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Massage Girl in Yanam: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Yanam who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Whats New

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Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Yanam that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Yanam massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Yanam who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Yanam massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Yanam massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Yanam who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Yanam employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Yanam helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Yanam

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Yanam at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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प्रेषक : अमित Antarvasna

पिछले भाग की कुछ Antarvasna अन्तिम पंक्तियाँ : लल्लू लाल कहाँ रुकने वाले थे, 5 मिनट बाद उन्होंने अपने पूरा चिकना लण्ड बहू की चूत में पेल ही दिया, अब सिर्फ़ आँड बाहर रह गये। जैसे ही सुषमा का दर्द थोड़ा कम हुआ और वो सामान्य हुई, उन्होने लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। लल्लू लाल बहू की चूत के खून से रंगा लण्ड अंदर-बाहर करते रहे, सुषमा की चीखे सुनाई देती रहीं।

बेटा तू बापू की गाण्ड चाट ! मैं आँड चाटती हूँ, नहीं तो ये बहू को चोद चोद कर मार डालेंगे ! रुक्मणि बोली।

सुषमा ने देखा कि उसका पति उसके ससुर की गाण्ड चाट रहा था और सास ससुर के मोटे काले अंडकोष चाट रही थी। लल्लू लाल जी उत्तेजना के शिखर पर थे- बहू, भर दूँ तुम्हारी कुँवारी चूत अपने ताक़तवर वीर्य से? उन्होने पूछा।

सुषमा ने कुछ बोलना चाहा ही था कि वो गर्र-गर्र करते हुए झड़ गये।

ओह ! ओह ! आपने तो कोई आधा कप पानी बहू की चूत में छोड़ दिया है, बच्चा होकर रहेगा ! रुक्मणि बोली।

अब आगे :

ससुर जी ऊपर से हट कर बिस्तर के कोने पर बैठ गये और सुषमा को सहलाने लगे। उधर सुरेश नीचे जाकर रुक्मणि की चूत चाट रहा था।

चाट मेरे लाल, चाट ! मेरे बेटे तेरी जीभ तो लण्ड से भी ज़्यादा मज़ा देती है ! रुक्मणि बोल रही थी। उधर लल्लू लाल जी भी नीचे पहुँच गये, उन्होंने सुरेश की गाण्ड में तेल लगा कर उसको उंगली से चोदना शुरू कर दिया।

हाँ बापू ! फ़ाड़ो मेरी गाण्ड ! सुरेश गाण्ड नचाते हुए बोल रहा था।

ससुर ने सुषमा को नीचे खींचा और उसका मुँह से अपने लण्ड को अड़ा दिया- इसको चूस चूस कर बड़ा कर बहूरानी ! ताकि मैं तेरे पति की सेवा कर सकूँ ! उन्होने कहा।

सुषमा ने उनके मोटे काले लण्ड को कस के पकड़ा और जीभ फेरने लगी। धीरे धीरे लल्लू लाल जी का सुपारा चीकू जितना बड़ा हो गया और लण्ड एकदम हथोड़े जैसा !

ससुरजी ने बहू को धन्यवाद दिया और वापस से सुरेश की गाण्ड पर अपना हथियार तान दिया। किसी मंजे हुए खिलाड़ी की तरह सुरेश ने गाण्ड को हिलाया और एक ही झटके में लल्लू लाल जी का आधा लण्ड उसकी गाण्ड में चला गया।

सुरेश ज़ोर से चीखा- मर गया बापू ! अभी पूरा कहाँ मरा है? अभी तो आधा ही मारा है ! लल्लू लाल जी बोले और पूरा लण्ड पेल दिया। सुषमा सोचने लगी कि सुरेश की गाण्ड क्या उतनी बड़ी है?

उधर सुरेश अपनी माँ की चूत चाटे जा रहा था।

रुक्मणि उछल रही थी- बेटा। मैं झड़ने वाली हूँ, पूरी जीभ डाल दे अपनी माँ के भोसड़े में ! वो बोली।

और दो मिनट में हांफ़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया। उधर लल्लू लाल जी की रफ़्तार बढ़ गई थी।

रुक्मणि पीछे आ गई, मेरे बेटे की गाण्ड फाड़ दोगे क्या ? अब रहम करो ! वो बोली और सुरेश के नीचे लेट गई। सुषमा ने देखा कि रुक्मणि सुरेश की लुल्ली को चूस रही थी और अपने हाथों से ससुरजी के बड़े बड़े अण्डकोषों को मसल रही थी।

अब अपने बेटे की गाण्ड अपने पानी से भर दो ! रुक्मणि बोली। यह सुनते ही लल्लू लाल जी तेज़ हो गये और बोले- हाँ जान। ये ले तेरे बेटे की गाण्ड में अपना पानी डालता हूँ ! कहकर वो झड़ गये। सुषमा थक कर सो गई।

सुषमा को पता चल गया था कि उसके ससुर उसकी सास को तो माँ नही बना सके मगर ये कसर अब उसके साथ ज़रूर पूरी करेंगे।

सुबह जब उसकी आँख खुली तो ससुर और पति दोनों काम पर जा चुके थे मगर सास नहीं गई थी।

रुक्मणि बोली- आज तेरी सेवा करूँगी बहू !

खून से भरी चादर धुल गई थी और रुक्मणि ने सुषमा से कहा- नहाने से पहले मैं तेरी तेल मालिश करूँगी।

रुक्मणि ने सुषमा के पूरे कपड़े खोल दिए और उसके पूरे बदन पर मालिश करने लगी। फिर उसने रेज़र लेकर सुषमा की झांट साफ की और बोली- बेटा यहाँ हमेशा सफाई रखनी चाहिए। मैं, तुम्हारे ससुर और सुरेश के झांट भी साफ करती हूँ हमेशा !

सफाई के बाद रुक्मणि ने तेल लेकर उसकी चूत पेर लगाया और उंगली से सुषमा की चूत चोदने लगी।

बेटी, इससे तेरा छेद बड़ा हो जाएगा ताकि आज रात तू आसानी से ससुर का लण्ड ले सके ! वो बोली।

उंगली की चुदाई में सुषमा को बहुत मज़ा आ रहा था और वो सास के साथ साथ अपनी गाण्ड हिलाने लगी। कोई पाँच मिनट बाद सास की तीन उंगलियाँ अंदर थी और सुषमा झड़ गई। उसे पहली बार चरमसुख मिला था। सास उसको रात के लिए तैयार कर रही थी।

रात होते ही सुषमा वापस ससुर के कमरे में गई। ससुरजी वैसे ही नंगे लेटे हुए थे, पास जाते ही उन्होंने सुषमा को अपने पास खींच लिया और चूमने लगे। एक ही पल में उन्होंने सुषमा को नंगा कर दिया और उसकी चूत चाटने लगे। कोई पाँच मिनट बाद सुषमा अपने ससुर की जीभ पर झड़ गई। उधर सुरेश अपने पिता का लण्ड कुत्तों की तरह चाट रहा था। सुषमा के झड़ते ही लल्लू लाल जी ने अपना लण्ड उसकी चूत से भिड़ाया और एक ही शॉट में भीतर पेल दिया। सुषमा चीखी मगर उसे आनंद भी आया। अब ससुरजी धीरे-धीरे लण्ड अंदर-बाहर करने लगे। उसको अच्छा लग रहा था, उसने अपने हाथों से ससुरजी की गाण्ड कस कर पकड़ ली और उन्हें अपने ऊपर दबाने लगी।

लल्लू लाल जी ने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से सुषमा को चोदने लगे। उधर सुरेश अपने पिताजी के अमरूद समान आण्डों को तेल लगा कर मसल रहा था और कह रहा था- बापू इन आण्डों का पूरा रस डाल दो इस रांड की चूत में, ताकि इसको आपका बच्चा हो !

हाँ बेटा, पूरा वीर्य खाली कर दूँगा ! लल्लू लाल जी बोले और एक चीख के साथ वो झड़ गये। सुषमा का भी पानी निकल गया। सुषमा को पहली बार चुदाई का मज़ा आया था।

अगले दिन रुक्मणि बोली- बेटी, हालाँकि तेरे ससुर का लण्ड शानदार है लेकिन तू मुझे कहेगी कि मैंने तुझे जवान लण्ड का मज़ा नहीं दिया, इसलिए आज एक जवान लण्ड के लिए तैयार रहना ! वो आँख मारते हुए बोली।

सुषमा कुछ समझती उससे पहले यासीन वहाँ आ गया। यह वही लड़का था जिसको उसने अपने पति सुरेश की गाण्ड मारते हुए देखा था। सुरेश उसको कमरे में लाया और अंदर से बंद कर दिया। सुरेश ने एक मिनट में सुषमा के कपड़े उतार दिये और यासीन को नंगा कर उसका लण्ड चूसने लगा। सुषमा ने देखा कि यासीन का लण्ड भी बहुत बड़ा था हालाँकि वो उसके ससुर के लण्ड से छोटा था मगर मोटाई अच्छी थी और ससुर की तरह उसके लण्ड के आगे चमड़ी नहीं थी।

यासीन तुरंत सुषमा के पास आया और उसके 38 इंच के स्तन दबाने लगा। उधर सुरेश नीचे सुषमा की चूत और यासीन का लण्ड चाट रहा था। यासीन कामोत्तेजना में पागल हो रहा था और उसने झटके से अपने लण्ड का गुलाबी सुपारा सुषमा की चूत में पेल दिया। सुषमा के मुँह से हल्की सी चीख निकली। चीख सुनते ही यासीन ने पूरा सात इंच का लण्ड अंदर घुसा दिया सुषमा की साँस ऊपर चढ़ गई। सुरेश यासीन की गाण्ड चाट रहा था और यासीन गालियाँ बक रहा था- भेन की लौड़ी, आज तेरे हिजड़े पति के सामने तेरी चूत फाड़ दूँगा।

सुषमा को उसके मज़बूत झटको से आनंद आ रहा था। यासीन ज़्यादा देर तक चल नहीं पाया, दो मिनट में उसका फव्वारा सुषमा की चूत में छुट गया। मगर सुरेश कम नहीं था, उसने यासीन का गीला लण्ड बाहर निकाला और उसको चाटने और चूसने लगा। दो मिनट में यासीन फिर तैयार था, उसने सुषमा की गीली चूत में ही अपना लौड़ा पेल दिया।

चोदो मुझे ज़ोर से ! सुषमा बोली।

इस बार कोई 5 मिनट चोदने के बाद यासीन और सुषमा एक साथ झड़ गये। यासीन के जाने के बाद रुक्मणि अंदर आई और बोली- मैने ही इस लड़के को सुरेश की गाण्ड मारने की आदत डलवाई है। इसका चाचा और बाप दोनों मुझे चोद चुके हैं, रात को उन दोनों को बुलाऊंगी ! यह कह कर वो चली गई।

रात में सुषमा ने देखा कि दो बुड्ढे घर आए, दोनो साठ के आसपास होंगे। एक की दाढ़ी थी। उनकी उमर देख कर लग नहीं रहा था कि उनका लण्ड काम भी करता होगा। एक तो हाथ में लाठी लिए हुआ था।

कोई दस बजे रुक्मणि सुषमा को कमरे में ले गई।

बेटा ये यूसुफ चाचा हैं और ये अकरम चाचा ! दोनों तेरे ससुर के दोस्त हैं ! वो बोली।

दोनों आदमी एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। उधर रुक्मणि एकदम नंगी हो गई और सुषमा को भी नंगा कर दिया। यह देख कर लल्लू लाल जी भी नंगे हो गये। सुषमा ने देखा कि दोनों बुड्ढों के औज़ार लटके हुए थे और आंड नीचे झूल रहे थे। दोनों बुड्ढे रुक्मणि के आगे खड़े हो गये और रुक्मणि उनके लौड़े एक एक करके चूसने लगी।

भाभी लण्ड चूसने में तुम्हारा मुक़ाबला नहीं ! बुड्ढों को भी जवानी चढ़ जाए ! यह कह कर अकरम हंसे।

उधर लल्लू लाल जी ने सुषमा के मुँह में अपना मोटा सुपारा ठूंस दिया। सुषमा मज़े से चूसने लगी। सुषमा ने देखा कि कोई 5 मिनट की चूसाई के बाद दोनों बुड्ढों के लण्ड तन गये थे। उसने देखा कि एक बुड्ढे का लण्ड तो 6 इंच था मगर मोटाई उसकी कलाई जितनी थी, दूसरे का पतला था मगर लंबाई पूरी नौ इंच थी।

अब देखो तुम्हारे लण्ड तैयार हैं मेरी बहू की चुदाई की लिए ! रुक्मणि बोली।

सुषमा को लल्लू लाल जी ने बिस्तर पर लिटाया और उसके मुँह मे अपना लण्ड डाल दिया। उधर अकरम ने सुषमा की टाँगें चौड़ी की और अपना मोटा लण्ड भीतर डाल कर सुषमा को चुदाई के मज़े देने लगा। सुषमा को मज़ा आ रहा था। ससुर उसके मुँह की चुदाई कर रहे थे और अकरम चूत की।

उधर सुषमा ने देखा कि यूसुफ ने रुक्मणि को घोड़ी बनाया हुआ था। रुक्मणि जितनी बड़ी गाण्ड सुषमा ने ज़िंदगी में नहीं देखी थी। ऐसा लगता था कि जैसे दो बड़े बड़े मटके हों।

यूसुफ रुक्मणि की गाण्ड को उंगली से चोद रहा था, साथ ही थूक भी लगा रहा था।

सुषमा को अब समझ में आया कि उसकी सास पतले और लंबे लण्ड कहां लेती है।

भाभीजान, आपकी गाण्ड है या घड़ा? युसुफ बोले और अपने लण्ड को घुसाने लगे। रुक्मणि दर्द में चिल्ला रही थी- मेरी मटकी आज फोड़ ही दो ! यह कह कर वो अपनी गाण्ड हिलाने लगी। युसुफ धीरे-धीरे रुक्मणि को चोदने लगे। उधर अकरम ने रफ़्तार बढ़ा दी थी।

चाचा इतना जोर से नहीं ! सुषमा बोली।

लल्लू लाल जी ने अपना लण्ड सुषमा के मुँह से निकाला और युसुफ के पीछे पहुँच गये। दो चम्मच तेल उन्होंने युसुफ की गाण्ड में लगाया और एक ही झटके में अपने तगड़ा लण्ड यूसुफ की गाण्ड में पेल दिया। यूसुफ दोनों तरफ से मज़े ले रहा था।

भाभी मैं झड़ने वाला हूँ ! कह कर उन्होंने रुक्मणि की चूत अपने वीर्य से भर दी। उधर लल्लू लाल जी ने स्पीड बढ़ा दी थी और उन्होंने अपनी टंकी यूसुफ की गाण्ड में खाली कर दी।

इधर अकरम का पानी निकलने वाला था। सुषमा दो बार चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी और अकरम का गरम फव्वारा उसके अंदर छुट गया।

चुदाई के बाद दोनों बुड्ढे बोले- भाभी, एक बार बहू को हमारे घर लाओ !

रात भर वहाँ जम कर चुदाई चली। दो महीनों बाद सुषमा को उल्टियाँ आने लगी।

लल्लू लाल जी, रुक्मणि, सुरेश भी सभी खुश थे। Antarvasna

मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं.
पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.

दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं 2011 से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
मुझे अन्तर्वासना वेबसाइट के बारे में मेरी सहेली ने बताया था, तभी से मैं यहां पर कहानिया पढ़ती आई हूँ.

यह 2013 की बात है.
मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.

शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था.
बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.

इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.

कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे.
क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.

मेरी क्लास में ही संजय भी था.
वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था.
मेरी दोस्ती संजय से थी.
हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.

संजय और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे.
हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.

छवि भी इस बात को जानती थी.
उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.

इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था.
हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.

मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.

संजय देखने में अच्छा लड़का था.
उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे.
उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी.
उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.

उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स संजय के बर्थडे पर उसके घर गए थे.

संजय के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं.
पर संजय ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था.
वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.

संजय और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे.
धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.

वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता.
मैं भी उसे मना नहीं करती थी.

उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया.
मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी.
ऐसे ही समय गुजरता रहा.

कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.

उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.

वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.

फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी.
मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.

संजय चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.

बस इसी तरह चल रहा था.

संजय सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था.
पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.

कुछ दिन बाद संजय ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.

मैं भी फटाफट तैयार हो गयी.
वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.

मैं छवि को बोल कर आई थी कि संजय के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.

मैंने संजय से पूछा- कहां चलना है?
तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं.
मैं राजी हो गई.

वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे.
उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.

तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे.
हम भी वहीं चले गए.

संजय ने कहा- क्या विचार है?
मैंने कहा- मैं नहीं आती.

वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया.
और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.

वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.

थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.

भीड़ कम होती गयी.

संजय ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं.
मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?

पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए.
वहां कोई नहीं दिख रहा था.

थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा.
वो दोनों कपड़े पहन रहे थे.
उन्होंने हमें नहीं देखा.

फिर संजय ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.

मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है.
पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.

वहां जाने के बाद संजय मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है.
मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं!
उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.

इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया.
उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी.
मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.

मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.

संजय की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी.
वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.

उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी.
उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.

उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था.
बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.

वह मुझे चूमने लगा.

करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है.
उसने कहा- ठीक है.

तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा.
फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.

उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे!
उसने कहा- ठीक है.

उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी.
वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.

मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा.
तो संजय बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.

मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा.
फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.

वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.

मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती.
उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.

फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.

उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी?
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.

मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.

अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.

संजय ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.

मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.
मुझे स्वाद ठीक लगा.

उसने अपने कपड़े पहन लिए.
तो मैंने कहा- अब चलते हैं.

उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं.
मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.

उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है.
मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी.
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.

उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा.
वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.

मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे.
तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.

फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है.
मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.

पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी.
चूत में हल्के हल्के बाल थे.

वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.

मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.

उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी.
मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.

उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो.
वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.

उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी.
वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.

इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और संजय ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.

फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.

अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय संजय ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है.
मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी.
होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.

संजय अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया.
बस फिर जुगाड़ हो गया.

मैंने संजय से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी.
उसने कहा- ठीक है अनु.

उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया.
फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.

दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना.
वह किसी काम से बाहर चला गया.

संजय ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया.
पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.

ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया.
मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.

उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए.
उसका लंड खड़ा होने लगा था.

वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.

फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.

वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.

मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.

मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.

उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.

वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता.
इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.

मैं भी उसके लंड को चूस रही थी.
मेरी चूत गीली हो चुकी थी.

वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.

मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और संजय के लंड को पहना दिया.

बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा.
जिससे मैं पागल सी हो गयी.

फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.

मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.

उसने कहा- अनु रेडी!
मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.

उसने झटके से लंड अन्दर किया.
वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.

उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला.
इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.

उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा.
मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.

उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!

फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.

वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा.
कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.

वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.

कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.

मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था.
मेरी चूत फट चुकी थी.

तभी संजय आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.

मैं बाथरूम में गयी.
जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा संजय मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था.
मैंने कहा- लाओ दो इधर.

उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी.
मैंने कहा- फिर मैं!
उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.

मैंने अपने कपड़े पहन लिए.
संजय बोला- अनु मजा आया?

मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है.
उसने कहा- ठीक हो जाओगी.

मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम?
संजय ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ?
तो मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो.
मैंने कहा- घर?

उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.

उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.

हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं.
उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.

वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं.
क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.

प्रेषक : रवि गुप्ता Sex Stories

मेरा नाम राहुल, मेरी Sex Stories उम्र 24 है। मैं एक सरकारी नौकरी करता हूँ। मेरी पत्नी का नाम सुनयना है। उसकी उम्र भी 23 साल है। वह एक निजी कम्पनी में काम करती है। उसने एम बी ए कर रखी है। वो बहुत सुन्दर है। उसकी फ़िगर 32-28-32 और उसका कद 5’4″ है। उसके चुची गोल गोल और गोरी गोरी है। हमारी लव मैरिज हुई थी। पर हम दोनों काम के कारण दूर-दूर रहते हैं। उसे मुझसे चुदना बहुत पसन्द है। जब भी हम मिलते हैं तो वो रात भर चुदती है। मैं कई बार झड़ ज़ाता हूँ पर वो एक बार भी नहीं झड़ती। वो काफी गरम है।

यह उस समय की बात है जब मैं उससे मिलने गया। उसके फ़्लैट की एक चाबी मेरे पास रहती है। मैं घर के अन्दर चला गया। सुनयना वहां नहीं थी। मैं उसे सरप्राइज़ देना चाहता था। पर मुझे क्या पता था मुझे सरप्राइज़ मिलेगा।

वहाँ पर मैंने जो देखा उसे देख कर मैं दंग रह गया। वहाँ पर शराब की बोतलें थी हर जगह। जब मैंने उसकी अलमारी खोली तो वहाँ ब्लू फ़िल्म की सीडी और काफ़ी कन्डोम थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब सामान यहाँ क्यों है।

मैं सुनयना पर बड़ा विश्वास करता था। पर मुझे गड़बड़ लगी। मैं सुनयना का इन्तज़ार करने लगा। तभी बाहर गाड़ी की आवाज सुनाई दी। मैंने सोचा कि सुनयना आ गई। जब मैंने शीशे से बाहर देखा तो मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। उसके साथ काई आदमी था, 45 साल का होगा। मैं तुरंत परदे के पीछे छिप गया। तभी दोनों अन्दर आ गये।

सुनयना ने सफ़ेद रंग की कमीज़ और काले रंग की स्कर्ट पहनी थी। उसके बाल खुले थे। सुनयना और उसका बॉस दोनों बातें करने लगे। सुनयना 4 गिलास और शराब की बोतल ले आई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करुँ। मैं सोचने लगा कि सुनयना ऐसा कैसे कर सकती है। सुनयना ने 4 ग्लास ड्रिन्क बना दिये। तभी बेल बजी, सुनयना ने दरवाज़ा खोला तो दो और आदमी अन्दर आ अये। सभी उसके बॉस लग रहे थे। एक ने अन्दर आते ही उसे चूम लिया और उसे उठा के ले आया। सभी ने ड्रिन्क उठा ली। उस समय मुझे इतना गुस्सा आ रहा था कि उसे मार दूँ। मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किया मेरे प्यार ने।

तब उसके एक बॉस उसके पास जा के बैठ गया और उसके वक्ष पे हाथ फ़ेरने लगा। उसने सुनयना की शर्ट उतार दी, उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी। तब सभी उसके पास आ गये और उसकी शरीर पे हाथ फ़ेरने लगे। वो अब गर्म होने लगी थी। एक बॉस ने उसकी स्कर्ट के अंदर हाथ डाल दिया और उसे उठा के बेड पे ले गए। उन्होंने उसकी स्कर्ट उतार दी, उसने काले रंग की पैन्टी पहनी थी। एक ने उसकी ब्रा उतार दी और पैन्टी भी।

वो अब बिल्कुल नंगी होकर एक रन्डी की तरह बेड पड़ी थी। एक बॉस उसके स्तन दबा रहा था और एक उसकी चूत में उन्गली डाल रहा था और एक उसको देख कर मुठ मार रहा था। वो इस सब का काफी मज़ा ले रही थी। मैंने देखा कि मेरा लन्ड भी खड़ा हो गया है। मैं भी उसे देख कर मुठ मारने लगा। तब एक ने सुनयना के मुँह में लण्ड डाल दिया। वह भी पूरा लण्ड मज़े से चूसने लगी। उसने कभी इस तरह मेरा लण्ड नहीं चूसा होगा। एक उसके स्तनों को जोर जोर से दबा रहा था, उसके मुँह से अहऽऽ अहऽ अहऽऽऽ की आवाज निकल रही थी। तभी एक ने उसकी चूत में पूरा लण्ड डाल दिया। वो पूरे मजे में चुद रही थी। तब एक ने उसकी गाण्ड में लण्ड डाल दिया। वो मेरे आँखों के सामने दो लण्ड ले रही थी और एक का लौड़ा अपने मुँह में ले रखा था। क्या दृश्य था ! मेरे सामने ब्लू फ़िल्म लगी थी जैसे।

फ़िर एक बॉस का पूरा लण्ड अपने मुँह में भर लिया और अन्दर-बाहर करते हुए अपने मुँह की चुदाई कराने लगी।

सर, मुझे लण्ड चूसने में मज़ा आ रहा है !

“आह…ये…या. यस…वाह…मेरी…जान…चूस…चूस ले..ले… और अन्दर … और अंदर ले … भोसड़ी … की.. और जोर .. से.. ले..और ले.. ले… वाह…” अब उसने सुनयना के मुँह में धक्के मारना चालू कर दिया था।

लेकिन अचानक बॉस ने सुनयना के मुँह में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और सर पकड़ कर पूरा लण्ड मुँह में अन्दर बाहर करते हुए ज़ोर से चिल्लाने लगा “आ…..ह…. .ह…. आ…ले… कॉम…ओं…न ….मेरी…जान…ले..पीले…पूरा.. पी..ले.. माँ..चोद. चूस.. चूस… पी…ले..पी..”

अचानक उसके मुँह में पिचकारी चल गई। एक बॉस सुनयना के मुँह में अपना पानी डाल चुका था और उसने उसका पूरा रस पी लिया। सुनयना ने उसका लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया, शायद उसके रस का स्वाद अच्छा था..

झड़ने के बाद उसने अपने लण्ड बाहर निकाल लिया और हंसने लगा।

उधर शायद दूसरा बॉस भी चूत चोद कर थक गया था इसलिए वो भी उठ कर खड़ा हो गया और सुनयना के मुँह के पास लण्ड ला कर बोला,”प्लीज़ जान मेरा भी तो चूसो..”

उसने हँसते हुए उससे कहा,”तुम तीनों अगर मेरे मुँह में ही उलटी करके चले जाओगे तो मैं क्या करूंगी..!”

“नहीं मेरी जान, मैं तो तुम्हारी चूत में ही पानी डालूँगा चिंता मत करो !” एक बॉस ने जवाब दिया।

सुनयना ने एक बॉस का लण्ड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक उसका लण्ड चूसने के बाद उसने अपना लण्ड मेरे मुँह में से निकाल लिया और उससे बोला,”चल.. मेरी रानी.. अब कुतिया बन जा… आज तेरी चूत का बाजा बजाऊंगा !” उसने फ़ौरन उसका आदेश माना और उलटी होकर चूत को उसकी तरफ़ कर दिया। उसने भी आसन लगा कर चूत की छेद पर लण्ड लगाया और एक करारा धक्का दिया।

“आ.इ.ई.गई….आ..आ गया…आ. गया..मेरे राजा..पूरा..अन्दर..आ..गया..” सुनयना चिल्लाने लगी।

फिर तीनों ने उसे बारी बारी चोदा। कोई उसकी चूत मारता तो कोई गाण्ड तो कोई उसके स्तन चूसता। मैं अब भी पर्दे के पिछे छिपा था। अपनी सुनयना की इस चुदाई को देख मुझे रोना आ रहा था कि मेरे प्यार ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। वो सब अब थक चुके थे अब वे सुनयना के स्तन और चूत को ही चूसे जा रहे थे।

तभी मैंने सुनयना को मोबाइल से संदेश भेजा कि वह क्या कर रही है।

मैं उसका उत्तर देखना चाहता था।

उसने लिखा- जान मैं नंगी हो कर बेड पे लेटी हूँ और तुम्हें सपने में प्यार कर रही हूँ।

वो सव साथ में सो गए। सुनयना रन्डी की तरह उनके बीच लेटी थी। उसका एक बॉस अभी भी उसकी चूत चूस रहा था और स्तन दबा रहा था। बाकी सब सो चुके थे और वो अभी भी उसे चूस रहा था।

उसके सभी बॉस उससे लगभग दस साल बड़े होंगे। तब मुझे लगा कि मैं उसे कभी सेक्स का मज़ा नहीं दे पाया। तब मुझे लगा कि प्यार से ज्यादा सेक्स की भूख होती है जो मैंने अपनी सुनयना में देखी।

इस कहानी से मैं आपकी मदद चाहता हूँ कि मैं क्या करुँ।

मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा। Sex Stories

Antarvasna

यह मेरे पड़ोस में Antarvasna रहनी वाली विश्रांती-रेशमा की कहानी जिनको मैंने गणित सिखाने के बहाने कैसे चोदा।

एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था। उस दिन विश्रांती और रेशमा दोनों मेरे घर चली आई। मैं उनके लिए चाय बनाने के लिए रसोई में गया। वे दोनों गप्पे हाँक रही थीं… मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।

विश्रांती- रेशमा, मैं कुछ पूछूँ तुझे?

रेशमा- हाँ विश्रांती, पूछ ना!

विश्रांती- आजकल सुहास और तू दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?

रेशमा- अरे नहीं विश्रांती! वो मुझे गणित का प्रोब्लम है इसलिए मैं अकसर उसके घर जाती हूँ, इसमें बुरा क्या है?

विश्रांती- रेशमा, तुम रोज दरवाजा क्यूँ बंद करके पढ़ते हो?

रेशमा- अरे विश्रांती वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे!

विश्रांती- रेशमा, तू तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।

रेशमा- तू ऐसा क्यूँ बोले रही है?

विश्रांती- मैंने एक दिन दरवाज़े पर कान लगा कर आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी! मुझे सब पता है वहाँ कैसी गणित की पढ़ाई होती है!

रेशमा मुस्कुराते हुए- अच्छा तो तुझे सब पता है! तो ऐसा बोलो ना! देखो किसी से बोलना मत! तो तू चाहती है कि सुहास तुझे भी ऐसे ही गणित सिखाए?

विश्रांती- चाहने से क्या होगा रेशमा!

रेशमा- अच्छा यह बता! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना?

विश्रांती- हाँ रेशमा, दूध तो निकलता है और अब बच्ची भी नहीं पीती… सो भरा हुआ है…

रेशमा- तब तो सुहास जरूर तुम्हें गणित सिखाएगा, रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी!

तभी मैं नाश्ता लेकर वहाँ आ गया। तुरंत दोनों ने विषय बदल दिया।

उसी दिन शाम को फ़िर विश्रांती मेरे घर चली आई।

विश्रांती- सुहास, रेशमा जैसे मुझे भी गणित सिखाओ ना!

मैं- विश्रांती तुझे भी गणित सीखना है…

विश्रांती- सुहास, तुझसे कुछ सवाल पूछने हैं…

मै- हाँ विश्रांती, रेशमा ने बोला था… मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रहा था, हा पूछ ना!

मैं- विश्रांती तुम सलवार-कमीज में बहुत खूबसूरत लग रही हो…

विश्रांती- तुझे अच्छा लगा यह ड्रेस?

मैं- हाँ विश्रांती, तू ऐसे ही ड्रेस पहना कर… बहुत अच्छी लगती है… पूछ क्या पूछना है?

विश्रांती- तू तो बस रेशमा से ही बातें करता है…

मैं- नहीं विश्रांती ऐसी कोई बात नहीं है… तू भी बहुत अच्छी है…

बात करते करते विश्रांती ने अपना दुपट्टा सरका दिया… विश्रांती के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे… मैं भी अपने आप को रोक न सका… विश्रांती की चूचियों को देखने लगा…

विश्रांती- सुहास, मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो… क्या देख रहे हो नीचे?

मैं- विश्रांती कुछ नहीं, सच्ची में तू भी बहुत अच्छी है…

विश्रांती- तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता… क्या देख रहा है नीचे?

मैं- कुछ नहीं विश्रांती…

विश्रांती- कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा?… बदमाश!

मैं- विश्रांती मैं साफ बोलूँ तो गुस्सा नहीं होगी ना?

विश्रांती- नहीं सुहास, तू मेरा दोस्त है उसमें क्या गुस्सा करना!

मैं- विश्रांती तेरे वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहाँ से…

विश्रांती- ये तो मेरी बच्ची को दूध पिलाने के लिए हैं….

मैं- विश्रांती, तेरी बच्ची तो अब बड़ी हो गई है! उसे अभी भी दूध पिलाती हो?

विश्रांती- नहीं! अब ओ नहीं पीती दूध!

मैं- विश्रांती, तेरी चूची में दूध है क्या?

विश्रांती- हाँ अभी भी दूध है… इसलिए तो इतने बड़े हैं!

मैं- विश्रांती मुझे प्यास लगी है…

विश्रांती- ठहर, मैं पानी लेकर आती हूँ…

मैं- विश्रांती, पानी नहीं दूध पीना है… चूची का दूध…

विश्रांती- बदमाश! कोई ऐसे दूध पीता है भला?

मैं- क्यूँ नहीं? पीने दो न… तेरे दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊँगा…

विश्रांती- अच्छा ठीक है पी ले… काफी दिन से भरी हुई हैं… खाली करने वाला कोई है नहीं…

फिर विश्रांती ने अपना कमीज़ उतार दिया… अब विश्रांती ब्रा में आ गई…

विश्रांती- आ जा सुहास! मेरी गोद में आ… तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊँगी…

मैंने विश्रांती की गोद में सिर रख लिया… विश्रांती ने अपनी ब्रा उतारी… और अपनी चूची को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया… लो सुहास पी लो… अच्छे से पीना…

उसके बाद मैं दूध का प्यासा विश्रांती का दूध मेमने की तरह पीने लगा… कभी बाईं चूची से तो कभी दाईं से…

साथ में चूची सहला भी रहा था।

विश्रांती- तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो!

मैं- विश्रांती, तूने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा तेरा आभारी रहूँगा… तू जो बोलोगी वो सब करूँगा…

विश्रांती- जो बोलूंगी वो करेगा?

मैं- हाँ विश्रांती, तू एक बार बोल के तो देख…

विश्रांती- अच्छा ठीक है… सुन, मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है… ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?

मैं- नीचे कहाँ विश्रांती?

विश्रांती- तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?

मैं- बोलो ना विश्रांती! तेरी मुँह से सुनना चाहता हूँ।

विश्रांती- अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है… मिटा दे ना…

मैं- कैसे मिटा दूं? उंगली से या चाट के? या फिर लंड ही डाल दूँ?

विश्रांती- मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है…

मैं- विश्रांती, मैं तेरी चूत का ख्याल रखूंगा…

विश्रांती- अपनी रेशमा से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना… . रेशमा तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती है…

मैं- तुम लोग ये सब बातें भी करती हो?

विश्रांती- तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?

मैं- विश्रांती, अभी तूने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?

विश्रांती- अच्छा तो यह बात है? तो जितना जलवा देख चुके हो उसमें कौन ज्यादा अच्छा लगा?

मैं- विश्रांती, इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है… रेशमा की चूची में अमृत तो है ही नहीं! दूध तो तू ही पिला सकती है… तब इसमें तू ही न हुई रानी… विश्रांती, अब तू अपने कुछ और जलवे भी दिखा ना!

विश्रांती- हाँ सुहास तेरी विश्रांती, आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा…

और फिर विश्रांती ने अपने कपड़े खोलने शुरु किये… विश्रांती जब पेंटी और ब्रा में आ गई तो मैं उसकी मदद करने लगा…

मैं- विश्रांती, लाओ अब मैं खोल दूं!

विश्रांती- हाँ सुहास! आ अपनी विश्रांती को नंगी कर दे…

विश्रांती मेरे पास आ गई… मैं विश्रांती की ब्रा को खोल के प्यार से सूंघने लगा… . विश्रांती की मादक मुस्कराहट ने और भी मजा भर दिया… फिर विश्रांती की पेंटी को एक ही झटके में खोल दिया… .पेंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।

फिर विश्रांती अपने हाथ मेरी पैंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगी… . मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी… . मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ. विश्रांती ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया… .अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे… विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है…

विश्रांती- सुहास, तेरा लंड तो काफी बड़ा है रे…

मैं- विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा… .

विश्रांती- क्या करूँ सुहास, ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है… .

मैं- विश्रांती तुझे पता है रेशमा तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती है…

विश्रांती- वाह रे बदमाश! अपनी विश्रांती को लंड मुँह में लेने बोल रहा है… .ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…

मैं- विश्रांती तो ले लो ना इसे…

फिर विश्रांती प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी… . इतना तो पता चल ही गया था कि विश्रांती को लंड चूसने में बहुत मजा आता है… रेशमा ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था… फिर जब विश्रांती मेरे लंड से खेल रही थी… मैं विश्रांती की चूची को मज़े देने लगा… . इतनी मुलायम चूचियाँ को सहलाना, नीचे लंड का विश्रांती से चुसवाना… सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है…

मैं- विश्रांती, लंड चुसवाने में इतना मजा आज तक नहीं आया… विश्रांती मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, विश्रांती उल्टा-पुल्टा करें… .

विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?

मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा… .अच्छा चल, मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब तू मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से तेरी चूत का रसपान करूँगा!

विश्रांती- अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मजा आएगा…

फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे… विश्रांती की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… विश्रांती की चूत काफी गीली हो गई थी… . इसलिए चाटने में बहुत मजा आ रहा था… मैं विश्रांती को बहुत मन से चाट रहा था… . विश्रांती भी काफी उत्तेजित हो गई थी… विश्रांती ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था।… ऐसा मजा विश्रांती ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था…

मैं- विश्रांती तेरा रस कितना स्वादिष्ट है… अब मेरा रस भी निकाल दे… अब मेरी लंड तेरी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता…

विश्रांती- आ न सुहास… अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ…

फिर विश्रांती बिस्तर पे लेट गई… अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी… चूत तो जैसे कि लंड के लिए बनी हो… मैंने भी अपना लंड हाथ में लेकर उसकी चूत पर लगा दिया…

विश्रांती- दे धक्का!… चोद अपनी विश्रांती को… चोद…

मैं- ले विश्रांती… ये गया मेरा लंड तेरी चूत में… चुद अपने सुहास से मेरी प्यारी विश्रांती…

फिर विश्रांती गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी… मैं भी विश्रांती को जी जान लगा के चोदने लगा… फिर विश्रांती ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया… उस पोजिशन में बहुत मजा आया… फिर विश्रांती मेरे ऊपर सवार हो गई… इसमें तो मेरा लंड सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था… करीब मिनट के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया… विश्रांती ने बड़े प्यार से फिर मेरे लंड को साफ़ किया… वो मुझे बेतहाशा किस कर रही थी… विश्रांती बहुत खुश थी…

विश्रांती- अपनी विश्रांती को चोदने में कैसा लगा… रेशमा को चोदने में ज्यादा मजा आया था क्या?

मैं- नहीं विश्रांती तू कुछ माल है… तुझे चोदने में बहुत मजा आया… मैं अब तुझे ही चोदूंगा…

विश्रांती- अरे नहीं सुहास! दोनों को चोदना… रेशमा भी बहुत अच्छी है उसने ही तो मुझे तेरा लंड दिलाया… तू उसे कभी नाराज़ न करना…

फिर मैं रेशमा और विश्रांती के साथ मस्ती करने लगा… दोनों प्यार से मुझसे चुदती हैं…

आपको यह हिंदी सेक्सी स्टोरी अच्छी लगी? मेल करना… Antarvasna

हॉट रंडी सेक्स कहानी एक ऐसी कामुक हाउसवाइफ की है जिसकी अजीब सी फैंटेसी थी कि वो एक दिन रण्डी बन के किसी गैर मर्द से चुदे। उसका शौहर भी उसका साथ देता है।

मेरी एक सहेली है हया (बदला हुआ नाम), और उसका पति अखलाक, उन दोनों का जीवन आपसी मुहब्बत, कामुक शौक, मस्ती और आनंद से भरा हुआ है।

उन दोनों ने अपने जीवन में सैक्स के हर खेल के भरपूर मजे लिए हैं।
दोनों ने एक दूसरे को पूरी छूट दे रखी है कि वे दोनों जब, जिस को, जहां मौका मिले, अलग अलग या साथ में, चुदाई का मजा ले सकते हैं।

हया का कहना है कि उसे ठीक से याद नहीं पर उसने कम से कम 30-40 लंड ले रखे हैं।

मैंने उससे पूछा- तेरे शौहर अखलाक ने कितनी औरतों को चोद रखा है?
वह बोली- 25-30 तो उसने भी चोदी होंगी।

इस पर मैंने पूछा- तूने इतने ज्यादा मर्दों से चुदवाया, तेरी तुलना में अखलाक ने कम औरतें चोदी, ऐसा क्यों?
तो वह बोली- क्योंकि किसी भी औरत के लिए मर्द को पटाना बहुत आसान होता है।

मैं तो यह कहूंगी कि अधिकांश मामलों में मर्द को यह गलतफहमी होती है कि उसने औरत को पटाया है। जबकि वास्तव में तो औरत ने अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए मर्द का शिकार किया होता है।
क्योंकि यदि औरत ना चाहे तो किसी भी मर्द की हिम्मत नहीं है कि वह उस औरत को छू भी सके।

हया अपने पति की गैरमौजूदगी में भी कई मर्दों से चुद चुकी है.
और पति के सामने भी उस ने कई बार नए-नए लंड से चुदाई के मजे लिए हैं।

उन दोनों ने अपनी हर तरह की सैक्स फैंटेसी पूरी की है। उन ने कभी, किसी गैर मर्द के साथ 3सम किया है तो औरत के साथ भी, कभी 4सम में दो मर्द उनके साथ थे तो कभी दो औरतें।

उनके लिए कपल स्वैपिंग तो जैसे एक सामान्य कामक्रीड़ा थी।
दोनों ने एक दूसरे की हर फैंटेसी को पूरा करने में अपना पूरा सहयोग दिया था।
यहां तक कि उन्होंने कई बार ग्रुप सेक्स के मजे भी लिए थे।

इसके लिए वे ऐसे क्लबों में गए जहां कामुकता का नंगा खेल होता है।
कोई भी मर्द किसी भी औरत के साथ और कोई भी औरत किसी भी मर्द के साथ मनचाही मस्ती कर सकते थे।
जहां किसी को कुछ भी करने से रोकना, वहां की तहजीब के खिलाफ माना जाता है।

एक बार तो ऐसे क्लब में हया को 10 से अधिक मर्दों ने जी भर के नोचा, उसके वासना की आग में जलते हुए शरीर को अंदर बाहर से वीर्य में तरबतर कर के ठंडा कर दिया था।

हया का कहना था कि उसे याद नहीं कि उस दिन उसकी चूत में कितने लंड गए, कितने गांड में घुसे, कितने मुंह में और कितनों ने उसके बदन पर वीर्य रस का छिड़काव किया।
उसे बस इतना याद है कि उस दिन उसने मस्ती के सब से ऊंचे शिखर को छुआ था।

इतने कामुक और खुले, सैक्स से भरे जीवन के बावजूद हया की एक अजीब सी फैंटेसी बाकी थी, जिसे वह हर हाल में पूरा करना चाहती थी।
उसकी हसरत थी कि वह एक रात रंडी बन के किसी गैर मर्द से चुदवाये.
और इतना ही नहीं, उसको चोदने के लिए ग्राहक, उसका शौहर अखलाक ढूंढ के लाए।

उसने अपनी यह फैंटेसी कैसे पूरी की, उस के बारे में मुझे बताया और मुझ से आग्रह किया कि उसकी इस हसीन फेंटेसी को, बिना उसका नाम लिए, कहानी के रूप में प्रस्तुत करूं।

जिससे उसके जैसी उन्मुक्त जीवन जीने वाली, प्रकृति के इस वरदान का भरपूर दोहन करने वाली, अन्य औरतों को भी इस नए आनंद को प्राप्त करने की प्रेरणा मिल सके।

क्योंकि ऐसी अजीब सी लालसा बहुत सी कामुक औरतों की फैंटेसी हो सकती है।
इस कहानी को पढ़ कर उनके लहू में भी उबाल आ सकता है।
उनमें भी किसी मौके पर अपनी फैंटेसी को पूरा करने की हिम्मत आ सकती है।

यह भी हो सकता है कि अपनी बीवी को गैर मर्द से चुदवाने वाले किसी शौहर की भी, इस किस्म की फैंटेसी हो और कहानी पढ़ के उस शौहर में, इस फेंटेसी को पूरा करने का जोश आ जाए।

इसलिए मेरे कामुक, रसीले पाठकों के लंड को तन्नाने और अपनी हर अधूरी हसरतों को पूरा करने को बेकरार, गर्म चूत वाली पाठिकाओं के लिए प्रस्तुत है मेरी सहेली की यह अनोखी, मगर सच्ची कहानी उसी के शब्दों में:

मैं हया हूँ, मैं 40 वर्षीया, 38 36 38 की फिगर और मांसल बदन वाली एक भरपूर जवान औरत हूं।
मेरे शौहर और मैं सैक्स का, कामक्रीड़ा का भरपूर मज़ा लेते हैं, नए नए लोगों के साथ, नए नए कामुक खेलों ने हमारे जीवन को आनन्द से भर रखा है।

मुझे नहीं पता नहीं कि हर कामुक औरत की ऐसी इच्छा होती है या नहीं … लेकिन मेरी बहुत दिली इच्छा थी कि एक दिन मैं किसी गैर मर्द से रण्डी बनकर चुदवाऊं।
मैंने अपनी इस निराली हसरत का इज़हार अपने शौहर से किया।

मेरे शौहर तो वास्तव में बड़े अनोखे हैं, उन्हें मेरी हर हसरत पूरी करने में एक अजीब सा आनन्द मिलता है।
उनने मेरी इस हसरत को भी सच करने की ठान ली।

मैं अपने शौहर के बारे में बता दूं, उनका नाम अख़लाक़ है.
वे 42 वर्षीय, 5 फीट 10 इंच के बहुत ज्यादा रसिक व्यक्ति हैं।

उन्हें चुदाई के अलावा और कोई शौक नहीं है।
वे न सिर्फ बढ़िया चुदाई करते हैं बल्कि मेरी हर तरह की ख्वाहिश पूरी करते हैं।

उनका लंड करीब साढ़े छः इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।
अपने इस शानदार लंड से उन्होंने मुझे हजारों बार झड़ा के तृप्त कर रखा है यानि वो चोदन क्रिया में निपुण हैं।

सैक्स के किसी भी खेल के लिए पूछो तो … ना तो वे कभी कहते ही नहीं!
उनका एक ही जवाब होता है- जरूर ट्राई करेंगे।

एक बार जब वो पहली बार मेरी गांड मारने वाले थे, तब उन्होंने लंड का सुपारा घुसेड़ने की कोशिश की थी तो दर्द के मारे मैं बिदक गई.
मैंने कहा- इतना मोटा लंड तुम्हारी गांड में घुसे तो पता चले!
तो वे हँस के बोले- हया, मौका आयेगा तो नीग्रो के जैसे लंबे-मोटे लंड से अपनी गांड मरवा के भी दिखा दूंगा।

मेरी किसी भी तमन्ना के लिए उन्होंने कभी मना नहीं किया।
जीवन में मेरे पास हर तरह की सुख सुविधा मौजूद है, किसी चीज की कमी नहीं है।

जब उन्हें मेरी इस रण्डी बनाने की विचित्र तमन्ना के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके लिए भी मना नहीं किया, बल्कि उनका लंड भी ये ख्वाहिश सुनकर तन्नाने लगा.
यह इस बात का सबूत था कि उनको भी मेरा आइडिया बहुत सैक्सी लगा था।

इसे पूरा करने के लिए उन्होंने हमारे शहर से 300 कि मी दूर जयपुर शहर को चुना।

हम शनिवार को दोपहर में वहां पहुंचे, खाना खाकर सो गए क्योंकि पूरी रात तो नए अनजाने, किसी गैर मर्द के लंड के मजे लूटने थे।

शाम 7 बजे करीब अख़लाक़ किसी बार से एक छह फुट के गठीले, कसरती बदन वाले 29-30 साल के लड़के राजेश को लेकर आए.

अख़लाक़ 6 बजे के करीब मेरे लिए ग्राहक ढूँढने निकल गए थे.
उन्होंने मुझे बाद में बताया था कि राजेश बार में अकेला बैठा ड्रिंक कर रहा था तो अख़लाक़ खुद भी एक पैग लेकर उसके पास जा के बैठ गए।

मेरे शौहर मार्केटिंग में हैं तो किसी भी व्यक्ति से परिचय करने में एक्सपर्ट हैं.
अख़लाक़ ने उससे इंट्रो किया तो पता चला कि वो राजेश है, एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब करता है.
उसकी शादी को चार साल हुए थे और उसकी बीवी डिलिवरी के लिए मायके गई हुई थी.
राजेश डेढ़ महीने से बिना चुदाई के तड़प रहा था.

अख़लाक़ को लगा यही राजेश, मेरी गैर मर्द के लंड की प्यासी चूत की फैंटेसी पूरी करने के लिए बिलकुल सही रहेगा।

तो अख़लाक़ ने उससे पूछा- यार एक बात तो बताओ, इतना समय हो गया तुम्हारी बीवी को गए … तो फिर रात में तुमको चैन कैसे पड़ता है?
वो बोला- सेल्फ सर्विस और क्या करूं?

अख़लाक़ ने पूछा- क्यों कोई स्टेपनी नहीं है?
वो बोला- नहीं सर, शादी के बाद अभी तक तो कंट्रोल किया हुआ है.

फिर अख़लाक़ ने पूछा- क्यों, यहां तो अच्छी प्रोफेशनल भी मिल जायेगी?
तो उसने कहा- सर, मैंने अब तक या तो गर्लफ्रेंड के साथ सैक्स किया है या फिर किसी भाभी, आंटी के साथ। किसी धंधे वाली औरत के पास अभी तक तो गया नहीं।

इस पर अख़लाक़ ने पूछा- यदि तुम्हें किसी अच्छे घर की ‘कामुक हाउस वाइफ’ मिले तो?
वो बोला- साफ साफ बोलो न सर, क्या कहना चाह रहे हो?

फिर अख़लाक़ ने कहा- देखो यार, मेरी बीवी का नाम हया है, हम ओपन माइंड कपल हैं, स्वैपिंग, थ्रीसम, फोरसम, हर तरह के सैक्स को खुल के एंजॉय करते हैं।
उसने पूछा- क्या तुम मुझे अपनी वाइफ हया को फक करने की पेशकश कर रहे हो?
अख़लाक़ ने कहा- हां, यूं ही समझो, बहुत आनन्द आएगा।

फिर राजेश ने पूछा- आप लोग कुछ चार्ज भी करेंगे या मुफ्त में आपकी बीवी चोदने को मिलेगी?
तो अख़लाक़ को मेरे रण्डी बन के चुदने में एक्स्ट्रा किक लगने का ध्यान आया तो उनने बोला- अरे यार, मेरी बीवी कोई धंधे वाली औरत नहीं है, न हमारे पास रुपए पैसे की कमी है। उसे बस एक बार एक अजनबी मर्द से रण्डी की तरह चुद के एंजॉय करना है, इसलिए वो चार्ज तो करेगी लेकिन बहुत कम!

इस पर उसने कहा- लेकिन यार, मैं बहुत भूखा हूं, मजा पूरा आना चाहिए!
अख़लाक़ ने कहा- हम दोनों मिलकर तुमको मस्त कर देंगे, यह हमारा वादा है।

फिर राजेश ने अख़लाक़ से पूछा- यार, तुम मेरे साथ मजाक तो नहीं कर रहे? क्या मैं तुम्हारी वाइफ से बात कर सकता हूं?
अख़लाक़ ने कहा- मैं हया से पूछ कर बताता हूं.

तब अख़लाक़ ने थोड़ा अलग होकर मुझसे पूछा- एक लड़का मिला है जो तुझसे बात करना चाहता है।
मेरा रण्डीपन मेरे दिमाग पे इतना हावी था कि मेरी चूत अपने ग्राहक से बात करने के नाम से रिसने लगी।

मैंने कहा- हां, बात करवाओ।
अख़लाक़ ने अपना फोन राजेश को दिया.

उसने अख़लाक़ को कहा- मैं थोड़ा अकेले में बात करना चाहता हूं.
तो अख़लाक़ थोड़ा दूर चले गए।

राजेश ने मुझ से पूछा- हया जी, आप एक अच्छे घर की होकर मेरे साथ रण्डी की तरह एंजॉय करोगी, तो मुझे छूट कितनी होगी?
मैंने कहा- 100%, तुम जो भी चाहो करना, जैसे चाहो वैसा करना, जितनी देर चाहो, उतनी देर करना!

उसने कहा- ओके … और तुम्हारी डिमांड क्या है?
मैंने कहा- मुझे ज्यादा नहीं केवल दस हजार दे देना, दस हजार में पूरी रात के लिए ये रण्डी तुम्हारी! तुम भरपूर मस्ती करना, जी भर के आनन्द लूटना, रौंद डालना मेरी जवानी को। मुझे मेरा रण्डी बन के चुदने का आनन्द चाहिए बस!

इस पर वो बोला- मुझे तुम से मिलना मंजूर है। लेकिन मैं जो चाहूं वो करूं? जैसे चाहूं वैसे करूं? और जितनी देर चाहूं उतनी देर करूं?
मैंने कहा- बिल्कुल सही, आज की रात तुम्हारी जिंदगी की यादगार रात होगी।

उसके बाद वो अख़लाक़ के साथ होटल के हमारे रूम में आया.
अख़लाक़ ने हम दोनों का परिचय करवाया।

हम तीनों ने दो दो पैग व्हिस्की के लिए!

पीने के बाद अख़लाक़ ने कहा- मैं कमरे में रुक सकता हूं या तुम अकेले एंजॉय करोगे?
वो बोला- रुको न यार, यह पहला मौका होगा जब मैं किसी मर्द की बीवी को, उसी के शौहर के सामने चोदूंगा। तुम्हारे सामने तुम्हारी लम्पट बीवी को एक रण्डी की तरह चोदने में अधिक मजे आयेंगे।

मैंने साड़ी पहन रखी थी.
राजेश ने चीरहरण से शुरू किया.

मैंने भी उसकी जैकेट, टी शर्ट उतारी।
फिर उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा भी उतार फैंकी.

जब उसने मेरे कोमल, मुलायम स्तनों पर हाथ फेरा तो मेरे बदन में वासना की लहरें उठने लगी।

उसने मेरे नंगे बदन से अपना बदन चिपका लिया और मेरे होंठ चूमने लगा.
फिर वह अपने दोनों हाथों से मेरे कूल्हे दबाने लगा.
वासना के वशीभूत मेरा हाथ उसके लंड पर चला गया.
वो तन्नाने की प्रक्रिया में था.

तभी राजेश पलंग के किनारे बैठ गया.

मैंने उसे कहा- तुम दोनों मर्द मेरे दोनों बोबे एक साथ चूसो!
उसको भी यह आइडिया पसंद आया, उसने अख़लाक़ को बुलाया.

अख़लाक़ भी इस बीच आधे नंगे हो गए थे.

फिर दोनों ने एक साथ मेरे बोबे चूसे और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.

करीब पांच मिनट तक मेरे बोबे चूसने के बाद राजेश खड़ा हुआ, उसने अपनी जींस और अंडरवियर एक साथ उतारी और मेरा पेटीकोट पैंटी सहित खींच के उतार दिया।

मैं एक रात की रण्डी एक गैर मर्द के सामने पूरी नंगी खड़ी थी.

अख़लाक़ भी पूरे नंगे हो गए थे.
राजेश ने अख़लाक़ को पूरा नंगा देखा तो बोला- अख़लाक़, अब तुम सोफे पर बैठ कर लाइव ब्लू फिल्म देखो. तुम्हारी ये कामुक हाउसवाइफ अब से कुछ घंटों के लिए मेरी रण्डी है रण्डी!

अख़लाक़ हंसते हुए जाकर सोफे पर बैठकर अपने लंड को सहलाने लगे.

राजेश ने मेरे कंधों पर दबाव डालकर मुझे झुकाया और अपना लंड मेरे मुंह के सामने ले आया।

यार … यह पहला लंड था जो अख़लाक़ के लंड से करीब एक इंच अधिक यानि साढ़े सात इंच लंबा था और मोटा भी थोड़ा ज्यादा ही था।

मैंने राजेश के चिकने, सांवले, सलौने, सुहाने लंड को कुछ पल निहारा.
उसने शायद आज ही झांटें साफ करी थी, उसका लंड बहुत ही मनमोहक लग रहा था।

मैंने उसके चमकदार सुर्ख लाल सुपारे को चूमा, हाथों से सहलाया फिर मैंने चूसना शुरू किया.

वो बोला- हया जान, सबसे पहले तेरे मुंह में ही सारा वीर्य निकालूंगा।
मैंने 👍👍 इशारा कर के कहा- ओके, निकालो।

उसने मेरे मुंह को चोदना शुरू किया.
मैंने कई बार अपनी जुबान उसके लंड के चारों ओर घुमाई.
उसके मुंह से मस्ती की सिसकारियां निकल रही थीं।

उसने दो तीन मिनट रुक रुक के अपना लंड मेरे मुंह के अंदर बाहर किया.
उसके लंड में वीर्य हिलोरें मार रहा था.

फिर एक तूफान सा उठा और फिर उसके लंड ने पिचकारी छोड़ी, ढेर सारा वीर्य उछल उछल के मेरे हलक में जा रहा था.
मैं हर कतरे को निगलती रही.

लेकिन आखिर में एक दो छोटे छोटे कतरे मैंने मुंह में रोक लिए।
मुझे ध्यान आया कि अख़लाक़ कहते थे कि मेरा लंड तन्नाया हुआ हो तो मैं तेरी चूत से किसी गैर मर्द का वीर्य भी चाट सकता हूं.
मैंने अख़लाक़ को आजमाने की सोची.

मैं, जब राजेश का लंड सिकुड़ के मुंह से निकल गया, तब अख़लाक़ की ओर बढ़ी और उनके होठों से होंठ लगाकर बचा खुचा वीर्य अख़लाक़ के मुंह में स्थानांतरित कर दिया।

राजेश ये देखकर हैरानी से ताली बजाने लगा- वाह यार, ये हुई न बात!

अख़लाक़ ने सारा वीर्य गटक लिया और राजेश से बोला- मैंने कहा था न हम हर तरह का सैक्स एंजॉय करते हैं।
उसके बाद राजेश बिस्तर पर पस्त होकर बैठ गया।
उसके चेहरे और बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।

थोड़ी देर वो इस मीठी थकान का आनन्द लेता रहा।

उसके बाद हमने थोड़ा नाश्ता किया।

मेरी चूत तो मेरे ग्राहक के लंड से चुदने के लिए कुलबुला रही थी.
इसके लिए मैं राजेश के नंगे बदन से चिपक कर लेट गई, उसके चौड़े सीने को चूमती रही, उसके निप्पलों को सहलाती रही, हल्के हल्के मसलती रही.
मैंने उसकी निप्पलों को चूसा, काटा.

राजेश का लंड अंगड़ाइयां लेने लगा.
मैंने झुक के उसका लंड मुंह में ले लिया और अख़लाक़ को इशारा किया.

वो भी उठकर आए और राजेश के आंड चाटने लगे.
राजेश के लंड में सनसनी होने लगी.

आखिर एक औरत और एक मर्द एक साथ उसका लंड चूस रहे थे।
उसका लंड फिर से तन्नाने लग गया।

मैंने राजेश को कहा- अब अपने इस माँसल लंड से मुझे कस के चोद दे मेरे राजा! मेरी चूत तेरे इस विशाल लंड को अपने भीतर लेने के लिए मचल रही है, तड़प रही है।

राजेश ने ये सुनते ही मेरे घुटने मोड़ के ऊपर किए और मेरी चूत पे अपने होंठ टिका दिए।
उसकी जुबान चूत के चारों ओर से चूत रस को सुड़क रही थी।

मेरी चूत को वो चाटता रहा और चूत पानी छोड़ती रही।

उसके बाद उसने मेरे संवेदनशील क्लिटोरिस को जुबान की नोक से टच किया और हौले हौले जुबान से सहलाने लगा.
फिर उसके स्ट्रोक में तेजी आने लगी मेरे बदन में चरम उठने लगा.

ऐसे में चूत के अंदर लंड के करारे रगड़े लग जाएं तो क्या बात है.
यह सोच कर मैंने उसे कहा- राजू यार … अब लंड डाल भी दे ना जल्दी से!

राजेश ने अपना लंड चूत पे टिका के दबाते हुए, धीरे धीरे अंदर डाला.

मुझे इतना अच्छा महसूस हो रहा था यार कि पूछ मत, सुंदर चेहरा, बलिष्ठ शरीर, खूबसूरत लंबा-मोटा, मेरा मन पसंद लंड!
उसका लंड मेरी चूत में जड़ तक चला गया।

दो मिनट तक वो दबाव डाल के आनन्द लेता रहा.
फिर मैं ही बोली- रगड़ न मादरचोद!

इतना सुनना था कि उसका जोश बढ़ा उसने गाली बकते हुए धक्के लगाने शुरू किए- ले मेरी रण्डी, ले भोसड़ी वाली, लंडखोर साली हया … ले!
बोलते हुए रुक रुक के दस पंद्रह मिनट तक चोदता रहा।

फिर जब मेरा चरम नजदीक लगने लगा तो मैंने उसे कहा- राजू, अब लगातार रगड़ दे कस के, मेरा बस होने वाला है!

उसने फिर दम लगा के खूब जोर जोर से रगड़े लगाए, उसका डिस्चार्ज होने लगा, चूत से फच फच की आवाज आने लगी.

लेकिन वो रुका नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद करीब दस धक्के और लगाए होंगे कि मेरा पूरा शरीर अकड़ा और चूत जोर जोर से फड़कने लगी, मानो मेरा दिल सीने से हट के चूत में चला गया हो।
मुझे इस चुदाई ने परम आनन्द से मस्त कर दिया।

मैं बहुत देर तक आंखें बंद करके चरम सुख के इन लम्हों को भोगती रही।

उसके बाद वो एकदम पस्त हो गया, बोला- यार हया, इतना आनन्द आज तक नहीं आया. तुम दोनों वास्तव में गजब की कामुक जोड़ी हो. तुम दोनों से मिलकर जो आनन्द मुझे आज मिला है, मैं उसके बारे में सोच भी नहीं सकता था.

अख़लाक़ को मैंने अब तक डिस्चार्ज करने से रोका हुआ था क्योंकि अभी अख़लाक़ को एक गैर मर्द के वीर्य से भरी मेरी चूत चटवानी थी।
मैंने राजेश को बोला- आज का एक और स्पेशल सरप्राइज़ अभी बाकी है.
वो जिज्ञासा से बोला- क्या?

मैंने अख़लाक़ को इशारा किया.
वो आया और मेरी चूत से सारा वीर्य चाटने और सुड़कने लगा.
राजेश हैरत से सारा नज़ारा देख रहा था.

अख़लाक़ ने आज साबित कर दिया कि वह मेरी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है।

उसके बाद अख़लाक़ ने मेरे होंठ चूसे मुझे राजेश के वीर्य और मेरी चूत रस का, मिला जुला खट्टा कसैला स्वाद आया।

राजेश हमारी हरकतें देख देख के मस्त हो रहा था।

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद राजेश ने कहा- यार, अब खाना खाते हैं फिर एक बार तेरी गांड और मारूंगा.
अख़लाक़ ने कहा- यार, अब मेरे को भी तो एक बार डिस्चार्ज करने दे!

मैंने कहा- देखो यार, मेरी चूत तो अभी अभी तृप्त हुई है और गांड तो राजेश के इस मस्त लौड़े से ही मरवाऊंगी। तुम भी चाहो तो मेरे मुंह में वीर्य निकाल दो!

अख़लाक़ ने तुरंत मेरे मुंह में लंड डाल के चोदना शुरू किया.
लंड उफना हुआ तो था ही, एक मिनट भी नहीं लगा और पिचकारी छूट गई।
मैंने अख़लाक़ का सारा वीर्य भी गटक लिया।

उसके बाद हमने खाना ऑर्डर किया.

जब तक खाना आया, तब तक हम तीनों साथ में नहाए, एक दूसरे के नंगे और साबुन लगे चिकने बदन का आनन्द लिया.

और खाना खाने के बाद भी हमने काफी देर आराम किया।

रात के करीब बारह बज रहे थे, मैंने और अख़लाक़ ने एक साथ राजेश का लंड चूस के खड़ा किया.

और जब वो तन्ना गया, तब उसने मुझे घोड़ी बना के लंड को तेल से चिकना किया, थोड़ा तेल मेरी गदराई हुई, सुडौल गांड में भी लगाया.

फिर राजेश ने बहुत धीरे से मेरी गांड में लंड का सुपारा घुसेड़ा.
मेरी गांड थोड़ा सा चिरमिराई पर उसका लंड मेरे जिस्म के अंदर घुसता चला गया.

फिर वो धीरे धीरे लंड अंदर डालता और जल्दी से बाहर निकालता.
वो गांड मारने का भी एक्सपर्ट था, बहुत देर तक उसने पूरे मन से मेरी गांड मारी.

उस को और मेरे को, दोनों को खूब मजे आए।

अख़लाक़ उसके पीछे खड़े होकर उसकी निप्पलें मसल रहे थे, उसके लंड में आनन्द की लहरें उठ रही थीं।

करीब पंद्रह मिनट के आनन्ददायक घर्षण के बाद उसने अपना वीर्य का स्टॉक गांड में खाली कर दिया और जब तक लंड मुरझा नहीं गया, मेरी गांड में अपना लंड, अंदर बाहर करता रहा.
हम दोनों को इस रगड़ाई का आनन्द मिलता रहा।

उसके बाद हम तीनों पस्त होकर बिस्तर पर पड़े तो नींद आने लगी.
एक ने मेरे स्तनों में मुंह दे रखा था, दूसरे ने गांड में!

फिर हम सो गए।

सुबह हमारी नींद खुली तो मेरी चूत फिर से चुदना चाहती थी.

मैंने राजेश से कहा- अब तुम दोनों एक बार और मेरी चुदाई कर दो।
उसने पूछा- एक साथ?
मैंने कहा- नहीं, बारी बारी।

उसके बाद हम दोनों से प्रेरणा लेकर राजेश ने अख़लाक़ के साथ 69 की मुद्रा में एक दूसरे का लंड चूसा।

दोनों लंड रात के रेस्ट के बाद तरोताजा तो थे ही, जल्दी कड़क हो गए।

उसके बाद मैं पलंग के किनारे पर लेटी, कभी पैर जमीन पर टिकाती, कभी घुटनों से मोड़ के ऊपर उठाती।

शुरुआत राजेश ने की.
राजेश और अख़लाक़ ने धक्के लगाने शुरू किए.

जब राजेश के लंड में सरसराहट होने लगती तो वह हट जाता, उसकी जगह अख़लाक़ धक्के लगाने लगता.
ऐसा बहुत देर तक चला, मेरी चूत की जबरदस्त कुटाई हुई।

आखिर में मुझे झड़ाने का श्रेय मिला राजेश को!

मेरी चूत में जैसे अनार छूट रहा था और उसके साथ राजेश के लंड से वीर्य का फव्वारा!

उधर मेरे शौहर अख़लाक़ के लंड से वीर्य की पिचकारी मेरे चेहरे और मेरे स्तनों पर गिर रही थी।

मैं अंदर बाहर से वासना के इस आनन्द-सागर में डूब रही थी।

करीब आधा घंटे सुस्ताने के बाद राजेश उठा, तैयार हुआ.
उसने अपने पर्स से दस के बजाए ग्यारह हजार निकाल के मुझे हॉट रंडी सेक्स के लिए दिए।

हम दोनों को थैंक यू के साथ फिर से सेवा का मौका देने का बोला।

हम तीनों एक साथ गले मिले और बस … वो चला गया कामुक और मस्त यादें छोड़ कर!

मेरी रण्डी बन के चुदने की ख्वाहिश पूरी हुई।

वो ग्यारह हजार रुपए, मेरी चूत की पहली कमाई, मुझे किसी खजाने से कम नहीं लग रहे थे। 😜😜

तो मेरे अनजाने, कामुक, रसिक दोस्तो, कैसी लगी मेरी सहेली की रण्डी बनने की फैंटेसी वाली कामुक गाथा?
मुझे ज़रूर बताएं। हॉट रंडी सेक्स कहानी पर कमेंट्स करें.
अगली नई कहानी के लिए आपके सैक्सी सुझावों का भी स्वागत है।
मेरा ईमेल आईडी है
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एक निवेदन सभी पाठकों से: कृपया अपनी बात रखते हुए, भाषा का ध्यान रखें और जबरन मिलने की या डींगें मारने की कोशिश न करें। मैं हर अच्छी मेल का जवाब दूंगी, मेरा वादा है। अनाप शनाप मेल भेजने वाले को ब्लाक मिलेगा.

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