Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in West Siang Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

पूजा, २४ साल की जवान लड़की, अपने शरीर की आग से हमेशा जलती रहती थी। उसके माता-पिता विदेश में थे, घर में वह और उसका १८ साल का भाई प्रकाश ही रहते थे। पूजा की जवानी ऐसी थी कि हर दिन उसकी योनि में आग जलती थी, उसके स्तन तनाव से भरे हुए थे। वह कई लड़कों से दोस्ती करती थी, और उनके साथ यौन संबंध बनाकर अपनी इच्छा शांत करती थी। हर रात उनके स्पर्श से उसका शरीर थरथराता था, लेकिन पर्याप्त नहीं था – उसे और ज्यादा चाहिए था। एक दिन, पूजा ने घर पर ही दो लड़कों को बुलाया था। उनके आने से घर का वातावरण ही गर्म हो गया था। पूजा के कमरे में आकर उन लड़कों ने पूजा के कपड़े एक-एक करके उतार दिए। उसके सफेद ब्रा और काले पैंटी से ढके शरीर अब नग्न था। एक लड़के ने पूजा के स्तनों को जोर से चूसना शुरू किया, उसके निप्पल कड़े होकर खड़े हो गए थे। दूसरे लड़के ने उसकी योनि में जीभ से खेलते हुए चूसना शुरू किया, पूजा की योनि से रस टपक रहा था। पूजा चीख रही थी, "आह्ह... ऐसे ही... बेबी...!" उन दोनों लड़कों ने उसे बीच में रखकर एक साथ संभोग किया, पूजा का शरीर थरथराता था, उसकी योनि में लिंग घुसते-निकलते आवाज आ रही थी। लड़कों ने वीर्य पूजा के मुंह में गिरा दिया, और पूजा भी संतुष्ट होकर हंस रही थी। लेकिन यह सब प्रकाश देख रहा था। वह छिपकर दरवाजे के पीछे से देख रहा था। उसके १८ साल के शरीर में बहुत उत्तेजना जागी। पूजा का नग्न शरीर, उसने लड़कों को बेबी... और ज्यादा... कहे शब्दों से, उसकी योनि से टपकते रस ने – सबने प्रकाश को पागल बना दिया। उसका लिंग कड़ा होकर खड़ा हो गया, पैंट के अंदर दुखने लगा। वह चुपचाप बाथरूम में भागा, जहां पूजा की धुली ब्रा और पैंटी रखी थी। प्रकाश ने उन ब्रा और पैंटी को हाथ में लिया, पूजा की योनि की गंध सूंघी। वह उत्तेजित होकर ब्रा को चूसने लगा, और पैंटी को भी जीभ से चाटने लगा। "दीदी... तुम्हारी योनि और दूध... मुझे चाहिए," वह मन ही मन कह रहा था। उसने अपना लिंग निकालकर उन अंडरवेयर पर रगड़ते हुए हस्तमैथुन किया, और वीर्य गिराया। उस रात वह पूजा के बारे में ही सोचता रहा। दिन बीतते गए, प्रकाश की इच्छा बढ़ती गई। वह दीदी की हर गतिविधि देखता था – वह नहाते समय, कपड़े बदलते समय। एक रात, प्रकाश ने बहाना बनाया, "दीदी, आज मुझे अकेले डर लग रहा है, मैं आपके ही कमरे में सोऊंगा न?" पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, भाई।" रात में पूजा सो गई, उसका शरीर नाइटगाउन के अंदर छिपा था, लेकिन स्तनों के निप्पल खड़े थे शायद ब्रा नहीं पहनी थी। प्रकाश चुपचाप उसके पास सोया। मध्यरात्रि में, प्रकाश ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और दीदी की पैंटी के अंदर हाथ घुसाया, उसकी योनि नरम और गर्म थी। उसने अपनी उंगली से योनि को खेलाना शुरू किया, धीरे-धीरे घुमाते हुए। पूजा की सांस तेज होने लगी, वह सो रही थी लेकिन पूजा का शरीर पसीने से पूरी तरह भीग चुका था। प्रकाश ने और साहस किया – दीदी का नाइटगाउन ऊपर सरकाकर स्तन बाहर निकाला और कड़े निप्पल को मुंह में रखकर चूसने लगा, और जीभ से स्तन के चारों ओर और कांखों को चाटने लगा। पूजा की योनि से रस टपकने लगा, उसका शरीर थरथराने लगा। पूजा धीरे-धीरे जागी, लेकिन उत्तेजना ने उसे रोकने नहीं दिया। "भाई... यह क्या कर रहा है?" उसने सिसकी भरते हुए कहा। लेकिन प्रकाश ने न सुनने का बहाना करके स्तन चूसना जारी रखा। उसने पूजा की पैंटी नीचे सरकाई और योनि को चूसना-चाटना शुरू किया, और अपना लिंग निकालकर उसकी योनि में घुसा दिया। "दीदी... आप मुझे होते हुए भी दूसरों के साथ किया मैं सहन नहीं कर सका... आपके बुब इतने मीठे हैं," वह चीख रहा था। पूजा की योनि गर्म और गीली थी, प्रकाश का लिंग आसानी से घुसता-निकलता था। उनके शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे, पूजा के स्तन हिल रहे थे। पूजा ने भी इच्छा जागकर भाई को गले लगाया, "आह्ह... ऐसे ही... गहरा धक्का दे!" उन्होंने घंटों तक संभोग किया – प्रकाश ने झड़ने के समय जोर-जोर से दीदी के दूध चूसते और कांखें चाटते हुए पूजा की योनि में वीर्य छोड़ा। उनके शरीर पसीने से भीगे थे। उस रात से उनके संबंध नए रूप में शुरू हुए – दीदी-भाई के बीच यौन की आग जलने लगी, जो उन्हें हर रात उत्तेजित करने लगी।

मेरा नाम अर्चना है.
मैं मुंबई की रहने वाली हूँ.
मेरी शादी इंदौर में हुई है लेकिन फ़िलहाल भोपाल में अपने पति के साथ रहती हूँ.

मेरे पति एक मल्टीनेशनल कम्पनी में मैनेजर हैं और वे महीने में 15 से 20 दिन बाहर ही रहते हैं.

मेरी उम्र 35 वर्ष है.

दोस्तो, मैं इतनी ज्यादा कामुक और सुन्दर हूँ कि हर कोई मुझे पकड़कर चोदना चाहता है.
हर इंसान मुझे बुरी तरह से जंगली बन कर चोदना चाहता है.

मैं भी अपनी पसंद के मर्द से लग जाती हूँ.
अभी तक मैं कितनी बार और कितने मर्दों से चुद चुकी हूँ, ये मुझे खुद याद नहीं है.

पर बहुत सी चुदाई मुझे अच्छे से याद हैं.

जैसा कि मैंने लिखा है कि मुझे खुद भी अलग अलग मर्दों से चुदना बहुत भाता है और मोटे व काले लंबे लंड मुझे प्रिय हैं.
उस पर भी लौड़े पर खोपरे का तेल लगा हो तो कहना ही क्या.

मैं दिखने में बिल्कुल अमृता राव की ट्रू-कापी हूँ.
मेरा सीना 34, कमर 32 और नितम्ब 38 के हैं.

स्कूल और कालेज लाइफ में लड़के मुझे अमृता राव ही बुलाते थे.

उस समय विवाह फिल्म रिलीज हुई थी, तब उस फिल्म के सभी गाने लड़के मुझे देखकर गाया करते थे.
मुझे बड़ा मजा आता था.

मैंने अपने आपको बिल्कुल फिट रखा है।
शुरू से ही मेरा मानना है कि फिट बॉडी को हर कोई सेक्सी निगाहों से देखता है.
मुझे मर्दों की कामुक नजरों से घूरा जाना बहुत अच्छा लगता है.

स्कूल में पहला अनुभव जब हुआ था, जब एक सहपाठी द्वारा मुझ पर यौन आक्रमण हुआ था.

मैं उस समय पढ़ने में सबसे तेज थी तो सभी लड़के और लड़कियां मेरे आस-पास ही मंडराते थे.

उनमें एक मेरा सहपाठी भी था, जिसका नाम संजय था.
वह पढ़ने में ठीक-ठाक ही था लेकिन था खूब मस्तीखोर.
हर समय उसे मस्ती ही सूझती थी.
दूसरी बात ये कि वह मुझे हमेशा घूरता रहता था.

उस समय मुझे इन सब चीजों की आदत नहीं थी तो मैं उससे डर गई.
मैंने उससे बात करना बंद कर दी.

उसने भी मुझे देखना बंद कर दिया, जिससे मुझे डर लगना बंद हो गया.

बात दिसंबर में क्रिसमस की छुट्टियों की है.
स्कूल से हमें एक टूर पर ले जाया जा रहा था.

यह जगह ओखला पक्षी अभ्यारण्य था, जो कि दिल्ली से 22 किलोमीटर की दूरी पर है.

पापा से अनुमति लेकर मैं भी टूर पर जाने के लिए तैयार हो गई.
वह तीन दिनों का टूर था जो मुझे एक नया अनुभव देने वाला था.
उसके बारे में मुझे आज तक कुछ भी पता नहीं था.

हम सभी लोग सुबह स्कूल में इकट्ठा होकर सुबह 7 बजे बस से निकले.
दिन भर हमने पक्षियों और अन्य जीवों की जानकारी हासिल की.

शाम को रुकने की व्यवस्था डाक बंगले पर रखी गई थी.
यहीं पर वह समय प्रारम्भ हो गया, जिसने मुझे नया अनुभव दिलाया.

डाक बंगले पर कमरों की कमी थी तो अल्फाबेटिकली 10-10 का ग्रुप बनाकर हम कमरों में शिफ्ट हो गए.
उस समय लड़के लड़कियां सब एक साथ ही रहते थे और सेक्स जैसी कोई भी बात किसी के दिमाग में नहीं आई.

मुझे सबसे आखिर में कोने में कमरे के गलियारे में जगह मिली.
मेरे पीछे संजय था.

उस गलियारे में हम दोनों के अलावा बाकी 8 स्टूडेंट कमरे में थे.
रात में लगभग सभी सो गए थे.

ठण्ड का मौसम था तो सब दुबके हुए सो रहे थे.
मैं भी सो गई थी.
परन्तु संजय नहीं सोया था.

रात में करीब सवा बारह बजे संजय मेरे बिस्तर में आकर सो गया.
जगह कम होने से मैं कसमसाई लेकिन ठण्ड के कारण उठी नहीं.

फिर जल्द ही नींद के आगोश में चली गई.
यही वह रात थी जब मुझे खोपरे के तेल से प्यार हो गया था.

हालांकि इस बात का पता बहुत बाद में चला, जब मैं कॉलेज में आ गई थी.
उस समय मेरी जबरदस्त चुदाई हुई थी.

संजय मुझसे पीछे से बिल्कुल सट कर सो रहा था.
उसने धीरे से मेरी मिड्डी ऊपर कर दी और मेरी चड्डी को खोल दिया.

तब तक भी मेरी नींद नहीं खुली थी.
उसने खोपरे के तेल में अपनी उंगली भिगो कर मेरी गांड के छेद पर लगाना शुरू कर दिया.

धीरे धीरे उसने पूरी उंगली मेरी गांड में डाल दी.
चिकनाहट के कारण और गहरी नींद में सोई रहने के कारण मुझे कुछ अहसास ही नहीं हुआ.

वह तो जब उस कमीने ने उंगली से अन्दर हरकत करना शुरू की, तब जाकर मेरी नींद खुली.
मुझे लगा कि कोई कीड़ा मेरी गांड में घुस गया है.
मैं जोर से चिल्ला दी.

मेरे कमरे के सर उठ कर आए और उन्होंने मुझसे पूछा- क्या हुआ?
मैंने अपने मुँह से कोई आवाज नहीं निकाली.

मैंने कहा- कुछ नहीं सर, मैं नींद में डर गई थी.
सर फिर सोने चले गए.

मैंने सर से इसलिए नहीं कहा क्योंकि संजय मेरे चिल्लाने पर अपने बिस्तर पर चला गया और हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने लगा था.
तो मैंने भी रात में कोई बखेड़ा खड़ा करना उचित नहीं समझा और फिर हम सभी सो गए.

अगले दिन मैं दिन भर उस बारे में सोचती रही कि रात में गुदगुदी हुई तो कैसा लगा था.
फिर मैंने बड़ी कक्षा की सहेलियों से पूछना उचित समझा.

उधर संजय मेरी कक्षा में एक बार फेल हो चुका था तथा बड़ी कक्षा की लड़कियां उसकी दोस्त थीं तो वह उनसे बातें कर रहा था.

मुझे आती देखकर वह दूसरी ओर चला गया.

फिर मैं उन सीनियर लड़कियों के पास गई और रात में जो गुदगुदी हो रही थी, उन्हें उसके बारे में बताया.
वे सभी हंसने लगीं.
उनको पता चल गया था कि मैं अभी इन सब बातों से अनजान हूँ.

उन्होंने कहा- ये सब इस उम्र में होता है … फिर अगर कोई ऐसी गुदगुदी करे, तो उसका मजा लो. इस बात की किसी से शिकायत मत करो.

मैं समझ गई कि संजय ने मुझसे पहले ही उनको सब बता दिया है.
खैर … फिर रात हुई तो मुझे थोड़ा डर सा लगने लगा.

तब हमारे सर ने उनके पास सोने का बोला तो मैंने ही मना कर दिया.
मैं फिर से उसी गलियारे में संजय के पास आकर सो गई.

उधर संजय की आंखों में शरारत के भाव थे और नींद तो नाम की नहीं थी.
जबकि मुझे डर के मारे नींद नहीं आ रही थी.

जैसे ही आधी रात हुई, संजय के हाथ हरकत करने लगे और उसने खोपरा के तेल से लबालब अपनी उंगली मेरी गांड में डाल दी.

मैं एकदम चिहुंक उठी तो संजय बोला- आज चिल्लाई नहीं?

मैंने गुस्से में उसे देखकर उंगली निकालने को कहा.
तो उसने अपने एक हाथ को मेरे गले में डालकर मेरे दूध को दबा दिया, फिर दो उंगलियों से मेरे चूचुक को मींजने लगा.

साथ ही वह अपनी उंगली को मेरी गांड में अन्दर बाहर करने लगा.
मुझे जो गुदगुदी उस समय हो रही थी, उसका मजा अलग ही था.

मैंने भी ज्यादा विरोध नहीं किया.
जिससे संजय का हौसला बढ़ता ही गया और वह उंगली को तेजी से अन्दर बाहर डालने लगा.

अब रजाई के अन्दर पटपट सट सट की आवाज आने लगी थी.

अचानक उसने अपनी उंगली निकाल ली.
मैंने समझा कि वह फिर से तेल लगाकर पेलेगा.
मैं यही सोचकर आंख बंद करके ऐसे ही नंगी ही लेटी रही.

उधर संजय ने एक हाथ से ही अपने छह इंच के लंड पर तेल लगाकर उसे लबालब कर लिया था.

उसका दूसरा हाथ मेरे गले में लिपटा हुआ मेरे दूध सहला रहा था.

फिर वह धीरे से मेरे पीछे आया और अपना पतला लम्बा लेकिन कड़क लंड मेरी गांड में डाल दिया.

थोड़े से दर्द के साथ मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और वह भी मेरी गांड को फचफच फच फच करके चोदने लगा.

जल्दी ही उसने अपना वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया लेकिन मुझे अधूरी छोड़ दिया.

अभी मेरी चूत से पानी तो निकला ही नहीं था जिसके बारे में मुझे कोई खास जानकारी भी नहीं थी.

गांड में उसका लिसलिसा पानी मुझे अजीब सा लग रहा था.
बड़ी मुश्किल से मुझे नींद आई.

सुबह मेरी गांड में जबरदस्त खुजली मची, तो मुझे खूब मजा आया.

मैंने सोच लिया था कि आज गांड मरवाने की आखिरी रात है.
यही सोचकर मैं रात का इंतजार करने लगी.

आखिर रात हुई तो मैंने सर से कहा- मैं और संजय कमरे के बाहर वाले गलियारे में आखिरी में सो जाएं क्या? क्योंकि यहां जगह नहीं है और खिड़की से ठंडी हवा भी आती है.

उस गलियारे के आखिरी में तीनों ओर से दीवारें थीं तो वह हिस्सा पैक था और सामने से कोई भी आता, तो दिख जाता.

लेकिन सर ने मना कर दिया- नहीं, ऐसे नहीं सोने दे सकता हूँ.
फिर खाने के बाद सर फिर रिक्वेस्ट की और उनको वह जगह बताई, तो सर मान गए.

मैंने तुरंत संजय से बोला तो संजय को विश्वास नहीं हुआ और वह बोला- आज फिर से खेलेंगे क्या?
मैंने कहा- हां पूरी रात मस्ती से खेलेंगे.

फिर आधी रात को हम दोनों एक दूसरे के पास सट कर सो गए.
पर आज उसने उंगली नहीं डाली, सीधे अपना लंड बिना तेल के डाल दिया.

मैं दर्द से चिल्लाऊं, इतने में उसने मेरा मुँह दबा दिया.
दर्द से मैं रोने लगी और उसके हाथ को काट लिया.

उसने कहा- आज तेल ख़त्म हो गया है.
मैंने भी गांड मरवाने से मना कर दिया.

वह उठा … और पता नहीं कहां चला गया.

लगभग दस मिनट बाद उसके हाथ में खोपरे का तेल था और वह जल्दी जल्दी आ रहा था.
नजदीक आकर उसने पहले मेरी गांड में तेल लगाया और फिर अपने लंड पर.

तेल लगाने के बाद उसने मुझे उल्टा लेटने को कहा तो मैं लेट गई.
मुझे नहीं पता था कि आज मेरी गांड की बैंड बजने वाली है.

वह मेरे ऊपर चढ़ गया और धीरे से अपना लंड मेरी गांड पर सैट करके रख दिया.
फिर धीरे से धक्का दिया.
तेल लगा लंड लहराता हुआ मेरी गांड में घुस गया.

मुझे आज तेल लगाने के बाद भी बहुत दर्द हो रहा था.
मैं रोने लगी तो अब संजय ने कुछ भी रहम नहीं दिखाया और जोर जोर से मेरी गांड को पेलने में लग गया.

गलियारे में रात के सन्नाटे में फचफच फचफच फच सटासट सटासट की आवाज आने लगी.

मुझे भी अब मजा आने लगा था.
आज मेरी चूत में अजीब सी खुजली मच रही थी.

मैं अपने हाथ से खुजली मिटाने के लिए चूत को जोर जोर से मसल ही रही थी कि अचानक मेरी चूत से चिकना सफ़ेद पानी निकलने लगा.
मुझे बहुत मजा आने लगा था.

उधर संजय भी फचफच फचफच करते हुए गांड में झड़ गया.
उसने अपना सारा वीर्य गांड में टपका दिया.

हम दोनों ने चुदाई के बाद अपने अपने कपड़े पहने और उसी चिकनाहट के साथ सो गए.

आज मुझे बिल्कुल भी अजीब नहीं लग रहा था और मन बिल्कुल शांत था.
मैं पूरी तरह संतुष्ट भी थी.

दोस्तो, मेरा पहला अनुभव गांड चुदाई से शुरू हुआ था.

Indian Sex Stories

लीजिए एक और नई कहानी Indian Sex Stories आपकी खिदमत में पेश है। यह कहानी मुझे मेरी एक सहेली ने सुनाई थी, सो मैं आपको सुनाता हूँ।

बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं है, मैं नेहा अग्रवाल, मेरी शादी मई, 2006 में कवीश से हुई थी। कवीश एक सजीला मर्द था और कामयाब बिज़ेनेस्मैन भी। दो साल तक उसने मुझे शादी का भरपूर सुख दिया, एक मासूम सी बेटी भी दी और मेरी कोई भी तमन्ना
उसने अधूरी नहीं छोड़ी थी।

मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत खुश थी कि अचानक एक दिन कार दुर्घटना में कवीश की मौत हो गई।
मेरे लिए यह ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सदमा था। 2-4 महीने तो रोते-रोते बीत गए पर असली परेशानी तो उसके बाद शुरू हुई। दिन तो जैसे तैसे बीत जाता था पर रात को तो नींद ही नहीं आती थी। कवीश की कमी अब मुझे सबसे ज़यादा महसूस हो रही थी। सिरहाने को बाँहों में भरने से भी मज़ा नहीं आता था।

अब मैं क्या करूँ ! किससे अपने दिल का हाल बयां करूँ ! अपनी बड़ी बहन को बताया तो उसने भी कन्नी काट ली के कहीं मैं अपनी प्यास बुझाने के लिए उसके पति को ही न पटा लूं। सारा दिन घर में रह कर भी काम नहीं चलता था। अपनी ऊँगली से या और चीज़ों से खुद को संतुष्ट करना चाहा पर मज़ा नहीं आया। हालात इतने बिगड़ गए कि मैं अक्सर अपने कमरे में नंगी घूमती रहती थी, पर इस से भी कोई लाभ नहीं हुआ।

एक बार तो घर में आने वाले सेलमैन को पटाने के लिए मैं सिर्फ एक पतली सी नाइटी में उस से कितनी देर बातें करती रही। वो भी मेरे बदन को घूरता रहा पर साले ने ज़रा भी हिम्मत नहीं दिखाई। मैंने उसे खुली बात भी कही कि मुझे तुम्हारा सामान नहीं कुछ और दमदार चीज़ चाहिए जो तुम्हारी पैंट में है, पर वो बोला- सॉरी मैडम मैं सिर्फ सामान ही बेचता हूँ !

मैं सोच कर हैरान रह गई कि कोई कैसे एक भरपूर जवान, गोरी चिट्टी, सुंदर औरत की पेशकश ठुकरा सकता है। खैर जब कहीं बात नहीं बनी तो एक दिन मैं अपने चाचा ससुर के घर गई।

उनका एक बेटा सुरेश था जो करीब मेरी ही उम्र का था पर था भोंदू राम। वो जिस तरह होते हैं न बुद्धू किस्म के बड़े ही सीधे साधे से, वैसा ही था। इसी वजह से उसकी अभी तक शादी भी नहीं की थी कि यह घर गृहस्थी का बोझ कैसे उठा पायेगा, इसे तो दो और दो चार करने भी नहीं आते।

खैर एक हट्टे कटते मर्द को देख कर चाहे वो भोंदू ही सही, पर मेरे मन में कुछ हुआ। दो तीन दिन रहने के बाद जब मैं वापिस आने लगी तो मैंने अपने चचिया ससुर से कहा- अगर कुछ दिन के लिए सुरेश मेरे साथ रहने चले तो मुझे अच्छा लगेगा।

तो उन्होंने खुशी खुशी उसे मेरे साथ भेज दिया, बिना यह जाने कि मेरे दिल में क्या है।

मैंने रास्ते में ही सारी योज़ना बना ली थी। जिस दिन हम घर पहुँचे, रात का खाना खा कर मैंने उसे अपने साथ ही सुला लिया।

एक गहरे गले वाली पतली सी नाईटी पहन कर मैं उसके सामने लेट गई। मैं चाहती थी कि वो मेरा बदन देखे। अपनी बेटी को दूध पिलाने के बहाने मैंने जानबूझ कर अपनी भरी पूरी चूची निकाल कर उसे दिखाई। पर वो तो ऐसे शरमा रहा था जैसे छोटा बच्चा हो।

खैर मैंने बातों बातों में उस से पूछा- सुरेश ! क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं?
वो बोला- हाँ भाभी ! आप बहुत अच्छी हो !
मैं बोली- कहाँ से? यहाँ से ! यह कह कर मैंने अपने गाल पर उंगली रखी।
वो बोला- जी भाभी !

और यहाँ से भी? यह कह कर मैंने अपने स्तन पर उंगली रख कर उससे पूछा।
तो वो शरमा कर बोला- भाभी ! आप बड़ी वो हो !

जब मेरी बेटी सो गई तो मैंने कहा- देख सुरेश ! ज़ीजिया तो दूध पीकर सो गई ! क्या तू भी सोने से पहले दूध पीना चाहेगा?
पर वो बदतमीज़ बोला- नहीं भाभी ! मैं ऐसे ही सो जाऊँगा !. आप मुझे तंग मत करो।

और यह कह कर वो मेरी तरफ़ पीठ करके सो गया। मुझे लगा कि यार मेरी तो सारी योजना ही चौपट हो गई। खैर ! मैं भी सो गई।

सुबह उठी तो देखा की सुरेश अभी सो रहा था मगर उसके पायजामे से उसका तना हुआ लण्ड ऊपर उठा हुआ था। यह तो मेरे सब्र की इन्तहा थी। मैं चुपके से उठ के उसके पास गई और धीरे धीरे से उसके पायजामे का नाड़ा खोला। पायजामे के नीचे उसने चड्डी पहन रखी थी, मैंने धीरे से उसकी चड्डी हटाई तो अंदर एक कुल्हाड़ी के दस्ते जैसा मोटा लम्बा लण्ड खड़ा था।

मैंने बड़े प्यार से उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ कर बाहर निकाला, उसे चूमा। उसके बाद कब मेरी आँखें बंद हो गई और कब उसका लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी, मुझे कुछ पता नहीं चला।
मैं चूसती गई, चूसती गई, मैंने सुरेश के जिस्म में हलचल महसूस की पर मैं आँखें खोल कर देखने की हालत में नहीं थी और तभी बिजली सी कौंध गई, सुरेश ने पानी छोड़ दिया जिससे मेरा सारा मुंह, सर के बाल गर्दन, छातियाँ भीग गए। जैसे कोई बांध टूटा है ऐसे सुरेश झड़ा।
उसका कुछ माल तो मेरे मुंह के अंदर भी चला गया। मैंने नज़र उठा कर देखा, सुरेश बड़ा परेशान सा लग रहा था।

वो बोला- भाभी आप बड़ी गन्दी हो, मेरे साथ गन्दा काम करती हो !
मैंने कहा- तुम्हें किसने कहा कि यह गन्दा काम है? देखो तुम्हें मज़ा आया ! आया या नहीं?
उसने सर हिला कर हाँ कहा।
मैंने कहा- आओ चलो, नहा कर आते हैं।

मैंने उसका हाथ पकडा और बाथरूम में ले गई। वहां मैंने उसको खुद नहलाया और जानबूझ कर उसके सामने पूरी नंगी हो कर नहाई। उससे अपने जिस्म पर साबुन लगवाया ताकि उसमें औरत के जिस्म के लिए चाहत पैदा हो। नहाकर हम बाहर निकले। फिर दिन में मैं उसे बाज़ार भी घुमा कर लाई, उसकी पसंद की चीजें भी उसे लेकर दी। दोपहर का खाना खा कर जब हम आराम कर रहे थे तो मेरी बेटी सोने के लिए जिद करने लगी। मैंने बिना किसी संकोच के सुरेश के सामने ही अपनी शर्ट उतारी और अपनी ब्रा में से एक स्तन बाहर निकल कर उसे दूध पिलाने लगी। सुरेश मेरे सामने बैठा ये सब देख रहा था। मैंने उससे पूछा- अरे सुरेश, क्या देख रहा है?

कुछ नहीं भाभी, वो बोला।
मैंने पूछा- दूध पिएगा?

तो वो शरमा गया। मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी ब्रा हटा कर अपनी दूसरी चूची उसके सामने करके बोली- ले पीकर देख !

पहले तो वो शरमा गया, पर जब मैंने उसका सर पकड़ कर अपने स्तन से लगाया तो उसने धीरे धीरे चूसना शुरू कर दिया। जब ज़ीनिया सो गई तो मैंने अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी और सुरेश से कहा- ऐसे मज़ा नहीं आएगा, मैं बताती हूँ कि कैसे पीना चाहिए।

यह कह कर मैंने उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लिया और उसके दोनों हाथ में अपने स्तन पकड़ा कर कहा- अब इन्हें चूसो !

उसने ऐसे ही किया। मैंने नीचे से अपनी कमर हिलानी शुरू की मैंने महसूस किया कि उसका लण्ड अकड़ने लगा था। जब उसका लण्ड पूरा तन गया तो मैंने कहा- सुरेश और मज़ा लेगा?

तो वो शरमा गया पर सर हिला कर उसने हाँ कह दी। मैंने अपनी सलवार उतारी और अपनी चूत उसके सामने खोल कर दिखाई और उसके लण्ड को पकड़ कर बोली- इसको इसमें डाल कर आगे पीछे करते हैं तो बहुत मज़ा आता है, बोल करेगा?

उसने फिर सर हिलाया तो मैंने झट से उसकी पैंट, शर्ट, बनियान और चड्डी उतार दी। मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पे रगड़ा तो वो बोला- भाभी ! वैसे करो जैसे सुबह किया था।

मैंने हंस कर कहा- क्यों मज़ा आया था न !
वो बोला- हाँ !

तो मेरे राजा अगर सुबह वाला काम करवाना है तो तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा, अगर मैं तुम्हारा चूसूंगी तो तुम्हें भी मेरी चाटनी पड़ेगी !

वो तैयार तो हो गया पर जब उसने मेरी चूत में मुंह लगा कर चाटा तो बोला- थू ओ ! ये तो गन्दा स्वाद है !

खैर मैंने उसे मजबूर नहीं किया, कुछ देर उसका लण्ड चूसने के बाद मेरी अपनी हालत बड़ी ख़राब हो रही थी सो मैंने उसकी पोसिशन अपने ऊपर सेट की और उसका लण्ड अपनी चूत पर रख कर उसे अंदर डालने को कहा।
उसने सी सी करते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डाला मगर वो ढंग से चोद नहीं पा रहा था।
मैंने सोचा- ऐसे तो मज़ा नहीं आएगा। यह चोद कम रहा है और हाय तौबा ज्यादा मचा रहा है।

फिर मैंने कमांड संभाली, उसे नीचे लिटा कर खुद ऊपर आ गई। चूत में लण्ड लेकर मैंने खुद ही चुदाई शुरू की। वो नीचे से हाय तौबा करने लगा तो 2 चांटे लगाये उसके और पूरे जोर से चुदाई करती रही और तब तक करती रही जब तक मैं झड़ नहीं गई। पर वो मर्द का बच्चा अभी खड़ा था सो मैंने अपनी तसल्ली होते ही नीचे उतार कर उसका लण्ड अपने मुंह में ले लिया और अपनी चूत 69 बनाते हुए उसके मुंह पर रख दी। बेशक उसने मेरी चूत नहीं चाटी पर मैं अपनी चूत उसके मुंह पर रगड़ती रही और उसका लण्ड चूसती रही और तब तक चूसती रही जब तक वो झड़ नहीं गया।

जोश ही जोश में मैं उसका सारा माल चट कर गई और संतुष्ट हो कर बेड पर लुढ़क गई क्योंकि आज मेरी तमन्ना पूरी हो गई थी। उसके बाद सुरेश मेरे पास 15 दिन और रहा और हमने तकरीबन रोज 2-3 बार सेक्स किया और हर स्टाइल से किया। मेरी इस सेक्स-शिक्षा का असर यह हुआ कि भोंदू राम को अकल आ गई और आज वो अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी जी रहा है। Indian Sex Stories

Antarvasna

दोस्तो, यह जिस्म, यह Antarvasna जवानी, यह नाज़ुक-नाज़ुक अंग सदा नहीं रहेंगे। आज हो कल नहीं ! यह किसने जाना है ! अगर भगवान् ने औरत और मर्द बनाए हैं, हर औरत एक जैसी नहीं होती, हर मर्द एक जैसा नहीं होता। लेकिन लौड़े की चाहत, चूत की चाहत किसको नहीं होती?

कौन कहता है कि कामवासना अपने हाथ में होती है ! जी नहीं ! मेरी थोड़ी कुछ अलग है। लगभग हर औरत की होगी।

मैं ऐसे माहौल में बड़ी हुई, बहुत उच्च वर्ग के परिवार से ताल्लुक रखती हूँ। मैं बी.सी.ए प्रथम वर्ष की छात्रा हूँ। मेरे माँ-बाप के पास मेरे लिए समय नहीं है। असल में किसी भी बच्चे के लिए समय नहीं था, पैसा अँधा था, होना भी चाहिए।

सोलहवें ही साल में मैंने सेक्स का सुख पा लिया था। अपनी मॉम, बहनों, पापा को अपने-अपने दोस्तों के प्रति चाहत थी। सातवीं कक्षा में थी जब मैंने अपने ही घर में अपनी मॉम को गैर-मर्द की बाँहों में झूलता देखा, वो भी पापा के बेस्ट फ्रेंड से ! उसके इलावा भी मैंने कई बार अपनी मॉम को अलग-अलग मर्दों की बाँहों में देखा था।

अपनी ही बहन को रात उसके बेडरूम, में आधी रात को चुदाई करते देखा।

पापा ज्यादातर घर से बाहर ही रहते थे, बिज़नस ही धर्म-करम सब कुछ था।

ऊपर से मेरी दोस्ती मध्यम वर्ग की कुछ लड़कियों से, जिनके एक नहीं, कई बॉय फ्रेंड थे। यह सब कुछ देख देख कर मेरा दाना भी फड़कने लगा, जवानी यार मांगने लगी, खुद को दबवाने के लिए, शांत करवाने के लिए ! लड़कों के गंदे-गंदे कटाक्ष अब अच्छे लगने लगे। उसके बाद शुरु हुआ मेरी जवानी का लुटाना ! पसंद के लड़कों से शुरु हुई जो अब बंद नहीं करना चाहती !

आखिर अपने इर्द-गिर्द मंडराने वाले भंवरों को अपना रस चखाने का फैंसला कर लिया और एक बहुत बड़े ट्रांस्पोर्टर के लड़के को मैंने हाँ कह दी। अपने लेवल, अपने स्टैण्डर्ड के ही लड़के को हाँ कही थी मैंने भी !

उसके साथ लॉन्ग-ड्राइव पर जाना, रात को डिस्को लेकर जाना ! आखिर एक दिन उसने मुझे अपना फार्म हाउस दिखाने लेकर गया। आलिशान सा फार्म हाउस मेरे लिए आम सा था। सीधा कार से उतर उसके बेडरूम में गए और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया। मैं भी बेल की तरहं उससे लिपट गई, वो पीछे से मेरे भरे-भरे गोल-मोल चूतड़ों को दबाने लगा और मेरे होंठ चूसने लगा। मैं भी गरम होती गई और नीचे से हाथ डाल उसके लौड़े को मसलने लगी। उसका खड़ा हो चुका था और मेरे हाथ में था।

उसने झट से मेरी टॉप उतार फेंका और फिर जींस खींच कर उतार दी।मेरी गोरी-चिट्टी जांघें देखकर उसका लौड़ा सख्त हो गया। उसने मेरी ब्रा उतार मेरा मम्मा मुँह में ले लिया और फिर मेरे चुचूक को चूसने लगा। जिससे में भड़क उठी और जोर से उसके लौड़े को मसलने लगी और फिर उसकी पेंट उतार ऊपर से उसका लौड़ा मसलने लगी। उसने मुझे नीचे दबाते हुए अपना लौड़ा मेरे होंठों पर टिका दिया और मैंने उसको मुँह में डाल दिया, उसके लौड़े को चूसने लगी।

अब उसने मेरी चड्डी उतार मेरी कोरी चूत पर जैसे ही मरदाना हाथ फेरा, वो पल मेरी जिंदगी का हसीन पल बन गया। वाह वाह ! क्या नज़ारा आया !

उसको मालूम हो गया कि चूत कोरी है ! उसने 69 में लिटा कर अपने होंट उसपर रख दिए जिससे वासना और भड़क उठी। मैं जोर-जोर से उसका लौड़ा चूसने लगी, वो मेरे दाने से खेल रहा था।

मैं अब आपे से बाहर होने लगी। यह देख उसने मुझे लिटाते हुए मेरी टांगें चौड़ी करवा दी और बीच में बैठ अपना लौड़ा चूत पे टिका दिया।

प्लीज़ घुसा दो इसको मेरे अन्दर !

उसने मेरी दोनों बाहें पकड़ ली और मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए और ज़बरदस्त झटका दिया। लौड़ा चूत चीरता हुआ अन्दर घुसने लगा। मैं चिल्लाना चाहती थी लेकिन वो खिलाड़ी था इस खेल का ! उसने पूरी मर्दानगी सीख रखी थी, पूरा घुसा कर उसने पूरा निकाल दिया, फिर से डाला, फिर निकाला ! मेरे खून से उसका लौड़ा भीगा पड़ा था।

यह देख मैं रोने लगी पर उसने मेरे होंठ नहीं छोड़े। जैसे ही मैं नीचे से चूतड़ उठाने लगी, उसने मेरे होंठ छोड़ दिए। मैंने चैन की सांस ली और उसकी छाती पर मुक्के मारे- अब और करो ! जोर-जोर से करो ! फाड़ डाली मेरी चूत ! लूट ली मेरी सील बंद चूत !

बोला- अच्छा लग रहा है?

मैंने कहा- बहुत अच्छा ! और मारो मेरी !

वो पटक पटक कर मेरी चूत मार रहा था, मैं नीचे से उठ-उठ कर उसे उकसा रही थी- आह !

उसने मुझे कुतिया की तरह घुटनों के बल कर पीछे से मेरी चूत में लौड़ा डाल कुत्ते की तरह चोदने लगा।

वाह ! इतना मजा आता है इस खेल में !

हां ! मजा आ रहा है ना ?

बहुत अच्छा लग रहा है ! फक मी ! फक मी फास्ट, यू रास्कल ! फक माय पसी फास्ट ! यः टेक इट ! अह अह उह उह !

उसने फिर से मुझे नीचे डाल लिया और मेरे ऊपर सवार होता चला गया। पम्प की तरह मेरी चूत चुद रही थी- यह ले साली, कुतिया ! गश्ती ! तू आज से मेरी हुई ! तोड़ डाली सील तेरी फुद्दी की !

हाय, मार मार मेरी लाल कर दे ! चोद हरामी चोद ! हरामी माँ बना दे मुझे ! कुंवारी माँ !

ले ! ले ! करते करते उसने अपना माल मेरे अंदर छोड़ दिया। उसका गरम-गरम माल वो भी इतना निकला कि बाहर गिरने लगा। उसने लौड़ा निकाल मेरे मुँह में डाल दिया, मैंने साफ़ कर दिया। उस पूरे दिन उसने मुझे तीन बार चोदा और मुझे कच्ची कली नहीं रहने दिया। मुझे भी सेक्स का इतना स्वाद आया और अब मौका मिलते हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे।

फिर वो इंग्लैंड में पढ़ने चला गया और मेरी चूत प्यासी रहने लगी।

मेरा अफेयर एक और लड़के के साथ चल निकला और मैंने उसको अपने घर बुलाया, वो बोला- रात को अकेला नहीं आऊंगा ! अपने कज़िन को साथ लाना पड़ेगा, तभी घरवाले रात को बाहर आने देंगे।

मैं मान गई। उसके बाद दो दो लौड़े मिले, उसके बारे में लिखूंगी अगली बार ! Antarvasna

आपा को चोदने के बाद मैं सऊदी चला गया काम करने!
लेकिन हम दोनों वीडियो कॉल करके अपने आप को शांत कर लेते थे.
लेकिन खुदा को कुछ और ही मंजूर था।

फिर एक दिन मेरी डार्लिंग आपा का कॉल आया.
वे रो रही थी.
मैंने पूछा- क्या हुआ? क्या चाहिए? मेरी याद आ रही है क्या? बोलो जान … अपने भाई का मोटा लंड याद आ रहा है क्या? बोलो … तुम सिर्फ रोये जा रही हो. क्या बात है बोलो?

उसने बताया- अम्मी अब्बू एक शादी में गए थे। शादी में से घर आ रहे थे पर रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया और वे दोनों खत्म हो गए. तुम फौरन घर आ जाओ.
मैंने इतना ही सुना … मेरे तो होश उड़ गए.

मैं फौरन घर जाने की तैयारी करने लगा.
मैंने पहले से बहुत शौपिंग कर राखी थी अपनी आपा के लिए और घर वालों के लिए।

खैर जैसे तैसे टिकट तो मिल गया और मैं घर के लिए निकल गया.

फिर अगली सुबह घर पहुंचा तो घर पे सब लोग जमा हुए थे.
आपा ने मुझे देखा और आकर मेरे गले लग गई.

वे रो रही थी.
मैंने उन्हें चुप कराया.

फिर हम सब मिट्टी देने के लिए चल दिए.

मिट्टी दे कर आए और सब धीरे धीरे सब अपने अपने घर चले गए.
मेरे घर में मैं और मेरी आपा के अलावा कोई नहीं था.

हम दोनों रो रहे थे.

जैसे तैसे हम दोनों ने अपने आप को संभाला और फिर कुछ दिन बीत गए.

2 महीने बाद हम दोनों के चेहरे पर हंसी आई.

फिर एक दिन आपा बोली- आसिफ, तुमने अपना सऊदी वाला बैग अभी तक नहीं खोला?
मैं: क्या करूं आपा, टाइम ही नहीं मिला.

कुछ देर ऐसे बात करते करते आपा रोने लगी और मेरे सीने से लग कर रोने लगी.

मैंने पूछा- क्या हुआ आपा, क्यों रो रही हो, क्या बात है?
आपा- कुछ नहीं, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.
मैं- मैं भी आपके बिना नहीं रह सकता.

फिर मैंने आपा को चुप कराया और उनको देखने लगा.

आपा बोली- क्या देख रहे हो? अपने बहन को नहीं देखा है क्या?
मैं बोला- मैं यह देख रहा हूं कि मेरी आपा वो आपा नहीं रही जैसे मैं छोड़ कर गया था।

आपा बोली- मतलब क्या है तुम्हारा?
मैं बोला- मतलब आप पहले से ज्यादा भर गई हो. आपकी चूची जो मैंने 34 से ३८ कर दी थी, अब 44″ से कम नहीं दिख रही … यह कैसे किया?
आपा बोली- ये सब मैंने तुम्हारे लिए ही किया है. मुझे पता है कि तुम्हें बड़ी चूची अच्छी लगती है.

फिर वे बोली- और अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती. इस दुनिया में हमारा एक दूसरे के अलावा और कोई नहीं है.
मैं बोला- हां आपा, आप सही बोल रही हो. मैं आपसे कुछ पूछूं तो आप मानोगी?

आपा बोली- हां बोलो ना, क्या बात है बोलो?
मैं बोला- आपा, क्या आप मुझसे शादी करोगी? इस दुनिया में हम दोनों का कोई नहीं है.
आपा बोली- यही तो मैं भी कह रही हूं.

मैं- तो ठीक है, हम लोग अब यहां नहीं रहेंगे. यहाँ का सब कुछ बेच कर दूसरे शहर में रहेंगे जहां हमें कोई नहीं जानता हो, वहाँ चल कर हम दोनों शादी कर लेंगे.
आपा- अच्छा तो अब अपना सऊदी वाला बैग खोलो. मैं भी देखूं क्या लाए हो मेरे लिए?

मैं- नहीं आपा डार्लिंग, अब यह शादी के बाद ही खुलेगा.

फिर हम दोनों भाई बहन वहाँ का सबकुछ बेच कर गोवा आ गए.
यहां पर मैंने एक रूम ले लिया.

फिर 5 महीने बाद हमने शादी कर ली और हम दोनों सुहागरात मनाने बेड पर आ गए.

इन 5 महीने में हम दोनों ने एक बार भी लंड चूत का खेल नहीं खेला था।

आपा- आसिफ, मेरे भाई राजा, मेरी जान … आओ ना … अपनी सगी बड़ी बहन, अपनी आपा को चोदो ना! जब से तुम सऊदी गए थे तब से मैं तुम्हारे लौड़े के लिए तड़प रही हूं. अब तो मैं तुम्हारी बेगम बन गई हूं. अब मैं तुम्हारी पूरी तरह से रखैल बन गई हूं. अब कोई डर नहीं है, जितना जी कहे उतना मुझे चोदो. आओ ना भाई!

मैं- सब्र करो मेरी जान आपा, अब तो आप मेरी हो ही गई हो. मैं आपको … सॉरी आपको नहीं, तुम्हें … अब तुम मेरी सगी बहन बनी बीवी हो, रखैल हो. अब मैं तुम्हें तुम कह कर बुलाऊंगा और तुम भी मुझे तुम कहोगी।
आपा- ठीक है।

मैं- अब तो आपा, मैं तुम्हें तब तक चोदूंगा जब तक तुम अपनी चूत से हम दोनों का बच्चा नहीं निकाल देती!

आपा- अच्छा आसिफ, सऊदी से मेरे लिए क्या लाए हो?

मैं- आपा सब तुम्हारे लिए ही लाया हूं. सब हॉट चीजें हैं. जींस, टीशर्ट, शर्ट और स्कर्ट टॉप और बहुत सारा ब्रा पैंटी!
“वाव … ब्रा पैंटी … दिखाओ ना जान!” आपा बोली.
मैंने कहा- आज नहीं कल!

“और क्या लाए हो?” आपा बोली.
मैंने बताया- और कंडोम सऊदी का है.
आपा बोली- क्या जान, मुझे कंडोम नहीं पसंद हैं ना!
तो मैंने कहा- हां जानता हूं. लेकिन सिर्फ 6 पीस हैं, कभी कभी लगा के तुम्हें पेलूंगा, चोदूंगा.

आप बोली- ठीक है, लेकिन आज नहीं क्योंकि आज हमारी सुहागरात है और मैं पूरा मजा लेना चाहती हूं। बहुत दिन से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं. समझे मेरे भाई डार्लिंग!
“हाँ मेरी आपा डार्लिंग!”

आपा- तुम जानते हो जब तुमने मेरी यानि अपनी सगी बहन की चूत सील तोड़ी थी तभी मैंने तुम्हें बताया था कि मुझे बिना कंडोम के चुदना पसंद है. क्यों पसंद है आज मैं तुम्हें ये भी बता दूं. जब तुमने मुझे चोदा था तब तुमने अपनी मनी, वीर्य यानि अपना माल मेरी चूत में निकाला था. तभी मैंने सोच लिया था कि कभी कंडोम लगा कर नहीं चुदूंगी।

मैं बोला- अच्छा अब ये सब छोड़ो … अब हम दोनों सगे भाई बहन जो अब शादी करके मिया बीवी बन गए हैं, अब हम दोनों अपनी सुहागरात मनाते हैं.

फिर मैंने पूछा- लाइट बन्द कर दूं आपा?
“नहीं जलने दो, तभी मजा आयेगा!”

अब सगे भाई बहन और मिया बीवी की सुहागरात यानि Xxx सिस्टर नाईट सेक्स स्टोरी शुरू!
मैं आपा के पास गया.
आपा ने लाल रंग की लहंगा पहना हुआ था.
वे इस जोड़े में बहुत ज्यादा सेक्सी और हॉट लग रही थी.

मैंने आपा का घूंघट हटाया.
क्या मस्त रसीले होंठ लग रहे थे उनके!

फिर मैंने आपा के सारे गहने उतारे और उनके माथे पर एक बोसा लिया.

धीरे धीरे हम दोनों के होंठ मिल गए.
लगभग 15 मिनट किस किया हमने!

फिर आपा बोली- अपने भाई बने शौहर का लन्ड देखूँ तो जरा!
मैंने कहा- हां आपा, यह आपका ही है.

फिर मैंने अपनी पैंट उतार दी और मेरा लन्ड बाहर आ गया.
आपा बोली- भाई, यह तो पहले से ज्यादा बड़ा हो गया है. बहुत मजा आयेगा.

फिर आपा ने मेरा लन्ड चूसना शुरू कर दिया और वे बहुत देर तक चूसती रही.

फिर मैंने आपा के सारे कपड़े उतार दिए.

क्या कयामत लग रही थी आपा … उनके बडे़ बड़े बूब्स और चिकनी चूत देख कर मेरा लन्ड और सख्त हो गया।

फिर मैंने आपा की चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और आपा को भी!

वे बोले जा रही थी- हां भाई … बहुत मजा आ रहा है. ऐसे ही चूसो मेरी चूत को … आह आह आह … प्लीज़ भाई … अब मत तड़पाओ. चोद दो अपनी बहन बनी बीवी को!

अब तक आपा दो बार झड़ चुकी थी.
मैं अपनी उंगली आपा की चूत में डाल कर चोद रहा था.

फिर मैं उठा और आपा को सीधा लिटा दिया और उनकी कमर के नीचे एक तकिया लगाया, फिर अपने लन्ड पर थूक लगाया और आपा की चूत पर भी.
और फिर धीरे धीरे आपा की चूत में लन्ड घुसाने लगा.

आपा की चूत बहुत टाइट थी और आपा को दर्द भी होने लगा था.
वे बोल रही थी- आसिफ, बहुत दर्द हो रहा है!

मैंने कहा- बाहर निकाल लूं क्या?
तो आपा बोली- नहीं … तुम बस चोदो मुझे!

फिर मैंने एक जोर का झटका मारा और मेरा पूरा लन्ड आपा की चूत में समा गया, उनकी बच्चेदानी से टकरा गया.
आपा छटपटाती रही.

मैं रुक गया थोड़ी देर के लिए और उनके बूब्स को दबाने लगा.

थोड़ी देर बाद जब आपा का दर्द कम हुआ तो आपा ने अपनी कमर हिला कर इशारा किया कि अब मुझे चोदो.

फिर मैंने धक्का लगाना शुरू कर दिया।
आपा बस बोली जा रही थी- आह अह आह आसिफ … बहुत मजा आ रहा है. चोदो … चोदो मुझे … अपनी बहन का बुर का भोसड़ा बना दो. अब तो मैं तुम्हारी बीवी हूं. चोदो चोदो भाई … और तेज चोदो. आह आह आह … अह क्या बात है. फक मी … फक मी हार्ड … भाई और तेज … और तेज चोदो मुझे … अह आह आह … भाई ल्ला कसम बहुत मजा आ रहा है भाई!

फिर मैंने आपा को अपने ऊपर आने के लिए बोला.
वे मेरे ऊपर आ गई, मेरे लन्ड पर बैठ कर चुदने लगी।

बहुत देर तक मैंने आपा को ऐसे ही चोदा.
फिर मैंने अपनी बीवी यानि अपनी बहन को बेड पर फिर से सीधा लिटा दिया और उनका दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और उनकी चूत में अपना लन्ड डाल दिया.

आपा फिर चीखी- आह भाई, क्या कर रहे हो. आराम से … मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूं. अब तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारी बन गई हूं.

फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

इस बीच आपा दो बार झड़ चुकी थी.
मैं बहुत तेज धक्का मार रहा था.
अब मैं भी झड़ने वाला था.

मैंने आपा से बोला- आपा मेरी जान, मैं झड़ने वाला हूं।
तो आपा बोली- भाई मेरी जान, मेरी चूत को पिला दो तुम्हारा माल … तुम मेरे अंदर ही अपना सारा माल झाड़ दो!

फिर 40 50 धक्कों के बाद मैं आपा की चूत में ही झड़ गया.
झड़ने के बाद भी मैंने आपा को 2 मिनट तक चोदा.

फिर मैं निढाल होकर आपा के ऊपर ही लेट गया.
कुछ देर बाद मैं उतर कर उनकी बगल में लेट गया.

मैंने आपा से पूछा- आपा डार्लिंग, मजा आया?
तो आपा बोली- हां बहुत मजा आया. अपने भाई को शौहर बनाकर चुद कर बहुत मजा आया.

हम दोनों ऐसे ही बात करते रहे.

कुछ टाइम बाद आपा मेरे लन्ड को सहलाकर उसे खड़ा करने लगी।
तो मैंने पूछा- क्या बात है आपा? फिर चुदना है क्या?
तो आपा बोली- हां!

फिर से हम दोनों गर्म हो गए और फिर चालू हो गए.
उस रात मैंने अपने सगी बहन से शादी करके सुहागरात मनाई और उसे कई बार चोदा.

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆