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रोज की तरह Antarvasna मेरे पति शराब की बोतल ले कर घर आ गये थे। मैंने उनके लिये शराब के साथ मांस पका कर रख लिया था। उसका दोस्त राजेश जो अभी कुँवारा था, साथ ही आता था। राजेश मुझे अक्सर घूरता तो रहता था पर मुझे उसकी नजरें बुरी नहीं लगती थी। उसकी शराफ़त मुझे भाती भी थी। शराब पीने के दौरान मेरे साथ पति की हरकतों को वो एन्जोय करता था।
आज भी वो दोनों शराब पी रहे थे। मैं नहाने के लिए बाथरूम में चली गई थी। मेरा पति ने तब तक हल्ला मचा कर मुझे बहुत गालियां दे डाली थी।
“मादरचोद रण्डी, गोश्त तेरा बाप लायेगा क्या… ?”
“रुको ना ला तो रही हूँ… “
मैंने जल्दी से मात्र पेटीकोट पहना और ऊपर एक हल्का सा टॉप डाल कर प्लेट में भुना मांस लेकर आ गई।
“भोसड़ी की ! गाण्ड मराने गई थी क्या … इधर ला… !”
राजेश मुझे देख कर मुस्करा रहा था। मुझे बहुत शर्म आ रही थी, पर ये गालियाँ मेरे लिये कोई नई नहीं थी। राजेश को मैंने चुपके से देखा और मन ही मन मुस्करा दी।
“जा कहाँ रही है… इधर आ… नहा कर आई है … तेरी भेन की चूत मारूँ … चिक्कन लग रही है !”
“बस भी करो ना … ” राजेश के सामने गालियाँ देना मुझे और भी आनन्दित कर रहा था।
“आजा मेरे लौड़े पर बैठ जा … हिच्च … तेरी चूत मार दूँ … “
मैं शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी… जाने राजेश क्या सोच रहा होगा।
क्या वो भी मुझे चोदने की सोच रहा था या …
नशे में धुत्त सा रहमान बोलता ही जा रहा था। उसने मेरी बांह पकड़ कर मुझे खींच लिया,” तेरी मां का भोसड़ा … ये देख मेरा लण्ड … आजा तेरी चूत में घुसेड़ दूँ !”
उसने सच में अपना लण्ड पैण्ट में से बाहर निकाल लिया … राजेश ने रहमान को सम्भालने की कोशिश की और फिर मेरी तरफ़ देखा।
“मां के लौड़े … चल हट … मेरी बीवी है … साली को चोद चोद कर मस्त कर दूंगा।”
पर शराब अधिक पी जाने से वो राजेश के हाथों में झूल गया। उसने रहमान को सोफ़े पर लेटा दिया। मैं जल्दी से उसका लण्ड पैण्ट में अन्दर डालने लगी।
मैंने राजेश को देखा और मुस्करा दी।
राजेश ने कहा,”बानो, मैं डाल दूंगा … ये तो कुछ भी नहीं है… ये ले … अब ज़िप लगा दे !”
यह सुनते ही मैं शरमा गई। उसने ही लण्ड अन्दर करके ज़िप लगा दी। उसने मेरी पीठ पर हाथ फ़ेरते हुये कहा,”शमीम, इसकी शराब छुड़ानी होगी !”
“अरे पीने दे, पी पी के साला मर जायेगा।”
तभी मुझे लगा कि उसका हाथ मेरी पीठ पर आ गया है। साले को नीचे आग लग रही है, पर कैसे कहूँ आग तो मेरी फ़ुद्दी में भी लगी हुई थी। उसके पीठ पर हाथ फ़ेरने से मुझे झुरझुरी सी होने लगी। मैंने तिरछी निगाहों से उसकी तरफ़ देखा। उसका लण्ड उठान पर था।
मैं समझ गई थी कि वो हाथ यूँ ही नही फ़ेर रहा है।
“भैया, ये तो देखो ना, मुझे कितनी गालियाँ देते हैं… “
“सच कहती हो भाभी, तुम हो ही इतनी प्यारी … दो जाम उतरते ही आपके लिये दिल में … “
मैंने उसके होंठो पर अंगुली रख दी,”धत्त भैया, ऐसा मत कहो, मुझे शर्म आती है … आप तो इनके जैसा मत कहो।”
उसके हाथ अब मेरे चूतड़ों की गोलाईयों तक पहुंच चुके थे। उसने एक बार नशे में धुत्त रहमान को देखा और मेरी तरफ़ बड़ी आस से देखा। मेरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। उसने धीरे से मेरा एक चूतड़ का गोला दबा दिया। उसका लण्ड अब पूरा तन गया था। मैंने कोई विरोध नही किया। उसके हाथ मेरे दूसरे गोले पर भी पहुंच कर सहलाने लगे थे। मैंने धीरे से उसका हाथ हटा दिया।
अचानक उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैं घबरा सी गई। पर मेरा जादू उस पर चल गया था।
“भैया … छोड़ो मुझे … यह क्या कर रहे हो… “
“ओह… सॉरी … तुम्हें देख कर मुझे भी नशा हो गया था … ” उसने मुझे छोड़ दिया।
मुझे बहुत ही बुरा लगा, मुझे लगा था कि वो मेरे साथ जोर जबरदस्ती करेगा और फिर मैं अपने आप को उसको सौंप दूगी। इस तरह मुझे एक ताजे नये लण्ड का मजा मिल जायेगा। पर ये तो बुद्धू निकला। हाय … पर मेरा अनुमान गलत निकला… कैसे भला … वो बुद्धू नहीं निकला ? मेरे बेडरूम में घुसते ही वो भी पीछे-पीछे आ गया और उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर पीछे से अपने से चिपका लिया।
“बानो … तू तो बहुत चिकनी है रे … मां कसम … चुदा ले एक बार… !”
“देखो राजेश … रहमान को पता चल गया ना तो तेरी गाण्ड मार देगा !”
उसने मेरे सीने के उभार अपनी हथेलियों में भींच लिये। मैं तड़प कर परे हट गई। उसने भी यूं तो शराब पी रखी थी पर नशा उसे शराब का नहीं, मेरा चढा हुआ था। उसने झपट कर मुझे अपने से चिपका लिया।
“अरे छोड़ ना, बड़ा मर्द बनता है … मुझे चोदना है तो ऐसे करेगा क्या ?”
“सच कहता हू बानो, तेरी आस तो मुझे कब से है … तेरे नाम की मैं तो रोज मुठ मारता हूँ … एक बार चुदा ले बस… मेरे दिल की हसरत निकल जाये !”
मैंने उसे अपने से फिर दूर किया और कहा,”चल ठीक है, मेरी बात मानेगा… पहले इस रहमान की गाण्ड मार … हरामी मुझे बहुत गालियाँ देता है !”
“बस , इतनी सी बात… ये तो मुझसे अक्सर गाण्ड मराता है … तू कहे तो इसकी मां को ही चोद दूँ !”
“चल उठा इसे, नीचे दरी पर सुला दे… “
राजेश ने उसे खींच कर नीचे दरी पर उल्टा लेटा दिया। मैंने तो सिर्फ़ पेटीकोट ही पहन रखा था, सो उसे उठा कर मैंने राजेश को अपनी चिकनी चूत दिखा दी…
“ये देख, है ना मस्त चूत … पर अब इसकी गाण्ड मार दे, तुझे ये चूत फ़्री में दूंगी।”
मैं जोर से खिलखिला कर हंस पड़ी। उसे भी हंसी आ गई। मैंने और राजेश ने मिलकर उसकी पैण्ट खींच के उतार दिया और चड्डी भी उतार कर गाण्ड खोल दी। वो नशे में कुछ बड़बड़ा रहा था।
“बानो इसे देख कर तो लौड़ा खड़ा तक नहीं हो रहा है !”
“धत्त तेरे की, फिर क्या दम है तेरे में… ला तेरा लौड़ा मसल कर खड़ा कर दूँ।”
मेरा हाथ लगते ही उसका लौड़ा फ़ूल कर बड़ा होने लगा। जैसे जादू हो गया था। कुछ पलों में उसका लौड़ा सात आठ इन्च का हो गया। लण्ड खासा मोटा था पर थोड़ा टेढ़ा था। मैंने उसकी चमड़ी पीछे खींच कर सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। लण्ड की फ़ूली हुई नसें और चमकदार गुलाबी सुपाड़ा मुझे भी भा गया।
“चल सेट कर इसकी गाण्ड में लौड़ा… !” मैंने झुक कर रहमान के चूतड़ों के पट खोल दिये। बीच में काला-भूरा छेद नजर आने लगा था। मैंने एक थूक का लौंदा उस पर टपका दिया। फिर मैं अपनी चूची खोल कर उसके सामने मसलने लगी। मुझे देख कर उसका लण्ड और कड़क हो चला था। उसने रहमान की गाण्ड में अपना लण्ड घुसा दिया। रहमान थोड़ा सा बेचैन हुआ, पर नशे में बड़बड़ा कर रह गया। वो पूरा नशे में धुत्त हो चुका था।
मैंने राजेश की बनियान भी ऊपर खींच ली और अपनी कठोर चूचियाँ उसकी पीठ से रगड़ने लगी। वो और उत्साह से रहमान की गाण्ड मारने लगा। मैं भी उत्तेजना से भर गई। मैंने अपना पेटीकोट भी उतार दिया। राजेश के सामने मैं नंगी हो कर खड़ी हो कर उसे अपनी चूत हिला कर दिखाने लगी।
“तेरी कसम बानो, मेरा निकल जायेगा … अब चूत मारने दे प्लीज !”
“अरे राजेश, मेरी चूत तो अब तेरी है … मस्ती से इसे चोद डालना … पर पहले इसकी गाण्ड तो पूरी मार … और अपना माल निकाल दे… !”
“आह्ह् … साले की गाण्ड अन्दर से गरम है … !” उसने जल्दी जल्दी लण्ड चलाना आरम्भ कर दिया। कुछ देर में गाण्ड के अन्दर ही उसका वीर्य निकल पड़ा।
“ले … हो गया ना … अब चूत मरा ले… !”
“जा ठीक से लण्ड धो कर आ … फिर आजा मेरे राजा… देख यह सब देख कर मेरी चूत क्या, चूतड़ भी लण्ड खाने को तैयार हैं… देख तबियत से चोदना मेरे राजा !”
फिर से उत्तेजित करने के लिये मैं उसे रिझाने लगी। उसने वहीं पर पानी के गिलास से अपना लण्ड धो लिया और कुछ ही क्षणों में वो फिर से तैयार था। मैं सीधे अपने बेडरूम में भागी। वो भी अपने खड़े लण्ड के साथ मेरे पीछे पीछे आ गया।
“बानो … तेरी कसम … तू तो चिक्कन माल है रे… अब तो खूब मजा आयेगा ना… “
“अभी नंगी खड़ी हूँ तेरे सामने, इसलिये ना … साला चूत देख कर मुँह में पानी आ रहा है, जब चोद देगा तो कहेगा, कौन बानो … कैसी बानो… !”
वो मुझसे लिपट पड़ा और अपना तना हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसाने लगा। मुझे भी उसके लण्ड के चुभन की मीठी मीठी सी टीस उठने लगी। वह बड़ी कोमलता से मेरी चूचियाँ सहलाने लगा, उसके हाथों स्पर्श मेरी चूत में गुदगुदी करने लगा। मैं अपने आप घोड़ी बनने लिये के लिये बेताब हो उठी, मैंने अपनी टांगें फ़ैला कर खूबसूरत गाण्ड पीछे उभार दी।
“राजेश, कुछ चिकनाई लगा दे रे … वर्ना गाण्ड फ़ट जायेगी !”
“वो तो पहले ही इतनी चिकनी है … फिर भी तेरी कोल्ड क्रीम क्या काम आयेगी।”
उसने कोल्ड क्रीम मेरे छेद पर लगा दिया और अंगुली को छेद में घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा।
“हाय मेरे अल्लाह, बहुत मजा आ रहा है … और कर … पर जरा प्यार से … “
“तो मेरे लण्ड का क्या होगा… ?”
“उसके लिये तो चूत है ना… आह्ह्ह जल्दी जल्दी कर … यह तो मेरी चूत को झड़ा देगा रे … उफ़्फ़, इतना मजा … तेरी अंगुली है या … जरा और अन्दर घुसेड़ ना… “
“बानो, मेरा लौड़ा झड़ जायेगा ना… चोदने दे अब… “
“तो अंगुली को मेरी गाण्ड में डाले रख और ये ले मेरी चूत … “
उसने मेरा इशारा समझा और अपना लण्ड थोड़ा सा नीचे झुकाते हुये मेरी चूत पर रख दिया। उसके सुपाड़े का स्पर्श से लगा कि मेरी चूत के लायक वो बहुत मोटा है। फिर भी लगा कि चूत तो लण्ड के साईज़ के हिसाब से फ़ैल जाती है। सो मैंने उसके सुपाड़े पर जोर लगाया। उसका जोर भी लगा … पर लण्ड के घुसते ही जैसे मेरी चीख निकलने को हुई। वो तो बहुत मोटा था … रहमान का तो उसके सामने पतला और छोटा था। उसने अपने चूतड़ों का और जोर लगाया और बहुत ही कसता हुआ आधा लण्ड अन्दर उतर गया। मेरी आंखें दर्द से उबल पड़ी… ।
“मादरचोद फ़ाड़ ही डालेगा क्या ? … साला क्या लोहे का है… ?”
“बस हो गया बानो … ” वो मेरी गाण्ड में अंगुली घुमा कर मुझे आनन्द देने की कोशिश कर रहा था। पर अब मुझे बस जोर का दर्द हो रहा था। उसने गाण्ड में से अंगुली निकाल ली। मेरे कूल्हों को कस कर पकड़ कर उसने जोर का धक्का दे ही दिया। मेरी चूत को चीरता हुआ लण्ड पैंदे में बैठ गया। मेरे मुख से एक चीख फिर से निकल पड़ी।
“अल्लाह रे … ये क्या कर रहा है … लगता है तूने तो रहमान की गाण्ड की तो मां चोद कर रख दी होगी।”
“अरे नहीं … उसकी तो मैं अक्सर मारता रहता हूँ… उसकी तो आदत है।”
“अम्मी रे … मेरे तो भोसड़े में नहीं ही घुसता है तो … गाण्ड तो … अरे ये क्या… चिकना चिकना क्या है ” उस समय मुझे पता नही चला, पर खून निकल आया था।
“अरे कुछ नहीं … चल अब मस्त हो जा… ” उसका लण्ड मेरी चूत में पीछे से धीरे-धीरे अन्दर बाहर होने लगा … मेरा दर्द भी शनैः शैनेः कम होने लगा। कुछ ही देर में मेरी चूत का साईज़ लण्ड जैसा हो गया और वो आसानी से मुझे पेलने लगा। अब मुझे भी आनन्द आने लगा था। उसके मोटे लण्ड ने मेरे शरीर में तेज उत्तेजना भर दी। सच में मोटे लण्ड का तो मजा ही कुछ और ही है… ।
मैं झुकी हुई थी, मेरे हाथ पलंग पर टिके हुये थे। मेरी चूचियाँ नीचे झूल रही थी, वो तो बस कभी कभी मेरे चुचूकों को अपने अंगूठे और अंगुलियों से मसल डालता था और एक मीठी सी टीस शरीर में उभर आती थी। उसकी लण्ड को अन्दर बाहर करने की गति तेज होने लगी। मेरे जिस्म में तेज मीठी सी तरावट भरने लगी। उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में कसता हुआ चल रहा था। रगड़ की मधुर आग तेज होने लगी थी।
चुदाई का असली मजा मुझे आने लगा था। रहमान का लण्ड अब मुझे नूनी सा लग रहा था। बस वो तो चूत में गुदगुदी ही कर पाता था, इतना मोटा लौड़ा खाने के बाद रहमान की चुदाई को तो मैं चुदाई अब कह ही नहीं सकती थी।
अब मुझे चुदाई की उत्तेजना चरम बिन्दु तक ले जा रही थी। मुझे तो बहुत आनन्द आ रहा था। अति उत्तेजना के कारण मेरे जिस्म में लहरें उठने लगी। चूत फ़ड़कने लगी। मेरी आंखें बन्द होने लगी। तभी मेरा सारा शरीर जैसे ऐंठ गया और चूत ने पानी छोड़ दिया। मैं झड़ने लगी… मेरा चूत में लसलसापन बढ गया, इस पर सोने पर सुहागा … जैसे चूत के अन्दर बाढ़ सी आ गई। राजेश का वीर्य तेजी से छूट गया और मेरी चूत में भरने लगा। मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर ली। वो अन्दर वीर्य भरता रहा और फिर उसकी बूंदें मेरी चूत से अब चू पड़ी- टप टप करके वो जमीन को गीली करने लगी। वो अपना लण्ड चूत में घुसेड़े हुये हांफ़ने लगा। तभी उसका लण्ड सिकुड़ कर धीरे धीरे चूत के बाहर आ गया। मैं भी सीधी खड़ी हो गई। तभी मैं चौंक गई, वीर्य के साथ मेरी चूत में से खून भी टपक रहा था। शायद अन्दर चोट लग गई थी या लण्ड ने चूत को अपने साईज़ में लाने के लिये उसे रगड़ मारा था। मैं जल्दी से बाथ रूम में गई और साफ़ पानी से चूत को धो लिया। अब मेरी चूत में दर्द होने लगा था।
राजेश मुझे चोद कर जा चुका था। मैं बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी कि अब तक मैं इस छोटे से लण्ड साथ चुदा कर बहुत खुश थी, पर अब मैं खुश थी मोटे लण्ड से चुद कर। रहमान के चूतड़ पर राजेश का वीर्य पड़ा हुआ चमक रहा था … सोच में अब थी कि क्या ये रहमान सच में गाण्ड मराता था … साला गाण्डू निकला ये तो ! उसे ही निहारते हुये मेरी आंखें सपनों में खो गई … मुझ पर गहरी नींद छाने लगी … शायद सपने में वो दूर खड़ा राजेश ही था जो अपना मोटा लण्ड हिला हिला कर मुझे अपनी ओर बुला रहा था … Antarvasna
“ओह … मीनू … सच Antarvasna कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर … प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।
“भैया क्या आपने कभी सोचा कि मैं आपके बारे में क्या सोचती हूँ ?”
“क… क्या मतलब ?” अब उनके चौंकने की बारी थी।
“हाँ भैया मैं भी आपसे प्रेम करने लगी हूँ !” मैंने अपनी नजरें झुका ली।
“ओह… मेरी मीनू मेरी मैना मेरी जान” और भैया मुझ से लिपट ही गए। उन्होंने मुझे अपने बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर एक चुम्बन ले लिया। आह … वो प्यार का पहला चुम्बन मुझे अन्दर तक रोमांच से भिगो गया। मेरा तन मन सब कुछ तो उसी एक छुवन की लज्जत से सराबोर हो गया। मैंने भी अपने जलते होंठ उनके होंठों पर रख दिए।
मुझे नहीं पता कितनी देर हम लोग इसी तरह एक दूसरे को चूमते रहे। हम तो जैसे अपनी सुधबुध ही खो बैठे थे। मैं तो उनसे ऐसे लिपटी थी जैसे कोई लता किसी पेड़ से। बाहर जोर की बिजली कड़की तब हमें होश आया। भैया ने झट से उठ कर कमरे का दरवाजा बंद किया और फिर वापस आकर मुझे अपने आगोश में भर लिया।
“मीनू कहीं हम गलत तो नहीं कर रहे ?”
“ओह … भैया अब कुछ मत सोचो। इस रात और इन हसीन लम्हों को यादगार बना लो। छोड़ो इन पुरानी दकियानूसी बातों को !”
और फिर ……………….
उन्होंने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया और मेरी लुंगी को खींचने लगे। मैंने कहा “नहीं पहले लाइट बंद करो !”
उन्होंने झट से लाइट बंद कर दी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। खिड़की से हलकी रोशनी आ रही थी। अब उन्होंने अपने और मेरे कपड़े निकाल फेंके। अब हम दोनों ही एक दम नंगे थे। मेरी मुनिया तो कब की पानी छोड़ छोड़ कर पीहू पीहू कर रही थी। मैंने शर्म के मारे अपने दोनों हाथ अपनी मुनिया के ऊपर रख लिए।
“मीनू मेरी जान ! अब शर्म छोड़ो ! मुझे अपनी इस प्यारी मुनिया को प्रेम करने दो !”
प्रेम ने मेरे हाथ परे कर दिए। मैं चित्त लेटी थी। मेरी जांघें आपस में कसी हुई थी। एक अनजाने डर और रोमांच से मैं तो लबालब भरी हुई थी। उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से मेरी पिक्की की केशर क्यारी पर फिराया। और फिर अपने जलते हुए होंठ मेरी मुनिया के होंठो पर जैसे ही रखे मेरी एक हलकी सी किलकारी निकल गई। फिर अपनी जीभ से मेरी मुनिया की गुलाबी पंखुडियों को चूम लिया और फिर उसे चाटना शुरू कर दिया तो मेरी बंद जांघें अपने आप खुलने लगी।
फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी पिक्की की दोनों फांकों को चौड़ा किया। शहद की कुप्पी जैसी लाल गुलाबी रंगत वाली प्रेम रस में सराबोर हुई अनछुई पिक्की हलकी ‘पुट’ की आवाज के साथ खुल गई। उन्होंने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। मेरे मुंह से सहसा निकल पड़ा “उई ……. माँ …….” अरे अभी तो उन्होंने दो तीन बार ही जीभ फिराई थी मेरी पिक्की तो निहाल ही हो गई और अपने प्रेम रस की 4-5 बूंदें उन्हें समर्पित कर दी। वो तो मस्त होकर उसे चाट ही गए। मैं सीत्कार पर सीत्कार करने ली। मेरे पैर अपने आप ऊपर उठ गए और मैंने उनकी गर्दन के चारों और लपेट लिया। वो कभी मेरे नितम्बों को सहलाते कभी मेरे गोल मटोल उरोजों को दबाते। मैं तो सातवें आसमान पर थी।
“ओह… प्रेम बस करो ! मुझे कुछ होता जा रहा है।”
मेरा शरीर अकड़ने लगा और साँसे तेज होने लगी। मुझे लगा जैसे कहीं मैं अनजाने खुमार और उन्माद में डूब रही हूँ। मैंने उनके सिर के बालों को जोर से पकड़ लिया और अपनी पिक्की की और दबा दिया। और उसके साथ ही मेरी किलकारी निकल गई और मेरी पिक्की ने गरम गरम प्रेम रस की जैसे बौछार ही चालू कर दी। आह … इतना मजा तो कभी हस्तमैथुन करके भी नहीं आया था। शमा सच कह रही थी इस लज्जत (स्वाद) से अब तक मैं तो अनजान ही थी। प्रेम पूरा का पूरा रस चटखारे लेकर पी गया।
“ओह मेरी मैना ! मेरी जान ! मजा ही आ गया ” प्रेम ने उठते हुए कहा। मेरा शरीर अब भी रोमांच से काँप रहा था। वो मेरे ऊपर आ गए। और मेरे होंठों को चूसने लगे। उनके होंठों पर लगे मेरे प्रेम रस का नमकीन और कुछ खट्टा सा स्वाद मुझे भी मिल ही गया। वो कभी मेरे गालों को कभी मेरे होंठो को कभी गले को कभी उरोजों को चूमते ही जा रहे थे। फिर उन्होंने अपना मुंह मेरे अमृत कलशों (उरोजों) पर लगा दिया और उनकी चने के जितनी बड़ी निप्पल्स को चूसना चालू कर दिया। कभी वो एक उरोज को पूरा मुंह में भर लेते और चूसते और कभी दूसरे को। मेरी तो सीत्कार ही निकलती जा रही थी।
अचानक मेरा हाथ उनके ‘उस’ से टकराया। ओह… मुझे शर्म आ रही है उसका नाम लेते हुए। आप समझ रहे हैं ना। लगभग 7” लम्बा और 1 ½ “ मोटा उनका पप्पू तो अकड़ कर जैसे लोहे की रॉड ही बना था। उसका रंग सांवला सा था। वो तो ऐसे खड़ा था जैसे किसी बन्दूक की मोटी सी नाली हो और बस घोड़ा दबाने का इंतज़ार कर रहा हो. और सुपाड़ा तो जैसे कोई लाल टमाटर ही हो । मैंने आज पहली बार किसी का “वो” इतने नजदीक से देखा था। मैंने प्यार से उसे छुआ तो वो तो फुफ्कारे ही मारने लगा। मैंने धीरे धीरे प्यार से उसे सहलाना शुरू कर दिया तो उसने भी ठुमके लगाने चालू कर दिए। मैंने जब सुपाड़े पर अंगुली फिराई तो मुझे कुछ लेसदार सा चिपचिपा सा महसूस हुआ। शमा बताती है ये प्री कम होता है। कुछ नमकीन सा होता है और इसका स्वाद बहुत ही मजेदार होता है। मेरा जी तो कर रहा था कि उसे मुंह में ले लूं पर शर्म के मारे मैं उसे मुंह में नहीं ले पाई।
“मीनू मेरी जान क्या तुम तैयार हो ?” उन्होंने मेरे होंठ चूमते हुए पूछा।
“किसके लिये ?”
“ओह ये भी बताना पड़ेगा क्या ?”
“हाँ बताये बिना तो मैं कैसे समझूंगी ?”
“अब चुदाई करनी है मेरी मैना !” उन्होंने मेरी नाक पकड़ते हुए मेरे होंठों पर एक चुम्बन ले लिया।
“ओह… भैया आप बहुत गन्दा बोलते हो ?”
“अब चुदाई को तो चुदाई ही कहा जाएगा और क्या बोलूँ ?”
“नहीं …ये गन्दा शब्द है हम इसे प्रेम मिलन कहेंगे ‘वो’ नहीं ?”
“वो क्या ?”
“ओह भैया आप फिर… नहीं मुझे शर्म आती है” मैंने अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढांप लिया।
अब वो कहाँ रुकने वाले थे। उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर कर मेरे होंठ चूम लिए। और फिर एक हाथ बढा कर उन्होंने बेड की साइड ड्रावर से वैसलीन की डब्बी निकाली और एक अंगुली में क्रीम भर कर मेरी पिक्की के होंठो पर और छेद में लगा दी। मैं तो सिहर ही उठी रोमांच से। उन्होंने धीरे धीरे अपनी अंगुलियों से मेरी पिक्की की फांकों को मसलना शुरू कर दिया। फिर एक अंगुली मेरे रति-द्वार के छोटे से छेद में डाल दी। “ऊईई …. माँ.. आ ….” मुझे गुदगुदी सी हो रही थी। उन्होंने अब अंगुली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी। मैं तो जैसे मदहोश ही हो गई। मेरे मुंह से तो बस आह … ओईई … ही निकलते जा रहा था। फिर उन्होंने अपने पप्पू को भी क्रीम से तर कर लिया और उसे मेरी पिक्की के मुंह पर रख दिया। वो तो बेचारी कब की तरस रही थी। उन्होंने कोई जल्दी नहीं की। मुझे बड़ी हैरानी हो रही थी ये इतनी देर क्यों कर रहे हैं। शमा तो कहती है की गुल तो एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार देता है।
प्रेम ने एक हाथ मेरी कमर के नीचे लगा लिया और एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे। उसने मेरे होंठ अपने होंठों में भर लिए। मेरी मुनिया तो कब की पीहू पीहू कर रही थी। उन्होंने एक जोर का सांस लिया और धीरे से एक धक्का लगाया। मेरी प्यारी मुनिया को चीरता हुए उनका पप्पू 3 इंच तक मेरी पिक्की में घुस गया और उसके साथ ही मेरी घुटी घुटी चीख निकल गई। मुझे लगा जैसे किसी ने लोहे की गरम सलाख मेरी पिक्की में ठोक दी हो। मुझे ऐसे लगा जैसे मेरी पिक्की की चमड़ी किसी ने चाकू से चीर दी है। मैं कसमसाने लगी। और जैसे ही मेरे होंठ उनके मुंह से छूटते मेरी हलकी सी चींख निकल गई। “ओह भैया…. मैं मर गई ……. म… म… मम्मी !”
“बस बस मेरी मैना अब दर्द ख़त्म ! बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो ! अब आगे मजा ही मजा है !”
“नहीं भैया बाहर निकाल लो प्लीज … मैं मर जाउंगी बहुत दर्द हो रहा है !”
“बस एक मिनट की बात है। प्लीज चुप करो। बस अब दर्द ख़त्म ! ”
हम लोग कोई 3-4 मिनट ऐसे ही एक दूजे की बाहों में लिपटे पड़े रहे और फिर तो जैसे कमाल ही हो गया। मेरा दर्द कम होता चला गया। आह ….. अब तो बस मजा ही मजा था। प्रेम धीरे धीरे धक्का लगाने लगे पर पूरा अन्दर नहीं किया।
मैंने कहा, “अब मत तरसाओ ! पूरा डाल दो !”
“क्या डाल दूँ ?”
“ओह भैया आप तो मुझे बेशर्म ही कर के छोडोगे। नहीं मैं इसका नाम नहीं ले सकती !”
“प्लीज बोलो ना ?” उन्होंने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में ले लिया और मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा।
“ये तो मेरा प्यारा मिट्ठू है बस अब तो आप खुश हैं ना ?” कहते हुए मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था और साँसें बेकाबू होती जा रही थी। मेरा तो रोम रोम ही पुलकित हो गया था। मैं तो जैसे मस्ती के सागर में ही डूबी थी।
अचानक उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने भी अपने नितम्ब उछालने शुरू कर दिए। पर मुझे क्या पता था अभी तो असली काम बाकी था। प्रेम एक मिनट के लिए रुका और फिर बोला “देखो मेरी जान थोड़ा सा दर्द और सहन करना होगा !”
“ओह प्रेम अब कुछ मत पूछो अब डाल दो पूरा अन्दर ! अब दर्द की चिंता मत करो ! तुम्हारे लिए मैं सब सहन कर लूंगी !”
फिर उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया और एक जोर का धक्का लगाया। उनका 7” लम्बा पप्पू मेरी मुनिया की झिल्ली को रोंदता हुआ अन्दर समा गया। मेरे मुंह से जोर की चीख और आँखों से आंसू दोनों एक साथ निकल पड़े। प्रेम तो पक्के गुरु थे। इस से पहले कि मेरी चीख हवा में गूंजे, उन्होंने मेरा मुंह अपने हाथ से ढक दिया और मैं तो बस गूं गूं करती ही रह गई। बाहर बहुत जोर से बिजली कड़की लेकिन मुझे लगा कि मुझे जितने जोर का झटका लगा है वो उस बिजली से कम नहीं था। मुझे लगा मेरी पिक्की से गरम गरम सा कुछ निकल रहा है। मुझे तो बाद में पता चला वो तो मेरी पिक्की की सील टूटने से निकला खून था जो पूरी बेडशीट को ही भिगो गया। मैंने उनकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए जिससे उनका हल्का सा खून निकल आया। पर इस खून और दर्द की किसे परवाह थी।
कोई 4-5 मिनट हम इसी तरह शांत पड़े रहे। फिर जब उनका ‘वो’ (अरे यार पप्पू) अन्दर एडजस्ट हो गया तो मेरी पिक्की ने भी रोना धोना बंद करके प्रेम रस बहाना चालू कर दिया। मेरी पिक्की अब संकोचन करने लगी थी। उनका पप्पू भी अन्दर मस्त हुआ ठुमके लगाने लगा। अब प्रेम ने धीरे धीरे धक्के लगाने चालू कर दिए। मैं भी अपने नितम्ब उठा उठा कर उनका साथ देने लगी। पता नहीं कितनी देर वो अपने पप्पू को अन्दर बाहर करते रहे। समय की परवाह किसे थी। मैं तो बस यही चाह रही थी हमारे प्रेम के ये सुनहरे पल कभी ख़तम ही न हों। मेरे मुंह से आह… ओईई …. या.. आ.. आ.. की आवाजें निकालने लगी थी और मेरी पिक्की से फच फच की आवाजें आनी शुरू हो गई थी। मेरा शरीर एक बार फिर अकड़ने लगा और इस से पहले की मैं कुछ समझती या करती मेरी पिक्की ने पानी छोड़ दिया।
प्रेम धक्के लगता जा रहा था। मैंने अपने पैरों को ऊपर उठा कर प्रेम की कमर से कैंची की तरह जकड़ लिया। अब वो धक्के नहीं लगा पा रहे थे। वो कुछ देर ऐसे ही मेरे ऊपर पड़े रहे। मैं तो प्रेम रस में डूबी रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। फिर मैंने धीरे धीरे अपने पैर नीचे कर लिए। हमें कोई 15 मिनट तो जरूर हो गए होंगे। प्रेम ने फिर जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उनके मुंह से अजीब सी गुरर्र.. गु….र…र्र की आवाज निकलने लगी थी। मेरी पिक्की से भी अब फच .. फच .. की आवाजें आनी शुरू हो गई थी। इस मधुर संगीत को सुनकर मैं तो तृप्त ही होती जा रही थी। इस अनोखे स्वाद से अब तक तो मैं अनजान ही थी। इसके बदले में अगर स्वर्ग भी मिले तो मैं ना जाऊं।
“मेरी मैना अब मैं भी जाने वाला हूँ !” उनके धक्को की रफ़्तार अचानक तेज हो गई।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उन्हें जोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और इसके साथ ही उनके पप्पू ने एक… दो.. तीन.. चार… न जाने कितनी पिचकारियाँ छोड़ दी। मेरी पिक्की तो उनके गरम और गाढ़े वीर्य से लबालब भर गई। मेरी पिक्की भला क्यों पीछे रहती उसने भी एक बार फिर काम रस छोड़ दिया।
बाहर बारिश अब बंद हो गई थी। मैं शर्ट और लुंगी पहन कर नीचे भाग आई।
प्रेम तो मुझे मीनल से मैना बना कर चले गए पर मैं आज भी उन लम्हों को याद करके रोमांच से भर जाती हूँ। लेकिन बाद में मेरे दिल में एक हूक सी उठती है और मेरी आँखों से आंसू छलक पड़ते हैं। आप शायद इन बातों को नहीं समझेंगी। प्रेम की याद में मैं कितना रोती और तड़फती हूँ आप क्या जाने। वो तो बस सावन में आग लगा कर चला गया। काश कोई मेरे इन आंसुओं की कीमत समझे और इस आने वाले सावन में मेरे भीगे बदन को अपने सीने से लगा ले।
क्या आप मेरे लिए “आमीन” (भगवान् करे ऐसा ही हो) नहीं बोलेंगे ? मेरी आपबीती आपको कैसी लगी मुझे और प्रेम को मेल करेंगे ना ???
मैना का विशेष आग्रह :
इस कहानी पर आप अपने विचार प्रकट करना चाहें तो अन्तर्वासना फ़ोरम के “कहानियों पर आपकी राय” कोलम में जाकर रजिस्टर करके अपनी राय दे सकते हैं यह बड़ा आसान है आपको
बस अपना नाम, पास वर्ड और मेल एड्रेस देना है आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा. उसके बाद आप अपनी राय लिख सकते है जिसे सभी पाठक भी आपकी राय पढ़ सकते हैं.
धन्यवाद ! Antarvasna
अन्तर्वासना में अपनी Antarvasna कहानियाँ भेजने वालों को सीता का प्रणाम! खुली फुदी से मेरी कहानी पढ़ने वालों को प्रणाम! यानि की सीता मेहरा का नमस्कार!
बहुत सी कहानियाँ पढ़ी जिन्हें पढ़ते ही चूत में आग लग जाती है, इस तरह मैंने भी अपनी ज़िंदगी के अब तक के सफ़र में कितना और कैसे चुदवाया? आज पहली दास्तान –
अब तो मैं शादीशुदा हूँ। जब पहली बार चुदी थी तो मैं कॉलेज़ में थी। मेरे पड़ोसी के घर में उनका लड़का था राम। राम का गारमेंट्स का बिज़्नेस था वैसे तो वो शादीशुदा था, उसकी बीवी सरिता भी मेरे साथ घुलमिल गई थी। हम दोनों अकेले होकर गप्पें लड़ाते!
गर्मियों की एक दोपहर की बात है हमारा फ्रिज़ खराब हो गया था। मम्मी ने मुझे कहा- उनकी फ्रिज़ से बर्फ़ की ट्रे लेकर आना!
हम पड़ोसियों में बहुत प्यार था और घुलमिल के रहते थे। मैंने सोचा- सरिता अकेली होगी, ज्यादातर वो घर पे रहती थी नई नई शादी जो हुई थी। मैं सीधा अंदर गई फ़्रिज़ से बर्फ़ की ट्रे निकाली और सरिता को हेलो बोलने उसके कमरे में चली गई। वहाँ पे राम टीवी पे ब्लू फिल्म देखने में मस्त था। उसको नहीं पता था कि मैं दरवाज़े पर आई हूँ। उसने अपना लण्ड हाथ में पकड़ रखा था और मूठ मार रहा था। उसको देख मेरे मुँह से आह निकल गई और उसने मुझे देख लिया।
मैं शरमा के, हंस के वहाँ से निकल आई, थोड़ी देर बाद मम्मी बाज़ार चली गई।
तभी फोन बजा। मैं अकेली थी। फ़ोन उठाया- राम था! बोला- तुम आई और देख कर मुड़ क्यूँ गई? वो भी हंस के?
मैं घबरा सी गई। वैसे मैंने कभी चुदाई का मजा पहले नहीं लिया था। लेकिन अपने बॉयफ़्रेन्ड के साथ ओरल-सेक्स, चूमा-चाटी का खेल, टॉपलेस होकर अपने चूचुक चुसवाना, यह सब मैंने किया था, यहाँ तक कि गाण्ड भी मरवाई थी। किसी भी बॉयफ़्रेन्ड को मैंने चूत नहीं दी थी, मैंने लण्ड भी चूसा। राम का लण्ड मुझे अब तक देखे लण्डों के मुक़ाबले बड़ा लगा था।
मैंने फोन पे कहा- मम्मी घर पर नहीं है राम जी, बाद में कॉल करना! मैं बता दूँगी अगर कोई काम है तो।
वो बोलने लगा। मैंने फोन काट दिया।
तभी फिर फोन आया और उसने कहा- सरिता नहीं है प्लीज़! मेरे लिए खाना बना दो, सब्ज़ी बना ली है, बस रोटियाँ उतार के दे जाओ।
मैं गई, किचन में तवा चढ़ाया ही था कि पीछे से राम ने मुझे पकड़ लिया और कहा- जानेमन! कितने साल से मैं तुझे चाहता था! कह नहीं पाया था।
उसने मेरे सूट में हाथ डाल कर मेरे मोम्मे दबाने शुरू कर दिए।
मैंने कहा- सरिता से मजा नहीं आता? इसीलिए मूठ मार रहे थे?
बोला- ब्लू फिल्म देख रहा था, मारनी ही पड़ी।
उसने गैस बंद की और मुझे बाहों में उठा लिया। मैंने कहा- राम! यहाँ ठीक नहीं! अगर कोई आ गया तो मुझे से पीछे वाली दीवार नहीं कूदी जाएगी। तुम छत से मेरे घर आ जाओ ताकि कोई आए तो तुम आसानी से निकल जाओ।
मैंने बाहर का गेट लॉक कर दिया, वो ऊपर से अंदर घुस आया और मुझे जंगलीपने से प्यार करने लगा। उसने जल्दी से मेरा नाला(नाड़ा) खोल कर सलवार उतार दी। बोला- क्या पट्ट(जांघें) हैं? मक्खन जैसे!
वो उनके चूमने लगा और फ़िर उसने मेरी कमीज़ उतार दी और मेरी छातियाँ मसलने लगा, चूचुक ऊँग्लियों के साथ मसलने लगा। मैं आहें भर भर कर बार बार उसके सर को पकड़ उसको और चूसने के लिए कह रही थी। तभी मैंने उसका लण्ड कच्छे से निकाल हाथ में लिया और सहलाते सहलाते पता नहीं कब चूसने लगी। फिर मेरे बस में कुछ नहीं था, मैं नहीं रोक पाई आज! आख़िर मेरी चूत चुदने ही वाली थी।
क्या मर्द था! कभी ऐसा आनन्द नहीं लिया था मैंने! वो मुझे 69 में करके मेरी चूत चाटने लगा। मेरे दाने को चबाने लगा। मैं पागलों जैसे उसका लण्ड चूसने में मस्त थी। वो जब अपनी ज़ुबान तेज़ करता तो मैं भी लण्ड उतनी तेज़ी से चुसती। उसने मेरी कमर के नीचे तकिया लगाया और मेरी टांगों के बीच में बैठ अपना लण्ड मेरे दाने पे रगड़ने लगा। मुझसे जवानी की आग सही नहीं गई, मेरे मुंह से निकल गया- अंदर डालोगे या बाहर ही छुटने का इरादा है!
उसने झटका मारा, आधा लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया। मेरी चीखें निकल गई। उसने मेरी दोनों बाहें पकड़ कर अपने होंठों से मेरे होंठ दबा लिए।
मैं चीखती रही- मर गई! अहह! निकाल कमीने! फट गई मां! मैं चुद गई री ईईईईई ईईई जैसे???
फ़िर लण्ड अंदर-बाहर आसानी से होने लगा, मानो मैं स्वर्ग में पहुँच गई।
‘चोद राम! चोद दे आज मुझे! तेरी रखैल बन जाऊँगी! कायल हो गई तेरी मर्दानगी पे! कभी किस से चूत नहीं मरवाई मेरे दिलबर! आशिक़ फाड़ दे! अब करता ही जा! ज़ोर ज़ोर से! हाए दैया रे! दैया मसल डाल मुझे! फाड़ डाल मेरी! अपना बीज आज मेरे अंदर बो दे!’
उसने लण्ड निकाल लिया और मुझे कहा- कुतिया! कमीनी! हरामजादी! चल हो जा घुटनो पे! बन जा कुत्ती! और वो पीछे से आकर मेरी चूत मारने लगा, घोड़ी बना के लेने लगा, साथ साथ में उसने अपनी उंगली मेरी पोली पोली गाण्ड के छेद में डाल दी। मुझे दोहरा मजा दिया उसने!
एकदम से चूत से उसने लण्ड खींचा और मेरी गाण्ड में पेल दिया।
‘हाए साले यह क्या किया? इसको तो बहुत चुदवाया है! तू चूत मार मेरी, प्यास बुझा मेरी!’
‘थोड़ी देर मारने दे कमीनी…’
फिर उसने निकाल लिया अपना लण्ड मेरी गाण्ड से। मुझे खड़ा करके कहा- अपने हाथ दीवार से लगा ले और उसने पीछे से चूत मारी।
‘हाए! गई! गई!’
वो बोला- आह! मैं झड़ने वाला हूँ!
मैंने कहा- ले चल बिस्तर पे! मेरे उपर लेट जा! ताकि जब झड़ जायें तो तुझे अपनी बाहों में भींच लूँगी।
उसने मुझे सीधा लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
‘ओईईई ईईईई माआआअ क्या नज़ारा है! हाए सईयाँ दीवाने! मैं झड़ने वाली हूँ! आह!’
वो बोला- हाँ ले साली ले!
मैं झड़ गई और आधे मिनट बाद उसके लण्ड ने शावर की तरह अपना सा माल मेरे पेट में डाल दिया, जब उसका पानी निकलने लगा तब इतना मजा आया चुदाई से भी ज्यादा!
मैंने आँखें बंद कर के उसको जकड़ लिया- निकाल दे सारा माल!
एक एक बूंद उसने निकाल लिया और मेरे मुंह में अपना लण्ड डाल कर बोला- साफ कर दे अपने होंठों से! ज़ुबान से!
दोपहर के दो बजे से शाम के चार बजे तक नंगा नाच ऐसे ही चलता रहा।
मुझे चूत मरवाने का ऐसा चस्का लगा कि अब एक मर्द से बंध कर मजा नहीं मिलता।
जो हर मर्द की बाहों में झूलकर मिलता है!
दोस्तो अगली दास्तान कुछ ही दिनों में बयान करूँगी।
तब तक के लिए सबको चूत से प्यार!
मिलते हैं अगली बार Antarvasna
मैं कुछ दिनों से Sex Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। इन कहानियोँ से मुझे मेरी घटनाएँ याद आ गई।
मेरे नाम मोहित है मैं पुणे से एम बी ए कर रहा हूँ। कद ५’८”, लंड ७” ।
मैं पुणे अप्रैल में पहली बार आया था, मुझे कॉलेज की फीस देनी थी। मेरी ट्रेन दोपहर १२ बजे स्टेशन पर पहुंची। अब मुझे कॉलेज जाना था। चूंकि मैं पुणे में नया था, मुझे सिटी बस के बारे में कुछ पता नहीं था। लेकिन ऑटो वाले बहुत ज्यादा भाड़ा बोल रहे थे। मैं स्टुडेंट हूं इसलिए इतना ज्यादा पैसा नहीं दे सकता था। तब मैंने कोई सवारी देखना शुरू किया, जो मेरे साथ भाड़ा शेयर कर ले। बहुत समय तक देखा कोई नहीं मिला।
फ़िर अचानक एक औरत आई और कहा वो ऑटो का भाड़ा शेयर कर सकती है। उसका घर भी रास्ते पर ही था। क्या फिगर था उसका, ३८-२८-३४ का फिगर था। उसके चूतड़ के तो क्या कहने जैसे निकलने के लिए बेताब हो।
उसने मेरा नाम पूछा, मुझे बहुत जोरों की प्यास लगी थी। तो उसने मुझे पानी दिया, वो शोपिंग कर के आ रही थी। मैं उससे सटकर बैठा हुआ था। मेरे जांघ उसके जांघ से टकरा रहे थे। मुझे स्वर्ग सा मज़ा आ रहा था।
ड्राइवर ने एक बार जोर से ब्रेक मारा तो मैं उस पर जा गिरा।
उसका घर आया। चूंकि हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी, स्वाति उसका नाम था। उसके पास सामान बहुत था सो मैं उसका सामान लेकर उसके घर गया। क्या बंगला था उसका। फ़िर मुझे उसने बैठाया और पानी लेकर आई, फ़िर मैंने पूछा कि इतने बड़े घर में अकेले रहती हो क्या?
उसने जवाब दिया कि वो और उसका पति रहते हैं। अभी ३ महीने ही हुए है शादी को। फ़िर उसने कहा कि वो कपड़े बदल के आती है, मैं तब तक अकेले ही बैठा रहा। फ़िर वो बरमूडा और टी शर्ट में आई, मैं तो उसे देखता ही रह गया।
क्या गोरे गोरे जांघ थे उसके। फ़िर वो मेरे पास आकर बैठ गई। फ़िर उसने मेरे बारे में पूछा, मैं तो उसके गोरे जांघ देखकर पागल हुआ जा रहा था, मुझ से रहा नहीं गया, मैंने उससे कहा कि वो बहुत सेक्सी है।
उसने कहा कि बस सेक्सी और कुछ नहीं।
बस मैं समझ चुका था। मैंने कहा कि आप तो हॉट हो, मैं आपके साथ सिर्फ़ कुछ पल बिस्तर पर बिताना चाहता हूँ।
उसने कहा- कुछ पल क्यों जितना बिता सकते हो !
फ़िर क्या था मेरा रास्ता साफ़ हो गया था।
फ़िर उसने बताया कि वो चुदवाने की बहुत दीवानी है, रात भर मेरा पति मुझे चोदता है, मैं कालेज के समय से ही रोज रात को चुदाते आ रही हूँ। बिना चुदे मुझे नींद नहीं आती है। पर दिन को मेरे पति काम पर होते हैं, तो चुदाई की विडियो देखकर काम चलाना पड़ता है।
मैंने कहा- रानी अब मैं तुम्हें चुदाई का असली मज़ा देता हूँ जो आज तक तुम्हें किसी ने नहीं दिया होगा। फ़िर मैंने उसके लाल रसीले होंठों को अपने होंठों से किस करना चालू किया, क्या रसीले होठ थे, मैं तो बस चूस ही रहा था। कभी ऊपर के होंठ तो कभी नीचे के। फ़िर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में दे दी, मैंने उसे चूसा, फ़िर मैंने अपनी जीभ उसे दी। इस तरह आधे घंटे तक चुम्मा चलता रहा। वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी।
फ़िर मैंने उसका टी-शर्ट उतार दिया और बरमूडा भी। अब वो मेरे सामने ब्रा और चड्डी में थी। क्या चूतड़ थे। चड्डी तो पूरी गीली हो चुकी थी। फ़िर मैं पूरा नंगा हो गया।
जैसे ही उसने मेरा ७” का लंड देखा तुंरत अपने मुँह में डाल लिया। अब वो मेरा लण्ड चूस रही थी, मैं उसके ब्रा और चड्डी उतार रहा था। क्या चूसती है। मैं उसके मुँह में अपने लंड को पूरा उसके गले तक डालता था, करीब आधे घंटे तक मैं उसके मुँह की चुदाई करता रहा।
मैंने बहुत देर तक उसके पूरे गोरे बदन को चाटा। ऐसा कोई अंग नहीं था जिसे नहीं चाटा हो। उसके चूतड़ को तो दबा दबा के लाल कर दिया था।
फ़िर उसे बेड पर लेटाया और और उसके चूत को चाटने लगा, उसने बताया कि उसने आज ही शेव की है चूत की। इसलिए चिकनी फ़ुद्दी चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने उसकी चूत को अपने जीभ से चोदा, ऊँगली डाल के चोदा, चूस चूस के उसके चूत को लाल कर दिया । वो वही पर झड़ गई।
फ़िर मैंने उसके गांड को चाटना चालू किया। वो चिल्ला रही थी मर गई, आऽऽ आ आऽऽ आऽ आऽऽऽऽऽऽ आ !
मुझे मजा आ रहा था। क्या गांड था, कुछ देर बाद वो रिचार्ज हो गई।
फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। उसे चोदता रहा, पहले धीरे धीरे चोदा फ़िर एक्सप्रेस की स्पीड से चोदा।
वो चिल्ला उठी- बस कर हरामजादे !
चूंकि वो बहुत अच्छे घर से थी, उसे गन्दी गालियां नहीं आती थी।
मैं फ़िर भी चोदता रहा। अब तो वो भी साथ देने लगी। अपने चूतड़ उठा कर साथ देने लगी।
उसने कहा- फाड़ दो आज इस चूत को।
फ़िर मैंने उसे कुतिया की तरह किया और पीछे से चोदा। बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हारे चूत का भोसड़ा बनाऊंगा ! क्या लग रही थी वो ! सिर्फ़ सेंडल पहन कर चुदा रही थी !
हम दोनों साथ में झड़ गए। वो शादीशुदा थी, इसलिए झड़ने का कोई डर नहीं था मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
हम दोनों सो गए, कुछ देर बाद मैं जगा, वो नंगी सो रही थी ! मैंने उसे जगाया, फ़िर मैंने उसकी गांड मारी।
उसने कहा कि उसने कभी गांड नहीं मराई क्योंकि गांड मराने से जवानी ढलती है। पर तुम्हारे लंड को देखकर मैं अपने आप को रोक नहीं पाई।
फ़िर मैंने उसकी गांड मारी, और उसके गांड में ही झड़ गया। अब हम दोनों बहुत थक चुके थे। फ़िर मैंने अपनी मुठ मारी और सारा माल उसके मुंह में दे दिया। फ़िर मैंने उसकी गांड और चूत को चाट कर साफ़ किया।
फ़िर हम दोनों साथ नहाए, फ़िर नाश्ता किए।
फ़िर उसने मुझे १००० रूपए देना चाहा पर मैंने नहीं लिया। फ़िर उसने मेरा फ़ोन नम्बर लिया। मैं आज पुणे में रहता हूँ। और स्वाति को कई बार चोद चुका हूँ। जब भी उसे जरुरत महसूस होती है, मुझे बुला लेती है।
हमारा राज़ आज तक कोई नहीं जान पाया।
आप को मेरी घटना कैसी लगी? मेल करें। Sex Stories
राम कुमार (ग्वालियर से) का Antarvasna stories अन्तर्वासना के सभी पाठकों को खड़े लण्ड का सलाम। मैं अपना एक सच्चा अनुभव लेकर हाज़िर हूँ जिस को पढ़कर आँटियाँ, चाचियाँ, मामियाँ, भाभियाँ और लण्ड की प्यासी लड़कियों की चूत गीली हो जाएगी और लंड के लिए तड़प उठेंगीं। और जिन लड़कों के पास चूत की व्यवस्था होगी, वो चूत चोदने लगेंगे और जिनके पास नहीं होगी, वो मूठ मारने लगेंगे।
यह बात मई की है। मेरी मामी जो लगभग ३२ साल की है और दो बच्चों की माँ है, रंग गोरा, शरीर भरा हुआ, न एकदम दुबला न एक दम मोटा-ताज़ा। मतलब बिल्कुल गज़ब की। पर चूचियाँ तो दो-दो किलो के और गाँड कुछ ज़्यादा ही बाहर निकले हैं। मेरे ख़्याल से उसकी फिगर ३८-३२-३९ होगी।
मैं उस मामी को चोदने के चक्कर में दो सालों से लगा था, और उसके नाम से मूठ मारा करता था। मेरे मामा (४०), जो ग्वालियर में ही रहते थे, रेडीमेड कपड़ों के धंधे में थे और अपना माल दिल्ली ख़ुद ही जाकर लेकर आते थे।
एक दिन जब मैं अपने घर पहुँचा तो मामा वहाँ थे, और मम्मी से बातें कर रहे थे। मैंने मामा से पूछा – “अब नये कपड़े कब आ रहे हैं?”
“बस आज ही लाने जा रहा हूँ। पर इस बार माल दिल्ली से नहीं, मुम्बई से लेकर आना है। वहाँ एक नामी कम्पनी से मेरी बात तय हो गई है। मुझे वहाँ से आने में चार-पाँच दिन तो लग ही जाएँगे। तब तक मैं चाहता हूँ कि तुम दिन में एक बार ज़रा दुकान जाकर काम देख लेना और रात में मेरे घर चले जाना।”
“तू कुसुम और बच्चों को यहीं क्यों नहीं छोड़ देता?” मेरी मम्मी ने पूछा।
“मैंने कुसुम से कहा था कि बच्चों के साथ दीदी के यहाँ रह लेना, पर वह कह रही थी कि चार-पाँच दिनों के लिए आप लोगों को क्यों परेशान करना, बस राम को बोल देना, वो तुम्हारे आने तक हमारे यहाँ ही आ जाए और दुकान को भी काम देख ले। नौकरों के भरोसे दुकान छोड़ना ठीक नहीं। तुझे कोई दिक्क़त तो नहीं?” – मामा बोले।
“अभी तो मैं पूरा खाली ही हूँ। परीक्षाएँ भी खत्म हो चुकी हैं। चलिए एक अनुभव के लिए आपकी दुकान को भी सँभाल लेते हैं (और मामी को भी)।”
“आज ८ बजे मेरी ट्रेन है, तू सात बजे घर आ जाना और मुझे स्टेशन छोड़ कर वापिस मेरे घर ही चले जाना।”
“ठीक है मैं ६:३० बजे आ जाऊँगा।”
६:३० बजे मैं मामा के घर पहुँच गया, मामा सफ़र की तैयारी कर रहे थे और मामी पैकिंग में मामा की मदद कर रही थी। पैकिंग के बाद मामी ने मामा को खाना दिया और मुझे भी खाने के लिए पूछा।
“मामा को छोड़कर आता हूँ, फिर खा लूँगा।” मैंने कहा।
७:३० बजे मामा और मैं स्टेशन पहुँच गए। मामा की ट्रेन सही समय पर आ गई, मामा का आरक्षण था, मामा अपनी सीट पर जाकर बैठ गए और पाँच मिनट के बाद ट्रेन मुम्बई के लिए चल पड़ी। चलते-चलते मामा बोले,”मामी और बच्चों का ख्याल रखना।”
“आप यहाँ की फिक्र ना करें, मैं मामी और बच्चों का पूरा ख्याल रखूँगा।”
मैंने स्टैण्ड से अपनी बाईक ली और ८:३० तक घर आ गया। मैंने दरवाज़े की कॉलबेल बजाई तो मामी ने दरवाज़ा खोला और बोली,”हाथ-मुँह धो लो, अब हम खाना खा लेते हैं।”
“आपने अभी तक काना नहीं खाया?” मैंने पूछा।
“बस तुम्हारा ही इन्तज़ार कर रही थी। बिट्टू और सोनू तो खाना खाकर सो गए हैं। तुम भी खाना खा लो।”
मैं और मामी डिनर की टेबल पर एक-दूसरे के आमने-सामने बैठ कर खाना खा रहे थे। जब मामी निवाला खाने के लिए थोड़ा झुकती उनकी चूचियों की गहराईयों के दर्शन होने लगते और मेरा लंड विचलित होने लगता। पर स्वयं को सँभाल कर मैंने खाना खतम किया और टीवी चालू कर लिया। उस समय आई पी एल मैच चल रहे थे, मैं मैच देखने लगा।
कुछ देर बाद मामी बर्तन साफ करने लगी और वह भी मैच देखने लगी। जल्दी ही उसे नींद आने लगी।
“मैं तो सोने जा रही हूँ, तुम भी हमारे कमरे में ही सो जाना, तुम डबल बेड में बच्चों के एक तरफ ही सो जाना” मामी बोली।
“ठीक है, बस एक घन्टे में मैच खत्म होने वाला है। आप सो जाओ, मैं मैच देखकर आता हूँ।”
मामी चली गई और मैं मैच देखने लगा।
कुछ देर बाद बाद ब्रेक हुआ और मैं चैनल बदलने लगा, और एक लोकल चैनल पर रुक गया। डिश वाले एक ब्लू-फिल्म प्रसारित कर रहे थे। अब काहे का मैच, मैं तो उसी चैनल पर रुक गया और वो ब्लू-फिल्म देखने लगा और मेरा लंड हिचकोले मारने लगा।
मेरा साढ़े पाँच इंच का लंड लोहे की तरह सख्त होकर तन गया, मैं अपनी पैंट के ऊपर से ही उसे सहलाने लगा। मेरा लंड चूत के लिए फड़फड़ाने लगा और मेरी आँखों के सामने मामी का नंगा बदन घूमने लगा और मैं मामी के नाम से मूठ मारने लगा। मैं मन ही मन मामी को चोद रहा था, कुछ देर बाद लंड ने एक पिचकारी छोड़ दी। मेरा वीर्य लगभग पाँच फीट दूर छिटका, और यह बस मामी के नाम का कमाल था।
अब मेरा दिमाग मामी को हर हाल में चोदने के बारे में सोचने लगा, तब तक फिल्म भी खत्म हो गई थी। मैंने टीवी बन्द किया और बेडरूम की ओर चल दिया। जैसे ही मैंने कमरे की बत्ती जलाई, मेरी आँखें फटी रह गईं। बिल्लू और सोनू, दोनों दीवार की ओर सो रहे थे, और मामी बीच बिस्तर में। उनकी साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठ गई थी और उनकी गोरी-गोरी जाँघें दिख रहीं थीं। उनका पल्लू बिखरा हुआ था, ब्लाउज़ के ऊपर के दो हुक खुले थे और काली ब्रा साफ-साफ दिख रही थी। मामी एकदम बेसुध सो रहीं थीं।
मैंने तुरन्त लाईट बन्द की और अपने लंड को सहलाते हुए सोचा,’क़िस्मत ने साथ दिया तो समझ हो गया तुम्हारा जुगाड़ !’
मैं जाकर मामी के पास लेट गया, मामी एकदम गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ मामी के गले पर रख दिया और हाथ को नीचे खिसकाने लगा। अब मेरा हाथ ब्लाउज़ के हुक तक पहुँच गया। मैं आहिस्ते-आहिस्ते हुक खोलने लगा। तभी मामी बच्चों की ओर पलट गई, इससे मुझे हुक खोलने में और भी आसानी हो गई और मैंने सारे हुक खोल दिए। ब्रा के ऊपर से ही मामी की चूचियों को सहलाने लगा।
मामी के स्तन एकदम मुलायम थे। पर ब्रा ने उन्हें ज़ोरों से दबा रखा था, इस कारण ऊपर पकड़ नहीं बन रही थी। मैं अपना हाथ मामी की ब्लाउज़ के पीछे ले गया और ब्रा के हुक को भी खोल दिया। अब दोनों स्तन एकदम स्वतंत्र थे। मैं उन आज़ाद हो चुके बड़े-बड़े स्तनों को हल्के-हल्के सहलाने लगा, फिर मैं एक हाथ उनकी जाँघ पर ले गया और ऊपर की ओर ले जाने लगा पर एक डर सा भी लग रहा था कि कहीं मामी जाग ना जाए। पर जिसके लंड में आग लगी हो वो हर रिस्क के लिए तैयार रहता है और लंड की आग को सिर्फ चूत का पानी ही बुझा सकता है।
हिम्मत करके मैं अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा। जैसे-जैसे मेरा हाथ चूत के पास जा रहा था, मेरा लंड और तेज़ हिचकोले मार रहा था।
अब मेरा हाथ मामी की पैन्टी तक जा पहुँचा था। पैन्टी के ऊपर से ही मैंने हाथ चूत के ऊपर रख दिया। चूत बहुत गीली थी और भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने साड़ी को ऊपर कर दिया और पैन्टी को नीचे खिसकाने लगा। थोड़ी मेहनत के बाद मैं पैन्टी को टाँगों से अलग करने में कामयाब रहा।
अब मैं हाथ को चूत के ऊपर ले गया और चूत को प्यार से सहलाने लगा। मामी अभी तक शायद गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ मामी की कमर पर रखा और उन्हें सीधा करने लगा।
मामी एक ही झटके से सीधी हो गई। मैं अपनी टाँग को मामी की टाँगों के बीच ले गया और मामी की टाँगों को फैला दिया। अब मैं नीचे खिसकने लगा और मैं जैसे ही चूत चाटने के लिए मुँह चूत के पास ले गया, मामी ने हाथ से चूत को ढँक लिया।
मेरी तो गाँड फट गई, रॉड की तरह तना हुआ लौड़ा एकदम मुरझा गया, दिल धाड़-धाड़ धड़कने लगला।
तभी मामी उठी और फुसफुसाकर बोली,”ये सब यहाँ नहीं। बिट्टू और सोनू जाग सकते हैं। अब तक तो मैंने किसी तरह अपनी सिसकियाँ रोक रखीं थीं पर अब नहीं रोक सकूँगी। हम ड्राईंगरूम में चलते हैं।”
इतना सुनते ही मेरा लंड फिर से क़ुतुबमीनार बन गया। मामी जैसे ही बिस्तर पर से उठी, मैंने मामी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने लगा। वह भी मेरे होंठों पर टूट पड़ी। हम एक-दूसरे के होंठों को पागलों की तरह निचोड़ने लगे।
मैं उनके होंठों को चूमते हुए अपने दोनों हाथ उनकी गांड तक ले गया और उन्हें उठा लिया। मामी ने अपने पैर मेरी कमर के गिर्द लपेट दिए। मैं उन्हें चूमते हुए ड्राईंगरूम तक ले आया और मामी को लेकर सोफे पर बैठ गया।
मामी मेरी गोद में थी, ब्लाउज़ और ब्रा अभी भी मामी के कंधों से लटक रहे थे। पहले मैंने ब्लाउज़ को निकाल फेंका, फिर ब्रा और एक चूची को हाथ से मसलने लगा और साथ ही दूसरी चूची को चाटने लगा।
अब साड़ी की बारी थी, मैंने साड़ी भी निकाल फेंकी, अब पेटीकोट बेचारे का भी शरीर पर क्या काम था। अब मामी एकदम नंगी हो चुकी थी। लाल नाईट-बल्ब की रोशनी में मामी का नंगा बदन पूर्णिमा में ताज़ की तरह चमक रहा था और इस वक्त मैं इस ताजमहल का मालिक था।
अब मामी मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरे सारे कपड़े उन्होंने उतार दिए और मैं सिर्फ अपनी फ्रेंची अण्डरवियर में रह गया पर वह भी अधिक देर न रह सका। उन्होंने वह भी एक ही झटके में उतार फेंकी और फिर मामी ने मेरे साढ़े पाँच इंच लम्बे विकराल लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
कभी मामी लंड पर, तो कभी अंडकोष से सुपाड़े तक जीभ फिराती, कभी लंड को हल्के से काटती, सुपाड़े पर थूकती और फिर उसे चाट जाती। मेरा तो बुरा हाल कर दिया और मेरे लंड ने मामी के मुँह पर अपनी पिचकारी मार दी। उनका पूरा चेहरा मेरे वीर्य से सन गया था। मैंने अपने दोनों हाथों से सारा वीर्य उनके चेहरे पर मल दिया।
“दूसरी बार में भी इतना माल? तेरा लंड है या वीर्य का टैंक?” – मामी ने कहा।
मैं यह सुनकर हैरान हो गया, मेरी हैरानी जानकर उन्होंने बताया – “जब तू ब्लू-फिल्म देख रहा था और मेरे नाम से मूठ मार रहा था तब मैं पानी पीने के लिए रसोईघर में आई थी और तेरे लंड की धार को देख कर मेरी कामवासना की प्यास जाग गई और मैं बेडरूम में अपने कपड़ों को जान-बूझ कर अस्त-व्यस्त कर लेट गई थी। वहाँ आने के बाद अगर तू ऐसी हरकतें नहीं करता तो आज मैं ही तेरा जबरन चोदन कर देती।”
“तरबूज़ तलवार पर गिरे या तलवार तरबूज़ पर, कटना तरबूज़ को ही है। अब तो आज रात सचमुच में जोरदार चोदन होगा। आज रात अगर आपसे रहम की भीख न मँगवाई तो मेरा भी नाम राम नहीं।” मैंने कहा।
“चल देखते हैं, कौन रहम की भीख माँगता है !” मामी ने भी ताना सा मारा।
मामी के ऐसा कहते ही मैंने मामी को ज़मीन पर लिटा दिया और उनकी चूत पर टूट पड़ा, अपनी जीभ को चूत में जितना हो सकता था अन्दर डाल दिया और जीभ हिलाने लगा। चूत के गुलाबी दाने को जैसे ही मैं हल्के-हल्के काटता-चूसता, वह तड़प उठती और आआहहहहहह आआहह्ह्हहहह करने लगती।
उसने टाँगों से मेरे सिर को जकड़ लिया और टाँगों से ही सिर को चूत में दबाने लगी और बालों में हाथ फेरने लगी। मैं चूत-अमृत पीते हुए दोनों स्तनों को मसल रहा था… तभी अचानक मामी का शरीर अकड़ने लगा उनकी चूत ज़ोरदार तरीके से झड़ने लगी।
मैंने चूत को चाटकर साफ कर दिया और जैसे ही मैं मामी के ऊपर आने को हुआ, मामी ने मुझे रोका और गेस्ट-रूम की ओर इशारा किया। मैं समझ गया कि वह उस कमरे में चलने को कह रही है। मैंने उन्हें गोद में लिया और चूमते हुए उस कमरे में ले आया। लाईट जलाई तो देखा, वहाँ एक सिंगल बेड था। मैंने पंखा चालू किया और उन्हें बिस्तर पर पटक दिया और उनके ऊपर आ गया। मैंने उनके होंठों को चूमते हुए अपनी टाँगों से उनकी टाँगे चौड़ी कीं।
अब मेरा लंड मामी की चूत के ऊपर था। मैंने अपने हाथों को सीधा किया और धक्के मारने की मुद्रा में आ गया। अब मैं अपनी कमर को नीचे करता और लंड को चूत से स्पर्श करते ही ऊपर कर लेता। कुछ देर ऐसा करने के बाद मामी बोली,”अब मत तड़पाओ, मेरी चूत में आग लग रही है, इसमें अपना लंड अब डाल दो और मेरी चूत की आग को शान्त करो, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ।
इस बार मैंने लण्ड चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगा और लण्ड चूत की गहराईयों में समाने लगा। चूत बिल्कुल गीली थी, एक ही बार में लण्ड जड़ तक चूत में समा गया और हमारी झाँटे आपस में मिल गईं। अब मेरे झटके शुरु हो गए और मामी की सिसकियाँ भी… मामी आआआहहहहह अअआआआआहहहह करने लगी। कमरा उनकी सिसकियों से गूँज रहा था।
जब मेरा लण्ड उनकी चूत में जाता तो फच्च-फच्च और फक्क-फक्क की आवाज़ होती। मेरा लण्ड पूरा निकलता और एक ही झटके मे चूत में पूरा समा जाता। मामी भी गाँड हिला-हिला कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो खाट भी चरमराने लगी थी। पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी। हम दोनों पसीने से नहा रहे थे। पंखे के चलने का कोई भी प्रभाव नहीं था।
दोनों के चेहरे एकदम लाल हो रहे थे पर हम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। झटके अनवरत जारी थे। कभी मैं मामी के ऊपर तो कभी मामी मेरे ऊपर आ जाती। दोनों ही चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे। पूरे कमरे में बस कामदेव का राज था। हम दोनों एक-दूसरे की आग को बुझा रहे थे। तभी हमारे शरीर अकड़ने लगे।
दोनों झड़ने वाले थे। मैं लण्ड को बाहर निकालने वाला ही था कि मामी ने रोक दिया और बोली – “अपना सारा माल चूत के अन्दर ही छोड़ दो।”
मैंने भी झटके चालू रखे। हम दोनों ने एक-दूसरे को भींच लिया। मामी ने टाँगों और हाथों को मेरे शरीर पर लपेट दिया। मैंने मामी के कंधों को कसकर पकड़ लिया और एक ज़ोरदार झटका मारा। मैं और मामी एक ही साथ झड़े थे। मामी की चूत मेरे वीर्य से भर गई।
वीर्य चूत से बह रहा था। मेरा मुँह अपने-आप चूत पर पहुँच गया और मैं मामी की चूत को चाट-चाट कर साफ करने लगा।
मामी ने भी मेरे लंड को चूस-चूस कर साफ कर दिया और हम दोनों एक-दूसरे के बगल में लेट गए, पर मामी का हाथ मेरे लंड पर था और मैं मामी के बालों को सहला रहा था।
मामा के आने तक मैं और मामी पति-पत्नी की तरह रहे। मैं सुबह को दुकान का एक चक्कर लगा आता। दिन में हम नींद ले लेते और रात को…
मामा के आने के बाद भी जब भी मौक़ा मिलता, मैं उसको छोड़ता नहीं।
अन्तर्वासना के पाठकों, आपको मेरी यह दास्तान कैसी लगी, मेल कर बताएँ। Antarvasna stories
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