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देसी भाभी पोर्न स्टोरी में एक भाभी को अपने पति से पूरा चुदाई सुख नहीं मिल रहा था. तो जैसे ही मौक़ा मिला, उसने गैर लंड को अपनी चूत में ले लिया.

मेरा नाम जागृति है और मैं 28 साल की हूँ.
यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.

हालांकि मैंने कई कहानियां लिखी हैं … पर किसी न किसी संकोच की वजह से कभी पोस्ट नहीं की.

पहले मैं खुद के बारे में बता दूँ.
मैं काफी हॉट दिखती हूँ.
लोग मुझे पसंद करते हैं, पर मैं कोई हूर की परी नहीं हूँ.

मैं झूठ बोलकर अपनी कहानी को नकली नहीं बनाना चाहती हूँ.
इस देसी भाभी पोर्न स्टोरी में मैं सब सच लिखने की कोशिश करूँगी.

मैं एक आम लड़की हूँ, बस मेरे ‘आम’ किसी आम लड़की जैसे नहीं हैं.
वे बहुत ही ख़ास हैं!

मैं बड़े गर्व से बताना चाहूँगी कि मेरी ब्रा का साइज़ 36 है.
अगर आपको ब्रा की साइज़ का ज़रा भी अंदाज़ा होगा तो आप समझ चुके होंगे कि मेरे ‘आम’ किसी बड़े खरबूजों से कम नहीं हैं.

अब मैं अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी कुछ बता देती हूँ.
मेरी शादी हुए कुछ साल हो गए हैं और मेरे पति काफ़ी बोरिंग इंसान हैं.

उन पर लानत है कि मेरी जैसी लड़की को शादीशुदा होते हुए भी अपनी प्यास बुझाने के लिए यहां वहां जाना पड़ता है.

वैसे तो मेरी रंगरेलियों के कई किस्से हैं.
मैं आपके साथ धीरे धीरे सब शेयर करूँगी.

पर यह एक किस्सा जो आज बता रही हूँ, वह बड़ा ही रोमांटिक हैं और कामुक कर देने वाला वाकिया है.

एक बार मैंने ब्यूटी सैलून की होम सर्विस देने वाले को ऑनलाइन बुक किया था.

मैंने सोचा था कि लड़की आएगी.
पर एक लड़का आ गया.

शुरू में थोड़ा अजीब सा लगा, पर फिर मैंने सोचा कि कई बार यूनिसेक्स सैलून में जाती हूँ तो उधर लड़के ही बेसिक ब्यूटी सर्विसेज देते हैं.
तो अजीब लगने की कोई बात नहीं लगी.

फिर मुझे सिर्फ़ पैडीक्योर और मैनीक्योर ही करवाना था.

मेरे घर पर सिर्फ़ मैं, मेरे पति और मेरे ससुर ही रहते हैं.
उस वक़्त मेरे पति ऑफिस गए हुए थे और मेरे ससुर ड्राइंग एरिया में टीवी देख रहे थे.

अब क्योंकि मुझे ब्यूटी सर्विसेज लेनी थी तो ज़ाहिर था कि उसे मैं अपने रूम में ही ले जाकर सेवा लूँगी.

हमारा घर एक ड्यूप्लेक्स है और मेरा रूम ऊपर की मंजिल में है.
नीचे ड्राइंग एरिया है और मेरे ससुर का कमरा है.

मैं उस लड़के को अपने कमरे में ले गयी.
मेरे ससुर अच्छी पोस्ट से रिटायर्ड हैं और काफ़ी खुले ख्यालों के हैं.
तो उनकी तरफ से कोई प्राब्लम नहीं थी.

मैंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद नहीं किया क्योंकि किसी के आने की कोई उम्मीद थी ही नहीं.
उसने अपना नाम आकाश बताया और सैटअप करना शुरू किया.

वह सामान निकाल रहा था और मैं उसकी तरफ देख नहीं रही थी.
पर मेरा ध्यान उसी की तरफ था क्योंकि काफ़ी अच्छी कद-काठी का था.

मेरे बेडरूम में एक अंजान आदमी का इस तरह होना, वह भी जब मेरे ससुर घर पर थे, मेरे लिए थोड़ा असहज कर देने वाला था.

मैं एक लड़की ब्यूटीशियन के आने की उम्मीद कर रही थी तो मैंने एक आरामदायक वन पीस पहना हुआ था.
इस वन पीस की स्लीव्स बहुत ही छोटी और ढीली थीं ताकि मैनीक्योर के बाद पूरे हाथ पर अच्छे से मसाज ले पाऊं.

साथ ही पैडीक्योर में भी आराम से घुटनों तक मसाज हो जाए.

उस लड़के ने सैटअप जमाया और मुझसे पूछा- मैम, शुरू करें?
मैंने कहा- हां श्योर!

मैं बेड के किनारे पर बैठ गयी.
उसने फ्लोर पर पैडीक्योर मशीन लगा दी थी.

मेरे पैर उठा कर उसने मशीन में रख दिए और मशीन को चालू कर दिया.

तभी उसने अचानक से मेरा गाउन ऊपर उठाया और घुटनों से भी ऊपर कर दिया.
एक लड़के के हाथ यह सब करवाना मुझे काफ़ी अजीब महसूस हुआ.

एकदम से नीचे वाले छेद में गुदगुदी सी होने लगी, पर मैंने सोचा कि यह तो उसका तो रोज़ का ही काम है, क्या शर्माना.

मैं अपनी जांघों को कसके एक दूसरे से चिपकाई हुई थी क्योंकि नीचे पैंटी पहन रखी थी, पैंट्स या ब्लूमर नहीं पहना था.
उसने मुझसे सहज रहने को कहा, पर मैं वैसे ही अपनी टांगों को छिपा कर बैठी रही.

उसने अचानक से मेरी एक टांग उठाई और अपने घुटने पर रख ली.
फिर मेरी टांग में क्रीम लगाने लगा.

अब इस तरह से करने से मेरी जांघें खुल चुकी थीं और मुझे पता था कि उसे मेरी पैंटी दिख रही थी.
यह सोच कर ही मैं थोड़ी गीली होने लगी कि एक आदमी मेरे बेडरूम में मेरी टांग पकड़ कर बैठा है और मेरी पैंटी भी देख पा रहा है.

इतने में उसने दूसरी टांग उठाई और उस पर क्रीम लगा कर दोनों टांगें विपरीत दिशा में फैला कर पैडीक्योर टब के दोनों तरफ रख दीं.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि वह मेरी टांगें फैला कर ऑलमोस्ट उनके बीच में बैठा है और मेरी चड्डी देख रहा है.

शायद मेरी चूत को सूंघ भी रहा है और मैं चुपचाप बैठी हूँ.

उसकी हरकतें मुझे अब कुछ ठीक नहीं लग रही थीं.
ऐसा लग रहा था कि उसके दिमाग़ में कुछ चल रहा है.
पर मुझे न जाने क्यों … यह सब कुछ थोड़ा अच्छा भी लग रहा था.

तभी उसने मुझसे पूछा- फुल बॉडी मसाज, फुल बॉडी वैक्सिंग के पैकेज पर काफ़ी डिस्काउंट चल रहा है, आप लेंगी मैम?

यह सुन कर जैसे मैं सुन्न सी हो गयी, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोलूं.
तभी उसने एक ऐसी बात कही कि मेरी आँखों के आगे अंधेरा सा छा गया.

‘बिकिनी वैक्स भी फुल बॉडी में इंक्लूडेड है!’
यह सुन कर मुझे लगा कि मैं कहां छुप जाऊं.

मेरी चूत पर काफ़ी घने बाल थे क्योंकि मैंने बहुत दिनों से हेयर रिमूवल नहीं किया था.
पति के साथ चुदाई किए हुए भी दो महीने हो चुके थे.

शायद मेरी पैंटी लाइन से उसने वह बाल देख लिए थे और तभी वह यह कह रहा था.
मैंने एकदम से उससे कह दिया- नहीं, मैं ऐसी सर्विसेज घर पर नहीं ले सकती … क्योंकि मेरे ससुर घर पर हैं.

यह कहने के बाद मुझे लगा कि यह क्या कह दिया मैंने … मैं सीधा मना भी कर सकती थी.
पर मैंने ऐसे कहा, जैसे मुझे उससे कुछ भी करवाने में आपत्ति नहीं होती … अगर मैं घर पर अकेली होती.

उसने कुछ नहीं कहा और बहुत कामुक तरह से मुझे छूते हुए मेरा पैडीक्योर करता रहा.

ऐसा लग रहा था कि वह मुझे उत्तेजित करने की कोशिश कर रहा हो.
मैं हो भी रही थी.

ऊपर से वह बार बार मेरी पैंटी की तरफ भी देख रहा था.

मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गीली हो रही हूँ, पर मैं चुपचाप अपने मोबाइल में देखती रही.

उसने पैडीक्योर पूरा किया बस मसाज होना बाकी था.

तभी उसने मैनीक्योर शुरू किया और पहले मेरे एक कंधे की मसाज करने लगा.

यह अजीब था क्योंकि अक्सर मैनीक्योर के बाद मसाज होती है.
पर उसने पहले शुरू कर दी थी.

वह मेरी कोहनियों से ऊपर मेरे कंधों तक आता … फिर अपनी उंगलियां मेरी स्लीव्स के अन्दर तक ले जाता.

फिर मेरी गर्दन पर मसाज करता और अपना हाथ लगभग मेरी छाती तक ले जाता.
ऐसे लग रहा था जैसे वह मुझसे आज्ञा माँग रहा हो कि उसे मम्मे छूने की पर्मिशन दे दी जाए.

मैं चुपचाप मोबाइल ही देख रही थी कि तभी नीचे से आवाज़ आई- जागृति, घर का दरवाज़ा बंद कर लो, मैं स्टेशन जा रहा हूँ.
मुझे याद आया कि मेरे ससुर के दोस्त आज कहीं जाने वाले थे और वह उन्हें ड्रॉप करने जा रहे थे.
यह सुन कर जैसे उस लड़के के हाथों में एक अलग ही जोश आ गया.

इस बार मेरी छाती के और अन्दर हाथ ले जाते हुए उसने धीरे से मेरे कान में कहा- दरवाजा बंद करके आ जाइए, मैम!

उसकी गर्म सांसें जैसे मुझसे कह रही थीं कि वह मेरा पूरा बदन टटोलना चाहता है.

मैं चुपचाप गेट बंद करके आ गयी.
मेरी सांसें अब काफ़ी तेज़ थीं और उसने यह बात नोटिस कर ली थी.

उसने कहा- मेम फुल बॉडी वैक्सिंग ले लो … मैं मसाज कॉंप्लिमेंटरी दे दूँगा.

इस बार उसने मेरे मम्मे छू लिए थे.
बस वह मेरी चूचियों के निप्पल तक नहीं पहुंच पाया था.

मैंने फिटिंग की ब्रा पहनी थी, तो वह मेरे एक दूध की ऊपरी चमड़ी को सहला कर वापस आ गया था.

मेरी चूत अब पहले से फड़फड़ा रही थी.
मैं दिमाग़ से नहीं, अब चूत से ही सोच रही थी.
अंतत: मैंने कह दिया- ठीक है कर दो वैक्सिंग!

यह सुन कर उसने मुझे ब्रा उतरने को कहा ताकि वह अच्छी तरह मसाज दे पाए.
असल में वह मुझे गर्म कर रहा था.

मैंने ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को ढीली करके चूचों से नीचे कर दी.
उस गैर मर्द ने पहली बार मेरी चूचियों पर अपनी उंगलियां फिराईं.

‘आह … मज़ा आ गया … बिल्कुल कड़क हो चुकी थीं.’
बस ऐसा लग रहा था कि मेरी चूचियां वन पीस फाड़ कर बाहर निकल जाएंगी.

मैं चाहती थी कि वह अपने मुँह में लेकर इनको अब चूस ले.

उसने जैसे मेरे दिल की बात सुन ली, उसने मेरे सामने के बटन्स खोल दिए और मुझे शीशे के सामने बैठने को कहा.

शीशे के सामने लाकर उसने कहा- मसाज का आनन्द लेना है तो शरीर को ढीला छोड़ दो और सब खोल दो.

उसके मेरे दोनों दूध सहज भाव से खींच कर बाहर निकाले और उन्हें देख कर हैरान हो गया.
बहुत मुश्क़िल से मेरे पूरे मम्मे बाहर आ पाए थे, दरअसल मेरे ऐसे लग रहे थे मानो दूध फँस गए हों.

इतने बड़े दूध उसने पहले असलियत में देखे नहीं होंगे.
उस पर मेरे निपल्स भी बहुत बड़े बड़े हैं. कड़क होकर जामुन से कम छोटे नहीं लगते हैं.

उसके मुँह से सच में पानी टपकने लगा, पर वह अभी भी ब्यूटीशियन का चोला पहले हुए था.
वह कहने लगा- बाहर से हमेशा पता नहीं चलता कि थैले के अन्दर कितना बड़ा फल है.

मैंने कुछ नहीं कहा.
पर वह शायद मुझे हंसाना चाहता था.

उसने कहा- मैं पहले नीचे की वैक्सिंग कर देता हूँ.
वह फिर से मेरी टांगें फैला कर मेरी पैंटी के बहुत करीब आकर बैठ गया और जोर जोर से सूंघने लगा.

जब तक वैक्स गर्म हो रहा था, उसने मेरी पैंटी बहुत प्यार से उतारी.

उस पर लगे मेरे पानी को देखा और कहा- बहुत सुंदर पैंटी है लेकिन अन्दर की चीज़ इससे भी सुंदर है.
मैं शर्मा गयी और नीचे देखने लगी.

उसने कहा- शीशे में देखती रहिए कि मैं क्या कर रहा हूँ, बाद में शिकायत ना हो.

मुझे दिखा दिखा कर उसके मेरी गीली चूत एक वेट वाइप से पौंछ दी और फ़ुद्दी के ऊपर टिश्यू लगा दिया.

फिर उसने वैक्स लिया और मेरे नीचे लेफ्ट साइड अच्छे से वैक्स लगा दिया.
जब वह वैक्स पर कपड़ा लगा रहा था, मुझे घबराहट हो रही थी क्योंकि मैंने इससे पहले कभी वहां पर वैक्स नहीं करवाई थी.

उसने मुझसे आश्वासन दिया और कहा- कुछ नहीं होगा, आपकी झांटों की सफाई अब मेरी ज़िम्मेदारी है.

यह कर उसने एक झटके से कपड़ा खींच दिया.
मैं जैसे ही दर्द से चिल्लाने वाली थी, उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया और चाटने लगा.

मुझे झांटों के खिंचने से दर्द तो हो रहा था पर उसके चाटने से मुझे इतना सुकून मिला जैसे सालों से सूखी धरती पर बारिश आ गयी हो.
मैंने अपनी दोनों टांगें और ज्यादा फैला दीं और उसे उसके मन की करने दी.

उसने मेरी चूत को चाट चाट कर मुझे ठंडक दे दी और जैसे एक साइड में झांटों के साथ किया था.
वैसे ही उसने दूसरी तरफ भी वैक्स करके झांटें खींच कर चूत चिकनी कर दी और पुन: चाटने लगा.

शायद ही कभी किसी ने मेरी इतनी अच्छी चूत चाटी थी.

दर्द कब गायब हुआ और मज़ा आने लगा … कुछ पता ही नहीं चला.

उसके चाटने से मैं और गीली होने लगी और अब वह मेरी फ़ुद्दी भी चाट रहा था.
मैं कामुक आवाज़ें निकालने लगी थी.

वह बार बार मेरा ध्यान शीशे की तरफ ले जाता ताकि मैं देख पाऊं कि वह क्या कर रहा है.

शीशे में अपनी चूत के साथ सब होता देख कर मैं और भी ज़्यादा गर्म होती गयी.
उसने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल डाल कर मुझे गर्म कर दिया.

जैसे वह मेरी चूत को अपने मुँह से ही चोदने की कोशिश कर रहा था.
वह कुछ देर रुक कर मेरी आंखों में देखने लगा और फिर से चूत चाटने लगा.

इस बार उसने धीरे से एक उंगली भी मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ दी और दाने को मसलने लगा.

मैं महीनों से नहीं चुदी थी और यह सब मुझे इतना मज़ा दे रहा था कि मुझे कोई याद ही नहीं रहा था कि मैं शादीशुदा हूँ और अपने बेडरूम में एक अंजान मर्द से अपनी चूत चटवा रही हूँ.

अब मैं कराह रही थी- आह आह आकाश … रूको मत प्लीज करते रहो.

उसने ऐसे ही मेरी फ़ुद्दी चाट-चाट कर एक बार मुझे चरम सुख का आनन्द दे दिया.
मैं झड़ गयी और मेरा शरीर ढीला पड़ने लगा.

तभी वह खड़ा हो गया और वापस मेरे पीछे खड़ा होकर मुझे मसाज देने लगा.
अब वह बहुत अच्छी तरह मेरे मम्मे दबा रहा था.

जैसे कोई आम को चूसने से पहले पिलपिला करता है, ठीक वैसे ही वह मेरे दूध मसल रहा था.

मैं मज़े ले रही थी, अपने दूध मसलवाती हुई शीशे में देख रही थी.

वह मेरी चूचियां ऐसे भींच रहा था जैसे उनमें से दूध निकालने की कोशिश कर रहा हो.

उसने मेरे दूध दबा-दबा कर खूब मज़े लिए और मुझे दिए भी.
फिर सामने आकर बैठ गया और मेरे एक दूध को चूसने लगा.

वह मेरे मम्मों पर ऐसे टूट पड़ा था, जैसे कोई भूखा बछड़ा अपनी गाय के थन पर टूट पड़ता है.
उसने हाथों से दबा दबा कर जो मेरी चूचियां चूसी, उससे मैं निहाल हो गई.

पहले एक-एक, फिर दोनों को मिला कर एक साथ चूसीं.
ऐसा लग रहा था कि वह सारा रस पीकर इनको चूसे हुए आम की तरह लटका देगा.

उसने मेरी चूचियां ऐसी लाल की कि कई दिनों तक मुझे उन पर क्रीम लगानी पड़ी.

आख़िर में उसने कहा- हाथ और मुँह से बहुत मसाज दे दी, अब मैं अपना ख़ास यंत्र निकालता हूँ, उससे मैं तुम्हारा बचा हुआ रस निकालूँगा.

वह बेदर्दी मुझे एक भूखी रांड समझ कर अपनी सभ्यता भूल कर तुम तुम्हारी करने लगा था.

सच तो यह है कि बॉस बन कर चूत चुदवाने से ज्यादा मजा एक दासी बन कर चुदवाने में आता है.

चुदाई के वक्त जब मर्द औरत को गाली देकर चोदता है और उसे कुचलता है तभी तृप्ति मिलती है … कम से कम मेरे साथ तो ऐसा ही है.

उसने मुझे खड़ा कर दिया और आगे की तरफ झुका दिया.
फिर अपनी जीन्स की ज़िप खोली और अपने तने हुए फड़फड़ाते लंड को बाहर निकाला.

मैं घूम कर लंड देखा तो लगा कि आज मेरी चूत की खैर नहीं.
फिर उसने मुझे पकड़ कर मेरी चूत में पीछे से अपना लंड पेला तो मेरी आह निकल गई.

उसने एक बार भी मेरी आह कराह पर ध्यान नहीं दिया और वह किसी मदांध सांड की तरह चूत फाड़ता चला गया.
बड़ी लंबी रेस का घोड़ा था वह … देसी भाभी पोर्न चुदाई करते हुए करीब चालीस मिनट के बाद उसने अपना पानी मेरी ड्रेसिंग टेबल पर छोड़ा.

इन 40 मिनट में उसने मुझे झटके मार मार कर मेरे हिलते हुए दूध दिखा दिखा कर और खुद देख कर जो तोड़ा है, उससे मेरी महीनों की सेक्स की प्यास बुझ गई थी.

उसने मेरे बदन का हर एक हिस्सा खोल दिया था.
खड़ा करके, घोड़ी बना कर, कुतिया बना कर … ऐसे अलग अलग आसनों में मेरी गांड पर थप्पड़ मार मार कर और मेरे दूध दबा दबा कर मेरे ही बेडरूम में मुझे चोदा.

उसने उस दिन ड्रेसिंग टेबल पर ही मुझे घोड़ी बना कर मेरी चूत फाड़ दी, बहुत सारा पानी निकाला.

जो सुख मेरे पति ने सालों में नहीं दिया, वह उसने अपनी कुछ घंटों की सर्विस में मुझे दे दिया.

इस घटना ने मेरी चूत की प्यास को जगा दिया था.
अब मेरी फुद्दी अकेली और सूखी नहीं रह सकती थी.

चुदाई के बाद कुछ मिनट तक हम दोनों बेड पर पड़े आराम करते रहे.
फिर उसने एक पेन से मेरे एक दूध पर अपना नाम और दूसरे पर अपना नंबर लिख दिया.
मैं मुस्कुरा दी.

वह मुझे चूम कर वापस चला गया.

उसे मैंने वापस बुलाया या नहीं, यह मैं फिर कभी बताऊंगी, तब तक के लिए बाय … चुदाई करते और करवाते रहें.

Antarvasna

मेरा नाम दीपक है। मैंने Antarvasna अन्तर्वासना की काफी कहानियाँ पढ़ी हैं और वो सब मुझे बहुत पसंद आई और मेरा मन मचल उठा अपनी एक सच्ची कहानी आपको बताने का !

तो दोस्तो, मैं एक २६ वर्षीय लम्बा, भरा-पूरा एथलीट हूँ और मुझे सेक्स करना एक कला लगता है।

अब मैं आपको अपनी आपबीती सुनाता हूँ।

बात एक दिन इतवार की है, उस दिन मैं जल्दी सुबह अपने कसबे (रुरल जयपुर) से जयपुर आया प्रतियोगी-परीक्षा देने के लिए ! मेरा परीक्षा-केन्द्र शास्त्री नगर, जयपुर के एक स्कूल में बना और मुझे अपने कमरे के गेट के पास वाली कुर्सी मिली।

थोड़ी देर में स्कूल की घंटी बजी और एक सुंदर सी मेडम पश्न-पत्र और उत्तर-पुस्तिका लेकर कमरे में आई। वो एकदम सुंदर नैन नक्श वाली और हुस्न की मल्लिका लगती थी। थोड़ी देर में उसने सबको पेपर बांटे और फिर मेरे पास वाली कुर्सी पर बैठ गई और कभी मेरी उत्तर-पुस्तिका और कभी मेरे ऊपर लगातार देखती रही। परन्तु मेरा मन उस समय केवल परीक्षा देने का ही था सो मैंने इस बात पर विशेष ध्यान नहीं दिया।

थोड़ी देर में वो मेडम मेरी चोरी छुपे मदद करने लगी और मुझे प्रश्न हल करवाने लग गई और मैं उसका पूरा पूरा फ़ायदा लेने लगा। मैंने अपना पेपर नियत समय से आधा घंटा पहले ही ख़त्म कर लिया और उसकी तरफ प्यार से देखने लग गया। अब वो भी मुझे प्यार से बातें पूछने लगी कि तुम कहाँ रहते हो और क्या करते हो?

मैंने बताया- मैं फुलेरा में रहता हूँ और शाम को ६ बजे वापस ट्रेन से जाऊंगा।

तो मेडम बोली- ठीक है, परीक्षा के बाद गेट के पास मेरा इंतजार करना !

मैं कुछ नहीं बोला और परीक्षा ख़त्म हुई तो गेट के पास मैं उसका इंतजार करने लगा।

थोड़ी ही देर में मेडम आई और मैं उसके साथ हो लिया। लगभग १० मिनट पैदल चलते चलते हमने इधर उधर की बातें करते करते उसके घर पहुंचे जो कि ऊपर वाली मंजिल में एक अलग थलग घर था। वो मुझे लेकर अन्दर आई और दरवाज़ा बंद कर दिया।

अब वो मुझे ऊपर से नीचे तक निहारती ही रही। तो मैंने मेडम से उनका नाम पूछा, उसने बताया की नीलम है।

थोड़ी देर में वो मेरे लिए पानी लेकर आई और मुझे खाना भी खिलाया। जब मैं खाना खा रहा था तो वो मेरे सामने ही अपने कपड़े बदलने लगी तो मैंने शरमाकर दूसरी तरफ गर्दन कर ली लेकिन वो एक झीनी सी नाईटी पहनकर मेरे सामने बैठ गई और मुझे प्यार से खाना खिलाने लग गई।

दोस्तो, मैं आपको बताऊँ, अब मैं उसकी हर इच्छा में एक सुखमय आनंद ले रहा था। खाना ख़त्म करने के बाद वो अचानक मुझसे लिपट गई और मुझे चूम लिया। मुझसे भी रहा ही नहीं गया और मैंने उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके खूबसूरत लबों पर अपने लब रख दिए, उसको बेतहाशा चूमने लग गया और नाईटी के ऊपर से ही उसके मम्मों से खेलने लगा। क्या गजब के मम्मे थे !

मैंने उसे उठाकर दूसरे कमरे में बेड पर लिटा दिया और बोला- मेडम, आप बहुत सेक्सी हो !

तो वो मुस्कराने लगी। अब मुझे जल्दी हो रही थी सो मैंने उसकी नाईटी खोलकर पूरा नंगा कर दिया। कसम से क्या चीज़ लग रही थी वो !

मैंने उसकी बुर में अपने हाथ से खुजली करी, वो मचल उठी और मेरे कपड़ों को खोलकर मुझे नंगा कर दिया। अब वो मेरे लंड पर हाथ फिरा रही थी और थोड़ी देर में उसने मेरे लम्बे मोटे से लंड को मुँह में ले लिया। उस समय मैं जैसे स्वप्नलोक में था। मैंने उसे कहा- मैडम और जोर से चूसो !

उसने कहा- मैडम नहीं, मुझे नीलू कहो !

मैने कहा- नीलू मैडम और जोर से !

उसने फिर कहा- सिर्फ नीलू ! ओके ?

मैंने कहा- ओके ! नीलू मेरी जान !

नीलू ने अब मुझे पकड़ कर साइड में लिटा दिया और मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी बुर में पेलने की तैयारी करने लगी। मैं उसका बराबर साथ दिए जा रहा था।

थोड़ी देर में मैंने उसे अपने नीचे लिटाकर खूब चोदा और ऐसे जमकर चुदाई की कि वो एकदम मस्त हो गई और बोली- मेरी जानू ! मेरी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत दिन आज था जो तुम मुझे मिले !

वो और मैं उस दिन लगभग ५ घंटे तक चुदाई-चुदाई खेलते रहे ! एक दूसरे को छेड़ते और खूब मज़े लूटते रहे ! उस दरमयान मैंने उसके खूब स्तन दबाये और जमकर एक दूसरे का रसपान किया, एक बार गांड भी मारी।

अब इतने में शाम हो गई और वो सब तरह से संतुष्ट होकर बोली- मेरे राजा दीपक, तुम मुझे मिलते रहना !

मैंने भी वादा किया और इजाज़त ली और चल पड़ा स्टेशन की ओर !

मैंने घर आकर उससे फोन पर बात की और बताया- मैं ठीक से पहुँच गया हूँ और तुम्हारी याद आ रही है !

तो वो रोने लगी और फ़ोन पर ही मुझे अगली मुलाकात का समय देने लगी !

मैंने तुरंत हाँ कर दी !

दोस्तो, फिर हम महीने में ४-५ बार मिलते और खूब मज़े करते। लेकिन एक दिन वो मुझसे दूर चली गई उसका तबादला हो गया दिल्ली और मैं अकेला पड़ गया।

अब मुझे उसकी बहुत याद आती है और मैं आपको विश्वास दिलाना चाहूँगा कि मैं उस प्यारी मैडम को कभी नहीं भूल पाया।

दोस्तो, मैंने अपनी इस कहानी में गन्दे शब्द ज्यादा प्रयोग नहीं किये क्योंकि मैं एक अच्छे घराने का सदाचारी नवयुवक हूँ और हमारे संस्कार ऐसे है कि मुझे गाली भी नहीं आती है।

कृपया मेरी कहानी के बारे में और मेरी नीलू मैडम के भविष्य में साथ के बारे में अपने अनमोल विचार और सुझाव मुझे जरूर मेल करें। Antarvasna

प्यारे दोस्तो ! Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, जी यह मेरी Sex Stories अन्तर्वासना में पहली दास्तान है।सभी अन्तर्वासना-पाठकों को मेरा सलाम और गुरूजी को मेरी तरफ़ से प्रणाम !

मैं +२ में पढ़ता हूँ, गोरा, चिकना, बड़ी-बड़ी गोल-मोल गांड ! अभी मेरे शरीर में बाल नहीं आए, चिकना चुपड़ा बदन है मेरा, मेरी चाल भी लड़कियों जैसी है। मेरे कुछ सीनियर लड़कों ने मुझ से खाली क्लासरूम में खाली समय में अपने लौड़ों की मुठ मरवाई, एक दो बार मैंने उनके लंड भी चूसे।

अकेला घर में होता तो बहन की अलमारी से उसके ब्रा, पैंटी, टॉप पहन शीशे में देखता रहता। एक रोज़ उसकी अलमारी में मैंने एक व्यस्क-पत्रिका देखी जिसमें लड़के को लड़के से गांड मरवाते देखा और लड़की को लड़की के साथ करते देख मेरा दिल भी गांड मरवाने को करने लगा।

एक दिन शाम को सब बैठ चाय वगैरा पी रहे थे कि तभी गाँव से फ़ोन आया मेरे पापा के चचेरे भाई यानि मेरे चाचा का देहांत हो गया। मेरे पेपर नज़दीक थे, मैं और दादी रुक गए, और सभी गाँव चले गए, साथ वाले अंकल को रात हमारे घर रहने को कह गए।

अंकल बहुत ठरकी थे, यह सभी लोग बताते हैं। वो अकेले घर रहते थे पीछे से वो तो कामवाली को नहीं छोड़ते। मैंने और दादी ने खाना वगैरा खाया। मैं ब्रश करने की सोच रहा था कि अंकल ने बेल बजाई। उनको अन्दर आने को कह मैं गेट लॉक करके उनके पीछे ही अन्दर गया। मैंने अंकल को कहा- आप लॉबी वाला कमरा ले लो, मैंने बिस्तर लगा दिया है।

कह मैं अपने कमरे में गया। गर्मी की वजह से मैंने निकर पहन ली और सोचा कि सोने से पहले नहा लूँ। पसीना आया था, अच्छी नींद आयेगी।

दरवाज़ा खुला ही छोड़ मैंने कपड़े उतार डाले, सिर्फ़ चड्डी पहने शावर के नीचे खड़ा नहाने लगा। पानी से मेरी चड्डी गांड से चिपक गई। तभी पीछे से किसी ने मेरी दोनों गांड के चूतड़ों को सहला डाला, पीछे से जफ्फी डाल ली।

मैंने मुड़ कर देखा तो अंकल मुझे बाँहों में लेकर पीछे मेरे साथ चिपके हुए थे।

यह क्या कर रहे हो अंकल ?

तेरे साथ नहाने का मन है, शावर एक ही है, इसलिए सोचा कि तुझसे चिपक नहा लूं ! वैसे तू बहुत चिकना है, गांड बहुत सेक्सी है, ऐसे चूतड़ तो किसी लड़की के भी न होंगे। मुझे अपनी तरफ़ घुमा के मेरी छाती देख बोले- यार ! यह तो लड़की की तरह पोली पोली है और साले यह निपल तो लड़कियों जैसे हैं।

कहते ही पानी से भीगे मेरे निपल को चूसना चालू किया। मेरी गांड में कुछ कुछ होने लगा, मुझ से रुका नहीं गया। जब अंकल मुझे गरम कर रहे थे तो मेरा हाथ भी उनके लंड पे गया, मैं सहलाने लगा।

अंकल बोले- मसल थोड़ा !

मुझे नीचे कर मेरे मुँह में लंड डाल दिया। गीला लंड, गीला बदन वो मेरे सर को पकड़ आगे पीछे करने लगे। शावर बंद कर मैंने उनके बदन पर साबुन लगते हुए उनकी चड्डी उतार डाली, लंड पे साबुन लगा दिया और ख़ुद उनके शरीर से अपने बदन को रगड़ कर साबुन लगवा लिया। वो गांड में ऊँगली करने लगे, साबुन की वजह से उनकी दो ऊँगलियाँ कब घुस गई मालूम न पड़ा।

शॉवर में साबुन उतार अंकल तौलिए से पोंछ मुझे बिस्तर पे ले आए और बोले- लंड चूस ! मुठ मार !

मेरी दोनों टाँगे कंधों पे रख लंड मेरी गांड पे रगड़ते हुए धक्का मारा, फट से लंड घुस गया मेरी गाण्ड में। अंकल ने मुझे मजबूती से पकड़ रखा था। मुझे मालूम था कि शुरू में दर्द होगा, मैंने अपने हाथ से अपना मुँह बंद कर रखा था। दूसरे धक्के में उनका आधा लंड घुस गया, मैं छटपटाने लगा दर्द से, टीस निकल रही थी कि तीसरे धक्के से लंड पूरा घुस गया।

लण्ड मेरी गाण्ड में फंस चुका था, अंकल ने निकाल के फ़िर डाला, तीन चार बार जब निकाल के डाला तो मुझे मजा आने लगा और उन्होंने मुझे छोड़ दिया। अब मैं नीचे से गांड उठा उठा उठा के चुदवाने लगा।

अंकल ने मुझे रात में तीन बार चोदा। सुबह मुझसे ठीक से चला नहीं गया, गांड पे सरसों का तेल लगाया फ़िर ठीक हुआ।

मैं स्कूल गया। शाम को पापा और अन्य लोग न लौटे तो अंकल को फ़िर रुकना था। दो रात में अंकल ने मुझे गांडू बना डाला। उसके बाद मौका मिलते में झट से उनके घर चला जाता, खूब चुदवाता, मौका रोज़ ही मिल जाता।

अंकल ने मुझे इतना चोदा कि मुझे उसके बाद गांड मरवाने का चस्का लग गया। आंटी के दुनिया से जाने के बाद ही अंकल को यह सब करना पड़ा था।

दोस्तो यह थी मेरी गांड में घुसे पहले लंड की ठुकाई !

मेरी गांड में दूसरा लंड किसका घुसा वो अगली बार लिखूंगा !

कभी अलविदा न कहना !

चलते चलते कोई लंड मिल जाए तो उसे गांड में डलवाना। Sex Stories

Antarvasna stories

ये Antarvasna कहानी उस समय की है जब १२ में आया था हमारे एक नौकरानी थी उसकी २ बेटी थी छोटी बेटी की मस्त थी फ़ीगर देख कर किसी के मुंह में पानी आ जाये.

एक बार वो झाडू बैठ कर लगा रही थी में उसके पीछे से गुजरा और मैने अपना पैर उसके चूतड़ पे छुआ कर निकला वो चौंक गयी लेकिन कुछ नहीं बोली। इस तरह मैं हमेशा करने लगा, मुझे इस बात का डर नहीं लग रहा कि वो मम्मी से कुछ कह देगी।

एक बार सब लोग बाहर थे मैं अंदर रूम में, वो झाडू लगाने आयी मैने उसे पकड़ कर किस करने लगा वो हैरान हो गयी और कहने लगी मैं बता दूंगी मैने उसके मुंह में अपनी थूक डाल दी और उसके लिप चूसने लगा फिर मैने एक हाथ से उसके बूब्स छुआ और कसके दबाने लगा तभि किसी के अंदर आने की आवाज आयी मैने उसे छोड़ दिया।

फिर एक बार फिर वैसा मौका मिला उस दिन मैं उसे पीछे से पकड़ कर क्लोथ सेक्स करने लगा वो थोड़ा मुस्कुरा रही थी फिर वो ज़मीन पर बैठ कर पोंछा लगाने लगी फिर मैने एक हाथ उसके कुरते के अंदर गर्दन की साइड से डाल कर उसका एक बूब बाहर निकालने लगा वो छटपटा गयी वो उस समय समीज पहनती थी उसके निप्पल दिखने लगे फिर कोई आ गया।

एक बार मैं स्टोरी वाली मैगज़ीन लाया उसमे ज़्यादातर कहानी वर्जिन की थी मेरा दिमाग खराब हो गया। मैं उसे घर में कहीं भी अकेला देखता तो उसको किस करने लगता।

एक बार मैने उससे पूछा चूत के बाल बनाती हो कि नहीं?
वो बोली- ये क्या होता है?
मैने उसकी चूत पर हाथ रख कर कहा इसको वो शरमा गयी और अंदर चली गयी।

हम लोग के यहां दो बाथरूम थे जिसमे एक बाथरूम कमरे और बाहर आंगन से जुड़ा था फिर जब वो बाथरूम में कुछ लेने जाती मैं कमरे से आकर उसको पकड़ कर किस करने लगता और अपना लंड बाहर निकाल कर उसको पकड़ने की कोशिश करता। जब मैने पूरी बुक पढ़ ली मैने सोचा अगर ये बुक इसको दे दूं तो ये बात आगे बढ़ सकती है। मैने बुक घर के दरवाजे के किनारे रखे गमले के पीछे रख दी और उसको बता दिया कि वहां बुक रखी है, ले जाना।

बाद में जब वो काम करके चली गयी तो मैने सोचा किताब ले गई कि नहीं मैने बाहर जाकर देखा तो किताब गायब थी। दो दिन बाद वो आयी तो उसकी आंखें चमक रही थी और अजीब सी नशीली थी।

मैने अकेले में उससे पूछा कैसी थी किताब उसने कहा बहुत गंदी थी.
मैने कहा- तो लाओ मेरी बुक वापस?
उसने कहा- मैने फेंक दी।

मुझे गुस्सा आया मैं उसको पकड़ कर किस करने लगा और एक हाथ सो उसकी चूत दबाने लगा इस बार उसने ज्यादा प्रतिरोध नहीं किया।

एक बार घर के सब लोग बाहर गये शाम से पहले कोई नहीं आना वाला था उस समय डोर बेल बजी मैने खोल के देखा दरवाजे पर सामने वो खड़ी थी, उसने कहा- मेम साहिब हैं?
मैने कहा- हां!
वो अंदर आ गयी।

मैने दरवाजा बंद कर दिया फिर मैं अंदर आ गया और जैसे वो रूम में आयी मैं उस पर टूट पड़ा और उसको किस करने लगा वो रिसपोंस कर रही ती फिर मैं उसके बूब्स दबाने लगा और मस्त हो गयी तभी वो चौंकी और बोली मेमसाहिब आ जायेंगी.
मैने कहा- घर पर कोई नहीं हैं।
वो डर गयी और बाहर जाने लगी मैने उसे पकड़ लिया वो रोने लगी- मुझे छोड़ दो।
मैने कहा इतने दिनो बाद मौका मिला है, कैसे जाने दूं।

फिर मैने अपने हाथ उसके कुरते के अंदर डाल कर उसके नंगे बूब्स कसके दबाने लगा. वो चिल्ला रही ती मगर मुझे मजा आ रहा था फिर मैने उसका कुरता उतारा वो विरोध कर रही थी मैने कहा चुपचाप करवा लो वरना जबर करना पड़ेगा और तुम्हारे कपड़े फट जायेंगे और सबको पता चल जायेगा और तुम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगी अगर चुपचाप करवा लोगी तो किसी पता नहीं चलेगा।

उसका विरोध कम हो गया मैने उसकी सलवार उतार दी और पेंटी को चूमने लगा फिर मैं उसके बूब्स चूसने लगा जैसे मैं उसका बेटा हूं और उसका दूध पी रहा हूं वो बहुत गरम हो गयी स्सस्सशह्ह ह्हह्हह की आवाज़ आने लगी थी उसके मुंह से, फिर उसने कहा- मेरे निप्पल को और तेज चूसो.

मैं हैरान हो गया, मैने कहा- ये कहा सीखा वो बोली जो आपने किताब दी उसमे, उसने मुझे झूठ बोला था वो मेरे बोक्स में है मैने खुशी के मारे उसकी आंखों को चूम लिया।

फिर मैने उसकी पैंटी उतारी.
वो मुझसे कहा कि मुझे बाथरूम आ रहा है.
मैं उसे बाथरूम ले गया और मैने उसे अपने सामने मूतने के लिये विवश किया वो शरम से पानी-२ हो गयी। और मैने उसके पेशाब में अपने हाथ धोये मुझे लगा कि गरम पानी से हाथ धो रहा हूं फिर मैने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया और ६९ पोसिशन में अपना लंड उसके मुंह में डाला और उसकी क्लीन शेव चूत चूसने लगा. थोड़ी देर बाद वो झड़ गयी मैने उसका टेस्टी कम पी लिया. फिर मैं भी झड़ गया वो मेरा कम मुंह में लेकर गटक गयी, पर उसको थोड़ा अजीब मगर अच्छा लगा।

फिर मैने अपना लंड उसे पकड़ कर बड़ा करने को कहा वो उससे खेलने लगी। जब मेरा ६” का कड़ा हुआ तो मैने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धक्का मारा टोपा अंदर घुसा था वो चिल्लाने लगी ईइ मार डालाअ बाहर निकालो मैने उसका मुंह बंद करके धक्के मारने लगा उसके आंसु निकलने लगे वो मेरी तरफ़ गुस्से से देख रही थी उसका मुंह बंद था। फिर मैं तेजी से उसे पेलने लगा वो चाहते हुए भी चीख नहीं पा रही थी मैने उसकी ह्य्मेन ब्रेक का सीन अपने मोबाइल पर शूट कर लिया उसकी चूत से खून बह रहा था थोड़ी देर के बाद वो नोर्मल हुई और मजे लेने लगी उसके मुंह से आवाज आने लगी फ़ाड़ दो मेरी।

यह तुम्हारी है मुझे पता नहीं था कि इसमे इतना मजा आता है, अब मैं तुमसे रोज चुदवाउंगी ओह्हह्ह यीईईईई और वो झड़ गयी मैं उसे पेलता रहा मेरा लंड भी झड़ने वाला था, मैने धक्के तेज कर दिये और उसकी चूत में झड़ गया उसकी चूत मेरे लावा और खून से सनी थी मैने उसको बैठने को कहा उसको दर्द हो रहा था बड़ी मुश्किल में बैठी तो उसकी चूत से मेरा वीर्य निकलने लगा मैने ये भी शूट किया।

दिन में उसे ३ बार पेला फिर मैने उसे पैन किलर दी और उसकी चूत की सिकाई की उसको देख कर मेरी फट रही थी कहीं उसने किसी को बता दिया या उसे देखकर किसी को पता चल गया तो। लेकिन सब ठीक रहा.
उसके बाद उसको मौका मिलने पर चोदता उसके बाद उसकी शादी हो गयी।

शादी वाले दिन से १ दिन पहले उसने खुशखबरी दी कि वो मेरे बच्चे की मां बनने वाली है। शादी के १ साल बाद आयी तो उसके साथ मेरा बच्चा भी था वो मेरे समने ही उसे दूध पिलाने बैठ जाती थी।

पिता जी का ट्रांसफ़र हो गया और मैं उससे अलग हो गया। मेरा मन कहीं लग नहीं रहा था फिर मैने अपनी स्वीट लिटिल सिस एस (चसमिश) के ऊपर नज़र आ गयी नेक्स्ट स्टोरी में बताउंगा उसको कैसे चोदा। Antarvasna

Sex Stories

हमारे घर के पड़ोस में एक Sex Stories परिवार रहता था। उनकी एक लड़की थी। उसका नाम सोनू था। उसकी उमर लगभग 19 साल की थी।

वो एकदम मस्त चीज़ थी उसके बूब 30-32 साइज़ के थे अपनी बॉडी से वो पूरी जवान लड़की लगती थी।

सोनू बहुत ही सेक्सी थी। मैं उसे चौदना चाहता था वो भी मुझे आते जाते अपने घर की छत पर से देखती थी और मुझे देख कर मुस्कुराती भी थी लेकिन कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।

उनके घर पर एक कंप्यूटर भी था।

यह उस समय की बात है जब सोनू के माता-पिता 5-6 दिन के लिए कहीं चले गये थे। घर पर केवल सोनू ही अकेली थी।

दूसरे दिन सोनू अपने घर के बाहर दरवाजे पर मुझे खड़ी दिखाई दी।
मैंने उसे देखा तो वो मुस्कुराई और मुझे बुलाया।

जब मैं उसके पास गया तो वो बोली- आप को अगर कंप्यूटर ठीक करना आता हो तो प्लीज़ हमारा कंप्यूटर ठीक दो ना प्लीज़!
और मुझे घर में आने का इशारा किया।

मैं स्कूल जा रहा था इसलिए मैं शाम को आने के लिए कह कर स्कूल चला गया।

स्कूल से वापस आने के बाद मैं सोनू के घर 5 बजे शाम को पहुँच गया।
मैंने कॉल बेल बजाई तो सोनू ने दरवाज़ा खोला।

उसने काले रंग की स्कर्ट और पिंक रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था। उसकी चूचियों के दोनो निपल्स बाहर से ही महसूस हो रहे थे।

मैं घर के अंदर गया।
वो मुझे कंप्यूटर के पास ले गयी।
मैंने कंप्यूटर को ओन किया और चेक करने लगा।

सोनू चाय बनाने चली गयी।

मैंने एक फोल्डर को खोला जो सोनू ने बनाया था। उस में बहुत सारी अश्लील तस्वीरें थी।

मैं उन तस्वीरों को देखने लगा। उसमें नेट से डाउनलोड की हुई बहुत सारी सेक्सी पिक्चर थी।

थोड़ी देर बाद वो चाय ले कर आ गयी।
उस समय कंप्यूटर स्क्रीन पर जो फोटो थी उसमें एक आदमी एक लड़की को डॉगी स्टाइल में चोद रहा था।

वो मेरे बगल में बैठ गयी और बोली- प्लीज़ ये फाइल्स बंद कर दो। इसे मत देखो।
मैंने कहा- बहुत अच्छी पिक्चर है।
सोनू का चेहरा शरम से लाल हो गया।

मुझे देखने दो।

वो बोली- प्लीज़ जीतू बंद कर दो इसे।

मैंने कहा- मैं कोई ग़लत काम थोड़े ही कर रहा हू। आख़िर तुम भी तो ये पिक्चर देखती होगी। तुम भी जावन हो और मैं भी। तुमने कभी ट्राइ किया है?

वो चुप रही तो मैंने फिर पूछा।

वो बोली- मैं अभी तक कुँवारी हूँ। मैंने कभी किसी से नहीं करवाया है।

मैंने उस से झूठ बोला और कहा- मैंने भी आज तक किसी लड़की के साथ कुछ नहीं किया है। घर पर भी कोई नहीं है। चलो, आज हम दोनों इसे ट्राइ करते हैं।

उसने इनकार कर दिया तो मैंने पूछा- क्यों?

इस बार वो कुछ नहीं बोली और उसने अपना सर दूसरी तरफ घुमा लिया।

मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया तो उसने मेरा हाथ झटक दिया। मैंने फिर पूछा- हम दोनो ही कुंवारे हैं और आज अच्छा मौका है। तुम भी जवान हो और मैं भी। घर पर भी कोई नहीं है। हमें ट्राइ करना चाहिए।’

वो एक दम चुप रही।

मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिरना शुरू कर दिया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

उसने अपनी दोनों जांघों को एक दूसरे पर रख कर ज़ोर से दबा लिया।

मैंने उसकी जांघों को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी जांघों के बीच घुसा दिया। मेरा हाथ सीधा उसकी चूत पर लगा। उसने नीचे भी कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी चूत एकदम मुलायम और चिकनी थी।

उसने इस बार मेरा हाथ नहीं हटाया। मैं समझ गया कि मेरा काम बन जाएगा।

मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया तो उसकी साँसें बहुत तेज़ चलने लगी और उसका चेहरा एक दम लाल हो गया। वो कुछ नहीं बोली।

थोड़ी देर तक उसकी चूत सहलाने के बाद मैं उठा। मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले जाने लगा तो उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया।

बेडरूम में ले जा कर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया।
मैंने उसकी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार दी। उसके कपड़े उतारने के बाद मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए।

मुझे नंगा होते देख उसने अपनी आँखें बंद ली लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी।

उसका संगमरमर सा गोरा बदन एक दम नंगा मेरे सामने था। मुझे जोश आने लगा।

मैंने उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक होठों को चूमने के बाद मैंने धीरे धीरे उसके चुचियों को, पेट को, जांघों को और फिर उसकी चूत को चूमने लगा।

वो एकदम गरम हो गयी और सिसकारियाँ भरने लगी।

मेरा लंड भी खड़ा हो कर जोश से एक दम लोहे जैसा हो गया था और झड़ने वाला था।

मैंने अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया और चूसने को कहा।
वो कुछ नहीं बोली।

मैंने उसके मुँह में अपना लंड घुसाने की कोशिश की तो उसने अपना मुँह इधर उधर करना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर ना नुकर करने के बाद आख़िर में उसने अपना मुँह खोल दिया।
मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और वो उसे चूसने लगी।

मैं उसके उपर लेट गया और मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। दो मिनट बाद ही मैं उसके मुँह में झड़ गया और उसने मेरे लंड का सारा पानी निगल लिया। लंड का सारा पानी निगल जाने के बाद भी उसने मेरा लंड चूसना ज़ारी रखा।

वो भी अब तक बहुत जोश में आ गयी थी और उसकी चूत से भी पानी निकलने लगा।
मैंने भी उसकी चूत का सारा पानी चाट लिया। वो एक दम नमकीन और कुछ कुछ खट्टा था।

दस मिनट में ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

मैं भी अभी तक उसकी चूत को चाट रहा था और वो भी अपना चूतड़ उठा उठा कर मज़ा ले रही थी।

हम दोनो बहुत जोश में आ गये थे। मैं उसके उपर से हट गया और उसे डॉगी स्टाइल में होने को कहा। वो कुछ नहीं बोली और चुप-चाप उठ कर डॉगी स्टाइल में हो गयी। उसने अपना सर तकिये पर टिका दिया।

मैं समझ गया कि वो चुदवाने के लिए एकदम बेकाबू हो रही है। मैं उसके पीछे आ गया। मैंने उसकी चूत को फ़ैला कर अपने लंड का सूपाड़ा उसकी चूत के बीच रख दिया। वो कुछ नहीं बोली।

मैंने अपना लंड थोड़ा सा अंदर दबाया। उसकी चूत बहुत टाइट थी और केवल मेरे लंड का सूपाड़ा ही उसकी चूत के अंदर घुस पाया।

मैंने थोड़ा और दबाया तो वो पहली बार बोली- प्लीज़। ज़रा धीरे।

मैं समझ गया कि वो एक दम जोश में आ गयी है। मैंने अपना लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो वो सिसकारियाँ भरने लगी।

मेरा लंड उसकी चूत में अब तक 2″ घुस चुका था।
मैंने अपना लंड उसकी चूत में धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

उसने भी अपना चूतड़ पीछे की तरफ दबाया और सिसकारियाँ भरने लगी, उफ़फ्फ़… जीत… धीरे… प्लीज़। दर्द हो रहाआ है… उईए… म्माआआआ… आआआहह… रुक्कक… जाओ…
मैं रुक गया।

वो बोली- जीतू, मैं पहली बार करवा रही हू। ज़रा आराम से धीरे धीरे करो। बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- तुम घबराओ मत। मैं धीरे धीरे और आराम से ही करूँगा। मैं जानता हूँ कि तुम अभी तक कुँवारी हो और तुम्हारी चूत एक दम टाइट है।

मैंने धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

छः सात मिनट तक चोदने के बाद उसे भी और ज़्यादा मज़ा आने लगा। वो बोली- जीतू, तुम अपना लंड थोड़ा सा और अंदर डाल दो। मैं तैयार हूँ।

मैंने थोड़ा सा और दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 3″ तक घुस गया।
वो फिर बोली- बस, रुक जाओ प्लीज़। दर्द हो रहा है। अभी इतना ही अंदर डाल कर चोदो मुझे।

उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लंड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी।
मैंने उसे धीरे धीरे चौदना शुरू कर दिया।
दो तीन मिनट में ही उसका दर्द जब कुछ कम हुआ तो उसे मज़ा आने लगा।

वो बोली- थोड़ा और अंदर डाल कर और तेज़ीसे चोदो… मुझे…

मैंने थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 4″ तक घुस गया।
मैं अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए उसे चोदने लगा। वो अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ दे रही थी।

पाँच मिनट तक चोदने के बाद वो बहुत ज्यादा जोश में आ गयी और बोली- जीतू, और अंदर डालो अपना लंड मेरी चूत में। खूब तेज़ चोदो मुझे। अब रुकना नहीं, पूरा लंड अंदर घुसा देना। मैं एक दम बेकाबू हो रही हू और मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

मैंने अपना लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 5″ तक घुस गया। मैंने उसे धीरे धीरे चौदना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर तक चोदने के बाद मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया।
मेरा लंड उसकी चूत में 6′ तक घुस गया।

वो चिल्ला उठी लेकिन उसने मुझे रुकने के लिए नहीं कहा।
मैंने एक फाइनल शॉट लगा दिया तो वो बहुत तेज़ चिल्लाने लगी।

मेरा पूरा लंड उसकी चूत में एकदम ज़ड़ तक घुस चुका था।

वो बोली- जीतू, तुमने आख़िर मुझे आज एक लड़की से औरत बना ही दिया। मैंने अपनी चूत में तुम्हारा पूरा लंड अंदर ले ही लिया। बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा रुक जाओ, तब चौदना।
मैं रुक गया।

थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई तो उसने मुझसे चोदने के लिए कहा। मैंने सोनू की चुदाई शुरू कर दी। पहले बहुत धीरे धीरे उसके बाद मैंने बहुत तेज़ी के साथ चौदना शुरू कर दिया।

5 मिनट तक उसे चुदवाने में थोड़ा दर्द हुआ लेकिन उसके बाद वो एकदम शांत हो गयी और उसे मज़ा आने लगा, उसने अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ देना शुरू कर दिया।

2 मिनट बाद ही वो बोली- और तेज़ चोदो, मेरे जीतू राजा। ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाओ।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बहुत तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा। वो अब अपनी चूत में मेरा पूरा लंड आराम के साथ अंदर ले रही थी।
2 मिनट भी नहीं बीते की वो फिर बोली- जीतू, मुझे कुछ हो रहा है। लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाओ।

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।

वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ

उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया।
मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग 20 मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी 2 बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।

हम दोनो तक गये थे। कुछ देर आराम करने लगे।

15 मिनट बाद वो बोली- जीतू, प्लीज़। एक बार और करो ना। मुझे बहुत अच्छी लग रही थी यह चुदाई।

उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। दस मिनट में ही मेरा लंड एक दम तैयार हो गया।
मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके चूतड़ के नीचे 2 तकिये रख दिए। उसकी चूत एक दम उपर उठ गयी।

मैंने उसकी चूत के बीच जैसे ही अपना लंड रखा तो वो बोली- जीतू, मुझे बहुत मज़ा आया था। इस बार तुम अपना लंड को एक ही धक्के में पूरा अंदर डाल दो।
मैंने अपनी सासें रोक कर अपने को थोड़ा तैयार किया और पूरा ज़ोर लगते हुए एक करारा धक्का मारा। मेरा पूरा लंड सनसंता हुए उसकी चूत में घुस गया। वो बहुत तेज़ चीख पड़ी।

मैंने बिना रुके उसकी चुदाई शुरू कर दी। 2 मिनट में ही वो अपना चूतड़ उठा उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। 5 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गयी। उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और मेरा लंड भी उसकी चूत के पानी से एक दम गीला हो चुका था।

मैं रुका नहीं, उसको चोदता रहा। कमरे में फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी। इस बार मैंने उसे बिना रुके उसको चौदा और उसकी चूत में ही झड़ गया। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकाल देने के बाद मैं हट गया और उसके बगल में ही लेट गया।

वो भी थक कर चूर हो गयी थी और एकदम निढाल हो गयी थी। वो बेड पर ही पड़ी रही। Sex Stories

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