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(Saasu Maa Ki Pyas) Sex stories

मेरे दोस्तो Sex stories ,मैं मुंबई से हूं और मेरा नाम राजेश है। मैं अपनी सासू मां के साथ बीता एक सेक्स का सच्चा हादसा आपके साथ बांटना चाहता हूं।
मेरी शादी एक वर्ष पहले ही हुयी थी। मैं एक उनतीस वर्ष का सुन्दर और सेक्सी लड़का हूँ।

मेरी शादी एक आठरह वर्षीय लड़की के साथ हुयी है और वो बहुत ही खूबसूरत है। उसकी मां भी उतनी ही सुन्दर व सेक्सी है। उस समय मेरी सासू मां की उम्र पैंतीस वर्ष की थी और उनका भी विवाह मात्र सोलह साल की उम्र में ही हो गया था। उन्हे कोई नहीं कह सकता था कि वे पैंतीस साल की है, वे तो देखने में चौबीस-पच्चीस साल की लगती थी। वो एक विधवा थी, उनके पति दो वर्ष पूर्व ही चल बसे थे।

तीन जुलाई 2003 को मैं और मेरी पत्नी मेरे ससुराल को गये। वहां पर मेरी सास हमारा इन्तज़ार कर रही थी। उन्हें देख कर मैं बहुत खुश हुआ।

मैंने कहा- कैसी हैं सासू मां?
वो बोली- ठीक हूं बेटा।
मैंने मुस्करा कर कहा- आपकी उम्र और मेरी उम्र में कोई ज्यादा फ़र्क नहीं है।
सास ने जवाब दिया- तो क्या हुआ रिश्ते में तो तुम मेरे दामाद लगते हो।

मैंने कहा- हाँ, दुर्भाग्य से मुझे पैदा होने में थोड़ी देर हो गयी वर्ना मै तो आपसे ही शादी करता!

ये सुनते ही वो शर्मायी और कहने लगी- ठीक है बातें तो होती ही रहेगी, तुम लोग जरा फ़्रेश हो जाओ.

हम लोग वहां से बाथरूम फ़्रेश होने के लिये चले गये।

फिर सबने साथ में डिनर लिया। फिर मैं और मेरी पत्नी बेड रूम में चले आये। बेड रूम में एक खिड़की भी थी जो मेरी सासू मां के कमरे में खुलती थी।
थोड़ी देर मैंनें और मेरी पत्नी ने आराम किया। रात करीब एक बजे मेरी नींद खुल गयी और मैं अपनी पत्नी के कपड़े उतारने लगा। मेरी पत्नी जाग गयी और कहने लगी- आज नही, मुझे नींद आ रही है..

मैंने कहा- तुम सो जाओ और मुझे अपना काम करने दो.
फिर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये। वो मुझे बार बार रोक रही थी।

इस तरह हमारी तकरार से सासू मां भी जाग गयी। उन्होंने धीरे से हमारी खिड़की खोली और अन्दर हमें देखने लगी। मैंने अपना काम जारी रखा और और अपनी पत्नी को चूमने लगा।

पहले उसके नाजुक होंठ पर किस किया, फिर उसके मादक चूचियों पर और फिर उसकी रस भरी चूत पर्। इतने भर से मेरी पत्नी अब मूड में आ चुकी थी और फिर उसने मेरे ऊपर के सारे कपड़े उतार दिये।

हम दोनो एक दूसरे के जिस्म पर चूमा चाटी करते रहे और फिर मैंने अपना पेण्ट खोला और अपना आठ इंच से भी लम्बा लण्ड निकाला। ये सब मेरी सासू मां देख रही थी। मैंने खिड़की पर चुपके से देखा वो वहीं पर खड़ी थी। मुझे देख कर वो थोड़ा सा पीछे हट

गयी। मैंने लण्ड को पत्नी की चूत में धकेल दिया और फिर जोरदार धक्के मारने आरम्भ कर दिये। मेरी पत्नी भी बहुत आनन्दित होने लगी थी।

वो आआह्हह… ऊओह्ह… ऊम्मम… की आवाजे निकाल रही थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। वो सफ़ेद वीर्य से भरा हुआ था। मेरी पत्नी ने जल्दी से मेरा लण्ड अपने मुख में ले लिया और मस्त हो कर उसे चूसने लगी।

ये सब देख कर मेरी सासू मां के मुख से सीत्कार सी आवाज निकल गयी। मैंने उनकी आवाज को सुन लिया था। वो बहुत बेचैन हो गयी थी। मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ देर बाद कपड़े पहन लिये थे।

कुछ देर बाद मेरी पत्नी सो चुकी थी। मैं अपनी पेण्ट पहन कर कमरे से बाहर निकला और बालकॉनी में आ कर खड़ा हो गया। मैंने कमीज नहीं पहन रखी थी और अपनी ही धुन में गुनगुना रहा था।

अचानक मुझे पीछे से किसी ने पकड़ लिया। इसके पहले कि मैं पलटता वो मुझसे लिपट गयी। मैंने समझा कि मेरी पत्नी है। लेकिन कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। उसके जिस्म से बहुत मधुर सी सुगन्ध आ रही थी जो मैंने अपनी पत्नी के जिस्म से कभी महसूस नहीं की थी। मैं परेशान था कि कौन है जो मुझसे आकर ऐसी लिपट गयी है।

मैं पलट कर उसका चेहरा नहीं देख सकता था। फिर उसके कांपते हाथ मेरी पेण्ट की जिप की तरफ़ बढे और मेरे लण्ड को पकड़ कर जोर जोर से सिसकते हुये दबाने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। पर मुझे अभी तक पता नहीं था कि ये कौन है।

मैंने उसके हाथ को अपने लण्ड से हटाया तो देख कर दंग रह गया और मेरी आंखे खुली की खुली रह गयी। वो और कोई नहीं मेरी सासू मां थी।

मुझे देख कर वो कहने लगी- तुम्ही ने तो कहा था कि हमारी उम्र में कोई फ़र्क नहीं है और अगर तुम जल्दी पैदा हो जाते तो मुझसे ही शादी करते। अब समझ लो ना तुम जल्दी पैदा हो गये हो’

इसके पहले मैं कुछ कह सकूं सासू मां के मुख से फिर आवाज निकली- देखो मैं एक जवान विधवा हूं, मैं अपने पति के बिना रह रही हूं, जो कि बहुत मुश्किल काम है। तुम मेरी इस मुश्किल को दूर कर सकते हो, मेरी इस बेचैनी को कम कर सकते हो। मेरी जिंदंगी रंगीन बना सकते हो.

ये कहते हुये वो मुझे बेताहाशा चूमने लगी और मेरे हाथो को अपने कसे हुये उभारो पर यानि चूंचियों पर रख दिया। सासू मां का सीना दबते ही उनके मुख से एक मद भरी सिसकारी निकल पड़ी।

इसके बाद क्या हुआ वो बहुत उत्तेजक और दिलकश Sex stories है। लेकिन आपको कुछ और इन्तज़ार करना होगा।

Antarvasna

मेरा नाम राजू है। मेरे दफ़्तर में Antarvasna एक सोनू नाम की लड़की थी। वो सच में बला की खूबसूरत थी। जब से वो मेरे दफ़्तर में काम करने के लिए आई, मैं तो बस उसको ही देखता रहता था। उसकी फ़ीगर कमाल की थी और लम्बे लम्बे बाल थे। उसके बड़े बड़े बूब्स देख कर तो मैं पागल ही हो जाता था और हर वक्त सोचता रहता था कि कब मैं इन बूब्स को चूस पाऊंगा। मैं अपने केबिन से छिप छिप कर उसको देखता रहता और उसके साथ सेक्स करने के सपने देखता रहता था। उसने भी मेरी यह बात पकड़ ली थी मैं उसको देखता रहता हूँ लेकिन उसने कभी कुछ नहीं कहा। शायद वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित थी।

लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे सारे सपने सच हो गए।

हुआ यूं कि एक दिन सोनू मेरे केबिन में आई और उसने मुझे कहा कि उसे वेतन के अलावा कुछ और पैसों की जरूरत है और वो ये पैसे धीरे धीरे वापिस कर देगी। लेकिन मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता था इसलिए मैंने उसे कहा कि अगर वो मुझ पर विश्वास करती है तो मैं उससे अकेले में मिलना चाहता हूं।

वो मान गई। मैंने उसे घर आने को कहा और कहा कि पैसे मैं घर पर ही दे दूंगा। अगले तीन दिन के लिए दफ़्तर बंद था और मेरे घर वाले भी बाहर गए हुए थे इसलिए मैंने उसे अगले दिन सुबह घर पर बुला लिया।

अगले दिन जब वो घर आई तो उसने जीन्स और शर्ट पहनी हुई थी और बाल खुले हुए थे। उस वक्त वो कयामत लग रही थी। उसे देख कर मेरा लण्ड एक दम से खड़ा हो गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को सम्भाला और उसे अपने बेडरूम में ले गया। मैं बस तरीका सोच रहा था कि किस तरह से मैं उसको चोदूं!
तब मैंने उसको अपने पास बुलाया और उसके हाथ अपने हाथों में ले कर कहा- सोनू, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.

उसने यह सुन कर कहा कि वो मुझ से प्यार करती है. यह सुन कर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड लिया। उसके बूब्स मेरी छाती से छू रहे थे और मैं और ज़्यादा पागल हो रहा था मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों से सहलाने लगा. अब मैं उसको अपने और करीब ले कर आया और अपने होंठो को उसके होंठों पर रख कर चूमने लगा। मैं बड़े प्यार से उसके होंठों को चूम रहा था और वो भी इसका मजा ले रही थी।

काफ़ी देर तक चूमने के बाद मैं उसके पूरे चेहरे पर चूमने लगा उसके गालों पर, उसकी गर्दन पर। फिर मैंने उसकी शर्ट का पहला बटन खोला वो एक दम से बोली यह क्या कर रहे हो, मैंने कहा हम एक दूसरे से प्यार करते हैं इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है, यह बोलते बोलते मैंने उसकी शर्ट के तीन चार बटन खोल दिए। अब मुझे उसकी ब्रा नज़र आ रही थी और ब्रा में बंद उसके बड़े बड़े बूब्स बाहर निकलने को तड़प रहे थे।

मैंने उसकी शर्ट उतार दी और वो ब्रा में तो कयामत लग रही थी। तब उसका ध्यान मेरे लंड पर गया जो बहुत खड़ा हो चुका था और उसे बार बार चुभ भी रहा था।
मैंने कहा- इसे देखना चाहोगी?

तब उसने मेरी पैंट का बटन खोल कर मेरी पैंट और मेरा अंडरवियर भी उतार दिया और मेरे लंड को ले कर जोर जोर से मसलने लगी। तब वो मेरा लंड अपने मुंह में ले कर उसे चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लंड और भी बड़ा हो गया। उसे मेरे लंड को चूसने में और उसके साथ खेलने में बड़ा मज़ा आ रहा था लेकिन मुझ से कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उसे उठा कर उसकी पैंट भी उतार दी। उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी। वोह सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी, मैं अपने पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था और मैं उसको पागलों की तरह चूमने लगा।

मैंने उसको उल्टा किया और अपने मुंह से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। अब वो भी तड़प रही थी चुदवाने के लिए। उसके बूब्स को देख कर मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा तब सबसे पहले मैंने उसके निप्पल को चूपा। उसके निप्पल भी बड़े सख्त हो रखे थे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आ रहा था।

वो भी बहुत तड़प रही थी और बार बार बोल रही थी- और ज़ोर से, और ज़ोर से.

फिर मैं उसके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और वो चीखने लगी फिर मैंने उसकी पैंटी को अपने दांतों से खींच कर उतार दिया। मेरे इस तरह करने से वो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंने उसकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बाल नहीं थे और उसकी चूत बहुत मस्त लग रही थी। उसकी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। सोनू ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी आ आ आ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगी

थोडी देर तक उसकी चूत चाटने के बाद मैंने देखा की वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैं उसको और गरम करना चाहता था इसलिए अब मैं अपने लंड को उसके पूरे बदन पर घुमाने लगा, पहले उसके चेहरे पर अपने लंड को लगाया फिर उसकी गर्दन पर, फिर उसके बूब्स पर, उसके निप्पल पर, उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह मैं अपने लंड को लगा रहा था। मेरे लंड से जो पानी निकल रहा था वो भी उसके पूरे बदन पर लग रहा था जिससे वो और ज़्यादा गरम हो रही थी। मैंने अपने लंड को उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरे लंड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।

तब उसने मुझसे कहा- राजू, अब और सहा नहीं जा रहा इस लंड को मेरी चूत में डाल कर मेरी प्यास शांत कर दो।

मैं नीचे लेट गया और सोनू मेरे ऊपर बैठ गई उसने मेरा लंड पकड़ा और पहले अपनी चूत पर घिसने लगी फिर मैंने एक झटके से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया मेरे लंड डालते ही सोनू ज़ोर से चीखी। मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था और सोनू ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी। वो ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और मैं कभी उसके बूब्स को दबा रहा था और कभी उसके निप्पल को चूप रहा था। थोड़ा देर बाद हम दोनों झड़ चुके थे।

फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों बाथरूम में गए और इक्कठे नहाते वक्त एक बार फिर सेक्स किया। वो तीन दिन सोनू मेरे साथ ही रही और हमने उन तीन दिनों में कई बार सेक्स किया, कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी सीढियों में, कभी डाइनिंग टेबल पर और कभी ज़मीन पर। वो तीन दिन मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे।

अगर आपको सोनू के साथ मेरा ये किस्सा पसंद आए तो ज़रूर बताएं ताकि मैं सोनू के साथ और किस्से भी आपके साथ बाँट सकूं. मुझे ज़रूर बताएं कि आपको मेरा ये किस्सा कैसा लगा? Antarvasna

Sex Stories

प्यारे दोस्तो, मेरा नाम Sex Stories वीरू, बीस साल का हूँ। मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में हूँ। मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला लड़का हूँ, राजस्थान के श्री गंगानगर में रहता हूँ।

मैं आपको अपनी पड़ोसन किशोर लड़की जिया के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 18 साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी चूचियाँ इतनी मदमस्त कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह कैसे होगा समझ नहीं आता था।

मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था राहुल। मैंने उसको पटाने की सोची, अगर इसको पटा लिया तो जिया को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं जिया के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर पीसी पर गेम भी खिलाता, इस तरह वो मेरे साथ रहने लग गया और कभी कभी मैं भी उसके घर भी चला जाता। कुछ समय बाद जिया से भी मेरी थोड़ी-थोड़ी बातें होने लग गई और हम एक साथ मिल कर खेलने लग गए।

पर मैं तो जिया को पटा कर चोदना चाहता था, पर कैसे हो सकता था। मैं नए-नए आईडिया सोचने लग गया कि किस तरह जिया को चोदूँ, मेरे मन में फ़िर एक आईडिया आया।

मैं एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर आया, उस दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे। मैंने अपनी छत से उसकी छत पर पर उस सीडी को फेंक दिया और अपनी छत पर घूमने लग गया। उसने मुझे देखा और वो भी छत पर आ गई और आते ही उसको वो सीडी मिल गई। वो मेरे पास उस सीडी को ले कर आई और बोली- यह सीडी छत पर मिली है।

मैंने पूछा- क्या है इसमें ?
तो उसने बोला- मुझे नहीं पता, मुझे तो छत पर पड़ी मिली है।
मैं उससे कहा- चलो देखते हैं कि क्या है इसमें!

तो वो राजी हो गई और मैं अपनी छत से उसकी छत पर आकर उसके घर पर चला गया।

वो जाते ही सीडी प्लेयर में उस सीडी को लगाने लगी। मेरा दिल बहुत जोर जोर से धक-धक कर रहा था, पता नहीं क्या होगा। कहीं उसने अपने घर वालों को इसके बारे में बता दिया तो?

मैं बहुत डर गया था।

उसने सीडी लगा कर टीवी ऑन किया। मैं अभी भी डर रहा था और टीवी चालू होते ही एक लड़का और एक लड़की आपस बातें कर रहे थे।
उसने मुझ से कहा- यह कोई हॉलीवुड फिल्म लगती है!
थोड़ी देर में उस लड़के ने उस लड़की के सारे कपड़े उतार दिए।
उसने एक दम अनजान की तरह कहा- ये क्या कर रहे हैं?
तो मैंने उससे कहा- यह एक ब्लू फिल्म है। पहले नहीं देखी क्या कभी?
उसने कहा- नहीं तो।

फिर धीरे धीरे वो लड़का उस लड़की की चूचियाँ दबाने और चूसने लग गया। उस लड़की ने उस लड़के के भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर उसका लण्ड चूसने लग गई।
उसने कहा- मुझे तो शर्म आ रही है, कितने गंदे है ये।
मैंने उससे कहा- ऐसे तो सब लोग ही करते हैं, इसको ही तो सेक्स बोलते हैं।
मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- नहीं किया।
मैंने उससे कहा- इसमें बहुत मजा आता है।

तभी मैंने उसके पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ धीरे उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली- यह क्या कर रहे हो तुम?

मैंने कुछ न बोलते हुए फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा और उसके टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। उस समय उसकी शक्ल देख कर ऐसा लग रहा था कि उसको मजा आ रहा था। फिर मैं दोनों चूचियों को एक साथ मसल मसल कर दबाने से ऐसा लगा और फिर मैं उसके टॉप मैं हाथ डाल कर चूचियों दबाने लगा और वो सिसकियाँ लेने गई। अब मुझे पता चल गया कि उसको मजे आ रहे हैं।

मैंने उसको पूछा- मज़ा आ रहा है क्या?
तो उसने कहा- हाँ, आ रहा है। क्या इसको ही सेक्स कहते हैं?
मैंने कहा- अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है, अभी तो और बहुत मजे आयेंगे।
उसने- कहा कैसे?
तो मैं कहा- तुझे मेरा साथ देना होगा!
तो उसने हामी भर दी।

मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वो बहुत ही गोरी थी और गोरे रंग पर लाल रंग बहुत सुन्दर लग रहा था। फिर मैंने दोनों को उतार फेंका। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था, उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे।

उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है!
और उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत और मोमो पर लगा लिए।

मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? सेक्स तो नंगे होकर ही किया जाता है।

मैंने प्यार से उसके दोनों हाथ हटा दिए और उसकी दोनों चूचियों को चूमने लगा तो वह पागल होने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूत पर रखा, उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी। अब मैं समझ गया कि ज़िया एक दम चुदने को तैयार है।

पर मैं उस को इतनी जल्दी नहीं चोदना चाहता था। इसलिए मैं उसकी चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा और थोड़ी सी उंगली अन्दर जाते ही वह चिहुँक उठी,”दर्द हो रहा है।”
तो मैंने कहा,”जान पहली बार ज़रा दर्द होता है, आज तो इस दर्द सहन करना ही पड़ेगा।”
उसने कहा,” ठीक है।”
फिर मैं उसको ऊँगली से चोदने लगा और उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।

फिर मैंने उसको मेरी शर्ट-पैंट उतारने के लिए बोला।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है।
मैंने कहा- अब काहे की शर्म!

और मेरे कपड़े उतारने के लिए बोला तो उसने मेरी शर्ट-पैंट उतार दी और लगे हाथ अण्डरवियर भी उतारने को बोला। ना ना करते हुए उसने उसको भी उतार ही दिया। उसने मेरा लण्ड देखा और अपनी आँखें बंद कर ली।

मैंने उससे कहा- यह प्यार करने की चीज है इससे मुँह नहीं मोड़ा करते।

फिर मैंने उसके दोनों हाथ आँखों से हटा दिए और उसको अपना लण्ड दिखाते हुए कहा- इसको लण्ड बोलते हैं और इसको ही चूत में डाल कर चुदाई करते हैं जिससे चूत और लण्ड का मिलन होता है। इस को अन्दर डालने से दोनों को बहुत मजा आता है!

तो उसने कहा- इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा? यहाँ तो उंगली भी ठीक से अन्दर नहीं जा रही है।
मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, सब कुछ हो जायेगा। पर इसको चूत में डालने से पहले चूसना पड़ता है।
मैंने अपना लण्ड पकड़ कर उसके मुँह में डाल दिया। पहले तो उसने मुँह में लेते ही निकाल दिया।

मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल दिया तो इस बार वो धीरे धीरे मेरे लण्ड का सुपारा चूसने लग गई और धीरे धीरे अपना सारा लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लग गया।
फिर मैंने उस को बेड पर लिटाया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को उंगली और जीभ से चोदने लगा।
वो सिसकारियाँ लेने लगी और बोली- वीरू! थोड़ा धीरे करो, मुझे दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- दर्द तो हो रहा है पर मज़ा आ रहा है या नहीं?
वो बोली- हाँ! मज़ा तो आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।
मैंने कहा- थोड़ी देर में यह दर्द खत्म हो जाएगा।

उसके मुँह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- सी… सी… स्… आ… अच्छा लग रहा … और चूसो और!
उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और उसकी चूत ने अंदर से सफ़ेद सफ़ेद सा पानी छोड़ दिया जिसे मैंने अपने मुँह पर महसूस किया और मेरा भी वीर्य निकलने वाला था और मैं उसके मुँह में झड़ गया।
उसने कहा- यह क्या है?
मैंने कहा- प्यार की निशानी है।
उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।

इसके बाद मैंने उसे सोफे पर बैठा दिया और अंदर से तेल की शीशी ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर तेल लगा लिया फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। इससे उसकी चूत मेरे लण्ड के करीब आ गई और मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। ज़िया सिसकारियाँ भरने लगी।

फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा। जिया की चूत कुंवारी होने के कारण काफी कसी थी। मैंने जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में ठेल दिया। लण्ड का सुपारा ही अंदर गया था कि जिया जोर जोर से चीखने लगी। अपने हाथ-पाँव मारने लगी और बोलने लगी- मुझे छोड़ दो! मुझे कुछ नहीं करना।

मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया और जोर-जोर से धक्के लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी आधा ही अंदर गया था कि उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उसका मुँह बंद था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे। मेरे हाथ से बंद होने के कारण उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाजें आने लगी। मैं समझ गया कि उसको मजे आ रहे हैं, मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया, उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।

मुझे उस किशोर लड़की की चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी। मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चौथाई लण्ड उसकी चूत में समा गया। इस झटके के लिए वो तैयार नहीं थी। और इस झटके के साथ ही जिया अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने लगी। अब मैं थोड़ी देर के लिए रुका और उसके मम्मे मसलने लगा। उसके होठों को चूमने लगा, अपने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। अब उसका सर पटकना कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी।

वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी, एक बार लगा कि मैं जिन्दा बच पाउंगी।
मैं बोला- मेरी जान! दर्द तो एक बार हुआ होगा, लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं?
जिया ने कहा- हाँ, मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में डालते रहो। सच में आज ज़न्नत जैसा अहसास हो रहा है।
मैंने कहा- मेरी जानू! अभी तुमने ज़न्नत देखी ही नहीं है, आगे आगे देखो, मैं तुम्हें क्या क्या और दिखाता हूँ।

इतना कहते ही मैंने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। जिया इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, इस कारण उसकी जोर की चीख निकल गई और बोली- प्लीज़! तुम अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल लो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ निकाल लो अपना लण्ड! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ।

मैं उसकी बातों पर ध्यान ना देकर उसके मम्मे चूसने लगा और अपने लण्ड को उसकी चूत धीरे धीरे आगे पीछे पेलने लगा। थोड़ी देर में उसको पूरा मज़ा आने लगा। उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लण्ड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी। वो अपनी गाण्ड ऊपर नीचे उछालने लगी और बोलने लगी- यस यस्स्स और जोर से चोदो वीरू , मेरी चूत फ़ाड़ दोओअओ, चोदो और जोर से चोदते जाओ, मेरी चूत को फ़ाड़ दो और मेरी चूत की प्यास को मिटा दो।
इस पर मैं उसको और जोर-जोर से चोदना शुरु कर दिया।
मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो! की रट लगा रही थी।
मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा।

फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लण्ड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो भी मेरे साथ ही झड़ गई, फिर हम दोनों एक साथ ले लेट गए।

फिर तो मैंने और जिया ने एक बार और सेक्स किया! उसको घोड़ी स्टाईल में खड़ा कर उसकी गांड में लण्ड घुसाने लगा। उसकी गांड भी बहुत कसी थी। मैंने पूरा दम लगा कर पूरा का पूरा लण्ड उसकी गांड में पेल दिया और धक्के मारने लगा। एक बार तो उसको दर्द हुआ फिर उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे बहुत ही आनंद दे रहे थे। दो-तीन मिनट में ही वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और लण्ड को गांड से निकाल कर फिर से उसकी चूत में डाल दिया। कुछ ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
उसने कहा- खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।
वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ

उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लण्ड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लण्ड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।

अब मुझे दर लगने लगा कि वो कहीं गर्भवती न हो जाये इसलिए मैंने उसको ई-पिल लाकर खिला दी।
अब जब कभी वो अकेली होती तो हम सेक्स करते और आज तक मैं उसके साथ सेक्स कर रहा हूँ।

दोस्तो यह मेरी पहली कहानी है किशोर लड़की की चुदाई की … कृपया अपने विचार मुझे जरूर भेजें … धन्यवाद। Sex Stories

Antarvasna

प्रेषक : राकेश
अभी तक आपने पहले भागों में पढ़ा Antarvasna कि प्रिया की मैंने पहली बार कैसे चुदाई की थी। वो पूरी तरह से संतुष्ट होकर मेरे घर से गयी थी। अब आगे की कहानी और जानें कि आगे की चुदाई कैसे हुई।

मैंने अपने आप को प्रिया की दोनों टांगों के बीच फ़िक्स कर लिया और उसकी दोनों टांगों को और फ़ैलाकर उसकी चूत को और चौड़ा कर दिया मुझे उसकी चूत का छेद साफ़ इतना बड़ा दिख रहा था कि उसमे में अपने थम्ब को सीधा डाल सकता था।

पर मैंने बिना टाइम गंवाये किये अपने लंड को सीधा उसकी चूत के छेद में झोंक दिया और मेरा लंड प्रिया की चूत में आधा धंस गया।
ये शायद ऐसा मौका था जब चुदाई में मुझे इतनी आसानी लंड डालने का मौका मिला हो।
मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड प्रिया की चूत में ठुक गया।

आज उसकी चूत पहले ही गीली हो रखी थी इसलिये अब मैं अपने लंड को ऊपर नीचे रगड़ने लगा तो प्रिया की चूत में सरसराहट होने लगी।

प्रिया ने भी नीचे से हमला कर दिया और अपनी गांड का एरिया ऊपर को उठा कर खुद भी चुदायी करवाने के लिये मुझे इनवाईट करने लगी।

आज मुझे और प्रिया को चुदायी में दर्द नहीं हो रहा था और दोनों ही मस्त थे वह आज बड़ी मस्ती में लग रही थी।

मैंने प्रिया की चूत में ऊपर नीचे रगड़म परेड शुरु कर दी और प्रिया भी अपनी चुदायी करवाने लगी।

धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ गयी तो गन्ने के खेत में जैसे तूफ़ान सा आ गया। मैंने चुदायी के साथ साथ प्रिया के पूरे बदन को चूमना, चाटना, मसलना और रगड़ना भी चालू रखा था।

मेरा ऐसा करने पर प्रिया भी जवाब दे रही थी बस जवाब के लिये उसके पास लंड नहीं था नहीं तो वह भी पूरे जोर से हमारी चुदायी की गाड़ी को धकेल रही थी।

मैं पहले की तरह बेड पर लेट गया और प्रिया मेरे ऊपर आ गयी। मुझे तो इससे बड़ा फ़ायदा हुआ, मैं पूरी ताकत से चोदने के चक्कर में अपनी काफ़ी एनर्जी वास्ट कर चुका था और इस पोसिशन में मुझे प्रिया की दुबारा चुदायी के लिये रिचार्ज होने का मौका मिल गया।
प्रिया ने अब ऊपर से धक्का लगाना शुरु कर दिया और मैं आराम से उसके चूचियों और निप्पलों को मसलने लगा।
पर उसके बूब्स ही मेरे हाथों के में टार्गेट थे, जब मुझे ज्यादा मज़ा आता तो मैं उसके चूतड़ पर जोर जोर से स्लाप कर देता जिससे प्रिया और मुझे दोनों को मज़ा आता।

मैं जैसे ही प्रिया की गांड के आस पास स्लाप करता प्रिया और जोर से अपनी चूत को मेरे लंड की तरफ़ उठा देती और दोनों का मज़ा दोगुना हो जाता।

अचानक प्रिया बोली- राजु, अब जल्दी करो मैं गीली हो गयी हूं.
तो मैंने प्रिया को फ़िर पहले वाली पोसिशन में करके अपने आप को उसके ऊपर ले आया।

अब मैंने ऊपर से अपनी स्पीड बड़ाकर प्रिया की चूत को अपने लंड से पूरी ताकत के साथ ठोंकना शुरु कर दिया।

प्रिया अब जोर जोर से आवाजें निकाल रही थी पर अब वह पहले की तरह खुश नज़र नहीं आ रही थी पर उसकी आहें मुझे और उत्तेजित कर रही थी और मैंने और जोर से उसकी चुदाई करने लगा।

मुझे प्रिया की चीख में एक अलग ही मज़े का आने लगा और में और जोर से उसकी चूत को अपने लंड से ठोंक रहा था।

करीब 2-3 मिनट बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और में थकने लगा तो मैंने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो प्रिया भी थोड़ा रिलेक्स लगने लगी।

अचानक मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लंड के जड़ से अंदर नसों में पानी निकलने को बेताब है मैं समझ गया कि अब मेरा भी झड़ने वाला है प्रिया तो शायद पहले ही झड़ चुकी थी।

मैंने प्रिया की चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक ठोंक कर अपने को रोक दिया। और मेरे लंड के अंदर से सारा क्रीम धीरे धीरे होता हुआ प्रिया की चूत में जाता सा लगने लगा।

उधर प्रिया भी शायद अपनी चूत में मेरे लंड का क्रीम फ़ील कर रही थी वह हलकी सी आहें भरते हुए रिलेक्स और खुश नज़र आ रही थी। कुछ पलों के बाद मेरे लंड का सारा क्रीम प्रिया की चूत की गेहराई में कहीं गुम हो गया।

मैं एकदम सुस्त हो गया था ऐसा लग रहा था जैसे किसी लम्बी रेस दौड़ी हो और मेरा लंड भी एकदम सिकुड़ गया था में इतना सुस्त हो गया कि वैसे हो प्रिया के ऊपर लेट गया और प्रिया ने भी कोई जावब नहीं दिया और हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे मतलब प्रिया नीचे बेड पर लेटी हुई थी और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर ही था।

5 मिनट बाद ही अलग हुए और बाथरूम जाकर पहले साफ़ किया और अपने अपने कपड़े पहन लिये।

इसके बाद प्रिया ने अपनी साड़ी और पेटीकोट ठीक किया और फ़िर हम दोनों बेडरूम से दुबारा कम्प्यूटर टेबल पर आ गये।

इस समय करीब 10:50 का टाइम हुआ था में बोला चलो चाय पीते हैं तभी अनिल का भी फोन आया कि वह 5 मिनट में पहुंच रहा है।

फ़िर 5 मिनट में चाय भी तैयार हो गयी और फ़िर तीनो ने चाय पी, आज अनिल ने ड्रिंक भी नहीं किया था शायद उसे मौका नहीं मिला पर मैं प्रिया को देखकर उसके बारे में सोचने लगा और शायद अनिल के इरादे ही आज कुछ वैसे ही थे।

मैं प्रिया को देख रहा था पर प्रिया शायद हम दोनों का मतलब समझ गयी थी पर दोनों को ही कुछ बताना नहीं चाहती थी। Antarvasna

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सभी साथियों को अभिवादन ! आप सभी Sex Stories को धन्यवाद ! ! आपकी प्रेरणा से मुझे लिखने का उत्साह मिलता है।

ज़रा सोच कर देखिये कि भगवान् ने सेक्स को इतना सुखदायक बनाया कि दुनिया इसकी दीवानी है। यदि यह सुखदायक नहीं होता तो………

दो इंच के खड्डे ने दुनिया को ख़ुद का दीवाना बना रखा है। सारी दुनिया की उत्पत्ति उससे हो गई।

क्या मनुष्य, क्या जानवर और क्या कीड़े मकोड़े….. सभी सेक्स के लिए उत्सुक होते हैं।

और सेक्स …….

इसको जितना तसल्ली से किया जाए उतना ही आनंद दायक हो जाता है।

और इसी सेक्स के कारण कई बार मनुष्य खेदजनक स्थिति में भी आ जाता है।

बहुत सी बार तो किसी में कोई दोष या परेशानी नहीं होती और वो सोचता है कि उसमे कोई दोष है।

यदि तसल्ली से, बिना किसी घबराहट के सेक्स करेंगे तो सेक्स का ख़ुद भी पूरा आनंद ले पाएंगे और साथी को भी सेक्स का पूरा आनंद दे पायेंगे।

जरूरत से ज्यादा उत्तेजित हो जाना, चिन्ता में होना, घबराहट होना और गुप्तांगों में कोई परेशानी होना (घाव या छीलन आदि) ही ज्यादातर परेशानियों का कारण हैं।

इनमे से एक परेशानी है स्त्री के बजाय पुरूष का जल्दी झड़ जाना।

और इस समस्या के निदान है, जो अच्छा लगे उनको अपना कर अनुभव करें —

-कंडोम का प्रयोग करें,

-स्त्री को अपने ऊपर ले लें,

-बैठ कर सम्भोग करें,

-सेक्स करते समय अपने दिमाग को शांत रखें, जरूरत से ज्यादा उत्तेजित न हों और जल्दबाजी न दिखाएँ,

-बहुत जल्दी जल्दी सम्भोग न करें अर्थात ५-७ दिन का अन्तर रखें,

सेक्स में किसी को कुछ ज्यादा अच्छा लगता है और किसी दूसरे को कुछ ओर !

इसलिए अपनी पसंद से दूसरों की तुलना करना बेकार है, यह मत सोचिये कि मुझको कोई बीमारी है।

मैं स्त्री को अपने ऊपर लेना ज्यादा पसंद करता हूँ।

इस आसन में स्त्री सेक्स करते समय जैसे जैसे अपनी गांड चलाती है तो उसकी चूत अदंर से फूलती पिचकती रहती है और लंड को अपार सुख देती है।

दूसरा आसन बैठ कर स्त्री को अपनी जांघों पर बिठा कर सम्भोग करना – इसमे दोनों के मुँह एकदम आमने सामने होते हैं, अतः चूमने में बहुत मजा आता है और पूरा शरीर होता हाथ की पहुँच में है, इस से हम एक दूसरे के पूरे शरीर के टांग से लेकर मुँह तक सहला सकते हैं।

आज मैं आपको जो बताने जा रहा हूँ उससे आप अपनी मन पसंद स्त्री को चोद सकते हैं।

हमारे एक परिचित का गोत्र मेरी मां के गोत्र का था। इसलिए हम लोग उनको मामा कहते थे। उनकी पत्नी का देहांत तीन बच्चों के पैदा होने के बाद, ४५ वर्ष की उम्र में हो गया। तब तक उनके दो लड़के और एक लड़की तीनों की शादी हो चुकी थी। अब मामाजी अकेले रह गए और उनमें सेक्स की प्रबलता देख कर कोई भी बेटा अपने साथ रखने को राजी नहीं था। मामा ५०-५२ के थे।

वो थे भी ज्यादा ही खुले हुए, उनके लिए उनकी बहु भी सेक्स संतुष्टि का एक साधन ही थी। अब अलग रहने से उनके खाने के साथ साथ सेक्स करने की भी समस्या हो गई। रुपयों की कोई कमी नहीं थी तो उन्होंने अपने लिए कोई औरत तलाशनी शुरू कर दी। आख़िर २-३ साल की तलाश के बाद हमारे ही समाज की एक तलाकशुदा ३० साल की औरत से उन्होंने मन्दिर में शादी कर ली।

ये मामी उम्र में मुझसे भी छोटी हैं। कोई सीधा सीधा रिश्ता तो है नहीं। लेकिन मान रखा था।

मामी दिखने में बहुत आकर्षक लगती हैं। जब कभी मेरे साथ स्कूटर पर बैठती तो कंधे पर हाथ रखकर बैठती और स्कूटर हलके से रोकने में भी अपने बोबे मुझसे टकरा देती। ३६+/३८ साइज़ के बोबे मेरी पीठ में गड़ते ही मेरा लंड फन्ना जाता। दिल उछल कर गले में आ जाता।

बात करते करते मेरे हाथो में ताली मार देती। यह जानते हुए भी कि यदि उनके साथ यदि मैं आगे बढूँ तो वो मान जाएँगी, मेरी गांड फटती थी उनसे ऐसी बात कहने में !

उनको चोदने की इच्छा बहुत थी इसलिए उनके बारे में बहुत सोचता था। सोते समय भी कई बार उनके बारे में सोचते सोचते सो जाता और गुसलखाने में नहाते समय कई बार उनकी सोच ले कर उनके नाम से मुठ मारी।

एक बार बरसात के सुहाने मौसम में, रात को खिड़की से छन कर आती मद्धिम रोशनी में उनको याद करते हुए आँख बंद कर के पत्नी के साथ लेटा हुआ था। उनको याद करते करते लंड में कठोरता आ गई। मैंने आँखें खोली तो पास में मामी को सोते हुए पाया। मैं उनके ख्यालों में इतना खोया हुआ था कि जाने पत्नी को कहीं भेजकर कब वो पास आकर सो गई पता ही नहीं चला।

मेरी तबियत बाग़ बाग़ हो गई। मैं करवट लेकर उन पर अधलेटा हो गया और उनके होटों पे अपने होंट रख कर चूसने लगा, लंड तन कर अकड़ गया। उन्होंने भी मेरे होंट चूसने शुरू कर दिए। मैंने उनके बोबे दबाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे उनके ब्लाउज के बटन खोलता गया। उनकी तरफ़ से कोई प्रतिवाद नहीं हुआ तो लंड नई औरत के अहसास से एक दम टन्ना गया।

फ़िर उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्लाउज और ब्रा उनके शरीर से अलग कर दी। होंट और जीभ एक दूसरे के मुँह से अलग ही नहीं हो रहे थे। बहुत जोर लगा कर मुँह को हटा कर उनके बोबों पर लाया और चूसने लगा। फ़िर एक हाथ से उनका दूसरा बोबा दबाता रहा। और दूसरा हाथ उनके पेटीकोट को ऊँचा करने में लग गया। पेटीकोट को सरका कर नाभि तक ले आया और उसी हाथ से उनकी चूत सहलाने लगा, उनके मुँह से सीत्कार निकलने लगी जो मुझको और भी कुछ करने के लिए उत्साहित करने लगी।

उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे धीरे दबाने लगी तो मैंने अपने पायजामे और अंडरविअर का नाड़ा खोलकर लंड उनके हाथ में पकड़ा दिया। लंड स्टील के माफिक हो गया।

मन सात समंदर की लहरों पर मचलने लगा। सीत्कार और आहों ने कमरे को एक नए तराने से भर दिया। उनकी चूत पनीली होने लगी। मैं अपनी जीभ से उनका बदन चाटने लगा। उनकी नाभि में जीभ घुसेड़ कर हिलाने लगा।

तो वो मेरा लंड छोड़ कर मुझको अपनी बाँहों में लेकर जकड़ गई। और इतनी जोर से चिपक गई कि यदि मैं उठ जाता तो वो भी मेरे शरीर से जुड़ी हुई उठ जाती। उन्होंने अपना मुँह मेरी गर्दन पर चिपका दिया और चूसने लगी, मुझको अपने आपको सम्हालना भारी पड़ गया, मुझे लगा कि जैसे मैं सूर्य के सामने खड़ा जल रहा हूँ।

हम दोनों के शरीर से जैसे धुंआ उठने लगा, हम पसीने में नहा गए।

मेरा लंड उनकी चूत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा। तो उन्होंने लंड को अपनी चूत के मुँह पर अड़ा लिया। और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने भी लंड पर दबाव डाल कर पूरा लंड उनकी चूत में देता चला गया।

नई औरत के अहसास और उनके मुँह से लम्बी मादक आह ने मेरे मन को सातवें आसमान पर उड़ा दिया। अब मैं अपने घुटनों को मोड़ कर उनकी जांघों के नीचे लाता गया फ़िर जब मेरे घुटने उनकी जांघों के नीचे आ गए तो अपने हाथ उनकी बगल में टिका कर उनको बोला कि अपने हाथों से मुझको मत छोड़ना फ़िर अपने हाथों को कोहनी से सीधा करते हुए उनको अपनी जांघों पर ले आया और बैठ गया। मैं तकिया दीवार के सहारे सीधा लगा कर उसका सहारा लेकर बैठ गया और वो मेरी जांघों पर मुझको अपने हाथो से कसे बैठी थी। मैंने उनके चेहरे को पकड़ कर अपने होंट उनके मुँह से मिला कर उनकी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और हाथ उनके बदन पर छुआते हुए सहलाने लगा। तो वो अपने बदन को उत्तेजना के मारे लहराने लगी। दोनों पहली बार एक दूसरे से चिपके थे इसलिए अलग होना मुश्किल हो रहा था। लंड अंदर चूत की गहराई में डूबा हुआ मस्त हो रहा था।

अब मामी पिघलने लगी, मेरे चेहरे और गले पर जगह जगह चूमने और चूसने लगी। फ़िर धीरे धीरे जांघों को टाइट करते छोड़ते हुए चूत को हरकत देने लगी। मैं भी अपने हिप्स को धीरे धीरे धक्के की स्थिति में हिलाने लगा। मैंने अपने हाथ उनके शरीर से हटा कर उनके बोबों पर लगा दिए। उनके दोनों बोबे मेरे दोनों हाथों से दबे जा रहे थे। होंट उनकी जीभ पर और उनके हाथों में मेरा शरीर कसा हुआ। कही भी हवा जाने भर की भी जगह नहीं थी।

उनकी चूत ज्यादा गीली होती गई और उस गीले चिकने गरम पानी में लंड डुबकियां लगा कर नहाने लगा। उनका गदराया शरीर मेरी रग रग में आग भरता गया और मेरा लंड उनकी चूत को गहरे तक खोद कर कुवें में से पानी निकालने लगा। उनका शरीर तनता चला गया। फ़िर थोड़ी देर बाद उनके होंट, उनके हाथ ढीले हो गए। और उनका शरीर मेरे बदन पर ढल गया।

थोड़ी देर तक मैंने उनको समंदर की लहरों और सातवें आसमान की उड़ान का मजा लेने दिया, उनके बोबे धीरे धीरे दबाता रहा।

फ़िर लगभग ३-४ मिनट बाद मैंने उनका चेहरा उठाया और अपने होंट उनके होटों से मिला दिए। उनके शरीर में फ़िर हरकत होने लगी। शरीर जो ढुलका पड़ा था फ़िर कसाव आने लगा। मैंने अपना एक हाथ हमारे बीच में उनकी चूत पर लाकर उँगलियों से चूत के चारों और सहलाने लगा, मामी में आग फ़िर भड़कने लगी।

अब मैंने अपने शरीर को थोड़ा पीछे झुका कर कोहनी बिस्तर पर लगा दी और थोड़ा आगे सरक कर लेटता गया और उनको ऊपर ले लिया।

मैंने उनके बोबे थोड़ा जोर दे कर दबाने शुरू किए। फ़िर थोड़ी देर बाद दोनों हाथ उनकी कूल्हों की गोलाइयों पर सहलाते हुए घुमाने लगा।

फ़िर उत्तेजना के मारे वो अपने हिप्स को हाथों से बचाने के लिए इधर उधर करने लगी। तो लंड को मजा आने लगा। मैं नीचे से धक्के लगाने लगा। उनके भी हिप्स तेज चलने लगे तो मैंने अपने हाथों में मामी को जकड़ लिया और अपनी जीभ उनके मुँह में देकर धीरे धीरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता गया। मामी का शरीर फ़िर अकड़ने लगा और ढीला पड़ता गया, मैं नहीं रुका लेकिन धक्के पूरी ताकत से लगाने लगा और ८-१० धक्कों में मैं भी जाने किधर उड़ने लगा।

मेरा पूरा शरीर नए अहसास से सुहागरात की जैसे तरंगित था।

फ़िर जब नींद से आँखें खुली तो मेरी बगल में मेरी पत्नी सोई हुई थी।

लेकिन वो नया अहसास ३-४ दिन तक मुझको तरंगित किए रहा।

आप भी किसी की यादों में इतना खो कर उसकी चुदाई कर सकते हैं।

कर के देखिये फ़िर बताइए ………….

न सिर्फ़ मर्द बल्कि औरतें भी ऐसा कर सकती हैं और नए अहसास से ख़ुद को तरो ताजा कर सकती हैं………। Sex Stories

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