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देवर ने मेरी चूत Hindi Porn Stories के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…
“स्सीईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईई ईईईई बस करो स्स्सीईईई देवर जी ब्ब्ब्स्स करो!” मैं बुदबुदाई.
देवर ने दाने को छोड़ा और जीभ से नीचे से ऊपर को चाटने लगा. जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआ आआ निकलता. मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना… मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊँगी.
अपना लण्ड बाहर निकालकर… “क्या बात है भाभी इतनी जल्दी…?” देवर ने कहा.
मैंने उसको बताया कि मल्टिपल डिस्चार्ज की वजह से मेरे साथ ऐसे होता है, तुम्हारे भैया के साथ भी उनके निपटने से पहले मैं दो-तीन बार झड़ जाती हूं.
“फ़िर तो आज सच में मजा आयेगा!” देवर ने कहा.
उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है.
मेरी मैक्सी और ऊपर सरकाकर मेरी एक चूची मुँह में लेकर वो चूसने लगा.
“स्स्स्शाआआ आआआ देवर जी… मत चूऊसो स्सीईईई.”
देवर ने मेरी चूची छोड़ दी और मेरे ऊपर से उतर कर बगल में लेटकर बोला- ठीक है भाभी! तुम मेरे ऊपर आओ और अपने हिसाब से जैसे चाहो वैसे करो…
मैं पलट कर उसके ऊपर आ गई. दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई. उसके लण्ड के नीचे के मोटे हिस्से से सरक कर जैसे ही टांके लगे हिस्से के पास पहुंचते ही चूत का मुँह सिकुड़ जाता और ऊपर सरकने पर चूत का छेद फ़िर से फ़ैलने लगता और सटक से लण्ड बाहर निकलने पर छेद फ़िर सिकुड़ जाता. फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मजा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा.
दर्द के बारे में बताने पर देवर मुझे उसी पोज में अपने ऊपर लिटा कर खुद ही नीचे से धक्के मारने लगा.
“आआआ स्स्सीईईई… ऊओ ओ ओ ओ स्स्सीईईई…”
देवर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
“हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईई ईईईई!” मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई.
देवर ने मुझे अपने ऊपर से उतार कर साइड में लिटाया और मेरे ऊपर आकर बारी बारी से मेरी चूचियाँ चूसने लगा. दस पन्द्रह मिनट में बाद फ़िर से मेरी कामवासना जागी तो देवर ने लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ कर मेरी चूचियाँ चूसते हुये अन्दर घुसे लण्ड पर झटके मारने लगा.
देवर ने पूछा- मजा आ रहा है भाभी…?
“कभी कभी आ रहा है, जब वो अन्दर टकरा रहा है!” मैंने कहा.
देवर ने बेड पर पलटकर मुझे उल्टा कर घोड़ी बना कर पीछे से घोड़ा बनकर पेलना शुरू किया.
यह स्टाइल बहुत गजब का था, मेरे पति ने कभी भी इस तरह नहीं किया था. इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख कर ही चोदा था. दूसरे तीसरे धक्के में ही मेरा चिल्लाना शुरू हो गया. एक तो देवर के लण्ड पर टांके की वजह से दो भागों में बंटा होने के कारण हर बार लगता था जैसे एक के बाद एक दो लण्ड बारी बारी से अन्दर बाहर हो रहे हों, दूसरा पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही मुँह से स्स्सीईईई हाआआ निकल जाता.
हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी. लगातार आधा घन्टा देवर ने मुझे इसी पोज में चोदा… इतना जबरदस्त मजा आने के बाद भी मैं झड़ी नहीं.
देवर का पसीना मेरी पीठ के ऊपर टपकने लगा. देवर ने मेरी मैक्सी निकाल कर मुझे नंगी कर बेड से उतार कर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुका कर खड़ा किया, मेरा एक पैर उठा कर बेड पर रखा और अपने बदन पर पहनी एक मात्र बनियान निकाल कर मेरे पीछे से आकर मुझे बेड के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखते रहने को कहा. मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ दस बार मेरी चूत को चाटा…
शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था. फ़िर मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर मेरी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे और झुका कर मेरी कमर पकड़ कर सटासट सटासट चोदने लगा.
ओ मां… कितना मजा आ रहा था मैं यहाँ बयान नहीं कर सकती…
जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता.. इससे पहले कि वो धक्का मारकर अन्दर करता… मदहोशी में मैं ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई हा आ आ करते हुये अन्दर लेने लगी. मैं झड़ने वाली थी… मेरा एक हाथ अपने आप उसकी जान्घ पर गया और हर धक्के में उसकी जान्घ को पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचती और पीछे को धक्का मारती… आआआ स्सीईईई देवर जीईई मेरा आआ हो… स्सीईईई हो… आआस्स्सीईई हो… गयाऽऽऽ देवर जीईईईऽ.
मेरे दोनों पैर काम्पने लगे. देवर ने बेड पर रखा मेरा पैर नीचे किया, दोनों पैरों को थोड़ा फ़ासले पर किया और मेरी कमर पकड़ कर पहले तो आहिस्ता आहिस्ता चोदा फ़िर जैसे ही स्पीड में चोदने लगा. मैंने शीशे में देखा मेरी चूत से सफ़ेद सफ़ेद टपक रहा था.
देवर हूं… हूं… हूं की आवाज निकालते हुये जोर जोर के धक्के मार रहा था.. मेरी चूत के दाने पर दर्द होने लगा… इससे पहले कि मैं उसको बताती उसने ओ ओ ओ करते हुये इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे हाथ फ़िसल गये मैं छाती के बल जोर से बक्से के ऊपर पसर गई… मेरी चूत से एक-दो इंच ऊपर हड्डी का हिस्सा बख्से के कोने से टकराया… मैं दर्द के मारे चिल्लाई- उईईई मां मर गई… देवर ने तीन चार और धक्के उसी अवस्था में मारे और पच पच पच पच पच करके अपने वीर्य की पिचकारियाँ मेरी चूत के अन्दर मार दी. जब उसने अपना लण्ड बाहर खींचा तो चूत से पर र र र र्र र्र र्र की आवाज के साथ साथ ढेर सारा वीर्य निकल कर फ़र्श पर गिर गया.
बड़ी मुश्किल से मैं बक्से के ऊपर से उठी… मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा ऊपर बक्से के कोने का निशान पड़ गया था. देवर ने देखा तो उसने मुझे बेड पर लिटाया और हथेली से उस निशान के ऊपर मालिश करने लगा. चुदाई का असल मजा मैंने आज लिया था… भले ही अब चूत में भयंकर दर्द हो रहा था.
मैंने बेड के ऊपर पड़ी मैक्सी से पहले अपनी चूत साफ़ की फ़िर देवर की वीर्य से सनी झांटों और लण्ड को तथा उसके बाद फ़र्श पर टपके वीर्य को साफ़ करने के बाद अलमारी से अपनी दूसरी मैक्सी निकाल कर पहनी.
देवर ने अपनी बनियान पहन कर नीचे लुन्गी लपेटी और बेड पर बैठते हुये मुझे अपनी गोद में लेकर मेरे गालों और होंठों को चूमते हुये बोला- भाभी, यह अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगा… पहली बार मैंने असली मजा लिया है. रात को भैया से मशवरा लेने के बाद मैं कल सुबह सुबह निकल जाऊँगा. फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…
मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना.
“सच भाभी…” कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझा कर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्द कर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई.
दूसरे दिन मेरा बेटा साढ़े सात बजे स्कूल चला गया और नौ बजे पति ऑफ़िस. देवर ने पति से झूट बोला कि वो देवरानी के लिये बाजार से कुछ कपड़े खरीद कर दोपहर को निकल जायेगा.
मेरे पति के जाने के बाद देवर ने मुझे किचन से खींच कर बेडरूम में लेजा कर अपनी बगल में लिटाया और मुझे चूमते चाटते, मेरी चूचियों को मैक्सी के बाहर से ही भींचते हुये अपनी और देवरानी के सेक्स के बारे में बताने लगा. उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है… वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है…कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया.
उसके पूछने पर मैंने भी बताया कि मेरे पति सेक्स के मामले में हर तरह से सक्षम हैं… पूरी तरह सन्तुष्ट करते हैं लेकिन देवर की तरह चूत चाट कर, घोड़ी बनाकर अलग अलग तरह से नहीं करते हैं.
बातचीत करते करते देवर ने अभी मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरना शुरू किया ही था कि दरवाजे की घन्टी बज गई. हड़बड़ाहट में भाग कर मैंने बाहर जा कर बरामदे का दरवाजा खोला तो सामने बबलू को देख कर मैं दंग रह गई.
दरवाजे पर खड़े खड़े मैंने पूछा- क्या हुआ..? स्कूल नहीं गया क्या…?
बबलू झुंझला कर बोला- अन्दर भी आने दोगी कि नहीं मम्मी, मेरे सिर में जोर का दर्द हो रहा है!
बोलते हुये वो अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया.
मैंने जाकर उसके सिर पर हाथ रखा… सिर तो ठंडा था.
बबलू बोला- मम्मी, कोई दवाई हो तो दे दो और दरवाजा बन्द कर दो, मैं सोऊँगा.
मैंने उसको एक सेरिडान की गोली दी और बाहर आते हुये उसके कमरे का दरवाजा भी भेड़ दिया.
मेरा मन खराब हो गया गया… मैं देवर के साथ जबरदस्ती वाले अन्दाज में अपने आप को छुड़ाते हुये चिल्ला चिल्ला कर चुदवाना चाहती थी. मैं देखना चाहती थी कि कैसे कोई मर्द किसी औरत को बिना उसकी इच्छा के चोद सकता है और इसमें कितना मजा आता है… पर बबलू तो सारा मजा ही किरकिरा कर दिया.
मैं बरामदे का दरवाजा बन्दकर गहरी सोच में डूब कर खड़ी हो गई कि अब तो कल की तरह चुदवाना भी मुश्किल हो गया है…
तभी देवर मेरे बेडरूम की खिड़की से इशारा कर मेरा ध्यान हटाया और मैं उसके पास चली गई. उसके पूछने पर मैंने उसको अब अपनी योजना के बारे में बताया तो वो हंसने लगा और बोला- क्या भाभी… यह तो अब भी हो सकता है ना.
मैंने पूछा- कैसे?
देवर ने याद दिलाई कि बाथरूम के साइड वाले गेस्ट रूम में जाकर कर सकते हैं. बेटे के कमरे तक वहाँ से कोई आवाज भी नहीं आयेगी लेकिन हमें दोपहर के खाने के बाद बेटे के सोने तक इन्तजार करना पड़ेगा. देवर चाबी लेकर गेस्ट रूम में ठीक ठाक करने चले गये और मैं रसोई का काम निपटाने.
काम निपटाकर मैं बेटे को देखने गई…वो सो रहा था. मैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं. सरसों का तेल और पानी की मल्लम से मैंने बबलू के सिर पर थोड़ी देर मालिश की और उसको ये बोल कर कि मैं थोड़ी देर के लिये पड़ोस में जा रही हूँ, तेरे चाचा यहीं हैं, लौट कर खाना बनाऊँगी…
उसके कमरे दरवाजा खींच कर बाहर आई, किचन में जाकर तेल से सने हाथ को अपनी चूत पर साफ़ किया और हाथ साफ़ कर गेस्ट रूम गई. दरवाजे की कुन्डी बन्दकर देवर से बोली- तुमने अपनी माँ का दूध पिया तो करके दिखाओ?
देवर बेड पर लेटा था, वो उठकर बैठ गया और मेरी तरफ़ हैरानी से देखने लगा.
मैंने एक झटके में अपनी मैक्सी ऊपर उठाकर नीचे कर कहा- देख क्या रहे हो? गांड में दम है तो आओ.
देवर झटके से उठकर मेरी तरफ़ लपका.
मैं भागकर बेड की दूसरी तरफ़ भाग गई. थोड़ी ही देर में मैं देवर की गिरफ़्त में आ गई, बेड पर पटकने के बाद वो मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी टांगे चौड़ी करने की कोशिश करने लगा और मैं अपना बचाव.
काफ़ी देर की उठा पटकी के बाद आखिरकार मैं थक गई थी, मुझ में बचाव करने की हिम्मत नहीं रही और मुझे चित्त कर वो मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया. हंसते हुये अपनी कामयाबी पर गर्व करते हुये उसने मेरी चूत पर लण्ड रख कर जैसे ही धक्का मारा मैंने जोर लगा कर चूत को भींच लिया. पता नहीं उसने कितनी कोशिश की पर लण्ड चूत के अन्दर नहीं कर पाया. दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे.
देवर ने एक बार फ़िर मेरी चूत पर अपना लण्ड सटाया और मेरी चूची को मुँह में भर कर जोर से दांत गड़ा दिये… मैं दर्द के मारे उचक गई… और चूत ढीली पड़ते ही सटट्टाक से लण्ड एक ही बार में पूरा अन्दर घुस गया.
देवर बोला- अब क्या करोगी मेरी जान…
मैंने शांत रहते हुये कहा- अब मैं क्या कर सकती हूँ… जो कुछ करोगे तुम ही करोगे…
मेरे ऐसा बोलते ही वो धीरे धीरे हिलने लगा और मौका पाकर मैं नीचे से एक तरफ़ सरक गई और बेचारा फ़िर से लण्ड अन्दर डालने की कोशिश में लग गया.
यहाँ पर मैं संक्षेप में बता दूँ कि तीन घन्टे तक हमने चुदाई की. पहली बार तो दैहिक शोषण के अन्दाज में, दूसरी बार कामसूत्र के ना जाने कितने आसनों के साथ, तीसरी बार देवर के जाने की वजह से भावुकता में.
देवर की इन तीन बार की चुदाई में मैं शायद सात-आठ बार झड़ी. बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया.
खाना डायनिंग टेबल पर लगाने के बाद मैं बेटे को उठाने गई… उसका चेहरा लाल हो रहा था… उसकी आँखें भी सूजी हुई थी… घबरा कर मैंने उसको उठाया और देवर को बताया. देवर ने खाना खाकर उसको डाक्टर के पास ले चलने को कहा. खाना खाते खाते बबलू का चेहरा ठीक हो गया. थोड़ी देर आराम करने के बाद बबलू अपने चाचा को बस स्टाप तक छोड़कर लौटा.
सारे नजारे एक एक कर मेरी आँखों के सामने घूमकर खत्म होते ही मेरी नजर बबलू पर पड़ी उसकी निगाह मेरे ब्लाउज के ऊपर अटकी थी.
मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी.
मैंने उसको समझाया कि ऐसी बातें किसी को नहीं बताया करते… अच्छी बात नहीं होती है. जा अब अपने कमरे में जा.
“मम्मी प्लीज… एक बार चाचा की तरह करने दो ना… सिर्फ़ एक बार!”
“कर तो लिया था तूने शादी वाली रात… बस अब नहीं…” मैंने कहा.
“नहीं मम्मी वैसे नहीं…बक्से के पास जैसे चाचा ने किया था.”
मेरे लाख डराने और समझाने पर भी वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उससे वादा लिया कि इसके बाद वो इस बारे में कभी सोचेगा भी नहीं और चाचा या अपने बारे में किसी को भी कुछ नहीं बतायेगा… राजू को भी नहीं.
उसके बाद मैं उसके साथ बक्से के पास उसी अवस्था में जाकर खड़ी हो गई. बबलू ने मेरा पेटिकोट ऊपर सरकाया, नीचे बैठकर अपने चाचा की नकल उतारते हुये मेरी चूत को चाटा फ़िर पीछे से कमर पकड़कर चोदने लगा.
थोड़ी देर बाद बोला- मम्मी चिल्लाओ ना जैसे चाचा के साथ चिल्ला रही थी.
अब मैं उसको कैसे समझाती कि उस वक्त तो मजा आ रहा था… मेरे मुँह से अपने आप आवाज निकल रही थी और इस वक्त एक तो ना चाहते हुये मजबूरी में बेटे से चुदवाने की ग्लानि और पतले से लण्ड से कैसे मज़े की आवाज निकल सकती है.
मैंने उससे कहा- बेटे जल्दी कर… बेटे के साथ वैसे नहीं चिल्ला सकते और मैंने जान बूझ कर अपनी चूत को भींच लिया जिस वजह से उसके लण्ड पर दबाव पड़ा और तीन चार धक्कों में ही हा आआ आआआआ करते हुये वो मेरे से चिपक गया.
उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.
मेरी समझ में भी आ गया कि हवस की आग हमेशा आँखें और दिमाग खुले रख आस-पास का मुआयना करने के बाद ही शान्त करने में अकलमन्दी होती है. देवर ने मेरी चूत के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…
“स्सीईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईई ईईईई बस करो स्स्सीईईई देवर जी ब्ब्ब्स्स करो!” मैं बुदबुदाई.
देवर ने दाने को छोड़ा और जीभ से नीचे से ऊपर को चाटने लगा. जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआ आआ निकलता. मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना… मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊँगी.
अपना लण्ड बाहर निकालकर… “क्या बात है भाभी इतनी जल्दी…?” देवर ने कहा.
मैंने उसको बताया कि मल्टिपल डिस्चार्ज की वजह से मेरे साथ ऐसे होता है, तुम्हारे भैया के साथ भी उनके निपटने से पहले मैं दो-तीन बार झड़ जाती हूं.
“फ़िर तो आज सच में मजा आयेगा!” देवर ने कहा.
उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है.
मेरी मैक्सी और ऊपर सरकाकर मेरी एक चूची मुँह में लेकर वो चूसने लगा.
“स्स्स्शाआआ आआआ देवर जी… मत चूऊसो स्सीईईई.”
देवर ने मेरी चूची छोड़ दी और मेरे ऊपर से उतर कर बगल में लेटकर बोला- ठीक है भाभी! तुम मेरे ऊपर आओ और अपने हिसाब से जैसे चाहो वैसे करो…
मैं पलट कर उसके ऊपर आ गई. दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई. उसके लण्ड के नीचे के मोटे हिस्से से सरक कर जैसे ही टांके लगे हिस्से के पास पहुंचते ही चूत का मुँह सिकुड़ जाता और ऊपर सरकने पर चूत का छेद फ़िर से फ़ैलने लगता और सटक से लण्ड बाहर निकलने पर छेद फ़िर सिकुड़ जाता. फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मजा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा.
दर्द के बारे में बताने पर देवर मुझे उसी पोज में अपने ऊपर लिटा कर खुद ही नीचे से धक्के मारने लगा.
“आआआ स्स्सीईईई… ऊओ ओ ओ ओ स्स्सीईईई…”
देवर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
“हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईई ईईईई!” मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई.
देवर ने मुझे अपने ऊपर से उतार कर साइड में लिटाया और मेरे ऊपर आकर बारी बारी से मेरी चूचियाँ चूसने लगा. दस पन्द्रह मिनट में बाद फ़िर से मेरी कामवासना जागी तो देवर ने लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ कर मेरी चूचियाँ चूसते हुये अन्दर घुसे लण्ड पर झटके मारने लगा.
देवर ने पूछा- मजा आ रहा है भाभी…?
“कभी कभी आ रहा है, जब वो अन्दर टकरा रहा है!” मैंने कहा.
देवर ने बेड पर पलटकर मुझे उल्टा कर घोड़ी बना कर पीछे से घोड़ा बनकर पेलना शुरू किया.
यह स्टाइल बहुत गजब का था, मेरे पति ने कभी भी इस तरह नहीं किया था. इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख कर ही चोदा था. दूसरे तीसरे धक्के में ही मेरा चिल्लाना शुरू हो गया. एक तो देवर के लण्ड पर टांके की वजह से दो भागों में बंटा होने के कारण हर बार लगता था जैसे एक के बाद एक दो लण्ड बारी बारी से अन्दर बाहर हो रहे हों, दूसरा पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही मुँह से स्स्सीईईई हाआआ निकल जाता.
हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी. लगातार आधा घन्टा देवर ने मुझे इसी पोज में चोदा… इतना जबरदस्त मजा आने के बाद भी मैं झड़ी नहीं.
देवर का पसीना मेरी पीठ के ऊपर टपकने लगा. देवर ने मेरी मैक्सी निकाल कर मुझे नंगी कर बेड से उतार कर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुका कर खड़ा किया, मेरा एक पैर उठा कर बेड पर रखा और अपने बदन पर पहनी एक मात्र बनियान निकाल कर मेरे पीछे से आकर मुझे बेड के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखते रहने को कहा. मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ दस बार मेरी चूत को चाटा…
शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था. फ़िर मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर मेरी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे और झुका कर मेरी कमर पकड़ कर सटासट सटासट चोदने लगा.
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जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता.. इससे पहले कि वो धक्का मारकर अन्दर करता… मदहोशी में मैं ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई हा आ आ करते हुये अन्दर लेने लगी. मैं झड़ने वाली थी… मेरा एक हाथ अपने आप उसकी जान्घ पर गया और हर धक्के में उसकी जान्घ को पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचती और पीछे को धक्का मारती… आआआ स्सीईईई देवर जीईई मेरा आआ हो… स्सीईईई हो… आआस्स्सीईई हो… गयाऽऽऽ देवर जीईईईऽ.
मेरे दोनों पैर काम्पने लगे. देवर ने बेड पर रखा मेरा पैर नीचे किया, दोनों पैरों को थोड़ा फ़ासले पर किया और मेरी कमर पकड़ कर पहले तो आहिस्ता आहिस्ता चोदा फ़िर जैसे ही स्पीड में चोदने लगा. मैंने शीशे में देखा मेरी चूत से सफ़ेद सफ़ेद टपक रहा था.
देवर हूं… हूं… हूं की आवाज निकालते हुये जोर जोर के धक्के मार रहा था.. मेरी चूत के दाने पर दर्द होने लगा… इससे पहले कि मैं उसको बताती उसने ओ ओ ओ करते हुये इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे हाथ फ़िसल गये मैं छाती के बल जोर से बक्से के ऊपर पसर गई… मेरी चूत से एक-दो इंच ऊपर हड्डी का हिस्सा बख्से के कोने से टकराया… मैं दर्द के मारे चिल्लाई- उईईई मां मर गई… देवर ने तीन चार और धक्के उसी अवस्था में मारे और पच पच पच पच पच करके अपने वीर्य की पिचकारियाँ मेरी चूत के अन्दर मार दी. जब उसने अपना लण्ड बाहर खींचा तो चूत से पर र र र र्र र्र र्र की आवाज के साथ साथ ढेर सारा वीर्य निकल कर फ़र्श पर गिर गया.
बड़ी मुश्किल से मैं बक्से के ऊपर से उठी… मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा ऊपर बक्से के कोने का निशान पड़ गया था. देवर ने देखा तो उसने मुझे बेड पर लिटाया और हथेली से उस निशान के ऊपर मालिश करने लगा. चुदाई का असल मजा मैंने आज लिया था… भले ही अब चूत में भयंकर दर्द हो रहा था.
मैंने बेड के ऊपर पड़ी मैक्सी से पहले अपनी चूत साफ़ की फ़िर देवर की वीर्य से सनी झांटों और लण्ड को तथा उसके बाद फ़र्श पर टपके वीर्य को साफ़ करने के बाद अलमारी से अपनी दूसरी मैक्सी निकाल कर पहनी.
देवर ने अपनी बनियान पहन कर नीचे लुन्गी लपेटी और बेड पर बैठते हुये मुझे अपनी गोद में लेकर मेरे गालों और होंठों को चूमते हुये बोला- भाभी, यह अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगा… पहली बार मैंने असली मजा लिया है. रात को भैया से मशवरा लेने के बाद मैं कल सुबह सुबह निकल जाऊँगा. फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…
मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना.
“सच भाभी…” कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझा कर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्द कर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई.
दूसरे दिन मेरा बेटा साढ़े सात बजे स्कूल चला गया और नौ बजे पति ऑफ़िस. देवर ने पति से झूट बोला कि वो देवरानी के लिये बाजार से कुछ कपड़े खरीद कर दोपहर को निकल जायेगा.
मेरे पति के जाने के बाद देवर ने मुझे किचन से खींच कर बेडरूम में लेजा कर अपनी बगल में लिटाया और मुझे चूमते चाटते, मेरी चूचियों को मैक्सी के बाहर से ही भींचते हुये अपनी और देवरानी के सेक्स के बारे में बताने लगा. उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है… वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है…कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया.
उसके पूछने पर मैंने भी बताया कि मेरे पति सेक्स के मामले में हर तरह से सक्षम हैं… पूरी तरह सन्तुष्ट करते हैं लेकिन देवर की तरह चूत चाट कर, घोड़ी बनाकर अलग अलग तरह से नहीं करते हैं.
बातचीत करते करते देवर ने अभी मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरना शुरू किया ही था कि दरवाजे की घन्टी बज गई. हड़बड़ाहट में भाग कर मैंने बाहर जा कर बरामदे का दरवाजा खोला तो सामने बबलू को देख कर मैं दंग रह गई.
दरवाजे पर खड़े खड़े मैंने पूछा- क्या हुआ..? स्कूल नहीं गया क्या…?
बबलू झुंझला कर बोला- अन्दर भी आने दोगी कि नहीं मम्मी, मेरे सिर में जोर का दर्द हो रहा है!
बोलते हुये वो अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया.
मैंने जाकर उसके सिर पर हाथ रखा… सिर तो ठंडा था.
बबलू बोला- मम्मी, कोई दवाई हो तो दे दो और दरवाजा बन्द कर दो, मैं सोऊँगा.
मैंने उसको एक सेरिडान की गोली दी और बाहर आते हुये उसके कमरे का दरवाजा भी भेड़ दिया.
मेरा मन खराब हो गया गया… मैं देवर के साथ जबरदस्ती वाले अन्दाज में अपने आप को छुड़ाते हुये चिल्ला चिल्ला कर चुदवाना चाहती थी. मैं देखना चाहती थी कि कैसे कोई मर्द किसी औरत को बिना उसकी इच्छा के चोद सकता है और इसमें कितना मजा आता है… पर बबलू तो सारा मजा ही किरकिरा कर दिया.
मैं बरामदे का दरवाजा बन्दकर गहरी सोच में डूब कर खड़ी हो गई कि अब तो कल की तरह चुदवाना भी मुश्किल हो गया है…
तभी देवर मेरे बेडरूम की खिड़की से इशारा कर मेरा ध्यान हटाया और मैं उसके पास चली गई. उसके पूछने पर मैंने उसको अब अपनी योजना के बारे में बताया तो वो हंसने लगा और बोला- क्या भाभी… यह तो अब भी हो सकता है ना.
मैंने पूछा- कैसे?
देवर ने याद दिलाई कि बाथरूम के साइड वाले गेस्ट रूम में जाकर कर सकते हैं. बेटे के कमरे तक वहाँ से कोई आवाज भी नहीं आयेगी लेकिन हमें दोपहर के खाने के बाद बेटे के सोने तक इन्तजार करना पड़ेगा. देवर चाबी लेकर गेस्ट रूम में ठीक ठाक करने चले गये और मैं रसोई का काम निपटाने.
काम निपटाकर मैं बेटे को देखने गई…वो सो रहा था. मैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं. सरसों का तेल और पानी की मल्लम से मैंने बबलू के सिर पर थोड़ी देर मालिश की और उसको ये बोल कर कि मैं थोड़ी देर के लिये पड़ोस में जा रही हूँ, तेरे चाचा यहीं हैं, लौट कर खाना बनाऊँगी…
उसके कमरे दरवाजा खींच कर बाहर आई, किचन में जाकर तेल से सने हाथ को अपनी चूत पर साफ़ किया और हाथ साफ़ कर गेस्ट रूम गई. दरवाजे की कुन्डी बन्दकर देवर से बोली- तुमने अपनी माँ का दूध पिया तो करके दिखाओ?
देवर बेड पर लेटा था, वो उठकर बैठ गया और मेरी तरफ़ हैरानी से देखने लगा.
मैंने एक झटके में अपनी मैक्सी ऊपर उठाकर नीचे कर कहा- देख क्या रहे हो? गांड में दम है तो आओ.
देवर झटके से उठकर मेरी तरफ़ लपका.
मैं भागकर बेड की दूसरी तरफ़ भाग गई. थोड़ी ही देर में मैं देवर की गिरफ़्त में आ गई, बेड पर पटकने के बाद वो मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी टांगे चौड़ी करने की कोशिश करने लगा और मैं अपना बचाव.
काफ़ी देर की उठा पटकी के बाद आखिरकार मैं थक गई थी, मुझ में बचाव करने की हिम्मत नहीं रही और मुझे चित्त कर वो मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया. हंसते हुये अपनी कामयाबी पर गर्व करते हुये उसने मेरी चूत पर लण्ड रख कर जैसे ही धक्का मारा मैंने जोर लगा कर चूत को भींच लिया. पता नहीं उसने कितनी कोशिश की पर लण्ड चूत के अन्दर नहीं कर पाया. दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे.
देवर ने एक बार फ़िर मेरी चूत पर अपना लण्ड सटाया और मेरी चूची को मुँह में भर कर जोर से दांत गड़ा दिये… मैं दर्द के मारे उचक गई… और चूत ढीली पड़ते ही सटट्टाक से लण्ड एक ही बार में पूरा अन्दर घुस गया.
देवर बोला- अब क्या करोगी मेरी जान…
मैंने शांत रहते हुये कहा- अब मैं क्या कर सकती हूँ… जो कुछ करोगे तुम ही करोगे…
मेरे ऐसा बोलते ही वो धीरे धीरे हिलने लगा और मौका पाकर मैं नीचे से एक तरफ़ सरक गई और बेचारा फ़िर से लण्ड अन्दर डालने की कोशिश में लग गया.
यहाँ पर मैं संक्षेप में बता दूँ कि तीन घन्टे तक हमने चुदाई की. पहली बार तो दैहिक शोषण के अन्दाज में, दूसरी बार कामसूत्र के ना जाने कितने आसनों के साथ, तीसरी बार देवर के जाने की वजह से भावुकता में.
देवर की इन तीन बार की चुदाई में मैं शायद सात-आठ बार झड़ी. बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया.
खाना डायनिंग टेबल पर लगाने के बाद मैं बेटे को उठाने गई… उसका चेहरा लाल हो रहा था… उसकी आँखें भी सूजी हुई थी… घबरा कर मैंने उसको उठाया और देवर को बताया. देवर ने खाना खाकर उसको डाक्टर के पास ले चलने को कहा. खाना खाते खाते बबलू का चेहरा ठीक हो गया. थोड़ी देर आराम करने के बाद बबलू अपने चाचा को बस स्टाप तक छोड़कर लौटा.
सारे नजारे एक एक कर मेरी आँखों के सामने घूमकर खत्म होते ही मेरी नजर बबलू पर पड़ी उसकी निगाह मेरे ब्लाउज के ऊपर अटकी थी.
मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी.
मैंने उसको समझाया कि ऐसी बातें किसी को नहीं बताया करते… अच्छी बात नहीं होती है. जा अब अपने कमरे में जा.
“मम्मी प्लीज… एक बार चाचा की तरह करने दो ना… सिर्फ़ एक बार!”
“कर तो लिया था तूने शादी वाली रात… बस अब नहीं…” मैंने कहा.
“नहीं मम्मी वैसे नहीं…बक्से के पास जैसे चाचा ने किया था.”
मेरे लाख डराने और समझाने पर भी वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उससे वादा लिया कि इसके बाद वो इस बारे में कभी सोचेगा भी नहीं और चाचा या अपने बारे में किसी को भी कुछ नहीं बतायेगा… राजू को भी नहीं.
उसके बाद मैं उसके साथ बक्से के पास उसी अवस्था में जाकर खड़ी हो गई. बबलू ने मेरा पेटिकोट ऊपर सरकाया, नीचे बैठकर अपने चाचा की नकल उतारते हुये मेरी चूत को चाटा फ़िर पीछे से कमर पकड़कर चोदने लगा.
थोड़ी देर बाद बोला- मम्मी चिल्लाओ ना जैसे चाचा के साथ चिल्ला रही थी.
अब मैं उसको कैसे समझाती कि उस वक्त तो मजा आ रहा था… मेरे मुँह से अपने आप आवाज निकल रही थी और इस वक्त एक तो ना चाहते हुये मजबूरी में बेटे से चुदवाने की ग्लानि और पतले से लण्ड से कैसे मज़े की आवाज निकल सकती है.
मैंने उससे कहा- बेटे जल्दी कर… बेटे के साथ वैसे नहीं चिल्ला सकते और मैंने जान बूझ कर अपनी चूत को भींच लिया जिस वजह से उसके लण्ड पर दबाव पड़ा और तीन चार धक्कों में ही हा आआ आआआआ करते हुये वो मेरे से चिपक गया.
उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.
मेरी समझ में भी आ गया कि हवस की आग हमेशा आँखें और दिमाग खुले रख आस-पास का मुआयना करने के बाद ही शान्त करने में अकलमन्दी होती है. Hindi Porn Stories
श्री मनोहर सिंह Antarvasna मेहता के द्वारा भेजी गई कहानी को मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ। मुझे कुछ कुछ ऐसा प्रतीत होता है कि जिन घरों में भाभियां होती हैं, तो साथ रहने वाले देवर के मन में कभी ना कभी तो पाप जाग ही जाता है और नतीजन भाभियाँ चुदने लगती हैं, या देवर भाभियों के चक्कर में आ ही जाता है। मैं तो कहती हूँ कि आग तो दोनों ओर ही बराबर सी सुलग उठती है …तो वास्तव में इसमें गलती किसी की नहीं होती। आईये देखे, यहाँ श्री मनोहर सिंह जी क्या बता रहे हैं..
मैं गोवा का निवासी हूँ, मेरी यहाँ में पर्यटकों की आवश्यकताओं से सम्बंधित एक दुकान है। यह घटना मेरी जवानी के समय की है जब मैं मात्र 18 वर्ष का था और कॉलेज में पड़गता था। मेरे भैया की शादी हो चुकी थी। मेरे छोटे होने के कारण भाभी मुझसे बहुत स्नेह रखती थी। यूँ तो वो मुझसे सिर्फ़ पांच साल ही बड़ी थी। सच पूछो तो उसके पृष्ठ-उभार मुझे बहुत लुभाते थे, बस ! लुभाते ही थे … पर भाभी के गोल गोल सुघड़ चूतड़ों को दबाने की इच्छा कभी नहीं हुई। भाभी अधिकतर टुक्की वाला ब्लाऊज पहनती थी। उनके कठोर पर्वत मुझे बहुत सुन्दर लगते थे, पर उन्हें मसलने जैसी इच्छा कभी नहीं हुई। उनके चिकने बदन पर मेरी दृष्टि फ़िसल फ़िसल जाया करती थी, पर ऐसा नहीं था कि मैं उस चिकने बदन को अपनी बाहों में लेकर उन्हें चूम लूँ !
बस हम दोनों एक दूसरे के साथ साथ खेलते थे। मैं उनके साथ खाना बनवाने में मदद करता था, वॉशिन्ग मशीन में कपड़े धो देता था और भी बहुत से काम कर देता था।
एक दिन अचानक ही ये सारी मर्यादायें टूट कर छिन्न भिन्न हो गई। दोनों के मन में काम भावनायें जागृत हो उठी…। उस दिन सारा काम निपटाने के पश्चात हम दोनों यूँ ही खेल रहे थे, कि मन में ज्वाला सुलग उठी। भाभी का टुक्की वाला ब्लाऊज कील में फ़ंस कर फ़ट गया और सामने से चिर गया। भाभी का एक कठोर स्तन उभर कर बाहर निकल आया। मेरी नजरें स्तन पर ज्यों ही पड़ी, मैं देखता ही रह गया, सुन्न सा रह गया। भाभी एक दम सिहर कर दीवार से चिपक गई। मैं अपनी आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर उन्हें देखने लगा। भाभी सिहर उठी और अपने हाथों को अपने नंगे स्तन के ऊपर रख कर छुपाने लगी। मैं धीरे धीरे भाभी की ओर बढ़ने लगा। वो सिमटने लगी। मेरा एक हाथ उसके कठोर स्तनों को छूने के लिये बढ़ गया।
“नहीं भैया, नहीं… मत छूना मुझे !”
“ये… ये… कितने चमक दार, कितने सुन्दर है…”
मेरी अंगुलियों ने ज्यों ही उनके स्तन छुये, मेरे बदन में जैसे आग लग गई। भाभी तुरन्त झुक कर मेरी बगल से भाग निकली, और दूर जाकर जीभ निकाल कर चिढ़ाने लगी। मैं स्तब्ध सा उन्हे देखता रह गया। जाने क्यूँ इस घटना के बाद मैं चुप चुप सा रहने लगा। मेरे दिल में भाभी के लिये ऐसे वैसे वासना भरे विचार सताने लगे। शायद जवानी का तकाजा था, जो मेरे मन को उद्वेलित कर रहा था।
शाम को मैं छत पर टहल रहा था कि भाभी वहां आ गई।
“क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?”
“नहीं … हां वो … ओह क्या बताऊ मैं…!”
“भैया मेरी कसम है तुझे … जो भी हो, अच्छा या बुरा… कह दो। मन हल्का हो जायेगा।”
“बात यह है कि भाभी … अब कैसे बताऊँ…”
“मैंने कसम दी है ना … चलो अपना मुँह खोलो…” शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।
“ओह कैसे कहूँ भाभी,… आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !”
“तो क्या हुआ … तुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?” भाभी की नजरें झुक गई।
“पर शायद… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…”
“ऐ … चुप… क्या कहते हो … मैं तुम्हारी भाभी हूँ…” सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा
“कसम दी थी सो बता दिया … पर मैं क्या करू… मैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी…”
“भैया, अपने मन की कहूँ… प्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँ” भाभी ने भी झिझकते हुये कहा।
“क्या कहती हो भाभी …”
भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दिया… मेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया ? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया ? सभी कुछ गड-मड हो रहा था। मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर आ गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।
“कमल, तुम तो बहुत प्यारे हो, तुम्हें देख कर मुझे तो बहुत प्यार आता है !”
“भाभी…”
“ना भाभी नहीं, दीपाली कहो, मेरा नाम लो …” भाभी ने अपनापन दिखाते हुये कहा।
“दीपा, तुम्हें देख कर जाने मन में क्या क्या होने लगता है, ऐसा लगता है कि तुम्हें प्यार कर लूँ, चूम लूँ…” मैंने अपने होंठों पर जीभ फ़ेर कर अपनी मन की बता दी। मेरे गीले होंठ देख कर भाभी ने भी अपने होंठ थूक से गीले कर लिये और मेरे पर धीरे से झुक गई और इतने नजदीक आ गई कि उसकी गरम सांसें मेरे चेहरे से टकराने लगी।
“गीले होंठ बहुत रसीले होते हैं, एक बार और गीले कर लो !”भाभी ने अपना रस भरा अनुभव बताया।
मैंने अपने होंठ फिर से गीले कर लिये और भाभी ने अपने गीले होंठ मेरे होठों से लगा दिये और मेरा ऊपर का होंठ अपने होंठों से चूसने लगी। इतने नरम और थरथराते होंठ मुझे असीम सुख दे रहे थे। मैं पहली बार गीले नरम होंठों का स्पर्श इतनी मधुरता के साथ महसूस कर रहा था। धीरे धीरे भाभी ने अपनी जीभ भी मेरे मुख में डाल दी। भाभी की एक एक हरकत मुझे वासना की पीड़ा दे रही थी। वो अब मेरे होंठों को बेतहाशा पीने लगी थी। जब वो उठी तो उनकी आंखे वासना से सुर्ख हो गई थी। पर मेरी हिम्मत अब भी उनके स्तनों को दबाने की नहीं हो रही थी।
“बबुआ, कैसा लगा … दिल की मुराद पूरी हुई या नहीं ?” भाभी ने मुझे मुस्कराते हुये पूछा।
मैं शरमा गया। मेरी आंखें झुक गई।
“मेरे भोले देवर, तू तो बुद्धू ही रहेगा !” और वो हंस दी।
इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो चुका था और पजामे में तम्बू जैसा तना हुआ था। भाभी ने मेरा कड़क लण्ड देखा तो उसके मुख से आह निकल गई। वो उठ कर चल दी। आज तो भाभी का मन बाग बाग हो रहा था। रात को भी भाभी ने मुझे खाने के बाद मिठाई भी खिलाई, फिर मेरा चुम्मा भी लिया। अब मेरे दिल में भाभी के शरीर की सम्पूर्ण रचना बस गई थी। रह रह कर मुझे भाभी को चोदने को चोदने का मन करने लगा था। कल्पना में भाभी की रस भरी चूत को देखता, उनके भरी हुई उत्तेजक चूंचियों के बारे में सोचने लगता था। भैया नाईट शिफ़्ट के लिये जाने वाले थे। मैं भी अपने कमरे में कम्प्यूटर पर काम करने लगा। भैया के जाने के बाद भाभी मेरे कमरे में चली आई।
“भाभी, मम्मी-पापा सो गये क्या ?”
“हां सो गये, भैया के जाते ही वे भी सो गये थे, समय तो देखो ग्यारह बज रहे हैं।”
“ओह हाँ, मैं भी अब काम बन्द करता हूँ, भाभी एक चुम्मा दे दो !”
मैं उठ कर बिस्तर पर बैठ गया। भाभी ने लाईट बन्द कर दी और कमरा भी अन्दर से बन्द कर दिया।
“अब चाहे कितनी भी बाते करो, कोई डर नहीं !”
“भाभी आप कितनी सुंदर हैं, आपके प्यारे नरम होंठ बार बार चूमने को मन करता है !”
“सच … तुम भी बहुत अच्छे हो… मेरे दिल में बस गये हो।”
“मुझसे बहुत प्यार करती हो ना …?”
हमारी प्यार भरी बातें बहुत देर तक चलती रहीं। मेरा दिल बहुत खुश था… भाभी और मैं बिस्तर पर लेट चुके थे… भाभी ने अपने गीले होंठ एक बार फिर मेरे गीले होठों से चिपका दिये। मेरा डण्डा तन गया था। भाभी मेरी पीठ को सहलाते हुये सामने पेट पर हाथ ले आई। भाभी के कड़े स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। वो बार बार अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दबा कर रगड़ रही थी। मुझे लगा कि जैसे मैं भाभी को सचमुच में प्यार करने लगा हूँ। मैंने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया,”भाभी सच कहूँ तो मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तुम्हारे बिना अब नहीं रहा जायेगा !”
“आह, मेरे कमल, तुमने तो मेरे दिल की बात की बात कह दी, मैं भी कैसे रह पाऊंगी तुम्हारे बिना… ?!!”
“पर भाभी, बड़े भैया का क्या होगा…?”
“बड़े भैया अपनी जगह है, अपन दोनों को तो बस प्यार करना है सो करते रहेंगे !”
भाभी के हाथ मेरे शरीर पर इधर उधर फ़िसल कर मुझे रोमान्चित करने लगे थे। मेरी छाती पर सर रख कर वो लेट गई थी और प्यार भरी बातें करने लगी थी। क्या वो प्यार की प्यासी थी, या उन्हें शारीरिक तृप्ति चाहिये थी ? पर कुछ भी हो, मैं तो बहुत खुश था। भाभी अपने एक एक अंग को मेरे शरीर के ऊपर दबा रही थी, सिसक रही थी… चुम्बनों से मेरा मुख गीला कर दिया था। Antarvasna
जीजा साली वाइफ एक्सचेंज सेक्स कहानी में मैं अपनी बीवी, साली और उसके पति के साथ भ्रमण पर गए. होटल में हम दोनों साढू एक दूसरे की बीवी की चुदाई करना चाहते थे.
फ्रेंड्स, मैं आज आपको अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ.
आगे बढ़ने से पहले मैं अपना परिचय दे देता हूँ.
मैं अभी 36 साल का हूँ और मेरी बीवी 33 साल की है.
उसका फिगर 34-30-36 का है. वह बड़ी ही कामुक है.
यह जीजा साली वाइफ एक्सचेंज सेक्स कहानी कुछ 4 साल पुरानी उस वक्त की है जब मैं, मेरी बीवी, मेरी साली और उसका पति एक साथ किसी फैमिली फंक्शन में शामिल होने जा रहे थे.
उसी दौरान हमने सोचा कि आते जाते में थोड़ा बहुत कुछ पिकनिक जैसा कर लेते हैं.
यही सब सोच कर हमने एक स्विफ्ट कार बुक की.
उसमें हम 4 लोग थे.
मेरी बीवी वीना और साली रानी ने शादी अटेंड करने के बाद साड़ी ही पहनी हुई थी.
वे दोनों नेट की साड़ियां पहनी थीं और गजब की सेक्सी माल लग रही थीं.
मेरी साली का पति शशिकांत आगे ड्राइवर के बाजू वाली सीट पर बैठा था.
मैं पीछे की सीट पर अपनी बीवी के बाजू में था.
हम लोगों ने अम्बोली में जांघल रिसॉर्ट में दो दिन रुकने का प्लान बनाया हुआ था.
हम लोग अम्बोली लगभग 7 बजे शाम को पहुंचे.
उधर हमें रुकने के लिए एक छोटा सा फ्लैट जैसा कॉटेज मिला.
हमारे दो रूम बुक थे पर उन्होंने बताया कि एक रूम हमको सुबह मिलेगा.
अब हम सभी को यह रात उस एक रूम में ही रुक कर किसी तरह से मैनेज करनी थी.
उस दौरान लगातार छुट्टियां पड़ी थीं तो और कहीं भी रूम भी नहीं मिल रहे थे.
मेरी बीवी और साली के कहने पर हम सबको एक ही कमरे में अड्जस्ट करना पड़ा.
रूम ज्यादा महंगा भी नहीं था तो रूम भी नहीं छोड़ा जा रहा था.
अब मेरी बीवी और साली ने अपने कपड़े बदल लिए.
वे दोनों फर्श पर सोने के लिए राजी हो गई थीं.
मैं और मेरी साली का पति शशिकांत, हम दोनों बेड पर सो गए.
जब रात को लगभग एक बजे मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरी साली और मेरी बीवी दोनों गहरी नींद में सो रही हैं और दोनों के कपड़े थोड़ा ऊपर की ओर हो गए थे.
मेरी बीवी का फिगर तो मैंने आपको ऊपर बता ही दिया है.
अब साली का फिगर भी आपको बता देता हूँ.
मेरी साली रानी का फिगर 36-30-38 का है.
उन दोनों ने शर्ट पहनी हुई थी.
मेरी बीवी ने शर्ट के नीचे लैगिंग्स पहनी थी जबकि रानी ने लोंग स्कर्ट पहना हुआ था.
मैंने जब रात को उन्हें देखा तो दोनों की ढीली-ढाली शर्ट्स ऊपर हो गई थीं जिससे उनके दूध दिखने लगे थे.
मैं रानी के टाइट बूब्स देख कर पागल हो गया.
उसका स्कर्ट भी जांघों तक ऊपर आ गया था.
मैं लंड सहलाते हुए सोच रहा था कि इसके ऊपर चढ़ ही जाऊं.
उसके मादक फिगर देख कर मैं एकदम से पागल हो गया था.
मैं उठा और बाथरूम जाकर आया.
उतने में मैं देखा कि शशिकांत जो मेरे बाजू में सोया था वह नींद में मेरी जगह आ गया था.
मैं उसकी जगह जाकर सो गया.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा तो शशिकांत अपने बरमूडा में हाथ डाल कर लंड हिला रहा था.
मैंने थोड़ा ऊपर को उठ कर देखा तो बेड के नीचे पहले मेरी बीवी वीना सोई थी.
उसकी शर्ट भी लगभग पेट के ऊपर और मम्मों से ठीक नीचे तक आ गई थी.
मेरी आहट सुनकर शशिकांत ने आंख बंद कर लीं और वह सीधा लेट कर सोने की एक्टिंग करने लगा.
इधर मैं अपनी साली रानी की जांघें और उसके कसे हुए दूध देख कर पागल सा हो रहा था.
शशिकांत भी शायद मेरी बीवी वीना के मम्मों को शर्ट के ऊपर देख कर गर्मा रहा था.
मैं फिर से उठ कर बाथरूम गया और वापस आते ही देखा तो शशिकांत दीवार की ओर मुँह करके सो गया था.
मैंने इधर उधर देखा और रानी का स्कर्ट थोड़ा सा और ऊपर कर दिया.
फिर धीरे से उसकी शर्ट के भी एक बटन को खोल दिया जिससे उसका आधा दूध बाहर आ गया.
अब मैं जाकर लेट गया.
पांच मिनट के बाद मैंने सोने का नाटक किया और देखा कि शशिकांत वीना की तरफ देख कर फिर से अपने लंड को सहलाने लगा.
वीना सीधी होकर सो गयी थी, जिससे उसका दूध बाहर लटकने लगा.
यह देख कर शशिकांत पागल हो गया और उसका हाथ तेज तेज चलने लगा.
फिर उससे रहा न गया तो वह बाथरूम में चला गया और उधर मुठ मारने लगा.
जब शशिकांत बाथरूम के अन्दर मुठ मार रहा था.
तब मैंने रानी के स्कर्ट को उठाकर एक बार उसकी चूत में उंगली की और उंगली को सूंघा.
उसकी चूत की महक से मुझे नशा सा चढ़ने लगा.
उतने में ही बाथरूम से निकलने जैसी आवाज आई, तो मैं सोने का नाटक करने लगा.
जल्दबाजी में हुई गड़बड़ी में रानी का स्कर्ट ऊपर किया हुआ वैसे ही रह गया.
अपनी बीवी की खुली चूत देख कर शशिकांत समझ गया कि कुछ गड़बड़ हुई है.
मेरे ख्याल से शशिकांत को समझ आ गया था कि मैंने ही उसकी बीवी की चूत के साथ कुछ किया है.
वह कुछ नहीं बोला और अपनी बीवी की चूत ढक कर मेरे बाजू में आकर सो गया.
उसके कुछ देर बाद मैं भी सो गया कि खामखा में लफड़ा न हो जाए.
सुबह उठ कर हम सब तैयार हो गए.
वीना ने टी-शर्ट और जीन्स पहनी थी.
रानी ने शॉर्ट कुर्ती ओर लैगिंग्स पहनी थी, जिसमें से उसकी जांघें मस्त दिख रही थीं.
मैं कार में पीछे वीना के साथ बैठा था.
वीना के बाजू में रानी थी.
शशिकांत बात करने के बहाने वीना के मम्मों को घूर रहा था.
वापस आते वक़्त मुझे उसकी मनोदशा का पता चल गया था कि इसका बस चलेगा तो यह मेरी बीवी को चोद देगा.
हम सबको कमरे तक पहुंचने में अभी भी एक घंटा का रास्ता तय करना शेष था.
रानी कार में ही सो गयी थी.
मैंने अपने घुटने दर्द होने का बहाना किया और आगे ड्राइवर के बाजू वाली सीट में बैठने का कहा.
शशिकांत राजी हो गया तो मैंने उसको पीछे भेज दिया.
रानी सो रही थी, तो शशिकांत को वीना के बाजू में बैठ जाने के लिए बोल दिया.
वीना भी थकान की वजह से थोड़ी नींद में थी.
कुछ मिनट बाद वह भी गहरी नींद में सो गयी.
मेरी बीवी वीना और रानी दोनों ही भरे बदन की हैं, तो पीछे तीनों के बैठने से वे सब बहुत चिपक कर बैठे थे.
मैं चुपके से शशिकांत को देख रहा था.
वह वीना की जांघ पर हाथ रख कर बैठा था.
कमरे पर पहुंचने में अभी भी 45 मिनट का वक्त बाकी था लेकिन कुहरे की वजह से मैंने ड्राइवर से स्लो चलाने को बोला था.
वीना शशिकांत के कंधे पर सिर रख कर सो गई जिससे उसके बूब्स शशिकांत के हाथ को लग रहे थे.
वीना का हाथ भी शशिकांत की जांघ पर आ गया था.
हम दोनों ने शॉर्ट्स पहने थे.
हम जिस स्पॉट पर गए थे, वहां वॉटर स्पॉट था.
शशिकांत का लंड टाइट हुआ था.
मैंने भी एक तरफ मुँह करके सोने का नाटक करना शुरू किया.
साथ ही मैं उन दोनों की हरकतों को भी देख रहा था.
शशिकांत ने वीना के हाथ को धीरे धीरे से अपने शॉर्ट्स के ऊपर लंड पर ले लिया.
वीना नींद में थी और बाहर का मौसम ठंडा था तो उसने भी लंड की गर्मी पाकर अपने हाथ को शशिकांत के लौड़े पर रख दिया था और शायद लंड को पकड़ लिया था.
थोड़ी देर बाद शशिकांत ने धीरे से अपने शॉर्ट्स को ऊपर किया और वीना के हाथ को अपने शॉर्ट्स में डलवा लिया.
वीना ने पोलो टी-शर्ट पहनी थी.
शशिकांत धीरे से उसकी टी-शर्ट के ऊपर से वीना के एक दूध को रगड़ रहा था.
मैंने देखा कि अभी भी हमारा होटल 30 किलोमीटर दूर था और मौसम के हिसाब से हम को अभी भी 30-35 मिनट का समय लग सकता था.
शशिकांत ने अपने अंडरवियर को साइड करके धीरे से अपना लंड वीना के हाथ में दे दिया और वीना नींद में ही उसे पकड़ कर सोई थी.
इधर रानी भी गहरी नींद में थी.
मुझे भी ये सब देख कर उत्तेजना हो रही थी.
वीना लंड छोड़ कर एक तरफ होकर सो गई.
शशिकांत ने भी अपना लंड अन्दर कर लिया.
मैं सोने का नाटक करता हुआ सब देख रहा था.
शाम के अंधेरे के कारण थोड़ा अंधकार सा हो गया था.
वीना अभी भी सीधी बैठ कर सो रही थी.
शशिकांत ने बैठे हुए ही उसकी ओर मुँह कर लिया था और वह सोने का नाटक करते हुए उसकी जांघों पर हाथ रखे था.
इतने में हमारी कार होटल के नजदीक आ गई थी.
शशिकांत सही होकर बैठ गया.
हम सब कमरे में पहुंचे और मैंने सबको जगा कर उतरने के लिए कहा.
जब हम सब कमरे में पहुंचे, तो होटल वालों ने हमारे लिए उसी रूम में दो डबल बेड्स और लगा कर व्यवस्था कर दी थी.
शशिकांत को मैंने लेडीज को रेडी होने तक ड्रिंक्स के लिए बुलाया.
हम दोनों ने उस दिन रूम में ही ड्रिंक्स लिए.
मैंने शशिकांत को पूरा क्वॉर्टर पिला दिया था, जिससे वह टाइट हो गया था.
अब मैंने उससे कहा कि रानी में जो बात है, वह बात वीना में नहीं है.
ड्रिंक्स के नशे में शशिकांत ने कहा- नहीं, जो कोऑपरेशन वीना देती है … वह बात रानी में नहीं है.
मैंने कहा- तुम झूठ कह रहे हो. रानी एक सेक्सी माल है और फुल कॉपरेटिव है.
हम दोनों ने नशे की टुन्नी में तय किया कि आज इन दोनों को वोदका पिला देते हैं और चैक कर लेते हैं कि कौन सही है.
उसे भी मेरा आइडिया समझ में आ गया.
दरअसल हम दोनों ही एक दूसरे की भावना को समझ गए थे कि आज हम दोनों एक दूसरे की बीवियों को चोदने का मजा ले लेते हैं.
शशिकांत ने मेरी राय से इत्तफाक जताते हुए हामी भर दी और कहा- हां चलो, इनको भी मस्त कर देते हैं.
हम दोनों को अपनी बीवियों को खाने के लिए बाहर ले जाना था.
पर मैंने शशिकांत से कहा कि इनको नहीं ले जाते हैं. बल्कि इनको कोल्डड्रिंक की दो लीटर की बोतल में दारू मिक्स करके बड़ा पैग बना कर पिला देते हैं और रात को मजा लेते हैं.
शशिकांत राजी हो गया.
अब हम दोनों यह सब सामान लेकर होटल आ गए.
जब होटल पहुंचने को हुए, तब मैंने बाहर से ही वीना को और शशिकांत ने रानी फोन करके बोला कि यहां सब बंद हो रहा है. हम लोग खाने पीने का सामान पार्सल बनवा कर ला रहे हैं.
रानी ने ओके बोल दिया.
जब हम कमरे में पहुंचे तो रानी का मुँह किसी बात पर फूला हुआ था.
शायद वह डिनर के लिए बाहर जाना चाहती थी, मगर हम दोनों के न होने के कारण वह जा नहीं सकी थी.
शशिकांत ने उससे कहा- रानी अब मान भी जाओ. लो तुम स्पेशल वाली कोल्डड्रिंक पियो … अन्दर तक झनझनी आ जाएगी.
यह कह कर उसने रानी को आंख मार दी.
वह भी मुस्कुरा दी.
मैं समझ गया कि रानी ड्रिंक करती है और इसलिए ही वह मुस्कुराई है.
अब रानी और वीना ने कोल्डड्रिंक पीनी शुरू की.
वीना को कोल्डड्रिंक का टेस्ट कुछ अलग सा लगा, तो रानी ने उससे कह दिया- बढ़िया स्वाद है. आप बिंदास पियो.
वे दोनों चिप्स ख़ाती हुई कोल्डड्रिंक पीने लगीं.
उन दोनों में मस्ती चढ़ने लगी.
उन्हें थोड़ा नशा सा महसूस होने लगा था.
मैं रानी के पास बैठा था और शशिकांत वीना के पास.
उन दोनों ने ब्रा नहीं पहनी थी.
वे दोनों लेग्गिंस और ढीली सी टी-शर्ट में थीं.
मैं ओर शशिकांत सिगरेट पीने लगे.
मैंने खुल कर कहते हुए कहा- शशिकांत, तुम वीना के साथ इन्जॉय कर सकते हो … मैं भी रानी के साथ मस्ती कर लूँगा.
उसने ओके कहा.
अब हमारे बीच सब खुलासा हो गया था कि हम दोनों वाइफ स्वाइप करने को राजी हैं.
हम दोनों अन्दर गए.
देखा तो वे दोनों नशे में थीं.
मैं रानी के साथ बैठ गया और शशिकांत वीना के साथ बैठ गया.
शशिकांत बची हुई ड्रिंक्स वीना को पिला रहा था और मैं रानी को.
जब रानी पी रही थी तो मैंने अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया और सहलाने लगा.
उसने नशे में कुछ विरोध नहीं किया तो मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा और उसकी चूत को कुरेदने लगा.
उसने अब भी कुछ नहीं कहा.
मैंने उसे धीरे से किस किया और शशिकांत को भी इशारा कर दिया.
उसने बॉटल नीचे रख कर वीना को किस किया और अपना हाथ उसकी टी-शर्ट में डाल कर उसके मम्मों को मसलने लगा.
मैंने अपनी टी-शर्ट को निकाल दिया और रानी से कहा- बहुत पसीना निकल रहा है.
वह हंस दी.
मैं अब सिर्फ़ अंडरवियर में था.
मुझे देख कर शशिकांत ने भी अपना सब निकाल दिया.
वह भी सिर्फ़ अंडरवियर में हो गया.
हम दोनों ने आंखों में इशारा किया और एक दूसरे की बीवियों को बेड पर ले गए.
मैंने एक सिगरेट सुलगाई और रानी को दो पफ पिलाए.
उधर शशिकांत ने भी वीना को दो पफ पिलाए, जिससे नशा और चढ़ गया.
मैं रानी किस करने लगा और शशिकांत ने वीना को स्मूच करना शुरू कर दिया.
शशिकांत अब आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था.
उसने वीना को चूमते हुए उसे पूरी नंगी कर दिया.
साथ ही उसने खुद को भी पूरा नंगा कर दिया.
मैं उसका लंड देख कर दंग रह गया.
उसका लंड काला था और 8 इंच से कुछ ज्यादा लंबा व मोटा था.
जबकि मेरा सात इंच का था.
हालांकि मेरा लंड शशिकांत के लंड से मोटा था.
मैंने भी रानी के कपड़े निकाल दिए और देखा कि उसने अपनी चूत को पूरा साफ किया हुआ था.
मैंने बिना कुछ सोचे अपना मुँह रानी की चूत में लगा दिया.
उसकी चूत पूरी रसीली थी.
मैं समझ गया कि यह भी चुदासी है.
वह मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी.
उधर शशिकांत वीना के मम्मों को मसल कर चूस रहा था.
उसने अपना लंड वीना की चूत पर रख दिया और रगड़ने लगा.
वीना चुदासी होकर उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
इधर रानी की चूत चाटने के बाद मैंने उसकी चूचियों का रुख किया.
रानी ने पलट कर मेरा लंड मुँह में ले लिया और लंड चूसने लगी.
मेरे लंड को चूसने के साथ साथ वह मेरे दोनों बॉल्स भी चूस रही थी.
मैं इसी सुख के लिए वीना से शादी से ही उसके पीछे पड़ा था.
अब रानी उठ खड़ी हुई और वह अपनी टांगों को फैला कर अपनी चूत में मेरे मुँह घुसवा कर चटवाने लगी.
मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में पेल दी.
वह मस्ती में आह आह करने लगी और मेरे मुँह में ही झड़ गयी.
उधर वीना ने शशिकांत का लंड अपनी चूत में ले लिया था और उसे अपने सीने से चिपका कर चुदवाना शुरू कर दिया था.
वह अति उत्तेजित होकर जोर जोर से चीखने लगी थी- आह चोदो … मजा आ गया … आह और जोर से चोदो!
मैं भी मूड में आ गया और मैंने भी रानी की चूत में लंड घुसेड़ दिया.
रानी भी कामुक सिसकारियां निकालने लगी- आअह हम्म्म डार्लिंग प्लीज … चोदो … हम्म्म आअह.
हम दोनों ने एक दूसरे की बीवियों को हचक हचक कर देर तक चोदा.
शशिकांत ने अपने लंड का माल वीना की चूत में ही छोड़ दिया और वह उसके ऊपर ही लुड़क गया.
फिर जब मैं झड़ रहा था तो रानी ने मुझसे लंड निकलवाने का कहा.
उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया.
वह मेरे लंड की रबड़ी को खा गई और उसने लंड चाट कर साफ कर दिया.
हम चारों बिना कपड़ों के ही लेट गए.
मैंने रानी की चूत पर स्केच से लिख दिया- राजा के लिए रानी की चूत.
शशिकांत ने लिखा कि वीना की चूत शशिकांत के लिए!
हम सभी ने एक एक पैग और लिया और सिगरेट पीकर वैसे ही नंगे सो गए.
एक घंटा बाद फिर से सेक्स का नंगा नाच शुरू हो गया.
जीजा साली वाइफ एक्सचेंज सेक्स का हम लोगों एक एक राउंड और लिया.
इस राउंड में मैंने अपना माल रानी की चूत में ही छोड़ दिया.
शशिकांत ने भी अपना माल वीना की चूत में टपका दिया था.
अपनी अपनी बीवियों की चूत में गैर मर्द के लंड का पानी टपकने का यह नतीजा निकला कि आज मेरी बेटी सांवली है और रानी का बेटा गोरा है.
हम चारों को बहुत मजा आया तो हम लोग तीन दिन तक वहीं रुके रहे.
उन तीन दिनों में हमें पूरा चुदाई का खेल किया.
दोनों लेडीज को सैंडविच चुदाई का मजा भी दिया.
रानी ने वीना को लंड चूसना सिखा दिया.
उस सबका वर्णन मैं आपको अपनी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.
जीजा साली वाइफ एक्सचेंज सेक्स कहानी पर आप अपने विचार हमें जरूर भेजें.
प्यारे पाठको, मेरा Sex Stories नाम विनय है। मैंने अन्तर्वासना की हर कहानी पढ़ रखी है। आपका अहसान चुका रहा हूँ अपनी सच्ची कहानी भेज कर! कृपया मुझे उत्साहित करें! यह मेरी पहली कहानी है, अच्छी लगे तो तो अपने विचार देना।
यह बात आज़ से दो साल पहले की है जब मैं नौकरी नहीं करता था और फ़्री रहता था। मेरी एक मौसी की लड़की जिसको देख कर मुझे कुछ कुछ होता था, हम दोनों काफ़ी घुले मिले हुए थे। इसी लिए हम एक दूसरे की सभी बातें जानते थे। मैं उसके स्तनों और चूतड़ों को देख कर अपने लण्ड से खूब पानी निकालता था और उसके करीब जाने की कोशिश करता था, बार बार उसके बूब्स से टकराता था । वो भी यह बात समझ चुकी थी इसलिए मुझे भी किसी मौके की तलाश थी और एक दिन मुझे मौका मिल गया।
मेरी मौसी ने कहा कि वो सब चार पाँच दिन के लिए बाहर जा रहे हैं लेकिन गौरी की परीक्षा है, इसलिए वो अकेली है, तुम रात को उसके पास सो जाना!
मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ और उसके घर पर ठीक दस बजे पहुँच गया। उसने लम्बी स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। पहले हमने बहुत सारी बातें की फ़िर मैं उसके करीब आ गया। हम सोफ़े पर बैठे थे। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे धीरे उसके साथ मस्ती करने लगा।
तभी वो मेरे गले से लग गई। जैसे ही मैंने उसे पकड़ा, वो अपने आप को छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। क्योंकि मैं यह मौका नहीं खोना चाहता था। मैं उसके गले पर चूमने लगा। अब वो भी मुझ से चिपक गई।
फ़िर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा।
वो कहने लगी- विनय! कुछ हो गया तो?
मैंने कहा- तुम डरो मत! मैं पूरे इन्तज़ाम के साथ आया हूँ, कुछ नहीं होगा।
फ़िर मैं उसे उठा कर कमरे में ले गया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए, सिर्फ़ चड्डी पहने रखी। वो काफ़ी डरी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमा और उसके ऊपर आ कर उसके गले और होंठों पर चूमने लगा। मैं एक हाथ से उसके स्तन मसले जा रहा था। अब उसे भी मज़ा आने लगा था।
फ़िर मैंने उसकी स्कर्ट जांघों से ऊपर कर दी और उसकी जांघें चूमने लगा। उसने सफ़ेद रंग की चड्डी पहनी थी। वो भी गर्म हो चुकी थी। मैंने उसकी स्कर्ट और टॉप दोनों उतार दिए।
उसका दूध जैसा गोरा और चिकना बदन देख कर मेरा लण्ड और सख्त हो गया। क्या गज़ब का फ़िगर था 36-28-34, मैंने उसकी ब्रा से उसके बूब्स को आजाद कर दिया और एक हाथ से उसकी चड्डी उतार दी। अब हम दोनों नंगे थे और पूरी रात हमारी थी।
मैं पागलों की तरह उसके बूब्स चूस रहा था और वो सिस्कारियाँ भर रही थी। फिर मैंने उसकी चूत में उंगली की, चूत पहले से बहुत गीली हो चुकी थी। मैंने नीचे आकर उसकी चूत को चूमा, वो तड़प उठी, मैंने उसकी चूत का दाना अपने मुंह में ले लिया, वो गांड हिला हिला कर चूत चटवाने लगी।
फिर मैंने भी अपना लण्ड उसके मुंह के पास कर दिया। उसने बिना समय गँवाए लण्ड को पकड़ कर अपने होठों में दबा लिया और चूसने लगी। अब हम 69 की अवस्था में थे, मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था और चोद रहा था और वो मेरा लण्ड चूस रही थी।
फिर वो बोली- प्लीज़ विनय! अब नहीं रहा जाता! कुछ करो!
मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया और लण्ड उसकी चूत पर रख कर एक झटका दिया, वो चिल्लाई लेकिन मैंने उसके होंठ अपने होंठों में दबा लिए। उसकी चूत कुंवारी थी। फिर मैंने एक और झटका दिया, अबकी बार मेरा लण्ड उसकी चूत फाड़ता हुआ पूरा समां गया और उसकी आँखों में आंसू आ गए।
फिर मैंने धीरे धीरे उसके स्तन चूसे और धीरे धीरे झटके दिए। मैंने देखा अब उसे भी मजे आ रहे हैं तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी। अब मैं उसको पूरी तेजी से चोद रहा था और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।
अब हम झड़ने वाले थे, मैंने अपना लण्ड निकल के उसकी गांड पर रख दिया और हिलाने लगा और तभी मैं झड़ गया और सारा पानी उसकी गांड पर निकाल दिया क्योंकि मेरा अगला कार्य उसकी गांड मारना ही था इसलिए मैंने उसकी गांड चिकनी कर दी थी।
इस बीच वो भी दो बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड चोदी। साली बड़ी ही कसी थी!जो मजा मुझे गौरी के साथ आया वो आज तक नहीं आया। उसके बाद हमने 3-4 दिन तक रात में 5-5 बार चुदाई की, लेकिन अब उसकी शादी हो चुकी है और मेरी जान अब मुझसे बहुत कम मिल पाती है।
प्यारे पाठको! मेरी कहानी के बारे में मुझे अवश्य लिखें! Sex Stories
मैं आज आप सबको यह सच्ची कहानी बता Sex Stories रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी साली को चोदा।
यह उन दिनों की बात है जब मेरा रिश्ता पक्का हुआ था। मेरी बीवी की 3 बहने हैं। एक बड़ी ओर दो छोटी।
सगाई के बाद मैं एक बार किसी काम से अपनी बड़ी साली के घर पर गया तो पता चला कि उसका पति टूर पर बाहर गया हुआ है और 3 दिन में वापिस आएगा।
मैं वहाँ रात को पहुँचा था। मेरी साली मुझे देख केर बहुत खुश हुई। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई थी। खाना खाने के बाद हम बातें करने लगे। मेरी बड़ी साली का नाम रीना है।
बातें करते करते मैंने कहा- मुझे नींद आ रही है तो उसने मुझे अपने साथ वाले कमरे में सोने को कहा। थोडी देर के बाद रीना मेरे पास आ कर बैठ गई।
मैंने शरारत में कहा- साली जी! क्या ख्याल है! आप के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे।
तो वह बोली- यह जीजा साली का रिश्ता होता ही है ऐसा कि इसमें शरारत तो होती ही है। उसने नाईट गाऊन पहन हुआ था। मैंने धीरे से अपना पैर उसके पैर से छू दिया तो वोह मुस्कराने लगी।
मैं समझ गया कि मामला साफ़ है। मैंने उसे कहा- रीना पास आ जाओ और वोह मेरे पास आ कर लेट गई।
मैंने उसे कहा- तू कितनी सेक्सी है!
तो वह बोली- शर्म नहीं आती! साली पर लाइन मार रहे हो?
तो मैं बोला- अब तो साली की चूत मारूंगा!
यह सुन कर वोह मेरे से लिपट गई। मैंने उसका गाऊन उतार दिया, अब वोह बिल्कुल नंगी थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और उस से लिपट गया और उस पर टूट पड़ा। मैंने उसके नंगे बदन को चूमना और काटना शुरू कर दिया।
वोह भी गर्म हो गई और कहने लगी- जीजू अपनी साली को चोद दो। जब से तुम्हें देखा है, तुमसे चुदने के लिए तरस रही हूँ!
मैंने अपना लण्ड उसके मुहँ में डाल दिया और वोह उसे प्यार से चूसने लगी।
फिर वोह बोली- मुझे अपने ऊपर आने दो।
वह मेरे ऊपर आ गई और मेरा लण्ड अपनी चूत में डाल कर आगे पीछे होने लगी और मेरे मुहँ में अपना निप्पल डाल दिया।
मैं उसके निप्पल को चूसने लगा और वोह झड़ गई।
फ़िर मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे काफी देर तक चोदा।
उसके बाद 3 दिन तक उसे रोज 3-3 बार चोदा। मैंने उससे बाकी सालियों को चोदने के बारे में भी पूछ लिया जो मैं आप को बाद में बताऊँगा।
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