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मैं सुरेश, मेरे प्रिय Antarvasna Sex Stories पाठकों और पाठिकाओं को मेरे लंड का नमस्कार।
मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर लगा कि मैं भी आपके समक्ष अपनी सच्ची कहानी रखूं।
मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम गौरी है। उसका कद करीब ५.३” है । रंग थोड़ा सांवला है और उसके मम्मे करीब ३४” के होंगे और उसके गांड करीब ३८” की होगी और उसकी पतली कमर अगर उसे कोई देख ले तो उसका लण्ड कड़क हो जाए।
बात उन दिनों की है जब मैं पटना(बिहार) के कोचिंग में पढ़ाया करता था, वो मेरे कोचिंग में पढ़ती थी। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी, इसीलिए छोटे छोटे और पारदर्शक कपड़े पहन कर आती थी जिससे देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। गुरु होने के कारण मैंने वैसे तो कभी उसे उस नजरिये से कभी नहीं देखा था पर उस दिन बात ही कुछ ऐसी हो गई।
मैं आपको बताना भूल गया कि उसे बार-बार बेहोश होने की बीमारी थी। वो रविवार का दिन था और कोचिंग की छुट्टी थी पर उसे गणित में कुछ प्रोबलम होने के कारण उसने मुझसे अकेले में पढ़ाने को कहा था। वो ठीक १० बजे मेरे कोचिंग में आ गई, और हमने पढ़ाई शुरू कर दी। मैं उसे पढ़ा ही रहा था कि इतने में वो बेहोश हो गई। मैं उसके मुँह पे पानी के छींटे मार रहा था उसे होश में लाने के लिए। इस बीच मेरी नज़र उसके मम्मे पर चली गई। पानी और पारदर्शक कपड़े होने के कारण उसके मम्मे गीले हो गए जिस कारण वो पूरे साफ़ साफ़ दिख रहे थे। मैं न चाहते भी उसके मम्मे दबाने लगा। उसके बाद मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाल दिया और उसे मसलने लगा और उसके होठों पे अपने होंठ रख कर चूसने लगा। इतने में वो होश में आ गई और हल्का सा मेरा विरोध करने लगी पर उसके बाद वो भी गरम हो गई।
मेरा भी लंड अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और उसने अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया। करीब १० मिनट की चुम्मा-चट्टी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए और थोड़े ही समय में दोनों पूरे नंगे हो गए। वह घुटने के बल बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबा रहा था। फिर मैंने उसे मेज़ पर लेटा दिया और उसकी संगमरमरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत एकदम कसी और वह अनचुदी कलि थी। वह सिस्कारियां भर रही थी और इतने में वह झड़ चुकी थी। मैंने उसके अमृत-रस को चाट कर साफ़ कर दिया।
थोड़ी देर में वो फिर से गरम हो गई और तड़पने लगी। फिर मैंने उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी टाँगे मेज़ पर फैलाई और अपना लंड उसकी बुर पे रख दिया। लंड अन्दर नहीं जा रहा था इसलिए मैंने वैसलिन लगाया और धीरे धीरे अन्दर डालने लगा। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया और वह दर्द से तड़पने लगी। मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला और दर्द के मारे तड़पने लगी …..आआआ… ऊउम्म्म्म्म्म्म्म…. येस्स्स्स…..ये सब आवाजें निकलने लगी।
मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और नीचे से वह गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। मैंने भी तब फिर से उसे चोदना चालू कर दिया और करीब १५ मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एकसाथ झड़ गए।
उस दिन मैंने उसे दो बार और चोदा। अब हमें जब भी वक्त मिलता है तो हम पढ़ाई के बहाने चुदाई किया करते हैं।
मेरे प्रिय पाठको, यह मेरी पहली कहानी है इसलिए जो भी गलती हुई उसके लिए माफ़ करियेगा और आपको अगर कहानी अच्छी लगी तो मुझे मेल कीजिये। आपके इ मेल्स मेरे लिए प्रेरणा-स्रोत का काम करेंगे तो मेल करने में कंजूसी न करें। Antarvasna Sex Stories
मेरा नाम सैम है। अन्तर्वासना में मेरी Indian Sex Stories यह पहली कहानी है। यह कहानी तब की है जब मैं कॉलेज में था।
एक दिन जब मैं कॉलेज पंहुचा तो एक लड़की कॉलेज के बाहर खड़ी थी। मस्त माल थी ! उसके गजब के बूब्स थे जो उसकी ब्रा से निकले जा रहे थे। लेकिन उसका रंग काला था पर वो गजब की सेक्सी लग रही थी।
मैंने उससे उसका नाम पूछा।
वो बोली- जी पूनम ! मैं अपनी दोस्त से मिलने आई थी। लगता है कि वो आज नहीं आई है।
उसने मुझसे कहा- क्या आप मुझे बस-स्टैंड तक छोड़ देंगे?
मैं तो मौके की तलाश में था, जो मुझे मिल गया। मैं उसे अपनी बाइक पर लेकर निकल गया, उसके बूब्स मेरे पीठ पर लग रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो जाता, उसके नुकीले निप्पल मुझे पागल कर रहे थे। स्टैंड पहुँच कर पता चला कि बस निकल गई है और अगली बस शाम को ६ बजे है। अभी तो सिर्फ़ १ बजा है, तो उसने कहा कि चलो घूम आते हैं, समय भी निकल जाएगा और पता भी नहीं चलेगा।
मैं उसे लेकर एक पार्क में गया। गर्मी के दिनों में वैसे भी कम लोग ही दिन को पार्क में होते हैं। एक पेड़ की नीचे हम दोनों बैठ गए। घास चारों तरफ थी, इसलिए हमें कोई दूसरा नहीं देख पा रहा था, और मेरी नज़र तो सिर्फ़ उसके बूब्स पर थी, बातों का सिलसिला चल रहा था, वो अपने बारे में बता रही थी और मैं अपने बारे में।
अचानक उसने कहा कि मैं लेटना चाहती हूँ ! क्या मैं अपना सर आपकी गोद में रख दूँ?
उसने अपना सर मेरी गोद में रख दिया और बातें करने लगी। मेरी नज़र तो उसकी छाती पर थी, उसके गोल गोल स्तन मैं साफ देख रहा था। जब वो साँस लेती तो उसकी छाती ऊपर नीचे होती, उसके स्तन कभी छोटे तो कभी बड़े हो जाते और मेरा लंड का तो बुरा हाल था। मैं तड़प रहा था उसे चोदने के लिए। मैं जानबूझ कर एक हाथ उसकी छाती पर ले गया और उसके बूब्स को छुआ लेकिन उसने कुछ कहा नहीं।
तब मैंने उससे पूछा कि कभी तुमने सेक्स किया है?
वो मेरे इस सवाल को सुनकर घबरा गई और शरमाते हुए बोली- नहीं !
मैंने तुंरत पूछा- ब्लू फ़िल्म देखी है कभी?
वो बोली- नहीं हाँ एक बार, अपने घर पर !
क्या देखा? – उससे मैंने पूछा।
मतलब- क्या?- क्या देखा?- एक लड़का एक लड़की को नंगा करके चोदे जा रहा है, और लड़की सिस सिस कर रही है।
अब वो मुझसे खुल कर बाते करने लगी। मैं अपना एक हाथ उसके स्तन पर ले गया अब वो भी मज़े लेने लगी, मैंने उसे जोरो से दबाया वो सी स सी सी —- कर रही थी, और दूसरे हाथ उसकी जींस के अन्दर ले गया, पैंटी के नीचे स्वर्ग था जिसकी अनुभूति मुझे मिलने लगी, उसकी चूत पर बाल थे, जैसे ही मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा, वो तिलमिला गई।
मैं अपनी उंगली उसके चूत के अंदर ले गया, साली पहले भी चुदवाई हुई थी, एक बार में पूरी उंगली चली गई। उसके मुंह से अजीब सी आवाजें निकल रही थी।
उसने मेरी जिप खोली और मेरा लंड चूसने लग गई और मैं उसकी चूत में अपनी ऊँगली अंदर बाहर करने लगा।
अब वो भी तड़प रही थी और मैं भी। मैंने उसकी जींस खोल दी, उसकी पैंटी को नीचे कर दिया और उसकी चूत को चूसने लगा।
जोर से — और जोर से चूसो ना मुझे ! आज मेरी चूत को पका दो मेरे राजा !
जैसे जैसे मैं उसकी चूत चूसता उसको मज़ा आता, अब उसने कहा- मादरचोद मुझे चोद ! चोद मादरचोद !
मैंने कहा- रंडी अभी चोदता हूँ तुझे, सच सच बता कितनी बार चुदाई है?
५ बार मेरे बॉय-फ्रेंड्स ने मुझे चोदा है और एक बार टीचर ने अपने मुझे घर पर !
अब मुझे चोद- उसके काले रंग पर उसकी चूत का रंग बहुत खिल रहा था। उसकी चूत लाल रंग और उसका सारा जिस्म काले रंग से ढका हुआ था।
उसके काले-काले स्तन और उस पर काले रंग के निप्पल मुझे पागल किए जा रहे थे।
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर जोर से धक्का दिया, और मेरा पूरा लंड उसके चूत में समां गया, अब वो भी अपनी गाण्ड उठा उठा कर जबाब देने लगी और उसके मुँह से गन्दी गन्दी गलियाँ निकल रही थी।
बहनचोद ! चोद मुझे ! आज चोद मुझे ! उसके चूत की गोलाई कभी फैल जाती कभी सिकुड़ जाती।
रंडी की औलाद ! आज जी भर के चोदूँगा तुझे !
हाँ मेरे राजा ! ये चूत तो तुम्हारी है !
जोर से ! जोर से ! से..से सी.. सी… सी….. अ आई…… अ….अ…आह्ह …. …या….. जोर .. जोर से मेरे रज्जा !
उई उई चोद दे … जोर से… आज ……. सी ! मैं तो गई …. मैं … मैं गयी…….. और वो झड़ गई।
थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया, उसने मेरा लंड साफ किया और मैंने उसे चूत।
इसी तरह हमने चार बार चुदाई की। Indian Sex Stories
मेरा नाम रेखा है और मैं दिल्ली में रहती Sex Stories हूं अपने पति अनिल के साथ। मेरी कहानी बहुत ही अजीब है पर है सच्ची।
बात तीन साल पहले की है, तब मैं अट्ठारह साल की थी। मैंने बंगलौर में स्नातिकी की शिक्षा लेना बस शुरू ही किया था। मेरे ताऊ का एक लड़का था जिसका नाम अनिल है। वैसे मेरे खानदान में पापा तीन भाई हैं और अगली पीढ़ी में मैं सबसे छोटी हूं।
हम कुल आठ भाई बहिन हैं और अनिल भइया दूसरे नम्बर पर और मैं आखरी। मेरा कद 5’2′ है और काफी खूबसूरत भी और शायद मैं वाकई में हूँ भी।
वैसे मेरी दो कजन बहनें भी काफी खूबसूरत हैं। पर मैं अपनी ही धुन में रहती थी। मेरा फिगर 34 -24 -34 है।
हम भाई बहिन आपस में काफी घुले मिले हैं इसलिए अक्सर चुहल बजी चलती थी। कभी कभी तो ये भी आपस में बातें होती थी कि यार तुम आजकल बहुत सेक्सी हो गई हो या हो गए हो।
अनिल भइया करीब 25 साल के थे उस वक्त। उनकी हाईट काफी थी 5’10′ और उनका व्यक्तित्व भी काफी अच्छा था।
कभी कभी लगता कि वो मुझे या मेरी एक और कजन के बदन को निहारते हैं, पर मैंने कभी उतना ध्यान नहीं दिया।
वैसे मुझे वो अच्छे तो लगते थे पर मैंने उस तरह कभी सोचा नहीं।
भैया दिल्ली में नौकरी करते थे और उनका टूर लगता रहता था।
एक बार उनका टूर बंगलौर का लगा और वो मुझसे मिलने मेरे कालेज़ आ गए।
मैं भी खुश हो गई कि चलो कोई घर से मुझसे मिलने आया तो.
वो मेरे हॉस्टल आ गए और हम दोनों गले मिले प्यार से और उन्होंने मुझे गाल पर एक हलकी सी पप्पी दी तो मेरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई. मुझे अच्छा लगा पर दूसरे सेंस में नहीं. वो मेरे दोस्तों से मिले और ये कह कर चले गए कि शाम को आऊँगा मिलने. मैं भी खुश थी कि भइया आए तो सही.
भइया शाम को 5 बजे आ गए और कहा कि चलो 3-4 दिन मेरे साथ रहो कंपनी के होटल में और घूमना मजे करना।
मैं भी चहक उठी और वैसे भी उन दिनों छुट्टियाँ थी 5 -6 दिनों की तो मैं तैयार हो गई और 1-2 ड्रेस ले कर जैसे ही चलने लगी तो उन्होंने कहा कि मैं खरीद दूँगा तो मैं और खुशी से झूम उठी. हम दोनों उनके ऑफिस की कार से उनके होटल में गए.
हम लोगों ने कुछ खाया पिया और घूमने चले गए और रात में 9 बजे के करीब होटल लौटे. मैं काफी थक गई थी इसलिए बिस्तर पर आ कर धम से पसर गई.
मैंने उस वक्त टाइट जींस और टॉप पहना हुआ था और इस वजह से मेरे टाइट हाफ सर्कल बूब्स तने हुए थे. वैसे भी मेरे बूब्स काफी टाइट थे.
भइया आए और सीधे बाथरूम में घुस गए और फिर निकल कर आते ही मेरे बगल में वो भी धम से लेट गए।
5 मिनट बाद भइया ने मेरी तरफ़ करवट ली और बोले ‘क्या बात है बहुत सेक्सी और सुंदर लग रही हो,’ और ये कहते हुए उन्होंने मेरे माथे पर किस किया और उनका एक हाथ ठीक मेरी नाभि के ऊपर था.
मैं भी मुस्कुरा दी. मैंने अभी तक भइया को कभी उस तरह से नहीं देखा था.
मैंने कहा,’यह तो सब बोलते रहते हैं।’
उन्होंने कहा ‘अरे सच्ची! वाकई में तुम बहुत कमाल की लग रही हो।’
मैं शरमाते हुए भइया से लिपट गई. भइया ने मुझे तब अपनी बाँहों में भर लिया और अपने सीने से चिपका लिया. उस वक्त मेरे बूब्स भिंचे हुए थे.
मेरे पूरे बदन में सिहरन दौड़ गई जब भइया ने प्यार से भींच कर मेरी गर्दन पर किस किया. फिर मैं उठ कर बाथरूम में चली गई नहाने. पर नहाने के बीच में याद आया कि मैंने नाईटी नहीं ली है तो मैंने भइया को आवाज़ दी कि भइया कोई दूसरा तौलिया दे दीजिये.
बाथरूम में शटर लगा हुआ था शावर केबिन में और कोई लाक नहीं था। बस अलग अलग केबिन थे, इसलिए भैया अन्दर आ गए।
मैंने शटर ज़रा सा सरका कर तौलिया ले लिया।
मैंने ध्यान नहीं दिया पर शायद वो भी तौलिया लपेटे थे क्योंकि उन्होंने भी नहाना था। वो शीशे के सामने अपना चेहरा धोने लगे।
मैं शटर से जैसे ही बाहर निकली और वो जैसे ही मुड़े तो हम दोनों टकरा गए और मेरा तौलिया खुल गया।
मैं घबरा गई और तुरन्त अपने दोनों हाथ अपने स्तनों पर रख लिए क्योंकि अब मैं पूरी तरह से नंगी थी।
मेरा योनि-क्षेत्र पूरी तरह से बाल- रहित किया हुआ था।
भैया ने मुझ पर ऊपर से नीचे तक नज़र डाली, उनके तौलिये के अन्दर भी कुछ उभार सा आ रहा था, पर उस वक्त मैं समझ नहीं पाई. मेरी आंखों में आँसू थे।
भैया ने तुरन्त तौलिया उठाया। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि कुछ समझने क मौका ही नहीं मिला।
मैं भी सन्न चुपचाप सर झुकाए खड़ी थी। भैया ने तौलिया मेरे कन्धे पर डाला और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मैं भी उनसे चिपक गई और रोने लगी।
मैंने यह भी ध्यान नहीं दिया कि मैं अभी भी नंगी हूँ। मेरे बूब्स उनके सीने से चिपके हुए थे। उनका भी शायद तौलिया खुल चुका था और उनका औज़ार यानि लिंग करीब 8-9′ लम्बा और 2′ मोटा मेरी कुँवारी योनि पर टिका हुआ था।
पर उस वक्त मेरा इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं गया।
भैया मुझे चुप कराते हुए बोले- अरे पगली मनु!(प्यार से वो मुझे मनु कहते हैं) सिर्फ़ मैं ही तो हूँ! क्या हुआ?’
ये कहते कहते उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और कमरे में ले गये और बिजली बंद करके मद्धम रोशनी कर दी ताकि मेरी शर्म दूर हो जाए।
ये सब 3-4 मिनट में हो गया था। उन्होंने मुझे दीवार से सटा दिया और मेरे माथे को किस किया और कहा- चिन्ता मत करो।
मैंने उन्हें चिपका लिया और उन्होंने मुझे। उनका लम्बा मोटा लिंग मेरी कुँवारी योनि पर रगड़ खा रहा था पर इस बात पर काफ़ी देर बाद मेरा ध्यान गया।
भैया ने मेरे चेहरे को अपने हाथों में के कर होठों को किस किया तो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मैंने कहा- भैया! यह सब ठीक नहीं है।
मैं यह कहना चाहती थी कि भैया मुझे होठों पर किस करने लगे। फ़िर रुक कर मेरे बालों को हटा कर मेरी गरदन पर किस किया तो मैं उनसे कस कर लिपट गई।
वो फ़िर मुझे बिस्तर पर ले गए और लिटा कर मेरे ऊपर लेट गए।
हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से कस कर चिपके हुए थे और हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे।
वो मेरे होठों को और मेरी जीभ को चूस रहे थे, मैं अपने होश खोती जा रही थी।
उनका लण्ड मेरी अनचुदी चूत पर रगड़ खा रहा था जिससे मैं पागल हुई जा रही थी।
फ़िर भैया मेरी एक चूची को जोर से दबाने लगे और दूसरी के निप्पल को चूसने लगे जिससे मैं और पगला गई।
अचानक मैं ज़रा होश में आई तो कहा- भैया ये सब ठीक नहीं है, अगर किसी को पता चला तो मैं तो मर ही जाऊँगी।
वो बोले- मनु जान! क्या तुम मुझे ज़रा भी नहीं चाहती! मैं तुम्हारे लिए इतने दिनों से तड़प रहा था और आज तुम्हें पूरी तरह से अपना बनाना चाहता हूँ।
मैंने कहा- भैया…ऽऽऽ…!
और मेरे आगे कुछ कहने से पहले उन्होंने अपने होठों को मेरे होठों पर रखा, फ़िर कहा- आज से मैं भैया नहीं, तुम्हारा पति और जान हूँ, अगर ज़रा भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए कोई जगह है तो बोलो।
मैंने कहा- मैं आपको चाह्ती तो हूँ पर…!
मेरे आगे बोलने से पहले उन्होंने मेरे होठों पर ऊँगली रख दी और कहा- बस हम आज से पति-पत्नी हैं और आज हमारी सुहागरात है।
मैंने कहा- लोग क्या कहेंगे?
उन्होंने कहा- मैं किसी की परवाह नहीं करता और अब हम तुम पति-पत्नी बन कर एक दूसरे को सुखी रखेंगे… मैं तुम्हें प्यार करता हूँ मनु जान!
मैंने कहा- मैं भी तुम्हें प्यार करती हूँ… भैया!
भैया कहते ही उन्होंने मुझे कहा- आज से मैं तुम्हारा भाई नहीं पति हूँ और अब तुम मुझे कुछ और कहा करो!
मैंने कहा- क्या!
वो बोले- कुछ भी … जैसे जान या कुछ भी!
मैंने कहा- ठीक है भैया.. ओह सोरी… जान… आई लव यू!
हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से कस के चिपके हुए थे। भैया ने फ़िर मुझे किस किया और मेरी जांघों के बीच में आ गए।
मैंने अपनी टांगें उनके पैरों पर रख ली थी। उन्होंने अपने एक हाथ को मेरे सर के नीचे रख कर किस किया और दूसरे से मेरी अनचुदी कुँवारी चूत में उँगली की तो मेरे मुंह से सिसकारी सी निकली- आऽऽऽऽऽऽह!
भैया ने कहा- जान अपने पति के लण्ड को अपनी कुँवारी चूत पर रखना जरा!
मैंने कहा- क्या होगा जान …!
कहते हुए उनके लण्ड को अपनी चूत पर रखा।
हम दोनों अब एक दूसरे का साथ देने लगे थे। भैया पहले धीरे धीरे मेरे अन्दर अपना डालने लगे। मैं सिसकारी लेने लगी थी। एक इन्च जाते ही मुझे दर्द का अनुभव हुआ तो मैंने कहा- आऽऽऽऽह्ह्ह … अब बस … जान, अब बस भी करो, दर्द हो रहा है …!
वो बोले- चिन्ता मत करो, आज सब कुछ होगा … दर्द, मज़ा और हमारी सुहागरात … आऽऽह!
कहते हुए उन्होंने एक झटका दिया कस के
आऽ… अऽऽऽऽअऽ ह्ह्हहाऽ आऽऽऽ ऊईऽऽऽ माँ मर गई मैं! प्लीज़ भैया अब निकाल लो अब और दर्द नहीं सहा जा रहा है! मैं रोते हुए बोली।
उन्होंने कहा- भैया बोलोगी? यह कहते हुए एक और झटका मारा, लण्ड शायद 5′ अन्दर जा चुका था।
मैंने कहा- सोरी जान …. लेकिन बहुत दर्द हो रहा है!
वो बोले- जान चिन्ता मत कर, थोड़ी देर में सब सही हो जाएगा। वो फ़िर मेरे बूब्स चूसने लगे। थोड़ी देर में मुझे कुछ आराम मिला तो उन्होंने फ़िर 3-4 जोरदार झटके मारे तो मेरी हालत ही बिगड़ गई और चीख निकल गई- आऽऽऽऽह… मर गई… … माँअऽऽऽऽऽ …!
मेरी आंखों में आँसू थे। मैं उनसे चिपक गई और अपनी टांगों को उनकी कमर पर जकड़ लिया।
वो मुझे किस करने लगे और हम दोनों एक दूसरे के मुंह में जीभ डाल कर चूमने लगे।
थोड़ी देर में मैं सामान्य होने लगी। तब भैया ने मेरे बूब्स को पकड़ा और अपने लण्ड को अन्दर बाहर करने लगे।
मुझे तकलीफ़ हो रही थी पर थोड़ा मज़ा भी था कुछ अलग तरह का- आऽऽऽऽह्ह्ह… जान… आऽऽह्ह्ह्हाअ … आज पूरी तरह से अपनी बना लो जानऽऽऽ … आऽऽऽअऽऽऽह्ह मैंने कहा
तो भैया ने भी कहा- ओहऽऽ… जान …!
कमरे में हमारी आवाज़ें गूंज़ रही थी। मेरी सिसकारियाँ ज्यादा ही थी क्योंकि उनका 8-9 इन्च लम्बा लण्ड मुझसे झेला नहीं जा रहा था।
5 मिनट तक वो मुझे लगातार रौंदते रहे, फ़िर मैं चीखी-जान आऽऽऽऽअऽऽ आऽऽह्ह मुझे कुछ हो रहा है, पता नहीं क्या हो रहा है, मज़ाऽऽ आ रहा है आऽअ अऽ आऽऽऽह!
‘ओऽऽह जान तू चरम पर है और मैं भी ऽऽऽ जान! मैं गया ऽऽ मेरा झड़ रहा है अआ…’ उन्होंने लगातार 6-7 झटके मारे और हम दोनों एक साथ आनन्द के शिखर तक पहुँच गए।
भैया मेरे ऊपर ही पसर गए और हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़ लिया। कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे से लिपटे हुए किस कर रहे थे।
थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और स्नानघर में जाने लगे तो देखा बिस्तर खून से भरा हुआ था। मैं घबरा गई और बोली,’ ये क्या… अब क्या होगा?’
भैया बोले,’ इसमें डर कुछ नहीं, पहले पहले यही होता है’
मेरी कमर में दर्द होने लगा था। हम दोनों बाथरूम में एक साथ नहाने गए तो एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया।
मेरी चूत अब कुँवारी नहीं रही थी।
भैया ने रगड़ कर मेरी चूत को धोया और मैंने उनके लण्ड को, जिससे हम दोनों गर्म हो गए।
मैं थोड़ा शरमाई पर काफ़ी झिझक निकल चुकी थी। हम दोनों फ़व्वारे के नीचे खड़े थे। भैया नीचे बैठे तो मैंने कहा,’ये क्या करने जा रहे हो जान!’
‘मैं तो अपने होठों की मुहर लगाने जा रहा हूँ … और अब तुम भी लगाना’
वो मेरी चूत में उँगली करने लगे थे और जीभ भी फ़िराने लगे।
मैं पागल हो उठी। मैं अपने एक स्तन को मसलने लगी और भैया हाथ बढ़ा कर दूसरे को।
भैया मेरी हालत समझ गए और फ़र्श पर ही लिटा लिया। मेरी चूत में उनकी जीभ तैर रही थी और मेरे हाथ उनके सर को पकड़ कर मेरी चूत को दबा रहे थे। मैं अपने होठों को काट रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी टांगें उनकी गरदन में लिपट गई थी।
फ़िर वो मेरे ऊपर आ गए और मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पे लपेट ली। मेरे दोनों हाथ उनकी गरदन में लिपट गए।
उन्होंने फ़िर जोर का झटका मारा तो आऽऽऽह्ह ऽऽआ… अ…अह… जैसे मेरी जान ही निकल गई।
फ़िर भैया मेरे बूब्स को दबाते और झटके मारते जाते। वो वहशी होते चले गए, मेरे बूब्स को निर्दयता से मसल रहे थे और दांतों से काट रहे थे, मेरी गरदन पर भी प्यार से काटा। वो जहाँ जहाँ अपने दाँत गड़ाते वहाँ खून सा जम जाता।
मैं भी पागल हो जाती तो बदले में अपने नाखून उनकी पीठ में गड़ा देती और उनकी गरदन पर काट लेती। जंगलीपने से बाथरूम में मेरी प्यार भरी चीखें गूंज रही थी, जिससे भैया का जोश बढ़ता ही जा रहा था।
यह सिलसिला आधे घण्टे तक चला और उतनी देर में मैं दो बार झड़ चुकी थी और भैया रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फ़िर जब हम शांत हुए तो मैं तीसरी बार झड़ी थी। हम फ़्रेश हो कर कमरे में चले गए और थोड़ा आराम करके खाना खाया। फ़िर हम नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर बातें करने लगे।
मैंने कहा,’भैया … ओह सोरी … जान, अब मेरा क्या होगा, मैं क्या करूँ और अब आगे का क्या प्लान है, मेरा मतलब भविष्य का, क्योंकि अब मुझे घबराहट हो रही है, मैं आपके बिना नहीं रह सकती।’
वो बोले ‘चिंता मत करो जान मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, हम दोनों दिल्ली जा कर शादी कर लेंगे पर अभी किसी को नहीं बताएँगे.’
मैंने कहा ‘ठीक है जान, चलिए अब सो जाते हैं क्योंकि कल आपको ऑफिस भी जाना है’
वो बोले ‘चिंता क्यों करती हो जान, मैं तुम्हें तड़पता नहीं छोड़ सकता। आज ही हम एक हुए और क्या तुम मुझे तड़पता छोड़ दोगी जान?’
मैंने कहा ‘नहीं जान… प्लीज़ ऐसा मत बोलो। आज हम नहीं सोयेंगे। आज हम एक दूसरे को पूरा सुख देंगे। आप मेरे साथ जी भर कर और जम कर करो और अपनी बीवी को रौंद डालो जान.’
फिर भइया ने मुझे रात में तीन बार और जम कर चोदा और वो भी आधे आधे घंटे तक।
और तब तक मैं बेहोशी की हालत में आ चुकी थी।
हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए।
सुबह जब मैं उठी तो भइया ऑफिस चले गए थे और फिर 10 .30 बजे फ़ोन भी कर दिया कि मैं 2-3 बजे तक आ जाऊँगा।
मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा बदन भी काफी दर्द कर रहा था खास कर से मेरी कमर।
मैंने फ्रेश हो कर नाश्ता किया और फिर सो गई।
मैं सीधे 3 बजे के करीब उठी तो काफी ठीक महसूस भी कर रही थी और देखा कि भइया मेरे सर को अपनी गोद में लिए हुए थे।
ये थी मेरी कहानी! आगे का मैं अब बाद में ही लिखूंगी! Sex Stories
मेरा नाम अंजलि है । मै, पापा Sex Stories और मम्मी बहुत दिनों बाद थियेटर में गये। स्थानीय कलाकार वहां अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। नाच, गाना व नाटक वगैरह चल रहे थे। मुझे एक डांस बहुत प्यारा लगा। कार्यक्रम चल रहा था। हम आगे ही बैठे थे। मैं पानी पीने के लिये स्टेज के पास गई। अचानक मुझे वो डांस करने वाली लड़की वहा मिल गई। मैं तुरन्त उससे जाकर मिली।
“आप डांस बहुत अच्छी करती हैं।”
“थेंक्स … यह मेरा बचपन का शौक है … ”
“आपका नाम जान सकती हूँ प्लीज … ?”
“कमल नाम है मेरा … ”
“मैं कभी आपसे मिलने जरूर आऊंगी !”
“आप अंजलि है ना … मेरा घर आपके पास ही है … ”
“अच्छा तो हम जरूर मिलेंगे … आप मेरे घर आना !”
औपचारिक बात होने के बाद मैं पानी पी कर अपनी सीट पर आ गई। कार्यक्रम समाप्त होने पर हम घर पर आ गये। दूसरे दिन सुबह ही कमल मुझे घर के बाहर दिख गई। वो स्कूटी से निकल रही थी … उसने मुँह पर कपड़ा बांध रखा था। उसने हाथ हिलाया और और स्कूटी रोक दी … मैंने उसे अन्दर बुला लिया … और उसका परिचय सबसे कराया। फिर मैं उसे कमरे में ले आई।
उसने टाईट जीन्स पहन रखी थी और सेक्सी लग रही थी। उसने मुँह पर से कपड़ा हटाया और बैठ गई। हम बातें करने लगे। उसके बात करने का करने का स्टाईल कुछ अलग सा था। कभी कभी वो लड़के के स्टाईल में बोलने लगती थी। मुझे कुछ शक सा होने लगा।
मैं एक दिन उनके डांस क्लब में गई। बाहर ही मेरे जान पहचान के अंकल मिल गये। बात बात में मुझे सब मालूम हो गया कि कमल वास्तव में लड़का ही है, पर मैंने उसे ये जाहिर नहीं होने दिया कि मुझे पता चल गया है कि वो लड़का है। चूंकि उसका जिस्म दुबला पतला था और नाचने में माहिर था, इसलिये वो ऐसा ही रहता था। उसके बाल वास्तविक लगे इसलिये बाल भी उसने लम्बे कर लिये थे। उसकी आवाज लड़कियों जैसी ही थी। उम्र भी 18 साल की थी। ना चेहरे पर कोई बाल … लड़कियों जैस चिकना चेहरा।
अब वो अक्सर मेरे घर आ जाता था। मैंने जान बूझ करके उसे मेरी सहेली बना लिया था … जब भी उसका कोई प्रोग्राम होता तो वो मुझे पास ला देता था। वो या तो जीन्स पहनता था या पैन्ट । एक दिन मैंने उससे पूछा।
“कमल … तुम्हारा कोइ बॉय-फ़्रेन्ड है क्या?”
“नहीं तो … और तुम्हारा … ”
“नहीं यार … कोई मुझे पसन्द ही नहीं करता है … ”
“तो मेरी फ़्रेन्ड बन जाओ … ”
“छी: तुम तो लड़की हो … मैं लड़कों की बात कर रही हूँ … ”
“अरे यार बॉय-फ़्रेन्ड तुम्हें परेशान कर देगा … तुमसे सेक्स की बातें करेगा और फिर जाने क्या क्या … ”
“तुझे क्या सेक्स की बातें अच्छी नहीं लगती है क्या ?”
“हां … लगती तो हैं … बातें क्या सेक्स भी अच्छा लगता है … कोई किसी के साथ सम्भोग करे मजा नहीं आयेगा क्या ?”
“क्या बात है … सम्भोग को चुदाई कहते हैं … ” मुझे सेक्स की बातों में मजा आने लगा था। मैं उसे उत्तेजित करने लगी।
“धत्त ये तो गाली होती है … पर हां च् … च् … चुदाई ही कहते हैं … ” कमल हड़बड़ा गया।
“अच्छा आज बाहर चल कर आईस्क्रीम खायेंगे … मैं ड्रेस बदल लेती हूँ … ”
मैंने अपना टॉप उतारा तो मेरी दोनों चूंचियां बाहर छलक पड़ी। मैंने जान कर उसे भड़काने के अपने बोबे सहला दिये।
“अरे … रे ये क्या कर रही हो … अन्दर जाओ ना … !” कमल आंखे फ़ाड़ कर मेरी चूंचियाँ देखने लगा।
“ऐसे क्या कर रही है … तेरे नहीं है क्या … ?” मैंने उसे छेड़ा।
“बड़ी सुन्दर हैं … सीधी तनी हुई … अच्छी लग रही हैं … ” उसके ऐसे कहने से मेरे शरीर में सिरहन दौड़ गई। मैंने जाल और कसा।
“कमल … हाथ लगा ना इसे … ” कमल ने धीरे से मेरे बोबे सहला दिये और मेरे चूंचक भी दबा दिये …
“मस्त है तेरी चूंचियाँ यार … ।” कमल उत्तेजित हो उठा था।
“हाय कमल … ला तेरे भी भी सहला दूं” मैंने उसे छेड़ने की नीयत से कहा और मुझे ये भी बताना था मैं उसे लड़की ही समझ रही हूं।
“नहीं … नहीं अभी नहीं … बाद में … मेरे तो अभी हैं ही नहीं … ” वो घबरा उठा।
“अरे जा … अभी दबा दबाऊंगी … ।” मैंने उसकी छाती पर जबरदस्ती हाथ लगाया तो साफ़ चट मैदान था। पर कमल की आंखो में वासना दिखने लगी।
मेरे हाथ दूर करके बोला,”आ ! तेरे और दबा दूं … !
“और उसने मेरे मेरे बोबे सहलाने शुरू कर दिये। मुझे मजा आने लगा। इतने में उसका एक हाथ मेरी चूतड़ पर आ गया … और दबाने लगा। उसने मुझे चिपका लिया और मेरे होंठ अपने होंठों से मिला दिये। मैंने भी उसके चूतड़ पकड़ लिये और दबाने शुरू कर दिये … अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और उसने जीन्स के ऊपर ही मेरी चूत भींच दी।
“हाय रे कमल … और भींच दे … साली तू लड़की क्यो है … लण्ड होता तो उसे ठूंस ठूंस कर चुदवाती … ” मेरे मुँह से एक वासना भरी कराह निकल पड़ी। उसके कड़े बदन में मर्दों वाली बात साफ़ नजर आ रही थी …
“ला मैं तेरी चूत भींच दूं !”
मैंने भी उसके लण्ड पर ज्योंही हाथ लगाया। वो दूर हो गया …
“बस अंजलि … अब नहीं … चल तैयार हो जा … चलते है … ” मेरा नशा टूट गया …
“कमल … रात को यहीं आ जाना … थोड़ा और मजा करेंगे … ऐसे ही … खूब मजा आया ना अभी … ”
हम दोनों स्कूटी पर बैठ कर निकल पड़े। हम दोनों ने मुँह पर कपड़ा बांध लिया था।
रात को मैं उसका इन्तज़ार करती रही, पर वो नहीं आया। मैंने उसे फोन किया तो वो बोला कि अभी रात हो गई है कल आऊंगी।
सुबह ही वो आ गया … मैं खुश हो गई … सोचा आज तो चुद के ही छोड़ूगी … साली चूत को शान्त तो करना ही है … ये चक्कर में आ गया है तो मजा कर लूँ … हमने चाय पी और कमरा बन्द कर लिया। और मम्मी से कह दिया कि हम एक घण्टा पढ़ेंगे … हमें डिस्टर्ब नहीं करना।
“चल यार मजे करते हैं … ” मैंने अपना नाईट सूट उतार दिया और नंगी हो गई …
“तू तो बड़ी बेशरम है … यार … ” कमल बोल उठा और मेरी चूचियाँ दाबने लगा … ।
“अरे उतार ना कपड़े यार … जल्दी कर … मेरी तो खुजली बढ़ रही है … ” मेरी वासना बढ़ती जा रही थी और कमल से चिपकती जा रही थी। उसने मेरी चूत दबा दी और मुझे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा … और मुझे बाहों में कसने लगा। मैं होश खोती जा रही थी … उसके लण्ड का दबाव अब मेरी चूत पर पड़ रहा था। मुझे मस्ती आने लगी थी। लण्ड की चुभन पा कर मुस्कराई। पर नंगा हो जाता तो उसकी पोल खुल जाती … जो कि अभी खुलने ही वाली थी।
“हाय रे कमल … काश तू लड़का होती … तेरे मोटा सा लण्ड होता … कितना मजा आता … अरे टॉप और जीन्स उतार ना … ” पर उसने नहीं सुना … वो मेरे अंगों को भींचती रहा। मैंने खींच कर उसका टॉप उतार दिया। उसने तुरन्त मेरी आंखें बन्द कर दी …
“प्लीज मत देखो शरम आती है … मैं जीन्स उतार रही हूँ … देखो आंखे बन्द ही रखना … ” अपना जीन्स उतार कर वो नंगा हो गया … मैंने तिरछी नजरों से उसका कड़कता लण्ड देखा। उसने वापिस से मुझे दबोच लिया।
उसका लण्ड अब मेरे जांघ पर लग रहा था … मैंने जान करके कुछ नहीं कहा।
“अरे ये चूत में क्या घुसा रही है … ” उसका मोटा लण्ड मेरी चूत पर रगड़ लगाता हुआ घुसने लगा।
“एक मजे की चीज़ है … ” मैंने आंखे बन्द किये हुये ही नशे में मजे लेने लगी। अचानक लण्ड का दबाव मेरी चूत पर पड़ा और मोटा और लम्बा लण्ड पूरा ही अन्दर घुस गया … मैं सिहर उठी … … उसने दुबारा धक्का दिया तो पूरा ही घुस गया। कमल के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
मेरे मुख से भी आह निकल पड़ी। मुझे भी असीम आनन्द आया … उसने धक्के मारना शुरु कर दिया … मैंने अचानक ही उसे धक्का दे दिया … पर नाटक तो करना था … मेरी चूत लप लप कर रही थी … चुदने को बेताब हो रही थी …
“हाय रे … तुम तो लडके हो … लण्ड तो असली है … और इतना मोटा ?”
उसने मुझे फिर से जकड लिया और लण्ड फिर से घुसा डाला। मैंने भी घुसने दिया … मजा कैसे छोड़ देती …
“हाँ … अंजलि मैं तो लड़का हूँ … प्लीज चुदाई चलने दो ना … मैं सब बता दूंगा … ” मुझे तो पहले से ही पता था … फिर उसे कैसे जाने देती।
“प्रोमिस … चोदने के बाद बताना … हाय अब चोद डालो … देखा तुम्हारे लण्ड आ ही गया ना … ” मैंने उसे छेड़ते कहा। उसका लण्ड चूत की जड़ तक घुसा हुआ था।
मुझे असली चुदाई का आनन्द मिल रहा था। चूंकी मामला खुल चुका था। उसके मन में भी अब चोर नहीं था। अब हम खुल कर मर्द औरत की तरह चुदाई का मजा लने लगे। मैंने भी उसे अब प्यार से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और उसके होंठ से होंठ मिला दिये।
उसका लण्ड मेरी चूत में रगड़ मारते हुए उतर रहा था और फिर एक के बाद एक मजे के झटके … मैं अपनी चूत उछाल उछाल कर चुदाने लगी। मेरी वासना उबलने लगी। कमल भी अपने होश खो बैठा। बेतहाशा धचक धचक धक्के मारने लगा … तेज सिसकारियाँ उसके मुँह से निकल रही थी।
डांस में माहिर होने से उसकी कमर में बहुत लचक थी … मेरी सिर्फ़ चूत पर उसका लण्ड टकरा रहा था … उसने ऐसा पोज बना रखा था लण्ड और चूत के अलावा कोई भी अंग स्पर्श नहीं कर रहा था। लण्ड और चूत दोनों आग उगल रहे थे। फ़च फ़च और थप थप की मधुर आवाजें उभर रही थी।
“कमल मेरी चूचियाँ मसल दे राजा … दे और दे … साली को फ़ाड़ दे … ” वो बड़ी सफ़ाई से मेरी दोनों चूंचियों की घुंडियों को हल्के हल्के गोल गोल घुमा कर मसलने लगा। मुझे लगा कि ये मुझे मस्त करके मार ही डालेगा। मेर सारा जिस्म अंगड़ाई लेने लगा। सारे शरीर में मिठास भरने लगी … नसों उबाल आने लगा … लगा कि जैसे सब कुछ मेरा अब चूत में सिमटने लगा है … सारी मिठास खिंच कर चूत में समाने लगी। कमल की आंखें बन्द थी … अपनी कला से मेरी आनन्द दायक चुदाई कर रहा था …
“ईईईह्ह्ह्ह् … हाय … ये ये … मर गई … कमल गई मैं तो … मेरी मां रे … चोद दे जोर से … घुसा और जोर से घुसा … ” मेर बदन ऐंठने लग गया था … मैं अपने आपको रोकना चाह रही थी … पर हाय रे … पानी निकल ही पड़ा … और मैं झड़ने लगी … उसी समय कमल ने मेरी चूत में अपना लण्ड गड़ा दिया … और जड़ में दबाने लगाने … हाय कहते हुए अपना वीर्य मेरी चूत की गहराईयों में निकालने लगा।
अब उसने मेरे शरीर पर अपना भार डाल दिया। और चूतड़ों को मेरी चूत पर दबा दबा कर अपना वीर्य उगलने लगा। मैंने अपने दोनो पांव फ़ैला कर चित लेट गई। कमल पूरा झड़ चुका था। कमल भी एक तरफ़ बगल में आ गया। हमारी सांसे जल्दी ही नियन्त्रण में आ गई। दिल की धड़कनें सामान्य होने लगी। कमल तो जल्दी से खड़ा हो गया मैंने उसे खींच कर फिर लेटा लिया …
“कमल प्लीज ! एक बार और चुदाई करेंगे … ! ” कमल मेरी बगल में फिर से लेट गया। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी …
कमल कहने लगा,” अंजलि सॉरी … मैंने तुम्हे नहीं बताया कि … ”
मैंने उसके मुख पर अंगुली रख दी,” मुझे बहुत पहले से ही पता था कि तुम लड़के हो … मुझे तो सच में चुदना था … अब रोज चोदोगे ना … ”
कमल के लण्ड में एक बार और उफ़ान आ गया और मैं एक बार फिर नीचे दब गई … मेरे बोबे मसलने लगा … और मेरी चूत में मोटा सा लम्बा सा गरम लोहा घुस पड़ा … Sex Stories
मेरे पड़ोस में एक Sex Stories आंटी रहती थीं, जिनका नाम मंजू था. उनकी उमर 27-28 साल और फिगर 36-28-36 था. उनको देखकर हमेशा मेरा लंड खड़ा हो जाता था और उनकी चूत में जाने के लिए फड़कने लगता था.
एक दिन उनकी 6 साल की लड़की पार्क में खेलते खेलते गिर गयी. मैंने उसे उठाया और उनके घर ले गया. वो बहुत रो रही थी. आंटी ने उसे चुप कराया, दवा लगाई और थपकी देकर सुला दिया.
मैं चुप चाप खड़ा आंटी के मम्मे और गदराई गांड देख रहा था.
लड़की के सोते ही आंटी मेरी तरफ़ मुखातिब होकर बोली ”तुम इसे नहीं लाते तो बेचारी वहीँ रोती रहती।’
मैंने कहा,’आंटी, क्यूँ नहीं लाता?’
आंटी मुस्कुराई और बोली- बैठो, तुम्हे चाय पिलाती हूँ।’
पता नहीं मेरे अन्दर कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि मैं बोला ‘पिलाना है तो दूध पिलाओ।’
आंटी तुंरत समझ गई और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोलीं ‘शर्म नहीं आती ऐसे कहने में।’
मैं बोला ‘आंटी शर्म करूँगा तो आप दूध कैसे पिलाओगे।’
इतना कहकर मैंने आंटी के मम्मों पर हाथ रखा और सहलाने लगा. आंटी भी शायद मुझसे चुदवाने को तैयार थीं इसीलिए कुछ नहीं बोलीं मैंने उनका गाउन उतारा और फ़िर ब्रा और पैंटी भी उतार दी. आंटी को पूरा नंगा करके मैंने अपने कपड़े उतारे और बिना देर किए अपना लंड आंटी कि चूत में डाल दिया और उनके मम्मे चूसने लगा. थोडी देर में आंटी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगीं.
इसके बाद 12 साल तक मैं आंटी को चोदता रहा. इस बीच उनकी लड़की 18 साल की हो गयी.
एक दिन मैं आंटी को चोद रहा था कि वो आ गयी.
आंटी को लगा कि ये अंकल को बता देगी.
आंटी ने उसको अपने पास बुलाया, उसकी स्कर्ट को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसकी पैंटी उतार दी और बोली ‘इसकी चूत पर अपना लंड रगडो इसको भी मजा दो’. मेरी तो लाटरी लग गयी, मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ना शुरू किया तो वो मस्त होने लगी. आंटी पेशाब करने बाथरूम गयी तो मैंने अपना लंड लड़की की चूत में डाल दिया. लड़की चिल्लाने लगी तो मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया, लड़की चुप हो गयी और और थोडी देर में मजा लेने लगी.
आंटी बाथरूम से आयीं और लड़की को चुदवाते देखकर बोलीं ‘पहले ही दिन पूरा ले लिया ! ये है मेरी बेटी की हिम्मत ! हिम्मतवाली माँ की हिम्मतवाली बेटी’. Sex Stories
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