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मैने गाण्ड मारने पर बहुत कहानियाँ पढ़ी Hindi Porn Stories हैं, कुछ अच्छी होती हैं लेकिन ज़्यादातर झूठ होती हैं। ऐसा लगता है यह कहानी नहीं बल्कि लेखक की कल्पना है। जिन लोगों को सेक्स नहीं मिलता या जो अपनी ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाते वो कल्पना से कहानियाँ लिखते हैं।
अगर इन कहानियों को सच समझा जाए तो गाण्ड मारना बहुत आसान लगता है। बस, लंड के सुपारे को गाण्ड के मुँह पर रखो और ज़ोर से धक्का लगाओ- हो गया… लड़की ज़ोर से चिल्लाएगी…” ऊऊउउइ मर गयी…… मेरी गाण्ड फाड़ दी……”
और थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगेगा !! असलियत में ऐसा नहीं होता है।
आप लोगों ने भी ऐसी बहुत कहानियाँ पढ़ी होंगी।
मैने बहुत गाण्ड मारी है और मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ कि गाण्ड मारना इतना आसान नहीं है। मेरे अनुभव में तो चूत लेना भी इतना आसान नहीं होता जितना यह लोग गाण्ड मारना समझते हैं।
अगर आप सचमुच में गाण्ड मारना चाहते हो और आप चाहते हो कि लड़की को भी उतना ही मज़ा आए जितना आपको आता है और वो बार बार आपसे गाण्ड मरवाने की चाहत रखे तो आपको मैं सही विधि बताता हूँ। ध्यान से पढ़िए आपकी मनोकामना पूरी होगी…
इस विधि में लड़की की गाण्ड की बात की गई है लेकिन अगर आप लड़के की गाण्ड मारना चाहते हैं तो भी यही विधि लागू होगी क्योंकि गाण्ड दोनों की एक जैसी होती है।
ज़रूरी बातें :गाण्ड मारने से पहले कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होगा। अगर इन बातों का ध्यान रखा गया तो लड़की को भी उतना ही मज़ा आएगा जितना आपको और वो आपसे बार बार गाण्ड मरवाने की कोशिश करेगी। अगर इन ज़रूरी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया तो हो सकता है आप गाण्ड कभी मार ही नहीं पाएँगे !
लड़की की मंज़ूरीसबसे पहले यह बहुत ज़रूरी है कि लड़की गाण्ड मरवाने के लिए राज़ी हो। इसके लिए आपको उसे यह भरोसा दिलाना होगा कि आप ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और अगर किसी भी वक़्त वो मना करती है तो आप रुक जएँगे। लड़की को ज़्यादा दर्द नहीं होना चाहिए। दर्द को कम करने का तरीक़ा इस विधि में आगे बताया गया है।
गाण्ड की बनावटभगवान ने गाण्ड को संभोग के लिया नहीं बनाया इसलिए इसकी बनावट, पोज़िशन और प्रक्रिया ऐसी है कि आदमी का लिंग आसानी से उस में प्रवेश नहीं कर सकता (जैसा की चूत में कर सकता है)। इसके लिए आप को गाण्ड की बनावट के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
गाण्ड का काम शरीर से मल बाहर निकलना है। इसके मुँह की तरफ दो छल्लेदार मांसपेशियाँ (रिंग मसल्स) होते हैं जो कि अपनी इच्छा से खोले या बंद किए जा सकते हैं। एक छल्ला बिल्कुल मुँह पर होता है और दूसरा करीब पौन इंच अंदर की तरफ होता है। इन मांसपेशियों को आप अपनी गाण्ड में महसूस कर सकते हैं।
अपनी बीच की उंगली पर तेल या क्रीम लगा कर अपनी गाण्ड में डालने की कोशिश करें। जो बाहर की मांसपेशी है वो अपने आप सिमट कर सिकुड़ जाएगी क्योंकि उसका काम है बाहर की चीज़ को अंदर जाने से रोकना !
अपने आप को थोड़ा रिलॅक्स करो और गाण्ड की मांसपेशी को ढीला करो तो आपकी उंगली थोड़ा अंदर चली जाएगी। अब आप दूसरी मांसपेशी को महसूस कर सकेंगे जो कि आपकी उंगली को और अंदर नहीं जाने देगी। इस मांसपेशी को भी आप ढीला कर सकते हैं और थोड़ी कोशिश के बाद आपकी उंगली इसके भी पार हो जाएगी। जब दूसरी मांसपेशी पार कर ली तो फिर कोई और रुकावट नहीं होगी और आपकी उंगली आसानी से अंदर जा सकती है।
गाण्ड की ये मान्सपेशियाँ काफ़ी मज़बूत होती हैं और इनको आसानी से पार नहीं किया जा सकता। ख़ास तौर से अगर लड़की की मर्ज़ी ना हो तो। दूसरी बात यह भी है कि उंगली के मुक़ाबले में लंड का घेरा (साइज़) ज़्यादा होता है, इस कारण भी गाण्ड के अंदर डालना मुश्किल होता है।
गाण्ड की एक ख़ासियत है कि चूत की तरह इसमें कोई तरल (लिक्विड) चीज़ का प्रवाह नहीं होता। जब लड़की सेक्स की लिए उत्सुक होती है तो उसकी चूत में अपने आप गीलापन होता है जिससे लंड का प्रवेश आसान हो जाता है। यह प्रकृति का तरीक़ा है क्योंकि चूत को बनाया ही इस काम के लिए है। गाण्ड में कोई प्राकृतिक चिकनाहट नहीं होती इसलिए वो हमेशा सूखी सी रहती है। ऐसी हालत में लंड के प्रवेश से ना केवल लड़की को दर्द होगा बल्कि पुरुष को भी मज़ा नहीं आएगा। कुछ देर के बाद लंड में भी दर्द हो सकता है तो चुदाई का मज़ा किरकिरा हो सकता है।
गाण्ड की इन मांसपेशियों के इर्द गिर्द बहुत सी चेतना-नसें(नर्व-एंडिंग्स) होती हैं जिनमें रक्त संचार होता है। इस कारण गाण्ड मरवाने के दौरान लड़की को भी बहुत मज़ा आता है, शर्त यह है कि उसे दर्द ना हो।
गाण्ड ठीक से ना मारी जाए तो लड़की को बहुत दर्द होता है।
गाण्ड की बनावट से यह साफ हो गया है कि:
1) गाण्ड में कोई बाहर की चीज़ आसानी से अंदर नहीं जा सकती।
2) गाण्ड के अंदर कुछ भी डालने के लिए गाण्ड की मांसपेशियाँ को ढीला करना ज़रूरी है।
3) गाण्ड की मांसपेशियों को लड़की अपनी मर्ज़ी से ढीली या टाइट कर सकती है।
4) गाण्ड को बाहरी चिकनाहट की ज़रूरत होती है।
5) गाण्ड में नर्व एंडिंग्स होती हैं जिससे लड़की को गाण्ड मरवाने मैं मज़ा आता है। (यही कारण है कि दुनिया में इतने पुरुष समलिंगी होते हैं और खुशी खुशी गाण्ड मरवाते हैं)
क्योंकि भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिए नहीं बनाया है तो यह आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि आप उसे इस काम के लिए तैयार करें। यह तैयारी तुरन्त नहीं हो सकती। इसमें 2-3 दिन से लेकर 6-7 दिन तक लग सकते हैं। जितनी आराम से तैयारी करेंगे, लड़की को आप पर उतना ही भरोसा बढ़ेगा और आपको भी उतना ही सुख गाण्ड मारने में मिलेगा। इसलिए जल्दबाज़ी मत करें।
गाण्ड की सफाईअगर लड़की ने मंज़ूरी दे दी है और वो गाण्ड मरवाने का अनुभव करना चाहती है तो अपने आप वो अपनी गाण्ड को अच्छी तरह से साफ करके आएगी। गाण्ड अगर गंदी होगी तो सारा मज़ा खराब हो जाएगा। सबसे मज़ेदार तरीक़ा है जब आप दोनों एक साथ स्नान करो और इस दौरान एक दूसरे के गुप्तांगों को सहलाओ और साफ करो।
ज़रूरी सामानसाफ बिस्तर
1-2 सख़्त तकिये
1-2 छोटे तौलिए
1 मोटी मोमबत्ती (1.5 – 2.0 इंच चौड़ी, 6-8 इंच लंबी)
1 ट्यूब के-वाइ जेली / नारियल तेल (तेल से जेली बेहतर है)
के वाइ जेली की ट्यूब रु 90/- किसी भी केमिस्ट की दुकान पर मिल जाएगी।
शुरुआतध्यान रखो कि आपकी उंगली के नाख़ून बढ़े हुए नहीं हैं और ठीक तरह से कटे हुए हैं। नाख़ून के किनारे तेज़ नहीं होने चाहिए, उन्हें ठीक से फ़ाइल कर लो। अगर नाख़ून बढ़े होंगे तो जब उंगली लड़की की गाण्ड में डालोगे तो उसे लग सकता है।
लड़की को गाण्ड की बनावट के बारे में और रिंग मसल्स को किस तरह से ढीला या टाइट कर सकते हैं, के बारे में बताओ।
अब प्यार से लड़की के कपड़े उतारो और एक साफ बिस्तर पर पीठ के बाल लिटा दो। उसकी टाँगों को मोड़ दो और थोड़ा खोल दो। अब उसके चूतड़ों के नीचे 1-2 सख़्त तकिये रख कर उसके चूतड़ उपर की तरफ उठा दो जिससे उसकी चूत और गाण्ड साफ दिखाई दे। खुद भी पूरी तरह नंगे हो जाओ। अब उससे प्यार भारी बातें करो और पूरे शरीर को सहलाओ, खास तौर से उसके गाल, गर्दन, स्तन, चूचुक, पेट, जांघें और टाँगें !
कुछ देर तक उसकी चूत और गाण्ड को हाथ ना लगाएँ। थोड़ी देर में लड़की की चूची सख़्त हो जाएगी और वो अपनी टाँगें और खोल देगी। अब उसकी चूत को प्यार से सहलाना शुरू करो जिससे वो उत्तेजित हो जाए और चूत में से पानी का रिसाव होने लगे।
अब लड़की चुदाई के लिए तैयार है पर हमारा इरादा उसकी गाण्ड मारने का है। अपनी एक उंगली पर अच्छी तरह से के-वाइ जेली (या नारियल तेल) लगा कर लड़की की गाण्ड के मुँह पर सहलाओ। अभी उंगली अंदर डालने की कोशिश ना करो। उसे अपनी मांसपेशियाँ बारी बारी ढीली और टाइट करने को कहो। आप अपनी उंगली पर उसकी रिंग मसल्स को महसूस कर सकोगे। लड़की से प्यारी प्यारी बातें करो और उसको रिलॅक्स होने को कहो। थोड़ी देर में जब लड़की रिलॅक्स होने लगेगी तो उसकी गाण्ड भी थोड़ी ढीली हो जाएगी।
अब अपनी उंगली पर थोड़ी और जेली लगा कर धीरे धीरे उसकी गाण्ड के अंदर धकेलो। अगर लड़की गाण्ड को टाइट कर ले तो फिर उसे विश्वास दिलाओ कि उसे दर्द नहीं होने दोगे। ज़रूरत हो तो उंगली बाहर निकल लो और उसकी चूत, जांघें और बूब्स को प्यार से सहलाओ। जब लड़की दोबारा रिलॅक्स हो जाए तो उंगली पर जेली लगा कर एक बार और गाण्ड में डालने की कोशिश करो, जल्दबाज़ी नहीं करना। गाण्ड की बाहरी रिंग मसल को धीरे धीरे ढीला कर के उंगली को करीब आधा इंच अंदर डाल दो। अब धीरे धीरे उंगली को आधा इंच तक अंदर बाहर करो। देखो कि लड़की को दर्द नहीं हो रहा है। अगर लड़की खुश नहीं है तो उंगली अंदर रख कर रुक जाओ और थोड़ी देर बाद फिर शुरू करो।
अगर लड़की खुश है तो धीरे धीरे उंगली को और अंदर करो। कुछ दूर तक तो उंगली अंदर चली जाएगी पर फिर ऐसा लगेगा जैसे आगे कोई रुकावट है। यह उसकी गाण्ड की दूसरी रिंग मसल है। इसको पार करने की लिए एक बार फिर लड़की को रिंग मसल ढीला करने के लिए बोलो। (इस वक़्त लड़की को अपनी गाण्ड पर नीचे के तरफ ज़ोर लगाना चाहिए जैसा कि पॉटी करते वक़्त लगाते हैं, ऐसा करने से रिंग मसल खुल जाएगी और आप अपनी उंगली उसके पार ले जा सकते हैं). अगर लड़की रिलॅक्स नहीं करती है तो आपको धीरज रख कर धीरे धीरे उंगली से उसकी रिंग मसल को खोलने की कोशिश करनी होगी। याद रहे, कोई काम जल्दबाज़ी में ना करो। देखा जाए तो इस क्रिया में भी आप काफ़ी मज़ा ले सकते हो।
किसी भी वक़्त अगर लड़की को तकलीफ़ होने लगे तो उंगली तुरंत बाहर निकाल लो और उसको प्यार करो। उसे यह पूरा विश्वास होना चाहिए कि गाण्ड मारने के वक़्त आप उसे तकलीफ़ नहीं दोगे।
जब उंगली दूसरी रिंग मसल को पार कर जाए तो आपकी उंगली ने फ़तेह पा ली है। अब आप आराम से उंगली को जितना अंदर डालना चाहो डाल सकते हो। ध्यान रहे कि उंगली पर जेली या तेल अच्छी तरह लगा हो। अगर सूख गया है तो उंगली बाहर निकल कर दोबारा लगा लो और फिर से धीरे धीरे अंदर डालो। अगर एक बार उंगली अंदर चली गई है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब हमेशा आसानी से चली जाएगी। गाण्ड की मसल्स तो फिर से बंद हो गई होंगी, इसलिए हर बार गाण्ड में धीरे धीरे और प्यार के साथ ही प्रवेश करना है।
जब आपकी एक उंगली गाण्ड के अंदर बाहर जाने लगे और लड़की को तकलीफ़ नहीं हो रही हो तो आप यही प्रक्रिया दो उंगलियों पर जेली लगा कर कोशिश करो। इसमें शुरू में थोड़ी मुश्किल होगी क्योंकि गाण्ड का छेद छोटा होता है। एक उंगली तो चली जाती है पर दो उंगलियाँ मोटी होती हैं. लेकिन यह काम भी प्यार से और धीरज से हो जाएगा। आप महसूस करोगे कि जैसे जैसे लड़की को आप पर भरोसा बढ़ेगा वो इस काम में आपको सहयोग देगी और थोड़ा बहुत दर्द भी सहन करने लगेगी।
जब आपकी दो उंगलियाँ पूरी तरह अंदर चली जाएँ तो धीरे धीरे उंगलियों को दोनो तरफ घुमाना शुरू करो, इससे गाण्ड का पूरा छेद ढीला होगा। साथ ही साथ उंगलियों को अंदर बाहर भी करो।
हो सकता है इतना सब कुछ करने के बाद आप दोनों थक गये हों। अगर ऐसा है तो उंगलियाँ बाहर निकाल लो और आप दोनों कुछ और कार्यवाही कर सकते हो। अगर लड़की खुश है तो वो आपके लंड को मुँह में ले कर चूस सकती है जिससे आपके तने हुए लंड को आराम मिलेगा। यह मैं इस लिए कह रहा हूं क्योंकि उंगली करने के चक्कर में आप का लंड ज़रूर तैयार हो गया होगा। पर अभी मंज़िल बहुत दूर है और आप को धीरज से काम करना होगा। दूसरी बात यह है कि जो लड़की गाण्ड मरवाने के लिए तैयार होगी वो लंड तो चूस ही लेती होगी। अगर नहीं करती है तो उसे मेरी “लंड चूसने की विधि” पढ़नी चाहिए।
चलिए, आप दोनों ने आराम कर लिया। अब आगे बढ़ते हैं !
अब एक मोटी मोमबत्ती लो जिसका घेरा आपके तने हुए लंड के बराबर हो। इसकी लंबाई 6 इंच से कम नहीं होनी चाहिए। मोमबत्ती को अच्छी तरह चिकना कर लो। मोमबत्ती का सिरा पैना (शार्प) नहीं होना चाहिए। उसे चाकू से छील करके लंड-नुमा शेप दे दो। अब आगे के 3-4 इंच पर अच्छी तरह से जेली लगा लो।
एक बार फिर लड़की को रिलॅक्स होने के लिए बोलो और उसकी गाण्ड के अंदर और बाहर भी अच्छी तरह से जेली लगा दो। कभी भी जेली लगाने में कंजूसी ना करो।
अब मोमबत्ती का सिरा गाण्ड के मुँह पर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने की कोशिश करो। शुरू में मुश्किल होगी। अगर ज़रूरत हो तो गाण्ड में एक उंगली डाल कर उसकी दोनों रिंग मसल्स को ढीला कर लो। लड़की को भी गाण्ड ढीली करने को कहो। जब मोमबत्ती करीब आधा इंच अंदर चली जाए तो एक दो बार उतना ही अंदर बाहर करो। लड़की के इशारों का ध्यान रखो कि उसे कोई तकलीफ़ तो नहीं हो रही। उससे बातें करते रहो। जब लड़की आधा इंच तक अंदर बाहर को सहन करने लगे तो आप मोमबत्ती को घुमाते हुए और अंदर डालने की कोशिश करो। (यकीन करो कि जेली सूख ना गई हो. ज़रूरत हो तो और लगा लो).
मोमबत्ती थोड़ा और अंदर जाएगी और फिर रुक जाएगी। अब तो आपको मालूम है यह क्यों रुकी है, दूसरी रिंग मसल सामने है। लड़की के स्तनों को चूमो और उसकी चूत को सहलाओ। साथ ही उसे रिलॅक्स करने और गाण्ड को ढीला करने को कहो। जैसे ही वो गाण्ड को रिलॅक्स करेगी, मोमबत्ती आराम से अंदर चली जाएगी।
अब थोड़ा इंतज़ार करो जिससे लड़की मोमबत्ती की मोटाई को अपनी गाण्ड में महसूस कर सके और उसका शरीर इस नई फीलिंग को समझ सके। थोड़ी देर के बाद मोमबत्ती को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू करो। बाहर करते वक़्त लड़की को कोई तकलीफ़ नहीं होगी पर अंदर करते वक़्त आप को ध्यान रखना होगा कि जल्दबाज़ी ना हो। अगर जेली कम हो गई हो या सूख गई हो तो और लगा लो। इस तरह मोमबत्ती से आप उसकी गाण्ड को चोदना शुरू करो।
धीरे धीरे लड़की की तकलीफ़ कम हो कर ख़तम हो जाएगी और वो आनंद महसूस करने लगेगी। अब आप ४-५ इंच तक मोमबत्ती अन्दर बाहर कर सकते हो। जब तक लड़की चाहे उसे मोमबत्ती से चोदते रहो और फिर धीरे धीरे मोमबत्ती को बाहर निकाल लो। यह काम भी धीरे धीरे ही करना चाहिए।
मेरी राय में आपको यह उंगली और मोमबत्ती वाली प्रक्रिया दो तीन दिन तक करनी चाहिए। वैसे भी अब तक आप दोनों थक गये होंगे और इंतज़ार का फल हमेशा मीठा होता है।
उम्मीद है आपने दो तीन दिन तक बताई हुई प्रक्रिया कर ली है और अब लड़की अपनी गाण्ड की मसल्स को ढीला और टाइट करना सीख गई है।
गाण्ड मारनामुबारक हो !! अब आपकी साथी लड़की गाण्ड मरवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। जिस दिन का इंतज़ार था वो आ गया है। आशा है आप भी तैयार होंगे। गाण्ड मारने के लिए ज़रूरी है कि आपका लंड मज़बूती से खड़ा हो। वैसे तो पहली बार गाण्ड मारने की कामना में आपका लंड अपने आप ही तना हुआ होगा लेकिन अगर ऐसा नहीं है (और आप हृदय या रक्त चाप के रोगी नहीं हो) तो आप फ़ोर्ज़ेस्ट 10 या 20 की एक गोली करीब 30 मिनट पहले ले सकते हो।
अगर लड़की भरोसे वाली नहीं है तो कॉन्डोम का इस्तेमाल ज़रूर करो क्योंकि एच आई वी का खतरा गाण्ड मारने में सबसे ज़्यादा होता है। लेकिन अगर आप एक दूसरे को जानते हो और एक दूसरे पर भरोसा है तो कॉन्डोम की ज़रूरत नहीं है।
एक ज़रूरी बात और है- कभी भी गाण्ड मारने के दौरान या उसके एकदम बाद, अपने लंड को लड़की की चूत में नहीं डालो। ऐसा करने से लड़की को चूत में इंफेक्शन हो सकता है। अगर चूत मारनी है तो पहले लंड को अच्छी तरह से धो लो।
गाण्ड मारने के आसनगाण्ड मारने के दो आसन हैं। इन दो बेसिक आसनों के कई रूप हो सकते हैं जो आप अपने आप बना सकते हैं।
आसन 1
इसमें लड़की पीठ के बाल लेटी होती है जैसा इस विधि के शुरू में बताया गया है और उसके चूतड़ के नीचे तकिये रखे जाते हैं जिससे उसकी गाण्ड उपर उठ जाए। इसको मिशनरी पोज़िशन या मॅन सुपीरियर पोज़िशन भी कहते हैं।
आसन 2
इसमें लड़की अपने घुटने और हाथों पर होती है और उसकी गाण्ड की ऊँचाई आप अपने हिसाब से उपर नीचे कर सकते हो। कुछ लड़कियाँ अपना सर नीचे बिस्तर पर टिका देती हैं और गाण्ड उपर की तरफ उठा देती हैं। इसको रियर एंट्री या डॉगी स्टाइल भी कहते हैं।
दोनों ही आसान ठीक हैं और आपको जो अच्छा लगे उसे इस्तेमाल करो। पहले आसन में लड़की आराम से होती है और आप उसके स्तन और चूत को देख व सहला सकते हो। लड़की भी आप को देख सकती है। आप एक दूसरे को किस कर सकते हो लेकिन लंड पूरा अंदर नही जा पाता। दूसरे आसन में लड़की जल्दी थक जाती है और आपको देख नहीं सकती। आप भी उसकी चूत और बूब्स को नहीं देख सकते हो ना ही ठीक से सहला सकते हो। लेकिन इस आसन में लंड ज़्यादा अंदर जा सकता है। इसमें लड़की भी पीछे की तरफ धक्का देकर लंड को प्रवेश में मदद कर सकती है।
चलिए, अब गाण्ड मारते हैं!लड़की को पहले की तरह आरामदेह पोज़िशन में बिस्तर पर लिटा दो। उसके पूरे तन को अच्छी तरह से प्यार करो और उसे मीठी मीठी बातें बोलो। उसके पूरे शरीर को सहलाओ तथा चूमो। उसकी चूत जब गीली हो जाए तो उसे उंगली से थोड़ी देर तक चोदो और उसकी भग्नासा के इर्द गिर्द सहलाओ। कुछ देर में लड़की चुदाई के लिए तैयार हो जाएगी। अब पहले की तरह जेली लगा कर शुरू में एक और फिर दो उंगलियों से उसकी गाण्ड को तैयार करो। लड़की अब तैयार है, उम्मीद है आप का लंड भी तैयार होगा।
जब पहली बार गाण्ड मारनी हो तो मेरी राय में दूसरा वाला आसान इस्तेमाल करना चाहिए (डॉगी स्टाइल) जिससे लड़की आपकी मदद कर सके और लंड के प्रवेश को कंट्रोल कर सके।
तो लड़की को डॉगी स्टाइल में आने को कहो और उसके चूतड़ की ऊँचाई को अपने लंड की उँचाई के हिसाब से ऊपर नीचे करो। उसका सर आराम से बिस्तर पर रह सकता है। अपने पूरे लंड पर खूब अच्छी तरह से जेली लगा लो और लड़की की गाण्ड के अंदर बाहर भी जेली अच्छे से लगा लो। एक बार फिर दो उँगलियों से उसकी गाण्ड को ढीला कर लो।
अब अपने लंड के सुपारे को गाण्ड के छेद पर रखो और धीरे से अंदर के तरफ धकेलो। अगर आपका लंड मोमबत्ती से बड़ा है तो धीरज से काम लो। धीरे धीरे, प्यारी-प्यारी बातें करते हुए और एक हाथ से उसकी चूत को सहलाते हुए अपने लंड को गाण्ड में धकेलते रहो। लड़की को अपनी गाण्ड ढीली करने के लिए याद दिलाते रहो।
एक बात और है, जब हम गाण्ड की मांसपेशी को ढीला करते हैं तो वो सिर्फ़ एक क्षण (सेकेंड) के लिए होती है और फिर टाइट हो जाती है। उसको अपनी मर्ज़ी से हम ज़्यादा देर तक ढीला नहीं रख सकते। आप इस बात को अपनी गाण्ड में खुद उंगली डाल कर महसूस कर सकते हो। इसलिए आप और लड़की के बीच ताल-मेल की ज़रूरत है। जब आप अंदर को धकेलो, तभी लड़की गाण्ड ढीली करे नहीं तो फ़ायदा नहीं होगा।
अगर गाण्ड का छेद ना खुले तो उंगली या मोमबत्ती का इस्तेमाल फिर करो और लड़की को रिलॅक्स करने को कहो। इस बात का ध्यान रखो कि लंड का घेरा काफ़ी ज़्यादा होता है और पहली बार आसानी से गाण्ड में नहीं जाता है। जेली लगी होने के कारण लण्ड फिसलता भी रहता है और गाण्ड में नहीं जा पाता।
थोड़ी कोशिश के बाद आपका लंड करीब 1/4 इंच अंदर चला जाएगा। यहाँ पर रुक जाओ और लड़की से पूछो उसे कैसा लग रहा है। अगर उसे दर्द हो रहा हो तो लंड बाहर निकाल लो, हो सकता है आपका लंड काफ़ी बड़ा है। यह तो आपके लिए खुश खबरी है !! या फिर लड़की को डर लग रहा है !
लड़की से दोबारा पूछो कि वो क्या करना चाहती है। ज़्यादातर लड़कियाँ आपको दोबारा कोशिश करने को कहेंगी। अगर ना भी कहे तो भी आप धीरज रखो और कुछ देर और मोमबत्ती वाली प्रक्रिया करो। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मेरी विधि से आप चलोगे तो कोई भी लड़की आपसे गाण्ड मरवाने के लिए मना नहीं करेगी। मेरे तज़ुर्बे में अच्छी तरह से मारी हुई गाण्ड में लड़कियों को चूत मरवाने से भी ज़्यादा मज़ा आता है। गाण्ड की बाहरी और अंदर की रिंग मसल्स के इर्द गिर्द बहुत नर्व-एंडिंग्स होती हैं जिसमें रक्त प्रवाह होता है जिस से गाण्ड मरवाने के दौरान लड़की को बहुत मज़ा आता है. आप धीरज से काम लो….
थोड़ी देर रुकने के बाद एक बार फिर लंड को गाण्ड के छेद पर रख कर अंदर डालने की कोशिश करो। जेली लगाना नहीं भूलना और जल्दबाज़ी नहीं करना। (मुझे मालूम है आपके लंड का सब्र ख़तम हो रहा होगा। अगर आपसे और ना रुका जाए तो चूत में डाल के संभोग कर लो। चिंता मत करो आपका लंड फिर तैयार हो जाएगा।
जब लंड पहली रिंग मसल को पार कर ले तो थोड़ी देर रुक जाओ और लड़की को रिलॅक्स करने को कहो। उसको बताओ कि अब आप लंड को और अंदर नहीं करोगे। लड़की खुद पीछे की तरफ धक्का लगा के लंड को जितना चाहे अंदर करेगी। अब कंट्रोल लड़की के पास है और आपको उसे तकलीफ़ पहुँचने की चिंता नहीं करनी।
जब कंट्रोल लड़की के पास आ जाता है तो आपको आश्चर्य होगा कि कितनी आसानी से वो आपके लंड को अंदर ले लेती है। आपको भी लड़की की टाइट गाण्ड का पहली बार अनुभव होगा। आपका लंड बिल्कुल टाइट फिट में जकड़ा जाएगा और आपको स्वर्ग महसूस होगा। ज़्यादातर लोग इससे ज़्यादा रोक नहीं पाते और क्लाइमॅक्स कर जाते हैं। अगर आप टारजन हैं तो कुछ देर तक लंड को पूरी तरह अंदर होने का आनंद उठाने दो, फिर धीरे धीरे लंड को बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करो। लड़की की गाण्ड आपके लंड को कस के पकड़ लेगी।
आपका लंड आसानी से बाहर नहीं आएगा। करीब आधा इंच बाहर निकाल कर फिर धीरे धीरे अंदर करो। यह प्रक्रिया 3-4 बार करो। हर बार अंदर धीरे धीरे ही करना है। लड़की को पूछो कि उसे कैसा लग रहा है। अगर वो ठीक है तो अब करीब एक इंच तक अंदर बाहर करना शुरू करो। अभी भी धीरे धीरे ही !! फिर लड़की से पूछो उसका हाल कैसा है… अगर वो खुश है तो और ज़्यादा अंदर बाहर करना शुरू करो।
कोशिश करो कि लंड अंदर की रिंग मसल के बाहर नहीं निकल जाए। अगर उसके बाहर निकल जाएगा तो आपको फिर से धीरे धीरे अंदर डालना पड़ेगा और लड़की को भी मदद करनी होगी. (पर इस में आपको मज़ा भी बहुत आएगा) इस तरह धीरे धीरे आप ३-४ इंच अन्दर बाहर कर पाओगे।
अगर अब तक भी आपका क्लाइमॅक्स नहीं हुआ है और लड़की को भी तकलीफ़ नहीं हो रही है तो धीरे धीरे अपना स्ट्रोक बड़ा करते रहो, ध्यान रखो कि जेली सूख ना गयी हो। ज़रूरत हो तो और लगा लो और फिर से शुरू हो जाओ। एक समय आएगा जब लड़की पूरी तरह से रिलॅक्स हो जाएगी और आपका लंड बिना मुश्किल के पूरा अंदर बाहर होने लगेगा। लड़की को दर्द नहीं होगा और वो आपके साथ मज़ा लेने लगेगी। वो अपने आप अपनी गाण्ड को आगे पीछे करने लगेगी और चाहेगी कि यह चुदाई ख़तम ना हो…
जब आपका क्लाइमॅक्स हो जाए तो आराम से लंड बाहर निकाल लो और लड़की को अच्छी तरह से प्यार करो। उसने दर्द सहकर भी आपको इतनी खुशी दी है। अगर लड़की का क्लाइमॅक्स नहीं हुआ है तो उसकी चूत और भग को सहला कर उसको चरम सीमा तक ले जाओ। फिर एक दूसरे की बाहों में जितनी देर तक लेट सकते हो लेते रहो।
जब अगली बार उसी लड़की की गाण्ड मारनी हो तो यह ना समझना कि अब तो उसकी गाण्ड हमेशा के लिए तैयार हो गई है। जब तक 7-8 बार उसकी गाण्ड नहीं मार लोगे, आपको धीरज से ही काम लेना पड़ेगा। यह ज़रूर है कि पहली बार गाण्ड मारने के मुक़ाबले बाद के मारने में थोड़ा फ़र्क़ तो आ जाता है, पर इतना नहीं आता कि लड़की को तकलीफ़ ना हो।
अगर आप कुछ अरसे (1-2 महीने) के बाद दोबारा गाण्ड मारने लगते हो तो आपको पूरी सावधानी फिर से बरतनी पड़ेगी जो इस विधि में बताई गई है।
और अधिक आनंद देने के लिए लड़की अपनी मांसपेशियों के ज़रिए आप के लंड को जकड़ सकती है और ढील दे सकती है। इससे आपका लंड ज़्यादा देर तक तना रह सकता है और आपको मज़ा भी ज़्यादा आएगा। जब आपका लंड पूरी तरह अंदर हो तो लड़की को गाण्ड की मान्सपेशियाँ कसने और ढीला करने को बोलो और स्वर्ग प्राप्त करो। यह क्रिया चूत से भी हो सकती है पर गाण्ड की बात ही और है !!
गाण्ड मारने के फायदेगाण्ड मारने के बहुत फायदे हैं:
1) दोनों को ज़्यादा मज़ा आता है क्योंकि गाण्ड चूत के मुक़ाबले ज़्यादा टाइट होती है और इसको ज़्यादातर लोग नहीं कर पाते हैं।
2) बच्चे होने का डर नहीं होता।
3) मासिक-धर्म के दौरान भी इसका मज़ा ले सकते हैं।
पता नहीं ज़्यादातर लड़कियाँ गाण्ड क्यों नहीं मरवाती ! ज़्यादातर लड़कियाँ इस सुख को भोग नहीं पाती हैं क्योंकि हम मर्द सही तरीका नहीं जानते और शुरू में ही उन्हें बहुत ज़्यादा दर्द का अहसास करा देते हैं। उन बेचारी लड़कियों को पता ही नहीं कि वो क्या खो रही हैं।
आशा है आपको मेरी विधि पसंद आई होगी। आप इस विधि का इस्तेमाल करो और बताओ कि आपको सफलता मिली या नहीं और लड़की को कैसा लगा। अगर कोई लड़की गाण्ड मरवाने को बिल्कुल राज़ी नहीं हो तो उसे यह विधि पढ़ने को बोलो। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर वो तुमसे प्यार करती है तो ज़रूर राज़ी हो जाएगी।
अगर आपको कोई और क्रिया की विधि सीखनी हो तो भी मुझे लिखो। Hindi Porn Stories
दोस्तो, आपके बहुत सारे Sex Stories मेल मिले ! मुझे ख़ुशी हुई कि सबको मेरी कहानी पसंद आई … गुरूजी को धन्यवाद जिन्होंने मेरी कहानी आप लोगों तक पहुँचाई ….
आपका रोहित फिर से अपनी मस्त सी भाभी और उसकी बहन को एक साथ चोदने वाली कहानी अन्तर्वासना के माध्यम से लेकर आया है।
भाभी की डिलीवरी के कुछ दिन बाद उसकी बहन मीनाक्षी अपने घर चली गई।
फिर कुछ दिनों बाद मैं फिर से भाभी को चोदने लगा। मैंने भाभी को अब नए ढंग से चोदना शुरु किया, मैं रोज़ नई-नई ब्लू फिल्म लाता, जिसमें अलग-अलग स्टाइल से चुदाई होती। हम उन्हीं नए-नए स्टाइल से सेक्स किया करते …
मैंने भाभी को घोड़ी बना कर गांड मारी, उसे गोद में उठाकर फास्ट स्पीड में चुदाई की ….
एक बार मैं शहद लाया और उसे भाभी के वक्ष, गांड और चूत में लगा कर स्तनों को चूसा, चूत में जीभ डाल कर खूब मस्ती की ! इससे सेक्स का मजा दोगुना हो गया।
भाभी ने भी मेरे लंड पर बहुत सारा शहद लगा कर २० मिनट तक मुँह में लिया। क्या तो मजा आया दोस्तो ! आप भी ऐसे करके देखें ! बड़ा मजा आएगा।
जब मैं भाभी को चोदता, तब मीनाक्षी (भाभी की बहन) के बारे में सोचता क्योंकि वो बहुत मस्त थी और भाभी को चोदता-चोदता बोर हो गया था, जैसे शादीशुदा लोग अपनी बीवी से बोर हो जाते हैं …
मैं भाभी से पूछता- मीनाक्षी कब आएगी?
तो बोलती- मैं तो कभी नहीं बुलाऊँगी ! उसने मेरा रोहित मुझसे छीन लिया … तुम सिर्फ मुझे ही चोदेंगे…
मुझे बड़ा गुस्सा आया और मैं बोला- अब मैं तुझे तब ही चोदूँगा जब तू अपनी बहन को बुलाएगी…
कुछ दिन चूत में लंड नहीं डालने पर वो बहुत परेशान हो गई …
कुछ दिन बाद मेरे घर आ कर बोली- देख रोहित ! मैं मीनाक्षी को बुला दूंगी पर उसे यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि तुम मुझे भी चोदते हो …
मैं बोला- वादा करता हूँ ! मैं तो कभी नहीं बताऊँगा।
फिर चलो अभी मुझे चोदो ..
मैं बोला- अभी घर में मम्मी है ….
तो बोली- दस मिनट में मेरे घर आ जाना !
मैं बोला- ठीक है ! आ जाउगा…
फिर दस मिनट बाद मैं भाभी के घर पंहुचा और खूब चुदाई की …
काफी दिन बाद सेक्स कर रहा था ना इसलिए बहुत शक्ति के साथ चोदा … मुस्कान (भाभी) ने भी अच्छा साथ दिया … मजा आ गया दोस्तो …
भाभी ने फ़ोन करके अपनी बहन को बुला लिया …
मैं बहुत खुश हुआ…
मैंने आते ही उसे गले लगा लिया …. और चूमना शुरु कर दिया …
बड़ा मजा आया ..
फिर हमने बातें करना शुरू कर दिया ..
मैंने बाते करते हुए उसके हाथ में मोबाइल देखा और बोला- मोबाइल भी ले लिया और नंबर भी नहीं दिया…?
बोली- सॉरी यार …
अब तो दो नंबर…
बोली नोट करो- 98********
अब तो हम रोज़ मोबाइल पर भी बात किया करेंगे ….
दो दिन बाद हमारे घर पर कोई नहीं था, हमने चुदाई की योजना बनाई …
वो उस दिन कपड़ों के अन्दर बिना पैंटी-ब्रा के आई …
उसे देखते ही लंड खड़ा हो गया …
फिर हमने चूमा-चाटी करना शुरू किया…
मैंने चूमते-चूमते ही उसकी जींस खोल दी …
और पैंटी नहीं होने से चूत में ऊँगली डाल कर घुमाने लगा … चुम्बन के साथ चूत में ऊँगली होने से मीनाक्षी सीसकारने लगी- अऽऽ आहऽऽ रोहितऽऽ बड़ा मजा आ रहा है ! ऐसे ही करो…
फिर मैंने उसकी गांड पर हाथ लगा कर हाथों में उठा लिया, नंगी गांड को मसलने लगा, उसकी नंगी चूत मेरे जींस के अन्दर खड़े लंड से अड़ रही थी, बड़ा मजा आ रहा था …. जब उसकी चूत से छू जाता ….
अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था… मैं बोला- यार, अब चुचियों को भी मुँह में लेने दो…
बोली- जानू ! मैंने कब मना किया ! मेरा पूरा शरीर अब तुम्हारा ही तो है ! जैसा चाहो, वैसा करो ! मैं नहीं रोकूँगी…
मैंने कहा- अच्छी बात है ..
फिर मैंने उसे पूरा नंगा किया और स्तनों को दबाने लगा, वो आहे भरने लगी- अह्ह्ह अह्ह्ह ! मजा आ गया रोहित ! यार, तुम्हारे हाथों में सच में कुछ जादू है… मैंने तीन लड़कों से चुदाई की लेकिन तुम ही सबसे मस्त लगे…
मैं बोला- जान, अभी देखना ! पिछली बार से भी ज्यादा मजा आएगा … बस तुम मेरा साथ दो !
फिर मैं रसोई में गया और शहद लेकर आया, जिस तरह मैंने भाभी के वक्ष, गांड और चूत पर लगा कर चाटा था, वैसे ही इसके साथ किया….
इसके साथ तो भाभी से भी ज्यादा मजा आया …
मैंने बारी-बारी से पहले स्तनों पर शहद लगा कर चूसा, फिर चूत में ढेर सारा शहद डाला और अपने मुँह से चाटने लगा। क्या मजा आया दोस्तो ! वाह … मीठी मीठी चूत का स्वाद ही अलग लगता है… तुम भी करके देखना…
फिर उसने मेरे लंड पर शहद लगाया और चाटने लगी। क्या तो मस्त लग रहा था…
मीनाक्षी बोली- यार तुम तो नए-नए तरीकों से सेक्स करते हो ! बड़ा मजा आ रहा है …
फिर मैंने उसकी चूत में अपना 7.5 इंच लम्बा लंड बड़ी तेजी से घुसाया …
उसने एक बार आह किया …. फिर सामान्य हो गई… फिर मैंने स्पीड से उसे चोदना शुरू कर दिया वो भी मेरा साथ दे रही थी…. अपनी गांड को हिला-हिला कर चुदाई को और मस्त कर रही थी …
मैं बीच बीच में उसके स्तनों को दबा देता, मुँह में ले लेता….साथ में चूमा-चाटी भी कर रहा था …
चोदते हुए चुम्बन में बड़ा मजा आया … सच में लग रहा थे जैसे जन्नत में पहुँच गया हूँ …
हमने उस दिन जी भर चुदाई की…
हर नये स्टाइल से चोदा उसे …
दो घंटे में तीन बार चुदाई करने के बाद हम कपड़े पहन कर लॉन्ग-ड्राइव पर निकल गए …
फिर हमने कई बार चुदाई की…
भाभी को भी चुदाने का मन करता … लेकिन मीनाक्षी हमेशा घर में रहती, जिस कारण वो नहीं चुदा पाती थी ….
एक दिन मीनाक्षी किसी काम से बाहर गई तो मैंने भाभी की बीस दिन की सेक्स की भूख शांत की…
बड़ा मजा आया बीस दिन बाद भाभी को चोदने में..
फिर कुछ दिन बाद भाभी को फिर चुदवाने की इच्छा होने लगी..
मैंने मना कर दिया- मीनाक्षी घर पर है….
शाम को जब मीनाक्षी रसोई में खाना बना रही थी, तब भाभी मुझे अपने बेडरूम में ले गई और बोली- रोहित, यार आज तो चोदो मुझे ..
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मैं बोला- मीनाक्षी ?
बोली- वो तो रसोई में है ! 20-25 मिनट में आयेगी, तब तक हमारा काम हो जायेगा …
भाभी ने दरवाज़े की कुण्डी लगाई और मेरे ऊपर लिपट गई …
मैंने चूमना शुरू किया तो बोली- रंडवे, पहले मेरी चूत की प्यास बुझा ! बाकी काम बाद में करना…
मैंने सीधे भाभी की साड़ी को उतारा और पेटीकोट को ऊपर करके अपना लंड चूत में घुसाने लगा … मेरा लंड उसकी चूत में आसानी से जा घुसा … बहुत फास्ट स्पीड में चुदाई कर रहा था कि अचानक गेट पर मीनाक्षी की आवाज आई- दीदी क्या कर रही हो…? और रोहित कहाँ गया बिना बताये …? हम दोनों डर गए ..
मैं बोला- अब हमे इसे सब कुछ बता देना चाहिए …
भाभी कुछ देर सोच कर बोली- ठीक है ! इस तरह मैं कभी भी चुदा तो सकूँगी…
फिर हम दोनों चूत में लंड डाले ही गेट खोलने चल पड़े…
गेट खोलते ही मीनाक्षी चौंक पड़ी, बोली- रोहित ! दीदी ! तुम दोनों एक साथ चुदाई करते हो…?
मैं बोला- मैं तो तुम्हारी दीदी को शादी के बाद से ही चोद रहा हूँ क्योंकि तेरा जीजा को नामर्द है…
वो बोली- क्या जीजू ने आज तक तुम्हें नहीं चोदा ? और ये बच्चा भी रोहित, तुम्हारा है…?
भाभी बोली- हाँ, यह रोहित का ही बच्चा है…
मीनाक्षी बोली- तुम धोखेबाज़ हो…
भाभी बोली- नहीं रे ! ये तो मेरे कहने पर ही मुझे चोदता है … मेरी भी तो चुदाने की इच्छा होती है ना…
वो बोली- ठीक है ! लेकिन ये अब हम दोनों को एक साथ चोदेगा…
मैं बोला- तब तो बड़ा मजा आयेगा ! दो दो चूत के साथ ..
फिर मैं मीनाक्षी को चूमने लगा और भाभी मेरा लंड मुँह में लेने लगी … मैंने मीनाक्षी के पूरे कपड़े उतार दिए। अब हम तीनों नंगे थे, मैं मीनाक्षी की चूत चाट रहा था, मीनाक्षी भाभी की चूत चाट रही थी और भाभी के मुँह में मेरा लंड था …
बड़ा मजा आ रहा था इस तरह करने में !
फिर हमने जगह बदल ली ! मैं भाभी की चूत चाटने लगा ! भाभी मीनाक्षी की चूत और … मीनाक्षी ने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया..
दस मिनट बाद भाभी मेरे मुँह में झड़ गई ..मुझे भाभी की चूत का पानी बड़ा मस्त लगा….
फिर मैंने पहले मीनाक्षी को चोदना शुरू किया….
जब मैं चोद रहा था, तब भाभी मीनाक्षी को चुचूक चूस रही थी और मैं भाभी के चूसने लगा …
मीनाक्षी बोली- आज तो बड़ा मजा आ गया जान .. तुम स्पीड और तेज़ करो !
फिर मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…
करीब बीस मिनट बाद मीनाक्षी झड़ गई…
लेकिन मैं नहीं झड़ा। फिर मैंने भाभी की चूत में अपना 7.5 इंच लम्बा लौड़ा डाल दिया … क्या मजा आया दोस्तो ! दोनों को एक साथ चोदने में…
जब मैं भाभी को चोद रहा था तो मीनाक्षी मुझे किस करने लगी..
15 मिनट बाद मैं झड़ गया तो दोनों लड़ने लगी कि मेरे मुँह में पानी डालो… मैंने पहले मीनाक्षी के मुँह में लंड डाल कर पानी डाला … भाभी अब भी उत्तेजित थी, बोली- रोहित यार चोदो ना …
मैं बोला- पाँच मिनट रुको ..
तब तक तुम दोनों आपस में मस्ती करो…
फिर दोनों बहनें आपस में एक दूसरे की चूत में हाथ डालने लगी…
मैं पाँच मिनट बाद फिर से चोदने आ गया … फिर भाभी को झड़वा कर मीनाक्षी को मस्त चुदाई की.. उस दिन चुदाई में जितना मजा आया उतना फिर कभी नहीं आया … हमने कई बार साथ चुदाई की …. कई बार अलग अलग …
मुझे मेल करके जरुर बताएँ कि आप लोगों को मेरी कहानी कैसी लगी ! मैं इन्तज़ार करुँगा … Sex Stories
Antarvasna stories मेरा नाम राकेश है। मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूँ, 20 साल का हूँ। कॉलेज में पढ़ता हूँ।
पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने ननिहाल अमृतसर घूमने गया हुआ था।
मेरे मामा का छोटा सा परिवार है। मेरे मामाजी पंकज सेठ 45 साल के हैं और मामी हरिता 42 के अलावा उनकी एक बेटी है कणिका 18 साल की।
मस्त क़यामत बन गई है वो!
अब तो अच्छे-अच्छों का पानी निकल जाता है उसे देख कर।
वो भी अब मोहल्ले के लौंडे लपाड़ों को देख कर नैन-मट्टका करने लगी है।
एक बात खास तौर पर बताना चाहूँगा कि मेरे नानाजी का परिवार लाहौर से अमृतसर 1947 में आया था और यहाँ आकर बस गया।
पहले तो सब्जी की छोटी सी दुकान ही थी पर अब तो काम कर लिए हैं। कॉलेज के सामने एक जनरल स्टोर है जिसमें पब्लिक टेलीफ़ोन, कम्प्यूटर और नेट आदि की सुविधा भी है। साथ में जूस बार और फलों की दुकान भी है।
अपना दो मंजिला मकान है और घर में सब आराम है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है।
आदमी को और क्या चाहिए। रोटी कपड़ा और मकान के अलावा तो बस सेक्स की जरूरत रह जाती है।
मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला रहा हूँ मुझे अभी तक सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था।
बस एक बार बहुत पहले मेरे चाचा ने मेरी गांड मारी थी।
जब से जवान हुआ था अपने लंड को हाथ में लिए ही घूम रहा था। कभी कभार नेट पर अन्तरवासना पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ लेता था और ब्लू फ़िल्म भी देख लेता था।
सच पूछो तो मैं किसी लड़की या औरत को चोदने के लिए मरा ही जा रहा था।
मामाजी और मामी को कई बार रात में चुदाई करते देखा था। वहीं 42 साल की उम्र में भी मेरी मामी हरिता एकदम जवान पट्ठी ही लगती है। लयबद्ध तरीके से हिलते मोटे मोटे नितम्ब और गोल गोल स्तन तो देखने वालों पर बिजलियाँ ही गिरा देते हैं।
ज्यादातर वो सलवार और कुर्ता ही पहनती है पर कभी कभार जब काली साड़ी और कसा हुआ ब्लाउज पहनती है तो उसकी लचकती कमर और गहरी नाभि देखकर तो कई मनचले सीटी बजाने लगते हैं। लेकिन दो दो चूतों के होते हुए भी मैं अब तक प्यासा ही था।
जून का महीना था। सभी लोग छत पर सोया करते थे।
रात के कोई दो बजे होंगे, मेरी अचानक आँख खुली तो मैंने देखा मामा और मामी दोनों ही नहीं हैं। कणिका बगल में लेटी हुई है।
मैं नीचे पेशाब करने चला गया। पेशाब करने के बाद जब मैं वापस आने लगा तो मैंने देखा मामा और मामी के कमरे की लाईट जल रही है।
मैं पहले तो कुछ समझा नहीं पर ‘हाई.. ई.. ओह.. या.. उईई..’ की हल्की हल्की आवाज ने मुझे खिड़की से झांकने को मजबूर कर दिया।
खिड़की का पर्दा थोड़ा सा हटा हुआ था, अन्दर का नजारा देख कर तो मैं जड़ ही हो गया।
मामा और मामी दोनों नंगे बेड पर अपनी रात रंगीन कर रहे थे।
नीचे मामा लेटे थे और मामी उनके ऊपर बैठी थी।
मामा का लंड मामी की चूत में घुसा हुआ था और वो मामा के सीने पर हाथ रख कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी और.. आह.. उन्ह.. या.. की आवाजें निकाल रही थी।
उसके मोटे मोटे नितम्ब तो ऊपर नीचे होते ऐसे लग रहे थे जैसे कोई फ़ुटबाल को किक मार रहा हो।
उनकी चूत पर उगी काली काली झांटों का झुरमुट तो किसी मधुमक्खी के छत्ते जैसा था।
वो दोनों ही चुदाई में मग्न थे। कोई 8-10 मिनट तक तो इसी तरह चुदाई चली होगी। पता नहीं कब से लगे थे।
फ़िर मामी की रफ्तार तेज होती चली गई और एक जोर की सीत्कार करते हुए वो ढीली पड़ गई और मामा पर ही पसर गई।
मामा ने उसे कस कर बाहों में जकड़ लिया और जोर से मामी के होंठ चूम लिए।
‘हरिता डार्लिंग ! एक बात बोलूँ?’
‘क्या?’
‘तुम्हारी चूत अब बहुत ढीली हो गई है बिल्कुल मजा नहीं आता !’
‘तुम गांड भी तो मार लेते हो, वो तो अभी भी टाइट है ना?’
‘ओह तुम नहीं समझी?’
‘बताओ ना?’
‘वो तुम्हारी बहन बबिता की चूत और गांड दोनों ही बड़ी मस्त थी ! और तुम्हारी भाभी जया तो तुम्हारी ही उम्र की है पर क्या टाइट चूत है साली की? मज़ा ही आ जाता है चोद कर !’
‘तो यह कहो ना कि मुझ से जी भर गया है तुम्हारा !’
‘अरे नहीं हरिता रानी, ऐसी बात नहीं है दरअसल मैं सोच रहा था कि तुम्हारे छोटे वाले भाई की बीवी बड़ी मस्त है। उसे चोदने को जी करता है !’
‘पर उसकी तो अभी नई नई शादी हुई है वो भला कैसे तैयार होगी?’
‘तुम चाहो तो सब हो सकता है !’
‘वो कैसे?’
‘तुम अपने बड़े भाई से तो पता नहीं कितनी बार चुदवा चुकी हो अब छोटे से भी चुदवा लो और मैं भी उस क़यामत को एक बार चोद कर निहाल हो जाऊँ !’
‘बात तो तुम ठीक कह रहे हो, पर अविनाश नहीं मानेगा!’
‘क्यों?’
‘उसे मेरी इस चुदी चुदाई भोसड़ी में भला क्या मज़ा आएगा?’
‘ओह तुम भी एक नंबर की फुद्दू हो ! उसे कणिका का लालच दे दो ना?’
‘कणिका? अरे नहीं, वो अभी बच्ची है!’
‘अरे बच्ची कहाँ है ! पूरे अट्ठारह साल की तो हो गई है? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या? तुम तो दो साल कम की ही थी जब हमारी शादी हुई थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी !’
‘हाँ, यह तो सच है पर !’
‘पर क्या?’
‘मुझे भी तो जवान लंड चाहिए ना? तुम तो बस नई नई चूतों के पीछे पड़े रहते हो, मेरा तो जरा भी ख़याल नहीं है तुम्हें?’
‘अरे तुमने भी तो अपने जीजा और भाई से चुदवाया था ना और गांड भी तो मरवाई थी ना?’
‘पर वो नए कहाँ थे मुझे भी नया और ताजा लंड चाहिए बस ! कह दिया?’
‘ओह ! तुम तरुण को क्यों नहीं तैयार कर लेती? तुम उसके मज़े लो ! मैं कणिका की सील तोड़ने का मजा ले लूँगा !’
‘पर वो मेरे सगे भाई की औलाद है, क्या यह ठीक रहेगा?’
‘क्यों इसमें क्या बुराई है?’
‘पर वो नहीं.. मुझे ऐसा करना अच्छा नहीं लगता !’
‘अच्छा चलो एक बात बताओ, जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उस फसल के अनाज को खाने का हक नहीं मिलना चाहिए? अब अगर मैं अपनी इस बेटी को चोदना चाहता हूँ तो इसमें क्या गलत है?’
‘ओह तुम भी एक नंबर के ठरकी हो। अच्छा ठीक है बाद में सोचेंगे?’
और फ़िर मामी ने मामा का मुरझाया लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
मैं उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हो गया था कि मुट्ठ मारने के अलावा मेरे पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा था। मैं अपना सात इंच का लंड हाथ में लिए बाथ रूम की ओर बढ़ गया। फ़िर मुझे ख़याल आया कणिका ऊपर अकेली है। कणिका की ओर ध्यान जाते ही मेरा लंड तो जैसे छलांगें ही लगाने लगा। मैं दौड़ कर छत पर चला आया।
कणिका बेसुध हुई सोई थी। उसने पीले रंग की स्कर्ट पहन रखी थी और अपनी एक टांग मोड़े करवट लिए सोई थी, इससे उसकी स्कर्ट थोड़ी सी ऊपर उठी थी। उसकी पतली सी पेंटी में फ़ंसी उसकी चूत का चीरा तो साफ़ नजर आ रहा था। पेंटी उसकी चूत की दरार में घुसी हुई थी और चूत के छेद वाली जगह गीली हुई थी।
उसकी गोरी गोरी मोटी जांघें देख कर तो मेरा जी करने लगा कि अभी उसकी कुलबुलाती चूत में अपना लंड डाल ही दूँ।
मैं उसके पास बैठ गया और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा।
वाह.. क्या मस्त मुलायम संग-ए-मरमर सी नाज़ुक जांघें थी।
मैंने धीरे से पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अंगुली फ़िराई।
वो तो पहले से ही गीली थी। आह.. मेरी अंगुली भी भीग सी गई।
मैंने उस अंगुली को पहले अपनी नाक से सूंघा। वाह.. क्या मादक महक थी।
कच्चे नारियल जैसी जवान चूत के रस की मादक महक तो मुझे अन्दर तक मस्त कर गई। मैंने अंगुली को अपने मुँह में ले लिया। कुछ खट्टा और नमकीन सा लिजलिजा सा वो रस तो बड़ा ही मजेदार था।
मैं अपने आप को कैसे रोक पाता। मैंने एक चुम्बन उसकी जाँघों पर ले ही लिया, फ़िर यौनोत्तेजना वश मैंने उसकी जांघें चाटी। वो थोड़ा सा कुनमुनाई पर जगी नहीं।
अब मैंने उसके उरोज देखे। वह क्या गोल गोल अमरुद थे। मैंने कई बार उसे नहाते हुए नंगी देखा था। पहले तो इनका आकार नींबू
जितना ही था पर अब तो संतरे नहीं तो अमरुद तो जरूर बन गए हैं। गोरे गोरे गाल चाँद की रोशनी में चमक रहे थे। मैंने एक चुम्बन उन पर भी ले लिया।
मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही कणिका जग गई और अपनी आँखों को मलते हुए उठ बैठी।
‘क्या कर रहे हो भाई?’ उसने उनीन्दी आँखों से मुझे घूरा।
‘वो.. वो.. मैं तो प्यार कर रहा था !’
‘पर ऐसे कोई रात को प्यार करता है क्या?’
‘प्यार तो रात को ही किया जाता है!’ मैंने हिम्मत करके कह ही दिया।
उसके समझ में पता नहीं आया या नहीं !
फ़िर मैंने कहा- कणिका एक मजेदार खेल देखोगी?’
‘क्या?’ उसने हैरानी से मेरी ओर देखा।
‘आओ मेरे साथ !’ मैंने उसका बाजू पकड़ा और सीढ़ियों से नीचे ले आया और हम बिना कोई आवाज किये उसी खिड़की के पास आ गए। अन्दर का दृश्य देख कर तो कणिका की आँखें फटी की फटी ही रह गई। अगर मैंने जल्दी से उसका मुँह अपनी हथेली से नहीं ढक दिया होता तो उसकी चीख ही निकल जाती।
मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा।
वो हैरान हुई अन्दर देखने लगी।
मामी घोड़ी बनी फ़र्श पर खड़ी थी और अपने हाथ बेड पर रखे थी, उनका सिर बेड पर था और नितम्ब हवा में थे। मामा उसके पीछे उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहे थे। उनका 8 इंच का लंड मामी की गांड में ऐसे जा रहा था जैसे कोई पिस्टन अन्दर बाहर आ जा रहा हो। मामा उनके नितम्बों पर थपकी लगा रहे थे। जैसे ही वो थपकी लगाते तो नितम्ब हिलने लगते और उसके साथ ही मामी की सीत्कार निकलती- हाईई… और जोर से मेरे राजा ! और जोर से ! आज सारी कसर निकाल लो ! और जोर से मारो ! मेरी गांड बहुत प्यासी है ये हाईई…’
‘ले मेरी रानी और जोर से ले… या… सऽ विऽ ता… आ.. आ…’ मामा के धक्के तेज होने लगे और वो भी जोर जोर से चिल्लाने लगे।
पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गांड मार रहे थे। फ़िर मामा मामी से जोर से चिपक गए। मामी थोड़ी सी ऊपर उठी। उनके पपीते जैसे स्तन नीचे लटके झूल रहे थे। उनकी आँखें बंद थी और वह सीत्कार किये जा रही थी- जियो मेरे राजा मज़ा आ गया !’
मैंने धीरे धीरे कणिका के वक्ष मसलने शुरू कर दिए। वो तो अपने मम्मी पापा की इस अनोखी रासलीला देख कर मस्त ही हो गई थी। मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में भी डाल दिया।
उफ़… छोटी छोटी झांटों से ढकी उसकी बुर तो कमाल की थी, नीम गीली।
मैंने धीरे से एक अंगुली से उसके नर्म नाज़ुक छेद को टटोला। वो तो चुदाई देखने में इतनी मस्त थी कि उसे तो तब ध्यान आया जब मैंने गच्च से अपनी अंगुली उसकी बुर के छेद में पूरी घुसा दी।
‘उईई माँ…!!’ उसके मुँह से हौले से निकला- ओह… भाई यह क्या कर रहे हो?’
उसने मेरी ओर देखा। उसकी आँखें बोझिल सी थी और उनमें लाल डोरे तैर रहे थे।
मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया।
हम दोनों ने देखा कि एक पुच्क्क की आवाज के साथ मामा का लंड फ़िसल कर बाहर आ गया और मामी बेड पर लुढ़क गई।
अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था। हम एक दूसरे की बाहों में सिमटे वापस छत पर आ गए।
Antarvasna कहानी जारी रहेगी।
मेरा नाम आतिश है, मैं Antarvasna दिल्ली में रहता हूँ। मैं हमेशा यह सोचा करता था कि क्या मैं भी कभी अपनी ज़िन्दगी में किसी के साथ सेक्स कर पाऊँगा! मुझे ब्लू-फिल्म देखने की आदत है लेकिन क़िस्मत देखिए कि कभी भी मैं किसी के साथ सेक्स नहीं कर पाया था। मेरी उम्र 23 साल और कद 5 फीट 9 इंच है। वैसे लोग कहते हैं कि मैं स्मार्ट भी हूँ, ख़ैर छोड़िये।
लेकिन मैं आप को अपनी एक ऐसी हक़ीकत से वाक़िफ कराना चाहता हूँ जो मेरे साथ पहले कभी नहीं हुई। ये होने के बाद मैं मन ही मन बड़ा खुश होता रहता था क्योंकि जो मैं इतनी कोशिश करने के बाद भी नहीं कर पाया वो अचानक हो गया।
हुआ ये कि मेरे घर के सामने एक घर है जिसमें एक परिवार रहता है जो बिहार से है, उस परिवार में 4 सदस्य हैं जिनमें से 2 बच्चे और दो बड़े हैं
जून 2004 की बात है जब मेरा परिवार स्कूल की छुट्टियों की वज़ह से गाँव गई हुई थी तो बस मैं ही घर पर अकेला था। शनिवार की बात है उस दिन मेरे ऑफिस में छुट्टी होती है तो थोड़ा देर से सोया और देर से जागा। उसके बाद मैं फ्रेश हुआ और बिस्किट खरीदने के लिए दुकान पर गया।
वह दुकान बहुत ही छोटी थी और वहाँ भीड़ बहुत ज्यादा रहती थी। जहाँ मैं खड़ा था उसके एकदम आगे मेरे सामने वाली आंटी खड़ी थी वो भी कुछ सामान ले रही थी और भीड़भाड़ होने की वज़ह से हम एक-दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया फिर मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड आंटी की गाँड पर लग रहा है। मेरा लण्ड एकदम तन गया, मुझे बहुत मज़ा आने लगा।
फिर आंटी सामान लेकर जाने लगी, जाते हुए आंटी ने मेरी तरफ देखा, उनका चेहरा गुस्से से लाल था। मुझे पता नहीं क्यों, बहुत शर्म सी आई और फिर मैं भी उनके जाने के करीब 10-15 मिनटों के बाद घर आ गया।
मैंने पहले तो चाय पी, फिर अपने दरवाज़े के सामने खड़ा हो गया। अचानक आंटी ने अपना दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर आंटी ने मुझे कहा ‘बेटा, क्या तुम हमारा एक काम कर दोगे?’
‘कहिए आंटी जी- मैंने डरते हुए कहा।
उन्होंने कहा- बेटा, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है, तुम मेरा एक डिब्बा उतार दो।’
मैंने कहा- ठीक है। फिर मैं उनके घर चला गया, वहाँ ऊँचाई पर एक डिब्बा रखा हुआ था, आंटी ने बताकर कहा- बेटा यही डिब्बा उतारना है।’
मैंने डिब्बा उतार दिया। तभी आंटी ने गेट बन्द कर लिया।
मैंने कहा- आंटी! मैं जाता हूँ, तो उसने मुझे बुलाया- इधर आओ-
यह सुनकर मेरी तो हवा ही खिसक गई, लेकिन फिर मैं भी हिम्मत करके चला गया। मैंने कहा ‘कहो आंटी, क्या कोई और कोई काम है?’
‘नहीं, एक बात पूछनी थी।’ आंटी ने कहा।
मैं डर गया, डरते-डरते मैंने कहा- कहिए आंटी जी!’
आंटी ने पूछा- तुम्हारी उम्र कितनी है?’
मैंने जवाब दिया- आंटी जी, 23 साल!’
फिर आंटी ने कहा कि मेरी उम्र 40 साल है और मैंने तुम्हारी माँ के उम्र की हूँ, तुम्हें शर्म नहीं आई दुकान पर ऐसी हरक़त करते हुए?
मैंने गर्दन नीचे किये हुए उनसे माफी माँगी- आंटी मुझे माफ कर दो, आज के बाद ऐसा नहीं होगा- मैं उनके सामने हाथ जोड़ने लगा।
‘अरे कोई बात नहीं, ऐसी उमर में ऐसा होता है। पहले भी किसी के साथ ऐसा या कोई और गलत काम किया है?’
मैं कुछ नहीं बोला।
फिर आंटी ने कहा- अरे शरमाओ मत, बताओ।’
‘नहीं आंटी! अभी तक नहीं।’
‘शादी से पहले कम से कम 2-3 बार ज़रूर करना चाहिए।’
मैंने हिम्मत करके कहा- क्यों आंटी?’
‘क्योंकि हर काम से पहले ट्रेनिंग ज़रूरी है, जैसे आर्मी वालों को दी जाती है। क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?’
‘नहीं आंटी जी, मेरी कोई भी गर्लफ्रेण्ड नहीं है।’
‘ये तो बड़े ही दुःख की बात है।’ आंटी ने कहा।
‘अगर तुम इजाज़त दो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ।’ आंटी ने आगे कहा।
‘कैसे?’ मैंने प्रश्न किया।
उन्होंने कहा- मैं तुम्हें ट्रेनिंग दूँगी ताकि तुम अपनी बीवी को ज़्यादा खुश रख सको। क्या तुम तैयार हो?’
‘जी हाँ आंटी, जैसा आप कहें।’
मैं सोच रहा था कि ये मेरे साथ ऐसी बातें कैसे कर रही हैं, वो भी पहली बार। मुझे लगा शायद दुकान वाली हरकत की वज़ह से वह मुझसे ऐसी बातें कर रही है।
आंटी ने मेरे हाथ अपने चेहरे पर लगाये और मुझे कहा कि मेरे गालों को सहलाते रहो। मैं ऐसा ही करता रहा। फिर आंटी ने मेरा हाथ अपनी टाँग पर रखा और मुझसे कहा- मेरी टाँग पर अपना हाथ फेरते रहो।
मैं ऐसा ही करता रहा। मुझे भी मज़ा आने लगा। आंटी बहुत गरम होने लगी और मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरी गाँड पर हाथ फेरने लगी।
मैंने अपना हाथ टाँग से हटाकर आंटी के मोटे-मोटे बूब्स पर रखा, वैसे तो उन्होंने कपड़े नहीं उतारे थे, पर फिर भी मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। आंटी कहने लगी कि तुम तो इंटेलीजेन्ट हो, अपने आप ही हाथ रख लिया।
फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से बूब्स दबाने लगा, आंटी एकदम पागल सी हो गई। मैं भी होश खो बैठा और अपना हाथ आंटी के पेटीकोट में अन्दर उनकी प्यारी सी चूत पर रखा, वो एकदम मुझसे चिपक गई।
फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी चूत में डाली और बार-बार अन्दर-बाहर करने लगा। आंटी को बड़ा मज़ा आने लगा। मज़े की वज़ह से वो सिसकियाँ लेने लगी। उनके मुँह से आवाज़ें आ रहीं थीं… हाय! मैं मर गईईईई…! ओओओ…! ह्ह्ह्ह।
फिर अचानक आंटी ने कहा कि मैं तुम्हें इस ट्रेनिंग का आखिरी पाठ सिखाती हूँ और फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे अपने बेड पर लेटने के लिए कहा। मैं लेट गया। उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये।
अब वो मेरे सामने एकदम नंगी थी। वो उतनी ख़ूबसूरत तो नहीं थी, पर उसकी फिगर लाजवाब थी। फिर वो मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़कर अपने हाथ को ऊपर-नीचे करने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उन्होंने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और फिर अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी। मेरा लण्ड एकदम तन गया और करीब 7-7.5 इंच का हो गया।
फिर उन्होंने फिर मुझे कहा कि अब तुम उठो और मैं लेटती हूँ। मैं सोच रहा था कि यार, कहीं इसका दिमाग तो खराब नहीं हो रहा है, लेकिन फिर ये सोचकर कि कहीं बना-बनाया काम न बिगड़ जाये, मैंने कुछ नहीं कहा। फिर वो लेट गई और मुझे कहा अपना मुँह मेरी दोनों टाँगों के बीच में रखकर मेरी चूत को चाटो!
मैंने कहा, आंटी ये गन्दी है। आंटी ने पूछा- क्या तुम अपनी बीवी को खुश नहीं रखना चाहते?’
मैंने उत्तर दिया ‘हाँ’।
‘तो फिर चलो, जल्दी करो।’
मैंने चाटना शुरू कर दिया।
मैंने देखा कि आंटी की आँखें बन्द हैं और वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ ले रहीं हैं। थोड़ी देर ऐसा ही करने के बाद आंटी ने कहा ‘रूको!’
मैंने पूछा ‘क्या हुआ?’
आंटी ने कहा- कुछ नहीं हुआ, अब मैं तुम्हें सबसे मज़ेदार, और सबसे आख़िरी स्टेप सिखाती हूँ।
फिर आंटी ने अपनी टाँगें ऊपर कीं और मुझे कहा कि अपना लण्ड मेरी चूत पर रखो और अपने हाथ मेरे कंधे के पास। मैंने ऐसा ही किया। फिर आंटी ने मेरा गरम लण्ड अपनी गरम चूत पर रखा और मुझे कहा कि अब धीरे-धीरे इसे अन्दर करते रहो। मैंने ऐसा ही किया। जब मेरा आधा लण्ड अन्दर जा चुका था तो मुझे बड़ा मज़ा आने लगा।
आंटी कह रही थी कि तुम्हारा लण्ड कितना मोटा है। बड़ा दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- अगर आप कहती हैं तो मैं निकाल लेता हूँ।
आंटी ने कहा, नहीं मेरी जान, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, और दर्द तो ज़रूर होता है और जितना दर्द होगा, बाद में मज़ा भी उतना ही आयेगा।
मैंने फिर एकदम से अपना सारा का सारा लण्ड उसकी गरम चूत में पेल दिया। वो चिल्लाने लगी, कहने लगी कि इसे फाड़ेगा क्या। उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।
मैंने पूछा- बहुत दर्द हो रहा है क्या?’
‘जानवर की तरह करेगा तो दर्द नहीं होगा?’
‘सॉरी आंटी…!’
आंटी बोली- कोई बात नहीं, तुम लगे रहो, धीरे-धीरे दर्द कम हो जाएगा।’
चार-पाँच मिनट बाद शायद उसका दर्द कम हो गया, क्योंकि वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी- आज इसे फाड़ दो… मैं तुम्हारी हूँ… ज़ोर-ज़ोर से पेलो मेरी जा..आआआन… आआआआह ईईईईईईई ऊऊऊऊऊ आआआआआह मैं मर गईईईईई।
तकरीबन 15 मिनट के बाद आंटी ने कहा मेरी जान अब दूसरा स्टेप करते हैं और वो फिर उठी और डॉगी स्टाईल में हो गई और मुझे कहा अब दुबारा अपना काम शुरू करो।
मैंने फिर उसकी गरम चूत में अपना सात इंच का मोटा लण्ड पेल डाला। वो फिर सिसकियाँ लेने लगी, और चिल्लाने लगी- मैं मर गई… आज मेरी चूत को फाड़ डालो मेरी जान…’
और मैं भी मज़े से पागल हो रहा था। हम दोनों की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं।
तकरीबन 10 मिनट बाद आंटी ने कहा ‘ज़रा हटो।’
‘क्यों आंटी?’
‘अब मैं तुम्हें वो स्टेप सिखाऊँगी जो अन्त में करना चाहिए, जब तुम्हारी गाड़ी मंज़िल पर पहुँचने वाली हो।’
‘ठीक है आंटी।’
वो पिर उसी पोज़ीशन में आ गई जैसे कि शुरू में थी, अपने दोनों पैर ऊपर उठा लिये और फिर कहा कि अब दुबारा इसमें डाल दो, और चाहे जो कुछ भी हो, अपना लण्ड अन्दर ही रहने देना।
मैंने सोचा कि यार क्या होगा, फिर मैंने अपना लण्ड घुसेड़ दिया और तकरीबन 6-7 मिनटों के बाद मुझे और आंटी को बड़ा जोश आने लगा। हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगे… आहहहह ओययययय आआ आआह हहह।
मैंने फिर आंटी से कहा कि आंटी लगता है मेरे लण्ड से कुछ निकलने वाला है।
‘मेरी भी चूत से निकलने वाला है, लेकिन तुम अन्दर ही रखना और अन्दर ही डाल देना जो भी निकलेगा।’
मैंने कहा- ठीक है।’
आंटी फिर शायद झड़ने वाली थी क्योंकि उसने मुझे बहुत कसकर पकड़ रखा था और आंटी कहने लगी मेरी जान… मैं मर गई… मैं झड़ने वाली हूँ। फिर वह झड़ गई।
दो मिनट बाद मेरा भी काम हो गया। आंटी पहले भी 1 बार बीच में झड़ चुकी थी, फिर हम दोनों थोड़ी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे और फिर आंटी ने कहा- लो ये कपड़ा और इसे साफ कर लो।’ आंटी ने भी अपनी चूत साफ कर ली और फिर पूछा- कुछ सीखा?’
‘हाँ आंटी, मैं सीख गया।’
‘मेरी जान अब मैं तुम्हारी हो चुकी हूँ। अगर तुम्हें मेरी क्लास अच्छी लगी हो तो तुम रोज़ आ सकते हो।’
‘ठीक है आंटी जी मैं रोज़ सीखने आया करूँगा।’ मैंने उत्तर दिया।
आंटी ने मुझे एक लम्बी पप्पी दी और कहा कि अब तुम जाओ मेरी जान।
फिर मैंने कपड़े पहने और अपने घर वापस आ गया।
उसके बाद मैं आंटी को चोदने रोज उसके घर जाने लगा।
1 महीने तक हमने खूब मस्ती की। और अब भी जब मौका हाथ लगता है हम दोनों सेक्स करते हैं, खूब मज़े लेते हैं… अब मैं एक दूसरी औरत पर लाईन मार रहा हूँ जिसकी शादी अभी-अभी हुई है। अगर हमारी बात वहाँ तक पहुँचती है तो मैं आपको ज़रूर लिखूँगा… बाययय
प्लीज़ आप मुझे बतायें कि आपको मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी।
मुझे मेल करें! मैं आपके मेल का इन्तज़ार करूँगा! Antarvasna
वैसे तो मेरे कई सारे सुखद अनुभव रहे हैं और आज मैं आपके सामने उनमें से ही एक सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ।
इस यूनिवर्सिटी प्रोफेसर सेक्स कहानी को मैं अपनी एक प्रशंसिका ऋतु नामक लड़की के आग्रह पर लिख रहा हूँ।
कहानी शुरू करने से पहले मै अपने बारे में आपको बता दूं, मेरा नाम अमित (बदला हुआ) है और मैं एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हूं।
मैं 29 वर्ष का अविवाहित युवक हूँ और मेरे लंड का साइज़ भी इतना मस्त है कि ये किसी भी लड़की या भाबी को चुदाई का पूरा मज़ा देता है।
मैं वाराणसी, उत्तर प्रदेश मैं रहता हूं और मेरी यह हॉट टीचर फक़ स्टोरी भी यहीं की है।
मुझे लड़कियों से ज्यादा भाभियों और शादी-शुदा महिलाओं की चुदाई करनें में ज्यादा मजा आता है।
मेरा आपसे यह अनुरोध है कि कृपया कोई भी पाठक मुझसे किसी भाभी या लड़की का नंबर या आइडी ना मांगे।
किसी भी भाभी या लड़की के लिए उसकी प्राइवेसी और गोपनीयता बनाए रखना बहुत ज़रूरी होता है और मैं हमेशा ऐसा ही करता हूं।
इसलिए ये देखते हुए मैंने कहानी में नाम बदल दिए हैं।
पहले मैं आपको अपनी कहानी की नायिका यानि कि उस खूबसूरत प्रोफेसर के बारे में बता देता हूं.
वे इसी शहर की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं,
मेरी उनसे मुलाकात एक प्रोग्राम के दौरान हुई जिसमें मैं अतिथि बनकर गया हुआ था।
हालांकि उस दिन मेरा ध्यान उन पर ज्यादा नहीं गया लेकिन उनका ध्यान मुझ पर ही था.
और यह मुझे प्रोग्राम खत्म होने के बाद मिले उनके पर्सनल व्हाट्सएप से पता चला जिसमें उन्होंने मेरी स्पीच के साथ-साथ मेरी भी तारीफ की थी।
उसके बाद से जब भी मैं यूनिवर्सिटी में जाता तो उनसे जरूर मिलता था.
और वे भी मुझसे उतनी ही खुशी के साथ मिलती थी.
धीरे-धीरे हमारी बात व्हाट्सएप पर होने लगी.
और कई बार मैं बिना काम के भी उनसे बातें करने लगा.
वे भी मुझसे सहर्ष बातें करती थी.
जिससे मुझे यह समझ में आने लगा कि वे भी मुझ में रूचि ले रही हैं।
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे बताया था कि यहां पर स्टाफ क्वार्टर में वे अकेली ही रहती हैं. उनके पति और बच्चे दूसरे शहर में रहते हैं।
तो बस मैंने एक योजना बनाई और फिर एक दिन बातों ही बातों में मैंने उनसे कहा- कभी अपने घर चाय पर बुलाइए!
पहले तो उन्होंने मना किया.
लेकिन फिर मैंने कहा- यूनिवर्सिटी में तो साथ में चाय नहीं पी सकते. तो अच्छा होगा कि आपके घर पर ही चाय पी जाए!
इस पर वे मान गईं … शायद उनका भी मन मुझसे मिलने का था।
लेकिन अब अगली समस्या यह थी कि उनके घर किस समय जाया जाए क्योंकि स्टाफ क्वार्टर की बिल्डिंग में और भी लोग रहते थे.
और वे नहीं चाहती थी कि मुझे उनके यहां आते हुए लोग देखें.
नहीं तो बातें बनना शुरू हो जाएंगी।
गर्मी का मौसम का और सभी लोग सुबह 9:00 बजे तक अपने ऑफिस चले जाते थे.
इसलिए उन्होंने मुझे अपने घर 9:15 बजे तक बुलाया क्योंकि वे 11:00 बजे तक अपने ऑफिस जाती थी.
बस फिर क्या था … मुझसे भी इंतजार नहीं हो रहा था और मैं सुबह 9:00 बजे ही उनकी कॉलोनी के बाहर पहुंच गया.
फिर उनका फोन आया तो उन्होंने बताया कि दरवाजा खुला रहेगा.
9:15 बजते ही तुरंत मैं उनकी बिल्डिंग में दाखिल हुआ और उनके घर में घुस कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.
पहले तो उन्होंने मुझे पानी, फिर चाय ऑफर की.
फिर हम बैठकर बातें करने लगे.
अब क्योंकि हम इस तरह पहली बार मिल रहे थे तो दोनों ही थोड़ा शर्मा रहे थे.
लेकिन मेरी नजर उनके मस्त गोरे बदन और चूचों पर थी.
उनके मस्त फिगर की बात करूं तो गोरा कसा हुआ बदन, चूचे 32″, कमर 30″, और गांड 32″ रही होगी.
उन्होंने स्लीवलेस टॉप पहना हुआ था जिसमें से झांकती उनकी ब्रा मेरा तापमान बढ़ा रही थी.
उनको देखकर बातों ही बातों में मैं उन्हें चोद चुका था.
लेकिन अब असल में चुदाई होनी थी।
जब घड़ी में 10:00 बजे तो मैंने उनसे कहा- मुझे थोड़ा पानी चाहिए.
जिसके लिए वे रसोई में गई.
मैं यही चाहता था। मैं भी उनके पीछे किचन में गया और जाकर उनको पीछे से पकड़ लिया.
पहले तो वह थोड़ा शर्माई और मना करने लगी.
लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी और पीछे से ही उनकी गर्दन और गालों पर किस करने लगा और मेरे हाथ उतनी ही तेजी से उनके मम्मों और पेट पर चलने लगे।
मैंने उनके कानों पर किस किया और धीरे से अपनी गर्म सांस उनके कानों में छोड़ी जिससे वे और उत्तेजित हो गई और मेरी तरफ को घूम कर मुझे किस करने लगी.
किचन का तापमान अब हमारी गर्मी से बढ़ने लगा था.
वे मेरे होठों को चूसती और मैं उसके चूचों को दबाता.
इसी बीच मैंने अपना हाथ उनकी पैंटी में डाला तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि उन्होंने पहले से अपनी चूत के बाल साफ कर रखे थे.
मेरा हाथ एक नर्म मुलायम सी चूत पर चलने लगा.
फिर धीरे से मैंने अपनी एक उंगली उनकी चूत में डाली तो वे अचानक से सिहर उठी और मेरे होठों को और जोर जोर से चूसने लगी.
उन्होंने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और हाथ रखते ही बोली- हाय राम, कितना बड़ा है … तुम्हारा जल्दी से दिखाओ मुझे!
कहते ही कहते मेरी बेल्ट खोलकर मेरी पैंट भी खोल दी और फिर मेरा अंडरवियर निकालकर मेरा लंड अपने हाथ में लेकर खेलने लगी।
अब हम किचन से निकलकर ड्राइंग रूम में आ गए थे.
रूम में चल रहा AC मानो कह रहा था कि कमरे का तापमान थोड़ा बढ़ाया जाए और हमने भी वैसा ही किया.
अब मैंने उनकी ब्रा उतार कर उनके चूचों को अपने हाथों में ले लिया और आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगा.
उनके चूचुक सहलाने से वे और उत्तेजित हो उठी.
उसकी उत्तेजना मेरे होठों पर साफ पता चलती।
देर ना करते हुए मैंने तुरंत उनके चूचों को चूसना शुरू कर दिया; कभी बायां तो कभी दायां!
एक अलग ही मजा था उनके चूचों को चूसने में!
और फिर बेड पर बैठ कर मैंने उनके सर को अपने लंड के ऊपर रखा और उसे इशारे से उसे चूसने को कहा.
पहले तो वे थोड़ा डरी कि कैसे मैं इतना बड़ा लंड चूस पाऊंगी.
लेकिन फिर अपने अनुभव का प्रयोग करते हुए उन्होंने चूसना शुरू किया.
और सच बताऊं दोस्तो, ऐसा लंड चूसा उम्होंने कि मुझे लगा जैसे मैं जन्नत में हूं.
10 मिनट के बाद वे बेड पर लेट गई और अपने पैर फैला कर कहने लगी- डाल दो अंदर, अब रहा नहीं जाता, जल्दी से डालो जान!
मैंने भी लंड पर थोड़ा सा थूक लगा कर उसे गीला किया क्योंकि वह कॉन्डम इस्तेमाल नहीं करना चाहती थी.
फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा.
पर वे उतनी ही तेज मचल रही थी- जल्दी से डालो मेरी चूत में!
फिर मैंने झटका दिया तो लंड थोड़ा साइड में हो गया.
उसने अपने हाथ से पकड़ कर लंड सेट किया और धक्का लगाने को कहा.
मैंने भी उसकी हां मिलते ही पहले अपने होंठ उसके होंठों पर रखे क्योंकि मुझे पता था कि वे चिल्लायेंगी.
फिर पूरी ताकत से मैंने उनकी चूत में अपना लंड पेल दिया.
वे बहुत जोर से चिल्लाई.
लेकिन उसके होंठ मेरे होंठो से दबे हुए थे जिससे उनकी आवाज बाहर नहीं आई।
वे मुझे नाखून गड़ाने लगी और गालियां देने लगी.
मैं भी और तेज उसे चोदता गया और कोई 5 मिनट बाद वो थोड़ा नॉर्मल हुई और कहने लगी- तुमने तो फाड़ दी पूरी चूत मेरी! बहुत बड़ा है तुम्हारा!
वे यही सब बोले जा रही थी और मैं मस्त चुदाई में व्यस्त था।
अब थोड़ी देर बाद हमने पोजिशन बदली और अब वे मेरे ऊपर आ कर बैठ गई.
उन्हें लंड पर बैठ कर चुदना बहुत पसंद था तो मैंने उन्हें इस तरह भी खूब चोदा।
और फिर थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें लेटा कर जोर जोर से चोदना शुरू किया.
चुदाई के दौरान वे गंदी गालियां भी देती जा रही थी.
बातों ही बातों में उन्होंने बोला- और किसे चोदना चाहते हो?
तो मैंने उनकी पड़ोसन रश्मि ( बदला हुआ नाम) का नाम बताया.
वे बोली- उसकी तो चूत ही फट जायेगी तुम्हारे लंड से!
रश्मि की बातें करते करते मैं उन्हें चोदता रहा और इस बीच वो दो बार अपने चूत का पानी निकल चुकी थी और उसका तीसरी बार निकलने वाला था.
अब मेरा माल भी निकलने वाला था तो मैंने पूछा उनसे- कहां निकालूं?
तो बोली- अंदर नहीं!
मैं मान गया.
फिर उन्होंने कहा- पहले मेरा पानी निकल जाए तो फिर तुम निकालना!
मैंने कहा- ठीक है.
और फिर वे दोबारा से मेरे ऊपर आकर मुझे पेलने लगी.
यह उनकी फेवरेट पोजिशन थी।
फिर मैंने अपने दिमाग को थोड़ा इधर उधर किया ताकि मेरा माल तुरंत न निकल जाए.
दोस्तो, यह ट्रिक होती है जल्दी झड़ने से रोकने की।
फिर अचानक से उन्होंने बहुत जोर से मुझे पकड़ा और चिल्लाते हुए 5-6 जोरदार झटके मारते हुए मेरे ऊपर ही लेट गई.
तो मैं समझ गया कि इन्होंने अपने चरम सुख को प्राप्त कर लिया है.
अब बारी मेरी थी।
मैंने तुरंत उनकी गांड को हाथ लगा कर हल्के से उठाया और उनकी पोजिशन में जोर जोर से पेलने लगा.
वे बोली- बस करो!
लेकिन मैं कहां रुकने वाला था, मैंने पेलना जारी रखा और कुछ मिनटों में मेरा माल बाहर आ गया जो मैंने उसके बिस्तर पर गिरा दिया.
और फिर उसे अपने ऊपर ही लिटाए हुए धीरे धीरे चूमता रहा।
ऐसा लग रहा था मानो मेरे शरीर से पूरा मैं खुद बाहर आ गया हूं.
हॉट टीचर फक़ के बाद मैं एकदम निढाल हो चुका था.
हमारी यह चुदाई का खेल लगभग 40 मिनट चला था जिसके बाद हम दोनों ही एकदम से ढीले हो चुके थे.
लेकिन फिर भी उसकी चूचियों को देख कर मेरा मन नहीं माना, मैं उन्हें पीने लगा.
वे मेरा सर सहलाने लगी.
फिर उन्होंने मुझसे वादा किया- अगली बार मैं रश्मि की चुदाई का भी जुगाड़ करने की कोशिश करूंगी जिससे हम तीनों ही चुदाई का मजा ले पाएं।
दोस्तो, यह तो थी मेरी और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर की चुदाई की कहानी.
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