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इस कहानी Sex Stories का पूरा मज़ा लेने के लिए पढ़िये कैसे मौसी ने मुझे बना दिया कोठे की कुतिया
हम लोग ९ बजे मौसी के कमरे में थे। मौसी ने मेरे और मोनी के लिए कमरे में ही खाना मँगा लिया। खाने में मुर्गे की टांगें और मटन था।
मौसी बोली- लो खाओ, देसी मुर्गा हैं, चूत में आग लगा देगा ! खाओ पियो और मस्तियाओ ! थोड़ी देर बाद ग्राहकों के लौड़ों पर बैठना और अपनी जवानी का रस पिलाना !
खाना बहुत स्वादिष्ट था, हम लोगों ने पेट भर के खाया।
खाने के बाद मौसी बोली- अब तू मस्तिया बहुत ली है, चल अब तुझे धंधे पर बैठाती हूँ ! मुफ़्त में तो मैं पानी भी नहीं पिलाती। अब ध्यान से मेरी बात सुन, नीचे स्पेशल हाल में तुझे मिलाकर कोठे की सबसे हसीन सात लड़कियां खड़ी होंगी और दो लड़कियां नंगी होकर नाचेंगी। ग्राहक तुम्हें खरीदेंगे और गोद में बैठाकर तुम्हें नंगा करेंगे और तुम्हारी चूत और चूचियों को मसलेंगे। तुम सब उनके लंड बाहर निकाल कर चूसोगी और मसलोगी।
डांस देखने का टिकट ५०० रुपये है, गोद में बैठाकर रंडियों की मसलाई करने के कम से कम १००० रूपये १० मिनट के हैं, उसके बाद हर ५ मिनट के ५०० रुपए हैं। लौड़ा चुसवाने के १००० रूपये अलग से हैं। कोई ५००० या ज्यादा देता है तो लोंडी १० मिनट के लिए उसकी ! वो इन १० मिनट में वो लोंडी की चूत मार सकता है।
१ घण्टा यह धंधा चलता है, हर लोंडिया को कम से कम ५००० रुपए कमा के देने होते हैं। चल १० मिनट के लिए तुझे ट्रेनिंग दिलवा देती हूँ !
मौसी ने घन्टी बजा दी, एक लड़की अंदर आई, मौसी बोली- शो कराने वाले चारों मुस्टंडों को भेज ! चारों मुस्टंडे थोड़ी देर में अंदर थे, उनके नाम रोकी, पिंटू, टीनू और भूरा थे। सब खतरनाक चेहरे के गुंडे लग रहे थे।
मौसी बोली- रोकी, तू जहाँ लड़कियां बिकेंगी, वहां खड़ा होगा ! पिंटू जहाँ रंडियां मसली जा रही होंगी वहाँ बैठेगा और रंडी अगर ५ मिनट के अंदर लौड़ा नहीं निकालेगी तो उस पर सिगरेट की चिंगारी डालेगा, टीनू पैसे इकठा करेगा, भूरा देखने वाले ग्राहकों को कण्ट्रोल करेगा।
मौसी पिंटू से मेरी तरफ इशारा करते हुए बोली- बाकी रंडियां तो सब खेली खाई हैं, यह नई है, तू जरा इसे गोद में बैठा ! बाकी मैं सिखाती हूँ !
पिंटू ने मुझे गोद में उठाया और पलंग पर अपनी जांघों पर बिठा लिया सभी गुंडे कुटिल मुस्कान के साथ मुझे देख रहे थे। पिंटू ने मेरे ब्लाउज़ और पेटीकोट उतार कर मुझे पूरा नंगा कर दिया और बोला- रंडी, साली ! अब तू पूरी कोठे की कुतिया लग रही है ! उसने कस कस कर मेरी चूचियां मसलनी शुरू कर दीं।
मौसी मेरे पास आईं और मेरा हाथ पिंटू के लौड़े पर रख दिया और बोली- जरा इसके शेर को तो बाहर निकाल !
मुझे लौड़ा निकलने मैं शर्म आ रही थी, तभी एक गुंडे ने मेरे ऊपर जलती हुई सिगरेट की राख़ डाल दी, मैं उई मर गई ! कहकर उठने लगी लेकिन पिंटू इतनी कस कर पकड़ा हुआ था कि मैं उठ नहीं पाई।
मौसी बोली- लौड़े को नहीं निकलेगी तो यही हाल होगा ! चल सारे बटन खोल इसके और लौड़ा मसल !
मैं घबरा गई, मैंने जल्दी जल्दी पिंटू की पैंट के सारे बटन खोल दिए नीचे मुस्टंडा कुछ नहीं पहना था, उसका सात इंच मोटा लंड तनतना के निकल आया, जिसे मैंने कस कस कर मुठी में दबा लिया। मौसी ने एक ट्यूब पिंटू की तरफ बढ़ा दी जिसे उसने मेरी चूत पर लगा दिया। मेरी चूत में चुदने की कुलबुलाहट भर गई। मौसी ने दो मिनट लगातार मुझसे पिंटू के लंड की मुठ मरवाई। इसके बाद मौसी ने मुझे उठा दिया और खड़े खड़े ही मुझसे सभी मुस्टंडों के लंड निकलवाए जिसमें से दो चड्डी पहने हुए थे और उनकी चड्डी नीचे सरका के मुझे उनके लंड निकालने पड़े।
इसके बाद मौसी ने उनमें से जो सबसे भद्दा और गन्दा दिख रहा था, जिसका नाम भूरा था, उसका लौड़ा मुझे पकड़ाया और बोली ले इसका लंड चूस !
भूरा काफी गन्दा था, मैं बोली- मौसी मैं इसका लंड मुँह में नहीं लूंगी !
मौसी ने पिंटू के हाथ से सिगरेट ली और मेरे नंगे चूतड़ों पर मसल कर बुझा दी। मैं जोरों से चीख उठी। मौसी गुर्राते हुए बोली- हरामखोर, साली, मैं प्यार से बात कर रही हूँ और तू अपने को कोठे की रानी समझ रही है? यह साले मोटे मोटे मुस्टंडे मुझे ना नहीं करते, तू ना कर रही है? और उन्होंने मेर बाल खींच दिए। मैं बिलबिला गई। मरती क्या नहीं करती, मैंने भूरा का गन्दा सा काला लंड अपने मुँह में डाल लिया।
मौसी बोली- कुतिया, ठीक से आगे पीछे कर के चूस ! यहाँ रानी कोई नहीं, सब रंडियां हैं अपने को अब तू कोठे की कुतिया मान ! इतने नखरे करेगी तो हाल में क्या लौड़ा चूसेगी।
मैं बहुत डर गई थी, मैं लपालप भूरा का लौड़ा चूसने लगी। आज तक मैंने लौड़ा नहीं चूसा था। भूरा गन्दा जरूर था लेकिन उसका लौड़ा चूसने में मुझे मज़ा आ गया। चिकना लौड़ा मेरे मुँह में आगे पीछे हो रहा था। मुझे लौड़ा चूसने में गज़ब का मजा आने लगा। मैंने ५ मिनट तक मस्त होकर लौड़ा चूसा। मौसी ने मुझसे भूरा के टट्टों पर भी जीभ फिरवाई।
मौसी ने थोड़ी देर बाद सबको बाहर भेज दिया और मुझसे बोली- देख, धंधे के मजे ले ! मैं जैसा कहूँगी वैसा करेगी तो बहुत मज़ा आएगा और नहीं करेगी तो तेरी चमड़ी को जला दूँगी ! कल मैं तुझे छोड़ दूंगी। तू कोठे से चली जाना। लेकिन जो सेक्स का मजा यहाँ ले लेगी वो तुझे और कहीं नहीं मिलेगा !
उसके बाद मौसी मुझे एक कमरे में ले गईं, वहां मोनी और मुझे मिलाकर सात लड़कियां थी। मौसी ने हम सबके कपड़े उतरवा दिए। अब हम सातों रंडियां पूरी नंगी थीं।
मौसी बोली- तुम्हारी चुचियों पर एक पतली चुन्नी रहेगी और चूत पर पतली चड्डी होगी जिसे ग्राहक उतार कर तुम्हारी चूत सहलाएगा और तुम सब उनके लौड़े मसलना ! चलो अब हाल में चलने को तैयार हो जाओ। जो भी कुतिया नखरे करेगी उसकी गांड और चूत जला दूँगी ! हर ग्राहक को पूरा मजा देना है और उनको इतना मस्त करना है कि वो अपना लौड़ा चुसवाएं और १०-१० हज़ार तुम्हारी चूत मारने के दें ! चलो अब हाल में चलें !
हाल में एक तरफ गद्देदार कुर्सियां पड़ी थीं, मोनी ने बताया कि इन सोफों पर ग्राहक हमारी चूत और चूचियां मसलेंगे। पास में ही एक काउंटर था जहाँ हम सातों रंडियां जाकर खड़ी हो गईं। मौसी ने हम सब की चूत पर जेली लगा रखी थी जिससे चूत में एक अजीब सी खुजली हो रही थी। बार बार हाथ चूत खुजलाने को चला जा रहा था। सामने डांस के लिए जगह थी, जहाँ दो रंडियां लहंगा पहन कर नाचने के लिए तैयार थीं।
मोनी ने बताया कि नाचते-नाचते ये दोनों नंगी करी जाएँगी और बीच बीच में मुस्टंडे इनकी चूत और चूतड़ों को मसलेंगे। आधे घंटे के बाद यह बदल जाएँगी और दूसरी दो लड़कियां नाचने आएँगी। सभी नाचने वाली लड़कियां बॉम्बे से आती हैं और एक शो के १०-१० हज़ार लेती हैं। यह लड़कियां १-२ घटिया हिंदी फिल्मों में छोटा मोटा रोल करे होती हैं। आज जो लड़कियां डांस करेंगी, ‘वो लुट गई लैला’ और ‘मस्त जवानी’ फिल्म की हेरोइन रह चुकी हैं।
मौसी अंदर आई और बोली- लो मेरे कोठे की कुत्तियों, एक एक कड़े पहनो !
सभी कड़े अलग-अलग रंग के थे। मेरे हिस्से में हरा कड़ा आया।
मौसी बोली- ग्राहक कड़े के रंग से तुम्हारी बोली लगायेंगे ! चलो सब लाइन से खड़ी हो जाओ और थोडा मस्तीयाओ ताकि तुम सबके रेट ज्यादा लगें।
पिंटू चल घंटी बजा और ग्राहकों को अंदर बुला, तब तक रोकी और भूरा, तुम इनकी घुन्डियाँ मसल कर खड़ी कर दो जिससे कि इनकी चूत की आग जोरों से भड़के।
रोकी और भूरा ने नोच नोच कर हमारी निप्प्लें खड़ी कर दीं। हम सब नग्न दूधों पर पतली चुन्नी डाले खड़ी थी।
ग्राहकों का अंदर आना शुरू हो गया था, रंडियां नाचनी शुरू हो गईं थीं। मेरे साथ की रंडियां कभी अंगड़ाई ले रही थी, कभी अपने संतरे दबाते हुआ ग्राहकों पर चुम्मे फ़ेंक रही थीं।
रोकी हमारे पास घूम रहा था ! उसने मेरे चूतड़ पर हाथ फेरते हुए कहा- जरा मचल ! देख बाकी कुतियां कैसे मचल रही हैं !
मौसी पास ही घूम रही थीं, मुझसे बोली- कुतिया, जैसे सभी रंडियां मचल रही हैं, वैसे मचल ! अब तू धंधे पर बैठ गई है, नखरे न कर, इस समय तू मेरे कोठे की कुतिया है, मेरी कुतियां जैसा मैं कहती हूँ, वैसा करती हैं ! नहीं तो उनकी गांड जला देती हूँ !
मौसी ने मेरा एक हाथ उठाया और मेरी चड्डी में डाल दिया और दूसरा हाथ मेरी चूची पर रख दिया। उसके बाद बोलीं- दोनों को धीरे धीरे मसल ! तेरा रेट अपने आप चढ़ेगा ! आज कोठे पर तू सबसे सेक्सी कुतिया लग रही है ! ५ मिनट बाद मस्त होकर अपने राजा का लौड़ा मसलना ! तुझसे इस शो में मुझे १०००० रु कमाने हैं।
नाच जोरों पे था, लड़कियों की ब्रा उतार दी गई थी, उनके नंगे स्तन बिलकुल सीधे तने हुए थे, वो अपनी चुचियाँ कभी लेट कर कभी झुककर हिला रही थीं, उनका नंगा डांस जोरों पर चल रहा था।
एक दो ग्राहक अपने लंड निकाल कर वहीं पर सहला रहे थे। हम सबकी बोली की आवाजें लग रही थी- कोई चिल्ला रहा था लाल वाली २००० हरी वाली १६०० !
१० मिनट बाद मौसी हमारी तरफ आई और रोकी से बोली- चल इन रंडियों को इनके खरीददारों के साथ भेज और इनका धंधा शुरू करा ! मेरा ४ नंबर था पहली ३ को उनके ग्राहक उनकी चूचियां मसलते हुए सोफे की तरफ ले गए। मेरा खरीददार एक नेताजी जैसा लगने वाला आदमी था जो मुझे बुरी तरह कामुक नज़रों से घूर रहा था। मौसी बोली- पूरे २२०० में उठी है तू ! जरा मस्त होकर नेताजी का लौड़ा गरम करियो ! नेताजी अगर खुश हो गए तो मालामाल कर देंगे और तुझे हेरोइन बनवा देंगे !
मौसी ने मेरा हाथ नेताजी के हाथ में दे दिया।
नेताजी ने मेरी चुन्नी उतार कर फ़ेंक दी और अपना एक हाथ पीछे से डालकर मेरी एक चूची अपने हाथ में दबा ली उसे दबाते हुए बोलने लगे- साली बहन की लोड़ी ! तेरा माल तो बड़ा गज़ब का है ! आज तो तेरा पूरा रस पीकर ही यहाँ से जाऊँगा ! और वो मुझे सोफे की तरफ ले गए। नेताजी के मुँह से दारू की जोर की बदबू आ रही थी। उन्होंने सोफे पर मुझे अपनी एक जांघ पर बैठा लिया और मेरे स्तनों की मालिश करते हुए मेरे होठ चूसने लगे।
बगल में मोनी की मसलाई हो रही थी। मोनी मुझे देख कर बोली- लौड़ा निकाल के खेल, वर्ना अभी पिंटू सिगरेट से जला देगा।
मैं संभल गई और नेताजी के पजामे का नाड़ा खोलने लगी। नेताजी अंदर कुछ नहीं पहने थे, उनका ६ इंच लम्बा लौड़ा खड़ा हुआ था, जिसे मैंने अपने हाथों में कस कर पकड़ लिया और दबाने लगी। मेरी चूत बुरी तरह से खुजला रही थी। नेताजी ने मेरी पतली चड्डी एक झटके में खींच कर फाड़ दी और जोर जोर से चूत की मसलाई करने लगे।
मेरी बुर बुरी तरह से गरम हो रही थी, मैंने अपनी टांगें चौड़ी कर दीं थीं और मेरी गरम खुली हुई चूत साइड में खड़े कुत्तों को मस्तिया रही थी।
नेताजी मेरे चूत का दाना रगड़े जा रहे थे। नेताजी के लौड़े पर मेरी पकड़ मजबूत होती जा रही थी और मैं उनका लोड़ा जोरों से सहला रही थी। मेरे आस-पास भी इसी तरह की रंडीबाजी चल रही थी। वाकई मैं अब कुतिया बन गई थी।
कहानी अभी बाकी है ! अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर शीघ्र ही प्रकाशित होगी। Sex Stories
मैं जयपुर का Antarvasna रहने वाला 21 साल का नौजवान हूँ। हमारे जयपुर में 14 जनवरी (मकर संक्रान्ति ) के दिन पतंगें उड़ती हैं। हम लोग पूरी जनवरी महीने में छत पर ही रहते और पतंगें उड़ाते थे।
हम पतंग उड़ाते हुए बहुत मजे करते थे। मैं इस बार अपने दोस्त तरुण के घर की छत से ही पतंगे उड़ा रहा था। उसका घर मेरे घर से एक किलोमीटर दूर है। तरुण के छत के पीछे वाली छत पर रोज़ एक खूबसूरत लड़की आती थी।
मैंने तरुण से उसका नाम पूछा तो बोला- इसका नाम रक्षिता है।
और साथ में यह भी बताया कि यह किसी को लाइन नहीं देती है।
मैंने कहा- मैं इस खूबसूरत रक्षिता से दोस्ती करना चाहता हूँ !
तो वो बोला- तू पागल तो नहीं हो गया? जिस लड़की ने आज तक हमसे दोस्ती नहीं की, वो तुझ से क्या करेगी?
मैं बोला- चल लगी हज़ार की शर्त ! मैं इससे दोस्ती करके रहूँगा।
वो बोला- ठीक है…
अब आप लोगों को उसका आकर्षक फिगर बताता हूँ… उसके वक्ष का आकार 36 और शक्ल मानो करीना सामने आ गई हो…
मैं उसके नाम पर रोज़ मुठ मारता था।
बात 11 जनवरी 2009 की है, उस दिन में पतंग उड़ा रहा था। किस्मत से उस दिन हवा भी रक्षिता के घर की तरफ थी। मैंने देखा कि वो कपड़े सुखाने छत पर आई है तो मुझे एक आईडिया आया और मैंने उसके छत पर रखे गमलों में अपनी पतंग अटका दी।
और आवाज लगाई- मैडम, मेरी पतंग सुलझा दो…
उसने पहले तो मेरी तरफ गुस्से से देखा फिर पतंग हटाती हुई बोली- मिस्टर, मेरा नाम रक्षिता है !
मैं बोला- अच्छा नाम है ! और मेरा नाम रोहित है… और मैंने यह पतंग जानबूझ कर अटकाई थी क्योंकि मुझे आपसे दोस्ती करनी है…
फिर वो गुस्से भरे लाल चेहरे से बोली- तुमने सिर्फ दोस्ती करने के लिए मुझे परेशान किया? दोस्ती के बारे में सोच कर बताउँगी।
मैं बोला- ठीक है…
अगले दिन में छत पर उसका इन्तज़ार कर रहा था, करीब दो बजे छत पर आई। तब मैं अकेला ही छत पर था।
वो आकर बोली- मुझे लगता है कि तुम एक अच्छे इन्सान हो क्योंकि तुमने उसी समय सच्चाई बता दी… इसलिए मैंने निर्णय लिया है कि मुझे तुमसे दोस्ती करना मंजूर है…
मैं ख़ुशी से उछल पड़ा…फिर मैंने उससे उसका फ़ोन नंबर लिया…
बाद में मैंने तरुण से पूछा- रक्षिता के घर में कौन कौन है?
वो बोला- यह अपने भाई और भाभी के साथ रहती है।
मुझे लगा कि मुझे इसके भाई से दोस्ती करनी चाहिए जिससे रक्षिता के घर में घुस सकूँ !
मैं तरुण से बोला- यार, मुझे रक्षिता के भाई से मिला दे…
तरुण बोला- मिला तो दूंगा, पर आगे बात तुझे ही संभालनी पड़ेगी..
मैंने कहा- ठीक है।
शाम को जब उसका भाई आया तो तरुण ने उससे मुझे मिलवाया…
अगले दिन 13 जनवरी थी तो मैंने रक्षिता के भाई से पूछा- कल मैं आपके साथ आपकी छत पर पतंग उड़ा सकता हूँ?
तो बोले- हाँ क्यों नहीं ! मुझे भी कोई साथी मिल जाएगा..
अगले दिन हम दोनों 9 बजे छत पर पतंग उड़ाने चले गए…
हमने 2-3 पतंगें उड़ाई, तब रक्षिता हमारे लिए कुछ खाने के लिए ले आई…
जब वो आई, तब उसका भाई पतंग उड़ा रहा था, उसका ध्यान हमारी तरफ नहीं था।
मैंने उसे आँख मार दी और उसने मुस्कान दिखाई…
अब तो मैं उसी चोदने के बारे में सोचने लगा…
फिर वो नीचे चली गई।
उसका भाई साढ़े दस बजे ऑफिस जाने के लिए तैयार हो कर चला गया और जाते हुए बोल गया- जब तक इच्छा हो, उड़ा लेना और किसी चीज की जरुरत हो तो मांग लेना !
मैंने कहा- ठीक है…
भैया के जाने के करीब एक घंटे बाद रक्षिता ऊपर आई, बोली- जल्दी पतंग उतारो ! मुझे तुम्हें कुछ दिखाना है जल्दी नीचे आओ…
मैंने जल्दी से पतंग उतारी और बोला- क्या दिखाना है?
बोली- अंदर तो चलो !
और वो मुझे अपने कमरे में ले गई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- रोहित, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो ! मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ।
ऐसा एकदम से सुनकर मैं तो दंग रह गया। फिर सोचा कि अब जल्दी चूत मिल जाएगी।
मैं बोला- मुझे भी तुम्हें देखते ही प्यार हो गया था ! चलो, अब मैं ऊपर जा रहा हूँ, भाभी ने देखा तो मुश्किल हो जाएगी।
वो बोली- वो पड़ोस में गई हैं…
मुझे एक मस्त किस कर ना…
मैं बोला- ले मेरी जान !
और कसके उसे पकड़ा और एक लम्बा किस दिया.. किस देते देते मैं उसके स्तन भी दबा रहा था। अब वो गर्म हो चुकी थी। मैंने उसकी गांड दबाना शुरू किया।
तभी अचानक घंटी बजी, मैं तो सीधे छत पर भाग गया और पतंग उड़ाने लगा।
अगले दिन मकर संक्रान्ति थी..
मैं अगले दिन सुबह 8 बजे छत पर जाने वाला था पर कोहरा होने के कारण मैं 9-30 पर छत पर गया…अपनी नहीं रक्षिता की..
उस दिन उसने गहरे नीले रंग की कसी जींस पहनी थी और गुलाबी रंग का कसा टॉप पहना था। क्या मस्त लग रही थी ! मुझे तो इच्छा हो रही थी अभी बाहों में लेकर चोदना शुरू कर दूँ..
वहाँ पर करीब 12 बजे तक रक्षिता के भैया पतंग उड़ा कर अपने दोस्त के घर चले गए साथ में भाभी को भी लेकर गए…
मुझे तो मजा आ गया…
मुझे अब रक्षिता को चोदने का मौका मिलने वाला था..
भैया के जाते ही मैं रक्षिता से लिपट गया…और उसे बहुत लम्बा किस दिया… और गांड पकड़ कर उसे अपने हाथों से उठा लिया…
थोड़ी देर बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया .. उसकी जींस में से ही चूत को सहलाने लगा…उसे मजा आने लगा और वो आहें भरने लगी…
मैं अब उसके स्तनों को भी टॉप में से ही दबाने लगा थोड़ी देर में उसकी चूत गीली हो गई…
वो बोली- जानू ! मेरी चूत में से मस्त माल निकल चुका है… अब आप अपने मस्त से लौड़े से मेरी चूत का उदघाटन करोगे…
मैं बोला- जानेमन, इतनी जल्दी भी क्या है… पहले पूरे मजे तो ले लो ! फिर तेरी चूत का भी उदघाटन करेंगे…
वो बोली- आप जैसा कहें मेरे जानू…
फिर मैंने उसे फिर से किस किया और..उसके वक्ष को उसके टॉप से आज़ाद किया… उसके स्तन क्या तो मस्त थे ! मैंने उसके चुचूक को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया…
उसे बहुत मजा आया और वो आहें भरने लगी- जानू, तुम तो बहुत मस्त चूसते हो… चूसते रहो…
फिर मैंने उसकी जींस को उतार फेंका, अब वो सिर्फ पैंटी में थी और बहुत मस्त लग रही थी उसकी काली पैंटी ! वो बिल्कुल अप्सरा लग रही थी…
फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को चूमने लगा… उसकी चूत में से मस्त खुशबू आ रही थी… वो आहें भरने लगी- अआहछ आह्ह
फिर मैंने उसे कहा- जान अब मुझे भी तो इन कपड़ों से आजाद करो !
बोली- ये लो जानू…
फिर उसने मेरा टी-शर्ट उतार फेंका और मेरे सीने पर चूमने लगी…
मुझे काफी मजा आ रहा था, साथ साथ मैं उसकी चूचियाँ भी दबा रहा था..
फिर उसने मेरी जींस उतारी और बोली- अब यह मस्त लंड आज़ाद होगा…
और उसने मेरा अन्डरवीयर उतारा और मेरे फड़फड़ाते साढ़े सात इंच के लंड को निकाला और मुँह में ले लिया और उसे मजे से चूसने लगी।
मुझे बड़ा मजा आ रहा था…15 मिनट बाद मेरा पानी निकला और वो चूसने लगी… मुझे काफी मजा आया..
फिर 10 मिनट में हमने कुछ खाया और फिर मैंने उसकी चूत में अपना लौड़ा डाला ..
वो पहली बार चुद रही थी इसलिए मैंने उसकी चूत में आराम से अपना लंड डाला। थोड़ा अन्दर जाने के बाद वो चिल्लाई- रोहित, निकालो इसे ! मुझे दर्द हो रहा है !
मैं बोला- थोड़ी देर बाद अच्छा लगेगा…थोड़ा सहन कर लो इसे…
वो बोली- ठीक है…
फिर मैंने चुदाई चालू रखी… थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा और वो बोली- रोहित, और तेज़ चोदो ! फाड़ दो मेरी चूत को…
मैंने और तेज़ चोदना शुरू किया। थोड़ी देर में वो झड़ गई .. मुझे काफी मजा आ रहा था, मैं लगातार चोदता रहा… थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया। उसने मेरा पानी अपने मुँह में पी लिया। फिर मैंने उसकी गांड भी मारी। हमने काफी मजा किया…
पर उसकी भाभी ने हमें पकड़ लिया और फिर मैंने उसे भी लंड का स्वाद चखाया…उसकी भाभी की चुदाई अगली कहानी में…
मुझे मेल करना मत भूलना… Antarvasna
मैं अपनी कहानी आज मेरे Sex Stories पाठको के पास पहली बार प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह मेरी एक सच्ची कहानी है। इसमें ग़लत और झूठ कुछ भी नहीं है!
मैं हिमाचल में अभी रह रहा हूँ पर मैं हरयाणा से हूँ! मेरे पास होटल भी है और मैं बहुत ही कूल पॉइंट पे हूँ! मेरी उमर 27 साल है मैं जितना ही कम उमर का हूँ उतना ही बड़ा लंबा और चौड़ा हूँ। मैं अभी अविवाहित हूँ मैंने आज तक बहुत फुद्दी, गांड मारी है! पर जितना मज़ा बड़ी उमर की फुद्दी में है किसी में नहीं है!
ऐसे ही एक मेरी चाची मेरे से 20 साल बड़ी मतलब कि वो 47 की पर मैं 27 का, उसकी फिगर 38 32 40 थी! मैं ऐसे ही उनके घर चला गया। चाचा मेरे ड्यूटी करते थे, उनके ड्यूटी जाने के बाद एक दिन मैं सुबह अपनी चाची के साथ रसोई में काम करवा रहा था। उसके बूब्स मेरे साथ टकरा गए और मेरा लण्ड पूरा गर्म हो गया।
इतने में मैं पूरा गरम हो गया। मेरी चाची ने देखा कि मेरे चेहरे का रंग पूरा लाल हो गया था मेरी चाची ने पूछा- क्या हुआ तुम्हें?
मैं एकदम चुप कर गया, मैंने बोला- मेरे को बाथरूम जाना है अभी।
मेरी चाची बोली- ठीक है।
जैसे ही मैं गया मैंने अपना लण्ड निकाला तो वो पूरा 8.5′ का हो गया था। मेरी चाची वो सब कुछ बाथरूम की खिड़की से देख रही थी मेरे को नही पता था। जैसे ही उसने मेरे लण्ड को देखा वैसे वो ओहह्ह आह्ह्हह्छ करने लगी। मैं कुछ समझा नहीं कि यह आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं। मेरा जैसे ही काम हुआ और मैं बाहर निकलने लगा तो देखा कि मेरी चाची ने अपनी बुर में ऊँगली डाली हुई थी और पूरी मस्ती में थी।
मैं चुपचाप देखता रहा, जब उसका काम हो गया तो मैंने बोला- चाची यह तुम क्या कर रही थी!
मेरी चाची ने बोला मेरे को कि इतना बड़ा लण्ड कभी नहीं मिला जो मैंने बाथरूम की खिड़की से तुम्हारा देखा।
मैंने बोला- चाची मैं 4 साल से तुम्हारी बुर के बारे में सोचता रहता था पर आज तुम मौके पर मिली हो, आज मैं तुम्हें नहीं बक्शूंगा! मैं उसे बिस्तर पर उठा के ले गया। उसकी ब्रा खुली तो कभी सोच नहीं सकता कि इतने बड़े मुम्मे होंगे।
जैसे ही मैंने पकड़े मेरी चाची के मुम्मे, मेरा लण्ड 5 मिनट मैं दुबारा खड़ा हो गया। ऐसा चूसा मैंने चाची को कि आज भी वो अपनी दूसरी सुहागरात याद करती है। जैसे ही मैंने अपना लण्ड चाची की फुद्दी के साथ लगाया मेरी चाची बड़ी गरम हो गयी बोली- एक बार अन्दर डालो, मैं बहुत सालों से प्यासी हूँ।
जैसे ही मैंने डाला तो वो रोने लगी मैंने बाहर निकाला तो मेरे को बोली- अन्दर डालो! मैं एक अच्छा खिलाड़ी हूँ। 25+ उमर की फुदी का, कोहिनूर का एक्स्ट्रा टाइम कंडोम था।
मैंने चाची को तीन बार झाड़ दिया पर आखिरी मैं हार गया मेरा भी काम हो गया। वो चाची के साथ दिन आज भी मेरे याद आते हैं।
ऐसे ही बहुत फुदी मारी मैंने। Sex Stories
तीन महीने से भी ज्यादा से Antarvasna अन्तर्वासना की कहानियों की नियमित पाठक हूँ मैं! अब जाकर मुझमे भी एक जोश आया है कि अपनी कहानी आप सभी के साथ बाँट सकूँ!
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में थी! मेरे स्कूल में को-एजुकेशन थी यानि की लड़के और लड़कियां साथ में पढ़ते थे! घर से स्कूल लगभग दो किलोमीटर दूर था, कभी पापा स्कूल छोड़ आया करते थे कभी मैं खुद पैदल में चली जाया करती थी!
ओह्ह्ह्ह सॉरी आप बोर हो रहे होंगे, सो मुद्दे पे आती हूँ!
एक दिन मैं साइकिल से स्कूल जा रही थी। उस दिन सुबह से हल्की हल्की बारिश हो रही थी। एक मन था कि स्कूल न जाऊँ पर फिर भी मैं चली गई! रास्ते में कीचड़ था। तभी एक रिक्शे वाले ने जानबूझकर मेरी साइकिल में साइड मार दी, जिससे मैं नीचे गिर पड़ी और मेरे सारे कपड़े कीचड़ से गंदे हो गए! तभी विकास ने उस रिक्शे वाले को भाग कर पकड़ लिया!
विकास मेरी क्लास में था और मेरी अच्छी दोस्ती थी उससे! पर मैंने उस तरफ ध्यान नहीं दिया क्योंकि मेरे सारे कपड़े गंदे हो चुके थे और कोहनी भी थोड़ी छिल गई थी। मेरी आँखों से आंसू टपक पड़े! मुझे अपने आप पर बड़ी कोफ़्त हुई कि इससे तो स्कूल ना में आती तो अच्छा होता!
तब तक विकास रिक्शे वाले को मरता हुआ मेरे पास ले आया। वो लगातार उस रिक्शे वाले को मार रहा था और गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था! विकास का घर सामने वाली गली में में था इसलिए वो और रोब झाड़ रहा था!
विकास ने रिक्शे वाले के कॉलर को झटका दिया और बोला- भोसड़ी के! तुझे इतनी बड़ी साइकिल नहीं दिखी, साले गांडू!!!!!
रिक्शा वाला हाथ जोड़ कर बोला- भाईसाब! गलती हो गई माफ़ कर दो!
तब तक काफी भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी।
विकास बोला- साले, मुझसे क्या माफ़ी मांगता है मादरचोद … इन से माफ़ी मांग!
विकास का इशारा मेरी तरफ था.
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रही थी पर भीड़ के सामने अच्छा भी नहीं लग रहा था!
तब मैंने विकास को बोला कि रिक्शे वाले को जाने दे!
पर विकास ने दो और थप्पड़ जड़कर ही रिक्शे वाले को जाने दिया!
और विकास मेरे पास आकर बोला- अरे रश्मि, तुम्हारे तो सारे कपड़े गंदे हो गए! अब स्कूल कैसे जाओगी??
“नहीं! अब स्कूल नहीं जाउंगी, वापस घर जाऊँगी!” मैंने जबाब दिया!
इन कपड़ो में वापस घर? नहीं नहीं! चलो, मेरे घर चलो वहां आराम से कपडे साफ़ कर लेना! विकास ने मेरी साइकिल को उठाते हुए कहा!
मैंने कुछ सोच कर कहा- चलो, यही ठीक रहेगा! पर तुम भी तो स्कूल के लिए लेट हो जाओगे?
“अरे! आज स्कूल में क्या घंटा करेंगे जाकर? बारिश में तो मैडम भी नहीं आती पढ़ाने!” वो हँसता हुआ बोला!
और मेरे साथ चल पड़ा मेरी साइकिल लेकर पैदल पैदल!
उसका घर सामने ही था! अपने घर के सामने साइकिल स्टैंड पर लगा कर विकास घर का ताला खोलने लगा!
“विकास, क्या घर पर कोई नहीं है तुम्हारे?” मैंने पूछा.
विकास- नहीं!
“क्यों? अंकल आंटी कहाँ गए हैं?” मैंने फिर सवाल किया!
विकास- अरे मम्मी, पापा तो ऑफिस चले जाते हैं ना! और नेहा दीदी अपने कॉलेज गई हैं!
“ओके!” मैं हल्के से सब बात समझने के अंदाज़ में बोली!
विकास की मम्मी, पापा सरकारी बैंक के कर्मचारी थे! और नेहा उसकी बड़ी बहन थी जो कॉलेज में थी! उस समय घर में मेरे और विकास के अलावा कोई नहीं था! मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि विकास मेरा अच्छा दोस्त था और मेरी में उम्र का था।
विकास सीधे बाथरूम में गया और नल खोल के देखा, नल में पानी नहीं था!
“ओह शिट्! आज भी पानी नहीं आ रहा.” विकास झुंझलाते हुए बोला- रश्मि एक काम करो, मैं हैण्ड पम्प चलाता हूँ और तुम हैण्ड पम्प के नीचे बैठ कर नहा लो!
मेरा मूड और ख़राब हो गया, पर मरती क्या ना करती! अनमने भाव से बोली- ठीक है! चलो चलाओ हैण्ड पम्प!
और मैं हैण्ड पम्प के नीचे बैठ कर नहाने लगी, मैं सूट सलवार में थी और ऐसे ही नीचे बैठ कर नहाने लगी!
विकास नल चला रहा था अब मैं मसल मसल कर कीचड़ साफ़ कर रही थी। विकास लगातार मुझे घूर रहा था, उसकी आँखों में एक चमक आ गई थी और मैं जानती थी कि वो क्या सोच रहा है! उसकी पैन्ट की चैन वाला भाग बढ़ता जा रहा था और मुझे यह देख कर अच्छा लग रहा था! मैं हलके हलके मुस्कुरा रही थी!
“रश्मि! अरे कमीज़ उतार कर आराम से साफ़ कर लो यार! कीचड़ अन्दर तक लगा है!” अचानक वो बोला!
“तुम पागल हो क्या? भला तुम्हारे सामने नंगी होकर नहाउंगी क्या?” मैं शरमाते हुए बोली!
“अरे तो क्या हुआ? मैं आँखे बंद कर लूँगा.” वो हंसते हुए बोला!
मेरे मन में शरारत समा चुकी थी। आखिर मैं जवानी में कदम रख रही थी, दिल का कीड़ा कुलबुलाने लगा और मन में मन मैं विकास को पसंद भी करती थी। पर आज तक प्यार-व्यार वाली कोई बात नहीं थी! मैंने कुछ करने की मन में मन में ठान ली और कुछ देर सोच कर बोली- अच्छा ठीक है! पर वादा करो कि आँखे बंद रखोगे!
“ठीक है मेरी माँ! अब ज्यादा नाटक ना करो! दिक्कत तुम्हें है, मुझे नहीं!” विकास किलसता हुआ बोला!
“ओके … चलो आँखे बंद करो!” मैं अपना शर्ट उतारते हुए बोली और अच्छे से नहाने लगी.
मुझे शर्म आ रही थी पर अब मैं कुछ और मूड में थी! विकास मुझे देखकर आश्चर्य चकित हो रहा था! उसकी आँखे बंद होने की बजाये और अधिक चौड़ी हो गई थी! वो लगातार नल चला रहा था! वैसे इस सबका एक और तरीका यह भी था कि मैं बाल्टी भर कर बाथरूम में भी नहा सकती थी, पर मैं कुछ और सोचे बैठी थी!
अचानक विकास मेरे पास आ गया, नल चलाना उसने छोड़ दिया और मेरा बायाँ हाथ पकड़ कर मुझे ऊपर उठा लिया और मुझे अपनी बाँहों में लपेटने लगा!
“यह क्या बदतमीजी है विकास! तुम पागल तो नहीं हो गए हो!” मैं बनाबटी गुस्सा दिखाते हुए उसकी गिरफ्त से छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी!
“रश्मि! आई लव यू … आज मुझे अपने से अलग न करो प्लीज! रश्मि तुम इतनी सुन्दर हो कि मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ! आज मुझे मना मत करना!” वो गिड़गिड़ाता सा बोला और मुझे बेतहाशा चूमने लगा!
मैं भी गरम होने लगी थी! पर अभी एकदम हथियार डाल देना सही नहीं था!
“विकास, ये ठीक नहीं है … दूर हटो मुझसे, मैं अंकल आंटी से कह दूंगी!” मैंने थोड़ी और स्यानपती दिखाई!
“रश्मि! प्लीज, पापा से मत कहना! मैं कुछ नहीं करूँगा! बस एक किस ही करूँगा!” वो बोला!
“ठीक है! पर किस से ज्यादा कुछ नहीं! नहीं तो मैं अंकल को बोल दूंगी!” मैंने हथियार डालते हुए कहा!
उसे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई! उसने मेरे होंठों को अपने होंठों मैं कैद कर लिया और मज़े से चूसने लगा! मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी! उसने मुझे बुरी तरह से बाँहों मैं जकड़ा हुआ था और फिर उसने अपना दायां हाथ मेरे दाहिने स्तन पे रख दिया। मेरी आँखें फटी की फटी रह गई, शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई!
मैं उससे मना करना चाहती थी पर उसने मेरे होंठ अपने होंठों से जोड़ रखे थे! विकास का दूसरा हाथ मेरे हिप पर पहुँच गया और उसने कसके मुझे ऊपर उठा लिया और फिर दाहिना हाथ मेरे स्तन से हटाकर मेरी कमर में डालकर मुझे पूरी तरह से अपनी गोद में उठा लिया!
मैंने भी अपनी बाहें उसके गले मैं डाल दी! इस सब के दौरान हमारे होंठ एक सेकंड को भी जुदा नहीं हुए! वो मुझे उठाकर अपने बेडरूम में ले आया और बिस्तर पे पटक दिया। मैंने सलवार नहीं उतारी थी जो कि पूरी तरह से गीली थी। बिस्तर भी गीला होने लगा। मैंने उठने की कोशिश की लेकिन विकास ने उठने नहीं दिया और मुझे अपनी बाहों में लिपटाकर मेरे होंठों का रसपान करता रहा। फिर धीरे से मेरी सलवार का नाड़ा खोलने लगा! मैंने विकास के हाथ पकड़ लिया पर वो नाड़ा खोल कर ही माना और सलवार को भी जबरदस्ती उतार दिया!
अब मैं केवल ब्रा और पैंटी मैं थी, मेरी आँखों से आंसू छलक आये!
“अरे यार रोना मत!” वो ये देख कर बोला!
और उसने मुझे छोड़ दिया! मैं तकिये मैं मुँह देकर रोने लगी वो थोड़ी देर खड़ा होकर सोचने लगा। फिर पता नहीं कहाँ से एक तौलिया लेकर मेरे पास आया और बोला- रश्मि! आय ऍम वैरी वैरी सौरी! प्लीज, मुझे माफ़ कर दो और यह लो तौलिया और अपना बदन साफ़ कर लो!
मैं लगातार रोये जा रही थी और उसकी तरफ भी नहीं देखा मैंने मुड़कर! तभी वो मेरी कमर को तौलिया से पोंछने लगा और टांगो को साफ़ करने लगा मैं करवट लेकर लेटी थी और मेरा चेहरा तकिये में धंसा हुआ था। उसका धीरे से मेरा बदन पर स्पर्श अच्छा लग रहा था
फिर मैं उठकर बैठ गई और उसकी आँखों में ना जाने ढूँढने लगी! वो बड़ा प्यारा लग रहा थ मुझे!
फिर मैंने झट से उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर होंठ से होंठ भिड़ा दिए! अब उसने भी मुझे भींच लिया और मेरे होंठों को पीने लगा! अब मेरे हाथ उसकी शर्ट के बटनों से खेल रहे थे सारे बटन खुलते ही उसने अपनी शर्ट निकाल फेंकी और अपने हाथ पीछे ले जाकर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ब्रा को मेरे स्तन से अलग कर दिया! मेरे दूधिया उरोज हिलते हुए अलग हो गए!
विकास एक तक देखता ही रह गया और बोला- रश्मि! तू क्या माल है यार! अब तक कैसे बच गई मेरे हाथ से!
मेरी हंसी छुट गई! और फिर उसने मेरे टेनिस बॉल के आकार के स्तनों को हाथों में ले लिया। फिर दाहिने स्तन के निप्पल को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया!
मैं मस्ती से सराबोर हो उठी और उसका सर अपने हाथों से अपनी छाती पर दबाने लगी! तभी उसने मेरे दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से मसल दिया!
आईईइ… क्या कर रहा है … दर्द हो रहा है! मैं चिल्ला उठी!
वो और जोश में आक़र मेरे स्तन को चूसने लगा! मेरी हालत ख़राब होने लगी, मैं अपने हाथ से अपनी बुर रगड़ने लगी! फिर हाथ ऊपर लाकर उसकी पैन्ट को खोलने लगी। वो बदस्तूर स्तनपान करे जा रहा था जैसे कितने जन्मों का प्यासा हो!
पैन्ट की जिप खुलते ही उसने अपनी पैन्ट जल्दी जल्दी उतार दी पर इस काम के बीच उसके होंठ और एक हाथ मेरे बूब्स पे लगे रहे!
अब उसने मेरी पेंटी भी उतार फेंकी! मेरा हाथ जैसे ही उसके अण्डरवियर से छुआ, मुझे करंट लगा। उसने मौके की नजाकत को समझते हुए अपना अंडरवियर भी उतार फेंका और मेरा हाथ ले जाकर अपने लिंग पे रख दिया! पहले तो मैंने शरमा कर अपना हाथ छिटक दिया! पर उसने दोबारा मेरा हाथ अपने लिंग पर रख दिया और इस बार उसने अपना हाथ भी मेरे हाथ से लगाये रखकर मुठ्ठी भीच दी!
अब विकास का लिंग मेरी मुठ्ठी में था! मुझे लिंग का स्पर्श अच्छा लगा! एकदम लकडी की तरह कड़ा हो चुका था उसका लिंग! मैंने अंदाजा लगाया कि उसका लिंग करीब ५.५” से ६” के लगभग था और २” मोटा रहा होगा!
मैं उसका लिंग सहलाने लगी! तभी विकास ने अप्रत्याशित हरकत कर दी, उसने अपनी ऊँगली से मेरी बुर को छेड़ दिया मैं चिहुंक उठी- आअह्हऽऽ विकास आराम से!
पर वो कहाँ मानने वाला था, उसने फिर अपनी एक ऊँगली मेरी बुर में घुसा दी! मैं उछल के उससे लिपट गई उसने फिर मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी टांगें चौड़ी करने लगा! मैंने अपनी बुर को अपने हाथों से ढक लिया, आँखे बंद कर ली और टांगों को आपस में भींचने की कोशिश करने लगी! विकास ने मेरे हाथ को हटा कर एक चुम्बन मेरी बुर पे ले लिया!
‘सीईईई ईइऽऽऽ’ मेरी सीत्कार छुट गई, अपने आप को संभाला मुश्किल हो गया! दांतों से निचला होंठ काटने लगी और दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर तकिये को मसलने लगी, मेरा शरीर कांप रहा था!
विकास अपनी जीभ से मेरी बुर चाट रहा था!
जब मैं मज़े के चरम पे पहुंची तो मैंने विकास को अपने ऊपर खींच लिया- जल्दी कुछ करो विकास! मेरी चूत में कुछ कुछ हो रहा है! आह्ह्हऽऽऽ! मैं मर जाऊँगी! प्लीज जल्दी कुछ करो!!!!! मैं पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी, मुझे नहीं पता!
मेरी जान, आज कसम से मज़ा आ जायेगा तुझे! विकास बोला!
और उसने अपने लंड पे थूक लगाया और मेरी चूत तो पहले ही गीली हो चुकी थी! चूत के मुहाने पे टिका कर एक हल्का सा धक्का मारा! लंड का अग्र भाग चूत में धंस गया।
मैं चिल्ला पड़ी- आईईईई ईईई मम्मी! मैं मरी! तू पागल है विकास! तू कुत्ता है! तू कमीना है! मेरी आँख से आंसू निकल पड़े!
मेरा पहला सेक्स था, इसलिए ज्यादा दर्द हो रहा था और शायद विकास का भी पहला ही था!!
शायद! इसलिए क्यूंकि उसको देखकर लग नहीं रहा था कि वो पहली बार कर रहा है! पर चूँकि उसने बताया था कि मैं ही उसके जीवन मैं पहली लड़की थी जिसके साथ यह सब कर रहा है!
उसने अपना लंड कुछ देर थामे रखा और मेरे उरोज सहलाता रहा। मुझे कुछ शांति मिली। मैंने नीचे से कूल्हे उचकाना शुरू किया तो उसने मेरी कमर को पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा!
हईईईए राम मम्म्य्य्य मैं मरी! आआअह्ह् विकास! पागल है क्या तू! इतना ही चीख पाई कि उसने अपने होंठों को मेरे होंठों पर कस दिया!
उसका आधा से ज्यादा लंड चूत में घुस चुका था! मेरी जान निकली जा रही थी और आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे, साँस लेने में भी दिक्कत हो रही थी! कुल मिलाकर यह लग रहा था कि आज मैं मरने वाली हूँ!
मैंने जबदस्ती उसके होंठों से अपने होंठ छुड़ाये! फिर थोड़ी देर साँस लेकर रोने लगी!
मुझे रोता देख विकास डर गया पर उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला- रश्मि कुछ नहीं होगा! पहली बार ऐसा ही होता है! अभी सब ठीक हो जायेगा!
हाई मम्मी! आईईई रीईई रामा! आआअह्ह्ह! विकास, आई हेट यू! यू आर फूल! कुत्ता! हाई! तू कमीना! हाई! तू! फिर पता नहीं क्या क्या कहा मैंने उसे!
विकास मेरे उरोज सहलाता, फिर कभी हिप को सहलाता, १० मिनट तक ऐसे ही पड़े पड़े मैंने उसे बहुत गालियाँ दी फिर भी वो बेचारा चुपचाप मुझे प्यार से सहलाता रहा!
फिर धीरे धीरे उसने अपना लंड हिलाना शुरू किया, जब मुझे मज़ा आना शुरू हुआ तो उसका वर्णन करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है!
“ऊऊऊओह्ह्ह! येस्स्स् विकास आई लव यू!” परिस्थिति बदल चुकी थी!
विकास मुस्कुरा रहा था- आई लव यू ठु डार्लिंग! तू कमाल है रश्मि! आआअह्ह! वाकई तू कमाल है!
धक्के पे धक्के, रेलमपेल हो रही थी! गपागप तथा फचाफच की मधुर आवाज़ निकल रही थी!
फिर विकास ढीला पड़ता गया, मैंने नीचे से अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी, उसी वक़्त मेरा भी स्खलन हो गया! विकास लम्बी लम्बी साँस लेता हुआ मेरे उपर लेट गया। फिर अपनी आँखें बंद कर ली!
२०-२५ मिनट ऐसे ही पड़े रहे हम दोनों!
फिर विकास को एक तरफ कर मैंने उठने की कोशिश की पर उठा नहीं गया।
मेरी नज़र बेड शीट पर पड़ी तो वो पूरी की पूरी खून से सनी हुई थी, मैं फिर लेट गई!
विकास ५ मिनट बाद उठा फिर बोला- रश्मि! तुम लेटी रहो मैं कुछ करता हूँ!
फिर उसने मेरे कपड़े और वो बेड शीट खुद धोई और फिर किचन में जाकर मेगी बनाकर लाया!
भूख भी लगी थी!
उसके बाद मुझे नींद आने लगी पर विकास नहीं माना और उसने मुझे एक बार फिर चोदा!
शाम को तीन बजे हमें नेहा दीदी ने जगाया! विकास दरवाजा बंद करना भूल गया था! मैं नेहा दीदी की मेक्सी ही पहन कर सोई थी और विकास भी उसी बेड पे सोया था! दीदी सब कुछ समझ गई थीं!
पर विकास ने उनको अलग ले जाकर पता नहीं क्या समझाया, वो मुस्कुरा कर बोली कि विकास मुझे मेरे घर छोड़ आये!!
अब मेरे कपड़े भी सूख चुके थे। मैंने अपने कपड़े पहने और विकास के साथ बाहर आ गई!
फिर उसे कहा कि मैं खुद चली जाऊँगी अब!
विकास ने मेरे माथे पे किस किया और बोला- रश्मि! थेंक यू फॉर आल थिंग्स!
मैंने मुस्कुराकर उसको बाय कहा फिर अपने घर चल दी!
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी पहली चुदाई? Antarvasna
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