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Massage Girl in Champhai: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Champhai who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Champhai that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Champhai massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Champhai who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Champhai massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Champhai massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Champhai who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Champhai employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Champhai helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Champhai

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Champhai at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

अध्याय 1 रात के 9 बज रहे हैं। अभिषेक होटल के कमरे में बिस्तर पर बैठा है। वो बहुत उत्सुक है और उत्तेजित भी। वह बार-बार कमरे से बाहर निकलता, फर्स्ट फ्लोर की बालकनी में जाता, नीचे झाँकता और निराश होकर लौट आता। फिर कुछ देर बिस्तर पर बैठता, आईने में देखकर अपने बाल सँवारता, शर्ट की कॉलर और बाहों की फोल्डिंग ठीक करता, बार-बार शर्टइन को निकालता और फिर से शर्ट इन करके बाहर जाता बालकनी में झाँकने। वह करीब सात बजे से यही क्रम दोहरा रहा है। आधा घंटा और बीत गया है। अब वह निराश होकर बिस्तर पर सीधे लेट गया है। उसकी आँखें लगभग रुआँसी होकर लगातार सीलिंग को देख रही है। वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उसने दो लोगों का खाना मँगाकर रखा हुआ है। उसे भूख भी लगी है। क्योंकि उसने सुबह ट्रैन में केवल 2 इडली खाई थी। उसके बाद से कुछ नहीं खाया। उसने अब सोचा है कि उसे खाना खा लेना चाहिए। उसे खाना खाने के लिए एक प्लेट और बाउल चाहिए। ये ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी वाले भी न, खाना तो थैली में भरकर पहुँचा देते हैं लेकिन खाने के लिए एक डिस्पोजेबल प्लेट या बाउल भी नहीं रखते। जबकि इन्हें पता होता है कि इनसे खाना मँगाने वाले अधिकतर लोग वो होते हैं, जो खुद घर पर खाना बना नहीं सकते या कहीं फँसे होते हैं। अभिषेक के मन में यहीं विचार चल रहा था। अभिषेक ने सोचा कि रूम में रखे फोन से रूम सर्विस को कॉल करके बोले। लेकिन उसे रूम सर्विस का नंबर हीं नहीं पता। ना वहाँ कहीं कुछ लिखा है। फ़ोन की दायीं तरफ एक मेनू कार्ड रखा है जिसपर खाने के आइटम्स और उनके सामने उनकी कीमत लिखी हुई है। कीमत इतनी है कि जैसे यह दुनिया का आखिरी खाना बचा हो। अगर यह दुनिया का आखिरी खाना भी होता तो अभिषेक इसके इतने पैसे न देता। फिर चाहे उसे भूखा हीं क्यों न मरना पड़ता। खैर, अभिषेक उठा "की कार्ड" निकाला और रूम लॉक करके रिसेप्शन की और चल पड़ा। रिसेप्शन पर पहुँच कर उसने कहा - "कैन आई गेट, वन प्लेट एंड वन बाउल" रिसेप्शन पर बैठे लड़के ने प्रश्नवाचक आवाज़ में कहा - "आँ?" अभिषेक ने दोहराया - "आई हैव सम फ़ूड, सो आई नीड सम प्लेट एंड बाउल, फॉर ईटिंग" रिसेप्शनिस्ट इस बार समझ गया कि उसे क्या चाहिए। उसने पूछा - "सर, हाउ मेनी प्लेट्स, यु नीड" अभिषेक ने मुस्कुराकर कहा - "सर, ओनली वन प्लेट एंड वन बाउल।" रिसेप्शनिस्ट - "ओके सर, आई अम सेंडिंग समवन टू योर रूम, रूम नंबर वन ज़ीरो नाइन ना" अभिषेक - "यस सर" रिसेप्शनिस्ट - "ओके सर, गिव मी टू मिनट्स ओनली"ई अभिषेक- "ओके सर, थैंक यू" फिर रिसेप्शनिस्ट से ध्यान हटाकर, दरवाजे के पास कुर्सी पर बैठे गार्ड को देखा, वह मुस्कुरा रहा था, अभिषेक भी उसे देखकर मुस्कुराया और अपने रूम की और जाने लगा। अभिषेक वैसे इंग्लिश स्पीकिंग आदमी नहीं है। लेकिन उसे आज मजबूरी में बोलना पड़ रहा है। क्योंकि वह चेन्नई में है। यहाँ ज्यादातर लोगों को सिर्फ तमिल आती है और अभिषेक को हिंदी। ऐसे में अंग्रेजी ही उसका एक मात्र सहारा है, जिसमें वो यहाँ के लोगों के साथ बात कर सकता है। थोड़ी अभिषेक बोल लेता है, थोड़ी वो समझ लेते हैं, कुल मिलाकर काम चल जाता है। अभिषेक जैसे ही रूम के सामने पहुँचा। उसके फ़ोन पर एक व्हाट्सएप्प मैसेज आया - "आई एम रीचिंग देअर इन फाइव मिनट्स।" अभिषेक मानों खुशी से उछल पड़ा। उसका हाथ अपने आप हीं उठा और हवा में मुक्का मारते हुए उसकी कमर के पीछे जाकर रुक गया। जैसे वह कोई गेंदबाज़ हो और अभी अभी उसने कोई विकेट ले ली हो। उसके पीछे प्लेट और बाउल लेकर आता हुआ लड़का उसे देखकर चौंक गया। लड़के ने पीछे से कहा - "सर।" अभिषेक ने उसे पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराया। लड़का भी मुस्कुरा दिया। अभिषेक ने कमरे का दरवाजा खोला और लड़के को सामान टेबल पर रखने का ईशारा किया। लड़के ने सामान टेबल पर रखा और वापस जाने लगा। अभिषेक ने उससे कहा - "कैन यु ब्रिंग मी वन मोर प्लेट?" लड़के ने जवाब दिया - "आँ?" अभिषेक समझ गया कि उसे अंग्रेजी नहीं आती। अभिषेक ने अपनी गर्दन को दाँए और बाएँ हिलाते हुए कहा – "नथिंग।" लड़का रूम से चला गया। अभिषेक भी बाहर निकला, दरवाजा बंद किया और बालकनी में जाकर खड़ा हो गया। उसका कमरा पहली मंजिल पर बिल्कुल सीढ़ियों के बगल में था। सीढ़ियों के सामने बालकनी थी। दिसंबर का पहला हफ्ता चल रहा था। सर्दी थोड़ी बढ़ गयी थी। शाम के वक़्त हल्की बारिश भी हुई। लेकिन अभी मौसम साफ था। बस, हवा चल रही थी। अभिषेक अपने दोनों हाथ वहाँ लगी स्टील की रैलिंग के पाइप पर रखकर सोच रहा था कि- "अब क्या होगा?" उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। उसने अभी तक उस संदेश का जवाब भी नहीं दिया था। वह बस व्हाट्सएप्प खोल के चैट्स में लिखे ऊपर के नाम को घूरे जा रहा था। "निवेदिता" यहीं नाम लिखा था वहाँ। कभी वह नाम पर क्लिक करके उस सन्देश को दोबारा पढ़ता, तो कभी उसकी डीपी पर क्लिक करके उसे ज़ूम करके देखता। निवेदिता अभिषेक को दो हफ़्तों पहले लूडो पर मिली थी। जी हाँ, फेसबुक, इंस्टाग्राम या टिंडर नहीं, लूडो पर। अगर लूडो पर चैट का विकल्प ना होता तो ये संभव नहीं था। अभिषेक ने इस विकल्प का फायदा उठाकर कईं लड़कियों से बातें की। दोस्ती हुई, इंस्टाग्राम आईडी और फ़ोन नंबर भी एक्सचेंज किया। मगर उसके आगे बात नहीं बनी। लड़कियाँ कभी फ़ोटो देखकर दिलचस्पी खो देती थीं, तो कभी दूर होने के कारण। हालांकि अभिषेक को ऐसी भी लड़कियाँ मिलीं जो उसकी अच्छी दोस्त बनीं, मगर कुछ दिन बात करने के बाद दिलचस्पी ना रही। कुछ लड़कियों ने तो चैट पर हीं सेक्स भी कर लिया, मगर मिलने की बात पर ब्लॉक करके चली जाती। निवेदिता से भी अभिषेक एक दिन ऐसे हीं लूडो पर मिला था। पहले हीं दिन इतनी बातें हुईं दोनों के बीच की छः गेम हो गये और पता हीं न चला। फिर निवेदिता ने हीं अभिषेक से व्हाट्सएप्प नंबर माँगा और अभिषेक को व्हाट्सएप्प पर मैसेज किया। फिर दोनों के बीच व्हाट्सएप्प पर बात हुई पूरी रात इसी में निकल गयी। फ़ोटो एक्सचेंज हुए, दोनों ने एक दूसरे की बहुत तारीफ की। फिर बातें करते-करते, निवेदिता ने बताया वो 28 साल की है और शादीशुदा है। उसका पति सऊदी अरब में कहीं नौकरी करता है। वह अपने पति से बहुत प्यार करती है। वह दो साल में एक बार मिलने आता है। अभिषेक उसे पहले हीं बता चुका था की वो 23 साल का है और फिलहाल भोपाल में रहकर थिएटर करता है। उसे एक फ़िल्म एक्टर बनना है और वो एक-दो साल में मुंबई शिफ्ट होने की सोच रहा है। फिर निवेदिता ने उससे पूछा - "क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड है?" अभिषेक ने कहा - "नहीं।" निवेदिता ने कहा - "ऐसा हो हीं नहीं सकता।" अभिषेक ने कहा - "हर लड़की का रिएक्शन यहीं होता है, जब कोई लड़का उससे कहता है कि वह सिंगल है।" निवेदिता ने अभिषेक से शादी के बारे में पूछा। अभिषेक ने कहा "मुझे शादी अभी नहीं करनी, मैं पहले फाइनेंसियल स्टेबिलिटी चाहता हूँ, फिर शादी, फिर तीन चार साल अपनी सेक्स लाइफ एन्जॉय करना चाहता हूँ, उसके बाद बच्चे।" यह सुनकर निवेदिता ने कहा तुम्हे बच्चे जल्दी कर लेने चाहिए। क्योंकि आजकल लड़को में इनफर्टिलिटी रेट ज्यादा बढ़ गया है। लड़कियों में भी बच्चा कंसीव करने में दिक्कत आती है और यहीं से उनकी बातें शुरू हुई सेक्स को लेकर। निवेदिता ने बताया उसे भी यही दिक्कत हुई थी। उसके पति का भी स्पर्मकॉउंट कम था। उसे खुद हीं अपनी पहली प्रेगनेंसी के पहले डॉक्टर की सलाह लेनी पड़ी थी और उसे अपना दूसरा बच्चा गिराना पड़ा था। निवेदिता ने उसे बताया कि किस तरह आजकल की माँए अपना फिगर खराब ना हो इस डर से ब्रैस्टफीडिंग से बचती हैं। लेकिन उसने अपनी बच्ची को खूब दूध पिलाया है, क्योंकि उसे दूध ज्यादा आता था। उसने अपनी बच्ची को तीन साल तक दूध पिलाया है। बीच-बीच में अभिषेक उससे कुछ ठरक भरे सवाल भी पूछ लेता था। जैसे जब वो प्रेग्नेंट थी तो क्या उस बीच उसने अपने पति के साथ सेक्स किया या नहीं? या जब उसे इतना ज्यादा दूध आता था तो क्या उसने अपने पति को कभी दूध पिलाया या नहीं? निवेदिता हर सवाल का खुलकर जवाब देती थी। की हाँ मेरे पति ने मुझसे प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स नहीं किया, लेकिन उन्होंने आठवें महीने में मेरा दूध ज़रूर पिया क्योंकि उसे डिलीवरी के पहले हीं दूध आने लगा था। उसने ये भी बताया कि उसके डिलीवरी के तुरंत बाद उसका पति सऊदी अरब चला गया था। अभिषेक को यह सब सुनने में बहुत मज़ा आ रहा था। क्योंकि इससे पहले उसने कभी किसी शादीशुदा औरत से इस तरह की बातें नहीं कि थी। उसने कईं लड़कियों के स्टेज सेक्स चैट की लेकिन यह कुछ अलग था। निवेदिता ने भी अभिषेक से उसकी गर्लफ्रैंड और सेक्स लाइफ के बारे में पूछा। अभिषेक ने बताया कि उसकी एक गर्लफ्रेंड थी। जिसके साथ उसने कई बार सेक्स किया। लेकिन फिर उसकी शादी हो गयी। पहे दिन यहीं सब बातें हुई। अगले दिन फिर रात नौ बजे से व्हाट्सएप्प पर अभिषेक, निवेदिता का इंतज़ार कर रहा था। करीब साढ़े दस बजे निवेदिता का "हाई" आया और दोनों में फिर बातें शुरू हो गयी। दोनों ने बातें फिर वहीं से शुरू की अभिषेक ने उससे अंग्रेजी में कहा कि - "मैं तुम्हारे बूब्स के बारे में सोच रहा था, क्या वे बहुत बड़े हैं जो तुम्हें इतना दूध आता है?" निवेदिता ने कहा- "यस।" अभिषेक- "क्या मैं जान सकता हूँ, उनका साइज क्या है।" निवेदिता - "इट्स 34" अभिषेक- "कप साइज?" निवेदिता - "डी।" अभिषेक- "ओह्ह कैन आई सी देम?" निवेदिता - "शट" अभिषेक- "सॉरी" निवेदिता - "इट्स ओके" रात की बात के बाद अभिषेक और निवेदिता के बीच की शर्म और झिझक खत्म हो चुकी थी। कुछ देर के सन्नाटे के बाद निवेदिता ने फिर एक मैसेज किया - "व्हाट वुड यु डू? इफ यु आर अलोन विथ योर गर्लफ्रैंड इन अ रूम?" अभिषेक ने जवाब दिया - "व्हाई नॉट विथ यू?" निवेदिता ने कहा - "ओके, टेल, बट इट विल बी ओनली वन टाइम थिंग।" अभिषेक ने कहा – "ओके।" और फिर अभिषेक ने बताना शुरू किया की वो उसे पहले किस करेगा, फिर हग करेगा, निवेदिता बीच-बीच में, इमोजीस के साथ आह, यस, उम्म जैसे मैसेज लिख कर भेज रही थी। अभिषेक ने वो सब बताया जो वो उसके साथ करना चाहता था या कहें कि जो-जो उसने पोर्न फिल्मों में देख रखा था। निवेदिता भी उसे बीच- बीच में बता रही थी कि ऐसे नहीं ऐसे करना। दोनों के बीच ये सेक्स चैट लगभग एक घंटा चली। फिर निवेदिता ने मैसेज किया - "आई विल शो यु माय बूब्स एंड यु शो मी योर डिक।" अभिषेक- "नाउ?" निवेदिता - "यस, आई एम कॉलिंग यु।" अभिषेक– "ओके।" निवेदिता - "बट, नो फेस।" निवेदिता ने अभिषेक को वीडियो कॉल किया। अभिषेक ने जैसे हीं वीडियो वाला बटन ऊपर खींचा, उसके फ़ोन पर मैक्सी पहनी हुई एक औरत की छाती नज़र आने लगी। अभिषेक ने तुरंत कैमरा स्विच वाले बटन पर क्लिक किया और फ़ोन के पीछे वाले कैमरे को अपने पैंट पर ले गया। उसके फोन की स्क्रीन पर मैक्सी के बटन खुलने लगे और उसे एक लाल ब्रा नज़र आने लगी। कुछ हीं देर में मैक्सी सामने से पेट तक खुल गयी और दो हाथों ने लाल ब्रा के अंदर से दो दूध की तरह सफेद स्तनों को बाहर निकाला और मसलना शुरू किया। अभिषेक भी अपने पैंट को नीचे करके अपने उत्सुकताओं को मुट्ठी में भींच कर मसलने लगा। कुछ देर के बाद कॉल कट गया। अभिषेक के पास मैसेज आया - "नाउ इट्स एनफ।" अभिषेक- "ओके।" निवेदिता - "गुड नाईट।" अभिषेक- "गुड नाईट।" और फिर दोनों ने एक दूसरे को किसिंग इमोजी भेजे। अभिषेक ने समय देखा तो रात के दो बज रहे थे। उसने बाजू में पड़े चार्जिंग केबल का सीरा पकड़ा और फ़ोन में घुसाया और फिर सो गया। अगले दिन करीब 11 बजे अभिषेक की आँख खुली। उसने सबसे पहले अपना फ़ोन चेक किया। उसमें चार-पाँच नंबर्स और ग्रुप्स के मैसेज थे। एक मैसेज थिएटर ग्रुप का था। एक मैसेज उसके कॉलेज ग्रुप का था। एक मेसेज उसके कजिन भाई का था, जो हर सुबह उसे एक लंबा-चौड़ा पैराग्राफ भेजता था। जिसके सबसे ऊपर चेतावनी की तरह लिखा होता था "हिजड़े इस मैसेज से दूर रहें" जिसके अंदर धर्म या राजनीति से जुड़ी कोई कांस्पीरेसी थ्योरी को विस्तार में बताया गया होता था। और अंत में उसे फॉरवर्ड करने की बात के साथ एक और चेतावनी लिखी होती थी जिसका मतलब ये होता था कि अगर आपने फ़ॉरवर्ड किया तो आप सच्चे देशभक्त या सच्चे हिन्दू या कम से कम असली मर्द तो साबित हो ही जायेंगे। अभिषेक के पास यह मैसेज हर रोज़ आता था। उसने आजतक वो मैसेज नही पढ़ा। ना अभिषेक कभी उसके इन मैसेजेस का जवाब देता था। दो लड़कियों के मैसेज भी थे। उनमें से एक निवेदिता भी थी। उसका मैसेज था - "गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट" के साथ एक लाल दिल वाला इमोजी। अभिषेक ने रिप्लाई किया - "गुड मॉर्निंग।" के साथ एक स्माइली। मैसेज सीन नहीं हुआ। फिर अभिषेक ने थिएटर ग्रुप का मैसेज देखा। लिखा था - "आज 23/11/20 से रिहर्सल कंटिन्यू रहेगी अपने कैरेक्टर की पूरी तैयारी करके आएं, 05 दिसंबर को शो है, समय काफी कम है।" अभिषेक यह नाटक पहले भी कर चुका था। उसका एक छोटा सा रोल था और साथ हीं उसे बैकस्टेज का काम संभालना होता था। जैसे सेट तैयार करना, कॉस्ट्यूम की धुलाई और प्रेस करवा कर लाना। संबंधित आर्टिस्ट को उसके करैक्टर के हिसाब से कॉस्ट्यूम देना और शो के बाद सबको इकट्ठा करके घड़ी करके बैग में रखना। साथ हीं प्रॉपर्टीज का ध्यान रखना, शो में हर सीन के बाद जब अंधेरा हो जाये तो दूसरा सीन शुरू होने से पहले जल्दी से जाकर सेट चेंज करना। और बाकी समय में म्यूजिक टीम के साथ बैठकर कोरस गाना। अभिषेक यह सब करने वाला अकेला नहीं था। उसके साथ पाँच छः लड़के और भी थे। जो लगभग उसी की उम्र के थे, कुछ एक दो साल छोटे तो कुछ एक दो साल बड़े। अभिषेक को इंजीनियरिंग के आखिरी साल में ही ये समझ आया कि उसको अभिनेता बनना है। साल भर पहले कॉलेज ख़त्म होते ही वह थिएटर ग्रुप से जुड़ा। उससे पहले वो अपने कैरियर को लेकर कुछ सोचता ही नहीं था। उसे लगता था कॉलेज खत्म होते ही कोई उसे नौकरी के लिए हाथ में जॉइनिंग लेटर थमा कर चला जायेगा। हालाँकि उसके कईं दोस्तों को हाथ में जॉइनिंग लेटर भी थमाए गये, कईं कंपनियां कॉलेज कैंपस में आती और उसके दोस्तों के इंटरव्यू लेकर उन्हें नौकरियाँ देकर चली जाती। लेकिन जब नौकरियां बँट रही थी तब अभिषेक होस्टल में अपने रूम में गांजे के नशे में सो रहा था। उसे तो चार साल की इंजीनियरिंग में सेमेस्टर एग्जाम देने के लिए भी किसी को जगाने आना पड़ता था। उसने क्लासेज भी तभी अटेंड की है, जब वह कोई फिल्म या वेबसीरीज देखने के चक्कर में रात भर सोया न हो। या सेमेस्टर के आखिरी दिनों में एग्जाम में बैठने के लिए अटेंडेंस पूरी करनी हो। कई बार उसकी अटेंडेंस पूरी नहीं हो पाती थी तब वह एग्जामिनर के हाथ पाँव जोड़कर परीक्षा में बैठने की भीख माँगता था। कभी एग्जामिनर तरस खा के पेपर लिखने की अनुमति दे देता था, तो कभी दुत्कार कर भगा देता था। फिर या तो एच.ओ.डी. के सामने दादाजी की मौत का बहाना बनाकर रो देना या अगले सेम रेगुलर आने का वादा करना। अभिषेक ने पढ़ाई को कभी सीरियसली नहीं लिया और ना हीं उसे पढ़ाई ने सीरियसली लिया। उसे बस वो मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री चाहिए थी। क्यों चाहिए थी? यह भी उसने कभी नहीं सोचा था। वह फर्स्ट इयर में पूरी ईमानदारी के साथ क्लास जाता था। फर्स्ट इयर में उसके पॉइंटर भी अच्छे थे और आदतें भी। तब हीं उसने सारे प्रोफेसर्स से अच्छी पहचान बना ली थी। यहीं वजह थी की सब उसके बहाने और झूठी कहानियां मान लेते थे। कई प्रोफेसर्स तो उसे किसी दोस्त की तरह समझाते भी थे। अभिषेक कोशिश भी करता था की वह पढाई को लेकर सीरियस हो जाये। लेकिन वह कभी नहीं हो पाया। करीब पंद्रह मिनट बाद निवेदिता का दूसरा मैसेज आया। "नाउ फ्री?" "जस्ट वोक उप।" निवेदिता ने अपनी एक फोटो भेजी। गीले बालों में साड़ी पहनी हुई एक जवान औरत, दूध की तरह सफेद रंग, आँखे भूरी, बड़े वक्ष और हल्का सा बाहर निकला हुआ पेट और उस पर गहरी नाभि, जो कि उसकी पतली साड़ी से साफ नजर आ रही थी। अभिषेक ने ऐसी औरतें अभी तक ऑल्ट बालाजी की वेबसीरीज़ में हीं देखी थी। उसने कभी सोचा नहीं था, कि ऐसी दिखने वाली कोई औरत उससे बात करेगी। निवेदिता ने पहले भी अपने फोटो भेजे थे। लेकिन वो ऐसी तो कभी नहीं लगी। अभिषेक ने दो दिल वाले इमोजी के साथ तुरंत रिप्लाई किया - "वॉव, यु आर सो ब्यूटीफुल।" "थैंक यू।" "इट्स माय फैंटेसी टू मेक अ गर्लफ्रैंड लाइक यु।" "आह? रियली?" "यस।" "ओके बेबी, आई एम योर गर्लफ्रैंड फ्रॉम नाउ।" "रियली?" "यस बेबी।" "आई वांट टू मीट यु।" "कम टू चेन्नई, वी कैन मीट हेअर।" "रियली?" "यस।" "ओके, आई विल कम आफ्टर फाइव दिसंबर।" "ओके, आई एम वेटिंग।" अभिषेक ने दो तीन हग वाले इमोजी भेजे। निवेदिता - "ओके बेबी, आई हेव सम वर्क टुडे, आई विल टेक्स्ट यु इन इवनिंग।" "ओके, बाय।" "बाय।" फिर अभिषेक बिस्तर से उठा। स्टडी टेबल पर रखी बोतल से दो घुट पानी पिया, जिसका ढक्कन हफ़्तों से गुम था। टेबल पर कुछ कविता संग्रह और उपन्यास की किताबें रखी थीं, जिन्हें अभिषेक पढ़ता था। उनमें से एक किताब थी, धर्मवीर भारती की "अंधायुग"। उसी से लगी हुई एक सिगरेट पड़ी थी। अभिषेक ने सिगरेट उठाकर होंठों के बीच दबाई। फिर टेबल के पीछे खड़ी अलमारी के शीशे में खुद को देखा। पाँच फुट, सात इंच का एक दुबला सा आधा नंगा लड़का। जिसके बाल बिखरे हुए थे, दाढ़ी बढ़ी हुई थी, सांवली देह, छाती पर घने बाल, पेट कमर से चिपका हुआ, जिसने कपड़ों के नाम पर जाँघों तक का एक चड्ढा पहना हुआ था, मुँह में सिगरेट लिए, गर्दन टेढ़ी करके खड़ा था। उसने पंखे का बटन बंद किया। टेबल से माचिस उठाई और उसे हिला कर चेक किया। उसमें दो तीन तीलियों की खनखनाहट सुनाई दे रही थी। उसने एक तीली निकालकर जलाई और खड़ी करके उसे सिगरेट के मुँह तक लाया। फिर एक कश अंदर खींचा थोड़ा धुँआ बाहर छोड़ा फिर दूसरा कश खींचा। फिर मचीस की तीली को हिलाकर बुझाया और टेबल पर हीं रखे एक चीनी के मग में डाल दी। जिसपर अभिषेक की फ़ोटो बनी थी। वो मग उसकी ऐश ट्रे था। पूरा मग बुझे हुए सिगरेट के फ़िल्टर और मचीस की जली हुई तीलियों से भर गया था। अभिषेक ने आईने में देखते हुए धुँआ छोड़ा और फिर अगला कश लेते हुए अपने बालों में हाथ घुमाते हुए आँख पर आ रहे बालों को हटाया फिर काँच की तरफ देखकर धुआँ छोड़ा और बाथरूम में चला गया।
Hindi Sex Stories

मैं राहुल जैन जयपुर Hindi Sex Stories में पढ़ाई कर रहा हूँ और मैं यहाँ किराये पर रहता हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ।

मैं आपको अपनी पहली कहानी बताने जा रहा हूँ कि मैंने अपने दोस्त की भाभी को कैसे चोदा!

अन्तर्वासना की आदत मेरे एक दोस्त ने डाली और मुझे भी इसमें मजा आने लगा। मैं उसकी ही भाभी को चोदने के सपने देखने लगा। मैं उसमें सफल भी रहा।

मेरे दोस्त का फार्म-हाउस जयपुर से बाहर है, हम अकसर उनकी खेती बाड़ी देखने के लिए वहाँ जाते रहते हैं। उसकी भाभी बहुत सुन्दर है और सेक्सी है। उसकी गांड के उभार देख कर मेरा लण्ड तन जाता है।

एक बार मेरे दोस्त के फार्म हाउस पर एक कार्यक्रम था। तो उसके सभी घर वाले वहाँ काम सम्हलाने के लिए वहीं थे, उसके घर पर उसकी भाभी और भैया ही थे।

मेरे दोस्त का फोन मेरे पास आया- यार मेरी भाभी को शाम को फार्म हाउस पर लेकर आ जायेगा क्या?

तो मैंने उसको पूछा- भैया नहीं हैं क्या?
तो उसने कहा- भैया तो दुकान पर हैं और वो तो रात को सात बजे तक आयेंगे।

मैंने तुरन्त हाँ कर दी और पूछा- भाभी को कब तक लेकर आना है?
उसने कहा- चार बजे तक उसके लेकर रवाना होना है!

मैं उसके घर पर दो घंटे पहले ही पहुँच गया और देखा कि भाभी जाने की तैयारी कर रही हैं पर खुद तैयार नहीं हुई हैं।

भाभी ने गाउन पहन रखा था।

भाभी मेरे लिए पानी लेकर आई और चाय के लिए रसोई में चली गई। मैं भी उनके पीछे-पीछे रसोई में चला गया और उनसे बातें करने लगा।

भाभी ने मुझसे पूछा- तुम मुझे अकसर घूरते क्यों रहते हो?
तो मैंने कहा- भाभी, आप बहुत सैक्सी हो!

भाभी की गांड देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो चला था। भाभी चोरी-छुपे मेरे लण्ड की तरफ देख रही थी, मैंने भाभी को कहा- क्या देख रही हो?

तो वो घबराने लगी, उन्होंने कहा- कुछ नहीं!

भाभी ने कहा- मैं तैयार होकर आती हूँ फिर अपन चलते हैं!

भाभी तैयार होने के लिए कमरे में चली गई। भाभी जब तैयार हो रही थी तो मैं उनको रोशनदान में से देख रहा था। उनके गोरे बदन को पैन्टी और ब्रा में देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी, मेरा दिमाग केवल उनको चोदने के बारे में सोच रहा था।

तभी भाभी की नजर मेरे ऊपर पड़ गई, उन्होंने कहा- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- भाभी मैं आपको चाहता हूँ।
तो भाभी बोली- सोचते बहुत हो! आ जाओ फटाफट और प्यार करो मुझे!

मैं उनके कमरे में गया और उनके गोरे बदन को अपनी बाहों में भरकर उनके गालों को, होंठों को चूमने लगा। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया और कहा- मैं तुमसे कई दिनों से चुदने के बारे में सोच रही थी लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा था। आज मौका मिला है तो मेरी चूत को और गाण्ड दोनों को चोद दो।

मैंने उनकी पैंटी और ब्रा खोलकर अलग कर दी और उनके नंगे बदन के दर्शन किए। मेरी जिन्दगी में पहली बार नंगी लडकी या औरत को मैंने देखा था। मैं तो उनकी सफाचट चूत को देखकर पागल हो गया। मुझसे रहा नहीं गया और उनको बिस्तर पर बिठाकर उनकी टांगें चौड़ी करके उनकी चूत को चाटने लगा। उनको चूत चटवाने में बड़ा मजा आ रहा था।

उन्होंने कहा- मुझे भी तुम्हारा लण्ड चूसना है।

फिर हम दोनों 69 की दशा में आकर एक दूसरे को पागलों की तरह चाटने लग गये। मैंने उसकी भाभी के जोकि एकदम गोरी चिटटी थी, खूब मजे लिए। चाटते चाटते उसने मेरा और मैंने उनका पानी पी लिया।

फिर उन्होंने कहा- राजा अब फटाफट मेरी चूत में लण्ड डाल के चोद दो मुझे!

फिर मैंने उनकी दोनों टांगों को चौड़ा करके लण्ड को उनकी चूत पर रख दिया और एक झटके में उनकी चूत में मेरा लण्ड घुस गया। मेरा लण्ड पहली बार किसी की चूत के दर्शन कर रहा था।

मुझे तो जैसे स्वर्ग मिल गया हो, मैं कितना भाग्यशाली हूँ कि मुझे पहली बार में ही इतनी चिकनी चूत चोदने के लिए मिली।
मैंने मेरी पहली चुदाई दस-पन्द्रह मिनट तक की और उनके गोरे-गोरे स्तनों को खूब दबाया।
चूंकि हम जल्दी में थे इसलिए पहली बार इतनी सी चुदाई करके हमको संतुष्ट होना पड़ा।

फिर हम तैयार होकर मेरे दोस्त के फार्म हाउस पर पहुँचे। रास्ते में गाड़ी में मैंने उनकी चूत पर कई बार हाथ फिराया और बोबे भी दबाये।

उस कार्यक्रम में मैंने उनके कई बार बोबे दबाये। अब अक्सर जब भी मैं मेरे दोस्त के घर जाता हूँ तो मौका पाकर मैं उनके बोबे दबा देता हूँ।

इसके बाद तो मुझे चुदाई का ऐसा चस्का लगा कि मैंने अब तक पांच-सात लड़कियों और औरतों का चोदा है। मेरे टीचर की बहु को मैंने कैसे चोदा, अगली कहानी में लिखूंगा।

आपको मेरी पहली कहानी कैसी लगी, मुझे मेल अवश्य करें। Hindi Sex Stories

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मैं बताना चाहूंगा कि मेरे अब तक के Hindi Porn Stories अनुभव के आधार पर आज तक मैंने कई कॉलगर्ल, रिश्तेदारी में, पत्नी, गर्लफ्रेण्ड आदि के साथ चुदाई कार्यक्रम किये, मगर चुदाई कार्यक्रम के दौरान ना तो उनके मुंह से कोई अश्लील भाषा निकली और ना ही मेरे मुंह से ! तो कैसे मान लूं कि चोदते वक्त अगर अश्लील भाषा का प्रयोग किया जाये तो औरत और मर्द दोनो में उत्तेजना बढ़ती है। अश्लील भाषा का प्रयोग चोदते समय तो कतई नहीं करना चाहिये, उत्तेजना बढ़ने के बजाय हो सकता है कि शिथिलता आ जाये।

खैर ……. दोस्तो, आज नई कहानी लेकर आया हूँ !

मेरी पत्नी घर के काम काज के मामले में बहुत ही आलसी है, कभी कभी मुझे उस पर बहुत ही गुस्सा आता है, मगर फिर भी मैं जानबूझ कर उसे कुछ नहीं कहता।

मेरे ससुराल में शादी थी तो मुझे भी वहां जाना था। वहां पर बहुत से रिश्तेदार आये थे, वहां मेरी पत्नी ने अपनी एक रिश्तेदार से मिलाते हुए कहा- इसका नाम चांदनी हैं और हम इसको परीक्षा के बाद अपने पास ही रखेंगे।

जब मैंने उस लड़की को देखा तो सच में देखता रह गया। उसके बोबे क्या माशा अल्लाह, और काया गजब अति सुन्दर काया थी उसकी, कि जो भी उसको देखे, देखता ही रह जाये।

अचानक मेरी पत्नी की आवाज ने मुझे झकझोर दिया कि कहां खो गये।

मैंने कहा- कहीं नहीं।

मेरी पत्नी ने मुझे धीरे से कहा- अगर तुम नहीं चाहते उसको अपने यहां पढ़ाना ! तो मैं मना कर देती हूँ।

मेरे मन में तो लड्‌डू फ़ूट रहे थे, मैं कब मना करने वाला था, मैंने कहा -नहीं-नहीं मुझे कोई एतराज नहीं।

जब तक मैं ससुराल में रहा तब तक मैं मजाक ही मजाक में उसके स्तन दबा देता, या नाजुक अंगों से छेड़छाड़ कर देता तो वह हंसकर भाग जाती।

जब मैं वापस अपने शहर आया तो मुझे उसकी याद आने लगी, मगर मैं अपने मुंह से कुछ नहीं कहना चाहता था क्योंकि पत्नी को शक होने का डर था। पर ऊपर वाला शायद एक बार फिर मुझ पर मेहरबान था।

मेरी पत्नी ने ही आगे होकर उसके शहर जाकर उसे लाने के लिये कहा। मेरा मन तो गार्डन-गार्डन हो गया।

मैं व मेरी पत्नी उसके शहर गये और उसे ले आये। अब तो बस मौके की तलाश थी। वाह री किस्मत मेरी पत्नी को फिर अपने ससुराल २-४ दिन के लिये जाना था। पहले तो मेरी पत्नी ने कहा- मैं चांदनी को भी साथ ले जाती हूँ। फिर उसने खुद ही विचार बदल दिया कि वह बेकार परेशान होगी, २-४ दिन की ही तो बात है। मैं और चांदनी मेरी पत्नी को छोड़ने सुबह ६ बजे ही रेलवे स्टेशन गये और उसे छोड़ कर वापस आये।

चांदनी ने आते ही कहा- जीजू चाय पीकर जाना !

मैंने उसका हाथ पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया और मस्ती करने लगा। यह सब ऊपर की मस्ती मजाक तो मेरी पत्नी के सामने भी करता था, मगर आज तो बस उसे चोदने का मन बना हुआ था।

मैंने कहा- चांदनी, चाय-वाय बाद में बनाना, आओ थोड़ी देर बैठो तो।

उसने कहा- जीजू, क्या बात है, विचार तो नेक हैं, आपके?

मैंने कहा- विचार तो आपके जीजू के हरदम ही नेक होते हैं, बस आप ही नहीं समझती।

और मैं अपने हाथों को उसके शरीर के नाजुक अंगों पर फिराने की कोशिश करने लगा। मैंने उसके वक्ष को पीछे से हल्के से दबाया तो वह कुनमुना गई और छुटने की नाकामयाब कोशिश करने लगी। आज मुझे लग रहा था कि चांदनी भी मुझसे चुदवाने को बेताब है। मैंने जब उसकी तरफ से मौन इशारा समझा तो अपने हाथों को धीरे-धीरे उसके नाभि-मण्डल पर ले गया और मेरे होंठों ने भी अपना काम चालू कर दिया था। मेरी तरफ उसकी पीठ होने के कारण मैंने उसकी गरदन को अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठों का रसस्वादन करने लगा। अब मेरा हौंसला भी बुलन्द होने लगा।

मैंने उसके कुर्ते को थोड़ा ऊपर किया तो उसने कहा- नहीं जीजू यह सब नहीं ! अगर किसी को मालूम हो गया तो?

मैंने चांदनी को समझाते हुए कहा- देखो जान ! इस घर में मेरे व तुम्हारे अलावा कोई नहीं है, तो किस को मालूम होगा और कौन बतायेगा कि हमने क्या किया।

चांदनी मेरा मतलब समझ गई और चुप हो गई। अब मैं भी बिन्दास हो गया और चांदनी की कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर बोबों को दबाने व सहलाने लगा। चांदनी का पहला चुदाई कार्यक्रम था तो उसमें डर और मजा दोनों का समावेश था।

उसके मुख से रह रहकर सिसकारियाँ निकल रही थी- आ….ह…….. जीजू……………

मैंने चांदनी की कुर्ती को एक झटके में शरीर से अलग कर उसकी ब्रा को खोल दिया और बोबों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

चांदनी मदहोशी में आंखे बंद किये ही कहने लगी- जीजू ! ऐसे क्या करते हो !

तो मैंने कहा- चांदनी अभी तो बाकी है ऐसे-वैसे सब करेंगे, तुम बस महसूस करो और मजा लो।

बोबों को चूसते हुए उसके नाभि-स्थल तक होंठों को फिराता हुआ लाया, नाभि से नीचे जाना चाह रहा था, मगर चांदनी का नाइट पायजामा और पेंटी दीवार बन कर खड़े थे। इधर चांदनी मेरी पीठ को सहला रही थी। मैंने चांदनी की पैंटी और पायजामा एक बार में ही खोल दिया और अपना मुँह चांदनी की गुलाबी चूत पर ले गया, चांदनी की गुलाबी चूत पर नाम मात्र के मुलायम बाल थे जो उसकी गुलाबी चूत की पहरेदारी कर रहे थे।

मैंने अंगूठे से उसके पहरेदारों को एक तरफ किया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी सिसकारियाँ लगातार जारी थी- जी……जू……….ये क्या……….कर रहे……. हो……….आ.हहहहहह जी…..जू………मजजजजजा आाा ररररहा हैं औररररर जोर सेससस चाटटो नााा

गुलाबी चूत से रिस रिस कर नमकीन पानी निकल रहा था, उसे चाटने में मुझे भी मजा आ रहा था और शायद अब चांदनी को भी मजा आने लगा था। चांदनी अपनी गांड उठा उठा कर मुखचोदन करा रही थी।

आधे घण्टे तक चूत चाटने के बाद हमारे लण्ड महादेव भी हुंकारने लगे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को व्याकुल होने लगे। मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लण्ड निकाल कर चांदनी के हाथ में दे दिया।

वह लण्ड देखते ही चिल्ला उठी- ये क्याऽऽऽ ?

मैंने कहा- लण्ड।

बोली- इतना बड़ाऽऽ? मैं मर जाऊंगी जीजू ! नहीं मुझे छोड़ दो !

मैंने उसे समझाया- जानू, तुम्हारी जीजी भी तो इसे लेती हैं, वो तो नहीं मरी। इसे मुँह में लो ! तुम्हें मजा आयेगा !

वह ना ना करती हुई मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेने लगी। धीरे धीरे आधा लण्ड मुँह में लेने के बाद मैंने उसके मुंह को चोदना चालू कर दिया। लण्ड चूसने में अब चांदनी को भी मजा आ रहा था। वो अब लण्ड को लॉलीपाप की तरह चूसने लगी। मैं पॉजीशन बदलते हुए ६९ की पॉजीशन में आ गया और अब वो मेरा लण्ड और मैं उसकी चूत चाटने लगा। करीब २०-२५ मिनट में चांदनी दो बार स्खलित हो गई और मैं अब होने वाला था।

और मैं……….. ये ……..गया वो गया……… और अपना सारा माल उसके मुँह में उड़ेल दिया। और फिर आपस में चिपक कर हांफने लगे।

थोड़ी देर बाद अचानक अपने लंड पर किसी के स्पर्श से मैंने आंखे खोली तो देखा कि चांदनी उससे खेल रही है और उसे खड़ा करने की कोशिश कर रही है। मेरे आंख खोलते ही मुझे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। मैं समझ गया कि अब मेरी साली को जीजू से क्या चाहिये।

मेरा लण्ड कब पीछे रहने वाला था, उसने तुरन्त सलामी ठोक दी और चूत पर जाकर पहरेदारों से भिड़ गया। आखिर जीत मेरे लण्ड की हुई और सारी दीवारें तोड़ता हुआ चांदनी की अनछुई गीली, चिकनी चूत में धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा क्योंकि मुझे मालूम था कि चांदनी पहली बार चुदने वाली हैं।

जैसे ही लण्ड ने संकरे रास्ते में प्रवेश किया, चांदनी ने रोक दिया- नहीं जीजू ! दर्द हो रहा है ! और चिल्लाने लगी।

मैंने सोचा अगर चांदनी की बातों में आ गया तो सारा किया धरा रह जायेगा और मैंने तुरन्त चांदनी के होंठों पर कब्जा कर एक लण्ड की तेज ठोकर लगाई और उसकी चिल्लाहट को होंठों से दबा दिया।

मैंने महसूस किया कि लण्ड पर खून का फव्वारा छुट गया और वह हाथ पैर मारने लगी, मगर मैं अपने हाथों से उसके स्तनों को सहलाते हुए और होंठों से अब गाल, कान, गरदन वगैरह चूम कर उसे दिलासा देने लगा और धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा। उसका प्रतिरोध अब कम होता नजर आया और अब शायद उसे भी मजा आने लगा इसलिये गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी और मुंह से अनाप शनाप आवाजें निकालने लगी- जी……जू चो…….दो मुझे………….. चोद………..डालो ! वगैरह वगैरह।

लण्ड और चूत की लड़ाई चालू हो गई थी, या यूं कहिये आपस में शास्त्रीय संगीत की प्रतिस्पर्धा चालू हो गई हो। क्योंकि लण्ड जैसे ही अन्दर जाता तो तबले पर पड़ने वाली थाप की आवाज आती और चांदनी के मुँह सिसकारियाँ निकलती। मतलब कि उस वक्त सरगम बज रही थी।

१५-२० मिनट बाद मैंने चूत में लण्ड डाले डाले ही उसे घोड़ी बनाया और फिर चालू हो गया। इस दरम्यान वो २-३ बार झड़ चुकी थी मगर मेरा अभी ठिकाना नजर नहीं आ रहा था।

मगर घोड़ी की पोजीशन में आते ही मुझे लगने लगा कि अब ज्यादा देर नहीं टिक सकूंगा और मैं भी १५-२० धक्कों के बाद उस पर ढेर हो गया और अपना सारा माल उसकी कोमल चूत में बहा दिया।

देर बाद जब हम उठे तो उसकी नजर बिस्तर पर गई जहां खून ही खून और वीर्य उसका और मेरा दोनों का पड़ा था, जिसे देख कर वह डर गई और रोने लगी- जीजू ! यह क्या हुआ ? इतना खून निकल गया।

मैंने कहा- साली साहिबा ! यह सब तो पहली बार में होता ही है ! और समझाने लगा।

मैंने उस दिन ऑफिस फोन कर छुट्‌टी ले ली और उस दिन और उसके बाद जब तक मेरी पत्नी नहीं आई तब तक मैं चांदनी को लगातार चोदता रहा कभी घोड़ी-कुतिया तो कभी किचन में एक टांग पर। कुल मिलाकर चांदनी के साथ बिताये वो हर पल आज भी मेरी आंखों के सामने आते हैं तो बस उसे चोदने की इच्छा जागृत हो जाती है।

उसके बाद हमें जब भी दिन में, रात में या जब भी मौका मिलता हम एक हो जाते। अब वो हमारे साथ नहीं रहती ! वो अपने घर चली गई, मगर उसकी याद अब भी दिल में बाकी है।

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चोदे, चुदायें और लाइफ बनायें। Hindi Porn Stories

Antarvasna

फिर वो उठे और बैग से कुछ निकाला Antarvasna और कहा, “जान तुम्हारे लिए साड़ी लाया हूँ प्लीज़ ! इसे पहन लो न !” मैं फिर उठी और बाथरूम चली गई और तैयार हो कर आई तो भैया मुझे ऐसे देखने लगे जैसे कोई शोषणकारी देख रहा हो और वो तुंरत आ कर मुझसे चिपक गए और मुझे फिर बिस्तर पर पटक दिया और अपने कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर आ कर मेरे ऊपर चढ़ गए और कहा “अब नहीं रहा जाता जान , अब तो मैं पूरा फाड़ दूंगा तुझे , आज वैसे भी जा रहा हूँ दिल्ली अब अगले महीने ही आऊंगा !” कहते हुए भैया ने मेरी साड़ी उतार दी।

भैया मेरी चूत पर बैठे हुए थे और मेरी चूचियों को मसल रहे थे . मैंने कहा “रौंद डालो आज मुझे जान, मत छोड़ना आज मुझे, जम कर चोदो आज मुझे ” ये सुनते ही भैया ने दोनों हाथों से कस कर मेरे दोनों चूचुक नौच लिए जिससे मैं चीख उठी और मेरी एक टांग अपने कंधे पर रख कर अपने लण्ड को मेरी चूत पर रख कर जोर का झटका मारा तो…

“आऽऽ अऽऽ ! आऽ आहऽऽ ह …”

“रानी अभी तो आधा ही गया है , अभी तो पूरा जाना है .. ओह ह ह !”

“भाई जान प्लीज़ऽऽऽऽ …! दर्द हो रहा है ! अऽआऽऽआऽऽआह ह !”

“और ले रानी … अब तो तेरी बहन नीतू मेरी साली हो गई है और अब उसे भी करना है ” कहते हुए पूरा लण्ड मेरी चूत में ठेल दिया।

“आ अ आया आह ह हह न ना आ आ !… नीतू तो भोली है …! प्लीज़ उसे तो छोड़ देना !”

“नहीं जानेमन …! साली आधी घरवाली ही तो होती है …!”

“ठीक है जान …! आ आ अ आह हह … कर लेना उसके साथ …! उसे यहीं ले आओ ना मिल लूंगी !”

“ठीक है फिर उसे यहीं चोदूंगा उस कमसिन जवानी को !”

फिर भैया ने मुझे १५ मिनट तक जम कर चोदा। फिर वो ऑफिस की कार से चल दिए एअरपोर्ट के लिए, साथ में मैं भी थी। कार में वे मेरी चूचियाँ दबाते हुए और किस करते हुए गए थे। उन्होंने ड्राईवर को कह दिया की मुझे कॉलेज छोड़ देगा। फिर मैं उनको छोड़ कर कार से आने लगी थी कॉलेज को. मैं कार में आगे ही बैठी थी।

ड्राईवर का नाम मोहन था। मोहन ने कहा “और मैडम लगता है आप अपने भाई से काफी सेक्स किया है !”

मैं यह सुनते ही सन्न रह गई।

मैंने कहा, “प्लीज़ ! ये बात मत किसी को बताना आप !” कहते हुए मेरे हाथ अपने आप उसके कंधे पर चले गए। उसने सुनसान जगह देख कर कार अचानक साइड में अँधेरे में रोक दी। उसने कहा,“आप तो घबराने लगी ! क्या हो गया?” उसने कहते हुए मुझे किस कर लिया और मेरे बूब्स मसलने लगा।

मैंने घबराकर कहा, “ये क्या कर रहे हैं आप?”

“क्यों मैडम अपने भाई से करवा सकती हो और मैं …! मैं क्या मर गया हूँ?”

उसने मेरी सीट पीछे की तरफ कर दी थी जिससे मैं लगभग लेटी हुई थी। उसने एक हाथ मेरी शर्ट के अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने लगा, मेरी जींस की जिप भी खोल दी और चूत में ऊँगली करने लगा।

“आया आ अह ह … प्लीज़ मत करो !”

मोहन करीब २६-२७ साल का था और ५”११” कद का होगा और काफी तगड़ा भी था। फिर उसने मेरी जींस खोल के घुटने तक सरका दी, मेरी शर्ट फाड़ दी और फिर उसने अपनी शर्ट उतार दी और अपनी पैंट भी अपने घुटने तक सरका दी। मोहन फिर मेरी टांगों के बीच में मेरे ऊपर आ गया। अब हम ऐसी पोसिशन में थे कि हम दोनों आराम से अलग भी नहीं हो सकते थे। उसने मेरी ब्रा भी मुझसे अलग कर दी और मेरी चूचियों को चूसने लगा।

उसका लण्ड करीब १०” लम्बा और ३” मोटा था जो कि भैया से भी तगड़ा था। मैं घबरा गई थी पर कुछ कर भी नहीं सकती थी।

“प्लीज़ मत करो ना … बहुत तकलीफ होगी मैं मर जाऊंगी !”

“अब होने दो मैडम जो हो रहा है, अब नहीं रहा जाता ! वैसे भी आप बहुत खूबसूरत हैं।” ये कहते हुए उसने अपना लण्ड मेरी चूत पर टिका दिया।

“प्लीज़ मुझे छोड़ दो ….!” पर धीरे धीरे मुझे भी कुछ होने लगा था।

“अब बस मैडम इसके बाद आप को मैं छोड़ दूंगा !” कहते हुए उसने जोर लगा दिया। पर इतना मोटा लण्ड कहाँ जाने वाला था अन्दर। मैंने भी सोच लिया था कि अब तो चुदना ही है उसके बाद फ्री तब मैंने उसका लण्ड पकडा तो घबरा गई कि इतना मोटा। फिर भी मैंने उसको अपनी चूत में थोड़ा फंसाया और कहा “अब करो पर आराम से !”

ये सुनते ही उसने जोर का झटका मारा …..

“आ आ अ आ अ आह ह ह ….. मर गई ई इ ई इ ” मेरे दोनों हाथ उसकी पीठ में गड़ गए।

“ऊऊओह सेक्सी बेबी …. अभी तो १/३ ही गया है २/३ तो बचा है !” उसका लण्ड मेरी चूत में बहुत कसा कसा जा रहा था पर लण्ड पूरा नहीं जा पाया और उसने मुझे १० मिनट तक चोदा जिसमे मैं २ बार झड़ गई थी। फिर हम दोनों किसी तरह उठे और उसने तुंरत गाड़ी दौड़ा दी और १० मिनट में अपने घर ले गया। उस वक़्त रात के ९ बज रहे थे।

मैंने कहा,“ये कहाँ आ गए हम, आप तो मुझे कॉलेज ले कर जाने वाले थे?”

“पहले फ्रेश तो हो जाएँ, फिर छोड़ दूंगा।”

“ठीक है पर जल्दी करिए न, अब तो आप मेरे साथ कर ही चुके हैं !”

हम दोनों जैसे ही घर में घुसे, उसने तुंरत दरवाजा बंद कर लिया और मुझसे चिपक गया।

“ये क्या कर रहे हो आप …..! प्लीज़ छोड़ दो !….. अब नहीं !”

“अभी कहाँ हुआ है पूरा जानेमन ! अब तो घर पर ही जम कर करूंगा जानेमन !”

“आप तो आ आ अ आह ह ह …. मत मसलो मुझे प्लीज़ … मुझे कॉलेज छोड़ दो !”

“कॉलेज की तो परसों तक छुट्टी है इसीलिए आज प्लीज़ घर पर ही …!” कहते हुए उसने मेरी दूसरी शर्ट भी फाड़ दी और मेरी जींस उतारने लगा और अपने दाँतों से मेरे निप्प्ल चबाने लगा।

मुझे भी कुछ होने लगा था। तब मैंने भी सोच लिया कि अब कोई चारा नहीं है।

मैं भी फिर उसको किस करने लगी, उसकी शर्ट उतार दी और उसकी पैंट खोल दी। २ मिनट में हम दोनों नंगे एक दूसरे से चिपके हुए किस कर रहे थे। वो मेरे नंगे बदन को देख कर पागल हो गया, मुझे अपने बिस्तर पर ले जा कर पटक दिया और बेतहाशा चूमने लगा। मैं भी उसे चूमने लगी।

“अब नहीं छोड़ूंगा तुम्हें …! आज जी भर कर खाऊँगा … तुम्हें !”

“खा के तो दिखाइए मुझे … ! देखें कितना दम है !”

“जानेमन कार में तो झेल नहीं पाई और दम की बात करती हो?” यह कहते हुए वो मेरी टांगों के बीच में आ गया और अपना लण्ड मेरी चूत पर रख दिया और जोर का झटका मारा।

“आ आ अ आ अ आह ह ह … प्लीज़ निकाल लो …!”

“ऊंह ह ह आह बहुत कसा कसा जा रहा है जानेमन ! अभी तो आधा बाकी है !” कहते ही उसने और जोर लगाया पर उसका लण्ड बहुत मोटा था और मैं कमसिन सी लड़की उसको झेल नहीं पा रही थी। जवाब में मैं उसकी पीठ में अपने नाखून गड़ा रही थी।

“आऽऽअ आह्हहहऽऽऽ उई माँ ऽऽऽ मर जाऊंगी मैंऽऽऽ !”

“आज तुझे अपना बना के ही छोड़ूँगा जानेमन !” कहते हुए उसने ३-४ जोरदार झटके मारे तो मैं कराह उठी क्योंकि अब शायद १-२” ही बाकी था पूरा जाने में।

“आ ऽऽऽऽ अ आहऽऽऽऽ ओऽऽह अ आऽअ आऽऽऽअ … आज मेरा पूरा भुर्ता बन जाएगा, मुझे किसी लायक नहीं छोड़ोगे क्या?”

“जानेमन अब तुम सिर्फ़ मेरे लिए ही रहोगी अब तो बस ! …..”

फ़िर उसने मुझे आधे घण्टे तक जम के चोदा और हम थक कर पसर गए। उसके बाद हम दोनों बाहर खाना खाने गए और वापिस उसी के घर आ गए। मैं बहुत थक भी गई थी और हम दोनों सो गए। करीब एक घण्टे बाद मोहन उठा और मुझे चूमने लगा।

मैंने पूछा,“ क्या हुआ और अब यह क्या हो रहा है ! अब तो हो चुका ना !”

“अभी तो बहुत कुछ होगा मैडम ! और वैसे भी आपको मेरा दम देखना था और आप मेरी हो चुकी हैं।” कहते हुए वो मेरे कपडे उतारने लगा।

“अच्छा … तो दिखाओ ना अपना दम !” कहते कहते मैं भी उसके कपडे उतारने लगी और चूमने लगी। फिर उसने मेरी चूत में अपना लण्ड डाल दिया।

“आ अ आ आया अआया अह ह्ह्ह … फक्क मी ! कम ओन … चोद डालो आज मुझे, बना लो आज मुझे अपना ….. ओ ऊ ओऊ ऊह हह ”

फिर उसने ३-४ मिनट बाद ५ मिनट तक घोड़ी बना कर चोदा फिर उठा और तेल ले कर आया और मेरी गांड के छेद पर मला तो मैंने पूछा “अब क्या करेंगे आप ?”

“अभी तो पीछे से भी लेना है ” कहते हुए उसने मेरी गांड में एक ऊँगली डाल दी और तेल लगाने लगा।

“आ आ आया अ आया आ आह हह …. प्लीज़ नहीं … पीछे से नहीं ! बहुत तकलीफ होगी !”

“तो होने दो ना … अब तो मेरी ही हो … प्रैक्टिस कर लो और वैसे भी आज मैं अपना लण्ड तुम्हारे हर छेद में डालूँगा ”

फिर उसने मेरी एक ना सुनी और मुझे घोड़ी बना दिया, हम दोनों ज़मीन पर थे और मैं बेड पर अपने हाथ टिकाये हुई थी। उसने अपना लण्ड टिका दिया मेरी गांड के छेद पर और जोर का झटका मारा।

“आ आ आ अ औ ऊ ऊ ओऊ ऊऊ ऊओउऊ ऊऊ ऊह्ह ह्ह्छ … बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ निकाल लो …!”

“आया हह अभी तो १” ही अन्दर है अभी तो पूरा … अह ह्ह्ह !” कहते हुए वो कस कर झटके मरने लगा।

“ओऊ ओऊ ऊह्ह ह्ह्ह मेरा दम निकल जायेगा !” पर शायद मैं भी उसका साथ दे रही थी और मेरी चीखें कमरे में गूँज रही थी।

“जान हम दोनों का दम यहीं निकलेगा पर तुम में क्या दम है !…. आह हह !” फिर हम दोनों खड़े हो गए और वो पीछे से मेरे बूब्स मसलने लगा और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे, जबकि उसका ४ ” लण्ड मेरी गांड में था।

फिर हम दोनों बिस्तर पर आ गए वो बैठ गया और मुझे अपनी गोदी में बैठा लिया और बैठने को कहा तो मैंने भी जोर लगाया …..

“आ अ आ आया अ आह हह …. बहुत दर्द हो रहा है !” वो फिर मेरे कंधे को पकड़ कर जोर लगाने लगा तो ६” लण्ड किसी तरह गया और वो दूसरे हाथ की उँगलियों से मेरी चूत चोदने लगा और २ मिनट बाद मुझे बिस्तर पर लिटा कर जम कर मेरी गांड १५ मिनट तक मरी मैं चीखती रही पर हम दोनों फिर भी लगे रहे। फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

सुबह मैं १२ बजे के करीब उठी तो देखा वो कहीं गया हुआ था। वो १५ मिनट में आ गया और खाने को कुछ लाया था। फिर हम दोनों ने खाना खाया और थोड़ी देर बाद हम दोनों नंगे नहाने एक साथ गए और नहाते समय उसने मुझे खूब मसला और मैंने उसे।

फिर नहाने के बाद वो मुझे अपनी बाँहों में उठा के बिस्तर पर ले कर आ गया और हम दोनों बिस्तर पर पसर गए और एक दूसरे को चूमने लगे और एक दूसरे का लण्ड और चूत सहलाने लगे। फिर वो उठा और मेरी टांगें अपने कंधे पर रख ली और मुझ पर झुक कर मेरी चूत पर अपना लण्ड रख कर अन्दर ठेलने लगा और मेरी चिकनी टांगों को चाटने लगा।

लण्ड कसा कसा जा रहा था। फिर वो लेट गया और मुझे अपने ऊपर कर लिया और कहा,“अब आप करो मैडम … ज़रा देखें आपका दम !”

“काहे की मैडम ?… आपने तो अब मुझे अपना बना लिया है !”

“अभी कहाँ बनी आप मेरी … अभी तो बच्चे पैदा करोगी आप और अपनी चूत से हमारे बच्चे निकलोगी और वो भी कम से कम २ !”

“अभी नहीं … अभी तो मैं सिर्फ १८ की ही हूँ … २ -३ साल बाद प्लीज़ !”

“अभी का किसने कहा है जान मेरी रानी … अभी तो तुम्हें इस लायक तो बना दूं और अभी तो हमें काफी मजे करने हैं !”

बातें करते करते मैं उसके लण्ड को धीरे धीरे अपनी चूत में लेने लगी, वो मजे से नीचे लेटा हुआ था और मेरी चूचियों को मसल रहा था। उसका लण्ड बहुत कसा कसा जा रहा था। फिर उसने नीचे से झटके मरने चालू कर दिए और मैं ऊपर से झटके मारने लगी पर २-३ मिनट में ही निढाल हो गई तो उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद ऊपर आ गया और रगड़ कर चोदने लगा मुझे।

“आ आ अ आः हह … जम कर चोदो मुझे जान !”

“ओह्ह … अब तो रोज ही करूंगा

हम दोनों १५ मिनट तक सेक्स करते रहे और फिर थक कर सो गए। दोपहर में खाना खा कर उसने मुझे कॉलेज छोड़ दिया।

फिर २०-२५ दिन बाद भैया फिर आये और मेरी बहन नीतू को ले कर आये तो मैं खुश हो गई। फिर हम तीनों एक ही कमरे में रुके और मैंने उनको सारी बात बता दी तो उन्होंने पूछा “तो तुम क्या चाहती हो … बताओ ?”

“मैं अब आपके लायक नहीं रह गई हूँ और मैं सोचती हूँ कि अब मोहन से ही शादी कर लूं !” मैं रोते हुए बोली।

“और मेरा क्या होगा … तुमने कभी सोचा ?”

“आप नीतू से कर लो न … प्लीज़ … हम दोनों नीतू को मना लेंगे !”

नीतू और मेरी फिगर लगभग एक ही जैसी है बस शकल से अलग हैं बस उसका बदन मेरे से ज्यादा कसा हुआ है।

“ठीक है … अब तुम मेरी साली हो जाओगी हा हा हा !”

फ़िर हम दोनों ने नीतू को सारी बात बता दी और समझाया तो वो मान गई। फिर हम तीनो बिस्तर पर पसर गए। भैया नीतू की चूचियों को सहलाने और मसलने लगे तो वो कसमसाने लगी।

फिर मैं भी भैया की मदद करने लगी, उनकी शर्ट उतार दी और उनकी पैंट खोल दी। फिर मैं नीतू की भी पैंट उतारने लगी तो भैया ने उसकी शर्ट उतार दी। उसका नंगा बदन देख कर भैया पागल हो उठे, उसको किस करने लगे और कस कस कर चूचियां मसलने लगे, जिससे नीतू भी पागल हो उठी और मैं भी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और नीतू को मैं चूमने लगी।

हम दोनों बहनें पहली बार एक साथ नंगे एक ही बिस्तर पर थी और अब हम तीनों ही नंगे थे।

अब बाकी अगली कहानी में ! Antarvasna

Sex Stories

प्यारे पाठको, मेरा Sex Stories नाम विनय है। मैंने अन्तर्वासना की हर कहानी पढ़ रखी है। आपका अहसान चुका रहा हूँ अपनी सच्ची कहानी भेज कर! कृपया मुझे उत्साहित करें! यह मेरी पहली कहानी है, अच्छी लगे तो तो अपने विचार देना।

यह बात आज़ से दो साल पहले की है जब मैं नौकरी नहीं करता था और फ़्री रहता था। मेरी एक मौसी की लड़की जिसको देख कर मुझे कुछ कुछ होता था, हम दोनों काफ़ी घुले मिले हुए थे। इसी लिए हम एक दूसरे की सभी बातें जानते थे। मैं उसके स्तनों और चूतड़ों को देख कर अपने लण्ड से खूब पानी निकालता था और उसके करीब जाने की कोशिश करता था, बार बार उसके बूब्स से टकराता था । वो भी यह बात समझ चुकी थी इसलिए मुझे भी किसी मौके की तलाश थी और एक दिन मुझे मौका मिल गया।

मेरी मौसी ने कहा कि वो सब चार पाँच दिन के लिए बाहर जा रहे हैं लेकिन गौरी की परीक्षा है, इसलिए वो अकेली है, तुम रात को उसके पास सो जाना!

मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ और उसके घर पर ठीक दस बजे पहुँच गया। उसने लम्बी स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। पहले हमने बहुत सारी बातें की फ़िर मैं उसके करीब आ गया। हम सोफ़े पर बैठे थे। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे धीरे उसके साथ मस्ती करने लगा।

तभी वो मेरे गले से लग गई। जैसे ही मैंने उसे पकड़ा, वो अपने आप को छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। क्योंकि मैं यह मौका नहीं खोना चाहता था। मैं उसके गले पर चूमने लगा। अब वो भी मुझ से चिपक गई।
फ़िर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा।

वो कहने लगी- विनय! कुछ हो गया तो?
मैंने कहा- तुम डरो मत! मैं पूरे इन्तज़ाम के साथ आया हूँ, कुछ नहीं होगा।

फ़िर मैं उसे उठा कर कमरे में ले गया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए, सिर्फ़ चड्डी पहने रखी। वो काफ़ी डरी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमा और उसके ऊपर आ कर उसके गले और होंठों पर चूमने लगा। मैं एक हाथ से उसके स्तन मसले जा रहा था। अब उसे भी मज़ा आने लगा था।

फ़िर मैंने उसकी स्कर्ट जांघों से ऊपर कर दी और उसकी जांघें चूमने लगा। उसने सफ़ेद रंग की चड्डी पहनी थी। वो भी गर्म हो चुकी थी। मैंने उसकी स्कर्ट और टॉप दोनों उतार दिए।

उसका दूध जैसा गोरा और चिकना बदन देख कर मेरा लण्ड और सख्त हो गया। क्या गज़ब का फ़िगर था 36-28-34, मैंने उसकी ब्रा से उसके बूब्स को आजाद कर दिया और एक हाथ से उसकी चड्डी उतार दी। अब हम दोनों नंगे थे और पूरी रात हमारी थी।

मैं पागलों की तरह उसके बूब्स चूस रहा था और वो सिस्कारियाँ भर रही थी। फिर मैंने उसकी चूत में उंगली की, चूत पहले से बहुत गीली हो चुकी थी। मैंने नीचे आकर उसकी चूत को चूमा, वो तड़प उठी, मैंने उसकी चूत का दाना अपने मुंह में ले लिया, वो गांड हिला हिला कर चूत चटवाने लगी।

फिर मैंने भी अपना लण्ड उसके मुंह के पास कर दिया। उसने बिना समय गँवाए लण्ड को पकड़ कर अपने होठों में दबा लिया और चूसने लगी। अब हम 69 की अवस्था में थे, मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था और चोद रहा था और वो मेरा लण्ड चूस रही थी।

फिर वो बोली- प्लीज़ विनय! अब नहीं रहा जाता! कुछ करो!

मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया और लण्ड उसकी चूत पर रख कर एक झटका दिया, वो चिल्लाई लेकिन मैंने उसके होंठ अपने होंठों में दबा लिए। उसकी चूत कुंवारी थी। फिर मैंने एक और झटका दिया, अबकी बार मेरा लण्ड उसकी चूत फाड़ता हुआ पूरा समां गया और उसकी आँखों में आंसू आ गए।

फिर मैंने धीरे धीरे उसके स्तन चूसे और धीरे धीरे झटके दिए। मैंने देखा अब उसे भी मजे आ रहे हैं तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी। अब मैं उसको पूरी तेजी से चोद रहा था और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।

अब हम झड़ने वाले थे, मैंने अपना लण्ड निकल के उसकी गांड पर रख दिया और हिलाने लगा और तभी मैं झड़ गया और सारा पानी उसकी गांड पर निकाल दिया क्योंकि मेरा अगला कार्य उसकी गांड मारना ही था इसलिए मैंने उसकी गांड चिकनी कर दी थी।

इस बीच वो भी दो बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड चोदी। साली बड़ी ही कसी थी!जो मजा मुझे गौरी के साथ आया वो आज तक नहीं आया। उसके बाद हमने 3-4 दिन तक रात में 5-5 बार चुदाई की, लेकिन अब उसकी शादी हो चुकी है और मेरी जान अब मुझसे बहुत कम मिल पाती है।

प्यारे पाठको! मेरी कहानी के बारे में मुझे अवश्य लिखें! Sex Stories

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