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हाय रीडर्स
ये मेरी पहली कहानी है।
बात उन दिनों कि है जब मोम, डैड कहीं बाहर गये हुए Antarvasna थे और मैं घर पे अकेला बोर हो रहा था, अचानक मन में आया और मैने कोई नम्बर घुमाना शुरु किया के शायद कोई लड़की भी होगी जो मेरी तरह बोर हो रही होगी, बहुत नम्बर मिलाने के बाद एक नम्बर मिल ही गया। मैने कहा-क्या मैं पायल से बात कर सकता हूँ, तो आवाज़ आयी – यहां कोई पायल नहीं है, तो मैने कहा आप कौन तो उसने अपना नाम सीमा बताया। मैने कहा अगर आप बुरा न माने तो हम कुछ देर बात कर सकते हैं? तो वो मान गयी।
अब हम हर दिन बात करने लगे, धीरे धीरे मैने उसके बारे में बहुत कुछ जान लिया, उसे भी सेक्स करने का उतना ही शौक था जितना मुझे। मैने उससे पूछा कि हम कब मिल सकते हैं तो उसका जवाब था जब आप चाहो।
१ दिन मिलने के लिये टाइम भी फ़िक्स हो गया जब हमारा सामना हुआ तो स्टोरी बदल चुकी थी, वो मेरे दोस्त की बहन थी और उसने अपने बारे में जो भी बताया सब गलत था, मैने उसे कहा क्या इरादा है अगर तुम मेरे साथ नहीं चलोगी तो मैने तुम्हारी सब बातें जो मोबाइल में रिकोर्ड की हैं तुम्हारे भाई को सुना दूंगा, वो डर गयी और मेरे साथ चलने के लिए मान गयी।
उसे लेकर मैं एक होटल में गया और हम रूम में पहुँच गये।
रूम में जाते ही मैने उसे अपनी बाहों में भर लिया, मैं मौका गवाँना नहीं चाहता था।
मैने उसकी चूची दबानी शुरु कर दिये, उसे दर्द होने लगा और वो ऊऊउह की आवाज़ करने लगी मैने उसकी चूचियां उसकी ब्रा से आज़ाद कर दी और उसकी चूचियां चूसने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा, मैने धीरे धीरे अपना एक हाथ उसकि सलवार में डाल दिया और उसके चूतड़ सहलाने लगा। वो मज़ा लेने लगी थी।
अब मैने अपना हाथ उसकी बुर पर फ़ेरना शुरु किया, वो मदहोश होने लगी, उसकी आंखें बंद होने लगी, मैने उसे बेड पे लिटा दिया और उसकी सलवार और पैंटी अलग कर दी। अब वो मेरे सामने एक दम नंगी लेटी हुई थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था, उसकी चूत गीली हो चुकी थी।
मैने उसकी टांगे उठाई और चोदना शुरु कर दिया वाह उसकी सील भी बंद थी जो और मज़े की बात थी।
जैसे ही मेरा ७ इंच का लंड उसके अंदर गया वो कराह उठी लेकिन ये मज़े की कराहट थी। अब २-३ बार धक्का देने के बाद उसकी सील टूट गयी अब चुदाई जोरों पे थी। वो आहह कर रही थी और मज़ा भी ले रही थी हम दोनो चुदाई का आनंद ले रहे थे।
उस दिन हमने २ बार चुदाई का मज़ा लिया और इसके बाद हमें जब भी मौका मिलता हम ये खेल खेलते थे और आज भी खेलते हैं। Antarvasna
मेरा नाम आयुष है.. मैं लखनऊ में रहता हूँ।
जब मैं 18 साल का हुआ था.. मेरा भी लण्ड मुझे परेशान कर रहा था और मैं काफ़ी सालों से मुठ मार रहा था। एक बार मेरे बाप ने मुझे मुठ मारते पकड़ लिया था.. बहुत मार पड़ी थी यार। मैं बचपन से ही बड़ा मनचला रहा हूँ।
चलो ये सब बाद में.. अब कहानी पर आते हैं।
एक बार मेरे घर पर मेरे दूर के रिश्ते के चाचा चाची आए थे, जब मैंने चाची को देखा तो मेरी तो सांस ही रुक गई।
क्या कयामत थी वो.. मेरा तो दिल किया इसको यहीं खड़े-खड़े चोद दूँ।
मैंने ऐसा किया भी.. उसको वहीं खड़े-खड़े आँखों से ही चोद दिया।
वो भी समझ गई कि मैं उसको आँखों से चोद रहा था.. पर उसने कुछ बोला नहीं।
रात को जब हम सब खाना खाकर सोने की तैयार करने लगे.. तभी ममी ने मुझे बताया कि वो दोनों मेरे ही कमरे में रहेंगे.. मुझे बड़ी खुशी हुई।
साथ में दु:ख भी था कि चाचा भी साथ में हैं।
ये तो वही बात हो गई कि हाथ में आया.. पर मुँह को ना लगा।
हम सोने चले गए।
चाचा तो कमरे में जाते ही सो गया.. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, फिर भी आँखों में चाची को चोदने के सपने ले सो गया।
रात को मेरी आँख खुल गई.. तो मैंने पाया कि कमरे में अंधेरा था और मेरे ऊपर से एक हाथ बार-बार आ-जा रहा था। मैंने महसूस किया कि वो हाथ चाचा का था.. जो बार-बार चाची को छू रहा था। चाची बार-बार उसको हटाने की कोशिश रही थीं। काफ़ी देर तक कोशिश करने पर भी जब चाचा को लगा कि दाल नहीं गलने वाली.. तो वो सो गए।
अब तक मेरी नींद तो उड़ गई थी। मैं काफ़ी देर तक अपने आपको रोकता रहा.. पर नहीं रोक पाया और मेरा हाथ चाची के ऊपर चला गया। मैं चाची की छाती दबाने लगा.. आह्ह.. चाची के क्या ठोस मम्मे थे।
मैं काफ़ी देर तक चाची के मम्मों को दबाता रहा।
फिर मेरा हाथ धीरे-धीरे नीचे की तरफ जाने लगा.. जब मेरा हाथ उनके पेट पर गया.. तो देखा उस पर एक ग्राम भी एक्सट्रा चर्बी नहीं थी.. बिलकुल सपाट और मुलायम था।
मैं और नीचे गया तो उनकी सलवार का नाड़ा मेरे हाथ में आ गया.. मैंने बड़ी सफाई से उसको खोल दिया और अपना हाथ उनकी सलवार में डाल दिया।
उनकी चूत पर थोड़े-थोड़े बाल थे.. ज़िनको छूकर मेरा तो दिल मचल गया। मैंने थोड़ी देर तक उन झांटों को सहलाया फिर नीचे की ओर जाने लगा उनकी चूत के दाने को थोड़ी देर तक बड़े प्यार से सहलाता रहा।
जब मेरा हाथ और नीचे गया.. तो मेरी एक उंगली उनकी चूत में चली गई, वहाँ गीला सा लगा, मैं अपनी उंगली को उनकी चूत में घुमाता रहा।
इस पर भी जब चाची कुछ नहीं बोलीं.. तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।
तब तक मेरे लण्ड का बुरा हाल हो चुका था।
दोस्तो, ये डर और उत्तेजना का मिला-जुला अहसास होता है.. इसका मुकाबला तो बड़े से बड़ा चोदू भी नहीं झेल सकता.. जो मैं उस वक्त झेल रहा था।
मुझे जब पूरा विश्वास हो गया कि चाची कुछ नहीं बोलने वाली हैं.. तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने चाची की पीछे से सलवार को इतनी नीचे कर दी कि वो मेरे लण्ड और चाची की चूत के बीच दीवार ना बन पाए।
मैंने अपना लण्ड भी अपनी पैंट की ज़िप खोलकर बाहर निकाल लिया और चाची की चूत में पीछे से ही डालने लगा।
मेरे काफ़ी देर कोशिश करने पर भी लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था।
एक तो चोदने को पहली बार चूत मिली थी.. ऊपर से यह डर कि कहीं चाची जाग ना जाएं.. उससे भी बड़ा कि उस चूत का मालिक भी बगल में ही सोया है।
आप समझ सकते हैं कि ऐसा करने के लिए कितना बड़ा ज़िगरा चाहिए।
मेरी भी गाण्ड फटी हुई थी। इसी चक्कर में.. मैं अपना लण्ड चाची की चूत में नहीं डाल पाया और बाहर ही ढेर हो गया। मेरी तो कलेजा गले में आ गया कि ये क्या हो गया।
मैंने अपने ऊपर थोड़ा काबू किया और चाची की सलवार को ऊपर करके दूसरी तरफ मुँह करके सो गया.. क्योंकि मुझे खुद पर इतनी शरम आ रही थी कि चूत मिली.. तो चोद नहीं पाया और लण्डबाज बना फिरता हूँ। शरम के मारे बाथरूम में भी नहीं जा सका.. वहीं पड़े-पड़े कब नींद आ गई.. पता ही नहीं चला।
मेरे साथ जो पहली बार Sex stories हुआ, उसे मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता। इस बात को मैं आज तक दो साल बीत जाने पर भी किसी को नहीं बता पाया, लेकिन आज इस कहानी के माध्यम से आप को बता रहा हूँ।
जब मैं यूरेका फोर्ब्स कम्पनी में सेल रैप पर काम कर रहा था। मैं देखने में स्मार्ट हूँ, लम्बा हूँ, सब कुछ ठीक-ठाक है। एक दिन मैं सेल्स के लिए एक पॉश कॉलोनी में गया। बारह बजे तक कोई भी सेल नहीं हुई, मैं बड़ा उदास था। लंच के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे सो मैंने सोचा कोई बुकिंग हो जाए तो कुछ एडवांस मिल जाएगा फिर लंच करूँगा। इसी उम्मीद में मैं दोबारा ग्राहक तलाशने लगा।
काफ़ी देर बाद एक औरत ने दरवाजा खोला, मैंने कहा- मैं एक्वा बेचता हूँ, आप देखना चाहेंगी..!
उसने कहा- हमारे पास तो पहले से ही है।
और वो वापस जाने लगी, मेरी ये उम्मीद भी जाती हुई लगी। मैंने जाते-जाते पूछ लिया- मैम.. ठीक चल रहा है…!’
उसने कहा- रुको.. मैं देख कर आती हूँ..!
वो औरत करीब 30 साल की रही होगी और शादी-शुदा भी थी। थोड़ी देर के बाद वो वापस आई और बोली- नहीं.. ठीक नहीं चल रहा है, तुम चैक कर लो..!
और मैं अन्दर चला गया। अन्दर जाकर मैंने मशीन को चैक किया तो, वैसे वो ठीक थी… बस थोड़ी सी सफ़ाई करनी थी।
मैंने कहा- मैम इसमें थोड़ी प्रोब्लम है, ठीक करने के 300 रुपये लगेंगे..!
उसने मुझसे कहा- ये तो ज्यादा हैं..!
मैंने कहा- ठीक है आप 200 दे देना, लेकिन बिल नहीं दूँगा..!
(जबकि मुझे मशीन ठीक करने के परमीशन नहीं थी)
उसने कहा- ठीक है.. करो..!
और मैं उसको ठीक करने लगा, थोड़ी देर बाद मशीन ठीक होने पर मैंने उनसे रुपये मांगे। तो वो अन्दर से आई और कहा- मशीन चैक करा दो..!
मैंने कहा- आप चला कर देख लीजिए..!
और वो मेरे आगे खड़ी होकर चैक करने लगी, ठीक उनके पीछे मैं खड़ा था। मैंने पहली बार ध्यान दिया उसने नाईटी के नीचे कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी फिगर भी 34-24-36 के आस-पास थी। अचानक वो पलटी और कहा- ठीक है.. अब बताओ कितने पैसे देने हैं..!
मैंने कहा- मैम 200 रुपये..!
उसने कहा- तुमने इसमें क्या सामान डाला है..! अपने ऑफिस में बात करो..!
मैं डर गया और मैंने कहा- ठीक है, आप 100 रुपये ही दे दीजिए..!
लेकिन वो फिर कहने लगी- नहीं.. मेरी अपने ऑफिस में बात कराओ..!’ और वो धीरे-धीरे स्माइल कर रही थी।
हार कर मैंने उनसे कहा- मैम मुझे मशीन ठीक करने की परमीशन नहीं है, इसलिए मैं आपकी ऑफिस में बात नहीं करा सकता..!
तो उसने कहा- तो तुमने मशीन को क्यों हाथ लगाया..!
मैंने कहा- पॉकेट-मनी के लिए..!
उसने कहा- क्यों सेलरी नहीं मिलती?
मैंने कहा- मैम अभी मैं नया हूँ..!
तो वो बोली- इसके लिए तुम गलत काम करोगे..!
मैंने कहा- मैम वैसे तो मैंने कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन आप को लगता है तो मैम आधा दिन हो चुका है और मेरे पास पैसे नहीं है जिससे मैं लंच कर सकूँ.. इसलिए मैंने आप की मशीन ठीक की है..!
तो वो बोली- ओके.. ठीक है बैठो..!
और मेरे बारे सब कुछ पूछने लगी, मेरी शादी के बारे में पूछा।
मैंने मना कर दिया, फिर मेरे गर्ल-फ़्रेंड के बारे पूछा, मैंने कहा- पहले थी..!
उसने कहा- उसके साथ क्या-क्या किया?
मैंने कहा- मैं समझा नहीं..!
तो वो बोली- उसके साथ सेक्स किया था?
पहले तो मैं शर्मा गया, फिर उसके जोर देने पर मैंने कहा- नहीं..!
वो बोली- तुम झूठ बोल रहे हो..!
मैंने कहा- नहीं..!
तो वो बोली- सच बोलो, मैं तभी तुम्हारे पैसे दूँगी..!
मैंने कहा- हाँ.. किया था..!
तो वो बोली- क्या तुम एक्स्ट्रा इनकम करना चाहते हो? साथ में गिफ़्ट भी मिलेंगे..!
मैंने कहा- जरूर..!
तो वो बोली- उसके लिए तुम्हें पहले टेस्ट पास करना पड़ेगा, अगर तुम टेस्ट में पास हो गए तो तुम्हें 1000 रुपये आज ही मिल जायेंगे और हर महीने 10000 रुपये मिलेंगे..! महीने में 15 दिन 2 घंटे रोज देने होंगे..!
मैंने कहा- ठीक है..!
मैं बड़ा खुश हुआ, मैंने काम के बारे में पूछा तो वो बोली- केवल तुमको थोड़ी सी मसाज करनी है।
मैंने कहा- मुझे तो आती नहीं..!
वो बोली- मैं सिखा दूँगी।
मैंने कहा- ठीक है।
‘तो चलो.. तुम्हें मसाज सिखाती हूँ और तुम्हारा टेस्ट भी हो जाएगा..!’
मैंने कहा- ठीक है।
फिर वो मुझे लेकर अपने बेडरूम में गई, वहाँ जाकर बोली- पहले अपने कपड़े उतारो..!
मैं अब सब कुछ समझ रहा था और खुश भी था। मैंने अपने कपड़े उतारे, बस अंडरवियर पहने रखा।
फिर वो अपने कपड़े उतार कर बेड पर बैठ गई और बोली- अपना लण्ड दिखाओ..!
मैं थोड़ा हिचकचाया, उसने आगे आकर अपने हाथ से मेरा अंडरवियर नीचे किया और मेरे लण्ड को हाथ में लेकर आगे-पीछे किया और कहा- अंडरवियर भी उतार दो..!
मैंने वैसा ही किया। उसने मेरे हाथ में एक बॉडी-लोशन दिया और कहा- इसको मेरे बॉडी पर लगाओ..!
उस समय उसने ब्रा-पैंटी पहन रखी थी। मैंने डिब्बे से पहले लोशन उसके पेट पर लगाया फिर उसके पैरों पर, फिर मैंने उनसे ब्रा और पैंटी के लिए पूछा, तो उसने उसको उतारने के लिए कहा। उसकी ब्रा उतरते ही मेरा मन उसको चूसने के लिए करने लगा और मैंने अपना मुँह उसके मम्मे पर रख दिया और उसको चूसने लगा और वो मेरा लण्ड पकड़ कर दबाने लगी। उसके मम्मे काफ़ी टाइट थे। काफ़ी देर मम्मे चूसने के बाद मैंने लोशन दुबारा लगाना शुरु किया। कभी आगे, कभी पीछे मेरा लण्ड अब गीला होने लगा था। मेरा मन अब उसको चोदने को कर रहा था। उसने अपनी ब्रा और पैंटी उतार कर मेरा अंडरवियर भी उतार दिया।
और मेरा फ़ेस अपनी चूत पर रख कर कहा- इसको चाटो..!
मैंने भी वैसा ही किया, मैं पहली बार किसी की चूत चाट रहा था। फिर उसने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी। अब तो जैसे मैं पागल हो गया था और लगने लगा मेरा पानी निकल जाएगा।
मैं अपने लण्ड को उसके मुँह से हटाने लगा, तो उसने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- पानी निकलने वाला है..!
तो उसने मेरा लण्ड अपने मुँह से निकाल दिया और कहा- अब तुम सबसे पहले अपना लण्ड मेरी गांड में डालो..!
मैंने कहा- आगे से नहीं..!
तो वो बोली- आगे से ज्यादा मजा पीछे से आता है।
मैं भी उसके पीछे से उसको चोदने लगा। काफ़ी देर बाद जब मेरा लण्ड से पानी निकलने वाला था, तो उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। मेरा लण्ड अब पानी छोड़ रहा था, लेकिन वो सारा पानी पी रही थी। जब मेरा लण्ड बैठ गया, तो उसने छोड़ा।
फिर उसने कहा- अब मेरी चूत में अपनी उंगली डाल कर आगे-पीछे करो। मैं वैसा ही करने लगा। थोड़ी देर के बाद मेरा लण्ड फिर तन गया और उसने देख कर कहा- चलो अब मेरी चूत मारो..!
मैंने अब उसकी चुदाई शुरु की और उसके मम्मे को अपने मुँह में लेकर चूसता रहा।
थोड़ी देर बाद उसने मेरा लण्ड अपनी चूत से बाहर निकाल कर अपने दोनों मम्मे के बीच में मेरा लण्ड दबा लिया और कहा- अब यहीं पर रगड़ते रहो और अपना पानी यहीं पर निकाल दो..!
मैं भी वैसा ही करता रहा। मेरे लण्ड उसके मम्मे के बीच में रगड़ रहा था, फिर मेरे लण्ड ने उसके मम्मे पर पानी छोड़ दिया। उसने दोबारा मेरा लण्ड अपने मुँह से साफ़ किया और मुझे कपड़े पहनने को कहा और वो बाथरूम चली गई। थोड़ी देर बाद फ़्रेश होकर आई और मुझे 1000 रुपये देकर कर कहा- ये तुम्हारा एडवांस..!
और मुझे एक फोन नम्बर देकर कहा- कल यहाँ पर फोन करके चले जाना..!
तो दोस्तो, यह थी मेरी कहानी। आप लोगों को कैसी लगी? Sex stories
सौम्या उनकी इकलौती बेटी है.
वह बचपन से ही थोड़ी समझदार टाइप की थी.
बचपन में मेरी मां कह देती थीं कि तुम दोनों शादी कर लेना.
हम दोनों ही झेंप जाते.
पर शायद उसे मैं हमेशा से पसंद था.
फिर मैं इंजीनियरिंग करने बाहर चला गया.
वह भी चली गई.
यह बात लॉकडॉउन की है.
मैं घर पर था.
मेरी गर्लफ्रेंड ने भी मुझसे ब्रेकअप कर लिया था.
सौम्या मेरे घर में आती जाती रहती थी.
हम दोनों आपस में बातचीत भी करते थे.
घर पर भी लोग हमें देखने तक नहीं आते थे कि हम दोनों अकेले में क्या कर रहे हैं.
उनके विचारों में हमारे जवान होने के बाद भी किसी तरह का बदलाव नहीं आया था.
एक दिन की बात है. मैं सोया हुआ था और वह सुबह घर आई.
मम्मी ने उसे कहा- राज को जगा लो, दोनों चाय पी लेना.
वह चाय लेकर आई.
उसने चाय की ट्रे रखी और मुझे जगाने लगी.
मैं गहरी नींद में सोया हुआ था.
दो तीन बार जगाने पर भी जब मैं नहीं उठा, तो वह मेरा हाथ पकड़ कर खींचने लगी.
मैंने नींद में ही उसे अपने करीब खींच लिया और हग करके उसके होंठों पर किस कर दी.
दरअसल मैं नींद में उसे अपनी गर्लफ्रेंड समझ रहा था.
पर फिर अन्दर याद आया वह तो मुझे छोड़ कर जा चुकी है तो ये कौन है!
यह याद करते ही मेरी फटी और नींद खुल गई.
वह भी उठ कर बैठ गई.
मैंने देखा सौम्या कांप रही थी.
मैंने उससे सॉरी कहा और कहा मैंने तुम्हें अपनी गर्लफ्रेंड समझ लिया.
यह सुनकर वह उठी और चाय छोड़ कर चली गई.
मुझे लगा मेरी वजह से नाराज हो गई है.
वह तीन दिन तक घर नहीं आई.
फिर एक दिन शाम को आई.
मैंने कहा- सॉरी सौम्या, उस दिन मुझसे भारी भूल हो गई थी.
उसने हंस कर बात को टाल दिया.
फिर यूं ही हम दोनों में बातचीत होती रही.
एक दिन शाम को हम बात कर रहे थे.
तो उसने पूछा- तुम उस दिन किसके बारे में सोच रहे थे?
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या?
उसने कहा- मैं समझ गई कि तुमने सॉरी क्यों कहा.
मैंने पूछा- इतना गौर करती हो मेरी बातों पर?
उसने कहा- अब इतना तो हक है!
मैंने सब बता दिया.
उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा- तुम्हें भी कोई खोना चाहेगी क्या?
मैं समझा नहीं.
वह चली गई.
फिर दीवाली आई.
हम सब मिल कर घर पेंट कर रहे थे.
वह भी काम में हाथ बंटाती थी.
मेरे कमरे में पेंट की बारी आई, तो उसने रंग पसंद करके बताया. मैंने भी वही रंग सोचा था. मुझे सौम्या और ज्यादा अच्छी लगने लगी.
फिर वह कमरे में आई तो मैं पेंट कर रहा था.
वह मेरे लिए चाय लेकर आई थी.
मैं चाय पीने लगा तो वह खुद ब्रश उठा कर पेंट करने लगी थी.
उस वक्त मुझे उसको देखने में बड़ा सुखद लग रहा था, मुझे उस पर प्यार आ रहा था.
आज मैं उसका फिगर देखने लगा था.
उसकी काया मुझे बड़ी ही कमनीय लग रही थी.
मैं आपको भी उसकी फिगर बता दूँ.
वह 34-30-36 की थी.
उसकी आखें एकदम गहरी मानो कोई नेचर का पोर्ट्रेट देख रहे हों.
दूसरे दिन बाहर की ओर पेंट चल रहा था.
वह मुझे चाय देकर खुद सीढ़ी के ऊपर चढ़ कर पेंट कर रही थी.
मैं उसे देखते हुए चाय पीने लगा.
पेंट का ब्रश डिब्बे में डुबोने के चक्कर में वह एकदम से फिसल गई.
मैंने चाय का कप छोड़ा और उसे लपक लिया.
वह आह करती हुई मेरे एकदम करीब हो गई थी.
मैं उसकी आंखों में खो गया.
चाय का कप गिरने की आवाज हुई.
तो मम्मी की आवाज आई- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं … कप गिर गया मेरे हाथ से.
फिर वह संभली और मुझे देख कर स्माइल करके बोली- हमेशा बचाओगे क्या?
मैंने भी उस अहसास को पहली बार महसूस किया था.
मैंने पता नहीं कैसे बस कह दिया- हां.
वह मेरे पास आई और बोली- सच में?
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उसे अपने गले से लगा लिया और कहा- हां हमेशा.
वह भी मेरी बांहों में कटी हुई डाली की तरह गिर सी गई.
मैंने उसका चेहरा उठाया और कहा- आई लव यू.
उसने कुछ भी नहीं कहा और चली गई.
मैं फिर उसका इंतजार करने लगा.
दीवाली के दिन वह फिर से आई.
मैंने कहा- प्रपोज किया था, घर नहीं आने के लिए नहीं कहा था.
उसने कहा- अच्छा जी, मिस कर रहे थे अपनी मिसेज को!
मैंने उसकी आंखों में देखा तो वह शर्मा गई.
तो मैंने कोहनी मारते हुए कहा- हां, मिसेज राज.
उसने सर झुका लिया और मुस्कुरा दी.
फिर हम सब दीवाली मनाने लगे.
दीवाली के अगली सुबह वह सुबह सुबह आई और मम्मी और मेरे लिए चाय बना कर लाई.
मम्मी को देने के बाद वह मेरे कमरे में आई और मुझे उठाने लगी.
मैं उठ गया था पर मैंने जानबूझ कर उसे फिर से खींच लिया और किस कर दिया.
उसने मुझे धक्का दिया और कहा- बचपन से तुम्हें प्यार किया है. क्या तुम भी करते हो?
मैंने कहा- देख लो.
उसने कहा- ठीक है.
फिर उस दिन के बाद हम दोनों नहीं मिले.
मैं जॉब पर वापस आ गया और वह भी.
6 महीने बाद मैं अपने घर गया.
वह भी आई हुई थी या शायद उसे पता था कि मैं आऊंगा.
अगले दिन फिर से मेरी पत्नी की तरह चाय लेकर आ गई.
मैं जाग कर बैठा हुआ था.
वह देख कर ऐसे मुस्कुराई जैसे जानती हो कि मैं उसका इंतजार कर रहा था.
चाय लेते हुए मैंने एक सिप ली और उससे पूछा- पूरी लाइफ केयर करोगी?
उसने कहा- तुम्हें पता नहीं क्या?
फिर मैंने अपना कप उसकी तरफ बढ़ा दिया.
उसने बेहिचक मेरी जूठी चाय से एक सिप ले लिया और अपने हाथ से में खुद मुझे पिलाने के लिए आगे झुकी.
मैंने भी पी ली.
उसने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा- गुड ब्वॉय.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा- किस्सी चाहिए मेरे बाबू को!
यह कह कर वह मेरे चेहरे पर झुकी और एक जोरदार किस दे दिया.
फिर कहा- सो स्वीट.
मैंने उसकी आंखों में प्यार से देखा.
उसने कहा- ये रोजाना चाहिए है तो सोच लो.
मैंने कहा- सोच कर ही आया था.
उसने कहा- क्या?
मैंने कहा- अभी देख लेना.
वह चली गई.
मैं उसकी मम्मी के पास गया और अपने और उसके बारे में बात की.
उन्होंने कहा- वह मेरी बेटी है और खुद समझदार है. वह जॉब भी करती है, उसे ही अपना फैसला लेना है. हम उसके साथ हैं.
फिर ये बात हमारे घर वालों ने की और हमारी शादी हो गई.
पहली रात को वह पहले से ही कपड़े चेंज करके बैठी थी.
मैं अन्दर आया तो उसने कहा- आप भी चेंज कर लो पतिदेव.
यह सुन कर मुझे अच्छा लगा.
मैं चेंज करके आया तो उसने हमारे लिए वाइन के दो ग्लास तैयार करके रखे थे.
मैंने कहा- वाह दूध की जगह सोमरस!
उसने मुझे ताना मारते हुए कहा- पुराने ख्यालों की नहीं हूँ मैं!
मैं उसके पास गया और उसके बालों में पीछे से साथ डाल कर उसे अपने चेहरे के पास लाकर कहा- तुम बचपन से इंतजार कर सकती हो … और मैं तुम्हारे दिल की बात नहीं समझता तो फिर प्यार किस बात का?
वह मेरी आंखों में देखने लगी और फिर उसने कांपते होंठों से मुझे चूम लिया.
मैंने भी उसे चूम लिया.
हम दोनों अलग हुए और हमने वाइन का पैग लिया.
कुछ देर बात करते हुए हम दोनों बिना कुछ किए वैसे ही सो गए.
सुबह 4.30 पर आंख खुली.
हल्की हल्की रोशनी आ रही थी.
मैं उठने लगा तो उठ नहीं पाया.
उसने मुझे जकड़ रखा था.
मेरे हिलने से वह भी उठ गई.
उसने ऐसे ही मुझे अपनी ओर खींच लिया और एक लंबा किस हुआ.
उसके बाद उसने कहा- ये तो हुआ मेरे हक का … अब आप कुछ पियेंगे?
मैंने उसकी तरफ देखा.
वह मुस्कुरा रही थी.
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा.
वह घूम कर मेरी गोद में सीने से सीना लगा ऐसे बैठ गई जैसे चंदन से लिपटा सांप.
मैंने उसकी गर्दन पर एक छोटा सा किस किया.
उसने अपना हाथ पीछे करके मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं, फिर अपनी ओर खींच कर किस कर लिया.
मैंने पीछे से उसके गाउन का स्ट्रैप खोल दिया और दोनों हाथ आगे ले आया.
उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने एक मम्मे पर रख दिया.
मेरा दूसरा हाथ सरकते हुए उसके पेट और नाभि से खेलने लगा.
अब उसकी काम वासना से भरी हुई सिसकारी निकल गई.
मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को निचोड़ रहा था.
हमें दस मिनट हो चुके थे.
अब वह गोद से उतरी और मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे खाने लगी.
वह किस करते करते मेरी चड्डी तक पहुंच गई.
मैं उसकी चूचियों से खेल रहा था.
उसने सीधे ही मेरी चड्डी खींच दी.
मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड उसके सामने था.
उसने उसे अपने हाथों में भरा और लौड़े की मुठ मारती हुई बोली- बचपन से एक ही सपना था कि तुम्हारी होना है. मेरी सहेलियों ने मुझसे कहा भी कि मजे कर ले, पर मुझे तुम्हारी होना था. तुम तो कर चुके हो!
मैंने उसके मुँह पर हाथ डाला और उसे अपने पास खींचते हुए कहा- अब बस तुम्हारा ही तो हूँ.
उसने कहा- यदि भरोसा ऐसा था तो बचपन में कहते … एक बार भी तुम्हें छोड़ कर नहीं गई होती.
मैंने कहा- फिर तुमसे प्यार कैसे होता?
वह मुस्कुरा दी.
उसने मेरे लंड को पकड़ा और मुँह में भर कर चूसने लगी.
फिर जब मुझे लगा कि अब रुक पाना मुश्किल है, तो मैंने उसे सीधा उठाया और बेड पर गिरा दिया.
उसने मेरी तरफ देख कर मुझे उंगली से इशारा करके चूत का रास्ता दिखाया.
मैंने कहा- ऐसे नहीं.
उसने मेरी तरफ देखा.
मैंने उसे उठाया और उसके शरीर पर कसे हुए ब्रा पैंटी को उतार दिया.
फिर दीवार से चिपका कर उसके दूध पीने लगा.
मैं एक चूची मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसका गला दबा रखा था.
थोड़ी ही देर में वह मचलने लगी और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर दबाने लगी.
उसने कहा- बस पतिदेव, अब चोद दीजिए ना!
मैंने कहा- ठीक है.
मैं भी खड़ा खड़ा थक गया था.
मैंने उसे बेड पर लिटाया और चूत चाटने लगा.
उसने कहा- कल भी यहीं रहूँगी और मेरी चूत भी … अभी पहले चोद दो ना प्लीज!
मुझे उसकी मासूमियत भरे चेहरे पर प्यार आ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया.
काफी गीली चूत थी.
थोड़ा इधर उधर करने पर लंड का सुपारा अन्दर फंस गया.
उसे हल्का सा दर्द हुआ.
वह उछली.
मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने दर्द भरे भाव से कहा- कुछ भी नहीं … बस रुकना मत, डाल दो तुम.
मैंने एक ही बार में पूरा लंड जड़ तक पेल दिया.
उसकी बहुत जोर से चीख निकली, जिसे सुन कर उसकी चचेरी बहन मानसी जो दिल्ली में डॉक्टर थी और शादी में आई थी, वह हमारे ही बाजू वाले कमरे में रुकी हुई थी.
मानसी जाग गई और अपने कमरे से उठ कर आकर दरवाजा खटखटाने लगी.
पर मेरी बीवी जो अपने नाखून मेरे पीठ में चुभो चुकी थी, अब चुप थी.
फिर उसकी बहन चली गई.
इधर मैंने भी उसे प्यार से सहलाते सहलाते उसका दर्द कम किया.
उसने मेरी आंखों में ऐसे देखा मानो उसने मुझे जीत लिया हो.
अपने आंसू पौंछते हुए आंखों से ऑर्डर दिया- आगे बढ़ो.
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए चोदना शुरू किया और 15 मिनट चोदने के बाद वह झड़ गई.
मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और उसकी चूत में लंड पेल दिया.
इस आसन में मेरा लौड़ा सीधा उसकी बच्चेदानी में ठोकर मारकर वापस आ गया.
वह चिहुंक उठी और उसने कराहते हुए कहा- पतिदेव मर गई.
मैं खड़ा हुआ और उसे दीवार से लगा दिया.
एक तरह से वह हवा में लटकी हुई थी.
मेरा लंड उसकी चुत में फंसा था.
मैं उसे चोदने लगा.
वह मेरी ताकत की कायल हो गई थी और चुदाई का मजा लेने लगी थी.
काफी देर बाद मैं थक गया तो मैं उसे वैसे ही लेकर लेट गया.
वह मेरे ऊपर आ गई और अपनी गांड उठा उठा कर चूत में लंड लेने लगी.
इधर मैं उसकी चूचियों को निचोड़ रहा था.
वह पागलों की तरह आह आह कर रही थी.
फिर हम दोनों एक साथ आह आह करते हुए झड़ गए.
मैं उसे उठा कर बाथरूम में लेकर जाने लगा तो उसने मेरे चेहरे को अपने चेहरे से ढक दिया और होंठ चूसने लगी.
लेकिन मुझे गेट बंद होने की आवाज आई.
मुझे लगा बाथकमरे में कोई है.
मेरा और मेरे बगल वाले कमरे का साझा बाथरूम है.
मैं रुक गया.
फिर मैं आगे बढ़ा.
दरवाजा हल्का सा खुला था.
पर उस टाइम मैंने गौर भी नहीं किया, बस बाथरूम में आ गया.
उधर भी साफ सफाई के बाद हमारी चुदाई होने लगी और बहुत देर तक हुई.
चुदाई की आवाज़ शायद मानसी ने सुनी ही होगी, जो उस टाइम हम दोनों के ध्यान में नहीं आई.
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