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प्रेषक : राकेश
अभी तक आपने पहले भागों में पढ़ा Antarvasna कि प्रिया की मैंने पहली बार कैसे चुदाई की थी। वो पूरी तरह से संतुष्ट होकर मेरे घर से गयी थी। अब आगे की कहानी और जानें कि आगे की चुदाई कैसे हुई।
मैंने अपने आप को प्रिया की दोनों टांगों के बीच फ़िक्स कर लिया और उसकी दोनों टांगों को और फ़ैलाकर उसकी चूत को और चौड़ा कर दिया मुझे उसकी चूत का छेद साफ़ इतना बड़ा दिख रहा था कि उसमे में अपने थम्ब को सीधा डाल सकता था।
पर मैंने बिना टाइम गंवाये किये अपने लंड को सीधा उसकी चूत के छेद में झोंक दिया और मेरा लंड प्रिया की चूत में आधा धंस गया।
ये शायद ऐसा मौका था जब चुदाई में मुझे इतनी आसानी लंड डालने का मौका मिला हो।
मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड प्रिया की चूत में ठुक गया।
आज उसकी चूत पहले ही गीली हो रखी थी इसलिये अब मैं अपने लंड को ऊपर नीचे रगड़ने लगा तो प्रिया की चूत में सरसराहट होने लगी।
प्रिया ने भी नीचे से हमला कर दिया और अपनी गांड का एरिया ऊपर को उठा कर खुद भी चुदायी करवाने के लिये मुझे इनवाईट करने लगी।
आज मुझे और प्रिया को चुदायी में दर्द नहीं हो रहा था और दोनों ही मस्त थे वह आज बड़ी मस्ती में लग रही थी।
मैंने प्रिया की चूत में ऊपर नीचे रगड़म परेड शुरु कर दी और प्रिया भी अपनी चुदायी करवाने लगी।
धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ गयी तो गन्ने के खेत में जैसे तूफ़ान सा आ गया। मैंने चुदायी के साथ साथ प्रिया के पूरे बदन को चूमना, चाटना, मसलना और रगड़ना भी चालू रखा था।
मेरा ऐसा करने पर प्रिया भी जवाब दे रही थी बस जवाब के लिये उसके पास लंड नहीं था नहीं तो वह भी पूरे जोर से हमारी चुदायी की गाड़ी को धकेल रही थी।
मैं पहले की तरह बेड पर लेट गया और प्रिया मेरे ऊपर आ गयी। मुझे तो इससे बड़ा फ़ायदा हुआ, मैं पूरी ताकत से चोदने के चक्कर में अपनी काफ़ी एनर्जी वास्ट कर चुका था और इस पोसिशन में मुझे प्रिया की दुबारा चुदायी के लिये रिचार्ज होने का मौका मिल गया।
प्रिया ने अब ऊपर से धक्का लगाना शुरु कर दिया और मैं आराम से उसके चूचियों और निप्पलों को मसलने लगा।
पर उसके बूब्स ही मेरे हाथों के में टार्गेट थे, जब मुझे ज्यादा मज़ा आता तो मैं उसके चूतड़ पर जोर जोर से स्लाप कर देता जिससे प्रिया और मुझे दोनों को मज़ा आता।
मैं जैसे ही प्रिया की गांड के आस पास स्लाप करता प्रिया और जोर से अपनी चूत को मेरे लंड की तरफ़ उठा देती और दोनों का मज़ा दोगुना हो जाता।
अचानक प्रिया बोली- राजु, अब जल्दी करो मैं गीली हो गयी हूं.
तो मैंने प्रिया को फ़िर पहले वाली पोसिशन में करके अपने आप को उसके ऊपर ले आया।
अब मैंने ऊपर से अपनी स्पीड बड़ाकर प्रिया की चूत को अपने लंड से पूरी ताकत के साथ ठोंकना शुरु कर दिया।
प्रिया अब जोर जोर से आवाजें निकाल रही थी पर अब वह पहले की तरह खुश नज़र नहीं आ रही थी पर उसकी आहें मुझे और उत्तेजित कर रही थी और मैंने और जोर से उसकी चुदाई करने लगा।
मुझे प्रिया की चीख में एक अलग ही मज़े का आने लगा और में और जोर से उसकी चूत को अपने लंड से ठोंक रहा था।
करीब 2-3 मिनट बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और में थकने लगा तो मैंने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो प्रिया भी थोड़ा रिलेक्स लगने लगी।
अचानक मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लंड के जड़ से अंदर नसों में पानी निकलने को बेताब है मैं समझ गया कि अब मेरा भी झड़ने वाला है प्रिया तो शायद पहले ही झड़ चुकी थी।
मैंने प्रिया की चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक ठोंक कर अपने को रोक दिया। और मेरे लंड के अंदर से सारा क्रीम धीरे धीरे होता हुआ प्रिया की चूत में जाता सा लगने लगा।
उधर प्रिया भी शायद अपनी चूत में मेरे लंड का क्रीम फ़ील कर रही थी वह हलकी सी आहें भरते हुए रिलेक्स और खुश नज़र आ रही थी। कुछ पलों के बाद मेरे लंड का सारा क्रीम प्रिया की चूत की गेहराई में कहीं गुम हो गया।
मैं एकदम सुस्त हो गया था ऐसा लग रहा था जैसे किसी लम्बी रेस दौड़ी हो और मेरा लंड भी एकदम सिकुड़ गया था में इतना सुस्त हो गया कि वैसे हो प्रिया के ऊपर लेट गया और प्रिया ने भी कोई जावब नहीं दिया और हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे मतलब प्रिया नीचे बेड पर लेटी हुई थी और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर ही था।
5 मिनट बाद ही अलग हुए और बाथरूम जाकर पहले साफ़ किया और अपने अपने कपड़े पहन लिये।
इसके बाद प्रिया ने अपनी साड़ी और पेटीकोट ठीक किया और फ़िर हम दोनों बेडरूम से दुबारा कम्प्यूटर टेबल पर आ गये।
इस समय करीब 10:50 का टाइम हुआ था में बोला चलो चाय पीते हैं तभी अनिल का भी फोन आया कि वह 5 मिनट में पहुंच रहा है।
फ़िर 5 मिनट में चाय भी तैयार हो गयी और फ़िर तीनो ने चाय पी, आज अनिल ने ड्रिंक भी नहीं किया था शायद उसे मौका नहीं मिला पर मैं प्रिया को देखकर उसके बारे में सोचने लगा और शायद अनिल के इरादे ही आज कुछ वैसे ही थे।
मैं प्रिया को देख रहा था पर प्रिया शायद हम दोनों का मतलब समझ गयी थी पर दोनों को ही कुछ बताना नहीं चाहती थी। Antarvasna
सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !यह कहानी Hindi Sex Stories सच्ची है …मेरी शादी होने के बाद जब मैं ससुराल गया और मेरी साली भैरवी को देखा तो देखते ही रह गया !
क्या बदन था … क़यामत थी … बड़े लम्बे बाल … गोरा रंग .. काली आँखें… बड़े बड़े स्तन …बड़े उभरे हुए नितम्ब …. आऽऽहा … क़यामत थी ….
शुरु में तो वो भाव खा रही थी … मेरी बीवी को बच्चा होने वाला था….मैं भी वहाँ रहता था … रोज काफी मस्ती होती थी। मैं भी उसको छू लेता था तो वो कुछ नहीं बोलती थी …
बाद में उसकी शादी हुई … उसकी उसके पति से नहीं बनी और उसने तलाक ले लिया।
अब वो मेरी साथ काफी बातें करती थी और खूब घुल मिल गई थी … जब भी मौका मिलता, मैं उसके बदन को छू लेता.. वो कुछ नहीं कहती।
एक दिन रात को मैं उसके कमरे में गया …. उसके बालों में हाथ घुमाया … केले जैसी पिन्डलियों पर भी हाथ घुमाया !
उसने कोई विरोध नहीं किया … मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैं अपने होठों से उसके होंठ चूमने लगा …
उसको मजा आया, कहने लगी- मुझे तुम पहले से पसन्द थे !
फिर तो देरी किस बात की…
मैंने उसके संतरे जैसे स्तनों को हाथ में पकड़ा और मसलने लगा..
उसको भी मजा आ रहा था, कई दिनों से उसने लंड नहीं लिया था …
मैं तो उसको चाटने लगा। ऊपर का गाउन को हटा दिया, अब मेरे सामने वो सिर्फ पेंटी में थी और मैं उसले सारे बदन को चाटने लगा…
यह मेरी बहुत सालों से इच्छा थी जो आज पूरी हो रही थी….
उसके दोनों बूब्स जो मेरी जान थे, वो आज मेरे हाथों में थे …
वो कराह रही थी … काफी गरम हो रही थी….. उसकी गोरी काया ….. मुझे उत्तेजित कर रही थी… पूरा बदन जैसे किसी ने फ़ुरसत में बनाया हो ऐसा था…
मैं नसीब वाला हूँ… मेरी जीभ नीचे की ओर गई … एक भी बाल नहीं था …. मेरी जीभ ने अपना काम चालू कर दिया ….
वो भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी !
मेरा ७ इन्च का लंड उसके हाथ में था ….
वो उसको अन्दर लेने के लिए बेताब थी ….
मैंने धीरे से उसकी चूत के मुँह पर लंड को रखा और एक ही झटके में आधा अन्दर घुसेड़ दिया…
क्या टाइट चूत थी… जैसे नई ….
वो बोली …ओह …धीरे से ….
दूसरे झटके में पूरा घुसेड़ दिया…
उसकी आँखों में से पानी निकल गया …
फिर भी बोली …. मजा आया .. जल्दी करो…
मैं तो चालू हो गया
झटके पे झटके ….
उसने दोनों पैर ऊपर उठा के मेरे कंधो पे रख दिए ….
झटके लग ही रहे थे कि उसने मुझे बोला … कुछ और स्टाइल करते हैं …
मैंने बोला- कुतिया बन जाओ…
वो घूम गई और झुक गई…..
क्या गांड थी…
मैं तो पागलों की तरह चूमने लगा !
तो वो बोली … अरे ! दीदी जग जायेगी… !
मैं तो उसकी गांड का छेद देखते ही रह गया…..और उस में डालने की सोचने लगा।
लेकिन उसने मेरा पकड़ के अपनी चूत में घुसेड़ लिया…
मैंने फ़िर से झटके लगाना चालू कर दिया …
काफी समय के बाद उसका पानी निकल गया, मेरा निकलने वाला ही था कि उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी …. पूरा पानी पी गई… बोली- अच्छी चुदाई करते हो ! दीदी लकी है ! …. पहले मालूम होता तो पहले ही कर लेती….
मैं भी पूरी रात उसके साथ ही नंगा सोया रहा … पूरी रात में तीन बार उसकी चुदाई की ….. पर उसकी गांड मरने की इच्छा पूरी नहीं हुई …..
यह मेरी सच्ची कहानी है ….. Hindi Sex Stories
यह एकदम १००% सच्चा अनुभव Hindi Porn Stories है जो कि मैंने अपनी पत्नी के साथ महसूस किया। मेरा मान राम है और मेरी उम्र ३२ साल है। मेरी पत्नी का नाम मुस्कान है, उसकी उम्र ३० साल है।
पिछले साल हम लोग केरल गए थे घूमने के लिए। वहाँ केरल में मालिश बहुत मशहूर है। दुनिया भर के लोग केरल की मालिश पसन्द करते हैं। मैंने अपनी बीवी को बताया कि यहाँ मालिश का बहुत मज़ा आएगा तुम्हें। पहले तो वो थोड़ा शरमाई फिर बाद में राजी हो गई।
हम लोग एक छोटे से मालिश-पार्लर में गए। वहाँ केवल एक ही आदमी था और वही वहाँ पर मालिश करता था। उसका नाम जोशीन था और उसकी उम्र २८ साल थी और वह केरल का ही रहने वाला था, वह यह छोटा सा मसाज पार्लर चलाता था।
जोशीन ने मुजे बताया कि वहाँ पर कोई लड़की नहीं है जो कि किसी और लड़की की मालिश कर सके। वहाँ सब की मालिश वह ख़ुद करता है, चाहे कोई लड़का हो अथवा लड़की। मैंने अपनी पत्नी को बताया तो वह पहले तो गुस्सा करने लगी, फिर बाद में मान गई, वह भी इस शर्त पर कि वह ब्रा और पैन्टी पहने हुए ही मालिश करवा लेगी। यह सुनकर मैं भी राजी हो गया।
हमने जोशीन से बात करके अगली सुबह ७ बजे का समय तय कर लिया, क्योंकि हमारी ट्रेन दिन में ११:४५ को थी। हम दोनों सुबह जोशीन के मसाज पार्लर में चले गए। वहाँ जोशीन अकेला टी-शर्ट और शॉर्ट में था, मेरी पत्नी ने ब्रा और पैन्टी के ऊपर गाऊन पहना हुआ था।
जब हम वहाँ गए तो उसने कहा कि पहले मैं मैडम की मालिश कर देता हूँ, बाद में आप करवा लेना। हम दोनों सहमत हो गए। मेरी पत्नी ने गाऊन उतार कर बगल में रख दिया और लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में मालिश करने की मेज पर लेट गई। मैंने उसे छेड़ने की नीयत से कहा, “ये ब्रा और पैन्टी भी उतार दो, और पूरी नंगी होकर मालिश करवा लो यार!”
यह सुनकर पत्नी गुस्से भरी नज़रों से मुझे देखने लगी और कहा, “एक कसकर थप्पड़ लगा दूँगी अभी।”
जोशीन को कुछ समझ में नहीं आया क्योंकि उसे हिन्दी नहीं आती थी, वह सिर्फ मलयालम जानता था। जोशीन ने मालिश करना शुरु किया, लेकिन १५ मिनट में ही उसने कहा, “मैडम आपको ये ब्रा और पैन्टी उतारनी पड़ेगी क्योंकि मालिश करने में मेरा हाथ फ्री होकर नहीं चल रहा है।” यह सुनकर मेरी पत्नी कुछ सोचने लग गई कि तभी जोशीन बोला, “मैडम मैं भी शादीशुदा हूँ और चिन्ता करने की कोई बात नहीं है।”
तभी मैंने पीछे से हाथ डालकर पत्नी की ब्रा की कप को ऊपर कर दिया और पत्नी की दोनों चूचियों को पूरा नंगा करकके जोशीन को दिखा दिया। पत्नी ने कहा, “ये क्या कर रहे हो राम?” तब मैंने कहा, “जोशीन भी विवाहित हूँ और ये चूचियाँ उसके लिए कोई नई चीज़ नहीं है, उसकी बीवी के भी ऐसी ही होंगी यार। और वैसे भी जब उसने सब कुछ देख ही लिया है तो पूरी ब्रा निकाल देने में कोई हर्ज़ नहीं है।” तभी मैंने एक ही झटके से अपनी पत्नी की पूरी ब्रा खोलकर निकाल दी।
जोशीन मेरी पत्नी की दोनों चूचियों को देखने लगा, ये देख मुझे बहुत मज़ा आया। फिर जोशीन ने कहा, “पैन्टी भी उतारनी पड़ेगी।”
यह सुनकर मैंने पत्नी को टेबल से उतार ज़मीन पर खड़ा किया और एक ही झटके में उसकी पैन्टी भी खींच दी। जोशीन मेरी पत्नी के पीछे खड़ा था और उसके बड़े-बड़े चूतड़ों को बड़े ध्यान से देख रहा था। तभी मेरी पत्नी ने कहा कि मेरी चूत पर आगे थोड़ा तो कपड़ा लगा दो। तब जोशीन ने एक पतला सा लम्बा सा कपड़ा दे दिया, जिसे मेरी पत्नी ने अपनी कमर पर बाँध कर अपनी चूत के आगे से लटका दिया। लेकिन वह कपड़ा ऐसे ही चूत के ऊपर लटक सा रहा था कहीं पर चूत के नीचे से बँधा हुआ नहीं था। और मेरी पत्नी फिर से मालिश करवाने के लिए ऊपर से नंगी मेज पर लेट गई और जोशी उसकी मालिश करने लगा।
तभी मैंने जोशीन को इशारा किया कि वह उसकी चूचियों की मालिश कर दे। यह सुनकर वह मुस्कुराया और थोड़ा सा तेल उसकी चूचियों पर डालकर मालिश करने लगा। यह सब देखकर मुझे बहुत मस्ती आई और मेरा लंड खड़ा हो गया। जब मैंने देखा तो मुझे लगा कि जोशीन का लंड भी खड़ा हुआ है।
काफी देर मालिश करने के बाद जोशीन ने मेरी पत्नी को पलटने के लिए कहा। जब वह पलट कर पेट के बल लेट गई तो उसके चूतड़ पूरे नंगे जोशीन के सामने थे जिन्हें देखकर वह मचल उठा और तबीयत से उसके चूतड़ों की मालिश करने लगा और बीच-बीच में वह उसकी गाँड और चूत पर भी हाथ लगा देता था, और मेरी ओर देखकर मुझे आँख मार देता।
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरी पत्नी एकदम मस्त होकर पूरी नंगी होकर अपनी मालिश एक अजनबी आदमी से मेरे सामने ही करवा रही थी और काफ़ी मज़े भी लूट रही थी। जोशीन ने फिर मेरी बीवी को पलटने को कहा, अबकी बार जब मेरी पत्नी पलटी तो उसकी चूत से कपड़ा सरक गया और चूत पूरी नंगी दिखने लगी। यहाँ पर बात कहनी ज़रूरी होगी कि एक रात पहले ही मैंने अपने शेविंग रेज़र से उसकी चूत को पूरा शेव किया था और आज उसकी चूत बहुत चिकनी दिख रही थी।
मैंने देखा कि जोशीन वह कपड़ा हटा कर उसकी चूत देख रहा था। मैंने वह छोटा सा कपड़ा हटा दिया और जब मेरी पत्नी ने पूछा कि वह कपड़ा क्यों हटा रहे हो तो मैंने कहा कि जोशीन ने सब कुछ देख लिया है और अब जोशीन से शरमाने का कोई फ़ायदा नहीं। मेरी पत्नी ने कुछ नहीं कहा और अब वह पूरी नंगी होकर जोशीन से मालिश करवाने लगी थी। जोशन भी मालिश करने के बहाने से उसकी चूत और चूचियों पर मज़े से हाथ फेर रहा था। यह सब देखकर मुझे तो बड़ा ही मज़ा आ रहा था, और मेरी पत्नी भी मज़े ले रही थी।
तभी जोशीन ने मुझसे कहा – “मैडम की मालिश पूरी हो गई, अब तुम्हारी बारी है। पर इससे पहले मैडम को आयुर्वेदिक-गरम पानी से नहाना पड़ेगा, क्योंकि शरीर पर काफी मात्रा में तेल है।”
टेबल और उसके शरीर पर बहुत सारा तेल होने की वज़ह से वह टेबल पर से उतर नहीं सक रही थी, तो वह उठकर बैठ गई। बैठने से उसकी नंगी चूत खुल कर अन्दर के नज़ारे भी दिखाने लगी, जिसे देख मुझे और जोशीन दोनों को बहुत मज़ा आया। मैंने जोशीन से कहा – “काफी तेल लगा हुआ है, इसलिए मेरी पत्नी को तुम ही टेबल से नीचे उतार दो।” यह सुनकर उसने मेरी पत्नी की गाँड के नीचे हाथ डालकर उसे अपनी गोद में उठाकर नीचे उतार दिया और मैंने देखा कि जोशीन का हाथ उसकी चूत व चूचियों को भी छू रहा था। यह देखकर मुझे काफ़ी मज़ा आया।
मेरी बीवी साथ में लगे बाथरूम में चली गई, और मैं और जोशीन बाहर खड़े होकर उसे नंगे देख रहे थे, और तभी मैंने पत्नी को पलटने को कहा। जैसे ही वह पलटी, उसे सामने से नंगी देख मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने ग़ौर किया कि जोशीन का लंड पहले से ही खड़ा है। उसने सिर्फ एक अन्डरवियर पहना रखा था, तो उसमें से एक तम्बू जैसा उठाव देखा जा सकता था। मेरी पत्नी पूरी तरह से नंगी होकर बाथरूम में टेबल पर बैठ गई और फिर गरम पानी भरने लगी। तभी जोशीन ने मेरी पत्नी की पीठ पर आयुर्वेदिक साबुन घिसना शुरु किया, मेरी नंगी बीवी उसका मज़ा ले रही थी। बाद में जोशीन अलग हटकर खड़ा हो गया, और उसे नंगी नहाते मेरे साथ ही देखने लगा। हमें काफ़ी मज़ा आया।
फिर जोशीन ने मुझे मालिश करवाने का इशारा किया और तभी मैं पूरा नंगा होकर टेबल पर लेट गया और मालिश करवाने लगा। कुछ देर के बाद मेरी पत्नी नहाकर बाहर निकली। वह पूरी नंगी थी, मैंने उसे बुलाया और अपना लंड पकड़ने को कहा, क्योंकि जोशीन ने मेरे लंड पर मालिश करने से मना कर दिया था। मैंने जोशीन को कहा कि तुम मेरी पत्नी की चूत और गाँड पर ख़ूब मालिश कर रहे थे, लेकिन मेरे लंड पर मालिश करने में क्या समस्या है, तो उसने बस मुस्कुरा दिया।
मेरी पत्नी मेज़ के किनारे नंगी ही खड़ी होकर मेरे लंड की मालिश करने लगी। जोशीन मेरी मालिश करते-करते मेरी पत्नी के नंगे बदन को देख रहा था और मज़ा ले रहा था। कभी-कभी वो उसकी चूचियों को छू लेता, तो कभी उसकी गाँड पर हाथ फेर देता। मैं भी ऐसा ही कर रहा था। हमें बहुत ही मज़ा आ रहा था।
मैंने अपनी पत्नी को अपना लंड चूसने को कहा, जोशीन के कारण पहले वह मना करती रही, पर बाद में राज़ी हो गई और फिर उसके सामने ही मेरे लंड को बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। जोशीन मेरी मालिश में मशरूफ था।
काफ़ी देर तक चूसने के बाद मेरा लंड झड़ गया और मेरी पत्नी ने उसे एक कपड़े से साफ़ कर दिया। तभी मैंने जोशीन को कहा कि तुमने मुझे और मेरी पत्नी को पूरा नंगा देखा, मगर हमने तुम्हें कपड़ों में देखा, तुम भी पूरे नंगे होकर अपना लंड मेरी पत्नी को दिखाओ। यह सुनकर मेरी पत्नी को गुस्सा आया और वह बोली कि मैं होटल जा रही हूँ, तुम्हें जो करना हो, करो। लेकिन मेरे समझाने पर वह राज़ी हो गई और जोशीन भी नंगा होने के लिए राज़ी हो गया।
जोशीन ने अपनी अन्डरवियर और बनियान उतार दी, और पूरा नंगा होकर मेरी मालिश करने लगा। मेरी पत्नी जो कि बगल में पूरी नंगी खड़ी थी जोशीन का लम्बा लंड देखकर घबरा कर बोली, “जोशीन, तुम्हारा तो काफ़ी लम्बा है। क्या केरल में सबके लंड ऐसे ही लम्बे होते हैं?” यह सुनकर जोशीन ने बस एक मुस्कान देकर कहा, “मुझे नहीं मालूम मैडम सबका होता है, या किसका होता है।”
तभी मैंने जोशीन का लण्ड पकड़ लिया और उससे खेलने लगा। यह देख मेरी पत्नी को मस्ती सूझी और वह जोशीन का लण्ड पकड़ने के लिए किनारे पर आ गई और नीचे झुक कर बैठ गई। जोशीन मेरी मालिश में मगन था। मेरी पत्नी नीचे बैठ उसका लण्ड चूसने लगी, वह उसे बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। यह देखकर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, और मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
जोशीन ने मुझे पलटने के लिए कहा और मेरी गाँड पर मालिश करने लगा, नीचे मेरी पत्नी को लंड भी चुसवाता रहा। यह सब देखकर मेरा लण्ड बहुत कड़क हो गया और मैंने चुदाई का मन बना लिया और मैंने अपनी पत्नी को कहा कि तुम टेबल पर किनारे में घोड़ी बन जाओ, मेरा चोदने का मन कर रहा है। पहले थोड़ा ना-नुकर करने के बाद वह राज़ी हो गई।
मैंने उसकी जम कर चुदाई की जोशीन के सामने ही। फिर जोशीन से भी उसे चुदवा दिया घोड़ी बना कर ही। यह सब करने में काफी समय निकल गया, पर हमें मज़ा बहुत आया था। उसके बाद हमने एक ऑटो किया और रेलवे-स्टेशन से ट्रेन लिया और अपने घर वापिस आ गए।
उस घटना को आज भी याद करने पर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
आपको हमारा अनुभव कैसा लगा, ज़रूर लिखे। Hindi Porn Stories
हाय! अन्तर्वासना के पाठकों को Sex Stories नमस्कार! अपनी पिछली कहानी “पापा के दोस्तों ने चोदा- 1” में आपने पढ़ा कि किस प्रकार पापा के दो दोस्तों ने सीमा हमारे घर में ही चोदा। वो अलग बात है कि इसके लिये उन्हें कोई विशेष कोशिश नहीं करनी पड़ी। सीमा तो वैसे ही चुदने के लिये मरी जा रही थी। उसी कड़ी में पेश आगे की कहानी …
यह कहानी भी मैं सीमा की ओर से ही पेश कर रहा हूं …
उस रात गुरुबचन अंकल और अकील अंकल ने जो कमरतोड़ चुदाई की उसका असर दूसरे दिन तक रहा। तीसरे दिन अकील का फोन आया, मैं घर में अकेली थी …
हैलो …
हाय रानी!!! कैसी है … ?
कौन बोल रहा है … मैं चौंक गई।
आय! हाय! दो दिन में ही लन्ड पच गया …
ओह! अकील अंकल … … मैं आवाज पहचानते ही बोली। अनायास ही मेरा हाथ चूत पर पहुँच गया।
अब अंकल तो मत कह रानी … क्या कर रही थी … अकेली ही है ना?
हाँ … क्यों … क्या करना है … मैं शोखी से बोली।
चोदना है तेरी प्यारी चूत को …
ना बाबा ना … अब तक नहीं सम्भल पाई हूँ … …
अरे जान … वो तो मौका प्रोपर नहीं था … वर्ना एक हफ़्ते तक बिस्तर से नहीं उठती …
तभी तो कह रही हूं … मुझे मरना नहीं है …
अच्छा! देख शनिवार को तेरे पापा टूर पे जा रहे हैं और गुरु की वाइफ़ भी बाहर है तो उस दिन गुरू के घर पे प्रोग्राम रखेंगे …
और फ़िर शनिवार का इन्तजार होने लगा।
पापा सुबह 5 बजे की बस से चले गये। मैं एक बार फ़िर चूत चिकनी की और फ़िर तैयार होके 11 बजे गुरू के घर पहुंच गई। मेरे पहुंचते ही उन्होंने मेरा दिल खोलकर स्वागत किया और सीधे बैडरूम में ले गये जहाँ एक शानदार बैड था। पूरा कमरा इत्र की खुशबू से महक रहा था … मैं रोमांचित हो रही थी … … गुरू ने नाश्ते का इन्तजाम किया हुआ था। नाश्ते के दौरान हम खूब गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे मैं भी पूरी तरह खुल चुकी थी।
इस सब में एक घंटा गुजर गया तो …
अकील बोला … चल अब शुरू करें …
और हम नंगे हो गये। अकील सोफ़े पर बैठ गया। मैंने जमीन पर कुतिया बनके उसके लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। गुरू मेरे पीछे आया और चूत चाटने लगा। जब अकील का लंड पूरी तरह तैयार हो गया तो मैं गुरू की ओर मुड़ी। गुरू घुटने के बल खड़ा हो गया तो मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और इधर अकील चूत चाटने लगा।
फ़िर अकील ने अपना लंड पीछे से ही चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा तो गुरू का लंड मेरे गले तक घुस गया मेरी सांस रुकने लगी पर वे रुके नहीं और मैं दोनों तरफ़ से चुदने लगी …
ले मादर चोद आज देख हमारे लंड का कमाल … … अकील दनादन ठोकते हुए बोला तो गुरू ने भी मेरे बाल पकड़ कर मुँह में ही अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। मुँह बन्द होने के बावजूद भी मैं कराह रही थी पर बहुत मजा आ रहा था। फ़िर उन्होंने साइट बदली और चालू हो गये। लगभग आधा घंटे की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद उन्होंने मुझे जमीन पर सीधा लिटाया और एक साथ अपने लंड मुँह डाल दिये, मैं लपालप चूसती रही। थोड़ी ही देर में वे मेरे मुँह में झड़ गये। उनके लंड से निकले गरम गरम वीर्य ने मेरा मुँह भर दिया। मेरी चूत भी झड़ चुकी थी। हम तीनों निढाल हो कर पड़ गये।
दूसरा राउंड 2 बजे शुरू हुआ और ये पहले से भी भारी था। मेरा रोम रोम दर्द करने लगा। ये मेरी जिन्दगी की सबसे यादगार चुदाई थी। Sex Stories
आज पहली बार मैं अंतर्वासना पर कहानी Antarvasna नहीं, सच्ची घटना लिखने जा रहा हूँ। मेरी उम्र २७ साल है, मैं कोइम्बटोर तमिलनाडु में नौकरी करता हूँ।
मेरे सेठ के परिवार में मेरे सेठजी, सेठानी और उनका एक लड़का जो ८ साल का तीसरी कक्षा में पड़ता है, रहते हैं।
कुल मिला कर ४ लोग थे, सेठजी की दुकान पर वैसे तो और भी ३-४ लोग काम करते थे लेकिन वे सब तमिल थे जो अपने-अपने घर चले जाते थे, सिर्फ मैं सेठजी के घर पर रहता था।
हमारा काम सुबह ९.३० बजे दुकान आना और रात को ८.०० बजे दुकान बंद करके घर पर चले जाना था।
मेरे सेठजी की उम्र ४० और सेठानी की ३२ थी। सेठजी पूरा दिन दुकान में लगे रहते थे, और अपनी सेहत का ख्याल न रखने की वजह से ४५-५० के लगते थे, वहीं हमारी सेठानी ब्यूटी पार्लर और योग से अपने फिगर को पूरा ख्याल रखती है। मेरी सेठानी का फिगर ३८-२६-३६ का है।
दोपहर को मैं घर जाकर सेठानी के हाथ का बढ़िया खाना खाकर सेठजी का खाना टिफिन में लेकर दुकान चला आता हूँ। एक दिन की बात है, दोपहर को जब मैं घर गया तो सेठानी स्नान कर रही थी। स्नान करते समय उसका पाँव फिसल गया तो वो ज़ोरों से दर्द से चिल्लाई… उ इ माँ, मर गई। मैंने पूछा क्या हुआ, तो बोली पाँव में मोच आ गई है आयोडेक्स लाओ। फिर मैंने सहारा देकर उसे हॉल तक पहुँचाया। उसने मेरे कन्धों पे हाथ डाल दिया और मैंने उसकी कमर में।
वाह क्या जन्नत थी मेरे लिए, उस क्षण मेरा लंड एकदम से खड़ा होकर खम्भा हो गया था। उसे सोफे पर बिठा कर मैं उसके पाँव पर आयोडेक्स लेकर मालिश करने लगा। उसके गोरे-गोरे पाँव इतने हसीन थे कि मन क़ाबू में करना मुश्किल हो रहा था। मेरे हाथ काँप रहे थे मालिश करते हुए। सेठानी ने प्यार से कहा: “मालिश ढंग से, जोर से करो, तो ही मोच जाएगी।” और उसने अपना गाउन घुटनों तक ऊपर उठा दिया।
वाह क्या नज़ारा था, उसकी गोरी-गोरी पिंडलियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। मालिश मैं कर रहा था, मज़ा दोनों को आ रहा था। अब मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी और मेरा हाथ घुटनों तक पहुँच रहा था। सेठानी आँख बंद करके सोफे पर लेटी हुई थी। धीरे-धीरे मेरा हाथ घुटनों से ऊपर जाने लगा तो सेठानी ने पूछा क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि सेठानी जी आज मैं आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूँ, प्लीज़ आज मुझे मत रोकिए।
सेठानी बोली: “कोई देख लेगा तो?”
उसके इतना कहते ही मैं समझ गया कि आग दोनों ओर बराबर की लगी है। फिर मैंने दरवाजा बंद किया और सेठानी को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। सेठानी जान चुकी थी कि आज उसकी चुदाई होकर रहेगी।
मैंने हिम्मत करके पूछा- सेठजी चोदते हैं क्या?
“कभी-कभार करते भी हैं तो उनका लंड अन्दर जाते ही झड़ जाता है, फिर मैं ऊँगली डाल कर अपनी प्यास बुझाती हूँ, वो तो आराम से खर्राटे मारते हैं।”
“सेठानी जी अब आप चिंता मत करो, जब भी आप चाहो, आपकी चुदाई मैं करूँगा।”
“बाथरूम में मेरा कोई पाँव नहीं फिसला था, वो तो एक बहाना था तुम्हें झाँसे में लेने का। मेरा तो उसी दिन से तुमसे चुदने का मन था जिस दिन तुम हमारे यहाँ पहले दिन नौकरी पर लगे थे।” – सेठानी ने रहस्योद्घाटन किया।
अब मैंने सेठानी का गाऊन ऊपर कर उतार दिया। वाकई ब्रा और चड्डी में सेठानी हसीन लग रही थी। सेठानी भी मेरे कपड़े उतारने लगी, मेरा लंड देखते ही वो बड़ी खुश हुई और अपने मुँह में लेकर चूसने लग गई
मैंने कहा- आराम से चूसो, दाँत मत चुभोना, नहीं तो दर्द होगा।
उसके चूसने का अंदाज़ महसूस करके मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था। मैं एक हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था, दूसरा हाथ चूत पर सहला रहा था।
अब तक सेठानी गरम हो चुकी थी। सेठानी ने कहा, अब सहा नहीं जाता, जल्दी से मेरी खुजली शांत कर दो।
मैंने सेठानी को कहा- अब आप ऊपर आ जाओ।
सेठानी तुंरत मेरे ऊपर आकर लंड को हाथ से चूत का दरवाजा दिखा रही थी। मैंने कमर से एक धक्का ऊपर की ओर दिया और सेठानी ने नीचे की ओर, और लंड चूत के अन्दर।
अब सेठानी आराम से धक्के लगा रही थी और मुझे स्वर्ग का आनंद आ रहा था। मैं दोनों हाथों से अब सेठानी की चूचियाँ पकड़ कर मसल रहा था। सेठानी आनंद विभोर हो रही थी। करीबन १० मिनट के बाद मैंने सेठानी को नीचे सुलाकर उसके ऊपर आ गया और लंड एक बार फिर चूत में घुसा दिया।
सेठानी बोली: “चोदो राजा, ज़ोर से चोदो, बहुत मज़ा आ रहा है। ऐसा मज़ा तो कभी नहीं मिला। मैंने धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर सेठानी चूतड़ उठा कर साथ दे रही थी। १० मिनट बाद सेठानी हाँफने लगी ओर कहा कि अब मैं झड़ने वाली हूँ। तो मैंने कहा मुझे कस कर पकड़ लो, मैं भी गया। औरर हम दोनों शिथिल अवस्था में कुछ देर पड़े रहे।
उसके बाद जब भी मौक़ा मिलता, मैं सेठानी को बीवी की तरह ही चोदता। सेठानी भी मुझे बहुत खुश रखती थी। तरह-तरह के पकवान व्यंजन बना कर खिलाती थी। मैं दुकान की वसूली, बैंक के काम का बहाना बना कर सेठानी को चोद कर आ जता था। सेठजी को भनक तक नहीं पड़ती थी
अब सेठानी सेठ का भी ख्याल न रख के मेरा ध्यान अधिक रखती थी। मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे। फ्री की चूत, अच्छा खाना, ओर सेठ जी से तनख्वाह। सेठ मेरे काम से खुश, सेठानी मेरे लंड से खुश, मैं दोनों खुशियों से बहुत खुश।
कैसी लगी मेरी ये घटना? कृपया मुझे मेल ज़रूर करें। Antarvasna
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