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Massage Girl in Champawat: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Champawat who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Champawat that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Champawat massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Champawat who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Champawat massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Champawat massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Champawat who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Champawat employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Champawat helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Champawat

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Champawat at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, मैं Sex Stories एक 26 साल का लड़का हूँ, पेशे से इंजिनियर हूँ, एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के ऑफिस में काम करता हूँ। वैसे तो मेरे साथ बहुत सी लड़कियाँ काम करती है पर एक लड़की पर मेरा दिल आ गया था। कुछ ही महीनो पहले एक नई लड़की ने हमारी कंपनी ज्वाइन की थी जिसका नाम गीता है। वो देखने में बहुत खूबसूरत है, उसके मम्मे उतने बड़े नहीं, पर वो देखने में बहुत गौरी है, उसकी आवाज भी बहुत मीठी है। वो अगर सामने आ जाये तो नजर नहीं हटती। वो कभी सलवार पहन कर आती तो कभी जींस।

मैं देखने में उतना खूबसूरत तो नहीं हूँ पर प्यार किया तो डरना क्या !

एक दिन मैं ऑफिस जल्दी पहुँच गया था, उस वक़्त कोई भी वहाँ नहीं था। थोड़ी देर में वो भी आ गई, उस वक़्त ऑफिस में सिर्फ हम दोनों थे। मैं भी अपने काम में लगा हुआ था, तभी एक मीठी सी आवाज से उस लड़की ने मुझे पीछे से पुकारा। उसने अपना हाथ हैन्डशेक करने के लिए बढ़ाया और अपना परिचय दिया। मेरे तो मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, मैं उसकी तरफ एक टक देखे जा रहा था। वो भी मुझे इस तरह देखते झेंप गई और मेरा ध्यान भंग करते हुए मुझसे अपना परिचय देने को कहा।

मैंने झट से अपना परिचय दे दिया। बस फिर क्या था, मैं भी उससे बात करने के लिए उसके बारे में पूछने लगा- वो पहले कहाँ काम करती थी ? उसके दोस्त कैसे थे वगैरह-वगैरह !

बातों ही बातों में मैंने उसे कॉफ़ी के लिए पूछ लिया। वो भी जल्दी से तैयार हो गई। फिर हम दोनों ने कैंटीन में जा कर काफ़ी पीते पीते बहुत सी बातें की।

यह सिलसिला काफी दिनों तक चला। एक दिन हम लोगों ने बाहर जा कर खाना खाने की सोची। वो एक बार बोलते ही तैयार हो गई थी। मैं उसे एक मंहगे होटल में ले गया था, वो होटल मेरे घर के काफी नजदीक था। हमने खाना आर्डर किया और खाना का इन्तजार करने लगे। खाना आने में बहुत समय लग रहा था तो मैंने उसको समय बिताने के लिए कोई चुटकला सुनाने को बोला। वो थोड़े नखरे करने के बाद एक चुटकला सुनाने को तैयार हो गई। उसने एक बकवास सा बच्चों वाला चुटकला सुना दिया। उसे खुश करने के लिए मैं बहुत हँसा।

अब मेरी बारी थी, मैंने उसे एक दोहरे मतलब वाला व्यस्क चुटकला सुना दिया, जिसे सुन कर वो शरमा गई और मुस्कुराने लगी। मैंने मौका देख कर एक और वैसा ही चुटकला सुना दिया। इस बार उसने मुझे ‘शरारती’ कहते हुए मेरे हाथ पर हल्के से चपत लगा दी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे। इतनी देर में खाना भी आ गया था। हम खाना खाते खाते अपनी रुचियों के बारे में बात करने लगे।

बातों बातों में हम एक दूसरे का हाथ छू लिया करते थे, वो बिलकुल भी ऐतराहुल नहीं करती थी। मेरा भी साहस बढ़ रहा था।

एक दिन हम नई मूवी के बारे में बात कर रहे थे, उसने मुझसे कोई एक मूवी लाने को कहा। अगले दिन मैंने उसे मूवी के साथ एक और इंग्लिश मूवी भी दी जिसमे कुछ सीन भी थे। दूसरे दिन जब उसने मुझे मेरी सीडी वापस की तो कहा कि वो इंग्लिश वाली मूवी उसे बहुत अच्छी लगी। मैं भी समझ गया कि यह तो खुल्लम खुल्ला लाइन दे रही है। मैंने मौका का फायदा उठाते हुए उससे शॉपिंग में मेरी मदद करने को कहा। वो झट से मान गई।

अगले दिन हम जब शॉपिंग के लिए गए तब मैं अक्सर साथ चलते चलते उससे टकरा जाता, ट्रैफिक क्रॉस करते हुए उसका हाथ पकड़ लेता। वो ऐतराहुल नहीं करती थी।

मैं जानबूझ कर उसकी चूचियों से टकरा जाता, वो भी मेरे काफी नजदीक आ गई थी, वो अक्सर मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे दुकानों में खींच लेती थी। मुझे भी बहुत मजा आता था और एक अजीब से सनसनी पूरे शरीर में दौड़ पड़ती। देखते देखते मेरी भी झिझक कम हो गई थी, मैंने भी उसके गले में हाथ डालना शुरू कर दिया था, फिर मैं अक्सर उसके बालों को सहलाने लगता, उसके गालों को आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगलियों से छू लेता था।

गीता अब मुझ से काफी घुल मिल गई थी। एक बार हम दोनों पिज्जा खा रहे थे, और थोड़ा सा सॉस उसके नाक पर लग गया, मैंने अपनी ऊँगली से उसकी नाक पर से सॉस को पौंछ दिया, उसने भी झट से मेरा हाथ पकड़ कर मेरी ऊँगली से सॉस को चूस कर साफ़ कर दिया। उसे ऊँगली चुसवाने से मुझे जो मजा आया वो मैं बयान नहीं कर सकता। मेरा रोम रोम खड़ा हो गया था, लौड़े से तो मानो एक बार पिचकारी छूट ही गई थी।

मैं इतना ज्यादा रोमांचित हो गया कि मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थी। मैंने तुंरत उसी ऊँगली को सॉस में डूबा कर कहा- एक बार और करो ना !

यह सुन कर वो शरमा गई और दोबारा मेरी उंगलियों को चूसना शुरू कर दिया। इस बार उसने पूरे 15 सेकंड तक मेरी ऊँगली को चूसा होगा। बस फिर क्या था, मुझे तो ग्रीन सिग्नल मिल गया था, मैंने भी खाना आधा छोड़ कर पेमेंट किया और उसके साथ जल्दी से होटल के बाहर आ गया।

हमने एक ऑटो किया और उसे समुन्दर के किनारे ले जाने को कहा। समुन्दर काफी दूर था, अब बस मैं और वो ऑटो की पीछे की सीट में बैठे बैठे पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे, मैं उसको पूरी ताकत से अपनी बाहों में कसने लगा और उसके गले के पीछे और उसके होठों को चूमने लगा।

एक लड़की को किस करने का आनंद मैं लिख कर बयान नहीं कर सकता। मेरे लौड़ा पूरी तरह खड़ा हो गया था, वो भी पूरी तरह गर्म हो गई थी।

मैंने ऑटो वाले को ऑटो अपने घर के तरफ मोड़ने को कहा।

घर में घुसते ही हम दोनों पागलों के जैसे एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। हम कोई भी बात नहीं कर रहे थे, बस एक दूसरे को चूम-चाट रहे थे। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए, वो मुझे और जोर से किस करने लगी थी।

फिर उसने मुझे कहा- अब बस और देर मत करो और जल्दी से बिस्तर पर चलो !

हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गए थे और दोनों की सांसें काफी जोर जोर से चल रही थी।

वो जाकर बेड पर लेट गई, उसकी चूत पर बहुत से रेशमी बाल थे जिसमें से उसकी चूत दिख नहीं रही थी। में भी उसके ऊपर लेट गया और अपने लौड़े को उसकी चूत पर रख दिया। उसने मुझे तुंरत रोक दिया और कहा- कंडोम है या नहीं ?

मैंने तुंरत दराहुल से एक कंडोम निकला और पहन लिया। इतनी देर में मेरा लौड़ा थोड़ा मुरझा गया था, वो भी समझ रही थी। मुझे उसे बोलना अच्छा नहीं लग रहा था कि मेरा लौड़ा चूसे। सो मैंने उसकी चूत में ऊँगली करनी शुरू कर दी और दूसरे हाथ से उसके मम्मे दबाने लगा और अपने मुँह से दूसरे मम्मे को चूसने लगा।वो अजीब अजीब सी आवाजें निकालने लगी, जैसे उसे बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी ही देर में वो झड़ने लगी। झड़ने के बाद मैंने उसे अपना लौड़ा दिखाते हुए कहा- तुम मेरे लौड़े को चूसो ना !

वो थोड़े नखरे करने के बाद मान गई। उसने जैसे ही मेरा लण्ड मुँह में लिया, मुझे अलौकिक आननद की अनुभूति होने लगी। थोड़ी देर में जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने उसके मुँह से लौड़े को निकाल लिया और उसकी चूत पर रख दिया और जोर जोर से धकेलने लगा। मेरा लौड़ा पूरी तरह उसकी चूत के अन्दर घुस गया था, मैंने आनंद में अपनी आँखें बंद कर ली, धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में हम दोनों फिर से झड़ने लगे।

मैं काफी देर तक उसके साथ लेटा रहा, थोड़ी देर में हम दोनों तैयार हो कर चल पड़े।

हम अब अक्सर मिला करते थे। धीरे धीरे मैंने उसे गांड मरवाने के लिए भी राहुली कर लिया था।

मेरी कहानी अगर आपको पसंद आई तो जरूर कमेन्ट करना… मैं आगे भी ऐसे ही कहानी लिखता रहूँगा। Sex Stories

Antarvasna stories

दोस्तो Antarvasna story, मेरा नाम मनदीप है, उमर २० और लम्बाई ५’९”। हमारा सारा परिवार एक ही घर में रहता है।

मैं आज आपको अपने जीवन की एक बड़ी ही सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहा हूं।

इस घटना से पहले मैं भी बड़ी सेक्सी फ़िल्में देखता था पर इसके बाद से तो मेरी लाइफ़ ही एक सेक्सी फ़िल्म जैसी हो गई है।

यह बात आज से करीब एक साल पहले की है जब हमारा सारा परिवार किसी की शादी में गया हुआ था और हमारे घर में कोई नहीं था। इसलिये मैं अपनी ताई जी के साथ शाम को घर वापिस आ गया। मेरी ताई की उमर ४७ साल और लम्बाई ५’८” है और उनकी फ़ीगर ४० -३५ -४० की है यानि कि वो थोड़ी मोटी है पर ऐसा होने पर भी वो बड़ी सेक्सी नज़र आती है।

जब पहले भी कभी मैं और ताई घर में अकेले होते थे तो ताई बिना चुनरी लिये काम किया करती थी मैंने कई बार उनकी झुक कर काम करते समय गोरी गोरी छाती देखी थी। उनके वो बड़े बड़े बूब्स हमेशा ही मेरी आंखों के सामने घूमते रहते थे।

उस शाम को जब ताई घर का काम कर रही थी तो उन्होंने सलवार कमीज पहना हुआ था। गरमी का मौसम होने के कारण उनके कपड़े पतले थे और उसमें से उनके अंदरूनी कपड़े ब्रा और चड्ढी साफ़ नज़र आ रहे थे। मैं उस वक्त टीवी देख रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान ताई की गांड और बड़े बड़े बूब्स पर था।

रात को भोजन खा के हम दोनों अपने अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझ को देर रात तक टीवी देखने की आदत है है इसि लिये मैं करीब रात ११:३० तक टीवी देखता रहा।

सोने से पहले जब मैं पेशाब करने के लिये जाने लगा तो मैंने देखा कि ताई अभी तक जाग रही है। मैंने पेशाब करके वापिस आ कर ताई से पूछा कि क्या बात है उन्हें नींद क्यों नहीं आ रही तो ताई ने बताया के उसके पेट में बड़ा दर्द हो रहा है।

तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं उनकी कोई मदद कर सकता हूं तो उन्होंने कहा के मुझे सरसों का तेल थोड़ा गरम कर के ला दो।
मैं तेल गरम कर लाया मैंने पूछा कि क्या मैं आप के पेट की मालिश कर दूं?
तो उन्होंने कहा ठीक है।

मैंने उनके पेट पर से कमीज ऊपर कर दिया मैंने उनके पेट की मालिश करनी शुरु कर दी। मैं करीब ३० मिनट तक उनकी मालिश करता रहा उसके बाद उनके पेट का दर्द ठीक हो गया पर अभी भी थोड़ा सा तेल बच गया था तो उन्होंने कहा कि इसे उनकी पीठ पर लगा दो।

ताई की पीठ से उनका कमीज ठीक से ऊपर नहीं हो रहा था ताई बोली कि चलो मैं कमीज ही उतार देती हूं। ताई कमीज उतार कर लेट गयी और मैं उनकी लातों पर बैठ कर उनकी पीठ की मालिश करने लग गया ऐसा करते समय मैंने कई बार अपना हाथ उनके बूब्स पे लगाया पर वो कुछ न बोली। फिर मालिश करने के बाद अपने कमरे में चला गया।

अभी मुझे लेटे हुए थोड़ा वक्त ही हुआ था कि ताई मेरे कमरे में आ गयी और मेरे ऊपर बैठ गयी। मुझे पता नहीं चल रहा था कि मैं क्या करूं मैंने ताई से पूछा कि आप यह क्या कर रही हो तो वो बोली कि आज तूने मेरे बूब्स को हाथ लगा कर कई सालों से मेरे अंदर की सोई हुई औरत को जगा दिया है और अब इसकी गरमी को ठंडा भी तुम्हें ही करना पड़ेगा।

वो ताई जिसके साथ नंगा सोने के मैं सिर्फ़ सपने ही देखता था वो आज मेरे ऊपर बिना कमीज के बैठी हुई थी। मेरा सपना सच होने जा रहा था इस लिये मैं बहुत खुश था।

फिर मैंने और ताई ने अपना काम शुरु कर दिया उसने अपने होंठ मेरे होंठों में डाल लिये और २-३ मिनट मुझे चूमती रही। पहले मैने अपनी जीभ ताई के मुंह में डाल दी और फिर उसने मेरे। फिर ताई ने अपनी सलवार उतार दी और अब उसने सिर्फ़ ब्रा और चड्ढी ही पहनी हुई थी।

वो बिस्तर पर लेट गयी और मैं उसके ऊपर फिर हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूजे को चूमते रहे कभी मैं उसकी छाती को चूमता कभी उसके पेट को तो कभी लातों को। फिर ताई ने अपनी ब्रा उतार दी और मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स चूसने शुरु कर दिया उसका दूध बड़ा मीठा था मैं अब भी कई बार उसका स्वाद चखता हूं।

फिर ताई ने अपनी चड्ढी भी उतार दी और मेरे साथ लेट गयी ताई की चूत बहुत बड़ी थी उसको चाटना शुरु कर दिया फिर ५-६ मिनट में ताई पहली बार झड़ गयी उसके बाद ताई ने मेरा बड़ा सा लंड अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लग गयी. मैंने भी उनके मुंह में ही पिचकारी मार दी।

ताई ने कहा कि चलो अब असली काम करते हैं और ताई लातों को थोड़ा खोल कर सीधी लेट गयी.
मैंने ऊपर से अपना लंड ताई की चूत में डाल दिया वो बड़ा खुश थी क्योंकि आज बड़े वक्त बाद उसकी चूत में लंड घुसा था।

मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरु कर दिया ताई ने भी आआअ ईए ऊऊह माआ हाआ हाअ की आवाज़ें निकालनी शुरु कर दी।
मैं करीब १ घंटे तक ताई की चूत चोदता रहा इसमें ताई दो बार झड़ गयी।

फिर मैंने ताई को कहा कि मैं अब उसकी गांड मारना चाहता हूं.
और ताई घोड़ी बन गयी. मैंने लंड को गांड में घुसेड़ दिया.

ताई की गांड बड़ी तंग थी, उसे दर्द हुआ और वो चिल्ला दी- आऐईईईईए माआआअ!
मैंने जोर जोर से लंड आगे पीछे करने शुरु कर दिया और १५ मिनट तक ताई को चोदता रहा। मैंने ताई जैसे गरम औरत की कभी नहीं ली थी।

फिर मेरा छूट गया और मैं ताई को चूमने लग गया।
ताई ने बोला कि मैं एक बार फिर उनकी चूत मारूं. और इस बार वो मेरे ऊपर बैठ गयी और अपने आप हिल हिल कर धक्के देने लगी।
मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर हम सारी रात ही नंगे सोये रहे सुबह उठ कर ताई ने फिर मुझे अपने बूब्स चुसवाये और चूमा भी। उसके बाद तो जब भी हम दोनो घर में अकेले होते हैं तो एक पति-पत्नी की तरह रहते हैं। Antarvasna

मैं अभी 47 साल का हूँ और मेरे दो बेटे हे. एक तो शहर में रहते हे और वही पर पढ़ाई करते हे. और बड़े बेटे की शादी अभी बस तिन महीने पहले ही करवाई हे मैंने. खेतो का सारा काम मेरा बड़ा बेटा अमित ही देखता हे. घर में बहु के के आने के बाद अब घर सूना नहीं लगता हे. बहु का नाम कमला हे. मैं कमला को बहु कह के ही बुलाता हूँ, और वो मुझे पिताजी कहती हे. अमित को कुछ काम से शहर जाना हुआ और बस उसके जाते ही बहुत के ऊपर मेरी नजर पड़नी शरु हुई. रमंन के जाते ही शाम को बहु अपने कमरे में सो रही थी और करवट बदलते हुए उसका लहंगा उसकी जांघो तक ऊपर आ गया था. मेरी नजर उसके ऊपर पड़ी तो ऐसे लगा जैसे लौड़े में नहीं जान आ गई हो.

थोड़ी देर के बाद बहु उठी तो मैं हर पल उसके साथ ही रहा. वो जब खाना बना रही थी तब भी मैं उसको ही देखता रहा. मैं नजरें उसके बूब्स और गांड के ऊपर टिका के बैठा हुआ था. खाने बैठे तब मैंने उसके मम्मों के ऊपर ही अपनी नजरें चिपका डाली थी जैसे. अब उसको भी पता चल गया था की मैं उसकी तरफ ही देख रहा था और वो भी बुरी नजरों से! खाने के बाद मैं बहु के साथ बातें करने लगा.

मैं: बहु मुझे आज आधी रात को खेत पर जाना होगा. नहर में पानी आया हुआ हे उसे खेतों में छोड़ के सिंचाई करनी हे. क्या तुम भी मेरे साथ चलोगी?

बहु: पिताजी इतनी रात को जाना क्या ठीक होगा? वैसे मुझे अँधेरे से बहुत डर लगता हे. और वो कह रहे थे की हमारे खेत जंगल से सटे हुए हे. रात में जा कर खतरे को मोल लेने जैसा हे. सुबह को नहीं जा सकते हे पिताजी?

मैं: नहीं बहु सुबह बहुत देरी हो जायेगी. अगर रात को पानी छोड़ा नहीं तो पानी किसी और के खेत में ले लेगा वो. और फिर हमें उसके खेत की सिंचाई पूरी ख़त्म होने की राह देखनी पड़ेगी. वैसे मैं साथ में हूँ फिर तुम्हे किसी से भी डरने की जरूरत नहीं हे. मेरी तो पूरी लाइफ ही निकल गयी इन खेतो में मैं चप्पे चप्पे से वाकिफ हूँ!

बहु: ठीक हे पिताजी, जैसे आप को ठीक लगे. मैं आप के साथ चलूंगी.

अब हम दोनों रात को घर से निकले खेतों की तरफ. 5 मिनिट चलने के बाद रास्ता और भी संकड़ा होता गया. रास्ते के दोनों तरफ जंगल था. मेरे हाथ में एक लालटेन थी.

बहु: पिताजी मुझे डर लग रहा हे.

मैं:डरो मत बहू मैं हूँ ना तुम्हारे साथ में ही. आओ मेरा हाथ पकड लो तुम.

ये कह के मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. हम दोनों थोड़ी दूर गए थे की मैं रस्ते में रुक गया.

बहु: क्या हुआ पिताजी आप रुक क्यूँ गए?

मैं: श्हह्हह्ह चूप रहो बहु. लगता हे यहाँ आसपास कोई सांप हे!

बहु को ये कहा तो वो और भी डर गई और मैंने मौके का फायदा उठाया और उसको अपने सिने से लगा लिया. अब उसके मम्मे मेरी छाती पर प्रेस हो रहे थे. मैंने दोनों हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और हाथों को पीठ पर रगड़ने लगा.

फिर मैन्स बहु के कान में कहा: बहु बस ऐसे ही शांत खड़ी रहो.

बहु: पिताजी मुझे सच में बहुत ही डर लग रहा हे.

बहु ने दबी हुई आवाज में कहा. अब मैंने अपने दोनों हाथ को उसकी गांड पर रख दिए. और मैं हाथ की हथेलियों और उँगलियों से उसकी गांड को दबाने लगा. बहु के मुहं से अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म की आवाज की और वो मेरे सिने से और भी लिपट गई.अब मैं बहु की गांड की क्रेक को अपनी ऊँगली से सहलाने लगा. ऊँगली को लहंगे के ऊपर से गांड की क्रेक मैं ऊपर से निचे तक फेरने लगा. बहु अब और मेरी पीठ पर अपने हाथ फेरने लगी, ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह पिताजी अप ये क्या कर रहे हो? सांप गया की नहीं?

मैं: लगता हे की सांप चला गया हे.

बहु: पिताजी मुझे बहुत जोर से पेशाब आया हे, लेकिन यहाँ तो सब तरफ जंगल ही जंगल हे.

मैंने अपने हाथ को उसकी गांड से हटाते हुए कहा, जंगल हे तो क्या हुआ तुम पेशाब कर लो यही पर. यहाँ पर कौन देखनेवाला हे!

बहु ने दबे हुए आवाज में कहा, जी पिताजी. और फिर उसने अपने लहंगे को उतारा और वो वही पर बैठ गई रस्ते के किनारे. उसकी चूत से निकलते हुए पेशाब की धार से मेरे लंड में जैसे और भी मस्ती चढ़ी हुई थी. उसकी धार स्टार्ट हो के रुक गई और वो 30 सेकंड तक उठी नहीं.

मैं: क्या हुआ बहुत पेशाब हुआ की नहीं?

बहु: नहीं पिताजी, डर की वजह से आधा ही हुआ और रुक गया.

मैं बहु के करीब गया और लालटेन के उजाले को उसकी चूत के ऊपर मारा. और फिर अपनी ऊँगली को मैंने बहु की चूत के ऊपर रख दिया और उसे सहलाने लगा. मैंने उसे कहा, अब कोशिश करो बहु. बहु ने अपनी आँखे बंद कर दी. मैं अपनी ऊँगली उसको चूत के ऊपर से निचे तक ररगड़ने लगा. वो सहम गई थी और ओह अहह पिताजी अच्छा लगा रहा हे ऐसे कहने लगी.

और फिर बहु का पेशाब मेरी ऊँगली के ऊपर फव्वारे के जैसे छुट गया. मैंने ऊँगली चूत पर रगड़ना चालु रखा. उसका पेशाब होते ही मैंने गमछा निकाला और उसकी चूत को पोंछ दिया. मैंने फिर उँगलियों कस दी उसकी चूत पर और जोर से मसल दिया उसकी चूत को. बहु चिल्ला उठी, अह्ह्ह्हह पिताजी! मैंने उसको साइड में लेट जाने को कहा. उसके करीब लेटकर मैंने उसके होंठो पर अपने होंठो को लगा दिया और चूसने लगा.

उसके निचे के होंठो को मैंने अपने दांतों से काट लिया. फिर मैंने उसे कहा, तुम अपनी जीभ बहार निकालो ना बहु. बहु ने अपनी जीभ बहार निकाली और मैंने अपने होंठो से उसकी जीभ का बेसवादा स्वाद चखा और फिर उसे चूसने लगा. बहु ने भी अपने दोनों हाथो को मेरी गर्दन पर डाल दिया. अब मैंने उसकी जीभ को अपने मुहं में ले लिया और अपने होंठो को जोर से बंद किया और उसकी जीभ को बहुत प्यार देने लगा. अब मैं और बहु दोनों ही अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ह्म्म्म करने लगे थे. अब बहु ने कहा, पिताजी आप का थूंक बड़ा ही स्वादिष्ट हे. मैंने कहा, मेरा तो सब कुछ स्वादिष्ट हे बहु रानी.

बहु ने कहा, तो फिर आज अपनी बहु को सब कुछ का सवाद दे दीजिये पिताजी.

मैंने अब बहु की चोली खोल दी. अब उसकी गर्दन को चुमते हुए मैं उसको जीभ से चाटने लगा. उसके मम्मो पर दोनों हाथ रगड़ने लगा. उँगलियों को कसने लगा उसके मुलायम मम्मो के ऊपर. ओह्ह्ह्ह फ्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह पिताजी और जोर से दबाओ ना, बहु ऐसे कहने लगी चुदासी आवाज में. ये सुनकर मैंने उसके मम्मो को जोर जोर से दबाना चालू कर दिया. मम्मे दबाते हुए मैंने अपनी थूंक उसके मुहं में डाल दी.

बहु ने अपनी जीभ से थूंक को स्वेलो कर लिया, अह्ह्ह अह्ह्ह पिताजी बड़ा मजा आ रहा हे!

मैंने अब उसके निपल्स को उँगलियों के बिच में रगड़ने लगा. उसके निपल्स पर चिमटी लगाने लगा. वो आह्ह्हह्ह अह्ह्ह कर के चिल्लाने लगी. अब मैंने उस से कहा, बहु जरा उठकर थूंक दो अपने मम्मो पर! उसने उठकर अपने मम्मो के अपने मुहं के करीब किया और दोनों मम्मो के ऊपर थूंक दिया. मैंने उसको फिर से लिटा दिया और अब मैं उसके दोनों मम्मो को चुसने लगा अपने होंठो से. अपने मुह को खोलकर मम्मो पर जोर से प्रेस किया और फिर मुहं को बंद कर के उसके मुलायम मम्मो को काटने लगा धीरे धीरे से. मेरे दांतों को निशान पड़ गए थे उसके मम्मो पर. उसने मुझे अपनी छाती पर जकड़ लिया जोर से. ऐसे जैसे मुझे जाने ही नहीं देना चाहती हो. फिर मैंने उसके एक निपल को चुसना चालू कर दिया, ओह पिताजी अह्ह्ह्ह चूस लो अपने बहु की चुचियों को!

मैंने उसे कहा, चूस रहा हूँ रंडी!

बहु ने कहा, आप को अच्छी लगी अपनी रंडी बहु की जवानी पिताजी?

अब मैं उसकी चुचियों पर अपनी जीभ फेरने लगा सर्कल्स में. फिर जीभ पूरी मम्मो पर फेरकर मैंने उसकी थूंक चाट ली उसके मम्मो के ऊपर से.

अब मैं थोड़ा निचे आ गया और मैंने उसके पेट को चूमना शरु कर दिया. मैंने उसके नावेल में जीभ डालकर जीभ को घुमाया सर्कल्स में और फिर नावेल पर दांत कसकर उनको काटने लगा. अह्ह्ह्हह औह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म पिताजी आप को रंडियों से खेलना खूब अच्छी तरह से आता हे. अब मैंने बहु का लहंगा निकाल लिया और उस से कहा की वो कुतिया बन जाए! बहु तुरंत अपने घुटनों के और हथेलियों के ऊपर खड़ी हो गई. मैंने उसकी कच्छी निकाली और उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा. वो मुडकर मुझे देखकर हौले से हंस पड़ी. और बोली, पिताजी कैसी लगी आप को आप की रंडी की गांड? मैंने उँगलियों को कस कर उसकी गांड पर दबाया और कहा, बहुत अच्छी गांड हे तेरी मेरी छिनाल बहुत दिनों से तेरे मम्मे और गांड ही देख रहा था मैं.

बहु ने कहा, अब से ये रंडी आप की ही हे पिताजी!

मैं उसकी गांड को दबाने लगा. फिर गांड पर जोर जोर से मुहं दबाया और उसको चूमने लगा. अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह मुआअहाआअ. फिर मैंने अपने दांत गाड़ दिए उसकी मांसल गांड के ऊपर. अब मैंने उसके चुत्त्ड खोले और उसकी गांड की छेद के ऊपर थूंक दिया. वो कांपने लगी थी. मैंने अब अपनी ऊँगली से उसकी गांड के छेद के ऊपर के थूंक को मलना चालू कर दिया.

बहु ने गांड को थोडा हिला के कहा, पिताजी मेरी गांड में अपनी ऊँगली डाल दो ना! मैंने ऊँगली को जोर जोर से छेद पर पुश किया और फिर ऊँगली डाल दी अपनी बहु की गांड में. ऊँगली को बेंड किया उसकी गांड में और फिर हिलाने लगा उसको जोर जोर से. अब ऊँगली को गांड से अन्दर बहार करने लगा था मैं.

मैंने फिर उसे कहा, अब तेरी चूत की बार हे बहु.

इतना सुनते ही उसने दोनों पैरों को फैला लिया और मेरा हाथ लेकर अपनी चूत पर रखवा दिया.

फीर वो बोली, आप की छिनाल आप के लिए सब कुछ करेगी पिताजी! जो चाहे कर लो आप मेरे स्वामी.

मैंने ऊँगली को बहु की चूत में डाली और जोर जोर से धक्का दिया अन्दर घुसाते हुए.

वो तडप उठी और अपने जिस्म को एकदम टाईट कर लिया उसने. मैंने ऊँगली को अन्दर बहार मूव किया उसकी चूत में. ऊँगली को जोर जोर से हिलाया उसकी चूत में. फिर मैंने ऊँगली उसकी क्लाइटोरिस के ऊपर रगड़ी. उसकी क्लाइटोरिस जोर से प्रेस की और ऊँगली को हिलाने लगा क्लाइटोरिस के ऊपर प्रेस करते हुए. वो आह्ह्ह अह्ह्ह ओह अह्ह्ह्हह ह्म्म्म कर के मोअन करने लगी थी. मैंने ऊँगली निकाली और उसके मुहं में डाल दी. वो मेरी ऊँगली को जोर जोर से चूसने लगी. फिर मैंने उसके पैरो में झुक के उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया. चूत पर मुहं प्रेस कर के जोर जोर से चूसने लगा मैं. वो बोली, पिताजी और जोर जोर से चाटो अपनी इस रंडी के बुर को. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह ओह मजा आ गया पिताजी इसको चटवा के!

अब मैंने अपना मुह खोल दिया और चूत पर जोर से प्रेस किया. मुह को बंद करते ही मेरे होंठो ने उसकी चूत को स्क्विज किया मुहं में. आह्ह्ह मर गई अह्ह्ह्हह ओह पिताजी आप बहुत बड़े चोदु हो अह्ह्ह्ह. मैंने अब उसकी चूत को दांतों से काटना शरु किया धीरे धीरे से. बहु आह्ह्ह अह्ह्ह्हह ओह ओह उईई माँ कह के अपनी चूत को मेरे मुहं पर घिस के चूस सेक्स का मजा ले रही थी. फिर मैंने अपनी धोती खोली. अपना लोडा निकाला और अपने टोपे के ऊपर हाथ घुमाया. लौड़े का टोपा गिला हो गया था प्री-कम से. मैंने टोपा बहु की चूत पर रगड़ा. अह्ह्ह उम्म्मम्म पिताजी मैं अब इस लौड़े की दीवानी हूँ, रोज पूजा करुँगी इस लंड की.

मैंने लौड़े को चूत में पुश किया और फिर जोर से धक्का दिया बहु की कमर को पकड़ कर.

बहु दर्द से चिल्ला उठी, अह्ह्ह्ह पिताजीईईईईईईइ अह्ह्ह्हह आप का तो बहुत बड़ा हे बाप रे, मेरी उतनी नहीं चूदी हे अह्ह्ह्ह. धीरे से करो पिताजी.

मैंने उसके बाल पकड़ के के कहा चूप कर साली हरामजादी.

मैंने अब उसकी चूत को चोदना चालू कर दिया. लौड़ा अन्दर बहार हो रहा था. सन्नाटे में चुदाई की आवाज साफ़ साफ सुनाई दे रही थी. ठप ठप ठप, जांघो के लड़ने से और चूत और गांड के संगम स्थान से चिपचिपी आवाजें आ रही थी. मेरा पूरा लोडा उसकी चूत में घुस के बहार होता था जिसे मैं फिर से वापस अपनी बहु की चूत में डाल देता था. बहु ने निचे जमीने के ऊपर की सुखी हुई घास को पकड़ा था और वो भी अपनी गांड को हिला के मेरा लंड ले रही थी अपनी चूत के अन्दर. वो अपनी कमर हिला रही थी मेरे झटको के साथ में. मैंने लौड़ा अन्दर तक डाल के उसे एकदम जोर जोर से चोदा. मेरे लौड़े का टोपा उसकी चूत के मसल को हिट कर रहा था एकदम जोर से. वो अब मजे से चिल्ला रही थी, और जोर जोर से चोदो मुझे पिताजी! मैंने उसके ऊपर झुक गया थोडा सा और उसके मम्मो को पकड कर दबाने लगा जोर जोर से. फिर मैं रुक गया और जोर से पुश किया अपने लौड़े को बहु की चूत के अन्दर. उसके मम्मे एकदम जोर से मसल दिए और मेरा लावा उड़ेल दिया उसकी चूत के अंदर ही मैंने!

कुछ देर तक बहु की चूत में लंड को रहने दिया. फिर मैंने अपना लोडा बहार निकाला और बहु को दे दिया. उसने मुझे खींचकर अपने ऊपर लिटा दिया. कुछ सेकंड्स के बाद वो बोली, बाबु जी आप मेरी चूत में ही झड़ गए हो, कहीं मैं पेट से हो गई तो? मैं बोल पड़ा, तो क्या तुम मेरे लंड से संतान नहीं चाहती हो! वो बोली, आप को कोई दिक्कत तो नहीं हे ना इसमें? मैंने कहा, मैं तो अब तुझे रोज चोदुंगा घर पर और अपने पोते को खुद पैदा करूँगा! वो बोली, फिर तो मैं आप के वीर्य से ही बालक पेदा करुँगी पिताजी.

Antarvasna

६ महीने बाद निधि कि कक्षा में ही एक Antarvasna नई लड़की ने प्रवेश लिया, उसका नाम प्रिया था। जब मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया। वो निधि से भी ज्यादा ही खूबसूरत थी। उसकी लम्बाई करीब ५’३” और रंग एकदम दूध जैसा था। उसको देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। मैं प्रिया को चोदने की तरकीब लगाने लगा।मेरे मन की मुराद जल्दी ही पूरी हो गई। प्रिया का स्कूल में लेट ऐडमिशन था और उसके पास विज्ञान विषय था, इस कारण उसे पढ़ाई में दिक्कत आ रही थी।

एक दिन वो मेरे पास आई और बोली- सर ! मेरा स्कूल में लेट ऐडमिशन है और मुझे फ़िज़िक्स में काफ़ी दिक्कत आ रही है, क्या आप मुझे ट्यूशन पढ़ा सकते हैं?

मैंने कहा- हां ! क्यों नहीं ! तुम स्कूल खत्म होने के बाद मेरे ओफ़िस में आ कर पढ़ सकती हो।

तो वो बोली- सर, मैं कल से आपसे पढ़ूंगी, क्योंकि आज मैंने घर नहीं बताया है और लेट होने पर मम्मी पापा परेशान होंगे।

मैंने कहा- ठीक है ! कल से पढ़ाई शुरू करेंगे।

उस रात मुझे नींद नहीं आई, बार बार प्रिया का ही ख्याल आता रहा और उसको चोदने का प्लान बनाता रहा, लेकिन कोई तरकीब मेरे दिमाग में नहीं आ रही थी। मैं प्रिया को रोज़ ट्यूशन देने लगा और पढ़ाते समय कभी उसके हाथ को छूता तो कभी उसके कंधे पर हाथ रख देता। कभी कभी उसकी जांघों पर भी हाथ लगाता था।

दो महीनों तक ऐसे ही चलता रहा। उसकू चोदने की तमन्ना मन की मन में रह गई। मार्च में १२वीं की बोर्ड की परीक्षा होनी थी इसलिए फ़रवरी से ही १२वीं कक्षा को परीक्षा की तैयारी के लिए छुट्टियां दे दी गई थी। एक दो दिन के बाद प्रिया स्कूल आई और मुझसे बोली- सर , क्या आप मुझे घर पर पढ़ा सकते हैं?

मैंने कहा- ठीक है, तुम शाम को ६ बजे के बाद मेरे घर आ जाना क्योंकि इससे पहले मैं स्कूल में रहता हूं।

उसने कहा- ठीक है सर ! मैं ६ बजे आपके घर आ जाऊंगी।

मैंने उससे पूछा- तुमने अपने पापा से पूछ लिया है?

तो वो बोली- हां सर ! मैंने पापा को बता दिया है कि मैं सर के घर जाकर ट्यूशन पढ़ूंगी।

वो मेरे घर आकर पढ़ने लगी।

५-७ दिन तक प्रिया को चोदने की कोई तरकीब नहीं मिल पा रही थी।

रविवार को मैं घर पर ही था। उस दिन बारिश हो रही थी और फ़रवरी की ठण्ड वैसे ही थी। मैंने शराब की बोतल निकाली और टीवी देखते देखते पीने लगा।

थोड़ी देर में दरवाज़े पए दस्तक हुई तो मैंने बोतल वगैरह दूसरे कमरे में रख कर दरवाज़ा खोला, सामने प्रिया खड़ी थी।

मैंने उसे अन्दर आने को कहा तो वो अन्दर आ गई और मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया। मैंने उससे पूछा कि इतनी बारिश में कैसे आई तो वो बोली कि पापा मुझे कार से छोड़ कर गए हैं और ट्यूशन खत्म होने पर फ़ोन कर देने को कहा है ताकि वो मुझे लेने आ जाएँ।

मैंने उससे कहा- ठीक है तुम्हें जो कुछ समझना है पूछ लो।

प्रिया ने उस दिन सफ़ेद रंग की पैन्ट और काले रंग की कसी हुई टीशर्ट पहनी थी। उसके उरोज़ों की गोलाईयाँ साफ़ दिख रही थी।

उसको देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। वो अपनी किताब में से सवाल पूछने लगी। मैं थोड़ी थोड़ी देर में उसे कोई सवाल करने के लिए दे कर दूसरे कमरे में जाकर पीने लगा।

नशा होने पर मैं प्रिया को चोदने के बारे में सोचने लगा।

फ़िर मैंने अपना हाथ उसकी जांघों पर रख दिया और सहलाने लगा। वो इससे कुछ बेचैन सी होने लगी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा तो प्रिया ने कहा- सर ! आप ये क्या कर रहे हैं? अपना हाथ हटाइये।

लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था, मैंने कहा- बस हाथ ही तो लगाया है और कुछ थोड़े ही किया है।

प्रिया थोड़े गुस्से में बोली- तो आपका क्या मतलब है कुछ होने के बाद बोलूं?

बात बिगड़ती देख मैंने थोड़े प्यार से कहा- प्लीज़ प्रिया ! बस थोड़ी देर !

उसके बाद प्रिया कुछ नहीं बोली।

इस कारण मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसकी पीठ से उस्कए उरोज़ों की तरफ़ बढ़ाया और धीरे धीरे उसके उरोज़ों को मसलने लगा।

इससे प्रिया को भी मज़ा आने लगा था क्योंकि वो भी सिसकियाँ भरने लगी थी।

मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी चूत पर रख दिय और पैन्ट के ऊपर से ही मसलने लगा। इससे प्रिया गरम होने लगी थी, क्योंकि उसके मुँह से अजीब आवाज़ें आ रही थी, प्लीज़ सरररररर बससस अब छोड़ दीजिए… आऽऽऽआऽऽअ…उ उईऽऽऽ…प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए।

फ़िर मैंने उसकी पैन्ट की ज़िप खोल दी और अपने हाथ को उसकी पैन्ट में डाल कर उसकी चूत को जोर जोर से दबाने लगा।

फ़िर एक उँगली को उसकी चूत में डाल दिया। उँगली के अन्दर जाते ही प्रिया एकदम चौंक पड़ी और गुस्सा दिखाते हुए मुझे हाथ हटाने के किए बोलने लगी। लेकिन मैं समझ गया कि यह बनावटी गुस्सा है और मन ही मन वो चुदवाना चहती है।

मैं अपनी उँगली को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा, जिससे प्रिय को काफ़ी मज़ा आने लगा क्योंकि वो अब सिसकियाँ भरने लगी थी।

थोड़ी देर बाद मैंए उसकी टी-शर्ट खोल दी, अन्दर उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी, जिसमें कैद उसकी गोलाईयाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थी।

मैंने जल्दी ही उसके उरोज़ों को ब्रा की कैद से मुक्त कर दिया।

उसके दूध जैसे उरोज़ों पर हल्के गुलाबी चूचुक बहुत आकर्षक लग रहे थे, मैं एक उरोज़ को मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा।

प्रिया कसमसाने लगी, मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया और उसे सहलाने को कहा।

प्रिया पैन्ट के ऊपर से ही मेरा लण्ड सहलाने लगी। इससे मेरा लण्ड एकदम टाईट हो गया और मुझे बहुत मज़ा आने लगा।

थोड़ी देर तक उसके उरोज़ों को चूसने के बाद मैंने उसे सोफ़े पर बैठा दिया और उसकी पैन्ट खोल दी, उसने सफ़ेद रंग की पैन्टी पहन रखी थी जो कि उसकी सफ़ेद जांघों पर काफ़ी सुन्दर लग रही थी।

मैंने उसकी पैन्टी को भी उतार दिया और उसकी चूत को देखता ही रह गया, एकदम गुलाबी चूत थी, जिस पर हल्के भूरे रंग के छोटे छोटे बाल थे।

प्रिया की चूत निधि की चूत से भी काफ़ी आकर्षक थी।

मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया और चाटने लगा। अब वो सीत्कार रही थी। मैंने अपनी जीभ उस्की चूत के अन्दर कर दी और उसकी चूत को जीभ से चोदने लगा।

प्रिया बड़बड़ाने लगी- और चूसो ओअओअ और जोर से, हाँ ऐसेएएए ही चूसो बहुतऽऽऽ मज़ाऽऽ आऽऽऽ रहाऽऽ है सर ! मेरा काम होने वालाऽऽऽ है और और जोर से यससस ओ यस ई ई ईऽऽ आ ऽऽऽ।

प्रिया की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसे मैं अपनी जीभ से चाटने लगा।

चूत को पूरी तरह से चाट कर मैं खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लण्ड तन कर फ़टने जैसा हो रहा था जिसे मैंने प्रिया के मुँह में डाल दिया और उसे चूसने को बोला, लेकिन लण्ड का आकार बड़ा होने के कारण उसको मुँह में लेने में कठिनाई हो रही थी।

वो अपनी जीभ से मेरे लण्द का सुपाड़ा चाट रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड ज़बरन उसके मुँह में पेल दिया और आगे पीछे करते हुए उसके मुँह को चोदने लगा।

उसके मुँह से घुटी घुटी आवाज़ें आ रही थी और उसकी आंखों में आँसू आ गए। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकाल कर, उसे ज़मीन पर लिटा कर। उसकी टांगें चौड़ी करके उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा जिससे लण्ड का सुपाड़ा प्रिया की चूत को फ़ाड़ता हुआ अन्दर चला गया।

लण्ड के अन्दर जाते ही प्रिया के मुँह से चीख निकल गई और चूत से खून टपकने लगा।

वो अपने हाथ पाँव पटकने लगी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ा था।

वो मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ सर मुझे छोड़ दीजिए, मैं मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है !

मैंने कहा- पहली बार में ऐसा होता है, तुम चिन्ता मत करो, एक बार अन्दर जाने के बाद तुम्हें मज़ा ही मज़ा आएगा। फ़िर मैंने एक और धक्का लगा कर उसकी चूत में अपना आधा लण्ड घुसा दिया।

प्रिया तड़पने लगी। मैं उसके उरोज़ों को दबाने लगा और उसके होठों को अपने होठों से रगड़ने लगा। इससे प्रिया की तकलीफ़ कुछ कम हुई।

अब मैंने जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लण्ड अन्दर कर दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।

थोड़ी देर में प्रिया भी नीचे से अपनी कमर उचका कर मेरे धक्कों का ज़वाब देने लगी और मज़े में बोलने लगी- सी … सी… और जोररर से सरररऽऽ बहुत मज़ा आ रहा है और अन्दर डालो और सर और अन्दर ऽऽ जोर से चोदो फ़ाड़ दो मेरी चूत को, आज मुझे लड़की होने का मज़ा आया है, मेरा काम होने वाला है सररर्॥ और जोर से य यस यससस मैं गईई… !

इसके साथ ही प्रिया ने अपना पानी छोड़ दिया, लेकिन मेरा काम अभी नहीं हुआ था इसलिए मैं जोर जोर से प्रिया की चूत पेलने लगा।

प्रिया रोने लगी और लण्द चूत में से निकालने के लिए बोलने लगी। लेकिन मेरे ऊपर शराब का नशा होने के कारण उसकी बातों को अनसुना कर धक्के लगाना जारी रखा। करीब १०-१२ मिनट बाद मैंने भी अपना पानी प्रिया की चूत में छोड़ दिया और उसके ऊपर गिर गया।

ऐसे ही पड़े रहने के थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और अपने कपड़े पहनने लगे।

मैंने प्रिया से पूछा कि कैसा लगा तो वो बोली- सर ! इतना मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया, सचमुच आज से मैं आपकी दीवानी बन गई हूँ, अब आप जब चाहें मुझे चोद सकते हैं।

फ़िर मैंने उसके होठों पर एक जोरदार किस किया और उसे अपने पापा को फ़ोन करने के लिए कहा, क्योंकि ज्यादा देर होने पर उसके पापा को शक हो सकता था। थोड़ी देर में वो अपने पापा के साथ चली गई।

उस दिन मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरे मन की इच्छा पूरी हो गई थी। उसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता मैं और प्रिया जम कर चुदाई का खेल खेलते। Antarvasna

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प्रेषक – रोशन Sex Stories

मेरा नाम रोशन है। यह मेरी एक आज तक की Sex Stories सबसे अच्छी गुज़री रात है। मैंने उस एक रात अपनी बीवी (शालिनी) और उसकी शादीशुदा सहेली (रचना) जिसका पति मेरी दोस्त भी है, को एक ही रात चोदा।

शालिनी ५ फीट ४ इंच लम्बी है और उसका फ़िगर ३२-२८-३२ है। रचना भी उतनी ही लम्बी और कद-काठी की है पर उसकी चूचियाँ और भी बड़ी और आकर्षक हैं।

मैं और शालिनी अक्सर ही एक-दूसरे से अलग-अलग लड़कियों या लड़कियों के साथ चुदाई करने की बात किया करते थे। एक दिन रचना को मजबूरी में हमारे घर रूकना पड़ा, क्योंकि उसके पति को ऑफिस के काम से बाहर जाना था।

उस दिन खाना खाने के बाद हम तीनों मिलकर बेडरूम में फिल्म देख रहे थे जिसमें बहुत ही सेक्सी सीन अचानक ही आ गया। उसके बाद मुझे कुछ हो गया और मैं शालिनी को किस करने लगा। रचना फिल्म देखने में व्यस्त थी। फिर मैंने शालिनी को प्यार करते हुए उसके कान में धीरे से कहा कि मैं उसे और रचना को एक साथ चोदना चाहता हूँ। शालिनी ने मेरी तरफ देखा और फिर एकदम से रचना के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा। उसके बाद रचना बाहर चली गई और शालिनी मेरे पास आकर मुझे चूमने लगी। मैंने उससे पूछा कि तुमने रचना से ऐसा क्या कहा है जो वह बाहर चली गई?

शालिनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- सब्र कर लो थोड़ी देर !

उसके बाद मैं शालिनी को नंगा करके उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर पीने लगा और उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।

अचानक ही दरवाज़ा खुला और रचना एक काले रंग के गाऊन में अन्दर आई और आकर मेरे पास बैठ गई। उसके बाद मैंने शालिनी की तरफ देखा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आज हम दोनों तुम्हारे हैं।

इसके बाद तो मैं झपट कर रचना को चूमने लगा और उसका गाऊन खोल दिया। फिर मैं रचना की चूचियों को पीने लगा तो वह तड़पने लगी और मेरे सिर को अपने सीने में ज़ोर से दबा दिया।

इधर नीचे शालिनी मेरे लण्ड को बड़े मज़े से चूस कर रचना की चूत के लिए तैयार कर रही थी। उधर मैं रचना के पूरे बदन को चूम लेने के बाद उसकी चूत को चाटने लगा तो वह सिसकने लगी, शालिनी ने भी उसे और उत्तेजित करने के लिए उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दी।

फिर मैंने अपने गरमा-गरम लण्ड पर रचना को बैठा दिया और उसे कुदाने लगा, और शालिनी इधर मेरे मुँह पर बैठ कर अपनी चूत मुझसे चटवाने लगी।

इस तरह मैंने दोनों को बारी-बारी से चोदा और वह रात हमारे लिए यादगार बन गई। उसके बाद से हम लोगों को जब भी मौक़ा मिलता है हम लोग समूह में सेक्स करते हैं। Sex Stories

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