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मेरा नाम कुसुम है, मैं पंजाब की Indian Sex Stories रहने वाली हूँ। मैं एक बहुत धनी परिवार से ताल्लुक रखती हूँ। मेरे पापा एक नामी बिज़नेस-मैन हैं और उनका एक दोस्त है जिनको मैं बड़े काका कहती हूँ। वैसे तो अमरीका में ही उनका सारा बिज़नेस है, उनका परिवार भी वहीं है, वो बिज़नस के सिलसिले में ही भारत आते।
इस बार वो आए तो वो पापा को चौंका देना चाहते थे तो वो बिना पापा को बताये ही भारत आ गए। मुंबई में अपनी मीटिंग में होकर कर के वो सीधा अमृतसर चले आए। हवाई अड्डे से बाहर निकल वहां से टैक्सी कर वो सीधा हमारे घर आ गए। पापा और माँ दोनों मेरी मासी की बेटी की शादी में पठानकोट गए हुए थे।
नौकर ने दरवाज़ा खोला और वो उनको अन्दर ले आया। मेरे पेपर चल रहे थे इसीलिए मैं और दादी घर रुक गए। दादी से मिलने के बाद उन्होंने जब पूछा- मां जी ! पुरुषोत्तम कहाँ है?
दादी ने बताया कि वो शादी में गए हैं। इतने में मैं भी बाहर आ गई, उनको देख मैं बहुत खुश हुई। मैंने उन्हें कमरा दिखाया और फ्रेश होने के बाद चाय वगैरा पिलाई।
बातों में समय क्या हो गया, पता ही नहीं चला। मां जी उनको बचपन से जानती थी। मुझे भी मालूम था कि वो विह्स्की के शौकीन हैं, आज पापा नहीं थे तो मैंने नेपाली को विह्स्की सर्व करने के लिए कह दिया।
काका बोले- तू कितनी बड़ी हो गई है !
दादी हंसने लगी और बोली- मैं बाथरूम जा कर आई !
तभी अंकल ने पैग पीते हुए कहा- तू भी बड़ी हो गई है और ऊपर से नीचे तक हर चीज़ में परफेक्ट निकली है !
उनकी यह बातें सुन मेरी चूत में कुछ होने लगा, मैं थोड़ा शरमा गई।
दादी बोली- भाई, में खाना लगवा रही हूँ!
मुझे तो खाना खा कर सोना है, तुम बातें करो !
अंकल की नज़रें बार बार मेरी चूचियों पे अटक जाती थी।
तीन पैग पीने के बाद अंकल ने कहा- कम्पनी नहीं दोगी?
नहीं अंकल ! मैं नहीं पीती !
आज पी लो थोडी !
नहीं अंकल ! मुझे पढ़ना है !
तभी उनका सेल बजा, वो फ़ोन पे बातें करने लगे। इस बीच दादी बोली- बेटा मुझे सुबह उठना है, मैं सोने चली ! तू खाना खा ले !
अंकल ने अपना पाँचवां पैग बनाया और इस बार मेरे साथ सोफ़े पे बैठते हुए बोले- लो ना एक पैग ! प्लीज़ ! कम ओन ! तुम जवान हो चुकी हो !
उनके ज़ोर देने पे मैंने ग्लास पकड़ा और एक दम सारा ख़त्म कर दिया। उन्होंने पास में पड़े चिप्स का टुकड़ा मेरे मुँह में डाल दिया।
कैसा लगा?
वो उठे और अब दो पेग बना लाये। मेरे मना करने पे अब वो बिल्कुल मेरे साथ सट कर बैठ गए, अपना हाथ मेरी जांघ पे रख दिया और अपने हाथ से पैग पिला डाला।
मुझे नशा होने लगा ! फ़िर अपना पैग भी मुझे पिला डाला !
मुझे नशे में करना उनका मकसद था। अब हाथ मेरी कमर से लिपट लिया दूसरे हाथ से मेरी छाती को दबा दिया। मैं गरम हो गई वहां से उठी, जल्दी से मेज़ पे बैठ थोड़ा खाना खाया और अपने कमरे में भाग आई। मैंने किताबें बंद कर साइड पे रख बत्ती बुझा कर चादर ले सोने की कोशिश करने लगी। अंकल की कामुक हरक़तें मुझे नींद नहीं आने दे रहीं थी।
१० मिनट बाद दरवाज़ा खुला अंकल अन्दर आए, बिजली का बटन ढूंढने लगे, तभी ट्यूब-लाईट जला कर उन्होंने कुण्डी लगा ली। मैं सोने की एक्टिंग कर रही थी। बेडलाइट जला कर, ट्यूब बुझा कर वो मेरे बिस्तर पर आए, मेरे ऊपर से चादर हटा कर बोले- जग जाओ कुसुम ! मुझे मालूम है कि तुम सो नहीं रही हो !
जब मैं कुछ न बोली तो उन्होंने अपने हाथ से मेरा पजामा खींच उतार डाला, फ़िर मैं पासा पलट के सो गई। वो मेरी पैन्टी के ऊपर से मेरे दोनों नितम्ब मसलने लगे। मुझे नितम्ब मसलवाने में बहुत मजा आ रहा था। अंकल ने मेरी पैंटी खींच के उतारी तो मैं उठ गई और उनके साथ लिपट गई।
उन्होंने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। दूसरे हाथ से मेरी चूत के दाने को रगड़ने लगे।
ओह्ह्ह यसऽऽ ! अंकल ! छोड़ो ! कुछ कुछ होता है ! प्लीज़ ! आप मुझसे कितने बड़े हो ! छोड़ दो मुझे ! मेरा दिल घबरा रहा है !
साली जवान हो गई है तू ! कह कर अंकल ने मेरी ब्रा ऊपर सरका दी और वो मेरे चूचुक चूसने लगे।
हाय ! क्या कर रहे हो अंकल !
अंकल बोले- मजा आया?
मैंने उनकी छाती में मुँह छुपा लिया, मैं शरमा गई।
अब मेरी ब्रा खोल फेंकी और खुले मैदान पर आराम से हाथ फेरते, सहलाते मेरा पूरा मम्मा अपने मुंह में डाल लिया।
तू अपनी माँ पे गई है ! वो बहुत सॉलिड माल है ! अभी पिछले दिनों जब अमरीका आई थी तो जम के चोदा था !
हाय अंकल ! मुझे छोड़ दो !
वो दबा दबा के मम्मे चूसते हुए मेरे निप्पल को काट देते।
अंकल बोले- रुक !
बाहर पड़ी बोतल में बची दारू ग्लास में डाल लाये और बोले- यह लवली-लवली होगा !
आधे से ज्यादा मुझे पिला दिया और ६९ की हालत में आ कर मेरी चूत चाटने लगे। मैंने भी अब शर्म छोड़ दी, खुलके उनका लौड़ा अपने मुंह में डाल लॉलीपोप की तरह चूसने लगी।
हाय अंकल ! बहुत सॉलिड लण्ड पाल रखा है ! कितना बड़ा है !
बेटा, यह ९ इंच का होगा ! तू चूसती जा !
तेरी मां बहुत मजे देती है साली ! मुझे क्या पता था माँ की जगह बेटी मिलेगी ! हाय और चूस ! जुबान से चाट इसके सर को ! जुबान से चाट कमीनी ! कुतिया बन ! हाय !
मैं अब नशे में थी और कौन सा मैं पहली बार चूस रही थी। मेरा अंदाज़ देख कर अंकल बोले- लगता है तू माहिर है ! साली तेरी चूत भी बजी हुई है।
मुझे गरम करने के लिए ऐसी बातें करते हए बोले- कितनों से चुदी हो ?
अंकल ! तीन लड़कों से !
गाजर, मूली कितनी लेती हो?
कभी कभी !
अब उन्होंने मुझे सीधा लिटा कर मेरी जांघों के बीच में बैठ अपने लण्ड का अग्र भाग मेरी चूत के मुँह पे रख कर धक्का मारा, लेकिन उनका लण्ड इतना मोटा था कि अन्दर नहीं गया। वैसे भी मैंने साँस थोड़ी अन्दर खींच कर चूत को कस डाला ताकि उनको जोर लगाना पड़े।
वो बोले- चल साली साँस छोड़ ! तेरा बाप हूँ मैं ! मुझे बनाएगी !
फ़िर उन्होंने एक ज़ोर का झटका मार पूरा लण्ड मेरी चूत के अन्दर पेल दिया और तेजी से चुदाई करने लगे। इतनी तेज चुदाई इतनी उमर में !
लगता था सेक्स के मास्टर हों !
ओह ! ओह ! कर वो मेरे दोनों मम्मे दबा दबा के मेरी चूत मारने लगे। मैं नीचे से अपने कूल्हे उठा-उठा के उनका साथ दे रही थी। अंकल ! तेज ! बहुत अच्छा है आपका लण्ड ! आज तक मेरी ऐसे चुदाई नहीं हुई !
बोले- आ गई न रांड जुबान पे ! ले खा !
हाय ! खा जाउंगी !
फ़िर एकदम से लण्ड बाहर निकाल, मुझे उल्टा कर पीछे से मेरी चूत में डाल दिया और तेजी से चोदने लगे। साथ में अपनी ऊँगली मेरी गाण्ड में डाल गोल गोल घुमाने लगे। मैं चुदाई में इतनी दीवानी हो चुकी थी कि कब अंकल ने दो ऊँगलियाँ अन्दर डाल दी।
फ़िर अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल लिया, मुझे उठाया, लण्ड सीधा खड़ा था, अंकल बोले- गोदी में आजा बेटे ! हमारी गोदी में खेल कर ही तू बड़ी हुई है !
उन्होंने मुझे अपनी जाँघों पर बैठाया और पदाच की आवाज़ के साथ लण्ड पूरा मेरी चूत में घुस गया, मेरे दोनों कूल्हों को नीचे से पकड़ के गोल गोल घुमाते हुए उछालने लगे। मेरे दोनों मम्मे बिल्कुल उन्के चेहरे पर के घिस रहे थे। उनके हाथ नीचे थे।
मैंने एक हाथ उनकी गर्दन मे डाल रखा था, दूसरे हाथ से ख़ुद अपना मम्मा पकड़ उनके होंठो से लगाते हुए उनके मुँह में डाल दिया। वो पूरा मम्मा चूसते, मैं ख़ुद बारी बारी दोनों मम्मों को चुसवा रही थी।
बहुत एक्सपर्ट है बेटी !
अंकल अब तेजी से उठा उठा के मारने लगे मेरी चूत। मम्मे मुँह में ले कर निप्पल पर काट देते !
अह ऽऽआह ! मैंने अब दूसरी बार पानी छोड़ दिया।
अंकल ने बिना लण्ड निकाले एक दम से ऐसी करवट ली कि मैं नीचे आ गई और वो फ़िर ऊपर !
फ़िर अंकल ज़ोर ज़ोर से हांफने लगे ! उनकी तेजी बढ़ गई ! तेज तेज धक्कों में एक दम स्टाप लग गया और उनका गरम माल मेरी कोख में छुटने लगा, जैसे कोई नहर बह रही हो ! पूरी चूत गीली करके भर दी ! अंकल मेरे ऊपर लुढ़क गए। मैंने जल्दी से लण्ड निकाला और घुटनों के पास बैठ कर मुँह में ले लिया, मुझे लण्ड का पानी पीना, चाटना पसंद है।
अंकल बोले- पहले कहती तो सारा मुँह में झाड़ देता !
मैंने चाट चाट के लण्ड साफ़ कर दिया और अंकल मेरे अंगों से खेलने लगे, बोले- कुसुम ! कहीं दारू पड़ी हो तो ला !
मैंने चादर लपेटी और लॉबी में बार से बोतल निकाल ली। हम दोनों ने दो दो मोटे पैग लगाये, मैं फ़िर से उनका लण्ड चूसने लगी। ६९ में आकर अबकी बार वो मेरी गांड चाटने लगे थूक डाल डाल के मेरी गाण्ड के छेद को ढीला करते हुए। उनका लण्ड तन के खड़ा मेरे मुँह में मस्ती कर रहा था। मैं ख़ुद उठ कर अंकल की जाँघों पर बैठ गई। पहले तो अपनी चिकनी गोरी जांघें उनकी जांघों से रगड़ने लगी, तभी ख़ुद ही उनके लण्ड को गांड के छेद पे रखते हुए उस पर बैठ गई और पूरा लण्ड अन्दर ले गई।
वो हैरानी से देख रहे थे, बोले- माल है तू ! घोड़ी बन जा !
इतना कह वो मेरे ऊपर छा गए, ताबड़तोड़ वार से मेरी गांड फाड़नी चालू की। मैंने रोका मगर वो नहीं रुके और फाड़ डाली मेरी गांड !
इस तरह झटकों से इस बार झड़ने के करीब आए तो मुंह में डाल दिया। मैंने मुठ मारते हुए उनका सारा माल अपने मुँह में ले लिया। उसके बाद उन्होंने पूरी रात मुझे ४ बार चोदा।
मैंने कहा- माँजी पॉँच बजे उठ जायेंगी !
ठीक साढ़े चार बजे वो अपने कपड़े पकड़ चादर लपेट गेस्ट रूम में चले गए। आंख खुली तो दोपहर के १२ बजे थे अंकल भी अभी तक सोये हुए थे। माँजी बोली- चाय दे आ अपने अंकल को !
मैं चाय देने गई, अंकल को उठाया, चाय साइड पे रख वो मुझे अपनी ओर खींचने लगे और गरम करने लगे।
दादी बाहर है !
अंकल बोले- चूस दे थोड़ा बस ! कपड़े नहीं उतारना ! नाड़ा खोल कर सलवार घुटनों तक सरका के डाल लूँगा। देखना डर की चुदाई में अलग ही मजा आता है ! रानी जब डर सा लगा हो तब !
उनकी बात सही थी, कपड़े पहने ही मुझे अलग फीलिंग आ रही थी। मैंने नाड़ा खोल कर सलवार घुटनों तक उतार दी। उन्होंने लोअर की जिप खोल लण्ड मुझे पकड़ा दिया। मैं सहलाने लगी, दो चार चूपे मारे और मुझे बेड के कोने पे ला उन्होंने डाल दिया और १० मिनट चोदने के बाद सारा माल निकाल दिया और एक दूसरे को चूमने चाटने लगे।
बाद में अंकल माँ जी से बोले- माँ जी ! अब मैं होटल रह लूँगा !
माँ जी बोली- बिल्कुल नहीं ! अगर पुरुषोत्तम को मालूम हुआ न तो वो हम दोनों की वाट लगा देगा ! तू अपना काम कर ! तू रात को घर आयेगा।
रात को अंकल ने ८ बजे मां जी को कहा कि वो आज लेट हो जायेंगे, खाना बाहर से ही खा के आएंगे, आप सो जाना, मैं ख़ुद दरवाज़ा खोल लूँगा।
मैं अंकल के कमरे में लेट गई और सिप कर कर के दारू पी रही थी। इंतजार में मैंने ३ पेग डाल लिए। तभी अंकल को कोई कार से छोड़ने आया, दोनों बातें करते हुए गेट बंद कर अन्दर आ गए। मैंने सोचा कि अंकल अकेले आयेंगे इसलिए मैं सिर्फ़ पैंटी टी-शर्ट में थी। अंकल बोले- यह मेरा पार्टनर है, बहुत बढ़िया चोदेगा।
वो दोनों मेरी तरफ़ बढ़े, बेड पे एक एक ओर से, दूसरा दूसरी ओर से।
अंकल मेरी जांघें सहलाते हुए बोले- इतनी खूबसूरत हसीन लड़की क्या चीज़ है यार गुप्ता ! अपनी माँ से ज्यादा आग लिए घूमती है।
ओह वो मेरे होंठ चूसने लगा। पास में बोतल देख अंकल बोले- पी ली?
चल एक एक पैग लगायें !
नशे मे मैंने कब उनका लण्ड निकाल चूसना शुरू कर दिया.
उसके बाद क्या क्या हुआ, जरूर बताऊंगी, अगर मेरी यह चुदाई अन्तर्वासना वाले छापते हो तब !
दोस्तों ! चुदाई का किस्सा जारी रहेगा।
उम्मीद है इस बार अन्तर्वासना अपनी इस नियमित पाठक को नजरअंदाज़ नहीं करेगी !
बाय बाय ! Indian Sex Stories
मैं प्रकाश आपका दोस्त Sex Stories लेकर आ गया आप लोगों के लिए यौन-कथा !
पहले अपने बारे में बताता हूँ मैं प्रकाश इक्कीस साल का जवान जयपुर का रहने वाला हूँ। मैं आज आप लोगो के लिए ऐसी सेक्स स्टोरी लाया हूँ जिसे पढ़ कर लड़कियों की चूत में से ५ बार पानी और लड़के २५ बार मुठ मारेंगे।
चलो, अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ ! हाँ कहानी पढ़ने के बाद मुझे मेल जरूर करना…!
बात करीब पाँच साल पहले की है जब हमारे घर के पास एक भैया रहने आये जिनका नाम सुनील और २२ साल के थे। वो अभी शादीशुदा नहीं थे उनकी न तो सेहत थी न लम्बाई !
मैं सोचता कि कौन सी लड़की इनसे शादी करेगी .. !
मैं सोलह साल का होता हुआ भी उनसे अच्छा दीखता था। पर स्वभाव उनका बहुत अच्छा था। हम दोनों जल्दी अच्छे दोस्त बन गए। वो मुझ से हर बात शेयर करने लगे। फिर मैंने उनसे पूछा- आपने कभी किसी लड़की को चोदा है?
तो बोले- नहीं !
फिर बात आई गई हो गई। २ साल बाद मुझे पता चला कि उनके घर वालो ने उनके लिए एक लड़की देख ली है, बस भैया को जा कर पसंद करनी है।
वो मुझे भी साथ ले गए। मैं था तो अट्ठारह का पर लग रहा था पूरा नौजवान बीस साल का ….
जब हम लोग लड़की वालों के पहुँचे तो सबने मुझे लड़का समझा।
तो मैंने उन्हें कहा- मैं नहीं, ये हैं जो आपकी लड़की से शादी करना चाहता है !
उन्हें ये पता लगते ही लगा कि वो भैया के साथ अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहते।
पर उनकी कुछ मज़बूरी थी जिस कारण वो कुछ नहीं बोल पाए ……
जैसे ही लड़की आई, हम दोनों उ़से ही देखते रहे- क्या तो लग रही थी ! बिल्कुल परी जैसी थी !
मैं तो बार बार उसके स्तनों और गांड को ही देख रहा था। मुझे तो उसी समय उसे चोदने का मन करने लगा पर मैं शांत ही रहा।
भैया ने शादी के लिए हाँ कह दी।
४० दिन बाद का मुहूर्त निकला शादी का ……
मैं तो दिन-रात मुस्कान ( भैया की होने वाली बीबी ) के बारे में ही सोचता रहता …… तब मुझे मूठ मरना नहीं आता था …..
शादी वाला दिन भी आ ही गया। मैंने अपने लिए नए कपड़े लिए तो जिसे देख भैया बोल उठे- आज तो तू ही दूल्हा लग रहा है..!
मैं भी हंस दिया।
बारात चलने लगी मैंने बारात में खूब डांस किया …. फिर करीब डेढ़ घंटे बाद हम शादी वाली जगह पहुँच गए …
शादी में हमने बहुत मस्ती की और भैया की साली जो मेरे बराबर थी के साथ बहुत मजे किये। बहुत बार उसकी गांड और बूब्स को दबा देता पर वो कुछ नहीं बोली…
शादी अच्छी तरह हो गई।
मुझे तो भाभी और उनकी बहन दोनों को चोदने की इच्छा होने लगी।
लेकिन दो महीने बाद मेरे एग्ज़ाम थे तो मैं उनकी तैयारी में लग गया। कभी कभी भैया के घर जाने लगा …
एग्ज़ाम खत्म होते ही मैं भैया के घर ही दिन भर बिताता …
मुझे भाभी कभी खुश नहीं लगी। मैंने कई बार पूछा, पर वो कुछ नहीं बोली। मैंने भैया को भी बोला कि क्या बात है !
तो भी बोले- कुछ नहीं ! लड़कियों की आदत ही होती है गुमसुम रहने की !
फिर मैंने भी कुछ नहीं कहा ….
२ महीने बाद मैं ऐसे ही रोज की तरह भैया के घर गया …. उनका गेट जो अक्सर बंद ही रहता है, आज खुला था। मैं सीधे अन्दर घुस गया।
सामने का नज़ारा देख कर मैं दंग रह गया।
भाभी ब्लू फिल्म देख रही थी जिसमें आदमी लड़की की चूत में अपनी ऊँगली डाल रहा था, भाभी भी अपनी चूत में ऊँगली डाल रही थी …
मैं जाने लगा तो भाभी ने देख लिया और जल्दी से कपड़े ठीक कर बोली- प्रकाश तुम कब आये?
मैं कुछ नहीं बोला और उनकी चूत की तरफ देखने लगा तो वो बोली- क्या देख रहे हो?
मैं बोला- कुछ नहीं ….!
तो एकदम से बोली- मेरी चूत की तरफ ना !
मैंने कहा- हाँ !
तो बोली- मुझे चोदोगे ?
मैं बोला- क्या????
तो बोली- तुम्हारे भैया तो नामर्द हैं, कभी लंड ही खड़ा नहीं होता। शादी के ९ महीने बाद भी मैं अक्षत-योनि हूँ…..!
मैं बोला- क्या????
वो बोली- प्लीज़ ! मेरी चूत की प्यास मिटाओ !
मैं अटकता अटकता बोला- ठीईई ठीई ठीक है ! चोदता हूँ ! पर भैया को पता चला तो ?
वो बोली- कुछ नहीं बोलेगा वो भैन का लौड़ाऽऽऽ !
मैं मन मन बहुत खुश हुआ, मेरी पहली चुदाई 18 साल की उम्र में ! मज़ा आ जायेगा …!
फिर मैं भाभी को उठा कर बेड पर ले गया और उनके स्तन ब्लाऊज़ के ऊपर से ही दबाने लगा।
वो आहें भरने लगी…अह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह मज़ा आ गया ! तेज़ दबाओ जान्न्न् …
मैं और तेज़ दबाने लगा, उसके बूब्स को उसकी ब्रा से आजाद कर के दबाने लगा वो और तेज़ आहे भरने लगी…अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह या आआआअह्ह् उह्ह्हुहुहू अहः
फिर मैं बूब्स को मुँह में चूमने लगा …..
फिर उनकी साड़ी हटा कर पूरा नंगा करने लगा ……. और उसके बदन पर हाथ फेरने लगा।
वो बोली- जान ! बड़ा मज़ा आ रहा है…
मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया, बस पैंटी नहीं खोली और बोला- मेरा लंड तो बाहर निकालो और तरोताजा करो…..!
तो बोली- अभी निकलती हूँ…..
२ मिनट में मुझे पूरा नंगा कर के मेरे ७.५ इंच के मोटे लंड से खेलने लगी….
मुझे भी काफी मज़ा आ रहा था….. मैं भी आहें भरने लगा..
मेरे लंड ने एक बार करीब २० मिनट बाद पानी छोड़ दिया….
फिर मैं उसकी चूत को पैंटी हटा कर नंगा करने लगा। क्या तो मस्त चूत थी उसकी ….छोटे छोटे बाल और गुलाबी रंग की….
मैं उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा तो वो आहें भरने लगी- आ आआ आह्ह ऊऊओह्ह्ह्ह माज्ज़ा आआआ राह्हा है जानी….
मैं बोला- अभी तो असली मज़ा आना बाकी है मेरी जान ….. मैं ऊँगली से उसकी चूत को खोलने लगा….
तो वो चिल्लाई- आह्ह्ह दर्द हो रहा है !
तो मैं बोला- फिर मेरा मोटा लंड घुसने पर क्या होगा मेरी जान…..?
कुछ देर बाद बोली- अब सब्र नहीं होता ! चोदो मेरी चूत को….
तो मैंने उसे बेड पर लेटा कर धीरे धीरे उसकी अनछुई चूत में लंड डालने लगा। मुझे पता था कि दर्द होगा, सो मैंने आराम से घुसाना जारी रखा…
उसे थोड़ा दर्द हुआ पर इतना नहीं जितना आमतौर पर लड़कियों को पहली चुदाई में होता है।
थोड़ी देर बाद मैं स्पीड बढ़ाता गया … अब उसे भी मज़ा आ रहा था, बोलने लगी- प्रकाश जान, और तेज्ज़ फाड़ दे मेरी चूत …
मैं और तेज़ हो गया और उसकी चूत को मज़े देने लगा….
उसकी चूत को चोदते हुए इतना मज़ा आ रहा था कि मुझे लगा कि मैं हमेशा ऐसे जीवन भर चोदता रहूँ…
१५ मिनट बाद वो झड़ गई और बोलने लगी- अब प्लीज़ ! रुक जाओ !
पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं अपनी स्पीड पर उसे चोदता रहा…..
दस मिनट बाद मैं भी झड़ गया और सारा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया…..
वो बोली- जान आज तो मुझे मज़ा आ गया !
मैं बोला- जान ! तुमने मुझे जो मज़ा दिया उसे मैं कभी नहीं भूलूंगा….
उस दिन हमने करीब ५ बार चुदाई की।
अब हम रोज चुदाई करने लगे। मैंने ही उसे बच्चा दिया।
मैंने मुस्कान की छोटी बहन की मीनाक्षी को भी खूब चोदा ……
पर यह कहानी बाद में !
मुझे मेल जरूर करना दोस्तों … मुझे आपके मेल कर इन्तज़ार रहेगा.. Sex Stories
मेरा नाम मोहित है. मैं देहरादून में एक बड़े वकील साहब के ऑफिस में टाईपिस्ट हूँ.
उनके तीन जूनियर वकील अस्टिटेंट थे, उनमें से एक अतुल नाम का भी वकील था, जो मेरा बॉस होता था. मैं उसी के काम को करने के लिए रखा गया था.
वो एक-दो बार मेरे साथ मेरे घर आया था.
अतुल दिलफेंक टाईप का था और उसकी उम्र भी लगभग 45 साल की थी.
उसके काफी सारे अफेयर भी थे, लेकिन उस सबसे मुझे कोई वास्ता नहीं था.
अब मैं अपनी बीवी के बारे में बताऊं, तो मेरी बीवी का नाम किरण है. उसकी हाईट 5 फीट 5 इंच है और उसका शरीर भरा हुआ है.
वो किसी फिल्म की ऐक्ट्रेस की तरह दिखती है. उसका 34-28 36 का फिगर है.
उसे सेक्स में चूत चटवाना बहुत पसंद है.
लेकिन पहले मुझे चूत चाटना जरा भी पसंद नहीं था, अब हो गया है. या यूं कहूँ कि पहले नहीं था, इसीलिए मेरी बीवी के साथ ये मामला हो गया था.
हुआ कुछ यूं कि एक दिन मैं अपने ऑफिस में गया.
लेकिन उस दिन बड़े बॉस नहीं आए थे, उनके सारे जूनियर आए हुए थे.
तभी बड़े बॉस का फान आया कि वह आज नहीं आ रहे हैं.
यह सुनकर अतुल नाम का वही जूनियर वकील तुरन्त ही ऑफिस से निकल गया.
उसके निकलते ही बॉस का फोन फिर से आया और उन्होंने कहा कि हम सब भी ऑफिस बंद करके आज छुटटी लेकर घर चले जाएं.
ये सुनते ही हम सभी भी अपने-अपने घर को निकल गए.
मेरा मन था कि आज घर जाकर बीवी के साथ सेक्स का मजा लूँ.
मैं एक किराये के घर में रहता हूँ. उसमें एक कमरा व रसोई है. वो घर भी ऐसी जगह है कि कोई आए-जाए, कुछ पता नहीं चलता क्योंकि ये कॉलोनी से थोड़ा एक ओर हट कर है.
जब मैं अपने घर पहुंचा तो मुझे अतुल वकील की बाईक मेरे घर के बाहर खड़ी मिली.
मुझे कुछ शक हुआ लेकिन सोचा मिलने आया होगा, या किसी काम से आया होगा.
ये सोचकर मैं अन्दर चला गया.
अन्दर कमरे में कोई दिखाई नहीं दिया तो मुझे थोड़ा शक हुआ.
अब मैं दबे पांव रसोई की तरफ जाने लगा.
वहां मेरी बीवी किरण वकील साहब के लिए चाय बना रही थी और वह भी वहीं खड़ा था.
यह देखकर मुझे थोड़ा अजीब लगा कि ये आदमी रसोई में क्या कर रहा है.
मैं छुप कर उन दोनों की बातें सुनने लगा.
वह मेरी बीवी से बातें कर रहा था.
अतुल- जान, बहुत दिन से तुम्हारे दूध की चाय पीने का मन था, इसलिए चला आया. तुम्हें बुरा तो नहीं लगा न?
किरण- नहीं सर, मुझे बुरा नहीं लगा. लेकिन अगर वह घर आ गए तो वह गलत समझेंगे.
अतुल- अरे तुम इतना क्यों डर रही हो, वह तो ऑफिस में है, शाम तक घर नहीं आएगा.
इतना बोलकर अतुल मेरी बीवी के पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा जिस पर मेरी बीवी ने ऐतराज किया.
लेकिन अतुल बोला- अरे डार्लिंग, तुम्हारी चूत का रस तो मुझे पागल बना रहा है, मैं तो बस वह रस पीने आया था.
उसकी इस बात से मैं समझ गया कि इन दोनों के बीच कुछ चल रहा है.
लेकिन मेरी बीवी किरण बोली- सर, वो सब तो ऐसे ही हो गया था लेकिन अब नहीं … मुझे डर लगता है.
तो अतुल ने कहा- किरण डियर डरो मत, तुम्हारे मुँह में मेरा लंड बहुत मजा देता है. प्लीज़ एक बार लो ना!
बस इतना बोलकर अतुल ने पीछे से मेरी बीवी के 34 साइज के मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
इस बार मेरी बीवी ने ना ही अतुल को इंकार किया और न ही समर्थन.
अतुल मेरी बीवी के दूध सहलाता रहा और साथ ही उसने अपने एक हाथ को साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया.
वो साड़ी के ऊपर से ही चूत में उंगली करने लगा.
उससे मेरी बीवी को शायद मजा आने लगा और उसके मुँह से मादक कराहें निकलने लगीं.
किरण- आह … रहने दो न यार … क्यों मेरी आग भड़का रहे हो?
वो मेरी बीवी के गाल चूमता हुआ बोला- सच में किरण मेरी जान, तुम मस्त माल हो. तुम्हारे दूध तो मेरी जान ही निकाल देते हैं.
किरण- एक बार तय कर लो कि मेरे दूध ज्यादा मजा देते हैं या चूत!
अपनी पत्नी किरण के मुँह से ये सुनकर मेरी समझ में आ गया कि किरण की चूत में आग लग चुकी है और वो अब चुदे बिना नहीं रह पाएगी.
उसकी बातों से मेरे लंड में भी तनाव आने लगा और मुझे भी अपनी बीवी की चुदाई होते देखने का मन करने लगा.
उन दोनों को देखकर साफ़ लग रहा था कि मेरी बीवी को अतुल के साथ काफी मजा आ रहा था.
तभी अतुल बोला- कमरे में चलो ना किरण, मुझे तुम्हारी चूत का रस पीना है.
इतना कह कर वो मेरी बीवी के होंठों को चूसने लगा.
वो बोली- अभी मेरे होंठ तो चूसो यार. क्या इधर मजा नहीं आ रहा है?
अतुल बोला- अरे मेरी जान, तुम्हारा हर अंग का रस पीने में मजा आता है. बस इधर जगह कम है न … इसलिए कह रहा हूँ कि कमरे में चलो.
इतना कह कर अतुल ने गैस बंद करके चाय बनाना बंद कर दिया और कहा- मैं चाय नहीं, तुझे पीने आया हूँ. अपने मातहत की बीवी की लेने में जो मजा आता है, वो और कहीं नहीं आता.
मेरी बीवी अतुल का लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
अतुल ने भी मेरी बीवी की साड़ी ब्लाउज उतार कर वहीं गैस के बगल की स्लिप में ही रख दिया.
उससे रुका नहीं गया और वो मेरी बीवी को स्लिप पर बिठाकर उसके दोनों पैरों को खोलकर उसकी टांगों के बीच में आ गया.
मेरी बीवी भी मचलने लगी.
अतुल मेरी बीवी के पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर धक्के मारने लगा.
वो अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाता रहा और साथ ही मेरी बीवी के रसीले होंठों को चूसने लगा.
अब इस सबसे मेरी बीवी को भी मजा आने लगा था और वह भी बोलने लगी थी- आपकी पैंट में उभरे लंड को देखकर ही मुझे पहली बार ही आपके साथ करने का मन होने लगा था लेकिन आप तो बड़े तेज निकले, जो नजर देखते ही पहचान गए. आपका चूत चाटना तो मुझे पागल ही कर देता है. मेरे हसबेंड तो मेरी टपकती चूत का रस कभी चखते ही नहीं हैं. मेरा कितना मन करता है कि जैसे मैं उनका लंड चूसती हूँ, वैसे ही वह मेरी चूत भी चाटें लेकिन वह नहीं करते. जब आपने मेरी चूत चाटी, तो मुझे समझो जन्नत मिल गयी.
फिर अतुल ने कहा- चलो ना किरण, अपनी टपकती चूत को लेकर कमरे में चलो, वहां आराम से चाटूंगा भी और तुझे अच्छे से तसल्ली से चोदूँगा भी!
किरण बोली- नहीं जी, आज तो आप यहीं स्लैब पर मेरी चूत को चाटोगे और चोदोगे भी. चलो अपने घुटनों पर आ जाओ और यहीं चाटो ना. देखो कितना पानी बह रहा है!
यह सुनकर अतुल अपने घुटनों के बल बैठ गया और मेरी बीवी किरण की चूत चाटने लगा.
किरण को भी मजा आने लगा और वो भी अतुल का सर पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
करीब 5 मिनट तक चूत चाटने के बाद अतुल खड़ा हो गया, उसने अपना लंड निकाल कर मेरी बीवी को दिखाना शुरू कर दिया.
उसका लंड लगभग 6-7 इंच का था और मोटा भी तीन से साढ़े तीन इंच का होगा.
वो लंड हिलाता हुआ मेरी बीवी किरण से बोला- चलो डार्लिंग, अब इसे अपने मुँह में लेकर मस्त चाटो ताकि अच्छे से गीला होकर आहिस्ता से तुम्हारी चूत में चला जाए. तुम्हें याद है ना पिछली बार सूखे लंड से तुम्हें कितना दर्द हुआ था?
मेरी बीवी किरण बोली- हां, पिछली बार आपने मेरी चूत बहुत छील दी थी. आज तो मैं इसे अच्छे से अपने थूक से गीला करूंगी, जिससे मुझे भी मजा आए. पिछली बार तो बस आप ही मजे लेकर चले गए थे.
फिर मेरी बीवी किरण घुटनों पर बैठकर अतुल का लंड चूसने लगी.
करीब 5 मिनट चूसने के बाद अतुल ने मेरी बीवी को स्लिप पर ही उसके पैर चौड़े करके बिठा दिया.
फिर उसने अपना लंड मेरी बीवी की चूत पर सैट करके एक धक्का दे मारा.
जिससे मेरी बीवी चिल्ला पड़ी, किरण बोली- आह यार थोड़ा आराम से चोदो ना! … आपका बहुत मोटा है.
लेकिन अतुल ने उसकी नहीं सुनी और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत में धक्के मारता रहा.
वो मेरी बीवी को चोदने के साथ साथ कह रहा था- तुझ जैसी कमसिन कली की चूत तो रगड़ कर मारने में ही मजा आता है मेरी जान!
मेरी बीवी किरण सिसकारती रही- आह प्लीज़ … थोड़ा तो रहम करो अपने मातहत की बीवी पर … आह आगे भी तो आपको यह चूत मारनी है … प्लीज़ आह यार प्लीज़ आराम से चोद लो.
थोड़ी देर बाद चूत ने भी उसके बड़े लंड को लेने के लिए अपना मुँह और खोल लिया.
इसके बाद मेरी बीवी किरण को भी मजा आने लगा और वो अतुल को अपनी तरफ खींचने लगी.
मेरी चीटिंग वाइफ सेक्स करती रही, साथ ही कहती भी रही कि आह और जोर से मारो मेरी … मजा आ गया … और जोर से आह और जोर से … आह!
ऐसे ही तकरीबन आधा घंटा तक मेरे बॉस ने मेरी बीवी की चुदाई की और उसके बाद अपना लंड बाहर निकाल लिया.
मैं सोच में पड़ गया कि इसने ऐसा क्यों किया.
उसने मेरी बीवी से कहा- चलो नीचे आ जाओ घुटनों पर, आज मैं तुमको अपना अमृतपान करवाता हूँ. पिछली बार रह गया था.
उसकी बात को सुनकर मेरी बीवी बैठ गयी और अतुल अपने लंड पर मुठ मारने लगा.
कुछ ही देर बाद उसने अपना वीर्य मेरी बीवी के मुँह में डाल दिया जिसको मेरी बीवी ने अपने मुँह में भर लिया.
अतुल ने भी जबरदस्ती मेरी बीवी के मुँह में झड़ने के बाद अपना लंड ठूंस दिया.
जिससे मेरी बीवी को रस पीना पड़ा.
उसको वीर्य पीने में मजा भी आया. यह उसके चेहरे को देखकर साफ़ समझ आ रहा था.
अब सब खेल खत्म हो चुका था और कहीं न कहीं मुझे भी यह अच्छा लगा था.
उसके बाद मैं वहां से निकल गया और मेरे दिमाग में भी कुछ और पकने लगा था.
आज मैं आपको अपनी सच्ची Hindi Sex Stories कहानी बताने जा रही हूँ ! मैं ३५ साल की ख़ूबसूरत महिला हूँ, मेरे पति मुझे पूरी संतुष्टि प्रदान करते हैं।
इचलकरंजी, महाराष्ट्र में कपडे का काम था हमारा, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ा, उस वजह से उनकी मानसिक हालत तनाव भरी रहती थी और उन्होंने मेरी और ध्यान देना छोड़ दिया था।
फ़िर हम लोग इचलकरंजी छोड़ कर कोयाम्बटर तमिलनाडु आकर बस गए। यहाँ पर नया कारोबार बसाने में जुट गए।
यहाँ पर उनकी एक आदमी से मित्रता हो गई जिनका नाम अमृत लाल है, दिखने में एकदम जवान ख़ूबसूरत हैं, मेरे पति का ध्यान नया कारोबार बसाने में था और मेरी सेक्स की भूख बढ़ती ही जा रही थी, उनका ध्यान मेरी ओर था ही नहीं !
कुछ दिनों बाद वो व्यापार के सिलसिले मैं दिल्ली चले गए, पीछे से अमृत जी को मेरा ध्यान रखने का कह कर गए।
मैंने बड़ी हिम्मत करके अमृतजी के मोबाइल पर फ़ोन लगाया और कहा कि घर पर कुछ सामान लाना हैं सो आप आ जाइए !
दोपहर को करीब ३ बजे अमृतजी आ गए, और मैं अमृतजी के साथ होंडा बाइक के पीछे बैठ कर मार्केट रवाना हो गई। मैं जान बूझ कर उनसे चिपक कर बैठी थी, मेरे मम्मे अमृतजी के पीठ में धंस रहे थे।
वो बोले- भाभीजी आप आराम से पकड़ने के लिए अपने हाथ मेरी जांघो पे रख लें !
लेकिन शर्म की वजह से हिम्मत नहीं हुई। बाइक चलाते हुए उन्हें भी मस्ती सूझ रही थी। वो बार बार ब्रेक लगा रहे थे जिनकी वजह से मेरे मम्मे उनकी पीठ में गड़ें !
खैर सामान लेकर वापस घर पहुंचे तो मैं उनके और मेरे लिए चाय बनाने किचन में चली गई, पीछे से अमृतजी भी किचन में आ गए, उन्होंने मुझसे पूछा- भाई साहब की बहुत याद आ रही हे क्या ?
घर में मैं अकेली और उनका किचन में आना, मैं पूरी शरमा गई थी। अमृतजी ने धीरे से मेरे कंधो पे हाथ रखा और अपना चेहरा मेरे चेहरे के सामने कर दिया, मैंने अपनी आँखें एकदम बंद कर दी, मुझे महसूस हुआ कि उनके होंठ मेरे होंठ से चिपक गए थे, उन्होंने मेरी यह मौन स्वीकृति मान ली थी।
फ़िर उन्होंने मुझे जो किस करना शुरु किया तो बंद करने का नाम नहीं ले रहे थे, गालों पे, गर्दन पे, हाथों पे, हथेली पे, फ़िर हम खुल गए और बेडरूम में जाकर चुदाई शुरू की तो मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया ! Hindi Sex Stories
मेरा नाम शेखर है और मैं 21 साल का हूं. मैं अपने मम्मी पापा के साथ मुंबई में रहता हूँ. बात उन दिनों की है जब मेरे मौसाजी जी की तबीयत खराब हो गयी थी और वो मुंबई के हॉस्पिटल में भरती थे. इधर मेरी मौसी जी को गाँव से लाने का काम मुझे करना था इसलिए मैं गाँव (उत्तर प्रदेश) चला गया. मौसाजी की शादी अभी २ बरस पहले ही हुई थी और शादी के कुछ ही महीने बाद से वो मुंबई में काम करने लगे थे. दो तीन महीने में एक दो दिन के लिए वो गाँव जाते थे. इधर बीमारी के वजह से वो तीन महीने से गाँव नहीं जा सके थे.
गाँव में पहुँचा तो मौसाजी दादा दादी जो कि मौसाजी जी के साथ रहते थे, अपने किसी रिश्तेदार से मिलने 3-4 दिन के लिए चले गये और घर में सिर्फ़ मैं और मौसी अकेले रह गये.वैसे तो मौसाजी दादाजी और मैं घर के बाहर बरामदे में सोते थे और मौसी जी और दादीजी घर के अंदर, पर अब मौसी जी ने कहा कि तुम भी अंदर ही सो जाओ. रात में खाना खाने के बाद मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर के दादीजी के कमरे में सोने चला गया. मौसी बोली कि “आकाश तुम मेरे ही कमरे में आ जाओ, बात करते करते सोएंगे” मैंने कहा कि ठीक है और उनके कमरे में चला गया.
मौसी जी के कमरे में एक ही पलंग था और मैंने पूछा कि आप कहाँ सोएंगी.
वो बोली- मैं नीचे ज़मीन पर सो जाऊँगी.
मैंने कहा- नहीं, आप पलंग पर सो जाओ मैं नीचे सो जाता हूँ.
वो बोली- नहीं तुम पलंग पर सो जाओ.
मैं नहीं माना और मज़ाक में बोला कि आप इसी पलंग पर सो जाओ, काफ़ी बड़ा तो है, दिक्कत नहीं होगी. पहले तो वो हँसी पर फिर बोली कि ठीक है, तुम दीवार के तरफ सरको मैं ऊपर ही आती हूँ. मैं दीवार के तरफ सरक गया और मौसी जी ने लालटेन बिल्कुल धीमा करके मेरे बगल में आकर लेट गयी. लगभग आधा घंटा हम लोग बात करते करते सो गये.
अब तक मैं सिर्फ़ मौसी जी को अपनी मौसी के तरह ही देखता था. वो जबकि काफ़ी जवान थी, लगभग 25-26 साल की, पर मेरे मन में ऐसी कोई ग़लत भावना नहीं थी. पर वहाँ मौसी जी को अकेले में एक ही बिस्तर पर पाकर मेरे मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी. मेरा लंड एक खड़ा था और दिमाग़ में सिर्फ़ मौसी की जवानी ही दिख रही थी. किसी तरह मैंने इन सब गंदी बातों से ध्यान हटाकर सो गया.
लगभग आधी रात में मेरी नींद खुली और मुझे ज़ोर से पेशाब लगी थी. मैं तो दीवार के तरफ था और उतरने के लिए मौसी के उपर से लाँघना पड़ता था. लालटेन भी बहुत धीमी जल रही थी और अंधेरे में कुछ साफ दिख नहीं रहा था. अंदाज़ से मैं उठा और मौसी जी को लाँघने के लिए उनके पांव पर हाथ रखा. हाथ रखा तो जैसे करेंट लग गया. मौसी जी की साडी उनके घुटनों के उपर सरक गयी थी और मेरा हाथ उनके नंगी जांघों पर पड़ा था. मौसी जी को कोई आहट नहीं हुई और मैं झट से उठकर रूम के बाहर पेशाब करने चला गया. पेशाब करने के बाद मेरा मन फिर मौसी जी के तरफ चला गया और लंड फिर से टाइट हो गया.
मैंने सोचा कि मौसी तो सो रही है, अगर मैं भी थोड़ा हाथ फेर लूं तो उनको मालूम नहीं पड़ेगा. और अगर वो जाग गयी तो सोचेगी कि मैं नींद में हूँ और कुछ नहीं कहेंगी. दोबारा पलंग पर आने के बाद मैं मौसी के बगल में लेट गया. मौसी जी अब भी निश्चिंत भाव से सो रही थी. मैंने लालटेन बिल्कुल बुझा दी जिससे कि कमरे में घुप अंधेरा हो गया. लेटने के बाद मैं मौसी के पास सरक कर अपना एक हाथ मौसी जी के पेट पर रख दिया. थोड़े इंतजार के बाद जब देखा कि वो अब भी सो रही थी मैंने अपना हाथ थोडा उपर सरकाया और उनके ब्लाउस के उपर तक ले गया. उनकी एक चुची की आधी गोलाई मेरे उंगलियों के नीचे आ गयी थी. धीरे धीरे मैंने उनकी चुची दबाना शुरू किया और कुछ ही देर में उनकी वो पूरी चुची मेरे हांथों में थी. मुझे ब्लाउस के उपर से उनकी ब्रा फील हो रही थी पर निपल कुछ मालूम नहीं पड़ रहा था.
मौसी जी अब भी बेख़बर सो रही थी और मेरा लंड एकदम फड़फड़ा रहा था. सिर्फ़ ब्लाउस के उपर से चुची दबाकर मज़ा नहीं आ रहा था. मुंबई के बस और ट्रेन में ना जाने कितने ही लड़कियों की चुची दबाई है मैने. मैंने सोचा कि अब असली माल टटोला जाए और अपना हाथ उठा कर मौसी जी की जाँघ पर रख दिया. मेरा हाथ मौसी की साडी पर पड़ा पर मुझे मालूम था की थोडा नीचे हाथ सरकाउं तो जाँघ खुली मिलेगी. मैंने हाथ नीचे सरकाया मौसी की नंगी जांघ मेरे स्पर्श में आ गयी क्या नरम गरम जाँघ थी मौसी की। तभी मेरा स्पर्श पाकर मौसी जी ने थोड़ी हलचल की और फिर शांत हो गयी.
मैं भी थोड़ा देर रुक कर फिर अपना हाथ उपर सरकाने लगा. साथ में साडी भी उपर होते जा रही थी. मौसी जी फिर से कुछ हिली पर फिर शांत हो गयी. मेरा मन अब मेरे बस में नहीं था और मैंने अपना हाथ मौसी के दोनो जांघों के बीच में ले जाने की सोची. पर मैंने पाया कि मौसी की दोनो जाँघ आपस में उपर सटे हुए थे और उनकी बुर तक मेरी उंगलियाँ नहीं पहुँच सकती थी. फिर भी मैंने अपना हाथ उपर सरकाया और साथ में मेरी उंगली दोनो जांघों के बीच में घुसाने की कोशिश की. मौसी फिर से हिली और नींद में ही उन्होने अपना एक पैर घुटनों से मोड़ लिया जिससे उनकी जांघें फैल गयी.
मौके का फ़ायदा उठाकर मैंने भी अपना हाथ उनके जांघों तक ले गया और जब की मेरा अंगूठा अब मेरे मौसी के बुर के उपरी उभार पर था, मेरी पहली उंगली मौसी के जांघों के बीच उनकी पैंटी के थ्रू बुर के असली पार्ट पर थी. मौसी की बुर की गर्माहट मेरी उंगली पर महसूस हो रही थी और कुछ कुछ गीलापन भी था. मेरा दिल अब ज़ोरो से धड़क रहा था. मेरा हाथ मौसी के बुर पर था और कमरे में बिल्कुल अंधेरा था. मैंने सोचा कि अब क्या करूँ. मौसी की बुर तो उनकी पैंटी से ढकी है और पैंटी में हाथ तो डाला तो वो ज़रूर जाग जाएँगी.
फिर भी मैं नहीं माना और मैंने सोचा कि धीरे से अपनी एक उंगली उनकी पैंटी के साइड में से अंदर डालूं. मैंने धीरे से अपनी उंगली मोडी और उनकी जांघों के बीच में पैंटी को थोडा खीच कर एक उंगली अंदर डाल दी. मेरी उंगली उनकी बुर के फोल्ड्स पर पहुँच गयी और मैंने पाया कि उनकी बुर एकदम गीली थी जिससे मेरी उंगली का टिप उनके बुर के मुहाने के अंदर आसानी से घुस गया. मैंने अपनी उंगली धीरे धीरे से मौसी के बुर में हिलाने लगा और तीन चार बार हिलाने पर ही मौसी जी एक झटके से जाग गयी. मैं तो एकदम से सन्न रह गया और सोचा कि अब तो मरा.
पर मौसी ने अपना हाथ से अपने बुर को टटोला और मेरा हाथ वहाँ पाकर थोड़ी देर उनका हाथ वहीं रुक गया. शायद वो भी सन्न रह गयी थी. मैं चुप चाप सोने का नाटक कर रहा था और सोचा कि अब मौसी मेरा हाथ वहाँ से निकाल कर मुझे दूर धकेल देंगी. पर मौसी जी ने वो किया जो मैं सोच भी नहीं सकता था. उन्होने मेरा हाथ ना हटाते हुए अपनी बुर खुजाने लगी और खुजाते खुजाते अपनी पैंटी थोड़ी नीचे सरका दी जिससे कि उनका बुर आधा खुल गया और फिर सोने का नाटक करने लगी. मेरी उंगली अब भी उनकी पैंटी में थी पर अब जब उन्होने पैंटी थोड़ी नीचे सरका दी तब मैं भी समझ गया कि मौसी जी चुप चाप मज़ा ले रही है.
फिर भी मैं थोड़ा रुका और फिर अपना हाथ बिल्कुल उनकी जाँघ पर से उठाकर सीधे उनके बुर पर रख दिया. मौसी की पैंटी का एलास्टिक अब भी मेरी उँगलियों और उनके बुर के बीच आ रहा था तो मैंने हिम्मत करके धीरे से एलास्टिक उठा कर अपनी उंगलियों को उनकी पैंटी के अंदर घुसा दिया. मेरी बीच की उंगली मौसी के बुर के स्लिट पर थी और जब मैंने धीरे से अंपनी उंगली मोडी तो वो उनकी गीली बुर में चली गयी मौसी ने भी अब पैर और फैला दिए और अपना एक हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया. लेकिन वो अब भी सोने का नाटक कर रही थी. मैंने भी अब अपनी दूसरी उंगली मोडी और वो भी मौसी की बुर में पेल दी.
रूम में वैसे भी सन्नाटा था और अब मौसी जी की साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी. अब तक तो सिर्फ़ मेरे हाथ मौसी की जवानी को टटोल रहे थे पर अब मैं बिल्कुल मौसी के करीब उनसे सट गया और अपना मूह उनके मूह के पास ले गया. हमारी गाल आपस में छू गये और मौसी ने अपना चेहरा इतना घुमाया की उनके होंठ मेरे होंठों से बस धीरे से छू भर गये. उनकी साँस की गर्मी मेरे होंठों पर आ रही थी. मैं भी थोडा सा इस तरह एडजस्ट हो गया की मेरा होंठ बिल्कुल उनकी होंठों पर सट गया.
उधर मेरी उंगलियाँ मौसी की बुर में अपना कमाल दिखा रही थी और मौसी भी अपने हाथ से मेरे हाथ को अपनी बुर पर दबा के रखा था. मौसी की गरम गरम गीली बुर में अब मैं खुल्लम खुल्ला उंगली कर रहा था और मौसी अब भी नींद में होने का नाटक कर रही थी. मैंने सोचा अब बहुत नाटक हो गया. अब तो असली जवानी का खेल हो जाए. मैंने मौसी की बुर में अपनी तीन उंगली डाल कर ज़ोर से दबा दिया और साथ में मौसी के होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए.
मौसी के मुंह से आह निकल गयी और उनका मुंह थोड़ा सा खुल गया. तुरंत ही मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी और मौसी की बुर से हाथ निकाल कर तुंरत उनको अपने बाहों में कस कर लिपट लिया. “उह्ह… शेखर यह क्या रहा है तू…छोड़ मुझे तू.. मौसी ने मुझे यह कहते हुए धकेलना चाहा. पर मैंने भी उनको कस कर पकड़ लिया और बोला कि मुझे मालूम है तुम पिछले आधे घंटे से जाग रही हो मेरी उंगली करने का मज़ा ले रही हो. तब मौसी ने मचलना बंद कर दिया और मेरी बाहों में शांत हो कर पड़ी रही. मौसी बोली” शैतान कहीं के, तुझे डर नहीं लगा मेरे
साथ यह करते हुए?”
मैंने कहा कि डर तो बहुत लगा था पर अब डर कैसा. अब तो तुम ना भी बोलोगी, तब भी तुम्हारा जबरन चोदन कर दूँगा इसी बिस्तर पर. कौन जानेगा कि इस घर के अंदर यह भतीजा अपनी मौसी के साथ क्या कर रहा है. यह कहते हुए मैंने अपना हाथ मौसी के पीठ पर से नीचे सरकते हुए उनके गांड के गोलाईयों पर ले गया और पीछे से उनकी पैंटी की एलास्टिक को पकड़कर पैंटी नीचे सरका दी.
वो बोली “आकाश जोर आजमाइश करने की क्या ज़रूरत है. तूने तो वैसे ही मुझे गरम कर दिया है. अब तो मैं ही तेरा जबर चोदन कर दूँगी” बस अब क्या था. मौसी जी ने अपना पैंटी पैर में से निकालकर साड़ी उतार दी. मैंने भी अपना लूँगी खोल कर अंडरवीयर निकाल फेंका. फिर मौसी को बिस्तर पर पीठ के बल दबाकर उनके ब्लाउस के बटन खोलने लगा.
“आज तुम्हारी जवानी का स्वाद लूँगा मेरी जान” मैंने ब्लाउस खोलते हुए एकदम फिल्मी अंदाज़ में मौसी से बोला. मौसी ने भी उसी अंदाज़ में कहा, “भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, मैं तुम्हारे पांव पड़ती हूँ”
सारे बटन खोलने पर मैंने ब्लाउज़ को पकड़ कर साइड में कर दिया और मौसी के ब्रा से ढके हुए चुचियों पर अपना मुह रख दिया. मौसी ने भी अब बेशरम हो कर मेरा सर को अपनी चूची पर दबा दिया और बोली, “आकाश क्या यह पैकेट नहीं खॉलोगे”
उनका इशारा उनकी ब्रा के तरफ था. मैंने तुंरत उन्हे उठाया और पलंग के बगल में खड़ा करके उनकी ब्लाउज और ब्रा उनसे अलग कर दी. फिर पेटिकोट का नाडा भी खींच कर खोल दिया और वो भी उनके पैरों के पास ज़मीन पर गिर गया. मौसी को इस तरह नंगा कर उनको पलंग पर खींच लिया और सीधे उनके उपर लेट गया. अब में उनकी चुचियों को आराम से चूस रहा था और वो मेरा सर अपने हाथों से सहला रही थी.
कुछ देर बाद मौसी ने अपना हाथ मेरे लंड पर ले गयी और बोली” आकाश नाश्ता हो गया. अब डिनर हो जाए?”
मैं भी तैयार था, पूछा- वेज या नॉन वेज?
वो बोली की वेज तो रोज़ ही लेते हो आज नॉन वेज चख लो” यह कहते हुए मौसी ने मेरा लंड उनके बुर के मुहाने पर रखा और मैंने उनको फाइनली पेल दिया. पेलते पेलते मौसी एकदम मस्त हो गयी और अपने दोनो पांव मेरे कमर के उपर लपेट दिया. मैं उनको पेलता रहा और साथ साथ चूमता रहा.
मौसी ने तभी अपना हाथ मेरी गाण्ड की तरफ ले गयी और एक उंगली मेरी गांड में घुसा दी. मैंने भी अपना एक हाथ मौसी के गांड के पीछे ले जाकर उनकी गांड में एक उंगली घुसा दी. तभी मौसी एकदम ऐंठने लगी और कस कर मुझे पकड़ लिया. आकाश और ज़ोर से चोदो…ऽउर छोड़ो …बोलते बोलते वो आख़िर वो झड़ गयी और फिर शांत हो गयी. पर मेरा पेलना अभी चालू था और लगभग १०-१५ झटकों के बाद मैं भी मौसी के बुर में ही झड़ गया. हम दोनो पसीने पसीने हो गये थे और में मौसी के उपर ही पड़ा हुआ था.
कुछ देर बाद मौसी उठी और बाथरूम जाकर आई. मैं भी अब अंडरवीअर पहन चुका था. मौसी ने सिर्फ़ पेटिकोट पहन रखा था. आकर बोली ” आकाश, तुम्हारे साथ जो किया वो तो अभी हम आगे भी बहुत बार करेंगे. पर यह बात किसी और को मालूम नहीं होने पाए. सबके सामने मैं तुम्हारी मौसी ही हूं” मैंने भी उनको अपने बाहों में लेते हुए बोला” सबके सामने क्यों मौसी , यहाँ पलंग पर भी तुम मेरी मौसी ही हो. और तुम्हारी यह जवानी की मिठाई तो मैं अकेले ही खाऊँगा. सब मौसाजी जी को ही मत खिला देना मौसी हँसी और अपना हाथ फिर से मेरे अंडरवीअर में डाल दिया.
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