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मेरी यह कहानी Hindi Porn Stories अपने गुरु-भाई प्रेम गुरु और पूनम जी को समर्पित है।
……. गीता
मेरी कहानी पिछली मिस गीता का मुझे काफी अच्छा रेस्पोंस मिला इसलिए में आपके लिए एक और आप बीती बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ यह कहानी भी आप लोगों को अच्छी लगेगी।
जैसा कि आप लोगों को मालूम है अब मुझे जब भी मौका मिलता, मैं गीता को चोद लिया करता था। लेकिन हमें यह नहीं मालूम था कि हमें कोई छुप कर भी देखता है !
यह बात हम करीब ३-४ महीने के बाद मालूम पड़ी ! और देखने वाली थी गीता में छोटी बहन मीता। गीता की तरह मीता भी बहुत सुंदर थी एक दम गोरी, भरे भरे गाल, गुलाबी होंठ,काली बड़ी बड़ी आँखे, लम्बे बाल और फिगर ३६-३०-३४ इसलिए अभी उसकी गांड नही मारी थी किसी ने।
अब मुद्दे की बात करते हैं।
एक दिन मैं और गीता मस्ती कर रहे थे, उस दिन उनके घर में कोई नहीं था। अंकल आंटी मार्केट गये थे और मीता स्कूल गई थी। हम दोनों तो अपने काम में मस्त थे, हमें नहीं मालूम कि कब मीता आ चुकी और हमें खिड़की से देख रही है। अकेले होने की वजह से घर में कोई रोक टोक तो थी नहीं इसलिए मैं बाथरूम जाने के लिए निकल आया और सीधा बाथरूम में चला गया। लौट कर आया तो देखा मीता खिड़की की तरफ चेहरा करे हुए है और शायद उसकी आँखे बंद थी क्योंकि बहुत जोर जोर से मीता अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी सलवार उतार कर।
मैंने भी उसे नही टोका और चला गया। आते ही मैंने गीता को इसके बारे में बताया तो वो बोलने लगी- बेचारी को अकेले ही तड़फने के लिए छोड़ आये?
मैंने कहा- मैं करता भी क्या ? तुम्हारी बहन है, अभी बुरा मान गई तो?
वो बोली- मादरचोद लड़की आधी नंगी खड़ी है और तुझे लगता है वो नाराज़ होगी।
ऐसा हो ही नही सकता ! चल मैं जाती हूँ और उससे तैयार करती हूँ। तुम १५ मिनट के बाद आ जाना।
मैं भी मान गया और बेड पर लेट गया और अपने लंड को ऊपर नीचे करने लगा और सोच रहा था कि मीता की चूत कैसी होगी। कहीं गीता की ही तरह मीता की भी तो चूत पहले से ही चुद चुकी है क्या ? और ना जाने क्या क्या सोचते सोचते १५ मिनट कब निकल गये मालूम ही नहीं चला।
और मैं मीता के कमरे में जाने लगा और गेट पर आकर रुक गया क्योंकि सामने का नज़ारा देखने लायक था। गीता मीता की चूत को २-३ ऊँगलियों से चोद रही है और चाट रही है। गीता कभी मीता की चूत चूसती तो कभी स्तन ! अब कब तक आँखें चार नहीं होगी, मीता ने अब मुझे देख लिया और वो एक दम उठ कर बेड के पीछे चली गई तो गीता ने कहा- वैसे तो गीता को बोलने के लिए चिल्ला रही थी अब क्या हो गया ?
मीता बहुत ही प्यार से थोड़ा शरमाते हुए बोली,“मुझे शर्म आती है !”
तो गीता बोली- गीता ! अब तुम ही इसकी शर्म दूर करो !
मेरा क्या था मैं तो रुका ही इसलिए था कि गीता या मीता खुद मुझ से बोले चोदने के लिए !
मैं अब धीरे धीरे बेड के पास गया और मीता का हाथ पकड़ कर उसे किस करने लगा, होठों को किस करने लगा। लेकिन मीता अभी भी शरमा रही थी और अपना चेहरा पीछे कर रही थी। मैंने भी सोच लिया था आज इसे इतने प्यार से चोदूंगा कि पूरी शर्म भाग जायेगी। मैं अभी भी मीता को किस कर रहा था और अपनी जीभ अन्दर बाहर कर रहा था। अब मीता थोड़ा थोड़ा खुलने लगी थी और मेरा साथ दे रही थी। अब किस करने में मज़ा आ रहा था क्यूँकि मीता मेरी जीभ को चूस रही थी और मैं उसकी।
अब मेरा हाथ उसके नंगे वक्ष पर था और दबा रहा था- ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म कितने नरम थे मीता के स्तन !
अब मेरे हाथ बहुत तेजी से चल रहे थे- कभी दांया स्तन दबता तो को कभी बाँयां ! और अब चूचुक भी चूस रहा था, काट रहा था। मीता के मुंह से सिसकारी निकल रही थी जोकि माहौल को और भी गर्म कर रही थी।
इसी तरह करीब २०-२५ मिनट निकल गये। मुझे तब याद आया जब गीता पास में आकर मेरा लंड हाथ में पकड़ कर बोली- मुझे क्यों अकेला छोड़ दिया है?
और गीता मेरा लंड चूसने लगी।
मुझे अब परेशानी हो रही थी शायद इसलिए कि बेड के पीछे जगह कम थी और दो दो हसीनाएं मेरे साथ काम-क्रिया कर रही थी।
मैंने कहा- बेड पर चलते हैं और मीता को गोद में उठाकर बेड पर ले आया और उसको अपने ऊपर कर लिया ताकि मैं आराम से उसके स्तनों को पी सकूँ, दबा सकूं, किस कर सकूं और गीता मेरा लंड आसानी से चूस सके। मैं दोनों तरफ से मजे ले रहा था।
अब यार एक बात बताओ एक लौड़ा हो और उसके पास दो दो सुंदर चूतें हों, वो कब तक अपना पानी रोक सकता है, मैंने भी अपना पूरा पानी गीता के मुँह में छोड़ दिया जिसे वो पूरा पी गयी और अपने होंठ पोंछते हुए हट गई। अब बारी मीता की जो थी।
लेकिन वो मना करने लगी। इस पर गीता ने उसकी गांड में लात मारते हुए गाली दी,“माँ की लौड़ी ! क्यूँ नखरे कर रही है, चुपचाप चूस ! नहीं तो तेरी चूत में पेट्रोल डाल दूंगी फिर ऊँगली डालते रहना रात भर !”
इससे एक फायदा यह हुआ कि मीता लंड चूसने लगी। वह तो गीता से अच्छा चूस रही थी।
अब मेरे मुंह में गीता ने अपनी चूत सटा दी और हिलने लगी। मैंने भी उसकी चूत को जीभ से खूब चाटा और चूसा। करीब १५ मिनट में मेरा फिर से पानी निकल गया और इस बार पानी मीता ने पीया था और गीता मेरे मुंह में झड़ गई, गीता का पानी मैंने पी लिया और गीता को हटा दिया ताकि वो मेरा लंड फिर से खड़ा कर सके। पता नहीं लेकिन गीता के हाथों में जादू था वो मुर्दे के लंड को भी खड़ा कर सकती थी।
मेरा लंड खड़ा करके गीता ने मीता से कहा- अब तू बेड पर लेट जा ! अब गीता तेरी चूत में अपना लंड डालेगा जो कि तुझे बहुत आराम से लेना है क्योंकि तू आज पहली बार चूत में लंड ले रही है तो तेरी झिल्ली फटेगी जिससे तेरे को दर्द भी होगा !
तो मीता बोली- दीदी, तुम टेंशन मत लो ! मैं आराम से ले लूंगी ! बस तुम क्रीम मेरी चूत में और गीता के लंड से लगा दो अच्छी तरह से !
गीता ने पूरी पौंड्स क्रीम मेरे लंड और मीता की चूत पर लगा दी और मीता को किस करने लगी।
मैं समझ गया कि अब सही समय है चूत से लंड का मिलन करने का !
मैंने मीता की चूत को पहले किस किया और उस पर लंड रगड़ने लगा जिससे मीता की उत्तेजना बढ़ती जा थी, वो सिसक रही थी ह्म्म्म्म्म्म्म……… आह्हनान्न्न्न्न्न………. यीयेय्ये इ,,,,,,,,,,,,,और ना जाने क्या क्या।
मीता के लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे उसे तड़फाने में मज़ा आ रहा था। आखिर मीता का सब्र का बाँध टूट गया और बोली,“मादरचोद चोदना हो तो अभी चोद दे, नहीं तो तेरे लंड को खा जाउंगी !”
मैं भी यही चाहता था कि मीता मुझ से मिन्नतें करे भीख मांगे …… लेकिन फिर भी उससे भीख ना मिले. इसके पीछे भी एक कारण था वो में फिर कभी बताऊंगा |
फिर मैंने धीरे से उसकी चूत पर लंड टिकाया और एक ही बार में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, जिससे वो तड़प उठी और जोर जोर से चिल्लाने लगी। मौके की नजाकत को समझते हुए गीता ने फिर से उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर लिया और आवाज वहीं दब गई।
मैं भी नहीं रुका और शॉट पर शॉट मारता गया- १,२,३,४,…………….२४,२५, तब मैं कहीं रुका और मीता की चूत को देखने लगा। उसकी चूत में से खून निकल रहा था और मीता की आँखों से पानी। लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रही थी।
अब मेरा बदला पूरा हो गया था इसलिए मैं १० मिनट के लिए रुक गया और मीता का इंतजार करने लगा कि वो कब अपनी गांड हिलाती है। लेकिन इसके लिए मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा ५ मिनट में ही वो अपने चूतड़ हिलाने लगी। मैं भी अब बड़े प्यार से लंड आगे पीछे करने लगा था। जिससे उसकी चीखें सिसकारी में बदल गई।
अब नज़ारा देखने और सुनने लायक था- मेरा लंड मीता की चूत को चोद रहा है और मीता गीता की चूत को चाट रही है और गीता मेरे होंठ चूस रही है किस कर रही है।
मीता की चूत अब काफी गीली हो गई थी इसलिए पूरे कमरे में फच फच …….फच की आवाजें आ रही थी और मेरा लंड बार बार फिसल रहा था।
मैंने तौलिये से उसकी चूत को साफ़ किया और लंड फिर अन्दर डाल दिया। अब मज़ा आ रहा था। धीरे धीरे लंड चूत में जाता और बाहर निकल आता ! मीता भी सिसकारी ले रही थी और गाली दे रही थी,“फाड़ ! फाड़ दे मेरे बालम ! मेरी चूत को फाड़ दे ! बहुत परेशान किया है इसने ४ महीने से ! आज इसकी गर्मी हो शान्त कर दे मेरे राजाआआ………… हम्म्मम्म्म्म ….. आआह्ह ह्ह्ह्हन्न्न्न्न्न्न फक्क मी फक्क या………… याआआआआ ……..गुड ,,,,,,,,” और ना जाने क्या क्या “मदरचोद अब कितनी देर तक चूत ही चोदेगा गांड भी मार ले लगे हाथ !”
मैंने कहा,“अभी नहीं ! पहले चूत का और लंड का मिलन तो होने दो सही से !”
और मैं फिर से चोदने लगा। बस अब दिल्ली दूर नहीं थी और मीता का पानी दूसरी बार निकल गया और साथ ही मेरा भी। मैं मीता के स्तनों पर ही मुंह रख कर लेट गया और चूसने लगा।
करीब १० मिनट बाद मैं उठा और कपड़े पहनने लगा तो गीता ने कपड़े छीनते हुए कहा,“कहाँ जा रहे हैं? आग लगा कर मेरी चूत कौन, तुम्हारा बाप आकर मारेगा या मेरा बाप !”
तो मैंने किस करते हुए कहा,“कहां जानेमन ! १० मिनट में आ रहा हूँ।”
क्योंकि अब मुझे ड्रिंक करने की जरुरत थी, इसके बिना अब और नहीं चोद सकता था इसलिए गीता के हैंडबैग में से ५०० रु. निकाल कर मैं विस्की लेने चला गया और आकर देखा तो वो दोनों अभी भी बिना कपड़ों के ही थी।
मैंने झट से अपने कपड़े उतार दिए। मीता मुझसे लिपट गई और मुझे किस करने लगी। लेकिन मुझे अभी कुछ अच्छा नही लग रहा था इसलिए उसकी गांड पर लात मार कर एक तरफ कर दिया।
इतने में गीता ३ ग्लास ले कर आ चुकी थी। मैं गीता और मीता के लिए बीयर लाया था जो उन लोगों ने अपने ग्लास में डाल ली और मेरा भी पैग बना दिया।
हम तीनों नंगे ही ड्रिंक करने लगे। मैंने जल्दी जल्दी ३-४ पैग डाले और मीता को ज़मीन पर ही पटक दिया और टाँगें चौड़ी करके एक बार में ही पूरा लंड अंदर कर दिया। इससे पहले कि वो चिल्लाना शुरू करे, मैं उसे किस करने लगा और चोदने लगा।
करीब १० मिनट तक मैं मीता को ऐसे ही चोदता रहा। उसके बाद उसको ज़मीन पर ही कुतिया बनाया और पीछे से चोदने लगा। ५-७ मिनट चोद कर देखा तो मीता की चूत डबल रोटी की तरह फूल गई थी। लेकिन मुझे उस पर बिलकुल भी रहम नहीं था। अब तक वो ३ बार झड़ चुकी थी और मेरा भी समय आ गया। मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया और उसका मुंह चोदने लगा।
यह सब चल ही रहा था कि गीता उठी और मीता की टाँगे चौड़ी कर उसकी गांड का छेद खोलने में लग गई। ३-४ लम्बे शॉट के बाद मैं भी मीता के मुँह में झड़ गया और हट गया।
करीब ३० मिनट के बाद मीता के मुंह से आवाज निकली, उसने मुझ से कहा,“जब मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो चुकी हूँ तो इतनी बेरहमी से क्यूँ चोद रहे हो ?????”
मैंने पूरी दम से खींच कर उसके गाल पर चांटा मारा और कहा- मीता डार्लिंग ! अब कुछ याद आया?
वो समझ चुकी थी आखिर क्यूँ मैं कुत्ते तरह उसे चोद रहा था।
फिर उठ कर मेरा लंड मुँह में लिया और चाटते हुए बोली,“सॉरी जो हुआ उसे भूल जाओ !”
उसके बाद मैंने मीता की गांड भी मारी और गीता को भी चोदा। लेकिन ये सब अगली कहानी में ! पहले आप इसको पढ़ो, मज़े लो और बताओ कैसी लगी कहानी ! यानी मेरी आप- बीती !
भाईयो और चूतो ! इसे कोरी बकवास मत समझना ! यह बिलकुल सच्ची कहानी है !
और अभी तो मुझे यह भी बताना भी है कि आखिर मीता ने किया क्या था?
उसके लिए अंतर्वासना में आते रहिये ! बहुत जल्द आगे का भाग भी आपके सामने आएगा।
मुझे मेल करना ना भूलें : Hindi Porn Stories
ये हिंदी में चुदाई की कहानी उस समय की है.. जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। उस वक्त मेरी उम्र 20 साल की थी जबकि मेरी सौतेली माँ 35 साल की थीं।
मेरी मॉम एक बहुत ही सेक्सी महिला थीं.. उनके जिस्म का एक-एक हिस्सा बिल्कुल तराशा हुआ था और अंग-अंग से मादकता टपकती थी। मैं कई बार उन्हें बाथरूम में सम्पूर्ण नग्नावस्था में देख चुका था। एक बार तो पापा उन्हें पूरा नंगा करके चोद रहे थे, तब भी उनकी मचलती जवानी को देखा था। जिस दिन पापा मॉम को चोद रहे थे, उसी दिन मेरा मन मॉम को चोदने के लिए मचल उठा था।
एक रात पापा शहर से बाहर गए हुए थे, मैं अपने बेडरूम में था। लेकिन मन में उत्तेजना के कारण मुझे नींद नहीं आ रही थी, सो मैंने मॉम की चूचियों को याद करते हुए मुठ मारनी चालू कर दी। कुछ ही देर में मेरी उत्तेजना और अधिक बढ़ गई तो मैंने गोल तकिया को अपनी टांगों में फंसा लिया और उसे ही मॉम समझ कर चोदना शुरू कर दिया।
उसी समय मेरी मॉम ने मेरे बेडरूम का दरवाजा खोला और मेरे कमरे में आ गईं।
दरवाजा खुलने की आवाज़ से मैं घबराकर रुक गया लेकिन मैं तकिए के ऊपर था। फिर मैंने मॉम को देखा तो मैं तकिए के बगल में लेट गया।
मॉम ने पूछा- क्या हुआ.. क्या कर रहे थे?
मैंने कहा- नींद नहीं आ रही है, कुछ बेचैनी सी है।
फिर मैंने मॉम से पूछा- क्या आपको भी नींद नहीं आ रही है?
वो बोलीं- हाँ मुझे भी नींद नहीं आ रही है।
मैंने कहा- आप भी यहीं लेट जाओ न।
फिर वो मेरे पास बैठ गईं।
मैंने फिर कहा- यहीं सो जाओ ना, मेरे पास।
वो सीधी लेट गईं। कुछ देर बाद मैंने पूछा- नींद नहीं आ रही है.. तो कोई कहानी पढ़ लेते हैं।
उन्होंने सर हिला कर हामी भरी तो मैंने पापा की किताब की रेक से एक सेक्सी कहानी की बुक निकाली और कहा- इसको पढ़ते हैं।
मॉम बोलीं- ये कौन सी किताब है?
मैंने कहा- कहानी की किताब है, इसकी कहानी पढ़ने में बहुत मजा आएगा, इसको पढ़ने से बहुत गुदगुदी भी होती है।
फिर मैंने किताब को हम दोनों के बीच में रखकर पढ़ने लगा। ऐसे में मॉम को पढ़ने में जरा दिक्कत हो रही थी तो मैंने कहा- चलो मैं पढ़कर सुनाता हूँ..
मैं उनको सेक्सी कहानी पढ़कर सुनाने लगा। इसमें एक लड़की का दूसरे मर्द के साथ सेक्स का किस्सा था। ये सेक्स स्टोरी बहुत डिटेल में थी।
मॉम बोलीं- ये सब क्या है?
मैंने कहा- अल्मारी में रखी थी।
वो बोलीं- इसमें बड़ों की गन्दी बातें लिखी हैं। तुमको इसे नहीं पढ़ना चाहिए।
मैंने कहा- फिर आपकी और डैड की अल्मारी में क्यों रखी है? एक बार पढ़ते हैं, सुनो ना!
फिर मॉम को भी मज़ा आने लगा। वो भी गरम होने लगीं। मॉम बीच-बीच में अपनी बुर खुजला रही थीं।
मैंने कहा- कहो गुदगुदी हो रही है ना।
मॉम ने स्माइल दे दी।
मैंने अपने लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- मेरे भी इसमें और सारे बदन में बहुत गुदगुदी हो रही।
फिर मैंने कहा- अब आप पढ़िए।
अब वो पढ़ने लगीं.. वो बहुत गरम हो गई थीं। तभी मॉम ने किताब बंद करके रख दी और बिस्तर पर अपने पैर पसार कर चित्त लेट गईं।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोलीं- बहुत बेचैनी हो रही है, नीचे बदन में कुछ खुजली भी हो रही है।
मैंने पूछा- शायद पावडर बदन पर लगाने से आराम मिल जाएगा।
वो बोलीं- हाँ ठीक है.. तुम पावडर ही लगा दो।
मैं बगल वाले रूम से पावडर लेकर आया।
मैंने देखा कि मॉम पेट के बल लेट गई थीं।
मॉम बोलीं- कमर में लगा दो।
मैंने देखा उन्होंने अपने ब्लाउज के बटन खोले हुए थे और ब्रा भी खोल दी थी।
मैं पावडर कमर पर लगाते हुए ब्लाउज के अन्दर हाथ डालकर मलने लगा। उनका कोई विरोध नहीं हुआ तो फिर मैं आहिस्ता-आहिस्ता पूरी कमर पर पावडर मलते हुए सीधे ही उनके मम्मों को मसलने लगा। मॉम को मम्मे मिंजवाने में मजा आ रहा था। वे मजा लेने लगीं तो मैंने सीधे ही उनके मम्मों पर पावडर लगाया और मम्मों को मसलने लगा।
अब उनको मजा आ रहा था।
फिर मैंने कहा- मॉम जरा आपकी गर्दन के पास भी पाउडर लगा देता हूँ।
वो घूमीं तो ब्लाउज के बटन खुले हुए थे और बूबस- पूरे नंगे दिखने लगे थे।
मॉम के बड़े-बड़े चूचे बहुत सेक्सी लग रहे थे।
मैंने उनकी गर्दन पर पावडर लगाने लगा। अब तो मैं सामने से मॉम के मम्मों को मसल रहा था और वो कुछ नहीं बोल रही थीं।
फिर मैंने मम्मे मसलते हुए हाथ नीचे पेट पर फिराया और नाभि को मसला। मॉम की आह निकली तो मैंने धीरे से उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ अन्दर डालकर जांघ पर फेरते हुए उनकी बुर पर भी पावडर लगाने लगा।
वो कामुक आवाज में बोलीं- उह.. ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- ठीक से लगा देता हूँ.. फिर नींद भी ठीक से आ जाएगी।
मॉम कुछ नहीं बोलीं तो मैं अपने हाथ को उनके गोल-गोल चूतड़ों पर फेरने लगा। सच में बड़ा मज़ा आ रहा था।
मैंने पूछा- मॉम क्या मज़ा आ रहा है.. आराम मिल रहा है?
अब मैं मॉम के चूतड़ों पर हाथ फेरते-फेरते उनके ऊपर चढ़ गया और बोला- इससे आपका बदन भी दब जाएगा।
मॉम भी मेरे मजे लेने लगीं।
मैंने कमर के नीचे से मॉम के चूचे पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा।
अब तो मॉम पूरी तरह से चुदास से तड़फ रही थीं।
मैंने कहा- किताब वाला सीन करते हैं।
मेरे बदन में जोर-जोर से गुदगुदी हो रही है।
फिर अचानक से मॉम को कुछ याद आया और वे बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- दरवाजा बंद है, किसी को पता नहीं चलेगा, मैं भी किसी से नहीं कहूँगा, तुम्हारी कसम मॉम आपको मज़ा भी आ जाएगा, प्लीज़ मना मत करो।
मॉम ने कुछ नहीं कहा।
मैंने फिर से उनसे कहा- कहानी की तरह मज़ा करते हैं मॉम।
मैंने अपना पजामा खोल दिया और उनकी जाँघों पर बैठ गया।
अब मॉम ने मेरा लंड पकड़ कर लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- मुझसे वादा करो कि तुम किसी से कभी भी नहीं कहोगे।
मैंने कहा- वादा।
और फिर क्या था.. उन्होंने अपने सारे कपड़े बदन से अलग कर दिए।
मैंने कहा- आप जैसे बोलेंगी.. मैं वैसे ही करूँगा।
उन्होंने कहा- हाँ जैसा कहानी में पढ़ा था.. वैसे ही करते रहो। मैंने उनके एक चुचे को चूसना शुरू किया.. दूसरे चूचे को दबा भी रहा था।
फिर वो भी मेरे लंड पर हाथ फेरने लगीं। मैंने भी एक हाथ की उंगली से मॉम की बुर को दबाने लगा और उंगली चुत के अन्दर कर दी।
फिर वो मुँह से ‘शह्ह.. उह्हह..’ आवाज निकालने लगीं।
मैंने उनसे किताब के सीन की तरह उनसे डॉगी स्टाइल में बैठने को कहा। जैसे ही मेरी मॉम कुतिया के जैसे बनीं मैंने अपने लंड को पीछे से उनकी बुर के छेद के पास ले जाकर सुपारे को फेरने लगा। साथ ही मैं दोनों हाथों से मम्मों भी दबा रहा था। सच में बड़ा मज़ा आ रहा था।
अचानक ही लंड फिसला और झटके के साथ बुर में घुस गया, क्योंकि उनकी बुर का छेद चुदवाते चुदवाते कुछ तो बड़ा हो गया था।
उनके मुँह से भी और मेरे मुँह से भी जोर की ‘शह्हह.. आह..’ की आवाज निकलने लगी।
मैंने अब धक्का लगाना शुरू किया, धीरे-धीरे धक्के की स्पीड भी बढ़ा रहा था। सच में क्या मस्त मज़ा आ रहा था।
मॉम भी बोलीं- और जोर से चोद.. और जोर से पेल.. आह मजा आ रहा है।
मैंने मॉम के मम्मों को जोर से दबाकर निप्पलों को खींचा और धक्के लगाने लगा।
‘अह.. उह.. ओह.. सुपरब.. श्शश.. और और जोर से.. क्या बात है और झटका दूँ मॉम?’
‘हाँ पेलता रह..’
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और वो बेड पर सीधी लेट गईं।
मैंने धीरे-धीरे उनके कामुक बदन पर हाथ फेरा, फिर बुर में उंगली घुसेड़ कर भीतर के पॉइंट को सहलाने लगा।
ये उनका जी-स्पॉटस था, वो बहुत जोर से हिल गईं और उनकी जोर से ‘आअ.. आअ.. श्शश.. उह..’ की आवाज निकल गई।
मैंने अब लंड को उनके मम्मों पर फिराना शुरू किया और ऊपर से नीचे की तरफ़ लंड लाने लगा। फिर उन्होंने मेरा मुँह अपने मुँह के पास खींचकर जोर से किस किया। मैं भी जोर-जोर से किस करने लगा और अपनी जीभ भी उनके मुँह पर फेरने लगा। उनकी जीभ को चूसने में मज़ा आ रहा था। वो साथ-साथ मेरे लंड को एक हाथ से जोर-जोर से सहला रही थीं।
मैं भी बोला- बहुत मज़ा दे रही हो।
फिर उन्होंने मेरे को जोर से अपनी तरफ़ खींचकर बांहों में जकड़ लिया। मैंने भी उनको भींच लिया, उनके चूचे मेरी छाती से चिपक कर दब रहे थे।
आह क्या रगड़ सुख मिल रहा था।
फिर उन्होंने अपनी जांघें फैलाईं और कहा- अब जल्दी-जल्दी जोर से यहाँ लंड ले आओ।
मैंने लंड को उनकी बुर में घुसेड़कर धीरे-धीरे हिलने लगा।
फिर वो बोलीं- आअह ऐसे नहीं चलेगा.. जोर-जोर से झटके लगाओ।
मैंने जोर से चोदना शुरू कर दिया।
क्या मस्त चुदाई का आनन्द आ रहा था। मॉम भी चुदाई का मजा ले रही थीं- शह.. शह आ.. क्या बात है आह.. आ.. शह.. अह्हह.. ओह्हह.. और जोर जोर से धक्के लगाओ.. बहुत मज़ा आ रहा है।
मैं भी पूरी ताकत से लंड को भीतर तक ठोकने लगा। चुदाई पूरी स्पीड पर थी और अब मैं झड़ने लगा था। मेरा रस झड़ने लगा और मैं ढीला होकर उनके नंगे बदन से जोर से लिपट गया। मॉम के गुदगुदे बदन पर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
फिर वो बोलीं- चलो हटो.. बहुत देर हो गई है.. अब सोते हैं।
वो अपने कपड़े पहनने लगीं। फिर बोलीं- ये राज ही रखना, किसी से कभी मत कहना।
मैंने हाँ कहते हुए उनके मम्मों को दबाकर किस कर लिया और बुर को दबाते हुए कहा- फिर कभी गुदगुदी होगी तो..?
वो हंसने लगीं.. मैं भी समझ गया।
मॉम बोलीं- बदमाश हो गए हो, चलो अब सो जाओ।
वो अपने कमरे में सोने चली गईं।
मैं अपनी मॉम के साथ चुदाई की इस कहानी को कभी नहीं लिखना चाहता था.. पर अब मुझे अच्छा लग रहा है।
इस चुदाई की कहानी पर आपके कमेंट्स का इन्तजार है।
अन्तर्वासना के एक एक Antarvasna पाठक को मेरी यानि कि गौरी का प्रणाम !यह मेरी आप सब के सामने पहली कहानी है, कहानी नहीं एक हकीकत है !
शादी से पहले से ही मेरा कई लड़कों के साथ अफेअर था और कई लड़कों से मैं चुदी थी। शादी हुई ससुराल चली गई, पहली रात निराशा हुई जब देखा पति का लौड़ा कोई खास नहीं था। दारु के नशे में था, मेरी चोरी पकड़ी नहीं गई थी, लेकिन वो मुझे ठंडी न कर पाया।
रोज़ रात को नशे में आता और पाँच-छह मिनट की चुदाई होती ! मुझे लौड़ा चूसना बहुत पसंद है लेकिन वो ज्यादा नहीं चूसने देता, जैसे ही खड़ा हो जाता, सीधा चूत में डाल देता। कुछ समय बाद उसने और ज्यादा पीनी शुरू कर दी, पीकर घर आकर वो मुझे पीट देता, गाली-गलौच करता। जिससे तंग आकर ससुर जी ने हमें अलग कर दिया। इस झटके से कुछ देर ठीक चला उसके बाद उसने फिर और ज्यादा पीनी शुरू कर दी।
मैं उससे बिल्कुल खुश नहीं थी। अब तो उनको उनके दोस्त घर छोड़ने के लिए आने लगे। उसको कोई होश ना रहती। उसको छोड़ने के बहाने वो मेरे दर्शन करने आते, मैं भी उनसे खुलने लगी। मुझे लौड़े के ज़रुरत थी।
वो तीनों बहुत हट्टे-कट्टे मर्द थे। उनके आने के समय पर मैं सेक्सी कपड़े पहनती, जिससे उनकी वासना भड़के। वो भी आने-बहाने मुझे छूने की कोशिश करते। मुझे देख तीनों के लौड़े खड़े हो जाते होंगे। मुझे उनमें से मनोहर जी सबसे अच्छे लगते। मैं उनकी ओर झुकने लगी, लेकिन वो जब भी आते तीनों इकट्ठे आते। मैं उन्हें हासिल करने के लिए मचलने लगी।
मेरी मुराद एक दिन पूरी होती दिखने लगी जब वो अकेले ही आये।
मैंने उसको बैठने को कहा और पानी देने के बहाने झुक कर अपने मम्मे दिखा दिए। उनकी नज़रें उनमें गड़ गई। मैं ग्लास रखने रसोई में गई, वो चाहते हुए भी कुछ नहीं बोल पाए, बस इतना कहा- मैं चलता हूँ भाभी !
वो मुड़े ही थे कि मैंने उनकी बांह पकड़ ली और बोली- बस ऐसे ही चले जाओगे? पहली बार अकेले मिले हो ! कह मैं उनसे लिपट गई।
उन्होंने भी मुझे कस कर बाँहों में भरते हुए कहा- मेरी जान ! मैं तो कई दिनों से इस पल के इंतजार में हूँ !
कहते ही उसने मुझे गोदी में उठाया और सीधा बिस्तर पे ले गए। वो मुझे जगह जगह चूमने लगे। एक एक करके हम दोनों नंगे हो गए उनका फौलादी लौड़ा देख मैं खुश हो गई। मैंने कहा- कुण्डी चढ़ा दो ! कहीं उनकी उतर गई और हम पकड़े गए?
मैंने उनके लौड़े को मुँह में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। वो आहें भर रहे थे। इतना मोटा लण्ड कसम से कभी नहीं पकड़ा था। कुछ देर में इतना सख्त हो गया कि चूसने में परेशानी होने लगी। फिर भी मैंने नहीं छोड़ा। उन्होंने तो मेरे मम्मों को मसल मसल कर चूस चूस कर लाल कर डाला फिर मुझे लिटा लिया और अपना फौलादी लौड़ा मेरी चूत में डालने के लिए चूत पे रख अन्दर किया।
दर्द से मैं कराहने लगी, इतने दिनों बाद इतना मोटा लौड़ा अंदर गया था। मैंने सब सहन कर लिया और देखते ही देखते उसने अपना नौ इंच का लौड़ा झड़ तक घुसा दिया।
हाय क्या माल हो भाभी जान !
फिर वो मुझे चोदने लगे।
हाय ! जोर से करो भाई साब ! फाड़ डालो ! कितने महीनों से आपसे चुदने को बेकरार थी, आज अपने नाकारा दोस्त की बीवी को अपनी रंडी बना कर चोदो ! मारो मेरी और जोर से मारो फाड़ डालो ! चूत फट जाने दो कामिनी को ! क्या मोटा लौड़ा है आपका !
ले कुतिया ! फाड़ डालूँगा ! कमीनी, तेरी माँ की चूत ! बहन की लौड़ी ! मादरचोद ! गली की कुत्तिया ! कुत्तों से चुद्वाऊंगा तुझे ! चल बहन चोद घोड़ी बन जा !
ले हरामी जात के ! बन गई घोड़ी ! घुसा दे अपना डंडा मेरे अन्दर !
ले साली !
दिल करता है एक साथ आगे से, पीछे से लौड़े ले लूँ !
बहन की लौड़ी ! तीन लौडे रोज़ तेरे पास आते हैं, पहले कहती तो रंडी, तुझे मिलकर चोद देते ! हाय !
मार अब !
आधे घंटे की चुदाई के बाद उसने अपने पानी को मेरे अन्दर डाल दिया। वो रात के तीन बजे तक मुझे चोदता रहा।
इस तरह मुझे लौड़ा मिल ही गया। कुछ दिन तक वो अकेला ही मेरी लेता रहा, लेकिन फिर मेरे कहने पर वो बाकी के दो को भी मेरे ऊपर चढ़ाने के लिए राज़ी हो गया और फिर एक रात ऐसी आई कि मेरे पति को उन्होंने सुला दिया फिर हम चारों ने दारु पी।
उसके बाद क्या हुआ?
वो आप सबके जवाब मिलने के बाद Antarvasna
हैलो, दोस्तो ये मेरी पहली कहानी है Antarvasna जो मैं आप को बताने जा रहा हूं। मेरा नाम राज है। मैं जब स्कूल में था तो काफ़ी शर्मीला हुआ करता था लेकिन जब मैं कोलेज पहुंचा तो वहां पर जो दोस्त मिले उनके साथ मैने एक चालू औरत के साथ उसके घर पर उसके पियक्कड पति के सामने चुदाई की और तब से यह सिलसिला आज तक चल रहा है।
वैसे तो मैंने अपनी ज़िंदगी में कई लड़कियों, कई आंटियों और भाभियों को चोदा है लेकिन आज जो घटना मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो मेरी ज़िंदगी में बिल्कुल अचानक घटी थी जब मैंने अपनी आंटी को ही चोद डाला।
पहले तो मैं आप लोगों को अपनी आंटी के बारे में बता दूं। वो 30 साल की, गोरा रंग, टाइट बोडी, बड़ी बड़ी चूचियां, ऐसा की जो भी देखे देखता ही रह जाये। वो दिल्ली में रहती है। उसके 2 बच्चे हैं। एक 10 और दूसरा 7 साल के
पिछले दिसम्बर में उनके घर गया था ओफ़िस के काम से, मैं मुम्बई में जोब करता हूं। और मेरा काम ऐसा है कि पूरा हिंदुस्तान घूमना पड़ता है।
दिल्ली में दिसम्बर के महीने में काफ़ी ठंड होती है। अंकल नाइट शिफ़्ट की ड्युटी करने गये था। घर छोटा होने के कारण हम एक ही रूम में सोये था। मैं बेड पर सोया था और आंटी बच्चों के साथ नीचे लेटी थी। ठंड काफ़ी थी इसलिये बेड पर सोते ही मुझे नींद आ गयी।
रात के 2 बजे पेशाब करने के लिये अचानक मेरी नींद खुली तो मैंने देखा आंटी एक पतली सी चादर ओढ़ी हुई है और बुरी तरह से कांप रही थी और बच्चे एक कम्बल में सो रहे थे। शायद घर में दो ही कम्बल थे, एक उन्होंने मुझे दिया था और दूसरा बच्चों को उढ़ाया था।
मैंने लाइट जलाई तो आंटी उठ कर बैठ गयी लेकिन वो बुरी तरह से कांप रही थी। मैंने कहा आप ऊपर बेड में चली जायें मैं नीचे सो जाता हूं, तो उन्होंने कहा ठंड बहुत है तुम्हें ठंड लग जायेगी। मैंने कहा आप तो बुरी तरह से कांप रही है ठीक से बोल भी नहीं पा रही हैं आप ऊपर बेड पे सो जाओ।
और इतना कह कर मैंने उनका हाथ पकड़ कर ऊपर बेड पे बैठा कर पेशाब करने चला गया। वापस आ कर देखा तब भी वो कम्बल के अन्दर बुरी तरह से कांप रही थी। तभी उन्होंने कांपते हुए कहा राज लाइट बंद करके तुम भी बेड पर सो जाओ।
मैंने लाइट बंद की और उनके पास आ कर सो गया। बेड छोटा होने के कारण हम एक दूसरे से बिल्कुल सटे हुए थे। तभी उनका हाथ मैंने छुआ तो वो काफ़ी ठंडा था और वो अब भी कांप रही थी ठंड से।
फिर आंटी ने मुझसे कहा- राज मुझे ज़ोर से पकड़ो मुझे बहुत ठंड लग रही है।
मैंने उनको कहा कि आप घूम कर सो जाओ!
और उनके सर को मैंने अपने एक हाथ के नीचे रखा और दूसरा उनके पेट पर रखा।अब हम दोनो की पोजिशन कुछ इस तरह थी कि उनकी गांड मेरे लंड पे पूरी तरह से चिपकी हुई थी और मैं पूरी तरह से उसे दोनो हाथों से पकड़े हुआ था।
मेरा लंड आंटी की गांड की दरार के बीच में घुस कर टाइट होने लगा था।
मैं अपनी कमर को पीछे ले जाने लगा और अपनी पकड़ को भी ढीला करने लगा। लेकिन आंटी बहुत बुरी तरह से कांप रही थी और मेरे हाथ को अपने हाथ से ज़ोर से पकड़े हुई थी। मैं आंटी के साथ कुछ गलत सोच भी नहीं सकता था लेकिन मेरा लंड मेरी बस में नहीं था। मेरा लंड अब बेकाबू हो रहा था और वो पूरी तरह से आंटी की चूत में घुसने को तैयार था।
तभी आंटी ने मेरे हाथ को अपनी कमीज़ के नीचे घुसा कर अपने पेट पर रख दिया उनका पेट बर्फ़ की तरह ठंडा हो रहा था। मेरा गर्म हाथ रखने से उनको काफ़ी अच्छा लग रहा था आंटी मेरे हाथ को पकड़ कर अपने पेट पेर और ज़ोर से रगड़ने लगी। मैं धीरे धीरे उसके पेट को सहलाने लगा। सहलाने के कारण कई बार मेरा हाथ उनकी चूचियों से टकराया लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
मैंने हिम्मत करके उसके एक दूध को पकड़ कर सहलाने लगा। उसकी दूध का निप्पल बिल्कुल टाइट हो कर बाहर निकल गया था। मैं उनके निप्पल को उंगलियों के बीच रख कर धीरे धीरे घुमाने लगा। अब उसके मुंह से सिसकियाँनिकलनी शुरू हो गयी थी।
फिर मैंने उनकी कमीज़ पीछे से पूरी उठा कर उसके गर्दन तक कर दिया और उसकी ब्रा के हुक भी खोल दिये फिर मैंने भी अपना बनियान उतार कर अपने पेट और सीने को उसकी नंगी पीठ पर सटा कर पुरी तरह से चिपक गया।
उसे मेरे जिस्म की गर्मी अच्छी लग रही थी वो भी मुझसे पूरी तरह से चिपक गयी थी। अब मेरे लंड को और रोक पाना मेरे लिये मुश्किल हो रहा था। मैं उसके पायजामे को धीरे धीरे नीचे करने लगा तो वो थोड़ी थोड़ी कमर उठाने लगी। मैं समझ गया कि आंटी को अब लंड की गर्मी की ज़रूरत है वो अब पूरी तरह से तैयार थी।
मैंने अब उसे पायजामे को पूरा उतार दिया और अपनी लुंगी को भी उतार दिया। फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पे रख कर धीरे से एक धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा चूत में घुस गया। मैं अब उसकी चूचियों को अपने हातों से ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था। थोड़ी देर के बाद वो मेरी तरफ़ घूम गयी। मैं अब उसके दोनो पैरों को खोल कर बीच में बैठ गया और उसकी चूचियों को मुंह से चूसने लगा। तभी उसने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ़ खीचने लगी। मैं समझ गया कि उसकी चूत चुदवाने के लिये बेताब हो रही है।
मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रख कर एक जोर का झटका मारा और पूरा का पूरा लंड उसकी बुर में घुस गया। वो पूरी मस्ती में आ चुकी थी। उसके मुंह से ऊह आह की आवाज़ निकल रही थी।
मैं पूरी स्पीड में अपने लंड को पूरा बाहर कर के अंदर डाल रहा था। लंड और बुर के टकराने से थप थप की आवाज़ आ रही थी। आंटी भी अपनी कमर को उठा उठा कर पूरा साथ दे रही थी।
फिर अचानक वो मेरे कमर को पकड़ का ज़ोर ज़ोर से खीचने लगी मैं भी ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लगा और फिर अचानक मेरे लंड ने 8-10 झटके में पिचकारी की तरह पूरी गर्मी आंटी के बुर में भर दिया। आंटी भी पूरी ताकत से मेरे सीने से चिपक गयी। हम दोनो आधे घंटे तक वैसे ही पड़े रहे। आधे घंटे के बाद मेरे लंड में फिर से जोश आने लगा।
मैंने आंटी को उल्टा लिटा दिया और पीछे से उसके बुर को चोदने लगा। पीछे से चोदने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी कुंवारी लड़की की चुदाई कर रहा था। उसकी गोल गोल गांड मेरे लंड के दोनो तरफ़ इस तरह से फ़िट हो रही थी मानो मेरे लिये ही वो गांड बनी हो। मैं फ़ुल स्पीड में उसकी चुदाई करने लगा और इस बार भी लंड ने सब गर्मी बाहर निकाली तो उसकी बुर मेरे वीर्य से भर गयी। अब वो पूरी तरह से नोर्मल हो चुकी थी।
फिर हम सो गये। सुबह वो मुझे जगाई तो मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था। लेकिन वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।
बच्चे भी स्कूल जा चुके थे।
तभी अचानक दरवाजे पर किसी ने खटखटाया, मैं समझा अंकल आ गये।
दरवाज़ा खुला तो एक खूबसूरत लड़की, बिल्कुल टाइट जीन्स और टी-शर्ट में अन्दर आयी और आंटी से कहा की अंकल ने फोन किया था अभी और कहा है कि वो ओवरटाइम पर हैं।
मैं खुश हो गया। फिर वो लड़की चली गयी।
मैंने आंटी से पूछा कि ये लड़की कौन है?
तो उन्होंने कहा कि मकान मालिक की बेटी है।
मैं आंटी को मुस्कुराते हुए देखा और कहा- आंटी, मुझे इसे चोदना है। तुम कुछ करो न प्लीज़।
आंटी बोली- नहीं नहीं, मैं कुछ नहीं कर सकती।
इतना सुनते ही मैंने आंटी को बेड पर पटक दिया और उसकी चूचियों को ब्रा से निकाल कर चूसने लगा और कहा बोलो- अब उसे मुझसे चुदवाने के लिये तैयार करोगी या नहीं।
आंटी हंसते हुए बोली- अच्छा बाबा मैं उसे तुम्हारे लिये तैयार करती हूं।
मैंने कहा ये हुई न बात!
और फिर आंटी के सारे कपड़े उतार कर फिर से उसकी चुदाई करने के लिये उसे गर्म करने लगा।
दिन के उजाले मैं उसकी खूबसूरती बिल्कुल साफ़ साफ़ दिख रही थी। उसकी नंगे जिस्म को देकते ही मेरा लंड लुंगी से बाहर आने को बेताब होने लगा। मैंने अपनी लुंगी निकाली और आंटी की ऐसी चुदाई की कि वो मेरी दिवानी बन गयी। Antarvasna
Antarvasna, मेरा नाम सुमित है, मैं कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर का काम करता हूँ, मेरा ऑफ़िस है गुजरात में !
मैं और मेरे घर वाले बहुत ही साधारण हैं इसलिए मेरा स्वभाव एक अच्छे लड़के की तरह है, पर क्या पता था कि एक दिन मेरी ज़िंदगी ही बदलने वाली है।
मेरी ज़िंदगी एक भाभी और उसकी सहेली ने बदल दी। उस भाभी का नाम सुषमा है। मैंने कभी उसे नहीं देखा था पर सुषमा भाभी सब कुछ मेरे बारे में जानती थी।
एक दिन शाम को मेरे ऑफ़िस में उसका फोन आया और कहने लगी- यू आर सुमित?
मैंने कहा- यस, हाँ बोलिए क्या काम है?
उसने कहा- मेरे घर का कंप्यूटर खराब हो गया है।
पहले मैंने उनसे पूछा- मेरा नंबर कैसे मिला आपको?
तब उस भाभी ने कहा- कभी कभार मैं तुम्हारे ऑफ़िस के रास्ते से जाती हूँ, तब तुम्हारे ऑफ़िस का नंबर मुझे तुम्हारे ऑफ़िस के बोर्ड पर से मिला और मैंने कॉन्टेक्ट किया तुमसे !
मैंने कहा- अच्छा। कल मैं आ जाता हूँ।
भाभी बोली- नहीं अभी आना होगा !
मैंने कहा- जी अभी नहीं आ सकता, अभी रात के आठ बज रहे हैं तो मैं कल आ जाऊँगा।
तब वो कहने लगी- मुझे आज कंप्यूटर में कुछ ज़रूरी काम है इस लिए तुम्हें अभी ही आना होगा।
मैंने कहा- जी अभी नहीं ! मैं कल सुबह जरूर आ जाऊँगा।
पर वो भाभी नहीं मानी, कहने लगी- मुझे आज कंप्यूटर में कुछ ज़रूरी काम है।
फिर मुझे भी उसकी बात माननी पड़ी और कहा- ओके, अपना एड्रेस बताओ?
उसने अपना पता बताया तो वो मेरी बिल्डिंग के ठीक पास वाली बिल्डिंग थी।
मैं उस पते पर गया, मैने कंप्यूटर को देखा तो उसका पीछे का तार ढील था, मैंने उसे ठीक कर दिया, वो कंप्यूटर चालू हो गया।
तब मैंने कहा- अब मैं चलता हूँ, मुझे घर जाना है, काफ़ी देर हो गई है।
पर भाभी ने मुझे कहा- अब घर नहीं जाओ, यहाँ ही सो जाओ आज, और मैं भी अकेली हूँ आज तो !
मैंने ना कह दिया- नहीं मैं यहाँ नहीं सोऊँगा।
पर उसने मुझसे ज़्यादा रिक्वेस्ट किया और कहने लगी- मेरे पति 15 दिन के लिए आउट ऑफ स्टेट गये हैं, मुझे अकेलापन महसूस हो रहा है और मुझे अकेले सोने में डर भी लगता है।
उसने मुझे अपने घर सुलाने के लिए बहुत मनाया, पर मैंने कहा- नहीं, मेरे घर वाले भी मेरा इंतजार करते होंगे।
भाभी कहने लगी- तुम घर पर फोन कर के कह दो कि आज ऑफीस में काम होने के कारण आज नहीं आ पाऊँगा।
तो मैंने घर पर फोन कर दिया और मैंने भाभी से कहा- मेरे पास तो नाइट ड्रेस भी नहीं है।
और भाभी अपने कमरे में जाकर पज़ामा लेकर आई और कहने लगी- यह पहन लो।
मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर पज़ामा पहन कर बाहर आया। भाभ्हि ने खाना लगा लिया था, हम दोनों ने खाना खाया।
तभी मैंने देखा कि कंप्यूटर चालू है तो भाभी से कहा- कंप्यूटर चालू है, उसे बंद कर दो, इतनी देर से क्यों चालू रखा है।
भाभी कहने लगी- मुझे उस पर अभी काम है।
मैंने कहा- क्या काम है?
उसने कहा- मैं रोज़ रात को ब्लू फिल्म देखती हूँ।
और भाभी मुझसे पूछने लगी- क्या तुम्हें पसंद है ब्लू फिल्म?
मैंने कहा- नहीं, मुझे बिल्कुल नहीं पसंद है ब्लू फिल्म।
मैंने नींद का बहाना कर के कहा- मुझे नींद आने लगी है, मुझे सोना है, तुम बताओ कि कहाँ सोऊँ।
भाभी मुझे सोने का बेड दिखाया और कहा- यहाँ सो जाओ !
मैं बेड पर लेट गया। बाद में ज़रा उठ कर देखा कि आख़िर भाभी क्या कर रही है तो सच में भाभी एक एडल्ट ब्लू सेक्सी फिल्म देख रही थी। मुझे उसमें इंटरेस्ट नहीं था इसलिए मैं वापस बेड पर आकर लेट गया।
थोड़ी देर के बाद मैं देखा कि मेरे पज़ामे पर कुछ है, कोई मेरे लंड को सहला रहा है. मैंने आँखें खोल कर देखा तो भाभी मेरे पास आकर सोई हुई थी और उनका हाथ मेरे लण्ड पर था। मैं घबरा गया, मैं सोने की एक्टिंग करता रहा।
तब थोड़ी देर देखता रहा तो वो और भी जोश में आकर मेरा लंड को ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद वो धीरे धीरे मेरे पज़ामे में हाथ डालने लगी। मैंने उठने की कोशिश की, भाभी को कहने लगा- यह क्या कर रही हो?
भाभी कहने लगी- मुझे बहुत सेक्स चढ़ गया है, मुझे तुमसे चुदवाना है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने कहा- नहीं, मैं यह काम नहीं करूँगा। मैंने किसी को यह न करने का वादा किया है।
उस पर भाभी कहने लगी- ओके, मुझे मत चोदना पर मुझसे खेल तो सकते हो?
तब मैंने कहा- प्लीज़, मुझे यह सब भी पसंद नहीं है।
तब भाभी ने थोड़ा गुस्सा करके कहा- अगर तुमने यह मुझसे नहीं किया तो मैं पूरे बिल्डिंग वालों को जगा दूँगी कि तुम मेरे घर जबरदस्ती आए हो और मुझे परेशान कर रहे हो।
तब मैं और घबरा गया पर भाभी सेक्सी फिल्म देख कर बहुत ही गर्म हो गई थी, इसलिए वो नहीं मान रही थी।
मैंने भाभी को कहा- अगर तुमने मुझे अब छुआ तो मैं यहाँ से चला जाऊँगा।
भाभी भी कहने लगी- ओके !
तब मैंने कहा- ओके, तुम मेरे साथ खेल सकती हो पर मैं तुम्हें नहीं चोद सकता।
उसने कहा- ठीक है।
भाभी ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और मेरा टी-शर्ट उतार दिया, वो मुझसे कहने लगी- अब मेरे ये बूब्स के निप्पल को थोड़ा अपने हाथ की उंगली से मसल दो !
और मैं मसलने लगा।
फ़िर उसने कहा- अपना मुँह ज़रा मेरे मुँह के पास लाओ।
जब मैं मेरा मुँह उसके करीब ले गया तो उसने अपने हाथ से मेरा सर पकड़ कर मुझे किस करने लगी, वो ज़ोर ज़ोर से स्मूच करने लगी।
मैंने कहा- अब बस करो, मेरा दम घुट रहा है।
तब भी जोश में आकर उसने करीबन दस मिनट तक स्मूच किया।
तब भाभी ने मेरा हाथ लेकर अपने वक्ष पर रख दिया और कहने लगी- अब अपने हाथ से मेरे बूब्स और उसके निप्पल को दबाओ।
फिर उसने अपना हाथ मेरे पज़ामे में धीरे धीरे हाथ डाल दिया और मेरे लंड को हिलाने लगी, कहने लगी- यह तुम्हारा लंड कितना छोटा है।
पर मैंने सच में यह सब कभी नहीं किया था, इसलिए मैं घबरा रहा था, मेरा लंड खड़ा नहीं हो रहा था।
पर भाभी ने कहा- अच्छा, इसे मैं अभी ठीक कर देती हूँ।
उसने मेरा पजामा उतारा और ज़ोर ज़ोर से मेरे लण्ड को मसलने लगी। फिर भाभी मुझसे कहने लगी- तुम अब मेरी चूचियाँ मुँह में लो और एक हाथ से मेरी चूत के ऊपर उंगली फिराओ।
और थोड़ी उंगली फिराने के बाद वो और भी गर्म हो गई, मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और कहने लगी- थोड़ा तो करो अभी !
मैंने कहा- नहीं, मैंने किसी को वादा किया है ! मैं नहीं करूँगा।
फिर वो अचानक मेरे मुख पर अपनी चूत रगड़ने लगी और कहा- अब मैं अपनी हवस ऐसे ही पूरी करूँगी।
बस फिर वो ज़ोर ज़ोर से मेरे मुँह से चूत को रगड़ रही थी, मैंने कहा- इसमें से तो पानी आ रहा है।
भाभी ने कहा- यह मेरी चूत का पानी है।
मेरा पूरा चेहरा उसकी चूत के पानी से भर गया था, फिर भाभी मेरे लंड को चूसने लगी और कह रही थी- तुम मेरी चूत को ज़ोर ज़ोर से चूसो, नहीं तो मैं तुम्हारे लंड को खा जाऊँगी।
मैं मजबूर होकर थोड़ा थोड़ा चूसता रहा और भाभी मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से मुँह में हिला रही थी। और क्या पता मेरे लंड में एक गर्मी महसूस हुई और मेरे लंड से गर्म पानी निकला और सुषमा भाभी हँसने लगी, कहने लगी- तुम्हारा इतना ज्यादा गाढ़ा पानी निकला।
फिर मैंने कहा- अब मुझे नींद आ रही है, मैं सो रहा हूँ।
पर भाभी मेरे ऊपर पूरे रात तक पड़ी रही और मुझे चूमती रही।
सुबह किसी तरह मैं उनसे पीछा छुड़ा क अपने घर आया।
Antarvasna कहानी जारी रहेगी !
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