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Massage Girl in Haridwar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Haridwar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Haridwar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Haridwar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Haridwar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Haridwar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Haridwar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Haridwar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Haridwar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Haridwar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Haridwar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Haridwar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi Sex Stories

मम्मी और पापा आज सवेरे दिल्ली जाने वाले थे। मैं Hindi Sex Stories घर पर अकेली थी। पापा ने पड़ोस में रहने वाले शर्मा जी को कहा था की वो मेरी और घर की देखभाल करें। शर्मा जी की बेटी मेरी सहेली है। उसका भाई राहुल२० साल का है और कॉलेज में पढता था। वो मम्मी – पापा के जाने के बाद अपनी किताबें ले कर घर पर आ गया था। उसे बैठक का कमरा दे दिया था।

दो जवान जिस्म और एकांत…फिर पूरी आज़ादी। कुछ तो होना ही था। वो शुरू से ही मुझे पसंद करता था। वो मुझसे बात करने के लिए बार बार मेरे कमरे में आ जाता था। मैं मन ही मन उसकी बात समझती थी और मुस्कुराती थी। मुझे भी वो अच्छा लगता था।

जिस समय वो मेरे कमरे में आया उस समय मैं बाथरूम में नहाने घुसी ही थी। मैंने बाथरूम के दरवाजे के छेद में से झांक कर देखा तो वो बाथरूम की तरफ़ ही देख रहा था। मैं कपड़े उतरने लगी। तभी मुझे लगा कि राहुल दरवाजे के पास आ गया है। मुझे मौका मिल गया उसे पटाने का।

मैंने चुपके से देखा कि बाथरूम के दरवाजे के उसी छेद से… एक आँख झिलमिला रही थी। मैं समझ गयी कि वो मुझे अब देख रहा है। मैंने उसे अपनी और आकर्षित करने के लिए अनजान बनते हुए अपना टॉप उतारा… मेरी चुंचियाँ उछल कर बाहर आ गयी। मैंने चुन्चियो को धीरे से सहलाया और नोकों को मसल दिया।

फिर मैंने छेद की ओर अपनी पीठ करते हुए अपना पजामा उतर दिया। पेंटी भी उतर दी। मेरे चूतडों की गोलाईयां और गहराइयाँ उसकी नजरों के सामने थी। ऐसा करते समय मेरे बदन में सनसनी फ़ैल रही थी, क्योकि मुझे पता था कि राहुल मुझे नंगा देख रहा है। मैंने अपना बदन अब उसके सामने कर दिया जिस से उसे मेरी छूट साफ़ दिख जाए। उसकी नजरे अभी भी छेद में चमक रही थी।

मैंने झरना खोला और गरम गरम पानी मेरे शरीर पर पड़ने लगा। मैंने कभी अपनी चुंचियाँ मलती, तो कभी अपनी चूत साफ़ करती। मैं चाहती थी वो मुझे देखे और उत्तेजित हो जाए। मैं नहा चुकी तो मैंने दरवाजे के छेद के पास अपनी चूत सामने कर दी। मेरी चुंचियाँ कड़ी होने लगी थी।

मुझे लगा कि उसे अब मेरी चूत साफ़ नजर आ रही होगी। मैंने अपना बदन तोलिये से पोंछ कर कपड़े पहनने शुरू किए। अब उसकी आँख वहाँ नहीं थी।

मैं बाथरूम से बाहर आयी और अनजान बनते हुए बोली-‘अरे… राहुलकब आए..?’
‘बस अभी ही आया हूँ…’ उसका झूठ पकड़ में आ रहा था। उसका लंड पैंट के ऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था।

‘क्या बात है… तुम्हारा मुंह लाल क्यूँ हो रहा है…’ मैं बालों पर कंघी कर रही थी। उसे छेड़ने में मुझे मजा आ रहा था। मैं उसके सामने बैठ गयी और झुक कर पंखे की हवा में बाल सुखाने लगी। उसकी नजरों के सामने मेरी उभरी हुयी चुंचियाँ टॉप के भीतर से झाँकने लगी।
उसकी नजरें मेरे स्तनों पर गड़ गयी।

मैंने नीचे से ही तिरछी नजरों से उसे देखा… और उसके गर्माते शरीर पर सीधे चोट की…’विनोद… अन्दर क्या देख रहे हो …झांक कर ?’
‘हाँ… नही… क्या…?’ वो बुरी तरह झेंप गया।

‘अच्छा.. अब मैं बताऊँ…कि क्या देख रहे हो तुम…’ राहुलएकदम से शरमा गया।
‘नेहा… वो… नही… सो… सॉरी…’
‘क्या सॉरी… एक तो चोरी…फिर सॉरी…’
‘नेहा… अच्छी लग रही थी…सॉरी कहा न ‘

मैं उसके पैंट पर से लंड के उभर को देख रही थी। उसने ऊपर हाथ रख लिया।
‘नही देखो… इधर.. ‘ वो शरमा गया। मैं मुस्कुरा उठी।
‘तो कान पकडो…’
राहुलने अपने कान पकड़ लिए… ‘बस…ना…’

हाथ हटाने पर लंड का उभार फिर से दिखने लगा।
मैं हंस पड़ी।
वो देखो… जो है वो तो दिखेगा ही… ‘

अब राहुलको समझ में आ गया था कि खुला निमंत्रण है। उसका लंड का आकार तक दिखने लगा था। राहुलउठ कर मेरे पास आ गया। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा-‘नेहा…तुम्हारी भी तो उभार है… एक बार दिखा दो…’

‘अरे…मैं तो मजाक कर रही थी… तुम अन्दर देख रहे थे… इसलिए मजाक किया था…’
राहुलसे रहा नही गया उसने एकदम से मेरे गालों को चूम लिया। मैं शरमा गयी…
‘विनोद… ये क्या कर रहे हो…’

उसने तुंरत ही मेरे होंट पर अपने होंट रख दिए। मैंने सोचा अब इसे और आगे बढ़ने दो। मुझे मजा आने लगा था।

उसने मेरे भारी स्तनों को पकड़ लिया। उसने स्तनों को मसलना चालू कर दिया। मैं सिमटी जा रही थी। पर उसके हाथों ने मेरे उभारों को मसलना जारी रखा। मैं अपने को बचाती भी रही…पर उसे रोका भी नहीं।

जब उसने मेरे उभारों को अच्छी तरह से दबा लिया तब मैंने जान कर के उसे पीछे की ओर धक्का दे दिया-‘बहुत बेशरम हो गए हो…’ मेरे हाथ से कंघी नीचे गिर गयी। मैं जैसे ही उठ कर कंघी उठाने को झुकी, मेरे पजामे में से मेरी गांड की गोलाईयां उभर कर राहुलके सामने आ गयी। राहुलबोल उठा-‘नेहा बस ऐसे ही रहो…’ मैं जान कर के वैसे ही झुकी रही।
‘क्या हुआ…?’

उसने मेरे नरम नरम गोल चूतडों को हाथ से सहला दिया। गोलाईयां सहलाते हुए उसके हाथ दोनों फाकों की दरार में घुस पड़े ओर फिर अपनी उंगली घुसा कर मेरी गांड के छेद को सहलाने लगा। मुझे बहुत आनंद आ रहा था। मैं वैसे ही जान कर के झुकी रही। अब उसके हाथ मेरी चूत की तरफ़ बढ गए।

मैं सिहर उठी। जैसे ही उसने चूत दबी… चूत का गीलापन उसके हाथ में लग गया। अब उसने मेरी चूत को भींच दिया। मैंने जल्दी से उसका हाथ हटा दिया। और सीधी खड़ी हो गयी।

राहुलमुस्कुराया ‘नेहा… मज़ा आ गया… तुम्हें कैसा लगा…?’
‘अब तुम बेशरमी ज्यादा ही दिखा रहे हो… कालेज़ नहीं जाना क्या…?’ मैंने भी उसे मुस्कुरा कर कहा।

हम दोनों ने दोपहर का खाना खाया। फ़िर राहुलकालेज़ चला गया। मैंने अपने कपड़े बदले, पैन्टी और ब्रा उतार दी और सिर्फ़ स्कर्ट और हल्का सा टाप पहन लिया। मैंने सोचा कि अब जब राहुलआएगा तो मुझे चोदे बिना नहीं छोड़ेगा। मैंने हमेशा की तरह अपनी गाण्ड में क्रीम लगा कर चिकनी कर ली और बिस्तर पर लेट गई। राहुलके बारे में सोचते सोचते जाने कब मुझे नींद आ गई।

अचानक मेरी नींद खुल गई। मुझे अपनी पीठ पर एक जिस्म का भार महसूस हुआ। मैं सिहर उठी और समझ गई कि यह राहुलहै पर मैंने आंख नहीं खोली। राहुलमेरी पीठ पर सवार था और उसका नंगा लण्ड मेरी गाण्ड पर स्पर्श हो रहा था।

मैं नीचे दबी हुई थोड़ी इधर उधर हुई तो उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर टिक गया। मैंने अपनी टांगें थोड़ी और फ़ैला दी।
‘नेहा… तुम बहुत अच्छी हो…’

‘आऽऽऽह… विनोद…’ उसके लण्ड की सुपारी से चिकनाई निकलने लगी जो मेरी गाण्ड को भी चिकना कर रही थी। उसके लण्ड ने अपनी मर्दानगी दिखानी शुरू कर दी, उसके चूतड़ों ने लण्ड पर जोर लगाया और सुपारी छेद में आराम से घुस गई।

‘आऽऽऽऽह… अन्दर गया…ऽऽ विनोद…’ मेरे मुंह से सिसकारी फ़ूट पड़ी। उसने हल्का सा जोर लगाया तो लण्ड गाण्ड की गहराईयों में रगड़ खाता हुआ उतरने लगा। अब मैंने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी और टांगें पूरी खोल दी। अब उसके लण्ड का जोर पूरा लग रहा था।

मैंने उसके हाथ पकड़ कर अपनी चुन्चियों पर रख दिए. मैं कोहनियों पर हो गयी और आगे से शरीर को थोड़ा ऊपर कर लिया. उसने अब मेरी चुंचियां पकड़ ली और मसलने लगा. मेरे ऊपर वो चिपका हुआ था. लंड उसका मेरी गांड में पूरा घुसा था पर वो अभी धक्के नहीं मार रहा था. वो मुझे चूमने चाटने में लगा था. उसके होंट मेरे होंट तक नहीं पहुँच पा रहे थे. मैं मस्ती में नीचे दबी पड़ी थी.

अब उसने अपने दोनों हाथ बिस्तर पर रखे और मेरे बदन को उसने मुक्त कर दिया. अब उसने धीरे धीरे धक्के मारने चालू कर दिए. मैं फिर से बिस्तर पर चिपक कर लेट गयी. और आराम से आंखे बंद कर ली. मैं पूरे मन से गांड चुदाई का आनंद ले रही थी. उसकी स्पीड अब तेज हो गयी थी. उसके लंड से चिकनाई भी निकल रही थी.
‘नेहा… आःह्ह… मजा आ रहा है…’

‘हाँ रे…सी सीई.. आः…’ मैं नीचे लेटे लेटे आँखें बंद करके सिस्कारियां भरती रही. मेरे अन्दर अब मीठी मीठी सी गुदगुदी बढने लगी. नीचे मेरी चूत भी बहुत पानी छोड़ रही थी. सारे बदन में वासना की रंगीन कसक सी बढ रही थी. मुझे ऐसा महसूस होने लगा था की राहुलमेरे अंग अंग को दबा दे , उसे मसल डाले… मेरा सारा कस बल निकाल दे.

‘विनोद… करते रहो…जोर से…करो… हाय…’ ऐसा लगा आवाज़ मेरी अंतरात्मा से निकाल रही हो. उसके धक्के मेरी गांड में ऐसे आराम से चल रहे थे जैसे कि चूत चुद रही हो. उसी सरलता से… उसी तेजी से…मजा भी उसी के समान आ रहा था…

‘हाय… आ अहह हह… नेहा… मैं गया… निकला मेरा…नेहा…’
उसके लंड ने मेरी गांड के अन्दर ही सारा वीर्य भर दिया. मेरी गांड में उसका लंड फूलता पिचकता का सा अहसास दे रहा था. उसका पूरा वीर्य निकल चुका था. राहुलमेरे ऊपर ही लेट गया. उसका लंड सिकुड़ कर अपने आप धीरे से गुदगुदी करता हुआ बाहर आ गया. वो एक तरफ़ लुढ़क गया. मेरी गांड में से वीर्य टपक टपक कर बिस्तर पर चूने लगा. मैं वैसे ही उलटी लेटी रही.

मैंने आँख खोली और गहरी साँस ली. मैं तुंरत बिस्तर पर से नीचे आ गयी. तौलिये से अपनी गांड साफ़ की, फिर राहुलका लंड भी साफ़ किया. अब मैं उसके ऊपर चढ़ कर लेट गयी. राहुलने अपनी आँख खोली… और मुस्कराया… मैंने उसे चूमना चालू कर दिया. एक हाथ नीचे ला कर उसका मुरझाया हुआ लंड पकड़ लिया. और उसे हिलाने लगी, मसलने लगी…

उसके लंड ने फिर से अंगडाई ली और जाग उठा. मैंने उसे अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे मुठ मारने लगी. कुछ ही देर में उसका लंड चोदने के लिए तैयार था. मैं राहुलके ऊपर लेट गयी. अपनी दोनों टांगे फैला दी.

लंड का स्पर्श मेरी चूत के आस पास लग रहा था. मैंने उसके होंट अपने होटों में दबा लिए. हम दोनों अपने आप को हिला कर लंड और चूत को सही जगह पर लेने की कोशिश कर रहे थे. उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड लिया. मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी.

अचानक मेरे अन्दर आनंद की तीखी मीठी लहर दौड़ पड़ी. उसका लंड फिर एक बार और मर्दानगी दिखने के लिए उतावला हो गया. वो मेरी चूत में रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुस गया. मेरे मुंह से एक मीठी सी सिसकारी निकाल पड़ी…’विनोद… अ आह हह हह हह… सी ई स स स ई एई…’

‘मजा आ रहा है न नेहा…’
‘विनोद… आआह्ह्छ… करते रहो…आ आह हह ह… लगाओ धक्का… आ अह ह्ह्ह्छ..’

मेरे मुख से आहें फूट पड़ी. गांड चुदाने से मेरी उत्तेजना पहले ही बढ़ी हुयी थी. अब उत्तेजना और भी बढाती जा रही थी. उसके लंड के मोटेपन का चूत में अहसास हो रहा था. लंड जड़ तक जा रहा था. मैं आनंद से सराबोर हो गयी थी. सिस्कारियां… आहे… फूट रही थी. मेरे चूतड ऊपर से तेजी से चल रहे थे. मैंने उसके हाथ अपनी चुन्चियों पर रख दिए. उसने मेरे स्तनों को मसलना…मरोड़ना… चालू कर दिया. उसने जैसे ही मेरी नोकों को मसलना और खींचना चालू किया. मेरी तो जान निकलने लगी.

‘जोर से खींच… मेरे राजा… मसल दे… आः ह्ह्छ… मेरे धक्के तेज होने लगे… मैं चरम सीमा पर पहुँचने लगी थी.

‘विनोद…हाय… मैं गयी… हाय… मैं गयी…सी सी ई… अरे..विनोद… रे…’
मैंने अचानक ही उसके हाथ मेरी चुन्चियो पर से हटा दिए…और चूत का पूरा जोर उसके लंड पर लगा दिया.
‘आ आह्ह ह्ह्ह… विनोद… निकला…निकला… हाय… रे…निकला… हाय… छूट गयी..रीई… आह्ह्ह्छ…’

मैं झड़ने लगी… मेरे चूत की लहरें उसके लंड पर लग रही थी. मैं पूरी झड़ चुकी थी. मैं तुंरत उठी और उसका लंड चूत में से निकाल गया. मैंने उसे अपने हाथों में लेकर कस के दबा लिया…और तेजी से दबा कर मुठ मारने लगी… जोश में उसके चूतड ऊपर उठे और उसके लंड ने फुहार छोड़ दी. उसका लंड रुक रुक कर पिचकारियाँ छोड़ रहा था. मैंने उसका सारा वीर्य उसके लंड पर लगा कर उसकी मालिश करने लगी. थोड़ा वीर्य उसके चूतडों पर और उसकी गांड के छेद पर भी मल दिया.

वो शान्ति से आँखे बंद करके लेट गया था. उसने थकान से अपनी आँखे बंद कर ली. मैं उठ कर बाथरूम में नहाने चली गयी. मैं जब बाहर आयी तो राहुलने बिस्तर की चादर बदल दी थी. अब वो कपड़े पहन रहा था.

‘नेहा तुम आराम करो… मैं चाय बना कर लता हूँ.’

मैंने घड़ी देखी…दिन के 4 बज रहे थे. मैं बिस्तर पर लेट गयी. वो चाय कब लाया मुझे पता नहीं चला। मैं गहरी नींद में सो गयी थी…
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प्रेषिका : दिव्या Antarvasna

श्री मनोहर सिंह Antarvasna मेहता के द्वारा भेजी गई कहानी को मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ। मुझे कुछ कुछ ऐसा प्रतीत होता है कि जिन घरों में भाभियां होती हैं, तो साथ रहने वाले देवर के मन में कभी ना कभी तो पाप जाग ही जाता है और नतीजन भाभियाँ चुदने लगती हैं, या देवर भाभियों के चक्कर में आ ही जाता है। मैं तो कहती हूँ कि आग तो दोनों ओर ही बराबर सी सुलग उठती है …तो वास्तव में इसमें गलती किसी की नहीं होती। आईये देखे, यहाँ श्री मनोहर सिंह जी क्या बता रहे हैं..

मैं गोवा का निवासी हूँ, मेरी यहाँ में पर्यटकों की आवश्यकताओं से सम्बंधित एक दुकान है। यह घटना मेरी जवानी के समय की है जब मैं मात्र 18 वर्ष का था और कॉलेज में पड़गता था। मेरे भैया की शादी हो चुकी थी। मेरे छोटे होने के कारण भाभी मुझसे बहुत स्नेह रखती थी। यूँ तो वो मुझसे सिर्फ़ पांच साल ही बड़ी थी। सच पूछो तो उसके पृष्ठ-उभार मुझे बहुत लुभाते थे, बस ! लुभाते ही थे … पर भाभी के गोल गोल सुघड़ चूतड़ों को दबाने की इच्छा कभी नहीं हुई। भाभी अधिकतर टुक्की वाला ब्लाऊज पहनती थी। उनके कठोर पर्वत मुझे बहुत सुन्दर लगते थे, पर उन्हें मसलने जैसी इच्छा कभी नहीं हुई। उनके चिकने बदन पर मेरी दृष्टि फ़िसल फ़िसल जाया करती थी, पर ऐसा नहीं था कि मैं उस चिकने बदन को अपनी बाहों में लेकर उन्हें चूम लूँ !

बस हम दोनों एक दूसरे के साथ साथ खेलते थे। मैं उनके साथ खाना बनवाने में मदद करता था, वॉशिन्ग मशीन में कपड़े धो देता था और भी बहुत से काम कर देता था।

एक दिन अचानक ही ये सारी मर्यादायें टूट कर छिन्न भिन्न हो गई। दोनों के मन में काम भावनायें जागृत हो उठी…। उस दिन सारा काम निपटाने के पश्चात हम दोनों यूँ ही खेल रहे थे, कि मन में ज्वाला सुलग उठी। भाभी का टुक्की वाला ब्लाऊज कील में फ़ंस कर फ़ट गया और सामने से चिर गया। भाभी का एक कठोर स्तन उभर कर बाहर निकल आया। मेरी नजरें स्तन पर ज्यों ही पड़ी, मैं देखता ही रह गया, सुन्न सा रह गया। भाभी एक दम सिहर कर दीवार से चिपक गई। मैं अपनी आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर उन्हें देखने लगा। भाभी सिहर उठी और अपने हाथों को अपने नंगे स्तन के ऊपर रख कर छुपाने लगी। मैं धीरे धीरे भाभी की ओर बढ़ने लगा। वो सिमटने लगी। मेरा एक हाथ उसके कठोर स्तनों को छूने के लिये बढ़ गया।

“नहीं भैया, नहीं… मत छूना मुझे !”

“ये… ये… कितने चमक दार, कितने सुन्दर है…”

मेरी अंगुलियों ने ज्यों ही उनके स्तन छुये, मेरे बदन में जैसे आग लग गई। भाभी तुरन्त झुक कर मेरी बगल से भाग निकली, और दूर जाकर जीभ निकाल कर चिढ़ाने लगी। मैं स्तब्ध सा उन्हे देखता रह गया। जाने क्यूँ इस घटना के बाद मैं चुप चुप सा रहने लगा। मेरे दिल में भाभी के लिये ऐसे वैसे वासना भरे विचार सताने लगे। शायद जवानी का तकाजा था, जो मेरे मन को उद्वेलित कर रहा था।

शाम को मैं छत पर टहल रहा था कि भाभी वहां आ गई।

“क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?”

“नहीं … हां वो … ओह क्या बताऊ मैं…!”

“भैया मेरी कसम है तुझे … जो भी हो, अच्छा या बुरा… कह दो। मन हल्का हो जायेगा।”

“बात यह है कि भाभी … अब कैसे बताऊँ…”

“मैंने कसम दी है ना … चलो अपना मुँह खोलो…” शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।

“ओह कैसे कहूँ भाभी,… आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !”

“तो क्या हुआ … तुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?” भाभी की नजरें झुक गई।

“पर शायद… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…”

“ऐ … चुप… क्या कहते हो … मैं तुम्हारी भाभी हूँ…” सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा

“कसम दी थी सो बता दिया … पर मैं क्या करू… मैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी…”

“भैया, अपने मन की कहूँ… प्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँ” भाभी ने भी झिझकते हुये कहा।

“क्या कहती हो भाभी …”

भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दिया… मेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया ? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया ? सभी कुछ गड-मड हो रहा था। मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर आ गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।

“कमल, तुम तो बहुत प्यारे हो, तुम्हें देख कर मुझे तो बहुत प्यार आता है !”

“भाभी…”

“ना भाभी नहीं, दीपाली कहो, मेरा नाम लो …” भाभी ने अपनापन दिखाते हुये कहा।

“दीपा, तुम्हें देख कर जाने मन में क्या क्या होने लगता है, ऐसा लगता है कि तुम्हें प्यार कर लूँ, चूम लूँ…” मैंने अपने होंठों पर जीभ फ़ेर कर अपनी मन की बता दी। मेरे गीले होंठ देख कर भाभी ने भी अपने होंठ थूक से गीले कर लिये और मेरे पर धीरे से झुक गई और इतने नजदीक आ गई कि उसकी गरम सांसें मेरे चेहरे से टकराने लगी।

“गीले होंठ बहुत रसीले होते हैं, एक बार और गीले कर लो !”भाभी ने अपना रस भरा अनुभव बताया।

मैंने अपने होंठ फिर से गीले कर लिये और भाभी ने अपने गीले होंठ मेरे होठों से लगा दिये और मेरा ऊपर का होंठ अपने होंठों से चूसने लगी। इतने नरम और थरथराते होंठ मुझे असीम सुख दे रहे थे। मैं पहली बार गीले नरम होंठों का स्पर्श इतनी मधुरता के साथ महसूस कर रहा था। धीरे धीरे भाभी ने अपनी जीभ भी मेरे मुख में डाल दी। भाभी की एक एक हरकत मुझे वासना की पीड़ा दे रही थी। वो अब मेरे होंठों को बेतहाशा पीने लगी थी। जब वो उठी तो उनकी आंखे वासना से सुर्ख हो गई थी। पर मेरी हिम्मत अब भी उनके स्तनों को दबाने की नहीं हो रही थी।

“बबुआ, कैसा लगा … दिल की मुराद पूरी हुई या नहीं ?” भाभी ने मुझे मुस्कराते हुये पूछा।

मैं शरमा गया। मेरी आंखें झुक गई।

“मेरे भोले देवर, तू तो बुद्धू ही रहेगा !” और वो हंस दी।

इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो चुका था और पजामे में तम्बू जैसा तना हुआ था। भाभी ने मेरा कड़क लण्ड देखा तो उसके मुख से आह निकल गई। वो उठ कर चल दी। आज तो भाभी का मन बाग बाग हो रहा था। रात को भी भाभी ने मुझे खाने के बाद मिठाई भी खिलाई, फिर मेरा चुम्मा भी लिया। अब मेरे दिल में भाभी के शरीर की सम्पूर्ण रचना बस गई थी। रह रह कर मुझे भाभी को चोदने को चोदने का मन करने लगा था। कल्पना में भाभी की रस भरी चूत को देखता, उनके भरी हुई उत्तेजक चूंचियों के बारे में सोचने लगता था। भैया नाईट शिफ़्ट के लिये जाने वाले थे। मैं भी अपने कमरे में कम्प्यूटर पर काम करने लगा। भैया के जाने के बाद भाभी मेरे कमरे में चली आई।

“भाभी, मम्मी-पापा सो गये क्या ?”

“हां सो गये, भैया के जाते ही वे भी सो गये थे, समय तो देखो ग्यारह बज रहे हैं।”

“ओह हाँ, मैं भी अब काम बन्द करता हूँ, भाभी एक चुम्मा दे दो !”

मैं उठ कर बिस्तर पर बैठ गया। भाभी ने लाईट बन्द कर दी और कमरा भी अन्दर से बन्द कर दिया।

“अब चाहे कितनी भी बाते करो, कोई डर नहीं !”

“भाभी आप कितनी सुंदर हैं, आपके प्यारे नरम होंठ बार बार चूमने को मन करता है !”

“सच … तुम भी बहुत अच्छे हो… मेरे दिल में बस गये हो।”

“मुझसे बहुत प्यार करती हो ना …?”

हमारी प्यार भरी बातें बहुत देर तक चलती रहीं। मेरा दिल बहुत खुश था… भाभी और मैं बिस्तर पर लेट चुके थे… भाभी ने अपने गीले होंठ एक बार फिर मेरे गीले होठों से चिपका दिये। मेरा डण्डा तन गया था। भाभी मेरी पीठ को सहलाते हुये सामने पेट पर हाथ ले आई। भाभी के कड़े स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। वो बार बार अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दबा कर रगड़ रही थी। मुझे लगा कि जैसे मैं भाभी को सचमुच में प्यार करने लगा हूँ। मैंने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया,”भाभी सच कहूँ तो मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तुम्हारे बिना अब नहीं रहा जायेगा !”

“आह, मेरे कमल, तुमने तो मेरे दिल की बात की बात कह दी, मैं भी कैसे रह पाऊंगी तुम्हारे बिना… ?!!”

“पर भाभी, बड़े भैया का क्या होगा…?”

“बड़े भैया अपनी जगह है, अपन दोनों को तो बस प्यार करना है सो करते रहेंगे !”

भाभी के हाथ मेरे शरीर पर इधर उधर फ़िसल कर मुझे रोमान्चित करने लगे थे। मेरी छाती पर सर रख कर वो लेट गई थी और प्यार भरी बातें करने लगी थी। क्या वो प्यार की प्यासी थी, या उन्हें शारीरिक तृप्ति चाहिये थी ? पर कुछ भी हो, मैं तो बहुत खुश था। भाभी अपने एक एक अंग को मेरे शरीर के ऊपर दबा रही थी, सिसक रही थी… चुम्बनों से मेरा मुख गीला कर दिया था। Antarvasna

मौसेरी बहन सरिता की चुदाई0 Antarvasna stories

सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार Antarvasna stories...!

मेरा नाम बंटी है और मुझे इनसेस्ट सेक्स बहुत अच्छा लगता है।

अब मैं आपको अपनी इस कहानी में बताऊंगा कि मैंने कैसे मौसी की बड़ी लड़की सरिता की चुदाई की।

मौसी और मौसा जी की चुदाई के बाद शाम को मैंने उनसे अपना वायदा पूरा करने के लिये कहा जिसमें उन्होने अपनी बेटी सरिता को चोदने की इजाजत दे दी थी।

मौसा जी बोले- तुम शाम को उसे जब अकेले देखना और फिर मौका देखकर उसकी चुदाई कर लेना।

मैं इस प्लानिंग से मैं बहुत खुश हो गया।

शाम को हम सब एक साथ डिनर कर रहे थे। मेरी नज़र बार बार सरिता की चूची पर जा रही थी जो कि उसके नाईट सूट से बाहर आने को बेताब थी। दोस्तों उसकी फ़िगर 34-28-34 हैं। उसके चूंची अपनी मां की ही तरह सभी को बहुत तड़पाती होंगी।

खाना खाने के बाद प्रिया (छोटी बेटी) और नितेश (छोटा लड़का) बोले- भैया चलो ऊपर कमरे में चलकर कुछ खेलते हैं।

पर मेरा मूड तो कुछ और ही था, मैंने मौसी से कहा- मौसी आप और मौसा जी इन दोनों के साथ ऊपर जाकर खेलो, मैं अभी टीवी देख कर आ जाऊंगा।

उन्होंने कहा- ठीक है।

और वो ऊपर चले गये और साथ ही सरिता को मेरा ध्यान रखने को बोल गये।
मौसा जी कहने लगे- सरिता, भैया को अपनी सभी नई सीडी दिखा देना।
सरिता बोली- ओ के पापा।

हम दोनों अब टीवी के सामने दीवान पर साथ बैठे थे, वो बोली- भैया, आपको कौन सी मूवी देखनी है?
मैंने कहा- कोई भी बड़े बच्चों वाली लगा दो !
तो वो बोली- क्या मतलब?

मैं उसकी तरफ़ आंख मारकर बोला- वही जो लोग शादी के बाद देखते हैं।
इतना सुनकर वो बोली- धत्त ! तुम बड़े गन्दे हो !
और हंसने लगी। मैं समझ गया कि वो तैयार है। और थोड़ी सी तैयारी के बाद आसानी से काम बन जयेगा।

वो बोली- भैया, ऐसी तो कोई सीडी नहीं है मेरे पास।
मैं बोला- कोई बात नहीं ! मैं अभी मारकेट से ले आता हूं।

इतना कहकर मैं बाहर जाने लगा। मुझे उसके चेहरे पर एक अलग मुस्कान दिख रही थी। मारकेट में बहुत मुश्किल से मुझे एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी मिल गई। जो कि हिन्दी में थी।
मैं अब वापस आकर सरिता से बोला- लो सीडी। स्टार्ट करो ! मैं अपनी ड्रेस चेंज करता हूं।
वो बोली- ठीक है।
उसने मुझे मौसा जी का एक पायजामा और कुरता लाकर दिया।

मैंने अपनी पैन्ट खोली तो उसकी नज़र मुझे ही घूर रही थी।
मैं मुस्कराने लगा।

कपड़े बदलने के बाद मूवी शुरु हो गई तो हम फ़िर साथ दीवान पर बैठ गये।

मूवी के पहले सीन में लड़की नहा रही थी। तभी एक लड़का भी बाथरूम में आकर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगता है।

मैंने देखा कि सरिता का चेहरा एकदम लाल हो रहा था। मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया। उसका पूरा बदन कांप रहा था।

मैं समझ गया कि ये सब बैचेनी मूवी के कारण है पर मैं अनजान बनकर उसे पूछने लगा- अरे, तुम्हें क्या हुआ? लगता है तुम्हारी तबियत खराब है, देखो, तुम्हारा पूरा बदन कांप रहा है। लाओ मैं तुम्हारा हार्ट बीट्स चेक करता हूं।

इतना कहते ही मैंने अपना हाथ उसके नाईट सूट में घुसा दिया और उसकी चूची दबाने लगा।

सरिता एकदम चौंक कर बोली- बंटी, यह क्या कर रहे हो। मैं आपकी बहन हूं और कोई आ गया तो बहुत बुरा होगा।

मैं उसको इमोशनल करते हुए बोला- सरिता, तुम मेरी बहन हो, यह मेरी मज़बूरी है नहीं तो मैं तुम्हें बचपन से जान से ज्यादा प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना रह नहीं सकता।

इतना सुनकर वो इमोशनल होकर मुझसे चिपट गई और बोलने लगी- आई लव यू बंटी, तुमने पहले मुझसे ये सब क्यूं नहीं कहा।

मैं बोला- हम शादी तो नहीं कर सकते पर थोड़ी मस्ती तो ले ही सकते हैं।
वो बोली- अगर मैं प्रेगनेंट हो गई तो?

मैं बोला- तुम मुझ पर विश्वास करो मैं ऐसे कुछ नहीं होने दूंगा।
वो बोली- तब ठीक है।

अब हमारे बीच किसी तरह की कोई दूरी नहीं रह गई थी इसलिये मैंने पहले जाकर टीवी ओफ़ कर दिया जिससे पूरा ध्यान सरिता की चुदाई पर लगा सकूं।
दीवान पर आकर मैंने उसे लेटा दिया और उसके बगल में लेट कर उसके होठों को चूसने लगा।
वो भी मेरे पूरा साथ देते हुए अपने जीभ मेरे मुंह में अन्दर बाहर कर रही थी।

इस सब में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता। मैंने अपना कुरता उतार दिया और बनियान भी।

अब मैं केवल पायजामे और उसके अन्दर अन्डरवियर में था।

मैंने सरिता के नाईट सूट के बटन खोलने शुरू कर दिया। वो शरमा कर सिमटी जा रही थी। पहली बार कोई उसके जवान बदन को छू रहा था।

उसका नाईट सूट हटते ही उसकी चूची ब्रा में कैद होकर भी आधी से ज्यादा दिख रही थी।

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूमना शुरू कर दिया, मेरा हाथ उसके पैन्टी को खोलने में लगा था और उसकी पैन्टी निकालने कि लिये मैंने उसे इशारा किया तो उसने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर कर दिया और मैंने उसे टांगों से बाहर निकाल दिया।

उफ़्फ़! उसकी गोरी और मांसल जांघे देख कर मेरा लौड़ा पजामा फ़ाड़ने को तैयार हो गया।

मुझसे अब रहा नहीं गया। मैंने अपना पजामा और अन्डरवियर निकालकर फेंक दिया।

वो मेरे खड़ा लण्ड देखकर बोली- बंटी ये लण्ड मेरी चूत में कैसे जायेगा, मैंने तो आज तक इसमें एक उंगली भी नहीं डाली।

मैं बोला- मेरी जान देखती जाओ! तुम्हारा दीवाना क्या क्या करता है।

मैं उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा तो वो मुझसे चिपट गई।

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी पीठ को सहलाने लगा। मेरा लण्ड बार बार जोर मार रहा था और उसकी जांघो पर छू हो रहा था। आआह ह्ह ! यह एक अलग मज़ा था। मेरी छाती और उसकी चूंची के बीच बस उसकी ब्रा थी जो मैंने एक तरफ़ खींच कर निकाल दी।

उफ़्फ़! उसकी दूध जैसे गोरी चूची देखकर मन कर रहा था कि उसको काट लूं। उसके गुलाबी चुचूक को मैं मुंह में लेकर चूसने लगा। वो एकदम टाईट हो गये।

उसके हाथ मेरे बालों में घूम रहे थे और मैं बहुत बेचैनी के साथ उसकी चूची को सुसक कर रहा था।

थोड़ी देर के बाद मैं उसके पैर की तरफ़ आ गया और उसकी पैन्टी अपने दांतों से खींचने लगा।

उसको बाहर निकालकर मैं अपना हाथ उसके पैरों को छूते हुए जांघो पर घुमाने लगा। मेरे मुंह उसकी चूत पर था। उस पर बहुत घने बाल थे।

मैं सरिता से बोला- तुम कभी अपनी चूत शेव नहीं करती?
वो बोली- कभी इस तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया।

मैं बोला- कोई बात नहीं, फ़िर कभी मैं साफ़ कर दूंगा।

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर घुमानी शुरू कर दी। उसको बड़ा अज़ीब लग रहा था, वो बोली- बंटी, यह क्या कर रहे हो?

मैंने पूछा- क्यूं? मज़ा नहीं आ रहा क्या?
वो बोली- मज़ा तो बहुत आ रहा है।

उसकी सिसकारी सारे कमरे में सुनाई दे रही थी आआआह ह्ह्हह। बंटी … बस करो आआअह मैं मर जाऊंगी आआ आआअह!

मैं और भी जोश में आने लगा और उसकी चूत में अपनी जीभ घुसाने लगा।

मेरे मन था कि वो भी मेरे लण्ड चूसे पर अभी मैं उसे झिझक के मारे कह नहीं पा रहा था।

उसने एक हाथ से मेरा लण्ड ज़ोर से पकड़ा हुआ था और अपनी आंखें बंद करके आआअह ऊऊओह कर रही थी।

उसकी चूत एकदम गीली हो रही थी।
मैं समझ गया कि एक बार उसकी चूत पानी छोड़ चुकी है।

अब मैं उसे चोदने की तैयारी करने लगा।

मैंने उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया लगा दिया। उसकी चूत अब बहुत उभर गई थी।

मैंने उसकी दोनों टांगों को खोल कर बीच में आ गया।

अपने लण्ड मैंने जैसे ही उसकी चूत पर रखा तो मुझे लगा कि जैसे मेरे लण्ड में आग लग गई हो। उसकी चूत एकदम गरम हो रही थी।

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाना शुरू किया तो वो दर्द से तड़प कर एकदम हटकर बैठ गई।

सरिता बोली- बंटी। इतना दर्द मुझसे सहन नहीं होगा। तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में नहीं जायेगा। मैं मर जांऊगी। तुम चाहे जो कर लो पर मैं चूत में लौड़ा नहीं लूँगी।

मैं बोला- जान, पहले तो सभी को दर्द होता है पर बाद में खूब मज़ा आता है। जरा सोचो अगर तुम्हारी मम्मी चुदने के लिये मना कर देती तो तुम कहां से पैदा होती।

बात उसकी समझ में आने लगी, वो बोली- ठीक है बंटी, तुम्हारे लिये मैं यह दर्द सह लूगीं, पर तुम थोड़ा सा तेल अपने लोड़े पर लगा लो।

मैंने कहा- ठीक है।

हमने तेल ढूंढना शुरू किया तो उस कमरे में तैल तो नहीं मिला पर दूध में से मलाई अपने लौड़े और उसकी चूत में लगा दी।

अब मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डालना शुरू किया। लौड़े का सुपारा उसकी चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई, मैंने अपने हाथों से उसके मुंह को सील कर दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा।

थोड़ी देर बाद उसको भी मज़ा आने लगा और उसने अपने चूतड़ उछालने शुरू कर दिये। पूरा कमरे में एक संगीत सा बजने लगा।

उसके हाथ लगातर मेरे चूतड़ पर घूम रहे थे और वो कभी कभी अपनी उंगलियाँ मेरी गाण्ड में डालने की कोशिश कर रही थी जिससे मेरा जोश और भी बढ़ जाता था और मैं और ज़ोर से धक्के मारने लगता।

मेरे पूरा लण्ड जब तक उसकी चूत में था और मेरे आण्ड उसकी गाण्ड से टकरा रहे थे।

लगातार धक्के मारने के वजह से मैं झड़ने वाला था। इसलिये मैंने लण्ड उसकी चूत से निकाल कर पानी उसके पेट पर झड़ा दिया।

मैंने देखा उसकी चूत से खून निकला हुआ था। मेरा लण्ड भी लाल हो रहा था।

यह देखते ही सरिता बोली- तुमने आज मेरी सील तोड़कर लड़की से औरत बना दिया है। आई लव यू।

वो मेरे लण्ड को सहलाते हुए बोली- मुझे कभी भूल तो नहीं जाओगे बंटी?

मैंने कहा- नहीं जान, मैं तो तुम्हारी शादी होने के बाद भी तुम्हें चोदना चहता हूं।

बहुत देर तक ऐसे ही एक दूसरे हो चूमते और सहलाते और बातें करते हुए ही लेटे रहे।

फ़िर सरिता बोली- चलो, अब ऊपर कमरे में चलते हैं, नहीं तो मम्मी पापा शक करेंगे।

उसे क्या पता था कि उसको चोदने का प्रोग्राम उसकी मम्मी ने ही बनाया है। मैं मन ही मन मौसी को धन्यवाद कर रहा था।

तो दोस्तो, यह थी मेरी दूसरी कहानी। मुझे आपके कई ई-मेल मिले, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

अगली कहानी में मैं बताऊंगा कि मैंने कैसे प्रिया को चोदा।

Antarvasna

यह तब की बात है Antarvasna जब एक दिन मेरा दोस्त राकेश अपनी पत्नी के साथ मेरे घर आया। राकेश और मैं साथ साथ काम करते हैं, राकेश की पत्नी प्रिया टीचर है।

उस दिन राकेश ने बताया कि उसका प्रिंटर और यू पी एस खराब हो गया है और प्रिया को स्कूल के कुछ पेपर सेट करके स्कूल में जमा करने हैं। इसलिये वो मेरी मदद चाहता था, मेरे पास प्रिंटर और पी सी दोनों हैं।

वह जब शाम को करीब 8:00 बजे आया तो मैं थोड़ा घबरा गया था कि अचानक दोनों कैसे आ गये।

राकेश को थोड़ा ड्रिंक लेने की आदत है और उस दिन शायद शनिवार था तो उस समय वह थोड़ा ड्रिंक किये हुये था।

उससे मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं टाइप कर देता हूँ, तुम बोलती रहो!

तो प्रिया ने कहा- कोई बात नहीं, मैं बोल देती हूं, यह मैंने ही बनाया है तो गल्तियाँनहीं होंगी!

उसने बताया कि उसको अच्छी टाइपिंग नहीं आती तो वह टाइप नहीं कर पायेगी।

प्रिया मेरे बगल में कुरसी लगाकर बैठ गई, वह इतना नज़दीक थी कि मैं उसकी सांसें महसूस कर सकता था।
कई बार उसके बोडी से मेरी बोडी छू रही थी और उसके लिप्स बिल्कुल मेरे करीब थे उसके गोरा रंग और स्लिम फिगर मुझे डिस्टर्ब कर रहा था।

राकेश भी पीछे बैठा था और मैं अपने पर किसी तरह कंट्रोल किये हुये था। पर प्रिया एकदम नोर्मल थी, उसे शायद ही मेरे बुरे इरादों का अहसास हो रहा हो।

मैं थोड़ा नर्वस सा भी हो रहा था। मन तो कर रहा था कि उसकी एक पप्पी ले लूं और उसकी थाईस पर हाथ फ़ेरूं। उसके मीडियम साइज़ के टाइट बूब्स पर अपने लिप्स से चूमूं।

पर ये सब उस समय सम्भव नहीं था, इस चक्कर में, मैं एक दो बार टाइपिंग करना ही भूल गया। कभी कभी मैं उसके पूरे बदन को ही देखते रह जाता।

थोड़ी देर में राकेश को फ़िर ड्रिंक की जरूरत महसूस हुई, तो वह बोला- प्रिया मैं 10 मिनट में आया।

हम दोनों समझ गये थे कि वह कहाँ जा रहा है। दोनों ही उसकी आदत जानते थे। राकेश के जाने के बाद प्रिया और मैं अपना काम करते रहे और मैं बीच बीच में प्रिया के पूरे बदन पर नज़र मार लेता तो प्रिया भी मुझे देखकर मुस्करा देती।

फ़िर जब पेपर पूरा हो गया तो मैंने एक प्रिंट आउट चेकिंग के लिये प्रिया को दे दिया। प्रिया ने कुछ कोर्रेक्शन के बाद मुझे प्रिंट आउट दिया तो मैं कोररेक्शन करके दुबारा फ़ेयर प्रिंट आउट निकालकर प्रिया को दे दिया।

इस तरह हमारा टाइपिंग का काम पूरा हो गया तो मैंने प्रिया को बोला कि काम तो पूरा हो गया पर राकेश नहीं आया। मैं ऐसा करता हूं थोड़ी चाय बनाता हूं तब तक शायद राकेश आ जाये फ़िर तीनो चाय पीयेंगे।

प्रिया बोली- नहीं चाय में बनाऊँगी, मुझे कल भी तुमको तकलीफ़ देनी है। यह तो एक ही पेपर हुआ है अभी तीन पेपर और हैं, प्रिंटर और यु पी एस शायद दो-तीन दिन में ठीक होंगे और मुझे पेपर परसों तक जमा करना है।

मैं कुछ कहता इससे पहले ही प्रिया किचन में चली गई मैं मना नहीं कर पाया। उसे किचन में कोई परेशानी नहीं हुई और उसने चाय बनाने को भी रख दी। पाँच मिनट के बाद प्रिया दो कप में चाय लेकर आ गई तो मैंने कहा कि राकेश को भी आने दो।

तो वह बोली- राज तुम क्या बात कर रहे हो, इस टाइम वह चाय पीने की हालत में होंगे कहाँ। उनके लिये चाय मैंने नहीं बनाई है उनको जो चाहिये वो उसके लिये ही गये हैं।

मैं तो राकेश के ड्रिंक के बारे में जानता था पर किसी की बुराई और वह भी उसकी बीवी से करना बड़ी बेवकूफ़ी होती है आखिर पति परमेश्वर जो होता है।

फ़िर अचानक वह मुझसे बोली राज तुम भी अब शादी कर ही लो, ऐसे कब तक चलेगा तो मैंने कहा हाँ राकेश को देखकर मेरा भी मन करता है और उसके मज़े देखकर कभी जलन भी होती है।

प्रिया बोली- क्यों जलन किस बात की, अरे वह तो तुम्हारी बचोलर लाइफ को अच्छा बताते हैं और कहते है कि वह गलत फ़ंस गये।

मैंने कहा- मैं सच कहूं तो एक बात की जलन बड़ी होती है कि उसकी (राकेश) की बीवी बड़ी खूबसूरत है।

मेरा ऐसा कहने पर प्रिया पहले तो शरमा सा गई फ़िर बोली- अच्छा जी तो तुम मुंह में जबान भी रखते हो। मैं तो तुमको बड़ा सीधा साधा समझती थी, पर तुम भी कम नहीं हो बातें बनाने में। दूसरे की हरी हरी दिखती है, मेरी भी कुछ परेशानियाँहैं।

मैंने कहा- क्यों आपका एक अच्छा परिवार है बच्चा है। ऐसी कोई प्रोब्लम तो नहीं लगती आप दोनों ठीक ठाक कमाते हो।

प्रिया बोली हाँ वह सब तो है पर। बहुत कुछ मिस करती हूं, फ़िर भी ठीक ही है। राकेश अभी तक भी नहीं आया तो मैंने कहा पता नहीं क्या बात है?

तो प्रिया बोली- यही तो बात है अगर ड्रिंक कर लिया तो इन्हे किसी बात का कोई ध्यान नहीं रहता। अब घर जाकर न ढंग से खायेंगे न कुछ करेंगे और सो जायेंगे, कभी कभी तो रोज़ ही ऐसा होता है। मुझे ऐसे पियक्कड़ से नफ़रत होती है और फ़िर हम दोनों कई दिनो तक एक कमरे में भी अलग अलग रहते हैं। बच्चा तो बस इस बात का सबूत है कि हम पति पत्नि हैं पर शायद एक पति पत्नि की तरह प्यार किये हमें सालों गुजर गये।

प्रिया एकदम इमोशनल हो गई थी, मैंने उसके हाथ पर हाथ रखकर कहा- सब ठीक हो जायेगा तुम उसे प्यार से समझाओ वह समझेगा। वह तुमसे डरता तो है पर शायद अपनी आदत भी नहीं छोड़ पाता और इसका कारण भी शायद उसकी कम आमदनी है, तुम उस से ज्यादा मांगें ना किया करो।

प्रिया ने अपना कंधा मेरी गोद में रख दिया और बोली- राजू, तुम्हारी भी तो प्रोब्लम्स होंगी तो क्या ड्रिंक में ही सब प्रोब्लम का हल है?

वह मेरी गोद में आ गई थी, मैं उसकी बाहों पर हाथ फ़ेरने लगा, वैसे मैं ये कन्सोल करने के लिये कर रहा था पर मेरा सेक्सी मन पूरा मज़ा ले रहा था।

प्रिया को भी मेरा टच पसंद आया था और वह कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे और ऊपर खींच कर अपनी बाहों में ले लिया। प्रिया ने कुछ नहीं कहा और अपना सर मेरे कंधों पर रख दिया।
मैं उसे कमर से पकड़ कर सोफ़े की तरफ़ ले गया तो वह मेरे साथ चल दी।

प्रिया दिखने में एकदम पटाखा है, गोरा रंग और चमकदार चिकनी त्वचा, पतली कमर, कद 5’3″ उसका फ़िगर 34-26-36 होगा। प्रिया शायद चाहती थी कि मैं उससे खूब बातें करूं और उसकी तारीफ़ करूं पर में ऐसा नहीं कर पाया।

मैं अब तक प्रिया के बदन को देखकर मस्त हो चुका था और मैंने सोचा बेटा इससे बढ़िया मौका किसी औरत के बदन से खेलने का मिलना मुश्किल है इसलिये मैं भी मौके का फ़ायदा उठाना चाहता था।

प्रिया को क्या फ़र्क पड़ता अगर मैं वहाँ नहीं होता तो राकेश तो उसके साथ रोज़ ही ऐसा करता। मैं उमर में बड़ा और उसको अपनी बाहों में लेकर बोला सब ठीक हो जायेगा तुम चिंता मत करो बस मस्त रहो, अभी तो मैं तुमको निराश नहीं करुंगा, राकेश से ज्यादा मज़ा दूंगा!

और इतना कह कर मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रखकर उसके लिप्स को बंद कर दिया। प्रिया सकपका गई और कुछ बोल नहीं पाई, मैंने उसके लिप्स जो बंद कर दिये थे। जैसे ही मैं अपने लिप्स हटाये वह बोली राज आप बहुत गंदे हो, आप ने ऐसी गंदी बात कैसे सोची।

मैंने कहा जो राकेश नहीं करता वह मैं करता हूं तो तुम क्यों परेशान हो, मैं कौन हूं भूल जाओ थोड़ी देर के लिये। मैं भी तुम्हारा नज़दीक का हूं और सोचो मैं वह सब तुमको दे रहा हूं जो तुम राकेश से इस समय चाहती हो, फ़िर मैं ड्रिंक भी नहीं करता।

मेरी इस बात का प्रिया पर असर हुआ, वह बोली- पर मुझे डर लग रहा है, मैं उनके साथ कोई गलत तो नहीं कर रही।

मैंने कहा- सोच लो यह तुम्हारे ऊपर है और मैं उसे चूमता और उसके जांघों और बैक पर मसाज भी करता रहा।

प्रिया बोली- प्लीज़ जैसा तुम चाहो पर प्लीज़ मेरे कपड़े मत उतारना आप बाहर से जो चाहे कर लो मुझे बड़ी शरम आ रही है।

मेरा तीर सही निशाने पर लग गया था और मैंने प्रिया को अपनी बाहों में ले लिया। फ़िर मैंने बिना समय गवाये किये हुए प्रिया के बूब्स पर उसकी कमीज़ के बाहर से ही हल्का हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया।

दोस्तो ये सब कैसे हो रहा था मुझे नहीं मालूम, मैं इतना हिम्मत वाला नहीं हूं। प्रिया मेरे छूने से मस्त हो रही थी, इसी बीच मैंने मौका देखकर प्रिया की सलवार का नाड़ा चुपके से खोल दिया और उसे पता नहीं चला।

मैं उसकी चिकनी जांघों पर हाथ फ़ेरना चाहता था पर जैसे मेरा हाथ उसकी पैंटी पर टच हुआ वह एकदम से नाराज़ होते हुए बोली- राज, नो चीटिंग!

और उसने अपनी सलवार एक हाथ से पकड़ ली, पर ऊपर से वह मस्त हो चुकी थी पर अभी भी मुझसे चुदवाने में वह संकोच कर रही थी पर मेरे टच से उसे मज़ा आ रहा था। उसकी सलवार अभी तक खुली हुई थी, जिसको उसने एक हाथ से पकड़ रखा था।

जैसे ही मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो उसके हाथों से उसकी सलवार नीचे सरक गई और मैंने ऊपर से उसकी कमीज़ की ज़िप पीछे से खोल दी और उसने अंदर से काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैं तो उसके गोरे बदन पर काली ब्रा देखकर मस्त हो गया।

आगे की कहानी अगले भाग में…Antarvasna

दोस्तो ! मैं हंस ! एक कालबोय दिल्ली से !Antaravsna

दोस्तो ! मैं हंस ! एक कालबोय दिल्ली से !

आपने मेरे पिछले अनुभव पढ़े होंगे।मेरे Antaravsna लण्ड का आकार ७.५ इन्च है। जिन लड़कियों, आंटियों, भाभियों को मैंने अभी तक चोदा है वो ही समझ सकती हैं मेरे लण्ड की महिमा। मैं ज़िगालो हूं और मेरा काम अच्छा चल रहा है। पूरे दिल्ली से मुझे काल आते हैं और पिछले हफ़्ते मुझे एक २९ साल की अविवाहित लड़की की मेल आई। उसने बताया कि वो एक प्राइवेट नौकरी करती है और उसे मेरी सेवाएं चाहिएं।

मैंने हां कर दी। उसने मुझे तारीख बताई और अपना मोबाइल नम्बर दिया कि इस दिन शाम को आठ बजे के बाद आप मुझे फ़ोन करना, मैं बता दूंगी कि कहां आना है। उसने अपने घर का पता नहीं बताया।

मैंने कहा- ठीक है।

मैं उसकी बताई तारीख पर शाम को तरोताज़ा होकर ८:३० पर मैंने उसको काल किया तो उसने मुझे एक शादी-स्थल पर बुलाया और कहा कि वहां बाहर से ही तुम मुझे फ़िर काल करना।

मैं आटो से वहां पहुंचा, बाहर से काल किया और अपना हुलिया बताया तो उसने मुझे बाहर ही रुकने को बोला। बाहर बहुत भीड़ थी, बहुत गाड़ियाँ खड़ी हुई थी, किसी पैसे वाले की शादी थी।

कुछ देर बाद एक बेहद खूबसूरत २८-३० साल की लड़की साड़ी पहने, बालों में फ़ूल लगाए हुए एकसम सज़ी-धज़ी गेट से बाहर आई। वो अपने कान से मोबाइल लगाए हुए किसी को खिज़ रही थी कि तभी मेरे मोबाइल की घण्टी बज़ी। अब तक वो मेरे पास पहुंच चुकी थी, मेरे मोबाइल की घण्टी उसे भी सुनाई दे गई थी। मैं अपनी जेब से मोबाइल निकाल भी नहीं पाया था कि मेरे मोबाइल की घण्टी बंद हो गई। मैं भी उसे देख रहा था।

उसने मेरे बगल में खड़े होकर फ़िर रि-डायल किया तो मेरा मोबाइल बजने लगा। वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी, मैं भी मुस्कुराने लगा। फ़िर उसने मोबाइल बंद किया और मुझसे पूछा- क्या तुम हंस हो?

मैंने कहा- जी हाँ ! मैं ही हंस हूँ।

हम दोनों ने हाथ मिलाया। उसने बताया कि यहाँ उसकी सहेली की शादी है, बस कुछ देर में कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा, आओ तुम मेरे साथ खाना ख लो।

मैंने कहा- ठीक है।

मैं मन ही मन हँस रहा था- बेगानी शादि में अब्दुल्ला दीवाना !

मैं अन्दर गया और भीड़ में शामिल हो गया। वो स्टेज़ पर चली गई। मैं खाना खाने लगा पर वो वो मुझे स्टेज़ से लगातार देखे जा रही थी, मैं भी उसे देख रहा था। वो २९-३० साल की परिपक्व लडकी थी। उसका जिस्म बहुत ही सेक्सी लग रहा था बिल्कुल प्रियंका चोपड़ा की तरह।

मैं खाना खा चुका था और एक कुर्सी पर बैठ कर कोफ़ी पीने लगा। तभी देखा कि दुल्हा-दुल्हन और सब लोग स्टेज़ से उतर कर खाना खाने जा रहे हैं इतने में वो उन लोगों को छोड़ कर मेरे पास आई और कोफ़ी लेकर मेरे पास बैठ गई। भीड़ से अलग हम दोनों कोफ़ी पीते हुए बातें करने लगे। उसने पूछा- आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई?

मैंने कहा- नहीं।

उसने बताया- यह मेरे बोस की बेटी की शादी है और वो मेरी सहेली भी है। मेरे बोस बहुत बड़े और अमीर आदमी हैं।

मैंने कहा- इन्तजाम देखने से ही पता चलता है।

वो बहुत बड़ी जगह थी। उसने बताया कि ये जो आजू-बाजू दो कोठियाँ दिख रही हैं, इनमें एक में लड़की वाले रुके हुए हैं और दूसरी में लड़के वाले। हम सभी को अलग अलग कमरे दिए हुए हैं। मेरा कमरा फ़ेरों वाली जगह के पास ही है। जहाँ इतनी भीड़ है कि कोई किसी के बारे में नहीं सोच रहा है कि कौन लड़की वाला है और कौन लड़के वाला।

मैं उसकी बातें सुन रहा था, बोलते बोलते उसकी सांस फ़ूल रही थी। मैं उसकी स्थिति समझ रहा था।

फ़िर उसने बताया कि मंगलीक होने की वजह से उसकी शादी कहीं तय नहीं हो पा रही है जबकि उसके साथ की सब लड़कियों की शादी हो चुकी है और कई माँ भी बन चुकी हैं। इस उम्र में सेक्स को लेकर मेरा क्या हाल हो रहा है, तुम समझ सकते हो। इसीलिए मैंने तुमसे सम्पर्क किया, पर हंस यह हमारी पहली और आखिरी मुलाकात होगी।

मैं उसकी सब बातें सुनने के बाद बोला- अगर कभी आप बाज़ार जाते हैं और आपकी जूस पीने की इच्छा होती है तो आप दुकान पर जाकर जूस पीते हैं और पैसे देकर घर आ जाते हैं ना ?

वो बोली- हाँ !

तो मैंने कहा- एक बात बताओ आप वो गिलास क्यों नहीं लाती साथ में जिसमें आपने जूस पिया?

तो वो बोली- गिलास नहीं खरीदा था, उसमें रखा हुआ जूस ही खरीदा था।

मैंने कहा- हाँ ऐसे ही आपने मेरी सेवाएँ खरीदी हैं, मुझे नहीं। आज के बाद मुझे आप से कोई मतलब नहीं रहेगा, आप निश्चिंत रहें।

वो मुस्कुराने लगी। हम काफ़ी देर बातें करते रहे। इसी बीच दुल्हा-दुल्हन उस कोठी की तरफ़ जाने लगे जहाँ मण्डप बना हुआ था और उधर ही उसका कमरा था, वो बोली- उठो ! साथ में चलो, हम भी दुल्हा-दुल्हन की भीड़ में शामिल हो गए। कोठी अन्दर से बहुत शानदार थी, बिल्कुल टीवी सीरियल के सेट की तरह।

दुल्हा-दुल्हन और कुछ लोग, लड़के, लड़कियाँ मण्डप के पास बैठ गए और कुछ अपने अपने कमरे में जाने लगे। प्रिया ने मुझे इशारा किया और मैं भी सामान्य होकर प्रिया के पीछे पीछे मगर कुछ दूरी से हो लिया। उसने कमरे का दरवाज़ा खोला और अन्दर हो गई, मैं भी मौका देख कर कुछ पल बाद कमरे के अन्दर हो गया।

एक पाँच सितारा होटल की तरह का कमरा था। बड़ा बेड, टीवी, फ़ोन वगैरह और कमरा महक भी रहा था। उसने ऐ सी चला दिया। बाथरूम का दरवाज़ा खुला हुआ था। मैंने झांक कर देखा तो बहुत बड़ा और सुन्दर बाथरूम था।

उसने कमरे का दरवाज़ा अन्दर से बंद कर लिया। मैं जूते निकाल कर बेड पर दीवार से पीठ लगा कर लेट गया। मैंने टीवी चला लिया। प्रिया बेड के पास खड़ी मुझे देखे जा रही थी। उसके सांस लेने के कारण उसके स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे। मैंने उसकी तरफ़ हाथ बढ़ाया। कुछ देर बाद उसने मेरा हाथ पकड़ा तो मैंने उसे बेड पर खींच लिया।

वो बड़ी अदा से मेरे सीने पर गिर पड़ी। हम दोनों अधलेटे थे। उसका सर मेरे सीने पर था। एक हाथ से मैं उसे थामे हुए था और एक हाथ से मैंने उसके गालों को छुआ। उसने आँखें बंद कर ली। वो दुल्हन की तरह सज़ी हुई थी। परफ़्यूम की मदहोश कर देने वाली उसकी महक से मैं दीवाना हो गया। मैंने उसके माथे को चूमा।

आज़ मैं भी सुहागरात मनाने के मूड में था। प्रिया एक अविवाहित लड़की थी, मैं अच्छी तरह से जानता था उसे क्या चाहिए। मेरा मतलब है कि एक अच्छा और पूरी सन्तुष्टि देने वाली यौन-क्रिया प्यार और ध्यान के साथ।

फ़िर मैंने उसकी बंद आँखों को चूमा और एक हाथ उसके बालों में फ़िराने लगा। वो किसी नई दुल्हन की तरह शरमा रही थी। उसका एक हाथ मुझे अपने घेरे में लिए हुए था। फ़िर मैं उस के ऊपर कुछ झुका और मैंने आपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए वो कांप गयी और जोर से मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

मैं उसके होंठ चूस रहा था, वो भी मेरे होंठ चूस रही थी। कुछ देर होंठ चूसते हुए वो इतनी बेचैन हो गई कि उसने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों गाल पकड़े और जोर जोर से सर घुमा घुमा कर मेरे होंठ चूसने लगी, बेतहाशा मेरे होंठ चूमती रही, एक समय तो मैं भी छटपटाने लगा था। वो इतनी गरम हो चुकी थी कि भूखी शेरनी हो गयी थी।

इस समय उसके बड़े बड़े स्तन मेरे सीने पर दब रहे थे। फ़िर मैं भी अपना एक हाथ उसके सर के पीछे डाल कर उसका सर पकड़ कर पूरे जोर से उसके होंठ चूसने लगा। करीब २० मिनट तक हम बस किस करते रहे।

ये फॉर प्ले का पहला भाग था।

फ़िर कुछ देर बाद हम अलग हुए, दोनों ही बुरी तरह हांफ रहे थे। हम दोनों बिस्तर पर अलग अलग लेटे हुए थे। कुछ देर बाद जब हम सामान्य हुए तो मैं उसकी तरफ़ पलटा, वो आँख बंद किए हुए लेटी थी। मैं उसे गर्दन पर चूमते हुए उसके स्तनों पर चूमने लगा साड़ी का पल्लू उसके सीने पर से अलग करते ही मैं हैरान रह गया, क्या मस्त बड़े बड़े स्तन थे यार ! गोरे ! गोल !

मैं मचल उठा। मैंने अपने दोनों हाथ उसके दोनों बूब्स पर रख दिए और सहलाने लगा उसकी साँसे तेज़ चलने लगी और वो मेरी तरफ़ देखने लगी। मैंने बूब्स सहलाते हुए अपना मुंह उसके ब्लाउज में घुसा दिया। वो मचल उठी और मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर बूब्स पर दबा दिया। मैं अपने होंठ उसके बूब्स पर फेरे जा रहा था।

फ़िर मैंने एक हाथ से उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए। वो गुलाबी रंग की रूपा की ब्रा पहने हुए थी। क्या सेक्सी ब्रा थी ! मजा आ गया। फ़िर मैं कुछ देर ब्रा के ऊपर से ही बूब्स दबाता रहा और अपने होंठ फिराता रहा। फिर मैं बूब्स से नीचे होते हुए उसके पेट और नाभि पर आया, उसकी कमर को खूब चूसा। उसकी हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी।

फ़िर मैं एक झटके से बिल्कुल नीचे उसके पैर के पास पहुँच गया। उसके पैर चूमते हुए उसकी साड़ी ऊपर करते हुए जाँघों तक आ गया।

क्या खूबसूरत सेक्सी जांघें थी !

मैं दोनों जाँघों पर अपने होंठ रगड़ रहा था। वो मदहोश हो रही थी और अपना सर जोर जोर से आजू-बाजू घुमा रही थी, अपने होंठ दांतों से चबा रही थी। मैंने अपने दोनों हाथ उसकी दोनों जाँघों पर से सरकाते हुए उसकी पेंटी को पकड़ा और नीचे खींच दिया। मेरी इस हरकत से वो चिंहुक गयी और सिस्कारने लगी।

बहुत ही शानदार चूत थी वो ! बिल्कुल मलाई की तरह और ब्रेड की तरह फूली हुई, बिल्कुल साफ़ ! एक भी बाल नहीं था और महक भी रही थी।

मैंने अपना काम शुरू कर दिया अपने दोनों हाथों से उसके नितम्ब सहलाते हुए उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाली तो वो अपनी कमर जोर जोर से ऊपर उछालने लगी और सी ,सी की आवाज़ निकालने लगी करीब १५ मिनट तक ऐसा करने पर उसने एक बार अपना पानी छोड़ा उसे बहुत आनंद आ रहा था।

फ़िर मैं अलग हुआ तो वो भी बैठ गयी और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी मैंने पैंट खोलना शुरू किया। उसने शर्ट उतारने के बाद मेरे सीने पर बहुत प्यार से हाथ फेरा, अपने होंठ मेरे सीने से लगा दिए और जोर जोर से मेरे सीने पर होंठ फिरने लगी।

मैं पैंट उतार चुका था। फ़िर मैंने उसकी ब्रा अलग की तो उसके बूब्स बाहर आ गये इतने बड़े और शानदार दूध देख कर मैं भी बेकाबू हो गया और मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया जिससे उसके बूब्स मेरे सीने से दब जाएँ। इससे उसे और मुझे भी अच्छा लगा।

कुछ देर बाद मैंने उसके नाभि के नीचे साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया। वो मुझे देखने लगी कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं मुस्कुराया और मैंने अन्दर से उसकी साड़ी की तह किया हुआ भाग पकड़ा और हाथ बाहर खींच लिया जिससे एक ही झटके में साड़ी बिकुल खुल गई। वो हँसने लगी। मैंने साड़ी अलग की।

अब वो पेटीकोट में थी। पेटीकोट में से ही उसके चूतड़ों का आकार देख कर मैं पागल हो गया। उसकी गांड बहुत गोल और ऊपर उठी हुई थी और बड़ी थी। मुझे साड़ी में चूतड़ देखना बहुत पसंद है। राह चलती औरतों में सबसे ज्यादा उनकी गांड देखता हूँ क्योंकि मेरा मानना है कि अगर औरत के चूतड (गांड) अच्छे आकार में न हों तो उसे देख कर सेक्स की बिल्कुल भी इच्छा नहीं होती और अगर कोई साड़ी पहने हुए अच्छे बड़े गोल चूतड़ दिख जाएँ तो लंड तभी झटके से खड़ा हो जाता है।

ऐसे चूतड थे प्रिया के जिसे देख कर मेरा लंड और कठोर हो गया। मैंने उसका पेटीकोट उतार दिया अब वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने थी। मैंने उसकी गांड को खूब प्यार किया सहलाया चूमा अब उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया। मैं अभी भी अंडरवियर में था वो ऊपर से ही मेरे लंड को दबा रही थी फ़िर अचानक उसने मेरे अंडरवियर को नीचे खींच दिया।

वो बोली- अब कब तक तड़फाओगे? जल्दी अन्दर डाल लो न प्लीज़ !

मैंने भी उसके दोनों पैर अपनी कमर पर रखे और चूत पर अपना लंड रख दिया। उसने आँखे बंद कर ली। पहले मैंने अपना लंड उसकी कुंवारी चूत पर रगडा, फ़िर धीरे से अंदर डाला। वो छटपटा उठी।

अभी मेरा थोड़ा सा ही लंड अन्दर गया था पर वो बेकाबू होने लगी। अभी उसे दर्द का अहसास नहीं था क्यूँकि मैंने अभी थोड़ा सा लंड चूत के अन्दर किया था पर वो इतनी मचल रही थी। अचानक उसने अपने दोनों पैर से मुझे जम कर जकड़ लिया और अपने दोनों हाथ बिस्तर पर टिका कर अपनी कमर में जोर दार झटका देकर मेरे लंड पर भरपूर वार कर दिया मेरा लंड पूरा चूत में घुस गया मेरे लंड की चमड़ी ऊपर चढ़ गयी थी। मुझे बहुत दर्द हुआ। मैं चीख पड़ा, मेरे साथ वो भी चीख पड़ी क्यूंकि उसे भी बहुत दर्द हो रहा था। उसकी चूत पर मेरे लंड छूते ही वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी कि ऐसा कर दिया।

हम कुछ देर रुक गये। मेरा लंड उसकी चूत में था। कुछ देर बाद दर्द कम होने पर मैं आगे पीछे हुआ। अब कुछ अच्छा लगने लगा था उसे, फिर मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढाई। उसे भी मज़ा आने लगा वो भी अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरा साथ दे रही थी। करीब ४५ मिनट तक मैंने कई तरीकों से उसकी चुदाई की। इतने समय में न जाने वो कितनी बार झड़ चुकी थी।

फ़िर वो बोली- अब बस करो हंस ! तुम अपनी शूट कर दो, मुझे सहन नहीं हो रहा है, तुमने मुझे जीते जी स्वर्ग की सैर करा दी। मेरी आत्मा ना जाने कब से प्यासी थी। हाँ ! मैं तुम्हारी बहुत अहसानमंद हूँ हंस !

ये कहकर उसने मुझे बाँहों में भर लिया। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। करीब १० मिनट और करने के बाद भी मैंने शूट नहीं की तो वो बोली कि शूट क्यूँ नहीं कर रहे हो हंस ! प्लीज़ ! अब मेरी कमर दर्द कर रही है।

मैं मुस्कुराया क्यूंकि मैं उसको तो संतुष्ट तो कर चुका था पर मैं भी संतुष्ट होना चाहता था। मैंने कहा- ओके ! अच्छा तुम मेरे ऊपर आओ।

वो बोली- ठीक है पर जल्दी कर देना !

मैंने कहा- ठीक है !

वो मेरे ऊपर आई, मैंने उसकी चूत में लंड डाला और उसने अपनी चूत का पूरा भार मेरे लंड पर रख दिया वो कुछ आगे पीछे हुई, मुझे अच्छा लगने लगा। फ़िर मैंने अचानक उसकी कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे कुछ ऊपर उठा दिया जिस से अब उसका भार उसके ही दोनों घुटनों पर था।

अब मैंने अपने दोनों पैर बिस्तर पर टिका कर अपनी गांड ऊपर उठा दी और जोर जोर से उसकी चूत पर अपने लंड से प्रहार करने लगा।

मुझे कुछ परेशानी हुई तो मैं रुका और अपने सर के नीचे एक तकिया रख लिया और फ़िर शुरू हो गया। मैं १०० की स्पीड से उसे चोद रहा था वो भी मथानी की तरह हिल रही थी।

करीब १५ मिनट तक लगातार छोड़ने के बाद मैंने उसकी चूत में सारा पानी छोड़ दिया अब मैं शांत पड़ गया वो मेरे ऊपर लेट गयी १० मिनट तक हम यूँ ही लेटे रहे। फ़िर हम अलग हुए दोनों बाथरूम गये, हमने अपने आपको साफ़ किया। हम दोनों ही नंगे थे, शरीर पसीने से लथपथ हो रहा था तो मैंने शावर खोल दिया। हम दोनों उसके नीचे खड़े थे उसका गीला बदन देख कर मैं फ़िर जोश में आ गया। हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे ऊपर पानी लगातार गिरे जा रहा था।

हम १५ मिनट तक एक दूसरे के शरीर से खेलते रहे। फ़िर मैं उसके पीछे आया और उसे आगे की तरफ़ झुका दिया और अपना लंड लेकर पीछे से उसकी गांड में डालना चाहा तो उसने मना कर दिया। मैं भी मान गया। फ़िर मैंने अपना लंड उसी तरह उसे और आगे झुका कर उसकी चूत में घुसा दिया। वो झुकी हुयी थी और दोनों हाथों से नल पकड़े हुए थी।

मैंने आगे पीछे होना शुरू किया। उसे भी मज़ा आने लगा वो भी अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी। मैंने अपनी स्पीड बढाई मेरे दोनों हाथ उसके चूतड को जम कर पकड़े हुए थे। १५ मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद वो बोली कि मेरी कमर दर्द कर रही है, प्लीज़ हंस ! अब शूट कर दो !

मैंने अपनी स्पीड बढाई और जोर जोर से धक्के मार कर उसकी चूत में पानी छोड़ दिया। पानी हमारे ऊपर लगातार गिरे जा रहा था। गिरते पानी में चुदाई का क्या आनंद आता है ये वो ही समझ सकता है जिसने ऐसा किया हो।

फ़िर हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को बाँहों में भर कर खूब प्यार किया।

रात के ३ बज रहे थे और हम बाथरूम में नहा रहे थे। नहा कर हम लोग बाहर आए तो प्रिया बहुत खुश थी। हमने अपने अपने कपड़े पहने और निकलने के लिए तैयार हो गये। प्रिया ने अपने पर्स में से रूपये निकाल कर मुझे दिए और बोली- थैंक्स ! तुम न होते तो जीवन के इस सुख से ना जाने कब तक मैं महरूम रहती !

ये कहकर वो फ़िर मुझसे लिपट गयी, बोली- तुम्हें जाने देने को मेरा बिल्कुल मन नहीं कर रहा है।

मैंने उसे चूमा और कहा कि अगर फ़िर मेरी याद आए तो मुझे कॉल कर देना। ओ के ! लेकिन अब ये कोशिश करना कि मेरी जरूरत ना पड़े तुम्हें। अपना ख्याल रखना !

ठीक है अब हम चलते हैं !

वो बोली- रुको ! पहले मैं बाहर देखती हूँ कोई है तो नहीं ?

मैंने कहा- ठीक है !

उसने दरवाज़ा खोला और बाहर से लाक करके चली गई। वो २ मिनट में ही वापस आ गई, बोली कि सब कार्यक्रम हो चुके हैं अब विदाई हो रही है। सब लोग उधर ही हैं तुम निकल जाओ।

मैं उसके साथ बाहर आ गया। बरामदे में आने पर मैंने देखा कि उधर अभी लोग इकट्ठा थे। हम भी भीड़ में शामिल हो गये और अलग अलग हो गये मैं धीरे धीरे बाहर कि ओर बढने लगा।

प्रिया भी अपनी साहिलियों के साथ शामिल हो गई थी। वो मुझे लगातार देखे जा रही थी। मैंने मुड़ कर देखा तो प्रिया की आंखों में आंसू थे। मैंने उसे एक हलकी मुस्कान दी और तेज़ी से बाहर निकल गया किसी को कोई शक नहीं हुआ।Antaravsna

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