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मेरा नाम अमन है। मैं बचपन से दिल्ली Antarvasna में रह रहा हूँ। जब से मुझे सेक्स की जानकारी हुई, तब से मैं बस सेक्स के बारे में ही सोचता रहता हूँ। विशेषकर मुझे विवाहित स्त्रियाँ अधिक पसन्द हैं, साथ ही मोटी स्त्रियाँ भी। मेरा लंड ८ इंच लम्बा व ३ इंच मोटा है।
मैं इन्टरनेट पर चैट रूम में एक समलैंगिक रूम में हमेशा एक स्त्री के नाम से चैट करता और पूरा मज़ा लेता। एक दिन मेरी बात ग्रेटर कैलाश में रहने वाली गौरी नाम की महिला से हुई। एक दूसरे की जानकारी लेने के बाद हम सीधा सेक्स की बात पर आ गए। उसने बताया कि उसके पति अक्सर बाहर रहते हैं। उसको जब भी अवसर प्राप्त होता है तो वह अपने कामवाली बाई के साथ समलैंगिक सहवास करती है। मैं भी उससे स्त्री बनकर ही बात कर रहा था।
मैंने उससे कहा, “आप किसी लड़के को क्यों नहीं तलाश करतीं?”
“मैं कुछ लड़कों को जानती हूँ, जो सेक्स-जॉब करते हैं।” – मैंने उसे आगे बताया
गौरी ने कहा, “क्या वो मेरी गाँड भी चाटेगा?”
“सब कुछ करेगा, जो कुछ तुम करवाना चाहोगी, और उसकी शुल्क भी अधिक नहीं है।” – मैंने उसे जानकारी दी।
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे, मेरी बात बनती नज़र आ रही थी। मैंने गौरी को टेलीफोन नम्बर दिया, और कहा कि यह उसका नम्बर है, और उसका नाम अमन है। तुम उससे बात कर लो, मैं भी उससे बात करके तुम्हारे बारे में बता दूँगी। असल में अमन तो मैं ही था।
चैट के लगभग एक घण्टे के बाद उस स्त्री का फ़ोन आ गया। उसने मेरा नाम पूछा, और अपना नाम बताया। उसने कहा कि आपका नम्बर मुझे एक औरत ने दिया है। वो तो मैं ही था, तो मैं समझ गया।
मैंने पूछा, “तो फिर कब आऊँ आपके पास?”
कल दिन में ११ बजे आ जाओ।
मैंने कहा, “ठीक है।”
क्या बताऊँ दोस्तों, वह आधा दिन काटना मेरे लिए पहाड़ जैसा प्रतीत हुआ, बस मैं तो यही सोचता रहा कि ये करूँगा, वो करूँगा, और ये सब सोच-सोचकर मैंने उस औरत के नाम से दो बार मुट्ठ भी मार ली।
अगले दिन ठीक ११ बजे मैं उसके घर पहुँच गया। मैंने घंटी बजाई, दरवाजा खुला, और लगभग ३५ वर्ष की एक गोरी स्त्री ने दरवाजा खोला। मैंने उसे बताया, “मैं अमन…”। उसने अन्दर आने को कहा।
मैं जैसे ही अन्दर घुसा, उसने दरवाजा बन्द कर लिया, और सीधे शयनकक्ष में ले गई और कहा, तुम ५ मिनट यहीं रुको, मैं अभी आई। ५ मिनटों को बाद जब वह वापस आई तो मैं उसे बस देखता ही रह गया। वह गुलाब़ी रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुए मेरे सामने थी। थोड़ी देर के लिए तो मैं बिल्कुल सुन्न हो गया था, फिर मैं होश में आया और सीधे जाकर उसे ज़ोरों से गले लगा लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा, उसे ख़ुद को सँभालने का मौक़ा भी नहीं मिला।
चूमते-चूमते मैंने अपना एक हाथ उसकी पैन्टी के अन्दर डाल कर उसके गोरे-गोरे और मुलायम चूतड़ों को सहलाने लग गया। फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी। ब्रा उतारते ही उसकी गुलाब़ी घुंडियों वाली चूचियाँ मेरे सामने थीं। मैंने उन्हें दबोच लिया और एक हाथ से उसकी घुंडी को मसलने लगा, तो उसकी सिसकियाँ निकल पड़ीं। फिर मैंने एक झटके से उसकी पैन्टी को उतार कर उसे बेड पर लिटा दिया, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।
उसने झट से उठकर मेरे लंड को पकड़ कर चूसना शुरु कर दिया। मैंने जीवन में कभी भी ऐसा अनुभव नहीं किया था, मुझे स्वर्ग की अनुभूति हो रही थी। वह मेरे लंड को चूसती रही। मैं कभी उसकी चूचियों को सहलाने लगता, कभी घुंडियों को काट लेता। उसने मुझे नीचे लिटा दिया और स्वयं मेरे ऊपर इस तरह आ गई, कि उसकी बिना बालों की चूत मेरे मुँह के पास थी। मैंने भी उसकी चूत में उँगली डालकर चूसने लगा।
उसके गाँड की छेद भी गुलाबी रंग की थी। मैं बीच-बीच में उसमें भी उँगली डाल देता, जिससे वह अचानक चिहुँक पड़ती। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे नीचे लिटा दिया, उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर मैंने अपना लंड उसके गाँड की छेद पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसके अन्दर चला गया, जिसके कारण वो चिल्ला उठी। मैं रुक गया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा, उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने फिर उसकी जाँघों को पकड़ कर धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। वह एकदम से चिल्ला उठी।
मैंने उसके होठों को चूमने शुरू कर दिया, फिर थोड़ा सामान्य होने पर मैं उसकी गाँड में अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा। मैंने साथ में उसकी चूत में उँगली करना भी जारी रखा, जिससे उसे और भी मज़ा आ रहा था। वह सिसकारियाँ लेने लगी और बोली, अमन थोड़ा और तेज़ करो। मैंने चुदाई की गति में और बढ़ावा किया। थोड़ी देर बाद उसकी चूत से पानी आने लगा, और वह अपनी गाँड को दबोचने लगी। उसने कहा, “अमन मैं गई… मैं गई…!” कहते हुए फिर वो आहहह्हहहह…. आह्ह्हहह्हहहह करने लगी।
पर मैं रुका नहीं। ५ मिनट बाद मेरा भी निकलने वाला था। मैंने पूछा – “गौरी कहाँ छोड़ूँ?”
उसने कहा, “अन्दर ही।”
थोड़ी देर धक्के मारने का बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी गाँड में ही छोड़ दिया। यह पहला अवसर था कि मैं किसी की गाँड में स्खलित हुआ था।
फिर मैं उसके ऊपर लेट गया, थोड़ी देर लेटे रहने के बाद हमने एक-दूसरे को साफ़ किया और वापस आकार दुबारा बिस्तर पर लेट गए और बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। फिर मैंने उसकी चूत की जमकर चुदाई की।
उस दिन मैंने उसकी २ बार चुदाई की। फिर उसने मुझे १००० रुपये दिए और कहा कि अब मैं तुम्हें बुलाती रहूँगी।
उस दिन से अब तक मैंने उसकी कई बार चुदाई की। फिर मैंने उसके द्वारा अन्य स्त्रियों से भी सम्पर्क साधा। Antarvasna
श्री मनोहर सिंह Antarvasna मेहता के द्वारा भेजी गई कहानी को मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ। मुझे कुछ कुछ ऐसा प्रतीत होता है कि जिन घरों में भाभियां होती हैं, तो साथ रहने वाले देवर के मन में कभी ना कभी तो पाप जाग ही जाता है और नतीजन भाभियाँ चुदने लगती हैं, या देवर भाभियों के चक्कर में आ ही जाता है। मैं तो कहती हूँ कि आग तो दोनों ओर ही बराबर सी सुलग उठती है …तो वास्तव में इसमें गलती किसी की नहीं होती। आईये देखे, यहाँ श्री मनोहर सिंह जी क्या बता रहे हैं..
मैं गोवा का निवासी हूँ, मेरी यहाँ में पर्यटकों की आवश्यकताओं से सम्बंधित एक दुकान है। यह घटना मेरी जवानी के समय की है जब मैं मात्र 18 वर्ष का था और कॉलेज में पड़गता था। मेरे भैया की शादी हो चुकी थी। मेरे छोटे होने के कारण भाभी मुझसे बहुत स्नेह रखती थी। यूँ तो वो मुझसे सिर्फ़ पांच साल ही बड़ी थी। सच पूछो तो उसके पृष्ठ-उभार मुझे बहुत लुभाते थे, बस ! लुभाते ही थे … पर भाभी के गोल गोल सुघड़ चूतड़ों को दबाने की इच्छा कभी नहीं हुई। भाभी अधिकतर टुक्की वाला ब्लाऊज पहनती थी। उनके कठोर पर्वत मुझे बहुत सुन्दर लगते थे, पर उन्हें मसलने जैसी इच्छा कभी नहीं हुई। उनके चिकने बदन पर मेरी दृष्टि फ़िसल फ़िसल जाया करती थी, पर ऐसा नहीं था कि मैं उस चिकने बदन को अपनी बाहों में लेकर उन्हें चूम लूँ !
बस हम दोनों एक दूसरे के साथ साथ खेलते थे। मैं उनके साथ खाना बनवाने में मदद करता था, वॉशिन्ग मशीन में कपड़े धो देता था और भी बहुत से काम कर देता था।
एक दिन अचानक ही ये सारी मर्यादायें टूट कर छिन्न भिन्न हो गई। दोनों के मन में काम भावनायें जागृत हो उठी…। उस दिन सारा काम निपटाने के पश्चात हम दोनों यूँ ही खेल रहे थे, कि मन में ज्वाला सुलग उठी। भाभी का टुक्की वाला ब्लाऊज कील में फ़ंस कर फ़ट गया और सामने से चिर गया। भाभी का एक कठोर स्तन उभर कर बाहर निकल आया। मेरी नजरें स्तन पर ज्यों ही पड़ी, मैं देखता ही रह गया, सुन्न सा रह गया। भाभी एक दम सिहर कर दीवार से चिपक गई। मैं अपनी आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर उन्हें देखने लगा। भाभी सिहर उठी और अपने हाथों को अपने नंगे स्तन के ऊपर रख कर छुपाने लगी। मैं धीरे धीरे भाभी की ओर बढ़ने लगा। वो सिमटने लगी। मेरा एक हाथ उसके कठोर स्तनों को छूने के लिये बढ़ गया।
“नहीं भैया, नहीं… मत छूना मुझे !”
“ये… ये… कितने चमक दार, कितने सुन्दर है…”
मेरी अंगुलियों ने ज्यों ही उनके स्तन छुये, मेरे बदन में जैसे आग लग गई। भाभी तुरन्त झुक कर मेरी बगल से भाग निकली, और दूर जाकर जीभ निकाल कर चिढ़ाने लगी। मैं स्तब्ध सा उन्हे देखता रह गया। जाने क्यूँ इस घटना के बाद मैं चुप चुप सा रहने लगा। मेरे दिल में भाभी के लिये ऐसे वैसे वासना भरे विचार सताने लगे। शायद जवानी का तकाजा था, जो मेरे मन को उद्वेलित कर रहा था।
शाम को मैं छत पर टहल रहा था कि भाभी वहां आ गई।
“क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?”
“नहीं … हां वो … ओह क्या बताऊ मैं…!”
“भैया मेरी कसम है तुझे … जो भी हो, अच्छा या बुरा… कह दो। मन हल्का हो जायेगा।”
“बात यह है कि भाभी … अब कैसे बताऊँ…”
“मैंने कसम दी है ना … चलो अपना मुँह खोलो…” शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।
“ओह कैसे कहूँ भाभी,… आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !”
“तो क्या हुआ … तुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?” भाभी की नजरें झुक गई।
“पर शायद… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…”
“ऐ … चुप… क्या कहते हो … मैं तुम्हारी भाभी हूँ…” सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा
“कसम दी थी सो बता दिया … पर मैं क्या करू… मैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी…”
“भैया, अपने मन की कहूँ… प्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँ” भाभी ने भी झिझकते हुये कहा।
“क्या कहती हो भाभी …”
भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दिया… मेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया ? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया ? सभी कुछ गड-मड हो रहा था। मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर आ गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।
“कमल, तुम तो बहुत प्यारे हो, तुम्हें देख कर मुझे तो बहुत प्यार आता है !”
“भाभी…”
“ना भाभी नहीं, दीपाली कहो, मेरा नाम लो …” भाभी ने अपनापन दिखाते हुये कहा।
“दीपा, तुम्हें देख कर जाने मन में क्या क्या होने लगता है, ऐसा लगता है कि तुम्हें प्यार कर लूँ, चूम लूँ…” मैंने अपने होंठों पर जीभ फ़ेर कर अपनी मन की बता दी। मेरे गीले होंठ देख कर भाभी ने भी अपने होंठ थूक से गीले कर लिये और मेरे पर धीरे से झुक गई और इतने नजदीक आ गई कि उसकी गरम सांसें मेरे चेहरे से टकराने लगी।
“गीले होंठ बहुत रसीले होते हैं, एक बार और गीले कर लो !”भाभी ने अपना रस भरा अनुभव बताया।
मैंने अपने होंठ फिर से गीले कर लिये और भाभी ने अपने गीले होंठ मेरे होठों से लगा दिये और मेरा ऊपर का होंठ अपने होंठों से चूसने लगी। इतने नरम और थरथराते होंठ मुझे असीम सुख दे रहे थे। मैं पहली बार गीले नरम होंठों का स्पर्श इतनी मधुरता के साथ महसूस कर रहा था। धीरे धीरे भाभी ने अपनी जीभ भी मेरे मुख में डाल दी। भाभी की एक एक हरकत मुझे वासना की पीड़ा दे रही थी। वो अब मेरे होंठों को बेतहाशा पीने लगी थी। जब वो उठी तो उनकी आंखे वासना से सुर्ख हो गई थी। पर मेरी हिम्मत अब भी उनके स्तनों को दबाने की नहीं हो रही थी।
“बबुआ, कैसा लगा … दिल की मुराद पूरी हुई या नहीं ?” भाभी ने मुझे मुस्कराते हुये पूछा।
मैं शरमा गया। मेरी आंखें झुक गई।
“मेरे भोले देवर, तू तो बुद्धू ही रहेगा !” और वो हंस दी।
इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो चुका था और पजामे में तम्बू जैसा तना हुआ था। भाभी ने मेरा कड़क लण्ड देखा तो उसके मुख से आह निकल गई। वो उठ कर चल दी। आज तो भाभी का मन बाग बाग हो रहा था। रात को भी भाभी ने मुझे खाने के बाद मिठाई भी खिलाई, फिर मेरा चुम्मा भी लिया। अब मेरे दिल में भाभी के शरीर की सम्पूर्ण रचना बस गई थी। रह रह कर मुझे भाभी को चोदने को चोदने का मन करने लगा था। कल्पना में भाभी की रस भरी चूत को देखता, उनके भरी हुई उत्तेजक चूंचियों के बारे में सोचने लगता था। भैया नाईट शिफ़्ट के लिये जाने वाले थे। मैं भी अपने कमरे में कम्प्यूटर पर काम करने लगा। भैया के जाने के बाद भाभी मेरे कमरे में चली आई।
“भाभी, मम्मी-पापा सो गये क्या ?”
“हां सो गये, भैया के जाते ही वे भी सो गये थे, समय तो देखो ग्यारह बज रहे हैं।”
“ओह हाँ, मैं भी अब काम बन्द करता हूँ, भाभी एक चुम्मा दे दो !”
मैं उठ कर बिस्तर पर बैठ गया। भाभी ने लाईट बन्द कर दी और कमरा भी अन्दर से बन्द कर दिया।
“अब चाहे कितनी भी बाते करो, कोई डर नहीं !”
“भाभी आप कितनी सुंदर हैं, आपके प्यारे नरम होंठ बार बार चूमने को मन करता है !”
“सच … तुम भी बहुत अच्छे हो… मेरे दिल में बस गये हो।”
“मुझसे बहुत प्यार करती हो ना …?”
हमारी प्यार भरी बातें बहुत देर तक चलती रहीं। मेरा दिल बहुत खुश था… भाभी और मैं बिस्तर पर लेट चुके थे… भाभी ने अपने गीले होंठ एक बार फिर मेरे गीले होठों से चिपका दिये। मेरा डण्डा तन गया था। भाभी मेरी पीठ को सहलाते हुये सामने पेट पर हाथ ले आई। भाभी के कड़े स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। वो बार बार अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दबा कर रगड़ रही थी। मुझे लगा कि जैसे मैं भाभी को सचमुच में प्यार करने लगा हूँ। मैंने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया,”भाभी सच कहूँ तो मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तुम्हारे बिना अब नहीं रहा जायेगा !”
“आह, मेरे कमल, तुमने तो मेरे दिल की बात की बात कह दी, मैं भी कैसे रह पाऊंगी तुम्हारे बिना… ?!!”
“पर भाभी, बड़े भैया का क्या होगा…?”
“बड़े भैया अपनी जगह है, अपन दोनों को तो बस प्यार करना है सो करते रहेंगे !”
भाभी के हाथ मेरे शरीर पर इधर उधर फ़िसल कर मुझे रोमान्चित करने लगे थे। मेरी छाती पर सर रख कर वो लेट गई थी और प्यार भरी बातें करने लगी थी। क्या वो प्यार की प्यासी थी, या उन्हें शारीरिक तृप्ति चाहिये थी ? पर कुछ भी हो, मैं तो बहुत खुश था। भाभी अपने एक एक अंग को मेरे शरीर के ऊपर दबा रही थी, सिसक रही थी… चुम्बनों से मेरा मुख गीला कर दिया था। Antarvasna
सोनाली वर्मा Antarvasna
मेरी नई नई नौकरी लगी एक साल हो Antarvasna गया था. मेरे ऑफिस में एक ही लड़की मैं थी. मेरी टेबल के पास सुनील की टेबल थी. मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी. बाद में मेरी दोस्ती सुनील से हो गयी थी. मैंने उस से कहा कि वो अपनी सेक्स के पल अन्तर्वासना के पाठकों को भी बताये …जिस से सभी उन बातों का मजा ले सकें. सुनील होमो का शौकीन भी था. उसी की लेखनी से प्रस्तुत है यह कहानी.
हाय मेरा नाम सुनील है. मेरी नौकरी लगे हुए २ साल हो चुके हैं. मुझे कंपनी की तरफ़ से मकान मिला हुआ है. मेरे साथ वाला मकान कामिनी का है. ये मकान दो मकानों के जोड़े में है. जिसकी एक ही चारदीवारी है. और पीछे एक चौक है जो दोनों मकानों को एक दरवाजे के द्वारा जोड़ता भी है.
इन दिनों मेरा ऑफिस का एक दोस्त टूर पर आया हुआ था. मेरी ही उमर का था और कुछ कुछ मेरे ही तरह गोरा और लंबा था. उसका नाम रोहित था. रोहित दिन भर टूर पर रहता था शाम को ६ बजे तक वो लौट आता था .फिर हम रात को थोडी सी व्हिस्की भी पीते थे और सो जाते थे. उस दिन रोहित शाम को आया और नहा कर हम चाय पीने लगे. हम दोनों आपस में बात कर रहे थे. बातों बातों में उसने बताया कि आज वो एक हिन्दी में ब्लू सीडी लाया है. मैंने कभी ब्लू फ़िल्म नहीं देखी थी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि इसमे बूब्स चूसना, चुदाई करना, वगेरह खुला दिखाया जाता है. मेरे मन में भी बहुत इच्छा थी कि में ब्लू फ़िल्म देखूं. शाम को करीब ८ कबजे उसने सीडी लगाई. हमने एक एक जाम बनाया और पीते हुए देखने लगे. थोड़ी ही देर में स्क्रीन पर गरम गरम बातें होने लगी.
“रोहित …ये तो लंड ..चूत की भाषा बोल रहे हैं ..”
” हाँ इस में सब कुछ खुला ही बोलते हैं ..”
मैंने पहली बार ब्लू फ़िल्म देखी थी इस लिए मुझे मजा आने लगा. मेरा लंड भी धीरे धीरे कब खड़ा हो गया मुझे पता ही नहीं चला. अचानक मुझे लगा रोहित मेरे लंड की और देख रहा है. मैंने संभलते हुए ऊपर एक कपड़ा डाल लिया. में रात के हिसाब से पजामा पहना था, अंडरवियर सोते समय नहीं पहनता था. मेरी नजर उस पर गयी तो उसका लंड भी सीधा खड़ा था, पर वो उसे छुपा नहीं रहा था. बल्कि उसे धीरे धीरे मसल रहा था .
“क्या मस्त चुदाई चल रही है …”
“हाँ यार … उसकी चूत तो देख …” मैं बोला।
“और उसका लंड … क्या मोटा है …”
उसने मेरी जांघ पर हाथ रख कर दबाया. मेरे मन के तार झनझना गए.
मैंने कहा – “यार रोज ही एक सीडी ले आया कर … ये तो मस्त चीज है …”
उसने मेरे ऊपर से कपड़ा खींच लिया ..
“यार तू तो लड़कियों की तरह शरमा रहा है …”
“अरे … मत कर …न ”
“मर्द है तो खड़ा तो होगा ही … ये तो साधारण सी बात है …”
मैंने देखा कि उसका लंड भी जोर मार रहा था .. उसने सीधे ही मेरा लंड पकड़ लिया ..
“..ये तो बहुत कड़क हो गया है. .”
” इस को छोड़ यार … हाथ हटा …” मैंने उसका हाथ पकड़ लिया पर लंड छुडाया नहीं. वो समझ गया कि मुझे मजा आ रहा है. सच में उसने मेरा लंड पकड़ा तो में आनंद से भर गया था. मेरे मन में भी अब उत्तेजना भर गयी थी. मुझे लग रहा था कि वो मेरी मुठ मार दे ..बस. मैंने भी हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया.
“हाय संजू … अब जरा दबा दे …”
मैंने उसे दबा दिया. उसने तुंरत अपना पजामा उतर दिया. उसके पजामा उतारते ही मैंने उसके लंड कि सुपारी खोल दी. और सुपारी को उँगलियों से दबाने लगा.
“हाँ संजू …घिस डाल … अपना पजामा भी तो उतार दे …”
मैंने अपना पजामा उतार दिया. उसने तुंरत ही मेरे लंड को मसलना चालू कर दिया.
मेरे मुंह से भी सिसकारी निकल गयी … मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था.
“और जोर से पकड़ कर मुठ मार …ओ ऊ ऊई ईई ”
“संजू तुम्हारा लंड तो बहुत प्यारा है …मेरी गांड में घुसाओगे क्या …”
“तुम बताओ … कैसे घुसाते हैं ..”
वो बिस्तर पर घोडी बन गया. मेरे से कहा – “अपना लंड मेरी गांड में घुसा दो …” मैंने अपना लंड उसकी गांड में रखा और दबाने लगा पर वो नहीं जा रहा था. उसने कहा “थोड़ा थूक लगा कर चिकना कर दो …”
मैंने थूक लगा कर जोर लगाया तो मेरे लंड की सुपारी अन्दर घुस गयी. पर मेरे लंड में जलन होने लगी।सुपारी के नीचे वाली झिल्ली फट गयी थी. और लंड की चमड़ी पूरी तरह से ऊपर चढ़ गयी. मैंने घबरा कर लंड बाहर निकाल लिया.
“मुझसे नहीं होता है …ये सब ..”
“अच्छा तो तुम घोडी बन जाओ …”
उसने मुझे घोडी बनाया और कहा -“देखो मैं बताता हूँ …”
रोहित एक्सपर्ट था. उसने मेरी गांड में थूक लगाया और लंड गांड के छेद पर रख कर जोर लगाया तो उसकी सुपारी मेरी गांड के अन्दर घुस गयी. उसने मेरा लंड नीचे से पकड़ लिया. ये सब करने से मैं बहुत उत्तेजित हो उठा था. मेरा लंड कड़ा हो कर फटा जा रहा था .उसने धक्का लगा कर अपना लंड पूरा गांड में घुसा दिया.
“क्या चिकनी गांड है संजू ” … उसने मेरा लंड मसलते हुए कहा. बीच बीच में मुठ भी मारता जा रहा था .मुझे गांड मराने में मजा आने लगा. गांड का छेद टाइट होने से वो ज्यादा देर नही टिक सका. और धक्के मारते मारते वो झड़ गया.उसने लंड गांड में ही रहने दिया. और कस कस कर मेरे लंड की हाथ से मुठ मारने लगा. कुछ ही देर में मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है. मैं मस्ती में आँखें बंद किए था. मेरे लंड को मुठ मारने से अब कुछ कुछ होने लगा था. निकलने जैसा होने लगा था. अचानक अन्दर से लावा बाहर आने लगा.
“अरे …आ आह ह्ह्ह …आ अहह हह … ये क्या …अरे छोड़ मेरा लंड … ” कहते हुए मेरी धार अपने आप ही निकल पड़ी. उसने अब अपनी उँगलियों से लंड को हलके हलके खीचने लगा. मेरी पिचकारी रुक रुक कर निकलती रही. मुझे लगा मेरी गांड में से भी उसका वीर्य निकल रहा है. मैं बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया और तोलिये से मेरे लंड और गांड को पोंछने लगा.
रोहित मुस्कराया ..”मजा आया न …”
“हाँ ये मेरा पहला एक्सपेरिएंस था …”
“इसमे कोई बदनामी का कोई खतरा नही … अपने मजे करो … और अपना पानी निकाल दो …”
हम दोनों हंसने लगे।
…
देखा आपने, ये सुनील है. ये लड़के कितनी मस्ती मारते हैं. सुनील की होमो की कहानी आगे भी चलती रही.
पर मैं इसमे कहाँ थी … जी हाँ मैं इस कहानी मैं ही हूँ.
जानते हैं आप …अब मेरी कहानी सुने …
संजू की बैठक और मेरी बैठक आमने सामने है. मेरा बेड रूम और मेरा किचेन भी आमने सामने है. जब संजू बैठक में रहता है तो रात को लाइट बंद करके खिड़की पर बैठ कर उसे देखती रहती हूँ. कभी कभी वो कपड़े बदलता है तो नंगा भी हो जाता है. सभी कुछ साफ़ दिकता है. वो कोई सीडी देखता है तो उसके हाव भाव और हरकतें देखती रहती हूँ.
… पर यही नही, बदले में मैं भी बेडरूम में उसको दिखाने के लिए अपने स्तनों को दबाती हूँ. अंगडाई लेती हूँ. सोने से पहले अपने कपड़े पूरे उतार कर सकर्ट और टॉप पहनती हूँ. पर वो देखता है या नहीं मैं नहीं जानती हूँ.
मुझे वाइरल ज्वर हो गया था. मैं ऑफिस नहीं गयी थी. शाम को सुनील मिलने आया. मुझे देख कर बोला -“तुम्हे बुखार हो रहा है …चलो मै डॉक्टर को दिखा दूँ ” वो मुझे जबरदस्ती क्लीनिक पर ले गया. डॉक्टर ने ५ दिन की दवाइयाँ दे दी. हम वापस घर आ गए।
मैं तो ख़ुद अपना खाना पकाती थी. पर सुनील का टिफिन आता था. सुनील सामने अपने घर चला गया. थोडी ही देर में सुनील ने फिर दरवाजा खटखटाया – मैंने उसे अन्दर बुला लिया. वो अपना टिफिन लेकर आया था. उसने मुझे खाना खिलाया और फिर बचा हुआ ख़ुद उसने खाया और चला गया. मैं उसे देखती रह गयी. अब सुनील मुझे सुबह, दिन और शाम को देखने आता था … मेरी पूरी देख रेख करता था. पॉँच दिनों में मैं बिल्कुल ठीक हो गयी. मैं उसके अहसान से दब गयी. पर इस बारे में न वो कुछ कहता … ना मैं ही कुछ कहती. जब मैं खाना बनाती तो उसको जरुर भेजती थी. बाद मैं मैंने उसका टिफिन बंद करवा दिया. अब वो मेरे घर पर ही खाता था. वो जब किचेन की खिड़की पर होता तो मैं उसे हाथ हिलती और जो भी बनाती उसे बताती. हम दोनों अब बहुत घुल मिल गए थे. बल्कि ऐसा लगता था कि हमें एक दूसरे से प्यार हो गया है.
एक बार शाम को मैं बाज़ार से लौटी और कमरे में घुसी तो सामने खिड़की में से सुनील दिखा. वो अपना हाथ से अपने पजामे के ऊपर से लंड को दबा रहा था. मैंने बत्ती नहीं जलाई और देखती रही और रोमांचित हो उठी. वो बेखबर हो कर कभी लंड को सीधा करता और अपनी मुट्ठी में भर लेता और दबाता. कभी उगलियों से लंड दबा कर ऊपर नीचे करता. उसने अब अपने पजामे का नाडा खोला और अपने लंड को बाहर निकाला. और देखता रहा. फिर उसने अपने लंड की चमड़ी ऊपर कर दी. उसका एक तो इतना मोटा लंड फिर लाल लाल मोटी सुपारी … मैं तो सिहर उठी … मेरे बदन में चींटियाँ रेंगने लगी. मैं उत्तेजित हो उठी. मेरे स्तनों में कड़ापन आने लगा. चुंचियां कड़ी होने लगी … उसने तभी अपना रिमोट उठाया और कोई बटन दबाया …
ओह ! तो सुनील कोई फ़िल्म देख रहा था … पर कैसी फ़िल्म?
मैं किचेन में गयी …और आइस की केन उठाई. पीछे के दरवाजे से मैंने उसका दरवाजा खटखटाया. उसने तुंरत ही उठ कर दरवाजा खोल दिया. पर अपने खड़े हुए लंड को नहीं छुपा सका. मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी. खड़ा लंड देख कर मैं शरमा गयी वो भी झट से हाथ से छिपाने की कोशिश करने लगा. मैं अन्दर आ गयी. इतने में सुनील लपक कर आया – “रुक जाओ कामिनी ..”
पर मैं अन्दर आ चुकी थी … उसने सीडी का मैं स्विच ही बंद कर दिया. मैंने ब्लू फ़िल्म की झलक देख चुकी थी. अनजाने बनते हुए पूछा -“कोई अच्छी फ़िल्म थी …बंद क्यूँ कर दी …”
“कुछ नहीं … ऐसे ही …” वो हडबडा गया “कोई काम था क्या …”
“हाँ बर्फ लेने ई थी …”
उसने अपना फ्रीज खोला और ट्रे खाली कर दी. मैंने इतनी देर में उसे छेड़ने के लिए सीडी का स्विच ओन कर दिया. फ़िल्म फिर से चलने लगी. सुनील ने जल्दी से आकर फिर से बंद करदी.
“कामिनी मत देखो …ये बडों की फ़िल्म है …”
“अच्छा नहीं देखती ..बस … पर खिड़की तो बंद कर लिया करो … फ़िल्म से अच्छा तो वो सीन था ..”
सुनील घबरा गया. मैं उसे देखती रही.
“मुझे भी दिखा दो ..बड़ों की ये फ़िल्म ..” मैंने फिर से सीडी ओन कर दी …चुदाई के सीन चल रहे थे … मैंने पहली बार ब्लू फ़िल्म देखी थी … मेरे रोंगटे खड़े हो गए … मेरी टांगे काम्पने लगी … मैं वहीं कुर्सी पर बैठ गयी …
“सुनील .. ये क्या … हाय रे. …”
“बस देख तो लिया …बंद कर दो प्लीज़ ..”
” प्लीज़ सुनील …देखने दो न …” मैंने रिक्वेस्ट की. सुनील पास ही खड़ा था. मैंने उसकी टांग पकड़ ली. और अपनी तरफ़ खीच ली.
“सुनील ये बड़ों की फ़िल्म नही है …ये तो हम जैसे जवानों के लिए है …देखो तो सही ..”
मैंने पजामे से हाथ ऊपर बढ़ा कर उसके चूतडों को पकड़ लिया .और जोश में अपनी तरफ खींचने लगी. मैं सब कुछ भूलती जा रही थी. जाने कब उसका लंड मेरे मुंह के करीब आ गया. और मेरे मुंह अपने आप खुलते गए. एक मोटा मोटा नंगा लंड मेरे मुंह में घुसता चला गया. सुनील भी सब कुछ भूल कर अपना लंड बाहर निकल कर मेरे मुंह से सटा दिया. मैंने उसके लंड को चूसना चालू कर दिया. मैं मस्त हो उठी. सुनील भी मेरे मुंह में धक्के मरने लगा. मैं कुर्सी से उठी और उस से लिपट गयी …
“सुनील …अब रहा नही जाता है. .प्लीज़ अब कुछ करो न …” मैं बहुत उत्तेजना से भर उठी.
सुनील ने मुझे लिपटा लिया और बेतहाशा चूमने लगा.
मैंने अपने आप को सुनील के हवाले करते हुए कहा – “प्लीज़ संजू मुझे चोद दो … देखो मैं कैसी तड़प रही हूँ .”
उसने प्यार से मेरे चेहरे को ऊपर उठाया … और किस करते हुए बोला – “हाँ मेरी कामिनी … अब तुम जरूर चुदोगी .. मेरा लंड …देखो तो फूल कर फट जाएगा .”
उसने मुझे बाँहों में उठाया और धीरे से बिस्तर पर लेटा दिया. उसने मेरी साड़ी उतर दी. फिर प्यार से ब्लाउज उतर दिया, पेटीकोट भी खोल डाला …अब में बिल्कुल नंगी सुनील के सामने चुदने के लिए लेटी थी .वो मेरे हुस्न को निहार रहा था. वो भी नंगा था. उसका लंड देखते मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया. मैं चुदने के लिए बेकरार हो उठी थी. मेरी चूत पानी से तर हो चुकी थी. वो मेरे ऊपर सवार हो गया. तभी मेरी चूत में कुछ चीरता हुआ अन्दर घुस गया. मैं तड़प उठी. चूत को ऊपर उठाते हुए बोली – राजा लो …और अन्दर घुसेड दो …” उसने दूसरे झटके में पूरा लंड जड़ तक घुसा दिया. मैं निहाल हो उठी. अब वो मेरी पूरी जवानी को मसल रहा था. मेरे उभरे हुए स्तनों को भींच भींच कर मसल रहा था. उसकी जवानी और मेरी जवानी टकरा उठी … आग जल उठी … दोनों ऐसे चिपक कर जवानी का मजा ले रहे थे जैसे एक जिस्म हो. चेहरा से चेहरा रगड़ खा रहे थे .फच फच की आवाजें बढती जा रही थी. मस्ती की चीखें जोर पकडती जा रही थी. मेरे चूतड नीचे से तेजी से उछल उछल कर लंड को ले रहे थे. मैं सिस्कारियां …आहें भर रही थी … जाने क्या क्या बोलती जा रही थी. .. “चोद ऐ रे संजू …आ आह्ह … फाड़ दे मेरी चूत … … दे लंड …और दे लंड आ अह्ह्छ मेरे राजा … हाय ..रे …चुद गयी …राजा …”
मेरी उत्तेजना हदें पर कर गयी. और अचानक जैसे ठंडी फुहार बरसने लगी … सुनील का मस्ती भरा रस बरसात की तरह फुहारे छोड़ रहा था. रुक रुक कर मेरे स्तनों पर बरसात कर रहा था. मैं भी अपना रस छोड़ चुकी थी …दोनों का ज्वार उतरने लगा. मैं निढाल हो गयी. सुनील को मैंने जोर से छाती पर भींच लिया. और उसे साइड में करवट लेकर चिपक कर लेट गयी. हमारी सांसे अब सामान्य होने लगी थी.
सुनील ने उठ कर …”कामिनी खाना खा कर सोना …उठो ..”
मैं हंस पड़ी …”अरे …सोता कौन है … अभी तो सारी रात पड़ी है …” Antarvasna
दोस्तो, मैं अजय 32 साल का हूं Antarvasna और यह कहानी तब की है जब मैं 25 साल का था।
मैं दसवीं के विद्यार्थियों को ट्यूशन पढ़ाया करता था। मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था, पति-पत्नी, उनकी 5 लड़कियाँ, एक लड़का और बच्चों के दादा। बड़ी लड़की दसवीं में पढ़ती थी। आदमी दिल्ली में नौकरी करता था।
मुझे ट्यूशन पढ़ाते देख सीता भाभी ने मुझे अपने घर बुलाया और कहा -मेरी बेटी की दसवीं की परीक्षा है, घर की हालत ठीक नहीं है, क्या आप उसको कभी कभार दस-बीस मिनट कभी भी शाम को या रात में थोड़ा पढ़ा देंगे?
मैंने कहा- हाँ! क्यों नहीं! कल से ही आ जाऊँगा।
दूसरे दिन फ़िर उसने मुझे कहा तो रात को मैं उनके घर चला गया, थोड़ी देर पढ़ाया और चला आया। फ़िर मैं रोज़ जाने लगा। पढ़ाई के समय सीता भाभी हमारे पास ही बैठती थी।
एक रात जब मैं पढ़ा रहा था तो सीता ने अपनी बेटी के सामने ही कहा- आप बहुत थक जाते होंगे, लाईये मैं आपके पैर दबा दूं!
पता नहीं क्यों मैं भी इन्कार ना कर सका और वो मेरे पैर दबाने लगी। मेरे शरीर में कुछ हलचल सी होने लगी। थोड़ी देर में मैं वहाँ से चला आया पर रात भर नींद नहीं आई क्योंकि पहली बार किसी औरत ने मेरे बदन को छुआ था।
अगले दिन से वो रोज़ मेरे पाँव दबाने लगी, पर उसका हाथ धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगा। एक दिन वो जिद करके तेल लगाने लगी। उस समय मैं उसकी बेटी को बायोलोज़ी पढ़ा रहा था। अचानक वो मेरे लण्ड पर तेल लगाने लगी। मेरा लण्ड खड़ा हो गया। जब मैंने उसकी ओर देखा तो वो मुस्कुराने लगी। जब मैंने आने लगा तो उसने कहा कि पेट दर्द की कोई दवाई हो तो देना।
करीब 9 बजे मैं दवाई देने गया तो दरवाज़ा खुला था, सीता के ससुर सोए हुए थे, मेर हाथ पकड़ कर वो मुझे अपने कमरे में ले गई। बच्चे दूसरे कमरे में सोए हुए थे। उसने भीतर से दरवाज़ बन्द किया और तेल लेकर आई और बोली- उस समय ठीक से लगा नहीं पाई थी। वो तेल लगाने लगी पर कुछ देर बाद तेल के बहाने वो मेरे लण्ड को सहलाने लगी। मेरा लण्ड तो पूरा खड़ा हो गया। मेरी सहनशक्ति समाप्त हो गई। मैंने उसे बाहों में कस कर जकड़ लिया और धीरे धीरे उसे बिछावन पर ले गया।
बिछावन पर जाते ही उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैं भी कुछ नहीं बोला। वो साली मेरा लण्ड खाने को बेताब थी ही। उसने सहलाते सहलाते मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। लण्ड चूसते हुए वो अपनी कमर भी ऊपर नीचे कर रही थी। मैं तो जैसे ज़न्नत में था। मेरे मुंह से ओह! भाभी और जोर से! ओह सीता ओह! मेरी रानी और तेज़! जैसे शब्द निकल रहे थे। उसकी कमर ऊपर नीचे होती देख मैंने पूछा- भाभी! यह क्या कर रही हो, तो उसने झट मेरा हाथ पकड़ कर अपनी बुर पर रख दिया। उससे पानी निकल रहा था।
अब उसने मेरी उंगली अपनी बुर में जोर से ठेल दी। उंगली घुसते ही उसने ज़ोर से ओह! कहा और बोला- देवर जी, एक उंगली और घुसा दो मेरी चूत में… और तेजी से अन्दर बाहर करो और मेरी बुर को चोदो।
मैंने पूछा- भाभी, क्या इसे ही चुदाई कहते हैं?
तब उसने कहा- देवर जी! तुम पढ़ाई में तो काफ़ी तेज़ हो पर चुदाई में निरे बुद्धू हो। यह तो तुम उंगली से चोद रहे हो, पर जब तुम अपना यह मोटा हथियार मेरी बुर में घुसाओगे तब होगी असली चुदाई। पर वो सब बाद में। अभी तो तुम 69 की अवस्था में हो कर उंगली ही अन्दर बाहर करो।
मैं वैसा ही करने लगा जैसा भाभी ने बताया। वो सेक्स के जोश में गंदी गंदी बातें कहने लगी।
मैं पेल रहा था और वो कहती जा रही थी- जोर से और जोर से मेरे राज़ा! मेरे पति ने तो कभी ऐसे प्यार ही नहीं किया, साला सिर्फ़ लण्ड पर तेल मालिश करवाता है। जब लण्ड खड़ा होता तो मेरे गर्म ना होते हुए भी लण्ड मेरी बुर में घुसा देता है और अपना धात जल्दी ही गिरा कर सो जाता है। इस भौंसड़ी बुर ने भी छः कैलेण्डर निकाल दिए पर इसकी आग शान्त नहीं हुई। पर मेरे राज़ा तुम नादान हो, जैसा मैं कहती हूँ तुम वैसा करो, तुम चुदाई जल्दी ही सीख जाओगे। मैं तुम्हारा लण्ड चूस कर इस पर तेल लगा कर घोड़े जैसा बना दूंगी, फ़िर उस घुड़लण्ड से रोज़ चुदवाऊँगी।
इतना कह कर सीता भाभी ने फ़िर मेरा लण्ड चूसना शुरू कर दिया। मैं भी अपनी उत्तेज़ना में उसकी बुर में अपनी तीन उंगली तेजी से घुसा निकाल रहा था, पर छः बच्चों के जन्म ने उसकी बुर का भौन्सड़ा बना दिया था। अतः उंगली कहाँ जाती, पता ही नहीं चलता। वो वाह रे मेरे राज़ा! तेजी से करो, जैसे शब्द कह कर शान्त पड़ गई, वो झड़ गई।
इतने में मैंने कहा- भाभी! मेरे भीतर से कुछ निकलने वाला है!
इतना सुन कर उसने मेरे लण्ड को मुंह से निकाला और हाथ से मेरे लण्ड को आगे पीछे करने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ ही देर में मेरे लण्ड से फ़व्वारा निकला और उस की साड़ी पर गिरा। उसने हंसते हुए कहा कि देवर जी, सारी साड़ी खराब कर दी ना! अब अपनी भाभी को नई साड़ी ला कर देना। पर कोई बात नहीं, अब तो मेरी साड़ी रोज़ खराब होनी है, क्योंकि जब तक तेरे भैया नहीं आ जाते, मैं तो तुमसे रोज़ चुदवाऊँगी, तुझे चुदाई में एक दम होशियार कर दूंगी। पर उनके आने के बाद भी मुझे छोड़ना नहीं, उनका लण्ड तो पुराना हो गया है पर तेरा तो जवान है। मैं समय निकाल कर तुमसे जरूर चुदवाऊँगी।
इतना कह कर वो बाहर गई, पानी लाई और मेरा लण्ड साफ़ किया और फ़िर से मेरा लंड चूसने लगी। तो मैंने कहा- अभी जाने दो, कल आऊँगा।
उसने कहा- ठीक है! कल तुम्हें असली चुदाई सिखाऊँगी और मजा दूंगी। Antarvasna
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