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हेल्लो Antarvasna के पाठकगण, मैं आपकी फ़ेवरेट आरज़ू। माफ़ी चाहती हूँ कि कल मैं अपनी कहानी पूरी नहीं कर पाई क्योंकि एक अरजेन्ट कॉल आया था
सो आज मैं अपनी कहानी वहीं से दोबारा शुरू करती हूं जहां से अधूरी छोड़ी थी।
जैसा कि मैं बता चुकी हूं कि मैंने ब्ल्यू फ़िल्म देख कर अब्बू से ज़िद करी कि मुझे भी चार आदमियों से एक साथ चुदाना है. तब अब्बू ने कहा कि अभी तो तेरा भाई और मैं ही हूं, हां ! कल ज़रूर तूझे चार आदमियों से चुदवा दूंगा और उसके बाद अब्बू ने नये तरीके से मेरी बुर चूसी. जो आप पार्ट एक में पढ़ सकते हैं।
अब बात आगे बढ़ाती हूं।
तो अब मैं अब्बू के कन्धे पर अपने दोनों पैर लपेटे उनका लण्ड चूस रही थी और अब्बू मेरी चूत को चूस रहे थे और वही किनारे मेरा भाई अपने लण्ड को हाथ में लेकर खड़ा था. तब अब्बू ने मुझे नीचे लेटा दिया और भाई से कहा- आओ बेटे, आज इस साली की चूत की दोनों बाप बेटे मिलकर धज्जियाँ उड़ा देते हैं. साली ब्ल्यू फ़िल्म देख कर चार लोगों से एक साथ चुदाने की ज़िद कर रही है तो आज तो हम दोनों ही चार के बराबर चुदाई कर देते हैं बाकि कल इस चूत मरानी को चुदाता हूं चार मुस्टण्डों से!
और फ़िर अब्बू मेरी चूत के मु्ंह पर अपने लण्ड को रगड़ने लगे और भाई मेरे सर के पास मेरे मुँह पर आया और अपने लण्ड को मेरे हाथ में देकर चूसने को बोला।
तब मैं भाई के तगड़े लण्ड को हाथ से सहलाने लगी. और अब्बू जी ने अचानक मेरी बुर पर चिकोटी काट ली और मेरी बुर के दाने के साथ छेड़खानी करने लगे. आज वाकई अब्बू के साथ अलग ही तरह का मज़ा मिल रहा था जो पहले कभी नहीं मिला था।
उधर भाई ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और मैं मज़े से चूसने लगी. अब्बू जान भी अब मेरी जवान बुर पे अपनी जबान रख कर चाटने लगे. फ़िर मैं भी अपने चूतड़ नीचे से उचकाने लगी अब मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- आआह्हह्ह आआअह्हह अब्बू जान, बहुत मज़ा आ रहा है चूस डालो मेरी बुर को … पी जाओ साली को! बहुत खाज मचती है इसमें! आआह्हह्ह आज अपनी बेटी की चूत की सारी खाज मिटा दो!
अब अब्बू ने अपनी जबान किसी लण्ड की तरह मेरी चूत के अन्दर धकेल दी और मथनी की तरह मथने लगे मेरी बुर को। अब मुझे दो तरफ़ा मज़ा मिल रहा था; एक तरफ़ भाईजान लण्ड अपनी बहन के मुँह में डाले था और अब्बू मेरी चूत को चूस रहे थे.
तब ही मैं ‘आआह्ह आआअह्ह …’ करते हुए झड़ गई और अब्बू मेरे सारे रस को बड़े मज़े से चाट गये. और फ़िर भाई भी जोरदार धक्के मेरे मुँह में लगाते हुए झड़ गया. उसके बाद थोड़ी देर तक हम लोग सुस्त से पड़े रहे।
करीब 20 मिनट बाद अब्बू ने कहा- अब बेटा, इस माँ की लोड़ी की चुदाई करनी है. वो भी इस तरह कि साली ब्ल्यू फ़िल्म की चुदाई भूल जाये!
और ये कहकर अब्बू ने मेरी चूची को कसकर दाब दिया और भाई मेरी पीठ के पीछे से चिपक गया. अब मैं अब्बू और भाई के बीच में पिसी जा रही थी।
आगे से अब्बू अपने सीने से कसकर मेरी दोनों चूची दाबे हुए मेरे लबों को चूस रहे थे और पीछे से मेरा भाई अपने दोनों हाथ से मेरी बुर की दरार को कुरेद रहा था और उसका 7″ का कड़ा लण्ड मैं अपनी गाण्ड पर साफ़ महसूस कर रही थी।
तब ही भाई ने गप्प से अपनी एक अंगुली मेरी चूत में डाल दी और अब्बू तो अब बकायदा मेरी एक चूची के निप्पल को मुँह में दाब कर अपने होंठ से मसल रहे थे और दूसरी चूची को हाथ से बहुत बेदर्दी से दबा रहे थे।
मैं सिसक रही थी- आआह्हह अब्बू … ज़रा धीरे धीरे दबाइये, बहुत दर्द हो रहा है, रहम कीजिए अपनी बेटी पर!

और फ़िर अब्बू ने कहा- बेटा, अब ज़रा आसन लगाने दे, आज एक साथ दो लण्ड तेरी बुर में डलवाऊँगा.
तब मैंने कहा- अब्बू जी, आपके पास तो एक ही है।
अब्बू ने कहा- अरी मेरी छिनाल बिटिया रानी! ज़रा सबर तो कर और पीछे देख! तेरे भाई का लण्ड भी तो है!
और ये कहकर वो बेड पर लेट गये उनका लण्ड किसी सांप की तरह फ़ुफ़कार रहा था।
इस उम्र में भी अब्बू का लण्ड बहुत मोटा और लम्बा था मेरा दिल अन्दर से डर रहा था कि आज मेरी नन्ही सी चूत का क्या होगा?
तब अब्बू ने कहा- मेरी प्यारी बेटी, तू अपनी चूत को मेरे लण्ड पे रख कर बैठ जा!
और मैं अपने दोनों पैर छितरा कर उनके लण्ड पर बैठ गई और फ़िर उनका लण्ड थोड़ा सा मेरी चूत में घुस गया।
तब अब्बू ने कहा- अब तू मेरी तरफ़ झुक जा!
और जैसे ही उनका पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया और मैं जब झुकी तो अब्बू ने अपने दोनों हाथ से मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया और मेरे होंठ को चूसने लगे.
अब अब्बू ने पीछे से भाई को इशारा किया कि तू भी अपना लण्ड इसकी चूत में घुसेड़ दे.
पर भाई इतना समझदार नहीं था, वो अपने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद में घुसेड़ने लगा।
तब मैंने कहा- अब्बू … भाई तो गाण्ड में मारने जा रहा है.
भाई ने कहा- साले बहनचोद … मैं कह रहा हूं कि बहन की चूत में डाल … और तू है कि बहन की गाण्ड के पीछे पड़ा है?
तब भाई ने कहा- इसमें तो आप डाले हुए हैं, मैं कहां से डालूं?
अब्बू ने कहा- साले आजकल के लड़के तो बस चूत मारना और गाण्ड मारना जानते हैं, साले बस लड़की की टांग उठाई और लगे चोदने! अरे साले हरामी, जिसमें मैं डाले हूं, उसी में तू भी अपना लण्ड डाल।
तब अब्बू ने मुझसे कहा- बेटी, तू ज़रा अपनी बुर और ऊपर कर दे ताकि इस बहनचोद को साफ़ साफ़ नज़र आये तेरी चूत!
और फ़िर मैंने अपनी चूत और ऊपर उठा दी।
अब भाई अपने लण्ड को मेरी चूत पे रख कर घिसने लगा. पर मेरी समझ में खुद भी नहीं आ रहा था कि जब अब्बू का लण्ड मेरी चूत में घुसा है, तब भाई का लण्ड कैसे जायेगा मेरी चूत में? हां अगर अंगुली पेलनी होती तो वो जा सकती थी.
पर मैं खमोश थी.
आखिर भाई ने बहुत ज़ोर देकर अपने लण्ड की टोपी मेरी चूत में डाल ही दी और तब मुझे बहुत दर्द हुआ- आआअह्हह ऊऊओह्हह अम्मीईई … अब्बू बहुत दर्द हो रहा है।
तब अब्बू ने कहा- क्या भाई का पूरा लण्ड चला गया अन्दर?
मैंने कहा- नहीं, अभी तो सिर्फ टोपी ही गई है.
तब भाई ने एक धक्का और मारा और अब भाई का करीब चार इन्च लण्ड उसकी बहन की चूत के अन्दर घुस गया था।
मैं चीख रही थी- आआअह्हह अब्बूऊऊ जीईई पलज़्ज़ रहम कीजिये, मैं मर जाऊंगी ईई आआह्ह्ह!
तब अब्बू मेरी चूची को दबाते हुए बोले- बेटी, अभी तुझे बहुत मज़ा आयेगा, जब दो लोगों का लण्ड एक साथ बुर में जाता है तब बहुत मज़ा आता है क्यूंकि मैंने तेरी अम्मी को भी इस तरह से तेरे चचा के साथ चोद चुका हूं!
और तब ही मेरे भाई ने एक और धक्का मारा और मेरा बेलेन्स बिगड़ गया और मैं अब्बू के सीने पर गिर गई और मेरी आंख से आंसू निकलने लगे और मेरी सिसकियाँ बंध गई।
अब भाई और अब्बू का पूरा पूरा लण्ड मेरी चूत में था और एक दूसरे के लण्ड से रगड़ खा रहा था और मेरी चूत की दरार फ़ैलती जा रही थी. अब मुझे भी दर्द की जगह मज़ा आने लगा था और मैं धीरे धीरे उन दोनों का साथ देने लगी थी- आआह्हह आआअह्ह ह्हह … अब्बू … भाई … बहुत अच्छा लग रहा है. और अन्दर कीजिये … आअह्ह ह्हह ऊऊफ़्फ़ … कसम से बहुत मज़ा आ रहा है!
और अब दोनों बहुत ही जोरदार धक्के लगा रहे थे साथ साथ मेरी दोनों चूची को भी मसल रहे थे. तभी मेरे बाप या भाई में से एक का लण्ड मेरी चूत में झड़ा. पर मैं समझ नहीं पाई कि किसका पानी मेरी चूत में गिरा है!
फ़िर कुछ देर बाद मैंने अपनी चूत में एक बार फ़िर से पानी की फ़ुहार महसूस की और फ़िर दोनों के लण्ड ढीले हो गये.
पर मैं अभी झड़ी नहीं थी, तब मैंने अब्बू से कहा- साला बेटी चोद कर अपना पानी तो आप लोगों ने निकाल लिया पर मेरा तो अभी पानी भी नहीं निकला. साले अगर जल्दी ही मेरी प्यास नहीं बुझाई तो तुम दोनों का लण्ड काट लूंगी।
तब अब्बू ने मुझे झट से अपने लण्ड पर बैठा लिया और मेरी चूची को चूसते हुए बोले- मेरी बिटिया रानी, ऐसे बात ना करो, आज देखो मैंने तुमको कितना मज़ा दिया है और अभी तुम्हारा पानी भी निकाल देता हूं.
और फ़िर मुझसे कहा- तुम ऐसा करो कि भाई से एक बार गाण्ड मरवा लो, तुम्हारा पानी भी निकल जायेगा।
तब मैंने कहा- अबे जाहिल … कहीं गाण्ड मरवाने से भी पानी निकलता है बेटीचोद? मेरी बुर में खाज है और तू गाण्ड मरवाने की बात कर रहा है।
तब अब्बू ने कहा- बेटी, मैं तेरी मारुंगा, भाई गाण्ड मारेगा.
और उसके बाद भाई ने मेरी जम कर गाण्ड मारी और आगे से अब्बू मेरी चूत में अपना लण्ड पेले जा रहे थे, अब मुझे दो तरफ़ से मज़ा मिल रहा था।
एक साथ बुर और गाण्ड मरवाने का थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गई और मेरी चूत से फ़स फ़स की अवाज़ आने लगी।
तो दोस्तो, कैसे लगी मेरी Antarvasna कहानी?
मैं जब भी कहीं जाती हूं तो मेरी नजर खूबसूरत Sex Stories लड़कों पर पहले पड़ती है, ठीक वैसे ही जैसे लड़कों की नजरें सुंदर लड़कियों पर जाती है। ऐसी ही घटना मेरे साथ एक शादी की पार्टी में हुई। उस पार्टी में मुझे एक पुराना क्लासमेट मिल गया। बेहद खूबसूरत, ६ फ़ुट लम्बा, गोरा, कसरती शरीर, उसके शरीर की मसल्स देखते ही बनती थी।
मैं तो देखते ही उस पर फ़िदा हो गई। मैं जानबूझ कर के उसके सामने लेकिन कुछ दूरी पर खड़ी हो गई ताकि वो मुझे देख कर पहचान ले।…. भला कोई सुन्दर लड़की आपके सामने खड़ी हो तो कौन नहीं देखेगा।
“हाय…. काजल जी…. आप…. मुझे पहचाना…. मैं विजय….”
“अरे….हां विजय हाय…. कहां हो….? क्या कर रहे हो….?”
“यहीं बी एच ई एल में लगा हूं…. एक छोटा सा मकान मिला हुआ है…. और आप….”
बातों का सिलसिला चल पड़ा और मैंने उसे और लम्बा कर दिया। साइड में डीजे चल रहा था। नाच गानों की आवाज में हमारी बातें कोई दूसरा नहीं सुन सकता था। वह मेरे साथ एक कुर्सी पर बैठ गया।
मैंने सोचा कि अभी विजय मुझमें दिलचस्पी ले रहा है….इसे अपनी ओर आकर्षित किया जा सकता है। बातों के दौरान उसे कंटीली नजरों से देखना…. उसे देख कर अर्थपूर्ण मुस्कान देना। अदाएं दिखाना….यानी जो कुछ मैं कर सकती थी ….उसके सामने करने लगी।
नतीजा ये हुआ कि वो मेरी गिरफ़्त में आता नजर आ ही गया। डिनर आरम्भ हो चुका था। हम दोनों धीरे धीरे खा रहे थे…. बातें अधिक कर रहे रहे थे। समय का पता ही नहीं चला….अचानक मेरे मम्मी पापा आ गये।
“चलें क्या…. कितनी देर लगेगी….”
” अंकल, हमने अभी तो शुरू किया है…. मैं काजल को घर पर छोड़ दूंगा….” विजय ने पापा से कहा।
“हां पापा…. ये विजय ! मेरा पुराना क्लासमेट ! …. बहुत दिनों बाद मिला है विजय….छोड़ देगा मुझे घर तक ! प्लीज़….”
“ठीक है…. जल्दी आ जाना….” कह कर पापा और मम्मी निकल गये।
हमने भी जल्दी से खाना समाप्त किया और निकल पड़े।
“देखो काजल…. यहीं पास में उस केम्पस में है मेरा क्वार्टर…. देखोगी….”
“नहीं…. अभी नहीं….देर हो जायेगी….”
मेरा कहा नहीं मानते हुये उसने अपनी गाड़ी अपने क्वार्टर की ओर मोड़ ली….
“बस जल्दी से आ जायेंगे….” हम उसके घर पहुंच गये। ताला खोल कर अन्दर आये तो देखा विजय ने अपना कमरा अच्छा सजा रखा था।
उसने अपना घर दिखाया, फिर बोला,” क्या पसन्द करोगी….चाय, कोफ़ी या कोल्ड ड्रिंक….?”
मैंने समय बचाने के लिये कोल्ड ड्रिंक के लिये कह दिया। विजय शायद मुझे घर पर कुछ कहने के लिये ही लाया था।
“काजल एक छोटी सी रिक्वेस्ट है…. देखो मना मत करना……..” विजय ने थोड़ा झिझकते हुए कहा।
मैं अन्दर ही अन्दर खुश हो रही थी कि अब ये कुछ कहने वाला है, शायद मुझे प्रोपोज करेगा !
“हां हां कहो…. ” फिर उकसाते हुए कहा “प्रोमिस ! मना नहीं करूंगी।”
“जाने से पहले एक किस दोगी……..!” फिर एकदम से घबरा उठा, “म्….म….मजाक कर रहा था !”
“अच्छा….मजाक कर रहे थे…. चलो मजाक में ही किस कर लो….” मैंने तिरछी नजरों से वार किया।
“क्….क्….क्या……..सच….” उसे विश्वास ही नहीं हुआ।
मैंने उसकी कमर में हाथ डाल दिया। और आंखे बन्द करके होंठ उसकी ओर बढ़ा दिये। मेरे शरीर का स्पर्श पा कर वो कांप गया। उसने धीरे से अपना होंठ मेरे होंठो से लगा कर किस करने लगा।
उसका लण्ड खड़ा होने लगा था…. मैंने उसके लण्ड पर थोड़ा दबाव और बढ़ा दिया। उसके शरीर का अहसास मुझे हो रहा था….उसके हाथ मेरी पीठ पर से फ़िसलते हुये मेरे चूतड़ों की तरफ़ जा रहे थे। मैंने भी अपने हाथ उसकी चूतड़ों की तरफ़ बढ़ा दिये। उसने अब मेरे दोनो चूतड़ों की गोलाईयों को दबा कर चूमना चालू कर दिया। मैंने भी वही किया और उसके चूतड़ों को दबाने लगी। मैंने धीरे से चूतड़ से एक हाथ हटाया और उसका लण्ड उपर से ही दबा दिया।
“आह……..काजल…. जोर से दबा दो….” मैंने और दबा कर ऊपर से ही लण्ड मसल दिया…. पर उसी समय मुझे कुछ अजीब सा लगा। उसने मुझे जोर से जकड़ लिया…. और मुझे उसके पैंट के ऊपर से ही गीलापन लगने लगा…. वो झड़ चुका था। उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया था।
” विजय…. ये क्या…. निकल गया क्या….” मैंने मजाक में हंसते हुये छेड़ा।
“सोरी काजल…. सह नहीं पाया….” उसका सर झुक गया।
मैंने उसकी हिम्मत बढ़ाते हुए कहा,” पहली बार तो ऐसा हो जाता है……..सुनो…. कल दिन को मुझे यहां ले आना…. कल मजे करेंगे”
विजय खुश हो उठा। इसने कपड़े बदले और मुझे घर छोड़ने के लिये चल पड़ा।
मैं खुश थी कि विजय जैसा जानदार लड़का मिल गया। अब जी भर कर चुदवाने का मजा लूंगी। अगले दिन वो दिन को २ बजे मुझे लेने आ गया।
हम दोनो सीधे उसके घर आ गये…. घर पर उसने पहले ही सारी तैयारी कर रखी थी। मैंने घर में आते ही दरवाजा बन्द कर दिया। और विजय से लिपट पड़ी। विजय भी जोश में लिपट पड़ा।
“विजय….मेरे कपड़े उतार दो…. बड़े तंग हो रहे है….” वो तो पहले ही पागल हो रहा था। उसने मेरा टॉप उतार दिया। मैंने जान कर ब्रा नहीं पहनी थी….मेरे दोनो कबूतर बाहर निकल कर फ़ड़्फ़ड़ा उठे…. विजय बैचेन हो उठा…. उसके हाथ मेरे स्तनों की ओर बढ़ने लगे….
“अजी ठहरो तो……..अभी मेरी जींस कौन उतारेगा….” उसके हाथ बढ़ते बढ़ते रुक गये और जींस की तरफ़ आ गये। मेरी जींस की ज़िप खोलते ही मेरी चूत के दर्शन हो गये। जींस नीचे सरकाते ही उसने अपना मुख मेरी चूत की पंखुड़ियों पर लगा दिये…. और जीभ ने दोनों पट खोल दिये…. और मेरी चूत में घुसने लगी। मुझे तेज सिरहन दौड़ गयी। मैंने अपनी आंखे बन्द कर ली।
“विजय अभी रुको जरा…. अपने कपड़े तो उतारो….” मुझे तो उसके शरीर को निहारना था। उसकी ताकत से भरी मसल्स को छूना था। उसके कड़े, मोटे और बलिष्ठ लण्ड को पकड़ना था। उसने अपने कपड़े भी तुरन्त उतार दिये और नंगा हो गया। वो मेरे जिस्म को देख कर आहें भर रहा था और मैं उसके तराशी हुई मसल्स को देख कर आहें भर रही थी। मैं उसके जिस्म से खेलना चाहती थी। मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया।
उसका लण्ड सच में बहुत बड़ा था। यानी लम्बा और मोटा था…. उसका लण्ड देखने से ही मस्कुलर और ताकतवर लग रहा था। मुझे उसका लण्ड देख कर नशा सा आने लगा कि हाय्…….. इतने सोलिड लण्ड से गहराई तक चुदने का मजा आयेगा।
“आहऽऽ …. कितना प्यारा लण्ड है तुम्हारा….तुमने कितनो को चोदा है….”
“सिर्फ़ एक को…….. पर थोड़ा सा ही…. ” मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया…. हाय रे…. ऊपर से नरम मसल्स थी…. लण्ड में बहुत कड़कपन था। मैंने उसके सुपाड़े पर से चमड़ी ऊपर सरका दी और उसके लाल चमकदार सुपाड़े को मलने लगी…. थोड़ा सा थूक लगा कर चिकना किया और हाथ में कस लिया। एक बार और थूक कर उसके लण्ड को मुठ मारने लगी…. उसका लण्ड जोर से फ़ड़फ़ड़ाया और पिचकारी छूट पड़ी…. मैं स्तब्ध रह गयी। मेरा हाथ थूक से पहले ही गीला था….अब वीर्य से नहा गया था।
“विजय…. ये तो माल निकल गया….” विजय अति उत्तेजना से हांफ़ रहा था।
मैंने सोचा इसे फिर से तैयार करते हैं…. चुदवाना तो था ही….
मैंने उसी के रूमाल से सब कुछ साफ़ किया और कहा,” अच्छा जी ! मुझे कितना तड़पाओगे…. अभी फिर से तैयार करती हूं….थोड़ी देर कोल्ड ड्रिंक पीते है….”
उसे प्यार से कह कर मैंने फ़्रिज से ड्रिंक्स निकाल ली और नंगी ही उसकी गोदी में बैठ कर पीने लगे…. मेरी गाण्ड के स्पर्श से उसका लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने धीरे धीरे उसके लण्ड पर अपनी गाण्ड सहलाने लगी…. ड्रिंक्स समाप्त करके मैंने उसे फिर से सीधा लेटा दिया। उसका लण्ड सीधा तन्नाया हुआ खड़ा था।
मैंने जोश में आते हुये उसके ऊपर लेट कर लण्ड चूत में घुसेड़ लिया और जोर लगा कर पूरा घुसा लिया। उसने भी मुझे जकड़ लिया और अपने लण्ड का पूरा जोर नीचे से लगा दिया…. और मुझे लगा कि उसका जोर बढ़ता ही जा रहा है…. और मेरी चूत में उसका लण्ड फ़ूलता – पिचकता सा लगा…. मुझे अपनी चूत में उसका वीर्य का अहसास हो गया…….. विजय झड़ चुका था। मेरा सारा जोश ठण्डा पड़ गया। मैं उस पर निराशा से निढाल हो कर लेट गई….
मैं समझ चुकी थी कि विजय मात्र ऊपर से ही शानदार दिखता है…. पर अन्दर से खोखला है। मैं उस पर से धीरे से उठी और बाथ रूम में जाकर सारी सफ़ाई कर ली और कपड़े पहन लिये।
विजय शर्मिंदा लग रहा था…. पर मैंने उसे हिम्मत बढ़ाते हुये कहा,” विजय…. ये कोई समस्या नहीं है…. बस अति उत्तेजना का असर है…. चाहो तो होस्पिटल में किसी स्पेशलिस्ट से बात करो….किसी नीम हकीम से या न्यूज पेपर के विज्ञापन से दूर रहना….” मैंने उसे समझाया।
“काजल …. हां मैं आज ही मिलता हूं….” वो पहले से खुद की कमजोरी जानता था। मुझे उस पर मन में दया भी आई…. पर मैं …….. प्यासी ही रह गई…. उसका शरीर और रूप देख कर धोखा खा गई….
“चलो मुझे अब घर छोड़ आओ…. ” वो मेरे साथ तैयार हो कर निकल पड़ा।
मैं रास्ते भर सोचती रह गई…. बेहद खूबसूरत, ६ फ़ुट लम्बा, गोरा, कसरती शरीर, उसके शरीर की मसल्स…. यानी शो पीस…. Sex Stories
मैं राज हिमाचल क रहने वाला हूं। यह बात की है जब मैं बारहवीं में Antarvasna पढ़ता था। मैं अपने मामा के यहां पेपर देने गया था।
वहां पड़ोस में एक लड़की सुन्दर सी, मस्त फ़िगर वाली रहती थी। नाम था हिना। वो मुझ पर पहले दिन से ही लाइन मारने लगी थी पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया.
एक दो दिन में वो मुझ से बात भी राजे लगी और हम लोग एक दूसरे को इशारे भी राजे लगे। एक दिन जब मामा काम पे गये थे और मामी बच्चों के साथ पड़ोस में गयी थी तो वो बाहर छोटे बच्चों के साथ खेल रही थी।
मैंने बड़ी हिम्मत कर के उसे इशारा किया और अपने पास बुलाया मगर उसने आने से मना कर दिया।
उस दिन के बाद मैंने सोच लिया कि कुछ ना कुछ तो जरुर करुंगा उसे पाने के लिये।
मेरे मामा शाम को 7:30 बजे वापिस आते थे। उस के थोड़ी देर बाद जब थोड़ा स अन्धेरा हो गया तो सब बच्चे घर चले गये और उस ने मुझे इशारा कर के मुझे बुलाया, मैं उसके पास गया मगर पड़ोस की एक औरत वहां आ गयी और उससे बात राजे लगी।
मैं बात बिना किये ही आगे चला गया।
थोड़ी देर बाद जब वापिस आया तो वो अकेली खड़ी थी। मैं उससे बात राजे लगा। पहले तो हम इधर उधर की बातें करते रहे फ़िर वो बोली कि आप मुझे भूल तो नहीं जाओगे।
मैंने कहा कि भूलूंगा तो नहीं मगर चाहता हूं कि ये याद थोड़ी शानदार और हसीन हो जाये।
यह सुन कर वो शरमा गयी।
उस समय काफ़ी अन्धेरा हो गया था और उसने बाहर की रोशनी भी नहीं जला रखी थी। हम अन्धेरे में ही बातें कर रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आगे कैसे बढूं। उस तरफ़ भी आग बराबर लगी थी.
वो हिम्मत कर के बोली- मुझे एक किस करो.
तो मैंने पूछा- कहां पे?
तो वो बोली- गाल पे।
मैंने कहा- नहीं मेरा दिल होठों पे राजे को कर रहा है।
उसने कहा- जहां दिल करता है वहीं कर लो।
मैंने उसे अपनी बाहों में पकर लिया और एक जोरदार चुम्मी ली उसके होठों पे। उसका गदराया बदन मेरे हाथों में था। पहली बार मैंने ऐसे किसी लड़की को पकड़ा था।
हम दोनों बहुत गरम हो गये थे।
उसने कहा कि यहां कोई आ जायेगा, चलो मेरे कमरे में चलो।
मैंने पूछा- घर पे कोई नहीं है?
वो बोली- पापा मम्मी बाहर रहते हैं, यहां मैं और भैया रहते हैं। वो भी आज नहीं आयेंगे। मेरे साथ मेरी एक भतीजी है 5 साल की, उसे पहले ताई जी के पास भेज देती हूं थोड़ी देर के लिये।
उसने फ़टाफ़ट भतीजी को भेज दिया और मैं उस के कमरे में चला गया।
दरवाजा बद करके हम एक दूसरे से लिपट गये। मैंने उसे बिस्तर पे गिरा लिया और उस की कमीज उतार दी। मैं उसके मोम्मों को दबाने लगा। हम काफ़ी देर एक दूसरे को चूमते, चूसते रहे। मैंने उस के मोम्में खूब चुसे पर दिल नहीं भरा।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और हम डर गये।
हिना ने पूछा- कौन है?
तो बाहर उसकी भतीजी थी।
उसने मुझे फ़टाफ़ट छिपने के लिये कहा। मैं बिस्तर के नीचे छिप गया।
उस ने दरवाजा खोला और कुछ बात करके भतीजी को फ़िर कहीं भेज दिया। दरवाजा बद करके वो वपिस आयी तो मैं निकला। मैंने देर ना करते हुए उसकी सलवार उतार दी और जल्दी से उसकी चूत में अपना लन्ड घुसा दिया।
मगर बड़ी दिक्कत के साथ अन्दर गया और उसके आंसू निकल आये।
वो चीखी- निकालो बाहर इसे!
मगर मैं अन्दर घुसाये जा रहा था। मेरे कुछ रुकने पे वो सामान्य हुई।
अब मेरे हल्के हल्के धक्कों से उसे मजा आने लगा और वो सिस्कारियां भरने लगी। मैं उसे चोदता रहा वो मजे लेती रही।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे कस के पकड़ लिया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- तुम धक्के लगते रहो, मजा आ रहा है।
मैं धक्के लगाता रहा और मैंने अपने लन्ड पे कुछ गरम गरम महसूस किया। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मुझे भी मजा आ रहा था। मैंने धक्के तेज कर दिये। थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया।
हम एक दूसरे से लिपटे रहे और चूमते रहे। कुछ देर बाद हमने कपड़े पहन लिये।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
हिना ने पूछा- कौन है।
बाहर उसकी भतीजी थी.
हिना ने मुझसे कहा- तुम अभी छुप जाओ, मैं इसे कहीं और ले जाती हूं, पीछे से तुम निकल जाना। हम कल मिलेंगे।
मैं वहां से आ गया।
अगले दिन उसका भाई आ गया और हम दोबारा नहीं मिल पाये।
एक दो दिन में मैं वापिस आ गया। फ़िर 3 – 4 साल बाद वहां गया तो उसकी शादी हो चुकी थी, मगर उसने कहा था कि भूलना मत और सही में मैं उसे आज भी नहीं भुला पाया हूं. Antarvasna
मैं रमेश 20 साल Hindi porn stories, अमदाबाद में रहता हूँ। मेरी हाईट 5’6″ गोर रंग और सबसे महत्त्वपूर्ण कि मेरा लंड 8″ का है जिसे सारी लड़कियाँ, भाभियाँ और आंटियाँ पसन्द करती हैं।
मेरी भाभी रीना, जो एक सुन्दर सेक्सी लेडी हैं, की उमर 27 साल है। उनके बड़े बड़े स्तन और मोटे चूतड़ जो चलते समय इधर उधर झूलते हैं, मुझे हर वक्त बेचैन किये रहते हैं।
मेरा भाई 28 साल का है और 8 महीने पहले उसकी शादी रीना से हुई है। वो एक बड़ी मल्टी नैशनल कम्पनी में सोफ़्टवेयर इंजीनीयर है। उसे अक्सर कम्पनी के काम से बाहर जाना पड़ता है। मैं भी एक कोलेज में पढ़ता हूँ और भैया भाभी के साथ रहता हूँ।
शुरू के महीनों में भैया भाभी ने अपनी मैरिड लाइफ़ को अच्छा एन्जोय किया। फ़िर भाभी भैया के लम्बे समय के विदेश के टूर से परेशान हो जाया करती। भैया चार महीने के लिये फ़िर गये तो मैं और भाभी दोनों ही घर मैं अकेले थे, भाभी एकदम उदास नज़र आती थी। मैं भाभी से बहुत बातें करता था और उनको खुश करने की कोशिश करता था, लेकिन यह बहुत मुश्किल था।
थोड़े दिन ऐसे ही बीत गये।
भाभी में मैंने थोड़ा चेंज नोटिस किया, मैं और भाभी अब अच्छे दोस्त बन गये थे। दोनों बाहर शोपिंग करने जाते थे, घूमते थे मज़े करते थे। जो लोग हमें नहीं जानते थे उन्हें हम दोनों पति और पत्नी लगते थे। मेरे मन में भाभी के बारे में बहुत सेक्सी ख्याल थे लेकिन वो मेरे बड़े भैया की पत्नी है यह सोच कर मैं अपने आप को कंट्रोल करता था। लेकिन रात को घर में हम दोनों अकेले होते तो मेरा लंड भाभी को चोदने के इरादे से खड़ा हो जाता था और मैं अपने लंड को अपने हाथों से हिला के अपनी आग बुझाता था।
भाभी और मैं बहुत सी बातें करते थे, वो हमेशा यह जानने की कोशिश करती थी कि कोई लडकी मेरी दोस्त है या नहीं?
मैं उसे कहता था कि मेरी कोइ गर्ल फ्रेंड नहीं तो वो मानने से इंकार करती थी, वो बोलती थी कि तेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं, ऐसा हो ही नहीं सकता। और कहती थी लड़कियों को तेरे जैसे सुडौल सुगठित लड़के चाहिये होते हैं। आज कल भाभी ऐसे ही बातें करती थी। मैं जान गया भाभी के मन में मेरे बारे में कुछ चल रहा है। उसका मेरे साथ व्यवहार भी थोड़ा बदल गया था। बातें करते समय वो मुझे छूने की कोशिश करती थी। मेरे करीब आया करती थी। मैं बड़े मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल करता था। भाभी अब सेक्स की कमी महसूस कर रही थी। उसकी हरकतों से ऐसे लगता था कि उनको सेक्स चाहिए बस!
सामान्यतया वो घर में साड़ी में रहती थी, साड़ी में उसके गोल गोल चूतड़ देख कर मेरा तो लंड हमेशा तन जाता था। उसकी नाभि, ब्लाउज़ में से दिखने वाली उसकी सेक्सी क्लीवेज, मैं इन सबके लिये पागल हुये जा रहा था। झाड़ू लगाते समय हमेशा मेरे सामने वो अपने साड़ी का पल्लू जानबूझ कर गिराया करती थी ताकि मैं उसके बड़े स्तन देख सकूँ। शायद वो मुझे पाने के लिये पागल हुए जा रही थी। लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं जाकर भाभी को चोदना शुरु करुं। मुझे बहुत डर लगता था।
एक दिन रात को बेडरूम मैं अपने सेक्सी भाभी के बारे में सोच कर अपना लंड हिला रहा था, मेरे कमरे का दरवाज़ा तो बंद था लेकिन मैंने लॉक नहीं किया था। तभी भाभी कुछ काम से या जानबूझ कर मेरे कमरे में बिना खटकाए चली आई, और मैं अपना लंड बड़े मज़े से हिला रहा था। भाभी को देख के मैं इतना शरमा गया, कुछ कह नहीं सका।
भाभी ने भी कुछ नहीं कहा, लेकिन मेरे बड़े लंड को 2-3 मिनट तक देखते रही और वहाँ से चली गई।
अगले दिन सुबह मैं जब कॉलेज जाने की तैयारी कर रहा था तब भाभी ने मुझे स्नैक्स और चाय दी। मैं तो रात की घटना से इतना शरमा गया था कि मैं भाभी से आंखें नहीं मिला पा रहा था। एक नज़र मैंने भाभी के तरफ़ देखा तो भाभी ने मुझे शरारती मुस्कान दी, लेकिन कुछ नहीं कहा। और मैं झट से वहाँ से कॉलेज के लिये निकल पड़ा।
मैं दोपहर को 1 बजे घर आया, भाभी ने दरवाज़ा खोला, उसने गुलाबी रंग की शीफ़ॉन साड़ी और सेक्सी स्लीवलेस ब्लाउज़ पहना हुआ था। वो सेक्सी दिख रही थी। उसकी पारदर्शक साड़ी में से उसका सेक्सी बदन साफ़ दिख रहा था। उसने मेरे हाथों से मेरा कॉलेज बैग लिया और मुझे अंदर लेकर दरवाज़ा बंद कर दिया और उसने मुझसे पूछा- प्यारे देवरजी, आप कल रात को क्या कर रहे थे??’
मैंने कहा- भाभी मैं कल रात को आपके बारे में सोच के अपना लंड हिला रहा था।’
मैं उसी के बारे में सोच के अपना लंड हिला रहा था, यह सुन कर वो एकदम पागल हो गई और मेरे पास आई, उसने मुझे धक्का दिया और सोफ़े पे गिरा दिया। अब वो कूद के मेरी छाती पर बैठ गई और बोलने लगी- रमेश, तुम कितने भोले हो, अपनी भाभी को चोदना चाहते हो लेकिन कभी ज़बरदस्ती नहीं की, मैं भी तुम्हारे लिये पागल हूँ, मैंने सोचा था कभी ना कभी आके तुम मुझे ज़रूर चोदोगे। लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया। मैं तुम्हारा प्यार पाने के लिये तड़प रही हूँ। तूने भाभी को बहुत तरसाया है। मुझे तुम्हारे प्यार की बहुत ज़रुरत है।’
ऐसे बोल के उसने मेरे होंठों पे अपने होंठ कस के दबा दिये। 15 मिनट तक वो मेरे और मैं उसके होंठ चूसता रहा। अब मेरा भी लंड बहुत टाइट हो रहा था। होंठों के बाद वो मुझे सब जगह पे चूमने लगी, गाल छाती और सब जगह। मैं भी उसके गालों को चूसने लगा। चूस चूस के उसके गोरे गाल मैंने लाल कर दिये।
अब तो वो बहुत गरम हो गई थी उसने मेरे कपड़े निकाल दिये, और मैंने उसके। अब मैं सिर्फ़ मेरे अंडरवीयर में था। और मेरे लंड का आकार साफ़ नज़र आ रहा था। वो शेप देख के वो और पागल हो गई और बोली- रमेश, जब से तुम्हें अपना ये बड़ा लंड हिलाते देखा है, मैं तो इसके लिये पागल सी हो गई हूँ, अब मुझे और ना तड़पाओ!’
ऐसे बोल कर उसने मेरी अंडरवीयर निकाल दी। अब वो मेरा पूरा नंगा लंड देख के जो कि अब 8′ से बड़ा हो गया था, अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। उसने उसे अपने हाथों से हिलाना शुरु किया और बोली- तुम्हारा तो तुम्हारे भैया से काफ़ी बड़ा है, इसलिये मैं तुम्हें कहती थी कि तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है क्या?? मेरे भोले देवर जी लड़कियों को ऐसे बड़े लंड वाले लड़के बहुत पसंद होते हैं!’
वो मेरे लंड के साथ खेल रही थी। अब उसने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया। मेरा लंड पहली बार किसी छेद में जा रहा था। मेरे लंड को गुदगुदी सी हो रही थी। मैं जैसे स्वर्ग में था।
उसने मेरा लंड पूरा अपने मुंह में ले लिया। क्योंकि यह मेरा पहली बार था, मैं ज्यादा देर नहीं टिक पाया, 5 मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं छूटने जा रहा हूँ!
उसने कहा- मुंह के अंदर ही छोड़ देना!
मैंने बड़े जोर के साथ अपना वीर्य उसके मुंह में निकाल दिया और उसने वो पूरा निगल भी लिया। अब छूटने की वजह से मेरा लंड फ़िर अपने सामान्य शेप में आ गया। तब भाभी और मैं बाथरूम में सफ़ाई के लिये चले गये। वहाँ वो तो और सेक्सी बातें करने लगी। लगता है अब तक उसकी गरमी ठंडी नहीं हुई थी। उसने कहा- तुम्हारे भैया का लंड तुमसे बहुत छोटा है, और वो मुझे इतना प्यार भी नहीं करते, भैया नहीं थे तो मैं सेक्स के लिये बहुत पागल हुये जा रही थी, मुझे तुम अपनी बीवी समझना और जब जी चाहे तब चोदना। ये भाभी आज से तेरी है।’
और उसने मुझे फिर चूमना शुरु किया। हम एक दूसरे को फिर चूसते रहे, चूमते रहे। मैंने उसे कहा ‘भाभी, देवर को दूधू पिलाओ!’उसने कहा- पूछो मत! ये दूध और दूधवाली सब आप ही के लिये हैं, जितना दूध पीना है पी लो!’
और मैंने बिना रुके उसके 36 डी साइज़ के सेक्सी बूब्स दबाने लगा। उसे ज़ोरो से चूसने लगा। वो चीखने लगी- चूसो और ज़ोरों से, पी जाओ सारा, रमेश् आआआआअ आईईइ ईइ अ दूध ऊऊऊह ह्हह्हा आऐइ ईई ईई…ऊऊ ऊऊओ ऊऊओ ऊओ ऊ…आ आआअ आ आअ।
मैंने अपनी चुसाई जारी रखी, और वो मेरे लंड से खेले जा रही थी। 20 मिनट मैंने उसके स्तन चूस चूस के लाल कर दिये, अब मेरा लंड फ़िर तन रहा था। अब तो मेरे लंड को उसके चूत के छेद में जाना था। अपना तना हुआ लंड मैंने उसकी चूत पर रख कर अन्दर करएने का प्रयत्न किया। मेरा लंड मोटा होने के कारण अंदर जाने में थोड़ी दिक्कत हुई। लेकिन 2-3 जोर के झटकों के बाद अंदर चला गया। तब वो चिल्लाई- आआअ आआअ आऐइ ईईईइ ऐईईइऊ ऊऊऊईइ ईईईई माआ आआआ निकालो बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन वो उसे अलग नहीं होने दे रही थी। उसे भी बहुत मज़े आ रहे थे। मेरा लंड भी बहुत मजा कर रहा था। उसे चूत चुदवाना अच्छा लग रहा था। मैंने उसे लगभग 20 मिनट तक चोदा और उसकी चूत में पानी निकाल दिया, उसी समय पे उसके भी चूत से पानी निकला।
फिर हम दोनों बाथरूम में एक साथ शॉवर में नहाये, वहाँ भी मैंने थोड़ी मस्ती की। कॉलेज से घर आने के बाद शाम को 2।00 से ले के 5।00 तक चुदाई का ही प्रोग्राम चलता रहा। उस रात को हम दोनों एक ही बेड पे सोये थे एक दूसरे के बाहों में पति-पत्नी की तरह। मेरी सेक्सी भाभी के बदन की आग ठंडी हो ही नहीं रही थी। सुबह 5।30 को वो फ़िर से मेरे लंड के साथ खेलने लगी, मैं तब नींद में था। लेकिन उसकी मस्ती से मैं उठ गया और मेरा लंड भी उठ गया। और फिर एक बार मस्त चुदाई हुई।
उस पूरे दिन में हम दोनों ने 4-5 बार सेक्स किया, मैं तो पूरा थक गया था और वो भी। दूसरे दिन मैं कॉलेज जा ना सका।
इस लिये मैंने इस स्टोरी को ‘भाभी ने देवर को चोदा’ ये नाम दिया है। वो रात मैं अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं भुला सकता। उसके बाद मैंने भाभी को बहुत बार अलग अलग तरीके से चोदा है।
लेकिन अच्छी बातें कभी ज्यादा देर नहीं टिकती। वैसे ही हुआ, पिछले महीने में भैया का ट्रांसफ़र हो गया और उन्हें शिफ़्ट होना पड़ा। भाभी भी अब उन्हीं के साथ रहती है।
अब अमदाबाद में मैं बिल्कुल अकेला हूँ।
अब मेरे लंड को चोदने की अच्छी आदत लगी है, और जैसा भाभी ने कहा था कि लड़कियों को बड़े लंड वाले लड़के पसंद है वैसे ही हुआ। मेरे कॉलेज में एक लड़की है, उसने मुझसे फ़्रेंडशिप की, मैंने उसे परपोज़ भी किया। उसे भी मैं 3-4 बार चोद चुका हूँ। यह कहानी मैं आपको अगली बार Hindi porn stories ज़रूर बताऊँगा।
मेरे साथ जो पहली बार Sex stories हुआ, उसे मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता। इस बात को मैं आज तक दो साल बीत जाने पर भी किसी को नहीं बता पाया, लेकिन आज इस कहानी के माध्यम से आप को बता रहा हूँ।
जब मैं यूरेका फोर्ब्स कम्पनी में सेल रैप पर काम कर रहा था। मैं देखने में स्मार्ट हूँ, लम्बा हूँ, सब कुछ ठीक-ठाक है। एक दिन मैं सेल्स के लिए एक पॉश कॉलोनी में गया। बारह बजे तक कोई भी सेल नहीं हुई, मैं बड़ा उदास था। लंच के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे सो मैंने सोचा कोई बुकिंग हो जाए तो कुछ एडवांस मिल जाएगा फिर लंच करूँगा। इसी उम्मीद में मैं दोबारा ग्राहक तलाशने लगा।
काफ़ी देर बाद एक औरत ने दरवाजा खोला, मैंने कहा- मैं एक्वा बेचता हूँ, आप देखना चाहेंगी..!
उसने कहा- हमारे पास तो पहले से ही है।
और वो वापस जाने लगी, मेरी ये उम्मीद भी जाती हुई लगी। मैंने जाते-जाते पूछ लिया- मैम.. ठीक चल रहा है…!’
उसने कहा- रुको.. मैं देख कर आती हूँ..!
वो औरत करीब 30 साल की रही होगी और शादी-शुदा भी थी। थोड़ी देर के बाद वो वापस आई और बोली- नहीं.. ठीक नहीं चल रहा है, तुम चैक कर लो..!
और मैं अन्दर चला गया। अन्दर जाकर मैंने मशीन को चैक किया तो, वैसे वो ठीक थी… बस थोड़ी सी सफ़ाई करनी थी।
मैंने कहा- मैम इसमें थोड़ी प्रोब्लम है, ठीक करने के 300 रुपये लगेंगे..!
उसने मुझसे कहा- ये तो ज्यादा हैं..!
मैंने कहा- ठीक है आप 200 दे देना, लेकिन बिल नहीं दूँगा..!
(जबकि मुझे मशीन ठीक करने के परमीशन नहीं थी)
उसने कहा- ठीक है.. करो..!
और मैं उसको ठीक करने लगा, थोड़ी देर बाद मशीन ठीक होने पर मैंने उनसे रुपये मांगे। तो वो अन्दर से आई और कहा- मशीन चैक करा दो..!
मैंने कहा- आप चला कर देख लीजिए..!
और वो मेरे आगे खड़ी होकर चैक करने लगी, ठीक उनके पीछे मैं खड़ा था। मैंने पहली बार ध्यान दिया उसने नाईटी के नीचे कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी फिगर भी 34-24-36 के आस-पास थी। अचानक वो पलटी और कहा- ठीक है.. अब बताओ कितने पैसे देने हैं..!
मैंने कहा- मैम 200 रुपये..!
उसने कहा- तुमने इसमें क्या सामान डाला है..! अपने ऑफिस में बात करो..!
मैं डर गया और मैंने कहा- ठीक है, आप 100 रुपये ही दे दीजिए..!
लेकिन वो फिर कहने लगी- नहीं.. मेरी अपने ऑफिस में बात कराओ..!’ और वो धीरे-धीरे स्माइल कर रही थी।
हार कर मैंने उनसे कहा- मैम मुझे मशीन ठीक करने की परमीशन नहीं है, इसलिए मैं आपकी ऑफिस में बात नहीं करा सकता..!
तो उसने कहा- तो तुमने मशीन को क्यों हाथ लगाया..!
मैंने कहा- पॉकेट-मनी के लिए..!
उसने कहा- क्यों सेलरी नहीं मिलती?
मैंने कहा- मैम अभी मैं नया हूँ..!
तो वो बोली- इसके लिए तुम गलत काम करोगे..!
मैंने कहा- मैम वैसे तो मैंने कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन आप को लगता है तो मैम आधा दिन हो चुका है और मेरे पास पैसे नहीं है जिससे मैं लंच कर सकूँ.. इसलिए मैंने आप की मशीन ठीक की है..!
तो वो बोली- ओके.. ठीक है बैठो..!
और मेरे बारे सब कुछ पूछने लगी, मेरी शादी के बारे में पूछा।
मैंने मना कर दिया, फिर मेरे गर्ल-फ़्रेंड के बारे पूछा, मैंने कहा- पहले थी..!
उसने कहा- उसके साथ क्या-क्या किया?
मैंने कहा- मैं समझा नहीं..!
तो वो बोली- उसके साथ सेक्स किया था?
पहले तो मैं शर्मा गया, फिर उसके जोर देने पर मैंने कहा- नहीं..!
वो बोली- तुम झूठ बोल रहे हो..!
मैंने कहा- नहीं..!
तो वो बोली- सच बोलो, मैं तभी तुम्हारे पैसे दूँगी..!
मैंने कहा- हाँ.. किया था..!
तो वो बोली- क्या तुम एक्स्ट्रा इनकम करना चाहते हो? साथ में गिफ़्ट भी मिलेंगे..!
मैंने कहा- जरूर..!
तो वो बोली- उसके लिए तुम्हें पहले टेस्ट पास करना पड़ेगा, अगर तुम टेस्ट में पास हो गए तो तुम्हें 1000 रुपये आज ही मिल जायेंगे और हर महीने 10000 रुपये मिलेंगे..! महीने में 15 दिन 2 घंटे रोज देने होंगे..!
मैंने कहा- ठीक है..!
मैं बड़ा खुश हुआ, मैंने काम के बारे में पूछा तो वो बोली- केवल तुमको थोड़ी सी मसाज करनी है।
मैंने कहा- मुझे तो आती नहीं..!
वो बोली- मैं सिखा दूँगी।
मैंने कहा- ठीक है।
‘तो चलो.. तुम्हें मसाज सिखाती हूँ और तुम्हारा टेस्ट भी हो जाएगा..!’
मैंने कहा- ठीक है।
फिर वो मुझे लेकर अपने बेडरूम में गई, वहाँ जाकर बोली- पहले अपने कपड़े उतारो..!
मैं अब सब कुछ समझ रहा था और खुश भी था। मैंने अपने कपड़े उतारे, बस अंडरवियर पहने रखा।
फिर वो अपने कपड़े उतार कर बेड पर बैठ गई और बोली- अपना लण्ड दिखाओ..!
मैं थोड़ा हिचकचाया, उसने आगे आकर अपने हाथ से मेरा अंडरवियर नीचे किया और मेरे लण्ड को हाथ में लेकर आगे-पीछे किया और कहा- अंडरवियर भी उतार दो..!
मैंने वैसा ही किया। उसने मेरे हाथ में एक बॉडी-लोशन दिया और कहा- इसको मेरे बॉडी पर लगाओ..!
उस समय उसने ब्रा-पैंटी पहन रखी थी। मैंने डिब्बे से पहले लोशन उसके पेट पर लगाया फिर उसके पैरों पर, फिर मैंने उनसे ब्रा और पैंटी के लिए पूछा, तो उसने उसको उतारने के लिए कहा। उसकी ब्रा उतरते ही मेरा मन उसको चूसने के लिए करने लगा और मैंने अपना मुँह उसके मम्मे पर रख दिया और उसको चूसने लगा और वो मेरा लण्ड पकड़ कर दबाने लगी। उसके मम्मे काफ़ी टाइट थे। काफ़ी देर मम्मे चूसने के बाद मैंने लोशन दुबारा लगाना शुरु किया। कभी आगे, कभी पीछे मेरा लण्ड अब गीला होने लगा था। मेरा मन अब उसको चोदने को कर रहा था। उसने अपनी ब्रा और पैंटी उतार कर मेरा अंडरवियर भी उतार दिया।
और मेरा फ़ेस अपनी चूत पर रख कर कहा- इसको चाटो..!
मैंने भी वैसा ही किया, मैं पहली बार किसी की चूत चाट रहा था। फिर उसने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी। अब तो जैसे मैं पागल हो गया था और लगने लगा मेरा पानी निकल जाएगा।
मैं अपने लण्ड को उसके मुँह से हटाने लगा, तो उसने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- पानी निकलने वाला है..!
तो उसने मेरा लण्ड अपने मुँह से निकाल दिया और कहा- अब तुम सबसे पहले अपना लण्ड मेरी गांड में डालो..!
मैंने कहा- आगे से नहीं..!
तो वो बोली- आगे से ज्यादा मजा पीछे से आता है।
मैं भी उसके पीछे से उसको चोदने लगा। काफ़ी देर बाद जब मेरा लण्ड से पानी निकलने वाला था, तो उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। मेरा लण्ड अब पानी छोड़ रहा था, लेकिन वो सारा पानी पी रही थी। जब मेरा लण्ड बैठ गया, तो उसने छोड़ा।
फिर उसने कहा- अब मेरी चूत में अपनी उंगली डाल कर आगे-पीछे करो। मैं वैसा ही करने लगा। थोड़ी देर के बाद मेरा लण्ड फिर तन गया और उसने देख कर कहा- चलो अब मेरी चूत मारो..!
मैंने अब उसकी चुदाई शुरु की और उसके मम्मे को अपने मुँह में लेकर चूसता रहा।
थोड़ी देर बाद उसने मेरा लण्ड अपनी चूत से बाहर निकाल कर अपने दोनों मम्मे के बीच में मेरा लण्ड दबा लिया और कहा- अब यहीं पर रगड़ते रहो और अपना पानी यहीं पर निकाल दो..!
मैं भी वैसा ही करता रहा। मेरे लण्ड उसके मम्मे के बीच में रगड़ रहा था, फिर मेरे लण्ड ने उसके मम्मे पर पानी छोड़ दिया। उसने दोबारा मेरा लण्ड अपने मुँह से साफ़ किया और मुझे कपड़े पहनने को कहा और वो बाथरूम चली गई। थोड़ी देर बाद फ़्रेश होकर आई और मुझे 1000 रुपये देकर कर कहा- ये तुम्हारा एडवांस..!
और मुझे एक फोन नम्बर देकर कहा- कल यहाँ पर फोन करके चले जाना..!
तो दोस्तो, यह थी मेरी कहानी। आप लोगों को कैसी लगी? Sex stories
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