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Massage Girl in Lower Dibang Valley: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Lower Dibang Valley who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Lower Dibang Valley that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Lower Dibang Valley massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Lower Dibang Valley who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Lower Dibang Valley massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Lower Dibang Valley massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Lower Dibang Valley who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Lower Dibang Valley employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Lower Dibang Valley helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Lower Dibang Valley

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Lower Dibang Valley at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

यह मेरे पड़ोस में Antarvasna रहनी वाली विश्रांती-रेशमा की कहानी जिनको मैंने गणित सिखाने के बहाने कैसे चोदा।

एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था। उस दिन विश्रांती और रेशमा दोनों मेरे घर चली आई। मैं उनके लिए चाय बनाने के लिए रसोई में गया। वे दोनों गप्पे हाँक रही थीं… मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।

विश्रांती- रेशमा, मैं कुछ पूछूँ तुझे?

रेशमा- हाँ विश्रांती, पूछ ना!

विश्रांती- आजकल सुहास और तू दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?

रेशमा- अरे नहीं विश्रांती! वो मुझे गणित का प्रोब्लम है इसलिए मैं अकसर उसके घर जाती हूँ, इसमें बुरा क्या है?

विश्रांती- रेशमा, तुम रोज दरवाजा क्यूँ बंद करके पढ़ते हो?

रेशमा- अरे विश्रांती वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे!

विश्रांती- रेशमा, तू तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।

रेशमा- तू ऐसा क्यूँ बोले रही है?

विश्रांती- मैंने एक दिन दरवाज़े पर कान लगा कर आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी! मुझे सब पता है वहाँ कैसी गणित की पढ़ाई होती है!

रेशमा मुस्कुराते हुए- अच्छा तो तुझे सब पता है! तो ऐसा बोलो ना! देखो किसी से बोलना मत! तो तू चाहती है कि सुहास तुझे भी ऐसे ही गणित सिखाए?

विश्रांती- चाहने से क्या होगा रेशमा!

रेशमा- अच्छा यह बता! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना?

विश्रांती- हाँ रेशमा, दूध तो निकलता है और अब बच्ची भी नहीं पीती… सो भरा हुआ है…

रेशमा- तब तो सुहास जरूर तुम्हें गणित सिखाएगा, रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी!

तभी मैं नाश्ता लेकर वहाँ आ गया। तुरंत दोनों ने विषय बदल दिया।

उसी दिन शाम को फ़िर विश्रांती मेरे घर चली आई।

विश्रांती- सुहास, रेशमा जैसे मुझे भी गणित सिखाओ ना!

मैं- विश्रांती तुझे भी गणित सीखना है…

विश्रांती- सुहास, तुझसे कुछ सवाल पूछने हैं…

मै- हाँ विश्रांती, रेशमा ने बोला था… मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रहा था, हा पूछ ना!

मैं- विश्रांती तुम सलवार-कमीज में बहुत खूबसूरत लग रही हो…

विश्रांती- तुझे अच्छा लगा यह ड्रेस?

मैं- हाँ विश्रांती, तू ऐसे ही ड्रेस पहना कर… बहुत अच्छी लगती है… पूछ क्या पूछना है?

विश्रांती- तू तो बस रेशमा से ही बातें करता है…

मैं- नहीं विश्रांती ऐसी कोई बात नहीं है… तू भी बहुत अच्छी है…

बात करते करते विश्रांती ने अपना दुपट्टा सरका दिया… विश्रांती के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे… मैं भी अपने आप को रोक न सका… विश्रांती की चूचियों को देखने लगा…

विश्रांती- सुहास, मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो… क्या देख रहे हो नीचे?

मैं- विश्रांती कुछ नहीं, सच्ची में तू भी बहुत अच्छी है…

विश्रांती- तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता… क्या देख रहा है नीचे?

मैं- कुछ नहीं विश्रांती…

विश्रांती- कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा?… बदमाश!

मैं- विश्रांती मैं साफ बोलूँ तो गुस्सा नहीं होगी ना?

विश्रांती- नहीं सुहास, तू मेरा दोस्त है उसमें क्या गुस्सा करना!

मैं- विश्रांती तेरे वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहाँ से…

विश्रांती- ये तो मेरी बच्ची को दूध पिलाने के लिए हैं….

मैं- विश्रांती, तेरी बच्ची तो अब बड़ी हो गई है! उसे अभी भी दूध पिलाती हो?

विश्रांती- नहीं! अब ओ नहीं पीती दूध!

मैं- विश्रांती, तेरी चूची में दूध है क्या?

विश्रांती- हाँ अभी भी दूध है… इसलिए तो इतने बड़े हैं!

मैं- विश्रांती मुझे प्यास लगी है…

विश्रांती- ठहर, मैं पानी लेकर आती हूँ…

मैं- विश्रांती, पानी नहीं दूध पीना है… चूची का दूध…

विश्रांती- बदमाश! कोई ऐसे दूध पीता है भला?

मैं- क्यूँ नहीं? पीने दो न… तेरे दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊँगा…

विश्रांती- अच्छा ठीक है पी ले… काफी दिन से भरी हुई हैं… खाली करने वाला कोई है नहीं…

फिर विश्रांती ने अपना कमीज़ उतार दिया… अब विश्रांती ब्रा में आ गई…

विश्रांती- आ जा सुहास! मेरी गोद में आ… तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊँगी…

मैंने विश्रांती की गोद में सिर रख लिया… विश्रांती ने अपनी ब्रा उतारी… और अपनी चूची को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया… लो सुहास पी लो… अच्छे से पीना…

उसके बाद मैं दूध का प्यासा विश्रांती का दूध मेमने की तरह पीने लगा… कभी बाईं चूची से तो कभी दाईं से…

साथ में चूची सहला भी रहा था।

विश्रांती- तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो!

मैं- विश्रांती, तूने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा तेरा आभारी रहूँगा… तू जो बोलोगी वो सब करूँगा…

विश्रांती- जो बोलूंगी वो करेगा?

मैं- हाँ विश्रांती, तू एक बार बोल के तो देख…

विश्रांती- अच्छा ठीक है… सुन, मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है… ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?

मैं- नीचे कहाँ विश्रांती?

विश्रांती- तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?

मैं- बोलो ना विश्रांती! तेरी मुँह से सुनना चाहता हूँ।

विश्रांती- अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है… मिटा दे ना…

मैं- कैसे मिटा दूं? उंगली से या चाट के? या फिर लंड ही डाल दूँ?

विश्रांती- मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है…

मैं- विश्रांती, मैं तेरी चूत का ख्याल रखूंगा…

विश्रांती- अपनी रेशमा से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना… . रेशमा तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती है…

मैं- तुम लोग ये सब बातें भी करती हो?

विश्रांती- तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?

मैं- विश्रांती, अभी तूने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?

विश्रांती- अच्छा तो यह बात है? तो जितना जलवा देख चुके हो उसमें कौन ज्यादा अच्छा लगा?

मैं- विश्रांती, इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है… रेशमा की चूची में अमृत तो है ही नहीं! दूध तो तू ही पिला सकती है… तब इसमें तू ही न हुई रानी… विश्रांती, अब तू अपने कुछ और जलवे भी दिखा ना!

विश्रांती- हाँ सुहास तेरी विश्रांती, आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा…

और फिर विश्रांती ने अपने कपड़े खोलने शुरु किये… विश्रांती जब पेंटी और ब्रा में आ गई तो मैं उसकी मदद करने लगा…

मैं- विश्रांती, लाओ अब मैं खोल दूं!

विश्रांती- हाँ सुहास! आ अपनी विश्रांती को नंगी कर दे…

विश्रांती मेरे पास आ गई… मैं विश्रांती की ब्रा को खोल के प्यार से सूंघने लगा… . विश्रांती की मादक मुस्कराहट ने और भी मजा भर दिया… फिर विश्रांती की पेंटी को एक ही झटके में खोल दिया… .पेंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।

फिर विश्रांती अपने हाथ मेरी पैंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगी… . मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी… . मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ. विश्रांती ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया… .अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे… विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है…

विश्रांती- सुहास, तेरा लंड तो काफी बड़ा है रे…

मैं- विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा… .

विश्रांती- क्या करूँ सुहास, ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है… .

मैं- विश्रांती तुझे पता है रेशमा तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती है…

विश्रांती- वाह रे बदमाश! अपनी विश्रांती को लंड मुँह में लेने बोल रहा है… .ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…

मैं- विश्रांती तो ले लो ना इसे…

फिर विश्रांती प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी… . इतना तो पता चल ही गया था कि विश्रांती को लंड चूसने में बहुत मजा आता है… रेशमा ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था… फिर जब विश्रांती मेरे लंड से खेल रही थी… मैं विश्रांती की चूची को मज़े देने लगा… . इतनी मुलायम चूचियाँ को सहलाना, नीचे लंड का विश्रांती से चुसवाना… सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है…

मैं- विश्रांती, लंड चुसवाने में इतना मजा आज तक नहीं आया… विश्रांती मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, विश्रांती उल्टा-पुल्टा करें… .

विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?

मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा… .अच्छा चल, मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब तू मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से तेरी चूत का रसपान करूँगा!

विश्रांती- अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मजा आएगा…

फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे… विश्रांती की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… विश्रांती की चूत काफी गीली हो गई थी… . इसलिए चाटने में बहुत मजा आ रहा था… मैं विश्रांती को बहुत मन से चाट रहा था… . विश्रांती भी काफी उत्तेजित हो गई थी… विश्रांती ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था।… ऐसा मजा विश्रांती ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था…

मैं- विश्रांती तेरा रस कितना स्वादिष्ट है… अब मेरा रस भी निकाल दे… अब मेरी लंड तेरी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता…

विश्रांती- आ न सुहास… अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ…

फिर विश्रांती बिस्तर पे लेट गई… अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी… चूत तो जैसे कि लंड के लिए बनी हो… मैंने भी अपना लंड हाथ में लेकर उसकी चूत पर लगा दिया…

विश्रांती- दे धक्का!… चोद अपनी विश्रांती को… चोद…

मैं- ले विश्रांती… ये गया मेरा लंड तेरी चूत में… चुद अपने सुहास से मेरी प्यारी विश्रांती…

फिर विश्रांती गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी… मैं भी विश्रांती को जी जान लगा के चोदने लगा… फिर विश्रांती ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया… उस पोजिशन में बहुत मजा आया… फिर विश्रांती मेरे ऊपर सवार हो गई… इसमें तो मेरा लंड सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था… करीब मिनट के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया… विश्रांती ने बड़े प्यार से फिर मेरे लंड को साफ़ किया… वो मुझे बेतहाशा किस कर रही थी… विश्रांती बहुत खुश थी…

विश्रांती- अपनी विश्रांती को चोदने में कैसा लगा… रेशमा को चोदने में ज्यादा मजा आया था क्या?

मैं- नहीं विश्रांती तू कुछ माल है… तुझे चोदने में बहुत मजा आया… मैं अब तुझे ही चोदूंगा…

विश्रांती- अरे नहीं सुहास! दोनों को चोदना… रेशमा भी बहुत अच्छी है उसने ही तो मुझे तेरा लंड दिलाया… तू उसे कभी नाराज़ न करना…

फिर मैं रेशमा और विश्रांती के साथ मस्ती करने लगा… दोनों प्यार से मुझसे चुदती हैं…

आपको यह हिंदी सेक्सी स्टोरी अच्छी लगी? मेल करना… Antarvasna

Oral Sex

शाम के सात बज रहे थे, मौसी Oral Sex ने मुझे बगल में बुला कर बिठा लिया, मैं मौसी के पास जाकर बैठ गई। रंडियों का नाच चालू था, कोठे पर भीड़ बढ़ गई थी।

मौसी बोली- 30 लड़कियाँ चुदने जा चुकी हैं। 25-30 और बच रही हैं, आठ बजे तक सब बिक जाएँगी। उसके बाद तो दूसरा राउंड शुरू हो जाएगा, नाच-वालियाँ 10 बजे तक नाचती हैं, उसके बाद इनको चुदवाती हूँ।’

तभी एक ग्राहक आकार सोना नाम की रंडी का दाम पूछने लगा। सोना, मौसी के पीछे ही बैठी थी। मौसी बोली- 5000 हैं, चूत और गाँड दोनों चुदवाएगी।’

‘3000 दूँगा, पुराना ग्राहक हूँ।’

‘हरामी तुझे बहुत अच्छी तरह जानती हूँ, 8 इंच लंबा लंड है तेरा, गाँड फाड़ कर रख देता है। पिछली बार रेशमा को चोदा था साली एक घंटे तक उठ नहीं पाई थी, चल 4000 दे और ले जा इसे। सोना, गाण्ड में क्रीम लगा लियो… वरना रोएगी, यह बहुत बड़ा चोदू है। और तू जरा आदमी की तरह चोदियो, वरना घुसने नही दूँगी कोठे पर… हरामी। सोना के अभी मुझे दो राउंड और कराने हैं’

मौसी मुस्कुराई, ग्राहक भी मुस्कुराते हुई सोना को लेकर चला गया। सस्ती रंडियों ( 100 से 300 वालियों) की बिक्री राजू मुस्टंडा देख रहा था। मौसी ने उसे बुला कर पूछा- ‘कितने जमा हो गए?’

‘सस्ती वालियों में से 20 धंधे पे बैठी हैं मौसी। 30 मर्दों को निपटा चुकी हैं, 15 से चुदवा रहीं हैं। 5 उधर बैठी हुई हैं, 2 बीमार हैं। कुल 14,000 रुपये जमा हुए हैं’- राजू ने जानकारी दी।

‘टॉप पर कौन चल रही है?’

‘अंगूरी टॉप पर है, 2 बार चुदवा चुकी, 1 को निपटाने में लगी हुई है। 1200 रुपये उसी के नाम के हैं।’

‘ठीक है, आज 30000 से कम की रक़म जमा नहीं होनी चाहिए। जा धंधा देख।’

पप्पू 500 से 1000 वालियों की दलाली कर रहा था। मौसी ने उस से पूछा- धंधा कैसा चल रहा है?’

‘मौसी, 24 लौंडियाँ धंधे पे हैं, 20 बार बिक चुकी हैं, 19 अन्दर लगवा रही हैं, 5 चुदने का इंतज़ार कर रही हैं। कुल 16000 रूपये जमा हुए हैं।’- पप्पू ने उत्तर दिया।

मौसी ने नज़र लड़कियों की तरफ़ घुमा कर देखी और कहा- यह रेखा और सीमा आजकल कम बिक रही हैं। कल भी सालियों ने एक-एक बार ही चुदवाया था। कम से कम साली 3-4 बार तो चुदें। ये रंडीबाज़ी ठीक से नहीं कर रही हैं। कल से सस्ती वालियों में बैठाती हूँ, जब रिक्शे वाले चोदेंगे तब मज़ा आएगा इन्हें। तू आज 50000 रुपये कलेक्ट कर दियो, कुत्तियों को चाहे 8-8 बार चुदवाना पड़े।’

मौसी के पास बैठी 12 रंडियों में से 8 चुदने जा चुकी थीं। मुझे मिला कर 4 रंडियाँ बची थीं तभी वहाँ दो लड़के मौसी की तरफ़ आए और मुझे देख कर बोले- ‘मौसी नया माल लग रहा है, कितने में दोगी?’

‘तू बता कितने में चोदेगा? पुराना ग्राहक है’- मौसी बोली

‘दो-दो हज़ार ले लेना, इसके और मोनी के!’

‘चोदू चोद तो बहुत चुका, लेकिन माल की समझ नहीं है तुझे, इसके संतरे देख ज़रा’- यह कहकर मौसी ने मेरे ब्लाउज़ का एकमात्र हुक खोल दिया।

मेरी गोल-गोल चूचियाँ फरफरा कर निकल पड़ीं। मैं एक दम से शर्मा गई, मैंने दोनों चूचियाँ अपने हाथों से छिपा लीं। मौसी डपट कर बोली- ‘हरामिन, ज्यादा नखरे किए तो यहीं सबके सामने चुदवा दूँगी मुस्टंडों से, चल हाथ हटा और मौसी ने मेरे हाथ को हटा दिया।’

अब मेरी चूचियों के दर्शन वो लड़के कर रहे थे, लड़कों के मुँह से निकल गया- ‘मौसी वाह, इसके संतरे तो बड़े लाजवाब हैं।’

मेरी चूत में खुजली बढ़ गई थी, मेरा मन अब चुदने का ज़ोरों से करने लगा था। मैं मन ही मन सोच रही थी की मौसी मुझे चुदने भेज दे इन लड़कों के साथ।

लड़के बोले- मौसी हम तो 5000 रुपये लाये हैं, इसे दे दो दो घंटे को 5000 में। हम-दोनों एक से ही काम चला लेंगे।

मौसी बोली- 10000 रुपये से कम में नहीं उठेगी। नयी रंडी है, तू कल चोद लियो इसे। तेरे बाप ने तो 20-20,000 में रंडियों को चोदा है, ज़रा चूचियाँ मसल कर तो देख इसकी! ख़ुद ही कहेगा भाव अधिक नहीं है।’

मौसी ने मुझसे कहा- जरा खड़ी हो कर चूची मसलवाने का मज़ा ले, पुराने ग्राहक हैं, यहाँ की हर बढ़िया रंडी चोद चुके हैं।

मैं खड़ी हो गई, मेरी चूत पानी-पानी हो रही थी। एक लड़के ने मेरी दोनों चूचियों को हाथ में पकड़ कर कस-कस कर मसल दिया। मेरे मुँह से आह… ऊह… की आवाज़ निकल गई, इसके बाद वहाँ खड़े मुस्टंडे ने उसे हटा दिया। अब दूसरे वाले ने एक हाथ से मेरी एक चूची मसली और दूसरे से मेरी दूसरी चूची की घुंडी कस कर घुमा दी, मेरी चूत पानी-पानी हो गई।

मौसी ने मुझे हाथ पकड़ कर नीचे बैठा लिया। लौण्डों के लंड टनक चुके थे, मौसी ने बगल में बैठी दोनों लड़कियाँ उनकी तरफ़ बढ़ा दीं और बोली- कल तेरे लिए इसे बुक करती हूँ, अभी तू इन दोनों की चूत फाड़’- और मौसी ने वे दो रंडियाँ उन्हें सौंप दीं।

अब मैं और मोनी, दो ही लड़कियाँ मौसी के पास रह गईं थीं। मौसी मेरी तरफ़ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली- मज़ा आया? देख तेरी चूचियाँ दिखा कर दोनों 2-2 हज़ार में उठा दीं, वरना साली आज 1000 में भी नही उठ रहीं थीं।

मैंने कहा- मौसी मस्ती तो बहुत आई।

डर नही मज़े कर, अभी तो तूने लौड़ा पकड़ कर भी नही देखा। फुल्ल मस्ती कर। चूत और गाँड तो तेरी तभी चुदेगी, जब तू ख़ुद कहेगी कि मौसी मुझे चुदवाओ।’ मौसी ने मेरे चूतङों पे हाथ फिरा कर कहा

मौसी बोली- 6 बजे से धंधा शुरू करवाती हूँ। पहला राउंड 6-9 चलता है, दूसरा 9-11 चलता है, तीसरा 11-2 चलता है। सस्ती वालियों को छोड़, बाकी सब 1-1, 2-2 घंटे के लिये उठतीं हैं। कुछ रंडियाँ एक राउंड में 2-3 बार भी चुद लेती हैं, वरना एक-एक बार तो सबको चुदना ही पड़ता है। अगर कोई रात भर में तीन बार नहीं चुदती हैं तो उसको दिन में पेलवाती हूँ। दूसरे राउंड में 7-8 रंडियों को नंगा करा के मुस्टंडों और ग्राहकों की गोद में बिठाती हूँ। मुस्टंडे और ग्राहक उनकी चूचियों और चूत की मसलाई करते हैं और रंडियाँ उनके लौड़े निकाल कर मुट्ठ मारतीं हैं, जिन्हें दूसरे ग्राहक बड़े मस्त होकर देखते हैं। आज मोनी और तुझे ग्राहकों की गोद में उनके लौ़ड़ों पर बिठाऊँगी। जब वो तेरी चूचियाँ और चूत मसलेंगे, तो तुझे बड़ा मज़ा आएगा। आधे घंटे में यह मसलाई वाला शो कराती हूँ, ताकि ग्राहकों के लंड टनटनाएँ और सारी रंडियाँ जल्दी-जल्दी बिकें।’

मौसी की बात सुनकर मेरी चूत बुरी तरह सनसना गई और मेरी चूत में से पानी निकल गया। मौसी बोली- अब तू एक काम कर, जा ज़रा कोठा घूम कर आ…’ मोनी की तरफ़ इशारा करते हुई मौसी ने कहा- मोनी, अब तो कोठे पे चुदाई का माहौल होगा। ज़रा हमारी नई रंडी रानी को कोठे की चुदाई तो दिखा के ला।’ मेरी तरफ़ देखते हुआ मौसी ने कहा- जा ज़रा चुदाई देख कर आ, अभी 7:30 बज रहे हैं, 8:30 बजे तक आ जाना। तुम दोनों की चूत और चूची का मुज़रा भी तो करना है मुझे।’ और इतना कह कर मौसी मुस्कुरा दी

मोनी ने मुझे साथ लिया और बोली- ‘चल घुमा कर लाती हूँ।’

सबसे पहले हम एक बड़े से हॉल में पहुँचे- वहाँ सस्ती वाली रंडियों की चुदाई हो रही थी

बग़ल में बहुत से गद्दे पड़े थे, जिन पर रंडियाँ लेटी हुईं थीं। सब मोटी और भद्दी सी थीं और कुछ रिक्शे वाले जैसे लोग उनके ऊपर चढ़े हुए थे। मोनी बोली- ‘सब की चूत भोंसड़ा हो रहीं हैं। 20-20 साल से चुदवा रहीं हैं, मौसी तो इन्हें भोंसड़ी वाली कह कर बुलाती हैं। सालियाँ एक दिन में 10-10 को निपटा देतीं हैं। आ पास से दिखाती हूँ।’

मैंने पास जाकर दखा तो एक भैंस जैसी मोटी औरत पर एक 50 साल का कमज़ोर सा बुड्ढा चढ़ा हुआ था, औरत की चूचियाँ पेट से चिपक रहीं थीं, बुड्ढा धक्के लगा रहा था। मोनी ने कहा- ‘जरा इस रसिया का लौड़ा तो देख, झड़ा पड़ा है, फिर भी यह साला चूत पर चढ़ा पड़ा है।’

हम दोनों हँसते हुए आगे बढ़ गए। सब जगह एक सा ही हाल था। मोनी बोली- ‘इनमें से कई तो ऐसी हैं, अगर 10 मिनट से ज्यादा अगर कोई चोदे, तो यह एक झपकी नींद की भी मार लेतीं हैं।’ हम दोनों खिलखिला कर हँस पड़े।

अब मोनी मुझे ऊपर वाली मंजिल पर ले गई। वहाँ कई कोठरी जैसे कमरे बने हुए थे।

इस मंजिल पर 500 से 1000 वाली चुदती थीं।
मोनी ने कहा- जितने कमरे बंद हैं, वहाँ लड़कियाँ चुद रहीं हैं, जो खुले हैं वो खाली हैं। एक कमरे में दो या दो से अधिक भी चुद सकती हैं।

मोनी बोली- हर कमरे के दरवाज़े पर एक छेद बना हुआ है, अंदर का नज़ारा देखने के लिए। आ… ज़रा झाँक कर लड़कियों की चुदाई देखते हैं।

मोनी एक-एक छेद में झाँक-झाँक कर देखती जा रही थी। एक जगह उसने कहा- यहाँ झाँक कर देख, मज़ा आएगा।

मैंने जब झाँक कर देखा तो मैं देख कर दंग रह गई। अंदर एक लड़की मुँह में लौड़ा लेकर बड़ी मस्ती से लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और लड़का उसके चूतड़ दबा रहा था। कुछ देर बाद लड़के ने लौड़ा मुँह से निकलवा दिया और बोला रानी ज़रा घोड़ी बनो, तुम्हारी चूत पीछे से चोदता हूँ। उसने उसे घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में अपना लंड एक झटके में घुसा दिया। लड़की के मुँह से ‘आह मर गई…’ की तेज़ आवाज़ निकली। लड़के ने कमर से पकड़ कर उसकी चूत में तेज़-तेज़ धक्के मारने जारी रखे। लड़की ज़ोरों से चिल्ला रही थी। कुछ देर बाद लड़के ने धक्के मारना धीमा कर दिया और उस पर झुक कर उसकी चूचियाँ बेदर्दी से मसलने लगा। लेकिन रंडी चिल्लाये जा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसे बहुत दर्द हो रहा हो।

मोनी बोली- यह 1000 वाली रंडियाँ ऐक्टिंग करने में बहुत तेज़ होतीं हैं। साले का 5 इंच का ही लौड़ा है और यह कुतिया ऐसे चिल्ला रही है जैसे चूत में से बच्चा निकल रहा हो।

फिर एक और कमरे में मैंने झाँका। अंदर दो लड़के एक लड़की पर चढ़े हुए थे। लड़की सीधी लेटी हुई थी, एक लड़की की जाँघें पकड़ कर फैलाए हुए था और उसकी चूत में सटासट लंड आगे-पीछे कर उसे चोद रहा था, तो दूसरा बगल से रंडी का मुँह तिरछा कर अपना लौड़ा चुसवा रहा था। क़रीब 2 मिनट तक लगातार लड़की की चूत चुदती रही। फिर चूत में से लड़के ने लंड खींच लिया उसका लंड झड़ने वाला था। लौण्डे ने कंडोम उतार कर दो झटके लंड पर मारे और ढेर सारा वीर्य लड़की की चूचियों पर गिरा दिया। फिर उसने अपने हाथों से लड़की की चूचियाँ कस-कस कर मसली और अपने गाढ़े लंड-रस से लड़की की मालिश कर दी। दूसरे वाले ने रंडी के मुँह से लंड निकाल लिया था। रंडी बोली तू भी चोद राजा कब तक लंड खड़ा रखेगा। दूसरे वाले का लंड काफ़ी अच्छा था, मेरा मन भी उसके लंड से चुदवाने का करने लग रहा था। दूसरे वाले ने रंडी को घोड़ी बना दिया और उसकी गाण्ड पर ढेर सारा थूक डाल दिया था। रंडी घबरा गई बोली- ‘राजा गाँड रहने दो, चूत मार लो, बहुत दर्द होगा। आपका लौड़ा बहुत बड़ा है।’ लड़का बोला- ‘गाँड थोड़े ही न मार रहा हूँ, थोड़ा चेक कर रहा हूँ।’ कह कर उसने अपनी ऊँगली उसकी गाँड में डाल दी और कस-कस उसे घुमाने लगा।

मुझे यह सब देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था। थोड़ी देर में लड़के ने ऊँगली निकाल कर एक झटके में उसकी गाँड में अपना लंड घुसा दिया… लड़की एक दम से चिल्ला पड़ी… ऊही… मर गई…, मर गई…। लड़के ने सटासट उसकी गाँड मारनी जारी रखी। रंडी के चिल्लाने की आवाज़ बाहर तक आ रही थी। मोनी ने पीछे से मेरा पेटीकोट उठा कर मेरी गाँड में अपनी पूरी ऊँगली घुसा दी। मेरे मुँह से एक दम से ‘उई… मर गई’ की आवाज़ निकल गई।

मोनी बोली- दूसरे की गाँड चुदाई देखने में बड़े मज़े आ रहे हैं। रात को जब तेरी मारी जाएगी, तब देखती हूँ।

मैंने शरमाते हुए एक मुस्कान भरी… मैंने कहा- मोनी, चुदने का अब बहुत मन कर रहा है।

मोनी बोली- चुदेगी, तू भी चुदेगी… और आज रात ही चुदेगी… और मोटे लंड से चुदेगी। मौसी तुझे ऐसे ही नही छोड़ेगी।

मोनी ने आगे बताया- ये सब रंडियाँ ठेके पर 20-20 दिनों के लिए आतीं हैं। 20 दिनों के बाद यह दूसरे कोठे पर चली जाएँगी। इनकी जगह नई आ जाएँगी, ताकि कोठों की रौनक बनी रहे। केवल 5-6 ही यहाँ की परमानेंट रंडियाँ हैं। चल, अब सबसे ऊपर की मंजिल पर चलते हैं, जहाँ मँहगी वाली लड़कियाँ चुदती हैं।

ऊपर वाली मंजिल पर भी कमरे बने हुऐ थे। मोनी ने बताया कि यहाँ मँहगी वाली रंडियाँ चुदतीं हैं। यहाँ कुछ वातानुकूलित कमरे भी हैं, हर कमरे में वीडियो और टीवी है। ग्राहक xxx देखते हुए चोदते हैं। मैं अभी तक हर बार यहीं चुदी हूँ। तू भी इन्ही में से किसी एक कमरे में चुदेगी। अंदर एक कमरे में मैंने झाँक कर देखा तो एक आदमी रंडी को गोद में बिठाए हुए था और उसका लौड़ा उसकी चूत में घुसा हुआ था। दारू का गिलास लड़की के हाथ में था जिससे वह हल्की-हल्की चुस्कियाँ ले रहा था और लड़की के चूची की घुंडियों को नोच रहा था। शायद कोई xxx देख रहा था। बाकी कमरों के छेदों से कुछ लोगो की गाँड के सिवा कुछ नही दिखा।

यह सब देख मैं काफ़ी गरम हो गई थी। राजू और कालू वहाँ चौकीदारी कर रहे थे। मुझे देखकर राजू बोला- जब से तु्म्हें देखा है, मेरा लंड तो नीचे बैठ ही नहीं रहा है रानी। चूत नही तो एक बार चूचियों का दूध तो पिला दो। इस कालू ने तो फिर भी एक बार तुम्हारी दबा रक्खी हैं।’

राजू की बात सुन कर मैं और मोनी हल्के से मुस्कुरा दिए। मोनी बोली- क्यों मैडम एक बार इन्हें दूध पिला दें?

मैंने कहा- चल, थोड़ा सा दूध इन्हें पिला देते हैं।

हमलोग एक खाली कमरे में आ गए। मेरी चूत चुदने को चुनमुना रही थी। मैंने अपनी ब्लाउज़ का हुक खोल दिया। अब मेरे दोनों संतरे बाहर थे। मैं बोली- लो राजू, दूध पियो, तुम भी क्या याद रखोगे।

राजू ने कस-कस कर मेरी दोनों चूचियाँ एक-दूसरे से चिपका दीं और मेरी घुँडियाँ ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। मुझे गज़ब की मस्ती छाने लगी थी। राजू कस-कस कर मेरे दूध दबा रहा था और मेरी घुँडियाँ जम कर चूसे जा रहा था। मेरी चूत से बुरी तरह से पानी बहने लगा था।

मैंने कहा- राजू डार्लिंग, मेरी चूत फाड़ो, मेरे होंठ चूस डालो… मुझे आज तुम चोद कर ही छोडना।

राजू ने मेरी चूचियाँ छोड़ कर, मुझे कस कर अपने से भींच लिया और मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी और मेरे होंठों को चूसने लगा। राजू का मोटा लंड मेरी चूत से चिपक रहा था, उसने मुझे जोरों से भींच रखा था। मेरे होंठ ज़बर्दस्त तरीके से वो चूस रहा था। तभी मौसी उधर आ गईं और मेरे चूतड़ों पर कस कर हाथ मारती हुई बोली- अरे मेरे रंडी रानी तुम तो यहाँ रंडीबाज़ी कर रही हो!’

मैं और राजू अब हट गए थे। मोनी मुस्कुरा रही थी। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने कहा- मौसी… अब मुझे चुदवाओ, मैं चुदना चाहती हूँ। मेरी चूत चुदने के लिए फड़क रही है।’

राजू मुस्कुरा रहा था, मौसी ने कहा- अभी थोड़ी रंडीबाज़ी तो सीख। लंड से तो तू खेली भी नही है> अभी तूने ढंग से लंड देखा भी नहीं है। पहले तू लंड से तो थोड़ा खेलना सीख, चुदवा तो मैं तुझे एक मिनट में दूँगी।’ राजू मुस्कुराए जा रहा था।

मौसी बोली- ‘राजू, पहले तू इसे अपना लंड दिखा।’ राजू ने एक झटके से अपना पाजामा उतार दिया। राजू का 8 इंच लंबा और मोटा लंड मेरे सामने था। मैं अपने होठों पर जीभ फिरने लगी थी। मैं इतना मोटा-नंगा लंड इतने क़रीब से आज पहली बार देख रही थी। मौसी पलंग पर बैठ गईं और मुझे भी बगल में बिठा लिया।

राजू को मौसी ने बुलाया और कहा- ‘जरा इसकी चुचियों पर लंड फिरा।’

मैं पलंग पर बैठी थी और राजू अब मेरी चूचियों पर अपना लंड हाथ से पकड़ कर फिराने लगा। उसने मेरी घुंडियों पर लंड का सुपाड़ा दबा-दबा कर फिराया। मैं पूरी मस्ती में आ गई थी।

मौसी ने राजू का लंड अपने हाथ से पकड़ कर मेरे हाथ में पकड़ा दिया और बोली- ले जरा इसे मसल और जरा मुट्ठ मार।’

जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में पकड़ा, मैं सनसना गई। लौड़ा बहुत गरम था, मेरी बुर पनिया रही थी। मैं कस-कस कर लौड़ा मसलने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। राजू मेरे बालों को सहला रहा था।

थोड़ी देर बाद राजू ने मुझे खड़ा कर दिया। मुझे लग रहा था शायद राजू मुझे अब चोद देगा, लेकिन राजू ने एक बार मुझे फिर भींच लिया। अब वह और कस-कस कर मेरे होंठों के बीच से अपनी जीभ डाल कर चूसे जा रहा था।

तभी राजू ने मुझे पीछे की तरफ़ मोड़ दिया, अब मेरा मुँह मौसी की तरफ़ था। राजू ने जोर से मेरी घुँडी नोच ली और मेरी चूचियाँ दबाईं। पीछे से राजू का मोटा लंड कस कर मेरी गाँड दबा रहा था। मौसी आगे बढीं और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। राजू ने मुझे ढीला छोड़ दिया। मेरी पेटीकोट अब ज़मीन पर थी।

नंगी गाँड पर राजू का नंगा लंड लगते ही मैं उचक पड़ी। अब मैं चुदवाने की उत्तेजना की चरम सीमा का अनुभव करने लगी थी। दो मिनट बाद मौसी के इशारे पर राजू हट गया। मेरी बुर का पानी जाँघों तक आ रहा था। मैं चिल्ला सी पड़ी- मौसी मुझे चुदवाओ ना… मेरी चूत में आग लगी पड़ी है, राजू से कहो मेरी चूत चोदे और मेरी प्यास बुझाए।’

मौसी बोली- गाँड मरवाएगी… तो तुझे चुदवाऊँ?

में पगला सी रही थी। मैंने कहा- ‘गाँड, चूत एक से नहीं 6-6 से मरवा लूँगी… प्लीज़ मौसी मुझे चुदवाओ, जल्दी चुदवाओ। राजू से बोलो कि वो अपना लंड जल्दी से मेरी चूत में डाल दे।’

मौसी मुस्कुराई- ‘ले ज़रा इसे पहले कंडोम पहना अपने हाथ से।’

मैंने कंडोम लेकर राजू के सुपाड़े पर लगाया। एक बड़ा रोमांचकारी अनुभव था।

मौसी बोली- ‘नीचे तो सरका दे।’

नीचे सरकाने के लिए मुझे एक हाथ से नीचे उसका लंड पकड़ना पड़ा और दूसरे हाथ से मैंने उसे नीचे सरका दिया। मेरी चूत की जलन बढ़ती जा रही थी, मुझे अब लग रहा था कि मेरी चुदाई शुरू होने वाली है।

मौसी राजू से बोली- ‘जरा इसकी चूत पर दो तीन बार लंड फिरा दे, फिर जरा नीचे चल के इसकी चूत के दर्शन ग्राहकों को कराते हैं।’

राजू ने मुझे पलंग पर लिटा दिया और कस-कस कर मेरी चूत पर अपना लंड फिरा दिया। एक बार उसने आधा इंच लौड़ा मेरी चूत में घुसाया लेकिन मौसी ने उसे डपट कर लौड़ा हटवा दिया।

मौसी ने राजू को हटा दिया और बोली- ‘चलो अब नीचे चलते हैं, वहाँ इसे ग्राहकों की गोदी में उनके लौड़े पर बिठाती हूँ।’

मैं चुदने को पागल हुई जा रही थी… मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने कहा- ‘मौसी मुझे चुदवाओ, मेरी चूत में जलन हो रही है, मैं पगला सी रही थी।’

मौसी ने मेरी तरफ़ देखा और बोली- ‘चूत में तो इसके वाक़ई आग लगी हुई है, राजू तू एक काम कर, इसकी चूत को चूस। 2-3 मिनट में यह पानी छोड़ देगी फिर इसे थोड़ी सी शान्ति मिलेगी।’

राजू ने अब मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया और कस-कस कर मेरी चूत चूसने लगा। मौसी के इशारे पर कालू ने मेरा सिर अपनी गोद में रख लिया और मेरी चूचियाँ ज़ोरों से दबाने लगा। राजू कुत्ते की तरह मेरी चूत चाट रहा था। उसने बुरी तरह से मेरी चूत के मुहाने को चाटना जारी रखा।

कुछ देर बाद उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी और उसकी 1 इंच लम्बी जीभ अब मेरी चूत में फिर रही थी। मेरी मस्ती से कमरा उह… आह… उह… आह… ऊह… आह… से गूँज उठा। थोड़ी देर में मेरी चूत से बड़ी तेजी से चूत-रस निकला जिसे राजू लपालप पीने लगा।

मुझे चूत में कुछ शान्ति सी लगी। मौसी ने इसके बाद राजू और कालू को नीचे भेज दिया और बोली- ‘चल इधर बहुत मस्ती ले ली अब नीचे मस्ती करियो। ये मेरा वादा है कि 12 बजे तक तेरी चूत के अंदर मोटा लंड मैं घुसवा दूँगी और आज रात तेरी गाँड भी ठुकवा दूँगी।’

मैं उठ गई थी, मोनी ने मुझे पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना दिया। ९ बजने वाले थे, मौसी ने कहा- ‘आओ मेरी रंडियों, अब तुम नीचे चलो और थोड़ा धंधा शुरू करो। Oral Sex

दोस्तो, Sex Stories

मेरा नाम राहुल है Sex Stories और मेरी उम्र 24 साल की है।मैं मुम्बई में नौकरी करता हूँ और रहने वाला इन्दौर का हूँ।

मैंने अन्तर्वासना पर काफी कहानियाँ पढ़ीं, और मुझे भी लगा कि मुझे भी अपनी कहानी अन्तर्वासना को भेजनी चाहिए। अब मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ।

आज से तीन साल पहले मैं मुम्बई नौकरी करने आया था।
तब मुम्बई मेरे लिए अजनबी शहर था, इसलिए मुझे मेरा अकेलापन खलता था, मुझे भी एक अच्छी दोस्त की ज़रूरत थी ताकि मेरा समय भी कट सके और मेरी काम-इच्छा भी पूरी हो सके।

मैंने बहुत प्रयास किया पर किसी भी अमीर और ख़ूबसूरत लड़की को पटा नहीं सका क्योंकि यहाँ की लड़कियों को पैसे वाले लंड पसन्द आते हैं।

तो मैंने आख़िर में एक मध्यम-वर्गीय लड़की जो दूसरों के घरों में काम करने जाती थी, उसको अपनी नौकरी और पैसे की झलक दिखलाकर पटा लिया।
मेरी उससे फोन पर बातचीत भी शुरु हो गई।

एक दिन शाम को मैंने उसे अपने घर बुलाया यह कह कर कि मेरी तबीयत ख़राब है और मेरे सभी दोस्त घर गए हैं। तुम मेरे लिए खाना बना दो, वरना मुझे भूखा ही सोना पड़ेगा।

मेरी तबीयत ख़राब है, यह सोचकर वो मेरे लिए खाना बनाने मेरे फ्लैट में आ गई।

मैं कई दिनों से इसी ताक में था कि कब मेरे दोस्त लोग फ्लैट पर ना हों और मैं उस कामवाली को चोद दूँ।

उस दिन जब वो मेरे फ्लैट में आई तो मैं खुश हो गया।

मैंने उसे किचन दिखा दिया, जब वो खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तो मैंने धीरे से उसके पीछे जाकर थोड़ा सा चिपक कर खड़ा हो गया।

वह अचानक मुझे पीछे देखकर घबरा सी गई और बोली, “आपकी तबीयत ख़राब है, आप जाकर आराम कीजिए … मैं खाना बना दूँगी.”

मैं उसकी बात सुनकर उससे थोड़ा और चिपक गया।
इससे पहले कि वो कुछ कहती मैं उसकी दोनों चूचियों को एक बार ज़ोर से दबा दिया और फिर सहलाने लगा।

पहले तो उसे बहुत डर लगा, लेकिन बाद में धीरे-धीरे सहलाने से उसे मज़ा आने लगा और वो आँखें बन्द कर मज़े लेने लगी।

मैंने लोहा गरम होते देख उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पैन्टी में डाल दिया और उससे पहले कि वह कुछ विरोध करे, मैंने उसकी चूत में उँगली डाल दी, और ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करने लगा।

वो अब सब कुछ भूल कर मदहोश होने लगी।

मैं उसे किचन में ही नंगा करने लगा और वो कुछ नहीं बोली।

थोड़ी ही देर में वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसके शरीर पर एक भी तिनका कपड़ा का नहीं बचा था।

उसे इस तरह देखकर मेरा लण्ड तुरन्त खड़ा हो गया।

अब वो भी जोश में आकर मेरे कपड़े उतारने लगी और मैं भी उसकी मदद करते हुए जल्दी से पूरा नंगा हो गया।

मैंने अब अपना लंड उसके मुँह में डालना चाहा तो शर्म के मारे उसने मना कर दिया।

फिर मैंने दूसरा तरीका अपनाया।
मैंने अब उसे ज़मीन पर सुला कर उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और उसकी चूत को ज़ोरों से चाटने लगा।
अब उसने मस्ती और मदहोशी में चूर होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं।

मैंने इसी बात का फ़ायदा उठा कर उसकी चूत चाटते-चाटते ही 69 की मुद्रा में आ गया और मेरा लण्ड उसके होंठों पर रख दिया।
पर इस बार भी उसने मना कर दिया।
मैं नाराज़ होने का नाटक करने लगा और कपड़े पहनने लगा।

अब तक तो वह इतनी गरम हो चुकी थी कि मुझसे चुदवाने के लिए कुछ भी करना पड़े तो वो कर सकती थी।
उसने तुरन्त मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया और उसे आईसक्रीम की तरह चूसने लगी।

मेरी योजना सफल हो गई, मैं बहुत खुश हुआ। आज तो जैसे लकी ड्रा ही निकल आया था मेरे लिए!

अब हम दोनों 69 की स्थिति में थे। मैं उसकी चूत चाट रहा था, और वह मेरा लंड चूस रही थी।

क़रीब आधे घंटे तक मैंने उसके मुँह की चुदाई की, इसी दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी और मेरे लंड ने भी उसके मुँह में एक बार उल्टी कर दी थी।
वो उस सफेद गाढ़े द्रव को पूरा पी गई।

अब तक आग दोनों ओर भड़क चुकी थी।
मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और अब उसकी चूत में डालने लगा लेकिन उसकी चूत काफी तंग थी, अतः मैं असफल हो गया।
उसकी सील शायद अभी तक नहीं तोड़ी गई थी।

मैंने किचन से तेल लेकर अपने लंड पर और थोड़ा तेल उसकी चूत पर भी लगा दिया और फिर से चूत में लंड डालने लगा।

इस बार मैंने उसकी चूत में एक ज़ोर का झटका दिया और लंड दो इंच तक अन्दर घुसा दिया।

इस झटके से वो तड़प उठी और ज़ोर से चिल्लाई। मैंने उसका मुँह तुरन्त बन्द कर दिया और साथ ही एक और झटका दिया तो उसकी आँखों से आँसू निकल आए।

मैं डर गया तो मैंने उसके मुँह से हाथ हटा लिया।
वो बहुत रोई, अब उसकी चूत से खून निकल रहा था।
मैंने उससे धीरे-धीरे चोदने का वादा करके फिर से राजी किया।

अब मैं अपनी कमर धीरे-धीरे चला रहा था और ऐसे ही धीरे-धीरे अपना ८ इंच लम्बा लंड उसकी चूत के अन्दर गाड़ ही दिया।

थोड़ी देर में दर्द कम होने की वज़ह से उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ अपनी चूत हिला-हिला कर देने लगी।
अब उसे मज़ा आने लगा था और वो ख़ुद बोल रही थी- ज़ोर से चोदो मुझे, और ज़ोर से, फाड़ दे आज मेरी चूत, बुझा दे आज इसकी प्यास … फाड़ दे साली चूत को और ज़ोर से!

मैं भी उसकी बात सुनकर जोश में आकर ज़ोरों के झटके मारने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे कुतिया बना कर उसकी चुदाई की। लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और उसके 2 मिनट बाद मुझे भी लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में चुदाई करनी शुरु कर दी।
और अन्त में मैं भी उसके मुँह में झड़ गया।

उसने फिर मेरे लण्ड का सारा पानी पी लिया और मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ कर दिया।

उसके बाद हम दोनों किचन से निकल करक साथ में नहाने चले गए।
नहाने के बाद मैंने उसे अपना मोबाईल देकर कहा कि अपने घर फोन करके कह दो कि आज तुम मैडम (जिसके घर वह काम करती थी) के यहाँ रुकोगी, क्योंकि उनके पति घर पर नहीं हैं, तो उन्होंने मुझे आज रात यहीं रुकने को कहा है।

उसने घर पर यही बता दिया।
उसके घर वालों को कोई आपत्ति नहीं थी।

हमने होटल से खाना मँगवा कर खाया।
उसके बाद फिर दोनों नंगे ही बिस्तर पर सो गए।

रात में मैंने उसकी चार बार चुदाई की और एक बार गाँड भी मारी।

पर सबसे ज़्यादा मज़ा मुझे उसकी गाँड मारने में आया था.

उस रात की चुदाई के बाद वो जब भी मुझसे बात करती तो यही कहती- अब आपकी तबीयत कब ख़राब होगी?
और मैं जब भी अपने फ्लैट पर अकेला होता तो उसे किसी ना किसी बहाने बुलाकर चुदाई का खेल खेलता।

दोस्तो, यह थी मेरी कहानी।
बाद में मैंने इन्दौर में भी एक शादीशुदा आन्टी की चुदाई की थी जिसका किस्सा मैं अगली कहानी में सुनाऊंगा।

यह कहानी आपको कैसी लगी।

लेखक की अगली कहानी: मेरी पहली ग्राहक Sex Stories

ये बात तब 2020 की है जब मैं कॉलेज में था । मेरा एक दोस्त था रोहित। हम दोनो खूब मस्त रहते थे, साथ कॉलेज जाते थे, जिम जाते साथ में । लोग हमे देख कर ये सोचते थे की हम सगे भाई है । इस ही दिन कट रहे थे मगर मैं कभी भी रोहित के घर नही गया था । एक दिन उसका कॉल आया और बताया कि उसके मम्मी पापा की सालगिराह है तो घर में पार्टी है जल्दी आने के लिए उसके घर। मैने सोचा पहली बार जा रहा हु और स्पेशल दिन भी है तो कुछ गिफ्ट ले लेता हु। मैने एक बुके लिया और चॉकलेट का पैक ले लिया। मैं उसके घर जैसे ही पोहौचा देखा बोहोत लोग आए हुए थे । 30,35 लोग थे तो मैंने रोहित को कॉल करा और बाहर आने को बोला । वो बाहर आया और मुझे लेके गया उसके मम्मी पापा के पास। मैं जाते ही हैरान हो गया उसकी मम्मी को।देख कर। उनका नाम श्वेता था और पापा का नाम कमलेश। अंकल की उम्र 54 थी और आंटी 43 मगर आंटी को देख कर लगा नही वो इस उम्र में है। एक दम फिट और सेक्सी। आंटी का साइज 34–38–42 मस्त सुडोल । आंटी ने चमकीली और नेट वाली साड़ी पहनी थी जिसमे हाफ स्लीव ब्लाउज था। ब्लाउज में से चूचे बाहर आने को हो रहे थे।आंखों में चमक, बाल लंबे , चूचे एक दम तने हुए और गान्ड देख कर तो मुंह में पानी आ जाए। आंटी ने कहा :– अच्छा ये राहुल है । मैं उनसे मिला और पार्टी में एंजॉय करने लगा। कुछ भी करू बस आंटी पर ही नजर जा रही थी । आंटी ने भी मुझे देख लिया था उन्हें देखते हुए। पार्टी में दारू बीयर चल रही थी तो मैं और मेरा दोस्त भी पी रहे थे। पार्टी खतम होने के बाद मैं जाने लगा तो रोहित ने कहा रात हो गई है यही रुक जा । मैने मना किया तो आंटी भी बोली रुकने का तो मैने सोचा चलो रुक ही जाते है। सब सोने चल दिए अपने अपने रूम में। मुझे नींद नहीं आ रही थी बस आंटी घूम रही थी दिमाग में । मुझे प्यास लगी तो किचन गया पानी पीने तो आंटी के रूम से आवाज़ सुनी। मैं दबे पाओ देखने चला गया । मैने देखा आंटी पूरी नंगी थी और अंकल भी। आंटी बिस्तर में लेटी थी और अंकल चोद रहे थे । आंटी के चूचे ऊपर नीचे हो रहे थे मस्त और अंकल दमादम चोद रहे थे। आंटी बोलती है आंटी :– चोदते रहो बस आह आह आह बस करते रहो कमलेश आह चोदो मुझे अंकल:– आज कल तू खूब रण्डी बन गई है हमेशा हवस चढ़ी रहती है तुझे आंटी :– तुमसे भी तो अब नही होता है कुछ कमलेश करते रहो। अंकल:– मेरा होने वाला है आंटी :– प्लीज़ अभी मत निकालना इतनी जल्दी प्लीज प्लीज अंकल का निकल गया और आंटी के ऊपर ढेर हो गए । आंटी मुंह बनाके बोलती है जब कर नही पाते हो तो क्यों मेरी वासना को जगा देते हो । अंकल चुपचाप होके सोने लगे । आंटी ने कपड़े से अपने आपको पोछा और पानी पीने आई तो मुझे देख लिया जगे हुए । मुझे बोलती है अभी तक सोया नही मैने भी कह दिया नींद नहीं आ रही। आंटी कहती है आजा फिर कॉफी पीते है। मैं भी चला गया उनके पीछे पीछे किचन में । मेरा लन्ड तो पहले से ही टाइट था जो दिख रहा था पैंट में से । आंटी और मे कॉफी पीते पीते बाते कर रहे थे। आंटी :– कैसी चल रही है पढ़ाई मैं:– बोहोत मस्त आंटी आंटी :– तुम दोनो भी ड्रिंक करते हो मैं डर के :– कभी कभी आंटी बस आंटी :– चलो अच्छा है मगर आदत मत बनाना मैं :– हा आंटी आदत नही बनाएंगे आंटी को मेरा लन्ड दिख गया था जो तना हुआ था । आंटी एक दम घूरने लगी तो मैने धीरे से एडजस्ट करा और चुपचाप बैठा रहा । आंटी बोलती है चल सो जाते है मैने भी हा कहा और रूम में चले गए । मेरा मन नहीं माना तो आंटी के रूम में धीरे से देखने लगा आंटी क्या कर रही है । मैं हैरान हो गया देख कर आंटी अपनी मैक्सी उठा के चूत में उंगली कर रही है और अपने चूचे मैक्सी के ऊपर से दबा रही है। 10 15 मिनट उंगली करने के बाद झड़ गई तो ऐसे ही थोड़ी लेटी रही और मैं उन्हें देख कर लन्ड सहला रहा था तो उन्होंने मुझे देख लिया की मैं उन्हें देख रहा था । मैं भाग गया और रूम में जाके सो गया चुपचाप। सुबह हुई तो आंटी उठाने आई हम दोनों को। मैं उठा तो आंटी को देखते रह गया नहा के आई थी गीले बाल और डीप नेक सूट में कमाल लग रही थी। उन्होंने उठाया और चाय देके गई । रोहित उठा बाथरूम में चला गया । मैं भी फ्रेश होने गया तो आंटी के ब्रा पैंटी देखा जो हैंगर में टंगे हुए थे । मैने उठाया और सूंघने लगा । पता नही क्या हुआ मैने सूंघते सूंघते मूठ मारने लगा और अपना माल पैंटी में छोड़ दिया । मुझे डर लगने लगा की अब मुझे डाट ना पड़े । मैं चुपचाप ब्रा पैंटी को पानी से गीला कर के आ गया। नाश्ता कर के घर चला गया । फिर ऐसे ही 2 दिन बीत गए फिर रोहित का कॉल आया की वो और उसके पापा अपने गांव जा रहे है कुछ काम से तो मैं उसके घर में रुक जाऊं क्युकी आंटी अकेली होगी। मैं मना कर नही सकता था तो मैं भी चला गया। रोहित ने बताया कि वो 3,4 दिन में आ जाएंगे तब तक उसके ही घर रुक जाऊं मैं।अंकल और रोहित चले गए अब मैं और आंटी बचे दोपहर में खाना खाया फिर आंटी ने मुझे मार्केट चलने को कहा तो मैं साथ चल दिया । कुछ सामान खरीदने के बाद घर आ गए । आते आते शाम हो गई थी तो आंटी ने आके मुझसे कहा ड्रिंक करूंगा क्या उनके साथ। मैं पहले तो डर गया मगर हा बोल दिया । आंटी ने मुझे पैसे दिए और कहा की बीयर ले आ साथ में कुछ खाने को भी लाना। मैं चला गया बीयर चकना के साथ साथ कॉन्डम भी ले आया। मैं जैसे ही आया तो देखा आंटी एक सेक्सी जालीदार मैक्सी पहनी हुई थी सोफे में बैठी हुई थी । मैक्सी से हल्की हल्की ब्लैक ब्रा दिख रही थी। हम दोनो पीने लगे और जब सुरूर चढ़ा तो आंटी बोलती है आंटी :– तेरी गर्लफ्रेंड कैसी है मैं :– कोई गर्लफ्रेंड नही है मेरी पहले थी मगर अब नही है आंटी :– अब कोई क्यों नही है ? मैं :– अब कोई मिली ही नहीं आपके जैसी आंटी :– तभी मेरे कपड़ों में माल निकाला था मैं डर गया और चुप रहा तो आंटी ने कहा :– मैं कैसी लगती हु तुझे मैने तपाक से कह दिया :– आप bomb हो आंटी मस्त एक दम आंटी:– अब मुझ में इतनी बात कहा मैं:– आंटी अभी भी आप जवान लड़कियों को पीछे छोड़ देती हो आप बोहोत खूबसूरत हो आंटी मेरे पास आके बोली :– अच्छा ऐसा है तो मुझे गर्लफ्रेंड बना ले मैं डर गया तो उन्होंने मेरे लन्ड को पैंट के ऊपर से सहला दिया । मेरा लन्ड एक दम से फुल टाइट हो गया। में बताना भूल गया की मेरा लन्ड 7.4 साइज है और मस्त मोटा। मैं मस्त होके उन्हें चूमने लगा वो भी साथ दे रही थी । हम सोफे में एक दूसरे को चूमे जा रहे थे और साथ में उनके मैक्सी के ऊपर से दोनो चूचे दबा रहा था। वो आह आह आह कर के कहार रही थी। फिर उन्होंने मेरी शर्ट उतारी और छाती को चूम रही थी।धीरे से बोलती है बेडरूम में चलते है तो मैने एक बीयर की बॉटल उठाई और उनके साथ चल दिया। जाते ही उनकी मैक्सी उतार दी और बेड में पटक दिया। चूम रहा था और चूत को पैंटी के ऊपर से सहला रहा था। वो मस्त होने लगी तो मैने उनकी ब्रा पैंटी उतारी और चूत को चूमने लगा। एक दम चिकनी चूत थी एक भी बाल नहीं थे। मैं उनके नीचे आके चूत चाटने लगा तो वो मेरा सर दबा रही थी । आंटी बोलती है आंटी:– खा जा मेरी चूत को आज तक ऐसा मजा नही दिया तेरे अंकल ने आह आह ओह चाट राहुल प्लीज करते रह चाट चाट के उन्हे पागल कर चुका था उनका निकलने लगा तो मेरा सर दबा दिया उन्होंने और मेरे मुंह में झड़ गई। अब में उठा और उनको लन्ड चूसने को बोला तो तुरंत चूसने लगी एक दम लॉलीपॉप की तरह । हाथ से हिलाती और चुस्ती रहती। मेरा निकलने वाला था तो उनका सर दबा दिया गले तक चला गया और मेरा निकल गया वो भी पी गई मेरा सारा माल। अब आंटी को चूम रहा था और उनके बूब दबा रहा था तो वो बोलती है इतना बड़ा लन्ड कभी नहीं देखा तेरे अंकल का तो इसका आधा है। अब में फिर से मस्त हो गया और उठा । लन्ड में कॉन्डम चढ़ाने लगा तो बोलती है ऐसे ही कर बिना कंडोम लगा के । मैने थूक लगाया और उनके ऊपर आ गया । मैं लन्ड चूत के ऊपर सहला रहा था तो बोलती तड़पा मत प्लीज अब डाल दे मैने टांगे कंधे पर रखा और सेट किया । जैसे ही थोड़ा अंदर गया तो बोलती है तो छठपटाने लगी और चूमने लगी। मै चूमते हुए एक हल्का धक्का दिया तो आधा अंदर चला गया तो उसके आंखों से आसू आने लगे । मैं :– क्या हुआ आंटी आंटी :– इतना बड़ा नही लिया है तू मेरे आसू मत देख मैने भी हल्का बाहर निकाला और जोर का धक्का दे दिया मेरा पूरा लन्ड उसके अंदर चला गया। वो रोने लगी और बोलने लगी की निकल ले सहन नही हो रहा। मैं उन्हें चूमता रहा थोड़ी देर और हल्के हल्के झटके दे रहा था । अब आंटी अपनी गांड़ हिलाने लगी तो मै भी धक्के देने लगा । अब आंटी मस्त होके बोलने लगी आंटी :– आह आआआह राहुल बोहोत मस्त लन्ड है तेरा , तू पहले क्यों नहीं मिला यार कितना मस्त तगड़ा लन्ड है तेरा , आह आह ओह राहुल करते जा आज से मै तेरी रण्डी हु इस पर वो और ज़्यादा चीखने लगीं और मुझे गालियाँ देने लगीं, “आह … अह … साले बहनचोद, मार दिया मुझे आह … हाय हअह … मादरचोद, ऐसे कौन चोदता है आह … हह अह … बहन के लौड़े, चूत फाड़ दी मेरी आह … हांह … साले गांडू…” मैं भी धक्के दे रहा था उसका होने वाला था तो मुझे पकड़ के चूमते हुए बोली करते रह राहुल i love you राहुल आह। फिर वो निकल गई तो मैंने उसे कहा मेरे ऊपर आओ मेरा नही हुआ तो वो मेरे ऊपर आई और लन्ड सेट कर के कूदने लगी। मैं उसके चूचे दबा रहा था और चूम रहा था वो उछल उछल के ले रही थी। मैं भी नीचे से धक्का दे रहा था । थोड़ी देर बाद मैने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा । उसकी गांड़ में थप्पड़ लगा रहा था और चोद रहा था। मेरा निकलने वाला था तो पूछा कहा निकालू तो बोलती है अंदर ही निकाल मैं भी निकालने वाली ही तो मैने जोरदार झटके देता रहा दोनो एक साथ निकल गए । मेरा निकलने के बाद उसके ऊपर लेटा रहा। उस रात हमने 4 राउंड चूदाई करी। फिर सुबह हुई तो उसके चेहरे में खुशी झलक रही थी । मैने उसको किचन बाथरूम हर जगह चोदा 4 दिन । कभी होटल जाके तो कभी मेरे रूम में । आज भी अंकल और रोहित को नही पता है की उसकी मां मुझसे चुदाती है।आज भी मौका मिलता है तो हम चूदाई करते रहते है। अगले पार्ट में बताऊंगा मैने उसकी कैसी गांड़ मारी आपको अगर मेरी कहानी पसंद आया है तो मुझे मेल कर सकते है और बता सकते है।किसी भाभी को मुझसे मिलना है तो मुझे मेल करे। Roleplayexpertincest@gmail.com is me
Hindi Sex Stories

आर्यन और सायरा एक दूसरे को Hindi Sex Stories चूमे जा रहे थे कि रूही कमरे में दाखिल हुई। “ये, यहाँ पर सब क्या हो रहा है?” रूही थोड़ा गुस्से में बोली।

“म… मैडम… मै… म…” सलमा घबराने का नाटक करते हुए बोली।
“हाय अल्लाह!!! ये तो मैडम हैं… आर्यन बाबा! उठो मुझ पर से”, सायरा चिल्लाती हुई उसे अपने ऊपर से हटाने लगी।

“नहीं! मैं तुम्हें एक बार और चोदना चाहता हूँ!” आर्यन उसे जोर से अपनी बाँहों में भरते हुए बोला।
“पहले मुझ पर से उतरो… फिर बताती हूँ!” कहकर सायरा उसे उठाने में अपना पूरा जोर लगने लगी।

“क्या कोई मुझे बतायेगा कि ये सब क्या हो रहा है?” रूही फिर से बोली। सलमा की समझ में नहीं आ रहा था कि रूही के दिमाग में क्या है, इसलिये वो चुप रही।

सायरा उठ कर पलंग पर बैठ गयी और रोने लगी।

“सायरा! मैंने तुम्हें यहाँ कपड़े धोने के लिये रखा है ना कि मेरे बेटे के साथ चुदाई करने के लिये!” रूही थोड़ा गुस्सा करते हुए बोली।

सुबकते और रोते हुए सायरा धीरे से इतना ही कह पायी, “म… म… मुझे पता नहीं क्या हो गया था मैडम।”

“प्लीज़ मम्मी! मैं इसे एक बार और चोदना चाहता हूँ।” आर्यन बीच में बोला।

“अपना मुँह बंद रखो और चुपचाप बैठे रहो”, रूही ने उसे डाँटते हुए कहा।

आर्यन अपना मुँह खोल कर कुछ कहने जा रहा था कि सलमा ने खींच कर अपने पास किया और कान में फुसफुसायी, “आर्यन बाबा! प्लीज़ आप चुप रहिये।”

“तुम्हारे अम्मी-अब्बा क्या कहेंगे जब मैं उन्हें बताऊँगी कि कैसे तुमने मेरे बेटे की वासना को भड़का कर उससे चुदवाया है”, रूही उसे डराते हुए बोली। सायरा और जोर-जोर से रोने और सुबकने लगी।

तभी सलमा बीच में बोली, “सायरा! मैडम के पैरों पे पड़ कर अपनी गलतियों की माफी माँग लो, ये तुम्हें माफ़ कर देंगी।”

“मैडम! आप मुझे जो चाहे सज़ा दे दीजिये पर मेरे घर वालों को कुछ मत बताइयेगा”, सायरा रूही के पैरों को पकड़ते हुए बोली, “इसके लिये आप जो कहेंगी मैं करने को तैयार हूँ।”

“पहले उठकर खड़ी हो जाओ!” रूही ने धीमे से कहा, “और मुझे ये बताओ कि तुमने ऐसा किया क्यों?” इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“मैडम, मुझे सही पता नहीं कि मैंने ऐसा क्यों किया, सलमा तुम क्यों नहीं मैडम को बताती हो। आबिदा तुम तो बताओ… ओहह मैं अपने आपको संभाल नहीं पायी। पता नहीं क्यों मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी”, सायरा अपनी चूत को रगड़ते हुए बोली।

“सलमा! इसे मेरे कमरे में लेकर आओ”, रूही ने हुक्म दिया, “फिर देखते हैं कि इसकी खुजलाती हुई चूत के साथ क्या कर सकते हैं।”

“चलो अपने कपड़े पहन लो”, सलमा ने सायरा से कहा।

“नहीं! इसे इसी हालत में लेकर आओ। और तुम दोनों भी जिस तरह हो… उसी तरह इसके साथ आओ,” रूही ने कहा। रूही अपने कमरे में दाखिल हुई और उसके पीछे तीनों लड़कियाँ और आर्यन।

“सायरा अब इन तगड़े और शानदार लंडों को देखो। इनमें से किस लंड से पहले तुम अपनी कसी चूत चुदवाना चाहोगी जिससे तुम्हारी चूत की खुजली मिट सके?” रूही ने पूछा।

“प…प… पर मैडम???” सायरा इतने सारे लंडों को निहारते हुए हकलायी।

“मैं कुछ भी नहीं सुनुँगी, तुमने वादा किया है कि जो मैं कहुँगी… तुम करोगी। अब लंड अपनी चूत में लेने को तैयार हो जाओ… विजय तुम पहले इसे चोदोगे”, रूही ने जैसे हुक्म दिया।

फिर जिस तरह हम सब ने टीना के जन्मदिन पर किया था वैसा ही किया। सब मिलकर सामुहिक चुदाई कर रहे थे। कोई चूत में लंड डाले हुए था तो कोई किसी की गाँड में। कोई चूत चाट रहा था तो कोई लंड चूस रही थी। इसी तरह शाम हो गयी।

“अब बताओ तुम्हारा दिन कैसा गया?” रूही ने सायरा से पूछा।

“मैडम! पहले तो मैं बहुत डरी हुई थी पर बाद में बहुत मज़ा आया”, सायरा ने मुसकराते हुए जवाब दिया।

“आज तुमने मुझे खुश कर दिया। ये लो तुम्हारा इनाम”, इतना कहकर रूही ने उसे एक हीरे का पेंडेंट दे दिया और साथ में पाँच हज़ार रुपये।

“मैडम ये क्या मेरा कुँवारापन खोने की कीमत है? मैं कोई वेश्या नहीं हूँ!” सायरा उदास होते हुए बोली।

“तुम वेश्या नहीं हो… मैं जानती हूँ”, रूही ने नम्रता से कहा, “ये पेंडेंट मैं तुम्हें इसलिये दे रही हूँ कि आज मेरे बेटे ने पहली कुँवारी चूत की चुदाई की है। तुमने उसे लड़के से मर्द बना दिया… और ये रुपये इसलिये हैं ताकि तुम कुछ अच्छे कपड़े, सैंडल और मेक-अप वगैरह का सामान खरीद सको… आबिदा और सलमा इसमें तुम्हारी मदद कर देंगी… अब से इस घर में आओ तो तुम भी इन दोनों की तरह ही टिप-टॉप बन कर आओ।”

“शुक्रिया मैडम! पर ये पेंडेंट तो बहुत कीमती लगता है”, सायरा पेंडेंट को ऊपर से नीचे देखते हुए बोली, “अगर मेरे घर वाले इसे देखेंगे तो समझेंगे कि मैं इसे चुरा के लायी हूँ।”

“तुम इसकी चिंता मत करो! ऐसा नहीं होगा”, रूही हँसते हुए बोली, “आबिदा तुम्हें घर तक छोड़ आयेगी और तुम्हारे घर वालों को बता देगी कि ये रुपये और पेंडेंट मैंने तुम्हें दिया है।”

“चलो सायरा! अब घर चलते हैं”, आबिदा दरवाजे की ओर बढ़ते हुए बोली।

जैसे ही सायरा जाने के लिये मुड़ी, आर्यन ने पूछा, “सायरा! अब हम फिर चुदाई कब करेंगे?”

“शुक्रवार को!” उसने शरमाते हुए कहा और आबिदा के पीछे भाग गयी!

जब आबिदा वापस लौटी तो रूही ने उससे पूछा, “उसके अम्मी-अब्बा से तुमने क्या कहा?”

“यही कि ये आपने उसे आर्यन बाबा के जन्मदिन पर इनाम दिया है”, आबिदा ने जवाब दिया।

“क्या उन्होंने तुम्हारी बात पर विश्वास कर लिया?” रूही ने पूछा।

“हाँ कर लिया… और मुझसे ये भी पूछा कि क्या मुझे भी कोई तोहफ़ा मिला है”, आबिदा हँसी।

“तो तुमने क्या जवाब दिया?” रूही बोली।

“मैंने कहा कि मुझे तो मेरा तोहफ़ा दो दिन पहले ही मिल गया था, है ना आर्यन बाबा?” आबिदा आर्यन की ओर देखते हुए बोली।

दूसरे दिन आयेशा ने प्रीती से वही स्पेशल दवाई माँगी। “तुम्हें क्यों चाहिये?” प्रीती ने पूछा।

“मैं इसे पीकर इसका असर देखना चाहती हूँ”, आयेशा ने जवाब दिया।

“नहीं इसे मत देना! इसकी चूत पहले से ही इतनी भूखी है और अगर इसने ये दवाई पी ली तो ये तो हमारे लंड से चुदवा चुदवाकर हमें मार डालेगी!” सब लड़के चिल्लाये।

“आयेशा! मुझे लगता है कि ये लड़के सही कह रहे हैं। ये दवाई तो लड़की की चूत को गरमाने के लिये है। अल्लाह ने तो तुम्हारी चूत को पहले से ही इतना गरमा रखा है कि तुम्हें इस दवाई की जरूरत नहीं है”, प्रीती ने उसे समझाया।

“तुम लोगों में कोई नहीं चाहता कि मैं भी थोड़ा मज़ा लूँ!” आयेशा ने हँसते हुए शिकायत की।

हमारे अगले दो दिन खूब मौज मस्ती में गुजरे, बल्कि ये कहो कि चुदाई में गुजरे। जब हम सब रूही से विदाई ले रहे थे तो मैंने रूही को हमारे यहाँ आने की दावत दी। “शुक्रिया, मुझे जैसे ही टाईम मिलेगा मैं जरूर आऊँगी”, रूही ने जवाब दिया।

“रूही इस शनिवार को क्यों नहीं आ जाती हो? हम भी सोमवार को अपने घर वापस जाने वाले हैं। अगर आ जाओगी तो आखिरी बार हमारा मिलना हो जायेगा”, जय ने कहा।

“हाँ ये अच्छा रहेगा। फातिमा और आर्यन को भी अपने साथ ले आना”, मैंने कहा।

रूही कुछ देर तक सोचती रही। “ठीक है! रवि भी दो दिन बाद चला जायेगा फिर मैं फ़्री हूँ”, रूही बोली, “ठीक है हम शनिवार कि शाम तक पहुँच जायेंगे।”

जब हमारा सामान गाड़ी की डिक्की में रखा जा रहा था तो मैंने देखा कि आयेशा हम सब के बीच नहीं थी। “ज़ुबैदा! तुम्हें पता है कि आयेशा कहाँ है?” मैंने पूछा।

“वो मुझसे बोली थी कि वो रवि और आर्यन को गुड-बॉय बोल कर आ रही है”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया।

“गुड-बॉय करके तो मुझे आधा घंटा हो गया”, रवि ने कहा। इतने मैं आयेशा और आर्यन हँसते हुए आ गये। “हरामी साले, लगता है कि तेरा चुदाई से जी नहीं भरा अभी तक?” रूही ने आर्यन को धीरे से एक थप्पड़ लगाते हुए कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ओह मम्मी! मैं आयेशा को कुछ दे रहा था जिससे वो मुझे याद रखे”, आर्यन ने शर्माते हुए कहा।

“कहीं देने के चक्कर में इसे प्रेगनेंट तो नहीं कर दिया… जिससे ये तुम्हें ज़िंदगी भर याद रखे?” रूही हँसते हुए बोली।

“आर्यन डरो मत! मैं प्रेगनेंट नहीं होऊँगी पर हाँ मैं तुम्हें हर वक्त हर पल याद रखुँगी”, आयेशा ने उसे कहा।

जब हम घर पहुँचे तो मैंने जय से पूछा, “अच्छा बताओ जब रूही यहाँ आयेगी तो तुम किस तरह की पार्टी करना चाहोगे।”

जय कुछ कहता उससे पहले विजय बोल उठा, “मुझे तो कुँवारी चूत चोदने में मज़ा आता है।”

“विजय तुम चुप बैठो। पिछली बार हम तुम्हारी बात मान चुके हैं। अब जय की बारी है।” मैंने जवाब दिया।

“और हमारा क्या, तुम हमसे नहीं जानना चाहोगे कि हमें क्या पसंद है?” राम और श्याम साथ-साथ बोले।

“नहीं! मैं जरूरी नहीं समझता!” मैंने थोड़ा गुस्से में कहा।
“दीदी! तुम ही जीजाजी को समझाओ ना।”

प्रीती हँसते हुए बोली, “तुम लोग सुनील का बुरा मत मानो। ये मज़ाक कर रहा है। आखिर जय और विजय इस घर के दामाद हैं, इसलिये उनका स्थान पहले है।”

“तो क्या हुआ? हम भी तो इनके साले हैं।” वो कहावत भूल गयी क्या, “सारी खुदाई एक तरफ जोरू का भाई एक तरफ?” राम ने कहा।

“हाँ तुम दोनों ठीक कह रहे हो। मैं तो मज़ाक कर रहा था। ऐसा है पहले जय की पसंद देख लेते हैं, फिर तुम दोनों की”, मैंने कहा।

“मेरा तो सपना है कि एक माँ की चुदाई उसकी बेटी के साथ करूँ!” जय ने कहा।

“अच्छा सपना है… मैं भी यही ख्वाहिश रखता हूँ”, राम ने कहा।

“और मैं तो विजय की तरह किसी कुँवारी चूत को चोदना चाहुँगा।”

थोड़ी देर सोचने के बाद मैं बोला, “ठीक है! मैं सब इंतज़ाम कर लूँगा। मैं एक जोड़ी माँ बेटी की भी ले आऊँगा जिसे तुम लोगों ने नहीं चोदा होगा।”

आगले दो दिन मैं अपने बचे हुए काम पूरा करने में लगा हुआ था। तीसरे दिन आयेशा ने मुझसे कहा, “सर मैंने सुना ही कि शनिवार की रात को आपके यहाँ एक पार्टी है?”

“हाँ है!” मैंने जवाब दिया, “किसने बताया तुम्हें।” इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“विजय ने!” आयेशा ने कहा, “क्या मुझे नहीं बुलायेंगे?”

“नहीं मैं तुम्हें नहीं बुला सकता क्योंकि ये सिर्फ़ माँ-बेटी की पार्टी है”, मैंने जवाब दिया।

मेरी बात सुनकर वो उदास हो गयी। मैंने उसे अपने पास खींचा और कहा, “आयेशा समझने की कोशिश करो… वैसे भी तुम्हारी चुदाई तो होती रहती है।”

“कहाँ होती है… देखिये ना”, कहकर उसने मेरा हाथ अपनी चूत पे रख दिया। मैंने देखा कि उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

“आयेशा, मेरी जान! पार्टी के अलावा जो तुम कहो मैं करने को तैयार हूँ”, मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।

“आप सच कह रहे हैं? मुकर तो नहीं जायेंगे?” उसने मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच लेते हुए कहा।

“ना नहीं कहुँगा, तुम कह कर तो देखो।”

“तो आज पूरा दिन मुझे इस सोफ़े पर चोदते रहिये!” आयेशा ने कहा।

“मेरा बहुत काम पेंडिंग पड़ा है… इसलिये पूरा दिन तो नहीं, हाँ! दो बार तुम्हारी चुदाई करूँगा और फिर तुम छुट्टी लेकर विजय और दूसरों से चुदवाने जा सकती हो”, मैंने कहा।

“ठीक है, जब आपकी यही मरज़ी है तो…” उसने थोड़ा निराश होते हुए कहा।

जब मैं दूसरी बार उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था उसी वक्त फोन कि घंटी बजी। मैं फोन उठाना चाहता था पर आयेशा ने मुझे रोक दिया।

“डार्लिंग! जरूरी फोन भी हो सकता है”, मैंने कहा।

“इस समय मेरी चूत से जरूरी कोई काम नहीं है! बस मुझे इसी तरह चोदते जाइये”, आयेशा ने अपने कुल्हे उछालते हुए कहा, “हाँ सर! इसी तरह जोर से अपना लंड घुसाते रहिये।” फोन दो चार बार बज कर बंद हो गया।

ऑफिस के दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई और नसरीन ऑफिस में आ गयी। “सर! आपको डिस्टर्ब करने के लिये माफी चाहती हूँ पर एम-डी आपको अर्जेंटली बुला रहे हैं।”

“कह दो कि ये नहीं आ सकते”, आयेशा ने झल्लाते हुए कहा, “तुम देख नहीं सकती कि ये बीज़ी हैं।”

“नहीं नसरीन! तुम ये मत कहना। कहना कि जैसे ही मुझे काम से फ़ुर्सत मिलेगी मैं आ जाऊँगा”, मैंने कहा। फिर मैंने आयेशा से कहा, “क्या तुम चाहती हो कि मैं अपनी नौकरी से हाथ धो बैठूँ?” बदले में वो शरारत से मुस्कुरा पड़ी।

थोड़ी देर में एम-डी मेरे केबिन में आया। “मुझे पहले ही समझ जाना चाहिये था कि तुम चुदाई में व्यस्त हो, इसलिये समय नहीं मिल रहा”, एम-डी हँसा, “सुनील! मुझे मिस्टर खोसला के साथ हुई तुम्हारी मीटिंग की डिटेल्स चाहिये।”

“क्या आपने वो रिपोर्ट देखी नहीं?” मैं चौंक पड़ा था। फिर आयेशा की ओर देखते हुए मैंने पूछा, “मैंने तुम्हें मिस्टर खोसला की रिपोर्ट डिकटेट करायी थी, वो कहाँ है?”

“अगर आपने डिकटेट करायी होती तो मैं उसे टाईप ना कर देती। मैं अपने काम में पूरी तरह पाबंद हूँ”, आयेशा अपनी बात पे जोर देती हुई बोली।

करीब दस मिनट के बाद एम-डी ने कहा, “नसरीन इसकी डेस्क पूरी तरह देख चुकी है… वो वहाँ नहीं है।”

“आयेशा! ये तुमने क्या किया, जरा अपने दिमाग पे जोर दो”, मैंने फिर कहा।

“मैं कैसे सोचूँ… जब एक लंड मेरी चूत को इतनी जोर से चोदे जा रहा है”, आयेशा ने शिकायत की।

“आयेशा या तो अपने दिमाग पे जोर दो नहीं तो मैं तुम्हारी चूत को चोदना बंद कर दूँगा”, मैंने उसे धमकाते हुए कहा।

“नहीं सर! ऐसा मत करना, मुझे याद आ रहा है… मैंने वो रिपोर्ट मीना मैडम को दी थी”, आयेशा ने कहा।

“सर आपको तकलीफ हुई… उसके लिये माफी चाहता हूँ”, मैंने एम-डी से कहा।

“मिस्टर खोसला दो बजे ऑफिस आने वाले हैं, कांट्रैक्ट साइन करने कि लिये, मैं चाहता हूँ कि उस समय तुम भी वहाँ मौजूद रहो”, एम-डी ने कहा और केबिन के बाहर चले गये।

शनिवार कि सुबह ही रूही, फातिमा और आर्यन के साथ मेरे घर पहुँच गयी। एक दूसरे को नमस्ते करने के बाद आर्यन ने लड़कियों को अपनी बाँहों में ले लिया, “आओ मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम लोग पूरे हफ़्ते क्या मिस करती रही हो।” हँसते और खिलखिलाते हुए वो लड़कियाँ आर्यन को बेडरूम में घसीट के ले गयीं।

लड़के भी पीछे नहीं थे। “फ़ातिमा खाने से पहले क्या तुम एक स्पेशल कॉकटेल पीना पसंद करोगी जिसमें हमारे लंड का पानी मिला हो?” उन्होंने दूसरे बेडरूम की ओर इशारा करते हुए कहा। “हाँ फिर तो मज़ा आ जायेगा”, फातिमा चहकते हुए बोली।

“आर्यन को तो अब एक ही शौक रह गया है, चोदना, चोदना और सिर्फ़ चोदना। जबसे तुम लोग गये हो, आबिदा और सलमा, दोनों रात में उसके साथ सोती हैं। वो रात को तो उनको चोदता ही है पर दिन में जब भी मौका मिलता है अपना लंड उनकी चूत में पेल देता है”, रूही ने आर्यन की ओर देखते हुए कहा।

“मज़े करने दो उसे! क्या शुक्रवार को सायरा आयी थी?” प्रीती ने पूछा।

“हाँ आयी थी। आर्यन उसका इंतज़ार कर रहा था और जैसे ही वो आयी उसे अपने कमरे में ले गया। वो शाम को घर जाने के समय ही बाहर आयी”, रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

“फिर उसके काम का क्या हुआ?” प्रीती ने पूछा।

“मैं ये बर्दाश्त नहीं करती कि काम बाकी पड़ा रहे। उसका काम आबिदा और सलमा को करना पड़ा”, रूही ने जवाब दिया।

“क्या उन्हें बुरा नहीं लगा?” प्रीती ने पूछा।

“नहीं… वो दोनों आर्यन से बहुत मोहब्बत करती हैं। आबिदा से तो मुझे ये भी पता चला कि सायरा की तीन छोटी बहनें हैं। और जब वो बड़ी हो जायेंगी तो सायरा पहली बार आर्यन से ही उनकी चुदाई करवायेगी”, रूही ने जवाब दिया।

“क्यों ना खाने के पहले ड्रिंक्स और थोड़ी चुदाई कर ली जाये?” मैंने रूही से पूछा।

“मुझे तो लग रहा था कि तुम पूछोगे ही नहीं”, रूही हँसते हुए बोली।

जब हम रूही की चुदाई कर चुके थे तो रूही ने पूछा, “क्या तुम्हारे एम-डी आ रहे हैं?”

“हाँ! वो आ रहे हैं। मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में बताया था। वो तुम्हें चोदने की फ़िराक में है”, मैंने जवाब दिया।

“अगर वो तुम्हें चोदे तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?” प्रीती ने पूछा।

“नहीं! बुरा क्यों लगेगा? मैं तुम्हारे एम-डी को बरसों से जानती हूँ। वो कई सालों से मेरे पीछे पड़ा हुआ है। जब भी मैं अपने शौहर के साथ क्लब में उससे मिलती तो वो मुझे छेड़ने से बाज़ नहीं आता था। पर अब जब कि मैं बेवा हो चुकी हूँ तो मैं भी उससे चुदवाना चाहुँगी”, रूही ने जवाब दिया।

“उससे चुदवाकर तुम्हें पछतावा नहीं होगा। एम-डी जानता है कि औरतों को खुश कैसे किया जाता है”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“उम्मीद है ऐसा ही होगा! उसे चुदाई की काफी प्रैक्टिस है”, रूही बोली।

पार्टी रात को सात बजे शुरू होने वाली थी। साढ़े छः बजे दरवाजे की घंटी बजी। “इस समय कौन हो सकता है?” प्रीती ने पूछा।

“आयेशा ही होगी!” मैंने जवाब दिया।

“मैंने तो सोचा था कि तुम उसे नहीं बुलाने वाले हो!” प्रीती ने कहा।

“पहले मैं उसे नहीं बुलाना चाहता था। पर जो खेल आज की रात के लिये मेरे दिमाग में है, उसके लिये एक लड़की कम पड़ रही थी… सो मैंने उसे बुला लिया”, मैंने प्रीती को समझाया।

“कैसा खेल?” रूही ने उत्सुक्त में पूछा।

“उसके लिये तुम्हें थोड़ा इंतज़ार करना होगा”, मैंने आयेशा को अंदर लेते हुए कहा।

हमेशा की तरह आयेशा बहुत ही सुंदर लग रही थी। उसने बहुत ही अच्छा मेक-अप किया हुआ था और आसमानी नीले रंग का बहुत ही सैक्सी सलवार-कमीज़ और उससे मैचिंग सफ़ेद रंग के हाई-हील के सैंडल पहन रखे थे। “आओ आयेशा! तुम्हारा स्वागत है”, प्रीती ने कहा। “मेरे करीब तो आओ जरा ताकि मैं तुम्हें अच्छी तरह निहार सकूँ।”

एक प्यारी मुस्कान के साथ आयेशा प्रीती के सामने एक मॉडल की तरह खड़ी हो गयी। “बहुत सुंदर लग रही हो… एक दम किसी अप्सरा की तरह”, प्रीती ने उसे गले लगाते हुए कहा, “लेकिन तुम्हारी आँखें सुर्ख क्यों हैं, क्या तुम रोती रही हो?”

उसकी आँखों में तुरंत ही आँसू आ गये और उसने गर्दन हिला दी, “हाँ!”

“क्या हुआ…? बताओ मुझे”, प्रीती ने पूछा।

“उन्हें सब मालूम पड़ गया है! ऑफिस में क्या होता है और आपके घर पर क्या-क्या होता है”, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

“ओह गॉड! फिर तो तुम्हारे अब्बा ने जमकर डाँट लगायी होगी तुम्हें?” मैंने कहा।

“हाँ! उन्होंने जरूर मेरी ठुकाई की होती अगर अम्मी ने उन्हें रोक ना दिया होता”, आयेशा ने नज़रें झुकाते हुए कहा।

“तुम्हारी अम्मी ने उन्हें रोका???” मैं आगे कहना चाहता था कि आयेशा हँस पड़ी, “सर! ये मगरमछी आँसू थे। पर ये सच है कि उन्हें सब पता चल गया है।”

“आयेशा थोड़ा सीरियस होकर सब सच-सच बताओ”, मैं थोड़ा जोर से बोला।

“सर! जब मैंने अब्बा से आज की रात को आने के लिये उनकी इजाज़त चाही तो वो मुझ पर बरस पड़े। कहने लगे कि वो सब जानते हैं कि वहाँ ऑफिस में और आपके घर पर क्या होता है।”

“वो इतना गुस्से में थे कि फिर अम्मी को बीच में आना पड़ा और उन्होंने सब उन्हें शुरू से बता दिया।”

“पर तुम्हारी अम्मी को कैसे पता चला?” प्रीती ने पूछा।

“जब एक महीने मुझे महावारी नहीं हुई थी तो उन्हें शक हो गया था। तब मैंने अम्मी से कहा था कि वो सच कह रही हैं, और मैंने उन्हें बताया कि कैसे प्रीती जी ने मेरा खयाल रखा था। तब अम्मी ने मुझसे कहा कि जो हो चुका है वो वापस नहीं आ सकता… बस मैं एक बात का खयाल रखूँ कि घर की बदनामी ना हो।”

“बस फ़िर क्या था… मैं तुरंत तैयार हुई और यहाँ चली आयी। सॉरी मैं थोड़ा जल्दी ही आ गयी।” आयेशा ने अपनी कहानी पूरी करते हुए कहा।

हम लोग बातों को और आगे बढ़ाते कि दरवाजे की घंटी बजी। “रुको मैं देखता हूँ”, कहकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला मैंने रूही को प्रीती से कहते सुना, “मैं अभी दो मिनट में आती हूँ।”

मैं एम-डी और उनके परिवार को अंदर लेकर आ गया। साथ ही अनिता और मीना भी आ गये। इस तरह सभी मेहमान आ चुके थे। आपस में परिचय और स्वागत के बाद एम-डी ने मुझसे पूछा, “सुनील! रूही कहाँ है?”

“हाय सुनीलू! मैं तुम्हारे पीछे खड़ी हूँ”, रूही ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाय रूही मेरी जान!” एम-डी ने उसे गले लगाते हुए कह।, “तुम पहले से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और जवान लग रही हो।”

“तुम पहले से जरूर थोड़े उम्र में बड़े लग रहे हो पर आज भी कोई भी औरत तुम्हारी ख्वाहिश कर सकती है”, रूही ने जवाब दिया।

“दोस्तों! इससे पहले कि हम बातचीत का दौर आगे बढ़ायें, क्यों ना हम सब अपने कपड़े उतार कर एक दूसरे से घुल मिल जायें”, मैंने घोषणा करते हुए कहा।

सब लोग अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये और ड्रिंक्स पीते हुए आपस में बातें करने लगे। औरतों ने सिर्फ अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए थे।

रूही के नंगे बदन को अपनी गिरफ़्त में लेकर एम-डी ने उसके मम्मों को मसल दिया। “रूही! आज मैं तुम्हें दिल भर के चोदूँगा। याद है मैंने तुमसे कहा था कि एक दिन मैं तुम्हें जरूर चोदूँगा।”

“उन दिनों का तो मुझे पता नहीं कि तुम मुझे चोद पाते कि नहीं… हाँ! आज जब मैं बेवा हो गयी हूँ तो जिससे मेरा मन करे उससे चुदवा सकती हूँ”, कहकर रूही ने जोर से एम-डी के खड़े लंड को भींच दिया, “आज मैं तुम्हारे लंड से एक-एक बूँद निचोड़ लूँगी।”

“सुनील कह रहा था कि तुम्हारी चूत काफी कसी हुई और गरम है!” एम-डी ने उसके मम्मों को मसलते हुए कहा।

“चोद कर खुद देख लो!” रूही हँसते हुए उसके लंड को और रगड़ने लगी।

“रूही! क्या तुम उस लड़की को जानती हो जो आयेशा से बात कर रही है?” एम-डी ने पूछा।

“वो मेरी बेटी फातिमा है”, रूही ने जवाब दिया।

“क्या उसकी भी चूत तुम्हारी चूत की तरह गरम है?” एम-डी ने पूछा।

“उसकी भी चूत को चोद के देख लो…” रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

“हाँ! मैं चोद के जरूर देखूँगा। लेकिन पहले तुम्हारी चूत को और फिर तुम्हारी बेटी की चूत को”, एम-डी जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा।

“फातिमा! जरा यहाँ तो आना”, रूही ने आवाज़ लगायी। फातिमा अब तक काफी शराब पी चुकी थी और ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में लड़खड़ाती उनके पास आयी। रूही ने उसका परिचय कराया, “इनसे मिलो! ये हमारे परिवार के पुराने जान पहचान वालों में से हैं और तुम्हारी सहेली रजनी के अंकल भी… मिस्टर सुनीलू।”

“सलाम सर!” फातिमा ने थोड़ा सा सर झुका कर उसे सलाम किया।

“मेरे पास आओ!” एम-डी ने कहा, “जरा तुम्हारे बदन की गरमाहट को महसूस करने दो।” फिर एम-डी ने फातिमा की चूचियों को जोर से मसलते हुए कहा, “तुम्हारी चूचियाँ कितनी भरी भरी हैं। लगता है कि तुम्हें चोद कर मुझे काफी आनंद आयेगा।”

“उम्मीद करती हूँ कि आपके लंड में इतना पानी हो कि वो हम दोनों की चूत कि प्यास बुझा सके”, कहकर फातिमा ने एम-डी के लंड को जोर से मसल दिया।

“प्लीज़ सब लोग मेरी बात पर ध्यान दें…” मैंने जोर से चिल्लाते हुए कहा, “आज की पार्टी का थीम है माँ-बेटी। पहले मैं आप सबसे उन चूतों का परिचय करा दूँ जो आज की रात माँ-बेटी की जोड़ी बन कर आयी हैं। पहली जोड़ी है मिली और टीना की!” कमरे में जोर की ताली बजने लगी।

“दूसरी जोड़ी है योगिता और रजनी की, तीसरी है अनिता और मीना की, और आखिरी है रूही और फातिमा की। उसके बाद हमारे बीच हैं, दो सगी बहनें, अंजू और मंजू और उनका साथ दे रही हैं मेरे सालों की बीवियाँ सिमरन और साक्षी। और आखिर में है मेरी बीवी प्रीती और और सुंदर आयेशा। प्लीज़ सब इनका जोर से ताली बजा कर स्वागत करें।”

कमरे में जोर की तालियों की गड़गड़ाहट गूँज पड़ी। शराब पानी की तरह पी जा रही थी और सब नशे और मस्ती में चूर थे। “आज की रात हम एक खेल खेलेंगे। हर मर्द अपने पसंद की जोड़ी चुनेगा। वो जोड़ी को अदल-बदल नहीं कर सकता”, मैंने कहा।

“मैं रूही और फातिमा को चुनता हूँ!” एम-डी थोड़े उतावले स्वर में बोला।

“सर! आप थोड़ा सब्र कीजिये। आपकी बारी बाद में आयेगी। पहली बारी जय की है। माँ -बेटी की जोड़ी को इस पार्टी में बुलाया जाये, ये सुझाव उसका था और इसलिये पहला हक उसका बनता है। जय के चुनने के बाद उम्र को महत्व दिया जायेगा। जय तुम किसे चुनना चाहोगे?” मैंने कहा।

“एम-डी को अपनी पसंद लेने दो! मैं अनिता और मीना को चुनता हूँ”, जय ने उन दोनों को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।

एम-डी के बाद मैं ही उम्र में बड़ा था। सो मैंने मिली और टीना को अपनी बाँहों में भर लिया। उसके बाद पसंद चलती रही और परिणाम ये था कि राम ने योगिता और रजनी को चुना। श्याम ने अंजू और मंजू दोनों बहनों को। विजय ने अपने आपको सिमरन और साक्षी के साथ कर लिया। आर्यन अपनी पुरानी दो प्रेमिकाओं, प्रीती और आयेशा को पाकर खुश था।

“सुनील तुमने ये नहीं बताया कि खेल क्या है?” अनिता ने जय के लंड को अपने ग्लास में डालकर शराब में नहलाते हुए पूछा।

मेरे लिविंग रूम के कोने में बने बार की तरफ इशारा कर मैंने कहा, “जो भी चाहे बार से ड्रिंक ले सकता है। जी भर कर पीजिये और मैं खेल और उसके नियम आप सबको १५ मिनट बाद बताऊँगा। सो प्लीज़ आप सब इंजॉय करें और १५ मिनट का इंतज़ार।” Hindi Sex Stories

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