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Massage Girl in Rajouri: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Rajouri who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Rajouri that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Rajouri massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Rajouri who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Rajouri massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Rajouri massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Rajouri who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Rajouri employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Rajouri helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Rajouri

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Rajouri at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

मैं सुनील, 26 साल का राजस्थान से हूँ। यह बात उन दिनों की है जब मैं नया-नया जवान हुआ था।

मैं एक लड़की को पसंद करने लगा, कब प्यार हुआ पता ही न चला।
इतनी ज्यादा जानकारी भी नहीं थी।

स्कूल में मुझे सब अक्षय कुमार कहते थे।
स्कूल में बहुत लड़कियों से दोस्ती थी, लेकिन उनके लाइन देने के बाद भी मुझे उनसे प्यार नहीं था। मुझे प्यार अम्रता से हुआ जो कि मेरी ही कालोनी में रहने आई थी। वो दिल्ली से आई थी।

मैं वहाँ पर क्रिकेट खेलने जाता था। उसका कद 5.5 फुट का था, गोरा-चिट्टा रंग, कालोनी के सब लड़के उसे लाइन मारते थे।

नए साल पर मैंने हिम्मत करके उसे लव-लेटर दिया तो उसने जवाब दिया।

‘आई एम सीनियर.. यू आर जूनियर…’

वो मुझसे एक साल बड़ी थी, लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया। मैं उसे किसी भी कीमत पर प्यार करना चाहता था।

मैंने उसकी सहेली जिसका नाम अंजलि था, उससे कहा- अम्रता मुझसे रिश्ता बनाए, चाहे जो भी रिश्ता बना ले, पर मुझसे बात करे।
मैं वास्तव में उसे बहुत प्यार करता हूँ।

मेरी हालत पागलों से भी बदतर थी। मुझे न भूख लगती थी, न प्यास.. सिर्फ़ वही दिखती थी।

आखिर वो दिन आ ही गया जब उसने मुझे अपने घर बुलाया बात करने के लिए। एक बात बताऊँ वो मेरी सीनियर थी, मेरी गांड फ़ट रही थी कि कहीं मेरे घर में बता न दे।

मैं एक टॉपर स्टूडेन्ट था इसलिए मेरे सभी इज़्ज़त करते थे। मैं उसके दरवाजे पर पहुँचा तो मुझे 103 डिग्री बुखार था।

उसके छोटे भाई ने मुझे कागज़ का एक टुकड़ा दिया और बोला- दीदी ने आपको देने को कहा है।

उस पर लिखा था- आई लव यू.. माई अक्षय कुमार और इसके आगे हम क्या कहें.. जानम समझा करो। शाम 6 बजे घर पर आना। कोई नहीं होगा। मैं आपको चाय पिलाऊँगी। प्लीज़ आ जाना- तुम्हारी अम्रता।

अब तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। शाम 6 बजे मैं उसके घर गया।

उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था मेरी अम्रता बहुत खूबसूरत थी, गोरा रंग 5.5 फुट का कद.. अच्छी फिगर.. गोल चूचियाँ… गोरी जांघें.. वो सब कुछ उसमें था, जो किसी को भी पागल कर दे, लंड को खड़ा कर दे.. हाथ से लौड़ा मसलने को मजबूर कर दे।

वो 18 साल की कमसिन चुदाई वाली उमर।

यहाँ तक कि अगर कह दें तो मैं किसी को भी गोली मार देता।

उसने मुझसे नमस्ते किया तो मैं बोला- सॉरी.. आप मेरी सीनियर हैं।

वो बोली- पहले सीनियर थी.. पर आप अब मेरे सब कुछ हो।

मुझे वो महसूस हुआ जो मैं शब्दों में नहीं कह सकता हूँ।

अम्रता मेरा पहला प्यार थी उससे मुझे बेइंतेहा मुहब्बत थी।

प्रिय पाठकों, मैं उसे आज भी प्यार करता हूँ।

अब आगे सुनिए उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा- डरो नहीं.. रियली आई लव यू… मैं भी आपको चाहती थी, पर डरती थी कि कहीं आप नाराज न हो जायें.. इसलिए कभी कहा नहीं, डियर सुनील जब तुम्हारे पास लड़कियाँ होती हैं तो मैं बहुत जलन महसूस करती हूँ, मुझे दूर मत करना।

इतना कहकर वो मेरे सीने से लिपट कर रोने लगी।

मैं भी रो रहा था। पहली बार कोई लड़की मेरे सीने से लिपटी थी, उसकी चूचियां मेरे सीने से चिपक रही थीं।

मेरा लंड खड़ा होने लगा, फ़िर उसने अपने गुलाबी होंठों से मेरे होंठों को चिपका दिया और हम लोग चुम्बन करने लगे।

मैं उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर रहा था वो रो रही थी।

चुम्बन करते समय वो अपनी जीभ से मेरी को जीभ चाटने लगी ये मेरे लिए पहल अनुभव था। मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी चूत के पास छूने लगा।

मुझे लगा इससे वो बुरा मान जाएगी मगर वो धीरे से बोली- सुनील क्या पहले ही दिन यह सब ठीक रहेगा?

मैं बोला- क्यों.. क्या मतलब?

वो बोली- अच्छा चलो कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी ही हूँ.. जो करना चाहो.. करो। अब मेरे समझ में न आए कि क्या करूँ? कैसे करते हैं?

वो मेरे लौड़े पर हाथ रखती हुई बोली- सामान तो दिखाओ।

मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी। उसके मुलायम गोरे हाथों ने मेरा 7 इन्च लम्बा मोटा लंड बाहर निकाला तो आँख मार कर बोली- यार ये तो बहुत बड़ा है।

मैं अब पूरे जोश में था।
मैं उसको बिस्तर पर ले गया और जींस उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में था।

मैं उसके होंठों को कसकर चूमने लगा। उसका कमीज उतारा, फ़िर ब्रा उतारी, मेरे हाथ में उसके गोरे-गोरे, गोल-गोल दूध थे उन पर भूरे रंग की भुंडी.. बहुत ही मस्त लग रहे थे।

वो ब्रा नहीं पहने हुए थी, सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो उसने शरमा कर आँखें बंद कर लीं।

मैं बोला- डियर अब काहे की शरम.. मैं आपका पति हूँ।

वो बोली- तो मैं कुछ कह रही हूँ क्या…? अब आप ही मेरे सब कुछ हो… मेरा सब कुछ आपका ही है.. जो चाहो करो।

उसे विश्वास था कि हम लोगों की शादी हो जाएगी.. क्योंकि हम एक ही जाति के थे। उसके मेरे बीच प्यार बहुत था, हम दोनों के ही पिता अधिकारी हैं, इसलिए कोई दिक्कत का सवाल ही नहीं था।

मैं भी उससे शादी करना ही चाहता था। उसकी सलवार खोल कर अलग किया उसकी गोरी-गोरी जांघें मेरा स्पर्श पाकर और भी गरम हो गईं। उसकी पैंटी में थोड़ा छेद था, देखा तो मैंने उंगली डाली।

तो बोली- अरे यार दोनों पैंटी गीली थीं इसलिए यह पुरानी पहन ली थी।

मैं मुस्कुराने लगा, तो हँस कर बोली- यार तुम तो मेरी गरीबी का मज़ाक बना रहे हो।

मैं बोला- डियर आप बहुत ही मालदार हैं। बोली- माल तो नीचे है मेरे सजना.. इस चड्डी को उतार कर फ़ेंक दो और अपने माल को ले लो।

इतना कहकर वो शरमा गई।

मैंने उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी बुर बिल्कुल गोरी.. और उस पर भूरे छोटे-छोटे बाल थे।

अब तो मैं पागल हो गया, बुर को छुआ तो लगा जैसे गरम-गरम भट्टी हो।
मैं बुर को सहलाने लगा।

‘आह ओह्ह.. क्या कर रहे हो.. प्लीज़्ज़..!’

मैंने उसकी बुर की दरार में ऊँगली डाली तो बोली- क्या ऊँगली ही डालेंगे आप? इतना कह कर चुप हो गई।

मैंने कहा- रुको डार्लिंग.. अभी सब डालूँगा जी भर कर तुझे चोदूँगा.. पहले तेरी चूत तो चाट लूँ।

मैं जीभ से उसकी चूत के दोनों हिस्सों को चाट कर चोदने लगा, इससे मैं तो उत्तेजित हो ही रहा था, वो भी ‘आह.. ओह्ह.. मार डालोगे… चोद दो.. प्लीज़्ज़..’ सिसकार रही थी।

फ़िर मैंने उसके मुँह में अपना लंड डाला वो मेरा लौड़ा चाटने लगी।
बहुत मज़ा आ रहा था।
इस 69 की अवस्था में हम दोनों पागल हो रहे थे।

अब बारी चुदने-चुदाने की थी।

वो बोली- सुनील.. लंड धीरे से डालना प्लीज़.. वरना मेरी खूबसूरत बुर फ़ट जाएगी..समझ रहे हो न…

मैंने अब उसकी बुर पर सुपारा रखा तो लंड बुर में नहीं गया..

फ़िसल गया तो हँस कर बोली- बुद्धूराम ऐसे नहीं होगा।
उसने अपने मुँह से थूक निकाल कर मेरे लंड पर मल दिया और लंड को बुर के मुँह पर खींचा।

मैंने हल्के से धक्का दिया तो बुर में दो इंच अन्दर घुस गया। वो आँखें फैला कर बोली- दर्द हो रहा है।

अब मेरे लंड को चूत की गरमी मिल गई थी।

मैं होंठों को चूसे जा रहा था… धीरे-धीरे 5-6 बार अन्दर-बाहर किया।

अब उसे भी मजा आ रहा था, वो नीचे से कमर भी हिला रही थी।
वो बोली- आप अभी इतना ही डालो… अब दर्द में भी मजा आ रहा है।

लेकिन मैं तो पूरा लंड उसकी बुर में डालना चाह रहा था।

मैं बोला- देखो अम्रता अब तुम्हें पूरे लंड का मजा देता हूँ।

मैंने दूसरा झटका लगाया तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी बुर में घुस गया।
वो इतनी तेज़ चिल्लाई कि मैं डर गया कि कोई पड़ोस से न आ जाए।
अब जोर से मैंने उसके शरीर पर दबाया कि वो उठ न जाए। वो दर्द से तड़फ कर बोली- हटो.. मैं मर गई प्लीज़्ज़.. खून आ गया है.. मुझे छोड़ दो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है।

मैं जानता था कि अगर इसे छोड़ा तो फ़िर इस डर की वजह से कभी नहीं चुदवाएगी तो मैंने धीरे-धीरे 7-8 शॉट लगाए, तो उसका विरोध कुछ कम हुआ, बोली- मार डालोगे क्या?

अब वो हल्की मुस्कुराहट के साथ कमर भी हिलाने लगी।

Hindi Sex Stories

नमस्ते दोस्तो ! मेरा Hindi Sex Stories नाम खुश है, मैं आपसे अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ।

अभी तो मैं मोदीनगर में रहता हूँ, लेकिन यह बात तब की है जब मैं मुज़फ्फरनगर से ग्रेजुएशन कर रहा था।

मेरी गर्लफ्रेण्ड का नाम कशिश है। वो ५ फीट ५ इंच की गोरी, लम्बी, सुडौल बदन, फिगर ३४-२४-३६ है, और मुझे जो सबसे अच्छा लगता है, वो है उसके होंठ, बिल्कुल एन्जेलेना जॉली जैसे हैं, जिनसे मैं खेलता रहता और चूसता रहता।

मैं भी कम स्मार्ट नहीं हूँ दोस्तों। मैं ६ फीट लम्बा, गोरा और हैंडसम हूँ। मैं अपने कॉलेज का प्लेब्वॉय हुआ करता था। किसी भी लड़की को कोई भी काम पड़ता, मुझे ही याद करती, “कहाँ है मेरा खुश ?”

जब मेरा प्रथम वर्ष पूरा हुआ तो मेरी नज़र में एक जूनियर आई, उसका नाम कशिश था, जैसा नाम वैसी शक्ल और खूबसूरती भगवान ने दी थी उसे! मैंने सोच लिया, मैं उसकी अपनी गर्लफ्रेण्ड बनाऊँगा, और मैंने बनाया भी।

जो भी हमारे अन्तर्वासना के पाठक मुज़फ्फरनगर से हैं, वो सभी रामलीला ग्राउंड का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रामलीला ग्राउंड प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक ! कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।

मैं भी अपनी जानेमन को लेकर रामलीला ग्राउंड गया। बाईक पार्क करने के बाद हम प्रेम-परिन्दे अपने लिए एक घोंसला तलाश करने लगे। काफ़ी ऊपर जाने के बाद मुझे एक जगह मिली, जहाँ मैं आराम से अपनी कशिश के साथ अपने प्यार के ग़ुल को ग़ुलिस्ता बना सकता था, और वहाँ किसी को पता भी नहीं चलता, कि कोई बैठा भी है। मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठ गया। हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे, और धीरे-धीरे मैं अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो भी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियाँ और ज़ोरों से दबवाने लगी।

फिर मैंने पीछे से उसके गले और कंधों पर चूमने लगा और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया, वो गुलाबी रंग की ब्रा में थी, सच में क्या क़यामत लग रही थी वो उस समय, जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। मैंने उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और मसलने लगा।

वो मेरी बाँहों में कसमसाने लगी, इसके बाद मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूम लिया और घुण्डियों को चूसा और काटा। फिर उसने मुझसे मुँह से ब्रा खोलने के लिए बोला, और मैंने अपने दाँतों से उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोली और एक तरफ फेंक दी। अब मेरे सामने उसकी उभरती जवानी थी जिसे मैंने अपने हाथों और मँह में भर लिया। एक हाथ से मैं उसकी बाईं ओर की चूची को दबाने लगा और दाईं तरफ की चूची को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा। उसके मुँह से और ज़ोरों की आवाज़ें निकलने लगीं।

फिर मैं अपनी जीभ से उसकी घुण्डियों को सहलाने लगा, उसे ज़ोर का झटका लगा और मैंने उसकी घुण्डियों को दाँतों से पकड़ लिया और हल्के से काट लिया और दूसरी घुण्डी को ज़ोर से मसल दिया।

वो मेरी बाँहों में तड़प उठी।

अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने चालू किए। मैंने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी। फिर वो पागलों की तरह बेतहाशा मेरे छाती पर चूमने लगी, बालों से खेलने लगी, और फिर अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चूसने लगी। मैं अब उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो अपने गीले होंठों से मुझे चूमे जा रही थी।

मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया।

इसके बाद मैंने उसे अपने नीचे लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हम ऐसे ही आनन्द लेते रहे। फिर मैं अपनी जीभ उसके मुँह में ले गया और वो उसे चूसने लगी – ज़ोरों से !

मैं अपनी जीभ उसके मुँह में चारों ओर फिरा रहा था और फिर उसकी जीभ पर घुमाने लगा। इससे अजीब नशा छा रहा था हम दोनों पर ! दोनों डूबे जा रहे थे एक-दूसरे में ! साथ-साथ में मैं उसकी चूचियों को भी दबाए जा रहा था, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी।

इस तरह हमने क़रीब 15 मिनट तक खूब प्यार किया।

फिर मैंने उसके कान के लटकन से खेलना शुरु किया, उसे अपने दाँतों में लिया, अपनी जीभ से चाटा और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा। अब मैं उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों पर किस करते हुए चूचियों के बीच की घाटी पर चूम रहा था। फिर नीचे उसकी नाभि पर चूमने लगा। इतनी देर में ही वो काफ़ी गरम हो गई थी, और सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी थी।

फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोल कर जीन्स उतार दी। अब उसके पूरे बदन पर कपड़े के नाम पर बस एक पैन्टी रह गई थी, वो भी ब्रा की तरह ही गुलाबी रंग की थी। मैं पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। पैन्टी पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने पैन्टी को निकाला और उसकी चूत के आस-पास सहलाने लगा। क्या चूत थी ! बिल्कुल गुलाबी, एक भी बाल नहीं। मन कर रहा था, खा जाऊँ उसकी चूत को ! उसे देखकर मुँह में पानी आ गया।

वो बोलने लगी- प्लीज़ ! अब मत तड़पाओ।

मैंने कहा, “अभी तो बहुत समय है स्वीटहार्ट ! थोड़ा सब्र करो, और पहले इन्हीं बातों से आनन्द उठाओ, तभी सेक्स का पूरा मज़ा आएगा।”

फिर मैं उसकी चूत को चूमने लगा, और अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उसके दाने को जीभ से उठाने लगा। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए और ज़ोर से चूसना शुरु किया, वह ज़ोर से तड़पी और बोली- क्या कर रहे हो?

अब मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा और जीभ से ही उसे चोदने लगा।

अब तक वो चिल्लाने लगी थी, “यस… कम ऑन, फक्क मी…!”

मैंने बोला- इतनी भी क्या ज़ल्दी है, आराम से करेंगे। तुम मेरे लंड से नहीं खेलना चाहती क्या?

फिर मैंने अपना ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया। पहले वो उससे खेलने लगी, फिर सुपाड़े की चमड़ी को पीछे कर अपनी जीभ से सहलाने लगी और अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा और टाईट होता जा रहा था। मैं उसको सिर से पकड़ करक उसका मुँह ही चोदने लगा और क़रीब 25-30 झटकों के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया और अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उगल दिया, जिसे वह आसानी से चाट-चाट कर निगल गई।

इसके बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और मैं उसकी चूत का रस पीने लगा, वो मेरे लण्ड से खेलने लगी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और उसकी चूत मारने को तैयार हो गया।

अब मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर फैला दिया, ताकि चूत का मुँह खुल जाए और लंड आसानी से चला जाए। वैसे भी चूत अभी तक इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड उसमें आसानी से चला ही जाता।

अब मैंने अपने लंड को चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा, इस विधि से लंड घुसाने पर उसे दर्द भी कम हुआ और मज़ा भी आया। अब तक मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था।

अगले झटके में मेरा पूरा-का-पूरा लंड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी।

फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और चूसने लगा।

धीरे-धीरे जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, मैं समझ गया अब वो तैयार है पूरी तरह से।

अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया और झटके लगाने लगा। वह भी कमर हिला-हिला कर झटकों का उत्तर झटकों से देने लगी।

ऐसे ही क़रीब 15 मिनटों तक चुदाई चलती रही। फिर मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और ऊपर उछाल-उछाल कर चोदने लगा, इससे हर बार मेरा लंड चूत की दीवार छू लेता, जिससे पूरा मज़ा आ रहा था। इतनी देर में वो तीन बार झड़ चुकी थी, और अब मैं झड़ने वाला था।

मैंने उसे नीचे किया और उसकी चूत में अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।

काफ़ी देर तक मेरा लंड धार मारता रहा। तब तक मेरी जानेमन भी एक बार झड़ गई मेरे साथ ही। ऐसे ही हम एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और फिर उठकर कपड़े पहन कर तैयार हो गए।

तो दोस्तों, कैसी लगा मेरा पहला अनुभव? Hindi Sex Stories

मैं हिमाचल में अभी रह रहा हूँ पर मैं हरयाणा से हूँ! मेरे पास होटल भी है और मैं बहुत ही कूल पॉइंट पे हूँ! मेरी उमर 27 साल है मैं जितना ही कम उमर का हूँ उतना ही बड़ा लंबा और चौड़ा हूँ। मैं अभी अविवाहित हूँ मैंने आज तक बहुत फुद्दी, गांड मारी है! पर जितना मज़ा बड़ी उमर की फुद्दी में है किसी में नहीं है!

ऐसे ही एक मेरी चाची मेरे से 20 साल बड़ी मतलब कि वो 47 की पर मैं 27 का, उसकी फिगर 38 32 40 थी! मैं ऐसे ही उनके घर चला गया। चाचा मेरे ड्यूटी करते थे, उनके ड्यूटी जाने के बाद एक दिन मैं सुबह अपनी चाची के साथ रसोई में काम करवा रहा था। उसके बूब्स मेरे साथ टकरा गए और मेरा लण्ड पूरा गर्म हो गया।
इतने में मैं पूरा गरम हो गया। मेरी चाची ने देखा कि मेरे चेहरे का रंग पूरा लाल हो गया था मेरी चाची ने पूछा- क्या हुआ तुम्हें?

मैं एकदम चुप कर गया, मैंने बोला- मेरे को बाथरूम जाना है अभी।
मेरी चाची बोली- ठीक है।

जैसे ही मैं गया मैंने अपना लण्ड निकाला तो वो पूरा 8.5′ का हो गया था। मेरी चाची वो सब कुछ बाथरूम की खिड़की से देख रही थी मेरे को नही पता था। जैसे ही उसने मेरे लण्ड को देखा वैसे वो ओहह्ह आह्ह्हह्छ करने लगी। मैं कुछ समझा नहीं कि यह आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं। मेरा जैसे ही काम हुआ और मैं बाहर निकलने लगा तो देखा कि मेरी चाची ने अपनी बुर में ऊँगली डाली हुई थी और पूरी मस्ती में थी।

मैं चुपचाप देखता रहा, जब उसका काम हो गया तो मैंने बोला- चाची यह तुम क्या कर रही थी!

मेरी चाची ने बोला मेरे को कि इतना बड़ा लण्ड कभी नहीं मिला जो मैंने बाथरूम की खिड़की से तुम्हारा देखा।

मैंने बोला- चाची मैं 4 साल से तुम्हारी बुर के बारे में सोचता रहता था पर आज तुम मौके पर मिली हो, आज मैं तुम्हें नहीं बक्शूंगा! मैं उसे बिस्तर पर उठा के ले गया। उसकी ब्रा खुली तो कभी सोच नहीं सकता कि इतने बड़े मुम्मे होंगे।

जैसे ही मैंने पकड़े मेरी चाची के मुम्मे, मेरा लण्ड 5 मिनट मैं दुबारा खड़ा हो गया। ऐसा चूसा मैंने चाची को कि आज भी वो अपनी दूसरी सुहागरात याद करती है। जैसे ही मैंने अपना लण्ड चाची की फुद्दी के साथ लगाया मेरी चाची बड़ी गरम हो गयी बोली- एक बार अन्दर डालो, मैं बहुत सालों से प्यासी हूँ।

जैसे ही मैंने डाला तो वो रोने लगी मैंने बाहर निकाला तो मेरे को बोली- अन्दर डालो! मैं एक अच्छा खिलाड़ी हूँ। 25+ उमर की फुदी का, कोहिनूर का एक्स्ट्रा टाइम कंडोम था।

मैंने चाची को तीन बार झाड़ दिया पर आखिरी मैं हार गया मेरा भी काम हो गया। वो चाची के साथ दिन आज भी मेरे याद आते हैं।

ऐसे ही बहुत फुदी मारी मैंने।

मेरी उम्र 28 वर्ष है और मैं पिछले दो साल से दिल्ली में जॉब कर रही हूँ.

मेरे पिताजी फौज में थे और जब मैं अबोध थी, तभी कश्मीर में वो शहीद हो गए थे.
उसके बाद से मुझे मेरी मां ने ही पाला.

मैं एक अच्छे घर से हूं लेकिन मैंने काफी छोटी उम्र से ही अपनी मां की चुदाई देखी है इसलिए चुदाई के नाम से मेरा दिल मचल उठता है.
जैसी चुदक्कड़ मेरी मां है, आज मैं भी वैसी ही चुदक्कड़ हूं.

मैं आज आपको अपने द्वारा देखी पहली सच्ची घटना बता रही हूं.
इसके बाद मैं खुद के साथ घटी घटनाओं को भी लेकर आऊंगी, अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मुझे Xxx डॉक्टर सेक्स कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा.

मैं बिल्कुल नयी हूं, इसलिए लिखने में अगर कोई भूल हो जाए तो उसे नजरअंदाज कर दीजिएगा.

यह बात काफी पुरानी है लेकिन मुझे यह बात आज तक बिल्कुल सही सही याद है.

मैं और मेरी मां, जिनका नाम विमला है.
हम हमारे नये घर में रहते थे. हमारा घर नया था और शहर से थोड़ा बाहर के इलाके में बना था.

हमारे घर के आस-पास उस वक्त केवल 3 घर और थे.
उनमें से एक घर में कोई नहीं रहता था और एक में एक अंकल और आंटी रहते थे.

एक अन्य घर में मेरी सहेली मेघा और उसके पापा, जो पेशे से डॉक्टर थे, वो रहते थे.
उसकी मम्मी नहीं थीं.
मेघा मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ती थी और ज्यादा समय मेरे पास ही रहती थी.

मेघा के पापा का नाम सुरेन्द्र था.
वो जब भी अपने क्लिनिक जाते तो मेघा को मेरे घर पर ही छोड़ जाते थे.

सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन उस दिन से मेरी जिंदगी एक अलग मोड़ लेने वाली थी.

मेरी मां की तबियत कुछ दिनों से खराब चल रही थी तो सुरेन्द्र अंकल ने उन्हें अपने क्लिनिक पर चेकअप के लिए बुलाया.
मां ने मुझे कहा- मैं थोड़ी देर में आ जाऊंगी, मेरी तबियत ठीक नहीं है. मैं दवाई लेकर आ जाऊंगी.

यह सुनकर कि वो शहर तरफ जाने वाली हैं, मैं भी उनसे साथ चलने को कहने लगी.
पहले तो मां ने मना कर दिया मगर मैं जिद करने लगी तो बाद में वो मान गईं और मुझे और मेघा को अपने साथ स्कूटी पर बैठाकर ले गईं.

हम लोग दोपहर के करीब दो बजे सुरेन्द्र अंकल के क्लिनिक पर पहुंचे.
वहां केवल एक मरीज था तो अंकल ने हमें बाहर बैठने को कहा और रेशमा आंटी, जो अंकल की सहयोगी थीं, उनको क्लिनिक बंद करके घर जाने को कहा.

वो क्लिनिक बंद करके पांच मिनट बाद चली गईं.
कुछ देर बाद वो मरीज भी वहां से चला गया और अंकल ने क्लिनिक को अन्दर से बंद कर दिया.

उसके बाद वो मेरे और मेघा के लिए कुछ चिप्स और बिस्किट लाने चले गए.

थोड़ी देर बाद अंकल खाने की ढेर सारी चीजें लेकर आए और हमें खाने को दे दीं.

फिर मम्मी बोलीं- बेटा, मैं चेकअप करवा कर आती हूं, आप लोग यहीं बैठो.
इतना कहकर मम्मी वहां लगे टीवी में एक कार्टून चैनल लगाकर अन्दर चली गईं.

मैं और मेघा खाने और कार्टून देखने में व्यस्त हो गए.
धीरे धीरे काफी समय बीत गया और मेघा टीवी देखते हुए सो गई.

मैंने कुछ देर टीवी देखा, फिर सोचा कि बहुत देर हो गई, मम्मी अभी तक नहीं निकलीं, एक बार जाकर बुलाती हूं.

यह सोचकर मैं अन्दर चेम्बर के तरफ जाने लगी.
जैसे ही मैं गेट के पास पहुंची, तो मैंने जो देखा, वो मुझे आज तक याद है.

मैंने देखा कि मेरी मां की सलवार और पैंटी नीचे जमीन पर गिरी हुई थी और मेरी मां अपनी टांगें फैलाए कुर्सी पर बैठी हुई थीं.
उनकी चूत में अंकल अपनी उंगली पेल रहे थे.

उस वक्त मैं बहुत छोटी थी. ये सब मेरे समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि चल क्या रहा था.
मैंने वहीं से आवाज लगाई- मम्मी क्या हुआ आपको?

मेरी आवाज सुनकर मेरी मां और अंकल दोनों अकबका गए.
मां ने मेरी तरफ देखा और घबराहट में बोलीं- कुछ नहीं बेटा, अंकल मेरा चेकअप कर रहे हैं और इलाज करेंगे, आप बाहर जाकर बैठो.

मां के इतना कहते ही अंकल झट से उठकर आए और मुझे केबिन से बाहर ले आए.
वहां अंकल ने मुझे कुछ चॉकलेट आदि दिए और समझाने लगे- बेटा, मैं मम्मी का इलाज कर रहा हूँ, इसमें थोड़ा टाइम लगेगा. तब तक आप कार्टून देखो और ये चॉकलेट खाओ.

इतना कहकर अंकल ने मुझे टीवी के सामने बिठा दिया और खुद वापस अन्दर चले गए.
उन्होंने केबिन का दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.

मैं दुबारा कार्टून देखने में व्यस्त हो गई. मैं इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि अन्दर अंकल मेरी मां चोदने वाले हैं.

कुछ देर तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा, मगर इधर मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई थी.
मैंने सोचा कि जरा एक बार जाकर देखूं कि मां का इलाज हुआ या नहीं.

जब मैं वहां गई, तो दरवाजा बंद था.
तब मैंने बाहर से आवाज भी लगाई मगर अन्दर से कोई जवाब नहीं आया.

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.
तभी मैंने सोचा कि एक बार खिड़की से देखती हूँ कि अन्दर क्या चल रहा है.

यह सोचकर मैं खिड़की के पास गई और देखने कि कोशिश की, मगर खिड़की ऊंची थी.
तब मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे मोटी मोटी किताबें एक शेल्फ में रखी दिखाई दीं.

मैंने उनमें से कुछ किताबों को निकालकर एक के ऊपर एक करके सीढ़ी जैसी बनाई और खिड़की से अन्दर देखने लगी.

इस बार का नजारा तो पहले से काफी अलग था. वहां पर मेरी मां पेशेंट वाले बेड बिल्कुल ही नंगी लेटी थीं और अंकल जोर जोर से मेरी मां को चोद रहे थे.
यह सब मेरे सामने पहली बार हो रहा था मगर पता नहीं क्यों, मुझे यह पसंद आ रहा था.

मेरी मां का गोरा जिस्म किसी परी के जैसे मखमली था.
अंकल काफी जोश के साथ मेरी मां को चोदे जा रहे थे.

कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद उन्होंने मेरी मां को कस कर पकड़ लिया और उनके जिस्म पर लेट गए.
मां ने अंकल को अपने ऊपर से हटाया और उठ कर खड़ी हो गईं.

अब वो अपने कपड़े पहनने लगीं.
यह देख मैं भी वहां से नीचे उतर गई और सारी किताबों को उनकी जगह पर रखने लगी.

दो किताबें अभी भी मेरे हाथ में ही थीं. तभी अचानक से पीछे से मेरी मां की आवाज आई- क्या कर रही हो बेटा?

उनकी आवाज सुनकर मैं घबराहट में बोली- कुछ नहीं मां, अंकल की बुक देख रही थी. ये किताब भी न कितनी मोटी है, मुझसे गिर गई थी. वापस रख रही हूँ.

मां ने कहा- तुम छोड़ दो, अंकल रख लेंगे.
मैं दौड़कर मां के पास गई और बोली- अब घर चलो.

उनको देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वो अभी अभी चुद कर आ रही थीं.
थोड़ी देर बाद अंकल भी बाहर निकले और बोले- ऐसे ही इलाज कराओगी, तो जल्दी ठीक हो जाओगी.

मैं बोल पड़ी- हां अंकल, आप मम्मी का इलाज अच्छे से कीजिए.
यह सुनकर मां मुस्कुराती हुई बोलीं- आज रात खाना आप हमारे घर पर ही खा लीजिए डॉक्टर साहब!

यह सुनकर अंकल मुस्कुराते हुए बोले- मैं तो मीट खाऊंगा, वो भी लाल लाल!
यह सुनकर मां हंसती हुई बोलीं- आपको जो खाने का मन हो, खा सकते हैं. कोई रोक नहीं है.

यह कह कर मां ने मुझसे चलने का कहा.
मैं और मां वहां से निकल गए.
मेघा वहीं रूक गई.

उस दिन मां बहुत मुस्कुरा रही थीं. मुस्कुराएं भी क्यों न, आखिर चुद कर जो आई थीं.

इसके बाद रास्ते में मुझे बहुत सारी चीजें बिना बोले ही मां ने दिला दीं.
रात के लिए मीट लेकर हम लोग वापस घर आ गए.

उनको भनक तक नहीं लगी थी कि मैंने उनकी चुदाई देख ली थी.
मैं भी चुप रही क्योंकि मेरी समझ में भी उस वक्त कुछ खास नहीं आया था.

रात को ठीक आठ बजे अंकल और मेघा हमारे घर आ गए.
मैं मेघा को लेकर अपने कमरे में चली गई.

उस वक्त मेरी मां बाथरूम में नहा रही थीं.

मैंने मां को आवाज दी कि मां, डॉक्टर अंकल और मेघा आए हैं.
कुछ देर बाद मां ने मुझे और मेघा दोनों को आवाज लगायी कि तुम दोनों बहनें खाना खाने नीचे आ जाओ.

यह सुनकर हम दोनों नीचे हॉल में आ गए.
तब मैंने देखा कि मां किसी परी की तरह सफेद ड्रेस में सजकर तैयार थीं.
उनके पूरे बदन से परफ्यूम की अच्छी खुशबू आ रही थी.

अंकल ने मां की तारीफ की और कहा- आप बहुत सुंदर दिख रही हैं.
हमने साथ बैठकर खाना खाया.

खाने के बाद मैं मेघा के साथ अपने कमरे में, जो ऊपर की तरफ था, वहां चली गयी और उसे अपने खिलौनों से खेलने देने लगी.
कुछ देर खेलते खेलते हम दोनों की आंख लग गई.

बहुत रात को मुझे प्यास लगी तो मेरी नींद खुली.
मैंने देखा कि मेघा मेरे बाजू में सोयी हुई है. मैंने सोचा कि नीचे किचन में जाकर पानी पी लेती हूँ.

यह सोचकर मैं धीरे धीरे सीढ़ियों से उतरकर हॉल में आई और वहां पानी पिया.
मैं जब पानी पी रही थी, तब मैंने देखा कि मेरी मम्मी के कमरे की लाईट अभी तक जल रही थी, जबकि मम्मी लाइट बंद करके सोती थीं.

तो मैं लाइट्स बंद करने जाने लगी तो वहां मैंने बुदबुदाने की आवाज सुनी.
वो आवाज मेरी मां की थी.

मैंने पर्दे के पीछे से झांक कर देखा, तो मेरे सामने बिल्कुल दोपहर वाला नजारा था.
मां और डॉक्टर अंकल दोनों बेड पर नंगे लेटे हुए थे और मां डॉक्टर अंकल से कह रही थीं कि दोनों बच्चियां जाग जाएं, इससे पहले आप मुझे जी भर के चोद दो.

इतना कहकर मां डॉक्टर अंकल को चूमने लगीं.
वो दिसम्बर का ठंडा महीना था. कमरे में गर्म वाला ब्लोअर चल रहा था, जिससे अन्दर का वातावरण अनुकूल था.

चुदाई की कह कर मेरी मां ने अपनी गोरी टांगों को फैला दिया और उनकी एकदम गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने आ गई थी.
अंकल मां के ऊपर चढ़े और बोले- साली छिनाल, तीन बार चुदवाकर भी मन नहीं भरा तेरा?

इस पर मेरी मां वासना भरे स्वर में बोलीं- मैं बहुत प्यासी हूं … मेरी इस मादरचोद चूत को एक बार और रगड़कर चोद दो.
इतना सुनते ही अंकल ने मेरी मां को अपनी ओर खींचा और दोनों टांगों को कस कर फैला कर चोदना शुरू कर दिया.

मेरी मां के मुँह से निकलने लगा- आ आह आह … और चोदो मेरी जान … ऐसे ही … आह ये चूत तुम्हारी ही है.
उनकी मादक आवाजें निकलने लगीं.

अंकल- अब तुम्हारी जवानी लंड के लिए नहीं तरसेगी विमला रानी.
ये कहकर अंकल मेरी मां को धकापेल चोदे जा रहे थे.

पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा था.

ऐसे ही काफी देर तक और चोदने के बाद अंकल ने मेरी मां की खूबसूरत चूत में अपना सारा रस डाल दिया.

मेरी मां और अंकल दोनों काफी हांफ रहे थे. दोनों एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे.
अंकल मेरी मां से बोले- तुम्हारी चूत बेहद खूबसूरत है विमला, मैं तो इसका दीवाना हो गया. जिंदगी में मैंने पहले कभी इतनी प्यारी चूत नहीं चोदी थी.

यह सुनकर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलने लगीं- क्या आप भी डॉक्टर साहब … मुझे तो शर्म आ रही है.
इस पर शायद अंकल भड़क गए और कड़क आवाज़ में मेरी मां को देखते हुए बोले- साली छिनाल, चार बार चुदवाने में तुझे शर्म नहीं आई … और अब तुझे शर्म आ रही है. साली आज तुझे इतना चोदूंगा कि तू शर्माना भूल जाएगी.

मेरी मां घड़ी की ओर देखती हुई बोलीं- डॉक्टर साहब, साढ़े तीन बजने वाले हैं. बच्चियां जाग गईं, तो दिक्कत हो जाएगी. आप कल या परसों फिर चोद लेना, मैं आज बहुत थक गई हूं. और वैसे भी कौन सा मैं कहीं भागी जा रही हूं.

इस पर अंकल बोले- तुम बच्चियों की चिंता मत करो. सुबह 5 बजने से पहले मैं तुम्हें चोद कर निकल जाऊंगा. तुम चुदने के लिए ही बनी हो, अपनी चूत के साथ अन्याय मत करो. इसे जी भरके चुद लेने दो.
यह बोलते ही अंकल मेरी मां के ऊपर फिर से चढ़ गए.

अब वो अपने लंड को धीरे से मेरी मां की चूत में डालने लगे.
मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- बड़े मादरचोद हो आप डॉक्टर साहब!

अंकल बोले- काश तुम मेरी बीवी होती.
मेरी मां उनको चूमते हुए बोलीं- अभी तो आपकी ही बांहों में हूँ, तो बीवी समझ कर ही मजा लीजिए.

यह कहकर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और Xxx डॉक्टर अंकल ने भी चुदाई तेज कर दी.
मेरी मां फिर से कराहने लगीं- ओह डॉक्टर साहब, बहुत मजा आ रहा है … ऐसे ही चोदो डॉक्टर साहब.

ये बातें सुनकर अंकल ने रफ्तार और बढ़ा दी … और वो मेरी मां को बहुत जोर जोर से चोदने लगे.
मुझे ये सब देखने में बहुत मजा आ रहा था.

अंकल बोलने लगे- कैसा लग रहा है?
मां बोलीं- बस ऐसे ही चोदते रहो डॉक्टर साहब.

दोनों चुदाई में इतने मगन थे कि उन्हें कोई दीन दुनिया का कोई होश ही नहीं था.
जल्द ही फिर से पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा.

चोदते चोदते अंकल कभी मां के चूचों को दबाते, तो कभी उन्हें अपने मुँह में भरकर चाटने लगते.
मां भी उनका पूरा साथ दे रही थीं और किसी रंडी की तरह धकापेल लंड खाए जा रही थीं.

ऐसे ही बहुत देर तक ताबड़तोड़ चुदाई चलती रही.
तभी अंकल ने रफ्तार बहुत तेज कर दी और एक झटके में सारा वीर्य मेरी मां की चूत में टपका दिया.

अब वो निढाल होकर मेरी मां के ऊपर ही लेट गए और मां ने भी उन्हें कसकर जकड़ लिया.
कुछ देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.

फिर अंकल ने धीरे से अपना लंड मेरी मां की चूत से बाहर निकाला और बोलने लगे- विमला, तुम्हें चोदने में बहुत मजा आया.
मां ने समय देखा और बोलीं- चोदते चोदते एक घंटा से ज्यादा हो गया. बच्चियां जाग जाएंगी, अब आपको जाना चाहिए.

अंकल बोले- हां विमला, अब मैं निकलता हूं. लेकिन वादा करो कि दुबारा फिर चोदने दोगी.
इस पर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- मैं कहां भागी जा रही हूं. आपका जब मन करे, तब आप मुझे चोद सकते हैं. मेरी चूत का ख्याल तो अब आपको ही रखना है.

अंकल ने कहा- तुम फिक्र मत करो, तुमसे ज्यादा ख्याल मैं तुम्हारी चूत का रखूंगा.
यह कहकर वो उठ कर अपने कपड़े पहनने लगे.

कपड़े पहनकर वो मां को किस करके बोले- विमला, अब तुम भी अपने कपड़े पहन लो.
मेरी मां बोलीं- मेरा अभी मन नहीं है. बाद में पहन लूँगी.

अंकल बोले- तुम समय निकालकर क्लिनिक आ जाना, मैं तुम्हारी नसबंदी करवा दूँगा. उसके बाद तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और उसके बाद हर शनिवार रात मैं तुम्हें ऐसे ही चोदूंगा.
मां ने हां कहकर सिर हिलाया और कंबल के अन्दर नंगी ही लेट गईं.

मैं भागकर मेघा के पास आ गई और सोने का नाटक करने लगी.
मुझे अभी तक समझ नहीं आया था कि आखिर अंकल ने मेरी मां के साथ क्या किया.

थोड़ी देर बाद अंकल मेघा को लेने आए.
जैसे ही वे हमारे पास आए, तो उनके शरीर से वही परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो मेरी मां ने शाम को अपने जिस्म में लगाई थी.
वो मुझे बिना जगाए मेघा को गोद में उठाकर चले गए.

जब वो दोनों चले गए तो मैं भी नीचे उतरकर मां के कमरे की तरफ चली गई.
अब वहां कोई लाइट नहीं जल रही थी और काफी अंधेरा था.

मैं अन्दर गई और एक डंडे से लाईट का बटन चालू किया.
मां सोयी हुई थीं, तो मैं भी धीरे से बेडपर जाकर कंबल में घुसकर उनके बगल में लेट गई.

मेरी मां के जिस्म से मस्त खुशबू आ रही थी.
थोड़ी देर बाद मैंने मां की जांघों पर अपनी टांग को रख दिया और मां से लिपट गई.

मेरे मन में वो सब चल रहा था, जो मैंने देखा था.
मैं जानना चाहती थी कि आखिर हुआ क्या?

यही जानने के चक्कर में मैंने अपना हाथ मां के पेट पर रख दिया और धीरे धीरे हाथ को नीचे की तरफ ले जाने लगी.
कुछ देर में ही मेरे छोटे हाथ मेरी मां की चूत तक पहुंच गए. उनकी चूत बहुत ज्यादा चिपचिपी थी और सारा माल मेरे हाथों में लग गया.

मैंने धीरे से अपने हाथों को मां की झांटों में रगड़कर साफ कर लिया.
अब मैंने सोचा कि ये क्या चीज थी, जो मेरी मां की सुसु में अंकल ने डाल दी.

यह जानने के लिए जैसे ही मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में डालीं, वैसे ही झट से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और उंगली को बाहर कर दिया.
वो घबराहट में बोलीं- हंषु बेटा, तुम यहां क्या कर रही हो?

मैं भी घबराकर बोली- मम्मी मुझे आपके पास रहना है.
यह कहकर मैं अपनी मां से लिपट गई और रोने लगी.

मां मुझसे पूछने लगीं- क्या हुआ बेटा, रो क्यों रही हो?
मैं रोती हुई बोली- मां अंकल ने आपके सुसु में क्या डाला?

यह सुनते ही मां के होश उड़ गए. वो समझ गईं कि मैंने सब कुछ देख लिया था.
वो कुछ देर के लिए बिल्कुल चुप रहीं. शायद उनको समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूं.

वो सोचने लगीं और तब उन्होंने मुझसे पूछा- तुमने क्या देखा?
मैंने सब कुछ सच सच बता दिया.

मेरी मां समझ गईं कि मैंने उनकी चुदाई देख ली.
अब मां को ये डर था कि कहीं मैं किसी को ये सब न बता दूं.
कुछ देर सोचने के बाद मां बोलीं- बेटी, तुम ये बात किसी से मत बताना.

मैं जिद करने लगी कि पहले आप बताओ, अंकल ने आपके साथ क्या किया?
इस पर वो मुझे समझाती हुई बोलीं- हंषु बेटा, तुमको तो पता हैं कि मां की तबियत कितनी खराब थी. जब आज हम लोग चेकअप के लिए गए, तब अंकल ने मुझे चेक करके बताया कि मुझमें प्रोटीन की कमी है. मेरे पैरों में और पेट में बहुत कम प्रोटीन है, इसलिए मुझे प्रोटीन शेक लेना होगा. तो अंकल मेरा इलाज कर रहे थे और मुझे प्रोटीन दे रहे थे बेटा.

ये सुनकर मुझे लगा कि हां अंकल मेरी मां का इलाज कर रहे होंगे.

मैंने पूछा- मगर वो आपकी सुसु करने वाली जगह से क्यों प्रोटीन दे रहे थे?
मां मुस्कुराती हुई बोलीं- वो इसलिए बेटा, क्योंकि सुसु वाली जगह से मेरा पेट और पैर पास में है न. उधर से वहां तक जल्दी प्रोटीन पहुंच जाएगा और मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी.

मैं खुश होकर बोली- अच्छा तो ये प्रोटीन दवाई है और आप इससे जल्दी ठीक हो जाओगी?
मां ने कहा- हां बेटा, ऐसे ही अंकल मेरा फिर से इलाज करेंगे, तो मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी. लेकिन तुम ये किसी को मत बताना वर्ना सब तुम्हें ये बोलकर चिढ़ाएंगे कि तुम्हारी मां बीमार है.

मैंने कहा- ठीक है मां, मैं किसी को नहीं बताऊंगी.
यह कहकर मैं अपनी मां की बांहों में लेट गई.

इसके बाद तो लगभग हर बार मैंने अपनी मां को चुदते देखा … और हर बार अंकल मेरी मां को ऐसी ही बेरहमी से चुदाई करते थे.
पिछले बीस सालों से वो मेरी मां को चोद रहे हैं. मेरी मां अब भी दिखने में काफी सेक्सी हैं, तभी तो अंकल अभी भी उन्हें जमकर चोदते हैं.

Indian Sex Stories

लीजिए एक और नई कहानी Indian Sex Stories आपकी खिदमत में पेश है। यह कहानी मुझे मेरी एक सहेली ने सुनाई थी, सो मैं आपको सुनाता हूँ।

बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं है, मैं नेहा अग्रवाल, मेरी शादी मई, 2006 में कवीश से हुई थी। कवीश एक सजीला मर्द था और कामयाब बिज़ेनेस्मैन भी। दो साल तक उसने मुझे शादी का भरपूर सुख दिया, एक मासूम सी बेटी भी दी और मेरी कोई भी तमन्ना
उसने अधूरी नहीं छोड़ी थी।

मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत खुश थी कि अचानक एक दिन कार दुर्घटना में कवीश की मौत हो गई।
मेरे लिए यह ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सदमा था। 2-4 महीने तो रोते-रोते बीत गए पर असली परेशानी तो उसके बाद शुरू हुई। दिन तो जैसे तैसे बीत जाता था पर रात को तो नींद ही नहीं आती थी। कवीश की कमी अब मुझे सबसे ज़यादा महसूस हो रही थी। सिरहाने को बाँहों में भरने से भी मज़ा नहीं आता था।

अब मैं क्या करूँ ! किससे अपने दिल का हाल बयां करूँ ! अपनी बड़ी बहन को बताया तो उसने भी कन्नी काट ली के कहीं मैं अपनी प्यास बुझाने के लिए उसके पति को ही न पटा लूं। सारा दिन घर में रह कर भी काम नहीं चलता था। अपनी ऊँगली से या और चीज़ों से खुद को संतुष्ट करना चाहा पर मज़ा नहीं आया। हालात इतने बिगड़ गए कि मैं अक्सर अपने कमरे में नंगी घूमती रहती थी, पर इस से भी कोई लाभ नहीं हुआ।

एक बार तो घर में आने वाले सेलमैन को पटाने के लिए मैं सिर्फ एक पतली सी नाइटी में उस से कितनी देर बातें करती रही। वो भी मेरे बदन को घूरता रहा पर साले ने ज़रा भी हिम्मत नहीं दिखाई। मैंने उसे खुली बात भी कही कि मुझे तुम्हारा सामान नहीं कुछ और दमदार चीज़ चाहिए जो तुम्हारी पैंट में है, पर वो बोला- सॉरी मैडम मैं सिर्फ सामान ही बेचता हूँ !

मैं सोच कर हैरान रह गई कि कोई कैसे एक भरपूर जवान, गोरी चिट्टी, सुंदर औरत की पेशकश ठुकरा सकता है। खैर जब कहीं बात नहीं बनी तो एक दिन मैं अपने चाचा ससुर के घर गई।

उनका एक बेटा सुरेश था जो करीब मेरी ही उम्र का था पर था भोंदू राम। वो जिस तरह होते हैं न बुद्धू किस्म के बड़े ही सीधे साधे से, वैसा ही था। इसी वजह से उसकी अभी तक शादी भी नहीं की थी कि यह घर गृहस्थी का बोझ कैसे उठा पायेगा, इसे तो दो और दो चार करने भी नहीं आते।

खैर एक हट्टे कटते मर्द को देख कर चाहे वो भोंदू ही सही, पर मेरे मन में कुछ हुआ। दो तीन दिन रहने के बाद जब मैं वापिस आने लगी तो मैंने अपने चचिया ससुर से कहा- अगर कुछ दिन के लिए सुरेश मेरे साथ रहने चले तो मुझे अच्छा लगेगा।

तो उन्होंने खुशी खुशी उसे मेरे साथ भेज दिया, बिना यह जाने कि मेरे दिल में क्या है।

मैंने रास्ते में ही सारी योज़ना बना ली थी। जिस दिन हम घर पहुँचे, रात का खाना खा कर मैंने उसे अपने साथ ही सुला लिया।

एक गहरे गले वाली पतली सी नाईटी पहन कर मैं उसके सामने लेट गई। मैं चाहती थी कि वो मेरा बदन देखे। अपनी बेटी को दूध पिलाने के बहाने मैंने जानबूझ कर अपनी भरी पूरी चूची निकाल कर उसे दिखाई। पर वो तो ऐसे शरमा रहा था जैसे छोटा बच्चा हो।

खैर मैंने बातों बातों में उस से पूछा- सुरेश ! क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं?
वो बोला- हाँ भाभी ! आप बहुत अच्छी हो !
मैं बोली- कहाँ से? यहाँ से ! यह कह कर मैंने अपने गाल पर उंगली रखी।
वो बोला- जी भाभी !

और यहाँ से भी? यह कह कर मैंने अपने स्तन पर उंगली रख कर उससे पूछा।
तो वो शरमा कर बोला- भाभी ! आप बड़ी वो हो !

जब मेरी बेटी सो गई तो मैंने कहा- देख सुरेश ! ज़ीजिया तो दूध पीकर सो गई ! क्या तू भी सोने से पहले दूध पीना चाहेगा?
पर वो बदतमीज़ बोला- नहीं भाभी ! मैं ऐसे ही सो जाऊँगा !. आप मुझे तंग मत करो।

और यह कह कर वो मेरी तरफ़ पीठ करके सो गया। मुझे लगा कि यार मेरी तो सारी योजना ही चौपट हो गई। खैर ! मैं भी सो गई।

सुबह उठी तो देखा की सुरेश अभी सो रहा था मगर उसके पायजामे से उसका तना हुआ लण्ड ऊपर उठा हुआ था। यह तो मेरे सब्र की इन्तहा थी। मैं चुपके से उठ के उसके पास गई और धीरे धीरे से उसके पायजामे का नाड़ा खोला। पायजामे के नीचे उसने चड्डी पहन रखी थी, मैंने धीरे से उसकी चड्डी हटाई तो अंदर एक कुल्हाड़ी के दस्ते जैसा मोटा लम्बा लण्ड खड़ा था।

मैंने बड़े प्यार से उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ कर बाहर निकाला, उसे चूमा। उसके बाद कब मेरी आँखें बंद हो गई और कब उसका लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी, मुझे कुछ पता नहीं चला।
मैं चूसती गई, चूसती गई, मैंने सुरेश के जिस्म में हलचल महसूस की पर मैं आँखें खोल कर देखने की हालत में नहीं थी और तभी बिजली सी कौंध गई, सुरेश ने पानी छोड़ दिया जिससे मेरा सारा मुंह, सर के बाल गर्दन, छातियाँ भीग गए। जैसे कोई बांध टूटा है ऐसे सुरेश झड़ा।
उसका कुछ माल तो मेरे मुंह के अंदर भी चला गया। मैंने नज़र उठा कर देखा, सुरेश बड़ा परेशान सा लग रहा था।

वो बोला- भाभी आप बड़ी गन्दी हो, मेरे साथ गन्दा काम करती हो !
मैंने कहा- तुम्हें किसने कहा कि यह गन्दा काम है? देखो तुम्हें मज़ा आया ! आया या नहीं?
उसने सर हिला कर हाँ कहा।
मैंने कहा- आओ चलो, नहा कर आते हैं।

मैंने उसका हाथ पकडा और बाथरूम में ले गई। वहां मैंने उसको खुद नहलाया और जानबूझ कर उसके सामने पूरी नंगी हो कर नहाई। उससे अपने जिस्म पर साबुन लगवाया ताकि उसमें औरत के जिस्म के लिए चाहत पैदा हो। नहाकर हम बाहर निकले। फिर दिन में मैं उसे बाज़ार भी घुमा कर लाई, उसकी पसंद की चीजें भी उसे लेकर दी। दोपहर का खाना खा कर जब हम आराम कर रहे थे तो मेरी बेटी सोने के लिए जिद करने लगी। मैंने बिना किसी संकोच के सुरेश के सामने ही अपनी शर्ट उतारी और अपनी ब्रा में से एक स्तन बाहर निकल कर उसे दूध पिलाने लगी। सुरेश मेरे सामने बैठा ये सब देख रहा था। मैंने उससे पूछा- अरे सुरेश, क्या देख रहा है?

कुछ नहीं भाभी, वो बोला।
मैंने पूछा- दूध पिएगा?

तो वो शरमा गया। मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी ब्रा हटा कर अपनी दूसरी चूची उसके सामने करके बोली- ले पीकर देख !

पहले तो वो शरमा गया, पर जब मैंने उसका सर पकड़ कर अपने स्तन से लगाया तो उसने धीरे धीरे चूसना शुरू कर दिया। जब ज़ीनिया सो गई तो मैंने अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी और सुरेश से कहा- ऐसे मज़ा नहीं आएगा, मैं बताती हूँ कि कैसे पीना चाहिए।

यह कह कर मैंने उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लिया और उसके दोनों हाथ में अपने स्तन पकड़ा कर कहा- अब इन्हें चूसो !

उसने ऐसे ही किया। मैंने नीचे से अपनी कमर हिलानी शुरू की मैंने महसूस किया कि उसका लण्ड अकड़ने लगा था। जब उसका लण्ड पूरा तन गया तो मैंने कहा- सुरेश और मज़ा लेगा?

तो वो शरमा गया पर सर हिला कर उसने हाँ कह दी। मैंने अपनी सलवार उतारी और अपनी चूत उसके सामने खोल कर दिखाई और उसके लण्ड को पकड़ कर बोली- इसको इसमें डाल कर आगे पीछे करते हैं तो बहुत मज़ा आता है, बोल करेगा?

उसने फिर सर हिलाया तो मैंने झट से उसकी पैंट, शर्ट, बनियान और चड्डी उतार दी। मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पे रगड़ा तो वो बोला- भाभी ! वैसे करो जैसे सुबह किया था।

मैंने हंस कर कहा- क्यों मज़ा आया था न !
वो बोला- हाँ !

तो मेरे राजा अगर सुबह वाला काम करवाना है तो तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा, अगर मैं तुम्हारा चूसूंगी तो तुम्हें भी मेरी चाटनी पड़ेगी !

वो तैयार तो हो गया पर जब उसने मेरी चूत में मुंह लगा कर चाटा तो बोला- थू ओ ! ये तो गन्दा स्वाद है !

खैर मैंने उसे मजबूर नहीं किया, कुछ देर उसका लण्ड चूसने के बाद मेरी अपनी हालत बड़ी ख़राब हो रही थी सो मैंने उसकी पोसिशन अपने ऊपर सेट की और उसका लण्ड अपनी चूत पर रख कर उसे अंदर डालने को कहा।
उसने सी सी करते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डाला मगर वो ढंग से चोद नहीं पा रहा था।
मैंने सोचा- ऐसे तो मज़ा नहीं आएगा। यह चोद कम रहा है और हाय तौबा ज्यादा मचा रहा है।

फिर मैंने कमांड संभाली, उसे नीचे लिटा कर खुद ऊपर आ गई। चूत में लण्ड लेकर मैंने खुद ही चुदाई शुरू की। वो नीचे से हाय तौबा करने लगा तो 2 चांटे लगाये उसके और पूरे जोर से चुदाई करती रही और तब तक करती रही जब तक मैं झड़ नहीं गई। पर वो मर्द का बच्चा अभी खड़ा था सो मैंने अपनी तसल्ली होते ही नीचे उतार कर उसका लण्ड अपने मुंह में ले लिया और अपनी चूत 69 बनाते हुए उसके मुंह पर रख दी। बेशक उसने मेरी चूत नहीं चाटी पर मैं अपनी चूत उसके मुंह पर रगड़ती रही और उसका लण्ड चूसती रही और तब तक चूसती रही जब तक वो झड़ नहीं गया।

जोश ही जोश में मैं उसका सारा माल चट कर गई और संतुष्ट हो कर बेड पर लुढ़क गई क्योंकि आज मेरी तमन्ना पूरी हो गई थी। उसके बाद सुरेश मेरे पास 15 दिन और रहा और हमने तकरीबन रोज 2-3 बार सेक्स किया और हर स्टाइल से किया। मेरी इस सेक्स-शिक्षा का असर यह हुआ कि भोंदू राम को अकल आ गई और आज वो अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी जी रहा है। Indian Sex Stories

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