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Massage Girl in Karim Nagar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Karim Nagar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Karim Nagar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Karim Nagar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Karim Nagar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Karim Nagar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Karim Nagar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Karim Nagar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Karim Nagar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Karim Nagar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Karim Nagar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Karim Nagar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi sex stories

दोस्तों Hindi sex stories, लड़की को सीड्यूस करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस सीड्यूस करने का तरीका ठीक होना चाहिये। मैंने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही सीड्यूस करके खूब चोदा। अब सुनाता हूं उसकी दास्तान। मेरा नाम है वही आपका अपना जाना पहचाना ‘होम अलोन’ सुमित।

मेरे घर में उल ज़लूल नौकरानियों के काफ़ी अरसे बाद एक बहुत ही सुन्दर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी। उसका नाम अनीषा था। 22-23 साल की उमर होगी। सांवला सा रंग था। मध्यम ऊंचायी की और सुडौल बदन, और फ़िगर उसका रहा होगा 33-26-34। शादी शुदा थी। उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला उसे खूब चोदता होगा।

बूबस यानि चूंचियां ऐसी कि हाय, बस दबा ही डालो। ब्लाऊज में चूंचियां समाती ही नहीं थी। कितनी भी साड़ी से वो ढकती, इधर उधर से ब्लाऊज से उभरते हुए उसकी चूंचियां दिख ही जाती थी। झाड़ू लगाते हुए, जब वह झुकती, तब ब्लाऊज के ऊपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा ना पाती थी।

एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उसने ब्रा तो पहना ही नहीं था। कहां से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें।

जब वो ठुमकती हुयी चलती, तो उसके चूतड़ बड़े ही मोहक तरीके से हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ। अपनी पतली सी साटन की साड़ी को जब वो सम्भालती हुयी सामने अपने बुर पर हाथ रखती तो मन करता की काश उसकी चूत को मैं छू सकता, दबा सकता।

करारी, गरम, फ़ूली हुयी और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था। काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता। और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता। और फिर मेरा तना हुए लौड़ा इसकी बुर में डाल कर चोद सकता। हाय मेरा लण्ड ! मानता ही नहीं था। बुर में लण्ड घुसने के लिये बेकरार था। लेकीन कैसे। वो तो मुझे देखती ही नहीं थी। बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुयी चली जाती।

मैंने भी उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिये बेताब है। अब चोदना तो था ही। मैंने अब सोच लिया की इसे सीड्यूस करना ही होगा। धीरे धीरे सीड्यूस करना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज हो जायें तो भाण्डा फ़ूट जायेगा। मैंने अनीषा से थोड़ी थोड़ी बातें करना शुरु किया। एक दिन सुबह उसे चाय बनने को कहा। चाय उसके नरम नरम हाथों से जब लिया तो लण्ड उछला।

चाय पीते हुए कहा- अनीषा, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो।
उसने जवाब दिया, “बहुत अच्छा बाबूजी।”

अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और उसकी बड़ाई करता। फिर मैंने एक दिन कॉलेज जाने के पहले अपनी कमीज इस्त्री करवायी।

“अनीषा तुम इस्त्री भी अच्छी ही कर लेती हो।”

“ठीक है बाबूजी,” उसने प्यारी सी अवाज़ में कहा। जब घर में कोई नहीं होता, तब मैं उसे इधर उधर की बातें करता। जैसे,

“अनीषा, तुम्हारा आदमी क्या करता है?”

“साहब, वो एक मिल मैं नौकरी करता है।”

“कितने घण्टे की ड्यूटी होती है?” मैंने पूछा।
“साहब, 10-12 घण्टे तो लग ही जाते है न। कभी कभी रात को भी ड्यूटी लग जाती है।”

“तुम्हारे बच्चे कितने है?” मैंने फिर पूछा।
“अभी कितने बच्चे हैं?”
शरमाते हुए उसने जवाब दिया, “अभी तो एक लड़की है, 2 साल की।”

“उसे क्या घर में अकेला छोड़ कर आती हो?” मैं पूछता रहा।
“नही, मेरी बूढी सास है ना। वो सम्भाल लेती है।”

“तुम कितने घरों में काम करती हो?” मैंने पूछा।
“साहब, बस आपके और एक नीचे घर में।”

मैंने फिर पूछा, “तो तुम दोनो का काम तो चल ही जाता होगा।”
“साहब, चलता तो है, लेकीन बड़ी मुश्किल से। मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बरबाद कर देता है।”

अब मैंने एक इशारा देना उचित समझा। मैंने सम्भलते हुए कहा, “ठीक है, कोई बात नही। मैं तुम्हारी मदद करूंगा।”

उसने मुझे अजीब सी नज़र से देखा, जैसे पूछ रही हो ‘क्या मतलब है आपका?’

मैंने तुरन्त कहा, “मेरा मतलब है, तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा।”

“ठीक है साहब.” कहाते हुए उसने ठण्डी सांस भरी।

इस तरह, दोस्तों मैंने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनो तक जारी रखा और अपने दोनो के बीच की झिझक को मिटाया। एक दिन मैंने शरारत से कहा,

“तुम्हारा आदमी पागल ही होगा। अरे उसे समझना चाहिये। इतनी सुन्दर पत्नी के होते हुए, उसे शराब की क्या ज़रूरत है।”

औरत बहुत तेज़ होती है दोस्तों। उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी तक अहसास नहीं होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराजगी का। मुझे भी ज़रा सा हिन्ट मिला कि अब तो ये तस्वीर पर उतर जायेगी। मौका मिले और मैं इसे दबोचूं। चुदवा तो लेगी और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा। कहते है ऊपर वाले के यहां देर है लेकीन अन्धेर नहीं।

रविवार का दिन था। पूरी फ़ेमिली एक शादी में गयी थी। मैंने पढायी का नुक्सान की वजह बताकर नहीं गया। कह कर गयी थी “अनीषा आयेगी, घर का काम ठीक से करवा लेना।”

मैंने कहा, “ठीक है.”

मेरे दिल में लड्डू फ़ूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा। वो आयी, उसने दरवाज़ा बन्द किया और काम पर लग गयी। इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बन्द कर दिया था। मैंने हमेशा की तरह चाय बनवायी और पीते हुए चाय की बड़ाई की। मन ही मन मैंने निश्चय किया की आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी। कैसे पहल करे? आखिर में ख्याल आया कि भैया सबसे बड़ा रुपैया। मैंने उसे बुलया और कहा,

“अनीषा, तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना। झिझकना मत।”

“साहब, आप मेरी तनखा काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा।”

“अरे पगली, मैं तनखा की बात नहीं कर रहा। बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये। और किसी को नहीं बताऊंगा। बशर्ते तुम भी ना बताओ तो।”

और मैं उसके जवाब का इनतज़ार करने लगा।

“मैं क्यों बताने चली। आप सच में मुझे कुछ पैसे देंगे?” उसने पूछा।

बस फिर क्या था। कुड़ी पट गयी। बस अब आगे बढना था और मलाई खानी थी।

“ज़रूर दूंगा अनीषा। इससे तुम्हे खुशी मिलेगी ना,” मैंने कहा।

“हां साहब, बहुत आराम हो जायेगा।” उसने इठलाते हुए कहा।

अब मैंने हल्के से कहा, “और मुझे भी खुशी मिलेगी। अगर तुम भी कुछ ना कहो तो और जैसा मैं कहूं वैसा करो तो? बोलो मंज़ूर है?”

ये कहते हुए मैंने उसे 500 रुपये थमा दिये।
उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा- क्या करना होगा साहब?

“अपनी आंखे बन्द करो पहले।” मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढा, “बस थोड़ी देर के लिये आंखे बन्द करो और खड़ी रहो।”
उसने अपनी आंखे बंद कर ली। मैंने फिर कहा, “जब तक मैं ना कहूं, तुम आंखे बंद ही रखना, अनीषा। वरना तुम शर्त हार जाओगी।”
“ठीक है, साहब,” शरमाते हुए आंखे बंद कर वो खड़ी थी।

मैंने देखा की उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे। दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था।

मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन लिया। अभी मैंने उसे छुआ नहीं था। उसकी आंखे बंद थी। फिर मैंने उसकी दोनो पलकों पर बारी बारी से चुम्बन लिया। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी। फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा। उसकी आंखे बन्द थी। इधर मेरा लण्ड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था।

फिर मैंने उसकी ठोड़ी (चिन) पर चुम्बन लिया।
अब उसने आंखे खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा, “साहब?”
मैंने कहा, “अनीषा, शर्त हार जाओगी। आंखे बन्द।”
उसने झट से आंखे बन्द कर ली। मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदायी करनी है।

मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होठों पर हल्का सा चुम्बन किया। अभी तक मैंने छुआ नहीं था उसे। उसने फिर आंखे खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पलको को फिर ढक दिया। अब मैं आगे बढा, उसके दोनो हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारो तरफ़ लपेट लिया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होठों पर अपने होठ रख दिये और चूमता रहा। कस कर चूमा अबकी बार।

क्या नरम होठ थे मानो शराब के प्याले। होठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया। उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था। तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूंचियां जो कि तन गयी थी, मेरे सीने पर दब रही थी। बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होठों को चूस रहा था, और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।

दांया हाथ फिर अपने आप उसकी दायीं चूंची पर चला गया। और उसे मैंने दबाया। हाय हाय क्या चूंची थी। मलायी थी बस मलायी। अब लण्ड फुंकारे मार रहा था। बांये हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लण्ड को महसूस करवाया।

शादीशुदा लड़की को चोदना आसान होता है क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है। घबराती नहीं है। ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाऊज के बटन पीछे थे, मैंने अपने दांये हाथ से उन्हें खोल दिया और ब्लाऊज को उतार फेका। चूंचियां जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गयी। एकदम सख्त लेकिन मलायी की तरह प्यारी भी। साड़ी को खोला और उतारा। बस अब साया बचा था। वो खड़ी नहीं हो पा रही थी। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी। मैं उसे हल्के हल्के से खींचते हुए अपने बेडरूम मैं ले आया और लेटा दिया। अब मैंने कहा, “अनीषा रानी अब तुम आंखे खोल सकती हो।”

“आप बहुत पाजी है साहब”, शरमाते हुए उसने आंखे खोली और फिर बन्द कर ली। मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। लण्ड तन कर उछल रहा था। मैंने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा। जैसे वो चुदवाने को तैयार ही थी। कोई अन्डरवियर नहीं पहना हुआ था। मैंने बात करने के लिये कहा,

“ये क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है। चड्डी नहीं पहनती क्या।”

“नहीं साहब, सिर्फ़ महीना में पहनती हू।” और शरमाते हुए कहा, “साहब, परदे खींच कर बन्द करो ना। बहुत रोशनी है।” मैंने झट से परदों को बन्द किया जिससे थोड़ा अन्धेरा हो गया और मैं उसके ऊपर लेट गया। होठों को कस कर चूमा, हाथों से चूंचियां दबायी और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया। घुंघराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर।

फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूंची को मुंह मैं ले लिया। अहा, क्या रस था। बस मज़ा बहुत आ रहा था। अपनी एक अंगुली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया। अंगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन मैं छुरी। चूत गरम और गीली थी। उसकी सिसकारियां मुझे और भी मस्त कर रही थी। मैंने उसकी चूत चीरते हुए कहा, “अनीषा रानी, अब बोलो क्या करूं?”

“साहब, मत तड़पाईये, बस अब कर दीजिये।” उसने सिसकारियां लेते हुए कहा।

मैंने कहा, “ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान।”

मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा, “साहब, डाल दीजिये ना।”

“क्या डालूं और कहां?” मैंने शरारत की। दोस्तो चुदायी का मज़ा सुनने में भी बहुत आता है।

“डाल दीजिये ना अपना ये लौड़ा मेरी चूत के अन्दर।” उसने कहा और मेरे होठों से अपने होठ चिपका लिये। इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होठों को चूसता।

अब मैंने कह ही दिया- हां रानी, अब मेरा ये लण्ड तेरी बुर में घुसेगा। बोलो चोद दूं?
“हां हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये।” और वो एकदम गरम हो गयी थी।

फिर क्या था, मैंने लण्ड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अन्दर। एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लण्ड के लिये ही बनी था। दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होठों से उसके गाल और होठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया। बस चोदता ही रहा। ऐसा मन कर रहा था की चोदता ही रहूं। खूब कस कस कर चोदा। बस चोदते चोदते मन ही नहीं भर रहा था। क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। वो तो खूब उछल उछल कर चुदवा रही थी।

“साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खूब चोदिये, चोदना बन्द मत कीजिये”, और उसके हाथ मेरी पीठ पर कस रहे थे, टांगे उसने मेरी चूतड़ पर घुमा कर लपेट रखी थी और चूतड़ से उचल रही थी। खूब चुदवा रही थी। और मैं चोद रहा था। मैं भी कहने से रुक ना सका,

“अनीषा रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल ना कैसी लग रही है ये चुदायी।”

“बस साहब, बहुत मजा आ रहा है, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये चोदिये चोदिये।” इस तरह हम ना जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये।

क्या चीज़ थी, वो तो एकदम चोदने के लिये ही बनी थी। अभी मन नहीं भरा था।

20 मिनट के बाद मैंने फिर अपना लण्ड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया। हमने 69 की पोजिशन ली और जब वो लण्ड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया। खास कर दूसरी बार तो इतना मज़ा आया की मैं बता नहीं सकता। क्योंकि अब की बार लण्ड बहुत देर तक चोदता रहा। लण्ड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा।

कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा, “अनीषा रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लण्ड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा।”
“साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदायी की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाऊंगी। चाहे आप पैसे ना भी दो।”

कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हल्के हल्के मसलते रहे। और मैं उसके गालों और होठों को चूमता रहा। एक हाथ उसके बुर पर चला जाता था और हल्के से उसकी चूत को दबा देता था।
“साहब अब मुझे जाना होगा।” कह कर वो उठी।

मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पर रखा- रानी एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूंगा।

दोस्तो, सच में लण्ड कड़ा हो गया था और चोदने की लिये मैं फिर से तैयार था। मैंने उसे झट से लेटाया, साड़ी उठायी, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया। अबकी बार उसे भचाभच करके खूब चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा। चोदते चोदते पता नहीं कब लण्ड झड़ गया और मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। चूमते हुए चूचियों को दबाते हुए, मैंने अपना लण्ड निकाला और अन्त में उसे विदा किया।

कैसी लगी ये नौकरानी के सथ मेरी मस्ती भरी Hindi sex stories चुदायी, सच सच बताना। बताना ज़रूर। मैं इन्तज़ार करूंगा।
आपका प्यारा दोस्त सुमित

मॅाम फक कहानी में मैंने ट्रेन में अपने पापा की दूसरी बीवी को चोदा, कई बार चोदा. फर्स्ट क्लास के केबिन में 4 लोग थे, दूसरा कपल भी चुदाई में लगा था. दोस्तो, मेरा नाम विकी है. हम लोग पुराने पैसे वाले रईस हैं. पापा स्कूल में प्रिंसिपल हैं. मेरे पापा ने दो शादियाँ की थी. दोनों पत्नियों को एक साथ ही रखा हुआ था. कुछ साल पहले मेरी जन्मदात्री इस दुनिया से चली गयी थी. अब मेरी दूसरी माँ ही है. मैं अपनी सौतेली मां के बारे में बता दूं. मां का नाम निर्मला है. वह पेशे से हाउसवाइफ हैं और घर में ही रहती हैं. यह मॅाम फक कहानी तब की है जब हम शहर से हमारे गांव भागलपुर के पास जा रहे थे. हमारी फर्स्ट एसी की टिकटें थीं और एक ही कंपार्टमेंट में थीं जहां एक रूम होता है और 4 सीटें होती हैं. मां की नीचे वाली सीट थी और मेरी उनके सामने वाली ऊपर की सीट थी. करीब दो घंटा बाद हमारे कम्पार्टमेंट में एक कपल आया. शायद उनकी नई नई शादी हुई थी. पूछने पर पता चला वह बीवी को मायके से लेने आया था. अब वे दोनों अपने घर जा रहे थे. अब दोनों की सेक्सी हरकतें चालू हो चुकी थीं. उनका एक दूसरे से सेक्सी बातें करना और बात बात में एक दूसरे को टच करना चल रहा था. मां यह सब देखकर शर्मा रही थीं. शायद उनको अपने दिनों की याद आ रही थी. मैंने मां को होंठ चबाते हुए देखा और जब किसी की नजर नहीं थी, तो मां ने साड़ी सैट करने के बहाने अपनी चूत भी खुजाई थी. उस वक्त मैं उन्हें देख रहा था. जैसे ही उन्होंने मेरी तरफ़ देखा, मैं यहां वहां देखने लगा. अब मुझे उनकी हरकतें मां के ऊपर लगे हुए शीशे में साफ दिख रही थीं. तभी मुझे उस सामने वाली औरत के पति ने देख लिया कि मैं उन दोनों को प्यार की हरकतें करता देख रहा हूँ. उस आदमी ने मुझे इशारा कर बाहर आने को कहा. मैं आ गया और वह भी पीछे आ गया. उसने कहा- भाई, मेरी नई नई शादी हुई है. तुम लोग ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा? मैंने सॉरी कहा. तो उसने कहा- कोई बात नहीं. अरे मुझसे कंट्रोल ही नहीं हो रहा है. तुम्हारा भी क्या दोष है … और सामने जो औरत बैठी है, मेरी पत्नी उसे समझा रही है. तू समझ गया तो मेरा एक काम करेगा. तू उनके साथ बैठ जा. उनको कंपनी दे दे. हम यहां लाइट बंद करके आते हैं. मेरा स्टेशन आने को अभी 5-6 घंटे हैं. उसके बाद मुझे घर पर ऐसा मौका 4-5 दिन नहीं मिलेगा. भाई मान जा. क्या पता अगर उस आंटी ने तुझे चांस दे दिया, तो कुछ भी हो सकता है. मजे ले ले! मैंने उससे कहा- ठीक है. कुछ देर बाद हम अन्दर आए तो मैं ऊपर न जाकर मां के बगल में ही बैठ गया. मां ने कहा- उनको प्राईवेसी चाहिए, तू यहीं मेरे साथ बैठ जा. फिर उन्होंने पूछा कि लाइट बंद कर दें? मैंने कहा- हां कर दो. उसके बाद अंधेरे में मैं और मां एक दूसरे से सट कर बैठे थे. अब हमें कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था पर उनकी हरकतों की आवाजें आ रही थी. उनकी चूमने की आवाज और उस लड़की का मादक भाव से सिसकना सुनकर मेरा लंड तन गया था. मेरा हाथ मां की तरफ था. मुझे लग रहा था कि मां अपने मम्मों से मेरी कोहनी पर दबाव डाल रही हैं. इतने में मां का फोन आया तो लाइट जली. हम दोनों ने देखा कि वह औरत ऊपर से नंगी हो चुकी थी और वह आदमी उसकी गोदी में बैठा, उसके मम्मे चूस रहा था. मां ने हड़बड़ा कर फोन कट किया और फोन ब्लाउज में डाल लिया. जैसे ही हाथ नीचे किया, तो मेरी जांघों पर लंड के करीब हाथ रख दिया. मैं कुछ नहीं बोला. फिर ना जाने क्यों … मां ने हाथ सरका कर लंड पर रखा और मेरे खड़े हुए लंड को महसूस करने लगीं. मां मेरे लंड को भांप रही थीं. उन्होंने लंड को पकड़ने की कोशिश की. शायद उन्हें पता चला होगा कि यह मेरा लंड है, तो उन्होंने झट से हाथ हटा लिया. अब मेरा पारा चढ़ गया था, मैंने हाथ पीछे लेकर मां की कमर पर रखा और वहां से हाथ निकाल कर मां के पेट को मसलने लगा. मां फुसफुसा कर बोलीं- बेटा यह क्या कर रहा है! मैंने पूछा- क्या? मां कुछ नहीं बोलीं. अंधेरे में मां ने वापस मेरे लौड़े पर हाथ रखा. इस बार उन्होंने उठाया नहीं. मुझे ऐसा लगा जैसे वे इशारा दे रही थीं कि चलो हम भी कुछ करते हैं. मैंने अपना एक हाथ मां के मम्मों पर रखा और मसलने लगा. मां मेरे कान में धीरे से बोलीं- बेटा, यह गलत है. मैंने मां के कान में कहा- छोड़ो ना मां … किसे पता चलेगा. प्लीज मां करने दो ना! बस एक बार, मैं इसके बाद ना मांगूंगा और ना किसी से कुछ कहूंगा. मैं ऐसे कहते कहते मां के कान और उनकी गर्दन को चूमने लगा. उनकी सांसें धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थीं. माहौल में गर्मी बढ़ रही थी. मैं मां का ब्लाउज खोलने लगा. मां ने मेरा हाथ पकड़ा मगर मैंने ब्लाउज के सारे हुक एक एक करके खोल दिए. मां का ब्लाउज खुल चुका था और मां का हाथ अभी भी मेरे हाथ पर ही था. मैं समझ गया था कि मां गर्म है और यही मौका है उनकी चूत पर लौड़ा मारने का. अब मैं मां की साड़ी को ऊपर खींचने लगा. मां ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन इस बार उन्होंने रोका नहीं. मैंने साड़ी ऊपर की और मां की जांघों पर हाथ फेरने लगा. मां की सांसें तेज़ चल रही थीं. ‘हम्मम हम्म सों सों …’ की आवाजें आ रही थीं. मैं चूत पर गया और चड्डी के ऊपर हाथ फेरने लगा. चड्डी गीली सी लगी इसलिए मैंने अन्दर हाथ डाला. शायद मां ने 2-3 दिन पहले ही चूत साफ की थी. उनके छोटे छोटे बाल आए हुए थे. उनकी चूत पर हाथ फेरने का क्या मीठा अहसास था. मुझे उनकी चूत के होंठ समझ नहीं आ रहे थे. यह मेरा पहली बार था, जब मैं किसी की चूत को टच कर रहा था. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर घुसाया और मेरी उंगली पकड़ कर चूत के छेद के अन्दर डाल दी. फिर गांड उठा कर इशारा दिया कि अन्दर बाहर करो. मैंने चूत से हाथ निकाला और खुद से दो उंगलियां डाल कर अन्दर बाहर करने लगा. तब तक सामने वाली सीट पर चुदाई चालू हो चुकी थी. पच फच धक्कों की आवाजें आ रही थीं. मैं उठा और अपनी पैंट निकाल कर नंगा हो गया. फिर मां के पास बैठ कर उनकी चड्डी निकालने के लिए हाथ लगाने लगा. पर मां पहले ही चड्डी निकाल टांगें फैला लेटी हुई थीं. मैं मां के ऊपर लेट गया. मां ने मेरा लंड पकड़ चूत पर सैट किया और धक्का देने को बोलीं- पेल दे! जैसे ही मेरा हैवी लंड चूत के अन्दर गया, मां की चीख निकल गई- उई मर गई आह आराम से कर ना! मेरे कुछ ही धक्कों में मां सामान्य हो गईं. मेरा लंड आसानी से अन्दर आ जा रहा था. अब हम भी फच फच की आवाज़ें करने लगे. मां गांड उठा उठा कर चुदवा रही थीं. अब मैंने मां के मम्मे चूसने को हाथ ऊपर किए, तो वे नंगे थे. मां ने ब्रा पहले से ही ऊपर कर ली थी. मैं बुरी तरह से मम्मे चूसने लगा और काट भी रहा था. मां कह रही थीं- आह काट मत बेटा … बस चूस कर मजा ले और ऐसे ही धक्के देता रह … बड़ा अच्छा लग रहा है. मैं धक्के देते देते हुए ही मां की चूत के अन्दर झड़ गया. मां भी झड़ गई थीं. उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और अपनी झड़ी हुई चूत को रगड़ने लगीं. हम दोनों ने अपने आपको संभाला. मैंने मां की चड्डी अपनी जेब में छुपा ली. थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे. फिर एक स्टेशन आया तो खिड़कियां खटखटाई जाने लगीं- चाय चाय. सामने की सीट वाले उस आदमी ने बाहर जाकर चाय ली. मेरी मम्मी ने भी मुझसे चाय मँगवा ली. वह आदमी मुझे देख कर हंस रहा था. उसने मुझे इशारा किया. हम दोनों पानी लेने के बहाने बाहर गए. बाहर आकर वह मुझसे बोला- भाई सही खेल गया तू तो … क्या गजब माल बजाया है. वैसे एक बात बोलूं यह मेरी बीवी नहीं है, मेरी बहन है. मैं शॉक्ड हो गया. मैंने कहा- चल झूठे … ऐसा भी कहीं होता है? “क्यों नहीं होता. आज तूने क्या किया. तुझे क्या लगा कि मुझे पता नहीं चलेगा कि जिसको तूने चोदा है, वह तेरी कौन है? मैंने बाहर लगे चार्ट पर तुम्हारे नाम पढ़े थे! तू मॅाम फक कर रहा था.” अब मेरी बोलती बंद हो गई. मैं उदास हो गया और सोचने लगा कि यह मुझसे क्या हो गया! वह बोला- भाई टैंशन क्यों लेता है, साले मजे ले इतना बड़ा कांड किया है तूने! हर फैमिली में ऐसे ही होता है, बस कोई बताता नहीं है. अब मुझे ही देख ले अपनी बहन को बीवी की तरह चोदता हूँ. कुछ रुक कर वह फिर से बोला- हमारे पास तो अभी मौका है. हम लोग तो यहां से जाने से पहले एक और शॉट मारने वाले हैं. अब तक मेरी बहन ने तेरी मां का दिमाग सैट कर दिया होगा. अब तुझे जब चाहे चूत मिलेगी, नहीं भी मिली तो अब भी मौका है. जो चाहे वह कर ले. अब हम दोनों ट्रेन में चढ़ गए. मेरी मां और उस लड़की की बातों से लग नहीं रहा था कि उनका कोई डिस्कशन हुआ था. उन दोनों में हंसी मजाक चल रहा था. फिर टीसी टिकट चैक करने आया. अब उस आदमी ने बोला- लाइट बंद कर दूँ … कोई दिक्कत तो नहीं है आपको! मैं हंस कर बोला- हां जी जरूर जरूर. मैं ऊपर वाली बर्थ पर जाने लगा तो मां बोलीं- बेटा कहां जा रहा है, यहीं मेरी बगल में सो जा! अब मैं बाहर की तरफ सो रहा था और मां अन्दर की तरफ सीट पर. जगह कम पड़ रही थी, इसलिए हम दोनों चिपक कर सो रहे थे. वे दोनों पुनः शुरू हो चुके थे. उसकी बहन की चूड़ियों की आवाज गूंज रही थी व उसकी खिलखिलाने की आवाज आ रही थी. मैं सोच रहा था कि अब क्या होगा. क्या मैं आगे फिर से कुछ करूँ. तभी मां की हरकतें शुरू हो गईं. मां अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं. मैं फिर से सेक्स नहीं करना चाहता था लेकिन इस बार मां सामने से मौका दे रही थीं. मेरा हाथ पकड़ मां ने अपने पेट पर घुमाते हुए नीचे को किया और अपनी चूत पर रख लिया. मां ने अपनी साड़ी ऊपर कर ली थी और एक हाथ से मेरी पैंट नीचे करने की कोशिश कर रही थीं. मैंने उठकर अपनी पैंट उतारी और मां ने मेरा लंड पकड़ लिया. वे लंड हिला हिला कर उसे टाइट कर रही थीं. मां मूड में आ गई थीं. अब मां मेरी तरफ मुँह कर मेरे ऊपर आना चाह रही थीं. मैंने मां को अपने ऊपर खींच लिया. मां ने अपना ब्लाउज के बटन खोल दिए; ब्रा तो पहले ही ढीली थी. ऊपर से मां नंगी हो गई थीं और अपने दूध मेरे मुँह में दे रही थीं. कुछ देर बाद मां ने मेरी भी शर्ट के बटन खोल दिए. मैंने भी जोश मैं मां की साड़ी उतार दी. मैं मां के नीचे था और वे मेरे ऊपर थीं. मां मुझे अपने दूध चुसवा रही थीं और मेरे लंड को मां अपनी चूत में लेकर खुद ऊपर नीचे करने लगी थीं. मैं नीचे से धक्के दे रहा था. ऐसे ही चुदाई होती रही. काफी देर बाद हम दोनों झड़ गए. मां मेरे ऊपर नंगी ही सोई रहीं. हमें जो कंबल मिला था, उसमें ही हम दोनों सोए रहे. सुबह अचानक उन दोनों ने हमें जगाया. उनका स्टेशन आ गया था. हमने उन्हें विदा करके कुंडी लगाई. अब हम दोनों ऐसे ही नंगे बैठे थे. मैंने पहली बार मां का नंगा गोरा बदन देखा था. मां मुझसे चिपक कर सोई थीं. हम एक दूसरे को देख रहे थे. मां ने मुझसे कहा- विकी बेटा देख, जो ट्रेन में हुआ, वह किसी को पता नहीं चलना चाहिए … और यह सब यहीं पर खत्म हुआ मान लेना. ट्रेन से उतरने के बाद गलती से भी नहीं होगा. ना ही मेरी तरफ से, ना ही तेरी तरफ से … ओके! मैंने मां से ओके कहा और उनके दूध चूसने लगा. मां मेरे बालों में हाथ डाल सहलाने लगीं मेरी एक जांघ मां की जांघों के बीच गई तो मुझे चूत की गर्मी महसूस हुई. मैं मां की चूत में लौड़ा घिसने लगा. मां कुछ नहीं बोलीं. मैंने मां से कहा- मां, अभी ट्रेन से उतरने में दो घंटा बाकी हैं. क्यों ना एक आखिरी बार और हो जाए. मां हंस दीं और बोलीं- बदमाश मुझे पता था कि तू इतने में नहीं मानेगा. अब हम दोनों ने किस करना चालू किया. मैं मां को चूमे जा रहा था और चूसे जा रहा था. यह मॅाम फक का आखिरी मौका था. मां मेरा लंड हिला रही थीं. मैंने मां से लंड चूसने को कहा. मां खड़ी हुईं और मेरा लंड चूसने लगीं. आह बड़ा मजा आ रहा था. मैंने मां को सीट पर बिठाया और उनके पैर फैला कर चूत चाटने लगा. अब मैं मां को अपनी गोद में बिठा कर चोद रहा था. फिर मैं मां को खिड़की के पास डॉगी स्टाइल में चोदने लगा. मां खिड़की की सलाखों को पकड़ कर गांड उछाल उछाल कर लंड अन्दर ले रही थीं. मस्त माहौल था. मां का ऐसा जंगली रूप रात को भी नहीं था. मैं मां को खड़ा करके और झुका कर पीछे से चोद रहा था. मैंने मां को नीचे बिठाया और उन पर अपने माल की बरसात कर दी और मां का सारा बदन अपने माल से भर दिया. हम दोनों हांफते हांफते एक दूसरे के ऊपर सो गए. अब मुझे मां को और चोदना था लेकिन मां जुबान की पक्की थी. वे मुझे ट्रेन के बाहर कभी चोदने नहीं देतीं. तो कैसे मैंने मां को पटाया और अगली चुदाई कब की. यह सब मैं अगली कहानी में लिखूँगा. इस मॅाम फक कहानी पर आप अपने विचार मुझे बताएं. rp8753660@gmail.com

हॉट कजिन स्टोरी में लॉक डाउन में मैं गुरुग्राम में एक बढ़िया फ्लैट में अकेला रह रहा था. तभी मेरी बुआ की बेटी का फोन आया. वह दिल्ली में थी और लॉकडाउन में घर जाकर कैद नहीं होना चाहती थी.

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!

मेरा नाम नीलेश शुक्ला है, मैं 27 वर्ष का हूँ और मूल रूप से इलाहबाद से हूँ.
मेरे परिवार वाले मुझे ‘नीलू’ कह कर ही पुकारते हैं अक्सर!

मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ, और सत्य अनुभव पर आधारित यह कहानी लिखने की प्रेरणा मेरे कुछ प्रिय लेखक हैं, जिनकी लेखन शैली इतनी उत्कृष्ट और आकर्षक है कि पाठक पढ़ते हुए स्वयं को उस कहानी के अंदर महसूस करता है.
अतः मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी इस सत्य कथा के माध्यम से आपसे अपनी आप बीती हॉट कजिन स्टोरी साझा करूँ.

इस लेख की भाषा में मैंने अधिकतर हिंदी और हिंगलिश के शब्दों का प्रयोग किया है, जो मेट्रो शहरों में बातचीत का आम लहज़ा बन गया है.
यह मेरी पहली रचना है, अतः कोई भी त्रुटि या कमी के लिए पहले ही पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ.

वर्तमान में पुणे में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हूँ.
लगभग 6 फ़ीट की हाइट और कसरती बदन के साथ एक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होने के कारण मेरे आज तक काफी लड़कियों के साथ सम्बन्ध रहे हैं.

किन्तु कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी अपनी एक अलग कसक, एक अलग खनक और एक अलग स्वाद होता है और वे जीवन में अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं.

अपने जीवन के एक ऐसे ही ख़ास अनुभव को मैं आपसे साझा कर रहा हूँ जिसने मुझे बहुत हद तक बदल कर रख दिया.

अपने जीवन की जिस घटना का उल्लेख मैं करने जा रहा हूँ वह 2020 में घटित हुई थी.

उस समय मैं अपनी इंजीनियरिंग की सफल पढ़ाई के पश्चात गुरुग्राम में एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपर काम कर रहा था.

काम करते हुए मुझे लगभग 2 साल हो गए थे.

2019 में अपने रहने के लिए मैंने अपने एक मित्र अखिल के साथ गुड़गाँव शहर के थोड़ा बाहरी इलाक़े में सोहना हाईवे की तरफ एक बहुमंजिला सोसाइटी में एक 2BHK फ्लैट किराये पर ले लिया था.

हम दोनों में गहरी मित्रता थी और खूब पटती थी.

हमारे बीच पार्टियों से लेकर लड़कियों की बेशर्मी से चर्चा होती थी.
अखिल भी गुड़गाँव में एक अन्य कंपनी में सेल्स लीड की भूमिका में कार्यरत था.

हमारा फ्लैट उन्नीसवीं मंजिल पर था.

सोसाइटी मुख्य शहर से दूर होने के कारण पूर्णतः फर्निश्ड लक्ज़री फ्लैट के बाद भी उसका किराया काफी कम था.
बाइपास और फारेस्ट एरिया से पास होने के कारण हमारे इलाके में खूब हरियाली और न के बराबर शोरगुल था.
ऑफिस से थोड़ा दूर था, परन्तु मानसिक शांति के परिप्रेक्ष्य से उस इलाक़े का कोई मुक़ाबला न था.

मकान मालिक कनाडा में रहता था और कोई हस्तक्षेप नहीं करता था.
हम भी समय पर किराया पंहुचा दिया करते थे.

सोमवार से शुक्रवार काम में व्यस्त रहने के बाद उस फ्लैट पर एक अलग ही सुकून मिलता था.

मास्टर बैडरूम मैंने और दूसरा बैडरूम अखिल ने ले लिया था.
इसके अतिरिक्त फ्लैट में फ्लैट में एक छोटा स्टडी रूम था जिसकी हमें तब तक ज़रूरत नहीं पड़ी थी, अतः हम स्टोररूम जैसे ही उसका उपयोग करते थे.

खाने और सफाई के लिए हमने एक नौकरानी भी लगवा ली थी.
उस समय गुड़गाँव में मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी श्रद्धा … जिसको डेट करते हुए मुझे लगभग डेढ़ साल हो गया था जबकि अखिल सिंगल था.

कुल मिलाकर हम दोनों मित्र नौकरी करते हुए मस्ती से अपना बैचलर जीवन जी रहे थे.

दिसंबर 2019 में अखिल ने बुझे बताया कि उसका बैंगलोर में एक बड़ी कंपनी में सफल इंटरव्यू हुआ है, बढ़ोतरी के साथ नयी नौकरी मिल गयी है और उसे जनवरी से ही ज्वाइन करना होगा.

20 जनवरी के आसपास अखिल अपना अधिकतर सामान लेकर बैंगलोर के लिए निकल गया.
किंतु चाबी मेरे हाथ में थमाते हुए अपनी कार यहीं छोड़ गया यह कहकर कि एक-आध महीने में बैंगलोर में अपना डेरा जमाने के पश्चात वह वापस आएगा और अपनी कार लेकर जाएगा.

चूँकि फ्लैट का किराया अधिक नहीं था इसलिए मैंने अकेले ही फ्लैट रखने का निश्चय किया यह सोचकर कि यदि कोई ऐसा मित्र मिले जिससे समन्वय बने तो वह अखिल की जगह रह सकेगा.

अखिल के जाने के बाद उस आलीशान फ्लैट में मैं अकेले रहने लगा.

फरवरी 2020 मध्य से कोरोना वायरस की खबरें (जो अबतक लोग हल्के में ले रहे थे) रफ़्तार पकड़ने लगी और फरवरी अंत तक समाचार का मुख्य हिस्सा बन गयी.

मार्च के पहले हफ्ते में जब कोरोना के फैलने की खबरें चरम पर थी, मेरे ऑफिस ने सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से अनिश्चितकालीन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की घोषणा कर दी.

मैंने अपने फ्लैट में स्टडीरूम को अपना ऑफिस बना लिया और मास्टर बैडरूम पहले से मेरे पास ही था.
बस अखिल का कमरा था जो खाली था.

7 या 8 मार्च की बात है.
दोपहर के समय मैं ऑफिस के काम में व्यस्त था.

अचानक से मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, जो नाम स्क्रीन पर चमका उसको देखते ही मैं थोड़ा सा चौंका.
“Moni Di Kanpur”

मोनी, जिसका पूरा नाम मोनिका भारद्वाज था, मेरी कानपुर वाली बुआ की लड़की थी और मुझसे पांच साल बड़ी थी.

मोनिका ने मास्टर्स तक की पढ़ाई कानपुर से ही की थी और अगस्त 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एक कॉलेज में पी०एच०डी में दाखिला ले लिया था.
साथ ही साउथ दिल्ली में ही एक गर्ल्स पीजी में कमरा ले लिया था.

मोनिका जब दिल्ली शिफ्ट हुई थी, तब उसका एक बार फ़ोन आया था और हमारी बात हुई थी.
किन्तु अब तक मिलने का अवसर नहीं मिला था; सच कहूँ तो मैंने प्रयास भी नहीं किया था, मैं नहीं चाहता था की मेरी रिश्तेदारी में किसी को भी मेरे बैचलर जीवन और मॉडर्न रहन-सहन का किसी को भी पता चले क्योंकि समस्त परिवार में मेरी छवि एक प्रतिभाशाली और परिश्रमी छात्र की थी.
अतः मैं परिवार के लोगों से और रिश्तेदारी में काफी रिज़र्व रहता था.

मोनी और मैं बचपन में छुट्टियों में काफी बार मिलते थे, कभी इलाहबाद में तो कभी कानपुर में.

हमारी अच्छी पटती थी लेकिन मोनी के हाई-स्कूल के पश्चात से हम बराबर संपर्क में नहीं थे.
मिले थे तो बस पारिवारिक शादी-ब्याह और अन्य पारिवारिक समारोह पर.

लगभग साढ़े तीन- चार साल पहले हम एक पारिवारिक फंक्शन में आखिरी बार मिले थे.

खैर, इन सब विचारों के बीच मैंने फ़ोन उठाया.
दूसरी तरफ से वही पहचानी हुई, चुलबुली आवाज़, तंज कसते हुए- नीलू!! कभी बहन को भी याद कर लिया कर!
मैंने कहा- दीदी, इतने दिनों बाद कैसे याद किया? कैसी हो आप? क्या हाल चाल है?

मोनी ने कहा- तेरी सवाल पे सवाल पूछने की आदत गयी नहीं अब तक! हाल चाल सब बढ़िया है, पी जी में हूँ फिलहाल. लेकिन कुछ दिक्कत हो गयी है. इसीलिए तुझे फ़ोन किया!
“दिक्कत? क्या हो गया ऐसा दीदी?”

“अरे तू न्यूज़ नहीं देखता क्या!? पता नहीं ये कोरोना वायरस क्या बला है. शुरुआत में तो मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कल कॉलेज से नोटिस आया कि कॉलेज बंद हो रहा, पता नहीं कब तक. सारी क्लासेज और रिसर्च का काम सब ऑनलाइन चलेगा. भाई मुझे तो सच में टेंशन हो रही. पी.जी. की लड़कियाँ खाली करने की बात कर रहीं. मेरी रूममेट दिव्या के तो घर से आज फ़ोन आया था, उसके पापा उसको लेने आ रहे 2 दिन में सारे सामान के साथ. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ … सब कुछ इतना अचानक से हो रहा!”

“सारी न्यूज़ देख रहा मैं दीदी, कोरोना की वजह से यूरोप, खासकर इटली में बुरा हाल है … वायरस तेजी से फ़ैल रहा. मेरे ऑफिस ने तो बीते हफ्ते से ही वर्क फ्रॉम होम कर दिया है सबका!”

“तो तेरा क्या प्लान है … घर निकलने का सोच रहा?”
“नहीं दीदी … मैं तो यहीं रुक रहा अपने किराये के फ्लैट में!”

मोनी ने लगभग हँसते हुए कहा- वाह भाई! गज़ब कॉन्फिडेंस है तेरा. कोई गर्लफ्रेंड है क्या जिसकी वजह से रुका हुआ है?
“क्या दीदी आप भी ना न… कुछ नहीं है ऐसा; फ्लैटमेट था, वह भी 2 महीने पहले चला गया, अकेला ही रहता हूँ. लेकिन 2 दोस्त दूसरी सोसाइटी में 15-20 मिनट दूर रहते हैं, तो मिलजुल कर देख लेंगे जो भी होगा!”

“तेरा तो सही हिसाब है भाई. ऐसे ही नहीं तेरी तारीफों के पुल बांधते हैं सब मेरी फैमिली में. पढ़ाकू तो तू था ही, तेज भी हो गया इतना यहाँ आकर. गुरुग्राम रह रहा ना तू?”
“हाँ दीदी गुरुग्राम में ही, लेकिन मेन गुरुग्राम से थोड़ा बाहर है. ये सब छोड़ो, आप बताओ कि बुआ फूफ़ा क्या बोल रहे?”

“यार, वे तो घर आने को बोल रहे हैं. चौदह तारीख की टिकट भी करवा दी है. लेकिन ये कोरोना इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा और इतनी अफरा तफरी भी है. पता नहीं सेफ होगा या नहीं इस तरह अचानक से जाना!”
“अब दीदी, बुआ फूफा ने बोल ही दिया है तो ऑप्शन भी क्या है और. मास्क वगैरह लगा कर जाना, आई थिंक सेफ रहेगा सब. ज़्यादा टेंशन मत लो!”

“हम्म … सही कह रहा यार … चल मैं पैकिंग वगैरह देखती हूँ.” मोनी ने बुझे मन से कहा.
“ओ.के. दीदी, अपना ध्यान रखना आप, और कुछ मदद चाहिए हो तो बेझिझक कॉल करना!”

“हाँ नीलू, तू भी ध्यान रख और बाहर ज़्यादा मत निकलना. नयी बीमारी का कुछ पता नहीं. चल मैं रखती हूँ … बाय!” कहते हुए मोनी ने फ़ोन रख दिया.

लगभग एक हफ्ता बीता.

13 तारीख की बात है, रात में साढ़े 11 बजे मेरे पास मोनिका का फ़ोन आया.

“नीलू! सो तो नहीं गया था?”
“नहीं दीदी, क्या हुआ? सब ठीक तो है न?”
“अरे यार … अभी मैसेज आया मेरे पास irctc का. ट्रेन कैंसिल हो गयी है. मैंने पता किया तो बहुतेरी ट्रेनें कैंसिल हो रहीं!”

“ओह इतने अचानक से? अब क्या दीदी?”
“समझ नहीं आ रहा यार, दिव्या भी चली गयी है. पीजी में 3 -4 लड़कियाँ बची हैं, लगता है वो भी चली ही जाएँगी कल परसों में!”

“दीदी बस का टिकट देखा? उसमे शायद मिल जाये आपको …”
“भाई ए.सी. बस में एक भी टिकट नहीं है और नार्मल बस से मैं सफ़र नहीं कर सकती, मेरी तबियत ख़राब हो जाती है. ऊपर से कितने सारे लोग भी होंगे बस में. इन्फेक्शन का चांस भी ज़्यादा है.”

“दीदी अब तो एक ही विकल्प बचा है. इंटरसिटी कैब या टैक्सी कर लो. थोड़ा महंगा पड़ेगा लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं!”
“अबे, तू भाई है या कसाई है … . मुझे घर भेजकर ही दम लेगा??” मोनी ने लगभग चिल्लाते हुए कहा.

“मतलब … समझा नहीं दीदी?”
“समझा नहीं मतलब क्या? तुझे नहीं पता घर जाकर मेरी ज़िन्दगी जेल जैसी हो जाएगी … सारी मौज मस्ती बंद … पहले से ही दुखी हूँ इतनी!”

“ओह … तो ये बात है … क्या सोच रही हो आप फिर? दिल्ली में ही रुकोगी?”
“यार सारी सहेलियों और दोस्तों से बात करके देख लिया … इस वक्त किसी के पास रुकने का जुगाड़ नहीं … तेरे पास कुछ व्यवस्था हो सकती है कुछ दिनों के लिए?” मोनी ने आशा भरी आवाज़ में पूछा.

सच तो यह था कि मैं भी अकेला ही था. मेरी गर्लफ्रेंड श्रद्धा जो अक्सर आती रहती थी, वह होली के समय घर गयी थी और उसके परिवार ने उसको माहौल ठीक होने तक वहीं रोक लिया था. केवल मेरे दो मित्र देवेश और सुमित थे, जो पास की एक सोसाइटी में रहते थे.
मैंने भी सोचा, एक-आध हफ्ते की तो बात है, मैनेज हो जाएगा सब.

“दीदी मैं तो गुरुग्राम रहता हूँ … साउथ दिल्ली से दूर पड़ेगा, लगभग सवा घण्टा. मुझे क्या समस्या होगी, फ़्लैट में एक कमरा भी खाली है, आप आ जाओ अगर आपको ज्यादा दूर न पड़े तो!”

मेरे इतना कहते ही मोनी की आवाज़ में राहत और प्रसन्नता का सैलाब आ गया- भाई … पक्का आ जाऊं ना? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न तुझे?
“अरे कम ऑन दीदी … इतनी फॉर्मेलिटी?”

“हाय मेरे प्यारे नीलू!! तूने बचा लिया मुझे … बस यही उम्मीद थी मुझे तुझसे … सुन, एक काम करती हूँ. पी.जी. खाली ही कर देती हूँ, तेरे साथ 2 -3 हफ्ते रुक लूंगी, और थोड़ा माहौल ठीक होते ही नया पी.जी. ढूंढ लूंगी. तू एक काम कर, मुझे लोकेशन भेज दे, मैं 3-4 दिन में सारा सामान पैक करके आती हूँ.”

“ठीक है दीदी … पहुँचने में कोई दिक्कत हो तो बताना … मैं लोकेशन व्हाटसऍप करता हूँ!” कहकर मैंने फ़ोन काट दिया.

अगले 3 दिन मैं काम में काफ़ी व्यस्त रहा तो मोनी से बात करने की तरफ ध्यान नहीं गया.

19 तारीख को मेरे पास सुबह लगभग 9:30 बजे मोनी का फ़ोन आया- नीलू, मैं निकल रही हूँ बस 10 मिनट में. कल ही आ जाती लेकिन सिक्योरिटी मनी फंसा हुआ था, वही लेने रुक गयी. गूगल मैप पर दिखा रहा एक-सवा घंटे में पहुंच जाऊंगी. तू फ्लैट पर ही रहेगा ना?
“हाँ दीदी, आप आराम से आ जाओ, मैं फ्लैट पर ही रहूँगा.”

“तेरी सोसाइटी का नाम क्या बताया था तूने?”
“दीदी सोसाइटी का नाम रीगल कासा है. और टावर का नाम ऐमीरेट्स है. आप गार्ड से बात करा देना मेन गेट पर!”

मोनी ने शरारत भरे फ़िल्मी लहज़े में पूछा- स्वागत नहीं करोगे हमारा?”
“हाहा … अरे बिलकुल दीदी … आप पहुँचो बस. फ्लैट इतना आलीशान है. उसको देखकर ही स्वागत हो जाएगा!”

मोनी ने उत्साह से भरपूर आवाज़ में कहा- हाय सच में क्या! मेरा छोटा भाई कितना बड़ा आदमी बन गया है … अब तो इंतज़ार नहीं हो रहा नीलू … चल मेरी कैब आ गयी, पहुंच कर कॉल करती हूँ”
कहते हुए फ़ोन काट दिया.

लगभग 11 बजे मेरे इण्टरकॉम पर गार्ड का फ़ोन आया- गुड मॉर्निंग सर … मैडम आयी हैं टैक्सी से, आपसे मिलने. सामान भी है साथ में!”
मैंने गार्ड को आदेश दिया- फ़ौरन उनको मेरे टावर पर भेज दो. वो मेरी कज़िन सिस्टर हैं.”
“जी सर, बिल्कुल!”

मैंने लिफ्ट ली और जब तक मैं नीचे पंहुचा, मोनी की कैब मेरे टावर के नीचे पहुंच गयी थी.
पीछे डिक्की से ड्राइवर कुछ सामान निकाल रहा था.
और एक सूटकेस मोनी पीछे वाली सीट से निकल रही थी.

क्योंकि हम सोशल मीडिया पर जुड़े हुए नहीं थे, मोनी को इतनी दिनों बाद देख रहा था मैं, 2 मिनट तक तो मेरी आँखें टिक गयी उस पर!
और टिकें भी क्यों न …
5′ 6″ से 5′ 7″ की हाइट, हल्का सांवला सुनहरा रंग, बॉटल ग्रीन रंग का चुस्त टॉप, जिसमें से मोनी के 36C के स्तन फाड़ के बाहर निकलने को हो रहे थे.
नीचे सफ़ेद रंग के हॉट-पैंट शॉर्ट्स जो सिर्फ चालीस प्रतिशत के लगभग चिकनी सुनहरी जांघों को ढक रहे थे.

मोनी की चिकनी टांगों पर एक भी बाल का नामोनिशान न था.

ऊपर से तीखे नैन-नक्श, बड़ी बड़ी आँखें, मेकअप, सनग्लासेस, जूते, मॉडर्न बॉडी लैंग्वेज.
अट्ठाइस-उनतीस साल की उस उम्र में मोनिका का वो यौवन से परिपूर्ण बदन डेवलपमेंट के चरम पर था.

10 सेकंड के लिए तो मैं उसे पहचान ही नहीं पाया.
मोनी डी०यू० की एक आइटम, पटाका माल लग रही थी.
देख कर साफ़ पता लग रहा था कि बहना को दिल्ली की हवा बहुत ज़बरदस्त लगी है. सच कहूं तो दो पल के लिए मेरा ईमान डगमगा गया.

प्रेषक : राहुल शर्मा Sex Stories

मेरा नाम राहुल शर्मा है मैं २५ साल का हूँ। मैं आज Sex Stories अपने सभी दोस्तों को अपने सेक्स और अपने कुँवारापन खोने के पहले अनुभव के बारे में बताना चाहता हूँ। तब हम लोग इलाहबाद में रहते थे और गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा के घर लखनऊ जाते थे। वहां हमारे दादा दादी के साथ हमारे ताऊ और ताई भी रहते थे। उनका बेटा भी वहीं रहता था और कॉलेज में पढ़ता था। वो लगभग २२ साल का था। उसका नाम था गोरव और हम उन्हें राजू भैया कहते थे।

उस साल हम जब छुट्टियों में वहां गए तो मैंने एक नया और अत्यधिक रोमांचक अनुभव किया। एक दिन रात को मैं उनके ही साथ सो रहा था अचानक मेरी नीद खुली और कुछ अजीब सा लगा मैंने देखा भैया मेरे बगल में नंगे लेटे हैं और वो मेरी निक्कर में हाथ डालकर मेरी लुल्ली को सहला रहे हैं।

मुझे शर्म आ गई मैंने कहा- भैया ये क्या कर रहे हो?

आखिर वो मेरा बड़ा भाई था। वो बोला- कुछ नहीं ! अब तुम बड़े हो गए हो और मैं यह देख रहा था कि तुम कितने बड़े हुए हो?

मैंने कहा- ऐसे कैसे पता चलता है?

उन्होंने कहा- पहले अपनी चड्ढी उतारो फ़िर समझाता हूँ !

मैंने कहा- मुझे शर्म आती है।

वो बोला- अगर मुझसे शरमाओगे तो लड़की के साथ कैसे सेक्स करोगे?

सेक्स का तो नाम ऐसा है कि कोई भी अपने आप उसकी तरफ़ बह जाएगा मैं भी तैयार हो गया पर शरमा रहा था। उन्होंने अपने लण्ड को हिला कर खड़ा किया तो मेरी तो साँस ही अटक गई, वो मेरे हाथ की कलाई के बराबर मोटा था और करीब ७ इंच लंबा था। मुझे उनका लण्ड देखने में बड़ा मजा आया। वो बोले- तुम्हारा भी खड़ा होता है या ऐसे ही लटका रहता है?

उनके लण्ड को देख कर मेरा भी लण्ड टाइट होने लगा और धीरे धीरे खड़ा हो गया। उनके लण्ड के सामने मेरे छोटे से लण्ड की क्या औकात जो उनके पैर के अंगूठे से थोड़ा पतला और लम्बाई में ४.5 इंच का था।

भैया बोले- अब तुम भी बड़े होने लगे हो !

मैंने कहा- अच्छा ! कैसे?

बोले- कभी मुठ मारी है?

मैंने कहा- वो क्या होता है?

बोले- इसको यानि लण्ड को हिलाने से सफ़ेद सफ़ेद जो निकलता है उसे माल कहते हैं।

मुठ मारने में तो मुझे भी बहुत मज़ा आता था।

भैया वैसे भी इतने सुंदर थे कि कोई भी लड़की उनके आगे अपनी टांगे फैला देती ! और वो थे भी बहुत बड़े चुद्दकड़।

बोले- कभी किसी लड़की की चूत देखी है?

मैंने कहा- नहीं !

वो बोले- रुको ! मैं दिखाता हूँ !

उन्होंने अपनी अलमारी से किताबों की एक गड्डी निकाली जो सारी नंगी तस्वीरों, चुचियों, गाण्डों और चुदवाती हुई लड़कियों और गाण्ड मराते हुए लड़कों की तस्वीरों से भरी पड़ी थी। उन्हें देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया क्योंकि अपने घर में ये सब मुझे कहाँ से मिलता और मुँह से ज्यादा पानी मेरे लण्ड से निकलने लगा था।

वो बोले- क्या हुआ? झड़ गया?

मैंने कहा- नहीं ! गीला हुआ है। क्यूंकि माल नहीं टपका था।

भैया बोले- लड़की चोदने का मज़ा लोगे?

मैंने कहा- हाँ ! पर लड़की कहाँ है?

वो बोले- मेरी गाण्ड मारो ! वही लड़की चोदने जैसा मज़ा और गर्माहट मिलती है।

बस फ़िर क्या था, वो पेट के बल बेड पर लेट गए और बोले- डालो अपना लण्ड मेरी गाण्ड में घुसेड़ दो।

मेरे लिए अजीब सा था पर चोदने का मज़ा लेने के लिए मैंने लण्ड बढ़ा दिया। पहले तो हल्का सा गया और मुझे दर्द सा होने लगा तो बोले- तुम्हें क्यों दर्द हो रहा है? गाण्ड तो मैं मरवा रहा हूँ !फ़िर उन्होंने थोड़ा सा तेल अपनी गाण्ड में लगाया और फ़िर तो मेरा लण्ड ऐसा दौड़ा कि माइकल शूमाकर की फरारी भी हार जाती पर मैं तीन मिनट में ही झड़ गया।

भैया बोले- ऐसे करोगे तो मज़ा नही आयेगा। पहले थोड़ी देर हलके हलके करो जब मज़ा आने लगे तब स्पीड बढ़ाओ।

मुझे सबक मिल चुका था। फ़िर मैं करीब घंटे भर तक उनकी नंगी नंगी फोटो वाली किताबें और चुदाई वाली कहानियाँ पढ़ता रहा। अब मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा हो गया था और मैंने फ़िर से भैया की गाण्ड मारी। इस बार मैंने १० मिनट तक अपने लण्ड को झड़ने नहीं दिया मैंने और भैया ने बराबर मज़ा लिया।

फ़िर मैंने उनसे कहा कि तुम भी मेरी गाण्ड मारो ! मैं भी गाण्ड मरवाने का मज़ा लेना चाहता हूँ।

उन्होंने बहुत मना किया, बोले- तेरी गाण्ड अभी बहुत छोटी है, फट जायेगी !

जब मैंने बहुत जिद की तो वो मान गए और जैसे ही अपने लंबा चौड़ा खली जैसा लण्ड मेरी गाण्ड में डालने की कोशिश की तो मेरी आँखों से आंसू निकल गए।

वो बोले- अब मैं नहीं मारूँगा !

मैंने कहा- भैया धीरे धीरे करना और पहले मेरी गाण्ड में तेल लगा दो।

उन्होंने ढेर सारा तेल मेरी गाण्ड में उड़ेल दिया फ़िर लण्ड को सहलाते सहलाते मेरी गाण्ड में डाला। कसम से बहुत दर्द हुआ। फ़िर हल्के हल्के अन्दर बाहर करते हुए उन्होंने पूरा मज़ा लिया और मुझे भी बहुत मज़ा आया।

फ़िर तो हम लोग हर रात यही लण्ड गाण्ड का खेल खेलते रहे। मैं अक्सर उनके साथ नहा भी लेता, हम लोग बाथरूम में देर तक नहाते, एक दूसरे के लण्ड से खेलते और फ़व्वारे के नीचे लेट कर गाण्ड गाण्ड खेलते थे। किसी को हम पे शक भी नहीं होता था कि हम इतनी देर तक बाथरूम में क्या करते हैं क्यूंकि घर वालों के लिए तो हम भाई थे पर आपस में हम बहुत अच्छे दोस्त हो गए थे।

मैंने पूरी छुट्टियाँ ऐसे ही मज़े लेकर बिताईं। जब भी घर वाले कहीं जाते तो हम दोनों घर पर ही रुकते और गाण्ड गाण्ड खेलते। मैंने तभी पहली बार अपने झांट के बाल भी उनके साथ शेव किए।

ये छुट्टियाँ ख़त्म होने के बाद हम इलाहबाद वापस आ गए। मुझे उनकी बहुत दिनों तक याद आई। फ़िर जब भी कोई छुट्टी होती तो मैं लखनऊ चला जाता और उनके साथ मजे लेता था इस गाण्ड गाण्ड के खेल के। मेरी कई गर्ल फ्रेंड भी बनी उन्हें भी बहुत चोदा, वो कहानियाँ फ़िर कभी सुनाऊंगा।

अब मेरी शादी हो चुकी है और उनकी भी पर आज भी जब कभी हमे मौका मिलता है हम गाण्ड गाण्ड खेलते हैं। आप लोग भी इस खेल का मज़ा लीजिये क्यूंकि इसमे न तो लड़कियों के नखरे उठाने पड़ते हैं न ही लड़की के गर्भ वाला खतरा होता है और लण्ड और चूत दोनों की प्यास बुझ जाती है। Sex Stories

Indian Sex Stories

म लोग शहर की घनी आबादी के एक Indian Sex Stories मध्यम वर्गीय मुहल्ले में रहते थे। वहां लगभग सभी मकान दो मंजिल के और पुराने ढंग के थे और सभी घरों की छतें आपस में मिली हुई थी। मेरे घर में हम मिया बीवी के साथ मेरी बूढ़ी सास भी रहती थी। य्ह कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के राज की है जो पिछ्ले महीने से ६-७ हमारे साथ वाले घर में किराये पर रहता था। राज अभी तक कुंवारा ही था और मेरा दिल उस पर आ गया था।

मेरे पति की ड्यूटी शिफ़्ट में चलती थी। जब रात की शिफ़्ट होती थी तो मैं छत पर अकेली ही सोती थी क्योंकि गरमी के दिन थे। राज़ और मैं दोनो अक्सर रात को बातें करते रहते थे। रात को छत पर ही सोते थे।

आज भी हम दोनो रात को खाना खा कर रोज की तरह छत पर बातें कर रहे थे। रोज की तरह उसने अपना सफ़ेद पजामा पहन रखा था। वो रात को सोते समय अंडरवियर नहीं पहनता था, ये उसके पजामे में से साफ़ ही पता चल जाता था। उसके झूलता हुए लण्ड का उभार बाहर से ही पता चल जाता था। मैंने भी अब रात को पेंटी और ब्रा पहनना बंद कर दिया था।

मेर मन राज से चुदवाने का बहुत करता था… क्युंकि शायद वो ही एक जवान लड़का था जो मुझसे बात करता था और मुझे लगता था कि उसे मैं पटा ही लूंगी। वो भी शायद इसी चक्कर में था कि उसे चुदाई का मजा मिले। इसलिये हम दोनों आजकल एक दूसरे में विशेष रुचि लेने लगे थे। वो जब भी मेरे से बात करता था तो उसकी उत्तेजना उसके खड़े हुए लण्ड से जाहिर हो जाती थी, जो उसके पजामे में से साफ़ दिखता था। उसने उसे छिपाने की कोशिश भी कभी नहीं की। उसे देख कर मेरे बदन में भी सिरहन सी दौड़ जाती थी।

मैं जब उसके लण्ड को देखती थी तो वो भी मेरी नजरें भांप लेता था। हम दोनो ही फिर एक दूसरे को देख कर शरमा जाते थे। उसकी नजरें भी जैसे मेरे कपड़ों को भेद कर अन्दर तक का मुआयना करती थी। मौका मिलने पर मैं भी अपने बोबे को हिला कर…या नीचे झुक कर दिखा देती थी या उसके शरीर से अपने अंगों को छुला देती थी। हम दोनो के मन में आग थी। पर पहल कौन करे, कैसे हो…?

मेरी छत पर अंधेरा अधिक रहता था इसलिये वो मेरी छत पर आ जाता था, और बहाने से अंधेरे का फ़ायदा हम दोनों उठाते थे। आज भी वो मेरी छत पर आ गया था। मैं छत पर नीचे बिस्तर लगा रही थी। वो भी मेरी सहयता कर रहा था। चूंकी मैंने पेंटी और ब्रा नहीं पहन रखी थी इसलिये मेरे ब्लाऊज में से मेरे स्तन, झुकने से उसे साफ़ दिख रहे थे… जिसे मैं और बिस्तर लगाने के बहाने झुक झुक कर दिखा रही थी। उसका लण्ड भी खड़ा होता हुआ उसके पज़ामे के उभार से पता चल गया था। मुझे लगता था कि बस मैं उसके मस्त लण्ड को पकड़ कर मसल डालू।

“भाभी… भैया की आज भी नाईट ड्यूटी है क्या…?”
“हां… अभी तो कुछ दिन और रहेगी… क्यों क्या बात है…?”
“और मां जी क्या सो गई हैं…?”
“बड़ी पूछताछ कर रहे हो… कुछ बताओ तो…!” मैं हंस कर बोली।

” नहीं बस… ऐसे ही पूछ लिया…” ये रोज़ की तरह मुझसे पूछता था, शायद ये पता लगाता होगा कि कहीं अचानक से मेरे पति ना आ जाएं।

हम दोनो अब छत की बीच की मुंडेर पर बैठ गये… मुझे पता था अब वो मेरे हाथ छूने की कोशिश करेगा। रोज़ की तरह हाथ हिला हिला कर बात करते हुए वो मुझे छूने लगा। मैं भी मौका पा कर उसे छूती थी।, पर मेरा वार उसके लण्ड पर सीधा होता था। वो उत्तेजना से सिमट जाता था। हम लोग कुछ देर तक तो बाते करते रहे फिर उठ कर टहलने लगे… ठंडी हवा मेरे पेटीकोट में घुस कर मेरे चूत को और गाण्ड को सहला रही थी… मुझे धीमी उत्तेजना सी लग रही थी।

जैसी आशा थी वैसा ही हुआ। राज ने आज फिर मुझे कुछ कहने की कोशिश की, मैंने सोच लिया था कि आज यदि उसने थोड़ी भी शुरूआत की तो उसे अपने चक्कर में फंसा लूंगी।

उसने धीरे से झिझकते हुए कहा -“भाभी… मैं एक बात कहूं… बुरा तो नहीं मनोगी ” मुझे सिरहन सी दौड़ गयी। उसके कहने के अन्दाज से मैं जान गई थी कि वो क्या कहेगा।

“कहो ना… तुम्हारी किसी बात का बुरा माना है मैंने…” उसे बढ़ावा तो देना ही था, वर्ना आज भी बात अटक जायेगी।

“नहीं… वो बात ही कुछ ऐसी है…” मेरे दिल दिल की धड़कन बढ़ गई। मैं अधीर हो उठी… मेरा दिल उछल कर गले में आ रहा था…

“राम कसम… बोल दो ना…” मैंने उसके चेहरे की तरफ़ बड़ी आशा से देखा।
“भाभी आप मुझे अच्छी लगती हैं…” आखिर उसने बोल ही दिया…और मेरा फ़ंदा कस गया।
“राज… मेरे अच्छे राज … फिर से कहो… हां… हां … कहो… ना…” मैंने उसे और बढ़ावा दिया।

उसने कांपते हाथों से मेरे हाथ पकड़ लिये। उसकी कंपकंपी मैं महसूस कर रही थी। मैं भी एकबारगी सिहर उठी। उसकी ओर हसरत भरी निगहों से देखने लगी।

“भाभी… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…!” लड़खड़ाती जुबान से उसने कहा।
“चल हट… ये भी कोई बात है… प्यार तो मैं भी करती हूँ…!” मैंने हंस कर गम्भीरता तोड़ते हुए कहा.
“नहीं भाभी… भाभी वाला प्यार नहीं… ” उसके हाथ मेरे भारी बोबे तक पहुंचने लगे थे।

मैंने उसे बढ़ावा देने के लिये अपने बोबे और उभार लिये। पर बदन की कंपकंपी बढ़ रही थी। उसे भी शायद लगा कि मैंने हरी झंडी दिखा दी है। उसके हाथ जैसे ही मेरे उरोज पर पहुंचे…मेरा पूरा शरीर थर्रा गया। मैं सिमट गयी।

“राऽऽज्… नहींऽऽऽ… हाय रे…” मैंने उसके हाथों को अपनी छाती पर ही पकड़ लिया, पर हटाया नहीं। उसके शरीर की कंपकपी भी बढ़ गयी। उसने मेरे चेहरे को देखा और अपने होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ाने लगा। मुझे लगा मेरा सपना अब पूरा होने वाला है। मेरी आंखे बंद होने लगी। मेरा हाथ अचानक ही उसके लण्ड से टकरा गया। उसका तनाव का अहसास पाते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये। मेरे चूत की कुलबुलाहट बढ़ने लगी। उसके हाथ अब मेरे सीने पर रेंगने लगे। मेरी सांसे बढ़ चली। वो भी उत्तेजना में गहरी सांसे भर रहा था। मैं अतिउत्तेजना के कारण अपने आप को उससे दूर करने लगी। मुझे पसीना छूटने लगा। मैं एक कदम पीछे हट गयी।

“भाभीऽऽऽ … मत जाओ प्लीज्…” वह आगे बढ़ कर मेरी पीठ से चिपक गया। उसका एक हाथ मेरे पेट पर आ गया। मेरा नीचे का हिस्सा कांप गया। मेरा पेट कंपकंपी के मारे थरथराने लगा। मेरी सांसे रुक रुक कर निकल रही थी। उसका हाथ अब मेरी चूत की तरफ़ बढ़ चला। मेरे पेटीकोट के अन्दर हाथ सरकता हुआ मेरी चूत के बालों पर आगया। अब उसने तुरन्त ही मेरी चूत को अपने हाथों से ढांप लिया। मैं दोहरी होती चली गयी। सामने की ओर झुकती चली गयी। उसका लण्ड मेरी चूतड़ों कि दरार को रगड़ता हुआ गाण्ड के छेद तक घुस गया। मैं अब हर तरफ़ से उसके कब्जे में थी। वह मेरी चूत को दबा रहा था। मेरी चूत गीली होने लगी थी।

“राज्… हाऽऽऽय रे… मेरे राम जी… मैं मर गई!” मैंने उसका हाथ नहीं हटाया और वो ज्यादा उत्तेजित हो गया।

“भाभी… आप कितनी प्यारी है…” मैंने जब कोई विरोध नहीं किया तो वह खुल गया। उसने मुझे अब जकड़ लिया। मेरे स्तनो को अपने कब्जे में लेकर होले होले सहलाने लगा। उसके प्यार भरे आलिंगन ने और मधुर बातों ने मुझे उत्तेजना से भर दिया। जिस प्यार भरे तरीके से वो ये सब कर रहा था… मैंने अपने आपको उसके हवाले कर दिया। मेरा शरीर वासना के मारे झनझना रहा था। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर दस्तक दे रहा था।

“तुम मुझे प्यार करते हो…!” मैंने वासना में उसे प्यार का इज़हार करने को कहा।

“हां भाभी… बहुत प्यार करता हूं…तब से जब मैं आपसे पहली बार मिला था!”

“देखो राज…ये बात किसी को नहीं बताना… मेरी इज्जत तुम्हारे हाथ में है… मैं बदनाम हो जाऊंगी… मैं मर जाऊंगी…!” मैंने उस पर अपना जाल फ़ेंका।

“भाभी… मैं मर जाऊंगा…पर ये भेद किसी को नहीं कहूंगा…” मेरी विनती से उसका दिल पिघल उठा।

“तब देरी क्यूं… मेरा पेटीकोट उतार दो ना… अपने पजामे की रुकावट हटा दो…” मुझसे अब बिना चुदे रहा नहीं जा रहा था। उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल डाला और पेटीकोट अपने आप नीचे फ़िसल गया। उसका लण्ड भी अब स्वतन्त्र हो गया था।

“भाभी… आज्ञा हो तो पीछे से शुरु करू… तुम्हारी प्यारे प्यारे गोल गोल चूतड़ मुझे बहुत पसन्द है…” उसने अपनी पसन्द बिना किसी हिचक के बता दी।

“राऽऽऽज… अब मैं तुम्हारी हू… प्लीज़ अब कहीं से भी शुरू करो… पर जल्दी करो… बस घुसा दो…” मैंने राज से अपनी दिल की हालत बयां कर दी।

“भाभी… जरा मेरे लण्ड को एक बार प्यार कर लो और थूक लगा दो…” मैंने प्यार से उसे देखा और नीचे झुक कर उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया… हाय राम इतना मस्त लण्ड!… वो तो मस्ती में फ़नफ़ना रहा था। मैंने उसका सुपाड़ा कस के चूस लिया। और फिर ढेर सारा थूक उस पर लगा दिया। अब मैं खड़ी हो गयी… राज के होंठो के चूमा… और अपने चूतड़ उघाड़ कर पीछे निकाल दी। मेरे गोरे चूतड़ हल्की रोशनी में भी चमक उठे। मैंने अपनी चूतड़ की प्यारी फ़ांके अपने हाथों से चीर दी और गाण्ड का छेद खोल कर दे दिया। मेरे थूक से भरा हुआ उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर आ टिका। मैंने हल्का सा गाण्ड का धक्का उसके लण्ड पर मारा। उसकी सुपारी मेरे गाण्ड के छेद में फ़ंस गयी। उसके लण्ड के अंदर घुसते ही मुझे उसकी मोटाई का अनुमान हो गया।

“राज… प्लीज… चलो न अब… चलो…करो ना!” पर लगा उसे कुछ तकलीफ़ हुई। मैंने पीछे जोर लगाया तो उसने भी लण्ड को दबा कर अंदर घुसेड़ दिया। पर उसके मुख से चीख निकल गयी।

“भाभी… लगती है… जलता है…” मुझे तुरन्त मालूम हो गया कि उसने मुझे ही पहली बार चोदा है। उसके लण्ड की स्किन फ़ट चुकी थी। मेरा मन खुशी से भर उठा। मुझे एक फ़्रेश माल मिला था। एक बिलकुल नया लण्ड मुझे नसीब हुआ था। मेरे पर एक नशा सा चढ़ गया।

“राजा… बाहर निकाल कर धक्का मारो ना… देखो तो मेरा मन कैसा हो रहा है। ऐसी जलन तो बस दो मिनट की होती है…” मैंने उसे बढ़ावा दिया।

उसने मेरा कहा मान कर अपना लण्ड थोड़ा सा निकाल कर धीरे से वापस घुसेड़ा। फिर धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ाने लगा। मैं उसका लण्ड पा कर मस्त हो उठी थी। मैंने अपने दोनो हाथ छत की मुंडेर पर रख लिये थे और घोड़ी बनी हुई थी। मैंने अपने दोनो पांव पूरे खोल रखे थे। चूतड़ बाहर उभार रखे थे। राज ने अब मेरे बोबे अपने हाथों में भर लिये और मसलने लगा। मैं वासना के मारे तड़प उठी। उसे लण्ड पर चोट लग रही थी पर उसे मजा आ रहा था। उसके धक्के बढ़ते ही जा रहे थे। उत्तेजना के मारे मेरी चूत पानी छोड़ रही थी। अचानक उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया… और मेरी तरफ़ देखा। मैं उसका इशारा समझ गयी। मैं बिस्तर पर आ कर लेट गयी।

“भाभी… आप बहुत प्यारी है…सच बहुत मजा आ रहा है… जिन्दगी में पहली बार इतना मजा आया है…” मुझे पता था कि जब पहली बार किसी चूत में लण्ड जायेगा तो …मजा तो नया होगा… इसलिये आत्मा तक तो आनन्द मिलेगा। और फिर मेरी तो जैसे सुहाग रात हो गयी… कई दिनों बाद चुदी थी। फिर कितने ही दिनों से मन में चुदने कि इच्छा थी। किस्मत थी कि मुझे नया लण्ड मिला।

राज मेरे पास बिस्तर पर आ गया। मैंने अपनी दोनो टांगे ऊपर उठा दी और चूत खोल दी। राज ने आराम से बैठ कर अपना लण्ड हाथ से घिसा और हिला कर चूत के पास रख दिया। मैं मुस्कुरा उठी… उसे ये नहीं पता था कि लण्ड कहां रखना है… मैंने उसका लण्ड पकड़ कर चूत पर रख दिया।

“राजा… नये हो ना… तुम्हे तो खूब मजा दूंगी मै…आ जाओ… मुझ पर छा जाओ…” मैंने चुदाई का न्योता दिया।

उसने हल्का सा जोर लगाया और लण्ड बिना किसी रुकावट के मेरी गीली चूत के अन्दर सरकता हुआ घुसने लगा। मुझे चूत में तीखी मीठी सी गुदगुदी उठने लगी और लण्ड अन्दर सरकता रहा।

“आहऽऽऽ … राज… मेरे प्यार… हाय रे… और लम्बा सा घुसा दे…अन्दर तक घुसा दे…” मेरी आह निकलती जा रही थी। सुख से सराबोर हो गई थी। उसने मेरे दोनो चूंचक खींच डाले… दर्द हुआ … पर अनाड़ी का सुख डबल होता है… सब सहती गयी। अब उसके धक्के इंजन के पिस्टन की तरह चल रहे थे। पर अब वो मेरे शरीर के ऊपर आ गया था…मैं पूरी तरह से उससे दब गई थी। मुझे परेशानी हो रही थी पर मैं कुछ बोली नही… वो अपना लण्ड तेजी से चूत पर पटक रहा था, जो मुझे असीम आनन्द दे रहा था।

“भाभी… आह रे… तेरी चूत मारूं… ओह हां… चोद डालू… तेरी तो… हाय भाभी…” उसकी सिसकारियां मुझे सुकून पहुंचा रही थी। उसकी गालियाँ मानो चुदाई में रस घोल रही थी…

“मेरे राजा… चोद दे तेरी भाभी को… मार अपना लण्ड… हाय रे राज…तेरा मोटा लण्ड… चोद डाल…” मैंने उसे गाली देने के लिये उकसाया… और राज्…
“मेरी प्यारी भाभी… भोसड़ी चोद दूं… तेरी चूत फ़ाड़ डालू… हाय रे मेरी… कुतिया…मेरी प्यारी…” वो बोलता ही जा रहा था।
“हां मेरे राजा … मजा आ रहा है… मार दे मेरी चूत …”
“भाभी …तुम बहुत ही प्यारी हो…कितने फ़ूल झड़ते है तुम्हारी बातों में… तेरी तो फ़ाड़ डालूं… साली!”

फ़काफ़क उसके धक्के तेज होते गये… मैं मस्ती के मारे सिसकारियाँ भर रही थी…वो भी जोश में गालियाँ दे कर मुझे चोद रहा था। उसका लण्ड पहली बार मेरी चूत मार रहा था। सो लग रहा था कि वो अब ज्यादा देर तक रह नहीं पायेगा।

“अरे… अरे… ये क्या…?” मैंने प्यार से कहा.
उसका निकलने वाला था। उसके शरीर में ऐठन चालू हो गई थी। मैं जानती थी कि मर्द कैसे झड़ते हैं।

“हां भाभी… मुझे कुछ हो रहा है… शायद पेशाब निकल रहा है… नहीं नहीं… ये …ये… हाय्… भाभी…ये क्या…” उसके लण्ड का पूरा जोर मेरी चूत पर लग रहा था। और … और… उसका पानी छूट पड़ा… उसका लण्ड फ़ूलता… पिचकता रहा मेरी चूत में सारा वीर्य मेरी चूत में भरने लगा। मैंने उसे चिपका लिया। वो गहरी गहरी सांसे भरने लगा। और एक तरफ़ लुढ़क गया। मैं प्यासी रह गयी… पर वो एक २२ वर्षीय जवान लड़का था, मेरे जैसी ३३ साल की औरत के साथ उसका क्या मुकाबला…। उसमें ताकत थी…जोश था… पूरी जवानी पर था। वो तुरन्त उठ बैठा। वो शायद मुझे छोड़ना नहीं चाह रहा था। मुझे भी लग रहा था कि कही वो अब चला ना जाये। पर मेरा अनुमान गलत निकला। वो फिर से मुझसे प्यार करने लगा। मुझे अब अपनी प्यास भी तो बुझानी थी। मैंने मौका पा कर फिर से उसे उत्तेजित करना चालू कर दिया। कुछ ही देर में वो और उसका लण्ड तैयार था। एकदम टनाटन सीधा लोहे की तरह तना हुआ खड़ा था।
“भाभी…प्लीज़ एक बार और… प्लीज…” उसने बड़े ही प्यार भरे शब्दों में अनुरोध किया। प्यासी चूत को तो लण्ड चाहिये ही था… और फिर मुझे एक बार तो क्या… बार बार लण्ड चाहिये था…
“मेरे राजा… फिर देर क्यों … चढ़ जाओ ना मेरे ऊपर…” मैंने अपनी टांगे एक बार फिर चुदवाने के लिये ऊपर उठा दी और चूत के दरवाजे को उसके लण्ड के लिये खोल दिया।

वो एक बार फिर मेरे ऊपर चढ़ गया… उसका लोहे जैसा लण्ड फिर मेरे शरीर में उतरने लगा। इस बार उसका पूरा लण्ड गहराई तक चोद रहा था। मैं फ़िर से आनन्द में मस्त हो उठी… चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुदवाने लगी। अब वो पहले की अपेक्षा सफ़ाई से चोद रहा था। उसका कोई भी अंग मेरे शरीर से नहीं चिपका था। मेरा सारा शरीर फ़्री था। बस नीचे से मेरी चूत और उसका लण्ड जुड़े हुये थे। दोनो हो बड़ी सरलता से धक्के मार रहे थे। वार सीधा चूत पर ही हो रहा था। छप छप और फ़च फ़च की मधुर आवाजे अब स्पष्ट आ रही थी। वो मेरे बोबे मसले जा रहा था। मेरी उत्तेजना दो चुदाई के बाद चरमसीमा पर आने लगी… मेरा शरीर जमीन पर पड़े बिस्तर पर कसने लगा, मेरा अंग अंग अकड़ने लगा। मेरे जिस्म का सारा रस जैसे अंग अंग में बहने लगा। मेरे दोनो हाथों को उसने दबा रखे थे। मेरा बदन उसके नीचे दबा फ़ड़फ़ड़ा रहा था।
“मेरे राजा… मुझे चोद दे जोर से…हाय राम जी… कस के जरा… ओहऽऽऽ … मैं तो गई मेरे राजा… लगा…जरा जोर से लगा…” मेरे शरीर में तेज मीठी मीठी तरावट आने लगी… लगा सब कुछ सिमट कर मेरी चूत में समा रहा है… जो कि बाहर निकले की तैयारी में है।
“मेरे राजा… जकड़ ले मुझे… कस ले हाऽऽऽय… मेरी तो निकली… मर गयीऽऽऽ ऊईईऽऽऽ आहऽऽऽ … ” मैं चरमसीमा लांघ चुकी थी… और मेरा पानी छूट पड़ा। पर उसका लण्ड तो तेजी से चोद रहा था। अब उसके लण्ड ने भी अन्गड़ाई ली और मेरी चूत में एक बार फिर पिचकारी छोड़ दी। पर इस बार मैंने उसे जकड़ रखा था। मेरी चूत में उसका वीर्य भरने लगा। एक बार फिर से मेरी चूत में वीर्य छोड़ने का अह्सास दे रहा था। कुछ देर तक हम दोनों ही अपना रस निकालते रहे। जब पूरा वीर्य निकल गया तो हम गहरी गहरी सांसे लेने लगे। मेरे ऊपर से हट कर वो मेरे पास ही लेट गया। हम दोनो शान्त हो चुके थे…और पूरी सन्तुष्टि के साथ चित लेटे हुए थे। रात बहुत हो चुकी थी। राज जाने की तैयारी कर रहा था। उसने जाने से पहले मुझे कस कर प्यार किया… और कहा…”भाभी… आप बहुत प्यारी है… आज्ञा हो तो कल भी…” हिचकते हुये उसने कहा, पर यहा कल की बात ही कहां थी…

मैंने उसे कहा -“मेरे राजा…मेरे बिस्तर पर बहुत जगह है… यही सो जाओ ना…”
“जी…भाभी…रात को अगर मुझे फिर से इच्छा होने लगी तो…”
“आज तो हमारी सुहागरात है ना… फिर से मेरे ऊपर चढ़ जाना…और चोद देना मुझे…”
“भाभी…आप कितनी…”
“प्यारी हूं ना… और हां अब से भाभी नही…मुझे कहो नेहा…समझे…” मैंने हंस कर उसे अपने पास लेटा लिया और बचपन की आदत के अनुसार मैंने अपना एक पांव उसकी कमर में डाल कर सोने की कोशिश करने लगी। Indian Sex Stories

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