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सभी अन्तर्वासना पढ़ने वालों Sex Stories को सन्नी शर्मा का कोटि कोटि प्रणाम!
दोस्तो! अभी तक मैंने अन्तर्वासना में लड़के और लड़की के बीच हुई चुदाई के बारे ही पढ़ा है। मैं इस वक्त कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का कोर्स कर रहा हूँ। मैं देखने में चिकना हूँ और सच पूछो तो मैं कहने के लिए लड़का हूँ मगर मेरे अन्दर एक औरत बचपन से घर कर चुकी है। मैं बचपन से ही लड़कियों के साथ गुड्डे-गुड़िया का खेल खेलता, चोरी चोरी मम्मी की ड्रेस पहनता और जब घर अकेला रहता तो लड़की की तरह सज-संवर कर तैयार होता था। इन हरक़तों से मुझे अलग सा आनंद मिलता!
मैं स्कूल में भी लड़कियों के साथ ही रहने की कोशिश करता। सभी लड़के स्कूल में मुझे लड़की कहते! बचपन से लड़कियों के साथ रहा था, उनके खाने-पीने में ध्यान देता, उनकी तरह गोलगप्पे-चाट वगेरह खाता। मेरे शरीर की बनावट लड़कियों जैसी है, मेरी छाती बहुत कोमल है, 16 साल की लड़की जितनी मेरी छाती है।
मैंने कई बार अपनी लड़की दोस्तों को उनके बॉय फ्रेंड के साथ अकेले में स्कूल के खाली कमरों में अश्लील हरक़तें करते देखा। लड़कियों में से पूजा से मेरे बहुत अच्छे से दोस्ती और बोलचाल है, वो अक्सर मेरे घर आती नोट्स के लिए। वो एक बहुत बड़े अमीर परिवार की छोरी है।
एक रोज़ मैं उसके घर चला गया, दोपहर का समय था, उस वक्त उसके घर कोई नहीं होता था। जब मैंने दरवाज़ा बंद देखा तो मैं दीवार से कूद कर अन्दर चला गया। हंसने के आवाजें सुन कर मैंने खिड़की के पास पहुँच कर देखा कि मेरे ही स्कूल का एक लड़का था, पूजा उसका लण्ड चूस रही थी, वो अपनी स्कर्ट में बार बार उसका हाथ डलवाती, कभी चुचियों में भी।
मैं वहाँ से चला आया। उस लड़के का लौड़ा देख मेरी गाण्ड में कुछ होने लगा, ना कि पूजा को नंगी देख कर।
उस दिन से मैंने भी किसी का लण्ड चूसने की सोची। स्कूल के लड़के से यह सब करके मेरी और बदनामी हो जाती, पहले ही सभी मुझे छेड़ते हैं।
मैं रोज़ शाम को ट्यूशन पढ़ने जाता था। रास्ते में एक नाशपाती का बाग़ है, वहाँ रोज़ एक मोची मुझे मिलता था, बिहार का था। वो मेरी गाण्ड को देख रोज़ अजीब इशारे करता। पहले मैं कुछ न कहता, लेकिन अब वो देखके लौड़ा खुजलाता। एक रोज़ वो नहीं मिला लेकिन जब मैं वापिस आ रहा था, तब अंधेरा हो चुका था। आज वो अपना सामान पहले ही पास में अपने कमरे में रख आया था। वो दिन में मोची का काम, रात को बाग के चौंकीदार का काम करता था। बीच बाग़ में उसका कमरा था। आज उसको देख मैंने कहा- क्या बात है भाई? तुम रोज़ मुझे क्यों देखते हो?
वो बोला- तेरी गाण्ड मारनी है!
मैंने कहा- चल हट!
बोला- तू क्यों देखता है?
मेरे पास जवाब नहीं था। वो थोड़ा पास आकर अपने हाथ मेरी गोल गाण्ड पे हाथ फेरने लगा।
सीईईईइ!
फ़िर मेरा हाथ पकड़ उसने अपने लौड़े पे रख दिया और पास आकार धीरे से बोला- चल कमरे में!
दोस्तो, जैसे उसने मुझे पेंडुलम दिखा बस में कर लिया हो, मैं बिना बोले उसके पीछे उसके कमरे में चला गया, उसने कुण्डी लगा दी। उसने अपनी पैन्ट उतार कर किल्ली पे टांग दी, फ़िर शर्ट भी। वो सिर्फ़ कच्छे में था, उसका लौड़ा खड़ा था। मोटा ताज़ा लौड़ा देख पूजा याद आई। उसने मेरी कमीज़, पैन्ट सब उतार दी और मुझे लिपटने लगा। मेरे अन्दर की लड़की जागी, वो मेरे निप्प्ल मसलने लगा, मम्मे दबाने लगा!
सीईईईइ क्या मजा था यार!
मैं घुटनों के बल बैठ उसके लौड़े को सहलाने लगा और अपने आप ही उसका 6 इंच का लौड़ा चूसने लगा, चूमने लगा।
वो बोला- साले दबा दबा के चूस!
साथ में वो मेरी गाण्ड थपथपा रहा था। उसने थूक से ऊँगली गीली कर मेरी गांड में डाली और आगे पीछे करने लगा और फ़िर दो ऊँगली!
वो भी पहली बार किसी से लौड़ा चुसवा रहा था। उसने अपना सारा माल मुँह में भर दिया, कुछ मेरी कोमल छाती पे भी गिरा। मैं कपड़े पहनने लगा तो उसने रोक दिया और बोला- चुदेगा तेरा बाप? गांडू! चल खड़ा कर दे! उसने ज़ोर से थप्पड़ मारा।
मैं भी रुक गया और उसके लौड़े को फ़िर मुंह में भर लिया। उसका फ़िर खड़ा हो गया, उसने मुझे घोड़ा बना लिया और सरसों का तेल अपने लौड़े पे लगा कुछ ऊँगली से मेरी गांड में भी लगा दिया और अपने लौड़े का टोपा मेरी मोरी पे रख धक्का दिया।
हाय, मर गया! छोड़ मुझे! प्लीज़ छोड़ दे!
दूसरे झटके से आधा लौड़ा अन्दर घुस गया। मैं दर्द से तड़फ रहा था, वो बिना रहम किए पूरा डालने में लगा था। मैं चिल्लाने लगा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। वो ज़ोर जोर से मुझे चोदने लगा। कुछ पल बाद मुझे थोड़ा आराम मिला और अब उसकी रगड़ मुझे अच्छी लगने लगी। उसके बाद उसने सीधा लिटा के अपने कंधों पर मेरी टांगें रख कर फ़िर लौड़ा मेरी गाण्ड में डाल दिया।
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उसकी आँखों में वासना के डोरे देख मैं घबरा सा गया।
वो बोला- चल तू भी जा जाकर खाना खा आ! मैं हूँ यहीं पे!
मोची चला गया। मैं अभी कपड़े पहनने लगा था कि उसने रोक लिया और बोला- मुझे खुश कर दे साले!
मैंने मना करने की बजाये बोला- नहीं देर हो गई है, पहले ही घर वाले परेशान होंगे।
वो बोला- साले! खींच के दूंगा कान के नीचे! चल पास आकर ख़ुद ही लण्ड निकाल!
मैं डरता हुआ पास गया और बोला- आज जाने दो! कल सुबह आऊँगा!
वो बोला- चल चूस ही दे थोड़ा, हाथ से निकल दे पानी!
बाप रे बाप! उसका लौड़ा देख मैं डर गया। बहुत सॉलिड था, मैं उसको पकड़ मुठ मारने लगा और फ़िर चूसने लगा। अंदर से मैं बहुत खुश था कि जिस लौड़े की मैं तलाश में था वो आज एक नहीं दो मिले!
करीब पाँच मिनट में मैंने उसके लौड़े को चूस चूस उसका माल निकाल दिया। उसने सारा माल मेरी नंगी गांड पे डाल दिया, झड़ने से पहले उसने मुँह से निकाल लिया था और गांड पे फव्वारा छोड़ दिया।
दोस्तो, कैसी लगी मेरी पहली चुदाई की दास्ताँ!
अगले दिन मैं उसके बताये समय के मुताबिक जब मोची निकल गया तो मैं अंदर घुस गया और फ़िर??
अपना चुदाई का यह किस्सा मैं अगले भाग में डालूँगा।
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सौरी सर, आज आखिरी दिन था मजार में हाजिरी लगाने का, आज 40 दिन पूरे हो गए हैं, कल से मैं समय से पहले ही हाजिरी दर्ज करा लूंगा.”
“यह क्या मजार का चक्कर लगाते रहते हो? इतना पढ़ने लिखने के बाद भी अंधविश्वासी बने हो।” प्रोफैसर ने व्यंग्य किया.
“सर, ऐसा न कहिए।” एक छात्र बोल उठा.
दूसरे छात्र ने हां में हां मिलाई,” सर, आप को मजार की ताकत का अंदाजा नहीं है।”
“सर, अंगरेजों के जमाने से ही इस मजार का बहुत नाम है, 40 दिनों की नियम से हाजिरी लगाने पर हर मनोकामना पूरी हो जाती है।” किसी छात्र ने ज्ञान बघारा.
आज भौतिकी की क्लास में मजार का पूरा इतिहास भूगोल ही चर्चा का विषय बना रहा.
प्रोफैसर भी इस वार्त्तालाप को सुनते रहे.
महेंद्र सिंह का पूरा छात्र जीवन व नौकरी के शुरू के वर्ष भोपाल में बीते हैं.
पिछले वर्ष उन्हें इस छोटे से जिले से प्रोफैसर का प्रस्ताव आया तो वे अपनी पत्नी को लेकर इस कसबेनुमा जिले परसिया में चले आए जहां सुविधा व स्वास्थ्य के मूलभूत साधन भी उपलब्ध नहीं हैं.
नए खुले आईटीआई में महेंद्र सिंह को उन के अनुभव के आधार पर प्रोफैसर के पद का औफर मिला, तो वे मना न कर सके और भोपाल के अपने संयुक्त परिवार को छोड़ कर अपनी पत्नी को साथ लिए यहां चले आए.
30 वर्षीय पत्नी सुजाता बेहद सुन्दर आधुनिक व उच्च शिक्षित है इसीलिए कभी कभार वह भी कालेज में गैस्ट फैकल्टी बन क्लास लेने आ जाती.
यह Xxx बाबा सेक्स कहानी इन्हीं सुजाता मैम की है.
सुजाता जब भी कालेज में आती, छात्रों की बांछें खिल जातीं.
नाभि दिखने वाली साड़ी, खुले बाल, गहरी लिपस्टिक से सजे होंठ और आंखों में गहरा काजल सजाए वह जब भी क्लास लेने आती, लड़कों में मैम को प्रभावित करने की होड़ मच जाती.
वे उसे फिल्मी हीरोइन से कम न समझते.
उस दिन महेंद्र जब घर लौटे तो चाय पीते हुए दिनभर की चर्चा में मजार का जिक्र करना न भूले.
यह सुनते ही निसंतान सुजाता की आंखें एक आस से चमक उठीं कि हो सकता है कि इसीलिए ही समय उसे यहां परसिया खींच लाया है.
शादी के कई साल बीत जाने पर भी अभी तक सुजाता निःसंतान थी बहुत उपाय कर लिए पर गर्भ धारण नहीं हो पाया।
दोनों दम्पति की मेडिकल जाँच में भी सब नार्मल था।
सुजाता जितनी वेशभूषा से आधुनिक थी उतनी ही धार्मिक थी.
आए दिन घर में महिलाओं को बुला कर धार्मिक कार्यक्रम करवाना उस की दिनचर्या में शामिल था.
इसी वजह से वह अपने महल्ले वालों में काफी लोकप्रिय हो गई थी.
सुजाता का शुरू में तो यहां बिलकुल मन नहीं लगता था मगर धीरे धीरे उसने अपने आप को साथी महिलाओं के साथ सामूहिक कार्यक्रम में व्यस्त कर लिया.
उसे रह रह कर भोपाल याद आता.
वहां की चमचमाती सड़कों की लौंग ड्राइव, किट्टी पार्टी, बड़े ताल का नजारा, क्लब और अपनी आधुनिक सखियों का साथ.
इधर, सुजाता का मन मजार के चक्कर लगाने को मचलने लगा.
वह सोचती कि सारे वैज्ञानिक तरीके अपना कर देख ही लिए हैं, कोई परिणाम नहीं मिला.
अब इस मजार के चक्कर लगा कर भी देख लेती हूं.
जब इस विषय में महेंद्र की राय लेनी चाही तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.
शायद उन्होंने भी सुजाता की आंखों में आशा की चमक को देख लिया था.
महेंद्र से कोई भी जवाब न पा कर सुजाता सोच में पड़ गई.
उसने अपने पड़ोसियों से इस विषय में बात करने का मन बना लिया.
लगे हाथ महिलाओं ने सुजाता की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उसे भी संतान की मनौती मांगने के लिए 40 दिन मजार का फेरा लगाने का सुझाव दे ही दिया.
कुछ का तो कहना था कि 40 दिन पूरे होने से पहले ही उसकी गोद हरी हो जाएगी.
जितने मुंह उतनी बातें सुन कर सुजाता ने तय कर लिया कि वह कल सुबह से ही मजार जाने लगेगी.
मजार कसबे के बाहर थी।
जब से यह जगह जिले में परिवर्तित हुई है, तब से भीड़ बढ़ने लगी और मजार में एक बाबा मुस्तफा की मौजूदगी भी थी.
बाबा हफ्ते में 3 दिन मजार में, शेष 4 दिन पास में पीपल के नीचे बनी झोपड़ी में बैठा मिलता.
लोग बाबा से अपनी परेशानियां बताते जिन्हें वह अपने तरीके से हल करने के उपाय बताता.
बाबा मुस्तफा बड़ा होशियार था, वह शाकाहारियों को नारियल तोड़ने तो मांसाहारियों को काला मुरगा काट कर चढ़ाने का उपाय बताता.
लोगों के बुलावे पर उन के घर जा कर भी झाड़ फूंक करता.
जो लोग उस के उपाय करवाने के बाद मन मांगी मुराद पा जाते, वे खुश हो उसके मुरीद हो जाते.
लेकिन जो लोग सारे उपाय अपना कर भी खाली हाथ रह जाते, वे अपने को ही दोषी मान कर चुप रहते.
इसलिए बाबा का धंधा अच्छा चल निकला.
सुजाता सुबह के समय साड़ी पहनकर घर से निकली.
उस समय हल्के जाड़े की शुरुआत हो गयी थी.
वह तेज कदमों से मजार की ओर निकल गई.
उसके घर और मजार के बीच एक किलोमीटर का ही फासला तो था.
अभी मजार में अगरबत्ती सुलगा कर पलटी ही थी कि बाबा मुस्तफा से सामना हो गया.
बाबा तगड़ा तंदुरुस्त अधेड़ उम्र का था।
सर पर गोल जालीदार टोपी, सफ़ेद कुरता और लुंगी में था; चेहरे पर लम्बी दाढ़ी।
बाबा सुजाता को देखता रह गया।
उसने कभी सोचा नहीं था कि इतनी सुन्दर स्त्री मजार पर आएगी।
सुजाता ने प्रणाम करने को झुकना चाहा पर बाबा दो कदम पीछे हट गया और बोला- मेरे नहीं, इसके पैर पकड़ो, वह जो इस में समाया है.
उसने उंगली से मजार की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जिस मंशा से यहां आई हो, वह जरूर पूरी होगी. बस अपने मन में कोई शंका न रखना.”
बाबा ने सुजाता की आँखों में देखते हुए कुछ मंत्र पढ़े और सुजाता को कुछ मिश्री के दाने दिए।
सुजाता गदगद हो गई.
आज सुबह इतनी सुहावनी होगी, उसने सोचा न था.
उसे पड़ोसिनों ने बताया तो था यदि मजार वाले बाबा का आशीर्वाद भी मिल जाए तो फिर तुम्हारी मनोकामना पूरी हुई ही समझो.
खुश मन से सुजाता ने जब घर में प्रवेश किया तो उसका पति चाय की चुस्की के साथ अखबार पढ़ने में तल्लीन था.
सुजाता गुनगुनाते हुए घर के कार्यों में व्यस्त हो गई.
महेंद्र सब समझ गया कि वह मजार का चक्कर लगा कर आई है.
मगर कुछ न बोला.
वह सोचने लगा कि कितने सरल स्वभाव की है उसकी पत्नी, सब की बातों में तुरंत आ जाती है. अब अगर मैं वहां जाने से रोकूंगा तो रुक तो जाएगी मगर उम्रभर मुझे दोषी भी समझती रहेगी।
अगले दिन फिर सुजाता मजार पहुंची।
उसने अगरबत्ती जला कर माथा टेका।
वापस जाने को घूमी तो सामने बाबा सामने खड़ा था।
बाबा अपनी गहरी आँखों से सुजाता को देखता हुआ बोला- सुजाता, तुम्हे अब चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. तुम्हारी सारी मनोकामना पूरी हो जाएगी।
सुजाता हैरान थी कि बाबा को उसका नाम कैसे पता चला.
“जल्दी ही तुम्हारी गोद में बच्चा होगा, बस कुछ महीनों की बात है।”
सुजाता से अब रहा नहीं गया और पूछा- आपको ये सब कैसे पता बाबा जी?
“मेरे पास तंत्र मंत्र की शक्ति है, मुझे सब पता है। लेकिन सुजाता इसके लिए तुमको साधना करनी होगी.” बाबा ने कहा.
“मैं सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ बाबा जी।”
बाबा मुस्तफा ने एक काला धागा निकाला और बोला- इस धागे को अभी अपनी कमर में बाँध लो और इसे कभी भी न खोलना।
सुजाता ने धागा ले लिया और साड़ी को हटाते हुए कमर में दो राउंड करके धागा बांध लिया।
उसकी गोरी कमर और गहरी नाभि पर बंधा काला धागा देखकर बाबा मुस्तफा की आँखों में खास चमक थी.
सुजाता प्रणाम करके घर लौट आयी।
शाम होते होते सुजाता के शरीर में वासना की आग जलने लगी।
उसने सोचा कि जरूर यह इस काले धागे के कारण हुआ है।
रात में पहल करते हुए उसने पति से कहा- आज बहुत मन हो रहा है!
पति महेंद्र ने सुजाता को बाँहों में भर लिया और फिर वासना का तूफ़ान चला और थोड़ी देर में महेंद्र संतुष्ट होकर एक तरफ लेट गया.
पर सुजाता अधूरी थी, अतृप्त थी.
वह जागती रही और उसके मन में बार बार बाबा का तगड़ा तंदरुस्त जिस्म आ रहा था।
सम्मोहनी काला धागा पूरा असर कर रहा था।
अगले दिन कामवासना से तपती सुजाता अच्छी तरह सज धज कर मजार पहुंची।
हरे बार्डर वाली हलकी गुलाबी साड़ी नाभि के नीचे बंधी थी और पारदर्शी साड़ी से कमर दिख रही थी.
गहरे हरे रंग के ब्लाउज से स्तनों के उभार साफ़ दिख रहे थे.
बाबा उसे देखकर समझ गया कि मंत्र वाले काले धागे का असर हो गया है.
सुजाता ने अगरबत्ती करके बाबा की ओर देखा।
बाबा ने अपने पीछे आने इशारा किया।
सम्मोहित सी सुजाता बाबा के पीछे चल दी.
झोपड़ी में पहुंचकर बाबा तख़्त पर बिछे गद्दे पर बैठ गया और सुजाता को बैठने को कहा।
सुजाता तख़्त पर बैठ गयी।
मंत्रमुग्ध सुजाता पूरी तरह से बाबा के वश में थी.
बाबा मुस्तफा उठा और सुजाता को अपने आगोश में ले लिया।
सुजाता के लिपस्टिक लगे होंठों को बाबा ने चूसते हुए उसकी साड़ी उतार दी।
गहरे हरे रंग के ब्लाउज में कैद सुडौल स्तन, गोरी कमर पर गुलाबी पेटीकोट और काले धागे का बंधन।
सुजाता की सुंदरता देख कर बाबा और इन्तजार न कर सका।
उसने सुजाता को तख़्त पर लिटा दिया और अपनी लुंगी खोलते हुए सुजाता के ऊपर आ गया.
धीरे धीरे पेटीकोट ऊपर सरक गया और फिर सुजाता की आ..ह के साथ बाबा का लिंग सुजाता की योनि में प्रवेश कर गया।
बाबा ने एक और धक्का दिया और पूरा लिंग सुजाता की योनि में समा गया।
और बाबा सुजाता के ऊपर छा गया।
सुजाता को अपनी योनि में इतना भराव और कठोरता पहले नहीं मिली थी।
उसने देखा तो नहीं पर शायद बाबा का लिंग काफी मोटा था।
मुस्तफा ने तेजी से सुजाता के शरीर का मंथन करना शुरू कर दिया।
बाबा के भारी भरकम जिस्म के नीचे दबी सुजाता की कामुक सिसकारियां गूंज रही थी.
उसके हर प्रहार के साथ तख़्त की चरमराहट, सुजाता की पायल की छन-छन और चूड़ियों की खन-खन ने बाबा को मस्त कर दिया।
बाबा को ऐसी सुन्दर स्त्री कभी नसीब नहीं हुई थी।
इधर सुजाता को ऐसा तेज और ताकतवर सम्भोग पहली बार मिला था।
वह सब कुछ भूल कर बाबा से लिपटी हुई सम्भोग के आनंद में खोयी हुई थी।
बाबा के एक एक धक्के का जवाब अपनी कमर उचका कर देते हुए आगे बढ़ते बढ़ते वह अपनी मंजिल के पास पहुँच गयी।
सुजाता ने अपनी जांघों से बाबा मुस्तफा को कस कर भींच लिया और चरमसुख के आनंद में खो गयी।
बाबा मुस्तफा ने कुछ लम्बे लम्बे धक्के लगाए और फिर एक लम्बा धक्का मारा।
उसका लिंग सुजाता की योनि में गहराई तक समा गया।
भारी भारी आवाज निकालते हुए बाबा स्खलित होने लगा।
वीर्य की फुहारों से सुजाता की योनि भर गयी।
कुछ हल्के हल्के झटके लगाते हुए बाबा शांत हो गया.
दोनों एक साथ तृप्त हो गए।
एक सुन्दर कामातुर गदरायी स्त्री से सम्भोग करके बाबा मुस्तफा मस्ती से सुजाता के ऊपर लेटा रहा।
थोड़ी देर बाद बाबा मुस्तफा उठा, अपनी लुंगी पहनी और झोपडी के बाहर देखा.
आसपास कोई नहीं था.
सुजाता के चेहरे पर सम्भोग की अपार संतुष्टि थी.
पहली बार उसे ऐसा सम्भोग सुख मिला था।
वह उठी और साड़ी पहनकर घर के लिए चल दी.
शाम तक सुजाता फिर से कामवासना की आग में जलने लगी।
उसका मन बाबा के बारे में सोचने लगा और वह अगले दिन का इन्तजार करने लगी.
सुजाता अगले दिन मजार पर गयी और बाबा से संतुष्ट होकर लौट आयी।
अब सुजाता को बाबा की आदत हो गयी और अब झाड़ फूंक के बहाने बाबा सुजाता के घर भी आने लगा।
पति महेंद्र ड्यूटी पर होते और सुजाता बैडरूम में बाबा के साथ होती।
बाबा मुस्तफा ने सुजाता के यौवन का भरपूर मजा लिया और सुजाता बाबा की सम्भोग शक्ति से मस्त रहने लगी.
यह Xxx बाबा सेक्स का सिलसिला चलता रहा और डेढ़ महीने बाद सुजाता गर्भवती हो गयी।
सब बातों से अनजान पति महेंद्र बहुत खुश थे.
और सुजाता भी बहुत खुश थी पर वो सच जानती थी कि उसका बच्चा बाबा मुस्तफा का है.
अब सुजाता मजार पर कभी कभी ही जाती थी।
लेकिन बाबा उसके घर पर आता रहा।
कुछ दिन बाद सुजाता मजार गयी तो देखा बाबा एक सुन्दर विवाहित स्त्री को काला धागा दे रहा था।
कुछ दिन बाद एक बार वह शॉपिंग करने गयी तो एक और युवती मिली।
उसकी कमर पर काला धागा बंधा था।
उस युवती ने सुजाता की ओर देखा और मुस्कुरा दी।
उसने सुजाता की कमर पर बंधा काला धागा देख लिया था।
सुजाता भी मुस्कुराई।
दोनों की मुस्कराहट में खास समानता थी।
मैने आप सबकी स्टोरी पढ़ी तो मुझे Antarvasna भी ऐसा लगा कि मैं भी आपनी बात कहुं सो लिख दिया।
मैं राजकोट का रहने वाला हूं। एक दिन मैं बारिश में भीगा हुआ घर आ रहा था तब रास्ते में एक भाभी की कार बंद हो गई थी, मुझे देखकर बोली कि मेरी कर बंद है प्लीज़ मुझे मेरे घर तक छोड़ देंगे? मैने बोला चलिये बैठिए, वो मेरी बाइक पर आ गई, तब मैने देखा की वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी, करीब ३० साल की होंगी। उसके कपड़े में से उसका जिस्म साफ़ दिखाई देता था, मेरे मन में सेक्स की इच्छा होने लगी, मैं बाइक चलाते वक्त थोड़ा पीछे दबाया तो देखा कि वो भी आगे की ओर धक्का दे रही है। मुझे मज़ा आता था।
जब उनका घर आया तो वो बोली कि यहीं रोक लो सो वो उतर गई फ़िर मैं चलने लगा तो बोली प्लीज़ अंदर आइये बारिश चालु है रुकने के बाद चले जाना। मैं भी यही चाहता था। सो उनके घर गया फ़िर देखा कि वहां कोई नहीं था। उनका लड़का था ८ साल का वो आया, फ़िर उन्होंने उससे कहा कि अपने रूम में जाकर सो जा तो वो चला गया फ़िर वो कपड़े बदल कर आकर मेरे सामने बैठी। उन्होंने बड़े सेक्सी कपड़े पहने थे मैं जब उनके बूब्स को देखने लगा तो बोली कि तुम भी भीग गये हो जाओ ऊपर मेरे पति के कपड़े पहन लो मैने पूछा कि कहां तो बोली चलो मैं दिखाती हूं। जब मैं ऊपर के कमरे में गया तो उन्होंने मुझे कपड़े दिये।
मैं जब चेंज करने के लिये बाथरूम में गया तो वो बोली मैं भी अन्दर आती हूं लाइट चालू कर देती हूं। जब वो अन्दर आयी तो उन्होंने गिरने का बहाना बनाकर मेरे ऊपर गिर पड़ी मैने उनको पकड़ा तो उसके बूब्स मेरे हाथों में थे, क्या नरम नरम थे वो, मुझे तो अच्छा लगा, तभी मैं जब अपना हाथ हटाने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर वापस बूब्स पर रखा और बोली प्लीज़ दबाओ मुझे अच्छा लगता है, मैं इसी इन्तज़ार में था, और मेरा लंड टाइट हो गया, मैने पूछा तेरा नाम क्या है तो बोली सोना। तो सोना तुम्हारा पति तुम्हारे साथ सेक्स नहीं करता? तो बोली कि वो बहुत बड़ा बिजिनेसमैन है उनको टाइम ही नहीं मिलता।
तभी कहा कि सोना मैं तुम्हे आज चोदूंगा और मजा दूंगा, तो वो बोली इसलिये तो मैने यहां बुलाया है तुझे और फ़िर क्या था मैने सीधा उनका फ़ेस पकड़ कर उनके गुलाबी और नाजुक लिप्स को चूमा और आहिस्ता आहिस्ता उनके कपड़े निकालने लगा अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी मैने फ़िर उनको पांव से लेकर चूमता हुआ उनकी चूत पर आया तो देखा कि वो एकदम साफ़ थी और रसीली हो गई थी और अभी भी किसी जवान लड़की की तरह तंग थी। मेरा मन काबू में नहीं था और मैने उनकी चूत पर जैसे ही अपने होंठ लगाये कि वो सीईईईईईईईईईईईस्सस्सस करने लगी और मैं अब जोर से चूसने लगा उनकी चूत को तभी अचानक वो मुझे खड़ा होने के लिये बोली फ़िर उन्होंने मेरी शर्ट निकाल दी और मेरा पैंट भी उतार दिया मैने अपनी चड्ढी भी उतार दी और अब मेरा लंड आज़ाद था जैसे ही मेरा ६.५ इंच का लंड अपना सीधा तनकर बाहर आया तो वो देखती ही रह गई और सहलाने लगी फ़िर मेरा लंड अपने मुंह में लेके चूसने लगी मुझे तो समझो स्वर्ग का आनंद आने लगा मेरे मुंह से भी आवाज़ आने लगी कि आआह्हह्हह्हह्ह ऊऊऊह्हह .
अब मैं और सोना दोनो पूरी तरह से गरम थे मैने शोवर चालु किया और अपनी बोडी पर पानी आया तो वो और भी स्सस्ससीईईक्सक्सक्सक्सक्सयययययी लगने लगी फ़िर मैने साबुन पूरे शरीर पर लगाया और लिपट गया, मेरे लंड की गरमी उनको चढ़ चुकी थी तभी मैने बोला कि जान अब न तड़पाओ तो वो बोली मैं तो कब से तैयार हूं, आ जाओ, और मैने सोना को नीचे झुकाया और अपना लंड उनकी गांड पर रगड़ा और फ़िर डोगी तरीके से पीछे से थोड़ा अन्दर डाला ओर सोना के मुंह से ऊऊऊऊईईईईइमा आवाज़ आयी तो मैने कहा कि अरे अभी तो शुरु ही किया है तो क्यों चिल्ला रही हो तो वो बोली पिछले १० महीने से सेक्स नहीं किया है मैने फ़िर मैने तेल लिया और अपने लंड में पूरा लगाया और फ़िर बेड पर सोना को ले गया और फ़िर डोगी तरीके से लेटया फ़िर पीछे से अपना लंड थोड़ा अन्दर डाला और अपना मुंह उनके मुंह के पास ले जाकर उनके पूरे मुंह को अपने मुंह में लेकर दबाया और एक ही झटका दिया मेरा लंड उनकी चूत में और सीधा चूत को छेदता हुआ पूरा घुस गया उनकी चूत में और सोना चिल्लाई आआईईईईईईईईईईईईईईईईईईईइ ऊऊऊऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह म्मम्ममाआआआआआआआआआ माआआर्रर्रर्रर्रग्गग्गग्गगाआअयययययययययययययीईईईईईईइ लेकिन सभी आवाजें मेरे मुंह में ही समा गयी अब धीरे धीरे मैं लंड को अन्दर बाहर करने लगा और अब सोना भी मेरा साथ देने लगी तभी मैने अपना लनद निकाल कर उनको सीधा लिटा दिया और उनके पैरों को उठाकर अपने हाथों से फ़ैलाया और उठा दिया और फ़िर अपना टाइट लंड उनकी चूत के बिल्कुल सामने था सो मैने आहिस्ता से धक्का दिया तो सीधा उनकी चूत में चला गया अब तो सोना भी मेरे साथ मजा ले रही थी हमने पूरे ४५ मिनट तक चुदाई की।
फ़िर मैने बोला अब कैसा लगता है तो बोली अपनी लाइफ़ में पहली बार सेक्स का मज़ा लिया है मैने फ़िर मैने उनको अपने ऊपर बिठाकर अपने लंड पर उनकी चूत लगा दी और अब वो मुझे चोदने लगी हम बैठे बैठे भी चुदाई करने लगे और फ़िर वो जड़ गई तो मैने अपनी रफ़्तार बढ़ाकर पूरी ताकत लगा दी उनको चोदने की अब तो उनको जो मज़ा आ रहा था वो सह नहीं सकती थी वो उछलने लगी समझो जैसे बिना पानी की मछली, मेरे लंड का धक्का पूरी रफ़्तार में आ गया था और आखिर में मैं भी जड़ गया और ऐसे ही हम दोनो १० मिनट एक दूसरे पर लेटे रहे और फ़िर मैं खड़ा हो कर नहा कर बाहर निकला उन्होंने मेरा मोबाइल नम्बर लिया और कहा कि अगर मेरी सहेली को तुम्हारा लंड चाहिये तो आयेंगे तो मैने बोला कि हां मगर एक शर्त है कि जब भी हम बाहर मिलें तो कोई जानता नहीं हो ऐसे ही पेश आना हगा मैं एक नामी बिजिनेसमैन हूं और मुझे १००% प्राइवेसी चाहिये तो वो बोली ये तो बहुत ही अच्छा है अब मैं तुम्हे कोल करुंगी तो आओगे न? मैने हां बोला और सोना की चुदाई के बाद और २ औरतों को मैने जो सोना की ही फ़्रेंड थी उनको चोदा है Antarvasna
सवेरे मैं सुस्ती में उठी… अलसाई Antarvasna सी बाहर बरामदे में आ गई और कसमसाते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए अपने बोबे को पूरा बाहर उभारते हुए अंगड़ाई ली… कि पीछे से एक सिसकारी सुनाई दी- रोशन जी… ऐसी अंगड़ाई से तो मेरे दिल के टांके टूट जायेंगे…! गुड मॉर्निंग…!’ साहिल मुसकराता हुआ बोला.
‘हाय रे… आप यहाँ…?’ मैं शरमा गई… दोनों हाथों से अपनी चूचियों को छिपाने लगी… पर रात की बातें मुझे याद आ रही थी। अब मैं भी कुछ करना चाहती थी… साहिल का सामना करना चाहती थी… शायद आज वो मेरे साथ जोर जबरदस्ती करे… पर इसके विपरीत मैं उसे रिझाना चाहती थी… पर मुझमें इतना साहस नहीं था… पर साहिल बेशरम था… एक के बाद एक मुझ पर तीर मारता गया… मुझे काम भी बनता नजर आने लगा… मैं मन मजबूत करके वहीं खड़ी रही.
‘ज़रा हाथ नीचे करो ना… आपके वक्ष बहुत सुन्दर हैं… और सुन्दरता दिखाई जाती है… छुपाई नहीं जाती…!’ मेरी चूचियों को निहारते हुए उसने कहा।
‘हाय साहिल जी… ऐसे ना कहो… मुझे शरम लगती है…’ मैंने अपने सीने से हाथ हटा कर चेहरा छुपा लिया।
वो मेरे पास आ गया और मेरे चेहरे को ऊपर उठा दिया…
‘इस खूबसूरत चेहरे पर पर्दा न करो… ये बड़ी बड़ी आंखें… गोरा रंग… गुलाबी गाल… ये इकहरा बलखाता बदन… गजब की सुन्दरता… खुदा ने सारी खूबियाँ आप में डाल दी हैं…’
‘हाय मैं मर जाऊँगी…’ मैं सिमटती हुई बोली। उसकी बातें मुझे शहद से ज्यादा मीठी और सुहानी लग रही थी। मैं इस बात से बेखबर थी कि कमला अपने कमरे के बाहर खड़ी सुन कर मुस्करा रही थी.
‘हाय… कश्मीर की वादियाँ भी इतनी सुन्दर नहीं होंगी जितनी सुडौल ये पहाड़ियाँ है… ये तराशा हुआ बदन… ये कमर… कही कोई अप्सरा उतर आई हो जैसे…’ मैंने अपनी आखें बन्द किये ही अपने हाथ नीचे कर लिये… मेरे उभार अब उसके सामने थे। साहिल मेरे बहुत नज़दीक आ गया था… अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था… मैं घबरा उठी।
‘हाय राम जी…!’ मैं कहती हुई मुड़ी और भागने के ज्यों ही कदम बढ़ाया मैं कमला से टकरा गई।
‘हाय राम… मां जी… आप…?’
‘जरा सम्हल कर रोशन… गिर जायेगी…! सुन मैं ज़रा काम से बाज़ार जा रही हूँ… साहिल को चाय नाश्ता और खाना खिला देना… देखना कुछ कमी न हो… एक बजे तक आ जाऊँगी…’ मुस्कुराती हुई आगे बढ़ गई।
साहिल ने फिर एक तीर छोड़ा- भरी जवानी… जवान जिस्म… तड़पती अदायें… किसके लिये हैं…’
मैंने देखा कमला जा चुकी थी। अब हम दोनों घर में अकेले थे… और कमला ने जब साहिल को छूट दे दी थी तो मुझे भी उसका फ़ायदा उठा लेना था।
‘कहाँ से सीखा… ये सब…’
‘जब से आप जैसी सुन्दरी देखी… दिल की बात जबान पर आ गई…’ मैं अब चलती हुई अपने कमरे में आ गई… साहिल भी अन्दर आ गया… मैंने चुन्नी उठाई और सीने पर डालने ही वाली थी कि उसने चुन्नी खींच ली… इसे अभी दूर ही रहने दो… और दो कदम आगे बढ़ कर मेरा हाथ पकड़ लिया…
‘ये क्या कर रहे है आप… छोड़ दीजिये ना…’ मैं सिमटने लगी… हाथ छुड़ाने की असफ़ल कोशिश करने लगी।
‘रोशन… प्लीज… आप बहुत अच्छी हैं… बस एक बार मुझे किस करने दो… फिर चला जाऊँगा…’ उसने अब मेरी कमर में हाथ डाल दिया। नीचे से उसका पजामा तम्बू बन चुका था… मेरी चूत भी गीली होने लगी थी। मैं बल खा गई और कसमसाने लगी… शर्म से मैं लाल हो उठी थी। मेरा बदन भी आग हो रहा था।
‘साहिल… देख… ना कर… मैं मर जाऊँगी…’ मैंने नखरे दिखाते हुए, बल खा कर उसके बदन से अपना बदन सहलाने लगी… और उसे धकेलने लगी
‘रोशन… देख तेरे सूखे हुए होंठ… तड़पता हुआ बदन… आजा मेरे पास आजा… तेरे जिस्म में तरावट आ जायेगी…’
‘साहिल… मैं पराई हूँ… मैं शादीशुदा हूँ… ये पाप है…’ उसे नखरे दिखाते हुए मैं शरम से दोहरी होने लगी…
‘रोशन तेरे सारे पाप मेरे ऊपर… तुझे पराई से अपना ही तो बना रहा हूँ…’ उसने अपना लण्ड मेरे चूतड़ो पर गड़ा दिया…
‘साहिल सम्हालो अपने आप को… दूर रखो अपने को…’ अब तो वस्तव में मुझे पसीना लगा था। मेरा बदन सिहर उठा था। कमला की रात वाली चुदाई मेरी आंखो के सामने घूमने लगती थी। मुझे लगा कि ये अपना लण्ड मेरी चूत में अब तो घुसेड़ ही देगा। मेरी चूतड़ो की दरार में उसका लण्ड फ़ंसता सा लगा। लण्ड का साईज़ तक मुझे महसूस होने लगी थी। मैंने घूम कर साहिल के चेहरे की तरफ़ देखा। उसके चेहरे पर मधुरता थी… मिठास थी… मुस्कुराहट थी… लगता था कि वो मुझ पर किस कदर मर चुका था।
मैं शरम के मारे मरी जा रही थी। मुझे उसने प्यार से चूम लिया। मैंने उसकी बाहों में अपने आप को ढीला छोड़ दिया… चूतड़ो को भी ढीला कर दिया। उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच लिया… मेरे साथ उसका पजामा भी नीचे आ गिरा… उसने मेरा ब्लाऊज धीरे से खोल कर उतार दिया… मेरी छोटी छोटी पर कड़ी चूंचिया कठोर हो गई… उसने मेरे दोनों कबूतर पकड़ लिये… हम दोनों अब पूरे नंगे थे।
मैं उसकी बाहों में कसमसा उठी। मैं सामने बिस्तर पर हाथ रख कर दोहरी होती गई और सिमटती गई… पर झुकने से मेरी गांड खुल गई और उसका लण्ड मेरी दरारो में समाता चला गया… यहाँ तक कि अन्दर के फूल को भी गुदगुदा दिया।
मुझे एकाएक फूल पर ठंडा सा लगा… साहिल ने अपने थूक को मेरे गाण्ड के फ़ूल पर भर दिया था। लगा कि चिकना सुपाड़ा फ़ूल के अन्दर घुस चुका था। मेरे मुख से आह निकल गई… मेरी दुबली पतली काया… गोरी गोरी सुन्दर सी गोल गोल गाण्ड… मेरी प्यासी जवानी अब चुदने वाली थी।
‘हाय रे रोशन… कितनी चिकनी है रे… ये गया…’ लण्ड मेरी गाण्ड के अन्दर सरकता चला गया… मेरे दिल में चैन आ गया… चुदाई के साथ सथ ही मेरे शरीर में चुदाई की झुरझुरी भी आने लगी थी कि आखिर चुदाई शुरू हो ही गई।
उसके हाथ मेरी पीठ को सहलाते हुये बोबे तक पहुंच गये थे… और अब… हाय रे… उसने मेरी छाती मसल डाली… मैं शरम से सिकुड़ सी गई… मैं धीरे धीरे बिस्तर पर पसर गई… मैंने अब हिम्मत करके शरम छोड़ दी।
अब मैंने मेरी दोनों टांगे खोल दी… पूरी चौड़ा दी… उसे मेरी गाण्ड मारने में पूरी सहूलियत दे दी… अब मेरे चूतड़ो को मसलता… थपथपाता… नोचता… खींचता हुआ गाण्ड चोद रहा था… मुझे मस्ती चढती जा रही थी। अपनी मुठ्ठियो में तकिये को भींच रही थी। दांतो से अपने होंठो को काट रही थी… और पलंग़ धक्को के साथ हिल रहा था।
अब वो मेरे पर लेट गया था… उसका पूरा भार मेरी पीठ पर था… और कमर हिला हिला कर धक्के मार रहा था। मेरी गाण्ड चुदी जा रही थी। मेरे मुख से बार बार आहें निकल पड़ती थी।
‘मेरी जानू… अब बस… अब तेरी चूत की बारी है…’ और अपना लण्ड गाण्ड से धीरे से निकाला और चूत का निशाना साध लिया। मुझे एकाएक अपनी चूत पर चिकने सुपाड़े की गुदगुदी हुई और मेरी चूत ने लण्ड के स्वागत में अपने दोनों पट खोल दिये… और लण्ड अकड़ता हुआ तीर की तरह अन्दर बढ चला।
‘मां रीऽऽऽऽ आऽऽऽह… चल… घुस जा… राम जी रे…’ मेरा मन और आत्मा तक को शांति मिलने लगी… लण्ड चूत की गहराई तक घुसता चला गया… और जड़ तक को छू लिया। दर्द उठने लगा… पर मजा बहुत आ रहा था। चूत को फ़ाड़ता हुआ दूसरे धक्के ने मेरे मुख से जबरदस्त चीख निकाल दी… मेरी चूत से खून बह निकला…
‘हाय… साहिल देख बहुत दर्द हो रहा है… धीरे कर ना…’
‘हाय रे मेरी बच्ची को मार देगा क्या…’ कमला की पीछे से आवाज आई… मैं घबरा उठी… ये कहाँ से आ गई…
‘नहीं वो धक्का जोर से लग गया गया था… बस…’
‘रोशन… मेरी बच्ची… मैं हूँ यहाँ… आराम से चुदवा ले…’ कमला ने हम दोनों को ठीक से लेटाया और तौलिए से खून साफ़ किया और मेरी चूत पर क्रीम लगाई…
‘अरे… गाण्ड भी मार दी क्या…’ मेरे पांव उपर करके गान्ड में भी चिकनाई लगा दी।
‘अब ठीक है… चलो शुरु हो जाओ…’ अब साहिल मेरे दोनों पांवो के बीच में आ गया और लण्ड को चूत में उतार दिया… चिकनी चूत में लण्ड मानो फ़िसलता हुआ… आराम से पूरा बैठ गया। मुझे बड़ा सुकून मिला। अब चुदाई बहुत प्यारी लग रही थी।
कमला भी अब मेरे बोबे सहला रही थी। रह रह कर वो साहिल की गाण्ड भी सहला देती थी थी और अपना थूक लगा कर अंगुलि को उसकी गाण्ड में डाल देती थी। इस प्रक्रिया से साहिल बहुत उत्तेजित हो जाता था।
अब कमला ने साहिल की गाण्ड को अंगुली से चोदना चालू कर दिया था। उसके धक्के भी बढ़ गये थे… मेरी चुदाई मन माफ़िक हो रही थी मेरा जिस्म बिजली से भर उठा था… बदन कसावट में आ चुका था, सारी दुनिया मुझे चूत में सिमटती नजर आ रही थी। लगा कि सारी तेजी… सारी बिजलियाँ… सारा खून मेरी चूत के रास्ते बाहर आ जायेगा… और… और…
‘मां री ऽऽऽऽऽ… हाऽऽऽऽय रे… मर गई…’
‘बस… बस… बेटी… हो गया… निकाल दे… झड़ जा…’ कमला प्यार से मेरे उरोजो को सहलाते हुए झड़ने में मदद करने लगी…
‘मम्मी… मैं गई… ईईऽऽऽऽऽऽऽ… आईईईइऽऽऽऽ… मेरे राम जी…’ और मैं जोर से झड़ गई…
‘अरे धीरे चोद ना… देख वो झड़ रही है…’ उसकी चुदाई धीमी हो गई… ऐसे में झड़ना बहुत सुहाना लग रहा था… पर साहिल जोर लगाने की कोशिश कर रहा था।
कमला ने उसकी कमर थाम रखी थी कही वो झटका ना मार दे। मैंने साहिल का लण्ड बाहर निकाल दिया और करवट ले कर लेट गई। कमला ने उसका लण्ड हाथ में भरा और जोर से रगड़ कर मुठ मारा और ‘ओ मां की चुदी… मैं मर गया… हाय निकाल दिया रे भोसड़ी की…’ और पिचकारी छोड़ दी…
‘देख इस मां के लौड़े को… पिचकारी देख…’ मैंने अपना मुख दोनों हाथो से छुपा लिया। वो झड़ता रहा… और एक तरफ़ बैठ गया।
मैंने जल्दी से पेटीकोट उठाया… पर कमला ने छीन लिया…
‘अभी और चुद ले… अपने पिया तो परदेस में है… सैंया से ठुकवा ले… अभी उनके आने में बहुत महीने हैं…’
‘मांऽऽऽ… तुम बहुत… बहुत… बहुत अच्छी हो’… प्यार से मैं मां के गले लग गई।
मन में आया कि पिया भले ही परदेस में हो… हम माँ बेटी तो साहिल के जिस्म से अपनी चूत की आग तो शांत ही कर सकती है ना…
साहिल एक बार और मेरे पर चढ़ गया… मैंने भी अपने पांव चौड़ा दिये… उसका कठोर लण्ड एक बार फिर से मेरी नरम नरम चूत को चोदने लग गया, लगा मेरी महीनों की प्यास बुझा देगा।
‘बेटी मैं तो जवानी से ही ऐसे काम चला रही हूँ… खाड़ी के देश गये हैं… इस खड्डे को तो फिर पड़ोसी ही चोदेंगे ना…’
‘मां अब चुप हो जा… चुदने दे ना…’ मुझे उनका बोलना अच्छा नहीं लग रहा था… रफ़्तार तेज हो उठी थी… सिसकियों से कमरा गूंज उठा… Antarvasna
पहले दिन रात को ममता (दीदी की ननद) को तीन बार Antarvasna चोद कर मैं वहीं सोफे पर सो गया था ! जब सुबह उठा तो देखा दीदी के सास ससुर और जीजू काम पर चले गए थे ! और ममता भी अभी तक उठी नहीं थी क्योंकि मैंने रात को उसको कॉलेज जाने के लिए मना कर दिया था। इसलिए वो अभी तक उठी नहीं थी।
सब के जाने के बाद दीदी मेरे पास आई, मेरी लुंगी खोल कर मेरे लंड से खेलने लगी और मुँह में लेकर चूसने लगी और कहा- कि कल तो जल्दबाजी में कुछ ज्यादा नहीं हो सका पर आज मैं तुमको नहीं छोड़ूंगी ! आज सारा दिन मैं तुमसे चुदवाउंगी ! तुम आज जी भर कर मेरी इतने दिनों की चुदाई की कसर पूरी कर दो !
मैंने कहा- वो तो ठीक है पर तेरे साथ ममता को भी चोदना पड़ेगा !
उसने कहा- क्या मतलब !
मैंने कहा- कल रात को ममता को लंड भी चुसा चुका हूँ और ३ बार चोद भी चुका हूँ ! बड़ी चुद्दकड़ है तेरी ननद ! बहुत मस्त भी है ! मजे ले ले कर नए नए तरह से चुदवाती है ! उसका मम्मे भी बहुत मस्त हैं !
दीदी ने कहा- तू तो बड़ा शैतान है !
मैंने कहा- दीदी क्या करूँ ! तुम लोगों ने जो आदत डाल दी है ! अब तो एक दिन भी चुदाई के बैगर नहीं रह सकता !
तब दीदी ने कहा- अब तो कोई समस्या नहीं है, चल कपड़े खोल जल्दी से और तेरा लंड दे मुझे !
मैंने कहा- दीदी तुमने कपड़े ही कहाँ छोड़े हैं जो उतारूँ !
उसने कहा- बनियान भी उतार दो ! आज शाम तक तुमको कपड़े नहीं मिलेंगें !
मैंने कहा- दीदी, पहले बाथरूम जाकर पहले फ्रेश तो हो लेने दो !
तो उसने कहा- एक बार लंड चूसने दो और चोद दो ! फिर जाना ! मैं कल शाम से तेरे लंड के लिए मरी जा रही हूँ !
खैर एक बार कुछ देर दीदी को लौड़ा चुसवा कर उसको चोदा फिर फ्रेश होने को चला गया और दीदी को कहता गया कि कपड़े मत पहनना !
दीदी हंस कर रह गई ! फिर मैं बाथरूम से नंगा ही बाहर आया और सोफे पर बैठ गया !
दीदी नाश्ता लेने चली गई !
इतने में ममता नंगी ही बाहर आई और मुझसे शिकायत करने लगी कि मैंने तो सोचा था कि तुम आओगे और अपने लंड का प्रसाद देकर मुझे उठाओगे !
मैंने कहा- मैं अभी अभी उठा हूँ ! अगर तुम और कुछ देर नहीं आती तो मैं ही अन्दर आ जाता तुझे उठाने को !
वह तुंरत मेरी गोद में आ बैठी और मेरे मुँह से अपना मुँह लगा दिया और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी हम दोनों एक दूसरे को बहुत बुरी तरह चूम रहे थे साथ ही वो मेरा लंड सहला रही थी। मैं उसकी चूत में ऊँगली डाले हुए मस्ती कर रहा था !
उसने कहा- संजय मुझे तेरी रबड़ी खानी है ! कल रात को खाकर बहुत मजा आया था !
मैंने कहा- कौन मना करता है जी भर कर खाओ !
इतने में दीदी नाश्ता लेकर आ गई और हम लोगों को देख कर बोली- तो यहाँ यह सब चल रहा है !
ममता बोली- भाभी ! संजय ने मुझे रात को बहुत मस्ती से चोदा है ! सच में बहुत दिनों बाद इतना मजा आया है ! नाश्ता-वाश्ता छोड़ो, जल्दी से आ जाओ, आज संजय का ही नाश्ता करते हैं !
चूकिं दीदी भी नंगी ही थी, वह तुरंत हमारे पास आ गई और हम दोनों से लिपट गई ! फिर दीदी ने ममता से कहा कि तुमने या विनय (जीजू) ने कभी नहीं कहा कि विनय तुमको भी चोदता है ! अगर मुझे पहले पता होता हम दोनों एक ही साथ चुदवाते ! सच में तीन या ज्यादा मिलकर चुदाई करते हैं तो बहुत मजा आता है क्योंकि सबके पास कई ऑप्शन्स रहते हैं !
ममता ने कहा- पहले संजय से तो चुदवा लूँ ! इसका लंड बहुत मजेदार है !
और हम तीनों चुदाई में लग गए ! कभी दीदी मेरा लंड चूसती कभी ममता !
फिर ममता ने कहा- संजय अपना अमृतरस मुझे पिलाओ !
मैंने कहा- मेरी रानी, घबराती क्यों हो ! आज दिन भर तुम दोनों को चोद चोद कर थका दूंगा !
दोनों ने कहा- देखेंगे कि तुम कौन सा तीर मार लेते हो !
फिर सिलसिला चालू हो गया और मैंने दोनों को बुरी तरह चोदा ! ममता तो जल्दी ही पस्त हो गई पर दीदी अभी फिर से तैयार थी !
मैंने दीदी से कहा- यहाँ तो दिन के अलावा टाइम नहीं मिलता, क्यों ना मेरे साथ चलती !
दीदी ने कहा- मैं तो तैयार हूँ ! तुम मेरे सास-ससुर से बात कर लो !
तो ममता ने कहा- मैं भी तुम लोगों के साथ चलूंगी !
मैंने कहा- ठीक है ! जब मैं बात करूँगा तब तुम कह देना कि तेरे कोलेज में एक हफ्ते की छुट्टी है और तुम भाभी के बिना यहाँ अकेली बोर हो जाओगी!
इस तरह हम चुदाई में लगे रहे फिर कुछ देर बाद ममता बोली- संजय मेरी गांड मारो ना ! मुझे गांड मरवाने में बहुत मजा आता है !
तो दीदी ने कहा- अगर ऐसी बात है तो मैं भी मरवा कर देखूंगी !
तब ममता ने कहा- भाभी पहली बार गांड मरवाने में बहुत तकलीफ होती है !
दीदी ने कहा- कोई बात नहीं ! मैं सह लूंगी, मज़े के लिए मैं सब कुछ कर सकती हूँ !
इसके बाद ममता उठ कर गई और क्रीम की ट्यूब ले आई और मेरे लंड पर मलने लगी और मुझे कहा- तुम भाभी की गांड चूस कर गीला कर दो तो तकलीफ कुछ कम होगी! दीदी ने कहा- हट ! गांड को भी कोई चूसते हैं !
ममता ने कहा- चुसवा कर तो देखो भाभी ! बहुत मजा आयेगा !
इस प्रकार ममता ने दीदी की गांड में भी क्रीम लगा कर और ऊँगली डाल कर कुछ ढीला कर दिया ! फिर मुझसे कहा- आ जाओ संजय ! अब भाभी की गांड तैयार है !
मैं दीदी को घोड़ी बना के उसकी गांड के छेद में लंड डाल कर लंड का सुपारा अन्दर करने लगा, लेकिन छेद इतना टाइट था कि अन्दर जा ही नहीं रहा था !
तब ममता ने कहा- संजय जरा जोर लगाओ !
और दीदी के नीचे आकर उसके मुँह को अपने मुँह से दबा लिया ! इस बार मैंने जोर लगा कर अपने लौड़े का सुपारा दीदी के गांड में घुसा दिया ! सुपारा घुसते ही दीदी चिल्ला उठी- अरे मेरी माँ ! मैं तो मर गई संजय ! और जोर जोर से चिल्लाने लगी !
मैंने कहा- दीदी जो होना था, वो हो चुका, ज्यादा जोर से चिल्लाओगी तो आस पड़ोस वालों को शक ना हो जाये !
दीदी कहने लगी- नहीं संजय, निकाल लो ! बहुत तकलीफ हो रही है !
ममता ने कहा- मुझे भी हुई थी ! पर बाद में जब धीरे धीरे पूरा लौड़ा अन्दर बाहर होने लगा तो बहुत मजा आया !
तो दीदी ने कहा- जब इतना बर्दाश्त किया है तो थोड़ी तकलीफ और सही ! लेकिन धीरे धीरे प्यार से डालना !
मैंने कहा- ठीक है !
फिर मैंने धीरे धीरे पूरा लंड अन्दर कर दिया !
ममता ने कहा- भाभी मेरी चूत चूसो ! मैं तुम्हारी चूची दबाती हूँ !
इस तरह दीदी को बहलाकर ममता ने मुझे कहा- संजय ! अब अपना लंड आगे पीछे करो !
कुछ ही देर में दीदी ने कहा- संजय, अब मजा आ रहा है ! जरा जोर जोर से चोदो !
काफी देर चोदने के बाद ममता ने कहा- अब मेरी गांड भी मारो ! मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकती !
इस तरह कहकर वह भी दीदी के बराबर घोड़ी बन गई ! अब मैं कभी दीदी की, कभी ममता की गांड मारने लगा ! मुझे भी बहुत मजा आ रहा था ! मैंने कहा- अब मैं छुटने वाला हूँ !
तब दीदी और ममता ने कहा- हम दोनों तो अब तक दो दो बार छुट चुकी हैं !
दीदी और ममता ने कहा- अपना अमृतरस हम दोनों को पिलाओ !
मैंने अपना कामरस दोनों के मुँह में डाल दिया। दोनों ने थोड़ा थोड़ा अपने मुँह में लिया फिर दोनों ने आपस में मुँह से मुँह मिला कर काफी स्वाद ले ले कर सारा चाट लिया। फिर मेरे लौड़े पर जो कुछ बचा था वह चाट चाट कर साफ कर दिया !
सच ! मुझे इतना मजा कभी नहीं आया ! फिर हम लोगों ने कुछ देर आराम किया ! उसके बाद दोनों मेरे लौड़े पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी और मैं भी उनके चुचे दबाने लगा ! इस प्रकार हम लोगों ने एक फिर जम कर चुदाई का आनंद लिया और कपडे पहन कर शरीफों के जैसे बैठ गए !
कुछ ही देर में दीदी के सास ससुर आ गए, विनय कुछ देर बाद में आया ! मैंने उनसे दीदी को ले जाने की इजाजत मांगी तो पहले कुछ ना नुकुर करने लगे, लेकिन मेरे काफी जोर देने पर एक हफ्ते के लिए मान गए ! जैसा कि हम लोगों ने प्लान बनाया था- ममता भी कहने लगी जाने को ! जैसे तैसे उसको भी मंजूरी मिल गई !
तब मैंने कहा- कल सुबह निकाल चलते हैं ! दोपहर तक पहुँच जायेंगे !
इस प्रकार हम हम करीब आठ बज़े की बस से रवाना हो गए ! बस में मैं बीच में बैठा था एक तरफ दीदी और एक तरफ ममता ! थोड़ी देर बाद ममता ने एक चद्दर निकाल कर हम तीनों पर डाल ली क्योंकि ठण्ड का मौसम चालू हो गया था इसलिए किसी को शक भी नहीं हुआ ! मैं पीछे से हाथ डाल कर दोनों एक एक चूची दबाने लगा !
और वो दोनों मेरे लौड़े से खेलने लगी ! करीब चार घंटे का सफ़र था। जब बस चाय पानी के लिए रुकी तो हम सब ने नीचे उतर कर चाय पी ! दोनों मुस्करा रही थी ! मैं समझ गया कि दोनों गरम हो रही हैं, दोनों घर पहुँचते ही चुदवाना चाहेंगी ! अब दोनों ने अपनी जगह बदल ली क्योंकि दोनों अपनी एक एक चूची दबवा चुकी थी अब दोनों की दूसरी चूची दबाने लगा और उन्होंने मेरा लंड निकाल लिया ! इस बीच ममता को ना जाने क्या सूझा कि वो अपना सर चद्दर में डाल कर मेरी गोद में आ गई और मेरा लंड चूसने लगी। अब दीदी को कैसे बर्दाश्त होता ! कुछ देर बाद उसने ममता को हटाया तो उसने कहा- पहले तुम कोने में बैठी थी, तेरे पास मौका था तुमने उसका फ़ायदा नहीं उठाया !
बात सही थी जिस तरफ दीदी बैठी थी उस तरफ से कोई मौका नहीं था !
इस प्रकार हम मजा करते हुए घर पहुँच गए ! जब मैंने घर की घंटी बजाई तो सीमा दीदी दरवाजा खोलने आई। चूकिं किसी को कोई खबर नहीं थी तो सीमा दीदी और विजय भैया चौंक पड़े एवं स्तब्ध रह गए ! इसके बाद विमला दीदी पहले सीमा दीदी के गले लगी फिर दौड़ कर विजय भैया के गले लग गई और उनको जोर जोर से चूमने लगी ! विजय भैया भी कहाँ चुप खड़े रहने वाले थे, वो भी दीदी चूमने लगे और उनकी चूची दबाने लगे।
इधर हम भी कहाँ चुप बैठने वाले थे मैंने सीमा दीदी और ममता को अपने से चिपका लिया और दोनों के मम्मे दबाने लगा ! कुछ देर ऐसा ही चला फिर भैया ने कहा- तुम लोग सफ़र के थके हुए आए हो, कुछ देर आराम कर लो !
विमला दीदी ने कहा- नहीं भैया, हम लोग बिलकुल भी थके नहीं हैं, चलो एक राउंड चुदाई-चुसाई का हो जाये, फिर आराम कर लेंगे ! क्योंकि आज रात तो जागना ही है तुमसे चुदाये बहुत दिन हो गए हैं और तुमको नया स्वाद ममता का भी तो लेना है !
इस तरह हम चाय पीते हुए एक दूसरे से छेड़ छाड़ करते हुए एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे ! इस तरह हम सब नंगे हो गए। ममता भी कम नहीं जा रही थी। वो उठ कर भैया के के पास चली गई और उनका लौड़ा मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी। अब विमला दीदी को कैसे बर्दाश्त होता, वो ममता से झगड़ा करने लगी !
मैंने कहा- दीदी झगड़ा क्यों करती हो? हालांकि तुझे भैया का लंड काफी दिनों बाद मिला है पर ममता को नए लंड का स्वाद चखने दो !
दीदी ने कहा- सिर्फ़ एक बार ही चूसने और चुदवाने दूंगी ! आज भैया केवल मेरा है ! कल से हम लोग सब मिलकर करेंगे, क्योंकि मुझे और ममता को एक हफ्ते ही रहना है !
इस पर सब राजी हो गए। फिर एक बार चुदाई के बाद हम सब कपड़े पहन कर आराम से बैठ गए ! इसके बाद पापा-मम्मी, ताउजी-ताईजी आ गए और विमला दीदी और ममता को देख कर काफी खुश हुए!
इस तरह हम पांचों ने पूरे हफ्ते बहुत मस्ती की जो कि मैं अगले भाग में बताऊंगा।
इंतजार करें और अपनी राय देना ना भूलें जिससे मैं इसको और रुचिकर शब्दों में पिरोकर आपके सामने प्रस्तुत कर सकूँ ! घटना बिल्कुल सच है ! Antarvasna
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