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मैं पेशे से एक Antarvasna Sex Stories फ़ोटोग्राफ़र हूँ, मुम्बई में रहता हूँ। मेरा अकसर शूटिंग के लिये बाहर जाना होता रहता है। ऐसे ही एक शूटिंग के लिये मैं एक बार गोवा गया था। मेरे लिये यह एक बहुत ही मजेदार अनुभव था। अपनी शूटिंग के बाद कुछ दिन के लिये मैं अकेला गोवा में रूक गया था। मैंने रेलगाड़ी से आने का फ़ैसला किया। मैंने ए सी कम्पार्टमेंट में अपने लिये एक सीट रिजर्व कराया। यह गोवा का ऑफ़ सीजन था इसलिए रेलगाड़ी में बिलकुल भी भीड़ नहीं थी। मुझे बहुत आसानी से रेलगाड़ी का टिकट मिल गया। शाम को 6 बजे मेरी रेलगाड़ी मडगाँव स्टेशन से छूटी। मेरे कम्पार्टमेंट में मुझे सिर्फ़ दो लोग दिखे लेकिन उनकी भी सीट डिब्बे के दूसरे कोने में थी। रेलगाड़ी वहाँ से चली और कुछ देर में ही कोई स्टेशन आया। जहाँ पर एक लड़की जो कि बहुत ही मॉर्डन कपड़ो में थी मेरे कम्पार्टमेंट में आई और मेरे भाग्य से उसकी सीट मेरे सीट की बगल में थी। उसने मेरे केबिन में प्रवेश किया। वह मुस्कराई और उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।
हाय ! मैं आलीन !
मैं भी मुस्कराया मन ही मन मुझे खुशी हो रही थी चलो अब मेरा रास्ता कम बोरिंग होगा। हम दोनों का वार्तालाप शुरू हुआ। वह काफ़ी बोल्ड किस्म की लड़की थी। उसका सेक्सी फ़िगर मुझे उसकी तरफ़ लगातार आकर्षित कर रहा था। बातों बातों में हम एक दूसरे के बारे में काफ़ी कुछ जान गये थे। वह मॉडलिंग के लिये मुम्बई आ रही थी। इसके पहले उसने एक दो विज्ञापन में काम किया था। मेरे बारे में जानने के बाद उसने मेरे में ज्यादा रुचि लेनी शुरु कर दी। मेरे केबिन की हलकी नीली लाइट जल रही थी। उसने केबिन का पर्दा खींच लिया जिससे हमें बाहर से कोई अवरोध न मिले। वह मेरे सीट पर बैठी थी हम दोनों कॉफ़ी पी रहे थे। हम दोनों की बातें और आगे बढ़ी और फिर फ़िल्म इण्डस्ट्री और उसके आकर्षक लाइफ़ के बारे में होने लगी।
रात काफ़ी हो चुकी थी। हमारे डिब्बे में जो भी दो चार लोग थे अपने केबिन में सो चुके थे। क्योंकि कहीं से कोई आवाज नहीं आ रही थी। हम दोनों अभी भी अपनी बातों में मशगूल थे। वह मेरे से काफ़ी सटकर बैठी थी जिससे हम रेलगाड़ी के झटकों से कभी कभी हलके से छू जाते थे। अचानक मैंने उसके हाथ को अपने हाथ पर पाया। मैंने उसकी तरफ़ देखा वह मुस्कराई, बस मुझे हरी झण्डी मिल गई।
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और चूम लिया। उसके कंधों पर अपना हाथ रखकर उसे अपनी ओर खींच लिया। वह आसानी से मेरे ऊपर आ गिरी। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये। उसके होंठ बहुत ही मुलायम और गुदाज थे। उसकी सांसे काफ़ी गर्म थी। मैं उसके निचले होंठों को अपने दोनों होंठों के बीच रखकर उन्हें चूसने लगा। उसके हाथो की उंगलियाँ मेरे बालों में उलझी हुई थी। उसने मेरी जीभ को अपने मुँह में लिया और बहुत ही मजेदार ढंग से चूसने लगी। मेरा प्राइवेट अंग पैंट के भीतर उफ़ान मार रहा था।
मेरा हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुये उसकी कमर के नीचे तक पहुँच गया। मैंने अपना हाथ उसकी टाइट टी-शर्ट में डाल दिया। धीमे धीमे मेरा हाथ उसकी दोनों गोलाइयों के नजदीक तक पहुँच गया। मेरे हाथ उसकी ब्रा को महसूस करने लगे। मैं उसकी दोनों गोलाइयों को अपने हाथों में लेने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे इतनी बड़ी थी कि मेरे हाथो में नहीं आ रही थी। इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना जारी रखा। उसकी हरकतें मुझे बहुत ही ज्यादा उत्साहित कर रही थी।
अचानक मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी पैंट पर पड़ा था। मेरा प्राइवेट अंग मेरे पैंट को फ़ाड़कर बाहर आने को तैयार था। वह मेरे सख्त हो चुके अंग को मेरे पैंट के ऊपर से रगड़ रही थी। उसने मेरी पैंट की जिप खोल दी और अपना हाथ मेरे पैंट के अन्दर डाल दिया और मेरे लण्ड को अण्डरवीअर के ऊपर से पकड़ लिया। मेरी हालत बहुत बुरी हो रही थी। उसने मेरी पैंट खोल दी और अण्डरवीअर को नीचे की तरफ़ सरकाकर मेरे जनानाँग को पकड़ लिया। मैं अपनी सीट पर ही बैठा था। वह अपनी जगह से उठी और मेरे लण्ड को उसने अपने मुँह में ले लिया। वह बहुत हॉट थी उसका यह सब करना मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मुझे लगा कि अगर मैंने उसे अपने लण्ड से और खेलने दिया तो मेरा वीर्य बाहर आ जायेगा।
मैंने उसे उठाया और अपनी सीट पर वापस बैठाया। मैंने उसके टी-शर्ट को ऊपर करके उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसकी दोनों बड़ी बड़ी खूबसूरत गोलाइयाँ मेरे समाने बिलकुल आज़ाद होकर झूलने लगी। उसकी गोलाइयाँ एकदम टाइट थी। मैं उन्हें अपने हाथ में लेकर दबाने लगा। उसके चेहरे पर मैं बैचेनी का आलम देख रहा था। मैंने उसके एक निप्पल को अपनी उंगलियों में लेकर उसे धीमे से मसाला। उसके मुँह से एक आआआह्ह्ह्ह्ह की ध्वनि निकाल गई। मैं झुककर उसके दूसरे निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे अपनी जीभ से सहलाने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि उसके स्तन अब और बड़े हो गये थे।
अब मेरे हाथ उसकी जांघों से होते हुए उसके गुप्ताँग पर पहुँच गये। उसने शर्ट-पैंट पहन रखा था। मैंने कैसे भी उन्हें खोला और उसके पैंटी को नीचे किया। उसके गुप्ताँग पर एक भी बाल नहीं थे। मेरी उंगलियां उसके गुप्ताँग में समा गई। मैं अपनी उंगली को उसके गुप्ताँग में अन्दर बाहर करने लगा। मैं उठकर नीचे बैठ गया और उसके गुप्ताँग पर अपनी जीभ रख दी। उसकी मादकता बढ़ती जा रही थी। उसने मेरे बालों को पकड़कर मेरे सर को अपनी जांघों में फ़ंसा लिया। जैसे जैसे मेरी जीभ अपना काम कर रही थी, वह और भी उत्तेजित होती जा रही थी। मैंने अपने आपको उसकी मजबूत पकड़ से मुक्त किया और उसके कपड़ो को निकाल कर उसके पैरो को फ़ैलाया। उसकी सेक्सी चूत मेरे समाने थी जो कि मुझे आमंत्रित कर रही थी। मैंने एक पल की भी देरी किये बिना अपने लण्ड को उसके चूत पर रखा और उसके अन्दर प्रवेश कर गया।
और फिर एक दूसरे को धक्के देने का सिलसिला चालू हो गया। हम दोनों की स्पीड बढ़ती जा रही थी। उसके पैर हवा में खुले हुई थे जिससे मुझे उसके अन्दर तक समाने में आसानी हो रही थी। मेरा लण्ड तेजी से उसके अन्दर बाहर हो रहा था। मेरा लण्ड उसकी चूत की दीवारों पर एक जबरदस्त घर्षण उत्पन्न कर रहा था। हम दोनों आनन्द की एक दूसरी दुनिया में तैर रहे थे। उसकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा जो कि लुब्रीकैंट का काम करने लगा। हम दोनों अपनी चरम सीमा के नजदीक पहुँच रहे थे। हमारे जननांगों से फच्च फच्च की आवाज आने लगी थी। आलीन ने मुझे कसकर पकड़ रखा था। हमारे अन्दर एक जबरदस्त तूफ़ान उबाल मार रहा था। मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी और थोड़ी देर में ही हम दोनों अपने चरम सीमा पर पहुँच गये। हम दोनों के अन्दर एक लावा था जो कि फूट पड़ा।
हम दोनों के शरीर शांत हो गये। हम थोड़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे। यह मस्ती का दौर रात में फिर चला। यह मेरी सबसे यादगार रेल यात्रा थी। Antarvasna Sex Stories
मेरा नाम राज है, अन्तर्वासना Antarvasna के सभी सदस्यों को मेरा प्रणाम। मेरी उम्र 28 साल है और मैं रोज जिम जाता हूँ इसलिए मैं काफी फिट रहता हूं। मैं जब मुंबई में नया आया था। मुझे पहले काफी दिक्कत हुई पर अभी मुझे यहाँ अच्छा लगता है। मैं मुंबई के दादर इलाके में रहता हूँ। मुझे सेक्सी औरतें अच्छी लगती हैं।
मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी कहानी सुनना चाहता हूँ जिसे मैं आज भी बहुत याद करता हूँ।
मैं एक बार नागपुर से मुंबई आ रहा था, एसी 2 टायर में बैठा था, मेरे सामने एक युगल बैठा था। हम लोगों का एक दूसरे से परिचय हुआ और हम लोग काफी घुलमिल गए। वो बन्दा, उसका नाम था प्रथमेश, सॉफ्टवेयर इंजिनियर था, मुंबई में ही जॉब करता था। काफी सारी बातें की और रात को सो गए।
अगले दिन सुबह जब मैं और वो भी उठ गए तो उसे याद आया कि उसने मेरा सेल नंबर नहीं लिया है, मुझसे सेल नंबर मांगने लगा। उसके याद आया कि उसका सेल तो बैग में है तो उसने अपनी बीवी को कहा कि अपने सेल में स्टोर करके बाद में उसे दे दे।
मैंने उसे अपना नंबर दे दिया। थोड़ी देर में ट्रेन मुंबई स्टेशन पर आ गई और हम लोग अपने अपने घर चले गए।
घर पहुँचते ही मुझे एक संदेश आया जिसमें दोस्ती करने के लिए लिखा था। मुझे ऐसे बहुत मैसेज आते रहते हैं तो मैं इन पर ध्यान नहीं देता। फिर थोड़ी देर में और एक मैसेज आया, लिखा था कि अगर दोस्ती नहीं करनी है तो साफ़ साफ बता दो ! तुम्हारी ट्रेन की दोस्त ! इस बार नाम लिखा था और उसका नाम था शालिनी।
मैं सोच में पड़ गया कि कौन है यह लड़की ? मुझे तो कुछ याद नहीं आ रहा था कि मैं किसी शालिनी से मिला हूँ।
फिर भी मैंने कोई उत्तर नहीं दिया, मुझे ऑफिस जाने की जल्दी थी तो मैंने सोचा कि शाम को बात करूँगा।
शाम को फिर मैंने कॉल किया, सामने से आवाज़ आई,”मैं आपके कॉल का कब से इंतज़ार कर रही हूँ।”
यह सुनकर मुझे अजीब लगा, फिर मैंने पूछा “क्या हम कभी मिले हैं?”
उसने कहा,”इतने जल्दी भूल गए? मैं दिखने में इतनी बुरी भी नहीं हूँ।”
मैं: मुझे याद नहीं आ रहा है आप कृपा करके अपना नाम बताइए !
उसने कहा कि उसका नाम शालिनी है और हम कल ही ट्रेन में मिले थे और उसने याद दिलाया कि वो सामने वाली सीट पर बैठी थी। फिर मुझे याद आया कि यह प्रथमेश की बीवी है और प्रथमेश ने मेरा नंबर उसे स्टोर करने के लिए कहा था।
मैं: सॉरी शालिनी जी ! मैंने आपका नाम नहीं पूछा था इसलिए मुझे याद नहीं था ! और प्रथमेश कैसा है?
शालिनी: वो ऑफिस चले गए हैं, रात को लेट आयेंगे।”
मैं: चलो छोड़ो, आप मुझसे दोस्ती क्यों करना चाहती हैं?
शालिनी: आप में मुझे अपना बॉयफ़्रेन्ड नजर आता है जो इस दुनिया में अब नहीं है।
मैं: आय एम सॉरी !
शालिनी: कोई बात नहीं ! मैं अपने बॉयफ़्रेन्ड की बात का बुरा नहीं मानती। तुम्हें पता नहीं कैसे नींद आ रही थी, मैं रात भर सो नहीं पाई।
मैं: क्यों ?
शालिनी: तुम्हें ही निहार रही थी, ऐसा लग रहा था कि मैं तुम्हारे पास आ जाऊँ !
मैंने मस्ती में कहा: तो आ जाना था !
शालिनी: कैसे आती? प्रथमेश साथ में था।
मैं: आपकी शादी को कितने साल हुए हैं ?
शालिनी: दो साल हुए हैं।
फिर हमने मिलने की योजना बनाई। उसने कहा कि वो गोरेगांव में रहती है, दो दिन बाद उसके पति जल्दी ही ऑफिस जाने वाले हैं सुबह साढ़े पाँच !
शालिनी का कद साढ़े पाँच फ़ुट है, गोरी, फ़ीगर 35-27-36, बहुत आकर्षक ! कोई भी उसे देखेगा तो उसका लण्ड वहीं खड़ा हो जायेगा। बला की खूबसूरत थी वो !
मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो मेरे बारे में कैसे सोचने लगी क्योंकि वो इतनी सुन्दर थी कि मैं सोच ही नहीं पाया कि वो मुझसे प्रभावित होगी।
दो दिन बाद उसका कॉल आया सुबह 5 बजे, उसने मुझे याद दिलाया कि अभी आधे घंटे में उसका पति ऑफिस जाने वाला है। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। मैं उठा और तैयार होकर मोटरसाईकल लेकर निकल गया।मैं उसके घर के पास उसके फ़ोन का इन्तज़ार करने लगा।
उसका कॉल आया- अभी आ सकते हो !
मैं: गुड मॉर्निंग डियर !
शालिनी: गुड मोर्निंग ऐसे नहीं करते !
फिर उसने मुझे गाल पर किस किया और गले से लगाया। जैसे ही उसने गले से लगाया मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैंने भी उसे किस करना शुरू कर दिया। सबसे पहले माथे पर, आंखों पर, गाल पर और अब उसके होंठों की बारी थी। जैसे ही मैंने होंठ चूमने चालू किए, उसने मुझे धक्का दिया और बोली- इतनी भी क्या जल्दी है? थोड़ा सब्र करो !
शालिनी: अभी तो आये हो ! जल्द बाजी क्यों?
मैं: आग लगा कर बोलती हो कि जल्दबाजी क्यों ?
शालिनी: आज का दिन हमें बहुत मस्ती करनी है ! क्यों ना धीरे धीरे मज़ा लें !
मैं: ठीक है ! कहाँ से शुरू करना है ?
शालिनी: नहा कर आये हो ?
मैं: पागल हो गई हो क्या ? इतने सवेरे नहा कर कौन आयेगा ?
शालिनी: मैं भी नहीं नहाई ! चलो फिर साथ में शावर लेते हैं !
मैं बहुत खुश हो गया। जिंदगी में पहली बार किसी के साथ शावर लेने का मौका मिला है, यह सुनकर ही मेरे मन में बहुत से ख्याल आने लगे और फिर हम शावर लेने चले गए।
जैसे ही मैं बाथरूम में गया तो देखा कि बाथरूम बहुत बड़ा था, बाथटब भी था। फिर मैंने उसके गुलाबी फूल की पंखुडियों जैसे होंठों को चूमना शुरू किया। इस बार वो भी मेरा साथ देने लगी। कभी मैं ऊपर का होंठ चूसता तो कभी नीचे का ! पूरी जबान उसके मुंह में डाल दी। वो भी किसी अनुभवी की तरह पूरा साथ दे रही थी। धीरे धीरे मेरे हाथ उसके वक्ष तक गए। ऊपर से ही मैं सहला रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था। वो भी मेरा लंड पैन्ट के ऊपर से सहला रही थी। लंड तो मेरा पहले से खड़ा हो गया था।
मैं उसकी गर्दन पर किस करते करते कान के पीछे पहुंचा ही था कि वो बोली- कपड़े तन पर बोझ हैं इन्हें उतार फेंकना चाहिए।
मैंने उसकी नाईटी उतार फेंकी। अब वो मेरे सामने ब्रा और पैन्टी में थी। मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों पर किस कर रहा था। उसने कहा- अब और मत तड़पाओ ! ब्रा खोल दो और चूस लो मेरी चूचियों को !
मैंने तुरंत ब्रा खोल दी और चूसने लगा। उसका हाथ मेरे लंड को सहला रहा था। मैंने दोनों स्तन अच्छी तरह से चूस चूस कर और दबा दबा कर लाल कर दिए। धीरे धीरे मैं उसकी नाभि को चाटने लगा। फ़िर मैंने उसकी पैन्टी उतार दी।
वाह ! क्या चूत थी ! पूरी तरह शेव की हुई थी, बहुत ही मनमोहक खुशबू आ रही थी। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अपनी जबान वहाँ लगा दी।
जैसे ही मैंने जबान लगाई उसने मेरा सर अन्दर धकेला और कराहने लगी, कहा- राज चाटो इसे ! मुझे बहुत मज़ा आ रहा है !
दस मिनट चाटने के बाद वो झड़ गई। फिर उसने मुझे चूमना चालू किया। पहले मुझे होंठों पर चूमा, गर्दन से होती हुई निप्पल पर आ गई। बाद में धीरे धीरे नीचे जाने लगी। उस समय मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता।
मुझे लगा कि वो मेरा लंड चूसने वाली है। उसने मेरी नाभि को भी चाटा और वो घड़ी आ गई जिसका मुझे इंतजार था। मेरा लंड उसने पहले अपनी जबान से पूरी तरह चाट लिया, फिर उसे मुँह में लिया और अन्दर-बाहर करके चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था मानो कि मैं ज़न्नत में हूँ। 10-12 मिनट बाद पूरा वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया जो उसने बड़े प्यार से चाट लिया। फिर हम लोग बाथत्ब में बैठ कर एक दूजे को नहलाने लगे।
हम दोनों नग्न ही पूरे घर में घूम रहे थे। बाद में हमने नाश्ता किया।
शालिनी ने कहा- अभी तो पहला भाग हुआ है ! अभी दूसरा चालू करते हैं !
फिर उसने मुझे चूमना चालू किया। इस बार उसने सीधा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। दो मिनट चूसने के बाद मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उसे गर्म करने के लिए उसके स्तन चूसना शुरू किया। थोड़ी देर में वो गर्म हो गई। फिर मैंने उसकी चूत चाटनी चालू कर दी। मेरी जुबान पूरी अन्दर तक भ्रमण करके आ रही थी।
शालिनी बोली- अब ज्यादा मत तड़पाओ ! चोद डालो ! और इंतज़ार नहीं होता !
मैंने लंड धीरे से अन्दर डाल दिया और जोर से धक्के मारने लगा।
उसकी आवाज़ निकल रही थी- आऽऽ…हऽऽ… मेरे राजा आई लव यू ! इसी तरह चोदते रहो ! बहुत मज़ा आ रहा है !
15 मिनट बाद मुझे ऐसा लगा कि मेरा गिरने वाला है। मैंने बाहर निकाल दिया और कंट्रोल करने लगा। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया फिर दो मिनट बाद चूत में डाल दिया। वो बहुत खुश हो गई कि मैं कंट्रोल कर सकता हूँ।
उसने कहा कि उसका पति कंट्रोल नहीं कर पाता और जल्दी ही गिर जाता है। इसलिए वो अधूरी है।
ऐसा मैंने दो बार और किया। मैं योग करता हूँ तो मुझे पता है कि अपनी इन्द्रियों को कैसे वश में करना है।
फिर मैंने उसे पूछा- शालिनी ! ज्ब तुम तृप्त हो जाओ तो मुझे बता देना, मैं बाहर गिरा दूंगा।
उसने कहा- अन्दर ही गिराना ! गर्म गर्म वीर्य जब चूत में पड़ता है तो उसका मज़ा ही कुछ और होता है।
मैंने कहा- बच्चा हो गया तो?
उसने कहा- तुम्हारा प्यार समझ कर अपने सीने से लगा कर रखूंगी।
मैंने फिर अन्दर ही गिरा दिया। हम दोनों निढाल होकर पड़े रहे।
उसके बाद उसने मुझे प्यार से चूमा।
आपको मेरी कहानी कैसे लगी ? मुझे मेल करें ! Antarvasna
मैं विकाश गुजरात से अपको एक सच्ची Hindi sex stories बताने जा रहा हूं, जो मेरे साथ हुई थी, मेरी एक मौसी बहुत ही सेक्सी और मस्त लेकिन मैंने उनको कभी इस नज़रों से देखा नहीं था, लेकिन एक दिन की बात, मैं गर्मियों की छुट्टियों में उनके घर गया था अकेला, उनके परिवार में वो, मेरी मौसाजी और एक छोटी लड़की थी, मौसी देखने में गोरी, चिट्टी और बहुत सेक्सी थी, उनका फ़ीगर 38-32-38 था थोड़ी मोटी थी लेकिन अच्छी थी उनकी उमर 45 साल थी।
एक दिन मौसाजी किसी काम से बाहर गये थे घर में मैं और मौसी और उनकी लड़की जो 4 साल की थी इतने ही लोग थे, मैं बाहर खेल के लौटा तकरीबन 9 बजे थे उनकी बेटी सो गयी थी तब, मौसी बोली बेटा आज बहुत गर्मी है जाओ नहा लो!
मैंने कहा नहीं मैं बहुत थक चुका हूं.
वो बोली- नहीं चलो, मैं तुम्हे नहलाती हूं चलो!
और वो आ गयी बाथरूम में, उन्होंने मेरी शर्ट निकाल दी, और पैंट भी, अब मैं सिर्फ़ अपनी निक्कर में था, मौसी उसे भी निकालने जा रही थी मैंने कहा नहीं मौसी मुझे शर्म आती है, वो बोली ऐसे नहीं चलेगा ठीक से नहाना तो पड़ेगा, और एक ही झटके में मेरी निक्कर निकाल दी अब मैं बिल्कुल नंगा खड़ा था, और वो मुझे सेक्सी निगाहों से देख रही थी, उस टाइम मेरा लंड छोटा सा था 4′ का और वो नहलाते नहलाते उससे खेलने लगी, उसके बाद से उनकी निगाहें मेरी तरफ़ अलग नज़र से देखने लगी।
थोड़े दिन ऐसे ही बीत गये, एक दिन हम दोनो रात को अकेले थे, वो बोली आज रात तुम मेरे कमरे में ही सोना, मुझे अकेले डर लग रहा है मैंने कहा ठीक है, मैं रात को उनके कमरे में गया सोने के लिये, वो बोली बहुत गर्मी है, मैंने कहा हां मौसी,
वो बोली इन कपड़ो मे बहुत गर्मी लगेगी निकाल दे, और वो भी अपने कपड़े निकालने लगी, उन्होंने ब्लु साड़ी पहन रखी थी बहुत सेक्सी लग रही थी, वो निकाल दी, और ब्लाउज़ भी, अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में ही थी, और मैं सिर्फ़ अपनी निक्कर में था,
उन्होंने लाइट बुझा दी और हम सो गये, थोड़ी देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि कोई मुझे छू रहा है और लंड को सहला रहा है, मैं जग गया, देखा तो मौसी प्यासी निगाहों से देख रही थी मुझे।
मैंने कहा मौसी ये क्या कर रही हैं आप, वो बोली कि तुम मुझे अच्छे लगते हो, तेरे मौसा को तो काम से फ़ुरसत ही नहीं है, और वो मुझसे लिपट गयी और मुझे चूमने लगी, और अपना पेटीकोट निकाल दिया वो अब सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी बहुत ही सेक्सी दिख रही थी, मैं भी उत्तेजित हो चुका था, मैंने अब तक किसी को छुआ भी नहीं था, और वो बहुत एक्सपर्ट थी, उनके बड़े बड़े मम्मे और बड़े चूतड़ उफ़्फ़ क्या सीन था, मैं उनके मम्मो को चूसने लगा ब्रा के ऊपर से ही, उन्होंने अपनी ब्रा भी निकाल दी और बहुत पागलों की तरह मुझे किस करने लगी, और निक्कर के ऊपर से ही लंड को सहलाने लगी, उन्होंने मुझे नंगा कर दिया और लंड चूसने लगी, जैसे कोई लोलीपोप हो, वो बोली बहुत मस्त लंड है
उस टाइम मेरा लंड छोटा था पर उनको अच्छा लगा, अब मेरी घबराहट थोड़ी दूर हो चुकी थी, और मैं भी रिस्पोंस दे रहा था, उनके निप्पल को चूस रहा था, वो बोली बेटे ऊपर आ जाओ!
मैं उन्हे किस कर रहा था पूरी बोडी पर, अब मैंने उनकी पैंटी भी निकाल दी, क्या मस्त चूत थी, एक भी बाल नहीं था, वो बोली चूसो इसे, मैं चूसने लगा वो आह, आह की आवाज़ें निकाल रही थी, फ़िर उन्होंने मेरा लंड पकड़ के चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगी और मैं भी धक्के लगा रहा था धीरे से एक दम फ़ास्ट चोद रहा था उन्हे, मुझे बहुत मज़ा आने लगा था
फ़िर उन्होंने मुझे लिटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गयी और धक्के लगाने लगी, फ़िर हमने डौगी स्टाइल में भी किया उनके चूतड़ बहुत ही मस्त थे, मैं उनको पकड़ कर चोद रहा था, फ़िर हम दोनो 1 घंटे के बाद झड़ गये, और उसी रात को हमने दो बार और किया, फिर नंगे ही सो गये,
फिर सुबह वो जल्दी उठ गयी थी, मुझको उठाया और हम दोनो साथ में ही नंगे नहाये, मेरा तो ये पहला एक्सपेरिएंस ही था लेकिन खूब एन्जॉय किया फिर तो हमने कई और बार सेक्स किया जब भी मौका मिलता।
दोस्तो कैसी लगी Hindi sex stories ज़रूर बताना
मैं राजेश लुधियाना से Antarvasna आपको अपनी कहानी नहीं बल्कि हकीक़त बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ हुआ।
भैया की नई नई शादी हुई थी, हम सब बहुत खुश थे क्योंकि भाभी बहुत ही खुश मिजाज हैं। शादी के कुछ महीनों बाद हमारे माता पिता को किसी काम से आठ दस दिन के लिए कहीं जाना पड़ा, सो घर में हम तीनों ही रह गए। उस पर भैया को एक दिन ऑफिस के काम से जाना पड़ा।
उस दिन घर में हम दोनों अकेले थे, सो भाभी से कहा- भाभी, कहाँ अकेले मेरे लिए खाना बनाओगी! चलो कहीं बाहर घूम आते हैं, आपका दिल भी बहल जायेगा और बाहर से खाना भी खा आयेंगे।
तो भाभी झट से मान गई। हाँ! मेरी भाभी की उम्र 26 साल कद 5’3′ रंग गोरा और फिगर 36/28/34 है। उसने जींस और टॉप पहना और हम मूवी देखने गए। हमने मूवी देखी। मूवी थोड़ी रोमांटिक थी सो मुझे कुछ अलग महसूस हो रहा था।
हम ने खाना पैक करवाया और सोचा घर जाकर खायेंगे। खाना पैक करवा के घर आ गए और मैं भाभी से बोला- आप कपड़े बदल लो, फिर खाना खाते हैं।
भाभी ने अपनी नाईट ड्रेस पहन ली। ड्रेस पारदर्शक थी, उसमें से उसके शरीर का एक एक कट नज़र आ रहा था कि कहाँ से उसकी चूचियाँ शुरू होती हैं, कहाँ पर ब्रा है और कहाँ से कमर और कहाँ पर उसकी पेंटी है।
उसको ऐसे देख कर मेरे शोर्ट्स में मेरा लंड स्टील रॉड की तरह हो गया। मेरा बैठना मुश्किल हो गया, बड़ी मुश्किल से अपने लंड को नज़र छुपाकर कुछ ठीक किया।
उसके बाद हमने खाना खाना शुरू किया तो मैंने भाभी से कहा- तुम रोज सर्व करती हो, लाओ, आज मैं करता हूँ!
और मैं जैसे ही दाल भाभी की प्लेट में डालने लगा तो मेरा ध्यान हट गया और दाल भाभी की ड्रेस के ऊपर गिर गई। मेरी तो जान ही निकल गई कि अब भाभी मुझे डांटेगी। मैंने झट से पास पड़े कपड़े से उनकी ड्रेस साफ़ करनी शुरू कर दी। पहले तो मैं ड्रेस ही साफ़ कर रहा था पर अचानक मेरा ध्यान गया कि दाल उनकी चुचियों पर गिरी है और उनकी आँखें बंद हैं। शायद मेरे दाल साफ़ करने पर वो गरम हो रही थी तो मैंने दाल साफ़ करने के बहाने उनकी चुचियों को सहलाना चालू रखा।
उनकी चुचियाँ कड़ी हो रही थी और इधर शोर्ट्स मेरा लंड भी फड़क रहा था। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी तो मैंने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में दबा भी रहा था। जब भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गया कि वो भी गरम है। तो मैंने उसकी चुचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया तो उनके मुँह से आह्ह् अह्ह् उफ्फ्फ निकलने लगा। मैंने लोहा गरम जान कर उनकी नाइटी का फ़ीता खोल दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी। उनकी आँखें अभी भी बंद थी।
अब मैं उनकी चुचियाँ ब्रा के ऊपर से सहला रहा था। वाह, क्या सफ़ेद चुचियाँ थी! पहली बार इतनी पास से देख रहा था! दिल कर रहा था खा जाऊँ! उनको सहलाते सहलाते हाथ कभी पेट तक ले जाता और कभी नाभि तक! तो वोह सिसक पड़ती- आ आआ आह्ह्ह ह हम्म म्म्म्म!
एक हाथ से सहलाते हुए हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल दी और उनकी ब्रा में टाइट हो रही चुचियों को आज़ाद कर दिया। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी। मुझे लगा शायद वो आँखें खोलकर मेरे साथ नज़र मिलाना नहीं चाहती थी।
उनके चुचूक बिल्कुल छोटे थे पर एक दम सख्त थे और हल्के रंग के थे। उसके चुचूक देख कर लंड अब बाहर आने को बेताब था, लगता था कि अगर एक दो मिनट में नहीं निकला तो अंडरवियर को फाड़ देगा।
भाभी की आँखें बंद थी तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने झट से भाभी के चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। भाभी ने एकदम से मुझे पकड़ लिया और मेरे सिर को जोर से दबाना शुरू कर दिया और कहने लगी- आह्ह्ह्ह हाँ! ऐसे ही करो और जोर से आआआआह्ह्ह ह्ह्ह आज इनको नहीं छोड़ना! बहुत प्यासी है यह! इनको खूब अच्छे से चूसो! आ आह!
अब तो मैं दोनों चुचियों पर टूट पड़ा, मैं पागल हो रहा था भाभी की मस्त चुचियाँ देख कर! उनको मसल रहा था, चूस रहा था जैसे बच्चे चूसते हैं। कभी कभी काट भी लेता था तो वो चिल्ला उठती। पर मेरे सिर को दबाये जा रही थी। मैंने 8-10 मिनट तक भाभी की चुचियों को खूब चूसा, चूस चूस के लाल कर दी, कहीं कहीं तो दांतों के निशान पड़ गए थे।
अब मैंने भाभी को ऐसे ही अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया, जाकर भाभी को बिस्तर पर गिरा दिया, मैं उन पर गिर पड़ा और भाभी को चूमना शुरू कर दिया। भाभी सिर्फ पेंटी में थी पर पेंटी पर निशान से पता लग रहा था कि भाभी स्खलित हो चुकी है।
मैंने भाभी को हर जगह चूमा, हर चुम्बन पर वह सिसक पड़ती। उसमें से आ रही मदमस्त खुशबू मुझे और पागल कर रही थी। अब वह भी मुझे पागलों की चूम रही थी। जब मैंने भैया का पूछा तो कहती- उनके पास समय नहीं है ऐसे प्यार करने का! उनको तो बस दो मिनट का सेक्स पसंद है, चूत में डाला और हो गया! उनको यह सब पूर्व-क्रीड़ा पसंद नहीं है। इसलिए आज सच में मजा आ रहा है! पहली बार किसी ने मुझे सेक्स से पहले वो मजा दिया जिसके लिए मैं तड़पती रही हूँ।
इतनी देर में मैंने भाभी की पेंटी भी उतार दी थी, वाह क्या मस्त चूत थी! आज तक ऐसी चूत तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखी थी, एक दम सफ़ाचट थी, चूत के होंठ गुलाबी थे और बिल्कुल छोटा सा चीरा था ऐसे लग रहा था जैसे अभी कुँवारी है। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से उसको चूसना शुरू कर दिया तो वह एक दम से उछल पड़ी। मैंने झट से उसकी चूत में जीभ डाल दी और उसका रस चूसना शुरू कर दिया। बहुत ही स्वादिष्ट थी उसकी चूत! उसकी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दिया मैंने!
वो बड़ी जोर से मेरा सिर दबा रही थी और कह रही थी- आऽऽ आह्ह उफ्फ्फ आअह्ह्ह ह्ह्हू ऊऊउल् मैं मर गई!
अब तक उसका हाथ मेरे लंड तक पहुँच गया था, वो उसको सहला रही थी निकर के ऊपर से! मैंने झट से अपनी निकर उतार दी। अब हम बिल्कुल नंगे थे। वह मेरा लंड देख कर हैरान रह गई, कहती- इतना बड़ा?
अब मैंने फिर से भाभी के चुचूक चूसना शुरू कर दिया और उनको जोर से मसल रहा था, तो कहती- हाँ राजेश! और जोर से कर! आआह्ह बहुत मजा आ रहा है!
फिर कोई 5 मिनट की चुसाई के बाद हम 69 पोज़ में आ गए। भाभी ने कहा- ला राजेश, अब मुझे भी मजा लेने दे! तेरे भैया तो चूसने ही नहीं देते! ना चूसते हैं, ना ही चुसवाते हैं!
भाभी ने झट से मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। पर लौड़ा इतना बड़ा हो गया था कि उनके मुँह में नहीं आ रहा था। पर जितना आ रहा था, वो उतना बड़ी मस्ती से चूस रही थी। मेरी भी जान निकल रही थी, लगता था जैसे कहीं स्वर्ग में आ गया हूँ और मैं भाभी की चूत को बड़ी मस्ती से चूस रहा था। कभी उसके दाने को चूसता तो कभी होंठों से खींचता तो उछल पड़ती। कभी उसकी चूत में उंगली करता, कभी उसकी चूत में जीभ डालता। पूरी चूत की मस्ती से चुदाई कर रहा था जीभ से!
इस दौरान वो कम से कम तीन बार झड़ चुकी थी। अब मैं भी झड़ने के करीब था तो मैंने भाभी का सिर पकड़ लिया और जोर से उनके मुँह की चुदाई शुरू कर दी। वो ग्गू गुउउऊ कर रही थी उसकी आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने बालों से पकड़ कर पूरा लंड मुँह में डाल दिया तो लगता जैसे उसकी सांस रुक गई। वो मिचका रही थी पर मैंने पूरे जोश से उसके मुँह की चुदाई चालू रखी और 5-7 मिनट बाद उसके मुँह में ही झड़ गया। उसने भी सारा रस पी लिया, एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी।
मैं झटके लेकर झड़ता रहा, लग रहा था कि जैसे आज वीर्य निकलना बंद नहीं होगा।
हम दोनों थक गए थे और ऐसे ही नंगे एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।
उसके बाद अगले दिन क्या हुआ, वो आपके जवाब देने पर बताऊँगा। Antarvasna
रोशन और राम नये नये कॉलेज Antarvasna में आये थे और शहर में ही कॉलेज के पास उन्होंने एक कमरा किराये पर ले रखा था। जवानी का नया नया जोश भी था और वो जवानी का पूरा लुत्फ़ भी उठाना चाहते थे। उन्हें स्वतन्त्र माहौल मिल गया था। मां बाप का कोई डर नहीं, यहां कोई भी कुछ कहने वाला नहीं था। सबसे पहले उन्होंने लुत्फ़ शराब का उठाया। वे दोनों लगभग रोज शाम को एक आधी बोतल ले आते थे और पीते थे। कुछ दिनों के बाद उन्होंने एक सी डी की दुकान से ब्ल्यू फ़िल्म भी किराये पर लाना आरम्भ कर दिया था। एक दिन…
शाम के आठ बजे थे। नहा धो कर वे दोनों ही बोतल खोल कर पीने बैठ गये थे। टिफ़िन आ चुका था। राम ने टी वी खोल कर कर किराये पर लाई हुई सीडी प्लेयर पर लगा दी और दारू का दौर चलने लगा। ब्ल्यू फ़िल्म भी चल रही थी। एक के बाद एक चुदाई के सीन आने लगे थे। रोशन और राम पर भी रंग चढ़ने लगा।
‘भेनचोद अन्ग्रेज औरतें क्या मस्त होती हैं…’ गर्म होता हुआ बोला।
‘हाँ यार, साली की चूत तो देख… लगता है अभी चोद डालूं…!’ राम अपना लण्ड पजामे के ऊपर से मसलता हुआ बोला। रोशन ने राम को देखा, राम का लण्ड खड़ा हुआ था। उसे देख कर रोशन का लण्ड भी जोर मारने लगा। पहले तो वो शरमा कर लण्ड दबा रोशनरहा था, पर राम को देख कर वो भी अपना लण्ड को हल्के हाथों से उपर नीचे करने लगा।
– अन्ग्रेजों का लण्ड भी देख कितना मोटा और लम्बा होता है… अपना तो उनके सामने कुछ भी नहीं है। रोशन ने अपना लण्ड सहलाते हुए कहा।
‘तो क्या हुआ, लण्ड तो तेरा भी बहुत जोर मार रहा है ‘ राम ने उसके लण्ड को मसलता हुआ देख कर कहा।
‘अरे ! ये मादरचोद… लण्ड को कैसे चूस रही है… ! हाय मेरा लण्ड भी ये मां की लौड़ी चूस ले…! ‘ रोशन ने अपना लण्ड दबाते हुए कहा।
‘उसे मां चुदाने दे…तू कहे तो…तेरा मसल दूं?’ कहते हुए राम ने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। रोशन एकबारगी सिहर गया। उसका हाथ हटाते हुए कहा- मत कर यार ! गुदगुदी होती है।
गुदगुदी तो होगी ही, पर मजा भी तो आता है, राम ने अपना हाथ लण्ड के पास रोशन के हाथ पर रख दिया और लण्ड पकड़ने की कोशिश करने लगा। पहले तो रोशन को अच्छा नहीं लगा, पर उसके हाथ की रगड़ से उसे मजा आने लगा। धीरे धीरे रोशन ने विरोध करना बंद कर दिया। अब लण्ड राम की गिरफ़्त में आ गया। पाजामे के ऊपर से ही वो लण्ड को सहलाने लगा। रोशन को मजा आने लगा। उसका लण्ड अब फ़ड़फ़डाने लगा।
राम, तेरा कैसा है?…लगता तो मस्त है! कैसे पजामे में से बाहर निकलने को बैचेन हो रहा है!’ रोशन ने अपना हाथ राम के लण्ड पर रख दिया और उसे दबा दिया। राम के मुख से आह निकल पड़ी। उसने कोई विरोध नहीं किया।
दोनो नशे में मदहोश थे। आंखें लाल हो चुकी थी। दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और एक दूसरे को नशीली निगाहों से देखने लगे। रोशन के पाजामे का नाड़ा खुल चुका था। राम ने रोशन का लण्ड बाहर निकाल लिया। पास में देसी घी का डब्बा पड़ा था, राम ने उसमें से थोड़ा सा घी निकाल कर रोशन के लण्ड पर मल दिया और उसे चिकना कर दिया।
अब चिकने लण्ड पर मुठ मारने में राम को भी आनन्द आने लगा था। रोशन भी आहें भरने लगा था। अचानक राम ने रोशन को चूम लिया और चूमते हुए उसके होंठों तक आ गया। रोशन भी अपना आपा खो बैठा और और उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिये और एक दूसरे को चूमने लगे।
– रोशन, आई लव यू…यार !
– राम, चूमते रह, मजा आ रहा है ! इतने दिन तक तू कहाँ था भोसड़ी के?
– मुठ मारने में कितना मजा रहा है, रस निकाल दे मेरे लौड़े का !
– हाँ रे ! बहुत मजा आ रहा है… और घिस दे यार…माँ चोद दे मेरे लण्ड की !’ दोनो के पजामे उतर चुके थे। लण्ड की घिसाई चल रही थी। दोनों के लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। मुठ अब जोर जोर से मार रहे थे। अचानक राम ने रोशन को जोर का धक्का दिया और वहीं चित लेटा दिया और उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुपाड़े को चूसने लगा। रोशन तड़प उठा और राम को खींचने लगा। राम ने इशारा समझा और 69 पोजिशन में आकर अपना लन्ड उसके मुँह में डाल दिया।
दोनो तरफ़ से कस कर लण्ड की चुसाई हो रही थी। इतने में रोशन का शरीर कसमसाया और उसके लण्ड ने लावा उगल दिया। राम ने तुरन्त मुँह हटा दिया और हाथ में वीर्य भर लिया। पर साथ में उसका लण्ड मसलता ही रहा। उसके लण्ड के आस पास उसका वीर्य फ़ैल गया था। इतने में राम भी छूट गया और रोशन का मुख वीर्य से भर उठा।
रोशन ने वीर्य को मुख से निकाल दिया और गले के पास से बहता हुआ नीचे बिस्तर पर गिरने लगा। दोनों ही झड़ चुके थे। ब्ल्यू फ़िल्म पर किसी का भी ध्यान नहीं था। पास में पड़ा तौलिया उठा कर दोनों ने अपने लण्ड और मुख साफ़ किये और नंगे ही बैठ गये। माहौल गर्म हो गया था। उन दोनों ने अब अपनी बनियान भी उतार कर मरजात नंगे हो गये थे। पंखे की हवा उनके शरीर को सहला रही थी। दोनों के जवान चिकने शरीर और उनकी कसी हुई मसल्स उभरी हुई दिख रही थी।
– मजा आ रहा है ना राम…
-हाँ यार, इसमें इतना मजा आता है मुझे तो पता ही नहीं था।
-देख घी लगा कर कितना चिकना लग रहा है तेरा लण्ड, रोशन।
– तू भी लगा ले यार…चल मैं लगा देता हूँ…
रोशन घी निकाल कर राम के लन्ड पर मलने लगा। राम का लण्ड फिर से तन्ना उठा। राम ने रोशन का लण्ड फिर से पकड़ लिया। दोनो फिर से झूम उठे। दोनों एक बार फिर एक दूसरे का मुठ मारने लगे।
अचानक राम बोला- रोशन मेरी गाण्ड में खुजली होने लगी है, शान्त कर दे यार ! राम ने अपनी गाण्ड रोशन की तरफ़ करते कहा।
रोशन ने घी के डब्बे में से घी निकाल कर उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और घिसने लगा। राम के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
‘रोशन यार पेल दे लौड़ा गाण्ड में, मजा आ जायेगा !
– सच ! पेल दूँ क्या?
राम घोड़ा बन गया। रोशन ने अपना कड़कता लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया। उसकी चिकनी मस्कुलर गाण्ड पर हाथ फ़ेरा और लण्ड गाण्ड के फ़ूल पर दबाने लगा। छेद चिकना था, लण्ड अन्दर घुस पड़ा।
-मजा आ गया रोशन, चोद डाल साली हरामी गाण्ड को। रोशन ने जोर लगाया और लन्ड घी की सहायता से अन्दर घुसने लगा।
राम दर्द से भरे स्वर में बोला- तेरी तो टाईट गाण्ड है… मेरे तो लण्ड की भी मां चुद जायेगी यार, कहीं छिल ना जाये?
-हाय रे, रोशन, दर्द होता है, पर पेल दे लण्ड, इस की तो मां दी फ़ुद्दी।
रोशन ने लण्ड बाहर निकाल कर फिर से अन्दर पेल दिया। और अब धक्के चल निकले। राम की गाण्ड चुदने लगी। रोशन का लौड़ा फूलने लगा और कड़कने लगा। राम को भी अब दर्द कम हो रहा था। पर उसे गाण्ड मराने में मजा आ रहा था। राम का लण्ड भी नीचे फ़ुफ़कारे भर रहा था, लन्ड नीचे लटकता हुआ फ़ड़क रहा था। कुछ ही देर में रोशन का वीर्य छूट पड़ा और राम की गान्ड में भरने लगा। रोशन झड़ चुका था।
अब दोनों ने अपना पोज बदला और राम का कड़कता लण्ड रोशन की गाण्ड में टिका था। रोशन की गाण्ड टाईट नहीं थी, फिर देसी घी का असर, लण्ड फ़क से रोशन गाण्ड में घुस गया, रोशन एक बार तो दर्द से कराह उठा पर सम्भल गया।
राम अपना लण्ड रोशन की गाण्ड में पेलने लगा। रोशन गान्ड चुदाई को एन्जोय कर रहा था। वो धीरे से नीचे पांव पसार कर पेट के बल लेट गया और अपनी आन्खे बंद कर ली और गाण्ड मराने क भरपूर आनन्द लेने लगा।
राम रोशन की पीठ पर लिपट कर लण्ड पेल रहा था। गाण्ड के फ़ूल की चमड़ी लण्ड के साथ साथ बाहर निकल रही थी और अन्दर जा रही थी। दोनों के चिकने शरीर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे।
अचानक राम के लण्ड ने पिचकारी छोड दी और वीर्य निकल पड़ा। राम हाय कह कर रोशन की पीठ से चिपक गया और वीर्य रोशन की गान्ड में भरने लगा। राम अब पूरा झड़ चुका था। उसका लण्ड अपने आप बाहर आ गया था। अब राम और रोशन आराम से बैठ गये। उन्होंने शराब का अन्तिम जाम बनाया और आज के मजे के नाम पर चीअर्स करके पीने लगे।
आज दोनों जवानी का पूरा लुत्फ़ उठा कर सन्तुष्ट थे। जाम समाप्त हो चुका था और अब टिफ़िन की तैयारी हो रही थी।
वो दोनों इस बात से अन्जान थे कि उन्हें किसी जगह से मेरी दो आंखें उन्हें ये सब करते हुए देख रही थी। इस दौरान मैं दो बार अपनी भोसड़ी में अंगुली डाल कर रस निकाल चुकी थी।… हमेशा की तरह मैं उन दोनों से चुदने का कोई बढ़िया प्लान बना रही थी… उन्हें अपने चक्कर में लेकर दो दो लण्ड का मजा लेने का प्लान। Antarvasna
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