Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Yamuna Nagar Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

छटे भाग से आगे : Antarvasna

सुबह Antarvasna मम्मी ने हम लोगों को करीब नौ बजे जगाया।

हम लोग हड़बड़ा कर उठे और अपने अपने कपड़े को खोजने लगे। हम लोगों की हालत देख कर मम्मी बड़ी प्रसन्ता से बोली- मैं तुम लोगों के लिए चाय नाश्ता बना रही हूँ, फ्रेश हो कर डाइनिंग टेबल पर आ जाना।

यह कहते हुए मम्मी रसोई की तरफ चली गई। हम सभी लोग थोड़ी ही देर में डाइनिंग टेबल पर आ गए। चाय नाश्ता मेज़ पर लगा था।

मम्मी रसोई से आते हुए मुस्कराते हुए बोली- लगता है तुम लोगों ने रश्मि को रात भर कस कर चोदा है।

इस बात पर प्रदीप और विशाल बगैर कुछ बोले मुस्कराने लगे। नाश्ता करने के बाद प्रदीप और विशाल एक साथ कॉलेज के लिए निकल गए।

पाँच दिनों तक विशाल और प्रदीप मुझे सुबह और रात में दो दो बार चोदते रहे। उसके बाद विशाल दिल्ली चला गया और प्रदीप अपने घर चला गया। लेकिन रोज शाम को आकर मुझे चोदता था और वीर्य पिलाता था। कभी कभी प्रदीप के दोस्त भी मुझे चोदते और वीर्य पिलाते थे।

एक दिन प्रदीप के साथ उसका दोस्त मोहन त्रिपाठी आया। मैं समझ गई कि आज यह भी मुझे चोदेगा और वीर्य पिलाएगा।

खैर प्रदीप ने मोहन त्रिपाठी का परिचय मेरी मम्मी से कराया ये मेरे बड़े भाई के और मेरे भी दोस्त हैं ये ज्योतिष और हस्त रेखा के विशेषज्ञ है ये जो भी बात बताते हैं वो बिल्कुल सही निकलती है।

यह सुन कर मेरी मम्मी तुरन्त मेरे बारे में पूछने लगीं- मेरी बेटी रश्मि का बदन एक जवान लड़की की तरह होगा या नहीं और इसकी शादी कब होगी?

इस पर मोहन त्रिपाठी ने मेरी कुन्डली मांगी। मम्मी ने मोहन त्रिपाठी को कुन्डली ला कर दे दी। उन्होंने बड़े ध्यान से कुन्डली को पाँच मिनट तक देखा फिर मुझसे बोले- अपना बायाँ हाथ दिखाओ।

मेरा हाथ उलट पलट कर देखते रहे, फिर मम्मी से बोले- आपकी बेटी का हार्मोनल सिस्टम बिगड़ा है अगर एक चीज आपकी बेटी के शरीर में होगी तो वो बिलकुल ठीक हो जायेगी।

वोह क्या… मम्मी बोलीं।

इस पर पंडित जी ने प्रदीप के कान में कुछ कहा। फिर प्रदीप ने मम्मी को इशारे से अन्दर आने को कहा। प्रदीप और मम्मी अन्दर चले गए। प्रदीप ने मम्मी से कहा कि पंडित जी रश्मि की बुर का निरीक्षण करना चाहते हैं।

मम्मी ने अनुमति दे दी।

फिर प्रदीप ने आकर पंडित जी से कहा कि आप देख सकते हैं !

और मुझसे कहा कि सलवार उतार कर तुम अपनी बुर पंडित जी को दिखाओ।

मैंने वैसा ही किया जैसे प्रदीप ने कहा। मुझे अब किसी के सामने कपड़े उतारने में कोई संकोच नही होता था।

पंडित जी ने मेरी चूत को बारीकी से देखा और मुस्कराकर मम्मी से बोले- आपकी लड़की बिल्कुल सही हो जायेगी क्योंकि इसकी योनि पर काला तिल है, आपकी लड़की इतनी सेक्सी है कि कोई साधारण लड़का इसको संतुष्ट नहीं कर पायेगा, वही लड़का इसको संतुष्ट कर सकता है, जिसके लिंग पर काला तिल होगा। आप इसकी शादी उसी लड़के से करियेगा। और जहाँ तक इसकी शादी की बात है वह 28-29 वर्ष में हो जायेगी। आप की लड़की तो सुन्दरता का प्रयाय बनेगी। आप देखती जाइये। क्योंकि इसकी कुन्डली में पिछले तीन महीने से शुक्र की महादशा चल रही है आप बिलकुल निश्चिंत रहिए। फिर प्रदीप और पंडित बाहर चले गए। मैं और मम्मी, पंडित जी की भविष्यवाणी सुन कर बहुत प्रसन्न हुए।

इसके बाद यह थैरेपी करीब तीन महीने तक चली लेकिन कोई खास परिवर्तन मेरे बदन में नही दिखा। लेकिन मेरी मम्मी ने कहा- तुम लगातार वीर्य पान करती रहो।

चौथे महीने के एक दिन जब सुबह उठी, तो मुझे लगा कि मेरी बुर के पास की सलवार गीली है। मैंने हाथ लगा कर देखा कि मेरी बुर से खून रिस रहा था।

मैंने भाग कर मम्मी को बताया। मम्मी ने मुझे बेड पर लिटा दिया और सलवार उतार कर मेरी बुर के होठों को फैला कर देखते ही बोली- चलो, तुम्हारे पीरियड शुरू हो गये हैं अब सब ठीक हो जायेगा। इसके बाद तो चुदाई में मुझे और मजा आने लगा। मेरी चुदाई से अब मेरे शरीर में परिवर्तन आने लगा था। पांचवे महीने मेरी चूचियाँ सन्तरे के बराबर हो चुकी थी और मेरा रंग भी पहले से ज्यादा साफ हो रहा था।

एक साल के बाद तो कोई मुझे पहचान ही नही सकता था। मैं एक सम्पूर्ण खूबसूरत लड़की हो चुकी थी। जहाँ भी जाती, लोग मुझे देखते ही रहते। अब तो मैं महफ़िलों की शान थी। जो भी लड़का मुझे देखता, वो चोदने के फिराक में आ जाता था। लेकिन मैं सबसे तो चुदवा नहीं सकती थी।

समय बीतता गया, बीच बीच में मेरे रिश्ते के मामा ने भी मेरी खूब चुदाई की। मुझे उनकी चुदाई में मजा भी आता था।

मम्मी अक्सर कहती थी कि तुम्हारी शादी इन्हीं से करवा दे ! लेकिन वो कभी भी मुझे पूर्ण संतिष्टि नहीं दे पाये। इसलिए मैंने उनसे शादी के लिए मना कर दिया। इसीलिए मैंने अपने कई ब्वाय फ्रेन्ड्स के साथ सेक्स किया लेकिन सर… ! मैंने किसी के लण्ड पर काला तिल नहीं देखा। मेरी उम्र बढ़ती जा रही थी। फिर मेरे पापा के जानने वाले ने मेरी शादी एक सी ए से तय करा दी। वो सी ए साधारण लड़का था। मैंने भी सोचा कि चलो इसी से कर लेते हैं। शादी हमारे समाज में आवश्यक है। जब कोई आदमी, जिसके लन्ड पर काला तिल होगा, मिलेगा, तो उससे अपनी चूत की आग बुझवा लिया करूगीं।

फिर कुछ दिनों के बाद मेरी शादी हो गई। दो महीने के बाद मैंने आप के यहाँ जॉब कर ली। और आज जब मैंने आप के लन्ड पर काला तिल देखा तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने तुरन्त आपके ऑफर को मान लिया। पंडित जी के अनुसार आप ही मुझे संतुष्ट कर सकते हैं !

यह सुनते ही मैंने कहा- ओह.. तो यह बात है… रश्मि। यही तो मैं सोच रहा था कि तुम्हारे जैसी बला की खूबसूरत लड़की इतनी आसानी से कैसे तैयार हो गई।

खैर मैंने रश्मि से कहा- चलो, आज मैं तुम्हारी अतृप्त वासना की इच्छा पूरी करता हूँ।

अगली कड़ी में समाप्य ! Antarvasna

प्रेषक – रोहित Hindi Porn Stories

दोस्तों यह बात उन दिनों की है Hindi Porn Stories जब मैं कॉलेज में प्रथम वर्ष में था। मेरी ही कक्षा में एक लड़की थी जिसका नाम था खुशबू। खुशबू ५.४” की थी, गोरा रंग, सुराहीदार गर्दन और कुल मिलाकर वह हुस्न की मलिका थी।

मुझे अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ने में बहुत अच्छा लगता है। हाँ पर मेरा सेक्स करने के तरीके अलग ही होते हैं। मैं सेक्स के दौरान बहुत सारी चीज़ों का प्रयोग करता हूँ। जैसे मधु, चैरी, अंगूर, रेशमी कपड़े, फ्रूट बीयर इत्यादि।

कॉलेज का वार्षिक महोत्सव था। खुशबू और मैं एक नाटक में भाग ले रहे थे। कुछ दिनों से खुशबू के घर में कुछ समस्या चल रही थी इसलिए उसकी रिहर्सल हो नहीं पा रही थी।

मैंने खुशबू से कहा- आज हमारे घर पर कोई नहीं है, चलो वहीं पर रिहर्सल कर लेते हैं। मेरे माता-पिता शादी में दो दिनों के लिए जयपुर गए हैं।

खुशबू ने पहले तो मना किया, फिर अचानक बोली,”ठीक है।”

उस दिन उसने नीली जीन्स और सफेद टॉप पहन रखी ही।

हम दोनों शाम के ४ बजे घर आ गए और रिहर्सल करने लगे। थोड़ी देर बाद मैंने खुशबू से पूछा,”कुछ पीओगी?”

उसने पूछा, “क्या है?”

“चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक या फ्रूट बीयर!”

मैंने कहा, ” तुमने फ्रूट बीयर तो कभी पी नहीं होगी, आज आज़मा कर देख लो।” उसने मना किया पर मैंने जोर देकर कहा तो मान गई और उसने एक गिलास बीयर पी ली।

मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था।

मैंने खुशबू से कहा, “अब काफी देर हो गई है, थोड़ा सा आराम कर लो, चलो थोड़ी देर टीवी देखते हैं।”

“नहीं मुझे घर भी जल्दी जाना है।”

“मैं छोड़ दूँगा ना घर तक !”

वह मान गई और हम टीवी देखने लग गए।

मैं सोफे पर जाकर उसके पास बैठ गया और अचानक उसका हाथ पकड़ लिया, और मलने लगा। वह एकदम से सकपका गई और कहा, “रमेश यह क्या कर रहे हो?”

मैंने कहा, “खुशबू, तुम बहुत सुन्दर हो, और उसे गले लगा लिया।”

मेरे हाथ उसकी टॉप के भीतर जा चुके थे, और साथ ही उसे मैं किस कर रहा था। पहले वह झिझकी, पर फिर उसे भी अच्छा लगने लगा।

अब मुझ स्वयं पर नियंत्रण नहीं हो रहा था। मैंने पहले उसकी टॉप उतार दी। उसने सफेद रंग की ब्रा पहन रखी थी।

मैं उसे अपने कमरे में ले गया। वह कहती जा रही थी, टॉम यह क्या कर रहे हो? पर अब मैं कैसे रुक सकता था। मैंने धीरे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और उसकी ब्रा उतार दी। अब वह एकदम परी लग रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और दराज में से शहद की शीशी लाया और उसकी चिकनी चूचियों पर लगा दिया। फिर मैं धीरे-धीरे शहद चूसने लगा, उसकी घुंडियाँ कड़ी हो रहीं थीं। और वह कह रही थी, “टॉम बहुत मज़ा आ रहा है!” फिर मैंने शहद उसके होंठों पर लगाया और चूसने लगा, इस बीच उसका एक हाथ उसकी जीन्स के अन्दर जा चुका था।

अब मैं फ़्रिज से आईसक्रीम लाया और उसकी घुण्डियों पर लगा धीरे-धीरे चूसने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने कुछ अंगूर उसकी नाभि पर रखे और एक-एक कर धीरे-धीरे खाने लगा। अब मैंने उसको उल्टा कर दिया और उसकी कमर पर थोड़ी सी फ्रूट बीयर डाली और उसकी कमर को चलाने लगा। उउउउउउऊऊऊऊऊ… .आआआआआहहहहह… अब उसके कानों पर चेरी रख कर उसके कान की लटकती पिंडलियों को हल्के से काटने लगा। उसके होंठों पर किस किया और दोनों हाथों से उसकी चूचियों को धीरे-धीरे दबाया।

अब मैं धीरे से उसकी जीन्स उतारने लगा। उसने काले रंग की पैन्टी पहन रखी थी। तभी उसने कहा, “टॉम अब रहा नहीं जाता, मुझे दे दो, मुझे चाहिए।”

मैंने उसके पैरों पर थोड़ी सी फ्रूट बीयर डाली और उसके पैरों को ऊँगली से चाटने लगा। उसके टखनों तक आता और बार-बार ऊपर नीचे चाटता चला जाता। उसका हाल बेहाल था। वह कह रही थी, टॉम बस… अब दे दो।

अब मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए।

मैं अब सिर्फ अण्डरवियर में था, और मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मैंने खुशबू की पैन्टी अपने मुँह से उतारनी शुरु की। वहाँ बाल बहुत कम थे। उसकी पैन्टी उतार कर मैंने उसको बीच में से सूँघा। गज़ब की खुशबू थी। अब मैंने उसके पैर थोड़े खोल दिए थे और उसके बीच में शहद लगाया और उसकी चूत की लाईन चाटने लगा। उसने कहा, “टॉम बहुत मज़ा आ रहा है… अब मुझसे रहा नहीं जा रहा, मुझे वो चाहिए।”

अब मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में घुसा दी, पहले उसे हल्का दर्द हुआ। फिर, वह आआहहहहहहहहह उउऊऊऊऊऊऊओओओओ आआआओओअअअओओओओ उउउऊऊऊऊऊऊऊओओओ आआआआआआओओओ ऊऊऊओओओ ऊऊऊफ्फ्फफफ… की आवाजें निकालने लगी। मैंने फिर से शहद डाला और चूसा। अब मेरी ऊँगली अन्दर-बाहर हो रही थी। उसे मज़ा आ रहा था और वह कह रही थी, “रमेश अब रुका नहीं जाता, तुम आ जाओ।”
मैं फिर से उसके होंठों के पास आया और उसे ज़ोर से किस करने लगा और उसकी चूचियाँ दबाने लगा और वह मादक चीत्कार करने लगी – ऊऊऊउउउऊऊऊऊऊऊऊ…. ऊऊऊऊऊऊम्म्मममममम… आआआ जाआआओओओ नाआआआ… ऊऊऊऊऊम्म्म्मममम…”

अभी के लिए इतना ही, आगे की कहानी अगले भाग में…

अपनी टिप्पणी कृपया मुझे मेल करें। Hindi Porn Stories

Antarvasna stories

Antarvasna हाय दोस्तो और प्यारी प्यारी सहेलियो … मेरा नाम देवांश मित्तल है.
मेरी उम्र 29 वर्ष की है और मैं देखने में काफी आकर्षक और सुंदर हूँ. बस मेरी बॉडी थोड़ी सी स्थूल है परन्तु मेरी हाईट 5 फुट 10 इंच होने के कारण मैं मोटा नहीं लगता हूँ.

मैंने आइआइटी रूड़की से इंजीनियरिंग की है.
इंजीनियरिंग के बाद मैंने अहमदाबाद से एमबीए किया है और दिल्ली में अपने परिवार की ही एक एक्सपोर्ट इम्पोर्ट कम्पनी में बहुत अच्छी पोस्ट पर कार्य कर रहा हूँ.

मुझे आठ लाख रुपए सालाना तनख्वाह मिलती है. मैंने अभी तक शादी नहीं की है, इसलिए मैं पूरी मस्ती के साथ साउथ एक्स्टेन्शन में रहता हूँ.

वैसे भी मैं उत्तर प्रदेश की एक बहुत बड़े जमींदार परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ.

मैंने साउथ एक्स्टेन्शन में ही अपना खुद का 4 बेडरूम वाला फ्लैट खरीद लिया है. मैं पूरी मौज मस्ती में रहता हूँ.

मैं अन्तर्वासना का रेगुलर पाठक हूँ और सारी कहानियां बड़े ध्यान से पढ़ता हूँ.

मैं बड़ा ही रसिक मिजाज का युवक हूँ और किशोरावस्था से ही चुदाई का मजा ले रहा हूँ. अब तक मैं 50 से ज्यादा लड़कियां चोद चुका हूँ.
आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सुना रहा हूँ.

ये बात उन दिनों की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था.

हमारे पड़ोस में एक पंजाबी फैमिली रहती थी जिसमें सिर्फ तीन ही सदस्य थे.

एक बुजुर्ग, एक लड़का और एक लड़की ही थे. लड़के की उम्र लगभग 24-25 साल की रही होगी और लड़की की उम्र 20-21 साल की थी. बुजुर्ग व्यक्ति उन दोनों के पिता थे और अक्सर बीमार से ही रहते थे जबकि उन दोनों की मां की मृत्यु हो चुकी थी.

वैसे तो उस परिवार में 5-6 लड़कियां और भी थीं … लेकिन वो सब काफी उम्र की हो चुकी थीं और उन सबकी शादी हो चुकी थी. वो सब अपने पति के साथ अपनी ससुरालों में रहती थीं. वो सब कभी कभी ही अपने पिताजी को देखने परिवार के साथ 2-3 दिन के लिए आती रहती थीं.

लड़के का नाम नवीन और लड़की का नाम दीपा था.
दीपा बहुत ही खूबसूरत थी. दीपा का बदन ऐसा खूबसूरत था मानो भगवान ने उसे सांचे में ढाल कर बनाया हो. गोरा-चिट्टा रंग हल्का गुलाबीपन लिए ऐसा दिखता था मानो दूध में चुटकी भर केसर डाल दी हो.

वो अधिकतर सलवार कुर्ता पहनती थी.

दीपा का फिगर 36-24-38 का था. उसके चूचे एकदम सख्त और उभरे हुए थे. बलखाती कमर के नीचे उसके भारी चूतड़ों का आकार बड़ा ही मस्त था. जब वो चलती थी तो ऐसा लगता था कि उसके चूतड़ों की जगह दो गोल फुटबाल चिपकी हों और ऐसा मालूम होता था कि दो गेंदें आपस में रगड़ खा रही हों.

जब दीपा हंसती थी … तो उसके गालों में गहरे और प्यारे से डिंपल पड़ जाते थे, जिससे वो और भी खूबसूरत लगने लगती थी.

मेरा भी उस पंजाबी फैमिली में काफी आना-जाना था. मैं नवीन को भाईसाहब और दीपा को जीजी कहता था.

दीपा बोलती बहुत थी और एक मिनट भी चुप नहीं बैठ सकती थी.
उसमें एक खास बात ये थी कि वो किसी की भी चीज में कोई नुक्स नहीं निकालती थी, फिर चाहे उसको पसंद हो या ना हो. वो हमेशा यही कहती थी कि बहुत ही प्यारी है. यदि उसको कुछ खाने के लिए दो और वो वस्तु उसको पसंद नहीं भी आई हो, पर वो तब भी उसकी तारीफ़ ही करती कि बहुत ही टेस्टी बनी है.

इस बात की हम सब हमेशा ही दीपा की तारीफ़ किया करते थे.

हमारी कॉलोनी के सभी मर्द उसके दीवाने थे और एक बार उसको चोदना चाहते थे. मैं भी अक्सर सोचता था कि काश मैं भी किसी तरह से दीपा को चोद सकूँ.

फिर एक दिन ऐसा मौका आ ही गया.

वो सितम्बर का महीना चल रहा था. उस दिन रविवार की छुट्टी थी. सुबह का लगभग 11 बजे समय रहा होगा. मैं किसी काम से अपनी छत पर गया था.

हमारी दोनों की छतें आपस में मिली हुई हैं और छत से उनके कमरे और बाथरूम बिल्कुल साफ़ दिखाई देते थे.

उस रोज जब मैं छत पर गया, तो दीपा के गाना गाने की आवाज आ रही थी. मैं यूं ही उनके घर की तरफ़ देखने लगा. जो सीन मुझे दिखाई दिया, उसे देख कर मैं एकदम से चौंक गया. क्योंकि दीपा बिल्कुल नंगी बाथरूम में पटरे पर बैठी थी और उसने अपनी टांगें चौड़ी कर रखी थीं.

सच में दोस्तो मैं तो उसे देखता ही रह गया. मेरी धमनियों में खून का प्रवाह एकदम तेज हो गया और मुझे झुरझुरी सी होने लगी.

दीपा की चूचियां एकदम गोरी और तनी हुई थीं. जैसा कि मैं अपने ख्यालों में सोचता था, दीपा उससे भी अधिक सुंदर थी. उसकी गोरी चूचियों के बीचों बीच में हल्के गुलाबी रंग के दो छोटे छोटे गोले बने थे और उन गोलों के बीच में बिल्कुल गुलाबी रंग के निप्पल तने हुए थे. उसके दोनों इस समय कड़क थे और बाहर को निकले हुए थे. उसका सारा शरीर बहुत ही चिकना और गोरा था … और टांगों के बीच के नजारे की तो कुछ पूछो ही मत. वहां उसकी चूत पर काली झांटें साफ़ नज़र आ रही थीं. उन काली रेशमी झांटों के बीच हल्की सी गुलाबी रंग की फांक नज़र आ रही थी. चुत की दरार में ऊपर की तरफ़ एक छोटा सा चने जैसा दाना चमक रहा था.

दीपा उस वक्त कपड़े धो रही थी और उसका सारा ध्यान उसी तरफ़ था.

दीपा को इस हालत में देख कर मेरा लंड एकदम से तन कर ऐसे खड़ा हो गया मानो वो इस हसीन चूत को सलामी दे रहा हो.

मेरा मन कर रहा था कि मैं फ़ौरन ही वहां पहुंच जाऊं और दीपा को कस कर चोद दूं, पर मैं ऐसा नहीं कर सकता था.

मैं काफी देर तक वहीं खड़ा रहा और दीपा को ऐसे ही देखता रहा. उसकी नंगी जवानी ने मेरे शरीर को उत्तेजना से भर दिया था इसलिए मैं अपने लंड को कपड़ों के ऊपर से ही पकड़ कर सहला रहा था.

मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी. मेरा गला एकदम से ऐसा खुश्क सा हो गया था कि मैं थूक भी ठीक से नहीं निगल पा रहा था. मेरी टांगें कांप रही थीं और ऐसा लग रहा था कि मेरी टांगों में बिल्कुल दम ही नहीं रहा है. मैं किसी भी पल गिर जाऊंगा.

मैं इस हालत में उसको करीब 15-20 मिनट तक देखता रहा. वो बार बार सर झुका कर टांगों में अपनी चूत की तरफ़ देख रही थी और एक कपड़े से चूत के बालों को रगड़ रही थी, जिससे उसकी चूत के कुछ बाल उतर जा रहे थे. मैं समझ गया कि आज दीपा अपनी चूत के बाल हेयर रेमूवर क्रीम से साफ़ कर रही है.

मैं उसे बड़े ही गौर से देख रहा था कि अचानक उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई और उसने एकदम से बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया.

यह देख कर मैं बहुत डर गया और छत से नीचे उतर आया. मैं सारे दिन इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि अगर जीजी इस बारे में पूछेगी, तो मैं उसे क्या जवाब दूँगा … लेकिन मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था. मैंने सोचा कि मैं 2-3 दिन उसको दिखायी ही नहीं दूंगा और उसके बाद मामला कुछ शांत हो जाएगा. तभी देखा जाएगा कि क्या जवाब देना है.

मैं एक दिन तो दीपा से बचा रहा और उसकी नज़रों के सामने ही नहीं आया. अगले दिन पापा और मम्मी को किसी के यहां सुबह से शाम तक के लिए जाना था और ड्राइवर आया नहीं था, तो पापा ने मुझसे कहा कि तुम कार से हम दोनों छोड़ आओ और शाम को वापस लेने आ जाना.

मैं उनको कार से छोड़ने जा रहा था कि मैंने दीपा को अपनी कार की तरफ़ तेजी के साथ आते हुए देखा, तो डर के मारे मेरा हलक खुश्क हो गया. मम्मी पापा कार में बैठ ही चुके थे, सो मैंने झट से कार स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी.

हालांकि मम्मी ने कहा भी कि दीपा हमारी तरफ़ ही आ रही है … कहीं उसे कोई ज़रूरी काम ना हो.
पर मैंने सुन कर अनसुना कर दिया और गाड़ी को तेजी के साथ ले गया.

मैंने मन ही मन सोचा कि जान बची तो लाखों पाए और लौट कर बुद्धू घर को आए.

जब मैं पापा मम्मी को छोड़ कर वापस घर आया तो देखा कि दीपा हमारे घर के गेट पर ही खड़ी थी.

जैसे ही मैंने कार रोकी, वो भाग कर कार के पास आ गई और बोली कि कार को भगा कर ले जाने की कोशिश ना करना … वरना बहुत ही बुरा होगा.

उसकी इस बात से मैं बहुत बुरी तरह से डर गया और हकलाते हुए बोला कि जीजी मैं कहां भागा जा रहा हूँ … और मेरी इतनी हिम्मत ही कहां है कि मैं आप से भाग सकूँ?
इस पर दीपा ने कहा- अभी जब तुमने मुझे देखा था, तब तो जल्दी से भाग गया था और अब बात बना रहा है.

मैंने कहा कि जीजी मुझको कार को एक तरफ़ तो लगा लेने दो. फिर अन्दर बैठ कर बात करते हैं.
वो बोली- ठीक है.

मैंने कार को एक तरफ़ लगा दिया और दीपा के साथ अन्दर अपने घर में चला आया. मैंने अपने कमरे में जाते ही एसी ऑन कर दिया क्योंकि घबराहट के मारे मुझे पसीना आ रहा था.

फिर मैं अपने होंठों पर जबरन एक हल्की सी मुस्कान लाते हुए बोला कि अ…ओ जीजी बैठ तो जाओ और बोलो कि क्या कहना है.

ऐसा कहते हुए मैं रुआंसा सा हो गया.

वो बोली- डर मत … मैं तुझको मारूंगी या डांटूगी नहीं, वो मैं तो यह जानने आई हूँ कि तू उस दिन छत से क्या देख रहा था?
मैं अनजान सा बनने लगा और कहा कि जीजी आप कब की बात कर रही हो … मुझे तो कुछ ध्यान ही नहीं है.

उसने हल्का सा मुस्कुरा कर कहा कि साले बनता है. अभी रविवार को सुबह छत से मुझे नंगी नहीं देख रहा था?

दीपा की बात का मैंने कोई जवाब नहीं दिया.

वो बोली कि क्या किसी जवान लड़की को इस तरह नंगी देखना तुझे अच्छा लगता है … शर्म नहीं आती!
मैंने सर झुका कर कहा कि जीजी आप हो ही इतनी खूबसूरत कि आपको उस रोज आपको वैसे देखा तो मैं आंखें ही नहीं फेर सका. बस मैं आपको देखता ही रहा. वैसे मैं बड़ा ही शरीफ़ लड़का हूँ और आपको ही मैंने जिन्दगी में पहली बार नंगी देखा है.

इस पर दीपा हंस कर बोली कि हां हां वो तो दिखाई ही दे रहा है कि तू कितना शरीफ़ लड़का है. जो जवान लड़कियों को नंगी देखता फिरता है.

दीदी की हंसी देख कर मुझे साहस आ गया और मैंने भी झट से कहा कि जीजी उस रोज आप टांगों के बीच बालों को बार बार क्यों रगड़ रही थीं?

मेरी इस बात पर वो शर्मा गई और बोली- धत कहीं जवान लड़कियों से ऐसी बात पूछी जाती है!
तो मैंने पूछा कि फिर किससे पूछी जाती है?
उसने इतना ही कहा कि मुझे नहीं मालूम.

अब मैं समझ गया था कि वो उस रोज मेरे देखने से ज्यादा नाराज नहीं थी.

उस समय तक मेरा डर काफी हद तक कम हो गया था और मेरा लंड खड़ा होना शुरू हो गया था.

मुझे मस्ती सूझी और मैंने फिर से दीपा से पूछा कि जीजी बताओ ना कि तुम उस रोज क्या कर रही थीं?
यह सुन कर वो पहले तो मुस्कुराती रही … फिर एकदम से बोली कि क्या तू मुझे फिर से नंगी देखना चाहेगा?

ये सुनकर मेरा दिल बहुत जोरों से धड़कने लगा. मैंने हल्के से कहा कि हां जीजी … मैं फिर से आपको नंगी देखना चाहता हूँ.
वो बोली कि क्या कभी तुमने पहले भी यह काम किया है!

मैंने कहा कि नहीं.
उसने कहा कि ओके चल आ मेरे पास, आज मैं तुझको सब कुछ सिखाऊंगी.

यह कह कर दीपा ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों चूमने लगी. मैंने भी उसको कस कर पकड़ लिया और उसके होंठों को चूमने लगा. अगले कुछ ही पलों में उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसने की कोशिश कर रही थी, तो मैंने अपना मुँह खोल कर उसकी जीभ चूसनी शुरू कर दी.

इधर मेरा लंड भी चोट खाए काले नाग की तरह फ़नफ़ना रहा था और पैंट में से बाहर आने के लिए मचल रहा था.

मैंने एक हाथ बढ़ा कर दीपा की तनी हुई चूचि पर रख दिया और बड़ी बेताबी के साथ उसको मसलने लगा.

दीपा का सारा शरीर एक भट्टी की तरह तप रहा था और हमारी गर्म सांसें एक दूसरे की सांसों से टकरा रही थीं.

ऐसा लग रहा था कि मैं बादलों में उड़ा जा रहा हूँ. अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था. मैंने एक हाथ से उसकी एक चूचि को मसलते हुए अपना दूसरा हाथ उसके चूतड़ों पर रख दिया और दोनों चूतड़ों व दोनों चूचियों को बहुत बुरी तरह मसलने लगा.

दीपा के मुँह से हल्की हल्की कराहने की आवाज निकलने लगी- ओह्हह … अयीईई … जरा आराम से करो … मैं कोई भागी नहीं जा रही हूँ. तेजी के साथ मसलने पर दर्द होता है.

लेकिन मैं अपनी धुन में लगा रहा और उसके चूतड़ों को और मम्मों को मसलता रहा.

वो ‘ओह्हह्ह … अययीए …’ करती रही.

उसकी मादक आवाजें सुन कर मेरा लंड बेताब हो रहा था और पैंट के अन्दर से ही दीपा की नाभि के आस पास टक्कर मार रहा था.

मैंने उसके कान में फ़ुसफ़साते हुए कहा कि अपनी सलवार कमीज़ उतार दो.

पहले तो वो मना करने लगी, लेकिन जब मैंने उसकी कमीज़ ऊपर को उठानी शुरू की, तो उसने कहा- रुको बाबा … तुम तो मेरे बटन ही तोड़ दोगे … मैं ही उतार देती हूँ.

यह कह कर उसने खड़ी होकर अपनी कमीज़ के बटन खोल दिए और अपनी कमीज़ उतार दी. अब वो सिर्फ एक सफेद ब्रा और सलवार में खड़ी थी. मैं उसको देखता रह गया.

मेरी पड़ोसन दीपा दीदी की नंगी जवानी ने मेरे होश उड़ा दिए थे. उसकी कड़क जवानी देख कर मेरा लंड फटा पड़ रहा था.

बेहद दिलकश फिगर वाली पंजाबन पड़ोसन दीपा दीदी की चुत चुदाई किस तरह से हुई, ये मैं आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूंगा.

आपको मेरी Antarvasna सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मेल और कमेंट्स करना न भूलें.

(Meri Padosan Chalu Ladki)-antarvasna

नमस्कार मेरे पाठक दोस्तो,मैं पंजाब से आकाश हूँ। मैंने यह antarvasna कहानी लिखी है क्योंकि मैं आप सभी को अपनी एक सत्य घटना बताना चाहता हूँ।

मैं अपनी थ्री ईयर आर्ट्स की पढ़ाई पूरी कर चुका हूँ और मै अभी आगे भी पढने की सोच रहा हूँ। लेकिन हमारा कॉलेज घर से बहुत दूर था। तो मैं अपने चाचा के घर रहने लगा था। उनका घर कॉलेज के नजदीक था। मेरे अंकल का लड़का विदेश गया हुआ था। मैं तो प्रातः कॉलेज जाता और संध्या को पांच बजे तक कॉलेज से वापस आ जाता था।

मेरे अंकल के पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहता था। उनकी तीन लड़कियाँ थी रूही, कोमल और पिंकी। सबसे बड़ी लड़की रूही को देख कर मेरा मन उस पर लट्टू होने लगा था। वो थी ही इतनी सुन्दर।

उसकी छोटी बहन पिंकी कभी कभी अंकल के घर आया करती थी। मैंने उसके जरिये रूही से बात करने का इरादा बनाया। लेकिन डर रहता था कि वो मेरी मदद नहीं करे या किसी को बता दिया तो क्या होगा। मैंने हिम्मत करके एक पत्र लिख कर उसकी बहन को दे दिया कि वो पत्र रूही को दे देना।

मैं उसे जितना बच्चा या नासमझ सोचता था वो उतनी नहीं थी। वो समझ गई और बोली- आप खुद ही क्यों नहीं दे देते?

पर मैंने जैसे तैसे उसे मना लिया। अगले दिन मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा। वो सात बजे हमारे घर आई और आंटी से बात करने लगी। मैं छत पर चला गया तो वो भी बहाना बना कर छत पर चली आई। मैंने उससे धीरे से पत्र के बारे में पूछा तो उसने पत्र का जवाब दिखा कर अपनी ब्रा में रख लिया और बोली खुद ही ले लो।

मैं उसकी बात सुन कर हैरान रह गया। अरे यह तो बहुत ही चालू लड़की है। मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया और पत्र निकालने के बहाने उसकी चूचियाँ दबाने लगा। तो वह बोली- क्या बात है रात रंगीन करने का इरादा है?

मैं उसकी बात सुन कर फिर से सुन्न सा रह गया कि अभी इसकी उम्र तो छोटी सी है और यह तो चुदने को भी राजी है।

मैंने हाँ कर दी तो बोली- चलते हैं किसी होटल में। मैंने अपनी बाईक ले ली और होटल की तरफ़ चल दिया।

वहाँ हम सारी रात एक दूसरे के साथ सेक्स करते रहे। उसने बताया कि उसने मेरे साथ पहली बार ही सेक्स किया है।

वो बहुत खुश थी, कहती थी कि बहुत मजा आया।

बाद में जब मैंने पत्र मांगा तो उसने मुझे दे दिया, लेकिन एक शर्त थी कि मैं उसे ऐसा मजा फिर से दूँ। मैंने उसे वहीं लिटा लिया।

उसने अभी अन्डरवियर नहीं पहना था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में गाड़ दिया और बहुत अन्दर गहराई तक पेल दिया। वो सिसक रही थी ऊऊओह्हह् हह्हह हीईईईई और अंदर ह्हह हह्हह्ह ह्हह फ़ाड़ डालो। अहहह हह्हह।

लगभग आधे घण्टे बाद हम एक दूसरे से अलग हुए। उसने अपने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहन लिये। उसके बाद मैंने वह पत्र पढ़ा तो मुझे हैरानी हुई कि उसकी बहन भी मुझ पर मरती है।

फिर उसने मुझे रात को अपने घर पर बुलाया।

पिंकी ने बताया कि आज रात को उसके घर में कोई नहीं होगा, तुम रात को आ जाओ। मैं उस दिन कॉलेज नहीं गया। रात को मैं उसके घर गया और कॉल बेल बजाई। पिंकी ने मुस्करा कर दरवाजा खोला।

फिर हम उसकी बहन के कमरे में चले आये और कहा कि मेरा इन्तज़ार करो। उसकी बहन पिंकी ने हम सभी के लिये खाना बनाया। भोजन के उपरान्त हम सभी ने ग्रुप सेक्स किया। मैं उस रात को बहुत खुश था फिर मैं वापस चला आया। अब तो जब भी हमें मौका मिलता है, हम सेक्स करते हैं।

मैं आगे की Antarvasna कहानी अगली बार लिखूंगा।

Sex Stories

यह Sex Stories कहानी उस वक्त की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था।

मध्यप्रदेश के जबलपुर में चौधरी चाल में मैं रहता हूँ। हमारे चाल में कविता, रेशमा, और पिंकी ये तीन लड़कियाँ रहती हैं। जब वे स्कूल में थी तब उनका मेरे घर में आना जाना रहता था। अब वे 18 साल की हो चुकी हैं। जब स्कूल में थी, उस वक्त से मैं उन तीनों बहुत चाहता हूँ। उनको मैंने कैसे चोदा, यही कहानी हैं।

एक दिन की बात है, उस वक्त मेरे घर में मैं अकेला था, और मैं कम्प्यूटर पर ब्ल्यू फिल्म देख रहा था। तभी कविता, रेशमा और पिंकी मेरे घर चली आई। उन्हें देखते ही मैंने फिल्म बंद कर दी। वे मुझे सुहास नाम से बुलाती हैं।

सुहास.. तू घर पर अकेले क्या कर रहा है? ऐसे कविता ने पूछा।

मैंने कहा- कुछ नहीं ! कम्प्यूटर पर काम कर रहा था…

पर आज तुम तीनों मेरे घर अचानक.. एक साथ ? क्या कुछ काम था..? मैंने पूछा तो पिंकी ने कहा- कॉलेज को छुट्टी है तो तुम्हारे साथ कुछ खेल खेले ऐसा सोचकर हम चली आई ! तू भी तो अकेला है…

क्या खेलें…..?

तो रेशमा बोली- आँख मिचौली खेलते हैं…

मैंने भी कहा- ठीक है….

वैसे मेरा घर बहुत बड़ा है, चाल में हमारा घर ही बड़ा है, एक बेडरुम, किचन और हॉल – ऐसे तीन कमरे थे, जिनमें हॉल सबसे बड़ा है।

कविता बोली- राज कौन लेगा….

तो मैंने कहा- हम लॉटरी निकालते हैं….

ठीक है- तीनों ने माना।

फिर मैंने परची डाली और पिंकी से कहा- इनमें से एक उठाओ ! जिसका नाम आयेगा वो राज लेगी….

ठीक है !

पिंकी ने परची उठाई तो रेशमा पर राज आई।

उस वक्त उन तीनों ने स्कूल की ड्रेस पहनी थी। घर में भी वे तीनों अक्सर स्कूल ड्रेस ही डाला करती थी। रेशमा ने उस वक्त चॉकलेटी रंग का पेटिकोट और अंदर से शर्ट पहना हुआ था, पिंकी ने पंजाबी ड्रेस की तरह नीले रंग का कुरता और आसमानी रंग का पज़ामा पहना था, ऊपर से दुपट्टा लिया था और कविता ने पीले रंग का स्कर्ट और टॉप पहना था।

मैं उस वक्त बरमुडा और टी-शर्ट में था।

पिंकी बोली- रेशमा पर राज आया है ! उसकी आँखों पर पट्टी बांधो….

मैंने कहा- पिंकी, मेरे पास तो पट्टी नहीं है….

तो कविता बोली- अरे सुहास ! पिंकी का दुपट्टा कब काम आयेगा….

पिंकी बोली- ठीक है… दुपट्टा ही बांधती हूं….

पिंकी ने अपना दुपट्टा निकाला और और रेशमा की आँखों पर बांधा।

रेशमा जिसे छुएगी उसको फिर राज लेना होगा… ऐसे पिंकी ने कहा और खेल शुरू हुआ। हम तीनों इधर उधर भागे, आँख पर पट्टी बंधी रेशमा हम तीनों को खोजने लगी। मैं रेशमा को हाथ लगा कर पीछे हट जाता था। वैसे ही पिंकी और कविता ने शुरु किया।

अचानक मेरा हाथ रेशमा के स्तनों पर लग गया और उस वक्त मैं पकड़ा गया। अब मेरे बारी थी। मेरे आँखों पर पिंकी ने पट्टी बांधी। पट्टी बांधते समय पिंकी के स्तन मेरे पीठ पर छू रहे हैं, ऐसा मुझे महसूस हुआ। तभी मेरा लंड खड़ा हुआ। अब मैं तीनों को खोज रहा था।

अचानक कविता बोली, अरे सुहास तुम्हारी जेब ऐसे फ़ूली क्यों है, कुछ जेब में है क्या….?

मैं घबरा गया- नहीं नहीं ! कुछ नहीं ! यह तो ककड़ी है जो मैं रोज खाता हूँ….

अच्छा मुझे भी चाहिए ! कविता बोली और जिद करने लगी।

देता हूँ…. खेल तो पूरा होने दो !

नहीं पहले दो ! नहीं तो मैं निकाल लूंगी ! पिंकी तो जिद पर आ गई।

मैं बोला- पास मत आना पिंकी ! आऊट हो जाओगी…

पर पिंकी नहीं मानी, उसने रेशमा और कविता से कुछ छुपी बातें की।

सुहास ! तुझे छूने ही नहीं दूंगी तो कैसे आऊट होऊँगी? खेल शुरु रख कर भी मैं ककड़ी निकाल सकती हूँ… पिंकी बोली।

उस वक्त मैं कुछ नहीं समझा मैं तीनों को ढूँढ रहा था कि अचानक रेशमा और कविता ने मेरे हाथ कस के पकड़ लिए।

मैं बोला- अरे यह क्या कर रही हो…?

तो कविता बोली- सुहास, तू हमें छू नहीं सकता क्योंकि हमने तुम्हारे हाथ पकड़े हैं…

मैं उस वक्त डर गया। तभी पिंकी ने मेरे जेब में हाथ डाला. और ककड़ी खींचने लगी… पिंकी ने ककड़ी नहीं, मेरा लंड पकड़ लिया था पर उसे कुछ नहीं पता था। इधर दोनों ने मुझे कस कर पकड़ लिया था।

रेशमा बोली- पिंकी ककड़ी निकालो…

पिंकी बोली- नहीं निकल रही है…

कविता बोली- अरे शायद सुहास ने अंदर में ककड़ी रखी होगी…. ऊपर वाली पैंट उतारो…

कविता झट से बोल गई तो पिंकी शरमा गई।

अरे, क्या शरमाना ! सुहास तो अपना दोस्त है….

अब मेरा भांडा फ़ूटने वाला है, मैं बहुत घबरा गया क्योंकि मैंने अंडरवीअर नहीं पहना था, सिर्फ बरमुडा पहना था।

तभी पिंकी ने मेरा बरमुडा खींचना शुरु किया। मैं हलचल करने लगा पर आखिर में पिंकी ने मेरा बरमुडा खींच ही लिया। बरमुडा नीचे आते ही मेरा सात इंच का लंड तीनों को सलामी देने खड़ा हुआ था। तीनों दंग रह गई। रेशमा चिल्लाई- बाप रे ! कितना बड़ा है सुहास तेरा लंड….

नहीं, यह इतना बड़ा नहीं है, यह तो तुम तीनों को देखकर बड़ा हो गया है….

अब मैंने हथियार डाल दिए और सच सच बातें करने लगा।

रेशमा, पिंकी कविता सुनो ! मैं तुम तीनों को चाहने लगा हूँ ! तुम्हारी जवानी का रस पीने की कोशिश कर रहा हूँ !

कविता बोली- कौन सा रस…?

तब मैंने कविता से कहा- बुरा नहीं मानेगी तो मैं साफ बात करुँ….?

तभी पिंकी बोली- अरे सुहास ! तू बिदांस बात कर…. कुछ मदद चाहिए वो भी हम देंगे….

तब मैंने खुलकर बातें करना शुरू किया, मैं बोला- मैंने तुम तीनों के बहुत बार स्तन दबाये हैं और अपना लंड तुम्हारे शरीर को छुआया है। तभी मेरा लंड ऐसे ही खड़ा हो जाता है…. अभी तुम्हारे स्तन देखकर इन्हें चूसने का मन कर रहा है ! और..

रेशमा बोली- सुहास और क्या….

तो मैंने कहा- मेरा लंड तुम तीनों चूसें ! ऐसी मेरी इच्छा है…. और मेरा लंड तुम्हारी चूत में डालने की इच्छा है….

तो कविता बोली- तो उसमें क्या है सुहास ! अभी तक तो तूने हम तीनों से ऊपरी-ऊपरी मज़े लिए, अब सच में इस नये खेल का हम आनंद उठाते हैं….

रेशमा और पिंकी ने कहा- हाँ सुहास…. तुम जैसे चाहे हमें चोद सकते हो ! शादी के बाद तो हमारा पति हमें चोदेगा, उससे पहले कैसे चोदते हैं यह सीख लिया तो शादी के बाद परेशानी नहीं होगी।

कैसे शुरुआत करें….? कविता बोली।

मैंने फिर परची डाली और रेशमा को कहा- एक एक कर के तीनों को उठाओ।

रेशमा ने उठाई तो पहली परची में पिंकी का नाम था, दूसरी में रेशमा का और तीसरी में कविता का नाम आया।

मैंने कहा- देखो, परची में जैसे नाम आएँ हैं, वैसे ही मैं एक एक को चोदूँगा….

ठीक है ! तीनों मान गई।

पिंकी, तेरा नाम पहले आया है, तू तैयार है ना….?

पिंकी बोली- हाँ, मैं तैयार हूँ, मुझे क्या करना होगा?

पिंकी तू कुछ नहीं करेगी ! करुंगा तो मैं, जब करना हो तो मैं बोलूँगा। बाद में तुम खुद ही करोगी, ऐसा ही यह खेल है…. पिंकी चलो, बेडरुम में चलते हैं…. मैंने कहा।

तभी रेशमा बोली- सुहास, क्या हम भी आ जायें ?

हाँ चलो, तुम भी देख लो कि कैसे चोदते हैं।

हम चारों बेडरुम में चले गये। मैंने पिंकी को बिस्तर पर लिटाया और उसके गाल चूमना शुरु किया। पिंकी ने थोड़ी हलचल की क्योंकि यह सब वह पहली बार महसूस कर रही थी। मैंने पिंकी के ओंठ पर अपने ओंठ रखे, फिर गले का चुंबन लेने लगा, फिर और नीचे आकर उसके स्तन को चूमने लगा, कपड़ों के ऊपर से मैंने उसके स्तन दबाना शुरु किए। फिर मैं पिंकी का कुर्ता उतारने लगा। पिंकी अब ब्रा पहनती थी, कुर्ता उतारते ही उसके स्तन उभर कर आगे आये।

पिंकी तुम्हारे स्तन तो आम जैसे पक गये हैं ! मैंने कहा।

पिंकी बोली- अब रस पी जाओ भी ?

तभी मैंने पिंकी की ब्रा भी उतारी, अब स्तन पूरे खुले गये थे। मैं स्तन देखकर उन पर लपक पड़ा। पिंकी के स्तन मैंने दबाना शुरु किए। फिर एक स्तन मैंने मुँह में लिया उसके निप्पल चूसने लगा और दूसरा स्तन दबाने लगा।

पिंकी ! तुम जिसे ककड़ी समझ रही थी, वो मेरा लंड था। तुम मेरा लंड हाथ में लेकर मसलना शुरु करो।

तब पिंकी ने मेरा लंड मसलना शुरु किया। सुहास, तेरी इच्छा थी ना कि तेरा लंड मैं मुँह में लूँ और चुसूँ ! तो अपनी इच्छा पूरी कर !

हाँ पिंकी, आय लव यू, फिर मैंने अपना लंड पिंकी के मुँह में दिया। पिंकी मेरा सात इंच का लंड मुँह में चूसने लगी। उधर कविता और रेशमा हमारा खेल देखकर गरम हो रही थी।

तभी रेशमा बोली- सुहास ! अरे, पिंकी को चोदना भी शुरु करो ! मुझे कुछ हो रहा है !

हाँ रेशमा डार्लिंग ! अभी चोदता हूँ ! मैंने पिंकी का पजामा उतार दिया। अब पिंकी पूरी नंगी थी, अपने बोबे दिखा कर बोली- सुहास … इन्हें दबाओ ! … और दबाओ !

मैं फिर टूट पड़ा। फिर मैंने पिंकी की चूत के पास अपना लंड ले गया। पिंकी ने मेरा लंड का पकड़ कर चूत के सामने रखा। मैंने कहा- पिंकी, अब मैं तुझे चोदने जा रहा हूं….

हाँ तैयार हूँ !

फिर मैंने जोर का धक्का देकर लंड पिंकी के चूत में धकेल दिया। लंड चूत में जाते ही आऽऽ आऽ आहह्हह्ह ! पिंकी चिल्ला उठी।

फिर थोड़ी देर बाद मैं लंड अंदर-बाहर करने लगा। पिंकी मदहोश होकर चुदाई का आनंद ले रही थी।

पिंकी अब बस करो ! अब रेशमा को चोदने दो… वो तरस रही है !

ठीक है ! पिंकी बोली और कविता के बगल में जा बैठी।

रेशमा डार्लिंग आओ.. मैंने कहा।

रेशमा तुरंत बिस्तर पर लेट गई…

रेशमा ने स्कूल पेटिकोट और शर्ट पेहना था। मैंने उसके ओंठ के चुंबन लेकर रेशमा का पेटीकोट उतारना शुरु किया फिर मैंने उसका शर्ट खोल दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। जैसे ही मैंने शर्ट खोला तो उसके दूध उछल के बाहर आ गये, मैं उन्हें दबाने लगा। कितने दिनों के बाद इसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिले। फिर मैंने उसके निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा। रेशमा आ आह्हह्ह हा आआ आऽऽह्हह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी पैन्टी उतार दी। पिंकी की चुदाई देखकर रेशमा की चूत बहुत गरम हो गई थी। मैं उसकी चूत को फैला कर चाटने लगा। वो सिसकारी भर रही थी- अहाऽऽआआ असऽऽ स्सहस आआअह्ह्हस् स्सशाआ आआहस्सह्हस्स अह्हह्हह ह्ह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्ह्हाआ ह्हाहहवो !

वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी- सुहास अरे लंड मुझे चूसने दो ना….

हाँ रेशमा…

और मैंने लंड रेशमा के मुँह में दिया। वो आयस्क्रीम की तरह उसे चूसने लगी। फिर रेशमा ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघों के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था। अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह में ठेलते हुए कहा- सुहास, चूसो इनको मुंह में लेकर।

मैंने उसकी चूची को मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के लिये मैंने उसकी चूची को मुँह से निकाला और बोला- मैं हमेशा तुम्हारी कसी चूची की सोचता था और परेशान होता था, इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हें मुँह में लेकर चूसूँ और इनका रस पीऊं। पर डरता था पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ। तुम नहीं जानती कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है !

अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो ! मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं जैसा चाहे वैसा ही करो ! रेशमा ने कहा।

फिर क्या था, हरी झंडी पाकर मैं जुट पड़ा रेशमा की चूची पर। मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ को उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूंगा। रेशमा भी पूरा साथ दे रही थी। उसके मुँह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी। उसने अपनी बाईं टांग को मेरे कंधे के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। यह उसकी चूत थी। उसने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों में घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था।

रेशमा ने तब हाथ में मेरा लंड लेकर निशाने पर लगा कर रास्ता दिखाया और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि वो सम्भले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया।

रेशमा चिल्लाई- उईई ईईईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह्हह ओह , ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, सुहास…हाय ! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला !

पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उसकी बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। उसकी चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी।

मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूचियों को पकड़ लिया और मुँह में लेकर चूसने लगा। रेशमा को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी। मेरा लंड धीरे धीरे चूत में अंदर-बाहर करने लगा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। रेशमा को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शोट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया।

इधर चुदाई जोरदार शुरु थी उधर कविता तड़फ रही थी। सुहास, बस भी करो अब मुझे कब शांत करोगे… कविता बोली।

कविता डार्लिंग ! हाँ अब तुन्हें ही चोदना है ! रेशमा अब बस करो ! कविता मुझे घूर-घूर कर देख रही है !

ठीक है सुहास ! तुम कवितो को चोदो !फिर रेशमा पिंकी के साथ जा बैठी।

कविता मेरी जानेमन ! आओ ! ऐसे कहते ही कविता तुरंत बिस्तर पर आ गई।

कविता, तुम स्कर्ट-टॉप में बहुत सुंदर दिखती हो ! तुम्हो बोबे भी अब पिंकी और रेशमा की तरह बड़े हो गये हैं।

सुहास ! अब तो बड़े हो गये हैं और तुम्हें बुला रहे हैं…

फिर मैं कैसे रुक सकता था। मैंने धीरे से कविता के टॉप के हुक खोल दिए और उसकी ब्रा उतार दी। अब वह एकदम परी लग रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया।, उसकी चिकनी चूचियाँ मैं चूसने लगा, उसकी घुंडियाँ कड़ी हो रही थीं और वह कह रही थी- सुहास बहुत मज़ा आ रहा है !

फिर मैं होंठ चूसने लगा, इस बीच कविता का एक हाथ मेरे लंड को पकड़ चुका था। कविता मेरा लंड मसलने लगी। तभी मैं उसके बोबे दबाने शुरु किया, उसकी चूचियाँ चूसने लगा- कविता, तेरा दूध पीने की बहुत इच्छा है !

अरे सुहास ! अभी तो मेरी शादी नहीं हुई, शादी के बाद माँ बन जाऊंगी तो जरुर मेरा दूध पीना !

सच कविता..? और मैं फिर कविता की चूचियाँ जोर-जोर से चूसने लगा। उउउउउउऊऊऊऊऊ… .आआआआआहहहहह… उसके होंठों पर किस किया और दोनों हाथों से उसकी चूचियों को धीरे-धीरे दबाया। अब मैं उसकी स्कर्ट उतारने लगा। उसने काले रंग की पैन्टी पहन रखी थी।

तभी उसने कहा- सुहास अब रहा नहीं जाता, मुझे दे दो, मुझे चाहिए !

अब मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड खड़ा था। मैंने कविता की पैन्टी अपने मुँह से उतारनी शुरु की। वहाँ बाल बहुत कम थे। उसकी पैन्टी उतार कर मैंने उसको बीच में से सूँघा। गज़ब की खुशबू थी। उसकी चूत की लाईन चाटने लगा। मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो चुका था। कविता ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसके सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथों से कविता की गोल चूचियां दबा रहा था। मैं भी गरम हो रहा था, कविता ने मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी.. वो मेरा सारा रस पी गई। कविता ने चूस-चूस कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया….

कविता बोली- सुहास, जान अब और न तड़पाओ ! अपनी रानी को चोद दो ! मेरी प्यास बुझा दो..

मैं तो तैयार था।उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो !

मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…..

अबकी बार मैंने धीरे धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया….

वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो ! बाहर करो ! मैं नहीं सह पाऊँगी !

पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कविता की कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया……वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में कविता को भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो….और जोर से…..आह…आह….मेरे राजा…..मुझे जन्नत की सैर कराओ….और अंदर डालो …आह ….सी…सी ….आह….

मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले … पूरा मेरा खा जा … ले … ले … पूरा ले …

आह …राजा….मैं गई….सी….थाम लो….मुझे…..आह….

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी….. थोड़े धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये..

कुछ देर बात कविता, पिंकी, रेशमा ने साथ-साथ मुझसे चुदवाया। जब मैं रेशमा के स्तन दबाता और चूसता तब पिंकी मेरा लंड चूसती। जब मैं कविता के स्तन दबाता और उसकी चूचियाँ चूसता, तब रेशमा मेरा लंड मुँह में लेकर उसे चूसती। जब मैं पिंकी के स्तन दबाता और चूचियाँ चूसता तो कविता मेरा लंड मुँह में लेकर उसे चूसती। कुछ देर बाद मेरा लंड पिंकी की चूत में जाकर उसे चोदता तब रेशमा अपने स्तन और चूचियाँ मुझसे दबवाती और चुसवाती। जब मैं रेशमा की चूत में मेरा लंड डालकर उसे चोदता तब कविता अपने स्तन मुझे दबाने को देती।

इस तरह यह चोदा-चोदी हमने दो घंटे की।

मेरी कहानी आपको कैसी लगी ? Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆