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दोस्तो! मेरा नाम सुनील है, मैं Sex Stoires आपको अपनी मॉम की सेक्स स्टोरी बताता हूँ। मेरी मॉम की उम्र लगभग 45 साल होगी, वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है। मेरे पिता बाहर रहते हैं घर में मैं और मॉम ही होते हैं।
एक दिन हमारे घर में कोई मेहमान आये हुए थे, मेरे रिश्ते की चाचा! उनकी अभी अभी शादी हुई थी।
हमने उनको एक कमरा सोने को दे दिया और मेरी मॉम और मैं साथ सो गए।
रात को उनके कमरे से आवाज़ आने लगी तो मेरी नींद खुल गई और मैं इधर उधर देखने लगा तो मैंने देखा कि मॉम अपने बेड पर नहीं थी। मैं मॉम को देखने बाहर आया तो मैंने देखा कि मॉम अपना पेटीकोट उतारकर दरवाज़े के छेद से अंदर देख रही हैं और अपनी चूत में उंगली कर रही हैं।
मैं चुपचाप देखता रहा, कुछ नहीं बोला। जब मॉम झड़ गई तो उठ कर कमरे में आई और मुझे देख कर घबरा गई, बोली- क्या देखा तूने?
मैं बोला- कुछ नहीं!
मॉम बोली- अच्छा चल सो जा!
और हम दोनों सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैं बार बार मॉम की तरफ देख रहा था। मुझे वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।
सुबह चाचा लोग चले गए, फिर घर पर हम दोनों ही रह गये। मॉम ने नाश्ता बनाया और हम दोनों ने साथ बैठ कर खाया।
मॉम ने मैक्सी पहन रखी थी और अन्दर से कुछ नहीं पहना था। मुझे लगा कि उनको सेक्स करने का मन हो रहा है। नाश्ता करने के बाद वो बाथरूम में चली गई, बोली-मैं नहाने जा रही हूँ, तू कहीं जाना मत!
मैंने कहा- ठीक है!
फिर मॉम नहाने चली गई। हमारे बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद है। जब मॉम को गए कुछ देर हो गई तो मैंने छेद पर जा कर देखा कि मॉम क्या कर रही हैं तो मैंने अन्दर देखा की मॉम बाथरूम में एक लम्बे बैंगन को अपनी चूत में जोर जोर से अन्दर बाहर कर रही हैं।
मैं यह खेल देखने में मशगूल हो गया। तभी अचानक मॉम ने दरवाज़ा खोल दिया। मुझे भागने का भी समय नहीं मिला और मैं पकड़ा गया। वो बहुत गुस्से में थी और अंदर जाकर बोली- रुक जा! तेरी शिकायत तेरे पापा से अभी करती हूँ!
पूरे दिन वो मुझसे नहीं बोली और अलग अलग ही रही। अब रात को जब सोने का समय हुआ तो मुझसे बोली- तू आज मेरे साथ ही सोयेगा!
मैं बोला- क्यों?
बोली- आज कल तू बहुत गलत बातें सीख रहा है, इसलिए!
मेरा तो मन उनके साथ सोने को हो ही रहा था क्योंकि वो रात को सिर्फ पेटीकोट पहन कर सोती हैं और नीद में उनका पेटीकोट ऊपर खिसक जाता है तो सब कुछ दिखता है।
फ़िर रात को हम सोने चले गए। मैंने पैन्ट पहन रखी थी। वो बोली- चल इसे उतार दे! सोने में परेशानी होगी!
मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।
तो बोली- मुझे होगी! चल उतार!
अब हम दोनों सो गए। मॉम बोली- तू क्या देख रहा है?
मैं बोला- कुछ नहीं!
बोली- सच सच बता! नहीं तो पापा से बोल दूंगी!
मैं डर के मारे बोला कि रात को आप जब उंगली कर रही थी तो मैंने आप को देखा था। फ़िर सुबह आप सेक्सी लग रही थी तो मेरा मन आपको देखने का कर रहा था तो आपको देखा।
मॉम बोली- तुझे कुछ होता है?
मैं बोला- हाँ, बहुत कुछ होता है!
उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया मेरा तो लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो गया।
वो बोली- अब समझी कि तू आजकल क्या कर रहा है।
वो बोली- अब जब तू सब कुछ जानता है तो चल मेरे साथ सब कुछ कर!
मैं बोला- नहीं!
तो बोली- पापा से बोलना है क्या!
मैं बोला- नहीं!
बस फिर क्या था, मैं तो चालू हो गया, उनके पूरे कपड़े उतार कर उनको चाटने लगा और चूत चाट चाट कर तो उनको झाड़ दिया।
मैं बोला- कैसा लगा?
बोली- अच्छा लगा! लगे रहो!
फ़िर मैंने उनकी चूत मारी! काफी देर तक मारने के बाद वो झड़ गई, फिर बोली- बेटा! मजा आ गया!
कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
अब तो रोज़ ही होता है!
एक दिन मेरे पापा को शक हो गया, लेकिन मॉम ने बात सम्भाल ली। अब मेरी मॉम और मैं रोज़ रात को साथ ही सोते हैं। मॉम और मैं बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी मॉम सेक्स स्टोरी कैसी लगी, मुझे मेल करना! Sex Stoires
हमारे देश में यौन, खास तौर से Masturbation के प्रति बहुत सी भ्रांतियाँ हैं जो कि या तो अनपढ़ लोगों ने या फिर निहित-स्वार्थ से प्रभावित लोगों ने समाज में फैलाई हुई हैं। पर जैसे जैसे समाज में शिक्षा फैली है और इस विषय पर शोध हुआ है इनमें से कई भ्रांतियों का पर्दा-फाश हुआ है।
दुर्भाग्यवश, इसके बारे में जानकारी केवल पढ़े-लिखे और समृद्ध लोगों तक ही सीमित है और इसका प्रचार अंग्रेजी तथा यूरोपीय भाषाओं में ही हुआ है। हमारे देश में अभी भी ढोंगी लोग (जो कि डॉक्टर, तांत्रिक, हकीम, वैद या स्वामी के रूप में फैले हुए हैं) इस अज्ञान का फ़ायदा उठा कर मासूम और अबोध लड़के-लड़कियों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें उपचार देने के बहाने उनसे पैसे लूट रहे हैं।
अन्तर्वासना की कोशिश है कि यौन-सम्बन्धी विषयों पर हिंदी-प्रार्थी समुदाय को सही व उचित ज्ञान प्राप्त हो जिससे वे इस अत्यंत आवश्यक, अत्यंत निजी और अत्यंत आनन्ददायक प्राकृतिक उपलब्धि का पूरा लाभ उठा सकें। यह लेख इसी अभियान की एक कड़ी है।
हस्तमैथुन Masturbation एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जिसे यौन सन्तुष्टि के लिए पुरुष और स्त्री दोनों ही करते हैं। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि हर आयु के लोग स्वेच्छा से करते हैं। हस्तमैथुन, यानि हस्त+मैथुन, मतलब हाथ से किया जाने वाला मैथुन (सम्भोग) अर्थात अपने यौनांगों को इस तरह से छूना, रगड़ना, सहलाना या उनमें कोई कृत्रिम चीज़ डालना जिससे करने वाले को चरम आनन्द प्राप्त हो।
यहाँ अपने हाथ (हस्त) को पुरुष स्त्री की योनि के एवज में और स्त्रियाँ अपनी ऊँगली पुरुष के लिंग के एवज में प्रयोग करती हैं। इसे तब तक करते हैं जब तक पूरी तरह उत्तेजित ना हो जाएँ और परम आनन्द महसूस ना कर लें।
हालांकि हस्तमैथुन को हमारे समाज में अभी भी हेय दृष्टि से देखा जाता है, किन्तु सर्वेक्षण से पता चला है कि लगभग सभी स्त्री-पुरुष अपने जीवन में कभी न कभी हस्तमैथुन करते ही हैं। कब करते हैं और कितना करते हैं- यह तो बहुत से कारकों और हालातों पर निर्भर करता है इसलिए हस्त-मैथुन की कोई ‘सामान्य-दर’ नहीं है।
कुछ लोगों की यौन इच्छा औरों के मुक़ाबले प्रबल होती है, जैसे जवान लड़के-लड़की, तो किन्हीं के हालात ऐसे होते हैं कि वे अपनी यौन-इच्छा की तृप्ति नहीं कर पाते हैं जैसे मोर्चे पर तैनात सैनिक, जेल में बंद कैदी, किसी बीमारी से त्रस्त मरीज़ या फिर किसी भी कारण से बिछड़े हुए दाम्पत्य जोड़े।
ऐसे लोग ज्यादा हस्त-मैथुन करते हैं। कुछ लोग में यौन-इच्छा कुदरतन कम होती है या उनको सामान्य सम्भोग के अवसर मिलते रहते हैं… इस तरह के लोग हस्त-मैथुन कम बार करते हैं।
मतलब, हस्तमैथुन करने की दर दिन में दो-तीन बार से लेकर महीने में दो-तीन बार हो सकती है।
यह भी देखा गया है कि यौन-इच्छा एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रबल ताक़त है जिस पर सामान्य लोगों का जोर नहीं चलता। जब किसी स्त्री-पुरुष में यौन-इच्छा उत्पन्न हो जाती है तो उसकी तृप्ति के लिए वह हर संभव प्रयत्न करने के लिए विवश हो जाते हैं।
यह एक प्राकृतिक ज़रूरत है जिसके अभाव में इस सृष्टि की रचना ही डाँवाडोल हो सकती है… अतः यौन-इच्छा का प्रबल होना और इसकी तृप्ति के लिए त्रस्त होना ना केवल मानव-जाति के लिए अपितु अधिकाँश जानवरों के लिए भी अनिवार्य है।
ऐसे में जब भी किसी स्त्री-पुरुष में इस इच्छा की प्रवृत्ति होती है उसका सम्भोग के लिए विवश होना स्वाभाविक है। अगर ऐसे कामोन्मुक्त व्यक्ति को सम्भोग के लिए कोई साथी ना मिले तो उसके पास हस्त-मैथुन ही एक ऐसा सहारा रह जाता है जिससे वह सुरक्षित, कानूनी एवं परिपूर्ण तृप्ति प्राप्त कर सकता है।
कोई और सहारा या तो सुरक्षित नहीं होगा, या कानूनी नहीं होगा या फिर परिपूर्ण सुख नहीं देगा।
इस लिहाज़ से जो लोग हस्तमैथुन को बुरा मानते हैं या इसके झूठे दुष्परिणामों की अफवाहें फैलाते हैं, वे एक तरह से वेश्यावृति, देह शोषण जैसे यौन-अपराधों को पैदा करने में मदद करते हैं।
अगर सभी यौन-उत्तेजित पुरुष अपनी तृप्ति हस्त-मैथुन से कर लें और ऐसा करने में उन्हें कोई व्यक्तिगत हानि का गलत डर ना हो तो समाज में लड़कियों और बहु-बेटियों की सुरक्षा अपने आप सुधर जाए।इसी तरह अगर स्त्रियाँ भी अपनी कामवासना की प्यास हस्त-मैथुन से बुझा लें तो कई सामाजिक और वैवाहिक तनाव से मुक्ति मिल सकती है।
अर्थात हस्तमैथुन के फायदे ही फायदे हैं… फिर भी ना जाने क्यों इसके प्रति इतनी गलतफ़हमियाँ और दुष्प्रचार फैला हुआ है।
हस्तमैथुन के प्रति गलत भ्रांतियाँ
हालांकि हस्तमैथुन के प्रति कई भ्रांतियाँ हैं पर लगभग सभी भ्रांतियाँ पुरुषों पर लागू होती हैं। क्योंकि ये भ्रांतियाँ अनपढ़ और स्वार्थ-निहित लोग फैलाते हैं उन्हें शायद यह नहीं पता कि हस्त-मैथुन स्त्रियों में भी उतना ही प्रचलित है जितना मर्दों में;
बल्कि स्त्रियाँ पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा हस्त-मैथुन का सहारा लेती हैं क्योंकि एक तो पुरुषों के बनिस्पत उन्हें सम्भोग की तत्परता दर्शाने की समाज इजाज़त नहीं देता और दूसरे सम्भोग के बाद भी जहाँ लगभग सभी पुरुष अपनी यौन पिपासा शांत कर लेते हैं वहीं लगभग 80% स्त्रियाँ पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पातीं और ना ही अपनी असंतुष्टि ज़ाहिर कर पाती हैं।
ऐसी हालत में वे हस्त-मैथुन के द्वारा ही चरमोत्कर्ष प्राप्त करती हैं।
इस पृष्ठभूमि के चलते हस्त-मैथुन के बुरे परिणामों का असर केवल पुरुषों पर होना अपने आप में एक भ्रान्ति है। अगर हस्त-मैथुन से शरीर पर बुरा असर पड़ता है तो स्त्रियों के शरीर पर क्यों नहीं? असल में ये भ्रांतियाँ पुरुषों के लिए इसलिए पनपी हैं क्योंकि पुरुष, स्त्रियों के मुकाबले, यौन सम्बन्धी विषयों पर बातचीत करने के लिए ज्यादा मुखातिब होते हैं।
सामाजिक बंधनों के चलते लड़कियाँ व औरतों अपनी यौन-सम्बंधित समस्याओं और प्रश्नों का ना तो खुल कर समाधान ढूंढ सकती हैं और ना ही किसी से विचार-विमर्श कर सकती हैं। यह छूट केवल लड़कों और पुरुषों को है। अतः यौन सम्बन्धी भ्रांतियाँ एवं दुर्प्रचार आदमियों (खास तौर से लड़कों) के लिए ही संभव थे। आइये, कुछ भ्रांतियों पर एक नज़र डालें :
देखा गया है कि हस्त-मैथुन कच्ची उम्र से शुरू होकर वृद्धावस्था तक चलता है और इसे हर तबके के लोग- अमीर-गरीब, पढ़े-लिखे या अनपढ़, स्त्री एवं पुरुष, बूढ़े और जवान- सभी करते हैं।
विवाहित होने का अर्थ यह भी नहीं कि स्त्री-पुरुष को सम्भोग सुविधा और अवसर सदैव मिलते रहे। कई कारणों से वे सम्भोग से वंचित रह सकते हैं और ऐसी हालत में उन्हें अविवाहित जोड़ों के मुकाबले ज्यादा तड़प होती है।
असल में ये एकदम सामान्य विकार हैं जो लगभग सभी लड़के-लड़कियों को किशोरावस्था में होते हैं… यह वही उम्र होती है जब युवाओं को अपने यौनांगों के प्रति जागरूकता पनपती है और वे हस्त-मैथुन करना शुरू करते हैं। ऐसे में ढोंगी लोगों को मासूम युवाओं को यह समझाने में मुश्किल नहीं होती कि उनके विकार हस्त-मैथुन के कारण हो रहे हैं।
उनके दिमाग में हस्त-मैथुन को एक गलत क्रिया और पाप की संज्ञा देकर उनको बहकाया जाता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इन भ्रमों को नष्ट कर दिया है। असल में जवानी में कदम रखते युवाओं में जो सामान्य शारीरिक बदलाव आते हैं या जो मानसिक रूप से उनके लिए चिंता का विषय होते हैं, ऐसी बातों का ही स्वार्थ-निहित लोग नाजायज़ फायदा उठाते हैं।
अक्सर यौन सम्बन्धी समस्याएँ बच्चे, शर्म के कारण, अपने माँ-बाप से छुपाकर अपने दोस्तों या अनजान लोगों से पूछना बहतर समझते हैं… इस विषय पर स्कूल या कॉलेज में भी कोई विधिवत चर्चा नहीं होती… यही कारण है कि युवा लड़के-लड़कियों को सही ज्ञान नहीं मिला पाता।
सच तो यह है कि हस्त-मैथुन एक सुरक्षित और सेहतमंद क्रिया है जिसे करना प्राकृतिक भी है और अनिवार्य भी। इसको करने से कोई दुष्परिणाम नहीं होते बल्कि इसके परहेज़ से कई शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
स्वप्नदोष जैसे अनियंत्रित स्खलन से तो हस्त-मैथुन द्वारा आनंद लेकर वीर्योत्पात करना समझदारी का काम है। इससे कोई कमजोरी नहीं आती और ना ही कोई विकार पैदा होते हैं।
हाँ, यह सच है कि हस्त-मैथुन के कुछ प्रभाव ज़रूर होते हैं, जैसे कि
पर ये सब तो अच्छे प्रभाव हैं… इसलिए बेझिझक और दिल भर कर हस्त-मैथुन करना चाहिए। यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। हाँ, जैसे कोई भी अच्छी क्रिया अत्याधिक मात्रा में की जाये तो हानिकारक हो सकती है… तो हस्त-मैथुन भी उपयुक्त समय और उपयुक्त मात्रा में करना ही उचित है। इसके प्रति आसक्त होना या इसको सम्भोग के एवज में करना ठीक नहीं है।
हस्त-मैथुन कैसे करते हैं?
हस्त-मैथुन सम्भोग क्रिया का ही अनुकरण है। तो भले ही वह पुरुष हो या स्त्री, हस्त-मैथुन करते समय अपने यौनांगों को इस तरह इस्तेमाल करते हैं जिससे उन्हें सम्भोग-क्रिया जैसा सुखी अनुभव हो।
पुरुष का लिंग योनि में प्रवेश करके जिस घर्षण का अनुभव करता है वही घर्षण पुरुष अपने लिंग को अपने हाथ से देने का प्रयास करता है।
इसी प्रकार से सम्भोग के दौरान जिस तरह स्त्री की योनि तथा भगनासा को मर्दाना लिंग रगड़ता है और योनि में प्रवेश होकर अंदर-बाहर होता है, वही रगड़ हस्त-मैथुन के द्वारा स्त्री अपनी योनि और भगनासा को देने की चेष्टा करती है।
पुरुष कैसे करते हैं?
सभी पुरुष मूल रूप से समान हस्त-मैथुन करते हैं, जिसमें अपने लिंग को हाथ में पकड़कर दबाना या लिंग के ऊपर हथेली चलाना सबसे सामान्य और प्रचलित तरीका है।
कभी-कभी वे हथेली पर चिकनाई लगाकर हथेली को गीली योनि का प्रारूप देने की कोशिश करते हैं जिससे उन्हें अपार आनन्द की अनुभूति होती हैं। हस्त-मैथुन वे तब तक जारी रखते हैं जब तक उनका वीर्यपात नहीं हो जाता।
इसके अतिरिक्त, पुरुष दो तकियों के बीच अपना उत्तेजित लिंग घुसा कर धीरे-धीरे आगे-पीछे धक्का देते हैं, मानो स्त्री की योनि में अपना पुरुषांग प्रविष्ट कर रहे हों।
अब तो कई प्रकार के खिलौने बन गए हैं जो कि योनि और गुदा की तरह बने होते हैं और जिनका इस्तेमाल पुरुष आसानी से कर सकते हैं। ये खिलौने ऐसे पदार्थ से बने होते हैं कि लगभग महिला जननांग जैसा ही अनुभव देते हैं।
आधुनिक तकनीक के चलते अब ऐसी गुड़ियाँ बन गई हैं जो छूने से त्वचा छूने जैसा अनुभव देती हैं और जिनके अंग एक लड़की के अंगों की तरह हिलाए तथा मोड़े जा सकते हैं। इन गुड़ियाओं की योनि और गुदा के आलावा इनके मुँह को भी इस तरह बनाया जाता है कि उसे मौखिक मैथुन के लिए पुरुष प्रयोग कर सकते हैं।
कुछ पुरुष ऐसी गुड़ियाओं को लड़कियों से भी ज्यादा अच्छा समझते हैं क्योंकि इनके साथ जब चाहे सम्भोग किया जा सकता है और इनमें लड़कियों वाली कोई समस्या नहीं होती।
ये गुड़ियाँ महँगी होती हैं और हमारे देश में इनका प्रचलन इतना व्याप्त नहीं है। प्रोस्टेट एक ऐसी ग्रंथि है जो पुरुषों में वीर्य के लिये तरल पदार्थ पैदा करती है। यह गुदा के अन्दर स्थित होती है और इसे गुदा में उँगली डालकर महसूस किया जा सकता है।
ऐसा करने से आनन्द मिलता है; अत: यह भी हस्तमैथुन का एक तरीका है। कुछ ऐसे मसाज पार्लर होते हैं जहाँ लड़कियाँ पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि की मसाज करके
उन्हें उन्मादित करती हैं।
स्त्रियाँ कैसे करती हैं?
स्त्रियों के लिए सबसे सामान्य हस्त-मैथुन का तरीका अपनी भगनासा को ऊँगली के सिरे से सहलाना और मलना पाया गया है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि लड़कियाँ हस्त-मैथुन के लिए अपनी योनि में कोई लिंग के आकार की वस्तु डालकर उसे अंदर-बाहर करती होंगी।
हालांकि, स्त्रियाँ यह भी करती हैं पर यह इतनी प्रिय क्रिया नहीं है… शायद इसलिए कि एक तो इसे करने के लिए उचित लिंगाकार वस्तु ज़रूरी होती है जो हर समय उपलब्ध नहीं होती और दूसरे, ऐसा करने के लिए उन्हें जो आसन ग्रहण करने होते हैं वे हमेशा संभव नहीं होते।
स्त्रियों को हस्त-मैथुन बड़ी गोपनीयता और कम समय में करना होता है और इस कारण वे अपनी ऊँगली से अपनी भगनासा, जो कि मानव शरीर का सबसे मार्मिक और उत्तेजनशील अंग है, को सहला कर और अपनी योनि के होठों को मसल कर तृप्ति प्राप्त कर लेती हैं।
इसके अलावा वे अपने भगोष्ठ के साथ अपनी तर्जनी या मध्यमा अँगुली से खेलती हैं तो कभी योनि के अन्दर एक या दो अँगुलियाँ डालकर मैथुन का अनुकरण करती हैं। अगर समय का अभाव ना हो और उपयुक्त एकांत भी हो तो हस्तमैथुन के लिये सब्जियॉं, जैसे लम्बे बैंगन, खीरा, गाजर, मूली, ककडी आदि अपने जननांग में प्रविष्ट कराकर सन्तुष्टि प्राप्त कर लेती हैं।
सब्जियों के आलावा कुछ घरेलु लिंगाकार चीज़ें जैसे मोटा कलम, मोमबत्ती, बेलन का हत्ता इत्यादि का प्रयोग भी होता है। यह भी देखा गया है कि कुछ महिलायें पलंग के किनारे अथवा किसी मेज के किनारे से अपने यौनांग रगड़ कर भी यौन-सुख प्राप्त कर लेती हैं।
कुछ महिलाएँ केवल विचार और सोच मात्र से तो कुछ अपनी टाँगें कसकर बन्द करके योनि पर इतना दबाव डालती हैं कि उन्हें यौन-सुख अनुभव हो जाता है।
ये काम वे सार्वजनिक स्थानों पर भी बिना किसी की नजर में आये कर लेती हैं।
इस क्रिया को महिलाएँ बिस्तर पर सीधी या उल्टी लेटकर, कुर्सी पर बैठकर या उकडूँ बैठकर भी कर सकती हैं। लेकिन ऐसी कोई भी क्रिया जिसे बिना हाथ के सम्पर्क के पूरा किया जाता है हस्तमैथुन की श्रेणी में नहीं आती।
जिस तरह मर्दों के यौन-सुख के लिए खिलोने बने हुए हैं, स्त्रियों के सुख के लिए भी तरह तरह के खिलोने (डिल्डो) बन गए हैं। ये मूल रूप से बड़े लिंग के आकार के होते हैं जिनपर हाथ में पकड़ने की जगह होती है और जिनको औरतें अपनी योनि या गुदा में घुसा कर मैथुन सुख प्राप्त कर सकती हैं।
तकनीकी उन्नति के चलते इन कृत्रिम लिंगों में काफी विकास हुआ है और अब ये तरह तरह के आकार, पदार्थ और सुविधाओं से लैस होते हैं। इनमें बैटरी से थरथराहट (वाईब्रेटर) पैदा की जा सकती है।
कुछ कृत्रिम लिंगों की बनावट दुमुही होती है जिनसे एक स्त्री एक साथ अपनी योनि और गुदा दोनों को भेद सकती है और साथ ही भगनासा को कुरेदने के लिए उचित उभार बने होते हैं।
ऐसे दुमुही लिंग को योनि और गुदा में घुसाने के बाद जब उसमें बिजली से थरथराहट शुरू की जाती है तो स्त्रियों को असीम बहुतिक आनंद मिलता है जो अक्सर असली लैंगिक सम्भोग से भी नहीं मिलता।
हालांकि, मर्दों के लिए गुड़ियाँ बन चुकी हैं, महिलाओं के लिए इस तरह के गुड्डे मुनासिब नहीं समझे गए हैं क्योंकि निर्जीव गुड्डा हिल-डुल नहीं सकता और ऐसी हालत में वह स्त्रियों को सम्भोग सुख नहीं दे सकता।
स्त्रियों को कृत्रिम सम्भोग-सुख दिलाने के लिए कुछ ऐसी मशीनें बनायीं गयी हैं जिनमें कृत्रिम लिंग को एक पिस्टन पर लगाया होता है जो कि बिजली से आगे-पीछे होता है।
ये मशीनें तरह तरह के आकारों और सुविधाओं के साथ मिलती हैं जिनका उपयोग महिलाएं अपनी इच्छानुसार लेट कर या बैठकर कर सकती हैं। इनमें पिस्टन की गति, स्ट्रोक की लम्बाई और लिंग का आकार स्वेच्छा से नियंत्रित या बदला जा सकता है। ऐसी मशीनें उन महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं जिनके पति या प्रेमी शीघ्रपतन के कारण उन्हें सम्भोग से उत्कर्ष तक नहीं पहुंचा पाते… या फिर कुछ स्त्रियाँ देर से ही उत्कर्ष को प्राप्त होती हैं।
ये मशीनें भी, सेक्स-गुड़ियाओं की तरह, हमारे देश में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
परस्पर-हस्तमैथुन
इसमें स्त्री-पुरुष एक दूसरे का हस्तमैथुन करते हैं। आमतौर पर इसे सम्भोग-पूर्व अपने साथी को उत्तेजित करने के लिए या फिर जब सम्भोग की इच्छा ना हो या किसी कारण सम्भोग मुनासिब ना हो, तब प्रेमी जोड़े परस्पर हस्त-मैथुन करके एक दूसरे को चरमोत्कर्ष तक पहुंचाते हैं।
इसको करने के लिए स्त्री अपने साथी पुरुष का लिंग अपने हाथ में लेकर उसको उसी तरह हिलाती या रगडती है जैसे हस्त-मैथुन के समय पुरुष करता है और साथ ही उसके शरीर के मार्मिक स्थलों को छू कर, सहला कर तथा खरोंच कर उसे उत्तेजित करती है।
साथ ही पुरुष उस स्त्री की योनि और भगनासा पर अपनी उँगलियों से मर्दन करके और उसके स्तनों, स्तानाग्रों और बदन के अन्य संवेदनशील अंगों, जैसे गुदा, चूतड़, पेट, गाल, गर्दन इत्यादि को छू कर, सहला कर अथवा मसल कर उसे उत्तेजित करता है। यह क्रिया भी एक दूसरे के चरमोत्कर्ष तक की जाती है।
प्रायः देखा गया है कि इस क्रिया में पुरुष आनंद-शिखर पर महिलाओं से पहले पहुँच जाते हैं और उन्हें वीर्य-स्खलन के बाद भी अपनी प्रेमिका का हस्त-मैथुन जारी रखना होता है जिससे वह भी पूर्णतया तृप्त हो सके। परस्पर-हस्त-मैथुन एक बहुत ही प्रेम-भरी क्रिया है जिसे सभी जोड़े निःसंकोच कर सकते हैं क्योंकि इससे सम्भोग जैसा ही सुख दोनों को मिलता है और साथ ही सम्भोग से सम्बंधित किसी परेशानी या भय, जैसे गर्भ-धारण, कौमार्य-खनन, यौन-विकार इत्यादि की चिंता नहीं होती।
हस्तमैथुन पर शोध
हस्तमैथुन के कारण स्त्री-पुरुषों के लिए अनेकों व्यक्तिगत लाभ तो हैं ही, पर इस विषय पर शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि इस अत्यंत निजी क्रिया के कई सामाजिक फायदे भी हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों के सामाजिक-शास्त्री अब यह मानने लगे हैं कि हस्तमैथुन करने वाले 15 साल के युवक-युवतियों से लेकर वृद्धावस्था तक के लोगों में अपराध करने की प्रवृत्ति कम पायी जाती है।
इस कारण बाल-शोषण और देह शोषण जैसे जघन्य अपराधों को रोकने में मदद मिलती है। हस्तमैथुन करने वाले लोग कम विचलित और ज्यादा संतुलित रहते हैं जिनसे समाज में स्थिरता एवं अनुशासन पनपता है। वे ना केवल अपराध कम करते हैं, वे अपराध करने वालों को रोकने में भी योगदान देते हैं।
हस्तमैथुन से समाज को जो अप्रत्यक्ष लाभ होते हैं उनमें किशोरियों में अवांछित गर्भावस्था को रोकना, यौन रोगों (एस0टी0डी0) को कम करना और नारी को सम्मान देना प्रमुख माना गया है। कई विकसित देश, जैसे ब्रिटेन, नीदरलैंड, डेनमार्क आदि किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों को दैनिक हस्तमैथुन करने के लिए प्रोत्साहित करने लगे हैं।
‘प्रतिदिन एक वीर्योत्पात’ उनकी स्वास्थ्य-निर्देश पुस्तिका में एक अधिकार के रूप में सम्मिलित किया गया है। यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देश भी इस तरह के प्रोत्साहन की योजना बना रहे हैं। हमारे देश में भी इस अत्यंत निजी परन्तु साथ ही साथ अत्यंत सामाजिक विषय पर अधिकाधिक विचार-विमर्श करने की जरूरत है तथा इसे गोपनीयता के दायरे से बाहर निकाल कर प्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करने के आवश्यकता है।
ऐसा नहीं करने से हमारे देश में यौन-अपराधों की घिनौनी घटनाएँ निरंतर बढ़ती ही जाएँगी और निर्भया जैसी अनेकों लड़कियाँ यौन-त्रस्त युवकों की बलि चढ़ती जाएँगी। हस्तमैथुन Masturbation-0 एक लाभदायक क्रिया
यह मेरी पहली कहानी Hindi Porn Stories है जो वास्तविक है, बड़ी हिम्मत करके मैं यह कहानी लिख रहा हूं। मेरे दोस्त चन्दू ने इस कहानी को लिखने में मेरी मदद की है।
यह घटना छः माह पहले की है। मैंने अन्तर्वासना की कहानियाँ अभी जब मेरे पास कम्प्यूटर आया तब पढ़ना आरम्भ की थी। अब हमें पुस्तक से अच्छी और अधिक वासनायुक्त कहानियाँ पढ़ने को मिल जाती हैं और हमारे अब पुस्तकों के किराये के पैसे भी बच जाते हैं।
मेरा एडमिशन बेंगलोर में हो चुका था और मैंने होस्टल में दाखिला ले लिया था। मेरे साथ एक और लड़का था, उसका नाम चन्द्र प्रकाश था। सभी उसे चन्दू कहते थे। यूं तो हम दोनों ही दुबले पतले हैं, और लम्बाई भी साधारण सी ही है। मुझे उसके साथ रहते हुये लगभग दो माह हो चुके थे। उसे फ़ुर्सत में अश्लील पुस्तकें पढ़ने का शौक था। वो मार्केट से किताबें किराये पर ले आता था और बड़े चाव से पढ़ता था।
एक बार मैंने भी उसकी अनुपस्थिति में वो किताब उसके तकिये के नीचे से निकाल कर पढ़ी। उसको पढ़ते ही मेरा भी लन्ड खड़ा हो गया। मुझे उसकी खुली भाषा बहुत पसन्द आई और कहानी को अन्त तक पढ़ डाला। अब मेरे खड़े लन्ड को शान्त करना मुश्किल हो गया था। मैंने अन्त में अपना लण्ड बाहर निकाला और हाथ से मुठ मारने लगा। जब वीर्य लन्ड से बाहर निकल आया तो मुझे चैन मिला। पर मुझे उस पुस्तक को पढ़ने में बड़ा मजा आया। धीरे धीरे मुझे भी उन पुस्तकों को पढ़ने में मजा आने लगा। मेरा मन पढ़ाई से उचटने लगा। रात को जब तब मैं अब मुठ मारने लगा था।
चन्दू को भी अब मेरी हरकतें मालूम होने लग गई थी। उसे शायद मालूम पड़ गया था कि मैं उसकी अश्लील पुस्तकें छुप कर पढ़ लेता हूँ। उसने एक दिन उसने वो किताब छुपा ली। मुझे ढूंढने पर भी जब वो पुस्तक नहीं मिली तो मैंने हार कर चन्दू से कह ही दिया,”चन्दू, वो जो तू किराये पर पुस्तक लाता है, क्या अब नहीं ला रहा है?”
“देख प्रेम, पुस्तक तो मैं अपने पैसे दे कर लाता हूँ, तू अगर आधा पैसा दे तो तुझे भी दे दूंगा।”
मैंने उसे आधा पैसा भरने के लिये हां कर दी। अब तो मैं उसकी उपस्थिति में भी पुस्तक पढ़ सकता था।
इन सबके चलते एक दिन हम दोनों ही खुल गये और फिर चला एक दूसरे की गान्ड मारने का सिलसिला।
यह कैसे आरम्भ हुआ…
मैं दिन को लंच के बाद कॉलेज नहीं गया, आराम करने लगा। चन्दू का लंच के बाद एक पीरियड लगता था। मैं कमरे में अश्लील पुस्तक पढ़ रहा था। फिर हमेशा की तरह मैं खड़े हो कर मुठ मारने की तैयारी में था। मैंने अपना पजामा उतार लिया था और चड्डी भी उतार कर अपने कड़क लन्ड को हिला रहा था। तभी चन्दू आ गया… और मुझे लन्ड हिलाते हुये देखने लगा।
“ये क्या कर रहा है रे…” उसने मुझे झिड़का।
मैं बुरी तरह चौंक गया। और पास में पड़ा तौलिया उठा कर लपेट लिया।
“अरे यार वो ऐसे ही… ” मैं हड़बड़ा गया था।
“ऐसे क्या मजा आता होगा … रुक जा, मुझे भी किताब पढ़ने दे … साथ मजा करेंगे !” चन्दू ने बड़ी आशा से मुझे कहा।
मैं कुछ समझा नहीं था।
“साथ कैसे… क्या साथ मुठ मारेंगे…?”
“हां यार, उसमे मजा आयेगा…” मुझे भी लगा कि शायद ये ठीक कह रहा है। वो अपना मुठ मारेगा और मैं अपना मारूंगा। कुछ ही देर में उसने किताब पढ़ ली और उसने बड़ी बेशर्मी से अपनी कॉलेज की ड्रेस उतारी और नंगा हो गया। उसका लण्ड भी तन्ना रहा था।
उसने कहा,”प्रेम, इधर आ और इसे छू कर देख…!” मुझे ऐसा करते हुये हिचकिचाहट हो रही थी। पर मैंने उसके लण्ड को हल्के हाथों से पकड़ कर छू लिया।
“ऐसे नहीं रे … जरा कस कर पकड़… हां ऐसे… अब आगे पीछे कर !” उसने आनन्द से मुझे पकड़ लिया। मुझे दूसरे का लण्ड पकड़ते हुये कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। कड़ा सा, नरम चमड़ी, चमकता हुआ लाल सुपाड़ा… फिर भी मैंने उसके लण्ड पर अपना हाथ आगे पीछे चलाना आरम्भ कर दिया। उसका हाथ मेरी कमर पर कस गया। उसके मुँह से आह निकलने लगी। उसने अब मेरी कमर से तौलिया खींच कर उतार दिया।
“अरे… ये क्या कर रहा है… ?” मैंने हड़बड़ाते हुये कहा।
“तेरा लण्ड की मैं मुठ मार देता हूँ… देख बेचारा कैसा हो रहा है…!” और उसने मेरा लण्ड थाम लिया। किसी दूसरे का हाथ लन्ड पर लगते ही मुझे एक सुहानी सी अनुभूति हुई। लण्ड हाथ का स्पर्श पाते ही बेचारा लन्ड कड़क उठा। उसका हाथ मेरे लन्ड पर कस गया और अब उसने हल्के से हाथ से लन्ड पर ऊपर नीचे करके मुठ मारा। मुझे बहुत ही आनन्द आने लगा।
“यार चन्दू, मैं मुठ तो रोज़ ही मारता हूँ… पर तेरे हाथ में बहुत मजा है… और कर यार… आह …” हम दोनों अब एक दूसरे का हल्के हाथों से मुठ मारने लगे। मेरे अन्दर एक तूफ़ान सा उठने लगा… सारी दुनिया रंगीन लगने लगी। चन्दू मुठ बड़ी खूबसूरती से मार रहा था। उसके हाथ में जैसे जादू था। उसकी अंगुलियां कहीं सुपाड़े को हौले से मसलती और कभी डन्डे को बेरहमी से मरोड़ती और कस कर मुठ्ठी में दबा कर दम मारती… कुछ ही देर में मेरा वीर्य छूट गया। मैं उससे लिपट गया और ना जाने कहां कहां चूमने लगा। मेरे झड़ते ही मुझे होश आया कि मैंने तो जाने कब चन्दू लण्ड छोड़ दिया था और अपने आनन्द में डूब गया था। अब मैं उसका लन्ड पकड़ कर मुठ मारने लगा। वो अपने बिस्तर पर लेट गया और अपने शरीर को आनन्द से उछालने लगा। उसका लण्ड और सुपाड़े को मैं सन्तुलित तरीके से या कहिये चन्दू के तरीके से मुठ मार रहा था। उसकी हालत देख कर मुझे लग रहा था कि शायद मुझे भी ऐसा ही मजा आया होगा… अन्जाने में मैं भी ऐसा ही तड़पा हूंगा। कुछ ही देर में उसके लण्ड ने पिचकारी निकाल मारी। उसका वीर्य मेरे हाथो में लिपट गया। मैंने उसका लण्ड धीरे धीरे मल कर उसमे से सारा वीर्य निकाल दिया
एक दूसरे का मुठ मारना रोज़ का खेल हो गया।
एक दिन मुझे चन्दू ने नया खेल सिखाया। उसने नंगे होने के बाद मुझे बिस्तर पर सुला दिया और वो मेरे ऊपर उल्टी पोजीशन में लेट गया। उसने मेरा खड़ा लण्ड अपने मुंह में भर लिया। उसके लण्ड चूसने से मुझे बड़ा मजा आया… मैंने भी उसके लण्ड के अपने मुँह में भर लिया। मैंने भी उसे चूसना शुरू कर दिया। उसकी टांगे मेरी गर्दन के आस पास लिपट गई। मेरा लन्ड तो उसके चूसने से फ़ूलने लगा और मैं आनन्द से भर गया। मेरे चूतड़ नीचे से हिल हिल कर प्रति उत्तर देने लगे थे। उसने भी अपने चूतड़ों को हौले हौले से मेरे मुख में चोदने जैसा हिलाने लगा। मैंने भी उसका लन्ड जोर से होंठ को भींच कर चूसना आरम्भ कर दिया। ये मस्त तरीका मुझे बहुत ही पसन्द आया। मेरा लन्ड भी नीचे फूल कर उसके मुख का भरपूर मजा ले रहा था। वह अपना हाथ से मेरा लण्ड का मुठ भी मार रहा था और मेरे सुपाड़े के रिन्ग को कस कर चूस रहा था। कुछ पलों में मेरा लण्ड मस्ती में हिल हिल कर मस्त हो उठा और ढेर सारा वीर्य उसके मुँह में ही उगल दिया। उसने वीर्य को नीचे जमीन पर थूक दिया और फिर से चूस कर मेरा पूरा वीर्य निकाल कर साईड में नीचे थूक दिया।
अब उसने अपनी कोहनियों पर अपनी पोजीशन ले ली । अब उसका पूरा ध्यान स्वयं के लण्ड पर था जिसे वो मस्ती से हौले हौले मेरे मुख को चोद रहा था। तभी उसने अपने लण्ड का पूरा जोर लगा कर लण्ड मेरे हलक तक उतार दिया और अपना वीर्य छोड़ दिया। उसका सारा वीर्य मेरे गले से सीधे उतर गया और मैं खांस उठा। उसने अपना लन्ड थोड़ा ऊपर करके मुँह में ही रहने दिया और उसका सारा वीर्य मेरे मुँह में भरने लगा। स्वाद रहित चिकना सा वीर्य, पहली बार किसी के वीर्य का स्वाद लिया था। उसके पांवों के बीच मेरा मुख जकड़ा हुआ था, उसका रस गले से नीचे उतर गया और अब उसने मुझे ढीला छोड़ा और मेरे ऊपर से हट गया। इस प्रकार के मैथुन में मुझे आर भी आनन्द आया।
उन्हीं दिनों चन्दू का कम्प्यूटर भी आ गया। हमारा इस तरह का दौर लगभग रोज ही चलता था। हम दोनों सन्तुष्ट हो कर फिर से पढ़ाई में लग जाते थे।
एक बार रात को चन्दू बड़े गौर से एक गे की सीडी देख रहा था। एक लड़का दूसरे लड़के की गान्ड मार रहा था। मैंने भी उस सीन को बहुत बार लगा कर देखा और फिर हम एक दूसरे को प्रश्न वाचक नजरों से देखने लगे।
“ये तो मुश्किल काम है ना… गान्ड का छेद तो इतना सा होता है… कैसे घुस जाता है यार… कहानियों में भी गान्ड की मारा मारी बहुत होती है।” मैंने हैरानी से कहा।
“तू कहे तो एक बार कोशिश करें क्या … अपने पास सोलिड लन्ड तो है ही ना…इस फ़िल्म को देख जब इस सीन में लन्ड गान्ड में घुसा है, ये सच तो लगता है… ये कुछ चिकनाई भी तो लगाते हैं ना…!”
उस सीन को देख कर लन्ड तो दोनों का ही खड़ा था… दोनों ने कपड़े उतार लिये… मैंने ही पहल की।
“देख मैं झुक जाता हूँ… तू अपना लन्ड मेरी गाण्ड में घुसाने की कोशिश कर…”
चन्दू ने यह देखा और तेल की शीशी देख कर कहा, “तेल लगा लेते हैं…!”
उसने तेल की शीशी से तेल मेरी गान्ड में लगा दिया और अपना तना हुआ लण्ड मेरी गान्ड से चिपका दिया। मेरी गान्ड का छेद डर के मारे और कस गया।
“अरे… गान्ड को ढीली छोड़ ना…” मैंने हिम्मत करके छेद को ढीला छोड़ दिया। उसने थोड़ा जोर लगाया और अन्ततः उसका सुपाड़ा अन्दर चला ही गया। मुझे बड़ा अजीब सा लगने लगा… ये मेरी गाण्ड में मोटा सा ये क्या फ़ंस गया… उसका मोटा सा लन्ड मुझे उसकी मोटाई का अहसास दिला रहा था। उसने जोश में आकर लण्ड को जोर से अन्दर की ओर मारा… उसके मुख से आह निकल पड़ी और उसने तुरन्त अपना लन्ड बाहर निकाल लिया। मुझे भी एक बार गान्ड में दर्द हुआ पर उसके लन्ड निकालते ही आराम हो गया।
“मुझसे नहीं होता है यार …” चन्दू ने अपना लण्ड सम्भालते हुये कहा।
“क्या हो गया… साले तेरे में दम नहीं है गान्ड मारने का, चल तू घोड़ी बन, मैं चोदता हूँ तेरी मस्त गान्ड को… चल घोड़ी बन जा…” मैंने भी उसे घोड़ी बना दिया… और तेल उसकी गान्ड में भर दिया। लण्ड की चमड़ी ऊपर खींच कर मैंने सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। उसकी गान्ड ने अंगुली कर के देखा, मुझे तो उसकी गान्ड मस्त लगी। मैंने अंगुली घुमाते हुये उसके छेद को खोला और सुपाड़ा उस पर रख दिया। दबाव डालते ही मेरा लन्ड छेद में घुस गया। चन्दू थोड़ा सा बैचेन हो उठा … मैंने जोर लगा कर लण्ड को धक्का दिया… मुझे अचानक ही तेज जलन हुई, जैसे आग लग गई हो… मैंने लण्ड जल्दी से बाहर निकाल लिया। देखा तो मेरे लण्ड की झिल्ली फ़ट गई थी और कुछ खून की बून्दें उस पर उभर आई थी। कमोबेश चन्दू का भी यही हाल था। हम समझ गये थे कि ये तो लण्ड के कुंवारेपन की निशानी थी, जो अब फ़ट कर जवानी की याद दिला रही थी। हमने अपने लण्ड को साफ़ किया और असमन्जस की स्थिति में सो गये।
अगले दिन भी हम दोनों के लण्ड में दर्द था, सो बस रात को हम कम्प्यूटर पर यूं ही सर्च कर रहे थे। अचानक एक जगह सेक्स कहानियों के बारे लिखा हुआ नजर आया, यह अन्तर्वासना साईट थी। साईट के खुलने पर हमें बहुत सी या कहिये कि अनगिनत कहानियाँ वहां पर मिली। उन कहानियों के पढ़ने पर हमें यह मालूम हुआ कि हमारी स्किन जो फ़टी थी वो तो एक दो दिन में ठीक हो जाती है। गान्ड मारने के बारे में भी पढ़ा और हम दोनों उत्साहित हो उठे। इन रस भरी कहानियों का भरपूर संग्रह मिल जाने से हमने मार्केट से अश्लील पुस्तकें लाना बन्द कर दिया।
अगले दिन हम दोनों ने सच में महसूस किया कि हमारे लण्ड अब ठीक हो चुके है तब हमने कहानियों के अनुसार ही किया। पहले मैंने ट्राई की, मैंने अंगुलिया घुमा कर गाण्ड का छेद चौड़ा किया। मैं तेल लगाता गया और अंगुली घुमाता गया, फिर अपना सुपाड़ा छेद पर रख कर अन्दर धकेला तो आराम से घुस गया। पर हां, गान्ड कसी हुई थी। मैंने डरते डरते लण्ड और अन्दर घुसेड़ा… लण्ड में तो दर्द नहीं हुआ पर चन्दू के मुख से कराह निकल गई। पर मुझे तो लण्ड में मीठी सी वासनायुक्त कसक भरने लगी। इस मीठी सी सुरसुरी का आनद लेने के लिये मैंने अपना लण्ड धक्का दे कर पूरा घुसेड़ दिया।
उसे शायद दर्द हुआ… पर मैं आनन्द के मारे झूम उठा था और उसकी गाण्ड में लन्ड अन्दर बाहर करना आरम्भ कर दिया। अब मुझे मालूम चल रहा था कि लड़कियों की चूत मारने में भी ऐसा ही मजा आता होगा। उसकी तंग़ गाण्ड मारने में मुझे एक अनोखा ही आनन्द आ रहा था। लन्ड खूब रगड़ रगड़ चल रहा था। मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो पूरा जोर लगा कर लन्ड को उसकी गान्ड में मारने लगा… फिर मेरे लण्ड से रस निकल पड़ा और उसकी गाण्ड में भरने लगा। मैंने लण्ड खींच कर बाहर निकाल लिया और बाकी का वीर्य बाहर निकाल दिया। उसकी गान्ड का छेद लण्ड निकालने पर खुला रह गया था और कुछ ही पलों में अब बन्द हो गया था। चन्दू के चेहरे पर पसीना था।
कुछ ही देर में उसने मुझे घोड़ी बना दिया और उसने भी मेरे साथ वही किया। वो मेरी गान्ड का छेद अंगुली डाल कर खींच खींच कर चौड़ा करने लगा। मुझे ऐसा करने से छेद में जलन तो हुई पर अधिक नहीं… बल्कि उसकी अंगुली गान्ड में मीठा सा मजा दे रही थी। कुछ ही देर में उसका सोलिड लन्ड मेरी गान्ड में घुस पड़ा। उसने मेरी गाण्ड में लण्ड धीरे से घुसाया और बड़े प्यार से मेरी गाण्ड मारने लगा। मुझे दर्द तो हो रहा था पर अधिक नहीं। उसका लन्ड मुझे गान्ड में चलता हुआ बहुत मजा दे रहा था। पर जोश में उसके तेज झटके दर्द दे जाते थे…। कुछ ही देर में वो भी झड़ गया। पर उसने अपना वीर्य पूरा ही गान्ड में भर दिया। उसका लन्ड गान्ड में ही सिकुड़ गया था और चिकने वीर्य के साथ सुरसुराता हुआ अपने आप बाहर आ गया।
हम दोनों ही बहुत खुश थे कि अब हमें लडकियों की कोई आवश्यकता नहीं थी… हमें अपना वीर्य निकालने के लिये एक छेद मिल गया था। एक दूसरे के चूतड़ों की नरम गद्दी का एक मधुर सा मजा लण्ड के आस पास गान्ड मारने पर आता था। हम दोनों धीरे धीरे गान्ड मारने और मराने के अभ्यस्त हो चुके थे … अब इस कार्य में बहुत ही मजा आने लगा था। हम अब सप्ताह में दो बार पूरी तैयारी के साथ गान्ड मारते थे। हम अब व्हिस्की लाते, साथ में चिकन और नमकीन लाते और ब्लू फ़िल्म लगा कर रात को कम्प्यूटर पर आराम से देखते और फिर उत्तेजित हो कर आपस में गाण्ड मारते और मराने लगे थे। Hindi Porn Stories
सौम्या उनकी इकलौती बेटी है.
वह बचपन से ही थोड़ी समझदार टाइप की थी.
बचपन में मेरी मां कह देती थीं कि तुम दोनों शादी कर लेना.
हम दोनों ही झेंप जाते.
पर शायद उसे मैं हमेशा से पसंद था.
फिर मैं इंजीनियरिंग करने बाहर चला गया.
वह भी चली गई.
यह बात लॉकडॉउन की है.
मैं घर पर था.
मेरी गर्लफ्रेंड ने भी मुझसे ब्रेकअप कर लिया था.
सौम्या मेरे घर में आती जाती रहती थी.
हम दोनों आपस में बातचीत भी करते थे.
घर पर भी लोग हमें देखने तक नहीं आते थे कि हम दोनों अकेले में क्या कर रहे हैं.
उनके विचारों में हमारे जवान होने के बाद भी किसी तरह का बदलाव नहीं आया था.
एक दिन की बात है. मैं सोया हुआ था और वह सुबह घर आई.
मम्मी ने उसे कहा- राज को जगा लो, दोनों चाय पी लेना.
वह चाय लेकर आई.
उसने चाय की ट्रे रखी और मुझे जगाने लगी.
मैं गहरी नींद में सोया हुआ था.
दो तीन बार जगाने पर भी जब मैं नहीं उठा, तो वह मेरा हाथ पकड़ कर खींचने लगी.
मैंने नींद में ही उसे अपने करीब खींच लिया और हग करके उसके होंठों पर किस कर दी.
दरअसल मैं नींद में उसे अपनी गर्लफ्रेंड समझ रहा था.
पर फिर अन्दर याद आया वह तो मुझे छोड़ कर जा चुकी है तो ये कौन है!
यह याद करते ही मेरी फटी और नींद खुल गई.
वह भी उठ कर बैठ गई.
मैंने देखा सौम्या कांप रही थी.
मैंने उससे सॉरी कहा और कहा मैंने तुम्हें अपनी गर्लफ्रेंड समझ लिया.
यह सुनकर वह उठी और चाय छोड़ कर चली गई.
मुझे लगा मेरी वजह से नाराज हो गई है.
वह तीन दिन तक घर नहीं आई.
फिर एक दिन शाम को आई.
मैंने कहा- सॉरी सौम्या, उस दिन मुझसे भारी भूल हो गई थी.
उसने हंस कर बात को टाल दिया.
फिर यूं ही हम दोनों में बातचीत होती रही.
एक दिन शाम को हम बात कर रहे थे.
तो उसने पूछा- तुम उस दिन किसके बारे में सोच रहे थे?
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या?
उसने कहा- मैं समझ गई कि तुमने सॉरी क्यों कहा.
मैंने पूछा- इतना गौर करती हो मेरी बातों पर?
उसने कहा- अब इतना तो हक है!
मैंने सब बता दिया.
उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा- तुम्हें भी कोई खोना चाहेगी क्या?
मैं समझा नहीं.
वह चली गई.
फिर दीवाली आई.
हम सब मिल कर घर पेंट कर रहे थे.
वह भी काम में हाथ बंटाती थी.
मेरे कमरे में पेंट की बारी आई, तो उसने रंग पसंद करके बताया. मैंने भी वही रंग सोचा था. मुझे सौम्या और ज्यादा अच्छी लगने लगी.
फिर वह कमरे में आई तो मैं पेंट कर रहा था.
वह मेरे लिए चाय लेकर आई थी.
मैं चाय पीने लगा तो वह खुद ब्रश उठा कर पेंट करने लगी थी.
उस वक्त मुझे उसको देखने में बड़ा सुखद लग रहा था, मुझे उस पर प्यार आ रहा था.
आज मैं उसका फिगर देखने लगा था.
उसकी काया मुझे बड़ी ही कमनीय लग रही थी.
मैं आपको भी उसकी फिगर बता दूँ.
वह 34-30-36 की थी.
उसकी आखें एकदम गहरी मानो कोई नेचर का पोर्ट्रेट देख रहे हों.
दूसरे दिन बाहर की ओर पेंट चल रहा था.
वह मुझे चाय देकर खुद सीढ़ी के ऊपर चढ़ कर पेंट कर रही थी.
मैं उसे देखते हुए चाय पीने लगा.
पेंट का ब्रश डिब्बे में डुबोने के चक्कर में वह एकदम से फिसल गई.
मैंने चाय का कप छोड़ा और उसे लपक लिया.
वह आह करती हुई मेरे एकदम करीब हो गई थी.
मैं उसकी आंखों में खो गया.
चाय का कप गिरने की आवाज हुई.
तो मम्मी की आवाज आई- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं … कप गिर गया मेरे हाथ से.
फिर वह संभली और मुझे देख कर स्माइल करके बोली- हमेशा बचाओगे क्या?
मैंने भी उस अहसास को पहली बार महसूस किया था.
मैंने पता नहीं कैसे बस कह दिया- हां.
वह मेरे पास आई और बोली- सच में?
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उसे अपने गले से लगा लिया और कहा- हां हमेशा.
वह भी मेरी बांहों में कटी हुई डाली की तरह गिर सी गई.
मैंने उसका चेहरा उठाया और कहा- आई लव यू.
उसने कुछ भी नहीं कहा और चली गई.
मैं फिर उसका इंतजार करने लगा.
दीवाली के दिन वह फिर से आई.
मैंने कहा- प्रपोज किया था, घर नहीं आने के लिए नहीं कहा था.
उसने कहा- अच्छा जी, मिस कर रहे थे अपनी मिसेज को!
मैंने उसकी आंखों में देखा तो वह शर्मा गई.
तो मैंने कोहनी मारते हुए कहा- हां, मिसेज राज.
उसने सर झुका लिया और मुस्कुरा दी.
फिर हम सब दीवाली मनाने लगे.
दीवाली के अगली सुबह वह सुबह सुबह आई और मम्मी और मेरे लिए चाय बना कर लाई.
मम्मी को देने के बाद वह मेरे कमरे में आई और मुझे उठाने लगी.
मैं उठ गया था पर मैंने जानबूझ कर उसे फिर से खींच लिया और किस कर दिया.
उसने मुझे धक्का दिया और कहा- बचपन से तुम्हें प्यार किया है. क्या तुम भी करते हो?
मैंने कहा- देख लो.
उसने कहा- ठीक है.
फिर उस दिन के बाद हम दोनों नहीं मिले.
मैं जॉब पर वापस आ गया और वह भी.
6 महीने बाद मैं अपने घर गया.
वह भी आई हुई थी या शायद उसे पता था कि मैं आऊंगा.
अगले दिन फिर से मेरी पत्नी की तरह चाय लेकर आ गई.
मैं जाग कर बैठा हुआ था.
वह देख कर ऐसे मुस्कुराई जैसे जानती हो कि मैं उसका इंतजार कर रहा था.
चाय लेते हुए मैंने एक सिप ली और उससे पूछा- पूरी लाइफ केयर करोगी?
उसने कहा- तुम्हें पता नहीं क्या?
फिर मैंने अपना कप उसकी तरफ बढ़ा दिया.
उसने बेहिचक मेरी जूठी चाय से एक सिप ले लिया और अपने हाथ से में खुद मुझे पिलाने के लिए आगे झुकी.
मैंने भी पी ली.
उसने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा- गुड ब्वॉय.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा- किस्सी चाहिए मेरे बाबू को!
यह कह कर वह मेरे चेहरे पर झुकी और एक जोरदार किस दे दिया.
फिर कहा- सो स्वीट.
मैंने उसकी आंखों में प्यार से देखा.
उसने कहा- ये रोजाना चाहिए है तो सोच लो.
मैंने कहा- सोच कर ही आया था.
उसने कहा- क्या?
मैंने कहा- अभी देख लेना.
वह चली गई.
मैं उसकी मम्मी के पास गया और अपने और उसके बारे में बात की.
उन्होंने कहा- वह मेरी बेटी है और खुद समझदार है. वह जॉब भी करती है, उसे ही अपना फैसला लेना है. हम उसके साथ हैं.
फिर ये बात हमारे घर वालों ने की और हमारी शादी हो गई.
पहली रात को वह पहले से ही कपड़े चेंज करके बैठी थी.
मैं अन्दर आया तो उसने कहा- आप भी चेंज कर लो पतिदेव.
यह सुन कर मुझे अच्छा लगा.
मैं चेंज करके आया तो उसने हमारे लिए वाइन के दो ग्लास तैयार करके रखे थे.
मैंने कहा- वाह दूध की जगह सोमरस!
उसने मुझे ताना मारते हुए कहा- पुराने ख्यालों की नहीं हूँ मैं!
मैं उसके पास गया और उसके बालों में पीछे से साथ डाल कर उसे अपने चेहरे के पास लाकर कहा- तुम बचपन से इंतजार कर सकती हो … और मैं तुम्हारे दिल की बात नहीं समझता तो फिर प्यार किस बात का?
वह मेरी आंखों में देखने लगी और फिर उसने कांपते होंठों से मुझे चूम लिया.
मैंने भी उसे चूम लिया.
हम दोनों अलग हुए और हमने वाइन का पैग लिया.
कुछ देर बात करते हुए हम दोनों बिना कुछ किए वैसे ही सो गए.
सुबह 4.30 पर आंख खुली.
हल्की हल्की रोशनी आ रही थी.
मैं उठने लगा तो उठ नहीं पाया.
उसने मुझे जकड़ रखा था.
मेरे हिलने से वह भी उठ गई.
उसने ऐसे ही मुझे अपनी ओर खींच लिया और एक लंबा किस हुआ.
उसके बाद उसने कहा- ये तो हुआ मेरे हक का … अब आप कुछ पियेंगे?
मैंने उसकी तरफ देखा.
वह मुस्कुरा रही थी.
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा.
वह घूम कर मेरी गोद में सीने से सीना लगा ऐसे बैठ गई जैसे चंदन से लिपटा सांप.
मैंने उसकी गर्दन पर एक छोटा सा किस किया.
उसने अपना हाथ पीछे करके मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं, फिर अपनी ओर खींच कर किस कर लिया.
मैंने पीछे से उसके गाउन का स्ट्रैप खोल दिया और दोनों हाथ आगे ले आया.
उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने एक मम्मे पर रख दिया.
मेरा दूसरा हाथ सरकते हुए उसके पेट और नाभि से खेलने लगा.
अब उसकी काम वासना से भरी हुई सिसकारी निकल गई.
मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को निचोड़ रहा था.
हमें दस मिनट हो चुके थे.
अब वह गोद से उतरी और मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे खाने लगी.
वह किस करते करते मेरी चड्डी तक पहुंच गई.
मैं उसकी चूचियों से खेल रहा था.
उसने सीधे ही मेरी चड्डी खींच दी.
मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड उसके सामने था.
उसने उसे अपने हाथों में भरा और लौड़े की मुठ मारती हुई बोली- बचपन से एक ही सपना था कि तुम्हारी होना है. मेरी सहेलियों ने मुझसे कहा भी कि मजे कर ले, पर मुझे तुम्हारी होना था. तुम तो कर चुके हो!
मैंने उसके मुँह पर हाथ डाला और उसे अपने पास खींचते हुए कहा- अब बस तुम्हारा ही तो हूँ.
उसने कहा- यदि भरोसा ऐसा था तो बचपन में कहते … एक बार भी तुम्हें छोड़ कर नहीं गई होती.
मैंने कहा- फिर तुमसे प्यार कैसे होता?
वह मुस्कुरा दी.
उसने मेरे लंड को पकड़ा और मुँह में भर कर चूसने लगी.
फिर जब मुझे लगा कि अब रुक पाना मुश्किल है, तो मैंने उसे सीधा उठाया और बेड पर गिरा दिया.
उसने मेरी तरफ देख कर मुझे उंगली से इशारा करके चूत का रास्ता दिखाया.
मैंने कहा- ऐसे नहीं.
उसने मेरी तरफ देखा.
मैंने उसे उठाया और उसके शरीर पर कसे हुए ब्रा पैंटी को उतार दिया.
फिर दीवार से चिपका कर उसके दूध पीने लगा.
मैं एक चूची मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसका गला दबा रखा था.
थोड़ी ही देर में वह मचलने लगी और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर दबाने लगी.
उसने कहा- बस पतिदेव, अब चोद दीजिए ना!
मैंने कहा- ठीक है.
मैं भी खड़ा खड़ा थक गया था.
मैंने उसे बेड पर लिटाया और चूत चाटने लगा.
उसने कहा- कल भी यहीं रहूँगी और मेरी चूत भी … अभी पहले चोद दो ना प्लीज!
मुझे उसकी मासूमियत भरे चेहरे पर प्यार आ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया.
काफी गीली चूत थी.
थोड़ा इधर उधर करने पर लंड का सुपारा अन्दर फंस गया.
उसे हल्का सा दर्द हुआ.
वह उछली.
मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने दर्द भरे भाव से कहा- कुछ भी नहीं … बस रुकना मत, डाल दो तुम.
मैंने एक ही बार में पूरा लंड जड़ तक पेल दिया.
उसकी बहुत जोर से चीख निकली, जिसे सुन कर उसकी चचेरी बहन मानसी जो दिल्ली में डॉक्टर थी और शादी में आई थी, वह हमारे ही बाजू वाले कमरे में रुकी हुई थी.
मानसी जाग गई और अपने कमरे से उठ कर आकर दरवाजा खटखटाने लगी.
पर मेरी बीवी जो अपने नाखून मेरे पीठ में चुभो चुकी थी, अब चुप थी.
फिर उसकी बहन चली गई.
इधर मैंने भी उसे प्यार से सहलाते सहलाते उसका दर्द कम किया.
उसने मेरी आंखों में ऐसे देखा मानो उसने मुझे जीत लिया हो.
अपने आंसू पौंछते हुए आंखों से ऑर्डर दिया- आगे बढ़ो.
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए चोदना शुरू किया और 15 मिनट चोदने के बाद वह झड़ गई.
मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और उसकी चूत में लंड पेल दिया.
इस आसन में मेरा लौड़ा सीधा उसकी बच्चेदानी में ठोकर मारकर वापस आ गया.
वह चिहुंक उठी और उसने कराहते हुए कहा- पतिदेव मर गई.
मैं खड़ा हुआ और उसे दीवार से लगा दिया.
एक तरह से वह हवा में लटकी हुई थी.
मेरा लंड उसकी चुत में फंसा था.
मैं उसे चोदने लगा.
वह मेरी ताकत की कायल हो गई थी और चुदाई का मजा लेने लगी थी.
काफी देर बाद मैं थक गया तो मैं उसे वैसे ही लेकर लेट गया.
वह मेरे ऊपर आ गई और अपनी गांड उठा उठा कर चूत में लंड लेने लगी.
इधर मैं उसकी चूचियों को निचोड़ रहा था.
वह पागलों की तरह आह आह कर रही थी.
फिर हम दोनों एक साथ आह आह करते हुए झड़ गए.
मैं उसे उठा कर बाथरूम में लेकर जाने लगा तो उसने मेरे चेहरे को अपने चेहरे से ढक दिया और होंठ चूसने लगी.
लेकिन मुझे गेट बंद होने की आवाज आई.
मुझे लगा बाथकमरे में कोई है.
मेरा और मेरे बगल वाले कमरे का साझा बाथरूम है.
मैं रुक गया.
फिर मैं आगे बढ़ा.
दरवाजा हल्का सा खुला था.
पर उस टाइम मैंने गौर भी नहीं किया, बस बाथरूम में आ गया.
उधर भी साफ सफाई के बाद हमारी चुदाई होने लगी और बहुत देर तक हुई.
चुदाई की आवाज़ शायद मानसी ने सुनी ही होगी, जो उस टाइम हम दोनों के ध्यान में नहीं आई.
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