Our site can help you find a professional massage girl in Bageshwar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.
Find Related Category Ads
Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Bageshwar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.
Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Bageshwar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.
Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Bageshwar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.
Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Bageshwar massage service, which makes it easier to obtain more customers.
There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.
A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Bageshwar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.
This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Bageshwar who are good at deep tissue treatments that function effectively.
Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Bageshwar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.
A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Bageshwar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.
Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Bageshwar
Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Bageshwar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:
Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.
Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.
When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.
The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.
All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मेरी उम्र २५ साल है, पेशे Sex Stories से एक डॉक्टर हूँ। कॉलेज ख़तम किये छः महीने ही हुए हैं। मैंने अपनी डिग्री शिमला से की है। मैं कॉलेज से ही उम्र में बड़ी उम्र की औरतों का बहुत शौकीन हूँ।
एक बार मैं घर से शिमला जा रहा था बस में। रास्ते में एक बहुत खूबसूरत लड़की बस में चढ़ी और मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई। रंग एकदम गोरा और भरी भरी काया ! बस फिर क्या था, मैं सोचने लगा कि कैसे उसके साथ बैठूं !
एक स्टाप पर जाकर जब बस रुकी तो मैं कुछ लेने के बहाने बस से उतरा और उसे कहा कि मेरी सीट का ख्याल रखे। पर जब मैं वापिस चढ़ा तो वहाँ कोई मोटा सा अंकल बैठा हुआ था। बस मैं उसे भला बुरा कहता हुआ उस लड़की के साथ बैठ गया।
अब वो मुझे घूर कर देखने लगी। मैं भी चुपचाप उसे अनदेखा करके बैठ गया। फिर धीरे से उसकी तरफ देखा, उसके स्तन उसके बिन बाजू के ब्लाऊज़ से दिख रहे थे। मैं अपने आप पर काबू न कर पाया और मेरा लण्ड झटके मारने लगा।
पर जैसे उसने मुझे घूर कर देखा, मेरी हिम्मत नहीं हुई दोबारा उसकी आँखों में देखने की।
करीब एक घंटे बाद उसने मुझे खुद बोला- मैंने आपको पहले कहीं देखा है !
मैं सकपका गया। मैंने पूछा- कहाँ?
वो बोली- नहीं जानती, पर देखा ज़रूर है।
मेरे दिल में ख़ुशी के लड्डू फूट रहे थे।
मैंने उसे कहा- शायद आपने मुझे मेडिकल कॉलेज में देखा होगा।
तब वो बोली- हाँ ! मैं अपनी बहन को चेक करवाने आई थी।
बस फिर क्या था, बातों का सिलसिला शुरु हो गया। अब मैं समझा कि वो मुझे घूर कर देख नहीं रही थी बल्कि पहचानने की कोशिश कर रही थी।
जब उसने मुझे बताया कि वो दो बच्चों की अम्मा है तो मैं हक्का-बक्का रह गया।
फिर उसने मुझे अपनी सारी कहानी सुनाई कि कैसे उसकी शादी छोटी उम्र में हो गई और उसका अकेलापन।
जैसे कोई मरीज डॉक्टर से कोई बात नहीं छुपाता वैसे ही वो अपनी हर बात बताती गई!
और मैं भी एक अच्छे डॉक्टर की तरह उसकी हर बात सुनता गया।
जब वो बस से उतरी तो उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर दिया और अपने घर की तरफ चली गई और मैं अपने हॉस्टल की तरफ !
तब तक मेरे दिमाग में कुछ भी उल्टा सीधा नहीं था। अब घर से इतने दिनों बाद आया था तो दोस्तों के साथ मिलकर शाम को थोड़ी सी शराब पी ली और फिर अपने कमरे में सोने चला गया। तभी मेरी आँखों के सामने नीरू का चेहरा घूमने लगा (नीरू जो लड़की मुझे बस में मिली) उसके गोल मटोल स्तन, उसकी दिल को चीर देने वाली हँसी, उसका भोला सा चेहरा और उसकी भारी गाण्ड ! यह सब मेरी आँखों के सामने घूमने लगे।
मैंने मोबाइल निकाला और लगा दिया नंबर !
रात के १२ बज रहे थे, मैंने सोचा कि वो सो गई होगी तो मैंने फ़ोन काट दिया।
थोड़ी देर बाद उसका फ़ोन आया और मुझे पूछने लगी कि फ़ोन क्यूँ किया?
मैंने कहा- बस तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए कर लिया। पर सॉरी मुझे समय का ख्याल नहीं रहा !
वो बोली- नहीं ! मैं जाग रही थी !
मैंने पूछा- वो क्यूँ?
वो बोली- बस मुझे भी तुम्हारी याद आ रही थी !
बस मेरा मन खुश हो गया। थोड़ी देर और बातें चली और उसने बताया कि वो अकेली सोती है अपने पति के साथ नहीं।
इस तरह मैंने उसे अगले दिन मिलने के लिए बुला लिया।
वो दूसरे दिन ठीक मेरे बताये हुए समय पर पहुँच गई जब हॉस्पिटल बंद होने का वक़्त होता है।
मैंने उससे पूछा- कहाँ चलें?
वो बोली- तुमने बुलाया है ! तुम हो ले चलो कहीं भी !
मैं अपनी फुद्दुपंथी पे इतना पछताया कि किसी कमरे का इंतजाम भी नहीं किया था मैंने।
मैंने नहीं सोचा था कि वो आते हो मुझसे ऐसे बोलेगी, पर क्या कर सकते थे, मैं उसे हॉस्पिटल के पीछे एक सुनसान जगह पर ले गया और कहा- तुम बहुत खुबसूरत हो नीरू ! मैं तुम्हें चाहने लगा हूँ !
तो वो यह बात सुन कर डर गई और बोली कि उसके दो बच्चे हैं और वो उनसे बहुत प्यार करती है। वो इन बन्धनों से बंधी हुई है।
पर मेरे उसे समझाने पर कि मैं किसी को नहीं पता लगने दूंगा हमारे बारे में, उसने मुझे चूमने दिया। धीरे धीरे मैं उसके वक्ष को चूमने लगा। मुझे पता हो नहीं चला कब मेरा हाथ उसके पिछवाड़े पर चला गया और वहां उंगली करने लगा।
वो बहुत उत्तेजित हो गई थी। वो मुझसे छिटकते हुए बोली- बस, बहुत हो गया ! तुम हद पार कर रहे हो !
वैसे बात भी सही थी, वहां कोई भी आ सकता था। मैंने उसे जाने दिया और वो भागते हुए वहाँ से चली गई।
फिर रात को मैंने उसे फोन किया और अपने किये पर सॉरी बोला। उसे मिलने के लिए बुलाया फिर से !
पहले तो उसने ना-नुकुर की पर उसके दिल में जो मेरे लण्ड को चखने की चाह थी, शायद वोही खाज उसे मेरे पास मिलने के लिए ले आई।
इस बार मैं पूरी तरह से तैयार रहना चाहता था। वो बुधवार का दिन था और मैं बुधवार को नॉन-वेज़ खा लेता हूँ। वो आई और चुपचाप मेरे साथ चलने लग पड़ी। हम मेरे दोस्त के कमरे पर पहुंचे, हॉस्टल तो ले जा नहीं सकता था नहीं तो जोर आजमाइश वाला चोदन हो जाता उसका।
कमरे पर पहुँचते हो मैंने उसका पर्स एक कोने में फ़ेंक दिया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया। वो थोड़ा शरमाई।
मैंने पूछा तो बोली- डर लगता है !
मैंने उसे कहा- दो बच्चों की माँ होकर डर लगता है तुझे?
तो बोली- यह बात नहीं है ! डर लगता है कहीं तुमसे प्यार न हो जाए !
मैंने उसे समझाया कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, देख, मैं ठहरा अकेला लोंडा अभी, और कल को मेरी शादी हो जायेगी, और मैं हूँ डॉक्टर तो सोसाइटी में तो कभी नहीं पता लगने दूंगा। बाकी सब तुम पर है कि तुम सुख चाहती हो या नहीं !
वो यह सब सुनते हो मेरी बाँहों में लिपट गई, मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और न जाने कब उसके स्तन मेरे हाथों मैंने आ चुके थे, और मैं पहुँच गया स्वर्ग वाटिका में।
धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके नाड़े की तरफ बढ़ गया। मैंने हलके से उसका नाड़ा खींच दिया। जिस काले सूट की मैं तारीफ कर रहा था वो अब बेडशीट का काम कर रहा था और उसकी लाल कच्छी आवाज़ दे दे कर मुझे बुला रही थी कि आओ और मुझे उधेड़ दो।
मेरे लण्ड का आकार जो कभी ७ इंच से बड़ा नहीं हुआ था, आज १ इंच ज्यादा होने की दौड़ में था।
वो मेरे ऊपर अपने भारी पिछवाड़े को सटा कर बैठी हुई थी। मैंने उसके नंगे स्तन अपने मुँह में लेकर जैसे हो चबाये कि वो सिस्कारियां भरने लगी, उसकी ऐसी आवाजें सुनकर मेरा बुरा हाल हो गया। मेरा लण्ड तो मानो जैसे सुन्न हो गया। बस मुझे तो उसका भरा हुआ शरीर ऐसे लग रहा था कि एक एक हिस्सा खा जाओ।
उसकी मेमने की तरह गदराई हुई फुदी के सुनहरे बाल !
उन्हें अपनी जीभ से सहलाते हुए मैं फुदी के द्वार पर पहुंचा, पर वहीं पर उसने मुझे रोक लिया और वो सी सी सी करती हुई मुझसे लिपट गई, मेरे कान में धीरे से फुसफुसाती हुई बोली- इतनी ख़ुशी इकट्ठी मत दो कि मैं संभाल न पाऊँ !
इससे पहले वो कुछ और बोल पाती उसकी आँखों से आंसू बह निकले, उधर आँखों से आंसू और इधर फुदी से आंसू !
अब मैं समझ नहीं पा रहा था मैं किन आंसुओं पर ध्यान दू..
फिर मैंने चुने फुदी के आंसू और अपनी दो उँगलियों से उसकी फुदी सहलाने लगा और उसे औंधे मुंह लेटा कर अपना लण्ड-बाबा उसकी फुदी पे लगाया। मेरा लण्ड उसके अंदर जाता गया और वो मेरी तरफ धक्के लगाते हुए और अंदर अंदर, बस थोड़ा और, सी सिस इस सी ,, उईईईम उइंमा बस थोड़ा और बस थोड़ा और,,,, आज मुझे मत छोड़ना अधूरी….
मैं बरसों की प्यासी हूँ ! मुझे भर दो अपने गरम लौड़े से…
इतना कुछ सुनने के बाद भी मेरा लण्ड था कि बस लगा हुआ था बुरी तरह से… तभी नीरू पूरा जोर लगा कर मुझे अपनी और खींचने लगी… मैं समझ गया कि वो झड़ रही है… मैंने सोचा फटाफट अपना काम भी निपटा लो वरना फिर उसे पता नहीं कब इतनी पॉवर आये, पहले तो मैं उसे खाना चाहता था, पर अब शायद वोही मुझे खा रही थी… उसकी सिस्कारियों के दौरान मेरी चमड़ी पे उसने अपने नाखूनों से कई घाव कर दिए थे, बहुत जंगली थी वो…
तो दोस्तो, मैंने कई बार मजे लिए उससे पर मैं उसे आज भी नहीं भूल पाया हूँ….. वो जहाँ भी रहे खुश रहे…हमे मिले हुए पूरा एक साल हो गया है… मैं आज भी उसे याद करता हूँ… और इसी तलाश में हूँ कि वैसी कोई मस्त फुदी फिर मिल जाए …
आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे ज़रूर लिखें… Sex Stories
ये राहुल और उसके दोस्त की बीवी की चुदाई की सच्ची कहानी Hindi porn stories है। राहुल जब बैंक में काम करता था।
उसका वह एक दोस्त बन गया मिस्टर आर (वास्तविक नाम नहीं) और वो भी पक्का। अब वो एक साथ खाते और एक साथ पीते थे।
कुछ दिनों के बाद राहुल अपने दोस्त के घर पर गया, मिस्टर आर ने उसकी मुलाकात अपनी बीवी से करवाई।
फ़िर उसका हर सन्डे को उनके यह आना जाना हो गया। राहुल ने उसकी बीवी को बहुत बार गुमसुम देखा जैसे वो अपने पति से खुश नहीं है।
उसने एक दिन जान बूझ कर ओफ़िस से छुट्टी ले ली। और मिस्टर आर के घर पर दिन में अकेले गया। उसकी बीवी उनको अकेला देख चौंक गयी।
राहुल ने कहा अंदर तो बुलाओ भाभी जी। वो अंदर गया और चाय पानी पिया। फ़िर कुछ देर बाद राहुल ने बात शुरू की और कहा भाभी आप के चहरे पर वो मुस्कान नहीं दिखाई देती।
उसने कहा- कुछ नहीं बस ऐसे ही।
उसने कहा- देखो मैं आपके दोस्त की तरह हूँ आप मुझे बताओ क्या मैं आपकी कुछ हेल्प कर सकता हूँ। उसने कहा ऐसी कोई बात नहीँ। फ़िर दुबारा उसने पूछा तब उसने कहा कि वो मुझे डांटते रहते हैं और ठीक से प्यार भी नहीं करते। मेरे दोस्त ने कहा मैं जानता था कि यही बात होगी।
उसने कहा- भाभी अब आप साफ साफ बताओ कि क्या वो आपको वो ख़ुशी पूरी तरह नहीं दे पाते।
फ़िर वो रोने लगी और कहा कि क्या बताऊँ वो ठीक तरह से नहीं कर पाते।
राहुल ने कहा कि आज कल ऐसी बहुत सी औरतें है जिनके साथ यह प्रॉब्लम है पर वो तो ऐसे नहीं रोती।
‘तो तुम ही बताओ कि मैं क्या करूं?’
राहुल ने कहा- मैं आपको वो प्यार दे सकता हूँ।
वो चौंक गई, राहुल ने कहा- इसमें कोई बुराई नहीं है सभी ऐसे ही करती हैं। आप का कोई दोष नहीं।
फ़िर उसने कहा आप बेफ़िक्र हो जाइये किसी को कानो कान खबर नहीं होगी।
उसने कहा- ऐसा पोसिबल है?
राहुल ने कहा- क्यों नहीं। दूसरे सप्ताह मैं आपके घर पर आऊँगा और आपको वो सब प्यार दूंगा बस आप तैयार रहना।
अगले सप्ताह ठीक उसी दिन वो घर पर ओफीस से छुट्टी ले कर आया। उसने हमें बताया कि मैंने नहाया और केवल पाजामा और टी शर्ट पहन कर उसके घर गया। अंदर अंडरवियर भी नहीं पहना था।
उसकी बीवी ने गेट खोला और उसे अंदर बुला लिया। फ़िर धीरे धीरे दोनों में प्यार की बातें होने लगी। फ़िर राहुल ने उसकी चुम्मी ली। वो सहम गयी पर फ़िर उसने उसकी होंठो की दुबारा चुम्मी ली, उसने अपनी आँखे बंद कर ली। दोनों चुम्मा चाटी में मस्त हो गए। एक दो मिनट तक वो दोनों चुम्मा चाटी करते रहे।
राहुल ने उसके चूचों को मसला और वो आहें भरने लगी। फ़िर कुछ देर बाद राहुल ने उसकी ब्रा उतारी और उसके चूचों को चूसने लग गया, दबाने लग गया। अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।
अब उनसे उसका पेटीकोट और फ़िर चड्ढी उतार दी वो पूरी तरह से नंगी हो गयी थी। राहुल ने भी अपने सारे कपडे उतार दिये। फ़िर दोनों में कुछ देर तक चुम्मा चाट, चूचे दबाना और उन्गल बाजी करना होता रहा।
अब दोनों का जोश उफान पर था और वो चूत की चुदाई के लिये तड़प रही थी। वो उसको पलंग पर ले गया और कोहीनूर डोट्ड नीरोध लगा कर उसकी छूत मे अपना लंड घुसेडा। वो आह ऊह करती रही, फ़िर क्या था दोनों में चूत की चुदाई का काम जोरों से चलने लगा।
राहुल ने उसकी पत्नी को पूरी तरह से चूत के चुदाई के मजे दिला दिये।
पर बाद में वो रोने लगी।
फ़िर राहुल ने उसे समझाया कि कुछ नहीं होगा और वह से चला गया। Hindi porn stories
फ़िर तो महीने में उसके दो चक्कर होने लगे उसके घर के और वो खूब चूत की चुदाई के और भाभी की चूत के चुदाई के मजे लेने लग गया। ये काफी दिनों तक चला और फ़िर एक दिन वो उसका दोस्त अपनी बीवी के साथ दूसरी जगह चला गया।
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. मैं राजकोट का रहने Sex Stories वाला हूँ. मेरी उम्र तेईस साल है और मैं एक अच्छा खासा मर्द दिखता हूँ. मेरी त्वचा भी काफी गोरी है, जो किसी भी लड़की या भाभी को आकर्षित कर लेती है.
आपको मैं अपनी पहली मगर सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ. यह कहानी दिसम्बर 2003 की है.
मैं राजकोट में अपना एक साइबर कैफे चलाता हूँ, वहां पर काफ़ी सारी लड़कियों का आना जाना रहता है. मगर मैं एक बहुत शर्मीला टाइप का बंदा हूँ, इसलिए मेरी किसी भी लड़की से बात करने की हिम्मत ही नहीं होती थी.
मुझे याद है ये काफी साल की बात है. उस दिन शाम के साढ़े सात बजे होंगे, तब मैं अपने साइबर कैफे में अकेला था. उस वक्त एक सुंदर सी लड़की अन्दर आई. उसने अपना नाम आरती बताया था.
मैंने उससे ओके कहा और इशारा किया कि किसी भी सिस्टम पर अपना काम कर ले.
वो मेरे सामने वाले कंप्यूटर पर आकर का बैठ गई थी. मैं उसे देख रहा था, वो बला की खूबसूरत माल लग रही थी. उसने शॉर्ट शर्ट और लो-वेस्ट जींस पहनी हुई थी. उसका बड़ा ही कातिलाना फिगर था. मैंने उसकी फिगर की नाप का अंदाजा 34-26-36 का लगाया था. उसके चूचे एकदम उभरे हुए थे.
कुछ मिनट बाद उसने मुझसे वो कम्प्यूटर ख़राब होने का बहाना बनाया. मैंने सोचा कि अभी तक तो सब सिस्टम सही थे, ये कैसे खराब हो गया है. मगर शायद उसने मुझे जानबूझ कर अपने पास बुलाया था. मैंने उसके करीब जाकर सिस्टम को चैक किया, तो वो बिल्कुल सही चल रहा था.
मैंने उससे कहा- क्या खराबी लग रही है. सिस्टम सही तो है?
इस पर उसने मुझसे कहा- मुझे कंप्यूटर चलाना ठीक से आता नहीं है. प्लीज़ आप मुझको थोड़ा सा सिखा दो.
अब इतनी हॉट लड़की देख कर मेरा भी मन डोल गया था.
मैंने कहा- ठीक है
जैसे ही मैं उसके बाजू में बैठा कि उसने पहले नीचे से अपने पैर को मेरे पैर पर रखा और धीरे धीरे उसको अपने पैर से सहलाने लगी. मैं तो एकदम से दंग रह गया. मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं.
मैं चुप रहा और मैंने अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई.
ये देख कर उसने धीरे धीरे करके मेरे लौड़े पर अपना हाथ रख दिया. उसका हाथ जैसे ही मेरे लंड पर आया तो मुझे एक अजीब सी सिहरन हुई और मैंने वहां से उठ कर जाने की कोशिश की.
उसने मुझे मना करते हुए मेरा हाथ खींच लिया और कहने लगी- मेहरबानी करके मुझे अकेला मत छोड़ो, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो.
मैंने कहा- ये क्या बात हुई .. अभी तो हम दोनों पूरी तरह से एक दूसरे को जानते भी नहीं हैं … और तुम मेरे से ये सब कर रही हो.
इससे आगे मैं कुछ और बोलता कि उसने मुझे गाल पर किस कर दिया और अगले ही पल मेरे होंठों से होंठ लगा कर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
बस फ़िर क्या था … मैं भी तो आख़िर मर्द ही था … मैंने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया और उसे अच्छे से किस करने लगा.
अब वो मेरी जुबान को चूस रही थी और मैं उसकी. तभी मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया, तो उसने कुछ नहीं बोला … बल्कि उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ कर खुद की गांड पर लगा दिया.
वो मुँह हटा कर मुझे देख कर जोर जोर से बोलने लगी- ओह रौनी .. प्लीज़ जोर से दबाओ आह .. और मेरे बूब्स जोर जोर से दबाओ आह कितना मजा आ रहा है.
मगर मैं डर रहा था कि कहीं कैफे पर कोई और कस्टमर न आ जाए, सो मैंने उसे वहीं पर रोका और उससे कहा- हम कहीं अकेले में आराम से मिलके एन्जॉय करेंगे. अभी इधर कोई आ जाएगा, तो सब गड़बड़ हो जाएगी.
उसने अपने टॉप को ठीक करते हुए कहा- ठीक है. मैं इसी संडे को सुबह छह बजे तुम्हारे कैफे पर आउंगी.
मैंने कहा- इतनी सुबह क्यों भला!
उसने कहा- सर्दियों के दिन हैं … सुबह सुबह का मजा ही कुछ और आएगा. वैसे भी मैं घर से सुबह घूमने के लिए निकलती हूँ, सो घर पर सबको यही पता रहेगा. फिर छह बजे थोड़ा सा अंधेरा भी होता है.
चूंकि सर्दी का मौसम था तो उसकी बात सही थी. मैं उसकी तरफ देखने लगा.
उसने कहा कि तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना!
मैंने सोचा और अपने आपसे भी कहा कि ऐसा मौका फ़िर नहीं मिलेगा … साली खुद ही चुत चुदने मचल रही है. मैंने कहा- ठीक है मैं आ जाऊंगा.
फ़िर उसने मुस्कुराते हुए मुझे एक किस की और गांड मटकाते हुए मेरे कैफे से निकल गई.
दो दिन बाद संडे था. मैं सुबह सुबह जल्दी पांच बजे उठा और फ्रेश होकर एक चाय पी और बाइक उठा कर फुल स्पीड से कैफे आ पहुंचा.
मैंने कल रात को ही पूरी व्यवस्था कर दी थी. एक बार अन्दर जाकर फिर से सब ठीक किया. थोड़ा रूम फ्रेशनर भी स्प्रे कर दिया और उसके आने का इन्तजार करने लगा. मैं कैफे की शटर आधी उठा रखी थी ताकि उसे मेरे आ जाने का अहसास हो जाए.
तभी वो शटर उठा कर अन्दर आ गई और आते ही मुझसे लिपट गई.
मैंने कहा- एक मिनट शटर तो बंद कर लेने दो.
वो अलग हुई, तो मैंने शटर बंद कर दी और उसकी तरफ घूम गया. वो मुझे देख कर सीधे आकर मुझसे लिपट गई.
मैंने ध्यान से देखा वो जॉगिंग सूट में आई थी. उसके खुले हुए लंबे बाल उसकी खूबसूरत जवानी को और भी ज्यादा मदहोश कर देने वाली बना रहे थे.
हम दोनों ने करीब दस मिनट तक किस किया. चूमाचाटी के दौरान एक बार तो उसने मुझे काटा भी, मगर मैंने कुछ नहीं कहा. वो काफी गरम हो रही थी.
मैंने उसके टॉप की जिप खोली, तो उसने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी थी.
जैसे ही मैंने उसके दूध दबाए, तो वो मादक सिस्कारियां भरने लगी- आह जोर से … और जोर से!
उसके चूचे काफी नर्म थे. मैंने उसका टॉप खोल दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी. उसकी चूचियां हवा में एकदम से फुदकने लगीं. मैंने उसका एक निप्पल मुँह में ले लिया.
बदले में उसने मेरी गांड पर जोर से दबाते और कहा- आह मेरे राजा और जोर से चूस ले इसको.
फ़िर मैं उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसता और चूमता हुआ उसके पेट तक आ गया. कुछ ही पलों के बाद मैंने उसके पैंट और पैंटी को भी उतार फैंका.
तभी उसने कहा- एक मिनट.
मैं रुका, तो उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे हर जगह पागलों की तरह चूमने लगी. अब चुदास बढ़ी … तो मैंने भी एक दो बार उसके निप्पल को काटा.
फिर वो नीचे बैठ कर तुंरत ही मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी. एक मस्त लौंडिया के मुँह में अपने लंड का अहसास पाते ही मैं अपने होश खो बैठा. ऐसा आनन्द आ रहा था मानो मैं किसी जन्नत की हूर से अपने लंड को चुसवा रहा हूँ.
मैंने आह भरते हुए कहा- आह जान अब और मत तड़पाओ … तुम अकेली अकेली मजा मत लो. मुझे भी मजा चाहिए.
वो तुंरत समझ गई और सोफे पर लेट गई. उसने मुझे अपने ऊपर उल्टा लेटा दिया. अब मेरे मुँह में उसकी चुत थी. मैं चुत पर टूट पड़ा. वो लंड को कुल्फी के जैसे चूसने लगी. उसे जो चाहिए था, उसे मिल गया और मुझे जो चाहिए था, मुझे मिल गया था. हम दोनों 69 में आकर मस्त मजा ले रहे थे.
सच में यार क्या मलाईदार चूत थी उसकी .. लगता था उसने अभी सुबह ही चुत की शेव की हो. उसकी चुत काफी गर्म भी थी और उसने चुत पर कोई मस्त स्वादिष्ट सा फ्लेवर भी लगाया हुआ था.
मैंने तुंरत ही अपनी जुबान नुकीली की और किसी पागल कुत्ते की तरह चुत चाटने लगा. मेरी जीभ उसकी चुत में अन्दर भी जाने लगी थी. वो भी काफी मजे से मेरा लौड़ा चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया और उसने बड़े मजे से मेरे लंडरस को चाट लिया. उसने मेरे वीर्य को पूरा का पूरा खा लिया था. एक बूंद भी बेस्ट नहीं जाने दी थी.
फ़िर पांच मिनट के बाद उसने फ़िर से मेरे लौड़े को चूस कर गरम किया और बोली- अब मेहरबानी करके मुझे जल्दी से चोद दो … मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने कहा- ठीक है रानी.
उसकी टांगें चौड़ी करके मैंने अपने कंधे पर रख लीं और अपना लौड़ा अन्दर पेलने के लिए कोशिश की. मगर लंड चुत के अन्दर नहीं गया. उसे दर्द भी हो रहा था.
उसे दर्द से कराहते हुए देख कर मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- एक मिनट रुको.
उसने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर मेरे लौड़े पर लगाया और कुछ अपनी चूत पर भी लगा लिया. फिर अपने हाथों से अपनी चूत को चौड़ा करके बोली- अब आ जाओ मेरे राजा.
मैंने कहा- हां ये ले मेरी रानी.
ये कहते हुए मैंने अपने खड़े लंड को एक ही झटके में पूरा का पूरा अन्दर डाल दिया.
लंड लेते ही वो चिल्लाने लगी- उई मां … मर गई … मेरी फट गई.
मैंने कहा- चिल्लाओ मत … कोई आ जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी.
वो अपनी चीख दबाते हुए बोली- दर्द बहुत हो रहा है रौनी … तुम एक काम करो तुम मेरे दर्द की परवाह किये बिना जल्दी से लंड को दो तीन बार अन्दर बाहर करो.
मैंने वैसे ही किया.
वो कराहते हुए अपने मुँह बंद किये हुए मेरे लंड के प्रहार झेलती रही.
कोई आठ दस धक्कों के बाद उसका दर्द जाता रहा. अब वो अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदवाने लगी. मैं भी उसके मम्मों को दबा रहा था, उसे किस कर रहा था.
थोड़ी देर के बाद वो बोली कि मुझे तुम्हारे ऊपर आना है.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं लंड खींच कर उठा और सोफे पर लेटने जा रहा था कि तभी उसे न जान क्या सूझा और वो मेरी गांड में उंगली डालने की कोशिश करने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
वो हंसने लगी और बोली- चलो लेट जाओ, मुझे रायडिंग करने दो.
मैंने कहा- नहीं, पहले मुझे तुम्हारी गांड मारने देनी होगी.
वो बोली- आज नहीं … फ़िर कभी ले लेना.
वो मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गई और लंड पकड़ कर चुत में फंसा कर बैठती चली गई.
आह क्या गजब की बला थी वो .. मेरे ऊपर क्या मस्त माल लग रही थी. लंबे बाल और हिलते हुए चुचे मुझे काफी मदहोश किए जा रहे थे.
करीब दस मिनट के बाद मेरा पानी निकलने वाला था.
मैंने पूछा- क्या करूं?
उसने कहा- अन्दर नहीं निकालना. मुझे पीना है … तुम्हारा गाढ़ा पानी बहुत मस्त स्वाद देता है.
मैंने कहा- ठीक है.
वो उठ कर अलग हुई और उसने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया. अगले ही पल मेरा रस छूट गया और उसने लंड का सारा पानी पी लिया.
चुदाई के बाद हम दोनों ने करीब आधे घंटे तक एक दूसरे को चूमा सहलाया और अपने अपने कपड़े पहने.
मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरा, तो उसने वादा किया कि वो मुझे अपनी गांड मारने देगी.
मेरे प्यारे दोस्तो, अन्तर्वासना के लिए ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, अगर कोई भूल हुई हो, तो प्लीज़ नजरअंदाज कर देना. कमेंट्स करना न भूलें. Sex Stories
मैं आप लोगों को अपने साथ घटी Hindi Porn Stories एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ।
मैं लुधियाना से अनीश हूँ, ६ फीट का ख़ूबसूरत, आकर्षक… और ८.३” लम्बे और काफी मोटे लण्ड का मालिक !”
तो दोस्तों, असली बात पर आएँ
मुझे लड़कियों की चूचियों और मोटी गाँड देखने का बड़ा शौक है। एक साल पुरानी बात है जब मैं एयर-हॉस्टेस एकेडमी में डिप्लोमा कर रहा था। आपको तो पता ही है कि लड़कियाँ मिनी-स्कर्ट में आतीं हैं, मेरे बैच में भी बहुत सी सेक्सी लड़कियाँ थीं। उनमें से मुझे एक लड़की जिसका नाम सरब था, बहुत अच्छी लगती थी, वह पहले दिन से ही मेरे साथ बैठती थी।
जब भी वह बैठने के लिए झुकती, उसके मम्मे मेरी आँखों के सामने आ जाता थे। उसके मम्मों का आकार ३६:२८:३२ होगा। जब भी वह मेरी तरफ ऐसे झुकती तो मेरे अन्दर कुछ होने लगता और मेरा लण्ड खड़ा होने लगता। दो महीने ऐसी ही बीत गए, रोज़ उसके बारे में सोच-सोचकर मैं मुट्ठ मारने लग गया कि कब उसके मम्मों के पूरे दर्शन होंगे।
एक दिन जब वह मेरे पास बैठने लगी तो उसका हाथ मेरे लण्ड पर लग गया, उसे जैसे करंट जैसा लगा हो। उस समय क्लास में कोई और नहीं था, वह मुझे घूर कर देखने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने कोई उत्तर नहीं दिया। उसे भी शायद अच्छा लगा, क्योंकि उसने भी कहाँ किसी का लण्ड पकड़ा होगा। मेरे अन्दर तो खुशी की लहर दौड़ गई कि किसी लड़की का हाथ तो लगा मेरे लण्ड पर, नहीं तो बेचारे को मसल-मसल कर इसका रस निकालना पड़ता और पहली बार किसी के हल्का सा हाथ लगाने से मेरी फ्रेंची गीली हुई। उस दिन मैंने कमरे में जाकर २ बार मुट्ठ मारी।
वैसे तो सरब भी मुझसे प्यार करने लग गई थी पर हम दोनों ही एक दूसरे को कहने से डरते थे। पर उस दिन उसका फोन आया, वह कहने लगी कि यार “आई एम रियली वेरी सॉरी,”
मैंने कहा- किस बात की सॉरी यार, दोस्तों में कोई सॉरी नहीं होती ! पर वैसे किस बात की सॉरी माँग रही हो?
उसने कहा कि जब मैं तुम पर गिर गई थी तो तुम्हें बड़ा दर्द हुआ होगा क्योंकि वह तो तुम्हारे शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा है, तुम चिल्लाए भी थे। मैंने सोचा अब तो लाईन साफ़ है बच्चू, बुला ले डेट पर।
मैंने कहा – “एक बात पर सॉरी मिलेगी, जब तुम मेरे साथ कल कॉफ़ी पीने चलोगी, क्लास शुरू होने से पहले !”
वह मान गई, मैंने सोचा मैं कल उसको “आई लव यू” कह ही दूँगा। उधर भी वही बात चल रही थी। फिर अगले दिन जब सुबह हुई, मैंने उठ कर पहले शेव की और नहाने के लिए गया, नहा-धो कर नाश्ता करके मैं उसके फोन का इन्तज़ार करने लगा। मेरे साथ चार लड़के रहते थे। सबसे देर से मैं ही उठता था, वे सब कहने लगे, भाई आज तू इतनी ज़ल्दी उठकर कहाँ जा रहा है, तेरी क्लास तो ११ बजे होती है। मैंने कहा कि कोई ज़रूरी काम है। फिर उसका फोन आया कि मैं तुम्हारा १० बजे कॉफी कैफ़े डे में इन्तज़ार करूँगी। मैं भी अपनी बाईक पर उसके मिलने के लिए निकल पड़ा, पहले तो मॉल रोड से उसके लिए एक ग़ुलाब लिया फिर एक आई लव यू वाली ग्रीटिंग कार्ड ली।
फिर मैं जब कैफ़े पहुँचा तो वो क्या क़यामत लग रही थी, आसमानी नीले रंग की डॉप और सफ़ेद जीन्स। मैंने उसको जाकर गुलाब दिया, वो भी समझ गई कि आज कुछ होने वाला है जब ग्रीटिंग दिया तो समझ गई कि मैं उससे प्यार करता हूँ। उसने कहा कि तुमने तो मेरे दिल की बात जान ली। मैंने कहा कि दो प्यार करने वाले ही एक दूसरे की बात समझ पाते हैं।
उसने कहा- आई लव यू डार्लिंग !
मैंने भी जवाब दिया। मैं कुछ ज्यादा ही रोमांटिक होता जा रहा था कि आज तो मेरे लण्ड को किसी गुफ़ा में जगह मिल ही जाएगी। मैंने उससे कहा कि चलो मेरे कमरे पर चलते हैं, मैं तुम्हें बहुत प्यार करना चाहता हूँ, तो उसने कहा कि ज़नाब के इरादे तो नेक हैं। खुजली तो उसे भी होने लगी थी क्योंकि उसे भी तो लण्ड मिलने वाला था, तो वह इन्कार नहीं कर पाई, उसने हाँ कर दी।
हम दोनों बाईक पर मेरे कमरे की ओर निकले, वो मेरे पीछे ऐसे बैठी, मानों मेरी पत्नी हो। मैंने २-३ बार ज़ोर की ब्रेक लगाई, उसके मम्मे मेरे साथ टकराए और मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख लिया और ज़ोर से दबाने लगी। मेरा लण्ड पैन्ट को फाड़कर बाहर आने को तैयार हो गया।
जैसे ही हम पहुँचे, तो मैंने उससे पहले अन्दर जाने को कहा, फिर बाद में मैं गया और मैंने मुख्य द्वार बन्द किया और उसको मेरे कमरे में बिठाया और पूछा – तुम कुछ लोगी क्या? उसने कहा – जूस चलेगा। मैंने फ्रिज़ में से रियल जूस की बोतल निकाली और हम दोनों जूस पीने लगे, उसके जूस पीते-पीते थोड़ा सा जूस उसके होठों के नीचे आ गया। मैंने मौक़ा न गँवाते हुए जूस की एक बूँद साफ करने के बहाने उसके होठों को भी चूम लिया और उसके होंठ चूसने लगा।
मैंने १० मिनट तक उसको नहीं छोड़ा और उसके मम्मों में हाथ डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। उसने भी मेरी ज़िप खोल ली और लण्ड राजा को बाहर निकाल लिया। मैंने उसकी टॉप उतार दी, उसके बाद उसके जीन्स भी। अब वह सिर्फ ब्रा और पैण्टी में थी, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए, मैं अब अपनी फ्रेंची में था, मैंने उसकी ब्रा उतारी तो उसके बड़े-बड़े मम्मे उछल कर बाहर आए। उसने जब मेरी फ्रेंची उतारी तो देखकर डर गई कि इतना बड़ा लण्ड ! उसने देर ना करते हुए मेरा लण्ड अपने मुँह में डाल लिया और ऐसे चूसने लगी मानों लॉलीपॉप हो।
मैंने उसकी पैण्टी उतारी तो उसकी शेव की हुई चिकनी चूत मेरे सामने आ गई और फिर हम ६९ की स्थिति में आ गए। मैंने जब उसकी चूत को देखा तो वह पानी छोड़ रही थी कि जैसे वह मेरा ही इन्तज़ार कर रही हो। मैं बड़े ही प्यार से उसकी चूत चाटने लगा, मुझे इतना मज़ा आया कि मैं आपको बता नहीं सकता कि मुझे क्या हो रहा था।
मेरा रस निकलने वाला था, और इतने में सरब दो बार झड़ चुकी थी, उसका रस नमकीन सा था, मेरी तो जैसे जन्मों की प्यास मिट गई हो। मैंने ३ बार उसका रस पिया, जैसे ही मेरा रस निकलने वाला था मैंने बाहर निकालना चाहा पर उसने मुँह से निकालने ही नहीं दिया, मेरे लण्ड की पिचकारी उसके गले में जा लगी, गरमा-गरम रस पीकर उसे बहुत मज़ा आया। उसने मेरे लण्ड को चाट-चाटकर साफ कर दिया। मैंने फिर से उसकी चूत चूसनी शुरू कर दी। वह १ बार फिर झड़ गई, मैंने फिर उसका सारा रस पी लिया।
फिर मैं अपना ८ इंच का लण्ड चूत में डालने लगा तो वह चिल्ला उठी, क्योंकि उसने कहा कि कोई भी लण्ड अपनी चूत में नहीं लिया था। मैंने मुश्किल से ४ इंच ही डाला था कि उसकी चूत खून से भर गई, और वह रोने लगी।
मैंने उसे चुप करवाया और उसे हौसला दिया, और फिर एक ही झटके में सारा लण्ड डाल दिया और मेरे बिस्तर का गद्दा खून से भर गया, वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। मैं २ मिनट के लिए रूका, ,वह भी शान्त हो गई थी, अब उसे भी मज़ा आने लगा था, वह भी अपनी गाँड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी थी। फिर मेरा रस निकलने लगा तो मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया। सरब ने वक्त बर्बाद न करते हुए मेरा लण्ड अपने मुँह में डाल लिया और मेरे सारा रस पी गई। फिर मैंने उसकी दो बार और चुदाई की फिर हम १ घण्टे ऐसे ही लेटे रहे, उसके बाद उठे फिर वॉशरूम में गए, दोनों साथ में ही नहाए। फिर उसको १ बार और चोदा शैम्पू लगा के, नहा के हम फिर खाना खाने के लिए होटल में गए, उसके बाद मैंने उसे उसके घर पर छोड़ दिया। उसके बाद मैंने उसकी दो बार चुदाई और की। Hindi Porn Stories
Xxx साली की चूत का मजा लिया मैंने अपने ही घर में! साली मेरे यहाँ रहने आई थी कुछ दिन के लिए. मैंने उसे छेड़ा तो उसके भी मुझे छेड़ा. मैं समझ गया कि माल गर्म है.
मेरा नाम आकाश है दोस्तो. मैं 30 साल का एक हत्ता कट्टा गोरा चिट्टा नौजवान हूँ।
मेरी शादी दो साल पहले दीक्षा नाम की एक लड़की से हुई है।
दीक्षा एक बहुत ही सुन्दर सुशील और सरल स्वभाव वाली लड़की है।
वह एक वर्किंग वुमन है।
Xxx साली की चूत का मजा मुझे मेरे बीवी की बहन ने दिया.
मैं आपको अपने बारे में थोड़ा बता दूँ।
मैं हैंडसम हूँ, स्मार्ट हूँ और घुंघराले वालों वाला हूँ।
कॉलेज की दिनों में मुझे सेक्स में बहुत ज्यादा मज़ा आता था।
मैं लड़कियों से खूब हंस हंस कर बातें करता था और मजे लेता था.
चूँकि मैं पढ़ने में बहुत अच्छा था और स्पोर्ट्स में भी बहुत अच्छा था तो हमारे कॉलेज की लड़कियां मुझ पर मरा करती थीं और मेरे आगे पीछे घूमा करती थी.
मैं भी मौके के फायदा उठाया करता था।
धीरे धीरे मैं लड़कियों को पटाने लगा; उन्हें अपनी मोटर साइकिल पर बैठा बैठा कर घुमाने फिराने लगा।
फिर आहिस्ते आहिस्ते उन्हें अपना लण्ड पकड़ाने लगा।
मुझे लड़कियों को लण्ड पकड़ाने में बड़ा मज़ा आता था तो मैं बहाने से लड़कियों को सिनेमा दिखाने ले जाता था और वहां सबसे पीछे की सीट पर बैठ कर लड़कियों को अपना लण्ड पकड़ाया करता था और उनकी चूचियाँ मसला करता था।
एक बार फरीदा नाम की एक लड़की मुझे अपने पैसों से सिनेमा दिखाने ले गयी।
हम दोनों सबसे पीछे की सीट पर बैठ गए।
फिल्म फ्लॉप थी इसलिए कोई भीड़ तो थी नहीं।
जैसे ही हाल में अँधेरा हुआ वैसे ही उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया।
वह लण्ड खूब प्यार से हिलाती रही, सहलाती रही और मेरे कान में गन्दी गन्दी बातें मुझे सुनाती रही।
फिर वह मुझे बाहर लेडीज टॉयलेट में ले गयी और कमोड पर अपनी चूचियाँ खोल कर बैठ गयी।
उसने मुझे अपने सामने खड़ा किया, मेरी पैंट खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया।
फिर वह बड़े प्रेम से मेरा लण्ड चाटने और चूसने लगी।
मुझे लण्ड चाटवाने और चुसवाने में मज़ा आने लगा।
फिर उसने लण्ड मुट्ठी में लिया और मुट्ठ मारने लगी।
लण्ड ने कुछ ही देर में वीर्य उगल दिया जिसे वह चट कर गई।
यह देख कर मुझे उससे प्यार हो हो गया।
मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया।
सिनेमा तो देखना ही नहीं था तो हम दोनों फिर वापस आ गए।
ऐसा मैंने कई लड़कियों के साथ किया और सबको लण्ड पकड़ाने का मज़ा लिया।
मेरी शादी के पहले मेरी नौकरी लग गयी।
मैं बहुत खुश हुआ।
लेकिन शादी के बाद भी मेरा लड़कियों को लण्ड पकड़ाने का सिलसिला रुका नहीं।
मैं अभी भी चुपके चुपके लड़कियों को लण्ड पकड़ा ही देता हूँ।
एक दिन अचानक मेरे घर में मेरी सगी साली साक्षी आ गई।
मैं तो उसे देख कर हैरान हो गया और मस्त भी हो गया।
मुझे उसे देखे दो साल हो चुके थे।
अपनी शादी के बाद आज पहली बार उसे देख रहा था।
वह 21 साल की थी।
उसने साड़ी और डीप नेक का स्लीवलेस ब्लाउज़ पहना हुआ था. ब्लाउज़ के अंदर से उसकी छोटी सी ब्रा का दायरा भी साफ़ साफ़ दिख रहा था।
उसकी चूचियों का साइज साफ़ साफ़ झलक रहा था।
चूचियाँ तो बहनचोद बाहर निकलने के लिए बड़ी बेताब हो रही थीं।
मुझे यह जानने में ज़रा भी देर नहीं लगी कि उसके मम्मे मेरी बीवी के मम्मों से बड़े बड़े हैं।
मेरा तो मन हुआ कि मैं अभी इसके मम्मों के बीच अपना लण्ड घुसेड़ दूं।
उसकी खुली खुली बाहें बड़ी सेक्सी लग रहीं थीं और उसकी बाहों की गोलाई तो बड़ा गज़ब ढा रही थी।
उसके बड़े बड़े चूतड़ देख कर, पीछे से उसकी आधे से अधिक नंगी पीठ देख कर, उसकी मोटी मोटी जाँघों का अंदाजा लगा कर मेरा तो लण्ड साला आपे से बाहर हुआ जा रहा था।
लग रहा था कि साला चड्डी फाड़ कर बाहर निकल आएगा।
मैं उसकी चूत और गांड की कल्पना में खो गया.
उसका गोरा गोरा गदराया हुआ बदन मुझे अपनी तरफ खींच रहा था।
उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखें गोल चेहरा और गुलाबी होंठ मेरी जान ले रहे थे।
उसने जब बड़े प्यार से मुझे जीजा जी कहा तो मेरा मन हुआ कि मैं उसे अपनी गोद में उठा लूं।
बस मैं अपनी साली साक्षी के आगे पीछे घूमने लगा, उससे बातें करने लगा और वह सब करने लगा जो वह चाहती थी।
उधर मेरी बीवी दीक्षा ने अपनी बहन के आने पर उसको घुमाने फिराने के लिए 3 दिन की छुट्टी ले ली।
मुझे भी 3 दिन की छुट्टी लेनी पड़ी।
हम तीनों खूब घूमते फिरते रहे।
इन तीन दिनों में मैंने उसे खुश करने के लिए बहुत कुछ किया।
मैं साली जी के साथ दूसरे ही दिन से थोड़ी थोड़ी छेड़खानी करने लगा।
मेरी बीवी जब बाथ रूम में होती या टॉयलेट में होती या अकेली किचन में होती तो मैं साली का कभी हाथ पकड़ लेता, कभी उसकी चुम्मी ले लेता और कभी उसकी चूचियाँ दबा देता।
वह भी जवाब में कभी प्यार से अपना कंधा मेरे कंधे पर मारती, कभी मुझे अपने कूल्हे से छू लेती, कभी मेरी जांघ पर हाथ रख देती तो कभी मुंह बना बना कर जबान निकाल निकाल कर मुझे चिढ़ाती।
वह भी मुझ पर डोरे डालने लगी जैसे मैं उस पर डोरे डाल रहा था।
लेकिन हम दोनों को कभी अकेले में रहने का मौक़ा नहीं मिला इन 3 दिनों में।
एक दिन जब मैं तौलिया लपेट कर एकदम नंगे बदन नहाने जा रहा था तो साक्षी वरांडा में बैठी हुई सब्जी काट रही थी।
मेरी बीवी अंदर किचेन में नाश्ता बना रही थी।
मेरा लण्ड बहन चोद खड़ा था।
मुझे शरारत सूझी।
मैं किचन की तरफ पीठ करके साक्षी के आगे खड़ा हो गया और अपनी तौलियां के दोनों सिरे फैलाकर अपना नंगा लण्ड उसे दिखाते हुए कहा- लो साक्षी, ज़रा इधर देखो!
उसने देखा तो बोली- बाप रे बाप … इतना बड़ा? इतना मोटा?
मैं फिर बाथ रूम में चला गया।
उधर किचन से मेरी बीवी बोली- अरी साक्षी, क्या बड़ा है और क्या मोटा है?
वह बहाना बनाती हुई बोली- दीदी, गोभी के फूल में देखो न कितना बड़ा और कितना मोटा कीड़ा है।
मैं यह सुनकर बहुत खुश हुआ।
आखिरकार मैंने साली जी को अपना लण्ड दिखा ही दिया।
मुझे मालूम हो गया कि आग अगर मेरे लण्ड में लगी है तो उसकी चूत में भी लगी है।
चौथे दिन मेरी बीवी काम पर चली गयी और मैं भी काम पर चला गया।
लेकिन मैं एक घंटे के बाद वापस घर लौट आया।
साली जी ने जैसे ही दरवाजा खोला तो मैंने दरवाजा बंद कर उसको अपनी बाँहों में भर लिया, चिपका लिया उसे अपने बदन से!
वह बोली- अरे जीजा जी, ये क्या कर रहे हो ? कोई देख लेगा तो?
मैंने कहा- कोई नहीं देखेगा। यहाँ और कोई नहीं है हम दोनों के अलावा। मैं कई दिन से तड़प रहा हूँ। आज मौक़ा मिला है मेरी रानी!
वह बोली- अगर दीदी को मालूम हो गया तो?
मैंने कहा- उसे मालूम ही नहीं होगा। तुम चिंता न करो।
वह मुझसे अपने आप को छुड़ाती रही लेकिन मैं उसे छोड़ने के मूड में कतई नहीं था।
मैंने उसे कस के चिपका लिया था और उसकी ताबड़तोड़ चुम्मियाँ ले रहा था।
वह बोली- अच्छा रुको, मुझे बाथरूम लगी है।
तब फिर मैंने उसे छोड़ दिया।
उसने एक ताला उठाया और बगल वाले छोटे दरवाजे से बाहर जाकर मेन दरवाजे पर ताला लगा दिया और फिर वापस आ गयी।
अंदर से छोटा वाला दरवाजा बंद कर लिया।
उसने कहा- अब अगर जो भी आएगा वह ताला देख कर चला जायेगा। अगर दीदी आ गयी तो वह मुझे फोन करेगी, तब तुम छत से कूद कर बाहर निकल जाना और मैं कह दूंगी की मैंने अपनी सेफटी के लिए ताला बंद किया था।
मैंने उसकी चुम्मी फिर ली और कहा- हाय मेरी रानी, तुम तो सच में बड़ी चालाक हो, बड़ी बुद्धिमान हो और बड़ी चालू चीज हो। अब तो मैं बिना तुम्हे चोदे जाऊंगा नहीं। आज मैं तुम्हे खूब जी भर के चोदूंगा मेरी रानी!
वह नखरा करती हुई बोली- तुम मुझे बहनचोद तभी चोद पाओगे जब मैं चुदवाऊंगी. वरना मुझे कभी नहीं चोद पाओगे.
मैंने कहा- तो फिर चुदवा लो न मुझसे मेरी रानी। मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।
मैं उसके कपड़े खोलने लगा।
वह बोली- नहीं जीजा, मुझे नंगी मत करो, मुझे शर्म आ रही है।
मैंने कहा- अब तुम जवान हो गयी हो यार! शर्म वरम छोड़ो। मैं तेरा जीजा हूँ कोई बाहर नहीं हूँ। जब तेरी बहन मेरे आगे नंगी हो जाती है तो तुम भी मेरे आगे नंगी हो जाओ मेरी रानी।
मैंने उसकी चूचियाँ खोल डाली तो मेरे लण्ड में करंट लग गया।
फिर मैंने उसका पेटीकोट भी खोल डाला तो उसने अपनी चूत दोनों जांघों दबाकर बैठ गयी।
मैंने कहा- अरे यार, अपनी मस्तानी चूत के दर्शन तो कराओ मेरी साली जी! तुम तो गज़ब की खूबसूरत हो। मैं तेरी चूत देखने के लिए तड़प रहा हूँ।
मैंने उसकी जांघें खोल कर अलग कर दी और झुक कर उसकी चूत की कई बार चुम्मी ले ली।
वह भी गनगना उठी।
उसको भी जोश आ गया।
वह भी उत्तेजित हो गई तो उसने मेरे कपड़े खोल कर मेरा नंगा खड़ा लण्ड पकड़ लिया और उसे चूम कर बोली- हाय दईया, बड़ा मोटा तगड़ा है तेरा भोसड़ी का लण्ड जीजू! उस दिन जब मैंने तेरा लण्ड देखा था तो मुझे एक नजर में पसंद आ गया था। मेरी चूत बुरचोदी गीली हो गयी थी। तब से मेरी आँखों में तेरा लण्ड ही बसा है जीजू! कितना प्यारा और कितना मस्त लौड़ा है तेरा!
मैंने कहा- आई लव यू माय डियर साक्षी! ।
वह बोली- आई लव यू जीजू वैरी मच एंड आई लव योर लण्ड टू!
फिर हम दोनों नंगे नंगे बेड पर गए और एक दूसरे के सामने 69 बन कर लेट गए।
मैं उसकी बुर चाटने लगा और वह मेरा लण्ड!
बुर के साथ मैं उसकी खूबसूरत जांघें भी चाटने लगा।
पोले पोले दांतों से जांघें प्यार से काटने भी लगा।
उसकी मस्तानी गांड भी चाटने लगा, चूतड़ों पर प्यार से थप्पड़ मार मार कर मज़ा लेने लगा।
फिर मैं दोनों उसके दोनों निपल्स भी मसलने लगा।
वह भी मेरे नंगे जिस्म पर सब जगह फिराने लगी, मेरी जाँघों पर मेरे चूतड़ों पर फिर मेरे पेल्हड़ भी प्यार से चूमने चाटने लगी।
मेरे लण्ड पर थप्पड़ मारकर बोली- तू भोसड़ी का बड़ा प्यारा है यार! कितना मोटा है तू … कितना लंबा है तू! तू मेरी जान जान ले लेगा। मुझे तुम पर बड़ा प्यार आ रहा है।
मैंने कहा- मुझे भी रहा है साक्षी!
वह बोली- अरे जीजू, मैं तुमसे नहीं आपके लण्ड से बात कर रही हूँ। मुझे लण्ड से बात करना बड़ा अच्छा लगता है। मैं जब किसी का लण्ड पकड़ती हूँ तो लण्ड से बातें जरूर करती हूँ। मुझे लण्ड से बतलाना बड़ा अच्छा लगता है।
मैंने पूछा- तुम अब तक कितने लण्ड पकड़ चुकी हो साक्षी?
वह बोली- लण्ड तो मैंने बहुत पकड़े हैं जीजा जी, पर किसी मादरचोद का लण्ड इतना जबरदस्त नहीं था जितना आपका है। मुझे तो आपके लण्ड से मोहब्बत हो गई है जीजा जी।
तब तक मैं बहुत जोश में आ गया था.
मैंने उसे बेड कोने में घसीटा और उसकी टांगें फैला दीं और मैं नीचे खड़ा हो गया.
मेरा लण्ड उसकी चूत के सामने आ गया।
मैंने लण्ड गच्च से पेल दिया लण्ड अंदर!
लण्ड सरसराता हुआ अंदर पूरा घुस गया।
उसके मुंह से उफ निकला, वह भी मजे से चुदवाने लगी।
मुझे अहसास हुआ कि वह पहले से चुदी हुई है।
लेकिन मुझे उसे चोदने में मज़ा आने लगा।
मैं स्पीड बढ़ाता गया और वह भी अपनी गांड उचका उचका कर चुदवाती गयी।
उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ मेरी आँखों के सामने नाचने लगीं।
मैं उन चूचियों पर बार बार प्यार से हाथ मारने लगा।
वह बोली- हाय मेरे जीजू, मेरे राजा, आज मुझे खूब अच्छी तरह से चोदो, सच पूछो तो मैं तुमसे चुदवाने ही आयी हूँ। आपके लण्ड का मज़ा लेने आई हूँ। आपका लण्ड अपनी बुर में ठोकवाने आई हूँ. तुमसे चुदने आयी हूँ मेरे भोसड़ी के जीजू! मुझे रंडी की तरह चोदो, मुझे हर रोज़ चोदो, मुझे चोद चोद के रंडी बना दो। मैं बुरचोदी बहुत चुदक्कड़ लड़की हूँ। हर रोज़ लण्ड लेती हूँ। हर रोज़ चुदवाती हूँ। फाड़ डालो मेरी बुर … चीर डालो मेरी चूत! वॉवो हूँ हो हूँ हो बड़ा !अच्छा लग रहा है. ही हूँ ही हो चोद हाय रे … क्या लौड़ा है क्या मस्त चुदाई है. वाह, मज़ा आ गया. और चोदो दिन रात चोदो मुझे। खुल्लम खुल्ला चोदो मुझे … तेरी बहन का भोसड़ा जीजू। मुझे चोदे जाओ। तेरी बहन की बुर। तुम ही मेरे मरद हो यार। लण्ड पेल पेल कर चोदो!
साक्षी सच में चुदाने में बड़ी मस्त थी।
मेरी साली के साथ पहली चुदाई थी तो न वह बड़ी देर तक रुक सकी और न मैं।
वह भी खलास हो गयी और मैं भी।
तब वह मेरा झड़ता हुआ लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी।
फिर मैं नहा धोकर फ़ौरन अपने ऑफिस चला गया।
शाम को मैं अपने ऑफिस से आ गया और मेरी बीवी अपने ऑफिस से!
हम लोग ऐसे मिले जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
आते ही मेरी बीवी ने बताया- अरे सुनो, आज जेठानी जी का फोन आया था। कल उसके बेटे का मुंडन संस्कार है। उसमें हम सबको सवेरे से ही जाना है। हमारे साथ कुछ और भी लोग हैं जो चलेंगे।
मैंने कहा- ठीक है, मैं कल की छुट्टी ले लूंगा।
मेरे भाई साहब का घर यहाँ से 12 किलोमीटर दूर है।
सवेरे सवेरे हम सब तैयार हो गए और गाड़ी में बैठ गए।
तब तक कुछ और भी लोग आ गए तो मेरी बीवी ने कहा- साक्षी, तुम अपंने जीजू के साथ मोटर साइकिल से आ जाना. अब कार में तो जगह है नहीं।
साक्षी ने कहा- ठीक है दीदी, मैं जीजू के साथ आ जाऊंगी, आप लोग चलिए।
उन लोगों के जाने के बाद साक्षी मुझसे लिपट गयी और बड़े सेक्सी अंदाज़ में बोली में बोली- अब तो मैं तुमसे चुद कर ही जाऊंगी जीजू! तेरे लण्ड का मज़ा लेकर ही जाऊंगी जीजू!
मैंने भी हंस कर कहा- हां हां मेरी रानी, मैं भी तुझे चोद कर ही जाऊंगा। तेरे चूत का मज़ा लेकर ही जाऊंगा।
फिर क्या … उसने अपने कपड़े उतार दिया और मैंने अपने कपड़े!
वह मेरे आगे नंगी हो गयी और मैं उसके आगे नंगा हो गया।
साली मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं उसके नंगे बदन से खेलने लगा।
मैंने कहा- साक्षी, आज मैं तुम्हे पीछे से चोदूंगा। डॉगी स्टाइल में चोदूंगा।
वह बोली- हां हां, बिल्कुल चोदो। किसी भी स्टाइल में चोदो, मगर चोदो और खूब जम कर चोदो।
मैंने सच में उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से पहले उसकी चूत में उंगली डाल कर खूब गर्म किया।
वह भी इतनी मस्त जवान है कि उसकी चूत हमेशा गीली ही रहती है, हमेशा गर्म ही रहती है।
मैंने जैसे ही लण्ड घुसेड़ा तो वह अंदर तक घुसता ही चला गया।
वह भी अपने दोनों हाथ नीचे जमीन पर रखे हुए अपनी गांड को आगे पीछे करती हुई बड़ी मस्ती से चुदवाने लगी।
साक्षी चुदवाने में बड़ी जबरदस्त लड़की है।
इतनी अच्छी तरह से तो मेरी बीवी भी नहीं चुदवा पाती।
वैसे भी साली की चूत बीवी की चूत से कहीं ज्यादा अच्छी और प्यारी लग रही थी मुझे!
मैंने उसे वहां जाने के पहले एक बार नहीं दो बार चोदा और खूब घपाघप चोदा।
अब उसकी शादी हो गयी है मगर वह जब भी मिलती है तो मुझसे चुदवाती जरूर है।
उसकी ससुराल लोकल ही है।
जब जब उसका पति बाहर जाता है तो वह मुझे बुला लेती है और मैं भी उस Xxx साली की चू जी भर के चोदता हूँ और खूब मजे ले ले कर चोदता हूँ।
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.