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Massage Girl in Lower Subansiri: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Lower Subansiri who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Lower Subansiri that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Lower Subansiri massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Lower Subansiri who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Lower Subansiri massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Lower Subansiri massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Lower Subansiri who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Lower Subansiri employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Lower Subansiri helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Lower Subansiri

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Lower Subansiri at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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प्रेषक : प्रेम Hindi Sex Stories

मुझे यह कहानी मेरे Hindi Sex Stories एक दोस्त ने भेजी है, जिन्होंने प्रार्थना की है कि उनका नाम नहीं बताया जाये। उन्हीं के शब्दों को मैंने कहानी का रूप दिया है।

लीजिये हाजिर है जीजू, दीदी और बाबू की मस्त कहानी…

यह मेरी सच्ची कहानी है। अन्तर्वासना पर मैं भी हिम्मत कर रहा हूँ अपनी आप-बीती बताने की।

मेरे जीजू और दीदी दिल्ली में रहते हैं। मैं भी कुछ दिन के लिये उनके साथ रहने के लिये वहाँ गया था। मेरे वहाँ जाने पर दीदी वहाँ से बड़ी दीदी की होस्पिटल में सेवा करने जयपुर आ गई थी और मुझे बता गई थी कि मुझे घर के काम में मदद करनी है। तीन-चार दिनों में वो वापस आ जायेंगी। मुझे हिदायत दी- देखो जाना मत, मुझे तुमसे काम है ! फिर कुछ मतलब से मुझे देख कर मुसकुराते हुए कुछ इशारा भी किया।

दो-तीन दिन तक सभी कुछ सामान्य रहा, फिर तीसरे दिन जीजू सिनेमा की दो टिकटे ले आये। शाम को हम दोनों सिनेमा हॉल में गये। अधिक भीड़ नहीं थी। हम आराम से पीछे की सीट पर बैठ गये। हमारे पास की सीटें खाली थी। कुछ ही देर में पिक्चर चालू हो गई। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि जीजू का हाथ मेरी जांघ पर था। मुझे झनझनाहट सी हुई। मैंने उनका हाथ धीरे से हटा दिया। पर वापस थोड़ी सी देर में उनका हाथ फिर से मेरी जांघ पर आ गया और सहलाने लगा। उनका हाथ धीरे धीरे मेरे लण्ड की ओर बढ़ने लगा। मुझे कुछ मजा सा आने लगा, पर मैंने उनका हाथ रोक दिया।

जीजू ने बात बदलते हुए मुझे कहा,”बाबू, कुछ ठण्डा लोगे…?”

फिर बिना कुछ कहे कोल्ड ड्रिन्क की दो बोतल ले आये। हम आराम से फिर पिक्चर देखने लगे। लेकिन जीजू ने फिर हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और दबाने लगे। मुझे भी रोमांच हो आया… और इस बार जीजू ने अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया और दबा दिया। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा।

“जीजू, हाथ हटा दो, मुझे अजीब सा लग रहा है !”

“अरे, तू तो मस्ती ले, मेरा भी पकड़ ले मुझे भी मजा आयेगा…!”

उन्होंने अब मेरे लण्ड को जरा ठीक से थाम लिया और सहलाने लगा। मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी। मैंने भी हिम्मत करके उनके लण्ड पर हाथ रख दिया। उसका लण्ड तो पहले से ही खड़ा था।

“बाबू, दो सीट उधर हो जा… “

मुझे पता चल गया कि उन्हें डर था कि कहीं पास वाला यह सब देख ना ले। पर तभी इन्टरवल हो गया। समय इतनी जल्दी निकल गया पता ही नहीं चला। पर अब मेरे जिस्म में एक तरावट आ गई थी। हम दोनों बाहर आ गये और हिरोइन के पोस्टर को देखने लगे।

सेक्सी पोज थे, जीजू बोले- भेनचोद क्या मस्त लगती है ये… पर तू इससे ज्यादा मस्त है।

जीजू, मैं कोई लडकी थोड़े ही हूँ !

जीजू मुस्कराये, बोले- देख मस्ती से चुदाना… क्या खायेगा…?

कुछ भी ले लो … आइस्क्रीम का ऑर्डर दे दो !

पिक्चर फिर शुरू हो चुकी थी। अब हम कोने वाली सीट पर आ गये थे।

बाबू, अपना लण्ड निकाल ! मुझे पकड़ा दे !”

“नहीं जीजू, शरम आती है…!”

पर जीजू ने मेरी पेन्ट की जिप खोल दी और मेरी अन्डरवियर को नीचे करते हुए लण्ड बाहर खींच लिया और हल्के हल्के मलने लगे। उफ़्फ़्… कैसा मजा आ रहा था। मेरा लण्ड बेहद कठोर होता जा रहा था। मेरा हाथ भी अपने आप जीजू की पैन्ट पर लण्ड के ऊपर पर चला गया। मैंने ज्योंही जिप खोली, वो अन्दर कुछ नहीं पहने थे। सीधा लण्ड हाथ में आ गया। मैंने उसे बाहर निकाल लिया। हम दोनों के लण्ड सधारण साईज़ के थे, पर हां … मेरा कुछ मोटा था। मैंने भी हौले हौले उसके लण्ड को मसलना चालू कर दिया। उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी।

“तेरा लण्ड तो मस्त है, तेरी दीदी को बताना पड़ेगा !”

“अरे नहीं, दीदी को कुछ मत कहना, नहीं तो नाराज हो जायेगी…”

अब हम पिक्चर नहीं देख रहे थे, एक दूसरे का लण्ड पर मुठ मार रहे थे। बला की मस्ती मुझ पर चढ़ गई थी। आंखें मस्ती में बन्द हो रही थी। जीजू अब मेरा लण्ड दबा कर जोर से मलने लगे। मेरे मुँह से आह निकल पड़ी और मेरा वीर्य निकल पड़ा। मैंने जल्दी से लण्ड आगे किया और वीर्य नीचे गिराने लगा फिर अपना रूमाल निकाला और लण्ड साफ़ कर लिया। अब सिर्फ़ जीजू को मस्त करना बाकी था। उनके लण्ड पर मैं मुठ जोर से मारने लगा। वो भी थोड़े से बैचेन हुए और लण्ड आगे करके वीर्य को नीचे टपका दिया। हमने अपने कपड़े ठीक कर लिये और ठीक तरीके से बैठ गये। मैंने सावधानी से इधर उधर देखा, किसी को कोई मतलब नहीं था, सभी पिक्चर देखने में लगे थे।

सिनेमा से हम दोनों घर आ गये। जीजू मुस्कुरा रहे थे। हमने डिनर लिया और रात को अपने कमरे में जा कर सो गये।

जीजू ने मुझसे कहा- यहाँ अकेले क्या सो रहे हो, इधर ही आ जाओ, बातें करेंगे।

मैं उनकी बात मान कर उनके कमरे में सोने चला आया। कुछ देर तक तो हम लोग बातें करते रहे।

“जीजू दीदी से मत कहना कुछ भी…”

“अरे तुम्हारी दीदी ही तो तुम्हारे बारे में कहती रहती है कि बाबू का लण्ड तो छोटेपन से ही बड़ा है और मोटा है।”

“अच्छा और क्या कहती थी वो…”

“कहती थी कि यदि आप चाहे तो भैया को मुझे चोदने के लिये राजी कर लो !”

“क्या… दीदी ने कहा ये…? मैं नहीं मानता…” मुझे आश्चर्य हुआ, पर मुझे लगा कि जीजू गे था उसे गाण्ड मारने या मराने में अधिक मजा आता होगा, इसलिये दीदी को कोई अपना लण्ड चहिये होगा कि बदनामी भी हो और चुदाई भी हो जाये।

“ठीक है… आयेगी तो देख लेना…”

दीदी के विचार सुन कर मेरा लण्ड तन्ना गया। मेरे जहन में दीदी का अब मस्त फ़िगर दिखने लगा था। दीदी की चूत कैसी होगी, चूचे कैसे होंगे। क्या सच में दीदी को चोद पाऊंगा। फिर जाने कब हम सो गये। रात को मुझे लगा कि जीजू मेरी पीठ से चिपक रहे थे और अपना लण्ड मेरी गाण्ड में रगड़ रहे थे। दूसरे हाथ से मेरा लण्ड पकड़ रखा था। मैं अनजान बन कर लेटा रहा। मुझे आनन्द आने लगा था। जीजू ने समझा कि मैं गहरी नींद में हूँ। उन्होंने मेरा पजामा उतार दिया। मेरी गाण्ड नीचे से नंगी हो गई और लण्ड बाहर आ गया। मेरा लण्ड भी बुरी तरह तन्नाने लगा था। अचानक मेरी गाण्ड में गीलापन लगा, शायद थूक था और फिर लण्ड का सुपारा मेरी गाण्ड की छेद में गड़ने लगा। अब मैंने जागना ही बेहतर समझा। मुझे भी तो मजा लेना था।

“जीजू, मेरी गान्ड मारोगे…?” मुझे गाण्ड में गुदगुदी सी लगने लगी।

“प्लीज, मारने दे ना बाबू… फिर तू भी मार लेना…” मेरा लण्ड बहुत ही कठोर हो चुका था, और रहा नहीं जा रहा था।

“जीजू पहले मुझे आपकी गाण्ड मारने दो… मेरा लण्ड बहुत कठोर हो रहा है।”

जीजू खुश हो गये, उनके मन की बात सामने आ गई।

“सच बाबू, देख तबियत से मेरी गाण्ड चोदना, मुझे लोहे जैसे लण्ड अपनी गाण्ड में बहुत भाते हैं… मेरी गान्ड चाटोगे?”

“जीजू घोड़ी बन जाओ…फिर गाण्ड चाटूंगा भी और चोदूंगा भी !” जीजू में गे वाली सारी आदतें थी।

जीजू तुरंत घोड़ी बन गए। उनकी गान्ड एकदम चिकनी और गोल थी। मैंने उसके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर चीर दिया। गाण्ड का छेद सामने था। मैंने अपनी जीभ को उसकी गाण्ड में घुसा कर उसको चाटा और जीभ को अन्दर भी डाला। कुछ देर तक चाटने के बाद जीजू खुद ही बोले,”बाबू, तू तो मस्त है रे… गाण्ड को भी चाटने से मस्ती आ गई…किसी ने मेरी गाण्ड ऐसे नहीं चाटी… अब लण्ड घुसेड़ दे…मार दे गाण्ड !”

मैंने अपना लण्ड छेद में जमा कर जोर लगाया तो पता चला कि गाण्ड तो पहले से ढीली है, लण्ड गान्ड में घुसता चला गया। मैं उनके चूतड़ों पर थपथपा कर कस कस हाथ से मारने लगा। उसे जोर का आनन्द आने लगा। उसका लण्ड भी कड़क हो उठा। मेरे धक्के चालू हो गये वो मस्त हो उठे और मुझे गालियाँ देने लगे। आह रे… मेरे लण्ड में गजब की मस्ती छाने लगी। चुदाई तो बहुत की थी पर किसी आदमी गान्ड पहली बार मारी थी। मैंने हाथ बढ़ा कर उनका लण्ड पकड़ लिया और धक्कों के साथ मुठ भी मारने लगा।

जीजू तो जैसे तड़प उठा,”भेन चोद… तू तो उस्ताद है रे… क्या गाण्ड को पेली है कि मादरचोद मजा आ गया…!”

“जीजू मेरे से मराओगे तो गाण्ड की मस्ती ऐसी चढ़ेगी कि बस मुझसे ही मरवाओगे आप !”

“तेरा लण्ड चूसने को मन कर रहा है… पर अगली बार… तेरा लण्ड और मेरी गाण्ड… वाह रे…” जीजू मेरी तारीफ़ करने लगा था।

“दीदी को मेरे से चुदवा दो… आपका अहसान होगा !” मैंने अपनी फ़रमाईश कर ही दी…

“कल ही लो… वो आये तो तू खुद ही उससे चिपक जाना… वो देखना तुझे गले लगा लेगी… और बिना कुछ कहे ही चुदवा लेगी।” जीजू ने मुझे असली बात बता दी।

जीजू का लण्ड मसलने से उसका हाल बुरा हो उठा था, और इधर मैं उसकी गाण्ड चोद चोद कर चरम बिन्दू पर आ रहा था। तभी मैं झड़ने लगा। मेरा वीर्य निकलने लगा। मेरा जोश ठण्डा पड़ने लगा। पर जीजू ने पलट कर मुझे घोड़ी बना कर मुझ पर चढ़ गया,”बस बाबू दो मिनट… मैं तो तैयार हूँ…”

उसने अपना कड़क तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसेड़ दिया। मैं दर्द से कराह उठा। उसने बस तीन-चार ही धक्के मारे और उसका वीर्य छूट पडा। पर इन तीन चार बार लण्ड पेलने से मेरी गाण्ड जैसे फ़ट गई हो… असीम दर्द होने लगा था। उसके लण्ड में भी कट दिख रहा था और खून की बून्दें छलक उठी थी।

“साली गाण्ड है या सुई का छेद… इसे बार बार चोद कर मेरे लायक बनाना पड़ेगा।”

अगले रोज दीदी आ चुकी थी। उसे देख कर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं जीजू के बताये अनुसार कुछ करूँ।

शाम को दीदी नहा कर जब बाहर आई तो सिर्फ़ पेटीकोट में थी। उसका पेटीकोट पतले कपड़े का था, सो साफ़ मालूम पड़ रहा था कि अन्दर पैन्टी नहीं पहनी है। मैं वहीं बिस्तर पर बैठा था। मुझे शरमाते देख कर दीदी ने ही पहल कर डाली।

“तुम्हारे जीजू बता रहे थे कि तुम दोनों के दिन बड़े मस्ती में कटे… खूब मजे किये…?”

“जी दीदी, जीजू तो है ही मस्त…पर आपको कैसे मालूम… ?” दीदी बिलकुल मेरे पास आ गई और लगभग चूत को मेरे मुँह के पास ले आई।

“उन्होंने मुझे सब बता दिया है…” अब कुछ शर्माने की गुन्जाईश नहीं रही थी। मैंने दीदी के चूतड़ों को थामते हुए दबा दिया और पेटीकोट के ऊपर से ही दीदी की चूत में अपना मुँह गड़ा दिया। दीदी के मुख से हाय निकल पड़ी। मेरे बालों को नोच कर पकड़ लिया और मेरे सर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। उसकी चूत की दोनों फ़ांके खुल गई और उसके बीच मेरा मुँह घुस पड़ा।

अपनी चूत को जोर देकर और मेरे मुख पर दबाने लगी,”मेरे भैया… जरा चूस डाल चूत को…!”

दीदी के मुख से आह निकली और अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया। उसकी चूत डबल रोटी की तरह फ़ूली हुई थी… उसमें से जवानी का मद मस्त रस निकल रहा था। दीदी ने अपनी एक टांग ऊंची करके बिस्तर पर रख ली और अपनी चूत का द्वार खोल दिया। मैंने अपनी जीभ निकाली और और दीदी की रस भरी जवानी को चाट लिया। उसकी यौवन कलिका चूत के साथ अन्दर-बाहर हो कर मचल रही थी। मैंने अपने होंठों से उस उभरी हुई छोटी सी नन्ही सी कली को मसल दिया।

“भाई जी, मार डालोगे क्या…?” दीदी सिसक उठी।

“बाबू… आपकी दीदी चुदने के तैयार है… पटक दो बिस्तर पर और दोनों लूटो जवानी का मजा…”

“जीजू और आप…?”

“ये तो बस गाण्ड मारते हैं और मराते हैं… ये तो गे है…” दीदी ने निराशा पूर्वक कहा।

“दीदी बस, निराश नहीं हो… मेरा लण्ड आपकी चूत की प्यास बुझायेगा… चोद चोद कर मस्त कर देगा !” मैंने उन्हे तसल्ली दी।

दीदी खुशी से मेरे से लिपट गई,” बस भैया अब लग जाओ, मेरी चूत को ठण्डी कर दो… मस्त चोद दो …।”

मैंने दीदी की कमर में हाथ डाल कर उसका पेटीकोट उतार दिया और प्यार से उसे बिस्तर पर लेटा दिया। मैंने तुरन्त अपनी पैन्ट और अंडरवियर उतार दिया और दीदी को अपना मोटा तगड़ा लौड़ा दिखाया।

“ला चूस लूँ इसे… ” मेरा लण्ड खींच कर अपने मुख में भर लिया और चूसने लगी।

मैंने भी कमर हिला कर उसका मुँह चोदना चालू कर दिया। उसके मुँह से गों गों की आवाज आने लगी। लण्ड शायद हलक में भी जा रहा था। दीदी ने लण्ड बाहर निकाल दिया और खांसने लगी।

“गले को चोद डालेगा क्या…?”

“सॉरी दीदी… जोश में गला चुद गया…” दीदी ने मुझे धक्का दे कर अपने ऊपर लेटा लिया और अपनी दोनों टांगें ऊपर करके अपनी चूत खोल दी। मैंने अपना लौड़ा निशाने पर लिया और उसकी चूत में घुसेड़ दिया। एक मोहक सी सीत्कार भरते हुए उसने मेरा लौड़ा अपनी चूत में भर लिया। और मुझे कस कर पकड़ लिया।

” भैया मेरी इतनी बड़ी-बड़ी चूचियाँ भी तो है ना… मसल डालो ना… देखो ना कितने बेताब हो उठे हैं।”

“मैंने दोनों बोबे अपने हाथों में भर कर उन्हें मसलना शुरू कर दिया। उसकी कमर हौले हौले चलने लगी और वो शान्ति से चुदने लगी। उसे बड़ा ही आनन्द आ रहा था। मेरे लण्ड में भी वासना की मिठास भरने लगी थी। उसके मस्त बोबे और चुचूक घुमा रहा था और हम दोनों जवानी का लुफ़्त उठा रहे थे… पर हाय ये जीजू भी… मेरी मस्त गोल गाण्ड देख कर उनसे रहा नहीं गया… उनका कड़क तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गान्ड में घुस पडा। मेरी गाण्ड तो कल से दर्द कर रही थी, मैं दर्द से बिलख उठा,”दीदी ये देखो ना जीजू को … फिर से मेरी गाण्ड मार रहे हैं…!”

“सह ले मेरे प्यारे भैया… देख मैं भी तो चुद रही हू ना…डबल मजा ले ले…” दीदी ने मुझे समझाया।

दीदी नाराज ना हो जाये सो गाण्ड भी मरवाता रहा औए चोदता भी रहा। गाण्ड के दर्द के मारे मेरा माल भी नहीं नहीं निकल पा रहा था… पर दीदी इतने में दो बार झड़ चुकी थी। इतने में जीजू झड़ गये, उनके वीर्य ने मेरी गान्ड चिकनी और लसलसी कर दी… जीजू का लौड़ा बाहर निकलते ही मुझे शान्ति हुई और मैं दीदी को फिर से चोदने लगा और अपने अंतिम पड़ाव पर आने लगा। दीदी भी तीसरी बार झड़ने वाली थी। आँखें बन्द करके खूब जोर जोर से चुदा रही थी… अब मेरा निकला …निकला हो रहा था। दीदी को पता चल गया गया कि मैं झड़ने वाला हूँ… सो उन्होंने अपनी चूत टाईट की और मेरे लण्ड को दबा लिया। मेरा वीर्य एकदम से छूट पडा और चूत में भरने लगा… तभी दीदी भी झड़ने लगी। दीदी ने मुझे प्यार से गले लिया और हम एक दूसरे के ऊपर वैसे ही लेट गये।

“भैया तेरा तो बड़ा तगड़ा है… देख मैं तीन बार झड़ गई… और तू है कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा।”

मैं क्या बताता कि जीजू के कारण था ये सब … पर उस दिन से दीदी मेरी चुदाई की फ़ैन हो गई। मेरी गाण्ड आज पूरी सूज गई थी, बहुत दर्द था। दीदी के कहने से जीजू ने मेरी गाण्ड सात दिनों तक नहीं चोदी। जीजू से तो उन्होंने चुदना ही छोड़ दिया था। सात रोज बीतने के बाद अब तो रोज रात को यही होता कि मैं दीदी को चोदता और जीजू मेरी गाण्ड मारते… दिन को तो जीजू मुझसे बहुत बार गाण्ड मरा लेते थे… बदले में मेरी सारी फ़रमाइश पूरी कर देते थे। अब हमारी लाईफ़ बडी मस्त चल रही है… या कहिये बहुत गड़बड़ चल रही है। Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories

मैं आज एक सच्ची कहानी Hindi Sex Stories बताने जा रहा हूं !मैं जब नौकरी कर रहा था तो एक क्रेडिट कार्ड कम्पनी से फ़ोन आया। एक लड़की बोल रही थी कि सर आप क्रेडिट कार्ड बनवा लो।

मैंने कहा- बनवा लूंगा तुम मुझ से डोक्यूमेंट ले जाओ।

जब मैं उससे मिला तो देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया क्योंकि वह बहुत खूबसूरत थी। मैंने उसे डोक्यूमेंट दे दिए और उसका मोबाईल नम्बर ले लिया। हम दोनों में आपस में बातें होने लग गई, मैं उसके घर जाने लग गया। मैंने उसका और उसकी मम्मी का दिल जीत लिया।

एक दिन जब मैं उसके घर गया तो वो घर पर अकेली थी। उसने मुझ अपने कमरे मे बैठाया और पानी लेने चली गई। उसने नीले रंग का गाऊन पहन रखा था। उसके बूब्स बड़े बड़े थे। उसे देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया।

मैंने उससे पूछा कि उसका कोई बोय-फ़्रेन्ड है क्या?

उसने कहा- नहीं !

तो मैंने कहा- तुम मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन जाओ ! मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- जान ! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !

वह शरमाई तो मैंने देर नहीं की और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी बाहों में भर लिया।

उसने कहा- छोड़ो मुझे ! कोई आ जाएगा !

मैंने कहा- कोई नहीं आएगा ! मैं उसके बूब्स दबाने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा। मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में दे दी। मैंने उसका गाऊन उतार दिया, उसने काली ब्रा, पैन्टी पहन रखी थी। मैंने उसके बूब्स को ब्रा से आज़ाद कर दिया और उसकी छोटी छोटी चुचूक चूसने लगा। वह पागल हो गई और कहने लगी- और करो और करो !

मैंने उसकी पैन्टी उतार दी और उसे पूरा नंगा करके बेड पर लिटा दिया। अपने सारे कपड़े उतार कर मैंने अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया। वह उसे दबाने लगी। मैं उसकी चूत को चूसने लगा तो उसने कहा- और चूसो ! इसकी प्यास बुझा दो !

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली तो वो सिसकारी भरने लगी। अभी उसकी चूत की सील नहीं टूटी थी। वो बार बार कह रही थी-इसे चूत में डालो !

तो मैंने कहा- इसे क्या कहते हैं? इस डंडे को ?

तो उसने कहा- इस लण्ड को मेरी चूत में डालो !

मैंने लन्ड उसकी चूत पर रख कर जैसे ही थोड़ा धक्का दिया तो वो चिल्लाई। मैंने उसका मुँह बंद करके जोर का झटका दे कर पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। वह छटपटा रही थी। मैं धीरे धीरे लन्ड को उसकी कसी हुई चूत में अन्दर बाहर कर रहा था।

अब उसे भी मज़ा आने लगा था और अब वो नीचे से अपने कूल्हों को उठा रही थी। अब मैं उसकी भोंसड़ी को जोर जोर से चोद रहा था। उसे बहुत मज़े आ रहे थे। उसकी चूत से पानी आने लगा, वो झड़ गई थी।

मैंने देखा कि उसकी चूत से खून आ रहा था। मैंने कहा- जान ! पहली बार चुदवा रही हो इसलिए खून आ रहा है।

मैं जोर जोर से झटके दे रहा था, अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने लण्ड चूत से निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया और झड़ गया। वो मेरा सारा वीर्य गटक गई। हम दोनों को नींद आ गई।

थोड़ी देर बाद मेरी नींद खुली तो देखा वो मज़े से नंगी सो रही है। फ़िर मैंने उसे दो बार और चोदा।

अब जब भी मौका मिलता है, मैं उसे चोद देता हूँ  Hindi Sex Stories

Hindi sex kahani

मैं एक 36 साल की शादी शुदा औरत हूँ। Sex kahani दिल्ली कैलाश कॉलोनी में हम रहते हैं। लोग मुझे पिंकी बोल के पुकारते हैं। मैं बहुत ही सेक्सी और हॉट पंजाबी औरत हूँ। जब मैं कॉलेज में थी तब सारे लड़के मेरे पीछे पागल थे। मेरे 2/3 बॉयफ्रेंड भी थे।
लेकिन शादी के बाद मुझे दिल्ली आना पड़ा। मेरा हज़्बेंड बहुत ही बिज़ी टाइप के आदमी हैं। अपनी खूबसूरत और सेक्सी बीबी से उसको अपना बिज़्नेस ज़्यादा पसंद है। हफ्ते में मुश्किल से 2 बार हम बिस्तर पे मिलते थे।

मेरी एक 12 साल की लड़की है, नाम हैं प्रिया… वो जब क्लास सेवेन में पहुँची तो हमने उसकी पढ़ाई के लिए एक हाउस ट्यूटर रखने को ठान ली।
मैंने अपने सहेलियों से पूछा तो उन्होंने राजीव नाम के एक ब्रिलियेंट ट्यूटर का नंबर दिया।

शाम को मैंने उसे फोन किया- हेलो, नमस्ते.. क्या मैं राजीव से बात कर सकती हूं?’
‘हाँ जी, कहिए?’
‘जी मैं पिंकी बोल रही हूँ, कैलाश कोलोनी से, मुझे आपकी ज़रूरत है.’
‘जी?? मैं समझा नहीं?’
‘मेरी एक बेटी है.. अगर आप उसे पढ़ा दें… तो मेहरबानी होगी!’
‘क्यूँ नहीं .. ज़रूर!’

‘आपकी फीस क्या है?’
वो तो आप पहले चीज़ देख लीजिए.. पिंकी जी.. फिर फीस तय करेंगे..’
‘ओके, आप कल शाम को 4 बजे आ जाओ!’
‘ओके!’

अगले दिन.. मैंने एक रेड डीप नेक टॉप और टाइट ब्लू जीन्स पहनी.. गुलाबी होंठो पे डीप चॉक्लेट लिपस्टिक भी… 4 बजते ही प्रिया खेलने चली गई..
4.15 पे बेल बजी, मैंने दरवाज़ा खोला तो एक 30 साल की हैंडसम युवक खड़ा था…
‘नमस्ते.. पिंकी जी?’
‘हाँ जी आइए ना..’
‘थॅंक यू!’
वो अंदर आया और सोफे पे बैठ गया… मैं फ्रंट के सोफे पे बैठ गई…
‘राजीव जी!’ मैंने कहा- आप तो बिल्कुल यंग हैं.. मैंने सोच रही थी कोई बुड्ढा सा टीचर आयेगा!
उसने कहा- सो तो है… मैं सत्ताईस साल का हूँ, वैसे.. आपको देख कर भी नहीं लगता कि आप एक 12 साल की लड़की की माँ हो..
देखने में लगता है… आप कॉलेज की स्टूडेंट हो…और मैं आपको पढ़ाने आया हूँ..’

‘ओ थॅंक्स..’ मुझे उनका स्टाइल अच्छा लगा… ‘ चाहो तो आप मुझे भी कभी पढ़ा लेना…मुझे भी शौक है… पढ़ने का!’
‘जी क्यूँ नहीं!’
वो मुझे स्माइल देते हुए देख रहे थे… मैंने भी एक सेक्सी स्माइल दे दी.

‘आप कोल्ड ड्रिंक्स लेंगे या कॉफी?
‘कोल्ड ड्रिंक्स’
मैं किचन गई और दो ग्लास में पेप्सी ले आई…
‘ये लीजिए..’
‘पिंकी जी, स्टूडेंट कहाँ है?’
‘ओह, वो तो खेलने चली गई.. बड़ी नॉटी है…’
‘मतलब… आज मुझे आपको ही पढ़ाना होगा?’
‘जी..’ मैं खिलखिलाकर खिल पड़ी..

उसने मुझे गौर से देखते हुए कहा- आपकी हँसी बहुत ही सेक्सी और कातिलाना है.
मैंने कहा- अच्छा?
‘कसम से!’ पिंकी जी… आप कोई फिल्म एक्ट्रेस से कम नहीं है..’

मुझे राजीव का स्टाइल अच्छा लगा… मैंने और सेक्सी स्माइल दी और कहा- अब आपकी फीस तो बताइए?
‘फीस का क्या है पिंकी मैडम, डेली आपकी 2/3 हँसी देखने को मिल जाए तो काफ़ी है..’
‘ओह.. तुम तो बड़े फ्लर्ट हो.. जी’
‘सच्ची, आप से क्या फीस लेना??’

‘तो क्या लोगे?’
उसने मेरे उभारों की तरफ देखते हुए कहा- जो आप प्यार से दे दो.. पिंकी..
मैं खिलखिला उठी… बहुत दिनों बाद कोई हैंडसम लड़का मुझे फ्लर्ट कर रहा था… अंदर से मैं बिल्कुल हॉर्नी फील कर रही थी…
मैंने कहा- सोच लो जी.. सिर्फ़ हँसी से काम चला लोगे न??
उसने देखा कि मैं सेक्सी स्माइल दे रही हूँ… उसने कहा- आपकी खूबसूरती की कसम पिंकी जी!

‘तुम मुझे जी मत कहो, सिर्फ़ पिंकी कहो’
‘ओके… पिंकी… पिंकी… कितना स्वीट नाम हैं..’
‘सच?’
‘हाँ… आपका नाम और सब कुछ बेहद खूबसूरत है…’

मैंने मुस्करा दी… वो धीरे से आगे आया.. और कहा…एक बात कहूँ?
मैं भी आगे झुक गई.. और.. पूछा- क्या बात है?

उसने मेरे कान के पास फुसफुसा कर कहा- मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी हाउस वाइफ नहीं देखी.. पिंकी…
कहते ही कहते उसने फटाक से मेरी लेफ्ट गाल पर एक किस दे दिया…
‘आउच’ मैंने नाटक किया- तुम बड़े नॉटी हो..

‘सच में’ राजीव ने कहा और धीरे से उठ कर मेरे साथ एक ही सोफे पर बैठ गया.
मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूँ… एक तो राजीव मेरे लिए स्ट्रेंजर था.. लेकिन मुझे फ्लर्टिंग और नॉटी चीज़े बहुत पसंद थी..

मैं मंद मंद मुस्कुरा रही थी… उसी वक़्त राजीव बिल्कुल मेरे बगल पर आ चुका था… वो मेरी दाईं ओर बैठ गया और मेरे हाथ को अपने हाथों में ले लिया- पिंकी…
‘जी??’ मैं मुस्करा रही थी.

उसने मेरी हाथों की ऊँगलियों को सहलाते हुए कहा- तुम्हारे ये लंबे नाख़ून, ये डीप रेड नैल पोलिश इन गोरी गोरी ऊँगलियों में कितनी सेक्सी लग रही है!

मुझे राजीव का सहलाना.. और बातें बहुत ही अच्छा लग रहा था…

‘पिंकी, तुम अपनी ब्यूटी की बहुत ध्यान रखती हो न??’..राजीव का हाथ धीरे धीरे अब मेरी पूरे हाथ और कलाई पर रेंग रहा था…
‘हाँ.. मैं हफ्ते में 2 बार ब्यूटी पार्लर जाती हूँ… और घर पे भी मेक अप करती हूँ…’
मुझे अब सहलाना.. और अच्छा लग रहा था.

‘तभी तो तुम इतनी सेक्सी हो… पिंकी… तुम्हारे पति बहुत लकी हैं…’
‘वो क्यूँ.?’ मैं हंस कर पूछा!!!
‘ये रेड नैल पोलिश, सेक्सी फिगर, सेक्सी होंठ… तुम्हारे पति के तो ऐश ही ऐश हैं…’
‘उन्हें फुर्सत कहाँ जी? सिर्फ़ बिजनेस.. और पैसा…’ मैं कह उठी..

अब राजीव ने अपना दायें हाथ से मेरे हाथ को सहलाते हुए अपना लेफ्ट हॅंड मेरी शोल्डर्स के ऊपर से ले गया और मेरी बाएँ आर्म को पकड़ लिया..’ तुम पंजाबी औरतों की बात ही कुछ और है… पिंकी, पता नहीं कैसे इतनी सेक्सी होती हो… करीना कपूर को ही देख लो…
तुम तो उस से भी बढ़ कर हो…’
मैं सेक्सी स्माइल देते हुए कहा- मैं जवानी में मॉडेलिंग किया करती थी..
‘जवानी मतलब?? तुम तो अब भी जवान और लाजवाब हो पिंकी…’ कहते हुए राजीव ने आहिस्ता अपने लेफ्ट हॅंड से मेरी लेफ्ट बूब को दबा दिया… ‘सी… ई ई…’ मेरी मुँह से आवाज़ निकल गई- राजीव… ये.. क्या…??’

जब राजीव ने देखा कि मैंने उसे ऐतराज़ नहीं किया तो उसने धीरे से अपनी दायाँ हाथ भी मेरी दाई मुम्मे पर रख दिया और होले से दबा दिया.
‘आ आ ह ह राजीव…’
‘उम्म म म म… कितनी सेक्सी है… ये…’
राजीव की बातें कंप्लीट होने से पहले ही बेल बज उठी..

डींग डींग डोंग…

हड़बड़ा कर राजीव अपने सीट पर चला गया… मैं दरवाज़ा खोलने गई.
बाहर.. प्रिया थी…
‘मम्मी, पता है… आज ईशा ने..’
प्रिया कुछ बोलने ही वाली थी कि राजीव को देख कर वो चुप हो गई.

‘प्रिया… नमस्ते करो… ये तुम्हारे सर हैं…बहुत ही अच्छे सर है…’ मैंने मुस्करा कर कहा.
‘हाय सर… आई एम प्रिया…’
‘औ.. आई एम युवर राजीव सर…’

मैंने कहा..’ बेटा, जाओ अपनी बुक्स ले कर आओ… राजीव सर से थोड़ा पढ़ लो…’

पाँच मिनट बाद हमारी डाइनिंग टेबल पे प्रिया और राजीव पढ़ रहे थे… मैं पास ही सोफे पर बैठी देख रही थी…
‘पिंकी जी आज पहली क्लास है… आप भी यहाँ आके बैठ जाओ…’ राजीव ने मुस्कराते हुए कहा…
मुझे पता चल गया उसके दिमाग़ मैं क्या चल रहा है… लेकिन.. मैं अपने आप ही उठ कर राजीव के दाईं और बैठ गई.
अब बाएं ओर प्रिया थी.. और दाई ओर.. सेक्सी मम्मी.. मतलब मैं थी.

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कोई चीज़ मुझे मेरी लेफ्ट थाई जांघ पर टच कर रहा है.. जल्द ही मुझे पता चला… ये राजीव का दायँ हाथ था…वो बड़े आराम से प्रिया को पढ़ा रहा था, और नीचे उसकी माँ की जाँघो को छू रहा था.
मुझे हल्की सी गुदगुदी हो रही थी.. ये लड़का बहुत ही नॉटी था.

उसने प्रिया को एक सम करने दिया… और धीरे से टेबल के नीचे से ही मेरे सपाट पेट पर अपना हाथ रख दिया.
उई माँ… मैं तो अब गर्म होने लगी थी… राजीव मुझे देख कर मुस्कराया, मैंने भी एक सेक्सी स्माइल दी.
अचानक उसने अपने शरारती हाथ को ऊपर ले जाकर मेरी लेफ्ट उभार को दबा दिया.
‘उउउहह..’ मेरी मुँह से आवाज़ निकली.

‘क्या हुआ माँ?’ प्रिया ने पूछा.
‘कुछ नहीं बेटा… बस ऐसे ही.. शायद कोई कीड़ा होगा…’ मैं सेक्सी स्माइल देकर राजीव को घूर रही थी.
उसने कहा- मैडम… कहीं कीड़ा ज़हरीला न हो… मैं देखूं?’
‘नहीं ठीक है!’ मैंने कहा.
‘नहीं मैडम, आप घबरायें मत… प्रिया.. जाओ एक ग्लास पानी लेके आना मम्मी के लिए…’ राजीव ने कहा.

प्रिया जैसे ही अंदर गई, राजीव ने मुझे पास खींच कर मेरे लेफ्ट उरोज़ को दबाना शुरू किया…
‘आह… आह राजीव छोड़ो न… कोई देख लेगा!’
‘पिंकी.. जी कर रहा है तुम्हें… अच्छी तरह प्यार दूं…लेकिन…’

तभी प्रिया आ गई पानी के साथ… पानी पीते हुए मैंने प्रिया को कहा- प्रिया.. ज़रा जाकर अंदर से एक पेन किलर ले आना..

जैसे ही वो गई, मैंने कहा- राजीव, यहाँ प्लीज़ कुछ मत करना, मैं फँस जाऊँगी, तुम मुझे वसंत विहार में आर. पी. एम. पब में मिलना… आज रात को सात बजे…
कह कर मैं अंदर चली गई. sex kahani

बीस मिनट बाद प्रिया ने आकर कहा- राजीव सर चले गये हैं.

मैंने प्रिया को पास ही मीना के घर खेलने भेज दिया और तैयार होने लगी.

मैं एक इन्टरमीडिएट कालेज में अध्यापिका हूं। ये मात्र 12 वीं कक्षा तक का कालेज है। शाम को अक्सर मैं अपनी सहेली के साथ भोपाल ताल के किनारे घूमने निकल जाती हूं।

ऐसे ही एक दिन मैं अपनी सहेली के साथ ताल के किनारे घूम रही रही थी। 12वीं कक्षा की एक छात्रा और एक छात्र मिल गये। ये दोनों मेरी कक्षा में नहीं थे। दूसरे सेक्शन में थे।

मैंने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपने नाम सोनल और किशोर बताए।

सोनल ने मुझे कहा कि उसे बायलोजी विषय में कुछ पूछना है।

मैंने उसे कहा कि कल घर आ जाना, मैं बता दूंगी। किशोर और सोनल दूसरे दिन घर पर आ गये।

मुझे लगा कि इनकी प्रोब्लम कुछ और ही है। मैंने पूछा- ‘सोनल ये किशोर तुम्हारा दोस्त है क्या…?’

‘हाँ मैम… इसे भी आपसे कुछ पूछना था…’ वो कुछ शरमाती सी बोली।

मैं एकदम भांप गई कि मामला प्यार का है।

‘या कुछ और बात है… कह दो…मैं भी तुम्हारी उम्र से गुजरी हूं’ मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा। पर सही लगा…

‘हाँ… मैम वो… हम तो आपके पास इसलिए आये थे कि हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय साथ रहे!… प्लीज मैम नाराज मत होना…’ उसके चेहरे से लगा कि वो मुझसे विनती कर रही हैं।

‘पर ये कोई मिलने की जगह है?’
‘मैम वो… निशा मैम ने बताया था कि आप हमें मदद कर देगीं…’

ओह तो ये बात है… निशा भी अपने बोय फ़्रेंड के साथ एक बार चुदवाने आई थी तो मैंने भी उसी से चुदवा लिया था। मेरे मन में भी एक हूक सी उठी… ये दोनों अपनी जिस्म की प्यास बुझाने आये हैं… क्यों ना मैं भी इस बात का फ़ायदा उठाऊँ।

‘तो तुम मिलना चाहते हो… मेरा क्या फ़ायदा होगा इसमें…’ मैंने तिरछी निगाहों से उसे परखा।

‘मैम मुझे मालूम है… निशा जी ने मुझे सब बता दिया है… इसीलिये तो मैंने आपसे सब कह दिया… आपकी सारी शर्तें इसे भी और मुझे भी मन्जूर है…’ उसने अपना सर झुकाये सारी बातें मान ली।

‘तो ध्यान रहे…शर्तें… कल दिन को स्कूल के बाद सीधे ही यहाँ आ जाना…’ मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा।

सोनल खुशी से उछल पड़ी… मैंने सोनल को चूम लिया…

मैंने कहा-‘किशोर तुम भी आओ जरा…’

मैंने किशोर के होंठ पर एक गहरा चुम्मा ले लिया… मेरे बदन में तरावट आने लगी… किशोर ने भी जोश में मुझे किस कर लिया।

दूसरे दिन किशोर और सोनल स्कूल में मेरे चक्कर लगाते रहे… मैं उन्हें मीठी सी मुस्कान दे कर उनका हौंसला बढ़ाती रही… सच तो ये था कि मेरी चूत में भी कुलबुलाहट मचने लग गई थी… सोच सोच कर ही रोमांचित हो रही थी कि 19 साल के जवान लड़के के लन्ड से चुदवाने को मिलेगा।

मैंने स्कूल से आते ही एयर कंडीशन चला दिया। लंच करके मैं आराम करने लगी। मैं जाने कब सो गई।

अचानक मुझे लगा सोनल ने मेरे हाथ पकड़ लिए और किशोर ने मुझे उल्टी लेटा कर मेरी चूतड़ की फ़ांकों को खोल दिया और अपना लन्ड मेरी गान्ड में घुसाने लगा। पर उसका लन्ड छेद में घुस ही नहीं रहा था। वो बहुत जोर लगा रहा था… मेरी गान्ड में इस जोर लगाने से गुदगुदी लगने लगी थी। सोनल चीख उठी… मार दे गान्ड मैम की…छोड़ना मत… उसकी चीख से मैं अचानक उठ बैठी… ओह… मैं सपना देखने लगी थी।

वास्तव में दरवाजे पर बेल बज रही थी…दिन को करीब 3 बजे थे…वो दोनों आ गये थे। मैंने अपना मुख धोया और हम तीनों कमरे में ही बैठ कर थोड़ी देर तक बातें करते रहे। उन दोनों की बैचेनी देखते ही बनती थी…

‘मैम… मुझे किशोर से कुछ बातें करनी है…’

‘हाँ हाँ… जरूर करो… पर बातें कम करना… और…’ मैंने मजाक किया।

और सोनल को बेड रूम में ले गई और सब बता दिया। किशोर को भी मैंने अन्दर आने का इशारा किया। सोनल तो बेड रूम देखते ही खुश हो गई… और बिस्तर पर लोट गई।

इधर किशोर को मैंने बुला कर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंठो को चूमना चालू कर दिया। उसने भी मेरी कमर मे अपना हाथ कस दिया। उसके लौडे की चुभन मेरे चूत के आस पास होने लगी। मैंने धीरे से उसका लन्ड पकड़ लिया। उसके हाथ मेरे बोबे पर जम गये और उन्हें दबाने लगे। सोनल जल्दी से आई और किशोर को खींचने लगी…

‘किशोर… आओ ना…’ किशोर खिंचता हुआ चला गया…पर मेरे बदन की गर्मी का अह्सास किशोर को मिल गया था। उसने किशोर को अपने से लिपटा लिया।

‘अरे… क्या ऐसे ही करोगे… कपड़े तो उतार दो…चुदाई का मजा नहीं लोगे क्या…’ मैंने उन्हे कहा.

‘नहीं…नहीं… चुदाई नहीं… बस ऐसे ही ऊपर से…’ सोनल ने कहा तो मुझे आश्चर्य हुआ।

‘तब क्या मजा आयेगा… क्यों किशोर…’

किशोर ने मेरा साथ दिया और हम दोनों ने मिल कर सोनल को नंगी कर दिया… किशोर ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उन्हें देख कर मैंने भी अपना गाऊन उतार दिया और नंगी हो गई। किशोर का जवान लन्ड देख कर मेरी चूत में पानी उतरने लगा।

सोनल भी जवान लड़की थी… उसके जवान जिस्म को देख कर कोई भी पिघल सकता था। किशोर सोनल से लिपट गया। और उसे बिस्तर पर पटक दिया। उसके ऊपर चढ गया और बेतहाशा चूमने लगा। दोनों का जोश देखते ही बनता था। एक दूसरे मे समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे। पर हाँ सोनल अपनी चूत से उसके लन्ड को दूर रख रही थी। किशोर जैसे ही अपना लन्ड उसकी चूत पर दबाता वो चूत को झटका दे कर हटा देती थी।

ये सब देख कर मेरी वासना बढती जा रही थी। मैंने अपनी चूत में दो अंगुलियाँ डाल ली और अपनी चूत चोदने लगी। मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। अब मैंने सोचा कि पहले इन्हें निपटा दूं। मैं उठी और दोनों को सहलाने लगी। फिर मैंने सोनल के चूत का दाना धीरे धीरे मलना शुरु किया। सोनल को और मस्ती चढने लगी। मैं घिसती रही…मलती रही… इतने में सोनल झड़ने लगी… मैंने हाथ हटा लिया… उसकी चूत में से पानी आ रहा था… इसी दौरान किशोर का लन्ड मैंने सोनल की चूत पर रख दिया। किशोर तो जोश में था ही… उसका लन्ड सोनल की चूत में उतर गया…

सोनल तड़प उठी…’अरे ये क्या… हटो…हटो… उसने जल्दी से उसका उफ़नता हुआ लन्ड चूत से निकाल दिया…

किशोर भी तडप उठा… उसे तो अब चूत चाहिये थी… सोनल अलग हट कर उठ गई।

‘देखो…मैम…मैंने मना किया था…तब भी इसने क्या कर डाला…’

‘कोई बात नहीं सोनल…ला मैं इसे सम्भालती हूं…’ मैंने अपनी बारी सम्हाली और किशोर को दबोच लिया और उसे अपने नीचे दबा लिया… उसके खड़े लन्ड पर मैंने अपनी चूत रख कर दबा दी… आऽऽऽऽऽअह्ह्ह्ह्ह…लन्ड मेरी चिकनी चूत मे धंसता चला गया… किशोर ने भी अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठा दिए… और उसका लन्ड पहले झटके में ही जड़ तक बैठ गया। मेरे मुख से आनन्द के मारे सिसकारी निकल पड़ी…

ना जाने कब से मैं इस चुदाई का इन्तजार कर रही थी। मैंने अपने चूतड़ थोड़े से ऊपर उठाये और दूसरा झटका दिया…फ़च की अवाज के साथ लन्ड गहराई तक चोद रहा था। किशोर आनन्द के मारे नीचे से झटके मार रहा था। दोनों ही हर झटके पर आहें भरते थे… सोनल भी हमे देख कर उत्तेजित होने लगी थी… शायद उसने ऐसी चुदाई पहली बार देखी थी। उसने अपनी एक अंगुली मेरी गान्ड में फ़ंसा दी और गोल गोल घुमाने लगी। मैं तो इस डबल चुदाई से मस्त होने लगी। दोनों तरफ़ से मजा आने लगा था।

‘सोनल…मजा आ रहा है…क्या मस्त लन्ड है…’

‘मैम आपकी चूत बड़ी प्यारी है… देखो ना लन्ड सटासट अन्दर बाहर जा रहा है…’

‘चोदे जा मेरे राजा… हाय… मैं तो मर जाऊँगी राम…’

किशोर ने मेरी चूंचियाँ मसल मसल कर बेहाल कर दी थी… अब मैं अति उत्तेजना का शिकार होने लगी… मुझे लगा कि अब मैं झड़ जाऊँगी। मेरे धक्के अब जोर से और अन्दर तक दबा कर जा रहे थे। और अचानक मेरा बदन लहरा उठा… और मेरा रस निकलने लगा। मैंने उसके लन्ड पर अपनी चूत गड़ा दी…और उस पर पूरी झुक गई।

‘सोनल प्लीज… मेरी गान्ड से अंगुली निकाल दे…’ सोनल ने अंगुली बाहर निकाल दी। मैंने किशोर से अपने बोबे जोर लगा कर छुड़ा लिये। पर मुझे वो छोड़ने को तैयार नहीं था…

‘किशोर… देख सोनल तेरा इन्तजार कर रही है… अब छोड़ दे मुझे…’ सोनल के नाम ने उस पर जादू सा असर किया।

उसने सोनल का नाम सुनते ही मुझे छोड़ दिया… और प्यार से वो दोनों एक बार फिर से लिपट गये। पर सोनल ये भूल गई थी कि किशोर की चुदाई पूरी नहीं हुई थी। किशोर ने प्यार से सोनल को चिपका लिया और पलटी मार कर अपने नीचे दबोच लिया… चिड़िया फ़ड़फ़ड़ाती रह गई…

सोनल जब तक कुछ समझती तब तक मैंने किशोर का लन्ड सोनल की चूत के छेद पर रख दिया था। किशोर ने धक्का मारा तो सीधा गहराईयों में उतरता चला गया। दूसरे धक्के में लन्ड जड़ तक बैठ गया था। सोनल के मुख से चीख निकलती उससे पहले मैंने उसके मुख पर तौलिया रख दिया।

उसकी झिल्ली फ़ट चुकी थी। सोनल को मालूम हो गया था कि उसका कौमार्य जाता रहा था। मैंने अब उसके मुँह से तौलिया हटा लिया था। उसके आंखों में आंसू आ गये थे। मैंने तौलिया अब सोनल की चूत के नीचे रख दिया था। खून बाहर आने लगा था। मैं उसे पोंछती जा रही थी।

किशोर इन सभी बातों से बेखबर तेजी से चुदाई कर रहा था… किशोर अब हाँफ़ने भी लगा था… सोनल भी अब सामान्य होने लगी थी। उसे भी अब मजा आने लगा था। मैंने देखा कि अब सोनल के चूतड़ भी धीरे धीरे उछलने लगे थे और चुदाई में साथ दे रहे थे…

मैंने सोनल कि चूंचियाँ मसलनी चालू कर दी… उसके निपल को भी घुमा घुमा कर हल्के से खींच रही थी। सोनल की सिसकरियाँ निकलने लगी थी। उसकी आहें तेज हो गई थी। वो बार बार किशोर को अपनी ओर खींच रही थी। इतने में सोनल चरमसीमा पर पहुंचने लगी। उसके मुख से अस्पष्ट शब्द निकलने लगे थे।’मांऽऽऽऽऽऽरी… मर जाऊँगी… हाय चोद दे… राम रे…’

मैं उसकी चूंचियों को और जोर से मसलने लगी… सोनल के चेहरे का रंग बदलने लगा… अपने होंठ बार बार काट रही थी… अचानक उसका शरीर ने एक ऐठन ली और आहाऽऽऽऽऽ करते हुए वो झड़ने लगी…मैंने उसकी चूंचियाँ छोड़ दी।

किशोर भी अब गया! तब गया! हो रहा था… अचानक उसने भी अपने लन्ड का जोर चूत पर लगा कर पिचकारी छोड़ दी… दोनों ही साथ साथ झड़ रहे थे… किशोर और सोनल दोनों ने आपस मे एक दूसरे को जोरों से जकड़ लिया था। कुछ ही समय बाद दोनों ही निढाल पड़े थे। और हाँफ़ रहे थे। सोनल की चूत में से अब धीरे धीरे वीर्य निकलने लगा था… मैंने तौलिया उसकी चूत के नीचे घुसा दिया… किशोर बिस्तर से नीचे उतर आया और अपने कपड़े पहनने लगा। सोनल थोड़ी गम्भीर लग रही थी।

‘दीदी मेरी तो झिल्ली फ़ट गई ना… अब क्या होगा…’

‘क्यो घबराती है…झिल्ली फ़टने के बहुत से कारण होते हैं…’ मैंने उसे बताया… खेलने से… साईकल चलाने से… किसी एक्सीडेन्ट से झिल्ली फ़ट सकती है…इसलिये डरने की कोई बात नहीं है।

‘और फ़िर तुम्हारी उमर अब चुदाने की हो गई है… तो अब इसे फ़ट जाने दो और जिंदगी का मजा लो…’

‘मैम हम क्या आपके पास रोज़ ट्यूशन पढने आ सकते हैं…?’ सोनल ने घुमा कर प्रश्न पूछा।

‘हा… जरूर अगर पढ़ना हो तो फ़ीस लगेगी एक की 500 रू और अगर आज जैसी पढाई करनी हो तो 250 रू…’

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