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हाय मेरा नाम राकेश है।मेरी वर्तमान Antarvasna उम्र ३५ साल है। मैं अपनी किशोरावस्था से बहुत ही सेक्सी रहा हूँ। मैं अभी इंदौर मैं रहता हूँ। मैंने आज तक करीब ५० से ऊपर लड़की और आंटी के मजे लिए हैं और उनकी चूत को अपने लंड के दर्शन कराये हैं।
मेरे साथ घटी एक घटना आपको बता रहा हूँ, कहानी सच्ची है पर पात्रों के नाम बदल कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और मेरी उम्र २७ साल थी।
एक दोस्त के माध्यम से एक मुस्लिम परिवार में आना जाना था। पाँच लोगों का परिवार था वो। पति सलीम ट्रक ड्राईवर जो ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था जिसको मैंने कभी घर पर नहीं देखा और न ही उसकी शकल जानता हूँ। पत्नी शबनम, थोड़ा सांवला रंग पर कसा हुआ बदन ३४-२८-३६ उम्र उस समय ३६-३७, बड़ी लड़की शमीम उमर १८, रंग साफ़ ३०-२८-३४ दिखने में साधारण उससे छोटी बानो, और सबसे छोटा लड़का उम्र १० साल मैं एक बार उनके घर गया तो शबनम ने कहा कि घर मैं तंगी है इसलिए शमीम को कहीं नौकरी लग जाए तो अच्छा रहेगा। मैंने मेरे ऑफिस में उसको नौकरी पर रख लिया। मैं उस वक्त तक उनके बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोचता था।
करीब एक महीने तक उसने मेरे यहाँ काम किया उसके बाद २-३ दिन वो आई नहीं, मैंने भी ध्यान नहीं दिया, एक दिन मैं मार्केट मैं था तो मुझे शमीम जाती हुई दिखी। मैंने बाईक उसकी तरफ़ मोड़ी और उससे पूछा कि क्या बात है तुम ऑफिस नहीं आ रही हो?
तो उसने बोला कि तबियत ठीक नहीं थी, और अभी आप मुझे घर छोड़ दो।
मैंने उसे बाइक पे बिठा लिया, इससे पहले मैंने कभी उसे बाइक पर नहीं बिठाया था। उसके बैठते ही उसके मम्मे मेरी पीठ पर गडे। मेरा लंड खड़ा हो गया।उसका घर दूर था हम बात करते हुए चल रहे थे, रास्ते में सिनेमा हॉल आया तो मैंने उसे पूछा कि पिक्चर देखनी है ?
उसने हाँ कर दी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही गया था सो उसे ठंडा करना जरूरी भी था। सिनेमा हॉल में मुश्किल से ३० लोग भी नहीं थे। हमने कोने की सीट पकड़ी और बैठ गए। पिक्चर चल रही थी कि मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने सिग्नल ग्रीन समझ कर धीरे से उसके मम्मों पर हाथ रख दिया उसने उसका भी कोई प्रतिवाद नहीं किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई, इधर पैंट में लंड कड़क होने लगा था।
मैंने धीरे -२ उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिए उसे भी अच्छा लग रहा था। धीरे से मैं अपने हाथ उसके कुरते के अन्दर ले जाकर उसकी ब्रा के ऊपर और अन्दर से उसके निप्पल और गोलाई के मजे लेने लगा। पर दोस्तों ! मजा अभी भी अधूरा था।
तो मैंने धीरे से उसकी सलवार में हाथ डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ चलाने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा था पर वो शायद पहल करने में अभी भी शरमा रही थी। मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड जो अब तक काफी तगड़ा हो चुका था बाहर निकल लिया
और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लंड पर रख दिया, वो शायद इसका ही इंतजार कर रही थी।
इधर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। वो भी मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहला रही थी। मैं कभी उसके दूध दबाऊं और कभी उसकी चूत में उंगली डालूँ।
दोस्तों मुझे बिल्कुल भी अपनी तकदीर पर विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसे अकस्मात मुझे उस लड़की का सब कुछ मिल जाएगा जिसे मैंने कभी इस नज़र से देखा ही नहीं।
इधर उसके हाथ मेरे लंड पर कसावट के साथ चलते जा रहे थे और दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ जो उसकी चूत में था उसको पकड़ लिया और मेरे हाथ को वो अपनी चूत में तेज़ी से अन्दर बाहर करने लगी। उसकी चूत ने थोडी देर में ही पानी छोड़ दिया जिसे उसने अपने रुमाल से पोंछ लिया। अब उसकी बारी थी मैंने उसे मेरा लंड मुंह में लेने के लिए बोला तो उसने ना कर दिया। फिर वो मेरी तरफ़ इस तरीके से मुड़ गई कि मैं उसके दूध पी सकूं मैंने उसके दूध पीने शुरू कर दिए, इधर उसने मेरे लंड पर अपना हाथ और तेज़ कर दिया जिससे मेरा पानी निकल जाए पर कमबख्त पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।
फिर मैंने उसकी सलवार उतार कर घुटने तक कर दी और पैंटी नीचे खिसका कर उसे इस तरह से बिठाया कि उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर आ जाए। मैंने उसे इस पोसिशन में बिठाकर नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए मेरा लंड उसकी चूत में अन्दर तक गया था, वो भी मेरे लंड के मज़े लेने लगी इधर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके मम्मे दबाना और मसलना जारी रखा। करीब तीन मिनट की उछल कूद के बाद उसने अपनी गांड मेरे लंड पर दबा ली और मेरी जाँघों पर अपने हाथ कस लिए। मैं समझ गया कि ये अब जाने वाली है, मैंने भी अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल कर उसके मम्मे दबाते हुए अपना पानी निकाल दिया।
उसके बाद हमने अपने-२ रूमाल से अपने लंड और चूत साफ़ किए और सामान्य होकर बैठ गए। उसने बोला कि अब आप मेरे को घर छोड़ दो क्योंकि घर पर मेरा इंतज़ार हो रहा होगा। उसने मुझे ये भी बोला कि घर पर मत बताना कि हम पिक्चर गए थे। दोस्तों मुझे चुदाई का शुरू से ही बहुत शौक रहा है। अभी मैं चाहता हूँ कि नई चूत चोदने के लिए मिले ! अगली बार आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने शबनम और उसकी बेटी की एक ही पलंग पर रात भर चुदाई की। मेरी अगली कहानी का इंतज़ार करें ! Antarvasna
मेरा नाम अमन है। मैं गुड़गाँव, हरियाणा का Hindi Antarvasna Stories रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 37 साल है। मेरी शादी को लगभग 12 साल हो गए। मेरा एक बेटा है जो लगभग 10 साल का है। वो देहरादून बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। मैंने बी. एस. सी. (जीवविज्ञान) और फिर बी. फार्मेसी किया। अपनी इस लम्बी पढ़ाई और कॉलेज-जीवन में मैंने अपनी कई गर्लफ्रेण्ड के साथ सम्भोग का आनन्द लिया। बड़े मज़े के दिन थे वो…
अब मैं आपको अपनी अगली सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। जल्दी ही मेरी अन्य कहानियाँ भी आप के सामने आने वालीं हैं। तो मित्रों, आनन्द लें। पर पढ़ने के बाद मुझे प्रतिक्रिया-स्वरूप मेल अवश्य करें।
मेरी यह कहानी शत-प्रतिशत सत्य है जो आप लोगों को एकदम अपने क़रीब लगेगी। उस समय मैं और सपना सिर्फ 18 वर्ष के थे। ख़ैर अब आगे…
मेरा अगला सम्भोगानुभव सपना के साथ था। सपना छोटे क़द की, भरे जिस्म की और बड़ी-बड़ी चूचियों वाली सुन्दर लड़की थी।
हमने अपना मकान दोमंज़िला बना लिया। हम लोग ऊपर वाले नए मंजिले में आ गए। नीचे की मंजिल किराए पर दे दिया। सपना के पापा ने मकान किराए पर लिया। सपना मेरे मक़ान में अपने माता-पिता, एक बड़ी बहन, और एक छोटे भाई के साथ किराए में रहती थी। सपना के पिता टेलीफोन ऑफिसर थे। सपना दिल्ली में श्रीराम कॉलेज से वाणिज्य- प्रथम वर्ष की छात्रा थी। सपना की बड़ी बहन दिल्ली में नौकरी कर रही थी। उसका छोटा भाई गुड़गाँव में स्कूल से दसवीं कर रहा था। मैं उस समय गुड़गाँव में कॉलेज से बी. एस. सी. प्रथम वर्ष में था। सपना और मैं एक ही मक़ान में होने के कारण हम अक्सर ही मिलते तथा कम ही बात कर पाते थे।
कुछ दिनों के बाद सपना की बहन का रिश्ता तय हो गया। सपना की बहन की सगाई से शादी तक लगभग तीन महीने में कई आयोजन हुए और सारे आयोजनों में मैंने और मेरे घरवालों ने सपना के घरवालों की पूरी मदद की। इसी सब के कारण मैं और सपना काफ़ी क़रीब आ गए। मैं और सपना कभी-कभी किसी ना किसी बहाने से अक्सर एक-दूसरे के यहाँ आने-जाने लगे थे। सपना की मुझ से बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। मैं और सपना एक-दूसरे को दिल से चाहने भी लगे थे। शादी के बाद सपना की बहन अपनी ससुराल चली गई। जिस वज़ह से सपना बहुत उदास रहने लगी। मैं अक्सर उसे खुश करने की कोशिश करता। उसका ध्यान बँटे इसलिए मैं उसे कैसेट में रोमांटिक गाने रिकॉर्ड करवा देता। सपना को मेरी गानों की पसन्द बहुत पसन्द आती।
मैं और सपना एक-दूसरे के काफी क़रीब आते जा रहे थे। अब मैं कभी-कभी सपना के साथ बस में दिल्ली उसके कॉलेज जाता और उसे कॉलेज छोड़कर वापिस आ जाता। कभी-कभी मैं और सपना कॉलेज में अनुपस्थित होकर दिल्ली में बुद्धा गार्डन में सारा दिन बैठकर बातें किया करते।
कभी-कभी मैं और सपना दिल्ली में कनॉट प्लेस में ओडियन या प्लाज़ा सिनेमा में कोई रोमांटिक फिल्म देखते। कभी-कभी जब मेरा कॉलेज जल्दी छूट जाता तो मैं दिल्ली सपना के कॉलेज चला जाता और फिर हम दोनों कुछ देर किसी रेस्तराँ में बैठ कर कोल्ड-ड्रिंक पीते या आईसक्रीम खाते और साथ-साथ गुड़गाँव वापस आ जाते। फिर बस-स्टॉप से हम अलग-अलग थोड़ी-थोड़ी देर में घर वापस आ जाते। बड़े मज़ेदार दिन थे वो।
फिर गर्मियों की छुट्टियों में कॉलेज बन्द हो गए। मैं और सपना घर पर ही मिलने लगे। मैं अक्सर घर पर अकेला होता था। मम्मी-पापा तो पहले से ही स्कूल में थे। दीदी ने भी बी. एड. करने के साथ-साथ एक जगह काम भी करना शुरु कर दिया। मैं सारा दिन लगभग 4 बजे तक अकेला घर में रहता। इसलिए अक्सर सपना ही किसी बहाने से ऊपर मेरे यहाँ आती और फिर हम दोनों एक-दूसरे से लिपट-चिपट कर एक-दूसरे को चूमते। फिर एक-दूसरे को बाँहों में भर कर चूमने से बात आगे बढ़ कर एक-दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। सपना अधिकतर स्कर्ट-टॉप पहनती थी। इसलिए मैं सपना के टॉप या टीशर्ट के ऊपर से ऊसकी चूचियों को दबाने और फिर स्कर्ट के ऊपर से उसकी चूत को दबाने और फिर स्कर्ट के नीचे से अन्दर से हाथ डाल कर उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया।
मैं अधिकतर टीशर्ट और लोअर पहनता था। मैं अपने लोअर की ज़िप या जिन लोअर में ज़िप नहीं होती थी उन्हें ज़रा सा नीचे सरका कर अपना लण्ड निकाल कर सपना के हाथ में थमा देता। सपना भी मेरे लण्ड को बेझिझक अपने हाथ में थाम लेती और हल्के-हल्के दबाती या मुट्ठी में भर कर हिलाती और आगे-पीछे करती। कुछ दिन बाद तो वो ख़ुद ही मेरे लोअर की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।
ये सारी बातें लगभग 10-15 मिनट तक चलती। हम दोनों बेहद गरम हो जाते और मेरे लण्ड और सपना की चूत से पानी निकल आता। लेकिन फिर भी हम एक नहीं हो पाते और ना ही कोशिश भी करते, क्योंकि सपना की मम्मी बड़ी शक्की थी और जैसे ही सपना को ऊपर आए हुए 10-15 मिनट हो जाते तो वो नीचे से आवाज़ लगानी शुरु कर देती या सपना के भाई को ऊपर भेज देती। फिर भी हम दोनों ये सब लगभग एक महीना तक करते रहे। मगर चाहते हुए भी सहवास न कर सके।
एक दिन तो हम दीवार से लग कर खड़े हो गए और मैंने सपना की स्कर्ट के नीचे से अन्दर हाथ डाल कर उसकी पैन्टी को उतार कर नीचे उसके पैरों में गिरा दिया। फिर मैंने उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने के बाद उसकी चूत के भग्नों को रगड़ना शुरु कर दिया।
जब उसकी चूत से चिकना-चिकना सा निकलने लग गया तो मैंने खड़े-खड़े अपना लण्ड उसकी चूत की फाँकों के बीच में फँसा कर ऊपर-ऊपर से धक्के मारने शुरु कर दिए। मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर तो नहीं जा सका, सिर्फ ऊपर से उसकी चूत के भग्नों को रगड़ता रहा। लेकिन उस दिन हम दोनों ख़ूब झड़े।
उस दिन ये सब करके बहुत मज़ा आया और हम एकांत में मिलने का बहाना ढूँढ़ने लगे। उसके बाद वो दिन आया जब हमने जम कर सेक्स के मज़े लूटे। सपना की दीदी और जीजाजी घर आए और वो उसकी मम्मी को लेकर मार्केट चले गए। वो लोग सपना को भी ले जाना चाहते थे लेकिन उसने सिर दर्द का और सोने का बहाना कर दिया।
उसका भाई पिछले कई दिनों से दिल्ली अपने मौसी के यहाँ गया हुआ था। उनके जाते ही उसने मुझे फोन कर दिया। मैंने उसे ही ऊपर आने को कहा, लेकिन उसने मुझे ही नीचे आने की ज़िद की। मैं नीचे आ गया। फिर मुख्य-द्वार बन्द करके मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके माथे को और फिर उसके गालों को चूमने लगा। सपना ने सफेद गाउन पहना हुआ था।
सपना बोली ‘बड़े बेसब्र हो रहे हो। रुको पहले मैंगोशेक पिएँगे। मैंने बना रखा है। ओह प्लीज़ छोड़ो मुझे।’
मैंने सपना को छोड़ने की बजाय उसे और ज़ोर से पकड़ लिया और गाउन के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाता हुआ बोला ‘सपना मेरी जान, आज मैंगोशेक नहीं, मुझे तो इनका शेक पीना है।’
सपना बोली ‘बड़े बेसब्रे हो। अच्छा चलो बेडरूम में चलते हैं।’
मैंने सपना को छोड़ दिया। सपना भागकर बेडरूम में घुस गई और दरवाज़े के पीछे छिपने का नाटक करने लगी। मैं अन्दर आ गया और फ़िर मैंने बेडरूम का भी दरवाज़ा बन्द कर दिया।
अब मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने अपने जलते हुए होंठ सपना के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सपना ने भी मुझे अपनी बाँहों में कस लिया।
मैं बोला ‘ओह सपना, कितने दिनों के बाद आज मौक़ा मिला है, तुम्हें अपनी बाँहों में भरने का। आई लव यू, आई लव यू सो मच।’
सपना बोली ‘हाँ अमन, सच कितने दिन हो गए, तुम्हारी बाँहों में आए हुए। मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।’
फिर मैं सपना का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर के पास लाया और उसे धकेल कर बिस्तर पर गिरा दिया। फिर उसके ऊपर लेट कर उसके गालों को चूमने लगा। फिर मैं उसके बगल में लेटकर उसके गाउन के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा। उसकी फूली हुई चूत उसके गाउन के ऊपर से भी महसूस हो रही थी। फिर मैं उसके गाउन के ऊपर से पावरोटी की तरह उभरी और फूली हुई उसकी चूत को दबाने लगा। फिर मैं बिना देर किए उसके गाउन को उतारने लगा।
सपना बोली, ‘ये क्या कर रहे हो? प्लीज़ इसे मत उतारो। प्लीज़ छोड़ो मुझे। मुझे डर लगता है।’
मैंने सपना से कहा ‘सपना, मेरे होते हुए डरने की क्या बात है! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। देखो सपना, मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ। तुम्हें दिल से चाहता हूँ। तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ। आज मुझे तु्म्हें जी भरकर प्यार करने दो। अगर कोई आ गया तो मेरा मूड बहुत ख़राब हो जाएगा। इसलिए पहले हम एक दूसरे को जी भरकर प्यार करेंगे। फिर आगे कोई बातें करेंगे और तुम्हारा बनाया मैंगोशेक पीएँगे।’
यह कह मैंने कुछ हद तक ज़बर्दस्ती ही उसका गाउन उतार कर फेंक दिया। सपना ने गाउन के नीचे लाल रंग की पारभासी ब्रा और पैन्टी का सेट पहना हुआ था। इस सेट में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
पारभासी ब्रा में से उसकी गोरी-गोरी चूचियाँ आधे से अधिक नज़र आ रहीं थीं और लाल पारभासी पैन्टी में से उसकी चूत के बाल तक नज़र आ रहे थे। सपना को इस तरह से देख कर मैं पागल हो गया और मैंने उठ कर अपने सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए और फिर मैं मुख्य बत्ती बन्द करके सिर्फ चड्डी में सपना से लिपट गया। कमरे में खिड़की के परदों से हल्की रोशनी आ रही थी।
मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने अपनी टाँगें सपना की टाँगों पर रख दीं और अपने जलते हुए होंठो उसके होंठों पर रख दिए। मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा। सपना ने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया।
मेरे हाथ सपना के भरे-पूर जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने सपना को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। फिर उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सपना के मुँह से आह निकलने लगी। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डालकर उसकी सख्त हो चुकी चुचियों को दबाने लगा।
फिर मैंने उसे अपनी ओर करवट दिला कर अपनी बाँहों में कस लिया और उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराने लगा। उसकी पीठ पर हाथ फिराते-फिराते मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और फिर आराम से उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराने लगा। पीठ पर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपना हाथ उसकी चड्डी में घुसा दिया और उसके बड़े-बड़े चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा। सपना मेरे से लिपटी हुई थी। उसने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भरा हुआ था।
कुछ देर बाद मैंने उसे अपने से अलग करके बिस्तर पर सीधा लिटा दिया औऱ फिर मैंने उसकी ब्रा भी खींच कर उसके तन से जुदा कर दी। सपना ने कोई विरोध तो नहीं किया पर अपनी चूचियाँ अपने हाथों से ढक ली।
मैं ज़ोर लगा उसके हाथों को उसकी चूचियों से हटा कर उसकी गोरी-गोरी और बड़ी-बड़ी सख्त चूचियों को दबाने लगा। साथ-साथ उसकी भूरी घुण्डियों को भी हल्के-हल्के मसलने लगा।
फिर मैं उसकी नरम-नरम गोरी-गोरी चूचियों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सपना के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं। फिर मैं उसकी चूचियों को चूसता हुआ उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को सहलाने और दबाने लगा। सपना ने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं।
फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर उसकी बड़ी-बड़ी झाँटों के भँवर में अपना हाथ फिराने के बाद मैं उसकी पैन्टी को उतारने लगा।
सपना ने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली ‘क्या करते हो! प्लीज़ इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।’
मैंने कहा ‘सपना मेरी जान, डरने वाली क्या बात है। ये तो प्यार है। आज सारे कपड़े उतार कर लिपट-चिपट कर ख़ूब प्यार करेंगे।’ यह कह कर मैं फिर उसकी पैन्टी को उतारने लगा।
सपना ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली ‘प्लीज़ इसे मत उतारो। क्या कर रहे हो? मुझे बहुत शरम आ रही है।’
मैंने कहा ‘अपनी आँखें बन्द कर लो। नहीं आएगी।’
सपना ने सचमुच अपनी आँखों पर अपना हाथ रख लिया और मैंने उसकी पैन्टी उतार कर अलग कर दी। सपना का कुँवारा नंगा बदन कमरे की हल्की-हल्की रोशनी में चमकने लगा।
मैं उसे निहारने लगा। उसके हाथ उसकी आँखों पर थे। उसके फूले हुए गुलाबी होंठ, तनी हुई बड़ी-बड़ी चूचियाँ, सपाट चिकना पेट, पेट के बीच गहरी नाभी, टाँगों के बीच में पावरोटी की तरह फूली हुई उसकी चूत, चूत के ऊपर काले घने घुँघराले बाल, केले के पत्ते की तरह चिकनी-चिकनी उसकी टाँगें। मैं एकटक उसे देखता ही रह गया।
कुछ देर बाद उसने अपनी आँखों पर से अपना हाथ हटा लिया और पूछा ‘क्या देख रहे हो?’
मैंने कहा ‘ओह सपना, तुम कितनी सुन्दर हो। तुम्हारी ख़ूबसूरती को अपनी आँखों में क़ैद कर रहा हूँ।’ यह सुनकर सपना शरमा गई और पलट कर पेट के बल लेट गई और अपना चेहरा बिस्तर में छुपा लिया। उसके ऐसा करने से उसके बड़े-बड़े चूतड़ उभर कर आ गए। उसे इस तरह से देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया।
मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और चड्डी फाड़ कर आने को हो रहा था। मैंने चड्डी उतार कर फेंक दी। फिर मैं सपना के ऊपर आकर लेट गया। मेरा लण्ड तन कर सपना के दोनों चूतड़ों के बीच टाँगों में घुस गया। मैं सपना के ऊपर आकर लेट कर उसकसे कन्धों को और गर्दन को चूमने लगा। फिर धीरे-धीरे अपनी कमर उठा कर अपना लण्ड सपना के चूतड़ों से रगड़ने लगा।
थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हट कर बगल में लेट गया और मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और एक हाथ उसकी चूचियों पर रख उसे दबाने लगा।
वो गरम होने लगी थी, मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबाने लगा। फिर मैंने सपना को अपने साथ-साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड उसकी झाँटों से टकरा रहा था। मैं सपना की चिकनी टाँगों पर हाथ फिराने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और मुझसे ज़ोर से लिपट गई। मैं भी उससे लिपट गया।
फिर मैंने उसको ख़ुद से अलग करके बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया और चूमना शुरु कर दिया। कुछ मिनटों तक मैं उसे चूमता रहा। मेरा हाथ सपना के जिस्म पर फिर रहे थे। फिर मैं थोड़ा नीचे सरका।
मेरे नीचे सरकते ही उसकी दूध सी चूचियाँ उछल कर मेरे नीचे से बाहर आ गए। मैं उन गोरी-गोरी सख्त चूचियों को दबाने लगा। उसकी घुण्डियों को मुँह में भर लिया और चूसने लगा। फिर मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए साथ-साथ उसकी गुलाबी घुण्डियों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।
सपना के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। वो हल्के हल्के आह अमन… ओओओहहहहह… आआहहह… सिस्स्स… आह्ह्ह्ह… आआआह्हह्हा…… आआआहह्ह… कर रही थी। मैं उसकी चूचियों को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूसता रहा।
फिर मैं उसकी पावरोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। सपना ने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं। मैं उसके चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत के बालों को अपने मुँह में भर लिया। वो सिसकारी भर रही थी।
उसके मुँह से ‘आआह्ह ओअहाआह्ह्ह अस्सशहस आअह्हस्सस्स स्सशाआ आआहस्सह्हस अहहह ह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्हह्हाआ ह्हह्हाहह’ निकल रहा था।
फिर मैंने सपना का हाथ पकड़ कर अपने खड़े हुए लण्ड पर रख दिया। सपना ने बिना झिझक मेरे लण्ड को अपने हाथ में थाम लिया और उसे हल्के-हल्के दबाने लगी। फिर वो मेरे लण्ड को मुट्ठी में भरकर हिलाने और आगे-पीछे करने लगी। वो मेरे लण्ड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लण्ड को ठीक तरह से पकड़ सके। वो मुझसे पूरी तरह से सटे हुए मेरे लण्ड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।
मैं सपना की चिकनी टाँगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं सपना की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराता-फिराते मैंने अपनी ऊँगलियाँ सपना की चूत के अन्दर डाल दीं। फिर मैं ऊँगलियों से सपना की चूत के दोनों फाँकों को खोलने और बन्द करने लगा। सपना ने मेरा लण्ड छोड़ कर अपनी आँखें बन्द कर लीं। फिर मैं अपनी एक ऊँगली से सपना की चूत के भग्नों को रगड़ने लगा। सपना के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मेरे सब्र का बाँध टूट रहा था। अब मैं सपना की चूत मारने को बेताब हो रहा था।
मैं रनू के ऊपर आकर लेट गया। सपना का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दब गया। फिर मैंने सपना की टाँगें खोलकर अलग कर दी। सपना की टाँगें खोलने से उसकी चूत की पंखुड़ियाँ खुल गईं और उनके बीच से उसकी गुलाबी चूत दिखने लगी। फिर मैंने अपने आप को सपना की टाँगों के बीच में सेट किया और अपने लण्ड को मुट्ठी में भर कर सपना की गुलाबी चूत के गुलाबी भग्न को ऊपर-नीचे करके रगड़ने लगा। सपना के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं।
कुछ देर बाद सपना की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। सपना ने मस्त होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं थीं और हाथों से बेडशीट को पकड़ रखा था। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए अपने लण्ड को मुट्ठी में भर उसकी चूत के भग्न को ऊपर-नीचे रगड़ता रहा। सपना की चूत में से कुछ चिकना सा निकलने की वज़ह से मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत के भग्नों के ऊपर-नीचे फिसल रहा था।
कुछ देर बाद मैंने यह सोचकर कि कहीं सपना ऐसे ही ना झड़ जाए, अपने हाथ से लण्ड को पकड़ॉ कर उसकी चूत के ठीक निशाने पर लगा दिया और एक हल्का सा धक्का दिया। पहले ही धक्के में मेरे लण्ड का सुपाड़ा सपना की चूत के अन्दर चला गया। सपना के मुँह से आह निकली और उसने हाथों से बेडशीट को कस कर पकड़ लिया और अपना मुँह दूसरी ओर घुमा कर फिर से अपनी आँखें भी कसकर बन्द कर लीं। मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड सपना की चूत में समा गया। सपना के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
इससे पहले कि सपना सम्भले या करवट बदले, मैंने तीसरा और आख़िरी धक्का लगाया और मेरा पूरा का पूरा लण्ड सपना की मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। सपना के मुँह से एक ज़ोर की आह सी निकली और उसने बेडशीट को छोड़कर मुझे अपनी बाँहों में पूरी ताक़त से कस लिया। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से समा गए।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही सपना के अन्दर समाए हुए उसके ऊपर लेटा रहा। फिर मैंने भी सपना को अपनी बांहों में भर लिया। फिर मैंने अपने जलते हुए होंठ सपना के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठो में भर कर चूसने लगा ताकि वह अपना दर्द भूल जाए और सामान्य हो जाए।
सपना को वाक़ई इससे कुछ राहत मिली और उसने भी मेरे होंठों को अपने होंठों से चूमना शुरु कर दिया और अपनी कमर भी हल्के-हल्के हिलानी शुरु कर दी।
मेरा पूरा लण्ड उसकी चिकनी चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। हम दोनों ने एक-दूसरे को इस क़दर अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से ना निकल सके।
सपना का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था।
मेरी टाँगें सपना की टाँगों के बीच फँसी हुई थीं। मैं सपना के होंठों को चूसना छोड़ कर उसके माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर उसके गोरे और नरम-नरम गालों को चूमने लगा। सपना भी मेरे गालों को अपने नरम-नरम होंठों से चूमने लगी।
कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे।
फिर मैंने सपना से पूछा ‘ठीक लग रहा है? कोई दिक्क़त तो नहीं हो रही है?’
सपना बोली ‘नहीं, ठीक लग रहा है। कोई दिक्क़त नहीं है। आई लव यू अमन।’
मैंने कहा ‘मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ सपना। तुम मेरी जान हो। तो फिर करें क्या?’
सपना ने कहा ‘हाँ अमन, मगर थोड़ा धीरे-धीरे करो।’
यह सुनकर मैंने अपने लण्ड को धीरे से सपना की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर धीरे से वापस अन्दर घुसा दिया। सपना ने कोई ऐतराज़ नहीं किया। इसलिए मैं अब धीरे-धीरे अपने लण्ड को सपना की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
कुछ देर तो मैं ऐसे ही सपना को धीरे-धीरे चोदता रहा। बाद में मैंने उसकी टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ लीं और अपनी कमर के दोनों ओर लपेट लीं। मैंने फिर से अपने लण्ड को धीरे-धीरे सपना की चूत के अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।
सपना की टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ने की वजह से अब मेरा लण्ड सपना की चूत की गहराई तक आ जा रहा था। मैं आराम से अपना पूरा लण्ड सपना की चूत से बाहर खींचता और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा देता। इस तरह कुछ देर तो मैं ऐसे ही उसे धीरे-धीरे चोदता रहा। फिर सपना ने मुझसे अपनी रफ्तार बढ़ाने को कहा। मैंने रफ्तार बढ़ा दी और तेज़ी से उसकी चूत में लण्ड पेलने लगा।
अब सपना को भी पूरी मस्ती आ रही थी और वो भी नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरे हर झटके का जवाब देने लगी। सपना की चूत में मेरा लण्ड समाए हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मुझे लग रहा था कि जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया हूँ।
कमरे में हमारी चुदाई की फच्च-फच्च की आवाज़ें गूँज रहीं थीं। सपना ने अपनी टाँगों को मेरी कमर के ऊपर रख कर मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदाई में मेरा साथ देने लगी। मैं भी अब सपना की चूचियों को मसलते हुए ठका-ठक शॉट पर शॉट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था। मैं सपना के ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा।
सपना अपनी कमर हिला-हिला कर, चूतड़ उठा-उठा कर चुदवा रही थी और बोले जा रही थी ‘अह्हह आअह्हह उनह्ह्ह ऊओह्ह ऊऊहह्हह हाआआन हाआऐ मेरे रारअमन्जज्जजा, आआह्ह्ह तेज़-तेज़। आआयीई रीईई तेज़-तेज़ करो, और-ज़ोर से करो मुझे। मेरे अमन्जज्जा’ और वो अपने चूतड़ों को हिलाने लगी।
मैंने लगातार थोड़ा-थोड़ा रुक-रुक कर लगभग 30 मिनट तक उसे चोदा। जब मुझे लगा कि मैं अब डिस्चार्ज होने वाला हूँ। तो मैं रुक कर सपना के ऊपर लेट कर उसे अपनी बाँहों में भर लेता। पिर मैं अपने होंठ सपना के होंठों पर रखकर चूसने लगा। ताकि वह भी सामान्य हो जाए और जल्दी से डिस्चार्ज ना हो। सपना को भी वाक़ई इससे राहत मिलती और वो भी मेरे होंठों को अपने होंठों से चूसना शुरु कर देती। मेरा पूरा लण्ड सपना की चिकनी चूत के अन्दर तक समाया रहता। हम दोनों एक-दूसरे को अपनी बाँहों में जकड़ लेते। दोनों के नंगे जिस्म आपस में चिपक जाते।
सपना अपनी टाँगों को बिस्तर पर फैला लेती क्योंकि शायद अधिक देर तकत अपनी टाँगों को ऊपर उठ कर रखने के कारण वह थक जाती थी। कुछ देर बाद मैं सपना के होंठों को चूसना छोड़ कर उसके माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर उसके गालों पर चूमने लगता। सपना भी मेरे गालों को नरम-नरम होंठों से चूमने लगती। फिर जब सपना अपनी कमर को हिला कर मुझे फिर से उसे चोदने का इशारा करती तो मैं फिर से उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रख कर उसे चोदना शुरु कर देता।
पहले तो मैं सपना को धीरे-धीरे से चोदता। फिर जब सपना मुझे अपनी गति बढ़ाने को कहती तो मैं अपनी गति बढ़ा देता और तेज़ी से उसकी चूत में अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करने लगता।
सपना भी पूरी मस्ती में आकर नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरे हर शॉट का उत्तर देने लगती। सपना की चूत के अन्दर की चिकनाई के कारण मेरा लण्ड उसकी चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर होने लगता। मुझे लगता कि जैसे में स्वर्ग में पहुँच गया हूँ। सपना अपनी टाँगों को मेरी कमर के ऊपर रख कर मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लेती और ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ ऊपर उठा-उठा कर चुदाई में मेरा साथ देने लगती। कमरे में हमारी चुदाई की फच्च-फच्च की आवाज़ें गूँजने लगती।
मैं भी चुदाई के नशे में मस्त होकर बोलने लगता ‘ओह सपना, मेरीईईइइ जानन्न। बड़ाआअ तड़पयययया है तुमनेएएए मुझेएएए। सपनाउउउह्ह मेरीईइ जाननन ये सब करना कितना अच्छा लग रहा है। सच, बहुत ही मज़ा आ रहा है। आज जितना मज़ा कभी नहीं आया। सपना सच बताना, क्या तुम्हें भी मज़ा आ रहा है?’
सपना बोलती ‘अह्हह्ह अमन्ज्ज्ज! उह्हहह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ आ रहा है। बस करते रहो। आज अपनी जान को ख़ूब प्यार दो। आई लव यू अमन। आई लव यू सो मय। प्लीज़ तेज़-तेज़ करो। अब बस मैं होने वाली हूँ। तुम जब होने लगो तो इसे बाहर निकाल देना और प्लीज़ बाहर ही झड़ना। अब करो। तेज़-तेज़ करो।’
अब सपना पूरे जोश के साथ अपनी गाँड को उछाल-उछाल कर मेरा लण्ड अपनी चूत में ले रही थी। मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल-मसल कर उसे चोदे जा रहा था। अब मेरा लण्ड सपना की चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था।
मैं सपना की चूत में अपने लण्ड के तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। हम दोनों ही सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। सपना को भी भरपूर मज़ा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।
उसने मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में थाम लिया। अब वह नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वह अपनी चूतड़ों को पीछे खींच लेती। मैं तेज़ी से धक्के मार कर उसे चोदने लगा।
मैं बिस्तर पर हाथ रख कर सपना के ऊपर झुक कर तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड उसकी चिकनी चूत में तेज़ी से आ-जा रहा था। सपना भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर
आनन्द ले रही थी। मैं उसे पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं अपनी पूरी रफ्तार पर था और कूद-कूद कर उसे चोदे जा रहा था। सपना इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी।
मैंने रुक कर सपना से पूछा ‘सपना, अच्छा लग रहा है क्या?’
सपना बोली, ‘हाँ बहुत ही अच्छा लग रहा है। पर प्लीज़ रुको मत। तेज़-तेज़ करते रहो।’
सपना के मुँह से यह सुनकर मैंने अपनी गति और बढ़ा दी। मैंने उसके चूतड़ों को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज़ शॉट मार कर उसे चोदने लगा।
सपना के मुँह से मस्ती में ‘ओह्ह्हहोहोह सिस्स्सह्ह्ह्ह हाहाह्हआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ अमन, तेज़-तेज़ करो ना।’
मैं सपना के ऊपर लेट गया और मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे और तेज़ी से चोदने लगा। सपना ने भी अपने हाथों से मेरी कमर को जकड़ लिया और अपनी टाँगें ऊपर की तरफ करके मोड़ लीं और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट भी लीं। अब मैं सपना के होंठ अपने होंठों से चूसते हुए उसे और भी तेज़ी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट सपना की चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं सपना की चूत में अपने लण्ड के तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। सपना भी अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसती हुई मज़े से चुदाई का मज़ा ले रही थी। मैं सपना को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूमते हुए कस कर चोदता रहा।
लगभग 5 मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठों को चूसते हुए चुदाई का मज़ा लेते रहे। फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक ज़ोर की आह भरी और बोली ‘अह्ह अमन! उह्ह बस ऐसे ही तेज़-तेज़ करते रहो। ओह अमन, प्लीज़ तेज़ करों। मैंने होने वाली हूँ। करो-करो। और तेज़-तेज़ करो। ज़ोर-ज़ोर से, और ज़ोर से आईएएएए मेरे अमन्जजा। रुको मत, रुको मत। आहहहह… मैं हो गई हाहह्हह्हह।’
फिर अचानक सपना ने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भर लिया। मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी है। मैंने रुक कर उससे पूछा ‘मेरी जान, तुम हो गई क्या?’
सपना ने कहा ‘हाँ अमन, मैं तो हो गई। तुम नहीं हुए क्या?’
मैंने कहा ‘मेरी जान मैं भी होने वाला हूँ। मैं तो बस तुम्हारे होने की प्रतीक्षा कर रहा था। लो बस दो मिनटों में हो जाऊँगा।
सपना बोली ‘प्लीज़ तुम भी जल्दी से हो जाओ और प्लीज़ जब होने लगो तो इसे बाहर निकाल लेना और बाहर ही होना। प्लीज़ मेरे अन्दर मत होना। मुझे डर लगता है।’
मैंने कहा ‘ठीक है मेरी जान। तुम चिन्ता मत करो। मैं बाहर ही होऊँगा।’ और यह कह मैंने फिर से उसकी चूत में अपने लण्ड के ज़ोरदार प्रहार शुरु कर दिए।
मैं भी छूटने वाला ही था, इसलिए मैं लगातार ज़ोरदार प्रहार करके उसकी चूत मारने लगा था। अब मेरा लण्ड उसकी चूत में तेज़ी से आ-जा रहा था। वह निढाल हो चुकी थी और अपनी आँखें बन्द करके मेरे झड़ने की प्रतीक्षा कर रही थी। लगभग 2 मिनट तक उसे काफ़ी तेज़-तेज़ चोदने के बाद जब मैं छूटने लगा तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के बाहर झड़ गया।
मेरा गाढ़ा-गाढ़ा रस मेरे लण्ड से ज़ोरों से छूट कर सपना की झाँटों और पेट पर गिर गया। फिर मैं हाँफते हुए उसकी बगल में उससे चिपक कर लेट गया। सपना चुपचाप आँखें बन्द करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका गोरा बदन, झाँट और उस पर गिरा मेरा रस चमक रहे थे।
कुछ देर तक मैं उसके साथ लेटा रहा और अपनी तेज़ चल रही साँसों को क़ाबू में इन्तज़ार करता रहा। सपना भी चुपचाप मेरे साथ आँखें बन्द करके लेटी हुई थी। मेरा वीर्य सपना के शरीर पर चिपक गया था।
कुछ देर बाद मैंने उठकर अपने अण्डरवियर से सपना की झाँटों और उसके पेट पर गिरे मेरे वीर्य, व साथ ही अपने लण्ड को साफ किया और उसकी बगल में उससे चिपक कर लेट गया। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही चुपचाप लेटे-लेटे अपनी-अपनी साँसों पर नियंत्रण में आने की प्रतीक्षा करते रहे।
कुछ देर बाद मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया और कहा ‘मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ सपना। तुमने मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ ही खुशियाँ भर दीं हैं। तुम बहुत ही लाजवाब हो। मैं चाहता हूँ कि हम दोनों हमेशा के लिए एक-दूसरे के लिए होकर रह जाएँ। मुझे इस प्रेम-क्रीड़ा का अत्यंत आनन्द आया और तुम्हें भी आया ही होगा। जब भी हमे मौक़ा मिलेगा तो क्या तुम मेरे साथ यह पुनः करना पसन्द करोगी?’
सपना बोली ‘ओह अमन हाँ। मुझे तो बहुत ही मज़ा आया और जब भी मौक़ा मिलेगा तो हम फिर करेंगे। लेकिन अमन अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे। अब तुम कृपा करके जाओ।’
मैंने कहा ‘ठीक है मैं जा रहा हूँ।’
यह कह कर मैं सपना के माथे पर, फिर आँखों पर, तथा फिर गालों पर चूमने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। कुछ देर तक मैं इसी तरह से उसको चूमता-चूसता रहा और उसके बालों पर हाथ फिरा कर उसे सहलाता रहा। फिर कुछ देर बाद सपना ने भी अपनी बाँहें मेरी गर्दन में डाल दीं। मैंने भी सपना को अपनी बाँहों में कस लिया। कुछ देर तक हम दोनों एक-दूसरे को इसी क़दर अपनी बाँहों में भरे रहे।
फिर सपना बोली ‘प्लीज़ अमन, अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे। प्लीज़ उठो।’
अब मैंने कोई नख़रा नहीं किया और सपना के यह कहते ही मैंने उठकर अपने कपड़े पहन लिए। सपना ने भी उठकर अपने कपड़े पहन लिए। मैंने कपड़े पहन कर अपनी बाँहें उसकी ओर फैला दीं। सपना भाग कर मेरी बाँहों में समा गई। मैं कुछ देर उसे अपनी बाँहों में भरे हुए उसके बालों पर हाथ पिरा कर उसके सहलाता रहा। सपना कुछ देर तक मेरे सीने से चिपकी रही।
फिर कुछ देर बाद सपना बोली ‘प्लीज़ अमन, अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे।’ मैंने कहा, ‘ठीक है, बाय सपना। मैं जा रहा हूँ।’ कह कर मैं ऊपर अपने यहाँ चला आया।
सपना और उसके घरवाले हमारे यहाँ लगभग डेढ़ साल किराए पर रहे। लेकिन सपना के साथ इस सम्भोगानुभव के लगभग छः माह उपरांत ही वे दिल्ली चले गए। इन छः माहों में मैंने और सपना लगभग 14 बार सम्भोग किया।
फिर सपना के पिता का सोनीपत में स्थानांतरण हो गया और वे सपरिवार दिल्ली चले गए। हमारी बातें अक्सर फोन पर होती रहती। फोन पर ही हम अपने पुराने अनुभवों के बारे में बातें करते।
फोन पर ही कार्यक्रम बन जाता और फिर कभी-कभी मैं और सपना कॉलेज से भाग कर दिल्ली में बुद्धा-गार्डन में सारा दिन बैठकर बातें किया करते और एक-दूसरे के अंगों को छूकर, दबा कर स्पर्श सुख लिया करते।
कभी-कभी मैं और सपना कॉलेज छोड़ करके दिल्ली में कनॉट प्लेस में ओडियन या प्लाज़ा सिनेमा में कोई रोमांटिक फिल्म देखते। कभी-कभी मेरा कॉलेज जल्दी छूट जाता तो मैं दिल्ली सपना के कॉलेज चला जाता और फिर हम दोनों कुछ देर किसी रेस्तराँ में बैठ कर कोल्ड-ड्रिंक पीते या आईसक्रीम खाते।
पर ये सब केवल साल भर ही चल पाया। फिर कुछ अवधि के बाद पता चला कि वह बैंगलोर चली गई। कभी-कभी फोन पर बातें ही हो पातीं थीं। फिर वह भी खत्म हो गईं। बाद में मैं भी बी. फार्मेसी करने के लिए बनारस चला गया और हम चाहते हुए भी दुबारा न मिल सके, और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।
सपना, आज तुम कहाँ हो? अगर तुम यह कहानी पढ़ोगी, तो ज़रुर मुझे पहचान लोगी। और अगर पहचान लिया है तो कृपा करके मुझे मेल करो।
कैसी लगी आपको मेरी यह कहानी, कृपया अपनी प्रतिक्रिया मुझे मेल करें। Hindi Antarvasna Stories
हाय, मेरा नाम नितेश है। मैं आपको एक सच्ची Antarvasna story पढ़ा रहा हूँ। मैं एक स्टुडेंट हूँ और अब मैं पटना (बिहार) में मेल एस्कोर्ट का काम भी कर रहा हूँ। मैं मेल एस्कोर्ट (प्ले ब्योय) कैसे बना वो मैं लिख रहा हूँ। एक बार मैं एक फ़्रेंड के रिसेप्शन में गया था। मेरा फ़्रेंड काफी पैसे वाला है तो उसके यहाँ गेस्ट भी पैसे वाले ही आये हुए थे। मैं मिडिल क्लास से सम्बंध रहता हूँ। मैं और मेरा फ़्रेंड एक ही कोलेज में पढ़ते हैं इस लिये मुझे भी रिसेप्शन में बुलाया था, मैं एक स्पोर्ट्स मैन भी हूँ तो मेरा शरीर एथेलेटिक टाइप का है। मैंने टाइट टी-शर्ट और जीन्स पहना हुआ था। उस पार्टी में एक औरत करीब २८ साल की शादी शुदा मुझे कभी कभी गौर से देख रही थी जब मेरी नज़र उन पर पड़ती तो वो मुस्कुराने लगती। मैं भी मुस्कुरा देता। पार्टी खत्म हुई तो मैंने अपने दोस्त को विश कर कहा “अब मैं चलता हूँ, काफी रात हो रही है” करीब १२:०० बज गये थे। मैं बाहर जाने लगा तभी वो औरत मुझे गेट पर इन्तज़ार करते हुए मिली। शायद मेरा ही इन्तज़ार कर रही थी। उसने मुझे हैलो कहा तो जवाब में मैंने भी हाय कहा।
मैं आगे बढ़ने लगा तो वो बोली “आप कहाँ जा रहे हैं?”
मैं “घर”
वो “आप किधर से जाइयेगा”
मैं “बोरिंग रोड हो कर”
वो “आप अकेले रहते हैं”
मैं “हाँ, मैं यहाँ पढ़ाई कर रहा हूँ, फ़ैमिली घर पर रहती है, मैं यहाँ रेंट पर रहता हूँ”
वो “मैं भी पाटलिपुत्र में रहती हूँ, मेरे पति बाहर गये हैं, अकेले घर जाने में डर लग रहा है, क्या मैं आप के साथ चलुं”
मैंने थोड़ी देर सोचा फिर कहा “ठीक है चलिये”
उसके घर पहुँचा तो बोली “मेरी शादी अभी ६ महीने पहले हुई है, मैं आज तक कभी अकेली घर पर नहीं रही, मेरे पति भी मीटिंग में बाहर गये हैं, अगर आपको बुरा न लगे तो क्या आप आज रात में यहाँ रह सकते हैं”
मैंने सोचा घर पर भी तो मैं अकेले सोउंगा, यहीं सो जाता हूँ, इन्हें डर भी नहीं लगेगा और सुबह मैं घर चला जाउंगा मेरा भी तो घर यहीं पर है। मैंने बोला “ठीक है” और हम दोनों घर में चले गये करीब १:०० बज चुके थे। उसने अपने पति का नाइट शोट मुझे दिया और खुद नाइटी पहन कर मेरे पास आ गयी। उसने कहा “मैं बगल वाले कमरे में जा कर सो जाती हूँ वैसे मैं आपके साथ ही सोना चाहती थी क्योंकि मुझे अकेले डर लगेगा”
मैंने कहा “ठीक है आप बेड पर सो जाइये मैं सोफे पर सो जाता हूँ”
वो “आप बुरा मत मानिये हम साथ सो सकते हैं। मैं “मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है”
और फिर हम दोनो एक ही बेड पर सो गये। करीब ३:०० बजे मुझे ऐसा महसूस हुआ कि उसका हाथ मेरे लंड पर है। मैंने आँखें खोली देखा वो सो रही है। तभी मेरी नज़र उसकी चूचियों पर गया। उसकी चूची आधी से ज्यादा बाहर थी। ये देख कर मेरा लंड तन गया। उसे शायद महसूस हो गया कि मेरा लंड टाइट हो गया है तो उसने मेरी तरफ़ करवट ली। ऐसा करने से उसकी चूची का निप्पल मुझे दिखने लगा। मैंने भी करवट ली तो महसूस हुआ उसकी साँसें तेज़ चल रही हैं। मैं समझ गया ये जागी हुई है और सेक्स चाहती है। मैंने अपना हाथ उसकी चूची पर रखा और धीरे २ दबाने लगा। उसने अपनी आँखें खोली और अपने लिप्स को मेरे लिप्स पर रख कर किस करने लगी। मैं भी उसकी चूची को जोर से दबने लगा। जब हम दोनो गरम हो गये तो एक दूसरे का कपड़े खोल दिये। हम दोनो बिल्कुल नंगे थे। उसके नग्न शरीर को मैं देखता ही रह गया, गोरा रंग, टाइट निप्पल, नारंगी के समान चूची, स्लिम, पावरोटी की तरह बुर, मक्खन जैसे लिप्स। मैं लिख नहीं सकता कि उस वक्त मेरी क्या हालत थी।
उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और बोली “प्लीज़ फ़क मी हार्ड” । मैंने उसके दोनो पैरों को साइड करके उसकी बुर के पास मुँह ले गया और
उसकी बुर को चाटने लगा। उसके बाद उसने मेरे लंड को चूसा, फिर बोली “फ़क मी” और उसने बेड पर लेट कर अपने पैर मेरे कंधों पर रख दिये। मैं अपना लंड उसके बुर के पास ले जाकर बुर की फ़ाँकों के बीच में रगड़ने लगा, वो लम्बी २ साँसें लेने लगी और अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर बुर में घुसाने लगी, मैं समझ गया ये चुदवाना चाहती है। मैंने भी जोर से धक्का दिया और मेरा लंड उसकी बुर में आधा चला गया वो चीखी “प्लीज़ प्यार से चोदो”।
तब मैं दोनो हाथों से उसकी चूचियों को मसलने लगा और लिप्स किस करने लगा साथ में धीरे धीरे कमर भी हिला रहा था थोड़ी देर बाद उसने कहा “प्लीज़ फ़ास्ट चोदो” मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। पूरे कमरे मे चुदाई की आवाज गूँज रही थी। थोड़ी देर बाद उसने कहा “प्लीज़ और तेज़ करो मैं झड़ने वाली हूँ” मैं ज़ोर २ से लंड से उसकी बुर चोदने लगा। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई मेरा भी झड़ने वाला था और मैंने अपना सारा वीर्य उसकी मुँह में डाल दिया उसने
मेरा लंड चूस २ कर सारा वीर्य पी गयी। और मुस्कुराते हुए मेरे लिप्स पर किस किया तब तक सुबह हो चुकी थी। मैं अपने कपड़े पहनने लगा। वो नंगी ही थी। वो उठी और अलमारी से पर्स निकाल कर २५०० /- रुपये मुझे
दी, कहा “लो तुम्हारे वीर्य की कीमत” और लिप्स किस की। Antarvasna
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What did you thin
अरे सुरेश, बड़े दिनों बाद दिखे, आज कल कहां Sex Stories रहते हो?’
‘मंथली एक्ज़ाम चल रहे थे न आंटी। अब इस साल मैं 12वीं में आ गया हूं।’
‘तुम्हारी क्लास में लड़कियाँ कितनी हैं?’
’12
‘और लड़के?’
’36 ‘
‘बड़ी किस्मत वाली हैं एक एक के तीन तीन लौंडे।’
‘पर मुझे तो कोई घास नहीं डालती।’
‘अरे कोई नहीं, मैं सिखा दुंगी तुम्हे लड़की कैसे पटाते हैं।’
‘प्लीज़ आंटी जल्दी सिखाओ।’
‘तुम्हारी कोई गर्ल फ़्रेण्ड है या नहीं?
‘है न, रीता।’
‘क्या करते हो उसके साथ?’
‘बातें, और क्या?’
‘क्या गर्ल फ़्रेण्ड के साथ केवल बातें करते हैं?’
‘नहीं, आंटी, वो न थोड़ी कंज़रवेटिव है।’
‘कंज़रवेटिव न होती तो क्या करते?’
‘तो सब कुछ कर देता।’
‘मतलब क्या-साफ़ साफ़ बताओ मुझे?’
‘मुझे शरम लगती है।’
‘मैं तुमको कैसी लगती हूं?’
‘बहुत अच्छी।’
‘मतलब क्या क्या अच्छा लगता है?’
‘आपका चेहरा बहुत अच्छा लगता है।’
‘मतलब मैं बुड्ढी हो गयी हूं चेहरे के सिवा कुछ अच्छा ही नहीं है।’
‘है न।’
‘तो बताओ न।’
‘आप गुस्साओगे तो नहीं?’
‘मैं क्यों गुस्साऊं, अपनी बढ़ाई किस को अच्छी नहीं लगती।’
‘आप का न फ़्रंटसाइड बहुत अच्छा है।’
‘फ़्रंटसाइड मतलब?’
‘वो ब्लाउज़ के भीतर।’
‘उसमे अच्छा क्या है तुमने अंदर देखा है कभी?’
‘नहीं पर बहुत बड़ा है न।’
‘मतलब तुम्हें बड़ी चूची पसंद हैं।’
‘हां।’
‘तो सीधे बोलो न मुझे आपके बड़े ब्रेस्ट पसंद हैं।’
‘बोलो बोलो।’
‘मुझे आपकी बड़ी चूची पसंद हैं।’
‘गुड, शाबाश, और क्या क्या पसंद है तुम्हें?’
‘आपका बैकसाइड।’
‘पर उसमें क्या?’
‘आपका बैकसाइड छोटा और स्लिम है न।’
‘मतलब तुम्हें छोटे बटक्स चाहिये।’
‘हां।’
‘बड़े परखी हो।’
‘तुम्हारी रीता की बैक साइड कैसी है?’
‘छोटी और स्लिम, पर पता नहीं आगे जाकर फ़ैल न जाये।’
‘क्यों? क्या पीछे से डाल कर फ़ैलाने का इरादा है?’
‘धत्।’
‘और तुम्हारी गर्ल फ़्रेण्ड की चूची कैसी हैं?।’
‘मीडियम है, आप जैसे बड़े नहीं हैं।’
‘बार बार दबाने से न बढ़ जाते हैं। चूत और चूची को जितना मसलो उतना बढ़ते जाते हैं।’
‘अब अब दबायेगा रोज रोज?
‘दबवायेगी तब न।
‘कभी मसला है उसकी चूची को?’
वो तो छूने ही नहीं देती।
क्या? छूने ही नहीं देती?
अपने ब्रेस्ट ।
हिन्दी में बोलो पूरा एक बार में
वो अपनी चूची छूने ही नहीं देती।
चिन्ता मत करो मैं तुम्हें ऐसे ट्रिक्स बताऊंगी और सिखाऊंगी कि वो खुद तुम्हें चूची मसलवाने की रिक्वेस्ट करेगी।
सचमुच। आप बड़ी अच्छी हो।
अच्छा अगर मैं तुम्हें फ़्री छोड़ दूं तो क्या करोगे?
धत्। आप तो आंटी हो?
फ़िर ये तुम्हारे पैंट के भीतर कड़ा कड़ा क्यों हो गया ये सवाल सुनकर?
आई एम सोरी, आप गुस्सा न करो।
एक शर्त पर अगर तुम सच सच बोलोगे, ये कड़ा कैसे हो गया?
आप भी सेक्सी हो न इसलिये।
तो बताओ न फ़्री मिल गये तो क्या क्या करोगे?
फ़्री थोड़े ही न छोड़ेंगे आप।
लेसन 1- हाथ की सफ़ाई
तो तुम्हारा पहला लेसन है हाथ की सफ़ाई। आदमी और औरत हाथ से क्या कुछ कर और करा सकते हैं और कितना मजा दे और ले सकते हैं?
तुम बताओ हाथ से क्या कर सकते हो?
हाथ से चूची को पकड़ सकते हैं?
और?
और क्या अपना हाथ जगन्नाथ।
तुम सच मुच घामड़ हो।
क्यों और कुछ भी करते हैं? प्लीज़ बताइये न आंटी।
अच्छा बताती हूं। आदमी औरत के हर अंग को दबा के सहला के उसे मजे दे सकता है।
कैसे?
अभी दिखाती हूं।
आज मेरे बदन में बड़ा दर्द है, थोड़ा बोडी लोशन लगा दोगे?
हां।
पर कुछ और तो नहीं करोगे, फ़्री समझ के?
नहीं।
तो लो ये लोशन मेरे कंधे, पीठ और कुल्हों पे लगा दो।
मैं पेट के बल लेट जाती हूं।
अपना टी शर्ट तो उतार दो आंटी।
लो उतार दिया अब ब्रा उतारने को मत कहना। और ये लेट गयी मैं पेट के बल। कंधे को धीरे धीरे दबाओ और बोडी लोशन लगाओ। हां, ऐसे ही, अब थोड़ा प्रेस करो, वेरी गुड। अब यही मेरे पीठ पर करो। वाह! शाबाश। अब मेरी जीन्स को थोड़ा नीचे सरकाओ और पैंटी को भी। थोड़ा लोशन मेरे चूतड़ों पर लगाओ और धीरे धीरे उस पर मालिश।
अरे नहीं, गांड में मत डालो लोशन, शैतानी नहीं। बस, हो गया।
आंटी थोड़ा और दबाऊं न। आपने जीन्स क्यों बंद कर ली? बड़ा मजा आ रहा था।
अच्छा अब आगे दबाने की ट्रैनिंग देती हूं।
आगे मतलब ऊपर या नीचे
क्या मतलब? साफ़ बोलो।
वो ब्रा के भीतर या पैंटी के भीतर।
तू तो बड़ा सयाना हो गया है। साफ़ साफ़ क्यों नहीं पूछता चूत या चूची?
हां वही।
वही क्या?
चूत या चूची दबाने की ट्रैनिंग?
तुझको कौन सी पसंद है।
दोनो।
बड़ा लोभी है तू।
अगली ट्रैनिंग चूत दबाने की। वहां अपना हाथ डाल के धीरे धीरे सहलाना चाहिये।
कहां?
चूत पे और कहां?
फिर न, उंगली को चूत के छेद में डाल कर धीरे धीरे फ़िंगर करते हैं।
इससे न, लड़की/औरत गर्म हो जाती है, तुम न अपनी गर्ल फ़्रेण्ड पर ट्राइ करना और बताना कैसा लगा उसे।
आंटी थोड़ा प्रेक्टिस तो करा दो प्लीज़।
तुम तो बड़े लोभी निकले।
अच्छा चलो पर केवल दो मिनट।
थैंक यू ।
कहां से शुरु करें?
मेरे जीन्स के बटन खोलो।
खोल दिया।
क्या मस्त जांघ है आपकी।
तुम्हें पसंद आयी?
हां।
तो चूम ले जी भर के?
चाट चाट चाट ! अब अपना हाथ मेरी पैंटी के अंदर डालो।
आंटी एक बार चूत तो दिखा दो अपनी।
आज नहीं, अगली बार।
और धीरे धीरे इसे सहलाओ।
छेद पर नहीं थोड़ा ऊपर। चूत के छेद से ऊपर जो थोड़ा उठा हुआ भाग है उसे क्लाइटोरिस बोलते हैं। औरतों को न सबसे ज्यादा मजा वहीं मिलता है।
चूत से भी ज्यादा?
हां।
आंटी आपको तो कितना पता है। आइ एम लकी कि आप मुझे सब बता रहीं हैं।
सहलाते रहो धीरे धीरे।
अब जरा स्पीड बढ़ाओ – जोर से और जोर से। बस। मैं आ गयी।
विकाश आज तुमने बड़े मजे दिये मुझे। ऐसे भी मैं किसी का उधार नहीं रखती।
मैं तुम्हें इनाम देना चाहती हूं।
क्या आइस क्रीम?
नहीं, उससे भी बढ़िया।
अरे, ये तुम्हारा पैंट के भीतर क्यों इतना कड़ा हो गया है?
कोई स्टील रोड छुपा रखा है क्या।v
नहीं तो?
क्या मैं खुद हाथ लगा कर देखती हूं।
जरा अपनी पैंट के जिप तो खोलो।
अरे तुम्हारा तो कितना मोटा लंड है।
आंटी आप इसको पकड़ते हो न तो बड़ा अच्छा लगता है।
कभी तुम्हारी गर्ल फ़्रेण्ड ने पकड़ा है इसे।
नहीं वो न शरमाती है शायद।
तो भूखों मरेगी साली। कोई नहीं मैं तुम्हें ऐसे तरीके सिखाउंगी कि इसके बिना जी नहीं पाएगी तेरी छोकरी। बस एक बार उसे आदत लगने दे। अच्छा ये जो मैं तुम्हारे लंड को दबा रही हूं ये कैसा लग रहा है?
बहुत अच्छा।
तो ले आज मैं तुझे हाथ से ही लाती हूं।
आंटी थोड़ा और जोर से दबाओ।
थोड़ा तेजी से प्लीज़।
और तेजी से।
फच फच फच।
ये मैंने आपका ब्लाउज़ खराब कर दिया और थोड़ा सा तो चेहरे पर भी पड़ गया, अरे आप इसे चाट क्यों रही हो?
तू चिंता मत कर आगली बार एक बूंद भी बाहर नहीं जयेअगा सारा मैं अंदर ले लुंगी।
आंटी आपके हाथों में तो जादु है।
तू देखता जा और कहां कहां जादु है साले। आंटी के तो अंग अंग में जादु है।
विकाश, ये जो मैंने तुम्हारी ट्रैनिंग करायी किसी को बताना नहीं।
जी ।
अपनी गर्ल फ़्रेण्ड को भी नहीं?
जी अच्छा।
और अपनी गर्लफ़्रेण्ड के ऊपर ट्राइ करके बताना उसे कैसा लगा?
जी।
पर करुंगा कहां?
सिनेमा हाल में, पार्क में, खाली क्लास रूम में, जहां मौका मिले।
वो कैसे?
और कभी ट्रैनिंग की जरुरत हो तो आ जाना।
तो आज शाम को आ जाऊं?
अरे बदमाश पहले ये ट्रैनिंग तो प्रेक्टिस करले रीता पर?
जब तुम्हारे अंकल नहीं हों तब आना ट्रैनिंग के लिये।
क्यों?
तुम्हारे अंकल न नहीं चाहते कि मैं किसी को ट्रैनिंग दूं। वो सारी ट्रैनिंग खुद ही लेना चाहते हैं
बड़े स्वार्थी हैं अंकल। Sex Stories
वो मेरे घर के साथ वाले घर में ही रहती हैं और काफी सुंदर हैं. उनके मम्मे भी काफी मोटे हैं और उनकी गांड का तो कहना ही क्या है. वो भी काफी मस्त माल हैं.
आंटी की कमर काफी पतली सी है. वो खुद भी पतली हैं, पर उनका फिगर काफी सेक्सी है.
मेरा दिल उनको देखकर काफी मचल उठता है.
आंटी का पति मोटा सा है जो उन्हें किसी प्रकार का सुख नहीं दे सकता है.
वो ना तो उन्हें सेक्स से संतुष्ट कर पाता है और न ही वो प्यार करता है.
उसका पेट काफी बाहर को निकला हुआ है और उसका लंड भी छोटा सा है, ये आपको पोर्न वाइफ फक कहानी में आगे मालूम हो जाएगा.
एक बार मेरे घर पर केबल टीवी साफ नहीं आ रही थी. मैंने सोचा छत पर केबल का जोड़ है, वो खराब हो गया होगा.
यह तार मेरी पड़ोस वाली आंटी की छत पर था.
तो पहले मैं छत पर तार सही करने के लिए आंटी के घर से छत पर जाने की सोचने लगा था.
फिर मन में आया कि चलो, अपनी छत से सीधा ही चला जाऊं.
मैं उनकी छत पर चला गया.
जैसे ही मैं उनकी छत पर गया, तो नीचे से कुछ आवाजें आ रही थीं.
मैं छत पर लगे जाल के पास गया और सुनने लगा कि क्या बात हो रही है.
तो आंटी चिल्ला रही थीं- नहीं, आज नहीं … कल ही तो किया था. आजकल तुम रोज परेशान करने लग लगे हो. छोड़ो मेरे को!
फिर आंटी जोर से कराहने लगीं.
उनके साथ कुछ और आवाजें भी आ रही थीं जैसे ब्लू-फिल्म चल रही हो.
उसके बाद कुछ थप्पड़ की आवाजें आने लगी थीं.
तभी आंटी बोलीं- आज फाड़ ही डालोगे क्या … आ आआ आह आराम से.
मैंने सोचा कि ये क्या हो रहा.
मैं धीरे से सीढ़ियों के दरवाजे के पास गया और देखा कि सीढ़ियों का दरवाजा तो खुला है.
मैं नीचे चला गया और देखा कि एक कमरे में लाइट जल रही है और दरवाजा बंद है.
बरामदे में काफी अंधेरा था और कमरे के पर्दे हटे हुए थे. वहां से अंकल आंटी साफ नजर आ रहे थे.
अंकल ने आंटी को गोद में बैठा रखा था और उनके मम्मे मसल रहे थे.
आंटी चीख रही थीं और कह रही थीं- आह और जोर से!
अंकल दूसरे हाथ से सलवार के ऊपर से आंटी की फुद्दी को मसल रहे थे.
वो काफी आवाज कर रही थीं.
तभी अंकल ने आंटी को गोद में उठाकर खड़ा किया और अपने सारे कपड़े खोल दिए.
वो सिर्फ अंडरवियर में रह गए.
मैं यह देखकर कर काफी खुश हो गया. मैंने सोचा कि आज तक मैंने काफी ब्लू फिल्म तो देखी हैं, पर आज रियल का सेक्स देख लेता हूं.
यह देखकर मैंने अपने आपको उनके कमरे के पास छुपा लिया और उनका सेक्स देखने लगा.
अंकल आंटी को कुछ मिनट तक तो ऐसे ही किस करते रहे, फिर उनकी फुद्दी पर हाथ फेरने लगे.
आंटी ने भी अब टांगें खोल दी थीं और वो मादक आवाजें भर रही थीं.
मेरा भी पूरा मूड बन गया. लंड खड़ा हो गया था.
अंकल ने आंटी को किस किया.
आंटी अंकल के अंडरवियर पर हाथ फेरने लगीं.
तभी आंटी ने अंडरवियर के अन्दर हाथ डाला और अंकल कराहे- आह.
अंकल ने खींच कर आंटी की गांड पर थप्पड़ मारा.
तभी आंटी हंस कर बेड के दूसरी तरफ चली गईं.
अंकल ने कहा- रुक साली, जाती किधर है … इधर आ.
आंटी ने कहा- क्यों जोर से खड़ा हो गया क्या?
अंकल ने कहा- पास तो आ, तेरी मां की चूत में लंड दे दूँगा.
आंटी ने कहा- मेरी में तो लंड दे दो, फिर मेरी मां की भी मार लेना. वो भी तुझे खुश कर देगी.
ये सुन कर मैं हैरान रह गया कि अंकल और आंटी गंदी बातें भी करते हैं.
अंकल आंटी के पास गए, उन्हें पकड़ कर किस किया और बोले- मेरी रांड, आज मेरे को खुश कर दे.
आंटी ने कहा- रोज ही तो करती हूं, तो आज क्यों नहीं करूंगी.
अंकल ने किस किया और मम्मों को कस कर पकड़ लिया.
आंटी चीखने लगीं.
अंकल- साली मेरे लंड को दबाती है, अब पता लगा कि दर्द क्या होता है?
आंटी ने कहा- आह छोड़ो … दर्द हो रहा है.
अंकल ने आंटी को गोद में उठाया और और बेड पर लुड़का दिया.
वो फिर से चीख उठीं.
अंकल उन पर कूद पड़े और किस करने लगे.
वो एक हाथ से आंटी के मम्मे दबा रहे थे, दूसरे हाथ से उनकी फुद्दी को मसल रहे थे.
आंटी ने भी पूरी टांगें खोल रखी थीं.
तभी आंटी ने कसमसाते हुए कहा- रूको छोड़ो … रूको ना.
आंटी ने अंकल को धक्का दिया और कहा- आज मेरी एक ना सुनना तुम …. मेरी फाड़ ही डालना.
मैंने सोचा कि आंटी ये क्या कह रही हैं अभी तक चुदाई नहीं हुई क्या आंटी जैसे माल की!
अंकल ने कहा- तेरी क्या, आज तो तेरी मां की भी फाड़ दूंगा. तेरी मां के भोसड़े में भी दर्द हो जाएगा.
आंटी ने कहा- मेरे मां के भोसड़े में दर्द हो ना हो, मेरी फुद्दी में कल तक तो दर्द होना चाहिए.
अंकल ने आंटी की कमीज को उतार दिया.
आंटी ने नीचे लेस वाली लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी.
अंकल ने आंटी को लिटाया और उनके मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही खाने लगे.
आंटी ने कहा- आह … ये माल तुम्हारा ही तो है राजा … आराम से करो ना!
फिर अंकल ने आंटी की सलवार का नाड़ा खोला और आटी ने अपनी गांड ऊंची कर दी.
अंकल ने सलवार खींच कर उतार दी.
आंटी अब केवल ब्रा और पैंटी में ही थीं. आंटी ने लाल रंग की वैसी लेसदार पैंटी पहनी हुई थी. आंटी का बदन काफी चमक रहा था. उनका बदन बहुत ज्यादा रसीला लग रहा था.
ब्रा और पैंटी आंटी की फुद्दी और मम्मों को छुपाने की कोशिश कर रहे थे पर वो छुप नहीं पा रहे थे.
तभी अंकल ने आंटी की टांगों को चौड़ा किया और उनकी फुद्दी को उसकी पैंटी से ही चूसने लगे.
आंटी तड़फने लगीं- बस अब नहीं रहा जाता. अब पेल दो.
अंकल ने कहा- मेरी रांड, अब तक तूने मेरे लंड को तो चूसा ही नहीं है.
अंकल लेट गए.
आंटी ने अंकल का अंडरवियर उतारा और लंड बाहर निकाल लिया.
ये क्या … अंकल का लंड तो काफी छोटा सा था.
फिर मैंने सोचा कि नहीं यार अंकल का लंड अभी बैठा होगा. क्योंकि मेरा लंड भी बैठने पर इतना ही होता है. उनका मुझसे तो बड़ा ही होगा.
आंटी ने लंड चूसा और लेट गईं.
अंकल ऊपर आ गए.
पहले ब्रा पैंटी को उतारा और आंटी को किस करने लगे.
वो उनकी फुद्दी को चूसते, तो कभी मम्मों को चूसने लगते.
अंकल उस वक्त किसी बन्दर जैसी हरकत कर रहे थे.
तभी आंटी ने कहा- बस करो, अब नहीं रहा जा रहा है.
अंकल ने कहा- ओके.
अब अंकल खड़े हो गए और आंटी की टांगों को फैला कर पोजीशन में आ गए और चूत में लंड लगा दिया.
मैं अंकल का लंड देखकर हैरान रह गया कि ये क्या … इतना छोटा सा अन्दर कैसे जाएगा?
जैसे ही अंकल आंटी के ऊपर लेटे, तो उनका पेट अड़ गया.
फिर भी अंकल ने आंटी की फुद्दी पर अपना दो इंच का लंड लगा दिया.
आंटी आह आह करने लगीं.
मैंने सोचा कि आंटी इतने से टुन्नू से ऐसे आवाज कर रही हैं. अगर आंटी ने मेरा लंड देख लिया, तो वो देखने से ही मर जाएंगी. ये मेरा लंड अपनी फुद्दी में नहीं ले सकेंगी.
आंटी आवाज निकाल रही थीं- आह आह … पेल दो मेरी फाड़ दो. आज मुझे खुश कर दो.
अंकल अभी ऊपर ही लेटे हुए थे और अब वो घस्से मारने लगे थे.
अंकल ने कुछ ही घस्से लगाए और चीखने लगे.
इधर से आंटी भी हल्का सा कराहीं.
तभी अंकल शांत हो गए.
अंकल आंटी के ऊपर कुछ देर तक लेटे रहे, फिर अलग हो गए.
वो पास में ही लुढ़क गए और कुछ मिनट तक लेट कर सांसें लेते रहे.
आंटी बैठ गईं और मैंने देखा कि उनके चेहरे पर वो खुशी नहीं थी, जो औरत को चुदने के बाद आती है.
ऐसा लग रहा था, जैसे उन्हें मजा ही ना आया हो.
अंकल का लंड काफी छोटा था, शायद इसलिए ऐसा था.
अंकल ने किया भी कुछ भी नहीं था. पोर्न वाइफ फक में बस पुल्ल पुल्ल करके ठंडे हो गए थे.
फिर आंटी ने अंकल के लंड पर हाथ फेरा.
अंकल ने कहा- क्यों दुबारा चुदाई करनी है क्या?
आंटी ने कहा- हां, मुझको दुबारा चुदना है.
तभी मैं समझ गया कि आंटी को अंकल खुश नहीं कर पाए हैं, नहीं तो औरत दुबारा चुदाई के लिए कभी नहीं कहती है.
मैंने सोचा कि यदि मैं कोशिश करूं, तो शायद मेरी दाल गल जाए और मैं आंटी को चोद सकूं. क्योंकि वो चुदाई में अभी प्यासी हैं.
फिर आंटी बोलीं- मेरा तो अभी छूटा भी नहीं है.
अंकल ने कहा- तू साली पता नहीं क्या खाती है कि मेरा तो तेरे ऊपर चढ़ते ही छूट जाता है … और तेरे होता भी नहीं है.
आंटी ने कहा कि मैं मस्त हूँ ना … काफी गर्मी है मेरे अन्दर!
ये कह कर वो हंसने लगीं.
तब अंकल उनके ऊपर चढ़ गए और आंटी को किस करने लगे.
अंकल का लंड बैठा हुआ था.
आंटी के मम्मों को अंकल ने मसला और फुद्दी को चूसने लगे.
तभी आंटी ने कहा- आज मेरी फुद्दी चूस चूस कर मेरी चूत ठंडी कर दो.
अंकल ने कहा- अच्छा … जब तेरे पास लंड है, तो तेरे को मेरे मुँह से मुठ मरवाने में ज्यादा मजा आता है क्या?
उन्होंने कहा- मुँह से करो ना यार … मुझको अच्छा लगता है. तुम फुद्दी बहुत अच्छे से चूसते हो. साथ में इतनी देर में आपका लंड भी तैयार हो जाएगा.
अंकल ने कहा- ठीक है, पर कल की तरह मत करना, मुकर मत जाना फुद्दी देने से!
आंटी ने कहा- मैं नहीं मुकरूंगी. एक बार मेरी मुठ मार दो, फिर जो चाहे मर्जी कर लेना.
अंकल ने कहा- ठीक है.
आंटी ने अपनी टांगें खोल दीं और अंकल आंटी की फुद्दी को जीभ से चोदने लगे.
आंटी आह आह करके कराहने लगीं.
वो अंकल का सिर अपनी फुद्दी पर दबा रही थीं.
पांच मिनट बाद आंटी जोर से चीखने लगीं- उह उह और करो … आह.
उन्होंने अंकल का सिर जोर से फुद्दी में दबा दिया.
आंटी का काम हो गया था.
अंकल आंटी का सारा माल पी गए.
आंटी अब खुश लग रही थीं.
अंकल फिर से उन्हें किस करने लगे.
वो दोनों बैठ गए.
अंकल ने कहा- मेरी रांड खुश हो गयी ना!
आंटी ने कहा- हां.
अंकल ने उनकी फुद्दी पर हाथ फेरा और कहा- चल अब लेट जा.
आंटी ने कहा- आह … दर्द हो रहा है.
अंकल ने आंटी को धक्का देकर लिटा लिया और उनके ऊपर लेट गए.
आंटी ने कहा- छोड़ो यार, अभी दर्द हो रहा है. कुछ देर बाद में चोद लेना.
अंकल ने कहा- मेरी रांड, मेरा लंड तो अभी तैयार है. इसे छेदा चाहिए.
आंटी ने कहा- नहीं.
अंकल ने आंटी के गाल पर थप्पड़ मारा और उसके बाल खींच दिए.
आंटी चीखने लगीं.
अंकल ने उनके मुँह में लंड डाल दिया और कहा- चूस साली, अब मेरी मुठ मार.
आंटी अंकल का लंड चूसने लगीं और मजे से चूसने लगीं.
अंकल ने भी उनके बाल छोड़ दिए थे.
आंटी अपने आप उनका लंड चूस रही थीं.
अंकल उनके सिर पर हाथ रखकर खड़े थे, उनके बालों को सहला रहे थे.
तभी अंकल ने आंटी का सिर पकड़ा और वहीं रोक दिया.
अंकल का भी रस छूट गया था.
पोर्न वाइफ भी हसबैंड का सारा माल पी गयी थीं.
अंकल और आंटी पास में ही लेट गए.
आंटी अंकल के ऊपर लेट सी गयी थीं.
कुछ देर लेटने के बाद अंकल ने कहा- अब कुछ मूड है?
आंटी ने कहा- बस अब नहीं.
अंकल ने कहा- एक बार करते हैं, फिर सो जाएंगे.
आंटी ने कहा- नहीं, अब कल करेंगे. अगर अब किया, तो मेरी फुद्दी पहले की तरह छिल जाएगी, फिर कल मेरी मां को चोदोगे?
अंकल ने कहा- हां, तेरी मां को चोद लूँगा.
वो हंसने लगे.
आंटी ने कहा- अब सो जाओ, सुबह जल्दी उठना है.
अंकल ने कहा- ठीक है, पेशाब करने चलते हैं, फिर सोते हैं.
आंटी बोलीं- तुम हो आओ.
अंकल खड़े हुए और बाहर आने लगे.
मैं वहां से छत पर आ गया.
अब अगली कहानी में मैं लिखूंगा कि कैसे मैंने आंटी को सैट करके उन्हें चोदा.
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