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मुझे जॉन ने अपने गांव में छुट्टी Hindi Porn Stories मनाने के लिये बुला लिया था। आज शाम को डिनर पर वो मुझे बता रहा था कि उसके पुराने मकान पर भूतों का निवास है, और वहां जाने पर वो उत्पात मचाते हैं। मैं हमेशा उसकी बातों पर हंसता था। मेरी हंसी सुन कर वो बड़ा निराश हो जाता था। उसका मन रखने के लिये मैंने उससे कह दिया कि अगले दिन अपन वहां चल कर देखेंगे।
दूसरे दिन शाम को वो चलने को तैयार था। मैं उसे टालने के चक्कर में था पर एक नहीं चली… हम दोनों डिनर करके कार में बैठ कर चल दिये। गांव की आबादी से थोड़ी ही दूर पर यह मकान था।
जॉन ने कार रोक दी और बताया कि यही मकान है। मैंने उसे समझाया कि देखो ये भूत वगैरह कुछ नहीं होता है… तो उसने मेरी तरफ़ देखा और कहा कि चलो वापस लौटते हैं… मैंने उसके दिल से वहम निकालने के लिये उसे कहा कि अब आये है तो अन्दर चल कर देख लेते हैं।
जॉन अब झुन्झला गया- अच्छा चलो… अपनी आंखों से देखोगे तो पता चलेगा.
मैंने उसकी बात हंसी में उड़ा दी।
हम दोनों उस मकान में दाखिल हो गये। तभी एक जवान लड़का दौड़ता हुआ आया और पूछा- साब… कौन हैं आप… ओह… जॉन साब…आप… आईये!
“सब यहां ठीक तो है…” जॉन ने पूछा।
“हां मालिक… मैं यहां की रोज सफ़ाई करता हूँ… अब मैं ही ध्यान रखता हूँ यहां का… आईये…!” लड़के ने कहा।
मैं हंसा- ये लड़का यहां रहता है… तेरा नौकर है ना?
“ह… आ… हां ये तो कालू है…”
हम अन्दर मकान में चले आये। पुराना मकान था… कालू और उसका परिवार वहां रहता था। उसने हमे बड़े आदर के साथ अन्दर बैठाया।
मैंने कहा- अरे भाई कालू मुझे मकान तो दिखाओ?
“हां साब… जब तक चाय बनती है, आपको मकान दिखाता हूँ!”
“और जॉन… तुम मुझे भूत दिखाओ…” मैंने जॉन का मजाक बनाया, कालू थोड़ा सहम गया।
हम दोनों कालू के पीछे चल दिये… वो एक एक कमरा बताता जा रहा था।
मैंने एक जगह रुक कर पूछा- इस कमरे में क्या है?
“इसे रहने दो मालिक… ये कमरा मनहूस है!”
“मैंने कहा था ना… अब चलो यहां से…” जॉन ने मुझे खींचा।
“क्या मनहूस है… खोलो इसे…”
“वहां चलते हैं…” कालू बात पलटता हुआ बोला।
“नहीं रुको… इसे खोलो…” मैंने ज़िद की…
“जी चाबी नहीं है इसकी…”
मुझे गुस्सा आ गया… मैंने दरवाजे पर एक लात मारी… दरवाजा खुल गया… वह एक सजा सजाया कमरा था।
“तो यह है शानदार कमरा… यानि भूतों वाला… तुम इसे मनहूस कहते हो?” मैंने व्यंग्य से कहा- जॉन को बेवकूफ़ बनाते हो?
तभी वहां दो जवान लड़कियाँ नजर आई.
मैंने उनसे पूछा,”आप लोग कौन हैं…?”
वो दोनों लड़कियाँ घबरा गई.
उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा- हम तो छुप कर यहां रहती है… ये कालू हमारी मदद करता है.
“तो जनाब ये है आपके भूत बंगले का राज़… जॉन निकालो इन्हें यहां से…”
“साब आप हमे मत निकालिये… हम आप को खुश कर देंगी…” एक मेरे पांव पर झुक गई।
उसके बड़े बड़े बोबे उसकी कमीज में से छलक पड़े।
मैं ललचा गया उसकी जवानी देख कर।
“जॉन खुश होना है क्या…” पर मैंने देखा जॉन वहां से शायद घबरा कर जा चुका था।
दूसरी ने विनती की- आप जॉन साब से कहेंगे तो वो मान जायेंगे… प्लीज़ साब…
उसने भी अपने स्तनों को थोड़ा सा झटका दिया।
मैंने पहली वाली से कहा- तुम्हारा नाम क्या है?
“जी मैं ईवा… ये जूही…!”
जूही मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई… दोनों लड़कियाँ अब मुझे सेक्सी लगने लगी थी… मुझे उनके कपड़ों में उनका बदन महसूस होने लगा था, मुझे एकाएक लगा कि कहीं जॉन की भूतों वाली बात सच तो नहीं है।
मैंने अपना संशय दूर करने के लिये पूछ ही लिया- अ…आप दोनों कौन हैं… सच बतायें…
“बता दें क्या… हम तो बस आपके लन्ड की प्यासी हैं… और मत पूछो… और हम यहाँ पर इसका धन्धा करती हैं…” ईवा ने मुझे उत्तेजित करते हुए कहा- आपको भी हम खुश कर देंगी… पर प्लीज़ हमें मत निकालना…!
“नहीं नहीं… मैं कुछ नहीं कहूँगा… आप झूठ बोल रही हैं !” मैं कुछ विस्मित होता हुआ बोला- आप जरूर कोई प्रेत-आत्मा हैं.
ईवा पीछे से मुझसे लिपटने लगी… उसके उरोज मेरी पीठ पर गड़ने लगे।
जूही मेरे सामने आ कर सट गई- आप ऐसे क्यों सोचते हैं… कालू कहता है इसलिये… वो तो हमारी खातिर करता है…” जूही ने कालू की पोल खोलते हुए कहा।
मुझे लगा ये दोनों सच बोल रही है… पर मुझे इससे क्या मतलब था… मुझे तो दो हसीनायें मिल रही थी।
मैंने जूही को अपने में समेटते हुए उसके स्तन दबा दिये.
“हाय… सीऽऽऽ और दबाओ मेरे राजा…” उसकी सिसकारी से मैं उत्तेजित हो गया.
ईवा ने पीछे से हाथ बढ़ा कर मेरे लन्ड को पकड़ लिया… मेरा लन्ड अभी ढीला ही था… पर स्पर्श पा कर उसने भी अब अंगड़ाई ली… और धीरे धीरे खड़ा होने लगा।
आगे से जूही के होंठ मेरे होंठो से सट गये और मेरे नीचे के होंठ को चूसने लगी।
“जो सर… आओ बिस्तर पर मजा करते हैं…”
मैं उनके साथ बिस्तर के पास आ गया.
ईवा और जूही ने मेरे कपड़े उतार दिये और फिर वो दोनों भी नंगी हो गई… कम उमर और भरपूर जवानी के उभार… कटाव… गहराईयाँ… मेरा लन्ड तन्ना उठा।
ईवा ने मेरी हालत देखी और मेरा लन्ड अपने मुँह में भर लिया, जूही ने मेरे बदन को सहलाना शुरू कर दिया… ईवा कभी मेरी गोलियों को सहलाती फिर तेजी से लन्ड को मुठ मारती… मेरा सुपाड़ा उसके मुख में खेल रहा था। अब ईवा खड़ी हो चुकी थी…और तन कर मेरे आगे खड़ी हो गई… जैसे उसके बोबे मेरे हाथों से मसलने के लिये ललकार रहे थे… उसने अपनी चूत मेरे लन्ड से यूं अड़ा कर खड़ी हो गई कि मानो लन्ड घुसेड़ने की हिम्मत हो तो घुसेड़ लो।
मेरे कन्धे जूही ने अपने बोबे से चिपका रखे थे। ईवा के सामने तने हुए बोबे मुझसे सहे नहीं गये… मैंने तुरन्त ही हाथ बढा कर उसके बोबे दबा दिये और अपनी और उसे खींच लिया… उसने भी अपनी व्यापारिक अदाएँ दिखाते हुए चूत को भी झटका देते हुए लन्ड अपनी चूत में फंसा लिया।
मेरा सुपाड़ा चूत में जा चुका था… उसने भी जोर से सिसकारी भरी… और मेरे से चिपक गई।
“जो… बिस्तर पर लिटा कर मुझे चोद दो ना… हाय ऐसा लन्ड तो पहले नहीं घुसा कभी…हाय जूही…मुझे चुदवा दे रे…”
जूही भी उतावली हो उठी…”दीदी पहले मुझे चुदवा दो ना…” मैंने ईवा को दबोच कर बिस्तर पर पटक दिया और उस पर चढ़ गया। उसकी बुर पर लन्ड जमाया और दबा कर लन्ड घुसेड़ दिया।
“मैं मर गई… हाय्…” ईवा जोर से चीख उठी… सारे कमरे में उसकी चीख गूंज उठी… उसकी तड़पन देख कर मेरी वासना और भड़क उठी…
इतने में चीख सुन कर जॉन और कालू वहां पर आ गये। पर ये नजारा देख कर जॉन भी भड़क उठा… उसने भी फ़टाफ़ट अपने कपड़े उतार दिये और जूही को पकड़ लिया… कालू वहां से चला गया। अब जॉन ने अपना लन्ड जूही की चूत में घुसा डाला। अब ये दूसरी जबरदस्त चीख थी जिससे सारा घर ही गूंज उठा था…
मेरे धक्कों की रफ़्तार तेज हो गई थी… उसी के हिसाब से दोनों लड़कियाँ भी जोर से चीख चीख कर मजा ले रही थी… शायद उनकी चीखों में ही उनकी वासना और उत्तेजना थी.
मैं ईवा के बोबे दबा दबा कर चोद रहा था… बदले में वो भी अपने मस्त चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही थी। उसका कसा हुआ शरीर मुझे तेजी से चरम-सीमा की ओर ले जा रहा था.
ईवा भी प्रोफ़ेशनल ढंग से सिसकारियाँ भरी चीखें निकाल कर… और बहुत ही उत्तेजित तरीके अपनी चूत को घुमा घुमा कर चुदवा रही थी… सच में वो एक वेश्या ही थी जो मर्द को पूर्ण रूप से सन्तुष्ट करना जानती थी।
मेरे धक्के बढ़ते जा रहे थे… मैं चरमसीमा तक पहुंच चुका था…मैं और मजे लेना चाहता था… देर तक चोदना चाहता था… पर ईवा की चूत की अदाएँ… मरोड़ना और दीवारों को सिकोड़ना और चूत का लन्ड को पकड़ने की कला ने मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया।
मैं अन्त में शिखर पर पहुंच ही गया और मेरी पिचकारी छूट पड़ी। मेरी पिचकारी के साथ ही ईवा फिर से चीख उठी- हाय जो… तुमने मुझे चोद डाला… मैं गई…हाय… मेरी तो निकल पड़ी.
और हम दोनों ही आपस में जोर से चिपक गये… मेरा लन्ड जोर लगा कर वीर्य निकालने में लगा था… और ईवा अपने चूत सिकोड़ कर मेरे लन्ड से पूरा रस निकालने में लगी थी।
कुछ ही देर में हम शान्त हो गये थे.
जॉन और जूही अभी भी जबरदस्त चुदाई में लगे थे…
ईवा ने कहा- जो… बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ?
“हां… हां जरूर कहो…” मैंने प्यार से कहा।
“प्लीज़ मेरी चूत चूस लो…और मुझे झड़ा दो… मैं झड़ी नहीं हूँ…प्लीज़…” मैंने विस्मय से उसे देखा… वास्तव में मैं आज जल्दी झड़ गया था… पर ईवा की अदाओं से मुझे लगा था कि झड़ गई है.
“नहीं हम लोग कितनी ही बार नहीं झड़ते हैं… पर ग्राहक को संतुष्टि के लिये यह महसूस कराना पड़ता है कि आपसे हमें बहुत मजा आया है, हमें पैसे इसी बात के मिलते हैं…”
मैंने ईवा के दोनों पांव ऊंचे कर दिये और उसके दाने को चाटने लगा… वो उछल पड़ी और एक बार फिर मस्ती की चीखों से कमरा गूंज उठा। ये वास्तविक मस्ती की चीखें थी. बीच बीच में मेरी जीभ उसकी चूत को भी चोद रही थी। झड़ते झड़ते ईवा ने अपनी दोनों टांगों से मेरा चेहरा दबा लिया और झड़ने लगी… उसकी चूत अब लगा कि पानी छोड़ रही है… मैं उसका सारा गीलापन चाटने लगा।
अब वो शान्त लग रही थी। उसने मुझे प्यार से देखा और सोते सोते ही अपनी बांहें फ़ैला दी… मैं धीरे से उसकी बाहों में समा गया, उसके प्यार भरे आलिंगन ने मुझे नींद के आगोश में ले लिया। मैंने धीरे से आंखे खोली… तो देखा कि जूही और जॉन आपस में प्यार कर रहे थे और उनका दौर भी समाप्त हो चुका था.
हम सभी अब बिस्तर पर बैठे हुए थे… कालू कोफ़ी ले कर आ गया और पास टेबल रख दी और जॉन के पांव पर झुक गया… और रोने लगा- जॉन साब… मुझे माफ़ कर दो… ये दोनों गरीब लड़कियाँ है, इन दोनों को मैं शैतानों के चन्गुल से जान पर खेल कर बचा कर लाया हूँ… इन दोनों का दुनिया में कोई नहीं है… इन्हें मत निकालना… मैं चला जाता हूँ साब… मैंने आपसे झूठ बोला!
“जॉन यार, माफ़ कर दो इसे… इसने अपने लिये नहीं… इन दो गरीबों के लिये किया है…” मैं कॉफ़ी पीने लगा।
“पर यार मैं इसके कारण पिछले एक साल से किराये के मकान में रह रहा हूँ… कोई बात है ये?”
ईवा और जूही दोनों उठी और और एक पोटली उठा लाई… और हमारे सामने रख दी।
“बाबू जी…ये हमारी शरीर की कमाई है… चोरी की नहीं है… ये आप रख लीजिये और कालू को हम अपने साथ सवेरे ले जायेंगे… जानते हो साब! कालू ने हमें हाथ तक नहीं लगाया है… यह तो हमारे भाई की तरह है… हम रोते हैं तो ये रोता है… बस हमें पुलिस में मत देना…”
उन दोनों ने कालू की बांह पकड़ी और कमरे से बाहर चली गई।
“ले भाई जॉन… तेरी प्रोबलम भूतों वाली तो समाप्त हो गई… बस…”
मन में बेचैनी लिये मैं जाने के लिये उठ खड़ा हुआ… जॉन पोटली को एकटक देख रहा था… एकाएक उसने पोटली ली और कालू के पास नीचे आया.
ईवा और जूही का चेहरा आंसुओं से तर था… पर कालू के चेहरे पर मर्दानापन था- साब ये तो मेरी कुछ नहीं लगती… पर आज मुझे इन्होंने भाई का दर्जा दे दिया… ये अब मेरे साथ ही रहेंगी!
“मेरा किराया दो सौ रुपये हर महीने का निकाल दो… और हर महीने देते रहना… तुम्हारा कमरा वही है… भूतों वाला…!” जॉन ने अपना फ़ैसला सुनाया।
कालू सुन कर देखता रह गया… और जॉन के कदमों में झुक गया।
ईवा और जूही प्यार से हमसे लिपट पड़ी। मैंने जॉन का मन बदलता हुआ देखा और अपने भगवान को धन्यवाद दिया… उनकी मजबूरी मेरे मन को छू गई… जाने मेरी आंखों से आंसू कब निकल पड़े… Hindi Porn Stories
मेरा नाम सुजाता है, मैं राजकोट के एक गाँव से हूँ। मेरे पति लखनऊ में सरकारी पद पर कार्यरत हैं इसलिए साल में मुश्किल से 25-30 दिन हम साथ गुजारते हैं।
हमारे दो बच्चे हैं एक लड़का और एक लड़की, दोनों ही दिल्ली में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।
दोस्तो, मैं बाकी लड़कियों या औरतों की तरह नही कहूँगी कि मेरा फिगर ऐसा है वैसा है।
मेरे जिस्म का सही आकार इस तरह से है- मेरे मम्मे 34″ हैं, कमर 38″ और मेरे चूतड़ 42″ के हैं, मेरे मम्मे थोड़े ढीले से ही हैं।
मेरे पति मुझे शुरू से ही संतुष्ट नहीं कर पाते थे, उनका दो मिनट में ही वीर्यपात हो जाता था किन्तु शुरू में मैं इसे ही अपना नसीब मानकर अपनी जिंदगी बिता रही थी।
बात उन दिनों की है जब मेरे पति का लखनऊ तबादला हुआ। तब हम एम पी के एक शहर में रहते थे किन्तु इनका ट्रान्सफर हो जाने के बाद मैं अकेली रह गई थी घर पर।
तब मेरे पति ने मुझे मेरे पति के पिताजी यानि कि मेरे ससुर के पास रहने का सुझाव दिया।
वो एक गाँव में रहते हैं, वहाँ हमारी कुछ पुश्तैनी ज़मीन भी थी। ससुर जी अकेले ही घर रहते थे, सासू माँ की कई साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। ससुर जी की आँखों की रोशनी और सुनने की क्षमता भी अब कम सी हो गई थी।
मैं अपने ससुर जी के पास रहने आ गई। वहीं मेरी मुलाकात संजू जी से हुई।
हुआ यूँ कि अगले दिन मैं छत पर कपड़े सुखाने गई तो मेरी नज़र सामने वाली छत पर पड़ी।
उस वक़्त संजू जी कसरत कर रहे थे, उन्होंने ऊपर कुछ नहीं पहना था, उनका कसरती जिस्म देखकर तो जैसे मैं मंत्रमुग्ध सी हो गई थी।
5’10” का कद, चौड़ा सीना, उठे हुए चौड़े कंधे, सुंदर चेहरा और उनके कोई तोंद भी नहीं थी, उनको देखकर दिल में कुछ कुछ सा होने लगा था… जब नज़रें मिली तो हम दोनों मुस्करा दिए।
फिर थोड़ी देर बाद वो घर पर आ गये और ससुर जी से बात करने लगे, तब ससुर जी ने हमें मिलवाया।
संजू भी घर पर अकेले रहते हैं, उनकी बीवी 5 साल पहले गुजर चुकी है, दोनों लड़के एम पी से बाहर कहीं जॉब करते हैं।
अब उनका हमारे घर आना जाना काफी ज्यादा हो गया, जल्दी ही हम दोनों की नजदीकियाँ भी बढ़ने लगी।
एक तरफ मैं थी जिसके पति ने कभी न तो पूरी तरह संतुष्ट किया था न ही साथ रहते हैं। दूसरी तरफ संजू जी जिनकी बीवी भी 5 साल पहले उन्हें छोड़ कर जा चुकी थी।
आग दोनों तरफ लगी थी दोस्तों।
एक दिन मैं रसोई में खाना बना रही थी, ससुर जी खेतों में घूमने गये थे, संजू जी रसोई में आये और मेरी कमर मे पीछे से हाथ डाल दिया। मैंने भी थोड़ा शरमाने का एहसास कराया।
किन्तु संजू जी भी जानते थे कि अभी कोई नहीं है घर पर… मैं बाहर जाने लगी तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी और खींच लिया और मैं सीधे उनके सीने से जा लगी।
उन्होंने बिना एक पल गँवाए अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
मैं भी जन्मों से प्यार की प्यासी की तरह उनके होंठों को चूमने लगी।
करीब दस मिनट तक हम यों ही एक दूसरे को चूमते रहे।
इतने में ससुर जी के कदमों की आहट हुई तो हम अलग हुए, तब मैंने उन्हें आज रात हमारे स्टोररूम में आने को कहा।
हमारे घर का स्टोर रूम करीब दो कमरों की जगह में बना है जिसमें आराम करने की सारी सुविधाएँ मौजूद हैं।
रात में ससुर जी को खाना खिलाकर अब तो बस उनके आने का इंतजार था।
थोड़ी देर में संजू जी चुपचाप स्टोररूम में आये, आते ही उन्होंने रूम का दरवाजा बंद किया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में कस के जकड़ लिया।
मेरी रूह को तो जैसे इसी पल का इंतजार था।
उन्होंने अपने होंठों में मेरे होंठों को ले लिया और दस मिनट तक मुझे चूमते चूसते रहे।
फिर उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरा ब्लाउज भी उतार दिया। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरे 34 साइज़ के मम्मे उनके सामने झूलने लगे।
उन्होंने मेरा एक मम्मा अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगे, साथ ही दूसरे मम्मे को अपने हाथ से मसलने लगे।
मेरी एक लम्बे अरसे की प्यास आज बुझ रही थी तो मेरे मुँह से अपनेआप मादक सिसकारियाँ निकलने लगी- ऊम्म्म उम्म्म आहाह्ह आह्ह ऊम्म।
फिर उन्होंने मुझे पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया और अपने कपड़े भी उतार दिए।
जैसा उनका शरीर बलवान और मजबूत था, वैसा ही उनका लिंग भी करीब 8″ लम्बा और 3″ मोटा, मेरे पति से डेढ़ गुना।
उसे देखते ही मेरी आँखों में चमक आ गई।
तब उनका इशारा पाकर मैंने उनके लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरु किया।
उसके बाद उन्होंने मुझे लिटाया और अपना बलवान लिंग मेरी चूत पर सेट किया, एक धक्के में ही आधा लिंग चूत में प्रवेश करा दिया। मेरी तो एकदम चीख ही निकल गई।
फिर उन्होंने समझते हुए मेरे मम्मों को सहलाया, मेरे होंठों को चूसा और फिर धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लिंग डालने लगे।
दो मिनट बाद मैं भी अपने चूतड़ों को उठाकर उनका साथ देने लगी।

तब उन्होंने तेज़ तेज़ धक्के मारने शुरू किये, करीब 15 मिनट तक ऐसे ही मेरी जमकर चुदाई की। इस बीच मेरा तो एक बार पानी भी निकल चुका था पर अभी तक उनका लिंग एकदम तना हुआ था।
फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से मेरी चूत में अपना बलिष्ठ लिंग डालकर मेरी चुदाई शुरू की, वो तेज़ तेज़ धक्के मारते रहे।
ऐसे ही बीस मिनट तक मेरी धुआंधार चुदाई की, इसके बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर बैठाकर भी चोदा, करीब 45 मिनट तक मेरी जमकर चुदाई करने के बाद उनके लिंग ने अपना कामरस बाहर निकाला।
उस रात मुझे पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि किसी ने मेरी चूत की संतुष्टि की है, मैं तीन बार झड़ी थी, मेरी हालत तो ऐसी हो गई थी कि मैं उठकर वाशरूम तक भी नहीं जा सकती थी।
उस रात हमने एक बार और चुदाई की थी। सुबह ससुर जी के उठने से पहले संजू जी अपने घर चले गये।
तब से आज तक संजू जी और मैं एक दूसरे की काम वासना की तृप्ति करते हैं।
संजू जी मेरे पति के न होने पर मेरा हर तरह से ख्याल रखते हैं।
दोस्तो, मेरा नाम अजय Antarvasna है मैं 29 वर्ष का हूँ, मैं भी आपकी तरह इस साईट का दीवाना हूँ और जब भी मुझे मौका मिलता है तो यहाँ कहानियाँ पढ़ता हूँ..
आज मैं आपसे हाल ही में घटित घटना के बारे में बताता हूँ।
मैं मुंबई में केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित विभाग में एक अफसर हूँ। वैसे मैं जयपुर का रहने वाला हूँ। नव वर्ष पर मैं जयपुर गया हुआ था, वापस आते समय मेरा आरक्षण जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट के दूसरे दर्ज़े के वातानुकूलित कोच में था। मेरे कम्पार्टमेंट में मेरे अलावा एक तक़रीबन ३५ वर्षीय औरत और उसके दो बच्चे थे। हमारे अलावा उस कम्पार्टमेंट में उस औरत की छोटी बहन भी थी जिसका नाम अनु था। अनु की टिकट कन्फर्म नहीं हुई थी इसलिए वो भी वहीं बैठी थी।
जयपुर से ट्रेन दो बजे के आसपास रवाना हो हुई। शुरू में तो उन लोगों से मेरी कोई ज्यादा बातचीत नहीं हुई परन्तु धीरे धीरे उस औरत के छोटे लड़के से मेरी दोस्ती हो गई क्यूंकि मेरे पास लैपटॉप था और वो मैंने गेम खेलने के लिए उस लड़के को दे दिया था।
मैं अनु और वो लड़का एक ही बर्थ पैर बैठे थे। मैं दोनों के बीच में था और मैंने लैपटॉप को भी सीट पर रख लिया था इस वजह से मैं अनु से काफी सट गया था। कभी कभी अनु के शरीर से मेरा शरीर छू जाता तो शरीर में सिहरन पैदा हो जाती थी। अनु भी अपनी बड़ी बहन के सामने शरमा रही थी। फिर थोड़ी बहुत बातें करते करते कोटा आ गया। कोटा से एक और लड़की हमारे कम्पार्टमेंट में आ गई। मेरी और उस नई लड़की की सीट ऊपर वाली थी जबकि औरत और उसके दोनों बच्चों की नीचे वाली बर्थ थी।
रात को खाना खाने के बाद हम लोग अपनी अपनी बर्थ पर लेट गए। हमने सभी लाइट ऑफ करके पर्दा लगा दिया था । कोटा वाली लड़की अपनी ऊपर वाली बर्थ पर चढ़कर जल्द ही सो गई। मेरे नीचे वाली बर्थ पर वो औरत और उसका छोटा लड़का सो गए और उसके सामने वाली नीचे की बर्थ पर अनु और उस औरत का दूसरा लड़का एक साथ सो गए।
अनु ने लाल रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। अनु का फिगर बहुत मस्त था। उसका वक्षाकार तो 36 का ही होगा। ऐसे गर्म माल के होते हुए नींद मेरे आसपास भी न थी। मैं तो बस ऊपर वाली बर्थ से अँधेरे में अनु को ही निहार रहा था। अनु भी बार बार करवट बदल रही थी क्यूंकि वो दो लोग एक सीट पर ठीक से लेट नहीं पा रहे थे। थोड़ी देर में सभी सो गए सिर्फ मैं और अनु ही जगे हुए थे। हालाँकि अनु चादर ओढ़ कर लेटी हुई थी उसका मुँह गैलरी की तरफ था और पैर खिड़की की तरफ।
रात के करीब 12 बज चुके थे, डिब्बे में पूरा अँधेरा था, कभी कोई स्टेशन आता तो रोशनी हो जाती। मेरी आँखों में नींद दूर तक नहीं थी, मैं तो बस अनु के ख्यालों में ही खोया हुआ था।
फिर रात में मैं टॉयलेट जाने के लिए धीरे से नीचे उतरा तो मेरे दिमाग में एक आईडिया आया। मैंने लाइट नहीं जलाई और जूते ढूंढने के बहाने अनु की सीट पर बैठ गया और धीरे से अपनी कोहनी अनु को छुआ दी। हालाँकि वो जाग रही थी पर वो कुछ नहीं बोली। इससे मेरा होंसला और बढ़ गया। फिर मैंने अपना हाथ अनु के बड़े बड़े स्तनों पर रख दिया। अचानक मेरे इतने दुःसाहस से वो हड़बड़ा गई जैसे उसे 440 वोल्ट का झटका लगा हो। उससे उसकी बहन भी जाग गई।
मैंने अपने जूते पहने और टॉयलेट की तरफ चल दिया। जब वापिस आया तो सब कुछ शांत हो गया था.. पहले तो मुझे लगा था कि आज तो पिटाई होगी परन्तु अनु मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। हम फिर लाइट बन्द करके लेट गए।
करीब तीन बजे अनु चुपके से टॉयलेट के लिए उठी। उसके जाते ही मैं भी पलक झपकते ही बर्थ से नीचे उतर गया। फिर मैंने देखा कि सब मस्त होकर नींद में लेटे हुए थे। मैं फटाफट टॉयलेट के गेट पर जाकर खड़ा हो गया। जैसे ही उसने दरवाजा खोला मैंने उसे अंदर लेकर लॉक कर लिया।
वो बोली- यह क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- डार्लिंग, तुम इतनी गर्म हो कि मैं खुद को रोक नहीं पाया..
वो बोली- अगर कोई जाग गया तो?
मैंने कहा- मैं अच्छे से चेक करके आया हूँ, डरने की कोई बात नहीं है, सब सो रहे हैं।
इसके साथ ही मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया। पहले तो थोड़ी देर वो हिचकिचाई, फिर वो भी अच्छा साथ देने लगी..
मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर किया तो नीचे गुलाबी रंग की ब्रा में कसे हुए कबूतर दीखे..
मैं पागलों की तरह उन पर टूट पड़ा।
वो बोली- थोड़ा धीरे करो..
फिर मैंने उसे सारे कपड़े उतारने को कहा..
उसने अपने कपड़े उतार दिए..
मैं भी एकदम नंगा हो गया था, मेरा लंड 90 डिग्री पर खड़ा होकर झटके मार रहा था.. वो उसकी प्यारी सी क्लीन शेव चूत में घुसने को बेसब्र हो रहा था..
मेरे हथियार को देखते ही अनु बोली- हाय राम ! तुम्हारा इतना बड़ा है ..
मैंने पूछा- तुमने पहले भी देखा है क्या?
तो उसने कहा- हाँ, मेरे स्कूल में मेरा एक बॉयफ़्रेंड है, उसी का देखा है….और 4-5 बार उसके साथ सेक्स भी कर चुकी हूँ.. पर उसका हथियार तो तुमसे बहुत छोटा है..
मैंने कहा- डार्लिंग, डरने की बात नहीं है, इससे तुम्हें बहुत मज़ा आएगा..
वो बोली- मेरा तो इसे चूमने का मन कर रहा है..
मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ ..
और उसके मुँह में अपना आधा लंड घुसा दिया..
अनु मेरे लंड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। अनु ने इतने शानदार तरीके से चूसा कि मैं आपको वो आनन्द बयान नहीं कर सकता..
करीब 6-7 मिनट के बाद मैंने अनु का सर पकड़ कर उसकी स्पीड बढ़ा दी। अब मेरा हथियार अनु के गले तक जा रहा था। अनु की आँखे बाहर आने को तैयार हो गई।
फिर मैंने उसे कहा- मेरा वीर्य छूटने वाला है..
उसने मुझे इशारा किया- कोई बात नहीं..
इतने में ही एक ज़ोरदार पिचकारी के साथ बहुत सारा वीर्य झटके से अनु के मुँह पर गिरा। आज तक मेरा कभी इतना वीर्य नहीं आया होगा जितना उस दिन आया..
फिर अनु ने अपनी पेंटी अपना चेहरा और हाथ साफ़ किये ..
अब मेरी बारी थी ..
मैं टॉयलेट सीट का ढक्कन लगा कर उस पर बैठ गया, अनु को मैंने अपनी गोद में बैठा लिया। फिर उसके मोमे भूखे भेड़िये की तरह चूसने लगा.. उसके गुलाबी गुलाबी चुचूक चूसने में मुझे स्वर्ग का सा सुख प्राप्त हो रहा था। उसके बाद धीरे धीरे चूमता हुआ मैं नीचे की तरफ बढ़ने लगा..
अब उसकी धड़कने बढ़ती जा रही थी, चेहरा खून के प्रवाह से एक दम लाल सुर्ख हो गया था..
मैंने अपने होंठ उसके क्लीनशेव संतरे की फांक जैसी सुर्ख लाल चूत पर टिका दिए और उन्हें चूसने लगा..
उसकी चूत फूल कर पाव रोटी की तरह हो गई थी और वो मचल-मचल कर बाँहों से छूट रही थी। फिर वो बोली- अब नहीं रहा जा रहा .. फटाफट अपना हथियार इसमें डालो !
तब तक मेरा नवाब भी वापिस तैयार हो गया था, मैंने झट से उसे अपने लंड पर बिठाया। एक बार तो वो दर्द के मारे चीख पड़ी लेकिन थोड़ी देर में ही उसे मज़ा आने लगा। 3-4 मिनट में ही वो झड़ गई। फिर मेरे शरीर से कस कर चिपक गई, मैं उसकी स्थिति देख कर थोड़ी देर रुक गया। 1-2 मिनट के बाद फिर से धक्के मारने शुरू किये। मैंने अपनी गति पूरी तेज़ कर दी, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसे खड़ा किया और उसे घोड़ी बनने को कहा।
फिर मैंने उसकी कमर को पकड़ कर कस कस के झटके देने शुरू कर दिये..
चलती गाड़ी में बहुत मज़ा आ रहा था। वो भी आनंद से जोर से आवाज़ निकल रही थी। मुझे यह भी डर था कि कहीं कोई आ न जाये। काफी देर बाद हम दोनों एक-साथ भरभराकर कर गिर गए। मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही डाल दिया।
अनु बोली- अब क्या होगा ? कहीं प्रेग्नंट तो नहीं हो जाउंगी?
फिर बोली- चलो आई पिल ले लूंगी..
मैंने कहा- हाँ, यह ठीक रहेगा !
फिर हम काफी देर तक एक दूसरे की गर्दन में बाहें डालकर चिपककर बैठे रहे। तब तक 5 बज चुके थे..
इतने में किसी ने हमारे टॉयलेट का दरवाज़ा खटखटाया..
अनु एकदम डर गई..
मैंने उसे शांत रहने का इशारा किया, फिर मैंने फ्लश चला दिया ताकि बाहर वाले को लगे कि अंदर कोई है..
फिर काफी देर तक बाहर कोई हलचल नहीं हुई तो लगा कि वो चला गया।
फिर हमने फटाफट कपडे पहने। अनु से मैंने उसकी पैंटी ले ली और कहा- इसे मैं ही रखूंगा, यह तुम्हारी मेरे पास निशानी के तौर पर रहेगी ..
उसने उसके लिए हाँ कर दी..
तब तक बाहर लोग आने लग गए थे। मैंने अनु को कहा- पहले तुम जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ..
किसी तरह अनु को बाहर निकाला और मैं अंदर ही रहा। अब मेरा दिल भी धक-धक कर रहा था कि कहीं किसी को पता न चल जाये। लगभग दस मिनट के बाद मैं बाहर आया, आकर अपने कम्पार्टमेंट में देखा तो सब सोये हुए थे। उन्हें सोता देख कर मेरी जान में जान आई। फिर मैं भी सो गया। मेरी नींद साढ़े सात बज़े खुली, तब तक बोरीवली स्टेशन आने वाला था।
मैंने नीचे देखा तो सब अपना सामान पैक कर रहे हैं। अनु मुझ से नज़र नहीं मिला रही थी शायद उसे लग रहा था कि किसी को पता न चल जाये..
बोरीवली स्टेशन पर उतरने के बाद वो लोग ऑटो में चले गए, मैं उन्हें जाता देखता रहा पर अफ़सोस अनु से मैं उसका फोन नंबर नहीं ले पाया..
मैंने अपनी कहानी इसलिए लिखी है कि शायद अनु इसे पढ़े और मुझसे सम्पर्क करे। उसकी पैंटी अभी भी मेरे पास है।
दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Antarvasna
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक Antarvasna हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी यौन-क्रीड़ा के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के मुठ मारने लगेंगे और लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को लण्ड की प्यास लग जाएगी।
दोस्तो, मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं। एक औरत की मैंने काफी कहानियाँ पढ़ी है उसना नाम नहीं लूंगा, वो औरत और वो सारी कहानियाँ बनावटी हैं। कोई भी औरत इतनी भी सेक्स की भूखी नहीं होती जितना वो अपने आपको बताती है। अगर है तो देहली के कोठे हैं और वो जगह उसके लिए ठीक हैं।
ये सब छोड़ो ! हम आते हैं अपनी बात पर ! हम कहानी पर आते हैं।
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं २५ साल का हूँ, कद ६’ है और दिखने मैं एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं मोगा (पंजाब) से हूँ।
नम्रता अपने बिस्तर पर बैचेनी से करवटें ले रही थी। उसे पिछले दो घण्टे से नींद नहीं आ रही थी। इस समय रात के दो बज रहे थे। उसका पति हमेशा की तरह खर्राटे ले रहा था लेकिन उसे नींद न आने की कोई और ही वजह थी। अपने पति के खर्राटों के साथ सोने की तो उसे आदत पड़ चुकी थी। आखिरकार वो इन्हें पिछले 18 सालों से सुन रही थी।
उसे तो थोड़ी देर पहले दूरदर्शन पर देखी एक फिल्म ने बैचेन कर रखा था। यह शुक्रवार रात को दिखाई जाने वाली व्यस्क फिल्म थी। फिल्म की तस्वीरें बार-बार उसके दिमाग में आ रहीं थी। उसकी जिन्दगी भी फिल्म की नायिका से बहुत मिलती थी।
उसे फिल्म में सबकुछ तो नहीं समझ में आया क्योंकि फिल्म अंग्रेजी में थी और उसे अंग्रेजी के कुछ शब्द ही आते थे। फिर भी वो फिल्म का मतलब तो समझ ही गई थी। फिल्म की नायिका का पति भी उसके पति की तरह अपना पुरूषत्व खो चुका था। पहले वो औरत 5 सालों तक बिना सम्भोग के रहती है फिर टूट जाती है और विवाहेत्तर सम्बन्ध बना लेती है।
पिछले दो घंटे से वो अपनी जिन्दगी के बारे में सोच रही थी। उसका पति अशोक 6 साल पहले अपना पुरूषत्व खो चुका था। बिना सम्भोग के रहते हुये उसे अब 6 साल हो गये थे, इन 6 सालों से जैसे-तैसे वो सहन कर रही थी पर आज की रात यह सब असहनीय हो रहा था…
उसे लगा कि क्या वो जिन्दगी में फिर से कभी सम्भोग नही कर पायेगी।
कभी-कभी वो विवाहेत्तर सम्बन्धों के बारे में सोचती थी। पर उसे डर लगता था कि अगर किसी को पता चल गया तो? वो ये सब खतरे मोल नही लेना चाहती थी पर सच यही था कि आज उसे एक पुरूष की जरूरत थी क्योंकि उसका अपना पति नामर्द था।
वो दिखने में बुरी नहीं थी। वास्तव में इस समय बिस्तर पर वो काफी आकर्षक लग रही थी। वो साड़ी में थी। प्रायः बिस्तर पर जाने से पहले वो गाउन बदल लेती थी पर आज उसका मन ही नही किया। उसका एक सुन्दर चेहरा था लेकिन उदासी की वजह से थोड़ा दयनीय लग रहा था। उसकी त्वचा का रंग एक आम सांवली भारतीय औरत जैसा था, बाल लम्बे थे, थोड़ा मोटापा पूरे शरीर पर चढ़ गया था… इससे उसका आकर्षण और भी बढ़ गया था।
उसके स्तन बड़े और अभी भी सुडौल थे, वो बहुत ही सेक्सी थी। उसे मैं जब भी देखता था तो बस ऐसा लगता था कि बस ये मिल जाए …तो जिंदगी सँवर जाए…
एक दिन लंच के बाद मैं नम्रता के घर गया क्योंकि मुझे उनसे कुछ पूछना था।
मैंने दरवाजा खटखटाया लेकिन अन्दर से कोई जवाब नहीं मिला और दरवाजा खुला था तो मैं अन्दर चला गया। उस समय वो नहा रही थी।
मैंने कहा- नम्रता मुझे कुछ पूछना है।
तो उसने कहा- बैठो, मैं अभी आती हूँ।
फ़िर मैं बैठ गया, वो अन्दर आई और कहा- हाँ अब बोलो !
मैंने कहा- मुझे कुछ समझ आ नहीं रहा है क्या आप मेरी मदद करेगी?
वो उस समय तौलिये में ही थी ..बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
फ़िर उन्होंने कहा- चाय पियोगे?
मैंने कहा- ठीक है !
वो कपड़े पहन चाय बना लाई।
हम लोग बात करने लगे, मैंने कहा- आपकी शादी को कितने साल हो गये?
उन्होंने कहा- शादी हुए 8 साल हो गए हैं।
मैंने कहा- नहीं, आप तो इतनी सुंदर है बिल्कुल परी जैसी ! आप तो शादीशुदा लगती ही नहीं।
और वो रोने लगी। मैंने उन्हें बाहों में ले लिया और पीठ सहलाने लगा ….
फ़िर धीरे वो भी गर्म होने लगी, उनको छूते ही मेरा सामान एक्शन में आ गया। बस फ़िर क्या था मैंने उनके गले में किस करना शुरू कर दिया।
इस पर उन्होंने कहा- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ मत कहो, बस करने दो, बहुत दिनों से तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ …..
वो शरमा गई …. और अपने चेहरे को दोनों हाथों से छिपा लिया। मैंने मौका देखा और …. और …. उसकी नंगी जांघ पर हाथ रख दिया। उसके पेटीकोट के भीतर मेरा हाथ चूत की तरफ़ सरकने लगा। उसके बदन की झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। मेरा हाथ उसकी झांटो तक पहुंच गया था। उसने झट से अपने हाथ से मेरा हाथ थाम लिया।
“सन्नीऽऽ …. ना …. ना …. कर …. मैं मर जाऊंगी …. ” उसकी वासना भरी आंखे मुझे बुला रही थी …. पर शरम उसका रास्ता रोक रही थी।
“नम्रता …. प्लीज़ …. मत रोको …. तुम्हारा जिस्म आग है …. मुझे जल जाने दो …. ।”
“हाय सन्नी …. नहीं …. यह पाप है …. “
“नहीं …. यह तो मर्द और औरत की जरुरत है …. इसे देखो तो …. यह क्या मांग रहा है …. “
मैंने जान करके अपने पेंट की ज़िप खोल कर अपना बेकरार तन्नाया हुआ लण्ड बाहर निकाल कर उसे दिखाया।
“हाय रे …. ऐसे नहीं करो …. ना …. इसे सम्हालो …. ” उसने हाथ बढ़ा कर उसे प्यार से पकड़ लिया ….
“इसे इसका साथी चाहिये …. नम्रता …. प्लीज़ …. मिला दो ना …. “
“सन्नीऽऽऽऽ हाय …. मत करो न …. ” उसने मुझे अपने हाथों खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया ….
“होंठों पर ना है …. पर दिल में हां है …. आपका जिस्म आग हो रहा है …. कपड़े जल जायेंगे …. हटा दो इनको …. “
मैंने फिर से उठ कर उसका पेटीकोट नीचे खींच लिया। उसकी गदराई जवानी निखर आई। उसकी चूत के आसपास की झांटे उसकी चूत को सजा रही थी …. चूत की दोनों पन्खुड़ियाँ फ़ड़फ़ड़ा रही थी। पानी से पूरी गीली थी। मैंने भी अपनी पैन्ट और अन्डरवीयर उतार दी। अब मैंने उसके ब्लाऊज को उतारा। उसके दोनों बोबे छलक उठे …. एकदम गोरे और भारी से …. भूरे रंग के कड़े चूचक ….
मैंने बिना किसी संकोच के उसके दोनों बोबे अपने हाथो में भर लिये।
“सन्नी …. हाय रे …. कितने साल हो गये इसे मसले हुए …. ” वो तड़प उठी।
उसने मेरा लण्ड खींच के अपने मुख में भर लिया। मैं उत्तेजित हो उठा और नम्रता के मुख को ही धक्के मार मार कर चोदने लगा। मेरा सुपाड़ा वो कस कस कर चूस रही थी। सुपाड़ा भी और फूल कर चिकना हो कर चमक उठा था।
इतने में नम्रता ने मेरा लण्ड छोड़ा और मुझे कहा,” सन्नी …. देख आज मेरी पिछाड़ी कितना तड़प रही है …. मेरी पिछाड़ी चोद दे …. “
मैंने तुरन्त पीछे हट कर उसे घोड़ी बना दिया। उसके चिकने चूतड़ उभर कर मेरे सामने चमक उठे। दोनों गोलाईयाँ गोरी गोरी सी मुझे बुलाने लगी। मैंने उसकी फ़ांके चीर दी। उसके गांड का फूल खिल उठा। अन्दर बाहर कि सिकुड़न करता हुआ गान्ड का छेद बड़ा प्यारा लग रहा था।
मैंने ढेर सारा थूक उसके छेद पर लगा दिया और अपनी दो अंगुली डाल कर उसमें घुमाने लगा। वह चिहुंक उठी। उसकी गान्ड में छेद लण्ड जाने को तैयार था। मैंने अपना सुपाड़ा छेद पर रख कर दबाया तो वह फ़क से अंदर उतर आया और छेद में फ़ंस गया। नम्रता ने मुझे धन्यवाद की नजरों से देखा।
“प्यारे सन्नी ….! मुझे बहुत अच्छा लग रहा है …. अपना प्यारा सा लण्ड पूरा उतार दे …. चोद दे मेरी गाण्ड को …. “
मैंने जोर लगाया और लण्ड गाण्ड की दिवारों पर रगड़ खाता हुआ अन्दर जाने लगा। मुझे मीठा मीठा सा तेज वासनायुक्त मजा आने लगा। उसकी गाण्ड चिकनी और गीली थी मेरा लण्ड जिस आसानी से आ जा रहा था, लगता था कि गाण्ड चुदाने की अभ्यस्त है। उसे गाण्ड चुदवाने में मजा आ रहा था …. वो सिसकरियाँ भर रही थी ….
मैंने बीच बीच में लण्ड गाण्ड से बाहर निकाला तो उसका छेद वैसा ही खुला रहा …. मै दुबारा पूरे जोश से अन्दर फिर पेल देता था। नम्रता मुझे बार बार मुड़ कर प्यार से देखती थी। अब उसने कहा,”सन्नी …. अब बस …. अपना लण्ड निकाल लो और …. …. ” उसने पूरा कहा भी नहीं था कि मेरा लण्ड उसकी चूत में पीछे से घुस चुका था।
“हाय …. रे …. …. सन्नीऽऽऽऽ घुस गया रे …. ” वो आनंद से सीत्कार भरने लगी …. यानी अब उसकी खुजली मिटी …. उसकी भारी और मोटी गाण्ड पर थपकियाँ मार मार कर चोदने लगा। उसकी चूत चिकना पानी छोड़ रही थी …. मेरा लण्ड सटासट चल रहा था। कभी कभी फ़च फ़च की आवाजें भी आ जाती थी ….
नम्रता की चूत की प्यास बुझने के बजाय बढ़ रही थी। मैं उसे चोदते चोदते अपनी चरमसीमा पर आ चुका था। मेरा लण्ड बार बार रस छोड़ने को बेताब हो रहा था।
“नम्रता …. मुझे सम्भाल …. मेरा निकला …. जल्दी …. करो …. “
नम्रता तुरन्त उठी और मेरा लण्ड पकड़ लिया और उसे बिस्तर से नीचे की तरफ़ कर दिया और लण्ड को तेज दबा कर मुठ मारने लगी। मैंने उसके गले में हाथ डाल दिया और अपनी तरफ़ उसे खींचने लगा। पर लण्ड आखिर छूट ही पड़ा ….
मेरा वीर्य एक तेज पिचकारी के रूप में हवा में लहरा उठा और फ़र्श गीला करने लगा। वो दांत भींच कर मुठ मारे जा रही थी। अब पिचकारी का जोर कम हो गया था। अब वो बूंदो को निचोड़ रही थी और झटके दे दे कर और जोर से हिला हिला कर उन्हें भी नीचे गिरा रही थी।
मुझे पता था कि नम्रता अभी नहीं झड़ी है …. मैंने तुरन्त ही नम्रता को फिर से दबा लिया और उसकी चूत में तीनों अंगुली डाल दी …. तीनों अंगुलियों से उसकी चूत चोदने लगा। वो आह भरती हुई तड़पने लगी और अपने शरीर को ऊपर नीचे हिलाने लगी …. मैंने उसे और दबा लिया। अचानक उसने अपनी चूत ऊपर उभार ली और …. और ….
“हाय सन्नीऽऽऽ मर गई …. आहऽऽऽ निकला रेऽऽऽऽऽ …. …. ” अब वो चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी …. उसकी सारी उत्तेजना चूत के रास्ते झड़ने लगी थी …. रह रह कर वो जोर लगा कर जैसे कुछ निकाल रही हो …. धीरे धीरे वो उसका झड़ना पूरा हो गया और अब वो तेज सांसे ले रही थी।
“नम्रता …. थेंक्स …. तुमने आज बहुत सुख दिया है …. ” मैंने उसे प्यार से किस कर लिया।
उसने धीरे से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींच लिया और अपने बदन से चिपका लिया।
“तुम्हें समय मिले तो आ जाया करो …. देखो मैंने कितने महीनों बाद चुदाया है …. “
“आपका ये होट इन्विटेशन मुझे स्वीकार है …. डार्लिन्ग नम्रता …. “
अब वो भी खड़ी हो गई।
चलो ना किचन में …. कॉफ़ी बनाते है …. फिर एक दौर और करेंगे …. मैं खुश हो गया और उसके मोटे मोटे चूतड़ पकड़ लिये ….
“ऊईऽऽऽऽ मांऽऽऽ …. ” वो उछल पड़ी …. और किचन की तरफ़ लहरा कर चल दी .. Antarvasna
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