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दोस्तो, यह मेरी पहली Antarvasna कहानी है अन्तर्वासना पर ! मैं यहाँ दूसरों की कहानियाँ पढ़ने में काफी समय बिताता हूँ। इतना पढ़ने के बाद आज मेरा भी मन किया कि कुछ लिखा जाए तो यह कहानी आपके लिए लाया हूँ। सच है या काल्पनिक इसका फैसला मैं आप पर छोड़ रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आपको यह पसंद आएगी।
मेरा नाम रोहित है उम्र 20 साल, कद करीब 5′ 9″, देखने में भी ठीक हूँ और मेंरे लंड की लम्बाई 6″ है। मैं हमेशा से पढ़ाई में अच्छा रहा हूँ जिस कारण मुझे काफी अच्छा कॉलेज मिला जहाँ से मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ, तीसरे वर्ष में ! मैं घर साल भर में दो तीन बार ही आ पाता हूँ। मेरे घर में मेरे अलावा मुझसे तीन साल बड़ी मेरी बहन है जो हॉस्टल में रहती है और मम्मी पापा हैं। मम्मी एक सरकारी विद्यालय में अध्यापिका हैं और मेरे पापा एक बैंक मेनेजर हैं।
मेरी छुटियाँ होने ही वाली थी जब मेरी मम्मी ने फोन पर मुझे हमारे नए पड़ोसियों के बारे में बताया। मेरी मम्मी उनको लेकर काफी खुश लग रही थी और बता रही थी कि वो लोग दोस्ताना स्वाभाव के हैं और मेरी मम्मी के काफी अच्छे दोस्त भी बन गए हैं। कुछ ही दिनों में मैं दो महीनों के लिए अपने घर आया। मम्मी ने बताया कि आंटी मुझसे जल्दी से जल्दी मिलना चाहती हैं इसलिए मैं अगले ही दिन उनके घर चला गया और मुझे उस परिवार से मिलने का पहले मौका मिला।
परिवार छोटा ही था जिसमें सिर्फ भाई बहन और मम्मी पापा थे। बहन का नाम आस्था था और उसके भाई का रोहण। आस्था करीब 19 साल की होगी और रोहण 10 साल का। आंटी ने मेरा उनसे परिचय करवाया और बताया कि आस्था भी इंजीनियरिंग के दूसरे साल में है।
आस्था 19 साल की एक मस्त लौंडिया थी जिसको देखते ही मुँह में पानी आ जाये, गोरा रंग, बी-कप वक्ष, मस्त गांड और कद 5’5″। जब वो चलती थी तो उसकी बड़ी गांड देखने में बड़ा मजा आता और मन करता कि अभी कुतिया बना कर चोद डालूँ साली को।
आस्था और रोहण मेरे घर मेरी मम्मी के साथ बैडमिन्टन खेलने रोज शाम को आया करते थे। मैं भी उनके घर कभी कभार चला जाता था पर सिर्फ आंटी से ही बात कर रह जाता था। फिर एक दिन हुआ यूँ कि मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। हमारी रिश्तेदारी में किसी के यहाँ लड़का हुआ था तो इसी खुशी में पार्टी थी। मम्मी-पापा वहीं गए थे। आस्था और रोहण घर खेलने के लिए आये पर मेरी मम्मी को न देखकर आस्था ने मुझसे उनके बारे में पूछा।
मैंने उसे बताया- मम्मी-पापा पार्टी में गए हैं।
अब उसे खेलने के लिए एक पार्टनर की जरुरत थी तो उसने मुझसे खेलने के लिए कहा।
मेरे मन में ठरक तो पहले से ही उठी थी तो मैंने मौके का फायदा उठाने का सोचकर बोला- अभी बाहर धूप है, कुछ देर में खेलते हैं और अभी तुम अंदर आ जाओ।
वो अंदर आ गई मगर उसका भाई बाहर ही कुछ खेलने लगा।
वो जब अंदर आई तो मेरा कंप्यूटर चालू था, डेस्कटॉप देखकर उसने कहा- यह क्या लगा रखा है?
डेस्कटॉप पर एक गन्दा सा वालपेपर लगा था। वालपेपर अश्लील नहीं था मगर एक बदसूरत कुत्ते का था। तब मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को बोला और कहा- बेब्स फोल्डर में जाकर तुम अपनी मनपसंद का वालपेपर लगा दो।
यह कहकर मैं जानबूझ कर वहाँ से रसोई में चला गया। बेब्स फोल्डर में बहुत सारी नग्न और बहुत ही सेक्सी तसवीरें थी। जब मैं वापिस आया तो मैंने देखा कि वो उन तस्वीरों को जल्दी जल्दी बदल कर देख रही है।
मैंने कहा- शरमाने की कोई बात नहीं है, तुम इन्हें आराम से देखो।
यह कहकर मैंने उसे कुर्सी से उठाया और खुद बैठ जाने पर उसको अपने टांगों के बीच की जगह में कुर्सी पर बैठा लिया। वो मेरी गोद में तो नहीं थी पर मेरा लंड उसकी गांड से टकरा रहा था और हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।
मैंने अब अपना हाथ उसकी कमर पर घुमाना शुरू किया जिसका उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। कुछ देर बाद उसने मुझे शरमाते हुए ब्लू फिल्म देखने की इच्छा बताई मगर मेरे कंप्यूटर में न होने के कारण मुझे उसे मना करना पड़ा।
कुछ देर में हमें एहसास हुआ कि शायद रोहण आ रहा है तो वो खड़ी हो गई और मुझे फोल्डर बंद करने को बोला। मैंने उसे बंद किया और हम लोग बाहर जाकर बैडमिन्टन खेलने लगे और फिर कुछ देर बाद अँधेरा होने पर मेरे मम्मी पापा आ गए और आस्था, रोहण भी अपने घर चले गए।
अगले दो चार दिन मुझे वो दिखाई नहीं दी पर मैं इस बीच कुछ मसालेदार नग्न फिल्में ले आया था। अगले दिन मैं बाहर जा रहा था तो वो मुझे मिली, उसने बताया कि उसके पेपर आ गए है इसलिए तैयारी करने में उसका सारा समय निकल जाता है।
हमने कुछ देर और बातें की, उसने मुझे अगले दिन दोपहर में अपने घर आने को बोला, उसके मम्मी पापा कहीं जाने वाले थे और रोहण स्कूल। मैं उस रात भर उसकी चूत के बारे में सोचता रहा और मुठ मार कर सो गया।
अगले दिन करीब एक बजे मैं उसके घर पहुंचा। उसने दरवाजा खोला और उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। वो काले रंग के सलवार कमीज़ में थी और बहुत मस्त माल लग रही थी। फिर क्या था मैं अंदर घुसा और उससे जा चिपका। मेरे दोनों हाथ उसकी गर्दन पर पहुँच गए और होंठ उसके होंठों को चूसने लगे। मेरे हाथ अब कभी उसके वक्ष पर जाते, कभी उसकी गांड पर तो कभी उसकी कमर को सहलाते। हाथ अब इधर उधर उसके गरम बदन पर भटक रहे थे। वो बेचारे करते भी क्या ! इतना गर्म माल था कि हर जगह का मजा लेना चाह रहे थे।
कुछ पल बाद मैं उसके पीछे अपना लंड उसकी गांड में लगाकर खड़ा हो गया। मेरे दोनों हाथ उसके स्तनों को मसल रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मजे में उसकी आँखें भी बंद थी, मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।
अब मेरा एक हाथ उसकी सलवार में चला गया और उसकी कच्छी के ऊपर से उसकी बुर का मजा लेने लगा। कुछ गीलापन महसूस हुआ तो हाथ उसकी पेन्टी में डाल दिया और ऊँगली से उसकी चूत को रगड़ कर मजा देने लगा।
अब तक तो वो इस नशे में पागल हो गई थी और आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह कर अपनी गांड और पीछे कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी।
कुछ देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए और एक दूसरे को देखते देखते नंगे हो गए। नंगे होने पर जब मैंने उसके चुचूक देखे तो मैं रुक नहीं पाया और उन्हें चूसने लगा। क्या गज़ब का शरीर था उसका ! हर जगह से एक दम मस्त ! चूत पर कोई बाल नहीं और ऊपर से नीचे तक दिन-रात चोदने लायक !
अब मैंने उसे गोदी में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने के लिए आगे बढ़ा। यह सब मैं पहली बार करने जा रहा था। उसने शर्म के कारण अपनी टांगों को एक दूसरे से चिपका लिया और मुझे मना करने लगी। पर मैं कौन सा रुकने वाला था, एक झटके में उसके पैर खोल दिए और उसकी चूत मेरे सामने थी। चूत चाटने के लिए जब मैंने अपनी जीभ निकाल कर उस पर लगाई तो मुझे थोड़ा गन्दा स्वाद लगा और मैं पीछे हट गया। चूत चाटने का ख्याल छोड अब मैं उसके स्तनों को चूसने चाटने लगा और वो बोलने लगी- आज तो इन्हें पूरा पी जाओ !
यह कहकर अब उसके मुँह से सिर्फ आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! जल्दी करो ! सिर्फ ये आवाजें आ रही थी।
अब उसने कहा- मुझसे रुका नहीं जाता और इस चूत को ले लो अब ! अपना लंड इसमें डाल इसको फाड़ डालो, पूरा अंदर घुसा दो और मेरी माँ चोद दो !
यह सब सुनते ही मेरा लंड कड़क होकर एकदम फटने को हो गया। मैंने लंड को उसकी चूत पर रखकर घुसाने की कोशिश की पर घुसा नहीं पाया। साली की चूत थी ही इतनी कसी हुई कि मैं क्या करता। मेरे बेचारे लंड का भी आज पहली बार था और मुझे घुसाने में हल्का दर्द महसूस हो रहा था तो मेरी गांड फटने लगी और मैंने अभी के लिए उसकी फुद्दी मारने का अपना इरादा छोड़ दिया।
फ़िर अपना लंड उसके मुँह में डालकर उसको चूसने को बोला। कुछ देर उसने लंड को ऐसे ही मुँह में रखे रखा। तब मैंने कहा- मेरी प्यारी रांड ! इसे लॉलीपॉप समझ कर चूसना शुरू कर !
यह सुनते ही वो भी जोश में आ गई और लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसना शुरू किया। मैं तो जन्नत में पहुँच गया था और उसे बोल रहा था- मान गए मेरी रांड को …. बस ऐसे ही चूसती रह.. आआआआआह्ह्ह्ह्ह् आआआह्ह्ह्ह्ह् …..
कुछ ही पल में मेरा झड़ने वाला था और मैंने उसके मुँह में पिचकारी मार दी। कुछ बूंदें तो अंदर ले गई और बाकी सब बाहर निकाल दिया। अब उसने मेरी और देखा और मुस्कुराने लगी। कुछ देर यूँ ही लेटे गए और तभी घर कोई आ गया। हमने फटाफट कपडे पहने और आस्था ने दरवाजा खोला तो पाया कि रोहण स्कूल से घर आया था।
उसने मुझे देखा और हैरान होकर अंदर चला गया। मैं उस दिन अब चूतिये की तरह वहाँ से भाग आया वो भी बिना उसको चोदे।
अगले दिन आंटी मेरे घर आई। मैं घर पर अकेला अपने कान में हैड्फोन लगाकर अश्लील फ़िल्म देख रहा था। आंटी ने दरवाजा खटखटाया मगर मुझे सुनाई नहीं दिया और मैं मुठ मारता रहा। आंटी ने तब बाहर से अंदर झाँक कर देखा कि अंदर मैं क्या कर रहा हूँ और तब दरवाजे को काफी जोर से खटखटाया।
इस बार मैंने उसे सुना और एकदम घबराया और अपना लंड अंदर करके दरवाजा खोला। मैं आंटी को देख हैरान था। तब मैंने देखा कि वो काफी गुस्से में थी और मुझसे पूछा- अभी क्या कर रहे थे और कल उनके घर दोपहर में क्या हुआ था?
मैं समझ गया था कि रोहण ने उन्हें बता दिया होगा। मैंने कुछ नहीं ! कहकर बात का जवाब नहीं दिया। तब उन्होंने एक दम से मेरे को एक चांटा लगा दिया और कहा- आज के बाद हमारे घर दिखाई दिए तो तुम्हारी टाँगे तोड़ दूंगी !
मुझे उनकी यह बात सुन कर बहुत गुस्सा आया और मैंने एक झटके में उन्हें कमर से खींच कर उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। उन्होंने मुझे हटाने की कोशिश की पर अब तक तो मेरे ऊपर हवस हावी हो गई थी। दो मिनट बाद आंटी को भी मजा आने लगा और उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ घूमने लगी।
आंटी 42 साल की मस्त महिला थी। उनकी गांड और चूचियों का आकार काफी बड़ा था और अपनी बेटी आस्था की तरह वो भी गोरी चिट्टी थी। देखकर लगता था कि अपनी जवानी में बहुत सारे लोगों के लौड़े शांत कर चुकी होंगी।
मैं अपने हाथ आंटी की मोटी गांड पर फ़िरा रहा था और उन्होंने मुझे कस कर गले लगा रखा था। ऐसा लग रहा था कि वो काफी समय से एक लंबी चुदाई की भूखी थी। मैं आंटी को गोदी में लेकर बैठ गया और नग्न मूवी चला दी। आंटी के स्तन दबाने में बहुत मजा आ रहा था और वो भी खूब मस्त हो रही थी। उनके मुँह से अब आआअह्ह्ह्ह्ह के अलावा कुछ और नहीं निकल रहा था और उनके हाथ उनकी चूत पर पहुँच गए थे। मूवी में अब एक 69 दृश्य चलने लगा, तब मैं आंटी को बिस्तर पर ले गया और हम भी 69 की दशा में आ गए। आंटी ने लंड को चाटना, चूसना शुरू किया। वो एक भूखी कुतिया की तरह लंड को चाट रही थी।
मुझे बेहद मजा आ रहा था और मैंने उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया। पिछले दिन की तरह आज मुझे गन्दा नहीं लगा बल्कि मजा आ रहा था ऐसा करने में। मैं चूत चाटते चाटते उनकी गांड पर थप्पड़ मार देता था तो उनकी गांड हिलती हुई काफी अच्छी लगती और गांड अब लाल हो चुकी थी। दो ही मिनट में मैं और आंटी दोनों झड गए। आंटी ने अपना मुँह बिल्कुल नहीं हटाया और सब कुछ चाट लिया। मैं भी उनकी चूत में घुसा जा रहा था जिसका स्वाद अब नमकीन लग रहा था। अब उन्होंने मेंरे लंड को छोड़ा और एक लंबी सांस लेकर उठ गई। वो उठ कर एक कुतिया की तरह बिस्तर पर खड़ी हो गई और मुझे आँखों से उनकी पीछे से चूत मारने का इशारा किया। मैं पीछे गया और लंड चूत पर लगाकर एक जोर का झटका दिया, मेरा 6 इंच का लंड सीधा अंदर चला गया क्योंकि चूत वैसे ही बहुत चिकनी हो गई थी। आंटी की एक काफी तेज चीख निकली थी जिसको रोकने के लिए मैंने पीछे से उनके मुँह पर हाथ रखा। कुछ पल में अब मैं अपनी कुतिया आंटी की सवारी कर रहा था।
उनके मुँह से आवाज़ आ रही थी- चोद दे मुझ रांड को, माँ चोद दे मेरी ,कितने समय से एक ऐसी चुदाई के लिए तड़प रही थी ! आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह !
और पच पच की आवाजों से पूरा कमरा भर गया था। पीछे से चोदते वक्त गांड बहुत बड़ी और मुलायम लग रही थी। अब मैं नीचे आया और वो मेरे ऊपर आ कर मेरे लंड पर बैठ गई। बैठते ही उन्होंने लंड पर उछालना शुरू किया और मेरे हाथ लेकर अपने वक्ष पर रख उन्हें दबवाने लगी।
वो आँखें बंद कर बोल रही थी- फाड़ डाल मेरी, मैं तो तेरी कुतिया बनके रहूंगी, आज तुम मुझे छोड़ना मत, मुझे पूरी तरह से चुदाई का मजा दो, सभी तरह से चुदाई करो मेरी तुम, चोद और चोद, मेरी चूत की प्यास बुझा दे आज तू ! ऊँगली से थक गई अब एआआह्ह्ह् आआआआह्ह्हह !
मैंने भी नीचे से एक दो फटके मारे और एक जोर के झटके में सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो सिसकाई- आहाहाआह्ह आजा मेरे अंदर आजा ! डाल मेरे अंदर डाल !
दस मिनट बाद हमने एक और राउंड लगाया और फिर मेरी मम्मी के आने का समय हो गया था इसलिए वो कपडे पहन जाने की तैयारी करने लगी। जाते वक्त मुझे बोलती कि मैं आस्था की जगह सिर्फ उनकी चुदाई करता रहूँ।
मैं उनके बाहर जाते ही हंसने लगा कि आस्था की चुदाई न करूँ, ऐसा कैसे हो सकता है। खैर दोस्तो, होना क्या था, शनिवार को मौका मिला और मैंने इस बार आस्था का भी बैंड बजा डाला। दबा कर चोदा साली रांड को ! समय के साथ मैं माहिर होता गया और अब जब भी घर आता हूँ तो माँ बेटी दोनों की चूत को शांत करता हूँ। आंटी को तो मेरे और आस्था का पता है मगर आस्था मेरे और उसकी माँ की चुदम-चुदाई के बारे में नहीं जानती। Antarvasna
मेरे घर वाले जब इन्दौर में जब सेटल Hindi Sex Stories हुए तो मुझे पापा ने होस्टल में डाल दिया। होस्टल में रह कर मैंने बीएससी की पढ़ाई पूरी की थी। मेरे होस्टल के पास ही पापा के एक दोस्त रहते थे, पापा ने उन्हें मेरा गार्जियन बना दिया था। वो अंकल करीब ५७-५८ साल के थे। उनका बिजनेस बहुत फ़ैला हुआ था। एक तो उन्हें बिजनेस सम्हालना और फ़िर टूर पर जाना… उन्हें घर के लिये समय ही नहीं मिलता था। आन्टी नहीं रही थी… बस उनके दो लड़के थे, जो बिजनेस में उनका साथ देते थे। घर पर वो अकेले रहते थे।
उन्होने घर की एक चाबी मुझे भी दे रखी थी। मैं कम्प्यूटर के लिये रोज़ शाम को वहां जाती थी… अंकल कभी मिलते…कभी नहीं मिलते थे… उस दिन मैं जब घर गई तो अंकल ड्रिंक कर रहे थे और कुछ काम कर रहे थे… मैं रोज़ की तरह कम्प्यूटर पर अपने ईमेल चेक करने लगी…
आज अंकल मुझे घूर रहे थे… मुझे भी अहसास हुआ कि आज …अंकल कुछ मूड में हैं…
“मीनू मुझे लगता है तुम्हें कम्प्यूटर की बहुत जरूरत है क्योंकि तुम रोज़ ही कम्प्यूटर प्रयोग करती हो !”
“हां अंकल… पर पापा मुझे अभी नहीं दिलायेंगे…”
“तुम चाहो तो ये कम्प्यूटर सेट तुम्हारा हो सकता है… पर तुम्हे मेरा एक छोटा सा काम करना पड़ेगा…” सुनते ही मैं उछल पड़ी…
“सच अंकल… बोलो बोलो क्या करना पड़ेगा…” मैं उठ कर अंकल के पास आ गई।
“कुछ खास नहीं… वही जो तुम पहले कितनी ही बार कर चुकी हो…”
“अरे वाह अंकल …… तब तो कम्प्यूटर मेरा हो गया……” मैं चहक उठी।
“आओ… उस कमरे में…”
मैं अंकल के पीछे पीछे उनके बेड रूम में चली आई। उन्होने अन्दर से रूम को बन्द करके कुन्डी लगा दी। मुझे लगा कि अंकल कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं करने वाले हैं। मेरा शक सही निकला।
उन्होने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा “मीनू… मैं बरसों से अकेला हूं… तुम्हें देख कर मेरी मर्दों वाली इच्छा भड़क उठी है… प्लीज़ मेरी मदद करो…”
“अंकल… पर आप तो मेरे पापा के बराबर है…” मैंने कुछ सोचते हुए कहा। एक तो मुझे कम्प्यूटर मिल रहा था …… पर अंकल ने ये क्यों कहा कि तुम पहले कितनी ही बार कर चुकी हो… अंकल को कैसे पता चला।
“सुनो मीनू … तुम्हे मुझे कोई खतरा नहीं है… क्योंकि अब मेरी उमर नहीं रही… और फिर मेरा घर तो तुम्हारे लिये खुला है…तुम चाहो तो तुम्हारे दोस्त को भी यहा बुला सकती हो”
मैं समझ गई कि अंकल ये सब पता चल चुका है… अचानक मुझे सब याद आ गया… शायद अंकल को मेरा ईमेल एड्रेस और पासवर्ड मिल गया था…जो गलती से मेज पर ही लिखा हुआ छूट गया था।
“अंकल… मेरा मेल पढ़ते है ना आप…” अंकल मुस्करा दिये। मैं उनकी छाती से लग गई।
” थैंक्स मीनू…” कह कर उन्होंने मेरे चूतड़ दबा दिये। मैंने अपने होंठ उनकी तरफ़ बढ़ा दिये… उन्होने मेरे होंठो से अपने होंठ मिला दिये… दारू की तेज महक आई… अंकल ने मेरी जीन्स ढीली कर दी… फिर मैंने स्वयं ही झुक कर उतार दी… टोप अपने आप ही उतार दिया। अंकल ने बड़े प्यार से मेरे जिस्म को सहलाना शुरु कर दिया। मेरे बोबे फ़ड़क उठे… ब्रा कसने लगने लग गई… पेंटी तंग लगने लगी… पर मुझे कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ी… अंकल ने खुद ही मेरी पुरानी सी ब्रा खींच कर उतार दी और पैंटी भी जोश में फ़ाड़ दी।
“अंकल ये क्या… अब मैं क्या पहनूंगी…” मैंने शिकायत की।
“अब तुम मेरी रानी हो… तुम ये पहनोगी… नही… मेरे साथ चलना… एक से एक दिला दूंगा……” अंकल जोश में भरे बोले जा रहे थे। मुझे नंगी करके अंकल ने बिस्तर पर लेटा दिया। मेरे पांव चीर दिये और मेरी चूत पर अपने होन्ठ लगा दिये। मेरी चूत में से पानी निकलने लगा… चुदने की इच्छा बलवती होने लगी। मेरा दाना भी फ़ड़कने लगा… अंकल जीभ से मेरे दाने को चाट रहे थे… साथ में जीभ चूत में भी अन्दर जा रही थी। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। अब अंकल ने मेरे पांव और ऊपर उठा दिये…मेरी गाण्ड ऊपर आ गई… उन्होने मेरी चूतड़ की दोनो फ़ांके अपने हाथों से चौड़ा दी। और गाण्ड के छेद पर अपनी जीभ घुसा दी और गाण्ड को चाटने लगे। मुझे गाण्ड पर तेज गुदगुदी होने लगी।
“हाय अंकल… बहुत मजा आ रहा है…”
कुछ देर गाण्ड चटने के बाद उनके हाथ मेरे बदन की मालिश करने लगे…
अब मैं अंकल से लिपट पड़ी…उनकी कमीज़ और दूसरे कपड़े उतार फ़ेंके। उनका बदन एकदम चिकना था… कोई बाल नहीं थे… गोरा बदन… लम्बा और मोटा लण्ड झूलता हुआ। सुपाड़ा खुला हुआ …लाल मोटा और चिकना। मैंने अंकल का लण्ड पकड़ लिया और दबाना शुरू कर दिया। अंकल के मुह से सिसकारी निकलने लगी।
“आहऽऽऽ मीनू… कितने सालों बाद मुझे ये सुख मिला है… हाय… मसल डाल…”
मैंने अंकल का लण्ड मसलना और मुठ मारना चालू कर दिया। वो बिस्तर पर सीधे लेट गये उनका लण्ड खड़ा हो चुका था… मेरे से रहा नहीं गया… मैं उनके ऊपर बैठ गई और चूत के द्वार पर लण्ड रख दिया। मैंने जोश में जोर लगा कर सुपाड़ा को अन्दर लेने की कोशिश करने लगी… पर लण्ड बार बार इधर उधर मुड़ जाता था… शायद लण्ड पर पूरी तनाव नहीं आया था।
“अंकल……ये तो हाय…जा नहीं रहा है…” मैं तड़प उठी…
” बस ऐसे ही मुझे रगड़ती रहो… लण्ड मसलती रहो…।” मैं अंकल से ऊपर ही लिपट पड़ी और चूत को उनके लण्ड पर मारने लगी। पर वो नहीं घुस रहा था। मैं उठी और उनके लण्ड को मुख में ले कर चूसने लगी… उन्के लण्ड मे बस थोड़ा सा उठान था। सीधा खड़ा था पर नरम था… अंकल अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे मुख को ही चोदने लगे। मैंने उनका सुपाड़ा बुरी तरह से चूस डाला और दांतो से कुचला भी… नतीजा… एक तेज पिचकारी ने मेरे मुख को भिगा दिया…अंकल ज्यादा सह नहीं पाये थे। अंकल जोर लगा लगा कर सारा वीर्य मेरे मुख में निकाल रहे थे। मैंने कोशिश की कि ज्यादा से ज्यादा मैं पी जाऊं। मैं उनका लण्ड पकड़ कर खींच खींच कर रस निकालने लगी… अंकल का सारा माल बाहर आ चुका था। उनका सारा जोश ठंडा पड़ चुका था… उनका लण्ड और भी ज्यादा मुरझा गया था। और वो थक चुके थे।
मैं पलंग से उतर कर नीचे बैठ गई और दो अंगुलियों को चूत मे डाल कर अन्दर घुमाने लगी… कुछ ही देर में मैं भी झड़ गई। मैं जल्दी से उठी और बाथ रूम में जा कर मुंह हाथ धो आई… अंकल दरवाजे पर खड़े थे…
” मीनू… तुम्हे कैसे थैंक्स दूं… आज से ये घर तुम्हारा है…आओ भोजन करें…”
“अंकल… पर आपका तो खड़ा होता ही नहीं है… फिर भी इतना ढेर सारा पानी कैसे निकला…”
“बेटी… बस ये ही तो खड़ा नहीं होता है… इच्छायें तो वैसी ही रहती हैं… इच्छायें शांत हो जाती है तो ही काम में मन लगता है…”
बाहर से नौकर को बुला कर डिनर लगवा दिया… और कहा,” मेरी कार ले जाओ … और ये कम्प्यूटर सेट मीनू बेटी के होस्टल में लगा दो।
मैं खुश थी कि बिना चुदे ही कम्प्युटर मुझे मिल गया। डिनर के बाद मैं होस्टल जाने लगी तो एक बार अंकल ने फिर से मुझे गले लगा लिया।
“अंकल … प्लीज़ आप दुखी मत होईये… आपकी मीनू है ना… आपका पूरा खयाल रखेगी…” अंकल को किस करके मैं होस्टल की तरफ़ चल पड़ी।
अंकल मुझे जाते हुए प्यार से निहारते रहे…… Hindi Sex Stories
मैं जय कुमार कालबाय हूँ और एक बार फिर से नई Antarvasna कहानी लिख रहा हूँ जो एक हकीकत है, आप लोग मानो या ना मानो मुझको कोई फर्क नहीं पड़ता है।
मेरा परिचय एक बार फिर : नाम जय, रंग साफ, कद 5 फीट 8 इन्च, एकदम से स्लिम, दिल्ली में रहता हूँ।
एक बार मैं अपनी ड्यूटी खत्म करके कुन्डली (नरेला) से रात को 11 बजे घर वापिस आ रहा था तो अलीपुर से आगे (बाई पास की तरफ) मुझे एक गाड़ी खड़ी नजर आई। जैसे ही मैं गाड़ी के नजदीक आया तो मैंने आपनी बाइक धीरे की तो गाड़ी के साथ एक महिला खड़ी हुई नजर आई।
मैंने बाइक रोककर पूछा- मैडम, क्या हुआ?
तो उसने कहा- शायद गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो गया है।
मैंने कहा- यहाँ पर तो आसपास कोई पेट्रोल पम्प नहीं है, क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?
तो वो कहने लगी- नहीं, आप जाओ, मैं किसी और से मदद ले लूँगी।
मैंने कहा- मैडम, इतनी रात को कौन आपकी मदद करेगा। और फिर यहाँ तो आसपास कोई भी नजर नहीं आता है बस ट्रकों के अलावा। फिर यहाँ सुनसान इलाका है।
तो वो बोली- कोई बात नहीं ! जो होगा सो देखा जायेगा।
मैंने कहा- नहीं, ऐसे कैसे हो सकता है मैडम।
तो वो कहने लगी- नहीं, कोई बात नहीं, आप जाओ, मैं कुछ ना कुछ कर लूंगी।
तो मैंने कहा- नहीं मैडम। पैट्रोल तो आपको यहाँ नहीं मिल सकता ! हाँ अगर आपके पास कोई बोतल हो तो वो मुझे दो, मैं कुछ इन्तजाम कर देता हूँ।
तो उसने कहा- हाँ, गाड़ी में पानी की बोतल है।
तो मैंने कहा- वो मुझे दे दो।
तो उसने गाड़ी से निकाल कर पानी की खाली बोतल मुझे दे दी और कहने लगी- आपको ज्यादा कष्ट करने की जरुरत नहीं, मैं अपने आप चली जाउँगी।
मैंने कहा- मैडम, इसमें कष्ट की क्या बात है? आदमी ही आदमी के काम आता है।
फिर मैंने उनसे पानी की खाली बोतल लेकर आपनी बाइक का नीचे से पेट्रोल का पाईप निकाल कर बोतल में पेट्रोल भरने लगा तो वो मेरे पास आकर कहने लगी- मैंने सोचा था कि आप पेट्रोल पम्प से पेट्रोल लेने के लिये जाओगे, इसलिये मैंने आपको मना कर दिया था। सॉरी !
मैंने कहा- कोई बात नहीं।
और मैंने पेट्रोल को बोतल में भरकर उनको कहा- आप अपनी गाड़ी का ढक्कन खोलो !
तो उसने गाडी के पेट्रोल टैक का ढक्कन खोल दिया और मैंने बोतल से उसकी गाड़ी में पेट्रोल डाल दिया और फिर दोबारा से बोतल में बाईक से पेट्रोल भरने लगा तो वो भी मेरे पास आकर बात करने लगी। उसने कहा- मेरा नाम वन्दना है !
मैंने अपना नाम जय बताया और बोतल में पेट्रोल भर कर गाड़ी में डाल दिया।
उसके बाद हम दोनों उसकी गाड़ी के पास खड़े होकर बात करने लगे। मुझे उसके साथ बात करते-2 वन्दना के मुँह से शराब की बू आई क्योंकि हम अब काफी नजदीक खड़े होकर बात कर रहे थे।
मैंने कहा- वन्दना जी, आप ड्रिन्क करती हैं क्या ?
तो वन्दना झेंप कर कहने लगी- नहीं तो !
मैंने कहा- फिर आपके मुँह से बू क्यों आ रही है।
वन्दना ने कहा- जय मैं अलीपुर शादी में आई थी और वहाँ अपने दोस्तों के कहने पर थोड़ी सी ले ली और कुछ नहीं।
मैंने देखा कि रात के 12 बज चुके हैं तो मैंने कहा- वन्दना जी, आप अब अपने घर जाइए, मैं भी अपने घर जाता हूँ।
वन्दना कहने लगी- ठीक है !
और मुझे पेट्रोल के पैसे देने लगी तो मैंने मना कर दिया।
तो वन्दना ने कहा- जय, आपके घर पर कौन-2 हैं ?
मैंने कहा- मैं अकेला ही रहता हूँ ! और आप वन्दना जी?
वन्दना ने कहा- जय, मैं रोहिणी में रहती हूँ और मेरे साथ मेरे पति रहते हैं वो ज्यादतर काम के कारण बाहर ही रह्ते हैं।
मैंने कहा- वन्दना जी अब घर चलते हैं !
तो वन्दना ने कहा- जय, अपना फोन नम्बर तो दे दो !
मैंने कहा- किसलिये ?
तो वन्दना ने कहा- क्यों? नहीं देना चाहते?
मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं ! और मैंने अपना फोन नम्बर वन्दना को दिया और हम दोनों चल दिये। बाई पास पहुँच कर हम दोनों ने एक दूसरे को बाय किया और अपने-2 घर चल दिये।
अगले दिन दस बजे वन्दना का फोन आया- जय कहाँ पर हो?
मैंने कहा- अभी तो घर पर हूँ !
वन्दना कहने लगी- आज मुझसे मिल सकते हो ?
तो मैंने कहा- नहीं, आज नहीं ! फिर कभी !तो वन्दना कहने लगी- नहीं, आज आप मेरे घर पर मिलो !
मैंने कहा- नहीं वन्दना जी ! आज मैं नहीं आ सकता !
तो वन्दना कहने लगी- नहीं जय ! आज आपको आना ही पड़ेगा !
मैंने कहा- नहीं वन्दना ! आज नहीं फिर कभी सही ! ओके ?
और मैंने फोन रख दिया। उसके बाद मैं नहाने के लिये चला गया और मैं 15 मिनट के बाद मैं जैसे ही देखता हूँ कि मेरे फोन पर 15 मिस काल हैं वन्दना जी की। मैंने जैसे ही काल किया तो वन्दना बोली- जय आप बात नहीं करना चाहते तो बोल देते !
मैंने कहा- वन्दना जी, मैं तो नहाने के लिये गया था ! तो फोन कैसे उठाता ? मैं तो अपने काम पर जाने के लिये तैयार हो रहा था। मैंने तो आपको पहले ही मना कर दिया था तो आप क्यों बार-2 फोन कर रही हैं?
यह कहकर मैंने फोन रख दिया।
मैं जैसे ही घर से निकला तो वन्दना का फिर से फोन आ गया।
मैंने झुंझलाहट मैं कहा- वन्दना जी, आपको मुझसे क्या चाहिये ? मैं तो आपसे परेशान हो गया ! बोलो, मैं आपके लिये क्या कर सकता हूँ ? बोलो ?
वन्दना कहने लगी- नहीं, आज ही मिलो !
तो मैंने कहा- ठीक है ! अपना पूरा पता दो ! मैं आपसे अभी एक घन्टे बाद आकर मिलता हूँ !
वन्दना ने अपना पता बताया। उसके बाद मैं थोड़ी देर के लिये अपने काए पर गया और उसके बाद रोहिणी, वन्दना के घर, पहुँचकर मैंने घण्टी बजाई तो वन्दना ने दरवाज़ा खोला और देखते ही बोली- जय, आप आ गये ! आओ अन्दर।
वन्दना ने दरवाज़ा बन्द किया और मैं भी वन्दना के साथ अन्दर आ गया।
उसने मुझे बैठने के लिये कहा और मेरे लिये पानी लेकर आई। मैंने पानी पीने के बाद कहा- वन्दना जी, आपको मुझसे क्या काम है जो आप इतना परेशान हैं?
वन्दना ने कहा- जय मैं अपने पति से खुश नहीं हूँ !
मैंने कहा- मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिये?
तो वन्दना ने कहा- मैं आपके साथ सेक्स करना चहाती हूँ !
मैंने कहा- मैं एक काल बोय हूँ और अपने काम की फीस लेता हूँ ! और अपने बारे में वन्दना को सब कुछ बताया तो वन्दना ने कहा- मुझे मन्जूर है, आप जो भी लोगे, मैं देने के लिये तैयार हूँ !
मैंने कहा- वन्दना जी, अब मैं चलता हूँ, ड्यूटी के लिये लेट हो जाउँगा !
तो वन्दना ने कहा- नहीं जय ! आज आप ड्यूटी मत जाओ ! मैं भी अकेली हूँ, दोनों मजा करते हैं !
मैंने कहा- नहीं !
तो वन्दना नाराज होने लगी, कहने लगी- जय, आप मेरे लिये एक दिन की छुट्टी नहीं ले सकते ?
मैंने कहा- नहीं वन्दना जी ! ऐसी कोई बात नहीं ! मैं आपको रात को 10-30 बजे मिलता हूँ ! ड्यूटी खत्म करके आता हूँ !
मेरे इतना कहते ही वन्दना के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और मुझे अपनी बाहों में भर लिया, मैंने भी उनका साथ देते हुए अपने होंठ वन्दना के होंठों पर रख दिये और एक लम्बा सा चुम्बन लिया और बाय करके ड्यूटी के लिये निकल गया।
उसके बाद मैं अपनी ड्यूटी जल्दी खत्म करके जल्दी से निकल गया क्योंकि मैंने अपने रिलीवर को जल्दी आने के लिये बोल दिया था। और मैं 9-00 बजे कुन्डली से निकल गया।
ठीक 9-25 पर मैंने वन्दना के घर पर घण्टी बजाईं तो वन्दना ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और बहुत ही जल्दी से बन्द करके मुझसे लिपट गई और मुझे चूमने लगी।
मैं भी वन्दना का साथ देने लगा। बस फिर क्या था, तूफान तो दोनों तरफ उठ रहा था और हम दोनों इक-दूजे को मसलते रहे और चूमते रहे।
8 से 10 मिनट तक हम दोनों लगे रहे, उसके बाद मैंने कहा- वन्दना जी, कुछ खाने पीने के लिये तो होगा !
वन्दना ने कहा- जय आपने भी क्या बात कर दी? मैंने पहले से ही तैयारी करके रखी हुई है।
बस फिर टेबल पर वन्दना ने सारा समान तुरन्त ही लगा दिया और दो बहुत ही बड़े-बड़े पैग बनाये, हम दोनों ने चियर किया और अपना अपना पैग खत्म किया। दोनों ने एक दूसरे को चूमा और थोड़ा सा खाया जो भी खाने के लिये वन्दना ने रखा था।
और फिर हम दोनों आपस में लिपट गये और एक दूसरे के अंगों को मसलने लगे। 5 से 10 मिनट तक हम दोनों आपस में लिपटे रहे।
फिर मैंने कहा- वन्दना, एक-एक पैग और हो जाये ! पर हल्का-हल्का !
वन्दना बोली- जय यार, आप कम पीते हो क्या?
मैंने कहा- वन्दना, मैं बहुत ही कम लेता हूँ !
तो कहने लगी- ठीक है !
फिर वन्दना ने दो पैग बनाये और फिर वही बड़े-बड़े और हम दोनों ने खत्म किये।
मैं कहने लगा- वन्दना, मुझे बहुत भूख लगी है !
वन्दना ने कहा- हाँ क्यो नहीं ! अभी दो मिनट में खाना लगाती हूँ।
और फिर हम दोनो ने बैठकर खाना खाया। Antarvasna
बारहवीं कक्षा पास करने के -Antarvasna बाद जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया तो वहाँ नई सहेलियाँ बनीं. दो चार दिन में ही उनकी बातें सुन सुनकर मुझे यह एहसास हो गया कि मैं कितने पिछड़े क़िस्म के स्कूल से पढ़ कर आई हूँ. उनकी बातें और अनुभव सुनकर मेरे अन्दर भी किसी से प्यार करने की इच्छा जागृत हो गई, सीधे शब्दों में कहूँ कि मैं चुदवाने के लिए बेताब होने लगी.
कॉलेज में ज्यादातर लड़कियाँ अपनी स्कूटर या कार से आती जाती थीं, मैं और तीन चार अन्य लड़कियाँ ही सिटी बस से कॉलेज आती जाती थीं.
एक दिन कॉलेज से निकलने के बाद मैं बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार कर रही थी कि एक हॉण्डा सिटी कार मेरे पास आकर रुकी, कार अमित अंकल चला रहे थे, अमित अंकल पापा के दोस्त थे और हमारे घर के सामने ही रहते थे.
उन्होंने मुझसे पूछा- घर चलना है?
मेरे हाँ कहते ही उन्होंने कार का दरवाजा खोला, मैं उनके बगल की सीट पर बैठी और थोड़ी ही देर में घर पहुँच गई.
घर पहुँचने के काफी देर बाद तक मेरे जहन से बस और कार के सफ़र का फर्क निकल नहीं पा रहा था, मैं सोच रही थी कि कितना सुखी रहता है कार में सफ़र करने वाला! ना धूल मिटटी, ना गर्मी, ठाठ से ए.सी. में बैठकर सफ़र कीजिए.
अब अक्सर यह संयोग होने लगा कि मेरे कॉलेज से निकलने के समय अमित अंकल उधर से गुजरते और मुझे साथ ले लेते. मेरे पापा भी खुश हो जाते कि आज भी वापसी का बस का किराया बच गया.
एक दिन मेरे कार में बैठते ही अमित अंकल ने पूछा- दस पन्द्रह मिनट देर हो जाए तो कोई परेशानी तो नहीं है ना?
मैंने कहा- नहीं अंकल, कोई परेशानी नहीं है!
अमित अंकल ने कार एक रेस्तरां के बाहर रोकते हुए कहा- इसका डोसा बहुत टेस्टी है!
पापा के साथ इस रेस्तरां में आने के बारे तो मैं सोच भी नहीं सकती थी, वो एक नंबर के कंजूस आदमी हैं. खैर, हमने डोसा खाया और घर आ गए.अब हर दूसरे चौथे दिन हमारा इसी तरह कहीं खाने पीने का प्रोग्राम होने लगा. एक दिन रेस्तरां में कॉफ़ी पीते पीते अमित अंकल बोले बहुत दिनों से पिक्चर देखने का मन हो रहा है, अगर कहो तो कल चलें, रानी मुखर्जी की नई फिल्म लगी है.
मैंने कहा- कल कब?
अंकल ने कहा- कॉलेज बंक करके, तुम्हारे घर किसी को पता भी नहीं चलेगा.
कुछ अंकल के अहसान, कुछ नई उमंग और कुछ अनजानी सी चाहत ने मेरे मुँह से हाँ निकलवा दी.
अगले दिन तय कार्यक्रम के हिसाब से हम मिले और पिक्चर देखने सिनेमा हॉल में पहुँच गए. इंटरवल तक आराम से पिक्चर देखी और बातचीत करते रहे. इंटरवल में अमित अंकल पॉप कॉर्न और कोका कोला ले आये. पिक्चर चलती रही और हम पॉप कॉर्न खाते रहे, पॉप कॉर्न लेने के दौरान कई बार एक दूसरे से हाथ छू हो गया तो अमित अंकल ने कहा- मनमीत जब तुम्हारा हाथ छूता है तो मेरे शरीर में कर्रेंट सा दौड़ जाता है, तुम्हें कुछ नहीं होता क्या?
मैं कुछ नहीं बोली तो अमित अंकल ने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर पूछा- मेरे छूने से तुम्हे कुछ नहीं होता क्या?
मैंने धीरे से कहा- होता है!
तो उन्होंने मेरा हाथ चूम लिया, अपने दोनों हाथों में मेरा हाथ छुपा लिया और बोले- यह हाथ मैं कभी नहीं छोडूंगा!
इसके बाद लगभग रोज ही मैं उनके साथ आने जाने लगी और हम लोगों में छूने और चूमने का काम शुरू हो गया.
एक रात को एक बजे मेरे मोबाइल पर अमित अंकल का कॉल आया- क्या कर रही हो?
मैंने कहा- सो रही थी!
तो बोले- मनमीत, हमारी नींद उड़ाकर तुम सो रही हो?
इसके बाद रोज़ रात को हम लोगों की बातचीत शुरू हो गई. बातचीत का विषय चलते चलते यहाँ तक आ पहुँचा कि अमित ( अमित अंकल कहना मैं छोड़ चुकी थी ) बोले- जिस दिन तुम्हारी चूत के गुलाबी होठों को खोलकर अपना लंड उस पर रखूँगा, तुम जन्नत में पहुँच जाओगी.
वास्तविकता यह थी कि अमित मुझे चोदने के लिए जितना बेताब थे मैं चुदवाने के लिए उससे ज्यादा बेताब थी. अमित की कल्पना करके ना जाने कितनी बार उंगली से काम कर चुकी थी.
खैर, जहाँ चाह वहाँ राह!
वीना आंटी ( अमित की पत्नी ) कुछ दिनों के लिए अपने मायके गई. रात को अमित का फ़ोन आया- कल का क्या प्रोग्राम है?
मैंने कहा- कुछ नहीं! आप बताएँ!
तो बोले- कल कॉलेज बंक करो, मैं भी ऑफिस नहीं जाता! मेरे घर आ जाना, दोनों मिलकर अच्छा सा खाना पकायेंगे, खायेंगे.
मैंने कहा- ठीक है, आप अपने घर का पिछला दरवाज़ा खुला रखना, मैं पीछे से आऊँगी.
इतना सुनकर अमित ने फ़ोन काट दिया.
मैंने अपना दाहिना हाथ अपनी चूत पर फेरते हुए कहा- मुनिया रानी ( चूत का यह नाम कॉलेज की लड़कियों ने रखा था) कल तुझे लंड की प्राप्ति होने वाली है! तैयार हो जा!
मैं सुबह थोड़ा जल्दी उठी, अपनी चूत के आस पास के अनचाहे बालों (झांटों) को साफ़ किया, अच्छे से नहा धोकर तैयार हुई, सुन्दर सा सूट पहना और मम्मी से ‘कॉलेज जा रही हूँ’ कहकर घर से निकल पड़ी.
चुदवाने के ख्याल से दिल बल्लियों उछल रहा था, मन में हल्का सा डर भी था लेकिन डर पर चाहत भारी थी. अमित के घर पिछले दरवाज़े पर हाथ रखा तो खुल गया. अन्दर घुसकर दरवाजा बंद किया तो तौलिया लपेटे अमित मेरे सामने आ गए, शायद नहाने जा रहे थे.
पहली बार उन्हें इस रूप में देखकर मैं रोमांचित हो गई. अमित करीब पचास साल के 5 फुट 10 इंच लम्बे हृष्ट-पुष्ट व्यक्ति थे, बालों से भरा उनका सीना उनसे लिपट जाने की दावत दे रहा था.
एक कदम मैं आगे बढ़ी और दो कदम अमित. मैं उनके सीने से लग गई, उन्होंने मेरे माथे पर चूमा, मेरे चूतड़ों को हल्के-हल्के हाथों से दबाने लगे, मैं बेहाल होती जा रही थी.
अमित ने एक एक करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए, संतरे के आकार के मेरे मम्मे देखकर उनकी आँखों में चमक आ गई और मेरी चूत के दर्शन करते ही वो पागल से हो गए और अपने होंठ मेरी चूत पर रखकर चूमने-चाटने लगे. उनके चाटने से मेरी चूत भयंकर रूप से गीली हो गई और चुदने के लिए बेताब हो गई. अमित चूत को चाटते ही जा रहे थे, मैंने उनका तौलिया खींच कर अलग कर दिया. तौलिया हटते ही उनका लंड मुझे दिख गया, अमित का लंड देखते ही मेरी तो गांड ही फट गई और चुदवाने का नशा हिरण होने लगा.
कारण यह कि अमित का लंड करीब 8 इंच लम्बा और काफी मोटा था, मुझे मालूम था कि यह मेरी चूत का भुरता बना देगा.
मैंने अपने जीवन में इससे पहले सिर्फ एक बार लंड देखा था, वो भी अपने पापा का. एक बार रात को मैं बाथरूम जाने के लिए उठी तो देखा मम्मी पापा के कमरे की लाईट जल जल रही थी, उत्सुकता से खिड़की की झिर्री से देखा कि मम्मी नंगी लेटी हुई हैं और पापा अपने लंड पर कंडोम चढ़ा रहे थे. पापा का लंड करीब 4-5 इंच लम्बा रहा होगा. आप ही सोचिये कोई बीस साल की कुंवारी लड़की जो 4-5 इंच का लंड अपनी बुर में लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो, उसे आठ इंच लम्बा अच्छा खासा मोटा लंड दिख जाए तो वो घबरायेगी या नहीं?
मुझे ख्यालों में खोया देखकर अमित बोले- क्या हुआ जान?
मैं कुछ नहीं कह सकी, मैंने कहा कुछ नहीं. अमित मेरे करीब आ गए और मेरा एक मम्मा अपने मुँह में ले लिया तथा दूसरे पर उँगलियाँ फिराने लगे. इस सबसे मुझमें उत्तेजना भर गई. अमित ने अपना एक हाथ मेरी चूत पर रखा और अपनी उंगली अन्दर-बाहर करने लगे.
मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैं चुदासी हो चुकी थी. मैंने कहा- अमित अब मेरे अन्दर समा जाओ!
अमित उठे, मेरी टांगों के बीच आकर अपने लंड का सुपारा मेरी चूत के होठों पर रखा, हल्के से दबाया और सुपारा चूत के अन्दर!
एक झटके में आधा लंड और दूसरे झटके में हल्के दर्द के साथ पूरा लंड मेरी मेरी मुनिया रानी के अन्दर जा चुका था. मैं हैरान थी कि जिस लंड को मैं देखकर डर रही थी वो कितनी आसानी से मुझे चोद रहा था.
करीब आधे घंटे तक चोदने के बाद अमित उठे और अपने लंड पर कंडोम चढ़ाकर फिर जुट गए.
उस दिन अमित ने मुझे तीन बार चोदा और उसके बाद सैकड़ों बार!
आज मैं छब्बीस साल की हो चुकी हूँ, अमित से चुदते-चुदते छः साल हो चुके हैं और शायद बाकी ज़िन्दगी भी अमित से ही चुदवाना पड़े क्योंकि कंजूस प्रवृति के मेरे पापा शायद मेरी शादी कभी नहीं कर पायेंगे. बिना दहेज़ के शादी होगी नहीं और दहेज़ मेरे पापा देंगे नहीं!
मुझे क्या!
अमित अंकल जिंदाबाद!!
खाओ पियो चौड़े से, चूत चुदाओ लौड़े से! Antarvasna
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