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दोस्तो, मैं फिर आप लोगों Indian Sex Stories की सेवा में आ गया। आप लोगों की काफी मेल आई, बहुत अच्छा लगा कि आप सभी लोगों ने मेरी कहानी को पसंद किया। मेरी जिंदगी ऐसे ही जा रही है, कोई भी माल नहीं था कि मैं भी उसके साथ कुछ चुदाई करता लेकिन जल्द ही वह मौका आ गया।
एक दिन मैं और मेरा दोस्त उसके मारुति गाड़ी से शाम के 3 से 6 बजे की फिल्म देखकर आ रहे थे। फिल्म का नाम था “जिस्म”। आप सब जानते ही है कि यह कैसी फिल्म है। फिल्म देखकर मन कर रहा था कि कोई लड़की होती तो बस। शहर से आते हुए एक सुनसान रास्ते से गुजर रहे थे। कुछ दूरी पर एक औरत अपने सर को झुकाकर बैठी थी। मुझे लगा कि वह बीमार है। हमने गाड़ी रोक कर जा कर देखा तो वह रोने लगी। वह एक गन्दी सी साड़ी पहने हुई थी। बाल उसके बिखरे हुए थे। उसकी उम्र 45 से 50 तक की होगी।
मैंने कहा- क्या हुआ? वह बस रोये जा रही थी। काफी पूछने पर बोली- मैं मरना चाहती हूँ बेटा। मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया है। कई दिनों से मैं भीख मांगकर खा रही हूँ। आज तो मुझे किसी ने भीख में भी कुछ नहीं दिया। भूख से पेट दर्द कर रहा है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं कहाँ जाऊँ। मुझे उस पर दया आ गई।
मैंने कहा- मेरे साथ मेरे घर चलिए। मैं आप को खाना खिलाता हूँ।
वह मान गयी। मैंने उसे सहारा देकर गाड़ी में बैठाया। मेरा दोस्त गाड़ी चला रहा था। मैंने एक सेब उसे निकाल कर दिया, वह खाने लगी फिर पानी पी कर उसे कुछ आराम महसूस हुआ। उसे नींद आने लगी। वह बैठे बैठे ही सोने लगी। जब वह सो रही थी तो उसका पल्लू उसके कंधे से सरक कर नीचे गिर गया तो मेरी नज़र उसकी चुचियों पर जा टिकी। मैं न चाहते हुए भी बार बार चुचियों को देख रहा था। मुझे लगा कि उसे घर ले जाना ठीक नहीं है। हम दोनों मिल कर उसे कहीं और ले जाना ठीक समझा।
कुछ दोस्तों ने मिलकर एक कमरा किराए पर ले रखा था जिसमें हम सब डांस-प्रक्टिस करते थे। वह कमरा आबादी से कुछ दूर था। क्योँकि म्यूजिक की आवाज़ से लोगों को तकलीफ होती थी। वहाँ केवल दो कमरे थे, एक किचन। किचन का सामान कोई ख़ास नहीं था। कभी कभी हम सब कुछ पार्टी भी वहां मना लेते थे।
किराये के घर के पास गाड़ी रोकते ही मेरे दोस्त ने उसे उठने को कहा। मैंने उसे उठाया और घर के अन्दर चलने को कहा। घर में पहुँचते ही उस औरत ने कहा- अरे तुम्हारे घर में तो कोई भी नहीं है।
हमने उसे बताया- यह किराये का घर है यहाँ कोई नहीं रहता है।
वह थोड़ा घबराई और कमरे के अन्दर चली गयी। मेरा दोस्त गाड़ी पार्क करने अपने घर चला गया। कुछ देर बाद मेरे मोबाइल पर मेरे दोस्त का फ़ोन आया कि वह नहीं आ सकता है। मैंने किचन में कुछ बनाया और उसे भी खिलाया। खाना खाना के बाद मुझे आशीर्वाद देते हुए धन्यवाद किया। जब मैंने उसके परिवार के बारे में पूछा तो वह कहने लगी- मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया हैं। मेरे पति के मरने के बाद मेरे बेटे और बहू ने दोनों मिलकर सताना शुरू कर दिया था। साडरी बातें कहते कहते वह रोने लगी। जब मैंने उसके सर पर हाथ रखा तो वह एकाएक मुझसे लिपटकर रोने लगी। मैंने भी उसे पकड़ लिया। उसके चूचियां मेरे सीने से दब रही थी। यह महसूस करके मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था। मैं वासना में बहने लगा। धीरे धीरे उसे अपनी और खींचते जा रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि अब मैं उसमें समां जाऊंगा। वह पीछे हटने की कोशिश करने लगी। पर मैं उसे कस कर जकड़े हुए था।
वह कह रही थी- नहीं बेटा, मुझे छोड़ दो, मुझे दर्द हो रहा है।
पर मैं उसे वासना भरी नजरों से देखे जा रहा था। वह अब सब कुछ समझने लगी थी। वह छूटने की नाकाम कोशिश कर रही थी। मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने अपने होंठ उसके सूखे होंठों पर रखे और जोरदार किस करने लगा था। लम्बी किस के बाद अपनी जीभ से उसके जीभ को चाटे जा रहा था। कुछ समय बाद उसकी छटपटाहट कम हुई। पर मैं उसकी जीभ को चाटे जा रहा था। धीरे धीरे उसकी गर्दन और उसकी चुचियों को कपड़ों के ऊपर से ही चाटने लगा था।
वह मदहोश होती जा रही थी। वह बस खड़ी खड़ी मेरी हरकत देखे जा रही थी। मैंने किस करते करते उसकी साड़ी और पेटीकोट को खोल दिया था। जैसे ही मैंने उसके बुर पर हाथ लगाया तो वह मचल गयी। उसके बुर पर बड़े बड़े बाल थे। मैंने एक ऊँगली उसके बुर में डालना चाहा पर पर आसानी से अन्दर नहीं जा रही थी क्योंकि उसकी बुर एकदम सूखी थी। उसके ब्लाउज को खोलकर उसकी चुचियों को चाटने लगा। एकाएक उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया। मैंने फट से अपने सारे कपड़े खोल दिए। वह मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी। फिर अपने मुंह में लेकर चाटने लगी। हम दोनों ६९ के पोजीशन में आकर एक दूसरे के अंगों को चाटने लगे। वह मेरे लण्ड को जोर-जोर से चाटे जा रही थी और कह रही थी- २ साल के बाद मुझे लण्ड चाटने को मिला है, आज तो खूब चाटूंगी।
सूखी बुर को गीली बनाने के लिए बहुत चटाई करनी पड़ी। काफी देर के बाद उसके बुर ने धीरे धीरे पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। उधर मेरा भी छूटने वाला था। मैं उठा और उसे लिटाकर अपना गीला लण्ड उसकी बुर पर रखा और उसे अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। उसने अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया। मैंने लण्ड डालना शुरू किया पर उसे कुछ नहीं हो रहा था। मैंने एकाएक लण्ड को पीछे लाकर जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा लण्ड उसके बुर में पूरा चला गया। वह थोड़ा छटपटाई और उसकी चीख भी निकली।
मैंने चोदना शुरू किया तो वह औरत बोली- जरा जोर से बेटा ….. और जोर से … और जोर से करो। फाड़ दो मेरी बुर को। मैं पूरी ताकत लगाकर उसे चोदने लगा। मेरा लण्ड काफी तेजी से उसकी बुर में अन्दर-बाहर हो रहा था। वह मुझे अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर अपनी ओर खींच रही थी। उसके झड़ने के बाद मैं भी झड़ कर उसके ऊपर लेट कर सो गया।
रात को मेरी नींद खुली तो देखा कि वह औरत मेरे लण्ड को जोर जोर से चाट रही है। लण्ड खड़ा होते ही वह उस पर अपनी बुर रखकर बैठ गई। लण्ड उसकी बुर में सांप सा चला गया। वह उछल-उछल कर चुदवाने लगी और झड़ गई। करीब 3:30 बजे उसे उठाया और जाने को कहा। वह कपड़े पहन कर जा ही रही थी कि 4 बजे मेरा दोस्त वहां आ गया। मैंने उसे सारी बात बताई। उसने उस औरत को पकड़ कर लिटाया और अपना काला लण्ड उसकी बुर में एक ही बार में डाल दिया। उस औरत के मुंह से चीख निकल गई। मेरा दोस्त का लण्ड मेरे लण्ड से काफी बड़ा है।
चुदाई के बाद मेरे दोस्त ने उसे 500 रूपये दिए और जाने को कह दिया, वह चली गयी और फिर नहीं मिली।
जब कोई लड़का कोई औरत को देखता है तो कहता है कि वह तो बूढ़ी है। यारो, सुखी बुर में भी काफ़ी मजा आता है। कोई आस-पास है तो कोशिश कर के देख लो। मेरी आप बीती आप को कैसी लगी जरुर मेल करें। गन्दी लड़कियों का मैं स्वागत करता हूँ। Indian Sex Stories
सबसे पहले तो मैं अन्तर्वासना Hindi Sex Stories का धन्यवाद करना चाहता हूँ मेरी नियमित रूप से कहानी छापने के लिये!
मैं कहानियाँ लिखता भी रहा हूँ और पढ़ता भी रहा हूँ पर नेहा वर्मा की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगती है।
मैंने अपको अपनी पिछली कहानी
लव स्टोरी 2008
में बताया कि किस तरह से उस लड़की ने मुझे मिलने के लिये तड़पाया और मुझे बाद में छोड़ के भी चली गई उसे भुला तो मैं नहीं पाया था लेकिन जिन्दगी जीना सिखा ही देती है।
उसके बाद मैं कई दिनों तक चूत की तलाश में बेचैन रहा और किसी को पाना चाहता था।
ऐसे में मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि आजकल तो लड़कियाँ पैसे देकर करवाती हैं और तू ऐसे तड़प रहा है!
तो मैं उसके सुझाव को सही मान कर उसकी बातों में आ गया और लौट गया मस्ती की दुनिया में फिर से!
उसने मुझे एक शादीशुदा अमीरजादी का नम्बर दिया जो पैसे देकर करवाती थी।
मैंने भी हिम्मत कर के उससे फोन पे बात की।
उसने मुझे अपने घर पर मौज-मस्ती के लिये बुला लिया।
वो दिल्ली के एकदम पॉश इलाके में रहती थी, शानदार गाड़ी उसके घर के बाहर देख कर मैंने सोचा कि बहुत ही मालदार और सेक्सी होगी।
खैर मालदार तो थी लेकिन सेक्सी के नाम पर धब्बा! देखने में एकदम लटकी हुई काया उसकी!
मेरा तो मुंह जैसे एकदम से उतर ही गया कि चूत की तलाश में मैं कहाँ फंस गया.
मैंने मन ही मन अपने दोस्त को बहुत ही गालियाँ दी- साले ने कहाँ फँसा दिया!
उसने मुझे बहुत ही प्यार से अन्दर बुलाया।
उसका घर बहुत शानदार था, देख के मैंने उसके घर की तारीफ की।
इस पर उसने मुझे अजीब से तरीके से देखा जैसे वो कुछ और चाहती थी और मैने बोल दिया कुछ और!
तब मुझे एकाएक याद आई कि किसी भी औरत के सामने उसके अलावा और किसी भी चीज की तारीफ नहीं करनी चाहिए।
मुझे उस लड़की के प्यार ने जैसे पागल ही बना दिया था (लव स्टोरी २००८ वाली) कि मैं उसकी तारीफ ही करना भूल गया।
तो मैंने बात को सम्भालते हुए कहा- लेकिन आपकी साड़ी से कम!
तो इस पर वो हँस पड़ी।
पता नहीं- पहली बार मुझे सेक्स करने का मन नहीं कर रहा था मगर सेक्स मेरी जरुरत भी बन गया था।
लेकिन उसके बेडौल शरीर के बावजूद गजब की अदाएँ थी उसकी।
वो बहुत बल खा के चल रही थी और बहुत ही हंसमुख भी थी, बात बात पर हंसती थी और मेरी तो चुटकुले छोड़ने की तो आदत है ही बात बात पर चुटकुले!
उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जो मुझे बेचैन कर रही थी। मैं ये सब सोच ही रहा था कि वो मेरे लिए शेक बना लाई।
मैंने जान कर खुश होकर शेक उसके हाथ से पीने की इच्छा जाहिर की।
वो झट से मान गई, जैसे वो तो यही चाहती हो और अब तक उसके हाथों में थोड़ी सी हलचल भी होने लगी थी।
मेरा जबरदस्त शरीर देख कर वो बहुत ही लालयित हो गई थी और शायद थी बहुत बेचैन कुछ पाने के लिये!
मैंने झट से शेक खत्म किया और उसके गुंदाज बदन को ध्यान से देखा तो लगा कि शायद यह मेरा एक अनमोल अनुभव रहने वाला है।
उसे देख कर मैं एक दम से जंगली हो गया।
मैं उसे नीचे बैठा कर उसके बाल पकड़ कर एकाएक उसके उभारों को दबाने लगा।
उसकी आँखों में गजब की प्यास थी, एकदम भूखी शेरनी की तरह!
अब मुझे कुछ महसूस हो रहा था कि जैसे अब मैं तैयार हो गया हूँ कुछ करने के लिये! मेरे अंदर एक वहशीयत सी आ गई है, मैं उसे रौंदना चाहता हूँ अपने पूरे जोर से, ताकत से, मस्ती से!
यह एक नये एहसास जैसा था कि मैं एक अपने से बड़ी उमर की औरत के साथ अपनी हवस पूरी करने जा रहा हूँ।
पर मैं यह सब सोच ही रहा था कि मेरी पैंट की जिप खुल चुकी थी।
मैंने यह सब करने से पहले उसे उठा कर अपनी ओर खींचा और उसके होठों को चूमना शुरु कर दिया और उसका बालों को खोल दिया।
मुझे उसके साथ खेलने में मजा आ रहा था।
उसके स्तन क्या बताऊँ, एकदम कप साइज के थे।
मुझे यह सब महसूस करके अच्छा लग रहा था।
वो अब तक मेरे लण्ड पर कब्जा बना चुकी थी उसकी साड़ी देख कर मेरे अन्दर का दुःशासन जाग गया और मैंने एकाएक उसकी साड़ी खींचनी शुरु कर दी।
हा हा हा वो एक दम सविता भाभी डॉट काम की हीरोइन लग रही थी सिर्फ़ चड्डी में!
मुझे यह देख कर एक मस्ती सूझी, मैंने उसकी लिपस्टिक पौंछ दी और अपने लण्ड पे लिपस्टिक लगा कर उसे चूसने के लिये कहा।
मैंने देखा कि वो भी इन सब चीजों का मजा ले रही है और बहुत हंस भी रही है।
तुम अज़ीब दीवाने तो हो ही, मूडी भी हो! अभी थोड़ी देर पहले तक मूड खराब सा लग रहा था और अब मस्ती सूझ रही है?
मैंने चुपके से उसकी पैंटी खींच दी … हहह हहह हहहह! मस्त चिकनी चूत थी उसकी एकदम! मक्खन जैसी नाजुक!
उसे मैंने हल्के से चिकोटी काटी, वो झट से मेरी गोद में आकर बैठ गई।
अब मुझे भी मस्ती छाने लगी थी। मैंने पास में रखा हुआ बनाना-शेक उसके ऊपर थोड़ा उलटा दिया और उसे बेतहाशा चूमने चाटने लगा। उसे मेरा ये स्टाइल अच्छा लगा और उसने भी अपनी आह उह से मेरा स्वागत किया। मुझे इस बात पर जोश छाया और मैंने उसे औंधा लेटा दिया और उसके ऊपर सारा बनाना-शेक पलट दिया उसे ठंडक का एहसास होने लगा और वो मेरी बाहों में आकर लिपट गई। मैं अब उसके सांसों की गरमी महसूस कर सकता था।
मैंने अब उसे धक्का देकर बेड पर लेटा दिया वो अब मेरे इरादे समझ चुकी थी तो उसने भी देर ना करते हुए अपनी टांगें फैला दी.
मैं सीधा आकर उसकी टांगों के बीच बैठ गया और कुछ करने से पहले उसकी गांड में उंगली घुसा दी।
वो सिहर उठी।
अब मैंने देर ना करते हुए जल्दी से काँडम चढ़ा लिया और उसके यौन-मंडल पर अपना लिंग रख दिया और धीरे से अंदर सरका दिया।
उसके मुख-मंडल पर नशे की लहर दौड़ उठी।
मैं थोड़ी देर वैसे ही रहा और उसके मुँह में उँगली घुसा दी वो मेरी उँगली को चूसने लगी।
मुझे और उसे दोनों को मजा आने लगा।
मैंने उँगली उसके मुंह से निकाल कर फिर से उसकी गाँड में डाल दी और धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा।
वो अब एकदम मदहोश हो गई।
मैंने एक हाथ उसकी गरदन के नीचे लगा दिया और जोर से धक्के लगाने लगा। वो जल्दी ही झड़ गई। थोड़ी देर में मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी और झड़ गया।
अब मैं उसके साइड में आकर लेट गया, वो काफी खुश लग रही थी।
मुझे नहीं पता था कि एक औरत मुझे इतना मजा दे सकती है।
उसकी कोमलता एक लड़की से ज्यादा थी और गरमी एक आग की भट्टी से ज्यादा!
मैंने उसके अंदर अपने प्यार को तलाशना चाहा और आशिकों की तरह ही उसे प्यार किया लेकिन बावजूद इसके, उसने मुझे पैसो में तोलना चाहा। पर क्या प्यार का कोई मोल हो सकता है?
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हें मजा आया?
उसने हामी भर दी तो मैंने कहा- सपनों में आकर तो सब चोद जाते है, हम तो वो है जो खुली आँखों में चुदने के सपने छोड़ जाते हैं। अगर खुशी हुई है तुझे तो पैसो में ना तोल मेरी मुहब्बत को! हम वो नहीं जो नोटों के लिये पैमाने छोड़ जाते हैं।
बस यह कह कर मैं वहाँ से चला आया फिर से नई चाह में, नये साथी की तलाश में!
अब मैंने भी ठान लिया है कि तेरे हसीन चेहरे को दूसरों में खोजता रहूंगा और अगर ना मिली तू तो तेरी चाह में दूसरी को चोदता रहूँगा।
तू इस जहाँ में नहीं तो उस जहाँ में मुझे मिलेगी और ना मिली तो तेरी बातें सोचता रहूँगा। Hindi Sex Stories
मेरा नाम किरण वर्मा है, मेरी उम्र बीस Hindi Sex Stories साल है, रंग इतना गोरा नहीं है पर नैन-नक्श तीखे हैं और बेहतरीन जिस्म की मलिका हूँ। इस वक़्त कॉलेज में पढ़ती हूँ। किसी लड़के की नज़र मेरे गोल-मटोल मम्मों पर न रुके, यह हो ही नहीं सकता। लड़कों ने मेरा नाम जुगाड़ डाल रखा है।
मैं शुरु से ही एक ऐसे माहौल में रही हूँ, जिससे मैं अपनी जवानी को शुरु से ही क़ाबू में नहीं कर पाई, मेरी संगत और गन्दी लड़कियों से रही। खाली समय में कक्षा में ही एक-दूसरी के मम्मे दबाना, पेन-पेन्सिल चूत में डाल कर मज़े लेना आदि। जल्दी ही पेन-पेन्सिल छोड़कर लंड भी तलाश लिया। उसके बाद कई लड़कों के साथ मैंने मज़े लूटे। वैसे मैंने बहुत चुदाई करवाई है, लेकिन आपको अपनी एक ऐसी चुदाई सुनाऊँगी जो मैं कभी नहीं भूल सकती।
मोहल्ले के ही एक लड़के के साथ मेरा चक्कर चल निकला। वह मुहल्ले का एक गुंडा टाईप लड़का था, जिससे सभी डरते हैं, कोई भी उसके साथ पंगा नहीं लेता। मुझे वह बहुत पसन्द था, इसलिए मैंने उसे बढ़ावा दिया और उसके इजहार करते ही मैंने हाँ कह डाली। हम छुप-छुप कर मिलने लगा। वो मेरे हर-एक अंग से खेल चुका था। बस जगह न मिलने के कारण उसने मुझे चोदा नहीं था। उसका मोटा लंड कई बार हाथ में लेकर सहलाया और मुठ मार चुकी थी। एक बार साईबर कैफे के केबिन में चूसा भी था।
जैसे ही मौसम बदला, सर्दी के दिन आए और घना कोहरा पड़ना शुरु हुआ, उसकी आड़ में हम मिलने लगे। हम चुदाई के लिए तड़प रहे थे, क्योंकि जब से उसके साथ मेरे चक्कर के बार में मेरे दूसरे बोर दोस्तों को पता चला तो वह मेरा साथ छोड़ धीरे-धीरे पीछे हट गए थे। एक दिन घना कोहरा पड़ा हुआ था। मैं स्कूल के लिए निकली थी, रोज़ की तरह थोड़ा आगे जाकर वह जहाँ मुझे रोज़ मिलता था, आज वह वहाँ नहीं मिला। थोड़ा आगे बढ़ी तो किसी ने मेरी बाँह पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैं उसकी बाँहों में चली गई। प्लॉट खाली था, कोहरा इतना था कि आदमी को पास खड़ा आदमी भी नहीं दिख पाता था। मैं उससे लिपट गई, उसने बेइन्तहा चूमना शुरु कर दिया। दोनों हाथों से मेरी चूचियाँ दबाने लगा।
मैंने उसका लंड पकड़ लिया। उसने मेरी स्कर्ट में हाथ डाल दिया। अन्दर स्लाक्स पहनी हुई थी, जो शरीर से बिल्कुल चिपकी हुई थी। उसने मेरी चूत मसल डाली। मेरे अन्दर आग आज कुछ अधिक ही धधक रही थी, आज मैं बहुत प्यासी थी। मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया।
मैंने उसकी बाँह पकड़ कर उसे प्लॉट के पिछले हिस्से में खींच लिया और उसकी ज़िप में से लंड निकाल लिया, पैरों के बल बैठ मुँह में डाल लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। उसने नीचे से अपना पैर स्कर्ट में डाल अपने पैर के अँगूठे से मेरी चूत को दबा दिया। ओस से कपड़े गीले हो जाते, इस वज़ह से हम नीचे नहीं लेट सकते थे। उसने मुझे खड़ा किया, स्कर्ट खोल डाली। हुक़ खुलते ही स्कर्ट नीचे गिर गई। हाय… यह क्या कर दिया तुमने?
तुझे नंगी किया.. साली…!
उसने चूस-चूस कर पागल कर दिया और स्लाक्स उतार कर फेंक दी।
मैंने कहा, ठीक से रख दो, फिर पहनने भी तो हैं। मैं भी बेशर्म हो गई और पैन्टी ख़ुद ही उतार दी। उसने अपनी शर्ट उतार कर वहीं नीचे बैठते हुए मुझे घुटने रखवा कर घोड़ी बना दिया और अपनी जीभ मेरी चूत में डाल कर चूसने लगा।
हाय… लंड पेल दो प्लीज़…
ले रानी, कहते हुए उसने लंड को चूत पर रखते हुए धक्का मारा। उसके तीन धक्कों से ही लंड मेरी चूत में पूरा समा गया। अब करो… फाड़ डालो… बहुत प्यासी है यह तेरे लंड की आज… ठंडी कर दे मेरी आग…
वह तेज़-तेज़ धक्के मारता गया… अचानक उसने पासा पलटा और सीधा लिटा कर अन्दर डालते हुए करारे झटके मारे… मैं झड़ गई और मेरी गर्मी से वो भी पिघल गया और अपना सारा पानी मेरी चूत में ही डाल दिया।
कितना मज़ा आया इस तरह रास्ते में चूत मरवा कर… ऐसा मज़ा बिस्तर पर कभी नहीं आया।
तो यह थी मेरी एक मस्त चुदाई की कहानी। फिर हाज़िर होऊँगी अगली कहानी लेकर। सब लड़कों के लंड खड़े रहें। भगवान सभी को मोटे लंड दें, ताकि मुझ जैसी प्यासियों की आग बुझती रहे। Hindi Sex Stories
मैं रेखा अपनी पहली Antarvasna चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ! उस समय मैं 18 साल की थी।
मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और अभी इन्जिनियरिन्ग अन्तिम वर्ष की छात्रा हूँ। मेरे पिताजी बिजनेस मैन हैं। हम दो बहनें हैं, बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, वो अपने ससुराल में रहती है। मेरा कोई भाई नहीं है। मैं अपने मम्मी-पापा के साथ ही रहती हूँ। पापा भी बिजनेस के सिलसिले में ज्यादातर घर से गायब ही रहते हैं।
हमारे घर के सामने वाले मकान में मेरे पापा के एक दोस्त कुछ ही दिनों से रह रहे थे। उनके एक लड़का और एक लड़की है। लड़की तो तब छोटी थी लेकिन लड़का बाईस साल से कम का नहीं था। क्योंकि वो मेरे पापा के दोस्त का लड़का था इसलिये हमारे घर में आता-जाता रहता था। उसका नाम सुरेश था, देखने में काफी हैन्डसम था और बहुत अच्छी बॉडी थी उसकी !
मैं भी काफी जवान हो चुकी थी और बहुत सुन्दर दिखती थी। सबके सोने के बाद मैं बेड पर लेट कर अकसर ब्लू फ़िल्में देखा करती थी और अपनी उन्गलियों से ही अपनी चूत को शान्त कर लिया करती। मेरे स्तन उस समय भी बहुत बड़े थे।
मैं तो सुरेश पर लट्टू हो गई थी और उसके साथ सोने के सपने देखने लगी और सोचती रहती कि कैसे अपनी चूत की प्यास शान्त करूँ !
वो भी मेरे गदराये जिस्म को चोरी-चोरी निहारा करता था। मेरे बड़े बड़े स्तन किसी भी लड़के को पागल कर देने के लिये काफी थे। धीरे धीरे मेरी उससे बात होने लगी।
एक बार वो किसी काम से हमारे घर में आया। उस समय मम्मी बाजार गई हुई थी और मैं टीवी देख रही थी। वो भी मेरे कहने पर बैठ कर टीवी देखने लगा। अब मेरा मन टीवी में बिल्कुल भी नहीं था और सोचने लगी कि इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा चुदवाने का !
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था ! उसकी हालत भी मेरे जैसी ही थी ! सुरेश के अन्दर भी खलबली मची हुई थी, उसका लंड खड़ा हो गया था और उसकी पैंट से निकलने के लिये कुलबुला रहा था !
हम दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और दिल की धड़कने जोर जोर से चल रही थी हम दोंनो की !
मैने हिम्मत करके उसकी जान्घों पर अपना हाथ रख दिया और धीरे धीरे सरकाते हुए उसके लंड को पकड़ लिया। सुरेश का पूरा शरीर कांप रहा था। हम दोनों ही जल रहे थे और अपनी आग बुझाने के लिये आतुर हो रहे थे। हम बहुत करीब आ गये और गरम सासें आपस में टकराने लगी ! उसने झट से मेरी चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा। उसके होंठ मेरे होठों का रस चूस रहे थे। मैंने उसकी पैन्ट की चैन खोलकर उसके लंड को अपने हाथों में ले लिया और सहलाने लगी।
मैं आपको कैसे बताऊँ कि क्या हालत हो रही थी मेरी उस समय !
मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी ! लेकिन उसी समय दरवाज़े पर घण्टी बज उठी !
मम्मी बाज़ार से लौट चुकी थी !
मेरी इच्छा अधूरी रह गई !
लेकिन मैने भी ठान लिया कि अब बिना चुदवाये नहीं रह सकती !
एक बार जब पापा किसी काम से बाहर गये हुये थे और घर में सिर्फ मैं और मम्मी ही थे, मैंने सोचा यह अच्छा मौका है अपनी चूत की प्यास शान्त करने का !
मौका देखकर मैंने उसका नम्बर ले लिया !
सोते समय जब मम्मी ने पीने के लिये दूध माँगा तो मैंने उसमें नीन्द की दवा मिला दी ताकि वो सुबह से पहले नहीं उठ सके और सुरेश को सारा कुछ बता दिया !
जब मम्मी सो गई तो मैंने उसे मिसकाल कर दिया !
रात काफी अन्धेरी थी और करीब 11 बज चुके थे, उसके घरवाले भी सो चुके थे।
उसे मैं अपने बेडरूम में ले गई। सिर्फ दो ही बेडरूम थे, एक में मम्मी पापा सोते थे और एक में हम !
मम्मी के बेडरूम का दरवाजा मैंने बाहर से लॉक कर दिया ताकि वो अचानक उठकर आ न जायें !
अब मेरी चुदाई का रास्ता साफ़ था !
हमने भी अपना दरवाजा अन्दर से लॉक कर लिया और एक दूसरे की बाहों में समा गये !
रात के 11 बज रहे थे और काली रात ! दो प्यासे बदन !
यह मौका मैं कैसे चूक सकती थी !
एक दूसरे से उलझ गये हम दोनों ! हम दोनों ही नंगे हो गये। काली रात थी तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा था ! वो मेरे वक्ष मसलने लगा और मैं उतेजना के मारे छटपटाने लगी !
वो कह रहा था कि तेरे गदराए हुए जिस्म के बारे में सोचकर मैंने न जाने कितनी बार मुठ मारी है !
वो मेरे ठीक उपर था और बिल्कुल नन्गा !
उसका लण्ड मेरी जान्घों और चूत को छू रहा था, मैं कह नहीं सकती कि कितनी उत्तेजित हो चुकी थी मैं !
वो भी होश में कहाँ था !
उसकी सांसें बहुत जोर जोर से चल रही थी !
मैं उसके लंड को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगी और वो अपने काबू से बाहर होने लगा !
काफी देर सहलाने के बाद मैं उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी !
बहुत बड़ा था उसका गरम लंड और मेरे मुँह में ठीक से नहीं आ पा रहा था !
बहुत देर तक चूसती रही मैं ! कैसे कहूँ कि कितना मजा आ रहा था मुझे !
वो नीचे खड़ा था और मैं बेड पर लेट कर चूसे जा रही थी !
वो अपने लंड को मेरे मुँह में ही आगे पीछे करने लगा ! बहुत बड़ा होने के कारण मेरे मुँह में पूरा समा नहीं पा रहा था लेकिन वो धक्के मार मार कर मेरे कंठ तक उतार दे रहा था और मैं अकबका जाती थी !
तीन चार मिनट तक वो मेरे मुँह को ही चूत समझकर पेलता रहा !
मुझसे अब नहीं रहा जा रहा था और उसे मैंने बेड पर खींच लिया अपने ऊपर !
और बोली- अब नहीं रुक सकती, चोदना शुरु करो !
मेरे कहते ही सुरेश ने अपना लंड मेरी बुर में धीरे से उतार दिया !
मैं दर्द से छटपटा उठी और कराहने लगी और उसका लंड अपने चूत से निकाल दिया !
बहुत खून भी निकल गया !
सुरेश ने मुझसे पूछा- पहले कभी किसी से भी नहीं चुदवाई?
मैंने कहा- नहीं ! पहली बार मुझे तुम ही चोद रहे हो !
मैंने उससे पूछा- क्या तूने इससे पहले किसी लड़की को चोदा है?
तो उसने कहा- हाँ मैं पहले भी लड़की की चूत का मजा ले चुका हूँ !
उसने मुझे समझाया कि शुरु में दर्द होगा लेकिन बाद में सही हो जायेगा।
सुरेश ने फिर से अपना कड़ा लण्ड मेरी चिकनी चूत में धकेल दिया। मुझे रोना आ गया लेकिन उस दर्द को मैं सह गई। सुरेश ने धीरे धीरे चोदना शुरु किया और मुझे मजा आने लगा। सारा दर्द गायब हो गया और मुझे असीम आनन्द आने लगा।
वो मेरे ऊपर लेट गया और अपने छाती से मेरे वक्ष को रगड़ने लगा। फिर वो मेरे चुचूक को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा और हौले हौले अपने दांत मेरी मुलायम चूचियों में गड़ाने लगा।
सुरेश का लंड मेरी बुर में घुसा हुआ था और आगे पीछे हो रहा था। वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मुझे चोदे जा रहा था ! मैं भी अपने चूतड़ उचका उचका कर चुदवा रही थी !
मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी ! कभी मैं उसे नीचे पटक देती तो कभी वो मुझे अपने नीचे ले लेता था !
बुरी तरह से एक दूसरे से उलझे हुए थे हम दोनों !
सुरेश के चोदने की रफ्तार धीरे धीरे तेज होने लगी। उसका बड़ा और कठोर लण्ड मेरी मुलायम चूत को फाड़े जा रहा था। सुरेश अपने लंड को मेरी चूत की पूरी गहराई में उतार उतार कर पेल रहा था और बहुत जोर जोर से धक्का लगा रहा था।
मैं उई उई कर रही थी और अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।
वो भी अनछुई चूत का जमकर मजा उठा रहा था।
वो बीच-बीच में पूछता भी कि मजा आ रहा है?
और मैं कहती- पूछो मत क्या हाल है मेरा ! आह आह ! बस चोदते रहो नॉन स्टॉप !
वो और तेजी से चोदने लगता !
वो कहता- रेखा तेरी कुँवारी चूत का स्वाद मैं बयान नहीं कर सकता !
एकाएक उसके चोदने की रफ्तार बहुत तेज हो गई, पूरा बेड हिलने लगा, मेरी सिसकारियाँ निकलने लगी और उसने मेरा मुँह ढांप दिया।
मैं बेड में धंसी जा रही थी और उसका सारा बोझ उठाये हुए थी !
मैं उतेजना में जोर जोर से चोदो ! उई उई ! फाड़ डालो चूत को ! ओह बहुत मजा आ रहा है ! पेलते रहो ! रुको मत ! और ना जाने क्या क्या बड़बड़ाती रही और वो पेलता रहा मुझे नॉन-स्टॉप !
अन्त में सुरेश ने मुझे जोर से पकड़ लिया और मेरी चूत में झड़ गया !
अभी करीब रात के बारह बज रहे थे और मेरी चूत पूरी तरह से शान्त नहीं हुई थी। वो भी मेरी मस्त मस्त चूत और चूचियों का फिर से मजा उठाना चाहता था और रात भी बहुत बची हुई थी !
वो फिर से तैयार हो गया और एक बार फिर से चोदने लगा !
वो कह रहा था- रेखा, मैं तेरी बड़ी बड़ी रसीली दूधिया चूचियों और चिकनी चूत का स्वाद कभी नहीं भूल पाऊँगा ! मुझसे शादी कर लो डार्लिंग ! और फिर मैं तुम्हें दिन रात चोदता रहूंगा ! हम दोनों ही रात गंवाना नहीं चाहते थे !
उस रात मैं करीब तीन बजे रात तक चुदवाती रही और फिर सुरेश अपने घर चला गया !
मेरी दोनों चूचियाँ फ़ूल कर लाल हो गई थी और मेरी चूत अन्दर से छिल सी गई थी !
यह थी मेरी पहली चुदाई !
इसके बाद तो मैं काफी चुदक्कड़ हो गई थी !
सुरेश ने पता नहीं कितनी बार मेरी चिकनी चूत का आनन्द उठाया और मैंने उसके गरम कठोर लंड का !
मुझे जरुर मेल करें ! Antarvasna
मेरा नाम रेशमा बेगम है। मेरी शादी एक साल पहले हो चुकी है और इस एक साल में मैं अपनी ससुराल के सभी लोगों को अच्छी तरह जान गई हूँ; घुल मिल गई हूँ मैं सबसे!
मुझे अब ऐसा लगने लगा है कि जैसे मैं इस घर में वर्षों से रह रही हूँ।
मेरी सास और ननद तो मेरे लिए बहुत ही अच्छी हैं; उनकी जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है।
मेरी सुहागरात के दूसरे ही दिन मेरी ननद ने रात में अपने शौहर का लंड मेरी चूत में पेल दिया था।
ऐसा बहुत कम होता है जब कोई बीवी अपने ही शौहर का लंड अपने हाथ से किसी और की चूत में पेल दे।
उसका लंड मेरे शौहर के लंड से मोटा भी है और हैंडसम भी!
ननद मेरे बगल में नंगी बैठी उसका लंड पेलती रही और मेरे नंगे जिस्म पर हाथ भी फेरती रही।
वह अपने मियां के चूतड़ सहला सहला कर मेरी चूत मजे से चुदवाती रही।
उसने अपने मियां से कहा- मेरी चूत चोदी भाभी जान की चूत चोद चोद कर हलवा बना दो। फाड़ डालो इसकी चूत … जैसे तुम मेरी माँ का भोसड़ा फाड़ते हो!
तब मुझे मालूम हुआ कि मेरी ननद अपने शौहर से अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदवाती है।
यह जानकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गयी।
मुझे चुदवाने में दुगुना मज़ा आने लगा।
आखिर में जब उसका लंड झड़ने लगा तो उसने मेरे साथ बड़े प्यार से झड़ता हुआ लंड चाटा।
बस उसी दिन से मैं ननद की गुलाम हो गयी, मेरी ननद से दोस्ती पक्की हो गई।
एक दिन मेरी सास आ गई।
वह बड़े मूड में थी- बहू, मैं तुमसे एक सवाल पूछ रही हूँ। जवाब सच्ची सच्ची देना?
मैंने कहा- पूछो।
वह बोली- तुम शादी के पहले चुदी हुई थी या नहीं?
मैंने कहा- चुदी हुई तो खूब थी मैं शादी के पहले सासू जी!
बस उसने मुझे गले लगा लिया और बोली- मैं चुदी हुई बहू चाहती थी क्योंकि चुदाई का मज़ा जितना चुदी हुई बहू देती है उतना बिना चुदी हुई दे ही नहीं सकती। मैं भी शादी के पहले खूब चुदी हुई थी. और तेरी ननद तो खूब जमकर चुदी हुई थी। असल बात यह है कि चुदी हुई बहू अपनी सास के भोसड़ा का और ननद की चूत का बड़ा ख्याल रखती है. चुदी हुई सास अपनी बेटी बहू को बड़े बड़े लंड का मज़ा देती है और चुदी हुई ननद अपनी माँ की चूत और भाभी की चूत खूब मजे से चुदवाती है।
सास की ये बातें सुनकर तो मैं ख़ुशी से पागल हो गई।
मुझे यकीन हो गया कि अब मुझे नए नए लंड का मज़ा खूब मिला करेगा।
तब तक मेरी ननद आ गयी।
उसको देख कर सास बोली- बहू, तेरी ननद की माँ का भोसड़ा!
ननद बोली- तेरी बहू की ननद की चूत अम्मी जान!
फिर मुझे भी जोश आ गया तो मैं बोली- तेरी माँ की बहू की चूत ननद रानी!
मैंने सास से कहा- तेरी बेटी की भाभी की चूत सासू जी!
फिर हम तीनों खिलखिलाकर हंसने लगीं।
सास बोली- मैं जानना चाहती थी कि मेरी बहू को गालियां देना आता है या नहीं … इसलिए मैंने गालियां देना शरू किया। बहू, तू तो बड़ी मस्त मस्त गालियां देती है। तू बुरचोदी सच में बड़ी मजेदार है। मैं अपनी बेटी बहू से गालियों के रिश्ते और चोदा चोदी के रिश्ते इसीलिए रखती हूँ कि मुझे अपनी बढ़ती उम्र का पता ही न चले। मेरी जवानी का राज़ है अपनी बेटी बहू के साथ लंड का मज़ा लेना, लंड पेलना और पेलवाना।
इतनी मस्ती और खुल्लम खुल्ला चोदा-चोदी की बातें करने से मुझे कुनबे के सारे लोगों के लंड के बारे में मालूम हो गया।
कुछ ननद ने बताया, कुछ सास ने बताया, कुछ मेरी जेठानी ने बताया.
और बचा खुचा वहां की मस्त जवान लड़कियों ने बता दिया।
बातों बातों में एक दिन ननद बोल भी गई- मेरे अब्बू के लंड के मुकाबले यहाँ किसी भोसड़ी वाले का लंड नहीं है.
ससुर बहू सेक्स कहानी की नींव यहीं से पड़ गयी.
यह बात मेरे दिमाग घुस गई बहनचोद कि यहाँ सबसे बढ़िया और मस्त लौड़ा तो मेरे ससुर का ही है।
बस मैं जल्दी से जल्दी अपने ससुर का लंड खाने की फ़िराक में घूमने लगी।
मुझे यह तो मालूम हो गया कि मेरे ससुर को बहू बेटियां चोदने का शौक है।
ऐसे में मुझे उसका लंड पकड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि मैं तो उसकी बहू हूँ।
अगर उसे बहू बेटियां चोदने का शौक है तो मुझे भी अब्बू और ससुर से चुदवाने का शौक है; उनके लंड पकड़ने का शौक है।
मैं बस मौके की तलाश में थी।
एक दिन जब वह अपनी लुंगी बदल रहा था तो मुझे उसके लटकते हुए लंड की एक झलक मिल गयी।
मैंने सोचा जब लटकता हुआ इतना बड़ा और हैंडसम है तो खड़ा होने पर कितना बड़ा हो जाएगा बहनचोद!
लंड के बाहर निकले हुए गोल गोल सुपारे ने तो मेरी जान ले ली।
मेरे मुंह में पानी आ गया और मेरी चूत गीली हो गई।
बस मैं मौक़ा की खोज में घूमने लगी।
मेरे दिमाग में उसका लंड घूमने लगा।
एक दिन जब मैं रात को लगभग 12 बजे उठी तो देखा कि मेरा ससुर मेरी जेठानी की चूत में लंड पेले हुए बड़ी मस्ती से चोद रहा है।
मुझे उसे देख कर जलन होने लगी।
मैंने मन में कहा- भोसड़ी के ससुर मैं भी तेरी बहू हूँ। तू मुझे क्यों नहीं चोदता? मेरी चूत में लंड क्यों नहीं पेलता? मैं तो जेठानी से ज्यादा जवान हूँ। मेरी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी है, मेरी भी गांड बड़ी चौकस है।
फिर मैंने सोचा कि आज वह मेरी जेठानी की चूत ले रहा है तो कल मेरी भी चूत लेगा।
मैं चुपचाप अपनी जेठानी की चुदाई देखती रही।
मेरी जेठानी भी बड़ी खूबसूरत और बड़े बड़े मम्मों वाली है।
वह अपने मियां के साथ पड़ोस के घर में रहती है।
आज ही शाम को आई थी और आज ही रात को अपने ससुर से चुदवाने लगी।
मुझे लगा कि वह ससुर से चुदवाने ही आई थी।
ससुर बोला- बहू, किसी दिन अपनी छोटी बहन को ले आना. मैं उसकी चूत में अपना लंड पेलना चाहता हूँ। वह मुझे बड़ी सेक्सी और हॉट लगती है।
जेठानी ने कहा- हां वह भी चूतचोदी ग़ैर मर्दों से खूब चुदवाती है जैसे मैं चुदवाती हूँ। अभी वह अपनी ससुराल में है. जब आएगी तब तेरे पास भेज दूँगी। वह खुद ही पकड़ लेगी तेरा लंड!
उसकी बात सुनकर मेरी झांटें सुलगने लगीं।
मैंने मन में कहा- भोसड़ी के ससुरे … तुझे जेठानी की बहन की चूत याद आ रही है लेकिन अपनी छोटी बहू की चूत याद नहीं आ रही है?
थोड़ा दूर से ही सही पर मैंने ससुर का लंड देख तो लिया।
मैंने मन में कहा- लंड तो भोसड़ी का बड़ा हक्कानी है.
फिर क्या … सारा मज़ा मेरी चूत चोदी जेठानी लेकर चली गई.
अब उसका लंड पकड़ने की मेरी तमन्ना और बढ़ गयी।
मैंने उस दिन की रात बिना लंड के गुज़ार दी।
दूसरे दिन मैं सवेरे से ही ससुर के आगे पीछे घूमने लगी, उसे अपने जिस्म का जलवा दिखाने लगी, कभी अपनी नंगी नंगी टांगें दिखाती कभी अपनी उछलती हुई चूचियाँ दिखाती और कभी अपनी मटकती हुई गांड दिखाती।
वह भी मुझे बड़े गौर से देखने लगा।
मैं कभी उससे आँखें मिलाती, कभी सेक्सी अदा से मुस्करा देती, कभी उसे तिरछीं निगाहों से देखती तो कभी उसके बदन से छू करके आगे निकल जाती।
किसी न किसी तरह मैं उसके लंड में आग लगाना चाहती थी।
रात के ११ बजे थे।
मेरी सास अपने मायके गई थी।
ननद थी, पर कहाँ थी और क्या कर रही थी, मुझे कुछ भी नहीं पता।
अचानक मेरे फोन की घंटी बज उठी।
मैं फोन पर जान बूझ कर खुल कर बातें करने लगी।
मेरा ससुर बगल में ही बैठा था; वह सब सुन रहा था।
मैं जो बोल रही थी वही उसे सुनाई पड़ा।
उधर की आवाज़ उसे बिल्कुल नहीं सुनाई पड़ी।
मैंने कहा – हां बोल भोसड़ी की रिया … क्या हुआ?
“अच्छा ऐसी बात है तो फिर पकड़ ले न उसका लंड!”
“अरे कुछ नहीं होगा पगली!”
“अपनी माँ के भोसड़े में भी पेल दे लंड … मोटा लंड सबको पसंद आता है यार!”
“ठीक है, मुझे भी कभी पकड़ा देना!”
फोन बंद हुआ तो ससुर ने पूछा- किसका फोन था बहू रानी?
मैंने कहा- मेरी फूफी की बेटी रिया का फोन था.
“रिया तुमसे खुल कर बात करती है. किसी दिन उसे बुला लो न बहू रानी!”
“हां हां बुला लूंगी। पर तुम क्या करोगे?”
वह उठा और मुझे अपनी बाँहों में भर कर बोला- मैं उसके मुंह से भी गालियां सुनूंगा बहू रानी जैसे मैंने तेरे मुंह से सुनी हैं गालियां। बड़ी प्यारी प्यारी गालियां देती हो तुम रेशमा! तुमने मेरा दिल जीत लिया। तूने तो मेरे लंड में आग लगा दी है रेशमा बहू!
“आग तो तेरी बड़ी बहू लगाती है तेरे लंड में … मैं क्या चीज हूँ?” मैंने मारे जलन के कहा।
“तुम तो उससे ज्यादा खूबसूरत हो, सेक्सी हो और हॉट हो रेशमा!”
“तो क्या करोगे तुम मेरा?”
“रानी बनाऊंगा मैं तुम्हें … रात भर के लिए बीवी बनाऊंगा मैं तुम्हें … तुम्हारे कपड़े उतार कर मैं तुम्हारे साथ नंगा लेटूँगा रेशमा!”
मैंने उसे और ललकारा- तेरे लंड में ताकत है इतनी? कुछ कर पायेगा तेरा लंड?
उसने अपनी लुंगी खोल दी और कहा- लो पहले पकड़ कर देख लो मेरा लंड, बहू रानी … तुम्हें अंदाज़ा हो जाएगा!
लंड तो मादरचोद पहले से ही खड़ा था।
मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ लिया लंड … तो वह और फनफना उठा।
तब मैंने मन में कहा- अब आया बहनचोद मेरे हाथ में ससुर का लंड, जिसके लिए मैं इतने दिनों से तड़प रही थी.
लंड पकड़ते ही मेरे अंदर की रंडी जाग उठी।
मेरी अम्मी जान ने एक बार कहा था- बेटी रेशमा, हर औरत अंदर से एक रंडी होती है उसके मन में गैर मर्दों से चुदवाने की इच्छा जरूर होती है और मौक़ा पाकर वह चुदवा भी लेती है। दुनिया में ऐसी कोई औरत नहीं जो पराये मर्दों से चुदवाना न चाहती हो.
अम्मी जान ने यह भी कहा था कि हर औरत को ग़ैर मर्दों से चुदवाने का हक़ है। मैं भी गैर मर्दों से चुदवाती हूँ। मुझे भी ग़ैर मर्दों के लंड बहुत पसंद हैं।
यह ख्याल आते ही मैंने ससुर का लंड बड़े प्यार और मजबूती से पकड़ लिया; पकड़ कर उसे हिला हिला कर मस्ती करने लगी।
उसने मुझे नंगी करके अच्छी तरह दबोच लिया।
मेरा पूरा नंगा बदन उसने अपने नंगे बदन से चिपका लिया।
लेकिन मैंने उसका लंड नहीं छोड़ा, मैं लंड मुट्ठी में लिए हुए सहलाती रही।
मेरे ससुर का नाम है ताहिर!
वह 48 साल का हट्टा कट्टा गोरा चिट्टा मर्द है।
जैसा मैंने उसके लंड के बारे में सुना था वैसा ही पाया।
मोटा तगड़ा लंड बड़ा शानदार था.
मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई और लंड की बड़े प्यार से कई चुम्मियाँ ले लीं; पेल्हड़ भी मजे से चूमे।
मैं मस्ती में चूर हो गयी।
मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी।
वह भी भोसड़ी वाला मेरे नंगे जिस्म से खेलने लगा, मेरे मम्मे दबाने लगा, मेरी चूत पर उंगलियां फिराने लगा; मेरे चूतड़ों पर, मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा; मेरे गाल, मेरे होंठ चूमने लगा.
फिर बोला- रेशमा बहू, तुम बड़ी बहू से ज्यादा खूबसूरत हो, ज्यादा हसीन हो और ज्यादा अच्छी लंड पकड़ती हो। तुम्हारा जिस्म बड़ा सेक्सी है. मुझे तुम्हारी ही जैसी बहू बेटियों को चोदने में मज़ा आता है जिनका नंगा जिस्म बिल्कुल तुम्हारे नंगे जिस्म की तरह हो.
तब मुझे पक्का मालूम हो गया कि मेरे मादरचोद ससुर को बहू बेटियां चोदने का शौक है।
फिर मैंने उसे नीचे जमीन पर लिटा दिया और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी।
वह मेरी चूत चपर चपर चाटने लगा और उसका लंड चाटने लगी।
मुझे लंड का टोपा चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
बिना झांट का एकदम चिकना चिकना लंड बड़ा हैंडसम लग रहा था।
कल यह भोसड़ी का लंड मेरी जेठानी के कब्जे में था, आज यह मेरे कब्जे में है।
उत्तेजित वह भी था और उत्तेजित मैं भी थी।
इतने में वह उठा और मेरे बूब्स फिर से मसलने लगा।
मैं भी उसके मरदाने जिस्म का मज़ा लेने लगी।
फिर उसने मुझे नीचे लिटा दिया, मेरी टांगें फैला दीं.
तो उसके सामने मेरी चूत एकदम खुल गयी।
उसने लंड उसी पर टिका दिया और फिर एक ही धक्के में पूरा लंड पेल दिया अंदर!
मैं तो चुदी हुई थी इसलिए दर्द तो हुआ नहीं … पर चिल्ला पड़ी- भोसड़ी के ससुरे … तूने इतना बड़ा लंड पेल दिया मेरी छोटी सी चूत में! तुझे रहम नहीं आया? बहुत बड़ा हरामजादा है तू … तेरी बहन का भोसड़ा … यह मेरी चूत है, तेरी जागीर नहीं … ज़रा संभल कर चोद न … प्यार से चोद न, मज़ा ले ले के चोद! मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या?
फिर वह सच में बड़ी मस्ती से चोदने लगा मुझे!
और मैं भी अपनी चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगी।
इतने में अचानक मेरी ननद एकदम नंगी हमारे सामने गई।
उसे देख कर मैं समझ गई कि वह किसी से लगी हुई थी; किसी के लंड का मज़ा ले रही थी।
पर कौन था यह मुझे मालूम नहीं।
मेरे ससुर ने उसे इस अवस्था में देखा तो उसका मन डोल गया।
उसने ननद का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वह खिंचती चली आई।
ससुर ने उसे चित लिटा कर गच्च से पेल दिया अपना लंड उसकी चूत में!
मैं यह देख कर चकित रह गयी कि एक बाप ने अपनी ही बेटी की चूत में लौड़ा घुसा दिया।
लेकिन फिर सोचा कि यह तो होता ही रहता है हमारे यहाँ!
मेरे मुंह से निकला- ससुर जी यह क्या हो रहा है? यह क्या किया तुमने? मेरी ननद तेरी बेटी है।
वह बोला- मैं तेरी ननद की चूत चोद रहा हूँ बहू रानी! मेरे लंड के सामने जो भी चूत आएगी, उस चूत में मेरा लंड घुस जाएगा. वह कोई भी हो, वह चाहे जिसकी चूत हो … इससे मेरे लंड को कोई फर्क नहीं पड़ता।
तब तक पीछे से आवाज़ आई- हां यार ताहिर, तुम ठीक कह रहे हो। मेरे भी लंड के सामने जो चूत आती है मेरा लंड बे रोक टोक के उसी में घुस जाता है।
मुझे नंगी देख उसने मेरी चूत में लंड पेल दिया बिना कोई देर लगाये!
वह बोला- अब देख न, तेरी बहू की चूत मेरे सामने है तो मैंने लौड़ा पेल दिया तेरी बहू की चूत में, ताहिर!
तब मुझे मालूम हुआ की वह मेरी ननद का ससुर है साहिर।
इसका मतलब की ननद चूत चोदी अपने ससुर से चुदवा रही थी।
साहिर बोला- देख यार ताहिर, मैं तेरी बहू चोद रहा हूँ, तुम मेरी बहू चोद रहे हो. कितना मज़ा आ रहा है। तेरी बहू बड़ा मज़ा दे रही है।
मेरा ससुर बोला- तेरी बहू भी बड़ा मज़ा दे रही है।
ननद बड़ी मस्त होकर अपनी कमर हिला हिला कर चुदवा रही थी।
मज़ा मुझे भी बहुत आ रहा था ननद के ससुर से चुदवाने में!
वह भी बड़ा शातिर बन्दा था चूत चोदने में … खूब हचक हचक कर चोद रहा था; छक्के छुड़ा रहा था वह मेरी चूत में!
मैं समझ गयी आखिर कार मेरी ननद माँ की लौड़ी अपने ससुर के लंड के पीछे पीछे क्यों लगी रहती है.
हम दोनों अगल बगल लेटी हुईं थीं।
मेरा मुंह उसकी गांड की तरफ था और उसका मुंह मेरी गांड की तरफ।
मैं उसकी चुदती हुई चूत देख रही थी और वह मेरी चुदती हुई बुर!
उधर वो दोनों ससुरे एक दूसरे की बहू चोदने का मज़ा ले रहे थे।
पहले दोनों ने अपनी अपनी बहू की चूत चोदी, अब एक दूसरे की चोद रहे हैं।
अम्मी ने सही कहा था कि बेटी रेशमा लंड जब खड़ा होता है तो वह किसी की भी चूत में घुस जाता है फिर वह चाहे बेटी की चूत हो चाहे माँ की चूत! इसी तरह जब चूत जब गर्म हो जाती है, चुदासी हो जाती है तो वह किसी का भी लंड पेलवा लेती है फिर वह लंड चाहे बाप का हो चाहे बेटे का!
उस समय हम दोनों की खूब घपाघप चुदाई हो रही थी; धच्च धच्च, भच्च भच्च, फच्च फच्च आवाज़ें चारों तरफ फ़ैल रहीं थी।
जितनी बेशर्मी से दोनों ससुर चोद रहे थे, उतनी बेशर्मी से हम दोनों बहुएं भी चुदवा रही थीं।
आखिर में हमने जब झड़ते हुए लंड चाटे तो उसका मज़ा ही कुछ और था।
उसके बाद हम सब नंगे नंगे ही बैठ कर सुस्ताने लगे।
लगभग आधे घंटे में फिर दोनों लंड टनटना उठे।
चुदाई फिर शुरू हो गई और फिर रात भर होती रही।
अगले दिन मेरी ननद बोली- अरे रेशमा भाभी जान, तेरी चूत चोदी ननद बड़ी चुदक्कड़ हो गई है।
तब तक उधर से आवाज़ आई- अरे बहू रानी, तेरी ननद की माँ भी भोसड़ी वाली बड़ी चुदक्कड़ है।
यह आवाज़ मेरी सास की थी।
उसने मुझसे पूछा- कैसा लगा तुम्हें अपनी ननद के ससुर का लंड, रेशमा बहू?
मैंने कहा- लंड तो बड़ा जबरदस्त है उसका सासू जी! किसी दिन तेरे भोसड़े में पेलूँगी।
वह बोली- तुम किसी दिन पेलोगी लंड मेरी चूत में … मैं तो आज ही पेलूँगी तेरी चूत में अपने देवर का लंड!
फिर क्या … रात में हम तीनों सास बहू ननद ने एक दूसरे की चूत में लंड पेल पेल कर खूब लिया सामूहिक चुदाई का मज़ा।
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