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दोस्तो, आज मैं आपको वो बताने जा रहा हूँ, जो आपने पहले शायद कभी न सुना हो।
मेरा नाम अमित है और मैं नासिक में रहता हूँ। मेरा अपना बिज़नेस है। जब काम थोड़ा बढ़ा तो मैंने अपनी एक ब्रांच पुणे में भी खोल ली, वहाँ मेरा भाई रहता है जो मेरा काम संभालता है।
काम के सिलसिले में मुझे अक्सर नासिक और पुणे आना जाना लगा रहता है, कभी ट्रेन से तो कभी अपनी कार से।

एक बार की बात है मैं अपने काम से नासिक से पुणे आ रहा था। रात के करीब साढ़े गयारह बज रहे थे, अभी नासिक से कोई 50-60 किलोमीटर ही आया था कि मैंने देखा सुनसान सड़क पर एक औरत सफ़ेद साड़ी में खड़ी मुझे हाथ का इशारा कर रही है।

पहले तो मेरी फट गई कि कहीं यह कोई भूत-वूत तो नहीं। मगर मैंने देखा, उसके पास ही एक टोयोटा कार खड़ी थी और उस लड़की ने भी पूरा मेकअप किया हुआ था, पूरे गहने पहने थे, शक्ल से तो भूत नहीं लग रही थी।

मैंने हिम्मत करके कार रोक ली।
वो मेरे पास आई और खिड़की के पास आकर थोड़ा झुकी, जब झुकी तो उसके गोरे गोरे बूब्स के दर्शन हुये, उसने मुझे ताड़ते देख लिया मगर बड़ी मीठी मुस्कान के साथ बोली- एक्सयूज मी, क्या आप मुझे थोड़ा आगे तक लिफ्ट दे सकते हैं, मेरी गाड़ी खराब हो गई है और आस पास कोई गैरेज भी नहीं है।

मैंने भी पूछा- इतनी रात को आप अकेली इस सुनसान रास्ते पे क्या कर रही हैं?

वो बोली- दरअसल मैं फिल्मों में असिस्टेंट आर्ट डाइरेक्टर हूँ, हमारी फिल्म की शूटिंग चल रही है और मैं वहीं जा रही थी।

मुझे बड़ी खुशी हुई, वैसे वो खुद भी किसी हेरोईन से कम नहीं थी, मैंने पूछा- कौन सी फिल्म की शूटिंग है, कौन कौन है फिल्म में?

वो मुस्कुरा कर बोली- चलते चलते बात करें?

मुझे बड़ा फील हुआ- अरे सॉरी, प्लीज़ आइये।

मेरे कहने पे वो मुझे उंगली से एक मिनट रुकने का इशारा करके अपनी कार के पास गई और कार में से अपना, पर्स, मोबाइल और एक बड़ा सा पैक उठा लाई, सामान कार में रख कर बोली- चलिये।

मैंने गाड़ी चला ली- इस बैग में क्या है? मैंने पूछा।

‘वो हमारी शूटिंग का समान है।’ उसने कहा।
‘ओके…’ मैंने कहा- क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?

वो बोली- मेरा नाम रेखा है, और आपका?

मेरी हंसी निकल गई और हंस कर बोला- अमित…

सुन कर वो भी हंस पड़ी।

‘तो रेखा जी, कौन सी फिल्म की शूटिंग कर रही हो आप?’

वो बोली- अमित जी, अब हर किसी की किस्मत रेखा जी जैसी तो नहीं होती, मैं तो छोटी मोटी फिल्मों में काम करती हूँ।

मुझे हैरानी हुई- छोटी मोटी फिल्में, मतलब?
‘मतलब, बी ग्रेड फिल्में…’ वो थोड़ा शर्मा के मुस्कुरा के बोली।

‘ओ हो, तो शीला की जवानी, कच्ची कली, गुलाबी जिस्म, ऐसी फिल्में?’ मैंने थोड़ा शरारती अंदाज़ में पूछा।

‘जी बिल्कुल!’ वो बोली।

‘तो क्या आप फिल्मों में एक्टिंग भी करती हो?’ मैंने पूछा।

‘जी नहीं, मैं सेट डिज़ाइनिंग का काम करती हूँ’ उसने कहा।

‘ओके, तो आप वो बिस्तर सजाती हैं, जिस पर हीरो और हेरोइन प्रेम लीला रचाते हैं।’ मेरे ऐसा कहने पर वो झेंप गई पर बोली कुछ नहीं।

‘बाई द वे, आप एक्टिंग क्यों नहीं करती, आप तो माशा अल्ला खुद भी बहुत खूबसूरत हो, जवान हो, और क्या कहूँ, सब कुछ हो?’ मैंने उसके गोल गोल स्तनों की तरफ घूर कर देखते हुये कहा।

साड़ी के पल्लू में से झाँकता उसका यौवन जैसे मुझे अपनी तरफ खींच रहा था, मेरा मन किया कि पकड़ के इसके दोनों स्तन दबा दूँ, मगर मैंने अपने आप को काबू करके रखा।

वो बोली- मैंने एक फिल्म में काम किया है।

‘अच्छा, कौन सी?’ मैंने चहक कर पूछा।

‘गुलाबी रातें!’ वो बोली।

‘अरे नहीं, कब आई यह फिल्म, मुझे तो पता ही नहीं चला, मैं ज़रूर देखना चाहूँगा।’ दरअसल मैं तो उसके नंगे बदन को देखने की ख़्वाहिश मन में पाले बैठा था।

‘कोई फायदा नहीं, मैं उसमें हीरो की बहन बनी थी और मेरा फिल्म में सिर्फ 2 मिनट का रोल था, वैसा कुछ नहीं जैसा आप सोच रहे हैं।’

उसकी बात सुन कर हम दोनों हंस पड़े।

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने सिगरेट निकली और उसे ऑफर की, उसनें डिब्बी से एक निकली और अपने होंठों में दबा ली।

मैंने कहा- अपनी सुलगाइएगा तो मेरी भी सुलगा दीजिये।

उसने दो सिगरेट अपने होंठों में ली और लाईटर से दोनों जला दी, मेरी सिगरेट पे उसके लिपस्टिक के निशान बन गए।

मैंने उसे देखते हुये पहले उसके लिपस्टिक के निशान को चूमा और फिर सिगरेट का कश लगाया।

वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो, लगता है, ज़्यादा ही लट्टू हो गए मुझ पर?

मैंने कहा- अरे रेखा और अमित की आशिक़ी के किस्से तो सारी दुनिया में मशहूर हैं।

वो हंसी और बोली- न तो आप वो अमित हैं, और न मैं वो रेखा हूँ।

‘हाँ, वो वाले नहीं हैं, मगर खुद को वो समझ तो सकते हैं।’ मैंने कहा।
तो उसने बड़ी गहरी निगाह से मुझको घूरा।

खैर बातें चलती रही और गाड़ी भी हम दोनों एक दूसरे से लगातार बातें करते रहे, मैंने उसके और उसने मेरे बारे में एक दूसरे को बहुत कुछ बताया और हम दोनों बातों बातों में एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए। हमने बहुत खुल कर बातचीत की, मगर मैंने एक मर्यादा से बाहर जाकर कुछ नहीं किया।

एलीफेंटा पहुँच कर मैंने गाड़ी रोकी और उस से पूछा- रेखा क्या लोगी?

वो भी मस्ती में बोली- कुछ मर्ज़ी ले आओ यार।

मैं दुकान से कोल्ड ड्रिंक, सोडा, नमकीन वगैरह ले आया, शराब मेरे पास गाड़ी में थी।

मैंने गाड़ी बढ़ाई और काफी आगे जा कर जब रास्ता सुनसान सा हो गया, गाड़ी रोक दी।

मैंने बोतल खोली और दो पेग बनाए- किसके साथ लोगी, कोल्ड ड्रिंक, सोडा, पानी?

वो बोली- सोडा और पानी मिक्स!

मैंने दोनों पेग बनाए, एक उसको दिया- अपनी दोस्ती के नाम!

‘दोस्ती के नाम…’ कह कर हम दोनों ने एक एक घूंट पिया।

उसके बाद तो बातों का जो दौर शुरू हुआ, पूछो मत।
हम दोनों आधी से ज़्यादा बोतल गटक गए, सुरूर दोनों को पूरा हो गया था, बेवजह बात बात पे हंसी, ठहाके चल रहे थे।
बात करते करते उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया और उसके ब्लाउज़ के लो कट से उसके आधे स्तन बाहर दिखने लगे।
वो अपना पल्लू ठीक करने लगी तो मैंने रोक दिया- मत कर यार, फिर गिर जाएगा, तू फिर ठीक करेगी, यह फिर गिर जाएगा।

तो वो बोली- इसका मतलब यह कि मैं तुझे अपनी छातियाँ बाहर निकाल के दिखाऊँ, या तू खुद इन्हें देखना चाहता है?

‘जैसा तू ठीक समझे!’ मैंने कहा- अगर दिखाना चाहती है तो दिखा दे, मुझे कोई ऐतराज नहीं!’ मैं उसे आँख मार के बोला।

‘भोंसड़ी के, छातियाँ मेरी, तू कौन होता है ऐतराज करने वाला’। मुझे उसके मुँह से गाली थोड़ी अजीब लगी, मगर बुरी नहीं लगी।

‘अरे यार, अगर तू फिल्म में एक्ट्रेस होती तो भी तो दिखाती, अब दिखा दे।’ मैंने कहा।

‘तू देखेगा?’ उसने पूछा।

‘अरे लवड़े की… दिखाएगी भी या बातें ही बनाएगी?’ मैंने भी उसे गाली दे ही दी।

उसने मेरी तरफ देखा और बोली- ले देख, हारामी, ठरकी साले!

कह कर उसने अपने ब्लाउज़ के हुक खोले, और ब्लाउज़ ब्रा दोनों उतार दिये।

वाह… क्या शानदार चूचे थे उसके, एकदम मस्त, गोल, भरे हुये और तने हुए।

मैंने देखते देखते उसके दोनों बूब्स अपने हाथों में पकड़ लिए- ओह रेखा, तुम बहुत लाजवाब हो।

कह कर मैंने उसके निप्पल को मुँह लिया और चूसने लगा।

वो व्हिस्की पीती रही और मैं उसके बूब्स चूसता रहा। बूब्स चूसते चूसते मैंने उसके पेट, बगलों, गर्दन और जहाँ तक हो सका, उसे चूमा भी और अपनी जीभ से चाटा भी।

उसकी साँसों की रफ्तार से मुझे पता चल रहा था कि वो भी पूरी गर्म हो चुकी है। अब मैं सोच रहा था कि इससे पूछूं कि आगे का क्या प्रोग्राम है।

तभी वो बोली- अमित, लेगा मेरी?

अरे मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने कहा- अब इतनी आगे आकर पीछे मुड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

कह कर मैं अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा तो वो बोली- यहाँ नहीं, रुको ज़रा, बाहर चलते हैं।

‘बाहर कहाँ?’ मैंने पूछा।

उसने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी कमर में ठूँसा और कार पिछली सीट पे रखा पैक उठाया और बोली- मेरे पीछे आओ।

मैंने भी कार को लॉक किया और उसके पीछे पीछे चल पड़ा। हम दोनों सड़क छोड़ कर पैदल ही सुनसान वीराने में चलते गए।
सड़क से काफी दूर एक बड़े से झाड़ के पीछे जाकर उसने पैक खोला, उसमें बिस्तर सा था, बिस्तर बिछाया और उस पर लेट कर बोली- आ जाओ।

यह तो जन्नत का नज़ारा था।

मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिल्कुल नंगा होकर मैं उसके ऊपर लेट गया। मेरे लेटते ही उसने मेरा सर पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये।

होंठ क्या, मैंने साथ की साथ अपनी जीभ भी उसके मुख में डाल दी, जिसे वो बड़े मज़े से चूसने लगी।
जब उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली तो मैंने भी जी भर के उसकी जीभ को चूसा और दोनों हाथों से उसके स्तन भी दबा रहा था। खुले आसमान के नीचे सेक्स करने का अपना ही मज़ा है।

‘अब सब्र नहीं होता जानेमन, अब तो यह साड़ी भी उतार दो।’ मैंने कहा तो रेखा ने अपनी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिये।

चाँदनी रात में उसका गोरा बदन चमक रहा था। मैंने उसके दोनों जांघों को अपने हाथों से सहलाया, अपने होंठों से चूमा, दांतों से काटा और उसकी चूत पे चुम्बन भी लिया।

उसने अपने टाँगें फैला दी- अमित, चाटो इसे! उसने कहा और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत से सटाया।
मैंने बिना कोई हील हुज्जत किए अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

थोड़ा सा चटवाने के बाद वो बोली- घूम जाओ अमित, मैं तुम्हारा लवड़ा चूसना चाहती हूँ।

मैंने वैसे ही किया, उसने मेरा लण्ड अपने होंठों में पकड़ा और चूसने लगी। कितनी देर हम एक दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे, फिर मैंने कहा- अब असल मुद्दे पे आया जाए!

वो बोली- नहीं, मेरे फुद्दे पे आया जाए!

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

और खिलखिला कर हंस पड़ी।

मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया।

आह क्या एहसास था, इतना चाटने के बाद भी उसकी चूत बिल्कुल सूखी पड़ी थी, मैंने कहा- तुम तो बिल्कुल ड्राई पड़ी हो?

‘वो बोली- हाँ, पता नहीं क्यों और औरतों की तरह मेरे पानी नहीं छूटता, मेरा बॉय फ्रेंड भी यही कहता है, इसी लिए उसका 2-3 मिनट में ही हो जाता है, तुम्हें देखती हूँ, कितना टाइम लगाते हो।

उसने कहा तो मेरा तो प्रेस्टीज़ इशू बन गया, जो मैं सोच रहा था कि आराम आराम से करूंगा, अब तो मैं पूरा लण्ड उसके अंदर तक डाल कर बाहर निकाल रहा था और जब अंदर डालता था तो कोशिश करता था कि अंदर ज़ोर से चोट करूँ।
मगर वो तो मुझसे भी दमदार थी, मेरी हर चोट कर जवाब वो ऐसे सिसकारी भर के देती जैसे उसे बहुत ही आनन्द आ रहा हो।
और कोई औरत होती तो शायद मना ही कर देती। दूसरा मेरा ध्यान घड़ी पर था, दो मिनट हुये, तीन मिनट हुए, पांच मिनट भी हो गए, करते करते नौ मिनट हो चले थे, मगर न तो वो झड़ रही थी और न ही मैं झड़ रहा था।

हाँ मेरे लिए करना अब मुश्किल होता जा रहा था, मैं सोच रहा था मैं इसकी फाड़ दूँगा, मगर अब तो मेरी फट रही थी। मुझे ऐसे लगने लगा था जैसे मेरा तो लण्ड ही छिल जाएगा। मैं और ज़्यादा बेदर्दी से उसके स्तनों को दबा रहा था, अपने दाँतों से काट रहा था और वो ‘ओह अमित, कम ऑन फक मी फक मी’ कर रही थी।

एक बार तो मैंने सोचा, कि गेम बीच में छोड़ देता हूँ, मगर वो इतने जोश से मुझे हौंसला दे रही थी कि मेरा बीच में छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।

हर थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं ऊपर से थूक कर अपने लण्ड को गीला कर रहा था। मगर लण्ड तो जैसे… खैर उसकी तेज़ चीख़ों और कराहटों के बीच मैं करीब 12 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद झड़ गया।
झड़ा क्या, मैं तो फारिग होकर कटे पेड़ की तरह एक तरफ को गिर गया।

उसके बाद मुझे कुछ होश नहीं रहा।

सुबह जब आँख खुली तो देखा के मैं सड़क से काफी दूर, वीराने में नंग धड़ंग लेटा पड़ा हूँ, मेरे सारे बदन और मुँह के अंदर तक रेत घुसी हुई थी, रेखा का या उसके सामान का कोई पता नहीं था, शायद वो चली गई थी, मगर कब और किसके साथ?

मैं उठा तो दर्द से बिलबिला उठा, मेरा लण्ड सूजा पड़ा था और लण्ड के हर तरफ खरोंचें ही खरोंचें पड़ी हुई थी।

मैंने सबसे पहले कपड़े पहने, अपना मुँह हाथ धोये और गाड़ी में बैठ कर सीधा पुणे की तरफ दौड़ा।

मेरी हालत बहुत खराब थी, पुणे पहुँच कर मैं सीधा अपने डॉक्टर दोस्त के पास पहुंचा।

जब मैंने उसको सबसे पहले अपना लण्ड निकाल के दिखाया तो वो छूटते ही बोला- तो मिल आए तुम भी रेखा से?

मुझे बड़ी हैरानी हुई, मैंने पूछा- तुम्हें कैसे पता?

वो बोला- तुम पहले आदमी नहीं हो, मेरे पास तुम से पहले भी कई आ चुके हैं।

‘मतलब?’ मैंने पूछा।

वो बोला- रेखा एक भूत है और अक्सर सड़क पे आने जाने वाले अकेले मर्दों को अपनी हवस का शिकार बनाती है, और जो तुम सोच रहे होगे कि तुमने उसको चोदा है, दरअसल उसके मायाजाल में उलझे तुम पत्थर या रेत पे ही अपना लण्ड घिसाते रह होगे, इसीलिए इसकी यह हालत हुई है।

मैं तो हैरान रह गया, मतलब मैंने एक भूत को चोदा या भूत ने मुझको चोदा?
कानों को हाथ लगा लिए तभी कि आज के बाद मैं न रात को किसी अकेली लड़की को लिफ्ट दूँ।

आप अपना देखना, अगर भूत की लेनी है तो रोक लेना गाड़ी।

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हाय दोस्तों मैं यानि संदीप एक Hindi Sex Stories कॉल बॉय फिर आपको अपनी कहानी पढ़ने के लिए प्रेरित करता हूँ …

मेरा कद ६.१ इंच का है और बॉडी भी ठीक है … लण्ड का साइज़ ६.५ है …

मुझे लड़कियों की चोदाई में बहुत ही मज़ा आता है …

जैसा कि पहले भी मैंने अपने बारे में बताया था कि मैं दक्षिणी दिल्ली में साकेत पीवीआर एरिया में रहता हूँ … मुझे मेरी पहली कहानी ( मैं एक कॉल बॉय हूँ ) का बहुत ही अच्छा रेस्पोंस मिला …

अब मुझे अपनी कहानी लिखनी चाहिए …

बात ऐसी है कि एक दिन मैं अपने किसी काम की वजह से जा रहा था। मैंने बस पकड़ी रूट नम्बर ४६३ मेहरौली से ओखला की। साली बस तो कम थी क़यामत ज्यादा थी। जब मैं उस बस में चढ़ा तो मैंने देखा कि बस में इतनी भीड़ थी की पूछो मत। मैंने बड़ी मु्श्किल के एक कोना पकड़ा और उसे पकड़ कर खड़ा रहा कि कब यह सब भोसड़ी के उतरेंगे और मुझे थोड़ा आराम मिलेगा … साली रंडी की बीज बस भी तो बहुत ही धीरे चल रही थी।

तभी अचानक बस रुकी और स्टाप पे से बिहारी और मजदूर लोग चढ़ने लगे। उन में कुछ औरतें भी थीं। उन औरतों में एक औरत ऐसी थी कि देख कर किसी का भी टल्ली हो जाए .. मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया। फिर अचानक बस खानपुर वाले स्टाप पर रुकी और और भरने लगी तभी उन मजदूर लोगों में से एक बूढ़ी औरत ने उस औरत को मेरे पास खड़े होने को कहा। मुझे अचानक कुछ महसूस होने लगा तो वो उसकी चिकनी गांड का कमाल था। उस औरत ने शायद लाल रंग की पैंटी पहन रखी थी। मैंने अपनी जांघ उसकी गांड से टकरा दी। एक बार तो मैं डर ही गया कि कहीं बस वाले मुझ देख न लें … लेकिन ऐसा हुआ नही !

फिर मैंने धीरे धीरे उसकी गांड का मज़ा लेना शुरू कर दिया। क्या गांड थी उसकी। मैं यह बात ज्यादा सोच रहा था कि वो महिला मुझे रोक क्यूँ नहीं रही थी। भोसड़ी की पूरा मजा दे रही थी और ले भी रही थी। फिर क्या था मैंने धीरे से अपने आप को संभाल कर सीधा किया और उसकी गांड का छेद ढूँढने लगा। जैसे ही मैं सीधा हुआ उन सभी लोगों ने मेरी तरफ़ देखा। तो मैं डर गया और वापस अपने पुरानी वाली पोसिशन में आ गया। लेकिन उस औरत को यह बात पसंद नही आई और ख़ुद ही इस पोसिशन में हो गई कि मुझे उसकी गांड का छेद आसानी से दिख जाए। मैंने धीरे धीरे से उसकी गांड की तरफ़ हाथ बढ़ाया और मजा लेने लगा। फिर उसे क्या हुआ उसने अपनी गांड को इतनी जोर से पीछे किया कि मेरे लण्ड पर उसकी वार हुआ।

फिर क्या था मैंने बस में ही उसकी गांड मारनी शुरू कर दी … यारो क्या मजा था उस बस का। मेरा लण्ड धीरे धीरे उसकी गांड में उसकी पैंटी को चीरता हुआ जाने लगा था और वोह औरत धीरे धीरे मजा ले रही थी। जब मेरा झड़ने को आया तो मैंने उसकी गांड मारनी बंद कर दी। ऐसा होता देख उस औरत ने मेरी तरफ़ अजीब सी नजरों से देखा लेकिन मैंने उसे कहा कि मेरा स्टाप आ गया है और मुझे अब उतरना है। तो उस औरत ने मुझे एक प्यारी सी मुस्कान दी। और उसके बाद उसने मुझे अपने इशारों में ही कह दिया था कि उसका मज़ा भी अब पूरा हो गया था यानि की वो बस में ही झड़ गई थी।

मैं अब भी उस जैसी औरत की प्यास बुझाने के लिए उस नम्बर की बस में सफर कर लेता हूँ …

तो दोस्तों यह कैसी लगी मेरी कहानी ? … भगवान् आपका भला करेगा … हा हा हा Hindi Sex Stories

Xxx मौसी की चुदाई हिंदी में पढ़ें इस कहानी में! मेरी मौसी बहुत चंचल बिंदास है, हर वक्त हर किसी से माँ बहन से बोलती है. मैं उसे चोदना चाहता था पर उसकी शादी तय हो गयी.

मेरा नाम विशाल है, मैं एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और एक कंपनी में काम करता हूँ।
मैं गोरा हूँ, घुंघराले बालों वाला हूँ और क्लीन शेव रहता हूँ।

मेरी काजल मौसी बड़ी खूबसूरत, चंचल और बिंदास है, हंसमुख है, बोल्ड है और हंसी मजाक करने में सबसे तेज है।

उसे गन्दी गन्दी बातें करने से कोई परहेज़ नहीं है।
अपनी बातों के बीच बीच में लण्ड, बुर, चूत भोसड़ा वगैरह खूब खुल्लम खुल्ला बोलती है।
गालियां तो उसके मुंह से अक्सर निकल ही जाती हैं जिन्हें सुनकर सब लोग एन्जॉय करतें हैं।
मैं उसकी गालियां सुनने के लिए घंटों इंतज़ार करता हूँ।

वह जब भोसड़ी वाली, माँ की लौड़ी, बहन चोद बोलती है तो मेरा लण्ड साला खड़ा हो जाता है।

जब भी वह अपनी सहेलियों से बातें करती है तो गालियां जरूर बकती है और मैं वो गालियां सुन सुन कर एन्जॉय करता हूँ।

उसका कद 5′ 4″ है रंग गोरा है और जिस्म एकदम संगमरमर जैसा है।
उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखें, गोल गोल सुर्ख गाल, गुलाबी होंठ और बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियाँ किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।

वह जब सज धज कर बाहर निकलती है तो लोग उसे देखते ही रह जाते हैं।
उसकी पतली कमर, बड़े बड़े उभरे हुए चूतड़ और उनके बीच की मटकती हुई गांड अपना अलग ही जलवा बिखेरती है।

मैं तो सच में उसके नाम का मुट्ठ मारता हूँ।
मेरा मन करता है कि मैं उसके मुंह में अपना लौड़ा घुसेड़ दूँ, उसकी चूचियों में अपना लौड़ा पेल दूँ और अगर किसी दिन मुझे नंगी मिल जाए तो घपाघप चोद डालूं उसकी फुद्दी!

काजल मौसी मुझसे केवल एक साल बड़ी है।
वह 25 साल की है और मैं 24 साल का!

यह Xxx मौसी की चुदाई हिंदी इसी काजल की है.

एक दिन मैंने कहा- मौसी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
वह बोली- अच्छा, तो फिर क्या करेगा तू मेरा, अगर मैं तुझको अच्छी लगती हूँ।

मैं- कर तो बहुत कुछ सकता हूँ मौसी जी, पर डरता हूँ।
मौसी- मुझे डरपोक लोग अच्छे नहीं लगते … तुम भोसड़ी के डरपोक हो तो मुझसे दूर रहो।

मुझे उसकी गाली पसंद आ गई मैंने कहा- दूर रह कर कहाँ जाऊंगा? तुम्हारे सामने रहूंगा तो निडर हो जाऊंगा, बेशर्म हो जाऊंगा और गन्दी गन्दी बातें करने लगूंगा।

वह बोली- गन्दी गन्दी बातें करने के लिए कलेजा चाहिए। बड़ों बड़ों की गांड फट जाती है गन्दी गन्दी बातें करने में! आसान नहीं है गन्दी गन्दी बातें करना!
मैं- पर तुम्हारी तो नहीं फटती काजल मौसी?

वह- मेरी तो गांड कभी फटती नहीं, मैं तो दूसरों की फाड़ देती हूँ गांड!

एक दिन मैं सवेरे सवेरे अपने कमरे में लेटा अपना लौड़ा सहला रहा था।
लौड़ा साला एकदम तन कर खड़ा हुआ था। सवेरे का लण्ड बहन चोद बड़ा कड़क होता है। लगता है कि दीवार में भी छेद कर देगा।
लण्ड का टोपा पूरा खुला हुआ था।

मैंने लण्ड हाथ में लिया तो काजल मौसी की तस्वीर मेरे दिमाग में घूमने लगी और मैं लण्ड का धीरे धीरे सड़का मारने लगा।

इतने में किसी ने मेरे हाथ से लण्ड छीन लिया और बोली- अरे यार, यह मेरा काम है भोसड़ी के विशाल!
वह मेरी मौसी ही थी।

मैं उसे देख कर थोड़ा सहम गया, बोला- अरे मौसी सॉरी!
वह बोली- सॉरी की माँ की चूत … मैं हूँ न तेरे लण्ड का सड़का मारने के लिए! यह लड़कियों का काम है।

उसने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मेरे लण्ड को कई बार बड़े प्यार से चूमा।
मौसी ने कहा- तेरा लौड़ा तो बड़ा मस्त है विशाल! मुझे उम्मीद नहीं थी कि तेरा लण्ड इतना जबरदस्त होगा और इतना मोटा तगड़ा होगा। मैं तो बुर चोदी तुम्हें अभी बच्चा ही समझ रही थी।

फिर उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया; खुद एक स्टूल पर बैठ गयी और एक हाथ से मेरे पेल्हड़ थाम दूसरे हाथ से सटासट सड़का मारने लगी।

मैंने कहा- अब मुझे अपने बड़े बड़े मम्मे दिखा दो न काजल मौसी!

उसने अपना ब्लाउज़ तुरंत खोल दिया और दिखा दिये अपने बड़े बड़े दूध।

मैंने कहा- वाओ बड़े रसीले हैं तेरे मम्मे काजल मौसी!
वह जोश में बोली- मौसी की माँ का भोसड़ा … मैं जब किसी का लण्ड पकड़ती हूँ तो उसकी बुरचोदी हरामजादी काजल हो जाती हूँ। मुझे माँ की लौड़ी भोसड़ी वाली काजल कहो!

मैंने कहा- हाय मेरी भोसड़ी वाली काजल, मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लो न प्लीज!
उसने फ़ौरन लौड़ा मुंह में घुसेड़ लिया और मजे से चूसने लगी.

मैं एन्जॉय करने लगा।

वह बार बार लण्ड मुंह में लेती और फिर मुंह से निकाल कर सड़का मारने लगती।
मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।

आज पहली बार मेरे लण्ड का सड़का कोई मस्त जवान लड़की मार रही थी।

मेरे मन में आया कि आज यह मेरे लण्ड का मुट्ठ मार रही है तो कल मुझसे चुदवा भी लेगी.
कितना मज़ा आएगा जब मैं इसकी मस्तानी चूत में अपना लण्ड पेलूँगा.

मैं इसी तरह के ख़याली पुलाव पकाने लगा।

मौसी बड़े मन से अपना मुंह खोले हुए मेरे लण्ड का सड़का मार रही थी और लण्ड से कुछ कह भी रही थी- अरे मेरे भोसड़ी के लण्ड राजा, जल्दी से निकाल दे तू अपना मक्खन! तू बड़ा प्यारा लग रहा है मुझे। तू बड़ा मस्त है, बड़ा ज़ालिम है। मुझे तुझसे प्यार हो गया लण्ड राजा! अब तू निकल आ … डुबो दे मुझे अपने वीर्य से! मैं उसे पीने के लिए तैयार बैठी हूँ।

फिर क्या … लण्ड ने छोड़ दी दनादन 4-5 पिचकारियाँ उसके मुंह में!
वह सच में सारा का सारा वीर्य चट कर गयी।

दूसरे दिन अचानक एक बहुत बड़ा परिवर्तन हो गया।
मौसी की शादी तय हो गयी।

अब वह अपनी शादी के मूड में आ गई। बार बार ब्यूटी पार्लर जाने लगी, शॉपिंग हॉल जाने लगीं, साड़ियां खरीदने लगी।
वह पूरी तरह व्यस्त हो गयी।
उसे मेरा लण्ड पकड़ने का ख्याल भी नहीं आया और न मेरी हिम्मत हुई उसको अपना लण्ड पकड़ाने की।

समय यूं ही बीतता गया.
वह जब दुल्हन बनी बैठी थी तो वास्तव में बड़ी जबरदस्त खूबसूरत लग रही थी।
मैं मन मसोस कर रह गया।
और वह शादी के बाद अपनी ससुराल चली गई।

15 दिन बाद वह अपनी ससुराल से वापस आ गयी।
मैं समझ गया कि काजल मौसी अपनी सुहागरात मना कर आई है; खूब चुद कर आई है; अपने पति का लण्ड खूब पेलवाकर आईं है।
लेकिन वह सच में बड़ी सुन्दर लग रही थी।

उसका रूप रंग सब कुछ बदला हुआ था।
मांग में सिन्दूर, हाथों में कंगन. गले में हार, कानों में झुमके, नाक में नथनी, कमर में करधनी और पावों में पायल!

ये सब मौसी की खूबसूरती बढ़ा रही थी।
वह बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी; एकदम सेक्स बम लग रही थी।
मेरा मन उसकी चूत देखने का हो गया।

मैं उसको आते जाते बड़े गौर से देखने लगा।
आते ही वह बड़े प्यार से मिली थी मुझसे!
लेकिन दो दिन बाद भी वह मेरे लण्ड से नहीं मिल पाई।
इसका मलाल था मुझे!
मैं उसके हाथ में अपना लण्ड देखना चाहता था।

वह सबसे खुल कर बातें भी कर रही थी, अपनी ससुराल के किस्से भी सुना रही थी सबको!
लेकिन उसकी सुहागरात की बातें किसी को भी नहीं मालूम हुई।

मैं यह जानना चाहता था कि उसके हसबैंड का लण्ड कैसा है?
उसका हसबैंड रिश्ते में अब मेरा मौसा था।

क्या मौसा का लंड मेरे लण्ड से बेहतर है या फिर मेरा लण्ड उसके लण्ड से बेहतर है?
इसका जबाब तो काजल मौसी ही दे सकतीं थीं वह भी एकांत में!

मैं उसी मौके की तलाश में था। मैं उससे अकेले में बात करने की कोशिश करने लगा.
पर वह हमेशा किसी न किसी से घिरी रहती थी।

एक दिन जब मैं बाथरूम जा रहा था तो वह मुस्कराती हुई मेरे कान में बोली- विशाल कैसा है तुम्हारा लण्ड?
मैंने भी उसके कान में ही जवाब दिया- जैसा तुम छोड़ कर गई थी, बस वैसा ही है मेरा लण्ड! लेकिन आजकल तुम्हें पाने के लिए बिचारा तड़प रहा है।

तब तक एक पड़ोसन आ गई मादरचोद।
मौसी उससे बातें करने लगीं।

ख़ैर मैं बाथरूम में नहाने चला गया और सोचने लगा कि चलो कभी न कभी तो मौका मिल ही जाएगा।

कुछ देर बाद किसी ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया।
मैंने खोला तो मौसी बाथरूम में ही घुस आईं और बोली- चली गयी बुरचोदी पड़ोसन! अब घर में हम दोनों के अलावा कोई और नहीं है। मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया है।

उसने मेरी तौलियां खींच ली तो मैं नंगा हो गया।
फिर उसने भी अपनी ब्रा खोल दी।
उसकी मस्तानी चूचियाँ नंगी हो गईं।

फिर उसने अपना पेटीकोट भी खोल डाला तो उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गयी.
उसकी गांड, उसके चूतड़ सब मेरी आँखों के सामने नंगे हो गए।

मैं बड़ी देर तक उसे नंगी देखता रहा, उसके नंगे जिस्म का मज़ा लेता रहा.
फिर उसकी चूचियाँ दबा कर कहा- तेरे तो मम्मे पहले से बड़े हो गए हैं मौसी!
वह बोली- अब तुम इन्हें मसल मसल कर और बड़ा कर दो विशाल!

मौसी मेरा लण्ड पकड़े पकड़े मस्ती करने लगी, उस पर प्यार से साबुन लगाने लगी और पेल्हड़ पर भी साबुन लगाने लगी।

मैंने भी उसके नंगे बदन पर खूब साबुन लगाया और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के नंगे बदन को खूब नहलाया।

मैंने कहा- यार काजल, मैं तुम्हें बहुत याद कर रहा था।
वह बोली- मुझे भी तुम और तुमसे ज्यादा तुम्हारा लण्ड याद आ रहा था।

फिर मैंने पूछ ही लिया- तेरे पति का लण्ड कैसा है?
वह बोली- हां बस काम चलाऊ है यार! तेरा लण्ड उसके लण्ड से ज्यादा बढ़िया है।

यह सुनकर मुझे बड़ी तसल्ली हुई।

मैंने फिर कहा- अगर उसे मालूम हो गया कि तुम मेरा लण्ड पकड़ती हो तो वह बुरा मानेगा न?
वह बोली- उसकी माँ का भोसड़ा। वह क्यों बुरा मानेगा? बुरा मानेगा तो मेरा क्या उखाड़ लेगा? मैं उसके लण्ड के सहारे नहीं रहने वाली। अब तो मैं खुल्लम खुल्ला पराये मर्दों से चुदवाऊंगी। जब तक शादी नहीं हुई थी तब तक छुप छुप कर चुदवाती थी।

मैंने कहा- अच्छा ऐसी बात है। मुझे तो पता नहीं था।
वह बोली- हां यार, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। मैं एक चुदक्कड़ औरत हूँ। अब मुझे किसी बात का डर नहीं है. अब तो मेरी शादी हो चुकी है। अब मुझे तुम खूब घपाघप चोदो। मैं तुमसे चुदने के लिए एकदम तैयार हूँ।

फिर हम दोनों नहा धो कर बाहर बेड पर आ गए।

उसने मुझे चित लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी.
मौसी ने अपने बालों का जूड़ा बनाया और झुक कर मेरा लण्ड चाटने लगी।
मैं भी उसकी चूत चाटने लगा।

मैंने अनुभव किया कि आज वह जितने बिंदास तरीके से लण्ड चाट रही है इतनी बिंदास तरह से उस दिन लण्ड नहीं चाटा था। उस दिन थोड़ा डर रही थी आज तो वह शेरनी बन कर लण्ड चाट रही है। उसे कोई लण्ड चाटते हुए देख भी ले तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

मेरा लण्ड साला बड़े ताव पर था तो मैंने उसे नीचे पटका और चढ़ गया उसके ऊपर! फिर रख दिया अपना लण्ड उसकी चूत पर!

लण्ड भी गीला था और चूत भी गीली … तो मैंने उसे अंदर तक घुसा दिया।
मेरा लण्ड बहनचोद सरसराता हुआ पूरा घुस गया अंदर!
तब मुझे मालूम हुआ कि बड़ी गहरी है ससुरी मौसी की चूत।

मैं लण्ड बार बार निकालने और पेलने लगा, चोदने लगा मौसी की चूत!

Xxx मौसी की चुदाई का मजा लेती हुई बोली- हाय विशाल, तेरा लण्ड भी विशाल है यार. बड़ी दूर तक चोट कर रहा है। मुझे इतना मज़ा तो अपनी सुहागरात में भी नहीं आया था जितना मज़ा आज आ रहा है। आज मैं सही अर्थों में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।

मैं धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ा रहा था और वह भी कमर हिला हिला कर बराबर मज़ा दे रही थी।

मैंने सोचा अगर मैंने इसे पहले चोदा होता तो शायद इतना मज़ा नहीं आता।
लड़की जब निडर और बेख़ौफ़ होकर चुदवाती है तो चोदने वाले को ज्यादा मज़ा आता है।

वह मस्ती में बोलने लगी- भोसड़ी के विशाल फाड़ डाल मेरी चूत … चीथड़े उड़ा दे मेरी चूत के! ये ससुरी लण्ड की बड़ी प्यासी है। इसकी प्यास बुझा दे यार। तेरा लण्ड साला बड़ा ज़ालिम है। हाय रे … मुझे अपनी बीवी की तरह चोद। समझ ले कि मैं तेरी बीवी हूँ। बड़ा मज़ा आ रहा है। हूँ आ … हो हां हां … और पेल … घुसेड़ दे और ठोक दे पूरा … घुसा दे … चीर डाल मेरी चूत।

मौसी की मस्ती देखने वाली थी।

मैंने कहा- माँ की लौड़ी मादरचोद काजल, अब मैं तुझे पीछे से चोदूंगा। तू बड़ी मस्त चीज है। तू एकदम लड्डू पेड़ा बर्फी है मन करता है तुझे कच्चा चबा जाऊं।

मैं उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदने लगा।
मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर थे।

वह भी बहन की लौड़ी अपनी गांड आगे पीछे करती हुई चुदवाने लगी।
मुझे यकीन हो गया कि काजल अच्छी तरह चुदी हुई है क्योंकि इसे चुदाने का बहुत बड़ा अनुभव है।

कुछ देर इस तरह चोदने के बाद मैंने लण्ड फिर आगे से उसके मुंह में घुसेड़ दिया, उसका सिर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।
मैं वास्तव में चोदने लगा उसका मुंह … मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा।

उसके बाद जब मैं झड़ने लगा तो काजल ने जिस मस्ती से झड़ता हुआ लण्ड चाटा … उसका वर्णन करना बड़ा कठिन है।

दूसरे दिन शाम को जब मैं मौसी के घर गया तो वह किसी औरत के साथ बैठी हुई बतला रही थी।
मैं उसे देख कर वापस होने लगा।

इतने में मौसी ने आवाज़ लगाई- अरे विशाल यहाँ आ न!
मैं उसके पास पहुँच गया.
तो वह बोली- यार शर्माते क्यों हो? इससे मिलो … ये हैं मेरी जेठानी मिसेज रोली। मैं तुम्हारी ही बातें इससे कर रही थी।

फिर वह रोली की तरफ मुंह करके वोली- बड़ा मस्त लड़का है ये विशाल! इससे ज्यादा मस्त इसका लौड़ा है। मैं जिस लौड़े की बात तुमसे कर रही थी, वह इसी का लौड़ा है.
मैंने कहा- अरे मेरी मजाक उड़ा रही हैं काजल मौसी?

तब तक उसकी जेठानी बोली- तो क्या मैं यह समझूँ कि तेरा लौड़ा वैसा नहीं है जैसा काजल कह रही है?
फिर तो मैं फंस गया।
मैंने कहा- नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं. पर सबसे ऐसा कहना अच्छा नहीं है न!

मौसी की जेठानी बोली- अरे विशाल, मैं तेरी बुरचोदी मौसी की जेठानी हूँ ऐसी वैसी नहीं हूँ। अगर तेरा लौड़ा तारीफ के काबिल है तो उसे बताने में हर्ज़ क्या है? कहो तो मैं खोल कर देख लूँ तेरा लण्ड?
मैंने मन में कहा तो फिर खोल कर देख लो न मेरा लण्ड!

उसकी बातें सुनकर तो मेरा लण्ड साला अंदर ही अंदर उछाल मारने लगा।

रोली भी काजल से कम खूबसूरत नहीं थी।
उसकी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी दिख रही थी।
साइज में काजल की चूचियों से बड़ी ही होंगी।

फिर हम तीनों बातें करने लगे और खुल कर करने लगे।

काजल मौसी बोली- विशाल देखो … जैसे मैं पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी हूँ, वैसे ही मेरी जेठानी भी पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी है!

उसके बाद सबका खाना पीना हो गया।
मूड सबका रोमांटिक हो गया था।

मैं जल्दी से जल्दी रोली को नंगी देखने के लिए बेताब था … रोली मेरा लण्ड देखने के लिए बेताब थी और काजल अपनी जेठानी के साथ चुदाई का मज़ा लेने के लिए बेताब थी।

सब काम हो जाने के बाद हम तीनों बिस्तर पर आ गए।
इस बार काजल ने बिस्तर जमीन पर लगा रखा था।

काजल ने पहल की और अपने कपड़े एक एक करके उतारने लगी।
उसे देख कर रोली भी अपने कपड़े उतारने लगी।
मुझे मालूम हो गया कि रोली तो काजल से कुछ ज्यादा ही बेशर्म है।

मैंने जब रोली की बड़ी चूचियाँ देखीं तो मेरे होश उड़ गये।
इतनी मस्तानी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां तो मैंने कभी पोर्न में भी नहीं देखी।
मेरा मन हुआ मैं उन्हें कच्चा चबा जाऊं।

फिर रोली मेरे कपड़े खोलने लगी।

आखिर में मैं जब पूरा नंगा हुआ तो मेरा लण्ड पकड़ कर बोली- वाओ … क्या मस्त लौड़ा है भोसड़ी का तेरा विशाल। बड़ा हैंडसम और शानदार है तेरा लौड़ा। हाय रे … आज मुझे आएगा चुदाने का असली मज़ा!
ऐसा बोल कर उसने लण्ड की कई चुम्मियाँ लीं।

मेरे पूरे लगे बदन पर हाथ फिराया, बोली- लड़का तो बड़ा बढ़िया है काजल। बड़ा मस्त माल है यार! इसका हथौड़ा जैसा लौड़ा आज मेरी चूत की ऐसी की तैसी कर देगा।

तब तक काजल भी नंगी नंगी हमारे सामने आ गई।
मैंने तो रोली के मम्मे खूब मसले खूब दबाये और खूब चूमा और चाटा।

फिर जब दोनों जेठानी और देवरानी मिलकर नंगी नंगी मेरा लण्ड चाटने लगीं तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा।
मैं बीच में नंगा लेटा था।

एक तरफ मेरी बाईं जांघ में अपना सर रख कर काजल मेरा लण्ड चाटने लगी। दूसरी तरफ मेरी दाईं जांघ पर अपना सर रख कर रोली मेरा लण्ड चाटने लगी।

काजल रोली के मुंह में लण्ड घुसेड़ती, रोली काजल के मुंह में लण्ड घुसेड़ती।
दोनों बड़े प्यार से मेरा लण्ड चूमने, चाटने और चूसने में जुट गईं।

मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।
मैं सातवें आसमान पर था।

कुछ देर बाद काजल ने कहा- इधर आ मेरी बुरचोदी जेठानी, अब मैं पेलूँगी तेरी चूत में लण्ड … मैं चोदूंगी तेरी फुद्दी!

उसने मेरा लण्ड रोली की चूत में पेल दिया और मेरी पीठ पर चढ़ बैठी।
मेरे साथ वह भी चोदने लगी अपनी जेठानी की चूत।
इसी तरह दोनों ने मिलकर खूब एक दूसरी की चूत मुझसे खूब चुदवाई.

रात भर यह चुदाई होती रही।
रोली रात में न खुद सोई और न किसी को सोने दिया।

Xxx साली की चूत का मजा लिया मैंने अपने ही घर में! साली मेरे यहाँ रहने आई थी कुछ दिन के लिए. मैंने उसे छेड़ा तो उसके भी मुझे छेड़ा. मैं समझ गया कि माल गर्म है.

मेरा नाम आकाश है दोस्तो. मैं 30 साल का एक हत्ता कट्टा गोरा चिट्टा नौजवान हूँ।

मेरी शादी दो साल पहले दीक्षा नाम की एक लड़की से हुई है।
दीक्षा एक बहुत ही सुन्दर सुशील और सरल स्वभाव वाली लड़की है।
वह एक वर्किंग वुमन है।

Xxx साली की चूत का मजा मुझे मेरे बीवी की बहन ने दिया.

मैं आपको अपने बारे में थोड़ा बता दूँ।
मैं हैंडसम हूँ, स्मार्ट हूँ और घुंघराले वालों वाला हूँ।

कॉलेज की दिनों में मुझे सेक्स में बहुत ज्यादा मज़ा आता था।
मैं लड़कियों से खूब हंस हंस कर बातें करता था और मजे लेता था.

चूँकि मैं पढ़ने में बहुत अच्छा था और स्पोर्ट्स में भी बहुत अच्छा था तो हमारे कॉलेज की लड़कियां मुझ पर मरा करती थीं और मेरे आगे पीछे घूमा करती थी.
मैं भी मौके के फायदा उठाया करता था।

धीरे धीरे मैं लड़कियों को पटाने लगा; उन्हें अपनी मोटर साइकिल पर बैठा बैठा कर घुमाने फिराने लगा।
फिर आहिस्ते आहिस्ते उन्हें अपना लण्ड पकड़ाने लगा।
मुझे लड़कियों को लण्ड पकड़ाने में बड़ा मज़ा आता था तो मैं बहाने से लड़कियों को सिनेमा दिखाने ले जाता था और वहां सबसे पीछे की सीट पर बैठ कर लड़कियों को अपना लण्ड पकड़ाया करता था और उनकी चूचियाँ मसला करता था।

एक बार फरीदा नाम की एक लड़की मुझे अपने पैसों से सिनेमा दिखाने ले गयी।
हम दोनों सबसे पीछे की सीट पर बैठ गए।

फिल्म फ्लॉप थी इसलिए कोई भीड़ तो थी नहीं।
जैसे ही हाल में अँधेरा हुआ वैसे ही उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया।

वह लण्ड खूब प्यार से हिलाती रही, सहलाती रही और मेरे कान में गन्दी गन्दी बातें मुझे सुनाती रही।
फिर वह मुझे बाहर लेडीज टॉयलेट में ले गयी और कमोड पर अपनी चूचियाँ खोल कर बैठ गयी।

उसने मुझे अपने सामने खड़ा किया, मेरी पैंट खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया।
फिर वह बड़े प्रेम से मेरा लण्ड चाटने और चूसने लगी।

मुझे लण्ड चाटवाने और चुसवाने में मज़ा आने लगा।

फिर उसने लण्ड मुट्ठी में लिया और मुट्ठ मारने लगी।
लण्ड ने कुछ ही देर में वीर्य उगल दिया जिसे वह चट कर गई।

यह देख कर मुझे उससे प्यार हो हो गया।
मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया।

सिनेमा तो देखना ही नहीं था तो हम दोनों फिर वापस आ गए।

ऐसा मैंने कई लड़कियों के साथ किया और सबको लण्ड पकड़ाने का मज़ा लिया।

मेरी शादी के पहले मेरी नौकरी लग गयी।
मैं बहुत खुश हुआ।

लेकिन शादी के बाद भी मेरा लड़कियों को लण्ड पकड़ाने का सिलसिला रुका नहीं।
मैं अभी भी चुपके चुपके लड़कियों को लण्ड पकड़ा ही देता हूँ।

एक दिन अचानक मेरे घर में मेरी सगी साली साक्षी आ गई।
मैं तो उसे देख कर हैरान हो गया और मस्त भी हो गया।

मुझे उसे देखे दो साल हो चुके थे।
अपनी शादी के बाद आज पहली बार उसे देख रहा था।

वह 21 साल की थी।

उसने साड़ी और डीप नेक का स्लीवलेस ब्लाउज़ पहना हुआ था. ब्लाउज़ के अंदर से उसकी छोटी सी ब्रा का दायरा भी साफ़ साफ़ दिख रहा था।

उसकी चूचियों का साइज साफ़ साफ़ झलक रहा था।
चूचियाँ तो बहनचोद बाहर निकलने के लिए बड़ी बेताब हो रही थीं।

मुझे यह जानने में ज़रा भी देर नहीं लगी कि उसके मम्मे मेरी बीवी के मम्मों से बड़े बड़े हैं।

मेरा तो मन हुआ कि मैं अभी इसके मम्मों के बीच अपना लण्ड घुसेड़ दूं।

उसकी खुली खुली बाहें बड़ी सेक्सी लग रहीं थीं और उसकी बाहों की गोलाई तो बड़ा गज़ब ढा रही थी।

उसके बड़े बड़े चूतड़ देख कर, पीछे से उसकी आधे से अधिक नंगी पीठ देख कर, उसकी मोटी मोटी जाँघों का अंदाजा लगा कर मेरा तो लण्ड साला आपे से बाहर हुआ जा रहा था।
लग रहा था कि साला चड्डी फाड़ कर बाहर निकल आएगा।

मैं उसकी चूत और गांड की कल्पना में खो गया.
उसका गोरा गोरा गदराया हुआ बदन मुझे अपनी तरफ खींच रहा था।
उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखें गोल चेहरा और गुलाबी होंठ मेरी जान ले रहे थे।

उसने जब बड़े प्यार से मुझे जीजा जी कहा तो मेरा मन हुआ कि मैं उसे अपनी गोद में उठा लूं।

बस मैं अपनी साली साक्षी के आगे पीछे घूमने लगा, उससे बातें करने लगा और वह सब करने लगा जो वह चाहती थी।

उधर मेरी बीवी दीक्षा ने अपनी बहन के आने पर उसको घुमाने फिराने के लिए 3 दिन की छुट्टी ले ली।
मुझे भी 3 दिन की छुट्टी लेनी पड़ी।

हम तीनों खूब घूमते फिरते रहे।
इन तीन दिनों में मैंने उसे खुश करने के लिए बहुत कुछ किया।

मैं साली जी के साथ दूसरे ही दिन से थोड़ी थोड़ी छेड़खानी करने लगा।
मेरी बीवी जब बाथ रूम में होती या टॉयलेट में होती या अकेली किचन में होती तो मैं साली का कभी हाथ पकड़ लेता, कभी उसकी चुम्मी ले लेता और कभी उसकी चूचियाँ दबा देता।

वह भी जवाब में कभी प्यार से अपना कंधा मेरे कंधे पर मारती, कभी मुझे अपने कूल्हे से छू लेती, कभी मेरी जांघ पर हाथ रख देती तो कभी मुंह बना बना कर जबान निकाल निकाल कर मुझे चिढ़ाती।

वह भी मुझ पर डोरे डालने लगी जैसे मैं उस पर डोरे डाल रहा था।

लेकिन हम दोनों को कभी अकेले में रहने का मौक़ा नहीं मिला इन 3 दिनों में।

एक दिन जब मैं तौलिया लपेट कर एकदम नंगे बदन नहाने जा रहा था तो साक्षी वरांडा में बैठी हुई सब्जी काट रही थी।
मेरी बीवी अंदर किचेन में नाश्ता बना रही थी।

मेरा लण्ड बहन चोद खड़ा था।
मुझे शरारत सूझी।

मैं किचन की तरफ पीठ करके साक्षी के आगे खड़ा हो गया और अपनी तौलियां के दोनों सिरे फैलाकर अपना नंगा लण्ड उसे दिखाते हुए कहा- लो साक्षी, ज़रा इधर देखो!
उसने देखा तो बोली- बाप रे बाप … इतना बड़ा? इतना मोटा?

मैं फिर बाथ रूम में चला गया।

उधर किचन से मेरी बीवी बोली- अरी साक्षी, क्या बड़ा है और क्या मोटा है?
वह बहाना बनाती हुई बोली- दीदी, गोभी के फूल में देखो न कितना बड़ा और कितना मोटा कीड़ा है।

मैं यह सुनकर बहुत खुश हुआ।

आखिरकार मैंने साली जी को अपना लण्ड दिखा ही दिया।
मुझे मालूम हो गया कि आग अगर मेरे लण्ड में लगी है तो उसकी चूत में भी लगी है।

चौथे दिन मेरी बीवी काम पर चली गयी और मैं भी काम पर चला गया।
लेकिन मैं एक घंटे के बाद वापस घर लौट आया।

साली जी ने जैसे ही दरवाजा खोला तो मैंने दरवाजा बंद कर उसको अपनी बाँहों में भर लिया, चिपका लिया उसे अपने बदन से!
वह बोली- अरे जीजा जी, ये क्या कर रहे हो ? कोई देख लेगा तो?
मैंने कहा- कोई नहीं देखेगा। यहाँ और कोई नहीं है हम दोनों के अलावा। मैं कई दिन से तड़प रहा हूँ। आज मौक़ा मिला है मेरी रानी!

वह बोली- अगर दीदी को मालूम हो गया तो?
मैंने कहा- उसे मालूम ही नहीं होगा। तुम चिंता न करो।

वह मुझसे अपने आप को छुड़ाती रही लेकिन मैं उसे छोड़ने के मूड में कतई नहीं था।
मैंने उसे कस के चिपका लिया था और उसकी ताबड़तोड़ चुम्मियाँ ले रहा था।

वह बोली- अच्छा रुको, मुझे बाथरूम लगी है।
तब फिर मैंने उसे छोड़ दिया।

उसने एक ताला उठाया और बगल वाले छोटे दरवाजे से बाहर जाकर मेन दरवाजे पर ताला लगा दिया और फिर वापस आ गयी।
अंदर से छोटा वाला दरवाजा बंद कर लिया।

उसने कहा- अब अगर जो भी आएगा वह ताला देख कर चला जायेगा। अगर दीदी आ गयी तो वह मुझे फोन करेगी, तब तुम छत से कूद कर बाहर निकल जाना और मैं कह दूंगी की मैंने अपनी सेफटी के लिए ताला बंद किया था।

मैंने उसकी चुम्मी फिर ली और कहा- हाय मेरी रानी, तुम तो सच में बड़ी चालाक हो, बड़ी बुद्धिमान हो और बड़ी चालू चीज हो। अब तो मैं बिना तुम्हे चोदे जाऊंगा नहीं। आज मैं तुम्हे खूब जी भर के चोदूंगा मेरी रानी!
वह नखरा करती हुई बोली- तुम मुझे बहनचोद तभी चोद पाओगे जब मैं चुदवाऊंगी. वरना मुझे कभी नहीं चोद पाओगे.

मैंने कहा- तो फिर चुदवा लो न मुझसे मेरी रानी। मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।
मैं उसके कपड़े खोलने लगा।

वह बोली- नहीं जीजा, मुझे नंगी मत करो, मुझे शर्म आ रही है।
मैंने कहा- अब तुम जवान हो गयी हो यार! शर्म वरम छोड़ो। मैं तेरा जीजा हूँ कोई बाहर नहीं हूँ। जब तेरी बहन मेरे आगे नंगी हो जाती है तो तुम भी मेरे आगे नंगी हो जाओ मेरी रानी।

मैंने उसकी चूचियाँ खोल डाली तो मेरे लण्ड में करंट लग गया।
फिर मैंने उसका पेटीकोट भी खोल डाला तो उसने अपनी चूत दोनों जांघों दबाकर बैठ गयी।

मैंने कहा- अरे यार, अपनी मस्तानी चूत के दर्शन तो कराओ मेरी साली जी! तुम तो गज़ब की खूबसूरत हो। मैं तेरी चूत देखने के लिए तड़प रहा हूँ।

मैंने उसकी जांघें खोल कर अलग कर दी और झुक कर उसकी चूत की कई बार चुम्मी ले ली।
वह भी गनगना उठी।

उसको भी जोश आ गया।
वह भी उत्तेजित हो गई तो उसने मेरे कपड़े खोल कर मेरा नंगा खड़ा लण्ड पकड़ लिया और उसे चूम कर बोली- हाय दईया, बड़ा मोटा तगड़ा है तेरा भोसड़ी का लण्ड जीजू! उस दिन जब मैंने तेरा लण्ड देखा था तो मुझे एक नजर में पसंद आ गया था। मेरी चूत बुरचोदी गीली हो गयी थी। तब से मेरी आँखों में तेरा लण्ड ही बसा है जीजू! कितना प्यारा और कितना मस्त लौड़ा है तेरा!

मैंने कहा- आई लव यू माय डियर साक्षी! ।
वह बोली- आई लव यू जीजू वैरी मच एंड आई लव योर लण्ड टू!

फिर हम दोनों नंगे नंगे बेड पर गए और एक दूसरे के सामने 69 बन कर लेट गए।
मैं उसकी बुर चाटने लगा और वह मेरा लण्ड!

बुर के साथ मैं उसकी खूबसूरत जांघें भी चाटने लगा।
पोले पोले दांतों से जांघें प्यार से काटने भी लगा।
उसकी मस्तानी गांड भी चाटने लगा, चूतड़ों पर प्यार से थप्पड़ मार मार कर मज़ा लेने लगा।
फिर मैं दोनों उसके दोनों निपल्स भी मसलने लगा।

वह भी मेरे नंगे जिस्म पर सब जगह फिराने लगी, मेरी जाँघों पर मेरे चूतड़ों पर फिर मेरे पेल्हड़ भी प्यार से चूमने चाटने लगी।
मेरे लण्ड पर थप्पड़ मारकर बोली- तू भोसड़ी का बड़ा प्यारा है यार! कितना मोटा है तू … कितना लंबा है तू! तू मेरी जान जान ले लेगा। मुझे तुम पर बड़ा प्यार आ रहा है।

मैंने कहा- मुझे भी रहा है साक्षी!
वह बोली- अरे जीजू, मैं तुमसे नहीं आपके लण्ड से बात कर रही हूँ। मुझे लण्ड से बात करना बड़ा अच्छा लगता है। मैं जब किसी का लण्ड पकड़ती हूँ तो लण्ड से बातें जरूर करती हूँ। मुझे लण्ड से बतलाना बड़ा अच्छा लगता है।
मैंने पूछा- तुम अब तक कितने लण्ड पकड़ चुकी हो साक्षी?
वह बोली- लण्ड तो मैंने बहुत पकड़े हैं जीजा जी, पर किसी मादरचोद का लण्ड इतना जबरदस्त नहीं था जितना आपका है। मुझे तो आपके लण्ड से मोहब्बत हो गई है जीजा जी।

तब तक मैं बहुत जोश में आ गया था.
मैंने उसे बेड कोने में घसीटा और उसकी टांगें फैला दीं और मैं नीचे खड़ा हो गया.
मेरा लण्ड उसकी चूत के सामने आ गया।

मैंने लण्ड गच्च से पेल दिया लण्ड अंदर!
लण्ड सरसराता हुआ अंदर पूरा घुस गया।

उसके मुंह से उफ निकला, वह भी मजे से चुदवाने लगी।

मुझे अहसास हुआ कि वह पहले से चुदी हुई है।
लेकिन मुझे उसे चोदने में मज़ा आने लगा।

मैं स्पीड बढ़ाता गया और वह भी अपनी गांड उचका उचका कर चुदवाती गयी।
उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ मेरी आँखों के सामने नाचने लगीं।

मैं उन चूचियों पर बार बार प्यार से हाथ मारने लगा।
वह बोली- हाय मेरे जीजू, मेरे राजा, आज मुझे खूब अच्छी तरह से चोदो, सच पूछो तो मैं तुमसे चुदवाने ही आयी हूँ। आपके लण्ड का मज़ा लेने आई हूँ। आपका लण्ड अपनी बुर में ठोकवाने आई हूँ. तुमसे चुदने आयी हूँ मेरे भोसड़ी के जीजू! मुझे रंडी की तरह चोदो, मुझे हर रोज़ चोदो, मुझे चोद चोद के रंडी बना दो। मैं बुरचोदी बहुत चुदक्कड़ लड़की हूँ। हर रोज़ लण्ड लेती हूँ। हर रोज़ चुदवाती हूँ। फाड़ डालो मेरी बुर … चीर डालो मेरी चूत! वॉवो हूँ हो हूँ हो बड़ा !अच्छा लग रहा है. ही हूँ ही हो चोद हाय रे … क्या लौड़ा है क्या मस्त चुदाई है. वाह, मज़ा आ गया. और चोदो दिन रात चोदो मुझे। खुल्लम खुल्ला चोदो मुझे … तेरी बहन का भोसड़ा जीजू। मुझे चोदे जाओ। तेरी बहन की बुर। तुम ही मेरे मरद हो यार। लण्ड पेल पेल कर चोदो!

साक्षी सच में चुदाने में बड़ी मस्त थी।
मेरी साली के साथ पहली चुदाई थी तो न वह बड़ी देर तक रुक सकी और न मैं।
वह भी खलास हो गयी और मैं भी।

तब वह मेरा झड़ता हुआ लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी।

फिर मैं नहा धोकर फ़ौरन अपने ऑफिस चला गया।

शाम को मैं अपने ऑफिस से आ गया और मेरी बीवी अपने ऑफिस से!
हम लोग ऐसे मिले जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

आते ही मेरी बीवी ने बताया- अरे सुनो, आज जेठानी जी का फोन आया था। कल उसके बेटे का मुंडन संस्कार है। उसमें हम सबको सवेरे से ही जाना है। हमारे साथ कुछ और भी लोग हैं जो चलेंगे।
मैंने कहा- ठीक है, मैं कल की छुट्टी ले लूंगा।

मेरे भाई साहब का घर यहाँ से 12 किलोमीटर दूर है।

सवेरे सवेरे हम सब तैयार हो गए और गाड़ी में बैठ गए।

तब तक कुछ और भी लोग आ गए तो मेरी बीवी ने कहा- साक्षी, तुम अपंने जीजू के साथ मोटर साइकिल से आ जाना. अब कार में तो जगह है नहीं।

साक्षी ने कहा- ठीक है दीदी, मैं जीजू के साथ आ जाऊंगी, आप लोग चलिए।

उन लोगों के जाने के बाद साक्षी मुझसे लिपट गयी और बड़े सेक्सी अंदाज़ में बोली में बोली- अब तो मैं तुमसे चुद कर ही जाऊंगी जीजू! तेरे लण्ड का मज़ा लेकर ही जाऊंगी जीजू!
मैंने भी हंस कर कहा- हां हां मेरी रानी, मैं भी तुझे चोद कर ही जाऊंगा। तेरे चूत का मज़ा लेकर ही जाऊंगा।

फिर क्या … उसने अपने कपड़े उतार दिया और मैंने अपने कपड़े!
वह मेरे आगे नंगी हो गयी और मैं उसके आगे नंगा हो गया।

साली मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं उसके नंगे बदन से खेलने लगा।

मैंने कहा- साक्षी, आज मैं तुम्हे पीछे से चोदूंगा। डॉगी स्टाइल में चोदूंगा।
वह बोली- हां हां, बिल्कुल चोदो। किसी भी स्टाइल में चोदो, मगर चोदो और खूब जम कर चोदो।

मैंने सच में उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से पहले उसकी चूत में उंगली डाल कर खूब गर्म किया।
वह भी इतनी मस्त जवान है कि उसकी चूत हमेशा गीली ही रहती है, हमेशा गर्म ही रहती है।

मैंने जैसे ही लण्ड घुसेड़ा तो वह अंदर तक घुसता ही चला गया।

वह भी अपने दोनों हाथ नीचे जमीन पर रखे हुए अपनी गांड को आगे पीछे करती हुई बड़ी मस्ती से चुदवाने लगी।

साक्षी चुदवाने में बड़ी जबरदस्त लड़की है।
इतनी अच्छी तरह से तो मेरी बीवी भी नहीं चुदवा पाती।

वैसे भी साली की चूत बीवी की चूत से कहीं ज्यादा अच्छी और प्यारी लग रही थी मुझे!

मैंने उसे वहां जाने के पहले एक बार नहीं दो बार चोदा और खूब घपाघप चोदा।

अब उसकी शादी हो गयी है मगर वह जब भी मिलती है तो मुझसे चुदवाती जरूर है।
उसकी ससुराल लोकल ही है।
जब जब उसका पति बाहर जाता है तो वह मुझे बुला लेती है और मैं भी उस Xxx साली की चू जी भर के चोदता हूँ और खूब मजे ले ले कर चोदता हूँ।


जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरे पति विकास एक एम एन सी में जॉब करते हैं और अक्सर उनके पास हमारे लिए समय नहीं होता है।

हम जमींदारों के खानदान से संबंध रखते हैं और हमारी गांव में काफ़ी जमीन है और हमारा पुश्तैनी मकान भी है।
गांव के लोग विकास को ठाकुर साहब और मुझे ठकुराइन कहते हैं।

लेकिन गांव में कोई रहता नहीं है इसलिए मकान गांव के ही एक लड़के के हवाले रहता है, जिसका नाम राजू है.
वह वहां का केयर टेकर है और वहां की गौशाला में अपना तबेला भी चलाता है।

राजू विकास को भईया और मुझे भौजाई कहता है।

वह एक 28 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है और वो अकेले ही तबेले और हवेली को संभालता है।

एक बार जमीन के सिलसिले में मेरा और मेरे पति का गांव जाना हुआ।
गांव पहुंचकर मैं और मेरे पति उसी पुश्तैनी मकान में रुकने वाले थे।

हमारे आने की खबर पाकर राजू ने पहले ही हवेली की साफ सफाई करवा दी थी और हमारे रुकने की अच्छी व्यवस्था की थी।

खैर आते आते शाम हो गई थी इसलिए रात का खाना पीना करके हम दोनों हवेली में ही सो गए।

राजू हवेली के पीछे बने गौशाला के पास सोता था इसलिए वह भी वहीं सो गया।
कमरे में बहुत गर्मी थी इसलिए मुझे बड़ी मुश्किलों से नींद आई।

अगली सुबह हमें अपने खेतों का मुआयना करने जाना था।

मेरे पति अपनी कुछ जमीन बेचना चाहते थे इसलिए पहले हमारा मुआयना करना जरूरी था।

राजू के साथ हम दोनों खेतों की तरफ गए और जाकर अपनी जमीन का मुआयना किया।

लेखपाल की मौजूदगी में सारी नपाई की गई और फिर खरीददार पार्टी से फोन पर बात हुई, उन्होंने 4 दिन बाद आने की बात कही।
क्योंकि हम गांव एक हफ्ते के लिए आए थे इसलिए हमें कोई दिक्कत नहीं थी।

इसी तरह हमारा दिन निकल गया और फिर रात आई।

क्योंकि हम दोनों ही पूरी हवेली में अकेले थे इसलिए आज मेरा दिल कुछ मस्ती करने का कर रहा था।
मैंने आज अपने पति से कहा- क्यों न आज हम आंगन में सोएं क्योंकि कल रात गर्मी बहुत ज्यादा थी।

मेरे पति ने राजू को आवाज दी।

राजू आया और पूछा- क्या हुआ भैया, आपने मुझे इस वक्त बुलाया?
विकास ने कहा- राजू, आज तुम्हारी भाभी बहुत गर्मी लग रही है, तुम हमारा बिस्तर यहीं जमीन पर लगा दो, कुछ राहत मिलेगी।

राजू ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और कहा- अब भौजाई को गर्मी लग रही है तो गर्मी का इलाज तो करना पड़ेगा ना!
उसने मुझे देखकर मुस्कान दी और फिर आंख मारी।

मैं कुछ न बोली और शर्मा कर नजर नीची कर ली।

राजू हमारे कमरे में गया और फिर हमारे गद्दे निकाल कर आंगन में जमीन पर लगा दिए और हमारा बिस्तर तैयार कर दिया।

उसके बाद राजू चला गया।

मैं विकास के साथ लेटी थी और हम सोने की तैयारी कर रहे थे।

आज मेरा मन सेक्स करने का कर रहा था लेकिन विकास कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे।
इसलिए मैंने उन्हें उत्तेजित करने का फैसला किया।

मैंने अपनी साड़ी उतार दी और पेटिकोट ब्लाउज में आ गई।
फिर मैंने धीरे धीरे विकास के सीने को सहलाना शुरू किया।

विकास मेरे इरादे समझ गए और बोले- डार्लिंग, आज मैं बहुत थका हुआ हूं, प्लीज हम कल करें?
मैं नाराज होकर बोली- आपका रोज का यही हाल है, एक तो घर पर नहीं रहते हो ऊपर से तुम्हारी थकावट! अगर मुझसे प्यार नहीं था तो शादी ही क्यों की?

विकास मेरी बात सुनकर हंस पड़े और कहा- अच्छा बाबा सॉरी, मेरी गलती है कि हम अपनी बीवी को खुश नहीं रख पाते हैं।
यह कहकर उन्होंने मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया ‘उउम्ह उउम्ह्ह’
मैं भी इस काम में उनका बखूबी साथ दे रही थी।

कुछ देर के चुम्बन के सिलसिले के बाद मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए और विकास मेरे स्तनों को चूसने लगे।
मेरे स्तनों को पीने के बाद उन्होनें अपना पजामा उतार दिया और मैंने उनके लिंग को चूसना शुरू कर दिया।

क्योंकि हमारे बीच अक्सर ऐसा होता रहता था इसलिए मेरे लिए उनका लिंग कोई विशेष नहीं था।

कुछ देर तक उसे गीला करने के बाद मैंने अपनी पैंटी उतार दी जिसे मैंने पेटीकोट के नीचे पहना हुआ था।

अब मेरे जिस्म पर पेटीकोट और ब्लाउज थे जिसके हुक खुले हुए थे।

मैं बिस्तर पर लेट गई और विकास ने मेरे पेटिकोट को ऊपर उठा दिया।

मेरी चूत पर थूक लगा कर विकास ने अपना लंड अंदर डाला और उसे आगे पीछे करने लगे।

मेरी आंखे इस अहसास से बंद हो गई और मैं धीरे धीरे आहें भरने लगी- उफ विकास, चोदो मेरी मुनिया को … आह!
इस तरह के अश्लील वाक्य मेरे मुंह से निकलने लगे।

इस दौरान मैं एक बार झड़ गई लेकिन विकास ने ये सब जारी रखा।
काफी देर बाद विकास भी झड़ने की कगार पे आ गए और मेरी चूत में ही झड़ गए।

जब उनका गर्म वीर्य मेरी योनि में भर गया तो मैंने आंख खोली तो छत पर कोई दिखा.
कद काठी से वह राजू लग रहा था।

मैं उसे गौर से देखने का प्रयास करने लगी.
लेकिन हल्की चांदनी की वजह से मुझे उसका चेहरा साफ़ नहीं दिखा लेकिन कद काठी से मैं ये समझ चुकी थी कि वह राजू ही है।

मेरे दिल में शरारत सूझी इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा और पतिदेव को अपने ऊपर लिटा लिया.
उनको भनक भी नहीं लगी कि कोई हमें इस हालत में देख रहा है।

जैसे ही राजू को आभास हुआ कि मैं उसे देख चुकी हूं, वह दबे पांव वहां से निकल गया और अपनी खाट पर लेट गया।

मेरा मन संतुष्ट तो नहीं हुआ था लेकिन मैंने अब विकास को जगाना उचित नहीं समझा और फिर उसी के साथ उसी अवस्था में सो गई।

अगली सुबह हम दोनों मियां बीबी नंगे ही सो रहे थे।

सुबह के 7 बजे थे।
सूरज निकल रहा था और उसकी रोशनी हमारे आंगन में आने लगी थी।

इतने में ही हमारे दरवाजे पर दस्तक हुई तो हमारी आंख खुली।
मैंने झट से अपने कपड़े उठाए और पास बने कमरे में घुस गई।

विकास ने भी अंडरवियर पहनी और जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने राजू खड़ा था।

राजू के हाथ में एक जग था, वह हमारे लिए दूध लाया था।

राजू ने अन्दर झांका तो मैं उसे नहीं दिखी।
कल रात में मेरी ठुकाई देखकर जरूर उसका दिल नहीं भरा था।

राजू दूध देकर चला गया और फिर हम दोनों अपने काम काज में लग गए।

फिर हम दोनों कुछ देर के लिए खेतों की तरफ गए।

वहां विकास के पास उसकी कम्पनी का कॉल आया था कि उसे दिल्ली आना होगा क्योंकि अप्रेजल होने वाला था और उसके प्रमोशन के पूरे आसार थे।

विकास ने मुझे बुझे मन से बताया कि उसे कल दिल्ली के लिए निकलना होगा।

हमारी जमीन की डील दो दिन बाद होने वाली थी इसलिए विकास ने मुझे गांव में ही रुकने को कहा।

मैंने हामी भर दी और घर वापस आ गए।

रात को हम दोनों फिर से आंगन में लेटे।

मुझे पता था कि आज भी राजू हम दोनों को देखेगा.
लेकिन मुझे तो मजा आ रहा था इसलिए मैंने आज रात फिर से पतिदेव को गर्म करने का फैसला किया।

क्योंकि कल उन्हें जाना था इसलिए वे भी आज पूरे दिल से मेरी फुद्दी मारना चाहते थे।

मैंने उनको रोका और कहा- 10 बज जाएं तब करिएगा क्योंकि तब तक गांव के लोग सो जाते हैं।

उनको मेरी बात ठीक लगी और रात 10 बजे के करीब हमारी रतिक्रिया शुरू हुई।

छत पर कुछ आहट सुनाई दी तो मैं समझ गई कि अब राजू छत पर आ गया है।

आज रात मैं राजू को पूरी तरह से अपना बेशर्म रंग दिखाना चाहती थी।

मैंने खुद ही अपने सारे कपड़े उतार दिए और जन्मजात नंगी हो गई।
मेरा गोरा बदन चांदी की तरह चमक रहा था।

मैंने विकास का लंड चूसना शुरू किया।
मैं जोर जोर से विकास का लंड चूस रही थी और मुंह से ‘ऊंह ऊऊउम्म’ की आवाजें निकाल रही थी.
आज मेरी आवाज कुछ तेज थी ताकि ऊपर बैठा राजू भी अच्छे से सुन सके।

लंड चूसने के बाद मैंने विकास को नीचे लिटाया और उसके ऊपर आकर 69 पोजीशन में आ गई।
मैं अच्छे से उनके लंड को चूस रही थी और विकास भी अच्छे से मेरी चूत चाटने में लगे थे।

इसके बाद मैं उनके लंड को पकड़ कर अपनी योनि पर सटाया और एक झटके में वो मेरी चूत में घुस गया।

मेरे मुंह से तेजी से आहें निकल रही थीं और मैं जोर जोर से धक्के लगा रही थी।

इस तरह चोदते हुए 10 मिनट हुए थे और विकास स्खलित होने वाले थे.
इसलिए मैंने उनके लंड को चूत से निकाल दिया और उसे चूसने लगी।

विकास का वीर्य मेरे मुंह में ही छूटा और वे हांफने लगे।

मैंने भी खुद को उनके बगल में लिटा दिया और एक हाथ से उनके लंड को सहलाने लगी।
इस दौरान मैंन्र चोर नज़रों से छत पर बैठे राजू को देखा।

वह चारदीवारी की आड़ में छुपा हमारी रतिक्रीड़ा देख रहा था।

फिर जब विकास का लंड तैयार हुआ तो हमने फिर से चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दिया।

पूरी रात हमने 3 बार चुदाई की और सुबह 3 बजे तक हमारी मस्ती चली।

इसके बाद हम दोनों सो गए।

अगले दिन सुबह हम दोनों उठे और मैंने उनके लिए नाश्ता बनाया।
नाश्ता कर के विकास जाने की तैयारी करने लगे।

राजू उनके साथ उन्हें स्टेशन पर छोड़ने जाने वाला था।

उन दोनों को विदा कर के मैं लेट गई और मेरी आंख लग गई।

उठी तो अब तक सुबह के 11 बजे थे।
राजू विकास को छोड़कर वापस लौट आया था और गौशाला के पास बैठा था।

मुझे शरारत सूझी।
मैं राजू को छेड़ना चाहती थी इसलिए मैंने एक प्लान बनाया।

मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार दिया और सिर्फ पेटिकोट से अपना वक्ष स्थल ढक लिया जैसे अक्सर गांव की महिलाएं नहाते वक्त कर लेती हैं। मेरी आधी नंगी चूचियां और आधी नंगी जांघें प्रदर्शित हो रही थी.

मैं अपनी इस हरकत से मन ही मन बहुत उत्तेजित हो रही थी.

मैं वैसे ही राजू के पास पहुंची तो वह मुझे देखकर हैरान रह गया।
मेरा चांदी सा जिस्म उसके सामने था और मेरे पेटीकोट से मेरी वक्षरेखा झलक रही थी।

राजू ने मुझे देखा तो ऊपर से नीचे तक निहारता रहा।
फिर कामुक अंदाज़ में बोला- क्या भौजी, आज खेतों में जाकर नहाने का इरादा है क्या? कहो तो ट्यूबवेल चला दें?

मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और कहा- अरे नहीं रे … खेतों में नहीं यहीं घर पर नहाऊंगी.

जब मैं नहाने बैठी तो देखा कि साबुन खत्म हो गया है.
“तुम मेरे लिए नहाने वाला साबुन ला दो।” यह कहकर मैंने राजू के हाथ में 100 का नोट रखा।

राजू ने मुस्कुरा कर कहा- वैसे आप जैसी गोरी गोरी भौजाई को साबुन में मजा नहीं आयेगा, आप कहो तो गाय का कच्चा दूध भिजवा दूं, उसी में नहा लीजिए, आप का गोरा बदन और निखर जाएगा।
मैंने कुछ नहीं कहा और हंसकर राजू की बात को टाल दिया।

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