Massage Girl in Adilabad: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Adilabad who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Last Updated: 25 May 2026, 11:44 AM

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Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Adilabad that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Adilabad massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Adilabad who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Adilabad massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Adilabad massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Adilabad who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Adilabad employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Adilabad helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Adilabad

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Adilabad at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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प्यारे दोस्तो Hindi Sex Stories

मेरा नाम Hindi Sex Stories रवि है, मैं आपको अपनी एक कहानी बताता हूँ।

जब मैं स्कूल में पढ़ता था तब मेरे साथ मेरी एक दोस्त थी जिसका नाम ऋतु था वो मेरे घर क पास ही रहती और हम एक साथ स्कूल जाया करते थे। एक बार किसी कारण से मुझे स्कूल जाने में देर हो गई तो ऋतु मेरा इन्तज़ार करते करते मेरे घर आ गई। उस दिन बारिश हो रही थी, वो भीगती हुई आई। उसकी स्कूल ड्रेस भीग चुकी थी उसे देख कर मेरी मम्मी ने कहा- थोड़ी देर रुको, रवि नहा कर आ रहा है, फिर तुम दोनों उसके पापा की कार लेकर स्कूल चले जाना। लेकिन उससे पहले अपने घर जाकर अपने कपड़े बदल लेना।

तो वह मान गई। जब मैं नहा कर आया तो देखा कि वो दरवाजे पर खड़ी मम्मी से बात कर रही थी। उसकी शर्ट एक दम गीली थी उसके स्तन और चुचूक एकदम मस्त लग रहे थे।

मैं पास गया तो देख कर हैरान हो गया। चूचियाँ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था। वो भांप गई कि मेरी नज़रें उसके वक्ष पर हैं लेकिन वह कुछ नहीं बोली। फिर मैं जल्दी से तैयार होकर आया तो पापा से कार की चाबी लेकर कार स्टार्ट करने लगा और होर्न बजा कर ऋतु को बुलाने लगा। ॠतु होर्न सुन कर जल्दी से मेरे पास आई और बोली- रवि, तू आज मरवा देगा बक्शी मैडम से !

मैंने कहा- तू जल्दी से गाड़ी में बैठ ! पहले तेरे घर चलें, तू ड्रेस बदल, फिर स्कूल जायेंगे।

वो बोली- नहीं, हम लेट हो रहे हैं, मैं घर नहीं जाउंगी, सीधे स्कूल चलते हैं।

और वो कार में बैठ गई। उसका स्कूल बैग उसकी पीठ पर था तो वह ठीक से बैठ नहीं पा रही थी।

मैंने कहा- ऋतु, अपना बैग उतार कर पीछे सीट पर रख दे !

तो वह बैग उतारने लगी। जब वह बैग उतार रही थी तो उसके कंधे पीछे की ओर हो गए और स्तन बाहर की ओर आ गए। उसके चुचूक एकदम कड़क थे पानी में भीगने की वजह से !

मेरा मन कर रहा था कि बस स्कूल न जाकर उसे घर ले जाकर चोद दूँ।

तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और बोली- क्या देख रहे हो ?

मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही !

उसने कहा- तुम मेरी चूचियाँ देख रहे हो ना ?

गलती से मेरे मुँह से हाँ निकल गया और वो बोली- कितने गंदे हो तुम रवि ! मुझे इतनी गन्दी नज़रों से देखते हो !

मैंने कहा- इसमें गुस्सा होने की क्या बात है? यह चीज़ ही ऐसी है कि किसी की नज़र ना पड़े तो वह अँधा है !

यह बात सुन कर वह मुँह दूसरी तरफ करके बैठ गई। मैं तो बस उसके वक्ष के बारे में ही सोच रहा था। थोड़ी देर में हम स्कूल पहुँच गए। मैं अपना बैग लेने के लिए पीछे मुड़ा, इतने में वो भी मुड़ी, उसके होंठ मेरे गालों से छू गए। फिर मेरे अन्दर एक करंट सा लग गया और उसे बोला- एक और प्लीज़ ! एक और !

वो बोली- तो बहाना चाहिए बस?

मैंने कहा- तू चीज़ ही इतनी मस्त है ! मैं क्या करूँ !

तो वह हँस पड़ी और हम दोनों बैग उठा कर स्कूल जाने लगे। स्कूल की सीढ़ी चढ़ते वक़्त मैंने देखा कि उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे हैं। मेरा तो लंड खड़ा हो रहा था देख-देख कर !

ना जाने कैसे उसकी शर्ट का बटन खुल गया था, अंदर से उसकी सफ़ेद रंग की ब्रा चमक रही थी लेकिन किसी तरह मैंने अपने आप को संभाल लिया और क्लास में चले गए।

फिर स्कूल ख़त्म होने के बाद हम फिर मिले और कार की तरफ बढ़ चले। कार में बैठ कर मैं कार स्टार्ट करने लगा तभी उसने कहा- आज कितनी बारिश हो रही है ! देखना, तुम्हारी कार स्टार्ट नहीं होगी !

उसका तो कहा ही हुआ और मेरी कार ने जवाब दे दिया, वो स्टार्ट नहीं हो रही थी। ऊपर से ऋतु खिलखिला कर हँस रही थी।

पास के टेलीफोन बूथ से मैंने पापा को फोन किया और बताया कि कार स्टार्ट नहीं हो रही है।

पापा ने कहा- कोई बात नहीं, मैं मकेनिक भेज कर कार ठीक करा दूंगा।

मैंने कार की चाबी स्कूल के चौकीदार को दे दी और हम पैदल घर की तरफ़ चल पड़े। रास्ते में काफी बारिश थी सो हम काफी भीग चुके थे। ऋतु के घर पहुँच कर देखा कि उसके घर पर ताला लगा है। पड़ोसी से पता लगा कि उसकी मम्मी मेरी मम्मी के साथ कीर्तन में गई है।

मैंने कहा- कोई बात नहीं ऋतु ! मेरे पास मेरे घर की दूसरी चाबी है, वहीं चलो !

उसने कहा- ठीक है !

और मेरे मन की मुराद पूरी हो गई कि आज तो रितू की चूचियाँ दबा कर ही रहूँगा। घर पहुँच कर मैंने ऋतु को तौलिया दिया और बोला- तुम अपना सर पौंछ लो, नहीं सर्दी लग जाएगी !

मैं उसे मम्मी के कमरे में ले गया- तुम यहाँ करो, मैं चाय बना कर लाता हूँ।

और मैं दरवाज़ा बंद कर के चला गया। लेकिन मैं गया कहीं नहीं था, दरवाज़े के पास खड़े होकर देख रहा था कि ऋतु क्या कर रही है।

पहले उसने शीशे के पास जाकर अपने आप को देखा और अपना सर पौंछने लगी। तभी उसकी नज़र अपने वक्ष पर पड़ी तो देखा कि उसकी शर्ट का बटन खुला है। (जिसे मैं सुबह देख रहा था) फिर उसने अपनी शर्ट क ऊपर से ही अपने स्तन दबाने चालू कर दिए। उसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं पैंट से बाहर निकाल कर सहलाने लगा। पता नहीं हल्की सी आहट से उसे पता चल गया कि मैं उसे देख रहा हूँ।

तभी उसने आवाज़ लगाई- रवि, बाहर क्यों खड़े हो ? अंदर आओ !

मेरे मन में तो लड्डू फूट गए। लंड को अंदर किये बिना मैं दरवाज़ा खोल कर अंदर चला गया। मेरा लंड देख कर वो चौंक गई और बोली- यह क्या है?

मैंने कहा- यह नागराज है ! गर्म लड़कियों को देख कर खड़ा हो जाता है विष छोड़ने के लिए !

उसने पास आकर मेरे लंड को पकड़ कर कहा- रवि सच बताओ, सुबह तुम मेरे स्तन को क्यों देख रहे थे?

मैंने कहा- तेरी चूचियाँ हैं ही इतनी मस्त चीज़ कि दबाने को, चूसने को मन करता है।

यह सुन कर उसने मेरे हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और कहा- लो ! जो करना है करो !

बस फिर क्या था, मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन खोल दिए और उसकी चूचियों की लाइन पर अपना मुँह रख कर महसूस कर रहा था कि यह कोई सपना तो नहीं है !

तभी उसने मेरे लंड को जोर से दबा दिया और कहा- सिर्फ महसूस करोगे या चूसोगे भी ?

फिर क्या था, मैंने झट से उसकी शर्ट उतारी, ब्रा उतारी और जोर से दबा दिया। उसके मुँह से आह निकल गई- रवि, और जोर से !

मैंने और जोर से दबा कर उसके स्तनों को अपनी मुट्ठी में लेकर उसके चुचूक चूसने लगा। वो मेरे लंड पर जोर से हाथ आगे पीछे कर रही थी। फिर धीरे धीरे मैं अपने हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर डाल उसके चूतड़ों को भी दबाने लगा, उसकी पैंटी नीचे करने के बाद उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। वो एक दम गीली थी। मैं नीचे झुक कर उसकी स्कर्ट के अन्दर अपना मुँह डाल कर चूत को चाटने लगा।वो पूरी मस्ती में आ गई और मुझे पलंग पर धक्का दे कर मेरी पैंट खोल कर मेरे लंड को चूसने लगी। मैं उसके वक्ष दबाये जा रहा था।

इतने में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।

वो बोली- देखो नागराज ने विष छोड़ दिया !

और वो पूरा चूस गई।

फिर मैं उसे पलंग पर लिटा कर उसकी चूत को चाटने लगा। वो पूरी तरह गर्म थी और मेरे बाल नोच रही थी, कह रही थी- रवि मत तड़पाओ ! डाल दो अपना नागराज मेरी सुरंग में !

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर एक जोर से झटका मारा और लंड अन्दर चला गया। मैं थोड़ी देर उसके ऊपर लेट कर उसके स्तन चूसने लगा और नीचे नागराज अपना काम करने लगा। दस मिनट बाद मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी। मैंने कहा- नागराज ने तेरी सुरंग में विष छोड़ दिया !

तो वह घबरा गई- अब क्या होगा ! मैं गर्भवती हो जाउंगी !

मैंने कहा- कोई बात नहीं ! मैं आई-पिल ला दूंगा, वो खा लेना, सब ठीक हो जायेगा !

और हम फिर पूरी मस्ती से फिर चुदाई में लग गए……….. Hindi Sex Stories

रात की ठंडी हवा दिल्ली की उस पुरानी हवेली में घुस रही थी, जहाँ परिवार की रौनक एक छत के नीचे सिमटी हुई थी। चन्दन उस रात सो नहीं पा रहा था। उसका मन बेचैन था, जैसे कोई अनजानी आग उसके सीने में सुलग रही हो। वह अपनी पत्नी के भाई की शादी में आया था, लेकिन अब यहाँ रुकना मजबूरी बन गई थी। बर्फीली सर्दी की वजह से ट्रेनें रद्द हो गई थीं, और घर वापस जाना नामुमकिन। हवेली का वो पुराना कमरा, जहाँ वह अकेला लेटा था, दीवारों से ठंडक चिपक रही थी। बाहर बरामदे में हल्की-हल्की बातें सुनाई दे रही थीं, लेकिन चन्दन का ध्यान कहीं और था—सारिका पर।

सारिका, उसके साले की बीवी। वह पहली बार मिली थी शादी में, लेकिन उसकी आँखों में वो चमक, वो मुस्कान, चन्दन को अंदर तक हिला गई थी। वह करीब तीस साल की होगी, गोरी चिट्टी, लंबे बाल जो कमर तक लहराते थे। उसकी साड़ी उसके बदन पर ऐसे लिपटी रहती थी जैसे कोई गुप्त राज़ छिपा रही हो। चन्दन ने खुद को कई बार रोका था, लेकिन उसकी नजरें बार-बार उस पर ठहर जातीं। “यह गलत है,” वह सोचता, “वह मेरी साली की तरह है, परिवार की इज्जत का सवाल है।” लेकिन दिल कहाँ मानता है? रात गहराती जा रही थी, और ठंड बढ़ती जा रही थी। चन्दन ने कंबल ओढ़ा, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। अचानक दरवाजे पर हल्की खटखटाहट हुई।

“कौन?” चन्दन ने धीमी आवाज में पूछा, दिल की धड़कन तेज हो गई।

“जीजू, मैं सारिका।” आवाज आई, नरम और थोड़ी कांपती हुई। चन्दन उठ बैठा, दरवाजा खोला तो सारिका खड़ी थी, शॉल लपेटे, चेहरे पर हल्की मुस्कान लेकिन आँखों में कुछ अनकहा। “क्या हुआ? इतनी रात को?” चन्दन ने पूछा, अपनी आवाज को संभालते हुए।

“जीजू, मुझे नींद नहीं आ रही। घर में सब सो गए हैं, लेकिन ठंड बहुत है। क्या मैं थोड़ी देर यहाँ बैठ सकती हूँ? बातें करेंगे।” सारिका ने कहा, उसकी आँखें नीची थीं, लेकिन चन्दन को लगा जैसे वो आँखें कुछ और कह रही हों। वह हिचकिचाया, लेकिन “आओ” कहकर दरवाजा खोल दिया। कमरे में हल्की रोशनी थी, एक छोटा लैंप जल रहा था। सारिका अंदर आई, दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गई। चन्दन भी उसके पास बैठ गया, लेकिन दूरी बनाए रखी।

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कमरा छोटा था, पुरानी दीवारें, लकड़ी का फर्श जो ठंड से चरमरा रहा था। बाहर से कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी, लेकिन अंदर सन्नाटा था। सारिका ने शॉल कसकर लपेटा, “जीजू, आपकी शादी को कितने साल हो गए?” उसने पूछा, बात शुरू करने के लिए। चन्दन ने जवाब दिया, लेकिन उसका मन कहीं और था। सारिका की खुशबू, वो हल्की सी परफ्यूम की महक, कमरे में फैल रही थी। वह सोच रहा था, “कितनी खूबसूरत है ये। उसके होंठ, इतने नरम लगते हैं।” लेकिन वह खुद को कोसता, “चन्दन, यह तेरे साले की बीवी है। रिश्ते की मर्यादा रख।”

बातें चलती रहीं—परिवार की, शादी की, दिल्ली की सर्दी की। लेकिन धीरे-धीरे बातें व्यक्तिगत होने लगीं। सारिका ने कहा, “जीजू, आपकी पत्नी कितनी लकी हैं। आप इतने हैंडसम हैं, केयरिंग।” चन्दन हँस दिया, लेकिन अंदर एक लहर उठी। “तुम भी तो बहुत सुंदर हो, सारिका। तुम्हारा पति सौभाग्यशाली है।” उसने कहा, और नजरें मिलीं। वो पल, वो नजरें टकराने का पल, जैसे समय रुक गया। सारिका की साँसें तेज हो गईं, चन्दन को लगा उसके दिल की धड़कन सुनाई दे रही है। वह करीब सरक गई, अनजाने में। चन्दन का हाथ उसके हाथ से छू गया, और दोनों ठहर गए।

“जीजू, मुझे ठंड लग रही है,” सारिका ने धीरे से कहा, उसकी आवाज में एक कंपन था। चन्दन ने अपना कंबल उसके कंधों पर डाला, लेकिन उसका हाथ उसके कंधे पर रुक गया। सारिका ने आँखें बंद कर लीं, जैसे वो स्पर्श उसे अच्छा लग रहा हो। चन्दन का मन उथल-पुथल था। “यह गलत है, लेकिन इतना अच्छा क्यों लग रहा है?” वह सोचता। धीरे से उसने अपना हाथ हटाया, लेकिन सारिका ने पकड़ लिया। “रहने दो, जीजू। गर्माहट अच्छी लग रही है।” उसने कहा, और चन्दन के करीब आ गई। अब他们的 बदन छू रहे थे, कमरे की ठंड में वो गर्माहट जैसे आग की तरह फैल रही थी।

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रात और गहरा गई। बातें कम हो गईं, लेकिन साँसें तेज। चन्दन ने सारिका की आँखों में देखा, वो आँखें अब शर्म से नहीं, इच्छा से भरी थीं। “सारिका, हमें नहीं करना चाहिए,” चन्दन ने कहा, लेकिन उसकी आवाज कमजोर थी। सारिका ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया, “जीजू, बस थोड़ी देर। कोई नहीं जानता।” उसकी साँसें उसके गले पर लग रही थीं, चन्दन का शरीर सुलग उठा। वह जानता था यह रिश्ते की सीमा लांघना है, लेकिन वो आकर्षण, वो चाहत, उसे रोक नहीं पा रही थी। धीरे से उसने सारिका के चेहरे को ऊपर किया, और उनके होंठ करीब आए। पहला चुंबन, हल्का सा, लेकिन जैसे बिजली दौड़ गई। सारिका की आह निकली, और वो और करीब आ गई।

कमरे में अब केवल उनकी साँसों की आवाज थी। चन्दन ने सारिका को अपनी बाहों में लिया, उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया। उसका बदन, इतना नरम, इतना गर्म। “जीजू, मुझे आपकी जरूरत है,” सारिका ने फुसफुसाया। चन्दन का मन अब नहीं मान रहा था। उसने सारिका के होंठों को चूमा, गहराई से, जैसे सालों की प्यास बुझा रहा हो। सारिका के हाथ उसके सीने पर घूमने लगे, उसकी शर्ट के बटन खोलने लगे। चन्दन ने उसके ब्लाउज को छुआ, वो नरम उभार, जो साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। “सारिका, तुम्हारी चूची कितनी मुलायम है,” चन्दन ने कहा, और सारिका शर्मा गई लेकिन करीब आ गई।

वे अब बिस्तर पर थे, कंबल के नीचे। चन्दन ने सारिका की साड़ी उतारी, धीरे-धीरे, हर पल को महसूस करते हुए। उसका पेटीकोट, उसकी जांघें, सब कुछ खुल रहा था। सारिका की आँखें बंद थीं, लेकिन उसके होंठ मुस्करा रहे थे। “जीजू, छुओ मुझे,” उसने कहा। चन्दन का हाथ उसकी चूत पर गया, वो गीली थी, गर्म। “तुम्हारी चूत कितनी गर्म है, सारिका।” चन्दन ने कहा, और उंगली से सहलाया। सारिका की सिसकारी निकली, “आह, जीजू।” वो उसके लंड को छू रही थी, जो अब सख्त हो चुका था। “आपका लंड इतना बड़ा है,” उसने कहा, और सहलाने लगी।

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तनाव बढ़ता जा रहा था। चन्दन ने सारिका को नीचे लिटाया, उसके ऊपर आ गया। उनका बदन एक-दूसरे से चिपक रहा था, पसीने से तर। “सारिका, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ,” चन्दन ने कहा। सारिका ने हाँ में सिर हिलाया, “हाँ जीजू, चोदो मुझे।” चन्दन ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा, धीरे से दबाया। सारिका की चीख निकली, लेकिन वो खुशी की थी। “आह, कितना मोटा है आपका लंड।” वे अब एक लय में थे, चन्दन अंदर-बाहर कर रहा था, सारिका की गांड पकड़कर। “तुम्हारी गांड कितनी गोल है,” चन्दन ने कहा। रात भर ये सिलसिला चला, कभी धीरे, कभी तेज। सारिका की सिसकारियाँ, चन्दन की आहें, कमरे में गूँज रही थीं।

सुबह होने से पहले, वे थककर लेटे थे। सारिका चन्दन के सीने पर सिर रखकर लेटी थी। “जीजू, यह रात कभी भूलूँगी नहीं,” उसने कहा। चन्दन ने उसे चूमा, लेकिन मन में अपराध बोध था। “हमने गलत किया, लेकिन इतना सही लगा।” वे जानते थे यह गुप्त रहेगा, परिवार की मर्यादा बनी रहेगी। लेकिन वो रात, वो चाहत, हमेशा याद रहेगी।

Sex Stories

चाय पीकर जीजाजी Sex Stories नहाने चले गए। बाथरूम से ही उन्होंने मुझे आवाज़ दी- राकेश आओ, तुम भी नहा लो।

मैं समझ गया कि उनका इरादा क्या है। पूरे दिन बाहर रहने के कारण वह दिन में एक बार भी मेरी गाण्ड नहीं मार सके थे।

मैं बाथरूम में आ गया। उन्होंने ही मेरे सारे कपड़े उतारे और बिना देर किए मेरे पोण्ड पर साबुन मलने लगे। उनका लण्ड पहले ही तन्नाया हुआ था, उन्होंने मेरा मुँह पकड़ कर लण्ड के पास कर दिया तथा कहा- इसे चूसो !

मैं थोड़ा हिचका, पर उन्होंने अपने लण्ड का सुपाड़ा मेरे मुंह में घुसा ही दिया। उनका लण्ड बहुत लम्बा और मोटा था। मैं और कोई चारा ना देख उनके लण्ड को लोलीपोप सा चूसने लगा, वह मेरे पोण्ड के छेद में उंगली करते रहे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे अपनी गोदी में बिठा कर अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। इस बार उन्होंने साबुन भी नहीं लगाया था। मैं तड़प कर रह गया। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे पोण्ड के नीचे लगा रखे थे और उनसे मुझे उठाकर ऊपर नीचे कर रहे थे। ऐसा करने से उनका पूरा लण्ड मेर गाण्ड में समा जाता था। १०-१५ मिनट तक लण्ड मेरी गाण्ड में अन्दर बाहर होने के बाद उन्होंने अपना रस मेरी गाण्ड में ही भर दिया। फिर नहा कर हम बाहर आ गए तो जीजाजी बोले- ‘सारा दिन बेकार हो गया योगी, रात में मैं पूरी कसर निकालूँगा, तैयार रहना !’

तैयार तो मैं था ही क्योंकि मुझे पता था की जीजाजी मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं।

रात को खाने के आधे घंटे बाद ही जीजाजी ने मेरी पहली बार गाण्ड मारी। उन्होंने उस रात कुल चार बार तरह तरह से मेरी गाण्ड मारी। अपना लण्ड चूसाया, कभी उल्टा कर गाण्ड में लण्ड घुसाया तो कभी अपने ऊपर बैठा कर मेरी गाण्ड में लण्ड डाला तो कभी मुझे हाथों में ऊपर उठाकर नीचे से मेरी गाण्ड मारी। सुबह तक मैं सो ही नहीं पाया। उस दिन में मैं सात-आठ बार गाण्ड मरवा चुका था। मेरी गाण्ड काफी फूल गई तथा मुझे काफी दर्द भी महसूस होने लगा।

सुबह उठाने पर जीजाजी ने बताया- ‘ डी. एफ. ओ. साहब कल की घटना की जाँच के लिए आ रहे हैं। तुम उन्हें खुश कर दोगे तो मैं निलंबित होने से बच जाऊँगा तथा वह अपनी रिपोर्ट मेरे हक़ में दे देंगे !’

लगभग ११ बजे डी. एफ. ओ. साहब आ गए। जीजाजी ने उनसे मेरा परिचय कराया- ‘ ये मेरे छोटे भाई का साला है, काफी समझदार है, दिन में यह आपकी पूरी सेवा करेगा !’

दोपहर के खाने के बाद जीजाजी जंगल की ओर चले गए तथा मुझे डी. एफ. ओ. की सेवा करने को कह गए। डी. एफ. ओ. साहब लेट कर आराम कर रहे थे। जब मैं उनके कमरे में पहुँचा, मेरी आहट पाकर मुझसे बोले- दरवाजा बंद कर दो। सेवा का मतलब वह अच्छी तरह समझते थे।

डी. एफ. ओ. साब काले कलूटे लेकिन तंदरुस्त इन्सान थे। दरवाजा बंद कर जैसे ही मैं मुड़ा तो मैंने देखा वह पूरी तरह नंगे लेटे हुए हैं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपना मोटा लण्ड मेरे हाथ में दे दिया तथा उसे चूसने का हुकुम दिया। उनका काला लण्ड बड़ा ही भयानक लग रहा था।

मैं थोड़ा झिझका तो वह चिल्लाये – जल्दी कर !

मैं उनका लण्ड अपनी ऑंखें बंद कर चूसने लगा। उन्होंने बिना देर किए मेरे सारे कपड़े उतार दिए। कुछ देर बाद मुझे अपने ऊपर ६९ की अवस्था में लिटा लिया। अब उनका लण्ड मेरे मुंह में था तथा मेरा लण्ड उनके मुंह के पास था। पर उन्होंने मेरे लण्ड को अपने मुंह में नहीं लिया बल्कि मेरी गाण्ड के छेद को चाटने लगे।

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद उन्होंने मेरी गाण्ड के छेद को चिकना कर दिया और मुझे उल्टा लिटा दिया। इसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पोंड फैला कर गाण्ड का छेद थोड़ा बड़ा कर लिया और एक जोर का धक्का लगा कर एक ही झटके में अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। मेरी तो जान ही निकल गई। मैं चिल्ला दिया – मर गया …!

पर वह तो मस्ती में धक्के पे धक्का पेले जा रहे थे। थोड़ी देर बाद मुझे अच्छा तो लगा पर उनके रूप रंग के कारण मुझे बड़ी ही घिन आ रही थी। उस दोपहर उन्होंने तीन बार मेरी गाण्ड मारी। मैं दर्द से बिलबिलाता रहा पर उन्होंने जरा भी परवाह नहीं की। मेरी गाण्ड का छेद कई जगह से कट गया।

शाम को वह चले गए तथा जीजाजी को उनके हक़ में रिपोर्ट भेजने का कह गए। जीजाजी बहुत खुश हुए।

रात में उन्होंने मुझे कुछ ज्यादा ही प्यार किया। मेरी गाण्ड की हालत देख कर अफ़सोस तो जताया पर इसके बाद भी उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। गाण्ड के छेद में तेल भर कर उन्होंने उस रात मेरी तीन बार गाण्ड मारी। जब मेरी गाण्ड से ज्यादा खून निकलने लगा तो उन्होंने शिव को कमरे में बुला लिया। मेरे ही सामने उन्होंने शिव की भी दो बार और गाण्ड मारी। शिव तो काफी अभयस्त था इसलिए वह काफी मस्ती में गाण्ड मरवाता रहा।

उन दोनों को देख कर मेरा भी लण्ड फाड़ फड़ने लगा पर जीजाजी के सामने मैं कुछ कह नहीं सकता था। चुपचाप लेटे लेटे अपना लण्ड मसलता रहा। जीजाजी ने यह सब देख लिया तो उन्होंने मथारू को बुला लिया तथा मुझसे मथारू की गाण्ड मारने को कहा। मथारू आदिवासी था तथा वह भी काफी सीखा हुआ था। उसने मेरे लण्ड को चाटा, चूसा, अपने पोंड के छेद में मुझसे ऊँगली घुसवाई तथा बाद में मुझसे गाण्ड में लण्ड पेलने को कहा।

मुझे यह सब करके बड़ा आनंद मिला। मैं अपनी गाण्ड का दर्द भूल गया। मथारू की गाण्ड मारने के बाद जीजाजी ने मुझसे शिव की भी गाण्ड मारने को कहा। जब मैं शिव की गाण्ड मार रहा था तभी मथारू ने अपना लण्ड पीछे से मेरी गाण्ड में भी घुसा दिया। जीजाजी मथारू की गाण्ड में अपना लण्ड पेल रहे थे। यानि की एक बार में ही तीन लोगों की गाण्ड मारी जा रही थी।

हम लगभग एक सप्ताह जंगल में रहे। जीजाजी ने इस बीच इतनी बार मेरी गाण्ड मारी कि मैं गिनती करना ही भूल गया। मेरी गाण्ड का छेद अब तक काफी खुल गया था तथा जीजाजी का मोटा लण्ड भी अब आसानी से मेरी गाण्ड में चला जाता था।

जंगल से लौटने के एक सप्ताह तक जीजाजी को फिर मेरी गाण्ड मारने का अवसर नहीं मिला।

जब उन्हें अवसर मिला तो क्या हुआ पढ़िये अगली कहानी में ….. Sex Stories

Hindi Sex Stories

मेरा नाम मोहित है और मैं प्रतिदिन Hindi Sex Stories अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ता हूँ! आज मैंने सोचा कि मैं आप लोगो के साथ अपना अनुभव बांटू.

पहले मैं आप को अपने बारे में बता दूं। मेरी उम्र 30 साल है। मेरी लम्बाई 6 फीट है और मैं दिखने में भी काफ़ी ठीकठाक हूँ। मैं बरोदा में रहता हूँ।

ये कहानी तब की है जब मैं इन्टरनेट पर बहुत ही चेटिंग करता था। तब मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई जो इंडियन है और अब अमेरिका में रहती है। उसका नाम रेशमा है और वो भी बरोदा से ही है। नेट पर हमारी रोज बातें होने लगी तभी एक दिन मुझे पता चला कि उसकी शादी हो चुकी थी और उसके पति ने उसे छोड़ दिया था.

फ़िर ये सिलसिला आगे बढ़ा और हम दोनों ने अपने अपने फोटोस एक्सचेंज किए। तभी मैं उसे देख कर दंग रह गया कि इतनी खूबसूरत और सेक्सी बीवी को कोई पागल ही छोड़ सकता है। उसकी लम्बाई करीबन 5.5 थी और उसका रंग भी एक दम गोरा था। सबसे अच्छे उसके बूब्स थे जो कि तरबूजों की तरह थे।

एक दिन उसने मुझे बताया कि वो इंडिया आ रही है तो मैं खुशी से पागल हो गया और मन ही मन उसकी चुदाई करने की सोचने लगा। अब जब वो इंडिया आ रही थी तो मैंने बिना राह देखे उस से बोल ही दिया कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है। वो खाली हंस कर नेट से चली गई।

जब वो इंडिया आई तो मैं उसे रिसीव करने एअरपोर्ट पर गया तब मैंने उसे देखा तो मुझे पता चला कि उसके बूब्स सही में बड़े और मजेदार थे और उसकी गांड की गोलाई भी बहुत मस्त थी। वो मुझसे गले मिली और फ़िर मिलने का कह कर अपने रिश्तेदारों के साथ उनके घर चली गई। उसके बूब्स और गांड देख कर अब मैंने नक्की कर लिया था कि मैं इसकी मस्त चुदाई करूँगा।

दूसरे दिन उसका फ़ोन आया और उसने मुझे कहा कि वो मुझे मिलने मेरे ऑफिस पर आ रही है। तब मैंने मेरे पूरे स्टाफ वालो को जल्दी ही घर भेज दिया। जब वो आई तो थोड़ी इधर उधर की बातें की। वो मेरे सामने कुर्सी पर बैठी थी। मैं उठ कर उसके पास वाली कुर्सी पर बैठ गया और फ़िर उसका हाथ पकड़ लिया। तो वो कुछ नही बोली मैं समझ गया कि लाइन क्लिअर है।

फ़िर मैंने उसे जम कर किस किया। अब हमारे होंठ एक दूसरे से चिपक गए थे और मैं उसकी जीभ चूस रहा था। फ़िर धीरे से मैंने अपना हाथ उस के बूब्स पर रख दिया और उनको मसलने लगा तो वो सिसकारे भरने लगी। उसने जींस और टॉप पहेना हुआ था। मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को मसलने लगा और उसकी निप्पल को खींचने लगा।

उसकी सिसकारियां अब और भी बढ़ने लगी और वो मुझे ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी। मैंने उसका टॉप उतार दिया और फ़िर उसकी ब्रा भी निकाल दी। तब तक उसका हाथ मेरे तने लण्ड पर था और वो उसे सहला रही थी। मेरा लण्ड अब तन गया था और चुदाई के लिए बेकरार था।

मैं उसे वहां से उठा कर बाहर पड़े सोफे पर ले कर गया और उसे वहां लिटा दिया। फ़िर उसके बूब्स को और उसकी निप्पल को चूसने लगा। फ़िर मैंने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर मेरा लण्ड उसके हाथ में दे दिया वो उसे हिलाने लगी और मुठ मारने लगी।

फ़िर मैंने उसका जींस भी उतार दिया और पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत में ऊँगली डाल दी। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैं अपनी ऊँगली निकाल कर देर किए बिना उसे चाटने लगा तो वो तड़पने लगी और बोली कि मुझे भी चूसने का मज़ा लेने दो। फ़िर हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गए।

करीब 10 मिनट तक ये चला। वो झड़ चुकी थी मैंने उसका पूरा पानी पी लिया और फ़िर मैंने कहा- अब तुम भी जल्दी से मेरा सब पानी पी लो। तो उसने मेरा लण्ड जोर जोर से चूसना चालू कर दिया और थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया और वो मेरा सब रस पी गई।

वो मेरा लण्ड चाट कर साफ़ कर रही थी तो मैंने बोला मेरी जान थोड़ा रस रहने दे तेरी गांड के होल पर लगा दे इस से आगे आसानी रहेगी। उसने ऐसा ही किया।

फ़िर मैंने उसे वहां से उठा कर बाजू वाले मेज़ पर लिटा दिया और उसकी दोनों टाँगे फ़ैला कर अपना लण्ड उसके चूत पर रख दिया। फ़िर धीरे से लण्ड के सुपारे को धक्का दिया तो वो अन्दर चला गया। गीली चूत होने के कारन लण्ड को अन्दर डालने में तकलीफ नहीं हुई। और फ़िर एक ज़ोर के धक्के से मैंने मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया… तो वो ज़ोर से चिल्लाई और बोली ज़रा धीरे से ! साले काफी टाइम से अन्दर कोई लण्ड नहीं गया है।

फ़िर मैंने धीरे से धक्के लगाने चालू कर दिए… और साथ में उसके निप्पल को चूसने लगा। वो उह्ह्ह्छ आःह्ह्छ करने लगी और बोलने लगी- फक्क मी फक्क मी हार्ड माय डार्लिंग फक्क मी वैरी हार्ड…

मुझे पूरा जोश आ गया और मेरे धक्के बढ़ने लगे… करीब 15 मिनट तक मैं उसे चोदता रहा…उसमें वो 2 बार झड़ चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था.. तो मैंने उससे पूछा की कहाँ डालू अपना पानी?

तो बोली अन्दर ही डाल दे मेरे राजा और फ़िर मैं झड़ गया…

थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे और फ़िर वो मेरे लण्ड को सहलाने लगी… फ़िर खड़ी हो कर उसने मेरे लण्ड को फिर से चूसना चालू कर दिया। इस से मेरा शेर फ़िर से लड़ाई और चढाई के लिए तैयार हो गया और मैंने उसे पकड़ कर उल्टा ही मेज़ पर लेटा दिया अब उसकी गांड का छेद मेरे लण्ड के सामने था।

मैंने कभी किसी की गांड नहीं मारी थी तो मैं भी बेकरार था। फ़िर मैंने अपने हाथो से उसके दोनों चूतड़ अलग किए और मेरे लण्ड को छेद के पास रख दिया। फ़िर ज़ोर से धक्का दिया तो मेरे लण्ड का सुपारा अन्दर चला गया। अब वो जोर से चिल्लाई और बोली- बास्टर्ड इट हर्ट्स।

मैंने बोला- रानी थोड़ा सब्र करो।
फ़िर मैं उसके बूब्स को पीछे से पकड़ कर मसलने लगा और थोडी देर बाद फिर से जोर का धक्का दिया तो पूरा लण्ड उसकी गांड में चला गया।
फ़िर वो मज़े लेने लगी और चिल्लाने लगी- चोदो मुझे जोर से मेरे राजा पूरा डाल दे अन्दर आज या तेरा लण्ड नहीं या मेरी गांड नही..फाड़ दे मेरी गांड को आज..ये पूरी तेरी है.. दो हिस्सों में बाँट दे आज इसे।

अब मुझे भी जोश आ गया और मैं जोर जोर से धक्के देने लगा। 15 मिनट तक मैं उसकी गांड मारता रहा फ़िर मैं उसकी गांड में ही झड़ गया और उसकी गांड का पूरा छेद मेरे पानी से भर दिया। फ़िर थोडी देर के बाद हम दोनों ने खड़े हो कर कपड़े पहन लिए।

और फ़िर वो पूरे 3 महीने तक इंडिया में रही और हम दोनों ने जम कर चुदाई का आनंद लिया.. एक बार तो मैंने उसे वाटर पार्क में भी चोदा था वो किस्सा बाद में बताऊंगा। मगर अभी वो वापस चली गई है और मैं फ़िर से अकेला पड़ गया हूँ।

दोस्तों मेरी कहानी कैसी लगी… अपनी राय दें। Hindi Sex Stories

Antarvasna

सभी अंतर्वासना सेक्स कहानी Antarvasna पढ़ने वालों को मेरी तरफ से यानि कि प्रीतो पंजाबन की तरफ से बहुत बहुत आदर, सतिकार, प्यार, सलाम, नमस्ते!

दोस्तों, आप ही की तरह मैं भी अन्तर्वासना की पक्की पाठक हूँ और अब तक वैसे इस में छपने वाली हर एक कहानी का लुत्फ उठाती रही हूँ और फिर कभी कभी तो बाथरूम में भी जाना पड़ता है जब पास में कोई मर्द न हो तो उंगली, मोमबत्ती जिंदाबाद!

मेरी उम्र इक्कीस साल की है. मैं पंजाब में अमृतसर में रहती हूँ और यह मेरी अन्तर्वासना पर पहली सेक्स कहानी है. पिछले तीन सालों से मुझे लड़कों का चस्का लगा है, घर में माहौल ही ऐसा था कि कदम खुद ब खुद बहकने लगे थे. मेरी कामुकता मेरे काबू में नहीं थी. अब तक तीन सालों में मैंने पांच बॉयफ़्रेन्ड बदले हैं. किसी एक साथ मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाती, जो भी लड़का या कोई भी मर्द मुझे सेक्स में खुश नहीं कर पाता या फिर जिस के साथ मुझे बिस्तर में मजा नहीं मिलता, मैं उसे छोड़ देती हूँ.

अन्तर्वासना पर अपनी चुदाई के एक एक किस्से को बताने जा रही हूँ जिस का आगाज़ मैं अपनी सब से पहली डेट पर हुई चुदाई के साथ करने लगी हूँ.

ठीक तीन साल पहले मैंने जवानी में बिल्कुल नया नया पैर रखा था, तभी से मेरा दाना फड़कने लगा था, जिस का कारण था केबल, हॉट वेब साइट्स अथवा अपनी उम्र से बड़ी लड़कियों के साथ मेरी दोस्ती! उनके घर जाती तो वो कंप्यूटर पर ब्लू फिल्में देख देख एक दूसरी की चूतें मसलती, मम्मे दबाती!

दसवीं क्लास में मेरा पहला एफेयर बारहवीं क्लास में पढ़ने वाले बबलू नाम के लड़के के साथ चला. उस की स्कूल में पूरी दहशत थी, हर लड़का उस से डरता था, स्कूल का चौकीदार, चपड़ासी वगैरा स्टाफ के लोग उस का पानी भरते थे, मन मर्ज़ी से स्कूल आता जाता! हमारा स्कूल बहुत बड़ा है, फ्री पीरियड में वो मुझे स्टोर रूम में बुला लेता, वहाँ बैठ बातें करतें, वो मेरी स्कर्ट में हाथ डाल कर मेरी जांघें सहलाता, मेरे बटन खोल मेरे मम्मे दबाता, चूमा चाटी करता, बदले में मैं भी उस का लौड़ा पकड़ लेती और मसल देती. एक दो बार उसने मुझ से लौड़े की मुठ मरवाई और चुसवाया भी. मुझे चूस कर बहुत मजा आया. मेरा दिल रोज़ उसके लौड़े को चूसने को करता लेकिन मौका और जगह सही ना होने की वजह से कभी आगे नहीं बढ़ पाए.

एक दिन उसने मुझे पहली डेट का ऑफर दिया. उसने मुझे स्कूल से बंक कर के सिनेमा हाल में बुला लिया. स्कूल टाइम पर घर से निकली और वहाँ पहुँचने की बजाये थिएटर चली गई. वहाँ डबल एक्स फिल्म लगी थी. दोनों अंधेरे में एक दूसरे से लिपट गए. उसने खुलकर मेरे मम्मे चूसे! तभी उसको कॉल आई और वो खुश हो गया और मुझे वहाँ से चलने को कहा. मैं उसके साथ बाहर आई, चेहरा चुन्नी से छुपा उसकी बाईक पर बैठ गई.

वो मुझे लेकर शहर से थोड़ा बाहर ले आया. जब मैंने पूछा तो उसने कहा- बस बैठी रहो!

मुझे लेकर वो किसी के फार्म हाउस में गया. वहाँ कोई नहीं था. सिर्फ गेट कीपर था. उस ने उसको चाभी दी, मैं समझ चुकी थी.

हम दोनों एक आलीशान बेडरूम में पहुँच गए. उसने उस आदमी को कुछ पैसे दिए और बीयर लेकर आने को कहा और साथ में कुछ खाने के लिए भी!

उसने मुझे बाँहों में भर लिया, मैं भी लिपट गई. उसने मेरी कमीज़ उतार दी और अपनी भी! उस ने मेरी स्कर्ट उतार फेंक दी मुझे ब्रा पेंटी में देख उसका लौड़ा हिलने लगा. फिर दोनों ने बीयर पी, पहली बार पीने से मुझे नशा हो गया, मैं बेशर्म बन गई और खुद ही अपनी ब्रा पेंटी उतार दी. पहली बार किसी मर्द के सामने पूरी नंगी हुई थी मैं उस दिन!

मेरी रोयेंदार सी सील बंद गुलाबी चूत देख वो मचल उठा, पागल हो गया और मेरे उभरती हुईं छातियों को देख वो रुक नहीं पाया और मेरे चुचूक पहली बार उसने रोशनी में देखे, पहले हर बार अँधेरे वाली जगह में देखे थे. वो चूसने लगा, मैं भी मचलने लगी.

वो मुझे पर छाता गया और मैं दबती गई. बेडरूम में पहली बार लड़के के साथ थी, मुझ से रुका नहीं गया और मैं नीचे बैठ उसका लौड़ा चूसने लगी. पूरा तन चुका था उसका लण्ड, मुझे बहुत स्वाद लग रहा था, अपनी ही धुन में मैं लगी पड़ी थी. फिर उसने फिर से मेरी चूत में अपनी जीभ घुमा घुमा कर पागल कर दिया मुझे! मैंने भी उसके लौड़े को कस के पकड़ लिया और अपनी ओर खींचने लगी. उसने ऊपर आते ही मेरी टाँगें खोल लीं और बीच में बैठ अपना लौड़ा मेरी सील बंद चूत पर रखते हुए झटका मारा.

मैं उछल उठी. वो इस काम का मास्टर लग रहा था, पहले से ही मुझे अपने सिकंजे में जकड़ रखा था और मेरे होंठ अपने होंठों में दबा रखे थे. दो तीन झटकों से उसने पूरा लौड़ा मेरी चूत में उतार दिया. मैं तड़प रही थी, उस का लौड़ा पूरी तरह से कस चुका था, उस को भी दर्द हो रही थी लेकिन उसने निकाल कर फिर से डाल दिया. इस बार थोड़ी राहत मिली और थोड़ा आराम से घुसा.

फिर मैं खुद ही अपनी गांड उठा कर चुदवाने लगी.
वाह मेरी जान! क्या टाइट चूत है साली तेरी!
हाँ अब अच्छा लग रहा है! थोड़ी स्पीड बढ़ाओ!
उसने तेज़ तेज़ झटके मारने शुरु कर दिए.
अह उहऽऽ
मैं उस का उत्साह बढ़ा रही थी!
साले चोद दे मुझे!
हाँ! मेरी रांड देखती जा!

उसने मुझे पलट लिया और घोड़ी बना कर चूत मारने लगा. उस का स्टेमिना बहुत था. मेरी इतनी चुदाई की जिससे मैं निहाल हो गई.

एक साथ दोनों का काम तमाम हुआ. उसके बाद कुछ बीयर और पी और उसने स्कूल टाइम तक मुझे खूब चोदा और मुझे कच्ची कलि से फूल बना दिया, वो भी तीन बार चोद कर!

मुझे चलने में मुश्किल हो रही थी.

यह थी मेरी पहली चुदाई!
आपके जवाबों का इंतज़ार है और बाद में अपनी चूत में घुसे दूसरे लौड़े के बारे में बताऊँगी.
बाय बाय!
यह तो शुरुआत है!!!! Antarvasna

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