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Massage Girl in East Kameng: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in East Kameng who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in East Kameng that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The East Kameng massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in East Kameng who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your East Kameng massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This East Kameng massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in East Kameng who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in East Kameng employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in East Kameng helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in East Kameng

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in East Kameng at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

प्रेषक : हिमांशु  Antarvasna

सबसे पहले मैं Antarvasna हिमांशु, हेल्लो कहूँगा लड़कियों, आंटियों, भाभियों को जो अपना समय निकाल कर अन्तर्वासना डॉट कॉम पर कहानियाँ पढ़ती हैं !

अब मैं शुरू करूँगा अपनी कहानी जिसने मुझे दिल्ली का एक मशहूर मालिश बॉय बना दिया।

बात पिछले साल की है जब मैं अपने मित्र सुरेश के यहाँ उसकी माँ से पढ़ने जाया करता था। सुरेश( नाम बदला हुआ है) ग्रेटर कैलाश में एक पोश सोसाइटी में रहता है! मैं और मेरा परिवार कालका जी में रहते हैं। सुरेश और मेरी दोस्ती स्कूल में हुई और अब हम कॉलेज में एक साथ पढ़ते हैं। सुरेश की माँ सुदेशना( नाम बदला हुआ है) की उम्र लगभग 40 साल की होगी। वह बहुत सुन्दर है और उसकी काया सिक्खनी औरत की तरह है भरी हुई ! जब भी मैं उनसे पढ़ने जाता था तो अपने आप को कभी उनकी तरफ ललचाई नज़रों से देखने को रोक नहीं पाता था। मैं अपने दोस्त की वजह से कुछ भी नहीं कह पाता था। पर मुझे ऐसा लगता था कि जैसे आंटी ने मुझे उन्हें देखते हुए देख लिया था।

बात उस दिन की है जब मैं घर में किसी काम के कारण कॉलेज नहीं जा पाया और उस दिन मैंने आंटी को उनके मोबाइल पर फ़ोन करके पूछा कि आज मैं छुट्टी पर हूँ, क्या मैं अभी पढ़ने आ सकता हूँ ?

आंटी ने मुझे बताया की वो बाज़ार में हैं और अभी शॉपिंग कर रही हैं। मैंने फ़ोन रख दिया। पाँच मिनट बाद मुझे मेरे मोबाइल पर फ़ोन आया कि मैं 30 मिनट में उनके घर पहुंचूँ ! मुझे कुछ अजीब लगा, आंटी ने कहा कि वो अभी अभी मार्केट पहुँची हैं और शॉपिंग कर रही हैं, और उन्होंने अपनी खरीदारी रद्द करके मुझे पढ़ना जरूरी समझा।

यह सब कुछ सोचता हुआ मैं उनके घर पहुंचा तो देखा कि आंटी दरवाज़े पर खड़ी हैं।

हेल्लो आंटी !

हेल्लो बेटा ! क्या बात है आज कॉलेज नहीं गए क्या ? सुरेश तो गया हुआ है।

आज घर पर कुछ काम था। क्या आप अभी मुझे पढ़ा पाएंगी?

हाँ हाँ ! अन्दर आओ !

आंटी ने पीले रंग की पारभासक साड़ी पहन रखी थी और उनका बदन चमक रहा था। यह सब देख कर मेरा मन कह उठा कि किसी तरह आज आंटी को छूने का मौका मिल जाए ! लेकिन मुझे क्या पता था कि छूना तो एक शुरुआत होगी एक बड़े काम की !

मुझे अन्दर बैठा कर आंटी रसोई में चाय और खाने का सामान लाने गई ! थोड़ी देर में रसोई से किसी के ज़मीन पर गिरने की आवाज़ आई तो मैं रसोई में पहुंचा तो देखा कि आंटी फर्श पर गिरी हुई हैं। आंटी दर्द से कराह रही थी और कह रही थी- कुछ करो बेटा ! मुझे दर्द हो रहा है !

मैं भाग कर डॉक्टर को फ़ोन करने लगा तो आंटी ने आवाज़ लगाई- मुझे उठा तो लो ज़मीन से !

फिर मैं आंटी को उठा कर उनके बेडरूम में ले गया और फिर डॉक्टर को फोन करने जाने लगा तो आंटी बोली- डॉक्टर की ज़रूरत नहीं है ! मैं दवाई ले लूंगी, तुम स्टोर से ला दो !

मैं स्टोर से दवाई ले कर आया तो आंटी दर्द से कराह रही थी और कह रही थी- बेटा मेरे पैर दबा दो ! दर्द हो रहा है !

मैंने पैर दबाने शुरू किये तो कहने लगी- दर्द इससे नहीं जायेगा, तुम एक काम करो, तेल ले आओ और लगा दो !

मैं स्टोर से तेल ले कर आया तो देखा कि आंटी ने अपना पेटीकाट और साड़ी ऊपर कर रखी है और दर्द से आ ऽऽऽ ह !!!! कराह रही हैं।

वो बोली- ले आए हो तो लगा भी दो अब तेल !

मैंने पैर पर तेल लगाना शुरू किया तो आंटी अहाहहा करने लगी। धीरे धीरे मैंने देखा कि आंटी गरम हो रही हैं मैंने अपना हाथ पैरों से उनकी जांघ पर लगा दिया तो वो एक दम से कराही- आआह्ह्ह्ह!!

उनकी इस कराहट में दर्द नहीं ख़ुशी थी। मैं अपना काम करता रहा। धीरे-धीरे मैं मौका देख कर उनकी पैंटी को छू लेता। उनकी तरफ से कुछ आपत्ति न होने पर मैंने लगातार उनकी पैन्टी पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उनका चेहरा लाल हो गया, उनकी आंखें बंद और मेरा लण्ड मेरी पैंट फाड़ कर बाहर आना चाहता था। मैं जानता था कि बस थोड़ा और इंतज़ार करना होगा मुझे और मंजिल करीब है !

अब मैंने उनकी पैन्टी के अन्दर हाथ डालना शुरू ही किया कि वो पलट गई और बोली- उतार दे इसे ! फ़ाड़ डाल ! बहुत दिनों की प्यासी हूँ मैं ! मसल डाल मुझे !

यह सुन कर मैं पहले तो थोड़ा घबरा गया फिर अपने आप तो सँभालते हुआ उनकी पैन्टी उतार कर उनकी योनि की मालिश करने लगा ! वो कराह रही थी- आआह्ह्ह्ह!!! उंहऽऽ आ !

उनका ब्लाऊज़ निकाल कर उनके वक्ष पर मालिश करना शुरू किया तो वो पागल हो गई कहने लगी- तेरी उँगलियों में तो जादू है रे !

मेरा एक हाथ उनका चुचूक मसल रहा था और दूसरा उनकी चूत में !

अब मैंने अपना लण्ड उनके हाथ में दिया और उससे देख वो पागल सी हो गई, बार-बार उसे जोर जोर से आगे पीछे करने लगी। उसका आकार देखकर कहने लगी- ऐसा तो मैंने फिल्मों में या पत्रिका में ही देखा है !

और यह कह कर लण्ड को अपने मुँह में ले लिया !

मेरे लण्ड की मालिश कर वो बोली- अब इस लौड़े से मेरी चूत फ़ाड़ दो !

मैं लण्ड डालने लगा तो चिल्लाई- रुको, पहले कण्डोम पहन लो !

मुझे कण्डोम पहनकर डालने के लिए जोर देने लगी !

अब मैं कंडोम पहन कर खड़ा हो गया और वो कुतिया की अवस्था में हो गई और बोली- डालो ! फ़ाड़ डालो आज इसे !

मैंने जैसे ही पहली बार अन्दर डाला तो वो चिल्ला पड़ी और बोली- थोड़ी धीरे धीरे ! इतना बड़ा और भारी लण्ड मैंने कभी अन्दर नहीं लिया !

आगे पीछे और ऊपर-नीचे होकर मैंने उन्हें मैंने दो बार चोदा। फिर सुरेश के आने का समय हो गया और मैं कपड़े पहन कर जाने की तैयारी करने ही लगा था कि वोह मेरे हाथ में दो हज़ार रुपए पकड़ा कर बोली- ये लो ! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !

तो मैंने कहा- आंटी, नहीं ! ये पैसे में नहीं ले सकता क्योंकि मैंने भी उतना ही आनन्द लिया जितना आपने !

उनके बहुत जोर देने पर मुझे पैसे रखने पड़ गए। आंटी ने मुझे होटों पर चूमा, मेरे लण्ड को बाहर से चूमते हुए मुझे गुड-बाय कहा !

एक वह दिन था और आज का दिन है। उस दिन के बाद मैंने आंटी तो कई बार चोदा, और यही नहीं उन्होंने मुझे अपनी कई सहेलियों से मिलवाया किटी पार्टी में और कभी होटल में !

और आज उस एक मालिश ने मुझे दिल्ली का एक मशहूर मालिश वाला बना दिया है। सबका यही कहना है कि तुम्हारी उँगलियों में तो जादू है, हाथ लगते ही ये किसी और दुनिया में ले जाती हैं ! Antarvasna

Antarvasna

अन्तर्वासना के प्यारे पाठको और सभी आंटियों और लड़कियों को मेरा प्यार…Antarvasnaआप लोगों को मेरी पहली कहानी मकान मालिक की बीवी को चोदा अच्छी लगी होगी ! मैं आज फिर एक नई कहानी लेकर आया हूँ…

ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए मैं कहानी शुरू करता हूँ…….

मेरी उमर २२ साल हैं.मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं बचपन से ही लड़कियों और आंटियों से शरमाता था। मेरे पड़ोस में एक नई लड़की गुंजन आई हुई थी। उसकी उमर भी १९-२० के आस पास होगी, देखने में वो एकदम मस्त थी। जब मैंने उससे पहली बार देखा था तो तभी से उसे चोदने की सोचने लगा। उसे देखते ही मेरा लण्ड खडा हो जाता था। आख़िर में भगवान ने मेरी सुन ही ली। मेरे घर के सारे लोग सर्दियों की छुट्टी में गाँव चले गए। मेरे पेपर चल रहे थे सो मैं नहीं गया। खाना खाने के लिए पड़ोस में बोल गई थी मेरी मम्मी।

एक दो दिन तो सब कुछ सामान्य रहा।

तीसरे दिन दोपहर को वो घर में अकेली थी। मैं दोपहर का खाना खाने के लिए उनके घर गया। उसने खाना लगा दिया, मैंने कहा- तुम नहीं खाओगी क्या?

तो वो बोली- मैं पहले नहा कर फिर खाना खाऊँगी ! और वो नहाने चली गई। मुझे पेट की नहीं चूत की भूख लग रही थी सो मैं भी उसके पीछे हो लिया।

मैंने बाथरूम के दरवाज़े के छेद से देखा- उसने एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए।

मेरे शरीर में अजीब सा करंट दौड़ गया। यह सब देख कर मुझे मजा आ रहा था और डर भी लग रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए। मेरा लण्ड एक दम ९० डिग्री पर सीधा खडा हो गया था और ऐसा लग रहा था कि पैन्ट को फ़ाड़ कर बाहर निकल आएगा। कुछ देर बाद गुंजन ने कपड़े पहनने शुरू कर दिए। मैं जल्दी से आकर खाने के पास बैठ गया।

नहाने के बाद गुंजन एकदम परी की तरह लग रही थी। उसने पूछा कि तुमने अभी तक खाना क्यों नहीं खाया?

मेरा लण्ड अभी भी खड़ा था। उसकी निगाह उस पर पड़ गई। मैं अब उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था। मैंने बात बदलते हुए कहा कि दोनों मिलकर खाना खा लेते हैं।

पर वो मेरा लण्ड खडा देख कर मुझसे मज़े लेना चाहती थी। पर पहल मेरी तरफ से हो, इसके लिए उसने कहा कि खाना ठंडा हो गया हैं, तुम इसे गरम कर लाओ, मैं अभी नहा कर आई हूँ।

मैं अपने लण्ड को दुबका कर बिठा था। गुंजन बोली- यह क्या छुपा रहे हो?

मैं पूरी तरह झेंप गया था। मैंने कहा- कुछ नहीं !

तो वो बोली- यह छुपाने के लिए नहीं होता !

इतना कहते ही मैंने उसे पकड़ लिया और किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा।

धीरे -२ उसे भी मज़ा आने लगा। वो मेरे लण्ड को हाथ से सहलाने लगी। हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े एक-२ करके उतार दिए। मैंने जैसे ही उसकी चूत में ऊँगली की, उसके मुँह से उह आह उह्ह आह्ह्ह की आवाजें निकलने लगी। मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि जिसे मैं चोदने के सपने देखता था, आज उसे चोद रहा हूँ।

वो पूरे जोश में आ गई थी और तेज़-२ बोल रही थी- चोद दो मु्झे आज ! जी भर कर चोदो !

मैंने भी लण्ड उसके छेद पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया !

लण्ड का सुपारा अंदर जाते ही वो ज़ोर से चिल्लाई और बोली- थोड़ा धीर करो !

मैंने उसकी एक ना सुनी और एक और जोरदार धक्का लगते हुए लण्ड को पूरा घुसेड़ दिया उसकी चूत में।

फिर धीरे-२ धक्के लगाने शुरू किए। अब वो भी गांड हिला कर मेरा साथ दे रही थी।

२०-३० धक्कों के बाद वो और मैं दोनों झड़ गए।

मुझे पहली बार एहसास हुआ कि पृथ्वी पर स्वर्ग सिर्फ़ चूत मारने में हैं।

आगे भी मैंने कई बार गुंजन को चोदा !

वो कहानी बाद में !

आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर मेल करें.. Antarvasna

देसी गर्लफ्रेंड चुदाई कहानी मेरे साथ पढ़ने वाली मेरी गर्लफ्रेंड के साथ उसके पहले सेक्स की है. उसके साथ में दो साल से रिलेशन में साथ रहने के बाद एक दिन दोनों ने सेक्स किया. दोस्तो, मेरा नाम अर्जुन सिंह है. मैं जयपुर राजस्थान का रहने वाला हूँ. मैं दिखने में थोड़ा साधारण हूँ. मेरी हाइट और वजन एक औसत युवा की तरह हैं. मेरा लंड 6 इंच लंबा और 3 इंच चौड़ा है. आज मैं आपके साथ अपनी एक सच्ची देसी गर्लफ्रेंड चुदाई कहानी शेयर कर रहा हूँ जो मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड की है. ये मेरी दूसरी सेक्स स्टोरी है. मैं पिछले छह सालों से रोज़ सेक्स कहानियां पढ़कर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स के नए-नए तरीके आज़माता हूँ. मेरी गर्लफ्रेंड का नाम अवनी है. उसका फिगर 30-28-34 का है और वह एक बहुत खूबसूरत लड़की है. हम दोनों लगभग दो साल से रिलेशन में थे. स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई हमने साथ-साथ की थी. उसने ही सबसे पहले मुझसे प्यार का इज़हार किया था जिसे मैंने स्वीकार कर लिया था और हम दोनों का प्यार शुरू हो गया था. फिर कॉलेज के दिनों में अवनी किसी दूसरे कॉलेज में चली गई थी और मैं अकेला हो गया था. उसके बिना समय निकालना मुझसे बड़ा मुश्किल हो रहा था. मैंने बिना अवनी को बताए शहर की एक दूसरी लड़की से दोस्ती कर ली थी और उसके साथ सेक्स का मजा लेने लगा था. हालांकि वह लड़की पहले भी चुद चुकी थी तो उसके साथ प्यार जैसा कोई मसला नहीं था. दोस्तो, सेक्स की भी एक उम्र होती है, शायद यही सोचकर मैंने ऐसा किया था. मेरा स्टैमिना भी काफी अच्छा है वह मेरी चुदाई की स्टैमिना से काफी खुश थी और हम दोनों एक दूसरे से शारीरिक सुख की चाहत में ही जुड़ गए थे. मुझे भी उसकी लेने में मजा आने लगा था क्योंकि मुझे मुठ मारने से तो चुत चोदना ज्यादा ठीक लगा था. फिर एक दिन अवनी मुझसे मिलने आई उस दिन हम दोनों बाहर घूमने गए थे. अवनी ने कहा- आज हम कहीं अकेले में बैठकर बातें करेंगे, जहां हमें कोई डिस्टर्ब न करे. मैंने पूछा- आज तुम ऐसा क्यों बोल रही हो? वह बोली- मेरा भाई आज घर पर नहीं है. मुझे लेट होने पर कोई सवाल नहीं करेगा. मैं मम्मी को बोल दूँगी कि मैं अपनी किसी फ्रेंड की जन्मदिन पार्टी में हूँ, तो घर आने में थोड़ा टाइम लगेगा. मेरे मन में भी सवाल उठने लगे कि क्या आज मुझे एक वर्जिन लड़की के साथ सेक्स करने का मौका मिलेगा! तभी उसकी एक फ्रेंड का कॉल आ गया. अवनी अपनी फ्रेंड से सारी बातें शेयर करती थी. उसने अपनी फ्रेंड को हमारी मिलने की बात बता दी और कहा- अगर मम्मी पूछे तो बोल देना कि मैं आज तुम्हारे साथ हूँ. अब हम दोनों ने एक होटल में कमरा बुक किया. उस होटल में गए तो एक वेटर हमें रूम तक छोड़ने आया और पानी की बोतल भी साथ लाया. उसने कहा- सर, कुछ चाहिए तो एक रिंग कर देना, मैं सुविधा उपलब्ध करवा दूँगा. वह शायद बियर या सिगरेट आदि की तरफ इशारा कर रहा था. मैंने ओके कह कर उसे जाने को कह दिया. अब दरवाजा बंद करके मैं और अवनी बिस्तर पर बैठ कर कुछ मिनट तक बातें करते रहे. फिर मैंने अवनी को लिप-किस करना शुरू किया. पहले उसने मुझे पीछे धकेल दिया लेकिन जब मैंने दोबारा कोशिश की तो उसे भी मज़ा आने लगा. वह आई ही चुदाई के लिए थी तो कब तक नखरे दिखाती. हम 20 मिनट तक एक-दूसरे को किस करते रहे. फिर मैंने धीरे-धीरे उसके कपड़े उतार दिए और उसे सिर्फ़ पैंटी में छोड़ दिया. उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझे पूरा नंगा कर दिया. उसके गोरे बदन को देखकर मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. वह मेरे लंड को बड़े गौर से देख रही थी.मैं एक हाथ से उसके बूब्स मसल रहा था और दूसरे बूब्स को किस कर रहा था. वह धीरे-धीरे मदभरी सिसकारियां ले रही थी. मैं उसके पूरे शरीर पर किस करता हुआ उसकी पैंटी के पास पहुंच गया. वहां से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी. मैंने उसकी पैंटी पर एक प्यारा सा किस किया तो वह सिहर उठी और उसने मेरे सर को अपनी चुत से हटा दिया. उसके बाद मैंने वापस किस करना शुरू किया और धीरे-धीरे करके अवनी की पैंटी भी उतार दी. उसकी चिकनी, गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने थी. मैंने बिना देर किए उसकी चूत पर किस करना शुरू कर अवनी चुदाई के लिए बिना पानी की मछली की तरह तड़पने लगी. लगभग 20 मिनट तक मैं उसकी चूत चाटता रहा. इस दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी और मैंने उसकी चूत का नमकीन पानी पूरा पी लिया था. अब उसकी शर्म खत्म हो गई थी और वह अपनी दोनों टांगें खोल कर मेरे सामने चित पड़ी हुई थी और अपनी चुत सहलाती हुई मुझे देख रही थी. उसकी नशीली आंखों को देख कर मुझसे रहा न गया और मैं खड़ा हो गया. वह मेरे मोटे लंबे लंड को अपनी मस्त निगाहों से देखने लगी. जैसे ही उसने अपनी जीभ को होंठों पर फेरा तो मैं अपना लंड उसके मुँह के सामने ले गया. मैंने उसे मुँह में लेने को कहा. लेकिन उसने मना कर दिया. मैंने बहुत कोशिश की, तब जाकर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया. जैसे ही उसने मुँह में लिया, मैंने एक झटके में पूरा लंड उसके मुँह में डाल दिया. उसकी आंखें मानो बाहर आ गईं. फिर कुछ मिनट तक मैं उसके मुँह को चोदता रहा. जब मेरा होने वाला था, मैंने बिना कुछ पूछे सारा पानी उसके मुँह में निकाल दिया और पीछे से उसका सिर जोर से पकड़ लिया ताकि पानी बाहर न आए! वह जबरन मेरे रस को पी गई. फिर 5 मिनट आराम करने के बाद मैंने उसे वापस किस करके गर्म करना शुरू किया. उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ने लगी. वह बोली- अर्जुन, अब डाल भी दो यार … फाड़ दो मेरी चूत को … ये मुझे बहुत परेशान करती है. जब मैं तुमसे रोज़ कॉल पर बात करती हूँ, तो ये मुझसे उंगली करवा कर ही मानती है! मैंने देर न करते हुए अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी चूत पर सैट करने की कोशिश की. पहली बार में लंड फिसल गया लेकिन दूसरी बार मैंने अपने लंड और उसकी चूत पर तेल लगाया. फिर मैंने अवनी को किस करना शुरू किया. क्योंकि ये उसका पहली बार का मामला था और मैं नहीं चाहता था कि उसकी आवाज़ बाहर जाए. मैंने धीरे से लंड उसकी चूत पर सैट किया और एक जोरदार झटके के साथ उसकी चूत को चीरता हुआ मेरा लंड अन्दर समा गया. वो जोर से चिल्ला दीं … पर उसकी आंखें अभी तक बंद थीं.आहह हऊ हह ऊईईई ऊईई मां बचाओ … मर गई … मेरी चूत फट गई … मां बचाओ … अर्जुन निकाल लंड.” वह तड़पने लगी और उसकी आंखों में आंसू आ गए. मैंने उसे फिर से किस करना शुरू किया. जैसे-जैसे उसका दर्द कम हुआ, उसने अपनी गांड उठाकर इशारा किया. फिर मैं कहां रुकने वाला था. मैंने एक और धक्का देकर अपना लंड अवनी की चूत में पेल दिया. लंड चुत को फाड़ता हुआ अन्दर तक चला गया. अब उस की आंखों से पानी आने लगा था. उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया. अवनी ‘ऊई … मां … मर गई … आह सी … सी …’ करके आहें भरने लगीं. अब मैंने उसे रिलैक्स होने दिया. मैं रुक गया और धीरे धीरे उसकी चूचियों को मसलने लगा और चूमने लगा. फिर उसके चूचों को पीने लगा. थोड़ी देर बाद उसकी चूत का दर्द कम हुआ तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया. अवनी ‘आह हह अहहह हहह …’ की आवाज करके लंड लेने लगीं. मेरा लंड अन्दर बाहर अन्दर बाहर हो रहा था. उसका बदन पूरा का पूरा हिल रहा था. तभी मुझे उसकी चूत की गर्मी का अहसास होने लगा था. उसकी चूत काफी कसी हुई थी. मैं अब अपनी स्पीड बढ़ाए जा रहा था. अवनी ‘आह आह आह …’ कर रही थीं. तभी अवनी की जोर की सिसकारी निकली- आहह हहहह ऊईईई ईईईई मर गई ऊईई. मैंने झटकों की रफ़्तार फुल स्पीड में कर दी और तेज़ी से चोदने लगा. अब उसकी चीख सिसकारियों में बदल गई, उसे भी मज़ा आने लगा. गपागप गपागप चुदाई चलने लगी. अवनी- आहह हहह ऊईई ईईई ऊईई मां … मर गई अर्जुन प्लीज धीरे धीरे करो. मगर मैंने झटकों की रफ़्तार तेज ही रखी और उसकी कमर पकड़ कर तेज़ी से चोदने लगा. ‘आहह हहह ऊईईई ईई आहह ऊईईई …’ और ‘थपथप थपथप …’ की आवाज से पूरा कमरा गूंजने लगा. मैंने अलग-अलग पोजीशन में पूरे एक घंटा तक उसे चोदा. इस दौरान अवनी दो बार झड़ चुकी थी. थोड़ी देर बाद मेरा होने वाला था. मैंने पूछा- कहां निकालूँ, अवनी? वह बोली- मेरी जान, मेरी चूत में ही निकाल दो! मैं तुम्हारा पानी अपनी चूत में लेना चाहती हूँ. मैंने दो-चार लंबे झटकों के साथ उसकी चूत में अपना पानी निकाल दिया और उसके ऊपर ढेर हो गया. थोड़ी देर बाद जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत से निकाला तो मेरा लंड खू.न से भरा हुआ था. ये देखकर अवनी बिना कुछ सोचे-समझे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर साफ करने लगी. हम दोनों बाथरूम में गए और शॉवर चालू किया. मैंने उसकी चूत को अच्छे से साफ किया. उसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था तो मैंने उसे उठाकर बेड पर लाकर सुला दिया. एक घंटे तक हम बिना कपड़ों के एक-दूसरे को खुशी से निहारते रहे. उसके बाद हम दोनों ने एक बार और सेक्स किया और अब वह मुझसे चुदने के लिए जब तब मिलती रहती है. आपको मेरी कहानी कैसी लगी? कमेंट में ज़रूर बताएँ या मुझे मेल करें। कोई भी भाभी या लड़की जो अकेली हो जयपुर में चुदाई कि इच्छुक हो मुझे मेल कर सकती हैं गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। arjunx359@gmail.com।
(Kamine Teacher Ne Ki Meri Maa Ki Chudai)मां की चुदाई

मैं आपको एक नई चुदाई कहानी सुनाने जा रही हूँ जो कि बिल्कुल सच्ची कहानी है।
मैं 23 साल की हूँ और सुंदर लड़की हूँ। मेरी कहानी एक माँ और उसके आशिक़ द्वारा एक मासूम लड़की को गंदे कामों में धकेलने की है।
मेरे पापा एक बैंक में काम करते हैं और मेरे पापा की मेरी मम्मी के साथ पटती नहीं है, वे हमेशा देर से घर आते हैं और खाना खा कर सो जाते हैं, मेरी तरफ़ उनका ज़रा भी ध्यान नहीं है।

यह कोई 5 साल पहले की घटना है, तब में 18 साल की थी। मैं बारहवीं में पढ़ रही थी। मैं मैथस में कुछ कमजोर थी तो मम्मी ने मुझे पढ़़ाने के लिए एक मैथ टीचर रखा था, जिस की उम्र क़रीब 28 साल की होगी। वो टीचर देखने में अच्छा था।

पहले ही दिन मम्मी ने उन्हें और मुझे अपने कमरे में बुलाया और हिदायतें देना शुरू कर दी। मम्मी ने मुझ से टीचर के लिए चाय बनाने को कहा और मैं चली गई जब में चाय लेकर आई तब मैंने देखा की मम्मी के कपड़े अस्त व्यस्त थे और टीचर के शर्ट पर मम्मी के लंबे बाल थे। मम्मी का पाऊडर भी उन पर लगा हुआ था।
मैं समझ गई थी कि वे दोनों प्यार कर रहे थे।
मुझे देख कर वे दोनों पहले की तरह ही बैठ गये जैसे कि कुछ हुआ ही ना हो।

टीचर हर रोज शाम के 5 बजे आया करते थे और मुझे पढ़़ाने और समझाने के बहाने इधर उधर हाथ फ़िराया करते थे। मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता था। मगर मैं किससे अपनी बात कहती।

एक दिन टीचर ने मुझे कुछ याद करने को कहा था और मैंने नहीं किया था। बस उन्होंने मेरी गोल चूचियों की चुटकी ली और बोले- तुम कुछ भी पढ़़ती नहीं हो, मैं तेरी मम्मी से बात करूँगा।
इतना कह कर वे रसोई में चले गये जहाँ मम्मी खाना बना रही थी।
उनके आते ही मम्मी ने पूछा- तुम्हारा काम हो गया?
टीचर ने कहा- हाथ ही रखने नहीं देती, चूत क्या देगी। मेरा तो लंड बड़ा हो गया है, उसे शांत करना पड़ेगा।
मम्मी ने कहा- मैं हूँ ना!

इतना कह कर उन्होंने टीचर की पैंट का ज़ीप खोल कर टीचर के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। टीचर का लंड बहुत बड़ा था जिसे देख कर मेरी चूत में चींटियाँ रेंगने लगी। मैं वो दृश्य देख ना सकी और अपने रूम में आ गई।
यह दृश्य मेरे मन में कई दिनों तक छाया रहा और मैं रात भर टीचर का लंड याद कर कर के मैं सो नहीं पाती थी।

कभी अपनी चूचियों को सहलाती तो कभी चूत को… मेरे बुर से पानी झरने लगता था। मैं यह सोचती थी कि लंड को चूसना शायद अच्छा लगता होगा और यदि मैं किसी का लंड चूसती हूँ तो वो मेरी भी बुर चाटे। ये ओरल सेक्स की बातें सोच कर मेरी चूत में खलबली मच जाती थी। मैं भी टीचर का लंड चूसने बेताब हो गई।

एक दिन टीचर बोले- आओ मैं तुम्हें मैथ का ये फारमूला सिखा दूँ!

मैं टीचर के पास बैठ गई और वे बहाने से मेरी चूचियों सहलाते रहे। मुझे यह अच्छा लग रहा था और मैंने अनजाने में अपनी टाँगें फैला दीं। बस उन्होंने अपना हाथ वहाँ रखा और धीरे से मेरे बटन खोलने लगे।

मैंने कहा- मम्मी आ जाएगी, अभी कुछ मत करो!
उसने कहा- चल मेरी जान, तेरी मम्मी भी मुझ से डलवाती है, आ भी जाए तो भी कोई फ़रक नहीं पड़ेगा।
टीचर ने मुझे पूरी नंगी कर दिया और मेरी चूचियों और बुर को चाटने लगे और अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया।

इतना बड़ा लण्ड पाकर मैं ख़ुश हो गई और मज़े से चूसने लगी।

तभी मेरी मम्मी आ गई और ग़ुस्से से लाल होकर बोली- ये तुम दोनों क्या कर रहे हो। ज़रा मुझे भी बताओ?
टीचर ने कहा- मैं तुम्हारी बेटी को तैयार कर रहा हूँ। इसकी चूत बहुत मीठी है इसे तुम भी चाटो।
मेरी मम्मी ने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया और चाटने लगी। मम्मी का मेरी चूत चाटना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

उधर टीचर ने अपना पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसा दिया और फिर उसने मुझे जी भर के चाटना शुरू किया। मम्मी के साथ चुदाई का यह खेल मुझे नर्वस कर रहा था। मगर मन में यह बात भी थी कि मेरी अपनी मम्मी ने मुझे सेक्स की सारी चीज़ें सिखाईं।

लेखिका : पायल शर्मा Hindi Porn Stories

मेरी सहेली पायल शर्मा, Hindi Porn Stories उम्र 24 वर्ष की, भरपूर जवान, शादी शुदा है, सुन्दर और लुभावनी फ़िगर वाली युवती है। उसने अपनी कहानी मुझे लिख कर भेजी है, उसे उसी के शब्दों में प्रस्तुत कर रही हूँ।

मेरी शादी मेरे व्यस्क होते ही 18 वर्ष की उम्र में कर दी थी। उस समय मैं सेक्स के बारे में अधिक नहीं जानती थी। पर शादी के बाद जब से मेरी चुदाई आरम्भ हुई है, मैं तो चुदाई की मतवाली हो गई हूँ। जैसा कि अधिकतर होता है कि समय के साथ साथ सेक्स से भी दिल ऊब जाता है, जिसका मुख्य कारण एक जैसी चुदाई, वही रात में पति को जोश चढ़ा और ऊपर चढ़ कर चोद दिया और सो गये। धत्त्… ये भी कोई जिंदगी है।

आज पांच-छः साल हो गये, अब तो पति देव का यह हाल है कि काम से लौटे, खाना खाया और बिस्तर पर लेट गये। बहुत हो गया तो महीने में एक बार चोद दिया। पर मैं… ना… ना… पतिव्रता तो हूँ, पर चुदाई के मामले में नहीं…
उसके कुछ दोस्तों से मैं चुद चुकी हूँ, पर वो सभी अब यहाँ नहीं है। मेरी चूंचियाँ भी अब बड़ी हो चुकी हैं, इतनी सी उम्र में 38 की ब्रा पहनती हूँ, मेरे चूतड़ बड़े और लचकदार हो गये हैं। मैं टाईट जीन्स और कसी हुई बनियान नुमा टॉप पहनती हूँ। मेरे बड़े बड़े चूंचे उसने उभर कर हिमालय पर्वत को भी मात देते है। कोई एक बार देखता है वो देखता ही रह जाता है।

घर की मुर्गी दाल बराबर…! घर के पास तो किसी का ध्यान जाता ही नहीं है। बेचारा पड़ोसी रोज़ ही प्यासी नजरों से मुझे निहारता रहता था। मुझे देख कर उसका लण्ड भी कड़कता होगा। जी हां, साथ वाले घर में एक लड़का रहता है, पर उस पर कभी ध्यान ही नहीं गया। बीस साल का भरपूर जवान लड़का, नाम आदित्य, हम लोग उसे आदी कहते है। उसकी नजर मुझ पर बहुत पहले से थी, पर मेरा ध्यान उस पर कभी नहीं गया।

एक दिन मैं बाल्कनी पर बैठी किताब पढ़ कर रही थी कि मेरी नजर अचानक साथ वाले घर पर आदी पर पड़ी… वो एक छोटी सी चड्डी पहने नहा रहा था। वो अपनी चड्डी के अन्दर हाथ घुसा कर लण्ड पर साबुन मल रहा था, फिर हाथ पीछे घुसा कर गाण्ड पर साबुन भी लगाता था। आह… मेरी नजरें जैसे उस पर चिपक कर रह गई। कसा हुआ बदन, उभरी हुई मसल्स, ताकत और उर्जा से भरा हुआ शरीर… जिस पर उसका उभरा हुआ लण्ड चड्डी में से साफ़ नजर आ रहा था।

अब वो अपने बदन पर पानी डाल रहा था। कुछ देर बाद उसने अपने शरीर को तौलिये से पोंछना चालू कर दिया। एक बार तो उसने सावधानी से यहाँ वहाँ देखा, फिर जल्दी से अपना लण्ड निकाला और तौलिये से साफ़ कर दिया। मेरे दिल ने जैसे धड़कना बन्द कर दिया। उसका सोलिड लण्ड मोटा और लम्बा, मेरे दिल को भा गया। मेरी चूत फ़ड़क उठी, बोबे कसक गये…
उसने तौलिया लपेटा और चड्डी खोल कर दूसरी पहनने लगा। उसकी चूतड़ों की दरार का दर्शन भी हो गया। मेरी नजर मेरे बोबे पर पड़ी, मुझे लगा कि मेरा ब्लाऊज तंग होने लगा है। मुझसे रहा नहीं गया मैं उठ कर नीचे चली आई और उसकी दीवार के पास खड़ी हो गई, जैसे कि फूल तोड़ने आई हूँ। चड्डी में से उसका उठा हुआ लण्ड मुझे बहुत ही प्यारा लग रहा था। मुझे इस तरह से देखने पर वो बेचारा झेंप गया। मैं मुस्करा उठी।

पर उसने तौलिया नहीं लपेटा, अब वो भी मुस्करा रहा था। उसे लगा कि शरमाना आण्टी को चाहिये,’ नमस्ते आण्टी… ‘

‘नमस्ते आदी… आजकल कहा रहते हो तुम… दिखते ही नहीं हो…?’

‘कहीं नहीं आण्टी… यहीं हूँ… कोई काम हो तो बता दीजिये…!’

‘हां काम तो है… समय मिले तो घर आओ, चाय भी पियेंगे… और काम भी बताऊंगी !’

‘ठीक है आण्टी… अभी आता हूँ… ‘ उसने चुपके से अपना लण्ड देखा जो खड़ा हुआ था, और शायद मुझे बुला रहा था। अचानक उसकी नजर मुझसे फिर मिल गई। दोनों ही मतलब से मुस्करा दिये। मैं खुश हो गई, मुझे लगा कि ये तो पट जायेगा। शायद वो भी यही सोच रहा था। अनजाने में मेरी एक आंख चल गई, आंख मारते ही वो शरमा गया। पर वो सब कुछ समझ चुका था।

कुछ ही देर में वो मेरे घर पर आ गया। इतनी देर में मैंने ढीला सा कुर्ता और पेटीकोट पहन लिया था, पेण्टी और ब्रा उतार कर एक तरफ़ रख दी थी। मुझे ये सब करते हुये बड़ी झुरझुरी सी हो रही थी और मन में लग रहा था कि मुर्गा तो फ़ंसा।

मैं अपनी टांगें बड़ी बेशर्मी से मेज़ पर रख कर बैठ गई ताकि उसके अन्दर आते ही उसे चूत के दर्शन हो जायें। जैसे ही वो अन्दर आया, मैंने उसे सामने बैठा दिया। जैसा कि होना ही था, उसकी नजरें सीधे मेरे उठे हुये पेटीकोट पर पड़ी और मेरी चिकनी शेव की हुई चूत पर पड़ी। एक बार जो नजरें टिकी तो वहीं पर चिपक गई। यह देख कर मैंने अपना थोड़ा सा पांव और खोल दिया। चूत अब स्पष्ट दिखने लगी थी।

‘क्या देख रहे हो आदी… !’

‘अह्ह्… कुछ नहीं… ‘ उसका लण्ड कठोर होता जा रहा था। मैं आगे को झुक गई, मेरे लो कट ब्लाऊज में से मेरे बड़े बड़े उरोज छलक उठे। उस पर प्रहार पर प्रहार हो रहे थे, वो बेचारा कब तक सहता। मेरे उरोज भी कड़क हो उठे थे, चूचुक फूल कर मचल रहे थे कि कोई उन्हें मसल दे।

‘आण्टी… बहुत बड़े हैं… ‘ उसके मुँह से अचानक निकल पड़ा।

‘क्या…? अच्छा तो जनाब ये देख रहे थे…! ‘ मैंने उसे उलाहना दिया।

वो असमंजस में था कि कैसे अपने आप को कंट्रोल में रखू, कहने लगा,’आण्टी… काम हो तो बताओ मुझसे और नहीं बैठा जा रहा है… ‘ वो कसमसाते हुए बोला।

‘बैठे रहो… खड़े हो जाओगे तो… तुम्हारा यह भी खड़ा हो कर जोर लगायेगा… ‘ मैंने हंसते हुए कहा और धीरे से उसके लण्ड पर हाथ मार दिया।

‘इसीलिये तो कह रहा हूं ना… बस मैं जाऊँ…? ‘ आह भरता हुआ वो बैचेन सा उठा।

‘ तुम मत बैठो पर इसे बैठाना नहीं है क्या… आओ पास में यहां बैठ जाओ… ‘ उसे मैंने सोफ़े में पास बैठा लिया…

अपने बोबे दिखा कर बोली,’तुमने ये देखे हैं ना… इन्हें दबाओ !… और देखो मैं भी यही चाहती हूं !’

कह कर मैंने उसका हाथ अपने सीने पर रख दिया। उसने मुझे बड़ी आसक्ति से मुझे देखा, और मेरी चूचियां दबाने लगा लगा जैसे उसने मुझे धन्यवाद दिया। मेरा हाथ उसके लण्ड पर आ गया। मैंने उसकी पेन्ट की ज़िप खोल दी और चड्डी में से उसका लण्ड खींच कर बाहर निकाल लिया।

आह कितना सुन्दर सुपाड़ा था… लाल और चिकना। उसने अपनी पेन्ट को खोल कर नीचे कर लिया। उसका पूरा लण्ड बाहर निकल आया। उसने मेरे बोबे को मसलते हुए एक हाथ चूत पर रख दिया। मेरा हाथ उसके लण्ड पर चल पड़ा… उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

मैंने जोर से उसका लण्ड मरोड़ते हुये मुठ मारनी शुरु कर दी। वो तड़प उठा। उसने भी हिम्मत की और अब उसकी अंगुली भी मेरी चूत में घुस गई थी। मेरी चूत के पानी से उसका हाथ तर हो गया था। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे मुख में अपनी जीभ डाल कर चूसने लगा।
जोश में मैं भी मुठ और जोर से मारने लगी। उसके मुख से जोर से हाय निकली और उसका वीर्य छूट गया। उसका लण्ड जोर से पिचकारी छोड़ने लगा।
मैंने तुरन्त ही झुक कर उसका लण्ड मुँह में ले लिया और उसका कुछ वीर्य तो पी गई और कुछ बाहर गिर गया। उसने मेरे बोबे छोड़ दिये और और अपना पेण्ट ठीक करने लगा।

‘अभी रुको ना… चले जाना… जल्दी क्या है?’

‘आण्टी अभी कॉलेज जाना है… फिर कल आऊंगा’ मैंने भी उसे नहीं रोका। सोचा कि इसे चस्का तो लग ही गया है, साला जायेगा कहाँ, यहीं तो आयेगा लण्ड शान्त करने।

मुझे सच में बहुत मजा आया था… मैं रसोई से बैंगन उठा लाई और अपनी चूत पर घिसने लगी। कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया। इतना कुछ होने के बाद मुझे लगा कि बैचेन आदी नहीं… मैं हो रही हूँ।

तड़पते हुए मैं उसकी राह देखने लग गई।

शाम को वह कॉलेज से वापस आया तो मुझे देख कर उसने हाथ हिलाया। मेरे दिल को सुकून मिला। मैंने हाथ हिला कर उसका जवाब दिया। उसने यहाँ वहाँ देखा और हाथ से लण्ड बना कर चूत में घुसाने का इशारा किया। मैं शरमा गई। मैंने भी हाथ की अंगुलियों से चूत का छेद बना कर उसने एक अंगुली लण्ड बना कर डाल कर चुदाई का इशारा किया। वो खूब हंसा और आंख मार दी। मैंने शरमा कर मुँह को हाथ से छुपा लिया।

सवेरे नौ बजे मेरे पति ओफ़िस चले गये। अब मैं बैचेनी से आदी की राह देखने लगी थी। मैंने हल्के फ़ुल्के कपड़े पहन लिये और चुदने के लिये बेकरार थी। चूत लप लप कर रही थी, पानी से तर हो रही थी। बार बार मेरी नजरें बाहर झांक रही थी। साला आया क्यों नहीं… ये मर्द बड़े निर्दयी होते हैं, साले ने कल भी मेरी चूत नहीं मारी थी। ठण्डी आह भरते हुए मैंने सोचा कि जब तक वो आये मैं नहा कर फ़्रेश हो लूँ…

मैं नँगी हो कर नहाने लगी। मुझे लगा कि जैसे मेरा शरीर आग में जल रहा हो। मैं अपनी आंखे बंद कर के अपने बड़े बड़े चूचे निचोड़ने लगी… स्तनाग्रों को मसलने लगी… मुझे तभी खटका हुआ… मैंने झांक कर देखा तो आदी ही था। उसे देखते ही मेरे मन की कली खिल उठी। लगता था वो भी चोदने की तैयारी से आया था। हल्का पजामा और बनियान बस… यही था उसका पूरा पहनावा।

मैंने गीले बदन ही तौलिया लपेटा और बाहर आ गई।

‘बड़े सेक्सी लग रहे हो… ‘

‘आण्टी… जरा अपने को तो देखो… पूरी बम्ब लग रही हो… यानी पटाखा…’

‘आ एक किस कर ले… ‘ मेरी चूत में आग लगी हुई थी।

‘काहे का किस आण्टी… आज तो लौड़े का नम्बर है किस करने का !’ कह कर उसने मुझे अपने से लिपटा लिया। मेरा तौलिया खींच कर एक और बिस्तर पर उछाल दिया। उसने बिना किसी देरी किये अपना पजामा खोल दिया और नीचे से नंगा हो गया।

‘आजा पायल… आज अपन दोनों मस्ती करें… उसने होंठ मेरे होंठ पर रगड़ दिये और उन्हें चूसना शूरू कर दिया। मैं मस्ती में झूम उठी। उसका लण्ड मेरी चूत के छेद को ढूंढने लगा और चूत के आस पास घुसने लगा।

‘आदी, चूत तो सेन्टर में है… वहाँ घुसाओ… अच्छा चलो बिस्तर पर… वहां तो खुद ब खुद घुस जायेगा… और मुझे चोद देगा !’

उसने प्यार से मेरे चूंचे दबाये… और किस करता हुआ बिस्तर की ओर चल पड़ा। मुझे उसने प्यार से लेटा कर खुद पास में लेट गया। मुझे प्यार से सहला कर अपने ऊपर खींच लिया। मैं अब उसके ऊपर आ गई थी। उसका लण्ड सीधा खड़ा था। ऐसा लग रहा था कि कोई सड़क पर खम्भा खड़ा हो। मैंने उसके लण्ड को हाथ में लिया और धीरे से मुठ मारी…

उसे बड़ा मजा आया… बोला,’आण्टी… और मुठ मारो… बहुत मजा आ रहा है… !’

मैंने सोचा कि कही पहले की तरह झड़ गया तो चुदाई रह जायेगी। मैंने उसका सुपाड़ा खोला तो देखते ही खुश हो गई… कुंवारा लण्ड था… उसने किसी को चोदा नहीं था। मैंने बड़े प्यार से उसे अपने चूत के खड्डे में रखा और धीरे से चूत का भार उस पर डाला। फ़क से लण्ड खड्डे में घुस पड़ा। मुझे असीम मजा आया। उसके मुख से भी आह निकल पड़ी।

‘मेरे आदी… तुम कितने प्यारे हो… हाय !’

फिर मैंने और जोर लगाया… उसमें जोश भरा था… नई उमन्गें थी, उसने भी नीचे से उछाल भरी। मेरी चूत ने उसका पूरा लण्ड निगल लिया। उसके मुँह से एक दर्द भरी आह निकल गई।

‘आण्टी… मुझे लण्ड पर लग गई है… !’

‘बस… सह लो… पहली बार ही ऐसा होता है… बाद में नहीं होगा… ‘

मैं उसके ऊपर लेटी रही, फिर बहुत ही धीरे धीरे से चूत हिलानी शुरू कर दी। उसकी आह निकलती गई। मैंने उसे होंठों पर होंठ रख कर कस कर दबा लिया और धक्के बढ़ा दिये। थोड़ी देर तक तो वो कसमसाता रहा फिर शान्त हो चला… मैंने अब उसे किस करना चालू कर दिया और चूतड़ो को दबा कर उसके लण्ड पर मारना शुरू कर दिया।

उसे भी अब मस्ती आने लगी। वासना की रंगीनियाँ रंग दिखाने लगी। वो कुछ ही देर में वासना के नशे में झूम उठा और उसने मुझे दबा कर नीचे पटक दिया। मेरा शरीर उसके बोझ तले दब गया, ये सुहाना दबाव मुझे और मस्त कर गया जब उसके लण्ड ने मुझे दबा कर चोदना शुरू कर दिया।

‘वाह मेरे शेर… लगा जोर… चोद दे अपनी अक्सू को… ‘ मैं भावना में बह चली।

‘हाय रे अक्सू आन्टी… आप कितनी अच्छी हैं… पहले क्यो नहीं चुदाया… !’

‘उईईई… क्या मेरी फ़ाड़ डालेगा राम… आह्ह्ह मेरा आदीऽऽऽ… चोद दे रे।’

वो भचाभच चोद रहा था… मुझे स्वर्ग की सैर करा रहा था। कभी वो मेरे बोबे मचकाता और कभी मेरे होंठो को चूमता और साथ में मेरे गालों को चाटता भी जा रहा था। मैंने चूतड़ों कि लय उसके लण्ड के साथ मिला ली और फ़च फ़च की आवाज के साथ मुझे चोदता जा रहा था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेरे शरीर में लग रहा था कि खिंचाव होने लगा था। सारे जिस्म में जैसे मीठा मीठा जहर भरने लगा। मेरी वासना की तड़प बढ़ने लगी। मैं उसके जिस्म को जोर से जकड़ने लगी… उसने भी लण्ड का भार मेरी चूत पर डाल दिया और उसका बदन जैसे कस गया।

‘मेरे आदी… हाय रे… फ़ाड़ दे मेरी चूत को… ।’ मेरी आंखों में गुलाबी डोरे तैर रहे थे, अधखुली आंखे नशे से चूर थी… लग रहा था कि मुझे जिन्दगी भर चोदता ही रहे।

‘ आण्टी… मेरा लण्ड… हाय रे… गया…’ वो शायद झड़ने वाला था। मुझे भी झड़ने जैसी उत्तेजना लगने लगी थी। आखिर चूत को मस्त लण्ड मिला था और हम दोनों दिल से चुदाई कर रहे थे। मैं आह भर कर उसे जकड़ कर चूत का रस निकालना चाह रही थी।

‘ आदीऽऽऽ… आह्ह्ह… तेरी तो… हाय चुद गई रे… गई मैं तो… ऊईईई…’

मेरी चूत से जवानी का रस चू पड़ा और मैं झड़ने लगी…

तभी आदी भी चीख सा उठा,’अक्सू आण्टी… गया मेरा लौड़ा… निकला माल… हाय रे… निकला…’

और वीर्य निकलते ही उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया,’आजा ऊपर ले आ…’

वो लण्ड मेरे मुँह तक लाता, उससे पहले ही उसकी पिचकारी निकल पड़ी और सीधे मेरे चेहरे पर आ कर वीर्य गिरा और अब उसका लौड़ा मेरे मुँह में था… थोड़ा ही सही पर वीर्य पीने को मिल गया… उसका लण्ड पूरा चाट कर साफ़ कर लिया फिर अपने चेहरे का वीर्य भी जीभ से मुँह में चाट लिया। आदी ने भी मेरे मुख से मुख को सटाते हुए मेरे चेहरे का वीर्य चाट किया। अब आदी ने पास पड़े कपड़े से मेरा मुख साफ़ किया और मुझसे लिपट कर लेट गया।

मुझे उसने आज भरपूर मजा दिया था। उससे मैंने दिन को रोज चोद जाने का आग्रह किया जिसके लिये वो सहर्ष तैयार हो गया।

‘अक्सू आण्टी… आप बहुत ही प्यारी चुदाती है… आप मुझसे गाण्ड भी मरा लेंगी क्या?’

‘मुझे तरसाओगे क्या… अभी गाण्ड मार लो आदी…’

‘सच आण्टी…’ मेरे कुछ कहने के पहले ही वो मेरी पीठ से चिपक गया और मेरी चूतड़ो की फ़ांके खुल गई। उसका लण्ड कठोरता से भर उठा। उसने मेरे चूतड़ों को सहलाया और दोनों गोल गोल चूतड़ों को फ़ाड़ कर गाण्ड का छेद खोल दिया। एक थूक का लौंदा मेरी गाण्ड के छेद पर महसूस हुआ और उसका सुपाड़ा जो कि कुछ दर्द से सूज भी गया था उसका स्पर्श हुआ। जोर लगाते ही उसका लण्ड मेरी गाण्ड में था…

मुझे मीठा सा एक अह्सास हुआ। गाण्ड की दीवारों को सहलाता हुआ लण्ड अन्दर उतरने लगा। मुझे बड़ा सुहाना सा लग रहा था। अब उसने धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना चलू किया और मेरी गाण्ड चुदने लगी थी… मैं निहाल हो उठी थी… फिर मेरी उसने जी भर कर गाण्ड मारी…

गाण्ड मराने की इच्छा पूरी हो गई, गाण्ड मराने का मजा काफ़ी दिनों बाद आया था। उसका गाण्ड मारना मुझे बहुत ही भाया और जब वो झड़ गया तब मैंने उसे एक बार फिर से मेरी चूत की प्यास मिटाने को कहा…

इतनी देर में मेरी चूत फिर से पानी छोड़ने लगी थी। वो बेचारा बुरी तरह फ़ंस चुका था… कुछ ही देर में उसे तैयार करके मैंने अपनी टांगे उठा कर चूत को खोल दिया। आदी को मुझे चोदना ही पड़ा…

उसे भूखी शेरनी जो मिल गई थी… जो उसकी जवानी के रस को पूरा पी जाना चाहती थी। अचानक मुझे लगा मेरा काम तो हो गया है अब इसे रवाना कर देना चाहिये, कही भण्डा फ़ोड़ ना हो जाये… पर इस चूत का क्या करुं साली प्यासी की प्यासी रहती है।

जी भर कर जब मैं चुद चुकी तो उसे मैंने लिपटा कर प्यार किया। वो भावना में बह चला और प्यार की कसमें खाने लगा। उसे शान्त करके मैंने उसे कहा कि यदि तुम मुझे प्यार करते हो तो कल फिर दिन में मुझे चोद जाना। उसने मेरे बोबे दबा कर अलविदा कहा।

मेरे जाल में शिकार फ़ंस चुका था…

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मुझे मेल करे पायल शर्मा के आई डी पर ! Hindi Porn Stories

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