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मैं तीस साल का हूँ और पंजाब में Hindi Porn Stories रहता हूँ। जैसे कि पंजाबी होते हैं अच्छे स्मार्ट, वैसा ही हूँ मैं ! अच्छे खाते-पीते घर का हूँ और मेरा कद 5’7″ और मेरे लंड का आकार 7″ और मोटाई 2.5″ है। मैं शादीशुदा हूँ। जैसे कि अक्सर होता है, शादी के बाद जब बच्चे हो जाते है तो पत्नी की पति में रूचि कम हो जाती है और बच्चों में ज्यादा ! ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ तो मैं ऑफिस से चैट करने लगा।
मुझे एक लड़की मेरे ही शहर की मिली, वो भी शादीशुदा थी, उसका कद 5’2″ और उसका फिगर 36 डी/30/36 था, जो मुझे बाद में पता चला। उसका घरवाला विदेश गया हुआ था और साल में दस बारह दिन के लिए आता था। हम दोनों में बातें होने लगी, धीरे-धीरे सेक्स की बातें होने लगी तो मुझे पता चला कि वो भी बहुत प्यासी है। पर हम दोनों डरते थे कि किसी को कहीं पता न चल जाये क्योंकि हम दोनों बदनामी से बहुत डरते थे।
फिर एक दिन मुझे एक आईडिया आया। उस दिन वो घर में अकेली थी। मैंने उससे उसके घर का पता लिया और दोपहर को उसके घर चला गया। उस समय आसपास में सब सो रहे होते हैं। मैंने अपने साथ एक बैग ले लिया जिससे लगे कि मैं उसके घर कुछ काम से आया हूँ।
वो मुझे देखकर बहुत खुश थी पर कुछ डर रही थी कि कहीं कोई आ ना आ जाये, तो मैंने उसको अपने पास बिठाया और प्यार से समझाया कि अगर कोई आ जाये तो कह देना कंप्यूटर ठीक करने आया है।
उसने घर में पजामा और खुली सी टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से उसके मम्मे बाहर निकलने को बेताब हो रहे थे। उसको ऐसे देख कर मेरा लंड सलामी देने लगा था। उसको बड़ी मुश्किल से पैंट में ठीक किया तो उसने देख लिया और वो चली गई। वो मेरे लिए पानी लेकर आई और मेरे पास ही बैठ गई। हम इधर उधर की बातें कर रहे थे, पर मेरा ध्यान तो उसके मम्मों की तरफ ही था।
उसने कहा- क्या देख रहे हो?
तो मैंने कहा- तुम्हारे मम्मे !
तो वो बोली- क्या टी-शर्ट में से दिख रहे हैं?
तो मैंने कहा- अन्दाज़ लगा रहा हूँ कि कैसे होंगे !
तो बोली- क्या सिर्फ अन्दाज़ा ही करोगे? सच में नहीं देखने?
तो मैंने झट से उसको अपनी बाहों में भींच लिया और उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। अगले ही पल मेरी जीभ उसके मुँह के अंदर थी और हम एक दूसरे की लार को चख रहे थे। उसकी साँसें गरम हो रही थी और मैंने चूमते-चूमते उसकी टी-शर्ट में हाथ डालकर उसकी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया। मैं पहली बार किसी पराई औरत को छू रहा था।
उसकी साँसे तेज हो रही थी और मेरा रोम-रोम खड़ा हो गया था। मैं पागलों की तरह उसको चूम रहा था और आगे से उसके मम्मों को हाथ से उसकी शर्ट के ऊपर से ही सहला रहा था। वो सिसकने लगी और बोलने लगी- आआह्ह्ह राह्ह्ह्हहुल्ल्ल इतने दिन क्यों लगा दिए आने में ? ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह !
वो खुद पर अपना कण्ट्रोल खो रही थी, लगता उसको काफी दिन हो गए थे सेक्स किये ! इसलिए वो पूर्व-क्रीड़ा और चूमने आदि में ही एक बार झड़ गई।
मैंने उसको गोद में उठाया और बिस्तर पर गिरा दिया, अपने कपड़े उतारने लगा। वो बड़ी गौर से मेरी चौड़ी छाती देख रही थी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। जिसमें दूर से ही मेरा खड़ा लंड नज़र आ रहा था।
मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी और उसको चूमना शुरू किया। वो हर चुम्बन पर सिसकियाँ ले रही थी और फ़िर मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया। उसकी चूचियां जो काफी बड़ी थी उनको चूसना शुरू दिया तो वो पागल सी होने लगी। उसकी चूचियों को कभी होठों से चूसता तो कभी काटता, तो वो सिसक पड़ती और अब वो पागलों की तरह मेरा सर अपने मम्मों में दबा रही थी और कह रही थी- हाँ ऐसे ही आह्ह्ह्ह ऊऊउफ़ ! ऊऊईईईईईईइ !
और ऐसे ही उसको चूमते-चाटते उसके पजामे तक आया और उसका पजामा उतार दिया। तो उसकी पैंटी एक दम गीली हो चुकी थी, मैं उसकी पैंटी को धीरे-धीरे उतार रहा था पर शायद उसको बहुत जल्दी थी तो उसने झट से अपनी पैन्टी टांगों के बीच में से निकाल दी। उसकी चूत पर उसके पानी की कुछ बूंदें थी जिसके कारण उसकी चूत चमक रही थी। मैंने आज तक ऐसी चिकनी चूत नहीं देखी थी। ऐसे लग रही थी मानो किसी सोलह साल की लड़की की हो ! एक दम छोटा सा चीरा और उस पर गुलाबी पंखुरी जैसा रंग ! दिल कर रहा था ख़ी खा जाऊं ! लगता था उसका घरवाला मेरे लिए छोड़ गया था !
जैसे ही मैंने उसकी चूत को छुआ तो एक दम से उछल पड़ी जैसे 440 वोल्ट का करंट लगा हो। मैंने उसकी चूत के पंखुरी जैसे नाज़ुक होठोँ को खोल कर अपने होठ वहां रख दिए। मानो जन्नत में आ गया हूँ ऐसे लग रहा था। मैंने उसकी चूत को खूब चाटा और इधर लंड जी महाराज अंडरवियर में खूब ठोकरेँ मार रहे थे। लगता था कि अगर बाहर नहीं निकाले तो अंडरवियर फाड़ के बाहर आ जायेंगे !
मैंने जैसे ही अंडरवीयर निकाला तो वो मेरा लंड देख कर हैरान रह गई, कहती- इतना बड़ा ? यह तो मेरी चूत को फाड़ देगा ! मेरे पति का तो इससे आधा ही है !
तो मैंने कहा- वो तो मैं तुम्हारी चूत की हालत देख कर ही समझ गया था कि अभी तक सिर्फ लुल्ली से चुदी है किसी मर्द का लौड़ा नहीं मिला इस को आज तक !
हम 69 पोज़िशन में आ गए, मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी। मेरा लंड उसके मुँह में पूरा नहीं आ रहा था और वो गों-गों कर रही थी। कोई 5-7 मिनट की चुसाई के बाद मुझे लगा कि अब इसकी चूत तैयार है चुदने के लिए !
तो मैंने अपना लंड उसकी चूत पर टिकाया और उसकी भग्नासा पर लंड का सुपाड़ा रगड़ना शुरू किया तो वह अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी की लण्ड जल्दी से उसकी चूत में घुस जाये। पर मैं उसको तड़पाना चाहता था और उसके मुँह से सुनना चाहता था।
जब लंड को रगड़ा तो वह तड़प उठी और बोली- अब और मत तड़पाओ ! इसको मेरी चूत में डाल दो ! मेरी चूत को फाड़ दो ! पिछले आठ महीनों से नहीं चुदी है, आज इसकी चुदने की सारी ख्वाहिश पूरी कर दो !
तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद से सटाया और सांस रोक कर जोर लगाने लगा। पर उसकी चूत बहुत कसी लग रही थी तो मैंने थोड़ा जोर से धक्का लगाया तो उसकी चीख निकल गई। मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि पड़ोसी न सुन सकें!
लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस चुका था। अब मैंने लंड को थोड़ा सा पीछे करके एक और जोर से धक्का दिया तो लण्ड चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा घुस गया था। अब वह सर को इधर उधर मार रही थी पर लंड अपना काम कर चुका था। मैंने अपनी सांस रोकी और लंड को वापिस थोड़ा सा पीछे करके जोर से धक्का दिया तो लंड पूरा उसकी चूत में घुस गया। उसकी आँखों से आंसू निकल गए और ऐसे लग रहा था कि जैसे वह बेहोश हो गई हो !
थोड़ी देर में उसका दर्द कुछ कम हुआ। अब वह धक्के पर आः ऊह्ह्ह श् औरऽऽर्र आआह्ह्ह्ह्ह कर रही थी, उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और वह अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा रही थी। उसने अपनी टांगों को मेरी टांगों से ऐसे लिपटा लिया था जैसे सांप पेड़ से लिपट जाता है। मुझे बहुत आनंद आ रहा था। उसके ऐसा करने से लंड उसकी चूत की पूरी गहराई नाप रहा था और हर शॉट के साथ वोह पूरा आनंद ले रही थी। उसकी साँसे तेज हो गई थी और आःह्हछ उफ्फ्फ्फ्फफ्फ् श्ह्ह्ह्ह्ह्ह् की आवाजें करते करते वो फिर से झड़ गई। अब उसकी चूत और चिकनी हो गई थी और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी- कभी तेज शॉट और छोटे शॉट तो कभी तेज शॉट और लॉन्ग शॉट लगाता। जब छोटे शॉट लगाता तो उसको लगता उसकी जान निकल रही है, जब लॉन्ग शॉट लगाता तो उसको दर्द होता और ऐसे ही दस मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और ऐसे ही उसके ऊपर निढाल होकर लेट गया। उसके चेहरे पर संतुष्टि और आनंद झलक रहा था।
हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो अपने कपड़े पहन सके। मैंने उसको एक चादर औढ़ाई और अपने कपड़े पहन के वापिस आ गया क्योंकि डर था कहीं कोई आ ना जाये !
मुझे उसने बाद में बताया कि वो घण्टे घंटे तक ऐसे ही पड़ी रही और शाम को वो वापिस फ्रेश हुई, अब वह बहुत खुश है !
हमें जब भी मौका मिलता है तो हम एक दूसरे की जरुरत को पूरा करते हैं। मुझे नहीं लगता कि हम किसी को धोखा दे रहे हैं क्योंकि हम दोनों की एक ही जरुरत है सेक्स……….
मुझे अपने विचार भेजें क्योंकि यह कहानी नहीं मेरी हकीक़त है। Hindi Porn Stories
मैं सीमा हूं। 35 साल की होने पर भी Antarvasna अकेली हूं और शादि के बारे में नहीं सोचा। मैं अपनी बूढी मां के साथ रहती हूं।
मेरा एक भाई और दो बहनें शादीशुदा हैं और वो अलग रहते हैं।
मेरे 38 आकार के सुडोल स्तन हैं और मेरी कुंवारी चूत जिसमें एक लाल छेद है, पर मुझे गर्व है। मेरे पिता की काफ़ी पहले मौत हो गयी थी। तब से मैं ही मां की देखभाल कर रही हूं। मेरी बड़ी बहन विधवा है इसलिये मां को अक्सर उसके पास जाना पड़ता है। मैं बाल मन्दिर विद्यालय में अधयापिका हूं।
नजदीकी रिश्तों में मेरे एक मौसी, मौसा और उनके दो बच्चे हैं। मेरी मौसी अपने परिवार के साथ खुश हैं। अपनी जिन्दगी में मैने जितने मर्दों को देखा है उन में मैं अपने मौसा को पसंद करती हूं। वो एक शान्त स्वभाव, अच्छे पति, अच्छे पिता और अच्छे मित्र हैं। मेरे पिता की मौत के बाद उन्होंने हमारे परिवार की देखभाल की।
एक बार बरसात के मौसम में मां दीदी के घर गयी हुई थी, हल्की बारिश हो रही थी और मैं अकेली ब्लाउज और पेटिकोट में बैठी टी वी पर कोई अन्गरेजी फ़िल्म देख रही थी। घर पर अक्सर मै ब्रा पैन्टी नहीं पहनती हूं। किसिंग सीन चल रहा था। रात के 11 बज रहे थे।
तभी दरवाजे पर घंटी बजी। मुझे हैरानी हुई, पहले मैने टी वी बन्द किया फ़िर दुपटटा औढ कर दरवाजे तक गयी और अन्दर से ही पूछा कि कौन है?
लेकिन जवाब नहीं मिला।
मैने धीरे से दरवाजा खोला तो मौसाजी को देखा, वो बोले- हैलो सीमा कैसी हो, तुम्हारी मां कहां है?
मैने कहा अन्दर तो आइये!
मौसाजी अन्दर आये- ओह क्या मम्मी नहीं है?
मैने कहा- दीदी के वहां गयी है.
‘तो मैं चलता हूं।’
मैने कहा- क्या यह घर नहीं है?
‘नहीं ऐसा नहीं…’ उन्होने कहा- तुम कहती हो तो रुक जाउंगा.
बारिश भी बढ़ गई थी।
हम दोनो भीतर आये, मैने पानी दिया तब उनकी नजर मेरी नजर से टकराई मैं भूल चुकि थी कि मैने अंडरवियर नहीं पहना है। उनकी नजर पानी पीते पीते मेरी चूचियों पर गयी, उसका ब्रा नहीं पहनने से आकार बड़ा दिखाई देता था.
मैने अपने को सम्भाला लेकिन बातें करते करते उन्होने कहा सच कहुं सीमा तेरी चूचियां बहुत बड़ी हैं और उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचने लगे। अगले ही पल में मुझे अपनी बाहों में भर दिया.
मैं चिल्ला उठी और कहने लगी मुझे छोड़ दो लेकिन वो नहीं माने और कस के मुझे चूमने लगे मैं ऐतराज करती रही पर मेरी नहीं चली वो मेरे होंठों का रस पीने लगे मैं कुछ भी कर न सकी वो जी भरके चूमने लगे फिर धीरे दुपट्टा खींच कर अलग कर दिया मैने खूब हाथ पांव मारे फिर भी वो चूमने रहे एक बार मैने धक्का मारा तो मैं बाहो में से निकल गयी लेकिन तुरन्त मुझे फिर से कस कर दबाया तो दोनो चूचियां पूरी दब के रह गयी।
मैने फिर से जोर लगाया पर मेरी चूचियां पर होले होले दबा रहे थे। फिर पीछे जा कर मेरी गर्दन गाल कंधे को चूमने और सहलाने लगे और दोनो चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से दबाते रहे.
करीब 5 मिनट तक यह खेल चलता रहा पर मैं अलग न हो सकी पर मौका मिला तो जोर से धक्का मारा लेकिन ये क्या? जैसे मैं दूर गयी कि मेरा ब्लाउज़ फाड़ दिया उन्होने और दोनो चूचियां कैद में से मुक्त हो कर पहली बार किसी मर्द के सामने उछल कर नंगी हो गयी हाय रे! ये क्या किया।
मैने दोनो चूचियों पर हाथ ढक दिये तो वो आगे आ कर बोले सीमा उसको छोड़ दो मैं उसे नंगा देखना चाहता हूं।
मैं नहीं मानी तब वो करीब आके बोले- दोनो हाथ को उठा लो!
‘नहीं नहीं…’ मैं चिल्लाई पर उन्होने मेरे दोनो हाथों को उपर कर दिया दोनो नंगी चूचियां पा कर देख कर वो आनन्दित हुये पूरा नंगापन देख कर कहा- सीमा ! इतनी बड़ी और कड़ी चूचियां पहली बार देखी हैं.
इतना कह कर बाकी ब्लाउज़ को हटाया और दोनो चूचियों को पहले पिया अपने हाथों को रख कर किया दोनो को होले होले दबाया फिर निप्पल को प्यार से दुलारा चूचियों को सहलाया दबाया.
मेरी कुछ न चली धीरे से खींच कर बाहों में लेकर सीने से लगाया मैं मचल उठी पहली बार मर्द के सामने नंगी चूचियों की थी वो प्यार से दोनो फलों को दबाना सहलाना करते करते मेरे नीचे अपने एक हाथ को ले गये कहा सीमा सच कहुं तुम्हारी चूचियां मुझे बहुत पसंद है.
और मैं अपने अपको सम्भाल न सकी उन्होने नाड़ा खींचकर पेटीकोट को गिरा दिया, मैं नंगी हो गई, मौसाजी बहुत खुश हो गये मेरा नंगापन देख कर उठा लिया, मुझे बेड पर करके उन्होने अपने सभी कपड़े निकाल दिये.
मैं हाय हाय कर उठी उसके नंगे लंड को देखा तो पूरा ८ इंच लम्बा हो गया मेरी चूत को देख कर मेरी साइड आकर चूचियों पकड़ दबाये बाद में चूसना और दूसरी को मसलने लगे फिर दूसरी को चूसा पहली को मसलने लगे बारी बारी दोनो चूचियों को चूसा और दबाया निप्पल को बच्चे की तरह बार बार चूस रहे थे.
मैं बेताब हो गयी पहली बार किसी मर्द ने मुझे नंगा देखा था। धीरे धीरे उंगली मेरी हसीन चूत पर फ़िराने लगे मैं जोश में आने लगी आखिर कब तक अपने आप से लड़ती रहती, बस मैने दोनो होंठों को मौसाजी के होंठों पर रख कर चूसना चूमना शुरु किया जियो मेरी रानी कह कर मुझे अपने ऊपर गिरा लिया कि लंड का पहला स्पर्श चूत से हुआ अपनी चूत को हटाया तो चूचियों को चुलबुलाने लगे.
मैं अब गर्म होने लगी थी होंठों का और चूचियों का रस करीब १५ मिनट तक पीने के बाद मुझे नीचे गिराकर वो ऊपर आ गये मेरा पूरा बदन कम्पन करने लगा उन्होने मेरी नंगी जवानी को देखा फिर अपने होंठों से पूरा बदन चूमने सहलाने और दबाने लगे मेरी चूत के सिवाय सभी हिस्सों को कई बार चूमा तो मेरी दोनो टांगें खुद फ़ैल गयीं मैं हार गयी थी
मुझे भी अब रहा नहीं जाता था उन्होने मेरी चूचियों जोर से कसा.
‘मैं आह्हह ह्हह्हह मर जाउंगी मेरे मौसाजी अब नहीं रहा जाता। हाय रे बिना स…’
‘बोलो मेरी सीमा रानी…’
‘मुझे सिर्फ़ तुम्हारा कसा हुआ लंड चाहिये जी भर के चोदो मुझे अपना लो मौसाजी मुझे’
‘हां हां बोलो मेरी सीमा रानी।’
‘मौसाजी…’ तब मैने दोनो टांगें ज्यादा फ़ैलाई मेरी चूत देख कर उनका लौड़ा पूरी तरह तन कर कड़ा हो गया वो अब झुक गया मेरी चूत पर धीरे धीरे चूत को चूमने लगे थे कि मैं चिल्ला उठी- बस करो मेरे प्यार अह्हह ह्हह्हह ओय माअ ओयम्मम्ममा अयह क्या कर रहे हो।
पर उन्होने कुछ न सुना और अपनी जीभ को चूत में डाल कर चूसने लगे, मेरी तो अब जान ही निकलने लगी थी हायययययी रीईईई यह क्या हो रहा है।
‘अब और मत तरसाओ अपनी रानी को…’
अपनी टांगे खुद फ़ैला के बोली.
वो पूरे 5 मिनट तक चूसता रहा मेरी चूत खुल गयी थी अब इन्तजार करना ठीक नहीं था मैने दोनो पांवों को ऊपर उठाकर मुझे मंजरी आसन में ले लिया, मौसाजी अब मत रुको मेरी चूत मस्तानी हो गयी है तब मैने लंड को पकड़ कर चूत पर रख दिया वो और आहें भरने लगी मौसाजी चोदो मेरी …।
तब उन्होने धीरे से चूत में लंड दबाया ओह्हह्हह ऊऊह्हह्ह ह्ह्हह्ह हयरीए मेरी कुंवारी चूत ३५ साल के बाद चुदाई उन्होने दूसरा धक्का मारा तो वो खुल गयी हायययी आह्ह आह्ह अह्हह मर जांउगी तब उनका तीसरा और एक दो एक दो करता हुआ लंड अपनी मन्ज़िल और आगे बढ़ गया पर मैं आह्हह ओअह्हह्ह ओह्ह करती रह गयी
सच में उनको मेरी चूत बहुत टाइट लगी पर अब वो मानने वाले कहां थे धक्के पर धक्का धका धक धका धक फ़का फ़क फ़का फ़क फ़का फ़क चोदने लगे मन्ज़िल को छू लिया पूरा लंड अब मेरी चूत में था और अब मेरी दोनो चूचियों को कस कस कर दबाते दबाते जि भर के मस्त चुदाई का आनंद लेने लगे.
मैं भी मस्त हो चुकी थी वो भी पुरी तरह चोदने लगे अब दिल खोलकर मैं भी चूचियों और चुदाई करवाने लगी सीमा आह हहह बहुत मजा आ रहा है.
‘मेरे रजा जोर जोर से अब चोदो मैं तुम्हारी हो चुकी हूं चोदो चोद मेरे राजा…’
बस वो कस कस कर चोदने लगे तब धीरे धीरे दोनो बाहों में भरकर मैने अपनी ऊपर खींचा और तेज और तेज मौसाजी पूरी तरह चोद लो, स्पीड बढ़ाते गये और तेज फ़का फ़क फ़का फ़क और तेज फ़चा फ़च फ़चा फ़च आह्हह फ़चा फ़च फ़च अह्ह्ह ह्हह्ह मैं गयी अह्हह्हह्हह्ह और मौसाजी पूरी तरह मेरे पर छोट गये और पहली बार वीर्यदान कर दिया हमारा मिलन हुआ वो मेरे ऊपर थे मैने कसकर उसे मेरी चूचियों पर दबाया हमारी सांसे तेज और एक हो गई.
बाहर बारिश तेज बरस रही थी और मैने अपनी सुहाग रात चार बार चुदवा के मनाई। Antarvasna
लेस्बियन वाइफ देसी कहानी में पढ़ें कि मेरी शादी हुई तो मेरी दुल्हन को चुदाई में ज़रा भी रूचि नहीं थी. वह मेरे सामने लेट जाती, मैं उसे चोद देता. तो मैंने अपनी एक दोस्त की मदद ली.
मेरे एक दोस्त संतोष ने अपने जीवन की यह कहानी मुझे बताई।
उसकी अनुमति से मैं यह कहानी अन्तर्वासना पर प्रकाशित करवा रहा हूँ पात्रों के नाम बदलकर!
लेस्बियन वाइफ देसी कहानी संतोष के शब्दों में:
मैं संतोष … जब से जवान हुआ बहुत सेक्सी था।
मेरे छोटे शहर में अच्छा कॉलेज नहीं था तो मैंने पुणे में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की.
22 वर्ष की उम्र में मुझे पुणे में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिली।
23 साल की उम्र में मैंने तय किया मैं शादी करूँगा.
मेरी कोई प्रेमिका नहीं थी।
शादी के लिए लड़की ढूँढने ले लिए घर वालों को कैसे बोलूं, समझ नहीं आ रहा था।
तब मुझे अपने बचपन की दोस्त मोना का ख्याल आया.
मोना मेरे शहर की थी, बचपन में उसके साथ खेल कर बड़ा हुआ।
बाद में मैं पुणे चला गया।
मोना की शादी हो गयी थी, आजकल मोना अपने पति के साथ पुणे में रहती है.
मैं अक्सर उसके घर जाता हूँ, उसके पति से भी मेरी बनती है।
मैंने मोना का अपनी समस्या बताई तो मोना ने मेरे घर वालों को मेरी शादी के लिए मना लिया।
तब मैंने घर वालों की मदद से कुछ लड़कियां देखी।
मुझे रति पसन्द आयी, मेरी शादी हो गयी।
रति पढ़ी लिखी, सुन्दर, भरे बदन की थी।
हमारी शादी हमारे पुश्तैनी शहर में हुई.
अपने दोस्तों से मैंने उनकी सुहागरात की रोमांटिक कहानी सुनी हुई थी.
मेरे दोस्तों ने मुझे सलाह दी थी कि पत्नी से जबरदस्ती मत करना। पहले थोड़ी बात चीत करना, फिर धीरे धीरे चुम्बन से शुरु करना और आगे बढ़ना.
सुहागरात को रति घागरा चोली में सजकर पलंग पर बैठी थी.
मैंने उसका घूंघट उठाकर उसकी सुंदरता की तारीफ की, उसे उपहार दिया।
उसे मैंने अपने बारे में, मेरे कॉलेज, काम और परिवार के बारे में बताया।
मेरी बीवी रति ने भी उसके बारे में बताया।
जब मुझे लगा हमारा सही समय आ गया है आगे बढ़ने का तो मैंने रति के गाल और मस्तक चूमे।
रति ने विरोध नहीं किया.
मैं रति के होंठ चूमने लगा.
रति मुट्ठी भींचकर बैठी थी, मुझे लगा शर्मा रही है
मैंने रति को लिटा दिया, उसके चूचे चोली के ऊपर से दबाने लगा.
मैं बहुत उत्तेजित हो गया।
मैंने चोली उतारने की जल्दबाजी में चोली के कुछ हुक तोड़ दिए, चोली सामने से हटाकर ब्रा के ऊपर चूचे दबाने लगा, साथ ही मैं घागरे में हाथ डालकर रति की जाँघों पर हाथ फेरने लगा।
रति बिना विरोध किये लेटी थी.
जब मैंने घागरा उतारने की कोशिश की तो रति ने घागरा अपनी कमर तक ऊँचा करके कहा- पूरे कपड़े मत उतारिये. मैं थक गयी हूँ, आप ऐसे ही कर लीजिये, आपका हक़ बनता है।
मैंने रति की पैंटी उतार दी.
उसकी चूत पर हाथ फेरकर महसूस किया तो चूत एकदम सूखी थी।
लेकिन मैंने पढ़ा था और दोस्तों से सुना थाकि जब स्त्री गर्म हो जाती है तो उसकी चूत से रस निकलता है, गीली हो जाती है.
पर मेरी दुल्हन रति की चूत सूखी थी.
मैंने अपना पजामा उतारा और खड़ा लंड चूत में डालने की कोशिश की.
लंड चूत में नहीं जा रहा था.
रति मुट्ठी भींचकर मुँह साइड में करकर चित लेटी थी, जैसे झेल रही हो.
इसी कोशिश में मैं झड़ गया, मेरा वीर्य रति की जाँघों पर गिरा।
मैंने रूमाल से वीर्य साफ़ किया, रति ने घागरा अपने पैरों की तरफ किया, चोली पहनी और करवट लेकर सो गयी।
तब मैंने अपना पजामा पहना और निराश सा सो गया.
सुबह मैंने अपने शादीशुदा दोस्त से सब कहा।
दोस्त बोला- पहली बार ऐसा बहुतों के साथ होता है। संतोष, तू आज रात बीवी के पास जाने से पहले हस्तमैथुन करके जाना. इससे तुझे जोश देरी से आएगा और तू जल्दी नहीं झड़ेगा. और डालने से पहले लंड पर नारियल का तेल लगा लेना.
रात को जब मैं बैडरूम में गया तो रति ने नाइटी पहनी थी।
मैं रति को चित लिटाकर उसके होंठ चूमने लगा.
सिर्फ मैं ही चूम रहा था, रति नहीं!
उसने अपना मुँह बंद कर रखा था, मैं उसके होंठ अच्छे से चूस नहीं सका।
रति की नाइटी सामने से खुलती थी, मैंने नाइटी खोल दी, उसका पूरा बदन ब्रा पैंटी में दिख था, सिर्फ कंधों पर और पीछे नाइटी थी.
मेरी देसी वाइफ ने नाइटी पूरी नहीं उतारने दी.
मैं ब्रा के ऊपर चूचे दबाने लगा.
फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी.
मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और चूत में डालने की कोशिश की.
परन्तु मुझे चूत का छेद नहीं मिल रहा था.
तब रति ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत की छेद पर रखा.
मैंने झटके से लंड चूत में डाल दिया।
रति आ आ करने लगी, उसकी आंखों में आंसू आ गए।
मैंने कहा- ज्यादा दर्द हो रहा है तो थोड़ा रुकता हूँ।
रति बोली- मेरी फ़िक्र मत करिये, आप कर लीजिये, पति का हक़ बनता है।
मैं चुदाई करने लगा.
रति मुर्दे की तरह लेटी रही, ना मना किया न सम्भोग में उत्साह दिखाया।
मैं थोड़ी देर में चूत में झड़ गया.
कुछ पल बाद मैं रति के ऊपर से उतर गया.
चादर में रति की सील टूटने से खून लगा था।
रति ने चादर बदली, बाथरूम से आकर कपड़े पहनकर सो गयी।
मुझे अपनी दुल्हन की पहली चुदाई में उतना मजा नहीं आया जिसकी मैंने कल्पना की थी।
मैं और रति पुणे चले गए, जंहा मैं नौकरी करता था।
मेरे बचपन की दोस्त मोना और उसके पति ने मेरे फ्लैट को सजा रखा था, उन्होंने हमारा स्वागत किया।
मैंने शादी के समय रति की मुलाकात मोना से कराई थी।
मोना ने छोटी सी पार्टी का इंतजाम किया था, पार्टी के बाद दोनों चले गए.
रति ने फ्लैट सलीके से सजाया, वह अच्छा खाना बनाती।
रात को रति सामने से खुलने वाला नाइटी पहनती थी पर सम्भोग के समय वह नाइटी सामने से खोलकर कहती- जल्दी कर लीजिये।
रति मोना ब्रा भी नहीं उतारती, नाइटी भी पूरी नहीं उतारती.
मैं उसकी पैंटी उतारकर बेमन से सम्भोग करता।
रति की चूत से कभी रस नहीं निकलता, हर बार मुझे लंड पर तेल लगाना पड़ता.
ऐसे ही एक महीना बीत गया.
मैंने रति के सेक्स में ठंडी होने की समस्या की बात मोना को बताने का निर्णय किया यह सोच कर कि शायद मोना कोई हल निकाल सके।
मेरे और मोना के बीच कोई पर्दा नहीं था।
मैं और मोना बचपन में डॉक्टर डॉक्टर खेलते थे। कभी मैं डॉक्टर बन जाता और मोना के जनन अंगों ( चूत, चूची ) की जाँच करता, कभी मोना डॉक्टर बनकर मेरे लुल्ली की जाँच करती।
थोड़ा बड़ा होने पर जब मेरा लंड खड़ा होने लगा, मोना सोये लंड को सहलाकर कहती- जादू से बड़ा हो जा!
लंड बड़ा होने पर वह खुश होती।
मोना के चूचे जब बड़े होने लगे, वह मुझे दिखाती।
हम इससे आगे नहीं बढ़े.
बाद में मैं कॉलेज में पढ़ने पुणे चला गया.
एक दिन मैंने मोना को फ़ोन किया, कहा कि मैंने उससे अकेले में मिलना है।
मैं ऑफिस से जल्दी छुट्टी लेकर मोना के घर गया।
वहां उसे मैंने रति के सेक्स में ठंडी होने की बात विस्तार से बताई।
जब मोना ने सुना कि रति की चूत कभी गीली नहीं होती, कामरस नहीं निकलता तो मोना बोली- शायद रति को किसी कारण उत्तेजना नहीं आती, मैं रति से निकटता बढ़ाकर कारण जानने की कोशिश करुँगी। यदि इससे बात नहीं बनी तो डॉक्टर से सलाह करना।
मोना ने पूछा- संतोष क्या मोना ने हॉस्टल में रहकर पढाई की?
मैंने कहा- हाँ, रति कॉलेज हॉस्टल में रहती थी. पर इसे मोना के ठंडी होने का क्या सम्बंध?
मोना बोली- ऐसे ही पूछ लिया!
अगले दिन से जब मैं ऑफिस में होता मोना रोज रति से मिलने आने लगी.
कभी रति मोना के घर जाती, दोनों मिलकर बाजार जाती, नए नए खाने बनाती, घूमती, मूवी देखती।
यह सब मुझे रति ने बताया।
एक हफ्ते बाद रति कुछ ज्यादा ही खुश दिखने लगी.
ऐसे ही दो सप्ताह बीत गए.
मोना ने मुझे अकेले मिलने बुलाया।
मिलने पर मोना बोली- संतोष, तुम अपनी पत्नी रति को बिस्तर पर गर्म करने के लिए उसकी चूत चूमा करो, चूत में जीभ डालकर चूसा करो, भगनासा पर उंगली फिराओ।
मैंने कहा- मुझे चूत चूसनी नहीं आती।
मोना बोली- सीख जाओगे, मुझे विश्वास है रति तुम्हें सिखा देगी।
मैंने पूछा- मोना तुमको कैसे मालूम हुआ?
मोना बोली- यह नहीं पूछो, जैसा कहा वैसा करो!
रात को मैंने रति को चूमना शुरू किया.
उसने नाइटी सामने से खोल दी, मुट्ठी भींचकर अकड़ कर चित लेट गयी।
मैंने रति की पैंटी उतारी और उसकी चूत चूमने लगा.
रति ने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया, पैर और फैला दिए।
मैं चूत में जीभ डालकर चूत चूसने लगा, भगनासा पर उंगली फेरने लगा।
रति सी सी सीत्कारी लेने लगी, मेरे सर को चूत की तरफ दबाने लगी, मचलने लगी।
उसकी चूत से पहली बार कामरस की धार बहने लगी।
रति ने अपनी ब्रा उतार दी, वह अपने चूचे दबाने लगी.
रति बुदबुदा कर बोली- अब रहा नहीं जा रहा, जल्दी से डाल दो!
उसने पहली बार नाइटी पूरी उतार दी।
मैंने लंड बिना तेल लगाए डाला, चूत गीली होने से आसानी से लंड चूत में चला गया।
मैं धीरे धीरे चोदने लगा, चूचे दबाने लगा, चूचे चूसने लगा।
रति कमर उछालकर साथ देने लगी।
वह बोली- और जोर से!
मैंने चोदने की गति बढ़ा दी.
करीब 15 मिनट बाद रति की चूत से रस का फव्वारा निकला.
इसके बाद वह निढाल लेट गयी.
मैंने अपनी पत्नी की चुदाई जारी रखी, थोड़ी देर में मैं रति की चूत में झड़ गया।
रति लेटे लेटे मुस्कुरा रही थी, उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।
मुझे पहली बार सम्भोग में इतना आनंद आया.
रति बाथरूम से होकर आयी और नंगी ही लेट गयी.
मैं बाथरूम से लंड धोकर आया।
रति के पास लेटकर मैंने उसके ओठों पर चुम्बन लेकर कहा- कैसा रहा?
उसने मेरी छाती में मुँह छिपा लिया, मेरे बालों पर हाथ फेरने लगी.
मैं रति की पीठ पर हाथ फेरने लगा।
मुझे लगा कि रति की एक बार फिर सम्भोग की इच्छा हो रही है.
मैंने रति के कान में कहा- मेरा चूसोगी?
रति ने हाँ में सर हिलाया.
हम 69 पोजीशन में आ गए, मैं रति की चूत चूस रहा रहा था, रति मेरा लंड।
रति की चूत फिर से गीली हो गयी।
वह बोली- अब मेरी बारी है.
उसने मुझे चित लेटने को कहा, मेरा लंड चूत में लेकर रति उछलने लगी।
उसके भरे चूचे उछल रहे थे, मैं चूचे दबाने लगा।
थोड़ी देर बाद रति मेरे ऊपर से उतरकर बोली थक गयी।
मैंने रति को घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ी किया, फर्श पर खड़े होकर उसकी चूत में लंड डाला, उसकी कमर पकड़कर घमासान चुदाई की।
करीब आधा घंटे बाद हम दोनों झड़ गए और थककर नंगे ही सो गए.
दूसरे दिन मैंने ऑफिस से मोना को फ़ोन करकर कहा- मोना धन्यवाद! तुम्हारा बताया तरीका काम आया।
मोना बोली- दोस्ती में धन्यवाद नहीं! ऐश करो।
छुट्टी के दिन मैंने मोना और उसके पति को खाने पर बुलाया.
मैं और रति रोज सम्भोग का आनंद लेते। मैं और रति साथ में सेक्स वीडियो देखते, नए नए आसान में सम्भोग करते।
मोना और रति दिन के समय अक्सर मिला करती।
दो महीने बाद एक दिन बाजार में मेरी मुलाकात मोना से हुई, हम दोनों चाय पीने बैठे।
मोना ने पूछा- संतोष, तुम दोनों का सेक्स जीवन कैसा चलो रहा है?
मैंने कहा- बहुत बढ़िया, सब तुम्हारे कारण ठीक हुआ.
मोना- तुम दोनों कभी साथ में सेक्स वीडियो देखते हो?
मैं बोला- अक्सर देखते हैं. बहुत कुछ सीखा उससे!
मोना- कभी BDSM वीडियो भी देखो साथ? जिसमें लड़की के हाथ पलंग से बांध कर, उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर, उसकी चूत चूसी जाती है, सम्भोग किया जाता है। लड़की को घोड़ी बनाकर सम्भोग के समय उसके कूल्हों पर चांटे मारे जाते है। मैं तुम्हे लिंक भेज दूंगी, तुम वीडियो डाउनलोड कर लेना।
मैंने पूछा- मोना, तुम और तुम्हारे पति सेक्स वीडियो देखते हो?
मोना बोली- हाँ!
मैंने वीडियो पेन ड्राइव में डाउनलोड किया, उसे कई बार अकेले में देखा।
फिर मैंने रस्सी खरीदी, कपड़े का काला चश्मा मेरे पास था जो मुझे हवाई जहाज में मिला था।
रात को मैंने रति को कहा- कल छुट्टी है, साथ में बैठकर सेक्स वीडियो देखें?
मैंने पेन ड्राइव टीवी पर लगा दिया।
BDSM का वीडियो देखकर रति अपने जाँघों और चूत पर हाथ फेरने लगी।
मैंने पूछा- करके देखें?
रति मेरा हाथ पकड़कर पलंग पर ले गई
मैंने रति के कपड़े उतार दिए, उसे चित लिटाकर उसके हाथ पलंग पर बाँध दिए, काले कपड़े का चश्मा पहना दिया।
मैं रति को जांघ चूमने के बाद उसकी चूत चूसने लगा.
रति आनंद से मचल रही थी, उसकी चूत से रस निकलने लगा.
वह बोली- अब शुरू करो।
मैंने रति की घमासान चुदाई की.
फिर रति के हाथ खोलकर उसे घोड़ी के समान खड़ा किया।
मैं पीछे से उसकी चुदाई कर रहा था और उसके कूल्हों पर चांटे मार रहा था।
हर चांटे के बाद रति को और जोश आता, वह कमर हिलाकर लंड और अंदर लेने की कोशिश करती.
कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए.
सुबह नाश्ते के बाद रति बोली- सन्तोष, तुम कपड़े उतारकर घोड़ा बन जाओ।
मैं घोड़ा बनकर पलंग पर खड़ा हो गया।
रति ने अपनी चुन्नी मेरे पीठ पर बाँधी, नंगी होकर मेरे पीठ पर चुन्नी को लगाम के समान पकड़कर बैठ गयी, उसके हाथ में लकड़ी का स्केल था।
उसने कहा- आइने में देखो।
मैंने देखा कि रति स्केल को तलवार के समान पकड़कर मेरे पीठ पर बैठी है, उसके चूचे तने थे, बहुत सुन्दर सेक्सी दिख रही थी।
रति ने स्केल मेरे कूल्हे पर मारकर कहा- चल मेरे लौड़े … ओह सॉरी घोड़े!
मैं चलने लगा.
हम दोनों हंस रहे थे.
थोड़ी देर बाद मैंने कहा- घोड़ा थक गया है.
रति उतर गयी।
उसने मुझे चित लिटाकर मेरे हाथ पलंग पर बांध दिये, काला चश्मा पहना दिया.
मुझे कुछ दिख नहीं रहा था।
रति मेरा लंड चूसने लगी.
मेरा लंड उछलने लगा।
रति ने चूत मेरे मुँह पर रखकर कहा- चूसो!
मैं पत्नी की चूत चूसने लगा.
उसका कामरस मेरे मुँह के अंदर जा रहा था।
कुछ देर बाद रति मेरे लंड को चूत में लेकर मेरी सवारी करने लगी.
काफी देर बाद वह झड़कर मेरे ऊपर लेट गयी।
मेरा लंड अभी भी खड़ा था।
रति ने लंड तब तक चूसा जब तक मैं नहीं झड़ा, उसने मेरा वीर्य पी लिया।
मैंने फ़ोन करके मोना को बताया- BDSM का वीडियो रति को बहुत पसन्द आया, हमने करा भी!
मैं- मोना, तेरी सलाह से मेरी जिंदगी बदल गयी. मैं तुझे उपहार देना चाहता हूँ, क्या चाहिए? और एक बात, तुझे कैसे मालूम पड़ा कि रति को सेक्स में क्या पसंद है?
मोना बोली- मैंने उपहार ले लिया है। संतोष, तूने बताया था कि हॉस्टल में तूने अपने रूम पार्टनर के साथ गे सम्भोग का मजा लिया. ठीक उसी तरह लड़कियां भी लेस्बियन सेक्स का आनंद हॉस्टल में लेती हैं. मैंने इसीलिए पूछा था रति ने क्या हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की? मैं भी हॉस्टल में रहती थी। मैंने रति से दोस्ती की, तेरी वाइफ लेस्बियन थी. मैंने उसके साथ लेस्बियन सेक्स का आनंद लिया, यही मेरा उपहार है। रति को क्या अच्छा लगता है, यह मालूम हो गया, मैंने तुझे बता दिया। इस बात की चर्चा रति से मत करना। रति यदि लेस्बियन नहीं होती तो भी मालूम हो जाता! पर समय लगता, हम औरतें अपने से जीवन की बातें एक दूसरी को बताती हैं.
मेरी ठंडी बीवी अब सेक्सी बीवी हो गयी है.
तब से अक्सर हम BDSM का खेल खेलते हैं.
हम खूब मजे करते हैं.
आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई Hindi Sex Stories के बारे में बताने जा रहा हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं दिल्ली इंजिनियरिंग कॉलेज के आखिरी वर्ष में था। घर के सभी लोग गर्मियों की छुट्टियों में गाँव (नैनीताल) गये थे। घर की देखभाल और मेरे खाने के लिए मेरी छोटी बहन की विधवा सास घर में रहने आई थी। उसका फिगर ३२-३४-३२, कद में मेरे ही बराबर, उम्र ३९, गदराया बदन उसकी छाती और गाँड दोनो ही मस्त थे। एक बार जो देख ले, उसका लंड एक सेकेंड मे ही घोड़े का लंड बन जावे ! उसके पति को मरे काफ़ी साल हो गये थे, इसलिए वो काफ़ी सालों से लंड के लिए जुगाड़ देख रही थी।
तो दोस्तो, मैं भी काफ़ी दिनों से जिसको चोदने के सपने देख कर मूठ मरता था, आज मेरा सपना सच होगा, यह मुझे मालूम नहीं था। वो किचन में काफ़ी बार मुझसे जानबूझ कर अपनी चुचियाँ या अपनी गोल-मटोल गाँड किसी न किसी बहाने छुआ रही थी पर मैं उसकी इस हरकत को नज़र-अंदाज़ कर रहा था। मुझे सेक्स के बारे में कोई ज्ञान नहीं था।
रात का खाना खा कर हम दोनों अलग-अलग कमरे में सोने के लिए चले गये। एक घंटे तक उसको चोदने के बारे में सोच-सोच कर नींद नहीं आई, सो पेशाब करने के लिए उठा और पेशाब करने के बाद मैं उसके कमरे में गया तो मैंने देखा कि वो पेटिकोट और ब्लाऊज़ में सो रही थी। उन्हें देख कर मेरे शरीर में कम्पन सी होने लगी। मैं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। मैं अपने आपको उसकी तरफ़ जाने से रोक नहीं पा रहा था। वो देखने में बिल्कुल मस्त थी।
मेरा लण्ड उसको देखते ही खड़ा हो गया था। मेरा एक हाथ उसकी टांग पर गया और धीरे धीरे उसके चूतड़ों तक पहुँच गया। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया, इतने में ही वो जाग गई। जैसी ही वो जगी, मैं वहाँ से भाग लिया और अपने कमरे में आ गया। थोड़ी देर बाद वो मेरे कमरे में आई और आते ही बोली- तुम क्या कर रहे थे?
मैं एकदम डर गया, मेरा चेहरा लाल हो गया। मैं चुप रहा। वो मन ही मन खुश हो रही थी, मैंने हिम्मत करके कहा- आगे से ऐसा नहीं होगा !
इस पर वो बोली- क्या नहीं होगा?
मैंने मुंह नीचे झुका लिया।
वो बोली- अब शरमा रहा हैं ! जब शर्म नहीं आई जब मेरे गाँड मे अंगुल कर रहा था !
मैंने उससे कहा- मैंने जान बूझ कर नहीं किया ! मैं अपने आप को रोक नहीं पाया !
उसको पेटिकोट और ब्लाऊज़ में देख कर मेरा लण्ड फ़िर तन गया था, उसने एक नज़र से ही उसे देख लिया था। वो बोली- अब तूने मुझे गरम कर दिया है, तुझे मेरे को चोदना पड़ेगा।
मैंने कहा- मुझे क्या करना होगा?
उसने कहा- मेरे कपड़े उतार !
मैं डर गया, मैंने कहा- नहीं !
उसने कहा- उतार भोसड़ी के ! नहीं तो तेरी ऐसी तैसी करवा दूंगी !
मैंने फिर डरते डरते पेटिकोट, ब्लाउज व चड्डी उतारी, और फिर उसने अपनी चूची मेरे हाथों में थमा दी और कहा- ले बेटा मज़े कर !
मैं उसकी चुचियों को सहलाने लगा और मसलने लगा। मेरे शरीर में एक अलग सा अनुभव हो रहा था ! उसके मुँह से आहह उह्ह स स स स स की आवाज़ आ रही थी। धीरे-धीरे मैं उसके शरीर को चूमने लगा। मेरा लण्ड एकदम सख्त हो गया था, उसने नीचे कुछ नहीं पहना था, मेरा एक हाथ उसकी चूत में जा रहा था, वो एकदम गरम हो गई थी और गालियाँ दे रही थी- चोद साले ! चोद मुझे !
उसने मेरा लण्ड हाथ में ले लिया और मेरे सारे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों नंगे थे। उसने मुझसे पूछा- तूने पहले कभी चुदाई की हैं?
मैंने कहा- नही !
तब उसने कहा- अपना लण्ड मेरे चूत में डाल !
मैंने पूरी कोशिश की लेकिन लण्ड चूत में नहीं घुस रहा था, तब उसने अपनी गांड के नीचे तकिया लगाया, मुझे खड़ा करके लण्ड घुसाने को कहा। इस बार लण्ड का सु्पाड़ा चूत में घुस गया, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं स्वर्ग में हूँ ! उसके बाद एक झटके में ही लण्ड पूरा उसकी चूत में घुस गया ! तीन चार झटको में ही मैं झड़ गया। तब उसने बताया कि पहली बार ऐसा ही होता हैं, तुम सच बोल रहे थे कि तुम ने पहले चुदाई नहीं की हैं।
उस रात उसकी तीन बार चुदाई की, फिर तो जब भी मौका मिलता, मैं उसको चोदता।
मुझे निःसंकोच ई मेल करे- Hindi Sex Stories
मेरी शादी के बाद एक महीना Indian Sex Stories तो रोज 4 से 5 बार चुदाई करते हुए निकल गया, और कैसे निकला कुछ पता ही नहीं चला। उसके बाद भी सेक्स के प्रति दीवानापन बना ही रहा। अक्सर औरतों की आदत होती है कि वो पति को ताने मारती रहती हैं कि आपको तो बस सेक्स के अलावा कुछ सूझता ही नहीं है।
मैंने उससे पूछा कि शायद तुम्हारे मायके में तुमको खिलाने के लिए कम पड़ने लगा होगा इसलिए तुम्हारी शादी करनी पड़ी !
तो पत्नी बोली- हो ओ ओ ओ ओ, कोई नहीं, खूब था !
मैं बोला- फिर लिखाई पढ़ाई लायक धन नहीं होगा !
तो वो बोली- और कितना पढ़ना था, खूब तो पढ़ लिया !
मैंने फिर पूछा- तो ओढ़ने पहनाने में असमर्थ होने लगे होंगे?
पत्नी बोली- आप भी ना कैसी बातें कर रहे हो, रुपये पैसों की कमी तो कोई नहीं थी !
तो मैं बोला- मेरी प्यारी प्राणेश्वरी ! अरे तो जिस चीज की कमी थी वो था लंड, और सेक्स ! समझी ना ! और इसी के लिए अपनी शादी की गई है और जिसके लिए शादी की गई है, उसका अनादर क्यों करें !
यह तो मन की खेती है, जब भी मन करे खूब चुदाई करो। इससे भी कभी मन भरना चाहिए क्या !
अरे यार लोगों में कई तरह की गलत धारणाएँ होती हैं, कई तो उन धारणाओं के चलते सेक्स का मजा नहीं ले पाते हैं, और कई लोग असमर्थ होते हैं, जल्दी ही स्खलित हो जाते हैं या किसी कारणवश उनका मन ही नहीं करता, वो बेचारे वैसे मजा नहीं ले पाते हैं, इसलिए जब तक इस मशीनरी को चालू रखेंगे ये सही तरीके से काम करेगी, वरना खराब हो जायेगी।
और मेरी दीवानगी पर तो तुझको फख्र होना चाहिए, कि इस कारण ही सही मैं तुम्हारे आगे पीछे तो घूमूँगा ना !
और मजे की बात कि मेरी पत्नी को यह बात ठीक से समझ आ गई, उसके बाद उसने कभी मुझे इस बात का उलाहना नहीं दिया।
लगभग बीस साल शादी को हो चुके हैं, अब कुछ समय से मेरी पत्नी में कुछ बदलाव आए हैं, वो सेक्स के लिए मना तो नहीं करती है, लेकिन वो सेक्स में सक्रिय भाग भी नहीं लेती है, मुझे सेक्स करना हो तो फोरप्ले मुझे अकेले को करना होता है, वो नहीं करती, सेक्स के लिए खुद पहल नहीं करती, हाँ सेक्स में ओर्गास्म लेने के लिए जरूर सक्रिय होती है ! बस, हो गयी चुदाई उसकी तरफ से ! चुम्बन लेने को मना करती है, बोलती है मेरा दम घुटता है।
मैंने उसको समझाया कि तुम किस के समय मुँह से सांस क्यों लेती हो, नाक से लो!
तो भी वो मना करने लगी है, बोलती है किस मत करो।
अब बताइये जो चीज मुझको सबसे अच्छी लगती है, जिस क्रिया में मैं 10-20 मिनट आराम से निकाल सकता हूँ, वो ही नहीं करने को मिले…
खैर…
मैंने कई जगह पढ़ा है कि लोग अपने लण्ड को तीन इंच चौड़ा और 9 इंच लम्बा बताते हैं।
एक आम इंसान के लिए यह सोच कर अपना दिमाग खराब करने की कोई बात नहीं है…
मैं एक बहुत साधारण सा उदाहरण दे रहा हूँ-
आप एक बिसलरी की पानी की बोतल ले लीजिये, यह बोतल तीन इंच चौड़ी होती है और इसके ऊपर का मुंह जहां से बोतल घूमना शुरू हो जाती है वहां तक नौ इंच लम्बाई होती है, मैंने 9 इंच लम्बाई का तो सुना है और बन्दे को देखा है लेकिन तीन इंच चौड़ा… मैंने कभी भी नहीं देखा…
मेरी सेक्स पॉवर में कोई कमी नहीं आई, अब मुझे रोज ही अधिकतर मुठ मार मार कर काम निकालना पड़ता है। जहां सेक्स रोज करते थे अब 20 दिन से एक महीना तक निकल जाता है, मन भटकने लगा, कि कोई साथी मिल जाए जो मेरी समस्या को समझे और मेरा साथ दे।
मेरी कंप्यूटर रिपेयरिंग शॉप के बाजू में मोबाइल कम्युनिकेशन की दुकान खुली, कुछ दिन तो बन्दा लगातार बैठा फिर उसने एक लड़की को वहाँ अपोइंट किया और खुद ने किसी और मल्टीप्लेक्स में एक और दूकान खोल ली और वहाँ बैठने लग गया। एकदम स्लिम लड़की जवानी की गोद में सर रखा ही था और जवानी में लड़की को जैसे खूबसूरती और अरमानों के पंख लग जाते हैं, वो थोड़ा बोलने में बोल्ड हो जाती है, वो भी शुरू में तो कम बोलती थी, फिर बोल्ड हो गई, किसी बात को लेकर परेशानी होती तो मुझे बोलती।
हम लोग आपस में खुलने लगे, एक दिन बहुत ही अजीब सा वाकया हुआ…
उसको सू सू जाना था वो मुझसे बोल गई कि मैं अभी आई ! ज़रा इधर दुकान में ध्यान रखना !
वो गई और वापस आई और बहुत परेशान सी लगी, कुछ देर बीत गई…
फिर हिचकती सी बाहर आकर मुझे बोली- सर, प्लीज ! एक मिनट इधर आयेंगे?
मैंने लड़कों को बोला- तुम लोग काम करो, मैं आया !
और उसके पीछे उसकी दुकान में गया, वो अन्दर केबिन में चली गई थी, मैं केबिन के दरवाजे पर जाकर बोला- हाँ क्या हुआ?
तो उसका मुँह लाल हो गया, बोली- मुझे शर्म भी आ रही है और इमरजेंसी इतनी है कि मैं बिना कहे रह भी नहीं सकती।
मैंने कहा- तो कह दे ना, फिर शर्म की क्या बात है।
तो वो हिचकते हुए रुक रुक कर बोली- सर मैं सु सु गई थी… मेरी सलवार… क्या बोलूं,
मैंने कहा- अरे बोल ना…
तो बोली- नाड़े में गाँठ लग गई है…
मैंने कहा- ओह्ह्ह, है तो समस्या ही ! लेकिन जो करना है वो तो करना ही पड़ेगा…
मैं केबिन के अन्दर हो गया, उसको एक साइड में किया और कुरते को ऊपर कर के नाड़े में पड़ी गाँठ को सही किया, और उसको सु सु करने भेज दिया…
मेरी क्या हालत हुई होगी आप भी इस हालत में होते तो… सहज ही अंदाजा लगा लो…
मैंने छोटे को चड्डी में हाथ डाल कर ऊपर की ओर किया और अपनी धड़कन पर काबू करने का यत्न करने लगा।
सपना का क्या हाल हुआ होगा, जिस तरह से बेचारी के हाव भाव लग रहे थे, धड़कन तो उसकी भी बढ़ ही गई होगी…, उसका मुँह एकदम लाल हो गया था। इसका मतलब पहली बार किसी मर्द का हाथ इस तरह से उसको लगा था…
मैंने सोचा कि मैंने तो क्या गलत किया, उसने कहा तो मदद कर दी ! इमरजेंसी थी ही इतनी ! खैर अब होगा जो देखा जायेगा…
अब मेरे मन में एक अरमान जागा कि सपना यदि तैयार हो जाए तो…
जो घुटन मेरे मन में मुझे महसूस होती है वो ख़त्म हो जायेगी।
खैर… मैंने अपना सर झटका, सोचा थ्योरी में और हकीकत में बहुत फर्क होता है…
वो जैसे ही अपनी दुकान में आई मैं अपनी दुकान में चला आया, लेकिन आते आते उसके मुँह से थैंक यू सर… निकला, मैंने उसकी और देखा और मुस्कुरा कर चला आया…
अब हम थोड़ा और खुल गए, कभी कभी जब वो बिल्कुल अकेली होती तो मुझसे कह देती- सर लंच कर लो !
तो हम साथ साथ लंच कर लेते थे…, कुछ हंसी मजाक, जोक्स भी चलता रहने लगा…
लेकिन दिल्ली अभी कितनी दूर थी कुछ पता नहीं…
वो खाली टाइम में कंप्यूटर पर गेम्स खेलती थी, ज्यादातर ताश वाले गेम्स !
एक बार लंच में बुलाया तो वही गेम लगा पड़ा था तो मैंने कहा- बोर नहीं होती इन गेम्स से? रोज रोज यही गेम, बच्चों वाले…
तो उसके मुंह से अचानक ही निकल गया- तो सर आप ही बता दो कुछ !
मैंने मौका देख कर कहा- तू बुरा तो नहीं माने तो बता दूंगा !
तो सपना बोली- आप भी क्या बात करते हो, बुरा काहे का मानना?
तो लंच के बाद मैं उसके कंप्यूटर पर अन्तर्वासना साईट लगा कर बोला- यह देख, एक एक टोपिक पर क्लिक कर, यदि पसंद ना आये तो बुरा मत मानना ! बंद कर देना मैं और कुछ गेम्स में कंप्यूटर पर डाल दूंगा…
उसके बाद 3-4 दिन तक उसने न तो मुझसे बात ही की और ना ही मुझे लंच के लिए आवाज ही दी। मैं यदि बाहर निकलता भी तो वो मेरी तरफ नहीं देख कर नजर नीचे कर लेती..
मैंने समझा कि गलत ही हो गया लगता है… शायद यह लड़की इस तरह की चीजों में रुचि नहीं लेती होगी…, मेरे मन में पछतावा होने लगा, कि क्यों मैंने उसको बिना उसका मन जाने इस तरह की साईट उसको दिखाई… बेचारी अच्छी दोस्त थी..
खैर.. अब जो होना था वो तो हो चुका…
हमारे मॉल में दुकानें लगभग 11 तक पूरी तरह से खुलती थी, लेकिन मैं हमेशा 9:30 पर दुकान खोल लेता हूँ।
इस घटना को लगभग 5 दिन निकल गये होंगे कि एक दिन वो भी 9:30 पर आई और सफाई पूजा के बाद उसने मेरी दुकान के बाहर से मुझे आवाज लगाई- सर एक मिनट प्लीज !
मैंने सोचा- जाने आज क्या होगा, यह क्या कहना चाहती है? मैंने सोचा कि अभी यहाँ कोई आस पास है भी नहीं… जो गलत हो गया उसको सुधरने का मौका भी है, यह सोच कर धड़कते दिल से उसकी दुकान में चला गया। वो मिठाई का डिब्बा हाथ में लेकर खड़ी थी, बोली- मिठाई खाओ सर…!
मैंने मिठाई का पीस हाथ में लेकर पूछा- किस खुशी की मिठाई है?
तो बोली- मैं आज बी ए की परीक्षा में पास हो गई।
मेरे मुंह से निकला अरे वाह…! बधाई हो !
और आधा टुकड़ा उसके मुँह में डाल दिया और बाकी का अपने मुँह में और उस पीस को ख़त्म करके एक और पीस उठाया। फिर मिठाई ख़त्म करके मैंने उसको बोला- सपना मैं तुझसे कुछ कहना चाहता हूँ।
मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई और मुँह से शायद लालिमा भी फूटने लगी हो…
सपना का मुँह भी सकपकाहट से लबरेज हो गया, उसको भी भान होगा कि मैं क्या कहना चाहता हूँ…
मैंने हिम्मत करके कहा- सपना उस दिन जो मैंने तुझको साईट खोल कर दी, यदि तुझे बुरा लगा हो तो मैं सच्चे मन से माफ़ी मांगता हूँ, सच में तेरी मंशा जाने बिना मैंने तुझको वो सब पढ़ने को दिया जो वर्जित माना जाता है, और यह जानते हुए भी कि यदि तुझको सेक्स चढ़ा तो तेरे पास उसको सँभालने का कोई साधन नहीं है। तू किसको कहेगी कि तुझको क्या हुआ है…
सपना का मुँह नीचा हो गया, चेहरा लाल हो गया, और बोली जैसे जम गई हो।
मैंने उसकी ठुड्डी के नीचे अपनी ऊँगली रख कर उसका चेहरा उठाया और मेरी तरफ देखने को बोला।
उसकी नजरें धीरे धीरे मेरी ओर उठी तो मैं बोला- सपना तू मेरी अच्छी दोस्त है, अब तू क्या मानती है यह तो तू जाने, लेकिन मैं तेरी दोस्ती कम से कम तेरी शादी तक तो नहीं खोना चाहता।
तो उसकी आँखों से दो बूँद आंसू टपक आये…
मेरा दिल भारी हो गया।
उसने धीरे धीरे रुक रुक कर कहा- सर मैं भी आपको अपना अच्छा दोस्त मानती हूँ, मैं नाराज नहीं हूँ…, नहीं तो आज इस समय क्यों आती…, मुझे आपसे बात करना अच्छा लगता है…
मेरे मन को कितना चैन आया, जैसे सर पर से पहाड़ एकदम से हटा दिया गया हो…
मैंने कहा- ठीक है तू थोड़ी देर मेरे पास मेरी दुकान पर बैठ… आ जा !
उसने शटर उठे रहने दिए और अलुमिनियम का दरवाजा लगा कर मेरे पास मेरी दुकान में आ गई और मैं रिपेयरिंग के साथ साथ उससे बात भी करने लगा। धीरे धीरे हम दोनों ही सामान्य होने लगे।
लगभग 45 मिनट बातचीत हुई जिसमें हमने एक दूसरे के घर में कौन कौन है, घर कैसा है, एक दूसरे की रुचियाँ क्या हैं यह सब जाना, फिर वो करीब 10:30- 10:45 पर अपनी दुकान में चली गई। अच्छा भी नहीं लगता था कि कोई उसको और मेरे को इस तरह से आपस में घुट कर बातें करता देखे, लड़की जात जल्दी बदनाम हो जाती है…
फिर वो अक्सर जल्दी ही आने लगी, हम दोनों में बहुत सी बातें होने लगी, धीरे धीरे वो मुझसे मजाक भी बहुत करने लगी, उसके चेहरे को देख कर लगता था कि उसको मेरा साथ अच्छा लगता है, वो ज्यादा से ज्यादा टाइम मेरे साथ निकालना चाहती है।
लेकिन मैंने उसको चेता दिया था कि देख सपना अपनी दोस्ती की बात अपने दोनों तक ही सीमित होनी चाहिए ! पगली, नहीं तो लड़की जात को बदनाम होते देर नहीं लगती।
यह बात उसको भी अच्छे से समझ में आ गई और जो भी हंसी मजाक हमें करना होता था वो सब हम और दुकानों के खुलने से पहले कर लेते थे। वो अकेले में मुझे निक नेम सोनू पुकारने लगी, मुझे बहुत अच्छा लगता था।
एक दिन जब मैं 9:30 पर दुकान पंहुचा तो सपना दुकान खोल चुकी थी और मुझसे बोली- सोनू प्लीज आज तुम थोड़ी देर मेरे साथ मेरे पास बैठो ना !
मैंने कहा- ठीक है आधा घंटा के करीब तुम्हारे साथ बिता लूँगा।
तो वो बोली- हाँ हाँ ठीक है।
मैं उसके पास बैठ गया। मैंने थोड़ा सा मूड हल्का करते हुए सपना से कहा- आज क्या बात है गुन्नू, तुम आज बहुत रोमांटिक मूड में लग रही हो, बिजली गिराने का इरादा तो नहीं है ना?
उसका मुँह लाल हो गया, और मेरे हाथ को अपने हाथो में ले लिया और बाजु के साइड में अपना सर हौले से टिका दिया…, मैं चौंका और सपना की ओर देखने लगा, वो नीचे देखने लगी, मैंने अपनी बांह उस से छुडाई ओर उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया ओर दूसरे हाथ से उसकी ठुड्डी उठाई, उसका चेहरा शर्म से लबरेज था… होंट पर एक गीलापन आ गया था, जो किसी लड़की के गरम होने पर आ जाता है, ओर आँखों में एक कुंवारी लड़की की शर्म भरी लालिमा आ गई थी। मुझे डर था कि कोई आ न जाए।
लेकिन वैसे अभी बाजार खुलने में थोड़ा समय था, मैंने सपना से कहा- गुन्नू मेरी रानू, हम आपस में अच्छे दोस्त हैं ना?
तो उसने हाँ में सर हिला दिया।
मैंने फिर कहा- गुन्नू ! अपनी नजरें मुझसे मिलाओ और बताओ कि क्या बात है?
तो उसने नीचे देखते हुए ना में सर हिला दिया और उसकी पलकें बंद हो गई, मैं बुरी स्थिति में फंस गया था, उसको वास्तव में सेक्स की गर्मी चढ़ गई थी।
अब यदि मैं उससे इस स्थिति का फायदा उठता हूँ तो मेरे दिल को गवारा ना था औजर यदि छोड़ता हूँ तो उसका क्या हाल होगा, मैं समझ सकता था। मैंने भगवान् को याद किया और टेबल पर से बाहर के गेट की चाभी उठाई और अन्दर से एल्यूमिनियम का दरवाजा लॉक कर दिया अन्दर सपना के पास आया और उसको अन्दर केबिन में ले गया और हम दोनों दो स्टूल पर सट कर बैठ गए। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसकी ठुड्डी उठा कर बोला- गुन्नू मेरी ओर देख…
बहुत मुश्किल से उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली, मैंने कहा- सेक्स के बारे में जानना है?
तो उसने हाँ में सर हिला दिया.
मैंने उसको सेक्स के बारे में बताना शुरू किया कि कैसे होता है, बच्चे कैसे होते हैं ओर करते में क्या क्या महसूस होता है।
उसने कहा- सोनू, रात को मैंने… अपने मम्मी पापा को… देखा है ! तुम भी करो… मेरे साथ… सब कुछ… वो… ही…
ओह तो यह बात है ! मैंने सोचा…
उसने मेरा दूसरा हाथ अपने दोनों हाथो से पकड़ लिया और उसका सारा शरीर कांपने लगा, उसके पूरे शरीर में थिरकन हो रही थी। ओ माय गोड… मैंने सोचा और मुझे बस एक ही उपचार नजर आया, मैं उसके एकदम सामने हुआ और मैंने उसको अपने से चिपटा लिया ओर उसके होंटो पर अपने होंट रख दिए… हम दोनों स्मूच (होंट ओर जीभ को चूसते हुए किस) की स्थिति में हो गए।
मैंने अपनी पेंट की हुक और जिप खोल दिए, उसकि सलवार के नाड़े को खोल दिया ओर उसका हाथ उठा कर अपने लण्ड पर रख दिया और उसकी पेंटी में हाथ डाल कर उसकी चूत पर सहलाने लगा।
उसकी चूत से पानी टपक रहा था और सलवार का कुछ हिस्सा तक गीला हो गया था। मैंने बैठे बैठे ही उसको थोड़ा ऊपर करके उसकी सलवार और पेंटी को टांगो से अलग किया और एक अन्य स्टूल पर सुखाने की स्थिति में डाल दी जैसे तैसे स्विच बोर्ड पर पंखा चालू कर दिया और उसकी टांगों को थोड़ा सा ऊपर करके उसको अपनी जांघो पर खींच लिया, उसकी चूत को थोड़ा सा खोल कर अपना लंड उसकी चूत की दरार में लम्बाई में रख दिया और उसके हिप्स के नीचे मेरे हाथ रखकर उसको अपने हाथों में थोड़ा सा उठा कर उसकी चूत में मेरे लंड की रगड़ देने लगा।
सपना ने कसमसा कर अपने होंट मेरे होंटो से अलग कर के खोले और बोली- सोनू अन्दर घुसा दो, प्लीज ! मैंने कहा- गुन्नू नहीं ! आज नहीं !
सोनू… प्लीज…
मैंने उसको बांहों में कस कर और भी जोर से भींच लिया, होंट से होंट मिला कर जोर से किस करने लगा, और उसको मेरे लंड से रगड़ देने लगा… अब उसको मजे आने लगे थे… सो वो भी धीरे धीरे हिलने लगी और 3-4 मिनट में ही हम एक दूसरे से जकड़े निढाल हो गए…
और तीन चार मिनट इस स्थिति में निकल गए फिर उसको धीरे धीरे होश आने लगा, आँखें खोल कर उसने अपनी स्थिति देखी, मेरी गोद में बैठी है… केबिन में है… नीचे कुछ नहीं पहना हुआ है… और मेरे नीचे के कपडे भी नीचे हुए पड़े हैं और हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में बंधे हुए हैं… एकाएक उसकी आँखों में लालिमा आई लेकिन उसने अपने हाथ मेरी पीठ से हटा कर मेरे मुँह को अपने हाथों में पकड़ा और और एक किस कर दिया।
सच में इस किस का कोई मुकाबला न था यह अब तक के मजे में सबसे ऊपर था.. आखिर यह किस उसने अपने पूरे होशोहवास में किया था।अब हम जल्दी से अलग हुए, मैंने अपने कपड़े दुरुस्त किये और उसकी सलवार को पंखे के एकदम सामने कर के 5 मिनट में जितना सूख सकता था उतना सुखाया और उसको भी उसके कपड़े पहनाए।
हमने फिर एक बार और किस किया फिर जल्दी से बाहर का दरवाजा खोला, गनीमत कि अभी तक चहल पहल न थी…
फिर मैंने और उसने एक दूसरे को देखकर मुस्कान दी. फिर मैं दुकान खोल कर अपने काम में व्यस्त हो गया।
लंच करते में सपना ने अगले दिन 9 बजे आने को बोला। मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसने आँख मार दी…
मैंने कहा- शैतान कहीं की… ठहर तो… कल देखूंगा…
अगले दिन मैं जब नौ बजे पहुंचा तो सपना दुकान में सफाई कर रही थी। जल्दी से फ्री हुई और मुझे अन्दर लेकर दरवाजा बंद किया और मेरे साथ केबिन में घुस गई और मुझे स्टूल पर बिठा कर मेरी गोद में बैठ गई और बोली- हाँ उस्ताद अब फिर से सिखाओ कल तो मैं होश में थी नहीं…
तो मैंने उसको सेक्स के बारे में फिर से बताना शुरू किया… आज न तो उसमे कल जितनी शर्म थी और ना ही मदहोशी…
वो बड़ी तन्मयता से सुन रही थी, समझ रही थी…
फिर उसने मेरे हाथ अपने बोबों पर लगा दिए और खुद मेरे होंटो को चूसने लगी फिर मेरी पेंट के हुक खोलने लगी…, मैंने उसको सहयोग किया तो उसने मेरे हाथ फिर से अपने बोबों पर रख दिए और मेरी पेंट को खोल दिया फिर खुद की सलवार को भी ! फिर खुद खड़ी होने की हालत में हो गई तो मुझे भी खड़े होना पडा तो उसने नीचे के कपड़े सरकाकर उतर जाने दिए…
फिर उसने मेरे लंड को अपनी चूत के दरार में सेट किया और मुझसे एकदम से चिपक गई, फिर अपने हाथ मेरी पीठ पर बाँध कर अपने पैर हवा में लेकर मेरे कूल्हों पर कस लिए और हिल कर चूत को मेरे लंड से रगड़ने लगी, तो मैंने अपने हाथ उसके बोबों से हटा कर उसके कूल्हों के नीचे किये और रगड़ में हिलाने में सहायता करने लगा। हमारा चुम्बन और भी प्रगाढ़ हो गया और धीरे धीरे वो अकड़ती गयी फिर मैं भी…
अब मैं उसको इसी हालत में लिये दिये स्टूल पर बैठ गया और हम अपनी साँसों में काबू पाने लगे…
ज़रा देर में ही सपना फिर चालू हो गई… चूमा-चाटी, बोबे दबाना चूसना, चूत को रगड़ना…!
फिर वो बोली- सोनू अन्दर डालो… चलो…
तो मैंने पूछा- तेरी एमसी कब हुई थी?
तो वो बोली- सत्रह दिन हो गए !
तो मैंने कहा- देवी और 2-3 दिन रुक जा ! नहीं तो फालतू में बच्चे का रिस्क हो जायेगा !
तो वो बोली- फिर अन्दर डाल कर करोगे…
मैंने कहा- हाँ बाबा हाँ !
वो बोली- प्रोमिस?
मैंने कहा- हाँ बिल्कुल पक्का…
तो बोली- लाओ हाथ और कसम खाओ !
मैंने उसके हाथ में अपना हाथ लेकर कसम खाई…
फिर हमारा दूसरा राउंड पूरा हुआ और उसके बाद हम हमारे काम में लग गए। दो और दिन इसी तरह से निकल गए…
इस बीच में मैंने वेसलीन की एक छोटी डिब्बी लाकर उसके केबिन में रख दी। उसने पूछा तो मैंने कहा- अन्दर वाले दिन काम आएगी ! फिर उसको बताया कि ज्यादा दर्द न हो इसके लिए जुगाड़ बिठा रहा हूँ…
तो वो मचल कर बोली- सोनू यार तुम्हारे जैसा आदमी तो बस… ये ध्यान रखते हो कि नादान से नहीं करना… उसको सेक्स का ज्ञान देते हो, उसे बच्चा न हो जाये ये ध्यान रखते हो.., उसे दर्द न हो ये भी ध्यान रखते हो आखिर क्यों…
मैंने कहा- मेरी जान हो तुम ! मैंने मात्र सेक्स के लिए नहीं, प्यार के लिए तुमको पाया है गुन्नू…
तो उसकी आँखों में जोश और विश्वास देखने के काबिल था…
आखिर एमसी के बीसवें दिन सुबह नौ बजे सपना बहुत उत्साह में थी, जैसे वो कोई तीर मारने जा रही हो।
मैंने उसको कहा तो बोली- हाँ ! तीर ही तो मार रही हूँ…, आखिर जिसके तुम जैसे गुरु हो वो कोई कम तीरंदाज होगा भला…
हम दोनों केबिन में बंद हो गए, और आज हमने एक दूसरे को पूरा नंगा किया और मैंने उसके होंट, बोबे और गर्दन चूसी, बोबे दबाये और खूब जोर से चिपटा कर किस करना चालू किया और सपना को कहा- लंड से खेल…!
वो लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी…! उसकी आँखों में खुमारी उतर आई और चूत में से पानी टपकने लगा…
मैं इसी इन्तजार में था… मैंने अपनी एक ऊँगली में खूब सारी वेसलीन लगा कर उसकी टांगों को फैला कर ऊँगली उसकी चूत में अन्दर डालता चला गया, उसका मुँह खुल गया और एक आह उसके मुँह से निकली।
मैंने पूछा तो बोली- कुछ नहीं…! आप तो करो…!
मैंने कहा- दर्द हो तो मुझे बताना !
तो बोली- सोनू दर्द तो एक बार होना ही है चाहे अभी या बाद में…! बाद का तो पता नहीं लेकिन तुम जैसा साथी हो तो इस साले दर्द की ऐसी की तैसी, होने दो एक बार ही तो होगा…
मैं दंग रह गया मुझे सपना पर बहुत प्यार आया, उसको कितना विश्वास था मुझपर…, जाने क्यों…
मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में दिए हुए ओ के आकार में घुमाने लगा… अन्दर उसका हायमन धीरे धीरे खुलने लगा, फिर 2-3 मिनट बाद में अंगूठे पर वेसलीन लगा कर चूत में डाला और उसके चेहरे को देखा तो फिर उसका मुँह किस करते करते रुक गया, और फिर वो किस करने लगी मैंने अंगूठे को आगे पीछे करना शुरू किया तो वो सिसकारी लेने लगी। धीरे धीरे कुछ देर बाद मैं अंगूठे को ओ के आकार में घुमाने लगा…
2-3 मिनट में उसका हायमन काफी खुल गया तो मैंने कहा- गुन्नू, अब तैयार…?
तो वो चहक कर बोली- अरे वाह सोनू ! मैं तो कब से राह देख रही हूँ… चलो… डालो…
मैं उसकी उत्सुकता देख कर दंग रह गया…
फिर मैंने उसको अपनी गोद में बिठाया और खूब सारी वेसलिन उसकी चूत पर मली ओर मेरे लंड पर भी, फिर हाथ बीच में रखकर अपना लंड उसकी चूत के छेद पर सेट किया… फिर सपना को बोला- गुन्नू अपनी टांगो को बिल्कुल ढीला छोड़… उसके कूल्हों पर मेरे हाथो का दबाव बनाते हुए धीरे धीरे अपनी ओर भींचने लगा… , लंड का सुपाडा अन्दर हो गया।
मैंने कहा- गुन्नू संभालो… दर्द होगा थोड़ा…
तो उसने अपनी टांगों को मेरे शरीर की तरफ एक झटका दिया और लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में आधा चला गया, उसके होंट भिंच गए और वो और और आने दो … की मुद्रा में गर्दन हिलाने लगी…
मैं धीरे धीरे हिलते हुए धक्के लगाते लंड अन्दर डालता गया… और फिर एक बार हम दोनों के होंट आपस में किस करने लगे। हाथ एक दूसरे के बदन पर फिरने लगे… लंड के अन्दर जाने का स्वाद धीरे धीरे सपना को आने लगा और उसके मुँह से सिसकारी और आह निकलने लगी। फिर जो घमासान होना था वो हुआ और अब तक की चुदाई का सबसे शानदार ओर्गास्म आया हम दोनों को…
उसके बाद हम दोनों लगभग 3 साल तक एक दूसरे के हुए रहे…, उसकी खाने पीने, पिक्चर देखने, घूमने की हर ख्वाहिश मैंने पूरी की। फिर उसकी शादी हो गई…, जिस दिन उसकी शादी पक्की हुई वो मेरे कंधे पर सर रखकर…
उसकी जुबानी कुछ बातें –
सोनू ना जाने क्यों मैं तुम पर मर मिटी, तुम्हारा बोलने चलने का ढंग, तुम्हारा सलीका देखकर तुमको मन ही मन चाहने लगी, फिर जब तुम्हारे यहाँ तुमको देखने तुम्हारे पास चली आती थी, जाने दिल अपने काबू में रखना मुश्किल हो जाता था।
फिर जैसे जैसे समय निकलने लगा मेरी दीवानगी तुम पर बढ़ने लगी. मैं चाहती थी कि तुम्हारे पास बैठ कर तुमको देखती रहूं और तुमसे बातें करती रहूँ, तुम्हारी सारी बातें मुझे अच्छी लगने लगी…
मुझे समझ आने लगा कि शायद यही प्यार है. फिर तो तुम पर विश्वास बढ़ने लगा, मैं खुद नहीं समझ पाती थी कि मुझे क्या हो रहा है…
फिर जब तुमने मेरी हालत का नाजायज फायदा नहीं उठाया तो मेरा विश्वास तुम पर और भी दृढ़ हो गया… और सच में तुम्हारा प्यार पाकर मैं निहाल हो गई…
और ये तीन साल तो तीन पलों की तरह से यूँ निकल गए… Indian Sex Stories
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