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मेरा नाम अमित है। काफी दिनों Antarvasna से सोच रहा था कि मैं भी अपनी कहानी सबको बताऊँ। आखिर यहीं से कहानियाँ पढ़ के मैं भी बड़ा हुआ हूँ। यहीं मैंने मुठ मारना सीखा, यहीं से मेरी सोच में सारी औरतें और लड़कियाँ एक सी लगने लगीं, इसलिये आज मैं आप सबको अपनी कहानी सुना रहा हूँ।
मेरा नाम तो आप जान ही गए हैं। मेरी माँ का नाम अनिता है। मैं एक संयुक्त परिवार में रहता हूँ। मेरे परिवार में मेरी दो चाचियाँ हैं, बड़ी चाची का नाम अनीता और छोटी चाची का नाम हेमा है। मेरी माँ की उमर 42 होगी, अनीता चाची 36 की हैं और हेमा चाची 32 की। मेरी एक दीदी का नाम सीता है जो 21 साल की है।
बात उस समय की है जब मैं 12वीं की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चला गया था, वहीं पे मुझे इन कामुक कहानियों की आदत पड़ी। इन कहानियों में तो माँ बहन का कोई लिहाज होता नहीं है और कहानियाँ पढ़ने में काफी रोचक होती हैं तो मैं सारी कहानियाँ पढ़ जाता हूँ। उसके बाद से जब कभी भी मैं घर वापस जाता तो मेरे दिमाग में यही कहानियाँ चलती रहती थी। इन कहानियों ने मेरी जिंदगी ही बदल दी या फिर यह भी कह सकते हैं कि मेरी लाइफ बना दी।
मैं घर पे काफी अकेला-अकेला सा रहने लगा। अकेले में अन्तर्वासना कहानियों को याद करके मैं दिन में कई बार मुठ मारता था।
एक दिन जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया तो देखा वहाँ अनीता चाची की पेंटी और ब्रा लटक रही थी। शायद चाची उन्हें ले जाना भूल गई थी। यह पहली बार था कि मैं किसी औरत की पेंटी और ब्रा इतनी पास से देख रहा था। मेरा हाथ रोके नहीं रुका और मैं उनको अपने हाथ में ले के सूंघने लगा, उसकी मादक सुगंध से मैं मदहोश होने लगा। मैं पेंटी को अपने मुँह में लेके चूसने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अनीता चाची की चुत चूस रहा हूँ। उसके बाद मैं ब्रा को भी मुँह में ले के खेलने लगा।
उस दिन पहली बार मेरा लंड इतना बड़ा लग रहा था। मेरे लंड का आकार इतना बड़ा आज तक नहीं हुआ था। उसके बाद मैंने अपने लंड से पेंटी और ब्रा को खूब चोदा, उसे लंड में लपेट के मैंने अपना मुठ उसी में गिरा दिया, फिर अच्छे से धो के चाची की ब्रा और पेंटी वहीं रख दी। उस दिन हिलाने में जितना मजा आया था उतना पहले कभी नहीं आया था।
मैं नहा कर नाश्ते के लिए गया, वहाँ अनीता चाची ही खाना खिला रही थी। चाची मुझे देख के मुस्कुराई। आज मैं चाची को देख के उनको देखता हो रह गया, वो भी मुस्कुराती ही जा रही थी। चाची ने हाफ ब्लाउज पहन रखा था, वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं बता नहीं सकता। मैंने तो सोच लिया कि आज के बाद मैं जब भी मुठ मारूंगा, चाची की पेंटी ब्रा ले के ही मारूंगा और चाची को ही याद करके अपना रस निकालूँगा।
अगले दिन जब चाची नहा के निकली, मैं नहाने के लिए जल्दी से बाथरूम की ओर दौड़ा ताकि कोई और ना चला जाए बाथरूम में। पर अन्दर जाते ही मुझे काफी निराशा हुई। इस बार चाची ने वहाँ अपने कोई कपड़े नहीं छोड़े थ। मैं उदास मन से नहा के बाहर आ गया।
अपने कमरे में जा के भी मैं यही सोच रहा था कि आज कैसे मुठ मारी जाए। तब मैं हिम्मत करके छत पे गया, वहाँ देखा तो चाची की पेंटी लटक रही थी। मुझे लगा कि यहाँ पर मुठ मारूंगा तो अच्छा नहीं होगा। सो मैंने उसे अपने अंडरवियर में छुपा लिया और अपने कमरे में चला गया। चाची की पेंटी को छूते ही अन्दर मेरा लंड जाग गया था। फिर कमरे में जाकर मैंने जी भर के मुठ मारी, फिर पेंटी को धो के वहीं लटका आया।
फिर मैंने इसी तरह काफी दिनों तक अनीता चाची की मदद से मुठ मारते हुए काफी मज़े लिए। इससे मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी। अब मैं कभी कभी कमरा खुला छोड़ के मुठ मारने लगा था। अब मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि केवल मुठ मार के मेरा मन नहीं भरता था। अब चाची के कपड़ो से मेरा लंड कड़क नहीं हो पाता था। मुझे लगा कि अब कुछ करना पड़ेगा।
मैं अब अनीता चाची के कमरे में ताक-झांक करने लगा, यह सोच कर कि कभी मैं चाची को नंगा देख सकूँ तो मजा आ जाए। बाथरूम में तो कई बार कोशिश कर चुका था पर चाची हमेशा बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लेती थी, इसलिए मुझे सफलता नहीं मिल पाई थी।
एक दिन दोपहर में जब काफी गर्मी थी तो मैं खाना खा के चाची के कमरे में चला गया। वहाँ खिड़की में काफी बड़े-बड़े परदे लगे हुए थे। उसमें कोई भी आसानी से छुप सकता थ। गर्मी इतनी थी तो मैंने सोचा शायद चाची जब काम करके आएगी तो कुछ कपड़े तो जरूर उतारेंगी, यही सोच कर मैं परदे के पीछे छुप गया। थोड़े देर बाद जब चाची आई तो मेरा सोचना सही निकला।
चाची ने कमरे का दरवाज़ा बंद करके तुंरत ही साड़ी उतार फेंकी। मैं तो देखता ही रह गया। चाची ब्लाउज और साये में काफी खूबसूरत लग रही थी। चाची बिस्तर पर लेट गई पर गर्मी इतनी थी कि चाची को अभी भी पसीना आ रहा था। चाची से रहा नहीं गया, उन्होंने साया पूरा उपर कर लिया। अब मैं उनकी जांघों का मजा ले रहा था। उन्होंने गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी, वो पसीने से भीग चुकी थी। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि आज इतनी गर्मी हो कि चाची पूरी नंगी हो जाए और मेरा सपना पूरा हो जाए। पर भगवान ने मेरी सुनी नहीं। चाची साया ऊपर करके ही सो गई।
काफी देर इन्तज़ार करने के बाद मैं उनकी जांघों को ही देख के मुठ मारने लगा और रस को अपने हाथ में गिरा लिया ताकि किसी को पता न चले और खिड़की से ही कूद के अपने कमरे में चला गया।
दूसरे दिन भी मैं आशा लगा के वहीं छुप गया। आपको यकीन नहीं होगा कि अगले दिन भगवान ने मेरी सुन ली थी। चाची ने आते ही साड़ी ब्लाउज और साया तीनों उतार कर फ़ेंक दिए। पेंटी और ब्रा में चाची किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। चाची बिस्तर पे लेट गई और अपने हाथ से पेंटी को सहलाने लगी। मुझे लगा कि चाची ऐसे ही सहला रही है, पर चाची ने जब अपनी चुत में अपनी ऊँगलियाँ डालनी शुरू की तो मुझे लगा कि आज चाची गरम हैं, आज वो भी मुठ मारने वाली हैं। मुझे तो स्वर्ग मिल गया था।
चाची ने फिर फिर अपनी पेंटी उतार दी और मैं उनकी चुत को देखता रह गया। और चाची ने फिर अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी। उनकी चुचियों को पहली बार मैं ऐसे नग्न देख रहा था। 38 इंच की उनकी चूचियाँ बस मेरी हालत ख़राब कर रही थी। इतनी बड़ी चूचियाँ मैंने तो सपने में ही देखी थी। उधर मेरा हाथ मेरे लंड की माँ बहन एक कर रहा था। मुझे पता भी नहीं चला कब चाची उठ कर खिड़की की तरफ़ आने लगी। मैंने जैसे ही देखा तो मैं जल्दी से खिड़की से कूद के भाग गया।
मैं इतना गरम हो चुका था कि खुले दरवाज़े ही मैं अपने बिस्तर पर लेट के ज़ोर ज़ोर से लंड हिलाने लगा। हिलाते हिलाते जब मेरी नज़र दरवाज़े पर गई तो मैं तो बस पत्थर हो गया। देखा कि चाची मुझे देख रही हैं। चाची को देखते ही मेरा लंड एकदम सिकुड़ गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!
तब चाची ही बोली- क्या कर रहा है रे अमित?
मैं- कुछ नहीं चाची!
चाची- कुछ नहीं का मतलब? तू ये सब कब से कर रहा है और किसने सिखाया तुझे ये सब! हाँ?
मैं- चाची, मैं कभी कभी करता हूँ, वो मेरे एक दोस्त ने बताया था इसके बारें में!
चाची- तूने ऐसे ऐसे दोस्त बना के रखे हैं जो तुझे ये सब सिखाते हैं?
मैं- चाची मुझे माफ़ कर दीजिये, मैं आगे से कभी नहीं करूँगा! और प्लीज़ किसी को नहीं बताइयेगा!
चाची- ठीक है वो सब, मैं किसी को नहीं बोलूंगी पर तू मेरे जवाबों का सही सही जवाब देगा तब!
मैं- हाँ चाची, मैं आपको सब सच सच बोलूँगा।
चाची- किसके बारे में सोच के अभी तू हिला रहा था?
मैं- सच बोलूं चाची? आपको सोच के हिला रहा था!
चाची- मुझे सोच के हिला रहा था या देख के हिला रहा था? तू मेरे कमरे में था ना खिड़की के पास?
मैं- नहीं चाची, मैं नहीं था!
चाची ने मेरे गाल पे एक ज़ोर से तमाचा मारा।
चाची- तूने बोला कि सब सच बोलूँगा और तू झूठ बोले रहा हैं। मैंने तो कल ही समझ लिया था जब मैंने खिड़की के परदे के नीचे तेरे रस की कुछ बूंद देखी। क्यूँ तेरे ही काम थे थे ना वो?
मैं- चाची, पता नहीं कैसे गिर गया वो, मैंने तो हाथ में ही निकाला था। सॉरी चाची…!
चाची- और तू ही मेरे ब्रा और पेंटी ले के उसमें मुठ मारता है ना? वो सब दाग तुमने ही लगाये थे न मेरे कपडों में?
मैं- चाची आपको वो भी मालूम चल गया? पर मैं तो उसे धो देता था!
चाची- अरे इसके दाग ऐसे ही थोड़े चले जाते हैं, और फिर मैं तेरी चाची हूँ रे! कोई दूध पीती बच्ची नहीं ..तुझे ये क्या सूझी रे कि तूने अपने चाची को अपनी मुठ मारने का जरिया बना लिया?
मैं- चाची मुझे माफ़ कर दीजिये, पर क्या करूँ आप हो ही इतनी सेक्सी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया!
चाची- तुझे ये 36 साल की औरत सेक्सी लगती है रे… तू भी ना!… अच्छा सुन ये अच्छी बात नहीं है.. ज्यादा मुठ मत मारना.. और अगली बार जब मुठ मारने का मन करे मुझसे कपड़े मांग लेना, मैं दे दूंगी, ऐसे चोरी मत कर! एक दिन पकड़ा जाएगा.. पर ज्यादा नहीं, हफ़्ते में 2 बार से ज्यादा नहीं मारना, ठीक है…?
मैं- हाँ चाची.. आप बहुत अच्छी हो…!
फिर मैं चाची से उनकी पेंटी और ब्रा मांग के हिलाने लगा. मुझे ऐसा लगने लगा था की चाची मेरे इस आदत का मजा ले रही है. मुझे ऐसा भी लग रहा थी चाची शायद मुझे अपनी चुत भी मारने दे! मुझे लग रहा थी कैसे चाची से बात करूँ इस बारें में। दूसरे दिन जब मैं चाची से उनकी पेंटी मांगने गया तो चाची की बातें बहुत मजेदार थी.
चाची- कल ही तो ली थी तुमने, आज फिर से चाहिए, कितना मनचला हो गया है मेरा भतीजा! आज कोई पेंटी नहीं मिलेगी! वो छत पर ही है और मैं नहीं लाने वाली…
मैं- चाची मैं तो मर जाऊँगा अगर नहीं मुठ मारूँगा तो, चाची दो ना ऐसा मत बोलो..!
चाची- अरे तुझे क्या लग रहा है कि मैं झूठ बोल रही हूँ? तू खोज ले पूरे कमरे में, यदि मिल जाए तो ले ले…
मैंने सब जगह देखा, पर शायद चाची सच बोल रही थी, मुझे कहीं भी ब्रा या पेंटी नहीं मिली। तब मुझे एक आईडिया आया!
मैं- चाची आप सच बोल रही थी, पर मुझे एक मिल गई…आप दोगी न उसे…?
चाची- मिल गई तो ले ले , पूछ क्यूँ रहा है?
मैं- चाची वो तो आपको देनी होगी, आपने जो अभी पहन रखी है मुझे तो वही पेंटी चाहिए…!
चाची- पागल हो गए हो क्या, ये नहीं मिलेगी, गन्दा कर दोगे, मैं क्या पहनूंगी उसके बाद? नहीं मैं नहीं दे सकती! जा आज तू कुछ और उपाय कर..!
मैं- चाची, आप ऐसा मत करो, मैं आपकी मिन्नतें करता हूँ.. आप जो बोलोगी मैं करूँगा पर आज मुझे अपने पेंटी दे दो.. आज मैं उसकी ताज़ी सुगंध से मस्त हो जाना चाहता हूँ…!
चाची- जो बोलूंगी वैसा करेगा तब दे सकती हूँ…!
मैं- चाची आप एक बार बोल के देखो तो , आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा!
चाची- आज तब तू मेरे सामने हिलाएगा… जो भी करेगा मेरी पेंटी के साथ, वो मेरे सामने करना पड़ेगा…!
मैं- चाची पर आपके सामने तो मेरा खड़ा भी नहीं होगा डर से.. आपने देखा नहीं था? जिस दिन अपने मुझे मेरे कमरे में पकड़ा था, मेरा कैसे सिकुड़ के छोटा हो गया था…
मुझे ऐसा लगने लगा कि आज तो मैं सफल हो ही जाऊँगा, लगा चाची आज गरम है और वो आज मुझे चोदने दे सकती है।
इसलिए मैंने चाची से फिर से बोला…
मैं- चाची पर एक बात बोलूं! यदि आप मेरी मदद करो तो शायद मेरा लंड खड़ा हो जाएगा… चाची! बोलो आप मेरी मदद करोगी न…?
चाची- मैं कैसे मदद करुँगी?
मैं- चाची यदि आप मेरे लिए अपने सारे कपड़े निकाल दोगी तो मेरा लंड जरूर खड़ा हो जाएगा…!
चाची- बदमाश कनीं का! आज तू मुझे नंगा होने के लिए बोले रहा है..? तेरी इतनी हिम्मत…? तुझे मैं अपने कपड़े देने लगी तो तू कुछ भी बोलेगा? जाके के तेरी मम्मी को सब बोले दूंगी!
मुझे लगा चाची गुस्सा कर रही हैं, सो मैंने सोचा छोड़ दें, पर फिर लगा नहीं एक बार और कोशिश की जाए, शायद चाची ऐसे ही मजाक कर रही हो.. फिर यदि चाची फिर से गुस्सा करेगी तो मैं माफ़ी मांग लूँगा…
मैं- चाची आप गुस्सा मत करो, ठीक है आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा… पर चाची एक बात पूछूं?
चाची- हाँ पूछ!
मैं- चाची आप वादा करो इस बार गुस्सा नहीं करोगी?
चाची- हाँ रे! ठीक है, नहीं करूंगी गुस्सा..
मैं- चाची जब पहले दिन आपने ये पता लगा लिया था कि मैंने खिड़की के पीछे खड़ा हो के वहाँ पे मुठ मारा था..तो फिर दूसरे दिन आप कमरे में आ के पूरी नंगी क्यूँ हुई थी…? सच बोलो चाची! आप जानती थी ना कि मैं वहाँ हूँ! और आप मुझे दिखा के मुठ मार रही थी ना…?
चाची- तूने तो मुझे चुप करा दिया रे…! अब मैं क्या बोलूं, हाँ मुझे यकीन था कि तू वहाँ है, इसलिए मैंने वो सब कुछ किया था, और मैं जानबूझ के खिड़की की तरफ़ गई ताकि तुझे पकड़ सकूँ पर तू भाग गया था।
मैं- चाची जब आप उस दिन नंगी हो सकती थीं तो आज क्यूँ नहीं? चाची आज तो आपको अब नंगी होना ही होगा..!
चाची- ठीक है अब तो मना भी नहीं कर सकती..!
उसके बाद चाची ने अपनी साड़ी उतार दी… फिर ब्लाउज और साया भी साइड में फेंक दिया.. और पेंटी को स्टाइल से खोल के मेरी तरफ़ फेंक दिया..
चाची- ले बदमाश ले सूंघ और हिला अपने लंड को..!
मैंने चाची की पेंटी को नाक से लगाया… उसकी मादक सुगंध से मेरा लंड तन गया.. फिर चाची को देख के लंड तड़पने लगा..
मैंने सोचा आज मौका है आज चाची से बोलता हूँ कि मेरी लंड की मालिश करें..!
मैं- चाची अपनी ब्रा उतारो ना, आपकी चूची देखनी हैं..!
चाची- क्यूं रे! क्या करेगा मेरी चूची देख के?
मैं- चाची आपके शरीर में सबसे प्यारी चीज़ तो आपकी चूची है.. उसे देख के मेरा लंड और भी तन जाएगा।
चाची- तुझे मेरी चूची इतनी अच्छी लगती है,
मैं- हाँ चाची आपकी चूची तो सारी ब्लू फ़िल्म की नायिकाओं से भी अच्छी है।
चाची- ठीक है, लगता है तू चूची का शौकीन लगता है.. ले देख मेरी चूची.. और अच्छे से हिला ..!
मैं- चाची एक बात पूछूँ , आप चाचा के लंड को छूती हैं ना?
चाची- हाँ तेरे चाचा के लंड पर तो मेरा अधिकार है.. उसे मैं छूती ही हूँ!
मैं- चाची मेरे लंड पे भी तो आपका अधिकार होता है.. तो आप मेरे लंड को पकड़िये ना.. देखिये ना कैसे ये लंड आपके हाथों में आने के लिए तड़प रहा है।
चाची- नहीं रे..! तू पागल हो गया है क्या..? मैं नहीं छूती तेरा लंड.. चल हिला अपना लंड ख़ुद से…!
फिर मैं चाची के पास जा के लंड हाथ में ले के- चाची लो ना देखो कितना तड़प रहा है ये.. ले लो ना चाची.. आपके हाथ का सोच के ही ये हाल है… यदि आपने इसे हाथ में ले के थोड़ा प्यार से हिला देंगी तो सोचो कि ये कितना खुश होगा।
फिर चाची के हाथ पे ज़बरन मैंने अपना लंड रख दिया.. चाची ने अब मना नहीं किया.. चाची ने जैसे मेरे लंड को प्यार से सहलाया.. मुझे लगा कि झड़ जाऊँगा..
मैं- चाची मेरा रस निकलने वाला है..
चाची- इतनी जल्दी…
मैं- चाची क्या करूँ आपके छूने से मेरा रस उबलने लगा था.. अब नहीं रहा जा रहा है…
इतनी बात करते ही मैंने अपना रस निकाल दिया.. जो चाची के बूब्स पे गिरा… चाची और भी सुंदर लग रही थी..
मैं- सॉरी चाची.. सारा आपके चूचियों पर गिर गया… मैं साफ़ कर दूँ?
चाची- अब तू चूची को हाथ लगाने के बहाने निकाल रहा है.. जरूरत नहीं है.. जा भाग अब..!
मैं- चाची आपका मन नहीं है ना मुझे भगाने का! मुझे पता है आप मुझे सब कुछ करने को देंगी.. देंगी ना चाची?
आप मेरी सबसे अच्छी चाची हो..
चाची- चल हट यहाँ से.. क्या क्या करना है तुझे रे… ज़रा बता तो एक बार..!
मैं- चाची मैं आपको चूमना चाहता हूँ, आपकी दूध पीना चाहता हूँ, आपकी चुत का मजा लेना चाहता हूँ, आपकी चुत का रस पीना है मुझे! फिर मुझे आपको चोदना भी है…
चाची- तू तो एकदम हरामी हो गया है रे.. अपनी चाची को ही चोदेगा… तू तो मादरचोद निकल गया है… तुझसे तो बच के रहना पड़ेगा..
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चाची- तू तो बड़ा हरामी है रे… मैंने तेरी मदद की तो आज मुझे ही चुदासी बना दिया.. आज से तुझे कुछ नहीं मिलेगा!
मैं- चाची आप ऐसा नहीं करो, मैं तो मर जाऊँगा.. मैंने तो सोचा कि ऐसा बोलने से आप मुझे चोदने दोगी तो मैंने बोल दिया.. मुझे माफ़ कर दीजिए।
चाची- ऐसा बोलने से कोई तुझे चोदने दे देगा..
मैं- तब चाची कब कोई मुझे चोदने देगा.. बोलिए न चाची मुझे आप कब चोदने दोगी?
चाची- तू नहीं मानेगा न.. ठीक है चल तू अपनी माँ के सामने यदि मुझसे बोलेगा कि चाची चोदने दो.. और तेरी माँ भी बोलेगी कि हाँ चुदा ले तो मैं तुझसे जरूर चुदवाऊँगी।
मैं- चाची इतनी मुश्किल शर्त रख दी आपने.. ठीक है मैं आज डिनर के समय ही मम्मी से बात करूँगा..!
फिर उस दिन डिनर पर मैं चाची और मम्मी के साथ ही खाने को बैठा, मुझे काफी डर लग रहा था कि मम्मी से कैसे बात की जाए.. फिर अचानक लगा कि कुछ घुमा के मम्मी से बात कर लेते हैं..
मैं- चाची आप मेरे इच्छा पूरी नहीं करोगी ना, मैं कब से आपसे एक चीज मांग रहा हूँ.. आप क्यूँ नहीं देतीं?
मम्मी- क्या हुआ अमित क्या चाहिए तुझे चाची से, जो वो नहीं दे रही है..
मैं- कुछ नहीं मम्मी! एक बहुत प्यारी चीज है चाची के पास मैं वही मांग रहा हूँ.. पर चाची देने को तैयार ही नहीं होती!
मम्मी- क्यूँ री अनीता! मेरे बेटे को वो चीज क्यूँ नहीं दे देतीं? देख बेचारा कितना परेशान है?
चाची- ठीक है दीदी! मैं आज ही दे दूँगी इसे..
मैं तो उछल पड़ा.. मैंने मम्मी से हाँ तो करवा लिया था.. फिर चाची ने मुझसे कहा कि कल लंच के बाद आ के ले लेना अमित…!
उसके बाद मैं हवा में उड़ने लगा था, मैं बस किसी तरह चाहता था कि रात ख़त्म हो.. और लंच का टाइम आ जाए… उस दिन रात काफी लम्बी लग रही थी .. पर आखिर में मेरा इंतज़ार ख़त्म हो गया.. सुबह मैं काफी अच्छे से नहा के सेंट वेंट लगा के लंच करने गया.. जल्दी से लंच करके चाची के कमरे में जा कर इन्तज़ार करने लगा चाची का..! आज मैं चाची को चोदने वाला था.. यह सोच कर मेरा मन फ़ूला नहीं समां रहा था.. फिर चाची कमरे में आई..
मैं बेड पे लेट के टीवी देख रहा था..
चाची- तो अमित आखिर तुमने अपना दिमाग लगा के माँ से हाँ करवा लिया न!
मैं- चाची मैं आपको चोदने के लिए कुछ भी कर सकता था!
चाची- आज तो चाची भी तुझसे चुदना चाहती है.. देख अच्छे से चोदना चाची को.. जल्दी बाज़ी में मत चोदना.. जैसे बोलूँ वैसे चोदना!
मैं- चाची आप जैसा बोलोगी, मैं वैसे ही चोदूँगा!
चाची- तू आ आज तू मेरी कपड़े उतार!
फिर मैं चाची के पास गया और चाची की साड़ी उतार दी.. फिर चाची की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.. फिर चाची ने ख़ुद ही ब्लाउज उतार दिया.. फिर मुझे लगा कि चाची को पूरा नंगा कर दूँ.. और मैंने चाची की ब्रा, साया, पेंटी सब निकाल दिया.. फिर चाची बिस्तर पर लेट गई और मैं चाची को खड़ा देखने लगा.. चाची को ऐसे देख के तो किसी मुर्दे में भी जान आ जाती..
चाची- क्यूँ रे दूर से ही देखता रहेगा.. या पास भी आएगा.. आ मेरे पास आ ना..
मैं चाची के पास जा के बैठ गया..
चाची- तू कल बोल रहा था न मेरा दूध पिएगा.. ये ले आ जा मेरे दूध पी जा..
मैं भी चाची के चूचियों को प्यार से सहलाने लगा.. उनकी चूचियाँ मेरे हाथों में नहीं आ पा रही थी.. इतनी बड़ी और इतनी मुलायम चूची… बस मन कर रहा था कि दबाता ही रहूँ। फिर मैं चाची की एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.. और दूसरी को पूरी ताकत से दबा रहा था.. चाची बड़े प्यार दे मुझे अपना दूध पिला रही थी.. हालाँकि चाची की चूची में दूध अब आता नहीं था, पर चाची की चूची बहुत स्वादिष्ट थी..
मैं- चाची आपने तो बोला दूध पियो.. पर आपके चूची से तो दूध नहीं निकाल रहा है.. चाची अब दूध कैसे पियूँ?
चाची- अरे मेरे लाल… चूची का दूध ख़त्म हो गया है.. पर आ तुझे अपना खास दूध पिलाती हूँ, मेरी चुत पे जा और चाट जा चुत का सारा दूध…
मैं- चाची आपकी बूर का रस मीठा है न?
चाची- तू चख के देख ले.. चूची का दूध भूल जाएगा..
फिर मैं चाची की चुत के पास जाकर बैठ गया.. चाची की चुत में हल्की हल्की झांट थी.. जो पसीने से भीगी हुई थी.. मैंने पहले चाची की झांट को चाटा.. चाची की झांट इतनी नमकीन थी कि बस चाटने का ही मन कर रहा था.. चाची उधर अपनी गांड उठा उठा कर मुझे इशारे कर रही थी कि चुत चाट..
तो मैंने सोचा कि अब चाची को ज्यादा न परेशान करूँ..फिर चाची की चुत को प्यार से सहलाया.. चाची की चुत तड़प में गीली हो गई थी.. मैंने पहले चाची की चुत में अपनी एक उंगली डाली, वो चाची की चुत में काफी आराम से आ जा रही थी.. तब मैंने दो दो उंगलियाँ एक साथ घुसाना शुरू किया. तब चाची को मजा आने लगा.. चाची हल्की हल्की आवाज़ निकलने लगी..
चाची की आवाज़ सुन के मैं और तेज़ी से उनकी चुत फाड़ने लगा.. चाची की चुत एकदम गीली हो गई थी.. सो मैंने सोचा अब बुर रसपान कर लिया जाए.. और चाची की बुर में अपना मुँह रख दिया… बूंद बूंद चाट लिया… इतनी स्वादिष्ट रस मैंने आज तक नहीं पिया था.. चाची चुत उठा उठा के मुझे चुत का रस पिला रही थी.. मैं चुत का रस ऐसे चूस रहा था जैसे कोई निम्बू से रस चूसता है.. मुझे सब कुछ सपना लग रहा था.. मैंने चाची की बूर का इतना रसपान किया चाची ने ख़ुद से मना किया..
चाची- अरे बस भी कर कितना प्यासा है.. क्या मुझे मार ही डालेगा..
मैं- चाची आपका चुत-रस इतनी प्यारा है कि मैं हमेशा आपका रस चूसता रहूँ।
चाची- तूने तो मुझे धन्य कर दिया रे.. आजतक ऐसा रसपान ज़िन्दगी में किसी ने नहीं किया.. चल अब आ मैं तेरी सेवा कर दूँ..
मै- क्या करोगी चाची?
चाची- आ मैं तेरी लंड की प्यास बुझा दूँ.. तू भी चाहता है न कि मैं तेरा लंड अपने मुँह में लूँ?
मैं- चाची मैं तो रोज़ रात को सपने में अपना लंड आपके मुँह में देता हूँ.. मुझे तो वि्श्वास नहीं हो रहा है कि.. आप इसे मुँह में लोगी।
फिर चाची ने मेरी लंड को अपने हाथ में लिया.. मेरा लंड गरम होकर इतना कड़ा हो गया था कि चाची ने उसे छूते ही अपने मुँह में ले लिया.. आज मेरे लंड को अपनी मंजिल मिल गई थी। चाची मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चाट रही थी.. चाची के चाटने के अंदाज़ से लग रहा था कि चाची तो लंड की शौकीन हैं।
चाची लंड मुँह से निकाल के उसे अपनी चूची से सटाने लगी… लंड से चाची की चूची को छू के इतना प्यारा लगा कि मैं बयान नहीं कर सकता.. मेरा लंड बस अब चाची की चुत का प्यासा था.. फिर चाची ख़ुद ही लेट के लंड को अपनी चुत से सटाने लगी.. तब मुझे लगा कि अब समय आ गया है.. चाची भी चुदना चाहती है…
मैं- चाची अब मैं आपको चोद लूँ?
चाची- हाँ अमित आ अब अपनी चाची की चुत को चोद डाल..! पूरी जान लगा के चोदना..! बहुत दिन से प्यासी है तेरी चाची की ये चुत.. आज इसकी प्यास बुझा दे मेरे लाल…!
मैं चाची को नीचे लिटा के उनके ऊपर आ गया.. चाची की चुत पे अपनी लंड को रखा और उसे चुत पे रगड़ने लगा। चाची से रहा नहीं जा रहा था.. चाची ने चुत उठा के गली दी की मादरचोद अब चोद भी.. कितना इन्तज़ार कराएगा..
फिर मैंने चाची की चुत में अपना लंड घुसाना सुरु किया.. एक ही बार में मेरा लंड आधा चाची की चुत में चला गया… फिर मैंने दूसरी बार जब ज़ोर लगाया तब मेरा पूरा लंड चाची की चुत में.. मुझे ऐसा लग रहा की चाची की चुत स्वर्ग हो.. मेरा लंड तो फुला नहीं समां रहा था..
मैंने चाची की चुत में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरु किया.. चाची काफी ज्यादा आवाज़ कर रही थी.. चोद डाल.. चोद मेरे ला..चोद दे अपनी चाची को.. चाची जैसे जैसे बोले रही थी.. मैं और भी ज़ोर ज़ोर से चाची को चोद रहा था..
फिर मैंने चाची घुमने की लिए बोला.. और चाची के पीछे से उनकी चुचियों को दबाते हुए.. लंड को फिर से चाची की चुत में डाल दी.. चाची मजा ले ले के चुदवा रही थी.. फिर मैंने चाची को कुतिया बन्ने को कहा.. और चाची के पीछे जाकर.. चाची की चुत की खूब पूजा की.. आज मेरा लंड काफी साथ दे रहा था.. चाची एक बार पुरी तरह से स्खलित हो चुकी थीं.. उसके बाद मेरा लंड फच फच की आवाज़ के साथ चाची की चुत फाड़ने लगा.. अब मेरा लंड भी अपनी पानी उगलने वाला था..
मैं- चाची मेरा लंड पानी निकलने को तैयार है..
चाची- निकाल दे बेटे चाची की चुत में ही निकाल दे.. चुत को काफी दिनों से नहीं मिली है लंड का रस..
मैंने पूरा का पूरा पानी चाची की चुत में डाल दिया.. चाची ने ज़ोर से मुझे गले लगा लिया और मुझे प्यार से चूमने लगी..
चाची- कैसा लगा बेटा चाची को चोद के.. मजा आया न तुझे..?
मैं- चाची मेरे ज़िन्दगी बन गई आज… आज से आप जैसा बोलोगी.. मैं वैसा ही करूंगा… आप मेरी चाची हो.. मेरी दुनिया हो… मेरी लव हो..! चाची, मैं आपको रोज़ चोदूंगा.. चुदवाओगी न चाची.. बोलो न…!
चाची- हाँ मेरे लाल मैं तेरे से रोज़ चुदवाऊँगी.. चल अब जा अपने कमरे में! नहीं तो कोई पकड़ लेगा…
फिर अनीता चाची को मैं रोज़ चोदने लगा!
पाठको! यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो मुझे ज़रूर मेल कीजिये, तब मैं आपको आगे की कहानी बताऊँगा.. अभी मेरी हेमा चाची..और माँ की कहानी बाकी है… Antarvasna
मेरा नाम राहुल शर्मा है मैं २५ साल का हूँ। मैं आज Sex Stories अपने सभी दोस्तों को अपने सेक्स और अपने कुँवारापन खोने के पहले अनुभव के बारे में बताना चाहता हूँ। तब हम लोग इलाहबाद में रहते थे और गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा के घर लखनऊ जाते थे। वहां हमारे दादा दादी के साथ हमारे ताऊ और ताई भी रहते थे। उनका बेटा भी वहीं रहता था और कॉलेज में पढ़ता था। वो लगभग २२ साल का था। उसका नाम था गोरव और हम उन्हें राजू भैया कहते थे।
उस साल हम जब छुट्टियों में वहां गए तो मैंने एक नया और अत्यधिक रोमांचक अनुभव किया। एक दिन रात को मैं उनके ही साथ सो रहा था अचानक मेरी नीद खुली और कुछ अजीब सा लगा मैंने देखा भैया मेरे बगल में नंगे लेटे हैं और वो मेरी निक्कर में हाथ डालकर मेरी लुल्ली को सहला रहे हैं।
मुझे शर्म आ गई मैंने कहा- भैया ये क्या कर रहे हो?
आखिर वो मेरा बड़ा भाई था। वो बोला- कुछ नहीं ! अब तुम बड़े हो गए हो और मैं यह देख रहा था कि तुम कितने बड़े हुए हो?
मैंने कहा- ऐसे कैसे पता चलता है?
उन्होंने कहा- पहले अपनी चड्ढी उतारो फ़िर समझाता हूँ !
मैंने कहा- मुझे शर्म आती है।
वो बोला- अगर मुझसे शरमाओगे तो लड़की के साथ कैसे सेक्स करोगे?
सेक्स का तो नाम ऐसा है कि कोई भी अपने आप उसकी तरफ़ बह जाएगा मैं भी तैयार हो गया पर शरमा रहा था। उन्होंने अपने लण्ड को हिला कर खड़ा किया तो मेरी तो साँस ही अटक गई, वो मेरे हाथ की कलाई के बराबर मोटा था और करीब ७ इंच लंबा था। मुझे उनका लण्ड देखने में बड़ा मजा आया। वो बोले- तुम्हारा भी खड़ा होता है या ऐसे ही लटका रहता है?
उनके लण्ड को देख कर मेरा भी लण्ड टाइट होने लगा और धीरे धीरे खड़ा हो गया। उनके लण्ड के सामने मेरे छोटे से लण्ड की क्या औकात जो उनके पैर के अंगूठे से थोड़ा पतला और लम्बाई में ४.5 इंच का था।
भैया बोले- अब तुम भी बड़े होने लगे हो !
मैंने कहा- अच्छा ! कैसे?
बोले- कभी मुठ मारी है?
मैंने कहा- वो क्या होता है?
बोले- इसको यानि लण्ड को हिलाने से सफ़ेद सफ़ेद जो निकलता है उसे माल कहते हैं।
मुठ मारने में तो मुझे भी बहुत मज़ा आता था।
भैया वैसे भी इतने सुंदर थे कि कोई भी लड़की उनके आगे अपनी टांगे फैला देती ! और वो थे भी बहुत बड़े चुद्दकड़।
बोले- कभी किसी लड़की की चूत देखी है?
मैंने कहा- नहीं !
वो बोले- रुको ! मैं दिखाता हूँ !
उन्होंने अपनी अलमारी से किताबों की एक गड्डी निकाली जो सारी नंगी तस्वीरों, चुचियों, गाण्डों और चुदवाती हुई लड़कियों और गाण्ड मराते हुए लड़कों की तस्वीरों से भरी पड़ी थी। उन्हें देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया क्योंकि अपने घर में ये सब मुझे कहाँ से मिलता और मुँह से ज्यादा पानी मेरे लण्ड से निकलने लगा था।
वो बोले- क्या हुआ? झड़ गया?
मैंने कहा- नहीं ! गीला हुआ है। क्यूंकि माल नहीं टपका था।
भैया बोले- लड़की चोदने का मज़ा लोगे?
मैंने कहा- हाँ ! पर लड़की कहाँ है?
वो बोले- मेरी गाण्ड मारो ! वही लड़की चोदने जैसा मज़ा और गर्माहट मिलती है।
बस फ़िर क्या था, वो पेट के बल बेड पर लेट गए और बोले- डालो अपना लण्ड मेरी गाण्ड में घुसेड़ दो।
मेरे लिए अजीब सा था पर चोदने का मज़ा लेने के लिए मैंने लण्ड बढ़ा दिया। पहले तो हल्का सा गया और मुझे दर्द सा होने लगा तो बोले- तुम्हें क्यों दर्द हो रहा है? गाण्ड तो मैं मरवा रहा हूँ !फ़िर उन्होंने थोड़ा सा तेल अपनी गाण्ड में लगाया और फ़िर तो मेरा लण्ड ऐसा दौड़ा कि माइकल शूमाकर की फरारी भी हार जाती पर मैं तीन मिनट में ही झड़ गया।
भैया बोले- ऐसे करोगे तो मज़ा नही आयेगा। पहले थोड़ी देर हलके हलके करो जब मज़ा आने लगे तब स्पीड बढ़ाओ।
मुझे सबक मिल चुका था। फ़िर मैं करीब घंटे भर तक उनकी नंगी नंगी फोटो वाली किताबें और चुदाई वाली कहानियाँ पढ़ता रहा। अब मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा हो गया था और मैंने फ़िर से भैया की गाण्ड मारी। इस बार मैंने १० मिनट तक अपने लण्ड को झड़ने नहीं दिया मैंने और भैया ने बराबर मज़ा लिया।
फ़िर मैंने उनसे कहा कि तुम भी मेरी गाण्ड मारो ! मैं भी गाण्ड मरवाने का मज़ा लेना चाहता हूँ।
उन्होंने बहुत मना किया, बोले- तेरी गाण्ड अभी बहुत छोटी है, फट जायेगी !
जब मैंने बहुत जिद की तो वो मान गए और जैसे ही अपने लंबा चौड़ा खली जैसा लण्ड मेरी गाण्ड में डालने की कोशिश की तो मेरी आँखों से आंसू निकल गए।
वो बोले- अब मैं नहीं मारूँगा !
मैंने कहा- भैया धीरे धीरे करना और पहले मेरी गाण्ड में तेल लगा दो।
उन्होंने ढेर सारा तेल मेरी गाण्ड में उड़ेल दिया फ़िर लण्ड को सहलाते सहलाते मेरी गाण्ड में डाला। कसम से बहुत दर्द हुआ। फ़िर हल्के हल्के अन्दर बाहर करते हुए उन्होंने पूरा मज़ा लिया और मुझे भी बहुत मज़ा आया।
फ़िर तो हम लोग हर रात यही लण्ड गाण्ड का खेल खेलते रहे। मैं अक्सर उनके साथ नहा भी लेता, हम लोग बाथरूम में देर तक नहाते, एक दूसरे के लण्ड से खेलते और फ़व्वारे के नीचे लेट कर गाण्ड गाण्ड खेलते थे। किसी को हम पे शक भी नहीं होता था कि हम इतनी देर तक बाथरूम में क्या करते हैं क्यूंकि घर वालों के लिए तो हम भाई थे पर आपस में हम बहुत अच्छे दोस्त हो गए थे।
मैंने पूरी छुट्टियाँ ऐसे ही मज़े लेकर बिताईं। जब भी घर वाले कहीं जाते तो हम दोनों घर पर ही रुकते और गाण्ड गाण्ड खेलते। मैंने तभी पहली बार अपने झांट के बाल भी उनके साथ शेव किए।
ये छुट्टियाँ ख़त्म होने के बाद हम इलाहबाद वापस आ गए। मुझे उनकी बहुत दिनों तक याद आई। फ़िर जब भी कोई छुट्टी होती तो मैं लखनऊ चला जाता और उनके साथ मजे लेता था इस गाण्ड गाण्ड के खेल के। मेरी कई गर्ल फ्रेंड भी बनी उन्हें भी बहुत चोदा, वो कहानियाँ फ़िर कभी सुनाऊंगा।
अब मेरी शादी हो चुकी है और उनकी भी पर आज भी जब कभी हमे मौका मिलता है हम गाण्ड गाण्ड खेलते हैं। आप लोग भी इस खेल का मज़ा लीजिये क्यूंकि इसमे न तो लड़कियों के नखरे उठाने पड़ते हैं न ही लड़की के गर्भ वाला खतरा होता है और लण्ड और चूत दोनों की प्यास बुझ जाती है। Sex Stories
प्रेषक : अजय शर्मा- उस्ताद जी आप ने मेरी आपबीती “मेरी यादगार Sex Storiesसुहागरात” पढ़ी होगी. ये भी एक आपबीती ही है, लेकिन मेरी ख़ुद की नही, बल्कि मेरे इंस्टिट्यूट में पढने आने वाले एक लड़के श्याम की. वो 22 साल का एक ठीक दिखने वाला पाँच फुट नौ इंच लंबा, करीब 32 इंच कमर का ठीक ठाक लड़का है. वो अलवर का रहने वाला है और उधर उनका अपना ख़ुद का मकान है.
श्याम मेरे पास कंप्यूटर कोर्स करने जयपुर आया हुआ है. वो बीच बीच में अपने घर जाता रहता है. उस मकान के एक हिस्से में उन्होंने एक किरायेदार रखा हुआ है.
किरायेदार के एक लड़का और एक लड़की हैं. लड़की की शादी हो चुकी है और जब वो प्रेगनंट हुई तो अपने मायके में आ गई. लगभग पूरे दिन थे तो उसकी मम्मी ने अपनी देवरानी को घर के काम काज में हेल्प के लिए बुलवा लिया. ये चाची भी जयपुर में ही रहती है. शादी शुदा बेटी से धीरे धीरे श्याम की सेटिंग हो गई. जब भी मौका मिलता उसके बूब्स दबा देता और किस करता रहता था. लेकिन चोदना इसलिए नही हो पाया कि उसे पूरे दिनों की प्रेगनेंसी थी. लड़की की चाची भी आ गई गोल चेहरा, सुता हुआ पाँच फुट चार इंच का बदन, आकर्षक चूचियां कि पूरी हथेली में आ जायें. चाची 35-36 साल की है और तीन बच्चों की माँ होते हुए भी नई नवेली जैसी लगती है.
श्याम ने चाची से बातचीत शुरू की, चाची ने भी इंटेरेस्ट लेना शुरू कर दिया, एक दिन मौका पाकर श्याम ने चाची से किस मांग लिया. तो चाची ने नाश्यामगी दिखाई. श्याम बेचारा अपना सा मुह लेकर डर गया और चुपचाप अपने कमरे में चला आया.
लेकिन अगले दिन जब दोनों फिर मिले तो एकांत पाकर चाची ने श्याम को बोला कि तुम मेरा किस लेना चाहते हो न, ले लो. अब श्याम ने हिम्मत करके चाची को लिप्स पर बड़े जोर का किस किया. अब तो जब भी मौका मिलता बूब्स दबाने और चूमने चाटने का दौर चालू हो जाता. लेकिन चोदने का मौका नही मिल रहा था. इतना एकांत उस किराये के मकान में उन लोगों के पास नही था.
धीरे धीरे चाची ने श्याम को बताया कि उसके पति का जनरल स्टोर है, और रात को जब भी उसकी इच्छा चोदने की होती है, उसके कपड़े ऊँचे करके 3-4 मिनट में चोद चाद के सो जाता है, न चूमना चाटना, न हाथ फेरना, न किस, न गर्माना. बोली कि मेरी इच्छा तो कभी पूरी ही नही होती है, इसलिए तुमसे लगी हूँ.
अब छुट्टी बिता के श्याम जयपुर आ गया, चाची के मोबाइल नम्बर उसने ले लिए. कुछ दिन में जब भतीजी को डिलिवेरी हो गई तो चाची भी जयपुर अपने घर आ गई, जयपुर में श्याम और चाची दोनों ही किराये के मकानों में रहते हैं. चाची के पास 2 कमरों का मकान है लेकिन श्याम के पास 2 कमरे और एक कोमन रूम है.
दोनों के घर के बीच तीन किलोमीटर का फासला है. श्याम के मम्मी, पापा और बड़े भाई में से कभी कोई कभी कोई आता जाता रहता है. श्याम जयपुर आने के बाद चाची से लगातार बातें करता रहता था. बहुत गरम बातें होती थी. एक दिन श्याम ने, जब उसके कोई आने वाला नही था, चाची को ख़ुद के घर आने का निमंत्रण दिया, जो चाची ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. श्याम ने उसको बोला कि तुम मेरा जोर से चोदन करोगी या मैं तुम्हारा तो चाची ने बोला कि ये तो वक्त बताएगा.
अगले दिन चाची दोपहर में 3 बजे श्याम के यहाँ पहुच गई, एकदम टाइट पजामा और ऊपर कुरता. कमरे के अन्दर आते ही दोनों एक दूसरे की बाँहों में बंध गए। दोनों के होंट एक दूसरे के साथ चिपक गए और बहुत लंबा किस का एक दौर चला। चाची के हाथ श्याम कि कमीज के अन्दर पूरे शरीर पर चल रहे थे, चल क्या रहे थे यो कहें कि चाची उत्तेजना में श्याम को खरोंच रही थी. बड़ी मुश्किल से दोनों थोडी देर के लिए अलग हुए तो श्याम ने बोला कि ये पजामा इतना टाइट है उतरेगा कैसे तो चाची ने ख़ुद उतार दिया. ज़रा सी देर में ही एक दूसरे को कपडों से अलग कर दिया. अब चाची ने श्याम के शरीर का कोई हिस्सा नही छोड़ा जहाँ किस नही किया हो.
उत्तेजना के मारे चाची का हाल बुरा था. वो घरेलू औरत श्याम के लंड तक को चूस गई. श्याम की पीठ और सीने पर चाची की उँगलियों की खरोंच छप गई. आख़िर कई बरसों में शादी के बाद उसकी चुदाई की इच्छा जोरदार ढंग से पूरी हो रही थी. श्याम ने भी चाची को खूब चूमा, जीभ चूसी, बोबे चूसे, खूब दबाए, चूत को लंड से रगडा.
चाची की चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी. चाची ने श्याम को ऊपर आने को बोला और बेड पर सीधी लेट गई. श्याम चाची की दोनों टांगो को चौडा कर के बीच में बैठ गया और अपने लंड को चाची की चूत पे लगा के अपना लंड चाची की चूत में गहरे उतार दिया. चाची के मुह से एक लम्बी सीत्कार निकली. होंट एक दूसरे के साथ चिपक गए. दोनों ने एक दूसरे को चूसना शुरू कर दिया. श्याम के दोनों हाथों में चाची के दोनों बोबे थे जिनको वो खूब दबा रहा था. लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर हो रहा था।
धीरे धीरे चाची की गांड हिलने लगी, वो नीचे से धक्के मारने लगी, और श्याम ने जोर जोर से धक्के मारना शुरू कर दिया, लंड चाची की चूत में ऊपर से चालू होकर खूब गहरे तक जा रहा था. चाची ने श्याम को दोनों हाथों से दबोच रखा था और अपनी दोनों टांगो को श्याम की कमर पर लपेट रखा था. श्याम को जब ओर्गास्म हुआ तब तक चाची को दो बार हो चुका था. अब दोनों के होंट खुले. दोनों नंगे एक दूसरे पर पड़े रहे, चाची दो घंटे वहां रही और टोटल तीन बार दोनों ने जबरदस्त तरीके से बिना एक दूसरे से अलग हुए चुदाई की।
चाची की आँखों में तृप्ति आ चुकी थी.
शाम को साडे पाँच बजे श्याम का फ़ोन मेरे पास आया कि मैं आपसे अभी मिलना चाहता हूँ. वो जब मेरे पास आया तो उसने मुझे अपना ऊपर का शरीर दिखाया. पूरे शरीर पर खरोंच के निशान थे. आख़िर चाची ने श्याम का देह शोषण कर दिया. वो बोला सर आज तो जबरदस्त कसरत हुई है. पूरा शरीर दुःख रहा है.
उसके बाद चाची हर सप्ताह कम से कम एक बार जरूर श्याम से चुदवाती है, एक साल हो गया है. इस बीच उसने अपने पति को भगवान की कसम दिला दी है कि वो उसे हाथ नही लगाये. पति ने जबरदस्ती करने की कोशिश की तो दोनों हाथों से दूर कर दिया. अब वो श्याम को ही अपना पति मानती है. जबकि दोनों में 13 साल का फर्क है.
जिस के पीछे दुनिया में कई युद्ध हुए, श्यामा महाश्यामाओं की क्या बिसात ऋषि, मुनियों तक की तपस्या भंग हो गई, उस खेल को हमेशा लंबा और परम आनंद दायक बनाना चाहिए नही तो एक सीधी सादी औरत तक क्या हो गई, ये सोचने वाली बात है.
आपको ये आपबीती कैसी लगी, अपना अनुभव जरूर बतावें. खासकर स्त्रियों के अनुभव. Sex Stories
हमारे यहाँ एक नौकरानी है गंगू बाई नाम की. उसकी उमर भी 20 साल की Sex Stories है. उसका रंग साँवला है और फ़ेस कटिंग एकदम अमीशा पटेल की तरह है। उसके बूब्स एकदम बड़े है और उसकी गांड है एकदम बाहर है. मैं उसको चोदने का ख्वाब बहुत पहले से देखता हूं.
मेरा ये सपना पूरा हुआ जब मेरी मम्मी औस्ट्रेलिया मेरे पापा के पास गयी।
उस दिन मैं घर में था सुबह गंगू बाई आयी तो मैंने दरवाज़ा खोल दिया.
वो अपना काम करने लगी.
मैं तभी अपने बेडरूम में जा के एकदम नंगा हो गया. उसको चोदने का ख्याल आते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मैं रात में ही वियाग्रा की गोली लाया था, मैंने उसको खा लिया।
फिर मैंने गंगू बाई को आवाज़ मारी.
वो जब मेरे बेडरूम में आयी तो हैरान हो गयी. मुझे नंगा देख कर हँस के वो किचन में भाग गयी.
मैं उसके पीछे गया. जैसे ही मैं किचन में गया तो वो मुझसे बोली- तुम्हारा इरादा क्या है?
मैं बोला- गंगू बाई रानी, मुझे तेरी चूत को चोदना है.
यह सुनते ही वो मेरी तरफ़ आयी और बोली- इतना कहने में इतने दिन लगा दिये?
मैं उसको फिर गोद में उठा के बेडरूम में ले गया. वहाँ मैंने उसको नंगा कर दिया. उसके बूब्स एकदम पिंक और रसीले थे. मैं झट से उसके बूब्स अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और एक बूब को अपने हाथ से मसलने लगा.
वो आह्ह उह्ह कर रही थी.
मैंनेदस मिनट तक उसके दोनों बूब्स को चूस के और मसल के लाल कर दिया.
तभी मुझे मेरे लंड पे कुछ गीला लगा. मैंने देखा तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था।
मैं झट से उसकी चूत पे मुँह डाल के चाटने लगा उसकी चूत के दाने (क्लिट) को अपनी जीभ से चाटने लगा तो वो जोर जोर से चिल्लाने लगी और तड़पने लगी।
अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत एकदम टाइट थी। जैसे ही मैं उंगली अंदर बाहर कर रहा था तभी उसका पानी निकल गया.
मैंने सारा पानी चाट लिया और फिर उठ गया.
उसकी गांड के नीचे मैंने दो तकिये रख दिये और उससे कहा- देख आज़ इस लंड से तेरी चूत को चोदूँगा. तूने कभी ऐसी चुदाई करवाई है?
उसने कहा- नहीं.
तो मैंने कहा- तुझे दर्द होगा, सहन करना, फिर बहुत मज़ा आयेगा.
यह कह के मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत में डालने लगा वो बहुत ही टाइट थी जैसे ही मैंने एक धक्का लगाया वो जोर जोर से रोने लगी।
एक और धक्का लगाया मैंने तो वो चिल्लाने लगी और कहने लगी- छोड़ दो मुझे, मुझे नहीं चुदवाना।
मैंने एक और धक्का लगाया तो मुझे लगा कोई चीज़ मेरे लंड को उसकी चूत में रोक रही है.
मैं समझ गया कि उसकी सील है.
मैंने दोनों हाथों से उसके कंधों को पकड़ा और एक जोरदार धक्का लगाया. मेरा लंड उसकी चूत की सील फाड़ते हुए ४ इंच अंदर चला गया.
उसकी चूत से खून आने लगा और पानी भी.
मैं रुक गया.
वो बहुत ही जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी.
मैंने उसके बूब्स को मसलना चालू किया. दस मिनट के बाद वो शांत हो गयी, मैं फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा।
दस मिनट तक मैं धीरे धीरे धक्के लगा रहा था, जब मुझे लगा उसे मज़ा आ रहा है.
तभी मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया.
उसकी चूत से पानी निकलने लगा. जैसे ही मैंने थोड़ा लंड को बाहर निकाला उसकी चूत से खून निकलने लगा.
मैं रुक गया. दस मिनट के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये.
मैंने उसे पूछा- अब कैसा लग रहा है?
वो बोली- दर्द तो कम हुआ है पर मज़ा नहीं आ रहा!
यह सुन के मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. थोड़ी देर में उसकी चूत का पानी गिर गया.
मैंने उसे और जोर से चोदना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने वियाग्रा खाया था. तो मुझे मालूम था कि मेरा पानी लेट गिरेगा.
मैं उसको और 30 मिनट तक चोदता रहा.
वो भी बोलती रही- चोद मुझे शान … चोद मुझे … और जोर से आहह उहह शान. हह चोद रे चोद मुझे रंडी बना दे रे चोद मुझे. आह्हह मेरा पानी निकल रहा है आहह उहह!
और उसकी चूत का पानी ४ बार निकल गया।
तभी मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसे उठने को कहा.
वो उठ नहीं पा रही थी.
उसको मैंने अपनी गोद में लिया और दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. उसकी चूत से खून और पानी टपक रहा था. उसके झांट के बाल एकदम गीले हो गये थे.
मैंने उसको खड़ा किया और अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुँह पर रख के उसके पैर अपने हाथ में ले लिये।
अभी वो पूरी तरह से हवा में थी।
दीवार से चिपक के मैंने झट से एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा. उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था. दस मिनट में ही उसका पानी निकल गया. मेरे हाथ दुख रहे थे तो मैं उसको बेड पे लिटा के आँधी की तरह चोदने लगा.
मैंने उसको आधा घंटा वैसे ही चोदा. मैं पूरा पसीना हो गया था. वो कम से कम 8 बार अपनी चूत का पानी छोड़ चुकी थी.
तभी मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है. मैंने अपने लंड निकाल के उसके मुँह में डाल दिया. वो उसे एकदम लोलीपोप की तरह चूसने लगी. तभी मेरा माल उसके मुँह में निकल गया और उसने उल्टी कर दी.
मैं उसको गोद में उठा के बाथरूम में ले गया और उसके साथ नहाने लगा. मेरा लंड एकदम टाइट था वियाग्रा की वजह से।
उसके बाद मैंने उसको बाथरूम में भी चोदा पर यह अगली बार में। Sex Stories
दोस्तो, मेरा नाम समीर Hindi Sex Stories है। आज मैं आपको मेरे और मेरी गर्लफ्रेंड के कुछ सच्चे और गर्मागर्म संस्मरण बताने जा रहा हूँ।
कॉलेज में मेरी गर्लफ्रेंड बनी सोफिया। लड़की क्या थी बस ऐसा लगता था कि चुदाई के लिए ही बनो हो। गोल-गोल पुष्ट 38 इन्च के मम्मे, सुडौल भरे-भरे नितम्ब, जिन्हें देख कर दिल करता था कि अभी अपना लंड निकाल के रगड़ दो। हमारा प्यार होंठ चूसने से शुरू होकर मम्मे दबाने और जांघें सहलाने तक पहुँच चुका था मगर कोई जगह न मिलने के कारण हमें इतने में ही गुज़ारा करना पड़ता था। कभी कभी तो हम दोनों इतने गर्म हो जाते थे कि दिल करता था कि कार ही में कर डालूं। वो भी बहुत चुदासी हो जाती थी और “सी-सी” कर के मेरे लंड को रगड़ने लगती थी।
एक दिन मेरे घर में कोई नहीं था, तो मैंने सोचा कि क्यों न उसे अपने घर बुलाने का रिस्क उठाया जाये। सच में अब रहा नहीं जा रहा था। चूत तो उसकी भी गर्म थी तो उसने हामी भर दी। हम अपने दिमाग से नहीं अपनी टांगों के बीच से सोच रहे थे।
माँ के जाते ही मैंने फटाफट खाने पीने का सामान खरीदा, फिर से ब्रश किया, कंडोम्स तो थे ही जिन्हें मैं मुठ मारने के लिए रखता था। बहुत इंतज़ार के बाद वो आई। क्या लग रही थी ! उसने कपड़े ऐसे पहने थे कि उसका अंग-अंग पूरा उभर के दिख रहा था। मैंने उसे चूमा और अन्दर ले आया। दिल तो कर रहा था कि बस शुरू हो जाऊं मगर फोर्मलिटी भी तो निभानी थी. हमने कोल्ड-ड्रिंक पी और इधर उधर की बातें की। वो अपने घर में सहेलियों के साथ पिक्चर जाने का बहाना बना कर आई थी। मेरी माँ को डिनर के बाद ही आना था और अभी सिर्फ बारह ही बजे थे। अभी काफी समय था। उसने अपना दुपट्टा हटा कर एक तरफ़ रख दिया और उसके वो गदराये हुए उभार मेरी आँखों के सामने आ गए। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके पास सोफे पर जाकर बैठ गया। पहले मैंने उसके गाल पर चूमा जो कि बाहर गर्मी की वजह से अभी तक लाल थे, यह किस पता नहीं कब एक गहन चुम्बन में बदल गया। हमारी ज़बानें आपस में लड़ने लगीं और हम बेतहाशा एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। फिर मैं उसकी गर्दन की तरफ आया और उसे चूमने लगा। उसके छाती तक आते आते मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था।
उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थीं। मैंने नीचे से उसकी कमीज़ के अन्दर हाथ डाला और उसकी चिकनी कमर से होता हुआ उसके ब्रा में कसे मम्मों पर पहुँच गया। दूसरा हाथ भी मैंने उसकी कमीज़ में डाला और उसकी पीठ सहलाने लगा। हमारी सांसें और तेज़ हो गई थीं।
“सोफिया…!”
“सी…हाँ”
“अपने कपड़े उतारो न…”
यह सुन कर उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर लिए। मैंने इशारा समझ कर फ़ौरन उसकी कमीज़ से हाथ निकले और उसे उतार दिया। मेरे सामने उसके बड़े-बड़े सख्त मम्मे थे। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उन्हें सहलाना और दबाना शुरू किया। मेरा लौड़ा उसकी जांघों से छू रहा था। मैंने पीछे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए।
“बड़े एक्सपर्ट हो इसे खोलने में !”
“जिस्म की प्यास सब सिखा देती है, जानेमन !” यह कह कर मैंने उसकी ब्रा उतार दी।
उफ़! ऐसे हसीन गदराये, रसीले स्तन तो मैंने ब्लू फिल्मों में ही देखे थे। मेरे हाथों मानो खज़ाना लग गया हो। मैंने पहले उन्हें सहलाया और झुक कर उसके गुलाबी, खड़े हुए चुचूक को मुँह में ले लिया।
‘अआह !” उसके मुँह से निकला।
एक हाथ से मैं दूसरे स्तन को मसलने लगा। उसने एक हाथ बढ़ा कर मेरे लंड पर रख दिया। मैं पहले तीन-चार बार कार में उससे मुठ मरवा चुका था और उसे उंगली से चोद भी चुका था। उसने मेरे एलास्टिक वाले पजामे में हाथ डाल कर मेरा अकड़ा हुआ, गरमाया लंड पकड़ लिया। उसकी नर्म और गर्म हथेली में जाकर वो और उछलने लगा। मैं एक एक करके उसके मम्मे चूस रहा था। उन्हें छोड़ कर मैं उसे अपनी तरफ खींच के उसकी उभरी, भरी हुई गांड दबाने लगा। मैंने आगे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया और शलवार नीचे गिरी पर पूरी नहीं। अब मैंने एक हाथ पीछे से उसकी चड्डी में डाल दिया और एक हाथ से चड्डी के ऊपर से उसकी चूत मसलने लगा। वो ऐसे करहने लगी जैसे कि उसे दर्द हो रहा हो। वो मेरे लंड को और जोर से हिलाने लगी। मैं उसकी गांड जोर जोर से भींच रहा था और फिर अपने नंगा लंड उसके हाथ से छुड़ा कर आगे से उसकी गीली चड्डी पर रगड़ने लगा। उसको थोड़ा सा आगे झुका कर मैंने अपनी बीच की ऊँगली पीछे से उसकी चूत पे रख दी। बिल्कुल गीली और गर्म थी साली।
” सी…आआआ…. सब कुछ यहीं पर करोगे क्या?”
मैं जानबूझ कर चाह रहा था कि एक बार मैं झड़ जाऊं क्योंकि फिर चुदाई देर तक कर सकता हूँ। इतनी उत्तेज़ना में अगर उसकी चूत में डालता तो फ़ौरन झड़ जाता।
“क्यों? बहुत खुजली हो रही है?” मैंने छेड़ते हुए पूछा।
“मत पूछो… ! दिल करता है कि बस…”
“बस क्या?”
जवाब में उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और अपनी चूत की तरफ खींचने लगी। मैंने आगे से उसकी चड्डी हटाई और अपना मोटा, गरम सुपारा उसकी चूत के मुँह पर रख दिया और रगड़ने लगा। इससे उसकी भग्नासा भी रगड़ खाने लगी। मैंने एक झटके में अपनी टी-शर्ट उतारी और उसकी गांड पकड़ के अपनी ओर खींचा और ऊपर से लंड रगड़ के गीली चूत पर घिसने लगा। उसके नंगे मम्मे मेरी नंगी छाती से दब रहे थे। मेरा लंड उसकी चड्डी में था। मेरे पूर्व-स्राव और उसकी चूत के रस ने चड्डी को आगे से बिलकुल भिगो दिया था। मेरे लंड पर उसकी चड्डी का दबाव भी पड़ रहा था। मैंने उसको धीरे-धीरे पीछे धक्का देते हुए दीवार के सहारे लगा दिया। उसे दीवार ठंडी तो ज़रूर लगी होगी मगर वो वासना में इतनी खोई थी कि उसने परवाह नहीं की। मैंने उसे दीवार के सहारे लगा कर उसकी गांड पकड़ के उसी चूत रगड़ाई शुरू कर दी।
“हाँ और जोर से…कितने दिन से प्यासी हूँ मैं तेरा गरम लंड यहाँ लगवाने को !”
“ले मेरी जान… इसके बाद अन्दर डाल के खुजली भी दूर करूँगा।”
हम दोनों इतने गरम हो चुके थी कि जैसे ही हमने अपनी ज़बानें एक दूसरे से लगाई, मेरे लंड ने ज़ोरदार पिचकारी छोड़ दी। ढेर सारा गरमागर्म, गाढ़े पानी ने उसकी चूत और चड्डी पूरी तरह भिगो दी। मेरे पानी की गर्मी से उसकी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया। मज़े के कारण हम दोनों की आँखें बंद हो गईं और हम दोनों पता नहीं कितनी देर तक ऐसे ही खड़े रहे।
इसके आगे की कहानी मैं तभी लिखूंगा जब आप लोग मुझे ईमेल करके प्रोत्साहित करेंगे। Hindi Sex Stories
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