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Massage Girl in Samba: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Samba who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Samba that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Samba massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Samba who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Samba massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Samba massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Samba who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Samba employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Samba helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Samba

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Samba at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna

दोस्तो और सजनियो ! कहानी एकदम सच्ची है और मेरा यह Antarvasna दावा है कि दोस्तों के लन्ड फ़नफ़ना जायेंगे और आन्टियों, भाभियों और कुवांरी कन्याओं की चूतें पानी छोड़ जायेंगी।

मैं एम पी का रहने वाला हूं। बात उस समय की है जब मेरी बीवी ने कहा कि मेरी भाभी को शहर से बुला कर ले आओ। अभी उसके स्कूल की छुटटी भी हैं, घूम जायेगी।

मैं जब उसे लेने गया तो साले ने अपनी पत्नी सुनीता (मेरी सलहज) को हंस कर मेरे साथ भेज दिया। वो २२ साल की है। उसको तब तक बच्चा नहीं हुआ था। लेकिन उसके दूध बड़े बड़े मल्लिका शेरावत की तरह हैं। गाड़ी में जब ए सी कोच में चढ ही रहे थे कि भीड़ के कारण मेरा लन्ड उसकी गोल गान्ड से लग गया।

मुझे तो मानो करंट लग गया और साथ ही उसे भी अहसास हुआ कि जीजाजी का लन्ड खड़ा है।

१८ घण्टे के सफ़र के दौरान मैं सोचता रहा कि इसे कैसे चोदूं। खैर घर आ गये हम।

पड़ोस की एक भाभी को बच्चा होने वाला था, इस कारण मेरी बीवी एक रात उनके साथ अस्पताल में रही। उस रात को सुनीता जो कि दूसरे कमरे में सोती थी, ने लाईट जलाई। मैं तुरन्त उठा और पूछा- क्या बात है?

उसने कहा- मेरी कमर में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है।

मैंने उसे बाम की शीशी दे दी। वो अपने कमरे में चली गयी। लेकिन मुझे नीन्द नहीं आ रही थी। मैं अपने दोनो बच्चों को सोते छोड़ कर उसके कमरे में पहुंच गया और बोला कि लाओ मैं बाम लगाता हूं।
पहले तो उसने आनाकानी की परन्तु फ़िर मान गयी। लेकिन बाम लगाने के लिये मैक्सी को ऊपर उठाना पड़ता, इसलिये उसने संकोच करके फ़िर मना कर दिया। परन्तु दर्द तेज होने के कारण उसने मुझे फ़िर बुलाया।

मैने कहा- सुनीता, एक दर्द निवारक गोली खा लो ठीक हो जायेगा। पर उसे डर था कि अगर उसे प्रेगनैन्सी हो चुकी हो तो कुछ नुकसान ना हो जाये।

आखिर उसने बाम लगवाने के लिये हां कर दिया। जैसे ही मैंने उसकी मैक्सी उठाई, उसकी चिकनी जांघे देख कर मेर लन्ड बेकाबू हो गया। मालिश करते करते मेरे हाथ उसकी साईड से दब रही चूचियों को भी स्पर्श कर रहे थे।

मैंने धीरे धीरे उसके चूतड़ों की तरफ़ मालिश शुरू कर दी। मैंने महसूस किया कि उसके रौंगटे खड़े हो रहे हैं थोड़ी देर में सुनीता पलट गयी और मुझे ऐसी नज़रों से देखा कि वह मुझे धन्यवाद देना चाहती है।

सुनीता मेरा हाथ अपने हाथ में ले कर सहलाने लगी। बस मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया। मैंने तुरन्त अपने दोनो हाथों से उसकी चूचियां दबा दी। उसने मुझे कस कर पकड़ लिया। मैने धीरे धीरे अपना हाथ उसकी चूत में घुसा दिया। अब वह कराह रही थी।

आखिर उसने मेरे लन्ड को हाथ में लेकर कहा- जीजाजी, अब इसे अन्दर करो। फ़िर उसके बाद जो सुबह चार बजे तक चुदाई का दौर चला कि पूछो मत।

चुदाई करते समय उसने बताया कि जीजाजी आपका लन्ड मेरे पति से बड़ा और मोटा भी है। शादी के बाद आज प्यास बुझी। आज मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इस बार प्रेगनैन्ट हो जाउंगी

और ऐसा ही हुआ। ठीक नौ महीने बाद सुनीता को एक सुन्दर सा बेटा हुआ। एक दिन सुनीता ने मेरी ससुराल में ही पूछ लिया कि इस उपकार के लिये क्या गिफ़्ट दूं। मैंने जो बहुत दिन से सोच रखा था, मांग लिया, कि मुझे तुम्हारी गान्ड मारनी है।

सुनीता ने कहा- जीजाजी, गान्ड क्या जितने भी मेरे पास छेद हैं आप सब में अपना लन्ड डाल सकते हैं।

तो एक दिन अवसर मिलने पर दिन में ही मैंने सुनीता की तीन बार गान्ड मारी। परन्तु तीसरी बार जब गांड मार कर उठ रहे थे, तक तक सास आ गयी। उन्हें तेल की शीशी गलत जगह पड़ी मिली। शायद उन्हें शक हो गया था।

सभी दोस्तों से निवेदन है कि यदि शादीशुदा होकर बीवी की गान्ड नहीं मारी तो समझो कुछ नहीं किया। Antarvasna

Antarvasna

हाय दोस्तो, मुझे हिंदी लिखनी Antarvasna नहीं आती पर कोशिश कर रहा हूँ, मेरी गलतियों को नज़रान्दाज़ कर दें।

मेरा नाम राज है, मैं इन्दौर का रहने वाला हूँ। मैं जब भी अपने घर जाता था तो हमेशा पड़ोस की आँटी को चोदने के बारे में सोचता रहता था।

इस बार जब मैं अपने घर गया तो मेरे ऊपर कृपा हो ही गई, मुझे चोदने का मौका मिल ही गया। मैं जिम जाने लगा था जिसका असर मुझे घर पर मालूम चला। आँटी के पति दुबले पतले थे और दिन भर को़र्ट में रहते थे।

उस दिन आँटी का हीटर ख़राब हो गया था। हमारे शहर में कई लोग हीटर पर खाना बनाते हैं। आँटी का भी खाना नहीं बना था, मैं गाय को रोटी देने बाहर आया तो आँटी बोली- राज, मेरा हीटर खराब हो गया है, उसे सुधार दो !

मैंने मजाक में कहा- आप तो खुद ही इतनी गर्म हो कि तपेली को हाथ से पकड़ लो तो पानी भाप बन जाये !
वो हंस दी, मैंने आज तो रास्ता साफ समझा और उनका हीटर सही करने उनके घर आ गया। उनकी लड़की जो दसवीं में है, स्कूल जा रही थी।

मैं हीटर को सही करने लगा, उनसे टेस्टर माँगा तो वो उसे लेकर खुद ही हीटर की स्प्रिंग को चैक करने लगी। तब उनके बड़े बड़े स्तन उनके ब्लाउज़ से बाहर दीखने लगे थे। मन तो कर रहा था कि उनके स्तनों को पकड़ कर मसल डालूँ पर मर्यादा मुझे रोक रही थी।

तब मैंने उनसे टेस्टर लेना चाहा तो उनका हाथ मेरे हाथ से छू गया। मुझे लगा कि आँटी इतनी हॉट हैं, अंकल की तो रोज जन्नत की सैर है।

मैंने जब स्प्रिंग से टेस्टर छुआ तो मेरे आँटी के ख्यालों के चक्कर में मुझे करंट का एक झटका लगा, मैं लगभग बेहोश हो गया था। आँटी घबरा गई और उन्होंने पानी लाकर मेरे ऊपर डाला और मुझे अपनी गोद में ले लिया और मुझे उठाने लगी।

मेरा सीना एकदम उभरा था जो शर्ट का बटन खुला होने से आँटी को दिख रहा था। आँटी ने अपना एक हाथ मेरी शर्ट में डाल दिया और धीरे-धीरे मेरे सीने पर फ़िराने लगी।

मुझे होश आने लगा था, आँटी बड़े प्यार से अपना गर्म हाथ मेरे 40 इंच के सीने पर घुमा रही थी।

मेरा लंड घोड़े के लंड की तरह धीरे धीरे बढ़ने लगा था जो मेरे रीबोक की चड्डी से बाहर निकलने को तरस रहा था और आँटी मेरे सीने को रगड़े जा रही थी।

अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था, मैंने अपनी आंख खोल दी। वो एकदम से मुझसे अलग हो गई।
मैंने बोला- आँटी करो ना ! मुझे मजा आ रहा है।
उसने पूछा- पहले कभी सेक्स नहीं किया?
मैंने मना कर दिया- नहीं !
मेरा दिमाग गर्म हो रहा था कि अगर आज सेक्स नहीं कर पाया तो मैं मर जाऊँगा।

वो शायद मेरी अवस्था समझ चुकी थी, वो मेरे पास आई और हाथ को चूमने लगी। मुझे कुछ होने लगा था। उसने धीरे से मेरे माथे को चूम लिया। मेरा लंड जोर जोर से सांस ले रहा था। आँटी की भी सांसें गर्म होने लगी थी। फिर वो मेरी दोनों आँखों को चूमने लगी। मेरी तो हवा ख़राब होने लगी थी। वो इतनी गोरी थी कि अगर हाथ रख दो तो लाल हो जाये।
उसने मेरे दोनों हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और बोली- इनको दबाओ !
वो मुझे अनाड़ी समझ रही थी। मैंने अपने हाथ उसके नर्म-नर्म बोबों पर घुमाने शुरु कर दिए। वो मचलने लगी और मेरे मसल्स को सहलाने लगी।

मैंने धीरे से उसकी साड़ी के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूत के दाने को छू लिया।
वो सिसकने लगी और बोली- तेरे अंकल को तो कोर्ट से ही समय नहीं है, मैं सात महीने से अपनी प्यास मोमबत्ती या अपने हाथ से मिटा रही हूँ। मेरी प्यास बुझा दे, तेरा मुझ पर उपकार होगा।
मैं उसकी चूत को रगड़े जा रहा था, उसने भी मेरे लंड को पकड़ लिया और रगड़ने लगी। मैंने उसके पेट पर हाथ रखा तो वो स्प्रिंग की लहरों की तरह हिलने लगा। अब हमारी धड़कने बढ़ चुकी थी। मैंने अपना लंड उसके कहने पर उसके दोनों बोबों के बीच रख दिया। मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था।
उसके बाद वो मुझसे बोली- लंड को धीरे-धीरे आगे पीछे करो !
मेरी उत्तेजना की सीमा पार हो रही थी, साथ ही मजा भी बढ़ता जा रहा था। मेरी सांसें तेज होने लगी थी। मेरा लंड ठीक उसके मुँह के पास आ जा रहा था। वो अपनी जीभ से उसे चाटने की कोशिश कर रही थी, मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरा लंड जैसे दो रुई के गोलों के बीच में हो जिनको हल्का गर्म कर दिया हो।

तभी वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- और जोर लगाओ अह अहअहहहह अहह हहहहह…
उसने मेरे कूल्हे कस कर पकड़ लिए और एकदम ढीली हो गई…
कहानी जारी रहेगी.. Antarvasna

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सौरी सर, आज आखिरी दिन था मजार में हाजिरी लगाने का, आज 40 दिन पूरे हो गए हैं, कल से मैं समय से पहले ही हाजिरी दर्ज करा लूंगा.”

“यह क्या मजार का चक्कर लगाते रहते हो? इतना पढ़ने लिखने के बाद भी अंधविश्वासी बने हो।” प्रोफैसर ने व्यंग्य किया.

“सर, ऐसा न कहिए।” एक छात्र बोल उठा.
दूसरे छात्र ने हां में हां मिलाई,” सर, आप को मजार की ताकत का अंदाजा नहीं है।”
“सर, अंगरेजों के जमाने से ही इस मजार का बहुत नाम है, 40 दिनों की नियम से हाजिरी लगाने पर हर मनोकामना पूरी हो जाती है।” किसी छात्र ने ज्ञान बघारा.

आज भौतिकी की क्लास में मजार का पूरा इतिहास भूगोल ही चर्चा का विषय बना रहा.
प्रोफैसर भी इस वार्त्तालाप को सुनते रहे.

महेंद्र सिंह का पूरा छात्र जीवन व नौकरी के शुरू के वर्ष भोपाल में बीते हैं.
पिछले वर्ष उन्हें इस छोटे से जिले से प्रोफैसर का प्रस्ताव आया तो वे अपनी पत्नी को लेकर इस कसबेनुमा जिले परसिया में चले आए जहां सुविधा व स्वास्थ्य के मूलभूत साधन भी उपलब्ध नहीं हैं.

नए खुले आईटीआई में महेंद्र सिंह को उन के अनुभव के आधार पर प्रोफैसर के पद का औफर मिला, तो वे मना न कर सके और भोपाल के अपने संयुक्त परिवार को छोड़ कर अपनी पत्नी को साथ लिए यहां चले आए.

30 वर्षीय पत्नी सुजाता बेहद सुन्दर आधुनिक व उच्च शिक्षित है इसीलिए कभी कभार वह भी कालेज में गैस्ट फैकल्टी बन क्लास लेने आ जाती.

यह Xxx बाबा सेक्स कहानी इन्हीं सुजाता मैम की है.

सुजाता जब भी कालेज में आती, छात्रों की बांछें खिल जातीं.
नाभि दिखने वाली साड़ी, खुले बाल, गहरी लिपस्टिक से सजे होंठ और आंखों में गहरा काजल सजाए वह जब भी क्लास लेने आती, लड़कों में मैम को प्रभावित करने की होड़ मच जाती.
वे उसे फिल्मी हीरोइन से कम न समझते.

उस दिन महेंद्र जब घर लौटे तो चाय पीते हुए दिनभर की चर्चा में मजार का जिक्र करना न भूले.

यह सुनते ही निसंतान सुजाता की आंखें एक आस से चमक उठीं कि हो सकता है कि इसीलिए ही समय उसे यहां परसिया खींच लाया है.

शादी के कई साल बीत जाने पर भी अभी तक सुजाता निःसंतान थी बहुत उपाय कर लिए पर गर्भ धारण नहीं हो पाया।
दोनों दम्पति की मेडिकल जाँच में भी सब नार्मल था।

सुजाता जितनी वेशभूषा से आधुनिक थी उतनी ही धार्मिक थी.
आए दिन घर में महिलाओं को बुला कर धार्मिक कार्यक्रम करवाना उस की दिनचर्या में शामिल था.
इसी वजह से वह अपने महल्ले वालों में काफी लोकप्रिय हो गई थी.

सुजाता का शुरू में तो यहां बिलकुल मन नहीं लगता था मगर धीरे धीरे उसने अपने आप को साथी महिलाओं के साथ सामूहिक कार्यक्रम में व्यस्त कर लिया.

उसे रह रह कर भोपाल याद आता.
वहां की चमचमाती सड़कों की लौंग ड्राइव, किट्टी पार्टी, बड़े ताल का नजारा, क्लब और अपनी आधुनिक सखियों का साथ.

इधर, सुजाता का मन मजार के चक्कर लगाने को मचलने लगा.

वह सोचती कि सारे वैज्ञानिक तरीके अपना कर देख ही लिए हैं, कोई परिणाम नहीं मिला.
अब इस मजार के चक्कर लगा कर भी देख लेती हूं.

जब इस विषय में महेंद्र की राय लेनी चाही तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.
शायद उन्होंने भी सुजाता की आंखों में आशा की चमक को देख लिया था.

महेंद्र से कोई भी जवाब न पा कर सुजाता सोच में पड़ गई.
उसने अपने पड़ोसियों से इस विषय में बात करने का मन बना लिया.

लगे हाथ महिलाओं ने सुजाता की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उसे भी संतान की मनौती मांगने के लिए 40 दिन मजार का फेरा लगाने का सुझाव दे ही दिया.

कुछ का तो कहना था कि 40 दिन पूरे होने से पहले ही उसकी गोद हरी हो जाएगी.
जितने मुंह उतनी बातें सुन कर सुजाता ने तय कर लिया कि वह कल सुबह से ही मजार जाने लगेगी.

मजार कसबे के बाहर थी।
जब से यह जगह जिले में परिवर्तित हुई है, तब से भीड़ बढ़ने लगी और मजार में एक बाबा मुस्तफा की मौजूदगी भी थी.

बाबा हफ्ते में 3 दिन मजार में, शेष 4 दिन पास में पीपल के नीचे बनी झोपड़ी में बैठा मिलता.

लोग बाबा से अपनी परेशानियां बताते जिन्हें वह अपने तरीके से हल करने के उपाय बताता.

बाबा मुस्तफा बड़ा होशियार था, वह शाकाहारियों को नारियल तोड़ने तो मांसाहारियों को काला मुरगा काट कर चढ़ाने का उपाय बताता.

लोगों के बुलावे पर उन के घर जा कर भी झाड़ फूंक करता.

जो लोग उस के उपाय करवाने के बाद मन मांगी मुराद पा जाते, वे खुश हो उसके मुरीद हो जाते.
लेकिन जो लोग सारे उपाय अपना कर भी खाली हाथ रह जाते, वे अपने को ही दोषी मान कर चुप रहते.

इसलिए बाबा का धंधा अच्छा चल निकला.

सुजाता सुबह के समय साड़ी पहनकर घर से निकली.

उस समय हल्के जाड़े की शुरुआत हो गयी थी.
वह तेज कदमों से मजार की ओर निकल गई.

उसके घर और मजार के बीच एक किलोमीटर का ही फासला तो था.

अभी मजार में अगरबत्ती सुलगा कर पलटी ही थी कि बाबा मुस्तफा से सामना हो गया.

बाबा तगड़ा तंदुरुस्त अधेड़ उम्र का था।
सर पर गोल जालीदार टोपी, सफ़ेद कुरता और लुंगी में था; चेहरे पर लम्बी दाढ़ी।

बाबा सुजाता को देखता रह गया।
उसने कभी सोचा नहीं था कि इतनी सुन्दर स्त्री मजार पर आएगी।

सुजाता ने प्रणाम करने को झुकना चाहा पर बाबा दो कदम पीछे हट गया और बोला- मेरे नहीं, इसके पैर पकड़ो, वह जो इस में समाया है.

उसने उंगली से मजार की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जिस मंशा से यहां आई हो, वह जरूर पूरी होगी. बस अपने मन में कोई शंका न रखना.”

बाबा ने सुजाता की आँखों में देखते हुए कुछ मंत्र पढ़े और सुजाता को कुछ मिश्री के दाने दिए।

सुजाता गदगद हो गई.
आज सुबह इतनी सुहावनी होगी, उसने सोचा न था.

उसे पड़ोसिनों ने बताया तो था यदि मजार वाले बाबा का आशीर्वाद भी मिल जाए तो फिर तुम्हारी मनोकामना पूरी हुई ही समझो.

खुश मन से सुजाता ने जब घर में प्रवेश किया तो उसका पति चाय की चुस्की के साथ अखबार पढ़ने में तल्लीन था.

सुजाता गुनगुनाते हुए घर के कार्यों में व्यस्त हो गई.
महेंद्र सब समझ गया कि वह मजार का चक्कर लगा कर आई है.
मगर कुछ न बोला.

वह सोचने लगा कि कितने सरल स्वभाव की है उसकी पत्नी, सब की बातों में तुरंत आ जाती है. अब अगर मैं वहां जाने से रोकूंगा तो रुक तो जाएगी मगर उम्रभर मुझे दोषी भी समझती रहेगी।

अगले दिन फिर सुजाता मजार पहुंची।
उसने अगरबत्ती जला कर माथा टेका।

वापस जाने को घूमी तो सामने बाबा सामने खड़ा था।
बाबा अपनी गहरी आँखों से सुजाता को देखता हुआ बोला- सुजाता, तुम्हे अब चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. तुम्हारी सारी मनोकामना पूरी हो जाएगी।

सुजाता हैरान थी कि बाबा को उसका नाम कैसे पता चला.

“जल्दी ही तुम्हारी गोद में बच्चा होगा, बस कुछ महीनों की बात है।”

सुजाता से अब रहा नहीं गया और पूछा- आपको ये सब कैसे पता बाबा जी?
“मेरे पास तंत्र मंत्र की शक्ति है, मुझे सब पता है। लेकिन सुजाता इसके लिए तुमको साधना करनी होगी.” बाबा ने कहा.

“मैं सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ बाबा जी।”

बाबा मुस्तफा ने एक काला धागा निकाला और बोला- इस धागे को अभी अपनी कमर में बाँध लो और इसे कभी भी न खोलना।

सुजाता ने धागा ले लिया और साड़ी को हटाते हुए कमर में दो राउंड करके धागा बांध लिया।
उसकी गोरी कमर और गहरी नाभि पर बंधा काला धागा देखकर बाबा मुस्तफा की आँखों में खास चमक थी.

सुजाता प्रणाम करके घर लौट आयी।
शाम होते होते सुजाता के शरीर में वासना की आग जलने लगी।
उसने सोचा कि जरूर यह इस काले धागे के कारण हुआ है।

रात में पहल करते हुए उसने पति से कहा- आज बहुत मन हो रहा है!

पति महेंद्र ने सुजाता को बाँहों में भर लिया और फिर वासना का तूफ़ान चला और थोड़ी देर में महेंद्र संतुष्ट होकर एक तरफ लेट गया.

पर सुजाता अधूरी थी, अतृप्त थी.

वह जागती रही और उसके मन में बार बार बाबा का तगड़ा तंदरुस्त जिस्म आ रहा था।
सम्मोहनी काला धागा पूरा असर कर रहा था।

अगले दिन कामवासना से तपती सुजाता अच्छी तरह सज धज कर मजार पहुंची।
हरे बार्डर वाली हलकी गुलाबी साड़ी नाभि के नीचे बंधी थी और पारदर्शी साड़ी से कमर दिख रही थी.
गहरे हरे रंग के ब्लाउज से स्तनों के उभार साफ़ दिख रहे थे.

बाबा उसे देखकर समझ गया कि मंत्र वाले काले धागे का असर हो गया है.

सुजाता ने अगरबत्ती करके बाबा की ओर देखा।
बाबा ने अपने पीछे आने इशारा किया।

सम्मोहित सी सुजाता बाबा के पीछे चल दी.

झोपड़ी में पहुंचकर बाबा तख़्त पर बिछे गद्दे पर बैठ गया और सुजाता को बैठने को कहा।
सुजाता तख़्त पर बैठ गयी।

मंत्रमुग्ध सुजाता पूरी तरह से बाबा के वश में थी.

बाबा मुस्तफा उठा और सुजाता को अपने आगोश में ले लिया।
सुजाता के लिपस्टिक लगे होंठों को बाबा ने चूसते हुए उसकी साड़ी उतार दी।

गहरे हरे रंग के ब्लाउज में कैद सुडौल स्तन, गोरी कमर पर गुलाबी पेटीकोट और काले धागे का बंधन।

सुजाता की सुंदरता देख कर बाबा और इन्तजार न कर सका।
उसने सुजाता को तख़्त पर लिटा दिया और अपनी लुंगी खोलते हुए सुजाता के ऊपर आ गया.

धीरे धीरे पेटीकोट ऊपर सरक गया और फिर सुजाता की आ..ह के साथ बाबा का लिंग सुजाता की योनि में प्रवेश कर गया।

बाबा ने एक और धक्का दिया और पूरा लिंग सुजाता की योनि में समा गया।
और बाबा सुजाता के ऊपर छा गया।

सुजाता को अपनी योनि में इतना भराव और कठोरता पहले नहीं मिली थी।
उसने देखा तो नहीं पर शायद बाबा का लिंग काफी मोटा था।

मुस्तफा ने तेजी से सुजाता के शरीर का मंथन करना शुरू कर दिया।
बाबा के भारी भरकम जिस्म के नीचे दबी सुजाता की कामुक सिसकारियां गूंज रही थी.

उसके हर प्रहार के साथ तख़्त की चरमराहट, सुजाता की पायल की छन-छन और चूड़ियों की खन-खन ने बाबा को मस्त कर दिया।
बाबा को ऐसी सुन्दर स्त्री कभी नसीब नहीं हुई थी।

इधर सुजाता को ऐसा तेज और ताकतवर सम्भोग पहली बार मिला था।

वह सब कुछ भूल कर बाबा से लिपटी हुई सम्भोग के आनंद में खोयी हुई थी।

बाबा के एक एक धक्के का जवाब अपनी कमर उचका कर देते हुए आगे बढ़ते बढ़ते वह अपनी मंजिल के पास पहुँच गयी।

सुजाता ने अपनी जांघों से बाबा मुस्तफा को कस कर भींच लिया और चरमसुख के आनंद में खो गयी।

बाबा मुस्तफा ने कुछ लम्बे लम्बे धक्के लगाए और फिर एक लम्बा धक्का मारा।
उसका लिंग सुजाता की योनि में गहराई तक समा गया।

भारी भारी आवाज निकालते हुए बाबा स्खलित होने लगा।
वीर्य की फुहारों से सुजाता की योनि भर गयी।

कुछ हल्के हल्के झटके लगाते हुए बाबा शांत हो गया.
दोनों एक साथ तृप्त हो गए।

एक सुन्दर कामातुर गदरायी स्त्री से सम्भोग करके बाबा मुस्तफा मस्ती से सुजाता के ऊपर लेटा रहा।

थोड़ी देर बाद बाबा मुस्तफा उठा, अपनी लुंगी पहनी और झोपडी के बाहर देखा.

आसपास कोई नहीं था.

सुजाता के चेहरे पर सम्भोग की अपार संतुष्टि थी.
पहली बार उसे ऐसा सम्भोग सुख मिला था।

वह उठी और साड़ी पहनकर घर के लिए चल दी.

शाम तक सुजाता फिर से कामवासना की आग में जलने लगी।
उसका मन बाबा के बारे में सोचने लगा और वह अगले दिन का इन्तजार करने लगी.

सुजाता अगले दिन मजार पर गयी और बाबा से संतुष्ट होकर लौट आयी।
अब सुजाता को बाबा की आदत हो गयी और अब झाड़ फूंक के बहाने बाबा सुजाता के घर भी आने लगा।

पति महेंद्र ड्यूटी पर होते और सुजाता बैडरूम में बाबा के साथ होती।

बाबा मुस्तफा ने सुजाता के यौवन का भरपूर मजा लिया और सुजाता बाबा की सम्भोग शक्ति से मस्त रहने लगी.

यह Xxx बाबा सेक्स का सिलसिला चलता रहा और डेढ़ महीने बाद सुजाता गर्भवती हो गयी।

सब बातों से अनजान पति महेंद्र बहुत खुश थे.
और सुजाता भी बहुत खुश थी पर वो सच जानती थी कि उसका बच्चा बाबा मुस्तफा का है.

अब सुजाता मजार पर कभी कभी ही जाती थी।
लेकिन बाबा उसके घर पर आता रहा।

कुछ दिन बाद सुजाता मजार गयी तो देखा बाबा एक सुन्दर विवाहित स्त्री को काला धागा दे रहा था।

कुछ दिन बाद एक बार वह शॉपिंग करने गयी तो एक और युवती मिली।
उसकी कमर पर काला धागा बंधा था।

उस युवती ने सुजाता की ओर देखा और मुस्कुरा दी।
उसने सुजाता की कमर पर बंधा काला धागा देख लिया था।

सुजाता भी मुस्कुराई।
दोनों की मुस्कराहट में खास समानता थी।

Antarvasna

मैं एक बार फिर आप लोगों को मेरी Antarvasna ज़िन्दगी में हुई असली और सच्ची सेक्स कथा लिखने जा रहा हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं कोलकाता में एक आर्ट कॉलेज में पढ़ता था। मेरे साथ संपा दीदी पढ़ती थी जो मुझसे एक साल सीनियर थी।

अंडमान आइलैंड से हम दोनों ही थे हमारे कॉलेज में, इस लिए संपा दीदी मुझे अपनी भाई की तरह मानती थी। गर्मियों की छुट्टी शुरू होने वाली थी तो दीदी ने कहा- संजय चलो इस बार हम दोनों शिप (जहाज) से अंडमान जायेंगे!

मैंने कहा- ठीक है दीदी, मैं टिकेट ले लूँगा।
और फिर हम लोग निर्धारित दिन में जहाज में चढ़ गए।

कोलकाता से अंडमान आने के लिए 4 दिन लगते है। मैंने एक ही केबिन के टिकेट लिए थे। जहाज में चढ़ कर हमने खिड़की में से देखा कि शाम को 5.00 बजे जहाज बन्दर से छूटा और फिर धीरे धीरे कोलकाता का खिदिरपुर डॉक हमसे दूर होता जा रहा था। शाम के वक्त लाइट बहुत सुंदर दिख रही थी।

तभी दीदी ने कहा- भाई देखो कितनी सुंदर दृश्य नज़र आ रहा है, इस सीन का लैंड स्केप बना सकते है।

मैंने भी हाँ में हामी भरी। वक्त कटता गया, शाम के 7.00 बजे डिनर होता है जहाज में, इसलिए हम 7.30 तक डिनर खाकर अपने केबिन में आ गए। दीदी ने कहा- संजय! इस केबिन में तो चार सीट हैं फिर हम दोनों के अलावा और किसी को इस केबिन का टिकेट नहीं मिला क्या?

मैंने कहा- दीदी शायद जहाज खाली जा रहा है, इसलिए जहाज में लोग भी कम नज़र आ रहे हैं।

थोड़ी देर की खामोशी के बाद दीदी बोली- भाई इतनी जल्दी तो नींद नहीं आने वाली! चलो कपड़े बदल लेते हैं और फिर हम एक दूसरे के स्केच बनाते हैं। मैंने भी हाँ कहा और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक नेक्कर और बनियान पहनकर बेड में बैठ गया।

दीदी ने कहा- दरवाजा बंद कर दो।

और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक स्कर्ट और हल्का सा टाप पहन कर बाहर आई। मैं देखता रह गया कि दीदी कितनी सुंदर लग रही हैं, इससे पहले दीदी को कभी इन कपड़ो में नहीं देखा था।

दीदी को पता चला तो बोली- संजय! क्या देख रहे हो? तुमको ठीक से मेरी फिगर दिखाई दे इसलिए ही इन कपड़ो को पहना है ताकि तुमको मेरी स्केच बनने कोई परेशानी न हो!

फिर हम दोनों एक दूसरे के स्केच बनाने लगे। मेरी नज़र तो बार बार संपा दीदी की छाती पर जाकर रुक जाती थी और मेरे लिए अपने लण्ड को हाफ पैन्ट में छुपाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था क्योंकि दीदी की उभरी हुयी चुंचियाँ टॉप के भीतर से झाँकने लगी थी। दीदी को शायद पता चला या नहीं अचानक दीदी ने कहा- भाई क्या हुआ तुमको? क्या देख रहे हो? क्या कुछ दिक्कत हो रही है स्केच बनाने में या ठीक से दिख नहीं रही है मेरी फिगर? चलो तुम्हारे लिए और थोड़ी एडजस्ट कर लेती हूँ, लकिन तुम भी अपना बनियान उतार कर बैठो, और फिर दीदी ने अपने स्कर्ट और टाप उतार दी।मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी। पर मैं चुपचाप से दीदी की ब्रा में बंद उनके बड़े बड़े बूब्स को ही देख रहा था।

तभी दीदी ने कहा- क्या हुआ संजय? जल्दी से अपनी बनियान उतार दो, मुझे भी तो तुम्हारा स्केच बनाने है। और इस तरह क्या देख रहे हो? ठीक से स्केच बनाओ!

मैंने धीरे से अपने बनियान उतार दिया और फिर स्केच बनने लगा, पर मेरा लण्ड को हाफ-पैन्ट में छुप नहीं पा रहा था और मैं इधर उधर देखने लगा। शायद दीदी को मेरा लण्ड हाफ-पैन्ट में खड़ा होता दिख गया।

दीदी ने कहा- संजय! क्या हुआ? कभी इस तरह किसी लड़की को नहीं देखा क्या? तुम्हारी नियत तो ठीक है न?

मेरा झूठ पकड़ में आ रहा था मेरा लण्ड पैंट के ऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था।

‘क्या बात है… तुम्हारा मुंह लाल क्यूँ हो रहा है…?’

मेरी नजरों के सामने दीदी की ब्रा में उभरी हुयी चुंचियाँ के भीतर से झाँकने लगी। मेरी नजरें उनके स्तनों पर गड़ गयी। दीदी ने नीचे से ही तिरछी नजरों से उसे देखा… और मुझे गर्माते देख कर सीधे चोट की…’संजय… मेरी छाती में क्या देख रहे हो…झांक कर?’

‘हाँ… नही… क्या…?’ मैं बुरी तरह झेंप गया।

‘अच्छा.. अब मैं बताऊँ…कि क्या देख रहे हो तुम…’ मैं एकदम से शरमा गया।

‘दीदी… वो… नही… सो…सॉरी…’

‘क्या सॉरी… एक तो चोरी…फिर सॉरी…’

‘दीदी… अच्छी लग रही है देखने में…सॉरी कहा न ‘

मैं ‘हाँ… नही… क्या…?’ मैं बुरी तरह झेंप गया।

‘अच्छा.. अब मैं बताऊँ…कि क्या देख रहे हो तुम…’ मैं एकदम से शरमा गया।

‘दीदी… वो…नही…सो… सॉरी…’

‘क्या सॉरी… एक तो चोरी…फिर सॉरी…’

‘दीदी… अच्छी लग रही थी… सॉरी कहा न ‘

दीदी मेरे पाइंट पर से लण्ड के उभार को देख रही थी। मैंने ऊपर हाथ रख लिया।
‘नहीं देखो… इधर.. ‘ मैं शरमा गया। दीदी मुस्कुरा उठी।

‘तो कान पकड़ो…’

मैंने अपने कान पकड़ लिए… ‘बस…ना…’

हाथ हटाने पर लण्ड का उभार फिर से दिखने लगा। वो हंस पड़ी।

‘नहीं देखो… इधर.. ‘ मैं शरमा गया। वो मुस्कुरा उठी।

अब मुझे समझ में आ गया था कि खुला निमंत्रण है। मेरा लण्ड का पूरा आकार तक दिखने लगा था। मैं उठ कर दीदी के पास आ गया। मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा-‘दीदी…तुम्हारे भी तो उभार हैं… एक बार दिखा दो…न…प्लीज़!’

मैंने दीदी की पूरे बदन को देखा और फिर अचानक ही… दीदी को बिस्तर पर चित लिटा दिया और उनकी पीठ पर सवार हो गया. वो कुछ कर पाती, उनके पहले मैंने उसको जकड़ लिया. मेरे लण्ड का जोर उनके चूतड़ों पर महसूस होने लगा था।

दीदी हलके से चीखी ‘संजू… ये क्या कर रहे हो…?’
‘दीदी… मुझसे अब नहीं रहा जाता है…!’

मैंने तुंरत ही उनके होंट पर अपने होंट रख दिए। मुझे लगा कि शायद दीदी को मजा आने लगा था।

मैंने उनके भारी स्तनों को पकड़ लिया और स्तनों को मसलना चालू कर दिया। वो सिमटी जा रही थी। पर मैंने हाथों से उनके उभारों को मसलना जारी रखा। वो अपने को बचाती भी रही…पर मुझे रोका भी नहीं। जब मैंने उनके उभारों को अच्छी तरह से दबा लिया तब उसने मुझे पीछे की ओर धक्का दे दिया और कहा -‘बहुत बेशरम हो गए हो…’

उनके हाथ से पेंसिल नीचे गिर गयी। वो जैसे ही उठ कर पेंसिल उठाने को झुकी, मैंने फिर से उनके स्तनों पर कब्जा कर लिया।

‘क्या हुआ… अब बस करो…छोड़ दो न… ये मत करो… संजू…हटो न ..?’
‘ अरे… हट जा न… हटो संजय…’
मना मत करो दीदी!’
‘देखो मैं चिल्ला पडूँगी ..’
‘नहीं नहीं…ऐसा मत करना… दीदी… प्लीज़ एक बार देखने दो न…!’

मैंने दीदी के नरम नरम गोल चूतड़ों को हाथ से सहला दिया। गोलाइयाँ सहलाते हुए अपना हाथ दोनों फाकों की दरार में घुसा दिया और फिर अपनी ऊँगली घुसा कर उनकी गांड के छेद को सहलाने लगा। मुझे बहुत आनंद आ रहा था। दीदी वैसे ही झुकी रही। अब मेरे हाथ उनकी चूत की तरफ़ बढ गए।

वो सिहर उठी। जैसे ही उनकी चूत पैन्टी के ऊपर से दबी… चूत का गीलापन मेरे हाथ में लग गया। अब मैंने उनकी चूत को भींच दिया पर जल्दी से हाथ हटा दिया। और दीदी सीधी खड़ी हो गयी।

मैं मुस्कुराया ‘दीदी .. मज़ा आ गया… तुम्हें कैसा लगा…?’
‘अब तुम बेशरमी ज्यादा ही दिखा रहे हो… स्केच नहीं बनाने क्या…?’ दीदी भी मुस्कुरा कर कहा।

मैंने कहा- नहीं दीदी प्लीज़ मुझे अभी कुछ और करना है… और मैंने दीदी को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और उनकी पीठ के ऊपर फिर से बैठ गया और मैंने अपना नेक्कर उतार दिया और दीदी की पैन्टी भी उतार दी।

अब मैं और दीदी नीचे से नंगे हो गए थे। मैंने फिर अपने लण्ड को उनके चूतड़ों पर दबाया, दीदी ने भी चूतड़ों को ढीला छोड़ दिया…और मेरा लण्ड उनकी गांड के छेद से टकरा गया।

दीदी ने फिर कहा-‘ अब बस करो…छोड़ दो न… ये मत करो… संजू…हटो न…’
‘आह संजू… मत करो…न… देखो तुमने…क्या किया?’
‘दीदी ..कुछ मत बोलो…आज मैं तुम्हे छोड़ने वाला नहीं… मेरी अपनी इच्छा जरूर पूरी करूँगा!’

मुझे तो आनंद आ रहा था… मैंने अपने लण्ड को दीदी की गांड के छेद से रगड़ना शुरू किया, दीदी चुप रही।

फिर अचानक मैंने दीदी को सीधा कर दिया… और अपना लण्ड उनको दिखाया…’देखो न दीदी… अपनी गांड से इसका क्या हाल किया है तुमने…’

उसने कहा ..’देख संजय…मैं हाथ जोड़ती हूँ… मुझे छोड़ दे अब… प्लीज़ ..’

‘ दीदी…सॉरी… ये मेरे बस में नहीं है अब… मैं अब पूरा ही मजा लूँगा… तुमने मुझे बहुत तड़पाया है ..’

मैंने उनकी ब्रा के हुक खोल दिए, उनके बूब्स को देख कर मेरा लण्ड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा तब सबसे पहले मैंने उनके निप्पल को चूपा। उनके निप्पल भी बड़े सख्त हो रखे थे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर मैं उनके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा मेरे इस तरह करने से वो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंने उनकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बाल नहीं थे और उनकी चूत बहुत मस्त लग रही थी। उनकी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उनकी चूत को चाटने लगा। दीदी ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी- आ आ आ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगी
थोड़ी देर तक उनकी चूत चाटने के बाद मैंने देखा कि वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैं उसको और गरम करना चाहता था इसलिए अब मैं अपने लण्ड को उनके पूरे बदन पर घुमाने लगा, पहले उनके चेहरे पर अपने लण्ड को लगाया फिर उनकी गर्दन पर, फिर उनके बूब्स पर, उनके निप्पल पर, उनके बूब्स के बीच में अच्छी तरह मैं अपने लण्ड को लगा रहा था। मेरे लण्ड से जो पानी निकल रहा था वो भी उनके पूरे बदन पर लग रहा था जिससे वो और ज़्यादा गरम हो रही थी। मैंने अपने लण्ड को उनके बूब्स के बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरे लण्ड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।

8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लण्ड देखते ही उनके होश उड़ गए और वो कहने लगी कि नहीं संजू प्लीज़ मेरे साथ वो मत करना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा- डरो मत दीदी मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा।

मगर वो मान ही नहीं रही थी।

तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इस हथियार को अपने मुंह में ले सकती हो?

उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बार बार प्लीज़ कहने पर वो मान गई। अब वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत में था। उससे खूबसूरत लड़की को मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था और वो मेरा लण्ड चूस रही थी।

थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाई का काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। फिर क्या था मैंने अपना सारा माल दीदी की मुँह में ही डाल दिया। दीदी को शायद ख़राब लगा और उन्हें उलटी आने लगी।

मैं जल्दी से उनकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उनकी चूत पर रख दिये। वो तिलमिला उठी मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के होठों पर रख दी। वो सिसक पड़ी। होले होले मैं उनकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उनकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा। उनकी सिसकियाँ बढ़ने लगी। अब वो सारे बहाने छोड़ कर दोनों हाथो से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपने लगी और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।

मैंने देखा कि वो हाँफ रही है ओर मेरी तरफ़ देख रही है, मैंने उनके कान के पास जाकर फुसफुसा के कहा- दीदी अब बोलो तुम्हे कैसा लगा?

दीदी ने आँख खोली और गहरी साँस ली। मैं उनके ऊपर से नीचे आ गया, दीदी तुंरत बिस्तर पर से नीचे आ गयी। अब दीदी ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गई और मुस्कराया…उसने मुझे चूमना चालू कर दिया। एक हाथ नीचे ला कर मेरा मुरझाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी, मसलने लगी…

लण्ड ने फिर से अंगडाई ली और जाग उठा. दीदी अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे मुठ मारने लगी। कुछ ही देर में मेरा लण्ड चोदने के लिए तैयार था। दीदी मेरे ऊपर लेट गयी, अपनी दोनों टांगे फैला दी, लण्ड का स्पर्श चूत के आस पास लग रहा था। मैंने उनके होंट अपने होटों में दबा लिए। हम दोनों अपने आप को हिला कर लण्ड और चूत को सही जगह पर लेने की कोशिश कर रहे थे। उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया। मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी।

अचानक मेरे अन्दर आनंद की तीखी मीठी लहर दौड़ पड़ी। मेरा लण्ड फिर एक बार और मर्दानगी दिखने के लिए उतावला हो गया। मैंने बाजी पलटी और दीदी को नीचे लिटा दिया और कहा- दीदी एक बार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुत मज़ा आएगा।

वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बार थोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गई और मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर अपने लण्ड और उनकी चूत पर लगाया और अपना काम धीरे धीरे शुरू किया।

उसे बहुत दर्द हो रहा था और मेर लण्ड उनकी चूत में रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुस गया। उनके मुंह से एक मीठी सी सिसकारी निकल पड़ी…’संजू… अ आह हह हह हह… सी ई स स स ई एई…!’

एक धक्का मारा मेरा आधा लण्ड उनकी चूत में चला गया।
वोह चिल्लाई- आआआआअह ह्ह्ह्ह्ह्छ ह्ह्ह… संजू… धीरे!

उनके बाद मैंने धीरे धीरे पूरा लण्ड उनकी चूत में पेल दिया फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, मैंने महसूस किया कि दर्द के मारे उनके आँखों से आंसू निकल आए थे। मैंने उनके गालो को चूम कर पूछा- ज्यादा दर्द हो रहा है..?’

उसने जवाब दिया ‘इस दर्द को पाने के लिए हर लड़की जवान होती है.. इस दर्द को पाए बिना हर यौवन अधूरा है!’

मैं उनके इस जवाब पे बस मुस्कुरा ही पाया क्योंकि मेरे पास बोलने को कुछ था ही नही..

अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।

वो मुझ में लिपटी हुई थी…और मैं उसे चूम रहा था…वो मेरे नीचे थी और अपने पैरों को मेरे कमर के इर्द गिर्द लपेटे हुए थी मानो कोई सर्पिनी चंदन के पेड़ को अपने कुंडली से कसी हो..अब मैंने धीरे धीरे अपनी रफ़्तार तेज कर दी… पूरे केबिन में मादक माहौल था… हमारी सिसकारियाँ ज़हाज के इस केबिन में ऐसे गूंज रही थी मानो जलजला आने से पहले बदल गरज रहे हो…

वो जलजला जल्द ही आया जब मैं अपने कमर की हरकतों की वजह से चरम सीमा पे पहुँचने वाला था .. उधर दीदी भी मुझे बोल रही थी…’.. संजू प्लीज और जोर से..और जोर से…मेरे शरीर में अजीब सी हलचल हो रही है ‘… मैं समझ गया कि वो भी चरम सीमा पे है…इस पर मैंने अपनी रफ्तार काफी तेज कर दी। देखते ही देखते हम उफान पर थे और सैलाब बस फूटने ही वाला था कि मैंने अपना लण्ड बाहर निकला और मानो मेरे लण्ड से कोई झरना फ़ूट पड़ा हो.. मैं वापस उनके बाँहों में निढाल हो गया ..

बहुत देर बाद जब मैं उठा और देखा कि संपा दीदी की जांघों पर खून गिरा है तब मैं समझ गया कि वो अभी तक अन्छुई थी .. मुझे ये देख कर अपने किस्मत पर गर्व हो रहा था और साथ ही साथ दीदी के बारे में सोचने लगा कि .. ऐसी लड़की नहीं थी कि किसी को भी अपना शरीर सौंप दे .. इतने दिनों से अकेले कोलकाता में रहने के बाद भी वो आज तक अन्छुई थी…

मैंने पास में पड़े तौलिए को उठाया और उनके बूर के ऊपर लगे खून को साफ़ करने लगा। जब खून साफ़ हुआ तो मैंने एक बात गौर की और मुस्कुराने लगा।

दीदी ने मुझ से पूछा कि’… तुम क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो ..?’

मैंने उनके बिल्कुल बिना बाल के गुलाब की पंखुड़ियों सी योनि-लबों को चूम कर के बोला… ‘ दीदी सच बताऊँ तो .. मैंने तुम्हारी बूर अभी तक नहीं देखी थी.. और साफ़ करते वक्त अभी ही देखा…!’

और हम दोनों हंस पड़े..

उस दिन से अगले 4 दिन तक आप समझ ही सकते है कि हमारे सैलाब में कितनी बार उफान आई होगी.. जब तक हम अंडमान नहीं पहुँचे।

दोस्तों आप लोगो को मेरी कहानी कैसी लगी अपनी राय मुझे जरूर भेजे। Antarvasna

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