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Massage Girl in West Godavari: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in West Godavari who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in West Godavari that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The West Godavari massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in West Godavari who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your West Godavari massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This West Godavari massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in West Godavari who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in West Godavari employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in West Godavari helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in West Godavari

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in West Godavari at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex Stories

ट्रेन के डिब्बे में माहॉल शांत होता जा रहा था Sex Stories क्योंकि रात काफ़ी हो चली थी और अधिकतर लोग सोने लगे था या सोने की तैयारी कर रहे थे। मैं भी सोने की कोशिश करने लगा पर नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही उधर लॅंड कुछ देर पहले के सीन को याद कर के टनटनाता जा रहा था। फिर धीरे धीरे मेरी भी पलकें भारी होने लगी। जैसे ही नींद का झोंका आया तभी लगा कि किसी ने मुझे उठा दिया है। आँखे खोली तो आंटी सामने खड़ी थी और फिर वो बाथरूम की तरफ चली गयी। मैं उसे देखता ही रहा, समझ मैं नही आ रहा था कि क्या करना चाहिए। तभी उसने पलट कर देखा और मुझे पीछे आने का इशारा किया। मैं उसके पीछे पीछे टाय्लेट में जा घुसा। शुक्र था किसी ने देखा नहीं। उसने मेरे अंदर घुसते ही दरवाज़ा बंद कर दिया और झट से मेरा लंड पकड़ लिया। लंड तो पहले से टनटनाया हुआ था। उसने मेरी पैंट खोल कर नीचे खिसका दिया और गीला अंडरवेयर भी नीचे कर दिया। फिर उसे कसके पकड़ के उपर नीचे करने लगी पर मुझे कभी कभी दर्द भी होता क्योंकि लौड्‍ा तो खड़ा होने के बाद बिल्कुल पेट से जा लगता था। और किसी ने उसकी इस तरह मालिश नहीं की थी। आंटी ने अब अपना चेहरा मेरे लंड पर झुकाया तो मैं बोला कि ये गंदा हो रहा है मैने अभी इससे नही धोया है।

वो कहने लगी –अरे इसको गंदा नहीं कहते। इसमें ही तो सारा मज़ा है। कितनी प्यारी गंध आ रही है इसमें से। ऐसा कहते हुए उसने मेरे लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं बड़ी तेज़ी से झड़ने की ओर बढ़ने लगा। मैने कहा- आंटी रुक जाओ नहीं तो मेरा माल फिर से निकल जाएगा। आंटी ने लोड्‍ा चूसने की रफ़्तार तो कम कर दी पर चूसना जारी रखा। वो इस तरह चूस रही थी कि मुझे लगा कि मैं ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाऊंगा। जब मेरा स्खलन नज़दीक आ गया तो मैंने चाहा कि उसके मुँह से लंड निकाल लूं पर उसने दाँत से हल्के से काट कर इशारा किया कि ऐसे ही रहो। इससे पहले कि मैं कहता कि निकलने वाला है उसे पहले ही लंड ने रस की बौछार करनी शुरू कर दी।

आंटी तो एक नम्बर की लंड चूसक्कर थी। एक भी बूँद नीचे नहीं गिरने दी। मैं लंबी लंबी साँसें ले रहा था और उसने अपना मुँह खोल कर मेरा रस मुझे दिखाया फिर उसने गले के नीचे उतार लिया। कैसा टेस्ट था- मैंने कहा। कहने लगी बहुत अच्छा तुम भी चाखोगे क्या। अपना नहीं पर आपका। मैंने कह दिया कि जो होगा देख जाएगा पर अगर इसने चूत दिखा दी तो जिंदगी की पहली चूत के दर्शन हो जाएँगे। फिर उसने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा कि यहाँ जगह नहीं है और वक़्त भी। फिर कभी देखेंगे, मन वहाँ से जाने का बिल्कुल ही नहीं हो रहा था। लंड ने इस बार खड़ा होने में थोड़ी देर लगाई पर फिर पहले की तरह टनटना गया।

मेरे उछलते हुए लंड को देख कर आंटी ने कहा कि उसे कम उमर के लड़के इसीलये तो ज़्यादा पसंद हैं क्योंकि कई बार झड़ने के बाद भी उनका लंड ज़रा सा हाथ लगते ही खड़ा हो जाता है। फिर वो झुक कर खड़ी हो गयी और कहा कि पीछे से डालो। मैंने पीछे से लंड सटा कर धक्का मारा तो उसके गांड के छेद से रगड़ ख़ाता हुआ चूत को रगड़ता हुआ निकल गया। वो समझ गयी कि लाड़ला बहुत ही अनाड़ी है।

उसने हाथ नीचे से लगा कर अपने चूत के छेद पर भिड़ाया और कहने वाली थी कि अब डालो पर सुनने की फुरसत किसे थी।ये डर था कि कहीं चूत में घुसने से पहले ही मामला खराब न हो जाए। लेकिन जैसे ही आंटी ने अपने छेद पर रखा । लौड्‍ा सरसराता हुआ चूत को चीरता हुआ जड़ तक समा गया। इतना अनुभवी होने के बावजूद उसके मुँह से कराह निकल गयी। मार डाला। धीरे डाल।। फाड़ेगा क्या।

मैं अपनी धुन में धक्के पर धक्के लगाया जा रहा था। अब मेरे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था कि मैं इतनी उमर की औरत को इतनी अच्छी तरह चुदाई कर रहा हूं। मैं और कस कस कर धक्के मार रहा था। तभी आंटी का शरीर अकड़ने लगा। पूछा कि क्या हुआ आंटी तो कहने लगी गयी … गयी … आज तो मधु … समझ में नहीं आ रहा था कि अब ये मधु कौन है और कहाँ गयी।

मेरा ध्यान चोदने पर नहीं था पर मैं कस कस कर धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था। तभी आंटी के शरीर ने झटका लिया और वो शांत पड़ गयी। चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया था जिसे पूरी चूत बुरी तरह फिसल रही थी। तभी मैंने ज़ोर ज़ोर से झटके मार मार के अपना ढेर सारा रस भी उसकी चूत में डाल दिया। हम दोनो हाँफ रहे थे। जैसे तैसे साँसों पर काबू पाया और फिर मुँह धोते हुए कहने लगी कि अब तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है। मेरी भी टाँगों में सिहरन हो रही थी। फिर ये कहती हुई कि थोड़ी देर बाद आना वो दरवाज़ा खोल कर निकल गयी।

२ मिनिट बाद मैं निकला। आस पास सब सोए पड़े थे । शुक्र मनाता हुआ अपनी सीट पर जा कर लेट गया।

आगे की कहानी अगले पार्ट में लिखूंगा । Sex Stories

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मैं गौरव, मैं 46 साल का हूँ Hindi sex stories और मेरी सेक्सी बीवी शैला (बदला हुआ नाम) 40 साल की है। हमारी शादी हुए 20 साल हो गये हैं।

अब शैला में वो पहले वाली बात नहीं रह गई थी। अब तो वो बस चुदाते समय बस लेटी रहती थी, उसमे कुछ भी सेक्स बाकी नहीं रह गया था। मैं उससे बहुत बोर हो गया था इस तरह का सेक्स करते करते।

एक दिन मैंने शैला के ड्रॉवर का ताला खोला तो उसमें एक बड़ा सा डिल्डो यानि प्लास्टिक का लण्ड रखा हुआ था।

मैं तुरन्त ही समझ गया था कि अब उसे कोई साधारण नहीं, मोटे लण्ड की आवश्यकता है, शायद उसे इस डिल्डो से बड़े लण्ड की आदत हो गई थी इसलिये उसे अब मेरे लण्ड की चुदाई में मजा नहीं आता था।

यह सब देख कर अब तो मेरा मन उसे किसी प्लास्टिक के लण्ड से नहीं, पर सच में किसी किसी मोटे और बड़े लण्ड से चुदाई होते देखने का मन हो आया था।

वैसे शैला पहले बहुत ही सेक्सी औरत थी और वो कई कई बार एक ही दिन में चुदा लेती थी, उसे डर नहीं लगता था।

वो चुदने में एक्सपर्ट थी और सब काम उसे सेक्स में करना मन्जूर था। वो चुदाते समय लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसती थी, अपनी गाण्ड में भी मस्ती से लण्ड ले लेती थी, 69 की पोजीशन में भी ओरल सेक्स के मजे लेती थी।

चुदते समय उसकी दर्द भरी आवाज में चिल्लाना, आहे भरना गर्म गर्म सांसें छोड़ना, चूतड़ों और चूत को उठा उठा कर लण्ड लेना, जीभ से लण्ड को सहलाना, उसकी वो कातिल निगाहें और मुंह से चूसने का अन्दाज और पूरा लण्ड मुंह में भर लेना, हम दोनों को बहुत ही मजा आता था।

अब कुछ सालों से वो ठण्डी हो गई थी और मुझे उसे फिर से गर्म करना था।

एक दिन मैं और शैला रात को कहीं से आ रहे थे। हम बिल्डिंग में आ गये तो देखा कि नया चौकीदार गेट पर था। वो कुछ पचास साल का होगा। वो मोटा सा लम्बा सा सांवले रंग का आदमी था।

मैंने इस बात को नोट किया कि जब हम ऊपर जा रहे थे तो वो मेरी बीवी शैला की गाण्ड को बहुत ही घूर रहा था।

शैला ने नाईटी पहन रखी थी सो उसकी गाण्ड पीछे से मस्त बाहर निकली हुई दिख रही थी।

मुझे लगा कि क्यूं ना मैं उससे शैला को चोदने के लिये बोलूं।

पर मुझे अभी उसके लण्ड का आकार भी देखना था क्यूंकि शैला को तो मोटे लण्ड की आवश्यकता थी।

मैं चौकीदार को दूसरे दिन दारू पिलाने ले गया और जब उसे पेशाब आया तो मै भी उसके साथ में गया।

जब उसने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर लण्ड निकाला तो मैं उसका लण्ड देख कर दंग हो गया। काला सा मोटा सा लण्ड नौ इंच का था। मैं उसका लण्ड देख कर खुश हो गया।

उसका नाम रविंद्र था पर बहुत ही गर्म दिमाग का आदमी था और बहुत गाली देता था।

बातों बातों में मैंने भी थोड़ी बहुत पी ली थी फिर उससे पूछा कि तुम मेरी बीवी को घूर रहे थे।
पहले तो वो थोड़ा डरा, पर दारू के नशे में बोला- मस्त माल है… क्या गाण्ड है उसकी!

मैंने पूछा- तुम उसे चोदोगे?
इस पर वो उठ कर बोला- चलो, अभी चोद डालूंगा उसे।

अब हम घर की तरफ़ चल दिए। मैं उसे घर में ले गया और शैला से कहा- आज ये यहीं सोयेगा।

वो अब हमारे साथ सो गया।

हम बेड पर थे और वो नीचे सो रहा था।

थोड़ी देर बाद मैं उठा और मैंने जो पहनने को उसको लुंगी दी थी, उसे ऊपर कर दी।

उसने अपनी लुन्गी निकाल दी। अब उसका काला सा मोटा और बड़ा सा लण्ड खुला हुआ था। वो अब सोने की एक्टिंग करने लगा।

मैं दूसरे कमरे में चला आया और जोर से दरवाजा बन्द किया।

दरवाजे के बन्द करने की आवाज से शैला उठ गई। उसने रविंद्र के बड़े लण्ड को देखा तो उसे कुछ होने लगा।
वो सोचने लगी कि रविंद्र नशे में सो रहा है तो वो उसके लण्ड को सहलाने लगी।

इतने में मैंने दरवाजे को खोला तो शैला डर गई पर मैंने उसे कहा- मज़े कर।

अब रविंद्र भी उठ गया। उसने शैला की जम कर चुदाई की।

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मेरी योनि के Hindi Porn Stories अन्दर घूमती उंगली ने मुझे मदहोश कर रखा था… स्स्स्स्सईई मेरी सिसकारी निकलने लगी… वो धीरे धीरे उन्गली अन्दर बाहर कर रहा था… पर मैं इतनी मस्त हो गई थी कि ना तो एक उंगली से गुजारा हो रहा था और ना ही इतनी कम स्पीड में अब मजा आ रहा था…

आज इन को क्या हो गया? इतनी देर से एक ही उंगली से करे जा रहे थे और वो भी इतनी धीरे धीरे… मेरी कामुकता इतनी बढ़ गई थी कि मैंने अपने आप ही उनकी दो उंगलियाँ पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ कर जोर जोर से पेलने के लिये जैसे ही उनका हाथ पकड़ा… मैं सन्न रह गई… यह तो बड़ा मुलायम सा हाथ था… मेरे पति का हाथ तो घने बालों से भरा पड़ा है.

तभी मेरा दिमाग झन्नाया… मुझे याद आया कि मैं तो अपने एक रिश्तेदार के घर शादी में शामिल होने आई थी और खाली जगह देख कर कोने में सो गई थी। कमरे में अन्धेरा था, मैंने उसके हाथ को पकड़ कर दूर करना चाहा लेकिन मैं उस की ताकत के सामने हार गई, मेरा बदन कांपने लगा।

इस कमरे में तो मेरे आने से पहले तीन औरतें और एक छोटा सा बच्चा सो रहा था और कमरे में लाइट जल रही थी तो फ़िर यह कौन है? कब अन्दर आया और इतनी हिम्मत कर ली कि मेरे साथ यह सब?

मैं उस को पहचानने के लिये अपना हाथ उसके चेहरे पर ले गई तो वो मेरे कान में फ़ुसफ़ुसाया- मम्मी, मैं हूं बिल्लू!
मैं सन्न रह गई… यह मेरा अपना 12वीं में पढ़ने वाला 18 साल का बेटा ही मेरी चूत में उंगली घुसेड़ कर मज़े लूट रहा था।
“कमीने, यह तू क्या कर रहा है… शरम नहीं आती… अपनी माँ के साथ…? चल हटा अपना हाथ!” मैं उसके कान में फ़ुसफ़ुसाई।
“मम्मी, प्लीज… अब रहने दो ना… मजा आ रहा है।”

मैंने उसको समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उस को जो कुछ भी करना है जल्दी करने को कहा।
बिना वक्त गवांये वो मेरे ऊपर आया… मेरी गीली चूत पर अपना लण्ड रखते ही धक्के मारने चालू किये, 6-7 धक्कों के बाद वो शान्त हो गया।

अगले दिन 11 बजे ऑटो से मैं और बबलू घर आये, रास्ते में हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई। चूंकि उस दिन वर्किंग-डे था सो बबलू के पापा पड़ोस में चाबी देकर गये थे, पड़ोस से चाबी ले कर दरवाजा खोलने के बाद मैं अपने बेडरूम में गई और बबलू अपने रूम में। बैग से कपड़े निकाल कर मैं बाथरूम में चली गई।

कपड़े धोने और नहाने के बाद मैं हमेशा की तरह पेटिकोट और ब्लाउज पहनकर अपने बेडरूम में साड़ी पहनने के लिये गई। साड़ी पहनने से पहले मैं आगे की तरफ़ झुक कर तौलिए से अपने बाल सुखा रही थी कि तभी किसी ने पीछे से आ कर मेरी दोनों चूचियाँ जोर से भींच ली, उस का तने हुये लण्ड का स्पर्श मैंने अपनी गांड की दरार पर महसूस किया।
एक सेकेन्ड के लिये चौंकी… फ़िर अहसास हुआ कि बबलू के अलावा घर में कोई और है भी नहीं…

मैंने गुस्से में पलट कर जोर से उसके गाल पर एक जबरदस्त तमाचा जड़ा। उसने मेरी चूचियाँ इतनी जोर से दबाई थी कि मेरे आंसू निकल गये। वो मेरे तमाचे से बौखला गया… उसका चेहरा लाल हो गया… और जोर से चिल्ला कर बोला- चाचा से तो खूब करवाती हो… चिल्ला चिल्ला कर… मैं भी तो वही कर रहा था… फ़िर मारा क्यों…??

उस की बात सुनकर मेरी जबान कुछ कहने से पहले मेरे हलक में अटक गई… मैं फटी आंखों से उस को देखती रही… मैं अवाक रह गई।
“बोलो ना! अब क्यों नहीं बोलती कुछ?” उसने गुस्से में कहा।

थोड़ी देर खामोश रहने के बाद मैंने थोड़े गुस्से और थोड़े प्यार के लहजे में उस से कहा- क्या बकवास कर रहा है तू? कौन चाचा और कैसा चाचा?
“सहारनपुर वाले चाचा और कौन? जब वो पिछली बार जब वो दोपहर में आये थे, मैंने सब अपनी आखों से देखा था… पहले दिन अपने बेडरूम में और आपने जबरदस्ती उन को एक दिन और रोका था… वही करने के लिये और दूसरे दिन गेस्ट रूम में…! मैंने दोनों दिन देखा था और उन के जाने के बाद आप बहुत उदास भी हुई थी।” उस ने उसी गुस्से वाले अन्दाज में कहा।

मेरे पैर काम्पने लगे… मैं सिर झुका कर बेड पर बैठकर सोचने लगी… अब क्या करूं…???
उसको समझाने के लिये हिम्मत कर मैंने उस की तरफ़ देखा… पर उस की निगाहें दूसरी जगह टिकी देख मैंने अपने पेट के नीचे देखा… मेरे पेटिकोट के नाड़ेघर के पास के कट की सिलाई उधड़ी होने के कारण मेरा पूरा झांट प्रदेश साफ साफ दिखाई दे रहा था।

मैं जल्दी से उस जगह पर अपना हाथ रख कर खड़ी हुई और पेटीकोट को घुमा कर नाड़ेघर को साइड में कर उसको पकड़ कर अपने साथ बिस्तर पर बिठाया और उस को समझने लगी- देख, देवर भाभी और जीजा साली के रिश्ते में कभी कभी ऐसा हो जाता है… पर तू तो मेरा बेटा है… मां बेटे के रिश्ते में यह सब पाप होता है… गाली भी होती है।
“झूठ मत बोलो मम्मी! राजू भी तो अपनी मम्मी के साथ कभी कभी करता है।” बबलू ने झल्ला कर कहा।
राजू बबलू की बुआ का लड़का जो बबलू से एक साल छोटा है.

इस बात से मैं और चौंकी और पूछा- तुझे कैसे पता ये सब…?

वो जब रात को सोने की जगह नहीं मिली तो राजू और मैं उस कमरे में गये जहाँ आप सो रही थी… आप का एक पैर मुड़कर एक साइड में और दूसरा पैर सीधा था, जिस वजह से आपकी साड़ी पूरी ऊपर सरकी हुई थी और पूरी नंगी लेटी हुई थी। मैंने जल्दी से लाइट बन्द की और राजू का हाथ पकड़ कर नीचे ले गया। राजू ने नीचे आकर कहा कि आप की चूत बहुत सुन्दर है और उसकी मम्मी की तरह काली नहीं है।

जब मैंने उस से पूछा कि तेरी मम्मी तो गोरी है तो फ़िर उनकी चूत काली कैसे हो गई? और तुझे कैसे पता?
तो उसने बताया कि पहले वो छुप छुप कर गुसलखाने में नहाते समय दरवाजे के नीचे की झिरी से देखता था और एक दिन उसकी मम्मी ने उसको पकड़ लिया और तब से वो कभी कभी अपनी मम्मी के साथ वही करता है जो चाचा ने आपके साथ किया था। उसने यह भी बताया कि उन के पड़ोस में रहने वाले जडेजा अंकल के साथ भी उस की मम्मी वही करती है।

उस ने मुझ से कहा कि मैं ऊपर जा कर चुपचाप आप की बगल में लेट जांऊ और अपनी उंगली में थूक लगा कर आप की चूत में डाल कर धीरे-धीरे घुमाऊँ… फ़िर आप अपने आप मुझे अपने ऊपर लिटा कर करने को कहोगी… लेकिन आपने तो ऐसा कुछ नहीं किया… उलटा रात को मेरा हाथ झटक दिया और अभी मेरे गाल पर तमाचा जड़ दिया…क्यों??

अब मैं उस को क्या जवाब देती…? कुछ समझ में नहीं आया। अपनी उस गलती को याद करने लगी जब घर में उसके होते मैंने अपने देवर से… पर मैं करती भी क्या…? मेरे देवर का लण्ड था ही ऐसा जो एक बार देख ले चुदाये बिना रहना मुश्किल और एक बार चुदवा लिया तो जहन में आते ही चूत कुलबुलाने लगती है।

मेरी शादी के चार या पांच महीने बाद एक दिन सहारनपुर में उन्हीं के घर में मौका पाकर उसने मुझ से सम्बन्ध बनाने चाहे…
मेरे टालमटोल करने के बावजूद उसने एक रात मेरे कमरे में आ कर अपनी हसरत पूरी करनी चाही… और पूरी हो भी गई लेकिन बेचारे को आधे में ही भागना पड़ा क्योंकि दूसरे कमरे में लाइट जलने पर वो मेरे ऊपर से उतर कर बाहर भाग गया था। जिस कमरे में मैं सोई थी और बगल वाले कमरे (देवर और उनकी बहन का कमरा) के बीच में छत के पास एक रोशनदान था जहाँ से लाइट जलने का पता चला।

उस रात जो आठ दस धक्के मेरी चूत पर पड़े थे, उन को मैं आज तक नहीं भूल पाई हूँ। ऐसा लग रहा था जैसे एक के पीछे एक दो दो लण्ड अन्दर जा रहे हों और बाहर निकल रहे हों। एक दिन पहले पीरियड से फ़्री होने के कारण ठुकाई के लिये आतुर मेरी चूत और ऊपर से आठ दस धक्कों की रगड़ से और भड़की आग की तड़प से मैं पूरी रात सो नहीं पाई थी।

एक हफ्ता वहाँ रहते हुये हम दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन असफलता ही हाथ लगी और एक दिन मेरे पति आ कर मुझे अपने साथ दिल्ली ले आये।

आज से दो महीने पहले (जिस दिन की याद बबलू ने आज दिलाई) दोपहर को खाने के वक्त वो हमारे घर आये अपनी लड़की से कोई कोर्स करवाने के सिलसिले में मेरे पति से सलाह लेने!

उसको देखते ही मेरी काम पिपासा जाग गई… अठारह साल पहले पड़े आठ दस धक्कों की रगड़ याद आते ही चूत रानी मस्तानी हो चली थी। मेरे पति उस वक्त आफिस गये थे। बबलू खाना खाकर अपने कमरे में लेटा था। मैंने दो थालियों में खाना परोस कर डायनिंग टेबल पर रखा और दोनों (देवर और मैं) बैठकर खाना खाने लगे।

खाना खाते खाते मेरी निगाह बार-बार उसकी टांगों के बीच अटक जाती, जिसे भांप कर देवर ने मेरे पैर पर पैर मारा… मैंने जब उसकी तरफ़ देखा तो उसने मैक्सी ऊपर सरकाने का इशारा किया।

मैंने आंख और सिर हिला कर नहीं में इशारा किया तो वो कुर्सी और नजदीक खिसका कर अपना एक पैर मेरी मैक्सी के अन्दर डालकर मेरी टांगों के बीच में लाकर पैर के अंगूठे से मेरी चूत टटोलने लगा… और उसके आग्रह पर मैंने कुर्सी से उठकर अपनी मैक्सी ऊपर कर उसको अपनी… के दर्शन कराये और बैठ कर खाना खाने लगी।

मेरा देवर तेज दिमाग वाला इंसान है, उसने लुंगी के नीचे कुछ नहीं पहना था, वो बीच में से लुंगी फ़ैलाकर अपने अजूबे लण्ड को निकाल कर मेरी तरफ़ देखते देखते खाना खाने लगा। खाना खत्म करने के बाद मैं किचन से आम लेकर आई।

किचन का काम निपटा कर मैं बाहर आकर उसके पास बैठ कर उसके घर परिवार के बारे में जानकारी लेने लगी।
“तुम बैठक में जाकर सो जाओ, मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा सुस्ता लूं!” कहते हुये जैसे ही मैं उठी, उस ने खींच कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया, एक हाथ से मेरी एक चूची दबा दी।

“पागल हो गये हो देवर जी! जवान लड़का घर में है… छोड़ो ना…” मैंने विनती की।
उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उठ कर अपने कमरे में चली गई। अन्दर जा कर मुझे पछतावा होने लगा। अठारह साल बाद ऊपर वाले ने मौका दिया था और मैंने गंवा दिया। मैं कुछ सोच कर पलटी ही थी कि देवर ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।

मन ही मन बल्लियों उछलते हुये मैंने नाटक करते हुये कहा- रुको देवर जी, मैं बबलू को देख कर आती हूँ।
“उसकी चिन्ता तुम मत करो मेरी जानेमन भाभी… मैं देख कर आया हूँ… वो अपने बिस्तर पर उल्टा हो कर सो रहा है।”
“छोड़ो तो सही… दरवाजा तो बन्द कर दूं!” मैंने कहा।

देवर बाहों में पकड़े पकड़े मुझे दरवाजे के पास लाया, अपने आप कुन्डी बन्द की और उसी अवस्था में ले कर बिस्तर पर आया… मुझे लिटाया… मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरे पैरों को फ़ैलाया और एक झटके में मेरी चूत की चुम्मी ले कर बोला- सच भाभी, भगवान की कसम, इन अठारह सालों तक कैसे कैसे बरदाश्त किया… उस दिन जल्दी जल्दी में कुछ मजा नहीं आया और मैंने तो तुम्हारी फ़ुद्दी के दर्शन भी नहीं किये थे।

मेरी चूत रस भरी की तरह अन्दर से भर चुकी थी, मैं किसी तरह भींच भींच कर पानी को बाहर निकलने से रोक रही थी। मैं आज तसल्ली से उसके लण्ड को देखना चाहती थी कि उस का आकार ऐसा क्यों है…??

मैं उठ कर बैठते ही अपना हाथ लम्बा कर उसकी लुन्गी के अन्दर ले गई… उसके लण्ड को पकड़कर लुन्गी से बाहर निकाल कर नजदीक से देखने लगी।

उसके लण्ड का टोपा नुकीला, टोपा खत्म होते ही (रिंग के पास से) फूला हुआ, 2 1/2 इंच के बाद जैसे 1/2 इंच की गांठ बंधी हो (पूछने पर देवर ने बताया कि बचपन में फोल्डिन्ग पलंग में उसकी लुली फंस गई थी, सात टांके आये थे, जिस कारण टांके वाली जगह से वो एक दम पतला और गिठा के आकार का हो गया था), उसके बाद तीन इंच पीछे की तरफ़ मोटा और जड़ के पास से आधा इंच पतला यानी कुल मिला कर करीब सात इंच लम्बा।

आज मुझे पता चला कि जिस रोज अठारह साल पहले इसने पहली बार मेरी चूत में डाला था उस वक्त मुझे क्यों अजीब लग था।

मेरे हाथ में ही उसका लण्ड झटके मारने लगा… इधर बैठे-बैठे मेरी चूत से फ़क से पानी पेशाब की तरह बाहर निकल गया और मेरे नीचे बेड सीट गीली हो गई। मेरी वासना पूरी तरह जाग चुकी थी…मैं बेड पर लेटी और बोली- आओ ना देवर जी… जल्दी करो… कहीं बबलू जाग ना जाये।
मैं आज अठारह साल पहले की भड़की आग को शान्त करना चाहती थी तसल्ली से।

देवर ने नीचे खड़े-खड़े मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हुये एक उंगली अन्दर सरका दी।
मैं बरदाश्त नहीं कर पाई… मैं समय बरबाद नहीं करना चाहती थी… उस को जोर से खींचते हुये मैंने अपने ऊपर लिटा कर कहा- बड़े कमीने हो तुम…! करते क्यों नहीं…??
“इतनी जल्दी क्या है मेरी जान…? तुमने तो मेरा तसल्ली से देख लिया… मैं भी तो देखूँ अपनी भाभी की मस्तानी फ़ुद्दी को…” वो बड़े इत्मिनान से बोला।

मेरी चूत से लगातार बूंद बूंद कर पानी रिस रहा था। हर औरत समझ सकती है कि ऐसा कब होता है और ऐसा होने पर अगर लण्ड नहीं मिले तो वो कुछ भी कर सकती है… कुछ भी। पर मैंने प्यार से काम लेना ही ठीक समझा और उसकी छाती पर उंगली फेरते हुए कहा- एक बार कर लो ना… फ़िर जी भर के देख लेना मेरे राजा।
“क्या कहा भाभी… जरा एक बार फिर बोलना जरा!” देवर बोला।

“मेरे राजा… एक… बार… कर लो… मेरी नीचे वाली तड़प रही है… उसके बाद जी भर कर जैसे मर्जी हो देखते रहना…” आधा बेशर्मी और आधा शरमाते हुये मैंने कहा और उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।
देवर- हाय मेरी जान… मुझे पता है तुम्हारी फ़ुद्दी टपक रही है… एक बार देखने दो…
मुझे खीज सी होने लगी थी- क्या है देवर जी… तंग मत करो ना… बोला तो है एक बार कर लो फिर जितना मर्जी देख लेना… कहते हुये मैं लेटे लेटे नीचे से अपने आप को एडजस्ट करने के बाद फ़िर कहा- अब नहीं सहा जा रहा है देवर जी… क्यों मेरा मजा खराब कर रहे हो… करो ना… नहीं तो मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगी…

“अच्छा यह बात है!” कहते हुये देवर ने पहले मेरी चूत के बाहर रिसे प्री-कम से अपने लण्ड के टोपे को गीला किया और फ़िर रखते ही गपा…क से घुसेड़ दिया।

मैं शायद इसी वक्त के लिये अटकी थी… मैं तो नीचे से फ़ुदकने लगी… आआआआ अभी आधा लण्ड ही अन्दर घुसा था कि मैं तो झड़ गई। मेरा मूड खराब हो गया…
मेरा बिगड़ा चेहरा देख देवर बोला- अब क्या हुआ…? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया फ़िर…

“बहुत गन्दे और कमीने हो तुम देवर जी!” मैंने कहा- कब से बोल रही थी… तुम हो कि माने ही नहीं, अब तुम भी जल्दी से अपना पानी झाड़ो और दूसरे कमरे में चले जाओ।
“पर हुआ क्या, कुछ बताओगी भी?” देवर ने पूछा।
“मैं तुम्हारे डंडे के साथ मज़े लेना चाहती थी पर तुमने तो सारा काम ही खराब कर दिया!” मैंने कहा।
“बस इतनी सी बात…! अरे मेरी जान…! सब्र करो! ऐसा मजा दूंगा कि भाई साहब को भूल जाओगी और सपने में भी याद करोगी तो चूत से पानी टपकेगा!” देवर ने कहा।

मेरे ऊपर से उतरने के बाद उसने मेरी मैक्सी से मेरी चूत को साफ़ किया और दोनों पैरों के बीच में आने के बाद मेरे चूतड़ों के नीचे अपनी दोनों हथेलियों को रख कर अपना मुँह मेरी चूत पर रखकर चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं उत्तेजित हो गई… चूत चटवाने का यह मेरा पहला अनुभव था… लाजवाब अनुभव!
मेरी चूत के अन्दर फ़िर से सरसराहट होने लगी।

आगे क्या हुआ? जानने के लिए कहानी का अगला भाग : बेटा और देवर-2 Hindi Porn Stories

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मैं Antarvasna मेरा नाम नितेश है.. मैं अभी 27 साल का हूँ.. मेरा जिस्म बहुत आकर्षक है और मैं एक इंजीनियर हूँ।
आज़ मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी कॉलेज फ़्रेंड के साथ चुदाई की।

यह कहानी उस वक्त की है जब मैं MCA कर रहा था। उस वक्त मैं तीसरे सेमस्टर में था। इसी सेमेस्टर में हमारे इंस्टिट्यूट में लखनऊ से एक लड़की ट्रांसफ़र हो कर आई थी.. उसका नाम रेखा था, वो काफ़ी सुंदर थी, उसका 36-23-32 का फिगर एकदम मस्त था.. और वो एकदम गोरी-चिट्टी एक माल थी।

मेरा तो मन उसे पहली बार देखते ही चोदने का कर रहा था तो मैंने उससे एक दिन मौका पाकर बात शुरू की।
मैंने पूछा- आपका नाम क्या है।
बोली- रेखा.. मेरा यहाँ पर कोई दोस्त नहीं है.. क्या आप मेरे दोस्त बनोगे।

जैसे उसने मेरे मन की बात ही छीन ली हो। मैंने भी झट से ‘हाँ’ कर दिया। उसके परिवार में उसका छोटा भाई था.. वो भी BE कर रहा था। उसके पापा बैंक में मैनेजर थे और उसकी मम्मी हाउसवाइफ थीं।

ऐसे ही क्लास में आते-जाते हम काफ़ी करीब आ चुके थे। एक दिन मौका देख कर मैंने उसे ‘आई लव यू’ बोल दिया.. और उसने भी ‘हाँ’ कह दिया।
फ़िर एक दिन उसके सभी घर वाले 70 किलोमीटर दूर मंदिर में दर्शन करने गए हुए थे, आने और जाने में करीब दस घन्टे लगने की उम्मीद थी।

इसलिए उसने मुझे मेरे मोबाइल पर फोन करके बुलाया। मैं उसके घर गया और देखा कि वो सिर्फ़ एक पतली नाइटी में थी। नाइटी के अन्दर उसने ब्लैक ब्रा और पैंटी पहन रखी थी.. जो कि साफ़ दिखाई दे रही थी।

उसे देखते ही मेरा मूड बन गया और नीयत खराब हो गई।

मैंने उसे नशीली निगाहों से ताकते हुए पूछा- बाकी सब लोग कहाँ गए हैं।
उसने भी अर्थपूर्ण तरीके से कहा- सब मंदिर गए हैं.. रात तक आयेंगे।

इतना सुनते ही मैंने उसे अपने बाहों में ले लिया और उसे किस करने लगा। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और अन्दर बेडरूम में ले गया।

मैं उसके होंठों पर किस करने लगा। करीब 15 मिनट तक मैंने उसे किस किया। वो एकदम उत्तेजित हो चुकी थी और कामुकता से सिस्या रही थी ओह्ह.. जान.. प्लीज़ कम ऑन..

फिर मैंने उसकी नाइटी को लगभग फाड़ते हुए खोल दिया। अब वो सिर्फ़ टू पीस में थी.. फिर मैंने अपनी पैंट-शर्ट खोल दिए।

अब मैं सिर्फ़ चड्डी में था, मैं उसे ऊपर से नीचे की तरफ़ किस करने लगा।
किस करते हुए जब मैं उसके मम्मों के पास आया.. तो मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। तो ये देख कर मैं पागल हो गया कि उसके इतने भरे हुए मम्मों एकदम पूरी तरह से टाइट थे.. और उसके चूचुक पूरी तरह से तन रहे थे।

मैंने उसका निप्पल चूसना शुरू किया तो वो चिल्ला उठी- प्लीज़ निमि.. जल्दी करो.. अहह.. फक मी..

फिर मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी और अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। मैंने भी अपनी चड्ढी खोल दी। मेरा 8 इंच का मोटा तगड़ा लंड देख कर वो घबरा गई और बोली- प्लीज पूरा मत डालना.. मैंने सुना है कि काफ़ी दर्द होता है।
फिर मैंने कहा- जान दर्द से ज्यादा मजा आता है.. तुम देखती जाओ बस।

और मैंने अपना लंड उसके मुँह में डालना चाहा.. तो उसने मना कर दिया और बोली- इसे मेरी चूत में ही डालो।
फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया और काफ़ी देर तक चाटता रहा। उसके मुँह से चीखें निकल रही थीं- मुझे जल्द चोद दो.. मुझसे अब रहा नहीं जाता.. आह्ह..

फिर उसने मुझे खींच कर अपने ऊपर लिटा लिया और मैंने उसके कंधों को अपने हाथों से कस कर पकड़ लिया और अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा। अभी सिर्फ़ 25% ही गया थे कि वो जोर से चिल्लाई और पीछे हटने की कोशिश की.. मगर मैंने भी उसे पूरे जोर से पकड़ रखा था।

फिर एक और झटके से मैंने अपना करीब 75% लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो फिर से चिल्लाई- ओह्ह.. छोड़ो मुझे.. बहुत बड़ा है.. दर्द हो रहा है.. आह्ह..

मैंने उसे फिर एक झटका दिया और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था। उसके मुँह से काफ़ी तेज आवाज निकल रही थीं। लेकिन कुछ ही देर में उसे भी मजा आने लगा। फिर उसने कहा- निमि.. अब मुझे मजा आ रहा है.. प्लीज़ फक मी..फास्ट..

फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाते हुए फ़ुल स्पीड पर चुदाई शुरू कर दी। अब वो चिल्ला रही थी- प्लीज जोर से चोदो.. प्लीज.. फक मी फास्ट..

काफ़ी देर तक मैं उसे चोदता रहा। फिर उसकी चूत में से पानी निकल गया और उसने मुझे और टाइट से पकड़ लिया।

मैं समझ चुका था कि उसका पानी निकल चुका है। अब मैंने अपनी स्पीड और तेज की.. थोड़ी देर में मेरा भी पानी निकल गया।

जब मेरा माल निकलने लगा तो मैं उसके ऊपर ही लेट गया और फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने एक-दूसरे को चूमा और यूँ ही प्यार करते रहे।

इसके बाद तो जब भी मौका मिला हम दोनों ने अपनी खूब प्यास बुझाई। Antarvasna

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राजस्थान में मैं जयपुर, बीकानेर Antarvasna Sex Stories और उदयपुर में घरों में काम कर चुकी थी। यहाँ उदयपुर में मुझे इस घर में काम करते हुए करीब दो महीने हो गये थे। राज सिन्हा साहब की पत्नी नहीं थी, उनका स्वर्गवास हुए कई वर्ष गुजर चुके थे। वे राजपूत थे, सभी राज साब को बन्ना सा कहते थे। उनके दो लड़कियाँ थी जो अजमेर में कॉलेज में पढ़ती थी। घर में वो अकेले ही रहते थे। राज की उम्र लगभग पचास वर्ष की थी। वो अक्सर मुझे घूरते रहते थे। मैंने उस तरफ़ ज्यादा ध्यान नहीं कभी नहीं दिया।

मेरे पति मजदूरी के काम से आस पास के शहर में चले जाया करते थे। घर पर भी मैं अकेली ही रहती थी। चुदाने आस और प्यास की ललक बढ़ती ही जा रही थी। जवानी का आलम मुझ पर भी चढ़ा हुआ था। जब डाली फ़लों से लद जाती है तो स्वमेव ही झुकने लग जाती है। मेरे भी अंग-अंग में से जवानी छलकती थी। मेरे फ़ल भी लद कर झूल रहे थे। मन करता था कि इन फ़लों का रस कोई चूस ले, कोई मेरे फ़लों को खींचे, मसले और मरोड़ डाले। मेरे चूतड़ों की गोलाईयां मस्त लचकदार थी, दोनों चूतड़ चिकने और अलग अलग खिले हुए थे। दरार तो मानो दूसरों के लण्ड को अन्दर समाने के लिये आमन्त्रित करती थी। मेरे मन की बैचेनी भला कोई क्या जाने ?

इसी प्यास में कभी कभी मेरी नजर उनके पजामे पर भी चली जाती थी और उनके झूलते हुए लण्ड को पजामे के ऊपर से ही महसूस कर लेती थी। जब राज मूड में होता था तब वो सोफ़े पर बैठ कर अखबार पढ़ने का बहाना करता था और अपना खड़ा हुआ लण्ड पजामे में से मुझे दिखाने की कोशिश करता था। अपनी अन्डरवियर जिसमें वीर्य भरा हुआ होता था, मुझे धोने के लिये देता था। उसकी इस हरकत पर मुझे हंसी आती थी। मुझ पर डोरे डालने के तरीके मैं जानती थी। मेरे मन में कसक भी उठती थी कि इस पचास साल के जवान को पकड़ लूँ और उसकी ढलती जवानी को चूस डालूँ। मुझे भी जब वो अपनी हरकतों पर मुस्कुराते देखता तो उसकी हिम्मत बढ़ जाती थी।

पर एक दिन ऐसा समय आ ही गया कि वो चक्कर में आ ही गया। क्यों ना आता, आग जो दोनों तरफ़ बराबर सुलग रही थी। उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये बेताब हो रहा था और मेरी चूत उसे देख कर पानी छोड़ रही थी और लार टपका रही थी।

उस दिन मुझे यह भी पता चला कि काम करते समय मेरे ब्लाऊज में से मेरे बोबे को वो झांक-झांक कर देखता था। मेरा ध्यान ज्योंही मेरे ब्लाऊज की तरफ़ गया, मैं शरमा गई। मेरे बैठ के काम करने से मेरे चूतड़ों की गोलाईयां उभर कर दिखती थी, जिन्हें वो बडे शौक से निहारता था। उसकी बैचेनी मैं समझने लगी थी कि बिना औरत के आदमी की इच्छायें कितनी बढ़ जाती हैं। मुझे उन पर दया आने लगती थी। कभी कभी उसकी यह हालत देख कर मेरी चूत भी गरम हो उठती थी, तो गीली हो कर मेरी चड्डी भिगा देती थी। मैं उसकी बैचेनी बढ़ाने के लिये अपने स्तनों के दर्शन उसे रोज़ कराने लगी, उसे उत्तेजित करने लगी। बस इस दया ने मेरी चुदाई करवा दी।

उसका लण्ड खड़ा था और उस पर उनका हाथ कसा हुआ था। बस देखते ही मेरी चूत फ़डक उठी। मेरी वासना भी जाग उठी। इच्छा हुई कि उसका लौड़ा पकड कर मसल डालूँ।

“बाबूजी, नीचे तो देखो… ” राज ने कुछ ओर समझा और झट से लण्ड पर से हाथ हटा लिया,”क्या हुआ…?”

“वो सोफ़े के नीचे से सफ़ाई करना है…” उसकी बौखलाहट पर मैं हंस पडी…

“ओह्ह… मैं कुछ और समझा…”

“मैं बताऊं… आप समझे कि आप रे नीचे…” मैंने मुँह दबा कर हंस दी।

“चल हट… अब अकेला हूं तो मजाक बनाती है !”

” आप अपने आप को अकेला मती समझो जी… मैं भी तो हूँ ना !” मैंने उसके खडे लण्ड को देख कर मसखरी की।

“सच लच्छी… ” उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेरे शरीर में करण्ट दौड़ गया। उसका उतावलापन भड़क उठा।

“साब… हाथ छोड़ दो…” पर मैंने हाथ छुड़ाया नहीं।

वो और आगे बढ़ा और मुझे अपनी तरफ़ खींचा। उसके जिस्म में जैसे ताकत भर गई। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसकी आंखो में वासना की प्यास और दया की भावना दिखी।

“देख लच्छी, तू भी जवान है और मैं भी, देख मुझे खुश कर दे… मैं तुझे पैसे दूंगा !”

मैं लड़खड़ाती हुई उसके सीने से टकरा गई। पैसे का लालच भी आ गया, और चुदाने की इच्छा भी जागृत हो उठी। दबी जुबान से नीचे देखते हुए बोली,”साब पूरे सौ रूपिया लूंगी…फ़ेर तो जो मर्जी हो आपरी !” मेरे इतना कहते ही उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और लण्ड मेरी चूत में दबाने लगा।

“साब अभी नहीं … माने तो सरम आवै…रात ने आ जाऊंगी…!” दिन को चुदने में शरम आती थी सो धीरे से बोली।

“दिन को यहाँ कौन है… !”

मैंने उसके जिस्म को सहलाया। राज ने भी मेरे स्तनों पर हाथ रख कर उन्हें सहलाना आरम्भ कर कर दिया। मेरे जिस्म में बिजलियाँ दौड़ने लगी। मैंने यह तो कभी सोचा ही नहीं था कि बात सीधे ही चुदाई तक आ जायेगी। पर उसका कई दिन का प्यासा लण्ड कुलांचे मारने लगा था। उसकी ऐसी हालत देख कर मुझे दया आ गई और धीरे से उसका लण्ड थाम लिया। उसका लण्ड फ़ड़क उठा और जोर मारने लगा। मेरी चूत भी चुदने के लिये लपलपाने लगी।

“बाबू जी, ये तो घणों मोटो है … माने तो डर लागे…!”सच में उसका लण्ड मोटा था।

“लच्छी, अब कुछ ना बोल, बस मेरे गले से लग जा…!”

राज ने मुझे जोर से भींच लिया। मेरी पीठ पर उसके हाथ खरोंचे मारने लगे। मेरा बदन भी वासना से जल उठा। मैं धीरे धीरे रंगत में आने लगी और मेरी नौकरों वाली भाषा पर आ गई

“बाबू जी, आपरो लौड़ो तो मस्त हो गयो है … अब तो मने चोद ही मारेगो…!” मैं आह भरती हुई बोली।

मेरी भाषा सुन कर उसके शरीर में सनसनी दौड़ गई। उसके जिस्म में जोश भर गया। मेरा ब्लाऊज के बटन खुलने लगे, ब्रा का हुक भी खुल गया। कुछ ही समय में मेरा ऊपर का तन नंगा हो गया। मेरे तने हुए सुन्दर गोल उभार उसके सामने थे। उसके कपड़े मुझे अब नहीं सुहा रहे थे।

“थारी कच्छी भी तो उतार नाक नी… कई सरमाने लागो है !” मैं हंस कर बोली।

“ले मैं तो चड्डी बनियान सभी उतार देता हू… पर तेरा पेटीकोट…” उसने भी नंगी होने की फ़रमाईश कर दी।

“ना रे बाबू जी, मारो भोसड़ो दीस जावेगो…” मैं नंगी होने को उतावली हो रही थी।

“क्या… भोसड़ा…” राज को हंसी आ गई। “साली बड़ी बेशरम है !”

मैंने अपना पेटीकोट उतार दिया। और अपनी चूत राज के सामने उभार दी। राज देखता ही रह गया।

“अब उतारो नी… आपरो लौड़ो रो दर्सन कर लूँ… मोटो और लाम्बो है नी, म्हारो भोसड़ो पसन्द आयो…?” राज को हंसी आ गई, उसने अपने पैन्ट और चड्डी उतार दिये। सच में उसका लण्ड मोटा और लम्बा था। हम दोनों अब पूरे नंगे थे और आपस में लिपटने की कोशिश कर रहे थे। उसका लण्ड मेरी चूत के आस पास ठोकर मार रहा था पर मुख्य द्वार पर से फ़िसल जा रहा था। मैं भी अपनी चूत को लण्ड के निशाने पर ले रही थी कि छेद पर लगते ही भीतर समा लूँ। राज ने मुझे मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे कस लिया। तभी लण्ड छेद से टकरा गया और मेरी चूत खुल गई। दोनों ही निशाने पर थे। मैंने चूत पर जरा सा जोर लगाया और लण्ड ने मेरी चूत चीर कर भीतर झन्डा गाड़ दिया।

“आह, बन्ना सा… घुसेड़ मारियो…यो तो घणों तगड़ो है… कांईं तेल पिला राख्यो है… आह्ह !”

“ले आजा पलंग पर चुदाई करे…”

मैं अपनी चूत हिलाते हुए लण्ड को अन्दर बाहर करने लगी,”बाई रे… भीतर मारो नी… भोसड़ो मार दो बन्ना सा… हाय बाबूजी…”

राज ने मुझे पास ही लण्ड घुसाये ही पलंग पर धीरे से लेटा दिया… और मुझे नीचे दबा डाला,”तू तो बिलकुल नयी लगे है रे… तेरी चूत तो टाईट है…फिर भोसड़ा क्यों कहती है?” उसने वासना भरी नज़र से मुझे देखा।

“इसे कूण चोदे ! साली भुक्खी है लौड़े की… भोसड़ा तो म्हारी भासा है बन्ना सा !” मैं उसके मोटे लण्ड को पाकर निहाल हो गई थी। दीवारों को रगड़ता हुआ लण्ड भीतर समा रहा था। दर्द उठने लगा था। चूत से लण्ड की मोटाई सहन नहीं हो रही थी। राज तो मस्ती में अपना लण्ड अन्दर बाहर करने में लगा था।

“थारा लौड़ा है या लक्कड़… धीरे धीरे चूत मारो जी…”

मेरी भाषा सुनकर वो और जोश में आ गया और मुझे दबा कर लण्ड पूरा जोर लगा कर पेल दिया। मैं चीख उठी… उसने फिर एक और झटका दिया पूरा लण्ड निकाल कर पूरा ही फिर से घुसेड़ मारा…

मैं फिर से चीख उठी… मेरी चीखे शायद उसकी उत्तेजना बढ़ा रही थी, उसने जोर जोर से लण्ड चूत पर पटकना चालू कर दिया… मैं चीखती रही और अब धीरे धीरे मजा आने लगा। मैं सीधी लेट गई और अपनी सांसे ठीक करने लगी। अब मैंने नीचे से हौले हौले कमर हिला कर उसका साथ देना चालू कर दिया। मुझे अब मजा आने लगा था। मोटे लण्ड ने मेरी टाईट चूत को खोल दिया था। अब मैं भी राज से चिपकने लगी थी। मेरे शरीर में रंग भरने लगा था। तबीयत मचल उठी थी। चूत में चिकनाई और खून मिल कर लण्ड को चिकना रास्ता दे रही थी।

“मारो… भोदी ने चोद मारो… हाय रे बन्ना सा… म्हारी तो फ़ाड़ डाली रे…” मैं चिहुंकती हुई सिसकारियाँ भर रही थी। राज के चेहरे पर पसीने की बून्दें छलक आई थी जो मेरे चेहरे पर टपक रही थी। मैं चुदाई से मदहोश होती जा रही थी। ऐसे मस्त और जानदार लण्ड जब जम के चोदे तो समझ लो जन्नत तो दिख ही जायेगी और मजा तो भरपूर आ जायेगा। राज की कमर अब मस्ती से चल रही थी और लण्ड मेरी चूत को भरपूर मजा दे रहा थ। हाय राम कब तक झेलती इस मोटे लौड़े को मेरी जान निकली जा रही थी… और अम्मां रे … मैं तो गई…। मेरा रस छूट गया…

” बन्ना सा, म्हारो तो पाणी निकली गयो रे… थां को पाणी निकाल मारो नी…” मैंने हांफ़ते हुए कहा।

“ये लो मैं तो अब कितनी देर का हूँ मेरी लच्छो रानी… ये ले … मुँह खोल दे रे अपना… मेरा माल चूस ले !” वो लगभग ऐठता हुआ बोला और उसने अपना लण्ड खींच के बाहर निकाल लिया और अपनी मुठ्ठी में भींचता हुआ वीर्य निकाल दिया। सारा वीर्य मेरे चेहरे पर फ़ैल गया। उसका वीर्य निकलता ही रहा… हाय रे इतना ढेर सारा… उसने अपने हाथ से सारा वीर्य मेरे चेहरे पर मल दिया। मुझे पहले तो घिन आ गई पर जब उसने अपनी जीभ से मेरा चेहरा चाटना आरम्भ कर दिया तो मुझे उस पर प्यार उमड़ पड़ा। हम एक दूसरे पर अब निढाल से पड़े थे।

“लच्छी, बहुत सालों से मैंने चुदाई का आनन्द नहीं उठाया था… तूने तो मुझे स्वर्ग का मजा दे दिया रे !”

“हाँ बाबू जी, औरत की कमी तो औरत ही पूर कर सके है… और आपरो लौड़ो तो क्या ही मस्त है !”

“ये लो लच्छी पूरे सौ रुपये और ये सौ रुपये तुम्हें तकलीफ़ हुयी उसके !”

मैं उसकी तरफ़ देखती ही रह गई। सौ की जगह दो सौ रुपये… मैंने राज का एक चुम्मा लिया और शरमा कर मुड़ गई।

“बन्ना सा, सान्झे फ़ेर आंऊगी… थाने फ़ेर खुस कर दूंगी, अबार के रुपया भी को नी लूंगी…” मैंने पीछे मुड़ कर देखा और मुसकरा कर भाग खड़ी हुई।

मेरी चूत उस भारी लण्ड से चुदने के कारण दर्द कर रही थी, शायद सूजन भी आ गई थी। देखा तो चूत लाल हो रही थी। मैंने एन्टीसेप्टिक क्रीम लगा ली। दो सौ रुपये को प्यार से देखा और सम्भाल कर रख दिये। शाम के बर्तन करने मैं ज्योंही पहुंची तो राज ने मुझे मुस्करा कर देखा और बिस्तर पर धकेल दिया।

“ये काम को छोड़, आज मेरी सेवा कर दे… खूब रुपया दूंगा !” यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

“ना बन्ना सा, मारी तो भोसड़ी का कचूमर निकली गयो है, जबरी मत करना जी, अबार को नी चोदो…दर्द करे है जी…फिर पैइसा … ना जी, अब नाहीं !”

“लच्छो रानी… चूत में दर्द है तो गाण्ड मरवा ले… पर ना मत कर…”

“मैंने गाण्ड ज्यादा नहीं मरवाई नहीं है… पर वा जी… आप मार लो म्हारी गाण्ड…”

“चल फिर घोड़ी बन जा…”

मैंने पैसे के लिये तो मना किया था पर मुझे पता था कि वो देगा जरूर…मैं घोड़ी बन गई…और अपना घाघरा ऊँचा कर लिया। मेरी चिकनी गाण्ड की खूबसूरती देख कर उसका लण्ड तन्ना उठा।

“ये नीचे देखो बन्ना सा, मेरी भोसड़ी को तो आपने पकौड़ा बना दिया !” मैंने शिकायत करते हुए कहा। पर गाण्ड के दर्शन होते ही जैसे उसने कुछ नहीं सुना। उसने तेल में अंगुली डाल कर मेरी गाण्ड में घुसा दी और उसे चिकनी करने लगा। फिर लण्ड पर तेल मल कर तैयार हो गया। मेरी गाण्ड चुदने के लिये तैयार थी…

“लच्छो, तैयार हो जा… ये लण्ड गया तेरी गाण्ड में…”

“हाय रे बन्ना सा… धीरे से डालना…”

पर कौन सुनता मेरी, लण्ड का सुपाड़ा अन्दर बैठते ही उसने तो पूर जोर लगा डाला। और तेज धक्का दे कर लण्ड पूरा घुसेड़ मारा।

मेरे मुख से चीख निकल पड़ी…”आईईई …… आप तो मेरी गाण्ड भी फ़ाड़ डालेंगे… राम रे…” मैं लगभग चीख सी उठी।

“चुप बे साली… मुझे तो मजा आ रहा है… बहुत सालों बाद कोई मिली है… मजा तो लेने दे…”

उसका दूसरा बेदर्द धक्का मुझे अन्दर तक हिला गया। हरामजादे का लौड़ा गाण्ड के हिसाब से बहुत ही भारी और मोटा था। उसके दिल में जरा भी रहम नहीं था। तेल की चिकनाई भी ज्यादा काम नहीं कर रही थी। गाण्ड की अन्दर से दीवार शायद, रगड़ से छिल चुकी थी। उसके धक्के बढ़ने लगे। उसके लण्ड पर भी शायद चोट लगने लगी थी। दर्द के मारे आंखों से आंसू निकल पड़े। मैंने होंठ सिल लिये। दर्द बर्दाश्त करने लगी।

लण्ड को पेलते हुए अचानक उसे लगा कि उसने कुछ अधिक क्रूरता दिखा दी है, उसने अपना लण्ड धीरे से बाहर निकाल लिया। मैं निढाल सी एक तरफ़ लुढ़क पड़ी। पर राज का वीर्य तो छूटा ही नहीं था। पर उसका लण्ड बहुत जोर मार रहा था।

मैंने आंखो में आंसू लिये उसे अपने मुख की ओर इशारा किया। उसने अपना लण्ड मेरे मुख में डाल दिया। और धीरे धीरे मेरा मुख चोदने लगा। मैंने भी उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारते हुए चूसना चालू कर दिया।

उसका लण्ड मस्ती में आ गया और फ़ूल उठा। मौका देखते हुए मैंने उसके लण्ड को मुठ्ठी में जोर से कस लिया और उसे घुमा घुमा कर मोड़ने लगी, उसके मुँह में धक्के की रफ़्तार बढ़ गई। मेरे मुख में चोट लगने लगी। उसका लण्ड कभी कभी तो मेरी हलक में भी उतर जाता था। मैं उसका लण्ड दबा दबा कर उसका वीर्य निकालने की भरपूर कोशिश करने लगी। अन्त में उसके लण्ड ने जोर से ऐंठन भरी और मेरी हलक में अपना वीर्य निकाल दिया। मैं कुछ ना कर सकी, वीर्य मेरे गले में उतरता चला गया। उसका लण्ड रह रह कर वीर्य की फ़ुहारे छोड़ता रहा और सारा माल मेरे हलक में सीधे ही उतर गया। राज ने लण्ड मेरे मुख से बाहर निकाल कर झटका और मेरे होठों से बाकी का वीर्य पौंछ डाला। मैंने उसे भी जीभ निकाल कर चाट लिया। अब राज धीरे से मुझ पर लेट गया और प्यार से चूमने लगा। मुझे आत्मा तक ठण्डे प्यार का आभास हुआ। मैंने अपनी आंखें आत्मविभोर हो कर बंद कर ली और अलौकिक आनन्द का मजा लेने लगी। उसके जिस्म का प्यारा सा भार जैसे ही कम हुआ मेरी तन्द्रा टूट गई। मेरी गाण्ड और चूत आज बहुत दर्द कर रही थी। पर जिस्म का आनन्द अपूर्व ही था।

राज ने मुझे पांच सौ रुपये दिये जिसे मैंने मना कर दिया। पर वो नहीं माना… मेरे दिल में इच्छा तो लेने की थी पर जो आनन्द मिला था उसका कोई मोल नहीं था। मैंने चुप से पैसे ले कर रख लिये।

“बन्ना सा, मुझे आपने तो आसमान पर बैठा दिया… पर देखो तो मेरी अगाड़ी और पिछाड़ी का क्या हाल कर दिया है !”

“लच्छी, जाओगी कहां, अब तो आप बन्ना सा री लाडली बन चुकी हो। अब कुछ दिन का आराम… फिर आपकी मरजी हो तो … तन और मन को एक बार नहीं रोज ही स्वर्ग की सैर करायेंगे !”

मैं राज से लिपट गई और उन्हें चूमते हुए बोली,”आप कितने भले हो साब, मैं तो आपकी दासी बन चुकी हूँ… आपरी लाडली को आपणे सीने में छुपा लो, मती छोड़जो मने !”

राज ने मुझे अपने से चिपका लिया और बिस्तर पर सुला कर मुझे प्यार करने लगे… मैं फिर से प्यार में खो गई… और आने वाले दिनों के सपने संजोने लगी… Antarvasna Sex Stories

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