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मेरा नाम राहुल है, उम्र ५१ साल, Antarvasna कद ५ फीट ९ इंच, रंग गोरा और बदन कसरती है। मेरी पत्नी का नाम कोमल है, उम्र ४८ साल, रंग गोरा और बदन दुबला पतला है। हमारे दो बेटे हैं, दोनों पुणे में इंजीनयरिंग पढ़ रहे हैं। मैं भी पेशे से इंजीनीयर हूँ।
बात लगभग दो साल पहले की है, जब मेरा ट्रान्सफर आगरा हुआ।
आगरा में जो मकान हमने किराये पर लिया, वह एक होमेओपथिक डॉक्टर का था। डॉक्टर साहब दक्षिण भारतीय हैं। उनका नाम के रामचंद्रन है, उम्र लगभग ५८ साल, कद ५ फीट ६ इंच, रंग सांवला और बदन दुबला पतला है। पहली नज़र में ही लगता है कि शरीफ आदमी हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी रागिनी है। उम्र लगभग ५२ साल, कद ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और बदन भरा पूरा है। नैन-नक्श तीखे होने के कारण इस उम्र में भी अच्छी खासी सेक्सी दिखती हैं। इन दोनों के अलावा इनके परिवार में इनकी तीन बेटियाँ हैं, जिनके नाम नंदिनी, कमलिनी और कुमुदिनी हैं। इनकी उम्र क्रमशः २४, २२ और २० साल है। तीनों का कद लगभग ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और नैन नक्श अपनी माँ की तरह तीखे हैं। सबसे बड़ी नंदिनी अपनी माँ की तरह भरे बदन की तथा कमलिनी और कुमुदिनी अपने पापा की तरह दुबली पतली हैं। तीनों एक ही कॉलेज में पढ़ती हैं।
मुझे इस मकान में रहते हुए तीन महीने हो चुके थे और डॉक्टर साहब व हमारे परिवार के सम्बन्ध घरेलू जैसे हो चुके थे। एक दिन रात को खाना खाने के बाद मैं कंप्यूटर पर अपना काम कर रहा था और मेरी पत्नी अपने कमरे में सोने जा चुकी थी, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे मुख्य द्वार के पास कोई खड़ा है और किसी से बात कर रहा है। मैंने घड़ी पर नज़र डाली तो देखा साढ़े बारह बज रहे थे।
मैं चुपके से उठा, दरवाजे के पास जाकर ध्यान दिया तो पता चला कि डॉक्टर साहेब की मंझली लड़की कमलिनी मोबाइल पर किसी से धीरे धीरे बात कर रही थी। मैंने बातचीत पर ध्यान दिया तो अंदाजा हो गया कि अपने बॉयफ्रेंड विक्की से बात कर रही थी। उसकी बात सुनकर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। वह विक्की से कह रही थी कि तीन दिन ऊपर हो गए हैं और मुझे महीना नहीं हुआ है, बहुत डर लग रहा है।
उसकी बातें सुनकर बहुत अजीब सा लगा कि मैं जिसे सीधी-सादी समझता था, खूब छुपी रुस्तम निकली। एक बात और यह हुई कि उसकी बातें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। पिछले तीन साल से मैंने अपनी पत्नी को नहीं चोदा था, क्यूंकि वह ठंडी हो चुकी थी और चुदाई के समय साथ नहीं देती थी। उसको चोदने की अपेक्षा मैं कंप्यूटर पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए मुठ मारना ज्यादा पसंद करता था।
खैर, कमलिनी और विक्की की मोबाइल पर बातचीत जारी थी और मेरा लंड भी जोर मारने लगा था।
मैंने कुछ सोचा और धीरे से दरवाजा खोला। मुझे देखते ही कमलिनी सकपका गई और फ़ोन काट दिया। मैंने अपने होठों पर ऊँगली रखकर उसे चुप रहने का इशारा किया और उसका हाथ पकड़ कर अन्दर कमरे में खींच लिया। वह रोने की हालत में थी। मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा, उसे अपने सीने से लगाकर सांत्वना दी तो वो कुछ सामान्य हुई।
मेरे पूछने पर उसने बताया कि विक्की उसकी क्लास में पढ़ता है, दोनों अच्छे दोस्त हैं। १५ दिन पहले जब मैं विक्की के घर गई तो वह अकेला था और प्यार करते करते सब हो गया।
मैंने उसे कहा- कोई बात नहीं, गलती किससे नहीं होती ? और कौन सी ऐसी समस्या है जिसका समाधान नहीं है ? अगर मुझ पर विश्वास करो तो तुम्हारा महीना १२ घंटे में हो जाएगा। लगभग रोते रोते उसने पूछा- बताइए अंकल क्या करुँ ?
मैंने कहा- पहली बात ! मैं तुम्हारा दोस्त हूँ, मुझे अंकल नहीं, राहुल कहो। दूसरी बात, तुम्हें कुछ नहीं करना है, जो करना है, मैं करूंगा, तुम शान्ति से देखती जाओ।
मैं उसे दीवान पर लाया और उसका हाथ अपने लंड पर रखकर कहा- तुम्हारा इलाज ये ही करेगा।
उसे अपने सीने से लगाकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर मैंने उसका गाउन धीरे धीरे ऊपर उठाया और चिकनी टांगों पर हाथ फेरते फेरते उसकी पैंटी पर पहुँच गया। धीरे से उसकी पैंटी उतारी, अपना लोअर नीचे खिसकाया, उसे दीवान पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच आ गया। उसकी चूत पर बाल थे, शायद उसने कभी अपनी झांटें साफ़ नहीं की थीं। झांटें हटाकर उसकी चूत फैलाई तो मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। एक तो मैं तीन साल बाद चूत देख रहा था, दूसरे उसकी चूत क्या गज़ब की थी।
उसकी चूत के गुलाबी होठों पर मैंने जब अपनी जीभ फेरी तो उसे भी करंट लगा। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और दो तीन बार में पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर कर दिया और उसका गाउन ऊपर खिसका कर, ब्रा हटाकर उसके मम्मे अपने हाथ में लेकर चूसने लगा। लगभग आधा घंटा चोदने के बाद जब मेरा लंड पानी छोड़ने को हुआ तो मैंने
अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और ६९ की पोजीशन में आकर उसके मुंह में डाल दिया और उसकी चूत चाटने लगा। वह मेरा लंड चूस रही थी। जब लंड ने पानी छोड़ा तो
वह घबरा गई और लंड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया जिससे सारा वीर्य उसके गाउन पर गिर गया।
हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए। ढाई बज चुके थे, मैंने उसे अपने सीने से लगाकर किस किया और डोंट वरी ! कह कर विदा कर दिया और वहीं दीवान पर सो गया।
करीब ३ बजे मेरे मोबाइल पर घंटी बजी, देखा तो कमलिनी का नम्बर था। मैंने धीरे से बोला- हेल्लो !
तो उधर से काफ़ी खुश लहजे में बोली- थैंक्यू ! अभी अभी मेरा महीना हो गया।
मैंने उससे कहा- विक्की जैसे छोकरों से सावधान रहना ! अब सो जाओ। शुभ रात्रि !
बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए..। Antarvasna
भाभी की Hindi sex stories बेटी को मैं बार बार किश कर उनको चुदासी कर रहा था जिसका असर उन पर हुआ भी और उनकी चूचियों को मसलकर और चूत में उंगली कर कर के उनके चूत का पानी निकाला..
ट्रेन में हसीना से मुलाकात
हाय मैं फिर से हाजिर हूँ।
अब मैं आपके सामने एक नई कहानी बताता हूँ। जब मैं बिलासपुर से तिरुवनन्तपुरम ट्रेन में यात्रा कर रहा था। इस भाभी की चुदाई तो बड़ी ही साधारण सी थी।
अब आप तो मुझे जान ही गए हैं। मैं 22 वर्षीय युवक हूँ। यह भाभी रायपुर से ट्रेन में चढ़ी थी। वह अपनी 2 वर्ष की बेटी के साथ इस कम्पार्टमेंट में चढ़ गई।
उसकी सीट बिल्कुल मेरे साथ की थी। यह सीट मात्र दो जनों के लिए पर्याप्त थी, मतलब आप समझ सकते हैं।
मैं जब रायपुर स्टेशन पर उतरा तो उसके पति से मिला। उसके पति ने मेरा मोबाईल नम्बर लिया और मुझे कहा कि, प्लीज! मेरी बात मेरी बीवी से समय समय पर करवाना।
मैं मान गया और अपना मोबाईल नम्बर उसे दे दिया। उसका नाम सुरेश था। वो उतना सुन्दर नहीं था, पर उसकी बीवी का नाम श्वेता था और, माँ कसम! बिल्कुल डेयरी मिल्क की तरह वो साफ़ सुथरी थी।
उसने उसी समय अपनी बीवी से मेरा परिचय करवाया। उसकी मुस्कान में जादू था। जैसे कि, एक नया फुल बाग में खिल रहा हो!
ठीक 12 बजे ट्रेन वहाँ से चल दी और उसके पति ने मुझे धन्यवाद कहा।
एकाएक भाभी की चूचियों को देखा
अब होना क्या था? मैंने उसकी बेटी को अपने गोद में लिया और खूब प्यार करने लगा। फिर श्वेता भाभी ने कहा कि, मैं कपड़े बदल कर आती हूँ तब तक आप मेरी बेटी ख्याल रखना!
जब वो कपड़े बदलकर आई तब मैंने देखा कि उसकी ब्रा थोड़ी पारदर्शी थी। मैं उसके बूब्स को देखता रह गया।
थोड़ी देर बाद मुझे जब होश आया तो मैंने उसका पूरा परिचय लिया तब जाना कि, वो चैनई में रहती है और उसके पति रायपुर के किसी बैंक में काम करते हैं और छुट्टी के वक्त वो चैन्नई आते थे।
मैंने तब तुरन्त सोचा कि यह शायद सेक्स नहीं करती होगी। अचानक! उसकी बेटी ने मेरे लिप्स को किश किया जिसका, मैंने भी उसे प्यार से उत्तर दिया।
वो हम दोनों के किश को बड़े प्यार से देख रही थी।
जब सोने का वक्त आया तो मैंने देखा, उसकी बेटी मेरे साथ सोने की जिद्द कर रही है तो श्वेता भाभी ने मुझे अपनी बेटी दे दिया।
भाभी को चुदासी इशारे किया
मैं ऊपर सो रहा था और श्वेता नीचे सो रही थी पर, मैं कहाँ सो पाता?
उसकी मस्त जवानी को देख देख कर मैं उसकी दो साल की बेटी को किश पे किश किए जा रहा था।
तब आधे घन्टे बाद श्वेता उठकर अपनी बेटी को उठा रही थी कि, तभी मैंने थोड़ा सा उदास होने का नाटक करने लगा।
मैंने कहा कि, प्लीज! अपनी बेटी को मेरे पास सोने दें, तभी उसने तुरन्त मुझे अपनी बेटी दे दी और वो नीचे थोड़ी देर बैठ कर चुपके से रोने लगी।
मैं तुरन्त नीचे उतरकर उनसे सॉरी! कहा, तो उसने कुछ नहीं कहा।
फिर मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ कर मेरे गाल पर थोड़ा ज़ोर से थप्पड़ दिलवाया तो वो मुझे कहने लगी कि यह क्या कर रहे हो?
मैंने कहा कि, अगर मैं आपकी बेटी अपने साथ ना सुलाऊँ, तो ठीक है मुझे माफ़ करना! तो वो थोड़ा और रोने लगी।
मैं उस कम्पार्टमेंट के बारे में बता दूँ। वैसे तो हमारे बगल वाली खाली थी और हम ए सी में यात्रा कर रहे थें तो उसमें परदे लगे होते हैं, जिससे कोई हमें देख नहीं सकता था।
मैंने उसका हाथ पकड़कर पूछा कि, वो क्यों रो रही हैं?
तो उसने बताया कि, उसके पति उससे प्यार नहीं करते हैं और ना ही उसकी बेटी से।
तो मैंने कहा- ऐसा ना कहे, वो आपको ज़रुर याद करते होंगे!
भाभी ने चुदासी हो मेरा साथ दिया
फिर वह और रोने लगी, मैंने और थोड़ी सी हिम्मत करके उनके आँसू पोंछे तो उसने मेरे हाथ को पकड़ कर किश किया। जिससे मैं कुछ ना कह सका।
मैंने धीरे से उसके कान के पास जाकर कहा कि, मैं उसकी बेटी से और उसकी खूबसुरत माँ से बहुत प्यार करता हूँ! तो उसने आँखें बन्द करके मुझसे लिपट गई।
मैं उसके बूब्स को फ़ील कर रहा था तो उसने भी धीरे से जवाब दिया कि चलो, अब बेटी से प्यार ख़त्म हो गया हो तो उसकी माँ को प्यार करो!
मैंने पहले उसके माथे पर किश किया, फिर मैं उसके कानों को, फिर नाक को, फिर उसके गालों को, मैंने अच्छी तरह से चाटा और फिर उसके मुलायम से होंठ को किश करने लगा।
वो थोड़ी गर्म हो गई थी। मैंने उससे कहा कि, तुम सो जाओ।
तो उसने कहा- क्यों?
मैंने कहा- तुम पहले लेट जाओ, फिर देखो मेरा जादू!
वो तुरन्त मुस्कुराई और लेट गई। मैं तुरन्त बाथरूम गया और अपनी चड्डी निकाल कर सिर्फ़ अपनी लोवर पहनकर वापस आया।
वो मेरा बेसब्री से इन्तज़ार कर रही थी। मैं उसकी आंखो में प्यार की प्यास देख सकता था और मैं अन्दर बैठकर परदा गिरा दिया ताकि हमें कोई ना देख सके।
भाभी ने अपनी चूची मसलवाई
मैं अब धीरे से उसके बूब्स को मसल रहा था। वो बेचारी ज़ोर जोर से चिल्लाना चाहती थी पर वो चिल्ला ना सकी और अपने आवाज़ पर उसने कन्ट्रोल किया।
मैंने धीरे से उसके चूड़ीदार के अन्दर हाथ डालकर उसकी ब्रा खोल दी। उसने कहा कि, मुझे नंगी कर दो! यह बात सुनकर और गर्म हो गया।
मैंने बड़े आराम से उसकी चूड़ीदार को उतारा और उसके बूब्स और उसके लिप्स के साथ प्यार करता रहा।
मैंने भी अपने कपड़े उतारे तब मैं सिर्फ बनियान और अपने लोवर में था और वो सिर्फ अपने पजामे और पैन्टी के साथ थी।
मैं उसके बूब्स के साथ 15 मिनट तक प्यार करता रहा, फिर मैंने अपना हाथ उसके पजामे के अन्दर डालकर उसकी चूत को पैन्टी के बाहर से सहला रहा था।
भाभी की चूत के रस का रसपान
वो मुझे पागलो की तरह देख रही थी, फिर उसने मेरे लिप्स को प्यार से काटा जिससे, मैं और मेरा नटराज पेन्सिल और गर्म हो गए!!
मैंने अपनी हाथों से उसका नाड़ा खोला और उसकी पैन्टी को थोड़ा नीचे कर दिया और अब धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर अपनी उंगली घुसा रहा था।
उसकी चूत तो पहले से हाय! गीली थी। अब मैं अपने दोनों उंगली से उसके क्लिंट को टटोला, तो उसकी सांसे तेज़ हो गई और मुझे वो नज़ारा देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था!
मैंने अचानक! तीन उंगलियाँ उसकी शरपनेर (चूत) में ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा अब तो वो बेकाबू हो गई थी।
वो मेरा साथ देने लगी थी। मैं उसे किश भी कर रहा था और एक हाथ से उसके बूब्स और निप्पल्स को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसके चूत में ज़ोर ज़ोर से घुसा रहा था।
ठीक पांच मिनट के बाद उसने अपना जूस बाहर निकाला और मैं उसके सामने उसे चाटने लगा तो उसने कहा- ऐसे तो, मेरे पति भी नहीं करते हैं।
तो मैंने कहा, प्लीज! इस वक्त अपने पति को मत याद करो, तो वो थोड़ा मुस्कुराई और मैंने उसे कहा, अब मेरा क्या होगा?
तो उसने कहा- चलो, बाथरूम मे चलें! Continue Hindi sex stories
मेरा नाम राहुल है Sex Stories और मेरी उम्र 24 साल की है।मैं मुम्बई में नौकरी करता हूँ और रहने वाला इन्दौर का हूँ।
मैंने अन्तर्वासना पर काफी कहानियाँ पढ़ीं, और मुझे भी लगा कि मुझे भी अपनी कहानी अन्तर्वासना को भेजनी चाहिए। अब मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ।
आज से तीन साल पहले मैं मुम्बई नौकरी करने आया था।
तब मुम्बई मेरे लिए अजनबी शहर था, इसलिए मुझे मेरा अकेलापन खलता था, मुझे भी एक अच्छी दोस्त की ज़रूरत थी ताकि मेरा समय भी कट सके और मेरी काम-इच्छा भी पूरी हो सके।
मैंने बहुत प्रयास किया पर किसी भी अमीर और ख़ूबसूरत लड़की को पटा नहीं सका क्योंकि यहाँ की लड़कियों को पैसे वाले लंड पसन्द आते हैं।
तो मैंने आख़िर में एक मध्यम-वर्गीय लड़की जो दूसरों के घरों में काम करने जाती थी, उसको अपनी नौकरी और पैसे की झलक दिखलाकर पटा लिया।
मेरी उससे फोन पर बातचीत भी शुरु हो गई।
एक दिन शाम को मैंने उसे अपने घर बुलाया यह कह कर कि मेरी तबीयत ख़राब है और मेरे सभी दोस्त घर गए हैं। तुम मेरे लिए खाना बना दो, वरना मुझे भूखा ही सोना पड़ेगा।
मेरी तबीयत ख़राब है, यह सोचकर वो मेरे लिए खाना बनाने मेरे फ्लैट में आ गई।
मैं कई दिनों से इसी ताक में था कि कब मेरे दोस्त लोग फ्लैट पर ना हों और मैं उस कामवाली को चोद दूँ।
उस दिन जब वो मेरे फ्लैट में आई तो मैं खुश हो गया।
मैंने उसे किचन दिखा दिया, जब वो खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तो मैंने धीरे से उसके पीछे जाकर थोड़ा सा चिपक कर खड़ा हो गया।
वह अचानक मुझे पीछे देखकर घबरा सी गई और बोली, “आपकी तबीयत ख़राब है, आप जाकर आराम कीजिए … मैं खाना बना दूँगी.”
मैं उसकी बात सुनकर उससे थोड़ा और चिपक गया।
इससे पहले कि वो कुछ कहती मैं उसकी दोनों चूचियों को एक बार ज़ोर से दबा दिया और फिर सहलाने लगा।
पहले तो उसे बहुत डर लगा, लेकिन बाद में धीरे-धीरे सहलाने से उसे मज़ा आने लगा और वो आँखें बन्द कर मज़े लेने लगी।
मैंने लोहा गरम होते देख उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पैन्टी में डाल दिया और उससे पहले कि वह कुछ विरोध करे, मैंने उसकी चूत में उँगली डाल दी, और ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करने लगा।
वो अब सब कुछ भूल कर मदहोश होने लगी।
मैं उसे किचन में ही नंगा करने लगा और वो कुछ नहीं बोली।
थोड़ी ही देर में वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसके शरीर पर एक भी तिनका कपड़ा का नहीं बचा था।
उसे इस तरह देखकर मेरा लण्ड तुरन्त खड़ा हो गया।
अब वो भी जोश में आकर मेरे कपड़े उतारने लगी और मैं भी उसकी मदद करते हुए जल्दी से पूरा नंगा हो गया।
मैंने अब अपना लंड उसके मुँह में डालना चाहा तो शर्म के मारे उसने मना कर दिया।
फिर मैंने दूसरा तरीका अपनाया।
मैंने अब उसे ज़मीन पर सुला कर उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और उसकी चूत को ज़ोरों से चाटने लगा।
अब उसने मस्ती और मदहोशी में चूर होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं।
मैंने इसी बात का फ़ायदा उठा कर उसकी चूत चाटते-चाटते ही 69 की मुद्रा में आ गया और मेरा लण्ड उसके होंठों पर रख दिया।
पर इस बार भी उसने मना कर दिया।
मैं नाराज़ होने का नाटक करने लगा और कपड़े पहनने लगा।
अब तक तो वह इतनी गरम हो चुकी थी कि मुझसे चुदवाने के लिए कुछ भी करना पड़े तो वो कर सकती थी।
उसने तुरन्त मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया और उसे आईसक्रीम की तरह चूसने लगी।
मेरी योजना सफल हो गई, मैं बहुत खुश हुआ। आज तो जैसे लकी ड्रा ही निकल आया था मेरे लिए!
अब हम दोनों 69 की स्थिति में थे। मैं उसकी चूत चाट रहा था, और वह मेरा लंड चूस रही थी।
क़रीब आधे घंटे तक मैंने उसके मुँह की चुदाई की, इसी दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी और मेरे लंड ने भी उसके मुँह में एक बार उल्टी कर दी थी।
वो उस सफेद गाढ़े द्रव को पूरा पी गई।
अब तक आग दोनों ओर भड़क चुकी थी।
मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और अब उसकी चूत में डालने लगा लेकिन उसकी चूत काफी तंग थी, अतः मैं असफल हो गया।
उसकी सील शायद अभी तक नहीं तोड़ी गई थी।
मैंने किचन से तेल लेकर अपने लंड पर और थोड़ा तेल उसकी चूत पर भी लगा दिया और फिर से चूत में लंड डालने लगा।
इस बार मैंने उसकी चूत में एक ज़ोर का झटका दिया और लंड दो इंच तक अन्दर घुसा दिया।
इस झटके से वो तड़प उठी और ज़ोर से चिल्लाई। मैंने उसका मुँह तुरन्त बन्द कर दिया और साथ ही एक और झटका दिया तो उसकी आँखों से आँसू निकल आए।
मैं डर गया तो मैंने उसके मुँह से हाथ हटा लिया।
वो बहुत रोई, अब उसकी चूत से खून निकल रहा था।
मैंने उससे धीरे-धीरे चोदने का वादा करके फिर से राजी किया।
अब मैं अपनी कमर धीरे-धीरे चला रहा था और ऐसे ही धीरे-धीरे अपना ८ इंच लम्बा लंड उसकी चूत के अन्दर गाड़ ही दिया।
थोड़ी देर में दर्द कम होने की वज़ह से उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ अपनी चूत हिला-हिला कर देने लगी।
अब उसे मज़ा आने लगा था और वो ख़ुद बोल रही थी- ज़ोर से चोदो मुझे, और ज़ोर से, फाड़ दे आज मेरी चूत, बुझा दे आज इसकी प्यास … फाड़ दे साली चूत को और ज़ोर से!
मैं भी उसकी बात सुनकर जोश में आकर ज़ोरों के झटके मारने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे कुतिया बना कर उसकी चुदाई की। लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और उसके 2 मिनट बाद मुझे भी लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में चुदाई करनी शुरु कर दी।
और अन्त में मैं भी उसके मुँह में झड़ गया।
उसने फिर मेरे लण्ड का सारा पानी पी लिया और मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ कर दिया।
उसके बाद हम दोनों किचन से निकल करक साथ में नहाने चले गए।
नहाने के बाद मैंने उसे अपना मोबाईल देकर कहा कि अपने घर फोन करके कह दो कि आज तुम मैडम (जिसके घर वह काम करती थी) के यहाँ रुकोगी, क्योंकि उनके पति घर पर नहीं हैं, तो उन्होंने मुझे आज रात यहीं रुकने को कहा है।
उसने घर पर यही बता दिया।
उसके घर वालों को कोई आपत्ति नहीं थी।
हमने होटल से खाना मँगवा कर खाया।
उसके बाद फिर दोनों नंगे ही बिस्तर पर सो गए।
रात में मैंने उसकी चार बार चुदाई की और एक बार गाँड भी मारी।
पर सबसे ज़्यादा मज़ा मुझे उसकी गाँड मारने में आया था.
उस रात की चुदाई के बाद वो जब भी मुझसे बात करती तो यही कहती- अब आपकी तबीयत कब ख़राब होगी?
और मैं जब भी अपने फ्लैट पर अकेला होता तो उसे किसी ना किसी बहाने बुलाकर चुदाई का खेल खेलता।
दोस्तो, यह थी मेरी कहानी।
बाद में मैंने इन्दौर में भी एक शादीशुदा आन्टी की चुदाई की थी जिसका किस्सा मैं अगली कहानी में सुनाऊंगा।
यह कहानी आपको कैसी लगी।
लेखक की अगली कहानी: मेरी पहली ग्राहक Sex Stories
मैंने शादी में देखा था कि मेरी मामी बहुत सुंदर लग रही थीं.
चूंकि वे काफी सीधी-सादी हैं तो उनकी सादगी उनकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी.
कहने का आशय यह कि खूबसूरत महिलाओं के नखरे आदि जैसी बात मामी में नहीं थी इसलिए उनकी सरल सी मुस्कान किसी का भी दिल मोह लेने के लिए काफी थी.
मेरे मामा का घर हमारे पास में ही था.
हम लोग उनकी शादी समारोह का मजा ले रहे थे.
शादी के बाद मामी जी घर में आ गईं और धीरे धीरे सब कुछ सामान्य होने लगा.
जैसे-जैसे शादी को वक्त गुजरता गया, उन दोनों पति पत्नी के बीच झगड़े होने लगे.
चूंकि हम लोगों के घर एक ही मुहल्ले में थे तो मैं देखता था कि मेरे मामा के घर में आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर लड़ाई होती रहती थी.
मामा अक्सर मामी पर गुस्सा होते रहते थे.
मेरी मामी बहुत सीधी-सादी होने के कारण उनसे कुछ नहीं कहती थीं.
जबकि मामा जी अक्सर गुस्से में मामी को पीट दिया करते थे.
यही सब देखते-देखते मैं 20 साल का हो हो गया था.
मुझे अपनी मामी पर बहुत तरस आता था.
और मुझे अपने मामा पर बहुत गुस्सा आता था, मगर मैं कुछ नहीं कर सकता था.
फिर मैंने मामी से नजदीकियां बढ़ाने की सोची और अक्सर जब मामा बाहर जॉब पर जाते थे तो मैं मामी से बात करने चला जाया करता था.
धीरे-धीरे मैंने मामी से दोस्ती कर ली और उनके साथ उनका दुख बांट लिया करता था.
वे अक्सर बात करते करते ही मेरे सामने रो दिया करती थीं.
धीरे-धीरे मुझे अपनी मामी से प्यार होने लगा था और शायद मामी को भी मुझसे.
फिर एक दिन मैंने अपनी मामी से पूछा- आप यह सब कैसे सहन कर लेती हैं?
इस पर उन्होंने कहा- मैं कर भी क्या सकती हूं!
मैंने कहा- क्यों आप जब तक कुछ विरोध नहीं करेंगी, तब तक मामा जी को कुछ भी समझ में आने वाला नहीं है!
वे कहने लगीं- मैं क्या कर सकती हूँ, मुझे कुछ समझ में ही नहीं आता है.
मैंने उनसे बोल दिया- मैं आपको बहुत पसंद करता हूं. आप विरोध के लिए एक कदम आगे बढ़ाएंगी, तो मैं आपके साथ दो कदम आगे चलूँगा. मैं आपसे प्यार करता हूँ.
मेरी इस बात को लेकर वे बहुत नाराज हो गईं और बोलीं- आज के बाद मुझसे कोई बात नहीं करना. मैं तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानती थी पर तुम मेरे बारे में यह सोचते हो. मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी!
मैं चुप रहा और वहां से चला आया.
कुछ दिन बाद ही दोबारा से मामा और मामी की लड़ाई हो गई.
मामा ने मामी को बहुत मारा.
यह सब होने के बाद में 2 दिन बाद गया.
मैं जब मामी के पास गया तो मामी अचानक से मेरे सीने से लग कर रोने लगीं.
पहले तो मैं सकपका गया कि यह क्या हुआ.
फिर मैंने उन्हें तसल्ली दी और उन्हें बहुत समझाया.
मेरे मनाने पर वे चुप हो गईं और मुझसे बात करने लगीं.
मैंने मौके का फायदा उठाकर उनसे फिर से कहा कि मैं आपको बहुत पसंद करता हूं, लेकिन आप हो कि मेरी तरफ देखती ही नहीं हो!
इस बात पर वे थोड़ी देर चुप रहीं, फिर बोली- पसंद तो मैं भी तुमको बहुत करती हूं, लेकिन तुम्हारे मामा से डरती हूं कि कहीं उन्हें पता लग गया तो मैं घर से भी निकाल दी जाऊंगी. मैं उस सूरत में अपने घर पर भी नहीं जा पाऊंगी, उधर क्या मुँह दिखाऊंगी सबको?
मैंने उनसे कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं आपका बहुत ध्यान रखूंगा. आपसे हमेशा प्यार करता रहूंगा. आपको कभी धोखा नहीं दूंगा.
वे चुप हो गईं.
उसके बाद मैं अपने घर आ गया.
अब धीरे-धीरे हमारी फोन पर बातें होने लगीं.
मामी की बातों से मुझे यह मालूम चला कि मामा से सेक्स सही से नहीं हो पाता है.
जब मैंने मामी से मामा जी की चुदाई को लेकर कुछ खुल कर पूछना चाहा तो मामी जी चुप हो गईं और उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वक्त आने पर तुम सब कुछ जान जाओगे.
तब मैं उनकी इस बात का मर्म समझ ही न सका.
मैं लगभग हर बार मामी जी से मामा के साथ हुई चुदाई को लेकर बात करने की कोशिश करता, पर वे हर बार उस बात का जबाव देने से बच जाती थीं.
एक दिन मैंने उनसे कहा- मुझे आपसे अकेले में मिलना है. जब आपके घर पर कोई नहीं हो, तब बता देना.
उन्होंने कहा- ठीक है.
फिर अगले दिन मामा जॉब पर गए, तब उनका मैसेज आया कि तेरे मामा जॉब पर चले गए हैं. मैं तुम्हारे लिए चाय बना रही हूं, आ जाओ.
मैं चला गया.
वहां पर जाकर बैठा, हम दोनों ने साथ में चाय पी और बातें करने लगे.
बातें करते करते मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.
उन्होंने कुछ नहीं बोला.
कुछ पल बाद उन्होंने उठकर टीवी ऑन कर दिया.
टीवी में किसिंग वाला एक हॉट सीन आ रहा था.
उसे देखकर मैं उनकी तरफ देखने लगा.
मामी थोड़ा शर्माने लगीं.
मैं उनके थोड़ा नजदीक हो गया और उन्हें हग करने लगा और उन्हें प्यार करने लगा.
वे भी धीरे-धीरे मुझसे प्यार करने लगीं और मेरा विरोध ना करते हुए मेरा साथ देने लगीं.
मामी मेरी बांहों में एकदम से झूल सी गई थीं और वे काफी सुकून महसूस कर रही थीं.
मैंने मामी के गाल पर चुम्मी ली तो वे मदहोशी भरी नजरों से मेरी आंखों में देखने लगीं और उन्होंने अपने लरजते हुए होंठों को मेरे होंठों पर रख दिए.
हम दोनों लिप किस करने लगे.
किस करते-करते मामी गर्म होने लगीं और मुझे भी सेक्स चढ़ने लगा.
मैं उन्हें गोदी में उठा कर उनके ही रूम में ले गया और हम पागलों की तरह एक दूसरे को किस करने लगे थे.
मामी के होंठों को किस करते-करते मैं उनके बूब्स दबा रहा था.
वे और ज्यादा चुदासी होने लगीं और उनकी सांसें बहुत तेज चलने लगी थीं.
मैंने अब उनके कुर्ते को उतार दिया और वे मेरे सामने ब्रा में आ गई थीं.
फिर मैंने उनकी गर्दन को चूमते हुए उनकी ब्रा भी खोल दी और उनके बूब्स को पीने लगा.
मामी की सांसें और तेज होने लगीं.
वे मुझे अपने दूध पिलाती हुई सर को सहलाने लगी थीं.
मैं भी उनके एक दूध के निप्पल को अपने होंठों के बीच दबा कर खींचने लगा … साथ ही दूसरे दूध को हाथ से दबाते हुए उन्हें मीठा दर्द देने लगा.
वे भी मुझे अपने मम्मों से खेलने के लिए कहे जा रही थीं- आह आह … और जोर से दबा लो मेरे दूध चूस लो.
कुछ देर बाद मैंने उनके दूध से मुँह हटाया तो उन्होंने भी मेरे कपड़े उतारने चालू कर दिए.
मैंने भी देर न करते हुए उनकी सलवार उतार दी.
अब वे मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थीं.
मैंने उनके बदन को जीभर के चूमना चालू कर दिया और मैंने उनके पूरे शरीर को चूम चाट कर गीला कर दिया.
कुछ देर बाद मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी और उनकी चुत को किस करने लगा.
वे मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चुत पर दबाने लगीं.
कुछ देर बाद मैंने मामी से अपना लंड चूसने को कहा.
कुछ पल आनाकानी करने के बाद मामी मान गईं और वे मेरे लंड को चूसने लगीं.
वे लंड को बहुत अच्छी तरह से चूस रही थीं.
मैं बता नहीं सकता कि मुझे मामी से अपना लंड चुसवाने में कितना ज्यादा मजा आ रहा था.
मैंने उनकी चूचियों को दोबारा किस करना चालू कर दिया.
इस बार वे कहने लगीं- प्लीज अपने लंड को मेरी चुत में डाल दो, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है.
मैंने उनकी दोनों टांगों को फैला दिया और अपने लंड को उनकी चुत पर सैट करके जैसे ही धक्का मारा, मेरा आधा लंड उनकी चुत में घुस गया.
वे चिल्ला उठीं- आह मर गई … प्लीज रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है आह ओह!
मामी दर्द भरी सिसकारियां ले रही थीं. यह देख कर मैं थोड़ा सा रुक गया और उन्हें दोबारा किस करने लगा.
थोड़ी देर बाद में वे सामान्य हो गईं और मैंने धीरे धीरे करके अपना पूरा का पूरा लंड उनकी चुत में उतार दिया.
इस बार वे पहले की तरह नहीं चिल्लाईं, पर उन्हें थोड़ा दर्द हुआ.
इंडियन लेडी सेक्स करती हुई आह आह कर रही थीं.
कुछ देर बाद जब वे लौड़े से मजा लेने लगीं.
तब मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में खड़ी करके पीछे से लंड पेल कर चोदा.
मैंने उन्हें बहुत देर तक चोदा.
काफी देर तक चले इस सेक्स में वे दो बार झड़ चुकी थीं.
मैं झड़ने के बाद शिथिल होकर लेट गया और अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा.
थोड़ी देर आराम करने के बाद मामी जी उठ कर अपनी कुर्ती पहन कर मेरे लिए चाय बनाने चली गईं.
हम दोनों ने चाय पी और मैंने फिर से उनके साथ मस्ती करना शुरू कर दी.
मैंने जल्दी ही उन्हें गर्म कर दिया और दोबारा से चोदा.
वे मुझसे कहने लगीं- कहीं तुम मुझे धोखा तो नहीं दे दोगे?
मैंने उनसे कहा- मैं आपको हमेशा जिंदगी भर प्यार करूंगा, कभी धोखा नहीं दूंगा.
वे मुझसे कहने लगीं- मैं तुम पर बहुत भरोसा करती हूं और प्यार भी करती हूं. मेरा भरोसा कभी मत तोड़ना.
उसके बाद से अब हम दोनों रोजाना सेक्स करने लगे थे.
आज बहुत दिन बाद मैं कोई कहानी लिखने जा Hindi Porn Stories रही हूँ मैं असल में बाहर चली गई थी।
आप लोगों के बहुत सारे मेल मिले थे जिनमें मेरी कहानियों को काफ़ी पसंद किया गया है जिसका मैं आप सबका खुले दिल और फ़ैली चूत के साथ शुक्रिया अदा करती हूँ लड़कियों की चूत के लिये दुआ करुंगी कि उनको भी कोई चोदने वाला जल्दी से मिल जाए।
और लड़के तो साले होते ही हरामी हैं, कहीं और नहीं मिली तो घर में ही शुरु हो गये।
मुझे लड़कों से एक शिकायत है कि वो सब ही मुझे चोदना चाहते हैं! अरे यार… मुझे चुदवाने से कोई इंकार नहीं है पर अब मैं बैठी यू पी में… और आप लोग पता नहीं कहाँ कहाँ बैठे हो, अब भला किसी का लंड इतना बड़ा तो होगा नहीं कि वहाँ बैठे बैठे मेरी चूत को चोद डाले…
तो प्लीज़ मुझसे हर तरह की बात करें पर मुझे चोदने की बात न करें क्योंकि यह हो नहीं सकता।
हाँ तो अब मैं आप सबको बताती हूँ कि मैं आगरा अपनी मुमानी के घर गई थी करीब 5 साल बाद अपनी अम्मी और भाई के साथ…
वहाँ मुझे बहुत अच्छा लगा, इतने साल बाद जाने के बाद वहाँ सभी लोग बहुत प्यार से मिल रहे थे। हम लोगों ने खूब मौज मस्ती की पर हफ़्ते भर बाद ही मुझमें चुदाने के कीड़े रेंगने लगे क्योंकि कहाँ तो लगभग रोज़ ही चूत में लंड खाती थी, शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब मैं न चुदवाऊँ, पर यहाँ तो चुदाई क्या साला किसी से चूची मसलवाने को तरस गई।
हालांकि मेरी मुमानी की दो लड़कियाँ मेरी हमउम्र थी पर वो बहुत सीधी सादी थी। कम से कम उनके बर्ताव से तो यही ज़ाहिर होता था कि बच्चियाँ अभी बहुत नादान हैं, बेचारी अपनी जवानी के बारे में भी शायद नहीं जानती थी जबकि वो दोनों बला की खूबसूरत हैं, जिस्म का रंग दूध जैसा गोरा, भरी भरी जांघें, लाल-लाल गाल और चूचियाँ तो कयामत थी! कसम से उनकी चूची बला की खूबसूरत थी! उनमें छोटी वाली अभी स्कर्ट टॉप ही पहना करती थी।
मैं अकसर सोचती कि साली इतनी खूबसूरत हैं दोनों, फ़िर भी इतनी सीधी साधी हैं।
एक दिन की बात है मैं छत पर नहा कर बाल सुखा रही थी कि तभी कोई मेरे पीछे से मेरी गांड में लौड़ा अड़ा कर मेरी चूचियों को दबाने लगा। मेरी तो बांछें खिल गई, सोचा किसी को तो तरस आया मेरी जवानी पे!
जब घूम कर देखा तो भाई जान थे।
मैंने कहा- हटिये भी भाई! भला यह भी कोई जगह है प्यार करने की? कोई देख लेगा तो शामत आ जायेगी।
तब भाई ने उसी अवस्था में खड़े खड़े मेरी चूचियाँ दबाते हुए कहा- हाँ यार, यह तो है! साला यहाँ बाकी सब तो ठीक है पर लंड को बहुत तरसना पड़ता है। साला यहाँ घर ऐसा महल तो है नहीं कि जब जी चाहा बिस्तर पर पटक कर चोद लिया! यार तुम न हुई तो अम्मी की पुरानी भोसड़ी में ही लंड डाल लिया, नहीं तो तुम्हें ही चोद लिया पर साला यहाँ तो बड़ी दिक्कत है, अब हफ़्ता भर हो गया, साला लंड को कोई चूत नसीब नहीं हुई।
उनके चूची दबाने से मैं अब तक गर्म हो चुकी थी, तब मैंने कहा- भाई, अब आप मेरी चूची न दबायें क्योंकि इस तरह तो आग और भड़क रही है, जब चोद नहीं पायेंगे तब गुसल खाने में जाकर मुझे भी उंगली करनी पड़ेगी और आपको भी मुठ मारना पड़ेगा।
तब भाई ने कहा- यार, अब इतने दिन बाद मौका मिला है तो बिना चोदे तो नहीं छोडूंगा, चाहे जो हो जाए!
और यह कह कर मेरा तौलिया खोलने लगे.
मगर मैंने कहा- हाय भाई, ऐसा न कीजिये, कहीं यहाँ किसी ने देख लिया तो बड़ी बदनामी हो जायेगी! चुदवाने का मन तो मेरा भी है पर क्या करें, मज़बूरी है!
तब भाई ने कहा- अच्छा तुम नहीं मान रही तो मेरा लंड बस मुंह से चूस कर ही हल्का कर दो, मैं सब्र कर लूंगा।
मैंने कहा- भाई, आप मान नहीं रहे, कहीं कोई उलटी सीधी बात हो गई तो क्या होगा?
मगर भाई न माने और मुझे एक तरफ़ दीवार की आड़ में ले गये और अपनी पैंट की जिप खोल कर मुझे घुटनो के बल फ़र्श पर बैठा दिया और मेरे हाथ में लंड पकड़ा कर बोले- प्यारी बहना चूस कर खलास कर दो लंड को!तब मैंने कहा- भाई, अभी तो खड़ा भी नहीं हुआ, बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और वक्त भी लगेगा। आप मान नहीं रहे।
तब वो मेरी चूची को तौलिये के ऊपर से दबाते हुए बोले- साली नाटक न कर बहन की लौड़ी! एक तो चोदने को नहीं मिल रहा, ऊपर से तू बातें चोद रही है! चल जल्दी से चूस कर खड़ा कर लंड को!
तब मुझे भी गुस्सा आ गया, मैंने कहा- बड़ी बहादुरी दिखा रहे हो? लो अब मैं भी बहादुरी दिखाती हूँ।
ये कह कर मैंने अपनी टोवल उतार कर फ़ेंक दी और झट से भाई का लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी.
भाई ने जब देखा कि मैंने टोवल उतार कर फ़ेंक दी तो उसकी भी गांड फ़टी- आरज़ू, तुमने ये क्या किया? कहीं किसी ने देख लिया तो क्या होगा?
तब मैंने कहा- अभी मैं कह रही थी तो मेरी गांड में घुस गये अब काहे गांड फ़टी जा रही है. चोदो जो होगा देखा जायेगा, ज्यादा से ज्यादा मुमानी की लड़कियाँ या मुमानी ही तो आयेंगी ऊपर सम्भाल लूंगी मैं…
उनको तब भाई ने कहा- अगर मामु जान आ गये तो क्या होगा?
तब मैंने कहा- यार लड़कियों और अम्मा को तुम सम्भालना और अगर मामु जान आये तो वो मेरी चूत और नंगी चूचियाँ देख कर ही धरशायी हो जायेंगे!
उसके बाद मैंने भाई से कहा- भाई, आप जल्दी से मेरी चूत को चाट कर गर्म कर दो और आपका लंड मैं चूस कर तैयार करती हूं.
तब भाई जल्दी से मेरी चूत की तरफ़ मुंह करके लेट गये और अपने लंड को मेरे मुंह के पास ले आये और तब मैं जल्दी से उनका लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी. भाई भी चटाक चटाक मेरी बुर को चटखारे के साथ चूस रहे थे.
भाई का लंड जल्दी ही खड़ा हो कर तन गया मगर मैं अभी पूरी तरह से गर्म नहीं हुई थी.
तब भाई ने कहा- आरज़ू, तुम जल्दी से चौपाया बन जाओ, मैं पीछे से डालता हूं आज तुम्हारी चूत में!
मैंने कहा- भाई, अभी मैं पूरी तरह गर्म नहीं हूं, आप ऐसा कीजिये कि अपनी टांगें फ़ैला लीजिये, मैं आज झूला आसन से चुदाऊँगी!
भाई अपनी टांगें सीधी फ़ैला कर बैठ गये और मैं अपनी चूत फ़ैला कर उनकी टांगों के बीच खड़ी हो गई और पहले भाई से कहा- भाई, एक किस मेरी बुर पर कीजिये, फ़िर सम्भाल कर बैठ जाइये मैं अचानक अपनी चूत आपके लंड पर गिराऊँगी.
भाई ने मेरी चूत पर किस तो करा मगर फ़िर बोले- रानी, अगर सेंटर आउट हो गया तो मेरी भी गांड फ़टेगी और तुम्हारी भी इसलिये भलाई इसी में है कि चुपचाप मेरे लौड़े पर अपनी चूत रख कर बैठ जाओ!
मगर मुझे तो ज़िद चढ़ गई, मैंने कहा- जैसा कहती हूं करो!
तब भाई सम्भल कर बैठ गये और मैं धड़ से उनके लंड पर बैठने को हुई कि उनका लंड पीछे चला गया और मेरी गांड के नीचे दब गया. भाई के मुंह से एक दर्द भरी चीख निकल गई- आआअह मार डाला कुतिया… सालीईई मैं पहले ही कह रहा था तू नहीं कर पायेगी मगर तू तो आज मेरी गांड फ़ाड़ने पर अमादा है. हट जा, ज़रा सहलाने दे लंड को, बहुत ज़ोर से दबा है! एक तो तेरे चूतड़ इतने भारी हैं, ऊपर से 9 मन का बोझ!
मुझे भाई की हालत देख कर हंसी आ गई और मैंने कहा- एक बार निशाना चूक गया तो गांड फ़ट गई? अरे मेरी चूत की तुम और अब्बु मिलकर कितनी बार कुटाई कर चुके हो?
तब भाई थोड़ा नोर्मल हो गये और मैं फ़िर से खड़ी हो गई, मुझे खड़ा होते देख कर भाई की गांड फ़ट गई, बोले- क्या इरादा है अब तेरा?
मैंने कहा- भाई वन्स मोर! कोशिश करो प्लीज!
तब भाई ने कहा- बहुत बड़ी निशानची बन रही है? याद रख, तुझे चांस तो दे रहा हूं, अगर इस बार निशाना चूका तो किसी कुत्ते से तेरी गांड मरवाऊँगा!
हम दोनों अपनी वासना में इतने गुम हो गये थे कि भूल ही गये थे कि यह घर मुमानी का है और हम लोग छत पे हैं, मुझे ज़रा आहट हुई तो देखा कि खाला की छोटी लड़की अफ़रोज़ दरवाज़े की आड़ लेकर खड़ी है और पता नहीं कब से हम दोनों की बातें सुन रही थी और नज़ारा देख कर मजा ले रही थी.
मैं उसे देख कर थोड़ा सकपका गई और सम्भलते हुए भाई की गोद में बैठ कर उसके कान में धीरे से कहा- भाई, अफ़रोज़ पता नहीं कितनी देर से हम लोगों को देख रही है और हमारी बातें भी सुन ली हैं उसने!
तब तो भाई भी घबरा गया लेकिन भाई ने धीरे से कहा- अब तो देख ही लिया है, मेरे ख्याल से ये ज्यादा कुछ नहीं करेगी, बस हम लोगों की चुदाई देखेगी, इसमें हमारा ही फ़ायदा है!
मैंने कहा- भाई, अगर मुमानी से कह दिया इसने… तब क्या होगा? मामु और मुमानी क्या सोचेंगी कि हम लोग आपस में चोदा चोदी करते हैं?
तब भाई ने कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा, अब हमें इसकी प्यास भड़कानी है, इसको इस बात का एहसास करा देना है कि चुदाई में बहुत मजा आता है. जवान तो ये भी है साली कितनी देर तक बरदाश्त करेगी चूत की प्यास को! और फ़िर जब मेरा औज़ार तुम्हारी चूत में घुसते हुए देखेगी, तब साली खुद ही उंगली करेगी अपनी बुर में और कसम से मैं तो पहले दिन से इन दोनों बहनों को चोदने के चक्कर में हूं मगर हाथ ही नहीं धरने देती हैं साली दोनों बहनें… पर आज यकीनन इसकी चूत में चुदाई का कीड़ा रेंगने लगेगा. बस तुम इस तरह से दिखाना कि तुमको बहुत मजा आ रहा है, फ़िर देखो कैसे लाइन पर आती है.
और उसके बाद भाई ने मुझे कैसे चोदा और फ़िर वहीं छत पर अफ़रोज़ को भी ऊपरी मजा यानि खाली चूची मसलने का मजा दिया उसके बाद उसकी चुदाई भी की पर उसके बारे में अगली कहानी में बताऊँगी. Hindi Porn Stories
कहानी का अगला भाग: भाई और बहन की आपस में चुदाई-2
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