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चुदाई की ढेर Antarvasna सारी कहानियाँ अन्तर्वासना में पढ़ने के बाद मैंने भी सोचा कि एक सेक्सी कहानी पाठकों के साथ बाँट लूँ !
यह बात उस समय की है जब मैं भिलाई में रह कर आईटीआई की ट्रेनिंग कर रहा था।
मेरे आईटीआई का एक मित्र हमेशा अपने घर ले जाता और उसके घर वाले भी बहुत अच्छे से पेश आते थे।
घर से दूर रहने के कारण परिवार के माहौल में बहुत अच्छा लगता था। मेरे दोस्त का एक भाई था, उसके पापा अच्छी नौकरी में थे।
उनकी मम्मी भी बहुत अच्छी थी, जब भी घर जाता तो नाश्ता चाय के बगैर आने ही नहीं देती थी।
मलयाली परिवार से होने के कारण खाने में ढेर सी अच्छी चीजें मिलती थी। टीवी देखने के नाम पर ही मेरा वहाँ जाना ज्यादा होता था क्योंकि उस समय मुझे फिल्मों का बहुत शौक था।
एक बार मेरे दोस्त के भाई की नौकरी के लिए उनके पापा और भाई को चार दिनों के लिए पूना जाना पड़ा। दोस्त ने मुझे तब तक के लिए अपने घर पर ही सोने के लिए कहा।
उस रात का खाना भी दोस्त के ही घर पर हमने खाया। दस बजे दोस्त सोने अपने बेडरूम में चले गया, मैं टीवी देखने के नाम पर ड्राइंग रूम में ही सोने के लिए रूक गया।
रात के साढ़े ग्यारह बजे चैनल बदलते समय अचानक ही टीवी में ब्लू फिल्म आने लगी।
मैं बहुत ही खुश हो गया क्योंकि मुझे ब्लू फिल्म देखने में बहुत ही मजा आता है। दस मिनट बाद ही मेरा लण्ड सनसनाने लगा।
एक आदमी एक औरत की चूत को चाट रहा था और साथ ही में उसकी गाण्ड के छेद में अपनी एक उंगली डाल आगे पीछे कर रहा था।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैने चड्डी उतार दी और लंड को पकड़ के सहलाने लगा। थोड़ी ही देर में सारा माल मेज़ के ऊपर ही गिर गया।
मैं बाथरूम में गया और लंड साफ कर लिया।
तभी मेरी नजर दोस्त की मम्मी की ब्रा और पैन्टी पर पड़ी।
मुझे फिल्म का सीन याद आ गया मैंने पहले कभी दोस्त की मम्मी के बारे में ऐसा गन्दा ख्याल नहीं किया था।
ब्रा और पैन्टी को छूते ही मेरा लंड फिर से तैयार होने लगा। ब्रा को सहलाते हुए आंटी को याद कर मैं मुठ मारने लगा।
जोश में आंटी की सेक्सी तस्वीर मन में आने लगी। मलयाली आंटी की मोटी गांड और मस्त बड़े बड़े दूध को याद करके मैं जोर जोर से मुठ मार ही रहा था कि आहट सी हुई पर जोश की अधिकता में मेरा माल आने ही वाला था और मैं अपने को रोक नहीं पाया और सारा माल आंटी की पैन्टी में ही निकल गया।
तभी बाहर से बाथरूम का दरवाजा खुल गया आंटी शायद बाहर खड़ी थी अचानक ही वो अन्दर आ गई। मैं हड़बड़ा गया।
आंटी मेरा हाथ पकड़ कर बोली- यह क्या कर रहा था?
मेरी आवाज़ ही नहीं निकल पा रही थी, मैं नज़रें नीचे झुकाए थर-थर कांप रहा था। आँटी ने गुस्से में पैन्टी छीनते हुए कहा- मादरचोद, मेरी फ़ुद्दी को याद कर लौड़ा घोंट रहा था !
मैं लगभग रोते हुए बोला- मुझे माफ़ कर दो आंटी !
आंटी ने कहा- बाहर टीवी में ब्लू फिल्म तूने ही लगाई है न ? कैसेट कहाँ से मिली ?
मैं हकलाते हुए बोला- वो तो केबल पर !
और चुप हो गया।
आंटी ने ओ..ह्ह्ह… कहा और चुप हो गई। मेरा लौड़ा आंटी की बदन की गरमी को महसूस कर अब ऊपर-नीचे होने लगा था।
मैं अभी तक नंगा था और आंटी अपने पैन्टी में लगे वीर्य की बूंदों को सूंघते हुए बोली- यह तूने मेरी पैन्टी को ख़राब किया है?
मैं इसे साफ़ कर देता हूँ आंटी !
और उनके हाथ से पैन्टी ले कर मैं उसे पानी में डुबा कर धोने लगा। आंटी मेरे हाथ पकड़ कर मुझे उसे धोने में मदद करते हुए बोली- जरा सी भी गन्दगी नहीं रहनी चाहिए !
और अपने बड़े बड़े दूधों को मेरे पीठ में रगड़ने लगी। मेरा लंड अभी भी नंगा था और पूरी तरह से तन कर तैयार हो गया था।
वो मुझसे बोली- लौड़े को हिलाने में बहुत मजा आता है क्या ?
मैं अ..ह…. ही कर पाया था। आंटी के झुके होने से उनके बड़े बाटलों की झलक साफ दिख रही थी।
अब मैं भी नंगे होने के बावजूद उनके बाटलो को घूर रहा था। आंटी समझ गई और बोली- दूध को क्या घूर रहा है बे ?
मैं एक पल को सकपका गया और नजर नीचे कर ली।
तभी आंटी मेरे लौड़े को अन्डकोषों के नीचे से सहलाते हुए बोली- वाह… कितना मस्त है रे.. !
मेरा लंड जैसे सलामी मारता हुआ उनकी चूत के नीचे जा कर रूक गया। वो हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी और बड़बड़ाने लगी- मादरचोद, इतना मस्त लौड़ा है और तू घोंट-घोंट कर गिरा रहा है !
अब मेरे से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, मैं आंटी से लिपट गया और “अ..ह… आंटी मस्त लग रहा है” मेरे हाथ बिजली की तेजी से उनके शरीर को मसल रहे थे।
दो मिनट बाद ही आंटी अपने को कंट्रोल करते हुए मुझे खींचते हुए अपने बेडरूम की ओर ले चली।
बेडरूम अन्दर से बंद कर वो अपने कपड़े उतारने लगी। चंद पलों में ही वो पूरी नंगी मेरे सामने अपने दूध को मसल रही थी।
मैं उनकी गाण्ड से लेकर जान्घों तक पप्पियों की बरसात करने लगा।
उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूत के पास किया और गरजदार लहजे में कहा- चूस.. इसे …. !
मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।
मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।
वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।
वो सी.. अह..ह… जान और जोर से छोड़ पूरा हाथ घुसा दे जान…. मेरी जान…. कह अपनी एक उंगली मेरे गांड के छेद में घुसाने लगी।
मुझे अनायास ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगी। एक हाथ से आंटी गांड में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से वो लौड़े को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी …….
शेष अगले भाग में ! अभी मैं मुठ मार लेता हूँ आंटी की पहली चुदाई को याद कर ! अब रहा नहीं जा रहा है ! Antarvasna
यहां से पचास किलोमीटर Hindi Porn Stories दूर शहर में भैया काम करते थे। मेरे से कोई चार साल बड़े थे। शादी हुये साल भर होने को आया था।
भैया शहर में शराब पीने लग गये थे। इसी कारण घर में झगड़े भी होने लगे थे। भाभी की आये दिन पिटाई भी होने लगी थी।
एक बार भाभी ने मोबाईल पर मुझे रात को दस बजे रिंग किया।
मैंने मोबाईल उठाया, पर फ़ोन पर चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दी तो मैंने पापा को बुला लिया।
पापा ने फोन को ध्यान से सुना फिर उन्होंने मुझे आदेश दिया कि सवेरे होते ही कार ले कर जाओ और बहू को यहाँ ले आओ।
गांव में पापा की एक छोटी सी दुकान है पर आमदनी अच्छी है। वो सवेरे नौ बजे दुकान पर चले जाते हैं।
मैं भाभी को लेकर घर पर आ गया। भाभी मुझे अपना दोस्त समझती हैं। हम दोनों एक ही उम्र के हैं।
शाम तक मेरे पास बैठ कर भाभी अपना दुखड़ा सुनाती रही, उसने अपनी पीठ, हाथ व पैर पर चोट के कई निशान दिखाये।
ये सब देख कर मुझे भैया से नफ़रत सी होने लगी।
मैंने भाभी को जैसे तैसे मना कर उनके चोटों पर एण्टी सेप्टिक क्रीम लगा दी।
अब मेरा रोज का काम हो गया था कि पापा के जाने के बाद उनकी चोटों पर दवाई लगाता था।
भाभी का शरीर सांवला जरूर था पर चमकीला और चिकना था। कसावट थी उनके बदन में। जब वो अपनी पीठ पर से ब्लाउज हटा कर दवाई लगवाती थी उनकी छोटी छोटी चूंचियां सीधी तनी हुई कभी कभी दिखाई दे जाती थी। तभी मैंने भाभी की चूंचियों पर भी चोट के निशान देखे।
“भाभी, आपके तो सामने भी चोटें हैं!” मैंने हैरत से कहा।
“देख भैया, तुझसे क्या छिपाना … ये देख ले … ”
कंचन ने झिझकते हुये सामने से अपनी छाती दिखाई … चूंचियों और चुचूकों पर खरोंच के निशान थे।
“भाभी प्लीज ऐसे मत करो!” मैंने तुरन्त पास पड़ा तौलिया उनकी छाती पर डाल दिया। उसकी आंखों से आंसू टपक पड़े। पर भाभी के चोटों के निशान मेरे मन में एक नफ़रत भरा बीज बो गये।
“नहीं देखा जाता है ना … वो आपकी तरह नहीं हैं … आप तो मेरा कितना ख्याल रखते हैं, दवाई लगाते हैं … अभी तो आपने मेरी पिछाड़ी नहीं देखी है … कितना मारते थे
वो यहाँ पर!”
“बस भाभी बस … अब बस करो …”
भाभी ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। अनायास ही मेरे हाथ उसके बालों पर चले गये और उन्हें सहलाने लगे। मेरा प्यार पा कर वो मुझसे लिपटने सी लगी। मैंने एक हल्का सा चुम्मा उसके गालों पर ले लिया … वो अपनी आंखें जैसे बन्द करके प्यार का आनन्द लेने लगी।
“भैया मेरी छाती पर दवाई लगा दो …!”
“क्या छाती पर ?… न … न … नहीं … यहाँ नहीं …!”
“तो क्या हुआ … दर्द है ना मुझे … प्लीज!”
मैंने उसे घूर कर देखा … पर उसकी आंखों में केवल प्यार था। मैंने उसे लेटा दिया और तौलिया हटा कर उसकी चूंचियों की तरफ़ झिझकते हुये हाथ बढ़ाया … और दवाई लगा दी।
मुझे अहसास हुआ कि उसके चुचूक कड़े हो गये थे। छोटी छोटी चूंचियां कुछ फ़ूल गई थी।
मेरा मन भी डोल सा उठा, पर मैंने फिर से उस पर तौलिया डाल दिया।
भाभी ने मुझे प्यार से बिस्तर पर लेटा लिया और मेरी कमर पर में एक पांव लपेट कर जाने कब सो गई।
मुझे नहीं पता था कि यह उसके दिल की पुकार है कि मुझे बाहों में लेकर खूब प्यार करो। वो प्यार की भूखी थी।
मैंने धीरे से उसका हाथ हटाया और बिस्तर से हट गया।
तभी अनायास मुझे ध्यान आया कि उसके चूतड़ों पर भी शायद चोट है, जैसा कि उसने अपनी पिछाड़ी के बारे में कहा था।
मैंने धीरे से उसका पेटीकोट ऊपर हटा दिया।
उसके गोल गोल चूतड़ों पर नील पड़ी हुई थी। मैंने तुरन्त दवाई उठाई और लगाने लगा। पर आश्चर्य हुआ कि दरारों के बीच गाण्ड के छेद पर भी चोट जैसा सूजा हुआ था।
मैंने चूतड़ों को खोल कर वहां भी दवाई लगा दी।
मैं पास ही बैठ कर भैया के बारे में सोचने लगा कि भैया उसकी गाण्ड में चोट कैसे लगा देते हैं? यह तो बहुत नाजुक स्थान है … इतना बुरा व्यवहार … मुझे बहुत ही खराब लगने लगा।
कंचन भाभी को यह पता चल गया था कि मैंने उनके बदन में दवाई कहां कहां लगाई थी।
अब वो मुझसे रोज ही जिद करके दवाई लगवाने लगी थी। कंचन को अपने गुप्त अंगों पर दवाई लगाने से या मेरे द्वारा छूने पर शायद आनन्द आता था।
पर इसके ठीक विपरीत मेरे दिल में कंचन भाभी के लिये प्यार बढ़ता जा रहा था।
पापा के दुकान पर जाने के बाद मैं दवाई लगाता था, फिर वो मेरे साथ लेटे लेटे खूब बातें करती थी।
मैं उसके बालों को सहलाता रहता था। वो प्यार में मुझे जाने कितनी ही बार चूम लेती थी।
पर आज जाने मुझे क्या हुआ, मुझे जाने क्यूँ उत्तेजना होने लगी। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मेरे दिल में एक बैचेनी सी होने लगी।
इन दस बारह दिन में भाभी की चोटें ठीक हो चुकी थी।
आज मैंने उनकी चूचियों पर दवाई लगाते हुये कहा भी था कि अब उसे दवाई की आवश्यकता नहीं है .. लेकिन उसका कहना था कि आप रोज ही लगायें … और मेरा हाथ अपनी चूंचियों पर दबा लिया था।
“आप बहुत शरारती है कांची … ”
बस … उसने एक कसक भरी हंसी वतावरण में बिखेर दी।
मेरे विचारों में अचानक ही परिवर्तन होने लगा, मुझे अपनी भाभी ही सेक्सी लगने लगी।
उनका सांवला रूप मुझे भाने लगा। वो तो निश्चिन्तता से मेरी कमर पर पांव लपेटे आंखें बंद करके कुछ कह रही थी। पर मेरा दिल कहीं और ही था।
मैंने अचानक ही कांची के होठों पर एक चुम्बन ले लिया।
उसने कोई विरोध नहीं किया।
मैंने साहस करके दुबारा चुम्मा लिया।
उसने मुझे देखा और अपने होंठ मेरी तरफ़ बढ़ा दिये। भाभी के दोनों हाथ मेरे गले से लिपट गये।
मैंने गहराई से कांची को चूम लिया … उसने भी प्रत्युत्तर में मुझे प्यार से खूब चूमा।
मैंने जाने कब एक करवट लेकर भाभी को अपने नीचे दबोच लिया और उनके ऊपर चढ़ गया।
मेरा कसा हुआ तन्नाया हुआ लण्ड उसकी चूत से टकराने लगा।
भाभी के मुख से वासना भरी सिसकारी निकल पड़ी।
“भैया … आह मुझे जोर से प्यार करो … मुझे आज प्यार से, आनन्द से भर दो।”
“कंची मुझे जाने क्या हो रहा है… शरीर में जाने कैसी कसावट सी हो रही है …!”
और मेरे चूतड़ों ने मेरा लण्ड जोर से उसकी चूत पर दबा दिया।
मुझे लगा कि भाभी ने भी उत्तर में अपनी चूत का दबाव मेरे लण्ड पर बढ़ा दिया है।
तभी मेरा वीर्य निकल पड़ा … मैं हैरत में रह गया … मेरा सारा नशा काफ़ूर हो गया।
मेरे लण्ड में से वीर्य का गीलापन देख कर कांची ने मुझे प्यार से उतार दिया।
“सॉरी … ये … ये … सब क्या हो गया …!!” मुझे अत्यन्त शर्मिन्दगी महसूस हुई।
“क्या पहली बार हुआ है ये?”
मैंने धीमे से हां में सर हिला दिया।
“अरे छोड़ ना यार … होता है ये … तुझे कुछ नहीं हुआ है … … शर्माना कैसा …”
“भाभी … मै तो आपको मुँह दिखाने के लायक भी नहीं रहा … ”
उसने धीरे से खिसक कर मेरी छाती पर अपना सर रख लिया।
हम फिर से बातें करने लगे … पर फिर से मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी। मेरा लण्ड फिर खड़ा होने लगा।
इस बार कांची ने कोई मौका मुझे नहीं दिया। मेरे खड़े लण्ड पर उसकी नजर पड़ गई। उसने धीरे से हाथ बढा कर उसे हल्का सा पकड़ लिया।
“भाभी, यह क्या कर रही हो … छोड़ो तो …!” मुझे शरम सी लगी, पर शरीर में कंपकपी सी आने लगी।
“मेरे काम की तो यही एक चीज़ है तुम्हारे पास! है ना भैया … ? और मेरे पास तो आपके काम की कई चीज़ें हैं, जैसे सामने ये उठे हुये गोल गोल, नीचे … वहीं जहाँ अभी तुम जोर लगा रहे थे … और पीछे जहां तुम अन्दर तक दवाई लगाते हो …”
मैं यह सब सुन कर उत्तेजना से हांफ़ उठा। उसकी बातें मेरी उत्तेजना भड़का रही थी।
“तुमने दवाई लगा लगा कर मेरे सभी चीज़ों को फिर से तैयार कर दिया है ना … अब उसके मजे भी तो लो!”
भाभी मेरे लण्ड को अब मसलने और मुठ मारने लगी थी। मेरा लण्ड उफ़न पड़ा था। सुपाड़ा फ़ूल कर लाल हो चुका था। जाने कब कांची ने मेरी एलास्टिक वाला पजामा नीचे खींच दिया था।
“हाय भैया … ये तो बड़े मजे का है … बड़ा तो तुम्हारे भैया जितना ही है … पर मोटा बहुत है …!” कहते हुए वो उठ कर मेरे लण्ड के पास पेटीकोट उठा कर बैठ गई।
उसके नंगे चूतड़ मेरी जांघ पर बड़ा मोहक स्पर्श दे रहे थे।
अपने मुख में से थूक निकाल कर उसने अपनी गाण्ड पर लगा लिया और मेरे लण्ड पर अपनी गाण्ड का छेद रख दिया। फिर जोर लगा कर उसके सुपाड़ा अन्दर घुसा लिया।
मेरे लण्ड में जलन होने लगी। मेरे मुख से आह निकल पड़ी.
“भैया … बिल्कुल फ़्रेश हो क्या?” उसने चुटकी लेते हुये कहा।
“फ़्रेश क्या … दर्द हो रहा है ना … जैसे आग लग गई है …” मैंने कराहते हुये कहा।
“भैया … तू तो बहुत प्यारा है … लव यू … कभी किसी को चोदा नहीं क्या … ?”
उसके मुख से चोदा शब्द सुन कर मेरे मन में गुदगुदी सी हुई।
“भाभी … आप पहली हैं … जिसे चोद …ऽऽ ” मैं बोलता हुआ झिझक गया।
“हां … हां … बोल … बोल दे ना प्लीज …!”
“जी … पहली बार आप ही चुद रही है … ”
“हाय रे मेरे भैया …!” चुदाई की बातें उसे बहुत ही रस पूर्ण लग रही थी।
उसने मुस्कराते हुये अपनी गाण्ड पर और जोर लगाया।
मेरा लण्ड भीतर सरकता गया और जलन बढ़ गई।
पर मौका था और इस मौके को मैं छोड़ना नहीं चहता था। मस्ती भी बहुत आ रही थी।
भाभी ने मुझ पर झुकते हुये मेरे अधरों को अपने अधरों से भींच लिया और कहने लगी- आप शर्माते बहुत है ना … देखो आपके भैया ने मेरी क्या हालत कर दी थी, मुझे पीट पीट कर मेरा तो पूरा शरीर तोड़ फ़ोड़ कर रख दिया, और आप हैं कि मेरे एक एक अंग को फिर से ठीक कर दिया, मेरे प्यारे भैया, आप बहुत अच्छे हैं।
“कांची तू बोलती बहुत है … अब जो हो रहा है उसकी मस्ती तो लेने दे!”
“हाय रे, तेरा लाण्डा पुरजोर है … ”
“ये लाण्डा क्या है … ”
“जिसका लण्ड बहुत मोटा होता है उसे हम लड़कियां लाण्डा कहती हैं … ही ही … ”
वह मुँह से मेरा होंठ चाटते हुये हंसी।
मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में फ़ंसा हुआ था। वह हौले हौले ऊपर नीचे हो कर आनन्द ले रही थी। मेरा लण्ड तरावट में मीठी मीठी लहरों का मजा ले रहा था।
मैं भी अपने चूतड़ों को धीरे धीरे हिला कर चुदाई जैसी अनुभूति ले रहा था। जैसे ही उसके धक्के थोड़े तेज हुये, मेरा बांध टूटने लगा। बदन में कसक भरी मिठास उफ़नने लगी और अचानक ही मैंने उसे अपनी बाहों में भींच लिया।
“कांची मेरा तो निकला … हाय … आह … ” और उसकी गाण्ड की गहराईयों में लण्ड वीर्य उगलने लगा।
“मेरे प्यारे भैया, निकाल दे … सारा भर दे मेरे अन्दर … पूरा निकाल दे …!” उसने मुझे चूम लिया और प्यार भरी नजरों से मुझे निहारने लगी।
वीर्य निकलने के बाद मेरा लण्ड सिकुड़ कर बाहर आ गया। उसकी गाण्ड की छेद से वीर्य टप टप करके बाहर टपकने लगा।
“पता है इतना मजा तो मुझे कभी नहीं आया … हां जोरदार चोदन जैसा अनुभव तो मुझे बहुत है … आपके भैया तो जानवर बन जाते हैं … ” वह मेरी छाती पर लेटे-लेटे ही बोली।
“भाभी, अब भूख लगी है … कुछ खिलाओ ना …!”
“रुक जा … अभी तो मेरी सू सू बाकी है … उसे खिलाऊंगी तुझे …!”
उसकी भाषा पर मैं शरमा गया … फिर भी कहा,”भाभी … खाना खाना है … सू सू नहीं …!”
कांची खिलखिला कर हंस पड़ी … वह उठी अपना पेटीकोट ठीक किया और दूध का एक गिलास भर कर ले आई।
मैंने एक ही सांस में पूरा गटक लिया।
“हां सू सू खिलाओगी … या पिलाओगी …?”
“धत्त … पागल हो क्या!” अपना पेटीकोट उतारते हुई हंसने लगी।
“इसकी बात कर रही हूँ … ” उसने चूत की तरफ़ इशारा किया।
मैं अनजाना था … कहा,”हां, हां … यही तो है सू सू … ”
“चल हट, बुद्धू बालम जी … ” हंसती हुई उसने अपना ब्लाऊज उतार दिया.
“माल तो यहाँ है बालमा … थोड़ा सा स्वाद तो लो …” कांची ने अपने ओर इशारा करते हुए कहा।
मैं अब नंगा हो कर बिस्तर पर बैठ गया था- कांची … रे … इसमें तो छोटा सा मुत्ती का छेद है … फिर तुम्हारा ये लाण्डा …कैसे डलवाओगी?
“तुम क्या सच में इतने बुद्धू हो … सच है जिसका माल ही आज पहली बार निकला हो, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है?” उसकी खिलखिलाती हंसी से मैं झेंप सा गया।
तभी कांची के छोटे छोटे मम्मे मेरे अधरों से टकराये।
उसके मम्मे की नरम सी रगड़ से मेरे रोंगटे खड़े हो गये।
सेक्स का इतना मधुर अनुभव होता है, यह मुझे आज ही मालूम हुआ।
पता नहीं भैया को इन सबका अनुभव है या नहीं। …फिर इतनी बेदर्दी क्यूँ … जंगलीपना … वहशीपना … अब यह तो मेरी पत्नी नहीं है ना … अगर यह सुखों का भण्डार है तो जब स्वयं की पत्नी आयेगी तो वो मुझे निहाल कर देगी।
मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। मेरे जैसे बुद्धू को चोदना तक नहीं आता था …। वो फिर से एक बार मेरे ऊपर चढ़ गई … मेरे खड़े उफ़नते लण्ड पर वो अपनी सू सू घिसने लगी … उसकी सिसकी निकल पड़ी … फिर मेरा सुपाड़ा फ़क से चूत में उतर गया।
“आह रे कांची … ये सू सू इतनी चिकनी होती है … इसे ही चूत कहते हैं क्या?”
“आह्ह्ह्ह … बस चुप हो जा … बुद्धू … ये चूत ही है … सू सू नहीं …!” मेरे अधरों से अपने अधरों को रगड़ती हुई बोली।
उसकी आवाज में कसक भरी हुई थी।
वो अपने ही होठों को काटते हुये बड़ी सेक्सी लग रही थी। उसके सांवले रूप का जबरदस्त लावण्य किसी को भी पिघला सकता था।
उसका कोमल गुंदाज़ जिस्म मेरे बदन में जैसे आग लगा रहा था। उसकी कमर ने एक प्यार भरा हटका दे दिया और उसका बदन जैसे शोलों में घिर गया।
उसने एक लचीली लड़की की तरह अपना बदन ऊपर उठा लिया और चूत को मेरे लण्ड पर एक सुर में अन्दर बाहर करने लगी।
उसके मुख से सिसकियाँ निकलने लगी। मेरी सीत्कारें भी कुछ कम नहीं थी।
फिर से एक बार मेरी तड़प बढ़ने लगी। मेरे चूतड़ नीचे से उछल उछल कर उसके धक्के लगाने में सहायता कर रहे थे।
कांची की कमर तेजी से चलने लगी थी जैसे जन्मों की चुदासी हो … उसके होंठ फ़ड़क रहे थे … पसीने की बूंदें छलक आई थी चेहरे पर …
उसका चेहरा लाल हो गया था।
उसकी चूचियाँ दबाने से और मसलने से लाल हो गई थी … उसकी जुल्फ़ें जैसे मेरे चेहरे से उलझ रही थी … आंखें भींच कर बन्द कर रखी थी।
वो अपूर्व आनन्द के सागर में डूबी हुई थी।
अचानक जैसे वो चीख सी उठी- हाय मेरे भैया … मुझे समेट ले … कस ले बाहों में … मैं तो गई … माई रे … मेरे राजा … मेरे बालमा … मुझे जोर से प्यार कर ले … उईईई … ईईई इह्ह्ह!
मुझे यह सब समझ में नहीं आया पर उसके कहे अनुसार मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया।
वो सीत्कार भरती हुई मेरे लण्ड पर दबाव डालने लगी और फिर उसकी चूत में लहरें सी चलने लगी … जैसे मेरे लण्ड को कोई नरम सी चीज़ लिपट रही थी।
उसका पानी निकल चुका था।
तभी मेरा लण्ड भी नरम सी गुदगुदी नहीं सह पाया और एक बार और मेरा वीर्य छूट पड़ा।
मुझे लगा कि इस बार वीर्य कम ही निकला।
नीचे दबे हुये मैंने एक दीर्घ श्वास ली … और अपने ऊपर कांची के तड़पने आनन्द लेता रहा।
थकी हुई सी, उखड़ी हुई तेज सांसें, भारी सी अखियाँ, उलझी हुई जुल्फ़ें, चेहरे पर पसीने की बूंदें … चेहरे पर अजीब सी शान्ति भरी मुस्कान … लग रहा था कि बरसों बाद उसे दिली संतुष्टि मिली थी.
उसने अपनी नशे से भारी पलकें मेरी तरफ़ उठाई और अपने होंठों को मेरे होठों से रगड़ती हुई बोली- मेरे बालमा … साजना … तुम मुझे ही अपनी पत्नी बना लो, देखो अपनी उम्र भी बराबर है … हाय रे, मैं तो तुम्हारे बिना मर जाऊंगी!
“भाभी मजाक तो खूब कर लेती हो … पर यह तो बताओ अभी यह सू सू थी या चूत?”
“उह्ह्ह … तुम तो … अब मारुंगी … इस उम्र में मुझे बताना पड़ेगा कि सू सू और चूत में क्या फ़र्क है …? जाओ हम नहीं बोलते।”
“पर घुसा तो मुत्ती में ही था ना … ?”
“ओ हो … अब ये कुर्सी तुम्हारे सर पर दे मारूंगी … बुद्धू, बेवकूफ़, हाय रे मोरा नादान बालमा …!!” उसकी खिलखिलाती, ठसके भरी जोर की हंसी मुझे सोचने पर नमजबूर कर रही थी कि मैंने ऐसा क्या कह दिया है … ?
मेरी प्यारी और अनुभवी पाठिकाओ, यदि आपको ऐसा बालमा मिल जाये तो आपको कैसा लगेगा? Hindi Porn Stories
मैं लक्ष्य हूँ दिल्ली से ! आई ऍम Sex Stories अ काल बॉय. मैं फ़िर आपको अपना नया अनुभव सुनाने आया हूं।
मेरी पिछली कहानी पढने के बाद कई लोगों ने मुझे ई-मेल भेजे, जिनमें एक दिल्ली की ही एक लड़की का था। उसने अपना फ़ोन नम्बर दिया हुआ था। मैंने उसे फ़ोन किया ओर बताया तो उसने कहा कि वो देहरादून की रहने वाली है और नोयडा में जोब करती है और लक्ष्मीनगर में रहती है।
तो मैंने उसे बताया कि मैं भी नजदीक ही मयूर विहार में रहता हूँ जब भी उसे सर्विस चाहिए तो मुझे मेल कर बुला सकती है तो उसने मुझे सन्डे को अपने फ्लैट पर आने के लिए कहा.
मैंने सन्डे को सुबह ११ बजे उसके फ्लैट के पास पहुँच कर फोन किया तो वो गेट पर मुझे लेने आ गई. फ़िर मैं उसके फ्लैट पर गया तो देखा कि वो २ रूम्स का फ्लैट था तब उसने बताया कि उसकी फ्रेंड्स भी उसके साथ रहती हैं और वो जॉब पर गई हुई हैं.
फ़िर हम दोनों बातें करने लगे तो उसने बताया कि उसने मेरी कहानी पढी, वो उसे अच्छी लगी और वो भी कोई साथी चाहती है गुप्त सेक्स के लिए. तो मैंने उसे आश्वस्त किया कि मेरा काम इसी पर निर्भर है कि बात छिपी रहे.
तभी वो उठी और बियर कि बोतल फ्रीज में से निकल लायी और बोली- मैंने कहानी में पढा था कि आपको पीने के बाद करना पसंद है. फ़िर हमने बियर पीनी शुरू की। धीरे -२ वो मेरे नजदीक आ गई और उसने मुझे गाल पर किस किया और मैंने भी कस कर गले लगा लिया और बेतहाशा किस उसके गले और लिप्स पर करने लगा. क्या रसभरे होंठ थे उसके. फ़िर मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी, उसने मेरी शर्ट. हम एक -दूसरे को किस करते रहे और नंगे होते रहे.
फ़िर मैं उसे गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया. तब मैंने गौर से उसे देखा क्या सुंदर साइज़ था उसका ३४ -२८ -३२. मैं उसके बूब्स को चूसने लगा उसके मुंह से आवाजें निकल रही थी- आ आ आया आ अ -औ ऊ ओऊ ओह ह्ह्ह हह जोर से —ओ ऊ ऊह ह्ह्छ हह उसके हाथ मेरे बालों और मेरी कमर पर घूम रहे थे. फ़िर वो उठ कर नीचे बैठ गई और मेरे ७ इंच के मोटे लंड को किस करने लगी, फ़िर धीरे से उसे अपने नरम होठों में दबाकर चूसने लगी। मैं तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रहा था.
तभी मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाल कर अन्दर बाहर करना शुरू किया तो वो बोली धीरे करो दर्द हो रहा है, यह मेरा पहली बार है. काफी देर फोरप्ले के बाद जब मैंने देखा कि वो भी उत्तेजित हो गई है तो मैंने उसकी टाँगें फैलाकर अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और एक झटका दिया तो वो रोने लगी कि दर्द हो रहा है तो मैंने उसे क्रीम लेन के लिए कहा वो क्रीम लेकर आई और मेरे लंड और अपनी चूत पर लगाई, फ़िर मैंने झटका दिया तो मेरा लंड ३ इंच अन्दर चला गया वो चिल्लाई ईई आया आ आ आह हह माँ आया आया अ आ आ मर गई ई ई
पर मैं लगातार धक्के लगाता रहा थोड़ी देर बाद दर्द कम होने पर वो कमर हिलाकर सहयोग देने लगी. फ़िर मैंने उसे कुतिया स्टाइल में चोदना शुरू किया करीब २५ मिनट उसे चोदने के बाद जिसमे वो ३ बार डिसचार्ज हो चुकी थी. मैंने उसे कहा कि मैं डिसचार्ज होने वाला हूँ तो उसने कहा कि अन्दर मत करो। तो जैसे ही मैंने लंड बाहर निकाला तो उसने अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी तभी मेरे लंड ने बारिश शुरू की और ६ -७ तेज़ धार सीधे उसके मुंह में उडेल दी.
वो भी थक कर वहीँ बेड पर लेट गई. ½ घंटे के बाद मैंने कपड़े पहने और जाने लगा तो उसने मुझे मेरी फीस के ३००० रुपए दिए और किस करके कहा कि मैं जल्दी ही तुम्हे अपनी फ्रेंड्स की सर्विस के लिए भी बुलाऊंगी. Sex Stories
दोस्तो, मेरा नाम लक्ष्य है Antarvasna और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी आयु 29 साल की है, कद 5’8″, देखने में अच्छा, एक शरीफ़ आदमी की तरह, वैसे मैं शरीफ़ आदमी ही हूँ।
बात कुछ महीने पहले की है।
एक दिन मैं नेट पर चैटिंग कर रहा था। तब मैंने देखा कि एक मैसेज कॉमन रूम में फ्लेश हुआ कि हम मैन और वूमन के लिए सर्विस देते हैं। और एक मोबाइल नंबर भी फ्लेश हुआ। मैंने नंबर नोट कर लिया फिर अगले दिन कॉल किया तो उस लड़के ने मिलने को कहा।
हमने कनॉट-प्लेस में मीटिंग की। उसने कुछ फीस ली और कहा कि सप्ताह में एक लेडी मिलेगी और आपकी फीस भी वही कस्टमर देगी।
मैं राजी हो गया।
एक हफ्ते बाद उसने मुझे कॉल करके बताया कि आपको ग्रेटर कैलाश में जाना है।
दोस्तो! यह मेरा पहला कॉल-बॉय का काम था।
मैं बताये हुए पते पर पहुँच गया। मैंने वहाँ पहुँच कर घर की बैल बजाई तो 33-34 साल की सुन्दरी ने दरवाजा खोला। मैं देख कर हैरान हो गया कि क्या सुन्दर थी वो!
मैंने उसे रेफेरेंस दिया तो उसने बुलाया और मीठी मीठी मुस्कान देने लगी। मेरा 8.5″ लम्बा और 3″ मोटा लण्ड कूदने लगा। मैं भी खुश था कि मैं एक परी की चूत मारूंगा। मैं अन्दर गया और सोफे पर बैठ गया। वो पानी लेकर आई, मैंने पानी पिया, कुछ बातें करने लगे। कुछ मिनटों के बाद वो मुझे अपने बेड-रूम में ले गई और मुझ से ऐसे लिपट गई मानों सालों की प्यासी हो।
मैंने उसके लिप्स पर जोर की किस ली और उसने भी मेरा साथ दिया। 10-12 मिनट के बाद मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोल कर उसमें हाथ डाल दिया और उसकी मुलायम चूत पर हाथ फेरा। वो गरम होती जा रही थी और इन्तजार मुझ से भी नहीं हो रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गए।
उसके मम्मे बहुत शानदार थे। मैंने उन्हें पीना शुरू कर दिया। कुछ मिनट के बाद मैं धीरे धीरे उसकी चूत तक आ गया और उसकी प्यारी सी चूत को चाटने लगा। मुझे चूत चाटना बहुत ही अच्छा लगता है। मैं 10 मिनट तक चाटता रहा। इसी बीच उसका पाना निकल गया और थोड़ा शांत हो गई। फिर मैंने उसके मुंह में अपना लम्बा मोटा लण्ड दिया तो वो एक भूखी शेरनी की तरह चाटने लगी और जोर जोर से आवाज निकालने लगी।
मेरा हथियार तो तैयार ही था, मैंने एक बार फिर उसकी चूत चाटनी शुरू की, वो फिर से गरम हो गई और कहने लगी- अब नहीं रुका जाता है, अब मुझे चोद दो!
मैं फिर उसकी टांगों के बीच में आ कर बैठ गया और अपना मोटा और लम्बा लंड उसक चूत के छेद पर रख दिया, फिर एक जोरदार झटका दिया तो आधा लण्ड उसकी चूत में था।
वो चिल्लाई और बोली- धीरे से करो!
मैंने कहा ‘तुम्हरी चूत तो पहले से ही खुली है, तो दर्द क्यों?
वो बोली- मैं अपने पति से 1 साल से दूर रह रही हूँ, किसी और से करवाया नहीं है, इसलिए दर्द हो रहा है!’
मैंने 1 मिनट के बाद एक झटका और दिया तो पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समां गया। फिर मैंने आगे पीछे करना शुरू किया। अब उसको भी मजा आने लगा था। अब तो वो अपनी गांड को उठा उठा कर हिलाने लगी। 10-15 मिनट तक करने तक वो दुबारा झड़ चुकी थी और मेरा भी आने वाला था लेकिन मैं लालची हो गया था कि थोड़ी देर और रुक कर झाड़ूँगा क्योंकि वो चूत ही इतनी प्यारी थी कि निकालने का मन ही नहीं कर रहा था।
4-5 मिनट करने के बाद मैं आने वाला था तो मैंने अपना लण्ड निकल कर उसके मुँह में दे दिया, साली पूरा रस गट गट पी गई और कहने लगी- आज बहुत दिनों के बाद मुझे स्वर्ग का मजा आया है!
फिर हम दोनों बाथ रूम में गए और वहाँ जाकर नहाने लगे। हम दोनों फिर से चिपट गए। मेरा हथियार तो फिर से खड़ा हो गया।
मैंने कहा- एक बार और हो जाए?
उसने हाँ कर दी। फिर मैंने उसे कुतिया के स्टाइल में चोदा। दो बार तो मैंने उसकी गांड में डाला लेकिन उसे दर्द हो रहा था तो फिर मैंने उसकी चूत में झाड़ दिया।
फिर हम नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए, कपड़े पहन कर मैंने चलने को कहा तो उसने मुझे 5000 रुपये दिए और एक प्यारी सी किस दी और कहा- दोबारा बुलाने के लिए अपना नम्बर दे जाओ!
मैंने उसे अपना मोबाइल नम्बर दे दिया और अपने घर वापिस आ गया।
दोस्तो! यह मेरी कहानी थी!
आप सभी को कैसे लगी, बताना!
लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को मेरे लम्बे लंड का नमस्कार!
आप सभी को चोदना और चुदवाना मुबारक हो! चोदते रहो और चुदवाते रहो और खुश रहो!
मुझे मेल कर सकते हो- Antarvasna
मैं गुप्ता बहुत समय से Sex Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ. कई बार सोचा कि अपने जीवन की घटनाओं के बारे में लिखूँ. पर पता नहीं हिम्मत नहीं हो रही थी. आज जब एक बार फिर से मैं अन्तर्वासना की साईट पर गया तो फ़ैसला किया कि एक बार तो अपना अनुभव मैं भी लिखूँ.
मैं आज चालीस साल का हूँ पर सेक्स का खुमार तो अभी भी बहुत है. एक तो वैसे ही मेरा जॉब घूमने वाला है और मैं भारत में घूमता रहता हूँ और हफ्ते में केवल दो तीन दिन के लिए ही घर जा पाता हूँ इसलिए जब घर जाता हूँ तो मेरी बीबी तो थक ही जाती है.
अब मैं अपनी पहली चुदाई के बारे में बताता हूँ.
उस समय मैं 18 साल का था, मेरी दूर की नज़र थोड़ी कमजोर थी. उस समय दिल्ली में एक डॉक्टर आया जो इलाज से चश्मा उतरवा देता था. बस मैं भी उसके पास पहुच गया. वहाँ पर एक हफ्ते तक रहना था. मेरे साथ वाले पलंग पर एक छोटी लड़की भी इलाज़ करवा रही थी. मेरे चश्मे का नंबर तो केवल -1 था पर उसका नंबर उस समय -3.5 था. उसके साथ उसकी मम्मी रहती थी.
यह दूसरी रात की बात है, जब सब सो रहे थे कि अचानक मुझे अपने पैर पर किसी का हाथ महसूस हुआ. मैंने धीरे से आँख खोल कर देखा तो पता चला कि लड़की की माँ जो मेरे पैरों की तरफ मुँह करके सो रही थी वो मेरे पैरों को सहला रही थी.
मैं कुछ नहीं बोला, चुपचाप सोने का बहाना करता रहा. हम दोनों के पलंग में केवल 6′ का फासला था. थोड़ी देर में उसने मेरा पैर पकड़ कर अपने पास खींच लिया और अपने सीने पर दबा दबा कर रगड़ने लगी. अब मेरा लंड भी खड़ा हो गया लेकिन मैं फिर भी आराम से लेटा रहा क्योंकि यह मेरा पहला मौका था इसलिए मेरी गांड फट रही थी.
पर थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपने पैर के अंगूठे से उसके मोमों को रगड़ना शुरु कर दिया. इतने में अचानक उसने अपना ब्लाऊज़ ऊपर करके अपने मोमे बाहर निकाल लिए. उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी. इस अचानक हुए परिवर्तन ने मेरी हवा निकाल दी. मुझे डर लग रहा था कि अगर कोई आ गया या कोई उठ गया तो क्या होगा!
पर वो आराम से मेरे पैर से अपने मम्मे मलवा रही थी.
धीरे धीरे मेरे हिम्मत भी बढ़ गई और मैं थोड़ा नीचे को सरक गया और पूरा जोर लगा कर अपने पैरों से उसके स्तन मलने लगा. उसने धीरे से अपना हाथ आगे करके मेरे लंड को पकड़ लिया और जोर से मलने लगी. मेरी तो जैसे जान ही निकल गई. फिर मैंने अपनी साइड बदल कर उसकी तरफ मुँह कर लिया और उसके मोमे जोर जोर से दबाने लगा. उसके मोमे बहुत ही नर्म-मुलायम थे. फिर धीरे से मैंने आगे को झुक कर उसके चुचूक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा. मैंने इतनी जोर से चूसा कि उसकी आह निकल गई. मैंने पहली बार किसी के मोमे चूसे थे इसलिए मैं तो पागल हुआ जा रहा था.
फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं चूसने के साथ साथ उसके मोम्मों को कस कस कर दबाने लगा.
वो बोलने लगी- और दबा जोर जोर से!
दस मिनट तक हम ऐसे ही मजे लेते रहे. वो मेरा लंड दबा रही थी और मैं उसके मोमे चूस रहा था और दबा रहा था. लेकिन जगह कम होने की वजह से हम और कुछ नहीं कर सकते थे. फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी चूत में उंगली डाल दी और जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा और वो मस्ती में मेरे लंड को रगड़ने लगी. कुछ देर बाद हम दोनों का माल निकल गया.
कुछ देर तो हम दोनों आराम से लेटे रहे, फिर वो बोली- मजा आया?
मैंने कहा- बहुत मजा आया!
तो वो बोली- कभी किसी को चोदा है?
मैंने कहा- नहीं!
तो वो बोली- कभी मेरे घर आना, तो बहुत मजे दूँगी और तुम्हें चोदना भी सिखा दूँगी.
अगले दिन जब मैं, वो उसकी बेटी सब एक साथ बैठे थे, तो उसने सेब निकाले और सब को काट कर खिलाने लगी. बाद में जब सब अपने पलंग पर चले गये तो मैंने उससे कहा- ये क्या छोटे छोटे सेब खिला रही हो!
तो वो बोली- अगर बड़े सेब खाने हैं तो घर आना पड़ेगा! फिर तुम्हें असली मुलायम और बड़े सेब खिलाऊँगी.
मैंने कहा- फिर तो पक्का तुम्हारे घर आना ही पड़ेगा.
उसने अपना पता और फोन नम्बर मुझे दे दिया. फिर कुछ दिनों के बाद हम अस्पताल से अपने अपने घर चले गये.
एक दिन मैंने सोचा कि चलो देखे कि वो कितना सच बोल रही थी और मैंने उसे फोन किया तो उसने मुझे अपने घर पर आने के लिये बोला.
वो बोली- सुबह 11 बजे मेरे पति काम पर चले जाते हैं, फिर घर पर अकेली हूंगी.
अगले दिन मैं ठीक 11 बजे उसके घर पर पहुँच गया. मैंने उसके घर की घन्टी बजाई तो उसने ही दरवाजा खोला. उस समय उसने गाउन पहाना हुआ था. मुझे देखते ही वो बहुत खुश हुई और जोर से बोली- वेलकम.
मेरी तो गान्ड फट रही थी, क्योंकि यह मेरी पहली बार थी. खैर मैं उसके घर के अन्दर चला गया. जैसे ही मैं अन्दर गया उसने दरवाजा बन्द कर दिया.क्योंकि मैं डर रहा था इसलिये पहले मैंने पूरे घर का एक चक्कर लगाया यह कह कर कि पहले तुम्हारा घर तो देख लूँ. फिर जैसे ही मैं उसके बेडरूम में पहुँचा, उसने कहा- देख लिया! घर पर कोई नहीं है.
मैं कुछ नहीं बोला, बस उसकी तरफ देख कर मुस्करा दिया. तो वो हंसने लगी और मुझे पकड़ कर एक जोरदार पप्पी कर दी.
बस फिर क्या था, मैंने भी उसे कस कर पकड़ लिया और चूमने लगा. उसने एक दम से मुझे पलंग पर गिरा दिया, मेरे ऊपर लेट गई और कहने लगी- तुझे बड़े बड़े सेब खाने थे ना? ले आज जी भर कर खा ले!
और उसने अपना गाउन नीचे को करके अपना एक मोमा मेरे मुँह में दे दिया जिसे मैं कस कर चूसने लगा. वो जोर जोर से आह आह करने लगी. उसकी आह सुन कर मेरा लन्ड जोर जोर से फड़कने लगा. मैंने एकदम से पल्टी ली और उसको नीचे दबा लिया और एक हाथ से उसके एक मोमे को कस कर दबाने लगा और दूसरे को चूसते हुए नीचे कपड़ों के ऊपर से ही लन्ड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा.
वो भी एकदम गरम हो गई और उसने मेरे सारे कपड़े एक मिनट में उतार दिये और अपना गाउन भी उतार दिया. जैसे ही उसने अपना गाउन उतारा, मेरी तो हालत ही खराब हो गई क्योंकि मैं पहली बार किसी औरत को एकदम नंगा देख रहा था. मेरा लन्ड फटने को तैयार था. इतने में ही उसने मेरे लन्ड को पकड़ कर दबा दिया. मेरी हालत बिल्कुल पागलों वाली हो रही थी.
उसने मुझे पलंग पर गिरा दिया और एकदम से मेरे लन्ड पर बैठ गई और पूरा का पूरा लन्ड अन्दर ले लिया.
लन्ड अन्दर जाते ही क्या सकून मिला… बता पाना बहुत मुशकिल है! पहली बार मेरा लन्ड किसी चूत में गया था. मैं तो बस स्वर्ग में पहुँच गया था और मेरे साथ साथ उसे भी शायद मजा आया. मैं नहीं जानता था कि ऐसा मजा भी होता है! मैं तो बस उड़ रहा था और यह शायद उसे भी समझ आ रहा था इसलिये वो बस आराम से बैठी थी.
फिर एक मिनट के बाद वो बोली- क्या हुआ रा…जा? यह तो बस शुरुआत है!
अब तक मैं भी अपने होश में वापस आ चुका था. मैंने कहा- चिन्ता मत करो और शुरु हो जाओ.
बस फिर क्या था, उसने ऊपर से धक्के लगाने शुरु कर दिये. मैं तो बस मजे से लेटे लेटे मजे ले रहा था, कि वो एकदम से बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लन्ड पर कस लिया.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोली- मैं तो गई!
इस पर मैंने कहा- अभी तो शुरुआत है!
तो वो हंसने लगी और बोली- अब तू धक्के लगा!
फिर क्या था, मैंने पल्टी लगाई और उसको नीचे दबा लिया. अब तक मैं भी समझ चुका था कि चुदाई कैसे होती है.
बस सबसे पहले तो उसके मोटे मोटे मोमों को दबाने लगा फिर एक एक को मुँह में ले कर बारी बारी से चूसने लगा. वो भी फिर से मस्ती में आने लगी और कहने लगी- बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूस… काट कर खा जा बस!
मैंने उसके कहने के साथ ही उसके निप्प्ल को हल्के से काट लिया. वो आ…ह कर उठी और बोली- चू…स खा…ली कर दे! काट! सेब क्या इतने आराम से काटते हैं?
यह सुन कर मुझे भी जोश चढ़ गया और मैं जोर जोर से उसके मोमों को चूसने और काटने लगा. इधर मेरे लन्ड की हालत खराब हो रही थी. तभी वो बोली- अपना लन्ड भी घुसा दे और फाड़ दे मेरी चूत!
बस फिर मैंने एकदम से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया और धक्के लगाने लगा. अभी दस मिनट ही हुए थे, कि वो बोली- तेज और तेज!
मैंने जोरदार धक्के लगाने शुरु कर दिये. तेज और तेज कहते कहते उसने मेरा सर अपने मोमों पर जोर से दबा दिया और अपनी टाँगें मेरी कमर पर कस ली और नीचे से उछल उछल कर धक्के लगाने लगी.
इस जोरदार चुदाई से 5 मिनट में हम दोनों स्खलित हो गये और मैं उसके ऊपर लेट गया. हम दोनों अपनी सांसों को सम्भाल कर कुछ देर बाद उठे तब तक बारह बज चुके थे.
वो बोली- अब मेरी बेटी स्कूल से आने वाली है इसलिए फिर कभी!
हम उठ गये और अपने कपड़े पहनने लगे तो वो बोली- मजा आ गया! मेरा पति तो बस 20-25 धक्कों में ही झड़ जाता है. फिर कब मिलोगे?
मैंने कहा- तुमने मुझे पहला सेक्स अनुभव कराया है! तुम जब बोलोगी, मैं हाजिर हो जाऊँगा.
अब तक हम अपने कपड़े पहन चुके थे और वो बाहर जाने के लिये तैयार थी. ज़ब हम गेट के पास पहुँचे तो उसने फिर से मुझे पकड़ लिया और एक प्यारी सी पप्पी दी और बोली- अगली बार और मजे करेंगे.
उसके बाद हम और भी कई बार मिले और सेक्स किया. अगर वक्त मिला तो बाकी के किस्से भी लिख़ूंगा. Sex Stories
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