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Massage Girl in Kurung Kumey: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kurung Kumey who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kurung Kumey that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kurung Kumey massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kurung Kumey who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kurung Kumey massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kurung Kumey massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kurung Kumey who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kurung Kumey employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kurung Kumey helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kurung Kumey

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kurung Kumey at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi Porn Stories

हेल्लो मेरा नाम कुणाल है और उम्र 24 Hindi Porn Stories साल है। मैं करनाल (हरियाणा) मैं रहता हूँ। मैं हमेशा अन्तर्वासना पर कथाएँ पढ़ता हूँ और मज़े करता हूँ।
आज मैं आपको मेरी सच्ची कहानी सुनाता हूँ।

वैसे मैं देखने में कोई खास नहीं हूँ, कद भी कम है पर मैं बातों से हमेशा ही सबको अपना बना लेता हूँ।

यह बात तबकी है जब मैं कंप्यूटर सीखता था, वहां पर एक लड़की आती थी 25-26 साल की, उसका नाम सोनू था, उसकी शादी हो चुकी थी। उसका फिगर कमाल का था, बड़े बड़े बूब्स और उसकी गांड तो बहुत ही सेक्सी लगती थी, थी भी वो काफी अमीर घर से, धीरे धीरे मैंने उस से बातें करना शुरू कर दिया।

उसने मुझे बताया कि वो यहाँ सिर्फ़ अपना समय काटने आती है, घर में उसका मन नहीं लगता। उसके पति हमेशा काम में व्यस्त रहते थे जयादातर वो शहर से बाहर ही रहते थे।

एक दिन उसने कहा कि चलो कहीं काफ़ी पीते हैं तो मैंने कहा कि आज तो मैं आपके हाथ की काफ़ी पीना चाहता हूँ।

तो उसने कहा ठीक है फ़िर मेरे घर ही चलते हैं मेरे पति भी बाहर गए हैं। फ़िर हम दोनों उसकी कार में उस के घर चले गए, उनके नौकर ने दरवाजा खोला, हम दोनों अन्दर चले गए तो उसने अपने नौकर को जाने के लिए कह दिया फ़िर अपने नौकर के जाते ही उसने अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया।

उसके बाद वो कहने लगी कि तुमने काफ़ी पीनी थी, मैं बना के लाती हूँ। फ़िर थोड़ी ही देर में वो 2 काफ़ी बना के ले आई। हम दोनों काफ़ी पीने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे।

मैंने उससे ऐसे ही पूछ लिया कि आपके पति आपको भी समय देते हैं या फ़िर सिर्फ़ बिज़नस को ही?

तो वो उदास हो गई और कहने लगी कि उनके पास समय होता ही नहीं उसके लिए ! वो तो सिर्फ़ और सिर्फ़ बिज़नस को ही समय देते हैं !

फ़िर अचानक मेरे मुंह से निकल गया कि फ़िर तो आप दोनों…! इतना कहते ही मैं रुक गया।
तो वो कहने लगी- आप दोनों क्या? बोलो !
मैंने कहा कुछ नहीं !
वो बोली कि तुम यही कहना चाहते हो ना कि हम सेक्स करते हैं या नहीं !

मैंने कहा हाँ मैं यही पूछना चाहता था।

तो वो कहने लगी कि महीने में 1 या 2 बार सिर्फ़ ! कहने लगी पर मेरी इतनी इच्छा होती है कि बस पूछो मत !

यह कह कर वो चुप हो गई।
फ़िर वो बोली कि तुम्हे एक बात कहूँ तो तुम बुरा तो नहीं मानोगे?
ना ! मैंने कहा- नहीं बोलो !

वो कहने लगी कि अगर तुम मेरी इच्छा को पूरा कर दो मैं तुम्हें तुम जितना चाहोगे उतना पैसा दूंगी।

मैंने कहा कि यह तुम क्या कह रही हो? तो वो मेरे साथ आ कर बैठ गई उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, कहने लगी- प्लीज़ कुणाल मैं प्यार चाहती हूँ प्लीज़ ! उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने बेडरूम में ले गई वहां जाते ही हम दोनों ने किस करनी शुरू कर दी। फ़िर मैंने उसका कमीज़ निकाल दिया।

उसके बूब्स चाँदी की तरह चमक रहे थे, उसने श्वेत ब्रा डाली हुई थी, फ़िर मैंने वो भी निकाल दी और उसे बेड पर लेटा दिया और उसके एक एक अंग को चूमने लगा- उसकी आंखों को, होठों पर, उसके कानों पर, गले पर।

सोनू के मुंह से सिसकी निकल रही थी सी इ इ ई इ ई ईई अह ह हह हह !

उसके बाद मैंने उसकी सलवार उतार दी और उसकी टांगों पर हाथ फेरने लगा। फ़िर मैंने उसकी टांगों पर ऊपर से नीचे तक किस किया और उसकी पैंटी पर हाथ फेरने लगा। सोनू के मुंह से आवाजें आ रही थी अह ह ह ! उसकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी।

फ़िर मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को किस करने लगा। वो एक दम मछली कि तरह छटपटा रही थी।

फ़िर मैंने भी अपनी पैंट उतार दी और मैंने उसको अपने ऊपर 69 पोसिशन में ले लिया फ़िर वो मेरा लंड लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

फ़िर उसने कहा कि कुणाल अब रहा नहीं जाता ! प्लीज़ डाल दो !

तो मैंने उसको सीधा लेटाया और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रख कर धक्का मारा, उसकी चूत काफी टाइट थी। उसको दर्द भी हो रहा था पर फ़िर मैंने एक जोर का धक्का मारा और मेरा लंड पूरा उसकी चूत में चला गया।

उसके बाद वो भी चूतड उछाल उछाल के मेरा साथ दे रही थी। 5 मिनट के बाद वो झड़ गई फ़िर मैंने भी अपनी गति तेज कर दी और 10-15 झटके मारने के बाद मैं भी झड़ गया।

उसके बाद हम बहुत देर तक एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे।

उसके बाद मैंने उसकी गांड भी कोल्ड क्रीम लगा के मारी।

शाम के 7 बज चुके थे मैंने उसको कहा कि मै चलता हूँ, तो उसने मुझे 2000 रूपये दिए और कहा कि अगर तुम मेरी सहेलियों की भी इच्छा पूरी कर दो तो तुम्हें और भी पैसे मिल सकते हैं, बस अंधे को क्या चाहिए 2 आँखें ! बस तब से मैं ऐसे ही इच्छा पूरी करने में लगा हूँ। Hindi Porn Stories

मेरा नाम शेखर है और मैं 18 साल का हूं. मैं अपने मम्मी पापा के साथ मुंबई में रहता हूँ. बात उन दिनों की है जब मेरे चाचा जी की तबीयत खराब हो गयी थी और वो मुंबई के हॉस्पिटल में भरती थे. इधर मेरी चाची जी को गाँव से लाने का काम मुझे करना था इसलिए मैं गाँव (उत्तर प्रदेश) चला गया. चाचा की शादी अभी २ बरस पहले ही हुई थी और शादी के कुछ ही महीने बाद से वो मुंबई में काम करने लगे थे. दो तीन महीने में एक दो दिन के लिए वो गाँव जाते थे. इधर बीमारी के वजह से वो तीन महीने से गाँव नहीं जा सके थे.

गाँव में पहुँचा तो मेरे दादा दादी जो कि चाचा जी के साथ रहते थे, अपने किसी रिश्तेदार से मिलने ४-५ दिन के लिए चले गये और घर में सिर्फ़ मैं और चाची अकेले रह गये.वैसे तो दादाजी और मैं घर के बाहर बरामदे में सोते थे और चाची जी और दादीजी घर के अंदर, पर अब चाची जी ने कहा कि तुम भी अंदर ही सो जाओ. रात में खाना खाने के बाद मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर के दादीजी के कमरे में सोने चला गया. चाची बोली कि “लल्लाजी तुम मेरे ही कमरे में आ जाओ, बात करते करते सोएंगे” मैंने कहा कि ठीक है और उनके कमरे में चला गया.

चाची जी के कमरे में एक ही पलंग था और मैंने पूछा कि आप कहाँ सोएंगी.

वो बोली- मैं नीचे ज़मीन पर सो जाऊँगी.

मैंने कहा- नहीं, आप पलंग पर सो जाओ मैं नीचे सो जाता हूँ.

वो बोली- नहीं तुम पलंग पर सो जाओ.

मैं नहीं माना और मज़ाक में बोला कि आप इसी पलंग पर सो जाओ, काफ़ी बड़ा तो है, दिक्कत नहीं होगी. पहले तो वो हँसी पर फिर बोली कि ठीक है, तुम दीवार के तरफ सरको मैं ऊपर ही आती हूँ. मैं दीवार के तरफ सरक गया और चाचीजी ने लालटेन बिल्कुल धीमा करके मेरे बगल में आकर लेट गयी. लगभग आधा घंटा हम लोग बात करते करते सो गये.

अब तक मैं सिर्फ़ चाचीजी को अपनी चाची के तरह ही देखता था. वो जबकि काफ़ी जवान थी, लगभग २२-२३ साल की, पर मेरे मन में ऐसी कोई ग़लत भावना नहीं थी. पर वहाँ चाचीजी को अकेले में एक ही बिस्तर पर पाकर मेरे मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी. मेरा लंड एक खड़ा था और दिमाग़ में सिर्फ़ चाची की जवानी ही दिख रही थी. किसी तरह मैंने इन सब गंदी बातों से ध्यान हटाकर सो गया.

लगभग आधी रात में मेरी नींद खुली और मुझे ज़ोर से पेशाब लगी थी. मैं तो दीवार के तरफ था और उतरने के लिए चाची के उपर से लाँघना पड़ता था. लालटेन भी बहुत धीमी जल रही थी और अंधेरे में कुछ साफ दिख नहीं रहा था. अंदाज़ से मैं उठा और चाचीजी को लाँघने के लिए उनके पांव पर हाथ रखा. हाथ रखा तो जैसे करेंट लग गया. चाची जी की साडी उनके घुटनों के उपर सरक गयी थी और मेरा हाथ उनके नंगी जांघों पर पड़ा था. चाचीजी को कोई आहट नहीं हुई और मैं झट से उठकर रूम के बाहर पेशाब करने चला गया. पेशाब करने के बाद मेरा मन फिर चाचीजी के तरफ चला गया और लंड फिर से टाइट हो गया.

मैंने सोचा कि चाची तो सो रही है, अगर मैं भी थोड़ा हाथ फेर लूं तो उनको मालूम नहीं पड़ेगा. और अगर वो जाग गयी तो सोचेगी कि मैं नींद में हूँ और कुछ नहीं कहेंगी. दोबारा पलंग पर आने के बाद मैं चाची के बगल में लेट गया. चाचीजी अब भी निश्चिंत भाव से सो रही थी. मैंने लालटेन बिल्कुल बुझा दी जिससे कि कमरे में घुप अंधेरा हो गया. लेटने के बाद मैं चाची के पास सरक कर अपना एक हाथ चाचीजी के पेट पर रख दिया. थोड़े इंतजार के बाद जब देखा कि वो अब भी सो रही थी मैंने अपना हाथ थोडा उपर सरकाया और उनके ब्लाउस के उपर तक ले गया. उनकी एक चुची की आधी गोलाई मेरे उंगलियों के नीचे आ गयी थी. धीरे धीरे मैंने उनकी चुची दबाना शुरू किया और कुछ ही देर में उनकी वो पूरी चुची मेरे हांथों में थी. मुझे ब्लाउस के उपर से उनकी ब्रा फील हो रही थी पर निपल कुछ मालूम नहीं पड़ रहा था.

चाचीजी अब भी बेख़बर सो रही थी और मेरा लंड एकदम फड़फड़ा रहा था. सिर्फ़ ब्लाउस के उपर से चुची दबाकर मज़ा नहीं आ रहा था. मुंबई के बस और ट्रेन में ना जाने कितने ही लड़कियों की चुची दबाई है मैने. मैंने सोचा कि अब असली माल टटोला जाए और अपना हाथ उठा कर चाचीजी की जाँघ पर रख दिया. मेरा हाथ चाची की साडी पर पड़ा पर मुझे मालूम था की थोडा नीचे हाथ सरकाउं तो जाँघ खुली मिलेगी. मैंने हाथ नीचे सरकाया चाची की नंगी जांघ मेरे स्पर्श में आ गयी क्या नरम गरम जाँघ थी चाची की। तभी मेरा स्पर्श पाकर चाचीजी ने थोड़ी हलचल की और फिर शांत हो गयी.

मैं भी थोड़ा देर रुक कर फिर अपना हाथ उपर सरकाने लगा. साथ में साडी भी उपर होते जा रही थी. चाचीजी फिर से कुछ हिली पर फिर शांत हो गयी. मेरा मन अब मेरे बस में नहीं था और मैंने अपना हाथ चाची के दोनो जांघों के बीच में ले जाने की सोची. पर मैंने पाया कि चाची की दोनो जाँघ आपस में उपर सटे हुए थे और उनकी बुर तक मेरी उंगलियाँ नहीं पहुँच सकती थी. फिर भी मैंने अपना हाथ उपर सरकाया और साथ में मेरी उंगली दोनो जांघों के बीच में घुसाने की कोशिश की. चाची फिर से हिली और नींद में ही उन्होने अपना एक पैर घुटनों से मोड़ लिया जिससे उनकी जांघें फैल गयी.

मौके का फ़ायदा उठाकर मैंने भी अपना हाथ उनके जांघों तक ले गया और जब की मेरा अंगूठा अब मेरे चाची के बुर के उपरी उभार पर था, मेरी पहली उंगली चाची के जांघों के बीच उनकी पैंटी के थ्रू बुर के असली पार्ट पर थी. चाची की बुर की गर्माहट मेरी उंगली पर महसूस हो रही थी और कुछ कुछ गीलापन भी था. मेरा दिल अब ज़ोरो से धड़क रहा था. मेरा हाथ चाची के बुर पर था और कमरे में बिल्कुल अंधेरा था. मैंने सोचा कि अब क्या करूँ. चाची की बुर तो उनकी पैंटी से ढकी है और पैंटी में हाथ तो डाला तो वो ज़रूर जाग जाएँगी.

फिर भी मैं नहीं माना और मैंने सोचा कि धीरे से अपनी एक उंगली उनकी पैंटी के साइड में से अंदर डालूं. मैंने धीरे से अपनी उंगली मोडी और उनकी जांघों के बीच में पैंटी को थोडा खीच कर एक उंगली अंदर डाल दी. मेरी उंगली उनकी बुर के फोल्ड्स पर पहुँच गयी और मैंने पाया कि उनकी बुर एकदम गीली थी जिससे मेरी उंगली का टिप उनके बुर के मुहाने के अंदर आसानी से घुस गया. मैंने अपनी उंगली धीरे धीरे से चाची के बुर में हिलाने लगा और तीन चार बार हिलाने पर ही चाची जी एक झटके से जाग गयी. मैं तो एकदम से सन्न रह गया और सोचा कि अब तो मरा.

पर चाची ने अपना हाथ से अपने बुर को टटोला और मेरा हाथ वहाँ पाकर थोड़ी देर उनका हाथ वहीं रुक गया. शायद वो भी सन्न रह गयी थी. मैं चुप चाप सोने का नाटक कर रहा था और सोचा कि अब चाची मेरा हाथ वहाँ से निकाल कर मुझे दूर धकेल देंगी. पर चाची जी ने वो किया जो मैं सोच भी नहीं सकता था. उन्होने मेरा हाथ ना हटाते हुए अपनी बुर खुजाने लगी और खुजाते खुजाते अपनी पैंटी थोड़ी नीचे सरका दी जिससे कि उनका बुर आधा खुल गया और फिर सोने का नाटक करने लगी. मेरी उंगली अब भी उनकी पैंटी में थी पर अब जब उन्होने पैंटी थोड़ी नीचे सरका दी तब मैं भी समझ गया कि चाची जी चुप चाप मज़ा ले रही है.

फिर भी मैं थोड़ा रुका और फिर अपना हाथ बिल्कुल उनकी जाँघ पर से उठाकर सीधे उनके बुर पर रख दिया. चाची की पैंटी का एलास्टिक अब भी मेरी उँगलियों और उनके बुर के बीच आ रहा था तो मैंने हिम्मत करके धीरे से एलास्टिक उठा कर अपनी उंगलियों को उनकी पैंटी के अंदर घुसा दिया. मेरी बीच की उंगली चाची के बुर के स्लिट पर थी और जब मैंने धीरे से अंपनी उंगली मोडी तो वो उनकी गीली बुर में चली गयी चाची ने भी अब पैर और फैला दिए और अपना एक हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया. लेकिन वो अब भी सोने का नाटक कर रही थी. मैंने भी अब अपनी दूसरी उंगली मोडी और वो भी चाची की बुर में पेल दी.

रूम में वैसे भी सन्नाटा था और अब चाचीजी की साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी. अब तक तो सिर्फ़ मेरे हाथ चाची की जवानी को टटोल रहे थे पर अब मैं बिल्कुल चाची के करीब उनसे सट गया और अपना मूह उनके मूह के पास ले गया. हमारी गाल आपस में छू गये और चाची ने अपना चेहरा इतना घुमाया की उनके होंठ मेरे होंठों से बस धीरे से छू भर गये. उनकी साँस की गर्मी मेरे होंठों पर आ रही थी. मैं भी थोडा सा इस तरह एडजस्ट हो गया की मेरा होंठ बिल्कुल उनकी होंठों पर सट गया.

उधर मेरी उंगलियाँ चाची की बुर में अपना कमाल दिखा रही थी और चाची भी अपने हाथ से मेरे हाथ को अपनी बुर पर दबा के रखा था. चाची की गरम गरम गीली बुर में अब मैं खुल्लम खुल्ला उंगली कर रहा था और चाची अब भी नींद में होने का नाटक कर रही थी. मैंने सोचा अब बहुत नाटक हो गया. अब तो असली जवानी का खेल हो जाए. मैंने चाची की बुर में अपनी तीन उंगली डाल कर ज़ोर से दबा दिया और साथ में चाची के होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए.

चाची के मुंह से आह निकल गयी और उनका मुंह थोड़ा सा खुल गया. तुरंत ही मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी और चाची की बुर से हाथ निकाल कर तुंरत उनको अपने बाहों में कस कर लिपट लिया. “उह्ह… शेखर यह क्या रहा है तू…छोड़ मुझे तू.. चाची ने मुझे यह कहते हुए धकेलना चाहा. पर मैंने भी उनको कस कर पकड़ लिया और बोला कि मुझे मालूम है तुम पिछले आधे घंटे से जाग रही हो मेरी उंगली करने का मज़ा ले रही हो. तब चाची ने मचलना बंद कर दिया और मेरी बाहों में शांत हो कर पड़ी रही. चाची बोली” शैतान कहीं के, तुझे डर नहीं लगा मेरे
साथ यह करते हुए?”

मैंने कहा कि डर तो बहुत लगा था पर अब डर कैसा. अब तो तुम ना भी बोलोगी, तब भी तुम्हारा जबरन चोदन कर दूँगा इसी बिस्तर पर. कौन जानेगा कि इस घर के अंदर यह भतीजा अपनी चाची के साथ क्या कर रहा है. यह कहते हुए मैंने अपना हाथ चाची के पीठ पर से नीचे सरकते हुए उनके गांड के गोलाईयों पर ले गया और पीछे से उनकी पैंटी की एलास्टिक को पकड़कर पैंटी नीचे सरका दी.

वो बोली “लल्ला जोर आजमाइश करने की क्या ज़रूरत है. तूने तो वैसे ही मुझे गरम कर दिया है. अब तो मैं ही तेरा जबर चोदन कर दूँगी” बस अब क्या था. चाची जी ने अपना पैंटी पैर में से निकालकर साड़ी उतार दी. मैंने भी अपना लूँगी खोल कर अंडरवीयर निकाल फेंका. फिर चाची को बिस्तर पर पीठ के बल दबाकर उनके ब्लाउस के बटन खोलने लगा.

“आज तुम्हारी जवानी का स्वाद लूँगा मेरी जान” मैंने ब्लाउस खोलते हुए एकदम फिल्मी अंदाज़ में चाची से बोला. चाची ने भी उसी अंदाज़ में कहा, “भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, मैं तुम्हारे पांव पड़ती हूँ”

सारे बटन खोलने पर मैंने ब्लाउज़ को पकड़ कर साइड में कर दिया और चाची के ब्रा से ढके हुए चुचियों पर अपना मुह रख दिया. चाची ने भी अब बेशरम हो कर मेरा सर को अपनी चूची पर दबा दिया और बोली, “लल्ला क्या यह पैकेट नहीं खॉलोगे”

उनका इशारा उनकी ब्रा के तरफ था. मैंने तुंरत उन्हे उठाया और पलंग के बगल में खड़ा करके उनकी ब्लाउज और ब्रा उनसे अलग कर दी. फिर पेटिकोट का नाडा भी खींच कर खोल दिया और वो भी उनके पैरों के पास ज़मीन पर गिर गया. चाची को इस तरह नंगा कर उनको पलंग पर खींच लिया और सीधे उनके उपर लेट गया. अब में उनकी चुचियों को आराम से चूस रहा था और वो मेरा सर अपने हाथों से सहला रही थी.

कुछ देर बाद चाची ने अपना हाथ मेरे लंड पर ले गयी और बोली” लल्ला नाश्ता हो गया. अब डिनर हो जाए?”

मैं भी तैयार था, पूछा- वेज या नॉन वेज?

वो बोली की वेज तो रोज़ ही लेते हो आज नॉन वेज चख लो” यह कहते हुए चाची ने मेरा लंड उनके बुर के मुहाने पर रखा और मैंने उनको फाइनली पेल दिया. पेलते पेलते चाची एकदम मस्त हो गयी और अपने दोनो पांव मेरे कमर के उपर लपेट दिया. मैं उनको पेलता रहा और साथ साथ चूमता रहा.

चाची ने तभी अपना हाथ मेरी गाण्ड की तरफ ले गयी और एक उंगली मेरी गांड में घुसा दी. मैंने भी अपना एक हाथ चाची के गांड के पीछे ले जाकर उनकी गांड में एक उंगली घुसा दी. तभी चाची एकदम ऐंठने लगी और कस कर मुझे पकड़ लिया. लल्ला और ज़ोर से चोदो…ऽउर छोड़ो …बोलते बोलते वो आख़िर वो झड़ गयी और फिर शांत हो गयी. पर मेरा पेलना अभी चालू था और लगभग १०-१५ झटकों के बाद मैं भी चाची के बुर में ही झड़ गया. हम दोनो पसीने पसीने हो गये थे और में चाची के उपर ही पड़ा हुआ था.

कुछ देर बाद चाची उठी और बाथरूम जाकर आई. मैं भी अब अंडरवीअर पहन चुका था. चाची ने सिर्फ़ पेटिकोट पहन रखा था. आकर बोली ” लल्ला, तुम्हारे साथ जो किया वो तो अभी हम आगे भी बहुत बार करेंगे. पर यह बात किसी और को मालूम नहीं होने पाए. सबके सामने मैं तुम्हारी चाची ही हूं” मैंने भी उनको अपने बाहों में लेते हुए बोला” सबके सामने क्यों चाची, यहाँ पलंग पर भी तुम मेरी चाची ही हो. और तुम्हारी यह जवानी की मिठाई तो मैं अकेले ही खाऊँगा. सब चाचाजी को ही मत खिला देना चाची हँसी और अपना हाथ फिर से मेरे अंडरवीअर में डाल दिया.

प्रेषक : संदीप हाय दोस्तो ! कैसे हैं आप !Hindi Sex Stories

मैं एक २० साल का नौजवान और कद Hindi Sex Stories में भी ठीक हूँ ६’ १”बात ऐसी है कि मेरी कहानी अन्तर्वासना पर आने के बाद मुझे काफी सारे ईमेल आने लगे। उन सभी ईमेल में से एक मेल में मुझे किसी लड़की ने अपना फ़ोन नम्बर और पता दिया हुआ था। इतना मिलते ही सरदार यानि की मैं बहुत ही खुश हुआ। मैंने उसे कॉल किया तो वो भी दिल्ली में ही रहनी वाली एक कुंवारी कन्या का निकला उसने अपनी उम्र २१ साल बताई और उसने मुझे एक सुझाव भी दिया था। मैंने उससे पूछा कि कैसा सुझाव तो वो कहने लगी कि कॉल बॉय का सुझाव। इतना सुनते ही मेरे लण्ड ने करवट बदली और सीधा होकर खड़ा हो गया। मैंने कहा कि मुझे क्या करना होगा तो बोली- वही जो करते हो और पैसे भी मिलेंगे।

मैं समझ चुका था कि मेरे लण्ड की बोली लगने के दिन आ चुके हैं। मैं बहुत उत्तेजित था यह सुन कर !

अगले दिन फिर मैंने उस कन्या से बात की तो उसने कहा की मैं उसके घर चला जाऊँ। तो फिर क्या था मैं गया, मैंने गेट पर बेल बजाई तो देखा एक बुढ़िया मेरे सामने आकर गेट खोल रही थी। बुढ़िया देख कर मेरी भी गांड फटने लगी। मैंने झूठ से ही कह दिया कि मैडम हैं घर पर?

तो वो बोली- हाँ !

और मेरा तुक्का भी ठीक लगा वो बुढ़िया उसके यहाँ काम करती थी. मैं अन्दर गया और उस कन्या से मिला, हाथ भी मिलाया। फिर हम दोनों एक कमरे में जाने लगे।

मैं काफी बेचैन था।

उस ने बताया कि मैं दिखने में और इस लाइन में काफी ठीक रहूँगा। तो मैंने पूछा कि किस लाइन में?

उस ने हंस कर कहा कि कॉल बॉय के काम में !

मैं भी हंसा और फिर मैंने हामी भर दी। फिर उसने मुझे सभी बातें बताई पैसे की कि इस लाइन में पैसे भी मिलते हैं !

मैंने कहा ओके।

फिर साली को क्या हुआ- उसने मेरा हाथ पकड़ कर एक प्यारी सी किस दी।

जैसा मने पहले भी कहा था कि मुझे ज्यादा तजुर्बा नहीं है इन सभी में, यह मेरा दूसरा अवसर था सेक्स का।

उसने मुझे अपने पास बुलाकर किस करने को कहा। मैंने उसे किस किस में ही नंगा कर दिया और उस बहन की लोड़ी ने भी मुझे नंगा कर दिया। मैंने उसके बूब्स देखे तो मैं फिर देखता ही रह गया था उसने उन पर कुछ लगाया हुआ था। मैंने धीरे धीरे उन्हें सहलाना सुरु किया वाह क्या मजा आ रहा था साली को बहुत ही एक्सप. था इन सब बातों का। वो मेरे लण्ड को चूसने लगी और आगे पीछे करने लगी। ऐसा करने से मेरे अन्दर ४४० वोल्ट का झटका लगा और मैं उस के मुह में ही झड़ गया।

फिर साली ने कहा कि अब मेरी बारी है एसा करने की !

मैंने उसकी कम बाल वाली चूत को चाटना शुरू ही किया था कि उस ने कहा- वह स्वर्ग का आनंद ले रही है।

मैंने उसे चाट चाट कर साफ कर दिया था और दो बार जान बूझकर काटा भी था।

उसके बूब्स हिल हिल कर मेरे लण्ड को मजा दे रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में पकड़ रखा था, क्या माल थी साली वो !

फिर हम दोनों ६९ की पोसिशन में होगये और किस करते रहे।

२० मिनट बाद मैंने उसकी चूत को ऊपर उठाया और लण्ड के सामने लगाकर बोली लगाई, लण्ड का जवाब था १२००/-

मैंने कहा- चलेगा?

तो वो बोली- ठीक है।

फिर क्या था ! साली में मैंने पेल दिया अपना लण्ड !

एक बार तो वो ऐसे चिल्लाई कि जैसे गरम गरम मशाल दे दी हो चूत में और थोडी देर बाद ऐसे चुदवाने लगी कि मानो बर्फ़ वाले लण्ड पर चुद रही हो्। फिर क्या था धक्के पर धक्के लग रहे थे उसका बेड भी आवाज कर रहा कि उसे माफ कर दो।

फिर २५-३० मिनट बाद मैं झड़ा। इस बीच वो शायद कम से कम ३ या ४ बार झड़ चुकी थी।

फिर उसने मुझे पैसे दिए और धन्यवाद कहा।

मैंने कहा- यू आर वेलकम और हंस पड़ा। यह मेरी पहली बोनी हुई थी।

और तब से मैं एक काल-बॉय हूँ !

तो यारो कृपया मुझे लिखिए कि मेरी कहानी कैसी लगी Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories

मेरे प्रिय पाठकों और Hindi Sex Stories पाठिकाओं को मेरा नमस्कार। मेरा नाम एलिस है। मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर बहुत मजा आता है। मुझे ये सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगी और मैं पुरानी वाली कहानियाँ भी पढ़ना चाहता हूँ इसलिये मैंने भी अपनी आपबीती आप लोगों के सामने पेश करने का इरादा अन्तर्वासना के जरिये किया है। यह मेरी पहली कहानी है, अगर आपकी कृपा हुई तो मुझे आगे भी और कहानियाँ भेजने का मौका मिलेगा।

मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम स्नेहा है। वो मेरे पड़ोस में रहती है। उसका कद करीब 5’6″ है, रंग गोरा है और बदन का क्या कहना ! साली क्या मस्त लगती है कि जो भी देखे तो उसका लंड तो खड़ा हो ही जाता है। उसके मम्मे करीब 34″ के होंगे और उसके गांड करीब 38″ की होगी।

बात उन दिनों की है जब मैं कोचिंग में पढ़ा करता था और छुट्टियाँ होने पर मैं घर जाता था। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी और शायद इसीलिए वो ज्यादातर जींस व टी-शर्ट में रहती थी। इस कारण उसके शरीर के सारे उभारों का अच्छी तरह से प्रदर्शन होता था और यह देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। पड़ोस में होने के कारण वो मुझे भाई जैसा मानती थी और मैंने भी कभी उसे गलत नजर से कभी नहीं देखा था। पर मुझे पता था कि भाई-भाई करके वो मुझे लाइन देती थी।

बात गर्मियों की है जब छुट्टियाँ हुई और मैं घर गया। मुझे लग रहा था कि इस गर्मियों की छुट्टियों का मैं पूरा आनंद लूँगा। एक दिन मैं अपने नए साल के सत्र के लिए पढ़ाई कर रहा था, वो आई और कहने लगी,”मेरे घर पर सब मेरी मौसी के यहाँ शादी में जा रहे हैं इसलिये मैं आज यहाँ ही सोउंगी।”

वो बहुत खुश नजर आ रही थी और मेरी किस्मत भी देखो यारो कि पापा-मम्मी को भी उसकी मौसी के यहाँ से आग्रहपूर्वक न्योता आया कि आप भी आओ और एलिस को भी ले आना। पर पापा स्नेहा के यहाँ होने से उसे अकेला छोड़ नहीं सकते थे और मुझे पढ़ना भी था, सो मैं यहीं रुक गया और पापा-मम्मी दोनों गेराज से गाड़ी निकाल कर चले गए। मम्मी ने जाने से पहले बहुत हिदायतें दी कि दरवाजे खुले रख कर मत सोना, दोनों एक ही कमरे में सो जाना और बेड अलग अलग रखना। और हम आज रात में भी आ सकते हैं या कल आ जायेंगे वगैरह-वगैरह। मैंने भी हर आज्ञा का पालन किया, सिर्फ एक को छोड़कर, बेड अलग अलग वाला।

रात के नौ बज चुके थे और हम सोने की तैयारी कर रहे थे। उसका आज मूड कुछ बदला-बदला लग रहा था। वैसे मैं उस समय शरीफ बच्चा था। ऊपर के दरवाजे जांचने के लिए हम दोनों ऊपर गए, क्योंकि मुझे रात में अकेले डर लगता है। हम नीचे न आकर वहाँ पर ही बातें करने लग गए। वह वो मुझे बार-बार स्पर्श कर रही थी और गन्दी-गन्दी मतलब यौन सम्बन्धी बातें करने लगी। उसी समय बिजली चली गई। अब तो वो बोलने लगी कि अगर नीचे जायेंगे तो मुझे भी डर लगेगा सो हम वहीं रुक गए और बातें करने लगे। मेरा तो लंड वहीं खड़ा हो गया पर शायद अँधेरा होने के कारण उसे दिखाई नहीं दिया होगा। मैं भी जवाब में थोड़ी-थोड़ी खुलकर बातें करने लग गया। अब दोनों में कुछ-कुछ होने लगा था, हम दोनों वहाँ चिपकने लगे थे। हम दोनों गर्म होने लगे थे और वहाँ आस-पास में कोई न होने के कारण हमने आखिर एक चुम्बन तो कर ही लिया। इतने में बिजली आ गई और वहाँ हमें कोई देख लेता, उससे पहले हम दरवाज़े जाँच कर नीचे आ गए।

उसने नीचे आते ही मेरा एक लम्बा चुम्बन किया। मैंने स्नेहा को अपनी बाँहों में भर लिया, अपनी टांगें स्नेहा की टांगों से चिपका दी और मैंने अपने जलते हुए होंठ स्नेहा के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नर्म-नर्म होंठों को अपने होंठों में भर कर चूमने लगा। स्नेहा ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ स्नेहा के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने स्नेहा को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया। हम दोनों फिर से किस करने लगे और मेरे हाथ उसके शरीर पर कहाँ-कहाँ फिर रहे थे, कुछ पता नहीं।

करीब दस मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरा भी लंड अब जैसे अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और जल्द ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। उसने अपने हाथों से मेरे लंड को मसलना शुरू कर दिया। मैं भी उसके मम्मे दबाने में व्यस्त था। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए। मैंने उसको खेलने के लिए अपना लंड दे दिया। मैंने उसे बिसतर पर लेटा दिया और फिर उसकी गोरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। चूत बिलकुल साफ़ थी यानि एक भी बाल नहीं था।

वो बोली,”आज पूरी तैयारी करके आई हूँ !”

स्नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। मैं तो मानो स्वर्ग की सैर कर रहा था।

आप तो उसे देखते ही पागल हो जाते और जंगली सेक्स चालू कर देते। पर जैसे कि मैंने कहा था कि मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, तो मैंने सेक्स करने के नियम पढ़ रखे थे जो किसी सज्जन ने अन्तर्वासना को भेंट किये थे। मैंने बस अपने को नियंत्रित किया।

उसके गुलाबी चुचूकों को हल्के-हल्के मसलने लगा, फिर अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। स्नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। बाद में वो मेरा लौड़ा चूसने लग गई, दो-तीन मिनट में ही मेरी हालत ख़राब हो गई तो मैंने उसे रोका। फिर मैं उसकी चूत चाटने लगा। दो-तीन मिनट बाद वो झड़ गई तो मैं उसका अमृत-पान करने लगा। वाह ! एक अजीब मजा आ रहा था। वास्तव में वो मजा आ रहा था जो जिन्दगी में पहले कभी नहीं लिया। फिर मैं स्नेहा की चूत पर हाथ फिराने लगा। हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ स्नेहा की चूत के अन्दर डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा।

वो और जोश में आ गई और तड़पते हुए बोलने लगी,”बस अब और मत तड़पाओ मेरे राजा !”

फिर मैं उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी चूत का श्री गणेश करने को तैयार था।

स्नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली,”प्लीज, कंडोम तो लगा लो ! मुझे डर लगता है।”

मैंने बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। स्नेहा ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। फिर अपना लंड उसकी बुर पर रख दिया। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया पर काफी मेहनत करनी पड़ी हमको पहली बार में। वो दर्द से तड़पने लगी थी, मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला। खून मेरे लंड पर व उसकी जांघों पर व थोड़ा चादर पर भी गिरा था। वो पहले तो यह देख कर घबरा गई पर वो जानती थी कि पहली बार में यह सब होता है, उससे उसे काफी हिम्मत मिली।

मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ, हमने खून साफ़ कर फ़िर शुरु किया। तब मैंने फिर से उसे चोदना चालू कर दिया। मैं उसके नर्म-नर्म होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए और करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।

बाद में तो मुझे लग रहा था कि उसकी चूत खुल गई। फिर हमने किस किया और उसके बाद वो मेरे लौड़े को चूसने लग गई ताकि फिर से मेरा लौड़ा खड़ा हो जाये। जल्द ही मेरा लंड एक बार फिर से चुदाई करने के लिए तैयार था। इस बार फिर से चूत को ही अलग-अलग आसनों से चोदने लगा।

स्नेहा बोली,”मुझे कुछ हो रहा है, लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।”

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी ।

उसके मुख से आवाजें आने लगी,”आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ”

उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।

अब उसकी गांड की बारी थी पर वो बोलने लगी,”आज नहीं, फिर कभी इसका भी नंबर आएगा, थोड़ा सब्र करो ।”

पर मैं ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहता था इसलिये उसकी एक न सुनी और गांड के लिए नीचे तकिये रखने लगा और फिर से उलटा लिटा कर गांड का पूरा मज़ा लिया। अब भी ऐसा मौका मिलता है तो छोड़ता नहीं हूँ और वो भी नहीं छोड़ना चाहती। जब भी समय मिलता है, मम्मे दबाकर और चूम कर मजे लेता हूँ, अब तक कई बार चोद चुका हूँ और औरों के भी मजे लिए हैं, वो मैं आपको बाद में कहानी के रूप में लिखता रहूँगा। अब तो कहना पड़ेगा कि “वाह ! क्या रात थी”

आप मेरी कहानी के बारे में अपनी राय जरुर दें और मेरी गलतियाँ भी बताएँ ताकि मैं उनको सुधार सकूँ। अच्छा अब के लिए इजाजत चाहता हूँ। Hindi Sex Stories

Hindi sex stories

रमेश, दोस्तो Hindi sex stories , लड़की को उत्तेजित करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस उत्तेजित करने का तरीका ठीक होना चाहिये।

मैंने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही उत्तेजित कर खूब चोदा।

अब सुनो उसकी दास्तान।

मेरा नाम है रमेश।
मैं लखनऊ यू पी का हूं, मेरे घर में ऊल-ज़ुलूल नौकरानियों के काफ़ी अरसे बाद एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी।
22-23 साल की उमर होगी।
सांवला सा रंग था।
मीडियम हाईट की और सुडौल बदन,
फ़ीगर उसका रहा होगा 33-26-34

शादी शुदा थी।
उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला खूब चोदता होगा।

बूब्स यानि चूचियाँ ऐसी कि बस दबा ही डालो।
ब्लाउज़ में समाती ही नहीं थी।
कितनी भी साड़ी से वो ढकती, इधर उधर से ब्लाउज़ से उभरते हुई उसकी चूचियाँ दिख ही जाती थी।

झाड़ु लगाते हुए, जब वो झुकती, तब ब्लाउज़ के उपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा न सकती।

एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उसने ब्रा तो पहना ही नहीं था।

कहां से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें।

जब वो ठुमकती हुई चलती, तो उसके चूतड़ हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ।

अपनी पतली सी सूती साड़ी जब वो सम्भालती हुई सामने अपने बुर पर हाथ रखती तो मन करता कि काश उसकी चूत को मैं छू सकता।

करारी, गर्म, फूली हुई और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था।

काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता।

और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता।

और फिर मेरा तना हुआ लौड़ा इसकी बुर में डाल कर चोद सकता।

हाय! मेरा लंड ! मानता ही नहीं था।

बुर में लंड घुसने के लिये बेकरार था।

लेकिन कैसे।

यह तो मुझे देखती ही नहीं थी।
बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती।

मैंने भी उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिये बेताब है।

अब चोदना तो था ही।

मैंने अब सोच लिया कि इसे उत्तेजित करना ही होगा।

धीरे धीरे उत्तेजित करना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज़ हो जाये तो भांडा फूट जायेगा।

मैंने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करनी शुरु की।

उसका नाम था नीरू।

एक दिन सुबह उसे चाय बनाने को कहा।

चाय उसके नर्म नर्म हाथों से जब लिया तो लंड उछला।

चाय पीते हुए कहा- नीरू, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो।

उसने जवाब दिया- बहुत अच्छा बाबूजी।

अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और बड़ाई करता।

फिर मैंने एक दिन कोलेज जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई।

‘नीरू, तुम प्रेस भी अच्छा ही कर लेती हो।’

‘ठीक है बाबूजी!’ उसने प्यारी सी आवाज़ में कहा।

जब कोई नहीं होता, तब मैं उससे इधर उधर कि बातें करता, जैसे- नीरू, तुम्हारा आदमी क्या करता है?

‘साहब, वो एक मिल में नौकरी करता है।’

‘कितने घंटे की ड्युटी होती है?’ मैंने पूछा।

‘साहब, 10-12 घंटे तो लग ही जाते हैं। कभी कभी रात को भी ड्युटी लग जाती है।’

‘तुम्हारे बच्चे कितने हैं?’ मैंने फिर पूछा।

शरमाते हुए उसने जवब दिया- अभी तो एक लड़की है, 2 साल की।

‘उसे क्यों घर में अकेला छोड़ कर आती हो?’ मैं पूछता रहा।

‘नहीं, मेरी बूढ़ी सास है न। वो सम्भाल लेती हैं।’

‘तुम कितने घरों में काम करती हो?’ मैंने पूछा।

‘साहब, बस आपके और एक नीचे घर में।’

मैंने फिर पूछा- तो क्या तुम दोनो का काम तो चल ही जाता होगा?

‘साहब, चलता तो है, लेकिन बड़ी मुश्किल से। मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बर्बाद कर देता है।’

अब मैंने एक हिंट देना उचित समझा।

मैंने सम्भलते हुए कहा- ठीक है, कोई बात नहीं, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।

उसने मुझे अजीब सी नज़र से देखा, जैसे पूछ रही हो – क्या मतलब है आपका?

मैंने तुरंत कहा- मेरा मतलब है, तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा।

‘ठीक है साहब!’ कहते हुए उसने ठंडी सांस भरी।

इस तरह, दोस्तो, मैंने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनों तक जारी रखा और अपने दोनो के बीच की झिझक को मिटाया।

एक दिन मैंने शरारत से कहा- तुम्हारा आदमी पागल ही होगा। अरे उसे समझना चाहिये, इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए, शराब की क्या ज़रूरत है।

औरत बहुत तेज़ होती है दोस्तों।
उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी एहसास नहीं होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराज़गी का।

मुझे भी ज़रा सा हिंट मिला कि ये तस्वीर पर उतर जायेगी।

मौका मिले और मैं इसे दबोचूं तो चुदवा लेगी।

और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा।

कहते हैं ऊपर वाले के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं।

रविवार का दिन था।
पूरी फ़ैमिली एक शादी मैं गयी थी।

मैं पढ़ाई में नुकसान की वजह बताकर नहीं गया।

माँ कह कर गयी थी- नीरू आयेगी, घर का काम ठीक से करवा लेना।

मैंने कहा- ठीक है!

और मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा।

वो आयी, दरवाज़ा बंद किया और काम पर लग गयी।

इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बंद कर दिया था।

मैंने हमेशा कि तरह चाय बनवाई और पीते हुए चाय की बड़ाई की।

मन ही मन मैंने निश्चय किया कि आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी।

कैसे पहल करें?

आखिर में ख्याल आया कि भाई सबसे बड़ा रुपैया।

मैंने उसे बुलाया और कहा- नीरू, तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना। झिझकना मत।

‘साहब, आप मेरी तनख्वाह से काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा।’

‘अरे पगली, मैं तनख्वाह की बात नहीं कर रहा। बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये। और किसी को नहीं बताऊंगा। बशर्ते तुम भी न बताओ तो।’

और मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा।

‘मैं क्यों बताने चली। आप सच मुझे कुछ पैसे देंगे?’ उसने पूछा।

बस फिर क्या था।
कुड़ी पट गयी।

बस अब आगे बढ़ना था और मलाई खानी थी।

‘ज़रूर दूंगा नीरू… इससे तुम्हे खुशी मिलेगी न!’ मैंने कहा।

‘हां साहब, बहुत आराम हो जायेगा।’ उसने इठलाते हुए कहा।

अब मैंने हल्के से कहा- और मुझे भी खुशी मिलेगी। अगर तुम भी कुछ न कहो तो। और जैसा मैं कहूं वैसा करो तो? बोलो मंज़ूर है?

ये कहते हुए मैंने उसे 500 रुपये थमा दिये।

उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा- क्या करना होगा साहब?

‘अपनी आंखें बंद करो पहले।’ मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढ़ा- बस थोड़ी देर के लिये आंखें बंद करो और खड़ी रहो।

उसने अपनी आंखें बंद कर ली।

मैंने फिर कहा- जब तक मैं न कहूं, तुम आंखें बंद ही रखना, नीरू। वरना तुम शर्त हार जाओगी।

‘ठीक है, साहब!’ शरमाते हुए आंखें बंद कर वो खड़ी थी।

मैंने देखा कि उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे।

दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था।

मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन किया।

अभी मैंने उसे छुआ नहीं था।
उसकी आंखें बंद थी।
फिर मैंने उसकी दोनो पल्कों पर बारी बारी से चुम्बन रखा।
उसकी आंखें अभी भी बंद थी।
फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा।
उसकी आंखें बंद थी।
इधर मेरा लंड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था।
फिर मैंने उसकी थुड्ठी पर चुम्बन लिया।

अब उसने आंखें खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा- साहब?

मैंने कहा- नीरू, शर्त हार जायोगी। आंखें बंद।

उसने झट से आंखें बंद कर ली।

मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है।

मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया।

अभी तक मैंने छुआ नहीं था उसे।

उसने फिर आंखें खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पल्कों को फिर ढक दिया।

अब मैं आगे बढ़ा, उसके दोनो हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारों तरफ़ घुमाया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमता रहा।

कस कर चूमा अबकी बार।
क्या नर्म होंठ थे मानो शराब के प्याले।

होंठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया।

उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होंठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था।

तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियाँ जो कि तन गयी थी, मेरे सीने पर दब रही हैं।

बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होंठों को चूस रहा था, और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।

दायाँ हाथ फिर अपने आप उसकी दायीं चूची पर चला गया और उसे मैंने दबाया।

हाय हाय क्या चूची थी। मलाई थी बस मलाई।

अब लंड फुंकारे मार रहा था।

बायें हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लंड को महसूस करवाया।

शादीशुदा लड़की को चोदना आसान होता है क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है, घबराती नहीं हैं।

ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाउज़ के बटन पीछे थे, मैंने अपने दायें हाथ से उन्हे खोल दिया और ब्लाउज़ को उतार फेंका।
चूचियाँ जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गयी।

एकदम सख्त लेकिन मलाई की तरह प्यारी भी।

साड़ी को खोला और उतारा।

साया बस अब बचा था।

वो खड़ी नहीं हो पा रही थी।

मैं उसे हल्के हल्के खींचते हुए अपने बेडरूम में ले आया और लिटा दिया।

अब मैंने कहा- नीरू रानी, अब तुम आंखें खोल सकती हो।

‘आप बहुत पाजी हैं साहब!’ शरमाते हुए उसने आंखें खोली और फिर बंद कर ली।

मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया।

लंड तन कर उछल रहा था।

मैंने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा।

उसने कोई अंडरवेअर नहीं पहना था।

मैंने बात करने के लिये कहा- ये क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है। चड्ढी नहीं पहनती।

‘नहीं साहब, सिर्फ़ महीना में पहनती हूं।’ और शरमाते हुए कहा- साहब, पर्दे खींच कर बंद करो न। बहुत रोशनी है।

मैंने झट से पर्दों को बंद किया जिससे थोड़ा अंधेरा हो और उसके ऊपर लेट गया।

होंठों को कस कर चूमा, हाथों से चूचियाँ दबाई और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया।

घुंगराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर।

फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूची को मुंह में ले लिया।

आहा, क्या रस था। बस मज़ा बहुत आ रहा था।

अपनी एक उंगली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया।

उंगली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी।
गर्म और गीली थी।

उसकी सिसकारियाँ मुझे और भी मस्त कर रही थी।

मैंने छेड़ते हुए कहा, नीरू रानी, अब बोलो क्या करूं?

‘साहब, मत तड़पाइये, बस अब कर दीजिये।’ उसने सिसकारियाँ लेते हुए कहा।

मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान।

मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब, डाल दीजिये न।

‘क्या डालूं और कहां?’ मैंने शरारत की।

दोस्तों चुदाई का मज़ा सुनने में भी बहुत है।

‘डाल दीजिये न अपना ये लौड़ा मेरे अंदर।’ उसने कहा और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका लिये।

इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होंठों को चूसता।

अब मैंने कह ही दिया- हां रानी, अब मेरा ये लंड तेरी बुर में घुसेगा… बोलो चोद दूं।

‘हां हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये।’

और वो एकदम गर्म थी।

मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान !

फिर क्या था, मैंने लंड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अंदर।

एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लंड के लिये ही बनी थी।

दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होंठों से उसके गाल और होंठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया।

बस चोदता ही रहा।

ऐसा मन कर रहा था कि चोदता ही रहूं।

खूब कस कस कर चोदा।

बस चोदते चोदते मन ही नहीं भर रहा था।

क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। उछल उछल चुदवा रही थी।

‘साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खुब चोदिये!’

चोदना बंद था, टांगे उसने मेरे चूतड़ पर घुमा रखी थी और चूतड़ से उछल रही थी।

खूब चुदवा रही थी और मैं चोद रहा था।

मैं भी कहने से रुक न सका- नीरू रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल न कैसी लग रही है ये चुदाई।

‘साहब, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये, चोदिये, चोदिये।’

इस तरह हम न जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये।

क्या चीज़ थी, एकदम चोदने के लिये ही बनी थी शायद।

दोस्तों मन नहीं भरा था।

20 मिनट बाद मैंने फिर अपना लंड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया।

हमने 69 पोसिशन ली और जब वो लंड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया।

खास कर दूसरि बार तो इतना मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकता क्योंकि अब की बार लंड बहुत देर तक चोदता रहा।

लंड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा।

कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा- नीरू रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लंड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा।

‘साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदाई की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाउंगी। चाहे आप पैसे न भी दो।’

कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हल्के हल्के मसलते रहे। और मैं उसके गालों और होंठों को चूमता रहा।
एक हाथ उसके बुर पर चला जाता था और हल्के से उसकी चूत को दबा देता था।

‘साहब अब मुझे जाना होगा।’ कह कर वो उठी।

मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा- रानी, एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूंगा।

दोस्तों, सच में लंड खड़ा हो गया था और चोदने के लिये मैं फिर तैयार।

मैंने उसे झट से लिटाया, साड़ी उठाई, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया।

अबकी बार खचखच चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा।

चोदते चोदते पता नहीं कब लंड झड़ गया और मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया।

चूमते हुए चूचियों को दबते हुए, मैंने अपना लंड निकाला और उसे विदा किया। Hindi sex stories

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