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उस दिन मैं नाइट ड्यूटी करके सुबह साढ़े सात बजे घर पहुँचा मेरी Sex Stories वाइफ एक टीचर है और स्कूल जाने के लिए तय्यार हो रही थी.आठ बजे वो घर से निकल गयी. मैं नहा कर फ्रेश हो गया और रोज की तरह सोने की तय्यारी करने लगा.अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई तो मैं चौंक गया. बड़ी गहरी नींद आ रही थी और मैं बहुत परेशान था की इस वक़्त कौन आ गया.मैने दरवाजा खोला तो सामने एक औरत खड़ी थी.
करीब पच्चीस साल की उमर की एक देहाती औरत को देखकर मैने सोचा शायद कोई माँगने वाली है.
“क्या चाहिए” मैने पूछा.
“मेरा भाई काम पर आया बाबूजी ?” वो बोली
“कौन भाई ?” मुझे गुस्सा आ रहा था
“मेरा भाई संजू बाबूजी” मीठी सी आवाज़ में वो बोली
“संजू बेलदार ?” मैने उसे उपर से नीचे तक देखते हुए पूछा. उन दिनों हमारे घर में कन्स्ट्रक्षन का काम चल रहा था और संजू एक बेलदार का नाम था
संजू हमारे बिल्डिंग ठेकेदार लल्लन का साला था.यानी मेरे सामने खड़ी औरत लल्लन की बीबी थी.
“जी बाबूजी संजू बेलदार मेरा भाई है कल रात से घर नही आया तो मैने सोचा की आपके यहाँ देख लूँ” वो बड़ी प्यारी मुस्कुराहट के साथ बोली.
मुझे उसकी मुस्कुराहट बड़ी सूंदर लगी. मैने उसे अंदर आने के लिए कहा तो वो अंदर आकर नीचे ज़मीन पर बैठने लगी
“अरे नीचे नही सोफे पर बैठो” वो शरमाती हुई सोफे पर बैठ गयी .मैं सामने के बेड पर बैठ गया.
“संजू तो कल शाम को पाँच बजे चला गया था और सुबह से आया नही” मैने कहा. वो गर्मियाँ के दिन थे कूलर की सीधी हवा बेड पर आ रही थी. वो सोफे पर बैठी तो शायद उसे गर्मी लग रही होगी.
“कोई बात नही बाबूजी , शायद किसी दोस्त के यहाँ रुक गया होगा संजू.मैं कहीं और देख लूँगी” वो बोली.
मैने पूछा ” क्या तुम लल्लन की घरवाली हो ?” उसने हाँ में गर्दन हिला दी ,बिल्कुल बच्चों की तरह.
“क्या नाम है तुम्हारा ?” मैने बातों का सिलसिला आगे बढ़ाया.
“सीमा” कहकर वो शर्मा सी गयी.
“बहुत सूंदर नाम है” मैने कहा “चाय पियोगी सीमा ?’
मेरे मूह से अपना नाम सुनकर उसने अचानक मेरी देखा “आप तकलीफ़ क्यों करते हो बाबूजी ?”
“अरे तकलीफ़ कैसी सीमा , मैं अपने लिए तो बना ही रहा हूँ तुम भी पी लेना” मुझे बार बार उसका नाम लेकर बुलाने में मज़ा आ रहा था.
“ठीक है बाबूजी , बना लीजिए” वो फिर मुस्कुराइ . अब मुझे उसकी मुस्कुराहट और अच्छी लगी.
मैं किचन में चाय बना रहा था और मन में उल्टे सीधे विचार आने लगे.चाय बनाने में ध्यान कहाँ लगता.आँखो के सामने सीमा की खूबसूरत मुस्कुराहट
घूम रही थी.चाय उबल कर बाहर निकल गयी.
“क्या हुआ बाबूजी ?” सीमा ने आवाज़ लगाकर पूछा.ऐसा लगा मानो मेरी घरवाली कुछ पूछ रही हो
“कुछ नही “कहते हुए मैं चाय दो कपो में लेकर रूम में आ गया . सामने बैठी सीमा को पसीना आ रहा था.
“गर्मी लग रही हो तो इधर बेड पर आ जाओ सीमा” मैने कहा तो वो आकर मेरे सामने बेड पर बैठ गयी. मैने देखा की उसकी हाइट बहुत कम थी
लेकिन शरीर भरा हुआ था थोडा पेट भी निकला हुआ था रंग सांवला लेकिन नैन नक्श तीखे थे
हम दोनो चाय पीने लगे . मैने पूछा “और घर में कौन कौन है सीमा” मैं जान बूझकर उसका नाम ले रहा था
“हम दोनो मियाँ बीबी और एक बच्चा है बाबूजी. अभी छोटा है एक साल का और साथ में संजू भी रहता है” वो आँखों में आँखें डालकर बात कर रही थी
“दूसरा बच्चा होने वाला है क्या , सीमा ?” पूछते हुए मेरा मन जोरों से धड़कने लगा. कहीं सीमा बुरा मान गयी तो ?
“धत्त बाबूजी आप भी क्या पूछते हैं ” वो शर्मा कर मुस्कुरा दी “आपने ऐसा क्यों पूछा ?”
“तुम्हारा पेट देखकर” मैने हिम्मत करके कह दिया.
“धत बाबूजी अभी नही , अभी तो पहला ही छोटा है ” उसने चाय ख़त्म करते हुए कहा.”अच्छा अब मैं चलूं बाबूजी ?” वो उठने लगी
“थोड़ी देर और बैठो ना सीमा प्लीज़” कहते हुए मैने उसका हाथ पकड़ लिया.
“ये क्या करते हो बाबूजी ? कहीं किसी ने देख लिया तो ? ” उसने हाथ छुड़ाने की कोशिश नही की
मेरी हिम्मत और बढ़ गयी. मैने उसे अपने पास खींच लिया “हम दोनो के अलावा यहाँ है कौन जो हमे देखेगा सीमा ?” मैने उसका एक चुम्मा ले लिया
“नही बाबूजी हमे जाने दो ,हमे खराब ना करो” वो दरवाजे की तरफ जाने लगी. मैने उसका पल्लू पकड़ लिया.
“ऐसे नही सीमा , ऐसे मत जाओ प्लीज़ . मैं तुम्हारे साथ कुछ और देर रहना चाहता हूँ” मेरे स्वर में विनती थी
“नही बाबूजी मैं और नही रुक सकती. आप इतने लंबे और मैं इतनी छोटी , हमारा मिलन कैसे होगा “वो बोली और इसी छीना झपटी में उसकी साड़ी खुल गयी.उसने अपनी बाहे अपने सीने पर रख ली.
“ये क्या छुपा रही हो हमसे सीमा रानी ,दिखाओ ना” मैने उसकी बाहे हटाने लगा.
“आप बड़े गंदे हो बाबूजी ,कैसी गंदी बाते करते हो . ये तो मेरा बच्चा चूस्ता है इनमे आप क्या लोगे ?” सीमा बोली.
“तो हमे भी दिखाओ ना हम भी चूस लेंगे थोड़ी सी” कहते हुए मैने उंसकी दोनो चुचियाँ पकड़ ली . क्या पत्थर की तरह सख़्त चुचियाँ थी सीमा की
चुचियाँ पकड़ते ही सीमा बुरी तरह से काँपने लगी
” क्या बात है सीमा रानी ? काँप क्यों रही हो ” मैं घबरा गया था
“क्या बताउन बाबूजी , बहुत डर लग रहा है . पता नहीं आप मेरे साथ क्या करने वाले हो . मुझे छोड़ दो बाबूजी, जाने दो, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ.”
मुझे लगा कहीं सीमा शोर ना मचा दे , आख़िर अडोस पड़ोस में और भी लोग रहते हैं
“इसमे डरने क़ी क्या बात है सीमा रानी ? मैं तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती नहीं करूँगा. जो भी होगा तुम्हारी रज़ामंदी से होगा . आओ बेड पर बैठ कर बात
करते हैं . ठीक है सीमा रानी ?” मैने पूछा
” ठीक है बाबूजी” उसके हाँ कहते ही मेरी जान में जान आई . मैने सीमा को अपनी बाहों में उठा लिया और ला कर बेड पर लिटा दिया.
बिल्कुल फूल क़ी तरह कोमल थी सीमा. हल्की सी, छोटी सी और प्यारी सी
” अब बताओ सीमा रानी, किससे डर लगता है तुम्हे ” मैं उसके पास बैठ गया और सिर पर हाथ फेरने लगा
” बाबूजी आप मुझे बार बार सीमा रानी कहकर क्यों पुकारते हो ? मैं कहीं क़ी रानी थोड़े ना हूँ . मेरा नाम तो सिर्फ़ सीमा है .” वो बोली .
“रानी तो तुम बन गयी हो सीमा , आज से मेरे इस दिल क़ी ” कहकर मैने झुककर उसके होंठ चूम लिए
” हाय राम बाबूजी , आप तो बड़े बेशरम हो ” उसने अपना चेहरा अपने हाथों से छुपा लिया . सीमा क़ी इस अदा पर तो मैं जैसे फिदा ही हो गया. मैने उसके चेहरे से हाथ हटाते हुए कहा “सीमा रानी मेरा दिल करता है कि तुम्हारे इन होंठो क़ी सारी लिपस्टिक चाट लूँ. तुम बुरा तो नहीं मान जाओगी”
“इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है बाबूजी ? बस एक बात का ख़याल रखना कि अगर आप मेरी लिपस्टिक चाटना चाहते हो तो नयी लिपस्टिक भी मुझे
दिलानी पड़ेगी , बोलो मंज़ूर है ?” मेरा कलेज़ा उछाल मारने लगा
“एक नही दस लिपस्टिक ले लेना मेरी जान ” मेरी किस्मत ज़ोर मार रही थी शायद .
“तो फिर आपको किसने रोका है लेकिन अपना वादा याद रखना ” सीमा मुस्कुराते हुए बोली. वही कातिलाना मुस्कुराहट जिसने मुझे पागल किया था. मैं पागलों क़ी तरह उसके होंठो को चूमने लगा . थोड़ी देर बाद सीमा भी मेरा साथ देने लगी .
सीमा ने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे रख लिया और मेरा चेहरा अपने होंठों पर दबाने लगी. मेरे होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगी, मेरे होंठ अपने दाँतों से काटने लगी. पता नही कितनी देर तक हम दोनो एक दूसरे को चुसते रहे. कितने रसीले होंठ थे सीमा के ,ऐसा लगा मानो मैं शहद पी रहा था, इतने मीठे होंठ मैने आज तक नहीं चखे थे. जब हम अलग हुए तो मैने कहा “सीमा रानी , मेरा मन कर रहा है कि मैं तुम्हारे ये कोमल कोमल गाल भी चूसू “
“फिर तो आपको एक पाउडर का डिब्बा भी दिलाना पड़ेगा बाबूजी ” कहकर सीमा खिलखिलाकर हंस पड़ी. क्या नज़ारा था वो. सीमा के हंसते ही मानो सारे कमरे में मोती बिखर गये . मेरा रोम रोम खिल गया . क्या किसी औरत क़ी हँसी इतनी सुंदर भी हो सकती है
“मैं तो तुम्हे सारा मेकप का सामान ही दिला दूँगा मेरी जान और अपने हाथों से तुम्हे दुल्हन क़ी तरह सजाऊंगा “कहकर मैं उसके गालो को चूमने लगा
“सच बाबूजी ?” उसने मुझे ज़ोर से भींच लिया अपनी बाहों में, “ओह बाबूजी आप कितनी प्यारी बाते करते हो . आज आपने मुझे जीत लिया बाबूजी. मैं आज से सचमुच आपकी सीमा रानी बन गयी हूँ ” और वो भी मुझे बेतहाशा चूमने लगी
मैने अपना एक हाथ उसके सीने क़ी एक गोलाई पर रख दिया . सीमा ने कोई प्रतिरोध नही किया .मैं समझ गया कि सीमा अब कोई प्रतिरोध नहीं करेगी
वही हाथ मैने दूसरी गोलाई पर रख दिया . “कुछ ढूँढ रहे हो क्या बाबूजी ?” सीमा धीरे से मेरे कान में बोली
“हाँ सीमा रानी “मैने उसके कान में कहा
“क्या ढूँढ रहे हो बाबूजी ? क्या मैं आपकी मदद करूँ?” सीमा मेरा कान दाँतों से काटने लगी
” हाँ सीमा रानी मेरी मदद करो ना . मेरा दिल तुम्हारी चोली में कहीं खो गया है उसे ढूँढने में मेरी मदद करो ” मेरा दिल बेकाबू हो रहा था
“अगर आपका दिल मेरी चोली में खो गया है तो ऐसे उपर से टटोलने से थोड़े ही मिलेगा बाबूजी , ज़रा अंदर कोशिश करो ” फिर वही शरारती मुस्कुराहट
” वाह सीमा रानी तुमने तो मेरे दिल कि बात कह दी ,” ठीक है मैं अपना दिल तुम्हारी चोली के अंदर ढूंढता हूँ “
इतना कहकर मैने अपना हाथ उसके ब्लाउस में डाल दिया .उसकी एक गोलाई को पकड़ लिया . कितनी सख़्त चुचि थी सीमा क़ी. फिर दूसरी गोलाई को पकड़ कर बहुत देर तक दबाता रहा . इतना दबाने पर भी चुचियाँ नरम नही हुई . अब मेरा मन सीमा क़ी गोलाइयाँ चूसने के लिए बेताब हो रहा था
” क्या हुआ बाबूजी दिल मिला या नही ” सीमा आँखे बंद किए हुए बोली
“नहीं मिला मेरी जान . अब क्या करूँ सीमा रानी” मैने उसका स्तन ज़ोर से दबा दिया
“उफ्फ बाबूजी , ये क्या करते हो ?अगर नहीं मिला तो ऐसे दबाने से थोड़े ही मिल जाएगा , चोली उतार कर ढूँढ लो ना “सीमा गरम हो चुकी थी
मैं भी तो यही चाहता था. मैने उसके ब्लाउस के सारे हुक खोल दिए .सीमा ने अंदर ब्रा नही पहनी थी हुक खोलते ही दोनो मस्त कबूतर बाहर झाँकने लगे. मैने सीमा को बैठा लिया और उसका ब्लाउस उसके सीने से अलग कर दिया . दोनो सफेद कबूतर अब आज़ाद थे और तने हुए थे
“सीमा रानी ये बताओ तुम्हारी ये सुंदर चुचियाँ इतनी सख़्त और तनी हुई क्यों हैं” मैने चुचियों को सहलाते हुए पूछा .
” बाबूजी ये तनी हुई नही भरी हुई हैं . इनमे दूध भरा है मेरे बेटे के लिए , जब वो इनको चूस लेता है तो उसकी भूख मिट जाती है और मुझे भी बड़ा चैन मिलता है .जब तक वो नही चूस्ता इनमे दर्द होता रहता है जैसा क़ी अब भी हो रहा है ” सीमा बोली
“सीमा रानी तुम्हारी चुचियों में दर्द हो रहा है और मुझे भी भूख लगी है , क्या कोई ऐसा रास्ता नही है क़ी मेरी भूख मिट जाए और तुम्हारी छातियों का दर्द कम हो जाए मेरी जान ” मैने अपने दिल क़ी बात कह दी
“मैं समझ गयी बाबूजी आप क्या चाहते हो . मुझे मालूम था क़ी आप का दिल मेरी चुचियों पर आ चुका है और आप इन्हे चूसे बिना नही छोड़ोगे .आओ बाबूजी मेरी गोद में लेट जाओ आज मैं आपको अपने बच्चे क़ी तरह चुचि पिलाऊँगी . जी भर कर पियो बाबूजी लेकिन काटना मत ” सीमा ने कहा
मैं सीमा क़ी गोद में लेट गया और सीमा ने दो उंगलियों से पकड़ कर चुचि वैसे ही मेरे मूह में दी जैसे कोई माँ अपने बच्चे को देती है. मैं चूसने लगा तो सचमुच सीमा क़ी चुचि में से दूध आने लगा . कितना गर्म और मीठा दूध था सीमा क़ी चुचियों का. मैं एक एक बूँद चूस लेना चाहता था और शायद सीमा भी यही चाहती थी इसलिए एक चुचि खाली होते ही उसने मेरे मूह में झट दूसरी चूची डाल दी
” चूसो बाबूजी और ज़ोर से चूसो , जी भर कर पियो आज अपनी सीमा रानी क़ी छातियाँ , चूस चूस कर खाली कर दो बाबूजी , इनको थोड़ी नरम बना दो , इनका दर्द मिटा दो ” सीमा मस्ती में बड़बड़ा रही थी “हाँ बाबूजी ऐसे ही प्यार से चूसो , हाए बाबूजी आप कितनी अच्छी तरह चूसते हो इतना मज़ा तो पहले कभी नही आया . लल्लन तो कभी इन्हे चूसता ही नही “
“क्या कहती हो सीमा रानी लल्लन इन चुचियों को नही चूसता . भला ऐसा कौन सा मर्द होगा जो तुम्हारी इन मदभरी चूचियों को छोड़ देगा “
” सच कहा बाबूजी आपने कोई मर्द नही छोड़ेगा लेकिन लल्लन मर्द कहाँ वो तो नामर्द है , हिज़ड़ा है हरामी “सीमा क़ी आँखे भर आई
“तो फिर ये बच्चा किसका है सीमा रानी “मैं चोंक गया था
“ये बच्चा भी आप जैसे किसी बाबू का है बाबूजी दो साल पहले उनसे ऐसे ही मिली थी जैसे आज आप मिल गये बाबूजी और उन्होने अपने प्यार क़ी निशानी ये बच्चा मेरे पेट में डाल दिया ” मैने सीमा को अपने पास खींच लिया और जी भर कर चूमा
“तो क्या तुम मेरे बच्चे को भी जन्म दोगी सीमा रानी ” धीरे धीरे वासना क़ी जगह प्यार ने ले ली
” हाँ बाबूजी मैं आपके बच्चे को जन्म दूँगी , आज आप अपना बच्चा मेरे पेट में डाल दो , बाबूजी आप का बच्चा आप ही क़ी तरह होना चाहिए लंबा और तगड़ा बाबूजी . ऐसे ही प्यार से मेरी छातियाँ चूसे जैसे आज आपने चूसी हैं
“सच सीमा रानी मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा क़ी तुम मेरा बच्चा जनोगी ” मेरा दिल मेरे मूह को आ रहा था
” इसमे विश्वास ना करने वाली कौन सी बात है बाबूजी . मैं आपके साथ एक बिस्तर पर लेटी हूँ , नंगी पड़ी हूँ , आपने चूस चूस कर मेरी छातियाँ खाली कर दी मेरिचुचियाँ निचोड़ डाली और अब मैं आपसे एक बच्चे क़ी भीख माँग रही हूँ . प्लीज़ बाबूजी मुझे आपका बच्चा पैदा करना है ” सीमा गिड़गिदने लगी
“सीमा रानी इसमे भीख माँगने वाली कोई बात नही . मैं तो खुद चाहता हूँ क़ी तुम मेरा बच्चा पैदा करो मेरी जान “
” तो फिर दो ना बाबूजी देर किस बात क़ी , डाल दो ना अपना बच्चा मेरे पेट में , मैं तय्यार खड़ी हूँ बाबूजी आओ “सीमा को काफ़ी जल्दी थी चुद्वने क़ी
” अभी तुम पूरी तरह तय्यार कहाँ हो सीमा रानी , ये घाघरा भी तो खोलना है , तभी तो मैं तुम्हारे पेट में बच्चा डाल सकता हूँ ” मैं मज़े ले रहा था
“खोल दो घाघरा बाबूजी आपको किसने रोका है और नही तो ये लो मैं खुद ही खोल देती हूँ ” कहते हुए सीमा ने एक झटके से अपने घाघरे का नाडा
खींच दिया . अब उसका घाघरा ज़मीन पर था और मेरी सीमा मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी . कितनी सुंदर दिख रही थी. मैने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा होकर सीमा को बाहों में उठा लिया
” आओ सीमा रानी आज मैं तुम्हारी मनोकामना पूरी करूँगा . तुम्हारे पेट में अपना बच्चा डालूँगा और तुम्हारी योनि क़ी सारी प्यास बुझा दूँगा ”
कहते हुए मैने सीमा को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके उपर चढ़ गया Sex Stories
बाकी अगले भाग में
दोस्तों यह कहानी नहीं, एक सच्चाई Hindi Sex Stories है। यह कहानी खासकर लड़कियों और महिलाओं को ज्यादा पसन्द आयेगी।
मेरी उम्र २६ साल है। कई साल पहले की बात है तब मेरी एक सगी बुआ की लड़की रेखा उस समय १९ साल की थी। वह अक्सर मुझे अपने घर ले जाया करती थी। मेरे घरवाले सब इसलिए अनुमति दे देते थे क्योंकि उसके कोई भाई नहीं था।
मैं उसे बहन की तरह ही प्यार करता था। लेकिन उसके दिल में कुछ छिपा था। एक दिन मैं साइकिल चला रहा था कि अचानक मेरे आँड दब गये। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। बुआजी और २ बहनें एक शादी में गई थीं। जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने रेखा दीदी को बताया। दीदी ने मेरी पैन्ट व अन्डरवीयर खोलने को कहा।
पहले तो मैं शरमाया परन्तु फिर मैंने खोल दिया। दीदी ने आयोडेक्स मेरी गोलियों पर लगाना शुरू किया और कभी कभी मेरे लन्ड को भी छू देती थी मुझे चिढ़ाने के लिए। दीदी का हाथ लगते ही वह अपने पूरे आकार में आ गया आखिर दीदी ने बोल ही दिया- बाप रे ! कितना बड़ा है।
उसके तीन दिन बाद एक दिन मैंने दीदी को झाँट साफ करते देख लिया। वे रेजर से साफ कर रहीं थी। मैं शरमाकर पीछे हट रहा था लेकिन दीदी ने कहा कि इधर आ। मुझे तेरा सामान देखकर शर्म नहीं आई थी, तू क्यों शरमा रहा है?
और उन्होंने रेजर मुझे दे दिया। फिर मैंने दीदी की बगलें तथा झाँटे साफ की। दीदी की गोरी गाण्ड व गुलाबी चूत देखकर अचानक मेरे लण्ड से भी कुछ रिसने लगा।
जब मैं रेजर चला रहा था दीदी बार बार मेरी पैन्ट में टाइट लण्ड को निहार रही थी। मैंने कुछ करना चाहा। तभी दीदी ने मन में कुछ सोच कर कहा- रात को।
उसी दिन से दीदी रात को अपने साथ सुलाने लगी थीं। एक दिन रात को उन्होने अपना एक हाथ मेरे सिर के नीचे डाल लिया और फिर करवट बदलकर मुझे अपने ऊपर कर लिया। मैं सोने का नाटक करता रहा।
फिर उन्होने मेरी पैन्ट नीचे खींच दी तथा हाथ से मेरा लन्ड पकड़कर अपनी टाइट चूत में डाल लिया। और मेरी पीठ दबाकर उपर नीचे करने लगीं। इस सिलसिले में कई बार मेरा लण्ड दीदी की चूत से बाहर आ जाता था। मेरा मन करता था कि स्वयं हाथ से पकड़ कर चूत में घुसा दूं, परन्तु मुझे करने की जरूरत नहीं थी, दीदी खुद डाल लेती थी और थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया। ये मेरा पहला सेक्स था।
सुबह उठकर दीदी ने कहा- किसी से कहना नहीं, ये खेल रोज खेला करेंगे, जब तक सर्दी की छुटटी खत्म हों।
३-४ दिन के बाद एक दिन मैंने खुद जब दीदी सो रहीं थीं। उनकी सलवार के पीछे से गाण्ड की दरार में लगा दिया। दीदी जग गईं और उन्होंने सलवार का नाड़ा खोलकर पहली बार गाण्ड भी मरवाई।
दोस्तों ! आज जब दीदी के २ बच्चे हैं और मेरी भी शादी हो गई है। जब भी हम अकेले में मिलते हैं, मैं उनसे पूछता हूँ कि आपके पति कैसे हैं सैक्स में?
हम अभी भी मौका मिलने पर एक दूसरे के अंगों को चूसते हैं। दीदी की गाण्ड अभी और मोटी हो गई है। वे कहती हैं गांड मारने के तो वे भी शौकीन हैं लेकिन लन्ड तुझसे छोटा है। और हाँ झाँट मैं उनसे ही साफ कराती हूँ।
कुँवारी देवियों और आन्टियों व भाभियों ! सिर्फ एक बार गाण्ड मरवाकर देखना कि कितना असीम आनन्द मिलता है। ये बातें मेरी दीदी व बीवी दोनों मान चुकी हैं।
मेरी बीबी मुझे सिर्फ सप्ताह में एक ही बार देती है उसे सैक्स में कम रूचि है। Hindi Sex Stories
मेरा नाम रौनक है, मैं दिल्ली Sex Stories का रहने वाला हूँ। मैं आपको तीन साल पुरानी अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ, कृपा कर इसे पढ़ें, मेरा दावा है कि इस कहानी को पढ़ते समय भाइयों के लंड और भाभियों की चूत गीली हो जायेगी और यदि भाइयों के पास चूत का जुगाड़ है तो वो चूत मारने पर विवश हो जायेंगे यदि नहीं है तो मुठ मारेंगे। लड़कियों और औरतों के पास लंड का जुगाड़ है तो वो चुदवाने पर विवश हो जाएँगी यदि नहीं है तो वो उंगली-मैथुन या अपनी चूत में बेंगन जैसी लम्बी चीज़ से मुठ मारेंगी।
मैं आपका ज्यादा समय बर्बाद न करके सीधा पॉइंट पर आता हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं ग्रेजुऐशन कर रहा था। मेरे दूसरे साल के पेपर चल रहे थे। हमारे घर में एक किरायेदार आया, जिसकी बीवी का नाम सुमन था। सुमन दिखने में कुछ ज्यादा सुंदर नहीं थी पर उसके स्तन बहुत बड़े थे जो हमेशा ब्लाउज से बाहर आने की कोशिश करते थे। ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज से बाहर आ जायेंगे। जिनको देख कर मेरा मन मचल उठा और उसकी गांड के तो क्या कहने!
जब वो चलती थी तो उसका एक कूल्हा आगे और एक कूल्हा पीछे होता था, जिसे देख कर मेरा लंड खंभे का रूप धारण कर लेता था। उसे देख कर मेरा मन भटकने लगता और मेरा मन पढ़ाई में न लगता। जब मैं उसे देखता, उसके बड़े स्तन और उठी हुई गांड का दृश्य मेरे सामने आने लगता और मैं उसके बारे में सोच कर मुठ मारता। मुठ मारने के बाद मैं शांत हो जाता और पढ़ाई में मन लगाता लेकिन मन फिर भी नहीं लग पाता।
असली दिक्कत तो रात को होती थी जब सुमन का पति आता था और रात को उसको चोदता था। उसके चीखने की आवाज़ मेरे कमरे तक आती थी, क्योंकि मेरा कमरा उसके कमरे से चिपका था। जब उसका पति उसे चोदता था तो वो सिसकारियाँ लेती थी। उसकी आवाजें मेरे कानों में गूंजती थी और मैं आँखों में उसकी तस्वीर ले आता और उसका नाम लेकर मुठ मारता था।
एक दिन सुमन आंटी ने मुझसे कहा कि मैं उनके केबल कनेक्शन लगवा दूँ।
तो मैंने उनसे कहा- आंटी, नए डिश कनेक्शन के लिए आपको 200 रुपये एडवांस केबल वाले को देने पड़ेंगे और 150 रुपये महीना देना होगा।
आंटी बोली- यह तो बहुत मंहगा है!
मैंने कहा- आंटी, मैं अपने केबल कनेक्शन में से आपका केबल लगा देता हूँ।
वो बोली- आप कितने पैसे लोगे?
मैंने कहा- जो आपकी इच्छा हो, दे देना…
उसने कहा- लगा दो।
आंटी के टीवी में कनेक्शन करने के लिए मार्केट से केबल की तार खरीद कर लाया और मैं अपनी टीवी से कनेक्शन ले कर तार उनके टीवी तक ले जाने लगा, लेकिन तार छोटी पड़ गई।।
मैंने कहा- आंटी। तार छोटी पड़ गई।
तो आंटी ने कहा- कुछ जुगाड़ कर के लगा दो?
मैंने कहा- आंटी, आपका कमरा और मेरा कमरा चिपका हुआ है, अगर मैं दीवार में छेद कर दूँ तो बहुत कम तार लगेगी।
वो बोली- कर लो न…
मैं ड्रिल मशीन लाया और ऐसी जगह छेद किया जहाँ से सुमन आंटी की चुदाई के दर्शन साफ़ तरीके से हो सके और मैंने दीवार का छेद काफी बड़ा किया जिससे मुझे आंटी की चुदाई की रासलीला का भरपूर आनन्द प्राप्त हो सके और आंटी की केबल लगा दी और मैं रात का इंतज़ार करने लगा।
रात हुई। मैं खाना खा ही रहा था कि अंकल ने अचानक अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं समझ गया कि आंटी की चुदाई का कार्यक्रम शुरू होने वाला है। मैंने जल्दी से खाना खाया और अपने कमरे में चला आया और केबल के तार के लिए किये गए छेद पर आंखें लगाईं।
और अचानक आंटी के कमरे में देख कर मेरे कान खड़े हो गए।
मैंने देखा अंकल ने टीवी पर ब्लू फिल्म लगा रखी थी, अंकल आंटी के गुदगुदी कर रहे थे और आंटी हंस रही थी। उस समय आंटी पेटीकोट, ब्लाउज में थी। अचानक अंकल ने आंटी के पैरों से चूमना शुरू किया। पेटीकोट उठाते हुए ऊपर चूत की ओर चूमते हुए आने लगे और धीरे धीरे पेटीकोट चूत से उपर हो गया। अंकल आंटी की जांघों को चूमते हुए आंटी की चूत में जीभ देकर कुत्ते की तरह आंटी की चूत चाटने लगे। आंटी सिसकारियाँ ले रही थी।
पहली बार मैंने सुमन आंटी की नंगी चूत देखी जिसे देख कर मेरा लंड काबू में न रहा और नाग की तरह फुंकार मारने लगा। अचानक अंकल पूरे नंगे हो गए और आंटी को भी पूरी नंगी कर दिया और आंटी की चूत में अपना लंड डाल दिया। मैंने देखा कि अंकल का लंड 5 से 6 इंच का है। अंकल आंटी पर चढ़ कर जोरदार धक्के मारने लगे।
मैंने देखा कि आंटी को छोटे लंड के कारण चुदने में कम मजा आ रहा था। इस चुदाई के सीन को देख कर मैं आंटी का ध्यान लाकर मुठ मारने लगा।
अचानक अंकल झड़ गए लेकिन अभी तक आंटी नहीं झड़ पाई थी। अंकल निढाल होकर आंटी के उपर से हट गए और सोने लगे। आंटी अंकल को अपनी ओर खींच रही थी। अभी आंटी प्यासी थी लेकिन अंकल आंटी से हाथ छुड़ा कर सो गए। अंकल के सोने के बाद सुमन आंटी रोने लगी और अपनी चूत को मसलने और उसमें उंगली करने लगी। यह देख कर मैं खुश हो गया कि अब मेरी दाल गल सकती है और मैंने अपना लंड झाड़ दिया। आंटी भी उंगली मैथुन से झड़ गई और सो गई।
सुबह मैं नहा रहा था। आंटी मेरे सामने बैठ कर अपने घर के बर्तन धोने लगी। मैंने सोचा यह अच्छा मौका है आंटी को अपने 9 इंच के लंड के दर्शन कराने का।
आंटी सामने बर्तन धो रही थी। मैं साबुन लगा रहा था, मैंने अपने कच्छे में हाथ डालकर अपने लंड पर साबुन लगाना शुरू किया और लंड खडा हो गया।
ये सब आंटी देख रही थी, आंटी कच्छे में से मेरे लंड की लम्बाई भांप चुकी थी, आंटी के चेहरे पर ख़ुशी थी।
मैं समझ गया कि आंटी लंड देखना और अपनी भोसड़ी में लेना चाहती है।
मैंने नहाने के बाद तौलिया पहन अपना कच्छा नीचे उतारा। लंड खड़ा था इसलिए तौलिया भी उठा हुआ था और मैं बैठ कर अपना कच्छा धोने लगा। आंटी बिल्कुल मेरे सामने थी इसलिए उनकी नज़र मेरी टांगों पर थी। मुझे महसूस हुआ कि उनकी नज़र मेरे लंड को देखने के लिए बेताब है। तभी मैंने अपनी दोनों टांगें चौड़ी कर ली, मेरा लंड तौलिये से बाहर निकलने लगा।
यह देख कर आंटी ने अपनी आँखें नीचे कर ली और बोली- रौनक, तुम्हारा तौलिया छोटा है।
मैंने कहा- आंटी, ऐसा क्यों कहा?
उसने कहा- तुम्हारा बाहर निकल रहा है।
मैंने जानबूझ के पूछा- क्या??
आंटी ने लंड की ओर इशारा किया, मैंने देखा लंड तौलिये से बिल्कुल बाहर था।
मैंने कहा- आंटी जी, तौलिया छोटा नहीं, मेरा बड़ा है।
आंटी बोली- वही मैं सोच रही हूँ… तुम्हारा कितना बड़ा है।
मैंने कहा- आंटी, आपने पूरा देख लिया?
उसने कहा- नहीं, थोड़ा सा…
मैंने आंटी के सामने अपना तौलिया खोल दिया, मेरे 9 इंच के खड़े लंड देख आंटी की आंखें चौंधिया गई, मैंने कहा- लो आंटी, पूरा देख लो।
वो हैरान थी।
मैंने आंटी का हाथ पकड़ा और अपना लंड उनके हाथ में दे दिया, वो मेरा लंड हिलाने लगी।
मैंने कहा- आंटी, मेरी ही सारी बड़ी चीज़ देखोगी? या अपनी भी कुछ बड़ी चीज़ दिखाओगी?
यह कह कर मैंने उसे गोद में उठा लिया और उसके कमरे में बेड पर लिटा कर उसके स्तन दबाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और देखते ही देखते मैंने उसे नंगी कर दिया। आंटी की चूत बिल्कुल चिकनी थी।
मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया जिससे वो तड़फ उठी और बोली- रौनक, अब सब्र नहीं हो रहा है। प्लीज़ मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोद दो।
मैंने उसकी दोनों टांगें चौड़ी की और उसकी चूत पर अपना लंड रख कर तेज धक्का दिया। मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया और वो चीख उठी क्योंकि उसने इतना लंड पहली बार अपनी चूत में लिया था।
मैंने दूसरा धक्का मारा और लंड उसकी चूत में समा गया। उसकी चूत से खून आने लगा और लंड भी काफी टाइट घुस रहा था।
मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू कर दिया और उसे मजा आने लगा। उसने मुझे अपनी बाँहों में कसना शुरू कर दिया। मैं समझ गया कि उसे अत्यंत आनन्द आ रहा है, उसकी पकड़ और भी टाइट होती जा रही थी और मेरे धक्के भी।
अचानक आंटी बोलने लगी- रौनक, चोद डालो मुझे। मेरी भोसड़ी को भोसड़ा बना दो!
और गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।
आंटी की सिसकारियों से पता चल रहा था कि वो अब झड़ने वाली है, इसलिए मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। वो झड़ गई और उसके साथ मैं भी झड़ गया।
उसके बाद मैं सुमन आंटी को अपनी लुगाई की तरह जब चाहता चोद लेता।
वो हमेशा कहती- रौनक, तुमने मेरी भोसड़ी को भोसड़ा बना दिया।
यह सिलसिला 6 महीने तक चला। उसके बाद वो हमारा कमरा खाली करके चले गए।
दोस्तो, मुझे बर्दाश्त करने के लिए धन्यवाद। Sex Stories
हाय! अन्तर्वासना के पाठकों Sex Stories के लिये पेश है पुलकित झा का एक और तोहफा! इस बार यह कहानी मैं सीमा की ओर से उसी के शब्दों में पेश कर रहा हूं।
हाय! मम्मी की डैथ के बाद पापा अकेले हो गये और उन्होंने पीना शुरू कर दिया। पापा के दो दोस्त थे, गुरुबचन अंकल और अकील अंकल। तीनों रोज शाम को किसी एक के घर बैठते थे। जब ये बैठक हमरे घर होती थी तो मैं ही उन्हें पानी नमकीन आदि सर्व करती थी। कुछ ही दिनों में मैंने महसूस किया कि जब भी मैं नमकीन आदि रखने के लिये झुकती हूँ तो अकील मेरे अन्दर झाँकने की कोशिश करते थे।
मैं भी कोई दूध की धुली नहीं थी तीन चार बार चुदवा चुकी थी सो उनका आशय समझ गई। चुदे हुए काफ़ी समय हो चुका था। मेरी चूत में खुजली मचने लगी। मैंने भी चारा डालने का मन बना लिया। आज जब वे आये तो मैंने अपनी ब्रा टाइट की और कुर्ते का ऊपर का एक बटन खोल लिया इससे झुकते ही मेरी जवानी बाहर झलकने लगती थी। पापा वाइन निकालने गये तो मैं नमकीन लेकर पहुँच गई और अकील की ओर मुँह करके प्लेट रखते हुए झुकी और थोड़ा रुक गई। इस बीच जब उनकी ओर निगाह की तो वे टकटकी लगाये देख रहे थे। जब आँखे मिली तो मैं मुस्करा दी। थोड़ा दूर पहुँचकर जब मैंने वापस देखा तो वे मेरी ओर ही देख रहे थे मैं फिर मुस्करा दी। मेरा संदेश उन तक पहुँच चुका था अब तो जबाव की बारी थी। गुरू अंकल ने भी यह सब नोट कर लिया था। बीच में जब पापा बाथरूम गये तो मैंनें उनकी बातें सुनी … …
उसकी बेटी पर लाइन मार रहा है क्या??? यह गुरू की आवाज थी।
जवानी सम्भाल नहीं पा रही है साली … … … अकील ने मुस्कराते हुए आँख मारी।
पट जायेगी????
पट तो चुकी है। … हाय!!! बस एक बार मौका मिल जाये तो लौड़े पर उछाल उछाल के चोदूंगा … … …
अकेले अकेले मत चोद लेना … … … ।
चिंता मत कर … । कल ऐसा करना … यहां आने के बाद इसके बाप के साथ दारू लेने चले जाना … पीछे से मैं सब सैट कर दूँगा … और हाँ … आना आराम से …
तभी पापा आ गये। मैं रोमांचित हो रही थी, मन कर रहा था कि अभी जाके गोद में बैठ जाऊँ पर इन्तजार तो करना ही था। दूसरे दिन मैंनें अपनी झांटें साफ़ कीं। शाम को जब वे आये तो आते ही गुरू बोले- अरे यार आज दारू लाना तो भूल ही गया …
चलो मैं ले आता हूं … … पापा ने कहा।
तो गुरू बोले- मैं भी चलता हूँ … … … …
फिर वे चले गये तो अकील ने मुझे आवाज दी … ।
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। आज मैंने टी शर्ट पहने थी जिसमें से मेरे स्तन बाहर निकले पड़ रहे थे। जब मैं पहुँची तो वह मुस्कराते हुए बोला- आ न … मैं अकेला बोर हो रहा हूँ … … मैं जब उसके सामने बैठने को हुई तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने पास बिठा लिया … …
कुछ देर चुप रहने के बाद उसने अपना एक हाथ मेरे कन्धे पर रखा और बोला- आज बडी क्यूट लग रही है … पर … कल के बराबर नहीं … … …
मैंने उसकी ओर देखा तो उसने मुस्कराते हुए आँख मार दी तो मैं भी मुस्करा दी। और उसने जब अपनी ओर खींचा तो मैं खिंची चली गई। उसने मुझे अपनी गोद में लिटा लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर जमा दिये और एक हाथ से चूचियां दबाने लगा। मैं तो पहले से ही मरी जा रही थी सो कोई विरोध नहीं किया। जैसे ही उसका चूचियों वाला हाथ चूत पर पहुंचा मैं उससे लिपट गई। जैसे ही उसने होंठ छोड़े मैंने एक लम्बी सांस ली।
उसने अपना हाथ मेरे लोअर में डाल दिया और बोला … आज तेरे पापा को ज्यादा पिला दें?????
क्यों????
गहरी नींद में सो जायेगा … फ़िर???? चूत पर उंगली दबाते हुये जोर का चुंबन दिया। मैंने आंखें बंद कर ली … तो उसने अपना हाथ चड्डी में डाल दिया।
बोल ना … चुदवायेगी … … …? वह चूत की दरार में उंगली चलाने लगा।
पर?? गुरू अन्कल भी तो हैं … … … अब मैं पूरी तरह से खुल चुकी थी।
उसे भी दे देना … … … वह चूत के छेद पर उंगली दबाते हुए बोला।
नहीं … … … दोनों से नहीं !!
अरे बहुत मजा आयेगा … … चुदवा तो चुकी है ना पहले????
मैं चुप रही।
फिर क्या प्राब्लम है? …
और फ़िर उसने मुझे सोफ़े पर सीधा लिटाया और लोअर को नीचे खिसकाना शुरू किया तो मैंने रोका- वे लोग आने वाले होंगे … … … …
चलने से पहले गुरू काल करेगा … … …
अच्छा!!! तो सारा प्लान बना कर आये थे … … … मैं लिपटते हुए बोली।
और क्या … तूने भी चूत हमारे लिये ही तो चिकनी की है … … … उसने मेरा लोअर व चड्डी उतार दी और चूत भींचते हुए बोला।
पहले तेरे पापा को डाउन कर देंगे फ़िर तेरी चिकनी चूत को जमकर चोदेंगे … … … फ़िर उसने अपना पैंट उतारा। उसका 7 इंच का मोटा तगड़ा लंड तना हुआ था। मेरी खुजली और बढ़ गई।
आजा ! जब तक वे आयें एक राउन्ड कर लें। और उसने वहीं जमीन पर लिटा लिया तो मैंने भी टांगे उपर उठा ली। उसने मेरा शर्ट गले तक उठाया और दोनों चूचियां थामते हुए लन्ड चूत पर टिका दिया जिसे मैंने हाथ से छेद पर लगा दिया। अकील ने दबाव बढ़ाया तो मेरे मुँह से आह निकल गई … …
उसने फ़िर एक जोरदार धक्का दिया तो लन्ड चूत की दीवार को चीरता हुआ जड़ तक समा गया …
आआह्ह्ह्ह्ह्ह् … … … … … मेरी चीख निकल गई।
उसने पूरा लन्ड बाहर खींचा और फ़िर पूरी ताकत से पेल दिया।
आह्ह्ह … … मारोगे क्या … … !
चुपचाप पड़ी रह बहन की लौड़ी … … आज बरसों के बाद नई चूत मिली है … और फिर वह रुका नहीं … सचमुच एक पक्का मर्द था … … उसकी हर एक चोट पर मुझे लगता था कि मेरी कमर टूट जायेगी … उसने दनादन चोदना शुरू कर दिया। मैं आह्ह आह्ह करती रही और वह चोदता रहा। लगभग 200 चोट मारने के बाद हम दोनों एक साथ झड़े। झड़ते समय उसने लन्ड बाहर खींच लिया और सारा पानी चूत के ऊपर निकाल दिया। फ़िर लन्ड चूत में वापस डालकर मेरे उपर लेट गया।
मजा आया मेरी जान को … … …? वह चूमते हुए बोला तो मैंने उसके गले में बांहे डालकर कई चुंबन ज़ड दिये।
अब सैकिण्ड राउंड में इससे भी बढ़िया चुदाई होगी … … मैं और कस के लिपट गई।
तेरी चूत का हलवा बना देंगे … … और फ़िर गुरू का काल आने तक हम यूँ ही लेटे रहे। जैसे ही गुरू का काल आया, हम सीधे बाथरूम में गये, जहाँ मैंने उसके लंड को और उसने मेरी चूत को साफ किया एक बड़े किस के साथ अलग हुए। फ़िर उनका दौर चला। अपने प्लान के मुताबिक उन्होंने पापा को ज्यादा पिला दी जिससे वे 9:30 तक ही लुढ़क गये तो वे उन्हें सुला आये। सोने से पहले पापा ने उनसे वादा लिया कि वे अपना कोटा पूरा करके ही जायेंगे। जैसे ही उन्होंने पापा के कमरे का दरवाजा बन्द किया मेरी धड़कने तेज हो गई। पहले तो जोश में चुदवा लिया पर अब दो, वो भी एक साथ, की कल्पना से डर लग रहा था। मैं दरवाजे की ओर पीठ करके लेट गई। वे धीरे से मेरे कमरे में घुसे तो मेरी साँस अटकने लगी। अकील मेरे पीछे से लेट गया और मुझे भींच कर बोला …
तो चुदने के लिये तैयार है मेरी रानी …
आज रहने दो, पापा की नींद कच्ची है … फ़िर किसी दिन कर लेना … मेरी बात में दम था सो वे मान गये
… इस बीच गुरू भी आगे से मेरे पास बैठ गया और मेरा चेहरा उठा कर बोला … मुझे प्यासा ही छोड़ देगी क्या … ?
मैंने कुछ नहीं कहा।
तो ऐसा कर गुरू से तो चुदवा ही ले … मैं बाहर तेरे पापा का ध्यान रखूंगा … अकील बोला।
जा तू बाहर ध्यान रख जब तक मैं इससे परिचय कर लूँ … गुरू अकील से बोला तो अकील बाहर चला गया।
गुरू ने मुझे अपनी बांहों व टांगों में भींचकर लिपटा लिया मैंने भी अपनी बाँह उसकी कमर में डाल दी और लिपट गई। गुरू तो इस मौके के इंतजार में ही था और पूरी तरह गरम भी था जिसका एहसास उसके लंड की सख्ती से, जो कि चूत पर दस्तक दे रहा था, से मुझे हो रहा था। जल्दी ही उसने मुझे नंगा किया और खुद भी हो गया। फ़िर वह सीधे ऊपर आया और लंड चूत पर टिका कर मेरे होंठ चूसने लगा।
मैं भी गरम हो चुकी थी सो बोली … … जल्दी करो … !!
तो ले … मादरचोद … और उसने एक ही झटके में लौड़ा चूत में उतार दिया। अकील की तरह उसका लंड भी खूब बड़ा और मोटा था। मैंने टांगे फ़ैला दी और फ़िर वह मेरी कमर तोड़ने में जुट गया। उसकी ताबड़तोड़ चुदाई से मैं कराहने लगी … पर वह तो भूखे भेड़िये की तरह टूट पड रहा था। थोड़ी देर बाद उसने मुझे चौपाया बनाया और फ़िर पिल पडा। उसकी चुदाई अकील से भी ज्यादा भारी थी। लगभग आधा घंटे चोदने के बाद वह झड़ गया तब जाकर मुझे कुछ चैन मिला। वे चले गये पर मेरा शरीर सारी रात दर्द करता रहा। Sex Stories
दोस्तों मेरा नाम लौड़ा पुजारी Hindi Sex Stories और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरा असली नाम है लक्ष्य !
मैं अन्तर्वासना का पुजारी हूँ, इस वेबसाइट के सामने अब देसीपापा भी कम है, इसमें छपने वाले बिस्तर के हादसे लोगों के सोये हुए सेक्स को जगा देते हैं।
एक यादगार चुदाई का जिकर करने जा रहा हूँ !
मैं किसी काम से गाजियाबाद गया, तीस चालीस मिनट का सफ़र है ट्रेन से।
वहां पर मैं अपनी बुआ के घर गया था। वहां से निकला, रिक्शा किया, ट्रेन में अभी एक घंटा बाकी था। मैंने पास में पड़ते ठेके से विस्की का हाफ लिया। उसके पास पीने के लिए कोई अहाता नहीं था। पास में खड़ी एक उबले अण्डों वाले की ठेली से गिलास लिया, उससे दो उबले अंडे लिए, एक मोटा पैग बना कर पी लिया। जल्दी में एक और पैग पिया।
जिस रिक्शा वाले के साथ आने जाने की बात करके लाया था उसने कहा- जनाब ट्रेन छूट जाएगी !
मैंने खटाक से बाकी बचा भी पी लिया और उसके रिक्शा पे बैठ गया। हवा से मुझे ज्यादा ही चढ़ गई।
मैं रिक्शा में बैठा बैठा डोलने लगा तो रिक्शा वाले ने मुझे थामा और बोला- आप इस हालत में कहीं नहीं जा पाओगे। बोलो तो जहाँ से आये हो वहीं छोड़ देता हूँ !
मैंने कहा- वहां नहीं जा सकता इस हालत में ! बोला- फिर मुझे अपने घर ले जाओ, सुबह निकल जाऊंगा !
वो बोला- जनाब हम गरीब लोग हैं, एक कमरा है, तीन बन्दे रहते हैं !
कोई बात नहीं, मैं भी आपके बीच लेट जाऊंगा, चलो !
रास्ते से मैंने फुल बोतल खरीद ली, रास्ते से एक तंदूरी लगवा लिया, उसने अपना पउआ पहले खरीद लिया था।
उसके कमरे में पहुँच गए। वहां हमें दो बन्दे मिले, उसने उन्हें मेरे बारे में बताया। मेरे पास कोई कपडा नहीं था, मैंने अपनी पेंट उतार किल्ली पे टांग दी। उनकी नज़र मेरी गोरी चिकनी जांघों में गड़ गई। एक भी बाल नहीं था मेरी टांगों पर !
मैंने टीशर्ट नहीं उतारी।
वो चार ग्लास ले आये। मैंने मोटे मोटे पैग बना दिए, साथ में उनको तंदूरी खाने को दिया। वो खुश थे- साब आप बहुत अच्छे हो !
मुझे ज्यादा होने लगी इसलिए दूसरा पैग अपना नहीं बनाया, उनको पिला दिया। उनको भी नशा होने लगा। वो मेरे साथ घुल-मिल कर बातें करने लगे। मेरी नज़र उनमें से एक पर चली गई सामने वाले पर ! उसकी लुंगी से उसका मोटा लौड़ा दिख रहा था। मेरे साथ सट के बैठे बन्दे ने नोट किया कि मेरा ध्यान कहाँ लगा है।
नशा होने लगा था, मैंने आखिरी पैग फिर मोटा कर दिया और हम पी गए। जिसके साथ में मैं आया था, उसने अपना पउआ निकाला, ब्रांड चेंज की वजह से मैंने नहीं लिया।
साथ वाले ने मेरी जांघ पे हाथ फेरते हुए कहा- बहुत चिकना है तू !
मैंने अपना हाथ उसकी लुंगी में डाल दिया और उसके कच्छे में हाथ डाल उसके लौड़े को पकड़ लिया। सामने वाला हैरान रह गया।
मैं बोला- क्या देख रहा है तेरा लौड़ा देख कर ही मेरी गाण्ड में आग लगी थी।
मैंने शर्ट उतार फेंकी। सब मेरी लड़कियों जैसी छाती देख दंग रह गए। जिसका लौड़ा मेरे हाथ में था, उसने मुझे वहीं लपेट लिया और मसलने लगा। इतने में दूसरा आगे बढ़ आया, मैंने उसकी लुंगी खींच दी। उसने कच्छा नहीं पहना था, उसका लौड़ा आधा खड़ा लटक रहा था। उसको पास खींच मैंने मुँह में भर लिया।
वो आँखें बंद करके आहें भरने लगा- कभी सोचा न था की कोई मेरा चूसेगा।
मुँह में डालते ही तन गया था।
जिसके रिक्शा पे मैं आया था। उसे कहा- तुम भी पास आओ न ! तेरी वजह से आज मुझे लौड़े मिले !
तीनों के लौड़े निकाल अपने मुँह के पास घुटनों के बल बिठा बारी बारी चूसने लगा। हाय क्या लौड़े हैं आपके ! साले जब डालेंगे तब और अच्छा लगेगा !
मैं घोड़ी बन गया। एक ने पीछे से अपना लौड़ा घुसा दिया, मैंने आराम से ले लिया और वो तेज तेज धक्के देने लगा, ज़बरदस्त वार करने लगा। इतने में बाकी के दोनों लौड़े मैंने खूब चूसे। एक ने चोदा, दूसरा चढ़ गया, उसने चोदा, तीसरा चढ़ गया, तीसरा उतरा, पहला फिर चुसवा कर खड़ा !
तीनों ने सारी रात मुझे ठोका, सुबह उठा तो गांड दुःख रही थी, लेकिन मुझे बहुत मजा आया।
सो यह थी मेरी एक नमकीन, हसीं, रंगीन चुदाई !
जल्दी दुबारा एक और मस्त ठुकाई लेकर आऊंगा !
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