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Massage Girl in Koppal: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Koppal who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Koppal that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Koppal massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Koppal who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Koppal massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Koppal massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Koppal who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Koppal employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Koppal helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Koppal

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Koppal at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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(Saasu Maa Ki Pyas) Sex stories

मेरे दोस्तो Sex stories ,मैं मुंबई से हूं और मेरा नाम राजेश है। मैं अपनी सासू मां के साथ बीता एक सेक्स का सच्चा हादसा आपके साथ बांटना चाहता हूं।
मेरी शादी एक वर्ष पहले ही हुयी थी। मैं एक उनतीस वर्ष का सुन्दर और सेक्सी लड़का हूँ।

मेरी शादी एक आठरह वर्षीय लड़की के साथ हुयी है और वो बहुत ही खूबसूरत है। उसकी मां भी उतनी ही सुन्दर व सेक्सी है। उस समय मेरी सासू मां की उम्र पैंतीस वर्ष की थी और उनका भी विवाह मात्र सोलह साल की उम्र में ही हो गया था। उन्हे कोई नहीं कह सकता था कि वे पैंतीस साल की है, वे तो देखने में चौबीस-पच्चीस साल की लगती थी। वो एक विधवा थी, उनके पति दो वर्ष पूर्व ही चल बसे थे।

तीन जुलाई 2003 को मैं और मेरी पत्नी मेरे ससुराल को गये। वहां पर मेरी सास हमारा इन्तज़ार कर रही थी। उन्हें देख कर मैं बहुत खुश हुआ।

मैंने कहा- कैसी हैं सासू मां?
वो बोली- ठीक हूं बेटा।
मैंने मुस्करा कर कहा- आपकी उम्र और मेरी उम्र में कोई ज्यादा फ़र्क नहीं है।
सास ने जवाब दिया- तो क्या हुआ रिश्ते में तो तुम मेरे दामाद लगते हो।

मैंने कहा- हाँ, दुर्भाग्य से मुझे पैदा होने में थोड़ी देर हो गयी वर्ना मै तो आपसे ही शादी करता!

ये सुनते ही वो शर्मायी और कहने लगी- ठीक है बातें तो होती ही रहेगी, तुम लोग जरा फ़्रेश हो जाओ.

हम लोग वहां से बाथरूम फ़्रेश होने के लिये चले गये।

फिर सबने साथ में डिनर लिया। फिर मैं और मेरी पत्नी बेड रूम में चले आये। बेड रूम में एक खिड़की भी थी जो मेरी सासू मां के कमरे में खुलती थी।
थोड़ी देर मैंनें और मेरी पत्नी ने आराम किया। रात करीब एक बजे मेरी नींद खुल गयी और मैं अपनी पत्नी के कपड़े उतारने लगा। मेरी पत्नी जाग गयी और कहने लगी- आज नही, मुझे नींद आ रही है..

मैंने कहा- तुम सो जाओ और मुझे अपना काम करने दो.
फिर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये। वो मुझे बार बार रोक रही थी।

इस तरह हमारी तकरार से सासू मां भी जाग गयी। उन्होंने धीरे से हमारी खिड़की खोली और अन्दर हमें देखने लगी। मैंने अपना काम जारी रखा और और अपनी पत्नी को चूमने लगा।

पहले उसके नाजुक होंठ पर किस किया, फिर उसके मादक चूचियों पर और फिर उसकी रस भरी चूत पर्। इतने भर से मेरी पत्नी अब मूड में आ चुकी थी और फिर उसने मेरे ऊपर के सारे कपड़े उतार दिये।

हम दोनो एक दूसरे के जिस्म पर चूमा चाटी करते रहे और फिर मैंने अपना पेण्ट खोला और अपना आठ इंच से भी लम्बा लण्ड निकाला। ये सब मेरी सासू मां देख रही थी। मैंने खिड़की पर चुपके से देखा वो वहीं पर खड़ी थी। मुझे देख कर वो थोड़ा सा पीछे हट

गयी। मैंने लण्ड को पत्नी की चूत में धकेल दिया और फिर जोरदार धक्के मारने आरम्भ कर दिये। मेरी पत्नी भी बहुत आनन्दित होने लगी थी।

वो आआह्हह… ऊओह्ह… ऊम्मम… की आवाजे निकाल रही थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। वो सफ़ेद वीर्य से भरा हुआ था। मेरी पत्नी ने जल्दी से मेरा लण्ड अपने मुख में ले लिया और मस्त हो कर उसे चूसने लगी।

ये सब देख कर मेरी सासू मां के मुख से सीत्कार सी आवाज निकल गयी। मैंने उनकी आवाज को सुन लिया था। वो बहुत बेचैन हो गयी थी। मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ देर बाद कपड़े पहन लिये थे।

कुछ देर बाद मेरी पत्नी सो चुकी थी। मैं अपनी पेण्ट पहन कर कमरे से बाहर निकला और बालकॉनी में आ कर खड़ा हो गया। मैंने कमीज नहीं पहन रखी थी और अपनी ही धुन में गुनगुना रहा था।

अचानक मुझे पीछे से किसी ने पकड़ लिया। इसके पहले कि मैं पलटता वो मुझसे लिपट गयी। मैंने समझा कि मेरी पत्नी है। लेकिन कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। उसके जिस्म से बहुत मधुर सी सुगन्ध आ रही थी जो मैंने अपनी पत्नी के जिस्म से कभी महसूस नहीं की थी। मैं परेशान था कि कौन है जो मुझसे आकर ऐसी लिपट गयी है।

मैं पलट कर उसका चेहरा नहीं देख सकता था। फिर उसके कांपते हाथ मेरी पेण्ट की जिप की तरफ़ बढे और मेरे लण्ड को पकड़ कर जोर जोर से सिसकते हुये दबाने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। पर मुझे अभी तक पता नहीं था कि ये कौन है।

मैंने उसके हाथ को अपने लण्ड से हटाया तो देख कर दंग रह गया और मेरी आंखे खुली की खुली रह गयी। वो और कोई नहीं मेरी सासू मां थी।

मुझे देख कर वो कहने लगी- तुम्ही ने तो कहा था कि हमारी उम्र में कोई फ़र्क नहीं है और अगर तुम जल्दी पैदा हो जाते तो मुझसे ही शादी करते। अब समझ लो ना तुम जल्दी पैदा हो गये हो’

इसके पहले मैं कुछ कह सकूं सासू मां के मुख से फिर आवाज निकली- देखो मैं एक जवान विधवा हूं, मैं अपने पति के बिना रह रही हूं, जो कि बहुत मुश्किल काम है। तुम मेरी इस मुश्किल को दूर कर सकते हो, मेरी इस बेचैनी को कम कर सकते हो। मेरी जिंदंगी रंगीन बना सकते हो.

ये कहते हुये वो मुझे बेताहाशा चूमने लगी और मेरे हाथो को अपने कसे हुये उभारो पर यानि चूंचियों पर रख दिया। सासू मां का सीना दबते ही उनके मुख से एक मद भरी सिसकारी निकल पड़ी।

इसके बाद क्या हुआ वो बहुत उत्तेजक और दिलकश Sex stories है। लेकिन आपको कुछ और इन्तज़ार करना होगा।

मेरा नाम राघवेंद्र है और मेरी उम्र 27 साल की है. मुझे अपने से बड़ी उम्र की औरतें चोदना बहुत पसंद है.

शुरू से ही मन में था कि मुझे चालीस से पैंतालीस साल की औरत को चोदने का सुख कब नसीब होगा.

फिर लॉकडाउन में ऊपर वाले ने मेरी सुन ली.
मैं मूलत: लखनऊ का रहने वाला हूं. पिछले वर्ष लॉकडाउन में घर पर काम करने की वजह से मैं दिल्ली से वापस अपने घर लखनऊ आ गया था.

अब मैं घर से ही काम करने लगा था.
परंतु लखनऊ में आकर मुझे चूत मिलना बंद हो गई थी जैसे कि दिल्ली में मुझे मेरी गर्लफ्रेंड की चूत चोदने को मिल जाती थी.

कुछ दिनों तक तो मैंने हाथ से मुठ निकाल कर काम चलाया, पर दिल है कि मानता नहीं.

मैं सुबह शाम को घर से निकल आता था. नजर इसी पर रहती थी कि शायद कोई ऐसी मिल जाए, जिसको मैं चोदकर अपनी अन्तर्वासना शांत कर लूँ.
Xxx भाभी हॉट चुदाई के लिए मैं बेचैन हो रहा था.

कुछ हफ्तों की मेहनत के बाद मुझे एक भाभी मिलीं भी, जो अपना कुत्ता टहलाने के लिए हमारी सोसाइटी में आती रहती थीं.
कुछ दिन तक तो मैं सिर्फ उन्हें देखता था कि वे अकेली आती हैं और अकेली ही कुत्ता टहला कर वापस हो जाती हैं.

धीरे-धीरे मैंने उनसे बात करने का तरीका ढूंढा और एक दिन ऐसे ही उनके पास जाकर पूछा- आपको पहले कभी नहीं देखा है … क्या आप नयी आई हैं?
उन्होंने मुझे जवाब दिया- मैं तो यहां पर नयी नहीं हूं. पर शायद आप नए हो, जो आप मुझे नहीं जानते हो.

इसके बाद बातों बातों में मालूम पड़ा कि उनके पति देश के बाहर कहीं जॉब करते हैं और वह लॉकडाउन की वजह से अपने देश वापस नहीं आ पाए.
मेरे मन में तुरंत लड्डू फूटा कि इनकी चूत प्यासी हो सकती है … और मैं इन्हें सैट करके इनकी व अपनी प्यास मिटा सकता हूँ.

अब मैं रोजाना उसी समय का इंतजार करने लगा कि कब शाम हो. कब वो अपना कुत्ता टहलाने के लिए सोसाइटी में आएं.
इस तरह से मेरी उसकी बातचीत लगभग रोज होने लगी.

धीरे-धीरे बातों में हम दोनों ने एक दूसरे के नंबर शेयर किए और उसके बाद मोबाइल का इस्तेमाल शुरू हो गया.
मैं कभी-कभी उनको सामान्य मैसेज करने लगा.

एक दिन जानबूझकर मैंने उन्हें ऑनलाइन देख कर एक गंदा सा मैसेज भेजा और उसके बाद उसको डिलीट फॉर ऑल कर दिया.
इस पर उनका रिप्लाई आया कि क्या भेज दिया … देख कर भेजा करो.

मैं सकपका गया और मुझे लगा कि आज बात खत्म हो गयी.
तो मैं उनसे माफी मांगने लगा.

मुझे लगा कि आज शाम को वो कुत्ता घुमाने नहीं आएंगी.
पर उस दिन शाम को वह लोअर और हाफ टी-शर्ट पहन कर आईं, जिसे देखकर मुझे समझ आ गया कि भाभी मूड में हैं.

मैंने उनके करीब जाकर उनकी तारीफ़ की जिससे वो खुश हो गईं.
फिर बात हुई तो साफ़ लगने लगा कि इनकी चूत का नशा मेरे लंड से ही उतरेगा.

बातों ही बातों में उन्होंने बताया- आजकल मैं घर पर अकेली ही रहती हूँ. मेरा बेटा भी अपनी मौसी के घर गया था पर लॉक डाउन होने की वजह से वह भी वापस नहीं आ सका है.
मैंने कहा- अरे तो आप कहें तो मैं आपका अकेलापन दूर करने आपके साथ आपके घर आ जाऊं?

वो हंस दीं और हम दोनों खुल कर बातें करने लगे.

मैंने अगले दिन अकेलापन दूर करने के लिए साथ में मिलकर घर पर पिक्चर देखने का प्लान बनाया जिससे कि उनका अकेलापन दूर हो सके और हम दोनों की दोस्ती हो जाए.
वह इस बात पर राजी हो गईं.

बस फिर क्या था.

उस दिन मैं रात में अपने घर आया और मैंने अपने लंड के बाल साफ किए.
उस दौरान मुझे उनकी ही याद आ रही थी और लंड खड़ा हो गया था.

मैंने उसी रात में यह सोच कर एक बार अपने लंड का माल निकाल दिया कि मैं भाभी को चोद रहा हूं.
माल निकलने के बाद थकान हुई और मैं सो गया.

अगले दिन जब सुबह मैं उठा और उनके घर जाने की योजना बनाने लगा.

लेकिन उसके लिए मुझे अपने घर से जाने की इजाजत लेनी जरूरी थी क्योंकि लॉकडाउन चल रहा था.

बाद में मौक़ा पाकर मैंने मम्मी पापा को बताया कि इधर पास में ही एक दोस्त रहता है, मैं उसके जा रहा हूं. वापस आने में शाम हो जाएगी.
मम्मी ने हां कह दी.

मैंने अपना लैपटॉप उठाया और गाड़ी उठा कर भाभी के साथ सुहागरात मनाने के लिए उनके घर पहुंच गया.

भाभी समझ गई थीं कि मामला एकदम गर्मागर्म है और मूवी देखने का तो सिर्फ बहाना है.
मैं भी जानता था कि हम दोनों को एक दूसरे की जरूरत है.

इसलिए उन्होंने ज्यादा वक्त बर्बाद नहीं किया और बैठकर बातों ही बातों में मुझसे पूछा- तुम अपनी फिजिकल जरूरत कैसे पूरी करते हो?
मैंने बताया कि दिल्ली में मेरी एक फ्रेंड है. उसके साथ में जब मेरा होता है या उसका मन होता है तो हम लोग सेक्स कर लेते हैं. आप बताइए आप कैसे करती हो?

तब उन्होंने शायराना अंदाज में कहा- क्या बताएं यार, मैं तो तन्हा ही उम्र गुजार रही हूँ … सनम की याद में!
मैंने हंस कर कहा- ऐसा मत कहिए. मैं आपकी तन्हाई दूर करूंगा.

ये कह कर मैंने आगे बढ़कर उनके गालों के नीचे गर्दन पर एक किस कर दिया.

वह पहले तो सकपका गईं, पर खुश भी हो गईं.
उसके बाद भाभी ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और उठकर गांड हिलाती हुई अपना गेट बंद करने लगीं.

उसके बाद उन्होंने वहीं से मुझे देखा और अपने होंठों पर जीभ फेरी.
मैंने आंख मार कर अपना लंड सहला दिया.

वो नशीली चाल से मेरे करीब आईं और मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर वाले कमरे में ले गईं.
अन्दर आकर उन्होंने मुझे बेड की तरफ चलने का इशारा किया और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया.

मैं उन्हें देखने लगा.
भाभी मादक भाव से चलती हुई बेड पर मेरे बाजू में बैठ गईं.
अब हम दोनों कमरे में बैठे थे.

उन्होंने मेरा खड़ा हुआ लंड देखकर कहा- अभी करना है … या थोड़ा मूड बनाना है?
मैंने भाभी को अपने पास खींचते हुए किस करना शुरू कर दिया और ऊपर से ही उनके दूध दबाने लगा.

वो मेरे होंठों से लग गईं और कम से कम पांच मिनट तक ऐसे ही चूसने के बाद मैंने उनके टॉप के अन्दर से हाथ डाल कर मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
भाभी की आह आह निकलने लगी.

ऐसे ही दबाते दबाते भाभी के एक निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच दबा कर उसको मींजते हुए कहा- भाभी मेरा तो मूड बना हुआ है, मुझे तो अभी करना है … आप अपनी बताओ कि अभी लेना है या बाद में लोगी?

मैंने भाभी जी से पूछा तो वो बोलीं- क्या दोगे?
तो मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- ये … चैक कर लो … मस्त मूसल है.

लंड पर हाथ फेरते ही भाभी का मूड बन गया और पूछने लगीं- ऐसे ही रांड बना कर लोगे या दुल्हन बनाकर चोदना है?

मैंने कहा- रंडियां तो बहुत चोद चुका हूँ … अब तो मैं आपको दुल्हन बनाकर चोदना चाहता हूं.
उन्होंने मुझसे कहा- ठीक है तुम थोड़ी देर बाहर बैठ कर टीवी देखो, तब तक मैं दुल्हन बन जाती हूँ. शादी वाला लहंगा चुनरिया पहन लेती हूं. उसके बाद मैं तुमको आवाज दूंगी. तब कमरे में आ जाना.

मैंने भाभी को चूमा और बाहर बैठकर टीवी पर पिक्चर देखने लगा.
तभी भाभी ने आवाज लगा कर कहा- तुम भी नहा लो.
मैंने कहा- ओके.

तब मैंने सोचा कि नहाने की कहने का मतलब है कि भाभी खुल कर मैच खेलना चाहती हैं. मतलब लंड चूत चूस कर मजा लेना चाहती हैं.
मैं नहाने चला गया.

नहाते समय मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अभी अन्दर भाभी के साथ खुल कर मैच खेलना है और खूब देर तक दबा दबा कर भाभी को चोदना है.
इज्जत का सवाल है आज भाभी को अपने लंड का गुलाम बनाना ही है.

मैं लंड को अच्छे से साफ़ करके बाथरूम से बाहर आ गया.
मैंने कुरता पजामा पहना हुआ था.

अभी मैं बैठा ही था कि कुछ ही देर बाद भाभी की आवाज आ गई- अन्दर आ जाओ देवर जी!

मैं जैसे ही अन्दर घुसा तो हतप्रभ रह गया.
मैंने देखा कि भाभी एक लाल लहंगा पहने हुए एक कोने में बैठी हुई थीं और बाजू की टेबल पर एक दूध का गिलास रखा हुआ था.

भाभी ने मुझे देखा तो तुरंत उठ कर मेरे करीब आईं और मेरे पैर छूकर मुझसे बोलीं- आप आज मेरे एक दिन के पति बन जाओ … आओ प्राणनाथ बैठो.
उनके इस तरह से झुक कर पैर छूने से मैं सकपका गया और ‘अरे अरे …’ कहते हुए मैंने उनकी बांहों को पकड़ कर उठाया.

आह … एकदम मलाई सी चिकनी बांहों को पकड़ते ही लंड ने झुरझुरी सी ली और लंड एकदम से अकड़ गया.

भाभी ने मुझे दूध का गिलास लाकर मेरे हाथों में दे दिया.
मैंने एक घूंट पी लिया और उनके होंठों से गिलास लगा दिया.

भाभी भी उसी गिलास से दूध पीने लगीं.

फिर दूध का गिलास खत्म करके मैं उनके लिपस्टिक लगे होंठों को चूसने लगा.
भाभी भी मेरे मुँह में अपनी जीभ देती हुई चुम्बन का मजा लेने लगीं.

इसके बाद मैंने खुद अपने कपड़े उतारे और धीरे से भाभी के लहंगे का नाड़ा ढीला कर दिया.
लहंगा ढीला हुआ तो सरसराता हुआ नीचे सरकने लगा.
भाभी नीचे से पैंटी में रह गईं.

उसके बाद मैंने उनको अपनी बांहों में भरा और उनके ब्लाउज के पीछे लगे बटन खोलने लगा.
ब्लाउज के हुक खोलने के बाद मैंने उसको उतारा नहीं, बस यूं ही ब्लाउज के साथ भाभी के मम्मों को मसलने लगा.

भाभी आह आह करने लगीं.
फिर मैंने एक झटके से हाथ से खींचकर ब्लाउज को हटा दिया.

अब भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं. उन्होंने जालीदार ब्रा पैंटी पहन रखी थी, जो नारंगी रंग की थी.

पैंटी की जाली से भाभी की सफाचट चूत साफ दिख रही थी.
चिकनी चूत देख कर एकदम साफ़ समझ आ रहा था कि भाभी ने आज ही झांटों को बनाया है.

मैंने घुटनों के बल बैठ कर भाभी की पैंटी को बिना उतारे हुए हल्का सा किनारे कर दिया और उनकी चूत में अपनी जुबान डाल दी.

जुबान डालते ही गुदगुदी की वजह से वह कसमसाने लगीं और पीछे को हटने की कोशिश करने लगीं.
इसी कोशिश में भाभी बेड पर गिर पड़ीं.

वो कहने लगीं- मैं आजके लिए तुम्हारी बीवी हूं … इतनी जल्दी क्या है!

पर मैं भूखा शेर सा तड़फ रहा था, चूत का स्वाद चखने के बाद अब कहां रुकने वाला था.
मैं चूत पर टूट पड़ा और चाट चाट कर चूत का दाना लाल कर दिया.

भाभी की चूत विकट गर्म हो गई थी.

वो सीत्कार भरती हुई बोलीं- अब बस भी करो … क्या बिना चोदे ही रस निकाल दोगे?
मैंने कहा- पहले तो बिना चोदे निकाल दूँगा … फिर चोद कर पानी निकाल दूँगा.
भाभी मस्त हुई पड़ी थीं.

इसके बाद मैं ऊपर उठा और उनके गले के पास जाकर अपना अंडरविअर हटाकर अपना लंड उनके मुँह में दे दिया.

मेरा मोटा और काला चिकना लंड देखकर भाभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हारा लंड देख कर मेरी नीयत डबडबा गई है. मैं तुमको एक शर्त पर अपनी चूत दूंगी.

मैं नंगा लड़का चूत के लिए भाभी की हर शर्त मानने को तैयार था.
मैंने लंड हिलाते हुए कहा- आपकी हर शर्त मान लूंगा … पहले आप मेरे लंड को अपने मुँह में लो.
उन्होंने कहा- ठीक है मैं ले लूंगी. पर मेरी शर्त यह है कि तुम जब तक यहां रहोगे, तब तक मुझे चोदने आया करोगे.

मैं उत्साह में था. मैंने झट से भाभी की बात मान ली और उनके मुँह में अपना लंड डाल दिया.
भाभी मेरे लंड को ठीक ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई भूखा बच्चा लॉलीपॉप चूसता है.

मैं उनकी दोनों चूचियों को अपने हाथों से गोल गोल घुमाता हुआ रगड़ रगड़ कर मसल रहा था.

भाभी भी लंड की गोलियों को मुँह में ले रही थीं और कभी लंड को जीभ से चाट रही थीं.
उन्होंने लंड को चूस चाट कर एकदम से कड़क कर दिया था.

मुझसे रहा नहीं गया और मेरा लंड उनके मुँह में झड़ गया.
उन्होंने माल मुँह में ले लिया लेकिन खाया नहीं.
बाद में पूरा माल अपने कमरे के फर्श पर थूक दिया.

मैंने कहा- अब लंड खाली हो गया है … अब हम लोग देर तक असली खेल खेलेंगे.
वो बोलीं- जरूर … पर पहले अपने लंड को वापस खड़ा कर लो.

मैंने कहा- हो जाएगा मेरी प्यारी भाभी जी. बस आप थोड़ी देर और चूस लो.
वो लंड को साफ़ करके फिर से चूसने लगीं और मैं उनकी चूचियां पीने और रगड़ने लगा.

दस मिनट के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
मैंने हल्का सा थूक लगाकर अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया.

कई महीनों से ठुकाई नहीं कारण भाभी की चूत टाइट हो गई थी.
दो तीन झटके के बाद लंड खुद-ब-खुद चूत में सैट हो गया और मस्त चुदाई चालू हो गई.

कम से कम 15 मिनट चोदने के बाद मैंने भाभी को बेड का किनारा पकड़ा कर घोड़ी बना दिया और उनकी गांड के छेद को साफ़ करके चाटने लगा.
गांड को चाट कर गीला कर दिया और उसमें अपना लंड डाल दिया.

जिस वजह से वह पागल हो गई थीं क्योंकि भाभी की गांड बहुत टाइट थी.
वो चिल्लाने लगी थीं- आंह मर गई … बाहर निकालो इसको … मैं मर जाऊंगी.

पर मैं कहां मानने वाला था … मैंने उनकी कमर को पकड़ कर दो तीन झटके में पूरा लंड गांड के अन्दर पेल दिया.
और दे धक्के दे धक्के मैं भाभी को चोदे जा रहा था.

भाभी की गांड चुदाई मुझे सामने लगे शीशे से साफ दिखाई पड़ रही थी.
मैं भाभी के बाल पकड़कर उन्हें घोड़ी की तरह चलाता हुआ चोद रहा था.

वे मेरे लंड को चाबुक समझ कर गांड हिलाती हुई दनादन दौड़ी जा रही थीं.

तभी मुझे अपने लंड के पास हल्का गीला सा महसूस हुआ.
मैंने जैसे ही हाथ ले जाकर देखा, तो खून था. मैं समझ गया कि जिस घोड़ी की मैं सवारी कर रहा हूँ वो कुंवारी गांड वाली घोड़ी हैं.

मैंने भाभी को कुछ नहीं बताया और उनकी गांड मारता रहा.

कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद मैंने पूरा माल भाभी की गांड में छोड़ दिया और गांड में से लंड निकाल लिया.

अब मैंने अपने लंड को भाभी के कमरे के परदे से साफ किया और भाभी के बाजू में लेट गया.
कुछ देर तक भाभी ऐसे ही अचेत लेटी रहीं.

फिर मैंने भाभी की चूत को चूसना शुरू कर दिया.

मैंने उनकी चूत को चूस कर गीला किया और उनकी चूत में फिर से अपना चेतक उतार दिया.
भाभी हल्की से कराहीं और उन्होंने लंड को चूत में समा लिया.

मेरा चेतक भाभी की गुफा में पूरी ताकत से दौड़ लगाये जा रहा था.

भाभी की चूत भी लगातार चुद चुद कर लाल हो गई थी और नाभि के नीचे की साइड सूज गयी थी.
पर मैं कहां मानने वाला था.

मैंने भाभी को तब तक चोदा, जब तक लंड ने उसकी चूत में उल्टियां करना शुरू नहीं कर दिया.
भाभी की चूत की फांकें सुर्ख लाल हो गयी थीं, पर चुदाई का सुख भाभी के चेहरे से साफ़ दिख रहा था.

मुझे भी लगा कि आज मेहनत सफल हो गई है.

इसके बाद मैं सो गया.

थोड़ी देर बाद जब मैं उठा तो मैंने देखा कि भाभी बाजू में नहीं हैं.
वो किचन में कुछ खाने को बना रही थीं. पर वो पैर फैला कर खड़ी थीं.

मैं समझ गया कि मेरे लंड ने भाभी की गांड और चूत दोनों को मसल दिया है, इसलिए ये टांगें फैला कर खड़ी हैं.

मैंने पूछा- भाभी क्या बना रही हो?
उन्होंने कहा- पोहे और चाय बना रही हूँ, खा पी लो. उसके बाद फिर से खेलेंगे.

मैंने कहा- फिर से खेलना ही है, तो बाद क्या होता है?
भाभी हंसने लगीं.

मैंने उनको पकड़ कर किचन की पट्टी पर टिका कर फिर से घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया.
इस बार मैंने अपने खड़े लंड से भाभी की चूत को चोदा और चाय में उबाल आने से पहले मेरे लंड में उबाल आ गया.

मैं भाभी की चूत में झड़ गया और भाभी को खुश कर दिया.

इस तरह मैं 45 दिन तक लखनऊ में रहा और लगातार उस भाभी की दिन में कई कई बार चुदाई की.
मैंने किसी भी दिन दो बार से कम नहीं खेला और उसकी चूत को और गांड को फैलाकर चौड़ा कर दिया था.

मैंने Xxx भाभी हॉट चुदाई करके उनकी रसीली चूत को भोसड़ा बना दिया था.
आज भी बात होती है तो भाभी कहती हैं कि लखनऊ आना तो मुझसे जरूर मिलना.

मैं जब भी लखनऊ जाता हूं और उस दिन अगर भाभी के पति घर नहीं होते हैं, तो कम से कम दो बार चोद कर आता हूं.
क्या करूँ अपने से बड़ी उम्र की भाभी मेरी कमजोरी है. फिर भाभी की रसीली चूत से कैसे दूर रह सकता हूँ.

Sex Stories

नमस्कार, मैं अन्तर्वासना Sex Stories को साल भर से पढ़ रहा हूँ। सभी को प्रोत्साहन देने वाली यह साईट सही मायने में अपने आप में एक उदाहरण है जोकि हरेक इंसान को अपने दिल की बात बताने का मौका देती है उन सभी पाठको में से मैं भी एक हूँ।

मेरा नाम स्वर्णिम है, मैं टाटा स्टील (जमशेदपुर) का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र २३ साल है, देखने या मिलने के बाद आप सभी लड़कियों को पता चल ही जायेगा कि मेरा शरीर और लंड कितना सख्त है।

यह बात है अगस्त, 2009 की ! मुझे एक कॉल आई मेरे मोबाइल पे करीबन 11 बजे दिन में ! उस तरफ से एक बड़ी ही प्यारी आवाज़ आई- हेलो ! मिस्टर स्वर्णिम?

मैंने भी कहा- यस, स्वर्णिम स्पीकिंग !

उसने कहा- मैं इप्शिता बोल रही हूँ ! एक निजी बैंक से !

(माफ़ कीजियेगा मैं बैंक का नाम नहीं बताना चाहूँगा)

उसने कहा- सर, मुझे आपसे एक बिज़नस प्लान के सिलसिले में आपसे अप्पॉंयंट्मेंट चाहिए !

मैंने पता नहीं कैसे उसे कह दिया- ओ के ! शनिवार को एक बजे आ जाना !

जब शनिवार का दिन आया करीब डेढ़ बजे एक बड़ी खूबसूरत क्यूट सी लड़की मेरे केबिन में एक लड़के से साथ आई और बोली- हेलो सर ! मैं इप्शिता फरोम ….. बैंक !

असल में मैं भूल गया था कि आज वो आने वाली है। मैंने भी हेलो किया और और बैठने को कहा। मैं तो उसके चहरे से नज़र हटा ही नहीं पा रहा था, गजब की खूबसूरत थी वो !

करीब एक घंटे तक वो और उसका साथी मुझे कुछ बिज़नस प्लान के बारे में बताते रहे पर मेरे ध्यान तो कहीं और ही था। मैं सोच रहा था कि पता नहीं कौन इसका बॉयफ्रेंड होगा जो भी होगा, इसके बाद ओ कभी भी दूसरी लड़की के बारे में कभी भी नहीं सोचेगा !

मैं खोया हुआ था, तभी इप्शिता ने कहा- सर, कहिये अगली बार कब मिलूं?

मैंने कहा- आप सोमवार को आ जाओ ! मैं सासे पेपर तैयार रखूँगा !

इप्शिता ने कहा- ओ के सर ! मैं सोमवार आ जाऊँगी करीब चार बजे !

मैंने कहा- ओके !

सोमवार को करीब सवा चार बजे इप्शिता अकेले आई। मैंने कहा- आज आप अकेले ?

तो इप्शिता ने कहा- मेरे कलीग को कहीं और जरुरी काम से जाना था तो वो वहाँ चले गए !

पेपर वर्क करते करते तकरीबन दो घंटे लग गए। शाम के सात बज रहे होंगे, वो जाने को हुई, मैंने कहा- इतनी देर हो गई है, मैं छोड़ देता हूँ !

तो उसने मना कर दिया। मैंने भी ज्यादा कोशिश नहीं की। दस मिनट के बाद जब मैं भी निकला तो देखा बाहर काफी बारिश हो रही थी और इप्शिता अपनी स्कूटी स्टार्ट करने में लगी हुई थी।

मैं इप्शिता के पास गया और पूछा- कोई प्रॉब्लम?

तो इप्शिता ने कहा- सर यह स्टार्ट नहीं हो रही है !

मैंने कहा- इतनी बारिश में कैसे जाओगी ?

तो इप्शिता ने कहा- पता नहीं बारिश कब रुकेगी और मैं कब घर जाउंगी ! वैसे मैंने तो कह रखा है घर पर कि देर हो जायेगी लेकिन बारिश रुक ही नहीं रही है तो सोचा भीग कर ही चली जाऊं !

मैंने कहा- अगर आप को कोई प्रॉब्लम न हो तो आप गाड़ी यहीं छोड़ दो, मैं अपनी कार में आपको छोड़ दूंगा !

वो बोली- नहीं सर ! मैं मैनेज कर लूँगी !

मैंने कहा- मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं होगी अगर आपको कोई प्रॉब्लम है तो कोई बात नहीं !

तो इप्शिता बोली- नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है, ठीक है चलती हूँ।

मैंने चौकीदार से कहा- स्कूटी को पार्क कर दो !

और इप्शिता को अपनी कार में बैठने को कहा, वो बैठ गई।

मैंने पूछा- कहाँ रहती हो?

वो बोली- टेल्को में !

मेरे ऑफिस से टेल्को काफी दूर था, करीब 35-40 मिनट का रास्ता था, इप्शिता थोड़ी भीग चुकी थी और मेरे कार का ए सी चालू था, उसको ठण्ड लग रही थी लेकिन कह नहीं रही थी कि उसे ठण्ड लग रही है। मैंने देखा इप्शिता के होंठ कांप रहे थे ठण्ड के चलते !

मैंने कहा- इप्शिता ठण्ड लग रही है क्या ?

वो बोली- नहीं !

मैंने कहा- आप कांप क्यों रही हो ? अगर ठण्ड लग रही है तो एसी बंद कर देते हैं !

हम लोग बात करते करते घर पहुँच गए। वो बोली- सर कॉफी पी कर चले जाइयेगा !

मैंने कहा- नहीं देर हो गई है, किसी और दिन कॉफी पीने आ जाऊंगा !

मैंने बाय किया और कार स्टार्ट करने लगा तभी कार की बैटरी लो गई, कार स्टार्ट नहीं हो रही थी। काफी कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हो रही थी। इप्शिता वापस आई, बोली- सर, क्या हुआ?

मैंने कहा- शायद जो प्रॉब्लम आपकी गाड़ी में हुई वही मेरे भी गाड़ी में हो गई है !

सर, आप वापस कैसे जाओगे?

अब देखता हूँ, अगर कोई ऑटो मिल जायेगा तो उसी से चला जाऊंगा।

बारिश के कारण ऑटो भी नहीं मिल रही थी तो इप्शिता ने कहा- आप मेरे घर आ जाइए !

मैंने भी कहा- ठीक है शायद तब तक कुछ मैनेज हो जाए !

मैं इप्शिता के साथ उसके घर चला गया। घर पर उसकी मम्मी थी, इप्शिता ने अपने मम्मी को सारी बात बता दी। तब आंटी ने कहा- बेटा, तुम्हारे घर वाले परेशान हो जाएँगे, तुम उनको फ़ोन कर के बता दो !

तब मैंने कहा- आंटी, मैं यहाँ अकेले ही रहता हूँ !

आंटी ने कहा- ठीक है बेटा ! तुम फ्रेश हो जाओ ! मैं खाना लगा देती हूँ !

इप्शिता मुझे अपने कमरे में ले गई और अपने पापा की नाईट-ड्रेस और तौलिया दिया। मैं फ्रेश हो कर आ गया। हम तीनों ने खाना खाते-खाते काफी बातें की। तब मुझे यह भी पता चला कि इप्शिता के पापा ऑफिस के काम से कोलकाता गए हुए हैं और वो अगले दिन वापस आयेंगे। हम लोग खाना खाने के बाद टीवी देखने लगे। थोड़ी देर में आंटी बोली- मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूँ, तुम लोग भी आराम कर लो !

मैंने कहा- ठीक है आंटी !

आंटी के जाने के बाद करीब तीस मिनट बाद हम लोग भी सोने की तैयारी करने लगे। मैंने पूछा- इप्शिता, यह कमरा आपका है क्या ?

वो बोली- हाँ सर ! यह कमरा मेरा है !

मैंने कहा- मैं यहाँ सो जाऊंगा तो आप कहाँ सोओगी?

वो बोली- मैं हाल में सो जाउंगी !

मैंने कहा- आप यहीं सो जाओ ! हाल में मैं सो जाऊंगा !

वो बोली- नहीं सर ! कोई प्रॉब्लम नहीं है ! आप यहीं सो जाओ !

ठीक है इप्शिता, जब तक नींद नहीं आती, हम लोग बात करें?

वो बोली- हाँ सर, ठीक है !

हम लोगों ने काफी बातें की। रात का करीब एक बज चुका था, मुझे लगा कि इप्शिता को नींद आ रही है, मैंने पूछा- इप्शिता, आपको तो नींद आ रही है !

वो बोली- हाँ सर ! नींद आने लगी है !

मैंने कहा- इप्शिता, आप मुझे सर-सर मत बोलो ! ऐसा लगता है कि मैं अभी भी ऑफिस में ही हूँ। मेरा नाम है स्वर्णिम ! आप मुझे मेरे नाम से बुला सकती हो !

ठीक है कोशिश करूँगी !

मैंने कहा- कोशिश नहीं ! बोलो !

यस ! ठीक ! स्वर्णिम अब मैं जा रही हूँ !

और वो चली गई। करीब 15 मिनट के बाद जब ओ वापस आई तो अपनी नाईट-ड्रेस में थी, वापस आकर बोली- स्वर्णिम ! मैंने तो गुड नाईट कहा ही नहीं था !

मैंने कहा- ओ हाँ ! मैंने भी तो नहीं कहा था !

इप्शिता बोली- गुड नाईट !

मैंने कहा- अगर बुरा नहीं मानो तो एक बात कहूँ?

वो बोली- नहीं मानूंगी स्वर्णिम ! बोलो !

मैंने कहा- आप इस ड्रेस में काफ़ी क्यूट दिख रही हो ! आपका कोई बॉय-फ्रेंड तो होगा ही !

इप्शिता काफी जोर से हंसने लगी, मैंने कहा- क्या हुआ ? मैंने कोई चुटकला तो नहीं सुनाया !

वो बोली- नहीं ! ऐसी बात नहीं ! मैं जहाँ भी गई, किसी न किसी ने मुझे प्रपोज़ किया- स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सभी जगह ! पर मुझे यह सब बिलकुल भी पसंद नहीं है ! मेरा मानना है कि यह सब टाइम पास करने के लिए होता है !

इप्शिता ने कहा- स्वर्णिम, तुम ने कभी किसी को प्यार किया है ?

मैंने कहा- हाँ मैंने प्यार किया है और उसी से शादी भी करूँगा !

ओ सॉरी ! मैंने शायद कुछ गलत कह दिया ! इप्शिता ने कहा।

मैंने कहा- नहीं इप्शिता, तुमने जो महसूस किया वही तो कह रही हो !

मैंने कहा- इप्शिता तुम बहुत खूबसूरत हो ! जिसे तुम मिल जाओगी, वो कभी भी किसी और के पास नहीं जायेगा !

इप्शिता ने कहा- ऐसी क्या चीज़ है मुझ में ?

मैंने कहा- सभी चीज़ है इप्शिता ! तुम्हारा व्यव्हार, तुम्हारी खूबसूरती !

इप्शिता ने पूछा- स्वर्णिम, तुम्हें क्या-क्या अच्छा लगा मुझ में?

मैंने कहा- सभी चीज़ इप्शिता !

इतना कह कर मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। इप्शिता कुछ नहीं बोली। धीरे-धीरे मैं उसके हाथ को दबाने लगा। जैसे ही मैंने इप्शिता को छुआ उसकी सांसें तेज़ होने लगी और कांपने लगी। मैं धीरे से उसके बालों को सहलाने लगा। वो कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं थी।

तभी उसने कहा- स्वर्णिम, काफी अच्छा लग रहा है ! ऐसे ही करते रहो !

मुझे लगा कि शायद इप्शिता गरम होने लगी है, मैं धीरे से अपने हाथ उसकी चूची की तरफ ले गया और सहलाने लगा। उसे काफी अच्छा लगने लगा। ऐसे करीब दस मिनट तक करता रहा और एकाएक सब कुछ करना छोड़ दिया।

इप्शिता बोली- क्या हुआ स्वर्णिम?

मैंने कहा- इप्शिता, शायद हम लोग गलत कर रहे हैं !

तो इप्शिता ने कहा- स्वर्णिम, मैं अपनी इच्छा से कर रही हूँ, तुम जबरदस्ती तो नहीं कर रहे हो !

मैंने कहा- इप्शिता, इसके पहले कभी तुमने किसी के साथ सेक्स किया है?

वो बोली- स्वर्णिम, अभी तक किसी लड़के ने मुझे छुआ तक नहीं ! सेक्स तो बहुत दूर की बात है !

मैंने कहा- इप्शिता, तुम क्या मेरे साथ कम्प्लीट सेक्स करोगी?

वो बोली- नहीं स्वर्णिम ! एक लिमिट तक !

मैंने कहा- कोई बात नहीं ! ठीक है !

इप्शिता उठी, कमरे को अन्दर से बन्द कर लिया और आकर मुझसे लिपट गई। उसकी चूची मेरे सीने से दबने से मेरा लंड जागने लगा। मैंने भी इप्शिता को चूमना शुरु किया। काफी लम्बा चुम्बन उसके होंठों पर लिया, साथ में उसकी चूची दबाने लगा। मैं मन ही मन सोच रहा था कि ऐसी हसीना मेरे बाहों में होगी, वो भी कंवारी ! सोचा न था !

इप्शिता के वक्ष का आकार काफी अच्छा था। चूची भी एकदम टाइट !

होंठों पर चुम्बन के साथ जब मैं उसके स्तन मसल रहा था तो उसके मुँह से आहऽऽ ऊउईऽ औऽऽ आह की आवाज़ आ रही थी।

मैं फिर उसके नाईट ड्रेस के टॉप का बटन खोलने लगा, इप्शिता ने मना नहीं किया। टॉप खोलकर देखा तो अन्दर काले रंग की ब्रा पहने हुई थी। मैंने उसको भी खोल दिया। अब वो ऊपर से बिल्कुल नंगी थी। फिर मैं उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। इप्शिता को काफी मज़ा आ रहा था, उसके मुँह से आह ऊई ऊउम्ह हाह ऊउफ आह की आवाज़ आने लगी थी।

तभी मैंने कहा- इप्शिता और कुछ करूँ?

तो वो बोली- स्वर्णिम, मुझे नहीं पता था कि यह सब करने से इतना अच्छा लगता है ! अब तुम जो करना चाहते हो कर सकते हो, मैं अब रोकूँगी नहीं ! और तुम रुकना मत !

मैंने कहा- ठीक है स्वीट हार्ट !

मैंने उसको बिलकुल नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। जब मैं नंगा हो रहा था तो उसकी आँखें बंद थी क्योंकि उस समय मैं उसकी चूची लगातार दबा रहा था। थोड़ी देर के बाद जब मैंने उसके हाथों में अपने लंड पकड़ाया तो वो एकदम से घबरा गई, बोली- स्वर्णिम, स्वीट हार्ट ! यह इतना बड़ा?

तब तक मेरा लंड पूरे आकार में आ चुका था। मैंने कहा- एश ! स्वीट हार्ट ! अब मेरा लंड लेकर इसको चूसो !

वो भोली भाली लड़की कुछ नहीं जानती थी, वो कुछ बोली नहीं !

मैंने कहा- यह सब कुछ करना होता है सेक्स में !

पहले तो नहीं मान रही थी, फिर धीरे-धीरे मान गई। उसके मुँह में पूरा लंड जा ही नहीं रहा था, न वो ठीक से चूस पा रही थी। फिर मैंने इप्शिता को कहा- इसको लॉलीपोप की तरह चूस !

फिर वो लंड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। इप्शिता के मुँह की गर्मी से मेरा लंड और बड़ा होता जा रहा था। दस मिनट चूसने के बाद मैंने अपने वीर्य उसके मुँह में ही डाल दिया। वो कुछ नहीं बोली क्योंकि वो पूरे जोश में आ चुकी थी।

फिर धीरे धीरे उसने मेरा लंड फिर खड़ा किया। फिर हम लोग 69 की पोज़ीशन में आ गए। मैंने उसकी बूर को चूसना और चाटना शुरु किया और उसने मेरा लंड !

इस तरह हम लोग काफ़ी देर तक एक दूसरे का लंड-बूर चूसते रहे।

अब बारी आई चुदाई की !

मैंने कहा- इप्शिता, मुझे तुम्हारी बूर में लंड डालना है !

इप्शिता बोली- स्वर्णिम, तुम्हारा लंड इतना बड़ा है और मेरी बूर इतनी छोटी है ! कैसे जायेगा ?

मैंने कहा- इप्शिता, पहले-पहले दुखेगा ! फिर मज़ा आएगा !

वो बोली- ठीक है स्वर्णिम ! प्लीज़, धीरे-धीरे चोदना !

मैंने अभी दो इन्च ही अन्दर डाला होगा, वो चिल्लाने लगी- नहीं नहीं स्वर्णिम ! बाहर निकालो लंड ! और नहीं सहा जाता !

मैंने कहा- ठीक है इप्शिता !

मैंने लंड बाहर नहीं निकाला और बोला- मैं थोड़ी देर रुकता हूँ !

उसकी आँख से आँसू निकल रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद धीरे धीरे इप्शिता के बूर में लंड डालने लगा। मैंने जब ध्यान से देखा तो खून आ रहा था। मैं समझ गया कि इप्शिता की सील मैंने ही तोड़ी है और वो जो कुछ भी बोल रही थी, सच बोल रही थी।

फिर मैंने चोदना जारी रखा। अब इप्शिता को भी मज़ा आने लगा। धीरे-धीरे मैंने स्पीड बढ़ा दी। इप्शिता के मुँह से जोर-जोर से आवाज़ आने लगी- आह ऊई ऊउम्ह औच आही अहह और जोर जोर से डाल लंड स्वर्णिम ! बहुत अच्छा लग रहा है !

मैंने और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। फिर हम लोग करीब बीस मिनट के बाद झड़ गए। मैंने अपना वीर्य उसके अन्दर उसकी बूर में ही डाल दिया और इस तरह मैंने इप्शिता की रात भर छः बार चुदाई की।

और जब मैं सुबह को जगा तो आठ बज चुके थे।

इप्शिता नहा-धोकर तैयार होकर चाय लेकर मेरे पास आई और बोली- स्वर्णिम स्वीट हार्ट ! गुड मोर्निंग !

मैंने कहा- आंटी कहाँ हैं?

इप्शिता बोली- मंदिर गई हैं !

मैंने कहा- इप्शिता जानू आओ न ! मेरा लंड चूसो !

वो बोली- स्वर्णिम, मम्मी आ जाएंगी ! बाहर का गेट तो बंद है न ? जब आएंगी तो पता चल जायेगा !

वो बोली- ठीक है !

फिर मैंने अपना लंड उसको पकड़ा दिया और वो लंड चूसने लगी। बीस मिनट तक चूसने के बाद फिर वीर्य मैंने उसके मुँह में ही गिरा दिया।

फिर नहा धोकर वापस चला गया।

दोस्तो, यह कोई कहानी नहीं ! यह मेरे साथ हुआ सच्चा वाकया है। इसके बाद अब हम लोग अक्सर मिलते हैं और जब कभी भी मिलते हैं तो चुदाई जरुर करते हैं।

मेरी यह सच्ची घटना कैसी लगी, जरुर बताइएगा। Sex Stories

हाय दोस्तो ! Hindi Porn Stories

मेरा नाम राहुल है, मैं हिमाचल का Hindi Porn Stories रहने वाला हूँ। मेरी उम्र २९ साल है। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। आज मैं अपनी कहानी आपको बताता हूँ, यह कहानी सच्ची है कोई कोरी कल्पना नहीं है।

बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक लड़की अपनी सहेली के साथ रहती थी, उन्होंने एक कमरा किराये पे ले रखा था।

वो लड़की कॉलेज में भी मेरे साथ ही पढ़ती थी, उसका नाम ऋचा था। उसका अक्सर हमारे घर आना जाना था। हम दोनों में कब प्यार हो गया, पता ही नहीं चला।

और एक दिन मैंने उसे “आई लव यू” कह ही दिया।

वो तो जैसे इस इंतज़ार में ही थी- उसने मेरा प्यार स्वीकार कर लिया।

अब जब भी मौका मिलता हम मेरे घर में ही घंटों बैठे प्यार भरी बातें करते रहते !

एक दिन मैंने उस से कहा- मैं तुम्हें चूमना चाहता हूँ !

पहले तो उसने मना कर दिया, फिर कहा- कर लो !

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए। अरे ! उसका फिगर बताना तो मैं भूल ही गया ! तब उसकी उम्र होगी कोई २० साल, कद ५”५ इंच, रंग सांवला, गोल गोल चूतड़ बड़े बड़े, ब्रा का साइज़ ३६, मम्मे बड़े बड़े।

मैंने उसे चूमना शुरू किया और अपना हाथ उसके मम्मों पर ले गया। उसने मना किया, फिर भी मैंने धीरे धीरे उसके निप्पलों को चूसना शुरू किया। वो गरम होने लगी और बोली- कुछ करो !

मैंने उसकी कमीज़ उतरवा दी और सलवार भी। फिर उसको चूमना शुरू किया।

वो तो जैसे पागल ही हो गई। शायद यह उसका पहला सेक्स था, उसने मुझे बालों से पकड़ लिया और बोली- लव ! लव !

मैंने उसे कहा- मैं पहले पीछे से करना चाहता हूँ !

क्योंकि मुझे उसकी गांड बहुत ही अच्छी लगती थी।

वो एकदम मान गई, मैंने उसे पेट के बल लिटा दिया और अपने लौड़े पे थूक लगाया। उसकी गांड इतनी चिकनी थी कि लौड़ा कब अन्दर चला गया, पता ही नहीं चला। मैंने अपना वीर्य उसकी गांड में ही छोड़ दिया।

वो बोली- अब आगे से भी करो !

उसने मेरे लण्ड को अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया। इस बार मैंने उसकी योनि में जैसे ही लण्ड डाला, वो दर्द से चिल्ला उठी और बोली- बाहरऽऽ निकालोऽऽऽ !

मैंने नहीं निकाला और जोर जोर से उसको चोदता रहा। बाद में शायद उसको भी मज़ा आने लगा था, उसने भी खुल कर साथ दिया, मैंने अपना सारा वीर्य उसकी रानों पे गिरा दिया।

उसकी आँखों में भी संतुष्टि के भाव थे, उसने मुझे धन्यवाद कहा।

फिर तो उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता मैं उसे चोद देता। मैंने उसे अपने घर में, रसोई में, बेडरूम में, गैलरी में सब जगह चोदा।

फिर तो वो इतनी बेशरम हो गई थी कि जब भी उसका चुदवाने को दिल करता था, वो मुझे सीधा बोल देती थी,”मुझे तुम्हारी जरुरत है !”

उसके साथ मैंने हर तरह से सेक्स का आनंद लिया, उसकी गांड भी मारी, मुख-मैथुन भी किया।

फिर वो वहां से अपनी पढ़ाई समाप्त करके चली गई। मैंने उसे करीब दो साल तक चोदा।

अब मेरी भी शादी हो गई है और उसकी भी।

पर कसम से आज भी मुझे उसकी गांड और मम्मे याद आते हैं तो मैं मुठ मार लेता हूँ।

उसे मैंने कैसे कैसे चोदा यह अगली कहानी में !

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प्रीती की कहानी सुनने के बाद मुझे सही Hindi Sex Stories में लगा कि जो कुछ मैंने किया वो गलत किया था। खैर जो होना था सो हो गया, अब वो बदला नहीं जा सकता था। मैंने प्रीती से कहा, “प्रीती! मैंने कुछ दिन बाद ही तुमसे माफ़ी माँग ली थी, उसके बाद भी मैं कई बार तुमसे माफ़ी माँग चुका हूँ, पर तुमने मेरी एक नहीं सुनी। आज फिर मैं दिल से तुमसे माफ़ी माँग रहा हूँ, मुझे माफ़ कर दो।”

“हाँ मुझे मालूम है, और मैं तुम्हें उस दिन भी माफ़ कर सकती थी, पर मैं तुम्हें एक सबक सिखाना चाहती थी। आज वो पूरा हो गया”, प्रीती ने जवाब देते हुए कहा, “सुनील मैं एक शर्त पर ही तुम्हें माफ़ करूँगी! अगर तुम मुझे एम-डी और महेश से बदला लेने में मेरी मदद करोगे?”

“मेरा वादा है तुमसे! मैं तुम्हारी पूरी मदद करूँगा।” मैंने जवाब दिया। “अब अंजू और मंजू के बारे में क्या करना है? अगर ये दोनों प्रेगनेंट हो गयी तो?”

“इसके बारे में मैंने सोच लिया है, सुबह मैं दोनों को डॉक्टर के पास ले गयी थी, इतनी जल्दी तो कुछ पता नहीं चलेगा किंतु भविष्य के लिये उसने बर्थ कंट्रोल पिल्स दे दी हैं”, प्रीती ने जवाब दिया।

“लेकिन अब इन दोनों का यहाँ क्या काम है, क्या तुम्हारा इनसे मक्सद पूरा नहीं हुआ?” मैंने पूछा।

“भाभी का हो गया होगा पर हमारा नहीं! अभी हम कुछ दिन और यहाँ रुकना चाहते हैं और खूब चुदाई करना चाहते है, क्यों भाभी ठीक है ना?” अंजू ने प्रीती से पूछा।

“क्या तुम लोग भी यहाँ रहकर वेश्या बनना चाहती हो? तुम लोगों का दिमाग खराब हो गया है?” मैंने थोड़ा झल्लाते हुए कहा।

“हाँ भैया! हम लोग पागल हो गये हैं, और एम-डी और उसके दोस्तों से चुदवा कर उनको पागल कर देंगे, जिन्होंने भाभी को उन सबसे चुदवाने पर मजबूर कर दिया था, और साथ ही साथ पैसा भी कमाना चाहते हैं,” मंजू ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“पर मैंने तो प्रीती से नहीं कहा था उन लोगों से चुदवाने को!” मैं थोड़ा गुस्से में बोला।

“नहीं भैया! आप गलत हो, जिस दिन आपने एम-डी और महेश को भाभी को चोदने दिया उसी दिन आपने भाभी को दूसरों से चुदवाने के लिये मजबूर कर दिया था”, अंजू ने कहा।

“हाँ भैया और हमारी शादी से पहले चुदाई भी आपके कारण ही हुई है”, मंजू ने कहा।

“पर ये मैंने नहीं, तुम्हारी भाभी ने किया है”, मैंने रोते हुए कहा।

“अगर आपने प्रीती भाभी के साथ ये सब ना किया होता तो ये हमारे साथ इस तरह ना करती”, अंजू बोली।

“प्रीती! तुम ही इन्हें समझाओ ना कि तुम्हारा बदला पूरा हो चुका है”, मैंने मिन्नत करते हुए कहा।

“करने दो इन दोनों को, इन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होगी… मैं हमेशा साथ रहुँगी। आओ पहले मैं तुम्हें इन दोनों की कुँवारी चूत के फटने की कुछ तसवीरें दिखाती हूँ”, प्रीती ने पर्स में से तसवीरें निकालते हुए कहा।

“भाभी! आप ने हम लोगों की तसवीरें कब निकाली?” अंजू ने पूछा।

“भाभी आप बड़ी बदमाश हो, आपको ऐसा नहीं करना चाहिये था”, मंजू बोली।

उनकी अलग-अलग रूप में चुदाई की तसवीरें देख कर मैं पागल सा हो गया, “बस अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता”, कहकर मैंने वो तसवीरें फेंक दीं।

“चलो लड़कियों! अब नहा धो कर तैयार हो जाओ, तब तक मैं फोन करके पास के होटल से खाना मंगवा लेती हूँ, आज मैंने बहुत पी ली है… खाना बनाने की हिम्मत नहीं है मुझमें”, प्रीती ने उन दोनों से कहा।

खाना खाते समय हम लोग बातें कर रहे थे कि प्रीती बोली, “चलो अब तुम लोग भी सोने जाओ और मैं भी सोने जा रही हूँ।”

“इतनी जल्दी भाभी? अभी तो बहुत वक्त पड़ा है,” अंजू बोली। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाँ इतनी जल्दी! क्योंकि आज मैं तुम्हारे भैया के लंड की एक-एक बूँद अपनी चूत में ले लूँगी। कई दिन हो गये हैं तुम्हारे भैया के मोटे लंड से नहीं चुदवाया है…” कहकर प्रीती मुझे घसीट कर बेडरूम में ले आयी।

रात भर हम जमकर चुदाई करते रहे। प्रीती ने मुझे एक पल भी साँस नहीं लेने दी।

अगले दिन मैं जब ऑफिस पहुँचा तो महेश मुझे एक नये केबिन की और ले गया। दरवाजे पर नेम प्लेट लगी थी, सुनील अग्रवाल {फायनेंस और अकाऊँट्स मैनेजर}। “थैंक यू सर”, मैंने खुश होते हुए कहा।

“मुझे नहीं! अपने एम-डी साहिब को थैंक यू बोलो, उन्होंने रातों रात इसे तैयार करवाया है, जाओ अब मजे लो… स्पेशियली इस नये सोफ़े का। तुम्हारी तीनों एसिस्टेंट्स इंतज़ार कर रही हैं…” महेश हँसते हुए बोला।

नया केबिन पहले केबिन से बड़ा था और उसकी खासियत यह थी कि उसमें सोफ़ा-कम-बेड भी था। अपनी तीनों एसिस्टेंट्स को बुला कर मैंने नये सोफ़े पर चुदाई का आनंद लिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

शनिवार को महेश ने मुझे होटल शेराटन के सूईट में पहुँचने को कहा। शाम को मैंने प्रीती को बताया, तो उसने कहा, “तुम्हारा सही इनाम मिलने का वक्त आ गया है, शायद कोई बिना चुदी चूत हो…”

“मेरा दिल नहीं कर रहा जाने के लिये”, मैंने कहा।

“नहीं सुनील तुम्हें जाना चाहिये! जाओ और चुदाई का मजा लो, मैं बुरा नहीं मानूँगी, कसम से, वैसे भी हम तीनों बिज़ी हैं…” प्रीती ने कहा।

जब मैं होटल के सूईट में पहुँचा तो एम-डी और महेश को मेरा इंतज़ार करते पाया, “आओ सुनील बैठो और अपने लिये ड्रिंक बना लो।”

मैं अपने लिये ड्रिंक बना कर सोफ़े पर बैठ गया और शक की निगाहों से उन्हें देखने लगा।

“डरो मत सुनील! आज हमने तुमसे कुछ लेने नहीं, बल्कि तुम्हें तुम्हारे काम का इनाम देने के लिये बुलाया है, इसलिये निश्चिंत हो जाओ”, एम-डी ने अपने ग्लास में से घूँट भरते हुए कहा।

“सुनील तुमने सुना तो होगा कि मैंने अपनी ऑफिस की हर औरत को चोदा है?” एम-डी ने मुझसे पूछा।

“हाँ सर! कुछ ऐसी अफ़वाह सुनी तो है…” मैंने जवाब दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ये अफ़वाह नहीं, हकीकत है सुनील! मैंने और महेश ने ऑफिस में काम करने वाली हर लड़की या औरत को खूब चोदा है। नयी-नयी लड़कियों को चोदने के बाद यहाँ काम पर लगाया है। आज हम दोनों तुम्हें अपना राज़दार और हिस्सेदार बनाना चाहते हैं”, एम-डी ने गर्व से कहा, मगर मैंने ये नहीं सोच था।

“इसका मतलब है कि तुम ऑफिस की किसी भी औरत को अपने नये केबिन में बुला कर उसे चोद सकते हो, तुम्हें मेरी परमिशन है इस काम के लिये।”

“थैंक यू सर”, मैंने जवाब दिया।

मेरे ऑफिस में कई लड़कियाँ थीं जिन्हें मैं चोदना चाहता था। इस बात ने मेरा काम और आसान कर दिया था। ये सोच मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी।

महेश ने ताली बजाते हुए कहा, “सुनील… कल का क्यों इंतज़ार करें! आओ आज से ही शुरू करते हैं।”

महेश के ताली बजते ही बेडरूम से दो निहायत ही सुंदर लड़कियाँ बाहर निकल कर आयी। दोनों के हाथों में शराब के ग्लास और सिगरेट थीं। “ये रेहाना है, हमारे डिसपैच डिपार्टमेंट से और ये नसरीन है हमारी ब्राँच ऑफिस से”, महेश ने मेरा उनसे परिचय कराते हुए कहा।

“पहले कभी इन्हें देखा है? मैंने आज की रात सबसे बेहतरीन लड़कियों को अपनी ऑफिस और ब्रन्च ऑफिस से चुना है…” एम-डी ने कहा।

“सर रेहाना को मैंने देखा है, और इसे चोदना भी चाहता था पर नसरीन मेरे लिये नयी है…” मैंने जवाब दिया।

“चिंता मत करो! थोड़े दिनों में सबको जान जाओगे…, लड़कियों! ये सुनील है और आज से इसे मेरी परमिशन है कि ये तुम सबको जब जी चाहे चोद सकता है, ये बात औरों को भी बता देना, समझ गयी तुम दोनों?” एम-डी ने उनसे कहा।

“हाँ सर! हम समझ गये”, रेहाना ने अपनी गर्दन हिलाते हुए सिगरेट का धुँआ बाहर छोड़ते हुए कहा।

“चलो फिर शुरू हो जाओ और अपना छुपा हुआ खज़ाना सुनील को दिखाओ”, महेश ने हुक्म दिया।

दोनों अपने कपड़े उतारने लगी। दोनों ही काफी सुंदर थी, भरी-भरी छातियाँ, पतली-पतली कमर, बिना बालों की चूत काफी शानदार लग रही थी, तरबूज जैसी गाँड, लंबी-लंबी सुडौल टाँगें और अंत में गोरे- गोरे पैरों में बहुत ही सैक्सी और ऊँची ऐड़ी वाली सैंडल। उन्हें नंगा देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।

“चलो महेश यहाँ से! और सुनील को चुदाई का पूरा आनंद लेने दो”, एम-डी ने कहा।

“रुकिये सर, आपने कहा कि मैं आज से आपका पार्टनर और राज़दार हूँ तो क्यों ना हम लोग मिलकर इन्हें चोदें?” मैंने एम-डी से कहा।

“देखा महेश! मैं नहीं कहता था कि अपना सुनील मतलबी नहीं है, ये सब कुछ शेयर करना चाहता है”, एम-डी खुश होते हुए बोला, “लेकिन सुनील ये दो हैं और हम तीन…”

“सर औरत के पास तीन छेद होते हैं, मर्द को मज़ा देने के लिये, चूत गाँड और मुँह… और इसके लिये हम तीन हैं।”

“मेरे लिये ये नयी बात होगी”, एम-डी ने कहा, “चलो महेश… कपड़े उतारते हैं और ट्राई करते हैं।”

“सर हम लोग एक-एक कर के तीनों छेदों का मज़ा लेंगे”, मैंने एम-डी को समझाया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ओह गॉड!!!” हम तीनों को नंगा देखते हुए एक ही झटके में अपना पैग गटकते हुए रेहाना बोली।

एम-डी की नज़र जब मेरे लंड पर पड़ी तो उसने हँसते हुए कहा, “महेश! देखो सुनील का लंड तुमसे बड़ा और मोटा है, अब तुम्हारे मोटे लंड के किस्से ही रह जायेंगे।”

रेहाना ने मेरे लंबे लंड को देखते हुए कहा, “सर!!! मैं ये लंबा लंड अपनी गाँड में नहीं लूँगी।”

“रेहाना! तुम्हें पता है मुझे ’ना’ सुनने की आदत नहीं है, इसलिये सुनील तुम्हारी गाँड में अपना लंड डालेगा।” फिर रेहाना ने विरोध नहीं किया। रेहाना वैसे भी काफी नशे की हालत में थी।

एम-डी बिस्तर पर लेट गया और रेहाना ने एम-डी के ऊपर आकर उसका लंड अपनी चूत में ले लिया और उछलने लगी। एम-डी का लंड जड़ तक उसकी चूत में समा चुका था। रेहाना की गाँड उभरी हुई थी। अपने लंड को सहलाते हुए मैं अपने थूक से उसकी गाँड को चिकना कर रहा था।

“सुनील ये कोई तरीका नहीं है इतनी सुंदर गाँड मारने का, मैं होता तो एक ही धक्के में पूरा लंड डाल देता…” महेश ने कहा।

“क्या उसे दर्द नहीं होगा?” मैंने कहा।

“हाँ… उसे दर्द तो होगा, पर जब वो दर्द से चींखेगी तो उसके दर्द की आवाज़ मुझे अपने कानों में संगीत की तरह लगती है…” महेश बोला।

“तुम्हें जैसे करना है, वैसे करना, मुझे अपने तरीके से करने दो”, मैंने जवाब दिया। रेहाना मेरी और देख कर मुस्कुरा दी। उसकी आँखें नशे में बोझल थीं। मैंने अपने लंड और उसकी गाँड को चिकना कर अपने लंड को गाँड के छेद पर रख कर थोड़ा अंदर घुसाया।

“ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईई प्लीज़ सर!!! रुक जाइये, बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी”, रेहाना दर्द से चिल्लायी।

“सुनील रुकना नहीं! और जोर से डालो”, एम-डी ने कहा। मैंने अपने लंड को और अंदर घुसाया।

“ऊऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईईई……. अल्लाहहहहह मर गयीईईईई…” रेहाना जोर से चींखी।

मैंने रेहाना की गाँड में धक्के लगाते हुए महेश से कहा, “अब तुम अपना लंड रेहाना के मुँह में दे दो।”

मैं ऊपर से गाँड मर रहा था और एम-डी नीचे से धक्के लगा कर उसकी चूत को चोद रहा था। रेहाना जोर-जोर से महेश के लंड को चूस रही थी। करीब पाँच मिनट के बाद हमारे तीनों के लंड ने रेहाना के तीनों छेद मैं पानी छोड़ दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“नसरीन!! अब तुम्हारी बारी है”, महेश ने कहा।

“ठीक है सर! सुनील सर का लंड अपनी गाँड में लेकर मुझे खुशी होगी”, नसरीन ने जवाब दिया, “लेकिन सर इजाज़त हो तो पहले मैं अपनी डोज़ ले लूँ?”

“जरूर….” लेकिन जल्दी एम-डी ने कहा।

मुझे कनफ्यूज़्ड देख कर महेश ने बाताया कि नसरीन चुदाई के समय ड्रग्स लेती है और फिर बहुत मस्त हो कर चुदवाती है। मैंने देखा कि नसरीन ने अपने पर्स में से एक पैकेट निकाला और एक सफ़ेद से पाऊडर की मेज पर धारी सी बना दी और फिर एक सौ रुपये के नोट को रोल करके उसके द्वारा वो पाऊडर अपनी नाक में खींचने लगी।

“चलिये सर… अब मैं तैयार हुँ, चुदाई के लिये…” नसरीन अपना बाकी का पैग गटकते हुए बोली। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी और उसकी आँखों की पुतलियाँ फैली हुई थीं।

इस बार महेश बिस्तर पर लेट गया और नसरीन उसके लंड को अपनी चूत में लेकर उस पर लेट गयी। एम-डी ने अपना लंड उसके मुँह में दिया। मैंने ऊपर आकर उसकी गाँड में एक ही धक्के में पूरा लंड पेल दिया।

हम तीनों जोर-जोर के धक्के लगाते हुए उसे चोद रहे थे। नसरीन की गाँड रेहाना की गाँड से कसी थी इसलिये मुझे और मज़ा आ रहा था। नसरीन की सिसकरियाँ भी तेज थी।

हम तीनों ने जम-जम कर धक्के मारते हुए अपना अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद एम-डी ने कहा, “सुनील तुम मज़े लो, हम लोग जाते हैं, देर हो रही है।”

उनके जाने के बाद मैंने एक-एक बार और उन दोनों की चुदाई की और रात के दो बजे घर पहुँचा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

मैं दूसरे दिन ऑफिस पहुँचा तो मुझे सभी महिला एम्पलोयिज़ की लिस्ट मिल गयी। उनका नाम, उम्र, किस डिपार्टमेंट में काम करती है और कितने साल से। उस दिन के बाद मैं एक-एक करके उनको अपने केबिन में बुला कर उन्हें चोदने लगा।

थोड़े ही दिन में ये बात आग की तरह फ़ैल गयी कि मेरा लंड महेश के लंड से मोटा है।

थोड़े दिन बाद पिताजी की चिट्ठी आयी कि मैं अंजू और मंजू को वापस भेज दूँ। मैंने उन दोनों की टिकट करा दी। जिस दिन वो जा रही थीं, मैंने उनसे कहा, “तुम दोनों वादा करो कि यहाँ से जाने के बाद ये सब छोड़ दोगी?”

“भैया! हम आपसे वादा करते हैं कि अब शादी से पहले किसी से नहीं चुदवायेंगे”, मंजू ने कहा।

उन दोनों को ट्रेन में बिठा कर मैं घर पहुँचा तो प्रीती ने कहा, “सुनील अब अंजू और मंजू यहाँ से जा चुकी हैं तो क्यों ना हम एम-डी और महेश से अपना बदला लेने का प्लैन बनायें।”

“तुम क्या करना चाहती हो?” मैंने पूछा।

“सबसे पहले मैं उनके बारे में सब कुछ जानना चाहुँगी”, प्रीती ने कहा।

“तुम उन दोनों से इतनी बार चुदवा चुकी हो, और क्या जानना चहोगी?” मैंने कहा।

“मजाक मत करो, मैं उनकी हर बात जानना चाहती हूँ, जिससे उनकी कमजोरियों का पता चल सके, सुनील! तुम जितना भी जानते हो मुझे बताओ”, प्रीती बोली।

“महेश के बारे में इतना नहीं जानता। पर हाँ एम-डी, मिसेज योगिता के साथ उनके ही बंगले पर रहते हैं, उनकी बीवी का नाम मिली है और उनकी दो बेटियाँ हैं”, मैंने जवाब दिया।

“दो बेटियाँ!” प्रीती के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

“मैं जानता हूँ तुम क्या सोच रही हो पर अभी वो छोटी हैं”, मैंने कहा।

“सुनील! तुम मिस्टर रजनीश, तुम्हारे एक्स एम-डी के परिवार के बारे में क्या जानते हो?” प्रीती ने पूछा।

“यही कि उनकी विधवा मिसेज योगिता, और उनकी लड़की रजनी साथ में रहती हैं। एम-डी रजनी को अपनी बेटियों से भी ज्यादा प्यार करता है”, मैंने जवाब दिया।

“तुम्हें ये कैसे मालूम?” उसने पूछा।

“मुझे रजनी ने बताया था, उसने छुट्टियों में कुछ दिन कंपनी में काम किया था।” मैंने जवाब दिया।

“क्या तुमने रजनी को चोदा है? मुझे सच- सच बताना”, उसने पूछा।

कुछ देर सोचते रहने के बाद मैंने सच बताते हुए कहा, “हाँ! मैंने उसे चोदा है पर वो हमारी शादी के पहले की बात है।”

“उस समय वो कुँवारी थी! है ना? क्या उसके बाद तुमने उसे चोदा है?” प्रीती ने फिर पूछा।

“नहीं प्रीती! कसम ले लो, मैंने उसके बाद उसे एक बार ही मिला हूँ, वो भी पार्टी में तुम्हारे साथ”, मैंने जवाब दिया।

“सुनील मैं जानती हूँ तुम सच बोल रहे हो! जब तुम झूठ बोलते हो तो तुम्हारे चेहरे से पता चल जाता है। रजनी तुम्हें प्यार करती है, मैंने उसकी आँखों में तुम्हारे लिये प्यार देखा है, क्या तुम जानते हो?” प्रीती ने कहा।

“मुझे भी ऐसा कई बार लगा है”, मैंने जवाब दिया।

“क्या पता तुम्हें फिर रजनी को चोदना पड़े”, प्रीती ने मुझे बाँहों में भरते हुए कहा, “फिलहाल तो रजनी को भूल जाओ, वो यहाँ नहीं है! पर मैं तो हूँ, सुनील! मुझे चोदो और इतना चोदो कि मेरी चूत माफी माँगने लगे।”

मैं उसे बाँहों में भर कर बेडरूम में ले गया और पूरी रात उसे कस-कस कर चोदता रहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

दूसरे दिन से प्रीती एम-डी और महेश के घर जाने लगी। वो बराबर उनसे और उनके परिवार से मिलने लगी। अब वो उनके परिवार की एक सदस्या जैसे हो गयी थी। एक दिन मैंने उससे पूछा, “क्या पता लगाया तुमने इतने दिनों में?”

“कुछ खास नहीं, महेश के दो बच्चे हैं! एक लड़की मीना २२ साल की… जो अपना ग्रैजुयेशन कर रही है और एक लड़का अमित १६ का। लगता है महेश घर से ज्यादा बाहर चुदाई करता है, प्रीती ने हँसते हुए कहा, मीना और मैं अच्छे दोस्त बन गये हैं।”

“एम-डी के बारे में क्या पता लगा?” मैंने पूछा।

“वहाँ भी कुछ खास हाथ नहीं लगा। मिसेज योगिता और मिसेज मिली, अच्छी सहेलियाँ हैं, और हाँ तुमने सच कहा था! उनकी बेटियाँ छोटी हैं। हाँ! रजनी और मैं अच्छे दोस्त बन गये हैं। मैंने हार नहीं मानी है, एक दिन भगवान हमारी मदद जरूर करेगा।”

करीब तीन महीने बाद मुझे पिताजी की चिट्ठी मिली कि अंजू और मंजू की शादी पक्की हो गयी। करीब के गाँव के जमीनदार के लड़कों के साथ। हम दोनों को शादी में बुलाया था।

मैं और प्रीती हमारे घर शादी अटेंड करने पहुँचे। देखा अंजू और मंजू बहुत खुश थीं। शादी के दिन जब हम अकेले में मिले तो प्रीती ने उनसे पूछा, “तुम दोनों को कोई शिकायत तो नहीं है?”

अंजू ने मंजू की तरफ देख कर कहा, “सिर्फ़ एक!”

“और वो क्या है?” प्रीती ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हम इतने दिन वहाँ रहे पर भैया को हम इतने सुंदर नहीं दिखे कि वो हमें चोद सके”, अंजू ने कहा।

“अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है, तुम भी यहीं हो और तुम्हारे भैया भी! जाओ और चुदवा लो उनसे, मैं बुरा नहीं मानुँगी”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“प्रीती! अपनी सीमा में रहो”, मैंने अपनी बहनों को बाँहों में भरते हुए कहा, “ऐसी बात नहीं है पगली, जब तुम दोनों का नंगा बदन देखा तो मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था, अगर तुम दोनों मेरी बहनें ना होती तो उसी समय तुम दोनों को चोद देता।”

“मैं भी इस चीज़ को मानती हूँ, रिश्तों की कदर करनी चाहिये”, प्रीती बीच में बोली, “अब तुम दोनों को अपनी सुहागरात का इंतज़ार होगा?”

“हाँ भाभी, तीन महीने हो गये चुदवाये, अँगुली से अपनी चूत चोद-चोद कर देखो हमारी अँगुली भी घिस कर एक इंच छोटी हो गयी है”, मंजू ने अपनी अँगुली दिखाते हुए कहा।

“मैं तो यही प्रार्थना करती हूँ कि सब अच्छी तरह से हो जाये, हमारे पतियों को ये ना पता चले कि हमारी चूत कुँवारी नहीं है”, अंजू थोड़ा सिरियस होते हुए बोली।

“घबराओ मत! सब ठीक होगा”, प्रीती ने उन्हें सांतवना दी।

शादी के बाद हम लोग वापस लौट आये। प्रीती बराबर एम-डी और महेश के घर जाती रही। हमारी चुदाई वैसे ही चल रही थी। मैं ऑफिस में लड़कियों को चोदता और प्रीती को घर पर। प्रीती भी घर पर मुझसे चुदवाती और क्लब में दूसरों से। वो चाहे एम-डी और महेश से कितनी भी गुस्सा हो पर मुझे लगने लगा था कि प्रीती को यह शबाब-शराब से भरपूर ऐय्याश लाइफ स्टाईल रास आ गया था। उसकी चुदाई की आग पहले से बहुत बढ़ गयी थी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

एक दिन मैं ऑफिस से घर लौटा तो देखा प्रीती एक खत फढ़ रही थी, और जोर-जोर से हँस रही थी।

“किसका खत है?” मैंने पूछा।

“लो तुम ही पढ़ के देख लो”, प्रीती ने मेरे हाथ में खत पकड़ा दिया।

मैंने खत लेके पढ़ा………………………..

“हमारी प्यारी भाभी,

सॉरी हम दोनों आप को खत नहीं लिख पाये।

हम दोनों बहुत मज़े में हैं। हमारे पति बहुत ही अच्छे इनसान है। हर रात को हमारी जमकर चुदाई करते हैं। मैं शुरू से बताती हूँ।

हाँ हमारी सुहागरात की रात से! हमारे पतियों ने पहले किसी लड़की को चोदा नहीं था, इसलिये जल्दबाज़ी में उन्हें हमारे कुँवारे ना होने का पता नहीं चला। फिर भी हम उन्हें कहते रहे, जरा धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।

कुछ महीनों तक ऐसे ही चलता रहा। फिर हमें चुदाई में इतना मज़ा नहीं आता था, क्योंकि हमारे पति बहुत ही सीधे हैं। ना तो वो हमारी चूत चाटते हैं, ना ही हमे अपना लौड़ा चूसने देते हैं। गाँड मारने की बात तो जाने दो।

फिर हम दोनों ने मिलकर इसका उपाय निकाला। हम दोनों ने एक दूसरे के पति को पटाया और उनसे चुदवा लिया। फिर एक बार हमने नाटक करके एक दूसरे को दूसरे के पति के साथ पकड़ लिया। हमारे पति इतने सीधे हैं कि हमसे माफी माँगने लगे। हमने उन्हें माफ़ किया पर एक शर्त पर कि वो हमें साथ-साथ चोदेंगे।

अब हम चारों साथ में ही सोते हैं, जैसे राम और श्याम के साथ सोते थे। हमने उन्हें चूत चाटना भी सिखा दिया है और हम उनका लंड भी मज़े से चूसते हैं। हम चारों का आपके पास आने को बहुत मन कर रहा है।

और आपका क्या हल है? भैया को हमारा प्यार देना।

बाय-बाय!

आपकी रंडी ननदें, अंजू और मंजू।”

“थैंक गॉड! ये दोनों अपने जीवन में सैटल हो गयी”, मैंने खत पढ़कर कहा।

समय गुजरने लगा और प्रीती की एम-डी और महेश से बदला लेने की ख्वाहिश और ज्यादा तेज होने लगी। मैंने उसे सांतवना देते हुए कहा, “प्रीती हिम्मत रखो! कोई रास्ता जरूर निकल आयेगा।” मुझे क्या मालूम था कि रास्ता भविष्य में हमारा इंतज़ार कर रहा है।

एक दिन मैंने ऑफिस से लौट कर प्रीती को बताया कि महेश बरबाद हो गया है। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“क्यों कैसे?”

“तुम्हें याद है? उसने बताया था कि वो अपना सारा पैसा शेयर मॉर्केट में लगाता है। मॉर्केट बहुत नीचे गिर गया है और उसे भारी नुकसान लगा है। बेचारा रो रहा था मेरे सामने, कि उसके पास अब कुछ भी नहीं बचा है।”

“भगवान ने अच्छा सबक सिखाया है हरामी को!”

“हाँ प्रीती, वो तो आत्महत्या तक करने की सोच रहा है।”

“नहीं सुनील! उसे आत्महत्या नहीं करने देना, पहले मेरा बदला पूरा हो जाये, फिर चाहे वो आत्महत्या कर ले। सुनील तुमने क्या बताया उसे पैसे की तकलीफ है? इससे मेरे दिमाग में एक ऑयडिया आया है”, प्रीती ने कहा।

मैंने प्रीती को बाँहों भरते हुआ पूछा, “जल्दी से बताओ क्या ऑयडिया है?”

“अभी नहीं पहले मुझे सोचने दो, चलो चल कर सैलिब्रेट करते हैं”, कहकर प्रीती ने मुझे बाँहों में भर लिया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख कर चूमने लगी।

उसने दो पैग बनाये और ड्रिंक पीने के बाद हम कपड़े उतार कर बिस्तर पर लेट गये। “ओह सुनील! देखो तुम्हारा लंड कैसे तन कर खड़ा है”, प्रीती ने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा।

“पर मैं तो समझा था कि तुम अपने प्लैन के बारे में बताओगी?”

“ओहहह सुनील! प्लैन तो वेट कर सकता पर इस समय इस खड़े लंड की ज्यादा चिंता है, आओ और मुझे कस कर चोदो”, प्रीती ने अपनी टाँगें फैला कर कहा।

जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत में घुसाया, “ओहहहहहह सुनील!!!” उसके मुँह से सिसकरी निकली।

“सुनील! मैं आज कितनी खुश हूँ, मुझे महेश से बदला लेने का तरीका मिल गया।”

“प्रीती! अब महेश के बारे में सोचना छोड़ो और इस बात पे ध्यान दो कि मैं अब तुम्हारी चूत के साथ क्या करने वाला हूँ”, मैंने अपना लंड तेजी से उसकी चूत के अंदर बाहर करते हुए कहा।

“हाँ सुनील! मुझे चोदो, बहुत अच्छा लग रहा है”, वो कहने लगी और मैं उसे और तेजी चोद रहा था। मेरा लंड पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था।

मेरे ध्क्कों की रफ़्तार बढ़ते देख उसने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर पे जकड़ लीं और अपने कुल्हे उछाल कर थाप से थाप मिलाने लगी। उसके मुँह सिसकरियाँ निकल रही थी।

“हाँआंआंआं सुनील!!! और जोर से!!!!!, हाँआँआँ ऐसे ही करते जाओ, हाँ और अंदर तक घुसा दो….. ओहहहहह….. आआआआआआहहहहहह….. मैं तो अपनी मंज़िल के करीब हूँ। मेरा छुटाआआ!!!” कहकर वो निढाल पड़ गयी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

मेरा नहीं छूटा था, इसलिये मैं और तेजी से उसे चोदने लगा। “लगता है तुम्हारा नहीं छुटा”, उसने भी मेरा साथ देते हुए कहा।

“नहीं, पर जल्द ही छूटने वाला है”, और मैं जोर-जोर से अपने लंड को अंदर डालने लगा।

वो फिर मेरा साथ देने लगी, “सुनील, रुको मत! हाँआँ चोदते जाओ… हाँआंआं लगता है मेरा फिर छूटने वाला है….” उसकी साँसें उखड़ रही थी।

“ओहहहहहहह सुनील मेरा छूटाआआआ….” वो जोर से चिल्लायी और उसी वक्त मैंने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।

हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरे चूम रहे थे और एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे। इससे मेरे लंड में फिर गर्मी आ गयी और वो खड़ा हो उसकी चूत पर झटके मारने लगा।

वो मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ कर बोली, “सुनील अब मेरी गाँड मारो।” मुझे भी गाँड मारने का शौक था, इसलिये उसके कहते ही मैं उसके पीछे आकर अपने थूक से उसकी गाँड को गीली करने लगा। “सुनील ये मत करो!!! आज मेरी गाँड में ऐसे ही अपना लौड़ा घुसा दो”, वो बोली।

“पागल हो गयी हो? तुम्हें बहुत दर्द होगा!”

“होने दो सुनील! महेश भी हमेशा मेरी गाँड ऐसे ही मारता आया है। और अब अगर मेरा ऑयडिया काम कर गया तो मैं समझूँगी कि जैसे मैंने महेश की कोरी गाँड मारी है। इसलिये मैं बोलती हूँ वैसा करो”, उसने कहा।

मेरे पास कोई चारा नहीं था। मैंने जोर से अपना लंड उसकी गाँड में डाल दिया।

“ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईई माँआंआंआं…. मर गयीईईईई”, उसके मुँह से चींख निकली। मैं उसकी गाँड मारने लगा और साथ ही उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल कर उसे चोदने लगा। थोड़ी देर में ही हम दोनों का काम हो गया और दोनों एक दूसरे को बाँहों में ले कर सो गये।

सुबह मैंने उसे फिर पूछा, “प्रीती! अब बताओ तुम्हारा प्लैन क्या है?”

“सुनील प्लैन सिंपल है, बस तुम्हारी मदद चाहिये। तुम्हारी मदद के बिना ये पूरा नहीं हो सकता”, प्रीती खुश होती हुई बोली।

“प्रीती! मैं तुम्हें पहले ही बोल चुका हूँ, तुम्हें मुझसे पूरी मदद मिलेगी जिससे तुम एम-डी और महेश से अपना बदला ले सको, अब बताओ।”

“ठीक है! सुनो मेरा प्लैन क्या है….” Hindi Sex Stories

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