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3सम कैम सेक्स का मजा मुझे दिलाया मेरी सुपरवाइजर ने! मेरी जॉब में उसके साथ मेरा टांका फिट हो गया। एक रात मैं उसके रूम पर था। वह सेक्स करना चाहती थी। फिर वहां पर कुछ ऐसा हुआ कि मजा आ गया!
मैं एक जॉब की तलाश में था और मैंने अपने शहर की कई कंपनियों में इसके लिए आवेदन भी दिया था।
लेकिन मेरे पास कोई कॉल नहीं आ रही थी जिससे मैं उम्मीद खोने लगा था।
एक दिन की बात है कि सुबह-सुबह ही मेरा फोन बजा।
फोन पर दूसरी तरफ एक बहुत ही मीठी आवाज सुनाई दी।
वहां से कोई महिला बोल रही थी जो ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए समय तय करने की बात कर रही थी।
मैंने भी तुरंत हां बोल दिया।
वही महिला मेरे इंटरव्यू पैनल में भी थी।
वह काफी स्वीट और खूबसूरत थी।
इंटरव्यू के दौरान बार बार मेरा ध्यान भटक रहा था।
मुझे तो यह भी पता नहीं चल रहा था कि मैं इस दौरान वासना की ठोकरें खाते हुए भी कैसे संभला रहा।
फिर बाद में पता चला कि ये महिला मेरी सुपरवाइजर निकली।
जल्द ही हम दोनों बहुत करीब आ गए।
उसका नाम मीरा था।
मीरा के बारे में बताऊं तो उसके लाल रंग के छोटे छोटे बाल थे।
उसका रंग एकदम से गोरा था और त्वचा ऐसी कि दुनिया के सबसे रेशमी रेशम से भी मुलायम।
उसके होंठ काफी रसीले थे जिनको देखकर चूसने का मन कर जाता था।
हम दोनों साथ में काफी समय बिता रहे थे।
एक दिन मैंने उसे बाहर ले जाने के लिए पूछा और वो मान गई।
हमने उस रात साथ में डिनर करने का प्लान किया।
प्लान के मुताबिक हमने खाना खाया और फिर वापस आते समय उसके घर पर आ पहुंचे।
हमने वाइन पी ली थी और रूम में पड़े हुए हम हंसते खिलखिलाते ऑफिस की बातें कर रहे थे।
हमारे दफ्तर में हमरे बारे में उड़ रही अफवाहों के वर्णन से अचानक से रूम में खामोशी छा गई।
हम दोनों एक तनाव सा महसूस करने लगे।
मैं बोला- मुझे अब जाना चाहिए।
मीरा- तुम चाहो तो रुक भी सकते हो … मुझे अच्छा लगता है जब तुम पास रहते हो।
मैं- रुकना तो मैं चाहता था, लेकिन हम करेंगे क्या?
मीरा- मतलब हम दोनों अभी थोड़े सुरूर में भी हैं, और आज डेट बड़ी कमाल थी … हमें कुछ करना चाहिए!
मैं- हां मुझे भी लगता है!
मीरा- तुम घबरा तो नहीं रहे हो?
मैं- तुम मेरे साथ समय बिताना चाहती हो पर मैं अभी कुछ टेंशन में आ गया हूँ … मैं माहौल ख़राब करना नहीं चाहता।
मीरा- तो हम आराम से शुरू करते हैं ना … देखते हैं क्या होता है।
कहकर वो मेरे पास आ गई और मुंह मेरी तरफ कर लिया।
मैंने धीरे से उसकी गर्दन पर किस कर दिया।
वह थोड़ी झुक गई और अपनी गर्दन मेरे होंठों के लिए परोस दी।
मैं उसे चूमने लगा और कुछ ही पल बाद उसने मेरा चेहरा पकड़ कर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया।
एकदम से हम दोनों के बीच जैसे आग सी जलने लगी, जीभ एक दूसरे से टकराने लगीं।
मैंने उसकी गांड से उसको थामकर अपनी तरफ खींच लिया।
वह मेरी गोद में बैठ गई और मुझे जोर से किस करने लगी।
मैं उसकी ड्रेस को उतारने लगा।
मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिराया तो उसकी गहरी आह … निकल गई।
मैं उसकी गर्दन पर जीभ से चाटने लगा, चूसने लगा, उसकी गले पर चूमने लगा।
उसका टॉप अब उसके कंधों से नीचे गिर गया।
उसने मुझे पास खींचा और मेरा मुंह अपनी चूचियों की क्लीवेज में दे दिया।
मेरी गर्म आहें अब उसकी चूचियों पर लग रही थीं।
मीरा गहरी सांसें लेते हुए- मेरी रूममेट के उठने से पहले दूसरे रूम में चलते हैं। वह पहले भी मुझे चुदाई करते हुए पकड़ चुकी है।
मैं- ओह शिट!
मीरा बीच बीच में मुझे किस करते हुए- कुछ बताऊं तुम्हें? मैंने उसको देखते हुए देखा तो ये देखकर मेरे अंदर की चुदास और भड़क गई और मैं और जोर से लंड पर कूद कूदकर चुदी!
मैं- ओह्ह ये तो बड़ी सेक्सी बात बताई तुमने!
मीरा- लेकिन मेरी दोस्त को शायद इसमें मजा नहीं आएगा। तो मेरे पास एक बेहतर आइडिया है, अगर तुम कहो तो?
मैं बोला- तो जरूर चाहूंगा।
फिर वह मुझे अपने रूम में ले गई और अपना लैपटॉप चला लिया। उसने एक वेबसाइट खोली जो DscGirls.Live नाम से थी।
मीरा- मुझे इस तरह से दूसरों के सामने चुदाई करवाना बहुत पसंद है। मैं इसके लिए इसी वेबसाइट पर कैम सेक्स के लिए आती हूं।
मैंने उसके हाथ से लैपटॉप ले लिया और स्क्रॉल करने लगा।
उसने कहा- इनमें से कोई भी एक क्यूट सी मॉडल चुन लो 3सम कैम सेक्स के लिए … जो हमें चुदाई करते हुए देख सके और हमें मजा भी आए।
तो मैंने पूजा नाम की एक मॉडल को चुन लिया।
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मीरा ने पूजा से चैट पर बात की और तुरंत यूपीआई के माध्यम से क्रेडिट खरीद लिए।
इस दौरान मैं पीछे से उसकी गर्दन पर चुम्बनों की बरसात किए जा रहा था।
कॉल पर बात करते हुए उसकी आहें निकल रही थीं।
फिर हमने वीडियो सेशन सेट कर लिया।
पूजा ऑनलाइन आ गई।
मीरा ने उसे घूमने के लिए कहा ताकि हम उसकी पूरी फिगर का जायजा ले सकें।
मैं बहुत उत्तेजित हो रहा था.
मीरा ही चैट को कंट्रोल कर रही थी और मैं पीछे बैठकर ये सब देख रहा था।
पूजा ने अपनी साड़ी का पल्लू हटाया और अपनी बड़ी सी वक्षरेखा के दर्शन करवा दिए।
वह अपने बदन पर कामुक तरीके से हाथ फिरा रही थी।
उधर ये देखकर मैंने मीरा की चूचियों को हाथों में भर लिया।
उनको दबाते हुए मैंने ब्रा के एक कप को हटा दिया जिससे उसकी चूची बाहर निकल आई।
मैं उसके निप्पलों को मरोड़ने लगा और गर्दन को चाटने लगा।
मीरा सिसकारियां भरते हुए- ओह फक! मजा आ रहा है! तुम्हें सामने का नजारा मजा दे रहा है?
पूजा अपनी गर्दन से नीचे की ओर क्लीवेज पर हाथ फिराते हुए- ओह येस! वो जानता है कि उसे क्या करना है, है न?
मीरा- हां मुझे लगता है हम पता लगा लेंगे!
मेरी सुपरवाइजर ने अब मेरा हाथ पकड़ लिया और उसे नीचे की ओर ले जाने लगी।
मेरा हाथ उसके पेट पर से होता हुआ उसकी पैंटी में सरकता चला गया।
मेरी हथेली उसकी ट्रिम की हुई झांटों को महसूस कर रही थी।
जैसे ही उसकी गीली चूत का अहसास मेरे नीचे वाले हाथ को हुआ, मैंने ऊपर वाले हाथ से जोर से उसकी चूचियों को भींच दिया।
मीरा ने मेरी हथेली पर चूत को रगड़ना शुरू कर दिया.
उधर पूजा अपने होंठों को काटने लगी।
वह भी इस नजारे का पूरा मजा ले रही थी।
मीरा की चूत टपकने लगी थी जिसका गीलापन मेरी उंगलियों पर आ रहा था।
इतने में ही मुझे उसकी क्लिट महसूस हुई और मैंने उसको रगड़ दिया।
मेरे लंड ने उसकी कमर पर झटका दिया और उसकी मजे में आह्ह … निकल गई।
वह मेरे हाथ पर लगातार अपनी चूत को रगड़े जा रही थी और स्क्रीन पर पूजा की तरफ देख रही थी।
मैं- पूजा, तुम्हें ये सब देखने में मजा आ रहा है?
पूजा मुझसे- तुम्हारी डेट (मीरा) तो सच में बड़ी नॉटी है। है न?
कहते हुए उसने अपना ब्लाउज और ब्रा उतार दिए.
मीरा- फक! ये तो बड़े हॉट हैं!
मैं- ये उससे भी ज्यादा हॉट होगा जो मैं करने जा रहा हूं!
उसने मेरी तरफ देखा।
मैंने दो उंगलियां उसकी चूत के अंदर सरका दीं।
उसे एकदम से झटका लगा और मुंह खुल गया।
लेकिन साथ ही मजे में आह भी निकल गई।
वह मेरी उंगलियों की तरफ चूत को चलाने लगी जिससे उसकी गांड एकदम से उठने लगी।
उसकी पैंटी अब चूत के पानी से गीली हो चुकी थी.
उधर पूजा भी कैम सेक्स करती हुई सिसकारियां भर रही थी।
पूजा- डैम! तुम तो बहुत ज्यादा गीली हो गई हो, चूत तो दिखाओ हमें अपनी!
मीरा ने अपनी पैंटी खींच दी और अपनी चूत को कैमरा की ओर दिखा दिया।
अब बदले में पूजा ने भी अपनी पैंटी उतार फेंकी।
उसकी चूत रस में चमकने लगी थी, शायद मीरा की चूत में मेरी उंगली जाते देख वो भी उतनी ही गर्म हो चुकी थी।
अब वह चाहती थी कि हम कुछ और ज्यादा करें।
पूजा- अब तुम दोनों को चुदाई करनी चाहिए। मैं भी तुम्हें देखते हुए अपने अंदर एक डिल्डो घुसाना चाहती हूं!
मीरा को भी यह आइडिया पसंद आया।
वह स्क्रीन के सामने ही घोड़ी बनकर झुक गई।
मैंने अपनी पैंट उतारी और नंगा हो गया।
मीरा ने मेरी आंखों में देखा और मेरे फनफनाते लंड के टोपे पर किस करते हुए चाट लिया।
इस अहसास से मेरे लंड में जोर का झटका लगा।
जब मैंने पूजा की तरफ देखा तो वह आहिस्ता-आहिस्ता अपनी क्लिट को रगड़ रही थी।
उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।
इतने में ही मीरा ने मेरे लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
लंड चूसते हुए मीरा इतना सेक्सी लग रही थी कि कुछ देर में मेरा माल छूट ही जाता।
मगर मैंने उसे दूसरी तरफ घुमा लिया और डॉगी पॉजीशन में चुदाई के लिए तैयार कर दिया।
मीरा- आखिरकार! ये लंड मैं लेने जा रही हूं। तुम्हें मजा आ रहा है पूजा?
पूजा- जब तुम इस लंड से चुदोगी, मैं तुम्हारे ये रसीले चूचे हवा में झूलते हुए देखना चाहती हूं।
मैं- बस अब तुम्हें और कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
मैंने मीरा की गांड पर एक थपका मारा और लंड को उसकी चूत में पेल दिया।
जैसे ही लंड मीरा की चूत में गया, वह गर्राहट के साथ अकड़ सी गई।
फिर मैंने चुदाई शुरू कर दी और उसकी सिसकारियां छूटने लगीं।
कैमरा में हम चुदाई करते हुए बहुत सेक्सी लग रहे थे, उधर पूजा भी ऐसी ही लग रही थी।
पूजा भी अब चारों पंजों पर आ गई थी और डिल्डो चूत में लेकर अंदर बाहर कर रही थी।
वह बोली- तुम दोनों बड़े हॉट हो!
मीरा- तो तुम्हें हमें चुदाई करते हुए देखने में बड़ा मजा आ रहा है?
पूजा- आह्ह … हां, बहुत!
दोनों ही सेक्सी लेडी सिसकारियां भर रही थीं और मेरे अंदर का लावा उबलने लगा था।
मैंने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और मीरा की चूत पच-पच करने लगी।
मुझे लगा अब मैं छूट जाऊंगा।
मैंने मीरा की गांड को कस कर पकड़ लिया और थपाथप धक्के देते हुए माल उसकी गर्म चूत में गिरा दिया।
चुदाई थम गई।
मीरा अब पूजा को देखते हुए अपनी चूत को सहला रही थी और मेरा माल उसकी चूत से बाहर निकल कर बहना चालू हो गया था।
मैं उसके करीब गया और उसकी चूचियों को भींचते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगलियां चलाने लगा।
अपने माल को मैं उसकी चूत में चारों ओर रगड़ रहा था जिससे मीरा हर बार उंगली अंदर जाने पर जोर से सिसकार रही थी।
पूजा- ओ येह! मैं भी छूटने वाली हूं!
मीरा- फक! मैं भी! ओह माय गॉड।
मीरा का बदन दोहरा होने लगा और फिर वो ढीली होती हुई आगे पड़े तकिया की ओर ढेर हो गई।
वह अपनी चूत की क्लिट को धीरे धीरे रगड़ रही थी और उस वक्त उसकी गांड में हल्के झटके लग रहे थे।
उसकी पीठ जैसे कांप रही थी।
पूजा भी डिल्डो से चुदते हुए झड़कर पीछे लेट चुकी थी।
उसकी चूत से सफेद रस बाहर निकल रहा था।
मीरा अब मेरे ऊपर लेटी हुई थी।
हम तीनों शांत हो चुके थे।
फिर हमने 3सम कैम सेक्स के बाद पूजा को विदा कहा।
उसके बाद रातभर मीरा और मेरी चुदाई का खेल चला।
उस दिन के बाद से अब हम दोनों के लिए यह रोज का खेल हो गया है।
हमें इसमें बड़ा मजा आता है।
मुझे लगता है कि सभी को अपनी लाइफ में एक बार ऐसा मजा लेकर जरूर देखना चाहिए।
इसमें थ्रीसम सेक्स जैसा ही मजा आता है।
लेकिन किसी के साथ भी किसी तरह की कोई जोर जबरदस्ती नहीं होती।
दोस्तो, यह बात उस समय की है जब मेरी पोस्टिंग कोटा में थी और विभाग में मैं नया था।
वहाँ मैं जवाहर नगर में किराए से रहता था। इत्तेफाक से दोस्तों वहीं पास में हमारे विभाग के एक अधिकारी का घर भी था जो दूसरे कार्यालय के अधिकारी थे।
मुझे पता नहीं था.. फिर भी मैं आते-जाते उनकी मैडम को देखा करता था।
वो देखने में तो कुछ खास नहीं थी.. फिर भी पता नहीं क्यों.. मेरी नज़र उनको ताकती रहती थी, क्योंकि उनका फिगर ही कुछ ही ऐसा था।
देखने में तो 34-28-36 के भरे-भरे से आम के जैसे चूचे थे.. जिन्हें देख कर मेरा मन करता था कि अभी जाकर सारा का सारा दूध निचोड़ लूँ और गांड तो ऐसे मटका कर चलती थी कि मुर्दों के लंड भी खड़े हो जाएँ।
इस बात को वो भी भांप चुकी थी कि मैं उसको देखता हूँ।
ऐसा करते-करते 5-6 महीने बीत चुके थे। गर्मी के दिनों की बात थी दोस्तों.. मेरी छुट्टी थी तो मैं ऑफिस नहीं गया था।
मैं अपने कमरे के बाहर कुर्सी लगा कर बैठा था.. तभी मैंने उनकी आवाज़ सुनी.. वो अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी।
थोड़ी देर बाद समझ आया कि वो सर से बात कर रही थी। बात पूरी होने के बाद उन्होंने मुझे देखा तो मुझे बुलाया।
मैं उनके पास गया तो वो मेरी ओर देखते हुए मुस्कुरा रही थी।
उन्होंने मुझसे मेरा परिचय पूछा.. तो अपने और अपनी जॉब बारे में मैंने उन्हें सब बताया।
फिर वो मुझसे बोली- हमारे बारे में जानते हो?
मैंने मना किया- नहीं…
उन्होंने मुझे बताया कि उनके पति आपके विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर हैं।
तो मैं तो बुरी तरह से डर गया और सोचा कि अब तो मेरी नौकरी गई, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
उन्होंने मुझे बताया कि उनका कूलर चलते-चलते ख़राब हो गया और उसे ठीक करने कोई नहीं आ रहा, क्योंकि उनकी लाइन पार्टी बिजी थी।
मैंने मन में सोचा कि आज अच्छा मौका है.. इसे मत जाने दे।
मैं बोला- मैम मैं देख लूँ कूलर को?
वो बोली- हाँ.. हाँ.. क्यों नहीं।
मैंने कूलर को अन्दर से खोल कर देखा तो उसके मेन कनेक्शन में से एक वायर निकला हुआ था.. जो मैंने जोड़ दिया और स्विच ऑन किया तो उनका कूलर चल गया।
वो बड़ी खुश हुई.. उन्होंने मुझे बिठाया और चाय बनाने चली गई।
बाद में उसने सर को भी बोल दिया कि कूलर ठीक हो गया।
जब हम चाय पी रहे थे तो मैडम मेरी ओर झुक कर बैठी हुई थी.. जिसके कारण मुझे उनके बोबे दिखाई दे रहे थे।
उनको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।
उस समय मैंने लोअर पहन रखा था जिसके कारण वो स्पष्ट दिख रहा था। मैंने बहुत छुपाने की कोशिश की.. मगर मैडम ने इसे भांप लिया था और मुझसे बोली- तुम मुझे क्यों देखते हो?
मैं बोला- ऐसे ही।
वो फिर मेरे पास आकर बैठी और बोली- मैं सब समझती हूँ और जानती हूँ कि इस समय तुम्हारे मन में क्या चल रहा है।
मैं चुप रहा।
वो आगे बोली- अंश.. आपके सर इस काबिल नहीं है जो मुझे तन का सुख दे सकें क्योंकि शादी के बाद एक एक्सीडेंट की वजह से उनकी सेक्स करने की क्षमता कम हो गई और मैं इसके लिए तरसती रहती हूँ.. क्या तुम मेरी ये इच्छा पूरी करोगे?
मैं बोला- मैडम यह सच है कि मैं आपको देखता हूँ लेकिन मैं आपके साथ ऐसा नहीं कर सकता।
मगर उन्होंने फिर दोबारा अपनी चाहत को दोहराते हुए मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी।
फिर मैंने भी उनकी व्यथा को समझते हुए अपने आपको उनके आगे सरेंडर कर दिया।
मैंने भी देर न करते हुए उनके लबों को अपने लबों के आगोश में ले लिया और उनके होंठों का रसपान करने लगा।
वो भी मेरे लंड को लोअर के ऊपर से ही मसल रही थी और मैं उन्हें चूमते हुए उनके बोबों को बड़ी बेदर्दी से एक-एक करके मसल रहा था।
मैडम ने गाउन पहना हुआ था तो मैंने गाउन के अन्दर हाथ डाल दिया।
चूंकि उन्होंने गर्मी के कारण अन्दर कुछ नहीं पहना हुआ था, तो मैं उनके बोबों की घुंडियों को मसलने लगा।
मेरे ऐसा करने से वो बेचैन हो उठी और मेरे लंड को लोअर से बाहर निकालकर अपने रसीले होंठों के बीच कैद करके उसे बड़े ही प्यार से लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.. मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगा।
वो मेरे लंड को जिस तरीके से चूस रही थी, मुझे लगा कि वो कई दिनों की प्यासी हो।
फिर अंत में मेरे लंड ने उनके मुँह में ही अपना ‘सोमरस’ छोड़ दिया.. जिसे वो बड़े प्यार से गटक गई और चाट-चाट कर मेरे पूरे लंड साफ़ कर दिया।
फिर मैंने उसका गाउन उतारा तो अन्दर से वो पूरी नंगी थी।
जिन बोबों को मैं रोज़ देखने की तमन्ना रखता था, आज वो मेरे सामने थे।
मैंने बड़े ही प्यार से उनके एक निप्पल अपने दांतों से काटा तो उनके मुँह से एक ‘सी..सी..’ करते हुए एक सीत्कार निकली।
अब मैं उनके बोबों को दबाते.. मसलते हुए एक-एक करके उनको चूसने लगा और वो अपने मुँह से मादक सीत्कार निकालने लगी।
‘आह.. आह.. उह्ह.. उह्ह.. सी.. आह.. मर गई..’
दोस्तों जब मैं उनके बोबों को मसलते हुए चूस रहा था तो वो अपने ही दातों से अपने ही होंठों को काट रही थी और मेरे बालों में अपनी ऊँगलियाँ फेर रही थी।
उनके मस्त बोबों को चूसते हुए मैं अपने एक हाथ को उनके बदन को सहलाते हुए उनकी चूत के ऊपर ले जाकर चूत के दाने को मसलने लगा।
मेरे ऐसा करने से वो और भी मस्ती में चूर होकर ‘उह्ह उह्ह आह आह हाय मैं मर गई’ जैसी सीत्कारें निकालने लगी।
मैडम की चूत एकदम गीली होकर धीरे-धीरे अपनी चूत से पानी छोड़ रही थी और वो जल बिन मछली की भाँति तड़प रही थी और मस्ती में कह रही थी- मेरी जान.. इसी चीज़ का तो मुझे बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था.. इस निगोड़ी चूत ने बड़ा परेशान कर रखा था।
फिर मैं धीरे से नीचे गया और उनकी चूत की पंखुड़ियों को अपने होंठों से चाटने व काटने लगा.. तो जैसे वो तो पागल हो गई।
मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदते हुए चाटने लगा और मैडम अपनी कमर उचकाते हुए अपनी चूत को इस तरह चटवा रही थी कि जैसे मेरे मुँह में समां जाएगी।
मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था, उनको जैसे चटवाने का शौक था.. तो उसी तरह मुझे चाटने का शौक था।
फिर मैडम बोली- अंश मेरे भोसड़े में अपना लंड डाल दो.. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा…
लेकिन मैं अपनी मस्ती में ही चूत चाटने में लगा हुआ था। मैडम तो जैसे पागल हो रही थी.. अपनी मस्ती के नशे में चूर होकर वो मेरे बालों को नोचते हुए अपनी चूत को मेरे मुँह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी।
उसकी स्थिति को समझते हुए फिर मैंने अपने लंड को उसकी मुनिया(चूत) के मुँह पर लगाया और एक धीरे से धक्का लगाया।
मैडम की चूत इतनी गीली थी कि ‘गच्च’ की आवाज़ के साथ मेरा लवड़ा मैडम की चूत की गहराइयों में उतरता चला गया।
फिर धीरे से मैंने अपने लंड को बाहर खींचा और वापस मैडम की चूत में पेल दिया।
फिर मैं मैडम की चूत में अन्दर-बाहर.. अन्दर-बाहर.. लंड पेलने लगा और मैडम भी हर धक्के का जवाब अपनी कमर को उचकाते हुए दे रही थी।
मैं अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ कर उसको चोद रहा था।
मैडम मस्ती के नशे में चूर होकर कह रही थी- चोद… मेरे राजा… उम्ह्ह उम्ह्ह.. आह.. आह… हाय… चोद… मेरे राजा.. आज मेरी चूत की खुजली मिटा दे.. मेरी चूत का भोसड़ा बना दे.. बहुत परेशान कर रखा है इस निगोड़ी ने.. आज के बाद मैं सिर्फ तुमसे ही चुदवाऊँगी.. घुसा दे अपना पूरा लंड मेरे राजा.. आह.. आह .. हाय मेरी जान।
हर एक धक्के पर गीली चूत के कारण ‘फच्च.. फच्च.. फच्च..’ की आवाज़ आ रही थी, जिसकी वजह से में भी पूरे जोश के साथ मैडम की चुदाई कर रहा था।
उसको चोदते हुए मुझे 7-8 मिनट हो गए थे। अब मुझे भी लगने लगा था कि मैं अब झड़ने वाला हूँ।
चुदाई करते हुए मैंने मैडम से कहा- मेरा पानी छूटने वाला है.. तो अन्दर ही छोड़ दूँ या बाहर…
मैडम बोली- अन्दर ही छोड़ दो.. मेरे कोई बच्चा नहीं है।
फिर मैंने देर न करते हुए अपने लंड को चूत से बाहर निकाला और मैडम के दोनों पैरों को उठाते हुए अपने कन्धों पर रखा और वापस अपने लंड को उसकी चूत में पेल दिया और जोर-जोर से उसकी चूत चोदने लगा।
जैसे ही मैडम ने कहा- मेरा पानी छूटने वाला है।
उसी समय मेरा लंड भी जवाब देने वाला था तब मैंने मैडम के पैरों को पूरी तरह से उठाते हुए उनके पैरों के घुटनों को उन्हीं के कन्धों से मिला दिया।
मेरे ऐसा करने से मैडम की चूत थोड़ा और ऊपर की ओर उठ गई और मैं जोर-जोर से उसकी चूत को चोदने लगा।
फिर करीब 8-10 धक्कों के बाद हम दोनों एक साथ झड़ने लगे और मेरे लंड की एक-एक बूंद उनकी चूत में उतर गई।
उस समय मैडम ने मुझे अपने शरीर से पूरी तरह चिपका लिया।
हम दोनों के शरीर पसीने से लथ-पथ हो चुके थे।
जब हम नार्मल हुए तो मैडम ने मुझे धन्यवाद दिया और मुझसे बोली- मैं आजीवन तुम्हें नहीं भूलूंगी।
उसके बाद हम दोनों साथ-साथ नहाए और नहाते हुए एक और चुदाई का राउंड लिया।
नहाने के बाद मैडम ने मुझे बिठाया और अपने हाथों से खाना बनाया और फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया।
फिर मैडम मुझे 2000 रूपये देते हुए कहा- ये आपका इनाम और फिर जरुरत पड़े तो मांग लेना.. आज से मैं अब तुम्हारी हुई।
मैंने वो पैसे लेने से इंकार कर दिया और मैडम से बोला- मैं ये काम पैसे के लिए नहीं करता बल्कि मुझे चुदाई करने का शौक है.. इसलिए करता हूँ। आप अपने पैसे अपने पास रखिए.. हाँ.. अगर कभी मुझे इनकी जरुरत पड़ी तो आप से जरुर मांग लूँगा।
फिर उसके बाद मैं चला गया। फिर मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं उनकी चूत की भूख मिटाता।
फिर एक दिन उन्होंने मुझे अपने गर्भ से होने की बात बताई तो मैं भी बहुत खुश हुआ।
बाद में मैडम ने सारी बात सर को बताई तो उन्होंने भी परिस्थिति से समझौता करते हुए मुझे बुलाकर मेरा धन्यवाद करते हुए कहा- जीवन में जब कभी भी हमारी जरुरत पड़े तो निसंकोच आ जाना।
उसके बाद तो मेरी जैसे लाटरी निकल गई।
गुरु जी को प्रणाम, सभी Sex Stories कुंवारी लड़कियों और शादी शुदा औरतों को मेरा प्यार और सेक्स भरा नमस्कार !
मैंने अन्तर्वासना की बहुत सी कहानियाँ पढ़ी है मेरी जीवन में भी बहुत सी सच्ची घटनायें हैं जिन्हें मैं अब बाँटना चाहता हूँ। इस बारे में मैंने आज तक किसी से बात नहीं की क्योंकि मैं बहुत अंतर्मुखी स्वाभाव का हूँ।
यह बिल्कुल सच्ची घटना है काल्पनिक न समझें, सिर्फ नाम काल्पनिक हैं।
मेरा नाम कमल है मेरी उम्र 22 साल है, लण्ड सात इंच, बदन गोरा, लम्बाई 5 फ़ुट 10 इंच, गठीला बदन है।
मेरी बुआ का नाम सरिता है, उम्र 31 साल, गोरा बदन, सेक्सी, आज भी हिरोइन सी लगती है, वो बहुत ही कामुक है।
बहुत दिन पहले मेरी बुआ मुझे ऊपर छत पर ले गई, मुझे बैठा कर मेरे सामने अपनी चड्डी उतार कर टट्टी करने लगी और एकदम अलग नजरों से देखने लगी। मुझे उसकी चूत दिखी, थोड़ी-थोड़ी सुनहरी झांटें थी और छोटी सी प्यारी सी गुलाबी सी चूत थी। पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रही है। टट्टी करने के बाद वो मेरे पास आई, मेरी चड्डी खोलने लगी और मेरी लुल्ली से खेलने लगी। फिर मेरी लुल्ली खड़ी हो गई। और फिर वो अपनी चड्डी उतार कर मेरे ऊपर चढ़ गई मेरे लण्ड के ऊपर अपनी चूत रगड़ने लगी। धीरे धीरे उसने अपनी चूत में मेरा लण्ड घुसवाना चालू किया।
वो सेक्सी सेक्सी आवाजें निकाल रही थी पर धीरे धीरे ! ताकि कोई सुन न ले !
मुझे भी अच्छा लग रहा था पर उतना नहीं जितना कि मेरी बुआ को ! फिर अचानक वो एकदम से तेज़-तेज़ हिलना चालू हो गई और एकदम उसका दबाव मुझ पर बढ़ने लगा। मैं तो छोटा था, मुझे डर लग रहा था कि इस पर भूत-चुड़ैल तो नहीं घुस गया। मैं तो एकदम चुप हो गया था।
धीरे धीरे वो एकदम शांत हो कर मुझ पर ही लेट गई, शायद क्योंकि उसकी वासना की आग बुझ चुकी थी। मेरा वीर्य नहीं निकला पर मुझे बहुत अच्छा लगा था।
उस दिन के बाद मेरी नज़र हमेशा मेरी बुआ के ऊपर थी कि कब वो फ़िर से मुझे चोदेगी।
पर उस दिन के बाद बुआ मुझे ध्यान ही नहीं देती थी पता नहीं क्यों !
शायद उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था इसलिए वो मुझसे ज्यादा बात भी नहीं करती थी और दूर दूर रहती थी। लेकिन मैं तो अब उसे और ध्यान से देखने लगा था। क्या जवानी थी उसकी ! साफ सफाई करती थी झुक झुक कर तो मैं उसके बूब्बे देखा करता था हमेशा नजर बचा कर ! मैंने इस बारे में आज तक किसी से बात नहीं की है, डर लगता है।
वो जब समझ जाती थी कि मैं उसे देख रहा हूँ तो मुझे घूर कर देखती थी क्योंकि वो भी किसी को कुछ नहीं बता सकती थी।
ऐसे ही कुछ साल बीत गए मेरी बुआ और ज्यादा जवान हो गई और सेक्सी लगने लगी लेकिन मुझे सेक्स का ज्ञान ही नहीं था।
पर कुछ समय बाद मुझे अपने दोस्तों के साथ ब्लू फिल्म देखने को मिली जिससे मुझे थोड़ा बहुत ज्ञान मिला।
एक दिन जब हमारा पूरा परिवार एक साथ हॉल में सो रहा था तो मेरी बुआ मेरे पास ही सोई हुई थी। उसकी टांगें मेरी तरफ थी। बुआ ने लहंगा और गाउन पहना था। गर्मी का मौसम था इसलिए किसी ने भी चादर नहीं ओढ़ी थी।
रात के लगभग दो बज रहे थे, अँधेरा होने के बावजूद मेरी आँखों में तो नींद ही नहीं थी, मैं तो अपनी बुआ के जवान स्तन देखना, चूसना चाहता था, उसकी चूत चाटना और चोदना चाहता था।
पर मुझे यह भी डर लग रहा था कि घर वाले मुझे पकड़ न ले ! वे तो मुझे मार ही डालेंगे।
धीरे से आखिर हिम्मत करके उसके लहंगे की तरफ मेरा हाथ बढ़ा, मैंने उसकी टांगों को उठाने की कोशिश की। वो शायद गहरी नींद में थी, इसलिए उसे पता नहीं चला। धीरे से मैंने उसका गाउन उसके घुटनों तक ऊपर किया जिससे मुझे मधिम रोशनी में उसकी चड्डी हल्की सी दिखी।
अब मैं धीरे से उसकी जांघ पर अपना हाथ फिर रहा था, वो अब भी नींद में थी। धीरे धीरे मैं उसकी पैन्टी के ऊपर हाथ फिराने लगा। मुझे बहुत डर भी लग रहा था और बहुत अच्छा और सेक्सी भी लग रहा था।
अचानक हाथ फिराते हुए मुझे लगा कि उसके जिस्म में हरकत हो रही है इसलिए मैंने तुरंत बुआ की चूत से हाथ हटा दिया और आंखें झपका कर सोने का नाटक करने लगा।
मेरा शक सही था, बुआ झटके से उठी और शायद समझ गई। उसने पहले अपना लहंगा ठीक किया और मेरी तरफ एकदम घूर कर देखने लगी। अँधेरे के कारण उसे ठीक से नहीं दिखा कि मैं भी पलकें झपका कर उसे देख्र रहा हूँ।
मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा जैसे मुझे कुछ मालूम ही नहीं। उसे पता होने के बाद भी वो किसी को मेरे बारे में बता नहीं सकती थी क्योंकि यह सब शुरू ही उसने किया था। कुछ देर तक वो मुझे देखने के बाद आखिर वो सो गई। शायद मुझे फिर से हरकत करते हुए रंगे हाथ पकड़ने के लिए !
पर इस बार मेरी हिम्मत ही नहीं हुई।
इस दिन के बाद मुझे कभी उसके साथ सोने का मौका नहीं मिला।
इसके कुछ समय बाद मेरी बुआ की शादी हो गई और मेरा उसको चोदने का सपना आज तक अधूरा है क्योंकि मेरी बुआ ने तो मुझे चोद दिया पर मैं उसे नहीं चोद पाया हूँ।
खैर आज भी मेरी तम्मना है कि मैं उसे चोदूँ।
पर मेरी जिंदगी सेक्स के लिए नहीं रुकी, मेरी जिंदगी में बहुत सी लड़कियाँ आ गई, बड़े अच्छे पल थे वो भी !
कई कुंवारी चूतों का स्वाद चखा है मैंने !
जैसे मेरी कुछ नौकरानियाँ खासकर सरोज, उसकी माँ, मेरी चचेरी और ममेरी बहन, मेरी बड़ी बुआ की बहु, मेरी सगी बहन की सहेलियाँ, मेरी बहुत सारी गर्लफ़्रेन्ड्स, आंटियाँ !
अगली बार इनके बारे में भी बताऊंगा। मुझे मेल जरूर करें ! Sex Stories
हाय ! मेरा नाम राज है, मैं अपनी Hindi Porn Stories कहानी लिखने जा रहा हूँ। वैसे मैं आगरा से हूँ। मेरा कद ५’८.३” है, दिखने में भी ठीक हूँ।
एक दिन मैं नेट पर संवाद कर रहा था तो मुझे एक लड़की मिली जिसका नाम था श्रुति (बदला हुआ नाम), हम दोनों रोज बात किया करते थे। करीब एक साल बात करी हम दोनों ने !
एक दिन वो आगरा आई अपना पेपर देने ! तब उसने मुझे मिलने के लिए बुलाया। मैं गया मिलने तो उसे देखा। वो सलवार और सूट में थी। मैंने सोचा- अगर यह लड़की मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन जाए तो कैसा रहेगा। तब मैं उसे मन ही मन में जीन्स और टॉप पहने हुए सोचने लगा। मुझे सोच कर अच्छा लगा। मैंने उससे करीब १० मिनट ही बात की और वो चली गई। मैं भी घर आ गया और उसे मोबाइल पर ही प्रोपोज़ कर दिया।
शाम तक वो मान गई। ऐसे करते करते काफ़ी समय निकल गया और वो मुझ पर विश्वास करने लगी। तब एक दिन मैंने उसे सेक्स के लिए कहा।
पहले उसने कहा- यह संभव नहीं है।
मेरे मनाने पर वो मान गई।
हाँ ! मैं उसक बारे में बताना ही भूल गया। उसका बदन की क्या कहूँ, एक दम मस्त ३४ २९ ३२ ! तो मैंने एक दिन अपने दोस्त का कमरा ले लिया और उसकी चुदाई का प्रोग्राम बनाया। जब हम कमरे में गये तो मैंने जाते ही उसे चूमना शुरू कर दिया। करीब २० मिनट तक किस करता रहा मैं ! उसकी सांसें तेज होने लगी और मेरा हाथ उसकी चूत तक पहुंच गया।
वो गर्म होती जा रही थी। तब मैंने उसकी जींस और फिर टॉप उतार दिया। माँ कसम, क्या कयामत लग रही थी ! अगर मुर्दा उसे देख ले तो फिर से जिन्दा हो जाये ! चुम्मा-चाटी के बाद मैंने उसकी चूत पर चूसना शुरू किया।
वो बोली- राज ! प्लीज़ मत करो ! कुछ हो रहा है !
मैंने कहा- अभी बहुत कुछ होना है डार्लिंग !
मैं नहीं हटा और चूसता रहा। इतने में वो झड़ गई लेकिन मैं अभी तो शुरू ही हुआ था। मैंने अपना लण्ड निकाला।
उसने देखते ही कहा- इसे मत डालना ! मैं मर जाउँगी !
वैसे मेरा लण्ड ज्यादा बड़ा नहीं है, बस ७ इंच का है और ३.४ मोटा है।
मैं कहाँ मानने वाला था ! मैंने उसकी चूत में लण्ड को रखा और थोड़ा अंदर किया। वो बोली- बस रुको यहीं पर !
मैं थोड़ा सा रुका लेकिन माना नहीं और एक दम झटके से लण्ड घुसा दिया।
वो चिल्ला उठी- मर गईईईऽऽऽ माआआआआआ फट गई मेरीऽऽऽ !
मैंने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिए और तब मैं बहुत धीरे-धीरे कर रहा था जिससे उसे और दर्द ना हो !
फिर वो बोली- तेज करो राज !
मैं तेज तेज करने लगा। करीब २५ मिनट में दो बार झड़ गई। कुछ देर के बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ गया और कुछ देर तक ऐसे ही गिरे पड़े रहे।
जब हम उठे, मैंने कहा- एक बार और डार्लिंग !
उसने कहा- ओके !
लेकिन उसे नहीं पता कि इस बार उसकी गांड की बारी है !
मैंने उसे कहा- घोड़ी बन जाओ !
वो बन गई और बोली- प्लीज़, इस बार धीरे करना !
मैंने कहा- ओके !
लेकिन मुझे कहाँ मानना था। मैंने सीधे उसकी गांड की बारी लगा दी। सिर्फ ३ झटकों में मेरा पूरा अन्दर चला गया।
वो बोली- राआआआआआआज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज !
और मैं रुक गया। कुछ देर बाद जब उसका दर्द बंद हुआ तो बोली- तेज तेज करो !
मैं करता गया, करता गया और इस बार मैं ४५ मिनट तक चोदता रहा। हम दोनों एकदम पसीने में नहा गये थे। ४५ मिनट बाद मेरा पूरा पानी उसकी गांड में था और मैं वैसे ही उसके ऊपर गिर गया और हमारी आंख लग गई। दो घण्टे बाद हम दोनों उठे और नहाये, एक दूसरे को किस किया और होटल में जाकर डिनर किया।
लेकिन श्रुति से चला नहीं जा रहा था।
वो दिन हम दोनों को आज तक याद है ! उसके बाद भी हमने बहुत बार चुदाई की, लेकिन पहली चुदाई तो पहली ही होती है ना !
आप सबको मेरी कहनी कैसी लगी?
अगर कोई गलती हो तो माफ़ करना और अपने विचार मुझे मेल करियेगा। Hindi Porn Stories
मैं अन्तर्वासना की Sex Stories कहानियाँ बहुत दिनों से पढ़ता आ रहा हूँ। मैं भी अपना अनुभव पाठकों के साथ बाँटना चाहता हूँ।
मुझे एक बार काम के सिलसिले में दिल्ली से चेन्नई जाना था। प्रोग्राम देर से बना था इसलिए मुझे कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाई थी, मैं स्टेशन पर जाकर टीटी से सीट के लिए बात कर रहा था कि अचानक एक 20-21 साल की लड़की मेरे पास आई और कहने लगी- मेरे पास फर्स्ट एसी का एक एक्स्ट्रा टिकट है, अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो आप मेरे साथ चल सकते हैं।
मैंने तुंरत ही हाँ कह दिया। कन्फर्म टिकट और हसीन साथ और क्या चाहिए। ट्रेन में जाकर मुझे पता लगा कि वोह एक एसी केबिन का टिकट है।
मैंने उससे पूछा- तुम्हें डर नहीं लगेगा अकेले मेरे साथ?
वो बोली- नहीं, तुम ऐसे लगते नहीं हो, वैसे भी अकेले सफ़र करने में भी तो डर है।
सफ़र शुरू होने के थोड़ी देर बाद टीटी टिकट चेक कर गया, फिर वो भी बाथरूम जाकर अपनी ड्रेस बदल कर आ गई।
मैं लेट कर एक नॉवल पढ़ने लगा तभी उसने मुझे दूसरा झटका दिया। उसने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया और अपने सामान से एक वोड्का की बोतल निकाल ली और मुझसे पूछने लगी- तुम लोगे क्या?
मैं हैरान था, मैंने हाँ कह दिया। थोड़ी देर में दोनों को नशा होने लगा। हम लोग आपस में काफी खुल गए थे।
फिर उसने कहा- चलो, ताश खेलते हैं।
थोड़ी देर के बाद वो बोली- तुमने कभी स्ट्रिप पोकर खेला है?
यह सुनकर मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैं समझने लगा कि यह लड़की चाहती क्या है, मैंने कहा- खेला तो नहीं है पर अगर तुम चाहो तो खेल सकता हूँ।
वो बोली- ठीक है पर पूरे कपड़े नहीं उतारेंगे और तुम मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा नहीं करोगे !
मैंने कहा- ठीक है।
पहला गेम मैंने जीता।
उसने शर्त के अनुसार अपनी शर्ट उतार दी। अन्दर उसने काली सिल्की ब्रा पहनी हुई थी जिसमें से उसके गोरे मम्मे झांक रहे थे।
मेरा सर घूमना शुरू हो गया। मेरी नज़र अब उसके मम्मों पर बार बार जा रही थी, ध्यान भंग होने के कारण मैं अगले दोनों गेम हार गया और अब मैं सिर्फ अपने अंडरवियर में था जिसमें मेरा लंड खड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था।
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराकर बोली- और खेलना है?
मैंने कहा- मैं हार गया तो पूरा नंगा हो जाऊंगा !
वो बोली- तो क्या मैं भी तो हार सकती हूँ !
हमने अगला गेम खेला और वो जानबूझ कर हार गई। उसने अपना पजामा उतारा तो उसकी दूधिया जांघें देखकर मेरी आह निकल गई।
वो बोली- और खेलना है?
मैंने कहा- पर तुम तो कह रही थी कि पूरे कपड़े नहीं उतारेंगे?
वो बोली- मैं उतारने को तैयार हूँ अगर तुम मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा न करो तो !
मैंने कहा- ठीक है।
मैं अगला गेम हार गया।
उसने बोला- चलो उतारो !
मैंने धीरे से अपना अंडरवियर उतार दिया और मेरा आठ इंच का मोटा लंड बाहर निकल आया जिसे देख कर वो मुस्कुराने लगी।
उसने कहा- और खेलना है?
मैंने कहा- और क्या ! मैं भी तुम्हें नंगा देखना चाहता हूँ !
वो मुस्कुराई और खेलने लगी, और बार बार मेरे मोटे लंड को देखती रही।
अगला गेम वो हार गई और जैसे ही उसने अपनी ब्रा उतारी उसके सफ़ेद मम्मे मेरे सामने प्रकट हो गए।
मैंने अपने आप को कैसे संभाला मैं ही जानता हूँ।
पर इस धीरे धीरे होने वाले इस गेम में मुझे मज़ा आ रहा था। अगला गेम वो जानबूझ कर हार गई।
मैंने कहा- तुम्हारी पैंटी मैं उतारूंगा !
उसने कहा- ठीक है ! पर शर्त याद है न? तुम कुछ उल्टा सीधा नहीं करोगे !
मैंने कहा- है तो बड़ा मुश्किल ! पर कोशिश करूंगा !
वो मेरे सामने खड़ी हो गई और मैंने धीरे से उसकी पैंटी उतार दी और उसकी चिकनी चूत के दर्शन किये।
मैं उसके बाद बैठ तो गया पर कण्ट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो रहा था। मैंने धीरे से अपना लंड सहलाना शुरू कर दिया।
वो हंस कर मेरे पास आई और बोली- कुछ तो करना पड़ेगा नहीं तो तुम तड़प कर मर जाओगे !
उसने अपने हाथ से मेरा लंड सहलाना शुरू कर दिया, फिर वो मेरे सामने नीचे बैठ गई और मेरे लंड को चाटने लगी, फिर धीरे धीरे उसने उसको चूसना शुरू किया।
मैं नियंत्रण से बाहर होता जा रहा था, मैंने उसके बाल पकड़ लिये और उसके मुँह को जोर जोर से चोदने लगा।
मुझे झड़ने में ज्यादा देर नहीं लगी, वो मेरा पूरा जूस पी गई। उसके बाद वो मेरे बगल में बैठ गई।
मैंने पूछा- आज तक तुम कितने लंडों का स्वाद चख चुकी हो?
वो बोली- मैंने गिना नहीं !
मैंने पूछा- और कबसे चुदवा रही हो?
“कई सालों से !”
“पहली बार कैसे हुआ था?”
वो बोली- ठीक है, जब तक तुम्हारा लंड दुबारा खड़ा होता है, तुम्हें पहली बार का किस्सा बताती हूँ।
वो मेरे बगल में बैठ गई और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे सहलाते हुए मुझे बताने लगी- य बात तब की है जब मैंने नया नया अपनी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा था, मेरी सहेलियाँ अपनी चुदाई के किस्से मुझे सुनाती थी, पर मैं तब तक कुँवारी ही थी। मेरे पापा के एक दोस्त हमारे साथ रहने हमारे घर आये। मैंने महसूस किया कि जबसे वो घर आये हैं बार बार मुझे देखते थे और मुझसे बात करते थे।
एक रात को जब सब सो गए तो वो मेरे कमरे में आये और बोले- मेरा आज अकेले मन नहीं लग रहा ! अगर तुम्हें कोई परेशानी नो हो तो तुम्हारे कमरे में सो जाऊँ?
मैंने कहा- ठीक है, जैसा आपका मन।
लाइट बंद होने के बाद थोड़ी देर में मेरी आँख लग गई। अचानक मैंने महसूस किया कि अंकल मेरी चादर में घुस गए हैं और मुझसे सट कर लेट गए हैं।
मैंने अंकल से दूसरी तरफ करवट ले ली। उन्होंने भी मेरी तरफ करवट ली और मुझसे फिर सट गए, उनका लंड मुझे अपनी गांड पर महसूस होने लगा। उन्होंने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और मेरे दाहिने मम्मे पर टिका दिया, फिर वो उसको धीरे धीरे मसलने लगे।
पहले तो मुझे थोड़ा डर लगा पर फिर मज़ा आने लगा। उन्होंने फिर अपना हाथ मेरी शर्ट के अन्दर डाल कर मेरी ब्रा के हुक खोल दिए और आगे हाथ ले जा कर मेरे मम्मे मसलने लगे।
मैंने करवट ली और सीधी हो गई। उन्होंने मेरी शर्ट और ब्रा ऊपर उठाई और मम्मे चूसने और चाटने लगे।
मैं अब गरम होने लगी थी, मेरी चूत गीली हो रही थी। अंकल ने एक हाथ मेरी पैंटी में डाला और मेरी चूत को छेड़ने लगे।
मैं काबू से बाहर हो रही थी, मेरे मुँह से आह….. आह….. की आवाजें निकल रही थी।
फिर अंकल ने नीचे जाकर मेरी पैंटी और पजामा दोनों एक साथ उतार दिए। उन्होंने मेरी टाँगे मोड़ कर फैला दी और चूत को पूरी तरह खोल दिया। मेरी उनचुदी बुर देखकर उनसे रहा न गया।
अंकल अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों उतार दिए और अपना लंड मेरी चूत के पास ले आये। उन्होंने मुझसे धीरे से पूछा- पहले किया है?
मैंने कहा- नहीं !
ठीक है ! मैं धीरे से करूंगा। शुरू में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़ा आएगा।
फिर उन्होंने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगाया और मेरी चूत से धीरे धीरे बाहर से ही रगड़ने लगे।
मैं धीरे धीरे पागल होती जा रही थी, फिर अचानक उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मेरी चीख निकल गई।
अंकल ने मेरे मुँह पर हाथ रखा फिर मुझे धीरे धीरे चोदने लगे, मेरा दर्द धीरे धीरे आनंद में बदलने लगा, उनके धक्के तेज होने शुरू हो गए थे और मैं पागल हुई जा रही थी। मेरी आह आह की आवाज़ से पूरा कमरा भर गया।
फिर अचानक अंकल झड़ गए। वो मेरे ऊपर से उतरे और कपड़े पहन कर अपने कमरे में चले गए।
मुझे पहली बार ज़िन्दगी में इतना मज़ा आया था ! मैं कभी भूल नहीं सकती !
उसकी कहानी सुनकर मेरा लंड फिर पूरी तरह तैयार था।
वो मुस्कुराकर बोली- अब मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी ! जो करना है कर लो !
मैंने कहा- अब मैं भी कहाँ रुकने वाला हूँ !
और मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया, उसके मम्मों को मैं जोर जोर से मसल रहा था।
वो सीट पर लेट गई और मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी टांगों को फैला दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो पागल होने लगी और चिल्लाने लगी।
मेरा लंड बेताब हो चला था।
उसने फिर उठकर दोनों सीटों के बीच में चादर बिछाई और लेट कर कहा- नीचे चुदाई करेंगे ! ज्यादा मज़ा आता है !
उसने लेट कर अपनी टांगों को फैला दिया। मैंने नीचे जाकर उसकी चूत में अपना आठ इंच का लम्बा मोटा लंड घुसेड़ दिया।
उसकी चूत मेरा पूरा लंड पी गई। फिर मैंने उसको पेलना शुरू किया। इतनी देर रुकने के बाद कसम से उसको चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
वो भी चिल्लाने लगी थी। ट्रेन अपनी पूरी स्पीड पकड़ चुकी थी और हम भी फुल स्पीड पर थे।
करीब आधे घंटे तक मैं उसको पेलता रहा उसके बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया। उस दौरान वो कम से कम तीन या चार बार झड़ी होगी।
फिर मैं अपने लंड को उसकी चादर से पोंछ कर सीट पर बैठ गया। थोड़ी देर में वो भी उठकर आ गई।
बाकी का सफ़र हमारा कैसा कटा यह मैं आपको फिर बताऊंगा। Sex Stories
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