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आजकल की बीवियां बड़ी पढ़ी लिखी, स्मार्ट, ओपन-माइंडेड और बोल्ड होती हैं।
वो अपना रास्ता खुद निकालतीं हैं और किसी के सहारे नहीं रहतीं।
बीवियां हर वो काम कर लेती हैं जो उनके मर्द करते हैं।
वैसे मर्दों का काम है चोदना और औरतों का काम है चुदवाना!
लेकिन आजकल बीवियां भी चोदने का काम करती हैं और मर्द चुदने का काम!
मर्द अगर बुर चोदता है तो औरत लण्ड चोदती है।
औरत अगर अपनी बुर चुदवाती है तो मर्द अपना लण्ड चुदवाता है.
पहले मियां अपनी बीवी को वाइफ स्वैपिंग के लिए मनाता था और बीवियां बड़े नखरे दिखा दिखा कर मानतीं थी पर आज ज़माना बिल्कुल बदल गया है।
अब तो अदल बदल कर चुदाई के खेल में बीवियां ही पहल करती हैं और एक दूसरे के पति से बिंदास चुदवाती हैं।
वे खुद अपने अपने मियाँ को तैयार करती हैं और हसबैंड स्वैपिंग करती हैं।
एक ऐसी ही सच्ची हस्बैंड स्वैपिंग सेक्स कहानी मैं मिसेज राधिका सिन्हा आपको सुनाने जा रही हूँ!
मेरा नाम मिसेज राधिका है यह तो आप जान ही गए हैं मेरे प्यारे दोस्तो!
मेरी शादी के 2 साल हो चुके थे और मैं अपना वैवाहिक ज़िन्दगी अच्छी तरह जी रही थी.
लेकिन एक बात जरूर थी कि रोज़ रोज़ वही लण्ड पकड़ते पकड़ते, वही लण्ड चाटते चूसते, वही लण्ड चूत में पेलवाते पेलवाते बहुत बोर हो चुकी थी।
मुझे लगा कि अब कोई नया लण्ड मिले तो अच्छा हो।
मैं बस नए लण्ड की तलाश करने लगी।
एक दिन अचानक मेरी मौसी की बेटी ललिता का फोन आ गया।
वह बोली- दीदी, हम दोनों मुंबई आ रहे हैं।
मैंने बड़ी गर्म जोशी से कहा- हां हां बिल्कुल आ जाओ। कौन सी फ्लाइट से आ रही हो?
उसने डिटेल बताया तो मैंने नोट कर लिया।
शाम को मैंने इसका ज़िकर अपने पति राघव से किया तो वह बड़ा खुश हुआ।
अगले सवेरे हम दोनों उसे रिसीब करने एयरपोर्ट पहुँच गए।
जब वह आई तो मुझसे लिपट गयी।
मैं उसके पति हरीश से मिली। वह भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम था।
मेरा पति ललिता को देख कर ललचा गया ऐसा मुझे उसके हाव भाव से मालूम हो गया।
हम लोग घर आ गए.
नाश्ता तैयार था ही!
वो लोग भी फ्रेश होकर आ गए और हम सब नाश्ता करके बाहर निकल पड़े।
दिन में थोड़ा घूमे दोपहर में एक पिक्चर देखी और शाम को बगीचे में घूमने लगे।
तब तक हम दोनों कपल एक दूसरे के काफी करीब आ चुके थे।
मैं ललिता से बातें करने लगी और वो दोनों अलग!
अब तक हमारी बातें और तरह की थी पर अब मैं और तरह की बातें करनी शुरू कर दी।
मैंने कहा- अच्छा ललिता, ये बताओ कि तुम एक ही मरद के साथ सेक्स करते करते बोर नहीं हो जाती हो?
वह बोली- अरे दीदी, आपने कहाँ दुखती रग पर हाथ रख दिया। सच बताऊँ यार मैं तो बहुत बोर हो जाती हूँ पर करूं क्या? मन मार कर रह जाती हूँ।
“तो फिर कोई ज़रिया कभी तलाशने की कोशिश की?”
“ज़रिया हो भी क्या सकता है? एक पराये मरद के अलावा और क्या हो सकता है पर कोई भरोसे वाला मिलता भी तो नहीं है.”
“अच्छा अगर मिल जाए तो?”
“मिल जाए तो मैं उसे नंगा करके सबसे पहले उसका लण्ड देखूंगी।”
“ऐसा क्यों कि तुम सबसे पहले लण्ड देखोगी?”
“इसके दो कारण हैं दीदी … एक तो लण्ड सबके अलग अलग होते हैं तो एक नया लौड़ा देखने को मिलेगा। और दूसरा कि चुदवाने के लिए सिर्फ लण्ड की जरूरत है बाकी का मुझसे क्या लेना देना?”
“अच्छा अगर कोई तेरे मरद का लण्ड ले ले तो?”
“मैं अपने मरद का लण्ड उसी को दूँगी जो खुद अपने मरद का लण्ड मुझे देगी।”
“इसका मतलब है कि तू लण्ड की अदला बदली करने को तैयार है?”
“हां कर लूंगी। मैं बिंदास हूँ, बोल्ड हूँ, पढ़ी लिखी हूँ, यह तो Lund Swapping है, कर लूंगी।”
“तेरा हसबैंड क्या मान जाएगा इसके लिए? वह नाराज़ तो नहीं होगा? उसे बुरा नहीं लगेगा?”
“मेरा हसबैंड भोसड़ी का मेरी मुठ्ठी में रहता है दीदी। जैसे मैं उसके लण्ड को मुठ्ठी में रखती हूँ वैसे ही मैं उसको भी मुठ्ठी में रखती हूँ।”
“अगर मैं तेरे मरद के लण्ड को अपनी मुठ्ठी में ले लूँ तो?”
“तो फिर मैं तेरे मरद के लण्ड को मुठ्ठी में ले लूंगी दीदी।”
“यही तो मैं चाहती हूँ।”
वह बड़ी जोर से हंस पड़ी और बोली- वाह दीदी वाह … तुमने तो मेरे मुंह से सब कुछ उगलवा लिया। अब मैं हसबैंड स्वैपिंग के लिए तैयार हूँ और मैं आज ही जीजू का लण्ड पकड़ कर देखूंगी।
मैंने कहा- अब तुम अभी से अपने जीजू को रिझाने में जुट जाओ, उसके लण्ड में आग लगा दो। मैं तेरे पति को रिझाऊंगी और उसके लण्ड में आग लगा दूँगी।
“चलो अब हम एक दूसरे के पति से खूब मस्ती वाली बातें करें और उनके लण्ड में आग लगा दें।”
फिर मैं उसके पति से खुल कर बातें करने लगी और वह मेरे पति से!
जैसे ही हम लोग घर वापस आये वैसे ही एक दूसरे के पति के आस पास घूमने लगीं।
हम दोनों ने कपड़े बदले, भड़कीले और छोटे कपड़े पहन कर सोफा पर बैठ गयीं।
न मैंने ब्रा पहनी और न उसने!
हम दोनों अपनी अपनी बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियों की झलक एक दूसरी के पति को दिखाने लगीं, अदायें भी दिखाने लगी और थोड़ा गन्दी गन्दी मजाक भी करने लगी।
मेरा पति उसका जीजू और उसका पति मेरा बहनोई तो मजाक का रिश्ता भी था हमारा।
फिर हम सब ड्रिंक्स पर बैठ गए।
पीती मैं भी हूँ और ललिता भी!
वो दोनों भी एक दूसरे की बीवी की तरफ आकर्षित होने लगे।
मैंने अपने पति से कहा- क्या बात है, ललिता की तरफ बहुत देख रहे हो तुम?
ललिता बोली- तो क्या हुआ दीदी … वह मेरा जीजू है मैं उसकी साली हूँ। अब अपनी साली को नहीं देखेगा तो किसको देखेगा? तुम्हारा मन हो तो तुम भी अपने बहनोई को देखो न दीदी, मना किसने किया है?
मैंने आँख मार कर बड़ी सेक्सी अदा से कहा- मैं तेरे पति को भी देखूंगी और तेरे पति का भी देखूंगी.
ललिता बोली- हाय दईया, तो फिर मैं भी तेरे पति का देखूंगी दीदी! मैं किसी से कम नहीं हूँ।
हमारी बातों का मतलब वो दोनों अच्छी तरह समझ रहे थे।
थोड़ा नशा और चढ़ा तो मस्ती भी और बढ़ गयी।
ललिता ने अपनी बांहें मेरे पति के गले में डाल दीं और उसके गाल चूम कर बोली- जीजू आज तुम मुझे बड़े अच्छे लग रहे हो।
मैं भी हरीश से चिपक कर बैठ गयी और उसकी जांघ पर हाथ रख कर सहलाने लगी।
उसका भी हाथ मेरे बदन पर आ गया और वह भी मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगा, फिर धीरे धीरे मेरी चूचियों पर आ ही गया.
उसने मेरी चूचियाँ दबायीं तो मैंने भी उसका लण्ड ऊपर से ही दबा दिया।
न उसने मना किया और न मैंने!
हम दोनों एक दूसरे को समझ गए कि अब क्या करना है.
उधर ललिता तो मेरे पति का लण्ड ऊपर से ही बड़ी जोर जोर से दबा रही थी।
वह भी ललिता के बूब्स दबाने लगा।
हमारे इस हाव भाव से मामला बिल्कुल साफ़ हो गया था कि हम दोनों एक दूसरे के पति से चुदवाना चाहती हैं और वो दोनों एक दूसरे की बीवी चोदना चाहते हैं।
हम लोग कुछ भी नहीं बोल रहे थे लेकिन हाथ हम सबके चल रहे थे।
हमारे हाथ ही बोल रहे थे कि अब आगे क्या होने वाला है.
मेरे पति ने ललिता के बूब्स खींच कर बाहर निकाल लिया।
इधर उसका पति भी मेरी ब्रा खोल कर मेरे दोनों बूब्स निकाल कर चाटने लगा और बोला- वाह वाह दीदी, क्या मस्त चूचियाँ हैं आपकी! कितनी बड़ी बड़ी और मस्त सुडौल हैं बूब्स आपके! बड़ा मज़ा आ रहा है इन्हें चाटने में चूसने में!
उधर मेरा पति बोला- वाह साली साहिबा, क्या मस्त और खूबसूरत हैं तेरी चूचियाँ! साली की चूची और साली की चूत बहुत नसीब वालों को मिलती है। आज मैं वाकई बड़ा नसीब वाला हूँ।
ललिता बोली- हाय दईया जीजू, आपने अभी मेरी चूत तो देखी ही नहीं!
उसने हाथ ललिता के पेटीकोट में घुसेड़ दिया और कहा- मेरा हाथ तो देख रहा है न? अभी मेरी आँखें भी देखेंगीं तेरी मस्तानी चूत!
इधर उसका पति मुझे एकदम नंगी करने पर तुला था, जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतार कर फेंक रहा था।
वैसे कपड़े कोई ख़ास थे भी नहीं!
पहले मैं मादर चोद नंगी हो गयी और फिर मेरे सामने बुर चोदी ललिता भी बिल्कुल नंगी हो गयी।
संयोग तो देखिये कि छोटी छोटी झांटें उसकी चूत पर भी थीं और छोटी छोटी झांटें मेरी चूत पर भी थीं।
कुछ भी हो लेकिन दोनों की चूत बड़ी सेक्सी लग रही थी।
इतने में मैंने हरीश को एकदम नंगा कर दिया।
उसका लौड़ा खड़ा हुआ था।
लण्ड देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई। आज शादी के बाद मैं पहली बार किसी पराये मरद का लण्ड देख रही थी।
वैसे शादी के पहले मैं कई लण्ड पकड़ चुकी थी। मतलब यह कि मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। कई लड़कों से चुदी थी।
इसीलिए मुझे शादी के बाद पराये मरद के लण्ड की जरूरत बहुत महसूस हो रही थी।
बात करने पर ललिता ने बताया- दीदी, मैं भी शादी के पहले खूब चुद चुकी थी। एक अंकल ने मुझे कई बार चोदा था और कॉलेज के दो लड़कों से मैं खुद बड़े मजे से चुदवाती थी। शादी के बाद मुझे भी कोई लौड़ा नहीं मिला तो मैं भी तरस रही थी। आज मेरी तमन्ना पूरी होगी।
फिर हमने प्लान बनाया कि आज हम दोनों एक दूसरे के पति से चुदवायेंगी जरूर और अब वही होने जा रहा है।
मैं उसके पति का लण्ड हिलाने लगी और वह मेरे पति का लण्ड!
दोनों ही लण्ड बड़े मस्त और तगड़े तंदुरुस्त थे; दोनों लण्ड के टोपा चमक रहे थे।
दो सोफे आमने सामने पड़े थे।
एक में मैं नंगी और उसका पति नंगा दूसरे में वह नंगी और मेरा पति नंगा।
ललिता मेरे पति का लण्ड चूसने और मैं उसके पति का लण्ड।
मैं हरीश का लण्ड उसकी आँखों में आंखें डाल कर चूस रही भी मेरे मियां का लण्ड उसकी आँखों में आँखें डाल कर चूस रही थी।
इससे अब न मुझे कोई शरम थी और न उसे!
मैंने कहा- यार ललिता, तेरे पति का लण्ड बड़ा खूबसूरत और मोटा तगड़ा है। बहनचोद देखो न … मेरे हाथ में आकर कितनी मस्ती से उछल रहा है।
उसने कहा- ये लण्ड भोसड़ी का … परायी बीवी के हाथ में जाकर ज्यादा ही उछलने लगता है। अब देखो न तेरे पति का लण्ड मेरे हाथ में कैसे फुफकार रहा है?
मजे की बात यह थी कि झांटें दोनों लण्ड की बिल्कुल साफ़ थीं। पेल्हड़ भी दोनों के एकदम चिकने थे।
मुझे तो ऐसे ही लण्ड पसंद हैं। ऐसे लण्ड चाटने में बड़े अच्छे लगते हैं।
ललिता भी बड़ी मस्ती से मेरे पति का लण्ड चाटने में जुटी थी।
वह बोली- अरे दीदी, जीजू का लण्ड इतना जबरदस्त है … अगर तूने पहले पकड़ाया होता तो अब तक जाने कितनी बार इससे चुदवा चुकी होती!
इतने में सबको जोश आ गया और हरीश ने लण्ड मेरी चूत में पेल दिया।
मेरे मुंह से निकला- उफ़ … बड़ा मोटा लण्ड है तेरा यार! मेरी तो बुर फट जाएगी बहनचोद, इतना मोटा लण्ड पहले कभी नहीं घुसा मेरी चूत में! हाय रे … आज मेरी चूत में छक्के छूट जायेंगे।
तब तक मेरे पति ने भी लौड़ा ललिता की बुर में ठोक चुका था।
वह बोली- उई माँ … मर गयी मैं! इस भोसड़ी वाले जीजू ने फाड़ दी मेरी बुर! हाय अब मैं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही। जीजू बड़ा बेशरम है तेरा ये मादरचोद लण्ड? धीरे धीरे चोदो न जीजू? मैं कहीं भाग नहीं जाऊँगी। चुदवा कर ही जाऊँगी तुमसे!
कुछ देर बाद वह बोली- क्या यार जीजू … पूरा लौड़ा पेल पेल के चोदो न? धीरे धीरे नहीं … तेज तेज चोदो, मर्दों की तरह चोदो मेरी बुर! बड़ा मज़ा आ रहा है। वाह वाह क्या मस्त लौड़ा है तेरा? फाड़ डालो मेरी बुर … चीर डालो मेरी बुर!
वह मस्ती मे कुछ भी बोलती जा रही थी।
इधर मैं भी बोल रही थी- हाय मेरे हरीश राजा, मुझे खूब चोदो, अपनी बीवी की तरह चोदो मुझे, मैं तेरी ही हूँ मुझे गपागप चोदो! हाय रे बड़ा गज़ब का है तेरा लण्ड … मुझे ऐसा ही लण्ड पसंद आता है. मेरी चूत ऐसे ही लण्ड खाती है. हाय राम हो ही ओहो हो बड़ा मज़ा आ रहा है आओ हूँ ओ हा ऊँ हूँ ओ ह्हो … क्या मस्त चुदाई है यार!
हम दोनों इसी तरह सिसियाती जा रही थी और मजे से चुदवाती भी जा रही थी।
हरीश बोला- यार राघव, मुझे अपनी बीवी के सामने तेरी बीवी चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है।
मेरे पति राघव ने कहा- हां यार हरीश, मुझे भी अपनी बीवी के सामने तेरी बीवी चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है. ऐसा मज़ा बहनचोद पहले कभी नहीं आया। एक बात और है मुझे अपनी बीवी चुदवाने में भी मज़ा आ रहा है।
मैं यह सुनकर बहुत खुश हो गयी। मैं चाहती थी कि मेरा पति अपनी बीवी चुदवाना शुरू कर दे तो सब काम बन जाए।
तब तक ललिता बोली- अरे जीजू, जो अपनी बीवी चुदवाता है वही दूसरे की बीवी चोद पाता है। मैं तो कहती हूँ कि तुम लोग रोज़ ही चुदवाओ अपनी बीवी और चोदो दूसरों की बीवियां! जाने कितनी बीवियां तुम्हारे जैस लोगों से चुदवाने के लिए तैयार हैं.
ललिता ने भी वही कहा जो मैं चाहती थी।
बस दोनों को और जोश आया तो वो हमें पीछे से चोदने लगे और फिर लण्ड पे बैठा बैठा के भी चोदने लगे।
आखिर में जब हम दोनों ने एक दूसरे के पति के झड़ते हुए लण्ड चाटे तो उसका आनंद कुछ और ही था जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता.
हमने महसूस किया कि चुदाई में रोज ऐसा ही मज़ा आये तो अच्छा हो!
फिर हम सबने नंगे नंगे ही खाना खाया, खूब गन्दी बातें की और थोड़ा इधर उधर घर में ही घूमे।
उसके बाद फिर इन लोगों ने हमें दो दो बार चोदा; तब हम लोग थोड़ा सोये।
ललिता जब तक रही, तब तक वह हर रोज़ रात को मेरे पति से चुदवाती रही और मैं उसके पति से चुदवाती रही।
उसके जान के करीब एक हफ्ते बाद उसका फोन आया।
उसने कहा- दीदी, अभी कल ही मेरी एक दोस्त कला अपने हसबैंड के साथ मुंबई गयी है। मैं उसके साथ चोदा चोदी कर चुकी हूँ। मैंने उसे तेरा फोन नंबर दे दिया है। उसके हसबैंड लौड़ा बड़ा मस्त है, ज्यादा बताऊंगी तो तेरा मज़ा किरकिरा हो जायेगा। अब तुम खुद पकड़ कर देख लेना उसका लण्ड! और जीजू से कहना कि कला की बुर खूब अच्छी तरह चोदे क्योंकि वह भोसड़ी वाली बड़ी मस्त है चुदवाने में। लण्ड का पूरा मज़ा लेती हैं और पराये मर्दों से जम कर चुदवाती है।
उसकी बातों ने मेरी चूत में आग लगा दी।
बस 2 मिनट में ही फोन फिर बजने लगा।
मैंने जैसे ही हेलो कहा वैसे ही वह बोली- दीदी, मैं कला बोल रही हूँ मुझे आपके बारे में ललिता ने बताया है।
तो मैंने कहा- मेरी बात ललिता से हो गयी है। तुम लोग आज शाम को 8 बजे मेरे घर पर डिनर के लिए आ जाओ।
तब तक मेरा पति भी आ गया।
मैंने उसको यह खबर सुनाई तो वह बड़ा खुश हुआ और बोला- यार राधिका, मेरा एक दोस्त देवा भी आज शाम को अपनी बीवी दिव्या के साथ आ रहा है। मैंने उन्हें डिनर पर बुला लिया। वह हमारे साथ वाइफ स्वैपिंग करने आ रहा है।
मैं तो यह सुन कर दुगुना खुश हो गयी कि अब आएगा असली मज़ा … तीन तीन कपल जब अदला बदली करेंगें तो मज़ा भी तिगुना हो जायेगा।
मैंने फिर फटाफट सारा इंतज़ाम कर लिया।
शाम को जब सब लोग इकट्ठे हो गए और एक दूसरे से परिचय हुआ तो सब बड़ी मस्ती में आ गए।
मेरे पति ने देवा को बता दिया कि कला और रोहित भी वाइफ स्वैपिंग के लिए ही आए हैं तो वो दोनों बहुत ही खुश हुए।
इधर कला को जब मालूम हुआ कि आज सेक्स पार्टी में 3 कपल होंगे तो वह ख़ुशी से उछल पड़ी।
मैंने हॉल में गद्दा वगैरह बिछा कर पूरी तैयारी कर ली थी और फिर हम सब बैठ कर मदिरापान करने लगे।
दिव्या बोली- अरे राधिका, बहुत अच्छा किया। ग्रुप सेक्स करने के पहले थोड़ा सरूर आना जरूरी होता है।
कला भी बोली- हां यार, चुदाई के पहले थोड़ा नशा ज्यादा मज़ा आता है।
मैं समझ गयी कि ये दोनों बीवियां शराब की उतनी ही शौकीन हैं जितनी की मैं!
दो दो पैग शराब ख़त्म हुई, सब लोग खुल कर बोलने लगे, अपने आपमें मन की बात बोलने लगे।
वाइफ स्वैपिंग करना सभी चाहते हैं पर बोलना कोई नहीं चाहता।
पहल कोई नहीं करना चाहता।
देवा बोला- यार, मैं बहुत दिनों से वाइफ स्वैपिंग के बारे में सोच रहा था पर कर नहीं पाया कभी! उस दिन जब राघव ने ज़िकर किया तो मज़ा आ गया। मैंने जब अपनी बीवी दिव्या को बताया तो वह ख़ुशी के मारे उछल पड़ी और खाना पीना सब भूल गयी।
कला ने कहा- मुझे जब ललिता ने बताया तो मैं इस बात से खुश हुई कि चलो मुंबई में भी अपना कोई होगा जिसके साथ हसबैंड की अदला बदली का मौक़ा मिलेगा। मेरे पति का तो चेहरा ही खिल उठा।
दारू पीते हुए बहुत सी बातों का खुलासा हुआ जिससे हम सब एक दूसरे के काफी नजदीक आ गए।
हमारे बीच शर्म और झिझक की दीवार टूट गयी।
हम बुर चोदी तीनों बीवियां एकदम बिंदास हो गयीं और शराबी बीवी की तरह व्यवहार करने लगी.
मैंने रोहित के गले में बाहें डाल दीं और उसके गाल चूमते हुए बोली- वाह कितना मस्त मरद है तू बहनचोद रोहित!
रोहित की बीवी कला देवा की तरफ मुड़ी और उससे चिपक गयी। उसका लौड़ा ऊपर से ही सहलाते हुए बोली- वाओ … लौड़ा भोसड़ी का बड़ा मस्त लग रहा है तेरा!
देवा की बीवी दिव्या ने मेरे पति के पास जाकर उसे उठाया और उसके गले लग गयी फिर वह हाथ नीचे करके उसका लौड़ा टटोलने लगी।
मेरा पति भी दिव्या की चूचियाँ ऊपर से दबा दबा कर मज़ा लेने लगा, बोला- वॉवो क्या मस्त चूचियाँ है तेरी दिव्या भाभी!
वह बोली- तेरा मस्त लौड़ा भी है मेरी जान राघव!
बस कुछ ही देर में एक एक करके हम सब नंगे हो गए।
तीनों बीवियां नंगी और तीनों मरद नंगे।
मैं रोहित का लण्ड हिलाने लगी, दिव्या राघव का लण्ड और कला देवा का लण्ड हिलाने लगी।
मैंने कहा- अब मैं आप सबको डबल मज़ा देना चाहती हूँ। बीवियों को पराये मरद का लण्ड चाटने का मज़ा और पराये मरद से बुर चटवाने का भी मज़ा। वह लण्ड चाटेगी किसी और मरद का … साथ ही साथ बुर चटवायेगी किसी और मरद से! मर्दों को डबल मज़ा कि … बुर चाटो किसी और की बीवी की और लण्ड चटवाओ किसी और की बीवी से!
यह सुनकर सब लोग हैरान हो गए कि यह कैसे होगा?
मैंने कहा- मैं बताती हूँ कि कैसे होगा.
मैंने सबको गोल गोल बैठा दिया।
एक बड़ा सा घेरा बन गया।
सब लोग नंगे थे ही!
पहले मैं बैठी, मेरी दाहिनी तरफ रोहित, फिर दिव्या, फिर राघव फिर कला फिर देवा।
अब हर मरद के अगल बगल परायी बीवी हो गयी और हर बीवी के अगल बगल पराया मरद हो गया।
मैंने कहा- अब सब बीवियां दाहिनी तरफ वाले का लण्ड चाटेंगी और सब मर्द दाहिनी तरफ वाली की बीवी की बुर चाटेंगे।
इसका असर यह हुआ कि मैं रोहित का लण्ड चाटने लगी और रोहित दिव्या की बुर!
दिव्या राघव का लण्ड चाटने लगी और राघव कला की बुर,
कला देवा का लण्ड चाटने लगी और देवा मेरी बुर चाटने लगा.
इस तरह सबको डबल मज़ा आने लगा।
बीवियों को लण्ड चाटने का और बुर चटवाने का मज़ा मिलने लगा।
मर्दों को बुर चाटने का मज़ा और लण्ड चटवाने का मज़ा मिलने लगा।
इस खेल से सबकी बुर में आग लग गयी और सबके लण्ड में भी.
बहुत देर तक ऐसा मस्ताना खेल ज़ारी रखना किसी के बस का नहीं था।
तो मैं रोहित का लण्ड अपनी बुर में पेल कर बिंदास चुदवाने लगी।
दिव्या बुर चोदी मेरे पति से झमाझम चुदवाने लगी और कला भोसड़ी वाली भकाभक देवा से चुदवाने लगी।
दूसरे सिरे से देखें तो मेरा पति देवा की बीवी चोदने लगा, देवा रोहित की बीवी चोदने लगा कर और रोहित राघव की बीवी यानि मुझे चोदने लगा।
परायी बीवी की बुर चोदने में सबको खूब मज़ा आने लगा और बीवियों को भी पराये मर्दों से चुदवाने में ज़न्नत का मज़ा आने लगा।
मैं मन ही मन बड़ी खुश हो रही थी कि मेरा प्लान कितना कामयाब हो गया।
हमने फिर एक हसबैंड स्वैपिंग क्लब बना लिया।
इस क्लब में आजकल 10 कपल हैं। हम सब हर शनिवार और रविवार को एक दूसरे के पति से खूब मस्ती से बिंदास खुले आम चुदवाती हैं.
हमारे हसबैंड भी खूब मन लगा कर दनादन एक दूसरे की बीवियां चोदते हैं और खूब एन्जॉय करते हैं।
हालाँकि सारे कपल हर शनिवार को नहीं आ पाते लेकिन हां 6 – 7 कपल तो आ ही जातें हैं और फिर होता है परायी बीवियों को चोदने का और पराये मर्दों से चुदवाने का लगातार हंगामा।
दो दिन तक न कोई वाइफ कपड़े पहनती है और न कोई हसबैंड!
अभी तक आप ने पढ़ा Sex stoies कि मैंने कैसे अपने दोस्त की बीवी को चोदने के लिये तैयार किया। अब आगे क्या होता है, ये जानने के लिये आगे पढ़ें।
वैसे तो मैं तो आराम से मस्ती के साथ मज़ा लेने वाला हूं पर सोफ़े में कम्फर्टेबल न होने के कारण ऐसा नहीं कर पाया।
मैंने जल्दी से प्रिया की कमीज़ उतार दी और अब वह सोफ़े के बीच काली ब्रा और लाल पैंटी में आधी नंगी खड़ी थी।
फ़िर मैंने उसे कमर से पकड़ कर उसकी ब्रा के बाहर से ही उसके बूब्स पर किस करना शुरु कर दिया वह चिल्लाने वाली थी पर मैंने उसे डराते हुए कहा की किसी ने सुन लिया तो तुम्हारी बहुत बे-इज़्ज़ती होगी इसलिये जैसे मैं करता हूं मुझे करने दो।
मैं तो उसकी सारे शरीर पर मस्ती से मसलना, दबाना, रब करना और किस करना जारी रखा।
फ़िर मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और उसके बूब्स को रब करने लगा.
अब प्रिया मस्ती में आने लगी और उसको मेरा ऐसा करना अच्छा लगने लगा वो मुझे बीच में प्यार से मना करती और कभी कभी चूमने लगती पर उसे इस बात का डर लगता था कि कहीं राकेश आ न जाये।
थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया तो वह परेशान हो गयी और उसने जल्दी में अपनी पैंटी अपने आप उतार दी।
वाह, उसकी चूत बड़ी मस्त थी एकदम गुलाबी और उसके चारों ओर छोटे छोटे से भूरे बाल, मुझे लगता है उसने अपनी चूत एक दो दिन पहले ही साफ़ की थी।
उसकी चूत के बाल एकदम नर्म नर्म थे शायद उनको कल परसों ही काटा गया था वह ज्यादा लम्बे भी नहीं थे ज्यादा से ज्यादा 1-2 मिलीमीटर तक होंगे।
उसकी चूत देखकर तो वह 18-20 साल की सी लगती थी उसे बूब्स भी एकदम टाइट और छोटे छोटे थे।
पर जहाँ तक चूत की बात थी शायद राकेश तो कभी कभी ही उसकी चूत तक हाथ फ़ेर पाता था, उसकी चूत देखकर लगता नहीं था कि वह अभी तक एक बच्चा निकाल चुकी थी और कई बार एक 6 फुटे मर्द के लंड की मार झेलती थी।
वह एकदम नर्म गुलाबी मस्त गुदगुदी मक्खन जैसी थी।
उसकी ऐसी अनछुई चूत देखकर मैं अपने आप को रोके नहीं सका और मैं समझ गया कि ऐसी चूत दुबारा चोदने को शायद कब मिल पाये।
फ़िर मैंने उसे सोफ़े पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया मैंने अपने कपड़े नहीं उतारे केवल पैंट की ज़िप खोलकर पैंट नीचे कर दी और अपना लंड बाहर निकाल कर प्रिया के ऊपर चढ़ गया।
मेरे लंड के टच से तो प्रिया पागल हो गयी और उसकी बोडी के टच से मेरा लंड भी टाइट होता चला गया मैं अपने लंड से उसकी पूरी बोडी पर रब करने लगा और वह शरमाते हुए चीखने लगी पर वह मस्ती में ये सब कर रही थी।
अचानक मुझे एक मस्ती सूझी और मैंने उसके दोनों बूब्स को दोनों हाथों में लेकर उसके बीच अपना लंड रख दिया।
मेरा लंड देखकर शरमाते हुए प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर ली और फ़िर मैं उसके दोनों बूब्स के बीच लंड को फ़िट कर के चुदाई वाली स्टाइल में उसके बूब्स से लंड को रगड़ने लगा।
इससे मेरा लंड और प्रिया के बूब्स टाइट होते चले गये और दोनों इसे एन्जॉय करने लगे।
प्रिया तो मेरे इस एक्शन से मचल उठी थी वह 27-28 साल की औरत थी उसके मुकाबले मेरा चुदाई का कोई ज्यादा अनुभव नहीं था। थोड़ी देर में मेरा लंड इतना टाइट हो गया कि उसे हिलाना भी मुश्किल लग रहा था। अब मुझे लगा कि यह प्रिया की चूत में जाने के लिये बिल्कुल फ़िट है।
प्रिया ने अपनी आंखें अभी भी बंद किये हुई थी। वह मेरा लंड देखकर घबराने का बहाना कर रही थी जबकि उसका पति पूरे 6′ का था और उसका लंड तो कम से कम 7-8′ का होगा।
फ़िर मैंने बिना दर किये प्रिया की दोनों टांगों को फ़ैलाया और एक धक्के के साथ प्रिया की चूत को दोनों ओर से फ़ैलाकर अपना खड़ा लंड उसकी चूत में ठोंक दिया और एक झटके में ही पूरा अंदर तक घुसेड़ दिया।
प्रिया की चूत बड़ी टाइट थी किसी 18 साल की लड़की जितनी टाइट और अनछूई थी और मुझे उसकी चुदाई की शुरुआत में ही इतनी मेहनत करनी पड़ रही थी।
प्रिया तो मेरे एक्शन से मस्त होती जा रही थी और उसकी भूख बढ़ती जा रही थी और वह मुझे और अंदर डालने के लिये कह रही थी।
मैंने भी फ़िर और एक धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और प्रिया अपनी गांड उठाकर और अपनी तरफ़ से धक्का लगा कर चुदवाने को बेताब थी इससे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था पर प्रिया के धक्के से मैं पूरा ही हिल रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में फ़ंस गया था।
क्योंकि मेरी चुदायी का अनुभव भी ज्यादा नहीं था पर मैंने अपनी मर्दानगी दिखाने के लिये प्रिया को पकड़ लिया और एक जोर का धक्का आगे पीछे लगाया तो प्रिया तो मस्ती में उछल पड़ी और दर्द के बावजूद मुझसे बोली राज, दिस इस वाट आइ वांट अह्ह्ह! बस ऐसे ही आगे पीछे करो, दर्द की परवाह मत करो चाहे मैं कितना चिल्लाऊँ। चाहे फाड़ ही डालो पर यार बड़ा मज़ा आ रहा है ऐसा पहली बार है जब दर्द में भी मज़ा आ रहा है।
मेरी हालत भी खराब हो गयी थी और मैंने उसका मुंह बंद कर दिया था जिससे वह चीख न पड़े।
पर लंड के अंदर जाते ही प्रिया की मस्ती बढ़ गयी अब मुझे दर्द हो रहा था पर वह दर्द के साथ मस्ती में मोअन कर रही थी और मुझे धक्का लगाने को कह रही थी।
एक तरफ़ वह चिल्ला रही थी और दूसरी तरफ़ मुझसे धक्का लगाने को कह रही थी- राज जोर से धक्का लगाओ न आअह्हह तेज़, और जूर्रर सीए प्पहफाड़ दो इसे आज मज़ा आ रहा है दर्द की परवाह नहीं पर धक्का लगाओ जल्दी। राज प्लीज़ तेजी से धक्के लगाओ न म्मम्म। आआह्हह्ह औअर जूओर र्र सीए आउरुर तेज़ म्मम्मम म्ममाज़्ज़ा आअ रहाअ हैई।
मैं लंड की रफ़्तार से प्रिया की चूत में पेलने लगा और वह भी चूतड़ उठा उठा कर चुदवा रही थी।
मैं उसके बूब्स को भी मसलता जाता था, कभी कभी तो जोश में मैंने उसके चूचियों को पूरी ताकत से दबा कर मसल दिया। पर उसके बूब्स उत्तेजना में इतने टाइट हो गये थे कि एकदम पत्थर से लगते थे पर मैंने भी उनको ऐसा मसला कि साली की हालत खराब हो गयी।
एक तो उसकी चूत वैसे ही फ़ट रही थी और ऊपर से मैंने उसके निप्पल भी पूरे जोर से मसल दिये तो प्रिया की मस्ती के साथ दर्द के मारे इतनी जोर से चीख निकली कि मैं डर गया कि कहीं पड़ोस में किसी को पता न चल जाये, अगर कोई और वहाँ होता तो वह भी समझ गया होगा कि उसकी जबरदस्त ठुकाई चल रही है।
पर प्रिया की ये चुदायी ज्यादा देर न चल सकी मेरी थकान से हालत खराब होने लगी और मैंने अपनी रफ़्तार थोड़ा कम कर दी।
इसी बीच मेरे लंड में लंड का प्रेसर लेवल से ऊपर पहुंच गया और उसमे सरसराहट सी होने लगी। मैं समझ गया कि अब मैं झड़ने वाला हूं तो मैंने प्रिया के दोनों चूतड़ पकड़ कर अपने लंड को उसकी चूत के अंदर पूरा घुसाकर रोका तो प्रिया भी समझ गयी कि मैं झड़ने वाला हूं।
प्रिया बोली- राज प्लीज़ पुल इट आउट जल्दी से!
मैंने वैसा ही किया और जैसे ही मैंने लंड को बाहर निकाला प्रिया ने झपट कर उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया।
फ़िर मेरे लंड का सारा माल प्रिया के मुंह में चला गया और एक ही झटके में उसने पूरा माल पी लिया और मेरे लंड को ऐसे चूसने लगी जैसे मैं उसके निप्पल को कर रहा था।
मेरे लंड को पूरी तरह से चूसने और चाटने के बाद प्रिया अपने कपड़े पहन लिये पर जब लास्त में वह अपनी सलवार पहन रही थी तो एकदम से फ़टाफ़ट अपने कपड़े ठीक करने लगी वह बड़ा घबरायी हुई थी।
मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट और कमीज़ ठीक की, मैं समझ गया था कि अब वह एम्बरास फील कर रही थी।
उसने कुछ बोला पर जैसी उसकी हालत थी उसमे उसका इतनी बेरुखी सा दिखना मुझसे समझ नहीं आया।
प्रिया ने मुझे दूर की तरफ़ इशारा सा किया और वह जल्दी से अपनी सलवार का नाड़ा बांधते हुए फ़टाफ़ट अपने कपड़े ठीक करके दूर की तरफ़ चली गयी। तभी बेल बजी और प्रिया ने नोर्मल होकर दरवाजा खोल दिया तो बाहर राकेश था।
अब मेरी समझ में प्रिया की घबराहट का मतलब समझ में आया। राकेश कुछ ज्यादा पिये लग रहा था पर वह बोला देर हो गयी है घर पर सब इंतज़ार कर रहे होंगे।
मैं एक बार राकेश की हालत देखकर उनको घर तक छोड़ना चाहता था पर में जानता था कि राकेश के लिये ऐसे में ड्राइव करना कोई मुश्किल नहीं था।
रात भर मैं इस घटना के बारे में सोचता रहा कि क्या ये ठीक हुआ और क्या ये गलत तो नहीं और काफ़ी देर बाद मुझे नींद आयी।
सुबह तक मैं पहले शाम वाली बात भूल गया और फ़िर मुझे प्रिया के बदन के बारे में सोचकर उत्तेजना होने लगी और मैं सोचने लगा कि प्रिया को अब और चोदने का मौका कैसे मिलेगा।
दिन में ओफ़िस में प्रिया का फोन आया तो मैंने सोचा शायद वह राकेश से बात करना चाहती है पर वह मुझसे ही बात करने लगी तो मैंने प्रिया को सोरी बोला पहली शाम के लिये।
वह बोली- राज, मैंने कल वाली बात के बारे में सोचा तो ऐसा लगता है कि इसमे हमारी कोई गलती नहीं। तुम इस बारे में परेशान मत होना मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूं, अरे मुझे तो तुम्हारा शुक्रिया करना चाहिये कि इतने दिनो बाद मुझे सचमुच प्यार और सेक्स का एक साथ अनुभव हुआ।
प्रिया कह रही थी- यह एक भूख की तरह है और भूख लगने पर हर कोई जो उसे मिलता हो उसका ही मज़ा लेता है। मैं तो चाहती हूं कि ये मौका मुझे और मिले वैसे मैंने फोन इसलिये भी किया है कि आज तुम घर पर ही रहना मुझे आज तुमसे 3 पेपर टाइप करवाने हैं। राकेश का तो पता नहीं वह कुछ मदद करें या न पर तुमसे उम्मीद है।
मैं अब काफ़ी नोर्मल हो गया था और मैंने मज़ाक में कहा- एक पेपर की ट्रीट तो तुमको पता ही है तो तीन के बारे में सोच लो तुमको मुझे तीन ट्रीट देनी होंगी।
प्रिया बोली- राज इसे मज़ाक समझो या सीरियसली लो पर मुझे भी तुम्हारी ट्रीट से उतना ही मज़ा आया जितना तुमको। इसलिये ट्रीट के लिये जगह का इंतज़ाम होना चाहिये और मेरे को मौका मिले तो मैं तो और ज्यादा ट्रीट लेना चाहुंगी।
मैंने कहा- आशा है तुम अपने शब्द याद रखोगी। Sex stoies
मेरा नाम विधि Hindi Sex Stories है। यह मेरी पहली कहानी है और सच्ची कहानी है। अगर आप इस कहानी को पसंद करेंगे तो मैं और भी कहानी लिखूँगी।
मैं मुंबई में रहती हूँ, मेरे पापा रेलवे में अधिकारी हैं। हमारे परिवार में पापा-मम्मी और मैं ही हूँ। मेरी परवरिश अच्छी तरह से हुई है। अब सेक्स के बारे में मैं क्या बताऊँ। इस सेक्स के लिए मैं बहुत तड़फ़ी थी। जब मेरी उम्र बीस साल की थी तब मैंने पहली बार सेक्स किया था। तब मेरे पास चूत थी आज मेरे पास भोसड़ा है। अब मैं आपको अपनी पहली चुदाई कहने जा रही हूँ तो आप सब लोग अपना हथियार पकड़ कर रखना क्यूंकि यह कहानी पढ़कर आप सब लोगों के हथियार में से पानी निकल जायगा।
कहानी उन दिनों की है जब मैं अपने मामा के घर गई थी। मामा के परिवार में मामा-मामी और उसका बड़ा बेटा निखिल हैं। निखिल की उम्र भी बीस साल की थी। जब मैंने उसको देखा तो देखती ही रह गई, क्यूंकि उसकी बॉडी बहुत सेक्सी थी जिस पर हर लड़की मर-मिटे।
मैंने उसे चुदवाने की ठान ली। मेरा फिगर 34-26-36 है। वो भी मुझे देखता ही रह गया और मुझसे बातें करने लगा, मेरे करीब आने लगा। वो मेरे बदन को निहारने लगा, मैं उसके सामने कई बार झुक जाती और वो मेरे वक्ष को देखने लगता इस तरह मैं उसे अपने जाल में फ़ंसाने लगी।
हम रात को एक ही कमरे में सोते थे। जब हम रात को सोने गए तब थोड़ी देर बात की और सोने की तैयारी करने लगे।
मैंने उसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है?
तो उसने जवाब में मना किया और बोला- तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बन जाओ।
मैंने हाँ कर दी। तो उसने मेरे गालों को चूम लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं उसके होंठों को चूमने लगी और वो भी मेरे होंठों को जोर से चूमने लगा। मुझे पता भी नहीं चला कि कब मेरे कपड़े उतार लिए। वो मेरे स्तनों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा। फिर उसने ब्रा को भी अलग कर दिया और मेरे चुचूकों को चूमने लगा। मेरे बदन में चींटियाँ रेंगने लगी। बाद में उसने अपने कपड़े भी उतार दिए। मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और चूमने लगी।
उसने मेरी पेंटी उतार दी और मेरी चूत को चाटने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुँह में ही झड़ गई। वो मेरे रस को चाटने लगा फ़िर अपना लंड मेरी चूत पर फिराने लगा। एक झटके में उसका आठ इंच का लंड मेरी चूत में आधा घुस गया। मैं चिल्लाने लगी तो उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया। दूसरे झटके में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदना शुरु कर दिया। मैं भी कमर उठा कर उसका साथ देने लगी और मेरे मुँह से आहऽऽ आआआ ऊऊऊऊ म्म्म्म्म्म्म्ममअहहहहह की आवाजें निकलने लगीं ! जोश के कारण मैं बोलने लगी- और चोदो ! और चोदो ! और चोदो !
उसने कहा- ले रांड ! और ले ! खा मेरा लंड !
फिर उस ने मुझे कुतिया बनाया और मुझे खूब चोदा! फिर वो झड़ने वाला था तो उसने मुझसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ !
उसके झड़ने से पहले ही मैं तीन बार झड़ चुकी थी तो मैंने उसे कहा- मेरी चूत में ही झड़ जाओ !
वो मेरी चूत में ही झड़ गया।
उस रात मैं तीन बार चुदी और उसने मेरी गांड भी मारी।
कैसी लगी मेरी कहानी ? मेल जरूर कीजिएगा। Hindi Sex Stories
हॉट कजिन स्टोरी में लॉक डाउन में मैं गुरुग्राम में एक बढ़िया फ्लैट में अकेला रह रहा था. तभी मेरी बुआ की बेटी का फोन आया. वह दिल्ली में थी और लॉकडाउन में घर जाकर कैद नहीं होना चाहती थी.
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम नीलेश शुक्ला है, मैं 27 वर्ष का हूँ और मूल रूप से इलाहबाद से हूँ.
मेरे परिवार वाले मुझे ‘नीलू’ कह कर ही पुकारते हैं अक्सर!
मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ, और सत्य अनुभव पर आधारित यह कहानी लिखने की प्रेरणा मेरे कुछ प्रिय लेखक हैं, जिनकी लेखन शैली इतनी उत्कृष्ट और आकर्षक है कि पाठक पढ़ते हुए स्वयं को उस कहानी के अंदर महसूस करता है.
अतः मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी इस सत्य कथा के माध्यम से आपसे अपनी आप बीती हॉट कजिन स्टोरी साझा करूँ.
इस लेख की भाषा में मैंने अधिकतर हिंदी और हिंगलिश के शब्दों का प्रयोग किया है, जो मेट्रो शहरों में बातचीत का आम लहज़ा बन गया है.
यह मेरी पहली रचना है, अतः कोई भी त्रुटि या कमी के लिए पहले ही पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ.
वर्तमान में पुणे में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हूँ.
लगभग 6 फ़ीट की हाइट और कसरती बदन के साथ एक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होने के कारण मेरे आज तक काफी लड़कियों के साथ सम्बन्ध रहे हैं.
किन्तु कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी अपनी एक अलग कसक, एक अलग खनक और एक अलग स्वाद होता है और वे जीवन में अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं.
अपने जीवन के एक ऐसे ही ख़ास अनुभव को मैं आपसे साझा कर रहा हूँ जिसने मुझे बहुत हद तक बदल कर रख दिया.
अपने जीवन की जिस घटना का उल्लेख मैं करने जा रहा हूँ वह 2020 में घटित हुई थी.
उस समय मैं अपनी इंजीनियरिंग की सफल पढ़ाई के पश्चात गुरुग्राम में एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपर काम कर रहा था.
काम करते हुए मुझे लगभग 2 साल हो गए थे.
2019 में अपने रहने के लिए मैंने अपने एक मित्र अखिल के साथ गुड़गाँव शहर के थोड़ा बाहरी इलाक़े में सोहना हाईवे की तरफ एक बहुमंजिला सोसाइटी में एक 2BHK फ्लैट किराये पर ले लिया था.
हम दोनों में गहरी मित्रता थी और खूब पटती थी.
हमारे बीच पार्टियों से लेकर लड़कियों की बेशर्मी से चर्चा होती थी.
अखिल भी गुड़गाँव में एक अन्य कंपनी में सेल्स लीड की भूमिका में कार्यरत था.
हमारा फ्लैट उन्नीसवीं मंजिल पर था.
सोसाइटी मुख्य शहर से दूर होने के कारण पूर्णतः फर्निश्ड लक्ज़री फ्लैट के बाद भी उसका किराया काफी कम था.
बाइपास और फारेस्ट एरिया से पास होने के कारण हमारे इलाके में खूब हरियाली और न के बराबर शोरगुल था.
ऑफिस से थोड़ा दूर था, परन्तु मानसिक शांति के परिप्रेक्ष्य से उस इलाक़े का कोई मुक़ाबला न था.
मकान मालिक कनाडा में रहता था और कोई हस्तक्षेप नहीं करता था.
हम भी समय पर किराया पंहुचा दिया करते थे.
सोमवार से शुक्रवार काम में व्यस्त रहने के बाद उस फ्लैट पर एक अलग ही सुकून मिलता था.
मास्टर बैडरूम मैंने और दूसरा बैडरूम अखिल ने ले लिया था.
इसके अतिरिक्त फ्लैट में फ्लैट में एक छोटा स्टडी रूम था जिसकी हमें तब तक ज़रूरत नहीं पड़ी थी, अतः हम स्टोररूम जैसे ही उसका उपयोग करते थे.
खाने और सफाई के लिए हमने एक नौकरानी भी लगवा ली थी.
उस समय गुड़गाँव में मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी श्रद्धा … जिसको डेट करते हुए मुझे लगभग डेढ़ साल हो गया था जबकि अखिल सिंगल था.
कुल मिलाकर हम दोनों मित्र नौकरी करते हुए मस्ती से अपना बैचलर जीवन जी रहे थे.
दिसंबर 2019 में अखिल ने बुझे बताया कि उसका बैंगलोर में एक बड़ी कंपनी में सफल इंटरव्यू हुआ है, बढ़ोतरी के साथ नयी नौकरी मिल गयी है और उसे जनवरी से ही ज्वाइन करना होगा.
20 जनवरी के आसपास अखिल अपना अधिकतर सामान लेकर बैंगलोर के लिए निकल गया.
किंतु चाबी मेरे हाथ में थमाते हुए अपनी कार यहीं छोड़ गया यह कहकर कि एक-आध महीने में बैंगलोर में अपना डेरा जमाने के पश्चात वह वापस आएगा और अपनी कार लेकर जाएगा.
चूँकि फ्लैट का किराया अधिक नहीं था इसलिए मैंने अकेले ही फ्लैट रखने का निश्चय किया यह सोचकर कि यदि कोई ऐसा मित्र मिले जिससे समन्वय बने तो वह अखिल की जगह रह सकेगा.
अखिल के जाने के बाद उस आलीशान फ्लैट में मैं अकेले रहने लगा.
फरवरी 2020 मध्य से कोरोना वायरस की खबरें (जो अबतक लोग हल्के में ले रहे थे) रफ़्तार पकड़ने लगी और फरवरी अंत तक समाचार का मुख्य हिस्सा बन गयी.
मार्च के पहले हफ्ते में जब कोरोना के फैलने की खबरें चरम पर थी, मेरे ऑफिस ने सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से अनिश्चितकालीन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की घोषणा कर दी.
मैंने अपने फ्लैट में स्टडीरूम को अपना ऑफिस बना लिया और मास्टर बैडरूम पहले से मेरे पास ही था.
बस अखिल का कमरा था जो खाली था.
7 या 8 मार्च की बात है.
दोपहर के समय मैं ऑफिस के काम में व्यस्त था.
अचानक से मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, जो नाम स्क्रीन पर चमका उसको देखते ही मैं थोड़ा सा चौंका.
“Moni Di Kanpur”
मोनी, जिसका पूरा नाम मोनिका भारद्वाज था, मेरी कानपुर वाली बुआ की लड़की थी और मुझसे पांच साल बड़ी थी.
मोनिका ने मास्टर्स तक की पढ़ाई कानपुर से ही की थी और अगस्त 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एक कॉलेज में पी०एच०डी में दाखिला ले लिया था.
साथ ही साउथ दिल्ली में ही एक गर्ल्स पीजी में कमरा ले लिया था.
मोनिका जब दिल्ली शिफ्ट हुई थी, तब उसका एक बार फ़ोन आया था और हमारी बात हुई थी.
किन्तु अब तक मिलने का अवसर नहीं मिला था; सच कहूँ तो मैंने प्रयास भी नहीं किया था, मैं नहीं चाहता था की मेरी रिश्तेदारी में किसी को भी मेरे बैचलर जीवन और मॉडर्न रहन-सहन का किसी को भी पता चले क्योंकि समस्त परिवार में मेरी छवि एक प्रतिभाशाली और परिश्रमी छात्र की थी.
अतः मैं परिवार के लोगों से और रिश्तेदारी में काफी रिज़र्व रहता था.
मोनी और मैं बचपन में छुट्टियों में काफी बार मिलते थे, कभी इलाहबाद में तो कभी कानपुर में.
हमारी अच्छी पटती थी लेकिन मोनी के हाई-स्कूल के पश्चात से हम बराबर संपर्क में नहीं थे.
मिले थे तो बस पारिवारिक शादी-ब्याह और अन्य पारिवारिक समारोह पर.
लगभग साढ़े तीन- चार साल पहले हम एक पारिवारिक फंक्शन में आखिरी बार मिले थे.
खैर, इन सब विचारों के बीच मैंने फ़ोन उठाया.
दूसरी तरफ से वही पहचानी हुई, चुलबुली आवाज़, तंज कसते हुए- नीलू!! कभी बहन को भी याद कर लिया कर!
मैंने कहा- दीदी, इतने दिनों बाद कैसे याद किया? कैसी हो आप? क्या हाल चाल है?
मोनी ने कहा- तेरी सवाल पे सवाल पूछने की आदत गयी नहीं अब तक! हाल चाल सब बढ़िया है, पी जी में हूँ फिलहाल. लेकिन कुछ दिक्कत हो गयी है. इसीलिए तुझे फ़ोन किया!
“दिक्कत? क्या हो गया ऐसा दीदी?”
“अरे तू न्यूज़ नहीं देखता क्या!? पता नहीं ये कोरोना वायरस क्या बला है. शुरुआत में तो मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कल कॉलेज से नोटिस आया कि कॉलेज बंद हो रहा, पता नहीं कब तक. सारी क्लासेज और रिसर्च का काम सब ऑनलाइन चलेगा. भाई मुझे तो सच में टेंशन हो रही. पी.जी. की लड़कियाँ खाली करने की बात कर रहीं. मेरी रूममेट दिव्या के तो घर से आज फ़ोन आया था, उसके पापा उसको लेने आ रहे 2 दिन में सारे सामान के साथ. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ … सब कुछ इतना अचानक से हो रहा!”
“सारी न्यूज़ देख रहा मैं दीदी, कोरोना की वजह से यूरोप, खासकर इटली में बुरा हाल है … वायरस तेजी से फ़ैल रहा. मेरे ऑफिस ने तो बीते हफ्ते से ही वर्क फ्रॉम होम कर दिया है सबका!”
“तो तेरा क्या प्लान है … घर निकलने का सोच रहा?”
“नहीं दीदी … मैं तो यहीं रुक रहा अपने किराये के फ्लैट में!”
मोनी ने लगभग हँसते हुए कहा- वाह भाई! गज़ब कॉन्फिडेंस है तेरा. कोई गर्लफ्रेंड है क्या जिसकी वजह से रुका हुआ है?
“क्या दीदी आप भी ना न… कुछ नहीं है ऐसा; फ्लैटमेट था, वह भी 2 महीने पहले चला गया, अकेला ही रहता हूँ. लेकिन 2 दोस्त दूसरी सोसाइटी में 15-20 मिनट दूर रहते हैं, तो मिलजुल कर देख लेंगे जो भी होगा!”
“तेरा तो सही हिसाब है भाई. ऐसे ही नहीं तेरी तारीफों के पुल बांधते हैं सब मेरी फैमिली में. पढ़ाकू तो तू था ही, तेज भी हो गया इतना यहाँ आकर. गुरुग्राम रह रहा ना तू?”
“हाँ दीदी गुरुग्राम में ही, लेकिन मेन गुरुग्राम से थोड़ा बाहर है. ये सब छोड़ो, आप बताओ कि बुआ फूफ़ा क्या बोल रहे?”
“यार, वे तो घर आने को बोल रहे हैं. चौदह तारीख की टिकट भी करवा दी है. लेकिन ये कोरोना इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा और इतनी अफरा तफरी भी है. पता नहीं सेफ होगा या नहीं इस तरह अचानक से जाना!”
“अब दीदी, बुआ फूफा ने बोल ही दिया है तो ऑप्शन भी क्या है और. मास्क वगैरह लगा कर जाना, आई थिंक सेफ रहेगा सब. ज़्यादा टेंशन मत लो!”
“हम्म … सही कह रहा यार … चल मैं पैकिंग वगैरह देखती हूँ.” मोनी ने बुझे मन से कहा.
“ओ.के. दीदी, अपना ध्यान रखना आप, और कुछ मदद चाहिए हो तो बेझिझक कॉल करना!”
“हाँ नीलू, तू भी ध्यान रख और बाहर ज़्यादा मत निकलना. नयी बीमारी का कुछ पता नहीं. चल मैं रखती हूँ … बाय!” कहते हुए मोनी ने फ़ोन रख दिया.
लगभग एक हफ्ता बीता.
13 तारीख की बात है, रात में साढ़े 11 बजे मेरे पास मोनिका का फ़ोन आया.
“नीलू! सो तो नहीं गया था?”
“नहीं दीदी, क्या हुआ? सब ठीक तो है न?”
“अरे यार … अभी मैसेज आया मेरे पास irctc का. ट्रेन कैंसिल हो गयी है. मैंने पता किया तो बहुतेरी ट्रेनें कैंसिल हो रहीं!”
“ओह इतने अचानक से? अब क्या दीदी?”
“समझ नहीं आ रहा यार, दिव्या भी चली गयी है. पीजी में 3 -4 लड़कियाँ बची हैं, लगता है वो भी चली ही जाएँगी कल परसों में!”
“दीदी बस का टिकट देखा? उसमे शायद मिल जाये आपको …”
“भाई ए.सी. बस में एक भी टिकट नहीं है और नार्मल बस से मैं सफ़र नहीं कर सकती, मेरी तबियत ख़राब हो जाती है. ऊपर से कितने सारे लोग भी होंगे बस में. इन्फेक्शन का चांस भी ज़्यादा है.”
“दीदी अब तो एक ही विकल्प बचा है. इंटरसिटी कैब या टैक्सी कर लो. थोड़ा महंगा पड़ेगा लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं!”
“अबे, तू भाई है या कसाई है … . मुझे घर भेजकर ही दम लेगा??” मोनी ने लगभग चिल्लाते हुए कहा.
“मतलब … समझा नहीं दीदी?”
“समझा नहीं मतलब क्या? तुझे नहीं पता घर जाकर मेरी ज़िन्दगी जेल जैसी हो जाएगी … सारी मौज मस्ती बंद … पहले से ही दुखी हूँ इतनी!”
“ओह … तो ये बात है … क्या सोच रही हो आप फिर? दिल्ली में ही रुकोगी?”
“यार सारी सहेलियों और दोस्तों से बात करके देख लिया … इस वक्त किसी के पास रुकने का जुगाड़ नहीं … तेरे पास कुछ व्यवस्था हो सकती है कुछ दिनों के लिए?” मोनी ने आशा भरी आवाज़ में पूछा.
सच तो यह था कि मैं भी अकेला ही था. मेरी गर्लफ्रेंड श्रद्धा जो अक्सर आती रहती थी, वह होली के समय घर गयी थी और उसके परिवार ने उसको माहौल ठीक होने तक वहीं रोक लिया था. केवल मेरे दो मित्र देवेश और सुमित थे, जो पास की एक सोसाइटी में रहते थे.
मैंने भी सोचा, एक-आध हफ्ते की तो बात है, मैनेज हो जाएगा सब.
“दीदी मैं तो गुरुग्राम रहता हूँ … साउथ दिल्ली से दूर पड़ेगा, लगभग सवा घण्टा. मुझे क्या समस्या होगी, फ़्लैट में एक कमरा भी खाली है, आप आ जाओ अगर आपको ज्यादा दूर न पड़े तो!”
मेरे इतना कहते ही मोनी की आवाज़ में राहत और प्रसन्नता का सैलाब आ गया- भाई … पक्का आ जाऊं ना? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न तुझे?
“अरे कम ऑन दीदी … इतनी फॉर्मेलिटी?”
“हाय मेरे प्यारे नीलू!! तूने बचा लिया मुझे … बस यही उम्मीद थी मुझे तुझसे … सुन, एक काम करती हूँ. पी.जी. खाली ही कर देती हूँ, तेरे साथ 2 -3 हफ्ते रुक लूंगी, और थोड़ा माहौल ठीक होते ही नया पी.जी. ढूंढ लूंगी. तू एक काम कर, मुझे लोकेशन भेज दे, मैं 3-4 दिन में सारा सामान पैक करके आती हूँ.”
“ठीक है दीदी … पहुँचने में कोई दिक्कत हो तो बताना … मैं लोकेशन व्हाटसऍप करता हूँ!” कहकर मैंने फ़ोन काट दिया.
अगले 3 दिन मैं काम में काफ़ी व्यस्त रहा तो मोनी से बात करने की तरफ ध्यान नहीं गया.
19 तारीख को मेरे पास सुबह लगभग 9:30 बजे मोनी का फ़ोन आया- नीलू, मैं निकल रही हूँ बस 10 मिनट में. कल ही आ जाती लेकिन सिक्योरिटी मनी फंसा हुआ था, वही लेने रुक गयी. गूगल मैप पर दिखा रहा एक-सवा घंटे में पहुंच जाऊंगी. तू फ्लैट पर ही रहेगा ना?
“हाँ दीदी, आप आराम से आ जाओ, मैं फ्लैट पर ही रहूँगा.”
“तेरी सोसाइटी का नाम क्या बताया था तूने?”
“दीदी सोसाइटी का नाम रीगल कासा है. और टावर का नाम ऐमीरेट्स है. आप गार्ड से बात करा देना मेन गेट पर!”
मोनी ने शरारत भरे फ़िल्मी लहज़े में पूछा- स्वागत नहीं करोगे हमारा?”
“हाहा … अरे बिलकुल दीदी … आप पहुँचो बस. फ्लैट इतना आलीशान है. उसको देखकर ही स्वागत हो जाएगा!”
मोनी ने उत्साह से भरपूर आवाज़ में कहा- हाय सच में क्या! मेरा छोटा भाई कितना बड़ा आदमी बन गया है … अब तो इंतज़ार नहीं हो रहा नीलू … चल मेरी कैब आ गयी, पहुंच कर कॉल करती हूँ”
कहते हुए फ़ोन काट दिया.
लगभग 11 बजे मेरे इण्टरकॉम पर गार्ड का फ़ोन आया- गुड मॉर्निंग सर … मैडम आयी हैं टैक्सी से, आपसे मिलने. सामान भी है साथ में!”
मैंने गार्ड को आदेश दिया- फ़ौरन उनको मेरे टावर पर भेज दो. वो मेरी कज़िन सिस्टर हैं.”
“जी सर, बिल्कुल!”
मैंने लिफ्ट ली और जब तक मैं नीचे पंहुचा, मोनी की कैब मेरे टावर के नीचे पहुंच गयी थी.
पीछे डिक्की से ड्राइवर कुछ सामान निकाल रहा था.
और एक सूटकेस मोनी पीछे वाली सीट से निकल रही थी.
क्योंकि हम सोशल मीडिया पर जुड़े हुए नहीं थे, मोनी को इतनी दिनों बाद देख रहा था मैं, 2 मिनट तक तो मेरी आँखें टिक गयी उस पर!
और टिकें भी क्यों न …
5′ 6″ से 5′ 7″ की हाइट, हल्का सांवला सुनहरा रंग, बॉटल ग्रीन रंग का चुस्त टॉप, जिसमें से मोनी के 36C के स्तन फाड़ के बाहर निकलने को हो रहे थे.
नीचे सफ़ेद रंग के हॉट-पैंट शॉर्ट्स जो सिर्फ चालीस प्रतिशत के लगभग चिकनी सुनहरी जांघों को ढक रहे थे.
मोनी की चिकनी टांगों पर एक भी बाल का नामोनिशान न था.
ऊपर से तीखे नैन-नक्श, बड़ी बड़ी आँखें, मेकअप, सनग्लासेस, जूते, मॉडर्न बॉडी लैंग्वेज.
अट्ठाइस-उनतीस साल की उस उम्र में मोनिका का वो यौवन से परिपूर्ण बदन डेवलपमेंट के चरम पर था.
10 सेकंड के लिए तो मैं उसे पहचान ही नहीं पाया.
मोनी डी०यू० की एक आइटम, पटाका माल लग रही थी.
देख कर साफ़ पता लग रहा था कि बहना को दिल्ली की हवा बहुत ज़बरदस्त लगी है. सच कहूं तो दो पल के लिए मेरा ईमान डगमगा गया.
करीब एक हफ़्ते के बाद भाभी लौट कर घर आई तो हमारे Sex Stories घर मिलने चली आई, एकान्त पाते ही मैने पूछा कि कहाँ गई थी? तो उसने कहा दोपहर में घर आना वहीं पर बातें होंगी, मैं तो तुम्हें ही बताने आई थी कि मैं लौट आई हूं। दोपहर में मैं स्कूल से ही उनके घर चला गया, बेल बजाने पर भाभी ने दरवाजा खोला, मैने देखा भाभी बहुत प्रसन्न दिख रही है मैने पूछा तो उसने कहा अन्दर तो आओ मैं अन्दर सीधे बेडरूम में चला गया बेड पर छोटू सो रहा था इसलिए मैं सोफ़े पर बैठ गया।थोड़ी देर में भाभी दो कप कोफ़ी लेकर आई और मेरे से सट कर बैठ गई उसने गुलाबी रंग की सलवार कमीज पहने थी काले रंग की ब्रा ऊपर से दिख रही थी। भाभी अक्सर काली ब्रा और काली पैंटी पहनना पसन्द करती है। मैने पूछा कहा गई थी? तो उसने कहा मैं इलाहाबाद अपनी बहन के घर गई थी वो मुझसे केवल दो साल छोटी है और वो मुझसे पूरी तरह खुली हुई है मैने उसे तुम्हारे बारे में बताया तो वो कह रही थी मैं भी मिलना चाहती हूं।कोफ़ी खत्म होने के बाद मैने भाभी को अपनी तरफ़ खींचा भाभी मेरी गोद मे गिर गई मैने उसकी चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा तो मुझे महसूस हुअ कि साइज़ में कुछ अन्तर आ गया है, मैने पूछा तो वो हसने लगी और कहा लगता है दवा का असर हो रहा है, मैने तबतक सलवार खोल दी थी भाभी जब खड़ी हुई तो सलवार नीचे सरक गई, उसने कहा लो मैं पूरा काम किए देती हूं यह कह कर उसने अपनी कमीज भी निकाल दी फ़िर से मेरे सामने उसका भरा हुआ शरीर सामने था। मेरे लंड में तनाव भरता जा रहा था, मैने भाभी को नीचे कालीन पर लिटा कर अपने होंठों को उनके होंठों से जकड़ दिया, भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी।ऊऊह कितना मीठा स्वाद लग रहा था, मैने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया मैं अपने हाथों से उसके चेहरे को पकड़ रखा था उसकी लार मेरे अन्दर बह रही थी कुच देर के बाद मैने अपनी जीभ उसके अन्दर डाल दी और उसे पूरा अन्दर डाल कर चारों ओर घुमाता रहा काफ़ी देर तक हम एसा करते रहे फ़िर उसने कहा चलो ६९ करते हैं, मैने पूछा ये क्या होता है तो उसने कहा पहले अपने कपड़े उतारो तो बताती हूं। मैने अपनी पैंट और शर्ट निकाल दी और बेड के किनारे बैठ कर भाभी को कपड़े उतारते देखने लगा अब उसने अपनी ब्रा को उतार दिया और मेरे पास आ कहा चलो मैं तुम्हारी सफ़ाई कर दूं यह कह कर उन्होंने वही बोतल निकाली और उसे मेरे लंड के चारों ओर लगा दिया तो मैने कहा लाओ मैं भी तुम्हारी पूरी सफ़ाई कर दूं तो उसने कहा ये बहुत अच्छा रहेगा यह कह कर वो बेड पर लेट गई मैने उनकी पैंटी निकाल दी उसकी फ़ूली हुई बुर पर छोटे छोटे काले बाल थे मैने उंगली डाल कर बोतल से ढेर सारी क्रीम निकाल कर उसकी चूत पर लगा दिया और धीरे धीरे मालिश करने लगा मेरा लंड हिलोरे लेने लगा, मैने उसकी चूचियों को दबाना चाहा तो उसने कहा पहले क्रीम को पोंछ लो, तभी मेरी नजर उसके बगल के बालों पर पड़ी मैने कहा इसे भी साफ़ कर दूं तो बोली नहीं ये जब कुछ बड़े हो जायेंगे तो तुम्हें अच्छे लगेंगे इसे रहने दोमैं सोफ़े पर बैठ गया और हम बातें करने लगे तो भाभी ने बताया तुम्हारे भैया तो रात में कपड़े निकाल कर अपना लंड मेरी बुर में डालने की कोशिश में लगे रहते हैं उन्हे ये भी जानने की जरुरत नहीं महसूस होती कि मेरी चूत सूखी होने के कारण कितना दर्द कर रही होती है जब तक मेरी चूत गीली होती है तब तक वो अपना पानी छोड़ चुके होते हैं इस तरह मैं असन्तुष्ट रह जाती हूं। मैने भाभी से पूछा अच्छा बताओ तो जरा लेडीज़ को क्या करना अच्छा लगता है तो भाभी ने कहा ये कोई नियम की बात नहीं है सेक्स तो महसूस करने की बात है केवल महसूस करके भी सेक्स में संतुष्टि मिल सकती है, तुम निश्चिंत रहो मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगी तो तुम शादी के बाद अपनी बीवी को पूरी तरह सन्तुष्ट कर पाओगे, मैने कहा भाभी तुम कितनी प्यारी हो और मेरा कितना ख्याल रखती हो, भाभी ने कहा देखो सेक्स तो एक भूख की तरह है इस तो सन्तुष्ट करना ही पड़ता है, कुछ लोग अपने हाथों से अपने आपको सन्तुष्ट कर लेते हैं तो कुछ लोग बाहर किसी को खोज लेते हैं इसमें तो कोई बुराई नहीं है केवल इस बात का ध्यान रखना है कि आस पास के लोगों में ये बात पता नहीं चले क्योंकि ये सब हमारे समज में अच्छा नहीं माना जाता।बातें करते काफ़ी देर हो गई तो भाभी ने कहा चलो बाथरूम में नहा लें, हम दोनो साथ ही बाथरूम में घुस गये शोवर चला कर हम एक दूसरे से लिपट कर देर तक भीगते रहे। मैं बीच बीच में भाभी के पीठ पर हाथ फ़िरा रहा था हम दोनो ने अच्छी तरह एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। भाभी की चूचियों पर साबुन वाला हाथ रगड़ने में बहुत अच्छा लग रहा था उसने भी मेरे लंड की अच्छी तरह से रगड़ाई की, हम दोनो बाहर आ कर टोवल से अपना बदन पोंछ लिए तो भाभी ने कहा चलो एक खेल खेलते हैं, हम दोनो बेड पर लेट गै भाभी ने पोंड्स का पाउडर निकाल कर उसे मेरे बदन पर पोत दिया और एसा ही करने को कहा मैने भी उनके बदन पर पाउडर डालकर पूरे शरीर पर लगा दिया तो भाभी ने कहा चलो मेरे ऊपर लेट जाओ मैं पूरी तरह उनके ऊपर लेट गया अब हम आपस में बदन रगड़ते रहे मेरा लंड भाभी की फ़ूली हुई चूत में घुसने के लिए बेताब हो रहा थाभाभी ने कहा तुम मेरी ऊपर की तरफ़ से धीरे धीरे नीचे की तरफ़ जाओ मैने भी चूत पर पहुंच कर अपनी जीभ को चूत में घुसाना चाहा तो भाभी ने कहा अभी समय नहीं हुआ है, अब मेरा मुंह भाभी के पैर की तरफ़ था और मेरा लंड भाभी के चेहरे को छू रहा था उसने मेरा लंड अपने दोनो हाथों से पकड़ लिया और अपने मुंह में डाल दिया अपने आप मेरा मुंह भाभी की चूत से सट गया अब भाभी की चूत से रस बह रहा था मैने चूत में अपनी पूरी जीभ घुसा कर चूसने लगा भाभी भी मेरे लंड को अपने मुंह से चूस रही थी कि अचानक मेरे लंड का पानी छूट गया भाभी ने उसे पूरा पी लिया अब भाभी जोर जोर से सिसकियां ले रही थी यस और करो और करो और करो यह कहते हुए भाभी ने अपने दोनो पैरों से मेरे सिर को दबा लिया और अब भाभी ने पलटने की कोशिश शुरु कर दी अब मैं भाभी के नीचे था भाभी मेरे मुंह पर धक्के मार रही थी और उसकी चूत से गरम गरम कुछ निकल रहा था जो सीधे मेरे गले में जा रहा था
भाभी, बोले जा रही थी ओह ऊओह ओह ओह ओह अंत में भाभी मेरे ऊपर पसर गई हम एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे भाभी का चिकना बदन बहुत ही कोमल लग रहा था मेरा मन कह रहा था कि काश ये समय खत्म ही न हो। हम दोनो एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे, थोड़ी देर बाद हम उठ गये तो भाभी ने कहा अब समझ में आया कि ६९ क्या होता है, मैं भाभी से लिपट गया हम दोनो काफ़ी देर तक लिपटे ही रहे तब भाभी ने मेरे माथे को चूमते हुए कहा जानते हो जब दो लोग सेक्स करते हैं तो उनका आपस में रिश्ता बहुत मजबूत हो जाता है। काफ़ी देर हो गई थी हालांकि मन नहीं हो रहा लेकिन भाभी ने कहा अब घर जाओ नहीं तो तुम्हारी मम्मी खोजेंगी, अधूरी प्यास लिए मैं अपने घर आ गया। आगे की कहानी पार्ट ५ में। Sex StoriesThe user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
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