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नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम Antarvasna राम है और मैं रीवा का रहने वाला हूँ। मैंने इस साईट की कई कहानियाँ पढ़ीं हैं और पहले तो मैं इन सब में बिल्कुल विश्वास नहीं रखता था क्योंकि मैं यही सोचता था कि ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता कि कोई अपने ही बेटे से चुदवा ले या कोई बहन अपने ही भाई से गाँड मरवा ले। पर यकीन मानिए जब से मेरे साथ चुदाई वाली यह घटना घटी तो मुझे यकीन हो गया कि ऐसा भी होता है। मेरे साथ कोई माँ-बहन वाली तो नहीं पर किरायेदार की चुदाई की घटना घटी जो मैं आप लोगों को सुनाना चाहता हूँ।
यह कहानी आज से दो साल पहले की है जब मेरी उम्र २३ साल की थी और मैं अपनी ग्रेजुएशन पूरा कर चुका था। हमारा घर रीवा के एक बड़ी कॉलोनी में है। हमारा घर बहुत बड़ा है। घर के एक हिस्से के तीन कमरों में किरायेदार रहते हैं। हमारे घर में एक हिस्से में कमरा खाली था, उसी में रहने के लिए एक दिन एक प्रधानमंत्री सड़क योजना के इंजीनियर सपरिवार आए। उनके परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी और उनकी एक बेटी थी। पत्नी की उम्र ३८ साल की होगी और उनकी बेटी की उम्र १९ साल की रही होगी।
अब मैं अपनी कहानी शुरु करता हूँ। मेरा ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद मैं नौकरी की तलाश में लग गया। कोई काम न होने के कारण मैं अक्सर घर पर ही रहता था। एक दिन की बात है कि मैं अपने बालकनी में कुर्सी लगाकर बैठा हुआ कुछ पढ़ रहा था कि इतने में मुझे पानी गिरने की आवाज़ सुनाई पड़ी, जैसे कोई नहा रहा हो। मैंने खड़े होकर नीचे आँगन में देखा तो मेरे होश उड़ गए। मैंने देखा कि रानी (इंजीनियर की पत्नी) नहा रही थी और वह भी पूरी नंगी होकर। मैंने पहली बार किसी औरत को पूरा नंगा देखा था। मेरे रोम-रोम खड़े हो गए, और उसका नहाना पूरा होने तक मैं उसे देखता रहा। चूँकि मेरे घर के चारों और उँची दीवारें हैं इसलिए बाहर से तो कोई भी नहीं देख सकता, तो इसलिए स्त्रियाँ आँगन में नंगी नहा सकतीं थीं।
अब मैं रोज़ाना उसी बालकनी में चला जाता और जब तक वो नहाती, मैं उसे देखा करता। मुझे पहले से चुदाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न मैं यह जानता था कि चुदाई कैसे करते हैं। बस, पूरे बदन में एक अजीब सी हरक़त होती थी। मैं परेशान होने लगा कि मुझे यह क्या हो रहा है, और कुछ ही देर में सब शांत हो जाता था। एक दिन जब वह नहा रही थी और मैं उसे देख रहा था, तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई। मैं जल्दी से वहाँ से भाग कर अन्दर आ गया। मैं काफ़ी डर गया था कि अब वह मेरे घरवालों को सबकुछ बता देगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
कुछ दिन बीत गए। मैंने बालकनी की ओर जाना बन्द कर दिया। एक दिन रानी ने मुझे अपने घर बुलाया। मैं वहाँ गया, वह घर पर अकेली ही थी। उसकी बेटी कॉलेज गई थी और पति दौरे पर जिले से बाहर गए थे। मैं जब उसके घर गया तो उसने बैठने को कहा और अभी आने की बात कहकर अन्दर चली गई। कुछ ही देर बाद वो एक झीनी सी गाऊन पहनकर बाहर आई। गाऊन के अन्दर उसने कुछ भी नहीं पहना था। गाऊन के बाहर से सबकुछ दिखाई दे रहा था। मैंने अपनी नज़रें नीची कर लीं। वह मेरे बगल में आकर बैठ गई। उसने कहा, “आजकल तुम दिखाई नहीं देते हो, क्या बात है?”
“नहीं आँटी ऐसी कोई बात नहीं है। इन दिनों मैं कुछ ज़्यादा ही व्यस्त था।”
“अच्छा बताओ, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?” – उसने बात आगे बढ़ाने के लिए पूछा।
मैंने ना में सिर हिलाया, तो वह चौंक कर बोली, “क्या? इतने बड़े हो गए हो, अभी तक कोई गर्लफ्रेण्ड नहीं है? तब तो तुम्हें बड़ी परेशानी होती होगी।”
“परेशानी कैसी?”
“तुम तो एकदम बुद्धू हो, और मैं कुछ और ही समझ रही थी।”
“आप क्या सोच रहीं थीं?”
“उस दिन तुम मुझे नहाते हुए देख रहे थे, तो मैंने सोचा कि तुम काफी एक्सपर्ट हो। पर तुम तो इन सब के बारे में बिल्कुल ही मूर्ख हो। अच्छा बताओ, तुमने मेरा क्या-क्या देखा।”
“मैंने आपका पूरा शरीर देखा।”
“पूरे शरीर और उसके कुछ भाग में अन्तर होता है। तुमने मेरे शरीर में ऐसा क्या देखा जो तुम्हें अच्छा लगा हो?”
“आपकी छाती…”
यह सुनकर वह हँसने लगी, “इससे पहले कभी किसी औरत या लड़की को नंगा देखा है?”
“नहीं।”
“चलो, मैं आज तुम्हें अपना पूरा नंगा बदन दिखाती हूँ,” और इतना कहकर वो मुझे अपने बेडरूम में लेकर चली गी। बेडरूम में पहुँचते ही उसने अपना गाऊन उतार कर फेंक दिया और मेरे कपड़े उतारने लगी। कुछ ही देर में उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझसे लिपट कर मुझे बेतहाशा चूमने लगी। कुछ देर के बाद मैं भी उसके बदन को चूमने लगा। जब मेरा हात उसकी चूची पर गया, मेरे बदन में कँपकँपी होने लगी। फिर मैं धीरे-धीरे उन चूचियों को दबाने लगा। मुझे मज़ा आ रहा था और वह सिसकारियाँ भर रही थी।”
अब उसने मुझ अपने घुटनों पर झुका लिया और अपनी चूत चूसने का इशारा किया। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसेड़ दिया। उसकी चूत से नमकीन पानी निकलने लगा और मैं बड़े चाव से उसका पानी पी गया। कुछ देर के बाद उसने मुझे अपने बेड पर लिटा दिया और मेरे बगल में बैठ कर मेरे ७ इंच लम्बे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। कुछ देर बाद मेरे लंड ने अपना पानी मुँह में ही छोड़ दिया। पर उसने मेरे लंड बाहर नहीं निकाल और उसे चूसती रही। थोड़ी ही देर में मेरा लंड वापस तैयार हो गया। तब उसने मुझसे कहा, “अब रहा नहीं जाता। अब मुझे चोदो।”
पर मुझे चोदना तो आता नहीं था, मैंने उसे बताया, तो वह मेरे ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत की छेद पर मेरे तैयार लंड को रखा और दबाव दिया। मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। वह चीख़ी तो मैं डरकर अपना लंड बाहर निकालने लगा, पर उसने मुझे रोक दिया और कहा कि ऐसा होता है। मैं कितना भी चीखूँ, तुम अपना लंड बाहर नहीं निकालना। मैंने ऐसा ही किया। अब वो दबाव बढ़ाने लगी और धीरे-धीर मेरा पूरा लंड उसकी चूत ने निगल लिया। कुछ देर बाद तक वो शांत थी, फिर जब उसका दर्द कम हुआ तो उसने अपनी गाँड ऊपर-नीच करनी शुरु कर दी। मुजे भी बहुत मज़ा आ रहा था फिर उसने कहा कि ऐसे ही तुम मेरे ऊपर चढ़ कर करो। इसी को चोदना कहते हैं। फिर वो बिस्तर पर चित्त लेट गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड को पूरा-का-पूरा उसकी चूत में पेल दिया और धक्के मारने लगा।
पूरे कमरे में फच्च-फच्च की मधुर आवाज़ें आ रहीं थीं। वो चीखती जा रही थी – और तेज़… मेरे रामा… आआ….. आ…. इइइइइईईईई… उउउउउऊऊऊ… मरररररर… गईईईईई… मैं…तो……..। मेरी उत्तेजना बढ़ गई और मैं उसे तेज़ी के साथ चोदता रहा। कुछ ही देर में वो चिल्लाई कि मैं अब झड़ने वाली हूँ। मेरी समझ में नहीं आया कि झड़ना किसे कहते हैं। पर मेरे लंड से कुछ ही देर में पानी निकला जो उसकी चूत ने पी लिया। उसी समय उसने भी मुझे कस कर दबोच लिया, शायद वह भी झड़ गई थी। फिर हम कुछ देर तक यूँ ही एक-दूसरे से लिपट कर लेटे रहे।
फिर जब मैं वापस घर जाने के लिए उठा तो मेरे कानों में उसकी बेटी रीना की आवाज़ें सुनाई दीं, “कहाँ जा रहे हो, अब तो मेरी बारी है।”
हम लोगों ने घबरा बाहर की ओर देखा तो बेडरूम के दरवाज़े पर रीना खड़ी थी और शायद उसने हमारी चुदाई-लीला देख ली थी। उसकी माँ ने हक़ला कर कहा रीना तुम? तुम कब आईं? तो रीना ने कहा, “अभी १० मिनट पहले, पर माँ तुम्हें दरवाज़ा तो बन्द कर लेना चाहिए था। दरवाज़ा खुला था, कोई और आ जाता तो तुम्हारी माँ चुद जाती। चलो शुक्र है कि मैं थी और अगर तुम दोनों अपनी सलामती चाहते हो तो राम तुम्हें मेरी भी जमकर चुदाई करनी होगी।”
मरता क्या न करता, मैं तैयार हो गया और रीना की माँ भी तैयार हो गई। रीना ने तुरन्त अपने कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर आ गई। उसने मुझे चूमने शुरु कर दिया, और मैंने उसे। उसकी माँ ने एक बार फिर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। रीना ने उसे मना किया कि माँ तुमने तो एक बार मुँह से और एक बार अपनी चूत से लंड का मज़ा ले लिया। अब मेरा मज़ा किरकिरा मत करो। तुम मेरी चूत चूसो। मैं राम का लंड चूसती हूँ, और राम मेरी चूत चूसेगा।
हमने ऐसा ही किया, फिर कुछ देर बाद रीना कुतिया बन गई और बोली कि राम अब चोदो। मैं उसके पीछे आया और उसकी माँ नीचे लेट गई। अब उसकी माँ की चूत और रीना की चूत ऊपर-नीचे थी, और बीच में मेरा लंड था। क्या क़िस्मत थी मेरे लंड की कि दो अप्सराओं की चूत आज उसे मिली थी। फिर मैंने रीना की चूत को अपने हाथों से पकड़ कर फैलाया और अपने लंड को उसकी कुँवारी चूत की छेद पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का मारा… वह चीख़ पड़ी… आआअअअअअअ…. मरी…… मर जाऊँगी… मैं…..।
मैंने रानी से जो सीख ली थी, उसी पर क़ायम रहते हुए अपने लंड को वापिस खींचकर एक बार फिर ज़ोरदार धक्का मारा। उसकी चूत से ख़ून निकल रहा था। अब मैं डर गया कि शायद उसकी चूत फट गई है। पर उसकी माँ ने कहा कि पहली बार ऐसा होता है। अब तुम मेरी चूत चोदो, तब तक रीना की शांत हो जाएगी। मैंने ऐसा ही किया और रानी की चूत चोदने लगा।
कुछ देर के बाद रीना बोली कि अब वह तैयार है। तो मैंने वापिस अपने लंड को उसकी चूत में पेल दिया और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। कुछ देर के बाद रीना भी अपनी गाँड आगे-पीछे करने लगी, तो मैंने चुदाई की गति बढ़ाई। रानी कभी मेरे लंड को पीती को कभी रीना की चूत को चाटती। कुछ ही देर में हम दोनों झड़ गए। पर चूँकि रीना कुँवारी थी इसलिए उसकी माँ ने कहा कि अपना पानी रीना की चूत में मत डालना, मेरे मुँह में डालना, वरना रीना गर्भ-धारण कर सकती है। मैंने वैसा ही किया। जैसे ही मेरा पानी गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और रानी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और मेरा पूरा पानी वह पी गई। रीना भी झड़ चुकी थी। फिर हम-तीनों आपस में लिपटे रहे और कुछ देर के बाद मैं अपने घर वापस चला गया।
आप सबको मेरी कहानी कैसी लगी, ज़रूर बताईएगा, ताकि मैं इसी प्रकार आपका मनोरंजन करता रहूँ। Antarvasna
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. मैं राजकोट का रहने Sex Stories वाला हूँ. मेरी उम्र तेईस साल है और मैं एक अच्छा खासा मर्द दिखता हूँ. मेरी त्वचा भी काफी गोरी है, जो किसी भी लड़की या भाभी को आकर्षित कर लेती है.
आपको मैं अपनी पहली मगर सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ. यह कहानी दिसम्बर 2003 की है.
मैं राजकोट में अपना एक साइबर कैफे चलाता हूँ, वहां पर काफ़ी सारी लड़कियों का आना जाना रहता है. मगर मैं एक बहुत शर्मीला टाइप का बंदा हूँ, इसलिए मेरी किसी भी लड़की से बात करने की हिम्मत ही नहीं होती थी.
मुझे याद है ये काफी साल की बात है. उस दिन शाम के साढ़े सात बजे होंगे, तब मैं अपने साइबर कैफे में अकेला था. उस वक्त एक सुंदर सी लड़की अन्दर आई. उसने अपना नाम आरती बताया था.
मैंने उससे ओके कहा और इशारा किया कि किसी भी सिस्टम पर अपना काम कर ले.
वो मेरे सामने वाले कंप्यूटर पर आकर का बैठ गई थी. मैं उसे देख रहा था, वो बला की खूबसूरत माल लग रही थी. उसने शॉर्ट शर्ट और लो-वेस्ट जींस पहनी हुई थी. उसका बड़ा ही कातिलाना फिगर था. मैंने उसकी फिगर की नाप का अंदाजा 34-26-36 का लगाया था. उसके चूचे एकदम उभरे हुए थे.
कुछ मिनट बाद उसने मुझसे वो कम्प्यूटर ख़राब होने का बहाना बनाया. मैंने सोचा कि अभी तक तो सब सिस्टम सही थे, ये कैसे खराब हो गया है. मगर शायद उसने मुझे जानबूझ कर अपने पास बुलाया था. मैंने उसके करीब जाकर सिस्टम को चैक किया, तो वो बिल्कुल सही चल रहा था.
मैंने उससे कहा- क्या खराबी लग रही है. सिस्टम सही तो है?
इस पर उसने मुझसे कहा- मुझे कंप्यूटर चलाना ठीक से आता नहीं है. प्लीज़ आप मुझको थोड़ा सा सिखा दो.
अब इतनी हॉट लड़की देख कर मेरा भी मन डोल गया था.
मैंने कहा- ठीक है
जैसे ही मैं उसके बाजू में बैठा कि उसने पहले नीचे से अपने पैर को मेरे पैर पर रखा और धीरे धीरे उसको अपने पैर से सहलाने लगी. मैं तो एकदम से दंग रह गया. मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं.
मैं चुप रहा और मैंने अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई.
ये देख कर उसने धीरे धीरे करके मेरे लौड़े पर अपना हाथ रख दिया. उसका हाथ जैसे ही मेरे लंड पर आया तो मुझे एक अजीब सी सिहरन हुई और मैंने वहां से उठ कर जाने की कोशिश की.
उसने मुझे मना करते हुए मेरा हाथ खींच लिया और कहने लगी- मेहरबानी करके मुझे अकेला मत छोड़ो, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो.
मैंने कहा- ये क्या बात हुई .. अभी तो हम दोनों पूरी तरह से एक दूसरे को जानते भी नहीं हैं … और तुम मेरे से ये सब कर रही हो.
इससे आगे मैं कुछ और बोलता कि उसने मुझे गाल पर किस कर दिया और अगले ही पल मेरे होंठों से होंठ लगा कर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
बस फ़िर क्या था … मैं भी तो आख़िर मर्द ही था … मैंने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया और उसे अच्छे से किस करने लगा.
अब वो मेरी जुबान को चूस रही थी और मैं उसकी. तभी मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया, तो उसने कुछ नहीं बोला … बल्कि उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ कर खुद की गांड पर लगा दिया.
वो मुँह हटा कर मुझे देख कर जोर जोर से बोलने लगी- ओह रौनी .. प्लीज़ जोर से दबाओ आह .. और मेरे बूब्स जोर जोर से दबाओ आह कितना मजा आ रहा है.
मगर मैं डर रहा था कि कहीं कैफे पर कोई और कस्टमर न आ जाए, सो मैंने उसे वहीं पर रोका और उससे कहा- हम कहीं अकेले में आराम से मिलके एन्जॉय करेंगे. अभी इधर कोई आ जाएगा, तो सब गड़बड़ हो जाएगी.
उसने अपने टॉप को ठीक करते हुए कहा- ठीक है. मैं इसी संडे को सुबह छह बजे तुम्हारे कैफे पर आउंगी.
मैंने कहा- इतनी सुबह क्यों भला!
उसने कहा- सर्दियों के दिन हैं … सुबह सुबह का मजा ही कुछ और आएगा. वैसे भी मैं घर से सुबह घूमने के लिए निकलती हूँ, सो घर पर सबको यही पता रहेगा. फिर छह बजे थोड़ा सा अंधेरा भी होता है.
चूंकि सर्दी का मौसम था तो उसकी बात सही थी. मैं उसकी तरफ देखने लगा.
उसने कहा कि तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना!
मैंने सोचा और अपने आपसे भी कहा कि ऐसा मौका फ़िर नहीं मिलेगा … साली खुद ही चुत चुदने मचल रही है. मैंने कहा- ठीक है मैं आ जाऊंगा.
फ़िर उसने मुस्कुराते हुए मुझे एक किस की और गांड मटकाते हुए मेरे कैफे से निकल गई.
दो दिन बाद संडे था. मैं सुबह सुबह जल्दी पांच बजे उठा और फ्रेश होकर एक चाय पी और बाइक उठा कर फुल स्पीड से कैफे आ पहुंचा.
मैंने कल रात को ही पूरी व्यवस्था कर दी थी. एक बार अन्दर जाकर फिर से सब ठीक किया. थोड़ा रूम फ्रेशनर भी स्प्रे कर दिया और उसके आने का इन्तजार करने लगा. मैं कैफे की शटर आधी उठा रखी थी ताकि उसे मेरे आ जाने का अहसास हो जाए.
तभी वो शटर उठा कर अन्दर आ गई और आते ही मुझसे लिपट गई.
मैंने कहा- एक मिनट शटर तो बंद कर लेने दो.
वो अलग हुई, तो मैंने शटर बंद कर दी और उसकी तरफ घूम गया. वो मुझे देख कर सीधे आकर मुझसे लिपट गई.
मैंने ध्यान से देखा वो जॉगिंग सूट में आई थी. उसके खुले हुए लंबे बाल उसकी खूबसूरत जवानी को और भी ज्यादा मदहोश कर देने वाली बना रहे थे.
हम दोनों ने करीब दस मिनट तक किस किया. चूमाचाटी के दौरान एक बार तो उसने मुझे काटा भी, मगर मैंने कुछ नहीं कहा. वो काफी गरम हो रही थी.
मैंने उसके टॉप की जिप खोली, तो उसने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी थी.
जैसे ही मैंने उसके दूध दबाए, तो वो मादक सिस्कारियां भरने लगी- आह जोर से … और जोर से!
उसके चूचे काफी नर्म थे. मैंने उसका टॉप खोल दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी. उसकी चूचियां हवा में एकदम से फुदकने लगीं. मैंने उसका एक निप्पल मुँह में ले लिया.
बदले में उसने मेरी गांड पर जोर से दबाते और कहा- आह मेरे राजा और जोर से चूस ले इसको.
फ़िर मैं उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसता और चूमता हुआ उसके पेट तक आ गया. कुछ ही पलों के बाद मैंने उसके पैंट और पैंटी को भी उतार फैंका.
तभी उसने कहा- एक मिनट.
मैं रुका, तो उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे हर जगह पागलों की तरह चूमने लगी. अब चुदास बढ़ी … तो मैंने भी एक दो बार उसके निप्पल को काटा.
फिर वो नीचे बैठ कर तुंरत ही मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी. एक मस्त लौंडिया के मुँह में अपने लंड का अहसास पाते ही मैं अपने होश खो बैठा. ऐसा आनन्द आ रहा था मानो मैं किसी जन्नत की हूर से अपने लंड को चुसवा रहा हूँ.
मैंने आह भरते हुए कहा- आह जान अब और मत तड़पाओ … तुम अकेली अकेली मजा मत लो. मुझे भी मजा चाहिए.
वो तुंरत समझ गई और सोफे पर लेट गई. उसने मुझे अपने ऊपर उल्टा लेटा दिया. अब मेरे मुँह में उसकी चुत थी. मैं चुत पर टूट पड़ा. वो लंड को कुल्फी के जैसे चूसने लगी. उसे जो चाहिए था, उसे मिल गया और मुझे जो चाहिए था, मुझे मिल गया था. हम दोनों 69 में आकर मस्त मजा ले रहे थे.
सच में यार क्या मलाईदार चूत थी उसकी .. लगता था उसने अभी सुबह ही चुत की शेव की हो. उसकी चुत काफी गर्म भी थी और उसने चुत पर कोई मस्त स्वादिष्ट सा फ्लेवर भी लगाया हुआ था.
मैंने तुंरत ही अपनी जुबान नुकीली की और किसी पागल कुत्ते की तरह चुत चाटने लगा. मेरी जीभ उसकी चुत में अन्दर भी जाने लगी थी. वो भी काफी मजे से मेरा लौड़ा चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया और उसने बड़े मजे से मेरे लंडरस को चाट लिया. उसने मेरे वीर्य को पूरा का पूरा खा लिया था. एक बूंद भी बेस्ट नहीं जाने दी थी.
फ़िर पांच मिनट के बाद उसने फ़िर से मेरे लौड़े को चूस कर गरम किया और बोली- अब मेहरबानी करके मुझे जल्दी से चोद दो … मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने कहा- ठीक है रानी.
उसकी टांगें चौड़ी करके मैंने अपने कंधे पर रख लीं और अपना लौड़ा अन्दर पेलने के लिए कोशिश की. मगर लंड चुत के अन्दर नहीं गया. उसे दर्द भी हो रहा था.
उसे दर्द से कराहते हुए देख कर मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- एक मिनट रुको.
उसने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर मेरे लौड़े पर लगाया और कुछ अपनी चूत पर भी लगा लिया. फिर अपने हाथों से अपनी चूत को चौड़ा करके बोली- अब आ जाओ मेरे राजा.
मैंने कहा- हां ये ले मेरी रानी.
ये कहते हुए मैंने अपने खड़े लंड को एक ही झटके में पूरा का पूरा अन्दर डाल दिया.
लंड लेते ही वो चिल्लाने लगी- उई मां … मर गई … मेरी फट गई.
मैंने कहा- चिल्लाओ मत … कोई आ जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी.
वो अपनी चीख दबाते हुए बोली- दर्द बहुत हो रहा है रौनी … तुम एक काम करो तुम मेरे दर्द की परवाह किये बिना जल्दी से लंड को दो तीन बार अन्दर बाहर करो.
मैंने वैसे ही किया.
वो कराहते हुए अपने मुँह बंद किये हुए मेरे लंड के प्रहार झेलती रही.
कोई आठ दस धक्कों के बाद उसका दर्द जाता रहा. अब वो अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदवाने लगी. मैं भी उसके मम्मों को दबा रहा था, उसे किस कर रहा था.
थोड़ी देर के बाद वो बोली कि मुझे तुम्हारे ऊपर आना है.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं लंड खींच कर उठा और सोफे पर लेटने जा रहा था कि तभी उसे न जान क्या सूझा और वो मेरी गांड में उंगली डालने की कोशिश करने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
वो हंसने लगी और बोली- चलो लेट जाओ, मुझे रायडिंग करने दो.
मैंने कहा- नहीं, पहले मुझे तुम्हारी गांड मारने देनी होगी.
वो बोली- आज नहीं … फ़िर कभी ले लेना.
वो मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गई और लंड पकड़ कर चुत में फंसा कर बैठती चली गई.
आह क्या गजब की बला थी वो .. मेरे ऊपर क्या मस्त माल लग रही थी. लंबे बाल और हिलते हुए चुचे मुझे काफी मदहोश किए जा रहे थे.
करीब दस मिनट के बाद मेरा पानी निकलने वाला था.
मैंने पूछा- क्या करूं?
उसने कहा- अन्दर नहीं निकालना. मुझे पीना है … तुम्हारा गाढ़ा पानी बहुत मस्त स्वाद देता है.
मैंने कहा- ठीक है.
वो उठ कर अलग हुई और उसने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया. अगले ही पल मेरा रस छूट गया और उसने लंड का सारा पानी पी लिया.
चुदाई के बाद हम दोनों ने करीब आधे घंटे तक एक दूसरे को चूमा सहलाया और अपने अपने कपड़े पहने.
मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरा, तो उसने वादा किया कि वो मुझे अपनी गांड मारने देगी.
मेरे प्यारे दोस्तो, अन्तर्वासना के लिए ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, अगर कोई भूल हुई हो, तो प्लीज़ नजरअंदाज कर देना. कमेंट्स करना न भूलें. Sex Stories
आजकल की बीवियां बड़ी पढ़ी लिखी, स्मार्ट, ओपन-माइंडेड और बोल्ड होती हैं।
वो अपना रास्ता खुद निकालतीं हैं और किसी के सहारे नहीं रहतीं।
बीवियां हर वो काम कर लेती हैं जो उनके मर्द करते हैं।
वैसे मर्दों का काम है चोदना और औरतों का काम है चुदवाना!
लेकिन आजकल बीवियां भी चोदने का काम करती हैं और मर्द चुदने का काम!
मर्द अगर बुर चोदता है तो औरत लण्ड चोदती है।
औरत अगर अपनी बुर चुदवाती है तो मर्द अपना लण्ड चुदवाता है.
पहले मियां अपनी बीवी को वाइफ स्वैपिंग के लिए मनाता था और बीवियां बड़े नखरे दिखा दिखा कर मानतीं थी पर आज ज़माना बिल्कुल बदल गया है।
अब तो अदल बदल कर चुदाई के खेल में बीवियां ही पहल करती हैं और एक दूसरे के पति से बिंदास चुदवाती हैं।
वे खुद अपने अपने मियाँ को तैयार करती हैं और हसबैंड स्वैपिंग करती हैं।
एक ऐसी ही सच्ची हस्बैंड स्वैपिंग सेक्स कहानी मैं मिसेज राधिका सिन्हा आपको सुनाने जा रही हूँ!
मेरा नाम मिसेज राधिका है यह तो आप जान ही गए हैं मेरे प्यारे दोस्तो!
मेरी शादी के 2 साल हो चुके थे और मैं अपना वैवाहिक ज़िन्दगी अच्छी तरह जी रही थी.
लेकिन एक बात जरूर थी कि रोज़ रोज़ वही लण्ड पकड़ते पकड़ते, वही लण्ड चाटते चूसते, वही लण्ड चूत में पेलवाते पेलवाते बहुत बोर हो चुकी थी।
मुझे लगा कि अब कोई नया लण्ड मिले तो अच्छा हो।
मैं बस नए लण्ड की तलाश करने लगी।
एक दिन अचानक मेरी मौसी की बेटी ललिता का फोन आ गया।
वह बोली- दीदी, हम दोनों मुंबई आ रहे हैं।
मैंने बड़ी गर्म जोशी से कहा- हां हां बिल्कुल आ जाओ। कौन सी फ्लाइट से आ रही हो?
उसने डिटेल बताया तो मैंने नोट कर लिया।
शाम को मैंने इसका ज़िकर अपने पति राघव से किया तो वह बड़ा खुश हुआ।
अगले सवेरे हम दोनों उसे रिसीब करने एयरपोर्ट पहुँच गए।
जब वह आई तो मुझसे लिपट गयी।
मैं उसके पति हरीश से मिली। वह भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम था।
मेरा पति ललिता को देख कर ललचा गया ऐसा मुझे उसके हाव भाव से मालूम हो गया।
हम लोग घर आ गए.
नाश्ता तैयार था ही!
वो लोग भी फ्रेश होकर आ गए और हम सब नाश्ता करके बाहर निकल पड़े।
दिन में थोड़ा घूमे दोपहर में एक पिक्चर देखी और शाम को बगीचे में घूमने लगे।
तब तक हम दोनों कपल एक दूसरे के काफी करीब आ चुके थे।
मैं ललिता से बातें करने लगी और वो दोनों अलग!
अब तक हमारी बातें और तरह की थी पर अब मैं और तरह की बातें करनी शुरू कर दी।
मैंने कहा- अच्छा ललिता, ये बताओ कि तुम एक ही मरद के साथ सेक्स करते करते बोर नहीं हो जाती हो?
वह बोली- अरे दीदी, आपने कहाँ दुखती रग पर हाथ रख दिया। सच बताऊँ यार मैं तो बहुत बोर हो जाती हूँ पर करूं क्या? मन मार कर रह जाती हूँ।
“तो फिर कोई ज़रिया कभी तलाशने की कोशिश की?”
“ज़रिया हो भी क्या सकता है? एक पराये मरद के अलावा और क्या हो सकता है पर कोई भरोसे वाला मिलता भी तो नहीं है.”
“अच्छा अगर मिल जाए तो?”
“मिल जाए तो मैं उसे नंगा करके सबसे पहले उसका लण्ड देखूंगी।”
“ऐसा क्यों कि तुम सबसे पहले लण्ड देखोगी?”
“इसके दो कारण हैं दीदी … एक तो लण्ड सबके अलग अलग होते हैं तो एक नया लौड़ा देखने को मिलेगा। और दूसरा कि चुदवाने के लिए सिर्फ लण्ड की जरूरत है बाकी का मुझसे क्या लेना देना?”
“अच्छा अगर कोई तेरे मरद का लण्ड ले ले तो?”
“मैं अपने मरद का लण्ड उसी को दूँगी जो खुद अपने मरद का लण्ड मुझे देगी।”
“इसका मतलब है कि तू लण्ड की अदला बदली करने को तैयार है?”
“हां कर लूंगी। मैं बिंदास हूँ, बोल्ड हूँ, पढ़ी लिखी हूँ, यह तो Lund Swapping है, कर लूंगी।”
“तेरा हसबैंड क्या मान जाएगा इसके लिए? वह नाराज़ तो नहीं होगा? उसे बुरा नहीं लगेगा?”
“मेरा हसबैंड भोसड़ी का मेरी मुठ्ठी में रहता है दीदी। जैसे मैं उसके लण्ड को मुठ्ठी में रखती हूँ वैसे ही मैं उसको भी मुठ्ठी में रखती हूँ।”
“अगर मैं तेरे मरद के लण्ड को अपनी मुठ्ठी में ले लूँ तो?”
“तो फिर मैं तेरे मरद के लण्ड को मुठ्ठी में ले लूंगी दीदी।”
“यही तो मैं चाहती हूँ।”
वह बड़ी जोर से हंस पड़ी और बोली- वाह दीदी वाह … तुमने तो मेरे मुंह से सब कुछ उगलवा लिया। अब मैं हसबैंड स्वैपिंग के लिए तैयार हूँ और मैं आज ही जीजू का लण्ड पकड़ कर देखूंगी।
मैंने कहा- अब तुम अभी से अपने जीजू को रिझाने में जुट जाओ, उसके लण्ड में आग लगा दो। मैं तेरे पति को रिझाऊंगी और उसके लण्ड में आग लगा दूँगी।
“चलो अब हम एक दूसरे के पति से खूब मस्ती वाली बातें करें और उनके लण्ड में आग लगा दें।”
फिर मैं उसके पति से खुल कर बातें करने लगी और वह मेरे पति से!
जैसे ही हम लोग घर वापस आये वैसे ही एक दूसरे के पति के आस पास घूमने लगीं।
हम दोनों ने कपड़े बदले, भड़कीले और छोटे कपड़े पहन कर सोफा पर बैठ गयीं।
न मैंने ब्रा पहनी और न उसने!
हम दोनों अपनी अपनी बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियों की झलक एक दूसरी के पति को दिखाने लगीं, अदायें भी दिखाने लगी और थोड़ा गन्दी गन्दी मजाक भी करने लगी।
मेरा पति उसका जीजू और उसका पति मेरा बहनोई तो मजाक का रिश्ता भी था हमारा।
फिर हम सब ड्रिंक्स पर बैठ गए।
पीती मैं भी हूँ और ललिता भी!
वो दोनों भी एक दूसरे की बीवी की तरफ आकर्षित होने लगे।
मैंने अपने पति से कहा- क्या बात है, ललिता की तरफ बहुत देख रहे हो तुम?
ललिता बोली- तो क्या हुआ दीदी … वह मेरा जीजू है मैं उसकी साली हूँ। अब अपनी साली को नहीं देखेगा तो किसको देखेगा? तुम्हारा मन हो तो तुम भी अपने बहनोई को देखो न दीदी, मना किसने किया है?
मैंने आँख मार कर बड़ी सेक्सी अदा से कहा- मैं तेरे पति को भी देखूंगी और तेरे पति का भी देखूंगी.
ललिता बोली- हाय दईया, तो फिर मैं भी तेरे पति का देखूंगी दीदी! मैं किसी से कम नहीं हूँ।
हमारी बातों का मतलब वो दोनों अच्छी तरह समझ रहे थे।
थोड़ा नशा और चढ़ा तो मस्ती भी और बढ़ गयी।
ललिता ने अपनी बांहें मेरे पति के गले में डाल दीं और उसके गाल चूम कर बोली- जीजू आज तुम मुझे बड़े अच्छे लग रहे हो।
मैं भी हरीश से चिपक कर बैठ गयी और उसकी जांघ पर हाथ रख कर सहलाने लगी।
उसका भी हाथ मेरे बदन पर आ गया और वह भी मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगा, फिर धीरे धीरे मेरी चूचियों पर आ ही गया.
उसने मेरी चूचियाँ दबायीं तो मैंने भी उसका लण्ड ऊपर से ही दबा दिया।
न उसने मना किया और न मैंने!
हम दोनों एक दूसरे को समझ गए कि अब क्या करना है.
उधर ललिता तो मेरे पति का लण्ड ऊपर से ही बड़ी जोर जोर से दबा रही थी।
वह भी ललिता के बूब्स दबाने लगा।
हमारे इस हाव भाव से मामला बिल्कुल साफ़ हो गया था कि हम दोनों एक दूसरे के पति से चुदवाना चाहती हैं और वो दोनों एक दूसरे की बीवी चोदना चाहते हैं।
हम लोग कुछ भी नहीं बोल रहे थे लेकिन हाथ हम सबके चल रहे थे।
हमारे हाथ ही बोल रहे थे कि अब आगे क्या होने वाला है.
मेरे पति ने ललिता के बूब्स खींच कर बाहर निकाल लिया।
इधर उसका पति भी मेरी ब्रा खोल कर मेरे दोनों बूब्स निकाल कर चाटने लगा और बोला- वाह वाह दीदी, क्या मस्त चूचियाँ हैं आपकी! कितनी बड़ी बड़ी और मस्त सुडौल हैं बूब्स आपके! बड़ा मज़ा आ रहा है इन्हें चाटने में चूसने में!
उधर मेरा पति बोला- वाह साली साहिबा, क्या मस्त और खूबसूरत हैं तेरी चूचियाँ! साली की चूची और साली की चूत बहुत नसीब वालों को मिलती है। आज मैं वाकई बड़ा नसीब वाला हूँ।
ललिता बोली- हाय दईया जीजू, आपने अभी मेरी चूत तो देखी ही नहीं!
उसने हाथ ललिता के पेटीकोट में घुसेड़ दिया और कहा- मेरा हाथ तो देख रहा है न? अभी मेरी आँखें भी देखेंगीं तेरी मस्तानी चूत!
इधर उसका पति मुझे एकदम नंगी करने पर तुला था, जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतार कर फेंक रहा था।
वैसे कपड़े कोई ख़ास थे भी नहीं!
पहले मैं मादर चोद नंगी हो गयी और फिर मेरे सामने बुर चोदी ललिता भी बिल्कुल नंगी हो गयी।
संयोग तो देखिये कि छोटी छोटी झांटें उसकी चूत पर भी थीं और छोटी छोटी झांटें मेरी चूत पर भी थीं।
कुछ भी हो लेकिन दोनों की चूत बड़ी सेक्सी लग रही थी।
इतने में मैंने हरीश को एकदम नंगा कर दिया।
उसका लौड़ा खड़ा हुआ था।
लण्ड देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई। आज शादी के बाद मैं पहली बार किसी पराये मरद का लण्ड देख रही थी।
वैसे शादी के पहले मैं कई लण्ड पकड़ चुकी थी। मतलब यह कि मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। कई लड़कों से चुदी थी।
इसीलिए मुझे शादी के बाद पराये मरद के लण्ड की जरूरत बहुत महसूस हो रही थी।
बात करने पर ललिता ने बताया- दीदी, मैं भी शादी के पहले खूब चुद चुकी थी। एक अंकल ने मुझे कई बार चोदा था और कॉलेज के दो लड़कों से मैं खुद बड़े मजे से चुदवाती थी। शादी के बाद मुझे भी कोई लौड़ा नहीं मिला तो मैं भी तरस रही थी। आज मेरी तमन्ना पूरी होगी।
फिर हमने प्लान बनाया कि आज हम दोनों एक दूसरे के पति से चुदवायेंगी जरूर और अब वही होने जा रहा है।
मैं उसके पति का लण्ड हिलाने लगी और वह मेरे पति का लण्ड!
दोनों ही लण्ड बड़े मस्त और तगड़े तंदुरुस्त थे; दोनों लण्ड के टोपा चमक रहे थे।
दो सोफे आमने सामने पड़े थे।
एक में मैं नंगी और उसका पति नंगा दूसरे में वह नंगी और मेरा पति नंगा।
ललिता मेरे पति का लण्ड चूसने और मैं उसके पति का लण्ड।
मैं हरीश का लण्ड उसकी आँखों में आंखें डाल कर चूस रही भी मेरे मियां का लण्ड उसकी आँखों में आँखें डाल कर चूस रही थी।
इससे अब न मुझे कोई शरम थी और न उसे!
मैंने कहा- यार ललिता, तेरे पति का लण्ड बड़ा खूबसूरत और मोटा तगड़ा है। बहनचोद देखो न … मेरे हाथ में आकर कितनी मस्ती से उछल रहा है।
उसने कहा- ये लण्ड भोसड़ी का … परायी बीवी के हाथ में जाकर ज्यादा ही उछलने लगता है। अब देखो न तेरे पति का लण्ड मेरे हाथ में कैसे फुफकार रहा है?
मजे की बात यह थी कि झांटें दोनों लण्ड की बिल्कुल साफ़ थीं। पेल्हड़ भी दोनों के एकदम चिकने थे।
मुझे तो ऐसे ही लण्ड पसंद हैं। ऐसे लण्ड चाटने में बड़े अच्छे लगते हैं।
ललिता भी बड़ी मस्ती से मेरे पति का लण्ड चाटने में जुटी थी।
वह बोली- अरे दीदी, जीजू का लण्ड इतना जबरदस्त है … अगर तूने पहले पकड़ाया होता तो अब तक जाने कितनी बार इससे चुदवा चुकी होती!
इतने में सबको जोश आ गया और हरीश ने लण्ड मेरी चूत में पेल दिया।
मेरे मुंह से निकला- उफ़ … बड़ा मोटा लण्ड है तेरा यार! मेरी तो बुर फट जाएगी बहनचोद, इतना मोटा लण्ड पहले कभी नहीं घुसा मेरी चूत में! हाय रे … आज मेरी चूत में छक्के छूट जायेंगे।
तब तक मेरे पति ने भी लौड़ा ललिता की बुर में ठोक चुका था।
वह बोली- उई माँ … मर गयी मैं! इस भोसड़ी वाले जीजू ने फाड़ दी मेरी बुर! हाय अब मैं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही। जीजू बड़ा बेशरम है तेरा ये मादरचोद लण्ड? धीरे धीरे चोदो न जीजू? मैं कहीं भाग नहीं जाऊँगी। चुदवा कर ही जाऊँगी तुमसे!
कुछ देर बाद वह बोली- क्या यार जीजू … पूरा लौड़ा पेल पेल के चोदो न? धीरे धीरे नहीं … तेज तेज चोदो, मर्दों की तरह चोदो मेरी बुर! बड़ा मज़ा आ रहा है। वाह वाह क्या मस्त लौड़ा है तेरा? फाड़ डालो मेरी बुर … चीर डालो मेरी बुर!
वह मस्ती मे कुछ भी बोलती जा रही थी।
इधर मैं भी बोल रही थी- हाय मेरे हरीश राजा, मुझे खूब चोदो, अपनी बीवी की तरह चोदो मुझे, मैं तेरी ही हूँ मुझे गपागप चोदो! हाय रे बड़ा गज़ब का है तेरा लण्ड … मुझे ऐसा ही लण्ड पसंद आता है. मेरी चूत ऐसे ही लण्ड खाती है. हाय राम हो ही ओहो हो बड़ा मज़ा आ रहा है आओ हूँ ओ हा ऊँ हूँ ओ ह्हो … क्या मस्त चुदाई है यार!
हम दोनों इसी तरह सिसियाती जा रही थी और मजे से चुदवाती भी जा रही थी।
हरीश बोला- यार राघव, मुझे अपनी बीवी के सामने तेरी बीवी चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है।
मेरे पति राघव ने कहा- हां यार हरीश, मुझे भी अपनी बीवी के सामने तेरी बीवी चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है. ऐसा मज़ा बहनचोद पहले कभी नहीं आया। एक बात और है मुझे अपनी बीवी चुदवाने में भी मज़ा आ रहा है।
मैं यह सुनकर बहुत खुश हो गयी। मैं चाहती थी कि मेरा पति अपनी बीवी चुदवाना शुरू कर दे तो सब काम बन जाए।
तब तक ललिता बोली- अरे जीजू, जो अपनी बीवी चुदवाता है वही दूसरे की बीवी चोद पाता है। मैं तो कहती हूँ कि तुम लोग रोज़ ही चुदवाओ अपनी बीवी और चोदो दूसरों की बीवियां! जाने कितनी बीवियां तुम्हारे जैस लोगों से चुदवाने के लिए तैयार हैं.
ललिता ने भी वही कहा जो मैं चाहती थी।
बस दोनों को और जोश आया तो वो हमें पीछे से चोदने लगे और फिर लण्ड पे बैठा बैठा के भी चोदने लगे।
आखिर में जब हम दोनों ने एक दूसरे के पति के झड़ते हुए लण्ड चाटे तो उसका आनंद कुछ और ही था जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता.
हमने महसूस किया कि चुदाई में रोज ऐसा ही मज़ा आये तो अच्छा हो!
फिर हम सबने नंगे नंगे ही खाना खाया, खूब गन्दी बातें की और थोड़ा इधर उधर घर में ही घूमे।
उसके बाद फिर इन लोगों ने हमें दो दो बार चोदा; तब हम लोग थोड़ा सोये।
ललिता जब तक रही, तब तक वह हर रोज़ रात को मेरे पति से चुदवाती रही और मैं उसके पति से चुदवाती रही।
उसके जान के करीब एक हफ्ते बाद उसका फोन आया।
उसने कहा- दीदी, अभी कल ही मेरी एक दोस्त कला अपने हसबैंड के साथ मुंबई गयी है। मैं उसके साथ चोदा चोदी कर चुकी हूँ। मैंने उसे तेरा फोन नंबर दे दिया है। उसके हसबैंड लौड़ा बड़ा मस्त है, ज्यादा बताऊंगी तो तेरा मज़ा किरकिरा हो जायेगा। अब तुम खुद पकड़ कर देख लेना उसका लण्ड! और जीजू से कहना कि कला की बुर खूब अच्छी तरह चोदे क्योंकि वह भोसड़ी वाली बड़ी मस्त है चुदवाने में। लण्ड का पूरा मज़ा लेती हैं और पराये मर्दों से जम कर चुदवाती है।
उसकी बातों ने मेरी चूत में आग लगा दी।
बस 2 मिनट में ही फोन फिर बजने लगा।
मैंने जैसे ही हेलो कहा वैसे ही वह बोली- दीदी, मैं कला बोल रही हूँ मुझे आपके बारे में ललिता ने बताया है।
तो मैंने कहा- मेरी बात ललिता से हो गयी है। तुम लोग आज शाम को 8 बजे मेरे घर पर डिनर के लिए आ जाओ।
तब तक मेरा पति भी आ गया।
मैंने उसको यह खबर सुनाई तो वह बड़ा खुश हुआ और बोला- यार राधिका, मेरा एक दोस्त देवा भी आज शाम को अपनी बीवी दिव्या के साथ आ रहा है। मैंने उन्हें डिनर पर बुला लिया। वह हमारे साथ वाइफ स्वैपिंग करने आ रहा है।
मैं तो यह सुन कर दुगुना खुश हो गयी कि अब आएगा असली मज़ा … तीन तीन कपल जब अदला बदली करेंगें तो मज़ा भी तिगुना हो जायेगा।
मैंने फिर फटाफट सारा इंतज़ाम कर लिया।
शाम को जब सब लोग इकट्ठे हो गए और एक दूसरे से परिचय हुआ तो सब बड़ी मस्ती में आ गए।
मेरे पति ने देवा को बता दिया कि कला और रोहित भी वाइफ स्वैपिंग के लिए ही आए हैं तो वो दोनों बहुत ही खुश हुए।
इधर कला को जब मालूम हुआ कि आज सेक्स पार्टी में 3 कपल होंगे तो वह ख़ुशी से उछल पड़ी।
मैंने हॉल में गद्दा वगैरह बिछा कर पूरी तैयारी कर ली थी और फिर हम सब बैठ कर मदिरापान करने लगे।
दिव्या बोली- अरे राधिका, बहुत अच्छा किया। ग्रुप सेक्स करने के पहले थोड़ा सरूर आना जरूरी होता है।
कला भी बोली- हां यार, चुदाई के पहले थोड़ा नशा ज्यादा मज़ा आता है।
मैं समझ गयी कि ये दोनों बीवियां शराब की उतनी ही शौकीन हैं जितनी की मैं!
दो दो पैग शराब ख़त्म हुई, सब लोग खुल कर बोलने लगे, अपने आपमें मन की बात बोलने लगे।
वाइफ स्वैपिंग करना सभी चाहते हैं पर बोलना कोई नहीं चाहता।
पहल कोई नहीं करना चाहता।
देवा बोला- यार, मैं बहुत दिनों से वाइफ स्वैपिंग के बारे में सोच रहा था पर कर नहीं पाया कभी! उस दिन जब राघव ने ज़िकर किया तो मज़ा आ गया। मैंने जब अपनी बीवी दिव्या को बताया तो वह ख़ुशी के मारे उछल पड़ी और खाना पीना सब भूल गयी।
कला ने कहा- मुझे जब ललिता ने बताया तो मैं इस बात से खुश हुई कि चलो मुंबई में भी अपना कोई होगा जिसके साथ हसबैंड की अदला बदली का मौक़ा मिलेगा। मेरे पति का तो चेहरा ही खिल उठा।
दारू पीते हुए बहुत सी बातों का खुलासा हुआ जिससे हम सब एक दूसरे के काफी नजदीक आ गए।
हमारे बीच शर्म और झिझक की दीवार टूट गयी।
हम बुर चोदी तीनों बीवियां एकदम बिंदास हो गयीं और शराबी बीवी की तरह व्यवहार करने लगी.
मैंने रोहित के गले में बाहें डाल दीं और उसके गाल चूमते हुए बोली- वाह कितना मस्त मरद है तू बहनचोद रोहित!
रोहित की बीवी कला देवा की तरफ मुड़ी और उससे चिपक गयी। उसका लौड़ा ऊपर से ही सहलाते हुए बोली- वाओ … लौड़ा भोसड़ी का बड़ा मस्त लग रहा है तेरा!
देवा की बीवी दिव्या ने मेरे पति के पास जाकर उसे उठाया और उसके गले लग गयी फिर वह हाथ नीचे करके उसका लौड़ा टटोलने लगी।
मेरा पति भी दिव्या की चूचियाँ ऊपर से दबा दबा कर मज़ा लेने लगा, बोला- वॉवो क्या मस्त चूचियाँ है तेरी दिव्या भाभी!
वह बोली- तेरा मस्त लौड़ा भी है मेरी जान राघव!
बस कुछ ही देर में एक एक करके हम सब नंगे हो गए।
तीनों बीवियां नंगी और तीनों मरद नंगे।
मैं रोहित का लण्ड हिलाने लगी, दिव्या राघव का लण्ड और कला देवा का लण्ड हिलाने लगी।
मैंने कहा- अब मैं आप सबको डबल मज़ा देना चाहती हूँ। बीवियों को पराये मरद का लण्ड चाटने का मज़ा और पराये मरद से बुर चटवाने का भी मज़ा। वह लण्ड चाटेगी किसी और मरद का … साथ ही साथ बुर चटवायेगी किसी और मरद से! मर्दों को डबल मज़ा कि … बुर चाटो किसी और की बीवी की और लण्ड चटवाओ किसी और की बीवी से!
यह सुनकर सब लोग हैरान हो गए कि यह कैसे होगा?
मैंने कहा- मैं बताती हूँ कि कैसे होगा.
मैंने सबको गोल गोल बैठा दिया।
एक बड़ा सा घेरा बन गया।
सब लोग नंगे थे ही!
पहले मैं बैठी, मेरी दाहिनी तरफ रोहित, फिर दिव्या, फिर राघव फिर कला फिर देवा।
अब हर मरद के अगल बगल परायी बीवी हो गयी और हर बीवी के अगल बगल पराया मरद हो गया।
मैंने कहा- अब सब बीवियां दाहिनी तरफ वाले का लण्ड चाटेंगी और सब मर्द दाहिनी तरफ वाली की बीवी की बुर चाटेंगे।
इसका असर यह हुआ कि मैं रोहित का लण्ड चाटने लगी और रोहित दिव्या की बुर!
दिव्या राघव का लण्ड चाटने लगी और राघव कला की बुर,
कला देवा का लण्ड चाटने लगी और देवा मेरी बुर चाटने लगा.
इस तरह सबको डबल मज़ा आने लगा।
बीवियों को लण्ड चाटने का और बुर चटवाने का मज़ा मिलने लगा।
मर्दों को बुर चाटने का मज़ा और लण्ड चटवाने का मज़ा मिलने लगा।
इस खेल से सबकी बुर में आग लग गयी और सबके लण्ड में भी.
बहुत देर तक ऐसा मस्ताना खेल ज़ारी रखना किसी के बस का नहीं था।
तो मैं रोहित का लण्ड अपनी बुर में पेल कर बिंदास चुदवाने लगी।
दिव्या बुर चोदी मेरे पति से झमाझम चुदवाने लगी और कला भोसड़ी वाली भकाभक देवा से चुदवाने लगी।
दूसरे सिरे से देखें तो मेरा पति देवा की बीवी चोदने लगा, देवा रोहित की बीवी चोदने लगा कर और रोहित राघव की बीवी यानि मुझे चोदने लगा।
परायी बीवी की बुर चोदने में सबको खूब मज़ा आने लगा और बीवियों को भी पराये मर्दों से चुदवाने में ज़न्नत का मज़ा आने लगा।
मैं मन ही मन बड़ी खुश हो रही थी कि मेरा प्लान कितना कामयाब हो गया।
हमने फिर एक हसबैंड स्वैपिंग क्लब बना लिया।
इस क्लब में आजकल 10 कपल हैं। हम सब हर शनिवार और रविवार को एक दूसरे के पति से खूब मस्ती से बिंदास खुले आम चुदवाती हैं.
हमारे हसबैंड भी खूब मन लगा कर दनादन एक दूसरे की बीवियां चोदते हैं और खूब एन्जॉय करते हैं।
हालाँकि सारे कपल हर शनिवार को नहीं आ पाते लेकिन हां 6 – 7 कपल तो आ ही जातें हैं और फिर होता है परायी बीवियों को चोदने का और पराये मर्दों से चुदवाने का लगातार हंगामा।
दो दिन तक न कोई वाइफ कपड़े पहनती है और न कोई हसबैंड!
हाय दोस्तो, मेरा Hindi Porn Stories नाम रमेश है, मैं अन्तर्वासना की कहानियों का नियमित पाठक हूँ। मेरी एक कहानी भतीजी की चुदाई अन्तर्वासना पर पहले प्रकाशित हो चुकी है। मैंने और कहानियाँ भेजने का वादा किया था, लेकिन समय पर भेज नहीं पाया क्योंकि इसी बीच मुझे जयपुर शिफ्ट होना पड़ा, इसके लिए मैं लंड झुका कर माफ़ी चाहता हूँ। खैर अब मैं आपको मेरी दूसरी कहानी भेज रहा हूँ, अच्छी लगे तो भी और अच्छी न लगे तो भी मेल जरूर करना।
हमारे कारखाने में शीला नाम की लड़की काम करती थी, कद पाँच फुट तीन इंच, गोरी और बदन भरा भरा, उसके बोबे संतरे के आकार के एकदम कसे थे। भोली इतनी कि जब मैंने उसे चूमना चाहा तो उसने कहा कि इससे तो मैं गर्भवती हो जाऊंगी क्योंकि एक बार मेरी कजिन बहिन ने मेरी चाची की चड्डी पहन ली थी तो उसके भी गर्भ ठहर गया था।
खैर अब मैं अपनी असली कहानी पर आता हूँ, उसको हमारे यहाँ काम करते हुए करीब एक महीना हो गया था, इसी बीच काम समझाने के बहाने मैं उसे रोज छूता था, कभी उसके बोबे को, कभी पीछे से चूतड़ों को, लेकिन वो कोई विरोध नहीं करती थी, लेकिन मेरा लंड तो उसको छूने से पैंट फाड़ कर बाहर आने लगता था।
एक दिन जब वो मशीन पर काम कर रही थी, मैं उसके पीछे जाकर चिपक कर खड़ा हो गया, मेरा लंड उसकी पीठ पर लगा हुआ झटके पे झटका खा रहा था। वो आगे झुक कर काम कर रही थी, चूंकि उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसकी कुर्ती में से उसके बोबे पूरे के पूरे मुझे दिखाई दे रहे थे। जी तो चाह रहा था कि उसकी कुर्ती में अभी हाथ डाल कर उन्हें जोर से दबा दूँ लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी। फिर भी मैंने पीछे खड़े खड़े ऊपर से उसकी कुर्ती में हौले से फूंक मारी तो उसने चौंक कर ऊपर मेरी ओर देखा और धीरे से मुस्कुराकर वापिस अपने काम में लग गई। मैं समझ गया कि इसको पटाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।
दूसरे दिन मैंने उसके पास जाकर उसके गालों को छूकर एक पप्पी देने का इशारा किया, लेकिन उसने शरमाकर मना कर दिया, लंच के वक्त जब सब खाना खाने जाते थे, तब मैं कारखाने में अकेला ही रुकता था, उनके आने के बाद मैं खाना खाने जाता था। उस दिन जब सब लंच पर चले गए तब मैंने उसे काम के बहाने स्टोर रूम में आने को कहा क्योंकि वहाँ बाकी की लड़कियाँ खाना खा रही थी। जब वो आई तो मैंने उसे पकड़ा और चूमना चाहा तब उसने कहा कि किस करने से गर्भ ठहर जाता है।
मैंने अपना सर पीट लिया, मैंने उसे बहुत समझाया लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं थी, तो मैंने उसे कहा- चलो मुँह लगाने से गर्भ ठहर जाता है लेकिन हाथ लगाने से तो कुछ नहीं होता !
तो उसने कहा- हाँ ! हाथ लगाने से तो नहीं होता !
इतना सुनते ही मैं उसके पीछे गया और उसकी बगलों से हाथ डाल कर उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर जोर से दबाने लगा।
दोस्तो, क्या चूचियाँ थी ! इतनी सख्त जैसे कच्चे अमरुद हों !
उसने छुड़ाना चाहा लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं तो उसने कहा- प्लीज, दर्द होता है ! धीरे धीरे करो !
इतना सुनते ही मैंने उसकी कुर्ती में हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा। अचानक वो मुझसे छूट कर बाहर भाग गई और बाकी लड़कियों के पास जा कर बैठ गई।
उसके बाद तो उसका मेरी तरफ देखना और शरमाकर मुस्कुराना मेरे लंड पर बिजलियाँ गिरा रहा था।
दूसरे दिन फिर मैंने उसे लंच में स्टोर रूम में बुलाया तो वो शरमाकर मेरे पास आ कर खड़ी हो गई। मैंने उसकी चूचियों को खूब दबाया। वो शी शी करती रही। मैंने पीछे से अपना लंड उसके चूतड़ों पर लगा रखा था और उसको समझा रहा था कि गर्भ चोदने से ठहरता है।
तो उसने कहा- वो कैसे?
तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर पैंट के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया तो उसने कहा- आप गंदे हो !
और यह कहकर भाग गई।
उसके बाद तो रोज ही वो लंच टाईम में मेरे पास आ जाती और मैं उसके स्तनों और चूतड़ों को दबाते रहता। अब मैंने अपना लंड भी उसके हाथ में देना चालू कर दिया था, जिसे वो पकड़कर धीरे धीरे दबाती रहती या सहलाती रहती। अब उसे भी मजा आने लगा था। मैंने उसकी चूत पर भी ऊपर से हाथ फेरना शुरू कर दिया था। एक सप्ताह में तो मैंने उसकी बुर को उंगली से चोदना भी शुरू कर दिया लेकिन उससे ज्यादा मौका ही नहीं मिल रहा था। मैं उसकी कुंवारी बुर में अपना लंड डाल कर उसकी सील तोड़ने के लिए तड़प रहा था।
आखिर दो दिन बाद मैंने उसे सुबह सात बजे कारखाने में आने के लिए राजी कर ही लिया। हमारे यहाँ स्टाफ और लेबर नौ बजे आते हैं।
दूसरे दिन वो सुबह पौने सात बजे ही कारखाने में आ गई। चूँकि मैं उस वक्त कारखाने में ही सोया करता था इसलिए जैसे ही वो अन्दर आई, मैंने दरवाजा बंद किया और उसे अपनी बाँहों मैं लेकर चूमने लगा। पहली बार मैंने उसकी कुर्ती को उतार कर उसके छोटे छोटे अमरूदों को देखा, उसकी घुन्डियाँ एकदम गुलाबी रंग की तथा सामने की ओर तनी हुई थी।
मैंने उसे गोदी में बैठाया और उसकी एक चुन्ची को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरी को हाथ से मसलने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।
मैंने अपना एक हाथ सलवार के ऊपर से उसकी चूत पर रख कर उसकी गद्दी जैसी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उसकी सिसकारियाँ और तेज होती जा रही थी। मैंने उसे गोद में उठाया और बिस्तर पर ले गया और धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे उतार दिया। जैसे ही उसकी चड्डी उतारने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- मैं इसे नहीं उतारने दूंगी !
मैंने कहा- इसे नहीं उतारोगी तो कैसे चोदूँगा ?
तो उसने कहा- मुझे नहीं पता ! पर मैं इसे नहीं उतारूंगी !
और रोने लगी।
मैंने कहा- कोई बात नहीं !
और उसकी चड्डी में हाथ डाल कर उसकी चूत को मसलने लगा। धीरे धीरे उसके दाने को सहलाया तो वो सिसकारियाँ भरने लगी, उसकी चूत गीली होने लगी।
मैंने अपनी उंगली उसमे डाली तो उसको मजा भी आने लगा। जब उसकी चूत एकदम गरमा गई, तब मैंने उंगली निकाल ली।
उसने कहा- क्या हुआ? रुक क्यों गए?
मैंने कहा- अब मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में डाल कर चोदूंगा !
तब उसने कहा- जो करना है, जल्दी करो !
तो मैंने कहा- जब तक चड्डी नहीं उतारोगी, मैं नहीं करूंगा !
तो उसने कुछ नहीं कहा और अपनी टांगे सीधी करके लेट गई और अपने हाथों से अपनी आँखे बंद कर ली। मैं समझ गया और धीरे से उसकी चड्डी उतार दी।
वाह क्या चूत थी ! चूत पर सिर्फ मुलायम से बाल आने शुरू ही हुए थे, एकदम फूली हुई गद्दी जैसी चूत को देख कर लंड फटने की हालत में हो गया। मैंने उसकी टांगें घुटनों से मोड़ी तो उसकी चूत की फांक कटे हुए लाल अंजीर की तरह दिखने लगी और बीच में जैसे किसी ने चेरी का छोटा सा टुकड़ा रख दिया हो।
मैंने अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उस पर थोड़ी वैसलीन लगाई, थोड़ी उसकी चूत पर और चूत के अन्दर लगाई। उसके बाद मैंने अपना छः इंच लम्बा और दो इंच मोटा लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और बिना दबाव दिए उसके ऊपर लेट गया। फिर उसके होठों को अपने होठों में दबा कर तथा हाथों से उसके कंधो को पकड़ कर धीरे से अपने लंड का दबाव उसकी चूत में दिया।
जैसे ही लंड का सुपारा उसकी संकरी चूत में घुसा, वो नीचे दबी हुई छटपटाने लगी और अपनी गर्दन को इधर उधर हिलाने लगी। लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ा हुआ था, मैंने एक झटका और लगाया तो मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुस गया।
वो बुरी तरह पसीने में भीग गई और रोने लगी। लेकिन मैं जानता था कि अगर इस बार इसको छोड़ दिया तो दोबारा यह मेरे नजदीक भी नहीं आएगी, मैंने अपना लंड सुपाड़े तक बाहर निकाला और एक जोरदार झटका और दिया तो खच की आवाज के साथ मेरा पूरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।
वह जोर से उछली, उसका मुंह एकदम लाल हो गया और वो मेरी पीठ में नाखून गाड़ने लगी। मैंने धीरे धीरे उसके बालों में हाथ फिराया और उसको धीरे धीरे सहलाने लगा। जब उसका मुंह छोड़ा तो वो जोर जोर से रोने लगी और मुझे धक्के देने लगी।
मैंने उसे समझाने की कोशिश की तो उसने कहा- आज के बाद मैं आपके पास कभी नहीं आउंगी !
मैंने उसे सहलाना चालू रखा और थोड़ी देर बाद अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और धीरे से वापस अन्दर धकेला तो उसने कहा- आप उठो ! मुझे कुछ नहीं करवाना !
मैंने उसके बोबे दबाये, धीरे धीरे उसके गालों को होठों से सहलाते हुए अपना लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा। वो मुझे धक्के देती रही और मैं उसको प्यार से चोदता रहा।
थोड़ी देर बाद उसने अपने हाथ मेरी पीठ पर कस लिए और मुझसे चिपक गई। मैं समझ गया कि अब रास्ता साफ़ है !
तो मैं जोर जोर से अपना पूरा लंड बाहर निकाल-निकाल कर उसे चोदने लगा। दो मिनट बाद ही उसने मुझे जोर से कस लिया, मुंह से आह ह ह ह ह ह ह आह ह ह ह ह ह करने लगी। वो झड़ चुकी थी मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसके पेट पर और चूचियों पर अपना सारा रस छोड़ दिया।
उसने उठने की कोशिश कि लेकिन ओह करते हुए वापिस लेट गई। मैंने उसे सहारा देकर उठाया तो बेड की हालत देख कर चौंक उठी और कहा- ये इतना खून कहाँ से आया?
तो मैंने कहा- ऐसा पहली पहली बार होता है, अब दुबारा करेंगे तो नहीं होगा !
तो उसने कहा- आज के बाद मैं कभी भी आपके पास नहीं आउंगी !
मैंने कहा- ठीक है, अभी तो सफाई करके कपड़े पहनो !
मैंने उसे सहारा देकर उठाया उसे कपड़े पहनने में मदद की, उसकी चूत पर रूई लगाई और दर्द की दवाई दे कर घर भेज दिया और कहा- आज तुम आराम करो, कल फिर बात करेंगे !
तो दोस्तो, तीन चार दिन बाद ही उसके फिर खुजली उठी और मैंने उसे फिर कई बार चोदा !
यह थी मेरी दूसरी सील तोड़ने की कहानी, आशा है आपको पसंद आई होगी ! अगर नहीं भी आई हो तो कृपया मुझे मेल जरूर करें ! Hindi Porn Stories
हॉट साली सेक्स कहानी मेरी अविवाहित साली की चूत चुदाई की है. मैंने अपने ससुराल में रात भर साली के साथ सेक्स किया. सर्दियों की रात में मेरा बहुत बढ़िया जुगाड़ चला.
मेरा नाम आर्यन (बदला हुआ नाम) है.
मेरी उम्र इस समय 23 साल है और मैं जयपुर में हॉस्टल में रहकर चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहा हूँ पर मैं शादीशुदा हूं।
अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली सेक्स कहानी है।
हॉट साली सेक्स कहानी के पात्रों के नाम, प्राइवेसी और सुरक्षा कारणों के कारण बदल दिए गए हैं।
यह घटना मेरे साथ दिसंबर 2020 में घटित हुई जो आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ.
मेरे मामा के लड़के की शादी थी तो एग्जाम खत्म होने के दूसरे दिन ही में शादी के लिए निकल गया.
वहीं पास के ही गांव में मेरा ससुराल था और बीवी की प्रेगनेंसी का नौवां महीना चल रहा था तो मेरी बीवी अपने मायके आई हुई थी.
एग्जाम की वजह से 3 महीने से मेरी पत्नी से मिलना हो नहीं पाया था.
इस कारण मामा के घर से मैंने सीधा ससुराल चला गया।
मेरे ससुराल वाले अपने खेत वाले घर में रहते हैं.
ससुराल में मेरे सास ससुर, मेरे दो साले और मेरी एक साली है.
दोनों साले पास के शहर में रहते हैं.
इस कारण अभी घर पर मेरे सास ससुर, मेरी पत्नी और मेरी साली ही थे.
थोड़ी देर तक औपचारिक बातें हुई।
रात को सबके साथ खाना खाने के बाद तकरीबन 10 बजे मैं दूसरे रूम में सोने के लिए चला गया.
अन्य लोग दूसरे कमरे में सोने चले गए थे.
मेरा बिस्तर वहीं चरपाई पर ही लगा हुआ था. वहीं पास में जमीन पर मेरी साली भी सोई हुई थी।
उसका सरदर्द हो रहा था तो मैंने उसे बोला- तुम चारपाई पर सो जाओ।
तो वह चारपाई पर आ गयी.
मैंने नीचे लेट गया.
इस समय तक मेरे मन में मेरी साली साहिबा जिसका नाम रूबिया (बदला हुआ) के लिए कोई गलत ख्याल नहीं आया था।
मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं अपना फोन चलाने लग गया.
रूबिया के सर में दर्द हो रहा था तो वो उठकर अपने सर पे विक्स लगाने लगी.
लेकिन उसका सरदर्द कम नहीं हो रहा था तो मैंने उसे बोला- मैं मालिश कर देता हूँ.
तो वह चारपाई से उतरकर नीचे आ गई।
सर्दी का समय था तो वह अपना सर मेरी गोदी में रखकर सो गई और मैं मालिश करने लगा.
मालिश करते करते मेरा लन्ड भी खड़ा होने लगा. जिसका उसे भी पता लग गया लेकिन वो ऐसे ही लेटे रही और मेरे लन्ड का जायजा लेने लगी.
थोड़ी देर मालिश करवाने के बाद वह वापस चारपाई पे लेट गई।
अब मेरे मन में भी उसे चोदने का विचार आने लगा.
लेकिन मैं पहल भी नहीं करना चाह रहा था तो मैं ऐसे ही लेटे लेटे फोन चलाने लगा और रूबिया भी चारपाई पर लेटी हुई मेरी ओर देख रही थी।
अब उसकी भी चूत में खुजली होने लगी तो वापस चारपाई से उतरकर मेरी रजाई में घुस गई और अपनी गान्ड को लन्ड से लगा दिया।
मुझे अब रूबिया की ओर से संकेत मिल चुका था तो मैंने भी उसके बूब्स को मसलना और उसकी गर्दन पे किस करना शुरू कर दिया.
और इसके साथ ही उसके मुंह से हल्की हल्की सिसकारियां निकलने लगी।
अब मेरे हाथ उसके बूब्स को मसलते मसलते उसके सलवार तक पहुंच चुके थे.
मैंने सलवार का नाड़ा खोलकर उसे घुटनों तक कर दिया।
नीचे उसने पैंटी पहन रखी थी तो मैंने पैंटी के अंदर से ही चूत सहलाना शुरू कर दिया।
उसकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी.
मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, उंगली चूत में जाते ही उसकी सिसकारियां और तेज हो गई इसके साथ ही मैंने उसकी पैंटी भी नीचे कर दी।
तब मैंने अपनी लोअर को भी नीचे घुटनों तक कर दिया. अब मेरा छ: इंच लंबा और 3 इंच मोटा लन्ड पीछे से ही उसकी चूत से रगड़ने लगा।
अब रूबिया की चूत में भी आग लग चुकी थी और वह कहने लगी- जीजू, अब और मत तड़पाओ अब डाल भी दो मेरी चूत में अपना लन्ड!
उसके इतना कहते ही मैं उसके ऊपर आ गया और लन्ड का सुपारा उसकी चूत के मुंह पर लगा दिया.
तब उसको मैंने बोला- लन्ड डाल दूँ अंदर?
तो उसने हां में अपना सर हिला दिया।
हॉट साली सेक्स के लिए तैयार थी, यह इशारा मिलते मैंने एक हल्का सा झटका दिया तो आधा लन्ड चूत में चला गया और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई.
लेकिन समय रहते मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
अब मैंने दूसरा झटका दिया तो पूरा लन्ड उसकी चूत में जा चुका था.
साली की चूत में मेरा लन्ड जाते ही मुझे पता चल गया था कि साली की चूत चुदी चुदाई है.
मैंने उससे उसकी चुदाई के बारे में पूछा तो पहले तो पूछने पर उसने मना कर दिया.
लेकिन मेरे दोबारा पूछने पर बताया उसने कि दो बार पहले भी वह चुद चुकी है.
अब वह धीरे धीरे आहें भर रही थी.
धीरे धीरे अब मैंने लन्ड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
करीब दस मिनट तक चोदने के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और गर्म गर्म फव्वारा मुझे अपने लन्ड पे महसूस होने लगा.
हालांकि मेरा अभी तक हुआ नहीं था तो मैंने उसके बाद पांच मिनट तक ऐसे ही उसकी चूत को चोदना जारी रखा.
फिर मैं पीछे से उसके साइड में आ गया और साईड से उसकी चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया और पीछे से उसकी चूत को पेलना शुरू कर दिया.
करीब 10 मिनट तक पीछे से चोदने के बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मेरे धक्के और तेज हो गए और 20-25 धक्कों के साथ ही मैंने अपना लन्ड बाहर निकाला और सारा माल उसकी गांड पे गिरा दिया।
उस रात मैंने उसकी एक बार और चूत मारी.
और अब सुबह हम दोनों अपने अपने बिस्तर पे जाकर सो गए क्योंकि गांव में सभी लोग सुबह जल्दी उठ जाते हैं।
उसके बाद मैं एक रात और वहाँ पर रुका और मैंने जमकर साली की चुदाई की।
उसके बाद मैं वापस जयपुर आ गया.
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