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Massage Girl in Kupwara: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kupwara who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kupwara that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kupwara massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kupwara who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kupwara massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kupwara massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kupwara who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kupwara employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kupwara helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kupwara

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kupwara at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

मैं राज हिमाचल क रहने वाला हूं। यह बात की है जब मैं बारहवीं में Antarvasna पढ़ता था। मैं अपने मामा के यहां पेपर देने गया था।

वहां पड़ोस में एक लड़की सुन्दर सी, मस्त फ़िगर वाली रहती थी। नाम था हिना। वो मुझ पर पहले दिन से ही लाइन मारने लगी थी पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया.

एक दो दिन में वो मुझ से बात भी राजे लगी और हम लोग एक दूसरे को इशारे भी राजे लगे। एक दिन जब मामा काम पे गये थे और मामी बच्चों के साथ पड़ोस में गयी थी तो वो बाहर छोटे बच्चों के साथ खेल रही थी।

मैंने बड़ी हिम्मत कर के उसे इशारा किया और अपने पास बुलाया मगर उसने आने से मना कर दिया।

उस दिन के बाद मैंने सोच लिया कि कुछ ना कुछ तो जरुर करुंगा उसे पाने के लिये।

मेरे मामा शाम को 7:30 बजे वापिस आते थे। उस के थोड़ी देर बाद जब थोड़ा स अन्धेरा हो गया तो सब बच्चे घर चले गये और उस ने मुझे इशारा कर के मुझे बुलाया, मैं उसके पास गया मगर पड़ोस की एक औरत वहां आ गयी और उससे बात राजे लगी।

मैं बात बिना किये ही आगे चला गया।

थोड़ी देर बाद जब वापिस आया तो वो अकेली खड़ी थी। मैं उससे बात राजे लगा। पहले तो हम इधर उधर की बातें करते रहे फ़िर वो बोली कि आप मुझे भूल तो नहीं जाओगे।
मैंने कहा कि भूलूंगा तो नहीं मगर चाहता हूं कि ये याद थोड़ी शानदार और हसीन हो जाये।
यह सुन कर वो शरमा गयी।

उस समय काफ़ी अन्धेरा हो गया था और उसने बाहर की रोशनी भी नहीं जला रखी थी। हम अन्धेरे में ही बातें कर रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आगे कैसे बढूं। उस तरफ़ भी आग बराबर लगी थी.
वो हिम्मत कर के बोली- मुझे एक किस करो.
तो मैंने पूछा- कहां पे?
तो वो बोली- गाल पे।

मैंने कहा- नहीं मेरा दिल होठों पे राजे को कर रहा है।
उसने कहा- जहां दिल करता है वहीं कर लो।

मैंने उसे अपनी बाहों में पकर लिया और एक जोरदार चुम्मी ली उसके होठों पे। उसका गदराया बदन मेरे हाथों में था। पहली बार मैंने ऐसे किसी लड़की को पकड़ा था।
हम दोनों बहुत गरम हो गये थे।

उसने कहा कि यहां कोई आ जायेगा, चलो मेरे कमरे में चलो।
मैंने पूछा- घर पे कोई नहीं है?
वो बोली- पापा मम्मी बाहर रहते हैं, यहां मैं और भैया रहते हैं। वो भी आज नहीं आयेंगे। मेरे साथ मेरी एक भतीजी है 5 साल की, उसे पहले ताई जी के पास भेज देती हूं थोड़ी देर के लिये।

उसने फ़टाफ़ट भतीजी को भेज दिया और मैं उस के कमरे में चला गया।

दरवाजा बद करके हम एक दूसरे से लिपट गये। मैंने उसे बिस्तर पे गिरा लिया और उस की कमीज उतार दी। मैं उसके मोम्मों को दबाने लगा। हम काफ़ी देर एक दूसरे को चूमते, चूसते रहे। मैंने उस के मोम्में खूब चुसे पर दिल नहीं भरा।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और हम डर गये।
हिना ने पूछा- कौन है?
तो बाहर उसकी भतीजी थी।

उसने मुझे फ़टाफ़ट छिपने के लिये कहा। मैं बिस्तर के नीचे छिप गया।

उस ने दरवाजा खोला और कुछ बात करके भतीजी को फ़िर कहीं भेज दिया। दरवाजा बद करके वो वपिस आयी तो मैं निकला। मैंने देर ना करते हुए उसकी सलवार उतार दी और जल्दी से उसकी चूत में अपना लन्ड घुसा दिया।

मगर बड़ी दिक्कत के साथ अन्दर गया और उसके आंसू निकल आये।

वो चीखी- निकालो बाहर इसे!
मगर मैं अन्दर घुसाये जा रहा था। मेरे कुछ रुकने पे वो सामान्य हुई।

अब मेरे हल्के हल्के धक्कों से उसे मजा आने लगा और वो सिस्कारियां भरने लगी। मैं उसे चोदता रहा वो मजे लेती रही।

थोड़ी देर बाद उसने मुझे कस के पकड़ लिया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- तुम धक्के लगते रहो, मजा आ रहा है।

मैं धक्के लगाता रहा और मैंने अपने लन्ड पे कुछ गरम गरम महसूस किया। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मुझे भी मजा आ रहा था। मैंने धक्के तेज कर दिये। थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया।
हम एक दूसरे से लिपटे रहे और चूमते रहे। कुछ देर बाद हमने कपड़े पहन लिये।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
हिना ने पूछा- कौन है।
बाहर उसकी भतीजी थी.

हिना ने मुझसे कहा- तुम अभी छुप जाओ, मैं इसे कहीं और ले जाती हूं, पीछे से तुम निकल जाना। हम कल मिलेंगे।

मैं वहां से आ गया।

अगले दिन उसका भाई आ गया और हम दोबारा नहीं मिल पाये।

एक दो दिन में मैं वापिस आ गया। फ़िर 3 – 4 साल बाद वहां गया तो उसकी शादी हो चुकी थी, मगर उसने कहा था कि भूलना मत और सही में मैं उसे आज भी नहीं भुला पाया हूं. Antarvasna

लेखक : जो हन्टर Hindi Sex Stories

मैं पुलिस स्टेशन से बाहर Hindi Sex Stories आया और अपनी मोटर साईकल उठा कर सीधे राहुल के घर आ गया। अभी सवेरे के साढ़े आठ ही बजे थे…हमेशा की तरह राहुल घर पर नहीं था। उसे शायद यह मालूम नहीं था कि आज उसका इस घर में अन्तिम दिन है। घर में सरोज नहीं थी…दिव्या ही मिली।

‘आज तो जल्दी आ गये… क्या हुआ रात को नींद नहीं आई क्या…?’ उसकी चुलबुली हरकत मेरे मन को बहुत अच्छी लगी।

‘दिव्या…बस रात को तो मैं तुम्हारे ही सपने देखता रहा… तुम्हारे जैसी कमसिन और जवान लड़की जिसे मिल जाये…उसकी तो किस्मत ही खुल जाये…’ मेरी बात सुन कर वो और इठलाने लगी।

‘अब अन्दर भी चलो… ‘ मुझे वो धक्का देते हुए बोली…’बोलो अब क्या इरादा है…!’
‘बस एक मीठा सा चुम्मा…’ मैंने शरारत से कहा।
‘है हिम्मत तो ले लो…!’ उसने हंस कर कहा।

‘ऐसे नहीं… पहले अपनी आँखें बंद करो…फिर देखो मेरा कमाल…’

उसने अपनी आँखें बन्द कर ली और अपना गोरा और चिकना चेहरा आगे कर दिया… मैंने उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिये… उसके कांपते होंठो का स्पर्श मुझे रोमांचित कर गया। एकदम नरम होंठ…गुलाब की पंखुड़ियों की तरह… हम दोनों एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे… दोनों ही मदहोश होने लगे। कुछ देर बाद अलग हुए तो दोनों के चेहरे की रंगत बदली हुई थी। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। उसकी आंखों में भी गुलाबी डोरे खिंच चुके थे।

दिव्या ने थोड़ा सा शर्माते हुए और फिर से आँखें बन्द करके कहा,’जो…मेरी छातियों को पकड़ लो…हाय… मसल डालो…’ उसने अपनी छाती आगे को उभार दी, उसके तने हुए उरोज बाहर को उभर आये। मैंने उसकी चूंचियो पर अपना हाथ रख दिया। और हौले हौले से दबाने लगा। उसके मुख से सिसकारी निकलने लगी। वो भी मेरे हाथों पर ज्यादा दबाने के लिये और दबाव डालने लगी।

मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर एक हाथ से उसके उभारों को मसलना शुरू कर दिया और अब मेरी कमर वाला हाथ चूतड़ों के ऊपर आ कर थम गया। मेरे हाथ उसके बोबे और चूतड़ दबा रहे थे और दिव्या अपने जिस्म को मेरे जिस्म से बल खा कर रगड़ रही थी। उसके मुँह से आह… हाय… मां री… जैसी सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने उसे दीवार से सटा कर उसकी चूत को पकड़ कर दबा दी। वो चिहुंक उठी…

‘हाय छोड़ दे जोऽऽऽ… मैं मर गई…’ वो मदहोश सी झूम गई। मैंने उसकी चूत नहीं छोड़ी… स्कर्ट के बाहर से ही उसकी चूत मसलता रहा… उसकी चूत पानी छोड़ रही थी… मेरे हाथ को गीलापन लगने लगा था।

वो मस्ती में झुकने लगी… पर उसने मेरा हाथ नहीं छुड़ाया… ‘क्या कर रहे हो जोऽऽऽ… मुझे मार डालोगे क्या???… अब बस अब…नहीं रहा जा रहा है…’ उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी… बेहाल हुई जा रही थी…

मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और प्यार से उसे बिस्तर पर लेटा दिया। उसकी आँखें बंद थी। मैंने उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया… उसकी पानी छोड़ती हुई गीली चूत सामने थी। गुलाबी रंग… हल्की भूरी भूरी झांटे… चूत के दोनों लब फ़ड़फ़ड़ा रहे थे… मैंने अपनी पैन्ट उतार दी… और अपना मोटा और तन्नाया हुआ लण्ड उसकी पनीली चूत पर रख दिया। चिकनापन इतना था कि रखते ही सुपाड़ा अन्दर घुस पड़ा और छेद में उतर गया।

‘घुसा दे रे… हाय… जरा जोर लगा दे…जो…’ उसकी बैचेनी बढ़ रही थी… पूरा लण्ड लेने को उतावली हो रही थी… मैं उस पर झुक पड़ा… और जोर लगा कर लण्ड अन्दर सरकाने लगा। वो भी अपनी चूत का पूरा जोर लगा रही थी। जब दोनों और बेकरारी बराबर हो तब भला तेजी को कौन रोक सकता था। वो भरपूर जवान… खिलती हुई कली… पूरा जोश… नतीजा ये कि धक्का पर धक्का… गजब की तेजी… चूत का उछाल… लण्ड को सटासट चला रहा था। मैंने उसके बोबे भींच लिये…

‘और जोर से भींचो… मेरे राजा… चोद दो आज मुझे…!’ उसकी वासना बढ़ती जा रही थी… मेरा लण्ड पूरी गहराई तक पहुंच रहा था… उसकी चूत जवान थी…कोई भी लण्ड पूरा ले सकती थी। मेरा लण्ड भी मानो कम लम्बा लग रहा था।

अचानक मेरे चूतड़ पीछे से किसी ने दबा दिये… मैंने देखा तो सरोज थी…चुदाई के जोश में वो कब आई पता ही नहीं चला। उसने मुझे इशारा किया। मैंने समझ गया… मैंने तुरन्त ही दिव्या के बोबे जोर जोर से मसलने और खींचने लगा। उसने भी मेरे चूतड़ दबाना चालू रखा।

‘जो मत करो… मैं झड जाऊंगी… हाऽऽऽय ना करो…’ पर मैंने बेरहमी से दिव्या के बोबे मसलना जारी रखा… और धक्के चूत में गड़ा कर मारने लगा। उसे जबर्दस्त चुदाई चाहिये थी।

‘मैं मर गई… राम रे… चुद गई… मेरी फ़ाड़ डाल जो… हाय मैं गई…’ उसके जिस्म में उबाल आ गया था। उसे नहीं पता था कि उसकी मां उसके पास खड़ी है। मेरी उत्तेजना भी बहुत बढ़ गई थी… पर अब दिव्या का शरीर ऐंठने लग गया था। वो मुझे अपनी ओर जोर से खींचने लगी थी। अचानक उसने पूरी ताकत से मुझे चिपका लिया और उसकी चूत लहरा उठी।
वो झड़ने लगी थी।
सरोज ने दिव्या का जिस्म जोर जोर से सहलाना शुरु कर दिया था। उसकी चूत का कसना और ढीला होना…उसका पानी छोड़ना मुझे बहुत सुहाना लग रहा था। सरोज बराबर उसका जिस्म सहलाये जा रही थी।

‘झड़ जा बेटी… निकाल दे पूरा पानी…’ सरोज उसे प्यार से कह रही थी।

‘मांऽऽऽ… हाय मेरी मां ऽऽऽ… तेरी बेटी तो चुद गई… जो ने तो मेरा दम निकाल दिया…’ दिव्या हांफ़ते हुए बोली। मैंने अपना लण्ड दिव्या की चूत से बाहर निकाल दिया।

‘लेकिन मेरा लण्ड तो देखो ना…अभी तक ये फ़ुफ़कार रहा है… सरोज तुम ही शान्त कर दो…’ मैंने अपनी बात भी कही… दिव्या भी अब बिस्तर से उठ चुकी थी।

‘जो…मम्मी की गाण्ड मार दो… मां की गाण्ड बहुत नरम है…!’ अचानक दिव्या ने मुझे सुझाया।

सरोज ने शरम से अपना मुख छिपा लिया। मैंने सरोज को तुरन्त घोड़ी बना दिया। और साड़ी खींच दी। सरोज की गोरे गोरे चूतड़ों की दोनों फ़ांके सामने आ गई। सरोज ने अपनी दोनों टांगें फ़ैला कर अपने गाण्ड का छेद खोल दिया। फिर मुझसे शर्माते हुए बोली,’हाय… मत करो जो… मैं मर जाऊंगी…’ फिर दिव्या की तरफ़ देखा -‘ दिव्या तू जा ना यहाँ से…’

‘मां, मेरे सामने ही गाण्ड चुदवा लो ना…! मुझे भी तो एक इसका एक्स्पीरीएन्स चाहिये ना…!’

‘चल हट… बेशरम… तेरे सामने चुदूंगी तो शरम नहीं आयेगी?’

‘मैं भी तो आपके सामने चुदी थी ना… जो लग जाओ ना अब…’ दिव्या ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल मां की गाण्ड में लगा दिया… ‘अब चोद दो मां की गाण्ड को…!’

मुझे लगा कि बस स्वर्ग है तो यहीं है… मां बेटी मुझसे इतने उत्साह से चुदवा रही थी…मैं तो सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैंने अपना लण्ड सरोज की गाण्ड के छेद पर लगा दिया और जोर लगाया, छेद में तेल भरा हुआ था मेरा सुपाड़ा फ़क की आवाज करता हुआ छेद में फ़ंस गया।

‘उईऽऽ…मां… हाय रे…घुस गया…!’ सरोज सिसक उठी। दिव्या अपनी मां के बोबे पकड़ कर धीरे धीरे मलने लगी और प्यार करने लगी।

‘जो… मेरी प्यारी मां को तबियत से चोदो… मां को आनन्द से भर दो… देखो ना मां को कितना अच्छा लग रहा है…’ दिव्या मां की ओर प्यार से देख रही थी। सरोज ने अपनी आँखें बन्द कर ली थी।
मैं अब अपना लण्ड जोर लगा कर अन्दर सरकाने लगा। मेरे लण्ड को छोटे से छेद में घुसने के कारण तेज मीठा सा सा मजा आने लगा। पर सरोज ने अपने दांत भींच लिये। उसे हल्का सा दर्द हो रहा था।
दिव्या मां को मजा देने के लिये उसके बोबे मसल रही थी। मेरा लण्ड गाण्ड में पूरा घुस चुका था। सरोज ने मुझे मुड़ कर देखा और आंख मार दी…

‘लण्ड है या लोहा… मेरी तो फ़ाड़ के रख दी… अब मारो ना जोर से गाण्ड को…’

मैंने हरी झण्डी पाते ही स्पीड बढ़ा दी। वो सिसक उठी। मजे में उसकी फिर आँखें बन्द होने लगी।

‘चोद दे मेरी मां को… प्यार से भर दो मां को… मेरी प्यारी मां…’ अब दिव्या सरोज को चूमने लगी थी। बोबे पर तो दिव्या ने कब्जा जमा रखा था। मैंने कमर में हाथ डाल कर उसकी चूत में अपनी अंगुली डाल दी। और डबल चुदाई करने लगा। उसका दाना मसलने लगा। उसे तेज मजा आने लगा।

‘हाय रे छोड़ दे अब रे… लगा…जोर से लगा… मेरी मांऽऽऽ… मार दी रे मेरी…’ सरोज ना जाने क्या क्या कहती रही। उसकी गाण्ड अब मक्खन की तरह चिकनी हो गई थी। लण्ड सटासट चल रहा था। अति उत्तेजना से उसका दाना अचानक ही फ़ड़फ़ड़ा उठा और सरोज झड़ने लगी। ये देख कर कर दिव्या ने भी मां को कस लिया।

मैंने भी झड़ने के चक्कर में स्पीड बढ़ा दी। मेरा सुपाड़ा फ़ूल कर कुप्पा हो रहा था। सहनशीलता सीमाएं पार करती जा रही थी और आखिर अन्तिम पड़ाव आ ही गया। मैंने तुरन्त अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। दिव्या ने देखते ही देखते मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर लिया और कस कर दबा कर मुठ मार दिया। मेरे लण्ड ने पिचकारी लम्बी और दूर तक उछाल दी।

‘हाय मम्मी… देखो तो… माल तो फ़व्वारे की तरह निकल रहा है…’

सरोज ने बिना समय गवांये झट से मेरा लण्ड मुख में भर लिया… अब वीर्य सरोज के मुख में भर रहा था… और वो उसे एक ही घूंट में पी गई। अब वह बचे खुचे वीर्य को भी निचोड़ रही थी… दिव्या अपनी मां की इस हरकत को ध्यान से देख रही थी…

‘मम्मी… ये क्या गन्दापना कर रही हो… इसे भी कोई पीता है क्या?’

मैंने दिव्या को समझाया कि ये तो पौष्टिक होता है और आनन्ददायक होता है… दिव्या ने कपड़े से मां की गाण्ड का तेल पोंछ दिया फिर मेरा लण्ड भी साफ़ कर दिया। सरोज ने दिव्या को गले लगा लिया। और चूमने लगी…

‘देखा जो…माँ को तुमने मस्त कर दिया… मुझे बहुत अच्छा लगा…मेरी प्यारी मांऽऽ…’ कह कर सरोज से अलग हो गई।

मैंने सरोज से बात पलटते हुए कहा- ‘आज राहुल नहीं दिख रहा है…?’

‘वो चारों आज शाम को गांव जा रहे हैं न… देर से आयेगा…’ सुनते ही मैं चौकन्ना हो गया।

‘अब तो वो तुम दोनों को पीटता तो नहीं है ना…’

‘वो जंगली है… कल देखो मुझे कितना मारा… दिव्या के तो बोबे तक नोच डाले… साला मरता भी तो नहीं है…हमारी जिन्दगी नर्क बना रखी है’ कह कर सरोज ने मेरे सीने पर सर रख दिया। दिव्या भी मां की पीठ से चिपक कर रोने लगी। तो सच में वो इतना निर्दयी और क्रूर है।

मैंने उन्हें अलग करते हुए कहा…’मुझे अब चलना चाहिये…शाम को आऊंगा।’ मैं मुड़ कर बाहर आ गया। वो दोनों मुझे प्यार से निहारते रही।

मैं तुरन्त पुलिस स्टेशन गया और अंकल से मिला… उन्हें सब कुछ बताया… कि वो सभी गांव जाने की तैयारी में है।

‘शायद उन्हें भनक लग गई है… चलो…’ उन्होंने जीप तैयार की और सभी सिपाहियो को आज्ञा दी। मैंने अपनी बाईक उठाई और उनके आगे आगे चला। पान-वाले की दुकान पर पहला छापा मारा।
मैंने भाग कर टूसीटर पर बैठे मौन्टी और सुरजीत को जा दबोचा। मौन्टी ने मुझे पीछे धक्का दे दिया और मौके की नजाकत देख कर भागने लगा। मैंने उछल कर एक फ़्लाईंग किक मार कर उसे गिरा दिया।

इतने में दो पुलिस वालों ने उन्हें धर दबोचा। हैप्पी का पीछ करके अंकल ने उसे हथकड़ी पहना दी। पान की दुकान को सील कर दी। जीप वहां से कॉलेज पहुंची। मुझे राहुल पर नजर रखने को कहा और साथ में दो पुलिस वालों को भी हिदायत दी। अंकल प्रिन्सिपल से मिलने ओफ़िस में चले गये। कुछ ही समय में अंकल और प्रिन्सिपल राहुल की क्लास के सामने थे।

राहुल देखते ही समझ गया और खिड़की से कूद कर भागने लगा। पर खिड़की के बाहर मुझे देखते ही उसके होश उड गये। उसे हथकड़ी डाल दी गई। समय पर पूरा अभियान निपट गया। चारों दोस्तों को और पान वाले को हवालात में बंद कर दिया गया। अब चला तलाशी अभियान ।

पुलिस मेरे साथ सबसे पहले राहुल के यहाँ पहुंची। राहुल भी साथ था। दिव्या और सरोज ने मुझे और राहुल को पुलिस के साथ देखा तो घबरा गई।

‘साब इसने कुछ नहीं किया… जो तो अच्छा लड़का है…’ अंकल ने मेरी तरफ़ देखा।

‘क्या बात है जो… बड़ी तरफ़दारी हो रही है… ये लो… अब इसका ध्यान रखना वरना साले की थाने में इसकी टांगें तोड दूंगा…’ अंकल में मेरी तरफ़ गुस्से में देखा और मुझे सरोज की तरफ़ धक्का दे दिया।

‘जी… जी… मैं ध्यान रखूंगी…’ घबराई सी सरोज मेरा हाथ पकड़ कर खड़ी हो गई।

‘साली… हरामजादी… जो के साथ खड़ी है… आने तो दे मुझे… तुम दोनों मां बेटी के हाथ पांव ना तोड़े तो देखना !’

मैंने राहुल के कान में कहा…’तू फ़िकर मत कर यार… मैं तेरी मां और बहन को रोज़ चोदूंगा… मस्त चीज़ें है दोनों…’
‘भड़वे… तेरी तो मैं… ‘ उसी समय अंकल का एक हाथ उसके मुँह पर पड़ा… उसके होंठो से खून छलक पड़ा।

मैंने राहुल की तरफ़ मुस्करा कर देखा… ‘तू क्या समझा था… कामिनी के साथ तूने जो किया था… वो चुपचाप बैठती…’ अब उसकी नजरें ऊपर उठी… वो समझ चुका था… कि ये सब क्यों हुआ है… उसका सर एक बार फिर झुक गया।

‘आगे से अगर ये जो… राहुल के साथ दिखा तो साला जेल जायेगा…’ अंकल अपने डायलोग बोले जा रहे थे। सरोज और दिव्या को अब भी कुछ समझ में नहीं आया। उनकी नजर में बस राहुल एक अपराधी था।

कामिनी का बदला उन दोनों के समझ में नहीं आया था। इतने में पुलिस वाले सारे घर की तलाशी ले कर कुछ समान ले कर आ गये। उसे वहीं पर सील कर दिया और हम तीनों के उस पर हस्ताक्षर करवा लिये।

वो मुझे छोड़ कर आगे तलाशी अभियान में निकल गये। मैं अंकल की अदाओं पर मुसकरा उठा। सरोज और दिव्या मुझसे प्यार करके लिपट कर रोने लगे। मैंने उन्हें समझाया

‘मैं कोई चोर थोड़े ही हूँ… मुझे तो बस इन्होंने यहां से निकलते देखा तो पकड़ लिया… हां राहुल ड्रग्स बेचने के चक्कर में पकड़ा गया है जाने कितने सालों के लिये अन्दर जायेगा।

उन दोनों ने राहुल से पीछा छूटने पर चैन की सांस ली… उनकी नजर में मैं पुलिस से बच गया और मुझे प्यार से बिस्तर पर सुला दिया। दोनों एक एक करके मुझे प्यार करने लगी… अचानक मुझे कामिनी का ख्याल आया।

‘मैं शाम को आऊंगा… रात भर मजे करेंगे… बाय…’ मैं सीधा वहां से कामिनी के पास आया। उसे सारी बात बताई… कामिनी खुश थी… उसने मुझे प्यार से चूम लिया…

‘बात कहां तक पहुंची… कार्यक्रम चालू है…?’ कामिनी और नेहा ने मुस्करा कर पूछा्।

‘दोनों ही बहुत सेक्सी है… खूब मजा आता है और अब तो दोनों ही मेरी फ़ेन है… क्यों जल गई ना…’ मैंने शरारत की नजरो से देखा।

दोनों ने मुझे पकड़ लिया और मेरी पिटाई शुरू कर दी… Hindi Sex Stories

प्रेषिका : रेखा शर्मा Sex Stories

सभी अंतर्वासना पढ़ने वाले पाठकों Sex Stories को और समूचे अंतर्वासना स्टाफ को नमस्कार ! अंतर्वासना से ही लोगों की बिस्तर, बाथरूम की बातें बाहर आती हैं। मैं एक-एक चुदाई के बारे पढ़ पढ़ कर मज़े लेती हूँ और आज मैं अपनी जिंदगी की एक ज़बरदस्त हकीकत अथवा अपनी मनचली जवानी के जोश में मैं होश खो बैठी थी, यह वाकया मैं मरते दम तक नहीं भूल पाऊँगी।

खैर मेरा नाम रेखा शर्मा है, मैं अठाईस साल की महिला हूँ, भगवान् ने भी गूंथ-गूंथ कर जवानी मेरे अन्दर भर दी थी और ऊपर से दिलफेंक मिजाज़ दिया, कामुक चालू किस्म का शबाब दिया है। सोलहवें साल में ही मेरा मन डोलने लगा था, मेरी उभरती हुई छाती जब मैं खुद भी आईने में देखती तो शरमा जाती, जब बाहर निकलती तो लड़कों की निगाहें वहाँ अटकती देखकर मेरे जवान होने पर मोहर लगा देतीं, छमक-छल्लो, नशे की बोतल सुन मैं कामुक हो जाती।

आखिर मैं एक लड़के को अपना दिल दे ही बैठी, पब्लिक प्लेस में मिलते हुए बात सिनेमा तक पहुंची, वहाँ वो मेरी जवानी को दिल खोल कर मसलता, क्रीम की तरह मेरी चिकनी जांघों पर हाथ लगते तो मैं सिकुड़ जाती।

सिनेमा से बात उसके घर तक पहुंची। एक दिन वो अकेला था और मुझे अपने बेडरूम तक ले गया वहां में बहक गई और अपनी जवानी लुटा बैठी। उसके बाद चुदाई का जो चस्का लगा, जो लगा कि बस फिर क्या बताऊँ ! कई लड़कों के साथ मेरा चक्कर चलने लगा और अपनी गूंथी जवानी में लुटाती रही, दबवाती रही।फिर एक दिन मेरी शादी एक बहुत बड़े घर में हुई। मेरे पति का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बहुत बड़ा कारोबार था। मैंने भी एम.कॉम कर रखी थी, जल्दी ही मैंने अपने पति के साथ उनका बिज़नस सम्भाल लिया लेकिन वो ज्यादातर घर से बाहर रहते, देश से बाहर भी जाना पड़ता, बिज़नस तो संभाल लिया लेकिन यह जवानी कैसे संभालती? चुदाई के बिना रहना मेरे लिए मुश्किल था, मर्द के बिना मैं नहीं रह पाती, शादी के बाद से वैसे ही सिर्फ एक लौड़े पर टिकी हुई थी। वो भी मुझे कभी संतुष्ट करता, कभी नहीं करता ! फिर भी ऊँगली, बैंगन से सार लेती(काम चला लेती) मेरे पति वैसे भी मुझे से बड़े उम्र के हैं। मैं एक मध्यम परिवार से उठ कर अमीर घर में आई थी।

एक दिन मैं अपने ऑफिस गई, वहां मेरी सहेली का फ़ोन आया, वो मुझे मिलने आ रही थी।

मैंने उसे कहा- ऑफिस ही आ जाओ !

मैंने बहुत आलीशान ऑफिस बनवा लिया था, पीछे एक आराम-कक्ष और एक छोटी सी लॉबी !

वो बोली- कोमल। ठण्डी बीयर मंगवा यार ! बहुत मन है !

मैंने अपने सेक्रेटरी को बुलाया और कहा- बिना किसी को दिखाए बीयर और कुछ खाने को लेकर आओ !

हम दोनों ने बैठ कर बीयर की चुस्कियाँ ली और फिरफिर उसको कॉल आई, उसको जाना पड़ा। मुझे सरूर सा हो चुका था। मैंने अकेले बैठने की बजाये उसको अपने सेक्रेटरी विनोद को अन्दर बुला लिया और अपने साथ बैठाया, उसको बीयर पिलाई और उसके साथ थोड़ा खुलने सी लगी।

वो बहुत मर्दानगी वाला मर्द दिखता है और अन्दर से मैं उस पर फ़िदा थी। आज मौका था, मैं उठी और उसकी गोद में बैठ गई। वो एक दम चौंक सा गया लेकिन मैं कुछ और सोच चुकी थी। उसे भी समझते देर न लगी। उसने मुझे जकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठों में डाल दिए। उसने भी अपना हाथ मेरे टॉप में घुसा दिया और मेरे चुच्चे दबाने लगा। उसका लौड़ा खड़ा हो चुका था, उसकी चुभन का एहसास होने लगा था मुझे !

उसने कहा- मैडम, थोड़ी बीयर और हो जाए ! मैं मंगवाता हूँ !

मैंने कहा- इस हालत में छोड़ कर ?

नहीं मैडम ! बाहर संजू है न ! अपना ही पट्ठा है, बहुत दमदार है वो भी !

मैं तो वासना की भूखी थी, नशे में थी ! हाँ कह दी ! उसी हालत में उसे अन्दर बुला लिया। मेरे निरावृत वक्ष देख उसकी आंखें चमक उठी।

जा चार चिल्ड-बीयर ले कर आजा !

उसके जाते ही उसने मेरी जींस भी उतार दी, खुलकर हाथ मेरी जांघों पर फिराने लगा।

वाह क्या माल हो !

उसने मुझे वहाँ से अपनी मजबूत बाँहों में उठा मेरे रेस्टरूम में बिस्तर पर फेंक दिया और मेरे ऊपर आते हुए उसने अपना मोटा लंबा लौड़ा मेरे होंठों पर टिका दिया, मैंने हंसकर मुँह में डाल लिया। एक हाथ से वो मेरी चूत मसल रहा था और उधर लौड़ा चुसवा रहा था, उसने टाँगे खोल अपना लौड़ा चूत में डाल दिया, मुझे इतना मजा आया जब उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत के अन्दर बाहर होने लगा। कितने दिन बाद मर्द का सुख मिल रहा था।

इतने में संजू वहाँ आ पहुंचा, उसने बीयर मेज़ पर रख दी, वहीं खड़ा होकर चुदाई देखने लगा, साथ में अपना लौड़ा भी मसल रहा था।

मैंने वासना और नशे की झोंक में उसको अपने पास बुला लिया बीयर का मग मांगने के बहाने ! जैसे ही पास आया मैंने उसकी जिप खोल दी और उसका लौड़ा अब मेरी आँखों के सामने था। बहुत बढ़िया लौड़ा था उसका ! मैं घोड़ी बनी हुई थी, उसने अपनी पैंट उतार दी, मेरे सामने घुटनों के बल बैठ अपना लौड़ा मेरे होंठों पर रख दिया। मैंने झट से मुँह में भर लिया। मैं नशे में पागल थी।

इसी बीच वो उठा और बीयर का मग मेरे मुँह को लगा दिया, मैंने भी पूरा खींच लिया।

अब वो मेरे बाल पकड़कर लौड़ा चुसवाने लगा- साली, कमीनी, रांड चूस इसको !

बहनचोद ! साले ! चूस रही हूँ कुत्ते !

पीछे से झटके तेज़ हो गए और आगे से लौड़ा स्वाद था। अब मुझे नशा ज्यादा हो गया। विनोद ने अपना सारा माल मेरी चूत में उतार दिया था, वह हांफते हुए बगल में गिर गया, संजू पीछे गया और चूत मारने लगा, साथ साथ ऊँगली गांड के अन्दर बाहर करने लगा। उसने काफी थूक लगाया और गांड के छेद पर अपना लौड़ा रखकर झटका दिया। मैं पहले से तैयार थी उसके इस वार के लिए- अह अह थोड़ा प्यार से करो ! गांड है राजा !

उसने जल्दी ही पूरा अन्दर डाल दिया और मेरी गांड मारने लगा।

विनोद ने अपना लौड़ा फिर से मेरे मुँह में डाल दिया और मैं उसको खड़ा करने के लिए हर अदा दिखा रही थी।

संजू तेज़ और तेज़ होता गया, गांड मार रहा था, कसी हुई थी, जल्दी उसकी पिचकारियाँ छूटने लगीं।

वाह मेरे लाला ! बहुत बढ़िया गांड मारता है तू !

दोनों मेरे ऊपर लुढ़क गिरे थे, दोनों के लौड़े हाथ में ले लिए, एक पक्की रांड की तरह उनके बीच नंगी लेटी हुई थी।

एक एक ग्लास बियर डकार कर बोला- मजा आया?

मैंने कहा- पूरा नहीं !

लेकिन फिर भी बोला- साली तू मालकिन नहीं आज रांड है अपने स्टाफ के मर्दों की !

समय देखा तो काफी हो चुका था, मैंने कहा- सालो, तुम दोनों से में अच्छी तरह ठंडी नहीं हो पाई !

मैडम फिर रुक जाओ, बाकी सबको भेज देते हैं ! साब कौन सा इंडिया में हैं !

मैडम आपके लिए दो और लौड़े तैयार हैं ! पीछे देखो !! पीछे कौन खड़ा है?

और मैंने क्या देखा ? फिर पूरी रात क्या हुआ ?

जानने के लिए इसका अगला भाग ज़रूर पढ़ना ! अभी आगे काफी कुछ है ! Sex Stories

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हम फ़िर डिज्नी लैंड के मुख्य Sex Stories पार्क में आ गए, शाम ढल चुकी थी। दोनों थक गए थे। पर मालती को इलेक्ट्रिक परेड देखना था। मैंने भी सोचा, चलो, इतनी महँगी टिकट ली है तो वह भी देखा जाए, उसके लिए समय था। मैं रात के लिए योजना बना रहा था। काश ! किसी तरह मालती तैयार हो जाए !

“क्या सोच रहे हो?” मालती ने कहा,” मुझे डिज्नी की यादगार चाहिए ! मुझे एक पेनी और दो क्वाटर दो।”

वह एक मशीन के पास खड़ी थी जिसमें एक पेनी और दो क्वार्टर डालने पर वह पेनी को चपटा करके डिज्नी के किसी चरित्र का चेहरा छाप देती थी।

मैंने हाथ ऊपर कर लिए,”पैन्ट से निकाल लो !”

“दो ना !” वह बोली।

“अरे बाबा, निकाल लो ना !” मैंने कहा।

उसने जेब में हाथ डालकर टटोला। उसकी उंगलियाँ लिंग से टकराई, लिंग ने अंगडाई ली और वह लाल भभूका हुई।

मैंने सोच लिया, आज रात को इसे समागम के लिए तैयार किया जाए तो मज़ा आ जाए।

इलेक्ट्रिक परेड में जबरदस्त भीड़ थी और हम थोड़ा विलंब से पहुंचे। मालती अपने पंजों पर खड़ी हुई, पर उसे कुछ दिख नहीं रहा था।

“धत,” वह निराशा से बोली,”विशाल, सब तुम्हारी गलती है !”

मैंने उसकी जाँघों को पकड़ा और उसे हवा में उठा लिया।

“ओह विशाल, क्या कर रहे हो?”

“अपनी, प्यारी प्यारी प्रेमिका की छोटी सी मुराद पूरी कर रहा हूँ !” मैंने उसके गाल चूमते हुए कहा।

जब तक परेड चलती रही, मैं उसे बाँहों में उठाये रहा। वह डिजीटल कैमरे से क्लिक क्लिक करते रही, हर क्लिक पर मैं उसके गाल एक बार चूम लेता था। मैं महसूस कर रहा था कि उसका बदन भी धीरे धीरे तप रहा है।

मैं स्वप्न लोक में था पर तभी मुझे एक झटका लगा।

परेड ख़त्म होने के बाद हम वापिस आ रहे थे। मैंने उसके कान में धीरे से प्रणय का इज़हार किया,”मालती ! क्या आज रात में हम यौन-आनन्द लें?”

वह रुक गई, मेरी ओर देख कर बोली,” विशाल, बुरा मत मानना ! तुम बहुत अच्छे इंसान हो ! मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे तुम्हारे जैसा दोस्त मिला ! पर मैं अक्षत-यौवना हूँ ! मैं अपना कौमार्य अपने पति को भेंट देना चाहती हूँ।”

मुझे एक झटका लगा, साथ ही मुझे लगा कि किसी ने मुझे एक झापड़ मारा हो ! रास्ते भर हमने बात नहीं की। बस में उसे नींद आ गई। वह मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई। मैं उसके मासूम चेहरे को देखता रहा। वह कितनी मासूम है ! अब मुझे आत्म-ग्लानि होने लगी ! मैंने उसके बालों में धीरे से हाथ फेरा,”माला ! उठो ! नोरवाक आ गया है, यहाँ से हमें ग्रीन लाइन की ट्रेन पकड़नी है।”

हम ग्रीन लाइन की ट्रेन से एविएशन स्टेशन आये, वहां से टैक्सी से उसके होटल चले गए।

मुझे अपना टीशर्ट और अंडरवियर याद नहीं रहा। मालती ने ही कहा,”चलो, मेरे कमरे में चलो, तुम्हारा टीशर्ट देती हूँ।”

“और वो भी !” मैंने कहा।

“हाँ, वो भी !” वह मुस्कुराई।

कमरे में आकर वह बाथरूम में कपड़े बदल कर आई और बोली,”विशाल ! आज यहीं रुक जाओ।”

“मालती, नहीं ! मुझे जाने दो !”

“नहीं, विशाल ! प्लीज ! रात हो गई है, ये एक सुइट है, सोने के लिए काफी बिस्तर हैं।”

मेरे बैग में टीशर्ट के अलावा एक बरमूडा भी था। रात वाकई काफी हो गई थी, पर मेरा मन खिन्न हो गया था।

फ़िर मैंने कहा, अच्छा, मैं सुइट के फ्रंट-रूम में सो जाता हूँ।”

बत्तियां बंद हुई पर मेरी आंखों से नींद ना जाने कहाँ गायब हो गई थी। अचानक कमरे में सरसराहट हुई। मैंने नाईट लैंप जलाया, देखा- सामने मालती खड़ी थी।

“मालती !” मैंने मुंह फेर लिया, वह पारदर्शी नाईट ड्रेस में सामने खड़ी थी।

“विशाल ! नाराज हो मुझसे?”

“नहीं !” मैंने कहा।

“मेरी ओर देखो प्लीज़ ! एक बार !”

मैंने उसकी ओर देखा, उसकी आंखों में आंसू उमड़ आए थे।

“मेरी मज़बूरी समझो विशाल ! मैं पुराने ख्यालों की लड़की हूँ। मेरा कौमार्य मेरे पति की अमानत है। तुम बहुत अच्छे इंसान हो। अगर तुम मेरे पति बन जाओ तो मुझसे खुशकिस्मत कोई नहीं होगा।”

“हो सकता है !” मैंने कहा।

“हाँ, पर वो शादी के बाद होगा ना ! मैं तुम्हें निराश नहीं करना चाहती, पर मेरी मज़बूरी समझो विशाल !”

और उसकी आंखों से आंसू की धार बह निकली। मैंने तड़पकर उसे बाँहों में भर लिया। हम एक दूसरे की बाँहों में खोये रहे। फ़िर मैंने पूछा,”मालती, हो सकता है, मैं तुम्हारा पति बन पाऊं, पर अभी तुम मुझे अपना क्या मानती हो?”

“एक अच्छा दोस्त।” वह बोली।

“बस ! मैंने कहा,” ओह नो !”

“अच्छा, मेरे खास, मेरे प्रियतम !”

“बस, यही तो मैं सुनना चाहता था। देखो मालती, प्रेमी और प्रेमिका बिना कौमार्य भंग किए यौवन मधु पी सकते हैं.यह यौन क्रीडा की चरम सीमा तो नहीं, पर उसके आस पास है समझो. . .बोलो पिलाओगी?”

“हाँ, वादा करो कि कुमारित्व …”

“हरगिज नहीं, पर पिलाओगी, न.”

“क्या ? ” वह शरमा गई,”यौवन मधु ?”

“मधु बाद में, पहले दूध !” मैंने कहा।

हम एक दूसरे की बाँहों में खो गए। मैंने उसके दोनों गालों पर कई चुम्बन लिए, फ़िर मेरे ओंठ सरककर उसकी सुराहीदार गर्दन पर घूमने लगे। फ़िर मैंने गर्दन के आधार पर चुम्बन लिया। वह शरमाकर बाँहों से निकल भागी, मैं उसके पीछे भागा और उसे बाँहों में उठा कर उसके बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया।

वह कसमसाने लगी, मैंने अपने ओंठ उसके ओंठों पर चिपका दिये और रस पीने लगा। धीरे धीरे मैंने उसके ओंठों की पंखुडियाँ फैलाई और अपनी जीभ उसके मुंह के अन्दर डाली। मेरी जिह्वा ने उसकी जिह्वा को ललकारा, उसकी जिह्वा शर्म से बाहर आई और मेरी जिह्वा से भिड़ गई। उसकी पलकें बंद हो गई थी।

मैंने उसकी स्लीवलेस गाउन के कंधे की तनी खोली और उसे धीरे धीरे नीचे सरकाया, वह शरमा कर फ़िर भागना चाहती थी पर जैसे ही उठी, उसकी गाउन कमर तक खुल गई और गुन्दाज तने हुए कबूतर चोंच उठाये बाहर आ गए।

मैंने भी तुंरत अपनी टीशर्ट हवा में उछाल दी, मेरी छाती देखकर मालती ने उँगलियाँ मुंह में डाली।

अब मुझे लगा कि मेरी प्रेयसी अपना इरादा ना बदल दे। मैंने फ़िर उसकी ग्रीवा के आधार पर कई चुम्बन जड़ दिए।

“सी, आहऽऽऽ सी..” वह सिस्कारियाँ भरने लगी, मैंने ओंठ नीचे सरकाए। फ़िर उसके उरोजों पर मुलामियत से हाथ फेरा। उरोजों के आधार पर उँगलियाँ फिराते हुए धीरे धीरे उपर ले गया, पर निप्पल जान बूझकर छोड़ दिए। मेरी उँगलियों ने मेरे ओंठों को रास्ता दिखाया। मैंने उसके कान में कहा,”मेरी रानी, दूध पीने की इजाजत है?”

“स्स्सिस, उन्ह हाँ”

मुझे कोई जल्दी नहीं थी। मैंने इस बार ओंठों से उसके स्तनाधार पर कई चुम्बन लिए।पहले बाएं स्तन पर, फ़िर दाएं स्तन पर। धीरे धीरे मेरे ओंठों का दायरा दाहिने स्तन पर कम होता गया और वह निप्पल के पास पहुंचे। मैंने अभी निप्पल पर एक गरम गरम साँस छोड़ी ही थी कि मालती में मेरा सर थाम लिया और उसे कस कर निप्पल पर जमा दिया।

उफ़, क्या स्वादिष्ट था उसके निप्पल का स्वाद। मैं निप्पल पर पिल पड़ा और जोरों से चूसने लगा, दूसरे हाथ से मैंने शरारत से दूसरे स्तनाग्र को चुटकी से मसल दिया…

“उईई, मां !”

मेरे हाथ उसके पेट और नाभि में घूम रहे थे।

‘उह उई, उई मां, धीरे, और जोर से, आह धीरे।”

मैंने निप्पल बदला और बाएं निप्पल पर आक्रमण कर दिया। अचानक उसने मेरा सर जोरों से दबाया और उसका शरीर जोर से कांपा, फ़िर वह निढाल हो गई।

“मालती !” मैंने उसके कानों में सीटी बजाई,” मेरी रानी, आगे बढ़ें?”

उसने गहरी साँस लेकर कहा,” उह, हाँऽऽऽ “

मेरी उंगलियाँ नाभि पर घूम रही थी। फ़िर मैंने नाभि का एक चुम्बन लिया और नाभि में जिह्वा घुसा दी। काफी गहरी थी उसकी नाभि। उत्तेजना में उसका शरीर लगा कि लहरों में नाव की तरह उपर नीचे हो रहा है। मैंने उसके नितम्बों पर एक थपकी दी, मालती इशारा समझ गई और उसने नितम्ब उठाये, मैंने गाउन उसके शरीर से अलग करके नीचे फेंक दिया और पेंटी में उंगलियाँ फंसी ही थी कि मालती शर्म से दोहरी हो गई।

“नहीं, यह नहीं !”

“क्या हुआ मेरी रानी?”

मालती पेट के बल लेटी थी,”नहीं विशाल, पेंटी नही !”

मैंने उसके नितम्ब पर हल्का दंत-प्रहार किया।

“सी ऽऽ काटो नहीं ! ” मैंने पेंटी के कटाव पर नितम्ब में गुदगुदा स्पर्श करना शुर किया और हलके हाथ नीचे ले गया। मालती अभी भी औंधी लेटी थी, फ़िर मैंने उसके नितम्बों के बीच उंगलियाँ फिराई और पेंटी के अन्दर से हाथ ले जाकर उसके गुदा-छिद्र को हल्के से कुरेदा।

“उई मां, मालती हवा में उछल पड़ी। इतना ही मेरे लिए काफी था, मैंने पेंटी नीचे सरका दी। मालती ने हार मानकर करवट बदली और टाँगें उपर उठाई पर तुंरत उसने योनि को हाथों से ढँक लिया।

“विशाल, नो ! प्लीज़ !”

“क्यों?”

“मुझे शर्म आती है ! तुम अब भी …”

“ओह हो !यह तो तुम्हारा काम था। खैर मैं कर देता हूँ अपनी प्यारी-प्यारी प्रेयसी की खातिर।” मैंने एक झटके से बरमूडा और अंडरवियर उतार फेंके। मेरा लिंग ज्यादा लंबा तो नहीं है, सिर्फ़ छः इंच का, पर उस समय वह भूखे शेर की तरह दहाड़ता हुआ बाहर आ गया।

“मालती, इसे छू कर तो देखो मेरी जान !” मैंने प्यार से कहा,” काटेगा नहीं !”

मालती का लाल भभूका चेहरा, उसकी आँखें भी बंद ! योनि पर उसकी हथेलियाँ और कस कर जम गई। मैंने लिंग के अग्र भाग से उसकी योनि में ढँकी उँगलियों को स्पर्श किया तो मेरे लिंग ने प्री-कम की एक बूंद उगल दी।

अब ?

इस हसीना के साथ जबरदस्ती का मेरा कोई इरादा नहीं था।

मैं फ़िर उसके उरोजों से रस पीने लगा।

“सी, उई आह इस्स्स्स्सी, .” योनि पर उसके उसके हाथ थोड़े ढीले पड़े। मैंने लिंग के अग्र भाग से उसके बाएं निप्पल को स्पर्श किया, वह सिसक पड़ी और उसकी उँगलियों ने मेरे लिंग को धकेला ..

इसी का तो मुझे इन्तजार था, योनि से उसकी हथेलियाँ हटते ही मैंने उसकी जांघों में अपना सर घुसा दिया और उसकी योनि का एक मधुर चुम्बन ले लिया।

“उई ऊऊऊऊउईईईईइ माँ मम्मी, मम्मी !”

और मैं उसकी आर्द्र झिरी में जीभ चलाने लगा। जीभ उपर ले जाकर मैंने उँगलियों से उसकी योनि के ओंठ खोले और जीभ कड़ी करके अन्दर घुसा दी और मथानी की तरह चलने लगा।

“अहा, अहा, उई, सीई, सीईईईईईईई, ”

और मैंने भगनासा खोज लिया और जिह्वा से एक करारा प्रहार किया।

“ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईइ, सीईईईईईईइ”

उसने मेरा सर जांघों से जोर से दबाया, उसकी योनि में मानो मदन-रस की बाढ़ आ गई.. मैं उसका यौवन मधु पीने लगा और वो उत्तेजना के चरमोत्कर्ष पर पहुँच कर निढाल हो गई। जैसे ही उसने आँखें खोली, मैंने फ़िर एक बार भगनासा का जीभ से मर्दन किया।

“ऊऊऊऊईईईई मर गाआआआआआईईईईईइ”

वो फ़िर शिखर पर पहुँची और निढाल हो गई।

इस बार मैंने अपना लिंग उसकी दरार से भिड़ाया। उसने चौंक कर आँखें खोली- नहीं विशाल नहीं ! प्लीज़, वादा?”

हाँ, वादा याद है मेरी रानी !”

मैंने लिंग के अग्र भाग से उसकी भगनासा के साथ घर्षण किया।

“सीईईईईईईए, ऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईई,आआया ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् “

वह फ़िर मानो आकाश में ऊँची उड़ी, एक रॉकेट की तरह, फ़िर झड़कर निढाल हो गई। जैसे ही उसकी आँखें खुली, मैंने उसका प्रगाढ़ चुम्बन लिया ।”मेरी रानी, देखा न, यौवन-क्रीड़ा का मधुर आनंद . .अब खुश हो ना?”

“हाँ, मजा तो आया, पर !”

“पर क्या?”मैंने पूछा।

“तुम प्यासे रह गए !”

“मेरी चिंता मत कर पगली”मैंने उसका एक और चुम्बन लिया।

“क्यों नहीं? मैंने कहा था न, कि अगर तुम मेरा वो चूसोगे तो मैं भी तुम्हारा वो चूसूंगी।”

और इससे पहले मैं कुछ कहता, उसने मेरा लिंग पकड़कर जोर से मरोड़ा मैं दर्द से कराहकर बिस्तर मैं पीठ के बल गिरा और वह मेरे उपर छा गई।उसने पहले मेरे निप्पल चूसने शुरू किए।

“आह, मालती, आह, प्लीज़ दांत नहीं आह !”

वह धीरे धीरे नीचे सरकी, नाभि पर अपन जिह्वा धुमाई, फ़िर और नीचे…फ़िर ना जाने उसे क्या सूझा, उसने रेशमी जुल्फों से तन्नाये लिंग को छेड़ा, लिंग उछल पड़ा।

फ़िर उसने शरमाते हुए लिंग थाम लिया और उंगलियाँ उपर नीचे फिराने लगी, लिंग के अग्र भाग को उसने नाखून से कुरेदा।

“आह, अचानक मुझे लगा, लिंग के अग्र भाग में कोई ठंडा अंगूर घिसा जा रहा है। वह अपने स्तनाग्र बारी बारी से घिसने लगी।

उसकी जिव्हा अब मेरे अंडकोष चूम रही थी।

“आह, आह” मैंने उसके लंबे बाल पकड़कर सर आगे धकेला।

“आआआह्ह्ह” मैं उत्तेजना के सागर मैं गोते लगाने लगा। उसने पहले लिंग का अग्र भाग चूसा फ़िर पूरा लिंग मुंह में भर लिया।

“आया ह्ह्ह … वह जीभ का सञ्चालन कर रही थी। अचानक मेरे शरीर की मसें कड़ी हुई,”आ ह्ह्ह्ह् ऊऊऊ आआआ ह्ह्ह्हा ” मैंने उसे पीछे धकेलना चाहा, पर कुछ नहीं, मेरा शेर उसके मुंह के पिंजरे मैं कैद था। मेरे लिंग से वीर्य की धारा फ़ूट पड़ी।

अगले ही क्षण बिस्तर में हम एक दूसरे की बाहों में थे।

इस तरह बिना मैथुन या गुदामैथुन के हमने यौन-क्रीड़ा का भरपूर आनंद उठाया।

तीसरे दिन मालती चली गई। मैंने मालती से कहा कि मैं जल्दी भारत आऊंगा और तुम्हारे मम्मी-पापा से तुम्हारा हाथ मांग लूँगा पर मैं अभी जल्दी भारत जाने के मूड में नहीं हूँ। मैं यहाँ यौवन के नए अनुभव अर्जित करना चाहता हूँ ताकि जब मालती से शादी हो तो उसे यौन-क्रीड़ा का सम्पूर्ण आनन्द दे सकूँ !! हम अभी भी ऑनलाइन भीनी भीनी मीठी रसभरी बारें करते हैं ! Sex Stories

Hindi Sex Stories

मैं बहुत दिनों से अन्तर्वासना Hindi Sex Stories की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। इसमें लोग कुछ तो काल्पनिक कहानी लिखते हैं और कुछ कुछ ही सच्ची होती हैं। किसी का आज तक तीन इंच चौड़ा लंड देखा है? गधे का भी दो इंच चौड़ा होता है। वो फिर क्या गधे का बाप है। कोई बात नहीं मैं अपनी कहानी पर आता हूँ। यह सच्ची है, आप लोग इसे सच माने या झूठ !

मैं राजवीर बीस साल का हूँ। मैं यहाँ फरीदाबाद में रहता हूँ। यहाँ हमारा पूरा परिवार है। हमारा घर में दो कमरे खाली रहते थे। हमने वो किराये पर देने का सोच लिया था। बात तीन साल पहले की ही है। हमारे घर एक परिवार आया उस परिवार में एक बुड्ढा आदमी था और उसकी एक 19-20 साल की एक बेटी होगी। उसका बाप दो हफ्ते भर रहा और फिर गाँव चला गया। उसकी बेटी अकेली ही रहती थी। उसकी पढ़ाई पूरी हो गई थी और नौकरी भी नहीं करती थी। सारा दिन घर पर ही रहती थी। उन दिनों मेरी डांस की प्रैक्टिस चल रही थी।

एक दिन उसने कहा- मुझ को भी डांस सिखा दो।

मैंने उससे कहा- अभी नहीं, बाद में !

वो मान गई।

शाम को घर में कोई नहीं था। सिर्फ वो और मैं। मैं टीवी देख रहा था। वो आई और कहने लगी- अब डांस सिखा दो !

तो मैंने पूछा- तुम डांस सीख कर क्या करोगी?

वो कहने लगी- कुछ नहीं ! बस ऐसे ही।

मैंने मना कर दिया तो वो मेरी मिन्नत करने लगी। सो मैं भी मान गया।

मैंने गाना लगा दिया और उसे डांस का एक स्टेप कर के दिखाया। वो मेरे स्टेप्स की कॉपी करने लगी। उसने सूट पहन रखा था तो उसको नाचने में दिक्कत हो रही थी पर उसकी चूची को देख कर, जो हिल रही थी, मेरा लंड भी हिल रहा था। वो डांस करते करते रुक गई।

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?

उसने कहा- परेशानी हो रही है इन कपड़ों में !

मैंने मजाक में कह दिया- कपड़े उतार कर डांस कर लो।

वो शरमा गई और चली गई।

मैं भी उसके पीछे गया। वो मुँह छुपा कर लेट गई।

मैंने कहा- मैं तो मजाक कर रहा था ! तुम बुरा तो नहीं मानी।

उसने कहा- इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है? मजाक ही तो किया था।

हम वहीं बैठ कर बातें करने लगे।

उसने मुझसे अचानक पूछ लिया- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?

मैंने कहा- हाँ ! हैं तो कई ! पर क्यों।

उसने कहा- किसी के साथ सेक्स सम्बन्ध बनाये हैं या नहीं?

मैंने कहा- तुम्हें क्यों बताऊँ।

उसने कहा- मैं तुम्हारी दोस्त नहीं हूँ क्या? मुझे बता नहीं सकते?

मैंने उससे कहा- हमने दोस्ती कब की?

उसने कहा- अब कर लो।

मैंने कहा- तुम बड़ी वो हो।

उसने कहा- वो मतलब क्या?

मैंने कहा- वो मतलब सेक्सी !

उसने अपना हाथ मुँह पर रख लिया। मैंने उसका चुम्बन ले लिया।

वो गुस्सा हो गई और कहने लगी- अभी तुम्हारी मम्मी को बताउँगी।

मैं डर गया और वहाँ से चला आया।

रात को मैं छत पर ही सोता हूँ। मैं छत पर सोया था, मेरे सामने रीमा की चूची थी। मैं उसके बारे में सोच कर मुठ मार रहा था। तभी वहाँ रीमा आ गई। उस समय रात के बारह बजे थे। मैं उसे देख कर घबरा गया। वो मुझे घूर कर देखने लगी। मैं घबराया हुआ था।

उसने कहा- तुम मेरे बारे में सोच कर ही मुठ मार रहे हो न?

मैंने कहा- नहीं !

तो उसने कहा- सच बताओ, नहीं तो आंटी को बता दूंगी। मैंने हाँ कह दिया।

उसने पूछा- क्या सोच रहे थे?

मैंने कहा- तुम्हारी चूची के बारे में।

मेरा लंड सिकुड़ गया था। उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और हिलाने लगी। मेरा लंड फिर खडा हो गया। उसने मेरी निक्कर उतार दी और जोर जोर से लंड हिलाने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर बाद उसने अपनी सलवार और कुर्ती उतार दी और कहने लगी- अब ठीक है ! अब डांस सिखा दो !

मैंने उससे कहा- सिखा तो दूँ … पर . . . . . . . ?

पर पर क्या ? उसने कहा- अगर कोई परेशानी है तो बाकी भी उतार देती हूँ।

यह बोलते ही उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। क्या चूची थी उसकी . . . . . . चूत अभी कुंवारी लग रही थी . . . . . . । चूत की खुशबू तो अलग ही आ रही थी। मेरा लंड वो देख कर और भी मोटा हो गया।

मैंने कहा- डांस तो सिखा दूँगा पर क्या तुम फीस दे दोगी।

उसने कहा- फीस अभी ले लो।

उसने मेरा मुँह अपनी चूची पर लगा दिया। मैंने भी अपना काम शुरु किया और उसकी चूची चूसने लगा। पाँच मिनट उसकी चूची चूसने के बाद मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा और रगड़ने लगा। वो मेरा लंड मुँह में लेकर रगड़ने लगी और मुठ मारने लगी। मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी। वो चिंहुक उठी। मैंने उसकी चूत चूसनी चालू की और साथ-साथ उंगली भी दे रहा था।

मैंने उससे कहा- यहाँ हमें कोई देख लेगा ! हम नीचे चलते हैं तुम्हारे कमरे में !

वो मान गई। मैंने जाते ही अपना मोबाइल ऑन किया और वीडियो रिकॉर्डर चालू कर दिया और 69 की अवस्था में आ गए। उसको मालूम नहीं था कि मैं उसकी और अपनी वीडियो बना रहा हूँ।

15 मिनट बाद मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धक्का दिया। मेरा आधा लंड अंदर चला गया। बिना रुके हुए दूसरा धक्का दिया और मेरा पूरा लंड अंदर चला गया। दस मिनट चोदने के बाद उसके चूत में ही झड़ गया और थोड़ी देर बाद वो भी झड़ गई।

हम लेट गए। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।

इस बार मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरु किया। चोदते-चोदते मैंने अपना लंड निकाला और उसकी गांड में दे दिया। आधा लंड उसकी गांड में चला गया।

वो रोने लगी और कहने लगी- छोड़ दो ! निकाल दो बाहर ! दर्द हो रहा है !

मैंने कहा- बस थोड़ी देर दर्द होगा फिर मजा आएगा।

मैं रुक गया और उसकी चूची दबाने लगा। उसको थोड़ा आराम मिला तो मैंने फिर धक्का दिया और उसकी गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया। वो छटपटा रही थी। पर लण्ड निकालने में नाकामयाब रही।

मैंने धक्के लगाने शुरु किये। वो आ आ ई ई की आवाजें निकाल रही थी। मैंने उसे 15 मिनट तक चोदा।

फिर मैंने अपना लंड निकाला तो उसने कहा- निकाल क्यों किया।

तो मैंने कहा- मेरा झरने वाला है !

तो उसने कहा- गांड में ही झार दो।

मैं अभी डालने ही वाला था, तब तक मेरा पानी निकल गया और उसके गांड के ऊपर ही गिर गया। वो जल्दी से पलटी और बाकी का सारा पानी अपने मुँह में ले लिया और मेरा लंड साफ़ कर दिया। हम थोड़ी देर लेटे रहे और फिर उठ कर कपड़े पहनने लगे। बिस्तर पर थोड़ा सा खून गिरा हुआ था।

तभी मुझे ध्यान आया कि मेरा वीडियो रिकॉर्डर चालू था। मैंने रीमा के नजरों से बचा कर अपना मोबाइल उठाया और वीडियो सेव करके मोबाइल ऑफ कर दिया। हम ऊपर ही जाकर सो गए। सुबह नींद खुली तो रीमा मेरे बगल में सो रही थी।

मेरा लंड बाहर था और उसकी चूची बाहर थी। शायद मेरे सोने के बाद उसने मेरा लंड चूसा था। मैंने भी उसकी चूची दबाई और चूसने लगा और सुबह मैंने उसे फिर दुबारा चोदा, सिर्फ उसकी गांड मारी।

तो दोस्तो, बताओ आपको मेरी कहानी कैसी लगी।

एक और कहानी है आपके किये मेरे पास पर पहले इस पर अपने विचार जरूर लिखना कि मैंने रीमा को चोदने में कहाँ कसर छोड़ दी, यह बताना। Hindi Sex Stories

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