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Massage Girl in Kupwara: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kupwara who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kupwara that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kupwara massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kupwara who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kupwara massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kupwara massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kupwara who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kupwara employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kupwara helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kupwara

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kupwara at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

प्रेषिका : राहुल वर्मा -Sex Stories

मेरे पड़ोस में एक Sex Stories आंटी रहती थीं, जिनका नाम मंजू था. उनकी उमर 27-28 साल और फिगर 36-28-36 था. उनको देखकर हमेशा मेरा लंड खड़ा हो जाता था और उनकी चूत में जाने के लिए फड़कने लगता था.

एक दिन उनकी 6 साल की लड़की पार्क में खेलते खेलते गिर गयी. मैंने उसे उठाया और उनके घर ले गया. वो बहुत रो रही थी. आंटी ने उसे चुप कराया, दवा लगाई और थपकी देकर सुला दिया.

मैं चुप चाप खड़ा आंटी के मम्मे और गदराई गांड देख रहा था.

लड़की के सोते ही आंटी मेरी तरफ़ मुखातिब होकर बोली ”तुम इसे नहीं लाते तो बेचारी वहीँ रोती रहती।’

मैंने कहा,’आंटी, क्यूँ नहीं लाता?’

आंटी मुस्कुराई और बोली- बैठो, तुम्हे चाय पिलाती हूँ।’

पता नहीं मेरे अन्दर कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि मैं बोला ‘पिलाना है तो दूध पिलाओ।’

आंटी तुंरत समझ गई और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोलीं ‘शर्म नहीं आती ऐसे कहने में।’

मैं बोला ‘आंटी शर्म करूँगा तो आप दूध कैसे पिलाओगे।’

इतना कहकर मैंने आंटी के मम्मों पर हाथ रखा और सहलाने लगा. आंटी भी शायद मुझसे चुदवाने को तैयार थीं इसीलिए कुछ नहीं बोलीं मैंने उनका गाउन उतारा और फ़िर ब्रा और पैंटी भी उतार दी. आंटी को पूरा नंगा करके मैंने अपने कपड़े उतारे और बिना देर किए अपना लंड आंटी कि चूत में डाल दिया और उनके मम्मे चूसने लगा. थोडी देर में आंटी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगीं.

इसके बाद 12 साल तक मैं आंटी को चोदता रहा. इस बीच उनकी लड़की 18 साल की हो गयी.

एक दिन मैं आंटी को चोद रहा था कि वो आ गयी.
आंटी को लगा कि ये अंकल को बता देगी.
आंटी ने उसको अपने पास बुलाया, उसकी स्कर्ट को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसकी पैंटी उतार दी और बोली ‘इसकी चूत पर अपना लंड रगडो इसको भी मजा दो’. मेरी तो लाटरी लग गयी, मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ना शुरू किया तो वो मस्त होने लगी. आंटी पेशाब करने बाथरूम गयी तो मैंने अपना लंड लड़की की चूत में डाल दिया. लड़की चिल्लाने लगी तो मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया, लड़की चुप हो गयी और और थोडी देर में मजा लेने लगी.

आंटी बाथरूम से आयीं और लड़की को चुदवाते देखकर बोलीं ‘पहले ही दिन पूरा ले लिया ! ये है मेरी बेटी की हिम्मत ! हिम्मतवाली माँ की हिम्मतवाली बेटी’. Sex Stories

Antarvasna

मेरा नाम अंश है. मेरी उम्र २१ साल है. यह उस Antarvasna वक्त की बात है जब में बी एस सी में था और मेरी उम्र १९ साल थी. मेरे चाचा की उम्र ३५ साल थी और मेरी नई चाची की उम्र २३ थी। जिनका नाम सुनीता है उनका फिगर ३६ -२८ -३८ है. उनके बूब्स बहुत सेक्सी हैं. जब वो लाल ब्रा और काली पैंटी पहनती हैं बहुत सेक्सी लगती हैं वो बहुत सेक्सी और प्यारी है। जब वो शादी के बाद हमारे घर में रहने लगी तो उनकी सेक्सी फ़ीगर का दीवाना हो गया। जब भी वक्त मिलता, मैं उनके साथ बैठता और उन से बातें करता। वो भी मुझे पसन्द करने लगी थीं, वो कहती थीं कि मैं उनका भतीजा नहीं बल्कि उनका देवर लगता हूं।

एक दिन घर के सभी लोग मेरे कज़िन की शादी में गए। मेरी वार्षिक परीक्षा चल रही थी इसलिए मैं नहीं गया, तो चाची ने कहा मैं भी नहीं जाऊंगी, मैं यहीं अंश की देखभाल करूंगी। चाचा ने भी हां कर दी।

मैं उनको स्टेशन छोड़ कर आया तो चाची ने खाना के लिए पूछा तो मैंने खाना लगाने को कह दिया। चाची ने कहा कि खाना तो तैयार है, तुम रसोई में ही आ जाओ, वहीं खा लेना। मैं रसोई में चला गया।

चाची खाना लगा रही थी कि बिजली चली गई। कुछ देर बाद गर्मी के कारण चाची का ब्लाऊज़ पसीने से भीग गया और उनकी ब्रा नज़र आने लगी। मैं खुश हो गया और उनके वक्ष देखने लगा। कुछ देर तो चाची को पता नहीं लगा पर बाद में उन्होंने भांप लिया कि मेरी नज़रें उनकी छाती पर हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या देख रहे हो। मैं घबरा गया और कहा कि कुछ नहीं, आप को गर्मी लग रही होगी, मैं खाना खा चुका हूं, आप कुछ देर बाहर जाकर हवा में बैठ जाएं।

उन्होंने कहा कि नहीं, मैं नहाने जा रही हूं, तुम दरवाजा चैक कर लेना। दरवाजा बंद करके मैं अपने कमरे में चला गया। बराबर में ही बाथरूम है और उस का एक दरवाजा मेरे कमरे में भी खुलता है।

अपने कमरे में पहुंच कर जब मैंने पानी गिरने की आवाज़ सुनी तो एकदम मेरे जहन में ख्याल आया कि क्यों ना मैं चाची को नंगा देखूं? मैं फ़ौरन उठा और दरवाजे के की-होल से देखने लगा। वो मोमबत्ती की रोशनी में नहा रही थी। बड़ी मादरचोद लग रही थी, रण्डी की तरह मम्मे मसल रही थी अपने।

हे भगवान ! मैंने पहली बार उनको नंगा देखा था। उनके मम्मे इतने बड़े थे कि मैं बस उनको ही देखता रहा। मेरे शरीर में एक अजीब किस्म का करंट दौड़ गया। मेरा लण्ड एकदम खड़ा होने लगा।

मैंने उसे अपने हाथ में ले लिया और हिलाने लगा। हिलाते हिलाते बराबर में मेज़ पर रखा फ़ूलदान गिर गया। उसकी आवाज़ को सुन कर चाची ने मेरे कमरे वाले दरवाजे को खोल कर देखा कि क्या हुआ। मगर जब उन्होंने मुझे अपना लण्ड पकड़े हुए देखा तो एकदम चौंक गई। मैं भी एकदम अपने लण्ड को अन्दर करके ज़िप लगाने लगा। चाची भी तुरन्त चली गई।

45 मिनट के बाद उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया तो मैं घबरा गया कि पता नहीं अब क्या होगा। खैर मैंने दरवाज़ा खोल दिया। चाची ने आसमानी रंग की साड़ी और मैचिन्ग ब्लाऊज़ पहन रखी थी। वो अन्दर आई और मेरे बेड पर बैठ गई। कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि मेरे पास आओ। मैं घबराते हुए उनके पास जा कर खड़ा हो गया। उन्होंने मुझ से पूछा कि तुम कितनी बार मुझे नहाते हुए देख चुके हो?

मैं एकदम घबरा गया, मेरे पसीने छूट गए। उन्होंने मेरी यह हालत देखी तो मुस्कुराई और कहा कि तुम मुझे बताओ, मैं किसी को नहीं बताऊंगी, अगर तुमने नहीं बताया तो मैं सबको बता दूंगी। मैंने फ़ौरन कहा – मुझे माफ़ कर दें ! यह पहली बार हुआ है, इससे पहले मैंने कभी ऐसा नहीं किया है।

उन्होंने कुछ देर बाद कहा कि क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं? मैंने कहा- हां ! आप मेरी चाची हैं मैं आपको बहुत पसन्द करता हूं।

उन्होंने कहा कि मैं जो कहूं, तुम मान लोगे?

मैंने कहा- आज़मा कर देख लें।

उन्होंने कहा- अपनी पैन्ट उतारो।

मैं सन्न रह गया।

उन्होंने कहा- अगर मेरा कहा नहीं मानोगे तो मैं सब को बता दूंगी कि तुम मुझे नंगा नहाते हुए देख रहे थे।

मैं और ज्यादा परेशान हो गया। उन्होंने फ़िर कहा कि अपनी पैन्ट उतारो।

मैंने कहा- क्यों?

उन्होंने कहा कि तुमने मुझे नंगा देखा है, मैं भी तुम्हें नंगा देखूंगी।

इसके बाद वो मेरे करीब आईं और जबरदस्ती मेरी शर्ट उतारने लगी। इससे मेरी आस्तीनें फ़ट गई तो मैंने कहा- अच्छा ! मैं उतारता हूं और मैंने अपनी कमीज़ उतार दी। फ़िर चाची ने कहा – पैन्ट भी उतारो। मैंने धीरे धीरे वो भी उतार दी। अब मैं अन्डरवीयर में उनके सामने खड़ा था। मुझे बहुत शरम आ रही थी।

इस पर उन्होंने कहा कि यह भी उतारो, मैं तुम्हें पूरा नंगा देखना चाहती हूं। मैंने मना कर दिया तो उन्होंने मेरे पास आ कर मुझे एक चपत लगाई और कहा- मादरचोद उतारता है या नहीं !

मैं उनके मुंह से गाली सुन कर हैरान रह गया। उन्होंने जलदी से मेरा अन्डरवीयर नीचे कर दिया। मेरा लण्ड उस वक्त ५” का था और किसी खम्बे की तरह खड़ा था।

चाची ने मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया तो मुझे एक अजीब सा मज़ा आया और मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। उन्होंने कहा कि तुम्हारे चाचा का तो 3″ ही लम्बा होगा मगर तुम्हारा तो उस से भी बड़ा है। तुम्हारे चाचा तो सेक्स करना जानते ही नहीं हैं, उनका लण्ड मेरे अन्दर जाते ही पानी छोड़ देता है। क्या तुमने किसी से सेक्स किया है?

मैंने कहा कि नहीं। तो उन्होंने कहा कि आज मैं तुन्हें एक नया गेम सिखाऊंगी। तुम्हें फ़ुटबाल बहुत पसन्द है ना, यह खेल उससे भी ज्यादा अच्छा है।

उसके बाद उन्होंने मेरे होंटों पर किस किया। मैं भी अपना काबू खो बैठा और उनको अपनी बाहों में ले लिया। वो किस मुझे हमेशा याद रहेगी, उनके होंटों को जब मैंने अपने दांतों में दबाया तो मुझे बहुत मज़ा आया था। चाची ने मुझे २०-२५ मिनट तक किस किया, फ़िर कहा कि बेडरूम में चलो।

मैं नंगा ही उनके साथ बेडरूम में चला गया। वहां पर चाची ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर आइसक्रीम कई तरह चूसना शुरू कर दिया। मैं तो आसमान पर पहुंच गया। मैं बता नहीं सकता कि कितना मज़ा आया था

कुछ देर बाद मैंने कहा- चाची अब मेरा निकलने वाला है, आप मुंह से मेरा लण्ड निकाल दें तो उन्होंने कहा कि मेरे मुंह में ही गिरा दो, मैं कब से लण्ड का पानी पीने को बेकरार हूं। मैंने ऐसा ही किया। मुझे अच्छी तरह याद है कि इससे पहले मेरा पानी इतना ज्यादा नहीं निकला था।

फ़िर चाची ने पूछा कि तुम्हें मेरे शरीर में सबसे ज्यादा क्या पसन्द है?
मैंने कहा- आप के स्तन।
तो उन्होंने कहा- दूर से तो देख ही चुके हो, क्या छूना चाहते हो?

यह सुनते ही मैंने उनको अपनी ओर खींच लिया और उनके ब्लाऊज़ के बटन खोलने लगा। ब्लाऊज़ के नीचे काले रंग की ब्रा उनके बूब्स पर कसी हुई थी। मैंने उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाना और चूमना शुरू कर दिया। फ़िर मैंने ब्रा खोलने की कोशिश की मगर मुझसे नहीं खुली। चाची हंस पड़ी और अपने आप अपनी ब्रा उतार दी।

उनके बूब्स देख कर मैं पागल हो गया, उफ़्फ़ ! इतने बड़े ! मैंने एकदम अपने मुंह में ले ली और चाची अजीब अजीब आवाज़ें निकालने लगी। मैंने उनके लाल लाल निप्पल चूस चूस कर बड़े कर दिए।

तब चाची ने कहा कि मुझे किस दो। मैं फ़ौरन उन के होंटों की तरफ़ बढा तो उन्होंने कहा- यहां पर नहीं ! नीचे ! मैंने कहा कि वहां पर मैं कैसे किस कर सकता हूं, तो उन्होंने कहा कि मैंने तो भी तुम्हारे लण्ड को चूसा था, अब तुम्हारी बारी है।

मैंने कहा- अच्छा ! कोशिश करता हूं!

फ़िर मैंने चाची की साड़ी खोली, पेटिकोट भी उतार दिया। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मैंने उन को बेड पर लिटाया और उनकी चूत पर हल्के से किस की। मुझे बड़ा मज़ा आया। मैंने फ़ौरन अपनी जीभ उनकी चूत के होंटों पर रख दी और रगड़ने लगा।

उनकी सिसकारियां निकल गई लेकिन वो कह रही थी कि ” अंश ! खा जाओ मेरी चूत को ! मैं बहुत दिनों से प्यासी हूं ! मेरी चूत का पानी पी लो ! मुझ से बरदाश्त नहीं होता आह ह्ह आ आऽऽ यस फ़क मी यू बास्टर्ड यू मदर फ़कर ऽऽऽ”

मैं सोच रहा था कि कैसे मां की लोड़ी गालियां दे रही है. मुझे चाचा की किस्मत पर रश्क हो रहा था। वो रोज़ कैसे मजे से चाची को बजाते होंगे. कुछ देर बाद चाची की चूत में से भी मनी निकली।
मैं बहुत हैरान हुआ कि लेडीज़ की भी मनी निकलती है।

हम दोनो एक दूसरे से लिपट कर बेड पर लेट गए। मैंने उन से पूछा कि क्या आपने शादी से पहले किसी के साथ सेक्स किया था? उन्होंने कहा कि यह मैं बाद में बताऊंगी, पहले मेरी चूत को ठण्डी तो कर।

मैंने कहा कि ठीक है मेरा लण्ड दोबारा चूसें।
चाची ने कहा कि ६९ पोज़ीशन में हो जाओ।
मैंने कहा- यह क्या होता है तो वो कहने लगीं कि सीधे लेट जाओ। मैं सीधा लेट गया, वो मेरे ऊपर इस तरह लेटीं कि उनका मुंह मेरे लण्ड की तरफ़ और उनकी चूत मेरे मुंह की तरफ़।
फ़िर उन्होंने कहा कि यह है ६९ पोज़ीशन। अब तुम मेरी चूत चाटो, मैं तुम्हारा लण्ड चूसती हूं।
हम दोनो चूसना और चाटना शुरू हो गए। ५-१० मिनट बाद मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा होने लगा था। पता नहीं उनके चूसने में क्या जादू था कि मेरा लण्ड इतना खूबसूरत कभी नहीं लगा।

मैंने कहा- क्या आप की चूत में डाल दूं?

उन्होंने कहा कि देर क्यों कर रहे हो, आ जाओ, लेकिन एक मिनट रुको, वो बेड से उठी और मेज़ की दराज़ से कन्डोम का पैकेट निकाला और मेरे लण्ड पे चढा दिया और कहा- मैं प्रेग्नैन्ट नहीं होना चाहती।
फ़िर उन्होंने मेरे लण्ड पर क्रीम लगाई और कुछ अपनी चूत पर भी लगाई और घोड़ी बन गई और कहा कि मेरे अन्दर आ जाओ मेरी जान ! मैंने अपने लण्ड की टोपी उनकी चूत पर रगड़ी।
चाची ने कहा कि क्यों तड़फ़ा रहे हो, जल्दी से मेरे अन्दर डाल दो। मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो चाची की चीख निकल गई। उन्होंने कहा – आराम से डालो।

मैंने आराम से धीरे धीरे करना शुरू कर दिया तो वो कहने लगी – मादरचोद ! बहनचोद ! चोद दे मुझे ! मेरी चूत फ़ाड़ दे आ आहऽऽऽ आ मज़ा आ रहा है, जोर से करो। अब मैं जोर से करने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में से निकाल लिया तो उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? मैंने कहा कि मैं अपने अन्दाज़ में करना चाहता हूं। चाची ने कहा- तुम जो चाहो करो।

मैंने चाची को गोद में उठाया और अपना लण्ड उनकी चूत में डाल कर उनको उछालने लगा। मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी मगर इस अन्दाज़ में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

दस मिनट में मैंने चाची से कहा कि मेरी निकलने वाली है तो उन्होंने फ़ौरन मेरा लण्ड निकाल कर उस पर से कन्डोम हटा दिया और अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। मेरी मनी फ़िर निकल गई।

कुछ देर बाद मैंने चाची से कहा कि मैं आपको फ़िर चोदना चाहता हूं।
उन्होंने कहा कि सब्र करो, अब कल करेंगे, हमारे पास पूरा एक हफ़्ता है।

मैंने कहा- अब आप अपनी कहानी मुझे सुनाएं।

उन्होंने कहा- मैंने सेक्स अपनी बहन के साथ किया था जिस का नाम सनम है। मैंने कहा कि आप उसी को बुला लीज़िए, मैं उसको भी मज़ा दे सकता हूं।

उन्होंने कहा कि ठीक है मैं बात करूंगी। कल तो मैंने उसे वैसे भी बुलाया ही हुआ है, डोन्ट वरी।
वो एक अलग कहानी है.
आपको मेरी यह सच्ची घटना कैसी लगी? Antarvasna

Antarvasna

मैं जब 25 साल की थी. मैं उस समय झाँसी में Antarvasna रहती थी. मेरी जयपुर में नई नई नौकरी लगी थी. मुझे दो दिन बाद जयपुर जाना था. पापा ने अपने ऑफिस का ही एक काम करने वाला, जो जयपुर में रहता था, उसे मेरे साथ में भेजने के लिए तैयार कर लिया था.

घर की बेल बजी तो मैंने बाहर निकल कर देखा. एक सजीला 25-26 साल का लड़का बाहर खड़ा था. मैंने पूछा – “कहिये… किस से मिलना है…”

उसने मुझे देखा तो वो बोल उठा -“अरे नेहा… तुम यहाँ रहती हो ..”

“हाय… तुम अनिल हो… आओ अन्दर आ जाओ…” उसे मैंने बैठक मैं बैठाया।

अनिल मेरे साथ कॉलेज में पढ़ता था. उसने बताया कि वो अब पापा के ऑफिस में काम करता था.

“अंकल ने बुलाया था… जयपुर कौन जा रहा है ..”

” मैं जा रही हूँ…”

“अंकल ने मुझे आपके साथ जाने को कहा है… रिज़र्वेशन के लिए बुलाया था… मैं भी दो दिन बाद जा रहा हूँ ”

मैंने सोचा कि कॉलेज में जब पढ़ते थे तो तब तो ये मेरी तरफ़ देखता भी नहीं था. उसे देखते ही मन में पुरा्नी यादें उभरने लगी. अनिल मुझे आरम्भ से अच्छा लगता था. अब जयपुर तक साथ जाएगा तो इसे छोडूंगी नहीं. मैंने कहा – “आगे का स्लीपर लेना है… वरना बस में परेशान हो जायेंगे. झाँसी से जयपुर लंबा सफर है ”

“ओके तो दो दिन बाद के स्लीपर लेना है…अंकल को बता देना ”

अनिल चला गया. अब मैं अपने प्लान बनाने लगी… मुझे सब समझ में आने लगा कि अनिल को कैसे पटाना है.

हम बस स्टैंड पहुच गए. बस में अनिल पहले से ही नीचे वाली डबल सीट पर बैठा था. मेरे आते ही वो खड़ा हो गया और बाहर आ गया. अभी बस जाने में १५ मिनट बाकी थे. मैंने आज सलवार और कुरता पहन रखा था. पर पेंटी नहीं पहनी थी. इस से मेरे चूतड़ में लचक अधिक दिख रही थी. अनिल ने मेरे चूतड़ों को बड़ी हसरत भरी निगाहों से देखा. मैं तुंरत भांप गयी. मैं अब कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो गयी.

“बड़ी सुंदर लग रही हो ..”

“थैंक्स… अनिल… सीट नम्बर क्या है ”

“आगे वाले पहले दो स्लीपर है… सिंगल नहीं मिला ”

मन में सोचा… ये अनिल की शरारत है. पर मुझे तो मौका मिल गया था. ऊपर से गुस्सा हो कर बोली -“मैंने तो सिंगल के लिए कहा था… पर ठीक है ..”

“अरे यार…खूब बातें करेंगे… साथ रहेंगे तो .”

बस का टाइम हो गया था. पापा मुझे छोड़ कर जा चुके थे. हम दोनों सीट पर आ गए. आगे से दूसरे नम्बर की सीट थी. पहले मैं जा कर खिड़की के पास बैठ गयी. फिर अनिल भी बैठ गया. बस खाली थी. झाँसी से बस ग्वालियर तक खाली रहती है. पर ग्वालियर में सब सीट फुल हो जाती है. कंडक्टर से अनिल ने ग्वालियर तक सीट पर बैठने की परमिशन ले ली थी. अँधेरा हो चला था. सड़क की बत्तियां जल उठी थी. शाम के ठीक ७ .३० बजे बस रवाना हो गयी. हम दोनों कॉलेज के टाइम की बातें करने लगे. दतिया स्टेशन क्रॉस हो चुका था. मैंने अपनी चादर और पानी की बोतल बगल में सीट पर रख दी. और थोड़ा अनिल से सट कर बैठ गयी. मेरे और अनिल की टांगे आपस में रगड़ खा रही थी. उसकी जांघों का स्पर्श मेरी जांघों पर हो रहा था. मैं अब जान कर बस के मुड़ने पर उस पर गिर गिर जाती थी. और उसकी जंघे पकड़ कर सीधी हो जाती थी. इतने में बस की लाइट जल गयी. मैंने पीछे मुड कर देखा तो थोड़े से लोग सीट पर बैठे झपकियाँ ले रहे थे. अचानक लाइट बंद हो गयी.

अब बस में पूरा अँधेरा था. मैंने आंखे बंद कर ली और सर पीछे करके बैठ गयी. इतने में मुझे महसूस हुआ कि मेरी जांघ पर अनिल के हाथ का स्पर्श हुआ है. पजामे के ऊपर मेरी मुलायम जांघों को उसका हाथ छू रहा था. मैं सिहर उठी. मुझे लगा अब अनिल चालू हो गया है. पर मैं चुपचाप रही. उसने अपना हाथ सहलाते हुए आगे बढाया और हौले से दबा दिया. मुझे करंट लगने लगा था. मैंने आँखे खोल कर उसकी और देखा. वो जान कर आंखे बंद करके ऐसा कर रहा था. उसने हाथ चूत कि तरफ़ बढ़ा दिया। मौका हाथ से निकल न जाए इसलिए मैं चुप ही रही और टांगे थोडी चौड़ी कर दी. अब उसका हाथ मेरे चूत की फांकों पर आ गया था. मैंने अब उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ़ खींच लिया. और उसे धीरे धीरे अपने स्तनों की तरफ़ ले जाने लगी. अनिल ने मेरी तरफ़ देखा. मैं भी उसकी नजरों में झाँकने की कोशिश करने लगी.

उसने अपना चेहरा मेरी तरफ़ बढ़ा दिया. मैंने भी धीरे से उसके होंट पर अपने होंट रख दिए. वो मेरे होंटो को चूमने लगा. मैंने भी जवाब में उसके होंटों के अन्दर अपनी जीभ डाल दी. उसके हाथ मेरे स्तनों पर आ चुके थे. अनिल ने मेरे बूब्स हौले हौले दबाना चालू कर दिए. मेरी आँखे मस्ती में बंद होती जा रही थी. मेरा हाथ उसके लंड की तरफ़ बढ़ चला. पेंट के ऊपर से ही लंड की उठान नजर आ रही थी. मेने उस को ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया. ऐसा लगा जैसे उसका लंड पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा… अनिल के हाथ मेरे शरीर को दबा दबा कर सहला रहे थे. मेरी उत्तेजना बदती जा रही थी. मैंने उसकी पेंट का जिप खोला और अन्दर से लंड पकड़ लिया. वो अन्दर अंडरवियर नहीं पहना था. लगा की वो भी इसी तय्यारी के साथ आया था.

“हाय रे मसल दो… हाय… तुमने अंडरवियर नहीं पहनी है…”

“नहीं… मैंने तो जान कर के नहीं पहनी थी… पर तुमने भी तो नहीं पहनी है…”

” मैंने भी जान बूझ कर नहीं पहनी थी…” तो आग दोनों तरफ़ लगी थी…

मैंने खींच कर उसका लंड पेंट से बाहर निकल लिया. मैंने झांक कर इधर उधर देखा. सभी आराम कर रहे थे. बस तेजी से मंजिल की और बढ़ रही थी. उसका लंड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया. मैंने उसके सुपारी के ऊपर की चमड़ी को ऊपर चढा दिया. उसकी लाल लाल सुपारी खिड़की से आ रही लाइट से बार बार चमक उठती थी. मैंने सर झुकाया और उसकी सुपारी अपने मुंह में ले ली. और उसका लंड नीचे से पकड़ कर मुठ मारना चालू कर दिया. मेरी हालत भी कुछ कम नाजुक नहीं थी. मैंने भी अपने पजामे का नाडा खोल दिया था. अब वो पीछे से हाथ बढ़ा कर मेरी गांड की गोलाईयों को दबा रहा था. उसके हाथ मेरे चूतड की दरार में भी घुसे जा रहे थे. पर मैं बैठी थी और आगे झुकी हुयी थी इसलिए उसे चूत के दर्शन नहीं हो रहे थे. हम दोनों के हाथ बड़ी तेजी से चलने लगे थे. उसने मेरी चूचियां मसल मसल कर मुझे बेहाल कर दिया था. मेरे मुंह में लंड था इसलिए मैं आह भी नहीं निकाल पा रही थी.

अनिल ने धीरे से कहा -“नेहा…बस करो… छोड़ दो अब ”

” नहीं… अभी नहीं ..राम रे…मजा आ रहा है…” मैंने उसकी सुपारी जोर से चूसने लगी और साथ ही जोर से मुठ मरने लगी. वो अपने को रोक नहीं पा रहा था. दबी जबान से मस्ती के शब्द निकाल रहे थे…”अरे .. बस…अब नहीं… बस ..बस… हाय… निकल रहा है ..नेहा…” कहते हुए उसका लावा उबल पड़ा और रुक रुक कर पिचकारी छोड़ने लगा. मेरे मुंह में उसकी सुपारी तो थी ही. मेरे मुंह में रस भरने लगा. मैंने गट गट कर पूरा पी लिया… और चाट कर साफ़ कर दिया.

मैं अब बैठ गयी. उसने भी अपने कपड़े ठीक कर लिए. मैंने भी पजामे को ठीक करके नाडा बाँध लिया. ग्वालियर में बस पहुँच चुकी थी. बस की लाइट जल उठी. बस स्टैंड पर आ कर रुक गयी.

कंडक्टर कह रहा था. “१५ मिनट का स्टाप है… नाश्ता कर लो…सभी अब अपने अपने स्लीपर पर चले जाए ..”

हम दोनों बस से उतर गए. और कोल्ड ड्रिंक पीने लगे.

“नेहा .. मजा आ गया… तुम्हारे हाथों में तो जादू है…”

“और तुम्हारे हाथो ने तो मुझे मसल कर ही रख दिया…” मैं मुस्कराई.

‘मेरा लंड कैसा लगा…”

“यार है खूब मोटा…पर जब चूत में जाएगा तो पता चलेगा.. कि कैसा है..”

दोनों ही हंस पड़े.

बस का टाइम हो रहा था. हम दोनों बस में स्लीपर में घुस गए, और नीचे वाली दोनों सीट खाली कर दी. स्लीपर में हमने चादर साइड पर रख ली और दोनों लेट गए. बस फिर से चल दी. मुझे अभी चुदवाना बाकी था.

मैंने कहा -“अनिल मैंने नाड़ा खोल लिया है… तुम भी पेंट नीचे खींच लो न..”

अनिल खुशी से बोला “चुदवाने का इरादा है… ठीक है ..” अनिल ने स्लीपर का परदा खेंच कर बंद कर दिया. इतने में बस की लाइट भी बंद हो गयी .अनिल ने अपना पेंट नीचे खीच दिया .अब हम दोनों नीचे से बिल्कुल नंगे थे. अनिल ने चादर अपने ऊपर डाल ली. और मुझे कमर से खींच कर मेरी पीठ से चिपक गया. मेरी चिकनी गांड का स्पर्श पा कर उसका लंड फिर से हिलोरें मरने लगा. बार बार मेरी चूतडों की फांकों में घुसने की कोशिश करने लगा. मैंने मुड कर उसकी तरफ़ देखा तो अनिल ने प्यार से मेरे गलों को चूम लिया और नीचे गांड पर जोर लगाया उसका लंड मेरी दोनों गोलाईयों को चीरता हुआ मेरी गांड के छेड़ से टकरा गया. मुझे लग रहा था कि वो जल्दी से अपने लंड को मेरी गांड में घुसेड दे. मैंने एक हाथ बढ़ा कर उसके चूतड पकड़ लिए और अपनी तरफ़ जोर से चिपका लिया. अनिल ने भी अपनी पोसिशन ली और अपने लंड को गांड के छेड़ में दबा दिया. उसकी सुपारी गांड में फक से घुस गयी. मेरे मुंह से आह निकल गयी. उसने अपना लंड थोड़ा बाहर खींचा और फिर से एक झटका दिया. लंड अन्दर घुसता ही चला जा रहा था. जैसा जैसा वो धक्के मरता लंड और अन्दर बैठ जाता. लंड पूरा घुस चुका था. अब अनिल रिलाक्स हो गया. और लेट गया अब वो मजे से गांड चोद रहा था. मुझे भी अब मजा आने लगा था. उसके धक्के अब तेज होने लगे थे.

अचानक उसने मुझे सीधा लेटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया. और मेरी चूत में अपना लंड घुसेड दिया. लंड बस के झटको और धक्कों से एक बार में अन्दर तक बैठ गया. मैं खुशी के मारे सिसकारी भरने लगी.

“धीरे… नेहा…धीरे…”

“अनिल ..मैं मर जाऊंगी…हाय…” उसने मेरे होटों पर होंट रख दिए जिस से मैं कुछ न बोल सकूँ…

मेरी उत्तेजना बढती जा रही थी. मैंने अपनी चूतडों को हिला हिला कर जोर से धक्कों का उत्तर धक्कों से देने लगी. अब मुझे लगाने लगा कि मैं झड़ने ही वाली हूँ. नीचे आग लगी हुयी थी… मेरी चूत में मीठी मीठी गुदगुदी तेज हो उठी. मन में सिस्कारियां भर रही थी. अब लग रहा था कि अब मैं गयी…मैंने चूत को ऊपर दबाते हुए जोर से पानी छोड़ने लगी. मेरा मुंह उसके होटों से चिपका था. कुछ बोल नहीं पाई. और अब पूरा पानी छोड़ दिया. उधर अनिल ने भी अपनी रफ़्तार तेज कर दी. मैं झड़ चुकी थी और अब उसका लंड का मोटापन और उसका भारी पन महसूस होने लगा था. अचानक ही उसके लंड का दबाव मेरी चूत में बहुत बढ गया. मेरे मुंह से चीख निकल कर उसके होटों में दब गयी. मुझे अपनी चूत में अब गरम गरम रस निकलता हुआ महसूस होने लगा. उसके वीर्य की गर्माहट मुझे अच्छी लगने लगी. अनिल निढाल हो कर मेरे पास में लुढ़क गया. उसका वीर्य मेरी चूत में से बह निकला. मैंने चादर को अपनी चूत पर लगा दी. वीर्य रिसता रहा मैं उसे पोंछती रही.

अचानक लगा कि कोई सिटी आने वाला है. मैंने अनिल को उठाने के लिए हिलाया पर वो सो चुका था. मैंने अपने कपड़े ठीक कर लिए. और अनिल के पेंट को ठीक करके उस पर चादर ओढा दी. बस रुक चुकी थी. धौलपुर आ गया था. यहाँ पर यात्री डिनर के लिए उतरते हैं. पर मैं एक करवट लेकर अनिल से चिपक कर सो गयी.

अन्तर्वासना के पाठक मेरी इस काल्पनिक कहानी कमेंट जरूर भेजें. ताकि आगे मैं अपनी लेखनी सुधार सकूँ ! Antarvasna

Xxx मौसी की चुदाई हिंदी में पढ़ें इस कहानी में! मेरी मौसी बहुत चंचल बिंदास है, हर वक्त हर किसी से माँ बहन से बोलती है. मैं उसे चोदना चाहता था पर उसकी शादी तय हो गयी.

मेरा नाम विशाल है, मैं एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और एक कंपनी में काम करता हूँ।
मैं गोरा हूँ, घुंघराले बालों वाला हूँ और क्लीन शेव रहता हूँ।

मेरी काजल मौसी बड़ी खूबसूरत, चंचल और बिंदास है, हंसमुख है, बोल्ड है और हंसी मजाक करने में सबसे तेज है।

उसे गन्दी गन्दी बातें करने से कोई परहेज़ नहीं है।
अपनी बातों के बीच बीच में लण्ड, बुर, चूत भोसड़ा वगैरह खूब खुल्लम खुल्ला बोलती है।
गालियां तो उसके मुंह से अक्सर निकल ही जाती हैं जिन्हें सुनकर सब लोग एन्जॉय करतें हैं।
मैं उसकी गालियां सुनने के लिए घंटों इंतज़ार करता हूँ।

वह जब भोसड़ी वाली, माँ की लौड़ी, बहन चोद बोलती है तो मेरा लण्ड साला खड़ा हो जाता है।

जब भी वह अपनी सहेलियों से बातें करती है तो गालियां जरूर बकती है और मैं वो गालियां सुन सुन कर एन्जॉय करता हूँ।

उसका कद 5′ 4″ है रंग गोरा है और जिस्म एकदम संगमरमर जैसा है।
उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखें, गोल गोल सुर्ख गाल, गुलाबी होंठ और बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियाँ किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।

वह जब सज धज कर बाहर निकलती है तो लोग उसे देखते ही रह जाते हैं।
उसकी पतली कमर, बड़े बड़े उभरे हुए चूतड़ और उनके बीच की मटकती हुई गांड अपना अलग ही जलवा बिखेरती है।

मैं तो सच में उसके नाम का मुट्ठ मारता हूँ।
मेरा मन करता है कि मैं उसके मुंह में अपना लौड़ा घुसेड़ दूँ, उसकी चूचियों में अपना लौड़ा पेल दूँ और अगर किसी दिन मुझे नंगी मिल जाए तो घपाघप चोद डालूं उसकी फुद्दी!

काजल मौसी मुझसे केवल एक साल बड़ी है।
वह 25 साल की है और मैं 24 साल का!

यह Xxx मौसी की चुदाई हिंदी इसी काजल की है.

एक दिन मैंने कहा- मौसी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
वह बोली- अच्छा, तो फिर क्या करेगा तू मेरा, अगर मैं तुझको अच्छी लगती हूँ।

मैं- कर तो बहुत कुछ सकता हूँ मौसी जी, पर डरता हूँ।
मौसी- मुझे डरपोक लोग अच्छे नहीं लगते … तुम भोसड़ी के डरपोक हो तो मुझसे दूर रहो।

मुझे उसकी गाली पसंद आ गई मैंने कहा- दूर रह कर कहाँ जाऊंगा? तुम्हारे सामने रहूंगा तो निडर हो जाऊंगा, बेशर्म हो जाऊंगा और गन्दी गन्दी बातें करने लगूंगा।

वह बोली- गन्दी गन्दी बातें करने के लिए कलेजा चाहिए। बड़ों बड़ों की गांड फट जाती है गन्दी गन्दी बातें करने में! आसान नहीं है गन्दी गन्दी बातें करना!
मैं- पर तुम्हारी तो नहीं फटती काजल मौसी?

वह- मेरी तो गांड कभी फटती नहीं, मैं तो दूसरों की फाड़ देती हूँ गांड!

एक दिन मैं सवेरे सवेरे अपने कमरे में लेटा अपना लौड़ा सहला रहा था।
लौड़ा साला एकदम तन कर खड़ा हुआ था। सवेरे का लण्ड बहन चोद बड़ा कड़क होता है। लगता है कि दीवार में भी छेद कर देगा।
लण्ड का टोपा पूरा खुला हुआ था।

मैंने लण्ड हाथ में लिया तो काजल मौसी की तस्वीर मेरे दिमाग में घूमने लगी और मैं लण्ड का धीरे धीरे सड़का मारने लगा।

इतने में किसी ने मेरे हाथ से लण्ड छीन लिया और बोली- अरे यार, यह मेरा काम है भोसड़ी के विशाल!
वह मेरी मौसी ही थी।

मैं उसे देख कर थोड़ा सहम गया, बोला- अरे मौसी सॉरी!
वह बोली- सॉरी की माँ की चूत … मैं हूँ न तेरे लण्ड का सड़का मारने के लिए! यह लड़कियों का काम है।

उसने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मेरे लण्ड को कई बार बड़े प्यार से चूमा।
मौसी ने कहा- तेरा लौड़ा तो बड़ा मस्त है विशाल! मुझे उम्मीद नहीं थी कि तेरा लण्ड इतना जबरदस्त होगा और इतना मोटा तगड़ा होगा। मैं तो बुर चोदी तुम्हें अभी बच्चा ही समझ रही थी।

फिर उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया; खुद एक स्टूल पर बैठ गयी और एक हाथ से मेरे पेल्हड़ थाम दूसरे हाथ से सटासट सड़का मारने लगी।

मैंने कहा- अब मुझे अपने बड़े बड़े मम्मे दिखा दो न काजल मौसी!

उसने अपना ब्लाउज़ तुरंत खोल दिया और दिखा दिये अपने बड़े बड़े दूध।

मैंने कहा- वाओ बड़े रसीले हैं तेरे मम्मे काजल मौसी!
वह जोश में बोली- मौसी की माँ का भोसड़ा … मैं जब किसी का लण्ड पकड़ती हूँ तो उसकी बुरचोदी हरामजादी काजल हो जाती हूँ। मुझे माँ की लौड़ी भोसड़ी वाली काजल कहो!

मैंने कहा- हाय मेरी भोसड़ी वाली काजल, मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लो न प्लीज!
उसने फ़ौरन लौड़ा मुंह में घुसेड़ लिया और मजे से चूसने लगी.

मैं एन्जॉय करने लगा।

वह बार बार लण्ड मुंह में लेती और फिर मुंह से निकाल कर सड़का मारने लगती।
मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।

आज पहली बार मेरे लण्ड का सड़का कोई मस्त जवान लड़की मार रही थी।

मेरे मन में आया कि आज यह मेरे लण्ड का मुट्ठ मार रही है तो कल मुझसे चुदवा भी लेगी.
कितना मज़ा आएगा जब मैं इसकी मस्तानी चूत में अपना लण्ड पेलूँगा.

मैं इसी तरह के ख़याली पुलाव पकाने लगा।

मौसी बड़े मन से अपना मुंह खोले हुए मेरे लण्ड का सड़का मार रही थी और लण्ड से कुछ कह भी रही थी- अरे मेरे भोसड़ी के लण्ड राजा, जल्दी से निकाल दे तू अपना मक्खन! तू बड़ा प्यारा लग रहा है मुझे। तू बड़ा मस्त है, बड़ा ज़ालिम है। मुझे तुझसे प्यार हो गया लण्ड राजा! अब तू निकल आ … डुबो दे मुझे अपने वीर्य से! मैं उसे पीने के लिए तैयार बैठी हूँ।

फिर क्या … लण्ड ने छोड़ दी दनादन 4-5 पिचकारियाँ उसके मुंह में!
वह सच में सारा का सारा वीर्य चट कर गयी।

दूसरे दिन अचानक एक बहुत बड़ा परिवर्तन हो गया।
मौसी की शादी तय हो गयी।

अब वह अपनी शादी के मूड में आ गई। बार बार ब्यूटी पार्लर जाने लगी, शॉपिंग हॉल जाने लगीं, साड़ियां खरीदने लगी।
वह पूरी तरह व्यस्त हो गयी।
उसे मेरा लण्ड पकड़ने का ख्याल भी नहीं आया और न मेरी हिम्मत हुई उसको अपना लण्ड पकड़ाने की।

समय यूं ही बीतता गया.
वह जब दुल्हन बनी बैठी थी तो वास्तव में बड़ी जबरदस्त खूबसूरत लग रही थी।
मैं मन मसोस कर रह गया।
और वह शादी के बाद अपनी ससुराल चली गई।

15 दिन बाद वह अपनी ससुराल से वापस आ गयी।
मैं समझ गया कि काजल मौसी अपनी सुहागरात मना कर आई है; खूब चुद कर आई है; अपने पति का लण्ड खूब पेलवाकर आईं है।
लेकिन वह सच में बड़ी सुन्दर लग रही थी।

उसका रूप रंग सब कुछ बदला हुआ था।
मांग में सिन्दूर, हाथों में कंगन. गले में हार, कानों में झुमके, नाक में नथनी, कमर में करधनी और पावों में पायल!

ये सब मौसी की खूबसूरती बढ़ा रही थी।
वह बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी; एकदम सेक्स बम लग रही थी।
मेरा मन उसकी चूत देखने का हो गया।

मैं उसको आते जाते बड़े गौर से देखने लगा।
आते ही वह बड़े प्यार से मिली थी मुझसे!
लेकिन दो दिन बाद भी वह मेरे लण्ड से नहीं मिल पाई।
इसका मलाल था मुझे!
मैं उसके हाथ में अपना लण्ड देखना चाहता था।

वह सबसे खुल कर बातें भी कर रही थी, अपनी ससुराल के किस्से भी सुना रही थी सबको!
लेकिन उसकी सुहागरात की बातें किसी को भी नहीं मालूम हुई।

मैं यह जानना चाहता था कि उसके हसबैंड का लण्ड कैसा है?
उसका हसबैंड रिश्ते में अब मेरा मौसा था।

क्या मौसा का लंड मेरे लण्ड से बेहतर है या फिर मेरा लण्ड उसके लण्ड से बेहतर है?
इसका जबाब तो काजल मौसी ही दे सकतीं थीं वह भी एकांत में!

मैं उसी मौके की तलाश में था। मैं उससे अकेले में बात करने की कोशिश करने लगा.
पर वह हमेशा किसी न किसी से घिरी रहती थी।

एक दिन जब मैं बाथरूम जा रहा था तो वह मुस्कराती हुई मेरे कान में बोली- विशाल कैसा है तुम्हारा लण्ड?
मैंने भी उसके कान में ही जवाब दिया- जैसा तुम छोड़ कर गई थी, बस वैसा ही है मेरा लण्ड! लेकिन आजकल तुम्हें पाने के लिए बिचारा तड़प रहा है।

तब तक एक पड़ोसन आ गई मादरचोद।
मौसी उससे बातें करने लगीं।

ख़ैर मैं बाथरूम में नहाने चला गया और सोचने लगा कि चलो कभी न कभी तो मौका मिल ही जाएगा।

कुछ देर बाद किसी ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया।
मैंने खोला तो मौसी बाथरूम में ही घुस आईं और बोली- चली गयी बुरचोदी पड़ोसन! अब घर में हम दोनों के अलावा कोई और नहीं है। मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया है।

उसने मेरी तौलियां खींच ली तो मैं नंगा हो गया।
फिर उसने भी अपनी ब्रा खोल दी।
उसकी मस्तानी चूचियाँ नंगी हो गईं।

फिर उसने अपना पेटीकोट भी खोल डाला तो उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गयी.
उसकी गांड, उसके चूतड़ सब मेरी आँखों के सामने नंगे हो गए।

मैं बड़ी देर तक उसे नंगी देखता रहा, उसके नंगे जिस्म का मज़ा लेता रहा.
फिर उसकी चूचियाँ दबा कर कहा- तेरे तो मम्मे पहले से बड़े हो गए हैं मौसी!
वह बोली- अब तुम इन्हें मसल मसल कर और बड़ा कर दो विशाल!

मौसी मेरा लण्ड पकड़े पकड़े मस्ती करने लगी, उस पर प्यार से साबुन लगाने लगी और पेल्हड़ पर भी साबुन लगाने लगी।

मैंने भी उसके नंगे बदन पर खूब साबुन लगाया और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के नंगे बदन को खूब नहलाया।

मैंने कहा- यार काजल, मैं तुम्हें बहुत याद कर रहा था।
वह बोली- मुझे भी तुम और तुमसे ज्यादा तुम्हारा लण्ड याद आ रहा था।

फिर मैंने पूछ ही लिया- तेरे पति का लण्ड कैसा है?
वह बोली- हां बस काम चलाऊ है यार! तेरा लण्ड उसके लण्ड से ज्यादा बढ़िया है।

यह सुनकर मुझे बड़ी तसल्ली हुई।

मैंने फिर कहा- अगर उसे मालूम हो गया कि तुम मेरा लण्ड पकड़ती हो तो वह बुरा मानेगा न?
वह बोली- उसकी माँ का भोसड़ा। वह क्यों बुरा मानेगा? बुरा मानेगा तो मेरा क्या उखाड़ लेगा? मैं उसके लण्ड के सहारे नहीं रहने वाली। अब तो मैं खुल्लम खुल्ला पराये मर्दों से चुदवाऊंगी। जब तक शादी नहीं हुई थी तब तक छुप छुप कर चुदवाती थी।

मैंने कहा- अच्छा ऐसी बात है। मुझे तो पता नहीं था।
वह बोली- हां यार, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। मैं एक चुदक्कड़ औरत हूँ। अब मुझे किसी बात का डर नहीं है. अब तो मेरी शादी हो चुकी है। अब मुझे तुम खूब घपाघप चोदो। मैं तुमसे चुदने के लिए एकदम तैयार हूँ।

फिर हम दोनों नहा धो कर बाहर बेड पर आ गए।

उसने मुझे चित लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी.
मौसी ने अपने बालों का जूड़ा बनाया और झुक कर मेरा लण्ड चाटने लगी।
मैं भी उसकी चूत चाटने लगा।

मैंने अनुभव किया कि आज वह जितने बिंदास तरीके से लण्ड चाट रही है इतनी बिंदास तरह से उस दिन लण्ड नहीं चाटा था। उस दिन थोड़ा डर रही थी आज तो वह शेरनी बन कर लण्ड चाट रही है। उसे कोई लण्ड चाटते हुए देख भी ले तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

मेरा लण्ड साला बड़े ताव पर था तो मैंने उसे नीचे पटका और चढ़ गया उसके ऊपर! फिर रख दिया अपना लण्ड उसकी चूत पर!

लण्ड भी गीला था और चूत भी गीली … तो मैंने उसे अंदर तक घुसा दिया।
मेरा लण्ड बहनचोद सरसराता हुआ पूरा घुस गया अंदर!
तब मुझे मालूम हुआ कि बड़ी गहरी है ससुरी मौसी की चूत।

मैं लण्ड बार बार निकालने और पेलने लगा, चोदने लगा मौसी की चूत!

Xxx मौसी की चुदाई का मजा लेती हुई बोली- हाय विशाल, तेरा लण्ड भी विशाल है यार. बड़ी दूर तक चोट कर रहा है। मुझे इतना मज़ा तो अपनी सुहागरात में भी नहीं आया था जितना मज़ा आज आ रहा है। आज मैं सही अर्थों में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।

मैं धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ा रहा था और वह भी कमर हिला हिला कर बराबर मज़ा दे रही थी।

मैंने सोचा अगर मैंने इसे पहले चोदा होता तो शायद इतना मज़ा नहीं आता।
लड़की जब निडर और बेख़ौफ़ होकर चुदवाती है तो चोदने वाले को ज्यादा मज़ा आता है।

वह मस्ती में बोलने लगी- भोसड़ी के विशाल फाड़ डाल मेरी चूत … चीथड़े उड़ा दे मेरी चूत के! ये ससुरी लण्ड की बड़ी प्यासी है। इसकी प्यास बुझा दे यार। तेरा लण्ड साला बड़ा ज़ालिम है। हाय रे … मुझे अपनी बीवी की तरह चोद। समझ ले कि मैं तेरी बीवी हूँ। बड़ा मज़ा आ रहा है। हूँ आ … हो हां हां … और पेल … घुसेड़ दे और ठोक दे पूरा … घुसा दे … चीर डाल मेरी चूत।

मौसी की मस्ती देखने वाली थी।

मैंने कहा- माँ की लौड़ी मादरचोद काजल, अब मैं तुझे पीछे से चोदूंगा। तू बड़ी मस्त चीज है। तू एकदम लड्डू पेड़ा बर्फी है मन करता है तुझे कच्चा चबा जाऊं।

मैं उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदने लगा।
मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर थे।

वह भी बहन की लौड़ी अपनी गांड आगे पीछे करती हुई चुदवाने लगी।
मुझे यकीन हो गया कि काजल अच्छी तरह चुदी हुई है क्योंकि इसे चुदाने का बहुत बड़ा अनुभव है।

कुछ देर इस तरह चोदने के बाद मैंने लण्ड फिर आगे से उसके मुंह में घुसेड़ दिया, उसका सिर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।
मैं वास्तव में चोदने लगा उसका मुंह … मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा।

उसके बाद जब मैं झड़ने लगा तो काजल ने जिस मस्ती से झड़ता हुआ लण्ड चाटा … उसका वर्णन करना बड़ा कठिन है।

दूसरे दिन शाम को जब मैं मौसी के घर गया तो वह किसी औरत के साथ बैठी हुई बतला रही थी।
मैं उसे देख कर वापस होने लगा।

इतने में मौसी ने आवाज़ लगाई- अरे विशाल यहाँ आ न!
मैं उसके पास पहुँच गया.
तो वह बोली- यार शर्माते क्यों हो? इससे मिलो … ये हैं मेरी जेठानी मिसेज रोली। मैं तुम्हारी ही बातें इससे कर रही थी।

फिर वह रोली की तरफ मुंह करके वोली- बड़ा मस्त लड़का है ये विशाल! इससे ज्यादा मस्त इसका लौड़ा है। मैं जिस लौड़े की बात तुमसे कर रही थी, वह इसी का लौड़ा है.
मैंने कहा- अरे मेरी मजाक उड़ा रही हैं काजल मौसी?

तब तक उसकी जेठानी बोली- तो क्या मैं यह समझूँ कि तेरा लौड़ा वैसा नहीं है जैसा काजल कह रही है?
फिर तो मैं फंस गया।
मैंने कहा- नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं. पर सबसे ऐसा कहना अच्छा नहीं है न!

मौसी की जेठानी बोली- अरे विशाल, मैं तेरी बुरचोदी मौसी की जेठानी हूँ ऐसी वैसी नहीं हूँ। अगर तेरा लौड़ा तारीफ के काबिल है तो उसे बताने में हर्ज़ क्या है? कहो तो मैं खोल कर देख लूँ तेरा लण्ड?
मैंने मन में कहा तो फिर खोल कर देख लो न मेरा लण्ड!

उसकी बातें सुनकर तो मेरा लण्ड साला अंदर ही अंदर उछाल मारने लगा।

रोली भी काजल से कम खूबसूरत नहीं थी।
उसकी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी दिख रही थी।
साइज में काजल की चूचियों से बड़ी ही होंगी।

फिर हम तीनों बातें करने लगे और खुल कर करने लगे।

काजल मौसी बोली- विशाल देखो … जैसे मैं पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी हूँ, वैसे ही मेरी जेठानी भी पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी है!

उसके बाद सबका खाना पीना हो गया।
मूड सबका रोमांटिक हो गया था।

मैं जल्दी से जल्दी रोली को नंगी देखने के लिए बेताब था … रोली मेरा लण्ड देखने के लिए बेताब थी और काजल अपनी जेठानी के साथ चुदाई का मज़ा लेने के लिए बेताब थी।

सब काम हो जाने के बाद हम तीनों बिस्तर पर आ गए।
इस बार काजल ने बिस्तर जमीन पर लगा रखा था।

काजल ने पहल की और अपने कपड़े एक एक करके उतारने लगी।
उसे देख कर रोली भी अपने कपड़े उतारने लगी।
मुझे मालूम हो गया कि रोली तो काजल से कुछ ज्यादा ही बेशर्म है।

मैंने जब रोली की बड़ी चूचियाँ देखीं तो मेरे होश उड़ गये।
इतनी मस्तानी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां तो मैंने कभी पोर्न में भी नहीं देखी।
मेरा मन हुआ मैं उन्हें कच्चा चबा जाऊं।

फिर रोली मेरे कपड़े खोलने लगी।

आखिर में मैं जब पूरा नंगा हुआ तो मेरा लण्ड पकड़ कर बोली- वाओ … क्या मस्त लौड़ा है भोसड़ी का तेरा विशाल। बड़ा हैंडसम और शानदार है तेरा लौड़ा। हाय रे … आज मुझे आएगा चुदाने का असली मज़ा!
ऐसा बोल कर उसने लण्ड की कई चुम्मियाँ लीं।

मेरे पूरे लगे बदन पर हाथ फिराया, बोली- लड़का तो बड़ा बढ़िया है काजल। बड़ा मस्त माल है यार! इसका हथौड़ा जैसा लौड़ा आज मेरी चूत की ऐसी की तैसी कर देगा।

तब तक काजल भी नंगी नंगी हमारे सामने आ गई।
मैंने तो रोली के मम्मे खूब मसले खूब दबाये और खूब चूमा और चाटा।

फिर जब दोनों जेठानी और देवरानी मिलकर नंगी नंगी मेरा लण्ड चाटने लगीं तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा।
मैं बीच में नंगा लेटा था।

एक तरफ मेरी बाईं जांघ में अपना सर रख कर काजल मेरा लण्ड चाटने लगी। दूसरी तरफ मेरी दाईं जांघ पर अपना सर रख कर रोली मेरा लण्ड चाटने लगी।

काजल रोली के मुंह में लण्ड घुसेड़ती, रोली काजल के मुंह में लण्ड घुसेड़ती।
दोनों बड़े प्यार से मेरा लण्ड चूमने, चाटने और चूसने में जुट गईं।

मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।
मैं सातवें आसमान पर था।

कुछ देर बाद काजल ने कहा- इधर आ मेरी बुरचोदी जेठानी, अब मैं पेलूँगी तेरी चूत में लण्ड … मैं चोदूंगी तेरी फुद्दी!

उसने मेरा लण्ड रोली की चूत में पेल दिया और मेरी पीठ पर चढ़ बैठी।
मेरे साथ वह भी चोदने लगी अपनी जेठानी की चूत।
इसी तरह दोनों ने मिलकर खूब एक दूसरी की चूत मुझसे खूब चुदवाई.

रात भर यह चुदाई होती रही।
रोली रात में न खुद सोई और न किसी को सोने दिया।

Sex Stories

चाय पीकर जीजाजी Sex Stories नहाने चले गए। बाथरूम से ही उन्होंने मुझे आवाज़ दी- राकेश आओ, तुम भी नहा लो।

मैं समझ गया कि उनका इरादा क्या है। पूरे दिन बाहर रहने के कारण वह दिन में एक बार भी मेरी गाण्ड नहीं मार सके थे।

मैं बाथरूम में आ गया। उन्होंने ही मेरे सारे कपड़े उतारे और बिना देर किए मेरे पोण्ड पर साबुन मलने लगे। उनका लण्ड पहले ही तन्नाया हुआ था, उन्होंने मेरा मुँह पकड़ कर लण्ड के पास कर दिया तथा कहा- इसे चूसो !

मैं थोड़ा हिचका, पर उन्होंने अपने लण्ड का सुपाड़ा मेरे मुंह में घुसा ही दिया। उनका लण्ड बहुत लम्बा और मोटा था। मैं और कोई चारा ना देख उनके लण्ड को लोलीपोप सा चूसने लगा, वह मेरे पोण्ड के छेद में उंगली करते रहे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे अपनी गोदी में बिठा कर अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। इस बार उन्होंने साबुन भी नहीं लगाया था। मैं तड़प कर रह गया। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे पोण्ड के नीचे लगा रखे थे और उनसे मुझे उठाकर ऊपर नीचे कर रहे थे। ऐसा करने से उनका पूरा लण्ड मेर गाण्ड में समा जाता था। १०-१५ मिनट तक लण्ड मेरी गाण्ड में अन्दर बाहर होने के बाद उन्होंने अपना रस मेरी गाण्ड में ही भर दिया। फिर नहा कर हम बाहर आ गए तो जीजाजी बोले- ‘सारा दिन बेकार हो गया योगी, रात में मैं पूरी कसर निकालूँगा, तैयार रहना !’

तैयार तो मैं था ही क्योंकि मुझे पता था की जीजाजी मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं।

रात को खाने के आधे घंटे बाद ही जीजाजी ने मेरी पहली बार गाण्ड मारी। उन्होंने उस रात कुल चार बार तरह तरह से मेरी गाण्ड मारी। अपना लण्ड चूसाया, कभी उल्टा कर गाण्ड में लण्ड घुसाया तो कभी अपने ऊपर बैठा कर मेरी गाण्ड में लण्ड डाला तो कभी मुझे हाथों में ऊपर उठाकर नीचे से मेरी गाण्ड मारी। सुबह तक मैं सो ही नहीं पाया। उस दिन में मैं सात-आठ बार गाण्ड मरवा चुका था। मेरी गाण्ड काफी फूल गई तथा मुझे काफी दर्द भी महसूस होने लगा।

सुबह उठाने पर जीजाजी ने बताया- ‘ डी. एफ. ओ. साहब कल की घटना की जाँच के लिए आ रहे हैं। तुम उन्हें खुश कर दोगे तो मैं निलंबित होने से बच जाऊँगा तथा वह अपनी रिपोर्ट मेरे हक़ में दे देंगे !’

लगभग ११ बजे डी. एफ. ओ. साहब आ गए। जीजाजी ने उनसे मेरा परिचय कराया- ‘ ये मेरे छोटे भाई का साला है, काफी समझदार है, दिन में यह आपकी पूरी सेवा करेगा !’

दोपहर के खाने के बाद जीजाजी जंगल की ओर चले गए तथा मुझे डी. एफ. ओ. की सेवा करने को कह गए। डी. एफ. ओ. साहब लेट कर आराम कर रहे थे। जब मैं उनके कमरे में पहुँचा, मेरी आहट पाकर मुझसे बोले- दरवाजा बंद कर दो। सेवा का मतलब वह अच्छी तरह समझते थे।

डी. एफ. ओ. साब काले कलूटे लेकिन तंदरुस्त इन्सान थे। दरवाजा बंद कर जैसे ही मैं मुड़ा तो मैंने देखा वह पूरी तरह नंगे लेटे हुए हैं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपना मोटा लण्ड मेरे हाथ में दे दिया तथा उसे चूसने का हुकुम दिया। उनका काला लण्ड बड़ा ही भयानक लग रहा था।

मैं थोड़ा झिझका तो वह चिल्लाये – जल्दी कर !

मैं उनका लण्ड अपनी ऑंखें बंद कर चूसने लगा। उन्होंने बिना देर किए मेरे सारे कपड़े उतार दिए। कुछ देर बाद मुझे अपने ऊपर ६९ की अवस्था में लिटा लिया। अब उनका लण्ड मेरे मुंह में था तथा मेरा लण्ड उनके मुंह के पास था। पर उन्होंने मेरे लण्ड को अपने मुंह में नहीं लिया बल्कि मेरी गाण्ड के छेद को चाटने लगे।

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद उन्होंने मेरी गाण्ड के छेद को चिकना कर दिया और मुझे उल्टा लिटा दिया। इसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पोंड फैला कर गाण्ड का छेद थोड़ा बड़ा कर लिया और एक जोर का धक्का लगा कर एक ही झटके में अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। मेरी तो जान ही निकल गई। मैं चिल्ला दिया – मर गया …!

पर वह तो मस्ती में धक्के पे धक्का पेले जा रहे थे। थोड़ी देर बाद मुझे अच्छा तो लगा पर उनके रूप रंग के कारण मुझे बड़ी ही घिन आ रही थी। उस दोपहर उन्होंने तीन बार मेरी गाण्ड मारी। मैं दर्द से बिलबिलाता रहा पर उन्होंने जरा भी परवाह नहीं की। मेरी गाण्ड का छेद कई जगह से कट गया।

शाम को वह चले गए तथा जीजाजी को उनके हक़ में रिपोर्ट भेजने का कह गए। जीजाजी बहुत खुश हुए।

रात में उन्होंने मुझे कुछ ज्यादा ही प्यार किया। मेरी गाण्ड की हालत देख कर अफ़सोस तो जताया पर इसके बाद भी उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। गाण्ड के छेद में तेल भर कर उन्होंने उस रात मेरी तीन बार गाण्ड मारी। जब मेरी गाण्ड से ज्यादा खून निकलने लगा तो उन्होंने शिव को कमरे में बुला लिया। मेरे ही सामने उन्होंने शिव की भी दो बार और गाण्ड मारी। शिव तो काफी अभयस्त था इसलिए वह काफी मस्ती में गाण्ड मरवाता रहा।

उन दोनों को देख कर मेरा भी लण्ड फाड़ फड़ने लगा पर जीजाजी के सामने मैं कुछ कह नहीं सकता था। चुपचाप लेटे लेटे अपना लण्ड मसलता रहा। जीजाजी ने यह सब देख लिया तो उन्होंने मथारू को बुला लिया तथा मुझसे मथारू की गाण्ड मारने को कहा। मथारू आदिवासी था तथा वह भी काफी सीखा हुआ था। उसने मेरे लण्ड को चाटा, चूसा, अपने पोंड के छेद में मुझसे ऊँगली घुसवाई तथा बाद में मुझसे गाण्ड में लण्ड पेलने को कहा।

मुझे यह सब करके बड़ा आनंद मिला। मैं अपनी गाण्ड का दर्द भूल गया। मथारू की गाण्ड मारने के बाद जीजाजी ने मुझसे शिव की भी गाण्ड मारने को कहा। जब मैं शिव की गाण्ड मार रहा था तभी मथारू ने अपना लण्ड पीछे से मेरी गाण्ड में भी घुसा दिया। जीजाजी मथारू की गाण्ड में अपना लण्ड पेल रहे थे। यानि की एक बार में ही तीन लोगों की गाण्ड मारी जा रही थी।

हम लगभग एक सप्ताह जंगल में रहे। जीजाजी ने इस बीच इतनी बार मेरी गाण्ड मारी कि मैं गिनती करना ही भूल गया। मेरी गाण्ड का छेद अब तक काफी खुल गया था तथा जीजाजी का मोटा लण्ड भी अब आसानी से मेरी गाण्ड में चला जाता था।

जंगल से लौटने के एक सप्ताह तक जीजाजी को फिर मेरी गाण्ड मारने का अवसर नहीं मिला।

जब उन्हें अवसर मिला तो क्या हुआ पढ़िये अगली कहानी में ….. Sex Stories

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