Important Notice: 📧 Mail for rent: info@tottaa.com

Massage Girl in Baramulla: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Baramulla who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Baramulla that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Baramulla massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Baramulla who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Baramulla massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Baramulla massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Baramulla who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Baramulla employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Baramulla helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Baramulla

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Baramulla at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Hindi Porn Stories

मेरा नाम राहुल है. मेरी उमर 24 साल है Hindi Porn Stories और मेरी शादी अभी नहीं हुई है. मैं आगरा में नौकरी करता हूँ. मैंने ऑफ़िस के पास ही एक कमरा किराये पर ले रखा है. मेरा कमरा ऊपर वाली मंजिल पर था. इस घर में नीचे बस एक परिवार रहता था. उसमें एक 18 साल की लड़की सोनम, उसकी मम्मी सोनू और पापा कमल रहते थे.

सोनम बहुत शरारती थी… कभी कभी वो सेक्स सम्बंधी सवाल भी कर देती थी.
आज भी सवेरे सोनम चाय ले कर आई और मुझसे पूछने लगी- ‘अंकल… मम्मी पापा हमेशा साथ सोते है पर रात को वो लड़ते भी है…’
‘अरे नहीं… लड़ेगे क्यूँ… क्या वो एक दूसरे को बुरा भला कहते है…?’
‘नहीं, पापा मम्मी के ऊपर चढ़ कर…उनकी छातियों पर हाथ से मारते हैं…मम्मी नीचे हाय-हाय करके रोती हैं!’

‘अरे…अरे… चुप… ऐसे नहीं कहते…वो तो खेलते हैं, तुमने और क्या देखा?’ मेरी उत्सुकता बढ़ गई.
‘और बताऊँ… पापा मम्मी का पेटीकोट उतार देते है और खुद भी पायजामा उतार देते है, फिर और भी लड़ते हैं…मम्मी बहुत रोती है और हाय-हाय करती है!’

मैं ये सुन कर उत्तेजित होने लगा. कि ये इतनी बड़ी लड़की हो कर भी अन्जान है या जान करके मुझे छेड़ रही है.

‘अरे तुम्हारी मम्मी रोती नहीं है सोनम… वो एक खेल है जिसमें मजा आता है… तुम नहीं समझोगी…!’
‘अच्छा अंकल इसमें मजा आता है? आपको आता है ये खेल…?’
‘हाँ…हाँ… आता है…!’ मैं सोनम की बातों से से हैरान हो गया… क्या ये सच में अनजान है?

‘अंकल चलो न फिर हम भी खेलें…?’
‘अरे… चुप… ये बड़े लोगों का खेल है… जैसे तुम्हारी मम्मी जितनी बड़ी… तुम भी खेलना मगर शादी के बाद!’ मैंने भी असमंजस में था पर उसे इशारा दे दिया.
‘अंकल मैं भी 18 साल की हो गई हूँ अभी पिछले महीने… खेलो ना मेरे साथ…’ मैंने सोचा अब ये मस्ती कर रही है… चलो थोड़ा सा मजा कर लेते हैं…!
‘अच्छा बताओ कि पापा सबसे पहले क्या करते है…?’

‘वो तो पता नहीं पर वो चुम्मा लेते हैं…’ उसके बताने पर मैं हंस पड़ा और रोमांचित भी हो गया.
‘तो फिर आओ… हम भी यही करते हैं…’

मैंने सोनम को पास बैठा कर उसके होठो को चूम लिया. वो शरमा गई… मैं समझ गया था उसका बहाना.
‘अंकल ऐसे तो अच्छा लगता है… और करो!’

मुझे मजा आने लगा था… सोनम की मन्शा मैं समझ गया था. मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसके नरम नरम होन्ठों पर अपने होंठ रख दिये… सोनम के होन्ठ कांप रहे थे… मैंने अपने हाथों को उसकी छोटे छोटे निम्बू जैसे उरोज पर रख दिये… और सहलाने लगा… सोनम मेरे से और लिपटने लगी… उसकी धड़कन बढ़ गई थी… सांसे तेज हो चली थी.
‘अंकल ये तो और ज्यादा मजा आ रहा है…’ वो कुछ कुछ लड़खड़ाती जबान से बोली… मेरी आंखो में वासना के डोरे उभरने लगे थे.

अब मेरे हाथ सोनम की नरम नरम जांघो पर फ़िसल रहे थे… नया ताजा माल मिल रहा था… सारा बदन अनछुआ लग रहा था. मैंने अपने हाथ उसकी चूत तक पहुंचा दिये…. मेरे हाथ सोनम की चूत पर आ चुके थे… मैंने चूत सहलाते हुये उसे दबा दिया…सोनम ने भी अपनी चूत और खोल दी.

‘अंकल मुझे कुछ हो रहा है…ये नीचे कड़ा कड़ा क्या है ‘ सोनम ने पज़ामे के उपर से मेरा लण्ड कस के पकड़ लिया.
‘बेबी हाय… पकड़ लो इसे…! देखो जोर से दबा कर पकड़ना…!’ मेरे मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. सोनम ने पज़ामे के ऊपर से मेरा तना हुआ कठोर लण्ड पकड़ कर मसल दिया.
‘पापा के भी ऐसा है,…मम्मी इसे चूसती भी है… मुझे भी इसे चूसने दो..’
‘जोर से मसल दे बेबी… फिर तुझे चूसने भी दूंगा…’

मैं तो मस्ती में बेहाल हो रहा था… खेल खेल में ये क्या हो गया हो गया. मैंने अपना लण्ड पाज़ामे में से बाहर निकाल लिया. लाल सुपाड़ा… चिकना फ़ूला हुआ…एक दम कड़क…
सोनम कहने लगी- अंकल ये तो बहुत बड़ा है… ये तो कैसे चूसूंगी…?

इतने में नीचे से सोनम की मम्मी ने आवाज लगाई.

‘बेबी थोड़ा सा चूस तो ले फिर चली जाना!’
सोनम जाते हुये और हंसते हुए बोली- अंकल बड़ा मजा आ रहा है, मैं अभी वापस आती हूं…

मैंने एक गहरी सांस भरी. मैंने सोचा ये तो अब गई. सोनम के जाने बाद मैं अपने रोज़ के कामों में लग गया और नहाने बाथ रूम में चला गया. नहाने के बाद मैं तौलिया लपेट कर जैसे ही बाहर आया तो सोनम की मम्मी सोनू कमरे में बैठी थी. मुझे वो गहरी नजरों देखने लगी.
‘आप खाना खा कर जाना… मैंने बना दिया है…’
‘जी… भाभी जी…’

‘हाँ सोनम को आपने कौन सा खेल सिखा दिया है…’ मैं एकदम से घबरा गया… मेरा मुँह सूख गया. मेरी हालत देख कर सोनू बोली- सोनम बहुत खुश नज़र आ रही थी?
‘न… न… नहीं… ऐसा कुछ नहीं ‘ मैंने बचने की कोशिश करने लगा.
‘मुझे भी सिखा दो ना…’
‘जी…जी… भाभी वो तो… खुद ही…’
‘बस बस… सोनम बता रही थी कि… आपने मुझे बुलाया है… ‘ वो और पास आ गई. उसकी मतलबी निगाहें मुझे कह रही थी.
‘नहीं भाभी… मैंने तो ये कहा था कि…ये खेल बड़ों का है… जैसे कि मम्मी…’

‘हाय… राहुल… मैं मम्मी ही तो हूं… सिखा दो ना…’ उसकी आवाज सेक्सी होती जा रही थी. मुझे लगा इन्हे सब पता है…वो सीधे ही लाईन मार रही थी और…मैंने भी ये जान कर अब वार किया
‘सोनू जी… आप तो रोज़ ही खेलती है… क्या आप…’
‘हाँ राहुल जी… अपनी कहो…खेलोगे…’

मेरे से रहा नहीं नहीं गया. मैंने सोनू को अपनी ओर धीरे से खींचा.
‘आपकी आज्ञा हो तो…श्री गणेश करूँ…?’ इतना सुनते ही वो मेरी छाती से ऐसे लिपट गई जैसे वो यही चाह रही हो…

अब उसकी आंखे मुझे चुदाई का निमन्त्रण दे रही थी. मैंने भी उसकी आंखों झांका…वासना के डोरे आंखों में थे. वो और मेरे पास आ गई और अपनी चूत को मेरे लण्ड से सटा दिया. मेरा तौलिया जाने कब नीचे फ़िसल गया, मुझे कुछ होश ही नहीं रहा…मैं नंगा खड़ा था… मुझे लगा किसी ने मेरा लण्ड पकड़ लिया है…
मैंने देखा सोनम थी.

‘मम्मी ये देखो… कितना मोटा है… पापा से भी लम्बा है..’
‘अरे सोनम ये क्या कह रही है… पापा का लण्ड…?’ मैं फिर से हैरान रह गया.

तभी सोनू बोल उठी…’हम जब चुदाई करते हैं…तो ये रोज़ सोने का बहाना करके हमें देखती है… इसे सब पता है…!’
‘पर ये तो कह रही थी कि…’
‘नहीं… बस करो ना…अब भी नहीं समझे, मैंने इसे सिखा कर आपके पास भेजा था.. कि लाईन साफ़ हो तो मैं फिर…’

मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया…’अच्छा जी… सब समझ में आ रहा है… आपकी इज़ाज़त हो तो आगे बढ़ें?’

सोनू के कपड़े भी एक एक करके कम होते जा रहे थे. सोनम को तो मेरा कड़क लण्ड मसलने में आनन्द आ रहा था. मुझे भी उसके नरम हाथों का आनन्द आ रहा था.
मैंने सोनम के उरोज दबाते हुये कहा- शैतान मुझे बेवकूफ़ बनाया तूने…!
‘अंकल…मुझे तो मम्मी ने कहा था… और मसलो ना अंकल!’
‘नहीं…बस अभी नहीं… पहले मम्मी… पहले वो चुदेंगी… ‘ मैंने मम्मी की तरफ़ इशारा किया.
‘राहुल… पहले इसे हाथ से कर दो… पर देखो इसे चोदना नहीं…’ सोनू ने सोनम की तड़प देख ली थी.

सोनम ने तुरन्त अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये… उसकी उभरती जवानी… वाह… मैं तो देखता रह गया…उभरी हुई चूत उसकी झीनी पेंटी से झांक रही थी…क्या चीज़ छुपा रखी थी उसने अपनी गुलाबी पेंटी में!

पेंटी के हटते ही पाव रोटी की तरह फ़ूली हुई चूत मेरे सामने थी बिल्कुल गोरी चिट्टी,
झाँटों के नाम पर हल्के हल्के से रौएँ ही थे,
चूत की फ़ांकें संतरे की फ़ांकों जैसी रस भरी,
अन्दर के होंठ हल्के गुलाबी और कॉफ़ी रंग के आपस में जुड़े हुए,
चूत कोई चार इन्च की गहरी पतली खाई जैसे,
चूत का दाना बड़ा सुर्ख लाल बिल्कुल अनार के दाने जैसा,
गोरी जांघें संगमरमर की तरह चिकनी, उरोज छोटे छोटे मगर सीधे तने हुए… अनछुए…

मेरा लण्ड बैचेन हो उठा मैंने उसे अपनी गोदी में बैठा लिया. दोनों नंगे बदन आपस में चिपक गये. धीरे धीरे उसके निम्बू जैसे स्तनों को सहलाने लगा…

‘देखो वो अभी जवान हुई है… उसे बहुत मजा आता है ऐसे करने में… वो सब जानती है… करते रहो…पर रगड़ कर!’ सोनू मुझे बताती जा रही थी और उत्तेजित भी हो रही थी… उसने अपनी चूत में अंगुली डाल ली थी.

मैंने सोनम की चूत को भी सहलाना चालू कर दिया था. सोनम तड़प उठी थी… वो मेरे लण्ड को खींचने लगी थी… मेरे लण्ड के मुँह पर चिकनाई आने लगी थी. उसकी चूत भीग उठी थी. सोनम ने मम्मी की तरफ़ देखा. वो चूत में अंगुली डाले अन्दर बाहर करने में व्यस्त थी. सोनम ने मेरा तना लण्ड अपनी चूत पर रख दिया और अपनी चूत को लण्ड पर दबाने लगी.

मेरे से रहा नहीं गया. मैंने भी धीरे से जोर लगा कर सुपाड़ा उसकी चूत में घुसा दिया. सोनम के मुख से सिसकारी निकल पड़ी. इसी सिसकारी ने सोनू की तन्मयता को तोड़ दिया.

वो चौंक गई ‘अरे… ये नहीं… हटो… हटो…’ सोनू ने जल्दी से उठ कर सोनम की चूत से मेरा लण्ड निकाल दिया…
‘मम्मी… करने दो ना…’ सोनम तड़प उठी…
सोनू ने सोनम को प्यार किया और बोली- अभी नहीं… सोनम… देख झिल्ली फ़ट जायेगी…! बस बहुत मजे ले लिये…! अब हट जा..!’

सोनम सब समझती थी… उसे सोनू ने बिस्तर पर लेटा दिया और मुझे इशारा किया… मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी और सोनू उसके चूचुक मसलने लगी… कुछ ही देर सोनम का पानी निकल गया… पर वो मुझे ही निहार रही थी…
‘राहुल… मैं हूँ ना… अब मेरी बारी है.. प्लीज़ मुझे चोदो ना!’ और मुझसे लिपट गई. मुझे बिस्तर पर धक्का मार कर लेटा दिया.

मेरा लण्ड तो पहले ही चूत के लिये तरस रहा था. जैसे ही वो मेरे ऊपर चढ़ी, मैंने उसे अपने ऊपर लेटा लिया. उसकी चूत पर मेरा लण्ड ठोकर मारने लगा था. कुछ ही देर में मेरे लण्ड को चूत का छेद मिल ही गया. मैंने धीरे से लण्ड अन्दर ठेल दिया.

सोनू के मुख से एक प्यारी सी सिसकारी निकल पड़ी. लण्ड अपना काम कर चुका था, और उसकी चूत की गहराईयों में उतरता जा रहा था. लगा कि अन्दर नरम सी चूत के अन्तिम छोर को छू गया था.

वो मेरे लण्ड पर अब बैठ गई थी. सोनू ने अपने चूतड़ ऊपर किए ओर अच्छी तरह से एक धक्का नीचे मार दिया. लण्ड पूरा जड़ तक गड़ गया. सोनू के दोनों बोबे सोनम ने दबा के मसलने चालू कर दिये. अब सोनू इत्मिनान से धीरे धीरे अपने चूतड़ हिला हिला कर चुदाई कर रही थी और आनन्द ले रही थी.

सोनम ने अपनी एक अंगुली सोनू की गाण्ड में डाल दी और घुमाने लगी. सोनू मस्ती में सिसकारियाँ भर रही थी और मस्ती में कुछ बोल भी रही थी. सोनू के कोमल धक्के बरकरार थे, वो ज्यादा देर तक मजा लेना चाहती थी पर मैं तो प्यासा था.. मुझसे रहा नहीं गया… मैंने सोनू को अपने से चिपका लिया और एक पलटी मार कर उसे अपने नीचे दबोच लिया.

वो फ़ड़फ़ड़ा उठी… मैंने अपना सीना ऊपर उठा कर, अपने दोनों हाथ बिस्तर पर जमा कर चूतड़ का जोर उसकी चूत पर डाल दिया. लन्ड उसकी चूत में अन्दर सरकता चला गया.

सोनू आनन्द से सिसक उठी और उसने अपनी चूत लण्ड से भिड़ा दी… उसका जिस्म मचल रहा था… उसके तन का तनाव… कसमसाना… शरीर की ऐंठन… उसकी उत्तेजना दर्शा रही थी….मुझे स्वर्ग जैसा आनन्द आने लगा. मेरे धक्के अब तेज होने लगे थे.

‘हाय रे मेरी रानी कितनी तंग चूत है…रगड़ के जा रहा है…कितना मजा आ रहा है..!’
‘हाय चोद दो मेरे राजा… मोटे लण्ड का स्वाद अच्छा लग रहा है हाय रे…!’
‘हाय… आहऽऽऽ… ओहऽऽऽ चुद ले मेरी रानी… हाय ले… और ले…’ मैं उत्तेजना में धक्के लगाये जा रहा था. चूत का पानी फ़च फ़च की आवाज कर रहा था.
‘मेरे राजा… ईऽऽऽह्ह… और जोर से… और भी…’

वो अपनी चूत उछाल रही थी और मेरे चूतड़ भी दनादन चल रहे थे…मीठी मीठी सी गुदगुदी तन में भरती जा रही थी. सोनू मुझे बार बार भींच रही थी.
‘मेरे बोबे दबा डालो राजा… मचका दो इसे… चूंचियाँ खींच डालो मेरे राजा…’

मैंने उसके उरोजो को बुरी तरह से भींचने चालू कर दिये, मुझे आनन्द की चरमसीमा नजर आने लगी थी… सोनू निहाल हो उठी थी- आऽऽऽह ओऽऽऽह मेरे राजा… चोद डालो… हाऽऽऽय… जोर से…!’

वो मुझे जकड़े जा रही थी… मुझे लगा कि अब सोनू झड़ने वाली है…मैंने उसकी चूंचियों से हाथ हटा दिया…
‘क्या कर रहे हो…! मसल डालो ना… जल्दी… आऽऽऽह… मैं गई… आह रे…! मेरा निकला…! मैं गई…राजा… मुझे कस लो…’
‘हाँ रानी… निकाल दो अपना पानी… आऽऽऽह…!’
‘मैं मर गई… राजा… हाय रे… ओऽऽऽह ऊऊऽऽऽह्ह्ह… गईऽऽऽ… झड़ गई रे… हाय… हाय…!’

वो अब झड़ने लगी थी… सिसकारियाँ भरती जा रही थी.. तेज सांस चल रही थी…आंखे बंद थी…

उसकी चूत की दीवारें लण्ड को जकड़ रही थी… उसका झड़ना मुझे महसूस होने लगा था…और फिर मेरा बान्ध भी टूटने लगा… मैंने तुरन्त लण्ड बाहर निकाल लिया… मैं लण्ड पकड़ कर मुठ मारने लगा… कुछ ही पलों में सोनू का चेहरा मेरे वीर्य की पिचकारियों से भर उठा. पिचकारी निकलती रही… उसने अपनी आंखे बन्द कर ली.

मैं शान्त हो चुका था…सोनू मेरे वीर्य को चेहरे पर क्रीम की तरह मल लिया. अब वो मुस्कुरा उठी और मेरा लण्ड अपने मुँह में भर लिया. सारा वीर्य चूस कर मेरे ढीले लण्ड को छोड़ दिया. सोनम ने कुर्सी पर बैठे बैठे ही मेरा गीला तौलिया हमारी तरफ़ उछाल दिया. सोनू ने अपना चेहरा साफ़ किया…और मेरा झूलता हुआ लण्ड भी रगड़ कर पोंछ डाला.

अब मैं और सोनू साथ साथ ही नंगे बिस्तर पर लेट गये थे सोनम भी नंगी ही मेरे साथ चिपक कर लेट गई… मुझे अपनी किस्मत पर नाज़ हो रहा था… भले ही वो मां बेटी हो…पर आज दो दो हसीनाएँ मेरी दोनों बगल में लेटी थी…

‘अंकल मेरी मम्मी अच्छी है ना…’
‘हाँ सोनम बहुत अच्छी… और तुम भी प्यारी प्यारी हो…’
‘अंकल अब दूसरा खेल सिखाओ ना…’
‘चुप शैतान…!!!’

हम तीनो ही हंस पड़े… पर सोनम उसका हाथ मेरे लण्ड पर बार बार जा रहा था… मैं सब समझ रहा था उसकी बेचैनी… वो तो मेरे लौड़े का आनन्द पाने को बेकरार हो रही थी… उसकी चूत की गर्मी मुझ तक आ रही थी… मैं भी एक हाथ से सोनू का नंगा बदन सहला रहा था.

वो आंखे बन्द किये सुस्ता रही थी और दूसरी और मेरे दूसरे हाथ की एक अंगुली सोनम की चूत में घुस चुकी थी और मैं उसका योनि-पटल अपनी उंगली से टकराता हुआ महसूस कर रहा था और मेरा मन सोनम की कुंवारी चूत का उदघाटन करने के लिए मचल रहा था.

सोनम का हाथ मेरे लण्ड पर चल रहा था, उसकी मनोदशा भी मुझ से छिपी नहीं थी.
सोनम और मेरी आंखों में इशारे हो चुके थे. यानि चुपके से शाम को…सोनम की एक नई शुरूआत… और मेरे लिए एक नई अनछुई सौगात…Hindi Porn Stories

गरम चूत में ओल्ड लंड ने खूब मजा दिया. मेरे पहचान के एक अंकल मुझे मुंबई बीच पर मिल गए. मैंने उन्हें अपने घर ले आई. अंकल की नजर मेरे जिस्म पर थी. तो बात बन गयी.

मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।

मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.

वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।

मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।

ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।

मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।

मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।

शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!

मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।

मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.

लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।

उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।

वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।

बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।

तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।

बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।

मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.

फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।

जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!

मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।

मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।

मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।

मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।

मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।

मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।

एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।

अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।

मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।

वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!

फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।

फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।

मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।

मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।

मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।

मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।

इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।

मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.

वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।

उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।

दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!

मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।

आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।

अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।

इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।

फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।

उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.

फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।

मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।

मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.

मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।

उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।

वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।

वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!

वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।

फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।

मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।

मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।

उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।

वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।

मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।

फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।

मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।

सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।

मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!

तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।

मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।

मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.

मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।

बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।

मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।

मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।

उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।

मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।

मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!

वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।

अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।

सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।

मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।

इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।

सुबह उठ कर वे चले गये।

उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।

Antarvasna

हाय मैं सीमा, आप लोगो को मेरी पहली कहानी Antarvasnaअच्छी लगी जानकर खुशी हुई.

आज मैं जो कहानी आप लोगो को सुनाने जा रही हूं वो 2-3 साल पहले की घटना है. तब मैं एक फ़्लैट में रहती थी. और मेरे बगल वाले फ़्लैट में एक बंगाली फ़ैमिली रहती थी. उनकी फ़ैमिली में चार मेम्बर थे. हस्बेंड, वाइफ़ उनकी एक 14 साल का लड़का सुनील और 18 साल की एक लड़कीसीता. मैं उन दोनों को भैया भाभी बुलाती थी. भैया और भाभी दोनों ही काम करते थे.

भाभी दिखने में बहुत खूबसूरत थी. 36सी साइज़ का बूब्स सुराहीदार गर्दन. ऊपर से उन्होंने अपनी नाभि को छिदवा कर उसमें एक रिंग पहना करती थी. मैंने कई बार उनकी साथ लेस्बियन सेक्स करनी की बात सोची थी. मैंने कई बार भाभी के बूब्स को उनकी नाइटी के ऊपर से देखा है. वो घर में कोई ब्रा नहीं पहनती थी और उनकी नाइट ड्रेस भी बहुत पारदर्शी है जिसमें से उनकी भूरे निप्पल टाइट बूब्स दिखाई देते थे. मैंने कई बार भाभी से बात करते हुए उनके मुलायम पेट को छुआ भी है.

एक बार भैया और भाभी किसी रिश्तेदार को दिखने के लिये बाहर जा रहे थे और मेरे पास आके बोले कि ‘नमिता और सुनील एक दिन के लिये अपने पास रखना सीमा’.
मैंने कहा ‘कोई बात नहीं.
वो लोग शाम कोसीता और सुनील को मेरे पास छोड़ कर निकल गये.

मेरे फ़्लैट में दो कमरे हैं एक में मैं सोती हूं. दूसरे कमरे में मैंनेसीता और सुनील का सोने का इन्तेजाम कर दिया. घर में मैं सिर्फ़ शोर्ट्स और एक टी-शर्ट पहनती हूं, खास करके गर्मियों में.

रात का खाना खाने के बाद हम तीनो टीवी देखने बैठे.सीता मेरी बगल में बैथी थी, थोड़ी देर बाद वो मेरी गोद में सर रख के सो गयी. मेरी टी-शर्ट थोड़ी ऊपर की तरफ़ उठ गयी थी और मेरा पेट उसे साफ़ नजर आ रहा था.
नमिता ने अचानक मुझसे पूछी- आंटी आप मम्मी की तरह नाभि में छल्ला क्यों नहीं पहनती, आपको बहुत सूट करेगी. आपकी नाभि कितनी सुन्दर है.
उसने फिर मुझसे पूछि क्या मैं आपकी नाभि में एक किस कर सकती हूं.
मैंने कहा- ठीक है.
उसने मेरी नाभि में एक किस किया.

फिर उसने मेरा हाथ अपने पेट के ऊपर रख दिया. उसने एक पिंक कलर का टोप और नीला शोर्ट स्कर्ट पहना हुआ था. मेरा हाथ उसके पेट के ऊपर रखते ही उसने अपना तोप थोड़ा और ऊपर उठा लिया.
मैंने अपना हाथ उसके पेट पे फिराते हुए उसको बोली ‘तुम्हारी नाभि भी तो बहुत अच्छी है तुम क्यों कोई रिंग नहीं पहनती’.
उसने कहा ‘मम्मी ने कहा है अगले साल मेरी नाभि छिदवा देंगी फिर मैं उसमे रिंग पहनुंगी’.

थोड़ी देर बाद मुझे ख्याल आया सुनील क्या कर रहा. मैं मुड़ के सोफ़े पे देखा तो देखा कि सुनील गहरी नींद में है. मैं उठी और सुनील को गोद में उठा दूसरे कमरे में बेड पर लिटा दिया. और वापस आ गयीसीता के पास जो कि तब भी टीवी देख रही थी. मैं जब उसके पास आयी तो देखा के उसने इतने में अपनी स्कर्ट उतार कर सिर्फ़ पेंटी पहन के बैठी थी. पिंक रंग की टोप और पिंक रंग की पेंटी में बहुत सुन्दर लग रही थी. मेरे बैठते ही उसने फिर से मेरी गोद पे सर रख कर सो गयी.

थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा- आंटी आप मेरे बदन पे थोड़ा सा हाथ फिरा देंगी?
मैंने कहा- क्यों नहीं.
तो उसने उठ कर अपनी टोप भी उतार दी. उसने अन्दर और कुछ नहीं पहना था. उसके स्तन (बूब्स) निम्बु जैसे थे और निप्पल हल्के गुलाबी रंग के थे.

मैं उसके बदन पर आहिस्ता आहिस्ता हाथ फिराने लगी. उसने अचानक मुझसे पूछा ‘आंटी क्या आप ऐसे ही सोती हैं मतलब पूरे कपड़े पहन कर.
मैंने कहा- क्यों तुम कैसे सोती हो?
उसने कहा मैं तो सिर्फ़ पेंटी पहन के कभी कभी तो ज्यादा गर्मी में बिल्कुल नंगी सोती हूं.
मैंने कहा तुम अपने भाई के साथ नंगी सो जाती हो.
उसने कहा तो क्या वो भी तो नंगा ही सोता है. और वैसे भी बचपन से हम कितनी बार एक दूसरे को नंगे देख चुके हैं.
मैंने कहा बचपन की बात अलग है, लेकिन आब तुम बड़ी हो गयी हो. क्या भैया भाभी कुछ नहीं कहते.

नमिता ने कहा नहीं वैसे भी वो लोग खुद अपने कमरे में नंगे ही सोते है. मैंने दो तीन बार देखा है. और आप भी तो घर में कभी कभी नंगी ही रहती हैं.
मैंने कहा तुम कैसे जानती हो.
उसने कहा एकबार मैं घर में सुबह दूध के बारे में पूछने आयी थी. आपका दरवाज़ा बंद नहीं था अन्दर आके देखा तो आप नंगे ही किचन में नाश्ता बना रही थीं.
मैंने कहा तुमने मुझे आवाज क्यों नहीं दि.
उसने कहा तब मैंने सोचा के आप मुझे डातोगी.
मैंने कहा क्यों डातुंगी क्या तुमने कोई गुनाह किया था.
नमिता ने कहा अगर आप नाराज़ न हों तो क्या आप मुझे अपने स्तनो दिखाएंगी.

मैं हंस पड़ी अपनी छोटी लेस्बियन को देख कर. और अपनी टी-शर्ट और शोर्ट उतार कर बिल्कुल नंगी होकर बैठ गयी. उसने भी अपनी पेंटी उतार दी उसकी बिना बालों वाली चूत एकदम चमक रही थी. मेरी चूत भी एकदम साफ़ थी.

उसने मेरी चूत पे एक प्यारी सी किस की. मेरे बदन में करेंट सा दौर रहा था, वो जैसे रियेक्ट कर रही थी मुझे लग रहा था वो इस तरह का सेक्स पहले कर चुकी है.
मैंने उससे पूछा क्या तुम ऐसे प्यार के बारे में जानती हो.
उसने कहा हाँ इसे लेस्बियन सेक्स कहते हैं.

मैं चौंक गयी और पूछा तुम्हे कैसे पता.
उसने कहा मेरी एक दोस्त है शालिनी एकबार मैं जब उसके घर गयी थी तब उसकी बड़ी दीदी, शालिनी और मैं हम तीनो ने ऐसे किया था. तब उसकी दीदी ने मुझे बताया था. और एकबार शालिनी जब हमारे घर में आयी थी तब भी हमने ऐसे सेक्स किया था और वो भी रजा के सामने.
मैंने कहा मतलब सुनील भी तुम्हारे इस सेक्स के बारे में जानता है.
हाँ लेकिन आंटी सुनील सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानता. अच्छा आंटी सुनील तो सेक्स के बारे में अभी कुछ नहीं जानता फिर भी जब भी मैं जब भी उसके लंड के साथ खेलती हूं तो उसका लंड एकदम टाइट और खड़ा हो जाता है.

मैंने पूछा क्या तुम सुनील के लंड के साथ खेलती हो?
उसने कहा हाँ रात में सोते वक्त कभी कभी मैं उसके लंड को और वो मेरी चूत को सहलाता है. और उसके लंड से कभी कभी कुछ चिपचिपा सा लिक्विड निकल आता है.
मैंने उससे कहा ये लड़कों के लंड का धर्म है. और वो चिपचिपा सा जो निकल आता है उसे सीमेन कहा जाता है.

मैन एक टीनऐज लड़की की बातें सुनकर हैरान भी हो रही थी और खुश भी हो रही थी एक टीनऐज लेस्बियन पार्टनर पा कर.

रात भी बहुत हो चुकी थी मैंनेसीता से कहासीता अब चलो सो जाओ कल मेरी छुट्टी है कल सुबह हम बात करेंगे.
उसने कहा आंटी आप भी हमारे साथ सो जाइये न.
मैंने कहा ठीक है.
हम तीनो एक ही कमरे में सो गये.

सुबह मैं जब उठी तबसीता और सुनील सो रहे थे. दिन के उजाले मेंसीता के गोरे नंगे बदन एकदम एंजल की तरह लग रही थी.
मैं फ़्रेश हो कर नाश्ता बनायी, इतने में सुनील औरसीता भी जग गये थे. मैं एक टी-शर्ट और पेंटी पहनी हुई थी.
मैंनेसीता से कहा ‘तुम भी फ़्रेश हो कर कुछ कपड़े पहन लो.
तो उसने कहा क्यों यहाँ कौन आने वाला है, मैन आज नंगी ही रहूंगी. और आप भी. मुझे आपका नंगा बदन बहुत अच्छा लगता है.

तब सुनील ने कहा दीदी आज क्या तुम और आंटी वैसा खेल खेलोगी जैसे शालिनी दीदी के साथ खेलती थी.
नमिता ने कहा हाँ.
सुनील ने कहा तब तो बड़ा मजा आयेगा. लेकिन दीदी आज मैं भी तुम लोगों के साथ खेलूंगा.
नमिता ने कहा ठीक है.

मैं भीसीता के साथ लेस्बियन सेक्स के लिये तड़प रही थी. हम तीनो नंगे हो कर मेरे बेडरूम चले गये. मैंनेसीता से कहा तुम अपनी टांग फैला कर बिस्तर में बैठो और सुनील का लंड को चूसो. मैं अपना मुंहसीता की चूत पे लगा कर उसे चाट चाट कर गीली की और दोनों हाथों से उसकी छोटी छोटी बूब्स को मसलती रही. फिर अपने एक हाथ से उसकी चूत को और फैलाई और दूसरे हाथ की दो ऊँगलियाँ उसकी चूत के अंदर धीरे धीरे घुसाने लगी.

शुरु शुरु में उसकी चूत टाइट होने के कारण घुसाने में तकलीफ़ हुई वो मुंह से आवाज़ भी निकल रही थी बाद में मैंने अपनी उंगली उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगी और वो जोर जोर से सुनील के लंड को चूसने लगी. थोड़ी ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा. मैंने अपना मुंह उसकी चूत पे लगा कर उसे चाटना शुरु कर दिया.

इधर सुनील के लंड से भी सीमेन निकलना शुरु हो गया था वो अपनी दीदी के मुंह में ही अपना पूरा सीमेन झड़ दिया. अब मैंनेसीता सा कहा तुम अब मेरी चूत को इसी तरह सहलाओ. उसने मेरी चूत में अपनी उंगली घुसा कर अन्दर बाहर करने लगी. बीच बीच में अपना मुंह मेरी चूत पे लगा कर चाटने भी लगी. कुछ समय बाद मेरी चूत से भी पानी निकलना शुरु हो गया तोसीता और सुनील दोनों ने मिलकर मेरी चूत को चाट कर साफ़ करने लगा.

हुम तीनो थक कर लेट गये.सीता ने कहा आंटी आज हम लोगों ने जो मजा किया वो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे.

उस दिन पूरा समय हम तीनो नंगे रहे. जब तक भैया भाभी आकरसीता और सुनील को घर न ले गये. उस दिन के बाद जब कभी भीसीता मेरे पास आती थी तब हम ऐसे सेक्स करते थे.

एक बार शालिनी भी उसके साथ अयी थी. वो दूसरि घटना है जो मैं आप लोगों को बाद में बताऊँगी. Antarvasna

(Mota Lund Nanga Badan) Antarvasna

Antarvasna के पाठकगण, कैसे है आप सभी अपने लण्ड और चूतों के साथ। मुझे आशा है कि आप सभी प्रसन्न होंगे, आपकी कृपा से मैं भी खुश हूँ।

आज मैं फ़िर से एक नई कहानी लेकर हाज़िर हूं।
आज मैं आपको अपनी एक भाभी की कहानी सुनांऊगी !

बात उन दिनो की है जब मैं अपनी एक भाभी के यहां गई हुई थी।

और एक दिन मैं शॉपिंग करके वापस आई तब मैंने दरवाजा बंद देखा।

मैंने घण्टी बजाई तब बहुत देर बाद घर का नौकर जिसकी उम्र 18 साल थी और काफ़ी लम्बा चौड़ा था। वो अपनी लुंगी सम्हालता हुअ आया और दरवाजा खोलते ही सकपका गया ।

Antarvasna
Antarvasna hindi storiees

मैं अन्दर आई तो भाभी अपने कपड़े जल्दी जल्दी दुरुस्त कर रही थी और मुझसे नज़रें चुरा रही थी। पर मैं तो एक नम्बर की चुदक्कड़ हूं, तुरंत ही सारा मामला समझ गई और भाभी को घूरते हुए बोली- ये सब क्या हो रहा था?
तब भाभी ने कहा- जो तू समझ रही है, वो नहीं है।
मैंने हंसते हुए कहा- अच्छा, मेरी सीधी सादी सी बन्नो, पहले अपनी कच्छी तो बिस्तर के नीचे से उठा लो। मैंने कब कहा कि आप आबिद से चुदा रही थी।

मेरी बात सुन कर भाभी ने अपने आपको देखा तो एकदम से शर्मा गई क्यूंकि वो हड़बड़ाहट में पेंटी पहनना भूल गई थी और उन्होंने झट से कच्छी उठा कर पहन ली और सलवार भी पहन ली।

अब काफ़ी हद तक उनकी सांस कंट्रोल में हो गई थी।

तब मैंने कहा- हां तो मेरी प्यारी भाभी, अब बताइये क्या माज़रा है?
तब भाभी ने कहा- शबनम तुझे तो पता है कि तेरे भैया जान 10-12 दिन बाहर रहते हैं, और घर आने के 4 दिन बाद फ़िर चले जाते हैं। अब तू ही बता मैं कैसे कंट्रोल करूं अपनी जवानी को, जबकि मैं तो तेरी तरह कॉलेज मे भी नहीं पढ़ती।

तब मैंने कहा- अरे भाभी, आपने तो घर मे ही साण्ड जैसा मर्द पाल रखा है और आपने मुझे अब तक बताया भी नहीं? अकेले अकेले ही मज़ा लेती रही आखिर मैं तीन दिन से आई हुई हूं और आपकी प्यारी ननद हूं, आपको मेरा ख्याल भी रखना चाहिये था।
तब भाभी ने कहा- आज रात को तैयार रहना!

और रात को उन्होंने अपने कमरे में आबिद को बुलवा लिया और मेरे सारे कपड़े उन्होंने खुद ही अपने हाथ से उतारे और आबिद से बोली- राजा, आज तुझे मेरी ननद की चूत की प्यास भी बुझानी है, चल जल्दी से मैदान में आ जा और अपना लण्ड ठोक दे इसकी चूत में।

तब आबिद ने अपनी लुंगी उतार दी।
मैंने भाभी से कहा- आप अपने कपड़े भी तो खोलिये।
भाभी बोली- तेरे सामने शर्म आ रही है।
तब मैंने कहा- वाह, मुझे चुदवा रही हो और खुद शर्मा रही हो, चलो उतारो अपने भी कपड़े!

और फ़िर वो भी पूरी नंगी हो गई और मेरे चूचों को अपने हाथ से रगड़ने लगी।
मैंने भी उनकी चूचियाँ अपने हाथ में ले ली और मसलने लगी।

आबिद बीच में बैठा हम दोनों की बुर मे अपनी उंगली चला रहा था और हम लोग उसका लण्ड सहला रहे थे।

जब उसका लण्ड पूरी तरह औकात में आ गया, तब भाभी बोली- पहले तू ही चुदा ले मैं बाद में चुदवाऊँगी!

और आबिद ने मुझे चित लेटा कर मेरी टांगों को अपने कंधे पर रख कर अपने मूसल जैसे लण्ड को एक ही धक्के में बुर की गहराई तक पेल दिया जिससे मेरी चीख निकल पड़ी- ऊऊऊ… ऊऊफ़्फ़… आआईईइ… आअह्हह… आआह… भोसड़ी के… मुफ़्त की चूत मिली तो साला भिखारी की तरह टूट पड़ा! आअह्हह आआह्हह मादरचोद, भड़वे साले हरामी ज़रा धीरे धीरे कर भड़वे साले! आज फ़ाड़ ही डालेगा क्याआआअ आआह्हह!

उसका लण्ड ज्यादा लम्बा तो नहीं था पर मोटा बहुत था, मेरी बुर चिरी सी जा रही थी और मेरे आंसू निकल रहे थे, मुझे बहुत दर्द हो रहा था।
मैंने भाभी से कहा- आआह्ह्ह भाभी निकलवा लीजिये… इसका लण्ड बहुत मोटा है ! आहह ऊफ़फ़्फ अम्मी मर गईईई।
तब भाभी ने कहा- अभी और मज़ा आयेगा मेरी जान!

और फिर उठ कर मेरे मुँह पर अपनी भोसड़ी जैसी फ़टी हुइ चूत फ़ैला कर बैठ गई और मुझे अपनी चूत का रस पिलाने लगी।

अब मुझे कुछ राहत मिल रही थी, आबिद मुझे जोर जोर से धक्के मार रहा था और सामने लटक रही भाभी की चूचियों को मसल कर दबा रहा था।

तब ही भाभी आआअहह्ह आअह्ह ऊऊओह्ह ओह्हह करती मेरे मुँह में ही झड़ गई और फ़िर अचानक ही आबिद के धक्कों की रफ़्तार में तेजी आ गई और मैं भी धपाधप धक्के मार रही थी ।

अब तो मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा था, मैं सिसकारियां लेती हुई चुद रही थी- अह्हह ह्हह राजा और जोर से अह्ह हह्हह आआआह… फ़ाड़ डालो आज साली मेरी चूत को, फ़ाड़ कर भाभी की तरह भोसड़ी बना दो राजा, तुम्हारा एहसान नहीं भूलुंगी, आआह्ह आआअह्ह ह्हह्ह…

और तभी मैं झड़ गयी मगर आबिद का लण्ड तब भी नहीं झड़ा और फ़िर करीब मैं 2 बार और झड़ी, तब कहीं जाकर आबिद झड़ा और उसके बाद उसने भाभी की गाण्ड मारी।

जिसका जिक्र अगली पेशकश में करुंगी।
ओके बाय बाय, मेरा बॉय फ़्रेन्ड आया है, मैं चुदवाने जा रही हूं और वापस आकर बतांऊगी कि आज कैसे चुदी मैं!
अलविदा! Antarvasna

Antarvasna

मैं कॉलेज में आ चुका था। मेरे Antarvasna एक पुराना दोस्त मेरे साथ में मेरे घर में रहता था। हम दोनो पक्के दोस्त थे और एक दूसरे को बहुत चाहते थे। सेक्स के मामले में मैं बहुत झिझकता था। इतनी तो मेरी बड़ी दीदी भी नही शर्माती थी। मैं जब सुबह जागता था तो मेरे लण्ड में पेशाब भरे होने के कारण वो खड़ा हो जाता था। दीदी बस यही देखने के लिये सुबह मेरे कमरे में आ जाती थी और मेरे खड़े लौड़े को देख कर आहें भरती थी। अपनी चूत भी दबा लेती थी।

मेरी नजर जब उस पर पड़ती तो मैं झेंप जाता था, पर दीदी बेशर्मों की तरह मुस्करा कर चली जाती थी। मुझे ये सब देख कर सनसनी आने लगती थी। दीदी के चूतड़ मस्त गोल गोल उभरे हुए थे, मेरे भी वैसे ही थे … पर लड़की होने के कारण उसके चूतड़ ज्यादा सेक्सी लगते थे। उसकी चूंचिया भी भरी भरी गोल गोल मस्त उठान और उभार वाली थी। सीधी तनी हुई, किसी को भी दबाने के लिये निमन्त्रण देती हुई।

मेरा दोस्त ज्यादातर मेरे बिस्तर पर ही सोता था। कितनी बार तो रात को वो मेरे चेहरे को चूम भी लेता था। मुझे लगता था वो मुझे बहुत प्यार करता है। कभी कभी मैं भी उसे चूम लेता था।

इन दिनों उसमें कुछ बदलाव आ रहा था। हम जब कॉलेज साथ साथ जाते तो वो कभी कभी मेरी गाण्ड सहला देता था। मुझे बड़ा अच्छा लगता था। एक बार तो छत पर उसने मेरे पीछे आ कर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में लगा दिया था। मुझे एक झुरझुरी सी आई थी। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी गाण्ड को करण्ट मार रहा था। मैंने अपनी गाण्ड हटा ली। बात आई गई हो गई।

रात को सोते समय उसने धीरे से मेरा लण्ड पकड़ लिया, मुझे अच्छा लगा। पर शरम के मारे मैंने उसका हाथ हटा दिया।

एक बार रात को सोते समय अनजाने में मेरा हाथ जाने कैसे उसके लण्ड पर चला गया। रवि ने मेरा हाथ अपने लण्ड पर दबा दिया। शायद उसने ही अपने लण्ड पर मेरा हाथ रख दिया होगा। कुछ देर मैं सोने का बहाना करता रहा, उसका हाथ अब मेरे लण्ड पर आ गया … मुझे बहुत मजा आया। मैं शान्त ही रहा। उसने अपना हाथ मेरे पजामे में डाल कर मेरा नंगा लण्ड पकड़ लिया। वो मेरा लण्ड सहलाने लगा।

मैंने मन ही मन आह भरी और जब सहा नहीं गया तो दूसरी तरफ़ करवट ले ली। उसने लण्ड छोड़ दिया। अब मेरा लण्ड तड़प रहा था कुछ करने को … पर क्या करने को … शायद गाण्ड मारने को या मराने को … वो पीछे से मेरे से चिपक गया और अपना लण्ड मेरे चूतड़ो में घुसाने की कोशिश करने लगा। चूतड़ो की दरार के बीच उसका लण्ड फ़ंसा हुआ अपनी साईज़ का अहसास दिला रहा था।

मैंने अचानक जागने का नाटक किया,”अरे यार सो जा ना … “

“तुझे प्यार करने को मन कर रहा है … ” उसने अपनी झेंप मिटाने की कोशिश की।

“ओह हो … ये ले बस … ” मैंने करवट बदल कर उसे पकड़ कर चूम लिया पर उसने मुझे जबरदस्ती होंठ पर चिपका लिया और होंठ चूसने लगा।

मैंने अलग होते हुए कहा,”ऐसे तो लड़किया करती हैं … साले … बस हो गया अब सो जा … “

“अभी आया … ” कह कर वो बाथ रूम गया, शायद अन्दर वो मुठ मार रहा था। कुछ देर में वो आ गया और अब वो शांति से सो रहा था। मुझे भी मुठ मारने की तेज इच्छा होने लगी थी, पर कुछ ही देर मेरा वीर्य बिस्तर पर ही निकल गया। मैंने अपना रूमाल पजामे में घुसा लिया और वीर्य पोन्छ दिया।

हमने सिनेमा देखने का कार्यक्रम बनाया। हॉल लगभग खाली था। बालकनी में बस हम दोनों ही थे। पिक्चर शुरू होते ही रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया … और फिर धीरे से हाथ छोड़ कर उसने मेरी जांघ पर रख दिया। मुझे पता था कि मुझे ये सिनेमा लाया ही इसीलिये है।

आज मैंने सोचा कि ये अधिक परेशान करेगा तो मैं उठ कर चला जाऊंगा।

पर उसके हाथों में जादू था। मेरी जांघ वो सहलाता रहा। मुझमें करण्ट दौड़ने लगा। धीरे से उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगने लगा पर आनन्द भी आया। जैसे ही उसने लण्ड दबाया, मैंने उसका हाथ हटा दिया। उसने मुझे देखा फिर कुछ ही देर के बाद उसने हाथ फिर से मेरी जांघ पर रख दिया। कुछ ही देर के बाद उसने फिर कोशिश की और मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और हल्के से सहलाने लगा।

मेरे मन में एक हूक सी उठी … हाय … कितना मजा आ रहा है … । पर दिल नहीं माना … उसका हाथ मैंने फिर से हटा दिया। उसने भी हिम्मत नही हारी … और कुछ ही देर में उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। पर यहाँ मैंने हिम्मत हार दी और उसे करने दिया।

वो मेरा लण्ड दबाने लगा … और अपनी अंगुलियां से दोनो ओर से लण्ड को दबा कर सहलाने लगा। मुझे कोई विरोध ना करते देख कर वो खुश हो गया। और मेरी पेन्ट की ज़िप खोल दी … अब उसका हाथ मेरे अंडरवीयर को ऊंचा करके नंगे लण्ड तक पहुंच गया था। उसने अपने हाथ में उसे पूरा भर लिया। मुझे आनन्द की एक तरावट सी आ गई। मुझे लगने लगा कि काश मेरा मुठ मार दे और मेरा वीर्य निकाल दे।

“कैसा लगा … बता ना !” उसने मुझसे फ़ुसफ़ुसा कर पूछा।

“बस रवि … अब हाथ हटा ले यार … “

“अरे नहीं … देख बहुत मजा आता है … ” कह कर उसने लण्ड पेन्ट से बाहर निकाल लिया। मेरा मन खुशी से भर गया। मैंने अपना हाथ उसके लण्ड की तरफ़ बढा दिया और बाहर से उसे पकड़ लिया।

“तुझे भी मजा आया क्या … ” मैंने उससे पूछा और उसके पेन्ट के अन्दर हाथ डाल दिया उसने अन्दर चड्डी नही पहन रखी थी, सीधे लण्ड से हाथ टकरा गया। उसे मसलते हुए मैंने बाहर निकाल लिया। अब वह मेरे लण्ड को हौले हौले घिस रहा था, और मैं उसके लण्ड को घिस रहा था। तभी इन्टरवेल हो गया।

हॉल की लाईटें जल उठी। दोनो के लण्ड बाहर मस्त हो कर लहरा रहे थे। मैंने शरमा कर लण्ड एक दम पेन्ट के अन्दर डाल लिया।

“चल यार … अब चलें … कही आराम से मजे करते हैं … “

“ओके … चल … ।” बाहर आकर मैंने स्टैण्ड से अपनी मोटर साईकल निकाली और नेहरू गार्डन चले आये। रात हो चुकी थी, भीड़ भी कम थी। हम दोनों एक एकान्त की ओर बढ़ गये। एक घने झाड़ के नीचे बैठ गये।

“आ जा अब मस्ती करते हैं !” मुझे तो वही मस्ती आ रही थी, मैंने तुरन्त अपना लण्ड निकाल दिया। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अब फ़्री स्टाईल में मुठ मारना चालू कर दिया। मैं झूम उठा …

“मजा आ रहा है ना … देख घर पर तबीयत से चुदाना … “

” चुदाना ? मैं क्या लड़की हूँ … साले … आह्ह्ह भोसड़ी के … मस्त मजा आ रहा है … तू भी अपना लौड़ा निकाल ना … ला मसल दूँ … ”

“निकाल तो रखा है यार … तू तो मस्ती में खोया है … ” मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और मसलने लगा। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे होंठो को चूमने लगा। मैं भी प्रति-उत्तर में उसे चूमने लगा। हम दोनो मदहोशी में भूल गये कि हम गार्डन में है।

लण्ड मसलने से कुछ ही देर में मेरा वीर्य छुट गया, कुछ ही देर में वो भी झड़ गया। हमें झड़ने के बाद होश आया। देखा तो पूरा गार्डन सूना था … हम उठ खड़े हुये, लण्ड को पेण्ट के भीतर डाला और उठ खड़े हुए।

“थेन्क्स यार … बड़ा मजा आया … ” और हम चल दिये।

घर आ कर मुझे बड़ी घिन आने लगी कि हाय मैं ये क्या कर रहा था? मैंने अलमारी से दारू की बोतल निकाली और दो पेग बना कर पी गया। खाना खा कर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे नशे में फिर से वासना की खुमारी चढ़ने लगी। इतने में दीदी आ गई।

“रवि, आज लगता है कोई खास बात है … ।”

“नहीं दीदी … ऐसा तो कुछ भी नहीं है … “

“अरे बता दे ना … आज कितनी मस्ती मारी है हमने … मजा आ गया !” मैंने नशे में कहा।

“भैया आप ही बता दो ना … !” दीदी ने मुझसे पूछा।

“अरे दीदी, क्या बताऊँ … इस साले ने मेरा लण्ड का मुठ मार कर माल ही निकाल दिया” मैंने हिचकी लेते हुये कहा।

‘दीदी ये तो बहक रहा है … “रवि ने शर्माते हुए कहा।

“अच्छा तो ये बात है … अकेले अकेले मजे कर रहे हो … ” दीदी मुस्कराई।

और मुड़ कर चली गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया … रवि ने भी मौका देखा और लाईट बंद कर दी और वो भी नंगा हो कर लेट गया। कुछ ही देर बाद हम दोनो एक दूसरे का लण्ड मसल रहे थे … मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मुझे लग रहा था कि कुछ करना चहिये … पर क्या ?

“गाण्ड मरवाओगे क्या … “

“क्या … क्या मरवाओगे … “

“मेरा मन, तेरी गाण्ड में लण्ड घुसेड़ने को कर रहा है … देख मजा आयेगा राजू … “

“पर यार छेद तो छोटा सा है … ” मुझे पता था कि लण्ड गाण्ड में घुसेड़ कर उसे चोदी जाती है … पर मैं मसूम ही बना रहा।

“लौड़ा घुस जायेगा … देख उल्टा लेट जा … ये तकिया भी नीचे लगा ले … “

मैं नीचे तकिया लगा कर लेट गया, मेरी गाण्ड और ऊंची हो गई। उसने मेरी गाण्ड ने थूक लगाया और वो मेरी पीठ पर चिपक गया और मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ने लगा। उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद में ठोकर मारी। मुझे गुदगुदी सी हुई। मैंने अपनी गाण्ड खोल दी उसने जोर लगा कर लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड में घुसेड़ दिया और आगे हाथ बढा कर मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसने जोर मार कर लण्ड अन्दर घुसा मारा …

मेरी गाण्ड नरम थी, जवान थी … पूरा लण्ड निगल गई। अब उसने धक्के मारने शुरू कर दिये … मुझे थोड़ी सी जलन हुई, पर मजा अधिक आया। पहली बार लण्ड से गाण्ड मरा रहा था। वो मुझे चूमने चाटने लगा … मेरा लण्ड तकिये से दबा हुआ सिसक रहा था … और जोर मार रहा था।

रवि तो मस्ती में चूर था … पूरे जोश के साथ मेरी गाण्ड चोद रहा था और कुछ ही देर में वीर्य निकाल दिया। रवि निढाल सा एक तरफ़ लुढ़क गया।

“राजू, तेरी बहन को चोद डाले क्या?” रवि ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

“साले मरवायेगा क्या … ?”

“नहीं यार … बड़ी सेक्सी है … चल यार कोशिश करते हैं … अपना लण्ड का माल उसी से निकाल लेना !”

“अच्छा, चल कोशिश करते हैं … देख बात बिगड़े तो सम्हाल लेना !”

रवि ने हामी भर दी। मेरी दीदी की नजर तो मुझ पर थी ही … मुझे लगता था कि काम हो ही जायेगा … । हम दोनों बिस्तर से उठे और तोलिया लपेट लिया और दबे पांव दीदी के कमरे में सामने चले आये। कमरे में बाहर की लाईट का खासा उजाला था … दीदी दोनों पांव चौड़े करके और स्कर्ट ऊंची करके लेटी हुई थी। मैं दीदी के बिस्तर पर उसके पास बैठ गया।

दीदी ने धीरे से आंखे खोली,”राजू … क्या हुआ … ये सिर्फ़ तोलिया लपेटे क्यूँ घूम रहे हो … ?”

मैं थोड़ा नर्वस हो गया। पर रवि बोल उठा,”दीदी … आप लेटी रहो … राजू … चल कर ना … “

मैंने दीदी की चूंचियों की तरफ़ हाथ बढ़ाया। दीदी सब समझ चुकी थी। मुस्करा उठी …

मेरे हाथ उसके बोबे तक आ चुके थे …

“राजू … घबरा मत … पकड़ ले और दबा दे … !”

मेरी हिम्मत खुल गई,” दीदी … थेन्क्स … ” और मैंने धीरे से दीदी के बोबे पकड़ कर दबा दिये।

“अरे, शरमा मत … मसल दे … मजा ले ले दीदी का … और मजा दे दे दीदी को … ” दीदी सिसक उठी, जाने कब से बेचारी चुदासी थी …

उसने मेरा तौलिया उतार दिया और रवि ने मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया …

“बस बस … चढ़े ही जा रहे हो … ” वो उठ कर बैठ गई … और भाग कर अपना दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। रवि ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और उसका एक चूतड़ दबा लिया।

“दीदी, आपकी बाटिया यानी चूतड़ सोलिड हैं … बॉल भी बड़े कसे हुए हैं …! ”

“तू भी तो रवि सोलिड है … भैया की अभी गाण्ड मारी है ना … उसकी बाटिया मेरी जैसी ही तो है … !”

“दीदी … आपने सब देखा है क्या … ” मैं चौंक गया। दीदी मुस्कुरा उठी।

“राजू जवानी लगी है अभी … इसमें सब चलता है … देख मैं भी अभी चूत मरवाऊंगी और इसकी प्यास बुझाउंगी, रवि से गाण्ड मरवाउंगी … साला हरामी मस्त गाण्ड चोदता है !” और खिलखिला कर हंस पड़ी।

रवि से हट कर दीदी मेरे पास आई,”भैया … पहले आपका हक बनता है … देखो प्यार से चोदना … तेरी मस्त चूतड़ो की तो मैं भी दीवानी हूँ !”

“और मैं भी दीदी … तेरी चूतड़ो की गहराई देख कर तो मेरा लण्ड कब से चोदने को बेताब हो रहा था।”

“हाय रे भैया, तो देरी किस बात की है … चोद दे ना … ” और वो मेरे से लिपट पड़ी।

मैंने उसे तुरन्त घोड़ी बनाया और और उसे अपने से चिपका लिया। रवि लपक कर आया और नीचे से मेरा कड़क लौड़ा उसकी चूत के द्वार पर रख दिया।

“मार राजू … चोद दे दीदी को … पर देख प्यार से … दीदी अपनी ही है … ” रवि के स्वर में प्यार झलक रहा था।

मैंने धीरे से लण्ड दीदी की चूत में ठेल दिया।

लण्ड का प्रवेश होते ही उसके मुख से प्यारी सी सिसकारी निकली और उसने प्यार भरी निगाहों से मुझे देखा,”भैया … रहम मत करना … साले लौड़े को जोर से ठोक दे … बहुत महीनों बाद लौड़ा खा रही हूं !”

“हाय दीदी … ये लो … मुझे भी मत रोकना … मेरा तो रोम रोम सुलग रहा है … पहली बार मुझे भी कोई चूत मिली है … !”

मैंने जोर लगा कर लण्ड चूत की जड़ तक बैठा दिया। रवि ने मेरी गाण्ड सहलानी चालू कर दी। उसका लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। मैंने दीदी की चूंचिया दबा कर पकड़ ली और मसलते हुए पूरी ताकत से लौड़ा खींच कर दे मारा।

“आह राजू … ये हुई ना बात … अब ढेर सारे जोर की ठोकरे दे मार … साली चूत को मजा आ जाये … “

मैं जैसे ये सुनते ही पगला गया … जोर जोर से उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ कर चोदने लगा … पर जवानी तो दीदी पर पूरी तरह से छाई हुई थी … उसकी चूत लपक लपक कर लौड़ा ले रही थी। तभी मुझे लगा रवि भी अपना संयम खो बैठा और उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

“राजू प्लीज … तेरे गोल गोल चूतड़ मारने को कर रहा है … !” रवि ने कहा।

“अरे रुक जा साले … दीदी की गाण्ड और भी मस्त है … ठहर जरा … दीदी, आप दोनो छेद से मजा लो ना … “

दीदी तो वासना की आग में जली जा रही थी …

“हाय आगे से और पीछे से … दोनो तरफ़ से चोदोगे … माँ मेरी … चल पोजिशन ले … आज तो तुम दोनों मुझे मस्त करके ही छोड़ोगे !”

मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया और दीदी ने ऊपर आ कर मेरा लण्ड चूत में डाल लिया और पूरा घुसेड़ कर जड़ तक बैठा लिया … और दोनों पांव से अपने चूतड़ ऊपर उठा लिये। रवि तुरन्त लपक कर बिस्तर पर चढ़ गया और उसकी खुले हुये चूतड़ो के पट में लण्ड रख दिया। दीदी ने रवि को देखा और मुस्कुरा दी और लण्ड गाण्ड में सरक गया।

“हाय रवि … भारी है … पर हां, कस के गाण्ड मारना … ये जवान लड़की की गाण्ड है … खूब लेती है और भरपूर लेती है !”

रवि तो सुनते ही जोश में आ गया और पहले धीरे धीरे और फिर जो जोर पकड़ा तो दीदी को भी मजा आ गया। अपनी गाण्ड उभार कर चुदाने लगी।

“वाकई, राजू … दीदी की गाण्ड तो मस्त है … जबरदस्त चोदने लायक है …! ” मैं नीचे उसके बोबे मसल मसल कर लण्ड उछाल उछाल कर दीदी को चोद रहा था। दीदी दोनों तरफ़ से चुद कर मस्त हो चली थी।

अब मुझे लगा कि मेरी नसें खिंचने लगी हैं … सारा कुछ लण्ड के रास्ते निकलने वाला है … मैं सिसक उठा,”दीदी … प्यारी दीदी … मेरा तो निकला … हाय … “

दीदी मुझसे चिपक गई … “राजू … निकाल दे … मस्त हो जा … रवि है ना, वो चोद देगा … तू झड़ जा … आराम से … हां”

“दीदी … तेरी तो … हाय … भेन की चूत … मैं गया … अरे रे रे रे … ओह्ह्ह्ह्ह्ह हा हाऽऽऽऽऽ।” और मेरा वीर्य छुट पड़ा … दीदी ने मेरा लौड़ा बाहर निकाल दिया … सारा वीर्य उसकी चूत के आस पास निकलता रहा। इतने में रवि ने गाण्ड से लण्ड निकाल कर दीदी की चूत में घुसेड़ दिया।

“आह्ह्ह साला हरामी रवि … मेरी चूत मार रहा है … “

“दीदी, अब आपकी बारी है माल निकालने की … “

“तेरे को कैसे पता … मैया री … अह्ह्ह् … साला … रवि … चोद दे रे … जोर से … मार और मार… भैया “

और मेरे से से जोर से लिपट गई … और दीदी का पानी छुट गया … दीदी मेरे से लिपट कर बल खाती हुई झड़ने लगी।

“दीदी … मेरा लण्ड … गया रे … निकला मेरा भी … ओये रे … चल निकल … हाऽऽऽऽऽऽ … ” और रवि ने लण्ड चूत से बाहर निकाला और दीदी की गाण्ड पर फ़ुहारें छोड़ दी … दीदी मुझे दबाये लेटी रही … रवि उठ कर बैठ गया।

“अब हो गया … सबका माल निकल गया … चलो उठो” रवि ने हांक लगाई।

दीदी ने मेरे ऊपर से सर उठाया और मुझे आंखो से जी भर कर देखा, और मुस्कराने लगी।

मुझे चूमते हुये बोली,”आप बहुत प्यारे हैं भैया … दीदी की प्यास बुझा दी और एक रवि जैसा गाण्ड की प्यास बुझाने वाला दोस्त भी दे दिया … क्यो रवि … है ना !”

“दीदी … आप के तो हम दास है … बस आप तो आदेश दे दे ना … लण्ड हाजिर है … “

दीदी हंस पड़ी और मुझे फिर से चूम लिया। वो मेरे ऊपर से हट गई और रवि को लिपट कर प्यार करने लगी। मैंने बड़ी मुश्किल से दोनों को अलग किया।

“चल साले तौलिया लपेट और निकल यहाँ से … अब तो रोज का प्रोग्राम रहेगा … उतावाला मत हो !”

रवि बड़ी आसक्ति भरी नजरों से दीदी को देखता हुआ कमरे से बाहर आ गया।

हम बिस्तर पर जा कर जैसे लुढ़क पड़े, और नींद की आगोश में चले गये … अचानक मेरी नींद रात को खुल गई … देखा तो रवि पास में नहीं था … मैंने जल्दी से उसे तलाशा … तभी दीदी के कमरे से सिसकियाँ सुनाई दी … अन्दर देखा तो मस्त चुदाई चल रही थी … मैं उनके पास गया”शश्श्श्श्श्श्श … चुप … ।”

“भैया … प्लीज करने दो … रहा नहीं गया ना … “

“चुप … बाहर तक सिसकारी की आवाजें आ रही हैं … चुप से चोदा-चादी करो … शोर नहीं … वरना ऐसा पिटोगे कि सब भूल जाओगे … ” मैंने दरवाजा बाहर से बंद कर किया … अब वो दोनों बिना आहें भरे … चुदाई कर रहे थे … । Antarvasna

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆