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कहानी का पिछला भाग: मेरे बस के सफ़र से आगे का सफ़र-2
मैंने भाभी को नीचे खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा. मेरा जोश अब पहले से भी ज्यादा था. क्या पता फिर मौका मिले ना मिले? मैं उनके मम्मे चूसे ही जा रहा था और एक हाथ से चूत सहला रहा था. मैंने अब उनको चाटना चालू किया. उन्होंने अपने हाथों से सर के नीचे जो तकिया था, उसे कस के पकड़ा था. तो मैंने उनकी बगलों में चूमना चालू किया जिससे भाभी पूरी सिहर उठी. धीरे धीरे चूमते हुए मैं नीचे आ गया और चूत चाटने लगा. अब भाभी ने धीरे से अपने पैर उठाये और अपनी छाती के पास ले गई जिससे अब उनकी गांड का छेद मेरे सामने आ गया था.
“आशीष , अगर तुमको तकलीफ ना हो तो थोड़ा इसे भी चाटो ना!”
मैंने अपनी जीभ गांड के छेद पर रखी और धीरे धीरे अपनी जीभ का जोर बढ़ाया. भाभी कसमसा रही थी और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुसवा रही थी.
“भाभी क्या इस छेद को कभी किसी ने छेड़ा है?”
“नहीं आशीष , ये तो मेरी चूत को हो नहीं चाटते! तो इसको क्या चाटेंगे!”
“भाभी, मैं इसको चूसूंगा भी और बजाऊँगा भी!”
भाभी अब जरा मेरा लंड गीला तो करो!”
भाभी ने वापस मेरा लंड मुँह में लिया और चूसना चालू किया.
“अब भाभी पेट के बल हो जाओ, मैं आपके पीछे के छेद को छेड़ता हूँ!”
“आशीष , संभल के! मैंने कभी पीछे लिया नहीं है!”
“अरे भाभी जी! तुमने कभी आगे भी नहीं लिया था! लेकिन अब लेती हो ना!”
मैंने अपनी पकड़ बना ली और उनकी गांड पर लंड का दबाव बनाने लगा.
“आशीष , धीरे से करो! मुझे दुःख रहा है!”
“हाँ भाभी! मैं धीरे से करता हूँ!”
“भाभी, एक काम करो! आप नीचे से गांड उठाओ और धीरे से अन्दर लेने की कोशिश करो!”
लंड तो अब मेरा भी दुखने लगा था क्योंकि गांड का छेद बहुत ही छोटा था. भाभी ने अपनी गांड नीचे से उठानी शुरू कर दी थी. वो गांड तो नीचे से उठा रही थी, साथ में चिल्ला भी रही थी.
“आशीष , आऽऽऽऽ आआआऽऽऽ बहुत दर्द हो रहा है आशीष …!”
अब लंड आधा अन्दर जा चुका था और भाभी अब गांड आगे खींचने लगी थी. मुझे लगा कि भाभी अब बाहर निकलेगी तो मैंने भाभी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा. भाभी की तो चीख ही निकलने वाली थी पर उसने जैसे तैसे रोक ली.
“भाभी, अब पूरा अन्दर गया है! अब कैसा लग रहा है?”
“आशीष , बहुत ही दर्द हो रहा है!”
“भाभी, थोड़ा सहन करो! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ!”
“हाँ भाभी! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ!”
भाभी ने अपना काम चालू कर दिया था.
“भाभी, कैसा लग रहा है?”
“आशीष , यह तो अलग ही अनुभव है! मुझे बहुत ही मजा आ रहा है! तुम भी कमर हिलाओ ना! मजा आ रहा है बहुत!”
अब मैंने अपने शॉट धीरे से चालू किये जिससे उनको तकलीफ़ ना हो.
लेकिन भाभी पूरे जोश में आ गई थी, वो तो नीचे से गांड हिला हिला कर लंड ले रही थी.
मैं भी जोरों पर था और और एक हाथ से उनकी चूची भी दबा रहा था.
बहुत देर ये खेल चला!
“भाभी, क्या बस करूँ गांड की ठुकाई?”
“हाँ आशीष , अब जरा मेरी चूत पर जोर लगाओ!”
मैंने गांड से लंड बाहर निकाला और उनको घोड़ी बना कर उनकी चूत में डाल दिया और पूरी गति से कमर हिलाने लगा.
भाभी की सिसकारियाँ रुक रुक कर निकल रही थी जो के मेरे धक्के के कारण हो रहा था.
“भाभी, कैसा लग रहा है?”
“आशीष , मत पूछो! तुम अपना काम चालू रखो!”
“आशीष ! आआऽऽऽ आआआआअ… क्या मजा आ रहा है! मैं तो पागल थी जो तुम्हें चोदने को मना कर रही थी!”
“आशीष , मैं निकलने वाली हूँ मुझे कस लो आशीष ! आआऽऽऽ आआआआअ…! ”
मैंने भाभी की हालत जान ली और पीछे से उनको कस कर पकड़ लिया.
भाभी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर कस लिया जिस कारण मैं भी मचलने लगा.
“भाभी, ऐसे ही चूत से दबाओ मेरे लंड को! मैं भी निकलने वाला हूँ…भाभी ऽऽऽ! ”
और मैं और भाभी एक साथ झड़ने लगे. मेरे लंड का फव्वारा भाभी की चूत में खाली हो रहा था और भाभी भी अपनी चूत के होंट दबा दबा कर मेरा पूरा लंड खाली करवा रही थी.
“क्यों आशीष , मजा आया?”
“बहुत भाभी…बहुत मजा आया!”
“अरे अभी कहाँ? मजा तो अब तुझे दूंगी जो तुम जिन्दगी भर नहीं भूलोगे!”
और भाभी ने मेरा मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह में लिया और अपनी जबान से और दातों से उसे चूसने लगी. मेरी हालत तो ख़राब हो रही थी, एक तो पहले ही मैं दो बार झड़ चुका था.
“भाभी बस करो ना! अब मेरे लंड में दर्द हो रहा है!”
“आशीष , यह दर्द बस थोड़ी देर सहन करो! फिर देखो!”
थोड़ी देर बाद मेरी लंड में जान आने लगी और वो वापिस पहले की तरह तैयार हो गया. भाभी मेरे लंड को निहार निहार कर चाट रही थी. शायद उनको लंड चूसना बहुत ही पसंद था.
“आशीष , तुम्हरे लंड में तो बड़ा जोर हैं! यह तो तीसरी बार भी तैयार हो गया है?”
“यह तो आप के मुँह में लेने की कला के वजह से हो रहा है!”
“अब मेरी समझ में आया कि मेरी गांड में इतना दर्द क्यों हुआ! यह तो कितना बड़ा है!”
“अब आपको पता चला? जब चूत और गांड दोनों चोद कर हो गया?”
“अरे तुमने देखने ही कहाँ दिया? जब देखो मशीन चालू थी तुम्हारी!”
“हाँ भाभी! अब क्या करना है मुझे?”
“आशीष , चूत और गांड तो तुमने चोद दी! अब मैं तुम्हें मुँह चोदना सिखाती हूँ.
भाभी ने मुझे घोड़ा बना दिया और मेरे नीचे आ कर नीचे से मेरे लंड को पकड़ा.
“आशीष , जैसे तुमने मेरी चूत चोदी और मेरी गांड चोदी, उसी तरह अब मेरे मुँह को चूत समझ कर जोर से चोदो!”
मैंने जैसे ही अपनी कमर हिलाना चालू किया, भाभी ने अपने मुँह से कमाल दिखाना चालू किया, नए-नए तरीके से मेरे लंड को मुँह में चूस रही थी, कभी अपने होंटों का दबाव बना कर, कभी अपनी जबान से सहला कर मुझे पागल कर रही थी.
मैं भी अब पूरी गति से उनके मुँह में लंड को हिला रहा था. मैं अब घुटनों के बल बैठ गया और भाभी वैसे ही नीचे से सर हिला के अपने मुँह को खुद चुदवा रही थी.
मैंने एक हाथ पीछे किया और उनकी चूत में उंगली डाल दी. भाभी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी. अब मेरा बदन अकड़ने लगा था. भाभी अपने मुँह का कमाल दिखा रही थी. मैं अब अपने हाथों पर आ गया और कमर हिला हिला के भाभी का मुँह चोदने लगा.
भाभी पूरा लो! खा जाओ! मैं तो झड़ने वाला हूँ ऽऽ!!
और एक जोरदार धक्का लगाकर मैं उनके मुँह में झड़ गया. पहले की तरह भाभी ने मेरा वीर्य पूरा चाट लिया और मेरे लंड को साफ कर दिया.
फिर हमने उठ कर कपड़े पहन लिए.
“भाभी, मैं निकलता हूँ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा!”
“आशीष भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी! तो फिर आशीष कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी.”
तो दोस्तो! कैसी लगी मेरी आगे की कहानी?
अब तो मैं इतना चोदने का आदि हो गया हूँ कि जब तक दो बार झड़ता नहीं, मैं नीचे उतरता ही नहीं.
तो अब मैं 32 साल का हूँ और मुंबई में रहता हूँ.
मेरा नाम मोहित है. मैं देहरादून में एक बड़े वकील साहब के ऑफिस में टाईपिस्ट हूँ.
उनके तीन जूनियर वकील अस्टिटेंट थे, उनमें से एक अतुल नाम का भी वकील था, जो मेरा बॉस होता था. मैं उसी के काम को करने के लिए रखा गया था.
वो एक-दो बार मेरे साथ मेरे घर आया था.
अतुल दिलफेंक टाईप का था और उसकी उम्र भी लगभग 45 साल की थी.
उसके काफी सारे अफेयर भी थे, लेकिन उस सबसे मुझे कोई वास्ता नहीं था.
अब मैं अपनी बीवी के बारे में बताऊं, तो मेरी बीवी का नाम किरण है. उसकी हाईट 5 फीट 5 इंच है और उसका शरीर भरा हुआ है.
वो किसी फिल्म की ऐक्ट्रेस की तरह दिखती है. उसका 34-28 36 का फिगर है.
उसे सेक्स में चूत चटवाना बहुत पसंद है.
लेकिन पहले मुझे चूत चाटना जरा भी पसंद नहीं था, अब हो गया है. या यूं कहूँ कि पहले नहीं था, इसीलिए मेरी बीवी के साथ ये मामला हो गया था.
हुआ कुछ यूं कि एक दिन मैं अपने ऑफिस में गया.
लेकिन उस दिन बड़े बॉस नहीं आए थे, उनके सारे जूनियर आए हुए थे.
तभी बड़े बॉस का फान आया कि वह आज नहीं आ रहे हैं.
यह सुनकर अतुल नाम का वही जूनियर वकील तुरन्त ही ऑफिस से निकल गया.
उसके निकलते ही बॉस का फोन फिर से आया और उन्होंने कहा कि हम सब भी ऑफिस बंद करके आज छुटटी लेकर घर चले जाएं.
ये सुनते ही हम सभी भी अपने-अपने घर को निकल गए.
मेरा मन था कि आज घर जाकर बीवी के साथ सेक्स का मजा लूँ.
मैं एक किराये के घर में रहता हूँ. उसमें एक कमरा व रसोई है. वो घर भी ऐसी जगह है कि कोई आए-जाए, कुछ पता नहीं चलता क्योंकि ये कॉलोनी से थोड़ा एक ओर हट कर है.
जब मैं अपने घर पहुंचा तो मुझे अतुल वकील की बाईक मेरे घर के बाहर खड़ी मिली.
मुझे कुछ शक हुआ लेकिन सोचा मिलने आया होगा, या किसी काम से आया होगा.
ये सोचकर मैं अन्दर चला गया.
अन्दर कमरे में कोई दिखाई नहीं दिया तो मुझे थोड़ा शक हुआ.
अब मैं दबे पांव रसोई की तरफ जाने लगा.
वहां मेरी बीवी किरण वकील साहब के लिए चाय बना रही थी और वह भी वहीं खड़ा था.
यह देखकर मुझे थोड़ा अजीब लगा कि ये आदमी रसोई में क्या कर रहा है.
मैं छुप कर उन दोनों की बातें सुनने लगा.
वह मेरी बीवी से बातें कर रहा था.
अतुल- जान, बहुत दिन से तुम्हारे दूध की चाय पीने का मन था, इसलिए चला आया. तुम्हें बुरा तो नहीं लगा न?
किरण- नहीं सर, मुझे बुरा नहीं लगा. लेकिन अगर वह घर आ गए तो वह गलत समझेंगे.
अतुल- अरे तुम इतना क्यों डर रही हो, वह तो ऑफिस में है, शाम तक घर नहीं आएगा.
इतना बोलकर अतुल मेरी बीवी के पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा जिस पर मेरी बीवी ने ऐतराज किया.
लेकिन अतुल बोला- अरे डार्लिंग, तुम्हारी चूत का रस तो मुझे पागल बना रहा है, मैं तो बस वह रस पीने आया था.
उसकी इस बात से मैं समझ गया कि इन दोनों के बीच कुछ चल रहा है.
लेकिन मेरी बीवी किरण बोली- सर, वो सब तो ऐसे ही हो गया था लेकिन अब नहीं … मुझे डर लगता है.
तो अतुल ने कहा- किरण डियर डरो मत, तुम्हारे मुँह में मेरा लंड बहुत मजा देता है. प्लीज़ एक बार लो ना!
बस इतना बोलकर अतुल ने पीछे से मेरी बीवी के 34 साइज के मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
इस बार मेरी बीवी ने ना ही अतुल को इंकार किया और न ही समर्थन.
अतुल मेरी बीवी के दूध सहलाता रहा और साथ ही उसने अपने एक हाथ को साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया.
वो साड़ी के ऊपर से ही चूत में उंगली करने लगा.
उससे मेरी बीवी को शायद मजा आने लगा और उसके मुँह से मादक कराहें निकलने लगीं.
किरण- आह … रहने दो न यार … क्यों मेरी आग भड़का रहे हो?
वो मेरी बीवी के गाल चूमता हुआ बोला- सच में किरण मेरी जान, तुम मस्त माल हो. तुम्हारे दूध तो मेरी जान ही निकाल देते हैं.
किरण- एक बार तय कर लो कि मेरे दूध ज्यादा मजा देते हैं या चूत!
अपनी पत्नी किरण के मुँह से ये सुनकर मेरी समझ में आ गया कि किरण की चूत में आग लग चुकी है और वो अब चुदे बिना नहीं रह पाएगी.
उसकी बातों से मेरे लंड में भी तनाव आने लगा और मुझे भी अपनी बीवी की चुदाई होते देखने का मन करने लगा.
उन दोनों को देखकर साफ़ लग रहा था कि मेरी बीवी को अतुल के साथ काफी मजा आ रहा था.
तभी अतुल बोला- कमरे में चलो ना किरण, मुझे तुम्हारी चूत का रस पीना है.
इतना कह कर वो मेरी बीवी के होंठों को चूसने लगा.
वो बोली- अभी मेरे होंठ तो चूसो यार. क्या इधर मजा नहीं आ रहा है?
अतुल बोला- अरे मेरी जान, तुम्हारा हर अंग का रस पीने में मजा आता है. बस इधर जगह कम है न … इसलिए कह रहा हूँ कि कमरे में चलो.
इतना कह कर अतुल ने गैस बंद करके चाय बनाना बंद कर दिया और कहा- मैं चाय नहीं, तुझे पीने आया हूँ. अपने मातहत की बीवी की लेने में जो मजा आता है, वो और कहीं नहीं आता.
मेरी बीवी अतुल का लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
अतुल ने भी मेरी बीवी की साड़ी ब्लाउज उतार कर वहीं गैस के बगल की स्लिप में ही रख दिया.
उससे रुका नहीं गया और वो मेरी बीवी को स्लिप पर बिठाकर उसके दोनों पैरों को खोलकर उसकी टांगों के बीच में आ गया.
मेरी बीवी भी मचलने लगी.
अतुल मेरी बीवी के पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर धक्के मारने लगा.
वो अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाता रहा और साथ ही मेरी बीवी के रसीले होंठों को चूसने लगा.
अब इस सबसे मेरी बीवी को भी मजा आने लगा था और वह भी बोलने लगी थी- आपकी पैंट में उभरे लंड को देखकर ही मुझे पहली बार ही आपके साथ करने का मन होने लगा था लेकिन आप तो बड़े तेज निकले, जो नजर देखते ही पहचान गए. आपका चूत चाटना तो मुझे पागल ही कर देता है. मेरे हसबेंड तो मेरी टपकती चूत का रस कभी चखते ही नहीं हैं. मेरा कितना मन करता है कि जैसे मैं उनका लंड चूसती हूँ, वैसे ही वह मेरी चूत भी चाटें लेकिन वह नहीं करते. जब आपने मेरी चूत चाटी, तो मुझे समझो जन्नत मिल गयी.
फिर अतुल ने कहा- चलो ना किरण, अपनी टपकती चूत को लेकर कमरे में चलो, वहां आराम से चाटूंगा भी और तुझे अच्छे से तसल्ली से चोदूँगा भी!
किरण बोली- नहीं जी, आज तो आप यहीं स्लैब पर मेरी चूत को चाटोगे और चोदोगे भी. चलो अपने घुटनों पर आ जाओ और यहीं चाटो ना. देखो कितना पानी बह रहा है!
यह सुनकर अतुल अपने घुटनों के बल बैठ गया और मेरी बीवी किरण की चूत चाटने लगा.
किरण को भी मजा आने लगा और वो भी अतुल का सर पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
करीब 5 मिनट तक चूत चाटने के बाद अतुल खड़ा हो गया, उसने अपना लंड निकाल कर मेरी बीवी को दिखाना शुरू कर दिया.
उसका लंड लगभग 6-7 इंच का था और मोटा भी तीन से साढ़े तीन इंच का होगा.
वो लंड हिलाता हुआ मेरी बीवी किरण से बोला- चलो डार्लिंग, अब इसे अपने मुँह में लेकर मस्त चाटो ताकि अच्छे से गीला होकर आहिस्ता से तुम्हारी चूत में चला जाए. तुम्हें याद है ना पिछली बार सूखे लंड से तुम्हें कितना दर्द हुआ था?
मेरी बीवी किरण बोली- हां, पिछली बार आपने मेरी चूत बहुत छील दी थी. आज तो मैं इसे अच्छे से अपने थूक से गीला करूंगी, जिससे मुझे भी मजा आए. पिछली बार तो बस आप ही मजे लेकर चले गए थे.
फिर मेरी बीवी किरण घुटनों पर बैठकर अतुल का लंड चूसने लगी.
करीब 5 मिनट चूसने के बाद अतुल ने मेरी बीवी को स्लिप पर ही उसके पैर चौड़े करके बिठा दिया.
फिर उसने अपना लंड मेरी बीवी की चूत पर सैट करके एक धक्का दे मारा.
जिससे मेरी बीवी चिल्ला पड़ी, किरण बोली- आह यार थोड़ा आराम से चोदो ना! … आपका बहुत मोटा है.
लेकिन अतुल ने उसकी नहीं सुनी और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत में धक्के मारता रहा.
वो मेरी बीवी को चोदने के साथ साथ कह रहा था- तुझ जैसी कमसिन कली की चूत तो रगड़ कर मारने में ही मजा आता है मेरी जान!
मेरी बीवी किरण सिसकारती रही- आह प्लीज़ … थोड़ा तो रहम करो अपने मातहत की बीवी पर … आह आगे भी तो आपको यह चूत मारनी है … प्लीज़ आह यार प्लीज़ आराम से चोद लो.
थोड़ी देर बाद चूत ने भी उसके बड़े लंड को लेने के लिए अपना मुँह और खोल लिया.
इसके बाद मेरी बीवी किरण को भी मजा आने लगा और वो अतुल को अपनी तरफ खींचने लगी.
मेरी चीटिंग वाइफ सेक्स करती रही, साथ ही कहती भी रही कि आह और जोर से मारो मेरी … मजा आ गया … और जोर से आह और जोर से … आह!
ऐसे ही तकरीबन आधा घंटा तक मेरे बॉस ने मेरी बीवी की चुदाई की और उसके बाद अपना लंड बाहर निकाल लिया.
मैं सोच में पड़ गया कि इसने ऐसा क्यों किया.
उसने मेरी बीवी से कहा- चलो नीचे आ जाओ घुटनों पर, आज मैं तुमको अपना अमृतपान करवाता हूँ. पिछली बार रह गया था.
उसकी बात को सुनकर मेरी बीवी बैठ गयी और अतुल अपने लंड पर मुठ मारने लगा.
कुछ ही देर बाद उसने अपना वीर्य मेरी बीवी के मुँह में डाल दिया जिसको मेरी बीवी ने अपने मुँह में भर लिया.
अतुल ने भी जबरदस्ती मेरी बीवी के मुँह में झड़ने के बाद अपना लंड ठूंस दिया.
जिससे मेरी बीवी को रस पीना पड़ा.
उसको वीर्य पीने में मजा भी आया. यह उसके चेहरे को देखकर साफ़ समझ आ रहा था.
अब सब खेल खत्म हो चुका था और कहीं न कहीं मुझे भी यह अच्छा लगा था.
उसके बाद मैं वहां से निकल गया और मेरे दिमाग में भी कुछ और पकने लगा था.
ठको, यह मेरी पहली कहानी है, जो मैं Antarvasna Sex Stories अपनी सहेलियों की मदद से लिख रही हूँ … इसमें कुछ तो वास्तविक है … और कुछ कहानी को दिलचस्प बनाने के लिये अलग से अंश जोड़े गये हैं।
सर्वविदित है कि जवानी बड़ी जालिम होती है। ये जाने लड़कों और लड़कियों से क्या क्या करवा बैठती है। मुझे भी अपने कॉलेज के समय में एक लड़के से दोस्ती हो गई थी। उसका नाम सुधीर था। हम लोग मिलने के लिये अक्सर एक झील के किनारे आते जाते थे। यूं तो वहा कितने ही जोड़े आते थे। पर वो सभी अपने आप में व्यस्त रहते थे। हम लोग वहां बस चाट और ठण्ड़ा ही लेते थे और बस यूँ ही बतिया कर चले आते थे।
पर हां, मेरे दिल में अब कुछ कुछ होने लगा था। मैं आज से चार साल पहले चुदाई का लुफ़्त उठा चुकी थी, पर फिर मै डर गई थी कि यदि मुझे गर्भ रह जाता तो क्या होता? पर नहीं हुआ। फिर कुछ दिन और चुदाया पर सावधानी रखी। आज फिर दिल में कुछ ऐसा ही हो रहा था। पर आजकल मैं भी औरों की तरह पिल्स के बारे में जानती थी, और साथ में रखती थी।
एक दिन एक अच्छी अंग्रेजी पिक्चर देखने का सुधीर ने प्रोग्राम बनाया । कहता था कि मस्त मूवी है … मजा आ जायेगा। कॉमेडी मूवी थी। मैं उसका मतलब खूब समझ रही थी। वो हॉल में मुझसे खेलना चाहता था। जैसे ही मुझे ये लगा, मेरी चूत में पानी उतर आया। मैं मजे लने के लिये तैयार थी। मेरी चूंचिया मसलवाने के लिये तड़प उठी। मेरी चूत में कोई अंगुली करे … हाय ये सोच कर मेरा शरीर वासना से भर उठा।
हम दोनों हाल में गये और एक कोने में बैठ गये … कम ही लोग थे। सुधीर बहुत ही उत्तेजित लग रहा था। बार बार मूवी की तारीफ़ कर रहा था। मुझे भी लगा कि जरूर मूवी अच्छी ही होगी। मूवी चालू हो चुकी थी। मुझे अंग्रेजी कम ही आती थी सो चुपचाप बैठी रही। सो सब कुछ सर के ऊपर से निकल रहा था। जब सब हंसते तो मै भी हंस देती थी। जोश में सुधीर मुझे हंसते हुये कभी पीठ पर मार देता था कभी कंधे पर। पर अब तो उसने मेरा हाथ भी पकड़ लिया था। मुझे झुरझुरी आने लग गई थी। मैं अपने आप को हर प्रकार से तैयार कर चुकी थी। मुझे लगा कि वो जल्दी से मेरी चूंचियाँ दबा दे … हाय राम … मेरी चूत में अंगुली घुसा कर मस्त कर दे … पर मैंने कुछ कहा नहीं, उसका हाथ और मेरा हाथ आपस में मिले हुये थे। वो कभी कभी मेरा हाथ दबा देता था।
अब धीरे से उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख लिया। मुझे दिल में गुदगुदी सी हुई। मुझे लगा कि कुछ ही देर में वो मेरी चूंचियो पर आ ही जायेगा। पर्दे पर चूमने का दृष्य चल रहा था। उसने भी मुझे गले से खींच कर अपने पास कर लिया और चुम्मा ले लिया। मै जान कर के उससे चिपक सी गई। हमारे सामने वाला जोड़ा जो साईड में सामने बैठा था, बिना किसी हिचकिचाहट के लड़की के बोबे मसल रहा था और उसे चूम रहा था। मैं तो उन्हीं को देख देख कर उत्तेजित हो रही थी।
अचानक मुझे अब अपनी चूंचियो पर दबाव मह्सूस हुआ। सुधीर का हाथ मेरे स्तन को सहलाने लगा। हाय रे मजा आ गया … मैं झुक कर दोहरी हो गई।
“ना करो, सुधीर … हाय हाथ हटा लो … ” मैंने भी शरीफ़ लड़की की तरह नखरे दिखाये।
“रजनी, कितने कठोर है तुम्हारे बोबे … मस्त है यार … ” सुधीर वासना भरे स्वर में बोला।
“आह … बस करो … ” मेरी सिसकी निकल पड़ी। पर सुधीर कहा मानने वाला था। उसका वो हाथ ऊपर से मेरी ब्रा में घुस गया और मेरी नरम नरम सी चूंचियां मसलने लगा।
उसने दूसरे हाथ से मेरा चेहरा ऊपर कर लिया और अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। अब मेरा हाथ भी उसकी जांघो पर रेंगने लगा था। मेरे निपल कड़े हो गये थे और वो उसकी अंगुलियों के बीच में घुमा घुमा कर मसले जा रहे थे।
मेरा शरीर भी वासना से भर उठा। मैंने अपना सीना थोड़ा सा और उभार लिया ताकि वो मेरी चूंचियाँ भली प्रकार से दबा सके। उसका कड़क … मेरे हाथों में आ चुका था। मैंने कोशिश करके उसकी ज़िप खोल दी।
पर अन्दर चड्डी के रूप में एक बाधा और थी। जल्दी ही ये बाधा भी मैंने पार कर ली और उसका मूसल जैसा लण्ड पकड़ ही लिया। गरम गरम कड़ा डण्डा, थोड़ा जोर लगाया तो वो पेण्ट से बाहर आ गया।
“हाय रे … ये तो बहुत मोटा है … देखो तो कैसा हो रहा है … ” मैंने सिसकते हुये कहा।
उसके सुपाड़े के सिरे पर चिकनापन लग रहा था, शायद उत्तेजना में उसमें से चिकनाई बाहर आ गई थी। उसने भी अपना हाथ मेरी छातियों पर से हटा कर मेरी चूत पर रख दिया था। मेरी सलवार के अन्दर हाथ घुसा कर मेरी गीली चूत को रगड़ दिया।
“मैं मर जाऊंगी रे … धीरे से करना … ! ” उसका हाथ जैसे ही मैंने अपनी चूत पर मह्सूस किया, उसे धीरे से समझा दिया। मेरी गीली चूत में उसकी अंगुली उतरी जा रही थी, मैंने भी अपनी चूत को थोड़ा सा ऊपर उठा कर उसे अंगुली घुसाने में सहायता की। मेरा जिस्म अब मीठी मीठी गुदगुदी से भर चुका था।
“रजनी, चुदोगी क्या … मेरे लण्ड की हालत खराब हो रही है … ” उसकी सांस फ़ूली सी लगी। उसने मेरे मन की बात कह दी। चूत फ़ड़क उठी।
“हां सुधीर … चुदने के चूत बेताब हो रही है … पर कैसे … ” सिसकती हुई सी बोली।
“मेरे घर चलें क्या ? वहाँ कोई नहीं है … मस्ती से चुदना … “
“हां हां … जल्दी चलो … ” और हम दोनों ने खड़े हो कर अपने आप को ठीक किया और हॉल के बाहर आ गये। सुधीर वहां से सीधे अपने घर ले गया … मैंने चेहरे पर कपड़ा बांध लिया था कि कोई पहचाने ना … । सुधीर ने ताला खोला और हम जल्दी से अन्दर आ गये।
मुझे भी अब लग रहा था कि बस एक बार तबियत से चुद जाऊं तो मेरा जी हल्का हो जायेगा।
उसने मुझे चाय के लिये पूछा पर यहाँ चाय की नहीं चुदाने की लगी हुई थी।
“चाय छोड़ो ना सुधीर, चलो बिस्तर पर चलते हैं … “
“रजनी … लगता है तुम्हारा बुरा हाल है … मेरे लण्ड को तो देखो , साला पेण्ट ही फ़ाड़ कर बाहर आ जायेगा।”
मुझे एकदम से हंसी आ गई। उसने पेन्ट की ज़िप खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। पहली बार इतने बड़े लण्ड के दर्शन हुये। मैं जैसे ही आगे बढ़ी, उसने मुझे रोक दिया।
“पहले रजनी तुम अपने कपड़े उतारो … तुम्हारी फ़ुद्दी देखनी है … ” सुधीर ने फ़रमाईश कर दी। मैं शरमा गई।
“धत्त … शरम नहीं आयेगी … ? ” मैंने नारी का धर्म अदा किया।
“शरम नहीं रे … नशा आयेगा तुम्हे नंगी देख कर … लण्ड फ़ड़फ़ड़ायेगा … कड़का कड़क हो जायेगा … “
“हाय रे … ऐसा मत बोलो … तुम्हारा लण्ड देख कर ही मेरी फ़ुद्दी तो वैसे ही लप लप कर रही है … “
“तो प्लीज उतारो ना … ” उसने अपना लण्ड मुझे दिखाते हुये मसला। मुझे हालांकि बड़ी शरम आ रही थी पर इस दिल का क्या करूँ, सो झिझकते हुये मैंने कपड़े उतार ही दिये। पंखे की हवा मेरे नंगे बदन को सहलाने लगी। मैं शरम के मारे नीचे बैठ गई। पर नीचे बैठते ही मेरे चूतड़ उभर कर खिल उठे। दोनों तरबूज सी फ़ांके अलग अलग हो गई। सुधीर भी नंगा हो चुका था। उसका लण्ड मेरी गाण्ड देख कर फ़ूल उठा। उसका तनतनाता हुआ बलिष्ठ लण्ड जैसे मेरी चूत को न्योता दे रहा था।
“रजनी तुम्हारा बदन तराशा हुआ है … जरा दोनो टांगे चौड़ी करो … अपनी फ़ूल जैसी चूत तो दिखा दो … यूँ सिकुड़ कर मत बैठो।”
“हाय … नहीं जी … ऐसे तो सब दिख जायेगा ना … ” फिर भी मैंने हिम्मत करके टांगे चौड़ी करके अपनी गीली चूत खोल दी। सुधीर मचल सा पड़ा।
“रजनी, लड़कियां मुठ कैसे मारती है … मार कर बताओ ना … चूत में अंगुली करती हो ना …? “
“चलो हटो जी … मुझे क्या बेशर्म समझ रखा है … अच्छा तुम मुठ मार कर बताओ … “
सुधीर ने अपने मोटे से लण्ड की सुपाडे पर से चमड़ी ऊपर हटाई और लण्ड को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उसे पकड़ कर हाथ ऊपर नीचे चलाने लगा। उसका सुपाड़ा लाल होने लगा और फ़ूलने लगा। मेरे दिल पर छुरियाँ चलने लगी … हाय चूत की जगह मुठ में उसका लण्ड मसला जा रहा था। उसके सुपाड़े पर चिकनाई की दो बूंदें तक उभर आई थी। मेरा हाथ अपने आप ही चूत की तरफ़ बढ़ गया और दाने पर आ गया। उसे मैं हल्के हल्के सहलाने लगी। मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। मेरी अंगुली भी चूत में घुसने लगी।
“हां … हां … रजनी, और करो … आपकी चूत कैसी लपलपा रही है … ” उसकी आवाज में वासना भरी हुई थी।
मेरे बाल बिखर गये थे, लटें माथे पर लहराने लगी थी। मेरी दोनों टांगें कांपने लगी थी। चूत में अंगुली सटासट अन्दर बाहर जा रही थी। उधर मेरी नजरें सुधीर पर पड़ी, वो जोर जोर से लण्ड पर हाथ चला रहा था। उसका सुपाड़ा लाल हो गया था, फ़ूल कर मोटा हो चुका था। उसकी आंखे नशे में बंद सी हो गई थी। हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुठ मारे जा रहे थे।
“हाय, सुधीर और जोर से मुठ चलाओ, क्या लण्ड है राम … चला हाथ जोर से … आह्ह्ह्ह्ह”
मैं ज्यों ही उठ कर उसके पास पहुंची,
” रजनी, ऐसे ही मजा आ रहा है … तुम वहीं जाओ … तुम उधर मुठ मारो ! मैं इधर मारता हूँ … चल घुसा दे फिर से अपनी अंगुली … ” उसकी सांस फूल उठी थी।
वो मना करता रहा पर मैंने जाकर उसके लण्ड को अपने दोनों हाथो से पकड़ लिया और उसके लाल लाल फ़ूले हुये सुपाड़े पर अंगुलियाँ फ़िराने लगी। उसके सुपाड़े को मलने से उसमें से चिकनाई की दो बूंदें और निकल आई। आनन्द में वो डूब रहा था। मुझे ऐसा करते देख उसने मेरी चूंचियों को पकड़ लिया और उसे दबाने लगा और निपल को अंगुलियों से हल्के हल्के दबाने और घुमाने लगा। मेरी मस्ती और वासना, मर्द के हाथों से मसले जाने से और बढ़ती गई।
अब वो मेरे निपल जोर जोर से मलने लगा था। मैं नशे में उसके लण्ड को जोर जोर से मुठ मारने लगी थी। मेरे हाथ बहुत ही तेजी से उसके लण्ड पर ऊपर नीचे हो रहे थे। उसकी सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी।
अचानक उसने मेरी फ़ुद्दी में अपनी दो अंगुलियाँ डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। इस से मेरी उत्तेजना तेजी से बढ़ने लगी, लगा कि चुद रही हूँ। मुख से आह की आवाजें निकलने लगी। शायद सुधीर को अहसास हुआ कि यदि ऐसे ही उसका लण्ड मेरे हाथों में फ़िसलता रहा तो उसका वीर्य निकल जायेगा। उसने मुझे नीचे दबा लिया और मुझसे लिपट पड़ा। हमारे नंगे शरीर बिस्तर में आपस में रगड़ खाने लगे।
उसका लण्ड मेरी चूत को ठोकर मारने लगा। मेरा मन सिहर उठा, लौड़ा लेने को आतुर हो उठा। मेरी चूत उसके लण्ड को लपकने की कोशिश कर रही थी, और अन्त में सफ़ल हो ही गई। उसका लण्ड चूत में समाता चला गया। मेरे मुख से खुशी की सीत्कार निकल पड़ी। सुधीर भी तड़प उठा। ऊपर से उसने अपने शरीर का बोझ मेरे पर डालना आरम्भ कर दिया। मैं दबती गई। आनन्द मेरे जिस्म में भरता गया।
सुधीर ने अब अपने चूतड़ ऊपर खींच कर फिर से मेरी चूत पर पटक दिए … उसका लण्ड मेरी चूत में जड़ तक चीरता हुआ घुस गया। मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ पर कसक भरी मिठास का अहसास अधिक हुआ।
“और जोर से चोद दे मेरे राजा … हाय … लण्ड़ पूरा घुसेड़ दे रे … मेरी मांऽऽऽऽऽऽ … ” मैं आनन्द से सिसकने लगी।
“ले … मेरी रजनी … मेरा पूरा लण्ड ले ले … तू तो मजे की खान है रे … ” वो मुझे भींच भींच के चोदने लगा। मेरी चूंचियों की हालत खींच खींच कर खराब कर दी थी। मैं नीचे से जोर से अपने चूतड़ उछल कर लण्ड ले रही थी। साला क्या चूत में गुदगुदी मचा रहा था। उसका मोटा लण्ड मेरी चूत की दीवारों से रगड़ता हुआ चोद रहा था। अचानक मेरे शरीर में ऐठन सी हुई और मुझे लगा कि मैं तो गई … ।
तेज मीठी सी आग भड़की और फिर जैसे पानी के ठण्डे छींटे पड़े … मेरा रज छूट पड़ा। मेरी चूत पानी से भरने लगी। मेरी चूत लहरा लहरा कर जोर लगा कर पानी छोड़ रही थी। पर उसका लण्ड था कि मेरी चूत को रोंदे जा रहा था।
मेरे मुख से अब मस्ती की सिसकियां की जगह दर्द की कराह निकल रही थी। इतनी कस कर चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी। पर आह्ह्ह रे … मेरी चूत में उसके लण्ड ने ठण्डक कर दी। मुझसे लिपटते हुये उसने अपना वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया। मैंने अपने दोनों हाथ फ़ैला दिये और बिस्तर पर पसर गई। उसका लण्ड मेरी चिकनी चूत में से फ़िसल कर बाहर आने लगा। उसके सिकुड़ कर निकलने से मेरी चूत में गुदगुदी सी हुई और लण्ड बाहर आ गया। चुदने के कारण मैं मस्ती में बस आंखे बंद करके यूँ ही पड़ी थी। सुधीर मेरे ऊपर से हट गया और मेरी चूत पर लगे वीर्य और चिकनाहट को चाटने लगा। उसके चाटने से मुझे चूत में फिर से गुदगुदी उठने लगी … कुछ ही देर में मुझे फिर से तरावट आने लगी। मैंने सुधीर को हटा दिया और उसके लण्ड पर लगे वीर्य का थोड़ा सा रस चाटने के लिये उसका लण्ड मुख में घुसा लिया और उसे चूसने लगी। कुछ ही देर में उसका लण्ड फिर से टनटना उठा। मैंने मुठ मारते हुये उसे और उत्तेजित किया। फिर सीधे खड़ी हो गई।
“बस सुधीर अब चलें … देखो शाम होने को है … “
“अच्छा … बस एक किस … फिर तुम्हें छोड़ आता हूँ।”
पर सुधीर के मन की इच्छा कुछ और ही थी। मैं जैसे ही पलटी, वो मेरी पीठ से चिपक गया। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने के लिये जोर लगाने लगा।
“अरे नहीं करो सुधीर … मुझे लग जायेगी … “
“नही रजनी , तुम्हारी गाण्ड गजब की है … बिना मारे मुझे तो चैन नहीं आयेगा !”
मेरी गाण्ड के छेद में लण्ड का घर्षण होने लग गया था। मैंने नाटक करते हुये अपनी दोनों टांगे चौड़ी कर दी। मुझे वास्तव में आनन्द आने लगा था। अभी मेरा गाण्ड का छेद तो प्यासा था ही …
“अरे यार फ़ट जायेगी ना तुम्हारे मोटे लण्ड से … हाय रे धीरे से करो …
आआईईईई … मर गई रे … “
उसका सुपाड़ा छेद में दाखिल हो चुका था। मुझे बड़ा सुहाना सा लगा। मैंने मुस्करा कर पीछे सुधीर को देखा, वो भी खुश था कि उसे एक कॉलेज गर्ल की ताजी गाण्ड मारने को मिल रही थी … हम दोनों ही मस्त हो रहे थे …
पीछे से मेरी गाण्ड चुदी जा रही थी … हम दोनों खुशी में किलकारियां मार रहे थे … अपने चूतड़ों को हिला हिला कर चुदाई का मजा ले रहे थे … मस्ती में डूबे जा रहे थे … Antarvasna Sex Stories
मैं आज आप सबको यह सच्ची कहानी बता Sex Stories रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी साली को चोदा।
यह उन दिनों की बात है जब मेरा रिश्ता पक्का हुआ था। मेरी बीवी की 3 बहने हैं। एक बड़ी ओर दो छोटी।
सगाई के बाद मैं एक बार किसी काम से अपनी बड़ी साली के घर पर गया तो पता चला कि उसका पति टूर पर बाहर गया हुआ है और 3 दिन में वापिस आएगा।
मैं वहाँ रात को पहुँचा था। मेरी साली मुझे देख केर बहुत खुश हुई। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई थी। खाना खाने के बाद हम बातें करने लगे। मेरी बड़ी साली का नाम रीना है।
बातें करते करते मैंने कहा- मुझे नींद आ रही है तो उसने मुझे अपने साथ वाले कमरे में सोने को कहा। थोडी देर के बाद रीना मेरे पास आ कर बैठ गई।
मैंने शरारत में कहा- साली जी! क्या ख्याल है! आप के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे।
तो वह बोली- यह जीजा साली का रिश्ता होता ही है ऐसा कि इसमें शरारत तो होती ही है। उसने नाईट गाऊन पहन हुआ था। मैंने धीरे से अपना पैर उसके पैर से छू दिया तो वोह मुस्कराने लगी।
मैं समझ गया कि मामला साफ़ है। मैंने उसे कहा- रीना पास आ जाओ और वोह मेरे पास आ कर लेट गई।
मैंने उसे कहा- तू कितनी सेक्सी है!
तो वह बोली- शर्म नहीं आती! साली पर लाइन मार रहे हो?
तो मैं बोला- अब तो साली की चूत मारूंगा!
यह सुन कर वोह मेरे से लिपट गई। मैंने उसका गाऊन उतार दिया, अब वोह बिल्कुल नंगी थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और उस से लिपट गया और उस पर टूट पड़ा। मैंने उसके नंगे बदन को चूमना और काटना शुरू कर दिया।
वोह भी गर्म हो गई और कहने लगी- जीजू अपनी साली को चोद दो। जब से तुम्हें देखा है, तुमसे चुदने के लिए तरस रही हूँ!
मैंने अपना लण्ड उसके मुहँ में डाल दिया और वोह उसे प्यार से चूसने लगी।
फिर वोह बोली- मुझे अपने ऊपर आने दो।
वह मेरे ऊपर आ गई और मेरा लण्ड अपनी चूत में डाल कर आगे पीछे होने लगी और मेरे मुहँ में अपना निप्पल डाल दिया।
मैं उसके निप्पल को चूसने लगा और वोह झड़ गई।
फ़िर मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे काफी देर तक चोदा।
उसके बाद 3 दिन तक उसे रोज 3-3 बार चोदा। मैंने उससे बाकी सालियों को चोदने के बारे में भी पूछ लिया जो मैं आप को बाद में बताऊँगा।
मैंने अपनी शादी वाले दिन अपनी छोटी साली को कैसे चोदा। Sex Stories
मैं एक शानदार शरीर का मालिक हूँ. बचपन Antarvasna से ही बॉडी बिल्डिंग और जुडो कराटे में रूचि होने के कारण हमेशा से ही बहुत सी लड़कियों की नज़रों में चढ़ा रहा हूँ. आज कल इंजीनियरिंग कोचिंग का मालिक होने के कारण तो मेरे आस पास बहार छाई रहती है. यदि आपको नहीं पता तो बता दूं कि 52 इंजीनियरिंग कॉलेज होने के कारण भोपाल बहुत ही हॉट है. आप फैशन देख देख कर के पागल हो जायेंगे और इंजीनियरिंग हॉस्टल की लड़कियों का तो कहना ही क्या. जवानी, आजादी, पैसा और कांफिडेंस तो इनमें कूट कूट कर भरा है.
ऐसे ही तीन लड़कियों का ग्रुप मेरी कोचिंग में आया, और इंजीनियरिंग कोर्सेस के बारे में जानकारी लेने लगा. अपने चैंबर से मैंने उन्हें देखा तो एक शक्ल कुछ जानी पहचानी लगी. अपनी रिसेप्शनिस्ट (वो भी बड़ी सेक्सी है, उसकी कहानी फिर कभी) को इंटरकॉम पर बोला तो उसने उन्हें मेरे पास भेज दिया.
एक लड़की मुझे देखते ही चौंक गयी- अरे सर आप !
3 दिन पहले ही मैंने उसे स्कूटी से गिर पड़ने के कारण अपनी कार से उसके हॉस्टल छोड़ा था, और उसकी स्कूटी मेरा ड्राईवर लेकर आया था. उस वक़्त उसने मेरा कार्ड ले लिया था.
मैंने उन्हें बैठने को कहा और उससे उसकी तबियत पूछी, उसने कहा कुछ नहीं हुआ, आपकी वजह से मैं उस दिन बच गयी नहीं तो मैं तो शायद बेहोश ही हो गयी थी,
उसने अपना नाम बताया, सुमन और उसकी दोनों सहेलियां थी सिमरन, और पिंकी.
तीनो इंजीनियरिंग की स्टूडेंट्स थी, और कोर्स करना चाहती थी.
नए बैच में तीनो ने एडमिशन ले लिया. (डिटेल मैं जानबूझ कर छुपा रहा हूँ, और नाम भी दूसरे बता रहा हूँ, क्योंकि डिग्निटी भी कोई चीज़ है, और मैं अपने किसी दोस्त का नुकसान नहीं चाहता.)
पढाते पढाते मैं कई दिनों तक देखता रहा कि सुमन एकटक मुझे देखती रहती है, अच्छे और अंग-प्रदर्शित कराने वाले कपडे पहनना, हंस कर बात करना, सट कर सवाल पूछना तो सभी लड़कियों की आदत है पर इसमें कुछ बात तो थी, मैं भी पुराना खिलाड़ी हूँ।
कुछ दिन बाद जब वो अकेले कुछ पूछने मेरे चैंबर में आई तो मैंने कहा कि कुछ पढाई पर भी ध्यान देती हो या मेरी शकल ही देखती रहती हो?
उसने छूटते ही जवाब दिया सर आपकी शकल ही।
मैंने मुस्कुरा कर कहा- क्यों?
बोली- आप ऊपर से नीचे तक हो ही देखने लायक !
मैंने कहा- तुम्हे कैसे पता?
वो बोली- मुझे जिस दिन आपने मुझे गोद में उठा कर अपनी कार मैं बिठाया था, उसी दिन मैं आपके एक एक मस्सल को नाप चुकी हूँ।
उसकी बेबाकी से मैं तो खिल उठा, मैंने कहा- दुबारा नापने के लिए फिर मत स्कूटी से गिर पड़ना !
वो बोली- नहीं ! अब सीधे आप पर ही गिरूंगी !
मै कुछ कहता, इसके पहले ही बाकी स्टुडेंट आ गए और वो कुछ खुश कुछ प्यासी सी बाय कर के चली गयी।
दो दिन तक आँखों ही आँखों में नैन-मटक्का और कुछ शिकायत, कुछ प्यार वो छलकाती रही, और शुक्रवार को अचानक वो बोली- सर पचमढ़ी का कुछ आईडिया है आपको?
मैंने पूछा- क्यों?
बोली हम तीनों शनिवार, रविवार को पचमढ़ी घूमना चाहते हैं, सुना है बहुत सुंदर जगह है !
मैंने कहा- है तो, पहले नहीं घूमा क्या?
बोली नहीं- हम तो सब यहाँ के है ही नहीं! मैं पुणे की हूँ, सिमरन अमृतसर की और पिंकी लखनऊ की, आप बताइए कैसी जगह है?
मैंने कहा है- तो अच्छी लेकिन हनीमून के लिए !
वो बोली- तो फिर आप भी चलिए!
मेरी तो निकल पड़ी, मैंने कहा- चलूँगा तो लेकिन फिर हनीमून मनाना पड़ेगा सोच लो !
बोली- आप चलिए तो सही !
प्रोग्राम तय हुआ, मैं और मेरा पार्टनर सनी दोनों और वो तीनों मेरी कार से निकल पड़े शनिवार की सुबह।
सनी को तो मैंने कार चलने पर लगा दिया और पिंकी भी आगे बैठ गयी वो सबसे शर्मीली लड़की थी। मैं सुमन और सिमरन पीछे बैठ गए, सुमन ने जिद करके मुझे बीच में बिठा दिया।
दोनों ही मस्त 5 फीट 5 इंच के ऊपर लम्बाई की थी और तीनों के बूब्स बिल्कुल तने हुए थे, ऊपर से स्किन टाइट जींस पहन रखी थी। सुमन और पिंकी ने। जबकि सिमरन स्कर्ट पहने थी पिंक रंग का।
सिमरन और कैटरिना कैफ में शायद 18-20 का फर्क होगा और सिमरन कैटरिना से दो कदम आगे ही थी, फिगर रंग और बूब्स में। घुटनों तक लम्बे बाल और चिकनी चमकती स्किन, प्राकृतिक गुलाबी होंठ और गाल।
सुमन जो कि एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी, सांवली लम्बी और बिल्कुल तराशे हुए बदन की मालकिन, लेकिन उसके बूब्स और रोम रोम बिल्कुल अलग से खिले हुए थे साथ ही उसकी बेबाक बातचीत किसी तो भी गरमाने के लिए काफी थी।
जबकि पिंकी एक बिल्कुल मासूम सी शक्ल की कश्मीरी टाइप की लड़की थी, लम्बाई करीब पांच फ़ीट 3 इन्च, जबकि शरीर भरा हुआ लेकिन कमर तो शायद थी ही नहीं, उसके गाल इतने गुलाबी थे जैसे शरमाने पर गोरी लड़कियों के हो जाते हैं, लेकिन उसकी आँखें बताती थी कि उसने दुनिया में कुछ देखा ही नहीं है।
जबकि सुमन की आँखें और बातें साफ़ बता देती थी की उसने दुनिया का पूरा मजा लूटा है और आगे भी लूटना चाहती है।
मैं दोनों के बीच मैं बैठा उनसे बातें शुरू कर चुका था, दोनों की जांघें मेरी जाँघों से सटी हुई थी और सिमरन और सुमन दोनों के बाल उड़ उड़ कर मेरे चेहरे पर आ रहे थे, धीरे धीरे मैंने सुमन की जाँघों पर अपनी जांघें रगड़ना शुरू किया और वो भी मुस्कुराने लगी। माहौल तो मैं समझ ही चुका था, तीन जवान लड़कियां 2 दिन एक रात वो भी दो जवान अंजान लड़कों के साथ बिना किसी जान पहचान के, सुमन का खेल तो पक्का था, अब मेरा ध्यान सिमरन और पिंकी पर भी था, साथ ही मुझे अपने दोस्त सनी को भी ऐश करवानी थी।
इसलिए मैं संभल कर खेलना चाहता था।
अब तक सुमन मेरी जांघ पर हाथ रख चुकी थी और धीरे धीरे हाथ फेर रही थी। मैंने अपना कोट उतार कर गोद में रख लिया, कोट उतारते वक़्त सिमरन के बूब पर ज़रूर कोहनी फेर दी। सिमरन ने अपना मुँह खिड़की की तरफ घुमा लिया और मैं उसकी प्रतिक्रिया नहीं देख पाया.
अब कोट के नीचे में और सुमन एक दूसरे को खुल कर सहला रहे थे, अचानक सुमन ने मेरी पैन्ट की ज़िप पर हाथ रख दिया और वो ज़िप खोलने की कोशिश करने लगी। मैंने उसका चेहरा देखा- उसके होंठ गीले और मुँह खुला हुआ था। साफ़ था कि वो गरम हो चुकी थी। मैंने धीरे से अपने आप ही अपनी ज़िप खोल दी, सुमन ने अपना हाथ अन्दर डाल कर मेरा 9 इंच लम्बा 3 इंच मोटा सूमो अपने हाथ में ले लिया।
अचानक मेरा पूरा बदन थरथरा गया पता ही नहीं चला कि कब मेरे हाथ उसके बूब्स पर और उसके टी-शर्ट के अन्दर पहुँच गए। उसके बूब्स बिल्कुल गोल और उसके निप्प्ल बिल्कुल खड़े थे, साइज़ क्रिकेट बाल से भी 1 1/2 गुना था. हम दोनों के ही बदन तने जा रहे थे और दोनों ही सातवें आसमान पर थे।
क्या नज़ारा था मेरा सूमो नर्म उँगलियों के बीच खेल रहा था, सुमन मेरे कंधे पर सर टिकाये हुए थी और मेरा हाथ उसकी टी शर्ट के अन्दर सहलाने में लगा था।
अचानक सुमन मेरे कान में फुसफुसाई,’ मुझे लोलीपोप खाना है !’
मेरे तो दिल की बात कर दी उसने, पर मैंने कहा,’ सिमरन देख लेगी तो?’
उसने सड़ा सा मुँह बनाया और बोली,’ इन बहनजी लोगों को सुधारना पड़ेगा, न खुद ऐश करती हैं न करने देती हैं !’
मैंने कहा,’ जो तुम्हें पीने से रोके उसे भी शराबी बना दो, हम तो यही करते हैं।’
वो बोली,’ सही कह रहे हो, इन्हें इस बार ऐश करना सिखाना ही है।’ और फिर हम दोनों अपने काम में लग गए।
अब मैंने सिमरन पर ध्यान देना शुरू किया, वो बिल्कुल ऐसे दिखा रही थी जैसे कि उसे कुछ पता ही नहीं था, इसलिए मैंने सुमन के निप्प्ल जोर जोर से दबाना और बूब्स को मसलना शुरू कर दिया तो उसकी सिसकारियां हल्के हल्के मुँह से बाहर आने लगी।
उधर सिमरन और सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी। अब मैंने उसकी जाँघों पर भी अपनी जांघ का दबाव हल्का सा बढ़ाया लेकिन वो चुप रही। अब तो मैं खुल कर सुमन के होठों को चूमने लगा।
1 घण्टा यही सब चलता रहा, फिर अचानक सिमरन बोली ‘कहीं थोड़ी देर गाड़ी रोक लें?’
हमने कहा- ठीक है कहीं चाय वगैरह पीते हैं !
इस चक्कर में करीब 1/2 घंटा और निकल गया इस बीच वो 3 बार बोल चुकी थी गाड़ी रोकने को !
अचानक वो चिल्ला पड़ी,’ गाड़ी रोकते क्यों नहीं?’
हमने तुंरत गाड़ी रुकवा दी. गाड़ी रुकते ही वो तुंरत उतरी और सड़क किनारे झाड़ियों की ओर दौड़ गई।
मैंने सुमन से पुछा,’ इसे क्या हुआ?’
सिमरन लौट कर आई और शरमाते हुए चुपचाप आकर बैठ गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ था?
वो और शरमा कर लाल हो गई और सर हिलाया कि कुछ नहीं !
सुमन ने उसका चेहरा उठाया और बोली- कहती क्यों नहीं कि जोर की सु-सु आई थी !’
मारे शर्म के सिमरन और लाल हो गई।
और हम सब खिलखिला कर हंस दिए, अब सिमरन भी शर्माती हुई हंस दी।
पहली बार मैंने देखा कि शर्म की लाली कैसी होती हैं, उसके कान, नाक, गाल सब लाल हो चुके थे, और हंसने की वजह से उसकी आँखों में अजीब सा पानी चमक रहा था।
मैंने कहा,’मेरी ओर देखो !’
उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर नज़रें चुरा कर मुस्कुरा दी।
मैंने कहा- 1/2 घंटे से तुम परेशान हो तो बोला क्यों नहीं?’
वो चुप रही।
मैंने फिर कहा- यदि हम दोस्त हैं, तो तुम अब किसी भी चीज़ के लिए परेशान नहीं होंगी हमसे नहीं तो कम से कम सुमन से तो कह सकती हैं’ वो चुप रही।
इस सब से माहौल और हल्का हो गया।
हाँ ! जितनी देर सिमरन कार से बाहर थी, इतनी देर में सुमन की जींस की ज़िप और बटन भी खुल चुकी थी, और वो मेरा सूमो भी मुँह में लेकर जीभ फिरा चुकी थी। साथ ही एक बार मैं भी उसकी जींस के ऊपर से ही उसकी पिंकी को किस कर चुका था। अब सिमरन के आने के बाद मेरा एक हाथ उसकी पिंकी और उसकी कड़ी कड़ी फेंसिंग से और कभी उसके बूब्स से खेल रहा था. और उसकी सिसकारियां फिर गूंजने लगी थीं। सिमरन फिर खिड़की के बाहर देख रही थी और पिंकी और सनी के लिए हमारे पास टाइम ही नहीं था।
अब तक खाते पीते ऊँगली करते, बूब्स मसलते हम लोग पिपरिया पहुँच चुके थे। इसके आगे पचमढ़ी की घाटियाँ शुरू हो जाती हैं। सनी की ड्राइविंग बहुत अच्छी है। ऐसी जगह पर भी वो 50 की स्पीड पर गाड़ी चला रहा था. अब घुमाव पर गाड़ी में हम पूरे के पूरे दायें या बाएँ झुक जाते थे, मेरी तो ऐश थी, सुमन के साथ साथ अब मुझे सिमरन के बूब्स भी कोहनी से सहलाने का मौका मिल रहा था। अक्सर मैं उसकी तरफ गाड़ी मुड़ने पर उसकी जाँघों पर हाथ रख देता था और कोहनी खड़ी करके उसके बूब्स पर टिका देता था कभी वो संभलने के लिए मेरी जांघ पर।
अब सुमन तो पूरी तरह से तैयार थी अब मैं सिमरन पर पूरा ध्यान दे रहा था। उसके गालों की रंगत लाल होती जा रही थी, उसके होंठों पर एक अजीब सी नमी छाने लगी थी, अब मैंने नींद आने का बहाना कर के उसकी जाँघों पर हाथ रख दिया था, उसके चेहरे के पास अपना चेहरा टिका कर अपनी सांसें उसके कान के पीछे और गर्दन पर छोड़ रहा था।
मैंने नींद का बहाना करके अपनी हथेली को उसकी पिंकी के ऊपर रख दिया, और अचानक उसकी ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे रह गयी। मुझे अचानक उसकी स्किन लाल और गरम महसूस होने लगी. उसका पूरा बदन थरथरा रहा था। पक्का था कि यह पहली बार थी जो किसी लड़के ने उसे छुआ भी था।
मैंने अचानक नींद से उठने का बहाना किया और सीधा उससे पूछा,’क्या हुआ?’
उसने आँखें उठाकर देखा उसकी हालत ऐसी कार की तरह हो रही थी जिसका ब्रेक और एक्सीलेटर एक साथ दबा कर रखा गया हो. उसका चेहरा तमतमाया हुआ था, उसके होंठ नम हो रहे थे, उसके बूब्स साँसों की वजह से ऊपर नीचे हो रहे थे, उसकी आँखें साफ़ कह रही थी कि वो अपने होशोहवास खो चुकी थी, और उसकी आँखें एकटक मुझे देख रही थी।
मैंने धीरे से उसके सर के पीछे हाथ रख कर उसके होंठों से होंठ सटा दिए, कैसे मुझे भी नहीं पता? दो मिनट बाद जब हम अलग हुए तो उसकी आंखों में आंसू थे, मैंने उसके कंधे से हाथ डाल कर उसे अपने सीने पर टिका लिया।
ऐसा लगा काश दुनिया ख़त्म हो जाए। बीच में मैं एक शानदार शरीर का मालिक, मेरे दायें हाथ में एक सांवली सलोनी लड़की जो ख़ुद मेरे सूमो को सहला रही थी और मेरा दायाँ हाथ उसकी टी शर्ट के अन्दर एप्पल जूस निकलने में लगा था। बाएँ हाथ में मेरे एक सरदारनी थी, अनछुई, कच्ची, गुलाबी और नाज़ुक लेकिन तैयार जो कैटरिना कैफ से भी शानदार थी। अचानक मैंने झुक कर सिमरन के गाल पर अपने होंठ सटा दिए. मेरे होंठ और आँखें दोनों भीग गयी, खुशी और किस्मत की देन पर।
धीरे से मैंने अपना हाथ सिमरन के एक बूब पर टी शर्ट के ऊपर ही टिका दिया। वो फिर थरथरा उठी और कस कर मेरे सीने से चिपक गई, मैंने हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसके बूब्स तो बिल्कुल कड़क थे और सुमन के बूब्स से दोगुने थे. फेरते फेरते मैंने हाथ टी शर्ट के अन्दर डाल दिया।
मैंने उसके निप्प्ल को उँगलियों से दबाया तो उसके मुँह से सिसकारी निकल गई, और उसने अपने होंठ मेरे गाल पर सटा कर फुसफुसाई,’ प्लीज़ ! मत करो !’
अचानक मुझे अपने सूमो पर एक चिकोटी का एहसास हुआ, सुमन जिसे मैं भूल चुका था, चहक रही थी,’ सिमरन तू भी?’ ज़माने भर की खुशी और शरारत उसके चेहरे पर थी।
वो कोट उठा कर अलग कर चुकी थी और मेरा सूमो खुली हवा में साँस ले रहा था। सुमन की जींस खुली हुई थी और उसकी पिंकी के ऊपर की सुनहरी फेंसिंग (बाल) साफ़ दिख रहे थे, यह सब देख कर सिमरन का मुँह खुला रह गया वो सन्न रह गई, मानो काटो तो खून नहीं।
अचानक मैंने उसके निप्प्ल ज़ोर से उमेठ दिए, वो कराह उठी फिर शरमा गई और मेरे सीने में घुस गई. मेरा ध्यान आगे गया तो पिंकी मुँह खोले आँखें फाड़े मेरे सूमो और सुमन की पिंकी को देख रही थी, उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे भूत देख लिया हो। सुमन ने उससे पूछ ही लिया ‘पिंकी क्या देख रही हो?’ वो बेचारी चुपचाप सामने मुड गई।
अब तो खुल कर खेल रहे थे हम सब, सिमरन की स्कर्ट घुटनों के ऊपर आ चुकी थी, मेरा हाथ कभी उसके शानदार कड़क बूब्स को मसलता कभी चूचुकों को उमेठता, कभी उसकी जाँघों पर सहलाता, वो भी मदमस्त हो चुकी थी, इतना गरम हो चुकी थी कि वो अपनी गर्दन मेरे होंठों पर रगड़ रही थी, उधर सुमन मेरे सूमो को झुक कर मुँह में ले चुकी थी और दूसरे हाथ से भी मैंने सिमरन के दूसरे बूब को भी थाम लिया था।
अब सिर्फ़ पूरी कार में हम तीनों की सिसकारियां गूँज रही थी। सुमन ने सिमरन का हाथ खींच कर उसे भी मेरा सूमो थमा दिया था, सिमरन अब होश में नहीं थी और मुझ पर पूरी तरह टिक कर मेरे सूमो को ज़बरदस्त तरीके से ऊपर नीचे कर रही थी। यह सब करते करते कब सनी ने गाड़ी रोक दी पता ही नहीं चला। अब गाड़ी खड़ी थी और सनी आराम से पलट कर हम तीनो को देख रहा था।अचानक मैंने आँखें खोली तो पाया कि सनी एकटक मुझे देख रहा है और गाड़ी जंगल के अन्दर सुनसान में खड़ी है।
अब मैंने आजू बाजू देखा तो सुमन की जींस और काली पैंटी उसके घुटनों के नीचे थी और उसकी टी-शर्ट ऊपर चढ़ी हुई थी घुटनों से लेकर सीने तक वो पूरी नग्न थी, और वो पूरी तरह से मेरे सूमो पर झुकी हुई थी।
उधर सिमरन तो मेरे सीने पर पूरी तरह टिकी हुई थी पीठ के बल और मेरा एक हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर और पैंटी के अन्दर डाला था और दूसरा हाथ उसके टी शर्ट के अन्दर बूब्स मसल रहा था। उसकी चिकनी मार्बल की तरह चमकती सुडौल जांघें ट्यूब लाइट की तरह दमक रही थी और उसकी स्कर्ट जाँघों के ऊपर चढ़ी हुई थी।
सनी का बस चलता तो जलन के मारे मेरा खून पी जाता।
मैंने उसे आँख मारी और पिंकी कि तरफ़ इशारा किया। उसने पिंकी की बाहँ पकड़ कर पीछे देखने को कहा, पिंकी ने पीछे देखा तो मैंने उसे आँख मार दी।
वो बेचारी बैठे बैठे काँप रही थी, इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि वो कुछ देखे।
आगे की कहानी के लिए इन्तज़ार करें और पचमढ़ी ज़रूर घूम कर के आयें !
मैं प्रार्थना करता हूँ कि ऐसी यात्रा सबको मिले ! Antarvasna
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