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Massage Girl in Kurung Kumey: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kurung Kumey who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kurung Kumey that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kurung Kumey massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kurung Kumey who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kurung Kumey massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kurung Kumey massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kurung Kumey who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kurung Kumey employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kurung Kumey helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kurung Kumey

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kurung Kumey at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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प्रेषक : देव Hindi Sex Stories

मैं दिल्ली का रहने Hindi Sex Stories वाला हूँ ! मैं मैंट्रिक तक शिमला में पढ़ा हूँ ! शिमला में मेरा नानी घर है !

बात उन दिनों की है जब मैं अपने ननिहाल शिमला, कॉलेज की छुट्टियों में गया था। मेरी उम्र बीस वर्ष की थी। उन दिनों मेरे कॉलेज में तो छुट्टियाँ थी पर शिमला कॉलेज में नहीं थी। इसलिए मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ शिमला कॉलेज की लड़कियाँ देखने जाया करता था ! मेरे दोस्तों ने मेरी इंट्रो अपनी क्लास की कुछ लड़कियों से करवा दी थी जिनके साथ मैं कॉलेज में सारा दिन बिताया करता था। उनमें से एक लड़की मेरी तरफ कुछ ज्यादा ही ध्यान देती थी। उसका नाम अनीता था, उसके पापा आर्मी ऑफिसर थे। उसका पारिवारिक माहौल आर्मी वालों की तरह बोल्ड था।

एक दिन उसने मुझे अपना फ़ोन नंबर दिया और कहा कि मैं उसे शाम को फ़ोन करूँ। पर मैंने उसे चिढ़ाने के लिय शाम को ना तो उसे फ़ोन किया और ना ही उसकी कॉल का जवाब दिया।

जब अगले दिन हम कॉलेज में मिले तब उसके पूछने पर कि कल तुमने फ़ोन क्यों नहीं किया, मैंने बहुत रूखे ढंग से कहा- मैं किसी और काम में व्यस्त था, सो मुझे तुम्हें फ़ोन करने का ध्यान नहीं रहा !

इस तरह के जवाब से वो बहुत नाराज हो गई और सारा दिन मुझसे बात नहीं की !

उस शाम हमारी एक और फ्रेंड चन्द्रिका के घर पर मैं चाये पीने गया, वहां पर अनीता भी थी। फिर हम तीनों चाय पीते हुए बातें करने लगे ! बातों बातों में चन्द्रिका अनीता को कहने लगी कि देव पर बहुत लड़कियाँ मरती है और हमारे कॉलेज की बहुत सी लड़कियाँ इसकी एक्स-गर्ल-फ्रेंड रह चुकी हैं !

मुझे लगा कि अब मेरे बारे में ये सब कुछ जान कर कम से कम अनीता तो कभी मेरे साथ नहीं फंसेगी ! पर इस बात का असर बिलकुल उल्टा हुआ ! अनीता मेरे बारे में मुझसे और चन्द्रिका से सब कुछ जानना चाहती थी !

मौका देख कर मैंने भी “दिल चाहता है” फिल्म का डायलोग मार दिया- मेरे बारे में इतना सब कुछ पूछ रही हो ! क्या मेरे साथ शादी करने का इरादा है ?

इस बात पर हम सभी हंसे और अपने अपने घर चले गए !

अगले दिन रविवार था, शनिवार रात को मैंने फ़ोन कर के अनीता को अकेले पहाड़ी वाले मंदिर में मिलने के लिए बुलाया, तब उसने जवाब दिया कि वो सोचेगी !

मैंने भी सोचा कि वो कहाँ आयेगी इतनी दूर, वो भी अकेली !!!

मैं अपने मामा के लड़कों के साथ स्विमिंग करने चला गया। मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि रात को मैंने अनीता को मिलने के लिए बुलाया है ! मेरी किस्मत खराब कि स्विमिंग पूल पर मेरा मोबाइल पानी में गिर कर खराब हो गया और उधर अनीता अकेले मंदिर में आ कर मेरा इंतजार करने लगी ! चार घंटों तक वीरान इलाके के मंदिर में वो लड़की मेरा इंतजार करती रही और मैं फ़ुद्दू स्विमिंग पूल में तैरता रहा !

मेरी इस हरकत से अनीता गुस्से से पागल हो कर चन्द्रिका के घर चली गई !

शाम को जब मैं चन्द्रिका के घर गया तो मुझे सारी बात का पता चला ! मैंने उसी समय अनीता को फ़ोन किया पर उसने काट दिया ! मैंने फिर फ़ोन किया तो उसने कहा कि वो मुझसे बात नहीं करना चाहती।

मुझे लगा कि वो मेरे हाथो से निकल गई !

अगले दिन हम कॉलेज मिले तो मैंने अनीता को क्लास बंक कर के मेरे साथ बैठे रहने को कहा, तब वो मान तो गई पर मुझसे कोई बात नहीं कर रही थी ! मैंने कल वाली बात के लिए माफ़ी मांगी तब वो रोनी आवाज में कहने लगी कि उसने कल चार घंटे मेरा इंतजार किया !

तब मैंने उसका हाथ पकड़ कर प्रोपोज किया, और वो कुछ ना बोल पाई!

कुछ दिन यूँ ही निकल गए।

फिर एक दिन वो कॉलेज के बाद मुझे अपने पापा से मिलाने उनके कमांड हेड क्वाटर ले गई ! फिर हमारा मिलना जुलना बढ़ गया और मैं अपने दोस्तों से मोटर साइकिल लेकर कॉलेज टाइम में उसे घुमाने ले जाया करता था !

एक दिन वो कॉलेज नहीं आई तब मैंने उसके घर पर यह पूछने के लिए फ़ोन किया कि वो कब तक आयेगी ! अनीता ने बताया की पापा को टूर पर जाना पड़ा है जिसके कारण आज जीप उसे छोड़ने नहीं आ सकती ! मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं फ्रेंड की कार ले कर उसके घर उसे लेने चला गया !

उसके घर पर दो बन्दूकधारी सुरक्षाकर्मियों ने जो अनीता की सुरक्षा के लिए थे, मुझे अंदर नहीं जाने दिया ! मैंने फ़ोन कर के अनीता को बताया तो वो जल्दी से बाहर आई ! उसने सुरक्षा कर्मियों से कहा कि जब भी मैं आऊँ तो मुझे ना रोकें !

मैं उसके घर पर गया और वो फटाफट तैयार होने चली गई ! रास्ते में मैंने पूछा कि उसने मेरे प्रोपोज़ल का कोई जवाब क्यों नहीं दिया तो वो कहने लगी कि लड़की के चुप रहने का मतलब उसकी हाँ होता है!

क्योंकि उसके घर पर कोई नहीं था तो हम शाम सात बजे तक बाजार में घूमते रहे ! जब हम वापिस जाने लगे तो उसने कहा कि वो लोकल बस से चली जाएगी पर मैं जिद कर रहा था कि मैं उसे घर छोड़ कर आऊँगा !

इस बात पर उसने कहा- तुम इतनी दूर से अकेले कैसे आओगे?

तो मैंने कहा- किसी भी तरह आऊँगा पर तुम्हें अकेले नहीं जाने दूंगा !

उसने कहा कि वो एक बात पर मुझे घर छोड़ने की इजाज़त दे सकती है यदि रात को मैं उसके घर पर ही रुक जाऊँ !

तब मैंने पूछा कि उसके सुरक्षा कर्मी यह बात उसके पापा को बता सकते है !

उसने कहा- मैं उनको छुट्टी दे दूंगी और कहूंगी कि रात मैं अपनी फ्रेंड के घर पर रुकूँगी !

रात मैं उसके घर पर रुका और अपने मामा जी को फ़ोन कर के बोल दिया कि मैं आज अपने दोस्त वरुण के यहाँ हूँ !

रात को हमने इकट्ठे खाना खाया फिर उसने मेरे सोने का इंतजाम अलग कमरे में कर दिया ! रात को हम काफी देर तक बातें करते रहे ! मैंने उसका हाथ पकड़ कर पूछा कि क्या मैं उसके हाथ को चूम सकता हूँ?

तो वो कुछ ना बोली और मैंने किस कर दिया ! उसके बाद तो चुम्बनों की बौछार कर दी उसके हाथों और मुँह पर ! फिर मैंने स्मूच किया ! यह मेरा और उसकी लाइफ का पहला स्मूच था ! पर मैं उस वक्त चोद नहीं पाया क्योंकि वो रोने लगी कि हम यह सब ठीक नहीं कर रहे !

ख़ैर मैंने जोर नहीं दिया क्योंकि मैं चाहता था कि सेक्स से पहले वो सामान्य हो जाए ! हम बाँहों में बाहें डाले सो गए ! थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि अनीता कि सांसें तेज हो रही हैं। मैं समझ गया और धीरे धीरे उसे सहलाने लगा। उसकी सांसें और तेज़ हो गई ! फिर मैंने धीरे से उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाला ! उसके स्तन ब्रा के साथ दबाए ! वो सिसकारियां भरने लगी ! फिर मैंने उसके और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और हमने अपनी जिंदगी का पहला सम्भोग किया !

इसके बाद हमने कई बार सम्भोग किया ! अब तो उसके सुरक्षा कर्मी भी मुझे पहचानते हैं और जब भी मैं उसके घर जाता हूँ तो सैल्यूट मारते हैं !

यह हमारी कहानी का पहला भाग है ! इसके आगे भी लिखूँगा यदि आप चाहें तो !!!!!!! Hindi Sex Stories

बिजनेस बढ़ाया चुदाई से नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम नीलम हैं। मेरी उम्र अभी 43 साल हैं। मैं कई सालों से दिन में टाइम पास करने के लिए हिंदी सेक्स स्टोरी पढ़ती हूं। मुझे इसके बारे में मेरे मोहल्ले की ही पड़ोसनों ने बताया था शाम को जब हम लेडिस आपस में बैठकर बातें करते तो रात के सेक्स को लेकर भी चर्चा करते थे तो सभी अपने-अपने अनुभव बताती थी कि उनके पति उनके साथ कैसे-कैसे क्या-क्या करते हैं उनमें से ही एक पड़ोसन प्रीती ने इसके बारे में हमें जानकारी दी। मैं पहले अपने परिवार के साथ गांव में ही रहती थी और मेरे पति शहर में रहकर काम करते थे। वह सप्ताह में एक दिन घर आते हैं और फिर वापस शहर चले जाते हैं। शहर में भी उनको खान और रहने में काफी परेशानी होती थी क्योंकि वह खुद बनाते हैं फिर सारा काम खुद करते हैं तो काफी टाइम लग जाता ऐसे फिर एक बार उन्होंने बोला कि क्यों नहीं तुम शहर चलती हो मैंने कहा कि शहर में खर्चा ज्यादा होगा तो बोले कि हम कुछ काम कर लेंगे और सब ठीक हो जाएगा। फिर मेरे पति ने शहर से थोड़ा बाहर की तरफ एक प्लॉट खरीदा और वहां पर छोटा सा मकान बना दिया वह कॉलोनी अभी नई-नई बस रही थी इस कारण आदि से ज्यादा प्लाट खाली पड़े थे और कुछ मकान बने हुए थे हम लोगों ने वार है ना शुरू कर दिया। वहां पर 8-10 मकान और बने हुए थे और उन में भी सब गांव से ही आकर लोग रहना शुरू हुए थे जो शहर में काम करते थे। मैंने मेरे दोनों बेटों को हॉस्टल में एडमिशन करवा दिया और हम दोनों पति-पत्नी वहां रहने लगे। मैं पूरा दिन खाली रहती थी तो मैंने पति को कहा कि आप गांव से गाय भैंस या लेकर आ जाओ तो काम भी हो जाएगा आमदनी भी होगी तो मेरे पति गांव से दो भैंसे और दो गाय लेकर आ गए। गांव में हमारे बहुत सी गाय भैंस थी। तो पति कुछ लेकर के यहां शहर आ गए। शहर में हमने पास वाले प्लॉट में गाय भैंस रखनी शुरू कर दी। मैं सुबह 5:00 उठाती और गाय भैंसों का दूध निकाल कर उन्हें चार वगैरा दे देती और मेरे पति हमारे घर से ही एक दो किलोमीटर दूर बड़ी पोश कॉलोनी में दूध सप्लाई करके आ जाते। शाम का दूध देने में परेशानी होती थी तो मेरे पति ने एक सेकंड हैंड एक्टिवा खरीद ली और मुझे एक्टिवा सीखा दी। अब मैं शाम को खुद ही दूध सप्लाई करने जाती थी। रात में जब हम मोहल्ले की सभी औरतें इकट्ठा होती तो वह सब मेरे गाय भैंस के बारे में ही बैठकर बातें करती थी क्योंकि वहां पर हम सब अकेले आराम से बैठ कर बातें कर सकते थे तो वह सब अपनी सारी बातें बताती थी उनमें से रजनी किसी बड़े बंगले में काम करती थी तो वह महंगे महंगे कपड़े पहनती थी बाकी औरतें उससे पूछता की रजनी इतना कैसे खर्च कर लेती है पहले तो वह बताती नहीं थी लेकिन फिर वह धीरे-धीरे बताने लगी की बंगले का जो साब है वह उसके साथ सेक्स करता है और बदले में उसे यह सब देता हैं। वह हम सब में बहुत तेज थी तो हम सबको ब्यूटी पार्लर भी साथ लेकर जाती थी वैक्स वगैरा करवाती थी और कहती थी कि तुम लोग अपनी वजाइना को एकदम क्लीन रखा करो ताकि तुम्हारा पति जब शाम को आए तो तुम्हारी पैंटी हटाकर सीधा उसे चाटने लग जाए। वह बोली कि शहर की औरतें तो रात में नाइटी और शर्ट पहनती है हम लोग भी अब ऐसे कपड़े पहनेगी तो हम सब लोगों को मार्केट लेकर गई और वहां से हम लोगों ने नाइटी टाइट योग पैंट टी-शर्ट लोवर टी-शर्ट जैसे नाइट वियर खरीद लिए अब हम लोग भी रात में नाइटी वियर यानी योगा पेट और टी-शर्ट लोवर टी-शर्ट पहनते थे। एक बार रजनी ने बताया कि उनके साहब के यहां पर कोई बड़ी पार्टी है और कैटरिंग के लिए महिलाओं की जरूरत है जो भरे पूरे मांसल बदन की हो। तो हमने कहा कि हम सभी का शरीर बहुत भरा पूरा हैं। रजनी बोली कि सब के यहां पर जो पार्टी है उसमें सब को महिला वेटर की जरूरत पड़ेगी रात में 9:00 से लेकर 1:00 तक पार्टी है और आप सबको दो ₹2000 मिलेंगे सभी महिलाओं ने हां कर दी की चार घंटे में ₹2000 तो अच्छे ही हैं। फिर रजनी बोले कि तुम ऐसे ही मत चलना पहले तुम ब्यूटी पार्लर जाकर अपना वैक्स वगैरा करवा लेना और अच्छे से तैयार हो जाना दिन हम लोग ब्यूटी पार्लर गए और वैक्स वगैरह कराया और अच्छे से तैयार हो गए हम लोग अपने घरों का काम खत्म कर रात 8:30 सब के फार्म हाउस पर पहुंच गए। वहां पर हम लोगों को वेटर की ड्रेस दी गई जो हेयर कलर का शर्ट और काले कलर की टाइट पेंट थी हम लोगों ने वह पहन लिए। वेटर की ड्रेस में हमारे बड़ी-बड़ी बस और बड़ी-बड़ी गांड बहुत ज्यादा ही दिख रही थी। पार्टी के मेहमान अभी हमें घूर-घूर कर देख रहे थे। उसने बड़े-बड़े लोग आए थे और करीब 100 तरह का खाना पीना था। रात 1:00 बजे पार्टी खत्म हो गई और जब हम लोग जाने लगे तो सब हमारे पास आया और बोला कि आप सब लोग मुझे बहुत अच्छे लगे हो आपने बहुत अच्छा काम भी किया है तो मैं तुम्हें खुश होकर दो ₹2000 ज्यादा दे रहा हूं मुझे इनाम समझ कर रख लेना। फिर वह बोला की पार्टी मेंखाने में भी बहुत बचा हुआ है आप लोगों को जितना चाहिए उतना ले जाओ तो काफी महिलाओं ने वहां से पैक भी करवा लिया और उसे साहब ने हम सबको अपने घर तक अपनी गाड़ी से भी छोड़ दिया। उसे दिन हम सभी महिलाएं बहुत खुश थी क्योंकि हमें चार-पांच घंटे काम करने के ही ₹4000 मिल गए थे। हम सब लेडिस ने अपने पतियों को बताया तो वह भी बहुत खुश हुए। अगले दिन शाम को जब हम बातें करने इकट्ठा हुई तो रजनी आकर के बोली की एक और काम हैं। उसके बदले और ज्यादा पैसे मिल सकते हैं तो हमने पूछा क्या काम है तो वह बोली कि सब के यहां आने वाले मेहमान को खुश करना हैं इसके बदले वो अच्छा पैसा देंगे। पहले तो हम लोगों ने सोचा पर बाद में हां कर दिया। उसके बाद रजनी रोज किसी ना किसी महिला को लेकर जाती वो वहां सेक्स करवाती और उसे अच्छे पैसे मिलते। एक बार रजनी मुझे भी लेकर गई वहां पर कोई सातवां आठवां साल का आदमी था जिसे मेरे साथ सेक्स करना था। मैं उसे आदमी के साथ कमरे में चली गई। अंदर जाते ही उसे आदमी ने मुझे कहा कि तू तू बहुत बड़ी रैंड लगती है तेरे बड़े-बड़े बस और गांड ही बता रहे हैं कि तू कितनी बड़ी रंडी है। मैंने कहा कि मैं तो गाय भैंस पालती हूं और दुध पीती हूं इस कारण मेरे बड़े हैं। वो मेरे 38-34-42 के फिगर को घूरकर देखा रहा था। फिर उसने मुझे बोला कि अब तू तेरे कपड़े उतार और पूरी नंगी हो जा तो मैं मेरे सारे कपड़े निकाल कर रख दिए वह मेरे नंगे बदन को देखता रहा फिर खुद भी नंगा हो गया उसका पेनिस 7 इंच लंबा और 2 इंच के बराबर मोटा था उसका एकदम काला काला पेनिस उठा हुआ था वह बोला कि अब मेरे पेनिस को मुंह में लेकर चूस। फिर मैं उसका पेनिस मुंह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर तक चूसने के बाद उसने मुझे सोफे पर बैठा दिया और मेरे दोनों टांगों को फैला कर खुद भी मेरी वजाइना को चाटना शुरू कर दिया मेरा पति कभी मेरी वजाइना जाता नहीं था तो मुझे बहुत मजा आया और मेरा पानी भी छूट गया। फिर उसने सोफे पर ही मेरे साथ पहली बार सेक्स किया। दूसरी बार उसने मेरे साथ गांड में सेक्स किया वह बहुत जल्दी ही फ्री हो गया। उसने मेरे से फोन नंबर लिए और बोला कि मुझे जरूरत पड़ेगी तो तुझे फोन करूंगा फिर वह वहां से चला गया और हमें भी रजनी के साथ घर आ गई। उसे दिन मुझे बहुत मजा आया क्योंकि उसने मेरी वजाइना कुछ इस तरह जाता था वैसा मजा मुझे पहली बार मिला। उसके एक-दो दिन बाद मेरे घर पर कुछ मेहमान आए और उसी दिन शाम को सब ने फोन किया कि नेहा कहां हो मिलोगी क्या तो मैंने कहा कि मैं मिल नहीं सकती हूं तो कहा कि आधे घंटे के लिए ही टाइम निकाल दे मैं बोली घर पर मेहमान आए हैं कैसे निकाले तो बोले कि हो तो मैनेज कर मेरे से अब नहीं रह जा रहा है या तो तू यहां आज या फिर मैं तेरे वहां आता हूं मैं बोली कि मेरे घर पर मेरा पति और मेहमान है मैं कहां मिलेगी तो वह बोली की तो कहीं भी मिल भले जंगल में मिलने आ जाना लेकिन एक बार मिलना पड़ेगा। फिर थोड़ी देर मैंने सोचा और मैं वापस फोन करके कहा कि मेरी गाय भैंस के बारे में ही जगह है वहां मिल सकते हो साहब बोला मैं तो तेरे लिए कहीं भी आ सकता हूं फिर वह रात को 12:00 बजे वह आया और मुझे फोन किया उसने अपनी कर हमारे घर से आधा किलोमीटर दूर खड़ी कर दिया और पैदल ही वहां तक आया फिर उसने मुझे फोन किया तो मैंने उसे बोला कि तुम वहीं रुको मैं आ रही हूं फिर मैं अपने पति को बताया कि रजनी मुझे बार-बार फोन कर रही है वह घर पर अकेली है तो मैं चली जाती हूं मेरा पति बोला ठीक है सुबह टाइम पर आ जाना मैंने कहा ठीक है आ जाऊंगी फिर मैं वहां से निकल गई और मैंने रजनी को फोन करके कहा कि रजनीबंगले वाला सब सेक्स के लिए आया है मैं गाय भैंस के बारे में उसके साथ करूंगी मैं तेरे घर का बोला है तू थोड़ा ध्यान रखना रजनी बोली कि तू चिंता मत कर तू मजे कर मैं संभाल दूंगी। फिर मैं सब को लेकर बड़े में चली गई वहां पर पूरा अंधेरा था और सब को तो पूरे कपड़े उतार कर करने की आदत थी मैंने बोला साहब आज आपको जल्दी-जल्दी करना पड़ेगा सब बोला कि जल्दी तू मेरे से होता नहीं है तरीका तो मेरा वही रहेगा हमें मुश्किल में पड़ गई कि अब क्या करूं तभी सब बोला कि इंतजार किसका कर रही है रंडी कपड़े उतार और नंगी हो जा हमें बोली कोई देख लेगा तब बोला कोई नहीं देखेगा तूने फोन तो कर दिया है रजनी को या कोई नहीं आएगा। फिर मैं सब को बड़े में एक कोने में लेकर गई जहां पर कई सारी बोरियां पड़ी थी और ऊपर भी छठ बनी हुई थी उसे कमरे में मैंने पर्दा लगा दिया और गेट बंद कर दिया अंदर मैंने लाइट ऑन कर दी वहां पर सिर्फ एक गड्ढा जमीन पर पड़ा था जहां पर हम सभी औरतें बैठकर बातें करते थे सब वहां बैठ गया और मैं कपड़े उतारने लगी साहब भी खड़ा होकर अपने कपड़े उतारने लगा फिर उसने जल्दी ही मेरे मुंह में अपना पेनिस डाल दिया और मैं चूसने लगी थोड़ी देर चूसने के बाद में गधे पर सो गई और सब मेरे ऊपर आ गया और अपना पेनिस मेरी वैजाइना में डाल दियामैंने सब को कहा कि क्या बात है साहब आज आपने मेरी वजाइना छाती नहीं साहब बोले रुक जा नेहा अभी एक बार करने दे फिर देख क्या-क्या करता हूं फिर सब ने जोर-जोर से झटका मारना शुरू कर दिया और 6 7 मिनट तक करीब 100 डेढ़ सौ झटका लगाया और अंदर ही स्पर्म छोड़ दिया। फिर सब ने किसी को फोन लगाया मैंने कहा किसी फोन कर रहे हो तो सब बोले कि मेरा एक दोस्त है वह भी है मैंने कहा आप कर क्या रही हो किसी को पता चल जाएगा बोला किसी को पता नहीं चलेगा फिर थोड़ी देर में सब का दोस्त नवीन भी पर आ गया। और अंदर जाकर वह भी पूरा नंगा हो गया। आप कमरे में हम तीन लोग थे नवीन मेरे बड़े-बड़े बूब्स को दबाने और चूसने लगा सब मेरी वजाइना को अच्छे से चैट रहे थे नवीन का पेनिस भी 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था थोड़ी देर के बाद नवीन बोला कि नीलम मेरा मुंह में ले ले यार तो मैं नवीन का पेनिस अपने मुंह में लिया और थोड़ी देर चुस्ती रही फिर नवीन बोला कि अब मैं तेरे साथ करूंगा तू घोड़ी बन जा तो मैं वहीं पर घोड़ी बन गई नवीन पीछे से मेरी वैजाइना में पेनिस डालकर सेक्स करने लगा और सब आगे आए और उन्होंने अपना पेनिस मेरे मुंह में दे दिया अब मैं एक साथ दो लोगों से सेक्स करवा रही थी। 10 मिनट तक दोनों लगातार करते रहे फिर उनके स्पर्म निकल गए तो उन्होंने मुझे छोड़ दिया मैं बोली अपने घर जा सकती हूं क्या तो बोले अभी कहां जाओगी आधा घंटा तो रुको फिर वह खड़े-खड़े ही मेरे बस और बड़ी-बड़ी गांड को दबाने लगे आज मुझे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि अमीर घरों के दो बड़े-बड़े साहब मुझे सेक्स का बहुत मजा दे रहे थे जितना मेरे पति ने कभी नहीं दिया था। फिर सब गधे पर सो गया और मैं उनके पेनिस पर अपनी वजाइना रखकर सेक्स करवाने लगी तभी नवीन ने मेरी गांड हमें क्रीम लगाई और अपना पेनिस मेरी गांड में डाल दिया अब मैं एक साथ दो लोगों से अपने दोनों छेदों को चुदवाने का मजा ले रही थी। वह दोनों अमीर घरों के बड़े-बड़े आदमी थे पर वह मुझे बहुत मजा दे रहे थे। 6 7 मिनट बाद उन्होंने मुझे सीधा खड़ा कर दिया और नवीन मेरी वैजाइना में सेक्स करने लगा और सब मेरी गांड में अपना पेनिस डालकर सेक्स करने लगे इस पोजीशन में 10 मिनट तक उन्होंने मुझे खड़े-खड़े ही सेक्स का मजा दिया और उसके बाद वह बोली की अब तो डॉगी स्टाइल में बन जा तो मैं गद्दे पर डॉगी स्टाइल में बन गई नवीन मेरी वैजाइना में पीछे से झटका करने लगा और सब मेरे मुंह में झटका देने लगे दो-तीन मिनट बाद सब ने मेरे मुंह में ही अपना स्पर्म गिरा दिया जबकि नवीन 15 मिनट तक लगातार तेज तेज झटके मारता रहा 15 मिनट तक उसने करीब 300 से ज्यादा झटका मेरी वैजाइना में लगाए थे मैं उसकी ताकत देखकर बहुत खुश थी कि 55 साल से ज्यादा की उम्र में भी यह दोनों लोग कितने ताकतवर हैं जो इतने अच्छे से सेक्स कर रहे हैं। फिर उन्होंने सेक्स के बाद मुझे कहा कि नेहा तू तो बहुत बड़ी मस्त और सेक्सी औरत है तेरे साथ हमें बहुत मजा आता है फिर सब बोले की यह बैग पकड़ इसमें तेरा गिफ्ट है तो मैंने वह छोटा सा बैग रख लिया सब मेरे लिए कोई महंगा लेडिस बैग लेकर आए थे जिसने मेरा गिफ्ट था फिर वह लोग चले गए। मैं भी घर जाकर सो गई। दूसरे दिन सब मेहमान चले गए और रात में हम सभी लेडिस रात में बातें करने के लिए करता हुए और 9:00 बजे वह सब अपने-अपने घर चली गई। फिर मैं अपने कमरे में आ गई और सोने लगी तो पति ने कहा कि रजनी के घर कल क्या काम था मैं बोली कि वह अकेली थी तो मुझे बुला लिया था। मेरा पति बोला कि मैं कल रात में रजनी के पति को फोन करके पूछा कि तुम कहां पर हो तो उसने मुझे बताया कि मैं तो घर पर ही हूं फिर मैं एक बार जब रात में गाय भैंस के बारे में चेक करने के लिए आया था कि सब ठीक-ठाक तो है तो मैं कमरे में लाइट चलती हुई देख ली तो मैं वहां बाहर खड़ा होकर देखने लगा कि अंदर कौन है तो मुझे तुम्हारी और दो लोगों की आवाज सुनाई दे रही थी फिर मैं खिड़की में से सब कुछ देखा है जो कल रात तू करके आई है। मैंने मेरे पति को कहा कि आप मुझे माफ कर दो वह मुझे अच्छा पैसा देते हैं और मैं तो हम सबके लिए ही यह कर रही हूं पति बोला कि वह लोग अब तुझे यहां घर आकर भी छोड़ रहे हैं मैं बोली कि आगे से मैं ऐसा नहीं करूंगी और मैं तो यह सब आपके लिए ही कर रही हूं आप अगर मना करेंगे तो मैं आगे से नहीं करुंगी फिर मैं पति को थोड़ी देर समझती रही तो वह मान गए वह थोड़ा गुस्से में भी थे उन्होंने अपना हाथ मेरे बस पर रखा और बोले कि कल तो दो लोगों के साथ कर रही थी आज मेरे साथ भी वैसा ही कर फिर वह बोले अब तू पूरी नंगी हो जा फिर मैं नंगी हो गई और मेरे पति भी पूरे नंगे हो गए पहली बार उन्होंने मेरे साथ घोड़ी बनाकर सेक्स किया और 4 मिनट में इस पर में गिरा दिया थोड़ी देर बाद और फिर से सेक्स के लिए तैयार हो गए फिर उन्होंने मुझे बोला तू लेट जा और अपनी टांगों को अपने कंधों के बराबर फैला कर उठा ले फिर मैं लेट गई और मैं मेरी दोनों टांगें उठा ली और कंधों के बराबर कर लिया अब मेरी वजाइना ऊपर की और उठी हुई थी और मेरे पति उसमें अपना पेनिस डालकर सेक्स करने लगे वह पूरा अंदर तक झटका दे रहे थे इस कारण मुझे बहुत दर्द हो रहा था मैं बोली धीरे करो दर्द भी होता है मुझे तो बोले कि कल दो-दो लोगों ने तीन-तीन बार किया तब दर्द नहीं हो रहा था। अब तेरा अपना पति कर रहा है तो तुझे दर्द हो रहा हैं। फिर उन्होंने अपना स्पर्म मेरी वैजाइना में ही गिरा दिया और मेरे पास सो गए। फिर सुबह जब मैं उठी और जाने लगी तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने पास बुलाया और सुबह-सुबह ही 15 मिनट तक फिर से सेक्स किया। मैं बोली आप मेरे से नाराज तो नहीं है मेरे पति बोले नहीं मैं तुझसे नाराज नहीं हूं तू बहुत सेक्सी हैं और मजा देती है। आप लोग पढ़ कर बताना कि मैं कैसा लिखा हैं। neelamexpert@outlook.com
शेर सिंह यादव Hindi Porn Stories

नमस्कार दोस्तों मैं एक बार फ़िर Hindi Porn Stories हाज़िर हूँ अपनी नई कहानी के साथ। मेरी पहली कहानी को आपने पसंद किया और मुझे ढेर सारे मेल भेजे जिसका मैं शुक्रिया अदा करता हूँ। तो लीजिये पेश है मेरी एक और कहानी।

मैंने अपने कैरियर की शुरुआत एक कम्प्यूटर अध्यापक के रूप में की थी। जिस संस्था में मैं पढ़ाता था उसमें एक बैच था जिसमें ज्यादातर विद्यार्थी कॉलेज में पढ़ते थे और मुझसे २-३ साल ही छोटे थे। उसी बैच में कुछ लड़कों के साथ दो खूबसूरत हसीन लडकियाँ भी थी, एक का नाम था शालिनी और दूसरी का सोनिया।

शालिनी पढ़ने में सोनिया से तेज़ थी और उसके मार्क्स भी ज्यादा आते थे। जब सेमेस्टर की परीक्षा होने वाली थी, उससे एक सप्ताह पहले मैंने उनकी क्लास खत्म की तो सब विद्यार्थी बाहर चले गए और मैं कक्षा में बैठा हुआ उनके बैच की टाइम-शीट भर रहा था। तभी सोनिया क्लास में आई। मैंने पूछा- क्या हुआ? अभी घर नहीं गई?

तो वो बोली- सर ! मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।

मैंने कहा- बोलो !

तो बोली- नहीं ! यहाँ नहीं, शाम को जब आप घर जायेंगे तो मैं नीचे आपसे मिलूंगी।

मैंने पूछा कि बात क्या है बता दो, तो वो बोली कि नहीं शाम को ही बताऊँगी।

मैंने कहा- ठीक है।

फिर वो चली गई और मैं अपना काम ख़त्म करके लैब में चला गया। शाम को जब घर जाने के लिए निकला तो एक कार मेरे पास आकर रुकी। उसमें सोनिया बैठी थी। मैं उसकी बात को भूल चुका था उससे देखकर याद आया कि इसने मुझे शाम को मिलने की बात की थी। मैं भी कार में बैठ गया और वो ड्राइव करने लगी।

मैंने उससे पूछा कि क्या बात करनी थी, अब बताओ।

वो बोली- चलिए किसी काफ़ी शॉप में चलते हैं वहीं बताऊंगी।

हम काफ़ी शॉप में गए और काफ़ी आर्डर कर दी तो वो बोली कि सर आप तो जानते हैं कि मैं और शालिनी बचपन के दोस्त हैं। वो मुझसे तेज़ है और हमेशा उसके नम्बर मुझसे ज्यादा आते हैं।

तो मैंने कहा- इसमें कौन सी बड़ी बात है, थोड़ी मेहनत करो तो तुम्हारे मार्क्स भी अच्छे आएंगे।

उसने मेरा हाथ अपने दोनों हाथों में लिया और बोली कि सर अगर आप चाहो तो मेरे मार्क्स उससे अच्छे आ सकते हैं। मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ। उसने आखिरी शब्द इस तरह कहे कि मेरे बदन में झुरझुरी होने लगी। उसकी आंखों में कुछ ऐसा था कि मेरा मन डोलने लगा और पहली बार मैंने उसे दूसरी नज़रों से देखा।

मैंने कहा- अगर मैं तुम्हारी मदद कर दूँ तो मुझे क्या मिलेगा?

उसने उसी अंदाज़ से कहा- सर ! आप जो मांगेंगे, मैं देने के लिए तैयार हूँ।

मैंने कहा- सोच लो, कहीं मैंने कुछ माँगा और तुम न दे सकी तो?

वो मेरे बगल में आकर बैठ गई और अपनी दोनों हथेलियाँ मेरी जाँघों पर रख दी और बोली- आप जो बोलोगे, मैं देने के लिए तैयार हूँ।

बात दोनों की समझ में आ चुकी थी। हमने काफ़ी पी और फिर अपने अपने घर चले गए। जब परीक्षा हुई और मैंने कॉपी चेक की तो पाया कि शालिनी के मार्क्स ८२ थे और सोनिया के ७५। मैंने सोनिया के कुछ प्रश्नों में मार्क्स बढ़ा दिए और उसके मार्क्स ८४ कर दिए। जब रिजल्ट निकला तो सोनिया बहुत खुश थी।

उसने मुझे क्लास के बाद थैंक्स कहा तो मैंने कहा- अब पार्टी कब दे रही हो?

तो वो बोली- सर ! कल आप मेरे साथ मेरे घर चलो, वहीँ पार्टी दूंगी।

अगले दिन वो क्लास के बाद मुझे अपनी कार में अपने घर ले गई। घर तो नहीं कह सकते अच्छा खासा बंगला था।

मैंने पूछा- घर में कौन कौन है?

तो वो बोली- पापा और मम्मी हैं, पर दोनों अक्सर पार्टी में व्यस्त रहते हैं। अभी सिर्फ़ ९-१० नौकर होंगे।

वो मुझे अपने कमरे में ले गई। मैं सोफे पे बैठ गया। उसने पीले रंग की सलवार कमीज़ पहन रखी थी, बाल खुले ही थे। उसने झुक कर मेरे दोनों घुटनों पे हाथ रख दिया और बोली- सर ! आपने मेरे बरसों की तमन्ना पूरी कर दी, बताइए, क्या लेंगे चाय या ठंडा।

मैं उसकी कमर पे हाथ फिराने लगा और बोला- प्यास लगी है, पर चाय या ठंडे का मन नहीं है, कुछ और पिलाओ।

फिर हम एक दूसरे की आंखों में देखने लगे और धीरे धीरे हमारे होंठ एक दूसरे की तरफ़ बढ़ने लगे। फिर हम धीरे धीरे एक दूसरे को किस करने लगे मैं उसे धीरे से अपनी तरफ़ खींचा तो वो मेरे जाँघों पे बैठ गई। और दोनों पैर सोफे पे रख लिए। अब उसके दोनों चूतड़ मेरी एक जांघ पर थे और जांघें दूसरी जांघ पर। वो अपनी साइड पे बैठी थी। हम एक दूसरे के होंठो को चूमने लगे। उन रसीले होठों को चूमते ही मुझे लगा जैसे मेरी बरसों की प्यास बुझ गई।

धीरे धीरे हमारी किस गहरी होती गई और हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह में घूमने लगी। मैंने अपना एक हाथ उसके स्तनों पे फ़िराना शुरू कर दिया, उसने एक हल्की सी सिसकारी ली। मैं धीरे धीरे उसकी चूचियाँ सहलाने लगा। उस एहसास का बयान मैं शब्दों में नहीं कर सकता। उफ्फ्फ क्या टाइट चूचियां थी। उसके दोनों हाथ मेरे बालों में फिर रहे थे।

हमारा शरीर धीरे धीरे गर्म होने लगा और चूमते चूमते मैंने उसका दुपट्टा उतार के एक तरफ़ रख दिया। फिर धीरे से उसकी कमीज़ ऊपर कर दी। मेरा इशारा पाते ही उसने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया और मैंने उसकी कमीज़ उतार के एक तरफ़ रख दी। फिर धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूमने लगे। अब उसने मेरी टी शर्ट उतार दी। और हम वापस अपने चूमा चाटी मैं मशगूल हो गए। फिर मैंने पीठ पे हाथ फिराते फिराते उसकी ब्रा के हुक खोल दिए।

उसकी चूचियां आजाद होकर बाहर आ गई और मैं उन्हें प्यार से मसलने लगा। दोस्तों आज भी उस पल को याद करता हूँ तो मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है। दो बेहतरीन चूचियाँ मेरे हाथों में थी और एक मस्त गाण्ड मेरी जाँघों पर। खैर आगे बढ़ते हैं। तो मैं उसकी मस्त चूचियों को मसल रहा था और वोह मजे से सिस्कारियां ले रही थी।

फिर उसने मेरी बनियान उतार दी। मैंने उसका एक पैर अपने दाहिनी तरफ़ और एक पैर अपने बायें तरफ़ कर लिया। उसका मुहँ मेरे तरफ़ था और हम अभी भी एक दूसरे को चूम रहे थे। मैंने एक हाथ से उसका नाड़ा खोल दिया और हाथ पीछे ले जाकर उसकी सलवार और पैंटी एक साथ उतार दी। उसने अपनी नाज़ुक बाहों का हार मेरे गले में डाल दिया और अपने होंठ मेरे कन्धों पर रख दिए। मैं भी उसके कन्धों पे प्यार करने लगा।

मेरा लण्ड पैन्ट में मुझे परेशान करने लगा। करता भी क्यों ना। मैं एक हसीना के साथ मजे कर रहा था और उस बेचारे का पैन्ट में दम घुट रहा था। मैंने उसे थोड़ा ऊपर किया और अपनी पैन्ट उतार दी। उसने मेरा अंडरवियर भी उतार दिया और प्यार भरी नज़रों से मेरे लण्ड को देखने लगी। मेरा लण्ड भी अपनी किस्मत पे नाज करने लगा और मस्ती में सलामी देने लगा।

मैंने उसकी गाण्ड पकड़कर अपनी तरफ़ खींचा और हम दोनों घूमकर बैठ गए। अब उसका मुंह मेरी तरफ़ था, में अपने घुटनों पे बैठा था और उसकी गाण्ड सोफे पे नीचे लगी हुई थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चिकनी चूत पे रखा तो वो मचलने लगी। मैं सोफे से नीचे आ गया और एक हथेली उसकी चूत पे फिराने लगा। वो मज़े से लम्बी लम्बी सिस्कारियां लेने लगी।

मैंने उसकी चूत पे प्यार किया और धीरे धीरे उसे चूमने और चाटने लगा। फिर आहिस्ता से मैंने अपनी जीभ थोडी से चूत के अंदर डाली तो उसने मेरा सर पकड़ लिया और जोर से अपनी गाण्ड इधर उधर करने लगी। आज भी उस लम्हे को याद करता हूँ तो मेरे रोयें खड़े हो जाते हैं। उसके इस तरह मचलने से मेरा लण्ड और सख्त हो गया। फिर मैं उसकी चूत पे अपनी जीभ फिराने लगा और धीरे धीरे उसे किस करने लगा। थोड़ी देर में उसका बदन अकड़ने लगा और वो आह्ह्ह करते हुए झड़ गई।

मैंने उसकी चूत को जीभ से साफ़ किया और सोफे के ऊपर बैठा तो वो बोली कि थोड़ा रुक जाओ, मैं थक गई हूँ।

मैंने कहा- मेरा नहीं तो व कम से कम मेरे लण्ड का तो ख़याल करो, बेचारा कब से तड़प रहा है।

वो बोली- तड़पाओ मत ! लाओ मैं उसका मूड बनाती हूँ।

इतना कहकर वो झुकी और मेरे लण्ड को प्यार करने लगी। फिर धीरे से उसने मेरे लण्ड को मुंह में ले लिया और उससे धीरे धीरे चूसने लगी। बीच बीच में उससे हलके से काट भी लेती थी। मेरा लण्ड इतनी मस्ती पाकर बेकाबू होता जा रहा था। चूसने से उसकी चूत वापस फूल की तरह खिल उठी।

मैंने उसके बाल पकड़कर ऊपर उठाया, अब हम दोनों अपने घुटनों पर थे। मैंने उससे चूमते हुए अपने लण्ड को उसकी चूत के द्वार पर टिका दिया। एक हल्का सा धक्का दिया पर उससे सिर्फ़ उसकी चूत के होंठ ही थोड़ा सा खुल पाया। मैंने उसकी गाण्ड पकड़कर एक जोर से धक्का मारा तो मेरा लण्ड आधा उसकी चूत में घुस गया। उसने हलकी सी सिसकारी ली और अपनी गर्दन पीछे के ओर फ़ेंक दी। मैंने गाण्ड पकड़े पकड़े एक ज़ोरदार धक्का मारा तो मेरा लण्ड उसकी चूत को फाड़ता हुआ उसकी नर्म मुलायम चूत में समां गया।

चूत बहुत कसी हुई थी और उसकी चीख निकल गई।

बोली- थोड़ा आराम से करो, बहुत दर्द हो रहा है।

उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। में थोड़ी देर रुका रहा, फिर मैंने उसके पैर उठाकर अपनी कमर पे लगा लिए। और ज़ोरदार धक्कों से उसकी चूत का मज़ा लेने लगा। थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसके दोनों पैर अपने दाहिनी तरफ़ कर दिए और धक्के जारी रखे। इस बीच वो २ बार झड़ चुकी थी।

आख़िर मैं भी इंसान था! २-४ धक्के और लगाने के बाद मेरा लण्ड उसकी चूत में सावन के बादलों की तरह ज़ोरदार बारिश करता हुआ निढाल हो गया। मैंने उसकी चूत में से लण्ड निकाल लिया जिसे उसने चाटकर अच्छी तरह से साफ़ कर दिया।

अब वो मेरे गोद में सर रखकर लेट गई। में धीरे धीरे उसकी चूचियों को मसलता हुआ जब उसकी गाण्ड तक पहुँचा तो शरारत से बोली कि अभी नहीं। आखिरी सेमेस्टर के बाद !

पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कहा- तुमने बोला था, जो मांगोगे वो दूंगी।

तो वो बोली- अभी इतना कुछ दे तो दिया।

मैंने कहा- मैंने माँगा कब था ये तो तुमने अपनी खुशी से दिया है।

वो बोली- आप बड़े शरारती हो ! मानोगे नहीं !

मैंने कहा- जब तुम जैसी हसीना गोद में बैठी हो तो किसी का भी मन डोल सकता है।

वो बोली- ऐसा क्या है मुझ में?

मैंने कहा- इतनी प्यारा चेहरा, नशीली आंखें, गुलाबी होंठ, सुराहीदार गर्दन, रसीले चूचे, मस्त बदन, गदराई गाण्ड, रेशमी बाहें, और खूबसूरत चिकनी टांगें और कोई खुदा से क्या मांग सकता है।

वो खुश हो गई और लेटे लेटे ही मेरे लण्ड को प्यार करने लगी। अब मेरा लण्ड तो प्यार का ही भूखा है। प्यार पाते ही वापस सलामी देने लगा। इधर उसकी गाण्ड मसलने से वो भी गरम हो चुकी थी। फिर मैंने उससे कुतिया स्टाइल में किया और उसकी गाण्ड चाटने लगा। बहुत ही नर्म, मुलायम गाण्ड थी उसकी। चाटते हुए थूक लगाकर मैंने उसकी गाण्ड को गीला भी कर दिया।

फिर मैंने अपना लण्ड गाण्ड पे लगाया, कमर को पकड़ा और एक ज़ोरदार धक्के के साथ आधा उसकी गाण्ड में पेल दिया। वो चिल्ला उठी और उसकी आंखों से आँसू निकलने लगे।

मैं थोड़ी देर रुका, जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने एक और ज़ोरदार धक्का लगाया, अब पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में समां चुका था। बहुत टाइट गाण्ड थी, मेरे लण्ड में भी जलन होने लगी। मैं थोड़ी देर और रुका और फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। अब उससे भी मज़ा आने लगा। धीरे धीरे मेरे धक्के तेज़ होते जा रहे थे और थोड़ी देर के बाद मैं उसकी गाण्ड में झड़ गया। मेरे लण्ड की बारिश से उसकी गाण्ड भी तृप्त हो चुकी थी।

इस जबरदस्त चुदाई के बाद हमने एक दूसरे को प्यार किया और फिर मैं अपने घर चला गया।

जिस दिन परिणाम निकला था उस दिन मैं सिर्फ़ सोनिया की खुशी देखकर खुश हो रहा था और सोच रहा था कि कब इसको चोद सकूँगा। और इस बीच मैंने शालिनी की तरफ़ देखा भी नहीं, वो बेचारी मेरे इस व्यवहार से बहुत आहत हो गई थी, पर उस ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया।

जब मैं अगले सेमेस्टर की क्लास लेने गया तो उसकी तरफ़ मेरी नज़र पड़ी। उससे नजरें मिलते ही मुझे अपने ऊपर थोड़ी शर्म आई। मैंने किसी तरह क्लास ख़त्म की। सब विद्यार्थी बाहर चले गए। थोड़ी देर में शालिनी रूम में आई और बोली- सर ! मुझे आपसे एक बात करनी है !

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तो दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी?

उम्मीद है, आपको पसंद आई होगी।

या मेरी लेखन में किसी कमी को महसूस करें तो मुझे ज़रूर मेल करें। मैं आपके मेल का इंतज़ार करूँगा। जितने मेल आएंगे उतना ही अगली कहानी लिखने के बारे में मेरा उत्साह वर्धन होगा। Hindi Porn Stories

हाय दोस्तो ! Sex Stories

मेरा नाम सुरेश है और मैं Sex Storiesअहमदाबाद, गुज़रात से हूं। मेरी उम्र 30 साल और कद 5’4′ है।

यह बात अभी की है जब मैं 3 साल के बाद विदेश से वापिस आया।

अहमदाबाद में जो मेरे पुराने साथी थे वे सभी अपने अपने काम में व्यस्त हो गए थे इस लिए अहमदाबाद मेरे लिए एक नया शहर हो गया था और मुझे एक साथी की तलाश थी।

मेरे जो एक दो पुराने दोस्त मिले, उनसे इस बारे में बात कि तो एक ने मुझे एक फ़ोन नम्बर दिया जो वास्तव में एक विधवा का था और उसकी एक सात साल की बच्ची है।

तो मैंने उसको फ़ोन लगाया और बताया कि मैं कौन बोल रहा हूं और किसने मुझे उसका नम्बर दिया है, तो वो मुझसे बात करने लगी।

पहले पहले हम बस सीधी सीधी बातें करने लगे और हमें रोज़ बात करने की आदत सी हो गई।

बातों बातों में मुझे यह भी पता नहीं चला कि वो मुझसे इतनी प्रभावित हो गई कि उसने एक दिन मुझे अपने घर मिलने के लिए बुलाया और मैं चला गया।

जैसे ही मैं उसके घर गया तो उसकी बेटी ने दरवाज़ा खोला जो बहुत प्यारी थी। लेकिन मैंने जैसे ही उसकी मम्मी को देखा तो मेरे होश उड़ गए।
क्यों?
अरे ! वो इतनी खूबसूरत नहीं थी जितना मैंने सोचा था।
हाँ ! वो गोरी जरूर थी लेकिन उसकी सूरत मुझे जरा भी पसन्द नहीं आई।

फ़िर हम इधर उधर की बातें करने लगे। असल में मेरे बात करने के अंदाज़ से और मेरे विदेश में रहने के कारण वो मुझसे बहुत प्रभावित थी।

थोड़ी बातें करने के बाद उसने मुझे कोल्ड-ड्रिंक दिया और अपनी बेटी को कहा- जाओ ! चिराग के घर में जाकर खेलो जो कि उनके ऊपर वाली मंजिल पे रहता था।

असल में मैं उसके घर पर यह सोच कर गया था कि कोई अच्छा साथी मिल जाए जिससे मैं अपने दिल की बातें कर सकूँ।

यहाँ पर मैं आपको बता दूँ कि मैं भी एक शादीशुदा आदमी हूँ, पर जैसा कि आप जानते हैं कि आदमी की कई ऐसी बातें होती हैं जो वो अपनी पत्नी के साथ भी नहीं बाँट सकता।

मेरे विचार में जीवन में ऐसी कितनी ही बातें होती हैं जो आप अपने निकटतम मित्रों से ही बाँट सकते हैं( ऐसे ही एक मित्र की मुझे तलाश थी)। लेकिन यहाँ तो बात कुछ और ही निकली। मेरी जरूरत थी एक खूबसूरत दोस्त जो मुझे दिल से समझ सके (सिर्फ़ सेक्स नहीं)

यहाँ इस भाभी को देखने के बाद मैंने निश्चय किया कि कम से कम इसके साथ तो मैं आगे कोई सम्बंध नहीं रखूँगा।

लेकिन उल्टा यह हो गया कि जैसे मैंने आपको बताया कि भाभी कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो गई थी मुझसे।

अब घर में सिर्फ़ हम दोनों थे और मेरे पास कोई बात नहीं थी उससे करने को।

इतने में उसने बोला कि आओ हमारा घर देख लो।

मैं और वो अपने हाथों में गिलास लिए खड़े हुए और पहले उसकी रसोई में गए जो कि अच्छा खासा पैसा खर्च करके बनाई थी, असल में उसके पति अच्छे पैसे वाले थे और उसकी मृत्यु के बाद भाभी ने भी अच्छी नौकरी कर ली थी।

उसने मुझे रसोई के बारे में पूरी जानकारी दी पर पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि वो जो भी बात कर रही थी वो दोहरे अर्थ में ही कर रही थी। मुझे एक और बात महसूस हुई कि जहां कहीं भी उसे मुझे छूने का मौका मिलता वो छोड़ती नहीं थी।

फ़िर वो मुझे बाहर लाई जहां हम पहले बैठे थे और हर बात बड़े विस्तार से बता रही थी। बात करते करते उसका हाथ मेरे हाथ से टकरा गया और मेरा कोल्ड ड्रिंक मेरे शर्ट पर गिर गया। उसने मुझ से माफ़ी मांगी और कहा कि आप जल्दी से शर्ट उतार दीजिए, मैं साफ़ कर देती हूं।

मैंने शर्ट उतार कर उसे दी तो उसकी नज़र मेरे सीने से हट नहीं रही थी क्योंकि मेरा सीना चौड़ा है, कोलेज़ के समय से ही मैं अखाड़े में जाया करता था।

मैंने उसे फ़िर कहा- भाभी जी ! शर्ट !

वो मेरे हाथ से शर्ट लेकर बेडरूम की ओर जाने लगी तो मेरी नज़र उसके पृष्ठ उभारों पर पड़ी जो कि मुझे पांच पांच किलो के नज़र आ रहे थे और ऊपर नीचे हो रहे थे। बेडरूम में जाकर उसने मुझे आवाज़ दी-सुरेश ! यहाँ आओ ! देखो यह मेरा बेडरूम है और बाथरूम भी यहीं पर है। फ़िर उसने कहा- तुम यहीं बेड पर बैठो, मैं आपका शर्ट मशीन में डाल देती हूँ। और वो बाथरूम में चली गई।

वहाँ बैठे बैठे मैं बोर हो रहा था और पता नहीं मुझे ज़रा नींद सी आ गई। मैं सोया नहीं था पर ज़रा आंख बंद हो रही थी। थोड़ी देर में मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे लण्ड पर किसी का हाथ घूम रहा है, पर मेरे मन में ऐसा कोई विचार था ही नहीं इसलिए मेरा लण्ड सामान्य ही था।

मैंने आंखें खोल कर देखा तो वो मेरे पूरे बदन को चूमने लगी तो मैं एकदम उसे रोकने लगा और कहने लगा कि आप यह क्या कर रही हैं। तो उसने कहा कि मैं तुमसे यौन सम्बंध बनाना चाहती हूँ और फ़िर मुझे जोर जोर से चूमने लगी।

दोस्तो ! विश्वास करना कि इतना सब कुछ होने के बाद भी मेरे लण्ड पर कोई असर नहीं हुआ क्योंकि मैं उसे चोदना ही नहीं चाहता था।

मेरी कोई प्रतिक्रिया ना मिलने पर उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम मुझसे कुछ भी करना नहीं चाहते?

मैंने साफ़ मना कर दिया कि नहीं मुझे तुम में कोई रुचि नहीं है, आप अच्छी हैं, आप का स्वभाव भी अच्छा है पर मैं आपके साथ सेक्स नहीं करना चाहता।

तो उसने कहा- तो फ़िर तुम मेरे घर क्यों आए और अब तक मुझसे बातें क्यों करते रहे?

मैंने उसे साफ़ बता दिया कि मैं उसके बुलाने पर ही उसके घर आया हूं और बातें इसलिए करता रहा कि आप अपनी किसी अच्छी सी खूबसूरत सहेली से मेरी दोस्ती करा दोगी, जैसा कि आपने वादा भी किया था।

यह सुन कर वो एकदम निराश हो गई और उसकी आंखों में आँसू आ गए। तभी उसने मुझे उसकी सारी बातें बताई और मुझे एकदम भावुक कर दिया और जोर जोर से रो रो कर मुझसे चिपक गई।

उसकी इतनी सालों की वासना की भूख सुन कर मुझे उस पर तरस आ गया और मैं उसके सिर पर हाथ फ़िराने लगा।

फ़िर उसने कहा-सुरेश ! मैं तुम्हें अपनी दो तीन अच्छी सहेलियों से मिलाऊँगी और दोस्ती भी करा दूंगी, पर तुम मुझे एक बार अच्छी तरह से संतुष्ट कर दो। जब से मैंने तुम्हारा यह गोरा और चौड़ा सीना देखा है मुझसे रहा नहीं जाता।

यह बात करते करते उसने फ़िर से मेरा लण्ड सहलाना शुरू कर दिया। मैंने सोचा कि यह औरत इतने सालों से भूखी है तो क्यों ना मैं इसकी आग ठण्डी कर दूँ!

मैंने अपनी ज़िप खोल कर अपना 4 इन्च का लण्ड उसके हवाले कर दिया जो कि अभी तक उठा नहीं था।

वो मेरे लन्ड से खिलवाड़ करने लगी जैसे किसी छोटे बच्चे को खिलौना मिल गया हो।

फ़िर उसने मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे आम चूस रही हो। अब यह तो स्वाभाविक ही है कि इतना लण्ड चुसवाने के बाद तो सत्तर साल के बुढ्ढे का भी खड़ा हो जाए, मैं तो सिर्फ़ तीस का था।

वो मेरा 7′ का खड़ा लण्ड देख कर पागल सी हो गई और जोर जोर से चूसने लगी। चूसते चूसते उसने मेरी पैन्ट और अन्डरवीयर निकाल दी थी। लगातार बीस मिनट लण्ड चूसने के बाद उसने मुझे बेड पर लेटने को कहा और उसने खुद अपने सारे कपड़े उतार दिए।

और उसने मुझे बताया कि मुझे पता है कि मेरी सूरत तुमको पसंद नहीं है, पर आज के किए तुम मुझे खुश करो।

तो ना चाहते हुए भी मैंने उसके बड़े बड़े स्तन जो कि एकदम गोरे अड़तीस इन्च के थे, दबाए फ़िर उसने अपने स्तन चुसवाए। मैं करता रहा क्योंकि मैं उसको प्यासी नहीं रखना चाहता था।

थोड़ी देर बाद वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने आप ही मेरा लण्ड अपनी चूत पर लगा कर अन्दर डलवाने की कोशिश करने लगी, लेकिन अन्दर नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत बहुत समय से प्रयोग ही नहीं हुई थी।

तो उसने कहा- आप अपने लण्ड को ज़रा पकड़ो, मैंने पकड़ा, फ़िर उसने अच्छी तरह से मेरे लण्ड की टोपी अपनी गीली चूत के मुँह पर जमाई और ज़रा सा जोर लगाया तो सिर्फ़ मेरा टोपा ही अन्दर घुस सका और वो चिल्ला उठी। पर वो हटी नहीं और दर्द होने के बावज़ूद दो तीन झटके लगा कर मेरा पूरा लण्ड अन्दर ले ही लिया और बिना हिले पाँच मिनट तक चुपचाप मेरे ऊपर बैठी रही (शायद दर्द के कारण!)

फ़िर धीरे धीरे हिलना शुरू होकर जो शताब्दी एक्स्प्रेस वाली गति पकड़ी कि रुकने का नाम ही नहीं लिया।

दोस्तो ! वैसे मैं चोदने में माहिर हूं और किसी भी महिला को दुनिया का स्वर्ग दिखा सकता हूं, मैं तीस चालीस मिनट तक चोदने की ताकत रखता हूँ। पर यहाँ मेरी इच्छा के विरुद्ध काम चल रहा था। मुझे उत्तेज़ना नहीं थी, मैं तो सिर्फ़ एक भूखी औरत को संतुष्ट करना चाह रहा था।

वो करीब बीस मिनट लगातार झटके लगाने के बाद आह ऊह की जोरों की आवज़ों के बाद मुझ से चिपक कर ढेर हो गई पर मुझे और मेरे लण्ड को आज़ाद करने से मना कर रही थी।

फ़िर उसने मुझे बोला कि मैं उसे अलग अलग तरीके से चोदूँ, तो मैंने उसे पाँच छः तरीकों से खुश किया और पता नहीं वो कितनी बार झड़ चुकी होगी।

तब उसने कहा कि आज के बाद अगर मैं सात जन्म तक नहीं चुदवाऊंगी तो भी अफ़सोस नहीं होगा। और रही तुम्हारी बात तो मैं तुम्हें अपनी ऐसी ऐसी दोस्तों से मिलवाऊँगी कि मुझे चोदने के बाद तो तुम्हारा नहीं छुटा पर मेरी सहेलियों को देख कर ही तुम्हारा लण्ड पानी छोड़ देगा।

दोस्तो ! विश्वास करो कि मैंने अपना खड़ा लण्ड ऐसे ही वापिस अपनी पैन्ट में समेट लिया और वहाँ से निकल लिया।

करीब दो दिन के बाद मेरे मोबाईल पर उसका फ़ोन आया और…

आपको कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी? Sex Stories


मैंने आकाश से विदा ली, बस स्टैंड से टैक्सी पकड़ी और आदित्य के होटल जा पहुंची।

वहां पहुंचकर मैंने समय देखा, सुबह के 6:30 बज रहे थे.
मैंने आदित्य के कमरे की बेल बजाई।

आदित्य अपने नाइट सूट में था.
उसने दरवाजा खोला और मुझे देखकर वह बहुत बुरी तरह चौंक गया.
फिर जैसे उसको होश आया, उसको तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई. उसने मुझे खींचा और बाहों में भींचकर मेरे होठों पर होंठ रख दिए।

आदित्य मुझे दीवानों की तरह चूमने लगा और मेरे ब्लाउज और ब्रा को खोल फेंका।
जी भर के मेरे होठों का रसपान करने के बाद वह पलंग के एक तरफ बैठकर मेरे स्तनों के बीच अपने चेहरे को रखकर दोनों स्तनों को मसलते हुए मेरे बदन की गर्मी का आनन्द लेने लगा।

उसके बाद उसने मेरे दाहिने निप्पल को मुंह में लिया और हाथों से ऐसे मसलने लगा जैसे कि उसका रस निचोड़ना चाह रहा हो।
कुछ देर बाद उसने बायें स्तन को मुंह में लिया और आम की तरह चूसने लगा।

मैं तो अभी एक घंटा पहले ही तो चुद के आई थी लेकिन एक तो बस में मैं झड़ी नहीं थी, दूसरे पति से चुदाई को पांच दिन हो गए थे, मेरी चूत में खलबली सी मचने लगी।
मैं बार-बार अपने चूतड़ों को भींच भींच कर इस मस्ती का मजा ले रही थी।

फिर आदित्य ने मुझे पलंग पर पटक दिया.
मॉर्निंग इरेक्शन के कारण उसका लंड अकड़ा हुआ तो था ही … इसलिए वह चुदाई वाले हवन की तैयारी में अपने नाइट सूट को उतारने लगा।
मैं उसकी बेताबी देख कर मुग्ध थी।

आदित्य के नंगा होने तक मैंने भी अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार दिए।

धार्मिक अनुष्ठान वाले हवन में तो पता नहीं प्रतिफल मिलता है या नहीं?
मिलता भी है तो क्या मिलता है?
और कब मिलता है?

लेकिन चुदाई वाले हवन में चूत के हवन कुंड में वीर्य की आहूति देते ही तुरंत आपको सारे तनावों से मुक्ति मिल जाती है।

आदित्य का लंड मेरी चूत में घुसने को उतावला हो रहा था लेकिन उसे तो अपनी आदत के अनुसार पहले चूत रस का स्वाद लेना था।
उसे पता नहीं था कि इस बार उसे केवल चूत रस नहीं बल्कि एक नए मर्द का वीर्य रस भी चखने को मिलेगा।

उसने मेरी पैंटी की और देखा तो उसने पाया कि वह बहुत अधिक फूली हुई थी, वह समझा कि मैं पीरियड से हूं इसलिए सैनिट्री नैपकिन लगा रखा है।

वह भन्ना गया और बोला- अरे यार, जब तुम पीरियड से थी तो मेरे खड़े लंड पर चोट करने यहां आई क्यों?

मुझे उसकी मनोदशा देखकर बहुत आनन्द आया।
मैंने कहा- यदि मैं पीरियड से होती तो रात भर का सफर करके यहां आती क्या बुद्धू?

तो उसने पूछा- फिर ये नैपकिन क्यों लगा रखा है?
मैंने कहा- तुम अपना काम शुरू करो, सब समझ में आ जाएगा।

आदित्य ने मेरी रिसती हुई चूत पर से नैपकिन हटाया और उस पर अपने जलते हुए होंठ रखे और जुबान को थोड़ा सा भीतर प्रवेश कराया।
उसके होंठ और जुबान मेरी चूत के रस और आकाश के वीर्य में सन गए।

उसने कहा- अरी भेनचोद, अब बस में किससे चुदवा के आई है तू?
मैंने कहा- बताती हूं … पहले मेरी रसभरी से उस मर्द का पूरा वीर्य अच्छे से चाटो जिसने मेरी चूत में अपना वीर्य भरा है।

वह अपनी जुबान को हरकत दे देकर मेरी चूत से सारा वीर्य अपने मुंह में खींचने लगा।
उसके बाद वह उठा और ऊपर की ओर आकर मेरे होंठ से अपने होंठ मिला दिए.

फिर अपनी जुबान को मेरे मुंह में डालकर पहले तो मुझे आकाश के वीर्य का स्वाद दिया फिर अपने मुंह में रोके सारे वीर्य को मेरे मुंह में धकेलने लगा।
हम दोनों की जुबान आपस में अठखेलियां करती हुई वीर्य रस को एक दूसरे की ओर धकेल रही थीं।

मुझे इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था.

उसके बाद थोड़ा-थोड़ा वीर्य दोनों ने गटक लिया।

इस खेल के बाद उसने पूछा- अब तो बता कि बस में किस से और कैसे चुद के आई है? क्या वैभव तेरे साथ आया था?

मैंने कहा- पहले तुम चुदाई शुरू करो, मैं चुदवाती चुदवाती तुम्हें सब बताती हूं।

आदित्य ने मेरी चूत में अपना कड़क लंड डाला, मेरे शरीर में एक सिरहन सी दौड़ गई.
मैंने उसके कूल्हों को पकड़ के जोर से अपनी और खींच लिया।

कुछ पल बाद उसने चुदाई शुरू की।
मैं उसे पूरा घटनाक्रम बताने लगी कि कैसे मैं आदी के कामुक सपनों में खोई हुई थी।

मुझे पता नहीं चला कि कब अजमेर का एक बैंक मैनेजर आकाश, रात में उत्पन्न तामसिक प्रवृति के चलते, मुझे देखकर कामातुर हो गया और अवसर मिलते ही मेरे केबिन में आकर मेरे पीछे लेट गया।
उसने मुझे नींदों में ही इतना गर्म कर दिया कि मेरी चूत पानी छोड़ने लगी और लंड लेने को तैयार हो गई।
मेरी वासना ने मेरे सपनों के साथ में तालमेल बिठा लिया.
फिर कर वो रहा था और मुझे सपने में आदी दिखाई दे रहा था।
मेरी नींद तब उचटी जब उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में एक ही झटके से घुसेड़ दिया।
उसके बाद जब लंड घुस ही चुका था तो मैं क्या कर सकती थी?
तो मैंने सोचा कि क्यों ना तुम्हारे लिए एक नए गैर मर्द का ताजा-ताजा स्वादिष्ट वीर्य ले चलूं, सुबह-सुबह ये वाला एनर्जी ड्रिंक तुम्हारा मूड फ्रेश कर देगा।

हम दोनों हंस पड़े.

आदित्य मेरी बातों से आश्चर्यचकित था क्योंकि पिछली बार जब वह जोधपुर आया था तो मैं अपने मकान मालिक वैभव से चुदने जा पहुंची थी।
इस बार वह जोधपुर आया तो मैं जयपुर से जोधपुर के बीच किसी अनजान मर्द से चुदवाती हुई आ रही हूं।

मेरी चुदाई गाथा सुनते हुए उसकी वासना में उबाल आने लगा और उसके धक्कों में तेजी आ गई.
बस में मेरी चुदाई जरूर हुई थी लेकिन मैं झड़ी नहीं थी।
इसलिए आदित्य के धक्कों ने मेरी चूत में भी आनन्द का ज्वार भाटा पैदा कर दिया।

कुछ ही मिनट के रगड़ों के बाद उसके लंड के साथ साथ मेरी चूत भी जोर-जोर से फड़कने लगी।
हम दोनों के शरीर अकड़ गये और दोनों की सांसें हमारे काबू से बाहर हो गईं।
कई मिनट तक हम दोनों पसीने में भीगे हुए लंबी-लंबी सांसें लेते रहे।

जब हमारी स्थिति सामान्य हुई तो उसके बाद फिर से आदित्य ने मेरी अनोखी बस यात्रा के बारे में बातचीत का सिलसिला पुनः प्रारंभ किया।
उसने पूछा- आकाश ने तुम्हारी चुदाई करने के बाद क्या कहा?

मैंने फिर बताना शुरू किया:
उसने (आकाश) कहा- तुम्हें देखते ही मुझे वासना ने जकड़ लिया, मेरा लंड इतनी जोर से अकड़ गया था कि उस समय मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया और मैं अपने आप को तुम्हारे केबिन में घुसने से रोक नहीं पाया।
उसने यह भी कहा- मैं आमतौर पर कार से जाता हूं पर किसी कारणवश मुझे बस से आना पड़ा और तुम्हें देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे कुदरत ने मुझे तुम्हारी चुदाई का मौका देने के लिए ही इस बार बस की यात्रा करवाई है।

तब आदित्य ने पूछा- तूने उससे फोन नंबर तो ले लिया होगा?
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- अब तू कोई एक बार उस से चुदवा कर तो चुप बैठने वाली है नहीं, मौका मिलते ही फिर चुदवाने का प्लान बनाएगी।
मैंने कहा- हां यार, सही बात है. बड़ी मुश्किल से नया लंड मिलता है। नए लंड से एक बार चुदवाने से मन तो नहीं भरता ना, और बस की पहली चुदाई में आकाश इतना अधिक उत्तेजित हो गया था कि मैं तो झड़ भी नहीं पाई थी।
फिर आदित्य ने पूछा- वह वापस कब जाएगा?
तो मैंने कहा- रविवार की रात यानि कल!

आदित्य ने पूछा- तो क्या तू जाते वक्त भी उसके साथ सोयेगी?
मैंने मुस्कुराते कहा- और क्या, तुमसे तो जयपुर जाकर भी चुदवा लूंगी, नए लंड से एक और बार चुदवाने का मौका क्यों छोड़ूं!

आदित्य रूआंसा हो गया और बोला- तो मैं अकेला क्या मुठ मारूंगा?
तो मेरी हंसी छूट गई, मैंने कहा- अब यह तुम जानो कि तुम क्या करोगे. मैं तो अजमेर तक के रास्ते में आकाश से कम से कम दो बार चुदवाऊंगी।

आदित्य उदास हो गया.

नाश्ते के बाद मैंने उसका लंड चूस के खड़ा किया और एक बार फिर हमारी चुदाई का दौर चला.
उसने जी भर के मुझे रगड़ा और उसकी उदासी एक हद तक दूर हो गई।

दोपहर में खाना खाकर हम दोनों सो गए।

दो घंटे की नींद के बाद आदित्य फिर से अकेला नहीं उठा, साथ में उसका लंड भी उठ चुका था।
फिर होना क्या था … जब लंड खड़ा हो और चूत गर्म हो तो चुदाई के अलावा और क्या हो सकता है?
तीसरी बार पुनः मेरी घनघोर चुदाई हुई।

मैं आज बहुत दिनों बाद एक ही दिन में चार बार चुद चुकी थी।
एक बार बस में आकाश ने चोदा था और तीन बार आदित्य चोद चुका था.
मेरी चूत तो आज जैसे चुद चुद के निहाल हो गई थी।

रात को हम जोधपुर घूमने निकले और खाना खाकर देर से लौटे।

आज मैं चार बार चुद के थकी हुई थी तो आदित्य भी तीन बार चोद के पस्त हो चुका था।
इसलिए रात को कोई चुदाई नहीं हुई।

शायद हम दोनों जोधपुर से जयपुर तक के सफर को यादगार बनाने के लिए भी अपनी ऊर्जा को संचित कर रहे थे।

रविवार की सुबह भी आदित्य जल्दी उठकर फील्ड में चला गया और शाम को लौटा।
आते ही उसे बस के टिकट की चिंता हुई.

मैंने उसे कहा- चिंता मत करो, आकाश ने टिकट बुक कर लिये हैं।

वह तो उसके साथ जाने के नाम से पहले ही मायूस था, जब उसे यह पता लगा कि टिकटें उसने बुक की हैं तो अब कोई संशय बाकी नहीं रहा था, यह और पक्का हो गया था कि उसने टिकट के साथ-साथ मेरी चूत को भी बुक कर लिया था और रास्ते में मेरी चुदाई तो वही करेगा।

यह सोचकर आदित्य का चेहरा और लटक गया।
मैं उसकी स्थिति को देखकर मन ही मन मजे ले रही थी।

हम खाना खाकर बस स्टैंड पहुंचे.

वहां पर मैंने देखा कि आकाश अपनी पत्नी शिल्पी के साथ खड़ा था।
मैंने आकाश और आदित्य का परिचय करवाया.
आकाश ने हम दोनों का परिचय अपनी पत्नी से करवाया.

अब आदित्य के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली कि चलो अब आकाश मेरी चुदाई नहीं कर पाएगा।

सामान्य बातचीत के बाद हम चारों अपनी अपनी अपनी बर्थ पर पहुंचे।

बस जोधपुर से चली, आदित्य को चौबीस घंटों से अधिक का आराम मिल गया था।
उस पर उम्मीद के विरुद्ध उसे मेरे साथ मेरे ही केबिन में सोने का मौका मिल रहा था इसलिए वह अतिरिक्त उत्साह से भरा हुआ था।

बस के चलते ही आदित्य पर मस्ती चढ़ने लगी।
पहले उसने मेरे होंठ चूमे, उसके बाद में बारी-बारी से मेरे दोनों स्तनों को मसल कर, दबा कर चूस कर मुझे गर्म किया।

फिर 69 की पोजिशन में दोनों ने एक दूसरे को मुखमैथुन का सुख दिया।

फिर मुझे पलटा कर उसने पीछे से मेरी चूत में लंड डाला और मेरी चुदाई शुरू कर दी।
कम से कम आधा घंटे तक उसने मुझे चोदा।

चलती बस में चुदवाने का भी अपना एक अलग मजा है।
मर्द के धक्कों और बस के हिलने से ऐसा अहसास होता है जैसे दो मिलकर चोद रहे हों।

आदित्य की दमदार चुदाई ने आखिरकार मेरे को चरमसुख बिंदु तक पहुंचा दिया.
मेरा पूरा शरीर कांप रहा था, मेरी सांसें भारी हो चली थीं।

मैंने आदित्य को कहा- आदी … अब जरा कसके रगड़ दे यार!

Xxx हस्बैंड सेक्स करते हुए थोड़ी ही देर में चरम सुख का वह क्षण आया जिसको प्राप्त करने के लिए पूरी दुनिया की सारी औरतें और सारे मर्द पागल रहते हैं।
मेरा शरीर ऐंठा और चूत फड़कने लग गई, चूत के हर एक स्पंदन के साथ मेरा शरीर शिथिल पड़ता जा रहा था।

आदित्य अपना वीर्य का स्टॉक खाली करके मस्ती में डूबा हुआ था।

कुछ ही देर में हम दोनों मीठी नींद की आगोश में खो गए।

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