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Xxx लड़की नाईट सेक्स कहानी में पड़ोस की एक लड़की मुझे अच्छी लगी तो मैंने उससे दोस्ती बढ़ाई. गर्मियों में हमारा और उसका परिवार छत पर एक साथ सोते थे.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मोहन है.
मैं एक शादीशुदा लड़का हूँ. मैं सूरत गुजरात का रहने वाला हूँ.
मेरी हाइट पाँच फुट आठ इंच है और मेरे लंड का साइज़ छह इंच है.
मैं देखने में गुड लुकिंग हूँ और ज्यादा मस्ती वाला मिज़ाज़ का हूँ.
वैसे तो मुझे तरह तरह की लड़कियां और भाभी पसंद हैं.
खास कर बड़े मम्मे और बड़ी गांड वाली भाभियां और लड़कियां ज्यादा पसंद आती हैं.
मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ.
अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.
आज मैं अपने साथ हुई एक घटना आपके साथ साझा करना चाहता हूँ.
मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरी Xxx लड़की नाईट सेक्स कहानी पसंद आएगी.
तब मेरी शादी नहीं हुई थी और पढ़ाई खत्म हुए 6 महीने हो चुके थे.
गर्मी की छुट्टियों की बात है.
उन दिनों हम लोग रात को छत पर सोने जाया करते थे.
हमारे वाले अपार्टमेंट में एक लड़की रहती थी.
उसका नाम एकता (बदला हुआ नाम) था.
एकता का फिगर 32-28-34 का था. उसे देख कर लगता था कि बनाने वाले ने बड़ी ही फुरसत से उसे बनाया हो.
क्या मस्त पीस थी यार … देखने में थोड़ी सांवली जरूर थी मगर बहुत सुंदर दिखती थी.
उसके बूब्स बहुत ही जानलेवा थे.
मैं तो उसके दूध देखते ही गदगद हो जाता था.
उसकी हरकतों से लगता था कि साली चूत में बहुत गर्मी भरी थी.
वह भी अपने परिवार के साथ छत पर सोने आया करती थी.
एकता हमारे बाजू वाले फ्लैट में किराये पर रहने आई थी.
वे लोग नए नए आए थे, तो हम लोग उनसे ज्यादा बात नहीं करते थे.
कुछ दिन तक मैंने उसे देखा तो वह भी मेरी तरफ देखने लगी थी.
कुछ दिन तक यूं हम दोनों एक दूसरे को बस देख कर हल्की सी स्माईल देकर घूम जाते थे.
वह देखने में तो सीधी सादी लग रही थी पर ऐसे किसी को कैसे समझा जा सकता था.
कुछ ही दिनों में कुछ ऐसा हुआ कि मैं उससे बात करने के लिए तड़पने लगा था.
मैंने बहुत हिम्मत जुटा कर जैसे तैसे उससे बात करने की कोशिश की.
वह भी सहज भाव से मुझसे बात करने लगी.
अब धीरे धीरे हम लोगों की दोस्ती हो गई और बातचीत भी होने लगी.
हम दोनों अब जब भी छत पर एक दूसरे को देखते तो थोड़ा मस्ती मजाक भी कर लिया करते थे.
जैसा कि मैंने बताया कि यह गर्मी के दिनों की बात है. उन दिनों हम लोग छत पर सोने जाया करते थे.
हमारी बिल्डिंग के कई सारे लोग सोने के लिए छत पर आ जाते थे.
उसमें एकता, उसके माता पिता और उसका छोटा भाई भी सब लोग सोने के लिए छत पर आ जाया करते थे.
हम दोनों में पहले से ही बोलने का व्यवहार था, तो हम लोग सोने से पहले थोड़ी बहुत बात कर लिया करते थे.
थोड़ी मस्ती मजाक भी कर लिया करते थे और सो जाते थे.
धीरे धीरे हम लोग और करीब आने लगे थे.
वह भी मेरे साथ बात करने का कोई ना कोई बहाना ढूंढ़ती रहती थी और मैं भी उससे बात करने का कोई न कोई बहाना ढूंढता रहता था.
हम दोनों जहां पर सोते थे, वह जगह पानी की टंकी की आड़ में थी.
मेरे बाजू में ही एकता का बिस्तर लगता था.
हम दोनों सोने से पहले मोबाइल में लूडो खेलते थे.
खेल में एकता, उसका छोटा भाई और मैं … हम तीनों खेलते थे.
खेलने के दौरान मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छूने की कोशिश करता रहता था.
वह भी समझती थी, तो मेरे स्पर्श का मजा लेती थी.
एक दिन उसका छोटा भाई अपनी छुट्टियां बिताने के लिए अपने मामा के घर गया था.
उसके मामा का घर गांव में था.
उसी वजह से आज मैं और एकता अकेले थे.
रोज की तरह हम दोनों ने लूडो खेलना चालू किया.
आपको तो पता ही है कि मुझे जो चाहिए था, वह मुझे मिलने वाला था.
अन्दर ही अन्दर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे थे.
आज एकता भी कुछ अलग सा व्यवहार कर रही थी.
पता नहीं क्यों आज उसके चाल चलन भी कुछ ठीक नहीं लग रहे थे.
रोज की तरह हम दोनों ने लूडो खेलना चालू किया.
आज हम दो ही थे.
हम दोनों ने थोड़ी देर तक लूडो खेला.
मगर पता नहीं क्यों, आज हम दोनों को खेलने में मजा नहीं आ रहा था.
एकता भी आज कुछ अजीब सी हरकत कर रही थी.
आज उसने एकदम छोटी वाली सॉर्टी और गंजी ही पहन रखी थी.
उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी, वह साफ साफ समझ आ रहा था.
उसके निप्पल उसकी गंजी से कड़क से साफ दिख रहे थे.
मेरी नजरें उसके नट्स पर ही टिकी थीं.
वह भी मेरी नजरों को भांप कर बार बार अपनी चूचियों को सहला रही थी.
आज वह मुझे इतना भाव दे रही थी कि साफ लग रहा था कि आज टांगें खोलने के लिए एकदम राजी है.
उसने मुझसे आज तक ऐसे कभी बर्ताव नहीं किया था.
वह बार बार पूरी नीचे झुक कर अपने गोल गोल संतरे मुझे दिखा रही थी.
आज उसका खेलने में जरा सा भी ध्यान नहीं था; वह कुछ और खेलना चाहती थी.
बात बात में वह मेरा हाथ भी पकड़ ले रही थी और जोर से मेरे हाथ पर च्यूँटी काट देती थी.
फिर बड़े प्यार से मेरे हाथ में किस कर देती थी.
थोड़ी देर बाद मुझे भी पता चल गया कि आज इसे क्या चाहिए है.
हम दोनों ने आज बहुत देर तक ऐसा किया.
हमारा खेल तो बस एक बहाना था. हमें तो कुछ और ही खेलना था.
मगर करें तो करें क्या … कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि शुरुआत कैसे करें.
उसकी हरकतें देख कर मेरा लंड भी तन कर तंबू बना चुका था.
वह एकता को भी मालूम पड़ गया था.
पूरी छत में सब लोग सोये हुए थे.
एकता के मम्मी पापा भी उसके बाजू में ही सोये हुए थे.
बहुत देर हो गई थी तो उसके पापा ने उसको सो जाने का बोला.
हम दोनों लेट गए मगर पूरी रात नींद नहीं आयी. हम दोनों अपनी अपनी जगह पर सो गए.
सोते सोते एक दूसरे को देखा रहे थे और इशारों में बात कर रहे थे.
उस वक्त रात के लगभग दो बज रहे होंगे.
मैंने उसे इशारा करते हुए कहा कि नीचे चलो.
वह आजू बाजू देख कर तुरंत वॉशरूम के बहाने नीचे चली गई.
थोड़ी देर बाद मैं भी अपने तकिया को चादर उढ़ा कर उठ गया और वॉशरूम के बहाने उसके पीछे पीछे नीचे आ गया.
वह नीचे भूखी कुतिया की तरह मेरा सीढ़ियों पर ही इंतज़ार कर रही थी.
हमारे अपार्टमेंट में कोई लिफ्ट नहीं है केवल सीढ़ियां ही हैं.
एकता सीढ़ियों के बीच बनी बाल्कनी में मेरा इंतजार कर रही थी.
मैं नीचे आया तो उसने मुझे इशारे से अपनी ओर बुलाया.
तो मैं झट से उसके पास पहुंच गया.
अब मैं बाल्कनी में जाकर खड़ा हो गया और चारों ओर देखा कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है.
बाद में वह मेरे पास आई.
उसने हल्के से मेरे गाल पर पप्पी दी और उसने कहा- आज मुझे तुमसे चुदवाना है!
बस फिर क्या था … मैं भी सालों से चूत का भूखा उसको अपनी बांहों में कसके पकड़ लिया और जोर जोर से उसके होंठों को अपने होंठों से रगड़ने लगा.
वह भी इतनी गर्म हो चुकी थी कि वह भी मेरा जोर जोर से साथ दे रही थी.
थोड़ी देर बाद उसने मेरे सर के बाल पकड़ लिए और मेरा मुँह अपने मम्मों पर रख कर बोली- चूसो.
मैं उसके मम्मों को जोर जोर से चूसने का मजा लेने लगा.
लगभग बीस मिनट तक हम लोग यूं ही चुम्मा-चाटी ही करते रहे.
उस वक्त एकता ने चूंकि ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी तो मैंने झट से उसकी छोटी सी टी-शर्ट उठा कर ऊपर कर दी और उसकी शॉर्टी को भी सरका कर नीचे कर दी.
हम दोनों को यह सब करते हुए बहुत डर लग रहा था कि कहीं कोई आ न जाए.
इसी लिए हम दोनों ने पूरे कपड़े नहीं उतारे थे.
मैंने भी छोटा सा बॉक्सर पहन रखा था, उसे भी मैंने नीचे सरकाने का इशारा किया.
उसने भी झट से मेरा बॉक्सर नीचे कर दिया और बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी.
साली ने लंड को लॉलीपॉप समझ लिया था. वह लौड़े को मुँह से रगड़ रही थी.
मुझे तो ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ.
वह एकदम अनुभवी रांड सी लग रही थी.
साली जैसे कई सालों से किसी का लंड मुँह में लेती आई हो.
खैर मुझे इससे क्या … मुझे तो आनन्द मिल रहा था, तो मैं क्यों ज्यादा सोचूं.
वैसे भी किसी ने सही कहा है, आम खाओ गुठलियां मत गिनो.
मैं भी आनन्द ले रहा था और वह मेरा लंड रगड़ रगड़ कर चूस रही थी.
मेरा छूटने वाला था, तो मैंने उसे बताया कि मैं छूटने वाला हूँ.
वह इशारे से बोली- कोई बात नहीं … मेरे मुँह में ही छोड़ दो.
क्या गजब मजा आ रहा था, सच बोलूँ तो आज तक किसी भी लड़की को मैंने मुँह में नहीं दिया था.
आज तो मानो जन्नत की सैर पर ही था.
ऐसा अहसास हो रहा था.
थोड़ी देर तक लॉलीपॉप चुसवाने के बाद मैंने उसे पलट कर खड़े होने को बोला और चारों ओर देखा कि कोई आ तो नहीं रहा है.
सब तसल्ली करने के बाद उसे दीवार पकड़कर खड़े होने को कहा.
वह पलट कर खड़ी हो गई.
बाद में उसके पीछे से डालने की कोशिश की, मगर उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मैं पीछे से लंड पेल ही नहीं पाया.
यह बाद में समझ में आया कि चुदी चुदाई चूत को ही पीछे से पेलना आसान होता है.
पहली बार में तो चित लिटा कर ही चुदाई संभव है.
उसके बाद मैंने उसे बाल्कनी की दीवाल पर बिठाया और धीरे से अपने लंड का सुपारा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा.
उसकी चूत गीली हो गई थी और लंड लीलने को खुल गई थी.
थोड़ी देर बाद मैंने हल्का सा झटका दिया, तो मेरा आधा लंड अन्दर चला गया.
वह दर्द के मारे एकदम से तड़प उठी और मुझसे छूटने की कोशिश करती हुई माँ बहन की गालियां देने लगी.
मगर मैंने उसके मुँह पर हाथ रख कर उसे जकड़ लिया था.
वरना उसकी चीख से सब लोग उठ जाते और इज्जत की कायदे से माँ चुद जाती.
बाद में थोड़ी देर तक मैं उसको चूमता रहा.
उसका दर्द कम हो गया था.
मैंने एक और जोर का झटका दिया तो मेरा पूरा लंड अन्दर घुस गया था.
वह फिर से तड़प उठी.
मैंने वैसे ही बिना हिले उसकी चूत में लंड घुसा रहने दिया और उसके मम्मों से खेलना चालू कर दिया.
उसकी आह निकलना बंद हुई तो मैंने उसके होंठों को चूसना चालू कर दिया.
मैं उससे इधर उधर की बातें करने लगा ताकि उसका दर्द से ध्यान भटक जाए.
थोड़ी देर बाद मैं लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
उसका भी दर्द कम हो गया था और Xxx लड़की नाईट सेक्स का मजा लेने लगी थी.
जैसे जैसे वक्त निकलता गया, वैसे वैसे मैं अपनी स्पीड बढ़ाता गया.
वह चुदाई का मजा लेने लगी थी.
तकरीबन 15 मिनट तक हम दोनों ने सेक्स किया.
बाद में मैंने उसे पलट कर दीवार को पकड़कर खड़े होने को कहा.
मगर उसने साफ साफ मना कर दिया कि मैं पीछे से नहीं करने दूंगी.
बहुत मनाने के बाद उसने पीछे से करवाने का मन बनाया.
उसके बाद जैसे ही वह गांड खोल कर खड़ी हुई, मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया.
वह डर के मारे घूम गई.
बहुत समझाने के बाद वह वापस घूमकर खड़ी हुई. इस बार जरा सी भी देर किए बिना मैंने अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया.
जैसे ही लंड पेला, तो उसे बहुत ज्यादा दर्द होने लगा था. वह दर्द सह रही थी और उसकी आंखों से पानी निकलने लगा था.
आज मैं उस पर तरस खाता, तो वापस ये मौका कभी नहीं आता.
जैसे तैसे मैंने उसको शांत किया और लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
एकता के मुँह पर दर्द साफ दिखाई दे रहा था मगर वह भी मजे ले रही थी और मेरा साथ भी दे रही थी.
कुछ पल बाद मुझे ख्याल आया कि एकता को छोड़ दूँ.
जैसे ही मैं उसको छोड़ने लगा तो उसके चेहरे पर उदासी छा गई.
मैं समझ गया कि वह भी दर्द होने का नाटक कर रही है, इतना हार्ड सेक्स करके अब उसे भी मजा आ रहा है.
बस फिर क्या … मुझे जो चाहिए था उसकी हरी झंडी मिल गई थी तो मैं किसी की भी सुनने वाला नहीं था.
मैं और जोर जोर से उसे चोदने लगा.
सच कहूँ तो पीछे से चोदने में जो मजा आता है, वह किसी भी स्टाइल में नहीं आता है.
वह चिल्लाना चाहती थी मगर सब लोगों के जागने के डर की वजह से वह अन्दर ही अन्दर चिल्ला रही थी और तेज तेज चोदने का कह रही थी.
मैंने स्पीड बढ़ा दी थी और जोर जोर से झटके दे रहा था.
वह सेक्स के दौरान दो बार झड़ चुकी थी.
अब मैं झड़ने ही वाला था इसलिए मैंने उसके दोनों चूचे पकड़ कर अपनी स्पीड और बढ़ा दी.
उसे भी चूत में बहुत दर्द हो रहा था, मगर क्या करे … चिल्ला भी नहीं पा रही थी.
मैं उसकी चूत में ही झड़ गया. तब जाकर उसने सुकून की साँस ली.
मैंने उसे अपनी बांहों में कसके पकड़ लिया और उसने भी मुझे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे की बांहों में खड़े रहे.
जैसे ही उसने मेरी तरफ देखा तो लगा कि वह आज मेरी जान ही लेकर मानेगी.
मैंने उसके माथे पर किस की और हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर छत पर आ गए.
उधर हम अपनी अपनी जगह सो गए.
दूसरे दिन सुबह एकता जब मेरे सामने आई तो मैंने देखा कि वह थोड़ी लंगड़ा कर चल रही थी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह इतराते हुए बोली- एक कुत्ते ने जबरदस्ती काट लिया.
मैं अन्दर ही अन्दर हंसने लगा और वह Xxx लड़की लंगड़ाती हुई चली गई.
फिर उसके बाद हम दोनों ने कई बार सेक्स किया.
सब लोगों को मंगू जी का Sex Stories प्रणाम ! मैं अपनी कहानी बता रहा हूँ। मैंने अपनी अड़तालीस साल की उम्र में ऐसा अनुभव नहीं किया था।
मैं अपने काम के सिलसिले में अहमदाबाद गया था और वहाँ से लौटते वक्त की बात है, ट्रेन में बहुत भीड़ थी और मुझे ऊपर वाली सीट पर बैठने की जगह मिली। गुजरात छूटने पर ट्रेन में भीड़ कम हुई और मैं ऊपर ही लेट गया। न जाने कब वसई आया और ट्रेन में कुछ लोग चढ़े ! एक यू पी वाले भाई ऊपर आकर मेरे बाजू में बैठ गए। तब तक ठीक था। मैं निद्रा की अवस्था में था और उस व्यक्ति ने अपना हाथ का पंजा मेरी जांघ पर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता मेरे लौड़े की तरफ बढ़ाया। रात का समय था, लोग पूरी तरह सो चुके थे और भीड़ भी कम हुई थी। मैं थोड़ा सा सिकुड़ गया तो उसने हाथ से इशारा किया कि कोई बात नहीं, पड़े रहो !
मैंने वैसा ही किया तो उसने सहलाना और तेज कर दिया। मैंने अपनी 48 साल की उम्र में ऐसा अनुभव नहीं किया था, क्या बताऊँ, अच्छा भी लग रहा था और थोड़ी हिचकिचाहट भी हुई। वह समझ गया कि क्या करना है। उसने मुस्कुराते हुए देखा और इशारे से कहा- पड़े रहो ! मज़ा आएगा !
और सही कहूँ तो वो था तो अच्छा अनुभव ! एक पुरुष मेरे लौड़े से इस तरह खेले, यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। मैं मन ही मन में मचलने लगा और सोचा कि कब वह मेरा लौड़ा मुँह में ले ले ! वह व्यक्ति बड़ा समझदार था, उसने मेरी पैंट की चेन खोल दी और देख कर दंग ही रह गया, कहा- अबे गांडू ! ऐसा लौड़ा क्यों हमसे छुपाते हो ? कैसा धनुष की तरह है (दोस्तों मेरा लौड़ा थोड़ा टेढ़ा है !) मुझे आज सही मज़ा आएगा ! कहते हुए धीरे से मुँह में लिया और लॉलीपॉप की तरह बड़े मजे से चाटता रहा और मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी।
मैंने पूरे मज़े लेना चाहा और उसके कानो में कहा- अरे, कोई सुनसान डिब्बा देख कर आओ !
और उसने बड़ी समझदारी दिखाई और थोड़ी ही देर में आकर कहा- चलो व्यवस्था हो गई है।
हकीकत में उसने टी टी को पटाया था और हम लोग फर्स्ट क्लास के डिब्बे में बंद कमरे में पहुँच गए। मै बड़ा खुश हुआ, सोचा, आज तक किसी ने मेरी गांड नहीं मारी थी और आज यह भी सपना पूरा होगा। मेरे हाथ-पैर गर्म हो गए। मैं चाहता था कि वो मुझे पूरे सफ़र में चाटता रहे। उसने मुझे सही तरीके से लेटने के लिए कहा और मैंने पूरी तैयारी के साथ वैसा ही किया। उसने मेरे पूरे कपड़े एक ही झटके में निकाल दिए और मेरा पूरा बदन औरतों के जैसे चाटने लगा। क्या कहूँ लिखते वक्त भी रोम रोम मचलता है।
सच कहूँ, ऐसा रोज़ हो ! क्या करूँ, कोई सामने से प्रस्ताव तो रखे, मैं तैयार हूँ !
ओ के !
तो उसके मुझे चाट लेने के बाद मैं चाहता था कि जल्दी से वह नंगा हो जाए और मुझे भी उसका लौड़ा भी चूसने दे पर वह बड़ा चालाक था, उसे मुझसे पहले मज़ा करना था, मैंने भी फिर थोड़ी सी नाराजगी के साथ कहा- बस आप मुझे कुछ नहीं दोगे तो मैं चला अपनी सीट पर !
फिर क्या था, उसने भी एक ही झटके में कपड़े उतार दिए और कहा- लो हम तुम्हारे हवाले हो रहे हैं मेरे लंड मास्टर !
उसका लौड़ा नुकीली पेंसिल की तरह था। फिर हम 69 की पोजीशन में हो गए। मैं उसका और वह मेरा लौड़ा चूसने लगे। दस मिनट के बाद उसने कहा- चलो, अब गांड मारने की शुरुआत करें !
मैं तैयार था, उसने तुरंत मुँह फेरा और कहा- पहले तुम मेरी गांड मारो !
मैंने कहा- नहीं पहले मेरी मारो !
तब उसने कहा- नहीं, शुरुआत मैंने की है तो मेरा पहला नंबर !
फिर क्या करता ? गांड मारने के पहले मैंने उसके निपल दबा दिए तो वह ख़ुशी से झूम उठा, कहा- अरे यार तुम तो गांड मारने के मास्टर बनोगे ! यह सब कहाँ से सीखा ?
मैंने कहा- बस यूं ही दिल हुआ !
तो उसने तेजी से मुँह पलट कर मेरे निपल मुँह में लिए और औरतों के निपल की तरह मेरे निपल से खेलने लगा और मेरे निपल एकदम कड़क हो गए। मैं और रोमांचित हुआ और लगा बस यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे। उसने झटके से मुँह पलटा- अरे यार गांड तड़प रही है, जल्दी से गांड में अपना लौड़ा डाल दो ! मेरी गांड में अब सहन नहीं होती यह दूरी !
उसने मुझे क्रीम दी और कहा- अपने लौड़े पर लगाओ और उंगली से मेरी गांड के अंदर भी लगाओ !
मैंने क्रीम लगा दी और उसे घोड़े की मुद्रा में करके जीवन का पहला अनुभव लेते हुए उसकी गांड में लौड़ा एक ही पल में घुसेड़ दिया। वह कराह उठा, कहा- यार, गांड मारनी भी नहीं आती ?
क्योंकि गांड मारने का अनुभव जो नहीं था।
उसने कहा- तेरा लौड़ा कितना कमनसीब है, चल अब डाल आहिस्ता से !
मैंने वैसे ही किया। थोड़ी देर मशक्कत करने के बाद मुझे समझ में आया कि कैसे गांड मारनी है। मैंने ऐसी मस्त गांड मारी कि वह बहुत खुश हुआ, कहा- यार, तू भी सीख गया है ना?
मैंने खुशी से हाँ कहा। न जाने मैं क्यों उतावला हो रहा था अपनी गांड मरवाने के लिए ! अपने जीवन में बहुत बार लोगों को गांड मारने वाली गाली देते हुए सुना था और आज सचमुच में ऐसा मस्त पेंसिल की नोक वाला लौड़ा मेरी गांड मारेगा, मैं बहुत उतावला हो रहा था।
वो बड़ी देर मेरे लौड़े से खेला और उसे देख कर बोला- यार ऐसा लौड़ा नसीब वालों को मिलता है।
यह कहकर दोबारा मुँह में डाल दिया और बड़ी इज्जत से गोलियों को चूसने लगा। फिर उसने कहा- अब मैं तुझे नहीं तड़फ़ाऊंगा।
उसने मुझे पलटने को कहा। मैंने घोड़े का पोज़ लिया, वह बड़ा खुश हुआ, मेरा मुँह डिब्बे की खिड़की की तरफ था और मैं तैयार था उसको चढ़वाने के लिए, यू पी वाला तो बस मेरी गांड मारने के लिए बेताब था।
उसने बिना क्रीम लगाये गांड में लौड़ा घुसेड़ना चालू किया। मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था।
उसने कहा- नए लोगो को क्रीम लगाए बिना गांड मरवानी चाहिए ! इससे गांड को आदत हो जाती है मरवाने के लिए !
और उसने पूरा लौड़ा घुसेड़ दिया और चालू कर दी उसने अपने लौड़े की रेलगाड़ी। बड़ा मज़ा आने लगा। वह गांडू इस कदर मेरी गांड मार रहा था जैसे कितने साल से भूखा था, मगर उसका पानी नहीं छुट रहा था। करीब बीस मिनट से मैं उससे चुद रहा था और फिर उसने मेरी गांड में पूरा पानी छोड़ दिया।
तभी दरवाज़ा खुला, मैं और वो एकदम चौंक गए क्योंकि दरवाज़े पर एक मस्त औरत खड़ी थी और हमारा खेल देख रही थी।
उसने कहा- यह क्या चल रहा है?
आगे की कहानी दूसरे भाग में पढ़िए। Sex Stories
बेटी को धन की सुख देने के लिए मेरी Antarvasna बाप ने मेरी शादी एक ५० बरस के मर्द के साथ कर दी. मेरे पति की मुझसे उनकी दूसरी शादी थी. पहली की मौत हो चुकी थी. उनका एक लड़की थी जिसकी शादी हो चुकी थी. शादी के पहले मुझे उनके और परिवार के बारे मे अधिक जानकारी नही थी.
सुहाग रात मे मैं उनको देखकर हैरान रह गई. वे देखने मे ही बहुत कमज़ोर दिख रहे थे. मेरी उमर उस समय सिर्फ़ १८ बरस थी. वे आते ही दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरी बगल मे बैठ गए. वे मुझे पकड़ कर चूमा लेने लगे. कुछ् इधर उधर के बाते करने के बाद वे मेरी ब्लाउज खोल दिए. मैं ब्रा पहन रखी थी. कुछ देर उपर से ही सहालाने के बाद ब्रा भी खोल दिए. उसके बाद मेरी चुची को चूसने लगे. मुझे अब अच्छा लगने लगा था.
मैने धीरे से अपनी हाथ उनके लंड तरफ़ बढ़ाया. अभी तक कुछ भी नही हुआ था. वे अपने कपड़े खोल दिए और सहालाने के लिए बोलने लगे. मैने भी कुछ देर तक हाथ से सहलाती रही. खड़ा नही होने पर मुख मे खाने के लिए कहने लगे. क़रीब १० मिनट के बाद भी जब नही खड़ा हो पाया तो मैं निराश हो गई. उनके लंड मे नाम मात्र का ही कडापन आया था. अब वे मेरी साडी खोल दिए और अपने मुरझाए हुए लंड से मेरी बुर रगड़ने लगे. मैं तो उनके लंड के तैयार होने का इंतज़ार कर री थी. वे मेरी बुर को अब जीभ से चूसने लगे. अभी भी उनका लंड बहुत नरम था. मैं मन ही मन अपने को कोसती रही और बाप को शराप्ती रही. वे मेरी बुर चूसने मे और मैं उनका लंड चूसने मे मशगुल थी. मुझे अब सह पाना मुश्किल था. जैसा था वैसा ही मैंने उनको चोदने के लिए कहने लगी. वे अपना नरम नरम लंड मेरी गरम गरम बुर मे प्रवेश करने लगे .मगर प्रवेश करने से पहले ही वे गिर गाये.मैं तड़पती रह गई . मैं सोचने लगी कि पहले रात के चलते ऐसे होगया. मैं चुप चाप रह गई. वे भी ऐसे ही कह रहे थे.
दूसरी रात भी मैंने बहुत कोशिश की मगर सब बेकार गया. इसी तरह महीनो बीत गाये. मैं जब भी बिस्तर पर तडपती रही. मेरी बड़ी बहन जीजाजी के साथ तबादला होकर उसी शाहर मे आ गयी. एक दिन मेरी बहन मुझसे मिलने मेरी घर पर आ गई. वे मेरा हाल ख़बर पूछने लगी. मैं चुप हो गई. जब वे ज़िद करने लगी तो मुझे सबकुझ बताना ही पड़ा. वे निराश हो गई और कुछ सोचने लगी. मैंने पूछने लगी तुम कैसी हो. जीजाजी कैसे हैं. वे कह रही थी की तुम्हारे जीजाजी तो बहुत तगडे है. वे मुझे बहुत मज्जे देते हैं. मान ही मान मैं इर्ष्या करने लगी .वे बोलने लगी की मैं कल तक कुछ सोचती हू. कल १२ बजे मेरी घर आजाना. वही पैर बैठ कर बाते करेंगे. मुझे कुछ आशा दिखाई देने लगी.
सुबह होते ही मैं जल्दी जल्दी काम निपटा कर तैयार हो गाई. ठीक १२ बजे मैं दीदी के घर पहौच गई. वे मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. वे मुझे अपने बेड रूम मे ले गई .दीदी अपने रूम मे टीवी चला रही थी. वे बोलने लगी की तुम कुछ देर तक वीडियो देखो मैं काम निपटा कर आती हूँ. एक सीडी वही पर रखा हुआ था जिसपर लिखा हुआ था हम दोनो. मैंने उसी सीडी को लगा कर देखने लगी. सीडी देखते ही मैं घबरा गई और दरवाज़े की तरफ़ देखी. दीदी बाथरूम मे थी. मुझे और अधिक देखने का इच्छा जागृत होगई. इस सीडी मे तो जीजाजी और दीदी का रंगीन खेल भरा हुआ था. जीजाजी का लंड तो देखते ही बनता था. लग रहा था की दीदी बहुत रोएगी .मगर वा तो मज़े ले रही थी. मैं सोचने लगी काश मुझे कोई ऐसे चोदने वाला मिलता.
उसी समय दीदी अंदर आ गई और कहने लगी तुम को यह कैसा लग रहा है. मैंने सीडी बंद करदी. उसी समय जीजाजी भी आगये. मुझे देखते ही वे मुस्कुरा दिए. दीदी कहने लगी अरे साली तरफ़ भी तो देखो. वह बेचारी शादी होने के बाद भी कुँवारी है. दीदी कहने लगी आज तुम्हारे जीजाजी को तुम्हारे लिए ही मैंने बुलाया है . कल तुमसे मिलने के बाद मैने इनको सब कुछ बता दिया था. दीदी कहने लगी अब तुम लोग अपना काम करो मैं बाहर देखती हूँ. जीजाजी कह रहे थे तुम तो बहुत सेक्सी लगती हो. तुम्हारे स्तन तो काफ़ी बड़े है और वे दीदी के जाने के बाद बिना रूम बंद किए ही मेरी स्तन दबाने लगे.वह कह रहे थे की जब तुम्हारे दीदी ही है तो उससे छिपाना क्या. ऐसे तो साली तो आधी घर वाली होती ही हैं. लेकिन मैं तुम्हारे इच्छा के बिपरीत कुछ नही करूँगा.
मैं चुप चाप थी. मैं सोचने लगी की कही वे चले ना जाए. इससे अच्छा मौक़ा अब नही आने वाला मैं मुसकुराने लगी.जीजाजी समझ गए की मैं सहमत हू. वे अब मेरा ब्लोउज और ब्रा खोल दिए . मेरे चुचि को मसलने लगे . मैं भी अब सहयोग करने लगी थी. जीजाजी के लॅंड का उभार अब पैंट पैर दिखाई देने लगा था. मैंने उनका पैंट पैर हाथ डाला तो वे पैंट खोल दिए. अब उनका लॅंड बाहर निकल चुका था. मैं अपने हाथ से उनके लॅंड को सहालाने लगी. अपने पति का लॅंड से जीजाजी का लॅंड को तुलना कर रही थी. मन ही मन मैं सोचने लगी की मेरी दीदी कितनी लॅकी है की उसे ऐसे लॅंड वाला पति मिला है. कुच्छ देर तक मैं उनके लॅंड को देखती रही. इतने मे जीजा जी कहने लगे कैसा है मेरा हथियार. तुम्हारे पति का कैसा हैं. मैं कहने लगी, जीजाजी उनका तो खडा ही नही होता हैं. मैं महीनो से तरप रही हू. आपका लॅंड तो काफ़ी मोटा और बड़ा है. दीदी को तो बहुत दुखता होगा. उसी समय दीदी आगई. बोलने लगी अरे केवल देखते ही रहोगी.
मैं बोलने लगी दीदी इनका तो बहुत मोटा है, मैं नही सह पाऊँगी. दीदी कहने लगी हा, मोटा तो है लेकिन सहना ही पड़ेगा. पहली बार मुझे भी बहुत दर्द हुआ था. लेकिन अब तो मजा आता है. जीजाजी को दीदी कहने लग
बेचारी तुम्हारा घोड़ लॅंड देख कर डर गई है. मेरे बहन को मत रूलाना. बेचारी अभी तक तो कुँवारी जैसे ही तो है.इतन कह कर वा फिर चली गई. जीजाजी अब मेरी साड़ी और पेटी कोट भी खोल दिए .वे मेरे बुर को चटने लगे. मुझे बेड पैर सूता दिए और अपना लॅंड मेरे बुर मे डाल कर चूसने के लिए कहने लगे. वे मेर उपर चढ़े हुये थे . अपनी जीभ से मेरी टिट चाट रहे थे. मुझे काफ़ी मजा आरहा था. मैंने भी दोनो हाथो से उनका सिर पाकर कर दबाने लगा. ज़ोर ज़ोर से लॅंड चूसने के लिए कह रहे थे. उनका लॅंड का स्वाद लेने मे मुझे भी मजा आरहा था.
इतने ही मे अपना पूरा लॅंड मुख मे अंदर तक धकेलने लगे. मुझे तो पहली बार इतना तगड़ा लॅंड मिला था. मैं मज़े से उनका लॅंड चुस रही थी और जीजाजी मेरे बुर चुस रहे थे. उसी समय मुख मे गरम गरम और नमकीन टेस्ट आने लगा. वे और ज़ोर से लॅंड अंदर किए. मुझे तो मजे का स्वाद आ रहा था. कुछ देर तक और चूसती रही. वे बाहर लिए और बाथरूम मे चले गए. बाथ रूम से आने के बाद वे फिर मुझसे अपना लॅंड सहलवाने लगे. क़रीब ५ मिनट के बाद वे फिर तैयार होगए. जीजा जी का लॅंड फिर से पहले जैसे ही कठोर और मोटा होचुका था. इस बार वे मुझे पट सूता दिए. मेरे गाड़ मे थोडा थूक लगाए और एक अंगुली घुसा कर बाहर भीतर करने लगे. मैंने कहने लगी जीजाजी इसमे भी करोगे क्या. इसमे तो नही सहा जायगा. आज बुर मे ही कर लो. फिर कभी इसमे. जीजाजी नही माने और कहने लगे गाड़ लिए बिना मैं तुम्हारा बुर नही लूंगा. अगर मेरा शर्त मंज़ूर है तो बोलो नही तो छोड़ देता हूँ. मुझे तो आज चुदाई का भरपूर मजा लेना था. मैं चुप रही. मैं मुसकूरा दी और कहने लगी आप बहुत बदमश हो, आज मैं सब कुछ सहने को तैयार हूँ. जीजाजी Antarvasna
हेल्लो दोस्तो,मैं पिछले Hindi Sex Stories कई दिनों से अन्तर्वासना में कहानियाँ पढ़ता रहता हूँ। मुझे बहुत सी कहानियाँ अच्छी लगती हैं कुछ तो मुझे ठीक भी नहीं लगती हैं।
ये सब छोड़ो हम आते हैं अपनी बात पर !
आज मैंने भी सोचा कि क्यूँ न मैं भी एक कहानी लिखकर भेजूँ…मतलब अपना अनुभव…
इसीलिए दोस्तों मैं पहली बार अपनी ओर से कहानी भेज रहा हूँ उम्मीद है कि आप लोगों को पसंद आएगी !
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं 23 साल का हट्टा कट्टा लौंडा हूँ कद 5’7′ है और दिखने न ही सलमान खान हूँ और न ही नाना पाटेकर मतलब आप लोग समझ ही गए होंगे कि मैं एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का हूँ।
चलो हम कहानी पर आते हैं_
बात उन दिनों की है जब मैं होस्टल में पढ़ता था। हमारा स्कूल लड़के लड़कियों का था, सभी लोग होस्टल में रहते थे। जब मैं दसवीं कक्षा में प्रवेश किया तब हमें काम से बाहर जाना पड़ा मतलब दूसरे स्कूल में। वहां भी ऐसा ही सिस्टम था।
वहां एक हिन्दी की मैडम थी, बहुत ही सेक्सी थी। उसे मैं जब भी देखता था तो बस ऐसा लगता था कि बस ये मिल जाए…तो जिंदगी सँवर जाए… एक दिन लंच के बाद मैं मैडम के घर गया क्योंकि मुझे उनसे कुछ पूछना था।
मैंने दरवाजा खटखटाया लेकिन अन्दर से कोई जवाब नहीं मिला और दरवाजा खुला था तो मैं अन्दर चला गया उस समय वो नहा रही थी। मैंने कहा की मैडम मुझे कुछ पूछना है तो उसने कहा कि बैठो मैं अभी आती हूँ।
फ़िर मैं बैठ गया वो अन्दर आई और कहा- हाँ अब बोलो !
मैंने कहा कि मैडम मुझे कुछ समझ आ नहीं रहा है क्या आप मेरी मदद करेगी?
वो उस समय तौलिये में ही थी ..बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
फ़िर उन्होंने कहा- चाय पियोगे?
मैंने कहा- ठीक है !
हम लोग हमारी बात करने लगे मैंने कहा- मैम आपकी शादी हो गई क्या?
उन्होंने कहा- हाँ शादी हुए 2 साल हो गए हैं।
मैंने कहा- फ़िर आप अकेली तो उन्होंने कहा कि मेरे पति मैं पसंद नहीं हूँ क्योंकि मैं उनको बच्चा नहीं दे सकती ना और वो रोने लगी।
मैंने कहा- नहीं मैडम आप तो इतनी सुंदर है बिल्कुल परी जैसी आप से तो कोई भी शादी कर सकता है…
फ़िर उसने कहा कि नहीं ऐसा नहीं है सभी को बच्चे की चाहत रहती है… और वो और ज्यादा रोने लगी मैंने उन्हें बाहों में ले लिया और पीठ सहलाने लगा…फ़िर धीरे वो भी गर्म होने लगी उनको छूते ही मेरा सामान एक्शन में आ गया। बस फ़िर क्या था मैंने उनके गले में किस करना शुरू कर दिया इस पर उन्होंने कहा कि क्या कर रहे हो?
फ़िर मैंने कहा कि कुछ मत कहो बस करने दो, बहुत दिनों से तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ…
वो भी बोली कि हाँ मैंने तुम्हें क्लास में भी देखा था… तो उसने कहा कि फ़िर देर क्यूँ कर रहे हो, मेरी प्यास को बुझा दो..
मैंने उसका तौलिया निकाल दिया। अन्दर का सीन देखकर तो मैं दंग रह गया क्योंकि अन्दर वो एकदम दूध जैसी सफ़ेद थी फ़िर मैं उसके बूब्स को दबाने लगा… वो सिसकियाँ लेने लगी और बोली और चूसो… आह्ह… आह्ह्ह… उम्म्म… काटो उसको काटो बहुत मजा आ रहा है…तुम कितने अच्छ्हे हो मुझे पहले पता होता तो मैं रोज़ तुम्हे बुला लेती ..
मैंने कहा कि मैं ख़ुद ही आ जाता नाह्ह्ह जानाह्ह …उम् …आह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…
फ़िर उसने मेरे लंड को मुँह में लिया और चूसने लगी…
आज इतना ही ..बाकि आपके उत्तर के बाद और हाँ एक बात और उसने मुझे 3000 भी दिए और बोली कि तुमने मुझे बहुत किया ये रख लो वैसे ये भी कम है जितना मुझे मिला है उसके मुकाबले…और उसके बाद से मैं ऐसे ही नाखुश को खुश करने लगा…सब बताऊंगा लेकिन जवाब के बाद… Hindi Sex Stories
समस्त Antarvasna चूतों को समस्त लंडों की तरफ से सलामी! मेरा नाम अंकुर है दोस्तो!
और मेरा लंड भी कोई ज्यादा बड़ा नहीं है जैसा कि सब लिखते हैं यहाँ पर, मेरा लंड का आकार सामान्य है और आप जानते हैं कि सील जब टूटती है तो कितना दर्द होता है और मेरा लंड ज्यादा बड़ा नहीं है इसलिए शायद लड़कियाँ मुझे ज्यादा पसंद करती हैं अपनी सील तुड़वाने के लिए।
मुझे सील तोड़ने का बहुत ज्यादा अनुभव भी है और शौक भी। मैं पुरानी चूतें तब ही मारता हूँ जब नई नहीं मिलती।
मैं वैसे तो अब तक उन्नीस सीलें तोड़ चुका हूँ पर अब मैं आपको ज्यादा बोर ना करते हुए कहानी पर आता हूँ।
सबसे पहले तो बता दूँ कि यह एक सत्य कथा है क्योंकि मुझे झूठ बोलने से भी और बोलने वालों से भी सख्त नफरत है। यह बात अभी पिछले महीने की है, हमने दिल्ली में एक नया घर खरीदा था।
एक लड़की जिसका नाम हेमा है, हमारे घर के सामने अपने परिवार के साथ रहती है। उम्र कोई होगी 18 के करीब, छोटी छोटी चूचियाँ, पतली कमर, गुलाबी होंठ और चूतड़ तो समझो कयामत।
अभी हमें नए घर में आये हुए चार दिन ही हुए थे। मैने देखा कि वो मेरी तरफ देख रही थी।
मैंने उस दिन उसको पहली बार देखा। बस मेरा तो समझो लंड पूरा अकड़ गया। मन किया कि साली को अभी पटक कर चोद दूँ पर मैं चाहता था कि पहल वही करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा।
मैं बाईस साल का स्मार्ट लड़का हूँ, अच्छी अच्छी लड़कियाँ मरती हैं मेरे ऊपर!
बस उस दिन तो मैं जैसे तैसे ऑफिस चला गया तो वो बाद में मेरे घर आई, मेरी मम्मी से मिली और पूछा कि कहाँ से आये हो? क्या करते हो? और मेरे बारे में भी पूछा।
आपको बता दूँ कि मेरा खुद का व्यापार है क्रॉकरी एक्सपोर्ट का। मैं सुबह 10 बजे ऑफिस जाता हूँ और रात को 8 बजे आता हूँ। शनिवार और रविवार मेरी छुट्टी होती है।
अगले दिन शनिवार था तो वो स्कूल नहीं गई। शायद उसे मम्मी ने बता दिया था कि मैं शनिवार को घर पर ही रहता हूँ।
जब मैं 7 बजे सोकर उठा तो बालकोनी की तरफ आया। देखा कि वो खड़ी थी, मेरी तरफ देखते ही उसने गरदन हिलाकर मुझे नमस्ते किया और मेरी तरफ एक मिनट में आने इशारा करके चली गई।
मैं देखता रहा।
अचानक देखा तो वो मेरे घर पर ही मेरे पीछे खड़ी थी।
अच्छा हुआ कि उस समय मम्मी वहाँ नहीं थी मंदिर चली गई थी।
मैंने उससे पूछा- जी हाँ! बताईये!
तो वो कहने लगी- आप मेरी तरफ देख रहे थे न! तो मैंने सोचा कि जाकर ही मिल लूँ।
मैंने कहा- प्लीज़, आप यहाँ से चली जाओ! कहीं किसी ने देख लिया तो परेशानी हो जाएगी।
वो बोली- ओ के बाबा! चली जाउंगी, तुम क्यों इतना डर रहे हो?
फिर बोली- अच्छा तुम्हारा नाम अंकुर है ना? और तुम बिजनेस करते हो! और तुम्हारी शादी भी नहीं हुई है! अभी तक क्या तुम्हारा शादी करने का मन नहीं करता?
तो मैंने गुस्से से कहा- तुम्हें इससे क्या मतलब?
क्योंकि मुझे डर लग रहा था, अभी चार दिन हुए थे मोहल्ले में आये हुए।
वो बोली- प्लीज़, मेरा एक काम करोगे?
उसकी आँखों में मासूमियत झलक रही थी तो मैं भी पिघल गया और बोला- बोलो, क्या काम है?
तो वो बोली- मैंने सुना है कि आपकी इंग्लिश बहुत अच्छी है लेकिन मेरी बहुत कमजोर है। अगर आप मुझे थोड़ा बहुत पढ़ा दिया करें तो आपका एहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।
मैंने कहा- इसमें एहसान की क्या बात है, अगर तुम्हारे घर वालों को कोई परेशानी नहीं है तो मुझे भी कोई परेशानी नहीं होगी। तुम रोज रात को आठ बजे आ सकती हो।
उसने मुझे धन्यवाद कहा तो मैंने सोचा कि मौका है गुरु! चौका मार दो और बोल दिया- दोस्ती में नो सॉरी! नो थैंक्स!
वो मुस्कुराई और जाने लगी.
तभी मेरी मम्मी भी मंदिर से आ गई और उससे पूछ ही लिया- हाँ बेटी! कैसे आई थी?
मम्मी को शक तो हो रहा था, बस मैं तुरंत अपने कमरे में चला गया।
पर उसने खुद ही मम्मी को बोल दिया कि मैं आज से शाम को 8 बजे से उसे पढ़ाने वाला हूँ क्योंकि उसकी परीक्षा करीब आ रही हैं, और उसे कोई इंग्लिश का अच्छा टीचर नहीं मिल रहा है।
मैंने भी चुपके से सुन लिया।
मैं भी मन ही मन खुश होने लगा।
उस दिन ऑफिस में भी काम में मन नहीं लगा।
अब इतनी सुन्दर लड़की और वो भी नई, तो भला किसका मन करेगा काम करने का!
और मैं ऑफिस से सात बजे ही आ गया।
मम्मी ने खाने को पूछा तो मैंने बोला- अभी नहीं! थोड़ा बाद में खाऊंगा।
बस 8 बजे और वो गई अपनी किताबें लेकर!
तो मैंने उसे बोला कि पढ़ाई हमेशा एकांत में ही होती है और अपने कमरे में आने को कहा।
बस वो मेरे पीछे पीछे आ गई। अब वो और मैं मेरे बिस्तर पर बैठ गये।
उसने अपनी किताब खोली और पूछने लगी यह क्या होता है, वो क्या होता है।
मेरा कहाँ मन कर रहा था पढ़ाने का! मैं तो बस उसकी तरफ देखता ही जा रहा था।
उसने पूछा- क्या देख रहे हो?
तो मैंने कहा- तुम्हारा चेहरा पढ़ रहा हूँ क्योंकि मैं एक साइकोलोजिस्ट हूँ और मुझे लगता है कि तुम्हें कोई ना कोई परेशानी जरूर है।
तब वो उत्साहित हो गई और बोली- आपको कैसे पता? और बताओ ना कुछ!
तो मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है और बोला- लगता है तुम्हें किसी की कमी खलती है अपनी जिन्दगी में!
वो बोली- हाँ! और तुम्हें शायद कोई अच्छा दोस्त नहीं मिला जिससे तुम अपने दिल की बातें कर सको!
तो उसने हाँ में सर हिलाया और उदास सी ही गई और बोली- कुछ और भी बताओ ना!
तो मैंने कहा- लाओ तुम्हारे गालों की लकीरें देखता हूँ क्या कहती हैं! और उसके गालों को छू-छू कर देखने लगा।
मेरा लंड तो समझो बाहर आने को बेताब था पैंट से!
वो देख रही थी और बोली- बताओ ना क्या लिखा है मेरे गालों पर?
तो मैंने बोल दिया कि तुम्हारी जिन्दगी में कोई बहुत जल्दी आने वाला है और तुम भी उसे चाहती हो और अगर तुमने उसे बोलने में थोड़ी भी देर की तो तुम जिन्दगी भर ऐसे ही पछताते रहोगी।
तब वो बोली- अगर उसने मना किया तो?
मैंने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता।
तब अचानक वो मुझसे लिपट गई और बोली- आई लव यू अंकुर!
बस मैंने भी बोला- आई लव यू टू जान!
और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
पांच मिनट तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे रहे कि अचानक उसकी मम्मी ने नीचे से आवाज लगाई- पढ़ाई ख़त्म हो गई हो तो आ जाओ बेटा! बाकी कल पढ़ लेना।
अगले दिन इतवार था तो मैंने उसे कहा- कल मैं कहीं बाहर जा सकता हूँ इसलिए तुम्हें सुबह आठ बजे ही पढ़ा दूंगा।
रात भर नींद नहीं आई और बस सोचता रहा कि कब सुबह हो और चोद डालूं उसे!
वो रात भी इतनी लम्बी हो गई कि बस आप तो जानते ही होंगे दोस्तो कि इंतजार कितना मुश्किल होता है।
खैर सुबह हुई, आठ बजे और वो आ गई। और तभी मम्मी भी मंदिर चली गई।
वो और मैं सीधे कमरे में गये, दरवाज़ा बंद कर लिया और जाते ही उसके जलते हुए होठों पर अपने होंठ रख दिये। वो भी मेरा साथ देने लगी। ना जाने कब ही कब में मैंने उसकी चूचियों को आजाद कर दिया और उन्हें जोर जोर से मसलने लगा।
उसने मेरा हल्का सा विरोध किया पर उसके बाद वो भी गर्म हो गई।
मेरा लंड अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और उसने अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया।
करीब 10 मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी।
मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए। उसने केवल पैन्टी ही पहनी थी।
उसका नंगा बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूचियाँ इस तरह मेरे सामने थीं कि मानो मुझे अपनी वासना बुझाने के लिए आमन्त्रित कर रही हों।
थोड़े ही समय में दोनों पूरे नंगे हो गए। वह घुटने के बल बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबा रहा था।
फिर मैंने उसे लिटा दिया और उसकी संगमरमरी चूत अपनी उंगलियों से चोदने लगा।
उसकी चूत एकदम कसी थी अनचुदी कली थी।
वह सिसकारियाँ भर रही थी और इतने में वह झड़ चुकी थी। मैंने उसके अमृत-रस को साफ़ कर दिया।
तब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद से सटाया और सांस रोक कर जोर लगाने लगा। पर उसकी चूत बहुत कसी लग रही थी तो मैंने कर थोड़ा जोर से धक्का लगाया तो उसकी चीख निकल गई। मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि पड़ोसी न सुन सकें।
लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस चुका था। अब मैंने लंड को थोड़ा सा पीछे करके एक और जोर से धक्का दिया तो लण्ड चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा घुस गया।
अब वह सर को इधर उधर मार रही थी पर लंड अपना काम कर चुका था।
मैंने अपनी सांस रोकी और लंड को वापिस थोड़ा सा पीछे करके जोर से धक्का दिया तो लंड पूरा उसकी चूत में घुस गया।
उसकी आँखों से आंसू निकल गए और ऐसे लग रहा था कि जैसे वह बेहोश हो गई हो!
थोड़ी देर में उसका दर्द कुछ कम हुआ।
अब वह धक्के पर आः ऊह्ह्ह श् औरऽऽर्र आआह्ह्ह कर रही थी, उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और वह अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा रही थी।
उसने अपनी टांगों को मेरी टांगों से ऐसे लिपटा लिया था जैसे सांप पेड़ से लिपट जाता है।
मुझे बहुत आनंद आ रहा था।
उसके ऐसा करने से लंड उसकी चूत की पूरी गहराई नाप रहा था.
और हर शॉट के साथ वह पूरा आनंद ले रही थी, बोल रही थी- अंकुर, प्लीज़ कम ओन ऽऽ न! फक मी हार्ड!
उसकी साँसें तेज हो गई थी और पूरे कमरे में आ आ… आ… उ… की आवाजें गूंजने लगी और फिर आःह्हछ उफ्फ्फ श्ह्ह्ह की आवाजें करते करते वो फिर से झड़ गई।
अब उसकी चूत और चिकनी हो गई थी और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, कभी तेज शॉट और छोटे शॉट तो कभी तेज शॉट और लॉन्ग शॉट लगाता।
जब छोटे शॉट लगाता तो उसको लगता कि उसकी जान निकल रही है, जब लॉन्ग शॉट लगाता तो उसको दर्द होता!
और ऐसे ही दस मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और ऐसे ही उसके ऊपर निढाल होकर लेट गया। उसके चेहरे पर संतुष्टि और आनंद झलक रहा था।
हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो अपने कपड़े पहन सके। मैंने उसको जल्दी जल्दी जल्दी कपड़े पहनाए क्योंकि डर था कहीं कोई आ ना जाये!
मुझे उसने बाद में बताया कि अब वह बहुत खुश है!
और उसके बाद मैंने उसे चार बार और चोदा और उसने मुझ से अपनी तीन सहेलियों की सील भी तुड़वाई पर वो मैं अगली बार लिखूंगा।
दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है सो प्लीज़ मुझे मेल जरूर करें ताकि मैं अपनी और भी सत्य कथाएँ तुम्हें भेजता रहूँ। Antarvasna
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