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Antarvasna

मेरा नाम सुरेंद्र है। मैं कॉलेज में Antarvasna अन्तिम वर्ष में पढ़ता हूँ। मेरी उम्र 24 है। मैं बीच की छुट्टियों में मेरे गाँव गया। गाँव में हमारा बड़ा घर है। वहाँ मेरी माँ और पापा रहते हैं। मेरे पापा एक बिल्डर हैं, और माँ एक गृहिणी। हम बहुत अमीर घराने से हैं। हमारे घर में नौकर-चाकर बहुत हैं।

मैं मेरे गाँव गया। दोपहर में मेरे घर पहुँचा। खाना हुआ और थोड़ी देर सोया। शाम को माँ के साथ थोड़ी बातें कीं और गाँव घूमने चला गया। रात क़रीब मैं 8 बजे घर आया। माँ का मूड ठीक नहीं था। मैंने माँ को पूछा- माँ, पापा कहाँ हैं?

माँ ने कुछ जवाब नहीं दिया। मेरी माँ बहुत गुस्से वाली है। वह जब गुस्से में होती है तब वह गन्दी गालियाँ भी देती है। लेकिन वह नौकरों के साथ ऐसा नहीं करती, गालियाँ नहीं देती।
माँ ने कहा- चल, तू खाना खा ले… आज अपना बेटा आया, फिर भी यह घर नहीं आए… तू खा… हम बाद में फार्म-हाउस पर जाएँगे… वहाँ पर तेरे पापा का काम चल रहा है…’

मैंने खाना खाया और हम निकले। पापा ने मेरी माँ को स्कूटर दी थी। हमारा फार्म-हाउस हमारे घर से एक घन्टे पर ही था। माँ ने स्कूटर निकाली, मैं माँ के पीछे बैठ गया। हाँ मेरे माँ का नाम रीमा है, उसकी उम्र 45 है लेकिन वो सुन्दर है, वो एक सामान्य गृहिणी है… सेहत से तन्दरुस्त… थोड़ी मोटी सी।

‘चलो चलें…’ माँ ने पंजाबी पोशाक पहनी थी… मैं माँ के पीछे था… हम चल दिए… मैंने मेरे हाथ से स्कूटर के पीछे टायर को पकड़ रखा था। माँ बीच-बीच में कुछ कह रही थी लेकिन कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। शायद बहुत ही गुस्से में थी.

एक घन्टे में हम फार्म-हाउस पर पहुँच गए। फार्म-हाउस के दरवाज़े पर चौकीदार था। उसने माँ को टोका… और कहा- साहब यहाँ नहीं हैं… वो शहर गए हैं।’ वह हमें दरवाज़े के अन्दर जाने से रोक रहा था।

माँ ने कहा- ठीक है।
और स्कूटर चालू की… हम थोड़ी ही आगे गए और माँ ने स्कूटर रोक दी। उसे कुछ शक हुआ… उसने मुझसे कहा- तू यहीं रुक, मैं आती हूँ।

माँ बंगले की तरफ चली गई। और चौकीदार का ध्यान बचाकर अन्दर चली गई। बंगले में जाकर खिड़कियों में ताक-झाँक करने लगी। मैंने देखा कि माँ क्यों नहीं आ रही है, और मैं भी वहाँ चला गया। मैंने देखा- माँ बहुत देर तक वहाँ खड़ी थी और खिड़की से अन्दर देख रही थी। वह क़रीब 10-15 मिनट वहीं खड़ी थी। मैं थोड़ा आगे गया। माँ ने मुझे देखकर कहा- साले तुझे वहीं रुकने को कहा था तो तू यहाँ क्यों आया? चल वापिस चल, हमें घर जाना है।’ माँ को इतने गुस्से में मैंने कभी नहीं देखा था।

मैं फिर से स्कूटर पर बैठ गया। रास्ते में बारिश चालू हुई। मेरे हाथ पीछे टायर पर थे। गाँव में रास्ते में लाईट नहीं थी। तभी माँ की गांड मेरे लण्ड को लगने लगी। मैं थोड़ा पीछे आया। लेकिन माँ भी थोड़ा पीछे आई और कहा- ऐसे क्यों बैठा है, ठीक से मुझे पकड़ कर बैठ।’
मैंने मेरे दोनों हाथ माँ के कन्धों पर रखे, लेकिन ख़राब रास्ते के कारण हाथ छूट रहे थे।
माँ ने कहा- अरे, पकड़, मेरी कमर को, और आराम से बैठ!

मैंने माँ के कमर पर पकड़ा, लेकिन धीरे-धीरे मेरा हाथ उसकी चूचियोँ पर लगने लगे। वाह! उसकी चूचियाँ… क्या नरम-नरम मुलायम मखमल की तरह लग रहे थे। और मेरा लण्ड भी 90 डिग्री तक गया। वो मेरी माँ की गांड से चिपकने लगा। माँ भी थोड़ी पीछे आई। ऐसा लग रहा था कि मेरा लण्ड माँ की गांड में घुस रहा है।

हमारा घर नज़दीक आया। हम उतर गए। क़रीब रात 11:45 को हम घर आए। माँ ने कहा- तू ऊपर जा… मैं आती हूँ।
माँ ऊपर आई… वो अभी भी गुस्से में लग रही थी। मालूम नहीं, वो क्यों बीच-बीच में कुछ गालियाँ भी दे रही थी। लेकिन वो सुनाई नहीं दे रहा था।

माँ ने कहा- आ, मैं तुझे बिस्तर लगा दूँ।
उसने उसकी चुन्नी निकाली और वह मेरे लिए बिस्तर लगाने लगी। मैं सामने खड़ा था। वह मेरे सामने झुकी और मैं वहीं ढेर हो गया। उसकी चूचियाँ इतनी दिख रहीं थीं कि मेरी आँखें बाहर आने लगीं। उसकी वो चूचियाँ देखकर मैं पागल हो उठा। उसने काली ब्रा पहन रखी थी। उसकी निप्पल भी आसानी से दिख रही थी।
तभी माँ ने अचानक देखा और कहा- तू यहाँ सो जा।

लेकिन मेरा ध्यान नहीं था। वो सामने झुकी… और मेरा ध्यान उसकी चूचियों पर था। वो यह बात समझ गई और ज़ोर से चिल्लाई- सुरेंद्र, मैंने क्या कहा! सुनाई नहीं देता क्या? तेरा ध्यान किधर है? साले मेरी चूचियाँ देख रहा है?
यह सुनकर मैं डर गया लेकिन मैं समझ गया कि माँ को लड़कों की भाषा मालूम है।
उसने बिस्तर लगाया और कहा- मैं आती हूँ अभी!

वह नीचे गई। मैंने देखा उसने हमारे बंगले के चौकीदार को कुछ कहा और ऊपर मेरे कमरे में आ गई। हम दोनों अभी बारिश की वज़ह से गीले थे। माँ मेरे कमरे में आई, दरवाज़े की कड़ी लगाई और उसने अपनी पंजाबी पोशाक की सलवार निकाल कर बिस्तर पर रख दी, मैं मेरी कमीज़ निकाल ही रहा था, इतने में माँ मेरे सामने खड़ी हो गई।

माँ ने मेरी शर्ट की कॉलर पकड़ी और मुझे घसीट कर मेरे बाथरूम में ले गई। मेरे कमरे में ही एक बाथरूम था। माँ फिर बाहर गई और मेरे कमरे की बत्ती बन्द करके मेरे सामने आ के खड़ी हो गई। उसने मेरी तरफ देखा, एक कपड़ा लिया और मेरे बाथरूम की खिड़की के शीशे पर लगा दिया। इसके पीछ वज़ह होगी कि बाथरूम में रोशनी थी और खिड़की से कोई अन्दर ना झाँक सके।

फिर से उसने मेरी ओर देखा… वो अभी भी गुस्से में लग रही थी। तुरन्त ही उसने मेरे गालों पर एक ज़ोर का तमाचा मारा… मैं माँ की तरफ ही गाल पर हाथ रख कर देख रहा था। लेकिन तुरन्त ही उसने मेरे गालों को चूमा और अचानक उसने उसके होंठ मेरे होंठों पर लगा कर मुझे चूमना चालू कर दिया… मैं थोड़ा हैरान था लेकिन मैंने भी माँ की वो बड़ी-बड़ी चूचियाँ देखीं थीं और माँ के साथ मेरे विचार गन्दे हो चुके थे। चूमते-चूमते उसने फिर से मेरी ओर देखा, वो रुक गई… फिर अपनी पूरी ताकत लगा कर उसने अपनी ही ड्रेस फाड़ डाली। फिर तुरन्त उसने मेरी कमीज़ भी खोल दी।

जब उसने अपनी ड्रेस फाड़ी… ओओओहहह… मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि माँ की चूचियाँ इतनी बड़ी होंगीं। वो तो उसकी ब्रा से बाहर आने के लिए आतुर दिख रहीं थीं। फिर वो मुझे चूमने-चाटने लगी..

उसने मुझे चड्डी उतारने को कहा… ‘साले, अपनी चड्डी तो उतार!’

मैंने अपनी चड्डी उतार दी, और मैं अपनी माँ पर चढ़ गया… मैं भी उसकी चूचियों को चाटने लगा-चूमने लगा और ज़ोरों से दबाने लगा… मैंने भी माँ की ब्रा फाड़ डाली। मैं भी एकदम पागलों की तरह माँ की चूचियाँ दबाने लगा.
माँ के मुँह से आहें निकलने लगीं… ‘आआआ ओओओ ईईईमम ओओओ… साआआआलेएए आआआ… ओओओईईईएए’

इतने में उसने मुझे धक्का दिया और एक कोने में छोटी बोतल पड़ी थी उसमें उसने साबुन का पानी बनाया और शावर चालू किया और कहा- मैं जैसा बोलती हूँ… वैसा ही कर!
वह पूरी तरह से ज़मीन पर झुकी और दोनों हाथों से अपनी गांड को फैलाया और कहा- वो पानी मेरी गांड में डाल।

मैंने वैसा ही किया। साबुन का पानी माँ की गांड में डाला। माँ उठी और मेरे लंड को पकड़ा और साबुन लगाया। दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी हुई और कहा- साले, भड़वे, चल तेरा लंड अब मेरी गांड में घुसा।
जैसा आप पहले पढ़ चुके हैं कि मेरी माँ कभी-कभी गालियाँ बहुत देती है। मैंने मेरा लंड माँ की गांड पर रखा और जोर का झटका मार दिया।

माँ चिल्लाई- आआआआ म्म्म्मउऊऊ… आआआआ, साले भँड़वे बता तो सही तू डाल रहा है!

साबुन की वज़ह से मेरा लंड पहले ही आधे से अधिक घुस गया, और मैं भी माँ को ज़ोरों के झटके देने लगा। माँ चिल्लाई… ‘साले, भड़वे… आआआ… उउऊऊऊ… उईईई… आआआ’
मैं भी थोड़ा रुक गया।
माँ बोली- दर्द होता है, इसका मतलब यह नहीं कि मजा नहीं आताआआआआआ… मार और ज़ोर से मार… बहुत मजा आता है… भँड़वे बहुत सालों के बाद मैं आज चुदाई के मज़े ले रही हूँ… आआआईईई आआईईई… आआउऊऊ… मार… मार… मार… आआआ’

वो भी ज़ोरों से कमर हिला कर मुझे साथ दे रही थी और मेरे झटके एकदम तूफ़ानी हो रहे थे। मेरा क़द 5.5 और माँ का 5… हम खड़े-खड़े ही चोद रहे थे… उसकी गांड मेरी तरफ, मैं उसकी गांड मार रहा था… उसका मुँह उस तरफ और हाथ दीवार पर थे… मैं एक हाथ की उंगली उसकी चूत में डाल रहा था.. और दूसरी ओर दूसरे हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था।

तभी उसने मेरी तरफ मुँह किया और एक हाथ से मेरे गाल पकड़े और मेरे होंठों पर उसके होंठ लगाए। हम कामसूत्र के एक आसन में खड़े थे। वह भी मेरे होंठों को चूम कर बोली… ‘तू… थोड़ी देर पहले मेरी चूचियाँ देख रहा था ना… मादरचोओओओद… हाय रे तू… मैं अभी तुझे पूरा मादरचोद बनाऊँगीईईई… .आआआ…’

तभी मैं माँ को बोला… ‘आज इतने गुस्से में क्यों हो?’
माँ बोली… ‘साले… सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। आआईईई उउओओओउऊऊ… जानता है… जब हम फार्म-हाऊस पर गए… ओओईईईई… मैंने क्या देखा… खिड़कीईईईई…ईईई सेएएए…’
मैं एक तरफ झटके दे रहा था इसलिए माँ बीच-बीच में ऐसी आवाज़ें निकालती हुई बात कर रही थी।
मैंने पूछा ‘क्या देखा तूने?’
माँ ने कहा- तेरा बाप किसी और औरत को चोद रहा था। ईईई ओओओओओ… आआआआ… मैं हमेशा इन्तज़ार करती थी… अब मुझे समझ आया… वो बाहर चोद लेता है… आआआ… ईईईई… ओओओओओओ’

मैं रुक गया। वह बोली ‘तू रुक मत… चोद मुझे भँड़वे… अपनी माँ को चोद। आज से तेरी माँ… हमेशा के लिए तेरी हो गई है। आज़…’
मैंने चोदना चालू कर दिया, माँ कहती रही- ‘ओओआआईईम्म तू ही मेरा सामान है… आआओओ ओईईम्म्म… अच्छा लग रहा है।’
तभी मैंने माँ की गांड में ओर ज़ोर का झटका मारा… वो भी उसकी गांड ज़ोरों से आगे-पीछे हिला रही थी… आख़िर में मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड का पानी माँ की गांड में डाल दिया… माँ चिल्लाई… ‘आआओओओम्म्म ईईई… कितना पानी है तेरे में… खत्म ही नहीं हो रहा है। आआउउऊऊ… क्या मस्त लग रहा है… साआआआला मादरचोद… सही चोदा तूने मुझे।’

थोड़ी देर हम एक-दूसरे से ऐसे ही चिपके रहे और फिर पलंग पर चले गए और सो गए।

थोड़ी देर के बाद मेरी नींद खुली… माँ मेरे पास ही सोई थी। हम दोनों अभी भी नंगे ही थे। मैं माँ की चूत में उंगली देने लगा।
तभी माँ की नींद खुली और वो बोली- क्या फिर से चोदेगा?
मैंने कहा- मुझे तेरी चूत चाहिए, तेरी गांड तो मिल गई, लेकिन तेरी चूत चाहिए…
और फिर से उसकी चूत में उंगली डालने लगा, उसे सहलाने लगा।

मुझसे नियंत्रण नहीं हुआ, मैंने माँ के दोनों पाँव ऊपर किए और मेरा लंड माँ की चूत पर रखा और ज़ोर से धक्का मारने लगा। मैंने झटके देना चालू किया। तभी माँ भी कमर हिला कर मुझे साथ देने लगी।
मेरे झटके बढ़ने लगे… माँ चिल्लाने लगी… ‘आआहह चोद.. और चोद.. फाड़ डाल मेरी चूत… तेरे बाप ने तो कभी चोदा नहीं… लेकिन तू चोद… और चोद… मज़े ले मेरीईईई चूत के… आआओउऊ… ईईईई… और तेज़…, और तेज…, आआआईईई मईईईओओआ… आआआ… ओओओ…’

माँ भी ज़ोरों से कमर हिलाने लगी और मैं माँ की चूचियों और ज़ोरों से दबा रहा था। माँ बोली ‘चोद रे… मादरचोद, और चोद… दबा मेरी चूचियाँ… और दबा… और चाट और काट मेरी चूचियों को… और उन्हें बड़े कर दे, ताकि वे मेरी ब्लाऊज़ से बाहर आ जाएँ। दबा और दबा… चल डाल पानी अब… भर डाल अपनी माँ की चूत… पानी से… आआओओ… तेरे गरम पानी से… आआओओ…’

तभी मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड का पानी माँ की चूत में डाल दिया। माँ चिल्लाई… ‘आआआ… ईईई… क्याआआआ गरम पानी है… जैसे असली जवानी… आज से तू मेरा बेटा नहीं… मेरा ठोकया है… आज से तू मुझे ठोकेगा… आआओओईई… क्या पानी है… सालों बाद मिलाआ… आज के बाद अच्छी हो गई… तेरे पाप उस रण्डी के साथ गए… लेकिन उनकी ही वज़ह से मुझे मेरा ठोकया मिल गया…’ आज से तू ही मुझे ठोकेगा…’

थोड़े दिनों के बाद मैं शहर चला गया और मेरे कॉलेज में रम गया। माँ और मैं छुट्टियों की प्रतीक्षा करते, और मौक़ा मिलते ही हम एक-दूसरे की चुदाई करते। Antarvasna

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हाय! रीडर्स मेरा नाम मनीष है। sex stories और मैं मनीषकोट (गुजरात) में रहता हूं, मेरे घर में तीन लोग हैं, मैं,पापा और मां मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और कोई भी मर्द उसे देखे तो उस का दीवाना हो जाये उसके। उसके दोनों दूध इतने बड़े है कि कभी भी उसके ब्लाउज़ में नहीं आते और बाहर से उसकी सत देखती है

हमारा जो भाजी वाला है वो मां से पैसे भी नहीं लेता क्योंकि जेब मां सब्जी खरीद ने जाती है तो वो झुकती है और उसके दोनों चूची बिल्कुल उसके सामने देखते है और उसकी धोती में उसका डंडा खड़ा हो जाता है… ये तो हुई रोज़ की बात लेकिन में अब आप को जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वो सब कुछ मेरी आंखों के सामने हुआ है…

मैंने 12वीं पास कर लिया है अब मुझे बोम्बे की युनिवर्सिटी मे पढ़ाना था वहाँ मेरे अंकल रहते हैं, पापा ने उनसे बात की वो घर आये और सब कुछ समझने के बाद पापा ने मुझे वहाँ जाने के लिये हाँ कहा मैं वहाँ चला गया और थोड़े दिनों बाद घर से मां का फोन आया और मुझसे पूछा कि तु खुश है तो मैंने कहा हाँ फ़िर मां ने कहा जरा अंकल को फोन देना तो मैंने दिया और चला गया

तभी मुझे याद आया कि मुझे अपने दोस्त को फोन करना था मैंने दूसरी लाइन से फोन करने वाला था मैंने जैसे ही रिसीवर उठाया अभी मां और अंकल बातें कर रहे थे मैं वो बातें सुनने लगा

अंकल ने मां से पूछा तुम कब आ रही हो तो मां बोली थोड़े दिनो में!

तब अंकल ने कहा- तुम्हारी गांड, पिकी और बोबले केसे हैं?
ये सुनकर मैं सुन्न हो गया.

तब मां ने जवाब दिया वहाँ आ रही हूं तब सब देख लेना तो अंकल ने कहा तुम्हारा पति नहीं आ रहा?
तो मां मुस्कुरा कर बोली- नहीं।
मां ने कहा- मेरे आने के बाद मुझे मौज कराओगे?
अंकल ने कहा हाँ क्यों नहीं तुम देखना तुम्हारी चुदाई में कोई कसर नहीं होगी!
फ़िर दोनों ने फोन रख दिया…

थोड़े दिनो में मां वहाँ आयी और अंकल उनको देख कर खुश हो गये वो तो मैं वहाँ खड़ा था इसलिये अंकल में कुछ रिएक्शन नहीं देखा था थोड़ी देर के बाद अंकल ने मां के सामने देख कर अपने लौड़े पर हाथ फ़िराया मां ने हाँ में सिर हिलाया फ़िर मां ने मुझसे कहा तुम ऊपर जाओ मुझे अंकल से कुछ बातें करनी है

मैं भी समझ गया था कि आज मां अपनी चुदाई करवाने वाली है
जैसे ही मैं गया दरवाजा बंद हो गया तो मैं वापस आया और की होल में से देखने लगा और बात चीत सुनने लगा…।

मां: क्या आप रात तक नहीं रुक सकते, आज लड़के को पता चल गया तो वो आप के भाई को बता देगा,

अंकल: मेरी रानी उसे कुछ नहीं पता चलेगा, तू चल अपने कपड़े उतार

मां: मुझे शरम आती है,

अंकल:अरे कितनी बार तो तुझे चोद चुका हूं मुझसे कैसी शरम डार्लिंग

मां: अगर मेरा बेटा नीचे आया तो…

अंकल: नहीं आयेगा चलो चलो…

फ़िर अंकल मां के पीछे आये और पीछे से मां की साड़ी और पेटीकोट कमर तक ले गये मैंने देखा कि मां की गांड दिख रही थी थोड़ी देर अंकल ने उसे सहलाया मां के मुंह से अजीब आवाज आ रही थी आअह्हह… आअह्हहा आह्हहा अह्हह ऊऊउह्ह हहाआआ…

मां के कहा- चलो ना डाल दो ना’ तो देर तक मुझे समझ नहीं आया क्या डाल दो फिर अंकल ने अपनी लुंगी में से अपना बड़ा लौड़ा निकाला और मां को देखते हुए बोले ले चाट ले…… मां बिना कुछ कहे चाट ने लगी जब मां चाट रही थी तब अंकल ने उनकी ऊँगली मां की गांड में घुसा दी मां उछल पड़ी और मुंह से आवाज निकल गयी आआहह ह्हहाह और बोली ‘क्या कर रहे हो, बता ना तो चाहिये’ तो अंकल मुस्कुराते हुए बोले ‘बता तो तुम यूं थोड़ी उछलती’ फ़िर अंकल बहुत उत्तेजित हो गये थे और उसने मां के कपड़े उतारने के बदले फ़ाड़ने शुरु कर दिये मां भी उत्तेजित हो चुकी थी फ़िर उस ने मां को आगे की तरफ़ झुकाया और मां की गांड में अपना लौड़ा डालने लगे लेकिन जा नहीं रहा था तब मां ने उनकी हेल्प की, अपने दोनों हाथों से अपनी गांड फ़ैलाते हुए बोली ‘चलो ये रास्ता क्लीयर है’ अंकल ने एक ही झटके में अपना लौड़ा डाल दिया और मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हह मार डाला आअ आआ आआअ… ह्ह दर्द कर रहा है आअ अहहहहा अह…अह… अह… अहह…अ हा अहा ह

फ़िर अंकल अपना लौड़ा अंदर बाहर करने लगे और तेजी से मुंह से आआअ… अ… अअ…ह ह्हह्हह की आवाज चल रही थी 15 मिनट के बाद दोनों शांत पड़ गये

तब मुझे लगा कि अंकल ने अपना वीर्य मां की गांड में छोड़ दिया है फ़िर दोनों थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे फ़िर 5 मिनट के बाद अंकल उठे और अपना लौड़ा मां के मुंह में रख दिया और मां भी उसे लोलीपोप समझकर चूस ने लगी 15 मिनट तक ऐसा ही हुआ फ़िर शायद अंकल फ़िर तैयार हो गये उसने मां की चूत पर हाथ फ़िराते हुए कहा ‘अब इस की बारी है’

तो मां बोली- हाँ, चलिये!
अंकल ने कहा ‘काफ़ी साफ़ है’
तब मां बोली ‘कल ही साफ़ की है’

फ़िर अंकल मां के ऊपर चढ़ गये और अपने लौड़े को अंदर डाल दिया और मां मुंह से आआअ… अ…अअ… ह्हह की आवाज शुरु हो गयी और बोली थोड़े देर रुकिये दर्द हो रहा है
लेकिन अंकल ने सुना नहीं और शोट लगाते गये और मां चिल्लाती गयी, मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हहह… हहह

आधे घंटे तक ऐसा चला फ़िर दोनों शांत पड़ गये 15 मिनट के बाद दोनों ने कपड़े पहने मां ठीक से चल भी नहीं पा रही थी लेकिन अंकल को और चोदने की इच्छा थी वो मां को पकड़ कर चूमने लगे

तब मां ने कहा- अब रात के लिये तो कुछ रखो, रात को मैं तुम्हारे पास ही आऊँगी!
अंकल ने कहा- ठीक है!
और वो दोनों दरवाजे की तरफ़ आये तो मैं ऊपर चला गया फ़िर मां ऊपर आइ मां कोई गीत गा रही थी मैंने मां को इतना खुश कभी नहीं देखा जब पापा मां की चुदाई करते हैं… और उस रात कि चुदाई sex stories फ़िर कभी बताऊँगा बाय बाय!!

Antarvasna

यह मेरे पड़ोस में Antarvasna रहनी वाली विश्रांती-रेशमा की कहानी जिनको मैंने गणित सिखाने के बहाने कैसे चोदा।

एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था। उस दिन विश्रांती और रेशमा दोनों मेरे घर चली आई। मैं उनके लिए चाय बनाने के लिए रसोई में गया। वे दोनों गप्पे हाँक रही थीं… मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।

विश्रांती- रेशमा, मैं कुछ पूछूँ तुझे?

रेशमा- हाँ विश्रांती, पूछ ना!

विश्रांती- आजकल सुहास और तू दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?

रेशमा- अरे नहीं विश्रांती! वो मुझे गणित का प्रोब्लम है इसलिए मैं अकसर उसके घर जाती हूँ, इसमें बुरा क्या है?

विश्रांती- रेशमा, तुम रोज दरवाजा क्यूँ बंद करके पढ़ते हो?

रेशमा- अरे विश्रांती वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे!

विश्रांती- रेशमा, तू तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।

रेशमा- तू ऐसा क्यूँ बोले रही है?

विश्रांती- मैंने एक दिन दरवाज़े पर कान लगा कर आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी! मुझे सब पता है वहाँ कैसी गणित की पढ़ाई होती है!

रेशमा मुस्कुराते हुए- अच्छा तो तुझे सब पता है! तो ऐसा बोलो ना! देखो किसी से बोलना मत! तो तू चाहती है कि सुहास तुझे भी ऐसे ही गणित सिखाए?

विश्रांती- चाहने से क्या होगा रेशमा!

रेशमा- अच्छा यह बता! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना?

विश्रांती- हाँ रेशमा, दूध तो निकलता है और अब बच्ची भी नहीं पीती… सो भरा हुआ है…

रेशमा- तब तो सुहास जरूर तुम्हें गणित सिखाएगा, रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी!

तभी मैं नाश्ता लेकर वहाँ आ गया। तुरंत दोनों ने विषय बदल दिया।

उसी दिन शाम को फ़िर विश्रांती मेरे घर चली आई।

विश्रांती- सुहास, रेशमा जैसे मुझे भी गणित सिखाओ ना!

मैं- विश्रांती तुझे भी गणित सीखना है…

विश्रांती- सुहास, तुझसे कुछ सवाल पूछने हैं…

मै- हाँ विश्रांती, रेशमा ने बोला था… मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रहा था, हा पूछ ना!

मैं- विश्रांती तुम सलवार-कमीज में बहुत खूबसूरत लग रही हो…

विश्रांती- तुझे अच्छा लगा यह ड्रेस?

मैं- हाँ विश्रांती, तू ऐसे ही ड्रेस पहना कर… बहुत अच्छी लगती है… पूछ क्या पूछना है?

विश्रांती- तू तो बस रेशमा से ही बातें करता है…

मैं- नहीं विश्रांती ऐसी कोई बात नहीं है… तू भी बहुत अच्छी है…

बात करते करते विश्रांती ने अपना दुपट्टा सरका दिया… विश्रांती के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे… मैं भी अपने आप को रोक न सका… विश्रांती की चूचियों को देखने लगा…

विश्रांती- सुहास, मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो… क्या देख रहे हो नीचे?

मैं- विश्रांती कुछ नहीं, सच्ची में तू भी बहुत अच्छी है…

विश्रांती- तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता… क्या देख रहा है नीचे?

मैं- कुछ नहीं विश्रांती…

विश्रांती- कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा?… बदमाश!

मैं- विश्रांती मैं साफ बोलूँ तो गुस्सा नहीं होगी ना?

विश्रांती- नहीं सुहास, तू मेरा दोस्त है उसमें क्या गुस्सा करना!

मैं- विश्रांती तेरे वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहाँ से…

विश्रांती- ये तो मेरी बच्ची को दूध पिलाने के लिए हैं….

मैं- विश्रांती, तेरी बच्ची तो अब बड़ी हो गई है! उसे अभी भी दूध पिलाती हो?

विश्रांती- नहीं! अब ओ नहीं पीती दूध!

मैं- विश्रांती, तेरी चूची में दूध है क्या?

विश्रांती- हाँ अभी भी दूध है… इसलिए तो इतने बड़े हैं!

मैं- विश्रांती मुझे प्यास लगी है…

विश्रांती- ठहर, मैं पानी लेकर आती हूँ…

मैं- विश्रांती, पानी नहीं दूध पीना है… चूची का दूध…

विश्रांती- बदमाश! कोई ऐसे दूध पीता है भला?

मैं- क्यूँ नहीं? पीने दो न… तेरे दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊँगा…

विश्रांती- अच्छा ठीक है पी ले… काफी दिन से भरी हुई हैं… खाली करने वाला कोई है नहीं…

फिर विश्रांती ने अपना कमीज़ उतार दिया… अब विश्रांती ब्रा में आ गई…

विश्रांती- आ जा सुहास! मेरी गोद में आ… तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊँगी…

मैंने विश्रांती की गोद में सिर रख लिया… विश्रांती ने अपनी ब्रा उतारी… और अपनी चूची को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया… लो सुहास पी लो… अच्छे से पीना…

उसके बाद मैं दूध का प्यासा विश्रांती का दूध मेमने की तरह पीने लगा… कभी बाईं चूची से तो कभी दाईं से…

साथ में चूची सहला भी रहा था।

विश्रांती- तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो!

मैं- विश्रांती, तूने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा तेरा आभारी रहूँगा… तू जो बोलोगी वो सब करूँगा…

विश्रांती- जो बोलूंगी वो करेगा?

मैं- हाँ विश्रांती, तू एक बार बोल के तो देख…

विश्रांती- अच्छा ठीक है… सुन, मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है… ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?

मैं- नीचे कहाँ विश्रांती?

विश्रांती- तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?

मैं- बोलो ना विश्रांती! तेरी मुँह से सुनना चाहता हूँ।

विश्रांती- अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है… मिटा दे ना…

मैं- कैसे मिटा दूं? उंगली से या चाट के? या फिर लंड ही डाल दूँ?

विश्रांती- मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है…

मैं- विश्रांती, मैं तेरी चूत का ख्याल रखूंगा…

विश्रांती- अपनी रेशमा से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना… . रेशमा तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती है…

मैं- तुम लोग ये सब बातें भी करती हो?

विश्रांती- तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?

मैं- विश्रांती, अभी तूने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?

विश्रांती- अच्छा तो यह बात है? तो जितना जलवा देख चुके हो उसमें कौन ज्यादा अच्छा लगा?

मैं- विश्रांती, इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है… रेशमा की चूची में अमृत तो है ही नहीं! दूध तो तू ही पिला सकती है… तब इसमें तू ही न हुई रानी… विश्रांती, अब तू अपने कुछ और जलवे भी दिखा ना!

विश्रांती- हाँ सुहास तेरी विश्रांती, आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा…

और फिर विश्रांती ने अपने कपड़े खोलने शुरु किये… विश्रांती जब पेंटी और ब्रा में आ गई तो मैं उसकी मदद करने लगा…

मैं- विश्रांती, लाओ अब मैं खोल दूं!

विश्रांती- हाँ सुहास! आ अपनी विश्रांती को नंगी कर दे…

विश्रांती मेरे पास आ गई… मैं विश्रांती की ब्रा को खोल के प्यार से सूंघने लगा… . विश्रांती की मादक मुस्कराहट ने और भी मजा भर दिया… फिर विश्रांती की पेंटी को एक ही झटके में खोल दिया… .पेंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।

फिर विश्रांती अपने हाथ मेरी पैंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगी… . मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी… . मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ. विश्रांती ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया… .अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे… विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है…

विश्रांती- सुहास, तेरा लंड तो काफी बड़ा है रे…

मैं- विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा… .

विश्रांती- क्या करूँ सुहास, ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है… .

मैं- विश्रांती तुझे पता है रेशमा तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती है…

विश्रांती- वाह रे बदमाश! अपनी विश्रांती को लंड मुँह में लेने बोल रहा है… .ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…

मैं- विश्रांती तो ले लो ना इसे…

फिर विश्रांती प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी… . इतना तो पता चल ही गया था कि विश्रांती को लंड चूसने में बहुत मजा आता है… रेशमा ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था… फिर जब विश्रांती मेरे लंड से खेल रही थी… मैं विश्रांती की चूची को मज़े देने लगा… . इतनी मुलायम चूचियाँ को सहलाना, नीचे लंड का विश्रांती से चुसवाना… सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है…

मैं- विश्रांती, लंड चुसवाने में इतना मजा आज तक नहीं आया… विश्रांती मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, विश्रांती उल्टा-पुल्टा करें… .

विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?

मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा… .अच्छा चल, मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब तू मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से तेरी चूत का रसपान करूँगा!

विश्रांती- अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मजा आएगा…

फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे… विश्रांती की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… विश्रांती की चूत काफी गीली हो गई थी… . इसलिए चाटने में बहुत मजा आ रहा था… मैं विश्रांती को बहुत मन से चाट रहा था… . विश्रांती भी काफी उत्तेजित हो गई थी… विश्रांती ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था।… ऐसा मजा विश्रांती ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था…

मैं- विश्रांती तेरा रस कितना स्वादिष्ट है… अब मेरा रस भी निकाल दे… अब मेरी लंड तेरी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता…

विश्रांती- आ न सुहास… अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ…

फिर विश्रांती बिस्तर पे लेट गई… अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी… चूत तो जैसे कि लंड के लिए बनी हो… मैंने भी अपना लंड हाथ में लेकर उसकी चूत पर लगा दिया…

विश्रांती- दे धक्का!… चोद अपनी विश्रांती को… चोद…

मैं- ले विश्रांती… ये गया मेरा लंड तेरी चूत में… चुद अपने सुहास से मेरी प्यारी विश्रांती…

फिर विश्रांती गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी… मैं भी विश्रांती को जी जान लगा के चोदने लगा… फिर विश्रांती ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया… उस पोजिशन में बहुत मजा आया… फिर विश्रांती मेरे ऊपर सवार हो गई… इसमें तो मेरा लंड सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था… करीब मिनट के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया… विश्रांती ने बड़े प्यार से फिर मेरे लंड को साफ़ किया… वो मुझे बेतहाशा किस कर रही थी… विश्रांती बहुत खुश थी…

विश्रांती- अपनी विश्रांती को चोदने में कैसा लगा… रेशमा को चोदने में ज्यादा मजा आया था क्या?

मैं- नहीं विश्रांती तू कुछ माल है… तुझे चोदने में बहुत मजा आया… मैं अब तुझे ही चोदूंगा…

विश्रांती- अरे नहीं सुहास! दोनों को चोदना… रेशमा भी बहुत अच्छी है उसने ही तो मुझे तेरा लंड दिलाया… तू उसे कभी नाराज़ न करना…

फिर मैं रेशमा और विश्रांती के साथ मस्ती करने लगा… दोनों प्यार से मुझसे चुदती हैं…

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(Hastmaithun - Masturbation Ek Labhadayak Kriya)

हमारे देश में यौन, खास तौर से Masturbation के प्रति बहुत सी भ्रांतियाँ हैं जो कि या तो अनपढ़ लोगों ने या फिर निहित-स्वार्थ से प्रभावित लोगों ने समाज में फैलाई हुई हैं। पर जैसे जैसे समाज में शिक्षा फैली है और इस विषय पर शोध हुआ है इनमें से कई भ्रांतियों का पर्दा-फाश हुआ है।

दुर्भाग्यवश, इसके बारे में जानकारी केवल पढ़े-लिखे और समृद्ध लोगों तक ही सीमित है और इसका प्रचार अंग्रेजी तथा यूरोपीय भाषाओं में ही हुआ है। हमारे देश में अभी भी ढोंगी लोग (जो कि डॉक्टर, तांत्रिक, हकीम, वैद या स्वामी के रूप में फैले हुए हैं) इस अज्ञान का फ़ायदा उठा कर मासूम और अबोध लड़के-लड़कियों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें उपचार देने के बहाने उनसे पैसे लूट रहे हैं।

अन्तर्वासना की कोशिश है कि यौन-सम्बन्धी विषयों पर हिंदी-प्रार्थी समुदाय को सही व उचित ज्ञान प्राप्त हो जिससे वे इस अत्यंत आवश्यक, अत्यंत निजी और अत्यंत आनन्ददायक प्राकृतिक उपलब्धि का पूरा लाभ उठा सकें। यह लेख इसी अभियान की एक कड़ी है।

हस्तमैथुन Masturbation एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जिसे यौन सन्तुष्टि के लिए पुरुष और स्त्री दोनों ही करते हैं। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि हर आयु के लोग स्वेच्छा से करते हैं। हस्तमैथुन, यानि हस्त+मैथुन, मतलब हाथ से किया जाने वाला मैथुन (सम्भोग) अर्थात अपने यौनांगों को इस तरह से छूना, रगड़ना, सहलाना या उनमें कोई कृत्रिम चीज़ डालना जिससे करने वाले को चरम आनन्द प्राप्त हो।

यहाँ अपने हाथ (हस्त) को पुरुष स्त्री की योनि के एवज में और स्त्रियाँ अपनी ऊँगली पुरुष के लिंग के एवज में प्रयोग करती हैं। इसे तब तक करते हैं जब तक पूरी तरह उत्तेजित ना हो जाएँ और परम आनन्द महसूस ना कर लें।

हालांकि हस्तमैथुन को हमारे समाज में अभी भी हेय दृष्टि से देखा जाता है, किन्तु सर्वेक्षण से पता चला है कि लगभग सभी स्त्री-पुरुष अपने जीवन में कभी न कभी हस्तमैथुन करते ही हैं। कब करते हैं और कितना करते हैं- यह तो बहुत से कारकों और हालातों पर निर्भर करता है इसलिए हस्त-मैथुन की कोई ‘सामान्य-दर’ नहीं है।

कुछ लोगों की यौन इच्छा औरों के मुक़ाबले प्रबल होती है, जैसे जवान लड़के-लड़की, तो किन्हीं के हालात ऐसे होते हैं कि वे अपनी यौन-इच्छा की तृप्ति नहीं कर पाते हैं जैसे मोर्चे पर तैनात सैनिक, जेल में बंद कैदी, किसी बीमारी से त्रस्त मरीज़ या फिर किसी भी कारण से बिछड़े हुए दाम्पत्य जोड़े।

ऐसे लोग ज्यादा हस्त-मैथुन करते हैं। कुछ लोग में यौन-इच्छा कुदरतन कम होती है या उनको सामान्य सम्भोग के अवसर मिलते रहते हैं… इस तरह के लोग हस्त-मैथुन कम बार करते हैं।
मतलब, हस्तमैथुन करने की दर दिन में दो-तीन बार से लेकर महीने में दो-तीन बार हो सकती है।

यह भी देखा गया है कि यौन-इच्छा एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रबल ताक़त है जिस पर सामान्य लोगों का जोर नहीं चलता। जब किसी स्त्री-पुरुष में यौन-इच्छा उत्पन्न हो जाती है तो उसकी तृप्ति के लिए वह हर संभव प्रयत्न करने के लिए विवश हो जाते हैं।
यह एक प्राकृतिक ज़रूरत है जिसके अभाव में इस सृष्टि की रचना ही डाँवाडोल हो सकती है… अतः यौन-इच्छा का प्रबल होना और इसकी तृप्ति के लिए त्रस्त होना ना केवल मानव-जाति के लिए अपितु अधिकाँश जानवरों के लिए भी अनिवार्य है।

ऐसे में जब भी किसी स्त्री-पुरुष में इस इच्छा की प्रवृत्ति होती है उसका सम्भोग के लिए विवश होना स्वाभाविक है। अगर ऐसे कामोन्मुक्त व्यक्ति को सम्भोग के लिए कोई साथी ना मिले तो उसके पास हस्त-मैथुन ही एक ऐसा सहारा रह जाता है जिससे वह सुरक्षित, कानूनी एवं परिपूर्ण तृप्ति प्राप्त कर सकता है।
कोई और सहारा या तो सुरक्षित नहीं होगा, या कानूनी नहीं होगा या फिर परिपूर्ण सुख नहीं देगा।

इस लिहाज़ से जो लोग हस्तमैथुन को बुरा मानते हैं या इसके झूठे दुष्परिणामों की अफवाहें फैलाते हैं, वे एक तरह से वेश्यावृति, देह शोषण जैसे यौन-अपराधों को पैदा करने में मदद करते हैं।
अगर सभी यौन-उत्तेजित पुरुष अपनी तृप्ति हस्त-मैथुन से कर लें और ऐसा करने में उन्हें कोई व्यक्तिगत हानि का गलत डर ना हो तो समाज में लड़कियों और बहु-बेटियों की सुरक्षा अपने आप सुधर जाए।इसी तरह अगर स्त्रियाँ भी अपनी कामवासना की प्यास हस्त-मैथुन से बुझा लें तो कई सामाजिक और वैवाहिक तनाव से मुक्ति मिल सकती है।
अर्थात हस्तमैथुन के फायदे ही फायदे हैं… फिर भी ना जाने क्यों इसके प्रति इतनी गलतफ़हमियाँ और दुष्प्रचार फैला हुआ है।

हस्तमैथुन के प्रति गलत भ्रांतियाँ

हालांकि हस्तमैथुन के प्रति कई भ्रांतियाँ हैं पर लगभग सभी भ्रांतियाँ पुरुषों पर लागू होती हैं। क्योंकि ये भ्रांतियाँ अनपढ़ और स्वार्थ-निहित लोग फैलाते हैं उन्हें शायद यह नहीं पता कि हस्त-मैथुन स्त्रियों में भी उतना ही प्रचलित है जितना मर्दों में;
बल्कि स्त्रियाँ पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा हस्त-मैथुन का सहारा लेती हैं क्योंकि एक तो पुरुषों के बनिस्पत उन्हें सम्भोग की तत्परता दर्शाने की समाज इजाज़त नहीं देता और दूसरे सम्भोग के बाद भी जहाँ लगभग सभी पुरुष अपनी यौन पिपासा शांत कर लेते हैं वहीं लगभग 80% स्त्रियाँ पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पातीं और ना ही अपनी असंतुष्टि ज़ाहिर कर पाती हैं।
ऐसी हालत में वे हस्त-मैथुन के द्वारा ही चरमोत्कर्ष प्राप्त करती हैं।

इस पृष्ठभूमि के चलते हस्त-मैथुन के बुरे परिणामों का असर केवल पुरुषों पर होना अपने आप में एक भ्रान्ति है। अगर हस्त-मैथुन से शरीर पर बुरा असर पड़ता है तो स्त्रियों के शरीर पर क्यों नहीं? असल में ये भ्रांतियाँ पुरुषों के लिए इसलिए पनपी हैं क्योंकि पुरुष, स्त्रियों के मुकाबले, यौन सम्बन्धी विषयों पर बातचीत करने के लिए ज्यादा मुखातिब होते हैं।

सामाजिक बंधनों के चलते लड़कियाँ व औरतों अपनी यौन-सम्बंधित समस्याओं और प्रश्नों का ना तो खुल कर समाधान ढूंढ सकती हैं और ना ही किसी से विचार-विमर्श कर सकती हैं। यह छूट केवल लड़कों और पुरुषों को है। अतः यौन सम्बन्धी भ्रांतियाँ एवं दुर्प्रचार आदमियों (खास तौर से लड़कों) के लिए ही संभव थे। आइये, कुछ भ्रांतियों पर एक नज़र डालें :

  1. हस्तमैथुन केवल युवा मर्द करते हैं- यह सच नहीं है। हस्तमैथुन पर अनुसंधान व शोध से अब यह प्रमाणित हो गया है कि हस्तमैथुन हर वर्ग और उम्र के स्त्री-पुरुष करते हैं। अमुमन यह क्रिया काफी छोटी उम्र में शुरू हो जाती है जब कि बच्चों को यौन-ज्ञान भी नहीं होता है पर अपने लिंग से खिलवाड़ करना उन्हें मज़े देता है।

देखा गया है कि हस्त-मैथुन कच्ची उम्र से शुरू होकर वृद्धावस्था तक चलता है और इसे हर तबके के लोग- अमीर-गरीब, पढ़े-लिखे या अनपढ़, स्त्री एवं पुरुष, बूढ़े और जवान- सभी करते हैं।

  1. हस्तमैथुन विवाहित लोगों की तुलना में अविवाहित लोगों में ज्यादा होता है- यह भी सच नहीं है। विवाहित स्त्री-पुरुष सम्भोग से परिचित और उसके आदि हो गए होते हैं… अतः सम्भोग के अभाव में उन्हें यौन क्रिया की कमी अविवाहित लोगों के मुकाबले ज्यादा खलती है और वे हस्तमैथुन का सहारा ज्यादा लेते हैं।

विवाहित होने का अर्थ यह भी नहीं कि स्त्री-पुरुष को सम्भोग सुविधा और अवसर सदैव मिलते रहे। कई कारणों से वे सम्भोग से वंचित रह सकते हैं और ऐसी हालत में उन्हें अविवाहित जोड़ों के मुकाबले ज्यादा तड़प होती है।

  1. हस्तमैथुन करने से शरीर कमज़ोर हो जाता है और कई विकार पैदा हो जाते हैं- यह सरासर झूठ है। ढोंगी और पैसा-परस्त लोग मासूम लोगों के अज्ञान का फायदा उठाते हुए अफवाह फैलाते हैं कि स्वप्न-दोष, बाल झड़ना, चेहरे पर मुहांसे निकलना, याददाश्त कमज़ोर होना इत्यादि हस्त-मैथुन के कारण होती हैं।

असल में ये एकदम सामान्य विकार हैं जो लगभग सभी लड़के-लड़कियों को किशोरावस्था में होते हैं… यह वही उम्र होती है जब युवाओं को अपने यौनांगों के प्रति जागरूकता पनपती है और वे हस्त-मैथुन करना शुरू करते हैं। ऐसे में ढोंगी लोगों को मासूम युवाओं को यह समझाने में मुश्किल नहीं होती कि उनके विकार हस्त-मैथुन के कारण हो रहे हैं।

उनके दिमाग में हस्त-मैथुन को एक गलत क्रिया और पाप की संज्ञा देकर उनको बहकाया जाता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इन भ्रमों को नष्ट कर दिया है। असल में जवानी में कदम रखते युवाओं में जो सामान्य शारीरिक बदलाव आते हैं या जो मानसिक रूप से उनके लिए चिंता का विषय होते हैं, ऐसी बातों का ही स्वार्थ-निहित लोग नाजायज़ फायदा उठाते हैं।

अक्सर यौन सम्बन्धी समस्याएँ बच्चे, शर्म के कारण, अपने माँ-बाप से छुपाकर अपने दोस्तों या अनजान लोगों से पूछना बहतर समझते हैं… इस विषय पर स्कूल या कॉलेज में भी कोई विधिवत चर्चा नहीं होती… यही कारण है कि युवा लड़के-लड़कियों को सही ज्ञान नहीं मिला पाता।
सच तो यह है कि हस्त-मैथुन एक सुरक्षित और सेहतमंद क्रिया है जिसे करना प्राकृतिक भी है और अनिवार्य भी। इसको करने से कोई दुष्परिणाम नहीं होते बल्कि इसके परहेज़ से कई शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

  1. हस्त-मैथुन करने से पुरुष का लिंग कमज़ोर हो जाता है- यह बिल्कुल गलत है। हस्त-मैथुन से आनंद और वीर्योत्पात के अलावा और कोई प्रभाव नहीं होता।
    वयस्क पुरुषों के लिए समय समय पर वीर्योत्पात उतना ही ज़रूरी है जितना मूत्र और मल त्यागना। हम वीर्य को शरीर में अनिश्चित काल के लिए नहीं संजो सकते… हमारे शरीर में विशेष ग्रंथियाँ हैं जिनका मूल काम वीर्य उत्पादन है… वयस्क मर्दों में ये ग्रंथियाँ वीर्य उत्पादन करके उसे एकत्रित करती रहती हैं।
    पर एक निश्चित मात्रा का वीर्य ही संजोया जा सकता है… अगर वीर्य का सामयिक स्खलन नहीं होगा तो वह स्वतः रात को स्वप्नदोष के रूप में निकल जायेगा।

स्वप्नदोष जैसे अनियंत्रित स्खलन से तो हस्त-मैथुन द्वारा आनंद लेकर वीर्योत्पात करना समझदारी का काम है। इससे कोई कमजोरी नहीं आती और ना ही कोई विकार पैदा होते हैं।

  1. हस्त-मैथुन से पुरुष गंजे और अंधे हो जाते हैं- यह भी पूरी तरह गलत धारणा है। हस्त-मैथुन और शरीर की किसी भी बीमारी का कोई वैज्ञानिक सम्बन्ध नहीं है। अगर यह सच होता तो दुनिया में सभी गंजे और अंधे होते !!

हाँ, यह सच है कि हस्त-मैथुन के कुछ प्रभाव ज़रूर होते हैं, जैसे कि

  1. यौन तड़प से मुक्ति
  2. यौन-अपराधों में कमी
  3. सम्भोग के अभाव में सम्भोग सा सुख
  4. पर-पुरुष या पर-स्त्री के सम्मोहन से मुक्ति
  5. एक बार हस्त-मैथुन के वीर्योत्पात के बाद किया गया सम्भोग पुरुष को देर तक सम्भोग-रत रहने में तथा स्खलन टालने में बहुत उपयोगी होता है। इससे स्त्री को सम्भोग द्वारा चरमोत्कर्ष प्राप्ति की संभावना बढ़ जाती है जिससे वह स्त्री उस पुरुष से ज्यादा प्रेम करने लगती है।

पर ये सब तो अच्छे प्रभाव हैं… इसलिए बेझिझक और दिल भर कर हस्त-मैथुन करना चाहिए। यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। हाँ, जैसे कोई भी अच्छी क्रिया अत्याधिक मात्रा में की जाये तो हानिकारक हो सकती है… तो हस्त-मैथुन भी उपयुक्त समय और उपयुक्त मात्रा में करना ही उचित है। इसके प्रति आसक्त होना या इसको सम्भोग के एवज में करना ठीक नहीं है।

हस्त-मैथुन कैसे करते हैं?

हस्त-मैथुन सम्भोग क्रिया का ही अनुकरण है। तो भले ही वह पुरुष हो या स्त्री, हस्त-मैथुन करते समय अपने यौनांगों को इस तरह इस्तेमाल करते हैं जिससे उन्हें सम्भोग-क्रिया जैसा सुखी अनुभव हो।
पुरुष का लिंग योनि में प्रवेश करके जिस घर्षण का अनुभव करता है वही घर्षण पुरुष अपने लिंग को अपने हाथ से देने का प्रयास करता है।
इसी प्रकार से सम्भोग के दौरान जिस तरह स्त्री की योनि तथा भगनासा को मर्दाना लिंग रगड़ता है और योनि में प्रवेश होकर अंदर-बाहर होता है, वही रगड़ हस्त-मैथुन के द्वारा स्त्री अपनी योनि और भगनासा को देने की चेष्टा करती है।

पुरुष कैसे करते हैं?

सभी पुरुष मूल रूप से समान हस्त-मैथुन करते हैं, जिसमें अपने लिंग को हाथ में पकड़कर दबाना या लिंग के ऊपर हथेली चलाना सबसे सामान्य और प्रचलित तरीका है।
कभी-कभी वे हथेली पर चिकनाई लगाकर हथेली को गीली योनि का प्रारूप देने की कोशिश करते हैं जिससे उन्हें अपार आनन्द की अनुभूति होती हैं। हस्त-मैथुन वे तब तक जारी रखते हैं जब तक उनका वीर्यपात नहीं हो जाता।
इसके अतिरिक्त, पुरुष दो तकियों के बीच अपना उत्तेजित लिंग घुसा कर धीरे-धीरे आगे-पीछे धक्का देते हैं, मानो स्त्री की योनि में अपना पुरुषांग प्रविष्ट कर रहे हों।

अब तो कई प्रकार के खिलौने बन गए हैं जो कि योनि और गुदा की तरह बने होते हैं और जिनका इस्तेमाल पुरुष आसानी से कर सकते हैं। ये खिलौने ऐसे पदार्थ से बने होते हैं कि लगभग महिला जननांग जैसा ही अनुभव देते हैं।
आधुनिक तकनीक के चलते अब ऐसी गुड़ियाँ बन गई हैं जो छूने से त्वचा छूने जैसा अनुभव देती हैं और जिनके अंग एक लड़की के अंगों की तरह हिलाए तथा मोड़े जा सकते हैं। इन गुड़ियाओं की योनि और गुदा के आलावा इनके मुँह को भी इस तरह बनाया जाता है कि उसे मौखिक मैथुन के लिए पुरुष प्रयोग कर सकते हैं।

कुछ पुरुष ऐसी गुड़ियाओं को लड़कियों से भी ज्यादा अच्छा समझते हैं क्योंकि इनके साथ जब चाहे सम्भोग किया जा सकता है और इनमें लड़कियों वाली कोई समस्या नहीं होती।
ये गुड़ियाँ महँगी होती हैं और हमारे देश में इनका प्रचलन इतना व्याप्त नहीं है। प्रोस्टेट एक ऐसी ग्रंथि है जो पुरुषों में वीर्य के लिये तरल पदार्थ पैदा करती है। यह गुदा के अन्दर स्थित होती है और इसे गुदा में उँगली डालकर महसूस किया जा सकता है।
ऐसा करने से आनन्द मिलता है; अत: यह भी हस्तमैथुन का एक तरीका है। कुछ ऐसे मसाज पार्लर होते हैं जहाँ लड़कियाँ पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि की मसाज करके
उन्हें उन्मादित करती हैं।

स्त्रियाँ कैसे करती हैं?

स्त्रियों के लिए सबसे सामान्य हस्त-मैथुन का तरीका अपनी भगनासा को ऊँगली के सिरे से सहलाना और मलना पाया गया है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि लड़कियाँ हस्त-मैथुन के लिए अपनी योनि में कोई लिंग के आकार की वस्तु डालकर उसे अंदर-बाहर करती होंगी।

हालांकि, स्त्रियाँ यह भी करती हैं पर यह इतनी प्रिय क्रिया नहीं है… शायद इसलिए कि एक तो इसे करने के लिए उचित लिंगाकार वस्तु ज़रूरी होती है जो हर समय उपलब्ध नहीं होती और दूसरे, ऐसा करने के लिए उन्हें जो आसन ग्रहण करने होते हैं वे हमेशा संभव नहीं होते।

स्त्रियों को हस्त-मैथुन बड़ी गोपनीयता और कम समय में करना होता है और इस कारण वे अपनी ऊँगली से अपनी भगनासा, जो कि मानव शरीर का सबसे मार्मिक और उत्तेजनशील अंग है, को सहला कर और अपनी योनि के होठों को मसल कर तृप्ति प्राप्त कर लेती हैं।
इसके अलावा वे अपने भगोष्ठ के साथ अपनी तर्जनी या मध्यमा अँगुली से खेलती हैं तो कभी योनि के अन्दर एक या दो अँगुलियाँ डालकर मैथुन का अनुकरण करती हैं। अगर समय का अभाव ना हो और उपयुक्त एकांत भी हो तो हस्‍तमैथुन के लिये सब्जियॉं, जैसे लम्बे बैंगन, खीरा, गाजर, मूली, ककडी आदि अपने जननांग में प्रविष्ट कराकर सन्तुष्टि प्राप्‍त कर लेती हैं।
सब्जियों के आलावा कुछ घरेलु लिंगाकार चीज़ें जैसे मोटा कलम, मोमबत्ती, बेलन का हत्ता इत्यादि का प्रयोग भी होता है। यह भी देखा गया है कि कुछ महिलायें पलंग के किनारे अथवा किसी मेज के किनारे से अपने यौनांग रगड़ कर भी यौन-सुख प्राप्‍त कर लेती हैं।

कुछ महिलाएँ केवल विचार और सोच मात्र से तो कुछ अपनी टाँगें कसकर बन्द करके योनि पर इतना दबाव डालती हैं कि उन्हें यौन-सुख अनुभव हो जाता है।
ये काम वे सार्वजनिक स्थानों पर भी बिना किसी की नजर में आये कर लेती हैं।
इस क्रिया को महिलाएँ बिस्तर पर सीधी या उल्टी लेटकर, कुर्सी पर बैठकर या उकडूँ बैठकर भी कर सकती हैं। लेकिन ऐसी कोई भी क्रिया जिसे बिना हाथ के सम्पर्क के पूरा किया जाता है हस्तमैथुन की श्रेणी में नहीं आती।

जिस तरह मर्दों के यौन-सुख के लिए खिलोने बने हुए हैं, स्त्रियों के सुख के लिए भी तरह तरह के खिलोने (डिल्डो) बन गए हैं। ये मूल रूप से बड़े लिंग के आकार के होते हैं जिनपर हाथ में पकड़ने की जगह होती है और जिनको औरतें अपनी योनि या गुदा में घुसा कर मैथुन सुख प्राप्त कर सकती हैं।

तकनीकी उन्नति के चलते इन कृत्रिम लिंगों में काफी विकास हुआ है और अब ये तरह तरह के आकार, पदार्थ और सुविधाओं से लैस होते हैं। इनमें बैटरी से थरथराहट (वाईब्रेटर) पैदा की जा सकती है।
कुछ कृत्रिम लिंगों की बनावट दुमुही होती है जिनसे एक स्त्री एक साथ अपनी योनि और गुदा दोनों को भेद सकती है और साथ ही भगनासा को कुरेदने के लिए उचित उभार बने होते हैं।
ऐसे दुमुही लिंग को योनि और गुदा में घुसाने के बाद जब उसमें बिजली से थरथराहट शुरू की जाती है तो स्त्रियों को असीम बहुतिक आनंद मिलता है जो अक्सर असली लैंगिक सम्भोग से भी नहीं मिलता।

हालांकि, मर्दों के लिए गुड़ियाँ बन चुकी हैं, महिलाओं के लिए इस तरह के गुड्डे मुनासिब नहीं समझे गए हैं क्योंकि निर्जीव गुड्डा हिल-डुल नहीं सकता और ऐसी हालत में वह स्त्रियों को सम्भोग सुख नहीं दे सकता।
स्त्रियों को कृत्रिम सम्भोग-सुख दिलाने के लिए कुछ ऐसी मशीनें बनायीं गयी हैं जिनमें कृत्रिम लिंग को एक पिस्टन पर लगाया होता है जो कि बिजली से आगे-पीछे होता है।

ये मशीनें तरह तरह के आकारों और सुविधाओं के साथ मिलती हैं जिनका उपयोग महिलाएं अपनी इच्छानुसार लेट कर या बैठकर कर सकती हैं। इनमें पिस्टन की गति, स्ट्रोक की लम्बाई और लिंग का आकार स्वेच्छा से नियंत्रित या बदला जा सकता है। ऐसी मशीनें उन महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं जिनके पति या प्रेमी शीघ्रपतन के कारण उन्हें सम्भोग से उत्कर्ष तक नहीं पहुंचा पाते… या फिर कुछ स्त्रियाँ देर से ही उत्कर्ष को प्राप्त होती हैं।
ये मशीनें भी, सेक्स-गुड़ियाओं की तरह, हमारे देश में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

परस्पर-हस्तमैथुन
इसमें स्त्री-पुरुष एक दूसरे का हस्तमैथुन करते हैं। आमतौर पर इसे सम्भोग-पूर्व अपने साथी को उत्तेजित करने के लिए या फिर जब सम्भोग की इच्छा ना हो या किसी कारण सम्भोग मुनासिब ना हो, तब प्रेमी जोड़े परस्पर हस्त-मैथुन करके एक दूसरे को चरमोत्कर्ष तक पहुंचाते हैं।
इसको करने के लिए स्त्री अपने साथी पुरुष का लिंग अपने हाथ में लेकर उसको उसी तरह हिलाती या रगडती है जैसे हस्त-मैथुन के समय पुरुष करता है और साथ ही उसके शरीर के मार्मिक स्थलों को छू कर, सहला कर तथा खरोंच कर उसे उत्तेजित करती है।

साथ ही पुरुष उस स्त्री की योनि और भगनासा पर अपनी उँगलियों से मर्दन करके और उसके स्तनों, स्तानाग्रों और बदन के अन्य संवेदनशील अंगों, जैसे गुदा, चूतड़, पेट, गाल, गर्दन इत्यादि को छू कर, सहला कर अथवा मसल कर उसे उत्तेजित करता है। यह क्रिया भी एक दूसरे के चरमोत्कर्ष तक की जाती है।

प्रायः देखा गया है कि इस क्रिया में पुरुष आनंद-शिखर पर महिलाओं से पहले पहुँच जाते हैं और उन्हें वीर्य-स्खलन के बाद भी अपनी प्रेमिका का हस्त-मैथुन जारी रखना होता है जिससे वह भी पूर्णतया तृप्त हो सके। परस्पर-हस्त-मैथुन एक बहुत ही प्रेम-भरी क्रिया है जिसे सभी जोड़े निःसंकोच कर सकते हैं क्योंकि इससे सम्भोग जैसा ही सुख दोनों को मिलता है और साथ ही सम्भोग से सम्बंधित किसी परेशानी या भय, जैसे गर्भ-धारण, कौमार्य-खनन, यौन-विकार इत्यादि की चिंता नहीं होती।

हस्तमैथुन पर शोध

हस्तमैथुन के कारण स्त्री-पुरुषों के लिए अनेकों व्यक्तिगत लाभ तो हैं ही, पर इस विषय पर शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि इस अत्यंत निजी क्रिया के कई सामाजिक फायदे भी हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों के सामाजिक-शास्त्री अब यह मानने लगे हैं कि हस्तमैथुन करने वाले 15 साल के युवक-युवतियों से लेकर वृद्धावस्था तक के लोगों में अपराध करने की प्रवृत्ति कम पायी जाती है।
इस कारण बाल-शोषण और देह शोषण जैसे जघन्य अपराधों को रोकने में मदद मिलती है। हस्तमैथुन करने वाले लोग कम विचलित और ज्यादा संतुलित रहते हैं जिनसे समाज में स्थिरता एवं अनुशासन पनपता है। वे ना केवल अपराध कम करते हैं, वे अपराध करने वालों को रोकने में भी योगदान देते हैं।

हस्तमैथुन से समाज को जो अप्रत्यक्ष लाभ होते हैं उनमें किशोरियों में अवांछित गर्भावस्था को रोकना, यौन रोगों (एस0टी0डी0) को कम करना और नारी को सम्मान देना प्रमुख माना गया है। कई विकसित देश, जैसे ब्रिटेन, नीदरलैंड, डेनमार्क आदि किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों को दैनिक हस्तमैथुन करने के लिए प्रोत्साहित करने लगे हैं।

‘प्रतिदिन एक वीर्योत्पात’ उनकी स्वास्थ्य-निर्देश पुस्तिका में एक अधिकार के रूप में सम्मिलित किया गया है। यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देश भी इस तरह के प्रोत्साहन की योजना बना रहे हैं। हमारे देश में भी इस अत्यंत निजी परन्तु साथ ही साथ अत्यंत सामाजिक विषय पर अधिकाधिक विचार-विमर्श करने की जरूरत है तथा इसे गोपनीयता के दायरे से बाहर निकाल कर प्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करने के आवश्यकता है।
ऐसा नहीं करने से हमारे देश में यौन-अपराधों की घिनौनी घटनाएँ निरंतर बढ़ती ही जाएँगी और निर्भया जैसी अनेकों लड़कियाँ यौन-त्रस्त युवकों की बलि चढ़ती जाएँगी। हस्तमैथुन Masturbation-0 एक लाभदायक क्रिया

प्रेषक : गौरव Antarvasna

मेरा नाम गौरव है और मैं Antarvasna आपको बताना चाहता हूँ कि मेरे यौन-जीवन की शुरुआत कैसे हुई।

मेरे घर में मेरे पापा और मम्मी रहती हैं। मुझे मस्ती करना बहुत अच्छा लगता था इसलिए मेरा पढ़ाई में उतना मन नहीं लगता था जितना लगना चाहिए। मेरे डैड ने इसीलिए मुझे होस्टल भेज दिया। वहाँ जा कर मुझे कुछ ऐसे दोस्त मिले जो कि मेरी क्लास के थे लेकिन अच्छे परिवारों से थे। मैं भी अच्छे घर से ताल्लुक रखता हूँ लेकिन उन सब में एक बात थी कि वे सब सेक्स के मामले में काफी एडवांस थे।

उनमें से एक था गौरव ! स्लिम बॉडी का गोरा लड़का था मैं भी उसी की तरह दीखता था इसलिए मेरी और उसकी दोस्ती जल्दी हो गई। वो मेरी कक्षा में और मेरे साथ ही कमरे में था। मुझे उसे अंडरवीयर में देख कर अच्छा लगता था।

एक दिन उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए वो क्लास में नहीं गया और मुझे भी नहीं जाने दिया। मैं भी दोस्ती के नाते नहीं गया। हमारी क्लास ९ से ४ बजे तक चली थी। लगभग सभी चले गए, तब गौरव ने कहा- गौरव ! मेरे को बुखार है जरा छू के देख !

कह कर मेरा हाथ पकड़ कर अपने सर पर रखा। थोड़ा गरम था उसका सर !

मुझे तो नहीं लग रहा है ! कहते हुए मैंने उसके सीने को छुआ तो मुझे लगा कि उसने शर्ट नहीं पहनी हुई है। मैंने हाथ को थोड़ा नीचे किया तो उसके निप्प्ल मेरे हाथ से छू गए। मुझे एक अजीब सा करंट सा लगा। मेरा हाथ धीरे धीर नीचे जाने लगा, मुझे पता भी नहीं चला कि मेरा हाथ कब उसके अंडरवीयर तक पहुँच गया।

तभी उसने मुझे पूछा- बुखार है या नहीं?

मैंने कहा- पता नहीं लग रहा है !

कहते हुए मेरा हाथ उसके अंडरवीयर के ऊपर से जाने लगा। इसी समय उसके लंड ने थोड़ी सी हरकत की और मुझे लगा कि कुछ है !

मैंने लंड को पकड़ कर कहा- यह क्या है?

वो बोला- कुछ नहीं !

मुझे भी नहीं मालूम था कि वह लंड है …..

मुझे लगा कि चॉकलेट है। मैंने कहा- चॉकलेट है ! और मुझसे छुपा रहे हो ! दोगे नहीं?

वो बोला- चॉकलेट नहीं है !

मैंने उसको पकड़ रखा था और मेरी पकड़ जोर से थी जिससे उसका लंड खड़ा हो गया। मैंने चादर को हटा तो देखा की उसका लंड पूरी तरह से खड़ा है। मैंने जल्दी से उसके अंडरवियर को नीचे खींचा तो देखा कि ७ इंच लंबा लंड छत की तरफ खड़ा है। मैंने उसे तुरन्त छोड़ दिया और छि छि करते हुए उससे दूर हट गया।

उसने चादर से फिर अपने आप को ढक लिया और सॉरी बोला ….

मै कमरे से बाहर चला गया, मेरे मन में सिर्फ उसके लंड का ही ख्याल आ रहा था। जिसके कारण मेरा भी लंड खड़ा हो रहा था और मेरे से रहा नहीं जा रहा था। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं !

और ३० मिनट के बाद मैं उसके पास आया तो वो सो रहा था। मैं भी उसके पास सो गया। मैं उसके अंडरवीयर में हाथ डाल कर उसके लंड को पकड़ कर महसूस करने लगा कि धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होने लगा और मेरा भी !

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका अंडरवीयर निकल दिया। उसका गोरा लंड अच्छा लग रहा था। फिर मैंने भी अपना अंडरवियर निकाल दिया और उसके लंड से खेलने लगा। 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि गौरव जागा हुआ है। उसने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे होठों पर चूमने लगा …… मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया …….

गौरव ने मुझे ऊपर खींचा और मेरे लंड को चूमने लगा।

चूमते-चूमते मुझे पेट के बल लिटा दिया और अपने आप मेरे ऊपर लेट गया। फिर मुझे उसका लंड मेरी गांड की दरारों में जाता हुआ लगा जोकि मेरे गांड की छेद के पास आ गया। सिर्फ एक जोरदार झटका और मेरी चीख निकल गई, ऐसे लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहा मेरी गांड में जा रहा है। मै गौरव से मना कर रहा था कि निकाल ले, मुझे दर्द हो रहा है। लेकिन गौरव नहीं रुका और मेरी गांड को पेलता चला गया, मै रोता जा रहा था और गौरव पेलता जा रहा था।

चार-पाँच मिनट के बाद गौरव शान्त हुआ, मुझे लगा कि मेरी गांड में कुछ गरम चीज गौरव के लंड से गिर रही है। गौरव १० मिनट तक मेरे उपर लेटा रहा, फिर बोला- गौरव ! सॉरी यार !

…….मै अभी रो रहा था …..

गौरव ने मुझे चुप करने के लिए बोला कि मेरी गांड ले ले !

पहले तो मैं मना करता रहा लेकिन बदले की भावना के कारण मैंने हाँ कर दी। गौरव नीचे लेटा, मैं ऊपर था। गौरव अपने हाथों से अपनी गांड फैला कर छेद दिखा रहा था। मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रख कर एक जोरदार झटका दिया, गौरव चिल्लाने लगा। मेरा लंड गौरव के लंड से ज्यादा मोटा था। मैंने एक ही बार में अपना पूरा लंड गौरव की गांड में पेल दिया और जैसे गौरव झटके ले रहा था, उससे भी तेज मैं कर रहा था क्योंकि मुझे गौरव से बदला लेना था।

२० मिनट के बाद मेरा माल गौरव की गांड में गिर गया और मैं गौरव के ऊपर से ५ मिनट के बाद उठा तो देखा कि गौरव की गांड से खून निकल रहा है।

मैं डर गया, गौरव बेहोश हो गया था !

मैं पानी ले कर आया, गौरव पर डाला तो उसे होश आया। रात में गौरव की तबीयत काफी ख़राब हो गई थी …… यह मेरे ही कारण हुआ था .. ४ दिन के बाद गौरव ठीक हुआ। मैं उसके पास गया और बोला- सॉरी गौरव ! उस दिन ज्यादा हो गया था !

गौरव बोला- नहीं यार …… यह तो शुरुआत है ! धीरे- धीरे अच्छा लगने लगेगा …..

उसके बाद से मैं और गौरव रोज रात एक दूसरे की गांड मारते थे …… Antarvasna

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