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भरी जवानी में मैं Sex Stories अपनी क्लास के एक सुन्दर से लड़के से प्यार कर बैठी। झिझक तो खुलते खुलते ही खुलती है। पहले तो हम क्लास में ही चुपके से प्रेम-पत्र का आदान प्रदान करते रहे। एक दिन प्रतीक ने मुझे वहाँ के एक गार्डन में शाम को बुलाया। मैं असमंजस में थी कि जाऊं अथवा ना जाऊं। फिर सोचा कि इसमें डरने की क्या बात है … वहाँ तो और लोग भी होंगे। पर किसी ने पहचान लिया तो फिर … ? चलो मुँह पर कपड़ा बांध लेंगे।
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पहले तो मुझे बहुत शरम आती थी, पर मैं अपना चेहरा हाथों से छिपा कर बहुत कुछ कह जाती थी। वो एक बहुत ही शरीफ़ लडका था, उसने मुझे अकेला पा कर भी कोई भी अश्लील हरकत नहीं की। पर मुझे यह अजीब लगता था। मेरी मन की इच्छा तो यह थी कि हम दोनों अकेले में एक दूसरे के यौन-अंगों से छेड़छाड़ करें, कुछ रूमानी माहौल में जाये। कुछ ऐसा करें कि मन की आग और भड़क जाये …
यानि … यानि …
एक दिन मैंने ही पहल कर दी। एकान्त पा कर मैंने अपना चेहरा हाथों में छिपा कर कह ही दिया,”प्रतीक … एक बात कहूँ … ?”
“हां अंजली … कहो …!”
“बस एक बार … एक बार … यानि कि … ” मैं नहीं कह पाई। पर दिल ने सब कुछ समझ लिया। उसने चेहरे पर से हाथ हटाया और मेरे होंठों को चूम लिया।
“हाय … और करो ना … !”
उसने ज्योंही मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे, मैंने जोर से उसे भींच लिया और बेतहाशा चूमने लगी। प्रतीक ने मेरे बालों में हाथ डाल कर सहला दिया। मेरी गुलाबी आंखें उस एकटक निहारने लगी। मेरी नजरें स्वतः ही झुक गई।
इसी तरह एक दिन मैंने उसके हाथों को मेरे सीने पर रख कर स्तनों को दबाने को कह दिया।
उसने बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहलाये और दाबे … । अब मुझे प्यार में सेक्स का भी मजा आने लगा था। फिर वो घड़ी भी आई जब मैंने उसका हाथ मेरा कुर्ता ऊपर करके अपनी चूत पर रख दिया। वो उसे सहला कर मेरे नक्शे का जायजा लेने लगा। मेरी गीली चूत का भी उसे अहसास हो गया।
मैंने भी हिम्मत करके उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी।
अब अधिकतर यही होने लगा था कि हम किसी कोने या अंधेरी जगह को तलाशते और एक दूसरे के अंगों के साथ खेलते और वासना में लिप्त हो जाते।
एक दिन प्रतीक ने मुझसे चुदवाने को कहा। मैं डर गई, मुझे तो इसी खेल में मजा आने लगा था। पर चुदना, मतलब उसके लण्ड को मेरी चूत में घुसवाना पड़ेगा। जाने क्या होगा … ? मैं उसे टालती रही। यूँ हम सालभर तक ऐसे ही वासना भरा, अंगों की छेड़छाड़ का खेल खेलते रहे। हां अब हम कभी कभी अपना यौवन रस भी निकालने लगे थे। उसका तो वीर्य भी ढेर सारा निकलता था। उसका लण्ड वास्तव में मोटा था। उसका सुपाड़ा भी मैंने देख लिया था, बड़ा सा फ़ूला हुआ लाल टमाटर जैसा था, पर उस समय वो उत्तेजित था।
यूँ ही करते करते मेरी शादी भी पक्की हो गई। शादी का समय भी आ गया और फिर देखते ही देखते शादी भी हो गई। हम दोनों इस बार बहुत ही फ़ूट फ़ूट कर रोये थे। हम में भाग कर शादी करने की भी हिम्मत नहीं थी। हमारी कसमें, वादे सभी कुछ किताबी बातें बन कर रह गये थे। तारे तोड़ कर लाना बस मुहावरा बन कर ही रह गया था।
मेरे पति बंसी लाल की एक बड़ी दुकान थी, जो बहुत अच्छी चलती थी। वो अधिकतर दिल्ली या कलकत्ता आता जाता रहता था। मेरे लिये बहुत सी चीज़ें लाया करता था। मुझे वो बहुत प्यार करता था। चुदाई भी बहुत बढ़िया करता था। हां, गालियां वगैरह नहीं देता था। जब भी बंसी लाल शहर से बाहर जाता तो मैं प्रतीक के कमरे पर चली जाती थी।
उन दिनों मेरी जिन्दगी रंगो से भरी हुई थी। मुझे सब कुछ सुहाना और सुन्दर सा लगता था। मेरा मन खिला खिला सा रहता था। मेरा पति मुझे बहुत प्यार करता था और मेरा प्रेमी मुझ पर अब भी जान छिड़कता था। दोनों ही मुझे बहुत खुश रखते थे। आज भी मैं अपनी स्कूटी से प्रतीक के घर आ गई थी। प्रतीक हमेशा की तरह अपनी पढ़ाई में लगा था। मुझे देखते ही वो खुश हो गया और मुझे अपने आलिंगन में जकड़ लिया। सदा की तरह उसका लण्ड खड़ा हो गया और मेरी गाण्ड की दरार में घुसने लगा। मुझे बस रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ नजर आने लगी।
कुछ देर तक तो हम चूमा-चाटी करते रहे … फिर मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। आज उसने अपना पजामा उतार दिया और अपना नंगा लण्ड मेरे हाथों में थमा दिया। उसका मोटा लण्ड मेरे दिल में पहले ही बसा हुआ था, सो उसे मैंने हौले हौले रगड़ना चालू कर दिया। उसने भी आज पहली बार मेरी साड़ी उतार दी और हाथ ब्लाऊज में घुसा दिया। मुझे इस से थोड़ी तकलीफ़ हुई फिर मैंने उसका हाथ हटा दिया।
“ऐसे मत करो, लगती है … बस अब मैं चलती हूँ !”
पर प्रतीक ने मेरी एक ना सुनी। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
“ये मत करो, पति के अलावा दूसरा कोई नहीं … !!” मैं कुछ आगे कहती, प्रतीक ने चुप करा दिया,”मैं दूसरा नहीं हूँ, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ, आज मुझे सब करने दो … “
“नहीं प्रतीक, बस ऊपर ही ऊपर से कर लो … “
“प्लीज बस एक बार चुदा लो … देखो मैं तो तुमसे कब से प्यार करता हूँ, मेरी कसम है तुम्हें … देखो तुमने मेरा क्या हाल कर दिया है … प्लीज अंजली … “
उसका यह हाल देख कर मुझे भी ठीक नहीं लगा। सोचा किसको पता मालूम चलेगा, सच है ये कब से तड़प रहा है … मैं पिघलने लगी। मैंने अपनी साड़ी ऊंची कर ली।
“तुम्हारी कसम अंजली … तुमने तो आज मेरा दिल जीत लिया … ” और वो मुझ पर झुक गया, मुझे प्यार से चूमने लगा, उसका लण्ड मेरी चूत में घुसने लगा। मुझे लगा उसका लण्ड मेरे पति से बहुत मोटा है … कसता हुआ सा भीतर जाने लगा।
आनन्द से मेरी आंखें बंद होने लगी। उसने धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी चूत में पूरा उतार ही दिया। दूसरा लण्ड, नया लण्ड … अलग ही आनन्द दे रहा था। मैंने प्यार से प्रतीक को देखा और अपनी ओर खींच लिया।
“प्रतीक … बहुत मजा आ रहा है … अब तक क्यों नहीं चोदा तुमने !”
“तुम ही दूर रही मुझसे … तुम तो मेरी जान हो … आह्ह्ह … !”
वो मेरे से प्यार से लिपट गया और उसके चूतड़ मेरी चूत के ऊपर भचाभच चलने लगे। मैं भी उसे प्यार से चूमने चाटने लगी। मैं अब पलट कर उसके ऊपर आ गई और उसके लण्ड पर बैठ कर चुदने लगी। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था।
उसका लण्ड मेरी चूत को मस्ती से चोद रहा था। कितनी खुशी लग रही थी मुझे।
उसका मोटा लण्ड मेरी योनि में अब भी कसता हुआ आ जा रहा था। मीठी सी गुदगुदी तेज हो गई। मुझे लगा कि मैं चरम बिन्दु तक पहुंच गई हूँ और अब मुझे नहीं सहा जायेगा। तभी मेरा रज छूट गया। प्रतीक ने झट से पोज बदला और मुझे घोड़ी बना दिया और देखते ही देखते उसका लण्ड मेरी गाण्ड में फ़ंस चुका था। मेरी गाण्ड खासी चिकनी थी और खुली हुई थी। उसने लण्ड को भीतर घुसा दिया और आगे पीछे करने लगा। मुझे फिर से आनन्द आने लगा। उसका ये सब इतने प्यार से करना मुझे बहुत पसन्द आया। उसका तरीका इतना अच्छा था कि कोई एक बार चुद जाये तो बार बार लण्ड खाने की इच्छा हो !
मैंने उसे कहा,”प्रतीक, एक बार और मेरी चूत चोद डालो, प्लीज !”
उसने जल्दी से लण्ड बाहर निकाल कर चूत में घुसेड़ दिया। मुझे फिर से असीम आनन्द की दुनिया में पहुँचा दिया। सच में कुतिया के पोज में ज्यादा मस्त चुद रही थी। धक्के अन्दर तक ठोक रहे थे। मधुर चुदाई ने फिर रंग दिखाया और मैं फिर से झड़ने के कगार पर थी। मस्त चूत की उसने जम कर ठुकाई की उसने और मेरा रस फिर से चू पड़ा। तभी उसका वीर्य भी निकल पड़ा। मेरी चूत उसके वीर्य से लबालब भर गई और फिर उसका लण्ड सिकुड़ कर बाहर आता प्रतीत हुआ।
उसने जल्दी से अपनी कमीज को मेरी चूत पर लगा दिया और उसे साफ़ करने लगा।
मैने पीछे मुड़ कर उसे प्यार से देखा। वो बड़े अच्छे तरीके से मेरी चूत को साफ़ करने में लगा था।
“प्रतीक, तुमने मुझे ये सुख पहले क्यों नहीं दिया … ?”
“यह तो सब समय की बात है, तुमने मुझे हाथ लगाने दिया तो मेरी किस्मत खुल गई।”
“हाय राम, अपन इतने दिनों तक बेकार ही यूँ ही मसला-मसली करते रहे, चुदाई कर लेते तो कितना आनन्द आता … ! है ना ?… अपन तो अपने आप को वासना की आग में जलाते रहे … मुठ मारते रहे … प्रतीक, साले तुमने मुझे जबरदस्ती क्यों नहीं चोद दिया?”
“मैं तुम्हें प्यार करता हूँ … कोई जानवर तो नहीं हूँ … “
“कसम खाओ, अब रोज ही ये सब करेंगे … तुम्हारा लण्ड मुझे बहुत ही अच्छा लगा !”
“बस जान लो … आज से ये लण्ड तुम्हारा ही है।”
हम दोनों एक बार फिर से लिपट गये और अब मुझे चोदने वाला पति के अलावा प्रतीक भी था। एक बार फिर से हमने मरने जीने की कसमे खाने लगे, चांद तारे तोड़ कर लाने की बातें करने लगे … मरने जीने की कसमें खाने लगे … आह्ह्ह्ह्ह … … Sex Stories
मेरा नाम अंजलि है । मै, पापा Sex Stories और मम्मी बहुत दिनों बाद थियेटर में गये। स्थानीय कलाकार वहां अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। नाच, गाना व नाटक वगैरह चल रहे थे। मुझे एक डांस बहुत प्यारा लगा। कार्यक्रम चल रहा था। हम आगे ही बैठे थे। मैं पानी पीने के लिये स्टेज के पास गई। अचानक मुझे वो डांस करने वाली लड़की वहा मिल गई। मैं तुरन्त उससे जाकर मिली।
“आप डांस बहुत अच्छी करती हैं।”
“थेंक्स … यह मेरा बचपन का शौक है … ”
“आपका नाम जान सकती हूँ प्लीज … ?”
“कमल नाम है मेरा … ”
“मैं कभी आपसे मिलने जरूर आऊंगी !”
“आप अंजलि है ना … मेरा घर आपके पास ही है … ”
“अच्छा तो हम जरूर मिलेंगे … आप मेरे घर आना !”
औपचारिक बात होने के बाद मैं पानी पी कर अपनी सीट पर आ गई। कार्यक्रम समाप्त होने पर हम घर पर आ गये। दूसरे दिन सुबह ही कमल मुझे घर के बाहर दिख गई। वो स्कूटी से निकल रही थी … उसने मुँह पर कपड़ा बांध रखा था। उसने हाथ हिलाया और और स्कूटी रोक दी … मैंने उसे अन्दर बुला लिया … और उसका परिचय सबसे कराया। फिर मैं उसे कमरे में ले आई।
उसने टाईट जीन्स पहन रखी थी और सेक्सी लग रही थी। उसने मुँह पर से कपड़ा हटाया और बैठ गई। हम बातें करने लगे। उसके बात करने का करने का स्टाईल कुछ अलग सा था। कभी कभी वो लड़के के स्टाईल में बोलने लगती थी। मुझे कुछ शक सा होने लगा।
मैं एक दिन उनके डांस क्लब में गई। बाहर ही मेरे जान पहचान के अंकल मिल गये। बात बात में मुझे सब मालूम हो गया कि कमल वास्तव में लड़का ही है, पर मैंने उसे ये जाहिर नहीं होने दिया कि मुझे पता चल गया है कि वो लड़का है। चूंकि उसका जिस्म दुबला पतला था और नाचने में माहिर था, इसलिये वो ऐसा ही रहता था। उसके बाल वास्तविक लगे इसलिये बाल भी उसने लम्बे कर लिये थे। उसकी आवाज लड़कियों जैसी ही थी। उम्र भी 18 साल की थी। ना चेहरे पर कोई बाल … लड़कियों जैस चिकना चेहरा।
अब वो अक्सर मेरे घर आ जाता था। मैंने जान बूझ करके उसे मेरी सहेली बना लिया था … जब भी उसका कोई प्रोग्राम होता तो वो मुझे पास ला देता था। वो या तो जीन्स पहनता था या पैन्ट । एक दिन मैंने उससे पूछा।
“कमल … तुम्हारा कोइ बॉय-फ़्रेन्ड है क्या?”
“नहीं तो … और तुम्हारा … ”
“नहीं यार … कोई मुझे पसन्द ही नहीं करता है … ”
“तो मेरी फ़्रेन्ड बन जाओ … ”
“छी: तुम तो लड़की हो … मैं लड़कों की बात कर रही हूँ … ”
“अरे यार बॉय-फ़्रेन्ड तुम्हें परेशान कर देगा … तुमसे सेक्स की बातें करेगा और फिर जाने क्या क्या … ”
“तुझे क्या सेक्स की बातें अच्छी नहीं लगती है क्या ?”
“हां … लगती तो हैं … बातें क्या सेक्स भी अच्छा लगता है … कोई किसी के साथ सम्भोग करे मजा नहीं आयेगा क्या ?”
“क्या बात है … सम्भोग को चुदाई कहते हैं … ” मुझे सेक्स की बातों में मजा आने लगा था। मैं उसे उत्तेजित करने लगी।
“धत्त ये तो गाली होती है … पर हां च् … च् … चुदाई ही कहते हैं … ” कमल हड़बड़ा गया।
“अच्छा आज बाहर चल कर आईस्क्रीम खायेंगे … मैं ड्रेस बदल लेती हूँ … ”
मैंने अपना टॉप उतारा तो मेरी दोनों चूंचियां बाहर छलक पड़ी। मैंने जान कर उसे भड़काने के अपने बोबे सहला दिये।
“अरे … रे ये क्या कर रही हो … अन्दर जाओ ना … !” कमल आंखे फ़ाड़ कर मेरी चूंचियाँ देखने लगा।
“ऐसे क्या कर रही है … तेरे नहीं है क्या … ?” मैंने उसे छेड़ा।
“बड़ी सुन्दर हैं … सीधी तनी हुई … अच्छी लग रही हैं … ” उसके ऐसे कहने से मेरे शरीर में सिरहन दौड़ गई। मैंने जाल और कसा।
“कमल … हाथ लगा ना इसे … ” कमल ने धीरे से मेरे बोबे सहला दिये और मेरे चूंचक भी दबा दिये …
“मस्त है तेरी चूंचियाँ यार … ।” कमल उत्तेजित हो उठा था।
“हाय कमल … ला तेरे भी भी सहला दूं” मैंने उसे छेड़ने की नीयत से कहा और मुझे ये भी बताना था मैं उसे लड़की ही समझ रही हूं।
“नहीं … नहीं अभी नहीं … बाद में … मेरे तो अभी हैं ही नहीं … ” वो घबरा उठा।
“अरे जा … अभी दबा दबाऊंगी … ।” मैंने उसकी छाती पर जबरदस्ती हाथ लगाया तो साफ़ चट मैदान था। पर कमल की आंखो में वासना दिखने लगी।
मेरे हाथ दूर करके बोला,”आ ! तेरे और दबा दूं … !
“और उसने मेरे मेरे बोबे सहलाने शुरू कर दिये। मुझे मजा आने लगा। इतने में उसका एक हाथ मेरी चूतड़ पर आ गया … और दबाने लगा। उसने मुझे चिपका लिया और मेरे होंठ अपने होंठों से मिला दिये। मैंने भी उसके चूतड़ पकड़ लिये और दबाने शुरू कर दिये … अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और उसने जीन्स के ऊपर ही मेरी चूत भींच दी।
“हाय रे कमल … और भींच दे … साली तू लड़की क्यो है … लण्ड होता तो उसे ठूंस ठूंस कर चुदवाती … ” मेरे मुँह से एक वासना भरी कराह निकल पड़ी। उसके कड़े बदन में मर्दों वाली बात साफ़ नजर आ रही थी …
“ला मैं तेरी चूत भींच दूं !”
मैंने भी उसके लण्ड पर ज्योंही हाथ लगाया। वो दूर हो गया …
“बस अंजलि … अब नहीं … चल तैयार हो जा … चलते है … ” मेरा नशा टूट गया …
“कमल … रात को यहीं आ जाना … थोड़ा और मजा करेंगे … ऐसे ही … खूब मजा आया ना अभी … ”
हम दोनों स्कूटी पर बैठ कर निकल पड़े। हम दोनों ने मुँह पर कपड़ा बांध लिया था।
रात को मैं उसका इन्तज़ार करती रही, पर वो नहीं आया। मैंने उसे फोन किया तो वो बोला कि अभी रात हो गई है कल आऊंगी।
सुबह ही वो आ गया … मैं खुश हो गई … सोचा आज तो चुद के ही छोड़ूगी … साली चूत को शान्त तो करना ही है … ये चक्कर में आ गया है तो मजा कर लूँ … हमने चाय पी और कमरा बन्द कर लिया। और मम्मी से कह दिया कि हम एक घण्टा पढ़ेंगे … हमें डिस्टर्ब नहीं करना।
“चल यार मजे करते हैं … ” मैंने अपना नाईट सूट उतार दिया और नंगी हो गई …
“तू तो बड़ी बेशरम है … यार … ” कमल बोल उठा और मेरी चूचियाँ दाबने लगा … ।
“अरे उतार ना कपड़े यार … जल्दी कर … मेरी तो खुजली बढ़ रही है … ” मेरी वासना बढ़ती जा रही थी और कमल से चिपकती जा रही थी। उसने मेरी चूत दबा दी और मुझे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा … और मुझे बाहों में कसने लगा। मैं होश खोती जा रही थी … उसके लण्ड का दबाव अब मेरी चूत पर पड़ रहा था। मुझे मस्ती आने लगी थी। लण्ड की चुभन पा कर मुस्कराई। पर नंगा हो जाता तो उसकी पोल खुल जाती … जो कि अभी खुलने ही वाली थी।
“हाय रे कमल … काश तू लड़का होती … तेरे मोटा सा लण्ड होता … कितना मजा आता … अरे टॉप और जीन्स उतार ना … ” पर उसने नहीं सुना … वो मेरे अंगों को भींचती रहा। मैंने खींच कर उसका टॉप उतार दिया। उसने तुरन्त मेरी आंखें बन्द कर दी …
“प्लीज मत देखो शरम आती है … मैं जीन्स उतार रही हूँ … देखो आंखे बन्द ही रखना … ” अपना जीन्स उतार कर वो नंगा हो गया … मैंने तिरछी नजरों से उसका कड़कता लण्ड देखा। उसने वापिस से मुझे दबोच लिया।
उसका लण्ड अब मेरे जांघ पर लग रहा था … मैंने जान करके कुछ नहीं कहा।
“अरे ये चूत में क्या घुसा रही है … ” उसका मोटा लण्ड मेरी चूत पर रगड़ लगाता हुआ घुसने लगा।
“एक मजे की चीज़ है … ” मैंने आंखे बन्द किये हुये ही नशे में मजे लेने लगी। अचानक लण्ड का दबाव मेरी चूत पर पड़ा और मोटा और लम्बा लण्ड पूरा ही अन्दर घुस गया … मैं सिहर उठी … … उसने दुबारा धक्का दिया तो पूरा ही घुस गया। कमल के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
मेरे मुख से भी आह निकल पड़ी। मुझे भी असीम आनन्द आया … उसने धक्के मारना शुरु कर दिया … मैंने अचानक ही उसे धक्का दे दिया … पर नाटक तो करना था … मेरी चूत लप लप कर रही थी … चुदने को बेताब हो रही थी …
“हाय रे … तुम तो लडके हो … लण्ड तो असली है … और इतना मोटा ?”
उसने मुझे फिर से जकड लिया और लण्ड फिर से घुसा डाला। मैंने भी घुसने दिया … मजा कैसे छोड़ देती …
“हाँ … अंजलि मैं तो लड़का हूँ … प्लीज चुदाई चलने दो ना … मैं सब बता दूंगा … ” मुझे तो पहले से ही पता था … फिर उसे कैसे जाने देती।
“प्रोमिस … चोदने के बाद बताना … हाय अब चोद डालो … देखा तुम्हारे लण्ड आ ही गया ना … ” मैंने उसे छेड़ते कहा। उसका लण्ड चूत की जड़ तक घुसा हुआ था।
मुझे असली चुदाई का आनन्द मिल रहा था। चूंकी मामला खुल चुका था। उसके मन में भी अब चोर नहीं था। अब हम खुल कर मर्द औरत की तरह चुदाई का मजा लने लगे। मैंने भी उसे अब प्यार से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और उसके होंठ से होंठ मिला दिये।
उसका लण्ड मेरी चूत में रगड़ मारते हुए उतर रहा था और फिर एक के बाद एक मजे के झटके … मैं अपनी चूत उछाल उछाल कर चुदाने लगी। मेरी वासना उबलने लगी। कमल भी अपने होश खो बैठा। बेतहाशा धचक धचक धक्के मारने लगा … तेज सिसकारियाँ उसके मुँह से निकल रही थी।
डांस में माहिर होने से उसकी कमर में बहुत लचक थी … मेरी सिर्फ़ चूत पर उसका लण्ड टकरा रहा था … उसने ऐसा पोज बना रखा था लण्ड और चूत के अलावा कोई भी अंग स्पर्श नहीं कर रहा था। लण्ड और चूत दोनों आग उगल रहे थे। फ़च फ़च और थप थप की मधुर आवाजें उभर रही थी।
“कमल मेरी चूचियाँ मसल दे राजा … दे और दे … साली को फ़ाड़ दे … ” वो बड़ी सफ़ाई से मेरी दोनों चूंचियों की घुंडियों को हल्के हल्के गोल गोल घुमा कर मसलने लगा। मुझे लगा कि ये मुझे मस्त करके मार ही डालेगा। मेर सारा जिस्म अंगड़ाई लेने लगा। सारे शरीर में मिठास भरने लगी … नसों उबाल आने लगा … लगा कि जैसे सब कुछ मेरा अब चूत में सिमटने लगा है … सारी मिठास खिंच कर चूत में समाने लगी। कमल की आंखें बन्द थी … अपनी कला से मेरी आनन्द दायक चुदाई कर रहा था …
“ईईईह्ह्ह्ह् … हाय … ये ये … मर गई … कमल गई मैं तो … मेरी मां रे … चोद दे जोर से … घुसा और जोर से घुसा … ” मेर बदन ऐंठने लग गया था … मैं अपने आपको रोकना चाह रही थी … पर हाय रे … पानी निकल ही पड़ा … और मैं झड़ने लगी … उसी समय कमल ने मेरी चूत में अपना लण्ड गड़ा दिया … और जड़ में दबाने लगाने … हाय कहते हुए अपना वीर्य मेरी चूत की गहराईयों में निकालने लगा।
अब उसने मेरे शरीर पर अपना भार डाल दिया। और चूतड़ों को मेरी चूत पर दबा दबा कर अपना वीर्य उगलने लगा। मैंने अपने दोनो पांव फ़ैला कर चित लेट गई। कमल पूरा झड़ चुका था। कमल भी एक तरफ़ बगल में आ गया। हमारी सांसे जल्दी ही नियन्त्रण में आ गई। दिल की धड़कनें सामान्य होने लगी। कमल तो जल्दी से खड़ा हो गया मैंने उसे खींच कर फिर लेटा लिया …
“कमल प्लीज ! एक बार और चुदाई करेंगे … ! ” कमल मेरी बगल में फिर से लेट गया। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी …
कमल कहने लगा,” अंजलि सॉरी … मैंने तुम्हे नहीं बताया कि … ”
मैंने उसके मुख पर अंगुली रख दी,” मुझे बहुत पहले से ही पता था कि तुम लड़के हो … मुझे तो सच में चुदना था … अब रोज चोदोगे ना … ”
कमल के लण्ड में एक बार और उफ़ान आ गया और मैं एक बार फिर नीचे दब गई … मेरे बोबे मसलने लगा … और मेरी चूत में मोटा सा लम्बा सा गरम लोहा घुस पड़ा … Sex Stories
Antarvasna - मेरा नाम दीपक है। मेरी उमर इस समय 24 साल की है। शादी के 3 साल बाद ही एक रोड दुर्घटना में भैया का स्वर्गवास हो गया था। मैं भाभी के साथ अकेला ही रहता था। मेरी भाभी का नाम संध्या है। हमारा अपना खुद का बिजनेस था। भैया के स्वर्गवास होने के बाद मैं ही बिजनेस की देखभाल करता था।
भाभी बहुत ही खूबसूरत थी। वो मुझे दीपक कह कर ही बुलाती थी। पापा और मम्मी का स्वर्गवास बहुत पहले ही हो चुका था। मैं एक दम हट्टा कट्टा नौजवान था और बहुत ही ताकतवर भी था। भाभी उमर में मुझसे 1 साल की छोटी थी। वो मुझे बहुत प्यार करती थी।
भैया के गुजर जने के बाद मैं भाभी की पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थी। मैं सुबह 10 बजे ही घर से चला जाता था और फिर रात के 8 बजे ही घर वापस आता था।
ये उस समय की बात है जब भैया को गुजरे हुये 6 महीने ही हुये थे। एक दिन मेरी तबियत खराब हो गयी तो मैने मेनेजर से दुकान सम्भालने को कहा और दोपहर के 1 बजे ही घर वापस आ गया।
भाभी ने पूछा- क्या हुआ दीपक?
मैने कहा- मेरा सारा बदन दुख रहा है और लग रहा है की कुछ फ़ीवर भी है।
मेरी बात सुनकर वो परेशान हो गयी। उन्होने मुझसे कहा, तुम मेरे साथ डॉक्टर के पास चलो।
मैने कहा, मैने मेडीकल स्टोर से कुछ मेडीसीन ले ली है। मुझे थोड़ा आराम कर लेने दो।
वो बोली, ठीक है, तुम आराम करो। मैं तुम्हारे बदन पर तेल लगा कर मालिश कर देती हूं।
मैने कहा, नहीं, रहने दो, मैं ऐसे ही ठीक हूं।
वो बोली, चुप चाप अपने क्मरे में जा कर लेट जाओ। मैं अभी तेल ले कर आती हूं।
मैं कभी भी भाभी की बात से इन्कार नहीं करता था।
मैं अपने कमरे में आ गया। मैने अपनी शर्ट और पेन्ट उतार दी और केवल बनियान और नेकर पहने हुये ही लेट गया। मेरा नेकर एक दम ढीला था और थोड़ा छोटा नेकर ही पहनता था।
भाभी तेल ले कर आयी। उन्होने मेरे सिर पर तेल लगाया और मेरा सिर दबाने लगी। उसके बाद उन्होने मेरे हाथ, सीने और पीठ पर भी तेल लगा कर मालिश किया। आखिर में वो मेरे पैर पर तेल लगा कर मालिश करने लगी।
आखिर मैं भी आदमी ही था। उनके हाथ लगने से मुझे जोश आने लगा। जोश के मारे मेरा लण्ड खड़ा होने लगा और मेरा नेकर तम्बू की तरह से उपर उठने लगा। धीरे धीरे मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया और मेरा नेकर एक दम तम्बू की तरह हो गया। मैं जानता था की नेकर के छोटा होने की वजह से भाभी को मेरा लण्ड थोड़ा सा दिखायी दे रहा होगा।
वो मेरे पैरों की मालिश करते हुये मेरे लण्ड को भी देख रही थी और उनकी आंखे थोड़ा गुलाबी सी होने लगी थी। उनके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान भी थी। मालिश करने के बाद वो चली गयी। उसके बाद मैं सो गया।
शाम के 6 बजे मेरी नींद खुली और मैं उठ गया। भाभी चाय लेकर आयी। मैने चाय पी। उसके बाद मैं बाथरूम चला गया। बाथरूम से जब मैं वापस आया तो भाभी ने कहा, अब लेट जाओ, मैं तुम्हारे बदन की फिर से मालिश कर देती हूं।
मैने कहा, अब रहने दो ना, भाभी।
वो बोली, क्या मालिश करने से कुछ आराम नहीं मिला।
मैने कहा, बहुत आराम मिला है। वो बोली, फिर क्यों मना कर रहे हो।
मैने कहा, ठीक है, तुम केवल मेरे पैर की ही मालिश कर दो।
वो खुश हो गयी। उन्होने मेरे पैर की मालिश शुरु कर दी। मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। इस बार मेरा नेकर थोड़ा पीछे की तरफ़ खिसक गया था जिस से भाभी को मेरा लण्ड इस बार कुछ ज्यादा ही दिखायी दे रहा था। भाभी मेरे लण्ड को देखते हुये मेरे पैरों की मालिश करती रही। मुझे साफ़ पता चल रहा था कि मेरे लण्ड को देख कर वो भी जोश मे अने लगी थी।
थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं जब तेरे पैर की मालिश करती हूं तो तुझे क्या हो जाता है। मैं कहा, कुछ भी तो नहीं हुआ है मुझे। उन्होने मेरे लण्ड पर हलकी सी चपत लगते हुये कहा, फिर ये क्या है।
मैने कहा, जब तुम मालिश करती हो तो मुझे गुदगुदी सी होने लगती है, इसी लिये तो मैं मना कर रहा था।
उन्होने जोश मे भर कर मेरे लण्ड पर फिर से चपत लगते हुये कहा, इसे काबू में रखा कर।
मैने कहा, जब तुम मालिश करती हो तो ये मेरे काबू में नहीं रहता।
वो बोली, तुम भी अपने भैया की तरह ही हो। मैं जब उनके पैर की मालिश करती थी तो वो भी इसे काबू में नहीं रख पाते थे।
मैने मजाक करते हुये कहा, फिर वो क्या करते थे।
वो बोली, बदमाश कहीं का।
मैने कहा, बताओ ना भाभी, फिर वो क्या करते थे। भाभी शरमाते हुये बोली, वही जो सभी मर्द अपनी बीवी के साथ करते हैं।
मैने कहा, तब तो तुम्हें भैया के पैरों की मालिश नहीं करनी चाहिये थी। उन्होने पूछा, क्यों। मैने कहा, आखिर बाद में परेशानी भी तुम्हें ही उठानी पड़ती थी। वो बोली, परेशानी किस बात की, आखिर मेरा मन भी तो करता था।
मैने कहा, मेरा भी मन भी काबू में नहीं है, अब तुम ही बताओ कि मैं क्या करूं।
वो बोली, शादी कर लो।
मैने कहा, मैं अभी शादी नहीं करना चाहता।
उन्होने मुस्कराते हुये कहा, फिर बाथरूम में जा कर मुठ मार लो।
मैने अनजान बनते हुये पूछा, वो क्या होता है।
वो बोली, क्या सच में तुझे नहीं मालूम है कि मुठ मारना किसे कहते हैं।
मैने कहा, नहीं।
उन्होने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा करते हुये कहा, इसे अपने हाथ में पकड़ कर अपना हाथ तेजी से आगे पीछे करना। थोड़ी ही देर में इस में से ज्यूस निकल जायेगा और ये शान्त हो जायेगा।
मैने कहा, तुम मुझे थोड़ा सा कर के बता दो।
भाभी जोश में तो आ ही चुकी थी। वो बोली, तू बहुत ही बदमाश है। अपने लण्ड को बाहर निकाल, मैं बता देती हूं की कैसे करना है। मैने कहा, तुम खुद ही लण्ड को बाहर निकाल कर बताओ की कैसे करना है। उन्होने शरमाते हुये मेरे लण्ड को पकड़ कर नेकर से बाहर निकाल लिया। जैसे ही मेरा 9″ लम्बा लण्ड बाहर आया तो वो बोली, बाप रे, तेरा तो बहुत ही लम्बा है और मोटा भी।
मैने पूछा, अच्छा नहीं है क्या।
वो शरमाते हुये बोली, बहुत ही अच्छा है। मैने पूछा, भैया का कैसा था। वो बोली, उनका भी अच्छा था लेकिन तेरे जैसा लम्बा और मोटा नहीं था। मैने कहा, अब बताओ की कैसे करना है। उन्होने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपना हाथ आगे पीछे करना शुरु कर दिया। मुझे बहुत मज़ा आने लगा। वो भी जोश में आने लगी।
2 मिनट मुठ मारने के बाद वो बोली, ऐसे ही कर लेना। अब जा बाथरूम में।
मैने कहा, बाथरूम में क्यों, अगर मैं यहीं कर लेता हूं तो इसमें क्या बुरायी है।
वो बोली, तेरा ज्यूस यहां गिरेगा और मुझे ही साफ़ करना पड़ेगा।
मैने कहा, मैं ही साफ़ कर दूंगा। वो बोली, ठीक है, यहीं कर ले। मैं जाती हूं। मैने उनका हाथ पकड़ कर कहा, तुम यहीं बैठो ना। वो बोली, तेरे लण्ड पर हाथ लगने से मुझे पहले ही थोड़ा सा जोश आ चुका है। अगर मैं तुझे मुठ मारते हुये देखूंगी तो मुझे और ज्यादा जोश आ जायेगा। फिर मेरे लिये बरदाश्त करना मुश्किल हो जायेगा। आखिर मैं भी तो औरत हूं और अभी जवान भी हूं। मैने कहा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करुंगा। वो बोली, मुझे पूरा भरोसा है तभी तो मैने तेरे लण्ड को पकड़ कर तुझे मुठ मारना बताया है। मैने पूछा, नेकर उतार दू या ऐसे ही मुठ मार लू। वो बोली, क्या नेकर भी खराब करेगा। उतार दे इसे।
मैने अपना नेकर उतार दिया और मुठ मारने लगा। भाभी मुझे मुठ मारते हुये देखती रही। मैं भाभी को देखता हुआ मुठ मार रहा था। धीरे धीरे वो और ज्यादा जोश में आ गयी। जोश के मारे मेरे मुह से आह… ऊह… की आवाज़ निकाल रही थी। वो मुझे और कभी मेरे लण्ड को देख रही थी। उन्होने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख लिया और सहलाने लगी। मैने पूछा, क्या हुआ। वो बोली, तू मुझे एक दम पागल कर देगा। मैं जा रही हूं।
मैने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा, बैठो ना मेरे पास। वो चुप चाप बैठ गयी। मैं मुठ मारता रहा। भाभी जोश के मारे पागल सी हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में उन्होने मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली, अब रहने दे, अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा है।
मैने पूछा, क्या हुआ। उन्होने अपना पेटीकोट उपर कर दिया और बोली, देख मेरी चूत भी एक दम गीली हो गयी। तूने तो मुझे पागल सा कर दिया है। अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तू मेरी चूत को सहला दे, मैं तेरा लण्ड सहला देती हूं। मैने कहा, केवल सहलना ही है या कुछ और करना है। वो बोली, अगर तेरा मन करे तो मेरी चूत को थोड़ा सा चाट ले जिस से मुझे भी थोड़ा आराम मिल जायेगा। मैने कहा, कपड़े तो उतार दो। वो बोली, तू खुद ही उतार दे।
मैने भाभी के कपड़े उतार दीये। अब वो एक दम नंगी हो गयी। उनकी चूत एक दम साफ़ थी।
मैने कहा, तुम्हारी चूत तो एक दम साफ़ है।
वो बोली, मुझे चूत पर बाल बिलकुल भी पसन्द नहीं हैं इसी लिये मैं इसे हमेशा ही साफ़ रखती हूं। तेरा भी तो एक दम साफ़ है।
मैने कहा, मुझे भी बाल पसन्द नहीं हैं।
वो लेट गयी तो मैने उनकी चूत पर अपनी जीभ फिरानी शुरु कर दी।
वो बोली, ऐसे नहीं।
मैने कहा, फिर कैसे?
वो बोली, मुझे भी तो तेरा चूसना है। तू मेरे उपर उल्टा लेट जा और अपना लण्ड मेरे मुह के पास कर दे फिर चाट मेरी चूत को।
मैं भाभी के उपर 69 की पोजीशन में लेट गया। मैने उनकी चूत पर जीभ फिरना शुरु किया तो उन्होने मेरे लण्ड का सुपाड़ा अपने मुह में ले लिया और चूसने लगी। मुझे खूब मज़ा आने लगा। भाभी भी जोश के मारे सिसकारियां भरने लगी।
मैने उनकी चूत की दरार को अपने होंठो से दबाना शुरु कर दिया तो उन्होने जोर की सिसकारी ली।
मैने पूछा, क्या हुआ।
वो बोली- बहुत मज़ा आ रहा है, और जोर जोर से दबा।
मैने उनकी चूत की दरार को और ज्यादा जोर से दबाना शुरु कर दिया तो उन्होने मेरा लण्ड अपने मुह में और ज्यादा अन्दर ले लिया और तेजी के साथ चूसने लगी। मैने एक अंगुली उनकी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में भाभी की चूत से ज्यूस निकाल आया।
वो बोली, चाट ले इसे। मैने उनकी चूत का सारा ज्यूस चाट लिया। थोड़ी ही देर में मेरे लण्ड का ज्यूस भी निकालने लगा तो भाभी सारा का सारा ज्यूस निगल गयी। उसके बाद मैं हट गया और उनके बगल में लेट गया।
भाभी मेरा लण्ड सहलने लगी। थोड़ी देर बाद वो बोली, आज तो वो हो गया जो कि नहीं होना चाहिये था।
मैने कहा, मैने ऐसा क्या कर दिया।
वो बोली, तूने मुझे अपना लण्ड दिखा कर आज मुझे पागल सा कर दिया।
मैने कहा, मैने तो नहीं दिखाया था।
वो बोली, तेरा नेकर ही इतना छोटा और ढीला था की मुझे तेरा लण्ड दिखायी दे गया। मैं अपने आप को काबू में नहीं रख पायी इसी लिये मैने तुझसे पैर की दोबारा मालिश करने के लिया कहा था। मैं तेरा लण्ड देखना चाह्ती थी क्यों की मुझे तेरा लण्ड बहुत ही लम्बा और मोटा दिख रहा था।
मैने कहा, अब तो देख लिया ना।
वो बोली, हा, देख भी लिया और पसन्द भी कर लिया।
मैने कहा, अब क्या इरादा है।
वो बोली, तू भी वही कर जो तेरे भैया मेरे साथ करते थे।
मैने कहा, ये ठीक नहीं है।
वो बोली, क्या ठीक है क्या नहीं, मैं कुछ नहीं जानती। अगर तू मेरे साथ नहीं करेगा तो मैं मर जाऊगी।
मैने पूछा, मैं तुम्हारे साथ क्या करूं। वो बोली, जो तेरे भैया मेरे साथ करते थे।
मैने कहा, मैने तो कभी देखा ही नहीं की भैया तुम्हारे साथ क्या करते थे। भाभी ने मेरे गालो को जोर से काट लिया और बोली, अब चोद दे मुझे।
मैने कहा, दर्द होगा।
वो बोली, तो मैं क्या करूं, होने दे। जो होगा देखा जायेगा।
मैने कहा, तुम मेरी भाभी हो, मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं?
भाभी का तो जोश के मारे बुरा हाल था। वो बोली, तू मुझे नहीं चोदेगा लेकीन मैं तो तुझे चोद सकती हूं।
मैने कहा, फिर तुम ही चोदो।
मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो चुका था। भाभी मेरे उपर आ गयी। उन्होने मेरे लण्ड के सुपाड़े को अपनी चूत के बीच रखा और दबाने लगी। उनके चेहरे पर दर्द की झलक साफ़ दीख रही थी फिर भी वो रुकी नहीं। मेरा लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत में घुसता ही जा रहा था। उनकी चूत बहुत ही टाईट थी। उन्होने दबाना जारी रखा तो थोड़ी ही देर में उनकी आंखो में आंसू भी आ गये।
मैने पूछा, क्या हुआ।
वो बोली, दर्द बहुत हो रहा है।
मैने कहा, फिर रुक जाओ ना, क्यों इतना दर्द बर्दाश्त कर रही हो।
वो बोली, मैं पागल हो गयी हूं।
अब तक मेरा लण्ड भाभी की चूत में 7″ तक घुस चुका था। दर्द के मारे भाभी का बुरा हाल हो रहा था। तभी वो अपने बदन का सारा जोर देते हुये अचनक मेरे लण्ड पर बैठ गयी। मेरा पूरा का पूरा लण्ड उनकी चूत में समा गया। उनके मुह से जोर की चीख निकाली। उनका सारा बदन थर थर कांपने लगा। उनके चेहरे पर पसीना आ गया। उनकी सांसे बहुत तेज चल रही थी।
वो मेरे उपर लेट गयी और मेरे होंठो को चूमने लगी। मैं उनकी कमर और चूतड़ को सहलने लगा।
तभी मुझे बदमाशी सूझी। मैने उनकी गाण्ड के छेद पर अपनी अंगुली फिरानी शुरु कर दी तो उन्हें मज़ा आने लगा।
अचनक मैने अपनी अंगुली उनकी गाण्ड में डाल दी तो उन्होने जोर की सिसकारी ली और बोली, बदमाश कहीं का। पहले तो कह रहा था की तुम मेरी भाभी हो, मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं। अब मेरी गाण्ड में अंगुली डाल रहा है। क्या मैं अब तेरी भाभी नहीं रह गयी।
मैने कहा, बिलकुल नहीं, अब तो तुमने मेरा लण्ड तुमने अपनी चूत में डाल लिया है। अब तुम मेरी भाभी नहीं रह गयी हो।
वो बोली, फिर मैं अब तेरी क्या लगती हूं।
मैने कहा, बीवी।
वो बोली, फिर चोद दे ना अपनी बीवी को। क्यों तरसा रहा है मुझे।
अब तो मैने तेरा पूरा का पूरा लण्ड अपनी चूत के अन्दर ले लिया है। मेरी अंगुली अभी भी भाभी की गाण्ड में थी। मैने फिर शरारत की और कहा, मैं तुम्हें एक ही शर्त पर चोद सकाटा हूं।
वो बोली, कैसी शर्त।
मैने कहा, मैं तुम्हारी गाण्ड भी मारुंगा। वो बोली, अपनी बीवी से भी पूछना पड़ता है क्या। मैने कहा, मुझे नहीं मालूम।
वो बोली, तेरे भैया ने तो मुझसे कभी नहीं पूछा, जब भी उनका मन किया उन्होने मेरी चुदायी की और जब उनका मन हुआ तो उन्होने मेरी गाण्ड भी मारी। मैने कहा, इसका मतलब तुम भैया से गाण्ड भी मरवा चुकी हो।
वो बोली, तो क्या हुआ, मज़ा तो दोनो में ही आता है। अब मुझे ज्यादा मत परेशान कर, चोद दे ना।
मैने कहा, थोड़ा सा तुम चोदो फिर थोड़ा सा मैं चोदुंगा। वो बोली, ठीक है, बाबा।
भाभी ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये तो उनके मुह से चीख निकालने लगी।
मैने पूछा, अब क्या हुआ। वो बोली, दर्द हो रहा है। मैने पूछा, क्यों, अब तो पूरा अन्दर ले चुकी हो।
वो बोली, अन्दर लेने से क्या होता है। मेरी चूत अभी तेरे लण्ड के साईज की थोड़े ही हुयी है।
मैने पूछा, मेरे लण्ड की साईज की कैसे होगी।
वो बोली, जब तू मुझे कई बार चोद देगा तब। वो धीरे धीरे धक्के लगाती रही।
मैने पूछा, तुम्हारी चूत को चौड़ा करने के लिये मुझे कितनी बार चोदना पड़ेगा।
वो बोली, ये तो तेरे उपर है की तू किस तरह से मेरी चुदायी करता है। मैने पूछा, क्या एक बार में भी हो सकता है।
वो बोली, बिलकुल हो सकता है, अगर तू मुझे पहली बार में ही कम से कम 1 घन्टे चोद सके तो। लेकीन मैं जनति हूं की तू ऐसा नहीं कर पयेगा।
मैने पूछा, क्यों।
वो बोली, तूने कभी किसी को पहले चोदा है।
मैने कहा, नहीं। वो बोली, तो फिर तू 10 मिनट से ज्यादा रुकेगा ही नहीं।
मैने कहा, रुकुनगा क्यों नहीं। वो बोली, तुझे मेरी चुदायी केरने में जोश ज्यादा आ जायेगा इस लिये।
भाभी को धक्के लगते हुये लगभग 10 मिनट हो चुके थे और वो इस दौरन 1 बार झड़ भी चुकी थी। तभी मेरे लण्ड का ज्यूस निकाल पदा और साथ ही साथ वो भी फिर से झड़ गयी।
वो मुस्कराते हुये बोली, क्या हुआ पहलवान। मैने कहा, वही हुआ जो तुम कह रही थी। वो बोली, मेरी चूत धीली करने के लिये तुझे कम से कम 1 घन्टे तक मेरी चुदायी करनी पदेगि। मैं ये भी जानती हूं की अगली बार तू ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट ही मुझे चोद पयेगा। इस तरह जब तू 3-4 बार मेरी चुदायी कर देगा तब कुल मिलकर 1 घन्टे हो जयेनगे और मेरी चूत ढीली हो जायेगी और तेरे लण्ड के साईज की हो जायेगी, समझ गये बच्चु। मैने कहा, बिलकुल समझ गया, मेडम।
भाभी ने मेरे लण्ड को अपनी चूत के अन्दर ही रखा और मेरे उपर लेट गयी। वो मेरे होंठो को चूमती रही और मैं उनकी चूंचियो को मसलता रहा। 10 मिनट के बाद मेरा लण्ड उनकी चूत में ही फिर से खड़ा होने लगा तो वो बोली, अब तुम मुझे चोदो। मैने कहा, जैसी आप की मरजी। वो मुस्कराते हुये मेरे उपर से हट गयी और लेट गयी। मैं उनके उपर आ गया। मैने उनकी चुदायी शुरु कर दी। मैं पूरे जोश में था और जोर जोर के धक्के लगाते हुये उनको चोद रहा था।
वो बोली, शाबाश बहादुर, बहुत ही अच्छी तरह से चोद रहे हो, चोदते रहो, रुकना मत, थोड़ा और जोर के धक्के लगाओ। मैने और ज्यादा तेजी के साथ धक्के लगने शुरु कर दिये। लगभग 15 मिनट की चुदायी के बाद मैं झड़ गया। भाभी भी इस चुदायी के दौरान 2 बार झड़ चुकी थी।
मैने उन्हें सारी रात खूब जम कर चोदा। वो भी पूरी तरह से मस्त हो गयी थी और मैं भी। सुबह तक मैं उ्न्हे 6 बार चोद चुका था। सुबह को मैने पूछा, तुम्हारी चूत मेरे लण्ड की साईज की हो गयी या नहीं।
वो बोली, जब तुमने मेरी 4 बार चुदायी कर दी फिर उसके बाद मैं चिल्लायी क्या। मैने कहा, बिलकुल नहीं। वो बोली, फिर समझ लो की मेरी चूत तुम्हारे लण्ड की साईज की हो गयी।
थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं एक बात तुमसे कहना चाहती हूं।
मैने पूछा, अब क्या है। वो बोली, मुझे तो तुम्हारा लण्ड बहुत पसन्द आ गया है। अगर तुम्हें मेरी चूत भी पसन्द आ गयी हो तो तुम मुझसे शादी कर लो। मैं तुमसे 1 साल छोटी भी हूं और जवन भी। मैं तुम्हें पूरा मज़ा दूंगी और एक दम खुश रखूगी। अगर तुम मुझसे शादी नहीं करोगे तो मैं तो तुम्हारी रखैल बन कर रह जाऊगी। जब तुम्हारी शादी हो जायेगी तो मुझे कौन चोदेगा। भाभी खूबसुरत थी ही। मैं उन्हें बहुत प्यार भी करता था और वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थी। उनकी बात सही भी थी क्यों की मुहल्ले के लोग बाद में उन्हें मेरी रखैल ही कहते।
मैने मजाक किया, अगर तुम मुझसे शादी करना चाहती हो तुम्हें एक काम करना पड़ेगा। वो बोली, मैं सब कुछ करने के लिये तैयार हूं। मैने कहा, तुमने उस पागल को देखा है ना जो हमारे मुहल्ले में घूमता रहता है। वो बोली, हां देखा है। मैने कहा, तुमने उसका लण्ड भी देखा होगा। वो बोली, देखा है। मैने पूछा, उसका लण्ड कैसा है। वो बोली, उसका तो तुमसे भी ज्यादा लम्बा और मोटा लगता है।
मैने कहा, मैं उसे एक दिन घर ले आता हूं, तुम उस से चुदवा लो।
वो बोली, ठीक है, ले आना। मैं तुमसे शादी करने के लिये कुछ भी कर सकती हूं। मैं उस पागल से भी चुदवा लूंगी।
मैने कहा, मैं तो मजाक कर रहा था।
वो बोली, तो क्या तुम समझी की मैं सच में ही उस पागल से चुदवा लूंगी।
मैने कहा, मैं तुमसे एक ही शर्त पर शादी करुंगा।
वो बोली, मैने कहा ना की मुझे तुम्हारी हर शर्त मनज़ूर है।
मैने कहा, सुन तो लो। वो बोली, फिर सुना ही दो। मैने कहा, मैं तुम्हारी गाण्ड मारुंगा तब ही तुमसे शादी करुंगा।
वो बोली, जब मैने तुम्हारा लण्ड अपनी चूत के अन्दर लिया तब ही मैं तुम्हारी बीवी बन गयी थी, भले ही हमारी शादी नहीं हुयी थी। अपनी बीवी से ये बात पूछी नहीं जाती। अभी मार लो मेरी गाण्ड।
मैने कहा, फिर सुहागरात के दिन मैं क्या करुंगा।
वो बोली, फिर रहने दो, सुहागरात के दिन तुम मेरी गाण्ड चोद लेना।
मैने कहा, एक दिक्कत और है।
वो बोली- अब क्या है।
मैने कहा, तुमसे शादी करने के बाद मैं सारी जिन्दगी किसी कुवांरी चूत को नहीं चोद पाऊगा।
वो बोली, मैं तुम्हारे लिये कुंवारी चूत का इनतजाम भी कर दूंगी। मैने पूछा, वो कैसे। वो बोली, ये मुझ पर छोड़ दो। मैने कहा, फिर मैं पण्डित से पूछ लेता हूं की हमें शादी कब करनी चाहिये। वो बोली, पूछ लेना। मैने पण्डित से बात की तो उसने 3 दिन बाद का मुहुरत बताया। 3 दिनो तक मैने संध्या की खूब जम कर चुदायी की। अब उसे और ज्यादा मज़ा आने लगा था।
संध्या चुदवाते समय मेरा पूरा साथ देती थी इस लिये मुझे भी खूब मज़ा आता था।
तीसरे दिन हम दोनो ने मन्दिर में शादी कर ली। रात में मैने संध्या की गाण्ड मारी। वो बहुत चीखी और चिल्लायी लेकिन उसने एक बार भी मुझे रोका नहीं। उसकी गाण्ड कई जगह से कट फ़ट गयी थी और उसकी गाण्ड की हालत एक दम खराब हो गयी थी। वो 2 दिनो तक ठीक से चल भी नहीं पा रही थी।
मैने पूछा, मैं जब तुम्हारी गाण्ड मार रहा था और तुम्हें इतनी ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी तो तुमने मुझे रोका क्यों नहीं। वो बोली, मैं अपने पति को कैसे मना करती। आखिर बाद में मुझे भी तो गाण्ड मारवने में मज़ा आया। मैने कहा, वो तो आना ही था। अब मेरे लिये कुंवारी चूत का इनतेजाम कब करोगी। वो बोली, बस जल्दी ही हो जायेगा।
शादी के 4 दिन के बाद जब मैं दुकान से घर आया तो घर पर एक लडकी बरतन साफ़ कर रही थी। उसके कपड़े थोड़ा गन्दे थे लेकीन वो थी बहुत ही खूबसुरत। उसकी उमर लगभग 18 साल की रही होगी। मैं सीधा अपने कमारे में चला गया। संध्या भी मेरे पीछे पीछे आ गयी।
मैने संध्या से पूछा, ये कौन है। वो मुस्कराते हुये बोली, मैने इसे घर का काम करने के लिये रखा है। इसका नाम रीना है। पसन्द है ना तुम्हें। मैं इसे तुम्हारे काम के लिये भी जल्दी ही तैयार कर लू्ंगी। मैने कहा, तुम्हारी पसन्द का तो जवाब नहीं है। कहां रहती है ये।
संध्या ने कहा, ये गावँ में रहती थी लेकिन अब यहीं रहेगी। मेरे भैया जब शादी में आये थे तो मैने उन से कहा था की मुझे घर का काम करने के लिये एक लड़की चाहिये। उन्होने ने ही इसे यहां पर भेजा है। ये हमारे साथ ही रहेगी। मैने कहा, जल्दी तैयार करो इसे। मैं इसे जल्दी से जल्दी चोदना चाहता हूं। वो बोली, थोड़ा सबर करो।
रीना बरतन साफ़ कर के कमारे में आ गयी। उसने संध्या से पूछा, मालकिन, मैने घर का सारा काम कर दिया है, और कुछ करना हो तो बता दो। संध्या ने कहा, तू तो मेरे गावँ की है, मुझे मालकिन मत कहा कर।
वो बोली, फिर मैं आप को क्या कह कर बुलाऊ। संध्या ने कहा, तू मुझे दीदी कहा कर और इन्हें जीजू। वो खुश हो गयी और बोली, ठीक है, दीदी। संध्या ने कहा, मेरी तबियत कुछ खराब रहती है इस लिये तू मेरे साथ ही सो जना। वो बोली, फिर जीजू कहन सोयेनगे। संध्या ने कहा, वो भी मेरे पास ही सोयेनगे। वो बोली, फिर मैं आप के पास कैसे सो पौनगि। संध्या ने कहा, मेरे एक तरफ़ तुम सो जाना दूसरी तरफ़ ये सो जायेगे। वो बोली, ये तो ठीक नहीं होगा।
संध्या ने कहा, शहर में सब चलता है। यहां ज्यादा शरम नहीं की जाती।
वो बोली, ठीक है, मैं आप के पास ही सो जाऊगी।
हम सब ने खाना खाया उसके बाद मैं अपने कमरे में सोने के लिये आ गया। मैने केवल लुंगी ही पहन रखी थी। थोड़ी देर बाद संध्या और रीना भी आ गये। संध्या ने बरा और पेन्टी को छोड़ कर अपने बाकी के कपड़े उतार दिये। उसके बाद उसने मैक्सी पहन ली। संध्या ने रीना से कहा, अब तू भी अपने कपड़े उतार दे। मैं तुझे भी एक मैक्सी देती हूं, उसे पहन लेना।
वो बोली, नहीं, मैं ऐसे ही ठीक हूं। संध्या ने कहा, मैं जो कहती हूं, उसे मान लिया कर। सोते समय सारा बदन खुला छोड़ देना चाहिये। वो बोली, जीजू यहां हैं।
संध्या ने कहा, जीजू से कैसी शरम, ये तुझे पकड़ थोड़े ही लेंगे। उतार दे अपने कपड़े। रीना ने शरमाते हुये अपनी शलवर और कमीज़ उतार दी। उसका बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूंचिया अभी बहुत ही छोटी छोटी थी। संध्या ने उसे भी एक मैक्सी दे दी तो उसने वो मैक्सी पहन ली।
संध्या मेरे बगल में लेट गयी। रीना संध्या के बगल में लेट गयी। हम सब कुछ देर तक बातें करते रहे। उसके बाद सोने लगे। थोड़ी ही देर में रीना सो गयी तो संध्या ने मुझसे कहा, अब तुम मेरी चुदायी करो।
मैने कहा, इसके सामने। वो बोली, मैं चाह्ती हूं की ये हम दोनो को देख ले, तभी तो मैं इसे तैयार करुंगी। तुम मुझे खूब जोर जोर से चोदना जिस से ये जाग जाये। मैने कहा, ठीक है।
मैने संध्या को जोर जोर से चोदना शुरु कर दिया। सारा बेड जोर जोर से हिलने लगा। थोड़ी ही देर में रीना की नींद खुल गयी और वो उठ कर बैठ गयी। जैसे ही वो उठी तो मैने अपना लण्ड संध्या की चूत से बाहर निकाल लिया।
रीना ने जब हुम दोनो को देखा तो शरमा गयी। वो बोली, दीदी, मैं बाहर जा रही हूं।
संध्या ने कहा, क्यों, क्या हुआ।
वो बोली, मुझे शरम आती है।
संध्या ने कहा, पागली, इसमें शरमाने की कौन सी बात है। तू अपना मुह दूसरी तरफ़ कर ले और सो जा। रीना उठ कर जाना चाहती थी लेकीन संध्या ने उसका हाथ पकड़ लिया। रीना कुछ नहीं बोली।
वो संध्या के बगल में ही लेट गयी लेकिन उसने अपना मुह दूसरी तरफ़ नहीं किया। संध्या ने मुझसे कहा, अब तुम अपना काम जल्दी से पूरा करो, मुझे नींद आ रही है।
मैने संध्या को चोदना शुरु कर दिया। रीना तिरछी निगाहों से हम दोनो के देख रही थी।
15 मिनट की चुदायी के बाद जब मैं झड़ गया तो मैने अपना लण्ड संध्या की चूत से बाहर निकाला। संध्या उठ कर बैठ गयी और उसने मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया। रीना ने शरम के मारे अपनी आखे बन्द कर ली।
संध्या ने अपना मुह रीना की तरफ़ कर लिया और अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया। उसने कहा, दीदी, अपना हाथ हटा लो।
संध्या ने कहा, मुझे तो ऐसे ही सोने की आदत है। अब सो जा।
रीना कुछ नहीं बोली। उसके बाद हम सब सो गये।
सुबह हम सब उठ गये। रीना फ़्रेश होने चली गयी। संध्या ने मुझसे कहा, अब तुम इसे बार बार अपना लण्ड दिखने की कोशिश करना लेकीन इसे हाथ मत लगाने देना। इसे ऐसा लगना चाहिये की जैसे तुम अपना लण्ड इसे दिखाने की कोशिश नहीं कर रहे थे। मैने कहा, ठीक है। रीना फ़्रेश हो कर आ गयी।
संध्या ने कहा- अब तू घर में झाड़ु लगा ले।
वो झाड़ु लगाने चली गयी।
संध्या ने मुझसे कहा- अब तुम जा कर फ़्रेश हो जाओ। आज से अपना टावेल साथ मत ले जना और एकदम नंगे ही नहाना, मैं रीना से तुम्हारा टावेल भेज दूंगी।
मैने कहा, ठीक है।
Antarvasna कहानी जारी रहेगी।
विधवा भाभी की चुदाई-2
मैं मेरे नये दोस्तों को मेरा अपना परिचय करा Sex stories दूं। मेरा नाम सीता है, मेरी उमर 28 साल है, मेरी शादी हो चुकी है। मैं सेक्स की बहुत भूखी हूं। मेरे हबी संजू बड़े स्मार्ट और सेक्स में पावरफ़ुल हैं पर वो ज्यादातर समय बाहर ही गुजारते हैं और मुझमें सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है इसलिये मैं हर वक्त नये लंड की तलाश में रहती हूं। अपनी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि किस तरह मेरे ड्राइवर अमित ने मुझसे जबरदस्ती की थी।
आज मैं आपको अपनी एक नयी कहानी सुना रही हूं जिसमे मैंने और मेरी दोस्त (अब वो मेरी ननद है) सुमन ने किस तरह मनाली में चुदाई के साथ इनकम भी की। ये बात 1998 की है जब मैं और मेरी दोस्त चंडीगढ़ में बी ए के तीसरे साल की पढ़ाई कर रही थी। हम दोनों ही शुरु से चुदक्कड़ थी और अक्सर अपने ब्वायफ़्रेंड के साथ डेट पर जाती और चुदाई का मज़ा लेती।
एक बार मैं अपने दोस्त के साथ शिमला घूमने के लिये गयी हुई थी। वहां पर हमने 3 दिन तक खूब चुदाई का नज़ारा लिया। वहां जिस होटल में हम रुके हुए थे वो होटल पर अक्सर काल गर्ल आती रहती थी और उस होटल में लगभग हर टूरिस्ट इसी लिये आता था।
मैं एक दिन शाम के वक्त बार टेबल पर बैठी थी मेरा दोस्त अभी रूम से नीचे नहीं आया था तभी एक सांवले रंग का मजबूत बदन का मर्द मेरे पास आ कर बैठ गया। उसने मुझे काल गर्ल समझ लिया था। मेरे पास आ कर उसने मुझे ड्रिंक की पेशकश की जिसे मैंने नम्रता से ठुकरा दिया। उसके बाद उसने स्माइल पास करते हुए मुझे से नाम पूछते हुए अपना परिचय देने लेगा। कुछ देर बाद उसने असली बात पर आते हुए मुझे रात की ओफ़र की और इसके लिये उसने बिना मेरी तरफ़ देखे सौ रुपये के काफ़ी सारे नोट मेरी तरफ़ बढ़ा दिये।
एक बार तो मैं उसकी हरकत पर हैरान हो गयी और मुझे गुस्सा भी आया पर दूसरे ही पल मेरे दिमाग में एक नया विचार आया (हालांकि मैं भी बहुत रिच फ़ैमिली से हूं पर जैसा कि सभी पाठक जानते हैं कोलेज लाइफ़ में पोकेट मनी की प्रोब्लम रहती है) कि ये तो पैसे के साथ मजा और नये लंड के साथ बाहर घूमने का बड़ा अच्छा साधन है। पर उस वक्त मैं अपने दोस्त के साथ थी। मैंने उसे अपना पता देते हुए बाद में सम्पर्क करने को कहा।
कई दिन के बाद मुझे उसका सन्देशा मिला कि उसे 2 लड़कियां 5 दिन के लिये चाहिये। वो और उसका दोस्त अपनी आउटिंग को इस बार रंगीन करना चाहते हैं। मेरे पूछने पर बताया की उन लोगों को मनाली के अन्दर अपना होलीडे बिताना है। मैंने उससे उसका कोन्टेक्ट नम्बर ले लिया और बोला कि मैं आपको कल तक बता दूंगी।
मैं तो उसी वक्त तैयार थी पर अब उसे दो लड़कियों की जरूरत थी जबकि मैं अकेली थी। तभी मेरे मन में सुमन का ख्याल आया। वैसे भी हम अकसर इकट्ठी चुदायी पर जाती थी।
पहले तो सुमन ने इन्कार कर दिया पर मेरे समझाने पर वो राजी हो गयी। मैंने उसी शाम उसको फोन करके रुपये और टाइम की सेटिंग कर ली। हम लोगों ने 5 दिन के उनसे 20000 रुपये मांगे। २ दिन के बाद हम मनाली के लिये निकल पड़े। अब हम दोनों बहुत खुश थे। एक तो हमे २-२ नये लंड मिलने वाले थे दूसरा हमें 20000/- रुपये भी मिलने वाले थे मनाली बसस्टेंड पर ही वो दोनों हमें मिल गये। हम दोनों उनके साथ कर पर चल पड़े। उन लोगों ने होटल पिकडेली में रूम ले रखा था। हमने रूम में पहुंचते ही उन्होने हमें नंगा होने को कहा और खुद फोन कर के वेटर को खाने का ओर्डर दे दिया।
हम लोगों ने पहले बाथ लेने की इच्छा जतायी। सन्जू (उनमें एक का नाम) ने कहा ठीक है परन्तु पहले कुछ खा लो। इतने में वेटर कोफ़ी और कुछ स्नैक्स ले आया। कोफ़ी लेने के बाद हम नहाने के लिये बाथरूम में चले गये। जैसे ही सुमन ने बाथरूम का गेट बंद करना चाहा तो उसे श्याम ने रोक दिया और कहने लगा, अब कोई शरम नहीं, दरवाजा खुला रहने दो हम देखना चाहते हैं कि तुम कैसे एक दूसरे को नहलाती हो। क्योंकि इस वक्त हम उनकी पेड सेक्स थी इसलिये चुप-चाप उनकी बात मानते हुए नंगी नहाने लेगी।
कुछ समय के बाद सन्जू और श्याम भी बाथरूम के अंदर आ गये। वो दोनों बिल्कुल नंगे थे। सन्जू बोला- इकट्ठे नहाएँ?
मैंने उन्हें कहा- ओके।
सन्जू ने श्याम से कहा- चलो हम चारों सब साथ साथ ही नहा लेते हैं, फिर चुदाई करेंगे!
और हम सब बाथरूम में इकट्ठे नहाने लगे।
मैं सन्जू की तरफ़ देख कर मुस्कुरा रही थी। उसका खड़ा हुआ लंड देख कर मेरा हाथ अन्जाने में मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत में उसके सामने ही उंगली करने लगी। ये देख कर श्याम बोला- अरे तुम क्यों अपनी चूत में उंगली कर रही हो। तुम तो अपने हाथ से सन्जू के लंड का मजा लो और फिर जम कर चुदवाओ।
सन्जू ने तभी एक हाथ से मेरी चूचियों को मसलना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ की दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी अपने एक हाथ से उसके लम्बे और मोटे लंड को कस के पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। उसके लंड का सुपाड़ा काफ़ी बड़ा था और बिल्कुल काले रंग का था।
उधर सुमन और श्याम शोवर के नीचे एक दूसरे से चिपके हुए खड़े थे और सुमन श्याम के लंड को पकड़ कर खींच खींच कर हिला रही थी। श्याम एक हाथ से सुमन के दोनों नंगे चूतड़ों को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली से चोद रहा था।
मैंने भी सन्जू के तने हुए लंड को इतना चूसा कि उसके सुपाड़े से चिकना चिकना पानी निकलने लगा। हम दोनों वहीं बाथरूम फ़्लोर पर 69 के पोज में लेट गये। सन्जू की जीभ मेरी चूत में आग लगा रही थी। मैं सन्जू के लंड को हाथ से पकड़ कर खींच खींच के चूस रही थी।
तभी सन्जू मेरे मुंह में ही झड़ गया। मैं तो उसके लंड से निकले डिस्चार्ज की मात्रा देख कर ही हैरान रह गई। काफी सारा सफ़ेद सफ़ेद गाढ़ा गाढ़ा माल उसके लंड से निकला जो मेरे मुंह में भर गया। मैं धीरे धीरे उस सारे खट्टे खट्टे माल को अपनी जीभ से चाट चाट कर पी गयी। इससे पहले मैंने जितने भी देखे थे उनके लंड से तो इसका करीब आधा माल ही निकलता है।
मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिये उसके झड़े हुए लम्बे लटकते हुए लंड को मैंने फिर से चूसना शुरु कर दिया। सन्जू अभी भी मेरी चूत चाटने में लगा था। मैं तो ये सोच कर मजे में बिल्कुल पागल सी हो गयी कि ये लंड आगले 5 दिन के लिये मेरे पास रहेगा।
जब सन्जू से नहीं रहा गया उसने मुझे वहीं बाथरूम के फ़्लोर पर कुतिया की तरह पोज बना कर बिठा दिया और मेरी दोनों टांगे फैला कर पीछे से मेरी चूत में अपना ८ इंच लम्बा और ४ इंच मोटा गधे जैसा लंड पेल दिया और एक जोरदार धक्का लगाया। मेरी चूत चुदने के लिये बिल्कुल गीली हो कर इतना खुल गयी थी कि एक ही धक्के में सन्जू का पूरा लंड गपक गयी। उसके धक्कों में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं भी अपने चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत में उसके लंड के धक्कों का मजा लेने लगी। दो तीन धक्कों में ही मेरी चूत फच फच करने लगी।
चार पांच धक्कों में ही मैं झड़ गयी। लेकिन सन्जू के लम्बे लंड के धक्के जारी थे और उसके बाद तो मैंने पहली बार मल्टीपल ओर्गास्म का मतलब जाना क्योंकि हर दूसरे धक्के पर मेरी चूत पानी छोड़ रही थी।
मुझे सन्जू से चुदाने में बहुत मजा आ रहा था कि मैं सिसकारियां भर रही थी, मैं एक्साइटमेंट में कई बार बोल भी पड़ी- मुझे और जोर से चोदो। पूरा लंड पेल दो। हाय, मेरी चूत फाड़ डालो।
करीब मुझे 15 मिनट तक सन्जू ने कई सारे पोज में कभी आगे से, कभी पीछे से, कभी खड़े खड़े और कभी अपने लंड पर बिठा कर वहीं पर श्याम और सुमन के सामने चोदा और मेरी चूत में अपना सारा माल एक बार फिर से निकाल दिया। हम दोनों अब थक कर अलग हो गये। मेरी चूत से सन्जू का सारा माल निकल निकल कर मेरी जांघों पर टपक रहा था।
सन्जू अभी भी मेरी चूचियां मसल रहा था। उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला हो कर चमक रहा था और गधे के लंड की तरह नीचे लटक गया था।
कुछ समय के बाद मैं फिर से गर्म हो गयी। मैंने फिर से सन्जू के लंड को चूसना शुरु कर दिया। सन्जू भी मेरी चूत में उंगली डाल डाल कर और निकाल कर उंगली में लगे मेरे और उसके झड़े हुए माल को चाटने लगा। इतने जोर से झड़ कर भी मेरी चुदास शान्त नहीं हुई थी और मेरा मन कर रहा था कि मैं सारी रात सन्जू के उस मोटे और लम्बे लंड से मजे लेती रहूं।
तभी हम सभी बाथरूम से बाहर आ गये सन्जू का गधे जैसा लम्बा लंड चलते समय उसकी दोनों टांगों के बीच लटका हुआ ऐसे मस्ताना हो कर झूल रहा था कि मैं उसके लंड पर से नजर हटा ही नहीं पा रही थी। मैं अभी भी सन्जू के लटकते हुए लंड को देख रही थी।
उसके बाद तो फिर 5 रातों तक हम चारों एक ही कमरे में सारी बत्तियां जला कर एक ही बिस्तर पर अलग अलग स्ताइल से एक-दूसरे को चोदते। वो 5 रातों में मैंने जी भर कर ऐसी चुदाई करवाई कि मैं जीवन भर कभी भूल नहीं सकती।
आखिरी रात को सन्जू के उस लम्बे लंड से मैं पता नहीं कितनी बार झड़ी। श्याम ने भी मेरी चूत और मुंह में पता नहीं कितनी पिचकारियां मारी होंगी। मेरी चूत को तो 5 दिन के बाद उसके लंड ने खुला भोसड़ा बना दिया था।
आखिरी दिन जब हम जब वो दोनों जाने लगे तब भी मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फिर से एक आखिरी बार सन्जू के लंड को चूस चूस कर इतना गर्म कर दिया कि वो मेरे मुंह में ही झड़ गया। उसका सारा सफ़ेद माल पी कर मैंने उसको बुझते हुए दिल से गुड बाय कहा।
हमें जाते वक्त उन्होंने 20000/- से अलग 2000/- और भी दिये और साथ में ब्रा-पैंटी के इम्पोरटेड सेट भी दिये।
अब चंडीगढ़ वापस आने के बाद हम दोनों उस रात की बात जरूर करते हैं और दोनों ही उत्तेजित हो कर एक दूसरे के साथ लेस्बियन करती। सन्जू का गधे जैसा मोटा और लम्बा लंड अभी भी आंखों के सामने आ जाता है। Sex stories
मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र २२ Hindi Sex Stories साल है ! मेरा शरीर मजबूत है क्यूंकि मैं बॉडी बिल्डिंग भी करता हूँ। मैं अन्तर्वासना की कहानियां हर सुबह पढ़ता हूँ ! मैं अपने जीवन की एक सच्ची कहानी लिख रहा हूँ !
हमारे घर के सामने नई नई एक शादी हुई ! मैं उनकी शादी में तो नहीं गया था ! इसलिए मैं उनके घर नहीं जाया करता था, परन्तु मैं अपनी गली में किसी की बात नहीं मोड़ता था, जिसकी वजह से सब लोग मुझे ही काम के लिए बुलाते थे।
एक दिन उस नई भाभी ने भी मुझे बुलाया और मैंने उनका जो काम था कर दिया। इस तरह मेरी उनसे बातें होने लगी।
धीरे-२ मैंने उनको कहा- मेरी किसी लड़की से बात करवा दो !
तो उन्होंने कहा- किस से?
मैंने कहा- किसी से भी !
उसने कहा- ठीक है, मैं देखती हूँ !
कुछ दिनों तक मैं उनके घर नहीं गया क्यूँकि मेरे दोस्त की उनके रिश्तेदार से लड़ाई हो गई! फिर कुछ साल बीतने के बाद मेरी भाभी से बात हुई पर तब तक तो उनके दो बच्चे हो चुके थे। मैंने भाभी से कहा- मिली कोई लड़की ?
तो उसने कहा- एक थी ! पर उसका रिश्ता हो गया है !
मेरी दिल में एक बात आई और मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई भी लड़की नहीं है, वो सिर्फ आप हो !
तो मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया ! उसने कहा- राहुल तुम्हें यह कैसे पता लगा कि मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ?
कुछ दिन बीत गए ! मैं उनसे नहीं मिला ! एक दिन उनके घर पर कोई नहीं था ! (मैं आपको बताना भूल गया कि उनके परिवार में उनका पति, देवर, सास, देवरानी और दो बच्चे हैं !) मैंने अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया ! भाभी ने कहा- यह क्या कर रहे हो !
मैंने कहा- कोई हमारी बातें न सुन ले !
तो उसने कहा- ठीक है, बोलो !
मैंने कहा- बोलना क्या है, एक पप्पी तो दे दो !
उसने थोड़ा दूर होते हुए मना कर दिया। मैं उठ कर गया और ज़बरदस्ती उसे चूमने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी !
मैंने उससे कहा- नीचे की चीज़ कब दे रही हो?
उसने कहा- मम्मी आ रही होंगी, हम यह सब किसी और दिन करेंगे।
मैं वहाँ से चला आया ! वो रोज किसी काम से मुझे अपने घर अपनी सास के सामने बुलाती और पीछे के कमरे में मेरा साथ चूमा-चाटी करती।
फिर एक दिन मैंने उससे कह दिया- जब मुझे चूत दोगी तभी मुझे बुलाना !
एक दिन उसका फ़ोन आया, उसने कहा- कोई काम है तुम आ जाओ !
मैं उसके घर गया तो उसने बोला- कापियाँ ला दे !
मैंने कहा- पहले मुझे वो दो !
उसने कहा- आकर कर लेना !
मैंने कहा- कर के ही जाउंगा !
वो लेट गई, मैंने उसकी सलवार उतारी और उसे हाथों से चोदना शुरू कर दिया ! वो सिसकियाँ लेने लगी ! मैंने उसका कमीज उतारा और उसकी चूचियाँ दबाने और चूसने लगा।
वो कहने लगी- अब जाओ !
मैंने कहा- अभी तो इसे चूसो !
उसने मना कर दिया, कहने लगी- मुझे उलटी आती है।
फिर मैंने उसे ज्यादा मजबूर नहीं किया, अपना लंड उसकी गीली चूत पर रखा, वो एक दम से अन्दर चला गया, मुझे मज़ा नहीं आया तो मैंने उसकी टांगों को एक दूसरे पर तिरछा कर दिया। अब मुझे मज़ा आने लगा और वो चिल्लाने लगी- बस अब और नहीं मारो !
मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसको उल्टा किया और उसके ऊपर लेट गया।
उसने कहा कि वो गांड नहीं देगी।
मैंने कहा- मैं चूत ही मारूंगा !
उसने कहा- देखो, गांड मत मारना !
मैं उसकी गर्दन आगे करके बीच में बैठ गया और एक झटके से उसकी गांड में लंड पेल दिया, वो तड़पने लगी क्यूंकि मैंने उसकी लातों को बांध दिया था जिसका उसे पता नहीं लगा। वो रोने लगी और मुझे हंसी आ रही थी, मैंने कहा- क्यूँ साली, बहुत तड़पाया है तूने !
जब मेरा छुटने को आ रहा था तो मैंने लंड बाहर निकाला और उसकी चुचियां गीली कर दी।
उसने कहा- यह तुमने ठीक नहीं किया राहुल !
मैंने कहा- कॉपी लेनी है या नहीं !
वोह कहती- यह सब करने में १ घंटा लग गया और तुमने कहा था सिर्फ पांच मिनट !
मैंने सॉरी कहा और अपने दोस्त की दुकान से कॉपियाँ लाकर दे दी।
वो मुझ से नाराज़ होने का नाटक करने कगी तो मैंने उसे मनाने के लिए ५ रुपये की चोकलेट लाकर दे दी। उसने कहा कि वो नहीं खायेगी!
मैंने कहा- तुम मुझे प्यार नहीं करती तो मैं जा रहा हूँ !
उसने मेरा हाथ पकड़ा और चोकलेट अपने मुंह में डाल कर मेरे आगे कर दी। मैंने चोकलेट खाते हुए उसे बहुत चूमा और अगली बार का कह कर घर चले आया।
अब मैं उसकी देवरानी को अपने चक्कर मैं ले रहा हूँ। Hindi Sex Stories
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