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(Callgirl Ka Pahla Call) - Antarvasna (एक प्रतिष्ठित बिजनेस वुमन, जो आज 35 वर्ष की है, के मेल पर आधारित)

मैंने अभी अभी 18वें वर्ष में कदम रखा है। antarvasna इतने सालों से मैं घर में माँ को ही देखते आ रही हूँ। मेर एक छोटा भाई भी है तो अभी सिर्फ़ 10 वर्ष का ही है। मेरी माँ की उमर लगभग 40 वर्ष की है। यूँ तो दिखने में वो आकर्षक लगती हैं, पर शायद अधिक काम की वजह से वो थकी हुई रहती है। मेरे पापा का देहान्त हुए 6 साल हो चुके थे। तब से मम्मी ही घर को सम्भालती आ रही है।

मुझे पता था कि माँ एक काल गर्ल के रूप में काम करती थी। अधिकतर वो जीन्स और शर्ट में रहती थी। और अपने आप को एक कम उम्र की लड़की बताया करती थी। पर अब लोगों की नजर मुझ पर भी पड़ने लग गई थी। उभरती जवानी की खुशबू फ़ैलने लगी थी। मैं भी अपनी माँ की तरह सुन्दर थी और मेरे नाक नक्शे और कट्स भी अच्छे थे। मैं अब कॉलेज जाने लगी थी। मुझे सेक्स का ज्ञान तो पहले से ही था। अब मुझे सहेलियों के द्वारा चुदाने और गाण्ड मरवाने की कहानियाँ भी सुनने को मिल जाती थी। चुदाने के बाद लड़कियाँ आई-पिल्स को भी बहुत काम में लाती थी। मेरे दिल में भी कभी कभी सेक्स की भावना जागृत हो उठती थी। पर मुझे इससे डर भी लगता था कि लड़के ना जाने क्या करते होंगे।

एक बार माँ रात को घर नहीं आई तो मैं घबरा उठी। मैंने बहुत बार मोबाईल पर सम्पर्क करने की कोशिश की पर फोन का स्विच ऑफ़ था। माँ के कॉल गर्ल होने के कारण, मैंने डर के मारे आस पास किसी की मदद भी नहीं ली। मैं आस पास धीरे धीरे सभी से पूछती रही, पर निराशा ही हाथ लगी।

फिर एक दिन एक पुलिस वाला घर आया और मुझे थाने में एक लाश की पहचान करनी थी। होस्पिटल में शव-गृह में एक बर्फ़ में रखी लाश को मैं पहचान गई। वो मम्मी ही थी, उनकी हत्या हुई थी। मुझे ये तो पता नहीं था कि क्या करना चहिये था पर डर के मारे मैंने मना कर दिया कि इसे मैं नहीं पहचानती हूँ। पर घर आ कर मैं बहुत रोई।

दिन ऐसे ही गुजरते गये, इस घटना को एक साल बीत गया। मेरा छोटा भाई भी बीमार रहने लगा था। अब मुझे पैसों से परेशानी आने लगी थी। हमें कभी खाना नसीब होता था कभी तो भूखे ही रहना पड़ता था।
माँ के मरने का प्रमाण पत्र मेरे पास नहीं था तो उनका पैसा भी मेरे काम नहीं आ सका। गरीबी मेरे सिर पर आ चुकी थी, मैंने एक घर में बर्तन और झाड़ू पोंछा का काम शुरु कर दिया था।

इस दिनों कॉलेज में मेरी एक लड़के कुलदीप से पहचान हो गई थी। बातों बातों में मेरे मुख से निकल गया कि इस बार पढ़ाई जैसे तैसे करके परीक्षा दे दूंगी पर आगे से तो ईशवर ही मालिक है।
वो लड़का एक बिजनेस मेन का लड़का था, शायद वो मुझे चाहता था, उसने अपने पापा से कह कर मुझे अपनी फ़ैक्टरी में लगवा दिया था।

अब मेरी मुश्किलें थोड़ी कम हो गई थी। उसके पापा रमेश चंद की बुरी नजरें मुझ पर पड़ चुकी थी।

एक दिन उन्होंने मुझे अपने दफ़्तर में बुला कर कहा कि यदि तुम अधिक पैसा कमाना चाहती हो तो तुम अपनी माँ का धन्धा अपना लो, मालामाल हो जाओगी। मैं घबरा उठी कि ये सब कैसे जानते हैं। पर जल्दी ही पता चल गया कि वो कॉल-गर्ल के शौकीन थे। शायद मेरी माँ उनके पास जाया करती थी। उनके पास दूसरी लड़कियाँ भी आती थी जिनके साथ वो मौज मस्ती करते थे।

एक बार उसने मुझे एक रात के लिये 1000 रु ऑफ़र किये। मैं चुप ही रही। पर पैसों की तंगी और पढ़ाई को देखते हुए एक बार मैंने यह निश्चय कर लिया कि जब मेरी माँ यह काम कर सकती थी तो मैं क्यों नहीं कर सकती हूँ। एक दिन मैंने उन्हें हिम्मत करके हाँ कर दी।

उन्होंने मुझे नई जीन्स और टॉप दिलाया। कई तरह की खुशबू और तरह तरह के कॉस्मेटिक्स दिलाये और रात को बुला लिया। यह वो घर नहीं था जहाँ वो रहते थे, इसे वो फ़ार्म हाऊस कहते थे। पूरा खाली था सिर्फ़ एक बड़ी उमर की औरत वहाँ काम करती थी। मैंने जिंदगी में पहली बार इतना मंहगा और स्वादिष्ट खाना खाया था।

बहुत देर तक तो वो मेरे से बातें करते रहे, फिर अपना फ़ार्म हाऊस घुमाया और अन्त में मुझे अपना बेड रूम दिखाया जहा मुझे उसके साथ खेल खेलना था।
खूबसूरत सा बेड रूम, नरम गद्दे, एयर कन्डीशन, कमरे में शानदार खुशबू, मन को खुश करने को काफ़ी था। उसे देख कर मैं अपने आप को बहुत छोटा समझने लगी।

उन्होंने मुझे कहा कि मैं अब आराम करूं, उन्हें कुछ काम करना है।

मैं बिस्तर पर लेटी तो जैसे स्वर्ग में आ गई। बदन को सहलाता नर्म गद्दा, और भीनी भीनी खुशबू ने मुझे कब सुला दिया मुझे पता ही नहीं चला।
पता नहीं कब, रात को मेरे बदन के अन्दर उनका हाथ रेंगने लगा। नींद में मुझे सपना जैसा लगा। मेरे बोबे में मिठास सी भरने लगी। इतना प्यारा सा अह्सास हुआ कि मैंने आंखे बन्द ही रहने दी और आनन्द लेने लगी।

मेरा टॉप ऊँचा हो गया, मेरी छातियाँ नंगी हो गई थी। मेरे निप्पल को होंठों से दबा कर चूसने लगा। मेरे मुख से हाय निकल पड़ी। मैंने धीरे से अपनी आँखें खोली तो वो रमेश ही था। उसका नंगा बदन मेरे सामने था।
रमेश सेक्स के मामले में एक अनुभवी इन्सान था। उसने मुझे आहिस्ता से उत्तेजित किया और जब मैं वासना से भर गई तो उन्होंने मेरे कपड़े एक एक करके उतार दिये। मुझे उनका लण्ड बहुत प्यारा सा लगने लगा। मैं बार बार उसे पकड़ लेती थी और अपनी तरफ़ खींचती थी।

वो मेरे निप्पल को अपनी अंगुलियों से धीरे धीरे मसलने लगे। एक तीखा सा मजा आने लगा। मेरे उरोज को भी वो सहलाने और मसलने लगा। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकल पड़ी, चूत गीली हो उठी, धीरे धीरे चिकना रस छोड़ने लगी।
उसका बलिष्ठ शरीर मेरे जिस्म से रगड़ खा कर गुलाबी सा मीठा सा मजा दे रहा था। मेरे अंग अंग को मसल कर वो मस्त किये दे रहा था।

मैं चुदने के लिये बिल्कुल तैयार थी। अब महसूस हो रहा था कि वो मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दे और बस अब चोद दे। बिना इस बात को जाने कि ये मेरी पहली चुदाई होगी और मेरी झिल्ली फ़ट जायेगी। चूत में एक अन्दर वासना युक्त मिठास भरने लगी थी। मुझे पहली बार ऐसे अनोखे आनन्द का मजा आ रहा था। सोचा कि लोग इसे बुरा क्यो कहते हैं? जिस काम से इन्सान मस्त हो जाये, असीम सुख मिले, उससे परहेज़ क्यूँ?

तभी उसने अपना लण्ड मेरे मुख के पास लाकर होंठों से सटा दिया। यह मेरा नया अनुभव था।
‘यह क्या कर रहे हो?’ एकाएक मुझे घिन सी आई।
‘इसे किस कर लो!’ रमेश ने कहा।
मैंने मजबूरी में उसे किस कर लिया।
‘ऐसे नहीं, मुँह में ले कर चूसो!’ उसने फिर से अपना मोटा सा लण्ड मेरे होंठों से छुला दिया।

‘हटो, ये नहीं करूंगी।’ मैंने घिन से अपना चेहरा घुमा दिया।
वो थोड़ा सा निराश हो गया।

मैंने ऐसा कभी नहीं किया था सो मुझे इस काम से और भी घिन आने लगी थी। मेरा सोचना था कि भला पेशाब करने की जगह को कौन मुँह में ले सकता है?

उसने कुछ नहीं कहा पर उसका चेहरा अब मेरी चूत पर झुक गया था और मेरी टांगें चौड़ी करके मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया।
‘अरे ये क्या कर रहे हो,… ये तो पेशाब की जगह है छी:, हटो, जाने क्या कर रहे हो?’ मुझे उसकी ये हरकत बड़ी अजीब सी और घिनोनी लग रही थी कि ये पेशाब करने की जगह को ही क्यों मुख से लगा रहा है। बस लण्ड घुसेड़ना हो तो घुसेड़ दो, दोनों ही पेशाब करने जगह ही तो हैं…

‘अब तुम मुझे कुछ करने दोगी या नहीं…!!’ वो कुछ नाराज़ से लगे।
‘तो करो ना, चालू करो ना वो, यहाँ वहाँ गन्दी जगह मुँह मत लगाओ।’ मैंने थोड़ा झिझकते हुए कहा।
रमेश मुस्करा उठा, और मेरे ऊपर चढ़ गया।

‘क्या पहला मौका है?’ रमेश मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया, उसका लण्ड तन्ना रहा था.
मुझे भी चुदाई का आनन्द पहली बार मिलने वाला था। मेरी चूत की दरारों में उसने अपना लण्ड ऊपर नीचे घिसा। मेरा दाना फ़ड़क उठा, एक मीठी सी टीस उठी।
‘हाँ, यह पहला मौका है, पर जल्दी करो ना, घुसा डालो ना…!’
‘मजा आ रहा है ना?’
‘जी हाँ, बहुत मजा आ रहा है!’ मैंने हाँ में सर हिला दिया।

मुझे चुदाने के लिये उन्होंने एक हज़ार रुपये भी दिये थे, और स्वर्ग सा आनन्द भी मिल रहा था, सो मैंने अपनी टांगें ऊपर कर ली और अपनी चूत खोल दी।
‘तुम्हें डर नहीं लगता है ऐसे?’ मेरे होंठों को चूमते हुए बोले।

‘डर कैसा, आप तो मेरे दोस्त के पापा हो ना, आपके पास तो मैं बहुत सुरक्षित हूँ।’ मैंने भोलेपन से कहा।
‘तुम्हारा कुंवारापन चला जायेगा, फिर मैं जो करने वाला हूँ उससे सुरक्षित कैसे रहोगी?’
‘मैं पैसे के लिये यहाँ वहाँ भीख मांगती हूँ, मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ेगा, अब मैं फ़ीस दे सकूंगी और परीक्षा दे सकूंगी, मेरी माँ नहीं है ना अब… घर में छोटा भाई भी है, भूख से बीमार रहता है। मुझे तो ये सब करना ही पड़ेगा ना। मेरी माँ भी यही करती थी ना।’

रमेश ने मुझे एक गहरी नजर से देखा, उनके चेहरे पर शर्मिन्दगी सी दिखी। उनका फूला हुआ लण्ड सिकुड़ता सा लगा। मैंने अपनी चूत का जोर उनके लण्ड पर लगाया, पर शायद वो मुरझा कर लटक गया था। मुझे लगा शायद ये कर नहीं पाते होंगे। पर ऐसा नहीं था।

‘तुम मेरे पास कैसे सुरक्षित हो, मुझे समझ में नहीं आया…!’ रमेश कुछ असमंजस में दिखा।
‘संदीप कहता है, आप बहुत अच्छे है, मुझे पता है आप ये सब करने के बाद मुझे पैसा देंगे।’ मैंने अपनी जरूरतें उसे बताई।
‘हाँ वो तो दूंगा ही!’ वो हैरान होता जा रहा था।

‘बस, तो मेरी कॉलेज की फ़ीस हो जायेगी, मेरे भाई को भी आगे पढ़ाऊँगी.’ मैंने सहजता से कहा।

वो बिस्तर छोड़ कर उठ खड़े हुए, कपड़े पहनते हुए बोले ‘उठो, और कपड़े पहन लो…! बस बहुत मजा कर लिया!’
मैं घबरा गई, और उनके पांव पकड़ लिये- नहीं नहीं जी, ये क्या… लाओ मैं चूस लेती हूँ, आप चाहे जो करो… पर प्लीज जाओ मत!’
‘दुनिया में यही सब कुछ नहीं है, बस अब नहीं… तुम इस काम के लिये फ़िट नहीं हो!’

मुझे अपने 1000 रुपए जाते हुए लगे। मेरी नजरों के सामने वही भूख और मजबूरियाँ नजर आने लगी। मुझे फिर वही अन्धेरे डराने लगे। मन में सोचा अरे मैंने यह क्या कर दिया… अब क्या होगा। इतना क्यूँ बोला मैंने… मैं रूआंसी हो उठी।
रमेश ने अपने पास बुलाया और मेरा टॉप मुझे पहना दिया, मेरी जीन्स उठा कर कहा- चलो पहनो इसे!

चेहरा उदास हो गया, जैसे मेरी जान निकल गई हो, मैंने जीन्स पहन ली और फ़फ़क के रो पड़ी ‘अब मैं परीक्षा नहीं दे पाऊँगी…’ रोते हुये हिचकी बंध गई।

रमेश ने मुझे गले से लगा लिया। उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। शायद वो खुद पर शर्मिन्दा हो रहे थे।
‘मुझे माफ़ कर दो… इस उमर में भी मैं जाने क्या करता रहा हूँ, तुमने तो मेरी आंखें खोल दी… क्या मैं तुम्हें कॉल गर्ल बनाने जा रहा था।’ रमेश के चेहरे पर से वासना गायब हो चुकी थी। हाँ, मुख पर एक उजाला सा जरूर नजर आ रहा था। मैं उन्हें देखती रह गई।

उनकी छाती पर सर रखे मैंने विनती की- मुझे आप फ़ीस जमा कराने लायक पैसे दे दें तो मेरी तन्ख्वाह में से काट लेना, प्लीज… नहीं तो हमें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जायेगा।

‘मुझे माफ़ कर दो, अपने सीने में ये राज दबा लो कि मैंने तुम्हारे साथ ऐसा कुछ किया था, और मुझे नहीं पता कि मेरा तुम से क्या रिश्ता रहेगा, पर तुम मेरी दोस्त बन कर रहो, चाहे बेटी बन कर, चाहे जो रिश्ता बना लो, पर अब से तुम मेरे साथ ही रहोगी, मेरी फ़ैक्टरी में ऑफ़िस का सारा काम तुम ही सम्हालना… फिर से ध्यान रखना ये बात अपने दिल में ही रखना!’

‘जी… पर आप तो… आप अब मेरे साथ कुछ भी नहीं करेंगे… पर मुझे तो कुछ करने की लग रही है!’

‘अब चुप भी हो जाओ, ये उमर ही ऐसी होती है, शादी के बाद तो रोज ही करना… मुझे अब ये नहीं करना है बस!’
‘अंकल जी… मुझे नहीं पता है ये सब… पर मैं क्या कहूँ…’
‘कुछ नहीं कहो बस, मुझे मजबूरी, मासूमियत का फ़ायदा नहीं उठाना…!’ कहते हुए वो दूसरे कमरे में चले गये।

मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। ये सब कैसे हो गया, ये मेरे पर अचानक इतने मेहरबान कैसे हो गये। मेरी मजबूरी और सच्चाई जान कर क्या उनका दिल पिघल गया था। क्या सच में मेरे अच्छे दिन आने वाले थे।

मैं धीरे धीरे उसके कमरे में आ गई, वो खिड़की पर खड़े हुए थे, मैंने उनकी पीठ पर हाथ लगाया, जैसे उन्हें झटका लगा। तुरन्त उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा। उनकी आंखों के आंसू छिप नहीं सके। मैंने धीरे से अपना सिर उनकी छाती पर रख दिया।

‘अंकल मुझे माफ़ कर देना, पैसों के लालच में मैं बहक गई थी, आप नहीं होते तो जाने क्या हो जाता, मेरी तो इज़्ज़त ही लुट जाती…! फिर मेरी शादी भी नहीं होती ना!’
रमेश ने मेरे सर में चूम लिया और अपनी बांहों में भर लिया।

मुझे भी शायद इसी प्यार की तलाश थी जिसे मैं वासना में खोज रही थी। मेरे दिल में ठण्डक आने लगी। सुकून सा आ गया। ऐसा प्यार मेरी आत्मा तक को छू रहा था।

रमेश ने मुझे देखा फिर अपनी पत्नी की तस्वीर को देखा और सर झुका कर मुझसे मुस्करा कर कहा- गुड नाईट, अब सो जाओ… मुझे अब इनसे भी माफ़ी मांगनी है।
कह कर उन्होंने अपनी पत्नी की तस्वीर की ओर देखा, फिर अपने बिस्तर की शरण ली और मुँह तक चादर ओढ़ ली।

मैंने कमरे की बत्ती बुझा दी और बाहर जाने लगी। फिर जाने क्या ख्याल आया, मेरे मन में उनके लिये प्यार उमड़ पड़ा। मैं भाग कर गई और उनकी चादर के अन्दर घुस गई और उनसे लिपट गई। मैं भावना में बह गई थी। उनके मुख पर चुम्बनों की बौछार कर दी और रो पड़ी। मुझे प्यार से उन्होंने एक तरफ़ लेटाया और मैं उनसे लिपट कर सो गई। मेरे प्यासे दिल को माँ-बाप जैसा प्यार मिल गया था। शायद बहुत दिनों बाद इतनी गहरी नींद, सुकून भरी नींद, प्यार भरी नींद आई थी।

सुबह उठी तो रमेश अंकल ने फ़ार्म हाउस की चाबी मुझे दे दी और अपने घर चले गये। मुझे वो सुबह एक नई सुबह लगी, शायद एक नई जिन्दगी की शुरुआत थी… तभी मुझे अपना भाई याद आया कि वो मेरी राह ताक रहा होगा और मैं अपने घर की ओर जल्दी जल्दी चल पड़ी! Antarvasna

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बात उन दिनों की है जब मैं दिल्ली में एक कंपनी Sex Stories में नौकरी करता था. हम लोगों ने एक घर किराये पर ले रखा था. घर में तीन कमरे थे. पहला कमरा एक बड़ा ड्राइंग रूम था और बाकी दो कमरे बेडरूम थे. मैं आखरी वाले कमरे में रहता था बिल्कुल अकेला.

हमने एक काम वाली रखी जो सिर्फ़ १९ साल की थी. देखने में तो वो ठीक थी, लेकिंग उसके मम्मे बहुत ही बड़े थे. उसका नाम मंजू था. मंजू आगरा की रहने वाली थी लेकिन उन दिनों वो अपने माँ बाप के पास रहती थी क्योंकि उसके पति के साथ झगडा हो गया था. उन दिनों मेरा लण्ड बहुत ही ज़्यादा परेशान करता था मुझे.

मंजू रोज़ सुबह ७ बजे आती थी और पहले झाडू पोचा करती थी और फिर वोह हम लोगो का खाना बनाती थी. मेरे मन में वो पहले दिन से ही छा गई थी, और मैं उसकी चूत मारने की सोचता रहता था.

एक रोज़ वोह सुबह सुबह जब मेरे कमरे में झाडू कर रही थी तो मैंने उसे सर दबाने के लिए कहा, उसने आने कोमल हाथों से मेरा सर दबाना शुरू कर दिया. फिर तो यह रोज़ के किस्सा हो गया. धीरे धीरे मैंने उसके हाथ पकड़ना शुरू कर दिया और जब उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई. फिर एक सुबह मैंने अपना सर दबवाते हुए उसके मम्मे पकड़ लिए और वोह मुझसे अपना हाथ छुड़वा कर चली गई. मैंने सोचा कोई बात नहीं तुझे तो मैं अच्छे से चोदूंगा.

एक शाम को मेरे दोस्त ने कहा कि उसको १० दिन के लिए जयपुर जाना पड़ेगा ऑफिस के काम से. मेरी तो जैसे लॉटरी ही निकल गई.

अब बस मैं अकेला ही बचा था उस फ्लैट में. अगली सुबह जब कामवाली ने दरवाज़े की घंटी बजाई तो मैंने दरवाज़ा खोला और वो मुझे देख कर चौंक गई.
मैंने कहा- मेरा दोस्त जयपुर गया है, १० दिन बाद लौटेगा.
मंजू ने शायद यह भांप लिया था कि अब तो उसको चुदना ही पड़ेगा. खैर मैंने उसे कहा कि तुम आज खाना सिर्फ़ मेरे लिए और अपने लिए ही बनाना. फिर उसने झाडू लगना शुरू किया तो मैं वापस अपने बिस्तर पर आ कर लेट गया.

जब वोह मेरे कमरे में आई तो मैंने उसे कहा- मंजू, आज शरीर में बहुत दर्द हो रहा है, लगता है आज छुट्टी लेनी पड़ेगी।
उसने कहा- मैं आपको दबा देती हूँ.

फिर मंजू ने मुझे धीरे धीरे दबाना शुरू किया. मुझे तो लग रहा था जैसे मैं जन्नत में हूँ. मैंने उससे पूछा- मंजू, तुम अपने घरवाले के पास क्यों नहीं जाती हो?
तो उसने जवाब दिया- वो मुझे छोड़ कर चला गया था एक लड़की पैदा होने के बाद, अब आता है माफ़ी मांगने के लिए लेकिन मैं उस पर कैसे विश्वास कर लूँ?

फिर मुझे समझ में आ गया कि उसकी चूत मारने में ज़्यादा टाइम नहीं लगेगा. मैंने धीरे धीरे उसे कहा की मेरी पीठ को भी दबाओ. उसने मेरा कहना माना और वो मेरे बिस्तर पर बैठ गई. मैंने उसकी जांघ पर हाथ फेरना शुरू किया और उसने ज़्यादा आना कानी नहीं की. फिर मैंने उसकी चुचियों को उसके कमीज़ के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया और वोह कराहने लगी. मैंने ज़्यादा टाइम बर्बाद नही करते हुए उसके बिस्तर पर लेटा लिया और उसका कमीज़ निकल दिया. फिर मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रखे और एक लम्बी सी किस दे दी. फिर मैंने उसकी ब्रा उतारी और मैंने उसके मम्मे चाटना शुरू कर दिया. वो तो जैसे सातवें आसमान पर थी. मैंने उसके मम्मों को दबाना भी जारी रखा. उसने कहा अब बस भी करो, अगर मैं जोश में आ गई तो गड़बड़ हो जायेगी.

मैंने उसकी सलवार उतारी और उसकी जाँघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. धीरे धीरे मैंने उसके जाँघों पर अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. वोह ” ऊउह्ह्ह आआ आआःः ऊऊऊईई कर रही थी, और मैं रुकने का नाम भी नहीं ले रहा था.

फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी टांगें फ़ैला कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. उसकी चूत में से एक नमकीन सा स्वाद आ रहा था. उसकी गर्मी बढती जा रही थी उसने मेरा लण्ड ज़ोर ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया. मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और उसके मुँह में अपना लण्ड रख दिया. उसने मेरे लण्ड को लोलीपोप के जैसे चूसना शुरू कर दिया.

मैंने फिर उसकी चूत को ज़ोर ज़ोर से चाटना शुरू किया और वोह भी मेरे लण्ड को चूस रही थी।

फिर मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकाला और उसकी चूत पर रख दिया और एक ज़ोर से धक्का मारा. मेरा ६.५” का लण्ड उसकी चूत में चला गया. उसकी तो जैसे जान जी निकल गई और बोली ” ज़रा धीरे धीरे से करो ना, बहुत दर्द हो रहा है, आपका लण्ड तो बहुत ही मोटा, और तगड़ा है, मुझे बहुत दर्द हो रहा है”

मैंने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और पूछा,” अब ठीक है क्या?”
वोह बोली,” हाँ अब ठीक है”

फिर मैंने धीरे से एक और धक्का मारा और इस बार मेरा सारा का सारा लण्ड उसकी चूत में समां गया.

“ऊऊओह्ह्ह अहह्ह्छ साहब बहुत अच्छा लग रहा है! चोद दो मुझे! आज से मैं आपकी हो गई हूँ! आह्ह्ह् उफ्फ्फ उईईई आआआ! बहुत मज़ा आ रहा है!”

मैं उसकी चुदाई ज़ोर ज़ोर से करने लगा और साथ में उसके मम्मों को चूस रहा था. मुझे बहुत दिनों के बाद कोई अच्छी चूत मिली थी इसलिए मैं अपनी सारी भड़ास निकलना चाहता था. मैंने उसके मम्मे चूसने के साथ साथ दबाना भी चालू रखा था. उसकी सिसकियों से कमरे का माहौल काफ़ी गरम हो रहा था.

ऊऊऊ आआआ अह्ह् ह्ह्ह्हछ उईईई! साहब और ज़ोर से करो ना! मुझे और प्यार करो! मेरा पानी निकाल दो! आज बहुत दिनों के बाद एक असली मर्द से पला पड़ा है! आआआ आआह्ह्ह ऊऊउह्ह्ह्ह ह्ह आआआ आआआ! मैं आआअ रहीईई हून्न्न साहब!

मैंने भी ज़ोर ज़ोर से उसको पेलना शुरू रखा और थोड़ी देर के बाद मैं भी आ गया उसकी चूत में सारा माल निकाल दिया मैंने अपना.

उसने मेरा लंड अपने मुँह से साफ़ किया और फिर मेरी बांहों में आ कर लेट गई. Sex Stories

प्रथम भाग से आगे … Hindi Porn Stories

पारो: अभी करो ना। देखो Hindi Porn Stories तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा है।

मैं: हाँ, लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है, मिटने तक राह देखेंगे, वर्ना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा।

मेरा लंड फिर से तन गया था। पारो ने उसे मुट्ठी में थाम लिया और बोली: होने दो जो होवे सो। मुझे ये चाहिए।

मैं ना कैसे कहूँ भला? मुझे भी चोदना था। मैंने किताब निकाली। इनमें एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें आदमी नीचे लेटा था और औरत उसकी जाँघों पर बैठी थी। मैंने ये तस्वीर दिखाकर कहा: तू ऐसा बैठ सकोगी?

पारो: हाँ, लेकिन इसमें आदमी का वो कहाँ है?

मैं: वो औरत की चूत में पूरा घुसा है, इसलिए दिखाई नहीं देता। आ जा।

मैं चित्त लेट गया। अपने पाँव चौड़े कर वो मेरी जाँघों पर बैठ गई, मैंने लंड सीधा पकड़ रखा था। उसने चूत लंड पर टिकाई। आगे सिखाने की ज़रूरत नहीं थी. कूल्हे गिरा उसने लंड चूत में ले लिया। लंड और चूत दोनों गीले थे इसलिए कोई दिक्कत ना हुई। पूरा लंड घुस जाने पर वो रुकी। लंड ने ठुमका लगाया। उसने चूत सिकोड़ी। नितम्ब उठा गिरा कर वो चोदने लगी।

चौड़े किए गए भोस के होंठ और बीच में तने भग्नों को मैं देख सकता था। मैंने अँगूठा लगाकर उसके भग्न सहलाए। आठ-दस धक्के में वो थक गई और मुझ पर ढल पड़ी।

लंड को चूत में दबाए रख मैंने उसे बाँहों में भर लिया और पलट कर ऊपर आ गया। तुरन्त उसने जाँघें पसारीं और ऊपर उठा लीं। दो-तीन धक्के मार कर मैंने पूछा: दर्द होता है?

पारो ने ना कही। मैं धीरे-गहरे धक्के से चोदने लगा। पूरा लंड निकालता था और घकच्च से डाल देता था। पारो अपने नितम्ब हिलाने लगी और मुँह से सी… सी… सी… करने लगी। योनि में फटाके होने लगे। मैंने धक्के की रफ्तार बढ़ाई।

वो बोली: उसस्सससस्सस… उस्सस्सससस मुझे कुछ हो रहा है रोहित, ज़ोर से चोदो मुझे।

मैं घचा छच्च्चच, घचा घच्चचचच धक्के से उसे चोदने लगा।

अचानक वह झड़ पड़ी। पर मैं रुका नहीं, धक्के देता चला। वो बेहोश सी हो गई। झड़ना शान्त होने पर उसकी चूत की पकड़ कम हुई। मैंने अब धीरे से पाँच-सात गहरे धक्के लगाए और अन्त मे लंड को चूत की गहराई में पेल कर ज़ोर से झड़ा।

एक-दूसरे से लिपट कर हम दोनों थोड़ी देर तक पड़े रहे। इतने में दीदी और जीजू आ गए। फटाफट हमने ताश की बाज़ी टेबल पर लगा दी। जब जीजू ने पूछा कि हमने क्या किया तो पारो ने फिर मुँह बिचकाया- हुँह… कहते हुए।

मैंने कहा: हम ताश खेल रहे थे, पारो एक बार भी नहीं जीती।

रात का खाना खाकर सब सो गए। आज पहली बार पारुल अपने भैया से अलग कमरे में सोई। मैं बिस्तर पर पड़ा, लेकिन नींद नहीं आई। सोचने लगा, क्या मैंने पारो को चोदा था, या कोई सपना था? उसकी चूत याद आते ही नर्म लौड़ा उठने लगता था और उसमें हल्का सा मीठा दर्द होता था। दर्द से फिर लौड़ा नर्म पड़ जाता था। इससे तसल्ली हुई कि वाक़ई मैंने पारो को चोदा ही था।

और दीदी और जीजू सारा दिन कहाँ गए थे? वापस आने पर दीदी इतनी खुश क्यूँ दिखाई दे रही थी। उसके चेहरे पर निखार क्यूँ आ गया था? जीजू भी कुछ गुनगुना रहे थे। और आज की रात जब पारो बीच में नहीं है तो जीजू दीदी को चोदे बिना छोड़ेंगे नहीं। मुझे पारो की भोस याद आ गई। दीदी की ऐसी ही थी ना? जीजू का लंड कैसा होगा? पारो को चोदने का मौक़ा कब मिलेगा? विचारों की धारा के साथ मेरा हाथ भी लंड पर चलता रहा। दीदी की और पारो की चुदाई सोचते-सोचते मैं झड़ पड़ा। नींद कब आई उसका पता न चला।

दूसरे दिन जीजू को तीन दिन वास्ते बाहर गाँव जाना हुआ। मैंने दीदी से पूछा कि वो लोग कहाँ गए थे। मुस्कुराती हुई वो बोली: रोहित, ये सब तेरी वज़ह से हो सका। तू था तो पारो ने हमें अकेले जाने दिया। हम गए थे अहमदाबाद। एक अच्छी सी होटल में। सारा दिन खाया-पिया, इधर-उधर घूमे और…

मैं: … और जो भी किया, चुदाई की या नहीं?

जवाब में उसने चोली नीची करके आधे स्तन दिखाए। चोट लगी हो, वैसे धब्बे पड़े हुए थे। जीजू ने बेरहमी से स्तन मसल डाले थे।

मैं: कितनी बार चोदा जीजू ने?

दीदी मुझ से बड़ी थी फिर भी शरमाई और बोली: तुझे क्या? तूने क्या किया सारा दिन?

मैंने सारी बात बता दी। पारो को मैंने चोदा, यह जानकर वह इतनी खुश हुई कि मुझसे लिपट गई और गालों पर चूमने लगी।

मैंने पूछा- क्यूँ। वो पारो को अपनी चुदाई देखने ना कहती थी।

वो बोली: तेरे जीजू अपनी बहन से शरमाते हैं। कहते हैं कि वो देखेगी तो उनका वो खड़ा नहीं हो पाएगा।

मुझे इस उलझन का रास्ता निकालना था। सबसे पहले मैंने जाकर दीदी का बेडरूम देखा। कमरा बड़ा था। एक ओर पलंग था, दूसरी ओर चौड़ी सीट थी। पलंग के सामने वाली दीवार में एक बन्द दरवाड़ा था। दरवाड़े पर एक बड़ा आईना लगा हुआ था। आईने की वज़ह साफ थी। सीट के सामने बड़ी स्क्रीन वाली टीवी थी, वीडियो-प्लेयर और सीडी-प्लेयर के साथ। एक कोने में बाथरूम का दरवाज़ा था।

मैंने मकान की टूर लगाई बेडरूम की बगल में एक छोटी सी कोठरी पाई। कोठरी में फालतू सामान भरा था। एक दूसरा दरवाज़ा बन्द था जो मेरे ख़्याल से बेडरूम में खुलता था। मैंने चाकू निकाला और बन्द दरवाज़े की पैनल में एक सुराख़ बना दिया। दरवाज़ा पुराना होने से सुराख़ बनाने में देर ना लगी। मैंने झाँका तो दीदी का बेडरूम साफ़ दिखाई दिया। मेरा काम हो गया।

मैं अब जीजू के लौट कर आने की राह देखने लगा। इसी बीच मैंने वो किताब ठीक से पढ़ ली। काफ़ी जानकारी मिली। कच्ची कुँवारी को चोदने के लिए कैसे गरम किया जाय, वहाँ से लेकर तीन बच्चों की शादीशुदा माँ कैसे झड़वाया जाए, वो सब तस्वीरों के साथ उसमें लिखा था। रोज़ किताब पढ़कर मैं हस्तमैथुन करता रहा, क्यूँकि पारो मुझसे दूर रहती थी।

एक दिन पारो को एकांत पा कर किस करके मैंने कहा: चल कुछ दिखाऊँ। हाथ पकड़ कर मैं उसे कोठरी में ले गया और सुराख़ दिखाई। उसने आँख लगाकर देखा तो दंग रह गई।

मैंने कहा: जीजू आएँगे, उसी दिन दीदी को चोदेंगे। तू रात को यहाँ आ जाना, चुदाई देखने मिलेगी।

मैं दीदी से कहूँगा कि वो रोशनी बन्द ना करे।

मेरे गाल पर चिकोटी काट कर वो बोली: बड़ा शैतान है तू।

मैं उसे चूमने गया, तब ठेंगा दिखा कर वह भाग गई।

जीजू शुक्रवार को आए। दूसरे दिन शनिवार था। जीजू सिनेमा के अन्तिम शो की टिकटें ले आए। दीदी ने मुझे पारो के साथ बिठाने का प्रयत्न लेकिन वो नहीं मानी। मुझे जीजू के साथ बैठना पड़ा।

फिल्म बहुत सेक्सी थी। जीजू एक हाथ से दीदी की जाँघ सहलाते रहे। दीदी का हाथ जीजू का लंड टटोल रहा था। शो छूटने के बाद जब घर वापस आए, तब रात के बारह बजे थे।

सिनेमा देखने से मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया था। मुझे ये भी पता था कि आज की रात जीजू दीदी को चोदे बिना नहीं छोड़ने वाले थे। मैं सोचने लगा कि वो कैसे चोदेंगे, और मुझसे रहा नहीं गया। मैंने किताब निकाली और एक अच्छी सी तस्वीर देखते हुए मैंने मुठ मार ली।

बाद में मैं दबे पाँव कोठरी में पहुँचा। सुराख़ में से देखा तो बेडरूम में रोशनी जल रही थी। जीजू नंगे बदन पलंग पर बैठे थे और लौड़ा सहला रहे थे। इतने में बाथरूम से दीदी निकली। उसने ब्रा और पैन्टी पहनी हुई थी। आकर वो सीधी जीजू की गोद में बैठ गी, उनकी ओर पीठ करके। जीजू ने आईने के ओर ईशारा करके कान में कुछ कहा। दीदी ने शरमा कर अपनी आँखों पर हाथ रख दिए जैसे ही दीदी के हाथ ऊपर उठे, जीजू ने ब्रा में क़ैद उसके स्तनों को थाम लिया। दीद उनके ऊपर ढल पड़ी और ऊँगलियों के बीच से आईने में अपना प्रतिबिम्ब देखने लगी।

जीजू ने हुक खोल कर ब्रा निकाल दी और दीदी के नंगे स्तनों को सहलाने लगे। दीदी के स्तन इतने बड़े होंगे ये मैंने सोचा ना था। जीजू की हथेलियों में समाते ना थे। स्तन के मध्य में बादामी रंग का गहरा घेरा और उसके बीचों-बीच घुण्डी थी। आईने में देखते हुए जीजू घुण्डियों को मसल रहे थे। दीदी ने सिर घुमा कर जीजू के मुँह से मूँह चिपका दिया। जीजू का एक हाथ दीदी के पेट पर उतर आया। दीदी ने ख़ुद की जाँघें उठाईं और चौड़ी कर दीं।

इतने में पारो आ गई। मैंने इशारे से कहा कि सुराख़ में देख। वो आगे आ गई और आँख लगाकर देखने लगी। मैं उसके पीछ सटकर खड़ा हो गया। मैंने मेरा सिर उसके कंधे पर रख दिया। धीरे से मैंने – दीदी की भोस दिख रही है? तेरे जैसी है ना? आकार में ज़रा बड़ी होगी। मेरे हाथ पारो की कमर पर थे। हौले-हौले मेरा हाथ पेट पर पहुँचा और वहाँ से स्तन पर।

पारो ने नाईटी पहनी थी। अन्दर ब्रा नहीं थी। बड़ी मौसम्बी के आकार के स्तन मेरी हथेलियों में समा गए। दबाने से दबे नहीं, ऐसे कड़े स्तन थे। नाईटी के आर-पार कड़ी घुण्डियाँ मेरी हथेलियों में चुभ रहीं थीं। वो दीदी की चुदाई देखती रही और मैं स्तन से खेलता रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे हटाया और नज़र लगाई।

दीदी अब पलंग पर चित पड़ी थी। ऊपर उठाई हुई और चौड़ी की हुई उसकी जाँघों के बीच जीजू धक्का दे रहे थे। कुल्हे उछाल कर दीदी जवाब दे रही थी। आईने में देखने के लिए जीजू ने मुद्रा बदली। अब दीदी का सिर आईने की ओर हुआ। जीजू फिर से जाँघों के बीच गए और दीदी को चोदने लगे। इस बार चूत में आता-जाता उनका लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। मैंने फिर पारो को देखने दिया।

मेरा लंड कब का तन गया था और पारो के कुल्हों के बीच दबा जा रहा था। पेट पर से मेरा हाथ उसके पाजामे के अन्दर घुसा। पारो नें मेरी कलाई पकड़ कर कहा: यहाँ नहीं, तेरे कमरे में जाकर करेंगे। मैंने हाथ निकाल लिया लेकिन पाजामे के ऊपर से भोस सहलाने लगा। पारो खेल देखती हुई नितम्ब हिलाने लगी। थोड़ी देर बाद सुराख़ से हटकर बोली: खेल खत्म, ओह रोहित, मुझे कुछ हो रहा है। मुझे से खड़ा नहीं जा रहा।

मैं पारो को वहीं की वहीं चोद सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मुझे अबकी बार पारो को आराम से चोदना था। थोड़ी देर पहले ही मैंने मूठ मार ली थी इसलिए मैं अपने आप पर नियंत्रण रख सका।

मैंने उसकी कमर पकड़ कर सहारा दिया। वो मुझ पर ढल पड़ी। मैंने उसे बाँहों में उठा लिया और मेरे कमरे में ले गया। पलंग पर बैठ मैंने उसे गोद में ले लिया।

मैंने कहा: देखी भैया-भाभी की चुदाई?

उसकी आँखें बन्द थीं। अपनी बाँहें मेरे गले में डालकर वो बोली: भैया का वो कितना बड़ा है! फिर भी पूरा भाभी की चूत में घुस जाता था ना?

मैंने कहा: तेरी चूत में भी ऐसे ही गया था मेरा लंड, याद है?

पारो: क्यों नहीं? इतना दर्द जो हुआ था।

मैं: अबकी बार दर्द नहीं होगा। चोदने देगी ना मुझे?

अपना चेहरा मेरी ओर घुमा कर वो बोली: शैतान, ये भी कोई पूछने की बात है?

पारो का कोमल चेहरा पकड़ कर मैंने होंठ से होंठ छू लिए, इसने चूमने दिया। मैंने अब होंठ से होंठ दबा दिए। उसके कोमल पतले होंठ बहुत मीठे लगते थे। थोड़ी देर कुछ किए बिना होंठ चिपकाए रखे। बाद में जीभ निकाल कर उसके होंठ चाटे और चूसे। मैंने कहा: ज़रा मुँह खोल।

डरते-डरते उसने मुँह खोला। मैंने उसके होंठ चाटे और जीभ उसके मुँह में डाली। तुरन्त उसने चूमना छोड़ दिया और बोली: छिः छिः ऐसा गन्द क्यूँ कर रहे हो?

मैं: इसे फ्रेंच किस कहते हैं। इसमें कुछ गन्द नहीं है। ज़रा सब्र कर और देख, मज़ा आएगा। खोल तो मुँह।

अबकी बार उसने मुँह खोला, तब मैंने जीभ लंड की तरह कड़ी कर ली और उसके मुँह में डाली। अपने होंठों से उसने पकड़ ली। अन्दर-बाहर करके जीभ से मैंने उसका मुँह चोदा। मुँह में जाकर मेरी जीभ चारों ओर घूम गई। तब मैंने मेरी जीभ वापस ली। फिर उसने ठीक इसी तरह अपनी जीभ से मेरा मुँह चोदा। मेरा लंड फिर तन गया, उसकी साँसें तेज़ चलने लगी।

चूमते हुए मेरे हाथ स्तन पर उतर आए। पाजामा तो हमने उतार दिया था। कमीज़ बाकी थी। देर किए बिना मैंने फटाफट हुकों को खोलकर कमीज़ उतार फेंकी। उसने मेरी कमीज़ के बटन खोल डाले। मैंने मेरी कमीज़ उतार दी। अब हम दोनों नंगे हो गए। शरम से उसने एक हाथ से चेहरा ढँक लिया, दूसरा चूत पर रख लिया। स्तन खुले हुए थे। मेरे हाथों ने नंगे स्तन थाम लिए।

क्या स्तन पाए थे उसने। बड़े आकार की मौसम्बी जैसे गोल-गोल। पारो के कुँवारे स्तन कड़े थे। मुलायम चिकनी त्वचा के नीचे खून की नीली नसें दिखाई दे रहीं थीं। बिल्कुल मध्य में एक इंच का गहरा घेरा था जिसके बीच छोटी सी कोमल घुण्डी थी। घेरा और घुण्डी बादामी रंग के थे और ज़रा सा उभर आए थे। उसका स्तन मेरी हथेली में ऐसे बैठ गया जैसे कि मेरे लिए ही बनाया हो।

स्तन को छूते ही दबोच लेने का दिल हुआ। लेकिन वो किताब की पढ़ाई याद आई। ऊँगलियों की नोक से पहले स्तनों को सहलाया। बाहरी भाग से शुरु करके स्तन के मध्य में लगी हुई घुण्डियों की ओर ऊँगलियाँ चलाईं। उसके बदन पर रोएँ खड़े हो गए। हौले से मैंने स्तन हथेली में भर लिया और दबाया। रुई के गोले जैसा नर्म होने पर भी उसके स्तन दबाए नहीं जा रहे थे, उत्तेजना से बहुत ही कड़े हो गए थे। छोटी सी घुण्डी सिर उठाए खड़ी थी। च्यूँटी में लेकर मैंने दोनों घुण्डियों को मसल दिया। पारों के मुँह से लम्बी आह निकल पड़ी।

मैंने उसे लिटा दिया। मैं बगल में लेट गया। वो मुझसे लिपट गई। मैंने मेरे होंठ घुण्डी से चिपका दिए। उसकी उँगलियाँ मेरे बालों में घूमने लगीं। एक-एक कर मैंने दोनों घुण्डियाँ काफी देर तक चूसीं। पारे ने मेरी घुण्डियाँ तलाश निकाली। जब मैंने उसकी घुण्डियाँ छोड़ दीं, तब उसने मेरी घुण्डियों को होंठों के बीच लेकर चूसीं। घुण्डियों से निकला करंट लंड तक पहुँच गया। लंड अधिक अकड़ कर लार बहाने लगा।

मैंने उसे चित्त लिटा दिया। हमारे मुँह फिर फ्रेंच किस में जुट गए। स्तन छोड़ करक मेरा हाथ उसके सपाट पेट पर उतर आया और भोस की ओर चला। जब मैंने नाभि को छुआ, उसे गुदगुदी हुई, वो छटपटाई और उस के पाँव ऊपर उठ गए।

मैंने उस किताब में पढ़ा था कि नई-नवेली दुल्हन किशोरी को लंड से दूर रखना चाहिए, ताकि उत्तेजित होने से पहले वह लंड देखकर घबरा न जाए। पारो तीन बार मेरा लंड पकड़ चुकी थी और अब उत्तेजित भी हो गई थी। इसलिए मैं रुका नहीं। उसका दाहिना हाथ पकड़ कर मैंने लंड पर रख दिया।

वो डरी नहीं, लंड पकड़ लिया। लेकिन आगे क्या करना, उसे पता नहीं था। वो लंड को पकड़े रही, कुछ भी किए बिना। फिर भी उसकी कोमल ऊँगलियों का स्पर्श मुझे बहुत मीठा लगता था। लंड अधिक कड़ा हो गया, ठुमके लगाने लगा और भरपूर लार बहाने लगा। मैंने उसकी कलाई पकड़ कर दिखाया कि मूठ कैसे मारी जाती है। धीरे-धीरे वो मूठ मारने लगी।

मुट्ठी से लंड दबोच कर वो बोली: कितना बड़ा और मोटा है तेरा ये? लोहे जैसा कठोर भी है, तुझे दर्द नहीं होता?

मैं: कड़ा ना हो, तो चूत में कैसे घुस पाएगा? मोटा और बड़ा है तेरी चूत के लिए।

पारो: मुझे तो पकड़ने से ही झुरझुरी हो जाती है।

उधर मेरा हाथ भोस पर पहुँच गया था। मेरी ऊँगलियाँ भोस की दरार में उतर पड़ीं। भोस ने भी भरपूर रस बहाया था और चारों ओर गीली-गीली हो गई थी। हल्के स्पर्श से मैंने भोस सहलाई। पारो ने पाँव उठा रखे थे, अब उसने जाँघें सिकोड़ दीं। फिर भी मेरी एक ऊँगली उसकी चूत के भग्न तक जा पाने में सफल रही। जैसे ही मैंने उसके भग्न को छुआ, पारो ने मेरा हाथ पकड़ कर हटा दिया।

अब चूमना छोड़ कर मैं बैठ गया और बोला: पारु, देखने दे तेरी भोस।

अपने हाथ से भोस ढँकने का प्रयत्न करते हुए वह बोली: ना, रहने दो, मुझे शर्म आती है।

मैं: मेरा लंड लेने में शर्म ना आई? अब शर्म कैसी? शरम आए तो मेरा लंड पकड़ लेना। चल, पाँव खुले कर।

वो ना-नुकर करती रही और मैं उसे पलंग के किनारे पर ले आया। मैं ज़मीन पर बैठ गया। जाँघें उठाकर चौड़ी की। शरमाते हुए भी उसने अपने पाँव चौड़े कर लिए। किताब में जैसी दिखाई थी वैसी ही उसकी भोस मेरे सामने आई।

मैंने पारो को दो बार चोदा था लेकिन उसकी भोस ठीक से देखी नहीं थी। इस वक़्त पहली बार ग़ौर से देखने का मौक़ा मिला था मुझे। उसकी भोस काफी ऊँची थी। बड़े होंठ मोटे थे और एक दूजे से सटे हुए थे। भोंस पर और बड़े होंठ के बाहरी हिस्से पर काले घुँघराले झाँटें थीं। बड़े होंठ के बीच तीन इंच लम्बी दरार रथी। मैंने हौले से बड़े होंठ चौड़े किए। अन्दर का कोमल हिस्सा दिखाई दिया। साँवली गुलाबी रंग के छोटे होंठ सूज गए मालूम होते थे। छोटे होंठ आगे जहाँ मिलते थे वहाँ उसकी भग्न थी। इस वक्त वही कड़ी हो गई थी, वह एक इंच लम्बी थी। उसका छोटा मत्था चेरी जैसा दिखता था। दरार के पिछले भाग में था योनि का मुख, जो अभी बन्द था। सारी भोस काम-रस से गीली-गीली हो चुकी थी।

मुझे फिर से किताब की शिक्षा याद आई, कैसे भोस चाटी जाती है। पहले मैंने बड़े होंठ के बाहरी भाग पर जीभ चलाई। आगे से पीछे और पीछे से आगे, दोनों ओर चाटी। पारो के नितम्ब हिलने लगे। होंठ चौड़े कर के मैंने जीभ की नोक से अन्दरी हिस्सा चाटा और भग्न टटोली। भग्न को मैंने मेरे होंठों के बीच लिया और चूसा।

पारो से सहा नहीं गया। मेरा सिर पकड़कर उसने हटा दिया और मुझे खींच कर अपने ऊपर ले लिया। उसने अपनी जाँघें मेरी कमर में डाल दीं तो भोस मेरे लंड के साथ जुट गईं। वह धीरे से बोली: चल ना, कितनी देर लगाता है?

राह देखने की क्या ज़रूरत थी? हाथ में पकड़ कर लंड का मत्था मैंने भोस की दरार में रगड़ा, ख़ास तौर पर भग्न पर। इस वक़्त मुझे पता था कि चूत कहाँ है। इसलिए लंड को ठीक निशाने पर लगाने में दिक्क़त नहीं हुई। लंड का मत्था चूत के मुँह में फँसा कर मैं पारो पर लेट गया।

मैंने कहा: पारो, दर्द हो तो बता देना।

हल्के दबाव से मैंने लंड चूत में डाला। सर्रर्रर्रर्रर्ररररररररर करता हुआ लंड जब आधा अन्दर गया तब मैं रुका। मैंने पारो से पूछा: दर्द हो रहा है क्या?

जवाब में उसने अपनी बाँहें गले में डालीं और सिर हिला कर ना कहा। अब मैं आगें बढ़ा और हौले-हौले पूरा लंड चूत में पेल दिया। उसकी सिकुड़ी चूत की दीवारें लंड से चिपक गईं।

ऊपरवाले ने भी क्या जोड़ी बनाई लंड-चूत की? अभी तो चूत में डाला ही था, चोदना शुरु किया नहीं था। फिर भी सारे लंड में से आनन्द का रस झड़ने लगा था। लंड से निकली हुी झुरझुरी सारे बदन में फैल जाती थी। थोड़ी देर लंड को चूत की गहराई में दबा रख मैं रुका और चूत का मज़ा लिया। मैंने उससे पूछा: पारो, मज़ा आ रहा है ना?

इतना कहकर मैंने लंड खींचा। तुरन्त उसने मेरे कूल्हे पर पाँव से दबाव डाला और चूत सिकोड़ कर लंड निचोड़ा। मैंने फिर कहा: अब तू मुँह से कहेगी, तभी चोदूँगा, वर्ना उतर जाऊँगा… क्या करना है?

वो बोली: क्यूँ सताते हो? मैं बोल नहीं सकती।

मैं: पाँव पसारे लंड ले सकती हो, और बोल नहीं सकती? एक बार बोल, मुझे चोदो।

हिचकिचाती हुई वो बोली: म…मुझे च… चो… दो।

फिर क्या कहना था? आधा लंड बाहर निकाल कर मैंने फिर से घुसा दिया। धीरे और लम्बे धक्के से मैं पारो को चोदने लगा। सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रररररररर बाहर, सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रररर अन्दर। वो भी नितम्ब हिला-हिला कर इस तरह चुदवाती थी कि लंड का मत्था अलग-अलग से घिस पाए। किताब में मैंने भग्न के बारे में पढ़ा था। मैं भी इस तरह धक्के देता था जिससे भग्न में रगड़ पड़ सके।

तीन दिन के बाद ये पहली चुदाई थी पारो के लिए। हम दोनों जल्दी उत्तेजित हो गए। लंड चूत में आते-जाते ठुमक-ठुमक करने लगा। योनि में स्पंदन होने लगी। पारो ज़ोरों से मुझसे लिपट गई। मेरे धक्के तेज़ और अनियमित हो गए। मैं घचा-घच्च, घचा-घच्च चोदने लगा। एकाएक पारो का बदन अकड़ गया और वो चिल्ला उठी। मेरी पीठ पर उसने नाख़ून गाड़ दिए। ज़ोर-ज़ोर से चारों ओर नितम्ब घुमा कर झटके देने लगी। चूत में फटाके होने लगी। अपने स्तन मेरे सीने से रगड़ दिए। स्खलन तीस सेकेण्ड तक चला।

स्खलन के बाद भी वह मुझे हाथ-पाँव से जकड़ी रही। मैं झड़ने के क़रीब था इसलिए रुका नहीं। धना-धन, धना-धन धक्के लगाता रहा। लंड कठोर था और चूत गीली थी इसलिए ऐसी घमासान चुदाई हो सकी। ज़ोरों के पाँच-सात धक्के मार मैंने पिचकारी छोड़ दी। मेरे वीर्य से उसकी योनि छलक उठी।

कुछ देर तक हम होश खो बैठे। जब होश आया तो पता चला कि पारो चिल्लाई थी और हो सकता था कि दीदी और जीजू ने चीख सुन भी ली हो। घबरा कर मैं झटपट उतरा और बोला: पारो, जल्दी कर। चली जा यहाँ से। दीदी-जीजू आएँगे तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

पारो का उत्तर सुनकर मैं हैरान रह गया, वो बोली: आने भी दे, तू डर मत। मैं ख़ुद भैया से कहूँगी कि तेरा कसूर नहीं है, मैं ही अपने-आप चु… चु… वो करवाने चली आई हूँ। अब लेट जा मेरे साथ।

हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर सो गए। दीदी या जीजू कोई भी नहीं आए।

सुबह पाँच बजे वो जागी और अपने कमरे में जाने को तैयार हुई। मुँह पर चूमकर मुझे जगाया और बोली: मैं चलती हूँ, सुबह के पाँच बजे हैं। तुम सोते रहो, और आराम करो। रात फिर मिलेंगे।

लेकिन मैं उसके कहाँ जाने देने वाला था! खींच कर आगोश में ले लिया। वो ना-ना करती रही। मैं जगह-जगह पर चूमता रहा। आख़िर उसने पाजामा उतारा और जाँघें फैलाईं। मेरा लंड तैयार ही था। एक झटके में चूत की गहराई नापने लगा। इस वक्त सावधानी की कोई ज़रूरत नहीं थी। धना-धन तेज़ी से चुदाई हो गई तीन मिनट तक। दोनों साथ-साथ झरे।

दूसरे दिन मैंन दीदी से पूछा: आईने में देखते हुए चुदाई का मज़ा कैसा होता है?

वो बोली: शैतान, तुझे कैसे पता चला कि हम… कि हम…?

मैं उसे कोठरी में ले गया और सुराख़ दिखाई। वो समझ गई।

शालिनी: तो तूने आख़िर हमारी चुदाई देख ही ली।

मैं: मैंने नहीं, हमने कहो।

शालिनी: ओह, तो पारो भी साथ थी?

मैं: हाँ थी।

शालिनी: तब तो तूने उसे… उसे…?

मैं: हाँ, मैंने उसे चोदा जी भर के।

शालिनी: चूत भर के कहो। कैसी लगी उसकी कुँवारी चूत?

मैं: बहुत प्यारी। मेरा लंड भी कुँवारा ही था ना!

शालिनी: अब क्या? शादी करेगा उससे?

दोस्तों, आ गए हम हमारी समस्या पर। मैं दीदी के घर अधिक दिनों तक नहीं रुका, लेकिन जितने दिन भी रहा, इतने दिन रोज़ाना रात को पारो को चोदा। किताब में दिखाए गए आसनों में से कोई-कोई आज़मा कर भी देखे। किताब के मुताबिक़ उसे लंड चूसना भी सिखाया। अकेले मुँह को भग्न से लगाकर उसे झड़वाया। छुट्टियाँ खत्म होने से पहले मैं घर लौट आया। Hindi Porn Stories

आज मैं एक कहानी बताने जा रहा हूँ जो मेरी अपनी है। Sex Stories

मेरी शादी हुए दस Sex Stories साल हो गये हैं और हम दोनों का यौन-जीवन बहुत बढ़िया है। पर मेरे मन में इसके अलावा भी कुछ और करने की इच्छा थी।

मैंने रात को सेक्स करते हुए बीवी को बोला- अगर तुम्हें एक ओर लंड मिले तो कैसे लगेगा?
यह सुन कर वह नाराज हो गई और बोली- तुम बस अभी चूत मारो ! मुझे इसमें मजा आ रहा है।
मैंने पूछा- अगर मेरा लंड और बड़ा होता तो कैसा लगता?
तो वो बोली- तब तो मेरी चूत को मजा आ जाता और मैं आसमान में पहुँच जाती।
मैंने पूछा- अगर एक और लंड का इन्तजाम हो जाये जैसे कि डिल्डो?
वो बोली- मजा आ जायेगा।
मैंने बोला- अगर इस डिल्डो की जगह अगर एक आदमी बड़े लौड़े वाला हो तो? हम दोनों मिल कर तुम्हें जम कर चोदेंगे।

तो वह इसे सुन कर हल्का मुस्कराने लगी।
मैंने बोला- तुम्हारा भी मन है !
अब वह खुल कर बोली- हाँ !
वह पूछने लगी- तुम्हारा मन भी किसी और चूत के लिये करता है क्या?
मैं तो इस भी ज्यादा चाहता हूँ !
वह बोली- तो और क्या?
मैंने बोला- दो लण्ड पहले तुम्हें चोदेगे और फिर वही लण्ड मुझे चोदेगा।
यह सुन कर वह बोली- तुम अपनी गाण्ड में लण्ड लोगे?
मैं बोला- हाँ मेरी जान ! दोनों एक लण्ड को चूसेंगे ओर मजे लेंगे।

उसकी आँखों में एक चमक आ ग़ई। अब हम दोनों सेक्स करते हुए यही बात करते और सेक्स का मजा लेते। अब मुझे एक ऐसे आदमी की ख़ोज थी जो मुझे और मेरी बीवी दोनों को चोद सके। हमारी यह ख़ोज भी जल्दी पूरी हो ग़ई। वह तो हमारा पुराना पड़ोसी ही था जिसे मेरी बीवी भी पसंद करती थी। एक दिन मेरी बीवी ने उसे मूतते हुए देखा था जब वह छत पर घूम रही थी। सामान्य अवस्था में भी उसका लण्ड 5 इन्च का था। अब बस उसे पटाना था और घर तक लाना था।

एक दिन मैंने उसे बोला- कभी बैठ कर पैग लगाते हैं।
वो बोला- इस शनिवार को बैठते हैं।

मेरे मन की और मेरी बीवी की इच्छा अब बस पूरी होने वाली थी। अब हम दोनों शनिवार का इन्तज़ार करने लगे।
शनिवार को सुबह ही मेरी बीवी ने मुझे बोला- आज तबीयत से तैयार होने वाली हूँ और मुझे काफ़ी समय लगेगा।
उसने पूरी वैक्सिंग करी और चूत को हेयर रिमूवर से साफ़ किया। मैंने भी अपने सारे झान्ट साफ़ किये और अपनी गाण्ड के बालों को हेयर रिमूवर से साफ़ किया।

शीशे में अपनी गाण्ड देख कर मुझे कुछ होने लगा। फिर मैंने अपनी गाण्ड में खूब तेल लगाया। जिससे कि मेरी गाण्ड चिकनी हो जाये। शाम को वह हमारा पड़ोसी आ गयाँ और हम दोनों इसके लिये पहले से तैयार थे। मैंने एक शॉर्ट और टीशर्ट पहनी थी ओर मेरी बीवी ने एक टॉप जिसका गला बहुत खुला था और इसके साथ उसने एक टाईट कैप्री पहनी थी जिसमें उसके कूल्हे एक दम गोल-गोल नजर आ रहे थे। टॉप के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उस के 38-सी कप के स्तन एक दम मस्त लग रहे थे और तने हुए चुचूक गजब ढा रहे थे।

जब वह कोल्ड ड्रिंक देने आई तो हम दोनों उसे देख़ते ही रह गये। जैसे ही उसने झुक कर सामान रखा हमारा पड़ोसी मेरी पत्नी के वक्ष देख़ने लगा। यह देख़ कर हम दोनों मुस्करा दिये क्योंकि आज रात वह हम दोनों को खुश करने वाला था। फिर मैंने ड्रिन्क ग्लास में डाला और उसे दिया। मैंने जानबूझ कर उसके पैग बड़े बनाए ओर दो पैग में वह सुरुर में आ गया।
अब हम दोनों अश्लील चुटकले सुनाने लगे।

इतने में रितु (मेरी बीवी) भी वहीं आ गई और हमारे साथ बैठ कर बातें करने लगी। रितु बोली- मुझे भी चुटकले सुनने हैं।
तो मैंने एक चुटकला सुनायाँ जो इस तरह से था :
राम लाल : ठाकुर साहब, ग़ब्बर ने बहू की इज्जत लूट ली है।
ठाकुर : तो मैं क्या करुँ?

रामलाल : बहूरानी पूछ रही है कि बब्बर से बदला लेना है या पेमेन्ट?
इस दौरान जब हम सब हंस रहे थे तो चौधरी (हमारा पड़ोसी) रितु के स्तन और चुचूक देख रह था।
और इस तरह से हमारी अश्लील बातचीत आगे चलने लगी। हम धीरे धीरे पूरी तरह से व्यस्क चुटकले सुनाने लगे।

मैंने चौधरी से पूछा- क्या कभी तुमने भाभी के अलावा किसी और से सेक्स कियाँ है?
वो बोला- मन तो बहुत करता है पर कियाँ नहीं है।
मैंने पूछा- किसी पर तुम्हारा दिल आयाँ है?
तो वो बोला- आप नाराज नहीं होना ! मुझे रितु भाभी बहुत सैक्सी लगती है।
मैंने बोला- तुम्हारी नजरें ही बता रही हैं क्योंकि तुम इसके स्तनों को ही घूरते जा रहे हो।
वो बोला- इनकी गाण्ड तो और भी सेक्सी है। मै तो अपनी बीवी को चोदते हुए भी इनके बारे में सोचते हुए चोदता हूँ।

यह सुन कर रितु हंसने लगी और बोली- तो क्या मैं इतनी सेक्सी हूँ?
तो हम दोनों एक साथ बोले- हाँ।
मैंने पूछा- चौधरी सच में इसे चोदना चाहते हो क्या?
वो बोला- अगर मौका मिले तो जरुर चोदूंगा।
मैंने बोला- आज तुम मेरे सामने ही चोद लो ! बाद में कुछ और हरकत मत कर बैठना।
वो बोला- तुम अपने सामने चोदने दोगे?
मैंने बोला- मैं भी तो चोदूंगा।

यह सब सुन कर रितु भी जोश में आ गई थी। अब हम तीनों अपने बैडरूम की तरफ़ चल दिए। रितु ऐसे मटक कर चल रही थी कि हम दोनों के लण्ड ख़ड़े हो गये। जैसे ही हम बैडरूम में पहुँचे, रितु ने बैड पर लेट कर एक जोरदार अंगड़ाई ली और उसके स्तन एक दम ख़ड़े हो ग़ये। मैंने आगे बढ़कर दोनों कबूतरों को पकड़ लिया और मसलने लगा। वह जोर से आह आह करने लगी और चौधरी अपने लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगा।

मैंने रितु का टॉप उतार दिया और दोनों कबूतर बाहर आ गये। चौधरी ने आगे बढ़कर एक चूची को पकड़ लिया और मसलने लगा। मैंने चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। अब हम दोनों के बीच में रितु थी और हम दोनों उसके स्तनों से ख़ेल रहे थे। उसने हमारे लण्ड पकड़ लिये और हिलाने लगी। अब हमने मिल कर उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गये। अब कमरे में एक चूत और दो लण्ड थे जो कि धमाल मचाने वाले थे।

चौधरी ने बोला- मैं तो रितु की चूत को चूसूंगा।
और रितु ने टांगें खोल कर उसे बुलाया। वो उसकी टांगें उठा कर चूत को चाटने लगा और रितु की सिसकारियां निकलने लगी। वह भी उसे जोर से चूसने को कह रही थी और क्यों ना कहे, उसे आज मनचाहा दिलदार मिला था जो उसे चोदने वाला था।

चौधरी भी पूरी जोर से चूत चाटे जा रहा था। उसने दोनों हाथों से चूत को फ़ैला रख़ा था और पूरी जीभ अन्दर पेल रहा था। रितु ने उस के सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर चूत पर दबा दिया और वो बोल रही थी- चूसो मेरे जानू और जोर से चूसो !
और इसको सुनकर चौधरी भी पूरा दम लगा कर चूसे जा रहा था। अब चूत में से पानी टपकने लगा था और चपर-चपर की आवाज भी आने लगी थी। मैं बड़े गौर से रितु को चूत चटवाते हुए देख रहा था। वह बहुत सैक्सी लग रही थी।

अब मैंने आगे बढ़कर उसे अपना लण्ड पकड़ा दिया और उसे चूसने को बोला। उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब कमरे में हमारी सिसकारियाँ निकल रही थी। रितु ने अचानक मेरे लण्ड को चूसना बन्द करके जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी और चौधरी के सर को जोर से चूत पर दबा दिया। वोह बोलने लगी- चूस जा इस चूत को ! चूस जा ! निकाल दे मेरा पानी ! मजा आ रहा है ! आ रहा है ! और जोर से चूस ! और जोर से।

चौधरी को भी जोश आ गया और पूरी जीभ अन्दर डाल कर चूसने लगा। इतने में रितु ने चूत को उछालना शूरु कर दिया और आअह्ह्ह, औह्हह, आआअह्ह्ह् करने लगी। और फिर थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरु कर दिया। चौधरी मजे ले ले कर चूत का पानी पीने लग़ा। रितु की भी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी और फिर वह प्यार से चौधरी के सर पर हाथ फेरने लगी। अब
मैंने चौधरी को बोला- बहुत हो गया चूसना ! अब जरा इस चूत को चोदना शुरु करो।
वह बोला- इसके लिए तो मैं कब से तड़प रहा हूँ।

फिर वह रितु की टांगों के बीच आ गया और अपने लण्ड को रितु की चूत पर फ़ेरने लगा। रितु ने भी दोनों टांगें फैला दी ताकि वह आराम से उसे चोद सके। अब चौधरी ने लण्ड को चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो उस का आठ इन्च का लण्ड पूरा अन्दर तक घुस गया और रितु जोर से बोली- फ़ाड दी मेरी भैन चोद !

यह सुन कर चौधरी को और जोश आ गया और उसने एक बार फिर लण्ड को बाहर निकाल कर पूरे जोर से पूरा लण्ड अन्दर पेल दिया। इस बार रितु ने बोला- मजा आ गया मेरी जान ! और पेलो जोर से पेलो।

मैं रितु को इस तरह से चुदते देख कर जोश से भर गया और बोला- आज इसकी चूत को फ़ाड दो और खूब दम लगा कर चोदो।
मैंने फिर से अपने लण्ड को रितु के मुँह में डाल दिया।
अब वह मेरे लण्ड को चूस रही थी और उधर से उसकी चूत में चौधरी लण्ड पेले जा रहा था। मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था।।

थोड़ी देर जब चौधरी ने चोद लिया तो मैंने बोला- तुम इसे अपना लण्ड चुसाओ, मैं तब तक चूत का स्वाद लेता हूँ।

अब हम दोनों ने पोजीशन बदल ली। मैंने चूत में अपना लण्ड डाल दिया और चौधरी ने अपना लण्ड रितु के मुँह में दे दिया। बड़ा लण्ड देख कर वह भी उसे जोश से चाटने लगी। चौधरी का लण्ड किसी ने पहली बार चूसा था और वह हवा में उड़ने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- वाह मेरी जान, आज पहली बार इस लण्ड को किसी ने चूसा है, मेरी बीवी तो चूसती ही नहीं है, आह्ह्ह्ह, आह्ह्ह्ह्ह, वाह्ह्ह्ह्ह्ह, हो हो !

और रितु ने उसे और जोर से चूसना शुरु कर दिया। यह सब देख कर मैंने भी चूत को जोर से चोदना शुरु कर दिया। इधर रितु की चूत से पानी निकलने लगा और चूत में चिकनाई और बढ़ गई, इसके साथ ही फच फच की आवाज भी आनी शुरु हो गई। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ रखा था और चोदे जा रहा था। जबकि चौधरी ने उसके सिर को पकड़ कर मुँह को चोदना शुरु कर दिया।

मैंने चौधरी को बोला- तुम इसकी चूत में आ जाओ और मैं थोड़ी देर तुम लोगों को देखता हूँ।
चौधरी ने फिर से चूत पर मोर्चा जमा लिया और उसकी दोनों टागों को कन्धे पर रख लिया। दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा। रितु भी नीचे से गाण्ड उठा उठा कर साथ दे रही थी।

अब दोनों के मुँह से आवाजें आने लगी- आऽऽ चोदो ! और जोर से चोदो ! फाड़ दो इस चूत को ! वह भी बोल रहा था- आज इस चूत का तो मैं बैन्ड बजा दूंगा।
और फिर रितु बोलने लगी- मैं झड़ने वाली हूँ, आईईईई, आह्ह्ह्ह्ह, और और और आह्ह्ह्ह्ह आईईईईई !

और फिर उसने कस कर चौधरी को पकड़ लिया। चौधरी अभी भी उसे पूरा जोर लगा कर चोदे जा रहा था। इतने में चौधरी की आवाज भी आने लगी- मैं खाली हो रहा हूँ, मेरा छुटने वाला है।

और रितु ने उसे और कस कर पकड़ लिया और फिर चौधरी भी उस से चिपक गया और हांफने लगा। उसके लण्ड ने रितु की चूत में अपना माल छोड़ दिया जो चूत से रिस कर बिस्तर पर गिरने लगा। अब तक मैं अपने लण्ड को सहला रहा था और ख़डा हो गया और बोला- अब इस चूत का पानी मैं निकालता हूँ।
चौधरी बोला- मैं इन मस्त चूचियों से दूध निकालता हूँ।

अब चौधरी ने एक चूची को मुँह में लेकर चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को मसलने लगा। रितु ने एक हाथ से उसके लण्ड को हिलाना शुरु कर दिया।मैंने रितु की चूत में अपना लण्ड डाल कर अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। फिर से कमरे में चूत से फच फच की आवाज आने लगी और माहौल और सैक्सी हो गया। कुछ ही देर में चौधरी का लण्ड फिर से खड़ा हो गया।

मैं जोर जोर से रितु को चोद रहा था पर मेरा ध्यान चौधरी के लण्ड पर था क्योंकि आज मुझे भी तो अपनी गाण्ड का उदघाटन करवाना था। चौधरी से अपने लण्ड का ताव सहा नहीं जा रहा था और मेरी चिकनी गाण्ड देख कर वो भी उत्तेजित हो रहा था जिसे मैंने सुबह ही साफ किया था और उसका परिणाम आने ही वाला था।

अब चौधरी ने उठ कर मेरी गाण्ड पर हाथ फेरना शुरु कर दिया जो कि मुझे भी उत्तेजित कर रहा था। इतने में वह मेरे पीछे आ गया और अपनी दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में पेल दी। मेरी गाण्ड में जोर से दर्द हुआ, मैं बोला- भैन्चोद ! तेल तो लगा ले।

यह सुन कर चौधरी ने ड्रैसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई और बहुत सा तेल लेकर मेरी गाण्ड में लगाने लगा। अब उसने दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में डालनी शुरु कर दी और मुझे अजीब सा मजा आने लगा। इधर चूत मारने का और उधर गाण्ड में अन्गुलियाँ, इससे ऊपर की थोड़ी ही देर में एक आठ इन्च लम्बा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने वाला है।

अब रितु फिर से उह आह करने लगी थी।
अब चौधरी ने बोला- मैं तुम्हारी ग़ान्ड मारने वाला हूँ, तैयार हो जाओ।

उसने मेरी कमर को पकड़ लिया और मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ने लगा। मैंने रितु को चोदना बन्द कर दिया ताकि वह अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डाल सके। उसने फिर से बहुत सा तेल अपने लण्ड पर लगाया और मेरी कमर पकड़ कर लण्ड को गाण्ड के छेद पर लगाया। मेरी गाण्ड में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब उसने एक जोर का धक्का लगाया और उसका दो इन्च लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया।
मेरी गाण्ड में लण्ड घुसते ही दर्द हुआ पर मै आगे का मजा सोच कर और उत्तेजित हो गया और इतनी ही देर में दूसरा झटका लगा और उसका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया और मेरा पूरा लण्ड रितु की चूत में। और इस के साथ ही हम तीनों की आवाज आई।
अब मै सैन्डविच की तरह से था। मैं रितु की चूत मार रहा था और चौधरी मेरी गाण्ड मार रहा था। पहले चौधरी मुझे धक्का मारता और मैं रितु की चूत में लण्ड पेलता।
इधर रितु कह रही थी- चोदो !
और उधर मै कह रहा था- चोदो।

चौधरी तो मेरी गाण्ड मारते हुए मजे से दीवाना हुआ जा रहा था और कह रहा था- क्या टाइट गाण्ड है !
मेरे को भी मजा आने लगा था और फिर चौधरी ने एक दम रफ़्तार बढ़ा दी। लगता था कि टाइट गाण्ड की वजह से वह जल्दी ही खाली होने वाला था। मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। अब रितु, मैं और चौधरी एक साथ ही झड़ने वाले थे और वह क्षण शीघ्र ही आ गया जब हम तीनों ने बोलना शुरु किया- मैं झड़ने वाला हूँ ! और तीनों कि रफ़्तार तेज हो गई।
इसके साथ ही चौधरी ने मेरी गाण्ड में अपना वीर्य छोड दिया और उसके गर्म गर्म वीर्य को महसूस करते ही मैंने भी रितु की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। रितु पहले ही झड़ना शुरू हो चुकी थी। मैंने कस कर रितु को पकड लिया और चौधरी ने मुझे।

तीनो ही हांफ़ रहे थे और एक जोरदार चुदाई से तीनों के चेहरे चमक रहे थे।
थोड़ी देर बाद ही हम तीनों फिर से एक और चुदाई के लिये तैयार थे। अब मै नीचे लेटा और मेरे लण्ड पर रितु मेरी तरफ मुँह करके अपनी चूत ख़ोल कर बैठ गई। फिर मैंने उसे अपनी तरफ झुका लिया जिससे उसकी गाण्ड ऊपर की तरफ निकल आई। चौधरी ने फिर से अपने लण्ड को रितु की गाण्ड में डालने की तैयारी कर ली।

उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया और अपनी अन्गुलियों पर तेल लगा कर रितु की गाण्ड में पेल दी और वह जैसे ही आगे हुई, मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा घुस गया। चौधरी ने अपने लण्ड को रितु की गाण्ड पर टिकाया और जोर से धक्का मारा। उसका लण्ड आधे तक गाण्ड में घुस गया और वह चिल्लाने लगी।

चौधरी ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दोनों स्तन पकड़ लिये और मसलने लगा। मैं उसके होठों को चूस रहा था। अब चौधरी ने एक और जोर से धक्का मारा और इसके साथ ही पूरा लण्ड अन्दर तक पेल दिया।

अब हमने मिल कर चोदना शुरु कर दिया और एक बार फिर से रितु की सुख भरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी। इस बार हमने पाँच मिनट तक ऐसे ही चोदा और फिर हमने अपनी पोजीशन बदल ली।
अब चौधरी चूत में लण्ड घुसा रहा था तो मै गाण्ड की मरम्मत कर रहा था।
और फिर कुछ ही देर में रितु ने बोलना शुरु किया- आज चोद डालो इस चूत को और गाण्ड को ! मजे आ गये ! जोर से चोदो ! और जोर से !

इतना सुनते ही हम दोनों की स्पीड बढ़ गई। और हम जोर जोर से चोदने लगे।
रितु की सिसकारियाँ निकलने लगी और वह और बोलने लगी- और तेज ! तेज-तेज !
इधर चूत और गाण्ड दोनों से ही आवाज आ रही थी- फ़्च, फ़च, फ़च !

और इसके साथ ही रितु ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और हमने अपने धक्को की रफ्तार और तेज कर दी ताकि हम भी एक साथ ही खाली हो जायें। अब मेरे चिल्लाने की बारी थी, आह निकला, आह निकला !
इतने में चौधरी की भी आवाज आई- मेरा भी निकला !

और हम दोनों ने अपना वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने रितु की गाण्ड में सारा वीर्य छोड़ दिया और चौधरी ने चूत में।
तीनों के चेहरे पर सन्तोष झलक रहा था और इस तरह हम सबकी इच्छा पूरी हो गई। Sex Stories

हॉट फॅमिली पोर्न स्टोरी में मैंने अपने साले की बीवी को चोदा. वो एकदम सुंदर माल है, मक्खन सी है. वो मुझसे खुली हुई थी. मेरा साला उसे ज्यादा नहीं चोद पाता था.

दोस्तो, मेरा नाम साहिल है.
मेरी पहली कहानी
सासू मां के साथ एक रात
को आप लोगों ने खूब पसंद किया. थोड़ा व्यस्त होने की वजह से मैं अपनी कोई सेक्स कहानी नहीं लिख पाया.

अब मैं आपके साथ मेरे और मेरे साले की बीवी के बीच हुई सेक्स कहानी को साझा कर रहा हूँ. मुझे उम्मीद है कि आप लोगो को ये हॉट फॅमिली पोर्न स्टोरी पसंद आएगी.

मेरे साले की बीवी का नाम स्वरा (बदला हुआ नाम) है. उसका फिगर 30-28-32 का है. वो दिखने में एकदम सुंदर माल जैसी है. उसका रंग मक्खन सा सफेद है.

उसकी शादी के बाद से ही हम दोनों में खूब जमती थी क्योंकि आपको तो पता ही है कि सलहज और जीजा में कुछ ना कुछ तो चलता ही रहता है.

स्वरा मुझसे अपनी हर बार साझा करती रहती थी, जिस कारण से हम दोनों काफ़ी क्लोज हो गए थे.

उसकी बातों से मुझे ये भी मालूम थी कि उसका पति उसमें कम इंटरेस्ट लेता था.
पता नहीं क्यों … लेकिन मेरे लिए तो ये सही था.

एक दिन मेरी सासू मां और उसके बेटे को उनके कोई निजी काम से एक दिन के लिए दिल्ली जाना पड़ा.

उन्होंने मुझसे कहा- आप या तो यहां रुक जाना या स्वरा को वहां अपने घर ले जाना.
स्वरा ने कहा- मैं जीजा जी के घर जाऊंगी तो घर सूना हो जाएगा. जीजू यहीं रुक जाएंगे. एक रात की तो बात है.

ये बात सुनकर उन्होंने भी हां कर दी और मैं उन दोनों को बस पर छोड़ कर उनके घर दस बजे के करीब पहुंच गया.

स्वरा ने नाइट सूट पहना हुआ था. नीचे पज़ामा और ऊपर बटनों टी-शर्ट वाली.

तो स्वरा ने मुझसे कहा- जीजू आपको चेंज करना है, तो कर लीजिए, फिर आराम से बैठते हैं.
मैं बाथरूम में चेंज करने चला गया.

मैंने जानबूझकर बाथरूम का गेट पूरा बंद नहीं किया. जब मैं अन्दर गया तो अन्दर स्वरा की ब्रा टंगी हुई थी. मैं वहां उसकी ब्रा अपने लंड पर लपेट कर मुठ मारने लगा.

कुछ ही देर में मैंने अपने लंड का पानी ब्रा में निकाला और चेंज करके बाहर आ गया.

मुझे ये नहीं पता था कि उस ब्रा को थोड़ी देर में ही उठा कर मशीन में डालने वाली है.

मैं अन्दर बैठा था तो मैंने देखा कि वो बाथरूम में गई और उसने बाथरूम से कपड़े उठाए.
फिर उसने मेरी और थोड़ा अजीब सी नजरों से देखा. फिर वो वॉशिंग मशीन की तरफ चली गयी.

मैं समझ गया कि इसे पता चल चुका है कि मैंने इसकी ब्रा के साथ क्या किया है.

फिर वो कमरे में आ गई.
कमरे की लाइट्स ऑफ होने के बाद रूम में अंधेरा हो गया था.

हम दोनों ही बेड पर लेटे हुए बातें कर रहे थे.
बातों बातों में वो मुझे बताने लगी थी कि इनको सेक्स में कोई इंटरेस्ट ही नहीं है. मैं कुछ कहूँ तो उन्हें मेरी बात बुरी लगती है.

मैंने कहा- नहीं तुम नहीं कहा करो, तुम क्यों ये सब कह कर अपनी वैल्यू कम करती हो.
वो बोली- हां, अब मुझे उनसे कुछ नहीं कहना है. मुझे उनसे अब कोई शिकायत नहीं है.

उसकी ऐसी बातें सुनकर मेरा लंड पूरा कड़क हो गया था. मैंने अंडरवियर भी नहीं पहनी थी, तो पजामे में मेरा लंड तम्बू बना रहा था.

रात के 12.30 बज चुके थे और स्वरा को नींद आ चुकी थी.

फिर भी मैंने चैक करने के लिए उसको आवाज लगाई.
उसका कोई जवाब नहीं आया.
मुझे कुछ हिम्मत मिली और मैं धीरे धीरे सरक कर उसके पास चला गया.

वो चित सोई हुई थी और उसने अपने बदन पर चादर डाला हुआ था.
शायद एसी के कारण उसे ठंड लग रही थी.

मैंने चादर को धीरे से एक तरफ किया और जहां उसकी टी-शर्ट के बटन थे, वहां हल्के हाथों से बटन खोलने लगा.

उसकी शर्ट में बटन आराम से खुलने वाले थे, तो जरा सी कोशिश में ही उसके दो बटन खुल गए.

एसी की एलईडी की रोशनी कमरे में काफी उजियाला कर रही थी जिसमें से में मुझे उसका पेट साफ़ दिखाई देने लगा था.

फिर मैं ऊपर वाले बटनों की तरफ गया तो वो उसके फूले हुए मम्मों के कारण उधर के बटन काफी टाइट लगे थे.
मुझसे बड़ी मुश्किल में उसमें से एक ही बटन खुल पाया.

तभी वो हिलने लगी और करवट लेकर पलट गई.

मुझे बहुत खीज हुई क्योंकि मुझे उसके बूब्स टच करने थे और अब वो उस साइड मुँह करके सो गई थी.

फिर भी मैंने अपनी कोशिशें जारी रखीं और कुछ मिनट बाद उसकी पीठ तरफ से उसका पज़ामा नीचे करने की कोशिश करने लगा.

स्वरा की फूली हुई गांड होने के कारण पजामा ने नीचे उतरने से मना कर दिया और मुझसे झांट कुछ नहीं हो पाया.

अब जब तक वो वापिस नहीं मुड़ जाती, तब तक मेरे पास कोई रास्ता नहीं था.

थोड़ी ही देर बाद मुझे ऐसे लगा जैसे शायद उसको सुसु आई क्योंकि वो हिल रही थी और उठने की कोशिश में थी.
मैंने इसे एक मौक़ा माना और मैं फटाफट उठ कर वॉशरूम में चला गया.

बाथरूम का गेट बिना बंद किए मैं मूतने लगा. मैं इस तरह से खड़ा था कि मेरा लंड उसे दिख जाए.

एक मिनट बाद ही वो आंखें मसलती हुई जब बाथरूम के पास आई तो मैं अपने लंड को हिला रहा था.
उसने मेरे लंड को देखा और वो एक तरफ हो गई.

वो बोली- जीजू, गेट बंद नहीं किया आपने.
मैंने कहा- कोई और था नहीं घर पर, मुझे नहीं पता था कि तुम भी उठ जाओगी. गर्मी कुछ ज्यादा थी तो नहीं किया.
वो बोली- ओके.

कुछ पल बाद मैं बाहर आ गया और वो अन्दर चली गई.

उसने सुसु की और हम दोनों वापिस बेड में आ गए.
हम दोनों फिर से सोने लगे.

उस समय रात के 3 बजे से ज्यादा का समय हो गया था.
उसने ठंड की वजह से एसी बंद कर दिया था और चादर भी हटा दिया था.

वो जब सो गई तो मैंने उसके मम्मों को सहलाना शुरू किया.

उसका कोई विरोध नहीं हुआ तो मुझे हिम्मत आ गई.
मेरी सोच यही थी कि आज कैसे भी करके ये मौका नहीं छोड़ना है.

मैंने हल्के से उसको आवाज दी, ‘स्वरा …’
उसका कोई उत्तर नहीं आया.

मैंने फिर से उसे जगाया, तो वो नींद में ही बोली- हां जीजा जी.
मैंने कहा- स्वरा यार, मैं तुझे पसंद करता हूँ.

ये बात सुनकर वो हंसने भी लगी और शर्मा गई.

वो बोली- मैं नींद में इतनी भी बेसुध नहीं हूँ, जो मुझे पता नहीं चल रहा कि आप क्या कर रहे हो. पहले मेरी ब्रा में अपना पानी गिराया, फिर मेरी शर्ट के बटन खोले. मुझे सिड्यूस करने के बाद भी आपने कुछ नहीं किया और 3 बजा दिए.

मैंने कहा- क्या मतलब?
वो बोली- मुझे भी जरूरत है जीजू … बहुत दिन से मैं भी प्यासी हूँ.
इतना कहते ही वो मेरे गले लग गई और हम दोनों लिपकिस करने लगे.

वो मेरे ऊपर आ गई और उसने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया. वो मेरे सीने को पागलों की तरह चूमने और चूसने लगी.

मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया और वो ऊपर ब्रा में रह गई. मैंने उसका पज़ामा उतार कर उससे कहा- हनी 69 में आ जाओ.

उसके पति ने कभी उसकी चूत नहीं चाटी थी तो वो 69 समझ नहीं पा रही थी.

फिर मैंने खुद ही उसकी चूत की तरफ आकर उसकी चूत चाटी, तो वो कंट्रोल से बाहर हो गई. मैं लगा रहा और वो आंह आंह करती रही अपनी चूत मेरे मुँह में देती रही.

कुछ ही पलों में उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुँह में आ गया.
वो झड़ कर मेरे बाजू में लेट गई.

कुछ मिनट बाद मैं नंगा हो गया और उसको गोदी में उठा कर उसे चूमने लगा.
मेरा लंड उसकी चूत में रगड़ मार रहा था.

उसने मेरे लंड को हाथ पकड़ कर रास्ता दिखाया और मैंने लंड चूत में डाल दिया.
वो आंह कह कर सिसक उठी.

उसकी चूत एकदम कसी हुई थी.
साले साहब का लंड एक तो छोटा था और काफी दिन से चूत में गया भी नहीं था.

कुछ देर की उन्ह आह के बाद वो चुदाई के पूरे मजे लेने लगी.

हमारी चुदाई धकापेल चलने लगी.
पहली बार का मामला था तो ये चुदाई 10 मिनट ही चली और मेरा लंड पानी छोड़ने को हो गया.

मैंने लंड चूत से निकला और पानी बाहर ही छोड़ दिया.
वो काफी खुश थी.

कुछ देर बाद हॉट फॅमिली पोर्न का दूसरा राउंड शुरू हो गया.
उस बार मैंने उसे हचक कर चोदा.
वो भी अपनी चूत को हर आसन में चुदवाने को मचल रही थी.

मैंने रात भर अपनी सलहज की चूत का मजा लिया.

पूरी रात चुदाई के चार राउंड करने के बाद हम दोनों काफी थक चुके थे.
स्वरा को भी नींद आ रही थी.

मैंने उसको सोने के लिए कहा और हम दोनों बिना कपड़ों के सो गए.
अगली सुबह मॉर्निंग जब मैं उठा तो देखा कि वह बिस्तर पर नहीं थी.

जब मैंने बाहर देखा, तो वो किचन में काम पर लगी हुई थी.

मैंने उसे आवाज लगाई और चाय बनाने के लिए कहा. मेरे दिमाग़ में अभी भी सेक्स करने की इच्छा चल रही थी.

मैंने उसके रूम में आने से पहले ही लंड सहलाना शुरू कर दिया था.

कुछ ही देर में वो अन्दर आई और मुझे लंड सहलाते देख कर मुस्कुराने लगी.

उसने कहा- जीजू, अभी तक शांत नहीं हुए आप!
मैंने कहा- तू है ही इतनी सेक्सी कि कंट्रोल करना मुश्किल है.

मेरी बात सुनकर वो मेरे पास आकर मुझे लिपकिस करने लगी.

मैंने उसे कपड़े उतारने के लिए कहा.
वो झट से अपना सलवार कुर्ता उतार कर मेरे पास आ गई.

उसने सिर्फ़ ब्लैक कलर की ब्रा डाल रखी थी.

मैंने उसे मेरे मुँह पर बैठने को कहा.
वो अपनी चूत चटवाने के लिए मेरे मुँह पर बैठ गई.

मैंने जीभ से उसकी फुद्दी चाटना शुरू कर दिया. मेरी जितनी जीभ अन्दर तक जा सकती थी, मैंने डालकर मजा लिया.

मेरी इस हरकत से वो फिर से चुदासी हो गई और मेरे मुँह से चूत हटा कर मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.

मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया.
वो और ज़्यादा गर्मा गई और मुझे लंड अन्दर डालने के लिए कहने लगी.

मैं झट से उसके ऊपर चढ़ गया और लंड सैट करके एक ही झटके में पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी फुद्दी में उतार दिया.
वो ‘आह मर गई …’ कह कर सिहर उठी.

कुछ ही मिनट में ही उसको चरम सुख की प्राप्ति होने लगी और उसकी चूत से पानी बाहर बहने लगा.
वो चिल्लाने लगी.

मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड बाहर निकाला और उसके मम्मों पर मुठ मारने लगा, अपने लंड का सारा पानी उसके मम्मों और पेट पर निकाल दिया.
वो खुश हो गई.

उस दिन शाम को मेरे साले और सासू मां को वापस आना था.
मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और तीन बजे तक अपनी सलहज को चोद चोद कर तृप्त कर दिया.

दोस्तो, इसके बाद भी हम जब भी अकेले में होते हैं, तो एक दूसरे साथ चुदाई कर लेते हैं.

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