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Massage Girl in Uttara Kannada: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Uttara Kannada who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Uttara Kannada that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Uttara Kannada massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Uttara Kannada who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Uttara Kannada massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Uttara Kannada massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Uttara Kannada who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Uttara Kannada employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Uttara Kannada helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Uttara Kannada

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Uttara Kannada at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna

मैं गुजरात का रहने वाला एक २४ साल का हैंडसम लड़का Antarvasna हूं और मेरा लंड का साइज़ ७.५” का है और मेरी बोडी एथलेटिस है और पार्ट टाइम जिम ट्रैनर हूं। यही मेरा काम है और शौक भी, कई बार दिन में ४-४ बार लड़कियों और औरतों को खुश करता हूं.

ये कहानी है मेरी काम वाली की लेकिन ये काम वाली १८ साल की थी क्या मज़ा आया उसको चोदने में

ये बात तब की है जब मैं गिगोलो नहीं था एक दिन घर पर कोई नहीं था मैं अकेला था और मैं उस दिन लेट उठा ११ बजे, तभी दरवाजा खटखटाया हुआ मैने सोचा काम वाली होगी और थी भी वोही, लेकिन ये उसकी बेटी थी मैने जब उसको पूछा तेरे मम्मी नहीं आयी वो बोली वो बीमार है मैने सोचा आज मौका है इसकी जवानी की खूबसूरती का लुत्फ़ उठाने का सो मौका गंवाना नहीं चाहिये, बाद में मैं अपने कमरे में चला गया और उसको बोला प्रिया चाय तो बना दे मुझको वो बोली ठीक है जब वो लेकर आयी तो मैने उससे ऐसे ही बातें करनी शुरु कर दी और उसको अपने पास बैठा लिया, तभी मैने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला एक किस तो दे उसने कुछ नहीं बोला तभी मैने उसको पकड़ कर किस करना शुरु किया पहले तो ५ मिनट तक वो थोड़ा छुड़ाती रही तभी मैने उसकी जुबान पर अपनी जुबान रख कर किस करने लगा और करीब २० मिनट तक उसके होंठों को चूसता रहा उसकी आंखे बंद थी तभी मैने देखा उसको मज़ा आ रहा है और मैने सीधा उसकी फ़ुद्दी में हाथ रख दिया वो तड़पी थोड़ा बाद में मैने अपनी एक उंगली उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा जब वो मस्त हो गये मैने उसके कपड़े उतार दिये उसको नंगी देख कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये क्या जवानी थी उसकी मस्त थी मैं ऊपर उसके मम्मे चूस रहा था तो नीचे उस चूत में दो उंगली डाल दिया क्योंकि वो कुंवारी थी तो।

मैने पहले हाथ उसकी चूत को थोड़ा ढीला किया ताकि उसको दर्द न हो लेकिन दर्द तो मैं ऊपर दे भी रहा था मैं उसके मम्मे पर दबा रहा था बार बार क्योंकि इसे मज़ा और आता है तभी वो झड़ गयी उसके बाद मैने उसके मुंह में जब अपना लंड डाला तो देख कर डर गयी लम्बा तो था ही लेकिन मोटा भी था वो थोड़ा न बोली मैने कहा थोड़ा सा ले अंदर जब उसने अंदर लिया तो मैने एक झटका दिया और उसके मुंह मैं ५” तक अंदर घुसा दिया उसकी आंखों मैं आसू आ गये मैने कुछ नहीं देखा और बोली चुप इसको जितना ज्यादा इसका ख्याल रखेगी उतना ज्यादा मज़ा देगा तुझको

उसने फ़िर चूसना शुरु कर दिया उधर नीचे वो पूरी गरम हो चुकी थी, मैने उसके मुंह से लंड निकला और उसकी चूत पर रख दिया, लेकिन मुझको मालुम था इसको दर्द होगा मैने उसको कस कर पकड़ लिया लगातार झटके दिये वो दर्द से चिल्ला रही थी लेकिन मेरा तरीका यही है सेक्स करने का. क्योंकि जितना ज्यादा आप हार्ड फक्क करोगे उतना ज्यादा आप उत्तेजित होगे और यही तो सेक्स है ,क्योंकि मैं जिम में नियमित जाता हूं सो मेरे अंदर जोश बहुत रहता है सो उसकी मैने उस दिन खूब चुदाई की उसको भी खूब आनन्द आया और मुझको तो आना ही था बाद में मैने उसको बोला कि आज के बाद तू मेरे से ही चुदवायेगी वो बोली क्यों नहीं साहिब अब तो मैं ही आपकी रंडी हूं मैने कहा कोई बात नहीं साली आज तो पहला दिन था सो थोड़ा तरस किया अगली बार देखना Antarvasna

Hindi Sex Stories

मेरा नाम संजीव Hindi Sex Stories है। मेरी उम्र 24 साल है। यह कहानी मेरी जिन्दगी का असली और सत्य अनुभव है। उन दिनों मैं जयपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र था। मैं जुलाई 2008 जयपुर में आया था। मैंने जयपुर आने से पहले कभी चुदाई नहीं की थी। चुदाई करने की कसक मेरे दिल में हमेशा से ही थी लेकिन न जाने क्यों 24 की उम्र में आते आते मुझे अपने नाग की तरह फुनकते लंड को थामना बहुत ही मुश्किल पड़ रहा था। मुठ मारने से भी में अब बोर हो गया था। मुझे चूत की बहुत जरूरत थी और इस बार किस्मत ने भी मेरा भरपूर साथ दिया।

मेरी कक्षा में सिर्फ दो लड़कियाँ थी। उन दोनों में से एक थी गार्गी ! गार्गी क्या लड़की थी, उसके दो दो किलो के चूचे थे और गांड भी खूब भारी थी। उसी दिन मुझे लगा कि गार्गी की चूत ही मेरे लंड की गर्मी को ठंडा कर सकती है।

अगले दिन गार्गी ने मुझे बताया कि उसे मोबाइल फ़ोन खरीदना है। कॉलेज से मार्केट काफी दूर था और मेरे पास बाइक भी नहीं थी। मैंने अपने दोस्त से पल्सर मांग ली।

फिर क्या था, क्लास ख़त्म होने के बाद गार्गी और मैं बाइक पर चल दिए। मैंने बाइक की स्पीड १०० से भी ऊपर कर दी और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया जैसे ही उसके नाजुक नाजुक हाथ मुझे छू रहे थे मेरी पूरी बॉडी में सनसनाहट दौड़ रही थी और मेरे लंड तो आज सारी हदें पार कर रहा था। उस वक़्त मुझे लगा कि अभी बाइक रोक कर उसे अपने लंड का स्वाद चखा दूँ। लेकिन मैंने अपनी भावनाओं को काबू में रखा। मुझे तो समुन्दर में तैरना था, नदी में नहाने में क्या रखा था।

उस दिन बाइक पर जो तीस मिनट का सफ़र था, उसको रात को सोच कर मैं मुठ ही लगा रहा था कि गार्गी का फ़ोन आ गया। अब मैंने गार्गी से फ़ोन पर बात करते करते ही लंड से ऐसी पिचकारी छोड़ी कि वीर्य दो मीटर दूर जाकर गिरा। लेकिन आज की मुठ में और दिनों से अलग मजा था।

अगले दिन क्लास में गार्गी मेरे आगे बैठी थी तो उसकी सलवार से उसकी पैन्टी दिख रही थी। उसने गुलाबी रंग की पैन्टी पहनी थी। अब तो मेरा लंड फ़ुफ़कारने लगा।

क्लास छुटने के बाद मैं गार्गी को कॉफ़ी के लिए कैंटीन ले गया। बात बात में उससे पता चला कि उसका अभी कोई बॉयफ़्रेंड नहीं है। अब तो मुझे गार्गी की चूत की सुरंग और मेरे लंड की तोप का मिलन साफ़ नजर आ रहा था। धीरे धीरे हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई।

एक दिन शाम के 4 बजे लैब में कोई नहीं था। मैंने गार्गी को अपने दिल की बात कह दी। उसने भी हामी भर दी, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और इमरान हाश्मी स्टाइल में गार्गी के होंठों का सारा रस चूस लिया। अब मेरे हाथ धीरे धीरे उसके वक्ष पर पहुँच गए। मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरु कर दिया। उसके स्तन डनलप के गद्दे से कम नहीं लग रहे थेऔर मेरा लंड तो उस वक़्त हीरे से भी सख्त हो रहा था। उसने भी मेरा लंड अपने कोमल हाथो में ले लिया और सहलाने लगी। अपने हॉस्टल में मैंने खूब ब्लू फिल्म देखी थी और मैंने लैब के कंप्यूटर में गूगल से ढूंढ कर ब्लू फिल्म चला दी।

अब मैंने फिल्म की नक़ल करते हुए अपना लंड गार्गी के मुँह में दे दिया। पहले तो गार्गी ने मना किया फिर मान गई और वो लंड चूसने लगी। मेरा लंड पहली बार किसी लड़की के मुँह में गया था। एक मिनट के अंदर ही मैं झड़ने लगा और मैंने गार्गी के मुँह के ऊपर वीर्य बारिश कर दी और वो उसको ऐसे चूसने लगी जैसे अमृत की बारिश हो रही हो।

मैं झड़ चुका था लेकिन गार्गी की आग अभी बाकी थी। उसने अपनी चूत में ऊँगली करके अपनी आग बुझाई।

अगले दिन मुझे गार्गी को संतुष्ट करना था इसलिए मैं अगले दिन पॉवर कैप्सूल और कंडोम लेकर गया। लेकिन अगले दिन लैब में क्लास चल रही थी और मैंने लंच के बाद कैप्सूल खा लिया था। शाम के चार बज रहे थे और मेरा लण्ड नाग के फन की तरह जींस को फाड़ के बाहर आने को कर रहा था। आज किस्मत ने मेरा साथ दिया। एक टीचर को बाहर जाना था दो घंटे के लिए उसने मुझे अपने ऑफिस की चाबी दे दी क्योंकि टीचर का कुछ काम करना था। इधर मुझे अपने लंड की आग बुझानी थी।

मैं गार्गी को लेकर ऑफिस में आ गया। मेरे ऊपर अब तो कैप्सूल का पूरा असर हो चुका था। ऑफिस में घुसते ही मैंने गार्गी को बाहों में भर लिया और टूट पड़ा। मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और स्तनों को चूसने लगा और गार्गी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। आज मेरा लंड सात इंच से बढ़ कर आठ इंच का हो गया था। गार्गी की चूचियाँ दबाने में बहुत मजा आ रहा था, उसके स्तन काफी गुदगुदे थे।

मैंने अपना लंड उसके दोनों स्तनों के बीच में रख दिया और हिलाने लगा। अब मेरा हाथ अपने आप गार्गी की पैन्टी पर पहुँच गया और मैंने उसकी पैन्टी उतार दी। गार्गी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और चूत एक दम गोरी गोरी थी। मैं चूत को सहलाने लगा।

अब उसकी चूत गीली होती जा रही थी, मुझे लगा कि गार्गी की सुरंग में तोप दागने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा और मैंने कंडोम चढ़ा के डाल दिया अपना लण्ड गार्गी की चूत में !

जैसे ही पहल झटका लगा, गार्गी कर गई- उहऽऽ ह्ह अह्ह्ह्हह्ह. और उसकी चूत से खून निकलने लगा। वो दर्द से कराहने लगी पर आज मेरा लण्ड कहाँ रुकने वाला था, मैंने उसकी एक टांग कुर्सी पर रखी और एक टांग को अपने हाथ में रख के झटके पे झटके देने लगा। उधर गार्गी दर्द से उफ्फ्फ अहह उफ़ आह्ह मर गई … और धीरे से डालो ..कहने लगी।

और जब तीन चार बार लंड चूत में घुस कर बाहर आ गया तो गार्गी को मजा आने लग गया।

अब गार्गी कहने लगी- और डालो … और डालो !पाँच मिनट तक मैंने गार्गी को खूब पेला। अब मेरा झड़ने वाला था कि तभी टीचर आ गया। लंड की आग में मुझे कुछ नहीं दिख रहा था। उसने हमें दरवाज़े के छेद में से देख लिया था। लेकिन जब तक मैंने अपने लंड से गार्गी की चूत को तृप्त नहीं कर दिया, मैं ठोकता रहा और अंत में मैं झड़ने लगा। फिर जल्दी जल्दी गार्गी और मैंने कपड़े पहने लेकिन टीचर हमें देख चुका था।

दरवाजा खोला तो टीचर ने गार्गी से कहा- मुझे भी अपनी चूत दे दे ! नहीं तो सबको बता दूंगा !

गार्गी मेरी तरफ देखने लगी, मेरे पास भी कोई और रास्ता नहीं था। टीचर ने भी गार्गी को ठोका और उसकी नई और गोरी गोरी चूत का मजा लूटा।

आज भी गार्गी और मेरा चुदाई कार्यक्रम चल रहा है और हफ्ते में एक दो बार टीचर गार्गी की ले लेता है।

लेकिन क्या करें ! हमे भी ऑफिस चुदाई करने को मिल जाता है।

दोस्तो, कहानी कैसी लगी, बताना जरूर ! Hindi Sex Stories

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Antarvasna

मेरा नाम अंश है. मेरी उम्र २१ साल है. यह उस Antarvasna वक्त की बात है जब में बी एस सी में था और मेरी उम्र १९ साल थी. मेरे चाचा की उम्र ३५ साल थी और मेरी नई चाची की उम्र २३ थी। जिनका नाम सुनीता है उनका फिगर ३६ -२८ -३८ है. उनके बूब्स बहुत सेक्सी हैं. जब वो लाल ब्रा और काली पैंटी पहनती हैं बहुत सेक्सी लगती हैं वो बहुत सेक्सी और प्यारी है। जब वो शादी के बाद हमारे घर में रहने लगी तो उनकी सेक्सी फ़ीगर का दीवाना हो गया। जब भी वक्त मिलता, मैं उनके साथ बैठता और उन से बातें करता। वो भी मुझे पसन्द करने लगी थीं, वो कहती थीं कि मैं उनका भतीजा नहीं बल्कि उनका देवर लगता हूं।

एक दिन घर के सभी लोग मेरे कज़िन की शादी में गए। मेरी वार्षिक परीक्षा चल रही थी इसलिए मैं नहीं गया, तो चाची ने कहा मैं भी नहीं जाऊंगी, मैं यहीं अंश की देखभाल करूंगी। चाचा ने भी हां कर दी।

मैं उनको स्टेशन छोड़ कर आया तो चाची ने खाना के लिए पूछा तो मैंने खाना लगाने को कह दिया। चाची ने कहा कि खाना तो तैयार है, तुम रसोई में ही आ जाओ, वहीं खा लेना। मैं रसोई में चला गया।

चाची खाना लगा रही थी कि बिजली चली गई। कुछ देर बाद गर्मी के कारण चाची का ब्लाऊज़ पसीने से भीग गया और उनकी ब्रा नज़र आने लगी। मैं खुश हो गया और उनके वक्ष देखने लगा। कुछ देर तो चाची को पता नहीं लगा पर बाद में उन्होंने भांप लिया कि मेरी नज़रें उनकी छाती पर हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या देख रहे हो। मैं घबरा गया और कहा कि कुछ नहीं, आप को गर्मी लग रही होगी, मैं खाना खा चुका हूं, आप कुछ देर बाहर जाकर हवा में बैठ जाएं।

उन्होंने कहा कि नहीं, मैं नहाने जा रही हूं, तुम दरवाजा चैक कर लेना। दरवाजा बंद करके मैं अपने कमरे में चला गया। बराबर में ही बाथरूम है और उस का एक दरवाजा मेरे कमरे में भी खुलता है।

अपने कमरे में पहुंच कर जब मैंने पानी गिरने की आवाज़ सुनी तो एकदम मेरे जहन में ख्याल आया कि क्यों ना मैं चाची को नंगा देखूं? मैं फ़ौरन उठा और दरवाजे के की-होल से देखने लगा। वो मोमबत्ती की रोशनी में नहा रही थी। बड़ी मादरचोद लग रही थी, रण्डी की तरह मम्मे मसल रही थी अपने।

हे भगवान ! मैंने पहली बार उनको नंगा देखा था। उनके मम्मे इतने बड़े थे कि मैं बस उनको ही देखता रहा। मेरे शरीर में एक अजीब किस्म का करंट दौड़ गया। मेरा लण्ड एकदम खड़ा होने लगा।

मैंने उसे अपने हाथ में ले लिया और हिलाने लगा। हिलाते हिलाते बराबर में मेज़ पर रखा फ़ूलदान गिर गया। उसकी आवाज़ को सुन कर चाची ने मेरे कमरे वाले दरवाजे को खोल कर देखा कि क्या हुआ। मगर जब उन्होंने मुझे अपना लण्ड पकड़े हुए देखा तो एकदम चौंक गई। मैं भी एकदम अपने लण्ड को अन्दर करके ज़िप लगाने लगा। चाची भी तुरन्त चली गई।

45 मिनट के बाद उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया तो मैं घबरा गया कि पता नहीं अब क्या होगा। खैर मैंने दरवाज़ा खोल दिया। चाची ने आसमानी रंग की साड़ी और मैचिन्ग ब्लाऊज़ पहन रखी थी। वो अन्दर आई और मेरे बेड पर बैठ गई। कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि मेरे पास आओ। मैं घबराते हुए उनके पास जा कर खड़ा हो गया। उन्होंने मुझ से पूछा कि तुम कितनी बार मुझे नहाते हुए देख चुके हो?

मैं एकदम घबरा गया, मेरे पसीने छूट गए। उन्होंने मेरी यह हालत देखी तो मुस्कुराई और कहा कि तुम मुझे बताओ, मैं किसी को नहीं बताऊंगी, अगर तुमने नहीं बताया तो मैं सबको बता दूंगी। मैंने फ़ौरन कहा – मुझे माफ़ कर दें ! यह पहली बार हुआ है, इससे पहले मैंने कभी ऐसा नहीं किया है।

उन्होंने कुछ देर बाद कहा कि क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं? मैंने कहा- हां ! आप मेरी चाची हैं मैं आपको बहुत पसन्द करता हूं।

उन्होंने कहा कि मैं जो कहूं, तुम मान लोगे?

मैंने कहा- आज़मा कर देख लें।

उन्होंने कहा- अपनी पैन्ट उतारो।

मैं सन्न रह गया।

उन्होंने कहा- अगर मेरा कहा नहीं मानोगे तो मैं सब को बता दूंगी कि तुम मुझे नंगा नहाते हुए देख रहे थे।

मैं और ज्यादा परेशान हो गया। उन्होंने फ़िर कहा कि अपनी पैन्ट उतारो।

मैंने कहा- क्यों?

उन्होंने कहा कि तुमने मुझे नंगा देखा है, मैं भी तुम्हें नंगा देखूंगी।

इसके बाद वो मेरे करीब आईं और जबरदस्ती मेरी शर्ट उतारने लगी। इससे मेरी आस्तीनें फ़ट गई तो मैंने कहा- अच्छा ! मैं उतारता हूं और मैंने अपनी कमीज़ उतार दी। फ़िर चाची ने कहा – पैन्ट भी उतारो। मैंने धीरे धीरे वो भी उतार दी। अब मैं अन्डरवीयर में उनके सामने खड़ा था। मुझे बहुत शरम आ रही थी।

इस पर उन्होंने कहा कि यह भी उतारो, मैं तुम्हें पूरा नंगा देखना चाहती हूं। मैंने मना कर दिया तो उन्होंने मेरे पास आ कर मुझे एक चपत लगाई और कहा- मादरचोद उतारता है या नहीं !

मैं उनके मुंह से गाली सुन कर हैरान रह गया। उन्होंने जलदी से मेरा अन्डरवीयर नीचे कर दिया। मेरा लण्ड उस वक्त ५” का था और किसी खम्बे की तरह खड़ा था।

चाची ने मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया तो मुझे एक अजीब सा मज़ा आया और मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। उन्होंने कहा कि तुम्हारे चाचा का तो 3″ ही लम्बा होगा मगर तुम्हारा तो उस से भी बड़ा है। तुम्हारे चाचा तो सेक्स करना जानते ही नहीं हैं, उनका लण्ड मेरे अन्दर जाते ही पानी छोड़ देता है। क्या तुमने किसी से सेक्स किया है?

मैंने कहा कि नहीं। तो उन्होंने कहा कि आज मैं तुन्हें एक नया गेम सिखाऊंगी। तुम्हें फ़ुटबाल बहुत पसन्द है ना, यह खेल उससे भी ज्यादा अच्छा है।

उसके बाद उन्होंने मेरे होंटों पर किस किया। मैं भी अपना काबू खो बैठा और उनको अपनी बाहों में ले लिया। वो किस मुझे हमेशा याद रहेगी, उनके होंटों को जब मैंने अपने दांतों में दबाया तो मुझे बहुत मज़ा आया था। चाची ने मुझे २०-२५ मिनट तक किस किया, फ़िर कहा कि बेडरूम में चलो।

मैं नंगा ही उनके साथ बेडरूम में चला गया। वहां पर चाची ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर आइसक्रीम कई तरह चूसना शुरू कर दिया। मैं तो आसमान पर पहुंच गया। मैं बता नहीं सकता कि कितना मज़ा आया था

कुछ देर बाद मैंने कहा- चाची अब मेरा निकलने वाला है, आप मुंह से मेरा लण्ड निकाल दें तो उन्होंने कहा कि मेरे मुंह में ही गिरा दो, मैं कब से लण्ड का पानी पीने को बेकरार हूं। मैंने ऐसा ही किया। मुझे अच्छी तरह याद है कि इससे पहले मेरा पानी इतना ज्यादा नहीं निकला था।

फ़िर चाची ने पूछा कि तुम्हें मेरे शरीर में सबसे ज्यादा क्या पसन्द है?
मैंने कहा- आप के स्तन।
तो उन्होंने कहा- दूर से तो देख ही चुके हो, क्या छूना चाहते हो?

यह सुनते ही मैंने उनको अपनी ओर खींच लिया और उनके ब्लाऊज़ के बटन खोलने लगा। ब्लाऊज़ के नीचे काले रंग की ब्रा उनके बूब्स पर कसी हुई थी। मैंने उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाना और चूमना शुरू कर दिया। फ़िर मैंने ब्रा खोलने की कोशिश की मगर मुझसे नहीं खुली। चाची हंस पड़ी और अपने आप अपनी ब्रा उतार दी।

उनके बूब्स देख कर मैं पागल हो गया, उफ़्फ़ ! इतने बड़े ! मैंने एकदम अपने मुंह में ले ली और चाची अजीब अजीब आवाज़ें निकालने लगी। मैंने उनके लाल लाल निप्पल चूस चूस कर बड़े कर दिए।

तब चाची ने कहा कि मुझे किस दो। मैं फ़ौरन उन के होंटों की तरफ़ बढा तो उन्होंने कहा- यहां पर नहीं ! नीचे ! मैंने कहा कि वहां पर मैं कैसे किस कर सकता हूं, तो उन्होंने कहा कि मैंने तो भी तुम्हारे लण्ड को चूसा था, अब तुम्हारी बारी है।

मैंने कहा- अच्छा ! कोशिश करता हूं!

फ़िर मैंने चाची की साड़ी खोली, पेटिकोट भी उतार दिया। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मैंने उन को बेड पर लिटाया और उनकी चूत पर हल्के से किस की। मुझे बड़ा मज़ा आया। मैंने फ़ौरन अपनी जीभ उनकी चूत के होंटों पर रख दी और रगड़ने लगा।

उनकी सिसकारियां निकल गई लेकिन वो कह रही थी कि ” अंश ! खा जाओ मेरी चूत को ! मैं बहुत दिनों से प्यासी हूं ! मेरी चूत का पानी पी लो ! मुझ से बरदाश्त नहीं होता आह ह्ह आ आऽऽ यस फ़क मी यू बास्टर्ड यू मदर फ़कर ऽऽऽ”

मैं सोच रहा था कि कैसे मां की लोड़ी गालियां दे रही है. मुझे चाचा की किस्मत पर रश्क हो रहा था। वो रोज़ कैसे मजे से चाची को बजाते होंगे. कुछ देर बाद चाची की चूत में से भी मनी निकली।
मैं बहुत हैरान हुआ कि लेडीज़ की भी मनी निकलती है।

हम दोनो एक दूसरे से लिपट कर बेड पर लेट गए। मैंने उन से पूछा कि क्या आपने शादी से पहले किसी के साथ सेक्स किया था? उन्होंने कहा कि यह मैं बाद में बताऊंगी, पहले मेरी चूत को ठण्डी तो कर।

मैंने कहा कि ठीक है मेरा लण्ड दोबारा चूसें।
चाची ने कहा कि ६९ पोज़ीशन में हो जाओ।
मैंने कहा- यह क्या होता है तो वो कहने लगीं कि सीधे लेट जाओ। मैं सीधा लेट गया, वो मेरे ऊपर इस तरह लेटीं कि उनका मुंह मेरे लण्ड की तरफ़ और उनकी चूत मेरे मुंह की तरफ़।
फ़िर उन्होंने कहा कि यह है ६९ पोज़ीशन। अब तुम मेरी चूत चाटो, मैं तुम्हारा लण्ड चूसती हूं।
हम दोनो चूसना और चाटना शुरू हो गए। ५-१० मिनट बाद मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा होने लगा था। पता नहीं उनके चूसने में क्या जादू था कि मेरा लण्ड इतना खूबसूरत कभी नहीं लगा।

मैंने कहा- क्या आप की चूत में डाल दूं?

उन्होंने कहा कि देर क्यों कर रहे हो, आ जाओ, लेकिन एक मिनट रुको, वो बेड से उठी और मेज़ की दराज़ से कन्डोम का पैकेट निकाला और मेरे लण्ड पे चढा दिया और कहा- मैं प्रेग्नैन्ट नहीं होना चाहती।
फ़िर उन्होंने मेरे लण्ड पर क्रीम लगाई और कुछ अपनी चूत पर भी लगाई और घोड़ी बन गई और कहा कि मेरे अन्दर आ जाओ मेरी जान ! मैंने अपने लण्ड की टोपी उनकी चूत पर रगड़ी।
चाची ने कहा कि क्यों तड़फ़ा रहे हो, जल्दी से मेरे अन्दर डाल दो। मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो चाची की चीख निकल गई। उन्होंने कहा – आराम से डालो।

मैंने आराम से धीरे धीरे करना शुरू कर दिया तो वो कहने लगी – मादरचोद ! बहनचोद ! चोद दे मुझे ! मेरी चूत फ़ाड़ दे आ आहऽऽऽ आ मज़ा आ रहा है, जोर से करो। अब मैं जोर से करने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में से निकाल लिया तो उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? मैंने कहा कि मैं अपने अन्दाज़ में करना चाहता हूं। चाची ने कहा- तुम जो चाहो करो।

मैंने चाची को गोद में उठाया और अपना लण्ड उनकी चूत में डाल कर उनको उछालने लगा। मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी मगर इस अन्दाज़ में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

दस मिनट में मैंने चाची से कहा कि मेरी निकलने वाली है तो उन्होंने फ़ौरन मेरा लण्ड निकाल कर उस पर से कन्डोम हटा दिया और अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। मेरी मनी फ़िर निकल गई।

कुछ देर बाद मैंने चाची से कहा कि मैं आपको फ़िर चोदना चाहता हूं।
उन्होंने कहा कि सब्र करो, अब कल करेंगे, हमारे पास पूरा एक हफ़्ता है।

मैंने कहा- अब आप अपनी कहानी मुझे सुनाएं।

उन्होंने कहा- मैंने सेक्स अपनी बहन के साथ किया था जिस का नाम सनम है। मैंने कहा कि आप उसी को बुला लीज़िए, मैं उसको भी मज़ा दे सकता हूं।

उन्होंने कहा कि ठीक है मैं बात करूंगी। कल तो मैंने उसे वैसे भी बुलाया ही हुआ है, डोन्ट वरी।
वो एक अलग कहानी है.
आपको मेरी यह सच्ची घटना कैसी लगी? Antarvasna

Antarvasna

हाय दोस्तो, मेरा नाम उमेश है, मैं हैदराबाद Antarvasna में रहता हूँ, मैं अन्तरवासना की कहानियों का नियमित पाठक हूँ. अभी मेरी उमर 37 साल है.

आज मैं आपको मेरी जिंदगी की मजेदार दास्ताँ बताना चाहता हूँ. यह करीब 10 बरस पहले की सच्ची कहानी है.

मैं अपने भाई बहनों में सबसे छोटा हूँ. उस समय मेरी भतीजी कोमल जिसकी उम्र उस वक्त करीब 18 साल होगी, उसका कद करीब 5 फुट 4 इंच है, बचपन से मैं उसे गोद में खिलाता आ रहा था, वो बचपन से रात को वो ज्यादातर मेरे साथ ही खेलते खेलते चिपक कर सो जाती थी, उस वक्त तो मुझे कुछ खास महसूस नहीं होता था. लेकिन जब उसके बूब्स करीब संतरे के आकार के हो गए तो रात को जब वो चिपक के सोती तो मेरी हालत ख़राब हो जाती.

हालाँकि तब तक मैं कई लड़कियों को चोद चुका था, तथा कइयों की तो सील भी मैंने ही तोड़ी थी, क्योंकि हमारा बिजनेस ही ऐसा था, हमारा रेडीमेड कपड़े बनाने का कारखाना है और हमारे यहाँ मशीनो पर सिर्फ़ लड़कियाँ ही काम करती हैं, हम ज्यादातर कुंवारी लड़कियों को ही काम पर रखते हैं, क्योकि एक तो कम पगार पर मिल जाती थी तथा दूसरे शादी होने पर अपने आप साल दो साल में काम छोड़ कर चली जाती थी. ज्यादातर हमारे यहाँ 18-20 साल की लड़कियाँ काम करती थी.

खैर ये कहानियाँ मैं आपको बाद मैं लिखूंगा, तो मैं बता रहा था कि रात को जब मेरी भतीजी मुझे चिपक के सोती तो उसके बूब्स मेरे सीने में दब जाते थे, उसे इस बारे में पता था या नहीं लेकिन इस हरकत से मेरा 7″ लंबा हथियार खड़ा हो जाता और मुझे डर रहता कि कहीं उसका हाथ या पैर मेरे लंड को छू न जाए.

एक रात को जब उसे नींद आ चुकी तो मैंने धीरे से अपना हाथ उसके एक बूब्स पर रख दिया उसके बूब्स कमाल के सख्त थे. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिय. थोड़ी देर बाद मैंने उसकी नाईट शर्ट के बटन खोल दिए और शमीज के ऊपर से उसके बूब्स को काफी देर तक दबाता रहा, उसने कोई हरकत नहीं की. इससे आगे बढ़ने की मेरी हिम्मत नहीं हुई आख़िर मैंने मूठ मार कर अपने को शांत किया और सो गया.

दूसरे दिन रात को फ़िर में उसके सोने का इंतजार करने लगा कि अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रख लिया और नींद में होने का नाटक किए हुए सोती रही. मुझे समझ में आ गया कि कल रात को उसे सब कुछ मालूम हो चुका था, फ़िर क्या था मैंने उसके नाईट शर्ट के बटन खोल दिए और देख कर हैरान रह गया कि आज उसने अन्दर शमीज ही नहीं पहनी थी. मेरे हाथ सीधे उसके अनछुए बूब्स पर थे, उसके छोटे छोटे पिंक कलर के निप्पल देख कर मेरे तो होश उड़ गए. उस रात मैंने उसके बूब्स को खूब मसला और मुँह में लेकर चूसा भी लेकिन वो सोती रही.

मैंने धीरे से उसके पजामे के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ रखा तो मुझे लगा जैसे फूली हुई गद्दी पर हाथ रखा हो, मैंने धीरे से उसके पजामे के अन्दर हाथ डालने की कोशिश की तो वो दूसरी तरफ़ करवट बदल कर ओढ़ कर सो गई, आख़िर उस दिन भी मैंने मूठ मार कर अपने को शांत किया और सो गया.

अगले दिन से उसका व्यव्हार मेरे साथ कुछ बदल सा गया और वो बार-बार चाचू-चाचू कहकर मेरे साथ चिपकने लगी, मैं समझ गया कि अब इसको चोदने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा लेकिन मौका हाथ नहीं लग रहा था क्योंकि उसी कमरे में मेरे पिताजी भी सोते थे, इसलिए केवल बूब्स दबाकर तथा चूत ऊपर से दबाकर ही संतोष करना पड़ता था, अब तक हम खुल गए थे लेकिन हर बार वो इससे आगे बढ़ने के लिए मना कर देती.

आख़िर एक दिन मुझे मौका मिल ही गया, भइया व भाभी शादी में मुंबई गए थे, पिताजी कारखाने में चले गए, घर पर सिर्फ़ मैं और कोमल ही थे. सुबह 10 बजे का वक्त होगा, पिताजी के जाने के बाद जब वो नहाने जा रही थी तो मैंने उसे पकड़ लिया और चूमने लगा. तो वो बोली चाचू मुझे छोड़ो! मुझे नहाना है! मैंने कहा चलो आज साथ नहाते हैं, तो वो शरमा गई, क्योंकि आज तक हमने रात में ही सब कुछ किया था. मैं उसके साथ बाथरूम में घुस गया और उसके कपड़े उतारने लगा. वो न ना करती रही लेकिन मैंने उसकी पेंटी छोड़ कर सब कपड़े उतार दिए और अपने भी अंडरवियर छोड़कर सब कपड़े उतार दिए.

वो शरमा रही थी लेकिन मैंने उसकी एक चूची एक हाथ में तथा दूसरी मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. धीरे धीरे उसे भी मजा आने लगा.
मैंने जैसे ही उसकी पेंटी को हाथ लगाया, उसने कहा- चाचू, ये सब नहीं!
लेकिन मैं जानता था कि आज मौका है, जो करना है आज ही कर लेना है!

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा!
और जबरन उसकी पेंटी में हाथ डाल दिया. उसकी चूत पर नरम नरम रोयें जैसे छोटे छोटे बाल आना शुरू ही हुए थे, मैंने देखा उसकी फूली हुई चूत पूरी तरह गीली हो रही थी. मैंने उसकी पेंटी उतार दी तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली. मैंने घुटनों के बल बैठ कर उसकी चूत को देखा और अपनी जीभ से उसे चाटने लगा वो सिसकारियाँ भरने लगी और मेरे सर को जोर से अपनी चूत पर दबा लिया.

मैंने उसे कहा- चलो अन्दर बेडरूम में चलते हैं.

वो कुछ नहीं बोली. मैंने उसे उठाया और अन्दर कमरे में बिस्तर पर ले आया. उसने आँखे बंद कर रखी थी, मैंने अपना अंडरवियर उतारा और उसकी बगल में लेट गया. धीरे धीरे उसकी चूत सहलाते हुए मैंने उसका एक हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया, उसने उसे पकड़ लिया लेकिन कुछ कर नहीं रही थी. मैंने उसे लंड मुंह में लेने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया. मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया.

मैंने फ़िर उसकी चूत चाटते हुए एक अंगुली उसकी चूत में डाल दी. उसने धीरे से उफ़ किया लेकिन कुछ बोली नहीं, मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा, धीरे धीरे उसे भी मजा आने लगा. फ़िर मैंने उठ कर अपने लंड पर थोड़ा तेल लगाया और उसके पैरों को चौड़ा करके बीच में बैठ गया. वो आँखे बंद करके पड़ी रही. मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुँह पर रखा और थोड़ा सा जोर लगाया ही था कि वो बोली- चाचू दर्द हो रहा है.
जबकि लंड तो अभी पूरा बाहर ही था.

खैर मैंने थोड़ी देर उसके बूब्स दबाये और फ़िर थोड़ा जोर लगाया वो फ़िर बोलने लगी- दर्द होता है.
उसकी चूत इतनी टाईट थी कि लंड का टोपा भी अन्दर नहीं घुस रहा था, मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे बातों में लगाया तथा उसे कहा कि वो जोर से मुझे बाँहों में भर ले. जैसे ही उसने मुझे बाँहों में लिया, मैंने पूरी ताकत से शोट मारा उसके मुँह से चीख निकल गई मेरा आधा लंड मेरी भतीजी की कुंवारी चूत में घुस चुका था, वो नीचे छटपटाने लगी लेकिन मैंने उसे जकड़ रखा था, वो रोने लगी और कहने लगी चाचू आप बहुत गंदे हो, आगे से मैं आपके पास कभी नहीं आऊँगी. मैंने अपना लंड और आगे नहीं दबाया और उतने ही लंड से उसको चोदता रहा.

धीरे धीरे उसे भी अच्छा लगने लगा, उसकी बाहें फ़िर मेरी पीठ पर कस गई, जैसे ही उसने अपनी पकड़ टाईट की, मैंने एक जोरदार शोट पूरा लंड बाहर निकाल कर लगा दिया. उसके मुँह से हिचकी सी निकली और वो फ़िर रोने लगी लेकिन अब मैं रुकने वाला नहीं था. मैं उसको पूरी ताकत से चोदे जा रहा था. करीब 10 मिनट बाद उसने मुझे फ़िर बाँहों में भर लिया और अपनी टांगे और चौड़ी कर ली.

अचानक उसकी चूत मेरे लंड को भींचने लगी और वो मुझसे बुरी तरह से चिपक गई. मैं भी आने वाला था, मैंने झटके से अपना लंड बाहर निकाला और उसके पेट पर अपना सारा माल उड़ेल दिया. मेरा लंड बुरी तरह दर्द कर रहा था तथा खून से लाल हो रहा था. 5 मिनट तक हम वैसे ही बेड पर पड़े रहे. जब उठने लगे तो कोमल उठ नहीं पा रही थी.

जब हमने बेड की तरफ़ देखा तो हमारे होश उड़ गए पूरी बेडशीट लाल हो चुकी थी, यह देख कोमल घबरा गई और फ़िर रोने लगी, मैंने उसे समझाया और चद्दर बदली, मैंने उसकी चूत पर नहाने के बाद रुई लगाई उससे चला नहीं जा रहा था, मैंने उसे पेनकिलर गोली दी, शाम तक काफी आराम हो गया, उसके बाद 4 दिन तक उसने मुझे हाथ भी नहीं लगाने दिया, लेकिन पांचवे दिन के बाद हमारा खेल फ़िर शुरू हो गया जो करीब 7 साल तक उसकी शादी तक चला.

इसके अलावा मैंने काफी लड़कियों की सील तोड़ी है जिसकी कहानी अगली बार! Antarvasna

सौरी सर, आज आखिरी दिन था मजार में हाजिरी लगाने का, आज 40 दिन पूरे हो गए हैं, कल से मैं समय से पहले ही हाजिरी दर्ज करा लूंगा.”

“यह क्या मजार का चक्कर लगाते रहते हो? इतना पढ़ने लिखने के बाद भी अंधविश्वासी बने हो।” प्रोफैसर ने व्यंग्य किया.

“सर, ऐसा न कहिए।” एक छात्र बोल उठा.
दूसरे छात्र ने हां में हां मिलाई,” सर, आप को मजार की ताकत का अंदाजा नहीं है।”
“सर, अंगरेजों के जमाने से ही इस मजार का बहुत नाम है, 40 दिनों की नियम से हाजिरी लगाने पर हर मनोकामना पूरी हो जाती है।” किसी छात्र ने ज्ञान बघारा.

आज भौतिकी की क्लास में मजार का पूरा इतिहास भूगोल ही चर्चा का विषय बना रहा.
प्रोफैसर भी इस वार्त्तालाप को सुनते रहे.

महेंद्र सिंह का पूरा छात्र जीवन व नौकरी के शुरू के वर्ष भोपाल में बीते हैं.
पिछले वर्ष उन्हें इस छोटे से जिले से प्रोफैसर का प्रस्ताव आया तो वे अपनी पत्नी को लेकर इस कसबेनुमा जिले परसिया में चले आए जहां सुविधा व स्वास्थ्य के मूलभूत साधन भी उपलब्ध नहीं हैं.

नए खुले आईटीआई में महेंद्र सिंह को उन के अनुभव के आधार पर प्रोफैसर के पद का औफर मिला, तो वे मना न कर सके और भोपाल के अपने संयुक्त परिवार को छोड़ कर अपनी पत्नी को साथ लिए यहां चले आए.

30 वर्षीय पत्नी सुजाता बेहद सुन्दर आधुनिक व उच्च शिक्षित है इसीलिए कभी कभार वह भी कालेज में गैस्ट फैकल्टी बन क्लास लेने आ जाती.

यह Xxx बाबा सेक्स कहानी इन्हीं सुजाता मैम की है.

सुजाता जब भी कालेज में आती, छात्रों की बांछें खिल जातीं.
नाभि दिखने वाली साड़ी, खुले बाल, गहरी लिपस्टिक से सजे होंठ और आंखों में गहरा काजल सजाए वह जब भी क्लास लेने आती, लड़कों में मैम को प्रभावित करने की होड़ मच जाती.
वे उसे फिल्मी हीरोइन से कम न समझते.

उस दिन महेंद्र जब घर लौटे तो चाय पीते हुए दिनभर की चर्चा में मजार का जिक्र करना न भूले.

यह सुनते ही निसंतान सुजाता की आंखें एक आस से चमक उठीं कि हो सकता है कि इसीलिए ही समय उसे यहां परसिया खींच लाया है.

शादी के कई साल बीत जाने पर भी अभी तक सुजाता निःसंतान थी बहुत उपाय कर लिए पर गर्भ धारण नहीं हो पाया।
दोनों दम्पति की मेडिकल जाँच में भी सब नार्मल था।

सुजाता जितनी वेशभूषा से आधुनिक थी उतनी ही धार्मिक थी.
आए दिन घर में महिलाओं को बुला कर धार्मिक कार्यक्रम करवाना उस की दिनचर्या में शामिल था.
इसी वजह से वह अपने महल्ले वालों में काफी लोकप्रिय हो गई थी.

सुजाता का शुरू में तो यहां बिलकुल मन नहीं लगता था मगर धीरे धीरे उसने अपने आप को साथी महिलाओं के साथ सामूहिक कार्यक्रम में व्यस्त कर लिया.

उसे रह रह कर भोपाल याद आता.
वहां की चमचमाती सड़कों की लौंग ड्राइव, किट्टी पार्टी, बड़े ताल का नजारा, क्लब और अपनी आधुनिक सखियों का साथ.

इधर, सुजाता का मन मजार के चक्कर लगाने को मचलने लगा.

वह सोचती कि सारे वैज्ञानिक तरीके अपना कर देख ही लिए हैं, कोई परिणाम नहीं मिला.
अब इस मजार के चक्कर लगा कर भी देख लेती हूं.

जब इस विषय में महेंद्र की राय लेनी चाही तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.
शायद उन्होंने भी सुजाता की आंखों में आशा की चमक को देख लिया था.

महेंद्र से कोई भी जवाब न पा कर सुजाता सोच में पड़ गई.
उसने अपने पड़ोसियों से इस विषय में बात करने का मन बना लिया.

लगे हाथ महिलाओं ने सुजाता की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उसे भी संतान की मनौती मांगने के लिए 40 दिन मजार का फेरा लगाने का सुझाव दे ही दिया.

कुछ का तो कहना था कि 40 दिन पूरे होने से पहले ही उसकी गोद हरी हो जाएगी.
जितने मुंह उतनी बातें सुन कर सुजाता ने तय कर लिया कि वह कल सुबह से ही मजार जाने लगेगी.

मजार कसबे के बाहर थी।
जब से यह जगह जिले में परिवर्तित हुई है, तब से भीड़ बढ़ने लगी और मजार में एक बाबा मुस्तफा की मौजूदगी भी थी.

बाबा हफ्ते में 3 दिन मजार में, शेष 4 दिन पास में पीपल के नीचे बनी झोपड़ी में बैठा मिलता.

लोग बाबा से अपनी परेशानियां बताते जिन्हें वह अपने तरीके से हल करने के उपाय बताता.

बाबा मुस्तफा बड़ा होशियार था, वह शाकाहारियों को नारियल तोड़ने तो मांसाहारियों को काला मुरगा काट कर चढ़ाने का उपाय बताता.

लोगों के बुलावे पर उन के घर जा कर भी झाड़ फूंक करता.

जो लोग उस के उपाय करवाने के बाद मन मांगी मुराद पा जाते, वे खुश हो उसके मुरीद हो जाते.
लेकिन जो लोग सारे उपाय अपना कर भी खाली हाथ रह जाते, वे अपने को ही दोषी मान कर चुप रहते.

इसलिए बाबा का धंधा अच्छा चल निकला.

सुजाता सुबह के समय साड़ी पहनकर घर से निकली.

उस समय हल्के जाड़े की शुरुआत हो गयी थी.
वह तेज कदमों से मजार की ओर निकल गई.

उसके घर और मजार के बीच एक किलोमीटर का ही फासला तो था.

अभी मजार में अगरबत्ती सुलगा कर पलटी ही थी कि बाबा मुस्तफा से सामना हो गया.

बाबा तगड़ा तंदुरुस्त अधेड़ उम्र का था।
सर पर गोल जालीदार टोपी, सफ़ेद कुरता और लुंगी में था; चेहरे पर लम्बी दाढ़ी।

बाबा सुजाता को देखता रह गया।
उसने कभी सोचा नहीं था कि इतनी सुन्दर स्त्री मजार पर आएगी।

सुजाता ने प्रणाम करने को झुकना चाहा पर बाबा दो कदम पीछे हट गया और बोला- मेरे नहीं, इसके पैर पकड़ो, वह जो इस में समाया है.

उसने उंगली से मजार की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जिस मंशा से यहां आई हो, वह जरूर पूरी होगी. बस अपने मन में कोई शंका न रखना.”

बाबा ने सुजाता की आँखों में देखते हुए कुछ मंत्र पढ़े और सुजाता को कुछ मिश्री के दाने दिए।

सुजाता गदगद हो गई.
आज सुबह इतनी सुहावनी होगी, उसने सोचा न था.

उसे पड़ोसिनों ने बताया तो था यदि मजार वाले बाबा का आशीर्वाद भी मिल जाए तो फिर तुम्हारी मनोकामना पूरी हुई ही समझो.

खुश मन से सुजाता ने जब घर में प्रवेश किया तो उसका पति चाय की चुस्की के साथ अखबार पढ़ने में तल्लीन था.

सुजाता गुनगुनाते हुए घर के कार्यों में व्यस्त हो गई.
महेंद्र सब समझ गया कि वह मजार का चक्कर लगा कर आई है.
मगर कुछ न बोला.

वह सोचने लगा कि कितने सरल स्वभाव की है उसकी पत्नी, सब की बातों में तुरंत आ जाती है. अब अगर मैं वहां जाने से रोकूंगा तो रुक तो जाएगी मगर उम्रभर मुझे दोषी भी समझती रहेगी।

अगले दिन फिर सुजाता मजार पहुंची।
उसने अगरबत्ती जला कर माथा टेका।

वापस जाने को घूमी तो सामने बाबा सामने खड़ा था।
बाबा अपनी गहरी आँखों से सुजाता को देखता हुआ बोला- सुजाता, तुम्हे अब चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. तुम्हारी सारी मनोकामना पूरी हो जाएगी।

सुजाता हैरान थी कि बाबा को उसका नाम कैसे पता चला.

“जल्दी ही तुम्हारी गोद में बच्चा होगा, बस कुछ महीनों की बात है।”

सुजाता से अब रहा नहीं गया और पूछा- आपको ये सब कैसे पता बाबा जी?
“मेरे पास तंत्र मंत्र की शक्ति है, मुझे सब पता है। लेकिन सुजाता इसके लिए तुमको साधना करनी होगी.” बाबा ने कहा.

“मैं सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ बाबा जी।”

बाबा मुस्तफा ने एक काला धागा निकाला और बोला- इस धागे को अभी अपनी कमर में बाँध लो और इसे कभी भी न खोलना।

सुजाता ने धागा ले लिया और साड़ी को हटाते हुए कमर में दो राउंड करके धागा बांध लिया।
उसकी गोरी कमर और गहरी नाभि पर बंधा काला धागा देखकर बाबा मुस्तफा की आँखों में खास चमक थी.

सुजाता प्रणाम करके घर लौट आयी।
शाम होते होते सुजाता के शरीर में वासना की आग जलने लगी।
उसने सोचा कि जरूर यह इस काले धागे के कारण हुआ है।

रात में पहल करते हुए उसने पति से कहा- आज बहुत मन हो रहा है!

पति महेंद्र ने सुजाता को बाँहों में भर लिया और फिर वासना का तूफ़ान चला और थोड़ी देर में महेंद्र संतुष्ट होकर एक तरफ लेट गया.

पर सुजाता अधूरी थी, अतृप्त थी.

वह जागती रही और उसके मन में बार बार बाबा का तगड़ा तंदरुस्त जिस्म आ रहा था।
सम्मोहनी काला धागा पूरा असर कर रहा था।

अगले दिन कामवासना से तपती सुजाता अच्छी तरह सज धज कर मजार पहुंची।
हरे बार्डर वाली हलकी गुलाबी साड़ी नाभि के नीचे बंधी थी और पारदर्शी साड़ी से कमर दिख रही थी.
गहरे हरे रंग के ब्लाउज से स्तनों के उभार साफ़ दिख रहे थे.

बाबा उसे देखकर समझ गया कि मंत्र वाले काले धागे का असर हो गया है.

सुजाता ने अगरबत्ती करके बाबा की ओर देखा।
बाबा ने अपने पीछे आने इशारा किया।

सम्मोहित सी सुजाता बाबा के पीछे चल दी.

झोपड़ी में पहुंचकर बाबा तख़्त पर बिछे गद्दे पर बैठ गया और सुजाता को बैठने को कहा।
सुजाता तख़्त पर बैठ गयी।

मंत्रमुग्ध सुजाता पूरी तरह से बाबा के वश में थी.

बाबा मुस्तफा उठा और सुजाता को अपने आगोश में ले लिया।
सुजाता के लिपस्टिक लगे होंठों को बाबा ने चूसते हुए उसकी साड़ी उतार दी।

गहरे हरे रंग के ब्लाउज में कैद सुडौल स्तन, गोरी कमर पर गुलाबी पेटीकोट और काले धागे का बंधन।

सुजाता की सुंदरता देख कर बाबा और इन्तजार न कर सका।
उसने सुजाता को तख़्त पर लिटा दिया और अपनी लुंगी खोलते हुए सुजाता के ऊपर आ गया.

धीरे धीरे पेटीकोट ऊपर सरक गया और फिर सुजाता की आ..ह के साथ बाबा का लिंग सुजाता की योनि में प्रवेश कर गया।

बाबा ने एक और धक्का दिया और पूरा लिंग सुजाता की योनि में समा गया।
और बाबा सुजाता के ऊपर छा गया।

सुजाता को अपनी योनि में इतना भराव और कठोरता पहले नहीं मिली थी।
उसने देखा तो नहीं पर शायद बाबा का लिंग काफी मोटा था।

मुस्तफा ने तेजी से सुजाता के शरीर का मंथन करना शुरू कर दिया।
बाबा के भारी भरकम जिस्म के नीचे दबी सुजाता की कामुक सिसकारियां गूंज रही थी.

उसके हर प्रहार के साथ तख़्त की चरमराहट, सुजाता की पायल की छन-छन और चूड़ियों की खन-खन ने बाबा को मस्त कर दिया।
बाबा को ऐसी सुन्दर स्त्री कभी नसीब नहीं हुई थी।

इधर सुजाता को ऐसा तेज और ताकतवर सम्भोग पहली बार मिला था।

वह सब कुछ भूल कर बाबा से लिपटी हुई सम्भोग के आनंद में खोयी हुई थी।

बाबा के एक एक धक्के का जवाब अपनी कमर उचका कर देते हुए आगे बढ़ते बढ़ते वह अपनी मंजिल के पास पहुँच गयी।

सुजाता ने अपनी जांघों से बाबा मुस्तफा को कस कर भींच लिया और चरमसुख के आनंद में खो गयी।

बाबा मुस्तफा ने कुछ लम्बे लम्बे धक्के लगाए और फिर एक लम्बा धक्का मारा।
उसका लिंग सुजाता की योनि में गहराई तक समा गया।

भारी भारी आवाज निकालते हुए बाबा स्खलित होने लगा।
वीर्य की फुहारों से सुजाता की योनि भर गयी।

कुछ हल्के हल्के झटके लगाते हुए बाबा शांत हो गया.
दोनों एक साथ तृप्त हो गए।

एक सुन्दर कामातुर गदरायी स्त्री से सम्भोग करके बाबा मुस्तफा मस्ती से सुजाता के ऊपर लेटा रहा।

थोड़ी देर बाद बाबा मुस्तफा उठा, अपनी लुंगी पहनी और झोपडी के बाहर देखा.

आसपास कोई नहीं था.

सुजाता के चेहरे पर सम्भोग की अपार संतुष्टि थी.
पहली बार उसे ऐसा सम्भोग सुख मिला था।

वह उठी और साड़ी पहनकर घर के लिए चल दी.

शाम तक सुजाता फिर से कामवासना की आग में जलने लगी।
उसका मन बाबा के बारे में सोचने लगा और वह अगले दिन का इन्तजार करने लगी.

सुजाता अगले दिन मजार पर गयी और बाबा से संतुष्ट होकर लौट आयी।
अब सुजाता को बाबा की आदत हो गयी और अब झाड़ फूंक के बहाने बाबा सुजाता के घर भी आने लगा।

पति महेंद्र ड्यूटी पर होते और सुजाता बैडरूम में बाबा के साथ होती।

बाबा मुस्तफा ने सुजाता के यौवन का भरपूर मजा लिया और सुजाता बाबा की सम्भोग शक्ति से मस्त रहने लगी.

यह Xxx बाबा सेक्स का सिलसिला चलता रहा और डेढ़ महीने बाद सुजाता गर्भवती हो गयी।

सब बातों से अनजान पति महेंद्र बहुत खुश थे.
और सुजाता भी बहुत खुश थी पर वो सच जानती थी कि उसका बच्चा बाबा मुस्तफा का है.

अब सुजाता मजार पर कभी कभी ही जाती थी।
लेकिन बाबा उसके घर पर आता रहा।

कुछ दिन बाद सुजाता मजार गयी तो देखा बाबा एक सुन्दर विवाहित स्त्री को काला धागा दे रहा था।

कुछ दिन बाद एक बार वह शॉपिंग करने गयी तो एक और युवती मिली।
उसकी कमर पर काला धागा बंधा था।

उस युवती ने सुजाता की ओर देखा और मुस्कुरा दी।
उसने सुजाता की कमर पर बंधा काला धागा देख लिया था।

सुजाता भी मुस्कुराई।
दोनों की मुस्कराहट में खास समानता थी।

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